रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती
अध्याय - २६९
तो साहील सबानाके होंठ चुमते उनके बुब्सको मसलने लगा.. सबानाने साहीलका हाथ हटानेकी कोइ कोसीस नही की.. वो मदहोस होने लगी.. आधी आंख चडाते साहीलके मुहमे अपनी जीभ डालने लगी.. ओर साहीलसे मजेसे अपने दोनो बुब्स बारी बारी मसलवाने लगी.. जीनकी वजहसे सबानाकी चुत गीली होने लगी.. सबानाको पता ही नही चलाकी साहील कबसे उनकी चुतको सहेलाने लगा.. तभी.... अब आगे

सबाना : (मदहोसीमे) सीसससइइइ... ओह.. सा..ही..ल.. आइ लव यु.. मत छेडो या..र.. मे रेह नही पाउगी..
साहील : (कामुक आवाजमे) सबु.. सबु आइ लव यु टु.. मीलनेदे यार.. फीर पता नही दुबारा कब मीलनेका मौका मीलेगा..
सबाना : (बहारकी ओर देखते) बस.. भाइ रहेने दो.. बडी अम्मी घरपे ही हे.. हम बादमे मीलते हेनां.. मे दो दीन यही हु.. सीर्फ आपसे मीलने आइ हु..
साहील : (गलेको चुमते धीरेसे कानमे) रातको कमरेमे अकेला सोउगा.. मे आजाउगा..
सबाना : (जटसे अलग होते सरमाते धीरेसे) बस.. बस साहील.. इनसे आगे अभी कुछ नही..
साहील : (सर्मीन्दा होते धीरेसे) सोरी सबु दीदी.. मे थोडा बहेक गया था.. आइ अेम सोरी..
सबाना : (गले लगते) भाइ जान.. आप सोरी मत बोलो.. आप मेरे होने वाले सौहर हो.. मे सीर्फ आपसे मीलने तो आइ हु.. लेकीन.. प्लीज.. बस.. फीर ये सबाना आपकी हे..
साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. क्या चाची चाचाको हमारे बारेमे सब पता हे..?
सबाना : (सरमाते मुस्कुराते) सीर्फ अम्मा ओर बडी अम्मीको.. अबुको अभी नही पता.. अम्मी केह रही थी जब वे दोनो यहा आजायेगे तब अबुसे बडे ठाकुर बात करलेगे..
साहील : (मुस्कुराते) दीदी आप सीर्फ दो दीनके लीये आइ हो.. वरना उन दोनो भाइ बहेनकी सादी देख करके जाती.. हम सभी दोस्तोको बुलाया हे..
सबाना : (मुस्कुराते) भाइ.. ये सब हमारेमे होता था.. अबतो पुरे गांवमे होने लगा हे.. कीतना अजीब हेनां..? घरमे ही रीस्ता होजाता हे.. बहार ढुंढनेकी जरुरत ही नही..
साहील : (सामने देखते मुस्कुराते) दीदी.. अेक बात पुछु..? आप इस रीस्तेसे खुस तो हेनां..?
सबाना : (अेक नजर देखते धीरेसे) भाइ.. मेने मनसे आपको अपना सौहर मानलीया हे.. अगर आपसे नीकाह नही हुआ तो प्रोमीस.. ये सबाना जींदगीभर कुआरी रहेगी.. अब कोइ सक हे..?
साहील : (मुस्कुराते नामे गरदन हीलाते) नही.. दीदी.. आइ लव यु.. मे कीतना खुस नसीब हु.. की आप जैसी बहेन मेरी बीवी होगी..
सबाना : (गले लगते) भाइ.. आइ लव यु टु.. मे बस जानेसे पहेले सीर्फ आपको मीलने आइ हु.. वोभी अेक सरप्राइज लेकर.. सीर्फ आपके लीये..
साहील : (मुस्कुरामते) सरप्राइज..? कैसी सरप्राइज..?
सबाना : (कातीलाना मुस्कुराते) हे अेक सरप्राइज.. जो मेरे डोकटर बनके आने तक आप याद रखोगे.. कमरेका दरवाजा खुला रखना..
साहील : (मुस्कुराते) अच्छा..? तो ये बात हे..? चलो देखते हे कैसी हे आपकी सरप्राइज.. मे इन्तजार करुगा..
सबाना : (मुस्कुराते) भाइ.. सृती दीदी यही हेनां..? क्या हम उसे मीलनेके लीये चले..?
साहील : (मुस्कुराते) हां स्योर.. क्यु नही..? चलो.. मे लखन भैयाको फोन करदेता हु..
फीर साहीलने लखनसे बात करली.. तो लखनने दोनोको घरपे बुला लीया ओर साहील सबाना पैदल चलते टहेलते हवेलीपे पहोंच गये.. तो बहारसे पुरानी ओर अंदरसे आधुनीक हवेलीको देखकर सबाना दंग रेह गइ.. सबने साहील ओर सबानाका स्वागत कीया..
वहा सबानाने सृतीको सभी जानकारी देदी.. ओर सृतीने भी सबानाको बहुत कुछ गाइड कीया.. फीर सृतीने घरकी सभी लेडीजसे सबानाको मीलवाया.. खास करके पुनमको.. तो सबाना बहुत खुस होगइ.. क्युकी सृतीने सबको यही बताके परीचय करवाया की यही लडकी डोक्टर बनके यहा आने वाली हे..
फीर सबाना ओर साहील चाइ नास्ता करके घरपे आगये.. दुसरी ओर सलमा खुद साहील ओर सबानाको स्पेस देना चाहती थी.. क्युकी उनको अभी भी सबानाके उपर पुरा यकीन नही था.. की वो साहीलसे सादी करेगी.. उनको मनमे आसंका थीकी कही डोक्टर बननेके बाद सबानाका मन बदल गया तो..?
इसीलीये तो उसने सबानाको यहा बुलालीया था.. ताकी साहील सबानाके साथ आगे बढे.. ओर प्यारके अलावा दोनोके बीच कुछ अैसा होजाये जो बादमे सबाना सादीके लीये इन्कार ना करे.. इसीलीये उसने आज सबानाकी पसंदका खाना बनाया ओर तीनो साथमे बैठकर खाने लगे..