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दया : (खुस होते हसते नाइटी देखकर) ओहो.. देवरजीने तो अपनी होने वाली बीवीका बहुत लेटेस्ट गाउन लीया हे.. उतारनेकी जरुरत ही नही पडेगी.. हें..हें..हें.. देखो.. सभी बीवीओके लीया हे.. क्या मस्त हे..
पुनम : (समरमाते धीरेसे दो गाउन देते) दीदी.. देखीये आप दोनोके लीये भी लीया हे.. पुरा लेटेस्ट सेट..
भावना : (हसते) कीतने कमीने हे.. मे भीतो साथमे थी.. मुजे तो पता ही नही चला.. की हमारे लीये भी लीया हे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. सबके लीये लीया होगा.. हम सबकी खरीदी भैया ही करते हे..
दया : (ब्रा पेन्टी देखते) दीदी.. ये तो मेरा नाप हे.. आपका भी यही नाप हे क्या..? की सृती दीदीके लीये हे.. रजुकातो ये नाप नही..
सृती : (हसते) दया बहेन आपके लीये ही होगा.. बडे कमीने हे वो..
दया : (मुस्कुराते सरमाते) लेकीन उनको मेरा नाप कहासे पता चला..?
रजीया : (हसते) मेने बताया.. हें..हें..हें.. मुजे पुछकर गये थे..
दया : (सरमाते हसते अेक मुका मारते) कमीनी कहीकी.. दोनो मीया बीवी अेक ही हो..
लखन : (आकर पुनम सृतीके बीच बैठते) अरे.. सब आज ही देखलोगी क्या..? सबके लीये लीया हे.. अब सोना नही हे..?
सृती : (सरमाते जांगपे मुका मारते धीरेसे) सोनेकी बडी जल्दीहे आपको..? आज नइ बीवीको मीलनेके लीये उतावले हो रहे हो क्या..?
भावना : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) सादीसे पहेले..? मे कोइ मीलने बीलने नही दुगी.. दीदीने इसीलीये हम दोनोको साथ भेजा हे..
लखन : (भावनाकी गरदन दबोचते) दीदी.. लगता हे इनका कुछ इलाज करना पडेगा..
भावना : (जोरोसे हसते) अरे छोडो.. मेतो मजाक कर रही थी.. हें..हे..हें..
सृती : (हसते) भावना दी.. रहेने दीजीये.. ये आपसे या मेरे रुकवानेसे रुकेगे नही.. करनेदो दोनोको मजे.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते कानमे धीरेसे) हां.. तुम भी साथ चलना.. तीनो मजे करेगे..
सृती : (सरमाते जुठा गुसा करते अेक चपत लगाते कानमे) बडे बेसर्म हो आप.. पुरी रात.. ओर सुबह भी करलीया.. मेरी हालत बीगाडके भी जी नही भरा क्या..? नही आज नइ बीवी हे तो अकेले ही मीललो..
भावना : (हसते) अरे.. दोनो अेक दुसरेके कानमे क्या खुसर पुसर कर रहे हो.. हमे भी सुनाओ..
लखन : (जोरोसे हसते) मेरे साथ सोनेकी बात कर रही हे.. आपको भी सोना हे क्या..? हें..हें..हें..
इतना सुनतेही सृती ओर भावना बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर जुठा गुस्सा करते दोनो लखनको मारने लगी.. तो लखन जटसे दोनोसे बचते उपर भाग गया.. ओर साथमे ज्वेलेरी बोक्ष भी लेता गया.. तो बाकी तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. सृती ओर भावना भी सर्मीन्दा होते हसती रही.. फीर सबने साडीया ओर सबके अंडर गारमेन्ट देख लीये..
भावना : (हसते) अरे.. ज्वेलेरी बोक्ष कीधर गये..? अभी तो थे यहा..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. लखन भैया लेगये हे.. तीन मंगलसुत्र हे.. मेरे लीये.. लता दीदी ओर वंदुके लीये..
भावना : (आस्चर्यसे) यार वंदुका तो समजी.. क्या लताके लीये भी..?
सृती : (धीरेसे) दीदी.. अब तो मंजु मोमने सबको छुट दे रखी हे.. तो फीर लताकी सादी हमारे जेठजीसे करनेकी क्या जरुरत हे..? वो अैसे ही बच्चा दे सकते हे..
पुनम : (मुस्कुराते) नही दी.. बात बच्च.की नही हे.. मुजे भी बडे भैयासे सादी करनी पडी थी.. मम्मी कभी नही चाहती की बच्चा नाजायज ओलाद कहेलवाये.. इसीलीये सादी करना जरुरी हे.. ओर मत भुलो.. लता लखन भैयासे नही बडे भैयासे प्यार करती थी..
सृती : (मुस्कुराते) ओह.. अब समजी.. चलो तो फीर अब सोते हे.. आज तो थक गइ.. वहा भी दोनो बाते करते बैठे थे तो बहुत देर होगइ.. वैसे दोनो क्या बाते करते होगे..? दीदी.. आपको तो सब पता हेनां..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वही.. जो आजकल हमारे घर ओर गांवमे होने लगा हे.. अबतो सहेरमे भी इनकी हवा लग चुकी हे.. यहा भी घर घरमे ये सब होने लगा हे.. जो हमारे गांवमे हो रहा हे.. दीदी.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. चलो अब मुजे तो नींद आ रही हे.. सोते हे..
भावना : (जोरोसे हसते) अच्छा..? आप सोजायेगी क्या..? लखन भैया आपको सोने देगे..?
पुनम : (सरमसे पानी पानी होते अेक मुका मारते) हां सोजाउगी.. यहा मे सुहागरात मनाने नही आइ हु समजी..?
फीर सब लोग सामान यही छोडके उपर जाने लगे.. तो रजीया सब लाइट बंध करके लखनको आवाज देकर नीचे बुलाती हे.. तो भावना बच्चीको तो दया जुला साथ लेजाती हे.. ओर लखन आकर सृतीको गोदमे उठाकर उपर लेगया..
रजीयाने भावना ओर सृतीको अपने रुममे सोनेको कहा.. ओर वो खुद आज दयाके साथ सोना चाहती थी.. क्युकी दोनो कीतने दिनोके बाद मील रही थी.. तो गांवमे भी नीर्मला ओर भुमीका सोने चली गइ.. तो मंजु चंदाको लेकर अपने रुममे चली गइ..
पुनम : (समरमाते धीरेसे दो गाउन देते) दीदी.. देखीये आप दोनोके लीये भी लीया हे.. पुरा लेटेस्ट सेट..
भावना : (हसते) कीतने कमीने हे.. मे भीतो साथमे थी.. मुजे तो पता ही नही चला.. की हमारे लीये भी लीया हे..
पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. सबके लीये लीया होगा.. हम सबकी खरीदी भैया ही करते हे..
दया : (ब्रा पेन्टी देखते) दीदी.. ये तो मेरा नाप हे.. आपका भी यही नाप हे क्या..? की सृती दीदीके लीये हे.. रजुकातो ये नाप नही..
सृती : (हसते) दया बहेन आपके लीये ही होगा.. बडे कमीने हे वो..
दया : (मुस्कुराते सरमाते) लेकीन उनको मेरा नाप कहासे पता चला..?
रजीया : (हसते) मेने बताया.. हें..हें..हें.. मुजे पुछकर गये थे..
दया : (सरमाते हसते अेक मुका मारते) कमीनी कहीकी.. दोनो मीया बीवी अेक ही हो..
लखन : (आकर पुनम सृतीके बीच बैठते) अरे.. सब आज ही देखलोगी क्या..? सबके लीये लीया हे.. अब सोना नही हे..?
सृती : (सरमाते जांगपे मुका मारते धीरेसे) सोनेकी बडी जल्दीहे आपको..? आज नइ बीवीको मीलनेके लीये उतावले हो रहे हो क्या..?
भावना : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) सादीसे पहेले..? मे कोइ मीलने बीलने नही दुगी.. दीदीने इसीलीये हम दोनोको साथ भेजा हे..
लखन : (भावनाकी गरदन दबोचते) दीदी.. लगता हे इनका कुछ इलाज करना पडेगा..
भावना : (जोरोसे हसते) अरे छोडो.. मेतो मजाक कर रही थी.. हें..हे..हें..
सृती : (हसते) भावना दी.. रहेने दीजीये.. ये आपसे या मेरे रुकवानेसे रुकेगे नही.. करनेदो दोनोको मजे.. हें..हें..हें..
लखन : (मुस्कुराते कानमे धीरेसे) हां.. तुम भी साथ चलना.. तीनो मजे करेगे..
सृती : (सरमाते जुठा गुसा करते अेक चपत लगाते कानमे) बडे बेसर्म हो आप.. पुरी रात.. ओर सुबह भी करलीया.. मेरी हालत बीगाडके भी जी नही भरा क्या..? नही आज नइ बीवी हे तो अकेले ही मीललो..
भावना : (हसते) अरे.. दोनो अेक दुसरेके कानमे क्या खुसर पुसर कर रहे हो.. हमे भी सुनाओ..
लखन : (जोरोसे हसते) मेरे साथ सोनेकी बात कर रही हे.. आपको भी सोना हे क्या..? हें..हें..हें..
इतना सुनतेही सृती ओर भावना बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर जुठा गुस्सा करते दोनो लखनको मारने लगी.. तो लखन जटसे दोनोसे बचते उपर भाग गया.. ओर साथमे ज्वेलेरी बोक्ष भी लेता गया.. तो बाकी तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. सृती ओर भावना भी सर्मीन्दा होते हसती रही.. फीर सबने साडीया ओर सबके अंडर गारमेन्ट देख लीये..
भावना : (हसते) अरे.. ज्वेलेरी बोक्ष कीधर गये..? अभी तो थे यहा..
पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. लखन भैया लेगये हे.. तीन मंगलसुत्र हे.. मेरे लीये.. लता दीदी ओर वंदुके लीये..
भावना : (आस्चर्यसे) यार वंदुका तो समजी.. क्या लताके लीये भी..?
सृती : (धीरेसे) दीदी.. अब तो मंजु मोमने सबको छुट दे रखी हे.. तो फीर लताकी सादी हमारे जेठजीसे करनेकी क्या जरुरत हे..? वो अैसे ही बच्चा दे सकते हे..
पुनम : (मुस्कुराते) नही दी.. बात बच्च.की नही हे.. मुजे भी बडे भैयासे सादी करनी पडी थी.. मम्मी कभी नही चाहती की बच्चा नाजायज ओलाद कहेलवाये.. इसीलीये सादी करना जरुरी हे.. ओर मत भुलो.. लता लखन भैयासे नही बडे भैयासे प्यार करती थी..
सृती : (मुस्कुराते) ओह.. अब समजी.. चलो तो फीर अब सोते हे.. आज तो थक गइ.. वहा भी दोनो बाते करते बैठे थे तो बहुत देर होगइ.. वैसे दोनो क्या बाते करते होगे..? दीदी.. आपको तो सब पता हेनां..?
पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वही.. जो आजकल हमारे घर ओर गांवमे होने लगा हे.. अबतो सहेरमे भी इनकी हवा लग चुकी हे.. यहा भी घर घरमे ये सब होने लगा हे.. जो हमारे गांवमे हो रहा हे.. दीदी.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. चलो अब मुजे तो नींद आ रही हे.. सोते हे..
भावना : (जोरोसे हसते) अच्छा..? आप सोजायेगी क्या..? लखन भैया आपको सोने देगे..?
पुनम : (सरमसे पानी पानी होते अेक मुका मारते) हां सोजाउगी.. यहा मे सुहागरात मनाने नही आइ हु समजी..?
फीर सब लोग सामान यही छोडके उपर जाने लगे.. तो रजीया सब लाइट बंध करके लखनको आवाज देकर नीचे बुलाती हे.. तो भावना बच्चीको तो दया जुला साथ लेजाती हे.. ओर लखन आकर सृतीको गोदमे उठाकर उपर लेगया..
रजीयाने भावना ओर सृतीको अपने रुममे सोनेको कहा.. ओर वो खुद आज दयाके साथ सोना चाहती थी.. क्युकी दोनो कीतने दिनोके बाद मील रही थी.. तो गांवमे भी नीर्मला ओर भुमीका सोने चली गइ.. तो मंजु चंदाको लेकर अपने रुममे चली गइ..





























