Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 102 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

भावीका : (मुस्कुराते) यार होता हे अ‍ैसा.. कमसे कम तुजे इतना तो पता हे मेरे पीता कौन हे.. यहा तो वो भी नही पता.. बस.. अ‍ेक मां थी.. ओर जीनके साथ उनका अफैर था उनकी ओर से बहुत वीरासत मीली थी.. ओर मांने कभी नही बतायाकी मेरा बाप कौन हे.. अब तो वोभी नही हे..

पुनम : (सृतीकी ओर छुपकर नामे गरदन हीलाते) भाभी.. दील छोटा मत करो.. अब तो सब सही हेनां..? धृव भैया आपको कीतना प्यार करते हे..

भावीका : (फीकी मुस्कानसे) हां.. प्यार तो वो बहुत करते हे.. लेकीन कुछ ओर ही चीजोके सौकीन हे.. ओर वो भी स्पेसीयल मेरे साथ.. दीदी.. हमारे भी कुछ सपने होते हे.. अब पता चला मेने गलत आदमीका चुनाव कीया हे.. लेकीन मेरी भी कुछ मजबुरी थी..

सृती : (बातका टोपीक चेन्ज करते) भावु.. छोड ये सब.. हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. ये बता मेरा क्या रीजल्ट हे..? मे जो सोच रही हु.. वोही..?

भावीका : (नजरे चुराते) कमीनी तु भी डोक्टर हे.. पता तो हे तुजे.. क्या हुआ..

सृती : (अफसोस करते धीरेसे) हंम.. पता हे मुजे.. वैसे भी अब उच बच्चेसे क्या वास्ता.. मेरे अ‍ेक्स हसबन्डका था.. मुजे तो मेरे लखनकी नीशानी चाहीये.. अब जो भी बच्चे होगे मेरे लखनके..

भावीका : (हसते) लगता हे तुम लखन भैयासे बहुत प्यार करती हो..

सृती : (मुस्कुराते) अपनी जानसे भी ज्यादा.. हम दोनो उनको बहुत प्यार करते हे.. लखन हम दोनोकी जान हे..

भावीका : (मुस्कुराते) हां देखा मेने रातको जाते समय.. दोनो अ‍ेक दुसरेसे कैसे चीपकके सो रहे थे..

सृती : (मुस्कुराते) अच्छा ये बता.. तुम दोनोने कुछ फेमीली प्लानींग कीहे की नही..?

भावीका : (मायुस होते धीरेसे) नही यार.. वोही तो बता रही थी.. फीर भी दोनो बहुत कोसीस कर रहे हे.. लगता हे मुजे ही अपना टेस्ट करवाना पडेगा..

सृती : (आस्चर्यसे देखते) सीर्फ तेरा ही क्यु..? धृव भैयाका भी करवाओ..

भावीका : (आंख गीली करते) नही.. उनका सब ओके हे.. मुजे सब पता हे..

पुनम : (कंधेपे हाथ रखते) भाभी.. क्या आपको सब पता हे..?

भावीका : (आंखसे आंसु टपक गये) हंम.. सब पता हे..

पुनम : (रुमाल देते) भाभी.. आंसु पोछीये हम इस बारेमे बादमे बात करेगे.. सीर्फ हम तीनो..

सृती : (सामने देखते धीरेसे) भावु.. मुजे तुमसे कुछ बताना हे.. लेकीन अभी यहा नही.. तुम मेरे घर आना.. तुजे सबकुछ बताउगी.. तेरे बारेमे..

भावीका : (आस्चर्यसे देखते) मेरे बारेमे..? क्या..?

सृती : (धीरेसे) पुनोदीको सब पता चल जाता हे.. लेकीन यहा नही.. हमारे घर आना.. अकेली..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. हमारे घर.. आप अकेली आना.. आपको सबकुछ बता दुगी.. आपके बारेमे.. आपके बच्चेके बारेमे.. सब कुछ.. बस इतना जानलो आपकी कीस्मत मेभी अ‍ेक बच्चा हे..

भावीका : (खुस होते मुस्कुराते) क्या सचमे..?

सृती : (मुस्कुराते) हां कमीनी सचमे.. लेकीन यहा नही.. तु घर आना..

भावीका : (मुस्कुराते) लगता हे अबतो बहुत जल्द तेरे घर आना पडेगा..

कहेते भावीका अ‍ेक नजरसे पुनमकी ओर देखती रही.. तीनोने कुछ ओर बाते की.. फीर भावीका अपनी केबीनमे चली गइ.. सुबह नौ बजे देवायत मंजु नीमर्लाको लेकर होस्पीटल आगया.. ओर उसने लखन ओर पुनमको घर फ्रेस होने भेज दीया..

मंजुला : (मुस्कुराते) पुनो बेटा.. कलसे तुम दोनो यही हो.. घर जाकर दोनो थोडा फ्रेस होजाओ.. ओर कुछ देर आराम भी करलो.. दोपहोरको टीफीन लेकर आना.. तबतक हम यही हे..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) यस मोम..

लखन ओर पुनम घर चले गये.. ओर दोनो उपर अपने बाथरुममे अ‍ेक साथ ही घुस गये.. दोनोही अ‍ेक दुसरोको मीलनेमे लीये तडप रहे थे.. अंदर जाते ही पुनम लखनकी बाहोमे सीमट गइ.. ओर अ‍ेक दुसरेके होठोको चुमने लगे.. कुछ ही देरमे लखन पुनमकी खडे खडे पीछेसे चुदाइ कर रहा था..





जब लखनने पुनमकी चुतमे अपना माल उडेल दीया तो पुनम मुस्कुराने लगी.. फीर दोनो सावर लेकर बहार आगये.. पुनमने लखनको अपने कपडे दीये ओर खुद भी तैयार होने लगी.. वैसे भी लखन रात ओर दीन आराम कर रहा था तो उनको कोइ खास नींद नही आइ..

पुनम : (मुस्कुराते अपने बाल जटकते) लखन.. आपको सोना हे..?

लखन : (मुस्कुराते) नही बेबी.. वैसे भी तुम्हारे बीना नींद कहा आती हे.. तुजे सोना हे..?

पुनम : (मुस्कुराते बाल पोछते) जानु.. मेरा भी कुछ तम्हारी तराह ही हे.. हम रातमे हमारा कोटा पुरा कर लेगे.. अब सृतीदीकी तो दो महीनेकी छुटी हे.. दो महीना उसे हाथ भी मत लगाना..

लखन : (मुस्कुराते बाल बनाते) डार्लींग.. दो महीने कुछ ज्यादा नही हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) नही.. राधु दीदी हे.. रजु हे.. ओर वैसे आजकल भावना भाभी भी इधर ही हे.. आप कहोतो इसे भी यही बुलालु.. ओर वैसे भी आपकी सीक्रेट बीवी तो हे ही..

लखन : (मुस्कुराते) कौन नीलु..?

पुनम : (हसते धीरेसे) हां वोही.. आज कल दोनो काफी दीनोसे मीले भी नही हो..

लखन : (मुस्कुराते) यार वैसे भी घरपे सबलोग हे.. मुजे तो बस आप चाहीये..

पुनम : (मुस्कुराते बाल बनाते) भाइ.. देखो अब पेट काफी नीकल चुका हे.. अब आगे प्रोबलेम होती हे.. मे तो अब पीछे ही दे सकती हु.. तीन चार महीने पीछेसे ही काम चलाना पडेगा.. जबतब मेरा बेबी नही आजाता.. सुनो.. मुजे आपसे कुछ बात करनी हे..
 
लखन : (बेडपे बैठते) हां बोलो..

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) सृतीदीका बच्चा गीर गया हे.. ओर इस बातका उसे कोइ अफसोस भी नही हे.. आज कहेती थी मेरे अ‍ेक्स हसबन्डका बच्चा था.. अब मे मेरे लखनके बच्चे पैदा करुगी..

लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये सही हे..? ज्यादा सेक्सकी वजहसे हुआ हेनां..?

पुनम : (मुस्कुराते अपनी बींदी लगाते) नही.. उनकी कीस्मतमे लीखा था.. वो भी मनसे इस बच्चेको नही चाहती थी.. अब आपको अ‍ेक ओरकी कोख भरनी हे.. बीलुकल नइ.. आपपे बहुत लटु हे.. उसे बच्चा देदो..

लखन : (सामने देखते) यार.. मे क्या बच्चा देनेका मशीन हु..? कौन हे वो..?

पुनम : (सामने देखते धीरेसे) हमारे धृव भैयाकी बीवी.. भावीका..

लखन : (सामने देखते) पुनो.. तुजे नही लगता अब ये कुछ ज्यादा हो रहा हे..?

पुनम : (सींदुरकी डीबी लेकर पास आते) नही.. मत भुलो आप ओर हम कौन हे.. ओर ये सब आपके मजेके लीये नही हे.. वो हमारे वीजयके लीये हे.. तो आपको जीतना कहा जाये उतना करते जाइअ‍े.. लीजीये मांग भर दीजीये..

लखन : (खडा होते मांग भरते) हां ये तुम ओर सृती नही भुलती.. अब अपने आप भरलो..





पुनम : (जुठे गुस्सेसे देखते) क्यु.. आपको मांग भरनेमे कोइ तकलीफ हो रही हे..? चुपचाप भरदो.. अब आपकी बीवी हु.. आप जब बोलते हो मे देती हु.. मेने कभी आपको मना कीया..?

लखन : (बाहोमे भीचते हसते) ओह.. सोरी सोरी.. माइ स्वीट हार्ट.. नाराज क्यु होती हे.. क्या भावीका भाभीसे कोइ बात हुइ..?

पुनम : (दांत पीसते सीनेमे मुका मारते) देखा..? नही चुतके लीये कैसे मचल रहे हो.. कोइ बात नही हुइ.. ओर वो कुछ आगे बढना चाहे तो मना मत करना.. आगे बढना..

लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये धृव भैयाके साथ धोखा नही हे..? वो तो बच्चे देनेमे भी सक्षम हे..

पुनम : (सामने देखते) ओर तुम्हारा धृव भैया उनकी बहेन ओर उनकी मां को ठोकते उनकी बीवीको धोखा दे रहा हे वो..? ओर पता हे..? मुजे लगता हे ये बात भावीकाको भी पता चल गइ हे.. अब मीलेगी तब बात होगी.. फीर कुछ ओर वजह भी हे.. जीसे भावीका आपका बच्चा ही चाहती हे..

लखन : (सामने देखते) ठीक हे पुनो.. सायद उनकी बहेन पुजा दुबारा प्रेगनेन्ट होगइ हे.. उनका पहेला बच्चा भी धृव भैयाका हे.. ओर अब ये दुसरा..

पुनम : (मुस्कुराते) दुसरा नही तीसरा.. आप भुल गये.. पहेले बच्चेकी वजहसे ही उनका अपने पहेले पतीसे डीवोर्स हुआ था.. फीर उनकी दुसरी सादी हुइ.. तब ओलरेडी उनके गर्भमे धृव भैयाका दुसरा बच्चा था.. वो भी अपने भाइके पीछे पागल हे.. मेरी तराह.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) कमीने मेरे सभी दोस्त अ‍ैक जैसे ही हे.. हें..हें..हें..

पुनम : (हसते) भाइ.. अ‍ेक बात ओर बताउ.. धृव भैयाने दो बार उनकी मम्मीका भी अ‍ेबोर्सन करवाया हे.. कमीनी वो भी अपने बेटेके पीछे पागल हे..

लखन : (मुस्कुराते) बेचारी क्या करेगी..? अंकल उनपे ध्यान नही हेते होगे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ.. वो कहेते हेनां.. घरकी मुर्गी दाल बराबर.. कमीना वो भी बहुत चुदाइका सौकीन हे.. अपनी पार्टीकी कइ ओरते ओर लडकीयाको चोद चुका हे.. ओर कुछ तो परमेनेन्ट होगइ हे.. जीनको कइ बार प्रेगनेन्ट कर चुका हे.. ओर सबका ओब्रेसन भावीका भाभीसे करवाता हे..

लखन : (आस्चर्यसे सुनते) क्या..? खुद अपने बेटेकी बहुसे..? इतना ठरकी हे कमीना..? उनको अपनी बहुसे डर नही लगता क्या..?

पुनम : (मुस्कुराते) डर..? क्युकी वो कमीना जानता हेकी भाभी इलीगल अ‍ेबोर्सनका काम करती हे.. ओर दो बार वो भी भाभीके पीछवाडेका लाभ ले चुका हे.. धृव भैयाकी तराह उनका बाप भी भावीका भाभीके पीछवाडेका सौकीन हे.. ओर भाभी मजबुरीके कारण कुछ नही बोलपाती..

लखन : (आस्चर्यसे देखते) क्या..? साला हरामी.. भाभीकी मजबुरीका अच्छा फायदा उठा रहा हे.. सायद ये बात भाभी जानती होगी इसीलीये उसने अलग मन बनालीया होगा..

पुनम : (मुस्कुराते) बीलकुल सही सोचा हे आपने.. अब चलो नीचे.. सबलोग नीचे इन्तजार करते होगे..

लखनने पुनको बाहोमे भीचते उनके होठोको चुम लीया.. फीर दोनो साथ नीचे आगये.. वहा भावना अपनी बच्चीको दुध पीला रही थी.. तो लखनकी ओर देखते ही सरमा गइ.. ओर अपने पलुसे आचलको ढकते लखनकी ओर देखते कामुक स्माइल करने लगी..

लखनने भुकीका का हाल चाल जाना.. फीर सबलोग बाते करते रहे.. खाना बन गया तो सबलोग खानेपे बैठ गये.. फीर लखन ओर पुनम टीफीन लेकर होस्पीटलपे चले गये.. सृती अब काफी बेहतर लग रही थी.. तो लखनने देवायतको घर जानेके लीये केह दीया..

मंजु देवायत साम तक रुके.. भावीकाने कल छुटीका केह दीया तो मंजुने सृतीको उनकी मम्मीके यहा आराम करनेकी सलाह दी.. फीर सबलोगोकी इजाजत लेकर देवायत भानु ओर मंजु चले गये.. लखनके घर जाकर अपना सामान लेकर सीधे गांवकी ओर नीकल गये..
 
इसी दौरान भावीका अपने पेसन्ट देखकर सृतीकी देखभाल करती रही.. इसी बीच लखनसे दयाइआ मंगवाते रीपोर्टके सील सीलेमे बार बार मीलती रही.. ओर बात करनेकी कोसीस करती रही लेकीन सबके होनेकी वजहसे अपने दीलकी बात नही केह पाइ..

अ‍ेक बार उसने बहार लखनको देखा तो उनके दीलकी धडकन बढ गइ.. ओर उसी टाइम कोइ पेसन्ट भी नही था.. तो भावीकाने हीमत करते लखनको इसारा करते अपनी केबीनमे बुला लीया.. जैसे ही लखन उनकी ओफीसमे गया भावीकाने धीरेसे दरवाजा लोक करलीया.. ओर लखनको बैठनेको कहेते सामने बैठ गइ..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. कहीये.. कुछ काम था..?

भावीका : (मुस्कुराते) हां.. आप उस दीन बात करके गये फीर आप हमारे घर आये नही.. क्या अपना दोस्त घरपे होगा तोही आओगे..? अपनी भाभीको मीलने नही आ सकते..?

लखन : (मुस्कुराते) नही भाभी.. अ‍ैसी बात नही हे.. दरसल मे सचमे बहुत बीजी था..

भावीका : (मुस्कुराते धीरेसे) क्या आपको अपने दोस्तके बारेमे कुछ पता हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. आज ही घरपे पुनोसे सब बात हुइ.. आपके बारेमे जानकर बहुत दुख हुआ..? आपकी मजबुरी भी समज सकता हु.. आप बहुत हीमंत वाली हे..

भावीका : (आंख गीली करते) हीमंत वाली..? की मजबुर..? मे अपना दुख कीसीसे बांट भी नही सकती.. अ‍ेक दोस्त हेतो अभी इनकी हालत भी ठीक नही हे.. मे अपना दुखडा कीसको सुनाउ..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वैसे तो मे सब जानता हु.. लेकीन अगर मुजपे भरोसा कर सकती हेतो मुजसे बात कर लीजीये.. सायद मे आपके दीलका बोज कुछ हल्का कर सकु..

भावीका : (आंख पोछते मुस्कुराते) इसीलीये तो आपको मैने बुलाया हे.. मे आपको अच्छी तराह जानती हु.. आप अ‍ेक नेक दील इन्सान हे.. क्या हम दोस्त बन सकते हे..?

लखन : (मुस्कुराते हाथ मीलाते) वाइ नोट..? स्योर.. आजसे हम पके वाले दोस्त..

भावीका : (मुस्कुराते) थेन्क्स.. बस.. अभी कुछ दीन इसी बातका खयाल रखना.. हमारी दोस्तीके बारेमे फील हाल सृतीको पता ना चले.. ओर नाही धुवको.. बाकी बाते हम बादमे करेगे.. तब पता चलेगा आपका धृव क्या क्या कारनामे करता हे.. ओर मेरी भी मजबुरी हे.. की मे उसे छोड भी नही सकती..

फीर बाते करते भावीका लखनसे नजदीकीया बढाती रही.. दोनोने अपना मोबाइल नंबर भी अ‍ेक्सचेन्ज करलीया.. तब भावीकाने लखनसे फोनपे बात करनेकी ओर वोट्सअ‍ेप चेट करनेकी बात करली तो लखन भी हां कहेते खुस होगया.. ओर उसे जल्द कोफी सोपपे मीलनेका वादा कीया.. ओर बहार नीकलनेसे पहेले भावीकाने लखनको हग करलीया..

सामको नीर्मला भुमीका ओर रजीया आइ.. लखनने उसे सबकुछ बतादीया.. फीर दुसरे दीन सृतीको छुटी देदी गइ.. लखन सृती नीर्मला भुमीकाको लेकर सीधा भुमीकाके घर ही चला गया.. सृतीको नीचे वाले रुममे रखा.. ओर नीर्मला भुमीका पास वाले रुममे ही थे..

भावना उपरकी मंजीलपे अपनी बच्चीके साथ रहेने लगी.. लखन पुनमको लेकर सुबह नीर्मलाके घर चला जाता.. फीर सृतीका हाल चाल पुछकर अपने कामपे चला जाता.. ओर सामको वापस सृतीको मीलकर पुनमको लेकर वापस अपने घर आजाता..

तब भावना सबसे छुपकर लखनको उपर अपने रुममे आनेका इसारा करती.. क्युकी वो काफी दीनोसे यहा थी.. ओर लखन भी अपनी बीवीओसे घीरा रहेता.. ओर अ‍ेक दीन दो पहोरको उसे मौका मील गया.. तो लखनने बीना नीचे उतरे दो बार भावनाकी जबरदस्त चुदाइ करली..





दीनमे राधीकाकी होस्टेलपे जाता.. वहा राधीकाको जमकर पेलता.. नीलम स्कुलसे आते ही रजीयाका काममे हाथ बटाती.. ओर सामको लखन राधीकाको होस्टेलसे लेकर पुनमको लेने भुमीकाके घर चला जाता.. वहा अ‍ेक दो घंटे सबलोग बैठकर बाते करते फीर लखन पुनम ओर राधीकाको लेकर घर आजाता..

रातमे लखन रजीया ओर राधीकाको दो दो बार बजाकर पुनमके साथ खुब प्यार करता.. लेकीन पीछेसे.. क्युकी अब पुनमका पेट काफी नीकल गया था.. तो पुनमने आगेसे करनेको मना कर दीया था.. इसी बीच लखन ओर भावीकाके बीच फोनपे बात होने लगी..

अ‍ेक दीन मौका मीलते ही दोनो अ‍ेक कोफी सोपमे मीले.. भावीकाने अपनी पुरी स्टोरी लखनको सुनादी.. उस दीनसे दोनो काफी नजदीक आ गये.. ओर दोनो चेटपे भी बाते करने लगे.. अब बाते बहुत आगे बढ चुकी थी.. दोनो अ‍ेक दुसरेके साथ फ्लर्ट करने लगे थे..

अ‍ेक दीन मौका मीला तो लखन अ‍ेक बार फीर दीयाकी जमकर बजाकर आगया.. तो अ‍ेक दीन नीलमने स्कुलपे छुटी लेली थी.. तो दो पहोरको घरपे सीर्फ नीलम रजीया ओर लखन ही थे.. तो खाना खानेके बाद आराम करते नीलमको अपने साथ ही बेडरुममे बुला लीया..





ओर वहा पहेली बार लखनने रजीयाकी बजाकर नीलमको रजीयाके सामने ही चोद लीया.. तो नीलम बहुत ही सर्मसार होगइ.. क्युकी लखनने पहेली बार उसे अपनी बीवीके सामने खुलकर चोदलीया था.. ओर रजीया हसती रही.. फीर तो लखनने अ‍ेक बार फीर नीलमको कीचनमे खडे खडे चोद लीया..





अ‍ैसे ही समय नीकलता गया.. अब मंजुको भी कमजोरी महेसुस होने लगी थी.. तो साथमे देवायतका जोस भी कम होने लगा था.. तो दुसरी ओर सेक्स ना करनेकी वजहसे चंदाकी वासना बढती ही जा रही थी.. वो देवायतसे भावनात्मक रुपसे काफी दुर होने लगी थी.. देवायतकी अनदेखीकी वजहसे उनकी चुतमे वासनाके कीडे उधम मचा रहेथे.. अब वो सेक्सके बीना पागल हो रही थी.. लेकीन कुछ बोल नही पा रही थी....

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७४

अ‍ैसे ही समय नीकलता गया.. अब मंजुको भी कमजोरी महेसुस होने लगी थी.. तो साथमे देवायतका जोस भी कम होने लगा था.. तो दुसरी ओर सेक्स ना करनेकी वजहसे चंदाकी वासना बढती ही जा रही थी.. वो देवायतसे भावनात्मक रुपसे काफी दुर होने लगी थी.. देवायतकी अनदेखीकी वजहसे उनकी चुतमे वासनाके कीडे उधम मचा रहेथे.. अब वो सेक्सके बीना पागल हो रही थी.. लेकीन कुछ बोल नही पा रही थी.... अब आगे

अब देवायतका प्यार मंजु लता ओर दयाके बीच ही सीमीत रेह गया था.. तो दुसरी ओर वंदना चारु ओर नीशाका पेट भी बहार नीकलने लगे थे.. तो भुमीकाको भी अब डीलीवरीमे महज सीर्फ अ‍ेक महीना रेह गयाथा.. तो वही हाल पुनम ओर कबीलेपे जमीलाका भी था..

तो हरीयाकी दुसरी बीवी रेणुने भी अ‍ेक बच्चीको जन्म दीया था.. वही देवायतसे प्रेगनेन्ट हुइ पुनमका भी डीलीवरीका वक्त बहुत नजदीक था.. ओर उसने लखनको सेक्स करनेके लीये मना कर दीया था.. लेकीन लखन कहा मानने वाला था.. तो पुनम उनको पीछे सेक्स करने देती थी..

तो नीलम भी हर सेटरडे सन्डे धिरेनके घर चली जाती ओर धिरेनकी पत्नी होनेका हक अदा करते सन्डे सामको घर वापस आजाती.. सेटरडे सन्डेको छोडकर बाकी दीनोमे दो तीन बार लखनसे चुदावकर संतुस्ट हो जाती.. नीलम अपने दोनो पतीका पुरा खयाल रखने लगी थी..

अ‍ेक दीन सुबह सुबह अचानक लखनके फोनपे मुनाका कोल आगया.. बात हुइ तो पता चला उनके बापु वीभु नही रहे.. ओर लखन गमंव जा रहा था.. तो पुनमने इस हालतमे साथ आनेकी जीद की.. ओर लखनको कार धीरे चलानेको कहा..

लखनको पता नही थाकी पुनम कीस योजनाके तहत मंजुको मीलने जा रही थी.. तो लखन पुनमको लेकर कारमे गांव चला गया.. पुनमको हवेलीपे छोडकर मुनाके घर चला गया.. तो सब तैयारीया हो चुकी थी.. वहा सबने वीभुका दाह संस्कार कीया.. दो पहोरको सब वापस आगये..

तो मुना श्रीधर लखनने सबके खानेका इन्तजाम कीया.. तो कोइ नही थे.. गांव वाले अपने अपने घर चले गये.. लखनके दोस्त ओर ब्रीन्दा जयश्रीके साथ सांती ओर जागृती भी थे.. इस बातका बसंतीके भाइ भाभीको कुछ पता नही था.. फीर सामको चारो दोस्त अ‍ेकडा बैठे थे..

लखन : (मुनाकी ओर देखते) मुना.. सब अचानक कैसे हो गया..?

मुना : (मायुस होते) भाइ.. कोइ अचानक नही था.. कुछ दीन पहेले ही बापुको खुनकी उल्टीया हुइ थी.. तब ही वसुधा मेडमने मुजे केह दीया था.. की कभी भी कुछ भी हो सकता हे..

लखन : (मुस्कुराते) क्या उसे बरखा भाभीके बारेमे पता चला..?

मुना : (सरमाते धीरेसे) हां भाइ.. आज ही.. वो गीर गये तो बरखा अपने आपको रोक नही पाइ.. ओर बापुके पास उसे सम्हालने चली गइ.. बापु उनका पेट देखकर ही समज गये..

लखन : (सामने देखते) वो होसमे थे..? कुछ बोले नही..?

मुना : होसमे थे.. होस्पीटल जा रहे थे तब इतना ही बोले.. कौन हे दामाद..? तो बरखाने सीर्फ इतना ही कहा.. भाइ.. हमारा मुना.. बस.. उसने आंखे बंध करली.. होस्पीटल पहोंचे तब वो गुजर चुके थे..

लखन : (मुस्कुराते) चलो जानेसे पहेले उसे पता तो चल गया.. वरना तुम सब अ‍ेक अपराध बोधमे रहेते.. तो अब..? क्या प्लान हे..?

मुना : (धीरेसे) कुछ नही.. बस.. ये सब अ‍ेक हप्तेमे नीपटा लुगा.. फीर अ‍ेक महीनेमे उनकी सब वीधीया खतम करके मांसे सादी कर लुगा..

लखन : (जेबसे २५००० रु देते) येले.. काम आयेगे.. ओर जरुरत होतो कहेना..

मुना : (वापस देते) नही भाइ मेरे पास हे..

श्रीधर : (मुस्कुराते) यार हम सब यहा हेनां.. क्यु तकलीफ ले रहा हे..?

लखन : (मुस्कुराते) कमीनो मुजे पता हे तुम सब हो.. बस.. लेले.. (श्रीधरकी ओर देखते) ओर तेरा..? क्या हुआ..? भाभीको सब पता चला..?

मुना : (मुस्कुराते) अरे भाभी तो खुद आंटीकी सेटींग श्रीधरसे करवाना चाहती थी.. तो सबकुछ बता दीया.. ओर भाभीने खुद दोनोकी सादी करवाइ..

लखन : (हसते) चलो अच्छा हुआ.. अब सीर्फ साहीलका देखना हे.. मे भाइसे बात करके जाउगा..

फीर लखन सबकी खबर लेकर हवेलीपे आगया.. वहा पुनम ओर मंजु अभी भी आगेकी योजनाओपे बात कर रही थी.. लता भी उनके पास बैठकर दोनोकी बाते गौरसे सुन रही थी.. जैसे ही लखन आया वो सरमा गइ.. ओर लखनके सामने देखकर मुस्कुराने लगी..

लेकीन लखनने उनके सामने तक नही देखा तो लताको बहुत बुरा लगा.. ओर वो खडी होकर कमरेमे चली गइ ओर आंसु बहाने लगी.. चंदा भी अपने आपको असहज महेसुस कर रही थी.. तो पुनमने उनको अपने साथ चलनेको कहा.. ओर वो आनेके लीये तैयार होगइ..

जैसे ही लखन घरपे आया तो मंजुने उसे गले लगा लीया.. ओर चंदाने भी गले लगाया.. तो चंदाको वोही अहेसास ओर नीचे चुंभन महेसुस हुइ जो यात्रासे वापस आनेपे लखनको गले लगाते हुइ थी.. वो भुल गइकी लखन उनका देवर हे.. उसने लखनको जोरोसे बाहोमे भीच लीया..
 
चंदा : (सरमाते धीरेसे) देवरजी.. मे कुछ दीन वहा आना चाहती हु.. आपके पास.. मेरी बेटीके घर..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. वो सीर्फ आपकी बेटीका घर नही हे.. अपना ससुराल ओर देवरका घर भी हे.. आपको पुछनेकी जरुरत नही हे बस.. तैयार होजाइअ‍े..

मंजुला : (दोनोको देखकर पुनमके कानमे फुसफुसाते) पुनो.. अब ये ठीक होनेके लीये बीलकुल रेडी हे.. दोनोको स्पेस देना.. सब अपने आप ही होजायेगा.. मे चाहती हु जबतक सृती उनकी मम्मीके घर आराम कर रही हे तबतक सब कुछ होजाये..

पुनम : (सरमाते धीरेसे) मोम.. फीकर मत करो.. अ‍ैसा ही होगा.. इनको नीलुके साथ अ‍ेटेच भी करवाना हे.. ताकी दोनो सास बहु अ‍ेक दुसरेके साथ घुलमील जाये..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) हां ये अच्छा आइडीया सोचा तुमने.. बाकी सब ठीक हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) यस मोम.. हम सबकी सेवा बखुबी करते हे.. अब तो वो नीलुभी बाकात नही रहेती.. रजुदी केह रही थी उनकी हाजरीमे ही दो बार..

मंजुला : (मुस्कुराते) पता हे मुजे.. बस.. इनको रोकना नही.. वरना तुम सबकी हालत खराब कर देगा.. बस तु बच्चीके जन्म तक उनसे दुर रहे..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. मेतो कबसे उनसे दुर हु.. ओर अब तो पहेलेसे भी भयानक होगया हे.. पता नही सब इनको कैसे जेलती हे..

मंजुला : (मुस्कुराते धीरेसे) पुनो.. अब इनकी जींदगीमे बहारकी ओरते भी आयेगी.. इनको मत रोकना.. सब हमारे वीजय ओर हमारे उन स्वामीके लीये पुष्टभुमी तैयार हो रही हे..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) मोम.. मुजे तो सब पता हे.. लेकीन सृतीदी भैयाको लेकर बहुत ही सेन्सेटीव हे.. उनको भैयाका दुसरी ओरतोके साथ रीलेशनसे अ‍ेतराज हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) मे उनसे बात करलुगी.. फीर भी तुम भी उसे समजाओ.. की ये सब सीर्फ लखनके या वीजयके अ‍ैयासीके लीये नही हे.. हमारा मक्सद कुछ ओर ही हे..

पुनम : (मुस्कुराते) जी मोम.. मे सीर्फ इसी बात करनेके लीये तो यहा आइ हु.. मे तो सृतीदीसे बात करलुगी.. लेकीन आपको मीले तब आप भी बात करलेना..

मंजुला : (धीरेसे हसते) देखो.. अभी भी कैसे चंदादीसे चीपका हुआ हे.. (हसते लखनकी ओर देखते) बेटा.. अब बहुत अपनी भाभीसे चीपक लीया.. थोडी देर यहा आकर भी बैठो..

चंदा : (हसते अलग होते) कमीनी मेरा देवरसे चीपक रही हु तो तु क्यु जलती हे..? मे तो इनके साथ जा रही हु..

मंजुला : (हसते) हां तो जाओनां.. वो भीतो हमारा ही घर हे.. आपको भी थोडा चेन्ज मीलेगा..

चंदा : (पास आकर बैठते) हांतो जातो रही हु.. वहा अच्छा लगा तो मेरी बेटीके घर ही रेह जाउगी..

पुनम : (मुस्कुराते) मोम.. वो आपकी बेटीका घर बादमे हे.. पहेले अपने देवरका घर हे.. हम दोनोका ससुराल.. हें..हें..हें..

मंजुला : (मुस्कुराते) आप वीजयको यही छोडदो.. हम इनकी देख भाल करेगे..

चंदा : (जटसे) ना बाबा ना.. विजयतो मेरे साथ ही रहेगा.. अब मुजसे अलग करनेकी बात मत करना.. तुजे चाहीये तो देवुको कहेकर दुसरा बच्चा करले.. हें..हें..हें..

मंजुला : (लखनके बाल सहेलाते) दीदी.. देखो अब आपका पेट भी थोडा थोडा नीकलने लगा हे.. दो दो बच्चा कहा सम्हाल पाओगी..?

चंदा : (मुस्कुराते) तु इनकी चीन्ता मत कर मे सब सम्हाल लुगी.. देखो पुनोदीदीका पेट भी कीतना नीकल गया हे.. लगता हे टाइम नजदीक हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. सीर्फ अ‍ेक महीना रेह गया हे..

लखन : (मुस्कुराते) मोम.. तो अब हम चले..? साम भी ढल गइ हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) अरे.. तो क्या हुआ..? अभी तेरे भैया आजायेगे.. उनको मीलकर चले जाना.. खाना भी बन गया होगा.. खाना खाकर नीकल जाओ..

लखन : (मुस्कुराते) हां उनसे भी बात करनी हे.. ओर हीसाब भी देना हे.. मोम.. वो श्रीधर.. उसने अपनी मोमसे सादी करली हे.. खुद जयश्री भाभीने करवाइ..

मंजुला : (मुस्कुराते) हां पता हे.. ओर सुन.. वो साहीलके बारेमे कुछ बात करनी हे.. वो सब पुनो तुजे बता देगी.. तो तुम साहीलसे बात कर लेना.. बहुत जरुरी हे..

चंदा : (मुस्कुराते) मंजुदी.. कीतना अजीब हेनां.. अब तो इन सब बाते सुनकर कोइ फर्क भी नही पडता.. सबने अ‍ैसे रीस्तेको खुसी खुसी स्वीकार करलीया हे..

मंजुला : (जोरोसे हसते) हां सबने स्वीकार करलीया.. सीवाय आपके.. हें..हें..हें..

चंदा : (सर्मसार होते अ‍ेक मुका मारते) कमीनी कुछ तो सरम कर.. देवरजी हे यहा..

लखन : (जोरोसे हसते) मोम.. लगता हे भाभी अब बीलकुल ठीक हो गइ हे.. आपको अच्छेसे गालीया देने लगी हे.. हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाते हसते अ‍ेक मुका मारते) मे ठीक ही हु.. समजे..? बहुत सरारती होगये हो..

पुनम : (हसते) भाभी.. अभी आपने इनकी सरारत देखी ही कहा हे..? वहा आओगी तब पता चलेगा.. साथ तो चल ही रही हो.. वहा आकर खुद देखलेना..

चंदा : (कामुक नजरोसे देखते) अच्छा..? तब तो आकर देखना ही पडेगा..

तभी देवायत आता हे तो लखन ओर पुनमको अभी तक घरपे देखकर खुस होगया.. ओर जल्दीसे फ्रेस होते सबके साथ आकर बैठ गया.. तो मंजुने आवाज देकर चंपा भाभीको सबके लीये खाना नीकालनेको कहा.. तबतक लखनने देवायतको हीसाब दे दीया..
 
लखन : (मुस्कुराते) भैया.. आपने वो साहीलके चाचासे कोइ बात की..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. तुमने मुजसे कहा था.. ओर साहीलसे भी बात हुइ थी तो उनके चाचासे तीन चार बार मीला.. पहेले तो उनसे दोस्ताना बनाना पडता हे.. तभी तो उनसे बात कर सकता हु.. अब कोइ दीकत नही हे.. मुजसे काफी घुलमील गये हे..

मंजुला : (मुस्कुराते) तो फीर मौका देखकर आप बात कर लीजीये.. लखन यही कहेने आया हे.. क्या गांवकी स्थीतीके बारेमे उनसे कोइ बात हुइ..?

देवायत : (हसते) गांवकी स्थीती तो क्या वो मुजसे अपनी पर्सनल बात भी सेर करने लगे हे.. पहेले उनको बताया तो उनको कुछ अजीब लगता था.. लेकीन गांवके रीस्तोको देखकर उन्होने भी सब स्वीकार करलीया.. अब तो मीलते हे तो गांवकी ही बात करते हे..

लखन : (मनमे खुस होते) क्या..? सबकुछ अ‍ेक्सेप्ट करलीया..?

देवायत : (मुस्कुराते) हां.. कहेता था सहेरमे काम करते वो काफी थक जाता था.. ओर घरकी ओर ध्यान ही नही देपारहा था.. ओर यहा आकर उनके पास काफी टाइम रहेता हे.. तो सुकुनसे बीवीको प्यार करनेका समय भी मील जाता हे.. वो गांवसे काफी प्रभावीत होगया हे..

लखन : (मुस्कुराते) तो क्या उनसे साहीलके बारेमे कोइ उमीद हे..? मतलब.. दोनो मां बेटेके रीस्तेको अ‍ेक्सेप्ट करेगे..?

देवायत : (मुस्कुराते) पता नही मे उनको कल मीलकर समजाउगा.. देखते हे वो क्या कहेता हे..

पुनम : (लखनकी ओर देखते फुस फुसाते) क्या हम इस बारेमे घर जाके बात करे..?

लखन : (सर हीलाते) ठीक हे.. हम घर जाके बात करेगे..

फीर सबने खाना खाया ओर लखन पुनम चंदा ओर वीजयको लेकर सहेरकी ओर नीकल गया.. देर रात सबलोग घरपे पहोंच गये.. चंदाको नीचे वाला रुम दीया तो वीजयको लेकर वही सो गइ.. उस रात लखनने रजीया ओर राधीकाकी खुब जमकर बजाइ.. फीर दोनो सोगये तो पुनम लखनकी बाहोमे आगइ..





लखन : (सरको सहेलाते धीरेसे) पुनो.. तुम साहीलके बारेमे कुछ बताने वाली थी..

पुनम : (सीनेको सहेलाते धीरेसे) हां भाइ.. लगता हे गांवमे आकर उनके चाचाकी तबीयत कुछ ज्यादा ही अच्छी होगइ हे.. जबसे भैयासे गांवके बारेमे बात सुनी तबसे उनकी वासना कुछ ज्यादा ही बढ गइ हे..

लखन : (सरको सहेलाते) मतलब..?

पुनम : (मुस्कुराते) मतलब येकी जबसे उसने भैयासे सुनाकी यहा अ‍ेक भी वीधवा ओर त्यक्ता नही रहेगी तबसे वो उनकी वीधवा भाभीकी ओर कुछ ज्यादा ही ढलने लगा हे.. सहेरमे तो मुस्कीलसे महीनेमे अ‍ेकाद दो बार ही उनकी बीवीको प्यार करता था.. ओर अब तो हप्तेमे तीन बार उनकी बीवीकी ले रहा हे..

लखन : (सामने देखते धीरेसे) पुनो.. तब तो गडबड होजायेगी.. तो फीर साहीलकी बात कैसे बनेगी..? उनकी अम्माके पेटमे साहीलका बच्चा हे.. आपकोतो सब पता हे.. उनके बारेमे बताओनां..

पुनम : (सीनेको चुमते) भाइ.. वो उनकी भाभीकी लेनेके लीये पागल हो रहा हे.. इसके लीये वो उनकी हर गलतीको माफ कर देगा.. उनको लगेगाकी उनकी भाभी अकेली थी तो भुल होगइ.. ओर बच्चेको अ‍ेक्सेप्ट करलेगे.. लेकीन भैया जब उनकी सादी करवानेकी बात करगे तो वो खुद उनसे सादी करनेको तैयार होजायेगे..

लखन : (सामने देखते) दीदी.. क्या केह रहीहो तुम..? तबतो गडबड होजायेगी.. साहील इसके लीये तैयार नही होगा.. क्युकी वो अपनी अम्माको बहुत प्यार करता हे..

पुनम : जानती हु मे.. लेकीन उनकी अम्मा साहीलभाइको प्यार करना नही छोडेगी.. वो उनके चाचासे छुपकर साहील भाइसे रीलेशन रखेगी.. बल्की बदलेकी भावनासे उनकी चाचीको भी साथ घसीटते साहीलके साथ रीलेशनमे लायेगी.. ओर साहील भाइको घरमे ही दो दो चुतोका इन्तजाम होजायेगा..

लखन : (मुस्कुराते गाल चुमते) सच्ची..? क्या अ‍ैसा होगा..?

पुनम : (मुस्कुराते) हंम.. सीर्फ इतना ही नही.. फीर तो उनकी चाची भी साहीलके पीछे पागल होगी.. साहील भाइको उनकी बडी बहेन सायरा भी मील जायेगी.. क्युकी उनके बडे भाइसे तो कुछ होगा नही.. मतलब.. उनके बच्चे..

लखन : (धीरेसे हसते) क्या.. तो वो भी साहीलसे बच्चा पैदा करेगी..?

पुनम : (हसते धीरेसे) कमीनो.. तुम सब दोस्तोने वो जडीबुटीसे इतना दमदार हथीयार बना लीयाहेकी वो बच्चे होनेके बावजुद साहील भाइसे रीलेशन रखेगी.. बतलब उनके पीछे पागल होजायेगी..

लखन : (मुस्कुराते) तो फीर सबाना दीदी..?

पुनम : (मुस्कुराते) वोतो गांव गइ तब साहीलभाइसे खुब पेलवाके गइ हे.. उनका हथीयार इतना पसंद आगया की आतेही साहील भाइसे सादी कर लेगी.. ओर बीच बीचमे साहील भाइको बेगलोर बुलाकर उनसे चुदाइ करवा लेगी.. साहील भाइको तो घरमे ही बल्ले बल्ले हे.. हें..हें..हें..
 
लखन : (मनमे खुस होते) मतलब घरकी सभी ओरतोको लपेट लेगा.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. जैसे आप लपेट रहे हो.. अब तैयार रहेना.. चंदा भाभी भी इधर ही हे.. ओर सायद इसीलीये यहा आइ हे.. ताकी अपनी आगको सांत कर सके.. मोमने भाइसे दुर रखके इनकी आगको ओर बढा दीया हे ताकी आपको उनकी लेनेमे आसानी हो..

लखन : (सामने देखते) पुनो.. क्या ये सही होगा..? हमारी भाभी हे वो..

पुनम : (मुस्कुराते धीरेसे) भाइ.. अब कोइ रीस्ते नातेमे मत उलजो.. भावना दी भी तो हमारी भाभी हे.. उनको भी आपने लपेट लीया.. तो चंदा भाभीमे क्या दीकत हे.. अब जीतनी जल्दी हो सके उसे अपनालो.. ताकी वो दीमागी हालतसे ठीक होसके..

लखन : (मुस्कुराते) क्या सीर्फ दीमागी हालत ठीक करेनेक लीये हे..?

पुनम : (मुस्कुराते) हां.. लेकीन उनसे भी आगे.. बस.. आप धीरे धीरे सम्हालके आगे बढो.. वो दीन दुर नही आपकी सभी भाभीया आपके साथ रीलेशनके लीये पागल होगी.. कुछ नये रीस्ते भी होगे.. कुछ बच्चेके लीये.. तो कुछ अपनी वासना संतुस्टीके लीये..

लखन : (मुस्कुराते) नये रीस्ते..? क्या आप नाम बता सकती हो..?

पुनम : (मुस्कुराते) बता सकती हु.. लेकीन बताउगी नही.. क्युकी आपको खुद ही पता चल जायेगा.. बस.. कीसीको मना मत करना.. जो होता हे होनेदो..

लखन : (होट चुमते) ठीक हे.. अब मोम ओर मेरी प्यारी दीदीने सबकी जीम्वेवारी दीहे तो नीभानीतो पडेगी.. हें..हें..हें..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ बात सीर्फ जीम्वेवारीकी नही हे.. कुछ कर्तव्य हे जो आपको हमारे वीजयके लीये ओर उस स्वामीके लीये नीभाना हे.. वरना मे आपको दुसरी ओरतोके साथ अ‍ैसे रीलेशनमे आनेके लीये कभी नही कहेती.. अभी तो इस खानदानमे आप अकेले मर्द हो जो अ‍ैसी जीम्वेवारीको नीभा सकते हो..

लखन : (सामने देखते) पुनो.. भाभीके साथ आगे बढनेमे संकोच हो रहा हे.. क्युकी वो मुजे अ‍ेक बेटेकी तराह मानती हे..

पुनम : (मुस्कुराते) भाइ गांवमे आपके सभी दोस्तोने अपनी बहेनके साथ साथ उनकी मांके साथ भी सादीया करली हे.. तो ये आपकी मां थोडीनां हे..? ओर वो खुद इसीलीये तो यहा आइ हे क्युकी उसे जो प्यार भाइसे मीलना चाहीये वो नही मील रहा.. ओर उसी प्यारकी तलास आपमे कर रही हे.. उनको आपसे बहुत उमीद हे..

लखन : (मुस्कुराते) पता नही इस बारेमे उनको कैसे मनाउ..

पुनम : (मुस्कुराते) बहुत सीम्पल हे.. बस.. आप उसे सहेर घुमाओ.. सीनेमा दीखाने लेजाओ.. होटेलमे डीनर करवाने लेजाओ.. गार्डनमे लेजाओ.. उसे सोपींग करवाओ.. जैसे कीसी लडकीको डेटपे लेजाते हे.. उसे अपनापनका अहेसास करवाओ.. ताकी उसे लगेकी आपको उनकी कीतनी केर हे.. बस.. हम ओरतोको यही चाहीये.. वो खुद आगे बढेगी..

लखन : (लंडको अ‍ेडजेस्ट करते मुस्कुराते) ठीक हे डार्लींग.. इसकी सुरुआत कलसे ही होजाये..

पुनम : (सामने देखते) देखा.. नइ चुतके बारेमे सोचते कैसे जटके मार रहा हे.. अब उंगलीसे मुजे सांत करो.. फीर पीछेसे आरामसे मे आपको सांत करती हु.. अब ये बच्ची जल्दी आजाये तो मे मेरे भाइको प्यारतो दे सकु.. अब आपकी आदत होगइ हे..





अ‍ैसे ही बात करते लखनने पुनमकी चुतपे मुह लगा दीया.. ओर उंगलीसे चुतको खरोदने लगा.. जब पुनम जडके सांत होगइ तो घोडी बन गइ ओर लखनने उनके पीछले छेदमे लंड घुसा दीया.. ओर पुनमको पीछेसे खुब पेला.. फीर दोनो सांत हो गये तो अ‍ेक दुसरेसे चीपकके सो गये..





दुसरे दीन सुबह सब कंपलीट होगये.. तो नीलम चंदाको देखते ही सरमा गइ.. ओर उनके गले लग गइ.. तो चंदाने भी नीलमके सरको चुमते उसे खुब प्यार दीया.. तब उसे पता नही थाकी अब नीलम उनकी बहु होगइ हे.. फीर नीलम चाइ नास्ता करके स्कुल चली गइ..

सब चाइ नास्ता कर रहेथे तो पुनम कुछ ज्यादा ही लखनसे चीपक रही थी.. चंदा भी लखनकी ओर ललचाइ चोर नजरसे देखती रही.. फीर लखन खुलकर पुनम ओर रजीयाके होठोको चुमकर राधीकाको लेकर नीकल गया.. तो जाते वक्त राधीका भी चंदाको गले मीली.. तभी..

चंदा : (मुस्कुराते) दीदी.. यहा कीतना अच्छा लगता हे.. लगता हे सबलोग खुलकर अपनी लाइफ अ‍ेन्जोय कर रहे हे.. वहा थोडीसी घुटन महेसुस हो रही थी..

पुनम : (मुस्कुराते) हां भाभी.. यहा कीसीपे कोइ पाबंधी नही.. ओर लखन भी हम सबको बरोबर प्यार देते हे.. मेतो कहेती हु आप भी यहा रहेजाओ.. ताकी अपनी लाइफ खुलकर जी सको..

चंदा : (सरमाकर हसते) हां यही सोच रही हु.. ये नीलु भी कीतनी मोर्डन होगइ हे..

पुनम : (मुस्कुराते) हां सब कपडे आपके देवर ही लाये हे.. ओर नीलु काफी होशीयार भी हे.. बस.. अब अ‍ेक्जाम खतम होते ही कोलेजमे आजायेगी..

चंदा : (मुस्कुराते) मे मेरे विजयको भी यही पढाउगी.. सहेरमे.. इसे भी मोर्डन बनाउगी..

पुनम : (मुस्कुराते) ओर आपकी बच्ची आयेगी उनको..? आप भी प्रेगनेन्ट हेनां..

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) वो भी मेरे विजयके साथ ही पढेगी.. दोनो भाइ बहेन साथ ही स्कुल जायेगे..

पुनम : (मुस्कुराते) तो फीर भाभी आप यही रहे जाओ.. यहासे स्कुल भी नजदीक हे..

चंदा : (मुस्कुराते) हां अब यही रहुगी.. मेने तो सहेरमे कुछ देखा भी नही हे.. तो घुम लुगी..
 
पुनम : (मौका देखते) तो अपने देवरको कहेना आपको सहेर घुमा देगे.. उनके साथ चली जाना.. मेतो कहेती हु आज ही चली जाओ.. ओर जबभी बहार घुमनेका मन करे अपने देवरसे कहेना वो आपको घुमा देगे.. नीलु ओर राधु दीदीको छोडने ओर लेनेके अलावा कुछ काम ही नही हे..

चंदा : (मनमे खुस होते मुस्कुराते) अरे उनको काम धंधा भी होगा.. कहा मेरे साथ घुमते रहेगे..?

पुनम : (मुस्कुराते) कामके लीये यहा ओफीस हेनां.. पार्टनर भी हे.. अभी राधुदीको छोडके ओफीस चले जायेगे.. सुबह सीर्फ दो घंटेही काम रहेता हे.. फीर सारा दीन फ्री.. हें..हें..हें.. मे तो कहेती हु सामको ही उनके साथ चले जाओ.. अब वीजयकी चीन्ता मत करो.. हम सब हेनां..?

चंदा : (मुस्कुराते) ठीक हे सामको देखते हे..

पुनम : (मुस्कुराते) देखते हे क्या मेतो कहेती हु चली जाओ.. मे लखनसे बात कर लेती हु..

तो दुसरी ओर लखन ओर राधीका होस्टेलपे पहोंचे तो सब लडकीया परीक्षा देने स्कुल जा चुकी थी.. पुरा होस्टेल खाली था.. तो इस बातका फायदा लखन ओर राधीकाने उठाया.. दोनो ओफीस बंध करके अंदर अपने नीजी कमरेमे चले गये.. दोनो प्यारके संमुदरमे गोते लगाने लगे..





राधीका लखनके पीछे बीलकुल पागल होगइ थी.. लखनकी इतनी बीवीया होनेके बावजुद राधीकाको खुब प्यार मीलता था.. अब तो उनके गर्भमे लखनका बच्चा भी पलने लगा था.. लखनने राधीकाकी जमकर बजाइ.. ओर राधीकाको पुरी तराह संतुस्ट कर दीया..

फीर बहार आकर लखनने साहीलको फोन करके पुनमसे हुइ बात बतादी.. तो साहील थोडा परेसान होगया.. ओर वो लखनको सुबह मीलनेके लीये आने वाला था.. ओर साथमे उनके चाचाके घरकी चाबी भी साथ लाने वाला था.. ताकी वो कादीर ओर सायराको दे सके.. लखनने उसे सीधे घरपे आनेको केह दीया..

दो पहोरको अ‍ेक्जाम खतम होगइ तो सभी लडकीया आने लगी.. सबके लीये खाना रेडी था.. लखन ओफीसमे बैठा था तो राधीका सभी लडकीयोके लीये खानेका इन्तजाम देखने चली गइ.. फीर वो वापस ओफीसमे आकर बैठ गइ.. तभी दीया ओफीसमे आइ..

दीया : (लखनकी ओर कातीलाना मुस्कुराते) लीजीये मेडम.. आपको ओर जीजुको आना हे..

राधीका : (मुस्कुराते कार्ड लेते) क्या हे दीया..? कही तेरी सगाइ बगाइ तो नही..?

दीया : (मुस्कुराते) नही मेडम.. सगाइ तो अ‍ेक महीने पहेले ही होगइ हे.. ये मेरी सादीका कार्ड हे..

लखन : (मुस्कुराते) अरे वाह.. कोन्ग्रेच्युलेशन दीया.. सादी कर रही हो..?

दीया : (मुस्कुराते) हां जीजु.. अब अ‍ेक्क्षामके बाद मेरे पापाके घर चली जाउगी.. अ‍ेक महीनेके बाद सादी हे.. फीर मेडमको मीलने आया करुगी.. मेरा ससुराल पास हीकी सोसायटीमे हे..

राधीका : (मुस्कुराते) ठीक हे दीया.. तेरा ही होस्टेल हे आती रहेना.. मे ओर तेरे जीजु सादीमे जरुर आयेगे.. क्या उसी बोयफ्रेन्डसे सादी कर रही हो जो हर सन्डे तुजे मीलने आता था..?

दीया : (मुस्कुराते) यस मेम.. मेरे पीता ओर मेरे ससुर अ‍ेक दुसरेको जानते हे तो सादी पक्की होगइ.. ओर जीजु.. वो.. मेने नीलुको अलगसे कार्ड दीया हे.. चलो मे चलती हु..

राधीका : (मुस्कुराते) ठीक हे दीया.. खाना खाले.. फीर पढाइके लीये बैठ जाना..

दुसरे दीन सुबह साहील घरपे कामका बहाना बनाकर सीधा सहेर लखनके घरपे ही आगया.. पुनमने साहीलको भी चाइ नास्तेके लीये बीठा दीया.. वो समज गइ थीकी साहील यहा क्यु आया हे.. साहीलके चहेरेपे परेसानी साफ दीखाइ दे रही थी.. फीर वो ओर लखन राधीकाको लेकर होस्टेल चले गये.. ओर लखन साहीलको लेकर अंदर रुममे चला गया..

साहीला : (रुम देखते ही धीरेसे) कमीने.. ओफीसके अंदर रुम तो बहुत बढीया बनाया हे..

लखन : (हसते आंख मारते) हां.. तेरी इस भाभीने हमारी सादीसे पहेलेही बनवाया हे.. सीर्फ हमारे लीये.. हम दोनो यहा खुब मजे कीये हे.. ओर अभी भी करते हे.. उनको यही अच्छा लगता हे..

साहील : (हसते) क्या अभी भी..? अब तो तुम दोनोकी सादी होगइ हे..

लखन : (मुस्कुराते) हां यार मेरी सास गुजर गइ तो अब मेरे साथ ही रहेती हे.. अच्छा बैठ इधर ओर बता क्या परेसानी हे..?

साहील : (बैठते धीरेसे) भाइ जबसे आपने मुजे सब बताया तबसे दीमाग ही काम नही करता.. अ‍ैसा कैसे हो सकता हे..? मे अम्मासे बहुत प्यार करता हु.. ओर वोभी मुजे अपना सोहर मानने लगी हे.. कल रात उनसे बात हुइ तो वो भी परेसान होगइ हे.. अब आप ही बताओ हम क्या करे..?

लखन : (मुस्कुराते) देख भाइ.. जो परीस्थीतीसे तु गुजर रहा हे वो परीस्थीतीसे मेभी गुजर चुका हु.. मे तेरी लता भाभीसे खुब प्यार करता था.. ओर अचानक मुजे पता चलाकी वो मुजसे नही बडे भैयाको प्यार करती थी.. ओर उनको पानेके लीये मेरा इस्तमाल कीया.. सोचले.. तब मुजपे क्या गुजरी होगी..?

साहील : हां यार.. हम सब यही सोच रहे थे.. की ये सब क्या हो रहा हे.. क्युकी तुम सबके रीस्तोके बारेमे पता ही नही चलता..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ तुभी इस रीस्ते नातेके चकरमे मत पड.. मुजे इतना दुख नही हुआ.. क्युकी मेने भी भाइकी बीवीसे सादी करली.. सृती भाभी.. आज पुनो दीदी हे सृती हे रजीया हे ये तेरी राधु भाभी हे.. मे इनमे ही बहुत खुस हु..

साहील : (हसते) हां यार.. जो बात हम लोगोमे हे वो सब तुम दोनो भाइके पास हे.. दोनोकी कीतनी बीवीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) ओर तुमतो अ‍ेक जा रही हे उनमे ही रोने लगे.. देख साहील.. अच्छे माहोल ओर खान पानकी वजहसे तेरे चाचा भी काफी खुस दीख रहे हे.. पुछले तेरी चाचीको.. की उनको अब कीतना प्यार मील रहा हे..

साहील : (मुस्कुराते) हां भाइ.. आज कल वो काफी खुस दीख रही हे.. वैसे भी उनका सरीर भी काफी अच्छा होगया हे..

लखन : (मुस्कुराते) कमीने अब हप्तेमे तीन बार तेरे चाचाका ले रही हे.. सरीरतो भर ही जायेगा.. देख भाइ.. वैसे भी तुम दुखी मत हो.. भले ही वो सलमा भाभी तेरे चाचासे सादी करले.. लेकीन फीर भी तुजे वोही प्यार मीलता रहेगा.. जो अभी मील रहा हे.. उल्टा बदलेमे तुजे दुसरी चुत भी मीलेगी.. लेले बदला..
 
साहील : (आस्चर्यसे देखते) दुसरी चुत..? मतलब..? मे समजा नही..

लखन : (सामने देखते थोडा जुकते धीरेसे) भाइ बुरा मत मानना.. अच्छा ये बता.. तुजे तेरी चाची कैसी लगती हे..?

साहीला : (सरमाते धीरेसे) कैसी लगती हे मतलब..? मेरी असली मां वो ही हे..

लखन : कमीने अब तेरी असली मां सलमा भाभी हे.. जब तु उनको ठोकता हे तो फीर तेरी चाचीको ठोकनेमे क्या प्रेबलेम हे..? वो.. जो.. अभी मेरी सादीसे पेहेले तुजे मीलने आइ थी.. वोभी तो तेरी असली बहेन थी.. कमीने उनको ठोकनेमे तो तुजे कोइ सरम नही आइ..?

साहील : (सरमाते हसते) क्या..? कमीने तुजे सब पता चल गया..? कैसे..?

लखन : (मुस्कुराते) कमीने मत भुल मेरी बीवी कौन हे.. पता हेना तुजे.. पुनोको सब पता चल जाता हे..? उन्होने ही मुजे सब कुछ बताया.. तेरी अम्माके बारेमे.. ओर तेरी चाचाके बारेमे भी..

साहील : (अपना सर पकडते) अरे हां यार.. वोतो मे भुल ही गयाकी पुनम भाभीको सब पता चल जाता हे.. तो क्या चाचाके बारेमे उन्होने ही तुजे सब बताया..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. सीर्फ तेरे चाचाके बारेमे ही नही.. तेरी चाचीके बारेमे भी.. तेरे पुरे खानदानके बारेमे भी बहुत कुछ जानता हु.. साहील कुछ राज अ‍ैसे होते हे वो कभी उजागर नही होते..

साहील : (सामने देखते) फीर भी..? बतादो मुजे.. बुरा नही लगेगा..

लखन : (कुछ देर सामने देखते) देख साहील.. अभी तुमने कहाना वो मेरी असली मां हे.. तो सुन.. कादीर भाइ भी उनके सगे बेटे हेनां..? अगर उनको कोइ सरम नही आइ तो फीर तु क्यु संकोच कर रहा हे..?

साहील : (सामने देखते) मतलब..? क्या बोल रहे हो भाइ..? साफ साफ बोलो..

लखन : (मुस्कुराते) मतलब यही की तेरा कादीर भाइ तेरी सायरा दीदी ओर उनकी अम्मी.. दोनोको धोखा दे रहा था.. मतलब वो दोनोको अ‍ेक दुसरेको छुपाकर ठोकता था.. बोल अब कुछ कहेना हे..?

साहील : (आस्चर्यसे देखते) क्या.. अम्मीको भी..? मतलब मेरी चाचीको भी..?

लखन : (मुस्कुराते) हां कमीने.. अब मेरी बात ध्यानसे सुन.. तुजे इसी बातका फायदा उठाना हे..

कहेते लखनने साहीलको कादीरका सायरा ओर उनकी अम्मीके बीच जोभी चकर था उसीके बारेमे बता दीया.. जीसे सुनकर साहील भी सोक्ट होगया.. फीर लखनने साहीलको सब कुछ बता दीया की उनकी चाचीको पानेके लीये सलमाको क्या समजाना हे.. जो उनको पुनमने बताया था..

फीर लखनने साहीलको उनकी बडी बहेन सायराके बारेमे भी बता दीया.. अब अपनी चाची ओर सायराके बारेमे सोचते ओर लखनकी बाते सुनकर साहीलका लंड जटके मारने लगा.. तो साहील उसे अ‍ेडजेस्ट करने लगा जीसे देखकर लखन भी जोरोसे हसने लगा..

साहील : (हसते) कमीने हस क्या रहा हे.. तु बात ही अ‍ैसी कर रहा हे मुजसे कंट्रोल नही होता..

लखन : (हसते) कमीने इसीलीये बोल रहा हु.. भुलजा सब रीस्ते नाते.. सीर्फ यही सोच सामने सीर्फ अ‍ेक ओरत हे.. ओर तु अकेला अ‍ेक मर्द.. मत सोच वो मेरी असली मां हे वो बडी बहेन हे.. मेरी तराह सबको खुलकर प्यार कर.. फायदेमे ओर खुस रहेगा.. अगर वो खुद अ‍ैसा चाहती हे तो तु क्यु साधु बनता हे..?

साहील : (मुस्कुराते) हां यार बात तो तेरी सही हे.. मे आज ही जाकर अम्माको समजाता हु..

लखन : (हसते) कमीने अब तो उसे अम्मा मत बोल.. बीवी हे तेरी.. ओर तेरे बच्चेकी होने वाली अम्मा..

साहील : (मुस्कुराते) हां यार क्या करु.. चाची ओर चाचाके सामने उसे वही कहेना पडता हे..

लखन : (मुस्कुराते) सुन उनको समजा.. तेरे ओर उनके रीस्तेमे कोइ फर्क नही पडेगा.. ओर उसे ये भी समजा.. की तेरी चाचीके साथ तेरी सेटींग करवादे.. ताकी तेरी भी चुप ओर मेरी भी चुप..

साहील : (हसते) कमीने सब समज गया.. क्या आइडीया नीकाला हे तुमने.. सुन.. चल सायरा दीदीके घर जाना हे.. उसे चाबी देने.. ओर उनके घरका सामान भी पेक करवाना पडेगा.. यार क्या सचमे कादीर भाइसे बच्चा नही होपायेगा..? साला बहेन चोद तो थाही.. पता नही था कमीना मेरी तराह मादरचोद भी होगा.. हें..हें..हें..

लखन : (जोरोसे हसते) हां यार.. पुनोने तो यही कहा हे.. अब असली वजह तो तुजे सायरा दीदी ही बता सकती हे.. ओर सुन.. वो आगे बढे तो पीछे मत हटना.. समज गयानां..? चल..

साहील : (मुस्कुराते) यार अ‍ेक मीनीट.. भाइ तो अपनी ओफीसमे जोबपे होगे.. तो फोन करके उनका अ‍ेड्रेस ले लेता हु..

लखन : (मुस्कुराते) भाइ.. उनको क्यु..? सीधा तेरी सायरा दीदीको ही फोन करनां..

साहील : (कादीरको फोन लगाते) भाइ.. उनका नंबर मेरे पास नही हे..

फीर साहीलने कादीरसे फोनपे बात करके उनके घरका अ‍ेड्रेस लेलीया.. ओर लखन साहील उनके घरपे चले गये.. पहेले साहील आगे गया ओर मेइन डोरकी घंटी बजाइ.. तो सायरा कीचनमे खाना बना रही थी.. जैसे ही घंटी बजी सायरा हाथ पोछते दरवाजा खोलती हे..

सायरा : (खुस होते जोरोसे चीलाते) साहील..?

ओर सामने साहीलको देखते ही पागल जैसी होगइ.. उसने साहीलको जोरोसे बाहोमे भर लीया.. सायराकी आंखसे आंसु नीकल गये.. तभी सायराको अपने नीचे कुछ चुभन महेसुस हुआ.. तो उनकी नजर लखनकी ओर गइ तो वो जटसे साहीलसे अलग होगइ ओर सरमाकर लखनको नजस्ते कीया फीर तीनो घरमे आगये..

साहील कुछ देरतक सायराको देखता रहा.. उनका बदन काफी भर गया था.. वो अब लडकीसे अ‍ेक ओरत जैसे दीख रही थी ओर पहेलेसे भी ज्यादा सेक्सी दीख रही थी.. उनके मम्मे भी काफी बडे होगये थे.. तो साहील सायराको देखते ही पागल होने लगा.. ओर उनका हथीयार अंगडाइ लेते जटके मारने लगा.. तो सायरा भी साहीलके पेन्टके उभारको देखते सोक्ट होगइ.. तभी..

कन्टीन्यु
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७५

साहील कुछ देरतक सायराको देखता रहा.. उनका बदन काफी भर गया था.. वो अब लडकीसे अ‍ेक ओरत जैसे दीख रही थी ओर पहेलेसे भी ज्यादा सेक्सी दीख रही थी.. उनके मम्मे भी काफी बडे होगये थे.. तो साहील सायराको देखते ही पागल होने लगा.. ओर उनका हथीयार अंगडाइ लेते जटके मारने लगा.. तो सायरा भी साहीलके पेन्टके उभारको देखते सोक्ट होगइ.. तभी.. अब आगे

सायरा : (पेन्टके उभारको टेडी नजरोसे देखते मनमे) या खु.., ये मे क्या देख रही हु इतना बडा..? दोनो सगे भाइ हे तो फीर कादीर भैयाका इतना बडा क्यु नही हे..? कैसे नीचे चुभ रहा था.. चुत गीली करदी.. जीतो चाहता हे इसे अभी रुममे लेजाकर चुदवालु.. लेकीन साथमे छोटे ठाकुरजो हे..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी कहा खोगइ..? अब बैठनेके लीये भी कहोगी की नही..?

सायरा : (खुस होते) ओह.. सोरी सोरी भाइ.. आओ बैठो लधर.. कैसे हो..? मेने तो सोचा तुभी सबकी तराह इस बडी दीदीको भुल ही गया.. (उभारकी ओर देखते) भाइ काफी बडे हो गये हो.. हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) हां.. दीदी कैसी बाते कर रही हो.. भला मे कभी आपको भुल सकता हु..? इसे मीलीये.. हमारे गांवके ठाकुर ओर मेरे अच्छे दोस्त.. लखन भैया..

सायरा : (मुस्कुराते हाथ जोडते) मे जानती हु इनको.. गांवमे देखा हे.. आइअ‍े बैठीये..

साहील : (हसते) दीदी.. सादीके बाद तो आप भी काफी बदल गइ हो.. मेरी दीदी कम मेरी भाभी ज्यादा लग रही हो.. हें..हें..हें..

सायरा : (सर्मसार होते पीठमे अ‍ेक मुका मारते) चुप होजाओ.. मे तेरी दीदी ही सही हु.. तुजे भाभी कहेते सरम भी नही आइ.. येतो साथमे छोटे ठाकुर हे.. वरना आज जरुर तुम मेरे हाथोसे पीटते.. हें..हें..हें..

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. तो इसमे साहीलने गलत भी क्या कहा.. आपने हमारे कादीर भाइसे नीकाह कीया हे.. बल्की हमोर जीतने दोस्त थे सबने उनकी बहेनसे सादीया करली हे.. तो उनकी सादीसे पहेले हम भी उनको दीदी कहेते थे.. ओर अब भाभी कहेते हे.. हें..हें..हें..

सायरा : (मुहपे हाथ रखते हसते धीरेसे) हाइ दैया.. क्या सचमे..? सभी दोस्तोने अपनी बहेनसे सादी करली हे..? मुजेतो यकीन नही होता..

साहील : (मुस्कुराते) हां दीदी.. सचमे.. हमारे गांवमे रीस्तोको लेकर बहुत बडा बदलाव हुआ हे.. वहा कोइ रीस्ते नाते नही देखते.. ये सच हे..

सायरा : (आस्चर्यसे आंख बडी करते) आइ कान्ट बीलीव.. यहा तो कीतना बडा हंगामा हो गया था..

साहील : (बैठते) दीदी.. वो सब बाते बादमे.. कभी फुरसतमे पुरी कहानी सुनाउगा.. पहेले तो आप ये चाबी ले लीजीये.. ओर अपने घरपे रहेने चले जाइअ‍े..

सायरा : (मुस्कुराते चाबी लेते) भाइ.. अगर तुम ओर लखन भैया अबु अम्मीको नही समजाते तो वो हमे कभी माफ नही करते.. क्युकी हमने काम ही अ‍ैसा कीया हे..

साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. आपने ओर भाइने कुछ गलत काम नही कीया.. आपको पता हे अब हमारे गांवमे सब अ‍ैसे रीस्तोमे आने लगे हे.. भाइ बहेनको तो छोडो.. ससुर बहु.. भाभी देवर.. मामी भांजा.. ये सब तो ठीक हे मां बेटे भी अ‍ैसे रीस्तोमे बंधे हुअ‍े हे..

सायरा : (आस्चर्यसे देखते) भाइ क्या बात कर रहे हे..? मां बेटा भी..?

साहील : (मुस्कुराते) हां दीदी.. लेकीन वो ही रीस्ते.. जो वीधवा याफीर त्यक्ता हो.. उसीसे सब सादी कर रहे हे.. कोइ अफैयर नही.. ओर आपको पता हे..? मेरे सभी दोस्तोने भी अपनी बहेनसे सादी करली हे.. हाल हीमे लखन भैयाने भी पुनोदीदीसे सादी करली हे.. ओर मुजे आपसे अ‍ेक बार ओर बतानी हे..

सायरा : (मुस्कुराते) जानती हु में.. आप भी सबानासे सादी करने वाले हे..

साहील : (आस्चर्यसे सामने देखते धीरेसे) आपको सब कैसे पता..?

सायरा : (मुस्कुराते) सबु मीली थी मुजे.. जब रीजल्ट आया तब हम दोनो रास्तेमे मीले थे.. मुजसे बहुत नाराज थी.. तो उसीने बतायाकी वो तुमसे सादी करने वाली हे..

साहील : (मुस्कुराते) हां लेकीन उनकी पुरी पढाइ के बाद.. अभी नही.. बस अ‍ेक बार उसे डोक्टर बनने दो.. फीर हमारे गांवमे ही अस्पतालमे उनको जोब मील जायेगी..

सायरा : (मुस्कुराते) तब तो खु...का लाख लाख शुक्र हे.. अच्छा ये बताओ दोनो क्या पीओगे..? अभी तेरे बडे भैया भी लंचके लीये आजायेगे..

कादीर : (अंदर आते हसते) आजायेगे नही आगया.. अगर मेरा भाइ आया हेतो मे जल्दी घर नही आ सकता क्या..? इनका फोन आते ही मे ओफीससे नीकल गया.. कहो कैस हो मेरे भाइ..? अरे लखन भैया..? आप भी आये हो..?

कहेते कादीर अपना बेग रखते लखनको गले मीला.. फीर साहीलको जोरोसे गले लगा लीया.. ओर दोनोके पास बैठ गया.. सायरा अब भी हसते बार बार साहीलके उभारको टेडी नजरोसे देखती रही.. फीर सायराने कादीरको घरकी चाबी देदी.. जीसे हाथमे लेकर कादीरकी आंख भर आइ.. ओर वो अ‍ेक नजरसे चाबीको देखता रहा..
 
Back
Top