रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - १२९/१
तीनोही कोल्ड्रींक पीते बाते करते रहे फीर देवायत वहासे न्योता देकर नीकल गया.. तब आज नीशा बहुत खुस थी.. क्युकी अपने मन चाहे प्यारको पानेमे अेक कदम आगे बढ चुकी थी.. तो दुसरी ओर देवायत सीधाही रमेशके घर पहोंभ गया.. तो वहा रमेश अभी अभी घरपे आया था.. तो चारुभाभी कीचनमे खाना पका रहीथी.. तब वंदना पुनमको मीलने गइ थी.. ओर रमेशने उनको देखतेही हसते गले लगा लीया....अब आगे
रमेश : (हसते) आओ भाइ.. अच्छा हुआ आप आगये.. वरना कल मे आपको मीलनेही आनेवाला था..
देवायत (सोफे पे बेठते) क्यु..? कुछ काम था क्या..? कहो.. आजकल कहा घुमता हे..? मीलता ही नही..
रमेश : भाइ कल वो स्कुलकी परमीशन आगइ हे.. तो दो तीन कोन्ट्राक्टरको मीलने गयाथा.. तो आप कहोतो टेन्डर नीकालके कीसीको काम देदे..? आप देखलो.. कीसको काम देना हे.. क्युकी बच्चेका अेडमीशन इतने आ गये हे की पंचायतके दो रुमभी कम पड जायेगे.. तो जीतनी जल्दी हो सके हमे स्कुल तैयार कर देनी पडेगी..
देवायत : रमेश तुम दो तीन दिनके बाद सब कोन्ट्रक्टरको बुलालो.. लीगल पेपर वर्क तुम देख लेना.. क्युकी कल मेरी सृतीके साथ आश्रमपे सादी हे तो दो तीन दिनके बाद हम देख लेगे.. बस उसीका न्योता देने आया हु.. आप तीनोको कल सुबह घर आजाना हे.. वहीसे सब आश्रमकी ओर नीकल जायेगे..
चारु : (पानी लाते हसते) अरे वाह.. सादीका दिन फीक्स होगया..? चलो अच्छा हुआ.. हम तीनो कल सुबह पहोंच जायेगे.. हें..हें..हें..
रमेश : (हसते) सोरी भाइ.. कल मे नही आपाउगा.. कल मुजेभी सहेर जाना हे.. वो जीला पंचायतकी ओफीसमे कल मुजे कुछ पेपर सबमीट करवानेहे कलका टाइम दीया हे.. तो आजही रश्मीभाभीसे कहेकर सब कंपलीट करवा दीया हे.. तो मुजे सुबह वही जाना हे.. आप अपनी भाभी ओर वंदनाको लेजाना..
चारु : (मनमे खुस होते) क्युजी..? आप परसो नही जा सकते..? अपने दोस्तकी सादी हे.. चलोनां..
रमेश : (हसते) नही चारु वो भाइको सब पता हे.. हमने उनको मीलनेका वक्त दीया हे.. अगर भाइ जायेगेतो वो इनको कभीभी मील सकते हे.. लेकीन हमे टाइम लेना पडता हे.. वो तुम नही समजोगी..
देवायत : (हसते) ठीक हे रमेश.. तुम चले जाना मे उनसे बात करलुगा.. अगर तेरा काम जल्दी होजाये तो तुम सीधा वहीसे चले आना..
रमेश : (हसते धीरेसे) भाइ.. वोतो ठीक हे.. लेकीन मुजे वहा दुसरा कामभी देखना हे.. अेक आदमीको मीलना हे.. कुछ पर्सनल काम हे.. मे आपको बादमे बता दुगा..
चारु : (हसते) देवरजी कामकी बात दोनो बादमे करलेना पहेले ये बताइअे क्या पीयेगे..?
देवायत : (हसते) कुछ नही मे चलता हु.. सुधीरके वहा कोल्ड्रींक पीकर ही इधर आया हु.. बस आप दोनो सुबह घरपे पहोंच जाना.. चलो मे चलता हु..
चारु : (हसते) अरे ना पीयोगेतो चलेगा.. बैठीये तो सही.. कहा जाना हे..? आये नही के भागने लगे..
देवायत : (खडा होते) भाभी घर जाना हे.. अभी भानुकोभी फोन करना हे.. ओर कल सुबह जल्दीभी नीकलना हे तो सुबह जल्दीसे घरपे आजायेगा..
चारु : (कामुक नजरोसे हसते हुअे देखते) हां.. आजाउगी.. अबतो आपहीके साथ आना पडेगा.. येतो आ नही रहे.. मे ओर वंदु दोनोही आजायेगी.. वैसे रमेश.. आपने मुजे बताया नही की कल आपको सहेर जाना हे.. पंचायतकी ओफीसके अलावा अैसा क्या काम हे..? कीसको मीलना हे आपको..?
रमेश : (हसते) अरे मुजेभी कहा पताथा.. ये तो वहा फोन कीया तो उसने कलही मुजे बुला लीया.. ओर मुजे कीससे मीलना हे वो क्या तुजे बताना जरुरी हे..? वोभी ओफीसका ही काम हे.. आजकल तुम मुजसे बहोत सक करती हो..
चारु : (थोडा गुस्सा होते) हां तो सकतो करुगीनां..? रात रातभर गायब रहेते हो.. रातमे कोनसी ओफीसका काम होता हे..?
देवायत : (हसते) अब आप दोनो आरामसे जगडा करो.. मुजे जाना हे.. हें..हें..हें..
तभी देवायत वहासे खडा होकर नीकलने लगा तो रमशे उनको बहार तक छोडने गया लेकीन आज देवायत रमेशके आग चल रहाथा तो चारुको देवायतके साथ सरारत करनेका कोइ मोका नही मीला.. ओर वो रमेशकी ओर गुस्सेसे देखते कीचनमे चली गइ.. तब रमेश ओर देवायत बहार नीकले.. तो रमेशकी दुकानपे उनका आदमी विभु दुकान बंध कर रहाथा.. तो दोनो वही रुक गये.. ओर विभु दुकान बंध करके चाबी देने रमेशके पास आगया.. तब..
विभु : (हसते देवायतकी ओर देखते) नमस्ते ठाकुरसाब.. आज कल दीखतेही नही.. आपकी महेरबानीसे मेरे घरके ओर जमीनके कागजात वापस मील गये.. आपका बहुत बहुत सुक्रिया.. (रमेशको चाबी देते) लीजीये मालीक चाबी.. अब घर चलता हु.. कल मुनाकी मां ओर बरखा सहेर जा रही हे..
रमेश : ठीक हे विभुभाइ.. क्या कुछ पैसे बैसे चाहीये..? (बटुअेमेसे पैसे नीकालकर देते) लीजीये उनको दे दीजीये सहेरमे जा रहेहे तो काम आयेगे.. क्या भाभीजी अपने मायके जा रही हे..?
विभु : (पैसे लेते खुस होते) जी.. कबसे मेरा साला बुला रहाथा.. तो दोनो मां बेटी उनको मीलने जा रही हे.. चलो मे चलता हु.. सुबह आजाउगा..
देवायत : (हसते) विभुभाइ.. अब जमीन वापस मील गइ हेतो उसे कीसीको भागमे खेतीके लीये दे दीजीये.. ताकी उनमेसेभी आपको पैसे मीले..
विभु : (हसते) ठाकुरसाब.. अब वोही करना हे.. क्युकी मुना तो ये काम करेगा नही.. वो पढा लीखा जो हे.. ओर उपरसे मुजसेभी ये काम होगा नही.. तो यही करुगा.. कभी हमारे घरपेतो आइअे.. आपकी भाभीके हाथोकी चाइ पीने.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हंम.. आउगा विभुभाइ.. अेक दिन जरुर आउगा.. क्युकी आपसेभी अेक जरुरी काम हे..
विभु : (हसते) अरे.. अैसे हमारे अहो भाग्य कहा..? जो आपको हमसे काम पडे.. फीरभी बताइअे क्या काम हे.. अगर मुजसे होगातो जरुर कर दुगा..
देवायत : (हसते) नही विभुभाइ अभी तो नही हे.. लेकीन मे जरुर आउगा..
विभु : (हसते) ठीक हे ठाकुरसाब मे चलता हु.. नमस्ते..
कहेते विभु अपने घर चला गया.. तब देवायत ओर रमेश दोनोही उनकी ओर देखते रहे.. विभुको पता नही थाकी अपनी बीवी ओर बरखा सहेरमे क्यु अपने मायके जा रही हे.. बस जीस घटनाओ का देवायत ओर मंजु इन्तजार कर रहेथे.. उन्ही की सुरुआत हो चुकी थी.. आज बरखाको सुबह फीरसे उल्टीया हुइ थी.. तब उनकी तजुर्बेकार मांको उनपे कुछ आसंकाये हुइ.. लेकीन उसने बरखाको कुछ नही कहा.. ओर उनके साथ सहेरमे उनके मामाके घर साथ चलनेकी बात कही.. तभी रमेशने हसते हुअे कहा..
रमेश : (हसते) भाइ.. अब ये बेचारा थक गया हे.. इनसे भारी काम नही होता.. तभी तो मेरी दुकान सम्हालके बैठा हे.. बेचारा बुहत भोला हे.. उनकोतो पताही नही हे की उनके पीछे घरमे क्या क्या होता हे.. क्या आपको इनके बारेमे कुछ ओर मालुम हे..? हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हंम.. मुजे सब पता हे.. मेरे पास सबकी कुंडली हे.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. अैसा तुजे यहा बहुत कुछ दिखनेको मीलेगा.. चल मे चलता हु.. अभी घर जाके भानुसेभी बात करके उनको न्योता देना हे.. वैसेतो उनको सब पता हे.. फीर भी उनको फोन तो करना पडेगा..
रमेश : (जोरोसे हसते) भानुभाइ.. भाइ इसीके बारेमे केह रहाथा.. क्या आपकोभी सब पता हे..? आप अभीतो चलो.. इनके बारेमे हम बादमे बात करेगे.. हें..हें..हें..
देवायत : (हसते) हां.. पता हे मुजे.. तुजे केहतो रहा हु.. की मेरे पास सबकी कुंडली हे.. अब तु सरपंच बनके सबपे अच्छा ध्यान रखता हे.. हें..हें..हें.. मुजे अभी कुछ नही केहना.. चल.. बाय..
कहेते देवायत हसते हुअे वहासे नीकल गया.. तो रमेशभी हसते हुअे वापस घरमे चला गया.. वहा रमेश वंदना ओर चारु तीनो मीलकर साथमे खानेके लीये बेठ गये.. तब देवायतभी अपने घरपे पहोंच गया.. ओर होलमे बेठकर भानुको फोन करने लगा.. तब मंजुभी आकर उनके पास बैठ गइ.. तभी भानुने फोन उठायातो देवायतने पुरी फेमीलीको कल सुबह सादीमे आनेके लीये न्योता देदीया..
तो दुसरी ओर लखन ओर धिरेनभी खेतोपे चले गये थे.. तो वहा लखनने धिरेनसे बाते करते उनको सभी सगाह घुमाया.. जबसे लखन ओर धिरेन अेक साथ हनीमुनपे गयेथे तो अेक दुसरेके साथ काफी कुछ घुल मील गयेथे.. ओर अेक दुसरेके साथ काफी खुल गयेथे.. दोनोही घुमनेकी जगहके बारेमे फीर लडकीयोके बारेमे भी खुलके चर्चा करने लगेथे.. तब धिरेनको नही पताथा की लखनको उनके ओर नीलमके बारेमे पता होने के बावजुद उनसे क्यु नजदीकीया बढा रहा हे..
लखन धिरेनको खेत दीखा रहाथा तब कुछ मजदुरन ओर उनकी जवान लडकीया लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते हस रहीथी.. तो लखनभी धिरेनके होनेके बावजुद उनकी ओर कामुक इसारा करते हसते हुअे आगे बढने लगा.. तो धिरेनभी उनकी हरकत देखके हसने लगा.. उनकोभी लखनके बारेमे सब पता चल गयाकी लखन बहुतही रंगीन मीजाजका हे.. ओर धिरेनको इन बातपे इन्ट्रेस होने लगा.. तब..
धिरेन : (हसते धीरेसे साथ चलते) लखनभैया.. लगता हे.. ये लडकीया आपपे कुछ ज्यादाही लटु हे.. हें..हें..हें.. कही इनके साथभी आपका कोइ चकर बकरतो नही हें..हें..हें..
लखन : (हसते धिरेनके कंधोपे हाथ रखते) जीजु.. यही तो हमारी मोज मस्ती करनेकी उमर हे.. क्या कभी आपके उपर कोइ लडकीया लटु नही हुइ..? हें..हें..हें..
धिरेन : (सरमाते हसते) नही लखनभैया.. बस पढाइ लीखाइसे फुरसत ही नही मीली.. तो कहासे लडकीया पटाउ..? आपने अबतक कीतनी लडकीया पटाइ हे..? हें..हें..हें..
लखन : (हसते) तबतो जीजु.. आपकी जवानी बेकारमे चली गइ.. आपतो कोलेजमेभी पढ चुके हो.. क्या वहाभी कोइ लडकी नही पटाइ..? हें..हें..हें.. मेभी आपकी तराह था.. लेकीन जबसे लतासे सगाइ हुइ तबसे मुजेभी इन लडकीयो मे इन्ट्रेस होने लगा.. ओर यहाकी लगभग लडकीयोको पटा चुका हु.. हें..हें..हें.. ओर कइ लडकीयोकी मां भी पटा चुका हु.. हें..हें..हें..
धिरेन : (आस्चर्यसे हसते) व्होट..? उनकी मां भी..? पटाइ मतलब..? आइ मीन.. कहा तक..
लखन : ((हसते धीरेसे) क्या धिरेन जीजु.. इतनाभी नही समजते हो..? देखना कीसीको कहेना मत.. खास करके पुनोदीदीको भी.. पटानेका मतलब.. (सरमाते हसते) मेरे नीचे लीटा चुका हु.. हें..हें..हें..आप समज गयेनां..
धिरेन : (सरमाते हसते) हां.. मे इतनाभी भोला नही हु.. मुजेतो अबभी यकीन नही हो रहा की आप.. इतने रंगीन मीजाजके कबसे होगये..? हें..हें..हें.. दीखनेमे तो अेकदम भोले भाले लगते हो.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) जीजु.. ये चीजही अैसी हे.. बस अेक बार स्वाद चखलो.. तो फीर.. हें..हें..हें.. क्या आपको देखना हे..? देखो.. अभी वो ट्युबवेलके पास वो लडकी हेनां..? जो वहा अकेली काम कर रही हे.. मेरी फेवरीट हे.. मुजे कभी मना नही करती.. जबभी उनको बुलाउ आजाती हे.. देखना हे..? अभी उनको बुलाता हु.. आप बादमे उस रुमके पीछे आजाना ओर खीडकीसे देख लेना आपको यकीन आजायेगा.. ओर देखना कोइ आवाज मत करना.. फीर वापस इधर चले आना.. हें..हें..हें.. देखो..
कहेते लखन हसते हुअे.. अकेला चलकर ट्युबवेल रुमके पास चला गया.. तो वो लडकी काम करते खडी होगइ.. ओर लखनके सामने देखते हसने लगी.. तभी लखनने उनको कुछ इसारा कीया ओर रुममे चला गया तो वो लडकी भी आजु बाजु नजर करते हसती हुइ धीरेसे रुममे चली गइ.. तब धिरेन अेक पेडके पीछेसे सब देख रहाथा.. जब दोनोही अंदर चले गये.. तब धिरेन धीरेसे चलके उस रुमके पीछे जाने लगा..
ओर धीरेसे पीछे जाकर खीडकीसे अंदरकी ओर जाकने लगा.. तब अंदर वो लडकी लखनके नीचे लेटी हुइ थी.. ओर लखन हाथके बल उचा होते जोरोसे कमर हीलाते उन लडकीको चोद रहाथा.. जीसे देखकर धिरेन दंग रेह गया.. वो ये सब देखकर उतेजीत होने लगा.. धिरेनका लंड पेन्टके अंदर जटके मारने लगा.. तब उस लडकी जोरोसे सीसकारीया करते हस हसके लखनसे चुदवा रही थी.. ओर चुदवाते भी लखनसे बाते कर रही थी..

लडकी : (कामुक आवाजमे) आइ.. लखनभैया थोडा धीरेसे चोदीयेनां.. कीतने दिनोके बाद आये हो.. कही दीख ही नही रहेथे.. आपके बीना यहा मन नही लग रहा था.. आपकी आदत जो लग चुकी हे..
लखन : (जोरोसे चोदते) अरे तेरी भाभीके साथ हनीमुनपे गयाथा.. तो कहासे दीखता..? अब आगया हुनां.. तुजे ओर तेरी माको अेक दिन साथमे चोदुगा.. हें..हें..हें..
लडकी : (हसते) क्या भैया.. वो तो पहेलेसेही आपकी तारीफ करती रहेती हे.. मां भी आपको याद कर रहीथी.. उसेभी मील लेना.. भैया.. आइपीलकी टेबलेट लाकर देना.. वो खतम होगइ हे.. आपनेतो मुने आपकी दिवानी बनादी हे.. क्या मस्त चोदते हो आप.. देखना अेक दिन पका आप मुजे पेटसे कर देगे..
लखन : (जोरोसे चोदते) वो तेरी मा के पास होगी.. अभी उसीसे लेकर खा.. लेना.. कल नही परसो आउगा तब लेकर आउगा.. आइ.. बस.. मेरा होने वाला हे..
लडकी : (जोरोसे बाहोमे भीचते) आइ. धीरे.. चोदोना.. आह..आह..आइ.. उइइइ मां.. लखनभैया.. मे गइइइइ... आह.. आह.. आइइइ.. आह..आह.. आ..ह..इइइइ...
लखन : (हांफते) बस.. बस.. हो गया.. हो गया..
कहेते लखन उन लडकीके सीनेपे ढेर होगया.. तब उस लडकी लखनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर धिरेन अपना लंड मसलते वहासे भारी मनसे नीकल गया.. क्युकी दोनोकी चुदाइ देखते धिरेनकोभी चुदाल करनेकी इच्छा होने लगीथी.. लेकीन लखन उनका साला था.. तो ये बात वो लखनको कैसे कहे..? अगर लखनके मनमे उनके प्रती गलत धारणा होगइ तो..? यही सोचते वो वापस अपनी जगाहपे आगया..
तब कुछही देरके बाद लखन भी हसते हुअे उनकी ओर आने लगा.. तब उस लडकी हसते हुअे लखनको जाते देख रहीथी.. तब लखन धिरेनके पास पहोंच गया तो उस लडकी धिरनको देखतेही खुब सरमाइ ओर जटसे वही नीचे बेठकर वापस अपना काम करने लगी.. तब लखन ओर धिरेन वापस ओफीसकी ओर चलने लगे.. तो धिरेन लखनकी ओर देखते हस रहाथा.. तो लखनने पुछही लीया..
लखन : (हसते) कहो जीजु.. अबतो आपको यकीन आ गयानां..? देख लीया हमारा लाइव सो.. हें..हें..हें.. साली क्या मस्त चुदवाती हे..
धिरेन : (सरमाते हसते) हां लखनभैया.. क्या आपको मेरी हाजरीसे सरम नही आइ.. आपतो बीन्दास्त उस लडकीको चोद रहेथे.. ओर उस लडकीकी बातोसे येभी पता चलाकी आपका उनकी मां के साथभी चकर हे..
लखन : (सरमाते हसते) जीजु.. ये बात कीसीको मत कहेना.. बस वहीतो मोज हे.. इसे ही जवानी कहेते हे.. आपने सही सोचा.. मे उन मा बेटी दोनोको चोदता हु.. दोनोही मुजपे लटु हे.. उनकी मांभी चुदवानेकी बहोत सौकीन हे.. जीजु.. क्या आपका मन नही करता..? कहोतो आपकी भी सेटींग करवा दु.. हें..हें..हें..
धिरेन : (सरमाते हसते) क्या लखनभैया.. आपकी बहेनको देखा हे.. अगर उसे पता चलातो मुजे तो मारही डालेगी.. हें..हें..हें..
लखन : (हसते) जीजु.. अैसी बाते घरपे कही नही जाती.. जीजातो आप अब हुअे हो.. पहेले हम दोस्त हे.. कहो.. कुछ इच्छा हे तो चलो वापस.. मे उन लडकीको भेजता हु.. जो अभी मे उसे चोदकर आया.. जाओ करलो मोज.. ओर फटाफट वापस आजाओ.. फीर हमे गांवमेभी जाना हे..
धिरेन : (सरमाते हसते) नही लखनभैया.. कही कीसीने देखलीया तो क्या सोचेगे.. की अभी अभी सादी हुइ हे ओर अयासी करने नीकले हे.. मुजेतो डर लग रहा हे.. हें..हें..हें..
लखन : (जालमे मछली फसते नजर आइ तो) अरे जीजु.. आप बहुत फंटुस हो.. इधर कोइ नही देखेगा.. हमारी ओफीससे इतनी दुर हेकी वहासे कोइ हमे देख ही नही सकता.. सब उधर काम कर रहे हे.. आप जाओ.. मे अभी उसे बात करके अंदर भेजता हु.. मे यही खडा हु.. आप अपना काम करके वापस आजाओ.. आप डरते बहुत हो.. जाओ..
धिरेन : (सर्मसार होते हसते) नही.. लखन भैया.. में.. कैसे.. आइ मीन.. वो कीसीको केह देगीतो..
लखन : (हसते ट्युबवेल रुमकी ओर धका मारते) अरे जाओ.. आप बहुत फंटुस हो.. वो कीसीको कुछ नही कहेगी.. मे उनसे बात करलुगा.. जाओ करलो मोज.. हें..हें..हें..
लखनने धका मारा तो धिरेन सरमाते हसते हुअे ट्युबवेल रुमकी ओर चल पडा.. तब लखनभी वापस उस लडकीके पास चला गया ओर उनसे कुछ बाते करली.. तब लडकी खुब सरमाइ.. ओर सरमाते हसते हुअे लखनको हां मे गरदन हिलाते रुमकी ओर जाने लगी.. तब लखन कातील स्माइल करते रुमके पीछे चला गया.. आज वो धिरेनको फसानेमे अपनी चालमे कामयाब होगया..
ओर लखनने नीलमको हमेसाके लीये अपने नीचे लीटानेका इन्तजाम करलीया.. क्युकी उनको पता थाकी धिरेन नीलमके पीछे पडा हे.. ओर नीलम उनकी साली थी.. तो वो मनही मन अपनी सालीपे अपना पहेला अधीकार मानता था.. जबसे लताने लखनको धिरेन ओर नीलमकी छेडछाड कारमे दीखाइ.. तबसे ही लखनको धिरेनसे ज्वेसेसी हो रहीथी.. ओर तबसे वो नीलमको अेक अलग नजरसे देखते उनको पानेकी फीराकमे था..
लखन धीरेसे अपना मोबाइल नीकालकर खीडकीके पास चला गया.. तब उस लडकी धिरेनको नंगा करके घोडी बन गइ.. तब धिरेनभी काफी उतेजीत हो गयाथा.. ओर उनकी कुछ हद तक सरम चली गइथी.. वो उस लडकीके पीछे चला गया.. ओर घुटनोके बल उनके पैरोके बीच बैठ गया.. तभी लडकीने धिरेनकी नुनी तनके खडी होती देखली.. तो सरमाते उनको हसी आगइ..
फीर उस लडकीने पीछे हाथ लेजाकर धिरेनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट कर दीया.. तो धिरेनने उनकी कमर दोनो हाथोसे पकडली.. ओर अेकही जटकेमे पुरा लंड उन लडकीकी चुतमे उतार दीया.. फीर लडकीको पीछेसे कमर हीलाते जोरोसे चोदने लगा.. तब दोनोको पता नही थाकी लखन खीडकीसे छुपरकर उन दोनोकी विडीयो क्लीप बना रहा हे.. तभी..

लडकी : (हसते) क्या जीजु.. आपतो बहुत सरमा रहे हो.. तो पहेले बोलना चाहीयेनां..? मे यही रहेती.. लगता हे आपभी इन चीजोके सौकीन हो.. कभी आते रहीयेगा..
धिरेन : (सरमाते हसते) अरे अैसे कैसे बोलदु.. मे इस घरका जमाइ हु.. तुम वाकइ मस्त हो.. अबतो जबभी इधर आउगा तुजे चोदने आजाउगा.. क्या मस्त चुदाइ करवाती हो..
लडकी : (सरमाते हसते) जीजु.. लेकीन ध्यान रखके इधर आना.. ओर जबभी आओ मुजे इसारा कर देना.. मे रुममे आजाउगी.. मुजे भी आपकी तराह चुदाइका बहुत सौक हे..
तब कुछही देरकी चुदाइके बाद धिरेन जोरोसे कमर हिलाते उन लडकीको चोदने लगा.. तो उस लडकीभी अपनी कमर आगे पीछे करते धिरेनका साथ देने लगी.. तब कुछही देरमे धिरेन जडके उस लडकीके पीठमे सर रखते ढेर होगया.. तो लडकी अैसेही घोडी बनके खडी रही..
फीर दोनोही अपने लंड चुतको साफ करके कपडे पहेनने लगे.. तो लखन अपना मोबाइल जटसे बंध करके वापस अपनी जगाहपे चला गया.. तब कुछही देरमे धिरेन उनके पास खुस होते हसते हुअे आ रहाथा.. तो उस लडकीभी इन दोनोकी ओर देखते हसती हुइ वापस अपने कामपे लग गइ.. तब धिरेनके आतेही..
लखन : (हसते) कहो जीजु.. कैसी हे वो..? हेनां.. कडक माल.. अब चलीये देर हो रही हे..
धिरेन : (हसते) हां यार.. पहेलेतो बहुत डर लग रहाथा.. लेकीन वो लडकीतो बहुतही बीन्दास्त थी.. बहुतही मस्त लडकी हे.. मुजे दुबारा आनेको केह रहीथी.. हें..हें..हें..
फीर दोनोही बाते करते गांवकी ओर चले गये.. वहा लखनके दोस्तोसे मीलकर काफी मस्ती मजाक करते रहे.. लेकीन आजकोइ धिरेनकी वजहसे खुलके बात नही कर रहेथे.. तब लखन समज गया ओर सबको कहाकी जीजुभी हमारी बीरादरीके आदमी हे.. इनसे डरनेकी जरुरत नही हे.. तब लखनके सब दोस्तो हसने लगे.. ओर सभी दोस्तो अेक दुसरेकी मासुकाके बारेमे खुलके बात करने लगे..
तब धिरेनको पता चलाकी यहाभी लखनके सभी दोस्तो लखनकी तराह रंगीन मीजाजके हे.. ओर धिरेनको येभी पता चलाकी लखनके सभी दोस्तो आपसी रीस्तोमे ही प्यार करते हे.. कोइ अपनी बहेनके बारेमे तो कोइ अपनी बुआके बारे बात कर रहेथे.. फीर साम होतेही दोनो घरपे आ रहेथे.. तब सामतके घरके पाससे गुजरे तब उनकी लडकी जागृती उनके घरके बहार दरवाजेपे खडी थी.. ओर लखनको देखतेही उनकी ओर कातीलाना स्माइल करने लगी..
तब लखनभी उनकी ओर हसते उनको आंख मार देता हे.. तब जागृती बहुतही सरमाइ.. ओर लखन धिरेनको थोडी देर वही खडे रहेनेको कहेकर जागृतीके पास चला गया.. तो जागृती गभराते अपने घरमे अंदर नजर डालके देखने लगी.. जब कोइ नही दीखा तो दोनोने धीमी आवाजमें कुछ बात करली..
तब वो लडकी जागृती बहुतही सरमाइ ओर हांमे गरदन हीलाते जटसे अपने घरके अंदर चली गइ.. ओर लखन हसते हुअे वापस धिरेनके पास आगया.. ओर दोनो घरपे चले गये.. तब देवायत घरपे होलमे बेठकर भानुको कलकी सादीका न्याता दे रहाथा ओर मंजु उनके पास बैठीथी.. तो दोनोको देखतेही..