अपडेट-91
अभ अग्गे...
इक अँधेरी जगह , जंगल के बेचू बेच , इक वेरियन , सुनसान जगह , यहाँ चारो तरफ अँधेरा था , वही उस अँधेरे के बेच रवि खड़ा हुआ था , और उसके सामने बेहद ब्यांक , खौफनाक , उसकी बड़ी बहिन रेखा कड़ी थी ,
रवि की आँखें नाम थी , वोह जवाब चाहता था , अपनी बहिन से , क्यों , आखिर क्यों , वोह ऐसे रूप में कैसे ा गई , जिसे देख , कोई भी दर से अपनी सांसे रोक ले ,
रवि अग्गे बढ़कर अपनी बहिन के पास ा गया , और उसके चेहरे पर हाथ फिरा , उसे महसूस करने लगा , के वोह कही सच में तोह नै मर गई ,
"मर चुकी हु में , क्यों देख रहा तू छू कर मुझे..." रेखा बेहद ब्यांक आवाज़ में बोली ,
"नै देदी , बोल दो यह झूठ है , प्लस , अप्प नै मर सकती , नई , अप्प मेरी हो , सिर्फ मेरी , बोल दो यह झूठ है , देदी..." रवि घुटनो के बल बेथ बेइंतहा रोटा हुआ बोलै ,
"रावी , तू प्यार मेरा , मेरी जिंदगी तू , तुज़से दूर हुई , तोह मर गई में , यह रूप मेरा , ब्यांक है बहुत , दूर रह मुज़से , और छोड़ दे कोमल का साथ , वार्ना सब मर जाओगे तुम..." रेखा पलट कर चलते हुए बोली , उसका सफेद जिस्म बेहद ब्यांक था , बोलने से होंठो और मोह से खून बह रहा था ,
"नई देदी , में , में आपका भाई , आपको फिर से जिन्दा करुगा , देदी में डेविल हु , में आपकी आत्मा को कही नै जाने दूंगा , देदी , में आपको जिन्दा करुगा..." रवि , रेखा के कंडे पर हाथ रख रट हुए बोलै ,
"मर चुकी में , जल गया जिस्म मेरा , कुछ न बचा , भूल जा मुझे , समाज मुझे अपना दुश्मन , मरना पढ़े अगर , तोह मर देना मुझे..." रेखा , रवि के चेहरे के करीब अपना चेहरा करते हुए बोली ,
"नई , नई , कभी नई , आपको मरना , में यह कभी नै करुगा , चाहे मेरी जान लेलो अप्प , अप्प मुज़से बड़ी हो , मेरी बहिन हो अप्प , मेरी बड़ी बहिन , डीडीई , प्लस , पहले जैसी बन जाऊ , मैं , मैं वादा करता हु , कभी , कभी आपसे दूर नै जाउगा , आपका ख्याल रखुगा , बोलू देदी , मन जाओ प्लस..." रवि , अपनी बहिन रेखा के ब्यांक गले सादे चेहरे को बेइंतहा चूमता हुआ बोलै ,
"तू देगा रुला मुझे , प्यार hi था इतना , तोह क्यों गया छोड़ कर मुझे , में तेरी थी , तू क्यों गया दूर मुज़से , छोड़ दिया घर तूने , बिना सोचे मेरे बारे , इक बार तोह सोच लेता , में कैसे जयगी , तेरे बिना , अपने बचे का ख्याल तोह करता तू..." रेखा बेहद नाम आँखों से बोली , उसकी आँखों से असनु की जगह खून बह रहा था ,
"kk...kya ..bb..bacha..." रवि इक डैम से चौंक कर बोलै , रवि खामोश हो गया , उसकी जुबान पर टाला लग गया , होंठ सुख गए , बर्फ जैसे ठन्डे पढ़ गए ,
"हऊणन , मने तुज़से जब प्यार किया , पेट से हो गई थी में , पर बताया न तुझे मने , शहर चला गया तू , तब , माँ ने मारा मुझे बहुत , उनको करनी थी शादी मेरी , बेचा होने से पहले , पर में न मणि , माँ मुझे रोज़ मरती , क्यों की वोह बचा नै पाप था , नज़र उनकी में , पर जानती थी में , यह मेरा प्यार है , भाई का प्यार , फिर जब तुम , छोड़ गए घर हमारा , तब कुछ महीनो बाद , घर छोड़ दिया मने भी , इक चर्च में चली गई में , (रेखा हरिजन थी , अभ वोह उलटी सीधी बतिअन नै कर रही थी , बल्कि साफ बोल रही थी , पता नै क्यों..) वह इक पादरी नेक था , उसने मुझे असर दिया , अपनी बची की तरह , वह की पवितर औरशन ने मुझे सम्बल लिया , घर छोड़ने के कुछ महीनो बाद , इक प्यारी सी बची ने जनम लिया , में खुद को धक् कर रखती थी , परदे में , किसी को न चेहरा दिखती अपना में..." रेखा बेहद रट हुए बोल रही थी , साथ में वोह कमज़ोर भी होती जा रही थी ,
रवि , रेखा की दर्द भरी बतिअन सुन , वोह पल , वोह लम्हे यद् कर रहा था , जब उसे कोई भी रेखा के बारे में , कुछ नै बताता था , यहाँ तक की , उसके हर अपने ने , उसे झूठ बोलै , के रेखा की शादी हो गई है , इतना बड़ा झूठ , उससे सच छुपाया गया , लेकिन अभी वोह रेखा देदी की बतिअन सुन रहा था ,
"देदी , इतना कुछ सहा अपने , क्यों नै बताया , के अप्प , उफ्फ्फ , क्यों , आपको विश्वास नै था मुझ पर , देदी , में आपका हाथ थम लेता , आपको खुश रखता , अपनी बची को खुश रखता , मेरी बची , देदी , मेरी बेटी कहा है , प्लस बता दो , प्लस..." रवि , रेखा के सामने रट हुए गिड़गिड़ा कर बोलै ,
"वोह तोह तुम्हारे पास है ..." रेखा थोड़ा मुस्करा कर बोली ,
"नै है , वोह मेरे पास नै है , इक मिंट , क्या , ओह्ह्ह , फर्जी , वोह , वोह , मेरी बेटी है , मेरी खुद की बेटी..." रवि बेहद नाम आँखों से चौंकते हुए बोलै ,
"हाँ , फर्जी मेरी बेटी है , उसे मने चर्च में जनम दिया था..." रेखा बेहद रट हुए बोली ,
"अह्ह्ह्हह्हह (चीख कर रट हुए) , अपने बताया क्यों नै , के में hi उसका पापा हु , क्यों..." रवि रट हुए गुस्से में चीख कर बोलै ,
"तुम पास थे , तुम , तुम , कहे थे उस वख्त , तुम्हारे जाने के 4 महीनो बाद , मने घर छोड़ दिया , फिर इंतज़ार किया तुम्हारा , घर के as-pas चर्च की औरशन को बेह्जति रही , तुम्हारा पूछने के लिए , 1 साल , 2 साल , 4 साल , तुम वापिस नै ए , मेरे भाई , तुम नै थे , और में , में , अपनी बची को क्या बताती , के वोह , के वोह , इक नाजायज औलाद है , जो बिना शादी के , मेरे , मेरे भाई ने पैदा की , मने उसे झूठ बोलै , के उसके पापा मर गए हैं , तुम , तुम , जानते हो , यह बात बोलने में , मुझे कितना दर्द हुआ , कितना दुःख हुआ , मेरी आत्मा तक मर गई , मेरा प्यार मर गया , मने , मने , सही किया मेरे भाई , और कोई रास्ता नै था , मेरी बची , बार बार पूछती , उसके पापा कोण हैं , कहा है , क्या करते हैं , में , में , उसके सवालों का जवाब न दे पति , आखिर अपने प्यार को मर कर , मने उसे बताया , के उसके पापा मर चुके हैं , जानते हो , यह बात सुन कर , वोह खामोश हो गई , उसके होंठो से ख़ुशी चीन गई , वोह पत्थर सी हो गई , न किसी के साथ खेलती , न बात करती , बस अकेली बैठी रहती , वोह , वोह , पगली चर्च में बेथ कर , जीसस के अग्गे हाथ जोड़ , अपने पापा को वापिस मांगती रहती , में , में , टूट चुकी थी रवि , वोह *** साल की मासूम लड़की थी...." रेखा बिलख बिलख कर रट हुए बोली , उसके शबदो में , वोह दर्द था , जो शयद hi किसी ने सुना , या महसूस किया हो ,
रवि खामोश था , वोह क्या बोले , उसने गलती की थी , पर गलती दोनों की थी , रेखा ने उसे बताया नै , के वोह माँ बनने वाली है , और रवि इस बात से अनजान था ,
दर्द , इक ऐसा शब्द , जिस में बस पीड़ा होती है , लेकिन यह दर्द , वोह दर्द था , जिसमे , अहह , क्या बोलू में , कोई शब्द नै मेरे पास ,
चोट लगने पर , कुछ दिनों की पीड़ा होती है , पर यह चोट सीधी दिल पर लगी थी , न खून निकला था , न घाव बना था , न इसका कोई इलाज था , न कोई बचाव , रेखा की जिंदगी पूरी तरह बदल गई , इक बची को जनम दिया , उसे *** सालो तक पल कर बड़ा किया , उफ़ , कितने दर्द सही होंगे उसने , जब उसकी खुद की बची , उससे पूछती होगी , मुम्मा , पापा कहा हैं , यह पल पल का दर्द था , हर पल का दर्द था , यह रत दिन का दर्द था , और यह दर्द रेखा की मौत तक चला ,
"देदी , माफ़ कर दो , में , में , तुम्हारा दोषी हु , माफ़ कर दो मुझे..." रवि घुटनो के बल बेथ , अपने चेहरे पर हाथ रख फुट फुट कर रट हुए बोलै ,
"हूँ (मुस्करा कर) , माफ़ी तुम मिल चुकी है , मेरे भाई , तूने मेरी बची को , वोह ख़ुशी दी , जो में उसे ** सालो में कभी न दे पायी , में , में , उसे रोज़ देखती हु , जब वोह खेलती है , खुश रहती है , जब वोह बोलती है , इतना खुश , रावी , मने उसे इतना खुश कभी नै देखा , ाचा हुआ , में मर गई , काम से काम , मेरी बची , अज्ज खुशनुमा जिंदगी तोह गुजर रही है..." रेखा बेइंतहा रट हुए बोली ,
"में , में , आपको मरने नै दूंगा , अप्प मेरी हो , समाजी , अप्प मेरी हो , सिर्फ मेरी..." रवि , रेखा को अपनी बहु में भरता हुआ , बेइंतहा चिल्ला कर बोलै ,
"रावी , वख्त बीत गया , मेरे भाई , जो गुजर गया , वोह नै मिल सकता , हाँ , अगर मुझे खुश देखना चाहते हो , तोह , तोह , मेरी बेटी को खुश रखना , उसे दुनिआ की हर ख़ुशी देना , वादा करो..." रेखा बेहद रट हुए बोली ,
"नयी , वादा नै करुगा , देदी , आपको मेरे साथ रहना होगा , हमेशा , हम दोनों , हाँ देदी , हम दोनों , फर्जी को खुश रखेंगे , अप्प , देदी अप्प मेरी साथ रहो न , मुझे अपनी गलती सुधरने का इक मौका तोह दो , प्लस देदी..." रवि , रेखा के चेहरे को बेइंतहा चूमते हुए बोलै , उसका दर्द , कोई नै समाज सकता था ,
"रावी , मेरी आत्मा को शांति नै मिल रही , में भटक रही हु , मुझे तुमसे वादा लेना है , मुझे जाने दो , और रावी , वख्त ऐनी पर , मुझे मर देना , वादा करो रावी..." रेखा बेहद रट हुए अपना हाथ अग्गे बड़ा कर बोली ,
"आपको किसने मारा , बोलू देदी , पहले बताओ मुझे..." रवि गुस्से में चीख कर बोलै ,
"उनको मर दिया मने , पर में , पर में जानती थी , इक न इक दिन हम मिलेंगे , और तुम मुज़से यह पूछोगे , इसलिए मने 4 लोग को जिन्दा छोड़ दिया , तेन की तू भी , अपना गुस्सा उन हरामजादो पर निकल सके..." रेखा , प्यार से रवि का चेहरा सेहला कर बोली ,
"कोण , कोण थे वोह..." रवि बेइंतहा गुस्से में चीख कर बोलै , उसका जिस्म लाल होकर जलने लगा , आँखें लाल होकर , खून बरसाने लगी ,
"रेहमान उल्ला , असलम खान , ठाकुर जी देव परताप , और दसप शमशेर , ें चारो ने , शहर में दंगे करवाए , हज़ारो बेगुनाह लोग को मर दिया , हम जैसी नन्स को भी नै छोड़ा , सबको तड़फा तड़फा कर मरवाया ें लोग ने , मने , मने अपनी बची को चर्च में छुपा दिया , तेन की वोह जिन्दा रह सके , पर , पर , मरने के बाद भी , मुझे शांति नै मिली , क्यों की , मेरी बची भुकी थी , वोह सड़को पर रट हुए चल रही थी , कोई उसे खाना नै दे रहा था , मेरी उस पर हमेशा नज़र रहती , अचानक इक दिन , कुछ लोग उसे उठा कर ले गए , में आत्मा थी , में किसी को छू नै सकती थी , में तब मज़बूर थी , में बहुत दर्द में थी , तभी मने देखा , तुम , तुमने उन सबको मरकर , मेरी बेटी की जान बचा ली , फिर तुम्हारे साथ जो लड़की थी , उसने मेरी बेटी को , अपना लिया , में बहुत खुश हुई..." रेखा बेहद रट हुए दर्द भरे शबदो में बोली ,
"वुफफ्फ्फ्फ़ , मेरे सामने क्यों नै आयी अप्प..." रवि बेहद भरी आवाज़ में , बेहद गुस्से में बोलै ,
"क्यों की , में नै चाहती थी , तुम कभी यह एहसास हो , के फर्जी तुम्हारी अपनी बची है , वोह सही वख्त नै था , तुम उस वख्त फर्जी को संबलना था , उसे प्यार देना था , अज्ज मेरी बची को , तुमने पूरी तरह अप्पन लिया है , इस लिए तुम बता रही हु , में जाती हु अभ , मेरी बेटी का ख्याल रखना , इस पल के बाद , हम दुश्मन हैं , न तुम मेरे भाई हो , न में तुम्हारी बहिन , क्यों की मुझे यह रूप , जोकर ने दिया था , तेन की में चीज़ो को छू सकू , और पहले में आत्मा थी , में किसी को छू नै सकती थी , मुझे जोकर का कारज उतरना है , हम दोनों मिलेंगे , लेकिन तब हम , इक दूसरे को मरने के लिए मिलेंगे..." रेखा रट हुए मुस्करा कर बोली , और फिर वह से गयाब हो गई...
"याःहीआननननन (तेज़ घूरते हुए) , वुफफ्फफ्फ्फ़ , मी आपको जिन्दा करुगा , आपका बदला लूंगा , में महाशक्ति को पाकर , आपको जिन्दा करुगा..." रवि बेहद गुस्से में चिल्ला कर बोलै , उसके बोलने से ऐसा लग रहा था , जैसे 4 लोग इक साथ भरी आवाज़ में बोल रहे हो ,
आसमान चीख रहा था , तूफान फिर से उमड़ आया था , क्यों की डेविल शिकार पर निकल चूका था , उसका गुस्सा , इतना अधिक था , के वोह उड़ते हुए , इक आग से जलता हुआ , दानव परतीत हो रहा था ,
रवि पल भर में hi रेहमान उल्ला की बिल्डिंग में पहुँच गया , उसने देखा बहार दो गार्ड्स खड़े थे , हाथो में गन लिए , रवि अगर इतने लोग को मर देता , तोह पूरा शहर दर जाता , रवि ने अपना लाल जिस्म छिपा लिया , पर गुस्सा और नफरत वही था , जो उसकी लाल आँखों से जलक रहा था ,
रवि ने अपना पसंद का हथयार लिया अपनी शक्ति से , जो थी इक लाल चमकती , बेहद तेज़धार खुल्हाडी , रवि उन दोनों की तरफ बढ़ने लगा ,
"ेहः कोण है तू , रुक वही... " इक गार्ड अपनी गन रवि के सीने पर ताँता हुआ बोलै ,
"उसके हाथ में क्या है..." दूसरा गार्ड इक बड़ी सी खुल्हाडी देख दर कर बोलै ,
"ेहः रुक..." वोह अभी इतना hi बोलै था , रवि ने जोरदार वॉर कर , उसकी गर्दन धड़ से अलग कर , उसका खून से लथपथ कटा सार , फुटबॉल की तरह घूमता हुआ , दूर रोड पर जा गिरा ,
"ेहठ नयी..." दूसरा गार्ड अभी इतना hi बोलै था , रवि ने उसके सार के बेचू बेच खुल्हाडी का जोरदार वॉर किया , खुल्हाडी ने उसके शरीर के , सार से लेकर निचे तक , दो टुकड़े कर दिए ,
"वुफफ्फ्फ़ (तेज़ सांसे भरते हुए) ..." रवि अग्गे बड़ा और तेज़ सांसे भरते घूरते हुए , इक बड़े से दरवाजे को खुल्हाडी के तेज़ वॉर से फाड् दिया , वोह लकड़ी का दरवाजा दो वॉर भी न सेह पाया , अभ रवि बिल्डिंग के अंदर घुस चूका था ,
"तमासस्स वोफ्फफ्फ्फ़.." रवि ने तेज़ आवाज़ में चीखते हुए ख़ुशी को पुकारा , ख़ुशी उसी पल उसके सामने ा गई ,
"वूफफ आठ वुफफ्फ कितने लोग है यहाँ..." रवि बेहद तेज़ लाल चमकती आँखों से बोलै ,
"21 लोग..." तामस अपने दोनों हाथो में खंजर पकड़ते हुए बोली ,
"लास्ट फ्लैट छोड़ कर , बाकि सब को मर दू , जावूओ..." रवि डेविल रूम में चिल्ला कर बोलै ,
"अभ आएगा मज़ा बेवकूफ प्यारे..." ख़ुशी अपने हाथ में पकड़े कंजर पर अपनी जीभ फिरा कर बोली ,
उन दोनों की आवाज़ सुन , पोरे के पोरे 21 लोग वह ा चुके थे , उनके हाथो में हथयार थे ,
"अरे देख क्या रहे , गोली मारो..." रेहमान उल्ला का खास आदमी रक्का चीला कर बोलै ,
लेकिन वोह सब थार थार कम्पनी लगे , जब उनके हाथो में पकड़ी गन्स , पिगल कर , उनके हाथो से पानी की तरह बह गई ,
रवि और ख़ुशी उनकी तरफ बढ़ने लगे , दो लोग रवि की तरफ ए , रवि ने खुल्हाडी के जोरदार वॉर इक आदमी के पेट पर किया , सब वही रुक गए , क्यों की उस आदमी के जिस्म के दो टुकड़े हो गए , और रवि का पूरा चेहरा उसके खून से भर गया ,
"अहःअहः , भागूओ , अपनी मौत से..." रवि अपने होंठो पर टपकते उस आदमी के खून की बूंदु को जीभ से छत्ते हुए डेविल रूप में हस्ता हुआ बोलै ,
"सुमंन्त्र...." रवि डेविल रूप में हस्ता हुआ चिल्ला कर बोलै , तोह रमा सेडीईओं पर कड़ी हो गई , उसके बालो ने इक देवर बना दी , तेन के यह सब सेडीईओं से ऊपर न जा पाए ,
"कविया...." रवि इक बार बेइंतहा हस्ते हुए चिलाय , तोह बेबी भी तलवार हाथ में लिए वह पहुँच गई , उसके साथ लारा भी थी ,
"ाहः , यह ही डेविल की आर्मी ाहः , मर दो सबको , इनके जिस्मो की बोटी बोटी कर दो , इतने टुकड़े करो के सुबह पहचान भी न हो पाए , ाहः...." रवि अपने ब्यांक शेतीआणि रूप में एते हुए , बेइंतहा हस्ते हुए बोलै , उसका रूप सच में दिल दहला देने वाला था ,
फिर धीरे धीरे वोह 20 लोग फ्लैट के निचले हॉल में ा गए , सभी बेहद डरे हुए थे ,
"सुमंत्र..." रवि , रमा की आँखों में आँखें दाल बोलै , तोह रमा के बालो ने पोरे हॉल को चारो तरफ से बंद कर दिया ,
फिर क्या था , सब सुरु हो गए , ख़ुशी अपने चाकू से सबके जिस्मो को फाड़ती जा रही थी , बेबी और लारा , पगलू की तरह अपनी तलवार चलाये जा रही थी , किसी का हाथ काट देती , किसी की तंग , और रवि निचे घ्याल तड़फ रहे लोग को , अपनी खुल्हाडी से , छोटे छोटे टुकड़ू में कट्टा जा रहा था ,
कोई 5 मिंट बाद , बिल्डिंग के हॉल में सबकी लशु के टुकड़े टुकड़े पढ़े हुए थे , खून पानी की तरह बेहटा हुआ , फ्लैट से बहार जा रहा था , ख़ुशी , बेबी , लारा , उन सबके खून से नहायी हुई थी , वोह तीनो बेहद ब्यांक लग रही थी ,
"तमासस्स , लाऊ उसे मेरी नज़रिओं के सामने..." रवि अपने असली रूप में अत हुआ गुस्से में चीला कर बोलै ,
ख़ुशी वह से गयाब होकर , जब वापिस लोट कर आयी , तब उसके साथ रेहमान उल्ला था , जिसकी टंगे कम्प रही थी , वोह अपने दोनों हाथ जोड़ रहा था , डेविल की तरफ देख कर....
"हैं , यह परिदा तोह थार थार कम्प रहे , साला फत्तू..." ख़ुशी अपने होंठो पर लगा खून जीभ से फिरा कर छत्ते हुए बोली ,
"वुफफ्फ , ऐसे दर है अपनी मौत का , जो ऐसे अभी मिलेगी..." रवि डेविल रूप में घूरते हुए बोलै ,
"हम्म्म , बेवकूफ डेविल , इतना क्यों बोल रहे हो , में अभी इसका सीने चीयर कर , इसका फड़फड़ाता हुआ दिल बहार निकलोगी , उम्म्म , अज्ज तोह मज़े ा गया , मुझे इसका दिल निकलना है , इसका दिल , अह्ह्ह , लाजवाब होगा , तुम अपनी जुबान बंद करो , और मुझे ऐसे मरने दो..." ख़ुशी , रवि के सामने आकर , बेहद गुस्से में बोली ,
"खुशी..." डेविल बेहद गुस्से में बोलै ,
"अह्ह्ह , बढ़ में जाओ कमीने..." ख़ुशी अपने हाथ फैला गुस्से में बोली ,
वही दूसरी तरफ....
"उफ्फ्फ मेरे रवि ने कितना दर्द झेला है , में उसे अभ कभी दर्द में नै रहने दूंगी , में , में हमेशा उसका साथ दूंगी , वोह नेक इंसान है ..." यह काट थी , जो अपने रूम में बीएड पर लेती , अपने मन के भेटेर यह सब सोच रही थी ,
"पगला , खुद को डेविल बोलता है , इतना नेक इंसान है वोह , पर क्यों , तू भी न काट , पागल हो गई है , रवि के प्यार में , कुछ और सोच , बेबी कहा है , लेकिन रवि है कहा , उफ़ , हमने सीमा देदी पर कितना शक किया , बहुत मासूम है वोह , में उनसे माफ़ी मांग लुंगी सुबह , मुझे रवि की यद् ा रही है , इस वख्त उसे मिलने जाऊ , और घर में इतनी शांति क्यों है , सब कहा गए , में देखती हु बहार जाकर..." काट मन hi मन यह बतिअन सोच रही थी , फिर वोह उठी और रूम से बहार निकल गई , लेकिन बहार कोई नै था , बस घर के हॉल में , सीमा , और फर्जी थी , फर्जी , सीमा की गॉड में सो रही थी , और सीमा उसका सार थपथपा रही थी ,
फिर काट सेड्यां चढ़ रवि के रूम में ा गई , पर वोह कोमल को देख हरिजन सा रह गई....
तो बे कुनिटेड....