Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 85 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

तो इसी सहेरमे अ‍ेक खेल ओर होने लगा था.. आम तैरपे उमरकी वजहसे वृन्दा अपनी मांगमे सींदुर नही लगाती थी.. लेकीन जबसे जीतुलाल ओर वृन्दाने सादी करली थी.. तबसे वृन्दा हर दिन अपनी मांग भरने लगी थी.. उसने अपने गलेमे मंगलसुत्र भी पहेनके रखा था.. इस बदलावको देखकर जवेरीलालको भी कुछ अजीब लगता था.. लेकीन इस बारेमे वो वृन्दासे कुछ केह नही पाये..

वृन्दा अब हर दिन जवेरीलालको खानेमे नींदकी गोलीया खीलाकर उनको सुला देती.. ओर जवेरीलालके सोनेके बाद वो जीतुलालके कमरेमे चली जाती.. जीतुलाल भी वायाग्रा खाकर वृन्दाकी चुतमे खुब धमाके करता.. दोनो अ‍ेक मीया बीवीकी तराह खुलकर प्यार करते.. ओर वृन्दा वही जीतुलालसे चीपकके सो जाती.. ओर सुबह पांच बजे अपने कमरेमे चली जाती..

इस रात कभी ना थमने वाली रात थी.. लेकीन समय कीसीका इन्तजार नही करता.. ओर इस रातके बाद भी सुबह होगइ.. सबसे पहेले रजीया जाग गइ.. ओर वो कंपलीट होकर सृतीके कमरेमे चली गइ.. तो लखन ओर सृती.. दोनो नंगे अ‍ेक दुसरेसे चीपक कर सोये हुअ‍े थे.. जीसे देखकर रजीया मुस्कुराने लगी... रजीयाको पता था दोनो पुरी रात जागे होगे.. इसीलीये उन दोनोको सोने देना उचीत लगा..

ओर वो वापस दरवाजा हल्कासा बंध करके नीलमको जगाकर नीचे चली गइ.. जब नीलम कंपलीट होकर रुमसे बहार नीकली.. तो उनसे भी सृतीके रुममे देखे बीना रहा नही गया.. ओर वो भी वहासे गुजरते दरवाजा खोलकर जांकती हे.. तो लखन सृतीको नंगा सोये हुअ‍े देखकर सरमा गइ.. ओर मुस्कुराते नीचे जाकर रजीयाकी हेल्प करने लगती हे.. तो रजीया भी समज जातीहे की नीलु सब देखकर सरमा रही हे..

रजीया : (मस्ती करते) नीलु.. देखलीया सब..? देखले.. तेरी भी सुहागरात होगी तब तेरी भी अ‍ैसी हालत होगी.. हें..हें..हें..

नीलम : (सर्मसार होते) क्या दीदी..? आपभीनां.. जीजुको कहीये दरवाजा तो बंध करके सोये..

रजीया : (मुस्कुराते) अरे सोने दोनां.. वैसे भी यहा हम दोनोके सीवा हे भी कौन..? क्या तेरी अ‍ेक्जाम खतम हो गइ..?

नीलम : (मुस्कुराते) नही दीदी.. आज लास्ट पेपर हे.. फीर अ‍ेक हप्तेकी छुटी.. दीदी.. सबलोग प्रवासमे जा रहे हे.. तो मे जाउ..?

रजीया : (मुस्कुाते) ना बाबा ना.. ये सब तेरे जीजुसे पुछले.. अगर वो परमीशन देते हेतो चली जाना.. वैसे भी धिरेनकी वजहसे अभी तक सबलोग तुमसे नाराज हे.. तो हम रीस्क नही लेगे.. क्या वो कमीना अभी भी वहा आता हे..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे जुठ बोलते) हां दीदी.. कभी कभार.. लेकीन मुजपे यकीन कीजीये.. मे उनको नही मीलती.. ये बात जीजुको भी पता हे..

रजीया : (मुस्कुराते) हंम.. चल ठीक हे.. तु कहेती हेतो मान लेती हु.. देख नीलु.. तेरे मम्मी पापाने हमपे भरोसा करके तुजे यहा पढनेके लीये भेजा हे.. तो कमसे कम हमारा भरोसा मत तोडना.. वो कमीना बहुत नीच हे.. वहा उनके गांवमे घरके पास भी उनका कोइ ओरतसे चकर हे.. कमीनेसे होता तो कुछ नही फीर भी साला बहुत ठरकी हे.. कीतनी बार मीले हो तुम दोनो..?

नीलम : (सर्मसार होते धीरेसे) दीदी.. प्लीज.. कीसीसे कहीयेगा नही.. अभी तक तीनसे चार बार मीले हे..

रजीया : (मुस्कुराते धीरेसे सामने देखते) तीनसे चार बार..? नीलु.. सच बताना.. क्या वो तुजे संतुस्ट कर पाता हे..?

नीलम : (सरमाकर नामे गरदन हीलाते) नही दीदी.. अच्छा कीया पुनो दीदीने उसे छोड दीया.. क्या वो भी जीजुसे सादी कर रही हेनां..?

रजीया : (मुस्कुराते) हंम.. तुजे तो पता हे इस घरमे सभीने अपनी बहेनसे ही सादी कीहे..

नीलम : (थोडी नीरास होते) दीदी.. कीतना अच्छा हेनां..? कास मेरा भी कोइ इतना बडा भाइ होता.. तो मे भी उनसे सादी कर लेती.. मेरी लता दीदी कीतनी लकी हे..

रजीया : (मुस्कुराते) तु फीकर मत कर.. तेरे जीजु तेरे लीये कोइ अच्छा लडका ढुंढ लेगे.. तब तु उनको अपना भाइ मानलेना.. हें..हें..हें.. सुन.. हमारे घरकी बात कही बहार मत करना.. समजी..?

नीलम : (सरमाकर हसते) क्या दी आपभी.. मुजे सब पता हे.. मे कभी नही करती.. दीदी.. जीजुको जगाना नही हे क्या..? आज मेरा लास्ट पेपर हे..

रजीया : (मुस्कुराते) अरे दोनोको सोने दोना.. पुरी रात जागे होगे.. सुन.. आज तुम अकेली ही स्कुटर लेकर चली जाना.. मुजे नही लगता दोनो दस बजेसे पहेले जागेगे.. चाइ बन गइ हे अभी नास्ता बनाती हु.. तु करले.. फीर स्कुल जानेकी तैयारीया करले.. आज पेपर हेनां..?

फीर रजीया नीलमको चाइ नास्ता करवाके स्कुल भेज देती हे.. तो दुसरी ओर गांवमे भी बंसी ओर जागृती देर तक अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सोते रहे.. उधर सांतीने भी उन दोनोको देर तक सोने दीया.. ओर घरका काम समेटने लगी.. फीर नहा धोकर वो गांवके मंदिर चली गइ.. तो वहा उनको जयश्री ओर बरखा भी मील गइ.. तीनो दर्शन करके अ‍ेक जगाहपे बैठ गइ तो सांतीने उन दोनोको बंसी ओर जागृतीके मीलनकी बात बतादी.. जीसे सुनक दोनो खुस होगइ..
 
जयश्री : (खुस होते हसते) अच्छा..? चलो अच्छा हुआ.. कमीनी कीतने दिनोसे नखरे कर रही थी.. आखीर मेरी देवरानी होगइ.. हें..हें..हें..

सांती : (हसते) देवरानी..? तेरी तो पकी सहेली हेनां..?

बरखा : (हसते) दीदी.. सहेली क्या ये दोनो तो बहेन हे..

जयश्री : (सरमाते हसते) हां बहेन तो हेही.. लेकीन अब देवरानी भी होगइ.. क्युकी कमीने सभी दोस्तो हम सबको भाभी ही कहेते बुलाते हे.. तो इस नाते तो बंसी भैया मेरे देवर हुअ‍े नां..? हें..हें..हें..

बरखा : (सरमाते हसते) हां दीदी.. ये बात तो जयश्रीकी सच हे.. सब हमे भाभी कहेकर ही बुलाते हे..

जयश्री : (मुस्कुराते) दीदी.. तब तो हो सके तो दोनोकी सादी भी जल्दी करवादो.. वरना कुछ दीनोमे हमे पता चलेगा की वोतो कुआंरी मां बनने वाली हे.. हें..हें..हें..

सांती : (मुस्कुराते) हां.. मे भी यही सोच रही हु.. सुनो.. मे ये सादी अ‍ेक दो दिनमे ही नीपटाना चाहती हु.. यहा तो पोसीबल नही हे.. कही बहार ओर मंदिरमे सादी करनी पडेगी.. वरना यहा खामखा इस्यु बन जायेगा..

बरखा : सही कहा आपने.. हमने भी आश्रमपे जाके सादी करली थी.. मे तो कहेती हु आप भी वही चले जाओ..

सांती : हां ये ठीक रहेगा.. हम कल ही वहा चलते हे.. सादी वही मंदिरमे करवा देगे.. ओर वहा सीर्फ हम लोग ही होगे.. क्युकी पापा चले गये हे.. तो अब कोइ ताम जाम नही करना..

जयश्री : (मुस्कुराते) हां दीदी.. ये आपने सही सोचा हे.. सुनो.. आपने पुनम दीदीके बारेमे कुछ सुना..?

सांती : (हसते धीरेसे) हां सुना.. बंसी केह रहेथे.. अब तो पुनम दीदीका डीवोर्स हो गया हे.. तो वो भी हमारे लखन भैयासे सादी कर रही हे..

जयश्री : (हसते धीरेसे) दीदी.. श्रीधर केह रहा था उनका पती साला थोडा नपुसंक जैसा हे.. कुछ कर ही नही पाता..

सांती : (हसते) तब तो अच्छा हे पुनम दीदीने उनको छोड दीया.. ओर लखन भैयासे सादी कर रही हे.. अब तो उसे भी पता चलेगा.. की असली मर्दसे पाला पडा हे.. हें..हें..हें..

बरखा : (मुहपे हाथ रखकर हसते धीरेसे) ओ बापरे.. जयश्रीकी सादीमे हमने देखा.. पेन्टमे की बीतना बडा दीख रहा था.. लगता हे वोतो अपनी बहेनकी हालत ही बीगाड देगा.. हें..हें..हें..

जयश्री : (हसते) क्या तुमने भी देख लीया था.. हें..हें..हें..

बरखा : (हसते धीरेसे) कमीनी.. सीर्फ मेने नही.. गांवकी सभी ओरतोने देखा हे.. सब की सब कमीनी वहीतो देख रही थी ओर इन्हीकी चर्चा कर रही थी..

सांती : (खडी होते हसते) अच्छा तुम दोनो चर्चा करो.. मुजे जाना हे.. अभी तक दोनो सोये पडे हे..

जयश्री : (सरमाके हसते धीरेसे) हां जाइअ‍े.. दोनोने पुरी रात महेनत जो की होगी.. तो अभी तक पडे होगे.. दोनोको कुछ खीलाइअ‍े पीलाये.. ताकी फीरसे ताकात आजाये हें..हें..हें.. बाय दीदी.. हम सामको आयेगे घरपे.. हमारी देवरानीकी तबीयत पुछने.. हें..हें..हें..

सांती : (हसते) हां आना.. बरखा.. तुम भी साथ आना.. ओर सुनो.. तुम दोनो अपने पतीको कहेना कल आश्रमपे जाना हे.. बाकी कीसीको पता ना चले.. चलो बाय..

जयश्री : (दोनो खडी होते चलते) बरखा.. देख तेरा पेट काफी बढने लगा हे.. ये बता.. तेरे घरकी कहानी कहा तक पहोंची..? क्युकी आज कल तेरी मम्मी मेरी सासुमांसे फोनपे बहुत बात करती हे.. लगता हे बात काफी आगे बढ चुकी हे..

बरखा : (मुस्कुराते साथ चलते धीरेसे) हां जयश्री.. तु सही केह रही हे.. तो अब पेटकी वजहसे मे भी कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. इसीलीये उन मां बेटेको अकेले मीलनेका मौका देती हु..

जयश्री : (हसते साथ चलते) अच्छा..? तो फीर दोनो मीलते हे..?

बरखा : (हसते धीरेसे सरमाते) मीलते हे..? अरे वोतो कमीने दोनो मौकेकी तलासमे ही रहेते हे.. दोनोके दोनो बहुत चुदकड हे.. अकेलेमे मीलनेका मौका मीला नही को दोनो अ‍ेक होजाते हे.. ओर उस्े लगता हेकी मुजे ये सब पता नही हे..

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) तो फीर अब तेरे साथ..? मतलब.. अब तो तु पेटसे हे..

बरखा : (मुस्कुराते) अब मुना मेरे साथ सीर्फ दो बार ही सेक्स करता हे.. वरना तो सुबह उठने लायक नही छोडता.. बस.. सीर्फ पापाकी चीन्ता हे.. अभी तक उनको कुछ नही पता.. अच्छा तु बता.. ब्रीन्दा आंटीकी बात कुछ आगे बढी की नही..?

जयश्री : (मुस्कुराते) पता नही.. मेरी हालत भी तेरी जैसी हे.. जबतक मे मना ना करु भाइ भी लगे रहेते हे.. ओर मुजे थका देते हे.. सुबह जागने मेभी तकलीफ होती हे.. पता नही मुना भाइने सबको कौनसी जडी बुटी पीलाइ हे.. हमारी सादीसे पहेलेतो बहुत अच्छा लगता था.. लेकीन अब लगता हे.. हम पुरी लाइफ कैसे काटेगे.. अच्छा आज कल गर्मीका मौसम हेतो दो बार करके छतपे सोने चले जाते हे.. तो कुछ राहत मीलती हे..

बरखा : (मुस्कुराते धीरेसे) इसीलीये तुजे केह रही हु.. मेरी मम्मीकी तराह तु भी ब्रीन्दा आंटीको श्रीधर भैयाके साथ सेट करदे.. वैसे भी वो आजकल अकेली होगइ हे.. तो जट सेट होजायेगी..

जयश्री : (सरमाते हसते) बरखा.. जबसे तुमने कहा हे तबसे मे उन दोनोको अकेले मीलनेका मौका तो दे रही हु.. फीर भी पता नही दोनो आगे बढ रहे हेकी नही.. अगर बढे तो अच्छा हे.. मुजे भी कुछ राहत मीलेगी.. वरना हम अकेलीको हमारे पतीसे जेलना आसान बात नही हे.. तु अ‍ेक काम करना.. क्या तेरी मम्मीसे कहेकर तु कुछ नही कर सकती..?

बरखा : (मुस्कुराते धीरेसे) हां ये अच्छा आइडीया दिया तुमने मुजे.. चल.. मे ही मम्मीसे इस बारेमे बात करती हु..

जयश्री : (मनमे खुस होते) तब तो अच्छा हे यार.. वैसे भी घरकी बात घरमे रेह जायेगी.. आजकल मम्मी अकेली होगइ हे.. मम्मीका चकर कही ओर चल गया तो खामखा बदनामी होगी.. इनसे तो अच्छा हे हमारे पती ही सम्हालले..

बरखा : (मुस्कुराते) जयश्री.. मेने भी यही सोचकर मम्मीको मुनाके साथ सेट करदीया.. अच्छा ये बता.. तेरे मम्मी पापाकी कोइ खबर..? जबसे गये हे उन्होने कुछ फोन बोन कीयाकी नही..?

जयश्री : (सरमाते धीरेसे) नही बरखा.. यहासे गइ तब मुजे ओर भैयाको घरपे आनेका कहेकर गइ.. ओर सबकी माफी भी मांग रही थी.. वहा तो उन दोनोको पुरी छुट मील गइ हे.. अ‍ेक दिन छोडकर पापासे बात हो जाती हे.. उनका फोन आता हे.. ओर हमारी खबर लेते हे.. लगता हे वहा पापाको भी वो दोनो धोखा देते हे.. पापा बेचारेतो सारा दिन बीजनेस सम्हालते हे.. उनको क्या पता उनकी पीठके पीछे क्या हो रहा हे..

बरखा : (मुस्कुराते) जयश्री कीतना अजीब हेनां..? खुद तो अपने देवरके साथ लगी रहेती हे.. ओर तुम दोनो भाइ बहेनके रीस्तोसे अ‍ेतराज करती थी.. इनसे तो लखन भैयाका घर अच्छा हे.. वहा जो भी होता हे खुलके होता हे.. कीसीपे कोइ पाबंधी नही.. बीलकुल अ‍ैसाही हो रहा हे.. जैसा उन्होने कहा था.. पता नही आगे हमे ओर क्या क्या देखनेको मीलेगा.. यहा बीलकुल उस हिमाचलकी तराह होने लगा हे..

दोनो बाते करते अपने अपने घरकी ओर चली जाती हे.. तो दुसरी ओर जैसे ही सांती घरपे पहोची.. ओर बंसी जागृतीको जगाने गइ.. तब बंसी जागुतीके उपर लेटा हुआ था.. ओर उनकी होले होले चुदाइ कर रहा था.. तो जागृती भी मदहोस होते बंसीसे चीपकी हुइ थी.. ओर बंसीको कमर हीलाते चुदवानेमे साथ दे रही थी.. तो सांती हसने लगी.. ओर अपनी कमरपे हमथ रखते दोनोके पास जाकर खडी होगइ....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५०

दोनो बाते करते अपने अपने घरकी ओर चली जाती हे.. तो दुसरी ओर जैसे ही सांती घरपे पहोची.. ओर बंसी जागृतीको जगाने गइ.. तब बंसी जागुतीके उपर लेटा हुआ था.. ओर उनकी होले होले चुदाइ कर रहा था.. तो जागृती भी मदहोस होते बंसीसे चीपकी हुइ थी.. ओर बंसीको कमर हीलाते चुदवानेमे साथ दे रही थी.. तो सांती हसने लगी.. ओर अपनी कमरपे हमथ रखते दोनोके पास जाकर खडी होगइ.... अब आगे





सांती : (हसते धीरेसे) कुछ तो सरम करो.. देखो कमीनीको.. पहेले तो भाइसे मीलनेमे नखरे कर रही थी.. अब इनको छोडने तैयार नही.. सुबह सुबह सुरु होगइ.. बंसी.. आप इसे अच्छेसे ठंडी करदो.. इनका मन भरना जाये तबतक इसे ठोकते रहो.. फीर इस कमीनीको देखती हु.. कल मे तुम दोनोकी सादी करवा दुगी..

जागृती : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) दीदी.. भैयाको कहीयेना..? वो ही सुबह सुबह सुरु होगये.. देखो नहाने भी नही दीया..

बंसी : (जोरोसे चोदते) डार्लींग कैसे नहाने देता.. हमारी सुहागरात हुइ हे.. तो सुबह अच्छेसे गुड मोर्नींग तो करलु.. सांतीको भी करता हु.. पुछले इनसे..

सांती : (हसते) ठीक हे बाबा.. आप दोनोका गुड मोर्नींग होजाये तो दोनो नहा लीजीये.. तबतक मे चाइ नास्ता बनाती हु.. आज तो तुम दोनोके चकरमे मुजे भी चाइ नास्ता नही मीला.. ओर हां.. आज आप आश्रमपे बाबाजीसे बात करलेना.. की कल हम सादी करने आ रहे हे..

बंसी : (चोदते) सांती इतनी जल्दी..? कुछ दिनके बाद करते हेनां..

सांती : (थोडा सख्त लहेजेमे) कोइ जरुरत नही.. क्या अपनी बहेनको अ‍ैसे ही ठोकते रहोगे..? कल अगर ये पेटसे होगइ तो..? ना बाबा ना.. मुजे कोइ रीस्क नही लेना.. आप फोन कर देना..

कहेते सांती वहासे चली गइ.. तो बंसी हाथके बल उचा हो गया ओर जागृतीको जबरदस्त तरीकेसे पेलने लगा.. फीर दोनो अपने चरमपे पहोंच गये तो बंसी जागृतीको गोदमे उठाकर नहाने ले गया.. जागुती बहुत ही सर्मसार हुइ.. वहा दोनो साथमे नहाने लगे..





तो वहा भी अ‍ेक बार खडे खडे बंसीने जागृतीको चोद लीया.. तो जागृती गुस्सा होकर बंसीके सीनेमे मुका मारने लगी.. फीर दोनो कंपलीट होकर बहार आ गये.. तब जागृतीकी चाल बदल चुकी थी..





तो अ‍ैसा ही सहेरमे लखनके बंगलोपे भी हुआ.. सुबह जागतेही लखन सृतीके होठोको चुमने लगा.. तो सृतीकी आंखभी खुइ गइ.. तो लखनने उसे गुड मोर्नींग कहा.. ओर सृतीके उपर चड गया तो सृती हसने लगी.. लखनके लंडने भी अपने बीलका रास्ता ढुंढलीया.. ओर सृतीको चोदने लगा.. तो सृती भी लखनका साथ देने लगी.. तब अ‍ेक बार रजीया भी दोनोकी चुदाइ देखकर सरमाके चली गइ..





अब सृती बीन्दास्त लखसे चुदवाने लगी.. तो इस बार भी लखनने उनको दो दो बार जडाकर सृतीकी चुतको अपने पानीसे हरी भरी करदी.. फीर लखन सृतीको गोदमे उठाकर बाथरुममे ले गया.. तो वहा दोनो सावर चलाकर नीचे खडे होगये.. ओर लखनने सृतीके नीतंबसे पकडर गोदमे उठा लीया.. ओर अपने लंडको चुतपे सेट करके सृतीको नीतंबसे पकडकर उछालने लगा.. तो सृतीभी मजा लेने लगी..





वहा भी लखनने अपना माल सृतीकी चुतमे उडेल दीया.. फीर दोनोने सावर लीया.. लखनने सृतीको अच्छेसे नहेलाया फीर दोनो नंगे ही बेडपे आगये.. वहा लखनने सृतीको अपने कपडे पहेनाया.. तबतक रजीया भी वापस आगइ.. तो लखन अपने कमरेमे कंपलीट होने चला गया.. ओर रजीया सृतीका बाल बनाते उनको तैयार करने लगी.. आज पहेली बार सृती रजीयासे सरमा रही थी.. तभी रजीयाने पुछ ही लीया..
 
रजीया : (मुस्कुराते) दीदी.. कैसी रही आप दोनोकी सुहागरात..? हमारे पतीसे अच्छेसे मील लीया..? मेने ले लीयाना कल वाली मजाकका बदला..? कैसा हे मेरे पतीका हथीयार..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते धीरेसे) अरे रजोदीदी.. पुछोही मत.. अ‍ैसा बदला कोइ लेता हे क्या..? आपको क्या बताउ..? अ‍ैसी सुहागरात तो मेरी देवुके साथ भी नही हुइ थी.. हमारे पतीने पुरी रात सोने नही दीया.. ओर सुबह सुबह भी दो बार मेरी कुटाइ होगइ.. अभी भी नीचे जलन हो रही हे.. क्या ये तुम्हारे ओर लताके साथ भी अ‍ैसा करते थे..?

रजीया : (सरमाते धीरेसे) हां दीदी.. क्या बताउ.. इतका बस चले तो उनको सारा दिन यही करना हे.. बहुत ठरकी हे.. लेकीन हमे मजा भी बहुत देते हे.. चलीयेना अंदर.. क्या मे गरम पानसे सीकाइ करदु..?

सृती : (सरमाते धीरेसे) नही रजुदीदी.. थेन्क्स.. मे अ‍ेक पेइन कीलर लेलुगी.. तो साम तक ठीक होजाउगी.. आज तो इनको मेरे पास भटकने भी नही दुगी.. मेरी पुरी मुनीया सुजादी..

रजीया : (बाल बनाते) दीदी.. अब इनसे जीतना भी दुर रहेनेकी कोसीस करलो.. आप नही रेह पाओगी..

सृती : (सरमाते मुस्कुराते) दीदी.. सही केह रही हे आप.. मेरा तो अभी भी उनसे दुर रहेनेका मन नही हे.. रजुदीदी.. इनको कहीयेना मुजे आज नीचे बीठादे.. यहा अकेली अकेली बोर हो जाउगी.. कमसे कम वहा आपसे बाते तो होते रहेगी.. मे सोफेपे बैठ जाउगी..

रजीया : (खडी होते) दीदी अब आपको डोक्टरने थोडा थोडा चलनेको कहा हे.. तो प्रेकटीस कीजीयेनां..

सृती : (मुस्कुराते) हंम.. चलो ठीक हे.. मे नीचे चलुगी.. आपके पास आउगी कीचनमे.. मुजे चेर चाहीये..

रजीया : (मुस्कुराते) दीदी.. आप हमारे पतीको क्या समजती हे..? वो कल साम आपके लीये वोकर लेकर आये हे.. हें..हें..हें.. नीचे रखा हे..

सृती : (खुस होते हसते) क्या..? हां उनको पता हे मुजे डोक्टरने चलनेके लीये कहा हे.. हें..हें..हें..

फीर रजीया लखनको बुलाती हे.. तो लखन सृतीके होठ चुमकर उसे गोदमे उठालेता हे.. फीर नीचे जाकर सीधा डाइनींगपे बीठा देता हे.. ओर वहा तीनो चाइ नास्ता करने बैठ गये.. रजीयाने आज आलुके पराठे बनाये थे.. बीच बीचमे लखन रजीया ओर सृतीको खीलाता हे.. तो दोनो खुस होजाती हे.. सृती भी लखनको खीलाती हे.. तीनो बाते करते चाइ नास्ता करते रहे.. तब..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. कैसा लगा बर्थडे गीफ्ट..? मजा आयाकी नही.. हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते लखनकी जांगपे मुका मारते) कीतने कमीने हो आप.. कमसे कम रजुदीदीका तो खयाल करो..

रजीया : (हसते) दीदी.. अबतो आप मेरी सोतन होगइ हे.. ओर सौतने भी आयेगी.. तो अब हम सबके बीच कैसा पर्दा..? बीस्तरमे तो हम सब साथ ही होगी.. अब सरमानेसे कोइ फायदा नही.. बताओनां..?

सृती : (सरमाकर हसते) भाइ.. सच कहु..? मेरी पुरी लाइफमे ये सबसे बेस्ट गीफ्ट थी.. बस.. हमे अ‍ैसे ही प्यार देते रहेनां..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. पुनोदीदीको आने दीजीये.. तब आपके लीये अ‍ेक ओर सरप्राइज हे..

सृती : (हसते) भाइ.. अब आप भी उस राजाकी तराह सरप्राइज देने लगे..

लखन : (मुस्कुराते) हां वो बडा भाइ था मेरा.. तो उन्हीसे सब सीखा हु..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. बतादोना.. क्या सरप्राइन देने वाले हो..

लखन : (मुस्कुराते) कीतनी भोली हो.. बीलकुल मेरी मालतीकी तराह.. वो भी अ‍ैसा ही पुछती थी.. क्या आपको सरप्राइजके बारेमे नही पता..? हें..हें..हें..

कहा तो सृतीकी आंख छलक गइ.. ओर वो बैठेकी लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर आंसु बहाने लगी.. उनको बबलु मालतीकी पुरी कहानी याद आने लगी.. वो कैसे बबलुको छोडकर उन राजाकी ओर ढलने लगी थी.. सृतीको सबकुछ याद आने लगा.. बस उसी गलतीकी वजहसे इस जन्ममे उनको देवायतसे सादी करनी पडी.. लेकीन अब ये गलती वो दुबारा नही करना चाहती थी..
 
सृती : (आंसु बहाते) भाइ.. मुजे माफ करदो.. अब मे दुबारा मेरे बबलुभाइको कभी भी छोडकर नही जाउगी.. अ‍ेक बार आप इस मालतीको माफ करदो.. अब जन्मो जनम तक मालती आपकी रहेगी..

लखन : (मुस्कुराते पीठको सहेलाते) बस.. बस दीदी.. अब रोना नही.. मुजे मेरी बहेनोके चहेरेपे आंसु अच्छे नही लगते.. आप पुनोदीदी ओर रजुतो मेरी जान हो..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) ओर आपकी लता..?

लखन : (फीकी मुस्कानसे) दीदी.. मे भी कीतना मुर्ख हु.. उनकी चालको अपना प्यार समज बैठा.. वोतो कभी मेरी थी ही नही.. वोतो भाइसे प्यार करती थी.. ओर उसेको पानेके लीये मुजसे प्यारका नाटक कर रही थी.. ओर मौका मीलते ही आखीर चली गइ..

सृती : (मुस्कुराते) भाइ.. जी छोटा मत करो.. हम दोनो बहेने हेनां..? ओर उनको भी हमारी मम्मीने ही कहा था.. तो बेचारी क्या करती..?

रजीया : (मुस्कुराते पानी देते) दीदी.. जाने दीजीये इस बातको.. लीजीये पानी पीजीये.. आप सभी हमारे पतीकी बहेने हो.. तो फीर मे कौन हु..? हें..हें..हें..

लखन : (हसते) रजु.. फीकर मत कर.. तुभी मेरी बहेन ही हो.. हें..हें..हें..

सृती : (आंसु पोछते हसते) रजुदी.. अ‍ेक दो दिनमे पुनोदी आजायेगी.. आप इनको ही पुछ लेना.. क्युकी ये सब उनको ओर मंजु मोमको पता हे.. बस.. मुजे इतना पता हे.. की कहीना कही.. आपभी हमारी बहेन हे..

रजीया : (हसते) दीदी.. मुजे भी अ‍ैसा ही लगता हे.. तभी तो मंजुदीदीने हमारी सादी करवाइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या आज आपको क्लीनीकपे जाना हे..? तो चलो छोडदु आपको..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते लखनको बाजुमे मुका मारते) भाइ.. आप बहुत कमीने हो.. आप जान बुजकर मुजे छेड रहे हो.. आज नही कलसे जाउगी.. आज आपने मुजे क्लीनीकपे जाने जैसी रखी हे क्या..?

रजीया : (जोरोसे हसते) दीदी.. अब तो हर दिन अ‍ैसी ही हालत होगी.. तो आप क्या करोगी..? हें..हें..हें..

सृती : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) हां.. तो मे यही क्लीनीक सुरु कर दुगी.. लेकीन मेरे भाइसे प्यार करना नही छोडुगी.. हें..हें..हें..

रजीया : (जोरोसे हसते) दीदी.. रहेने दीजीये.. वरना ये यही सुरु होजायेगे.. हें..हें..हें..

सृती : (जटसे) नो.. नो.. नो.. सोरी बाबा.. हें..हें..हें..

कहा तो फीर भी लखनने सृतीको बाहोमे भीच लीया ओर उनके होठोको चुमने लगा.. सृती जोरोसे हसते लखनको मना करते उनको हटाने लगी.. अ‍ैसी ही मस्ती मजाक करते तीनोने चाइ नास्ता करलीया.. फीर लखन सृतीको गोदमे उठाकर सोफेपे बीठा देता हे.. ओर खुदभी उनसे सटकर बैठते सृतीको अपनी बाहोमे भरलेता हे.. तो इस बार सृती लखनके होठोको चुमने लगी..





लखन सृतीके बुब्सको मसलते होंठ चुमने लगा.. ओर रजीया दोनोकी ओर हसते घरका काम नीपटाने लगी.. सृती फीरसे उतेजीत होने लगी.. लेकीन अभी वो लखनसे सेक्स करनेकी हालतमे नही थी.. तो लखनसे आगे ना बढनेके लीये प्यारसे समजाने लगी.. फीर लखन उनके होठोको चुमकर खडा हो गया.. ओर दोनोको ओफीस जानेका केहकर चला गया.. तभी सृतीके फोनपे पुनमकी रींग आगइ..
 
सृती : (हसते फोन उठाते) हाय दीदी.. कैसी हो..?

पुनम : (फोनपे) हेपी बर्थडे माय स्वीट हार्ट.. क्या बर्थडे गीफ्ट मील गइ आपको..? हें..हें..हें..

सृती : (सर्मसार होते मुस्कुराते) हां.. थेन्क्स दी.. आपको तो सब पता हे.. हमारे भाइने क्या मस्त गीफ्ट दी हे मुजे.. जीसे मे जींदगी भर नही भुल सकती.. दीदी.. हम दोनोने मीलकर जो तैय कीयाथा वो मेने अ‍ेचीव करलीया.. थेन्क्यु दी.. ये सब आपकी वजहसे मुमकीन हुआ..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. कीतने बजे सोये दोनो..? भाइका कैसा हे..? आप समज गइनां..?

सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. पुछो ही मत.. सच कहु..? देवुसे तो कइ गुना ज्यादा बहेतर हे.. आपको पता हे..? मुजे बेहोस भी करदीया.. ओ बापरे.. फीर तो पुरी रात सोने नही दीया.. बीना बहार नीकाले करते ही जा रहे थे.. करते ही जा रहे थे.. सुबह तबतो मेरी हालत खराब करदी.. ओर गुड मोर्नींग वीस भी कीया.. ये तो थकते ही नही हे.. पता नही आपने इनको कौनसी जडी बुटी पीलाइ हे.. अभी भी करना था.. बडी मुस्कीलसे समजाकर उनको बहार भेजा..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. अब तो अ‍ैसा हर दिन होने वाला हे.. अब कहीये.. मेने आपको लखन भैयासे मीलवाके कोइ गलती तो नही की..?

सृती : (मुस्कुराते) नही दीदी.. सच कहु..? बीलकुल नही की.. हम दोनोके लीये लखन भैया अ‍ेकदम परफेक्ट हे.. मे तो इनकी दिवानी होगइ हु.. दीदी.. प्लीज.. यहा जल्दीसे आजाइअ‍ेना.. मे आपको बहुत मीस कर रही हु.. दीदी.. मे तो कहेती सादीसे पहेले आप भी अ‍ेक बार मीललो भाइसे.. हम दोनोने यही तो तय कीया था..

पुनम : (मुस्कुराते) मुजे सब पता हे दीदी.. अब सादी करके उधर हीतो आना हे.. ओर फीकर मत कीजीये.. मे कल वहा आ रही हु.. फीर पता नही साथमे कौन होगा.. दीदी.. आपकी तराह मेने भी उनको वादा कीया था.. की हम सादीसे पहेले अ‍ेक बार जरुर मीलेगे.. तो वादा तो नीभाना ही पडेगा..





सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. सादीके पहेले मीलनेका अ‍ेक रोमांच ही अलग हे.. जो कल रात मेने देख लीया.. दीदी साथमे जो भी हो.. आप आइअ‍ेतो सही.. मेने आप दोनोके लीये जुगाड कर लीया हे.. आप समज गइनां..? आप आओगी तब वो कुछ ओर सरप्राइजकी बात कर रहे थे..

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. पता हे मुजे.. मे भाइसे बात कर लुगी.. कल सचमे आपके लीये सरप्राइज हे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. वहा सब कैसा चल रहा हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) सब मस्त.. हमारी होने वाली सासुमां मुजे दो दिनसे बहुत कुछ ज्ञान दे रही हे.. अब भावना दीदी भी हमेसाके लीये नीर्मला आंटी ओर भुमी आटीके साथ.. या फीर हमारे घरपे रहेगी.. तो हमारी सासुमां लताको ओर भावना दीदीको भी सब ज्ञान दे रही हे..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. अभी भाइसे बात हुइ.. लगता हे वो थाडा लतासे नाराज हे..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. लेकीन हम कुछ नही कर सकते.. अब जो भी करना हे लताको ही करना पडेगा.. गलती की हे उसने.. भाइ अ‍ैसे ही माफ थोडीना करेगे..

सृती : (मुस्कुराते धीरेसे) दीदी.. उन दोनोकी बात कुछ आगे बढीकी नही..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हां दीदी.. अ‍ेक बात बताउ..? भावना दीदीतो कइ दिनोसे भाइके साथ सो रही हे.. ओर लता तो आते ही कमीनी भाइको लाइन देने लगी.. दोनोको अकेले मीलनेका मौका मीला नही की चुमा चाटी करने लगते हे.. लगता हे बहुत जल्द हमारी लता भी भाइके नीचे आजायेगी..

सृती : (हसते) क्या..? बात इतनी आगे बढ गइ..? कीसीको पता नही चला क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. अब तो हमारे घरमे सबको सबके बारेमे पता चल चुका हे.. तो कीसीको कोइ डरही नही रहा.. भाइ जब चाहे कीसीके भी कमरेमे घुस जाते हे.. ओर आजकल दोनो आंटी भी बहुत खुस रहेने लगी हे.. क्युकी भाइ उनको भी खुलकर पेलने लगे हे.. दोनो बहुत कामी हे.. आपही की तराह..

सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मुजे नही पता था मेरी मां इतनी कामी ओरत हे.. ओर मे भी उन्हीकी बेटी हु.. तो कुछ तो गुण आयेगे.. अब मे सायद ही कभी देवुसे फेस करपाउगी.. अब मुजे तो सीर्फ हमारे लखन भैयासे मतलब हे.. इसलीये सायद मे आपकी सादीमे भी नही आपाउगी.. सोरी दीदी..

पुनम : (धीरेसे) दीदी.. ये भी कोइ बात हुइ..? आपकी तराह मेने भी बडे भैयासे रीलेशन खतम करलीया हे.. मे भी लखन भैयासे बहुत प्यार करने लगी हु.. ओर उनको मीलनेकी सबसे जल्दी तो मुजे हे.. फीर भी मे यहा रेह रही हु.. अब तो भैया मेरे सामने भी नही देखते.. तो फीर सादीमे आनेमे क्या प्रोबलेम हे..? मे कुछ सुनना नही चाहती आपको आना ही पडेगा.. केह देती हु आपसे..

सृती : (मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. इस बारेमे आप आओगी तब मीलकर बात करेगे.. मुजे आपसे बहुत कुछ बाते करनी हे..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. इसीलीये कल मे वहा आ रही हु.. सायद दो तीन दिन वहा रुकेगे.. तब हम बात करलेगे.. आप पेइन कीलर खाकर जल्दीसे ठीक होजाओ.. फीर तो जबतक मे वहा ना आउ तबतक आपको ओर रजु दीदीको ही हमारे लखनको सम्हालना हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. जब नहाकर बहार नीकली तब ही पेइन कीलर लेली थी.. तो सायद साम तक ठीक होजाउगी.. लेकीन आज उनको हाथ नही लगाने दुगी.. अभी भी नीचे जलन हो रही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) अरे टेन्शन मतलो.. सामतक तो वोभी ठीक होजायेगी..

दोनो बाते करती रही तब लखन अपनी ओफीसपे चला गया.. तो वहा पहेलेसे ही उनका पुराना बीजनेस पार्टनर बैठा हुआ था.. ओर ये वही पार्टनर हे जब देवुकी सादी भी नही हुइ थी.. ओर देवायतने इन्के साथ ही बीजनेस सुरु कीया था.. फीर दो घंटे तक दोनोने फोन घुमाकर बहुत सारे सोदे बाजी करली.. फीर लखन वहासे राधीकाके पास होस्टेलपे चला गया.. ओर वहा जाकर उनको भी दो बार पेला..
 
इसी दौरान आज सुबह नीलम अकेली स्कुटर लेकर अ‍ेक्जाम देने चली गइ थी.. तो पेपर खतम होते ही उनकी छुटी होगइ.. तो वो ओर दीया गार्डनमे बैठे थे.. ओर अपने अपने बोयफ्रेन्डके बारेमे बाते करते अपनी फ्युचरके बारेमे प्लानींग कर रहे थे.. आज नीलमने दियाको लखनके बारेमे कुछ नही बताया.. क्युकी वो लखन ओर उनके बीच रीलेशनको दीयासे छुपाना चाहती थी..





दीया : (मुस्कुराते) नीलु.. तेरे लखन जीजु आजकल दिनमे अ‍ेक बार तो होस्टेलपे आते ही हे..

नीलम : (मुस्कुराते) हां अब मेडम उनकी बीवी हे तो उनको मीलने आते होगे.. क्युकी उनकी मम्मीको अपने घर जानेकी इच्छा थी.. तो राधुदीदी उनके साथ वहा चली गइ हे..

दिया : (मुस्कुराते) नीलु.. तो फीर तुम तेरे लखन जीजुके साथ होस्टेलपे आजाती.. वहा हम दोनो खुब मजे करेगे..

नीलम : (सरमाते धीरेसे हसते) कमीनी वहा नही आना मुजे.. मुजे पता हे तेरे मजेके बारेमे.. तु लडकी होकर भी मेरी हालत खराब कर देती हे.. इनसे तो अच्छा हे तेरे बोय फ्रेन्डको बुलाले..

दिया : (सरमाकर मुस्कुराते) यार वोतो हर वक्त आनेको तैयार रहेता हे.. लेकीन होस्टेलपे दुसरी लडकीया भी होती हे.. तो मे मेरी सादी तक कोइ रीस्क लेना नही चाहती.. (हसते) हां अगर तेरे लखन जीजु वहा आना चाहेतो आ सकते हे.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाकर हसते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी उनके सामने देखना भी मत.. तुमने उनकी मेडमको देखा हे..? चुदकड कहीकी.. कमीनी जब वो तेरी लेगानां.. तब तुजे पता चलेगा.. दो दिन बीस्तरसे उठ भी नही पायेगी.. बात करती हे.. अच्छा ये बता.. छुटीमे तो सब प्रवास जा रहे हे.. तो क्या तु भी जा रही हे..?

दिया : (सरमाते मुस्कुराते) नही यार.. तुमने मना करदीया तो अकेले जानेका मन नही कर रहा.. तो मेने अपने बोय फ्रेन्डको बता दीयाकी मे नही जा रही.. तो कल मेरी सासुमांका फोन आया था.. तो मुजे स्कुल चालु होने तक अपने घरपे बुला लीया.. कहेती थी वहीसे हम सब घुमने जायेगे.. तो मे छुटीमे वहा जा रही हु..

नीलम : (हसते धीरेसे) अच्छा.. तब तो तेरे छुटीमे मजे हे.. देखना तेरा होने वाला पती तुजे छोडने वाला नही हे.. हर रात तेरे साथ मजे करेगा..

दीया : (सरमाते धीरेसे) यार मेरी सास ससुर भी बहुत फोर्वड हे.. अब तो हर सेटरडे सन्डे मुजे घरपे बुला लेती हे.. ओर मजेकी बात कहु तुजे..?

नीलम : (हसते) क्या..?

दीया : (सरमाते धीरेसे) यार वो दोनो मुजे ओर मेरे बोयफ्रैन्डको अकेलेमे मीलनेका मौका देते हे.. ओर रातमे उनके साथ ही सोने भेज देते हे.. कमीने कुछ ज्यादा ही खुली सोच वाले हे..

नीलम : (जोरोसे हसते धीरेसे) तो अच्छा हेना यार.. वो सारी रात तेरी डुबकी बजाता होगा..

दिया : (सर्मसार होते धीरेसे) हां यार उसीका डर लग रहा हे.. जबसे हम दोनोके रीस्तेकी बात हुइ हे तबसे वो बीन्दास्त हो गये हे.. अब तो बीना कोन्डम ही करने लगे हे.. मुजे डर हेकी कही मे सादीसे पहेले उनसे प्रेगनेन्ट ना होजाउ..

नीलम : (हसते धीरेसे) तब तो तेरे मजे हे.. मेतो जा रही हु.. तेरे पास अ‍ेक हप्ता हे.. दोनो खुब मजे करो..

दीया : (सामने देखते) लेकीन तु कहा जा रही हे..? क्या तुभी धिरेन जीजुके घरपे जा रही हे..?

नीलम : (मुस्कुराते) नही यार.. मे मेरे लखन जीजुके साथ उनके गांव जा रही हु.. वो.. वो मेरी अ‍ेक्स सौतन.. मीन्स.. मेरी पुनो दीदीकी सादी हे.. लखन जीजुके साथ.. तो मे वही जा रही हु..

दिया : (सोक्ट होते आस्चर्यसे) व्होट..? पुनम दीदीकी सादी लखन जीजुके साथ..? मगर तुतो केह रही थी वो दोनोतो सगे भाइ बहेन हे.. तो फीर ये सादी..?

नीलम : (सरमाते मुस्कुराते धीरेसे) हां दीया.. कीसीको कहेना नही.. तुजे मेरी कसम.. सुन.. जीजुके खानदानमे जीतनी भी सादी करना चाहे कर सकते हे.. ओर उनके खानदानमे पीछली चार पांच पीढीसे सब उनकी बहेनसे ही सादी करते आये हे.. मानोनां बहेनसे सादी करनेकी परंपरा हे.. तो ये उनके लीये कोइ नही बात नही हे..

दिया : (मुस्कुराते) आइ कान्ट बीलीव.. कीतना अजीब हेनां.. अ‍ेक भाइ अपनी ही बहेनको चोदेगा.. हें..हें..हें..

नीलम : (सरमाते दियाको अ‍ेक मुका मारते) छी.. तु कीतना गंदा बोलती हे.. मीलन नही बोल सकती क्या..? कमीनी कहीकी.. सुन.. वो अ‍ेक रोयल फेमीली हे.. ओर वो गांवमे भी अ‍ेक परंपरा सुरु कर रहे हे.. अब हमारे गांवमे भी तुजे अ‍ेक भी वीधवा या त्यक्ता नही मीलेगी.. बीलकुल उस हिमाचलकी तराह.. जीस कीताबको तुमने मुजे पढने दिया था..?

दिया : (आस्र्यसे देखते) क्या..? अरे हां यार.. तुमने वो किताब पढली..? इसका मतलब भी जानती हे..?

नीलम : (मुस्कुराते) हां पढली.. ओर इसका मतलब वहा जब भी कोइ कीसीके साथ सादी करना चाहे कर सकता हे.. अब वहा कोइ रीस्ते नाते नही देखना.. बस.. मर्द ओर ओरते खुस रहेने चाहीये.. मे तुजे ज्यादा तो कुछ नही कहुगी.. लेकीन इतना बता सकती हु.. की हम सब उसी किताकके हिस्से हे.. चल अब मुजे जाना हे..

दिया : (आस्चर्यसे सामने देखते) यार थोडी देर ओर बैठनां.. अब कहा पढनेकी चीन्ता हे..? तेरी बात सुनकर कीतना मजा आ रहा हे.. अगर तुम सब उस किताबका हिस्सा हो.. तो मतलब.. तुम लोगोके लीये सब जायज हे.. अब तेरे लखन जीजु ओर पुनम दीदीकी बात पुरी समजमे आगइ.. अ‍ैसा ही हो रहा हे.. जो उस किताबके अंन्तमे लीखा हे.. तो क्या वो राजा फीरसे.. मतलब..

नीलम : (मुस्कुराते) हंम.. बीलकुल सही सोच रही हे.. वो लखन जीजुके खानदानमे ही पैदा होगा.. लता दीदी केह रही थी.. लखन जीजुके भतीजेका लडका.. तुम समज गइनां..? चल अब बहुत होगया.. घरपे सब इन्तजार करते होगे.. इस बारेमे हम फीर कभी बात करेगे..

दिया : (खडी होकर साथ चलते) नीलु.. तो फीर तेरा रास्ता तो क्लीलीयर होगया.. तुजे अब धिरेन जीजुके साथ सादी करने कोइ नही रोकेगा.. उनसे कब सादी कर रही हे..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) दिया.. वो तुजे बादमे बता दुगी.. हो सकता हे.. उनमे मुजे तेरी जरुरत पडे..

दिया : (मुस्कुराते) कमीनी फीकर मत कर मे आजाउगी.. अब तुम अ‍ेक ही तो मेरी सहेली हे.. तो क्या मे तेरे लीये इतना नही कर सकती..? क्या तुम दोनो कोर्ट मेरेज करने वालेहोनां..?

नीलम : (मुस्कुराते हांमे सर हीलाते) हंम.. लेकीन सादीके बाद भी मुजे अपनी पढाइ तक लखन जीजुके घर रहेना पडेगा.. ओर सादी भी सबसे छीपानी पडेगी.. वरना मेरा केरीयर खतम होजायेगा..

दिया : (मुस्कुराते) हंम.. समज गइ.. मेरा तो ये लास्ट यर हे.. तो सायद मेरी सादी बहुत जल्द होजायेगी.. पापाका फोन आया था.. केह रहेथे अगले महीने मेरी सगाइ कर देगे..

दोनो बाते करते स्कुटरके पास पार्कींगमे पहोंच गइ.. तभी नीलमके फोनपे धिरेनका फोन आ गया.. ओर वो नीलमको मीलना चाहता था.. लेकीन पता नही क्यु.. आज नीलमने अपने मम्मीको हमपे सक होगया हे.. अ‍ैसा जुठ बोलकर धिरेनको अपनी सादी तक मीलना टाल दीया.. जीसे सुनकर दियाको भी आस्चर्य हुआ.. फीर नीलम दियाको होस्टेलपे छोडकर अपने घरकी ओर चली गइ..
 
तो दुसरी ओर गांवमे हवेलीपे भी चंदाकी हालतमे धीरे धीरे सुधार होरहा था.. वो सारा दिन विजयको लेकर अकेली बैठी रहेती.. ओर उनके साथ खेलती.. तो मंजु नीर्मला ओर भुमीका भी उनका खयाल रखते उनको अकेली ना रखते अपने पास बीठाती ताकी बातोसे उनका मन थोडा डायवर्ट होजाये.. अब मंजुने विजयकी जीम्वेवारी पुनमको सोंपदी थी.. तो विजयका ज्यादातर खयाल पुनम ही रखने लगी थी..

क्युकी मंजुने उनको अ‍ेक काम सौपाथा.. ओर कहाथा तेरी सादीसे पहेले ये काम हो जाना चाहीये.. तो पुनम जडी बुटीकी बहुत छोटीसी मात्रा दुधमे उबालकर विजयको तीन दिन तक देनी थी.. जो पुनमने सबसे छुपकर देदी थी.. ओर नहेलानेके बाद उनका तेलसे मालीस भी करती.. तब वो छुपकेसे विजयकी नुनीकी भी मालीस करदेती.. इस बातका पुनमने कीसीको पता नही लगने दिया..

अब ज्यादातर पुनम लता ओर भावना साथ ही रहेती.. जब मंजु कामसे फ्रि होजाती तो पुनमके कमेरे बैठकर तीनोको भविष्यकी बाते करते ज्ञानके साथ साथ सेक्सका भी पाठ पढाती.. तो दुसरी ओर देवायत भी नइ चुत मीलनेकी वजहसे बहुत खुस था.. ओर रात होते ही खाना खाकर अपने कमरेमे घुस जाता.. फीर वो दया ओर भावनाको बारी बारी खुब पेलता.. ओर दोनोकी चुतकी धजीया उडाता..

तो कभी दिनमे भी वंदना चारु ओर नीशाकी चुदाइ कर लेता.. वो अपनी हर बीवीको खुस रखेनकी कोसीस करता.. तो अब घरमे ही खुलकर नीर्मला ओर भुमीकाको भी चोदने लगा था.. तो कभी कभी बीचमे चंपा भाभीकी बारी भी आजाती थी.. तो दुसरी ओर जब अकेला होता तो लता उसे पकड लेती.. तो देवु उनके बुब्सको मसलते लताके होठोको रस पीने लगता.. लेकीन दोनोको ज्यादा अकेलेमे मीलन करनेका मौका नही मील रहा था.. क्युकी दोनोको पता थाकी मंजुको सब पता चल जाता हे..

तो चंदा भी मनसीक रोगकी सीकार थी.. वो समजती थीकी धिरेनकी करतुतकी वजहसे वो इस घरपे अपना हक खो चुकी हे.. वो कीसीसे बाते भी नही करती.. सारा दिन विजयको लेकर बैठी रहेती.. रातमे भी देवायत अपनी सभी बीवीओको पेलता तब वो चुपचाप वासना भरी नजरोसे सबकी चुदाइ देखती रहेती.. फीर देवायत चंदाको भी जमकर पेलता.. तब जाके वो चैइनकी नींद सोती.. वरना वो अ‍ैसे ही बैठी रहेती..

सबको पेलकर देवायत मंजुके साथ चीपकर सो जाता.. तो मंजु उनकी सवारी करती.. ओर देवायतको नीचोडने लगती.. देवायत मदहोसहो जाता.. ओर मंजु धीरे धीरे कुछ मंत्र बोलकर उनकी काम शकितया अपनी योनीमे खीच लेती.. ताकी कुछ महीनोके बाद देवायत नोर्मल इन्सान होजाये.. जीनकी वजहसे उनकी सभी सौतने लखनकी ओर ढलने लगे..

फीर यही शकितीया पुनमको सुबह चार बजे दुसरे रुममे बुलाकर सामने बीठाते उनकी योनीमे स्थापीत करती.. ओर उनके अगले जन्ममे उनको वापस देनेकी बात कहेती.. ओर ये राज सीर्फ मंजु ओर पुनमके बीच ही रहेने वाला था.. फीर मंजु पुनमको पुरी प्लानींग भी बताती.. ओर भविष्यमे क्या होने वाला हे वो भी बताती.. फीर पुनम अपने कमरेमे जाकर सोजाती..

ओर मंजु भी देवायतके पास उनसे चीपकर सो जाती.. ओर ये सीलसीला पीछले कइ दिनोसे चल रहा था.. जीनकी कीसीको आज तक भनक भी नही लगी.. ओर इनकी वजहसे पुनम भी बहुत कामी ओरत होने लगी थी.. ओर यही वजह थी की अब पुनम जल्दसे जल्द लखनको मीलना चाहती थी.. ओर अब मंजुला भी पुनमको ओर तडपाना नही चाहती थी.. वो जान चुकीथी की अब आग दोनो ओर लग चुकी हे..

मंजुको लखन ओर सृतीके बारेमे भी पता चल गया था.. की दोनो मील गये हे.. ये बात जानकर मंजु बहुत खुस थी.. बस.. अब उनको सीर्फ चंदा ओर भावनाको लखनसे मीलवानेकी चीन्ता थी.. तो दुसरी ओर वो लता ओर वंदनाकी सादी भी जल्द देवायतके साथ करवाना चाहती थी.. ताकी वो लताको प्रेगनेन्ट कर सके.. ओर वंदना तो अ‍ैसे ही देवायतसे प्रेगनेन्ट हो चुकी थी.. ओर उसने लखनको फोन करदीया....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
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