रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १२८/२
जब देवायत जा रहाथा तब रश्मी कामुक नजरोसे कातील स्माइल करते उनको देखती रही.. तो वंदनाभी सरमाते हसते हुअे उनको देखती रही.. जबवो चला गया तो रश्मी वंदनाकी ओर देखते रहस्यमय तरीकेसे हसने लगी.. तब वंदना बहुत ही सरमाइ.. लेकीन रश्मी उनकी ओर देखते अैसे हस रहीथी तब वंदनाको कुछ आसंकाये हुइ तो रश्मीको पुछने लगी..
वंदना : (सरमाते हसते) भाभी.. आपने देवायतजीको क्यु मीलने बुलाया हे..? क्या मुजे बता सकती हे..? आप उनको कीससे मीलवाना चाहती हे..?
रश्मी : (हसते) नही.. हें..हें..हें.. अभी नही बता सकती.. हें..हें..हें.. तुजे बडी दिलचस्पी हे सब जाननेकी..? तो सुन.. बस इतना पता हे दो दिनके बाद तुजेभी मेरे घर आना हे.. वही मे तुम दोनोकी मुलाकात करवाना चाहती हु.. समज गइनां..? तब अपने दिलकी बात उनसे करलेना..
वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे) भाभी प्लीज.. कही आप पागलतो नही होगइ..? मुजे नही मीलना.. आपही मील लेना.. कही कीसीको पता चल गयातो मेतो गइ कामसे.. मम्मीको देखा हे..? मार डालेगी मुजे..
रश्मी : नही वंदु.. कीसीको कुछ पता नही चलेगा.. ओर सुन.. ये सब तेरी मम्मीका ही प्लान हे.. वो चाहती हेकी तुजे तेरा प्यार मील जाये.. ओर तु इनकी फीकर मत करना ये तो राजा हे.. कीतनीभी सादीया करले कोइ इनको नही पुछेगा.. बस तुम जीले अपनी जींदगी.. जबसे मे इनके साथ रीलेशनमे आइ हु तबसे मेरे जीवनमे खुसीया ही खुसीया हे.. तुमभी बटोरले अपनी खुसीया.. मेरे जीवनमे सब सही होता जा रहा हे..
वंदना : (सर्मसार होते धीरेसे) नही भाभी.. पता नही फीरभी अेक डरसा लग रहा हे..
रश्मी : कमीनी इसी डरकी वजहसे तो आज तक अपने दिलकी बात उनको नही बतापाइ.. वंदु अगर डरेगीतो अैसेही घुट घुटके जीयेगी.. बस अेक बार इनसे प्यार करकेतो देख.. तेरी जींदगीमे बहार आजायेगी.. ओर वैसेभी तेरे लीये इनको मीलनेकी दो दो जगह हे.. पुनोने भी तुजे उनके घरपे मीलनेको कहा हे.. ओर तेरे लीये तो मेरे घरके दरवाजे हमेसा खुले ही हे.. जबभी इनको मीलनेका दिल करे मुजे बता देना मे इनको बुला लुगी.. पता नही इनमे क्या आकर्सण हे इनको देखतेही दिल मचलने लगता हे..
वंदना : (सर्मसार होते हसते) भाभी.. यकीन नही होता मम्मीने आपको कहा हे.. क्या सचमे कहा हे..?
रश्मी : हां वंदु.. ये बात तुम कीसीको मत कहेना.. वो तेरी मा हेनां..? तुजे अैसे घुट घुटके जीते नही देख सकती.. वो तेरी सादीभी इनसे करवानेके लीये तैयार हे..इसके लीये तेरे पापासे भी क्यु बगावत करना पडे..
वंदना : नही भाभी.. मे पापाकोभी इतना चाहती हु.. मे उनको दुखी होते नही देख सकती.. वो दोनो दोस्तभी हे.. मे नही चाहती मेरी वजहसे उनकी दोस्तीमे कोइ दरार आये..
रश्मी : नही वंदु कोइ दरार नही आयेगी.. क्या तुमभी मेरी तराह उनकी सीक्रेट वाइफ बनके नही रेह सकती..? तो फीर क्या प्रोबलेम हे..? मेरी मान.. अैसा कुछभी नही होगा.. ओर वैसेभी मंजुभाभीसे सुना हे.. की देवुकी जींदगीमे जीतनीभी ओरते ओर लडकीया आयेगी वो कोइ सामान्य ओरते नही होगी.. वो उनके पीछले जन्मकी बीवीया ही होगी.. तो फीर क्या पता तुम ओर मे भी वोही हो.. हें..हें..हे..
वंदना : (हसते) भाभी.. क्या तुमभी ये सब बातोपे बीलीव करती हो..? मुजेतो अैसा नही लगता.. हें..हें..हें..
रश्मी : (गहेरी सांस लेते) सुन वंदु.. मुजे लगता हे आज कुछ बाते तुमसे केह ही दु.. क्या तुमने वो हिमाचलके राजाकी कहानी सुनी या पढी हे..?
वंदना : (हसते) क्या वो.. कीताब जो जीनका नाम (ये केसी अनुभुती) हे.. आप उन्हीकी बात तो नही करती..?
रश्मी : (हसते) हां वोही.. वंदु ये सीर्फ कहानी नही हे.. कुछ सालो पहेले वहा सब हकीकतमे हुआ हे.. ओर उन राजाका जन्मभी हमारे पासके सहेरमे ही हुआथा.. तब वो छोटासा सहेरथा.. जहा सुती रहेती हे.. आज वो बहुत बडा सहेर होगया हे.. बस उसीके कारण आज हिमाचलमे अेकभी विधवा या त्यक्ता नही मीलती.. वहा आजभी सब आपसी रीस्तोमे सादी करके सुहागन रहेती हे..
वंदना : (हसते) हां भाभी मेने वो किताब दो बार पढी हे.. पुनोके पास थी.. सायद अभीभी हे.. तो उन कहानीका हमसे क्या तालुकात..?
रश्मी : हे वंदु.. हे.. मंजुभाभीके कहेने मुताबीक वोही राजा देवुके घर यहा उनके पोतेके रुपमे जन्म लेगा.. ओर उन्हीकी रानीया अभी जन्म लेकर उनके अंसको मील रही हे.. देवुभी उनका अंस हे.. तभीतो उनमे इतना आकर्सण हे.. कोइभी ओरत हो या लडकी उनको देखतेही पागल होजाती हे..
तुजे पता हे हमारे गांवमे कुछ ओरते ओर लडकीया.. देवुके नीचे लेट चुकी हे.. ओर बहुत सारी ओरते लडकीया अभीभी देवुके नीचे लेटनेके लीये तैयार हे.. सब ओरते लडकीया इनको पानेकी फीराकमे हे.. तुम ओर मे नसीब वाली हेकी देवु हमसे जुडा हुआ हे..
वंदना : (हसते) लेकीन भाभी.. उनकी रानीया तो सभी परीया यातो अप्राये थी.. अैसा उनमे लीखा हे..
रश्मी : नही वंदु.. तुमने ठीकसे नही पढा.. ये सच हेकी वो सभी परीया या अप्सराये थी.. लेकीन वो सब अपने स्वामीको पानेके लीये धरतीपे ओरतके रुपमे उनकी बहेन बनके या उनकी टीचर बनके आइ थी..जो बादमे उनसे सादी करलेती हे.. ओर जन्मो जन्म तक उनको मीलनेकी कामना करती हे..
ओर सायद हमारी मंजुदी ओर हम सभी वो रानीया हे.. वंदु तुजे अेक बात बताउ..? जबसे देवु मेरी जींदगीमे आया हे तबसे मेरी सारी तकलीफे दुर होती जा रही हे.. जैसे उन राजाको मीलतेही सबकी जींदगीमे शुभ होताथा..
वंदना : (हसते) भाभी.. आपकोतो बहुत कुछ पता हे..? क्या ये सब सच हे..? अगर सच हेतो उन्होनेतो वहा बुहत सारी परंपरा सुरु कीथी.. यहा तक की उन्होने अपनी दादी.. चाची.. बहेने.. भाभी उनकी टीचरसेभी सादी करलीथी.. तो फीर यहातो अैसा कुछ भी नही हे.. हें..हें..हें..
रश्मी : वंदु.. सायद कुछही दिनोमे अैसा अब हमारे गांव ओर आसपासके सभी गांवोमे होने वाला हे.. देखना कुछही दिनोमे अैसे कइ रीस्ते हमारे सामने आजायेगे.. जीनके बारेमे हम सोचभी नही सकते.. ओर मंजुभाभीके कहेनेके मुताबीक उनकी सुरुआत उनके खानदानमे तीन पीढीसे होगइ हे.. तुजे पता हे देवुके पीता ओर उनके दादाके साथ हमारे गांव वालोसे रीस्ता नही था.. सायद इन्हीका कारण यही हे.. सबलोग कहेते थे की उन्होनेभी अपनी बहेनसे सादीया करली थी.. इसीलीये सबने उनसे रीस्ते तोड दीये थे..
वंदना : (आस्चर्यसे देखते) ओह गोड.. भाभी.. अब कुछ बात मेरी समजमे आ रही हे.. सायद इसीलीये.. हमारी पुनो.. ओर देवुभी..
रश्मी : हां वंदु.. ये बातका जीक्र कीसीके सामने भुलसेभी मत करना येतो हम दोनोको पुनोका राज पता हे इसीलीये हम बाते कर रहे हे.. तो बी केरफुल.. ओर सायद वही वजह हेकी पुनोने देवुसे सादी करली हे.. ओर अेक राजकी बात मुजे ओर पता हे जो मे सादी करके इधर आइथी तब अेक बार राघवके मुहसे सुनाथा..
वंदना : (आस्चर्यसे देखते) कोनसी बात..? भाभी प्लीज.. बताइअेना मे कीसीको नही कहुगी..
रश्मी : (मुस्कुराते) हंम.. देखना मंजुभाभी ओर पुनोकोभी नही बताना.. सुन.. सायद मंजुभाभी भी उनकी बहेन हे.. अैसा राघव अेक बार मुजे सब बता रहा था..
वंदना : (आस्चर्यसे) व्होट..? भाभी क्या बात कर रही हो..? पर कैसे..? वोतो राजीव अंकल ओर नीर्मलाआंटी की बेटी हेनां..?
रश्मी : (मुस्कुराते धीरेसे) सुन.. प्लीज.. कीसीको कहेना मत.. पहेले राजीव अंकल ओर नीर्मलाआंटी यही हवेलीमे रहेते थे.. वो दोनोभी सायद भाइ बहेन हे.. तब देवुके पीता ओर नीर्मलाआंटी दोनोही अपनी सादीसे पहेले रीलेशनमे थे.. ओर देवुके पीतानेही उनको सादीसे पहेले प्रेगनेन्ट करदीयाथा..
फीर दोनो यहासे चले गये ओर भाइ बहेनने आपसमे सादी करली.. ओर मंजुभाभीका जन्म हुआ.. देवु ओर मंजुभाभीके पीता दोनोही हमारे बडे ठाकुर हे.. तो दोनो हुअेनां भाइ बहेन..? बस इसीलीये केह रहीथी.. यहा बहुत कुछ होने वाला हे..
वंदना : भाभी आइ कान्ट बीलीव.. मुजेतो अब भी यकीन नही हो रहा हेकी हम सब उनका हिस्सा हे.. आजके जमानेमे भी ये सब पोसीबल हो रहा हे.. ओर हमारा दिमाग इन बातोको ना मानने को मजबुर हे..
रश्मी : नही वंदु.. उन बातोको कोइ ज्यादा साल नही हुआ.. तबभी उनको ये सब पोसीबल नही लगता था.. ओर ये बात सच हे.. इसीलीये केह रही हु.. की तु मानजा.. मीलले हमारे स्वामीको.. ओर जब गांवमे अैसे रीस्तोको सब अपनाने लगेगे तब तेरे पापाभी ये सब मानते होगे.. तो फीर क्या दीकत..?
वंदना : (कुछ सोचते) हां भाभी.. सायद आप ठीक केह रही हे.. फीरभी उनको मीलनेमे अेक डरसा लग रहा हे.. ओर अबतो पुनोभी ससुराल चली जायेगी.. वरना उनको साथ रखती.. भाभी.. क्या आप हमारे साथ रहेगी..? तो फीर कुछ सोचती हु..
रश्मी : (हसते) हां मे तेरे साथ ही हु.. ओर कमीनी.. अगर उनको अकेली मीलेगी तो वो तुजे सीधी चोद नही लेगा.. जो उनसे डरती हे हें..हें..हें.. बात करती हे.. हें..हें..हें..
वंदना : (सर्मसार होते अेक मुका मारते) भाभी.. तुम कीतनी कमीनी हो.. मुजेतो बहुत सर्म आ रही हे.. अैसाभी कोइ बोलता हे.. हें..हें..हें.. चलो ठीक हे.. मे आजाउगी.. हें..हें..हें..
रश्मी : (खडी होकर हग करते) हां ये हुइना बात.. वैसे कलतो हम सब साथमे ही हे.. तो कुछ प्लानीग करते हे.. मुजे पुनोसेभी बात करनी पडेगी..
वंदना : (सरमाते हसते धीरे) वो कमीनीतो कबसे हम दोनोके मीलनका इन्तजार कर रही हे.. कमीनी मेरे पीछेही पड गइथी.. भाभी आप पुनोसे बात करलेना.. मुजेतो बहुत सरम आयेगी.. मे कुछ नही कहुगी..
रश्मी : (हसते) हा. हा.. तो मेही बात करलुगी तु फीकर मत कर..
दोनोही अैसी बाते करती रही.. तबतक देवायत सीधाही सुधीरके घर चला गयाथा.. ओर वहा जाके उनका दरवाजा खटखटाया तो नीशाने आकर दरवाजा खोला.. ओर देवायतको देखतेही सरमाके हसने लगी.. ओर साइडमे हटकर उनको अंदर आनेका रास्ता दीया.. तो देवायत घरके अंदर चला गया तब नीशाने धीरेसे दरवाजा बंध करके लोक करदीया ओर सरमाते वोभी देवायतके पीछे घरके अंदर चली गइ..
नीशा : (सरमाते हसते) आइअे देवरजी.. आखीर आपने हिंमत करही ली.. वरना तो आपके भाइ होते हे तबही घरमे आते हे.. अभीतो वो क्लीनीकपे हे.. ९ बजे आयेगे.. आइअे बैठीये.. कहो क्या पीयोगे..? चाइ के कुछ ठंडा..? आप बेठीये मे पानी लेकर आती हु..
देवायत : (पहेली बार नाम लेते हसते) नही नीशा.. आज मे तुमसे ही मीलने आया हु.. आइ लव यु..
कहेते देवायतने अपने दोनो हाथ फैला दीये.. तब नीशा दोडके देवायतकी बाहोमे समा गइ.. ओर सीनेमे सर छुपाके आंसु बहाने लगी.. तो देवायतने उनकी पीठ सहेलाते जोरोसे बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनो काफी देरतक अेक दुसरेकी बाहोमे खडे रहे.. तभी देवायतने नीशाके चहेरेको पकडके थोडा उचा करदीया ओर उनके होठोपे अपना होठ रख दीया.. तब नीशा सरसे पांव तक कांपते आंखे बंध करते देवायतके होंठ चुमते उनका साथ देने लगती हे..

नीशा : (लडखडाती आवाजमे आंखोमे देखते) देवु.. आइ लव यु टु.. आपने बहुत इन्तजार करवाया मुजे..
देवायत : (सरको चुमते) लव यु.. नीशा.. हमेतो मीलनाही था.. बस थोडी देर होगइ.. कही हम सुधीरको धोखातो नही दे रहे..? बस उन्हीकी फीकर हे.. वो मेरा दोस्त हे..
नीशा : (बाहोमे उनके सामने देखते) नही देवु.. आप उनकी फीकर मत करो.. आज मे आपको अेक बात बताना चाहती हु.. ये बात सीर्फ मेरे ओर सुधीरके अलावा कोइ नही जानेगा.. इनके बारेमे सीर्फ मुजे ओर सुधीरकोही पता होगा.. आपभी कीसीके सामने इसका जीक्र मत कीजीयेगा.. चारुभाभी ओर रश्मीभाभीको भी नही.. बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रहेगी..
देवायत : (बाहोमे भरते खडे रहेते) नीशा.. अेसी कौनसी बात हे जो मे नही जानता..? बता..
नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आपतो जानते हे.. की सुधीर मुजे वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. ओर ये बात वो खुदभी जानता हे.. इसके लीये वो मुजसे डिवोर्स देनेके लीयेभी तैयार था.. ताकी मे वो सुख कीसी ओरसे पा सकु.. उस दिन आपने उसे समजाने हमारे घर आयेथे उसी रात हम दोनोने कुछ बाते करके डीसाइड कीयाथा.. अब मे उनके साथ ही रहुगी..
देवायत : नीशा.. बता तुम दोनोने क्या डीसाइड कीयाथा..
नीशा : (सरमाते नजरे जुकाते) देवु.. सुधीरने मुजे आपके साथ रीलेशनमे आनेकी सलाह दीथी.. ताकी वो सुख मे उनके साथ रहेकरभी पा सकु.. सुधीरको हम दोनोके रीलेशनसे कोइ अेतराज नही हे.. उसने सामनेसे मुजे आपके साथ रीलेशनके लीये कहा हे.. तो सुधीरको पता होनेका कोइ डरही नही हे.. वो चाहताहे मे आपके साथ रीलेशनमे आकर ओरतका वो हर सुख पाउ.. जीनका हर ओरतका सपना होता हे..
देवायत : (आस्चर्यसे देखते) नीशा.. क्या अैसा सुधीरने खुद कहा हे..?
नीशा : (सरमाते हसते) हां देवु.. उनको पता हे की वो मुजे वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. ओर वो मुजे प्यारभी बहुत करते हे.. ओर मे उनको छोडनाभी नही चाहती.. तो सुधीरने बीचका यही रास्ता नीकलक हे.. उसे हम दोनोके रीलेशनसे कोइ अेतराज नही हे.. बस.. ये बात सीर्फ हम तीनोके बीचही रखना चाहते हे..
देवायत : नीशा.. सुधीरवाली बात हम तीनोके बीच ही रहेगी.. आइ प्रोमीस.. लेकीन हमारे रीस्तोके बारेमे मेरी बीवीओको पता चल जायेगा.. सोचले.. खास करके चारुभाभी ओर रश्मीभाभीको..
नीशा : (सरमाते हसते) देवु.. वैसेतो उन दोनो कमीनीओको सब मालुम हेकी आपने मेरा प्यार कबुल करलीया हे.. ओर इस बारेमे मंजुभाभी ओर पुनमदीदीको भी पता हे.. क्या उन दोनोको सब पता चलजाता हेनां..?
देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. पुनोकातो पता नही लेकीन मेरी मंजुको सब पता चल जाता हे.. कहो.. कब मीलना हे हमे..?
नीशा : (सरमाते धीरेसे) देवु.. आजतो पोसीबल नही हे.. बस आपही कुछ अेरेन्ज कर लेना.. वरना मुजे मौका मीलतेही मे आपको इधर बुला लुगी.. आप आजाना.. मे हमारा पहेला मीलन अैसे जल्दबाजीमे करना नही चाहती.. मुजे पुरा समय चाहीये.. पुरी रात सीर्फ हम दोनोही होगे.. बस मुजे वो सुख देदो.. जो मे सादी करकेभी नही पा सकी.. देवु.. आइ अेम वर्जीन.. मे अभी तक कुआरी हु.. मुजे लडकीसे ओरत बननेका सुख चाहीये..
देवायत : (होंठ चुमते) हंम.. नीशा.. हम अपनी सुहागरात मनायेगे.. हमारी सेज सजी होगी.. ओर बेडकी चदरपे तेरे कोमार्यकी नीशानी हमारी सुहागरातकी गवाही होगी..
नीशा : (खुस होते जोरोसे बाहोमे भीचते) ओह.. देवु.. आइ लव यु.. आइ लव यु सो मच..
तभी कीसीने दरवाजा खटखटाया तो दोनो जटसे अलग होगये.. तब देवायत आरामसे सोफेपे बैठ गया ओर नीशा अपने कपडेको सही करते जटसे दरवाजा खोलने चली गइ.. ओर दरवाजा खोलके देखातो बहार सुधीर खडाथा.. तब नीशाने हसते हुअे देवायतके आनेकी बात कही.. तो सुधीरभी हसते हुअे अंदर आ गया.. ओर आतेही देवायतको गले लग गया.. फीर दोनोही सोफेपे बैठ गये तब नीशा उनके लीये पानी लेने चली गइ..
सुधीर : (हसते) आओ भाइ.. आजतो इधरका रास्ता भुल गये..?
देवायत : (हसते) हां अभी अभी पंचायत ओफीससे आ रहा हु.. अभी आयाही थाकी तुम आगये.. हें..हें..हें..
नीशा : (दोनोको पानी देते) लीजीये पानी पीजीये.. ओर कहीये आप क्या पीयेगे..?
सुधीर : (हसते पानी लेते) लगताहे अभी आके बैठे ही हो.. नीशा.. हमारे लीये मस्त दुधवाला कोल्डड्ढींक बनादे.. वरना खाना नीकाल आज हम तीनो साथमे ही खायेगे.. क्या खाना बन गया हे..?
देवायत : अरे रहेने दे अभी रमेशके घरभी जाना हे.. वहाभी चारुभाभी जबरदस्ती कुछना कुछ पीलाही देगी.. बस तुम दोनोको न्योता देने आया था.. कल तुम दोनोको आश्रमपे हमारे साथ आना हे.. कल सृतीके साथ मेरी सादी हे..
नीशा : (खाली ग्लास लेते हसते) अरे वाह.. मतलब अेक और देवरानी आ रही हे मेरी.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हां यार.. पता नही अब मेरे नसीबमे कीतनी सादीया लीखी हे.. हें..हें..हें..
सुधीर : (जोरोसे हसते) भाइ.. तो अच्छा हेना.. हमेतो लडु खानेको मील रहा हे.. हें..हें..हें.. आप सादीया करते जाओ.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) साले तेरे लडुके चकरमे मुजे जींदगीभरके लीये बीवीको पालना पडता हे.. हें..हें..हें..
नीशा : (जोरोसे हसते) अरे.. गालीया देने लगे.. आप बैठो मे अभी कोल्ड्रींक बनाकर लाइ.. हें..हें..हें..
सुधीर : (हसते नीशाके जातेही नजदीक आते) भाइ.. क्या वो मुना आपको मीलने आया था..? उनसे बात हो गइ..? उसने कुछ कहातो नही..?
देवायत : (हसते धीरेसे) नही सुधीर.. मेने उन दोनोसे बात करली हे.. सब सही हो गया हे.. बस अेक बार मेने जो कुछ सोचा हे होनेदे.. फीर देख.. मजा.. बस तुम इतना खयाल रखना.. वहा तेरी क्लीनीकपे जीतनीभी लडकी या ओरते आये.. उनपे ध्यान रखना.. की कीतनी प्रेगनेन्ट हे.. बस उनकी जानकारीया मुजे चाहीये.. बाकी मे सब सम्हाल लुगा.. ओर मुना ओर बरखाकी सादीभी करवा दुगा..
सुधीर : (हसते) भाइ.. वो सब इन्फोर्मेशन तो मे देदुगा..क्या उनके मा बाप इस सादीके लीये मानेगे..?
देवायत : हां मान जायेगे.. क्युकी कुछ बात मुजे अैसी पता चली हे की दोनोकी सादी होजायेगी.. ओर कुछ ही दिनमे बाबाभी सबको समजाने इधर आ रहे हे..
सुधीर : (हसते) भाइ.. लगता हे बाबाने भुतकालमे जोभी बाते कहीथी आज सब सच होने जा रही हे.. अब हमारे गांवमेभी उन हिमाचलकी तराह होने लगा हे.. ओर सहेरमेभी ये बात बढ गइ हे.. वहाभी अैसे रीस्ते बहुत बढ गये हे.. भाइ.. इनमे मेरी कोइभी मददकी जरुरत होतो कहेना.. अबतो मेभी अैसे रीस्तोको गलत नही मानता.. क्युकी अैसे रीस्तोमे दोनोके बीच प्यारभी बहुत होता हे..
देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. लेकीन तु अब यहा अेक लेडीसकी बडी होस्पीटलके बारेमे सोचना.. क्युकी आगे जाकर इनकी बहुत जरुरत पडेगी.. तुम अेक बार सृतीको मीललेना.. वो कोइ तेरी मदद कर देगी..
सुधीर : (हसते) भाइ मेभी यही सोच रहा हु.. की कही बडी जगाह लेकर वो होस्पीटल मेही खोलदु.. अेक दो लेडीस डोक्टरको रखलु तो काम होजायेगा.. नीशाभी मेरी मदद करती रहेगी.. ओर मेरा क्लीनीकभी वहीसे चलाउगा.. तो बाकीका मेइन्टेनका काम नीशा देख लेगी.. क्या कहेते हो आप..?
देवायत : हां यार.. आइडीया अच्छा हे.. लेकीन ध्यान रखना.. वहा गरीब लोगोको मत लुटना.. तु समज गयानां..? वरना सबसे पहेले मे ही तुजे पीटुगा.. हें..हें..हें..
सुधीर : (हसते) नही भाइ.. मुजे धंधा नही करना.. बस सेवा करनी हे.. मे आपकी बात बीलकुल समज गया.. आप फीकर मत करो.. जो पैसे वाले हे उन्हीके पास ही फीस लेनी हे.. बाकी सब खर्चा ही लेना हे..
देवायत : (हसते) हां तब ठीक हे.. अगर जगाह नही मीलती तो रमेशको कहेना.. वो कुछ अेरेन्ज करदेगा..
सुधीर : (हसते) साला.. आज कल मीलताही नही.. पता नही कमीना कहा घुमता रहेता हे.. क्या आपको मीलता हे..?
देवायत : नही सुधीर.. मुजे नही मीला काफी टाइम होगया हे.. बस अभी वंदुकी नोकरका ओडर लेकर आये तबही मीलाथा.. (धीरेसे) सुधीर.. सुना हे उनकाभी कीसीके साथ चकर हे..? हें..हें..हें..
सुधीर : (हसते धीरेसे कानके पास) हां भाइ सही सुना हे आपने.. वो आपके पंचायतके सदस्य हेनां.. सामतभाइ.. बस उनकी बीवीको ठोकता हे.. कमीना बहुत ही छुपा रुस्तम नीकला.. हें..हें..हें.. दोनोही अलग अलग जाकर सहेरमे कीसी होटेलमे मीलते हे.. ओर वापस अलग अलग आजाते हे.. हें..हें..हें.. सालेने क्या मस्त गदराया माल सेट कीया हे.. हें..हें..हें..
नीशा : (कोल्ड्रींक लाते) अरे दोनो क्या खुसर पुसर कर रहे हो.. लीजीये ठंडा पीजीये.. हें..हें..हें..
सुधीर : (ठंडेका ग्लास लेते हसते) अरे कुछ नही.. नीशा.. देवु केह रहा हे.. की हम यहा लेडीसकी होस्पीटल खोलदे.. ओर उनको तुम ओर मे दोनो सम्हालेगे.. ओर सृतीभाभी भी हमारी हेल्प करेगी.. क्या कहेती हो तुम..? हें..हें..हें..
नीशा : (खुस होते देवायतको ठंडा देते) अरे वाह.. तबतो अच्छा हेना.. यहा कीसीको सहेरमे इनकी नइ बीवीके पास जानाही नही पडेगा.. हें..हें..हें..
देवायत : (ठंडा पीते) देखा.. सुधीर.. तेरे होस्पीटलके चकरमे मेरी बीवीका धंधा तो गया हाथसे.. हें..हें..हें..
सुधीर : (हसते) क्या भाइ.. आप भाभीकोही इधर बुलालो.. तो हम तीनो मीलकर ही होस्पीटल खोल देगे..
देवायत : (हसते) नही यार मेतो मजाक कर रहा हु.. वहा भी उनकी होस्पीटल बहुत अच्छी चल रही हे.. वो यहा आनेके लीे नही मानेगी.. फीरभी मे उसे अेक बार पुछ लुगा..
तीनोही कोल्ड्रींक पीते बाते करते रहे फीर देवायत वहासे न्योता देकर नीकल गया.. तब आज नीशा बहुत खुस थी.. क्युकी अपने मन चाहे प्यारको पानेमे अेक कदम आगे बढ चुकी थी.. तो दुसरी ओर देवायत सीधाही रमेशके घर पहोंभ गया.. तो वहा रमेश अभी अभी घरपे आया था.. तो चारुभाभी कीचनमे खाना पका रहीथी.. तब वंदना पुनमको मीलने गइ थी.. ओर रमेशने उनको देखतेही हसते गले लगा लीया....
कन्टीन्यु