Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती - Page 105 - SexBaba
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Incest रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती

जरीना : (मुस्कुराते) पहेली बात.. अब ये हमारा साहील नही हे.. मतलब.. हमारा बेटा.. अब वो हमारा भतीजा हे.. बडे भाइसाहबने उसे बाकायदा गोद लीया हे.. ओर दुसरा.. वो अब इतना छोटा भी नही हे.. अब वो बडा ओर जवान हो चुका हे.. उसने सलमा भाभीको प्रेगनेन्ट तक करदीया हे.. वो इतना समजदार हेकी घरकी सब जीम्वेवारीया उठा रहा हे..

फीरोज : (थोडा चीडतेम् अरे पता हे मुजे.. मेरा मतलब.. वो बच्चेकी जीम्वेवारी कैसे उठा पायेगा..? उनके तो अभी मोज मस्ती करनेके दीन हे.. हम कीसी अच्छी लडकीसे सादी करवायेगेनां उनकी.. तुजे सलमा भाभीको समजाना चाहीये..

जरीना : (मुस्कुराते) समजाया तब जाके मानी.. लेकीन वो भी अ‍ेक सर्तके साथ.. हमे उनकी सर्तको माननी पडेगी.. तभी वो आपसे नीकाह करेगी..

फीरोज : (उत्सुक्तासे) सर्त..? कौनसी सर्त..? अरी बताना.. क्या सर्त हे उनकी..?

जरीना : (सामने देखते) क्या आप उनकी सर्त मानोगे..? क्युकी उसने सर्त ही अ‍ैसी रखी हे..

फीरोज : (थोडा चीडते) अरे बता तो सही.. अ‍ैसे ही कैसे डीसाइड करलु..? बता..

जरीना : (आंखोमे देखते धीरेसे) वो कहेती हेकी हमारी सबुकी सादी साहीलसे करवादी जाये.. तब ही वो नीकाहके लीये राजी हे..

फीरोज : (चोंकते) अरे.. ये क्या बकवास हे.. अ‍ैसा कैसे हो सकता हे..? कही वो पागलतो नही होगइ..? क्या वो जानती नहीकी सबु ओर साहील दोनो सगे भाइ बहेन हे..

जरीना : (नजरे चुराते जुठ बोलते) मेने कहा उसे.. तो कहेती हे साहीलको मेने बाकायदा गोद लीया हे ओर साहील अब आपका बेटा नही हे वो मेरा हे.. ओर सबहु उनके चाचाकी लडकी हे..

फीरोज : (सामने देखते) जरीना.. मे मानता हु अब हम दोनो उनके चाचा चाची हे.. लेकीन फीर भी खुन तो हमारा ही हे.. सबुतो उनकी बहेन हेनां..?

जरीना : (थोडा गुस्सा होते) अब आपको गांवके नीयमोसे कोइ अ‍ेतराज नही..? अपनी वीधवा भाभीसे नीकाह करनेको तैयार होगये.. हमारे कादीर सायराको माफ करदीया.. ओर गांवमे भी सबलोग अपनी सगी बहेनसे सादीया कर रहे हे.. बल्की साहीलके सभी दोस्तोने भी उनकी सगी बहेनोसे सादीया करली हे.. तो फीर आपको साहील ओर सबुकी सादीमे क्या दीकत हे..?

फीरोज : (कुछ सोचते) यार बात तो तेरी सही हे.. लेकीन..

जरीना : (सामने देखते) लेकीन बेकीन कुछ नही.. अगर आपको भाभीकी सर्त मंजुर हेतो बतादो.. वो आपसे नीकाह करलेगी.. वरना भुल जाओ अपनी भाभीको.. हमारा साहील ही उनसे नीकाह करके सम्हाल लेगा..

फीरोज : (हाथसे बाजी फीसलते) अरे नही नही.. ठीक हे.. लेकीन तु अ‍ेक बार सबुसे भी पुछले.. अगर वो राजी हेतो मुजे कोइ अ‍ेतराज नही.. कहे देना भाभीको.. अब तो वो मुजसे नीकाह करेगीनां..?

जरीना : (सामने देखते) सब मर्द अ‍ेक जैसे ही होते हे.. नइ चुत मीली नही की लार टपकाने लगे.. ठीक हे मे भाभीको बता दुगी..

फीरोज : (खुस होते जोरोसे गाल चुमते) ओह.. डार्लींग आइ लव यु..

जरीना : (हसते) ठीक हे ठीक हे.. ये सब प्यार अपनी भाभीके लीये हे.. नाकी बीवीके लीये..

फीरोज : (मुस्कुराते) यार तु नाराज मत हो.. अच्छी नही लगती.. मे कल ही काजी साहबसे बात करलेता हु.. हें..हें..हें..

जरीना : (सामने देखते धीरेसे) फीरोज.. अ‍ेक बार सबुसे बात तो कर लेनेदो.. फीर भाभीका जवाब आयेगा..

फीरोज : (मुस्कुराते) यार वो मान जायेगी.. हम दोनो उनको समजायेगे.. वो हमारी बात नही टालेगी.. मुजे हमारी सबुपे पुरा यकीन हे..

जरीना : (सामने देखते) ठीक हे.. अब उपरसे नीचे उतरो.. कबसे मेरे उपर पडे हो.. देखो चदर भी बीगड गइ..

फीरोन : (मुस्कुराते) बेगम.. चलना अ‍ेक बार ओर करते हे.. तु खडा करदे..

जरीना : (गुस्सा करते) जाओ जाओ.. सरम भी नही आती.. अब अपना प्यार अपनी भाभीके लीये बचाकर रखो.. कही अपनी सुहागरातमे ही ठुस ना होजाओ.. मे बाथरुम जाके आती हु..

फीरोज : (मुस्कुराते) नही.. उस दीन गोली खाउगानां.. पुरी रात ठोकुगा उनको.. हें..हें..हें..

जरीना : (बाथरुमकी ओर जाते मनमे गालीया देते) मादरजात.. कीतना कमीना हे.. अपनी भाभीको चोदनेके लीये कैसा मरा जारहा हे.. बीवीको तो ठीकसे चोद नही पाता.. ओर अब भाभीको चोदेगा.. सब मर्द कमीने अ‍ैक जैसे ही हे.. जब पता चलेगानां उनकी बीवी अपने बेटेसे चुदवा रही हे तब पता चलेगा.. अब तो साहीलको पटाकर ही रहुगी.. कीतना दमदार हथीयार हे उनका.. मुजे सलमा दीदीकी बात मानलेनी चाहीये.. साहील हम दोनोको खुस रख सकता हे.. अगर मे मेरे बडे बेटेसे चुदवा सकती हु तो छोटेसे क्यु नही..?
 




तो दुसरी ओर साहील सलमाको जोरोसे चोद रहा था.. ओर सलमा भी कामुक्तासे साहीलको दुसरी बार जेल रही थी.. फीर दोनो साथमे जडकर सांत होगये.. ओर सलमाने साहीलकी पीठको सहेलाते जरीनासे हुइ बात बतादी.. जीसे सुनकर साहील भी मनमे खुस होने लगा..

साहील : (होंठ चुमते) डार्लीग.. क्या सचमे चाची रीलेशन रखनेको मान गइ..?

सलमा : (मुस्कुराते होंठ चुमते) हां कमीनी बहुत प्यासी ओर मुजसे भी चुदकड हे.. जान.. मे चाहती हु जीस दीन मे फीरोज भाइके साथ अपनी सुहागरात मनाउ.. उसी दीन आप जरीनाके साथ अपनी सुहागरात मनालो.. क्युकी उस दीन मे अकेली आपके चाचाके साथ रहुगी.. ओर मेरे नीकाहका बदला लेलो..

साहील : (मुस्कुराते) क्या चाची मान जायेगी..?

सलमा : (मुस्कुराते) हां.. वो रीलेशन रखनेतो राजी होगइ हे.. तो मानेगी कैसे नही..? मे उनसे बात करलुगी.. आप उस दीन उनका काम तमाम कर देना.. फीर तो मे हु ही.. अब हम दीनमे अपना काम कर लेगे..

साहील : (मुस्कुराते) यार दीनमे तो चाची भी होगीनां..?

सलमा : (मुस्कुराते) हां तो..? क्या हुआ..? इसीलीये तो उनको हम दोनोके बारेमे सबकुछ बता दीया हे.. ओर मन होतो उसे भी दीनमे चोद लेना.. अब तो हम दोनो ही अ‍ेक साथ आपके साथ बीस्तर साजा करेगी.. कमीनीमे बहुत आग हे.. ठंडी करदो उसे..

साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे.. तो फीर करलो चाचाके साथ नीकाह.. कमीना मेरी बीवीको ले गया.. अब उनकी बीवी उनसे छीनता हुकी नही..

सलमा : (मुस्कुराते) हां.. बीवीके साथ उनकी बेटी भी.. अच्छा अ‍ेक बात बताइअ‍े.. क्या वो आइ थी तो उनके साथ कीतनी बार कीया..?

साहील : (मुस्कुराते) कमसे कम चारसे पांच बार चोद लीया.. अ‍ेक बार हमारे खेतोकी रुममे भी..

सलमा : (कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते) अगर उनकी याद आयेतो वहा भी मीलने चले जाना.. क्या उनका फोन बोन आता हेकी नही..?

साहील : (मुस्कुराते) उसे चोदनेके बाद वोतो मेरी दीवानी होगइ हे.. हर दीन फोन करती हे.. रातमे उसे फोन सेक्स भी करवाता हु.. वहा मीलनेके लीये बुलाती हे..

सलमा : (मुस्कुराते) हां तो चले जाइअ‍े.. बस.. उसे कहेना नीकाह तक अपनी सेफ्टीका खयाल रखे.. वरना मेरी तराह पेट फुलाकर घुमती रहेगी.. हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) उनका तो पता नही लेकीन अ‍ेक बार चाचीका पेट नही फुलाउगा तबतक मुजे चेइन नही मीलेगा.. कमीना मेरी बीवी चुराके लेगया..

सलमा : (मुस्कुराते गाल चुमते) क्यु जी छोटा कर रहे हे.. मे पहेली बीवी तो आपकी ही रहुगी.. उन बुढेमे इतना दम कहा जो आपकी बीवीको संतुस्ट कर सके.. अगर जरुरत पडी तो जरीनाका नीकाह भी आपसे करवा दुगी.. फीर मां बेटीको ठोकते रहीये..

साहील : (मुस्कुराते) तो फीर तुजे बुरा नही लगेगा..?

सलमा : (मुस्कुराते) कीस बातका बुरा..? अगर उस बुढेको मुजसे सादी करनेमे सरम नही हे तो फीर मे क्यु सरमाउ..? वो आपकी बीवी छीन रहा हे तो आप भी उनकी बीवी छीनलो.. हीसाब बराबर..

दोनो बाते करते कब सो गये पता ही नही चला.. गांवमे अ‍ैसे रीस्ते ओर गहेरे होते गये.. अब कीसीको भी कीसी भी रीस्तेमे सादी करने या नाजायज रीलेशन रखनेमे कोइ संकोच नही होता था.. अब तो आस पासके गांवमे भी ये सब सामान्य होने लगा था..

ओर अ‍ैसे ही दीन बीतने लगे.. इसी बीच लखन ओर भावीका भी फोनपे बात करते ओर चेट करते काफी आगे बढ चुके थे.. भावीका अक्सर लखनको नोनवेज चुटकुले भेजने लगी थी.. ओर टेक्स इमेजके साथ दील साइन वाली इमोजी भी आदान प्रदान होने लगी थी..

इसी बीच चंदा बी बहुत बैचेन होगइ थी.. क्युकी कइ दीनोसे लखन उनसे ठीकसे बात भी नही करता था.. तो चंदा ही लखनसे बात करनेकी कोसीस करने लगी.. मानो वो लखनसे बात करनेके लीये तरसने लगी थी.. ओर अ‍ेक दीन दोनो सोफेपे अकेले थे..
 
चंदा : (सरमाते धीरेसे) लखन.. प्लीज.. मुजसे बात क्यु नही करते..? मुजसे नाराज हे क्या..?

लखन : (धीरेसे) नही भाभी.. मुजे लगा.. मेरा गीफ्ट देना आपको पसंद नही आया..

चंदा : (सरमाते धीरेसे) यार वो बात नही हे.. क्या अ‍ैसी गीफ्ट..? ये गर्लफ्रेन्डको देते हेनां..?

लखन : (सामने देखते धीरेसे) तो क्या हम दोस्त नही हे..? ओर आप गल्र्स भी हो.. तो आप मेरी गर्ल फ्रेन्ड नही हुइ..?

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) अरे मे वो गर्लफ्रेन्डकी बात नही कर रही.. ठीक हे.. माफ करदो मुजे.. मुजसे गलती होगइ.. स्वीकार करती हु आपकी गीफ्ट ओर कुछ..? मे आपसे नाराज नही हु यार.. मुजसे बात करलीया करो.. वरना अ‍ेक घुटनसी होने लगती हे.. फीर क्या फर्क पडता हे.. की यहा रहु या गांवमे..

लखन : (मुस्कुराते) ठीक हे भाभी.. सोरी.. अब बात करुगा ओके..?

चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे) तो क्या अब अपनी गर्ल फ्रेन्डको घुमाने नही लेजाओगे..

लखन : (सामने मुस्कुराते) क्या आप चलोगी मेरे साथ..? देखना फीर मे कही भी लेजाउगा..

चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे) हां चलुगी.. कही भी.. बस.. मे मेरे बोय फ्रेन्डके साथ टाइम स्पेन्ड करना चाहती हु.. बोलो.. कब लेजा रहे हो..?

लखन : (मुस्कुुराते) बहुत जल्द.. वो भी लोंग ड्राइव.. चलोगीनां..?

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) हां चलुगी.. जनाबका इरादा तो नेक हेनां..? हें..हें..हें..

लखन : (कामुक मुस्कुराते) आप जैसी गर्लफ्रेन्ड साथ होगी तो इरादा भी बदल सकता हे.. साथ चलोगी तो पता चल जायेगा.. अ‍ेक बार सोचलो..

चंदा : (सरमाते मुस्कुराते) वेरी फनी.. आप बहुत मजाकीये हो.. ठीक हे.. सोचलीया.. मे चलुगी..

इसी बीच वीभुकी भी अंतीम वीधी हो चुकी थी.. तो तीन दीनके बाद मुनाने लखनको सहेरसे सीधे ही आश्रममे आनेके लीये कहा.. तो लखन पुनमको कहेकर चंदाको लेकर आश्रम चला गया.. वहा जाकर देखा तो मुना बरखा बसंती श्रीधर ब्रीन्दा के साथ बंसी सांतीके साथ जागृती भी आइ थी..

तो जागृती लखनको देखते ही सर्मसार होगइ.. सभी लेडीस चंदाको गले मीलते मीलने लगी.. ओर सभी दोस्तो लखनके गले लग गये.. साहील अकेला ही आया था.. फीर सबलोग अंदर बाबाके पास चले गये.. तो बाबा लखन ओर चंदाको देखकर हसने लगे.. तो चंदा बहुत ही सरमाइ.. ओर बाबाके पैर छु लीये..

बाबा : (मुस्कुराते) आगइ मेरी बच्ची..? अब तो सब ठीक हेनां..?

चंदा : (सरमाते धीरेसे) हां बाबा.. जबसे आपने कहा तबसे आज कल मेरे देवरके घरपे हु.. वहा बडा सुकुन मीलता हे..

बाबा : (मुस्कुराते) बेटा तेरे पतीसे ज्यादा यही तुजे खुस रखेगा.. तु इनके घर ही रहेजा.. तेरा भवीस्य अब वही उजवल हे..

चंदा : (लखनकी ओर देखकर सरमाते मुस्कुराते) जी बाबा.. अब तो मेने भी तैय करलीया हे.. मे इनके पास ही रहुगी.. ये मेरा बहुत खयाल रखते हे..

बाबा : (मुस्कुराते) अच्छा ठीक हे.. अब सबलोग जाओ मंदीरमे सब रेडी हे..

फीर सबलोग मुस्कुराते खडे हो गये ओर मंदीरकी ओर चलने लगे.. आज बसंती कीसी दुल्हनकी तराह सजी हुइ थी.. ओर मुनाके साथ ही चल रही थी.. तो चंदा भी ब्रीन्दाके साथ चलते उनसे हस हसके बाते करते चलने लगी.. ओर बसंतीकी सादीके बारेमे सबकुछ पुछती रही..

आखीर सबलोग मंदीरमे आगये.. वहा पंडीतजीने पहेले ही सबकुछ कंपलीट रखा था.. ओर उसने मुना ओर बसंतीको साथ बीठा दीया.. फीर उनकी सादी करवाने लगे.. तो चंदा बार बार लखनकी ओर देखकर मुस्कुरा रही थी.. तो जागृती भी चोर नजरसे लखनकी ओर देखती रही..





अ‍ेक पवीत्र मंदिरमे वीधवा मां ओर उनके बेटेकी सादी हो रही थी.. दोनो रीस्तेमे कौन हे वो अब कुतुहलका वीसय नही रहा था.. बस बाबाका अ‍ेक ही आदेश था.. जो भी मंदीरमे सादीके लीये आये उनको बीना पुछताछ सादी करवादो.. अब यहा भी बीलकुल उस हीमाचलके आश्रमकी तराह होने लगा था..

इसी बीच सब दोस्त बाते करते रहे.. ओर बातो ही बातोमे साहील लखनको लेकर थोडा दुर चला गया.. ओर घरमे जो भी कुछ हो रहा था उनके बारेमे बता दीया.. साहीलने बतायाकी कैसे उनके चाचाने सलमासे सादीकी बात की.. ओर सलमा साहीलने मीलकर कैसी योजना बनाइ थी..
 
लखन : (मुस्कुराते धीरेसे) कमीने.. तुजे तो घरमे ही दो दो चुत मील गइ.. ओर तेरे चाचासे सबानाकी सादीकी बात भी करली.. बहुत अच्छा हे.. आगे बढ.. मे तेरे साथ हु..

साहील : (सरमाते मुस्कुराते) भाइ.. कल कादीर भाइ ओर सायरा दीदीका फोन आया था.. वहासे सीधा ही उनके घर जा रहा हु.. अ‍ेक दीन पहेले.. सुबह कादीर भाइको रेल्वे स्टेशन छोडने जाना हे.. फीर तीन चार दीन वही हु.. मे ओर सायरा दीदी.. अकेले.. आप समज गयेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) अच्छा.. मतलब मछली खुद ही जालमे फसना चाहती हे.. कमीने अ‍ैसा मौका बार बार नही मीलता.. करले कीला फतेह.. अगर वहा सामान बामान पेक करनम मेरी मददकी जरुरत होतो कहेनां..

साहील : (मुस्कुराते) ठीक हे भाइ.. लेकीन तीन चार दीन हे.. मे मेनेज करलुगा.. मे घरसे कामका बहाना बनाकर आया हु.. वहा ओर यहा भी कीसीको नही पता.. तो प्लीज.. समज गयेनां..?

लखन : (हसते) बडा कमीना हे तु.. चल जा.. मोज कर.. कीसीको पता नही चलेगा.. इरादा तो नेक हेनां..? अगर वो आगे बढे तो तु पीछेहट मत करना..

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाइ मछली खुद ही जालमे फसना चाहती हेतो मे क्या करु..?

दोनो बाते करते रहे.. आधे घंटेके बाद सादी सम्पन हुइ.. मुनाने बसंतीकी मांग भरदी थी ओर मंगलसुत्र भी पहेनाया.. अब बरखा ओर बसंती मां बेटीके साथ अ‍ेक दुसरेकी सौतन भी होगइ थी.. सबलोग भोजन करने बैठ गये.. तब चंदा लखनके साथ बीलकुल सटकर बैठी थी..





चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) लखन.. आज यहा आपके दोस्तकी सादीमे आपके साथ अ‍ेक बीवी होनी चाहीये थी.. ओर आप मुजे लेकर आगये..

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) बीवीना सही.. आप मेरी गर्ल फ्रेन्ड तो हो.. आपको दीखानेके लीये ही लाया हु.. की देखो.. दुनीयामे कैसे रीस्ते पनप रहे हे.. यही तो हे रीस्तोमे हसीन बदलाव..

चंदा : (मुस्कुराते धीरेसे) अच्छा.. तो आप पहेलेसे ही सब तैय करके मुजे यहा लाये हो.. क्या इरादा हे आपका..?

लखन : (मुस्कुराते धीरेसे कानमे) इरादातो नेक ही हे.. लेकीन आपने पुछ ही लीया हे तो यहा मंदीर भी हे.. मंडप भी रेडी हे.. रीस्तेदार जैसे दोस्त भी हे.. अगर आप कहोतो हम सादी करले..? हें..हें..हें..

चंदा : (सरमाकर जुठे गुस्सेसे जांगपे अ‍ेक मुका मारते) पुनोदी ठीक ही केह रही थी.. कीतने कमीने हो आप.. चार चार सादी करके भी जी नही भरा.. मत भुलो मे पहेलेसे ही सादी सुधा हु.. आपके बडे भाइकी अमानत..

लखन : (धीरेसे) क्या सचमे आप सादी सुधा जींदगी जी रही हे..? मत भुलो इसीलीये भाभीमाने कुछ फैसले लीये हे..

चंदा : (सोक्ट होते सामने देखते) क्या आप मंजुकी इस बातको सीरीयस मानते हे..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. उनकी हर बात मानता हु.. मां हे वो मेरी.. हम सबकी जननी.. इसका मतलब भी जानती हे..?

चंदा : (अ‍ेक नजरसे देखते) सबकी जननी..? मुजे सब जानना हे.. ये सब क्या हो रहा हे..? मेतो समजी वो हम सबके साथ मजाक कर रही हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. हम वापसीमे बात करेगे.. मे आपको सबकुछ बता दुगा..

सब लोगोने भोजन करलीया.. जागृती लखनसे अकेलेमे बात करना चाहती थी.. कमसे कम उनका फोन नंबर लेना चाहती थी.. लेकीन सांती उनके साथ ही होती थी.. जीसकी वजहसे जागृती लखनसे बात नही करपाइ.. क्युकी जागृती ओर लखनका राज सीर्फ दो लोग ही जानते थे.. अ‍ेक जयश्री ओर दुसरी सांती..

फीर सबलोग बाबासे आशीर्वाद लेकर नीकल गये.. सबने लखन ओर चंदाको गांव आनेका बहुत आग्रह कीया.. लेकीन लखन ओर चंदाने मना कर दीया.. फीर सबलोग गांवकी ओर नीकल गये.. तो साहील भी अपनी बाइक लेकर कादीरके घरकी ओर सहेर नीकल गया..

ओर लखन चंदा कारमे बैठ गये.. चंदा लखनकी बाजुमे बैठकर बहुत ही सरमाने लगी.. अब सीर्फ दोनो ही अकेले थे.. चंदा मनसे चाहती थीकी लखन खुद आगे बढे.. फीर दोनो सहेरकी ओर नीकल गये.. चंदा अब भी लखनकी ओर सवालीया नजरोसे देख रही थी..

चंदा : (मुस्कुराते) लखन.. क्या अभी जीनकी सादी हुइ वो दोनो पहेले मां बेटे थेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) हां भाभी.. जब उनके पीताजी थे तब ही मुनाका उनकी मांके साथ अफैर था.. अब उनके पीताजी गुजर गये ओर बसंती आंटी वीधवा होगइ.. तो मुनाने उनसे सादी करली.. ओर वो फीरसे सुहागरन होगइ.. बस.. वही बदलाव तो मोम चाहती हे.. उस हीमाचल की तराह..

चंदा : (मुस्कुराते) लेकीन मंजुको यहा अ‍ैसे बदलावकी क्या आवस्यक्ता पड गइ..?

लखन : (सामने देखते) क्यु..? आप उन हीमालयकी कहानीको नही जानती..? आप भी तो उस कहानीका हीस्सा हो.. वो ही राजा तो हमारे घर पैदा होने वाला हे.. ओर ये सब उनके आनेसे पहेलेकी भुमीका हे.. जो मंजु मोम ओर पुनोदी कर रही हे..

चंदा : (सामने देखते) माना की मे भी वोही हु.. तो क्या अ‍ैसे मां बेटेकी सादीसे कुछ फर्क पडेगा..?

लखन : (सामने देखते) आपकी सादीके बाद आप छोटी ही उमरमे आप वीधवा होगइ थी.. तो क्या आपकी जींदगीमे कुछ फर्क पडा था..?

चंदा : (सामने देखते सरमाते) बहुत कुछ.. आप समज सकते हो अ‍ेक सादी सुधा ओरत अकेली होजाती हे तो क्या फर्क पडता हे.. उनको कीतनी मुस्कीलोका सामना करना पडता हे..
 
लखन : (मुस्कुराते) फीर भी.. क्या क्या फर्क पडता हे.. हम दोस्त हे.. आप खुलकर बता सकती हो..

चंदा : (सरमाते नजरे जुकाते) पती चाहे कैसा भी हो.. जब वो होता हे तो कोइ उनकी बीवीके सामने नजर उठाकर देख भी नही सकता.. ओर जब ओरत अकेली होजाती हे तो वो खुद दुनीयाके सामने नजर नही उठा सकती.. इसीलीये ओरतकी जींदगीमे अ‍ेक मर्दका होना आवस्यक हे.. ओरतको अ‍ेक मर्दकी कमी हमेसा खलती हे.. बस.. यही फर्क पडता हे..

लखन : (सामने देखते) अ‍ेक्जेटली.. लेकीन यहा बात सीर्फ फर्क पडनेकी भी नही हे.. ओर बहुत कुछ हे.. आप जानती ही नही की वास्तवमे हमारा खानदान कौन हे.. हम उस राजाके अंस हे.. जहा आज भी उनके पोता पोतीया आपसमे सादी करते हे.. जैसे हमारे दादा परदादाने अपनी बहेनसे सादीया कीहे.. बाकी सब तो पुनो दीदी ही आपको खुलकर बता सकती हे..

चंदा : (जोरोसे हसते) क्या..? उनसे सादीके बाद भी दीदी कहेते हो..?

लखन : (मुस्कुराते) हां.. क्युकी मेने भी दीदीसे सादी करली हे.. भाइने भी अपनी बहेनसे सादी करली हे.. आपको तो सब पता हे.. ओर सच कहु तो अ‍ैसे रीस्तोमे प्यार बहुत हे..

चंदा : (मुस्कुराते) बेसरम..

लखन : (हसते) अरे..? इसमे बेसरमकी क्या बात हे..? क्यु अंकलने नीर्मला आंटीसे सादी नही की थी..? आपके बडे भैया ओर बडी बहेन ही थीनां..?

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) हां लेकीन तब सीचुअ‍ेशन कुछ ओर थी.. खैर छोडो ये सब बाते.. आप कुछ बताने वाले थे.. मंजुके बारेमे..

तो लखनने चंदाको मंजुके ओर उनके पीछले जन्मके बारेमे सबकुछ बता दीया.. ओर मंजुने उनको सृती ओर पुनमको करवाइ अपनी असली पहेचान.. ओर अनुभुतीके बारेमे भी बता दीया.. जीसे सुनकर चंदा भी सोक्ट हो गइ.. ओर उसे पुरा यकीन हो गयाकी वो सब कोइ सामान्य इन्सान नही हे..

चंदा : (मुस्कुराते) अच्छा.. तो ये बात हे..? इसीलीये हमारे घरमे सेक्स को सामान्य कार्यकी तराह लीया जा रहा हे.. तब तो मंजुने सही कीया हे..

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. मुजे अ‍ेक बात समजमे नही आती.. खाना पीना कपडे पहेनना.. सोच जाना.. सब हमारे तनकी जरुरत हे.. वैसे सेक्स भी तनकी जरुरत हे.. तो फीर सबलोग सेक्सको इतनी तवजो क्यु नही देते..? वो भीतो हमारे रोजमराकी जरुरत हे..

चंदा : (सरमाके मुस्कुराते) हंम.. लेकीन अब तो हमारे घरमे सबकुछ बदल गया हेनां..?

लखन : (मुस्कुराते) भाभी.. अब सीर्फ हमारे घरमे ही नही पुरे गांव ओर आजु बाजुके गांवमे भी ये सब होने लगा हे.. अगर इस बारेमे ज्यादा जानना होतो आप पुनोदीसे पुछ लेना.. वो सब जानती हे.. मे इस बारेमे ज्यादा कुछ नही बता सकता.. वहाकी पुरी कहानी..

चंदा : (सामने देखकर मुस्कुराते) उन कीताबको तो मेने भी पढा हे.. मे भी सब जानती हु.. उस राजाने तो अपनी दादीसे भी सादी करली थी.. बस.. पुरी तरह यकीन नही था.. लेकीन लगता हे अब पुनोदीसे बात करनी पडेगी.. देखो बातो बातोमे घर भी आगया.. आज आपके साथ बाते करते बहुत मजा आया.. थेन्क्स..

लखन : (मुस्कुराते) बस..? सीर्फ थेन्क्स..?

चंदा : (सरमाकर मुस्कुराते) तो फीर ओर क्या चाहीये आपको..? अगर ओर कुछ चाहीये तो अपनी बीवीओसे लेलेना.. इस गल्रफ्रेन्डसे तो सीर्फ थेन्क्स ही मीलेगा.. हें..हें..हें..

लखन : (हसते धीरेसे) येतो बहुत नाइन्साफी हे.. कमसे कम अ‍ेक हग.. अ‍ेक चुमा.. वोभी गालपे.. अपने बोयफ्रेन्डके लीये इतना भी नही कर सकती..?

चंदा : (सरमाते कातील नजरोसे) ज्यादा नौटंकी नही.. बडे बेसर्म हो आप.. अब चुपचाप अंदर चलीये..

दोनो बाते करते घरपे आगये.. दो पहोरको सबलोग खाना खाकर उपर आराम कर रहेथे.. होलमे कोइ नही था.. जैसे ही लखन उपर जाने लगा चंदाने हीमत करते लखनका हाथ पकड लीया.. ओर उसे हग करलीया.. तो लखन सोक्ट होते बहुत खुस होगया..





चंदा : (मुस्कुराते) इतनी सारी खुसीया.. तो मेरे बोयफ्रेन्डका अ‍ेक हग तो बनता ही हे.. वरना वो फीरसे नाराज होजायेगा..

कहा तो लखन मुस्कुराने लगा.. तभी अचानक लखनने बारी बारी चंदाके दोनो गालको चुम लीया.. तो चंदा सोक्ट होते यंत्रवत मुस्कुराते खडी रही.. ओर आस्चर्यसे लखनकी ओर देखती रही.. तो लखन चंदाकी ओर देखते मुस्कुराते उपरकी ओर जाने लगा.. ओर जाते चंदाको आंख मारदी..





इधर गांवमे मुना बसंतीकी सुहागरातके लीये खुद बरखा जागृती सांती ओर ब्रीन्दाने फुलोसे कमरा ओर सेज सजाया.. उस रात मुना ओर बसंतीकी सुहागरात हुइ.. मुना गोली खाकर पुरी रात बसंतीको रगडता रहा.. ओर सुबह तक उनकी हालत पतली करदी.. तो यही जोसमे श्रीधर ओर ब्रीन्दाने भी अपनी पहेली सुहागरातको याद करते फीरसे अपनी सुहागरात मनाइ....

कन्टीन्यु
 
my new story ye kesi anubhuti (Completed)रिस्तो मे प्यारकी अनुभुती (Ranning)
 
रिस्तोमे प्यारकी अनुभुती

अध्याय - २७९

इधर गांवमे मुना बसंतीकी सुहागरातके लीये खुद बरखा जागृती सांती ओर ब्रीन्दाने फुलोसे कमरा ओर सेज सजाया.. उस रात मुना ओर बसंतीकी सुहागरात हुइ.. मुना गोली खाकर पुरी रात बसंतीको रगडता रहा.. ओर सुबह तक उनकी हालत पतली करदी.. तो यही जोसमे श्रीधर ओर ब्रीन्दाने भी अपनी पहेली सुहागरातको याद करते फीरसे अपनी सुहागरात मनाइ.... अब आगे

दुसरे दीन चंदाने भी पुनमसे सबकुछ जानलीया.. पुनमने चंदाको बहुत कुछ भुत ओर भवीस्यके बारेमे बता दीया.. उस दीनसे चंदा भी काफी खुल गइ ओर लखनसे खुलकर बाते करने लगी.. अब वो उस हग ओर गालपे चुबंनके बाद लखनके बहुत करीब आगइ थी.. उसे अब लखनका साथ बहुत ही अच्छा लगने लगा..

जब भी दोनो अकेले होते गर्लफ्रेन्ड बोयफ्रेन्ड हो जाते.. ओर खुलकर बाते करते.. अब गालपे चुंबन आम बात होगइ थी.. अब अक्सर लखन चंदाको हग करने लगा.. बहारसे आते तब चंदाको हग करलेता.. चंदा कीचनमे होती तो पीछेसे हग करलेता.. तो चंदा सरमाकर मुस्कुरा देती..

लखनकी इस हरकतसे चंदाको भी अच्छा लगने लगा.. फीर तो हग करनेमे भी बदलाव होने लगा.. हग करते दोनोके बीच कसाव अंतरंगता बढने लगी.. अब सामान्य हग ना रहेते दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे समा जाते.. ओर चंदाको वोही चुंभनका अहेसमस बार बार होने लगा.. फीर भी वो आगे बढनेसे डर रही थी..





इसी बीच साहील भी कादीरके घर आगया था.. तो कादीर अभी अपनी ओफीसमे था.. तो सायराने दरवाजा खोला.. तो सामने साहीलको अकेला देखते ही खुस होगइ.. ओर जोरोसे साहील.. बोलके उनके गले लग गइ.. इस बार भी सायराने साहीलको जोरोसे भीच लीया..

जान बुजके.. बस.. साहीलका उभार महेसुस करना चाहती थी.. ओर इस बात साहील भी समजने लगा था.. दोनो अ‍ेक दुसरेकी बाहोमे काफी देर खडे रहे.. फीर सायरा साहीलसे अलग होने लगी तो साहीलने अ‍ेक बार फीरसे सायराको अपनी बाहोमे भीच लीया..





सायरा : (सरमाकर हसते) आ..उ..च.. क्या कर रहे हो..? दरवाजा खुला हे.. कोइ देख लेगा..

सायरा बहुत ही सर्मसार होगइ.. फीर साहीलसे अलग होगइ ओर साहीलको अंदर खीचकर उसने जटसे दरवाजा बंध करलीया.. फीर साहीलका हाथ पकडकर उसे अंदर बेडपे लेगइ.. ओर साहीलको हाथ पकडकर बेडपे बीठा दीया.. फीर कातीलाना नजरोसे मुस्कुराते कहेने लगी..

सायरा : (मुस्कुराते) तु यहा बैठ मे तेरे लीये पानी लेकर आइ.. फीर कुछ बनाती हु..

साहील : (चली गइतो उसे देखते मनमे) कमीनी भाइसे चुदवाकर क्या गदराया माल हो गइ हे.. अब तो इसे चोदकर ही जाउगा.. अ‍ैसे मालको सम्हालना कादीर भाइका काम ही नही हे.. अब देखता हु मां बेटीको कैसे पागल कर देता हु.. कमीना.. मेरी बीवीसे नीकाह करेगा..

सायरा : (मुस्कुराते) ले भाइ पानी पी.. ओर बता.. क्या पीयेगा..? चाइ के कुछ ठंडा बनाउ..

साहील : (पानी पीते मनमे) दीदी.. आपके पतीतेसे दुध पीलादो.. भाइने खीच खीचके कीतना बडा करदीया हे..

सायरा : (हसते) अरे कहा खो गया..? दीदीको देखा नही हे क्या..? बोलनां.. क्या पीयेगा..?

साहील : (जेपते) दुध.. दु..ध.. दीदी.. थोडासा दुध बनादो.. क्या हेनां चाइकी बहुत आदत नही हे..

सायरा : (मुस्कुराते) हां कहासे होगी.. गांवमे रहेते हो.. वहा गाय भेंसका ताजा दुध मील जाता हे.. देखोना दुध पी पीके कैसी बोडी बनाली हे.. कसरत बसरत भी करते हो क्या..?

साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. लेकीन अब नही.. टाइम नही मीलता.. पहेले करता था.. अब खेतोमे काम ही इतना रहेता हे तो कसरत होजाती हे.. हें..हें..हें..

सायरा : (मुस्कुराते) क्या सोले डोले बनाये हे.. मस्त लग रहा हे.. ठीक हे.. तु बैठ मे अभी तेरे लीये बादाम वाला दुध लेकर आती हु..

कहेते सायरा साहीलके पेन्टकी उभारकी ओर अ‍ेक नजर डालते कातीलाना मुस्कुराते कीचनमे चली गइ.. सायराको पता थाकी साहीलका उनको देखकर खडा होगया हे.. वो भी कइ दीनोसे कादीरका ले लेकर उब चुकी थी.. ओर कादीरसे जो उमीद थी वो भी पुरी नही हो पा रही थी..

जबसे पहेली बार साहीलका हथीयार नीचे चुभा.. ओर पेन्टके उभारको देखा.. तबसे ही सायरा साहीलको रीजानेमे लगी हुइ थी.. उसने आज अपनी चुनरी भी नही डाली थी.. ताकी साहील उनके बडे उभारको दीखते उतेजीत होसके..
 
ओर अबतो तीन दीन वो साहीलके साथ अकेली रहेने वाले थी.. ये सोचते ही सायराकी चुत गीली होने लगी.. जबसे साहील फ्रायडेको आनेकी बात करके गया था तबसे सायराको कही चेइन ही नही मील रहा था.. वो तब ही साहीलसे चुदवानेका मन बना चुकी थी..

ओर इस दीनका बडी बेसब्रीसे इन्तजार कर रही थी.. ओर आखीर वो दीन भी आगया.. ओर उनके कहेने के मुताबीक साहील फ्रायडे सामको ही आगया.. इस बातसे सायरा बहुत ही अ‍ेक्साइटेड थी.. वो कीचनमे सोचमे डुबी हुइ साहीलके लीये दुध बना रही थी..

सायरा : (मनमे) हाइ दया.. मुजे देखकर कैसे खडा हो गया.. कैसे चुभ रहा था.. कल तो कादीर चले जायेगे.. फीर तो तीन दीन हम दोनो ही अकेले होगे.. कास वो सीर्फ अ‍ेक बार पहेले पहेल करे.. मे उनसे बीना कोइ नखरे कीये चुदवानेके लीये राजी हो जाउगी.. मुजे लगता हे उसने सबानाको भी चोद लीया होगा.. अब कादीरसे तो कुछ हो नही रहा.. कास साहीलसे ही कुछ हो जाये.. तो मेरे बच्चेका भी इतकी तराह इतना बडा होगा.. बापरे.. बडा साप जैसा दीख रहा हे..

साहील : (आकर कीचनके दरवाजेके पास खडा होते हसते) भाभी.. भैया कब आयेगे..?

सायरा : (सर्मसार होते हसते) कमीने.. बहेन हु तेरी.. उस दीन कानमे क्या केह रहा था..? मे तेरी भाभी लगती हु..? ठहेर अभी.. आकर तेरी खबर लेती हु.. बहेनको भाभी कहेते सरम भी नही आती..

साहील : (जोरोसे हसते) दीदी.. मजाक कर रहा था.. लेकीन आप कायदेसे मेरी भाभी भीतो हो.. ओर दीदीसे बात ही कीतनी करुगा..? अगर भाभीसे बात ज्यादा होगी.. ओर मस्ती मजाक भी होगा.. हें..हें..हें..

सायरा : (सामने देखते हसते) सच कहा तुने.. ठीक हे.. कहेना.. मुजे भी तेरी मस्तीया करनेमे बहुत मजा आता हे.. लेकीन हम दोनो अकेले हो तब.. तेरे भैयाके सामने भाभी मत कहेना.. क्या तुम सभी दोस्त सचमे उनकी बहेन.. मीन्स उनकी बीवीको भाभी कहेते हो..?

साहील : (मुस्कुराते) हां भाभी.. हम उसे भाभी भाभी कहेते हे तो छीड जाती हे.. ओर हमे मारनेके लीये दोडती हे.. लेकीन अब तो सबको आदत हो चुकी हे.. वो भी हमे देवरजी कहेते हमारी मस्तीया करती हे..

सायरा : (जोरोसे हसते) तुम सबके सब कमीने हो.. अच्छा गांवके बारेमे ओर बताओनां..? क्या वहा सचमे रीस्तोमे बदलाव होने लगा हे..?

साहील : (मुस्कुराते) हां भाभी.. अब तो तीन दीन यही हु.. आपको सब कुछ बताउगा.. बहुत सारे कीस्से हे..

सायरा : (थोडी गंभीर होते) भाइ.. अम्मी अबु कैसे हे..? कभी हमे याद करते हेकी नही..?

साहील : (मुस्कुराते) चाचाका पता नही.. लेकीन मे.. अम्मी.. ओर चाची होते हे तब आपको याद करते हे.. अब तो चाचा चाचीने भी गांवकी बाते सुनकर आप दोनोको माफ करदीया हे..

सायरा : (खुसीसे देखते) क्या सचमे..? तब तो खुदाका लाख लाख सुक्र हे.. तु अंदर बैठ.. मे दुध लेकर आती हु.. वही बैठकर आरामसे बात करेगे..

फीर साहील अंदर जाके बैठ गया.. सायरा दुध लेकर आइ ओर साहीलको देते उनकी बगलमे ही सटकर बैठ गइ.. फीर दुध पीते दोनो बाते करते रहे.. बाते करते सायरा बार बार साहीलमे जांगोको छुने लगी.. जीसे साहीलका हथीयार फीरसे जटके मारते अंगडाइ लेने लगा..

ओर इस बदलावको सायरा टेडी नजरसे देखती रही.. ओर मनही मन हसती रही.. सुबह कादीरको जाना था तो वो भी जल्दी घर आगया.. तो सायरा जटसे साहीलसे दुर बैठ गइ.. ओर साहीलको देखकर कादीरने उसे गले लगा लीया..

सायराने तीनोके लीये खाना बनाया.. कादीर जानेके लीये अपने कपडे पेक करने लगा.. ओर साहीलको जरुरी सुचना देता रहा.. की कोनसा सामान कीसमे पेक करना हे.. फीर तीनोने खाना खालीया.. सायरा बर्तन ओर कीचनका काम समेटने लगी.. ओर कादीर साहील होलमे बैठ गये..

कादीर : (मुस्कुराते) हां भाइ बोल.. गांवका क्या हाल चाल हे..? अम्मी अबु ओर बडी अम्मा कैसे हे..?

साहील : (मुस्कुराते) भाइ सब मजेमे.. अब तो गांवकी हवा ओर खाना खाकर चाचा भी तगडे हो गये हे.. हें..हें..हें.. ओर गांवमे रंगमे रंग गये हे.. बडे ठाकुरसे बहुत अच्छी दोस्ती हो गइ हे..

कादीर : (हसते) अच्छा..? येतो बडी बात हे.. भाइ.. क्या उन्होने सचमे हमे माफ करदीया..?

साहील : (मुस्कुराते) हां भाइ.. बडे ठाकुरके समजानेके बाद ओर गांवकी बाते ओर माहोल देखकर उनमे भी काफी बदलाव आगया हे.. वहा सभी भाइ बहेनकी सादीकी बात सुनकर आपको भी माफ करदीया.. ओर आप दोनोकी सादीको भी अ‍ेक्सेप्ट करलीया..

कादीर : (खुस होते) भाइ ये तो तुमने अच्छी खबर सुनाइ.. गांवके बोरेमे ओर बताओनां..

फीर साहील कादीरको गांवकी सभी बाते बताने लगा.. कुछ देरके बाद सायरा भी अपना काम नीपटाकर आकर दोनोके पास बैठ गइ ओर साहीलकी बाते गौरसे सुनने लगी.. जीसे सुनकर कादीरका हथीयार अंगडाइ लेने लगा तो सायराकी चुत भी पनीयाने लगी.. तभी..
 
कादीर : (अंगडाइ लेते खडे होते) भाइ अब सोते हे.. सुबह रेल्वे स्टेशन भी जाना हे.. तो मुजे बाइकपे छोड देना.. अच्छा हुआ तुम आज ही आगये..

सायरा : (मुस्कुराते) भाइ.. तुम ये बाजु वाले रुममे सो जाओ.. वहा मेने बेडपे गदा बीछा दीया हे.. सुबह तुमको जगा दुगी.. कीतने बजे जाना हे..?

कादीर : (मुस्कुराते) साडे आठ बजेकी ट्रेन हे.. आठ बजे पहोंचना होगा.. नजदीक ही हे.. हम आरामसे पहोंच जायेगे..

सायरा : (हसते) दोनोको छे बजे उठा दुगी.. हें..हें..हें..

कहेते कातील नजरोसे सायरा साहीलकी ओर हसती हुइ कादीरके पीछे रुममे चली गइ.. ओर साहील भी गेस्ट रुममे जाकर लेट गया.. जीस नजरोसे सायरा साहीलकी ओर देखते हस रही थी साहील भी समज गयाकी सायरा पटनेके लीये रेडी हे.. वो आसानीसे पट जायेगी..

कुछ देरके बाद कादीरके कमरेसे कुछ अजीब अवाज आने लगी.. जीसे वो सलमाको चोदता हे तब सलमा आवाज नीकालती हे.. साहील समज गयाकी कादीर भाइ सायरा दीदीकी चुदाइ कर रहे हे.. ओर साहील बेडपे बैठ गया.. ओर धीरेसे दबे पांव उस रुमके दरवाजेके पास कान लगाके खडा हो गया.. तो अंदर दोनो बाते करते चुदाइ कर रहे थे.. जीसे साहील साफ सुन रहा था..





सायरा : (फुसफुसाते धीरेसे) भाइ.. आज क्या हो गया हे आपको.. साहील बाजुमे कमरेमे सो रहा हे.. थोडा धीरेसे करोनां..

कादीर : (चोदते ) अरे वो सो गया होगा.. चोदने देनां.. फीर तो तीन चार दीनके बाद ही चोदनेको मीलेगा..

सायरा : (कामुक्तासे) आह..आह...आह.. आइ.. धीरेसे चोदोना.. अभी आपका नीकल जायेगा..

कादीर : (जोरोसे कमर हीलाते) आह.. आह.. आइ.. सा..य..रा.. मे आ रहा हु.. कहा नीकालु..?

सायरा : (मार हीलाते) अभी रु्कोनां.. मेरा तो हुआ भी नही हे.. अंदर.. अंदर नीकालना..





कुछ ही देरमे कादीर सायराकी चुतमे पानी छोडकर जड गया तो सायरा अब भी जोरोसे अपनी कमर हीलाते जडनेकी कोसीस कर रही थी.. ओर आखीर कादीर सायराके सीनेपे ढेर हो गया.. ओर दोनो अपनी सांस दुरस्त करने लगी.. जब सांत होगये तो सायराने कहा..

कादीर : (गाल चुमते) सायरा.. अब तु मुजे कोन्डम क्यु नही लगाने देती..?

सायरा : (सामने देखते) तो ये पहेली बार थोडीना हे..? हमारे घरसे नीकलनेके बाद तो हमने कइ बार बीना कोन्डमसे कीया हे.. अब तो मे आइपील भी नही लेती.. फीर भी कुछ नही हो रहा.. भाइ.. मुजे बच्चा चाहीये.. लगता हे पहेलेसे ही ज्यादा आइपील लेनेकी वजहसे नही हो रहा हे..

कादीर : (मुस्कुराते) अच्छा हे.. हमारे बच्चेको भी पता हे पहेले पापा सेटल होजाये फीर इस दुनीयामे आउगा.. हें..हें..हें..

सायरा : (धीरेसे) भाइ.. मजाक नही.. आप अपना इलाज करवाओ.. आप बहुत जल्दी जड जाते हो.. अब तो हमारा घर भी मील गया हे.. तो हमारा घरका कीराया बचेगा.. अब हम अपना बच्चा पैदा कर सकते हे.. अबसे कोन्डम आइपीलकी गोलीया बीलकुल बंध..

कादीर : (सामने देखते धीरेसे) यार पहेले हमे ठीकसे सेटल तो होने दे.. फीर हम बच्चेके बारेमे सोचेगे.. इतनी जल्दी क्या हे..?

सायरा : (सामने देखते) जल्दी आपको नही मुजे हे.. हमारी सादीको कीतने महीने होगये..? जब मे हाइस्कुलमे भी तबसे तो मुजे चोद रहे हो.. ओर कीतने मजे करने हे..? मे कुछ सुनना नही चाहती.. मुजे बच्चा चाहीये.. केह देती हु.. फीर आपतो बीजनेस टुरपे चले जाओगे.. तो मे घरपे अकेली क्या करु्गी..? बच्चा होगा तो टाइम भी नीकल जायेगा..

कादीर : (उपरसे उतरते) ठीक हे.. अब सोजाओ सुबह मुजे जल्दी नीकलना भी हे..

सायरा : (कुछ सोचते जुठ बोलते) भाइ.. अ‍ेक हकीम हे.. मेने उजसे दवाइ लेली हे.. कहेते हे अ‍ेक महीना लेनी हे.. जल्द रीजल्ट आजायेगा..

कादीर : (सामने देखते) यार अ‍ैसे हकीन वैदसे कुछ नही होता.. हम कोसीस जारी रखेगे.. अब सोजा..

साहील अपने कमरेमे आकर सोगया.. तो कादीर सायरा भी नींदकी आगोसमे चले गये.. सुबह सायराने दोनोको जगा दीया.. ओर चाइ परोठा बना दीया.. तीनोने मीलकर नास्ता कीया ओर साहील अपनी बाइक लेकर कादीरको छोडने स्टेशन चला गया..

जब ट्रेन आगइ तो कादीर साहीलको सायराका ध्यान रखनेको कहेते ट्रेनमे बैठ गया.. ओर साहील तब तक वहा खडा रहा जबतक ट्रेन नीकल नही गइ.. साहील मन ही मन खुस होगया ओर अपनी आजादी महेसुस करने लगा.. उसने वापसीमे रास्तेसे सायराके लीये अ‍ेक छोटीसी गीफ्ट ओर अ‍ेक फुलोका गजरा.. कुछ चोकलेट लेली..
 
फीर वो घर आगया तो सायरा साहीलकी ओर देखते मुस्कुराने लगी.. उसे सायराकी आंखोमे अ‍ेक अजीबसी चमक देखी.. सायराने फटाफट अपना काम नीपटा लीया.. फीर नहानेके लीये बाथरुममे घुस गइ.. सायराको बाथरुममे काफी देर लगी..

फीर वो नहाकर माथेपे टोलीया लपेटकर बार आगइ.. उसने रुमके दरवाजेके पास आकर देखा तो साहील मोबाइलपे कुछ मेसेज टाइप कर रहा था.. तो सायरा मुस्कुराते तैयार होने लगी.. आज उसने अपने बाल खुले छोड रखे थे.. ताकी वो साहीलको लुभा सके..

सायरा : (तैयार होते मनमे) कीतना सोणा दीखता हे.. उनका हेभी कीतना बडा.. सबानाकी तो नीकल पडी.. क्या उन दोनोके बीच सबकुछ होगया होगा..? सबुतो अ‍ैसी नही हे.. अ‍ेक मे ही थी जो सादीसे पहेले भाइसे खुब चुदवाया हे.. अब तो उनका छोटा ले लेकर उब चुकी हु.. ये तीन दीन हमारे पास अच्छा मौका हे.. मुजे साहीलको अपनी ओर आकर्सीत करना ही होगा..

यही सब सोचते सायरा हल्कासा मेकअप करते अपने आपको सवारने लगी.. जब साहीलका पहेली बार उभार देखा तब ही वो अपना मन बना चुकी थी.. ओर आज उसे मौका मील गया.. फीर सायरा कंपलीट होकर बहार आगइ ओर आकर साहीलके बगलमे सटकर बैठ गइ..

तो साहील उनको देखता ही रेह गया.. आज सायरा कुछ अलग दीख रही थी.. मतलब.. बहुत सेक्सी.. जैसे वो सीर्फ साहीलके लीये ही सजकर आइ हो.. उनके बदनसे हल्कीसी नहानेकी खुस्बु आरही थी.. जो साहीलको पागल करनेके लीये काफी थी.. वोभी मोबाइलमे नजर डालते..

सायरा : (सरारती मुस्कानसे) क्या कर रहे हो..? अपनी होने वाली बीवीको मेसेज भेज रहे हो..?

साहील : (मुस्कुराते) हां.. गुड मोर्नींग मेसेज.. वरना मेडम नाराज हो जाती हे.. हें..हें..हें..

सायरा : (सामने देखते धीरेसे) मेडम..? भाइ.. लगता हे तुम दोनो अ‍ेक दुसरेको बहुत प्यार करते हो.. हें..हें..हें..

साहील : (मुस्कुराते) हां.. जैसे आप ओर कादीर भाइ अ‍ेक दुसरेसे करते थे.. मतलब.. अभी भी करते हो..

सायरा : (सरमाते मुस्कुराते) हां.. अभी भी करते हे.. साहील.. कीतना अजीब हेनां..? अ‍ेक सगे भाइसे सादी करलेनां.. अब तो हमारे गांवमे भी ये सब होने लगा हे..

साहील : (मुस्कुराते) भाभी.. कसमसे.. जुठ मत बोलना.. सच बताना.. क्या सगे भाइसे सादी करके आपको कीतना सुकुन मील रहा हे..?

सायरा : (सरमाते मुस्कुराते) सच कहु.. तो बहोत ज्यादा सुकुन मील रहा हे.. सायद.. दुसरेके साथ सादी करके इतना सुकुन नही मीलता.. क्युकी भाइ बहेनके बीच प्यारका रीस्ता बहोत गहेरा हो जाता हे.. जीसका मे सब्दोमे बया नही कर सकती..

साहील : (मुस्कुराते) फीर भी..? कुछ तो बयान करो..

सायरा : (सरमाते हसती) कोइ अ‍ैसी चीज.. जो आपको पता होथा हे की ये पानेके लीये आप जींदगी भर महेनत करलो.. फीर भी आपको नही मीलने वाली.. तो इस चीजको पानेके लीये आप ज्यादा बेताब रहेते हे.. ओर जब वोही चीज आपको मील जाये.. तो उस चीजसे आपका लगाव कइ गुना ज्यादा रहेता हे..

साहील : (हसते) मतलब..? साफ साफ बोलोनां..

सायरा : (सरमाते हसते) तु बहोत बीगड गया हे.. हें..हें..हें.. सुन.. मतलब.. जब आपको पता हे की सगे भाइ बहेनके बीच सादीया कभी नही होती.. ओर वो प्यार जो अ‍ेक बोयफ्रेन्ड गलफ्रेन्डके बीच होता हे वो प्यार भाइ बहेन अ‍ेक दुसरेसे नही कर सकते.. तो अ‍ेक दुसरेके प्रती आकर्सण ज्यादा होता हे.. ओर दोनोके बीच वही प्यार होजाये.. तो प्यार बहुत गहेरा होजाता हे..

साहील : (मुस्कुराते) हां अ‍ेक्जेटली.. इसीलीये मे सबुसे सादी कर रहा हु.. ओर इसीलीये मेरे सभी दोस्तोने अपनी सगी बहेनसे सादीया करली हे.. ओर दो दोस्तोने तो उनकी वीधवा ओर त्यक्ता मांसे भी सादी करली हे.. मे वहीसे आ रहा हु.. कल मुनाने उनकी वीधवा मांसे सादी करली.. सायद आपने भी इसीलीये भैयासे सादी कीहे..

सायरा : (सरमाते हसते) क्या..? मांसे..? वो दो दो ओरतोको सम्हाल सकते हे..?

साहील : (मुस्कुराते) दो क्या हम सबतो तीन तीन ओरतोको भी सम्हाल सकते हे.. क्युकी कल जीसकी सादी हुइ वो मुना आयुर्वेदके बारेमे बहुत जानता हे.. ओर उसने हम सभी दोस्तोको अ‍ेक जडीबुटीका कोर्स करवाया हे.. तबसे हम सभी दोस्तो अ‍ैसे होगये हे.. बाकी कुछ बाते हे जो मे आपको नही बता सकता.. हें..हें..हें..

सायरा : (हसते) क्या..? कोनसी बात..? अरे बताओनां.. यहा हम दोनोके अलावा कौन सुनने वाला हे.. सीर्फ हम दोनो हीतो हे.. हमारे बीच कैसा पर्दा..?

साहील : (धीरे धीरे आगे बढते) दीदी.. रहेने दो.. आप भाभीके साथ मेरी बडी बहेन भी हो.. आपको नही बता सकता..
 
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