- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 33,357
पुनम : (हसते) हां तो भाभी.. अब आपको क्या कहु..? भाभी कहु या दीदी.. हें..हें..हें..
सृती : (सरमाकर हसते) नही.. अब दीदी ही ठीक हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. तुम दोनो ही बहुत कमीनी हो.. आप मुजे पहेले भी सब बता सकती थी.. आप भी तो मेरे बारेमे सबकुछ जानती थी..
पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. मे सब जानती जरुर हु.. लेकीन मंजुदीदीसे पुछे बगैर आपको कैसे बताती..? इन्होने मुजे मना कीया था.. हें..हें..हें..
सृती : (हसते) दीदी.. यहा तो अब सब अपनी बहेने ही हे.. तो मम्मी ओर हमारे बापुके बारेमे बता दीजीयेनां.. वैसे भी इन सबसे क्या छुपाना.. सब अपने ही हे..
पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. रहेने दीजीये.. क्युकी कुछ बाते अैसी हे जो आपको अच्छी ना लगे.. अगर जानना हे तो दोनो हमारे पीछे जो गार्डन हे वहा चली जाओ.. ओर आरामसे बैठकर बात करो.. तबतक डीनर भी बन जायेगा.. क्युकी अभी बहुत टाइम हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती पुनो सही केह रही हे.. वैसे भी पुनो भी सब कुछ जानती हे.. तो तुम इनके साथ क्यु नही चली जाती..? तेरी पकी सहेली जो हे.. हें..हें..हें.. जा पुनो.. तुम दोनो आरामसे बात करो..
पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. आप ही जाओ हम तो हमारी नइ भाभीका बेड सजा रहे थे.. ये तो सृतीदीदी की रोनेकी आवाज सुनकर हम यहा चली आइ.. चलो भावनादीदी हम हमारा काम करते हे.. इन दोनोको बतीयाने दो.. हें..हें..हें..
सृती : (हसते पीठमे मुका मारते) अरे..? दीदी तो गांवकी भासा भी बोलने लगी.. हें..हें..हें..
फीर पुनम भावना ओर दया वहासे हसते हुअे खडी होगइ.. ओर वापस रुममे चली गइ.. ओर देवु ओर दयाके लीये बेडको सजाने लगी.. तब मंजु ओर सृती धीरे धीरे बात करते बहारकी ओर जाने लगी.. तो सृतीको अपने बारेमे जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ..
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे चलते) हां दीदी.. अब बताइअे.. मुजे मम्मी ओर हमारे ससुरकी पुरी कहानी जाननी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सुन.. तेरे मम्मी पापा हमारे बापु मेरी मम्मी भानुभाइके पीता.. सबलोग आपसमे अच्छे दोस्त थे.. ओर अेक साथ कोलेनमे पढते थे.. तेरी मम्मी हमारे बापुको पसंद करती थी.. बापुका नाम किशन था.. लेकीन वो अपने दिलकी बात कहे इनसे पहेले ही मेरी मम्मी ओर हमारे बापु अेक दुसरेको प्यार करने लगे थे.. ओर दोनोके बीच जीस्मानी रीस्ता भी कायम होगया था..
सृती : (हसते) मंजु लगता हे हमारे बापु बहुत रंगीन मीजाजके ओर ठरकी थे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (थोडी सीरीयस होते) नही सृती.. ये सब गलत हे.. बहुत अैसे रीस्ते थे.. जो उनको मजबुरीमे उनके साथ रीलेशन बनाना पडा.. इनमे सीर्फ हमारे बापुका दोस नही हे.. ओर जो भी रीलेशन था.. सब अेक दुसरेकी सहमतीसे था.. मम्मी ओर बापुके बीच सबकुछ अच्छा चल रहा था.. ओर अेक दिन हमारी दादी आश्रमसे अेक लडकीको लेकर आगइ.. विमला नाम था उनका.. बस.. फीर सबकुछ बीखर गया..
सृती : (आस्चर्यसे देखते) लडकी..? विमला..? कौन थी वो..? कही हमारी सांस तो नही..?
मंजुला : हां सृती.. वो कोइ ओर नही.. हमारी सगी बुआ ओर हमारी सांस ही थी.. हमारे बापुकी छोटी बहेन.. जो कीसी श्रापकी वजहसे हमारे दादी दादाने उसे आश्रमपे छोडा था.. लेकीन जब गलत फहेमी दुर हुइ तो दादी उनको वापस हवेलीपे लेकर आइ.. ओर तबतक वो भी जवान हो चुकी थी.. ओर गांवके डरकी वजहसे कीसीको केह भी नही पाये की ये लडकी मेरी ओलाद हे.. सबको यही कहा.. की ये अनाथ थी तो हमने गोद लेली..
सृती : (आस्चर्यसे) क्या वो सचमे हमारी सगी बुआ थी..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. लेकीन वो बहुत ही सातीर थी.. उनको पता थाकी बापु उनके सगे भाइ हे.. फीर भी उसने ये बात बापुसे छीपाइ.. क्युकी वो भी बापुसे प्यार करने लगी थी.. ओर बापुको अपने प्रेम जालमे फसाकर हर रात उनसे अपने तनकी आग बुजाने लगी.. ओर बापुको मेरी मम्मीसे अलग करदीया.. लेकीन तबतक तो मम्मी भी बापुसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर अपनी प्यास बुजाते बुजाते वो खुद भी प्रेगनेन्ट हो चुकी थी..
फीर मंजुने सृतीको विमला किशन ओर नीर्मलाकी पुरी कहानी सुनाइ.. की कीस तराह विमलाने साजीस करके नीर्मलाको किशनसे दुर करदीया ओर किशनसे सादी करली.. फीर सृतीने खानदानके श्रापके बारेम भी बता दीया.. की कीस तराह श्रापका नीवारण हुआ.. ओर देवायतके बाद लखन ओर पुनमका जन्म हुआ.. सृतीने देवायतके खानदानके बारेमे सबकुछ सृतीको बता दीया..
सृती : (हसते गार्डनमे आते) मंजु.. ये तो बडी दिलचस्प कहानी हे.. अब समजी.. इस खानदानके सभी मर्द अपनी बहेनसे ही क्यु सादी करते हे.. इनमे मेरी मम्मी भी बाकात नही रही.. सृती.. मेरी मम्मीके बारेमे बताओनां.. चल यही बैठते हे..
मंजुला : (मुस्कुराते बैठते) हां सुन.. जब भुमी आंटीको पता चलाकी बापु मेरी मम्मीको प्यार करते हे.. तब भुमी आंटीका दिल टुट गया.. ओर उपरसे तेरी मम्मीके साथ वो विरजी अंकलका हादसा हो गया.. फीर तेरे मम्मी पापाने आपसमे सादी करली.. ओर सादी करके सभी दोस्तोके साथ अपना रीस्ता खतम करलीया.. सीर्फ बापुके साथ ही रीस्ता रखा.. क्युकी बापु उनको अपनी बहेन मानते थे ओर हर साल उनको सहेर जाकर राखी बंधवाते थे..
सृती : (हसते) मंजुदी.. अगर बापु मेरी मम्मीको सचमे बहेन मानते थे.. थो फीर बापुने उनके साथ रीलेशन क्यु बनाया..? क्या वो जवानीमे इतनी खुबसुरत थी..? हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) खुबसुरत..? अरे कमीनी वो दोनो सहेलीतो कीसी हीरोइनसे कम नही थी.. ओर खुबसुरत तो वो दोनो अभी भी हे.. मेरी मम्मी भी कुछ कम नही हे.. देखा नही.. दोनो कैसे पटाका लग रही हे..? सुन.. रीलेशन बापुने नही.. भुमी आंटीने बनाया था.. तेरे पापा सेक्स ओर संतुस्ट करनेमे तो सक्षम थे..
दोनोकी सेक्स लाइफ बहुत अच्छी थी.. मगर तेरे पापाके स्पम मे उतने काउन्ट नही थे.. की वो भुमी आंटीको प्रेगनेन्ट कर सके.. इस बारेमे तो अच्छी तराह जानती हेनां..? दोनोने कइ जगह अपना इलाज भी करवाया.. मगर फीर भी भुमी आंटी प्रेगनेन्ट नही हो पाइ..
सृती : (सामने देखते) अच्छा.. अब समजी.. इसीलीये दोनो रीलेशनमे आये..
मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. तेरे मम्मी पापा दोनो सहेरमे रहेते थे.. तब सीर्फ बापुही जानते थे की दोनो कहा रहेते हे.. उन्होने सीर्फ बापुके साथ ही रीस्ता रखा था.. बापु दोनोकी तकलीफके बारेमे जानते थे.. इसीलीये दोनोको अेक दिन हमारे आश्रमपे लेकर गये.. ओर बापुने बाबाको दोनोकी तकलीफके बारेमे बात की..
जब बापु ओर तेरे पापा वही इधर उधर धुम रहेथे तब भुमी आंटीने मोका देखकर बाबाको अपनी तकलीफके बारेमे पुछा.. तब बाबाने उसे तेरे पापासे संतान नही होनेकी बात कही.. ओर उसे ये भी कहा.. की तेरे नसीबमे संतान हे.. मगर तेरे पतीसे नही हमारे बापुसे..
सृती : (आस्चर्यसे) क्या..? ये बात खुद बाबाने कही..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. पहेले तो तेरी मम्मीने मना कर दीया.. लेकीन बादमे उसने अपना मन बदल दिया.. क्युकी अेक जमानेमे प्यार जो करती थी उनसे.. ओर धीरे धीरे करते भुमी आंटीका पुराना प्यार जाग उठा.. ओर अेक दिन उसने राखीके तोहफेके बदले बापुसे संतान सुख मांग लीया.. तो बापु उनपे बहुत गुस्से हो गये.. ओर उन्होने भुमी आंटीको मना करदीया..
सृती : (हसते) कमीनी तुमतो बडा सस्पेन्स रखती हो.. बताना तो फीर मेरा जन्म कैसे हुआ..?
मंजुला : (हसते) सुन.. जीस तराह बापु आंटीको राखी बांधने आते थे उसी तराह तेरे पापा भी अपने गांव अपनी बहेनको राखी बांधने जाते थे.. उनका गांव दुसरे राज्यमे था.. तो उनको आने जानेमे ओर वहा रुकनेमे अेक हप्ता लग जाता था.. तो उनको राखीके तीन दिन पहेले ही नीकलना होता था.. तो अेक दिन तेरे पापा गांव चले गये.. तब उनके जाते ही भुमी आंटी बापुको लेकर आश्रमपे चली गइ..
सृती : (हसते) क्यु..?
मंजुला : (हसते) क्युकी बाबा हमारे बापुको समजा सके.. क्युकी बापु उनको बच्चा देनेके लीये मान नही रहे थे.. तब बाबाने बापुको समजाया.. तो बापुने कहा ये मेरी बहेन हे.. तब बाबा भी थोडा गुस्से होगये.. ओर बापुको कहा.. की तुमने तेरी सगी बहेनसे तो सादी करली.. तो फीर येतो मुह बोली बहेन हे.. फीर भी तुजे बुरा लगता हे तो चल.. मे तुम दोनोकी सादी करवादु.. ओर बाबाने वहा दोनोकी गांधर्व सादी करवादी..
सृती : (सरमाकर हसते) नही.. अब दीदी ही ठीक हे.. हें..हें..हें.. दीदी.. तुम दोनो ही बहुत कमीनी हो.. आप मुजे पहेले भी सब बता सकती थी.. आप भी तो मेरे बारेमे सबकुछ जानती थी..
पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. मे सब जानती जरुर हु.. लेकीन मंजुदीदीसे पुछे बगैर आपको कैसे बताती..? इन्होने मुजे मना कीया था.. हें..हें..हें..
सृती : (हसते) दीदी.. यहा तो अब सब अपनी बहेने ही हे.. तो मम्मी ओर हमारे बापुके बारेमे बता दीजीयेनां.. वैसे भी इन सबसे क्या छुपाना.. सब अपने ही हे..
पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. रहेने दीजीये.. क्युकी कुछ बाते अैसी हे जो आपको अच्छी ना लगे.. अगर जानना हे तो दोनो हमारे पीछे जो गार्डन हे वहा चली जाओ.. ओर आरामसे बैठकर बात करो.. तबतक डीनर भी बन जायेगा.. क्युकी अभी बहुत टाइम हे..
मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती पुनो सही केह रही हे.. वैसे भी पुनो भी सब कुछ जानती हे.. तो तुम इनके साथ क्यु नही चली जाती..? तेरी पकी सहेली जो हे.. हें..हें..हें.. जा पुनो.. तुम दोनो आरामसे बात करो..
पुनम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. आप ही जाओ हम तो हमारी नइ भाभीका बेड सजा रहे थे.. ये तो सृतीदीदी की रोनेकी आवाज सुनकर हम यहा चली आइ.. चलो भावनादीदी हम हमारा काम करते हे.. इन दोनोको बतीयाने दो.. हें..हें..हें..
सृती : (हसते पीठमे मुका मारते) अरे..? दीदी तो गांवकी भासा भी बोलने लगी.. हें..हें..हें..
फीर पुनम भावना ओर दया वहासे हसते हुअे खडी होगइ.. ओर वापस रुममे चली गइ.. ओर देवु ओर दयाके लीये बेडको सजाने लगी.. तब मंजु ओर सृती धीरे धीरे बात करते बहारकी ओर जाने लगी.. तो सृतीको अपने बारेमे जाननेकी उत्सुक्ता बढ गइ..
सृती : (मुस्कुराते धीरेसे चलते) हां दीदी.. अब बताइअे.. मुजे मम्मी ओर हमारे ससुरकी पुरी कहानी जाननी हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सुन.. तेरे मम्मी पापा हमारे बापु मेरी मम्मी भानुभाइके पीता.. सबलोग आपसमे अच्छे दोस्त थे.. ओर अेक साथ कोलेनमे पढते थे.. तेरी मम्मी हमारे बापुको पसंद करती थी.. बापुका नाम किशन था.. लेकीन वो अपने दिलकी बात कहे इनसे पहेले ही मेरी मम्मी ओर हमारे बापु अेक दुसरेको प्यार करने लगे थे.. ओर दोनोके बीच जीस्मानी रीस्ता भी कायम होगया था..
सृती : (हसते) मंजु लगता हे हमारे बापु बहुत रंगीन मीजाजके ओर ठरकी थे.. हें..हें..हें..
मंजुला : (थोडी सीरीयस होते) नही सृती.. ये सब गलत हे.. बहुत अैसे रीस्ते थे.. जो उनको मजबुरीमे उनके साथ रीलेशन बनाना पडा.. इनमे सीर्फ हमारे बापुका दोस नही हे.. ओर जो भी रीलेशन था.. सब अेक दुसरेकी सहमतीसे था.. मम्मी ओर बापुके बीच सबकुछ अच्छा चल रहा था.. ओर अेक दिन हमारी दादी आश्रमसे अेक लडकीको लेकर आगइ.. विमला नाम था उनका.. बस.. फीर सबकुछ बीखर गया..
सृती : (आस्चर्यसे देखते) लडकी..? विमला..? कौन थी वो..? कही हमारी सांस तो नही..?
मंजुला : हां सृती.. वो कोइ ओर नही.. हमारी सगी बुआ ओर हमारी सांस ही थी.. हमारे बापुकी छोटी बहेन.. जो कीसी श्रापकी वजहसे हमारे दादी दादाने उसे आश्रमपे छोडा था.. लेकीन जब गलत फहेमी दुर हुइ तो दादी उनको वापस हवेलीपे लेकर आइ.. ओर तबतक वो भी जवान हो चुकी थी.. ओर गांवके डरकी वजहसे कीसीको केह भी नही पाये की ये लडकी मेरी ओलाद हे.. सबको यही कहा.. की ये अनाथ थी तो हमने गोद लेली..
सृती : (आस्चर्यसे) क्या वो सचमे हमारी सगी बुआ थी..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. लेकीन वो बहुत ही सातीर थी.. उनको पता थाकी बापु उनके सगे भाइ हे.. फीर भी उसने ये बात बापुसे छीपाइ.. क्युकी वो भी बापुसे प्यार करने लगी थी.. ओर बापुको अपने प्रेम जालमे फसाकर हर रात उनसे अपने तनकी आग बुजाने लगी.. ओर बापुको मेरी मम्मीसे अलग करदीया.. लेकीन तबतक तो मम्मी भी बापुसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर अपनी प्यास बुजाते बुजाते वो खुद भी प्रेगनेन्ट हो चुकी थी..
फीर मंजुने सृतीको विमला किशन ओर नीर्मलाकी पुरी कहानी सुनाइ.. की कीस तराह विमलाने साजीस करके नीर्मलाको किशनसे दुर करदीया ओर किशनसे सादी करली.. फीर सृतीने खानदानके श्रापके बारेम भी बता दीया.. की कीस तराह श्रापका नीवारण हुआ.. ओर देवायतके बाद लखन ओर पुनमका जन्म हुआ.. सृतीने देवायतके खानदानके बारेमे सबकुछ सृतीको बता दीया..
सृती : (हसते गार्डनमे आते) मंजु.. ये तो बडी दिलचस्प कहानी हे.. अब समजी.. इस खानदानके सभी मर्द अपनी बहेनसे ही क्यु सादी करते हे.. इनमे मेरी मम्मी भी बाकात नही रही.. सृती.. मेरी मम्मीके बारेमे बताओनां.. चल यही बैठते हे..
मंजुला : (मुस्कुराते बैठते) हां सुन.. जब भुमी आंटीको पता चलाकी बापु मेरी मम्मीको प्यार करते हे.. तब भुमी आंटीका दिल टुट गया.. ओर उपरसे तेरी मम्मीके साथ वो विरजी अंकलका हादसा हो गया.. फीर तेरे मम्मी पापाने आपसमे सादी करली.. ओर सादी करके सभी दोस्तोके साथ अपना रीस्ता खतम करलीया.. सीर्फ बापुके साथ ही रीस्ता रखा.. क्युकी बापु उनको अपनी बहेन मानते थे ओर हर साल उनको सहेर जाकर राखी बंधवाते थे..
सृती : (हसते) मंजुदी.. अगर बापु मेरी मम्मीको सचमे बहेन मानते थे.. थो फीर बापुने उनके साथ रीलेशन क्यु बनाया..? क्या वो जवानीमे इतनी खुबसुरत थी..? हें..हें..हें..
मंजुला : (हसते) खुबसुरत..? अरे कमीनी वो दोनो सहेलीतो कीसी हीरोइनसे कम नही थी.. ओर खुबसुरत तो वो दोनो अभी भी हे.. मेरी मम्मी भी कुछ कम नही हे.. देखा नही.. दोनो कैसे पटाका लग रही हे..? सुन.. रीलेशन बापुने नही.. भुमी आंटीने बनाया था.. तेरे पापा सेक्स ओर संतुस्ट करनेमे तो सक्षम थे..
दोनोकी सेक्स लाइफ बहुत अच्छी थी.. मगर तेरे पापाके स्पम मे उतने काउन्ट नही थे.. की वो भुमी आंटीको प्रेगनेन्ट कर सके.. इस बारेमे तो अच्छी तराह जानती हेनां..? दोनोने कइ जगह अपना इलाज भी करवाया.. मगर फीर भी भुमी आंटी प्रेगनेन्ट नही हो पाइ..
सृती : (सामने देखते) अच्छा.. अब समजी.. इसीलीये दोनो रीलेशनमे आये..
मंजुला : (मुस्कुराते) नही सृती.. तेरे मम्मी पापा दोनो सहेरमे रहेते थे.. तब सीर्फ बापुही जानते थे की दोनो कहा रहेते हे.. उन्होने सीर्फ बापुके साथ ही रीस्ता रखा था.. बापु दोनोकी तकलीफके बारेमे जानते थे.. इसीलीये दोनोको अेक दिन हमारे आश्रमपे लेकर गये.. ओर बापुने बाबाको दोनोकी तकलीफके बारेमे बात की..
जब बापु ओर तेरे पापा वही इधर उधर धुम रहेथे तब भुमी आंटीने मोका देखकर बाबाको अपनी तकलीफके बारेमे पुछा.. तब बाबाने उसे तेरे पापासे संतान नही होनेकी बात कही.. ओर उसे ये भी कहा.. की तेरे नसीबमे संतान हे.. मगर तेरे पतीसे नही हमारे बापुसे..
सृती : (आस्चर्यसे) क्या..? ये बात खुद बाबाने कही..?
मंजुला : (मुस्कुराते) हां सृती.. पहेले तो तेरी मम्मीने मना कर दीया.. लेकीन बादमे उसने अपना मन बदल दिया.. क्युकी अेक जमानेमे प्यार जो करती थी उनसे.. ओर धीरे धीरे करते भुमी आंटीका पुराना प्यार जाग उठा.. ओर अेक दिन उसने राखीके तोहफेके बदले बापुसे संतान सुख मांग लीया.. तो बापु उनपे बहुत गुस्से हो गये.. ओर उन्होने भुमी आंटीको मना करदीया..
सृती : (हसते) कमीनी तुमतो बडा सस्पेन्स रखती हो.. बताना तो फीर मेरा जन्म कैसे हुआ..?
मंजुला : (हसते) सुन.. जीस तराह बापु आंटीको राखी बांधने आते थे उसी तराह तेरे पापा भी अपने गांव अपनी बहेनको राखी बांधने जाते थे.. उनका गांव दुसरे राज्यमे था.. तो उनको आने जानेमे ओर वहा रुकनेमे अेक हप्ता लग जाता था.. तो उनको राखीके तीन दिन पहेले ही नीकलना होता था.. तो अेक दिन तेरे पापा गांव चले गये.. तब उनके जाते ही भुमी आंटी बापुको लेकर आश्रमपे चली गइ..
सृती : (हसते) क्यु..?
मंजुला : (हसते) क्युकी बाबा हमारे बापुको समजा सके.. क्युकी बापु उनको बच्चा देनेके लीये मान नही रहे थे.. तब बाबाने बापुको समजाया.. तो बापुने कहा ये मेरी बहेन हे.. तब बाबा भी थोडा गुस्से होगये.. ओर बापुको कहा.. की तुमने तेरी सगी बहेनसे तो सादी करली.. तो फीर येतो मुह बोली बहेन हे.. फीर भी तुजे बुरा लगता हे तो चल.. मे तुम दोनोकी सादी करवादु.. ओर बाबाने वहा दोनोकी गांधर्व सादी करवादी..













