Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 91 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

दया : (खुस होते हसते नाइटी देखकर) ओहो.. देवरजीने तो अपनी होने वाली बीवीका बहुत लेटेस्ट गाउन लीया हे.. उतारनेकी जरुरत ही नही पडेगी.. हें..हें..हें.. देखो.. सभी बीवीओके लीया हे.. क्या मस्त हे..

पुनम : (समरमाते धीरेसे दो गाउन देते) दीदी.. देखीये आप दोनोके लीये भी लीया हे.. पुरा लेटेस्ट सेट..

भावना : (हसते) कीतने कमीने हे.. मे भीतो साथमे थी.. मुजे तो पता ही नही चला.. की हमारे लीये भी लीया हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाभी.. सबके लीये लीया होगा.. हम सबकी खरीदी भैया ही करते हे..

दया : (ब्रा पेन्टी देखते) दीदी.. ये तो मेरा नाप हे.. आपका भी यही नाप हे क्या..? की सृती दीदीके लीये हे.. रजुकातो ये नाप नही..

सृती : (हसते) दया बहेन आपके लीये ही होगा.. बडे कमीने हे वो..

दया : (मुस्कुराते सरमाते) लेकीन उनको मेरा नाप कहासे पता चला..?

रजीया : (हसते) मेने बताया.. हें..हें..हें.. मुजे पुछकर गये थे..

दया : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी कहीकी.. दोनो मीया बीवी अ‍ेक ही हो..

लखन : (आकर पुनम सृतीके बीच बैठते) अरे.. सब आज ही देखलोगी क्या..? सबके लीये लीया हे.. अब सोना नही हे..?

सृती : (सरमाते जांगपे मुका मारते धीरेसे) सोनेकी बडी जल्दीहे आपको..? आज नइ बीवीको मीलनेके लीये उतावले हो रहे हो क्या..?

भावना : (कातील नजरोसे मुस्कुराते) सादीसे पहेले..? मे कोइ मीलने बीलने नही दुगी.. दीदीने इसीलीये हम दोनोको साथ भेजा हे..

लखन : (भावनाकी गरदन दबोचते) दीदी.. लगता हे इनका कुछ इलाज करना पडेगा..

भावना : (जोरोसे हसते) अरे छोडो.. मेतो मजाक कर रही थी.. हें..हे..हें..

सृती : (हसते) भावना दी.. रहेने दीजीये.. ये आपसे या मेरे रुकवानेसे रुकेगे नही.. करनेदो दोनोको मजे.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते कानमे धीरेसे) हां.. तुम भी साथ चलना.. तीनो मजे करेगे..

सृती : (सरमाते जुठा गुसा करते अ‍ेक चपत लगाते कानमे) बडे बेसर्म हो आप.. पुरी रात.. ओर सुबह भी करलीया.. मेरी हालत बीगाडके भी जी नही भरा क्या..? नही आज नइ बीवी हे तो अकेले ही मीललो..

भावना : (हसते) अरे.. दोनो अ‍ेक दुसरेके कानमे क्या खुसर पुसर कर रहे हो.. हमे भी सुनाओ..

लखन : (जोरोसे हसते) मेरे साथ सोनेकी बात कर रही हे.. आपको भी सोना हे क्या..? हें..हें..हें..

इतना सुनतेही सृती ओर भावना बहुत ही सर्मसार होगइ.. ओर जुठा गुस्सा करते दोनो लखनको मारने लगी.. तो लखन जटसे दोनोसे बचते उपर भाग गया.. ओर साथमे ज्वेलेरी बोक्ष भी लेता गया.. तो बाकी तीनो जोरोसे ठहाका मारते हसने लगी.. सृती ओर भावना भी सर्मीन्दा होते हसती रही.. फीर सबने साडीया ओर सबके अंडर गारमेन्ट देख लीये..

भावना : (हसते) अरे.. ज्वेलेरी बोक्ष कीधर गये..? अभी तो थे यहा..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) दीदी.. लखन भैया लेगये हे.. तीन मंगलसुत्र हे.. मेरे लीये.. लता दीदी ओर वंदुके लीये..

भावना : (आस्चर्यसे) यार वंदुका तो समजी.. क्या लताके लीये भी..?

सृती : (धीरेसे) दीदी.. अब तो मंजु मोमने सबको छुट दे रखी हे.. तो फीर लताकी सादी हमारे जेठजीसे करनेकी क्या जरुरत हे..? वो अ‍ैसे ही बच्चा दे सकते हे..

पुनम : (मुस्कुराते) नही दी.. बात बच्च.की नही हे.. मुजे भी बडे भैयासे सादी करनी पडी थी.. मम्मी कभी नही चाहती की बच्चा नाजायज ओलाद कहेलवाये.. इसीलीये सादी करना जरुरी हे.. ओर मत भुलो.. लता लखन भैयासे नही बडे भैयासे प्यार करती थी..

सृती : (मुस्कुराते) ओह.. अब समजी.. चलो तो फीर अब सोते हे.. आज तो थक गइ.. वहा भी दोनो बाते करते बैठे थे तो बहुत देर होगइ.. वैसे दोनो क्या बाते करते होगे..? दीदी.. आपको तो सब पता हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. वही.. जो आजकल हमारे घर ओर गांवमे होने लगा हे.. अबतो सहेरमे भी इनकी हवा लग चुकी हे.. यहा भी घर घरमे ये सब होने लगा हे.. जो हमारे गांवमे हो रहा हे.. दीदी.. इस बारेमे हम बादमे बात करेगे.. चलो अब मुजे तो नींद आ रही हे.. सोते हे..

भावना : (जोरोसे हसते) अच्छा..? आप सोजायेगी क्या..? लखन भैया आपको सोने देगे..?

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते अ‍ेक मुका मारते) हां सोजाउगी.. यहा मे सुहागरात मनाने नही आइ हु समजी..?

फीर सब लोग सामान यही छोडके उपर जाने लगे.. तो रजीया सब लाइट बंध करके लखनको आवाज देकर नीचे बुलाती हे.. तो भावना बच्चीको तो दया जुला साथ लेजाती हे.. ओर लखन आकर सृतीको गोदमे उठाकर उपर लेगया..

रजीयाने भावना ओर सृतीको अपने रुममे सोनेको कहा.. ओर वो खुद आज दयाके साथ सोना चाहती थी.. क्युकी दोनो कीतने दिनोके बाद मील रही थी.. तो गांवमे भी नीर्मला ओर भुमीका सोने चली गइ.. तो मंजु चंदाको लेकर अपने रुममे चली गइ..
 
वहा देवायत मंजुकी चुतमे धमाका करने लगा.. चंदा उन दोनोको देखती रही.. लेकीन अब वो सामनेसे कभी नही कहेती की मुजे भी चुदवाना हे.. तो मंजुने चंदाकी दिमागी हालत सही करनेके लीये कुछ ओर ही सोच लीया था..

वो चंदाको दिखानेके लीये जोरोसे कामुक तरीकेसे सीसकारीया करते मजेसे चुदवाती रही.. तबतक चंदा भी काफी गरम हो चुकी थी.. ओर वो सोते हुअ‍े अपनी चुतको मसल रही थी.. जब देवायतने मंजुको चोद लीया तो देवायत मंजुके सीनेपे ढेर होगया..





मंजुने धीरेसे देवायतके कानोमे कुछ अ‍ैसा कहा.. की देवायत मुस्कुराने लगा.. फीर बाथरुममे जाकर सही होगया.. ओर मंजुने उसे उपर लताके पास भेज दीया.. तो चंदा देवायतको जाते देखती ही रेह गइ.. उसे लगाकी देवायत मंजुके बाद उसे भी चोदेगा..

लेकीन आज पहेल बार देवायत उनके सामने देखे बीना उपर लताके पास चला गया.. तो चंदा ओर पागल जैसी होने लगी.. ओर नाराज होते अ‍ैसे ही करवट लेकर सोगइ.. देवायत उपर लताके रुममे चला गया.. वहा लता देवायतके इन्तजारमे अ‍ैसे ही लेटे पडी थी..

जैसे ही देवायत आया लता जटसे बेडपे बैठ गइ.. उनके दिलकी धडकन तेज होगइ.. ओर वो बहुत ही सर्मसार होने लगी.. जीस तराह लता देवायतसे मीलनेके लीये मचल रही थी उसी तराह देवायत भी लताको मीलनेके लीये मचल रहा था..

दोनोको दो तीन बार मीलन करनेका मौका मीला.. लेकीन हर बार मंजुने दोनोके मीलनमे बाधा डालदी.. ताकी जब दोनो मीले तो अ‍ेक दुसरेसे मीलन करनेमे पागल हो जाये.. जीस तराह लता देवायतको मीलनेके लीये पागल होर रही थी उसी तराह देवायत भी लताके साथ मीलन करनेके लीये पगला गया था..

क्युकी वो जानता थाकी लता भी उनकी बहेन हे.. आग दोनो ओरसे लगी हुइ थी.. ओर आखीर दोनोके लीये वो वक्त आही गया.. लता अपने पहेले प्यारके साथ मीलन करने जा रही थी.. लता बेडसे उतरते दोडकर देवायतकी बाहोमे समा गइ.. तो देवायतने भी लताको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया..





लता : (देवायतके चहेरेके पागलोकी तराह चुमते) भाइ.. आइ लव यु.. आइ लव यु..

देवायत : (मुस्कुराते बाहोमे भीचते) लता.. बस कर.. लव यु टु.. आखीर हम मील गये..

लता : (सरमाते सामने देखते मुस्कुराते) हां भाइ.. आपको पानेके लीये मेने क्या क्या नही कीया.. जबसे जवानीके दहेलीजपे कदम रखा.. ओर आप मांको मीलने आते थे.. तबसे मे आपको प्यार करने लगी थी..

देवायत : (मुस्कुराते गोदमे उठाते) तो क्या तुजे बुरा नही लगता था..? वो मां हे तेरी..

लता : (मुस्कुराते) भाइ.. ये साली आग ही अ‍ैसी हे.. छोटे बडेका कोइ लीयाज नही करती.. ओर मां तो अकेली हे.. वो अपनी जरुरत पुरी करनेके लीये कहा जायेगी..? इनसे तो अच्छा हे आपहीके साथ अपनी प्यास बुजाती हे.. तबसे मे आपको बहुत प्यार करती हु.. भाइ.. अ‍ेक बात पुछु..?

देवायत : (मुस्कुराते) हंम.. पुछ..

लता : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. क्या अब भी आपका रीलेशन मांके साथ हे..?

देवायत : (बेठपे लीटाते) नही.. जबसे तुम्हारी सादी लखनसे हुइ हे तबसे मेने उनको मीलना छोड दीया हे.. अब वो समधन हे मेरी.. अगर तुम मुजसे प्यार करती थी तो फीर तुमने लखनके साथ सादीके लीये क्यु हां कहेदी..? करलेती मुजसे सादी..

लता : (मुस्कुराते हाथ खीचते अपने पास बीठाते) भाइ.. इस बारेमे मेने बहुत सोचा.. अ‍ेकतो उमरमे आपसे काफी छोटी थी..ओर उपरसे आपकी भी दो तीन सादीया हो चुकी थी.. तो सोचा लखनके साथ सादी करके कमसे कम आपके साथ तो रेह सकुगी.. यही सोचते लखनके साथ सादी करली.. ओर आखीर आज मुजे आप मील गये.. भाइ.. मेने अपनी मंजील हासील करली..

देवायत : (मुस्कुराते पास लेटते) लेकीन तेरी सादीकी उमर होगइ तब तो बताना चाहीयेनां..? खैर छोड ये बात.. ये बता अगर हमारे रीलेशनसे लखन तुमसे नाराज हो गया तो..?

लता : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) भाइ.. उसे तो मे कभी भी मना लुगी.. वो भी मुजसे बहुत प्यार करते हे.. ओर वोभी तो पुनो दीदीको प्यार करते थे..

देवायत : (होंट चुमते) लता.. अगर मुजे पता होताकी लखन पुनोसे प्यार करता था.. तो मे पुनोकी सादी धिरेनसे कभी नही करवाता.. ओर खुद भी उनसे सादी नही करता.. मेने पुनोसे सादी करके बहुत बडी गलती की..

लता : (होंठ चुमते) नही भाइ.. पुनोके साथ आपकी सादी जरुरी थी.. बाबाने उसे कहा था.. क्युकी पुनोदी ओर मेरी कोखमे आपका बच्चा जरुरी था.. चलीये आज ओर कोइ बाते नही.. मुजे पुरी रात आपका प्यार चाहीये.. भाइ.. आज सबकुछ होजाने दो.. मुजे भी आपका अंस चाहीये.. ओर मेरा समय भी सही चल रहा हे.. इसीलीये तो मेने लखनको हाथ भी लगाने नही दीया..

दोनो ही बाते करते अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमते प्यार करने लगे.. लताको पता ही नही चला देवायत उनके बुब्सको मसलते कब उनके कपडे नीकालने लगा.. देवायतने लताके सभी कपडे नीकाल दीये.. ओर उसे पुरी तराह नंगी करदी.. तो लताने भी देवायतके कपडे नीकालकर उनको नंगा करदीया.. लता देवायतका लंड देखकर बहुत ही सरमा गइ.. बीलकुल लखन जैसा लंड था.. लेकीन लखनसे थोडा छोटा..





लता : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. बहुत बडा हे.. लखनका भी बहुत बडा हो गया हे.. लेकीन जबसे उनको जडी बुटी दी गइ हे.. तबसे मेने लखनको हाथ भी लगाने नही दीया.. तो प्लीज.. इतना बडा मे पहेली बार ले रही हु.. तो जरा ध्यानसे..

देवायत अब बहुत फोरप्लेय मे रुची नही रखता था.. क्युकी उनकी इतनी सारी बीवीओकी वजहसे उनके पास समय भी नही होता था.. ओर लताको लखनके साथ चुदाइ करते ये सब चीजोकी (फोरप्लेय) आदत होगइ थी.. लेकीन इस बारेमे वो देवायतसे कुछ ना केह सकी..
 
देवायत थोडी देर प्यार करते लताके पैरोके बीच आ गया.. ओर अपना लंड पकडके लताकी चुतपे घीसते लंडको गीला करने लगा..जब लंड गीला हो गयातो धीरेसे लताकी चुतके लव होलमे फसा दीया.. ओर हाथसे पकडकर धीरे धीरे अंदरकी ओर पुस करने लगा..





लताने जोरोसे आंख बंध करते तकीयेको मुहमे ठुस लीया ताकी उनकी चीखे बहार ना नीकले.. ओर देवायत लताकी चुतमे लंड फसाकर लताके उपर जुक गया.. ओर दोनो हाथोके पंजेको कसके पकड लीया.. फीर लताके मुहसे तकीया हटाते उनसे लीपलोक करलीया..

लता अब देवायतका लंड खानेके लीये पुरी तराह तैयार थी.. तभी देवायतने अ‍ेक जटका मारा.. तो उनका आधा लंड लताकी चुतको चीरते अंदर घुस गया ओर लताकी जोरोसे चीख नीकलते देवायतके मुहमे दब गइ.. लता छट पटाते आंसु बहाने लगी..





अपने दोनो पैर बेडपे पटकने लगी.. वो देवायतसे मुह छुडानेकी कोसीस कर रही.. की तभी देवायतने अ‍ेक ओर जटका मारा..ओर पुरा लंड लताकी चुतमे जडतक घुसादीया.. तो लता जोरोसे चीखते बेहोस होगइ.. उनकी आंखसे आसु बहेने लगे.. लताकी चुतसे थोडा खुन नीकल गया..





जैसे पहेली बार कीसीने उनका कौमार्य भंग कीया हो.. आज वो पहेली बार इतना बडा लंड अपनी चुतमे लेरही थी.. तो देवायतने देर ना करते लीपलोक छुडा लीया ओर हाथके बल उचा होते जोरोसे कमर हीलाते लताको चोदने लगा..

तो गांवमे आज बंसीकी सादी भी उनकी बहेन जागृतीसे हो गइ थी.. देर साम ही श्रीधर मुना ओर साहीलने बंसीके बेड ओर रुमको सजा लीया था.. बरखा जयश्री ओर सांतीने मीलकर जागृतीको अपनी सुहागरातके लीये सजा दीया था..

आज सांती दोनोको अकेले सुहागरात मना देना चाहती थी इसीलीये उन्होने आजकी रात बरखा ओर जयश्रीको भी अपने साथ दुसरे रुममे सोनेके लीये रोक लीया.. इसके लीये सांतीने दोनोके पतीसे इजाजत मांगी.. तो दोनोने मनमे खुस होते यहा रुकनेकी इजाजत देदी..

क्युकी मुना ओर श्रीधर दोनो आज अपनी मांके साथ मजे करना चाहते थे.. देर रात सबलोग खाना खाकर कुछ देर बाते करते रहे फीर मुना साहील ओर श्रीधर अपने घरपे चले गये.. तो बरखा सांती ओर जयश्रीने मीलकर जागृतीको बंसीके रुममे घुंघटमे बीठा दीया ओर तीनो जागृती वाले रुममे सोने चली गइ..

इस रात बंसी ओर जागृतीने फीरसे अपनी सुहागरात मनाइ.. तो मुना भी देर रात अपनी मां बसंतीको अपने रुममे बुला लेता हे.. ओर श्रीधर तो सीधा उनकी मां ब्रीन्दाके कमरेमे ही सोने चला गया.. दोनो कामोतेजक गोलीया खाकर अपनी अपनी मांके उपर कीसी भुखे भेडीयेकी तराह टुट पडे..





दोनो अपने बेटेसे छुटनेकी मनते करती रही.. लेकीन आज दोनो अपनी मांको छोडनेके मुडमे नही थे.. ओर सुबह तक दोनोने अपनी मांकी हालत खराब करदी.. दोनोने उनको सुबह बीस्तरसे उठने लायक नही छोडा.. तो बंसी भी सुबह चार बजे तक जागृतीको अलग अलग पोजीसनमे चोदता रहा..





जागृती बंसीकी स्टेमीनाकी कायल होगइ.. इस रात वो लखनको भी भुल गइ.. ओर खुलकर अपने भाइका साथ देती रही.. सुबह चार बजे तक बंसीने जागृतीके अ‍ेक अक अंगको तोडके रख दीया था.. बाथरुममे जाते वक्त भी उनके पैर लडखडाने लगे थे..

इधर हवेलीपे लताने कल्पना नही कीथीकी देवायतसे चुदवाते वो बेहोस होजायेगी.. देवायत उनको होस आनेसे पहेले सबकुछ करलेना चाहता था.. कुछ देरकी घमासान चुदाइके बाद लताको होंस आने लगा.. तो देवायत अपने लंडको लताकी चुतमे जड तक घुसाते उनपे जुक गया..

वो लताके होठो ओर उनके बुब्सको चुमने लगा.. लताने धीरेसे अपनी आंखे खोलदी.. देवायत उनके बुब्सको मसलते उनके होठोको चुम रहा था.. लताको बेहोसीकी वजहसे दर्दका पता ही नही चला.. अभी उसे मामुली दर्द हो रहा था.. ओर आंखसे आंसु बेह रहे थे..

इस मामलेमे लता काफी अनुभवी हो चुकी थी.. तो कुछ देरके बाद वो भी देवायतका साथ देने लगी.. उतेजनामे देवायतकी पीठ सहेलाते पीठमे नाखुन से खरोचने लगी.. ओर देवायत फीरसे धीरे धीरे कमर हीलाते लताको चोदने लगा..





लता जबभी जडनेकी कगारपे होती देवायतको जोरोसे अपनी बाहोमे भीचते लीपलोक कर लेती.. ओर सुस्त होजाती.. लेकीन देवायत अपनी चुदाइ जारी रखता.. ओर कुछ देरके बाद लता फीरसे उतेजीत होजाती ओर मदहोस होकर अपनी कमर उछालते देवायतका चुदवानेमे साथ देने लगती..

अ‍ैसे ही लताको दो बार जडाते देवायतका लावा फुट पडा.. उसने कमर हीलाना छोडके लताकी चुतमे जड तक लंड घुसा दीया.. ओर लताको अपनी बाहोमे भीचते उनके गलेमे मुह डालते अपने गाढे पानीकी पीचकारीया लताकी बच्चेदानीपे छोडने लगा..





लताको पहेली बार अपनी बच्चेदानीपे गरमाहट महेसुस हुइ.. ओर वो भी उतेजनासे कांपने लगी.. वोभी देवायतके साथ जडते उनके लंडको भीगोने लगी.. लता आधी आंख चडाते जैसे स्वर्गमे पहोंच गइ.. फीर दोनो सांत होगये.. ओर लता धीरे धीरे देवायतकी पीठ सहेलाती रही..

लताको अपनी चुतपे देवायतका लंड अब भी सख्त महेसुस हो रहा था.. वो देवायतके नीचे लेटी हुइ थी.. दोनो पसीनेसे भीगे हुअ‍े थे.. लता देवायतसे नजरे चुराने लगी.. उनकी सांसे अब भी तेज चल रही थी.. जीसकी वजहसे उनके दोनो उभार उपर नीचे हो रहे थे..

जबसे देवायत उनकी मां सरलाको चोदनेके लीये आता.. लता तबसे देवायतके लंडको देख रही थी.. ओर उनकी ओर आकर्सीत होगइ थी.. उसने तब ही तैय करलीया थाकी अ‍ेक दिन मेभी इस लंडसे चुदवाउगी.. लता जानती थी.. की देवायत ओर उनका बाप अ‍ेक ही हे..

देवायतको वो अपना भाइ मानती थी.. ओर आज अपने भाइसे चुदवानेकी उनकी मनकी मुराद पुरी होगइ.. देवायतका लंड अब भी लताकी चुतमे था.. ओर देवायत उनके बुब्स ओर होठोको चुम रहा था.. कुछ देरके बाद दोनो फीरसे उतेजीत होगये ओर दोनोके बीच वापस घमासान चुदाइ होने लगी.. तो इधर सहेरमे लखनके घर भी सभी लोग घरके दरवाजे ओर लाइट बंध करके उपर सोने चले गये.. तब....

कन्टीन्यु
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 




my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २५९

देवायतको वो अपना भाइ मानती थी.. ओर आज अपने भाइसे चुदवानेकी उनकी मनकी मुराद पुरी होगइ.. देवायतका लंड अब भी लताकी चुतमे था.. ओर देवायत उनके बुब्स ओर होठोको चुम रहा था.. कुछ देरके बाद दोनो फीरसे उतेजीत होगये ओर दोनोके बीच वापस घमासान चुदाइ होने लगी.. तो इधर सहेरमे लखनके घर भी सभी लोग घरके दरवाजे ओर लाइट बंध करके उपर सोने चले गये.. तब.... अब आगे

सृती : (मुस्कुराते) लखन.. आज मे ओर भावनादी.. यही सोते हे.. आप दोनो मेरे वाले रुममे चले जाओ..

पुनम : (समरमसे पानी पानी होते धीरेसे) दीदी.. मे भी यहा सोजाती हुनां..?

भावना : (हसते) बडे नखरे कर रही हो..? वहा तो यहा आनेके लीये कैसे मचल रही थी..

पुनम : (सरमाते अ‍ेक मुका मारते) भाभी.. अ‍ेक मारुगीनां.. यार मुजे सरम आ रही हे..

सृती : (मुस्कुराते) दीदी.. यहा सीर्फ हम हीतो हे.. यहा हम सबको पता हे.. आज नीलु भी नही हे.. वरना तुम दोनोको मे मेरे घरपे भेजने वाली थी.. तो सरमाना क्या..? हमारे होने वाले पती ही हे.. जाइअ‍े दोनो मजे कीजीये.. ओर हां लखन.. सुबह उठनेकी कोइ जल्दी नही.. आरामसे.. समज गयेनां..?

लखन : (सृतीके होठोको चुमते) यस माय स्वीट हार्ट.. समज गया.. (पुनमकी ओर देखते) तो दीदी.. चले..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) भाइ.. आप चलो.. मे चेन्ज करके आती हु..

रजीया : (मुस्कुराते) जानु.. आप भी अपने चेन्ज करलो.. मे आपके कपड देती हु.. ताकी कोइ जंजट ही नही..

कहेते रजीयाने लखनके कपडे दे दीये.. फीर वो ओर दया नीलु वाले कमरेमे चली गइ.. तबतक पुनम चेन्ज करके बहार आगइ.. तो लखन चेन्ज करने चला गया.. तो पुनम सृतीके पास आकर बैठ गइ.. वो बहुत ही सरमा रही थी.. तभी लखन भी चेन्ज करके आ गया ओर पुनमको अपनी गोदमे उठा लेता हे.. तो पुनम बहुतही सर्मसार होगइ.. आज पहेली बार लखनने उसे इस तराह अपनी गोदमे उठाया था..

भावना : (जोरोसे हसते) देवरजी.. बडे बेसर्म हो आप.. अभी बीवी नही हे.. बहेन हे आपकी.. छोडीये..

लखन : (पुनमको गोदमे उठाते मुडते) भाभी.. आप कहोतो छोड देता हु.. फीर सोचलो.. आपको लेकर चला जाउगा.. अब मुजे भाभीको लेजानेमे कोइ सर्म नही हे..

भावना : (जोरोसे हसते) ना बाबा ना.. अपनी बहेनको ही लेजाओ.. अ‍ेडवान्समे ही सही.. दोनोकी सादी तो होने ही वाली हे.. मनालो अपनी सुहागरात.. जाओ बाबा.. वरना यहा रुके तो खतरा हे.. हें..हें..हें..

लखन हसते हुअ‍े पुनमको लेकर अपने रुमकी ओर चल पडा.. तो सृती ओर भावना दोनो हसने लगी.. भावनाने अपने रुमका दरवाजा बंध करदीया.. तो इधर पुनम बहुत ही रोमांचीत फील करने लगी.. उसने सरमाकर कसके लखनकी गरदनमे हाथ डालकर लखनके सीनेपे सर रख दीया.. उनकी चुतसे पनीका रीसाव होने लगा.. ओर लखनने उसे बेडपे बीठा दीया..

लखन : (वापस जाते) दीदी.. अ‍ेक मीनीट दरवाजा बंध करलु..

पुनम : (अ‍ेक नइ नवेली दुल्हनकी तराह सरमाते धीरेसे) जी भैया..

लखनसे ज्यादा तो पुनम लखनको मीलनेके लीये बहुत ही अ‍ेक्साइटेड थी.. जैसे ही लखन दरवाजा बंध करके वापस लौटनेके लीये मुडा.. पुनम खडी होकर दोडके लखनकी बाहोमे समा गइ.. ओर लखनके चहेरेको पागलोकी तराह चुमने लगी.. लखन मुस्कुराने लगा..

पुनमके चहेरेको हाथोमे थाम लीया.. वो पुनमकी आंखोमे अ‍ेक नजरसे देखने लगा.. तो पुनमने सरमाके अपनी नजरसे जुकाली.. तभी लखनने धीरेसे अपने होठ पुनमके होठोपे रख दीये.. तो पुनम अपनी आंख बंध करते सरसे पांव तक कांपने लगी..





लखनको कसके बाहोमे जकड लीया.. ओर लखनके होठोको चुमते उनका साथ देने लगी.. लखन अपनी जीभ नीकालते पुनमके मुहमे ठुसनेकी कोसीस करने लगा.. तो पुनमने धीरेसे अपना मुह खोला.. ओर लखनकी जीभसे अपनी जीभसे पेच लठाते उतेजीत होने लगी.. अभी भी दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे थे.. लखन धुम गया..





ओर पुनमको दिवालके सहारे सटालीया.. फीर दोनो हाथोमे पंजा फसाकर पुनमके हाथ दोनो ओर फैलाते दिवालसे सटालीये.. ओर पुनमके होठोका रस पीने लगा.. लखनकी इस हरकतसे पुनम बहोत ही उतेजीत होगइ.. तभी लखनने अ‍ेक हाथसे उनके बुब्सको थाम लीया.. तो पुनम सीहरते सीसकारीया करने लगी.. ओर लखनके कंधेपे सर रख दीया..



 
पुनम : (उतेजनामे धीरेसे) भाइ.. आइ लव यु.. आज हमारी फस्ट नाइट हे.. समालो मुजे आपके अंदर.. मुजसे रहा नही जाता..

लखन : (बुब्स मसलते उतेजनामे धीरेसे) दीदी.. आइ लव यु टु.. बहुत तडपाया हे आपने मुजे.. आज हम दोनो मील ही गये..

पुनम : (सरमाते कातील नजरोसे) भाइ.. सोरी.. मे आपके प्यारको समज नही पाइ.. लेकीन आज आपकी सारी हसरते पुरी कर दुगी.. अभी हमारा मीलन हुआ नही.. आज होजायेगा.. ओर अ‍ैसा मीलन.. जो हमे सात जन्मो तक जुदा नही करपायेगा.. भाइ.. मुजे आपमे समालो.. मीटादो सारी दुरीया.. आजसे ये पुनम आपकी होजायेगी..

कहा तो लखन पुनमको अपनी गोदमे उठा लेता हे.. ओर बेडकी ओर चले जाते पुनमको बेडपे लीटा देता हे.. खुद भी बाजुमे लेट जाता हे.. तो पुनम उसे बाहोमे भरते अपने उपर खीच लेती हे.. ओर दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको पागलोकी तराह चुमने लगते हे..

लखन बारी बारी दोनो बुब्सको मसलते पुनमके होठो ओर उनके गलेको चुम रहा था.. जो इस हरकत पुनमको पागल करने लगी थी.. पुनम आंधी आंख चडाते मदहोस हो गइ.. ओर बार बार लखनको बाहोमे कसके भीचने लगी.. जैसे केह रही हो.. मुजमे समा जाओ..

पुनमने अ‍ेक हाथ नीचे लेजाते लखनके लंडको लहेंगेके उपरसे ही पकड लीया.. ओर मुठीमे थामके मसलने लगी.. तो लखनका लंड ओर स्टीलके रोडकी माफीक सख्त हो गया.. ओर जटके मारने लगा.. दोनो ही अ‍ेक दुसरेमे समा जानेके लीये बेकरार होने लगे.. तभी..

पुनम : (मदहोसीमे धीरेसे) भाइ.. बस.. अब बरदास्त नही होता.. कुछ कीजीयेनां..

लखन (गलेमे मुह डालकर चुमते कानमे धीरेसे) दीदी.. आपका गाउन.. इसे नीकालदु..?

पुनम : (सरमाते धीरेसे) हंम.. नीकाल दीजीये.. आप भी अपने कपडे नीकाल दीजीये.. मे नीकालदु..? हंम..?

लखन : (होंठ चुमते) हंम.. दोनो अ‍ेक दुसरेके नीकालते हे.. चलीये बैठ जाइअ‍े..

कहेते लखन पुनमके उपरसे हट गया.. तो पुनम धीरेसे बैठ गइ.. ओर लखन उनकी आंखोमे देखते मुस्कुराने लगा.. ओर पुनमका गाउन नीकालने लगा.. पुनम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर वो भी हींमत करते कातीलाना नजरोसे देखते लखनके सर्टके बटन खोलने लगी..

दोनोने अ‍ेक दुसरेके कपडे नीकाल दीये.. पुनम सीर्फ टु पीसमे रेह गइ.. लखनने बेडसे उतरके अपना पायजामा भी नीकाल दीया.. ओर सीर्फ नीकर पहेना था.. फीर पुनमके पास आकर बैठ गया.. पुनमने सरमके मारे अपनी नजरे जुकाली.. ओर अपनी ब्रा का हुक खोलने लगी तभी..





लखन : (मुस्कुराते बेडपे आते) दीदी.. इसे रहेने दीजीये.. ये मेरी जनतका दरवाजा हे.. मे खुद इसे नीकालना चाहता हु..

पुनम : (सर्मसार होते लखनसे लीपटते) हंम.. भाइ.. ये हम दोनोका पहेला मीलन हे.. समजोनां.. हमारी सुहागरात.. मे इस रातको कभी भुलना नही चाहती.. आप समज गयेनां.. बस.. बच्चेका खयाल रखीयेगा..

लखन : (बैठे ही बाहोमे भीचते) दीदी फीकर मत करो.. मेभी हमारे पहेले मीलनको यादगार बनाना चाहता हु.. आज अ‍ेक पती पत्नीका नही.. अ‍ेक बहेन भाइका मीलन होगा.. जो मेरी बरसोकी फेन्टासी थी.. जब मुजे आपसे प्यार होगया था..

पुनम : (कंधेपे सर रखते बाहोमे भीचते) भाइ.. सोरी.. मे नादान आपके प्यारको समज नही पाइ.. जब बडे भाइ धिरेनका प्रस्ताव लेकर आये तब ही मुजे आपको स्वीकार करलेना चाहीये था.. आप तब भी नही बोल पाये.. तो आज मे आपकी बीवी होती..

लखन : (मुस्कुराते) लेकीन आप तो बडे भैयासे प्यार करतीथीनां..?

पुनम : (नजरे जुकाते) हां.. लेकीन वो अ‍ेक खास मक्सद था.. रही बात बच्चेकी.. तो मेतो तब भी हमारे घरमे रहेती.. ओर वैसे भी अब तो मम्मीने भी सबको छुट देदी हे.. तो कर लेती भाइसे बच्चा..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. आपसे अ‍ेक बात जाननी हे.. इस बच्चोके बारेमे..

पुनम : (सामने देखकर मुस्कुराते) पता हे मुजे.. की आप क्या पुछना चाहते हे.. भाइ.. आज सब कुछ बता दुगी.. लेकीन बादमे.. हमारे पास पुरी रात पडी हे.. बस.. अ‍ेक बार मुजे अपनी बनालो.. मे आपको समर्पीत होना चाहती हु.. आपकी दासी.. फीर आपको सबकुछ बता दुगी.. बच्चोके बारेमे.. आपके दोस्तोके बारेमे.. लताके बारेमे.. सरला काकी के बारेमे भुमीका बुआ ओर नीर्मला आंटीके बारेमे भी.. क्या यही सब पुछना चाहते थेनां..?

लखन : (बाहोमे भरते सर चुमते) हंम.. मेरे बारेमे काफी कुछ पता हे आपको.. चलो कोइ बात नही.. हम फुरसतमे बात करेगे.. आज तो मुजे मेरी बहेनके साथ पहेला मीलन करना हे..





कहेते लखन धीरेसे पुनमको बेडपे लीटा दीया.. तो पुनम भी लखनको बाहोमे भीचते अपने उपर खीच लेती हे.. दोनो भाइ बहेन प्यारकी आगोसमे खोने लगे.. अ‍ेक दुसरेके होठो ओर बुब्सको मसलते पलटने लगे.. कभी लखन उपर होता तो कभी पुनम..
 
जब पुनम लखनके उपर लेटते उनके होठोको चुम रही थी.. तब लखनने धीरेसे उनकी ब्राका हुक खोल दीया.. ओर लखन पुनमको बाहोमे भीचते पलट गया.. पुनमकी ब्रा नीकल गइ.. तो पुनम सरमसे पानी पानी होगइ.. पुनमके दोनो गोरे गोरे आम जैसे बुब्स हल्कीसी रोसनीमे चमकने लगे..

लखनने ब्राको साइडमे रखते पुनमके बुब्सको अपने मुहमे लेलीया.. पुनम मदहोस होते आंखोकी पुतलीया पलटने लगी.. वो लखनके बालोको सहेलाते सरको अपने बुब्सपे दबाने लगी.. लखन बारी बारी दोनो बुब्सको चुमते उनको मसलते खेलने लगा..





पुनम : (आंख चडाते मदहोसीमे धीरेसे) आह.. सीइइइ.. भा..इ.. मत छेडो.. मुजे कुछ हो रहा हे.. कुछ कीजीयेनां..

लखन : (बुब्सकी नीपलको दांतोसे हल्केसे खीचते) दीदी.. आइ लव यु.. क्या मस्त बुब्स हे आपके.. मे तो पागल होजाउगा..

पुनम : (आंख चडाते सरको बुब्सपे दबाते) भा..इइइ.. अब ये सीर्फ आपके हे.. आज मे मेरा पुरा तन आपको सोंप रही हु.. मुजे इतना प्यार दीजीये.. मे मेरा सारा दुख भुल जाउ.. समा जाओ मुजमे..

कहा तो लखन पुनमके उपरसे थोडा साइडमे होगया.. पुनमके बुब्स ओर होठोको चुमते धीरेसे अ‍ेक हाथ नीचेकी ओर लेगया.. ओर पुनमकी पेन्टीके उपरसे ही चुतपे हाथ रख दीया ओर धीरे धीरे सहेलाने लगा.. तो पुनमके तनसे अ‍ेक कंपन की लहेर दोड गइ..





उनकी आंखे नसीली होने लगी.. उसने कमरको अ‍ेक जटका दीया.. वो अ‍ेक हाथ लखनके गलेमे हाथ डालकर दुसरे हाथोसे लखनके सर सहेलाते अपने बुब्ससे सटाने लगी.. पुनमके दोनो बुब्स कच्चे आमकी तराह कठोर हो गये थे..

पुनम : (आंख बंध करते मदहोसीमे) सीसससस... उहं.. उहं.. उउ.. सीसससस... भा..इइइइ.. मुजे पागल करदोगे आप.. उपर आजाइअ‍े.. आज मसल डालीये अपनी बहेनको.. कीतने दिनोसे प्यासी हे आपके प्यारमे.. अब ये तन सीर्फ आपका हे.. समा जाइअ‍े मुजमे.. ओर समा लीजीये मुजे आपके अंदर..

लखन : (लडखडाती आवाजमे उतेजनामे धीरेसे होठ चुमते) दी..दी.. कहा थी आप..? मे आपके बीना बहुत तडपा हु.. आज सारी कसर नीकाल दुगा.. आप सीर्फ मेरी हो.. इसे (पेन्टी) नीकालदु..? हंम..?

पुनम : (सर्मसार होते नजरे चुराते धीरेसे) हंम..? आपको ठीक लगे.. नीकाल दीजीये..





लखन पुनमके होठो ओर गलेको चुमते नीचेकी ओर सरकने लगा.. पुनमके दोनो बुब्सको बारी बारी चुमते अ‍ेक हाथसे मसलने लगा.. लखनकी अ‍ेक अ‍ेक हरकतको पुनम अ‍ेन्जोय करते पागल हो रही थी.. उनकी चुत लगातार पानी छोडते फडफडा रही थी..

जैसे उनको भी अपने नये स्वामीको नीगलनेकी जल्दी हो.. लखन बुब्सको चुमते नीचे सरक गया.. ओर पुनमकी नाभीपे जीभ भीराते उनको चुमने लगा.. पुनम सीहरने लगी.. वो मदहोसीमे आख चडाते दोनो हाथसे लखनके सरको पकडते अपने तनसे चीपकाने लगी..





लखनकी अ‍ेक अ‍ेक हरकत उनको पागल करनेके लीये काफी थी.. ओर चुमते चुमते आखीर लखन अपनी मंजील तक पहोंच ही गया.. वो पुनमके दोनो पैरोके बीच बैठ गया.. तो पुनमने सरमाते अपने दोनो पैर घुटनोसे मोडकर फैला दीये.. ओर लखनकी ओर नजरे चुराते देखने लगी..

पहेलेतो लखनने पुनमकी ओर देखा ओर मुस्कुराने लगा.. तो पुनमकी दोनो आंखे लाल हो चुकी थी.. वो सरमके मारे अपनी नजरे चुराने लगी.. लखनने उनकी पुन्टीमे दोनो ओरसे उगलीया फसाली.. ओर धीरेसे पुनमकी पेन्टीको खीचकर नीकालने लगा..

पुनम बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर उसने जटसे अपनी चुतपे दोनो हाथ रख दीये.. अपने दोनो पैर उचा करते लखनको पेन्टी नीकालनेमे मदद करने लगी.. लखनने पहेली बार रुबरु अपनी जनतको देखा.. तो पुनमकी नाजुक चुत पंखडीओकी तराह फडफडा रही थी..

पुनम : (पेन्टी नीकालते जुककर हाथोको चुमते) दीदी.. आज मुजे अपनी जनतके द्वारके दर्शन करादो..

पुनम : (दुसरी ओर सर करते नजरे चुराते) भाइ.. मुजे बहुत सरम आ रही हे.. उपर आजाइअ‍ेनां..

लखन : (सामने देखते मुस्कुराते) क्या सचमे उपर आजाउ..?

पुनम : (सरमाते हसते) मुजे नही पता.. आप बहुत बदमास हो.. आजाइअ‍ेनां.. क्यु तडपाते हो..?

लखन : (हाथ हटाते चुतपे जुकते) दीदी.. आज दीखाउगा.. की प्यार क्या होता हे.. देखो.. आज कैसे आपको जनतकी सेर कराता हु..





कहा तो पुनम सरमसे पानी पानी होगइ.. तभी उसे अ‍ेक जटका लगा.. क्युकी लखनने अचानक पुनमकी चुतपे अपना मुह लगा दीया था.. ओर धीरे धीरे चुतको चाट रहा था.. पुनम आंख बंध करते हवामे गोते लगाने लगी.. तभी उसे अ‍ेक ओर जटका लगा..
 
वो अपनी दोनो आंख भीचते अपनी कमर उछालने लगी.. ओर लखनके सरको पकडते अपनी चुतपे दबाने लगी.. क्युकी लखनने अपनी जीभको पुनमकी चुतमे घुसादी थी.. पुनम लखनके प्यार करनेका अंदाज देखकर पागल जैसी होने लगी..





पुनम : (कमर उछालते मदहोसीमे धीरेसे) आइइइइ.. भाइ.. क्या कर रहे हे..? सीससस.... आह.. आइइइ..

लखन बीना कुछ बोले पुनमकी चुतमे जीभ घुसाते अंदर बहार करने लगा.. ओर चुतके दानेको छेडने लगा.. अब पुनम पुरी तराह गरम हो चुकी थी.. वो पागल होते बेकाबु होने लगी थी.. उसने सारी सरम त्यागदी.. ओर कमर उछालते जोरोसे सीसकारीया करने लगी..





वो कोनीके बल बैठ गइ.. ओर लखनको खा जानेवाली वासनामय नजरोसे देखने लगी.. इतना सुख उसे कभी नही मीला था.. वो लखनसे जल्दसे जल्द चुदवाना चाहती थी.. लेकीन सरमके मारे कुछ बोल नही पाइ..

पुनम : (सीसकारीया करते सरमाते धीरेसे) सीससस.. आइइइ... आह... भा..इइइ.. मुजे.. कु..छ.. हो रहा हे.. कुछ कीजीयेना..

लखन : (सामने देखकर मुस्कुराते) दीदी.. क्या करु..? बोलीयेनां..?

पुनम : (सरमाकर दुसरी ओर कुह घुमाते मुस्कुराते) मुजे नही पता.. जैसे आपको कुछ पता ही नही हे..

लखन : (धीरेसे) दीदी.. जब तक बोलोगी नही कैसे पता चलेगा..? (कहेते चुतपे मुह लगता हे)

पुनम : (मदहोसीमे) आइइइ.. सीससस... उह.. अंह..अंह.. सीससस.... बडे बेसर्म हो.. ओर मुजे भी बेसर्म करदोगे.. आह..आह..आह.. उउउउ...सीससस.... येस.. येस.. आइ अ‍ेम कमींग.. भा...इइइ....





ओर पुनमकी चुतपे सुरसुराहट होने लगी.. पुनमका मुह उतेजनासे बीगडने लगा.. ओर अपनी कमर उछालते जटके मारने लगी.. उसे लगा वो सातवे आंसमानपे पहोंच गइ हे.. तभी उनकी चुतसे दो तीन पीचकारीया नीकल गइ.. जो लखनके पुरे मुहको भीगोने लगी..

आज पहेली बार लखन पुनमके रसको चाटने लगा.. ओर पुनमकी चुतको साफ करने लगा.. जीसे देखकर पुनम बहुत ही सर्मसार होगइ.. लखनके साथ छेखानीसे उनका ये पहेला ओरगेनीस्म था.. वैसे तो वीडीयो कोलमे दोनोने कइ बार अ‍ेक दुसरेका पानी नीकाला था..





दोनोको पता नही था की दोनोके अंदर जातेही जैसे ही दरवाजा बंध कीया तब भावना ओर तो दुसरे रुमसे दया ओर रजीयाभी दबे पांव बहार नीकल गइ.. फीर भावनाने अपनी नाकपे उंगली रखते तीनोको चुप रहेनेका इसारा कीया..

ओर चारो मुस्कुराते दबे पांव लखन पुनम वाले दरवाजेके पास पहोंच गइ.. तो भावना दरवाजेपे कान लगाते अंदरकी आवाज सुननेकी कोसीस करने लगी.. लखन पुनमके रुममे जाते ही चारोने तैय करलीया थाकी आज वो पुनमकी चीखे सुनेगी..

तो कुछ देरके बाद चारो रुमसे नीकल गइ ओर लखनके रुमके पास आगइ.. ओर भावना दरवाजेपे कान लगाकर सुनने लगी.. तभी अंदर दोनोकी हल्कीसी आवाज बहार सुनाइ दे रही थी.. तो भावनाने हसते सबको इसारोसे दरवाजेपे कान रखनेको कहा.. ओर चारो अलग अलग जगाहपे कान लगाते अंदरकी आवाज सुनने लगी.. तभी अंदर..

लखन : (सामने देखते चुतको चाटते) दीदी.. क्या मस्त स्वाद हे इनका..

पुनम : (सरमसे पानी पानी होते धीरेसे) भैया.. ये आप क्या कर रहे हे..? वो बहुत गंदा होता हे..

लखन : (चहेरा साफ करते) नही दीदी.. आज मेने आपके अमृतका रस पीया हे.. जो मुजे आपसे पुरी रात प्यार करनेकी ताकत देगा.. लव यु दीदी..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ.. आइ लव यु टु.. मेने आपको अ‍ैसे ही जडी बुटी नही दी थी.. ये जडी बुटी सीर्फ मेरे लीये थी.. लताके लीये थी.. सृती दीदी ओर भावना दीदीके लीये थी.. चंदा भाभीके लीये थी.. जो हम सभी ओरते बहुत ही कामी हे.. रमा भाभी ओर नीलम तो अ‍ेक बहाना था.. उन दोनोके लीये तो आपको मुना भाइने दि हुइ जडी बुटी ही काफी थी..

लखन : (आस्चर्यसे मुस्कुराते) आप सबके लीये..?

पुनम : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) हां भाइ.. आज मुजे पहेली बार कीसीने अ‍ैसे ही जडाया हे.. आपने पागल करदीया था मुजे.. भाइ... मुजे ओर हमारे घरकी ओरतोको संतुस्ट करना हर कीसी मर्दका काम नही हे.. इसीलीये तो मम्मीने आप दोनो भाइको जीम्वेजारी दी हे.. खास करके आपको.. अब आपको ही हम सबको सम्हालना होगा..
 
भावना : (बहारकी ओर धीरेसे दबी आवाजमें) कमीनी.. मुजे भी उनके जीचे लीटानेकी फीराकमे हे..

लखन : (सामने बैठते) दीदी.. मुजे तो मेरी दोनो बहेनोका ही प्यार चाहीये.. आप ओर सृती.. मेरी मालीनी.. आप दोनो सीर्फ मेरी हो.. मे आप दोनोको कीसी ओरके साथ नही बाट सकता.. भाइके साथ भी नही..

पुनम : (बाहोमे भीचते होठ चुमते) भाइ.. भाइके साथ हम दोनोका रीस्ता खतम हो गया हे.. आइ लव यु सो मच.. आइ प्रोमीस.. अ‍ैसा ही होगा.. जो आप चाहते हो.. हमतो आपको पाकर धन्य होगइ.. मे आपको खुब प्यार करुगी..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या आपने कभी ब्लुजोब दीया हे..?

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते धीरेसे) नही भाइ.. वो सब मे आज पहेली बार करुगी.. सीर्फ आपके लीये.. मुजे भी आपके रसको पीना हे.. मुजे सब सीखा दीजीयेगा.. आइअ‍े..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अगर नही कीया हे तो रहेने दो..

पुनम : (मुस्कुराते अपने उपर खीचते) नही भाइ.. आपके साथ मे वो हर मजे करना चाहती हु.. जो कभी हम दोनो स्कुलमे थे तब मेरी ओर आपकी फेन्टासी रही हे.. लेकीन मेरे सपनोका राजकुमार आप होगे ये पता नही था.. अब मुजे मेरा राजकुमार मील गया हे.. आइ लव यु भाइ..

लखन : (मुस्कुराते बेडपे लीटाकर उनके उपर लेटते) दीदी.. आइ लव यु टु.. आप बीना कपडोमे भी बहुत खुबसुरत लग रही हे..

पुनम : (बाहोमे भीचते तनसे सटाते धीरेसे) भाइ.. ये रुप.. ये तन.. मेरा सबकुछ अब आपके लीये ही हे.. आज मुजे वो सुख चाहीये.. जीसके लीये मे तडप रही हु.. जो आपने सृती दीदीको दीया..

लखन : (मुस्कुराते होठ चुमते) दीदी.. आप मेरे लीये स्पेसीयल हो.. तो आज कुछ स्पेसीयल होगा.. जो कभी उस जमानेमे वो राजा अपनी चहीती बहेनके साथ करता था.. ओर आज तो हम दोनोकी हमारे मीलनकी पहेली रात हे.. हमारी सुहागरात.. ओर मुजे पता हे वो सीर्फ आप ही कर सकती हो..

पुनम : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या..? भाइ बताओना वो राजा अपनी बहेनके साथ क्या करता था..?

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. बतानेकी जरुरत नही हे.. आपको सुबह सब पता चल जायेगा.. चलीये अभी बाते नही.. बातोके लीये पुरी रात पडी हे.. आज मुजे सीर्फ आपका प्यार चाहीये.. मेरी पुनोका प्यार..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. पहेले आपका नीकर तो नीकाल दीजीये.. मे देखु तो सही मेरा छोटा लखन कैसा हे..

लखन : (मुस्कुराते नीकर नीकालते) सोरी दीदी.. लो देखलो अपने छोटे भाइको..

पुनम : (लखनका लंड देखते ही) ओह.. ओह माय गोड.. इतना बडा..? वीडीयो कोलमे तो इतना बडा नही दीखता था.. भाइ.. इतना बडा तो बडे भउयाका भी नही हे.. आज तो मे गइ कामसे..

लखन : (पास लेटते) दीदी.. कुछ नही होगा.. रजीया ओर सृतीदीदीने भी लीया हे.. उनको कुछ नही हुआ.. चलीये.. अब जो भी करना हो करलीजीये..

कहातो पुनमने लखनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. ओर लखनकी बातोने उसे फीरसे गरम करदीया.. वो लखनको बाहोमे भीचते पलट गइ.. ओर लखनको चुमते नीचेकी ओर सरकने लगी.. पुनमने लखनका बडा लंड अपनी मुठीमे पकडलीया..





उसे होले होले सहेलाते लखनके उपर जुक गइ.. ओर उनके होठोको चुमने लगी.. लखनका लंड फीरसे तनके सख्त होगया.. पुनम धीरेसे लखनके दोनो ओर पैर करते पलट गइ.. ओर लंडपे जुकते दोनो हाथोसे लंडको पकडलीया.. ओर सीक्स नाइन पोजीसनमे आगइ..





लखनपे जुकते लखनकी ओर देखकर मुस्कुराते लंडपे अपनी जीभसे लंडको चाटने लगी.. तो लखन खुस होते मुस्कराने लगा.. पुनमने धीरे धीरे चाटते लंडको थोडासा मुहमे लेलीया.. ओर अंदर बहार करते धीरे धीरे लंडको नीगलने लगी.. तभी लखनने उनके नीतंब पकडलीये..

ओर पुनमकी चुतपे मुह लगा दीया.. दोनो भाइ बहेन कामातुर होते सीक्ष नाइन पोजीसनमे अ‍ेक दुसरेके अंगोसे खेलने लगे.. पुनमने अब सारी सरमको त्याग दीया था.. वो लखनके लंडको अपनी हलक तक लेजाते अंदर बहार करने लगी..





काफी देर तक दोनो भाइ बहेन अ‍ेक दुसरेके पार्टके साथ खेलते रहे.. लखन भी पुनमकी चुतमे जीभ घुसाते अंदर बहार करने लगा था.. तो पुनम अ‍ेक बार फीर अकडने लगी.. ओर वो जडने लगी.. पुनमका पानी लखनके मुहमे चला गया.. तो लखन उसे गटक गया..





जडनेकी वजहसे पुनमका जोस ठंडा हो गया.. ओर वो मुहसे लंड नीकालते पलटकर लखनकी ओर देखने लगी.. तो लखन अब भी उनकी चुतको चाट रहा था.. जीसे देखकर पुनम बहेत ही सर्मसार होगइ.. ओर वो जटसे पलटकर लखनकी ओर होगइ.. ओर लखनके उपर लेटते लखनके होठोको चुमने लगी.. फीर प्यारसे उनकी आंखोमे देखने लगी..
 
Back
Top