Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 99 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २६९

तो साहील सबानाके होंठ चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. सबानाने साहीलका हाथ हटानेकी कोइ कोसीस नही की.. वो मदहोस होने लगी.. आधी आंख चडाते साहीलके मुहमे अपनी जीभ डालने लगी.. ओर साहीलसे मजेसे अपने दोनो बुब्स बारी बारी मसलवाने लगी.. जीनकी वजहसे सबानाकी चुत गीली होने लगी.. सबानाको पता ही नही चलाकी साहील कबसे उनकी चुतको सहेलाने लगा.. तभी.... अब आगे





सबाना : (मदहोसीमे) सीसससइइइ... ओह.. सा..ही..ल.. आइ लव यु.. मत छेडो या..र.. मे रेह नही पाउगी..

साहील : (कामुक आवाजमे) सबु.. सबु आइ लव यु टु.. मीलनेदे यार.. फीर पता नही दुबारा कब मीलनेका मौका मीलेगा..

सबाना : (बहारकी ओर देखते) बस.. भाइ रहेने दो.. बडी अम्मी घरपे ही हे.. हम बादमे मीलते हेनां.. मे दो दीन यही हु.. सीर्फ आपसे मीलने आइ हु..

साहील : (गलेको चुमते धीरेसे कानमे) रातको कमरेमे अकेला सोउगा.. मे आजाउगा..

सबाना : (जटसे अलग होते सरमाते धीरेसे) बस.. बस साहील.. इनसे आगे अभी कुछ नही..

साहील : (सर्मीन्दा होते धीरेसे) सोरी सबु दीदी.. मे थोडा बहेक गया था.. आइ अ‍ेम सोरी..

सबाना : (गले लगते) भाइ जान.. आप सोरी मत बोलो.. आप मेरे होने वाले सौहर हो.. मे सीर्फ आपसे मीलने तो आइ हु.. लेकीन.. प्लीज.. बस.. फीर ये सबाना आपकी हे..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या चाची चाचाको हमारे बारेमे सब पता हे..?

सबाना : (सरमाते मुस्कुराते) सीर्फ अम्मा ओर बडी अम्मीको.. अबुको अभी नही पता.. अम्मी केह रही थी जब वे दोनो यहा आजायेगे तब अबुसे बडे ठाकुर बात करलेगे..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी आप सीर्फ दो दीनके लीये आइ हो.. वरना उन दोनो भाइ बहेनकी सादी देख करके जाती.. हम सभी दोस्तोको बुलाया हे..

सबाना : (मुस्कुराते) भाइ.. ये सब हमारेमे होता था.. अबतो पुरे गांवमे होने लगा हे.. कीतना अजीब हेनां..? घरमे ही रीस्ता होजाता हे.. बहार ढुंढनेकी जरुरत ही नही..

साहील : (सामने देखते मुस्कुराते) दीदी.. अ‍ेक बात पुछु..? आप इस रीस्तेसे खुस तो हेनां..?

सबाना : (अ‍ेक नजर देखते धीरेसे) भाइ.. मेने मनसे आपको अपना सौहर मानलीया हे.. अगर आपसे नीकाह नही हुआ तो प्रोमीस.. ये सबाना जींदगीभर कुआरी रहेगी.. अब कोइ सक हे..?

साहील : (मुस्कुराते नामे गरदन हीलाते) नही.. दीदी.. आइ लव यु.. मे कीतना खुस नसीब हु.. की आप जैसी बहेन मेरी बीवी होगी..

सबाना : (गले लगते) भाइ.. आइ लव यु टु.. मे बस जानेसे पहेले सीर्फ आपको मीलने आइ हु.. वोभी अ‍ेक सरप्राइज लेकर.. सीर्फ आपके लीये..

साहील : (मुस्कुरामते) सरप्राइज..? कैसी सरप्राइज..?

सबाना : (कातीलाना मुस्कुराते) हे अ‍ेक सरप्राइज.. जो मेरे डोकटर बनके आने तक आप याद रखोगे.. कमरेका दरवाजा खुला रखना..

साहील : (मुस्कुराते) अच्छा..? तो ये बात हे..? चलो देखते हे कैसी हे आपकी सरप्राइज.. मे इन्तजार करुगा..

सबाना : (मुस्कुराते) भाइ.. सृती दीदी यही हेनां..? क्या हम उसे मीलनेके लीये चले..?

साहील : (मुस्कुराते) हां स्योर.. क्यु नही..? चलो.. मे लखन भैयाको फोन करदेता हु..

फीर साहीलने लखनसे बात करली.. तो लखनने दोनोको घरपे बुला लीया ओर साहील सबाना पैदल चलते टहेलते हवेलीपे पहोंच गये.. तो बहारसे पुरानी ओर अंदरसे आधुनीक हवेलीको देखकर सबाना दंग रेह गइ.. सबने साहील ओर सबानाका स्वागत कीया..

वहा सबानाने सृतीको सभी जानकारी देदी.. ओर सृतीने भी सबानाको बहुत कुछ गाइड कीया.. फीर सृतीने घरकी सभी लेडीजसे सबानाको मीलवाया.. खास करके पुनमको.. तो सबाना बहुत खुस होगइ.. क्युकी सृतीने सबको यही बताके परीचय करवाया की यही लडकी डोक्टर बनके यहा आने वाली हे..

फीर सबाना ओर साहील चाइ नास्ता करके घरपे आगये.. दुसरी ओर सलमा खुद साहील ओर सबानाको स्पेस देना चाहती थी.. क्युकी उनको अभी भी सबानाके उपर पुरा यकीन नही था.. की वो साहीलसे सादी करेगी.. उनको मनमे आसंका थीकी कही डोक्टर बननेके बाद सबानाका मन बदल गया तो..?

इसीलीये तो उसने सबानाको यहा बुलालीया था.. ताकी साहील सबानाके साथ आगे बढे.. ओर प्यारके अलावा दोनोके बीच कुछ अ‍ैसा होजाये जो बादमे सबाना सादीके लीये इन्कार ना करे.. इसीलीये उसने आज सबानाकी पसंदका खाना बनाया ओर तीनो साथमे बैठकर खाने लगे..
 
सबाना बार बार साहीलको चोर नजरसे देखते मुस्कुरा रही थी.. तभी सलमाने सबानासे नजर बचाते साहीलको आंखोसे रुमकी ओर इसारा कीया.. ओर कातील नजरोसे देखकर हल्केसे मुस्कुराते साहीलको आंख मारदी.. तो साहील सबकुछ समज गया.. आखीर सलमाने बात छेडदी..

सलमा : (मुस्कुराते) सबु.. अभी छोटीका फोन आया था.. क्या उनसे तुम्हारी कोइ बात हुइ हे..?

सबाना : (सरमाते धीरेसे) अम्मीका..? कीस बारेमे..?

सलमा : (मुस्कुराते सामने देखते) तुम दोनोके बारेमे.. तेरी अम्मीको मेने कुछ पुछा था.. तो आज उनका फोन आया था.. तो उसने मुजे कुछ कहा हे.. कहेती थी तुम राजी हो.. बस.. अ‍ेक बार तुम्हारे मुहसे सुनना चाहती हु..

सबाना : (सरमसे पानीपानी होते धीरेसे) जी बडी अम्मा.. मे राजी हु..

सलमा : (मुस्कुराते) चलो.. अ...का लाख लाख सुकर हे.. बेटा.. जो बात सीर्फ हमारेमे होती थी.. ये बात तो अब पुरे गांवमे होने लगी हे.. साहीलके सभी दोस्तोने अपनी बहेनसे सादी करली हे.. तो तु भी कोइ संकोच मत करना.. तेरे अबासे बडे ठाकुर बात करलेगे..

सबाना : (सरमाते मुस्कुराते) जी बडी अम्मा.. साहील भैयाने बताया मुजे..

सलमा : (हसते) तेरे होने वाला सौहर हे.. अभी भी भैया महोगी..? नामसे बुला.. मुजे कोइ अ‍ेतराज नही हे.. यहा सब सहेरकी तराह रहेते हे.. कीसीपे कोइ पाबंधी नही..

सबाना : (साहीलकी ओर सरमाकर मुस्कुराते) जी.. बडी अम्मी..

सलमा : (मुस्कुराते) आज तो मे बहुत थक गइ हु.. बर्तन धोकर मेतो सो जाउगी.. तुम दोनो साहीलके रुममे जाकर बाते करना बहुत नींद आ रही हे..

सबाना : (मुस्कुराते) अम्मा आप सोजाइअ‍े मे सब काम कर दुगी..

सलमा : (मुस्कुराते) अरे नही नही.. सीर्फ दो दीनके लीये आइ हो.. फीर तो दो सालके बाद आना होगा.. अपने होने वाले सौहरसे अच्छेसे मीलकर बाते करले.. हें..हें..हें..

सबाना : (सरमाकर मुस्कुराते) क्या अम्मा.. आपभीनां.. मे कोइ पराइ थोडीना हु..? येभी तो मेरा ही घर हे..

सलमा : (मुस्कुराते) सही कहा तुमने.. देखोना यहा कैसे सबकुछ बदल गया हे.. यहा जीस घर लडकीका मायका था.. वही घर अब उनका ससुराल हो गया हे.. तेरा भी वैसा ही हे..

सबाना : (सरमाते मुस्कुराते) बडी अम्मा.. कीतना अजीब हेनां..? वकीन ही नही होता गांवमे भी लोग बदलने लगे हे..

सलमा : (खडी होते) नही बेटा.. सीर्फ गांव ही नही.. अबतो जमाना बदल गया हे.. मे भी कोइ पुराने खयालोकी नही हु.. वक्तके साथ बदलना पडता हे.. कल हमारे खेतोको भी देख लेना.. साहील तुजे लेजायेगा..

सबने खाना खालीया तो सलमाने कीचनका सब काम समेट लीया.. ओर अपने कमरेमे जाते सलमाने सबानासे छुपकर साहीलकी ओर मुस्कुराते सबानाकी ओर इसारा करते आंख मारदी.. तो साहील भी मुस्कुराने लगा.. वो सलमाका इसारा समज गया था..

फीर साहीलने घरका दरवाजा बंध करदीया ओर अपने कमरेमे चला गया.. सबाना अलग कमरेमे आराम कर रही थी.. देर रात साहीलके रुमका दरवाजा धीरेसे खुला.. साहील सबानाका ही इन्तजार कर रहा था.. उसे लगा सबाना नही आयेगी..

साहील कमरेकी हल्की रोशनीमे देखने लगा.. सबाना धीरेसे दरवाजा बंध करके साहीलके पास आने लगी.. साहीलने देखा तो सबानाने हल्कासा शींगार कीया हुआ था.. ओर अपने साथ अ‍ेक पेइनकीलर ओर आइपीलकी गोलीया.. छुपाकर लाइ थी.. सबाना साहीलके पास आकर बैठ गइ..

सबाना : (सरमाते धीरेसे) साहील.. आप सो गये क्या..?

साहील : (बेडपे बैठते) नही सबु.. तेरा ही इन्तजार कर रहा था..

सबाना : (सरमाते धीरेसे) आपको पता था मे आउगी..?

साहील : (मुस्कुराते) हमारी बात हुइ थी.. ओर मुजे अपने प्यारपे भरोसा था..

सबाना : (जोरोसे बाहोमे भरते) हां साहील.. यही भरोसा कायम रखना.. जानेसे पहेले सोचा अ‍ेक बार आपको मीलकर जाउ.. कुछ अ‍ैसी यादे लेकर जाउ.. जो हर दीन आपको याद करु..





दोनो थोडी देर अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे बैठे रहे.. ओर धीरेसे साहीलने सबानाके होठोपे होठ रख दीये.. सबानाने आंखे बंध करली.. वो मदहोसीमे साहीलकी पीठको सहेलाने लगी.. धीरे धीरे दोनो प्यारके आगोसमे खोने लगे.. साहील सबानाके बुब्सको मसलते दबा रहा था..
 
सबानाके तनमे अ‍ेक आगसी लगी हुइ थी.. वो मदहोसीमे आंधी आंख चडाते साहीलका साथ देने लगी.. दोनो वासनामे इतने अंधे होगये की अ‍ेक अ‍ेक करते कब उनके तनसे कपडे हटते गये पता ही नही चला.. सबानाकी आंख लाल हो चुकी थी.. वो धीरेसे बेडपे लेट गइ..





सबाना : (सरमाते धीरेसे फुसफुसाते) आओ साहील.. आज सबानाको पुरी तराह अपनालो..

साहील : (होंठ चुमकर मुस्कुराते) सबु.. कही मे सपना तो नही देख रहा हु..

सबाना : (हाथ थामपे अपे उपर खीचते) नही जान.. आजसे सबु आपकी अमानत हे.. बनादो मुजे ओरत.. मे यही सुख पानेके लीये यहा आइ हु..

साहील : (मुस्कुराते) सबु.. ये सब अचानक..? मतलब.. जीस लडकी बहुत सीधी सादी थी.. जो सादीसे पहेले ही अपने आपको अपना सबकुछ अपने सौहरपे लुटानेको तैयार होगइ..

सबाना : (मुस्कुराते) भाइ.. मे देखना चाहती थी.. की सादीसे पहेले प्यारमे अ‍ैसा क्या हे जो हमारी बहेन.. भर जवानीमे ही अपना सबकुछ बडे भैयासे लुटवाकर बहुत खुस थी.. ओर उनके पीछे पागल थी.. तो सोचा मेभी अ‍ेक बार देखलु.. ओर अनुभव करलु.. आइअ‍े.. मुजे भी वो सुख दीजीये.. जो कभी सायरा दीदीको कादीर भाइने दीया था..





कहेते सबानाने साहीलका हाथ पकडकर उसे अपने उपर खीच लीया.. तो साहील सबानाके उपर छागया.. सबानाने उनको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया.. साहीलका तगडा लंड सबानाकी चुतपे दस्तक देने लगा.. सबानाके तनसे अ‍ेक जुरजुरीसी लहेर दोड गइ..





साहील उनके होठोको छोडकर सबानाके बुब्सकी नीपलको चुमने लगा.. तो सबानाने साहीलके सरको पकडते अपने बुब्सपे दबाने लगी.. वो आंधी आंख चडाते मदहोस होगइ.. वासनामे बहेकते खुद सबानाने साहीलके लंडको पकडकर अपनी चुतपे सेट कर दीया..





साहीलने सबानाके दोनो हाथ थामते मोर्चा सम्हाल लीया.. बस.. सीर्फ अ‍ेक लीपलोक ओर कमरका अ‍ेक जटका.. सबानाकी चीख साहीलके मुहमे ही दब गइ.. आंखसे आसुओकी धारा बहेने लगी.. अपने दोनो पैर बेडपे पटकती रही.. ओर साहीलसे अपना मुह छुडानेकी कोसीस करने लगी..





फीर कुछ देरके बाद सांत होगइ.. वो साहीलकी पीठको सहेलाने लगी.. जब साहीलने उनके होठोको छोडा तो सबाना बहुत ही सर्मसार होने लगी.. ओर मुहको इधर उधर करते साहीलसे नजरे चुराने लगी.. यही तो वो सरप्राइज थी जो वो साहीलको देना चाहती थी..





घरसे नीकली तब ही सभी तैयारीया करके आइ थी.. सलमा ओर जरीनाका साथ थातो अब सबानाको कोइ डर नही था.. आज उसने अपने प्यारको अपना कौमार्य सोंप दीया.. जब दर्द कम हुआ तो दोनो धीरे धीरे अपनी कमर हीलाते चुदाइमे मसगुल होगये.. सबाना बडीही कामुक नजरोसे साहीलकी आंखोंमे देख रही थी..





साहील : (कमर हीलते होंठ चुमते) सबु.. इतनी हींमत..? आइ कान्ट बीलीव..

सबाना : (मुस्कुराते) अच्छा..? इन्गलीस..? कीसने कहा मेरा भाइ अनपढ हे.. भाइ.. यही तो थी मेरी सरप्राइज.. मे हमारी यही यादे लेकर बेंगलोर जाना चाहती थी.. मे हमारी सादीके पहेले आपके साथ हर लम्हा जीना चाहती हु.. दो दीन हु आपके पास.. मुजे आपके अंदर समालो..





कहा तो कुछ ही देरमे दोनोके बीच घमासान चुदाइ होने लगी.. सलमाके अलावा आज पहेली बार साहील कीसी कुआरी लडकीको चोद रहा था.. अबतक सबाना दो बार जड चुकी थी.. साहीलने लंडको चुतमे जड तब घुसा दीया.. ओर अपनी कमरको जटके देने लगा..





सबानाको अपनी चुतकी गहेराइओमे गरम महेसुस हुआ.. जीसे वोभी उतेजनामे कांपने लगी.. उसे समजमे नही आ रहा थाकी क्या हो रहा हे.. वो उतेजनामे कांपने लगी.. ओर उसने साहीलको जोरोसे अपनी बाहोमे भीच लीया ओर लीपलोक करलीया..





अंदर सुरसुराहट होने लगी.. तो जैसे सबानाकी चुतसे भी सैलाब उमड पडा.. ओर साहीलके लंडको भीगोने लगा.. दोनोने ही परम आंनदकी अनुभुती प्राप्त करली.. जैसे दोनोने सारी खुसीया समेटली हो.. ओर कुछ ही देरमे साहील सबानाके सीनेपे ढेर होगया..





सबाना उनकी पीठ सहेलाती रही.. सबानाके चहेरे पे आज संतुस्टीके भाव थे.. वो हल्केसे मुस्कुराइ.. जैसे उसने कीसीसे बदला लेलीया हो.. हां.. उसने बदला लीया अपनी बडी बहेन सायरासे.. काफी समय होगया.. साहील अब भी सबानाकी चुतमे लंड डालकर लेटा हुआ था..





बीच बीचमे दोनो अ‍ेक दुसरेके होठोको चुम लेते थे.. कुछ देरके बाद फीरसे दोनोके बीच चुदाइ होने लगी.. इस रात साहीलने सबानाको तीन बार चोद लीया.. सबाना हीलनेकी स्थीतीमे नही थी.. उनके पांव लडखडाने लगे थे.. साहील उनको गोदमे उठाकर बाथरुममे लेगया..

सबानाकी चुतकी सीकाइ करदी.. ओर दोनोने नहा लीया.. ओर बेडपे आगये.. देखा तो दोनोके काम रसके साथ चदरपे खुनके धबेभी थे.. समहीलने चदरको बदलदी.. सबानाको कपडे पहेनाये ओर उनके रुममे छोडकर आगया.. दोनो गहेरी नींद सो गये..
 
लेकीन दोनोको नही पता थाकी सलमा खीडकीसे दोनोकी चुदाइ देख रही थी.. ओर अपनी चुतको सहेला रही थी.. आज साहीलके बीस्तरपे उनकी जगह सबाना थी.. फीर सलमाने उंगलीसे अपने आपको सांत कीया.. तो उसी दीन सामको देजायत ओर भानु खेतोपे बहार रामुकाकाकी खटीयापे बैठे थे..

देवायत : भानु.. अब रामुकाका चले गये हे.. तो मे चाहता हु तु अब तुम्हारा गांव छोडदे..

भानु : गांव छोडदु..? बात तो सही हे यार.. अब खेतोका ध्यान हमे ही रखना पडेगा.. अब तो मे भी दो दो तीन तीन दीन यहा रहेता हु.. तो घरपे मां ओर रमा अकेली होती हे..

देवायत : (मुस्कुराते) इसीलीये केह रहा हु.. तु अब यही रहेने आजा.. गांवके आखीरमे हमारा ही खेत हे.. बीचमे सीर्फ अ‍ेक नदी.. तो हमारे खेतोके सामने ही गांवमे अ‍ेक घर बनवाले.. ओर यही रहेने आजा.. उस घरको बेचदे.. मे पंचायतसे जमीन दीलवा दुगा.. कोइ अच्छासा बडा घर बनवाले..

भानु : (मुस्कुराते) हां ये सही सोचा हे तुमने.. कमसे कम मां ओर रमा नजरके सामने तो रहेगी.. ओर मां भी यहा आयेगी तो उनका भी समय नीकल जायेगा..

देवायत : तो फीर ठीक हे मे सश्मीसे कहेकर जमीनके कागजात करवाता हु.. तु कोइ अच्छासा ठेकेदार ढुंढले.. ओर मकान बनानेको बोलदे..

भानु : (मुस्कुराते) भाइ.. वो सश्मी भाभीका घर बन गया..?

देवायत : हां यार वहा कलरका काम चल रहा हे.. उसी ठेकेदारको केह देता हु.. वो होस्पीटल ओर स्कुलका काम भी सुरु होगया हे.. बस.. अभी रामुकाका का कार्य खतम होजाये तो चारुको लेकर अ‍ेक बार सहेर जाना पडेगा.. क्युकी रमेशने सरपंचके पदसे त्याग पत्र दे दीया हे..

भानु : (हसते) साला जैसा बाबाने कहा था अ‍ैसा ही होने लगा हे.. ओर तो ओर हम भी इनमे बाकात नही रहे.. सबकी हडीयोमे फीरसे जान आगइ हे.. हें..हें..हें..

देवायत : (सामने देखते) भानु.. कल रामुकाका का सब कार्य खतम होजायेगा.. ओर तीन दीनके बाद लखन पुनोकी सादी हे.. तुम सबलोग आ रहे होनां..?

भानु : (सर जुकाते) हां यार.. माइ केह रहीथी.. सब आजायेगे.. मंजुभाभीका भी फोन आया था.. कहेती थी लताका कन्यादान मुजे ओर रमाको करना हे.. ठीक हे हम आजायेगे..

देवायत : (सामने देखते) लताके बारेमे सुनकर तुजे बुरा नही लगा..?

भानु : (सामने देखते) यार.. बुरा क्या लगना.. हमे पहेले ही बता देती.. की वो तुमसे प्यार करती हे.. तो तुमसे ही सादी करवा देते.. उसने लखनकी जींदगी क्यु खराब की..?

देवायत : (मुस्कुराते) छोड यार.. अब उनको कुछ मत कहेना.. उसे बुरा लग जायेगा.. भानु बहुतसी बाते अ‍ैसी हे जीसे हम समज नही पाते.. मंजु ओर पुनो सबकुछ जानती हे.. जो जैसा हो रहा हे होने दे..

भानु : (मुस्कुराते) हां यार.. माइ भी यही केह रही थी.. कीतना अजीब हेनां.. यहा हर दीन रीस्ते बदल जाते हे.. कीसीको कोइ अ‍ेतराज भी नही हे..

देवायत : (मुस्कुराते) हां यार.. मंजु केह रही थी हमारे गांवकी धरती ही अ‍ैसी हे.. वहा आकर ओरत हो या मर्द.. कीतना भी सीधा सादा ओर ठंडा क्यु ना हो.. सब कामुक हो जाते हे.. अच्छा ये बता ओर कोइ तकलीफ..?

भानु : (मुस्कुराते) भाइ आप ओर लखन हमारा कीतना खयाल रखते हो.. तो क्या तकलीफ..? सबकुछ बीना कहे ही मील जाता हे.. हां.. आज कल अ‍ेक पर्सनल प्रबलेम होगइ हे..

देवायत : (मुस्कुराते) क्या..?

भानु : (आजु बाजु देखते धीरेसे) भाइ.. नीचे कुछ प्रोबलेम हो गइ हे.. अब पहेले जैसा जोस नही रहा.. ढीलापन रहेता हे.. ओर दर्द भी करता हे..

देवायत : (जोरोसे हसते) कमीने.. सारा दीन उस छोटुकी बीवीके साथ लगा रहेता था.. तो तकलीफ तो होगीनां..?

भानु : (मुस्कुराते) यार तेरी भी इतनी बीवीया हे.. घरमे ओर बहार भी.. तुजे तो कभी तकलीफ नही हुइ..?

देवायत : (हसते धीरेसे) कमीने मुजे ओर लखनको बाबाके कहेनेपे बचपपने कुछ जडी बुटीया दीथी.. इसीलीये.. अगर हम नही करेगेनां तो अ‍ैसा लगता हे अभी ये फट जायेगा.. इसीलीये हम दोनोकी इतनी बीवीया हे..

भानु : (जोरोसे हसते) साला क्या कीस्मत पाइ हे दोनो भाइने.. अगर मुजे पहेले पता होता तो बाबाको कहेता थोडी मुजे भी देदो.. हें..हें..हें..

देवायत : (हसते) कमीने ये हमे मजे करनेके लीये नही कुछ मक्सदसे दी हुइ हे.. ओर वो तुजे भी पता हे.. छोड ये सब.. तु सहेर जाकर कीसी अच्छे डोक्टरको दीखा.. मे लखनसे कहेता हु..

भानु : (मुस्कुराते) लखनसे बात होगइ हे.. उनकी सादीका नीपट जाने दो.. फीर जाकर दीखा दुगा..

दोनो बाते करते बैठे रहे फीर साम होते ही घरपे चले गये.. लखन सृती पुनम भावना नीलम लता सब हसी मजाक करते रहे.. लेकीन लखन लताको अ‍ेवोइड करता था.. जीसे लता ओर दुखी रहेने लगी.. दुसरे दीन रामुकाका का सब कार्य खतम होगया.. ओर अ‍ैसे ही दीन नीकल गया..
 
दुसरे दीन सुबह साहील सबानाको लेकर अपने खेत दीखाने लेगया.. वहा मजदुर काम कर रहे थे.. साहीलने सबानाको खेतोमे घुमाया ओर वापस मीली जमीन भी दीखाइ.. जीसे देखकर सबाना बहुत खुस हो गइ.. फीर दोनो आराम करने टयुबवेल वाली रुममे चले गये..





वहा कोइ नही था तो सहील सबानाको कीस करने लगा.. ओर दोनो बहेकने लगे.. वही खटीयापे गदा बीछाकर साहीलने सबानाको चोद लीया.. फीर दोनो सही होकर घरपे आगये.. इस रात भी साहील ओर सबानाने देर रात तक प्यार कीया.. सलमाने दोनोको मीलनेका पुरा मौका दीया..





सुबह सबानाको छोडने साहील जाने वाला था.. सबाना बहुत खुस थी.. चाइ नास्ता करके नीकल रहे थे.. सबाना सलमाके गले मीली ओर साहीलके साथ सहेरकी ओर नीकल गइ.. ओर साहील पुरा दीन साथ रहेकर बचा कुचा सामान भी पेक करवाके सामको घर आगया..

उसी सुबह मंजु कंपलीट होगइ.. ओर उसने चारुको तैयार रहेनेको कहा.. फीर वंदनाको भी तैयार रहेनेको कहेकर देवायतको जगा दीया ओर उसे भी जल्द कंपलीट होनेका कहेकर कुछ सामान लेकर तैयारीया करने लगी.. फीर उसने बाबाको फोन कर दीया..

चाइ पीते मंजुने मुस्कुराते लखनसे उनकी नइ कारकी चाबी लेली.. ओर चाबी देवायतको देते उनको लेकर नीकल गइ.. रास्तेमे उसने चारु ओर वंदनाको साथ लेलीया ओर सीधे आश्रम चले गये.. वहा मंजुने देवायत ओर वंदनाकी सादी करवादी.. फीर चारो घर आगये..

आज वंदना बहुत खुस थी.. आखीर उनकी सादी जो होगइ थी.. फीर चारो सीधे हवेलीपे ही आगये.. ओर मंजुने वीधी वीधानसे वंदनाका गृह प्रवेस करवाया जीसे देखकर सबलोग बहुत खुस हो गये.. ओर वंदनातो अंदर जाते ही सीधे पुनमके गले लग गइ..

पुनम : (हसते धीरेसे) हां तो मेरी भाभी.. अब बोल.. तेरे मनकी मुराद पुरी होगइ..?

वंदना : (सरमाते धीरेसे) हां पुनोदी.. आज मे बहुत खुस हु.. ओर ये सब आपकी बदलोत हुआ.. थेन्क्स..

पुनम : (हसते धीरेसे) कमीनी दोस्तमे थेन्क्स नही कहेते.. ओर अब तो मेरी जेठानी होगइ हे..

वंदना : (हसते धीरेसे) हां पता हे आप लखन भैयासे सादी कर रही हे..

इस रात वंदना ओर देवायतकी फीरसे सुहागरात हुइ.. वंदनाके पेटमे चार महीनेका गर्भ था.. तो देवायतने बडे ही सावधानीसे वंदनाको तीन बार चोद लीया.. फीर तो लखन पुनमके साथ देवायत ओर लताकी भी सादीकी तैयारीया होने लगी.. फीर भी लताका मन अभी भी लखनमे अटका हुआ था..

बरखा जयश्री जागृती तीनो पुनमकी सभी तैयारीया करने आती थी.. तो साथमे लता भावना नीलम ओर सृतीभी अपनी तैयारीया करने लगी थी.. ओर आखीर वो दीन भी आगया.. जीस दीन लखन ओर पुनमकी सादी थी.. चंदा ओर देवायतने पुनमका कन्यादान दीया..





आज पुनम दुल्हनके लीबासमे बहुत ही सरमा रही थी.. लखनके साथ फेरे लेते उनका पेट साफ दीखाइ दे रहा था.. उनके पेटमे छे कहीनेका गर्भ पल रहा था.. फीर लखनने पुनमकी मांग भरदी तो पुनमकी आंखसे आंसु नीकल गये.. फीर लखनने पुनमको नया मंगलसुत्र भी पहेनाया..





लखनके सभी दोस्तो अपने परीवारके साथ आये थे.. ब्रीन्दा बार बार लखनकी ओर कामुक नजरोसे देखते स्माइल करती थी.. अब उनका मन पुरी तराह भटक चुका था.. भानुकी भी पुरी फेमीली आइ थी.. रमा भी ब्रीन्दाकी तराह लखनकी ओर ज्यादा ध्यान दे रही थी..

लखन पुनमकी सादीके बाद दुसरे मंडपमे लता ओर देवायतकी सादी भी करदी गइ.. रमा ओर भानुने लताका कन्यादान दीया.. वंदनाकी पहेले ही देवायतके साथ मंदिरमे सादी करवादी थी.. ओर आज देवायतकी लताके साथ उनकी आखरी सादी थी.. अब बहुत कुछ बदलने वाला था..

नीर्मला भुमीका चारु नीशा वंदना.. देवायतकी सभी बीवीया इस सादीमे मौजुद थी.. ओर नीर्मलाके अलावा देवायतकी सभी बीवीया प्रेगनेन्ट थी.. कीसीका पेट बडा था तो कीसीका छोटा.. मंजु सभीको इस हालतमे देखकर मन ही मन बहुत खुस हो रही थी.. क्युकी वो अपने बेटे वीजयके लीये अ‍ेडवान्समे तैयारीया कर रही थी..

इनके ज्यादातर लडकीया उनके बेटे वीजयकी बीवीया थी.. आज देवायत ओर मंजुका कार्य ओलमोस्ट खतम हो चुका था.. सादी होते ही मंजुने अ‍ेलान कर दीया.. की अब आजसे हवेलीकी महारानी पुनम कहेलायेगी.. ओर हवेलीके सारे फैसले अब पुनम ही लेगी.. फीर सादीके बाद मंजु पुनमको लेकर अपने रुममे चली गइ ओर दरवाजा बंध कर दीया..

पुनम : (अंदर जाते ही) मोम.. आपने इतनी जल्दी इतना बडा फैसला कैसे कर दीया..? मे यहा थोडीनां रहेने वाली हु..?

मंजुला : (हाथ पकडते लेजाते) अरी पता हे मुजे.. मे इतनी जल्दी जाने वाली नही हु.. सुन तुजे कुछ दीखाना हे..

पुनम : (मुस्कुराते) क्या मोम.. इस वक्त..? आपभीनां.. चलीये..

कहेते मंजु अ‍ेक अलमारीके पास लेगइ.. पुनमको चाबीया देदी.. ओर मंजुने कहा वो चाबीसे पुनमको अलमारी खोलनेको कहा.. फीर तीजोरीकी चाबी दीखाइ.. देखा तो अंदर अ‍ेक ज्वेलरी बोक्ष दीखाइ दीया.. मंजुने उसे अंदर ही खोलनेको कहा.. जैसे ही पुनमने ज्वेलेरी बोक्ष खोला अंदर उसे अ‍ेक की होल ओर दीखाइ दीया.. पुनम मंजुकी ओर आस्चर्यसे देखने लगी..
 
मंजुला : (मुस्कुराते) यही सोच रही हेनां.. मुजे सब ग्यात हो जाता हे.. तो इस बारेमे कैसे पता नही चला..?

पुनम : (अवाचक होते धीरेसे) येस.. मोम..

मंजुला : (मुस्कुराते) चल दीखाती हु.. ये चाबी उनमे लगा..

जैसे ही पुनमने चाबी लगाकर घुमाइ.. पुरी अलमारी पलट गइ.. ओर अंदर अ‍ेक गुप्त सीडीया दीखाइ दी.. नीचे अ‍ेक गुप्त तेहखाना था.. मंजुने कही हाथ डालकर लाइट जलादी.. ओर दोनो सीडीया उतरके नीचे चली गइ.. वहा सीडीया खतम होते ही अ‍ेक दरवाजा ओर दीखाइ दीया..

मंजुने उनकी चाबी थी दीखाइ ओर पुनमने दरवाजा खोल दीया.. अंदर जाते ही मंजुने लाइट जलादी.. जैसे ही लाइट जली पुनमका मुह खुला ही रेह गया.. अंदर पुरा रुम सोनेके आभुसणसे भरा हुआ था.. ओर वहा साइडमे अ‍ेक मंदिर था.. हुबहु अ‍ेक छोटी आकृतीका..

जो उनके पुर्खोका बीच जंगलमे मंदिर था.. वहा देवायतने भुमीका ओर चंदासे तो लखनने सृतीसे सादी कीथी.. नीचे अ‍ेक बडा बक्षा पडा था.. ओर मंजुने पुनमको आखरी चाबी दीखाइ.. ओर पुनमने बक्षा खोल दीया.. तो पुरे कमरेमे रोसनी फैल गइ..

मंजुला : (मुस्कुराते) ये मणी हे.. उसी नाग देवताका प्रसाद.. जो हमारे पुर्खोको मीला हे.. ओर अंदर राउन्ड फोल्डर पडा हे.. उसे अ‍ेक बार खोलकर देखले..

पुनम : (राउन्ड फोल्डर खोलते) मोम.. क्या हे ये..? ये तो कोइ नक्सा हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) वही नक्सा.. जो आजकल बडे बडे चोर चके इनको हासील करनेमे लगे हुअ‍े हे.. रश्मीका पती वो सरपंच भी इनके पेछे लगा हुआ था..

पुनम : (नक्सा देखते) ओर वो आपने मुजे दीया था वो..?

मंजुला : (मुस्कुराते) इनका अ‍ेक चोथाइ हीस्सा था.. जो कीसी भी तराह वो सरपंचके हाथ लग गया था.. रश्मीके दीये हुअ‍े कागजातमे हमे वापीस मील गया.. ओर बाकी लोगोके पास हे वो अ‍ेक छलावा हे.. मीन्स.. नकली.. गुमराह करनेके लीये..

पुनम : (मुस्कुराते) तो फीर इसके बारेमे मुजे ज्ञात क्यु नही हुआ..? आपको सब पता था..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही.. सीर्फ तुजे ही नही मुजे भी इनका ज्ञात नही हुआ.. ओर वजह हे इस मणी.. वरना इस जमानेमे तो इतने बडे तांत्रीक हे.. जो इसे ढुंढना उनके लीये कोइ बडी बात नही हे.. इनके बारेमे सीर्फ हमारे बापुको पता था.. जो मरनेसे ठीक अ‍ेक महीने पहेले बाबाके कहेनेपे मुजे बताया..

पुनम : (आस्चर्यसे) हमारे बापुने..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. तेरे ओर मेरे पीताने.. जो अब हमारे ससुर हे..

पुनम : (आस्चर्यसे) इतना बडा सीक्रेट..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. तुजे भी सीक्रेट रखना हे.. तेरी कीसी सौतनको भी नही.. समजी..? तुजे इसीलीये बता रही हु.. क्युकी तब मे नही रहुगी.. तुम हमारे वीजयको भी मत बताना.. सीर्फ इनके बेटेको.. जो मेरे दुसरे जन्ममे मेरी कोखसे जन्म लेगा..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) मोम.. उसे कब देना हे..?

मंजुला : (रहस्य मुस्कानसे) जब मे कहु..

पुनम : (आस्चर्यसे देखते) आप कहोगी..? लेकीन आप तो..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) बहुत रहस्यमय बात हे.. सीर्फ तुजे बता रही हु.. मेरा बेटा.. तेरी बेटी यानीकी तेरी नातीसे सब ज्ञान लेकर वापस आयेगा.. तब वो जवान हो चुका होगा.. ओर मेरे साथ यानीकी अपनी मांके साथ संभोग करेगा.. ओर संभोगके माध्यमसे मुजे अपना पीछला सब ज्ञात करवा देगा.. उनके प्रशीक्षणके बाद मे उसे यहा लेकर आउगी.. तब मे कहुगी.. ओर हम दोनो उसे दे देगे.. सबसे छुपकर..

पुनम : (आस्चर्यसे देखते) मोम.. अभी तो वो सब शक्तिया आपने मुजे दीहे.. तो फीर..

मंजुला : (मुस्कुराते) तुम चारो तब भी जवान होगी.. लेकीन मेरी उमरकी..

पुनम : (सामने देखते) मोम.. सीर्फ हम चारोका ही जीक्र क्यु कर रही हे..? बाकी भीतो होगी..

मंजुला : (गहेरी सास लेते) नही पुनो.. बेसक वो जवान रहेगी.. लेकीन समयके साथ सबको जाना हे.. ओर सबको वापीस भीतो आना हे.. अभी हे वो सीर्फ मेरे लखनके लीये हे.. फीर कुछ तुम सबको छोडकर दुर होजायेगी तो कुछ चल बसेगी.. तब सीर्फ तुम चारो ही होगी.. मेरा बेटा इतना मोहक होगा.. तुजे उनसे कुछ देनेकी जरुरत ही नही पडेगी.. तुम सब खुद उनसे जुड जाओगी..

पुनम : (मुस्कुराते) मतलब..?

मंजुला : (मुस्कुराते) मतलब वो खुद तुमसे संभोगके माध्यमसे ले लेगा.. उसे सब पता होगा.. कब क्या करना हे.. तबतक मुजे ओर तुजे ही सबकुछ सम्हालना हे..

पुनम : (मुस्कुराते) मोम.. क्या मे सब कुछ सम्हाल पाउगी..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां क्यु नही..? इसीलीये तो तुजे सब शक्तिया दी हे.. आज तु मेरी बहु हे.. दुसरे जन्ममे मे तेरी बहु होजाउगी.. मेरा वीजय बहुत अयास आदमी होगा.. लेकीन याद रहे.. वो तुजे कभी अपनी वासनाका शीकार ना बनाये.. तबतक तुजे मेरा लखन ही सम्हालेगा.. आजसे तेरी नइ जींदगीकी सुरुआत हो रही हे..

पुनम : (रोल वापस रखते) मोम.. अब तो लखन भैया भी मेरे साथ.. तो फीर उनको ये शक्तिया..

मंजुला : (मुस्कुराते) ये सब शक्तिया ना लखनके पास होगी ना वीजयके पास.. वो शक्तिया सीर्फ मेरे बेटेके पास होगी.. वो मंत्रके साथ जो तेरी बेटी ओर नातीसे पायेगा.. ओर तुमसे संभोग करके मंत्रके माध्यमसे सब प्राप्त करेगा..

पुनम : (बक्षेको ताला लगाते) येस मोम.. सब समज गइ.. ओर कुछ बताना हे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) नही बस.. फील हालतो इतना ही..

पुनम : (मुस्कुराते) तो फीर अब चले..?

मंजुला : (मुस्कुराते) हां.. सब अच्छेसे बंध करदे.. ओर ये चाबीया तु अपने पास ही रखना.. सबसे छुपकर.. समज गइनां..? ओर सुन.. तुम सबको परसो वापस जाना हे.. फीर मेरे जानेके बाद तुम सबको यही वापस आना हे.. सब कुछ सम्हालनेके लीये..

पुनम : (सब बक्षेमे रखते) मोम.. ये तो पता हे कौन जायेगी ओर क्या करेगी.. क्या सबका रोल वही तक सीमीत हे..? मतलब..

मंजुला : (मुस्कुराते) समज गइ.. की तु क्या कहेना चाहती हे.. मेरे वीजयके साथ साथ उनके बेटेके लीये भी तो जमीन तैयार करनी हे.. वो सबको वापीस भीतो आना हे.. अ‍ेक नया जनम लेकर.. ये तो अभी सुरुआत हे.. तब सबकुछ बदल गया होगा.. अ‍ेक आधुनीक जमाना.. मेरे पोतेके लीये मोर्डन लडकीया.. तब हम सब हीतो होगी..

पुनम : (मुस्कुराते) सबकुछ समज गइ मोम..

फीर पुनमसे अपने हाथोसे सबकुछ लोक कर दीया.. ओर दोनो बहार आगइ.. इस रात उपरकी ओर देवायत लताके लीये तो लखनके रुममे लखन पुनमके लीये रुम ओर सेज सजाइ हुइ थी.. रात होते ही सबने डीनर कीया.. फीर भानु रमा ओर सरला चले गये..
 
तो बाकीके लोग भी मंजुकी इजाजत लेकर जाने लगे.. घरपे सीर्फ घरके लोग ही रेह गये.. सब होलमे बैठे थे.. भावना रजीया दया ओर सृती सब मीलकर लता ओर पुनमको अपनी सुहागरातके लीये सजा रही थी.. आज चंदा बहुत खुस नजर आ रही थी..

मंजुला : (मुस्कुराते) आखीर जीस दीनका इन्तजार था वो काम आज खतम हो गया..

नीर्मला : (मुस्कुराते) मंजु.. हम भी इसी दीनका इन्तजार कर रहे थे.. तो मे सोच रही हु मे ओर भुमी हमारे घर चली जाये..

देवायत : (मुस्कुराते) अगर जाना ही हे.. तो आप दोनो सहेरमे भुमी वाले घरपे क्यु नही चले जाते..? वहा चले जाओ.. वो घर बडा थी हे ओर हमारे गांवसे नजदीक भी हे.. वहा लखन होगा तो तुम दोनोका ध्यान भी रख पायेगा..

भुमीका : (मुस्कुराते) नीमु.. देवुका आइडीया मुजे बेटर लग रहा हे.. हम दोनो वही चले जाते हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) भुमी तो हम उस घरका क्या करेगे..?

मंजुला : (मुस्कुराते) बेचदो.. देवु घर ओर हमारी दुकानका सब देख लेगे.. वैसे भी वो गांव यहासे बहुत दुर पडता हे.. यहा सहेरमे आना जाना तो लगा रहेगा.. ओर यहा नजदीक भी हे..

नीर्मला : (मुस्कुराते) ठीक हे.. देवु.. ये सब आप देख लेना.. अब मे ओर भुमी उसीके घरमे रहेगी.. वैसे भी वहा लखन बेटा सृती पुनम हे तो आना जाना भी लगा रहेगा..

चंदा : (नजरे जुकाते धीरेसे) मंजुदी.. मे सोच रही हु मे भी मेरे घर चली जाउ..

मंजुला : (थोडा सख्त लहेजेमे) क्यु..? आपको यहा क्या दीकत हे..? कुछ प्रोबलेम हे क्या..?

चंदा : (आंख गीली करते) नही.. सब मुजे बहुत प्यार देते हे.. लेकीन मे अ‍ेक अपराध बोध महेसुस कर रही हु.. तो मुजे चेन्ज चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अगर आपको चेन्ज चाहीये तो अब तो हमारे पास दो दो घर हे.. आप भुमी भाभीके पास या फीर अपनी बेटीके पास चली जाना.. लेकीन आप रहोगी तो इधर ही..

भुमीका : (दांत पीसते मुका मारते) तुम अपनी हरकतोसे बाद तो नही आओगे.. बदमास कहीका..

मंजुला : (जोरोसे हसते) रहेने दीजीये.. अब आपके देवरके साथ साथ अपना दामाद भी हे..

भुमीका : (जोरोसे हसते) ओ बापरे.. मेतो भुल ही गइ थी.. सोरी.. सोरी..

नीर्मला : (सामने देखते धीरेसे) चंदा.. क्यु अपने मनमे ये सब टेन्शन लेकर बैठी हे..? अ‍ेक हादसा साजकर भुलजा सब..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां दीदी.. मम्मी सही केह रही हे.. आप जो चाहती थी वो आपने अपने हाथोसे कर दीया.. पुनोको बेटी मानती हेनां..? तो उनका ब्याह तो आपने करवा दीया.. अब आप धिरेनको भी माफ करदो.. ताकी ये टेन्शन ही खतम होजाये..

देवायत : (मुस्कुराते) हां चंदा मंजु ठीक केह रही हे.. तु माफ करदे धिरेनको.. अब बुहत हुआ.. इतनी भी नफरत ठीक नही हे..

चंदा : (आंसु बहाते) माफ करदु..? देवु उसने अ‍ेक मासुमकी जींदगीसे खीलवाड कीया हे.. अच्छा हुआ वक्त रहेते हमारे लखनने उनको सम्हाल लीया.. वरना उस नन्हीकी जानका क्या होता..?

मंजुला : (मुस्कुराते) दीदी.. सायद आप भुल गइ हेकी हम सब कौन हे.. यही समजलो येभी हम सबकी जींदगीका अ‍ेक हीस्सा था.. वरना दो प्यार करनेवालोका मीलन कभी नही होता.. धिरेन तो अ‍ेक जरीया था.. इसमे धिरेनकी कोइ गलती नही हे.. आप अपने दीमागसे नीकालदो..

चंदा : (आंसु पोछते अचानक) मंजु.. मे नही भुल सकती.. तुजे पता नही हे क्या..? की उसने मुजे क्या कहा हे.. अ‍ेक रंडी..

देवायत : (कंधेपे हाथ रखते) भुलजा सब.. गुस्सेमे कहा होगा.. मुजे भीतो कहा हे.. तो क्या मे उनके साथ दुस्मन जैसा व्यवहार करु..?

चंदा : (सामने देखते) देवु.. मेरा दील आप सबके जैसे वीसाल नही हे.. ठीक हे.. मुजे अ‍ेक बार बाबासे मीलना हे.. तब ही मेरे दीलको तसली होगी.. ओर हां.. विजय अब मेरा बेटा हे.. उनको मे पालुगी.. ओर मेरे पास ही रहेगा..

मंजुला : (मुस्कुराते) ठीक हे हमे मंजुर हे.. अब तो धिरेनको माफ करदो..

चंदा : (सामने देखते) अभी नही.. बाबासे मीलनेके बाद सोचुगी..

देवायत : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर कल हम सब लोग जाते हे बाबाके पास.. सादीका आशीर्वाद भी लेलेगे.. क्या कहेती हो मंजु..

मंजुला : (हसते) बेस्ट आइडीया.. तो फीर मे लखन ओर पुनो सबको कल ही सहेर जानेके लीये केह देती हु.. वहा उन राधुका भी देखना पडेगा..

नीर्मला : (हसते) तो फीर हम भी चलेगे.. वहीसे सहेर चले जायेगे.. आप सब लोग भी चलना..

मंजुला : (मुस्कुराते) अच्छा सबको जाना हे तो फीर कल नही सब परसो ही चलेगे..

भुमीका : (हसते) हां ये सही रहेगा.. कल सादीकी दोडधामसे कुछ आराम भी होजायेगा..

फीर सबलोग प्लानींग करते खडे होगये.. लता ओर पुनमको अपने अपने रुममे भेज दीया.. ओर भावना सृती नीलम सब पुनम वाले रुममे ही सो गइ.. नीर्मला ओर भुमीने भी लखन देवायतको बेस्ट ओफ लक कहेते टांग खीचली.. सब अपने अपने रुममे सोने चले गये.. देवायत ओर लखन भी उपर अपने अपने रुममे अपनी सुहागरात मनाने चले गये.. देखा तो लता अपने रुममे ओर पुनम अपने रुममे बेडपे घुंघटमे अपने अपने पतीके इन्तेजारमे बैठी थी....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७०

फीर सबलोग प्लानींग करते खडे होगये.. लता ओर पुनमको अपने अपने रुममे भेज दीया.. ओर भावना सृती नीलम सब पुनम वाले रुममे ही सो गइ.. नीर्मला ओर भुमीने भी लखन देवायतको बेस्ट ओफ लक कहेते टांग खीचली.. सब अपने अपने रुममे सोने चले गये.. देवायत ओर लखन भी उपर अपने अपने रुममे अपनी सुहागरात मनाने चले गये.. देखा तो लता अपने रुममे ओर पुनम अपने रुममे बेडपे घुंघटमे अपने अपने पतीके इन्तेजारमे बैठी थी.... अब आगे





सादीसे पहेले मीलनके बाद दोनो भाइ अपनी सुहागरात मनानेके लीये उत्सुक्त थे.. तो यही हाल पुनम ओर लताका था.. ओर इस रात कभी ना थंभने वाली रात थी.. आज देवायत ओर लखनके रुपमे स्वयंम कामदेव.. ओर पुनम लताके रुपमे स्वयंम रती धरतीपे उतरके आयी थी..

अ‍ैसा लगता थाकी लखनके प्रती लताका प्यार सीर्फ अ‍ेक छलावा था.. लताने लखनके खयालातको भुलकर देवायतको इतना प्यार दीया की देवायत लताका दीवाना होगया.. आज वो मंजुको भी भुल चुका था.. आज लता अपने प्यारको खुलकर साथ दे रही थी..





देवायतने लताको खुब जमकर चोद लीया.. तो लता भी बहुत ही कामुक तरीकेसे देजायतसे कमर उछाल उछालके चुदवाती रही.. दोनो सुबह चार बजे तक चुदाइ करते रहे.. अबतक देवायत पांच बार अपना माल लताकी चुतमे उडेल चुका था.. आज लता पुरी तराह तृप्त हो चुकी थी..





तो दुसरी ओर लखन ओर पुनमके उपर भी कामुक्ता पुरी तराह छाइ हुइ थी.. आज पुनम खुलकर लखनका साथ दे रही थी.. लखनने बीना नीचे उतरे ही पुनमको तीन बार चोद लीया.. दोनोने पहेली बार इतने लंबे वक्त तक तीन बार सेक्स कीया..





फीर दोनो बाथरुममे चले गये.. दोनो ही पसीनेसे तरबोर हो चुके थे.. वहा दोनोने सावर लीया.. तो लखनने वहा भी अ‍ेक बार खडे खडे पुनमको चोद लीया.. पुनम बहुत ही सरमाइ.. फीर दोनो सावर लेकर बहार आगये.. तो वहासे पुनमने साथमे वेसेलीन भी लीया..

लखन : (बेडपे आते मुस्कुराते) दीदी.. आपने वेसेलीन क्यु लीया..?

पुनम : (सरमाकर हसते) अब तो दीदी कहेना छोडदो हम दोनोकी सादी होगइ हे..

लखन : (मुस्कुराते बाहोमे भरते) नही.. कमसे कम बीस्तरपे तो बीलकुल नही.. आपको भी पता हे मेरी फेन्टासीके बारेमे.. बताओनां ये वेसेलीन क्यु लीया..?

पुनम : (सर्मसार होते धीरेसे) लखन.. आपको याद हे..? जब हम पहेली बार मीले तब मेने आपसे क्या कहा था..? याद करो उस तोहफेके बारेमे..

लखन : (याद करते मुस्कुराते) नही याद आ रहा.. आपही बतादो..

पुनम : (सरमाते धीरेसे मुस्कुराते) भाइ.. मेने कहा था मे पहेले ही बडे भैयासे अपनी सील तुडवा चुकी हु.. तो मे आपको हमारी सुहागरातमे अ‍ेक स्पेसीयल तोहफा दुगी.. याद हे..?

लखन : (याद आते ही अपना सर पीटते) ओह नो.. दीदी क्या सचमे..?

पुनम : (मुस्कुराते सरको हांमे हीलाते) येस.. भाइ.. सीर्फ आपके लीये सम्हालके रखी हे.. सीलपेक.. समजलो यही मेरा सुहागरातका तोहफा हे..

लखन : (सामने देखते) आर यु सीरीयस..? नो.. दीदी.. आपको बहुत दर्द होगा.. रहेने दीजीये..

पुनम : (वेसेलीनकी डीबी थमाते मुस्कुराते) भाइ.. यही समजलो ये मेरी फेन्टासी हे.. सीर्फ आपके लीये.. मेरे दर्दकी परवाह मत करो.. बस.. धीरे धीरे.. मे रेडी हु.. मुजे कुछ नया चाहीये..

लखन : (मुस्कुराते) अगर नया चाहीये तो फीर सोचलो.. ये बार बार होगा..

पुनम : (सामने देखकर मुस्कुराते) सोच लीया हे.. मुजे पता हे.. मे रेडी हु.. जीतनी बार चाहीये मे दुगी.. हमारे प्यारमे कुछ नयापन होगा..

कहेते पुनम घोडी बन गइ.. लखनने बहुत सारा वेसेलीन लंडपे लगाया.. फीर उंगलीमे लेकर पुनमकी गांडके छेदपे लगाया.. लखनने ओर वेसलीन लेकर पुनमकी गांडके छेदमे उंगली डालदी.. ओर अंदर अच्छेसे घुमाने लगा.. पुनमने अपने दोनो होठ आपसमे भीच लीये..

लखन उंगलीको अंदर बहार करने लगा.. पुनम दर्द ओर मजेके मीले जुले अंदाजमे सीसकारीया करने लगी.. जब उंगली आरामसे जाने लगी तो लखनने दुसरी उंगलीभी घुसादी.. पुनमकी दर्दके मारे सीसकारीया नीकल गइ.. वो होठ भीचते आंखोको भी भीचने लगी.. लखन पुनमके चहेरेकी ओर देखता उंगलीया घुमा रहा था..

लखन : (मुस्कुराते) दीदी.. अभी भी सोचलो.. आपको दर्द होगा..

पुनम : (नांमे गरदन हीलाते) भाइ.. दर्दकी परवाह मत करो.. बस.. आप घुमाते रहो.. मजा भी आ रहा हे.. आइ अ‍ेम रेडी.. जब आपको लगेकी अंदर चला जायेगा.. तब आरामसे..

लखन दोनो उंगलीया अंदर बहार करते पुनमकी गांडका छेद चौडा करता रहा.. जब दोनो उंगली आरामसे अंदर बहार जाने लगी तो लखनने अ‍ेक बार ओर अपने लंडपे वेसेलीन लगाया.. ओर पुनमके पीछे आगया.. फीर अपना लंड पकडकर पुनमकी गांडपे सेट करदीया..
 
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