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सायरा : (कातीलाना मुस्कुराते) कमीने.. अब तेरे भैया नही हे.. बहेन मानकर नही बता सकता.. भाभीको तो सब बता सकता हेनां..? बहेनसे सादी कर सकता हे.. उसे प्यार कर सकता हे.. ओर उनसे कुछ बता नही सकता.. अरे बताना.. हम देवर भाभी भी हेनां..? तो अेक देवरके नाते बता..
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. वो.. जडी बुटीकी वजहसे हम सबका पेनीस भी बडा हो गया हे.. ओर जबतक हम बीना नीचे उतरे दो बार सेक्स नही करलेते तबतक हमे चेइन नही मीलता..?
सायरा : (आस्चर्यसे मुहपे हाथ रखते) हाइ दया..? क्या सचमे..? आइ कान्ट बीलीव.. तुम्हारे भैया तो.. (सरमाकर) जाने दो.. नही बता सकती..
साहील : (मुस्कुराते) भाभी.. देवर कहेकर मेरे मुहसे सब उगलवा लीया.. तो अब आप कीस लीये सरमा रही हो..? बताओनां.. आइ प्रोमीस.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी..
सायरा : (सर्मसार होते धीरेसे) साहील.. तुमतो मुजे भी बेसर्म करदोगे.. ठीक हे बताती हु.. लेकीन ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेनी चाहीये.. सुन.. तेरे बडे भैयातो अेक ही बारमे ढेर होजाते हे.. ओर ज्यादातर मुजसे पहेले ही.. तुम समज गयेनां..? गांवकी ओर बाते बताओनां.. मुजे सुनना हे..
साहीलको लगाकी अब धीरे धीरे मछली जालमे फस रही हे.. तो उसने गांवकी बाते कहेना सुरु कर दीया.. ओर अैसी बाते जो सुनकर सायरा उतेजीत हो जाये.. साहील अेक अेक कीस्सा खुलकर बताने लगा.. गांवके रीस्तेके बारेमे बाते करते कुछ अैसे सब्दोका इस्तमाल करता जो सायराको उतेजीत करनेके लीये काफी थे..
तो सायरा भी गौरसे साहीलकी बाते सुनते उतेजीत होने लगी.. उनकी चुतसे पानी बहेने लगा.. ओर वो सवाल पुछते बार बार साहीलकी जांगोपे हाथ रख देती.. तो साहील भी मौका नही छोडता.. वो भी अपनी जांगोपे सायराका हाथ थाम लेता.. ओर बात सारीरीक सबंधोपे आगइ..
साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. मुना ओर श्रीधरने तो सादीसे पहेले ही उनकी बहेनको प्रेगनेन्ट कर दीया था.. ओर श्रीधरने बादमे अपनी बहेनको भगाकर सादी करली..
सायरा : (सरमाते मुस्कुराते) साहील कीतना अजीब हेनां.. हमे क्या पता थाकी गांवमे अैसा कुछ हो रहा हे.. सब कीतने लकी हेकी उनको अपनी बहेन आसानीसे मील गइ.. ओर हमे कीतनी तकलीफे जेलनी पडी.. ओर ये क्या लाया हे तु..?
साहील : (मुस्कुराते गजरा ओर चोकलेट देते) आपके लीये.. आपकी फेवरीट चोकलेट.. केटबरी.. ओर आपके लीये ये गजरा..
सायरा : (आंखोमे चमक लाते खुस होते) वाव.. केटबरी..? तुजे आज भी याद हे..? ओर ये गजरा..? मेरे लीये..? लगता हे तुजे लडकीया पटानेका काफी अेक्सपीरीन्स हे.. हें..हें..हें.. पता हे गजरा कौन लाता हे..?
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. सब पता हे.. लेकीन सोचा मेरी इस खुबसुरत भाभीके बालोमे खुब जचेया.. तो लेलीया..
सायरा : (हसते) आजकल भाभीका बडा खयाल रखते हो.. तेरे भाइने तो कभी नही लीया..
साहील : (मुस्कुाते हाथ थामते) आप मेरी स्पेसीयल ओर चहीती भाभी हो.. तो इतना खयाल तो रखना ही पडता हे.. क्या आपको बुरा लगा..?
सायरा : (खुस होते मुस्कुराते) अरे तेरा भी कभी बुरा लगता हे क्या..? अब तो मेरे प्यारे देवर भी होगये हो.. लो.. अपने हाथोसे ही लगादो..

साहील : (मुस्कुराते गजरा लगाते) भाभी.. आप वाकइ बहुत खुबसुरत हो.. कादीर भाइ बहुत नसीब वाले हे.. जो उसे आप जैसी बहेन मील गइ..
सायरा : (कातीलाना मुस्कुराते) बहेन तो मे तेरी भी हु.. क्या तुम खुसनसीब नही हो..?
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) हु.. लेकीन कादीरभाइ जीतना नही..
सायरा : (सरमाते धीरेसे) साहील.. मेरी सबु बहुत नसीब वाली हे.. जो तुज जैसा प्यार करने वाला लडका मीला.. तुम सबुसे सादी करना डीजर्व करते हो..
साहील : (मुस्कुराते) भाभी.. आपकी ओर भाइकी कहानी सुनाओनां.. दोनोने सुरुआत कहासे की.. दोनोके बीच कब प्यार हो गया..?
सायरा : (सरमाकर मुस्कुराते) जब मेने जवानीके दहेलीजपे कदम रखा.. तब मे आठवी क्लासमे पढती थी.. भाइको रोज कसरत करते देखती.. ओर उनकी ओर आकर्सीत होने लगी.. वो भी मेरी नजरको पहेचान गये.. फीर मेरे महेंगे सौक पुरे करने लगे.. ओर अेक गर्लफ्रेन्डकी तराह मुजे धुमाने लेजाने लगे.. फीरतो मेभी बीना डर उनके साथ हर जगह घुमने लगी..
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) भाभी.. वो.. जडी बुटीकी वजहसे हम सबका पेनीस भी बडा हो गया हे.. ओर जबतक हम बीना नीचे उतरे दो बार सेक्स नही करलेते तबतक हमे चेइन नही मीलता..?
सायरा : (आस्चर्यसे मुहपे हाथ रखते) हाइ दया..? क्या सचमे..? आइ कान्ट बीलीव.. तुम्हारे भैया तो.. (सरमाकर) जाने दो.. नही बता सकती..
साहील : (मुस्कुराते) भाभी.. देवर कहेकर मेरे मुहसे सब उगलवा लीया.. तो अब आप कीस लीये सरमा रही हो..? बताओनां.. आइ प्रोमीस.. ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच रहेगी..
सायरा : (सर्मसार होते धीरेसे) साहील.. तुमतो मुजे भी बेसर्म करदोगे.. ठीक हे बताती हु.. लेकीन ये बात सीर्फ हम दोनोके बीच ही रहेनी चाहीये.. सुन.. तेरे बडे भैयातो अेक ही बारमे ढेर होजाते हे.. ओर ज्यादातर मुजसे पहेले ही.. तुम समज गयेनां..? गांवकी ओर बाते बताओनां.. मुजे सुनना हे..
साहीलको लगाकी अब धीरे धीरे मछली जालमे फस रही हे.. तो उसने गांवकी बाते कहेना सुरु कर दीया.. ओर अैसी बाते जो सुनकर सायरा उतेजीत हो जाये.. साहील अेक अेक कीस्सा खुलकर बताने लगा.. गांवके रीस्तेके बारेमे बाते करते कुछ अैसे सब्दोका इस्तमाल करता जो सायराको उतेजीत करनेके लीये काफी थे..
तो सायरा भी गौरसे साहीलकी बाते सुनते उतेजीत होने लगी.. उनकी चुतसे पानी बहेने लगा.. ओर वो सवाल पुछते बार बार साहीलकी जांगोपे हाथ रख देती.. तो साहील भी मौका नही छोडता.. वो भी अपनी जांगोपे सायराका हाथ थाम लेता.. ओर बात सारीरीक सबंधोपे आगइ..
साहील : (मुस्कुराते) दीदी.. मुना ओर श्रीधरने तो सादीसे पहेले ही उनकी बहेनको प्रेगनेन्ट कर दीया था.. ओर श्रीधरने बादमे अपनी बहेनको भगाकर सादी करली..
सायरा : (सरमाते मुस्कुराते) साहील कीतना अजीब हेनां.. हमे क्या पता थाकी गांवमे अैसा कुछ हो रहा हे.. सब कीतने लकी हेकी उनको अपनी बहेन आसानीसे मील गइ.. ओर हमे कीतनी तकलीफे जेलनी पडी.. ओर ये क्या लाया हे तु..?
साहील : (मुस्कुराते गजरा ओर चोकलेट देते) आपके लीये.. आपकी फेवरीट चोकलेट.. केटबरी.. ओर आपके लीये ये गजरा..
सायरा : (आंखोमे चमक लाते खुस होते) वाव.. केटबरी..? तुजे आज भी याद हे..? ओर ये गजरा..? मेरे लीये..? लगता हे तुजे लडकीया पटानेका काफी अेक्सपीरीन्स हे.. हें..हें..हें.. पता हे गजरा कौन लाता हे..?
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) हां.. सब पता हे.. लेकीन सोचा मेरी इस खुबसुरत भाभीके बालोमे खुब जचेया.. तो लेलीया..
सायरा : (हसते) आजकल भाभीका बडा खयाल रखते हो.. तेरे भाइने तो कभी नही लीया..
साहील : (मुस्कुाते हाथ थामते) आप मेरी स्पेसीयल ओर चहीती भाभी हो.. तो इतना खयाल तो रखना ही पडता हे.. क्या आपको बुरा लगा..?
सायरा : (खुस होते मुस्कुराते) अरे तेरा भी कभी बुरा लगता हे क्या..? अब तो मेरे प्यारे देवर भी होगये हो.. लो.. अपने हाथोसे ही लगादो..

साहील : (मुस्कुराते गजरा लगाते) भाभी.. आप वाकइ बहुत खुबसुरत हो.. कादीर भाइ बहुत नसीब वाले हे.. जो उसे आप जैसी बहेन मील गइ..
सायरा : (कातीलाना मुस्कुराते) बहेन तो मे तेरी भी हु.. क्या तुम खुसनसीब नही हो..?
साहील : (सरमाकर मुस्कुराते) हु.. लेकीन कादीरभाइ जीतना नही..
सायरा : (सरमाते धीरेसे) साहील.. मेरी सबु बहुत नसीब वाली हे.. जो तुज जैसा प्यार करने वाला लडका मीला.. तुम सबुसे सादी करना डीजर्व करते हो..
साहील : (मुस्कुराते) भाभी.. आपकी ओर भाइकी कहानी सुनाओनां.. दोनोने सुरुआत कहासे की.. दोनोके बीच कब प्यार हो गया..?
सायरा : (सरमाकर मुस्कुराते) जब मेने जवानीके दहेलीजपे कदम रखा.. तब मे आठवी क्लासमे पढती थी.. भाइको रोज कसरत करते देखती.. ओर उनकी ओर आकर्सीत होने लगी.. वो भी मेरी नजरको पहेचान गये.. फीर मेरे महेंगे सौक पुरे करने लगे.. ओर अेक गर्लफ्रेन्डकी तराह मुजे धुमाने लेजाने लगे.. फीरतो मेभी बीना डर उनके साथ हर जगह घुमने लगी..



















