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रमा : (जल्दीसे पास आते धीरेसे) लखनजी.. रुकीये जरा.. मुजे आपसे कुछ कहेना हे..
लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. क्या आप सचमे मां बनने वाली हे..? कहीये..
रमा : (सरमाते दरवाजेकी ओर देखते धीरेसे) हां लखनजी.. ये सब आपहीकी क्रीपासे हे.. आप फुफा नही.. इस बच्चेके पापा बनने वाले हे.. हमने वहा बहुत महेनतकी उसीका फल हे.. तो आपको भी मुबारक हो..
लखन : (दरवानेकी ओर देखते) भाभी.. क्या मेने कहा था अैसा कीया की नही..? वरना भानु भाइको सक होजायेगा..
रमा : (सरमाते धीरेसे) अरे हां बाबा.. जब आप छोडने आये थे.. उसी रात.. गोली खाकर तीन बार कीया हमने.. ओर आपको तो पता हे..? इनको रोज चाहीये.. तो फीर मे मना नही करती.. तो हमपे कीसीको सक नही होगा..
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. तो फीर मे चलता हु.. आप अपना खयाल रखीयेगा.. ओर ये लीजीये.. पांच हजार हे.. अपनी सेहतका खयाल रखीयेगा..
रमा : (आंख गीली करते पैसा लेते) लखनजी.. क्या सीर्फ रमा नही केह सकते..? हंम.. आपकोतो पता हेनां आपको मेने क्या माना हे.. अब आपही मेरे पती हो.. लखनजी.. अब कब मीलेगे हम..? हंम..?
लखन : (कारमे बैठते) रमा.. फीकर मत कर.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. मेरी सादीमे भी आना हे तुम लोगोको.. अगर मौका मीलेगा तो वही मीलेगे.. चलो अब मे चलता हु..
फीर लखन कार लेकर नीकल जाता हे तो रमा अपनी सारीके पलुमे पैसे छुपाकर अंदर चली गइ.. सरला खीडकीसे देखकर कातील मुस्कान करते बाथरुमसे बहार नीकल गइ.. आज उनको रमा ओर लखनकी असलीयतका पता चल चुका था.. जो बात वो पहेले भी जानती थी.. जब लखन उनको ओर रमाको छोडने घर आया था.. तब भी बाथरुम जाते उन्होने रमा ओर लखनकी चुदाइ देखली थी..
ये बात नीलम पहेलेसे ही जानती थी.. ओर इस बारेमे दोनो मांबेटी खुलकर चर्चा भी कर चुकी थी.. बस.. अभी नीलमको अपनी मम्मीके प्रेगनन्सीके बारेमे नही पता था.. तो इधर सरला भी कुछ सोचकर मन ही मन खुस होने लगी.. क्युकी अब देवायत इतनी सारी बीवीओकी वजहसे उनके पास आना ही छोड दीया था.. तबसे सरला भी काफी दिनोसे प्यासी थी..
सरला : (मनमे) कमीनी.. बीलकुल मुजपे गइ हे.. मे भी भानुके बापुके साथ अैसे ही करती थी.. हायरे मेरा कीशन.. हम दोनो कीतना प्यार करते थे.. कीशनने मेरी मांग भी भरी थी.. मे उनको ही अपना पती मानती थी.. तो क्या रमा ओर लखनने भी वोही कीया होगा..? तभी तो रमा लखनको अपना पती मानती हे.. देवु ओर लखन बीलकुल उनके बापपे गये हे.. अब उसे भी पुनम बीटीयासे मेरे बारेमे सबकुछ पता चल जायेगा..
कोइ बात नही वो वादेका पका हे.. बापरे.. जडी बुडीकी वजहसे उनका कीतना बडा होगया हे.. जब गले मीला तब कैसे चुभ रहा था.. ओर रमा तो इसे अंदर भी लेचुकी हे.. वहा रही ही कीतने दिन..? तीन चार दिनमे ही लखनसे पेटसे होगइ.. ओर अेक मेरी लता हे.. जो अभी भी पेटसे नही हुइ.. लगता हे कमी कुछ लतामे ही होगी.. अेक बार मीले तो कमीनीको पुछ लुगी.. की क्या प्रोबलेम हे.. जो भी हो.. कमसे कम रमाने मेरी बात तो रखली.. फीर चाहे बच्चा कीसीका भी हो.. दोनो हेतो मेरे कीशनका खुन..
इधर सरला यही सब सोचते खटीयापे बैठी थी तो उधर लखन अपनी नइ कार लेकर सीधा घरपे पहोंच गया.. तब ग्याराह बजनेको आये थे.. देवायतभी अपने खेतोपे था.. जो इस वक्त भानु ओर साहीलके साथ अपने गाडाउनकी ओफीसमे बैठा था.. ओर फसलके बारेमे बात कर रहा था.. इधर जैसे ही लखन हवेलीके अंदर आगया तो उसने मुस्कुराते होर्न बजाया ओर कारसे उतर गया..
लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कोन्ग्रेच्युलेशन.. क्या आप सचमे मां बनने वाली हे..? कहीये..
रमा : (सरमाते दरवाजेकी ओर देखते धीरेसे) हां लखनजी.. ये सब आपहीकी क्रीपासे हे.. आप फुफा नही.. इस बच्चेके पापा बनने वाले हे.. हमने वहा बहुत महेनतकी उसीका फल हे.. तो आपको भी मुबारक हो..
लखन : (दरवानेकी ओर देखते) भाभी.. क्या मेने कहा था अैसा कीया की नही..? वरना भानु भाइको सक होजायेगा..
रमा : (सरमाते धीरेसे) अरे हां बाबा.. जब आप छोडने आये थे.. उसी रात.. गोली खाकर तीन बार कीया हमने.. ओर आपको तो पता हे..? इनको रोज चाहीये.. तो फीर मे मना नही करती.. तो हमपे कीसीको सक नही होगा..
लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. तो फीर मे चलता हु.. आप अपना खयाल रखीयेगा.. ओर ये लीजीये.. पांच हजार हे.. अपनी सेहतका खयाल रखीयेगा..
रमा : (आंख गीली करते पैसा लेते) लखनजी.. क्या सीर्फ रमा नही केह सकते..? हंम.. आपकोतो पता हेनां आपको मेने क्या माना हे.. अब आपही मेरे पती हो.. लखनजी.. अब कब मीलेगे हम..? हंम..?
लखन : (कारमे बैठते) रमा.. फीकर मत कर.. हम बहुत जल्द मीलेगे.. मेरी सादीमे भी आना हे तुम लोगोको.. अगर मौका मीलेगा तो वही मीलेगे.. चलो अब मे चलता हु..
फीर लखन कार लेकर नीकल जाता हे तो रमा अपनी सारीके पलुमे पैसे छुपाकर अंदर चली गइ.. सरला खीडकीसे देखकर कातील मुस्कान करते बाथरुमसे बहार नीकल गइ.. आज उनको रमा ओर लखनकी असलीयतका पता चल चुका था.. जो बात वो पहेले भी जानती थी.. जब लखन उनको ओर रमाको छोडने घर आया था.. तब भी बाथरुम जाते उन्होने रमा ओर लखनकी चुदाइ देखली थी..
ये बात नीलम पहेलेसे ही जानती थी.. ओर इस बारेमे दोनो मांबेटी खुलकर चर्चा भी कर चुकी थी.. बस.. अभी नीलमको अपनी मम्मीके प्रेगनन्सीके बारेमे नही पता था.. तो इधर सरला भी कुछ सोचकर मन ही मन खुस होने लगी.. क्युकी अब देवायत इतनी सारी बीवीओकी वजहसे उनके पास आना ही छोड दीया था.. तबसे सरला भी काफी दिनोसे प्यासी थी..
सरला : (मनमे) कमीनी.. बीलकुल मुजपे गइ हे.. मे भी भानुके बापुके साथ अैसे ही करती थी.. हायरे मेरा कीशन.. हम दोनो कीतना प्यार करते थे.. कीशनने मेरी मांग भी भरी थी.. मे उनको ही अपना पती मानती थी.. तो क्या रमा ओर लखनने भी वोही कीया होगा..? तभी तो रमा लखनको अपना पती मानती हे.. देवु ओर लखन बीलकुल उनके बापपे गये हे.. अब उसे भी पुनम बीटीयासे मेरे बारेमे सबकुछ पता चल जायेगा..
कोइ बात नही वो वादेका पका हे.. बापरे.. जडी बुडीकी वजहसे उनका कीतना बडा होगया हे.. जब गले मीला तब कैसे चुभ रहा था.. ओर रमा तो इसे अंदर भी लेचुकी हे.. वहा रही ही कीतने दिन..? तीन चार दिनमे ही लखनसे पेटसे होगइ.. ओर अेक मेरी लता हे.. जो अभी भी पेटसे नही हुइ.. लगता हे कमी कुछ लतामे ही होगी.. अेक बार मीले तो कमीनीको पुछ लुगी.. की क्या प्रोबलेम हे.. जो भी हो.. कमसे कम रमाने मेरी बात तो रखली.. फीर चाहे बच्चा कीसीका भी हो.. दोनो हेतो मेरे कीशनका खुन..
इधर सरला यही सब सोचते खटीयापे बैठी थी तो उधर लखन अपनी नइ कार लेकर सीधा घरपे पहोंच गया.. तब ग्याराह बजनेको आये थे.. देवायतभी अपने खेतोपे था.. जो इस वक्त भानु ओर साहीलके साथ अपने गाडाउनकी ओफीसमे बैठा था.. ओर फसलके बारेमे बात कर रहा था.. इधर जैसे ही लखन हवेलीके अंदर आगया तो उसने मुस्कुराते होर्न बजाया ओर कारसे उतर गया..



