Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 38 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो इधर देवायत ओर नीशाके बीचभी घमासान चुदाइका दोर चल रहाथा.. अब तक नीशा दो बार जड चुकी थी फीरभी देवायत उसे चोदेही जा रहाथा.. जबभी नीशा जडती देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लेगी.. चारुभी बेडके अ‍ेक कोनेपे बैठकर अपनी चुतमे उंगली डालकर जोरोसे हीला रहीथी.. आज नीशाको अपनी सुहागरातकी असली पहेचान हो गइ.. वो बहुतही कामुक तरीकेसे चुदवानेमे साथ दे रहीथी..





नीशा : (कामुक आवाजमे मदहोसीमे) जा..नु.. बहुत मजा आ रहा हे.. ओर जोरसे चोदीये..

देवायत : (होंठ चुमते) नीशा.. अब तुम दोनो मेरी बीवी हो.. तुजे अब कभी भी आकर चोद सकता हु..

नीशा : (सरमाते धीरेसे कामुक नजरोसे) हां जानु.. अब मे बायकायदा आपकी बीवी हु.. अब आप सुधीरके होते हुअ‍े भी मुजे चोद सकते हे.. क्युकी उसने खुद मुजसे आपसे सादीके लीये कहाथा.. जानु.. मे हमारे बच्चेकी मां बनना चाहती हु.. करदो मुजे प्रेगनेन्ट..

चारु : (मुस्कुराते) नीशा.. तु फीकर मत कर.. आज यही होगा.. ये यहासे जायेगे तब तुजे प्रेगनेन्ट करके ही जायेगे.. आजतो मेरी भी इच्छा हो रही हे.. की मेभी इनसे अ‍ेक बच्चा पैदा करलु..

देवायत : (चारुके होठ चुमते) पागल हो गइ हो क्या..? फीर रमेशको क्या कहोगी..?

चारु : उस कमीनेका नामभी मतलो.. अभी सामतकी बीवीको हमारे घरमे बुलाकर उसे चोद रहा होगा.. अब मुजे उस आदमीसे कोइ लेना देना नही.. अब हम दोनो ही मां बेटी आपकी बीवीया हे..

कुछही देर घमासान चुदाइके बाद देवायत अकडने लगा.. ओर वो आधी आंख चडाते मदहोस होने लगा.. तो नीशानेभी अपने दोनो पैर सीकुड लीये.. तभी देवायत नीशाकी चुतमे पुरा लंड डालकर रुक गया.. ओर कांपते हुअ‍े अपनी कमरको जटके मारते नीचाकी चुतको अ‍ेक बार फीर अपने गाढे पानीसे भरने लगा.. तब नीशाभी अपने बच्चेदानीपे गरम विर्य महेसुस करते कांपने लगी.. ओर वोभी देवायतके साथ जडने लगी..





कुछ देरके बाद देवायतने अ‍ैसेही नीशाको दो बार ओर चोद लीया.. इस रात देवायत लगातार बीना लंड बहार नीकाले नीशाकी चुदाइ करता रहा.. ओर उनकी चुतको चोद चोदके भरता रहा.. पुरी चुदाइके दौरान पहेली बार नीशा आठ बार जड चुकीथी.. देवायतने नीशाको चोद चोदकर उनके अ‍ेक अ‍ेक अंगको तोडके रख दीयाथा.. तब चारुभी खुदको दो बार सांत कर चुकीथी.. नीशा हीलनेकी स्थीतीमे भी नही थी..

तो देवायत उसे गोदमे उडठाकर बाथरुममे लेगया.. वहा चारुने उनकी चुतकी सीकाइ करदी.. फीर दोनो नहाकर बहार आगये.. देवायतने नीशाको बेडके अ‍ेक कोनेमे सुला दीया.. तो कुछही देरमे नीशा थकानकी वजहसे नींदकी आगोसमे चली गइ.. तब चारु अपने दोनो पैर फैलाकर मेदानमे आगइ.. ओर देवायत उनकी बगलमे लेट गया.. तो चारुने उसे अपनी बाहोमे भीचलीया.. ओर उसे खीचकर अपने उपर चडालीया..

इस रात दोनोही अ‍ेक मीया बीवीकी तराह प्यार करने लगे.. अ‍ेक बार फीर रुममे चुदाइका तुफान भवंडर बनके तांडव करने लगा.. देवायत पुरी रात चारुकी जमकर चुदाइ करता रहा.. अ‍ेक बार उपर चड गया.. फीर बीना नीचे उतरे चारुकी चुतको भी तीन बार अपने गाढे पानीसे भर दीया.. ओर अ‍ेक बार बाथरुममे भी खडे खडे चारुको चोद लीया.. तब चारुकी भी हालत पतली होचुकी थी..





आज चारु ओर नीशा दोनो ही देवायतके साथ अपनी सुहागरात मनाकर पुरी तराह चुदवाकर संतुस्ट हो चुकीथी.. फीर दोनोही नहाकर बहार आगये ओर नंगेही अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे चीपककर सो गये.. तब चारु ओर नीशा दोनोको नही पताथा की देवायतका बीज उनके गर्भमे स्थापीत हो चुका हे.. आज देवायतने दोनोको प्रेगनेन्ट कर दीयाथा.. अब चारु ओर नीशाभी रश्मी वंदनाकी तराह देवायतकी सीकैट बीवीया बन चुकी थी..

तो दुसरी ओर राजीवके गांवमे भी राजीवके घरपे सब लोग सोने चले गये.. तब राजीवके रुममे राजीव ओर नीर्मला अपने रुममे जातेही अ‍ेक दुसरेके साथ मीलन करनेके लीये मचल रहेथे.. दोनो फटाफट नंगे होगये.. तब नीर्मलाने राजीवको बेडपे लीटा दीया.. ओर खुद उनके उपर चड गइ.. नीर्मला राजीवके उपर दोनो पैर फैलाकर उनकी कमरपे बैठ जाती हे.. ओर उनका लंड अपनी चुतमे घुसाकर राजीवको होले होले चोदने लगती हे.. जब वो अ‍ेक बार जड गइ तब राजीवके उपरसे उतरकर बेडपे पैर फैलाकर लेट गइ..





तो राजीव उनके उपर चड गया ओर नीर्मलाकी चुतमे लंड घुसाकर उनको जोरोसे चोदने लगा.. जब नीर्मलाकी जमकर चुदाइ करके दोनो साथमे जड जाते हे तब राजीव अ‍ैसेही नीर्मलाके उपर लेटा रहा.. ओर दोनो प्यार भरी बाते करते रहे.. दो घंटे तब नीर्मलाको राजीवका लंड अ‍ैसेही चुतमे सख्त महेसुस होता रहा.. जीसे देखकर अ‍ेक बारतो नीर्मलाभी हेरान रेह गइ.. ओर दो घंटेके बाद राजीव फीर नीर्मलाको चोदने लगा..





तब नीर्मलाभी खुस होगइ.. उनको लगाकी राजीवकी स्टेमीना बढ गइ हे.. इनको सेक्स करनेमे कोइ दिकत नही आरही.. लेकीन नीर्मलाको नही पताथा की आज राजीवसे उनसे छुपकर अ‍ेक वायग्राकी टेबलेट खाली थी.. बस यही टेबलेट राजीवके लीये घातक साबीत होने वाली थी.. फीर अ‍ेक घंटेके बाद फीरसे राजीवने नीर्मलाको चोदनेकी इच्छा जाहीरकी.. तो नीर्मलाको मंजुकी बात याद आगइ.. ओर वो राजीवको मना नही कर सकी..





बस.. आजकी रात यही राजीवकी नीर्मलाके साथ आखरी चुदाइ साबीत होने वाली थी.. राजीवने नीर्मलाको घोडी बनाकर जुका दीया.. ओर वो उनके पीछे चला गया.. ओर पीछेसे नीर्मलाकी चुतमे लंड घुसाकर नीर्मलाको बडेही बेहरेहमीसे चोदने लगा.. तो नीर्मला देवायतके तगडे लंडसे चुदनेके बावजुद चीखते चीलाने लगी.. ओर राजीवने नीर्मलाकी चोद चोदके हालत पतली करदी..

राजीव उनकी चुतमे खलास होकर उनकी पीठपे ढेर होगया.. नीर्मलाकी चुतसे दोनोका कामरस उनकी चुतसे बहेते पैरोपे उतरने लगा.. तब नीर्मलाने बडी मुस्कीलसे राजीवको अपने उपरसे हटाया.. ओर चुतको कपडेसे साफ करते मुस्कीलसे बेडसे उतर पाइ.. ओर धीरे धीरे लंगडाते बाथरुमकी ओर जाने लगी.. आज कीतने अरसोके बाद राजीवने उनकी हालत अ‍ैसी करदी थी.. ओर वो बाथरुमे जाकर नहाने लगी..

जब नहाकर बहार नीकली.. तब राजीव अपने बीस्तरपे गहेरी नींद सो चुकाथा.. तो नीर्मला उसे देखकर मुस्कुराने लगी.. आज राजीवने वाकइ सही मानोमे उनकी जमकर चुदाइ करलीथी.. राजीव अ‍ैसेही नंगा सोया हुआथा.. तो नीर्मलाने उसे नाइट ड्रेसका पायजामा पहेना दीया.. ओर खुद उनकी बगलमे उनसे चीपककर सो गइ.. जैसे जैसे राजीवका खुन ठंडा होता गया.. तो वो नींदमे ही कोमाकी ओर जाने लगा..
 
तो इधर श्रीधर अपने दोस्तोको मीलकर जल्दीही घरपे आगया था.. आज लखनने श्रीधर ओर मुना दोनोको कामोतेजककी गोली पीलाइ थी.. तो घर आतेही श्रीधर अपने रुममे घुस गया.. तो वहा जयश्री बडेही बेसब्रीसे उनका इन्तजार कर रहीथी.. तब कुछही देरके बाद दोनोही नंगे थे.. ओर श्रीधर जयश्रीके उपर चडकर उनकी जबरदस्त चुदाइ कर रहाथा.. इस रात श्रीघरने जयश्रीको चार बार चोदकर उनकी हालत पतली करदी थी..

तो वही हाल आज मुनाके घरपे भी था.. जब खाना खाकर बसंतीका पती वीभु सो गया.. तब बसंती मुनाको अपने दोस्तोके पास भेजकर बरखाको लेकर मुनाके रुममे चली गइ.. ओर दरवाजा बंध करके वो बरखाको दुल्हनका जोडा पहेनाकर अ‍ेक बार फीरसे उनका शींगार करने लगी.. क्युकी आजही बरखा ओर मुनाने आाश्रमपे जाकर सादी करली थी.. तो बसंती खुद बरखाको उनकी सुहागरातके लीये सजा रहीथी.. तब बरखा बहुतही सरमा रहीथी.. ओर उसने अ‍ेक बार फीर बातको छेडदी..

बरखा : (अपने बालोको सही करते सरमाते धीरेसे) मोम.. मेने आपसे कुछ पुछा था.. तो फीर आपने क्या सोचा..?

बसंती : (जानकरभी अंन्जान बनते सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) कीस बारेमे..?

बरखा : (मुस्कुराते सामने देखकर) मोम.. मुजे पता हे आपको सबकुछ मालुम हे.. की मे आपको कीस बारेमे पुछ रही हु.. आप भोली मत बनीये.. मेने भाइके बारेमे आपको कुछ पुछाथा..

बसंती : (सरमाकर मुस्कुराते) हंम.. पहेले आज तु तो अपनी सुहागरात ठीकसे मनाले.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. वैसे बहोत चीन्ता करती हे मेरी..? हंम..?

बरखा : (सरमाते) मोम.. आपकी चीन्ता करती हु इसीलीये तो आपको पुछ रही हु.. मुजे पता हे इस आगको ज्यादा दिन जेलना कीतना खतरनाक हे.. मे ओर आप दोनो इस दौरसे गुजर चुकी हे..

बसंती : (मुस्कुराते आयनेमे सामने देखकर) मेरातो ठीक हे.. लेकीन तुम इस दौरसे कैसे गुजरी हो..? तुम दोनोतो स्कुलमे थे तबसेही अ‍ेक दोनोको प्यार करते हो.. तो तुजे कहा तकलीफ हुइ..?

बरखा : (सरमाते धीरेसे सामने देखते) मोम.. जब भाइके साथ मेरा पहेला मीलन हुआ.. उसके बाद उनसे दुर रहेना मुस्कील होने लगा.. जब घरपे हम दोनो नही मील पाते तब मे भाइके बीना पागल होजाती थी.. तो फीर सोचो आपतो इस प्यारसे कीतने दिनोसे वंचीत रही हो.. ओर अ‍ेक प्यार आपको मील रहाथा.. उसेभी हमने रोक लीया.. मोम.. आइ अ‍ेम सोरी..

बसंती : (मुस्कुराते) बीटु.. छोड वो बाते.. अब मे उसे भुल चुकी हु.. अब मुजे कही बहार रीलेशन नही रखना.. अब मे अ‍ैसा कोइ काम नही करुगी.. जीनसे मेरे बच्चोकी इजतपे आंच आये.. मे अब अ‍ैसेही खुस हु..

बरखा : (हाथ थामते) मोम.. प्लीज.. बुरा मत मानना.. मुजे इस रीलेशनसे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. भाइ इतना सक्षम हेकी वो हम दोनोको सम्हाल सकता हे.. ओर वैसेभी आपकी उमरभी क्या हे.. बीलकुल मेरी बडी बहेन जैसी दीखती हो.. हें..हें..हें.. मोम.. आप सचमे मेरी बडी बहेन होजाओनां.. हम दोनो बहेने साथमे रहेगी..

बसंती : (सरमाते पीठमे अ‍ेक मुका मारते धीरेसे) बीटु.. कुछभी बोलती हे.. तेरी मांसे इस तराह बात करते तुजे सरमभी नह आती..? हंम..? अभी तक तेरे पापा जीन्दा हे.. मे ये सब अभी नही कर सकती..

बरखा : (सरमाते धीरेसे) मोम.. मे अभी आपको सादीके लीये कहा केह रहीहु..? फीर करलेना आपभी सादी.. लेकीन तबतक तो आप.. भाइके सा..थ.. म..जे.. समज गइनां.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

बसंती : (अ‍ेक नजरसे देखते) पागल होगइ हो क्या..? बीटु.. तु बहोत बीगड गइ हे.. कोइ अपनी मांसे इस तराहकी बाते करती हे..? चल आजा सब मेकअप होगया.. क्या मस्त लग रही हे.. आजतो मेरा मुना तुजे देखकर पागल होजायेगा.. हें..हें..हें..

कहेते बसंती बडी सीफततासे बातको टाला देती हे.. तब बरखाको नही पताथाकी बसंती ओल रेडी मुनाकी होचुकी हे.. उसे बरखाके साथ इस खेलमे बडाही मजा आ रहाथा.. वो बरखाको लेकर बेडकी ओर जाने लगी.. तभी अचानक बरखाने बसंतीको अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर बसंती कुछ समजे इनसे पहेलेही बरखाने बसंतीके होठोको चुमलीया.. तब बसंती सख्तेमे आगइ.. ओर बरखाकी ओर बडी आंख करते खुब सरमाइ..

वो कुछ नही बोली.. बसंती सर्मसार होते जटसे बरखाको अच्छी तराह अ‍ेक दुल्हनकी तराह बेडके बीच बीठा देती हे.. तब बरखा बसंतीकी ओर देखते बहुतही सरमाइ ओर बसंती मुस्कुराते वहासे चली गइ.. तब कुछही देरमे मुना लखनने दी हुइ गोली खाकर आगया.. फीरतो क्या..? पुरी रात उनके रुममे धमाल हुआ.. पुरी रात मुना बरखाकी घमासान चुदाइ करता रहा.. इस रात मुनाके रुममे चुदाइका तांडव हो रहाथा..
 
इसी वक्त देर रात सब सो गये.. तब जीतुलाल चुपकेसे घरकी छतपे चला गया.. वहा पहेलेसे ही वृन्दा इनका इन्तजार कर रही थी.. जैसेही जीतुलाल वहा गया वृन्दा जटसे आकर उनकी बाहोमे समा गइ.. ओर जीतुलालको पागलोकी तराह चुमने लगी.. तब कुछही देरके बाद वुन्दा जीतुलालके नीचे लेटकर उनसे चुदवा रही थी.. दोनोके बीच काफी घमासन चुदाइ हुइ.. ओर जीतुलालने वृंन्दाकी चुतमे अपना माल उडेल दीया.. जब दोनो साथ जड गये.. तब वुन्दा जीतुलालके बालको सहेलाते उनसे बात करने लगी..





जीतुलाल : हां भाभी.. बोल इतनी रात इधर क्यु बुलाया..? तुजे पता तो हे ब्रीन्दा हमारे बारेमे सबकुछ जान चुकी हे.. क्या कुछ खास बात करनी थी..?

वंन्दा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) जीतु.. मुजे अब ब्रीन्दाकी कोइ परवा नही.. तुजे पतातो हे.. जयश्री हमारी लडकी हे.. भलेही दोनो भाइ बहेनकी हम अलग अलग मां हे.. लेकीन श्रीधर ओर जयश्री दोनोही तेरा खुन हे.. आज जयश्री कैसे बीन्दास्त श्रीधरके रुममे चली गइ..

उनको मेरीभी सरम नही आइ.. अभी दोनो भाइ बहेनभी वोही कर रहे होगे.. जो अभी हमने कीया.. जीतु.. मुजे लगता हे उन दोनोको मीलवानेमे तेरी बीवीका पुरा सपोर्ट हे.. आज कैसे बेसर्म होकर मेरी ओर देखते हस रहीथी.. जैसे वो हमसे कोइ बदला ले रही हो..

जीतुलाल : (मुस्कुराते) हां भाभी.. मुजेभी यही लगता हे.. हमारे बारेमे उसे पता चल गया हे तो उसी बातका बदला हमारे बच्चेकी सादी करवाके हमसे ले रही हे.. अब हम करभी क्या सकते हे..? दोनोही बालीक हे.. दोनोने अपनी मरजीसे सादी कीहे.. ओर तुमतो जानती हो अब ब्रीन्दाके साथ मेरा कोइ रीलेशन नही हे.. कमीनी मुजसे डीवोर्स भीतो नही लेलेती..

वृन्दा : (कुछ सोचते) जीतु.. अब मुजे लगता हे वक्त आगया हे.. की हम दोनो फेकीली अलग होजाये.. मे अब तेरे साथ रहेना चाहती हु.. मुजे तुमसे अ‍ेक लडका चाहीये.. लेकीन हर बार लडकी ठहेर जाती हे.. तो मुजे गीरवानी पडती हे.. लेकीन लास्ट बार बच्चा गीरवाने गये तब डोक्टरनेभी अब मना करदीया हे.. की अब मे बच्चा नही गीरवा सकती.. बहुतही जोखीम हे.. तो मे चाहती हु.. तुम ब्रीन्दाको डीवोर्स देदो.. ओर मुजसे सादी करलो.. हम दोनो सहेरमे अ‍ेक छोटा मकान लेकर वहा रहेने चले जायेगे..

जीतुलाल : भाभी.. वो सबतो ठीक हे.. मे आपके साथ जानेके लीये तैयार हु.. लेकीन बडेभैया..? आप उनको क्या जवाब दोगी..? ओर वैसेभी आप लडकेकी चाहमे कीतनी बार अ‍ेबोर्सन करवा चुकी हे.. क्यु करती हे आप अ‍ैसा..? हमे नही चाहीये कोइ लडका हम अ‍ैसेही खुस हे..

वृन्दा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) नही जीतु.. तु नही समजेगा.. मे तुमसे बहुत प्यार करती हु.. मुजे तेरी अ‍ेक नीशानी चाहीये.. जो हम दोनोके बुढापे मे हमारा सहारा बन सके.. अ‍ेक नीशानी जयश्रीके रुपमे हमे मीली थी.. क्या नतीजा हुआ..? वोभी ब्रीन्दा हमसे छीनकर लेगइ.. जानु.. बस सीर्फ अ‍ेक लडका..

जीतुलाल : भाभी.. तो अब तुही बता हम क्या करे..? तेरे दिमागमे हे कोइ आइडीया..?

वृन्दा : (मुस्कुराते पीठ सहेलाते) हां जीतु.. इसीलीये तो आज तुजे यही बुलाया हे.. सुन.. तुम ब्रीन्दाको डीवोर्स देदो.. तब तेरे भाइ तुमसे नाराज हो जायेगे.. तब मे तेरे भाइको कहुगी अब हमे इस घरका बटवारा कर देना चाहयी.. भलेही हमारा बीजनेश साथमे हो.. जब वो इसके लीये राजी होजायेगे तब वो तेरे हीस्सेका भाग तुजे कभी नही देगे.. वो तेरा सभी हीस्सा ब्रीन्दा ओर श्रीधरको दे देगे..

जीतुलाल (मुस्कुराते धीरेसे सोट मारते) हंम.. डार्लींग.. लेकीन मेरातो नुकसान हो गयानां..? हें..हें..हें..





वृन्दा : (मुस्कुराते) नही जीतु.. तब तेरे भाइ उनका हीस्सा मेरे नाम करदेगे.. तो फीर मे ओर तुम कहा अलग हे..? मुजेतो अब तुम्हारे साथही रहेना हे.. तो मेरा सभी हीस्सा मे तेरे नाम करदुगी.. लेकीन बादमे.. जब हम दोनो अकेले होजायेगे.. समज गयेनां..?

जीतुलाल : (मुस्कुराते होठोको चुमते जोरोसे सोट मारते) भाभी.. क्या दिमाग पाया हे तुने.. हें..हें..हें.. फीर..?

वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) जीतु.. थोडा प्यारसे चोदोनां.. बहुत मजा आता हे.. सुनो.. जब बटवारा हो जायेगा तब हम सहेरमे अ‍ेक मकान लेलेगे.. ब्रीन्दाको उनके बेटे बहुके साथ जहा रहेना हे रहेगी.. तब मे तेरे भाइको कहुगी.. की अब हमारा कोइ बेटा नही हे.. ओर अब जीतुभी अकेला हे.. तो मे उसे हमारे साथ रखना चाहती हु.. वो मेरी बात कभी नही टालेगे.. बस.. हो गया हमारा काम.. हम वहा जातेही सादी करलेगे.. ओर तुम ओर मे हमेसा पती पत्नी बनकर साथ रहेगे.. क्या कहेते हो..?

जीतुलाल : (मुस्कुराते बुब्स चुमते चोदते हुअ‍े) हंम.. भाभी.. बाततो आपकी सही हे.. अगर तभी हमारा बच्चा ठहेर गया तो..? तुम बडे भैयाको क्या कहोगी..? मत भुलो अब भाइको भी पता हे.. वो इस उमरमे बच्चा नही कर सकते..

वृन्दा : (मुस्कुराते) जीतु.. मे यही तो चाहती हु.. की उनको सब पता चल जाये.. ओर इनकी फीकर तुम मत करो.. भलेही उनको हम दोनोके बारेमे ओर हमारे बच्चेके बारेमे पता चल जाये.. वो इस उमरमे ये सदमा बरदास्त नही कर पायेगे.. ओर उनकी इतनी हींमतभी नही हेकी वो हम दोनोको घरसे नीकालदे.. क्युकी उस सहेरका घर मे मेरे नामही रजीस्ट्रेसन करवाउगी.. फीर वो जीयेगे भी तो कीतना.. फीर हम दोनोही आजाद.. मे चाहती हु अब हमाराभी अ‍ेक वारीस हो.. मे सारी जींदगी तेरी बीवी बनकर रहुगी..

जीतुलाल : (मुस्कुराते होंठ चुमते) भाभी.. क्या दिमाग पायाहे तुने.. मेतो कायल होगया तेरी सोचपे.. लेकीन इस बार अ‍ेक बात याद रखना.. भलेही लडका हो या फीर लडकी.. जोभी हमारे नसीसबमे होगा उसे हम स्वीकार कर लेगे.. इस बार मे तुजे हमारा बच्चा गीराने नही दुगा.. तबही मे तेरे साथ आउगा..

वृन्दा : (सरमाते धीरेसे) ठीक हे.. जीतु.. मुजे तेरे साथ रहेना हे.. हमेसा हमेसाके लीये.. तु जोभी कहेगा मे मान लुगी.. अब मेरा पती सीर्फ तु ही हे.. मुजे तेरी हर बात मंजुर हे.. चल.. आइइइइ.. इसी बातकी खुसीपे अ‍ेक बार ओर चोदले मुजे.. करदो प्रेगनेन्ट मुजे.. तु कलही इस बारेमे ब्रीन्दासे बात करले.. अब मे तेरे बीना नही रेह सकती.. बस.. जल्दीसे इन दोनोकी सादीका नीपटारा करलो.. अब मुजे नही रहेना यहा..

जब दोनो बाते कर रहेथे तब उनको नही पताथाकी छतपे टंकीके पीछे खडी ब्रीन्दा इन दोनोकी बाते सुनते उनके चुदाइकी रासलीला देख रही हे.. जब जीतुलाल उपर आया तबही वो उनका पीछा करते उपर आ गइथी.. जब जीतुलाल बात करके हाथके बल वृन्दाकी जबरदस्त चुदाइ करने लगा.. तब ब्रीन्दा आहीस्तासे वहासे नीकलकर अपने रुमपे आकर सोगइ.. तब कुछही देरके बाद जीतुलालभी वृन्दाकी चुदाइ करके नीचे आगया..

जब वो अपने रुमकी ओर जा रहाथा तब श्रीधरके कमरसे जयश्रीकी सीसकारीयोके साथ दर्दसे कणसनेकी आवाजभी आ रहीथी.. तब जीतुलाल समज गयाकी उनका बेटा श्रीधर उनकी बटी जयश्रीकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा हे.. वो अपने रुममे चला गया.. तब कुछ देरके बाद वृन्दाभी दबे पांव थोडी लंगडाते अपने रुममे चली गइ.. ओर बाथरुममे जाकर अपनी चुतको साफ करके अपने पतीके पास जाकर सोगइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७३

जब वो अपने रुमकी ओर जा रहाथा तब श्रीधरके कमरसे जयश्रीकी सीसकारीयोके साथ दर्दसे कणसनेकी आवाजभी आ रहीथी.. तब जीतुलाल समज गयाकी उनका बेटा श्रीधर उनकी बटी जयश्रीकी जबरदस्त चुदाइ कर रहा हे.. वो अपने रुममे चला गया.. तब कुछ देरके बाद वृन्दाभी दबे पांव थोडी लंगडाते अपने रुममे चली गइ.. ओर बाथरुममे जाकर अपनी चुतको साफ करके अपने पतीके पास जाकर सोगइ....अब आगे

ना सीर्फ देवायतके गांवमे बल्की आजु बाजुके सभी गांवोमे अ‍ेक वासनाकी लहेरसे चुदाइका भवंडर तांडव मचाकर सांत होगया.. ओर सबलोग नींदकी आगोसमे चले गये.. तब सीर्फ अ‍ेक ही सख्सीयत ध्यान लगाकर सभी जगह अपनी शक्तिसे नजर जमाये बैठी हुइथी.. वो थी मंजुला.. जो सबके सोजानेके बाद ध्यान लगाकर बैठे सब जानकारीया ले रहीथी.. तब उसे अपने पापाकी हालत देखी नही गइ..

जब वो कोमाकी ओर ढलने लगे.. तब मंजुकी आंखोसे आंसुओकी धारा बहेने लगी.. वो उनकी मदद करना चाहते हुअ‍ेभी नही कर सकती थी.. क्युकी बाबाने उसे कसम खीलवाकर प्रकृतीके बीच हस्तक्षेप करनेको मना कीया था.. ओर उसे सब पता थाकी अब उनके पापाका समय खतम होचुका हे.. आज उसे पहेली बार अपनी शक्तिया पानेका दुख होने लगा था.. क्युकी वो चाहकर भी कुछ नही कर सकती थी..

आज सुबहका सुरज अपनी सरारत भरी मुस्कानके बीना ही चुपचाप जल्दी जल्दी नीकल गया..हवेलीपे सब लोग देर सुबह तक सोते रहे.. तो लताने तैयार होते ही लखनको जगा दीया.. ओर उसे नीलमको उनके घरपे छोडनेको कहा.. तो नीलमका नाम सुनतेही लखन जाग गया.. ओर फटाफट नहाने चला गया.. तबतक लताने नीलमकोभी जगाकर बाथरुममे नहानेके लीये भेज दिया..

दोनोको जगाकर लता कीचनमे फटाफट चाइ नास्ता तैयार करवाने लगी.. फीर कुछ देरके बाद लखन ओर नीलम दोनोही तैयार होकर नीचे आगये.. तब लखन बहुतही खुस हो रहाथा.. आखीर उनको नीलमसे अकेलेमे मीलनेका मौका जो मील रहाथा.. लखन नीलमको अपनी साली मानकर उनपे अपना पहेला हक जमाते कीसी भी तराह नीलमको सेट करना चाहता था.. लेकीन बीचमे धिरेन बाजी मार गया..

जब उसे पता चलाकी नीलम धिरेनसे चुद गइ हे.. तबसे तो लखन नीलमको पानेके लीये ओर तील मीलाने लगा.. लेकीन लखन आज कल इस मामलेमे बहुत दिमाग चला रहाथा.. इसी वजहसे नीलम ओर धिरेनके कांडसे खुसभी हो रहाथा.. अब वो इस कांडकी वजहसे नीलमको बडीही आसानीसे पा सकता था.. उसे अब नीलमको अपने नीचे लीटानेका रास्ता बहुतही आसान लग रहाथा..

जीसकी वजहसे वो आजही मीशन नीलमपे लग गयाथा.. लता लखन ओर नीलम चाइ नास्ता करने बैठ गये.. तब लता ओर नीलम साथमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहीथी.. तब लखन आज लताके सामने ना बैठकर नीलमके सामने बैठ गया.. तब लखनने नीचेसे अपना अ‍ेक पैर आगे बढाया.. ओर नीलमके पैरपे रख दीया.. तभी नीलम चोंक गइ.. ओर गभराते टेडी नजर करते नीचेकी ओर देखने लगी..

तब लखन नीचेसे नीलमके पैरको सहेलाते चाइ नस्ता कर रहाथा.. तो नीलम लखनकी ओर घुरने लगी.. तो लखन उनकी ओर देखते अपने दोनो नैन नचाते मुस्कुराने लगा.. तो नीलमभी सबकुछ समज गइ.. ओर वो सरमाकर मुस्कुराते अपने पैर पीछे लेने लगी.. लेकीन इस बार लखनने उनके पैरोको जोरोसे दबाके रखाथा.. तो नीलम बहुतही सर्मसार होगइ ओर अ‍ैसेही बैठी रही.. उनको लगाकी लखनजीजु उनकी मस्ती कर रहे हे.. तभी..

लता : लखन.. आप भाभीको कहेकर आना.. की हम जब सहेर जायेगे तब भानुभाइको कहे नीलुको इधर छोड जाये.. ओर आप भाभीसे बातभी करलेना.. उनको अच्छा लगेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (पैर पीछे लेते मुस्कुराते) लता.. तुमभी साथ चलना.. हम दोनो नीलुको छोडकर वापस आजायेगे..

लता : (मुस्कुराते) अरे ना बाबा नां.. पुनोदीदी ओर सृतीभाभी भी नही हे.. तो वो मुजे घरका खयाल रखनेको कहेकर गइ हे.. मुजे नही आना.. आपही इसे पहेले घर छोडदो फीर खेतोपे चले जाना..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. आपभी साथ चलोनां.. जीजु आपको वापस इधर छोड देगे..

लता : (धीरेसे) अरे नही नही.. इधर घरपे कोइ नही हे.. तुम तेरे जीजुके साथही चली जाना.. ओर सुन.. वहा जाकर उस कमीनेके साथ कोन्टेक्ट करनेकी कोसीस मत करना.. वरना मुजसे बुरी कोइ नही होगी.. समजी..? उनका नंबरतो तुजे बखुबी याद होगा..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही दीदी.. आइ प्रोमीस अब अ‍ैसा वैसा कुछभी नही करुगी.. ट्रस्ट मी..

लता : (मुस्कुराते) हंम.. गुड गर्ल.. जाओ अपने कपडे लेलो.. ओर अब मोबाइल मेरे पास ही रहेगा.. ओर हां.. वहा जातेही भाभीको कहेकर मुजे फोनपे बात करवाना की तुम वहा पहोंच गइ.. ओके..?

नीलम : (खडी होते) जी दीदी..

जब चाइ नास्ता खतम होगया तो नीलम उपर अपने कपडेकी बेग लेने चली गइ.. तो लखनने इसारोसे लताको पुनमके रुममे आनेको कहा.. तो लता सरमके मारे पानी पानी होगइ ओर नां मे गरदन हीलाते मना करने लगी.. तो लखन मुह बीगाडते जुठमुठ नाराज होगया.. तो लता जोरोसे हसने लगी.. तभी नीलम अपनी बेग लेकर नीचे आगइ.. तो लखन अपनी बाइक चालु करके बैठ गया ओर नीलम उनके पीछे बैठ गइ.. ओर लखनने बाइकको जाने दी.. तब..

लखन : (मुस्कुराते बाइक चलाते) नीलु.. आज भाइ नही हे.. तो चल हम रामुकाकाको जरा कहेकर जाते हे की मे आउ तबतक खेतोका काम देखले.. क्या तुमने हमारे खेतोको देखा हे..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते) नही.. कभी नही देखा.. चलो.. जीजु.. थेन्क्स.. आपने हमे लतादीदीके गुस्सेसे बचालीया..

लखन : (हसते) हंम.. चल ठीक हे.. तुजे पहेले हमारा खेत दीखाता हु.. फीर मुजे तुमसे इस बारेमे बात भी करनी हे फीर हम घर चले जायेगे..

कहातो नीलम समज गइ की लखनजीजु जरुर उनके ओर धिरेनके बारेमे पुछेगे.. नीलमके दिलकी धडकन बढने लगी.. उनको लगाकी आज वो बुरी तराह फसी हे.. क्युकी नीलम इतनीभी ना समज नही थी.. की लखनकी हरकते ओर उनकी नजरको पहेचान ना सके.. लखन कलसेही उनके साथ कुछना कुछ हरकत कर रहाथा.. ओर लखन नीलमको लेकर खेतोपे आगया..
 
वहा उसने रामुकाकाको उनके वापस आनेतक खेतोका काम देखनेको कहा.. फीर उसने नीलमका परीचय भानुभाइकी बेटीके रुपमे करवाया.. तो रामुकाकाने नीलमको आशीर्वाद दीये.. ओर लखन नीलमको लेकर गोडाउनकी ओफीसमे चला गया.. तो अ‍ेक बारतो नीलमकी गांड फटने लगी.. की लखनजीजु उनके साथ कुछ उल्टी सीधी हरकत ना करले.. ओर वो गभराते लखनके पीछे जाने लगी..

तो लखन ओफीसके बजाये नीलमको सीधा आराम करनेके कमरेमे ही लेगया.. ओर बेडपे बैठकर नीलमकोभी बैठनेके लीये कहा.. तो नीलम सरमाते धीरेसे बेडके कोनेपे बैठ गइ.. ओर अपनी नजरे जुकाये बैठी रही.. तब लखन धीरेसे रुमका दरवाजा बंध करदेता हे.. ओर नीलमकी ओर मुडकर उनकी ओर देखते हसने लगता हे.. तब नीलमका दिल जोरोसे धडकने लगा.. वो बहुतही सर्मसार होने लगी.. तभी..

लखन : (हसते) अरे अ‍ैसे गभरा क्यु रही हे..? मे तुजे थोडीना डांटनेके लीये इधर लाया हु.. मत भुल मे तेरा जीजु ओर तु मेरी साली हे.. तो मुजे तेरी चीन्ता तो होगीनां..? तुम आरामसे बैठ.. क्या पानी पीयेगी..?

नीलम : (नामें गरदन हीलाते) नही जीजु.. चलीयेना.. यहा कुछ काम था..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. देख नीलु.. मुजे गोल मोल घुमाकर पुछनेकी आदत नही हे.. ये बता.. अब तक तुम ओर धिरेनजीजु इस तराह कीतनी बार मीले हो..? जो सेटरडे सन्डे मीले थे..

नीलम : (सुनतेही नीलम सरमके मारे पानी पानी होकर नजरे जुकाये खामोस बैठी रही)......

लखन : (थोडी सख्तीसे) नीलु.. मे तुजे कुछ पुछ रहा हु.. सच बताना.. वरना मजबुरन मुजे तेरी मम्मी पापाको सबकुछ बताना पडेगा.. फीर मत कहेना लखन जीजुने मुजे नही बचाया..

नीलम : (अ‍ेक बार सामने देखकर नजर जुकाते धीरेसे) अ‍ेक बार गार्डनमे ओर अ‍ेक बार दोनो फील्म देखने गयेथे तब.. लेकीन वोतो अ‍ैसेही मीलेथे.. तब हमने कुछ नही कीयाथा.. अ‍ैसे तो हम पहेली बार ही मीले.. जीजु.. प्लीज.. आप मम्मीको कुछ मत बताना.. वरना वो मेरी खाल उखाड देगी.. ओर मेरी पढाइभी छुडवा देगी.. प्लीज..

लखन : नीलु.. तुमने पुनोके साथ अ‍ैसा क्यु कीया..? दोनो उनकी सादीसे पहेले रीलेशनमे होनां..? तुजे पताथा की धिरेनकी सादी पुनो दीदीसे होने वाली हे.. फीरभी उसे प्यार कीया..?

नीलम : (नजर जुकाये धीरेसे) जीजु.. दरसल वो पुनो दीदीसे नाराज थे.. इसीलीये वो मुजसे प्यार करने लगेथे..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? लेकीन क्यु..? वो पुनो दीदीसे नाराज थे..? अगर पुनो दीदीसे नाराज थे तो फीर उनसे सादी करके उनकी जींदगी खराब करनेकी क्या जरुरत थी..? तुम दोनो कर लेते सादी.. नीलु.. मुजे उनकी नाराजगीकी वजह जाननी हे.. बता मुजे..

नीलम : (बहुतही सर्मसार होते सर जुकाये बैठी रही..)......

लखन : (थोडी सख्तीसे) नीलु.. मेने तुमसे कुछ पुछा हे.. बता मुजे.. वरना हमे मजबुरन तेरी मम्मी पापाको बताना पडेगा.. बता..

नीलम : (जटसे सामने देखकर नजर जुकाये गभराते) अरे नही नही.. बताती हु.. जीजु.. दरसल.. धिरेन जीजु.. वो.. वो.. अपनी सादीसे पहेले पुनम दीदीके साथ वो.. से..(सरमाते धीरेसे) सेक्स.. करना चाहते थे.. ओर इसके लीये पुनम दीदीने उसे सादीसे पहेले सेक्स करनेको मना कर दीयाथा.. तो वो उनसे नाराज थे..

लखन : (आस्चर्यसे) क्या.. सीर्फ यही रीजनथा क्या..? नीलु.. मुजे सब खुलकर बता..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) नही जीजु.. धिरेन जीजुने मुजसे कुछ बातभी कही हे.. जो मुजे कीसीको ना बतानेकी कसम भी खीलाइ हे.. तो वो मे नही बता सकती.. सीर्फ उनकी ख्वाहीसके बारेमे बता सकती हु..

लखन : ( सामने सख्तीसे देखते) नीलु.. आज मुजे सब सचाइ जाननी हे.. अगर उसने तुजे कसम खीलाइ हे फीरभी मुजे सब बताना पडेगा.. तबही मे तुजे बचा सकता हु.. बता..

नीलम : (डरसे सामने देखते) जीजु.. दरसल धिरेन जीजुकी ख्वाहीस थी.. की वो सादीसे पहेले उनकी बीवीके सथ सेक्स करेगे.. ओर पुनम दीदीने उनका सपना तोड दीया.. इसीलीये वो मुजसे प्यार करने लगेथे.. ओर मेभी उनके प्यारमे बहेक गइ.. ओर उसे प्यार करने लगी.. जीजु.. वो मुजसे सादी करना चाहते हे.. धिरेन जीजुने मुजसेभी वादा लीयाथा.. की मे उनका ये सपना पुरा करु.. इसीलीये हम आगे बढे.. ओर मेने उनका सपना पुरा करदीया..

लखन : हंम.. तो फीर तुमसे ही सादी करलेता.. ओर पुनम दीदीको मना करदेता.. तो पुनोकी जींदगीसे क्यु खीलवाड कीया..? क्या कुछ ओर रीजन हे..? तु वो बात बता जो तुजे कसम खीलवाकर कीसीको ना कहेनेको मना कीया हे.. आज मुजे सब सचाइ जाननी हे..

नीलम : (सर जुकाते धीरेसे) जीजु.. प्लीज ये बात कीसीको मत कहेना.. वरना घरपे हंगामा होजायेगा..

लखन : (मुस्कुराते) नीलु.. आइ प्रोमीस.. बता.. ये बात सीर्फ मेरे तकही सीमीत रहेगी..

नीलम : (सरमाते) जीजु.. दरसल धिरेन जीजु पुनम दीदीसे सेक्स करके आपके बडे भैयासे बदला लेना चाहते थे.. अगर पुनम दीदीने सादीसे पहेले धिरेन जीजुके साथ सेक्स कीया होता तो वो सायद उनसे सादी ही ना करते.. वो सीर्फ मेरे साथ सादी करना चाहते थे..

लखन : (आस्चर्यसे चोंकते) क्या..? बडे भैयासे बदला..? लेकीन कीस बात का बदला लेना चाहता था..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) जीजु.. दरसल.. धिरेन जीजुको पता चल गयाथा.. की उनकी मम्मीका उनके जीजुके साथ सादीसे पहेलेही जीस्मानी तालुकात हे.. फीर उनकी मम्मीकी सादी जीजुसे होगइ.. तब जीजुनेही पुनो दीदीका रीस्ता करवाया था.. तब वो उनकी मम्मी.. ओर बडे भैयाके डरसे पुनो दीदीसे प्यार ना करनेके बावजुद सादी करनेको राजी होगये.. वो सादीसे पहेले पुनम दीदीके साथ फीजीकल होना चाहते थे.. लेकीन अ‍ैसा ना होसका.. इसीलीये धिरेन जीजुको मजबुरन पुनम दीदीसे सादी करनी पडी..

लखन : (सामने देखते) अगर मेरी मम्मीको जीजु सादीसे पहेले ठोकते थे.. तो मेभी उनकी बहेनको सादीसे पहेले ठोकुगा.. क्या सीर्फ यही रीजन था..? लेकीन ये क्या बात हुइ..? येतो कोइ खास रीजन नही हुआ.. तेरे साथभी सादीसे पहेले फीजीकल रीलेशन बनाये.. अगर कल वो तेरे साथ सादी नही करेगातो..? (मुस्कुराते) नीलु.. क्या ये सब करनेकी तेरी उमर हे..? हंम.. कीतने साल हुअ‍े तुजे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दो महीने पहेले उनीसवा बैठा.. जीजु.. अब मे बालीक हु.. इस बारेमे मे खुद नीर्णय ले सकती हु.. मुजे कीसीसे पुछनेकी जरुरत नही हे.. हमने जोभी कीया आपसी रजामंदीसे कीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) हंम.. मुजे कायदा सीखा रही हे..? देखा हमने.. तु अपने बारेमे बहुत अच्छा नीर्णय ले रही हे.. तभी तुजपे इतनी जवानी चडी हुइ हे.. नीलु.. तुजमे बहुत आग हेनां..? अगर धिरेन तेरा जीजा हे तो.. मेभी तो तेरा सगा जीजा हु.. अगर तुजे अपनी आगही मीटानी थी तो क्या तु पहेले मुजे नही केह सकती थी..? हंम..?

वैसेभी जीजा सालीमे तो ये सब चलता ही रहेता हे.. इसीलीये तो लोग सालीको आधी घरवाली कहेते हे.. मेरी मान तु धिरेनको छोडदे.. मे तुजे खुस रखुगा.. बनजा मेरी आधी घरवाली.. अगर तुम चाहोतो तुजे मे अपनी पुरी घरवाली भी बना सकता हु.. बोल..?
 
नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. आप अ‍ैसी बाते कत करीये.. आप लता दीदीके पती हे..

लखन : (नीलमका हाथ पकडते) तो फीर पुनम दीदी कौन थी..? मत भुल वो मेरी बहेन हे.. ओर तु उसीका घर बरबाद करनेमे तुली हइ हो..? हंम..? अगर तुजे अपनी आगही मीटानी थी तो मुजसे कहेती.. इसमे मेरी बहेनका घर क्यु बरबाद कर रही हे..?

नीलम : (धीरेसे) जीजु.. लेकीन हम दोनो अ‍ेक दुसरेको प्यार करते हे.. वो मुजसे सादी करनेके लीये तैयार हे.. तो हम दोनो सादी करने वाले हे.. मे कोइ अ‍ैसी वैसी लडकी नही हु..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे हाथ पकडते) हंम.. अगर तु अ‍ैसी वैसी लडकी नही हे.. तो फीर मेभी तुमसे सादीके लीये तैयार हु.. करले मुजसे सादी.. मे इतना सक्षम तो हुही तुजे ओर तेरी लता दीदी दोनोको खुस रख सकता हु.. अगर यकीन ना होतो पुछ लेना तेरी लता दीदीको.. की मे कैसे बीस्तरमे उनकी चीखे नीकलवाता हु.. यकीन मान.. मे तुजे धिरेनसे ज्यादा खुस रखुगा..

नीलम : (सर्मसार होते परेसानीमे) जीजु.. प्लीज.. मत कीजीये अ‍ैसी बाते.. चलीयेना हमे घर जाना हे..

लखन : (मुस्कुराते नीलमकी जांगोपे हाथ रखते) चलते हे.. चलते हे.. लेकीन आज कुछ बात तो क्लीयर होजाये.. क्या तुमने धिरेनका हथीयार देखा हेनां..? तो फीर अ‍ेक बार ये मेराभी हथीयार देखले.. फीर तुम खुद डीसाइड करना.. की कीसका हथीयार दमदार हे..

नीलम : (टेडी नजरसे लखनके पेन्टमे तंबु देखकर) जीजु.. प्लीज.. अ‍ैसी बाते मत कीजीये.. चलीयेनां..

लखन : (पेन्टकी चेइन खोलकर अपना तना हुआ लंड नीकालकर) नीलु.. अ‍ेक बार देखले इसे.. ये तुजे खुस रख सकता हे.. मुजे पता हे धिरेनका इतना बडा नही हे.. उनका तो इनके सामने नुनी लगता हे.. अ‍ेक बार इसेभी अंदर लेकर देखले.. तु जनतकी सेर करेगी.. ओर खुस होजायेगी.. हें..हें..हें..

कहेते लखन अपना लंड मुठीमे पकडकर हीलाते सहेलाने लगा.. तो लखनका लंड नीलमको देखतेही हवामे सख्त होते लहेराने लगा.. ओर लखन नीलमका हाथ पकडकर उसे अपना लंड पकडाने लगा.. तो नीलम लखनके तगडे लंडको देखते ही हकी बकी रेह गइ.. नीलमने पहेली बार इतना बडा लंड देखा तो वो डरते बहुतही सर्मसार होते टेडी नजरसे लंडको देखते अपना हाथ वापस खीचने लगी..

तभी लखनने जबर दस्तीसे उनका हाथ पकडकर वापस लंडको पकडा दीया.. ओर नीलमकी ओर गुस्से देखने लगा.. तो नीलम अपने मम्मी पापाको बता देनेके डरसे गभरा गइ.. ओर अपनी नजर जुकाये लंडको मुठीमे पकडकर बैठी रही.. तभी लखन भी नीलमकी मुठीको थामते नीलमके हाथोसे लंडको सहेलवाने लगा.. तब नीलम सरमके मारे पानी पानी होने लगी.. नीलमको लखनका लंड वाकइ धीरेनसे बडा ओर मोटा लगा..

नीलम अपने दांतोसे होठोको दबाते टेडी नजरसे लंडको देखती रही.. लखनभी तावमे आते उतेजीत होने लगा.. तो अचानक नीलमके सरको पकडकर उनके होठोपे अपना होठ रखकर भीच लीया.. ओर दुसरे हाथसे नीलमके बुब्सको मसलने लगा.. तो अचानक हुअ‍े हमलेसे नीलम गभरा गइ.. ओर लखनसे छुटनेकी नाकाम कोसीस करने लगी.. तभी लखनने बुब्सको छोडकर नीलमकी चुतको उनके कपडेके उपरसे ही दबोच लीया.. तो नीलम दर्दके मारे उछल पडी..

ओर बेडसे खडी होनेकी कोसीस करने लगी.. तब उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. तो लखनने उसे फौरन छोड दीया.. ओर बेडसे खडा होकर फटाफट लंडको पेन्टमे डालकर जीप लगा देता हे.. तो नीलम रोने लगी.. नीलमने आज पहेली बार धिरेनके अलावा दुसरे मर्दके लंडको देख भी लीया.. ओर हाथोमे पकडकर महेसुस भी करलीया.. की वाकइ लखनका लंड धिरेनके लंडसे मोटा ओर लंबा हे.. तभी..

लखन : (खडा होते) नीलु.. आइ अ‍ेम सोरी.. मे बहेक गयाथा.. चल तुजे घर छोड देता हु.. लेकीन जानेसे पहेले तु अ‍ेक बार इस मोबाइलमे देखले.. फीर ठंडे दिमागसे सोचना.. मे सही केह रहा हु..

कहेते लखनने अपना मोबाइल नीकाला.. ओर धिरेन नीलमकी चुदाइ वाली विडीयो क्लीप चालु करके नीलमके हाथोमे फोन थमाते दीखाने लगा.. तो नीलम गौरसे देखने लगी.. ओर देखतेही नीलमकी सीटीबीटी गुल होगइ.. वो आंसु बहाते जटसे फोन लखनको वापस देती हे.. ओर दोनो हाथसे अपना चहेरा छुपाकर रोने लगती हे.. तब बडी मुस्कीलसे लखनने नीलमको सांत कीया.. फीर उनका मुह पानीसे साफ करवाके पोछ दीया.. तब..

नीलम : जीजु.. प्लीज.. ये डीलीट कर दीजीये.. अगर मम्मी पापाको पता चल गयातो मे बरबाद होजाउगी.. मे मर जाउगी.. मेरे पास ओर कोइ रास्ता नही बचेगा.. प्लीज..

लखन : (फोन जेबमे रखते) नीलु.. तु चल.. तुजे घरपे छोड देता हु.. अब मुजसे बात मत करना.. अब जोभी करना हे मुजे करना हे.. अब जबतक तेरी पढाइ खतम नही होजाती ये क्लीप मेरे पासही रहेगी.. मे तेरी पढाइ डीस्टर्ब करना नही चाहता..

नीलम : (गीड गीडाते) जीजु.. प्लीज.. आप कीसीको मत दीखाना.. वरना मम्मी मुजे मार डालेगी.. प्लीज..

लखन : (हाथ पकडकर गालको सहेलाते) नीलु.. तु फीकर मत कर.. मे इतना कमीना नही हु.. की तुजे ब्लेक मेइल करु.. मुजपे यकीन कर.. मे कीसीको नही दीखाउगा.. ये सीर्फ मेरे पासही रहेगी.. वरना तु फीरसे उस कमीनेको मीलेगी.. ओर मुजे पता हे वोभी तुजे मीले बगैर नही रहेगा.. अगर तुम उसे मीली तो मुजे मजबरुन ये तेरी मम्मी पापाको दीखाना पडेगा.. चल..

नीलम : (गीड गीडाते लखनका हाथ पकडके वापस अंदर खीचते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. मे वादा करती हु.. मे आइन्दा उसे कभी नही मीलुगी.. आप जोभी कहोगे मे करुगी.. लेकीन मम्मी पापाको मत बताना..

लखन : (अचानक रुकते अ‍ेक नजरसे देखते) ठीक हे.. मे नही दीखाउगा.. लेकीन इसके बदले मेरी अ‍ेक सर्त हे.. अगर तु ये सर्त मानती हे तो फीर समजले तु पुरी तराह सेइफ ओर धिरेनसे सादी करनेके लीये आजाद हे.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही..

नीलम : (सामने देखते) जीजु.. प्लीज.. ये क्लीप कीसीको मत दीखाना.. मुजे आपकी सभी सर्त मंजुर हे.. कहो.. क्या सर्त हे..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) नीलु.. अगर तुजे सर्त मंजुर हे तो समजले.. तु हमेसा सेइफ हे.. तु भलेही मुजसे सादी नाकर.. तु चाहे धीनेरके साथ सादी भी करना चाहे तो कर सकती हे.. बस.. मे जब चाहु तु मुजे खुस करती रहेना.. मे तेरे साथ फीजीकल रीलेशन रखना चाहता हु.. अगर तुजे ये सर्त मंजुर हेतो बता.. मे वादा करता हु इस बारेमे हम दोनोके अलावा कीसीको पता नही चलेगा.. फीर तु पढाइके बाद भलेही धिरेनसे सादी करलेनां.. लेकीन तेरी सादीके बादभी हम दोनोके बीच रीलेशन जारी रहेगे..

नीलम : (धीरेनका हाथ छोडते धीरेसे) जीजु.. प्लीज.. मत कीजीये अ‍ैसा.. मे बरबाद होजाउगी.. आप मेरे जीजु हे.. मे ये नही कर सकती..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे नीलु.. मे तेरा जीजु हु इसीलीये तो केह रहा हु.. तु मेरी आधी घरवाली हे.. मेरा तुजपे धिरेनसे पहेले हक हे.. मेने आज तक कीसीके साथ जबरदस्ती नहीकी.. मे तुजपे भी जबर दस्ती अपनी सर्त नही मनवाउगा.. अगर तुजे सर्त मंजुर नही हेतो मना करदे मुजे.. फीर तु आजाद.. तु अपने तरीकेसे.. मे अपने तरीकेसे.. जा मे वादा करता हु.. मे ये क्लीप कीसीको नही दीखाउगा.. बस..? ये मत भुलना की हमे तेरी चीन्ता नही हे.. चल..

नीलम : (कुछ सोचते) जीजु.. थेन्क्स.. लेकीन प्लीज.. मुजे कुछ सोचनेका वक्त दीजीये.. मे आपको बादमे बता दुगी.. लेकीन प्लीज.. ये आप लता दीदीको मत दीखाना.. चलीये..

कहातो लखन नीलमको लेकर उनके गांवकी ओर चला गया.. नीलम सारे रास्ते गुम सुम बैठी लखनके बारेमे सोचती रही.. आज नीलमने जींदगीमे दुसरा लंड देखा ओर हाथमे पकडकर महेसुस भी कीया.. जो अभी लखनने उसे दिखाया.. लखनका लंड देखकर नीलम मनमे उसे धिरेनके लंडसे कंपैर करने लगी.. तो उसे लखनकी बात सही लगी.. वाकइ आज उसे लखनके लंडके आगे धिरेनका लंड नुनी लग रहाथा.. उसे पताही नही चला की कब उनका घर आगया..
 
जैसेही बाइक खडी रही नीलम बाइकसे उतरके अंदरकी ओर जाने लगी.. तो पीछे लखनभी बाइक खडी करके अंदर चला गया.. तो भानु सरला ओर रमा चाइ नास्ता कर रहेथे.. तो दोनोको देखतेही तीनो खुस होकर हसने लगे.. तो रमाने खडी होकर दोडकर नीलमको गले लगा लीया.. फीर उनके चहेरेको अपने हाथोमे थामकर उसे देखते मुस्कुराती रही.. ओर लखनकी ओर देखतेही वो सरमाकर मुस्कुराते उसे प्यारसे देखती रही..

रमा : (सरमाते) आइअ‍े आइअ‍े लखनजी.. आखीर आपने मुजे नीलुसे मीलवा ही दीया.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां भाभी.. क्या मे मेरी भाभीके लीये इतना नही कर सकता..? चलीये सम्हालीये अपनी नीलुको.. ओर मुजे पानी पीला दिजीये मुजे खेतोपे जाना हे..

भानु : (हसते जोरोसे) अरे अ‍ैसे कैसे जाओगे.. चलो तुम दोनोभी चाइ नास्ता करने बैठ जाओ.. फीर हम दोनो साथमे चले जायेगे.. हें..हें..हें..

सरला : (हसते) हां लखन बेटा.. चल आजा.. ओर नीलु.. तुमभी आजा.. चल कुछ खा पीले..

नीलम : (मुस्कुराते) नही दादी.. हम दोनो घरसे चाइ नास्ता करके ही नीकले हे.. अगर लखन जीजुको करना हे तो आप उसे बीठा दीजीये.. मे अंदर जाती हु..

रमा : (नास्ता करने बैठते) अरे.. अंदर कहा जा रही हे.. तेरे जीजुको कुछ पानी बानीतो पीला.. फीर इधरसे चाइ लेकर उसे पीला.. ओर थोडी देर बैठ हमारे पास.. कीतने दिनोके बादतो आइ हो.. फीर अंदर आराम करने चली जाना..

भानु : (मुस्कुराते) भाइ.. क्या वो होस्टेल वालोने इस आने दिया..? इसे लेने कौन गया था..?

इतना सुनतेही नीलमकी गांड फटने लगी.. उसे लगाकी अभी लखन जीजु मम्मी पापाको सबकुछ बता देगे.. ओर वो लखनकी ओर देखते आंखोसे ना बतानेकी मनते करने लगी.. तो लखन उनकी ओर देखते हसने लगा.. तो नीलमकी सीटी बीटी गुल होने लगी.. ओर उनका चहेरा पीला पडने लगा.. तब लखनने जुठ बोलकर आज अ‍ेक बार फीर नीलमको बचा लीया.. तब नीलमने राहतकी सांस ली..

लखन : (जुठ बोलते वही खटीयापे बैठते) नही भैया.. मे पुनमको लेकर इस लेने गया था.. क्युकी वहा उनकी मेडमके साथ बहुतही पहेचान हे.. बस.. हम जल्द बाजीमे सीर्फ नीलुके कुछ कपडे लेकर आगये.. क्युकी उनको ओर सृती भाभीको भाइके साथ राजीव अंकलके वहा जाना था.. बाकीका सामान हम सहेर रहेने जायेगे तब ले लेगे.. लताने कहा हे अब जबतक हम सहेर नही जाते तबतक नीलु यही रहेगी..

रमा : (सरमाते हसते) लखनजी.. लेकीन येतो बताइअ‍े आप दोनो सहेरमे रहेने कब जा रहे हो..? हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) बस भाभी.. जब मंजुभाभी.. चंदाभाभी पुनमदीदी.. सबलोग वापस आजायेगे तब हम चले जायेगे.. भानुभाइ.. लताने कहा हे तब आप नीलुको हमारे घरपे छोड जाना.. वो हमारे साथही चलेगी..

सरला : (हसते) लखनबेटा.. तुम हमारे साथ नास्ता करने बैठ जाते.. देख आज तेरी भाभीने मस्त आलुके पराठे बनाये हे.. हें..हें..हें..

लखन : (कामुक नजरोसे रमाकी ओर देखते हसते) चाची फीकर मत करो.. अबतो आयेदिन यहा आना जाना लगाही रहेगा.. तो फीर कभी भाभीके आलु पराठे खालुगा.. वो मुजे खीला देगी.. क्यु भाभी..?

कहेते लखनने सबसे छुपर रमाकी ओर अ‍ेक आंख मारदी.. तो रमा लखनकी डबल मीनींग बाते सुनकर सब समज गइ.. ओर बहुतही सर्मसार होते हां मे गरदन हीलाते नजरे जुकाते मुस्कुराती रही.. तभी नीलमने लखनको ग्लास भरके पानी दीया.. तो लखनने ग्लास लेते नीलमके हाथको छुकर दबा दीया.. तो नीलमने गभराकर जटसे ग्लासको छोड दीया.. ओर सरमाकर चली गइ.. ओर सबके साथ बैठकर नास्ता करने लगी..

रमा : (खडी होकर चाइ लाते) लखनजी.. आप सहेर जाओतो मेभी आजाउगी.. दो दिन वही रहुगी.. तो घरका सब सामान अच्छी तराह सेट करके सजा देगे.. फीर आप मुजे वापस घर छोड देना.. हें..हें..हें..

जब रमा लखनको चाइ देने आइ तब कप पकडनेके बहाने लखनने रमाके हाथको पकड लीया.. तो रमा गभराते जटसे पीछेकी ओर देखने लगीकी कोइ देखतो नही रहा.. तब भानु सरला नीलम तीनो ही चाइ नास्ता करनेके बीजी थे तो रमाने हाथको अ‍ैसेही रखा.. ओर वो सरमाते लखनकी ओर देखते मुस्कुराती रही.. ओर लखनने धीरेसे हाथ सहेलाते उनके बुब्सको छु लीया.. ओर हल्केसे दबाने लगा.. तो रमा सरसे पांव तक हील गइ.. क्युकी आज उसे लखनने पहेली बार छुकर छेडा था..

रमा बहुतही सर्मसार होगइ.. लखन भीरे धीरे रमाके उरोजोको दबाके मसल रहा था.. तो लखनके हाथ लगतेही रमाके दोनो उरोज कठोर होने लगे.. ओर नीचे चुतमे सुरसुराहट होने लगी.. रमा लखनकी ओर देखकर नां मे गरदन हीलाते मुस्कुराने लगी.. तभी उसे अपनी चुतपे गीलापन महेसुस होने लगा.. ओर चुतमे मीठीसी खुजली होने लगी.. तब रमाका लखनके पास ज्यादा देर तक रहेना मुस्कील होने लगा.. ओर वो बहुतही सर्मसार होते अपना हाथ लखनसे छुडानेकी कोसीस करने लगी.. तभी..

भानु : (हसते) हां लखन.. ये बात तेरी भाभीने ठीक कही.. वहा लता अकेली कब अपना सब सामान सेट कर लेगी..? अगर आपकी भाभी साथ होगीतो उनको कुछ मददभी मील जायेगी.. ओर वो अ‍ेक बार नीलुकी स्कुलभी देख लेगी.. फीर आप उनको सहेरमे घुमा देना.. हें..हें..हें..

रमा : (थोडी दुर हटते सर्मसार होते हसते) जाओजी.. मे वहा घुमने थोडीना जा रही हु..? मेरी ननंदकी मदद करने जा रहीहु.. बात करते हे.. (लखनकी ओर कातील स्माइल करते) हां.. अगर हमारे ननंदोयजी हमे घुमाने लेजायेगे तो हम जरुर जायेगे.. देखते हे ये वहा हमारी कैसी खातेरदारी करते हे.. हें..हें..हें..

सरला : (हसते पास आकर बैठते) अरे हां बाबा हां.. तु भी चली जाना.. बस.. अबतो खुस.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमाते धीरेसे) लखनजी.. जब आप फ्रि होतो इधर आते जाते रहीये.. मे आपको मस्त पराठा खीलाउगी.. हें..हें..हें..

सरला : (मुस्कुराते) हां लखन बेटा.. अगर तुम आते होतो हमारा भी दिल लगा रहेगा.. अबतो देवुको टाइमही नही मीलता वरना वो हप्तेमे कमसे कम अ‍ेक दो बार आजाता था..

भानु : (हसते पास आते) भाइ.. चलो मे रेडी हु.. अब खेतोपे चलना हेनां..?

लखन : (हसते खडा होते) हां हां.. चलीये.. (रमाकी ओर देखते) भाभी.. अगली बार आउगा तो आप अपना आलु पराठा तैयार रखना.. मे फोन करके आजाउगा.. चलो सबको बाय.. हें..हें..हें..

कहातो रमा अ‍ेक बार फीर बहुत सर्मसार होगइ.. ओर सरमाकर हसने लगी.. वो लखनकी सब बाते भली भांती समजती थी.. फीर चाइ पीली तो लखन ओर भानु दोनोही अपने खेतोकी ओर नीकल गये.. तो रमाभी नीलमको अपने रुममे आनेको कहेते जटसे अपने रुमके बाथरुममे घुस गइ.. ओर दरवाजा बंध करतेही वो दरवाजेके पीछे अपने दोनो हाथ अपने उरोजोपे रखते सरमाते मुस्कुराने लगी..

आज पहेली बार लखनने उसे इस तराह छुआथा.. रमाने अपनी पेन्टी नीकालकर उसीसे अपनी चुतको साफ करलीया.. जो उनकी चुत अभी भी लखनके लंडकी यादमे आंसु बहा रहीथी.. रमाने पेन्टीको वही रखदी.. फीर अपने आपको सही करके बहार आगइ.. आतेही वो नीलमको अपने गले लगा लेती हे.. फीर प्यारसे उनके सरको सहेलाते अपने बेडपे बैठ जाती हे.. जैसे नीलमसे लखनके बारेमे बात करनेकी जल्दी हो..
 
इधर गांवमे सुबह देवायत चारु ओर नीशा.. अबभी तीनो अ‍ेक दुसरेसे चीपककर नंगे सोये हुअ‍े थे.. तभी देवायतके फोनकी रींग बजने लगी.. तो चारुने सोते हुअ‍े देवायतके होंठ चुमकर उसे जगा दिया.. ओर देवायत बीना फोनमे देखकर नींदमे ही फोनको कानपे लगाकर बाते करने लगा.. तो सामने मंजुने उनको जल्दीसे नीकल जानेको कहा.. तो देवायत फटाकसे बेडपे बैठ गया.. ओर मंजुकी बाते सुनता रहा..

तब तक नीशा ओर चारुभी बेडपे बैठकर बडेही गौरसे देवायतकी ओर आस्चर्यसे देखती रही.. दोनोही भुल गइ की इस वक्त दोनोही पुरी तराह नंगी हे.. फोन रखतेही देवायत जटसे दोडकर बाथरुममे घुस गया.. ओर नहाने लगा.. तब नीशा ओर चारुभी समज गइकी मामला कुछ गंभीर हे.. तो वो दोनो भी अपने कपडे पहेनने लगी.. तबतक देवायत कंपलीट होकर बहार नीकल गया ओर फटाफट तैयार होने लगा.. तभी..

चारु : (धीरेसे) जानु.. क्या हुआ..? क्या बात हे..? क्या कोइ सीरीयस मेटर तो नही..?

देवायत : (जटसे) चारु.. मुजे जल्दी जाना होगा.. वहा राजीव अंकलकी तबीयत बहुतही खराब होगइ हे.. मंजु ओर सृती उसे होस्पीटल लेजा रही हे.. मे चलता हु.. तुम दोनो हवेलीपे जाती रहेना.. वहा लता अकेली हे..

चारु : ठीक हे जानु.. आप यहाकी चीन्ता मत करना हम सब सम्हाल लेगे.. आप जाओ फटाफट..

देवायत फटाफट तैयार होकर राजीवकी बाइक लेकर उनकी हवेलीकी ओर चला गया.. तो वहा रजीया चंपाभाभी ओर दया सुबहका काम नीपटा रहीथी.. तो लता उपर अपने रुममे थी.. तो देवायत दयाको कहेकर फटाफट बाइक रखकर लखनकी जीप लेकर नीकल गया.. ओर उसने रास्तेमे पहेले वहाके डोक्टरको फोन करके उनसे बात करली.. फीर भानु ओर धिरेनको जल्दी राजीवके गांव पहोचनेके लीये फोन कर दीया.. ओर वो स्पीडसे जाने लगा..

तो उधरसे धिरेनभी फटाफट तैयार होकर नीकल गया.. तो भानु भी अभी अभी लखनके साथ खेतोपे आ रहाथा.. तो वोभी वापस मुडकर घरपे चला गया ओर सरलाको लेकर राजीवके गांवकी ओर चला गया.. तो घरपे सीर्फ रमा नीलम ओर भावेशही रेह गये.. तो उधर राजीवके गांव सुबह होते ही नीर्मला जाग गइथी.. ओर तैयार होकर राजीनके पास आगइ.. तबभी राजीव गहेरी नींद सोया हुआथा.. तो नीर्मलाको लगाकी कल राजीवने उनकी तीन बार जबरदस्त चुदाइ करली हे.. तो थका हुआ होगा..

इसीलीये अभी तक सो रहा हे.. तो वो मुस्कुराकर राजीवके सरको चुमते उनके होठोको चुम लेती हे.. फीर दरवाजा खोलकर बहार नीकली तो भुमीका मंजु चंदा पुनम सबलोग तैयार होकर नीर्मलाके इन्तजारमे बैठे थे.. मंजुके कहेने पे सृतीने पहेलेही देवायतकी कारको बहार रेडी रखाथा.. नीर्मला जब बहार नीकली तो सबलोग तैयार होकर रेडी थे.. तो नीर्मलाको लगाकी सीर्फ वोही देरसे जागी हे.. तो वो सरमाके मुस्कुराने लगी..

तभी मंजु जटसे नीर्मलाके पास चली गइ ओर उनका हाथ पकडकर उसे वापस रुममे लेगइ.. तो पीछे सृतीभी आगइ.. ओर सीधे राजीवके पास चली गइ.. ओर उनका हाथ पकडकर चेक करके उनकी आंख चेक करने लगी.. तो नीर्मला ये सब देखकर गभराने लगी.. ओर वो गभराते मंजु ओर सृतीकी ओर देखती रही.. तब सृतीने जटसे भावना ओर चंदाको आवाज देकर बुलाया.. ओर तो दोनो फटाफट अंदर आगइ..

सृती : (जटसे) भावु चंदादीदी.. आजाओ सब मेरी मदद करो.. हमे मौसाजीको अभी के अभी होस्पीटल लेजाना पडेगा.. ओर मंजु तु देवुको फोन करदे.. की वो फटाफट इधर आजाये..

नीर्मला : (थोडी परेसानीमे उची आवाजमे) अरे कोइ बताओ तो सही मेरे राजीवको क्या हुआ हे..?

सृती : मौसी.. लगता हे मौसाजी फीरसे कोमामे चले गये हे.. हमे अभी होस्पीटल जाना होगा आप हटीये..

नीर्मला : (जटसे साइडमे हटते आंसु बहाते) ओह.. गोड.. मेरे राजीवको बचा लेना..

तब सृती भावना चंदा मंजु चारो राजीवको चदरमे डालकर बहारकी ओर लेजाने लगी.. तो भुमीकाने फटाफट कारका पीछला दरवाजा खोल दीया ओर सबने राजीवको पीछेकी सीटपे सुला दीया ओर सृतीने फटाफट कारकी ड्राइवींग सीट सम्हाली.. तो साथमे मंजु ओर भावना बैठ गइ तो नीर्मला पीछे राजीवके सरको अपनी गोदमे लेकर बैठ गइ.. ओर सृतीने कारको तेजीसे होस्पीटलकी ओर जानेदी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - १७४

तब सृती भावना चंदा मंजु चारो राजीवको चदरमे डालकर बहारकी ओर लेजाने लगी.. तो भुमीकाने फटाफट कारका पीछला दरवाजा खोल दीया ओर सबने राजीवको पीछेकी सीटपे सुला दीया ओर सृतीने फटाफट कारकी ड्राइवींग सीट सम्हाली.. तो साथमे मंजु ओर भावना बैठ गइ तो नीर्मला पीछे राजीवके सरको अपनी गोदमे लेकर बैठ गइ.. ओर सृतीने कारको तेजीसे होस्पीटलकी ओर जानेदी....अब आगे

ओर थोडीही देरमे सबलोग होस्पीटलपे पहोंच गये.. तो वहा डोक्टरने देवायतके फोन आतेही पहेलेसेही स्ट्रेचर रेडी रखाथा.. उनके स्टाफने फटाफट राजीवको कारसे स्ट्रेचरमे लेलीया ओर अंदरकी ओर दौड पडे.. तो पीछे नीर्मला मंजु भावनाभी फटाफट उनके पीछे जाने लगी.. सृतीभी कार पार्क करके अंदर आगइ.. ओर सीधेही डोक्टरके पास चली गइ.. क्युकी उनकी इस डोक्टरके साथ अच्छी खासी पहेचान थी..

राजीवको आइ.सी.यु.मे लेजाकर फटाफट ओक्सीजन मास्क लगा दीया.. ओर उनकी ट्रीटमेन्ट सुरु होगइ.. तो आधेही घंटेके बाद देवायतभी तेजीसे सीधाही होस्पीटलपे आगया.. ओर अंदर चला गया.. तो अंदर सब लोग गुमसुम आंसु बहाते बैठे थे.. तभी देवायतको अंदर आते देखते ही नीर्मला उनके पास दौड पडी ओर उनसे लीपटर फुटफुटके रोने लगी.. तो मंजु ओर भावनाभी देवायतसे लीपटके आंसु बहाने लगी.. सबको पताथा की क्या होने वाला हे.. फीरभी अ‍ेक आशामे थे..

नीर्मला : (आंसु बहाते) देवु.. मेरा राजीव.. उसे कुछ होगातो नही..? हे भगवान.. बचालो उसे..

मंजुला : (नीर्मलाको सम्हालते) मोम.. पापाको कुछ नही होगा.. आप अ‍ैसे रोइअ‍े मत.. वो आपको बहुत प्यार करते हे.. वो आपको अ‍ैसे रोते नही देख सकते.. चुप होजाइअ‍े..

भावना : (रोते हुअ‍े) हां मम्मी.. पापा हमे बहुत प्यार करते हे.. मत रोइअ‍े..

कहातो नीर्मलाने फटाफट अपने आंसु पोछ दीये.. ओर देवायतका हाथ पकडकर उसे आइ.सी.यु.की ओर लेगइ.. लेकीन उसे अ‍ेक नर्सने ट्रीटमेन्ट चालु हे.. कहेकर वही रोक लीया.. ओर वो फटाफट चली गइ.. तीनो काचकी विन्डोसे अंदर जाकते देखने लगे तो अंदर सृती ओर डोक्टर राजीवके सीनेपे हाथसे पंपींग कर रहेथे.. तब देवायत सीचुअ‍ेशनकी गंभीरता समज गयाकी अभी राजीवका हार्ट बंध हे.. ओर वो तीनोको लेकर अ‍ेक बेंचपे बैठ गया..

तो कुछही देरके बाद भानु ओर सरलाभी आगये तो पीछे धिरेनभी अपनी बाइक लेकर जल्दी जल्दी होस्पीटल पहोंच गया.. तो नीर्मला धिरेनको गले लगाकर आंसु बहाने लगी.. तो घरपे चंदा पुनम ओर भुमीका तीनो बच्चोको सम्हालके बैठीथी.. तब चंदाभी रुक रुक कर आंसु बहाती रही.. सृती ओर डोक्टरकी आधे घंटेकी महेनत रंग लाइ.. उसने पंपींगसे राजीवके हार्टको अ‍ेक्टीव करदीया था.. ओर अभी राजीवकी तबीयत अ‍ैसेही स्टील पोजीसनमे रुक गइ..

सृती : (बहार आतेही) देवु.. आगये आप.. अभी अंकलकी तबीयत बीगडनेसे रुक गइ हे.. उसे ओर आरामकी जरुरत हे.. अगर जरुरत हुइ तो हमे उनका अ‍ेम.आइ.आर. करना पडेगा..

नीर्मला : (जटसे) सृती बेटा.. क्या तेरे अंकलकी तबीयत तो ठीक हेनां..? उसे कुछ हुआतो नही..?

सृती : (मुस्कुराते) अरे नही मौसी अंकलको कुछभी नही हुआ.. बस थोडीसी कमजोरी लग रही हे.. अभी होसमे आजायेगे.. (देवायतका हाथ पकडते) देवु.. आप चलीये मेरे साथ.. हमे डोक्टरने बुलाया हे.. आप लोग सब यही बैठीये हम अभी उसे मीलकर आते हे.. चलो देवु..

कहातो मंजु सृतीकी ओर देखती रही.. ओर नीर्मलाको लेकर वापस बेंचपे बैठ गइ.. तभी सृती देवायतको लेकर डोक्टरकी चेम्बरमे चली गइ.. तो वहा डोक्टरने मुस्कुराते देवायतसे हाथ मीलाया.. ओर दोनोको सामनेकी चेयरपे बैठनेके लीये कहा.. तो सृती ओर देवाफत डोक्टरकी ओर देखने लगे.. तभी..

डोक्टर : (मुस्कुराते) कहो मी. देवायतजी कैसे हो..? आखीर आपको आनाही पडा.. यही हेना आपकी वाइफ डो. सृतीजी.. इन्होने आपके ससुरको बचानेकी बहुत महेनतकी..

सृती : (सरमाकर मुस्कुराते) सर.. लेकीन उनको ये सब अचानक कैसे हुआ..? कलतो अच्छे भले थे.. अ‍ैसा होनेका कुछतो रीजन होगा..

डोक्टर : (मुस्कुराते) मी. देवायतजी.. लगता हे आपके ससुर कुछ ज्यादाही रंगीन मीजाजके लगते हे.. मुजे जीस बातका डर था वोही हुआ.. सृतीजी.. लास्ट टाइम ये दोनो चेकअप के लीये आयेथे.. तबही मेने उसे मना कीयाथा की इस चीजसे दुर रहेना.. लगता हे ज्यादा इन्टरकोर्स की वजहसे ये सब हुआ हे.. जीस चीजके लीये मैने सख्त मना कीयाथा.. वोही सब इन्होने कीया हे.. आपतो जानती हे इस केसमे इनके लीये कीतना जोखीम हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. मतलब उसने मेरी सासको जुठ बोला होगा.. कोइ बात नही.. अब इसमे क्या हो सकता हे..? क्या कुछ रीकवरीकी गुंजाइस हे..? तो कहीये हम इसके लीये सबकुछ करनेको तैयार हे..

सृती : (धीरेसे) देवु.. सोरी.. मेने बहार थोडासा जुठ बोला हे.. अंकल बहुत ही सीरीयस हे.. हमने उनका हार्ट तो पंपींग करके चालु करदीया हे.. लेकीन उतनी रीधींग नही आ रही जीतनी हमे चहीये.. ओर वो भी धीरे धीरे कम होती जा रही हे.. आप समज गयेनां.. हमे सबको सम्हालना होगा..

देवायत : (आंखसे आंसु टपक गये) सृती.. हमारे पास कीतना वक्त हे.. बता मुजे..

डोक्टर : (थोडी सीरीयस होते) देवायतजी.. सायद दो से ढाइ घंटे.. आपको जीसे बुलाना हो बुला लीजीये..

देवायत : (अपने आंसु पोछते) सर.. बस.. आपसे अ‍ेक रीक्वेस्ट हे.. बहार कीसीको कुछभी मत कहेना.. हम सब उनके आखरी वक्तमे उनके पास रहेना चाहते हे.. हो सकेतो हमे अलग रुम दे दीजीये..

डोक्टर : (मुस्कुराते) अरे अलग रुममे क्यु.. सबलोग वही चले जाओ.. अभी वहा कोइ ओर पेशन्ट नही हे..

देवायत : (हाथ मीलाते खडे होते) सर.. थेन्क्यु वेरी मच..

इधर देवायत सृती डोक्टरसे बाते कर रहेथे.. तब मंजु अपनी शक्तिओके माध्यमसे अंदरकी सब बाते सुन रहीथी.. ओर तीनोकी बाते सुनतेही उनकी आंखसे आंसु बहेने लगे.. तो वो जटसे अपने आंसु पोछते बहार नीकल गइ.. वरना उनकी मम्मी देखलेती तो सबकुछ समज जाती.. ओर मंजु दुर जाकर अ‍ेक पेडके पीछे जाकर रोने लगी.. लेकीन मंजुको पता नही थाकी भावनाने उसे देखलीया हे.. तो वोभी धीरेसे मंजुके पीछे चली गइ..

बहार जाकर देखातो मंजु दुर अ‍ेक पेडके पीछे खडी रहेके रो रहीथी.. तभी मंजुको अपने कंधेपे कीसीका हाथ रखते महेसुस हुआ.. तो मंजुने रोते हुअ‍े जटसे पीछेकी ओर देखा तो पीछे भावना आंसु बहाते उनको देख रहीथी.. तो मंजु जटसे पलट गइ.. ओर भावनाको गले लगाकर रोने लगी.. तो भावनाभी सबकुछ समज गइ.. उसे पताथा की मंजुको सबकुछ पता चल जाता हे तो भावनाभी रोने लगी.. ओर रोते रोते..

भावना : (आंसु बहाते) दीदी.. क्या हुआ..? आपकोतो सब पता चल जाता हे.. बताइअ‍ेनां..

मंजुला : (रोते धीरेसे) भावु.. पापा हमे छोडके जा रहे हे.. तु अंदर कीसीको मत बताना.. वरना मोम टुट जायेगी.. अब हमारे साथ वो सीर्फ दो ढाइ घंटे ही हे.. तुम हिमंत रखना मे तेरे साथ हु.. चल अंदर..

कहेते दोनोही अंदर जानेके लीये मुडती हे तो पीछे देवायत खडा उनकी बाते सुन रहाथा.. तो दोनोही देवायतके गले लग गइ.. ओर फुटफुटके रोने लगी.. तीनोही बहुत दुर खडे थे तो कीसीको उनकी आवाज अंदर नही सुनाइ दे रहीथी.. देवायतने दोनोको कसके अपने गले लगा लीया.. ओर खुदभी आंसु बहाने लगा.. फीर कुछ देरके बाद देवाफतने दोनोको सांत कीया.. ओर अंदर अ‍ेकभी आंसु ना बहानेकी सुचना देदी..

फीर तीनोही अपना चहेरा साफ करके अंदर आगये.. तो देवायतने भानुको बहार बुलाकर घरसे भुमीका चंदा ओर पुनमको लेआनेकी बात करली.. ओर उसे अपनी कारकी चाबी देदी तो भानु कार लेकर तीनोको लेने राजीवके घरपे चला गया.. तो देवायत सबको लेकर आइ.सी.यु. मे आगया.. सबलोग राजीवकी ओर देखने लगे.. नीर्मला राजीवके सरके पास उनके हाथको थामकर बैठ गइ.. ओर प्यारसे उनको देखती रही..
 
तभी इस वक्त गांवमे मुना ओर बरखा अपनी सुहागरात मनाकर सुबह देर तक अपने रुममे सोते रहे.. मुनाने कल पुरी रात कामोतेजक गोली खाकर बरखाको जबरदस्त तरीकेसे अलग अलग पोजीसनमे चार बार चोद लीयाथा.. बरखाका अ‍ेक अ‍ेक अंग मुनाने तोडके रख दीयाथा.. ओर जब मुनाने चोथी बार बरखाकी चुदाइकी तब वो लगभग बेहोसीकी हालतमे चली गइथी.. ओर अभी भी गहेरी नींद सो रहीथी..

तो यही हाल श्रीधरके घरभी था.. सब लोग कंपलीट होकर होलमे बैठकर चाइ नास्ता कर रहेथे तबभी श्रीधर ओर जयश्री अपने रुममे गहेरी नींद सो रहेथे.. कल पुरी रात श्रीधर जयश्रीकी चुतको बजाता रहा.. जीसे जयश्रीकी हालतभी पतली हो चुकीथी.. उनको भी समजमे नही आयाकी आज श्रीघरको इतना जोस कहासे आगया.. श्रीधरने जयश्रीका अ‍ेक अ‍ेक अंग तोडके रख दीया था.. तभी बहार वृन्दाने बातको छेडदी.. जब चारो अ‍ेकठे बैठेकर चाइ नास्ता कर रहेथे..

वृन्दा : (नास्ता करते अपने पती जवेरीलालको) सुनीये जी.. अब आप जीतनी जल्दी हो सके इन दोनोका जोभी कुछ करना हे कर दीजीये.. उनकी सादी करनी हेतो सादीका फटाफट नीपटारा करलो.. अब मुजे यहा दोनोने कीसीको मुह दीखाने लायकभी नही छोडा..

जवेरीलाल : (थोडा गुस्सा होते) तुम बार बार क्यु अ‍ेकही रट लगाये बेठी हो..? जो होना था सब होगया.. हम सबने उन दोनोकी सादीको भी अ‍ेक्सेप्ट करलीया हे.. तो फीर अब तुजे क्या प्रोबलेम हे..? कान खोलकर सुनले.. अब ये दोनो यही रहेगे.. हमारे पास.. समजी..

कहातो वृन्दा गुस्सा करके चाइ नास्ता छोडकर अपने रुममे चली गइ.. तब ब्रीन्दा मनही मन मुस्कुरा रहीथी.. क्युकी उनको पताथाकी ये सब उनकी बहेन अपने प्लानके मुताबीक कर रही हे.. वो सांतीसे बैठकर मुस्कुराते चाइ नास्ता करती रही.. जसे कुछ हुआही नही.. तब जवेरीलालभी परेसान होकर खडे होगये.. ओर वृन्दाके पास उनको मनानेके लीये उनके पीछे चले गये.. तब टेबलपे सीर्फ जीतुलाल ओर ब्रीन्दाही बैठे थे.. तभी..

जीतुलाला : (धीरेसे) ब्रीन्दा.. अब हमारे बच्चोकी सादीभी होगइ हे.. तो अब तुजे नही लगता हम दोनोको अब फीरसे मील जाना चाहीये..? कबतक मुजसे दुर रहेगी..? अ‍ैसेतो ना तुम सुखी रेह सकती हो ना मे..

ब्रीन्दा : (कातील मुस्कुराते) क्यु..? तेरे पास तो तेरी भाभी हेनां.. वो तुजे सुख तो देती हे जो तुजे चाहीये.. तो फीर मेरे पीछे क्यु पडा हे..? मेतो अ‍ैसेही बहुत खुस हु.. अबतो तुम मुजे भुल ही जाओ.. इस तनको छुनेका अधीकार तुम चार साल पहेलेही खो चुके हो.. जब मुजे तुम दोनोके बारेमे पता चला.. मुजे अब तुमसे कोइ रीस्ता नही रखना.. येतो श्रीधर बडा होगया हे इसीलीये मे यहा पडी हु.. वरना मेतो तुजे कबसे छोडकर चली गइ होती..

जीतुलाल : (थोडा परेसानीमे) ठीक हे.. तो फीर मुजे छोड क्यु नही देती..? देदो मुजे डीवोर्स..

ब्रीन्दा : (मुस्कुराते) मे तुजे क्यु डीवोर्स दु..? मे कहा तुजे छोडनेकी बात कर रही हु..? अगर जाना होतातो तबही चली गइ होती.. तुम्हे मुजे छोडना हे तो तुम मुजे डीवोर्स देदो.. मे साइन कर दुगी.. बस.. मुजे मेरे लीये कुछ नही चाहीये.. लेकीन मे मेरे श्रीधरका हक कभी नही छोडुगी.. ना इस घरपे ना हमारे बीझनेसमे.. इसके लीये मुजे जोभी करना पडे मे सब करुगी.. याद रखीयो..

कहेते ब्रीन्दा टेबलपे हाथ मारते वहासे खडी होगइ.. ओर अपने रुममे चली गइ.. तब जीतुलाल उसे मुह फाडकर देखता ही रेह गया.. क्युकी जीतुलालको ब्रीन्दासे अ‍ैसी बातोकी उमीद नही थी.. कल रातसे ही ब्रीन्दाने इन दोनोकी बात छतपे सुनली थी.. तबसेही वो मानसीक तौरपे इस बातके लीये पहेलेसे ही प्रीपेर होगइ थी.. ओर आज उसने जीतुलाल ओर उनकी बहेन वृन्दा अपने प्लानको आगे बढाये.. उनसे पहेलेही ब्रीन्दाने उन दोनोकी बातपे जोरोसे हथोडा मार दीया..
 
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