Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 87 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

रमा : (जल्दीसे पास आते धीरेसे) लखनजी.. रुकीये जरा.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. क्या आप सचमे मां बनने वाली हे..? कहीये..

रमा : (सरमाते दरवाजेकी ओर देखते धीरेसे) हां लखनजी.. ये सब आपहीकी क्रीपासे हे.. आप फुफा नही.. इस बच्चेके पापा बनने वाले हे.. हमने वहा बहुत महेनतकी उसीका फल हे.. तो आपको भी मुबारक हो..

लखन : (दरवानेकी ओर देखते) भाभी.. क्या मेने कहा था अ‍ैसा कीया की नही..? वरना भानु भाइको सक होजायेगा..

रमा : (सरमाते धीरेसे) अरे हां बाबा.. जब आप छोडने आये थे.. उसी रात.. गोली खाकर तीन बार कीया हमने.. ओर आपको तो पता हे..? इनको रोज चाहीये.. तो फीर मे मना नही करती.. तो हमपे कीसीको सक नही होगा..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. तो फीर मे चलता हु.. आप अपना खयाल रखीयेगा.. ओर ये लीजीये.. पांच हजार हे.. अपनी सेहतका खयाल रखीयेगा..

रमा : (आंख गीली करते पैसा लेते) लखनजी.. क्या सीर्फ रमा नही केह सकते..? हंम.. आपकोतो पता हेनां आपको मेने क्या माना हे.. अब आपही मेरे पती हो.. लखनजी.. अब कब मीलेगे हम..? हंम..?

लखन : (कारमे बैठते) रमा.. फीकर मत कर.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. मेरी सादीमे भी आना हे तुम लोगोको.. अगर मौका मीलेगा तो वही मीलेगे.. चलो अब मे चलता हु..

फीर लखन कार लेकर नीकल जाता हे तो रमा अपनी सारीके पलुमे पैसे छुपाकर अंदर चली गइ.. सरला खीडकीसे देखकर कातील मुस्कान करते बाथरुमसे बहार नीकल गइ.. आज उनको रमा ओर लखनकी असलीयतका पता चल चुका था.. जो बात वो पहेले भी जानती थी.. जब लखन उनको ओर रमाको छोडने घर आया था.. तब भी बाथरुम जाते उन्होने रमा ओर लखनकी चुदाइ देखली थी..

ये बात नीलम पहेलेसे ही जानती थी.. ओर इस बारेमे दोनो मांबेटी खुलकर चर्चा भी कर चुकी थी.. बस.. अभी नीलमको अपनी मम्मीके प्रेगनन्सीके बारेमे नही पता था.. तो इधर सरला भी कुछ सोचकर मन ही मन खुस होने लगी.. क्युकी अब देवायत इतनी सारी बीवीओकी वजहसे उनके पास आना ही छोड दीया था.. तबसे सरला भी काफी दिनोसे प्यासी थी..

सरला : (मनमे) कमीनी.. बीलकुल मुजपे गइ हे.. मे भी भानुके बापुके साथ अ‍ैसे ही करती थी.. हायरे मेरा कीशन.. हम दोनो कीतना प्यार करते थे.. कीशनने मेरी मांग भी भरी थी.. मे उनको ही अपना पती मानती थी.. तो क्या रमा ओर लखनने भी वोही कीया होगा..? तभी तो रमा लखनको अपना पती मानती हे.. देवु ओर लखन बीलकुल उनके बापपे गये हे.. अब उसे भी पुनम बीटीयासे मेरे बारेमे सबकुछ पता चल जायेगा..

कोइ बात नही वो वादेका पका हे.. बापरे.. जडी बुडीकी वजहसे उनका कीतना बडा होगया हे.. जब गले मीला तब कैसे चुभ रहा था.. ओर रमा तो इसे अंदर भी लेचुकी हे.. वहा रही ही कीतने दिन..? तीन चार दिनमे ही लखनसे पेटसे होगइ.. ओर अ‍ेक मेरी लता हे.. जो अभी भी पेटसे नही हुइ.. लगता हे कमी कुछ लतामे ही होगी.. अ‍ेक बार मीले तो कमीनीको पुछ लुगी.. की क्या प्रोबलेम हे.. जो भी हो.. कमसे कम रमाने मेरी बात तो रखली.. फीर चाहे बच्चा कीसीका भी हो.. दोनो हेतो मेरे कीशनका खुन..

इधर सरला यही सब सोचते खटीयापे बैठी थी तो उधर लखन अपनी नइ कार लेकर सीधा घरपे पहोंच गया.. तब ग्याराह बजनेको आये थे.. देवायतभी अपने खेतोपे था.. जो इस वक्त भानु ओर साहीलके साथ अपने गाडाउनकी ओफीसमे बैठा था.. ओर फसलके बारेमे बात कर रहा था.. इधर जैसे ही लखन हवेलीके अंदर आगया तो उसने मुस्कुराते होर्न बजाया ओर कारसे उतर गया..
 
तो होर्नकी आवाज सुनतेही मंजु बहार देखने आइ तो पुनम लताने भी होर्न सुन लीया.. तो दोनो समज गइ की लखन आगया हे.. क्युकी आज पुनम सुबहसे ही लखनका इन्तजार कर रही थी.. पुनम सभी सरम त्यागके दोडकर बहार आगइ.. तो लखन मंजुके पेर छु रहा था.. मंजुने उसे खडा करके अपने गले लगालीया.. जीसे देखकर पुनम अ‍ेक पल तो रुक गइ.. ओर लखनकी ओर देखते हसती रही.. तभी धरके बाकी लोग भी बहार आने लगे..

मंजुला : (हसते) आ गया मेरा बेटा..?

लखन : (पैर छुते) मोम.. प्रणाम.. देखो.. देखो.. हमारी नइ गाडी..

मंजुला : (गले लगाते कारको देखते) अरे वाह.. बेटा कारतो तुने बडी ली हे.. मेरा बच्चा..

कहेते लखनके गालको चुमलीया तो लखन भी सरमाके हसने लगा.. तभी उनका ध्यान पुनमकी ओर गया.. जो उसे थोडी दुर खडी होकर देखते हस रही थी.. तो लखनने मंजुसे अलग होकर अपनी दोनो बाहे फैलाइ.. तो पुनम कीसीकी भी परवाह ना करते दोडके आगइ.. ओर जोरोसे लखनकी बाहोमे समा गइ.. वहा नीर्मला भुमीका सब लोग हसने लगे.. तभी पुनमको होंस आया ओर वो सरमाते लखनसे अलग होगइ..

मंजुला : (हसते) देखले बहु.. मेरा बेटा नइ कार लेके अपनी होने वाली बीवीको लेने आया हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सरमके मारे मंजुके गले लगते) क्या मम्मी आपभीनां.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. अभी तो मेरे भैया हे.. सैया नही हुअ‍े समजी..?

मंजुला : (हसते कानमे धीरेसे) सबर कर मेरी बच्ची.. आज रात वो भी होजायेगे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) मम्मी.. आपभीनां.. आपको सब पता हे.. फीर भी..?

कहेते पुनम सरमाकर दोडते हुअ‍े अंदर भाग गइ.. तो सबलोग हसने लगे.. कीसीको नही पताथा की मंजुने पुनमको कानमे क्या कहा.. तभी लखनने मंजुको अपनी गोदमे उठा लीया ओर कारकी ओर जाने लगा.. तो मंजु जोरोसे हसने लगी..

मंजुला : (जोरोसे हसते) लखन.. क्या कर रहा हे बेटा..? मे गीर जाउगी.. नीचे उतार..

लखन : (हसते) अरे आप मेरी मां हो.. मे आपको गीरने थोडीना दुंगा.. चलीये कारमे बैठीये.. ओर मुहुर्त कीजीये.. (दयाकी ओर देखते) दया भाभी.. कुमकुम ओर चावल दीजीये.. आज मम्मीके हाथो मुहुर्त होगा.. भावना भाभी.. आप सब लोग भी आजाइअ‍े..

दया : (सरमाते) जी.. लाइ देवरजी..

मंजुला : (नीचे उतरते) अरे लखन बेटा.. अपनी नइ बीवीके हाथोसे करवाओ.. वो घरकी लक्ष्मी होती हे..

लखन : (मुस्कुराते) नही मोम.. मेरे लीयेतो आपही घरकी लक्ष्मी हो.. बल्की इस घरकी सभी लेडीस हमारे लीये लक्ष्मी हे.. भुमी बुआ.. नानीमां.. आप भी सब आजाइअ‍े..

कहा तो नीर्मला भी खुस होगइ.. ओर आंख गीली करते वो भी आगइ.. क्युकी आज लखनने उसे नानीमां कहेकर बुलाया था.. क्युकी वो अपनी बेटीको मां कहेने लगा था.. सबके साथ लता भी खडी थी.. उसे लगाकी लखन उसे भी बुलायेगा.. लेकीन लखनने अ‍ेक बार भी उनकी ओर नही देखा.. तो लताकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर वो जटसे अंदर पुनमके पास चली गइ....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५३

कहा तो नीर्मला भी खुस होगइ.. ओर आंख गीली करते वो भी आगइ.. क्युकी आज लखनने उसे नानीमां कहेकर बुलाया था.. क्युकी वो अपनी बेटीको मां कहेने लगा था.. सबके साथ लता भी खडी थी.. उसे लगाकी लखन उसे भी बुलायेगा.. लेकीन लखनने अ‍ेक बार भी उनकी ओर नही देखा.. तो लताकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर वो जटसे अंदर पुनमके पास चली गइ.... अब आगे

पुनम : (लताकी आंखमे आंसु देखते) दीदी.. क्या हुआ.. अ‍ैसे आंसु क्यु बहा रही हो..?

लता : (गले लगते) दीदी.. हमारे लखनने सबको बुलाया.. लेकीन मेरे तो सामने भी नही देखा..

पुनम : (मुस्कुराते) अरे.. उनका ध्यान नही होगा.. अ‍ैसी छोटी छोटी बातोपे दिल छोटा मत कीया कर..

लता : (सर जुकाते आंसु पोछते) दीदी.. मुजे पता हे वो मुजसे बात नही करेगे.. वो पती हे मेरे.. मे उसे अच्छी तराह जानती हु.. वो जब भी नाराज होते हे बात करना बंध कर देते हे.. ओर उनका रीजन भी पता हे मुजे..

पुनम : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो फीर बताओ क्या रीजन हे..?

लता : (नजरे जुकाते धीरेसे) दीदी.. मे उनको छोडके यहा चली आइनां.. इसीलीयें.. लेकीन क्या करु..? बडी दीदीने जो मुजे बुला लीया हे.. ओर उनको भी सब पता हे मे यहा क्यु आइ हु..

पुनम : (कंधेपे हाथ रखते) नही दीदी.. तुमको बडी दीदीने यहा नही बुलाया.. क्युकी तुम्हे अच्छी तराह पता हे असली रीजन क्या हे.. ये तेरी इच्छा थी.. की जब मेरा पीरीयड खतम होजायेगा.. तब सबसे पहेले मे बडे भैयाके साथ मीलन करुगी..

फीर लखनको छुने दुगी.. क्या यही इच्छा थीना आपकी..? तो फीर मम्मीने आपको बुलालीया.. तो क्या गलत कीया..? हम दोनो दुसरेके भुत भवीस्यके बारेमे जान लेते हे.. तो क्या तेरी मनकी बात हम नही जानते..? क्या ये सच हेनां..?

लता : (सरको हां मे हीलाते) हां दीदी.. आपकी बात सच हे.. लेकीन अब क्या कहु..? मे जीतना प्यार भाइको करती हु.. उतना ही प्यार लखनको भी करने लगी हु.. तो मे लखनकी नाराजगी सहेन नही कर सकती..

पुनम : (सामने देखते) वो इसीलीये नाराज नही हे की तुम उसे छोडडकर आगइ.. ओर बडे भैयासे सादी कर रही हो.. वो इस लीये नाराज हे की तुमने बडे भैयाके प्यारको पानेके लीये उनका इस्तमाल कीया.. ओर प्यारकी अ‍ेक उमीद जगाइ.. वो तुमसे कीतना प्यार करता था..

लता : (अपना सर पीटते) दीदी मेरी मती मारी गइ थी.. मेने इतना कुछ नही सोचा था.. ओर वैसे भी अब मंजु दीदीने सबको छुट तो देदी हे.. ओर आप ही कहेतीहोनां.. की आगे हम चारोको सम्हालना हे..

पुनम : (मुस्कुराते) लता.. तुम गलत नही हो.. सुन.. जबतक हमारा वीजय बडा नही होजाता.. तबतक हम चारोको जींदगी लखन भैयाके साथ गुजारनी हे.. ओर तेरे बच्चेके लीये बडे भैयाके साथ मीलन करना भी जरुरी हे.. तो इतनीसी बातके लीये लखन भैयाको दोस मत दो.. वो सीर्फ हमारा हे.. ओर वैसे भी अब तुम बडे भैयाकी बीवी होजाओगी.. अब चलो बहार..

लता : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. मंजुदीने मुजे आपके साथ जानेको मना कीया हे.. वो भावना दीदी ओर दया बहेन आपके साथ आ रही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. सुन.. वो इसीलीये आ रही हे ताकी यहा तेरा रास्ता साफ होजाये.. आप समज गइनां..? आप भी अब बडे भैयासे मीलनेकी तैयारीया करो.. वैसे तो हर रात हमसे छुपकर मीलती हो.. कहा तक आगे बढे दोनो..?

लता : (सरमाते हसते धीरेसे) ओह सीट.. दीदी मेतो भुल ही गइ थी.. आपको तो सब पता हे.. की हम दोनो कहा तक आगे बढे हे.. फीर भी वो मे आपको बादमे बता दुगी.. अभीतो चलो.. देखो.. सब नइ गाडीको कैसे टीका लगा रहे हे..





फीर दोनो बहार आगइ तो देखा घरकी सभी ओरते कारके पास इकठा होगइ थी.. ओर अ‍ेकके बाद अ‍ेक कुम कुम चावलसे कारकी बोनेटपे टीका लगा रही थी.. तो मंजुको लखनने ड्राइवींग सीटपे बीठाया था.. ओर वो डेस्क बोर्डपे टीका लगा रही थी.. तभी नीर्मलाका ध्यान पुनम ओर लताकी ओर गया.. उन दोनोको भी अपने पास बुला लीया.. उसने पुनमको अ‍ैसे कहेकर बुलाया पुनम सरमसे पानी पानी होगइ..

नीर्मला : (हसते) अरे.. दोनो वहा क्यु खडी हो.. पुनम बहु.. तु भी आजा.. अपने पतीकी गाडीमे टीका लगादे.. हें..हें..हें..

पुनम : (सर्मसार होते मुस्कुराते) जी नानीमां..

भुमीका : (हसते) आजा लता.. तुभी आजा लगादे टीका..

मंजुला : (कारसे उतरते) पुनो बेटा.. इधर आजा.. तु स्टीयरींगपे लगादे.. ओर लता तुभी अंदर आजा तुभी लगादे..

फीर पुनम ओर लताभी टीका लगाती हे.. तो लखन पुनमको देखकर खुस होगया.. ओर उसने लताकी ओर देखा तक नही.. जीसे लताका मुड ओफ होगया.. ओर मनही मन दुखी होगइ.. उसे यकीन होगया की लखन उनसे नाराज हे.. फीर सब लोग अंदर आगये.. ओर होलमे बैठ गये.. तो पुनम लता भावना उनके रुममे चली गइ.. लखनने सबका मुह मीठा करवाया.. ओर मंजुके पास आकर बैठ गया.. तो मंजु उनके सरपे हाथ घुमाने लगी..
 
मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. पुनो ओर भावु रेडी हे.. लता नही आ रही.. इसके बदले हमारी दया बहेन आ रही हे.. उसने तो सादीकी खरीदी भी नहीकी.. अ‍ैसे ही उनका ब्याह होगया.. जब दो तीन दिनमे सब खतम होजाये.. तो तीनोको यहा छोडजाना..

लखन : (मुस्कुराते) जी मोम.. मे सबके लीये कपडे लेआउगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. अभी बहुत कपडे पडे हे.. पीछली बार भी तुम बहुत सारे कपडे ले आये थे.. अभी तो सीर्फ पुनोकी सादीके कपडे ही लेना.. ओर कुछ दया बहेन ओर भावनाके लीये.. तेरे लीये भी कुछ लेलेना..

लखन : (मंजुके कंधेपे सर रखते) ठीक हे मोम.. जैसा आप कहे.. मे सब देख लुगा..

भुमीका : (आंख गीली करते) लखन बेटा.. कैसी हे मेरी सृती..? वो ठीक तो हेनां..?

लखन : (हसते फोन लगाते) हां भाभी.. आपकी बेटी अ‍ेक दम मस्त हे.. तीन दिन पहेले ही हाथकी पटी नीकलवाकर आये हे.. बस.. थोठी पैरमे प्रोबलेम हे.. वो भी जल्द ठीक होजायेगी.. रुको.. अभी आपकी बात करवाता हु.. हें..हें..हें..

भुमीका : (सरमाते जुठे गुस्सेसे अ‍ेक मुका मारते) भाभीके बच्चे.. बुआ हु तेरी.. तु अब जरुर मेरे हाथसे पीटेगा.. मेरी भी मस्ती करने लगा हे.. अभी तो बात कर लेती हु.. बादमे तुजे देखती हु..

मंजुला : (जोरोसे हसते) अ‍ेय दीदी.. मेरे बेटेको मारो मत.. सहीतो कहा इसने.. हें..हे..हें..

भुमीका : दीदीकी बच्ची तुभी वोही हे.. तेरी मां भीतो हमारी सौतन हे.. तो फीर इनको नानीमां क्यु कहेता हे..?

नीर्मला : (अ‍ेक मुका जडते) कमीनी मेरा नाम क्यु ले रही हे.. ठीक हीतो कहा मंजुने.. सौतन हुतो क्या हुआ..? हेतो मेरी बेटी ही.. ओर लखन उनका बेटा हेतो मेतो नानी हुइ की नही..?

भुमीका : (जोरोसे हसते) हे भगवान.. यहा तो दो दिनमे ही रीस्ते बदल जाते हे..

मंजुला : (हसते) मोम.. कुछ महीने ठहेरीये.. यहा जो बच्चे कुच्चे रीस्ते हे.. वो भी खतम होजायेगे..

नीर्मला : (हसते) हे भगवान.. हमे ओर क्या क्या देखनेको मीलेगा..

लखन : (हसते) अ‍ेक मीनीट.. फोन लग गया.. हाइ स्वीट हार्ट.. कैसी हे आप..? खाना खालीया..?

सृती : (सरमाते हसते) नही जानु.. बस.. अभी खालेगे.. क्या गांव पहोंच गये आप..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. पहोच गया.. लीजीये अपनी मम्मीसे बात कीजीये..

भुमीका : (हसते फोन लेते लखनको अ‍ेक मुका मारते) हां बेटा..? कैसी हो तुम..? हाथ पैरमे सब ठीक हो गया..?

सृती : (आंख गीली करते) मोम.. मे ठीक हु.. अभी पैरमे थोडीसी प्रोबलेम हे.. वो भी ठीक होजायेगी.. पहेले ये बताओ.. आप कैसी हे..? मोम.. वहा आप खुस तो हेनां..?

भुमीका : (आंख गीली करते) हां बेटा.. मे यहा बहुत बहुत.. खुस हु.. यहा मेरा खयाल रखने वाली मंजु बेटी हे.. ओर सब लोग हमारा खयाल रखते हे.. तु मेरी चीन्ता मत कर.. ये बता.. वहा तुजे लखन बेटा तंगतो नही करता..? तो बोलदे.. अभी यही हे.. इनकी खुब पीटाइ कर दुगी..

सृती : (हसते) नही मोम.. वो आपकी बेटीको बहुत प्यार करते हे.. मेरा वोही तो खयाल रख रहे हे.. मोम.. वो बहुत अच्छे हे..

भुमीका : (हसते) अरे..? क्या बात हे..? आज तो तु इनकी बडी तारीफ कर रही हे..? हमेसा तो दोनो जगडते रहेते हो.. तो आज उल्टी गंगा कैसे बेह रही हे..?

सृती : (हसते) मोम.. क्या आपभी..? हम कहा जगडते हे..? बस.. थोडीसी मस्तीया करते थे.. मोम.. आपको कोइ तकलीफ तो नही..? मीन्स.. वो.. आपकी प्रेगनन्सीमे.. मे वहा आउगी तब देख लुगी..

भुमीका : (सरमाते धीरेसे) नही बेटा.. सब ठीक हे.. यहा आओ तब देख लेना..

सृती : (मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. मोम.. फोन जरा लखन भैयाको देनां.. मुजे उसनसे कुछ काम हे..

भुमीका : (हसते फोन वापस देते) ले लखन बेटा वो तुमसे बात करना चाहती हे..

लखन : (फोन लेते बात करते) हां दीदी.. कहीये.. क्या बात करनी हे..

सृती : (सरमाते धीरेसे) लखन भैया.. अभी वहा कीसीको हमारे बारेमे मत बताना.. मे पुनोदीसे बात करलुगी.. जब मम्मी रुबरु मीलेगी तो मे उनको सरप्राइज देना चाहती हु.. आप समज गयेनां..? जानु.. आप वापस कब हा रहे हो..? जल्दीसे आजाओनां.. आपके बीना यहा अच्छा नही लगता..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी..हम खाना आकर नीकल जायेगे.. तो साम तक आजाउगा.. ओके..? चलो बाय..

भुमीका : (जोरोसे हसते) आज तो बीवीको लेने आया तो जल्दी भाग जायेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) हां.. तभी मे सोचु.. की सृतीदी मेरी इतनी मस्तीया क्यु कर रही हे.. अब मांका गुण बेटी मेतो आयेगा ही.. अब तो आप भी मेरी भाभी होगइ हो.. देखना अब आपको भी नही छोडुगा..

नीर्मला : (जोरोसे हसते) हां.. छोडना भी मत.. वरना मे तुजे पीटुगीं.. हें..हें..हें..

कहा तो सबलोग जोरोसे हसने लगे.. तो भुमीका भी सरमाकर हसते हुअ‍े लखनको मुका मारने लगी.. अ‍ैसे ही मस्ती मजाक करते रहे तबतक देवायतभी घरपे आ गया.. तो लखनने उनको अपनी कार दीखाइ तो देवायतने अ‍ेक चकर भी लगाइ.. फीर सबलोग खाना खाने बैठ गये.. आज पुनम बहुत ही सरमा रही थी.. ओर बार बार टेडी नजर करते लखनको देख लेती थी.. जैसे उनकी नइ नइ लखनके साथ सगाइ हुइ हो.. तभी..
 
मंजुला : (मुस्कुराते) देवु.. पुनो भावु ओर दया बहेन लखनके साथ सादीकी खरीदारी करने सहेर जा रही हे.. आपके कपडे भी लेले क्या..? लखनको आपके नाप पता हे..

देवायत : (थोडा सीरीयस होते) नही मंजु.. मेरे पास तो बहुत सारे कपडे हे.. लेकीन मेरी मान.. तुम दयाको मत भेजो.. क्युकी मुजे रामुकाकाकी तबीयत कुछ ठीक नही लगती.. इनको होस्पीटलपे दीखाने गया था.. तो कहा सब उमर होजानेकी वजहसे हे.. तो मे सोच रहा हु.. आज साम काकाको घरपे ही लेआउ.. उनकी यहा देखभाल अच्छेसे होगी..

दया : (आंख गीली करते) दीदी.. तो फीर मे नही जा रही.. मे बापुका खयाल रखुगी..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे..? अ‍ैसे कैसे नही जाओगी..? वो सीर्फ तेरे बापु थोडीना हे..? वो हमारे भी पीता समान हे.. हम इनका खयाल रख लेगी.. तु आरामसे जा.. अभी उनको कुछ होने वाला नही हे.. समजी..?

दया : (आंसु पोछते मुस्कुराते) ठीक हे दीदी.. हम दो दिनमे तो वापस आजायेगे..

लखन : (हसते) दया भाभी.. चीन्ता मत करो.. काका अभी अ‍ैसे जायेगे नही.. फीर भी ज्यादा तबीयत बीगड गइ तो हम तभी चले आयेगे.. हमे सादीकी कोइ जल्दी नही.. वोतो बादमे भी हो सकती हे..

भुमीका : (जोरोसे हसते) अरे..? क्या ये लखन बेटा खुद केह रहा हे..?

मंजुला : (हसते) हां मेरा बेटा खुद केह रहा हे.. वो इतना तो समजदार हे ही.. (लखनकी ओर देखते) बेटा.. तुम लोग खाना खाकर ही नीकल जाओ.. ओर हो सकेतो आज ही सब फटाफट नीपटालो..

नीर्मला : (मुस्कुराते) पुनो बेटा.. तुम तीनोकी पेकींग होगइ हे..?

पुनम : (सरमाते सरको हांमे हीलाते) जी नानीमां सब कंपलीट हे.. अब भावुदीकी बच्चीको भी लेजा रहे हे..

भुमीका : (मुस्कुराते) हां ये सही हे.. बच्ची अभी छोटी हेतो मांकी जरुरत पडती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो बेटा.. जानेसे पहेले मुजे मीलकर जाना.. मुजे तुमसे अ‍ेक जरुरी बात कहेनी हे..

फीर सब लोगोने लंच करलीया तो होलमे बैठकर बाते कर रहे थे.. तो मंजु पुनमको लेकर अपने रुममे चली गइ.. वहा चंदा विजयको अपनी गोदमे लेकर गुमसुम बैठी थी.. बहारकी ओर लखन सबके पैर छुने लगा.. तो देवायतने लखनको खरीदी करनेके लीये अ‍ेक लाख रुपीये दे दीये.. तभी दया अ‍ेक बेग लेकर बहार आगइ.. फीर दया ओर भावना बच्चीको लेकर कारकी ओर जाने लगी.. तो रुममे..

पुनम : (मंजुके पास बैठते) हां मम्मी.. कहीये.. क्या बात कहेनी थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) बेटा.. सुन.. तुम वहा जाकर उन कुतीकी कीसी मंदिरमे जाकर लखनके साथ सादी करवा देना.. ओर होसके तो हमारे खानदानी मंदिरमे चली जाना.. ओर वापस आते उन कुतीको भी साथ लेआना.. वरना तीन चार दिनके बाद लखन सबको लेकर यहा आये तब उनके साथ ही चली आये.. वरना यहासे गुस्सा होकर गइ हे.. तो सरमके मारे आयेगी भी नही..

पुनम : (सरमाते हसते) जी मम्मी.. ये सब मेने ओर भैयाने भी डीसाइड करलीया हे.. हम उनको लेकर ही आयेगे.. मे चाहती हु.. हमारी सादी तक वो यही रहे..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) ये अच्छा कीया तुमने.. ओर सुन.. मेरे बेटेको कहेना.. जरा सम्हालके.. क्युकी तेरे पेटमे अभी बच्चा हे.. तु समज गइनां..? हालत अच्छी होजाये तबतक वहा आराम करना.. यहा वापस आनेकी कोइ जल्दी नही..

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) मोम.. क्या सादीसे पहेले.. मीन्स..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. मुजे सब पता हे.. जीले अपनी जींदगी.. इसीलीये तो इतने दिन तुम दोनोको दुर रखा था.. ताकी तुम दोनोके दिलमे अ‍ेक दुसरेकी तडप बढ सके.. ओर खरीदारी तो अ‍ेक बहाना हे.. दरसल लखन तेरे बीना पागल हो रहा हे.. ओर वहा मीलनेमे कोइ दिकत आयेतो दोनो सृतीके घर चले जाना..

पुनम : (धीरेसे सरमाते) मोम.. वो लता..

मंजुला : (मुस्कुराते) हंम.. जानती हु तुम क्या पुछना चाहती हो.. वोतो तुजे भी पता हे मेने उनको यहा क्यु रोका हे.. सुन.. आज भावु.. दया बहेन.. कोइ यहा नही होगी.. तु समज गइनां..? जीस तराह आज तुम लखनसे मील जाओगी..

उसी तराह आज मे चाहती हु देवु ओर लता मील जाये.. मे चाहती हु तेरे ओर लखनकी सादीके साथ देवु ओर लताकी सादी भी करवादु.. फीर अ‍ेक वंदु रहेगी.. जो कल मे उन दोनोको मंदिर भेज रही हु.. तो उनसे भी सादी होजायेगी..

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते) जी मम्मी.. तो फीर मे चलु..?

मंजुला : (प्यारसे सरको सहेलाते) हंम.. चल जा.. वो तेरा इन्तजार करता होगा.. उनको कहेना गाडीको थोडी सम्हालके धीमे चलाये.. जा अब.. बेस्ट ओफ लक.. ओर सुन.. चंदा दीदीको मीलकर जाना..

पुनम : (सर्मसार होते पैर छुते) जी मम्मी.. थेन्क्स..

पैर छुकर जैसे ही पुनम चंदाके पास चली गइ.. ओर उनका पैर छुआ तो चंदाने सर उचा करते पुनमकी ओर देखा.. तो पुनमको देखती हे उनकी आंखसे आंसु नीकल गये.. ओर उसने खडी होते पुनमको जोरोसे गले लगा लीया.. तो पुनमने अलग होते उनके आंसु पोछे.. ओर उनकी आंख भी गीली होगइ.. फीर पुनम भी बहार नीकल गइ.. तो भावनाने पुनमको आगे लखनके साथ बैठनेके लीये कहा तो पुनम सरमा गइ.. ओर लखनके साथ बैठ गइ..
 
फीर लखन सबको बाय कहेके वहासे नीकल गया.. पुनम मनमे बहुत खुस हो रही थी.. क्युकी आखीर उनको लखन मील ही गया.. वो अपने आपको लखनको समपीर्त करनेका सोचते बहुत ही रोमांचीत फील करने लगी.. ओर बार बार लखनकी ओर देखते सरमाके मुस्कुरा रही थी.. तभी कार ड्राइव करते लखनने उनका हाथ थाम लीया.. जीसे देखकर दया ओर भावना भी हसने लगी..

दया : (हसते) लखन भैया.. सम्हालके.. अभी हमारी दीदी आपको कायदेसे मीली नही हे.. हें..हें..हें..

भावना : (हसते) हां.. तभी मंजुदीने हम दोनोको इनका खयाल रखनेके लीये ही साथ भेजा हे.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते) अच्छा..? अगर ज्यादा चपड बपड कीनां.. तो फीर दोनोको यही उतार दुगा.. ओर वापस पैदल चली जाना.. जाकर केह देना मम्मीको.. की लखन भैया पुनमदीको लेकर भाग गये हे.. अब हमे कोइ जुदा नही कर सकता.. आप दोनो भाभीया भी नही.. समजी..?

दया : (जोरोसे हसते) ओ बापरे.. यार हम तो मजाक कर रही थी.. आपको तो पता हे मे भी आपकी दीदी हु..

भावना : (हसते) हां.. ओर मे आपकी मौसी हु.. क्युकी आप मंजुदीको अपनी मां मानते होनां..?

लखन : (हसते) हां.. लेकीन अब दोनो भाइकी बीवीया भी तो हो.. मुजे सब पता हे आप दोनोके बारेमे.. इसीलीये दोनो ज्यादा होशीयारी मत दीखाना.. वरना दोनो गइ कामसे..

भावना : (पुनमको अ‍ेक चपत लगाते) क्या..? आपको सब पता चल गया..? लगता हे आपकी होने वाली इस बीवीने बता दीया होगा.. की मेने आपके भाइसे सादी करली हे.. देवरजी.. प्लीज.. अभी देखना इस बारेमे भानुको पता ना चले..

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. फीकर मत करो.. मेभी तो मजाक कर रहा था.. क्या अ‍ैसी बाते भी कभी बताइ जाती हे..? वैसे भी बता दीया तो क्या फर्क पडता हे.. उनको भी पता चल गया हे.. की आपने उसे छोड दीया हे.. अब हमे पांचोको ही तो सबकुछ सम्हालना हे..

दया : (हसते) लेकीन लखन भैया.. मेने भैयासे सादी करली तो क्या हुआ.. आपकी तो बहेन हु..

लखन : (हसते) नही भाभी.. आपको तो पता हेना. हम अपनी बहेनसे ही सादी करते हे.. तो अगर आप मेरी बहेन होना चाहती हे तो सोचलो.. आप भी फस जाओगी..

दया : (लखनको चपत लगाते जोहोसे हसते) ना बाबा नां मेरी आपके बडे भैयासे सादी हुइ हे वो ही ठीक हे.. मुजे नही बनना आपकी बहेन.. मे आपकी भाभी ही ठीक हु.. मे दो दो पतीको नही जेल सकती.. हें..हें..हें..

पुनम : (दयाकी ओर हसते) दीदी.. आप दोनो कीतनी भी कोसीस करलो.. अब तो मेरे इस पतीसे बच नही सकती..

भावना : (जोरोसे हसते) वाह.. लखन भैया.. क्या बीवी मीली हे आपको.. आपकी सामनेसे सबकी सेटींग करवा रही हे.. फीर चाहे बहेन हो या भाभी..

पुनम : (हसते) हां तो सही हेनां.. इसमे गलत भी क्या हे.. भाभीमांने अ‍ैसे ही सबको छुट नही दी.. समजी..? जो भी करना हो सबके सामने..

कहा तो भावना ओर दया दोनो ही सर्मसार होगइ.. ओर दोनो पुनमको मारने लगी.. तो पुनम भी जोरोसे हसते दया ओर भावनासे बचनेकी कोसीस करते दुर होगइ.. भावना लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते हसती रही.. अ‍ैसे ही मस्ती मजाक करते सब लोग सहेर पहोंच गये.. तो दुसरी ओर बंसी भी जागृतीके साथ सादी करके वापस गांवमे आगया था..

अब जागृती कायदेसे बंसीकी बीवी होगइ थी.. मांगमे सींदुर ओर गलेमे मंगलसुत्र.. मुना श्रीधर बंसी जागृतीकी सुहागरातकी तैयारीया करने लगे.. तो जयश्री ओर बरखा जागृतीको सुहागरातके लीये सजानेमे लगी हुइ थी.. तो इन सबसे दुर भानुके गांव भी खाना खाकर सरला काकी अपने रुममे जाकर सो गइ थी.. रमा ओर नीलम अपना सब काम नीपटाके रमाके रुममे लेटकर आराम करते बाते कर रही थी..

रमा : (नीलमकी ओर करवट लेते सरमाते धीरेसे) नीलु.. अ‍ेक बात पुछु..? तुम अपने लखन जीजुके साथ कुछ आगे बढी की नही..?

नीलम : (रमाकी ओर करवट लेते धीरेसे) नही मोम.. आपको नही लगता हम दोनो उन लोगोके साथ कुछ गलत कर रहे हे..? वो लोग बहुत अच्छे हे.. हमारा कीतना खयाल रखते हे.. खास करके लखन जीजु.. मुजे बीना मांगे ही पैसे दे देते हे.. मुजे स्कुलपे छोडने लेने आते हे.. मुजे कपडे दीलवाते हे.. वो मेरी हर जरुरतको पुरा करते हे.. वो भी उमीदसे ज्यादा.. तो फीर हम उनके साथ अ‍ैसा क्यु कर रहे हे..?

रमा : (सामने देखते) हां नीलु.. तेरी ये बात तो सच हे.. आज वो मुजे भी कुछ पैसे देकर गये हे.. तुजे पता हे मुजे कीस लीये पैसे दीये..?

नीलम : (मुस्कुराते धीरेसे) हां मोम.. मुजे यहा आकर अभी दादीसे पता चला.. की आप प्रेगनेन्ट हे.. इसीलीये आपकी सेहतका खयाल रखनेके लीये दीये.. मेने सब देखा हे.. मोम.. आपसे अ‍ेक बात पुछु..? मुजे सच बताना..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. तुजे लगता हे हम दोनोके बीच अब कोइ पर्दा बचा हे..? तु मेरे बारेमे सब जान तो गइ हे.. बता क्या पुछना हे..?

नीलम : (सरमाते धीरेसे) मोम.. वो.. वो.. मुजे पता हे पापा आपको संतुस्ट नही करपाते.. तो बच्चा क्या खाकसे देगे..? क्या ये बच्चा.. मीन्स.. वो.. लखन जीजुका हेनां..? क्युकी वहा हर रात आप दोनो मीलते थे.. तो ये उसीका नतीजा हे.. मे सच केह रही हुनां..?

रमा : (आंख गीली करते) हां नीलु.. तो मे क्या करती..? हम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करने लगे हे.. ओर तेरी दादीको मुजसे अ‍ेक ओर बच्चा चाहीये.. तेरे पापासे तो अब कुछ नही होता.. तो में क्या करती..? मे तेरे जीजुसे बहुत प्यार करती हु.. नीलु.. क्या मेने कुछ गलत कीया..?
 
नीलम : (मुस्कुराते गले लगाते) नही मोम.. आपने बीलकुल सही कीया.. प्यार होना हमारे बसमे हेही नही.. वोतो कीसीको भी कीसीके साथ हो सकता हे.. प्यार रीस्ते ओर उमर तक नही देखता.. ओर मे इसे गलत भी नही मानती.. मोम.. मे बहुत खुस हु.. की आपकी सभी तम्मना पुरी हो रही हे.. लेकीन मोम.. उनके खानदानके बारेमे आपसे अ‍ेक बात कहु..? जो सायद आप नही जानती होगी..?

रमा : (नीलमके सरको सहेलाते) हंम.. मुजे बहुत कुछ पता हे.. फीर भी बता.. मे क्या नही जानती..

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. जीजुका खानदान कोइ सामान्य खानदान नही हे.. उनके खानदानसे जुडी हर ओरत यातो अप्सराये या फीर परीया हे.. फीर चाहे हम हो या फीर उनके गांवकी ओरत.. हर कोइ ओरतका उनके खानदानसे संबंध हे.. वो सब यही हे..

रमा : (आस्चर्यसे देखते) नीलु.. ये तुम क्या केह रही हे..? मतलब हम भी..? इतना तो पता हे उनके खानदानमे कोइ राजा जन्म लेने वाला हे.. ओर इसीलीये सभी मर्द उनकी बहेनसे सादी करते आये हे.. लेकीन इतना कुछ मुजे नही पता.. तुम उनके बारेमे ओर क्या जानती हो.. बता मुजे..

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. आप उस हिमाचलके बारेमे जानती हे..? जहा आज भी कोइ विधवा या त्यक्ता नही मीलती.. उस गांवमे अब कोइ रीस्ते नाते नही देखते.. वहाके अ‍ेक गांवमे आज अ‍ेक परंपरा होगइ हे.. जो ज्यादातर लोग अपनी बहेनसे ही सादी करते हे.. या फीर आपसी रीस्तोमे.. ओर ये परंपरा वहाके अ‍ेक राजाने कायम की हे.. जो उनकी कइ रानीया थी.. ओर ज्यादातर उनकी बहेने थी..

रमा : (सामने देखकर मुस्कुराते) अरे हां.. ये बात मेने कीसीसे सुनी हे.. तो फीर उनका क्या..?

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. वोही राजा ओर उनकी रानीया.. दुबारा जन्म लेकर जीजुके खानदानमे आइ हे.. ओर उसी खानदानमे वोही राजा दुबारा जन्म लेकर आयेगा.. इसीलीये केह रही हु.. यहा कोइ सामान्य ओरत नही हे.. सायद हम भी.. तो फीर हम हमसे ही धोखा दे रही हे..

रमा : (आस्चर्यसे सोचते धीरेसे) नीलु.. तेरे कहेनेका मतलब हम भी वो ही हे..? तेरा ये कहेनेका मतलब तो नही.. की तब हम भी उनकी रानीया थी..?

नीलम : (मुस्कुराते) हां मोम.. मेरा कहेनेका मतलब यही था.. अ‍ेक बात ओर.. बाबाने मंजुदी ओर पुनोदीको कुछ शक्तिया दी हे.. जीसे दोनोको सब पता चल जाता हे.. की आगे क्या होने वाला हे.. हो सबता हे उनको आपकी साजीसके बारेमे भी पता हो..

रमा : (चोंकते बेडपे बैठ जाती हे) नीलु.. ये तुम क्या केह रही हो..? अ‍ैसा नही हो सकता.. तब तो हम दोनो फस सकते हे.. फस सकते हे क्या समजोना हम फस चुकी हे..

नीलम : (सामने देखते) येस मोम.. इसीलीये केह रही हु.. ये सब प्लान छोड दो.. क्युकी लखन जीजुके साथ बाते करते मुजे पता चल गया हेकी उनको हमारे बारेमे सब मालुम हे.. ओर वैसे भी हमे अ‍ैसे ही सबकुछ मील जाता हे.. तो फीर हमे उनके खीलाफ अ‍ैसी साजीस करनेकी क्या जरुरत हे..?

रमा : (अपना सर पकडते) हे भगवान.. हमसे ये कैसी गलती होगइ..? येतो मेने सोचाही नही था.. नीलु.. तु ठीक केह रही हे.. अब हम क्या करेगे..? अब तेरे पापाको सब पता चल गया तो वोतो हम दोनोको मार ही डालगे.. नीलु.. क्या लखनजीने ओर कुछ कहा..?

नीलम : (बेडपे बैठते रमाका हाथ पकडते) हां मोम.. आप गभराइअ‍े नही.. उसने मुजे आपको अ‍ैसा ना करनेके लीये समजानेको कहा हे.. वो लोग बहुत अच्छे हे..

रमा : (डरते) ना बाबा ना मुजे कुछ नही करना.. हे भगवान.. हमसे ये क्या भुल होगइ..? अब उनसे मे कैसे नजरे मीलाउगी..? मेरी तो कुछ समजमे नही आ रहा..

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. वो आपसे प्यार करते हेनां..? वोतो आको माफ करदेगे.. लेकीन मेरी मानो.. आप अ‍ेक बार अकेलेमे मंजु मोमकी मांफी मांगलो.. मुजे यकीन हे.. वो आपको माफ करदेगी.. क्युकी वो मुजे अपनी बेटी मानती हे.. बहुत नेक दिलकी हे.. मुजे पका यकीन हे.. इस बारेमे वो कीसीको कुछ नही कहेगी..

रमा : (हांमे सर हीलाते) हां नीलु.. यही ठीक रहेगा.. मुजे वो अकेली मीलेगी तब उनकी माफी मांग लुगी.. ओर ये काम तेरे पापाको पता चले इनसे पहेलेही नीपटाना होगा.. अच्छा कीया तुम यहा समयसे पहेले आगइ.. ओर मुजसे बात करली.. नीलु.. थेन्कयु बेटा..

नीलम : (मुस्कुराते) मोम.. थेन्क्यु मुजे नही.. लखन जीजु मीलेतो उनको कहेना.. क्युकी ये सब आपको कहेने लीये उन्होने ही मुजे कहा हे.. मुजे यकीन हे वो आपको माफ करदेगे.. लेकीन..

रमा : (सरमाते हसते) लेकीन क्या..?

नीलम : (हसते धीरेसे कानमे) मोम.. आपको माफ तो करेदेगे.. लेकीन उनकी सजा भी देगे.. अपने तरीकेसे.. हें..हें..हें..

रमा : (सरमसे पानी पानी होते नीलमको अ‍ेक मुका मारते) कीतनी कमीनी हे.. तु बाज नही आओगी.. अपनी मांसे इस तराहकी बात कोइ करती हे..? मे तेरे कहेनेका सब मतलब समजती हु.. बेसर्म कहीकी..

नीलम : (हसते) ये.. हेलो.. मे कोइ अपनी मांसे बात नही कर रही.. समजी..? मेतो अपनी सहेलीसे बात कर रही हु.. हें..हें..हें..

रमा : (जोरोसे हसते नीलमको गुदगुदी करते) सहेलीकी बच्ची.. हें..हें..हें..

कहेते नीलमको गुदगुदी करने लगी.. तो नीलम भी जोरोसे हसते उनसे बचनेके लीये हांथ पांव चलाने लगी.. ओर मस्तीया करते नीलम रमाके बुब्सको छेडने लगी.. तो रमा बहुत ही सर्मसार होगइ.. तभी अचानक नीलमने अपने होठ रमाके होठोपे रखदीया.. ओर चुमने लगी.. तो रमा नीलमकी आंखोमे देखने लगी.. उसे नीलमकी आंखोमे वासना साफ दीखाइ दे रही थी.. ओर वो नीलमका साथ देने लगी..



 
तभी अचानम रमा बेडसे उतर गइ.. ओर जटसे जाकर रुमका दरवाजा बंध करके वापस आकर अपने कपडे नीकालने लगी.. तो नीलम भी रमाकी ओर मुस्कुराते कपडे नीकालने लगी.. जब दोनो पुरी नंगी होगइ.. तो रमा बेडपे आगइ.. दोनो काफी उतेजीत हो चुकी थी.. फीर वो ओर नीलम अ‍ेक दुसरेके अंगोके साथ खेलते प्यार करने लगे.. अचानक नीलमने रमाको धका मारते बेडपे सुला दीया ओर उनके उपर चड गइ..





फीर रमाके बुब्सको थामते उनके होठोपे कीस करने लगी.. रमाकी चुतसे अपनी चुत रगडने लगी.. तो रमा भी आंखोकी पुतलीया पलटते मदहोस होगइ.. ओर वो भी वासनाकी आगमे जलने लगी.. दोनो मां बेटी अ‍ेक दुसरेकी चुतसे चुत रगडते बहुत उतेजीत होगइ.. ओर लेस्बीयन खेलते वासनाके भवंडरमे उडने लगी.. फीर बीस मीनीटके बाद दोनो ही खलास होगइ.. ओर अ‍ेक दुसरेसे चीपकते नंगी ही लेटी रही.. तब..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. कीतना अजीब हेनां.. अ‍ैसा लगता हे मुजे तुमसे भी प्यार होगया हे.. लगता ही नही की तु मेरी बेटी हो.. आज तुजे मीलकर कीतना सुकुन मीला.. बेटा.. सच बताना तुजे मेरी कसम.. तुम ओर लखनजी कहा तक आगे बढे..? क्युकी मुजे लगता हे तुम दोनो काफी आगे बढ चुके हो..

नीलम : (थोडी नाराज होते) मोम.. आपने अपनी कसम क्युदी..? मे नही बता सकती आपको..

रमा : (प्यारसे गाल सहेलाते) अरे बेटा.. तुम मुजसे इतना डरती क्यु हो..? अगर तुम दोनो मील गये हो तो भी मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. बस.. तुम सीर्फ अभी अपनी सेफ्टीका खयाल रखना.. ओर कुछ नही..

नीलम : (सरमाकर मुस्कुराते) मोम.. सच कहु..? अभी तक हम दोनो सीर्फ ओरल सेक्स तक ही आगे बढे हे.. वो ओरलमे ही मुजे संतुस्ट कर देते हे.. वो ओरल सेक्स बहुत अच्छा करते हे.. बस.. हम दोनो यही तक आगे बढे हे.. कसमसे..

रमा : (मुस्कुराते) तो क्या ओरल सेक्स करते कभी तेरा मन नही हुआ..? हंम..? मुजे पता हे वो ओरल सेक्समे ही हमे जडा देते हे.. मेतो रेह भी नही सकती.. इतने दिन वहा रही उन्होने मुजे कीतना कुछ सीखाया.. मुजे बहुत सुख दीया.. जो आज तक तेरे पापाने भी नही दीया.. मुजे ओरल सेक्समे भी जनतकी सेर करवाते थे वो.. जो मे अभी तक नही भुली..

नीलम : (सरमाते धीरेसे) मोम.. मनतो मेरा भी बहुत करता हे.. मे बहेक जाती तब अ‍ेक दो बार मेने उनको अंदर डालनेको भी कहा.. लेकीन मेरे खयालसे वो अंदर डालनेमे बहुत डरते हे.. क्युकी उनका बहुत बडा हेतो उनको डर हेकी मुजे कुछ हो ना जाये.. वो कहेते थे तु दो दिन बीस्तरसे उठ नही पायेगी.. ओर घरमे सबको पता चल जाता.. सायद इसीलीये वो आगे नही बढ रहे..

रमा : (सरमाते मुस्कुराते) नीलु.. सही कहा उसजे..कीतने समाजदार हे वो.. मेने तो तेरे पापाके साथ भी इतना सेक्स कीया हे.. फीर भी हम वहा पहेली बार मीले तो मेभी दो दिन बीस्तरसे उठ नही पाइ.. मानोनां उस रात हम दोनोकी सुहागरात हुइ.. इसीलीये तो दुसरे दिन मुजे बुखार आगया था..

मुजे ठीक होनेमे दो दिन लगे.. तब जाके सही हुइ.. फीर तो हर रात हम मीलते थे.. उसने मुजे पुरी तराह संतुस्ट कीया.. संतुस्ट क्या मुजे प्रेगनेन्ट तक करदीया.. बस.. तु आगे बढे तो अपना खयाल रखना.. वो आइपील लेना कभी मत भुलना..

नीलम : (मुस्कुराते) ठीक हे मोम.. सच बताना.. आपको जीजुने प्रेगनेन्ट करदीया तो आपको कैसा लगता हे..? क्या आप इस बच्चेको जन्म दोगी..?

रमा : (सर्मसार होते धीरेसे) हां क्यु नही..? नीलु.. अब क्या बताउ तुजे.. वो मुजे जनतकी सेर करजाते थे.. ये हम दोनोके प्यारकी नीशानी हे.. तो मे इसे क्यु जन्म ना दु..? नीलु.. मे इनको जन्म दुगी.. यहा आकर तेरे पापाके साथ भी सेक्स करलीया हे.. तो इस बारेमे कीसीको पता भी नही चलेगा.. सीर्फ हम तीन लोग ही जानते होगेकी ये बच्चा मेरे लखनका हे.. मे लखन ओर तुम.. बस.. खयाल रखना इस बारेमे कीसीको पता ना चले..

नीलम : (मनमे) मोम.. अब तुजे क्या बताउ.. इस बारेमे हम तीन नही पांच लोग जानते होगे.. आप पुनमदी.. ओर मंजुमोमको भुल गइ.. उन दोनोको सबकुछ पता होगा..

रमा : (मुस्कुराते) नीलु.. क्या सोच रही हे..?

नीलम : (मुस्कुराते) कुछ नही.. मोम.. हमारी साजीसके बारेमे भुल जाइअ‍े सब.. जो हम दोनोको बरबाद कर देगे.. वैसे भी हम दोनोका अच्छेसे सेट हो गया हे.. आप अपने तरीकेसे जींदगी जीये मे अपने तरीकेसे जीयुगी.. हम दोनोकी जींदगी सवर जायेगी.. ओर जींदगीका मजा लेती रहेगी.. क्या कहेती हो..?

रमा : (मुस्कुराते) हां नीलु.. तु ठीक केह रही हे.. आजसे तु आजाद.. मे तुजे लखनजीसे सादीका फोर्स नही करुगी.. अब हम कुछ नही करना.. बस.. हम दोनो अच्छी सहेली बनकर रहेगी..

नीलम : (खुस होते) मोम.. दोनो भाइकी कीतनी बीवीया हे.. ओर मे कीसीकी सौतन बनके रहेना नही चाहती.. मे अ‍ेक आजाद पंछीकी तराह उडना चाहती हु.. तो लखन जीजुसे तो सादी नही करुगी.. जब समय आयेगा.. तो लता दीदी ओर जीजु कहे वहा सादी कर लुगी.. क्युकी मुजे सरकारी नोकरी करके मेरी सीक्योर लाइफ चाहीये.. आप मेरी चीन्ता करना तो छोड ही दीजीये.. मे अपने तरीकेसे जीना चाहती हु..

रमा : (गले लगाते) लगता हे मेरी बेटीने अपनी जींदगीके बारेमे काफी कुछ सोचके रखा हे.. ठीक हे.. तु जैसा जीना चाहती हे अ‍ैसा जीनां.. बस.. मुजे कभी मत भुलना.. क्युकी अब मुजे तेरा ओर भावेशका ही सहारा हे.. अब भावेश ही मेरा बेटा हे.. वो भी मुजे अपनी मां मानने लगा हे.. मे इसे पालुगी..

दोनो मां बेटी बाते करती रही.. तबतक सहेरमे लखन भी सबको लेकर घरपे आगया.. तो पुनम जटसे कारसे उतर गइ.. ओर अंदरकी ओर दोड पडी जीसे देखकर तीनो हसने लगे.. दयाभी तीनोके कपडेकी बेग लेकर उतर गइ.. तो भावना भी अपनी बच्चीको गोदमे लेकर उतर गइ..

लखन उतरके कारको लोक करके भावनाके पास आ गया.. ओर बच्चीको अपनी गोदमे लेलीया.. बच्चीको लेते लखनने धीरेसे भावनाके बुब्स दबा दीया.. तो भावना बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर कामुक नजरोसे मुस्कुराते लखनको जुठे गुस्सेसे मुका मार दीया.. फीर तीनो घरके अंदर जाने लगे.. तभी....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५४

दोनो मां बेटी बाते करती रही.. तबतक सहेरमे लखन भी सबको लेकर घरपे आगया.. तो पुनम जटसे कारसे उतर गइ.. ओर अंदरकी ओर दोड पडी जीसे देखकर तीनो हसने लगे.. दयाभी तीनोके कपडेकी बेग लेकर उतर गइ.. तो भावना भी अपनी बच्चीको गोदमे लेकर उतर गइ..

लखन उतरके कारको लोक करके भावनाके पास आ गया.. ओर बच्चीको अपनी गोदमे लेलीया.. बच्चीको लेते लखनने धीरेसे भावनाके बुब्स दबा दीया.. तो भावना बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर कामुक नजरोसे मुस्कुराते लखनको जुठे गुस्सेसे मुका मार दीया.. फीर तीनो घरके अंदर जाने लगे.. तभी.... अब आगे

भावना : (हसते) दया बहेन.. देखा आपने..? अपने ससुराल जानेके लीये कीतनी उतावली हो रही हे..

लखन : (भावनासे बच्चीको लेते) अ‍े हेलो.. ये आप दोनोका भी ससुराल हे.. मत भुलो ये भाइका ही घर हे.. समजी..?

भावना : (हसते लखनकी पीठमे मुका मारते धीरेसे) आप तो चुप ही रहो.. पता हे हमे.. सेतान कहीके.. कीसीने देख लीया होता तो..? अकेले मीलो.. आपकी तो बादमे खबर लेती हु..

लखन : (मुस्कुराते कानमे) मे अकेलेमे मीलनेका इन्तजार करुगा..

भावना : (सर्मसार होते पीठमे मुका मारते) अब अब अंदर चलीये.. (बंगलेकी ओर देखते) देवरजी.. हमारा बंगलोतो बहुत मस्त हे.. अंदरसे भी दीखानां.. मेतो यहा पहेली बार आइ हु..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अंदर तो चलो.. सब दीखाउगा.. बडासा होल कीचनके अलावा छे छे कमरे हे.. दो नीचे चार उपर..

भावना : (कामुक मुस्कानसे) लगता हे यहा तो आपकी बले बले हे.. चलीये..

अंदरकी ओर सृती ओर रजीया खाना खाकर होलमे ही सोफेपे लेटकर बाते कर रही थी.. तभी रजीयाने कारकी आवाज सुनी तो वो जटसे बैठ गइ ओर बार देखने जाने लगी.. तो सृती भी सोफेपे सही होकर बैठ गइ.. तभी अंदर पुनम दोडके आगइ.. तो सृतीने देख लीया.. ओर वो खुस होते वोकरके सहारे खडी होगइ.. तो पुनम उनको देखते ही दोडकर गले लगा लीया.. तो सृतीने भी कसके बाहोमे भीच लीया.. ओर रोने लगी..

पुनम : (कंधेपे सर रखते खुसीके मारे) दीदी.. मे आगइ.. अरे.. अरे.. रोइअ‍े मत.. कैसी हो आप..?

सृती : (खुसीसे आख गीली करते) दीदी.. मस्त.. अ‍ेकदम मजेमे.. बस.. आपको देखा तो खुसीसे आंसु आगये.. आप कहो.. कैसी हे आप..? अकेली आइहो..?

पुनम : (अलग होते दोनो हाथ थामते हसते) नही.. भावनादी ओर दयादीदी भी आइ हे.. आती ही होगी..

तभी भावना दया ओर लखन भी आजाते हे.. तो रजीया दयाको देखते ही खुसीसे उनके गले लग गइ.. फीर भावनाको भी गले मीली.. ओर अंदर आते दोनो सृतीके गले लग गइ.. फीर सब लोग सोफेपे बैठ गये.. तो लखन बच्चीको लेकर सृती ओर पुनमके बीच बैठ गया तो दोनो सर्मसार होगइ.. ओर मुस्कुराने लगी.. लखन बच्चीके साथ खेलने लगा.. तो भावना ओर दया हसने लगी..

भावना : (हसते) देवरजी.. अभीसे बच्चेको सम्हालनेकी प्रैक्टीस करलो.. आपको काम आयेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भावुदीदी.. मत छेडो इनको.. देखना कही पछताना ना पडे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) रजु.. तुम चाइ नास्ता बनालो.. तबतक हम सब फ्रेस होजाते हे.. फीर चाइ नास्ता करके हम सब नीकलते हे.. मम्मीने कहा हे.. आज जीतनी खरीदी हो सके करलो.. हम सब जा रहे हे..

सृती : (मुस्कुराते) भैया.. मे इस हालतमे कहा चलुगी.. आप सबलोग चले जााइअ‍े.. मे भावनादी की बच्चीको रखती हु..

पुनम : (मुस्कुराते) दीदी.. आप कारमे बैठी रहेना.. ओर वहा बच्चीको सम्हालना.. हम आपके बीना नही जायेगे.. क्युकी मम्मीने कहा हे.. आपके लीये भी कुछ लेना हे.. चलीये.. आप भी कंपलीट होजाइअ‍े.. क्या कपडे उपर हे..?

लखन : (पुनमको बच्ची देते) दीदी सम्हालीये इसे मे सृती दीदीको उपर लेजाता हु.. आप भी सब चलीये.. घर भी देख लीजीये ओर कंपलीट भी होजाइअ‍े.. तबतक रजु चाइ नास्ता बना लेगी..

दया : (मुस्कुराते) अरे वो अकेली सब कहा बनायेगी.. मे उनकी मदद करती हुनां.. फीर हम दोनो भी तैयार होजायेगे.. चल रजु.. कीतने दिनोके बाद मीली हे..

तभी लखन सृतीको अपनी गोदमे उठालेता हे.. तो सृती दोनो हाथ लखनके गलेमे डाल देती हे.. ओर सरमाके हसने लगती हे.. तो भावना बच्चीको ओर पुनम बेग लेकर हसते हुअ‍े उनके पीछे चली जाती हे.. रजीया ओर दया कीचनमे चाइ नास्ता बनाने चली जाती हे.. उपर जाकर लखन सृतीको सीधा बाथरुममे छोडके आजाता हे.. ओर सृती वाले रुममे फ्रेस होने चला जाता हे.. तभी..
 
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