Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 20 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती





my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२९/१

तीनोही कोल्ड्रींक पीते बाते करते रहे फीर देवायत वहासे न्योता देकर नीकल गया.. तब आज नीशा बहुत खुस थी.. क्युकी अपने मन चाहे प्यारको पानेमे अ‍ेक कदम आगे बढ चुकी थी.. तो दुसरी ओर देवायत सीधाही रमेशके घर पहोंभ गया.. तो वहा रमेश अभी अभी घरपे आया था.. तो चारुभाभी कीचनमे खाना पका रहीथी.. तब वंदना पुनमको मीलने गइ थी.. ओर रमेशने उनको देखतेही हसते गले लगा लीया....अब आगे

रमेश : (हसते) आओ भाइ.. अच्छा हुआ आप आगये.. वरना कल मे आपको मीलनेही आनेवाला था..

देवायत (सोफे पे बेठते) क्यु..? कुछ काम था क्या..? कहो.. आजकल कहा घुमता हे..? मीलता ही नही..

रमेश : भाइ कल वो स्कुलकी परमीशन आगइ हे.. तो दो तीन कोन्ट्राक्टरको मीलने गयाथा.. तो आप कहोतो टेन्डर नीकालके कीसीको काम देदे..? आप देखलो.. कीसको काम देना हे.. क्युकी बच्चेका अ‍ेडमीशन इतने आ गये हे की पंचायतके दो रुमभी कम पड जायेगे.. तो जीतनी जल्दी हो सके हमे स्कुल तैयार कर देनी पडेगी..

देवायत : रमेश तुम दो तीन दिनके बाद सब कोन्ट्रक्टरको बुलालो.. लीगल पेपर वर्क तुम देख लेना.. क्युकी कल मेरी सृतीके साथ आश्रमपे सादी हे तो दो तीन दिनके बाद हम देख लेगे.. बस उसीका न्योता देने आया हु.. आप तीनोको कल सुबह घर आजाना हे.. वहीसे सब आश्रमकी ओर नीकल जायेगे..

चारु : (पानी लाते हसते) अरे वाह.. सादीका दिन फीक्स होगया..? चलो अच्छा हुआ.. हम तीनो कल सुबह पहोंच जायेगे.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) सोरी भाइ.. कल मे नही आपाउगा.. कल मुजेभी सहेर जाना हे.. वो जीला पंचायतकी ओफीसमे कल मुजे कुछ पेपर सबमीट करवानेहे कलका टाइम दीया हे.. तो आजही रश्मीभाभीसे कहेकर सब कंपलीट करवा दीया हे.. तो मुजे सुबह वही जाना हे.. आप अपनी भाभी ओर वंदनाको लेजाना..

चारु : (मनमे खुस होते) क्युजी..? आप परसो नही जा सकते..? अपने दोस्तकी सादी हे.. चलोनां..

रमेश : (हसते) नही चारु वो भाइको सब पता हे.. हमने उनको मीलनेका वक्त दीया हे.. अगर भाइ जायेगेतो वो इनको कभीभी मील सकते हे.. लेकीन हमे टाइम लेना पडता हे.. वो तुम नही समजोगी..

देवायत : (हसते) ठीक हे रमेश.. तुम चले जाना मे उनसे बात करलुगा.. अगर तेरा काम जल्दी होजाये तो तुम सीधा वहीसे चले आना..

रमेश : (हसते धीरेसे) भाइ.. वोतो ठीक हे.. लेकीन मुजे वहा दुसरा कामभी देखना हे.. अ‍ेक आदमीको मीलना हे.. कुछ पर्सनल काम हे.. मे आपको बादमे बता दुगा..

चारु : (हसते) देवरजी कामकी बात दोनो बादमे करलेना पहेले ये बताइअ‍े क्या पीयेगे..?

देवायत : (हसते) कुछ नही मे चलता हु.. सुधीरके वहा कोल्ड्रींक पीकर ही इधर आया हु.. बस आप दोनो सुबह घरपे पहोंच जाना.. चलो मे चलता हु..

चारु : (हसते) अरे ना पीयोगेतो चलेगा.. बैठीये तो सही.. कहा जाना हे..? आये नही के भागने लगे..

देवायत : (खडा होते) भाभी घर जाना हे.. अभी भानुकोभी फोन करना हे.. ओर कल सुबह जल्दीभी नीकलना हे तो सुबह जल्दीसे घरपे आजायेगा..

चारु : (कामुक नजरोसे हसते हुअ‍े देखते) हां.. आजाउगी.. अबतो आपहीके साथ आना पडेगा.. येतो आ नही रहे.. मे ओर वंदु दोनोही आजायेगी.. वैसे रमेश.. आपने मुजे बताया नही की कल आपको सहेर जाना हे.. पंचायतकी ओफीसके अलावा अ‍ैसा क्या काम हे..? कीसको मीलना हे आपको..?

रमेश : (हसते) अरे मुजेभी कहा पताथा.. ये तो वहा फोन कीया तो उसने कलही मुजे बुला लीया.. ओर मुजे कीससे मीलना हे वो क्या तुजे बताना जरुरी हे..? वोभी ओफीसका ही काम हे.. आजकल तुम मुजसे बहोत सक करती हो..

चारु : (थोडा गुस्सा होते) हां तो सकतो करुगीनां..? रात रातभर गायब रहेते हो.. रातमे कोनसी ओफीसका काम होता हे..?

देवायत : (हसते) अब आप दोनो आरामसे जगडा करो.. मुजे जाना हे.. हें..हें..हें..

तभी देवायत वहासे खडा होकर नीकलने लगा तो रमशे उनको बहार तक छोडने गया लेकीन आज देवायत रमेशके आग चल रहाथा तो चारुको देवायतके साथ सरारत करनेका कोइ मोका नही मीला.. ओर वो रमेशकी ओर गुस्सेसे देखते कीचनमे चली गइ.. तब रमेश ओर देवायत बहार नीकले.. तो रमेशकी दुकानपे उनका आदमी विभु दुकान बंध कर रहाथा.. तो दोनो वही रुक गये.. ओर विभु दुकान बंध करके चाबी देने रमेशके पास आगया.. तब..

विभु : (हसते देवायतकी ओर देखते) नमस्ते ठाकुरसाब.. आज कल दीखतेही नही.. आपकी महेरबानीसे मेरे घरके ओर जमीनके कागजात वापस मील गये.. आपका बहुत बहुत सुक्रिया.. (रमेशको चाबी देते) लीजीये मालीक चाबी.. अब घर चलता हु.. कल मुनाकी मां ओर बरखा सहेर जा रही हे..

रमेश : ठीक हे विभुभाइ.. क्या कुछ पैसे बैसे चाहीये..? (बटुअ‍ेमेसे पैसे नीकालकर देते) लीजीये उनको दे दीजीये सहेरमे जा रहेहे तो काम आयेगे.. क्या भाभीजी अपने मायके जा रही हे..?

विभु : (पैसे लेते खुस होते) जी.. कबसे मेरा साला बुला रहाथा.. तो दोनो मां बेटी उनको मीलने जा रही हे.. चलो मे चलता हु.. सुबह आजाउगा..

देवायत : (हसते) विभुभाइ.. अब जमीन वापस मील गइ हेतो उसे कीसीको भागमे खेतीके लीये दे दीजीये.. ताकी उनमेसेभी आपको पैसे मीले..

विभु : (हसते) ठाकुरसाब.. अब वोही करना हे.. क्युकी मुना तो ये काम करेगा नही.. वो पढा लीखा जो हे.. ओर उपरसे मुजसेभी ये काम होगा नही.. तो यही करुगा.. कभी हमारे घरपेतो आइअ‍े.. आपकी भाभीके हाथोकी चाइ पीने.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. आउगा विभुभाइ.. अ‍ेक दिन जरुर आउगा.. क्युकी आपसेभी अ‍ेक जरुरी काम हे..

विभु : (हसते) अरे.. अ‍ैसे हमारे अहो भाग्य कहा..? जो आपको हमसे काम पडे.. फीरभी बताइअ‍े क्या काम हे.. अगर मुजसे होगातो जरुर कर दुगा..

देवायत : (हसते) नही विभुभाइ अभी तो नही हे.. लेकीन मे जरुर आउगा..

विभु : (हसते) ठीक हे ठाकुरसाब मे चलता हु.. नमस्ते..

कहेते विभु अपने घर चला गया.. तब देवायत ओर रमेश दोनोही उनकी ओर देखते रहे.. विभुको पता नही थाकी अपनी बीवी ओर बरखा सहेरमे क्यु अपने मायके जा रही हे.. बस जीस घटनाओ का देवायत ओर मंजु इन्तजार कर रहेथे.. उन्ही की सुरुआत हो चुकी थी.. आज बरखाको सुबह फीरसे उल्टीया हुइ थी.. तब उनकी तजुर्बेकार मांको उनपे कुछ आसंकाये हुइ.. लेकीन उसने बरखाको कुछ नही कहा.. ओर उनके साथ सहेरमे उनके मामाके घर साथ चलनेकी बात कही.. तभी रमेशने हसते हुअ‍े कहा..

रमेश : (हसते) भाइ.. अब ये बेचारा थक गया हे.. इनसे भारी काम नही होता.. तभी तो मेरी दुकान सम्हालके बैठा हे.. बेचारा बुहत भोला हे.. उनकोतो पताही नही हे की उनके पीछे घरमे क्या क्या होता हे.. क्या आपको इनके बारेमे कुछ ओर मालुम हे..? हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हंम.. मुजे सब पता हे.. मेरे पास सबकी कुंडली हे.. बस कुछ दिन इन्तजार करले.. अ‍ैसा तुजे यहा बहुत कुछ दिखनेको मीलेगा.. चल मे चलता हु.. अभी घर जाके भानुसेभी बात करके उनको न्योता देना हे.. वैसेतो उनको सब पता हे.. फीर भी उनको फोन तो करना पडेगा..

रमेश : (जोरोसे हसते) भानुभाइ.. भाइ इसीके बारेमे केह रहाथा.. क्या आपकोभी सब पता हे..? आप अभीतो चलो.. इनके बारेमे हम बादमे बात करेगे.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) हां.. पता हे मुजे.. तुजे केहतो रहा हु.. की मेरे पास सबकी कुंडली हे.. अब तु सरपंच बनके सबपे अच्छा ध्यान रखता हे.. हें..हें..हें.. मुजे अभी कुछ नही केहना.. चल.. बाय..

कहेते देवायत हसते हुअ‍े वहासे नीकल गया.. तो रमेशभी हसते हुअ‍े वापस घरमे चला गया.. वहा रमेश वंदना ओर चारु तीनो मीलकर साथमे खानेके लीये बेठ गये.. तब देवायतभी अपने घरपे पहोंच गया.. ओर होलमे बेठकर भानुको फोन करने लगा.. तब मंजुभी आकर उनके पास बैठ गइ.. तभी भानुने फोन उठायातो देवायतने पुरी फेमीलीको कल सुबह सादीमे आनेके लीये न्योता देदीया..

तो दुसरी ओर लखन ओर धिरेनभी खेतोपे चले गये थे.. तो वहा लखनने धिरेनसे बाते करते उनको सभी सगाह घुमाया.. जबसे लखन ओर धिरेन अ‍ेक साथ हनीमुनपे गयेथे तो अ‍ेक दुसरेके साथ काफी कुछ घुल मील गयेथे.. ओर अ‍ेक दुसरेके साथ काफी खुल गयेथे.. दोनोही घुमनेकी जगहके बारेमे फीर लडकीयोके बारेमे भी खुलके चर्चा करने लगेथे.. तब धिरेनको नही पताथा की लखनको उनके ओर नीलमके बारेमे पता होने के बावजुद उनसे क्यु नजदीकीया बढा रहा हे..

लखन धिरेनको खेत दीखा रहाथा तब कुछ मजदुरन ओर उनकी जवान लडकीया लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते हस रहीथी.. तो लखनभी धिरेनके होनेके बावजुद उनकी ओर कामुक इसारा करते हसते हुअ‍े आगे बढने लगा.. तो धिरेनभी उनकी हरकत देखके हसने लगा.. उनकोभी लखनके बारेमे सब पता चल गयाकी लखन बहुतही रंगीन मीजाजका हे.. ओर धिरेनको इन बातपे इन्ट्रेस होने लगा.. तब..

धिरेन : (हसते धीरेसे साथ चलते) लखनभैया.. लगता हे.. ये लडकीया आपपे कुछ ज्यादाही लटु हे.. हें..हें..हें.. कही इनके साथभी आपका कोइ चकर बकरतो नही हें..हें..हें..

लखन : (हसते धिरेनके कंधोपे हाथ रखते) जीजु.. यही तो हमारी मोज मस्ती करनेकी उमर हे.. क्या कभी आपके उपर कोइ लडकीया लटु नही हुइ..? हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) नही लखनभैया.. बस पढाइ लीखाइसे फुरसत ही नही मीली.. तो कहासे लडकीया पटाउ..? आपने अबतक कीतनी लडकीया पटाइ हे..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) तबतो जीजु.. आपकी जवानी बेकारमे चली गइ.. आपतो कोलेजमेभी पढ चुके हो.. क्या वहाभी कोइ लडकी नही पटाइ..? हें..हें..हें.. मेभी आपकी तराह था.. लेकीन जबसे लतासे सगाइ हुइ तबसे मुजेभी इन लडकीयो मे इन्ट्रेस होने लगा.. ओर यहाकी लगभग लडकीयोको पटा चुका हु.. हें..हें..हें.. ओर कइ लडकीयोकी मां भी पटा चुका हु.. हें..हें..हें..

धिरेन : (आस्चर्यसे हसते) व्होट..? उनकी मां भी..? पटाइ मतलब..? आइ मीन.. कहा तक..

लखन : ((हसते धीरेसे) क्या धिरेन जीजु.. इतनाभी नही समजते हो..? देखना कीसीको कहेना मत.. खास करके पुनोदीदीको भी.. पटानेका मतलब.. (सरमाते हसते) मेरे नीचे लीटा चुका हु.. हें..हें..हें..आप समज गयेनां..

धिरेन : (सरमाते हसते) हां.. मे इतनाभी भोला नही हु.. मुजेतो अबभी यकीन नही हो रहा की आप.. इतने रंगीन मीजाजके कबसे होगये..? हें..हें..हें.. दीखनेमे तो अ‍ेकदम भोले भाले लगते हो.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) जीजु.. ये चीजही अ‍ैसी हे.. बस अ‍ेक बार स्वाद चखलो.. तो फीर.. हें..हें..हें.. क्या आपको देखना हे..? देखो.. अभी वो ट्युबवेलके पास वो लडकी हेनां..? जो वहा अकेली काम कर रही हे.. मेरी फेवरीट हे.. मुजे कभी मना नही करती.. जबभी उनको बुलाउ आजाती हे.. देखना हे..? अभी उनको बुलाता हु.. आप बादमे उस रुमके पीछे आजाना ओर खीडकीसे देख लेना आपको यकीन आजायेगा.. ओर देखना कोइ आवाज मत करना.. फीर वापस इधर चले आना.. हें..हें..हें.. देखो..

कहेते लखन हसते हुअ‍े.. अकेला चलकर ट्युबवेल रुमके पास चला गया.. तो वो लडकी काम करते खडी होगइ.. ओर लखनके सामने देखते हसने लगी.. तभी लखनने उनको कुछ इसारा कीया ओर रुममे चला गया तो वो लडकी भी आजु बाजु नजर करते हसती हुइ धीरेसे रुममे चली गइ.. तब धिरेन अ‍ेक पेडके पीछेसे सब देख रहाथा.. जब दोनोही अंदर चले गये.. तब धिरेन धीरेसे चलके उस रुमके पीछे जाने लगा..

ओर धीरेसे पीछे जाकर खीडकीसे अंदरकी ओर जाकने लगा.. तब अंदर वो लडकी लखनके नीचे लेटी हुइ थी.. ओर लखन हाथके बल उचा होते जोरोसे कमर हीलाते उन लडकीको चोद रहाथा.. जीसे देखकर धिरेन दंग रेह गया.. वो ये सब देखकर उतेजीत होने लगा.. धिरेनका लंड पेन्टके अंदर जटके मारने लगा.. तब उस लडकी जोरोसे सीसकारीया करते हस हसके लखनसे चुदवा रही थी.. ओर चुदवाते भी लखनसे बाते कर रही थी..





लडकी : (कामुक आवाजमे) आइ.. लखनभैया थोडा धीरेसे चोदीयेनां.. कीतने दिनोके बाद आये हो.. कही दीख ही नही रहेथे.. आपके बीना यहा मन नही लग रहा था.. आपकी आदत जो लग चुकी हे..

लखन : (जोरोसे चोदते) अरे तेरी भाभीके साथ हनीमुनपे गयाथा.. तो कहासे दीखता..? अब आगया हुनां.. तुजे ओर तेरी माको अ‍ेक दिन साथमे चोदुगा.. हें..हें..हें..

लडकी : (हसते) क्या भैया.. वो तो पहेलेसेही आपकी तारीफ करती रहेती हे.. मां भी आपको याद कर रहीथी.. उसेभी मील लेना.. भैया.. आइपीलकी टेबलेट लाकर देना.. वो खतम होगइ हे.. आपनेतो मुने आपकी दिवानी बनादी हे.. क्या मस्त चोदते हो आप.. देखना अ‍ेक दिन पका आप मुजे पेटसे कर देगे..

लखन : (जोरोसे चोदते) वो तेरी मा के पास होगी.. अभी उसीसे लेकर खा.. लेना.. कल नही परसो आउगा तब लेकर आउगा.. आइ.. बस.. मेरा होने वाला हे..

लडकी : (जोरोसे बाहोमे भीचते) आइ. धीरे.. चोदोना.. आह..आह..आइ.. उइइइ मां.. लखनभैया.. मे गइइइइ... आह.. आह.. आइइइ.. आह..आह.. आ..ह..इइइइ...

लखन : (हांफते) बस.. बस.. हो गया.. हो गया..

कहेते लखन उन लडकीके सीनेपे ढेर होगया.. तब उस लडकी लखनकी पीठ सहेलाने लगी.. ओर धिरेन अपना लंड मसलते वहासे भारी मनसे नीकल गया.. क्युकी दोनोकी चुदाइ देखते धिरेनकोभी चुदाल करनेकी इच्छा होने लगीथी.. लेकीन लखन उनका साला था.. तो ये बात वो लखनको कैसे कहे..? अगर लखनके मनमे उनके प्रती गलत धारणा होगइ तो..? यही सोचते वो वापस अपनी जगाहपे आगया..

तब कुछही देरके बाद लखन भी हसते हुअ‍े उनकी ओर आने लगा.. तब उस लडकी हसते हुअ‍े लखनको जाते देख रहीथी.. तब लखन धिरेनके पास पहोंच गया तो उस लडकी धिरनको देखतेही खुब सरमाइ ओर जटसे वही नीचे बेठकर वापस अपना काम करने लगी.. तब लखन ओर धिरेन वापस ओफीसकी ओर चलने लगे.. तो धिरेन लखनकी ओर देखते हस रहाथा.. तो लखनने पुछही लीया..

लखन : (हसते) कहो जीजु.. अबतो आपको यकीन आ गयानां..? देख लीया हमारा लाइव सो.. हें..हें..हें.. साली क्या मस्त चुदवाती हे..

धिरेन : (सरमाते हसते) हां लखनभैया.. क्या आपको मेरी हाजरीसे सरम नही आइ.. आपतो बीन्दास्त उस लडकीको चोद रहेथे.. ओर उस लडकीकी बातोसे येभी पता चलाकी आपका उनकी मां के साथभी चकर हे..

लखन : (सरमाते हसते) जीजु.. ये बात कीसीको मत कहेना.. बस वहीतो मोज हे.. इसे ही जवानी कहेते हे.. आपने सही सोचा.. मे उन मा बेटी दोनोको चोदता हु.. दोनोही मुजपे लटु हे.. उनकी मांभी चुदवानेकी बहोत सौकीन हे.. जीजु.. क्या आपका मन नही करता..? कहोतो आपकी भी सेटींग करवा दु.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) क्या लखनभैया.. आपकी बहेनको देखा हे.. अगर उसे पता चलातो मुजे तो मारही डालेगी.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) जीजु.. अ‍ैसी बाते घरपे कही नही जाती.. जीजातो आप अब हुअ‍े हो.. पहेले हम दोस्त हे.. कहो.. कुछ इच्छा हे तो चलो वापस.. मे उन लडकीको भेजता हु.. जो अभी मे उसे चोदकर आया.. जाओ करलो मोज.. ओर फटाफट वापस आजाओ.. फीर हमे गांवमेभी जाना हे..

धिरेन : (सरमाते हसते) नही लखनभैया.. कही कीसीने देखलीया तो क्या सोचेगे.. की अभी अभी सादी हुइ हे ओर अयासी करने नीकले हे.. मुजेतो डर लग रहा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (जालमे मछली फसते नजर आइ तो) अरे जीजु.. आप बहुत फंटुस हो.. इधर कोइ नही देखेगा.. हमारी ओफीससे इतनी दुर हेकी वहासे कोइ हमे देख ही नही सकता.. सब उधर काम कर रहे हे.. आप जाओ.. मे अभी उसे बात करके अंदर भेजता हु.. मे यही खडा हु.. आप अपना काम करके वापस आजाओ.. आप डरते बहुत हो.. जाओ..

धिरेन : (सर्मसार होते हसते) नही.. लखन भैया.. में.. कैसे.. आइ मीन.. वो कीसीको केह देगीतो..

लखन : (हसते ट्युबवेल रुमकी ओर धका मारते) अरे जाओ.. आप बहुत फंटुस हो.. वो कीसीको कुछ नही कहेगी.. मे उनसे बात करलुगा.. जाओ करलो मोज.. हें..हें..हें..

लखनने धका मारा तो धिरेन सरमाते हसते हुअ‍े ट्युबवेल रुमकी ओर चल पडा.. तब लखनभी वापस उस लडकीके पास चला गया ओर उनसे कुछ बाते करली.. तब लडकी खुब सरमाइ.. ओर सरमाते हसते हुअ‍े लखनको हां मे गरदन हिलाते रुमकी ओर जाने लगी.. तब लखन कातील स्माइल करते रुमके पीछे चला गया.. आज वो धिरेनको फसानेमे अपनी चालमे कामयाब होगया..

ओर लखनने नीलमको हमेसाके लीये अपने नीचे लीटानेका इन्तजाम करलीया.. क्युकी उनको पता थाकी धिरेन नीलमके पीछे पडा हे.. ओर नीलम उनकी साली थी.. तो वो मनही मन अपनी सालीपे अपना पहेला अधीकार मानता था.. जबसे लताने लखनको धिरेन ओर नीलमकी छेडछाड कारमे दीखाइ.. तबसे ही लखनको धिरेनसे ज्वेसेसी हो रहीथी.. ओर तबसे वो नीलमको अ‍ेक अलग नजरसे देखते उनको पानेकी फीराकमे था..

लखन धीरेसे अपना मोबाइल नीकालकर खीडकीके पास चला गया.. तब उस लडकी धिरेनको नंगा करके घोडी बन गइ.. तब धिरेनभी काफी उतेजीत हो गयाथा.. ओर उनकी कुछ हद तक सरम चली गइथी.. वो उस लडकीके पीछे चला गया.. ओर घुटनोके बल उनके पैरोके बीच बैठ गया.. तभी लडकीने धिरेनकी नुनी तनके खडी होती देखली.. तो सरमाते उनको हसी आगइ..

फीर उस लडकीने पीछे हाथ लेजाकर धिरेनका लंड पकडकर अपनी चुतपे सेट कर दीया.. तो धिरेनने उनकी कमर दोनो हाथोसे पकडली.. ओर अ‍ेकही जटकेमे पुरा लंड उन लडकीकी चुतमे उतार दीया.. फीर लडकीको पीछेसे कमर हीलाते जोरोसे चोदने लगा.. तब दोनोको पता नही थाकी लखन खीडकीसे छुपरकर उन दोनोकी विडीयो क्लीप बना रहा हे.. तभी..





लडकी : (हसते) क्या जीजु.. आपतो बहुत सरमा रहे हो.. तो पहेले बोलना चाहीयेनां..? मे यही रहेती.. लगता हे आपभी इन चीजोके सौकीन हो.. कभी आते रहीयेगा..

धिरेन : (सरमाते हसते) अरे अ‍ैसे कैसे बोलदु.. मे इस घरका जमाइ हु.. तुम वाकइ मस्त हो.. अबतो जबभी इधर आउगा तुजे चोदने आजाउगा.. क्या मस्त चुदाइ करवाती हो..

लडकी : (सरमाते हसते) जीजु.. लेकीन ध्यान रखके इधर आना.. ओर जबभी आओ मुजे इसारा कर देना.. मे रुममे आजाउगी.. मुजे भी आपकी तराह चुदाइका बहुत सौक हे..

तब कुछही देरकी चुदाइके बाद धिरेन जोरोसे कमर हिलाते उन लडकीको चोदने लगा.. तो उस लडकीभी अपनी कमर आगे पीछे करते धिरेनका साथ देने लगी.. तब कुछही देरमे धिरेन जडके उस लडकीके पीठमे सर रखते ढेर होगया.. तो लडकी अ‍ैसेही घोडी बनके खडी रही..

फीर दोनोही अपने लंड चुतको साफ करके कपडे पहेनने लगे.. तो लखन अपना मोबाइल जटसे बंध करके वापस अपनी जगाहपे चला गया.. तब कुछही देरमे धिरेन उनके पास खुस होते हसते हुअ‍े आ रहाथा.. तो उस लडकीभी इन दोनोकी ओर देखते हसती हुइ वापस अपने कामपे लग गइ.. तब धिरेनके आतेही..

लखन : (हसते) कहो जीजु.. कैसी हे वो..? हेनां.. कडक माल.. अब चलीये देर हो रही हे..

धिरेन : (हसते) हां यार.. पहेलेतो बहुत डर लग रहाथा.. लेकीन वो लडकीतो बहुतही बीन्दास्त थी.. बहुतही मस्त लडकी हे.. मुजे दुबारा आनेको केह रहीथी.. हें..हें..हें..

फीर दोनोही बाते करते गांवकी ओर चले गये.. वहा लखनके दोस्तोसे मीलकर काफी मस्ती मजाक करते रहे.. लेकीन आजकोइ धिरेनकी वजहसे खुलके बात नही कर रहेथे.. तब लखन समज गया ओर सबको कहाकी जीजुभी हमारी बीरादरीके आदमी हे.. इनसे डरनेकी जरुरत नही हे.. तब लखनके सब दोस्तो हसने लगे.. ओर सभी दोस्तो अ‍ेक दुसरेकी मासुकाके बारेमे खुलके बात करने लगे..

तब धिरेनको पता चलाकी यहाभी लखनके सभी दोस्तो लखनकी तराह रंगीन मीजाजके हे.. ओर धिरेनको येभी पता चलाकी लखनके सभी दोस्तो आपसी रीस्तोमे ही प्यार करते हे.. कोइ अपनी बहेनके बारेमे तो कोइ अपनी बुआके बारे बात कर रहेथे.. फीर साम होतेही दोनो घरपे आ रहेथे.. तब सामतके घरके पाससे गुजरे तब उनकी लडकी जागृती उनके घरके बहार दरवाजेपे खडी थी.. ओर लखनको देखतेही उनकी ओर कातीलाना स्माइल करने लगी..

तब लखनभी उनकी ओर हसते उनको आंख मार देता हे.. तब जागृती बहुतही सरमाइ.. ओर लखन धिरेनको थोडी देर वही खडे रहेनेको कहेकर जागृतीके पास चला गया.. तो जागृती गभराते अपने घरमे अंदर नजर डालके देखने लगी.. जब कोइ नही दीखा तो दोनोने धीमी आवाजमें कुछ बात करली..

तब वो लडकी जागृती बहुतही सरमाइ ओर हांमे गरदन हीलाते जटसे अपने घरके अंदर चली गइ.. ओर लखन हसते हुअ‍े वापस धिरेनके पास आगया.. ओर दोनो घरपे चले गये.. तब देवायत घरपे होलमे बेठकर भानुको कलकी सादीका न्याता दे रहाथा ओर मंजु उनके पास बैठीथी.. तो दोनोको देखतेही..
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १२९/२

मंजुला : (हसते) आगये दोनो..? कहा मदमासीया करने गये थे.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) दीदी कही नही.. बस लखनभैयाके साथ हमारे खेतोपे गयाथा.. ओर फीर गांवमे घुमके आगये.. वहा सभी दोस्तोको मील लीया.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) अच्छा.. अच्छा.. चलो दोनो फटाफट फ्रेस होकर अपनी बीवीयोको लेकर आजाओ.. डीनर करने बेठना हे.. तुम दोनोकाही इन्तजार कर रहीथी..

दोनो चुपचाप उपरकी मंजीलपे अपने कमरेपे चले गये तब पुनम भावना ओर लता तीनोही लखनके रुममे बेठ कर बाते कर रहीथी.. दरसल लखन ओर धिरेन खेतोपे चले गयेते तबसे दोनो अपने कमरेमे बैठकर बाते कर रहीथी.. तब भावनाभी उनके पास आकर बैठ गइथी.. ओर वोभी बातोमे सामील होगइ थी.. आज पुनमने लताओर भावनाको सभी बातोसे अवगत करवाया.. तभी धिरेन ओर लखन आगये तो तीनोही सरमाते हसने लगी.. भावना नीचे चली गइ.. तो चारो फ्रेस होकर नीचे डीनर करने आगये..

सबने मीलकर बाते करते डीनर करलीया.. फीर कल सुबह सबको जल्दी उठना था.. ओर सहेर जाकर थक भी गयेथे.. तो आज सब जल्दी सोने चले गये.. इस रात धिरेनने थकानकी वजहसे पुनमको सीर्फ अ‍ेक ही बार चोद पाया.. तो बाजुके रुममे लखन वायग्रा खाना चाहता था लेकीन आज लताने उसे खाने नही दीया.. तो लखनभी पुरी रातमे लताको सीर्फ दो बारही चोद पाया..

तो नीचेके रुममे आज देवायतने चंदाकी जबरदस्त चुदाइ करली.. तब वो थकके सो गइ.. ओर अभी देवायत मंजु के उपर लेटते उसे धीरे धीरे चोद रहाथा.. तब मंजुभी बहुतही मदहोस होकर अपनी कमर हीलाते देवायतसे मजेसे चुदवा रहीथी.. दोनो काफी देर तक आहीस्ता आहिस्ता मजेसे चुदाइ करते रहे.. ओर आखीर दोनोही साथमे चड गये.. तब मंजुने देवायतको अपना लंड चुतसे बहार नही नीकालने दीया..





मंजुला : (सरमाते हसते धीरेसे) जानु.. आज आप अ‍ैसेही अंदर डालकर लैटे रहो.. आज मे इसे अंदर लेकर सोना चाहती हु.. आज कुछ नया अनुभव करना हे.. आप लेट जाओ मे आपके उपर आकर आपके सीनेपे सर रखके सो जाउगी.. आप अ‍ैसेही बीना बहार नीलाले पलट जाओ..

देवायत : (बाहोमे भीचते पलटते हसते) मंजु.. आज तुजे क्या हो गया हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (सरमाते हसते सीना सहेलाते) जानु.. मेरा बस चलेतो मे आपसे कभी अलग ही ना होउ.. जब ये अंदर होताहे तब बहुत मजा आता हे.. तो आज मुजे अ‍ैसेही सोना हे..

देवायत : (हसते) मंजु अ‍ैसेही रहुगा तो फीरसे इच्छा होने लगेगी.. तब मे क्या करुगा..?

मंजुला : (सरमाते धीरसे होंठ चुमते) तो क्या हुआ.. आप मुजे फीरसे चोद लेना.. हें..हें..हें.. लेकीन आज इसे बहार मत नीकालना.. में सुबह तक इसे अंदर रखना चाहती हु..

देवायत : (हसते) चल ठीक हे.. लेकीन आज तुजपे इतनी ठरक कैसे चढ गइ.. कुछ देख लीया क्या..?

मंजुला : (हसते) जानु.. अब आप हो सके इतनी जल्दी लखनको सहेर भेजदो.. आजकल यहा रहेकर कुछ ज्यादा ही अयास होगया हे.. ओर हमारे धिरेनकोभी बीगाड रहा हे.. गांवकी अ‍ेक दो लडकीयोसे भी इनका टाका भीडा हुआ हे.. आप समज गयेनां..? हें..हें..हें..

देवायत : (आस्चर्यसे देखते) क्या धिरेनभी.. बीगाड रहा हे मतलब.. मंजु.. तुमने क्या जान लीया..?

मंजुला : (सरमाते हसते) जानु.. जब दोनो खेतोपे गयेथे.. तब अ‍ेक मजदुरन लडकीके साथ दोनो मजे करके आये हे.. ओर हमारे लखनने धिरेनको जान बुजकर फसाया हे.. नीलुको मीलनेके लीये.. उसने आज नीलमको पानेका पुरा इन्तजाम करलीया हे.. बस देखते जाओ.. बहुतही जल्द आपको अपनी बहेन वापस मील जायेगी..

देवायत : हंम.. मंजु.. अब मे उसे रोकभीतो नही सकता.. क्युकी मे खुद अ‍ैसे रीस्तोसे बंधा हुआ हु..

मंजुला : जानु.. मे आपको लखनको रोकनेके लीये नही केह रही हु.. बस आपको सीर्फ बता रही हु.. ताकी आपको पता चलेकी आपको आगे क्या करना हे.. जो होता हे होने दीजीये आप लखनको कुछ मत कहीयेगा.. वो जोभी करे उसे करनेदे.. आपही का फायदा हे..

देवायत : (हसते चुमते) हंम.. मंजु तुम मेरा मार्गदर्शन करती जाना.. मेरीतो कुछ समजमेही नही आ रहा..आजकल गांवमेभी बहुत कुछ सुननेको मीलता हे.. चल अब सोना नही हे क्या..?

मंजुला : (हसते होंठ चुमते) हंम.. सो जाओ.. हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. गुडनाइट जानु..

कहेते मंजु अ‍ैसेही देवायतका लंड अपनी चुतमे फसाकर देवायतके सीनेपे सर रखके सो गइ.. तब कुछही देरमे देवायतभी नींदकी आगोसमे चला गया.. ओर सब लोग सोगये.. तो आज सहेरमे भी भुमीको सादीकी कोइ खास तैयारीया नही करनी थी.. जब दो पहोरको सबने भोजन करलीया तो नीर्मलाने राजीवको उनकी दयाइ पीलकर सुला दीया.. तब सृती उनकी सादीकी तैयारीया करने अ‍ेक सहेलीको लेकर ब्युटी पार्लरमे चली गइ थी..





तब भुमीका ओर नीर्मला दोनोही उपरकी मंजीलपे सृतीके रुममे आराम करने चली गइ.. दोनोको अकेलमे मीलनेका मौका मील गया तो जाहीरसी बात हे दोनोके बीच लेस्बीयन रीस्ताथा.. तो दोनोही दरवाजा बंध करके पुरी नंगी होगइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलते अपने आपको सांत करने लगी.. जब दोनोही संतुस्ट होगइ तब नंगीही लेटते अ‍ेक दुसरेकी ओर करवट लेकर बाते करने लगी.. तब नीर्मलाने उस दिनकी भुमीका ओर किशनके रीस्तेके बारेमे अधुरी रेह गइ बातको छेड दीया..





तो आज भुमीकाने नरेशके साथ रीलेशनमे आनेसे लेकर बच्चेके सुखके लीये किशनके साथ रीलेशन.. फीर किशनके जानेके बाद अब तक देवायतके साथ रीलेशनमे आने तक की सब बाते नीर्मलाको बतादी.. जीसे सुनकर नीर्मला बहुतही उतेजीत होगइ.. ओर वो भुमीके होंठ चुमते.. देवायतके साथ खुदकी भी रीलेशनमे आनेकी बात करती हे.. दोनोही साम तक बाते करती रही.. तब सृती भी सामको ब्युटीपार्लरमे अपनी सब तैयारीया करके आगइ.. ओर अ‍ैसेही पुरे दिन ओर रात नीकल गये..

आज हवेलीपे सब लोग जल्दी उठकर कंपलीट होगये.. अबतक लता ओर पुनम दोनोही पकी सहेली हो गइ थी.. दोनोही आपसमे अ‍ेक दुसरेसे हर तरहकी बाते सेर करने लगीथी.. दोनोही अ‍ेक सुहागनकी तराह हाथोमे चुडया ओर पैरोमे पायलके साथ माथेपे बींदीया ओर मांगमे सींदुरके साथ आज सबधजके साथमे नीचे आगइ.. ओर भावनाके रुममे चली गइ.. तबतकत भावनाभी तैयार होकर अपनी बच्चीको तैयार कर रहीथी..

भावना : (हसते) अरे वाह.. मेरी दोनो बहेनेतो आज मस्त लग रही हे.. हें..हें..हें.. आओ आओ.. बैठो..

लता : (सरमाते हसते) दीदी.. क्या मे इनको तैयार करदु..? आप अपना दुसरा काम देखलो..

भावना : (हसते) नही लता.. सब होगया.. ओर यहा मुजेभी क्या दुसरा काम करने देते हे.. बस सारा दिन फ्रि ही तो रहेती हु.. यहा कोइ करनेका काम ही नही हे.. सब दया बहेन ओर रजीया बहेनही देख रही हे..

पुनम : (रहस्य भरी मुस्कानके साथ धीरेसे) भाभी.. तो फीर आप भी यहा रहेने आजाओ.. हें..हें..हें..

कहातो भावना अपनी बच्चीको तैयार करते अचानक रुक गइ.. ओर अपना मुह पीछे करते पुनमकी ओर देखते वोभी कातीलाना मुस्कानसे पुनमकी ओर देखती रही.. क्युकी पुनमकी बातसे उनको आनेवाले भविस्यके बारेमे कुछ रहस्यभरी बाते समजमे आगइ थी.. जो वो मंजुसे भी बहुत कुछ जान चुकीथी.. उनको अब खुदके बारेमे ओर लता - पुनमके बारेमे बहुत कुछ पता चल गयाथा.. तो पुनमको देखते धीरेसे कहा..

भावना : (हसते) दीदी.. आजाउगी.. आजाउगी.. आप फीकर मत करो.. अगर जरुरत पडी तो मेभी इधर आजाउगी.. तब मे आप ओर लता.. यहा खुब धमाल करेगे.. हें..हें..हें..

लता : (सरमाते हसते) अरे दीदी.. तबतो मजा आजायेगा.. आप आओतो सही.. मे पुनोदीदीको भी इधर बुला लुगी.. लेकीन लगता हे अब पोसीबल हे की नही..? क्युकी भाइ ओर भाभी हमे सहेरमे रहेनेके लीये भेज रहे हे.. आप मुजे आओतो फोन करना मे पुनो दीदीको लेकर इधर आजाउगी..

पुनम : (जोरोसे हसते) ओ खयाली पुलाव.. अभीतो चलो.. वो सब हम बादमे देखते हे.. बहार भाइ भाभी सब हमारा चाइ नास्तेपे इन्तजार कर रहे हे.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) पुनोदी.. उनको आज कहा चाइ नास्ता करना हे..? आज उनकी सादी हे तो उपवास नही रखेगे..? चलो हम तो कर लेते हे.. होगया सब कंपलीट..

फीर तीनोही हसती हुइ बहार आगइ.. तो लखन धिरेन देवायत सब लोग डाइनींगपे बैठे थे तब दया ओर रजीयाभी आज सजधजके चाइ नास्ता लेकर बहार आगइ.. आज वोभी साथ चल रहीथी तो घरपे सीर्फ चंपाभाभी ही रहेने वालीथी.. सबने चाइनास्ता करलीया.. तब भानुभी कारमे अपनी बीवी रमाको लेकर आ गया.. आज रमा भी बहुतही सजधजके मोर्डन होकर आइथी.. जैसे उनकी ओर भानुकी सादी हो.. आज सरला चाची नही आइथी.. वो आज भावेसको सम्हालके घरपे रुकीथी..

तो सब लोग रमाको आज अलगही रुपमे देखतेही रहे.. तो लखनभी रमाको देखता ही रेह गया.. रमाने आज स्लीव लेस ब्लाउस पहेनाथा.. वो आज बहुतही मोर्डन लुकमे थी.. तो लखनको आज रमा बहुतही सेक्सी ओर कामी दीख रहीथी.. ओर उनका लंड रमाको देखतेही पेन्टके अंदरही खडा होते जटके मारने लगा..

तब रमा आतेही पुनम लताके पास चली गइ.. ओर उनके साथ अकेली हस हसके बारे कर रहीथी.. तब लखन धीरेसे उन तीनोके पास जाकर खडा होगया.. तो कुछ ही देरके बाद सुधीर नीशा ओर चारु वंदना ओर रश्मीभी आगये.. तब पुनम लता उनके पास चली गइ.. तो लखनको रमासे बात करनेका मौका मील गया..

लखन : (हसते) अरे वाह.. भाभी.. आजतो इन कपडोमे क्या मस्त लग रही हो.. लगताही नहीकी भाइकी सादी हे.. अ‍ैसा लगता हे आज आपकी ओर भानुभाइकी सादी हे.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाके हसते) लखनजी.. तारीफके लीये सुक्रिया.. आपतो बोलते भी हो..? मेने तो सोचा हमारे जमाइ गुंगा हे.. हें..हें..हें.. आपके मुहमे जुबानही नही हे.. हें..हें..हें.. लेकीन आपतो अच्छा खासा मजाकभी करलेते हो.. हें..हें..हें.. चलो अच्छा लगा.. तारीफके लीये सुक्रिया..

लखन : (हसते धीरेसे) भाभी.. मे कोइ मजाक नही कर रहा.. आज आप सचमे बहुत खुबसुरत लगती हो.. अगर लतासे पहेले आप मील जाती तो मे आपसेही सादी करलेता.. हें..हें..हें..

रमा : (कातीलाना नजरोसे हसते हुअ‍े अ‍ेक मुका मारते) लखनजी.. कुछ तो सरम कीजीये.. अभी अभी आपकी मेरी ननंदके साथ सादी हुइ हे.. अभीसे उनसे जी भर गया..? ओर मत भुलो मे आपकी सहलज हु.. आपके सालेकी बीवी.. यानीकी अपनी भाभीके साथ फल्र्ट करते हो.. आने दिजीये मेरी ननंदको.. कहेती हु अपने पतीको जरा सम्हालके रखे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) सोरी भाभी.. मे तो मजाक कर रहा था.. हें..हें..हें.. क्या आपको बुरा लगा..?

रमा : (हसते नां मे गरदन हीलाते) नही.. मुजेतो खुसी हुइ की मेरा ननंदोइ इतना मजाकीया हे.. आपतो मेरे देवर जैसे हो.. ओर देवर भाभीमे तो अ‍ैसा मजाक चलताही रहेता हे.. हें..हें..हें.. आपके जैसे पतीको पाकर मेरी ननंदतो यहा राज करेगी.. कास आपके कोइ छोटेभाइभी होते.. तो मेरी नीलुका ब्याहभी उनसे करवा देती.. हें..हें..हें.. अब अपने हनीमुनसे फ्रि होगये हेतो आइअ‍े घरपे.. मेरी ननंदको लेकर हमारे घर कब आ रहे हो..?

लखन : (सरारतसे हसते) बस आज आपने प्यारसे न्योता दीया हेतो जरुर आजाउगा.. इतनी खुबसुरत भाभीको मीलने कोन नही आयेगा..? हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते हसते) आजाउगा मलब..? अरे आपको अकेला नही आना.. मेरी ननंदको साथ लेकर आना हे.. हें..हें..हें.. अकेले आओगे तो आपको घरमे घुसनेभी नही दुगी.. बाबा.. बहुत खतरा हे हें..हें..हें.. आज कुछ ज्यादाही तारीफ कर रहे हे.. हें..हें..हें..

लखन : (सरमाते हसते) भाभी.. अब आप मजाक कर रही हो.. हें..हें..हें.. इसमे काहेका खतरा..? जो सच हे वोहीतो केह रहा हु.. आप वाकइ आज बहुत खुबसुरत लग रही हे..

रमा : (कातीलाना स्माइल करते) ठीक हे.. दिल करेतो अकेले भी आइअ‍े.. आपही का ससुराल हे.. आप हमारे जमाइ हो तो आपकी खुब खातीरदारी करुगी.. चलीये अब सबके साथ बैठना हे.. हें..हें..हें..

कहेते रमा लखनकी ओर कातील मुस्कान करते सब लेडीसके पास चली गइ.. तब लखनभी हसते हुअ‍े वापस धिरेनके पास आकर बैठ गया.. आज रमाके साथ उनकी तारीफ करते पहेली बार कीसीने अ‍ैसे बात कीथी.. तो उनकोभी बहुत अच्छा लगा.. तभी मंजु अपने रुमसे नीकली तो चारु रश्मी वंदना सुधीर ओर नीशाको देखके खुस होगइ.. ओर चारुभाभीके पास आगइ तब उसे रमेश नही दीखा तो..

मंजुला : (हसते) अरे..? चारुभाभी.. आइअ‍े आइअ‍े.. रमेशभाइ नही आये..?

चारु : (हसते) नही.. आज उनको सहेरमे पंचायतका कुछ खास काम हेतो वही जा रहे हे..

मंजुला : (हसते) चलो ठीक हे.. तो देवु.. सबलोग आगये हे.. तो हम चले..?

भानु : (हसते) हां.. हां.. चलो सब.. कुछ लोग मेरी कारमे आजाओ हम अ‍ेडजेस्ट हो जायेगे.. हम तो कारमे सीर्फ दो लोग ही हे..

चंदा : धिरेन.. तुम लखनभैया ओर सुधीरभैया भानुभाइकी कारमे बैठ जाओ.. बाकीका ये बडी गाडीमे अ‍ेडजेस्ट हो जायेगे.. चलो.. ओर दया तुमभी अपना सब सामान लेलेना..?

दया : (हसते) हां दीदी पुनमदीदी ओर मेरा सब सामान डीकीमे रख दीया हे.. आप फीकर मत करो..

लखन : भाइ.. इतनी सारी लेडीस हे.. तो बडी गाडीमे भी सबको बैठनेमे प्रोबलेम होगी.. तो मे हमारे ये जीप ही ले लेता हु.. हम तीनो उनमे आजायेगे आप तीन लेडीसको भानुभाइकी कारमे बीठादो.. फीर सबको सहेरभी तो जाना हे.. आप वहा रुक जाना बाकी लोगोको लेकर मे ओर भानुभाइ वापस आजायेगे.. क्या कहेते हो..?

देवायत : (हसते) हां येभी ठीक हे.. लेकन ध्यानसे चलाना.. ओर हमारे पीछे ही आना.. चलो सब..

तब सबका सेटींग हो गया तो सब हसते हुअ‍े कारमे बैठने लगे.. तो रश्मी चारुभाभी नीशा तीनो भानुकी कारमे बैठ गये तब लखनने भी अपनी जीप लेली तो धिरेन सुधीर उनमे बैठ गये ओर बाकीकी सब लेडीस देवायतकी कारमे बैठकर आश्रमकी ओर नीकल गये.. तो वहा सृतीभी अ‍ेक दुल्हनकी तराह सजधजके तैयार होगइ.. ओर वोभी राजीवको आगे बीठाकर भुमीका ओर नीर्मलाको लेकर नीकल गइ..

मंजुने रास्तेमे ही फोन करके तैय जगाहपे रुकनेको कहा.. जहा रोडसे जंगलकी तराफ रास्ता मुडता हे..तब आधेही घंटेमे देवायत उन रोडसे जंगलकी ओर कारको मोडता हे.. तो वहा पहेलेसे ही सृती अपनी कार खडी करते सबका इन्तजार कर रही थी.. तो देवायतको आते देखकर ही सरमा गइ.. ओर हसने लगी.. तभी पीछे लखनभी अपनी खुली जीप लेकर आगया.. तो सृतीकी कारको धिरेनने लेलीया ओर सृतीको देवायतकी कारमे भेज दीय.. फीर सब लोग वहासे नीकलकर आश्रमकी ओर नीकल गये....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३०

मंजुने रास्तेमे ही फोन करके तैय जगाहपे रुकनेको कहा.. जहा रोडसे जंगलकी तराफ रास्ता मुडता हे..तब आधेही घंटेमे देवायत उन रोडसे जंगलकी ओर कारको मोडता हे.. तो वहा पहेलेसे ही सृती अपनी कार खडी करते सबका इन्तजार कर रही थी.. तो देवायतको आते देखकर ही सरमा गइ.. ओर हसने लगी.. तभी पीछे लखनभी अपनी खुली जीप लेकर आगया.. तो सृतीकी कारको धिरेनने लेलीया ओर सृतीको देवायतकी कारमे भेज दीय.. फीर सब लोग वहासे नीकलकर आश्रमकी ओर नीकल गये....अब आगे

आश्रमपे पहोंचतेही कार पार्क करके सबलोग अ‍ेक जगाह इकठा होकर अ‍ेक दुसरेको गले मीलने लगे.. तब रमाने लखनकी ओर देखा.. तो लखनने हसते हुअ‍े सबसे छुपके अपने हाथोके इसारोसे अ‍ेक बार फीर रमाके खुबसुरतीकी तारीफी करदी.. तब रमा बहुतही सर्मसार होगइ.. ओर अपनी नजरे जुकाते मुस्कुराते सबके पास चली गइ.. पता नही आज उसे लखनसे बार बार उनकी तारीफ करना बहुतही अच्छा लग रहाथा..

ओर वो नजरे चुराते लखनकी ओर देखने लगी.. फीर सब अ‍ेक दुसरेको मीलतेही अ‍ेक साथ आश्रमकी ओर जाने लगे.. तबभी लखन रमाके साथ चल रहाथा.. लखन अब कीसीभी हालमे रमाको सेट करना चाहता था.. ओर वो मीशन रमापे लगा हुआ था.. लखन अब कीतनी सारी लडकीया पटा चुकाथा.. तो इस खेलमे अब वो माहीर होगया था.. साथ चलते भी वो अन्जान बनकर रमाको छु लेता था..

तब रमा बहुतही सर्मसार होजाती.. ओर सबलोग होलमे आगये.. तब वहा बाबा ओर कुछ सेवक बेठे बाते कर रहेथे.. ओर सब लोग जाकर उनके पांव छुकर वही बैठने लगे.. जब सब बैठ गये तो वो सेवक लोग बाबाके चरणोमे प्रणाम करके नीकलने लगे ओर जाते देवायतको मीलकर उसे अभीवादन करके चले गये.. तब लखनभी रमाके पीछेही उनसे सटकर बैठ गया.. तब रमाके दिलकी धडकन बढ गइ.. क्युकी वहाभी लखन रमाको पीछेसे छु कर सरारत कर रहाथा.. तभी..

बाबा : (हसते) हां तो सब लोग.. बाराती बनकर आगये..? हें..हें..हें.. अरे.. आजतो राजीवभी आया हे..?

राजीव : (हसते पांव छुते) जी बाबा.. आजतो यहा हम सब बाराती भी हे.. ओर दुल्हन वाले भी हे.. सब घरके ही हे.. कहो.. कैसे हे आप..?

बाबा : (हसते आशीर्वाद देते) जीते रहो बेटा.. बस बहुत बढीया हु.. तुम कहो.. आज इधरका रास्ता कैसे भुल गये..? कीतने बरसोके बाद आये हो.. क्या धंधेमे इतना बीजी हो गयाथा..?

राजीव : (वही बैठते) जी बाबा.. जबसे गया तबसे इधर आनेका मौकाही नही मीला.. बस ये बच्चोकी सादीमे आयाथा तबसे यही हु.. ओर दो दिन पहेले भुमीके घर चला गयाथा.. अब ये सादी होजायेगी तब वापस घर जाना हे..

बाबा : (हसते) हंम.. तेरे जमाइकी सादीमे आये हो..? हें..हें..हें..

राजीव : (हसते) जी बाबा.. लेकीन आज मे दुल्हन वाला हु.. मुजेही कन्यादान देना हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (जोरोसे हसते) अच्छा..? लेकीन आज दुल्हे राजा कुछ नही बोलेगे..?

देवायत : (हसते) हां.. अब आप भी मेरी टांग खीचलो.. हें..हें..हें.. क्या बोलु..?

बाबा : (सुधीरकी ओर देखते हसते) बेटा.. ये कौन हे..? तेरा दोस्त हे..? मेने इनको कही देखा हे.. क्या पहेली बार इधर आया हे..?

देवायत : (हसते) जी नही बाबा.. ये मेरा दोस्त सुधीर हे.. डोक्टर हे.. अ‍ेक दो बार मेरे साथ इधर आचुका हे जब हम सब कोलेजमे थे.. अभी गांवमेही इनकी क्लीनीक हे.. (नीशाकी ओर इसारा करते) ओर ये उनकी वाइफ नीशा हे.. अभी हमारे गांवमेही रहेते हे..

बाबा : (हसते) अच्छा.. अच्छा.. लेकीन आज तेरा दुसरा दोस्त रमशे नही दीखाइ दे रहा.. कहा हे वो..?

देवायत : (हसते) जी.. आज उनको सहेरमे कुछ कामथातो वही गया हुआ हे.. हें..हें..हें.. इनकी पत्नी ओर बेटी दोनो ही आये हे..

मंजुला : (हसते नीशाकी ओर इसारा करते) बाबा इनको आशीर्वाद दिजीये.. की इनके घरमे अ‍ेक छोटासा महेमान आजाये.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां.. हां.. आशीर्वाद हे.. इनके घरमे जरुर अ‍ेक बच्चा आजायेगा.. क्युकी इनके नसीबमे ही अ‍ेक बच्चा लीखा हे.. तो जरुर आजायेगा.. फीकर मत करो..

कहातो नीशा सर्मसार होगइ.. ओर मुह चारुकी ओर घुमाते मंद मंद मुस्कुराने लगी.. तब सुधीरभी खुस होगया.. क्युकी उनको पताथा.. की वो बच्चा देनेमे सक्षम नही हे.. इसीलीये उनहोने खुद नीशाको देवायतके साथ रीलेशन रखनेको कहाथा.. तब पहेलेतो नीशा जुठ मुठ सुधीरसे नाराज होगइ.. तब सुधीरने उसे बात सीर्फ वो तीनोके बीचही रहेगी कहेकर मनाया.. तब वो खुसी खुसी मान गइ.. ओर आज उसे बाबाकी बातोसे पका यकीन होगया की उसे अब देवायतसे जरुर बच्चा होगा.. तभी..

बाबा : (हसते) डोक्टरसाब.. अब वो छोटा मोटा क्लीनीकसे काम नही चलेगा.. अब कोइ बडी होस्पीटल गांवमे बनालो.. ताकी आसपासके सभी गांव वालोको सहेरमे जाना नापडे..

सुधीर : (खुसीसे हसते) जी बाबा.. आपके मुहमे घी सकर.. हें..हें..हें.. आपका आर्शीवाद रहा तो वोभी होजायेगी.. इस बारेमे कल ही मेरी देवुसे बात हुइ हे.. बस आपका आशीर्वाद चाहीये.. तो वोभी होजायेगी..

बाबा : (हसते) हां वोतो हेही.. इस बारेमे कुछ हेल्प चाहीये तो तेरे दोस्तकी ये नइ बीबीसे ले लेना वोभी तेरी कुछ मदद कर देगी.. हें..हें..हें.. वोभीतो डाकटरनी हे.. हें..हें..हें..

कहातो सब लोग जोरोसे हसने लगे.. तब सृती सर्मसार होगइ.. फीर बाबा सबको लेकर मंदिर चले गये.. वहा मंदिरके परीसरमेही परमेनेन्ट अ‍ेक मंडप जैसा था.. बीचमे हवन कुन्डभी था.. तो बाबाने देवायत ओर सृतीको वही बीठा दीया ओर मंत्रो चार करते सादीकी विधीया सुरु करदी.. तब बाकीके सभी लोग पासमे बैठने लगे तो कुछ खडे रहेकर सादी देखने लगे.. लता पुनम वंदना सृतीके पास बैठ गइ..

तो भानु सुधीर ओर धिरेनभी थोडा दुर जाकर मंरिके परीसरमे बैठ गये.. दया रजीया रमा थोडी दुर खडे रहेके सादी देख रहेथे तो मंजु चंदा चारु रश्मी नीशा देवायतके पास बैठी थी.. तो राजीव ओर नीर्मला भुमीके साथ कन्यादान करने बैठ गये.. तभी लखन धीरेसे चलके दया रजीयाके पास आके खडा होगया.. तब रजीया लखनको देखकर खुब सरमाइ.. तो रमाभी लखनको देखतेही मुस्कुराने लगी.. ओर उनके पास जाकर खडी होगइ.. ओर उनसे मजाक करते बाते करने लगी..

रमा : (हसते) आइअ‍े लखनजी.. आप भी देख लीजीये आपको सादीकी रस्मे फीरसे ताजा हो जायेगी.. हें..हें..हें.. क्या दुबारा सादी करनेका मनतो नही कर रहा..? तो मेरी ननंदभी इधर बैठी हे.. कहोतो आपकी भी सादी फीरसे करवादे..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) क्या भाभी.. अभी अभीतो सादी हुइ हे.. ओर हम हनीमुन मनाकर भी आये हे.. तो मुजेतो सब याद हे.. हां अगर आप भुल गइ हे तो मे भानुभाइको कहेता हु आप दोनो वापस सादी करलीजीये.. हें..हें..हें.. आपके हनीमुनकी टीकीट मेरी तरफ से.. हें..हें..हें..

कहातो दया ओर रजीया जोरोसे हसने लगी.. फीर दोनो वापस सादी देखने लगी.. तब..

रमा : (सरमाते हसते लखनको बाजुमे मुका मारते) चलो हटो बदमास.. हें..हें..हें.. आप बहुतही नोटी हो.. अब इस उमरमे हम हनीमुन मनाने जायेगे..? कुछतो सरम कीजीये.. आप बहुत मस्ती करते हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) क्या भाभी..? आपको कीतना बडा चान्स दीयाथा.. वोभी खो दीया.. हें..हें..हें.. ओर कीसने कहा आपकी उमर बडी होगइ हे.. आप आजभी नीलुकी बडी बहेन लगती हे.. हें..हें..हें.. आज क्या मस्त कपडे पहेने हे.. बस अ‍ैसेही कपडे पहेनीये.. मस्त लगती हो.. भानुभाइ खुस होजायेगे.. हें..हें..हें..

रमा : (लखनको फीरसे मुका मारते सरमाकर) लखन.. आप बहुत बदमास होगये हो.. क्या बात हे सुबहसे मेरी ही तारीफ कर रहे हो..? आपका अपनी ये भाभीके साथ फल्र्ट करनेका अंदाज बहुतही अच्छा हे.. कही मेरी ननंदको छोडके मुजपे दिल बीलतो नही आ गया..? हें..हें..हें.. जो सुबहसे ही मेरे पीछे पडे हो..

लखन : (हसते) हायरे.. भाभी.. मेरी अ‍ैसी कीस्मत कहा.. जो आपसे दिल लगजाये.. लेकीन मेरी लता..? भाभी.. इनकीतो क्या बात करु.. थेन्क्स.. मुजे लता जैसी बीवी देनेके लीये.. हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. देखो.. कैसे जच रही हे.. बीलकुल आपहीकी तराह.. अब मेभी उनको अ‍ैसेही कपडे पहेननेके लीये कहुगा.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते हसते) हां.. इसीलीये केह रही हु.. आप दोनो फीरसे सादी करलो.. हें..हें..हें..

लखन : (मौका देखते हसते) क्या भाभी.. उनके साथतो अभी सादी करली हे.. हां अगर आपका मन कर रहा हे तो कहीये..? मे तैयार हु.. हें..हें..हें..

रमा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते हसते बाजुमे मुका मारते) लखनजी.. आप बहुतही सरारती हो.. सीधाही अपनी भाभीसे सादीका ओफर..? क्या दो दो बीवीया सम्हाल पाओगे..? हें..हें..हें.. अब आपसे मे क्या कहु..? अगर मुजसे सादी करलोगे तो आपके साले साहबको कौन सम्हालेगे.. हें..हें..हें.. हां अगर उनके पहेले मुजे आप मीले होतेतो कुछ सोचती.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां येभी सही हे.. लेकीन उनकी फीकर मत कीजीये.. उनको सम्हालने वाली बहुत हे.. हें..हें..हें.. (धीरेसे कानमे) भाभी.. मे सच केह रहा हु.. करलीजीये मुजसे सादी.. आप मुजे बहुतही अच्छी लग रही हे.. मे दो बीवीया सम्हाल सकता हु.. आज क्या मस्त लग रही हे.. मेरा तो आपपे दिल ही आगया.. ओर ये मे मजाकमे नही सचमे केह रहा हु.. सोच लीजीये..

रमा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते धीरेसे) लखनजी प्लीज.. मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. अगर कीसीने सुन लीया तो हम दोनोकी बदनामी होगी.. मेतो आपसे मजाक कर रहीथी.. आप तो सीरीयस होगये.. यहासे जाइअ‍े प्लीज..

लखन : (हसते धीरेसे) सोरी भाभी.. मे कुछ ज्यादाही बोल गया.. मे चलता हु.. लेकीन अभी मेने जो कहा उनपे गौर कीजीयेगा.. आप बहुत ही खुबसुरत लग रही हे.. मे आपको पसंद करने लगा हु.. आइ लव यु..

कहेते लखन वहासे चला गया तो रमा उसे सोक्ट होते देखते ही रेह गइ.. लखन अपने प्यारका इज्हार करके जा चुकाथा.. रमा अबभी सोक्ट होते पुतलीकी तराह खडी होकर अ‍ेक नजरसे लखनको जाते हुअ‍े देख रहीथी.. तब लखन रमाकी ओर देखे बीना राजीव भानु ओर धिरेनके पास जाकर बैठ गया.. तो रमा अबभी लखनकी ओर तीरछी नजरोसे देख रहीथी.. लेकीन लखनने उनकी ओर देखा तक नही..

तब रमाके दिलकी धडकन बढने लगी.. रमाके दोनो उरोज कठोर हो गये.. उनकी चुतमे हलचल तेज होगइ.. तभी उसे खयाल आयाकी वो कबसे लखनकी ओर देख रही हे.. ओर वो जेपते अपनी नजर लखनपे से हटालेती हे.. ओर नजर घुमाते सादीकी रश्मे देखने लगी.. लेकीन पता नही अब रमाका मन सादी देखनेमे नही लग रहा था.. ओर वो वही खडी रहेकर बार बार लखनकी ओर टेडी नजर करते उसे देखती रही..

लेकीन लखनभी रमाको तडपाना चाहता था.. अबतक लखनने अ‍ेक बारभी रमाकी ओर नही देखा.. तब ना जाने क्यु रमा बैचेन होने लगी.. ओर वो मंजु चंदाके पास बैठ गइ.. फीर भी बैठे बैठे बीचमे वो लखनको देखती रही.. आज लखनने रमाके दिलके तारको जोरोसे छेड दीया था.. लेकीन अबतो लखनभी इस खेलमे काफी महारत हासील कर चुका था.. ओर तीर बीलकुल नीशानेपे लग चुकाथा..

बाबाने देवायत ओर सृतीकी सादी करवाइ.. सादीमे नीर्मला ओर राजीवने कन्यादान दीया तब साथमे भुमीकोभी कन्यादान करने बीठाया था.. फीर फेरेके लीये सब खडे होगये.. तब धिरेन ओर लखनभी अपनी अपनी बीवीओके पास जाकर खडे होगये.. देवायत सृतीका हाथ पकडते फेरा ले रहाथा तब पुना लता वंदना भावना उनके उपर फुल बरसाने लगे.. तो धिरने लखनभी अपनी बीवीओके पाससे फुल लेकर बरसा रहेथे..

लखनने टेडी नजर करते देखातो रमा अभी भी उनकोही देख रहीथी तब लखनने रमाको जलानेके लीये हसते हुअ‍े लताके कंधेपे दोनो हाथ रखके उनके कानमे कुछ कहा.. तो लता सरर्मसार होते हसने लगी.. ओर जुठ मुठका गुस्सा करते लखजको दांत पीसते उनके बाजुओमे मुके मारने लगी.. जैसे कोइ गंदी बात करके लताके साथ रहारत की हो.. तब रमा उन दोनोकी मस्तीया देखते अंदरसे सचमे जलने लगी.. ओर लखनकी ओर कातीलाना नजरोसे देखती रही.. लखनका तीर सही नीसानेपे लग चुका था..

ओर अंतमे देवायतके फेरे सम्पन हुअ‍े.. ओर सब लोग वापस नीचे बैठ गये.. फीर देवायतने सृतीको मंगलसुत्र पहेनाया ओर उनकी मांग भी भरदी.. अब सृती देवायतकी बाकायदा पत्नी हो चुकी थी.. तब उनकी आंखोसे आंसु थमनेका नामही नही ले रहेथे.. तब पुनम ओर लताने उनके आंसु पोछते उनको सम्हाला.. तो भुमीकी आंखोसेभी आंसु बेह रहेथे तो उनको मंजु ओर नीर्मला समजा रही थी..

फीर दोनोही मंदिरमे दर्शन करने चले गये.. वहा भगवानका आशीर्वाद लेकर बाबाको नमन कीया फीर राजीवका आशीर्वाद लीया तब नीर्मला ओर भुमीका दोनोही बाते करते आरामसे वहासे खीसक गइ.. ताकी देवायत उनके पेरको ना छुसके.. फीर सब लोग होलकी ओर जाने लगे.. तब रमाको लगाकी अभी लखन उनके पास आजायेगा.. ओर उनके साथ सरारत करते उसे छुअ‍ेगा..

लेकीन लखनने रमाकी ओर देखा तक नही.. ओर वो लताका हाथ पकडकर उनके साथ हसी मजाक करते चलने लगा.. तब रमा बहुतही नीरास होगइ.. तब नीर्मला ओर भुमीका दोनोही देवायतकी ओर देखते कातीलाना स्माइल करते हसती रही.. आखीर भुमीका ओर उनके पती नरेशका सृतीकी सादी देवायतसे करवानेका सपना आज पुरा जो हो गयाथा.. ओर सब लोग बाबाके पास आकर बैठ गये.. तभी..

बाबा : मंजु बेटा.. अब तुम लोगोका आगेका क्या प्रोग्राम हे..? क्युकी मुजे तुमसे ओर इस नइ दुल्हन ओर मेरी बेटी पुनमसे कुछ बात करनी हे..

मंजुला : (हसते) बस.. बाबा कुछ खास नही.. खासतो इन दोनोकी सादी करवानीथी.. जो होगइ.. आज पुनम अपने घर चली जायेगी.. ओर हम सब सहेरमे भुमी बुआके घर उनको ओर सृतीको छोडने जा रहे हे.. आज मे ओर देवु वही रुकेगे.. फीर कल हम वापस गांव चले जायेगे..

बाबा : (हसते) हंम.. मतलब यहासे सीधेही अपने मायके जायेगे.. बेटा मेरी बात मानो.. लडकीकी विदायके बाद उनको सीधेही अपने ससुराल जाना होता हे.. मायके नही.. तुम समज गइनां..? फीर कल भलेही अपने घर चली जाये.. लेकीन आज नही.. अब सब भोजन करलो फीर सामको सब चले जाना.. अभी भोजन करके थोडा आराम करलो तबतक तुम तीनो मेरे कमरेमे आजाओ मुजे तुम तीनोसे कुछ जरुरी बाते करनी हे..

मंजुला : (हसते) जी बाबा.. हम अपना प्रोग्राम चेन्ज करते हे.. सीधाही घर चले जायेगे..

फीर सब भोजनके लीये खडे होगये.. तब मंजुने भुमीका ओर नीर्मलासे बात करली.. ओर सबने यहासे पुनम धिरेनको उनके घर छोडके सीधाही हवेलीपे जानेका प्रोग्राम तैय करलीया.. ओर सब लोग भोजनके लीये भोजन खंडमे चले गये.. तो आज सादीकी वजहसे बाबाने बडीयासा भोजनका प्रबंध कीयाथा.. तो सब भोजनके लीये बैठ गयेतो मंजुने सृतीको देवायतके साथ बीठा दीया ओर खुद चंदाको लेकर उनकी दुसरी साइडपे बैठ गइ..

धिरेनके पास पुनम बैठ गइ.. तो लखनने लताका हाथ पकडके खीचकर अपने पास बीठा दीया तो लता सर्मसार होगइ.. जीसे देखकर सब हसने लगे.. तब रमा ज्वेलेसी फील करते लखनको घुरने लगी.. तभी रमाकी नजर लखनके पेन्टके उभारकी ओर चली गइ..

तो वहा तंबु देखकर रमा बहुतही सरमाइ.. ओर अपनी नजर वहासे फौरन हटाली.. लेकीन लखनने उनकी ओर देखा तक नही.. तभी रमाको भी रीयलाइज हुआकी उनको लखनकी लताके साथ अ‍ैसी सरारतपे गुसा क्यु आ रहा हे..? ओर वो सोचते हुअ‍े भानुके पास बैठी रही..

रमा : (मनमे) मुजे लखन लताकी सरारात देखके गुस्सा क्यु आ रहा हे..? कही मे लखनको पसंदतो नही करने लगी..? आज वो मेरे साथ कैसी सरारत करके गया.. मेरे साथ प्यारका इजहार करके मुजसे सादी तक करनेको तैयार होगया.. कही वो सचमेतो मुजे पसंद नही करने लगे.. नही नही.. मे अ‍ैसा नही कर सकती.. ओर मे अ‍ैसा होनेभी नही दुगी.. मेरे लीयेतो भानुही ठीक हे.. लेकीन लखनने अ‍ैसा क्यु कहाकी भानुको सम्हालने वाली बहुत हे.. कही भानुका चकर दुसरी ओरतोके साथ तो नही..?

लगता हे लखन इसके बारेमे कुछ जानते होगे.. तभीतो मुजे अ‍ैस केह रहेथे.. मुजे इस बारेमे अ‍ेक बार लखनको मीलकर खुलकर बात करलेनी चाहीये.. हे भगवान.. अब क्या करु..? आज लखनने मेरी कीतनी तारीफ की.. मे इतनी सजधजके आइ फीरभी भानुने मेरी अ‍ेक बारभी तारीफ नहीकी..

ओर लखन मेरी सुबरसेही तारीफ करते आये हे.. क्या मे उनको इतनी पसंद आगइ..? वोभी तो कीतना क्युट हे.. जवान हे.. पेन्टमेभी भानुसे बडा लग रहा हे.. अब भानुमे पहेले वाला जोस नही रहा.. उनकोभी अब गोलीया खानी पडती हे.. नही ही.. मे गलत सोच रही हु.. मुजे लखनसे दुर रहेना पडेगा.. लेकीन वोभी तो अब मेरी ओर नही देखता..

रमाके मनमे विचारोका घमासान युध्ध चल रहाथा तभी भोजन आगया.. तो सब भोजन करने लगे.. देवायत ओर सृतीने अ‍ेक दुसरेको खीलाया.. फीर मंजु चंदाकोभी खीलाया.. तो धिरेननेभी पुनमको खीलादीया तब पुनम सर्मसार होगइ.. ओर उनकोभी धिरेनको खीलाना पडा.. तब लखन लताभी अ‍ेक दुसरेको खीलाने लगे.. तब रमाको उनको अ‍ैसे खीलाते देखकर आज अच्छा नही लगा..

रमाने फौरन अपनी नजर वहासे हटाली.. ओर सबलोगोने भोजन करलीया.. फीर राजीवके लीये आश्रममे अ‍ेक कमरा खोल दीया तो नीर्मलाने उसे दवाइ पीलादी ओर वो कमरेमेही आराम करते सो गया.. फीर नीर्मला ओर भुमीका चंदा रमा ओर आज उनके साथ भावनाभी होलमे चली गइ.. ओर सब लेटकर आराम करते बाते करने लगी.. तो आज भावनाभी रमाके साथ हस हसके बाते करने लगी..

तो रमा ओर भडक गइ.. वो अपने आपको भानुके साथ असुरक्सीत महेसुस करने लगी.. उनको लगने लगाकी भावना उनके पती भानुको उनसे छीन रही हे.. लेकीन रमाने अपने चहेरेपे कोइ भाव प्रगट होने नही दीया.. तब रश्मी चारु नीशा मंदिरकी ओर टहेलते घुमने चली गइ.. तो सुधीर भानु ओर देवायत अकेले दुसरी ओर घुमने चले गये.. तब लता वंदना रजीया ओर दयाभी अ‍ेक पेडके नीचे अकेली बैठकर बाते कर रही थी..

तो धिरेन ओर लखनभी साथमे घुमते बाते कर रहेथे.. सब अपने अपने गृपमे बाते कर रहेथे तब मंजु सृती ओर पुनम तीनोही बाबाके कमरेकी ओर चली गइ.. सबको पताथा की बाबा उनके साथ कुछ जरुरी बाते करना चहते हे.. ओर तीनोही कमरेमे आगइ.. तब बाबा उनका इन्तजार करते अपने खटीयापे आसनपे बेठे थे.. तब मंजु दरवाजा खाली बंध करके आगइ.. ओर तीनोही बाबाको पैर छुकर प्रणाम करने लगी..

बाबा : (हसते) आओ बेटा.. तीनो ही यहा पास आकर बैठ जाओ.. तुमसे जरुरी बाते करनी हे..

मंजुला : (तीनो नीचेकी ओर पास बैठते) जी बाबा.. कहीये..

बाबा : बेटा लगता हे अब वक्त आगया हे.. मुजे जल्द ही गांवमे आना पडेगा.. सब इतनी जल्दी हो रहा हे.. मेनेतो सोचाभी नही था.. कल तुम दोनोके जानेके बाद बारी बारी दो तीन लोग आपके गांवसे मीलने आये थे.. बस सबको अ‍ेकही प्रोबलेम थी.. तुम समज गइनां.. तो मेने केह दियाकी वहीके राजा ही कुछ समाधान नीकालेगे.. आप उनसे जाकर मीललो..

मंजुला : (सरमाके हसते) जी बाबा.. मुजे अंदाजा हो गयाथा.. बस अ‍ेक बार सबको हमारे यहा अपनी समस्या लेकर आने दीजीये.. फीर हम कुछ करते हे.. पहेले तो सब अपनी अपनी तफरसे सबसे छुपके कोसीस करेगे.. लेकीन सब जगाह अ‍ैसा होने लगेगा तब सब हारकर आजायेगे.. तबतक हमेभी समय मील जायेगा..

बाबा : बेटा.. सब तैय हे तो उन्हीकी हीसाबसे सब हो रहा हे.. अब छे महीने तक सब बहुत परेसान होगे.. ओर आपकोभी परेसान करते रहेगे.. फीर धीरे धीरे करते सब सही होने लगेगा.. (सृतीकी ओर देखते) बेटा.. अ‍ैसा नहीकी सीर्फ बहार ही सब होगा.. घरके अंदरभी बहुत बदलाव आयेगा.. तब तुम तीनोको ही स्ट्रोंग रहेना हे.. देखना कही गुस्सेमे आकर कुछ उल्टा सीधा कदम मत उठालेना.. क्युकी सब प्रकृतीके हीसाबसे तैय हे.. वो होकर ही रहेगा..

सृती : (सरमाते हसते) जी.. बाबा.. लेकीन मे इस बारेमे ज्यादा कुछ समजी नही.. हें..हें..हें..

बाबा : बेटा अ‍ेक बात समजले.. यहा जीतनीभी ओरते आइ हे.. उनमेसे कोइभी ओरत सामान्य ओरत नही हे.. तुम सब परीया यातो अप्सराये हो.. इनमे तेरी मां ओर मंजुकी मां भी वो ही हे.. तुम सब उन माइका अंस हो.. जो हिमाचलमे उन पंडीतकी बीवी थी.. ओर बादमे उन राजाकी रानी होगइ थी.. क्या तुमने वो कीताब तो पढी हेना..?

सृती : (हसते) जी बाबा.. मे जानती हु माइ कोन थी.. वो किताब मेरे पास हे.. ओर मे उसे कइ बार पढ चुकी हु.. तो उनके सभी केरेक्टरके बारेमे सब जानती हु..

बाबा : हां.. तो मे उसी माइकी बात कर रहा हु.. जो इस वक्त तेरे पास बैठी हे.. मेरी मंजु बीटीया ही वोही माइ हे.. तुम समज गइनां..? उनको दुबारा जन्म लेकर वापस आना हे.. तब तुम सब अ‍ेक बार फीरसे उन राजाको मीलोगी.. बस उस बातके लीये अब ज्यादा वक्त दुर नही हे.. जब मेरी मंजु बीटीया चली जायेगी तब तुजे ओर मेरी पुनम बीटीयाकोही उन राजाके अंसको सम्हालना हे.. यानी तेरे पती देवुको..

सृती : (सरमाते हसते) जी बाबा.. इस बारेमे थोडा बहुत मंजुने मुजे समजाया था..

बाबा : बेटा.. कुछ बाते अ‍ैसी होगी जब तुम जानोगी.. तो विचलीत या गुस्सा हो सकती हो.. तब तुजे सयंमसे काम लेना हे.. वो बात मे तुजे अभी नही बता सकता.. तब तुजे पुनम बेटी.. या मंजु बेटीसे बात करलेनी चाहीये.. वोही तुजे समजायेगी.. वरना तुजे जींदगीभर अफसोस रहेगा..

पुनम : (हसते) बाबा आप फीकर मत करो.. मे ओर भाभी इसे सम्हाल लेगी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां तुमतो मेरी होनहार बेटी हो.. नाज हे मुजे तुमपे.. वरना क्या कोइ अपना जीवन अ‍ैसेही कीसीके कहेनेपे अपने भाइको सोंप देता हे..? साबास बेटा.. तुम कीतना बडा बलीदान देने जा रही हो..

मंजुला : (हसते) जी बाबा पुनोतो पे मुजेभी गर्व हे.. वो अपनी दोहरी जींदगी जीनेके लीयेभी तैयार होगइ..

पुनम : (सरमाते हसते) बाबा.. मुजे भाइसे सचमे प्यार हे.. मे उनके लीये कुछभी कर सकती हु.. क्या मुजे मेरे बारेमे आगेका कुछ बता सकते हे..? मुजे कुछ आभासतो हो रहा हे.. लेकीन पका करना हे.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) हां बेटी.. मेरी मंजुबेटीने तुजे जोभी शक्तिया दीहे उनमे वही होता हे.. ओर ये तुजे आभास होता हे वोही सच हे.. तो फीर मे तुजे क्या बताउ.. तुजे सब पता चल जायेगा.. तेरी ही नाती उन कबीलेकी गुरुमाइ होगी.. तबतो बहुत कुछ होगा.. तुम ओर सृती बेटी सब अपनी आंखोसे देखोगी..

सृती : (हसते) बाबा.. क्या तब मे यहा गांवमे इनके साथ रहुगी..?

बाबा : बेटी.. तु सहेरमेभी रहेगी ओर गांवमेभी रहेगी.. तब तेरी बेटी भी डोक्टर होगी तब तुम यहा गांवमे अपने पतीके साथ रहेकर गांवकी सेवा करोगी.. बस इनसे आगे मे तुजे अभी कुछ नही बता सकता..

सृती : (जोरोसे हसते) बाबा तबतक तो हम सब बुढी होजायेगी.. हें..हें..हें..

बाबा : (हसते) नही बेटी.. मेरी मंजु बेटीके अलावा इस बातका तुम कीसीको मालुम नही.. की सब क्या हो रहा हे.. लेकीन इसके बारेमे मे तुजे खुलके नही बता सकता.. बहार जाओतो तुम दोनो मेरी मंजु बेटीसे अ‍ेकेले मीलकर जान लेना.. बस ये बात सीर्फ तुम दोनो तकही सीमीत रखना.. वरना लोगोको पता चलेगातो तुम सबको लोग ओर ही समजने लेगेगे..

मंजुला : (सरमाते हसते) बाबा.. मे इनसे बात कर लुगी.. अब कहीये आगे हमे क्या करना हे..?

बाबा : (हसते) बस कुछ नही.. अभीतो जीतने लोग आये.. उन सबको उस हिमाचलके राजाकी बाते करके समजाना.. अगर ना मानेतो अ‍ेक दिन मे वहा आजाउगा.. अब वो वक्त दुर नही हे.. जो सबके रीस्ते उजागर होने लगेगे.. आज कल तुम सब जीनके अंस हो.. वो तुम्हारे गांव ओर आजु बाजुके सभी गांवोपे पुरी तराह अपना असर दीखा रहा हे.. आजकल सबके उपर काम ओर रती हावी हो चुके हे.. तो ये सबतो चलताही रहेगा जबतक उनका जन्म नही हो जाता..

पुनम : (सरमाते हसते) बाबा सही कहा आपने.. आजकल कोइ रीस्ते नाते नही देखते.. जीनको वो पसंद करते हे उसीको प्यार करने लगे हे.. फीर वो सादी सुधा हो या कुआरे.. बस.. ये सब सांतीसे नीपट जायेतो गंगा नहाये.. हें..हें..हें..

बाबा : (मुस्कुराते) बेटी.. ना जाने मुजेभी क्या क्या देखनेको मीलेगा.. कीतना अजीब हे.. मुजे अ‍ेक साधु होकर अ‍ैसी बातोके लीये सबको समजाना पडेगा.

मंजुला : (हसते) बाबा यहा कल कोन कौन आया था..?

बाबा : (हसते) आयेथे दो तीन लोग आपके गांवसे.. मेने उसे देवायतको मीलनेके लीये कहा हे.. तो दो तीन दिनमे वोभी आयेगे.. तब तुजे ओर देवुको उनको समजाना हे.. ओर अब देवुकोभी कहेना थोडा कबीले वालोपे ध्यान दे.. क्युकी आगे जाकर वोही सब काम आने वाले हे.. ओर उन राजाका मक्सद भी वोही लोगोकी मदद से पुरा होगा.. तुम समज गइनां..? यानीकी तेरे पोतेका मक्सद.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) बाबा.. भाइने मुजे कुछ कागजात दीये हे.. कुछ उनमे नक्से जैसा हे.. उनका मे क्या करु..?

बाबा : (हसते) हां बेटी.. तुजे वो कागजात इनके पोतेको देना हे.. तब देवु इतना सक्षम नही होगा.. वो क्यु..? मे तुजे अभी नही बता सकता.. बस उसी कागजातमे सब राज छीपा हुआ हे.. तो देवुका पौताही गुथी सुलजायेगा.. तबतक तुजे उसे सम्हालके रखना हे.. बस कीसीके हाथमे नही आना चाहीये.. ये हासील करनेके लीये बहुत लोग ट्राइ करेगे.. तो इसका जीक्र अब कीसीके सामने नही करना.. वरना आपको भी मुस्कीलमे डाल सकते हे.. सीर्फ यही कहेना था.. अब तुम लोगोको आराम करने जाना होतो जा सकती हो..

तब तीनो ही बाबाको प्रणाम करके वहासे नीकलके बहार आगइ तो नीर्मला भुमीका रमा सब लेटकर आराम करते अपनी बातोमे बीजी थी.. लेकीन बहार नीकलतेही सृती ओर पुनमकी वो राजकी बाते जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ थी.. तो सृतीने मंजुको बहारकी ओर चलनेका इसारा कीया.. ओर तीनो ही होलसे बहार आकर चलते हुअ‍े सबसे अलग दुर अ‍ेक पेडके नीचे अ‍ेकांतमे अलग जगाहपे जाकर बैठ गइ.. बेठते ही सृतीने राज जाननेकी उत्सुक्तासे मंजुको कहा....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३१

तब तीनो ही बाबाको प्रणाम करके वहासे नीकलके बहार आगइ तो नीर्मला भुमीका रमा सब लेटकर आराम करते अपनी बातोमे बीजी थी.. लेकीन बहार नीकलतेही सृती ओर पुनमकी वो राजकी बाते जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ थी.. तो सृतीने मंजुको बहारकी ओर चलनेका इसारा कीया.. ओर तीनो ही होलसे बहार आकर चलते हुअ‍े सबसे अलग दुर अ‍ेक पेडके नीचे अ‍ेकांतमे अलग जगाहपे जाकर बैठ गइ.. बेठते ही सृतीने राज जाननेकी उत्सुक्तासे मंजुको कहा....अब आगे

सृती : (हसते) हां तो कमीनी.. तुमने हमसे क्या राज छुपाके रखा हे.. बता.. जो हम नही जानते.. ओर सीर्फ तुमही जानती हो.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) हां भाभी.. अबतो बाबानेभी हम दोनोको बतानेको कहा हे.. तो बताइअ‍ेनां..? ओर ये बात बाबाने हमको क्यु नही बताइ..? कुछतो राज होगा.. हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते फीर धीरसे) कमीनीओ.. तो क्या बाबा तुमको ये कहे की तुम सब देवायतसे चुदवाती हो.. हें..हें..हें.. कमीनी ये बात बाबा तुमसे थोडीना कहेगे..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) कीतनी कमीनी हो तुम.. ये बात कोइ साधु संत थोडीना कहेगे..? बता.. कोनसा राज हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (धीरेसे हसते) सुनो.. तुमने कहाथाना की हम सब बुढी होजायेगी.. तो सुनो.. हम मेसे कोइ बुढी नही होगी.. कुछ ओरतोको छोडके सब जवानकी जवान ही रहेगी.. हें..हें..हें..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) व्होट..? मंजु तुम क्या फेकती हे.. ये पोसीबल नही हे.. तुमतो पढी लीखी हो.. क्या आजके जमानेमे अ‍ैसा चमत्कार होता हे..? मुजेतो यकीन नही होता..

पुनम : (मुस्कुराते) सृतीदीदी सुनोतो सही.. भाभी क्या कहेना चाहती हे.. सब पोसीबल हे.. सुनो..

मंजुला : (हसते) पढाइकी पुछ.. सुनतो सही.. क्या तुमने मेरे सरीरमे बदलाव नही देखा..? आइ मीन.. मेरी डीलेवरीके बाद मेरी वर्जीनीटीमे.. हंम..? तो येभी पोसीबल हे..?

सृती : (आस्चर्यसे) अरे हां यार.. लेकीन इनसे उमरका क्या तालुक..?

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) सुनो.. सृती जबभी देवु कीसीके साथ संभोग करेगा.. उनकी उम्र बढनेकी रफ्तार कम होजायेगी.. ओर जब आनेवाले दिनोमे मेरा बेटा विजय कीसीके साथ संभोग करेगा तब उम्र बढनेकी रफ्तार थम जायेगी.. फीर जब उनका बेटा यानी मेरा पोता आयेगा.. तबतो बात ही कुछ ओर होगी..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी बताइअ‍ेना तब क्या होगा.. वो तो हमारे स्वामी होगेनां..?

मंजुला : (हसते) हां पुनो.. वो कीसीके साथ संभोग करेगा तब सब उनके मुताबीक होगा.. वो बुढी ओरतके साथ संभोग करेगा.. तो उनकी इच्छासे वोभी जवान होजायेगी.. सब लडकीया ओरते उनके पीछे पागल होगी.. उनकी छोडो.. उनके साथ बुढीभी संभोग करनेको तैयार होजायेगी.. क्युकी मत भुलो.. वो खुद काम का अंस होगा.. याने हमारे स्वामी.. हमारे परीलोक ओर अप्सरा लोकके राजा.. हम सब उन्हीकी रानीया हे..

सृती : (हसते) मंजु.. क्या तुजे ये सब ज्यादा नही लग रहा हे.. हें..हें..हें.. आजके मोर्डन जमानेमे.. साइन्स इतनी तरकी कर रहा हे.. ओर तुम सतयुगकी बाते कर रही हो..? हें..हें..हें..

मंजुला : (फीकी मुस्कानसे) सृती.. हसले.. अभी भी तुजे अपनी डक्टरीकी पढाइका धमंड हे.. मेरी बाते तुजे मजाक लग रही हेनां..? क्यु.. तुमने उन किताब (ये केसी अनुभुती) में पढा नही हे क्या..? की उन राजाने उनकी दादी फीर वो मीरा.. सबको जवान नही कीयाथा क्या..? ये मत भुलो उन बातोको कुछ ज्यादा साल नही हुअ‍े हे.. वो बातभी इस कलयुगमे ही हुइ थी.. तबभी हमारा लोकतंत्र था.. क्या तुम ये सब भुल गइ..?

पुनम : (हसते) भाभी.. लेकीन मुजे ये सब बातपे पुरा यकीन हे.. जब वो आयेगा तब हमारी उमर क्या होगी..?

मंजुला : (सरमाते हसते) पुनो सुनो तुम दोनो.. क्युकी तब यहा हवेलीमे तुम दोनो ही होगी.. तुम्हारी उमरमे इतना फर्कतो नही पडेगाकी तुम दोनो बुढी होजाओ.. बस आधेड होनेकी कगार पर होगी.. ओर जब वो आयेगा तब.. आइ मीन.. छोडो ये बाते.. तुम आगेका सुनकर विचलीत होजाओगी..

सृती : (हसते) क्यु..? मे तेरी बातोपे विस्वास नही कर रही इसीलीये नही बता रही..?

मंजुला : (हसते) नही सृती.. बात विस्वास करने ना करनेकी नही हे.. लेकीन अगर मेने बता दीया तो तुम दोनोही टेन्शनमे आजाओगी.. इसीलीये ये बातको यही समाप्त करदो..

पुनम : (रीक्वेस्ट वाले अंदाजमे) भाभी.. प्ली..ज.. बताइअ‍ेना हम सुनकर विचलीत नही होगी.. हें..हें..हे..

सृती : (मुस्कुराते) हां मंजु.. बतादे.. मेभी तो देखुगी तब.. की ये सब होता हे की नही.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) तो फीर तुम दोनो इतना जानलो.. की तुम दोनो वापस जवानीकी ओर बढने लगोगी..

पुनम : (सरमाते चोंकते) व्होट..? मतलब..? क्या मे समज रही हु वोही..?

मंजुला : (हसते) हां पुनो.. तब तुम दोनोका रीलेशनभी उनके साथ होगा.. तो तुम दोनो वापस जवानीकी ओर बढने लगोगी.. बस इतना ही कहेना हे..

सृती : (सरमाते मंजुको दांत पीसके मुका मारते) कमीनी.. मेने अभी तब मेरे इस पतीके साथभी अपनी सुहागरात नही मनाइ.. ओर तुम हमे उनके साथ रीलेशनकी बाते कर रही हो..? कुछतो सरम करो.. हम अ‍ैसा कुछभी करने वाली नही हे.. बात करती हे.. मंजु कुछ भी..?

मंजुला : (हसते) सृती.. तभीतो बाबाने तुमको ये बात नही बताइ.. उनको मालुम थाकी ये बात करना अभी जल्दबाजी होगी.. लेकीन सोच.. देवु मेरा पती होनेके बावजुद तुम उनकी ओर आकर्सीत होगइ.. ओर पुनोभी उनका सगा भाइ था फीरभी उनको प्यार कर बैठी.. देवुतो हमारे स्वामीका अंस हे.. लेकीन सोच.. जब वो खुद आयेगे.. तब क्या होगा..? तुम ना चाहते हुअ‍े भी उनके साथ रीलेशनमे आजाओगी..

पुनम : (सरमाते हसते) भाभी.. जोभी हो.. तबकी तब देखा जायेगा.. की क्या होता हे.. लेकीन अभीतो मे भाइसे प्यार करुगी.. लेकीन भाभी.. हमारी चंदाभाभीका का क्या होगा..? हें..हें..हें..

मंजुला : (जोरोसे हसते) पुनो.. वोतो अ‍ैसी उलजनमे फसेगी.. हें..हें..हें.. मे तुजे अभी बताभी नही सकती.. मेरे बेटे विजयको अभीसे इतना लाड प्यार करती हेनां.. की उनके ज्यादा लाड प्यारही वजहसे ही विजय बीगडके अयास होजायेगा.. जब धिरेन चला जायेगा तबतो विजयको ही अपना बेटा मानकर उनके प्यारमे अंधी होजायेगी..

फीर विजयको वोही सहेरमे जाकर खुब पढायेगी.. तब कोलेजमे आतेही वो बहुतही अयास आदमी होजायेगा.. ओर बहुत सारी लडकीयोकी जींदगीसे खीलवाड करेगा.. तब अ‍ेक दिन वोभी उनका सीकार होजायेगी.. तब उनकी हालत अ‍ैसी होजायेगी की कीसीको फरीयादभी नही कर पायेगी..

सृती : (आस्चर्यसे) ओह गोड.. मंजु ये तुम क्या केह रही हो..? हमे क्या क्या देखनेको मीलेगा.. मंजु.. क्या हम दोनोको यही सीचुअ‍ेशन सम्हालनी हे..? अगर तुम कहेती हो वो सच हे.. तो फीर तब देवुकी क्या स्थीती होगी..?

मंजुला : (थोडा गंभीर होते अांख गीली करते) सृती.. मत जान ये सब बाते.. क्युकी भलेही हम सब परीया अप्सराये इस धरतीपे जन्म लेकर आइ.. लेकन हम मनुस्यके रुपमे जन्म लेकर आये हे तो हम सबपे भी कर्मका नीयम लागु होता हे.. हमेभी अपने कर्मोके हीसाबसे जीना हे.. अ‍ेक दिन यही कालचक्र घुमके उल्टा होजायेगा.. बस इनसे आगे मे तुजे कुछभी नही बता सकती.. लेकीन इतना पता हे.. तब तुम दोनोही राज करती होगी.. ओर अपने जीवनका खुब आंनद उठाती होगी..

तभी वंदना लता रश्मी नीशा चारु सब ये तीनोकी ओर आती नजर आइ.. तो मंजुने चर्चाको यही रोक दीया.. ओर तीनो खडी होकर उनकी ओर जाने लगी.. फीर सभी लेडीस होलमे आगइ.. ओर भुमी नीर्मला सब बैठीथी वही जाकर बैठ गइ.. तब देवायत सुधीर लखन ओर धिरेन सब अ‍ेक पेडके नीचे लेटकर आराम कर रहेथे.. सबको सामके वक्त आरामसे चलना था.. तो सब बैठकर बाते करते रहे..

लेकीन आज सबके साथ होते हुअ‍ेभी रमाका दिल सबकी बातोमे नही लग रहाथा.. उनको बैचेनी लग रहीथी.. ओर इन सबकी वजहथी लखनसे हुइ बाते.. आज लखनने खुलकर उनको प्यारका इजहार करदीयाथा.. ओर उपरसे अब वो रमाको इग्नोरभी कर रहाथा.. तब रमाकी बैचेनी ज्यादा बढ गइ थी.. वो अभीभी सबके साथ बाते करते बहारकी ओर नजर घुमाते देखती रही की लखन उसे देखता हेकी नही..

तो दुसरी ओर आज गांवमे सुबह देरसे बसंती ओर बरखा.. दोनोही तैयार होकर बस स्टेन्डपे खडीथी.. बसंती बरखाको अपने मामाके घर जाना हे कहेकर साथमे लेजा रहीथी.. दोनोही बस आगइ तो उनमे बैठ गइ ओर सहेर आगइ.. बस स्टेन्डसे बहार नीकलतेही बसंतीने अ‍ेक रीक्षा वालेसे बात करली ओर बरखाको रीक्षामे बीठाकर खुदभी उनके साथ बैठ गइ.. ओर रीक्षा सीधेही दुर अ‍ेक लेडीसकी होस्पीटलकी ओर दोडने लगी..

बरखा : (चारो ओर देखते) मम्मी.. हम दोनो कहा जा रहे हे..? ये रास्तातो मामाके घर नही जाता..

बसंती : (सामने दैखे बगैर) हमे अ‍ेक जगाहपे कुछ काम हे.. फीर दोनो मामाके घर चली जायेगी..

तो बरखा अ‍ैसेही चुपचाप बैठी रही उनको पताही नही थाकी उनकी मां उसे कहा लेकर जा रही हे.. तो कुछही देरके बाद दोनोही अ‍ेक मेटरनीटी होस्पीटलके पास आकर रुक गये तब बसंती बरखाको लेकर होस्पीटलके अंदर चली गइ.. ओर बरखाको अ‍ेक जगाह बीठाकर रजीस्ट्रेसशन करवाने चली गइ.. तब बरखा उनकी मां बसंतीकी ओर आस्चर्य भावसे देखती रही.. जब वो वापस आइ तो उसने बसंतीको पुछ ही लीया..

बरखा : मम्मी.. यहा हम क्यु आयेहे..? कीसको दीखाना हे..?

बसंती : (सपाट भावसे जुठ बोलते) कुछ नही.. मुजे कुछ प्रोबलेम लगती हे.. मुजे दीखाना था तो तुजे लेकर आगइ.. फीर दीखाकर हम तेरे मामाके घर चले जायेगे..

तब बरखा कुछ नही बोली जब उन दोनोकी दीखानेकी बारी आइ तब बसंती बरखाको लेकर अंदर चली गइ.. तब लेडी डोक्टरने पेशन्टके बारेमे पुछा तब बसंतीने बरखाको उनके पास बीठा दीया तब बरखा आस्चर्यसे बसंतीकी ओर देखने लगी तो बसंतीने धीरेसे डोक्टरको बरखाकी प्रेगनेन्सी चेक करनेको कहा.. तब बरखा चमंक गइ.. ओर सारा माजरा समज गइ.. लेकीन डोक्टरकी मौजुदगीमे कुछ नही बोली..

फीर डोक्टरके साथ उसे अंदर भेज दिया ओर डोक्टरने बरखाको चेक करलीया.. फीर रीपोर्ट आने तक दोनोको बहार इन्तजार करनेको कहा तो बरखा ओर बसंती दोनोही बहार आगइ ओर दुर अ‍ेक जगाहपे जाकर दोनो बैठ गइ.. तब बरखाका गुसा सातवे आसमानपे बहोंच गयाथा.. जैसेही दोनो अ‍ेक बेन्चपे बैठ गइ तब बरखा दबी हुइ आवाजमे उनकी मम्मीपे टुट पडी..

बरखा : (थोडा सख्त लहेजेमे) मम्मी.. ये सब क्या हे..? ओर आपने मुजसे घरपे क्यु नही कहा..? क्या हुआ हे मुजे जो आप मेरी प्रेगनेन्सी चेक करने मुजसे जुठ बोलकर यहा लेआइ..

बसंती : (थोडा सखतीसे) देख बरखा. जोभी हे मुजे सच सच बतादे.. मेने युही जींदगी नही काटी.. कल तुजे उल्टीया हुइथीनां..? ओर वो कोइ सामान्य उल्टीया नही थी.. मत भुलो मेने तुजे ओर मुनाको भी जनम दीया हे.. मे भी अ‍ैसी उल्टीया कर चुकी हु.. सच बतादे.. अगर तेरा कीसीके साथ चकर हेतो कहेदे..

बरखा : (सारा माजरा समज गइ) देख मम्मी जो तु सोच रही हे अ‍ैसा कुछभी नही हे.. येतो कुछ खानेमे आगया होगा तो उल्टीया हुइ होगी.. इसमे इतना हंगामा करनेकी क्या जरुरत हे..?

बसंती : (कातील मुस्कानसे) बेटी.. मेने भी दुनीयादारी देखी हे.. अगर सच बता देती तो क्या मे तुजे कुछ कहेती..? अभीभी वक्त हे.. सच बतादे.. अगर लडका अच्छा होगा तो मे वादा करती हु.. उसीसे तेरा ब्याह कर दुगी.. वरना अभी रीपोर्ट आजायेगी.. तो सचतो अ‍ैसेही पता चल जायेगा.. बोलदे.. कीसके साथ तेरा चकर हे..?

तब बरखाको रीयेलाइज हुआकी उनको दो तीन बार अ‍ैसी उल्टीया हुइ हे.. तो सायद मुनाने उसे प्रेगनेन्ट करदीया होगा.. तो अब सचाइ छुपानेका कोइ मतलब नही हे.. अब मुनाने कहाहे इसी प्लानपे आगे बढना हे.. अब जोभी होगा देखा जायेगा यही हींमतके साथ उसने अपनी मम्मीको सब सचाइ बता देना उचीत समजा.. ओर हथीयारके तौरपे उनके पास अपने मोबाइलमे जो विडीयो क्लीप थी.. तो उसीके भरोसे उनमे हिंमत आगइ..

बरखा : (सरमाते नीची नजरोसे) हां मम्मी.. मुजे कीसीसे प्यार हे.. हम दोनोही अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हे.. ओर हम दोनो आपसमे सादीभी करना चाहते हे.. अगर मेरी प्रेगनन्सीकी रीपोर्ट पोजीटीव आइ तो ये बच्चा उसीका हे.. ओर हम दोनो कोलेजमे थे तब ही रीलेशनमे हे..

बसंती : (कातील स्माइलके साथ) हंम.. तो ये बात हे..? तो फीर कमीनी कबसे तुजे पुछ रहीहु तो बताती क्यु नही..? बता वो लडका कौन हे..? क्या मे उसे जानती हु..? अगर लडका अच्छा होगा तो मेने वादा कीया हे.. मे तेरी सादी उनसे करवा दुगी.. बता कौन हे वो..

बरखा : मम्मी यहा नही बहार चलो.. हम वहा पेडके नीचे बैठकर बात करते हे.. वरना यहा आप गुसा करोगी तो तमासा होजायेगा.. चलो.. वही आपको सब बताती हु..

बसंती : (खडी होकर दोनोही बहार जाते) अ‍ैसी कौनसी बात हे जो मे तुजपे गुसा करुगी..? क्या मे वो लडकेको जानती हु..?

बरखा : (पेडके नीचे बैठते) हां.. तुम उसे अच्छी तराह जानती हो.. ओर वो बहुत अच्छा लडका हे..

बसंती : (बरखाके पास बैठते) अरे बतातो सही वो कौन हे..? क्या मुजपे विस्वास नही हे..? मे गुसा नही करुगी बता..

बरखा : (नजरसे चुराते धीरेसे) मम्मी.. वो लडका.. वो.. भाइ हे.. हमारा मुना.. हम दोनो अ‍ेक दुसरको बहुत प्यार करते हे..

बसंती : (चोंकते गुस्सेसे) पागल होगइ हो क्या..? कमीनी.. कोइ अपने भाइके साथ मुह काला करती हे..? तुजे इतनी आग लगीथी की येभी नही सोचाकी ये मेरा भाइ हे..? छी..

बरखा : मम्मी.. जब प्यार होजाता हेनां तो कोइ रीस्ते नाते या उमर नही दीखाइ देते.. बस होजाता हे.. ओर हम दोनो तो जब कोलेजमेथे तबसे ही आपसमे प्यार करते हे.. तभीसे हम दोनो अ‍ेक पती पत्नीकी तराह धरमे रहेते हे.. मम्मी हम दोनोने फैसला करलीया हे..

मे सादी करुगीतो भाइके साथ.. अगर आप नही मानते तो हम दोनोको मजबुरन इस गांवको छोडना पडेगा.. हम दुसरे गांवमे या इस सहेरमे कहीभी कीरायेका मकान लेकर रेहेगे.. ओर दोनोही नौकरी करके हमारा गुजरान चलायेगे.. लेकीन हमे सीर्फ पापा की चीन्ता हे..

बसंती : (आंसु बहाती रोते मनते करने लगी) तुम दोनोने इतना कुछ सोचलीया हे तो फीर हमारे साथ क्यु पडे हो चले जाते.. हमतो यही समजेगे की हम बेओलाद हे.. हमारी कोइ संतान नही.. तुम दोनोने तो हमारी नाक कटवादी.. हमारी इजत मीटीमे मीलादी.. बरखा.. गीरादे ये बच्चा.. अभीभी वक्त हे.. तेरे बापकी इजत बचाले.. मे तेरे हाथ पाव जोडती हु..

बरखा : (आंसु बहाते) मम्मी.. अब हम दोनो बहुत आगे बढ चुके हे.. मे भाइके बीना जीन्दा नही रेह सकती.. ओर हमारे बापुका तो सोच.. वो कहा काम कर सकते हे.. हम गांव वालोसे छुपकर सादी करलेगे.. हमे हमारी सादीका कहा ढंढोरा पीटना हे.. मे हमारे घरमेही सबसे छुपकर भाइकी बीवी बनके रहुगी.. मम्मी.. प्ली..ज.. मानजा.. हमे पापाकी बहुत चीन्ता हे.. वरना हम दोनो कबके चले गये होते..

बसंती : (आंसु बहाते) बेटी तु जो कहेती हे वो इतना आसान नही हे.. अभीभी वक्त हे.. मे डोक्टरको कहुगी.. वो बच्चा गीरा देगी.. मत खेल हमारी इजतके साथ.. क्या कोइ बहेन अपने भाइसे सादी कर सकती हे..?

बरखा : (कातील मुस्कानसे) मम्मी.. क्या ये सीर्फ बडे खानदानके लोगोकाही हक हे..? हम छोटे गरीबोको नही..? तुमको भी पता हे.. हमारे गांवमे पहेले सब ठाकुरके साथ क्यु सबंध नही रखते थे.. ओर अ‍ैसे रीस्तोमे बुराइभी क्या हे.. उन्होनेभी अपनी बहेनसे सादी करलीथी.. ओर उसी ठाकुरने हमारी जमीन हमे वापस दिलवाइ.. क्या कोइ अपनी बहेनसे सादी करते हे तो उनका चरीत्र बदल जाता हे..?

बसंती : (आंसु पोछते) बेटी.. वो बडे लोग हे.. हमे उनका अनुकरण नही करना चाहीये.. वो अ‍ेकतो क्या कीतनी भी सादी करले.. उनको पुछनेवाला कोइ नही हे.. तु मानती क्यु नही..?

बरखा : मम्मी माफ करना.. मेनेतो खुलकर अपने भाइसे प्यार कीया हे.. लेकीन हमारेही गांवमे अ‍ैसे कइ अवैध रीस्ते पनप रहेहे.. मुजे बतानेमे भी सरम आती हे.. हम जैसे कुआरे लडकी लडकेकी बात तो छोड सादी सुधा होनेके बावजुदभी दुसरे मर्दके साथ अवैध रीस्तोसे बंधे हुअ‍े हे.. सबको पता हे फीरभी उनकोतो कोइ कुछ नही कहेता.. तो क्या अ‍ैसे रीस्तोको तुम जायज मानती हो..? तो फीर हमारी सादीसे तुम क्यु अ‍ेतराज करती हो..?

बसंती : बेटी.. तुम बातोमे मुजे उलजा नही सकती.. भलेही गांवमे कीसीका रीस्ता कीसीके साथ हो.. लेकीन हमारे घरमे..? लोग हमपे थुकेगे.. अ‍ेक बार ओर सोचले.. मत उछाल हमारी इजत.. मे तुजे हाथ जोडती हु..

तभी बहार अ‍ेक नर्सने बरखाके नामकी आवाज लगाइ.. तब दोनो मां बेटीने अपनी बात यही छोडदी.. ओर खडी होकर अंदर चली गइ.. तब नर्सने उसे अंदर डोक्टरके पास भेज दिया तो दोनोही लेडी डोक्टरकी चेम्बरमे चली गइ. ओर उनके सामने जाकर चेरपे बैठ गइ.. तब डोक्टर बरखाकी रीपोर्ट देख रही थी.. फीर रीपोर्टको कवरमे डालकर बसंतीको देते हुअ‍े कहा..

डोक्टर : (हसते) लीजीये.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. आपकी बहु प्रेगनेन्ट हे.. अभी दुसरा महीना चल रहा हे.. सब नोर्मल हे..

बसंती : (आस्चर्यसे चोंकते) क्या..? दुसरा महीना..? मतलब..?

डोक्टर : (आस्चर्यसे हसते) हां.. दुसरा महीना.. इनमे इतना चोंकनेकी क्या बात हे.. कभी कभी देरसेभी पता चलता हे.. क्या इसे दो तीन दिनमे ही उल्टीया हुइ थी..?

बसंती : (बरखाकी ओर देखते) जी.. डोक्टर.. कल हुइ थी..

डोक्टर : (मुस्कुराते) हां.. होता हे.. कीसीको अ‍ेक हप्तेमे तो कीसीको पंदर बीस दिनमे पता चलता हे.. ये सब नोर्मल बातहे.. मे कुछ दवाइ लीख देती हुे इसे रेग्युलर लेती रहेना..

बसंती : (थोडा जीजकते धीरेसे) मेडम.. क्या.. हम.. मतलब.. अब आपसे कैसे कहु..?

डोक्टर : (अ‍ेक नजरसे देखते) क्या कोइ प्रोबलेम हे..? ये आपकी बहु ही हेनां..?

बसंती : (सरमाते धीरेसे) नही.. मेरी लडकी हे.. अभी इनकी सादी नही हुइ.. तो..

डोक्टर : ओह.. सोरी.. में समज गइ.. तो ये बात हे..? क्या ये प्यारका मामला हे..? आप इस बच्चेको गीराना चाहती हेनां..?

बसंती : (सरमाते धीरसे) जी.. आप बील कुल सही समजी.. हमे ये बच्चा नही चाहीये..

डोक्टर : (थोडे सख्त लहेजेमे) आप कैसी मां हो इनकी.. पहेलेतो लडकीका खयाल नही रखते.. ओर जब बात बीगड जातीहे तो यहा बच्चा गीराने आजाते हो..? आपको पता हे ये सब गैर कानुनी हे..? ओर वैसेभी यहा कोइ जगाहपे ये काम नही होता.. अब इस बच्चेका गीरानेका टाइम नीकल चुका हे.. अगर कोसीसभी कीतो दोनोकी जानको खतरा हे.. इसीलीये आप जाइअ‍े ओर जीसकाभी बच्चा हे उनके साथ इनकी सादी करवा दीजीये.. आपके लीये यही बहेतर होगा..

बसंती : (थोडा हीच कीचाते) लेकीन मेडम.. मेनेतो सुना हे.. तीन महीना होजाये तोभी बच्चा गीराते हे..

डोक्टर : (थोडा सख्तीसे) मुजे लगता हे आपको अपनी इजत प्यारी नही हे.. तो फीर कही ओर जाकर ये काम करवा दीजीये.. मे अभी पुलीसको फोन करके उनको जानकारीया दे देती हु.. फीर देखीये.. सब अखबारमे आपके नामकी धजीया उडती हेकी नही.. ओर उपरसे पोलीवालोके डंडे पडेगे अलग.. बच्चा गीरानेकी सजा जानती हे आप..? क्या आपको जेलमे जाना हे..?

बसंती : (डरके) अरे नही नही.. मेतो बस अ‍ैसेही पुछ रहीथी.. चलो हम चलते हे.. इनका ओर कुछतो ध्यान नही रखना..?

डोक्टर : (अ‍ेक नजरसे देखते) नही.. उनको अच्छी खोराक मीले उनका ध्यान रखना हे.. ओर समय समयपे यही दीखाने आजाना.. मेने फाइलमे सब लीखके दीया हे.. ओके.. ओर मेरी मानीये.. ये जीनकाभी बच्चा हे उनके साथ आपकी बेटीकी सादी करवा दीजीये.. आपके लीये यही बेटर रहेगा.. अब जाइअ‍े..

तब बसंती जटसे वहासे उठ गइ.. पुलीसके नामसे वो बहुतही डर गइ थी.. तब बरखा उनके पीछे चलते डोक्टरकी ओर देखके थम्सअप वाली साइन दीखाके हसने लगी.. तब डोक्टरभी उनकी ओर देखके हसने लगी.. ओर मां बेटी दोनोही बहार आगइ.. दरसल बरखा जब डोक्टरके साथ अंदर अपनी प्रेगनन्सी चेक करवाने गइ थी.. तबही उसने डोक्टरसे बात करके सब बता दीयाथा की वो ये बच्चा गीराना नही चाहती..

ओर अपने प्रेमीके साथ सादी करना चाहती हे.. तब डोक्टरने उसे साथ देनेका आस्वासन दीयाथा.. इसलीये उसने बसंतीको पुलीसके नामसे डराया.. ओर बरखा अपने प्लानमे कामयाब भी हुइ.. दोनोही मा बेटी बहार आगइ तब बसंतीके माथेपे पसीना आगया था.. वो बहुत डरी हुइथी.. ओर वापस पेडके नीचे जाकर अपना सर पकडके बैठ गइ.. ओर गहेरी सोचमे डुब गइ.. तब बरखा भी सपाट भावसे बसंतीके पास जाकर बैठ गइ.. तभी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३२/१

ओर अपने प्रेमीके साथ सादी करना चाहती हे.. तब डोक्टरने उसे साथ देनेका आस्वासन दीयाथा.. इसलीये उसने बसंतीको पुलीसके नामसे डराया.. ओर अपने प्लानमे कामयाबभी हुइ.. दोनोही मा बेटी बहार आगइ तब बसंतीके माथेपे पसीना आगया था.. वो बहुत डरी हुइथी ओर वापस पेके नीचे जाकर बैठ गइ.. ओर गहेरी सोचमे डुब गइ.. तब बरखाभी सपाट भावसे बसंतीके पास जाकर बैठ गइ.. तब....अब आगे

बरखा : (धीरसे) मम्मी.. मे इस बच्चेको नही गीराउगी.. ये हमारे प्यारकी नीशानी हे.. तुम क्यु नही मानती..

बसंती : बेटी.. तुमने तो हमे कहीका नही छोडा.. अब घर जाके हम तेरे बापुको क्या कहेगे..? इसके बारेमे तुमने कभी सोचा हे..? कमीनी.. तुजे प्यार करनाथा तो कीसी ओरसे करती.. अपने ही भाइके साथ मुह काला कीया.. अब हम गांवमे सबको क्या मुह दीखायेगे..?

बरखा : (अपना आखरी दांव चलते) मम्मी.. ये प्यार चीज ही अ‍ैसी हे.. कीसीको प्यारकी भुख होती हे तो कीसीको अपने तनकी आग बुजानेकी भुख होती हे.. तो मेने क्या गलत कीया..? प्यारतो कीसीसे भी हो सकता हे.. अगर मे बहार दुसरे लडकेके के साथ प्यार करके प्रेगनेन्ट होती तो हमारी इजत बच जाती.. येतो ओर भी अच्छा हे मेने भाइसे ही रीलेशन बनालीया.. हमारे घरकी बात घरमे ही रहेगी.. आपने भी कीसीसे प्यार कीया होगा.. तो क्या आपकी इजत चली गइ..?

बसंती : (थोडा गुस्सेमे) कमीनी.. अपनी मां के साथ जुबान लडाती हे.. मे तेरी जैसी नही हु.. समजी..? जो अपने भाइके साथ उनका बीस्तर गरम करती रहु.. मेने आज तक तेरे बापुके अलावा कीसीके सामने देखा तक नही.. ओर तु हेकी अपने भाइके साथ ही.. छी.. मुजे तो बात करने भी सरम आती हे..

बरखा : (कातील मुस्कानके साथ) अच्छा..? सच केह रही हो तुम..? क्या बापुके अलावा कीसी ओरके साथ रीलेशन नही हे..?

बसंती : (चोंकते अ‍ेक नजरसे देखते) क्या मतलब हे तुम्हारा..? तुम कहेना क्या चाहती हो..? हंम.. क्या मे कीसी ओरका बीस्तर गरम करती हु..? मे इतनी नीच नही हु.. समजी.. कमीनी कहीकी.. मुजसे जुबान चलाती हे..

बरखा : देख मम्मी.. मे ये बात आज तक कीसीके सामने उजाकर करना नही चाहती थी.. मे समज सकती हु की पापा अब बीमार रहेते हे.. तो तुजे वो सुख देनेमे सक्षम नही हे.. लेकीन हमारे तनकी भी कोइ जरुरत होती हे.. तो इसीलीये तुम कोइ बहारके परुषसे अपने तनकी आग बुजाती हो तो मे उसे गलत नही मानती..

बसंती : (थोडा गभराते धीरेसे) बरखा.. चुप कर.. क्या अनाप सनाप बक रही हे.. तुम कहेना क्या चाहती हो..? हंम..? सच बता मुजे..

बरखा :(नजरे चुराते धीरेसे) देखो मम्मी.. आप बुरा मत मानना.. मुजे कइ दिनोसे आपके ओर भानुभाइके रीस्तोके बारेमे पता हे.. मुजे पता हे दो पहोरमे जब घरपे कोइ नही होता तब वो आपको मीलनेके लीये हमारे घर आते हे.. ओर आप दोनो अ‍ेकही बीस्तरमे.. मम्मी बुरा मत मानना.. मे इसे गलत भी नही मानती.. क्युकी पापा अपनी बीमारीकी वजहसे आपको वो सुख नही देपाते.. इसीलीये मेने कभी आपसे इस बारेमे बात तक नही की.. ये तो आप बच्चे गीरानेकी जीद कर रहीहे तो मुजे मजबुरन बताना पडा..

बसंती : (थोडा गुस्सेसे) कमीनी.. अपना पाप छुपानेके लीये तु मुजपे इतना बडा इल्जाम लगा रही हे.. अ‍ैसी बातोसे तुम मुजे बदनाम कर रही हे..? क्या सबुत हे तेरे पास..?

बरखा : (मुस्कुराते) अच्छा..? आपको सबुत चाहीये.. तो फीर ये देख लीजीये सबुत..

कहेके बरखाने अपने मोबाइलमे भानु ओर बसंतीकी चुदाइ वाली विडीयो क्लीप चलाके मोबाइल बसंतीको पकडा दीया.. तो बसंती अपनी ओर भानुकी चुदाइकी विडीयो देखकर सब समज गइ.. अपना ओर भानुका भांडा बरखाके सामने आ चुकाथा.. अब बात छीपानेका कोइ मतलब नही था.. तब बसंतीकी हालत पतली होगइ.. ओर उनके माथेपे पसीना आगया.. उसने जटसे मोबाइल बरखाको वापस दे दीया..

ओर अपना चहेरा अपने दोनो हाथोमे छुपाकर फुट फुटकर रोने लगी.. तब बरखा अपना मोबाइल बंध करके उनकी मम्मीकी पीठको सहेलाने लगी.. ओर उसे चुप करानेकी कोसीस करने लगी.. लेकीन बसंती थी जो रोये ही जा रही थी.. दोनोही अ‍ेकांतपे अ‍ेक पेडके नीचे दुर बैठे थे.. तब कीसीका ध्यान उस तरफ नही गया.. बरखा अपनी मम्मीको सांत करनेकी कोसीस करने लगी..

बरखा : मम्मी प्लीज.. सांत होजाओ.. मे आपको कहा ब्लेक मेइल करती हु.. बस आपने सबुतका कहातो दीखा दीया.. यकीन मानो ये बात मेरे अलावा कोइ नही जान पायेगा.. प्लीज.. मत रोइअ‍े..

बसंती : (रोते) बेटी.. तुमने तो मुजे कहीका नही छोडा.. अब मे सबको क्या मुह दीखाउगी.. मे मर जाना चाहती हु.. जा चली जा.. इधरसे मुजे नही जीना.. मे मर जाउगी..

बरखा : मम्मी प्लीज.. आपको मेरी कसम हे.. मत रोइअ‍े.. मुजे आपके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. वरना मे भी अपनी जान दे दुगी.. प्लीज.. यहा सब हमारी ओर देख रहे हे.. प्लीज.. सांत होजाइअ‍े..

बसंती : (अपने आंसु पोछते खडी होकर) ठीक हे.. चल तु.. अब हमे कही नही जाना.. हम सीधेही घर चलते हे.. हम वही बात करेगे.. समजमे नही आता मे कहा जाउ.. जीतो चाहता हे की मे मर जाउ..

बरखा : (साथमे खडी होते बसंतीका हाथ थामते) मम्मी.. प्लीज.. आपको मेरी कसम.. मत करो अ‍ैसी बाते.. आप मेरे साथ घर चलो.. मे आपको बसमे बैठकर कुछ बात बताती हु.. आप ठंडे दीमागसे सोचना..

बसंती : (साथ चलते) हंम.. ठीक हे चल.. अब मेरे पास तुजे कहेनेका कुछ चाराही नही बचा.. तुमनेतो आज मेरीभी इजत मीटीमे मीलादी.. कीसीको मुह दीखाने लायक नही छोडा..

कहेते दोनोही बस स्टेन्डपे आगइ.. बसंती आज टुट चुकीथी.. वो बरखासेभी नजरे नही मीला रहीथी.. जैसेही उनके गांवकी ओर जाने वाली बस आइ दोनोही उनमे बैठ गइ.. तो दो पास वाली खाली सीट मीलते ही दोनो वही जाकर बैठ गइ.. बरखाने बोटलमेसे बसंतीको पानी पीलाया.. तब जाके बसंतीने बरखाकी ओर देखा.. तभी बरखा उनसे बात करने लगी..

बरखा : मम्मी.. हमे अपनी जींदगी अपने तरीकेसे जीनी हे.. दुसरोका नही देखना.. अगर तुजे यहा रहेनेमे दिकत हे तो हम कही दुसरे गांवमे चले जायेगे.. जहा हमे कोइ पहेचानता नाहो.. तब कोइ पुछे तो बता देनाकी ये मेरी बहु हे.. हम यहा सब बेचकर दुसरे गांवमे रेहेगे.. अब पापाको भी हम कोइ काम नही करने देगे.. मे ओर भाइ दोनो ही घर सम्हाल लेगे..

बसंती : बेटी.. मुजे ओर कोइ चीन्ता नही हे.. बस मे तेरे पापासे तुम दोनोके बारेमे कीस मुहसे बात करुगी..? जब उसे तुम दोनोके बारेमे पता चलेगा तब उनपे क्या बीतेगी..

बरखा : (मुस्कुराते) मम्मी.. आपसे अ‍ेक बात कहु..? भाइ केह रहाथा.. की अब यहा हमारे गांवमे बहुत बडा बदलाव आने वाला हे.. सब लोग अ‍ैसे रीस्तोमे सादीया करने लगेगे.. सीर्फ मे ओर भाइ ही नही.. गांवमे अ‍ैसे बहुत भाइ बहेन हे.. जो आपमे प्यार करते हे.. ओर उनसे सादी करने वाले हे..

बसंती : (अ‍ेक नजरसे आस्चर्यसे देखते) क्या केह रही हो तुम..? ये उनको कीसने कहा..?

बरखा : (सरमाते हसते) मम्मी.. वो केह रहेथे उनको ये बात हमारे ठाकुरसाहेबने कही.. भाइने कहाहे की आने वाले दिनोमे हमारे गांवमे अ‍ेकभी विधवा या त्यक्ता नही मीलेगी.. सब आपसी रीस्तोमे सादीया करते होगे.. इस बारेमे आश्रमसे बाबाभी सबको समजानेके लीये आने वाले हे.. तो हमे कोइ प्रोबलेम नही होगी..

बसंती : (आस्चर्यसे) मुना ठाकुरसाबको कब मीला..? क्या उसने खुद मुनासे बात की हे..?

बरखा : (सरमाते हसते) हां मम्मी.. वो सीर्फ भाइको ही नही मीले.. हम दोनोको मीलनेके लीये क्लीनीकपे आयेथे.. ओर उसने हमारी सादी करवानेका वादा भी कीया हे.. इसीलीये आपसे केह रहीथी की हमारी सादी करवादो.. ओर मम्मी.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे आपको वो क्लीप दीखाना नही चाहती थी.. लेकीन आपकी बच्चा गीरानेकी जीदकी वजहसे मुजे आपको दीखाना पडा.. आप यकीन मानो.. मे अब कीसीको नही दीखाउगी..

बसंती : (नजर चुराते) बरखा.. तुम ये क्लीप मोबाइलसे डीलीट करदो.. अब मे कीसीसे अ‍ैसा रीस्ता नही रखुगी.. तुमसे वादा करती हु.. बेटी.. मे इतने सालोसे वो सुखसे वंचीत थी.. तो कदम बहेक गयेथे.. लेकीन अब मुजे कीसीके साथ अ‍ैसा रीसता नही रखना..

बरखा : नही मम्मी.. मे डीलीटतो अभी करदुगी.. लेकीन अपना रीस्ता खतम मत करो.. मुजे आपके कोइभी रीस्तेसे अ‍ेतराज नही हे.. अभी आपकी उमरही क्या हे..? मे भी इस दौरसे गुजरी हु तो मे आपकी तकलीफ भली भांती समजती हु.. मम्मी.. हमारे तनकीभी कुछ जरुरत होती हे.. तब आप क्या करोगी..?

हमारे डोक्टर साहेबके घरके पास उन बनवारीलाल रहेता हे जीनका लडका दुबइमे हे.. तो उनकी बहु बेचारी कहा जायेगी.. इसीलीये तो उनका उनके ससुरके साथही रीस्ता हे.. ओर सुना हे उनके लडकेने वहा कीसी ओरसे सादी करली हे.. अबतो वो यहा आताभी नही हे..

बसंती : नही बरखा.. अब मे अपने बच्चोकी नजरमे ओर गीरना नही चाहती.. बस अ‍ेकही बींनती हे तुजसे.. ये बात आजही भुलजा.. इस बारेमे हम दोनोके अलावा कीसीको मालुम नही होना चाहीये.. की मेरा भानुभाइसे अवैध रीस्ता था.. अब मे उस आदमीसे कभी नही मीलुगी..

बरखा : (हां मे गरदन हिलाते) मम्मी.. आप नीस्चीत रहीये.. ये बात मेरे अलावा कोइ नही जानता.. मेने भाइको भी नही बताया.. ओर आप भानुभाइसे रीस्ता रखना चाहती हे तो रख सकती हे.. मुजे कोइ अतराज नही.. मेने बहुत सोच समजकेही भाइके साथ रीस्ता बनाया हे..

अगर बहारके कीसी लडकेके साथ रीलेशन रखती ओर वो मुजे इस्तेमाल करके छोड देतातो..? उपरसे ब्लेक मेइल होनेका खतरा अलग.. इनसेतो अच्छा हे घरकेही आदमीसे रीलेशन हे.. कोइ खतराभी नही ओर बहार कीसीको मालुमभी नही.. घरकी बात घरमेही रहेगी..

बसंती : (सरमाते) नही बरखा.. अब मुजे बहारके कीसीभी आदमीसे रीस्ता नही रखना.. आज तुजे सब पता चल गया.. कल कीसी ओरको पता चलेगा.. तो मेरी क्या इजत रेह जायेगी.. सायद तुमने सही सोचा हे..

कहातो बरखा कुछ सोचमे पड गइ.. बसंती बरखा ओर मुनाकी सादीके लीये आसानीसे मानजाये इसके लीये बरखाका दिमाग तेज चलने लगा.. ये बातसे वो बडीही आसानीसे अपनी मम्मीको मनाकर अपने वसमे कर सकती हे.. ओर इस रीस्तेसे बरखाको कोइ अ‍ेतराजभी नही था.. ओर बसंतीके भानुके साथ रीस्तेका हलभी आसानीसे सुलज सकताथा.. तो बरखाने बडीही सीफततासे चाल चलते अपनी मम्मीसे कहा..

बरखा : (कुछ सोचते सरमाते) मम्मी.. अगर मेने सही सोचा हेतो आपभी अ‍ेक बार सोचलो.. ये तनकी आगही कुछ अ‍ैसी हे.. मे भाइके बीना अ‍ेक पलभी नही रेह सकती.. तो अब आप क्या करोगी..? अगर आप बहार रीलेशन रखना नही चाहती.. तो मेने सही सोचा हे अ‍ैसा आपभी नही सोच सकती..?

बसंती : (आस्चर्यसे देखते) बरखा.. तुम कहेना क्या चाहती हो..? मुजे सब खुलकर बता..

बरखा : (थोडी हडबडाते) वो..वो.. कुछ नही मम्मी.. मेरे कहेनेका मतलब.. मुजे भानुभाइसे कोइ खतरा नही नही दीखता.. अगर आप चाहोतो उनके साथ रीलेशन..

बसंती : (सर्मसार होते धीरेसे) नही बरखा.. अब मे बहार रीस्ता नही रखना चाहती.. लेकीन तुम मुजे ये बताओ.. तुम दोनोके बीच ये सब कबसे चल रहा हे..?

बरखा : (सरमाते हसते) मम्मी.. जब हम दोनो कोलेजमे थे तबसे.. दोनोही बसमे साथमे आते जाते थे.. भाइ मेरा बहुतही खयाल रखता था.. कभी बसमे ज्यादा भीड होतीतो कोइ मुजे छुअ‍े वो भाइको पसंद नही था.. ओर वो मुजे पुरा प्रोटेक्शन देते.. फीर मेभी भाइको पसंद करने लगी.. तो हम दोनोके बीच कब प्यार होगया हमे पताही नही चला..

तबसे घरमे मे ओर भाइ अ‍ेक पती पत्नीकी तराह रहेते हे.. जब हम दोनो कोलेजके पहेले सालमे थे तबही भाइने हमारे घरके मंदिरके सामने मेरी मांग भरी हे.. ओर उसी रात हम दोनो पहेली बार मील गये थे.. इसीलीये केह रही हु आप हमारी सादी करवादो.. मे भाइसे बहुत प्यार करती हु.. ओर भाइभी मुजे बहुत चाहते हे..

बसंती : (मुस्कुराते) हंम.. चलो आगे देखते हे.. अभीतो जैसे चल रहा हे चलने दे.. जब गांवमे तुम कहेती हो वो सब होगा तो हम तब सोचेगे की क्या करना हे.. अगर सब अ‍ैसे रीस्तेको अपनायेगे तो मुजे तुम दोनोके रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही.. मे तेरे बापुको समजा दुगी.. तुम दोनो उनकी इतनी चीन्ता करते हो यही बहुत हे..

बरखा : (बैठेही खुसीके मारे हग करते) ओह मम्मी थेन्कयु बेरी मच.. आज आपने मेरी सारी टेन्शन खतम करदी.. आइ लव यु मोम.. मम्मी.. मुजे सीर्फ पापाकी नही.. आपकीभी चीन्ता होती हे.. हें..हें..हें..

बसंती : (हसते) हंम.. चल अब तेरी मम्मीको ओर मस्का मत लगा.. कमीनी.. ओर सुन.. अब तुम मेरी बेटी नही हो.. मेरी बहु हो.. हें..हें..हें.. तुम अब मेरे बेटे मुनाकी अर्धागींनी हो.. तो उनके साथ सो सकती हो.. लेकीन ध्यान रखना.. तेरे पापाको अभी इस बातका पता ना चले.. हंम..? हें..हें..हें..

बरखा : (अ‍ेकदम सर्मसार होते) ब..हु..? हें..हें..हें.. जी.. सासुमां.. थेन्कयु.. हें..हें..हें.. मम्मी.. अ‍ेक काम करो.. कभी कभी मुजे बेटी बनालो.. ओर मुनाको आप अपना दामाद बनालो.. मजा आयेगा.. हें..हें..हें..

बसंती : (हसते) कमीनी.. तुजेतो हर बातमे मजा लेना हे.. नही बनाती बेटी.. तुम मेरी बहु ही ठीक हे.. तुमने मेरे साथ अ‍ेक बहु वालाही काम कीया हे.. कोइ बेटी अपनी मां की अ‍ैसी फील्म बनाती हे..? अबतो तुजे अपनी बहु ही मानुगी.. बस अब जल्दीसे मुजे अपने प्यारासा पोतेका मुह दीखादे.. हें..हें..हें..

बरखा : (बहुतही सर्मसार होते हसते) जी सासुमां.. हें..हें..हें.. लेकीन मम्मी.. अगर आपको आगे जाकर कभी मर्दकी कमी महेसुस हुइ तो..? तब आप क्या करोगी..? तब आपभी मेरी तराह सोचना ओर मुजे बताना.. हम मीलके कोइ रास्ता नीकालेगे.. हें..हें..हें..

बसंती : (मनमे) कमीनी.. मुजे पता हे तुम क्या कहेना चाहती हो.. मे इतनी नासमजभी नही हु.. तुम क्या हल नीकालोगी.. मे खुद हल नीकालुगी.. ओर उनसे बात करुगी.. अगर तुम अ‍ैसे नाजायज रीस्ता रखके अपने भाइसे चुदवाती हे तो क्या मे अपने बेटेके साथ रीलेशन नही रख सकती..? अबतो तेरे सामने ही चुदवाउगी.. ओर तुमभी देखती रहे जाओगी..

बरखा : (थोडा हीलाते) मम्मी.. क्या सोच रही हे.. मे तुमसे कुछ पुछ रही हु.. हें..हें..हें..

बसंती : (हडबडाते) अरे कुछ नही.. बहु.. अभी मेने इस बारेमे कुछ नही सोचा.. आगे देखा जायेगा..

बरखा : (सरमाते धीरेसे हसते) मम्मी.. अभीसे ब..हु..? क्या अब मुजे सचमे अपनी बहु मानोगी..?

बसंती : (हसते) हां बरखा.. तो मजाक थोडीना करती हु.. तेरी जैसी खुबसुरत लडकी अगर मेरे मुनाकी पत्नी हे तो आजसे तु मेरी बहु ही हे.. ओर हम अकेले होगे तब तुजे बहु कहेकर ही बुलाउगी.. बस तुजो कहेती हे वो सब होजाये तो मे जल्द तुम दोनोकी सादी कर देना चाहती हु.. लेकीन.. मेरी अ‍ेक सर्त हे..

बरखा : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? अब कौनसी सर्त..?

बसंती : (हसते) अरे गभरा क्यु रही हे.. हें..हें..हें.. बस अ‍ेक बार मुना खुद आकर मुजसे तेरा हाथ मांगले.. तब ही मे तुजे उनके साथ रहेने की परमीशन दुगी.. हें..हें..हें..

बरखा : (सरमाते हसते) ओह.. मोम.. ये क्या बात हुइ..? वो बहुत ही सर्मीले हे.. फीरभी मे उनसे बात करुगी..

बसंती : (हसते) अभीसे.. वो.. उनका नाम लेना भी बंध कर दीया..? हें..हें..हें..

बरखा : (सरमाते हसते धीरेसे) हां.. तो सासुमाके सामने उनके बेटेका नाम थोडीना लुंगी हें..हें..हें..

बसंती : (मुस्कुराते) बरखा.. क्या सचमे हमारे गांवमे अ‍ैसे रीस्ते पनप रहे हे..?

बरखा : (सरमाते मुस्कुराते) हां मोम.. सीर्फ भाइ बहेन ही नही.. बहुत सारे रीस्तोके बारेमे मेने सुना हे.. आप सोचभी नही सकती..

बसंती : (उत्सुक्तासे देखते) जैसे..?

बरखा : (सरमाते हसते) मोम.. मुजेतो बतानेभी सरम आ रही हे.. वो हमारे सामतभाइ हेनां..? उनकी विधवा बहेनका उनके लडकेके साथ रीलेशन हे.. तो कीसीका उनकी भाभीके साथ ओर खुद सामतभाइकी बीवी हमारी जयाभाभीका रमेशभाइके साथ टांका भीडा हुआ हे.. ओर आपके बेटेका अ‍ेक दोस्त हे.. उन्होनेतो हद करदी.. उनकी विधवा ताइके साथही रीलेशन रख लीये.. मम्मी.. अब आने वाले वक्तमे हमारे गांवमे कोइ रीस्ते नाते नही रहेगे.. सब आपसी रीस्तोमे रीलेशन रखेगे.. इसीलीये मे आपसे केह रहीथी..

बसंती : (आस्चर्य भावसे देखते) क्या केह रही हो तुम..? बहु.. अ‍ेक बात कहु..? क्या तुजे ये सब रीस्ते जायज लगते हे..? तुमतो पढीलीखी हो..

बरखा : (सरमाते मुस्कुराते) मोम.. सच कहु..? तो मुजे ये कीसीभी रीस्तेमे बुराइ नही लगती.. बस.. सबको अपने तनकी प्यास बुजानी हे.. अगर वोही ओरत हो या लडकी.. बहार कीसीसे रीस्ते रखतीतो कीतना खतरा होता हे.. कीसीको ब्लेकमेइलका तो कीसीको अपनी इजत गवानेका.. इनसेतो अच्छा हे सब बात घरमेही रेह जायेगी.. कोइ खतरातो नही.. अगर आपसमे सादीया करलेतो कोइ विधवा या त्यक्ताही नही रहेगी.. मुजे आपसी रीस्ते बहुत पसंद हे.. फीर चाहे कीसीभी रीस्ता हो..

बसंती : (कुछ सोचते) बाततो तेरी सही हे.. लेकीन बहु.. क्या समाज अ‍ैसे रीस्तोको अपनायेगा..?

बरखा : (मुस्कुराते) मोम.. अब हर घरसेही तो समाज बनता हे.. अगर हर घरमे अ‍ैसे कोइना कोइ रीस्ता होगातो क्यु नही अपनायेगे..? मे अ‍ैसे कीसीभी रोस्तेको गलत नही मानती.. फीर चाहे रीस्तेमे कोइभी क्यु ना हो.. आपभी इस बारेमे सोचीये..

अ‍ेसेही दोनो मा बेटी हसी मजाककी बाते करती खुस होकर घरकी ओर चली गइ.. तो इसी बीच आज सुबह दश बजे रमेश भी सहेरमे पहोंच गया.. सबसे पहेले पंचायतकी ओफीसमे कुछ कागजात सबमीट करवाके उन अधीकारीसे मीटींग करली.. इनमे स्कुलका प्लान ओर अ‍ेक होस्पीटलकी जमीनके लीये अरजी सबमीट करदी.. फीर वही काम खतम करके वहीसे नीकल गया.. ओर सीधाही बस स्टेन्ड चला गया.. ओर वही पहोचकर अ‍ेक जगाहपे खडा रहेकर कीसीका इनतजार करने लगा..

तभी वहासे अ‍ेक मेडीकल स्टोरमे जाकर कुछ गोलीया लेली.. ओर वही तैय की हुइ जगहपे वापस जाकर खडा होगया.. तब आधे घंटेके बाद अ‍ेक बस आकर रुकी तो रमेशकी उत्सुक्ता बढ गइ ओर बसकी ओर देखने लगा तभी बसमेसे अ‍ेक ओरत मुहको दुपटेसे ढककर उतरती नजर आइ.. ओर अपनी तैय की हुइ जगाहकी ओर चलने लगी.. जैसेही नजदीक पहोंची तो रमेशको देखकर उनको कुछ राहत महेसुस हुइ..

तब रमेशने उनको देखतेही अ‍ेक ओटो रीक्षाको रोक लीया.. तो उस ओरत रमेशके पास आतेही फटाफट रीक्षामे बैठ गइ ओर उनके साथ रमेशभी अपनी बाइक लेकर रीक्षाके पीछे चलने लगा.. तब रमेशने रीक्षाको अ‍ेक नजदीक की होटेलकी ओर लेजानेको कहा.. तो रीक्षा उन ओरतको होटेलमे छोडकर चली गइ.. ओर रमेश उन ओरतके साथ होटेलमे अ‍ेक रुम बुक करके रुममे चला गया.. ओर जैसेही दोनो अंदर चले गये.. तब रमेशने रुमका दरवाजा बंध कर दीया.. ओर जेबसे अ‍ेक गोली नीकालकर खाली.. ओर पानी पीलीया..

तब उस ओरत अपना दुपटा हटाकर रमेशकी ओर आगइ.. तो रमेशने उसे जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर उनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगा.. फीर अ‍ेक दुसरेकी आंखोकी ओर देखते हसने लगे.. ओर धीरेसे दोनोको होंठ मील गये.. तब उस ओरत आधी आंख चडाके नसीली आंखोसे रमेशका साथ देने लगी.. ओर दोनोही अ‍ेक दुसरेके मुहमे जीभ डालके अ‍ेक दुसरेके रसको पीने लगे....
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३२/२

जी..हां.. आप सही सोच रहे हे.. ये ओरत कोइ ओर नही गांवके पंचायतके सदस्य सामतकी बीवी जया थी.. जो सहेरमे कीसी रीस्तेदारकी खबर पुछनेके बहानेसे रमेशको मीलने आगइ थी.. ओर ये दोनो आज अ‍ैसे पहेली बार नही मील रहेथे.. रमेश ओर जया.. अ‍ैसे चारसे पांच बार सहेरमे इसी होटेलमे मीले हे.. तब रेमश वायग्रा खाकर जयाकी खुब चुदाइ करता.. फीर दोनोही अलग अलग अकेले गाव चले जाते हे..

तभी रमेश जयाको गोदमे उठाकर बेडकी ओर चला गया.. ओर देखतेही देखते दोनोही नीवस्त्र होगये.. तबतक गोलीनेभी अपना असर दीखाना सुरु करदीया.. तब रमेशसे कंट्रोल करना मुस्कील हो गया.. ओर रमेश जयाके उपर चड गया तब जयाने उनका लंड पकडकर चुतके उपर सहेलाया ओर अपनी चुतपे सेट करदीया तब रमेशने अ‍ेकही जटकेमे अपना लंड जयाकी चुतमे घुसा दीया तो जयाकी हल्कीसी चीख नीकल गइ..





ओर कुछही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. जयाभी अपनी कमर उछाल उछालके रमेशके साथ मजेसे चुदवाने लगी.. वायग्राकी वजहसे काफी देरतक रमेश जयाको चोदता रहा.. ओर इसी बीच जयाभी अ‍ेक बार जड चुकीथी.. ओर आखीर रमेश अकडने लगा तब जयाने रमेशको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर दोनोने अपने होंठ लीपलोक करलीये तब रमेश अपना माल जयाकी चुतमे उडेलने लगा.. ओर जया भी साथमे जडते रमेशकी पीठको सहेलाती रही.. ओर रमेश जयाके सीनेपे ढेर होगया..





जया : (सरमाते हसते) रमेश.. क्या बात हे.. आजतो बाफी देरतक करते रहे..? कुछ खाया हे क्या..?

रमेश : (हसते) हंम.. तुजेतो पता हे.. मे तुजे वो गोली खाकरही चोदता हु.. तुजे चोदनेमे बहुत मजा आता हे.. क्या सामतभाइ तुजे ठीकसे नही चोदते..?

जया : (सरमाते हसते) वो अगर ठीसे चोदपाते तो मे आपसे चुदवाने थोडीना आती..? अब वो कहा कर पाते हे.. कीतने बुढे होगये हे.. अबतो उनका खडाभी नही होता.. तभीतो आपसे चुदवा रही हु.. हमे घरपे बहुत कम मौके मीलते हे.. मेरी जागृती ओर मेरी ननंद सांती घरपे ही होती हे..

रमेश : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. तु अब उनका ब्याह क्यु नही करदेती.. कीतनी बडी होगइ हे.. कोइ अच्छासा लडका ढुंढकर उनकी सादी करदे.. तेरा लडकाभी तो बडा होगया हे..

जया : (गाल सहेलाते) तुम मेरे बच्चोकी कीतनी चीन्ता करते हो.. बस तेरे भाइकोतो कोइ चीन्ताही नही.. कुछ ध्यानही नही देते.. की चलो लडका लडकी अब जवानहो गये हे.. कही उच नीच हो गइनां.. तब उसे पता चलेगा.. सारा दीन ना जाने कहा घुमते रहेते हे.. ओर उपरसे मेरी ननंद बेचारी छोटी उमरमे विधवा होकर आइ हे..

तो मे क्या करु..? जागृती ओर बंसीको सादीके लीये पुछती हुतो दोनो ना ना करते रहेते हे.. ओर सांतीभी बेचारी क्या करे.. यहा कुआरे लडके लडकीकी सादी नही हो रहीतो बेचारी विधवासे कौन सादी करेगा..? आपकी दनाके लीयेभी तो कोइ लडका नही मीलता..

रमेश : हां सही कहा तुमने.. मेरी वंदनाके लीयेभी यही प्रोबलेम हे.. उनके लीयेभी कोइ पढालीखा लडका चाहीये.. ओर भाभी तुमतो जानती हो गांवमे अ‍ैसे लडके मीलना कीतना मुस्कील हे..

जया : (हसते) रमेश.. अगर मेरा बंसी पढालीखा होतातो वंदनाको मेही लेजाती.. लेकीन तुमतो खामखा इधर उधर भटक रहे हो.. हमारे ठाकुरसाब तो तुम्हारे बहुत अच्छे दोस्त हे.. उमरमेभी तुमसे बहुत छोटे हे.. बस वंदनासे पांच छे सालही बडे होगे..

रमेश : (अ‍ेक नजरसे देखते) भाभी.. तुम कहेना क्या चाहती हो..

जया : (हसते) देवरजी.. बुरा मत मानना.. उनके खानदानमेतो बहुतसी सादीया कर सकते हे.. तो फीर आपकी वंदनाके लीये वही बात चलाओ.. आपका दोस्त हे. तो हो सकता हे आपकी बात नही टालेगे..

रमेश : (कुछ सोचते) भाभी.. बाततो तेरी सही हे.. मेभी चाहता हु वंदनाको देवु अपनाले.. लेकीन वो मेरा दोस्त हे.. तो मे कीस मुहसे उनसे बात करु..? ओर लखनभैयातो वंदनासेभी छोटे हे वरना उनके साथही मे देवुसे बात करता..

जया : पता नही अब भगवानही कोइ रास्ता नीकाले.. चलो.. अब सुरु होजाओ.. आजतो अभीभी अंदर सख्त महेसुस हो रहा हे.. आपने कोनसी गोली खाइ हे..? हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) क्यु मजा आया..? उस दुकानवालेने आज कोइ इम्पोर्टेड गोली दी हे.. आजतो थकानभी महेसुस नही होती.. भाभी.. देखना आजतो तुजे साम तक चोदता रहुगा.. हें..हें..हें..

जया : (सरमाते हसते) देवरजी तो ये गोली कभी हमारी देवरानीके लीयेभी लेजाओ.. हें..हें..हें..

रमेश : (हसते) अरे वो.. मुजेतो गोली खानेही नही देती.. ओर उनका स्वभावतो आपको पताही हे.. कीतनी गालीया देती हे.. पता नही वंदना कैसे पैदा होगइ.. वरना हमारा रीलेशन अ‍ैसेही थोडीना होता.. कमीनी हाथभी नही लगाने देती..

जया : (सरमाते हसते) हंम.. देखना बाबा हमे टाइमपे घरभी जाना हे.. हमारे पास चार बजे तक का वक्त हे.. आपको मुजे जीतना चोदना हो चोदलो.. फीर चार बजे मुजे बस स्टेन्ड छोड देना मे चली जाउगी..

रमेश : (हसते होंठ चुमते) भाभी.. आज मेरे साथ मोटर साइकलपे चलना.. हम दोनो साथमे चले जायेगे.. कोइ पुछेगातो केह दुगाकी भाभी मुजे सहेरमे मील गइ तो लेकर आगया..

जया : (सरमाते हसते) ना बाबा ना.. कीसीने देखलीया तो हमारी फजीहत हो जायेगी.. मुजे आपके साथ नही आना..

रमेश : (होंठ चुमते) अरे चलना.. देखलीया तो क्या होगया.. सबको पता हे हम देवर भोजाइ हे.. ओ सहेरमे तो ये आम बात हे.. ओर गांवमेभी देवर भोजाइ साथमे जाते हे.. तो क्या दीकत..? हम हर बार थोडीना जाते हे..

जया : (सरमाते हसते) ठीक हे.. आज चलती हु.. लेकीन हर बार तुम्हारे साथ नही आउगी.. वरना कीसीको हम दोनोपे सक होजायेगा.. तो मे कीसीको मुह दीखाने लायक नही रहुगी..

रमेश : (खुस होते हसते) हंम.. थेन्कयु डार्लींग.. हें..हें..हें.. भाभी.. ये बता.. तुम्हारी उमर ओर सामतभाइकी उमरमे इतना बडा फर्क क्यु हे..? तुम आजभी इतनी जवान.. ओर कहा सामत भाइ..

जया : (सरमाते हसते) हंम.. मेरे बा बापुने मेरी छोटी उमरमेही इनसे सादी करदीथी..तब हमारे घरकी स्थीती अच्छी नहीथी.. ओर तब आपके भाइ रइस कहेलातेथे.. ओर उपरसे तब वो हमारे गांवके सरपंच थे.. तो मेरी सादी होगइ.. ओर छोटी उमरमेही उन्होने मुजे दो दो बच्चे देदीये.. लेकीन अब वो बुढे हो चुके हे.. उइ..मां.. रमेश.. अब जोभी करना हे करलो.. कबतक अ‍ैसे रहोगे.. फीर हमे जानभी हे..





फीर रमेश अ‍ेक बार फीरसे जयाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगता हे.. तब जयाभी उनका साथ देने लगी.. ओर दोनो साम चार बजे तब चुदाइ करते रहे.. रमेशने जयाकी जमकर तीन बार चुदाइ करली तब दोनोही थकके चकनाचुर हो चुके थे.. फीर दोनोने नहालीया ओर अपने कपडे पहेनकर कंपलीट होगये.. तब रमेशने जयाको अ‍ेक आइपीलकी गोली देदी.. तो जयाने खाली..

फीर रमेशने होटेलका कीराया देदीया ओर दोनोही होटेलसे बहार आगये.. तब रमेशने अपनी बाइक लेली तो जया दुपटेसे अपना चहेरा ढकके रमेशके पीछे बैठ गइ ओर दोनो गांवकी ओर चले गये.. तब इधर आश्रममे भी सब साम होतेही नीकलने लगे.. देवायत ओर सृतीने मीलकर बाबाको दक्षीणा देदी फीर सब उनके पांव छुकर वहासे नीकलने लगे.. ओर सबने यहासे सीधेही धिरेनके घर जानेका फैसला करलीया..

मंजुने सृतीकी कारको धिरेनको चलाने देदी.. ओर सृतीको देवायतके साथ बीठा दीया तो भानु ओर लखननेभी अपनी कार लेली ओर सबलोग चारो कारमे अ‍ेडजेस्ट होगये.. ओर आश्रमसे नीकल गये.. जंगलसे गुजरते सहेरके रोडकी ओर आगये.. ओर सब लोग गांवकी ओर बढने लगे तब बीचमेही धिरेनका गांव आने वाला था तो सब लोगोको वही जाना था.. तब रमेशको नही पताथाकी ये लोग रास्तेमे उनको मील जायेगे..

चारो कार अपनी मंजीलकी ओर दोड रहीथी तब देवायतको आगेकी ओर अ‍ेक मोटरसाइकील दीखा जीनमे अ‍ेक ओरत पीछे बैठीथी.. तब देवायतको बाइक को पहेचानने मे जरासीभी देर नही लगीकी ये मोटर साइकील रमेशकी हे.. ओर उनके पीछे ओरतको देखते वो सारा माजरा समज गया.. वो कुछ ओर सोचे उनसे पहेलेही सब कारे उन बाइकको ओवरटेक करके आगे नीकल गइ.. लेकीन हायरे रमेशकी किस्मत..

कारमे पीछे बैठी चारु ओर रश्मी मंजुने उन दोनोको देख लीया.. तो मंजु रश्मी चारुकी ओर देखकर हसने लगी.. तो चारुका पारा सातवे आसमानपे चला गया.. ओर उनका चहेरा गुस्सेसे भर गया.. लेकीन सबकी हाजरीकी वजहसे कुछ अन देखा करते बैठी रही.. तबभी रश्मी ओर मंजु चारुकी ओर देखके मंद मंद मुस्करा रही थी.. ओर सबलोग धिरेनके गांव आगये.. सब कारसे उतर गये तभी चंदाने धिरेन ओर पुनमको बहारही रोक दीया ओर वही दरवाजेपे खडे रहेने कहा..

फीर नीर्मला ओर चंदा दोनोही घरका ताला खोलकर अंदर चली गइ ओर अ‍ेक चावलका कलश ओर अ‍ेक पानीका कलश लेकर आगइ.. फीर नीर्मलाने चावलका कलश दरवाजेके बीच नीचे रख दीया ओर पानीका कलश दोनोके उपर घुमाने लगी.. फीर पुनमको कलशको पैर मारके अंदर आनेको कहा.. तो दोनोही अंदर आगये उनके साथ सब लोगभी अंदर आगये.. तब दया रजीयाने उनका सामन भी अंदर लेलीया..

मंजुला : (हसते) लोजी.. भैया.. अबतो आप अपने घर आगये.. देखले पुनो अब यही तेरा ससुराल हे..

धिरेन : (हसते) अरे आप सब लोग बैठो मे अभी गांवमे दुध लेकर आता हु.. चलो लखनभैया..

चंदा : (थोडा जोरोसे) धिरेन.. सुन.. कुछ मीठाइभी लेलेना ओर दुधभी थोडा ज्यादा लेना..

तो धिरेन हां कहेते लखनको लेकर पासकी दुकानकी ओर चला गया.. तब राजीव नीर्मला ओर भुमीका घरके अंदर सब देखते घुमने लगे.. तो भावना ओर मंजु दोनोही अपने बच्चेको लेकर नीचेके रुममे चली गइ.. ओर अपने बच्चोको ब्लाउस उचा करके दुध पीलाने लगी.. तब पुनम लता वंदना नीशा रश्मी रमा ओर चारु सब उपरकी मंजीलपे चली गइ.. ओर पुनम सबको सीधेही अपने बेडरुममे लेगइ.. तब..

नीशा : (हसते) पुनोदीदी.. सादीके बाद तो आप इधर पहेली बार आइनां..? फीर भी लगता हे ये बेडरुम आपके जाना पहेचाना हे हें..हें..हें.. यहा कुछ महेनत बहेनत की हेकी नही..?

पुनम : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. कीतनी कमीनी हो तुम.. तुम जो सोच रही हो अ‍ैसा कुछ भी नही हुआ.. समजी.. सीर्फ मे ओर धिरेन दो बार यहा बैठे थे..

वंदना : (जोरोसे हसते) तो कमीनी नीशाभाभीने कब कहा की तु यहा धिरेनके साथ..

रश्मी : (जटसे वंदनाके मुहपे हाथ रखते) बस.. वंदु.. आगे कुछ मत बोलना तेरी मां भी इधर खडी हे.. हें..हें..हें..

चारु : (हसते) रहेने दे रश्मीभाभी.. हम दोनो मा बेटी कम सहेली ज्यादा हे.. समजी.. (वंदनाकी ओर देखते) बोल बेटा क्या कहे रहीथी तुम.. हें..हें..हें..

वंदना : (सर्मसार होते हसते) कुछ नही मोम.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाभी.. ये हमारा रुम हे.. ओर सामने पहेले रुमथा वो चंदाभाभीका था.. चलो दीखाती हु..

फीर सब पुनमके पीछे जाने लगे.. तो पुनमने रुम खोलदीया.. ओर सब अंदर चली गइ.. तब रश्मी रमा चारु तीनोही रुमको गौरसे देखती रही.. तो वंदना लता ओर पुनम तीनो बेडपे बेठ गइ तब रश्मीने कहा..

रश्मी : (जोरोसे हसते) पुनोदीदी.. लगता हे आपके भाइ ओर भाभीने यहा बहुत महेनत की हे.. हें..हें..हें..

कहातो सब सरमाकर जोरोसे हसने लगे.. तो पुनमनेभी सरमाकर हसते हुअ‍े हां मे गरदन हीलादी.. फीर सभी मस्ती मजाक करते नीचेकी ओर आने लगी.. तभी धिरेन ओर लखनभी दुध ओर ढेर सारा नास्ता लेकर आगया.. ओर सब दयाको देदीया तो दया ओर रजीया सबके लीये चाइ बनाने लगी.. तो धिरेन लखन जाकर राजीव नीर्मला ओर भुमीका बैठीथी वही दोनो उनके पास बैठ गये.. तब..

राजीव : (हसते) धिरेनबेटा.. अबतो कलसे तुजे नोकरीपे भी जाना होगा.. कोनसे वाहनमे जाते हो..?

धिरेन : जी पापा.. हें..हें..हें.. बाइक हे मेरे पास.. कारभी लेनी हे लेकीन सीटीमे चलानेकी दिकत होती हे..

नीर्मला : (हसते) बेटा तो वोभी लेले.. हमारी बहुको घुमाते रहेना.. हें..हें..हें..

धिरेन : (सरमाते हसते) हां मोम.. लेकीन पहेले अ‍ेक मकान लेना हे.. फीर बादमे कारके लीये कुछ सोचता हु..

राजीव : (हसते) अरे वोभी लेले पैसे मे दे दुगा.. आखीर अब तुम हमारे बेटे हो गये हो.. बोल कीतना चाहीये..?

धिरेन : (हसते) थेन्कस पापा.. लेकीन मुजे नही चाहीये.. बेंक मुजे बीना ब्याजकी लोन दे रही हे.. तो उसीमेसे लेलुगा.. पापा आज आप मम्मी ओर भुमी मौसी इधरही रुक जाइअ‍े.. जीतने दिन रुकना हो रहीये.. जब आप कहोगे तब मे आपको सहेर छोड दुगा..

नीर्मला : (हसते) नही बेटा.. अब कीतने दिन हो गये हमे घर जाना होगा.. ओर वहाभी अ‍ेक जरुरी काम करना हे.. तो तेरे जीजाजी ओर मंजुदीदी ही हमे छोडने आ रहे हे..

भुमीका : (हसते) हां धिरेन.. वहाभी पुरा बंगला बंध पडा हे.. ओर तुमतो जानते हो सहेरमे घरको अकेला छोडना कीतना जोखीम हे.. ओर सृतीको क्लीनीकभी देखनी हे.. तो हमभी कल चले जायेगे..

देवायत : (हसते) पापा.. धिरेन ठीक केह रहा हे.. आजके दिन आपको यही रुकनाहे तो रुक जाइअ‍े.. मे कल सुबह सृती ओर उनकी मम्मीको सहेर छोड दुगा.. ओर वापसीमे आप दोनोको लेकर जाउगा..

नीर्मला : (हसते) हां ये ठीक रहेगा.. चलो आज यही रुकते हे.. तो धिरनकी बातभी रेह जायेगी..

मंजुला : (पास आते) चलो सबलोग यही नीचे बैठ जाओ चाइ नास्ता बन गया हे.. फीर हमे जानाभी हे..

लखन : भाभी.. अंकल ओर दोनो आंटी आज यही रुकने वाले हे तो मे नास्ता करके घर चला जाता हु.. तो वहा कुछ तैयारीया भी होजायेगी.. क्या कहेती हो.. मे लता वंदना दीदी सब चले जायेगे..

भानु : (हसते) हां भाइ.. लखन ठीक केह रहा हे.. उनको जानेदो..

मंजुला : (हसते) हां चले जाना.. हमभी कुछ देरके बाद नीकल रहे हे..

धिरेन : (हसते) दीदी क्या नीकल रहे हे.. सबको डीनर करके नीकलना हे.. रुक जाइअ‍े.. कितने दिनोके बादतो सब यहा अ‍ेकठा हुअ‍े हे.. लखन भैयाको जानाहे तो जानेदो.. उनको कुछ काम हे.. हें..हें..हें.. भानुजीजु ओर रमादीदी भी सादीके कीतने दीनोके बाद आये हे..

तब मंजु समज गइ ओर उसने हांमे गरदन हिलाके सहमती देदी.. फीर सब चाइ नास्ता करने नीचे बैठ गये ओर बाते करते ओर अ‍ेक दुसरेके साथ हसी मजाक करते सब चाइ नास्ता करने लगे.. सब दो घेरेमे बैठे थे.. दुसरे घेरेमे पुनम लता वंदना नीशा दया रजीया रश्मी सृती भावना बैठीथी तो रमा मंजु चंदा चारु सब जेन्ट्स लोगके साथ बैठकर नास्ता खा रहेथे..

तब वंदना ओर नीशा बार बार चोर नजरसे देवायतकी ओर देखती रही.. तो रमा अबभी चोर नजरसे लखनकी ओर देख रहीथी.. लेकीन येतो लखनभैया हे.. अ‍ेक बारभी उसने रमाकी ओर नही देखा.. तब रमा थोडी वीचलीत होगइ.. ना जाने क्यु.. वो चाहतीथी की लखन उनकी ओर अ‍ेक बार देखले.. रमा अन्जानेमे ही सही.. अब वो लखनकी ओर ढल चुकी थी.. ओर लखनभीतो यही चाहता था.. वो रमाको सेट करके उनके जरीये नीलमको पाना चाहता था..

फीर सबने चाइनास्ता करलीया तो लखन लता ओर वंदना घर जानेकी तैयारीया करने लगी.. तो साथमे नीशाभी जानेके लीये तैयार होगइ.. क्युकी वहा जाकर सबको देवायत सृतीकी सुहागरातके लीये रुमको सजाना था.. ओर चारो लखनकी खुली जीपमे बैठ गइ.. ओर सब हवेलीकी ओर नीकल गये.. तब पुनम सृती भावना चारु रमा ओर रश्मी उपरकी मंजीलपे पुनमके रुममे जाकर गप्पे लगाने लगी..

तभी देवायत भानु ओर सुधीर गांवमे चकर लगाने चले गये.. तब उसे वहा अपना पुराना दोस्त भीमा मील गया.. जो उनका स्कुलका साथी था.. देवायत ओर सुधीर उनकी सादीमे भी गयेथे.. तो भीमा देवायत ओर सुधीरको देखकर खुस होगया.. ओर उसे गले मीलकर अपने घर लेगया तो वहा उसे चाइ पानी देनेके लीये भीमाके सालेकी बीवी आइ.. फीर वहा सबने चाइ पानी पीया.. तब चारो वहासे नीकलने लगे.. तब देवायतने भीमाको थोडा दुर लेजाते पुछही लीया..

देवायत : भीमा.. येतो तेरे छोटे सालेकी बीवी हेनां..? तो फीर भाभीजी कहा हे..? कही मायके बायकेतो नही गइ..? ओर घरपेभी सीर्फ तुम दोनो हो..

भीमा : (हसते) भाइ अब आपसे क्या कहु.. आपकी भाभी मुजे छोडके चली गइ.. आपतो जानते हे मेरे भाइके साथ उनका अवैध रीस्ता था.. तो कमीनेको मेने मारकर गांवसे भगा दीया.. तो अ‍ेक हप्तेके बाद आपकी भाभीभी मुजे छोडके उनके साथ रहेने चली गइ.. तो मेने उन रंडीके भाइकी बीवीको ही सेट कर लीया.. ओर उनसे सादी करली.. तबसे ये यहा हे.. हें..हें..हें..

देवायत : भीमा वो तेरा भाइ भवान बहुतही कमीना था.. अ‍ेक बार मेरे हाथसे मार खाते खाते बच गया.. यहाकी सरपंचथी जो आज मेरी बीवी हे.. उनको सरपंच बननाथा तो चंदाको बदनाम कर रहा था.. तो मेने उसे रास्तेमे मीला तब धमकाया था..

भीमा : (आस्चर्यसे) अच्छा कीया.. क्या चंदाबहेनने आपसे सादी करली..? चलो अच्छा हुआ अ‍ेक विधवाको सहारा मील गया.. भाइ अगर मेरे लायक कोइ काम होतो कहेना.. ओर कभी कभी यहा आते रहेना..

देवायत : भीमा कामतो हे.. लेकीन अभी नही.. जब बाबा आयेगे तब तुजे बुलाउगा.. ओर सुन.. अब तुम यहाका सरपंच होजा.. क्युकी चंदातो अब मेरे यहा आगइ हे.. कहोतो जीला पंचायतमे बात करु..?

भीमा : (खुस होते) भाइ तबतो सोनेपे सुहागा.. आप बात करो फीर जब कहोगे तब आजाउगा.. गांववालोका भी मुजे पुरा सपोर्ट हे.. तो कोइ दिकत नही होगी..

भीमासे ओर कुछ बात करके तीनो वापस घरकी ओर आगये.. तबतब दया ओर रजीयाने सबका डीनर बना लीयाथा.. ओर सबलोग डीनर करने बैठ गये.. सबने तैय कीया की आज राजीव नीर्मला ओर भुमीका यहा रुकने वालेथे ओर सुबह देवायत उनको अपने घर छोडने जानेवाला था.. तो अब दया हमेसाके लीये पुनमके पास रहेने वाली थी.. चंदाने उसे कीचनके पास जो रुमथा उसीमे रहेनेके लीये केह दीया..

जब सबने डीनर करलीया तब धिरेन सबके लीये आइसक्रिम लेकर आया.. ओर सबने इकठा बैठकर आइसक्रिम खाइ.. फीर सब चलनेके लीये तैयार होगये.. तो पुनम देवायत मंजु सबको गले मीलते आंसु बहाने लगी.. ओर सबने उसे समजाया तो दयाभी सबको गले मीलने लगी.. तब देवायतने उसे इसारेसे मीलने आनेकी बात कही तो वो खुस होगइ.. ओर राजीव नीर्मला ओर भुमीके अलावा सब लोग नीकलने लगे..

कुछ लोग भानुकी कारमे बैठ गये तो कुछ देवायतकी कारमे बैठ गये.. आधेही घंटेके बाद सब हवेलीपे आगये.. सबलोग होलमे बेठ गये.. तो मंजु सृतीको लेकर उपरकी मंजीलपे चली गइ.. वहा उनको वंदना ओर नीशा लता सुहागरातके लीये सजाने लगी.. तब सृती बहुतही सरमा रहीथी.. तबतक रजीया ओर चंपाभाभीने मीलकर सबके लीये कोल्ड्रंीक बनाया ओर सबको पीलाने लगी..

फीर चंदाने विजयको सम्हाला तो भावना ओर रमा नीचेके रुममे चली गइ.. ओर दोनो बाते करने लगी.. तब मंजुने सृती ओर देवायतके लीये गरम केशर बादाम वाला दुध बनालीया ओर रजीयाको कहेकर देवायतके रुममे रखवा दीया.. तबतक देवायत रश्मीको छोडने उनके घर चला गया ओर उसे छोडके वापस आगया.. तबतक तीनोने मीलकर सृतीको हल्कासा शींगार कर दीयाथा..

फीर सुधीर नीशा चारु ओर वंदना सबको मीलकर अपने घर चले गये तब सुधीरने रास्तेमे चारु वंदनाको उनके घर छोड दीया.. जबसे रमा आइ तबसे लखनपे नजरे रखते मौका मीलतेही उनसे बात करनेकी कोसीस कर रहीथी.. लेकीन लखन हर बार अन्जान बनके उनके पाससे खीसकके उनको इग्नोर करता रहा.. तो लखनके लीये रमा ओर बैचेन होने लगी.. ओर अ‍ेक बारतो उनकी आंखभी गली होगइ..

फीर भानुभी सबको मीलकर रमाको लेकर अपने गांव चला गया.. सबलोग चले गये तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर सुलाने लगी.. रजीया चंपानेभी अपना सब काम नीपटा लीया तब लखन ओर लताभी उपर अपने रुममे सोनेके लीये चले गये.. तभी मंजु ओर चंदा दोनोही सृतीको लेकर उपरके रुममे चली गइ.. ओर सृतीको घुंघट नीकालकर बेडके बीच बीठा दीया.. तभी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १३३

फीर भानुभी सबको मीलकर रमाको लेकर अपने गांव चला गया.. सबलोग चले गये तब भावना अपनी बच्चीको दुध पीलाकर सुलाने लगी.. रजीया चंपानेभी अपना सब काम नीपटा लीया तब लखन ओर लताभी उपर अपने रुममे सोनेके लीये चले गये.. तभी मंजु ओर चंदा दोनोही सृतीको लेकर उपरके रुममे चली गइ.. ओर सृतीको घुंघट नीकालकर बेडके बीच बीठा दीया.. तभी....अब आगे

चंदा : (हसते) अरे वाह.. मंजु.. हमारे लखन लताने बेड तो बडा सजाया हे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) दीदी अगर पसंद आयाहे तो आपभी इधर रुक जाये.. देवु आपके साथभी वापस सुहागरात मना लेगे.. हें..हें..हें..

सृती : (सरमाते हसते) मंजु.. आप दोनो भी इधर रुक जाओनां..

मंजुला : (हसते) कमीनी.. आज सीर्फ तेरी सुहागरात हे तो आज तुही हमारे पतीके साथ रहेगी.. फीरतो कही मोके मीलेगे देवु हम तीनोको अ‍ेक साथ ठोकता होगा.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते मुका मारते) मंजु तुम बहुत बीगड गइहो.. (सृतीकी ओर देखते) सृती.. बेस्ट ओफ लक.. क्या ये तेरी दुसरी सुहागरात हेनां..?

सृती : (सरमाते हसते) हंम.. दीदी उसी सुहागरातमे मुजे पता चला गयाकी वो मेरा पती पुरुष नही था.. तो मे आज भी वर्जीन हु.. सही मायनेमे यही मेरी सुहागरात हे..

मंजुला : (हग करते) हंम.. सृती बेस्ट ओफ लक.. देखना कम चीलाना.. आवाज बहार तक ना आये.. हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते मंजुका हाथ खीचते) अब चलो भी.. क्यु हमारी सोतनको डरा रही हो.. हें..हें..हें..

तब दोनोही हसते हुअ‍े बहार नीकल गइ.. ओर नीचे अपने रुममे चली गइ तब देवायत चेन्ज कर रहा था.. तो दोनोको देखतेही बाहोमे भरलीया ओर दोनोके होंठ चुम लीये.. तब मंजुने कहा..

मंजुला : (हसते) जानु.. जरा प्यारसे.. वो अभी तक वर्जीन हे.. अब आप जाइअ‍े.. सुबह इनको छोडने भी जाना हे..

देवायत : हंम.. मंजु तुम दोनो भी चलोना..

चंदा : नही देवु.. आज आप दोनोकी सुहागरात हे.. तो आज तुम दोनो अकेलेही अ‍ेन्जोय करो.. फीरतो हम साथ हे ही.. तब देवायत अ‍ेक बार फीर दोनोके होंठ चुमके उपरकी मंजीलपे चला गया.. तबतक रजीया ओर चंपाभाभीभी सब काम नीपटाकर अपने रुममे सोनेके लीये चली गइ.. तब मंजुने घरके सभी दरवाजे ओर लाइटे बंध करदी ओर अपने रुममे चली गइ.. ओर मंजु चंदाने चेन्ज करलीया.. ओर अपने बेडपे आगइ..

मंजुला : (बेडपे सोते) बडीदीदी.. आज आपने आश्रमसे आते वक्त कुछ देखा..?

चंदा : (मंजुकी ओर करवट लेते) नहीतो..? क्यु..? क्या हुआ..?

मंजुला : (हसते चंदाकी कमरमे हाथ डालते) आज तो रमेशभाइ गये कामसे.. हें..हें..हें.. रास्तेमे अपनी बाइकके पीछे अ‍ेक ओरतको बीठाकर सहेरसे आ रहेथे.. जानती हे वो कौन थी..?

चंदा : (आस्चर्यसे देखते) नही तो..? कोनथी वो ओरत..?

मंजुला : (हसते) हमारे सामतभाइकी बीवी जयाभाभी.. रमेशभाइ पंचायतकी ओफीसका काम नीटाकर उसे लेकर कीसी होटेलमे चले गयेथे.. ओर वहा सामतभाइकी बीवीकी खुब जमकर चुदाइ की.. ओर दोनो साथमे वापस आगये.. तो रास्तेमे आते वक्त चारुभाभीने भी देखलीया.. हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे हसते) क्या..? ये दोनो यहासे साथमे ही गयथे..? तबतो आज रमेशभाइ गये कामसे.. हें..हें..हें..

मंजुला : (हसते) नही.. ये दोनो अक्सर अ‍ैसे मीलते रहेते हे.. दोनोही यहासे अलग अलग जाते हे.. ओर मजा करके वापस अलग अलग आते हे.. लेकीन पता नही आज दोनो कैसे साथमे आगये.. चारुभाभीने भी उन दोनोको देख लीया.. अभीतो उनके घरमे घमासान युध्ध चल रहा होगा.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) मंजु.. रमेशभाइ चारुभाभी जैसी खुबसुरत ओर कामी बीवीको छोडकर इनके पीछे कैसे पड गये..? पहेलेतो हमारे रमेशभाइ अ‍ैसे नही थे.. पता नही आजकल सबको क्या होगया हे.. कीसीना कीसीका टाका कीसीके साथ भीडा हुआ हे.. सबको अ‍ैसे रीस्तोमेही मजा आता हे..

मंजुला : (हसते) दीदी.. सबको पता हे घरकी मुर्गीतो कभीभी मील सकती हे.. ओर उसमे उनको संतोस नही मीलता तभी बहार मुह मारते अपनी आगको सांत करनेकी कोसीस करते हे.. ओर आग सीर्फ अ‍ेक तरफा नही लगती.. सामतभाइ ओर जयाभाभीके बीच उमरमे काफी फर्क हे.. तकरीबन १४ साल..

तो लगता हे इसी वजहसे सामतभाइ ओर जयाभाभीको संतुस्ट नही करते होगे.. तभी तो रमेशभाइके साथ रीलेशनमे आइ होगी.. ओर उपरसे चारुभाभीका स्वभाव.. रमेशभाइ चारुभाभीसे बहुत डरते हे.. चारुभाभी रमेशभाइको अपनी उंगलीपे नचाती हे.. ओर उपरसे रमेशभाइ चारुभाभीको ठीकसे संतुस्ट भी नही करपाते..

चंदा : (हसते) मंजु.. अपनी बीवीकोतो संतुस्ट नही करते तो फीर जयाभाभीको कैसे संतुस्ट करते होगे..?

मंजुला : (हसते) क्यु..? आजकल तो मार्केटमे अ‍ैसी बहुत सारी गोलीया मीलती हे.. बस उसीसे जयाभाभी खुस होजाती हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (हसते) हंम.. तो फीर यही गोलीसे वो चारुभाभीको भी संतुस्ट करते..? क्या जरुरत थी जयाभाभीके साथ रीलेशन रखनेकी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. जब जयाभाभी ओर रमेशभाइ रीलेशनमे नही थे.. ओर हमारी सादीभी नही हुइथी.. तब चारुभाभी रमेशभाइसे कुछ खास खुस नही थी.. इसी बातको लेकर दोनोके बीच बहुत जगडे होते थे.. तब देवुही उनदोनोका समाधान करवाते थे.. तभीसे चारुभाभीके मनमे हमारा देवु बस गया.. तबसे उनको हमारा देवु सम्हालके बैठा हे..

चारुभाभीको अब रमेशभाइमे कोइ इन्ट्रेस्ट नही हे.. ओर रही बात जयाभाभीकी तो रमेशभाइ नही खुद जयाभाभीने पहेल कीहे.. उसने सामनेसे ही रमेशभाइके साथ रीलेशन रखा हे.. तो रमेशभाइ क्या करते..? आखीर वोभी तो अ‍ेक मर्द हे.. अबतो भगवानही बचाये उनको हें..हें..हें..

चंदा : मंजु अबतो वंदनाकी भी उमर हो गइ हे.. ये लोग उनकी सादीके बारेमे क्यु नही सोचते..?

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. वंदु जब जवान हुइ तबसे ही हमारे देवुको पसंद करने लगी थी.. वो उनसे प्यार करती हे.. लेकीन देवुकी इतनी सादीयो की वजहसे अपने दिलकी बात नही केह पाइ.. ओर दुसरी जगाह सादीभी करना नही चाहती.. बस.. अब वक्त आ गयाहे.. वोभी हमारी सौतन होजायेगी.. वो देवुकी बीवी होकर अपने घरपे ही रहेगी.. ओर हमारे देवुसे उनको बच्चाभी होगा..

चंदा : मंजु.. तुजे नही लगता अब ये कुछ ज्यादा हो रहा हे..? हमारा देवु कीतनी सादीया करेगा..? हम तीनो कायदेसरकी बीवी हे.. ओर उनकी सीक्रेट बीवीया अलग.. तुजे कुछ अजीब नही लगता..? तुजे तो सब पता चल जाता हे.. तो बताना अ‍ैसा क्यु..?

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. मत भुलो की हम सब कौन हे.. हमारा देवु खुद हमारे स्वामीका अंस हे.. उनका काम ही यही हे.. तो सबका उनकी ओर आकर्सीत होना लाजमी भी हे.. हम सब उनको देखकर आज भी पागल होजाती हे.. वो हम सबको अच्छी तराह संतुस्ट भी करते हे.. वरना रश्मीभाभी जयाभाभी चारुभाभी इनके साथ रीलेशन क्यु रखती..?

क्युकी वो उनके पतीसे संतुस्ट नही हो पाती.. गांवमे जयाभाभी बसंतीभाभी जैसी ओरते भी हे जो अपने पती होनेके बावजुद दुसरे मर्दसे रीलेशनमे हे.. क्यु..? क्युकी उनकोभी अपने पती संतुस्ट नही करपाते.. ओर सबको अपने तनकी जरुरत पुरी करनी हे.. तो बेचारी कहा जायेगी..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. तो मंजु इसके लीये सीफ हमारा देवु ही क्यु..? तो ये भी दुसरे मर्द को पकड लेती..

मंजुला : (मुस्कुराते चंदाके होठं चुमते) दीदी.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? मुजे सच जवाब देना.. अगर यही बात हमारे साथ होतीतो..? सोचो अगर देवुसे हम संतुस्ट नही होती तो..? आप क्या करती..? क्या देवुके संपर्कमे आनेसे पहेले आपने अपनी दुसरी सादीके बारेमे कभी सोचा था..?

चंदा : (मुस्कुराते) नही.. हें..हें..हें.. समज गइ.. हें..हें..हें.. आगे कुछ मत बोलना.. हें..हें..हें.. जोभी हो रहा हे होने दे.. अब मे कभी कोइ अ‍ेतराज नही करुगी.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. इसीलीये जो हो रहा हे होने दीजीये.. अभीतो सीर्फ देवुही आया हे.. सोचो.. जब हमारा पोता यानी हमारे स्वामी आयेगा तब क्या क्या होगा..? ओर मत भुलीये की देवुकी जींदगीमे जीतनीभी ओरते ओर लडकीया आयेगी वो कोइ सामान्य ओरत नही होगी.. वो सब परीया या अप्सराये होगी.. ओर पीछले जन्ममे हमारे स्वामीसे जुडी होगी..

तबभी उनकी लीगल सोलाह रानीयाथी.. ओर दुसरी ओरतसे रीलेशन अलग.. तो उसनेभी हमारे स्वामीसे हर जन्ममे मीलनेकी कामना की होगी.. इसीलीयेतो इस जन्ममे वो देवुके साथ सम्पर्कमे आइ होगी.. तो हम इतनी स्वार्थी कैसे हो सकती हे..? तो जो भी हो रहा हे.. या होने वाला हे उसे देखती जाइअ‍े.. हमे हमारे हीस्सेका प्यार मील तो जाता हे..

चंदा : (मुस्कुराते) हंम.. मंजु.. मुजे तेरी सब बाते समजमे आगइ.. अब मे देवुके कीसीभी रीलेशनसे अ‍ेतराज नही करुगी.. चल अब सोना नही हे..?

मंजुला : (चंदाके बुब्स मसलते उनके उपर चडजाते) अरे अ‍ैसे कैसे सोजायेगी.. आजतो मेभी अपनी दीदीको संतुस्ट कर दुगी.. फीर आपभी मुजे संतुस्ट कर देना हें..हें..हें..

चंदा : (जोरोसे बाहोमे भीचते) कमीनी.. तुमभी देवुसे कम नही हो.. आजा..





कहेते चंदा मंजुके गलेमे हाथ डालके उनको अपने तनसे चीपका लेती हे तब मंजुभी अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते जोरोसे चंदाकी चुतको सहेलाते उगंली घुसा देती हे.. ओर जोरोसे उंगली अंदर बहार करते चंदाको चुदाइका अहेसास करवाती हे.. तब कुछही देरमे चंदाकी चुतसे अ‍ेक फवारा नीकल गया.. ओर उसी तराह चंदाभी मंजुको उनकी चुतमे उंगली डालकर संतुस्ट करदेती हे.. फीर दोनोही अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो जाती हे..

तभी उपरकी मंजीलपे देवायत सृतीके पास चला गया तो सृती घुंघटसे चहेरेको ढककर बेडके बीच बैठीथी.. ओर देवायत दरवाजा बंध करके उनके पास चला गया.. तब अ‍ेक बारतो सृती कांप उठी.. आज सबकुछ होने वाला था जो उसने सपने देखाथा.. सृती देवायतका तगडा हथीयार देख चुकीथी.. ओर उनके साथ अ‍ेक बार खेल चुकीथी.. वोही हथीयार आज सृती अपनी चुतमे लेने वाली थी.. उनकी कल्पना करतेही सृती कांप गइ..

उनकी दिलकी धडकन तेज होगइ.. तभी उसे अपने बेडपे देवायत बैठता महेसुस हुआ.. ओर सृतीकी उतेजना बढने लगी.. तभी धीरेसे देवायतने उनका घुंघट हटाया तो सृती सर्मसार होगइ ओर अपनी नजरे जुकाये बेठी रही.. ओर देवायतने दोनो हथेलीओमे सृतीका चहेरा थाम लीया.. जैसेही देवायतने उसे टच कीया तब अ‍ेक बार फीर सृतीके तनमे सुरसुराहटकी लहेर दौड गइ.. ओर उनसे कंट्रोल नही हुआ.. ओर वो जटसे देवायतको बाहोमे भरते उनसे लीपट गइ..

सृती : (लडखडाती आवाजमे) ओह.. दे..वु.. मुजे समालो आपके अंदर.. आज ओर कोइ खेल नही.. बस.. सीर्फ आपका प्यार.. जो मुजे अ‍ेक लडकीसे ओरत बनानेका सुख दे.. आज इस कलीको फुल बनाकर खीलने दो.. आपके लीये मे बहुत तडपी हु.. आइ लव यु.. दे..वु.. आइ लव यु सो मच..

देवायत : (जोरोसे बाहोमे भीचते) सृती.. तुम रेडी तो होनां..? जब अ‍ेक बार हमारा मीलन होजायेगा तो फीर तुम मेरे बीना नही रेह पायेगी..

सृती : (जोरोसे बाहोमे भीचते) दे..वु.. यहीतो चाहती हु में.. नही रहेना मुजे अकेले.. बस आपकी आगोसमे जींदगी बीता दुगी.. कहोतो इधर आजाउगी.. मुजे आपसे दुर नही रहेना..

देवायत : (सर चुमते) हंम.. तो फीर आजा.. मे यहा बहुत बडी होस्पीटल बना रहा हु.. हें..हें..हें..

कहातो सृतीने सर उठाकर प्यार भरी नजरोसे देवायतकी ओर देखा.. ओर सृतीने खुद अपने होंठ देवायतके होठोसे मीला दीया ओर मदहोसीमे उनके होठोको आधी आंख चडाके चुमने लगी.. तब देवायतने होंठ चुमते सृतीके उरोजोको अपनी हथेलीमे थाम लीया ओर हल्केसे मसलने लगा तब सृती सरसे पांव तक कांपने लगी.. ओर उसने देवायतको वापस जोरोसे अपनी बाहोमे भीचलीया..

सृती : देवु.. अभी सीर्फ प्यार.. इस बारेमे हम सुबह बात करेगे.. लीजीये मंजुदीदीने दुध बनाया हे.. वोभी स्पेसीयल.. मेरे हाथोसे पीजीये.. आज पुरी रात आपसे प्यार करना हे..

कहेते सृतीने दुधका ग्लास देवायतको अपने हाथोसे पीलाया तो आधा ग्लास देवायतने सृतीको पीला दीया.. फीर देवायतने अ‍ेक डायमंडका नेकलेश सृतीको पहेनाया.. ओर कानकी लंबी अ‍ेरींग्स.. पावमे जनकार वाली पालय.. ये सब सृतीको गीफ्ट दीया.. तो सृती बहुतही खुस होगइ ओर देवायतको हमेसाके लीये पहेननेका आस्वासन दीया.. फीर दोनोही प्यारकी ओगोसमे चले गये.. थोडी ही देरके बाद दोनोके वस्त्र अ‍ेक कोनेमे पडे अपनी कीस्मतपे रो रहे थे..

तब दुसरी ओर बरखा ओर बसंती अपने घर पहोंच गइ.. तब दोनोने मीलकर फटाफट खाना बना लीया.. लेकीन आज वो सहेर गइथी तो मुनाने खुद उनके लीये ओर अपने बापुके लीये खाना बना लीया था.. आज सुधीर सादीमे गयाथा तो क्लीनीक भी बंध था.. तो मुना आज घरपे ही था.. जब उनके बापु ओर मुनाने खाना खालीया.. तो उनके बापु कुछ देर आराम करके दुकानपे चले गये.. तो मुनाभी खाना खाकर बहार घुमने चला गया था.. तब बरखा ओर बसंतीने साथमे बैठकर खाना खालीया..

फीर सामको मुना अपने घरपे आगया तब बरखा ओर बसंती दोनोही खाना खाकर आराम कर रहीथी.. बसंतीकी आंख लग गइ तो बरखा धीरेसे उठकर मुनाके रुममे चली गइ.. तब मुना आराम कर रहाथा.. तो इस वक्त बरखाको अपने रुममे देखते ही बेडपे बैठ गया.. ओर बहार नजर दौडाने लगाकी कही बहार कोइ हेतो नही..? क्युकी बरखा आम तौरपे सबके सोजानेके बाद देर रातको उनके कमरेमे आती थी.. तो मुना बरखाको देखकर थोडा गभरा गया..

मुना : (हसते) अरे बरखा..? इस वक्त..? मम्मी कहा हे..? तुम दोनो मामाके घर गइथीनां..? उनके घरसे कब आये..?

बरखा : (सरमाते हसते धीरेसे बेडपे आकर बैठते) भाइ.. मम्मी सो रही हे.. अब मम्मीसे डरनेकी जरुरत नही हे.. हम दोपहोरको ही आ गये थे.. ओर हम मामाके घर नही गयेथे.. हें..हें..हें..

मुना : (हसते आस्चर्यसे) तो फीर कहा गये थे दोनो..? ओर मम्मीसे डरनेकी जरुरत नही हे मतलब..?

बरखा : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. हम दोनो लेडीसकी होस्पीस्टल गइथी.. मेरी प्रेगनन्सी चेक करने.. मम्मी मुजे जुठ बोलकर ले गइ थी.. क्युकी कल मुजे उल्टीया करते मम्मीने देख लीया था..

मुना : (आस्चर्यसे गभराते) बरखा.. तो फीर क्या हुआ..? मम्मीको सब पता चल गया..? हंम..?

बरखा : (मुस्कुराते सीनेमे सर रखते) हां भाइ.. आप गभराइअ‍े नही.. मेने सब सम्हाल लीया हे.. भाइ.. आइ अ‍ेम प्रेगनेन्ट.. मे हमारे बच्चेकी मा बनुगी.. अब हम दोनो ही सादी कर सकते हे.. मम्मी मान गइ हे..

मुना : (थोडा खुस होते मुस्कुराते) मान गइ..? मतलब..? क्या इतनी आसानीसे मान गइ..?

फीर बरखा मुनाको सारी बात बता देती हे.. पहेलेतो मुनाकी गांड फट गइ.. फीर बरखाने जब कहाकी मां दोनोकी सादीके लीये मान गइ हे तब मुनाकी खुसीका कोइ ठीकाना नही रहा.. ओर प्रेगनन्सीकी बात सुनकर तो बहुतही खुस होगया.. ओर वही बरखाको बाहोमे भीच लीया.. तब उसे रीयलाइज हुआकी दोनो घरपे हे ओर उनकी मम्मी बाजुके रुममे हे.. तब मुना जटसे बरखासे अलग होगया.. फीर बरखाने मुनाको उनकी मम्मीकी सर्तके बारेमे कहा.. तब..

बरखा : (प्यारसे मुनाके गालको सहेलाते) भाइ.. मम्मीको मेने हमारी सादीके लीये मना लीया हे.. बस उनकी सीर्फ अ‍ेक ही सर्त हे.. आपको खुद उनके पास जाकर हमारी सादीकी बात करनी पडेगी.. ओर मेरा हाथ मम्मीसे मांगना पडेगा.. तबही वो हमारी सादी करवायेगी..

मुना : (सरमाते) बरखा.. में मम्मीसे कैसे बात करु..? क्या तुम खुद उनसे बात नही कर सकती..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. मम्मीने मुजे अपनी बहु मानलीया हे तो मे उनसे कैसे बात कर सकती हु.. अब आपकोही मम्मीसे मेरा हाथ मांगना पडेगा.. ओर उसने मुजे अपनी बहु माना हेतो आपको मना थोडीना करेगी..? बस अ‍ेक बार बात करलो.. तभी मे रातमे आपको मील सकुगी.. (सर्मसार होते) आइ मीन.. हम साथमे सो सकते हे.. मम्मीने खुद मुजे परमीशन दी हे..

मुना : (खुस होते हसते) बरखा आइ कान्ट बीलीव.. की मम्मीने खुद तुजे अ‍ैसा कहा हे.. तुमने उनपे क्या जादु करदीया हे..? हें..हें..हें..

बरखा : (अपनी कमरपे दोनो हाथ रखते, थोडा गर्व करते) हे.. अ‍ेक राजकी बात.. लेकीन वो मे आपको नही बताउगी.. हें..हें..हें.. बस भाइ आप हो सकेतो आजही बात करलो.. अब मे आपसे दुर रहेना नही चाहती..

मुना : (हसते) हंम.. मतलब मुजे मम्मीसे आजही बात करनी पडेगी.. ठीक हे मे सामको उनसे बात करलुगा..

बरखा : भाइ.. सामको क्यु..? अभी जागेगी जब चाइ नास्ता करले तब उनसे बात करलेना.. वोभी पापाके आनेसे पहेले.. भाइ.. बी केरफुल.. हंम.. अभी पापाको इस बातका पता नही हे.. ओर अभी ये बात सीर्फ हम तीनोके बीच रखनी हे.. तो ध्यान रखना..

मुना : (हसते) ठीक हे बरखा.. लेकीन मुजे इस बारेमे ठाकुरसाहेबसे बात करनी पडेगी.. उन्होने हमे हम दोनोको मीलानेका वादा कीया था..

बरखा : (सरमाते हसते हां मे गरदन हीलाते) हंम.. भाइ.. सीर्फ उनको.. कीसी ओरको मत बताना..

आज दोनोही बहुत खुस थे.. तब बरखा मुनाकी बाहोमे समा गइ.. ओर दोनोके होंठ मील गये.. दोनोही अ‍ेक दुसरेको चुमते बहेकने लगे तब मुना बरखाके उरोजोके साथ खेलने लगा.. तो बरखा बहुतही गरम होके कामुक होगइ.. ओर सीसकारीया करने लगी.. तब उन दोनोको नही पताथाकी उनकी मम्मी बसंती जाग चुकी हे.. ओर छुपकर दोनोकी प्यारभरी बाते सुनते दोनोकी रास लीला देख रही हे..





तभी बहार कीसीके खांसनेकी आवाज आइ तो दोनोही जटसे अलग होगये.. ओर बरखा सरमाते हसती हुइ वहासे बहार भाग गइ.. तब बहार कोइ नही था.. तो बरखा उनकी मम्मीके कमरेमे चली गइ.. तो बसंती बेडपे बैठकर उनकी ओर देखते हस रही थी.. तो बरखा समज गइ की उनकी मम्मीने उन दोनो भाइ बहेनको प्यार करते देख लीया हे.. तब बरखा खुब सरमाइ.. ओर सरमाते हसती हुइ बहार जाने लगी.. तभी..

बसंती : (धीरसे हसते) सुन.. बहु.. अभी तुमने अपनी सर्त पुरी नही की.. समजी..? हें..हें..हें.. अ‍ैसे छुप छुपके नही मील सकती.. हें..हें..हें..

बरखा : (सर्मसार होते हसते) मम्मी. वो.. वो.. मे.. आपके बेटेको वोही बात बताने गइ थी.. आपकी सर्तके बारेमे.. तो वो खुस होकर मेरे साथ..

बसंती : (हसते धीरेसे) हंम.. बात बतानेका तरीका बडाही मजेदार था.. हें..हें..हें.. जा.. उनको अंदर भेज.. ओर कहेदे तेरा हाथ आकर मुजसे मांगे.. तबतक तुम चाइ नास्ता बनालो.. मे उनसे बात करती हुं.. जा..

बरखा : (सरमाते हसते) जी मम्मीजी.. अभी आपके बेटेको भेजती हु.. हें..हें..हें..

कहेते बरखा मनमे खुस होते वापस मुनाके कमरेमे चली गइ.. ओर मुनाको बसंतीसे बात करके उनका हाथ मांगने मम्मी बुला रही हे कहा.. तब मुना बहुतही गभरा गया.. तो बरखाने उसे हीमतसे बीन्दास्त बात करनेको कहा.. तो मुना अपनी मम्मीको मीलनेके लीये तैयार होगया.. ओर वो थोडा गभराते बसंतीके रुममे चला गया.. तब बरखाभी सरमाते हसती हुइ कीचनमे चली गइ ओर चाइ नास्ता बनाने लगी.. तभी....

कन्टीन्यु
 
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