Incest Deewanapan... - Page 27 - SexBaba
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Incest Deewanapan...

अपडेट-138

अभ अग्गे....

जब फर्जी रूम का दरवाजा बहार से बंद किया , तब रवि और काट अकेले अंदर रह गए , काट ने अपनी नज़रियन ज़ुका राखी थी , वोह बेहद खूबसूरत लग रही थी , रवि के मन में कई विचार जनम ले रहे थे , उसे काट से कुछ जरुरी बात करनी थी , और थोड़ा सा प्यार भी , दोनों बीएड पर बेहद करीब बैठे हुए थे , काट की सांसे तेज़ चल रही थी ,

"काट..."

काट ने चेहरा थोड़ा सा ऊपर उठा रवि की तरफ देखा , फिर थोड़ा सा मुस्करा अपनी नज़रियन निचे कर ली , उसे थोड़ी थोड़ी शर्म सी ा रही थी ,

"हम्म , तोह अप्प रुक hi गई , मुझे लगा तुम चली जोगी..." रवि ने मुस्कारते हुए बोलै ,

"में क्यों जाऊ , वोह तोह , वोह.." काट बोलते बोलते रुक गई , क्यों की रवि उसके बेहद करीब ा गया था , अभ उसे रवि की सांसे अपने चेहरे पर पढ़ती महसूस हो रही थी ,

"हाँ , हाँ , बोलो न , में सुन रहा हु..." रवि ने ka5lt करले काळा मुलाम बालो की खुशबु लेते हुए बोलै ,

"मेरा मतलब था , ोूक्छः..." काट अभी बोल hi रही थी , रवि ने उसके कण को दांतो में दबा हल्का सा काट दिया ,

"हम्म , बोलो न..."

"ोुछः , तुम बोलने डोज अह्ह्ह तब न..." काट ने फिरसे तेज़ सांसे भरते सिसकते हुए बोलै , जब रवि ने उसे कण्डु से पकड़ पीछे बीएड पर गिरा दिया , और उसके ऊपर हो उसकी आँखों में देखने लगा ,

"तुम मुज़से कितना प्यार करती हो..."

"बहुत , बहुत , बता नै सकती कितना..." काट ने मुस्कराते हुए होका ,

"रत कहा गई थी तुम , जब हम सब बहार बैठे हुए थे ..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,

काट खामोश हो गई रवि की बात सुन , उसे लगा था , किसी ने कुछ नै देखा , पर रवि सब जान चूका था , चचे काट ने यह बात रवि से छिपाई थी ,

"बताओ न , चुप क्यों हो , उनसे मिलने गई थी तुम , कैसे हैं अभ वोह..." रवि ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"रवि , ओह्ह , तुम कैसे पता , मतलब तुम सब जानते हो , में क्यों आयी हु..." काट ने बेहद चिंता में बोलै ,

"सुरु से , जब से तुम पहली बार देखा तब से , में जनता था तुम पिता जी ने बेह्जा है , अभ बताओ क्यों..." रवि ने काट के साथ लेट उसे बहु में भरते हुए बोलै ,

"हासष्ठ , तुम मरने के लिए , मेरा कोई अतीत नै , और न hi मेरा जनम हुआ है , मने बेबी से सब झूठ बोलै था..." काट अभी बोल hi रही थी , रवि बेच में बोल पढ़ा ,

"क्या , पर , अगर , बेबी को पता चला तब क्या होगा , पर तुम तोह मर चुकी थी..." रवि ने सीधा लेते चाट की तरफ देखते हुए बोलै ,

"नयी , में कभी मर नै सकती , मेरा कोई शरीर नै है , तुम , तुम सब जानते हो , में इक ऊर्जा हु , इक शक्ति , और शक्ति का कोई वजूद नै होता , वोह शरीर मने खुद बनाया था , रमा ने मुझे नष्ट कर दिया , पर , जिन्होनो मुझे बनाया था , वोह अभ भी जिन्दा हैं , वोह तुम्हारे पिता थे , वोह मेरे भी पिता हैं , पिता जी ने मुझे दुबारा जनम दिया और इस धरती पर बेहज दिया , यहाँ आकर में सबसे पहले उसके पास गई..." काट ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"मतलब बेबी के पास , अपनी पारी लोग की कविया के पास..."

"हाँ , पर मुझे बेबी पर बहुत गुस्सा था , उसने मुझे पहचाना तक नै , के में कोण हु , क्या हु , वोह मुज़से बात तक नै करती थी , रवि , तुम तोह पता है , कविया के बिना में इक पल भी नै रहती थी पारी लोग में..." काट ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"पर तुम बताना था बेबी को , के तुम कोण हो , उसका दूसरा जनम था , तब वोह इक इंसान थी , उसे पारी लोग का कैसे कुछ यद् रहता..." रवि ने काट की आँखों में देखते हुए मुस्कराते हुए बोलै ,

"उम् , तब मुज़मे भावनायिओं की कमी थी , तुम यही समाज लो , जैसे ऊर्जा की कोई भावना नै होती , तब में नयी थी , धीरे धीरे इंसानो के बेच रहते , में उनकी तरह बन गई , में इंसानो जैसे रोने लगी , खुश रहने लगी , दुखी होने लगी , गुस्सा करने लगी , पर में बेबी के पास पास hi रही , उसके साथ हर मिशन पर गई , उसकी रक्षा की , मने कभी भी उसका साथ नै छोड़ा , कभी नै , जब से वोह है , तब से में उसके साथ हु..." काट ने अपनी बेबी को यद् कर बेहद रट हुए बोलै ,

"उफ़ , मतलब तुम hi निशा हो..."

"नई , में निशा नै हु , उस बारे में मुज़से कुछ मत पूछना , जब बेबी को बिमान शाह ने बुला लिया , तब मेरा दिल था उसके साथ जाऊ , पर उसने इक बार भी मुझे नै बोलै , में इस बात से इतना गुस्सा हो गई के मेरा दिल किया , में बेबी को मर दू , पर मेरे प्यार की जीत हुई और बेबी ने तुम बचा कर , बिमान शाह को धोका दे दिया , तब बिमान शाह ने मुझे बुला लिया , में ख़ुशी ख़ुशी उसकी बात मन गई , मने बेबी के साथ फाइट की , उसे पकड़ कर कैद किया , उसे मारा पीटा , क्यों की मुझे उस पर बहुत गुस्सा था , वोह मेरी आँखों में अपने लिए जो प्यार था , वोह देख नै रही थी , फिर तुम जानते हो , जब तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ तब आखिर उसने मुझे चुम लिया , मेरे करीब ा गई वोह , पर मेरा प्यार जायदा दिन मेरे पास न रहा , वोह तुम्हारे साथ झरने में गिर गई , में चाहती तोह इक पल में तुम दोनों के पास चली अति , पर मुझे देखना था , बेबी खुद मेरे पास अति है या नै , और मेरा प्यार उसे खिंच लाया मेरे पास , वोह 6 महीने बाद मुज़से मिलने आयी , बस तब से वोह मेरे पास है..." काट ने बेहद रट हुए बोलै , रवि ने उसे अपनी बहु में भर लिया , उसके बालो को सहलाते उसे शांत करने लगा ,

"काट , मुझे ख़ुशी है , तुम वोह सब मिल गया जो पारी लोग में तुम न प् सकीय , काट अभ मुझे वोह पाने दो जो में न प् सका , क्या तुम मेरा साथ डौगी या फिर से पिता जी का..." रवि ने बेहद उदास होते हुए बोलै ,

"रविइइइ , यह तुम क्या बोल रहे हो..." काट ने और भी रवि को अपनी बहु में कस्ते हुए बोलै ,

"काट , पिता जी तुमसे कब बात करते हैं , काट इस बार , इस बार , तुम मेरे रस्ते में मत एना , प्लस , मुझे मेरी कोमल को पाना है , मुझे मेरी कोमल को पाने दो , तुम किसके साथ हो , बस यह बताओ मुझे..." रवि ने बेहद घम्बिर होकर बोलै , वोह काट की आँखों में देख रहा था ,

"ओह्ह , तुम यह नै बोल सकते , में क्या बोलू अभ , पिता जी ने मुझे बनाया है , अपनी शक्ति से , अभ उनकी हर आज्ञा का पालन मुझे करना hi होगा , मेरे पास कोई और रास्ता नै , में क्या करू , मुझे कुछ समाज नै ा रहा , पर , में तुमसे बहुत प्यार करती हु , इस बारे में , मैं कुछ नै बता सकती..." काट ने रवि के होंठो को चूमते हुए बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"मतलब तुम मेरा साथ नै डौगी..." रवि ने उठ कर बैठते हुए बोलै ,

"मने कब बोलै , के में तुम्हारा साथ नै दे रही , पर तुम मेरे mano-bhavna को नै समाज रहे , पिता जी रत मुज़से मिले थे..." काट ने भी बीएड पर उठ कर बेथ ते हुए बोलै ,

"हम्म , क्या बात की तुम दोनों ने..."

"वही जो हर बार वोह करते हैं , तुम्हारी और कोमल की , वोह तुमसे अभ भी नफरत करते हैं , उनहोनु कुछ बड़ा सोचा है , तेन की तुम दोनों कभी इक न हो पाओ , वोह जल्द hi कुछ करने वाले हैं..."

"क्या , तुमने पूछा नै उनसे..."

"ouu-huu , मुझे कब बताते हैं वोह , में तोह गुलाम हु उनकी , रवि , में तुमसे वोह प्यार नै कर सकती जो तुम किसी इंसान से करते हो , उनहोनु मुझे रोका है , पर , में हमेशा तुमसे hi प्यार करुँगी , इक बात बताओ मुझे..." काट ने रवि की गॉड में सर रख सोते हुए बोलै ,

"हाँ बोलो न..." रवि ने निचे झुक काट के होंठो को चूमते हुए बोलै ,

"तुम कब पता चला के तुम डेविल हो..."

"हासष्ठ , काट मुझे जब जब भी चोट लगी , मेरा जखम कुछ hi दिनों में ठीक हो जाता था , उसका निशान तक नै रहता था , जब पाक़िआ ने मुझे चाकू मारा और जब मने विक्तोर को मर कर खुद को गोली मरी , तब मेरा जखम कुछ hi दिनों में भर सा गया , बस धीरे धीरे मुझे खुद का एहसास हो गया , में कोण हु , क्या हु..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"हम्म , और तुमने यह बात सब से छिपा कर राखी , पर में जानती थी , पर मने कभी बिमान शाह को कुछ नै बताया के तुम कोण हो..." काट भी मुस्कराते हुए बोली ,

"ाचा जी , शुक्रिया आपका , हम आपके एहसान मंद रहेंगे , वैसे अप्प बेहद खूबसूरत हो , जैसे पारी लोग में थी , काट तुम मुज़से कितना डर्टी थी , और अभ , अभ तुम मेरी बहु में सोई हुई हो , काट में जनता हु , इक दिन तुम मेरे लिए कुछ बहुत बड़ा करुँगी , में जनता हु , में समज़ता हु , मेरा दिल कहता है , इक दिन तुम मेरा साथ डौगी , पिता जी से भागवत करके और मुझे उस दिन का हमेशा इंतज़ार रहेगा , क्यों की में भी तुमसे बेपनाह मोह्हबत करता hu..."ravi ने अपने दिल की गहरायी से यह शब्द बोले , तोह काट खामोश सा हो गई , रवि ने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए , और कास कर काट के होंठो को चुम लिया , काट मुस्कराने लगी ,

"काट , इक बात और , क्या तुम माँ से मिली हो , हमारी माँ से..."

"नयी , उनसे कभी नै मिली में , मुझे बिलकुल नै पता वोह कहा है , बस पिता जी जानते हैं , माँ कहा रहती है..." काट ने बेहद उदासी में बोलै ,

अभी रवि कुछ बोलने hi जा रहा था , रूम का दरवाजा इक डैम से खुल गया , दरवाजा खुलते hi फर्जी अंदर ा गई , और अपनी कमर पर दोनों हाथ रख , रवि और काट को देखने लगी ,

"हांजी बीटा , कैसा एना हुआ आपका..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"चालू पापा , आपके 5 मिंट ख़तम हुए , अभ अप्प जाओ , कोमल मुम्मा आपको बुला रही , और पापा में भी आपके साथ जोगी..." फर्जी ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,

"ाचा , अप्प वह क्या करुँगी..."

"पापा..."

"ok , अप्प भी चलो मेरे साथ , आपसे डरते हैं हम फर्जी जी , काट तुम फर्जी को त्यार कर दो , में कोमल से मिल लेता हु..." रवि ने पहले फर्जी को और बाद में काट को बोलते हुए कहा ,

रवि इतना बोल रूम से बहार चला गया , अभी रवि रूम के दरवाजे के पास hi पहुंचा था के उसे बेबी मिल गई जो रूम के अंदर जा रही थी ,

"कैसी हो जूही , हाय अज्ज तोह अप्प बेहद क़ातिलाना लग रही हो..." रवि ने बेबी को बहु में भरते हुए बोलै ,

"शठ , छोड़ू भी , फर्जी देख रही है..." बेबी ने बेहद शरमाते हुए बोलै ,

"उम् , ाचा , रत को मज़ा आया या अज्ज फिर..." रवि अभी बोल hi रहा था के बेबी ने उसके होंठो पर अपना हाथ रख दिया ,

"शहहह , फर्जी सुन लेगी , तुम जाओ अभ..." बेबी ने रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै ,और फिर काट और फर्जी के पास जाकर उनसे बतिअन करने लगी , अज्ज वोह बेइंतहा खुश थी ,

रवि भी मुस्कराते हुए अपनी कोमल के पास पहुँच गया जो सीमा के साथ घर के हॉल में सोफे पर बैठी हुई थी , दोनों त्यार थी , बस उनको रवि का इंतज़ार था और रमा और फर्जी का भी ,

रवि भी उनके पास hi बेथ गया , और उनसे बतिअन करने लगा , करीब आधे घंटे बाद , फर्जी और रमा भी ा गई , फिर रवि , कोमल , सीमा , रमा और फर्जी , चल पढ़े , इक नए सफर की और , जो था , चाचा जी का घर , यहाँ इक नयी मुसीबत उनका इंतज़ार कर रही थी....

दूसरी तरफ...

"t..tt...tum jj...jj...jinda हो..." ख़ुशी ने बेहद हकलाते हुए बोलै ,

"हाँ बहाना , में जिन्दा हु , तुम किसके लिए इतना रो रही हो..." उस शक्श ने मुस्कराते हुए बोलै , यह और कोई नै कुणाल था ,

"माँ के लिए ..." ख़ुशी ने जैसे hi यह बोलै और पलट कर अपनी माँ की तरफ देखा , पर वह कोई न था , बीएड इक डैम खली था ,

"ः , vasat-vikta वोह नै जो तुम देख रही हो , vasat-vikta वोह है , जो में तुम दिखा रहा हु , में हु जेनिथ , पारी लोग का असली राजा , में हु जादूगरो का जादूगर जेनिथ , ः..." कुणाल ने ख़ुशी के बेहद करीब आकर हस्ते हुए बोलै ,

"में भी ख़ुशी नै , में तामस हु , जानते हो न , तामस कोण है..."

"जनता हु , जनता हु , जिद्दी , चालक , मदिरा में डूबी , इक दानवी औरत हो तुम , हस्सश्ठ , अभ तुम कही नै जा सकती , अभ में हु तुम्हारा मालिक , तुम वही करना होगा जो में कहुगा , समाज गई तामस.."

"हूँ , खवाब अचे देखते हो , डेविल अभ भी है , वोह तुम कुत्ते की मौत मरेगा..."

"ः , उस से पहले , तुम कुछ दिखाना है , यह देखो , जैसे hi ख़ुशी ने देखा उसकी आँखों से असनु बहने लगे , क्या यह कोई मायाजाल था जेनिथ का...

तो बे कुनिटेड....[friends update thoda short hai next time se bade update hi ayege...]
 
अपडेट-139



अभ अग्गे...

कुणाल ने ख़ुशी को कुछ ऐसा दिखा दिया , के ख़ुशी अंदर तक हिल सा गई थी , ख़ुशी की आँखों से असनु बहने लगे , ख़ुशी का दिल कमज़ोर होने लगा , ख़ुशी के सामने खड़ा कुणाल अभ मुस्कराने लगा था , उसने जैसा सोचा था , ठीक वैसा hi हो रहा था ,

"ः , मेरी गुडिअ , कैसा लगा , तुम्हारे भाई का दिया यह खूबसूरत तोहफा..." कुणाल ने बेहद हस्ते हुए बोलै ,

"तुम , तुम , बेहद नीच इंसान हो , मुझे खुद पर घिन अति है , तुम जैसा दरिंदा मेरा भाई है..." ख़ुशी ने और भी रट हुए बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,

"आआ , तुम जैसा सोचना चाहती हो , सोच सकती हो , अभ में जो कहुगा , तुम वही करना होगा..." कुणाल ने ख़ुशी के बेहद करीब आकर उसकी आँखों में अखन दाल बोलै ,

"नईईई , अगर तुम यह चाहते हो , के में रवि को धोका दू , नयी , नयी , प्लस , मुज़से यह मत करवाओ , प्लस भइआ..." ख़ुशी ने बेइंतहा रट हुए घुटनो के बल बैठते हुए बोलै ,

कुणाल के चेहरे का रंग लाल हो गया , उसे बेहद गुस्सा ा रहा था , वोह इक डैम से निचे बेथ गया और ख़ुशी के बालो को पीछे से मुठी में कस्ते हुए , गुस्से में चीला कर बोलै ,

"क्या , तुम मुझे मन करुँगी , कुणाल ठाकुर को , महँ जादूगर जेनिथ को , बेवकूफ लड़की , तेरे कारन , सिर्फ तेरे कारन , वोह कोमल मेरे हाथ से निकल गई , पहले रूही और अभ कोमल , ाःह , तुम नै जानती , मुझे उस कोमल को झुकना है , अपनी सदियों पुराणी प्यास शांत करनी है , उफ़ उसके हसीं लाजवाब हुसैन को भोगना है , और इक बात , उस हरामजादे रवि को कुत्ते की मौत मरना है , में तुम इक मिंट का वख्त देता हु , उसके बाद , में इसको मर दूंगा , तुम्हारा वख्त सुरु होता है , मेरी कुटिया बहाना..." कुणाल ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै , ख़ुशी तोह सुन सी पढ़ गई , उसका रोना अभ थम चूका था , अभ उसे इक फैसला लेना था , उसे जान बचानी थी , या जान देनी थी ,

कुणाल उठ कर खड़ा हो गया , और पास पढ़े इक टेबल की तरफ चला गया , कुणाल ने टेबल पर पढ़ी वीने की बोतल उठा , उसका ढकन खोल , उसमे निकलती लाल रंग की वीने को इक गिलास में दाल दिया , कुणाल ने गिलास उठा , अपने होंठो से लगा लिया और वीने के छोटे छोटे सिप लेने लगा ,

दूसरी तरफ ख़ुशी वही बैठी अपने भाई कुणाल को देख रही थी , वख्त बीत रहा था , तभी ख़ुशी उठ कर कड़ी हो गई , उसने अपनी कमर के पास से इक डेमों कंजर निकल लिया , और कुणाल के उसकी तरफ घूमने का इंतज़ार करने लगी ,

"भइआए , अभ तुम क्या करोगे..." ख़ुशी ने मुस्कराते हुए बोलै , उसके हाथ में इक डेमों खंजर था ,

ख़ुशी की आवाज़ सुन कुणाल उसकी तरफ पलट गया , कुणाल ने ख़ुशी के हाथ में खंजर देखा , तोह उसके होंठो पर इक मुस्कान दौड गई ,

"भइआ , अगर में न रही तोह तुम मुज़से कुछ नै करा पाओगे..." ख़ुशी ने इतना बोल , वोह खंजर ऊपर की तरफ उठा , अपने पेट में घुसा दिया ,

"नई , कुटिया..." कुणाल बेइंतहा गुस्से में चिलता हुआ बोलै , पर शयद तब तक बहुत देर हो चुकी थी ,

"अह्ह्ह्हह...." ख़ुशी ने इक जोरदार चीख मरी , उसे महसूस हुआ , जैसे कंजर पूरा उसके पेट में घुस चूका है , पर जब उसे दर्द का जरा सा भी एहसास न हुआ , तोह उसने नज़रियन ज़ुका निचे की तरफ देखा , उफ़ खंजर पानी के बुलबुले बन उड़ने लगा था , ख़ुशी यह देख हरिजन सी रह गई , उसकी अखन खुली की खुली रह गई , अभ वोह मर भी नै सकती थी ,

"ाहः , vasat-vikta वोह नै जो तुम देख रही हो , vasat-vikta में हु , अभ वही होगा जो में चाहुगा , बोलो क्या सोचा तुमने , है या न , बताओ जल्दी , वार्ना ऐसे मर दूंगा..." कुणाल ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"ठीक है , तुम उनको छोड़ दो , में तुम्हारी हर बात मानूगी..." ख़ुशी ने बेहद दर्द भरी आवाज़ में बोलै , कई बार रिश्ते प्यार पर भरी पढ़ जाते हैं , और इंसान को बलिदान देना पढता है , किसी अपने की जान बचने के लिए ,

"वैरी गुड , में उसे जिन्दा छोड़ दूंगा , तुम मेरा इक काम करना है , यह लो , जादुई शरबत..." कुणाल ने मुस्कराते हुए बोलै , उसने अपना हाथ अग्गे किया , तोह उसके खली हाथ की हथेली पर , इक गुलाबी रंग से भरी छोटी सी जादुई शरबत की बोतल ा गई ,

ख़ुशी ने वोह जादुई शराब कुणाल के हाथ से पकड़ लिया , और उसकी तरफ देखने लगी , जैसे पूछ रही हो के इसका क्या करना है ,

"हम्म , मेरी बहिन , यह शरबत तुम रवि के पोरे परिवार को पिलाना है , बस इक बूँद , इस से जायदा नै..."

"तुम क्या सबको मरना चाहते हो..."

"नई , बस तुम पीला दो , फिर देखना क्या होगा.."

"नै पहले बताओ , वार्ना पहले में पे लेती हु.."

"उम् , तुम बहुत जिद्दी हो , ाचा सुनो फिर , इस शरबत को पेट hi , वोह सब 7 दिन तक शक्तिहीन हो जायेगे , फिर में आसानी से रवि को ख़तम कर दूंगा , और , और , कोमल मेरी हो जाएगी..." कुणाल ने बेहद मुस्कराते हुए बोलै ,

"ठीक है , में जाती हु..."

"अज्ज रत तक यह काम कर देना , वार्ना..."

"कर दूंगी..." ख़ुशी इतना बोल वह से गयाब हो गई...

दूसरी तरफ....

"हासष्ठ , आखिर पहुँच hi गए , सोनल कितना खुश होगी , चलो जल्दी..." रवि ने गाड़ी चाचा जी के घर के सामने रोकते हुए बोलै ,

अभी दुपहर के 1 बज रहे थे , 10 बजे सब घर से चले थे , और 3 घंटो में सब पहुँच गए थे , रवि ने गाड़ी बहुत तेज़ भागे थी , क्यों की सोनल ने उसे 1 बजे का वख्त दिया था , और रवि अपना वादा पूरा करना चाहता था , और रवि अपनी वाइफ सीमा को भी सबसे मिलवाना चाहता था , उसकी बहाने सीमा से मिल चुकी थी , पर चाचा और चची अपनी बहु सीमा से नै मिले थे , अज्ज उनका यह सपना भी पूरा होने वाला था ,

"वाओ , कितना सुन्दर घर है..." सीमा ने बेहद खुश होते हुए बोलै ,

"तभी तुम ऐनी से मन कर रही थी..." रवि ने सीमा की आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"भइआ , चलो अंदर चले..." रमा ने घर के मैं गेट की तरफ बढ़ते हुए बोलै , फिर सभी रमा के पीछे पीछे घर के अंदर ा गए ,

"ट्रीइंगगग तृंणगगग..." रमा बेल्ल बजने लगी , पर कोई दरवाजा नै खोल रहा था , रमा ने पलट कर अपने भाई की तरफ देखा , सब काफी वख्त से दरवाजा खुलने का इंतज़ार कर रहे थे ,

"भइआ , कोई दरवाजा क्यों नै खोल रहा , कही..." अभी रमा ने इतना hi बोलै था , के रवि इक डैम से उसे पीछे करता हुआ दरवाजे के पास आकर खड़ा हो गया ,

रवि ने अपनी शक्ति से दरवाजे के arr-par देखा , तोह उसे बेहद गुस्से ऐनी लगा , उसकी अखन लाल रौशनी में चमक उठी ,

"याहहहहह..." रवि ने जोर से चीखते हुए दरवाजे पर दोनों हाथो से ढाका जड़ दिया , "काडाकककक..." की आवाज़ करता दरवाजा टूट कर दूर जा गिरा , जैसे hi सबने अंदर देखा , सभी बेहद गुस्से में ा गए ,

घर के हॉल में दो लोग ने पोरे परिवार को बंदी बना रखा था , सोनल , कविता और सीतल , सोफे पर इक साथ बैठी , रो रही थी , रुक्मणि चची और सुमन चची इक साथ बैठी हुई थी , और चाचा जी इक तरफ बैठे हुए थे , उनके हाथ में कोई पेपर्स थे , जिन पर वोह गुंडे उनको सिग्न करने को बोल रहे थे , पूरा परिवार मज़बूर सा लग रहा था ,

दरवाजा टूटने की आवाज़ उन लोग ने भी सुन ली थी , वोह गुंडे दरवाजे की तरफ देख बेइंतहा दर गए , क्यों की रवि गुस्से में दहकता उनकी तरफ देख रहा था ,

"भइआए ..."कविता जोर से छीलते , रट हुए बोली ,

"हूँ , चुप साली , वार्ना यही थोक दूंगा..." इक गुंडा कविता की तरफ अपनी गन की नाली करता हुआ बोलै ,

"याआआह्ह्ह..." रवि बेहद गुस्से में चिलता उनकी तरफ भगा , इक गुंडे ने गन रवि की तरफ कर गोली चला दी , गोली गन से निकल , रवि के कंडे पर जा लगी , पर रवि रुका नै , अभी वोह गुंडा दूसरी गोली चलने hi जा रहा था , तब तक बहुत देर हो चुकी थी , रवि ने उसका हाथ कलाई से पकड़ , ऊपर उठा दिया , दूसरी गोली चाट पर जा लगी ,

"क्या बोले तुमने..." रवि ने बेइंतहा गुस्से में चीखते हुए बोलै , रवि ने उसका हाथ कलाई से पकड़े hi पूरा मोड़ दिया , और कास कर मुक्का उसकी गर्दन के बेचू बेच जड़ दिया ,

"आआह्ह्ह..." की दर्दनाक चीख मरता वोह गुंडा जमीन पर गिर गया , उसके होंठो , उसके मोह से खून पानी की तरह बहने लगा ,

रवि ने दूसरे गुंडे की तरफ देखा , वोह दर से थार थार कम्प रहा था ,

"भैई माफ करदु..." वोह गुंडा रवि के पैरो में गिरता हुआ बोलै ,

"किसने बेह्जा तुम..." रवि ने उस गुंडे को गर्दन से पकड़ ऊपर उठाते हुए बोलै ,

"ाःह भाई s...ss...somnath..nn..ne..." उस गुंडे ने दर्द से हकलाते हुए बोलै , रवि ने उसे गर्दन से पकड़े अपने करीब किया और उसकी आँखों में अखन दाल बोलै..." अपने सोमनाथ से बोल देना , अज्ज से ठीक 3 दिन बाद , में उसे मर दूंगा , वोह इस दुनिआ में कही भी चिप जाये , में उसे मर कर hi रहुगा , अभ जाओ यहाँ से..." रवि ने बेहद गुसी में इतना बोल , उस गुंडे को इक तरफ फेंक दिया ,

कुछ hi देर में वोह गुंडा , अपने साथी को पैरो से खिंच बहार ले गया , अभ सब चैन की साँस ले रहे थे , क्यों , अभ खतरा ताल चूका था , अभ बुराई का देवता खुद उनकी रक्षा करने पहुँच चूका था ,

"भइआए..." कविता और सीतल रट हुए भाग कर रवि के गले लग गई , दोनों कई सालो बाद रवि से मिल रही थी , बहुत तदपि थी दोनों , पर अज्ज अपने भाई के आगोश में जाकर , उनके मन को इक सकूं , इक ठंडक सी मिल चुकी थी ,

"शहहहहह अभ रोना नै..." रवि ने दोनों के असनु भेज गालो को साफ करते हुए बोलै ,

"भइआ , अप्प , अप्प , कहा थे , 3 साल , आपका इंतज़ार करती रही , कहा थे अप्प , कहा थे..." कविता बेइंतहा रट हुए बोली , उसका इक इक,0. शब्द दर्द में डूबा हुआ था ,

"में , में , उसे लेने गया था , हमारी कोमल को , वोह देखो कोमल , बस ऐसे लेट लेट 3 साल बीत गए , मुझे माफ़ कार्डो कवी..." रवि ने बेहद नाम आँखों से बोलै , तोह कविता अपने भाई की आँखों में असीम प्रेम देख , उसके चेहरे को पगलू की तरह चूमने लगी ,

फिर सब सीमा की तरफ देखने लगे , चाचा और चची अपनी बहु को देख बेहद खुश हो गए , सीमा ने अग्गे बढ़ रुक्मणि चची के पेअर छुए लिए ,

"जीती रहो बीटा , कितनी सूंदर है मेरी बहु , किसी की नज़र न लगे..." रुक्मणि चची ने सीमा का माथा चूमते हुए , उसे अपने गले लगते हुए बोली ,

फिर सीमा ने सुमन चची के पाइए छुए , सुमन चची ने भी सीमा को प्यार और अपना आशीर्वाद दिया , चाचा जी ने सीमा के सर पर हाथ रख उसे आशीर्वाद दिया , फिर कोमल , रमा और फर्जी से सब मिले ,

"सोनल कैसी हो अप्प..." रवि ने सोनल के पास जाकर उसकी आँखों में अखन दाल बोलै ,

"में अछि हु..." सोनल ने थोड़ा सा शरमाते हुए बोलै , उसके गुलाबी होंठो पर इक दिलकश मुस्कान थी ,

"भइआ , जब से में आयी हु , देदी ने आपकी बतिअन कर कर , मेरे कण पका दिए..." कविता हस्ते हुए बोली ,

"कवी..." सोनल ने बड़ी सी अखन करते हुए कविता की तरफ देखते हुए बोलै ,

"अरे तुम सब बैठो , में छाए नाश्ता लती हु..." सुमन चची इतना किचन की तरफ चली गई ,

फिर सब सोफे पर बेथ गए , और सब बतिअन करने लगे , परिवार की बतिअन , जो दिल को सकूं देती हैं...

तो बे कुनिटेड....
 
अपडेट-140



अभ अग्गे...

रवि अपने चाचा जी के घर में , पूरे परिवार के साथ बैठा हुआ था , रुक्मणि चची बहुत खुश थी , वोह सीमा से मेथी मेथी बतिअन कर रही थी , और सीमा बेहद प्यार , बेहद समजदारी से उनकी हर बात का जवाब दे रही थी , बाकि सब दोनों की बतिअन को सुन रहे थे ,

कुछ hi देर में सुमन चची किचन से छाए नाश्ता लेकर ा गई , फिर सुमन चची ने सबको छाए नाश्ता दिया , और उनके पास hi बेथ गई ,

"रवि , अज्ज अगर तुम न एते , पता नै क्या हो जाता..." सुमन चची ने रवि की आँखों में ज़कते हुए बोलै ,

"चची अप्प या कोई भी मुझे फ़ोन कर देता .."

"बीटा , सब इक डैम से हो गया , वोह गुंडे अचानक से ा गए , और हम सब इक साथ बैठे , तुम्हारे ऐनी का इंतज़ार कर रहे थे , पर जो भी हो , भगवन ने तुम सही वख्त पर बेहज , हमारी जान बचा ली..." रुक्मणि चची ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,

"पता नै यह कब तक चलेगा , अभ तोह सोचता हु , उनको जमीन दे दू..." सूरज चाचा ने बेहद चिंता में बोलै ,

"नै चाचा जी , हम उनको जमीन नै दे सकते , क्यों दे उनको जमीन , हमारी जमीन है , हमारी ीचा , और चाचा जी , वोह कोई अचे काम के लिए जमीन नै मांग रहे , अगर इस गाओं में फैक्ट्री खुलेगी , तोह कितना नुकसान होगा , कितने लोग बीमार होंगे , नई , में हु न , में आपसे वादा करता हु , 3 दिन में उस सोमनाथ को ख़तम कर , इस लड़ाई का अंत कर दूंगा..." रवि ने बेहद गुस्से में बोलै ,

"बीटा , तुम्हारा इक परिवार है , तुम अपनी जान को जोखिम में दाल रहे हो..." रुक्मणि चची ने थोड़ा उदास आवाज़ में बोलै ,

"चची जी , रवि ठीक बोल रहा है , अप्प इनकी चिंता मत करो , यह सब देख लेंगे..." सीमा ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"भाभी चलो में आपको अपना रूम दिखती हु , प्लस भाभी ..." कवी और सीतल ने सोफे से उठ , सीमा का हाथ पकड़ , उसे खिंच कर उठाते हुए , अपने साथ लेजाते हुए बोलै ,

"कोमल बीटा अभ कैसी हो तुम..." सुमन चची ने मुस्कराते हुए बोलै ,

"में बिलकुल ठीक हु..." कोमल ने बेहद खुशनुमा अंदाज़ में बोलै , उसे पता था , जब वोह पिछली बार आयी थी , तब वोह बच्चू जैसा बर्ताव कर रही थी , ऐसी लिए चची उसे पूछ रही है ,

"भगवन का शुक्र है , बीटा तुम पिछली बार जब देखा था , तब बहुत दर्द हुआ दिल में , तुम फर्जी जैसा बर्ताव कर रही थी , अभ तुम ठीक देख , बहुत ख़ुशी हो रही है..." रुक्मणि चची ने कोमल के पास बेथ , उसका माथा चूमते हुए , बेहद प्यार से बोलै ,

"अरे सोनल तुम रवि को अपने कपडे दिखा दो , जाओ बीटा..." सुमन चची ने सोनल की तरफ देखते हुए बोलै , जो न जाने कब से अपनी नज़रियन ज़ुका बैठी हुई थी , अपनी माँ की आवाज़ सुन , उसने रवि की तरफ देखा , और फिर थोड़ा शरमाते हुए , अपने रूम की तरफ चली गई ,

"भइआ जाओ अप्प..." रमा ने मुस्कराते हुए बोलै , तोह रवि भी उठ कर , सोनल के पीछे पीछे सेड्यां चढ़ उसके रूम में चला गया , रवि के जाने के बाद , सूरज चाचा भी अपने रूम में चले गए , रुक्मणि चची ने फर्जी को अपनी गॉड में बैठा लिया , और फिर सुमन चची और रुक्मणि चची , कोमल और रमा से बतिअन करने लगी , कोमल अज्ज 16 साल बाद अपनी दोनों चच्यों से बतिअन कर रही थी , पिछली बार जब वोह आयी थी , तब सूरज चाचा हॉस्पिटल में एडमिट थे , तब कोमल किसी से जायदा बात नै कर पायी थी , बस ऐसी कारन सुमन चची और रुक्मणि चची , कोमल पर बेइंतहा प्यार लुटा रही थी ,

वही रवि जब सोनल के रूम में पहुंचा , तब सोनल बीएड के पास कड़ी हुई थी , उसकी पीठ दरवाजे की तरफ थी , उसकी सांसे तेज़ चल रही थी , उसे अपने दिल की हर धड़कन बेहद साफ सुनाई दे रही थी ,

रवि ने रूम में एते hi दरवाजा अंदर से बंद किया , और अग्गे बढ़ सोनल को पीछे से अपनी बहु में भर लिया , सोनल के नरम गुलाबी होंठो पर इक मुस्कान दौड गई ,

"मिथु जी , कैसी हो अप्प..." रवि ने सोनल की कमर पर अपने दोनों हाथ रख , उसे अपनी तरफ खींचते हुए , उसकी गर्दन को चूमते हुए बोलै ,

"अह्ह्ह्ह..." सोनल ने सिसकते हुए अपनी अखन बंद कर ली , वोह कुछ न बोल पायी ,

"अरे मेरी मिथु अज्ज चुप क्यों है , अपने हमसे कुछ वादा किया था , शयद अप्प भूल गई हो..." रवि ने सोनल का चेहरा अपनी तरफ कर , उसकी आँखों में अखन दाल बोलै , तोह सोनल इक डैम से रवि की बहु से निकल , बीएड पर जाकर लेट गई , वोह बीएड पर लेती , रवि की तरफ देखने लगी ,

रवि , सोनल के मन के हालत समाज गया , और अग्गे बढ़ सोनल के साथ लेट गया , सोनल ने अपना चेहरा रवि के कंडे पर रख दिया , और उसकी तरफ करवट बदल , उसके सीने पर अपना नरम गोरा हाथ फिरने लगी , उसके मोठे मोठे बूब्स रवि के सीने में धसने लगे ,

"सोनल देदी , उफ़ अप्प कितनी हसीं लग रही हो , में बता नै सकता , और देखो , आपकी और हमारी सगाई भी हो रही है , मने कभी नै सोचा था , में अप्प से शादी करुगा , में बस आपको राहुल से बचाना चाहता था , अप्प मेरी बहिन थी , पर अपने मुज़से hi प्यार कर लिया , देदी सच सच बोलना , आपको कब प्रेम हो गया मुज़से..." रवि ने मुस्कराते हुए सोनल के हाथ को अपने हाथ में पकड़ते हुए बोलै ,

"जब अपने मुझे किश किया था , जब राहुल से वोह वीडियोस लेकर हम वापिस घर ा रहे थे , तब में बहुत टूट सा गई थी , लेकिन भाई अपने मुझे बोलै के अप्प अपने जैसा कोई दंड कर लोगे , तब मेरे दिल में आपका hi ख्याल आया , घर के बहार जब अपने मुझे चूमा , उफ़ में बता नै सकती , मुझे कैसा महसूस हुआ , ऐसा लगा , जैसे में आपको जनमो जनमो से जानती हु , और भाई , मुझे आपके और कविता के रिश्ते का पता था , फिर सीतल के साथ आपका रिश्ता भी सामने ा गया , भाई , जब अपने मेरे प्यार को नकार दिया , तब में बहुत रोई , बहुत हिमेट करके , आपसे इज़हार किया था , पर मने हार नै मणि , आपसे hi सीखा था , हमें जीवन में लड़ना पढता है , कुछ पाना है , तोह हिमेट से अग्गे बढ़ते रहो , मने भी खुद से वचन लिया , आपका प्यार पाकर hi रहूगी , चाहे मर hi क्यों न जाऊ , भाई , जब अपने मुझे गुंडों से बचाया , और जैसे अप्प ने उस सुल्ताना को मारा , मेरा दिल और मज़बूत हो गया , के मेरा भाई , मेरे लिए , किसी भी हुड से गुजर सकता है , मने आपकी आँखों में असीम प्रेम देखा , पर तब आपकी हालत अछि नै थी , कोमल के न होने से , अप्प पगलू जैसा बर्ताव कर रहे थे , मेरा दिल रो रहा था , पर उस दिन मुझे सब कुछ मिल गया , जब अपने कहा के अप्प मुज़से शादी करोगे , पर भाई , अपने इक शरत राखी , के मुझे डॉक्टर बनना होगा , आपको क्या लगा के में डॉक्टर नै बन सकती , में आपको पाने के लिए किसी भी हुड से गुजर सकती हु , क्यों की , मने सच्चा प्यार किया आपसे , बहुत दर्द जेहला मने , 3 साल रो रो कर बिताये , जिन्दा लाश बन गई , पर में ज़ुकी नै , टूटी नै , और ऐसी लिए भगवन को भी तरस ा गया मुझ पर , और आपको मेरे पास बेहज दिया , भाई , ी लव ु , में आपसे बेइंतहा प्रेम करती हु..." सोनल ने अपने दिल में छिपे हर विचार को , बेहद दर्द भरे शबदो में बयान कर दिया , उसकी अखन नाम थी , रवि बस उसके होंठो से निकले हर शब्द को अमृत की बूँद मान , अपने मन के भीतर उतर रहा था ,

रवि कुछ देर कुछ न बोलै , फिर िका इक वोह सोनल के ऊपर लेट गया , उसके मासूम , थोड़े थोड़े असनु भीगे चेहरे को निहारने लगा , सोनल बेहद खूबसूरत लग रही थी , रवि बस उसके गुलाबी नरम होंठो को कंपते हुए देख रहा था , फिर िका इक रवि ने अपना चेहरा निचे ज़ुका दिया , रवि ने सोनल की आँखों में ज़कते हुए , अपने सख्त , कठोर , होंठो को , सोनल के नरम लाल होंठो से हल्का सा छुआ दिया , जब होंठ होंठो से थोड़ा सा टच हुए , उफ़ सोनल का पूरा जिस्म कम्प सा गया , सोनल मदहोश हो गई , वोह रवि के होंठो को हल्का हल्का चूमने लगी , उसके हर चुमन में असीम प्यार था , फिर िका इक रवि सोनल के होंठो को कास कास कर चूसने लगा , सोनल के रसीले लाल होंठ उसके होंठो में पिगलते से जा रहे थे , कुछ hi वख्त की चूसै ने , सोनल के होंठो को बुरी तरह सज़ा दिया था , आखिर रवि इक डेविल था , और सोनल इक आम सी लड़की ,

"ओह्ह सोनल , मेरी जान उम्..." रवि बेहद वासना में बेहटा , सोनल के पोरे चेहरे को चूमने लगा , सोनल हर चुमन को अपनी अंतर आत्मा तक चोट करता महसूस कर रही थी , उससे अपनी भाई का इतना प्रेम सेहन न हो रहा था , उसकी छूट पूरी गीली हो चुकी थी , वोह अपनी मखमली जांगू को आपस में रगड़ रगड़ कर , अपनी कमसिन छूट में उठती खुजली को काम करने का हर संभव प्रियस कर रही थी ,

"थप्प्प्प थप्प्प्प..." तभी रूम के दरवाजे पर इक आवाज़ हुई , रवि उसी पल सोनल के ऊपर से उतर , इक तरफ लेट गया , सोनल अपनी तेज़ चलती संसू को काबू करने लगी , उसकी सांसे इतनी तेज़ थी , ऐसा लग रहा था , उसके मोठे मोठे बूब्स उसका कमीज़ फाड् बहार निकल जायेगे ,

"भइआ , भइआए..." अचानक से इक आवाज़ भी आयी , और रवि पहचान गया , यह आवाज़ किसकी है , तभी सोनल बीएड से उठी , उसके होंठो पर इक दिलकश मुस्कान थी , वोह उठी , और तेज़ी से अग्गे बढ़ रूम का दरवाजा खोल , इक तरफ कड़ी हो गई , दरवाजा खुलते hi , कविता भाग कर अंदर आयी , और बीएड पर सोये रवि की बहु में समां गई ,

"भईई..." कवी की आँखों से असनु बहने लगे , उसने भी 3 साल बेहद दर्द में गुजरे थे , अपने भाई से दूर रहना , इक दर्दनाक वख्त था ,

"उम् कवी , बस अभ और नै रोना.." रवि ने कविता को अपनी बहु में कस्ते , उसके बालो को बेहद प्रेम से सहलाते हुए बोलै ,

"भइआ , आपकी बहुत यद् आयी , में हर रोज़ , हर पल , हर लम्हा , सोनल देदी से , आपका पूछती रही , ऐसा कोई दिन न था , जब आपको यद् न किया हो , भाई , प्लस अभ दूर मत जाना , में मर जोगी , प्लस भाई , प्लसस..." कविता ने रवि के चेहरे को बेइंतहा चूमते हुए बोलै , उसके हर शब्द में असीम दर्द था ,

"ओह्ह कवी , इतना प्यार मत कारु , मत कारु , मेरे जीवन में , न जाने कितनी लड़कियाँ और हैं , और कवी , अभ में दूर क्यों जाउगा , सोनल से शादी करके , तुम सबके पास पास hi तोह रहुगा , में तुमसे बहुत प्यार करता हु..." रवि ने बेहद दर्द भरे शबदो में , कवी के असनु भीगे गालो को चूमते हुए बोलै ,

"भाई , कोई लड़की कविता नै बन सकती , आपकी कविता बस आपकी कविता hi रहेगी , में आपके लिए कुछ भी कर सकती हु..." कविता ने रवि की आँखों में अखन दाल बोलै , उन 3 सालो ने कविता को पूरा बदल दिया था , अभ वोह अनंत समजदारी से बात कर रही थी ,

"कुछ भी..."

"हम्म..."

"तोह फिर मेरी कविता जी , अज्ज के बाद , अप्प कभी रोयेगी नै , वादा करो..." रवि ने थोड़ा सा मुस्कराते हुए बोलै ,

"भाई , अप्प बहुत चालक हो , में वादा करती हु , अगर अप्प मुज़से बात करते रहोगे , में तब नै रोयुगी..." कविता ने मुस्कराते हुए रवि के होंठो को बार बार चूमते हुए बोलै ,

"ाहूऊ ाहूऊ..." सोनल ने नकली सा खासते हुए बोलै , तोह कविता और रवि अलग हो गए , कविता अपनी बहिन सोनल की तरफ देख मुस्कराने लगी ,

"भइआ , अप्प निचे जाओ , हम अति हैं..." कविता ने थोड़ा सा मुस्कराते हुए बोलै , रवि बीएड से उठा और रूम से बहार निकल गया ,

रवि ने पहले निचे जाने का सोचा , पर फिर पता नै क्यों , वोह हवेली की चाट पर चला गया , उफ़ गाओं की ताज़ा हवा ने उसके मन को बेबस सा कर दिया , रवि दूर hare-bhare खेतो से अति , गाओं की मीठी हवा की खुशबु को , अपने मन की गहरायी तक महसूस करने लगा , रवि ने अपनी अखन बंद कर ली , वोह अपनी गुजर चुकी यादिओं में खो सा गया ,

रवि ने महसूस किया , वोह अपने घर से सुबह सुबह निकल , अपने खेतो की तरफ जा रहा था , उसने अपना इक फटा पुराण धोती कुरता पहना हुआ था , उसके कंधे पर मिटी खोदने का औज़ार था , उफ़ रवि की आँखों से असनु बहने लगे , वोह क्या था , और क्या बन गया , उसके पैरो में फटी चपल की जोड़ी थी , जिसे उसने रसयिओं से बांध रखा था , उसकी उम्र 16 साल थी , गाओं से 2 कम बहार उसका खेत था , जिसका रास्ता पूरा कच्चा था ,

रवि को महसूस हुआ , वोह उस रवि के साथ साथ अपने खेतो की तरफ जा रहा था , जो वोह खुद कभी था , तभी उसे अपना दोस्त चंदू मिल गया , चंदू की यद् एते hi , रवि की अखन और बहने लगी , 17 साल बीत चुके थे , अपने दोस्त को देखे हुए , उससे बात किये हुए , रवि अपने दोस्त को देख रहा था , दोनों बतिअन कर रहे थे , दोनों ham-umar थे , रवि के जीवन में , चंदू के बाद , कोई दोस्त न बना था ,

दोस्त बस दोस्त होता है , पर कई बार कुछ लोग दोस्ती पर भी कलंक लगा देते हैं , जो दोस्ती में धोका देता है , उसे कभी दूसरा मौका मत देना , जो दोस्त तुम बुरे हालातो में छोड़ दे , ऐसे दोस्त का कोई नाम भी ले , तोह उसका मोह पर थूक देना , मने दोस्त को वख्त के साथ बदलते देखा है , कुछ दोस्त मतलबी होते हैं , जो बतिअन बेहद धरम करम की करेंगे , पर उनका चरित्र बेहद घिनोना और दूषित होगा , ऐसे दोस्तों से बचना ,

रवि अपनी यादिओं में और अग्गे बढ़ा , उफ़ अभ वोह अपने खेत पहुँच चूका था , यहाँ उसका टुटा फूटा झोपड़ा , उसका रत से इंतज़ार कर रहा था , हर बारिश में , तेज़ हवाओ में , उसका झोपड़ा टूट कर भीकर जाता था , तब रवि फिर से कड़ी म्हणत कर , अपने इस झोपड़े को ठीक करता , ऐसी झोपड़े में , उसने अपनी बहिन रमा के साथ , प्रेम भरे पल गुजरे थे , बस उसी दिन के बाद , उसकी जिंदगी पूरी बदल गई ,

रवि ने अपनी यादिओं में अग्गे बढ़ देखा , के वोह गेहू की पाकी फसल को काट रहा है , जून महीने की ताप्ती धुप , उसके जिस्म को जला रही है , पर उसे फसल काट कर , अपनी कोमल को कुछ पैसे बेहजने हैं , िका इक फसल काट ते , उसका तीखा औज़ार उसके हाथ पर फिर गया , हाथ से खून बहने लगे , रवि को अभ भी वोह दर्द महसूस हो रहा था , जब उसने इक फाटे पुराने कपडे को अपने हाथ पर बांध लिया था , उसी ताज़ा जखम के साथ , वोह पूरा दिन फसल काट ता रहा , उसे बेइंतहा दर्द हो रहा था , पर कोमल को पैसे बेहज , वोह अपनी गुडिअ को खुश करना चाहता था , उसकी पढाई ख़राब न हो , बस ऐसी लिए अपना हर दर्द वोह अपने अंदर समां रहा था ,

रवि को अज्ज भी यद् है , जब रमा ने उसके हाथ का जखम देखा था , वोह कितना रोई थी , कितनी मुश्किलों से उसने रमा को चुप करवाया था , और अगले hi दिन , रवि फिर से अपने खेतो में फसल काट रहा था , पर इस बार उसकी रमा उसके साथ थी , रमा का स्थान शयद hi कोई और लड़की ले पाए , यह बात रवि अपने मन के अनंत भीतर तक महसूस कर चूका था , रमा बस रमा थी , और कोमल बस कोमल ,

िका इक रवि को अपने कंडे पर इक हाथ महसूस हुआ , रवि ने िका इक अपनी अखन खोल ली , उसकी आँखों से असनु बह रहे थे , अपने गाओं के जीवन को उसने बेहद करीब से महसूस किया था ,

"भैई..." यह कोमल थी , जो अपने भाई का हर दिलो दर्द , इक पल में महसूस कर लेती थी , रवि ने कोमल को अपनी बहु में भर लिया , अपने दर्द को काम करने की कोससिह करने लगा ,

"कोमल , में कब जाउगा अपने गाओं , अपने खेतो में , कोमल , में बस इक बार , अपने खेतो में , फिर से काम करना चाहता हु , में चाहता हु , जब भी मुझे मौत ए , में अपनी जमीन पर लेता हुआ खुद को पाव , और अपने खेतो की मिटटी की खुसबू लेते , मेरी जान मेरे जिस्म से जुड़ा हो , कोमल , मुझे गाओं जाना ही..." रवि ने बेइंतहा दर्द भरे शबदो में बोलै , इक किसान हमेशा किसान रहता है ,

"भैई , हम जायेगे , सब इक साथ , भाई , अप्प मरने की बात मत करो , मुझे जीना है आपके साथ , आपकी वाइफ बनकर , आपके लिए खेतो में खाना लेकर जाऊ , आपको अपने हाथो से खाना खिला , उफ्फ्फ भइआए , में भी गाओं जाना चाहती हु , हमारे अपने गाओं..." कोमल ने बेहद रट हुए बोलै , फिर रवि अपनी कोमल को अपनी बहु में कैसे , गाओं से अति ठंडी ठंडी हवा को महसूस करते , ें हसीं पलु को अपनी यादिओं का हिस्सा बनाने लगा , पर दोनों यह बात नै जानते थे , के उनके दुश्मन अभ बढ़ चुके थे , अभ तोह अपने भी दुश्मन थे , क्या 6 महीनो तक कोमल जिन्दा रह पायेगी , क्या कुणाल अपने मकसद में कामयाब होगा , क्या सिको ट्विन्स , बेबी और काट को मर पायेगी , सवाल बहुत हैं , और सबके जवाब बस ऐनी वाले वख्त में छिपे हैं , और वख्त कभी रुकता नै , यह बात यद् रखना...



तो बे कुनिटेड.... [Friends abh har 2 din bad update aya karega , me dubara duty par jane laga tha , toh wakht nai milta , subah 7 se rat 7 tak meri duty hoti hai , 12 ghanto duty ke bad me update type kar pata hu , par kuch bhi ho , abh do din bad paka update ayega , muz par vishwas karna , apka apna Robin... ]
 
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