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तुम तो आये नहीं तो सोचा में hi मिल लू तुमसे ( समय बुआ ने पास आते हुए बोलै )
कारन - ऐसा नहीं है बुआ जी ये आप भी जानती है की में 12 साल पहले भी आप के आस पास रहना hi पसंद करता था और आज भी आप मेरी उन मीठी यादो में शामिल हो तो भला में कैसे नहीं आता आप से मिलने वो तो रात जायदा हो गयी थी बस इसलिए नहीं आया और कुछ नहीं
समय - है वो तो देख रही हु पहले मेरे आगे पीछे घूमने वाला आज मुझसे दूर दूर भाग रहा है
कारन - आप गलत समझ रही हो बुआ ऐसा कुछ नहीं अब में बड़ा हो गया हु पहले की तरह आप से चिपक कर रहूँगा तो लोग क्या सोचेंगे
समय - हां भाई अब तुम बड़े हो गए हो तो अब बुआ की क्या जरुरत है क्यों सच में बड़ा होने के साथ साथ काफी समझदार भी हो गया है जो लोगो की फ़िक्र भी कर न सिख गया भले hi उसके लिए किसी अपने का दिल टूट जाए शाबाश में hi पागल थी जो तुमसे मिल ने चली आयी
कारन - आप न पहले भी ज़िद्दी थी और आज भी ज़िद्दी हो पैर मुझे अपनी ज़िद्दी बुआ को मानना अछि तरह से आता है आओ इधर
कारन के इस तरह प्यार से गले लगा ने से समय खुश हो गयी और खुद भी उसकी बाहो में सिमट टी चली गयी जिसे खुद में छुपाते हुए कारन बोलै
कारन - अब खुश है आप या अभी भी कुछ कमी बाकी है
समय जो पति के मर ने के बाद आज पहली बार किसी पुरुष के संपर्क में आयी थी वो तो मदहोश सी हो गयी कारन की मजबूत बाहो में और उसे जोर से अपनी बाहो में कस्ते हुए बोली
समय - नहीं अब कोई कमी नहीं है कारन बस अब तुम मुझे छोड़ कर मत जाना वर्ण तेरी बुआ तेरे बिना जी नहीं पायेगी
कारन - में कही नहीं जा रहा बुआ अब आप के पास hi रहूँगा हमेशा अब चलो निचे चलते है छत्त पैर ठण्ड बढ़ ने लगी है
समय - चलते है मेरे लाल पैर पहले अपनी इस बुआ को 12 साल की बेचैनी तो दूर कर लेने दे
ाचा तो कारन को भी लग रहा था इस गोरी और भरी हुई महिला का अलिगन पैर रिश्ते की मर्यदा उसे रोक रही थी इसलिए वो जल्द से जल्द निचे जाना चाहता क्युकी समय की मखमली बदन की खुसबू उसकी नाक की नथुनों में घुल ने लगी थी तो वही समय मदहोशी में कारन को खुद से चिपकाए उसके बालो में ऊँगली दाल के सहलाने लगी उसे भी पता न चला
आँखे बंद और अपने भतीजे के जिस्म की गर्मी को महसूस करती समय को जब एहसास हुआ की वो क्या कर ने लगी है तो वो घबरा कर उस से अलग हुई और नज़र चुरा दूसरी तरफ देख ने लगी जिस पैर कारन आश्मान में निकले चाँद को देखते हुए बोलै
कारन - वैसे दुनिया भी कितनी अजीब है न बुआ जब चाहे अपने हिसाब से सब कुछ बदल देती है जैसे इस चाँद को hi लेलो बचपन में बच्चो को चंदा मां बताते है तो बड़े हो ने पैर सुहाग की निसानी जिसे मान कर औरते अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती है जब की सच तो ये है की अगर ये चाँद न होता तो हम कभी चांदनी की कीमत जान hi नहीं पाते ठीक वैसे जैसे हम इंसान अपनी ीचा छुपा कर जी तो लेते है पैर वही ख़ुशी किसी दूसरे रूप में मिल जाये तो हम रिश्तो के भवर में फसे रहते है क्यों
समय - रिश्तो की कुछ मर्यादा होती है कारन जिस में रह कर hi जीवन सही और अचे तरीके से जिया जा सकता है
कारन - हम्म बात तो आप की ठीक है पैर मेरे पल्ले एक बात नहीं पड़ी की अगर रिश्ते hi दर्द की दवा है और जीने का मक़सद तो फिर लोग ें रिश्तो में भागते क्यों फिर रहे है
समय - अभी बड़े हुए हो न समझ जाओगे धीरे धीरे खैर छोडो ये सब बाते निचे चलो और वैसे कहा सोने वाले हो
कारन - बात बदल ने में तो आप शुरू से माहिर हो तो मेरे सोने की जगह भी आप hi बता देना फिलहाल तो निचे चलते है जैसे बचपन में आप मुझे लेकर जाती थी
समय कुछ समझे इस पहले वो मांस से भरी कामुक काय कारन की मजबूत बाहो में झूल रही थी जिसे कारन बड़े प्यार से उठाये निचे जाने लगा जिस समय बड़े गौर से देखते हुए बोली
समय - निचे उतार पागल लड़के किसी ने देख लिया तो गलत समझेगा
कारन - अभी छत्त पैर तो बड़ा ज्ञान दे रही थी आप अब अपनी बारी आयी तो चिंता हो ने लगी थिस इस नॉट फियर बुआ जी
समय अब कहती भी तो क्या बस शर्माती सी उसके कंधे पैर सर रख के आंखे बंद किये रूम आने का इंतज़ार करने लगी
समय का चेहरा इतनी पास से देखते हुए कारन उसे लेकर रूम में पंहुचा और ग समय को सोफे पैर लिटा कर उसके माथे को चुम कर चुपचाप दबे प् वापस चा गया समय की याद में डूबा हुआ
जंगल में रात अक्षर जायदा डरावनी क्यों लगती है रामु काका
रामु - लगता है अभी तक तेरे दिमाग में छोटे मालिक hi छाए हुए जो एक hi सवाल तीसरी बार पूछ रहा है हरिया
हरिया- सच पूछो तो हां और झूट बोलू तो अब क्या होगा काका हमारा वो सारे लोग जो मरे है वो शर्मा के आदमी थे और वो जल्लाद तो बिना गलती के जान से मार देता है जब की छोटे मालिक ने तो उसके कितने hi आदमी मौत के घात उतार दिए है पता नहीं अब वो क्या करेगा
रामु - तू क्यों इतनी फ़िक्र कर रहा ये उनके हक़ की लड़ाई है जिसे वो भली जानते है तो जो उन्होंने किया है सोच समझ कर hi क्र रहे होंगे तू जायदा दिमाग मत लड़ा और सो जा देख सियार भी बोल ने लगे है समझा की नहीं
हरिया - समझ गया काका की हर खूबसूरत चीज़ खूबसूरत नहीं होती खतरनाक भी होती है
रात अपनी गति से कटी और सुबह की पहली किरण के साथ सब उठे और अपना नीतिया कर्म कर ने लगे थे जब की कारन अपनी बुआ को बुलाने उनके कमरे में गया और जैसे hi दरवाज़े को हाथ लगाया तो उस सुन्दर काय के मोठे नितम्ब उसके गीले हुए पेटीकोट में पारदर्शी हो कर अपनी आभा बिखेर रहे थे और उनसे ऊपर वो नंगी कमर जिस पैर गीले बालो से गिरती बूंदे जिन्हे देख कर कारन को झटका लगा तो वही कारन को तिरछी नज़रो से देख कर शर्माती समय अपनी छाती पैर हाथ रख कर अपने प्रेम कलश छुपाते हुए बोली
समय - कारन प्ल्ज़ बहार जाओ में कपडे बदल रही हु
कारन - सॉरी बुआ में जाता हु मुझे नहीं पता था की आप...
अपनी बात पूरी किये बिना hi कारन वापस मुद गया और सीधा छत्त पैर चला गया जहा पहले से hi सुरभि मजूद थी जो कारन को देख कर मुस्कुराते हुए बोली
सुरभि - तुम कारन हो न मुझे पहचाना
कारन - अपनों को कोण भूलता है सुरभि दीदी या फिर सरु बुलाऊ पहले की तरह
सुरभि - जो तेरा दिल करे बुला भाई वैसे भी तेरे जाने के बाद किसी ने इस नाम से बुलाया hi नहीं वैसे बॉडी अछि बना ली भाई
कारन - अपने आप बन गयी दीदी मैंने इतना ध्यान नहीं दिया मेरा ध्यान तो हमेशा आप लोगो से मिलने की तरफ था
सुरभि - हम ने भी बहुत मिस किया तुझे भाई कोई दिन ऐसा नहीं गुज़रा जब तेरा जिक्र न हुआ हो
aaaaaahhhhhhhhhhhhh इस आवाज़ को सुनते hi सुरभि एक दम से कारन से चिपक गयी जिसे खुद से लगा कर कारन बोलै
कारन - डरो मत कुछ नहीं है और में हु न आप के पास
सुरभि - पता नहीं ये चीखे कब बंद होगी और कब हम लोग बहार निकल सकेंगे भाई सच में अब तो लगता है इस हवेली में hi घुट घुट कर मर जायेंगे
अभी ये दोनों बाते कर hi रहे थे की निचे से आवाज़ आयी जो शेरा की थी जो अपने आदमियों को बुला रहा था जिसे सुनते hi कारन ने निचे की तरफ दौड़ लगा दी और हवेली का गेट खोल कर सीधा बहार निकल गया जहा कुछ बचे बदमाश थे जिनका सामना रात कारन से नहीं हुआ था वो गाओं के लोगो से अपने साथियो के बारे में पूछ रहे थे मार मार कर
कारन - अगर रात को hi मिल जाता तो इनसे पूछ ने की जरुरत नहीं पड़ती तुझे पैर शायद तेरे नसीब में एक रात का जीवन और लिखा था इसलिए तू बच गया पैर अफ़सोस अब जाने का समय आ गया ( सामने आते हुए बोलै )
आदमी- पहले इसे निपटा रे बहुत बोल रहा है ये एंट्री तो हीरो वाली मारी है बच्चे ने
आदमी की बात सुनते hi दूसरा आदमी कुर्शी से हुम्ला करने के ख्याल से कारन की तरफ दौड़ा hi था की उस सांड की कमर पैर फत्ते का एक जोरदार प्रहार हुआ और वो बिलबिलाता हुआ वही ढेर हो गया जिस के बाद कितनी पड़ी वो तो वही जाने
जिस आदमी ने हुम्ला कर ने को कहा था वो ये सब देख hi रहा था की कारन चीते की फुर्ती से आगे बढ़ता उसके मटके जैसे सर को फोड़ चूका था एक जोरदार प्रहार से ये सब इतनी जल्दी हुआ की किसी को कुछ समझ hi नहीं आया की आखिर हुआ तो क्या हुआ
चारो तरफ से बस आठ और हड्डी टूट ने की आवाज़े आ रही थी जिस ने भी ये देखा उसके लिए ये एक सपना सा था उन्हें आज बहुत ख़ुशी भी हो रही थी तो साथ hi नया दर भी लग ने लगा था की आगे क्या होगा जब की कारन सब को निपटा ने के बाद अपने हाथो पैर लगी आग साफ़ करता हुआ गाओं वालो के सामने आया जिस देख कर रामु बोलै
रामु - छोटे मालिक ये सब कब तक चलेगा कब तक यु दर के साये में जीना होगा
कारन - अब से गाओं में ऐसा कुछ नहीं होगा काका ये अकिहिरी गंदगी थी जो रात को छुपी रह गयी अब गाओं बिलकुल साफ़ है अब आप लोग कही भी घूम सकते हो बिना दर के शेरा भैया रास्ता बंद करवा दो फ़ौरन मुझे जरा भी देर नहीं चाहिए इस काम में
शेरा - बस होने वाला है छोटे मालिक रात hi आदमी काम पैर लगा दिए थे और गाओं की सीमा पैर भी पत्थर की मोती दीवार कड़ी हो रही है जैसा आप ने कहा था
कारन - ठीक है भैया और ये छोटे मालिक नहीं कारन बोलै कीजिये बड़े है आप मुझसे समझे आप
शेरा - ठीक है कारन बाबा अब से नहीं बोलेंगे
कारन - ये हुई न बात और ें लाशो को जला दो जंगल में ले जा कर आप सब लोग भी अपना अपना काम कीजिये में हु अब आप लोगो के साथ ठीक है न रामु काका
रामु - जीते रहो बीटा भगवान् दीर्घ आईयू दे तुम्हे
कारन - ाचा काका परनाम में चलता हु
अंदर आते hi सामना हुआ साक्षी से जो शायद नाहा कर निकली थी और अभी पूजा कर के आयी थी जिसके सर पैर टोलिया बंधा था और वो एक तुक अपने जवान बेटे को निहार रही थी जो कल रात शायद अँधेरे की वजह से अधूरा रह गया था
साक्षी - कहा चला गया था सुबह सुबह और ये चीखे कैसी आ रही थी बहार से
कारन - कुछ नहीं कुछ जंगली जानवर थे उन्ही की आवाज़े थी
साक्षी - तूने नहीं मैंने तुझे पैदा किया है कारन तो मुझे मत चला और एक बात ध्यान से सुन तू घर में hi रहेगा बहार नहीं जाएगा
कारन - में रुक ने का चुप ने के मूड में बिलकुल नहीं हु माँ मुझे अपना गाओं पहले जैसा करना है जहा किसी को कही आने जाने में दिक्कत न हो
कारन की बात सुनकर साक्षी की आंखे बड़ी हो गयी और वो एक तुक उसे देखते हुए बोली
साक्षी - तेरे पिता जी का हाथ काट दिया राहुल को ज़िंदा जला दिया और तू चाहता है की अब में तुझे भी मरते देखु यही चाहता है तू
कारन - हर बार कारन नहीं मरेगा माँ इस बार उस दानव अर्जुन को मरना होगा जिस ने अपने नाम की भी गरिमा नहीं राखी
अभी कोई कुछ कहता की मुस्कुराते चेहरे के साथ दमकते हुए शीला बोली
शीला - बस भी करो दीदी कुछ खा ने को तो दो बेचारे को या दांत से पेट भर न
कारन - बस आपको hi मेरी फ़िक्र है चची और किसी को भी नहीं
साक्षी - चल जायदा नौटंकी मत कर और नाश्ता कर ले
कारन - जो हुकम मेरे आका
बहार नास्ते की तैयारी हो रही थी तो वही समय अपने कमरे में जंगल बदल बदल के खुद को देख रही थी
तुम तो आये नहीं तो सोचा में hi मिल लू तुमसे ( समय बुआ ने पास आते हुए बोलै )
कारन - ऐसा नहीं है बुआ जी ये आप भी जानती है की में 12 साल पहले भी आप के आस पास रहना hi पसंद करता था और आज भी आप मेरी उन मीठी यादो में शामिल हो तो भला में कैसे नहीं आता आप से मिलने वो तो रात जायदा हो गयी थी बस इसलिए नहीं आया और कुछ नहीं
समय - है वो तो देख रही हु पहले मेरे आगे पीछे घूमने वाला आज मुझसे दूर दूर भाग रहा है
कारन - आप गलत समझ रही हो बुआ ऐसा कुछ नहीं अब में बड़ा हो गया हु पहले की तरह आप से चिपक कर रहूँगा तो लोग क्या सोचेंगे
समय - हां भाई अब तुम बड़े हो गए हो तो अब बुआ की क्या जरुरत है क्यों सच में बड़ा होने के साथ साथ काफी समझदार भी हो गया है जो लोगो की फ़िक्र भी कर न सिख गया भले hi उसके लिए किसी अपने का दिल टूट जाए शाबाश में hi पागल थी जो तुमसे मिल ने चली आयी
कारन - आप न पहले भी ज़िद्दी थी और आज भी ज़िद्दी हो पैर मुझे अपनी ज़िद्दी बुआ को मानना अछि तरह से आता है आओ इधर
कारन के इस तरह प्यार से गले लगा ने से समय खुश हो गयी और खुद भी उसकी बाहो में सिमट टी चली गयी जिसे खुद में छुपाते हुए कारन बोलै
कारन - अब खुश है आप या अभी भी कुछ कमी बाकी है
समय जो पति के मर ने के बाद आज पहली बार किसी पुरुष के संपर्क में आयी थी वो तो मदहोश सी हो गयी कारन की मजबूत बाहो में और उसे जोर से अपनी बाहो में कस्ते हुए बोली
समय - नहीं अब कोई कमी नहीं है कारन बस अब तुम मुझे छोड़ कर मत जाना वर्ण तेरी बुआ तेरे बिना जी नहीं पायेगी
कारन - में कही नहीं जा रहा बुआ अब आप के पास hi रहूँगा हमेशा अब चलो निचे चलते है छत्त पैर ठण्ड बढ़ ने लगी है
समय - चलते है मेरे लाल पैर पहले अपनी इस बुआ को 12 साल की बेचैनी तो दूर कर लेने दे
ाचा तो कारन को भी लग रहा था इस गोरी और भरी हुई महिला का अलिगन पैर रिश्ते की मर्यदा उसे रोक रही थी इसलिए वो जल्द से जल्द निचे जाना चाहता क्युकी समय की मखमली बदन की खुसबू उसकी नाक की नथुनों में घुल ने लगी थी तो वही समय मदहोशी में कारन को खुद से चिपकाए उसके बालो में ऊँगली दाल के सहलाने लगी उसे भी पता न चला
आँखे बंद और अपने भतीजे के जिस्म की गर्मी को महसूस करती समय को जब एहसास हुआ की वो क्या कर ने लगी है तो वो घबरा कर उस से अलग हुई और नज़र चुरा दूसरी तरफ देख ने लगी जिस पैर कारन आश्मान में निकले चाँद को देखते हुए बोलै
कारन - वैसे दुनिया भी कितनी अजीब है न बुआ जब चाहे अपने हिसाब से सब कुछ बदल देती है जैसे इस चाँद को hi लेलो बचपन में बच्चो को चंदा मां बताते है तो बड़े हो ने पैर सुहाग की निसानी जिसे मान कर औरते अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती है जब की सच तो ये है की अगर ये चाँद न होता तो हम कभी चांदनी की कीमत जान hi नहीं पाते ठीक वैसे जैसे हम इंसान अपनी ीचा छुपा कर जी तो लेते है पैर वही ख़ुशी किसी दूसरे रूप में मिल जाये तो हम रिश्तो के भवर में फसे रहते है क्यों
समय - रिश्तो की कुछ मर्यादा होती है कारन जिस में रह कर hi जीवन सही और अचे तरीके से जिया जा सकता है
कारन - हम्म बात तो आप की ठीक है पैर मेरे पल्ले एक बात नहीं पड़ी की अगर रिश्ते hi दर्द की दवा है और जीने का मक़सद तो फिर लोग ें रिश्तो में भागते क्यों फिर रहे है
समय - अभी बड़े हुए हो न समझ जाओगे धीरे धीरे खैर छोडो ये सब बाते निचे चलो और वैसे कहा सोने वाले हो
कारन - बात बदल ने में तो आप शुरू से माहिर हो तो मेरे सोने की जगह भी आप hi बता देना फिलहाल तो निचे चलते है जैसे बचपन में आप मुझे लेकर जाती थी
समय कुछ समझे इस पहले वो मांस से भरी कामुक काय कारन की मजबूत बाहो में झूल रही थी जिसे कारन बड़े प्यार से उठाये निचे जाने लगा जिस समय बड़े गौर से देखते हुए बोली
समय - निचे उतार पागल लड़के किसी ने देख लिया तो गलत समझेगा
कारन - अभी छत्त पैर तो बड़ा ज्ञान दे रही थी आप अब अपनी बारी आयी तो चिंता हो ने लगी थिस इस नॉट फियर बुआ जी
समय अब कहती भी तो क्या बस शर्माती सी उसके कंधे पैर सर रख के आंखे बंद किये रूम आने का इंतज़ार करने लगी
समय का चेहरा इतनी पास से देखते हुए कारन उसे लेकर रूम में पंहुचा और ग समय को सोफे पैर लिटा कर उसके माथे को चुम कर चुपचाप दबे प् वापस चा गया समय की याद में डूबा हुआ
जंगल में रात अक्षर जायदा डरावनी क्यों लगती है रामु काका
रामु - लगता है अभी तक तेरे दिमाग में छोटे मालिक hi छाए हुए जो एक hi सवाल तीसरी बार पूछ रहा है हरिया
हरिया- सच पूछो तो हां और झूट बोलू तो अब क्या होगा काका हमारा वो सारे लोग जो मरे है वो शर्मा के आदमी थे और वो जल्लाद तो बिना गलती के जान से मार देता है जब की छोटे मालिक ने तो उसके कितने hi आदमी मौत के घात उतार दिए है पता नहीं अब वो क्या करेगा
रामु - तू क्यों इतनी फ़िक्र कर रहा ये उनके हक़ की लड़ाई है जिसे वो भली जानते है तो जो उन्होंने किया है सोच समझ कर hi क्र रहे होंगे तू जायदा दिमाग मत लड़ा और सो जा देख सियार भी बोल ने लगे है समझा की नहीं
हरिया - समझ गया काका की हर खूबसूरत चीज़ खूबसूरत नहीं होती खतरनाक भी होती है
रात अपनी गति से कटी और सुबह की पहली किरण के साथ सब उठे और अपना नीतिया कर्म कर ने लगे थे जब की कारन अपनी बुआ को बुलाने उनके कमरे में गया और जैसे hi दरवाज़े को हाथ लगाया तो उस सुन्दर काय के मोठे नितम्ब उसके गीले हुए पेटीकोट में पारदर्शी हो कर अपनी आभा बिखेर रहे थे और उनसे ऊपर वो नंगी कमर जिस पैर गीले बालो से गिरती बूंदे जिन्हे देख कर कारन को झटका लगा तो वही कारन को तिरछी नज़रो से देख कर शर्माती समय अपनी छाती पैर हाथ रख कर अपने प्रेम कलश छुपाते हुए बोली
समय - कारन प्ल्ज़ बहार जाओ में कपडे बदल रही हु
कारन - सॉरी बुआ में जाता हु मुझे नहीं पता था की आप...
अपनी बात पूरी किये बिना hi कारन वापस मुद गया और सीधा छत्त पैर चला गया जहा पहले से hi सुरभि मजूद थी जो कारन को देख कर मुस्कुराते हुए बोली
सुरभि - तुम कारन हो न मुझे पहचाना
कारन - अपनों को कोण भूलता है सुरभि दीदी या फिर सरु बुलाऊ पहले की तरह
सुरभि - जो तेरा दिल करे बुला भाई वैसे भी तेरे जाने के बाद किसी ने इस नाम से बुलाया hi नहीं वैसे बॉडी अछि बना ली भाई
कारन - अपने आप बन गयी दीदी मैंने इतना ध्यान नहीं दिया मेरा ध्यान तो हमेशा आप लोगो से मिलने की तरफ था
सुरभि - हम ने भी बहुत मिस किया तुझे भाई कोई दिन ऐसा नहीं गुज़रा जब तेरा जिक्र न हुआ हो
aaaaaahhhhhhhhhhhhh इस आवाज़ को सुनते hi सुरभि एक दम से कारन से चिपक गयी जिसे खुद से लगा कर कारन बोलै
कारन - डरो मत कुछ नहीं है और में हु न आप के पास
सुरभि - पता नहीं ये चीखे कब बंद होगी और कब हम लोग बहार निकल सकेंगे भाई सच में अब तो लगता है इस हवेली में hi घुट घुट कर मर जायेंगे
अभी ये दोनों बाते कर hi रहे थे की निचे से आवाज़ आयी जो शेरा की थी जो अपने आदमियों को बुला रहा था जिसे सुनते hi कारन ने निचे की तरफ दौड़ लगा दी और हवेली का गेट खोल कर सीधा बहार निकल गया जहा कुछ बचे बदमाश थे जिनका सामना रात कारन से नहीं हुआ था वो गाओं के लोगो से अपने साथियो के बारे में पूछ रहे थे मार मार कर
कारन - अगर रात को hi मिल जाता तो इनसे पूछ ने की जरुरत नहीं पड़ती तुझे पैर शायद तेरे नसीब में एक रात का जीवन और लिखा था इसलिए तू बच गया पैर अफ़सोस अब जाने का समय आ गया ( सामने आते हुए बोलै )
आदमी- पहले इसे निपटा रे बहुत बोल रहा है ये एंट्री तो हीरो वाली मारी है बच्चे ने
आदमी की बात सुनते hi दूसरा आदमी कुर्शी से हुम्ला करने के ख्याल से कारन की तरफ दौड़ा hi था की उस सांड की कमर पैर फत्ते का एक जोरदार प्रहार हुआ और वो बिलबिलाता हुआ वही ढेर हो गया जिस के बाद कितनी पड़ी वो तो वही जाने
जिस आदमी ने हुम्ला कर ने को कहा था वो ये सब देख hi रहा था की कारन चीते की फुर्ती से आगे बढ़ता उसके मटके जैसे सर को फोड़ चूका था एक जोरदार प्रहार से ये सब इतनी जल्दी हुआ की किसी को कुछ समझ hi नहीं आया की आखिर हुआ तो क्या हुआ
चारो तरफ से बस आठ और हड्डी टूट ने की आवाज़े आ रही थी जिस ने भी ये देखा उसके लिए ये एक सपना सा था उन्हें आज बहुत ख़ुशी भी हो रही थी तो साथ hi नया दर भी लग ने लगा था की आगे क्या होगा जब की कारन सब को निपटा ने के बाद अपने हाथो पैर लगी आग साफ़ करता हुआ गाओं वालो के सामने आया जिस देख कर रामु बोलै
रामु - छोटे मालिक ये सब कब तक चलेगा कब तक यु दर के साये में जीना होगा
कारन - अब से गाओं में ऐसा कुछ नहीं होगा काका ये अकिहिरी गंदगी थी जो रात को छुपी रह गयी अब गाओं बिलकुल साफ़ है अब आप लोग कही भी घूम सकते हो बिना दर के शेरा भैया रास्ता बंद करवा दो फ़ौरन मुझे जरा भी देर नहीं चाहिए इस काम में
शेरा - बस होने वाला है छोटे मालिक रात hi आदमी काम पैर लगा दिए थे और गाओं की सीमा पैर भी पत्थर की मोती दीवार कड़ी हो रही है जैसा आप ने कहा था
कारन - ठीक है भैया और ये छोटे मालिक नहीं कारन बोलै कीजिये बड़े है आप मुझसे समझे आप
शेरा - ठीक है कारन बाबा अब से नहीं बोलेंगे
कारन - ये हुई न बात और ें लाशो को जला दो जंगल में ले जा कर आप सब लोग भी अपना अपना काम कीजिये में हु अब आप लोगो के साथ ठीक है न रामु काका
रामु - जीते रहो बीटा भगवान् दीर्घ आईयू दे तुम्हे
कारन - ाचा काका परनाम में चलता हु
अंदर आते hi सामना हुआ साक्षी से जो शायद नाहा कर निकली थी और अभी पूजा कर के आयी थी जिसके सर पैर टोलिया बंधा था और वो एक तुक अपने जवान बेटे को निहार रही थी जो कल रात शायद अँधेरे की वजह से अधूरा रह गया था
साक्षी - कहा चला गया था सुबह सुबह और ये चीखे कैसी आ रही थी बहार से
कारन - कुछ नहीं कुछ जंगली जानवर थे उन्ही की आवाज़े थी
साक्षी - तूने नहीं मैंने तुझे पैदा किया है कारन तो मुझे मत चला और एक बात ध्यान से सुन तू घर में hi रहेगा बहार नहीं जाएगा
कारन - में रुक ने का चुप ने के मूड में बिलकुल नहीं हु माँ मुझे अपना गाओं पहले जैसा करना है जहा किसी को कही आने जाने में दिक्कत न हो
कारन की बात सुनकर साक्षी की आंखे बड़ी हो गयी और वो एक तुक उसे देखते हुए बोली
साक्षी - तेरे पिता जी का हाथ काट दिया राहुल को ज़िंदा जला दिया और तू चाहता है की अब में तुझे भी मरते देखु यही चाहता है तू
कारन - हर बार कारन नहीं मरेगा माँ इस बार उस दानव अर्जुन को मरना होगा जिस ने अपने नाम की भी गरिमा नहीं राखी
अभी कोई कुछ कहता की मुस्कुराते चेहरे के साथ दमकते हुए शीला बोली
शीला - बस भी करो दीदी कुछ खा ने को तो दो बेचारे को या दांत से पेट भर न
कारन - बस आपको hi मेरी फ़िक्र है चची और किसी को भी नहीं
साक्षी - चल जायदा नौटंकी मत कर और नाश्ता कर ले
कारन - जो हुकम मेरे आका
बहार नास्ते की तैयारी हो रही थी तो वही समय अपने कमरे में जंगल बदल बदल के खुद को देख रही थी