- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 34,373
अपडेट-138
अभ अग्गे....
जब फर्जी रूम का दरवाजा बहार से बंद किया , तब रवि और काट अकेले अंदर रह गए , काट ने अपनी नज़रियन ज़ुका राखी थी , वोह बेहद खूबसूरत लग रही थी , रवि के मन में कई विचार जनम ले रहे थे , उसे काट से कुछ जरुरी बात करनी थी , और थोड़ा सा प्यार भी , दोनों बीएड पर बेहद करीब बैठे हुए थे , काट की सांसे तेज़ चल रही थी ,
"काट..."
काट ने चेहरा थोड़ा सा ऊपर उठा रवि की तरफ देखा , फिर थोड़ा सा मुस्करा अपनी नज़रियन निचे कर ली , उसे थोड़ी थोड़ी शर्म सी ा रही थी ,
"हम्म , तोह अप्प रुक hi गई , मुझे लगा तुम चली जोगी..." रवि ने मुस्कारते हुए बोलै ,
"में क्यों जाऊ , वोह तोह , वोह.." काट बोलते बोलते रुक गई , क्यों की रवि उसके बेहद करीब ा गया था , अभ उसे रवि की सांसे अपने चेहरे पर पढ़ती महसूस हो रही थी ,
"हाँ , हाँ , बोलो न , में सुन रहा हु..." रवि ने ka5lt करले काळा मुलाम बालो की खुशबु लेते हुए बोलै ,
"मेरा मतलब था , ोूक्छः..." काट अभी बोल hi रही थी , रवि ने उसके कण को दांतो में दबा हल्का सा काट दिया ,
"हम्म , बोलो न..."
"ोुछः , तुम बोलने डोज अह्ह्ह तब न..." काट ने फिरसे तेज़ सांसे भरते सिसकते हुए बोलै , जब रवि ने उसे कण्डु से पकड़ पीछे बीएड पर गिरा दिया , और उसके ऊपर हो उसकी आँखों में देखने लगा ,
"तुम मुज़से कितना प्यार करती हो..."
"बहुत , बहुत , बता नै सकती कितना..." काट ने मुस्कराते हुए होका ,
"रत कहा गई थी तुम , जब हम सब बहार बैठे हुए थे ..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,
काट खामोश हो गई रवि की बात सुन , उसे लगा था , किसी ने कुछ नै देखा , पर रवि सब जान चूका था , चचे काट ने यह बात रवि से छिपाई थी ,
"बताओ न , चुप क्यों हो , उनसे मिलने गई थी तुम , कैसे हैं अभ वोह..." रवि ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,
"रवि , ओह्ह , तुम कैसे पता , मतलब तुम सब जानते हो , में क्यों आयी हु..." काट ने बेहद चिंता में बोलै ,
"सुरु से , जब से तुम पहली बार देखा तब से , में जनता था तुम पिता जी ने बेह्जा है , अभ बताओ क्यों..." रवि ने काट के साथ लेट उसे बहु में भरते हुए बोलै ,
"हासष्ठ , तुम मरने के लिए , मेरा कोई अतीत नै , और न hi मेरा जनम हुआ है , मने बेबी से सब झूठ बोलै था..." काट अभी बोल hi रही थी , रवि बेच में बोल पढ़ा ,
"क्या , पर , अगर , बेबी को पता चला तब क्या होगा , पर तुम तोह मर चुकी थी..." रवि ने सीधा लेते चाट की तरफ देखते हुए बोलै ,
"नयी , में कभी मर नै सकती , मेरा कोई शरीर नै है , तुम , तुम सब जानते हो , में इक ऊर्जा हु , इक शक्ति , और शक्ति का कोई वजूद नै होता , वोह शरीर मने खुद बनाया था , रमा ने मुझे नष्ट कर दिया , पर , जिन्होनो मुझे बनाया था , वोह अभ भी जिन्दा हैं , वोह तुम्हारे पिता थे , वोह मेरे भी पिता हैं , पिता जी ने मुझे दुबारा जनम दिया और इस धरती पर बेहज दिया , यहाँ आकर में सबसे पहले उसके पास गई..." काट ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"मतलब बेबी के पास , अपनी पारी लोग की कविया के पास..."
"हाँ , पर मुझे बेबी पर बहुत गुस्सा था , उसने मुझे पहचाना तक नै , के में कोण हु , क्या हु , वोह मुज़से बात तक नै करती थी , रवि , तुम तोह पता है , कविया के बिना में इक पल भी नै रहती थी पारी लोग में..." काट ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"पर तुम बताना था बेबी को , के तुम कोण हो , उसका दूसरा जनम था , तब वोह इक इंसान थी , उसे पारी लोग का कैसे कुछ यद् रहता..." रवि ने काट की आँखों में देखते हुए मुस्कराते हुए बोलै ,
"उम् , तब मुज़मे भावनायिओं की कमी थी , तुम यही समाज लो , जैसे ऊर्जा की कोई भावना नै होती , तब में नयी थी , धीरे धीरे इंसानो के बेच रहते , में उनकी तरह बन गई , में इंसानो जैसे रोने लगी , खुश रहने लगी , दुखी होने लगी , गुस्सा करने लगी , पर में बेबी के पास पास hi रही , उसके साथ हर मिशन पर गई , उसकी रक्षा की , मने कभी भी उसका साथ नै छोड़ा , कभी नै , जब से वोह है , तब से में उसके साथ हु..." काट ने अपनी बेबी को यद् कर बेहद रट हुए बोलै ,
"उफ़ , मतलब तुम hi निशा हो..."
"नई , में निशा नै हु , उस बारे में मुज़से कुछ मत पूछना , जब बेबी को बिमान शाह ने बुला लिया , तब मेरा दिल था उसके साथ जाऊ , पर उसने इक बार भी मुझे नै बोलै , में इस बात से इतना गुस्सा हो गई के मेरा दिल किया , में बेबी को मर दू , पर मेरे प्यार की जीत हुई और बेबी ने तुम बचा कर , बिमान शाह को धोका दे दिया , तब बिमान शाह ने मुझे बुला लिया , में ख़ुशी ख़ुशी उसकी बात मन गई , मने बेबी के साथ फाइट की , उसे पकड़ कर कैद किया , उसे मारा पीटा , क्यों की मुझे उस पर बहुत गुस्सा था , वोह मेरी आँखों में अपने लिए जो प्यार था , वोह देख नै रही थी , फिर तुम जानते हो , जब तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ तब आखिर उसने मुझे चुम लिया , मेरे करीब ा गई वोह , पर मेरा प्यार जायदा दिन मेरे पास न रहा , वोह तुम्हारे साथ झरने में गिर गई , में चाहती तोह इक पल में तुम दोनों के पास चली अति , पर मुझे देखना था , बेबी खुद मेरे पास अति है या नै , और मेरा प्यार उसे खिंच लाया मेरे पास , वोह 6 महीने बाद मुज़से मिलने आयी , बस तब से वोह मेरे पास है..." काट ने बेहद रट हुए बोलै , रवि ने उसे अपनी बहु में भर लिया , उसके बालो को सहलाते उसे शांत करने लगा ,
"काट , मुझे ख़ुशी है , तुम वोह सब मिल गया जो पारी लोग में तुम न प् सकीय , काट अभ मुझे वोह पाने दो जो में न प् सका , क्या तुम मेरा साथ डौगी या फिर से पिता जी का..." रवि ने बेहद उदास होते हुए बोलै ,
"रविइइइ , यह तुम क्या बोल रहे हो..." काट ने और भी रवि को अपनी बहु में कस्ते हुए बोलै ,
"काट , पिता जी तुमसे कब बात करते हैं , काट इस बार , इस बार , तुम मेरे रस्ते में मत एना , प्लस , मुझे मेरी कोमल को पाना है , मुझे मेरी कोमल को पाने दो , तुम किसके साथ हो , बस यह बताओ मुझे..." रवि ने बेहद घम्बिर होकर बोलै , वोह काट की आँखों में देख रहा था ,
"ओह्ह , तुम यह नै बोल सकते , में क्या बोलू अभ , पिता जी ने मुझे बनाया है , अपनी शक्ति से , अभ उनकी हर आज्ञा का पालन मुझे करना hi होगा , मेरे पास कोई और रास्ता नै , में क्या करू , मुझे कुछ समाज नै ा रहा , पर , में तुमसे बहुत प्यार करती हु , इस बारे में , मैं कुछ नै बता सकती..." काट ने रवि के होंठो को चूमते हुए बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,
"मतलब तुम मेरा साथ नै डौगी..." रवि ने उठ कर बैठते हुए बोलै ,
"मने कब बोलै , के में तुम्हारा साथ नै दे रही , पर तुम मेरे mano-bhavna को नै समाज रहे , पिता जी रत मुज़से मिले थे..." काट ने भी बीएड पर उठ कर बेथ ते हुए बोलै ,
"हम्म , क्या बात की तुम दोनों ने..."
"वही जो हर बार वोह करते हैं , तुम्हारी और कोमल की , वोह तुमसे अभ भी नफरत करते हैं , उनहोनु कुछ बड़ा सोचा है , तेन की तुम दोनों कभी इक न हो पाओ , वोह जल्द hi कुछ करने वाले हैं..."
"क्या , तुमने पूछा नै उनसे..."
"ouu-huu , मुझे कब बताते हैं वोह , में तोह गुलाम हु उनकी , रवि , में तुमसे वोह प्यार नै कर सकती जो तुम किसी इंसान से करते हो , उनहोनु मुझे रोका है , पर , में हमेशा तुमसे hi प्यार करुँगी , इक बात बताओ मुझे..." काट ने रवि की गॉड में सर रख सोते हुए बोलै ,
"हाँ बोलो न..." रवि ने निचे झुक काट के होंठो को चूमते हुए बोलै ,
"तुम कब पता चला के तुम डेविल हो..."
"हासष्ठ , काट मुझे जब जब भी चोट लगी , मेरा जखम कुछ hi दिनों में ठीक हो जाता था , उसका निशान तक नै रहता था , जब पाक़िआ ने मुझे चाकू मारा और जब मने विक्तोर को मर कर खुद को गोली मरी , तब मेरा जखम कुछ hi दिनों में भर सा गया , बस धीरे धीरे मुझे खुद का एहसास हो गया , में कोण हु , क्या हु..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"हम्म , और तुमने यह बात सब से छिपा कर राखी , पर में जानती थी , पर मने कभी बिमान शाह को कुछ नै बताया के तुम कोण हो..." काट भी मुस्कराते हुए बोली ,
"ाचा जी , शुक्रिया आपका , हम आपके एहसान मंद रहेंगे , वैसे अप्प बेहद खूबसूरत हो , जैसे पारी लोग में थी , काट तुम मुज़से कितना डर्टी थी , और अभ , अभ तुम मेरी बहु में सोई हुई हो , काट में जनता हु , इक दिन तुम मेरे लिए कुछ बहुत बड़ा करुँगी , में जनता हु , में समज़ता हु , मेरा दिल कहता है , इक दिन तुम मेरा साथ डौगी , पिता जी से भागवत करके और मुझे उस दिन का हमेशा इंतज़ार रहेगा , क्यों की में भी तुमसे बेपनाह मोह्हबत करता hu..."ravi ने अपने दिल की गहरायी से यह शब्द बोले , तोह काट खामोश सा हो गई , रवि ने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए , और कास कर काट के होंठो को चुम लिया , काट मुस्कराने लगी ,
"काट , इक बात और , क्या तुम माँ से मिली हो , हमारी माँ से..."
"नयी , उनसे कभी नै मिली में , मुझे बिलकुल नै पता वोह कहा है , बस पिता जी जानते हैं , माँ कहा रहती है..." काट ने बेहद उदासी में बोलै ,
अभी रवि कुछ बोलने hi जा रहा था , रूम का दरवाजा इक डैम से खुल गया , दरवाजा खुलते hi फर्जी अंदर ा गई , और अपनी कमर पर दोनों हाथ रख , रवि और काट को देखने लगी ,
"हांजी बीटा , कैसा एना हुआ आपका..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"चालू पापा , आपके 5 मिंट ख़तम हुए , अभ अप्प जाओ , कोमल मुम्मा आपको बुला रही , और पापा में भी आपके साथ जोगी..." फर्जी ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,
"ाचा , अप्प वह क्या करुँगी..."
"पापा..."
"ok , अप्प भी चलो मेरे साथ , आपसे डरते हैं हम फर्जी जी , काट तुम फर्जी को त्यार कर दो , में कोमल से मिल लेता हु..." रवि ने पहले फर्जी को और बाद में काट को बोलते हुए कहा ,
रवि इतना बोल रूम से बहार चला गया , अभी रवि रूम के दरवाजे के पास hi पहुंचा था के उसे बेबी मिल गई जो रूम के अंदर जा रही थी ,
"कैसी हो जूही , हाय अज्ज तोह अप्प बेहद क़ातिलाना लग रही हो..." रवि ने बेबी को बहु में भरते हुए बोलै ,
"शठ , छोड़ू भी , फर्जी देख रही है..." बेबी ने बेहद शरमाते हुए बोलै ,
"उम् , ाचा , रत को मज़ा आया या अज्ज फिर..." रवि अभी बोल hi रहा था के बेबी ने उसके होंठो पर अपना हाथ रख दिया ,
"शहहह , फर्जी सुन लेगी , तुम जाओ अभ..." बेबी ने रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै ,और फिर काट और फर्जी के पास जाकर उनसे बतिअन करने लगी , अज्ज वोह बेइंतहा खुश थी ,
रवि भी मुस्कराते हुए अपनी कोमल के पास पहुँच गया जो सीमा के साथ घर के हॉल में सोफे पर बैठी हुई थी , दोनों त्यार थी , बस उनको रवि का इंतज़ार था और रमा और फर्जी का भी ,
रवि भी उनके पास hi बेथ गया , और उनसे बतिअन करने लगा , करीब आधे घंटे बाद , फर्जी और रमा भी ा गई , फिर रवि , कोमल , सीमा , रमा और फर्जी , चल पढ़े , इक नए सफर की और , जो था , चाचा जी का घर , यहाँ इक नयी मुसीबत उनका इंतज़ार कर रही थी....
दूसरी तरफ...
"t..tt...tum jj...jj...jinda हो..." ख़ुशी ने बेहद हकलाते हुए बोलै ,
"हाँ बहाना , में जिन्दा हु , तुम किसके लिए इतना रो रही हो..." उस शक्श ने मुस्कराते हुए बोलै , यह और कोई नै कुणाल था ,
"माँ के लिए ..." ख़ुशी ने जैसे hi यह बोलै और पलट कर अपनी माँ की तरफ देखा , पर वह कोई न था , बीएड इक डैम खली था ,
"ः , vasat-vikta वोह नै जो तुम देख रही हो , vasat-vikta वोह है , जो में तुम दिखा रहा हु , में हु जेनिथ , पारी लोग का असली राजा , में हु जादूगरो का जादूगर जेनिथ , ः..." कुणाल ने ख़ुशी के बेहद करीब आकर हस्ते हुए बोलै ,
"में भी ख़ुशी नै , में तामस हु , जानते हो न , तामस कोण है..."
"जनता हु , जनता हु , जिद्दी , चालक , मदिरा में डूबी , इक दानवी औरत हो तुम , हस्सश्ठ , अभ तुम कही नै जा सकती , अभ में हु तुम्हारा मालिक , तुम वही करना होगा जो में कहुगा , समाज गई तामस.."
"हूँ , खवाब अचे देखते हो , डेविल अभ भी है , वोह तुम कुत्ते की मौत मरेगा..."
"ः , उस से पहले , तुम कुछ दिखाना है , यह देखो , जैसे hi ख़ुशी ने देखा उसकी आँखों से असनु बहने लगे , क्या यह कोई मायाजाल था जेनिथ का...
तो बे कुनिटेड....[friends update thoda short hai next time se bade update hi ayege...]
अभ अग्गे....
जब फर्जी रूम का दरवाजा बहार से बंद किया , तब रवि और काट अकेले अंदर रह गए , काट ने अपनी नज़रियन ज़ुका राखी थी , वोह बेहद खूबसूरत लग रही थी , रवि के मन में कई विचार जनम ले रहे थे , उसे काट से कुछ जरुरी बात करनी थी , और थोड़ा सा प्यार भी , दोनों बीएड पर बेहद करीब बैठे हुए थे , काट की सांसे तेज़ चल रही थी ,
"काट..."
काट ने चेहरा थोड़ा सा ऊपर उठा रवि की तरफ देखा , फिर थोड़ा सा मुस्करा अपनी नज़रियन निचे कर ली , उसे थोड़ी थोड़ी शर्म सी ा रही थी ,
"हम्म , तोह अप्प रुक hi गई , मुझे लगा तुम चली जोगी..." रवि ने मुस्कारते हुए बोलै ,
"में क्यों जाऊ , वोह तोह , वोह.." काट बोलते बोलते रुक गई , क्यों की रवि उसके बेहद करीब ा गया था , अभ उसे रवि की सांसे अपने चेहरे पर पढ़ती महसूस हो रही थी ,
"हाँ , हाँ , बोलो न , में सुन रहा हु..." रवि ने ka5lt करले काळा मुलाम बालो की खुशबु लेते हुए बोलै ,
"मेरा मतलब था , ोूक्छः..." काट अभी बोल hi रही थी , रवि ने उसके कण को दांतो में दबा हल्का सा काट दिया ,
"हम्म , बोलो न..."
"ोुछः , तुम बोलने डोज अह्ह्ह तब न..." काट ने फिरसे तेज़ सांसे भरते सिसकते हुए बोलै , जब रवि ने उसे कण्डु से पकड़ पीछे बीएड पर गिरा दिया , और उसके ऊपर हो उसकी आँखों में देखने लगा ,
"तुम मुज़से कितना प्यार करती हो..."
"बहुत , बहुत , बता नै सकती कितना..." काट ने मुस्कराते हुए होका ,
"रत कहा गई थी तुम , जब हम सब बहार बैठे हुए थे ..." रवि ने थोड़ा घम्बिर होकर बोलै ,
काट खामोश हो गई रवि की बात सुन , उसे लगा था , किसी ने कुछ नै देखा , पर रवि सब जान चूका था , चचे काट ने यह बात रवि से छिपाई थी ,
"बताओ न , चुप क्यों हो , उनसे मिलने गई थी तुम , कैसे हैं अभ वोह..." रवि ने बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,
"रवि , ओह्ह , तुम कैसे पता , मतलब तुम सब जानते हो , में क्यों आयी हु..." काट ने बेहद चिंता में बोलै ,
"सुरु से , जब से तुम पहली बार देखा तब से , में जनता था तुम पिता जी ने बेह्जा है , अभ बताओ क्यों..." रवि ने काट के साथ लेट उसे बहु में भरते हुए बोलै ,
"हासष्ठ , तुम मरने के लिए , मेरा कोई अतीत नै , और न hi मेरा जनम हुआ है , मने बेबी से सब झूठ बोलै था..." काट अभी बोल hi रही थी , रवि बेच में बोल पढ़ा ,
"क्या , पर , अगर , बेबी को पता चला तब क्या होगा , पर तुम तोह मर चुकी थी..." रवि ने सीधा लेते चाट की तरफ देखते हुए बोलै ,
"नयी , में कभी मर नै सकती , मेरा कोई शरीर नै है , तुम , तुम सब जानते हो , में इक ऊर्जा हु , इक शक्ति , और शक्ति का कोई वजूद नै होता , वोह शरीर मने खुद बनाया था , रमा ने मुझे नष्ट कर दिया , पर , जिन्होनो मुझे बनाया था , वोह अभ भी जिन्दा हैं , वोह तुम्हारे पिता थे , वोह मेरे भी पिता हैं , पिता जी ने मुझे दुबारा जनम दिया और इस धरती पर बेहज दिया , यहाँ आकर में सबसे पहले उसके पास गई..." काट ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"मतलब बेबी के पास , अपनी पारी लोग की कविया के पास..."
"हाँ , पर मुझे बेबी पर बहुत गुस्सा था , उसने मुझे पहचाना तक नै , के में कोण हु , क्या हु , वोह मुज़से बात तक नै करती थी , रवि , तुम तोह पता है , कविया के बिना में इक पल भी नै रहती थी पारी लोग में..." काट ने बेहद नाम आँखों से बोलै ,
"पर तुम बताना था बेबी को , के तुम कोण हो , उसका दूसरा जनम था , तब वोह इक इंसान थी , उसे पारी लोग का कैसे कुछ यद् रहता..." रवि ने काट की आँखों में देखते हुए मुस्कराते हुए बोलै ,
"उम् , तब मुज़मे भावनायिओं की कमी थी , तुम यही समाज लो , जैसे ऊर्जा की कोई भावना नै होती , तब में नयी थी , धीरे धीरे इंसानो के बेच रहते , में उनकी तरह बन गई , में इंसानो जैसे रोने लगी , खुश रहने लगी , दुखी होने लगी , गुस्सा करने लगी , पर में बेबी के पास पास hi रही , उसके साथ हर मिशन पर गई , उसकी रक्षा की , मने कभी भी उसका साथ नै छोड़ा , कभी नै , जब से वोह है , तब से में उसके साथ हु..." काट ने अपनी बेबी को यद् कर बेहद रट हुए बोलै ,
"उफ़ , मतलब तुम hi निशा हो..."
"नई , में निशा नै हु , उस बारे में मुज़से कुछ मत पूछना , जब बेबी को बिमान शाह ने बुला लिया , तब मेरा दिल था उसके साथ जाऊ , पर उसने इक बार भी मुझे नै बोलै , में इस बात से इतना गुस्सा हो गई के मेरा दिल किया , में बेबी को मर दू , पर मेरे प्यार की जीत हुई और बेबी ने तुम बचा कर , बिमान शाह को धोका दे दिया , तब बिमान शाह ने मुझे बुला लिया , में ख़ुशी ख़ुशी उसकी बात मन गई , मने बेबी के साथ फाइट की , उसे पकड़ कर कैद किया , उसे मारा पीटा , क्यों की मुझे उस पर बहुत गुस्सा था , वोह मेरी आँखों में अपने लिए जो प्यार था , वोह देख नै रही थी , फिर तुम जानते हो , जब तुम्हारा एक्सीडेंट हुआ तब आखिर उसने मुझे चुम लिया , मेरे करीब ा गई वोह , पर मेरा प्यार जायदा दिन मेरे पास न रहा , वोह तुम्हारे साथ झरने में गिर गई , में चाहती तोह इक पल में तुम दोनों के पास चली अति , पर मुझे देखना था , बेबी खुद मेरे पास अति है या नै , और मेरा प्यार उसे खिंच लाया मेरे पास , वोह 6 महीने बाद मुज़से मिलने आयी , बस तब से वोह मेरे पास है..." काट ने बेहद रट हुए बोलै , रवि ने उसे अपनी बहु में भर लिया , उसके बालो को सहलाते उसे शांत करने लगा ,
"काट , मुझे ख़ुशी है , तुम वोह सब मिल गया जो पारी लोग में तुम न प् सकीय , काट अभ मुझे वोह पाने दो जो में न प् सका , क्या तुम मेरा साथ डौगी या फिर से पिता जी का..." रवि ने बेहद उदास होते हुए बोलै ,
"रविइइइ , यह तुम क्या बोल रहे हो..." काट ने और भी रवि को अपनी बहु में कस्ते हुए बोलै ,
"काट , पिता जी तुमसे कब बात करते हैं , काट इस बार , इस बार , तुम मेरे रस्ते में मत एना , प्लस , मुझे मेरी कोमल को पाना है , मुझे मेरी कोमल को पाने दो , तुम किसके साथ हो , बस यह बताओ मुझे..." रवि ने बेहद घम्बिर होकर बोलै , वोह काट की आँखों में देख रहा था ,
"ओह्ह , तुम यह नै बोल सकते , में क्या बोलू अभ , पिता जी ने मुझे बनाया है , अपनी शक्ति से , अभ उनकी हर आज्ञा का पालन मुझे करना hi होगा , मेरे पास कोई और रास्ता नै , में क्या करू , मुझे कुछ समाज नै ा रहा , पर , में तुमसे बहुत प्यार करती हु , इस बारे में , मैं कुछ नै बता सकती..." काट ने रवि के होंठो को चूमते हुए बेहद दर्द भरे शबदो में बोलै ,
"मतलब तुम मेरा साथ नै डौगी..." रवि ने उठ कर बैठते हुए बोलै ,
"मने कब बोलै , के में तुम्हारा साथ नै दे रही , पर तुम मेरे mano-bhavna को नै समाज रहे , पिता जी रत मुज़से मिले थे..." काट ने भी बीएड पर उठ कर बेथ ते हुए बोलै ,
"हम्म , क्या बात की तुम दोनों ने..."
"वही जो हर बार वोह करते हैं , तुम्हारी और कोमल की , वोह तुमसे अभ भी नफरत करते हैं , उनहोनु कुछ बड़ा सोचा है , तेन की तुम दोनों कभी इक न हो पाओ , वोह जल्द hi कुछ करने वाले हैं..."
"क्या , तुमने पूछा नै उनसे..."
"ouu-huu , मुझे कब बताते हैं वोह , में तोह गुलाम हु उनकी , रवि , में तुमसे वोह प्यार नै कर सकती जो तुम किसी इंसान से करते हो , उनहोनु मुझे रोका है , पर , में हमेशा तुमसे hi प्यार करुँगी , इक बात बताओ मुझे..." काट ने रवि की गॉड में सर रख सोते हुए बोलै ,
"हाँ बोलो न..." रवि ने निचे झुक काट के होंठो को चूमते हुए बोलै ,
"तुम कब पता चला के तुम डेविल हो..."
"हासष्ठ , काट मुझे जब जब भी चोट लगी , मेरा जखम कुछ hi दिनों में ठीक हो जाता था , उसका निशान तक नै रहता था , जब पाक़िआ ने मुझे चाकू मारा और जब मने विक्तोर को मर कर खुद को गोली मरी , तब मेरा जखम कुछ hi दिनों में भर सा गया , बस धीरे धीरे मुझे खुद का एहसास हो गया , में कोण हु , क्या हु..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"हम्म , और तुमने यह बात सब से छिपा कर राखी , पर में जानती थी , पर मने कभी बिमान शाह को कुछ नै बताया के तुम कोण हो..." काट भी मुस्कराते हुए बोली ,
"ाचा जी , शुक्रिया आपका , हम आपके एहसान मंद रहेंगे , वैसे अप्प बेहद खूबसूरत हो , जैसे पारी लोग में थी , काट तुम मुज़से कितना डर्टी थी , और अभ , अभ तुम मेरी बहु में सोई हुई हो , काट में जनता हु , इक दिन तुम मेरे लिए कुछ बहुत बड़ा करुँगी , में जनता हु , में समज़ता हु , मेरा दिल कहता है , इक दिन तुम मेरा साथ डौगी , पिता जी से भागवत करके और मुझे उस दिन का हमेशा इंतज़ार रहेगा , क्यों की में भी तुमसे बेपनाह मोह्हबत करता hu..."ravi ने अपने दिल की गहरायी से यह शब्द बोले , तोह काट खामोश सा हो गई , रवि ने उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए , और कास कर काट के होंठो को चुम लिया , काट मुस्कराने लगी ,
"काट , इक बात और , क्या तुम माँ से मिली हो , हमारी माँ से..."
"नयी , उनसे कभी नै मिली में , मुझे बिलकुल नै पता वोह कहा है , बस पिता जी जानते हैं , माँ कहा रहती है..." काट ने बेहद उदासी में बोलै ,
अभी रवि कुछ बोलने hi जा रहा था , रूम का दरवाजा इक डैम से खुल गया , दरवाजा खुलते hi फर्जी अंदर ा गई , और अपनी कमर पर दोनों हाथ रख , रवि और काट को देखने लगी ,
"हांजी बीटा , कैसा एना हुआ आपका..." रवि ने मुस्कराते हुए बोलै ,
"चालू पापा , आपके 5 मिंट ख़तम हुए , अभ अप्प जाओ , कोमल मुम्मा आपको बुला रही , और पापा में भी आपके साथ जोगी..." फर्जी ने थोड़ा गुस्से में बोलै ,
"ाचा , अप्प वह क्या करुँगी..."
"पापा..."
"ok , अप्प भी चलो मेरे साथ , आपसे डरते हैं हम फर्जी जी , काट तुम फर्जी को त्यार कर दो , में कोमल से मिल लेता हु..." रवि ने पहले फर्जी को और बाद में काट को बोलते हुए कहा ,
रवि इतना बोल रूम से बहार चला गया , अभी रवि रूम के दरवाजे के पास hi पहुंचा था के उसे बेबी मिल गई जो रूम के अंदर जा रही थी ,
"कैसी हो जूही , हाय अज्ज तोह अप्प बेहद क़ातिलाना लग रही हो..." रवि ने बेबी को बहु में भरते हुए बोलै ,
"शठ , छोड़ू भी , फर्जी देख रही है..." बेबी ने बेहद शरमाते हुए बोलै ,
"उम् , ाचा , रत को मज़ा आया या अज्ज फिर..." रवि अभी बोल hi रहा था के बेबी ने उसके होंठो पर अपना हाथ रख दिया ,
"शहहह , फर्जी सुन लेगी , तुम जाओ अभ..." बेबी ने रवि के होंठो को चूमते हुए बोलै ,और फिर काट और फर्जी के पास जाकर उनसे बतिअन करने लगी , अज्ज वोह बेइंतहा खुश थी ,
रवि भी मुस्कराते हुए अपनी कोमल के पास पहुँच गया जो सीमा के साथ घर के हॉल में सोफे पर बैठी हुई थी , दोनों त्यार थी , बस उनको रवि का इंतज़ार था और रमा और फर्जी का भी ,
रवि भी उनके पास hi बेथ गया , और उनसे बतिअन करने लगा , करीब आधे घंटे बाद , फर्जी और रमा भी ा गई , फिर रवि , कोमल , सीमा , रमा और फर्जी , चल पढ़े , इक नए सफर की और , जो था , चाचा जी का घर , यहाँ इक नयी मुसीबत उनका इंतज़ार कर रही थी....
दूसरी तरफ...
"t..tt...tum jj...jj...jinda हो..." ख़ुशी ने बेहद हकलाते हुए बोलै ,
"हाँ बहाना , में जिन्दा हु , तुम किसके लिए इतना रो रही हो..." उस शक्श ने मुस्कराते हुए बोलै , यह और कोई नै कुणाल था ,
"माँ के लिए ..." ख़ुशी ने जैसे hi यह बोलै और पलट कर अपनी माँ की तरफ देखा , पर वह कोई न था , बीएड इक डैम खली था ,
"ः , vasat-vikta वोह नै जो तुम देख रही हो , vasat-vikta वोह है , जो में तुम दिखा रहा हु , में हु जेनिथ , पारी लोग का असली राजा , में हु जादूगरो का जादूगर जेनिथ , ः..." कुणाल ने ख़ुशी के बेहद करीब आकर हस्ते हुए बोलै ,
"में भी ख़ुशी नै , में तामस हु , जानते हो न , तामस कोण है..."
"जनता हु , जनता हु , जिद्दी , चालक , मदिरा में डूबी , इक दानवी औरत हो तुम , हस्सश्ठ , अभ तुम कही नै जा सकती , अभ में हु तुम्हारा मालिक , तुम वही करना होगा जो में कहुगा , समाज गई तामस.."
"हूँ , खवाब अचे देखते हो , डेविल अभ भी है , वोह तुम कुत्ते की मौत मरेगा..."
"ः , उस से पहले , तुम कुछ दिखाना है , यह देखो , जैसे hi ख़ुशी ने देखा उसकी आँखों से असनु बहने लगे , क्या यह कोई मायाजाल था जेनिथ का...
तो बे कुनिटेड....[friends update thoda short hai next time se bade update hi ayege...]