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अपडेट. 197
सूर्य किरण विवाह समारोह ...
चंद्रभान जी .... फिर ऐसे लड़के से रिस्ता
नाना जी ....... आप गलत सोच रहे है वो मेरा नाती भी है गुस्सा तभी आता है जब कोई गलत करता है वैसे दिल का बहुत अच्छा है
कभी फुर्सत में मिलवाता हूँ आपको उस से
एक रूम में जहा किरण को सजाया जा रहा था वह किरण आवर सपना की कुछ आस प्रदोष की भैया आवर हम उम्र शी लिया
किरण को अपने अपने अनुभव बया कर रही थी मस्ती मजाक के साथ
वही बहार विजय आवर पाण्ड्य जी अपने काम पे लग चुके थे
ताकि किसी को कोई परेशानी न हो बारात सूरजगढ़ पहुंच चुकी थी आवर उसका संकेत शिव ने जोरदार आतिश बजी कर सभी को दे दिया था अभी बारात हवेली ी पहुंचे 1 हर से भी ऊपर का समय लेने वाली थी ...............
अब आगे ........
सक्तिपुर .......... रुक्मणि जी गीता जी दोनों को सूर्य की सदी में समय पे सरिक होना था पैर वो दोनों हे काफी लेट हो चुकी थी
रुक्मणि जी ..... दीदी हमें बहुत लेट हो गया है विधि से बात हुई मेरी अभी अभी वो लोग तो सूरजगढ़ पहुंच भी गए है कुछ देर में बारात विवाह मंडप में होगी
गीता जी ....... है हम बहुत लेट हो गए है चलो चलते है सब सामान रखवा लिया है न कार में
रुक्मणि जी ...... जी दीदी पैर क्या अजय को आपने समजा दिया है
गीता जी ....... है मैंने उसे समजा दिया है आवर विक्रम को डॉक्टर नींद का इंजेक्शन लगा दिया है सुबह तक उसकी आँख नहीं खुलेगी
रुक्मणि जी आवर गीता जी कुछ सामान अपने साथ ले कर रूम से निकल जाते है
हॉल में अजय बैठा इन्हे हे देख रहा था
गीता जी ....... अजय हवेली का ख्याल रखना कुछ देर में हम लोग आ जायेंगे आवर कोई प्रॉब्लम हो तो कॉल कर देना राणा भी कुछ देर में तुम्हारे पास आ जायेगा
अजय ...... ठीक है बड़ी मम्मी आप चिंता न करो
गीता जी रुक्मणि जी वह से निकल जाती है कार ले कर सूरजगढ़ की आवर
अजय ...... वो दोनों पहले हे जा चुकी है आप भी निकल गई आज तो यही पार्टी करूंगा अपने दोस्तों के साथ
अजय अपने फ़ोन से अपने दोस्तों को कॉल करता है पार्टी के लिए ला जो कुछ हे देर में आने को त्यार हो गए थे
अजय ...... एक बार राणा अंकल को कॉल कर लेता हु की वो आ रहे है की नहीं अगर यहाँ वो आये तो मुझे फार्महाउस जाना होगा
अजय ......hello राणा अंकल आप हवेली आ रहे हो न
राणा ....सॉरी बीटा मुझे कुछ काम से अच्चानक सहर जाना पद रहा है अगर कुछ जरुरी हो तो मैं किसी आवर को भेज देता हूँ
अजय .....नहीं अंकल उसकी जरुरत नहीं है यहाँ मैं सब संभल लूंगा
राणा ....... ठीक है बीटा कुछ भी जरुरत हो कॉल कर देना
अजय ...... जी अंकल
अजय कॉल कट कर देता है आवर आवर पार्टी की तयारी करने लगता है लिखे बेयर आदि को फ्रीज में रख देता है आवर कुछ बोतल बढ़िया सरब की
अजय किसी को कॉल कर मट्टन चिकन आदि लेन को कहता है
लगता खूब जोर शोर से पार्टी करने का सोचा है अजय ने
सूरजगढ़ ...........
सूर्य घोड़ी पे सवार डेरी डेरी अपने नाना जी की पुराणी हवेली की आवर भाड़ रहा था परिवार की ज्यादातर लड़किया जो सदी में शामिल हुई थी वो कुछ देर नाच गाने के बाद कार से सीधा हवेली जा पहुंची किरण के पास
कोमल ....... वाओ स्वीटी तुम तो बहुत खूबसूरती लग रही हो
राधा ....... पहले से हे हम सब से खूबसूरत है आवर आज तो अपने पिया जी की दुल्हन बानी है खूबसूरती आवर कुदरती निखार से दमक रही है स्वीटी तो
किरण ....... आप सब यहाँ पे है उनके साथ कोण है
राधा ........ अभी से उनकी चिंता हो रही है चिंता न करो वो सीधा यही आएगा कही आवर नहीं जाने वाला इस चाँद को छोड़ कर हेहेहे
किरण ...... बुआ आप भी न
राधा ...... देख स्वीटी फिर मुझे बुआ मत कहना यार हम बहने है भूल मत
किरण आगे भध राधा के दोनों गाल चुम लेती है
किरण .......हेहेहे अब आप न ये नकली गुस्सा हटालो अपने खूबसूरत चेहरे से ये आप पे अच्छा नहीं लगता
कोमल ...... वैसे बुआ आप बुआ कहने पे क्यों छोड़ जाती है पहले तो नहीं चिश्ती थी
राधा ......कोमल तुम भी अरे दुल्हन वो हम मैं नहीं तंग खिचड़ी है तो उसकी खींचो
वैसे वो अपनी एक्सपीरियंस होल्डर सपना कहा है उसने कुछ ज्ञान अपनी दुल्हन स्वीटी को दिया की नहीं फर्स्ट नाईट का
राधा के मुँह से ऐसे खुले आम फर्स्ट नाईट की बात सुन किरण शर्माने लगती है
कोमल ......है है अपनी बनो तो अभी से शर्मा रही है
अभी काफी टाइम है उसमे क्यों सपना
सपना ...... तुम सब का no. भी जल्दी हे लगने वाला है वैसे अभी मेर्री जी थी न यहाँ वो कहा गई
राधा ....... आवर कहा आपके चाचा जी विजय जी से मिलने गई होंगी बेचारे बड़ी आस भरी नजरो से देख रहे थे आते वक़्त मेर्री जी को
सपना ...... मतलब की उनके बिच
कोमल ....... आपको पता नहीं है क्या स्वीटी ने बताया नहीं क्या
ीदार सूर्य की बराड़ हविले के द्वार पे पहुंच चुकी थी इस लिया अलीना पायल प्रीती मानसी सोफिया सानिया मानवी माया के साथ किरण की आवर निकल गयी
सूर्य के साथ मानसी राधिका दीप्ती विधि गायत्री मेनका जी शालिनी जी रेखा जी हे बचे थे
जैसे हे सभी को बारात द्वार पे आने की खबर मिली
किरण तेजी से अपने रूम से बहार निकल द्वार पे घोड़ी पे स्वर सूर्य को देखती है

पायल ....... अरे स्वीटी आराम से इतनी भी जल्दी क्या है वो तुम्हारे लिया हे आया है
किरण सब बाटी को नजर अंदाज कर बस घोड़ी पे स्वर सूर्य को हे देख रही थी
सूर्य भी घोड़ी पे बैठा ीदार उधर देख रहा था
तभी सूर्य हवेली की पूरी मंजिल पे देखता है
सूर्य की नजर अपनी आवर उत्ते देख किरण फ़ौरन सपना की यह में चुप जाती है
सपना ...... तुमने तो देख लिया स्वीटी अब उन्हें भी देख लेने दो खुद को
किरण न में गर्दन हिला देती है
राधा ...... तुम समाजी नहीं सपना अपनी स्वीटी सूर्य के साथ आँख मिचोली खेल रही है सुहागरात से पहले वाली
कितन थोड़ा जोर से राधा के कूल्हों पे चिकोटी काट लेती है
राधा ........ अह्हह्ह्ह्ह स्वीटी
कोमल ....... क्या हुआ बुआ
राधा ........ कुछ नहीं बुआ की बची
उदार सूर्य सपना को इसरा करता है सामने से हटने का पैर किरण के मन करने पे सपना न में गर्दन हिला देती है
वही द्वार पे प्रिय जी सन्ति जी कुछ महिलाओ के साथ द्वार पे पहुंची है तिलक थल ले कर वर का स्वागत करने के लिया
सूर्य घोड़ी से उतर द्वार पे सुसज्जित चौकी पे आ खड़ा होता है
सन्ति जी की एक तो हिघ्त सूर्य से काम थी ऊपर से सूर्य चिकि पे खड़ा था था जिस से सूर्य के माथे तक हाथ नहीं जा प् रहा था
प्रिय जी ..... जमाई सा थोड़ा निचे जुखो
मेनका जी ...... नहीं सूर्य अभी से जखन मत
सन्ति जी ...... शालिनी दीदी आप हे कहो न
मेनका जी ....... आज वो आपकी ननद बाई सा नहीं आपकी संदन जी है
शालिनी जी ....... सूर्य
सूर्य जी ..... माँ पैर पहले तिलक बड़ी मम्मी करेगी तभी जुखुन्गा
रेखा जी ......मैं क्यों बीटा
शालिनी जी ......ठीक है प्रिय भाबी सा आप तिलक कीजिये वो आपके लिया कह रहा है
प्रिय जी .....पैर मैं कैसे रीती अनुसार तो जमाई सा का तिलक उसकी सास करती है दीदी
दादी जी बिच में आते हुए
दादी जी ....... बेटी किरण तुम दोनों की बेटी है इसमें इतना सोचना क्या आवर तुम दोनों के सामने तुम्हारा जमाई नहीं तुम दोनों का बीटा खड़ा है अब तिलक करो यही पे रोके रखना है क्या
प्रिय जी ....... जी माँ सा
प्रियाजी थल में रखे तिलक से सूर्य का तिलक कर चावल आदि लगा कर रीती पूर्ण करती है उसके बाद सन्ति जी तिलक कर सूर्य का नक् पकड़ कर खिचड़ी है
( ये भी एक रसम है जो सास द्वारा पूरी की जाती है )
सन्ति जी सूर्य हाथ थम उसे दवार के भीतर प्रवेश करती है
सूर्य को रोहन सोहेल आवर मनु एक तरफ बने भव्य स्टेज पे ले जाते है
जहा पहले से कुछ सोफे आवर दो सिंघासन लगे हर थे उनके से एक पे सूर्य को बैठा दिया जाता है
कुछ हे देर बाद वह ऋषि वर आते है आवर कुछ विधि पूरी कर दुल्हन को वरमाला के लिया आमंत्रित किया जाता है
कुछ देर बाद सभी लड़कियों के बिच घिरी घूंघट निकले किरण को स्टेज पे लाया जाता है
सूर्य ने भरकश प्रयाश किये किन्तु वह किरण के चेहरे को नहीं देख पाया
रोहन .......भाई इतना उतावला पैन ठीक नहीं वो सिर्फ तुम्हारी है अब जीवन भर का साथ है देखते रहना उन्हें
सूर्य ....... ऐसी बात नहीं है रोहन भाई
रोहन ......भाई मैं भी इस डोर से गुजर चूका हूँ हाहाहा समाज सकता हूँ तुम्हारी इस्थिति
सभी लड़किया किरण को ले स्टेज पे सूर्य के सामने कड़ी हो जाती है
सपना ...... कितने उतावले हो रहे है स्वीटी को देखने के लिया
अब जी भर के देख लीजिये अपनी स्वीटी को जीजा सा
सूर्य ........ क्या कहा जीजा सा
सपना .....क्यों जेब खली करने से बचना चाहते हो मुँह दिखाई तभी होगी जब 51000 रस नेग में मिलेगा हमें
रोहन ........हहहह भाई लो करलो दर्शन दुल्हन के 51000 रस है एक जलक देखने के
सूर्य सोहेल को देखता
सोहेल ....... ठीक है भाई अभी लता हूँ
सोहेल तेजी से एक तरफ जाता है आवर एक बेग ले कर आता है
सोहेल उसे खोल कर उसमे से एक 500 की गाड़ी निकल कर गिने लगता है
सपना सोहेल के हाथ से नोटों की गाड़ी ले लेती है आवर किरण के सर से वॉर कर घोड़ी वाले को दे देती है
सपना ......हमें पैसे नहीं चाइये वो तो हम बस परख रहे थे
सूर्य ...... कभी अकेले में मिलना फिर बताऊंगा अब तो देखने दो
सभी किरण को सूर्य के सामने छोड़ थोड़ा पीछे हो जाती है
किरण मुस्कुराते हुए अपना गुणगाहट ऊपर करती है

सूर्य तो बस उस खूबसूरत चंद्र सामान तेज दमकते हुए खूबसूरत चेहरे में खो चूका था जैसे हे सूर्य की नजरे किरण की नजरो से मिली
सूर्य का हाथ खुद बा खुद किरण के गुलाबी गलो की तरफ भाड़ चले
पैर ही रे किस्मत सपना फिर से किरण को पीछे खींच लेती है
सपना ......नेग मुँह दिखाई का था न की फ़िलहाल दुल्हन को चुने का
ऋषि वर ...... बच्चो वरमाला का समय हो चूका है
सूर्य किरण सपना को घर के देखते है जैसे दोनों की चाहत के बिच सपना आ गई हो
सपना ......ऐसे क्या घर रहे हो साली हूँ इतना हक़ तो बनता है
रोहन ........ भाई साली तो आदि घरवाली भी होती है न
सपना ...... है होती है पैर आदि नहीं पूरी बनाने की निकट करो तब जाने क्यों जीजा श्री
सूर्य ...... वो वक़्त भी आएगा आवर याद है न मेरा वादा
सपना ......कोनसा वडा
सूर्य आगे जुक कर सपना के कान में डेरी से कुछ कहता है
जिसे सायद किरण ने भी सुन लिया था दोनों के चेहरे सरम से लाल हो जाती है
ऋषि वर दोनों को वरमाला देते है एक दूसरे को पहनने के लिया

ऋषि वर ......पुत्री किरण वर को जैमल ा पहनाओ
रोहन आवर सोहेल दोनों सूर्य को ऊपर उठा लेते है
रोहन ..... अब डालो वरमाला
किरण सूर्य की आवर देखती है
सूर्य...... भयो क्यों मेरा घर बसने से पहले जगदा करवाना चाहते हो
तभी कही से वयोम महाशय आते है स्टेज पे
वयोम ...... आप को एतराज न हो तो मैं उठा लूँ आपको जैसे मानसी मेरी बहन है वैसे हे आप भी
किरण सूर्य को देखती है जैसे इजाजत लेना चाहती हो
सूर्य के है में पलके झपकते हे किरण है में इसरा करती है वयोम बहुत सभ्य तरीके से किरण को ऊपर उठा कर वरमाला डलवाता है सूर्य भी किरण को जैमल ा पहना देता है
दोनों को निचे उतर ते हे स्टेज के चारो तरफ लगी आतिश बजी से एक्के बाद एक दमके आकाश में होते है
बाकि सभी दोनों पे गुलाब की पंखुड़ियों की पुष्प वर्षा करने लगते है

ऋषि वर जयमाला पूर्ण करवा वह से फैरो की तयारी के लिया हवन बेचीं की आवर निकल जाते है किरण वह सूर्य को वही दोनों सिंघासन पे बैठाया जाता है बाकि सब भोजन आदि या किसी न किसी विशेष कार्य में लग जाते है कुछ एक घंटे बाद
किरण को भीतर ले जाया जाता है फैरो के लिया त्यार करने हेतु ीदार शिव सूर्य को विवाह विधि पे ले जाते है
जहा ऋषि वर दशहरा मंत्रो उच्चारण के साथ सूर्य विवाह बेचीं अग्नि में आहुति देता है
कुछ आधे जानते चले इस सिलसिले के बाद ृषिव वर फैरो के लिया कन्या को आमंत्रित करते है
सभी बड़े बुज़ुर्ग इस वक़्त विवाह विधि के पास मौजूद थे क्युकी फैरो का समय हो चूका था
कुछ आवर विधि पूर्ण करने के पश्चात प्रिय जी वह सन्ति जी बाकि महिलाओ के साथ लोकगीत गाते हुए किरण को सूर्य लेफ्ट साइड में बैठा दिया जाता है

ऋषि वर विवाह फैरो के मंत्र उच्चारण कर विवाह विधि सुरु करते है
ऋषिवर के कहे अनुसार सूर्य किरण का घटजोड़ किया जाता है जो संजय जी के आग्रह पे प्रिय जी आवर जोरावर जी करते है
दोनों भयो का एक दूसरी के पार्टी ये प्रेम हे तो था जहा पिता अपनी पुत्री के विवाह में होने वाला हर अदिकार अपनी पिता सामान बड़े भाई वह माँ सामान भाभी को दे रहा था
ऋषिवर....... वधि के माता पिया आगे आये आवर कन्यादान विधि को पूर्ण करे
जोरावर जी ......संजय भौ दांतो आगे आओ ये विधि तुम्हे हे पूर्ण करनी है
संजय .......भाई सा आप हे विधि पूरी कीजिये किरण हमारी बेटी अवश्य है पैर वो हमेशा हम से ज्यादा आपके दिल के करीब रही है हम से ज्यादा आप दोनों का हक़ है इस विधि पे
नाना जी .....मुझे ख़ुशी है की तुम दोनों मेरे बचे हो पैर बीटा रीती तिवाज अपने नियम से चलते है तुम दोनों को हे किरण का कन्यादान ( वाग्दान ) करना चाइये
ऋषिवर ....... आप दोनों इस विधि को पूर्ण कर सकते है किन्तु जिन्होंने जनम दिया उनका इस पे पहला हक़ है
ऋषिवर की बात सुन जोरावर संजय सन्ति जी प्रिय जी चारो मिल कर किरण का हाथ सूर्य के हैंतो में सौंप ते है आवर ऋषिवर के कहे अनुसार सूर्य किरण के हठी में जल वह ढूढ से इस विधि को पूर्ण करते है
विधि पूर्ण होते हे शालिनी जी एक थाल आगे बढाती है जिसमे एक खुला बॉक्स रखा हुआ था जिसमे एक खूबसूरत डायमंड लगा मंगलसूत्र था
सूर्य मंगलसूत्र उठा किरण के गले में बंद देता है
ऋषिवर ........वर कन्या की मांग को सिंदूर से सुसज्जित कर फैरो के लिया खड़े हो जाये

सूर्य सोने के सीके से पे सिंदूर ले किरण की मांग भर देता है
कुछ कतरे सिंदूर के किरण के चहरे पे आ गिरते है
जिन्हे बड़ी सफाई से कोमल आगे भाड़ अपने रूमाना से बिना मेकउप करण किया साफ कर देती है
ऋषिवर के मंत्रो उच्चारण के साथ हे सूर्य किरण के फेरे सुरु हो जाते है

ऋषिवर के कहे अनुसार फैरो के साथ साथ सूर्य किरण एक दूसरे को वचन देते हुए फेरे पूर्ण करते है
फेरे पूर्ण होते हे सभी दोनों पे पुष्पों की वर्षा कर दोनों को आसिष देते है
विवाह पूर्ण होते हे सूर्य किरण को मंडप से एक बार फिर स्टेज पे ले जाया जाता है जहा
सभी बड़े बुजुर्ग उपहार आदि के साथ इन दोनों नए जीवन के लिया ढेरो सुभकामनाये आवर अपना अमूल्य आशीर्वाद देते हुए पिछ आदि बनाये है
कोई एक एक घंटे से ऊपर चले आशीर्वाद कार्यक्रम के बाद किरण वह सूर्य को हवेली के भीतर ले जाया जाता है
आवर बाकि जो कुछ रस्मे बची थी उसे पूरी कर भोजन के लिया बैठा दिया जाता है
इन सब में रात का एक बज गया था सूर्य को रुक्मणि वह गीता जी के आने के बारे में फैरो के वक़्त पता चला था जब दोनों सूर्य से लेट आने की मांफी मांगी थी
( कल के अपडेट में मैंने एक विवाह रसम को नहीं लिखा था जो थोड़ी विचित्र थी हमारे यहाँ राजस्थान में बहुत से इलाको में विवाह में इस रसम को भी मन जाता है आवर कुछ इलाको में नहीं
दूल्हा जब घर से निकलता है घोड़ी पे स्वर हो कर तब अपनी माँ का स्तन पैन करता है ये एक रिवाज है केवल रिवाज पूरा करने के लिया एक बार अपनी माँ के स्तन ( बूब्स निप्पल्स )/को मां में ले कर इस रसम को निभाया जाता है
)
कल के अपडेट में इसे ऐड करना भूल गया था )
परीलोक .......
सूर्य की विवाह स्टाल पे पहुंचने के कुछ देर पश्चात हे किरण पालकी में स्वर हो विवाह स्टाल पे पहुँचती है
जहा गुरुदेव वह ऋषि वर द्वारा दोनों को वरमाला आदि रीती पूर्ण करवाने के बाद मंत्रो उच्चारण के साथ किरण वह सूर्य की विवाह विधि आराम कर दी जाती है
किरण वह सूर्य को विवाह विधि पे बैठा दोनों से हवन में आहुति डलवाई जाती है
फिर वही वाग्दान ( कन्यादान ) की विधि के पश्चात
वचनो के साथ विवाह के फेरे लिए जाते है
इसी तरह सूर्य किरण को मंगलसूत्र पहना कर किरण की मांग भर जन्मो जनम के लिया किरण को अपनी जीवन संगिनी बना चूका था
किरण वह सूर्य सभी ऋषि गुरुदेव वह अपने बड़े बुजुर्ग का आशीर्वाद ले गुरुदेव के साथ मंदिर की आवर निकल जाते है जहा पूजा आदि कर परबु वह देवी माँ का आशीर्वाद लेते है
गुरुदेव ......पुत्र सूर्य पुत्री किरण तुम दोनों का विवाह बिना किसी विज्ञानं के परबु की इच्छा से पूर्ण हुआ
अब तुम दोनों हे अपने इस नए जीवन की सुरुहत करने जा रहे हो
इस लिया मेरा वचन याद रखा पुत्र सूर्य पुत्री किरण पति पत्नी के सम्बन्ध बहुत से चुनौती तुम दोनों के जीवन में आएगी पैर तुम्हे कभी भी घबराना नहीं है बल्कि एक दूसरे का पूरे बन हर आने वाली समस्या का समाधान करना है
सूर्य ...... जी गुरुदेव
गुरुदेव ....... पुत्री किरण तुम ये तो जानती हो की पुत्र सूर्य के जीवन में बहुत सी पत्नियों का योग है
किरण ......जी गुरुदेव मैं जानती हूँ ये सत्य
गुरुदेव ....... पुत्री भले हे वो सब तुमसे उम्र आवर अनुभव में बड़ी हो सकती है किन्तु पुत्र सूर्य की पत्नी के रूप में वो सभी तुमसे छोटी तुम्हारी छोटी बहनो के रूप में होंगी तुम्हे सभी को अपनी छोटी बहन मन सभी को एक रिश्ते में बाँड्ने है जहा एक दूसरे के पार्टी केवल प्रेम भाव हो विश्वाश हो जनता हु बहुत से मुस्किले होंगी पैर तुम दोनों हर उस मुश्क का सामना कर सकते हो मुझे यकीं है बस कभी भी किसी के बिच मतभेद भले हे आ जाये पैर मनभेद नहीं आने चाइये कभी कभी घाटी नक्षत्र के प्रभाव से हम भी परववित हो गलत को उचित तहत देते है इस लिया जब भी बात अपनों की हो एक न हजार बार सोच के बाद हे अपना फैसला सबके सामने रखना बेटे क्युकी एक गलत फैसा एक भरे पुरे परिवार को तबाह कर देता है
बाकि परबु आवर देवी माँ का आशीर्वाद सदैव तुम दोनों पे बना रहेगा
किरण ....जी गुरुदेव मैं हमेशा आपकी बात का मान रखूंगी
सूर्य .......जब तक परबु आवर देवी माँ के आशीर्वाद के साथ साथ आपका आशीर्वाद है गुरुदेव हम हर मुश्किल का सामना कर सकते है
गुरुदेव ......आप दोनों से यही अपेक्षा थी पुत्र सूर्य पुत्री किरण
मेरा आसिष हमेशा तुम सभी के साथ है सदैव सौभाग्यवती भाव पुत्री चिरयावन प्राप्ति अस्तु पुत्र सूर्य
गुरुदेव दोनों को ले कर विवाह मंडप में पहुंचते है जहा पे किरण की विदाई की तयारी चल रही थी
रानी पारी के आग्रह पे किरण की विदाई रानी महल से होने वाली थी सूर्य महल के लिया
जहा शालिनी जी रेखा जी आवर दादी जो ने पहले से हे पूरी तयारी कर ली थी ..........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................
दोस्तों कल की सदी है तो सायद अपडेट नहीं दे पाउँगा ...............
सूर्य किरण विवाह समारोह ...
चंद्रभान जी .... फिर ऐसे लड़के से रिस्ता
नाना जी ....... आप गलत सोच रहे है वो मेरा नाती भी है गुस्सा तभी आता है जब कोई गलत करता है वैसे दिल का बहुत अच्छा है
कभी फुर्सत में मिलवाता हूँ आपको उस से
एक रूम में जहा किरण को सजाया जा रहा था वह किरण आवर सपना की कुछ आस प्रदोष की भैया आवर हम उम्र शी लिया
किरण को अपने अपने अनुभव बया कर रही थी मस्ती मजाक के साथ
वही बहार विजय आवर पाण्ड्य जी अपने काम पे लग चुके थे
ताकि किसी को कोई परेशानी न हो बारात सूरजगढ़ पहुंच चुकी थी आवर उसका संकेत शिव ने जोरदार आतिश बजी कर सभी को दे दिया था अभी बारात हवेली ी पहुंचे 1 हर से भी ऊपर का समय लेने वाली थी ...............
अब आगे ........
सक्तिपुर .......... रुक्मणि जी गीता जी दोनों को सूर्य की सदी में समय पे सरिक होना था पैर वो दोनों हे काफी लेट हो चुकी थी
रुक्मणि जी ..... दीदी हमें बहुत लेट हो गया है विधि से बात हुई मेरी अभी अभी वो लोग तो सूरजगढ़ पहुंच भी गए है कुछ देर में बारात विवाह मंडप में होगी
गीता जी ....... है हम बहुत लेट हो गए है चलो चलते है सब सामान रखवा लिया है न कार में
रुक्मणि जी ...... जी दीदी पैर क्या अजय को आपने समजा दिया है
गीता जी ....... है मैंने उसे समजा दिया है आवर विक्रम को डॉक्टर नींद का इंजेक्शन लगा दिया है सुबह तक उसकी आँख नहीं खुलेगी
रुक्मणि जी आवर गीता जी कुछ सामान अपने साथ ले कर रूम से निकल जाते है
हॉल में अजय बैठा इन्हे हे देख रहा था
गीता जी ....... अजय हवेली का ख्याल रखना कुछ देर में हम लोग आ जायेंगे आवर कोई प्रॉब्लम हो तो कॉल कर देना राणा भी कुछ देर में तुम्हारे पास आ जायेगा
अजय ...... ठीक है बड़ी मम्मी आप चिंता न करो
गीता जी रुक्मणि जी वह से निकल जाती है कार ले कर सूरजगढ़ की आवर
अजय ...... वो दोनों पहले हे जा चुकी है आप भी निकल गई आज तो यही पार्टी करूंगा अपने दोस्तों के साथ
अजय अपने फ़ोन से अपने दोस्तों को कॉल करता है पार्टी के लिए ला जो कुछ हे देर में आने को त्यार हो गए थे
अजय ...... एक बार राणा अंकल को कॉल कर लेता हु की वो आ रहे है की नहीं अगर यहाँ वो आये तो मुझे फार्महाउस जाना होगा
अजय ......hello राणा अंकल आप हवेली आ रहे हो न
राणा ....सॉरी बीटा मुझे कुछ काम से अच्चानक सहर जाना पद रहा है अगर कुछ जरुरी हो तो मैं किसी आवर को भेज देता हूँ
अजय .....नहीं अंकल उसकी जरुरत नहीं है यहाँ मैं सब संभल लूंगा
राणा ....... ठीक है बीटा कुछ भी जरुरत हो कॉल कर देना
अजय ...... जी अंकल
अजय कॉल कट कर देता है आवर आवर पार्टी की तयारी करने लगता है लिखे बेयर आदि को फ्रीज में रख देता है आवर कुछ बोतल बढ़िया सरब की
अजय किसी को कॉल कर मट्टन चिकन आदि लेन को कहता है
लगता खूब जोर शोर से पार्टी करने का सोचा है अजय ने
सूरजगढ़ ...........
सूर्य घोड़ी पे सवार डेरी डेरी अपने नाना जी की पुराणी हवेली की आवर भाड़ रहा था परिवार की ज्यादातर लड़किया जो सदी में शामिल हुई थी वो कुछ देर नाच गाने के बाद कार से सीधा हवेली जा पहुंची किरण के पास
कोमल ....... वाओ स्वीटी तुम तो बहुत खूबसूरती लग रही हो
राधा ....... पहले से हे हम सब से खूबसूरत है आवर आज तो अपने पिया जी की दुल्हन बानी है खूबसूरती आवर कुदरती निखार से दमक रही है स्वीटी तो
किरण ....... आप सब यहाँ पे है उनके साथ कोण है
राधा ........ अभी से उनकी चिंता हो रही है चिंता न करो वो सीधा यही आएगा कही आवर नहीं जाने वाला इस चाँद को छोड़ कर हेहेहे
किरण ...... बुआ आप भी न
राधा ...... देख स्वीटी फिर मुझे बुआ मत कहना यार हम बहने है भूल मत
किरण आगे भध राधा के दोनों गाल चुम लेती है
किरण .......हेहेहे अब आप न ये नकली गुस्सा हटालो अपने खूबसूरत चेहरे से ये आप पे अच्छा नहीं लगता
कोमल ...... वैसे बुआ आप बुआ कहने पे क्यों छोड़ जाती है पहले तो नहीं चिश्ती थी
राधा ......कोमल तुम भी अरे दुल्हन वो हम मैं नहीं तंग खिचड़ी है तो उसकी खींचो
वैसे वो अपनी एक्सपीरियंस होल्डर सपना कहा है उसने कुछ ज्ञान अपनी दुल्हन स्वीटी को दिया की नहीं फर्स्ट नाईट का
राधा के मुँह से ऐसे खुले आम फर्स्ट नाईट की बात सुन किरण शर्माने लगती है
कोमल ......है है अपनी बनो तो अभी से शर्मा रही है
अभी काफी टाइम है उसमे क्यों सपना
सपना ...... तुम सब का no. भी जल्दी हे लगने वाला है वैसे अभी मेर्री जी थी न यहाँ वो कहा गई
राधा ....... आवर कहा आपके चाचा जी विजय जी से मिलने गई होंगी बेचारे बड़ी आस भरी नजरो से देख रहे थे आते वक़्त मेर्री जी को
सपना ...... मतलब की उनके बिच
कोमल ....... आपको पता नहीं है क्या स्वीटी ने बताया नहीं क्या
ीदार सूर्य की बराड़ हविले के द्वार पे पहुंच चुकी थी इस लिया अलीना पायल प्रीती मानसी सोफिया सानिया मानवी माया के साथ किरण की आवर निकल गयी
सूर्य के साथ मानसी राधिका दीप्ती विधि गायत्री मेनका जी शालिनी जी रेखा जी हे बचे थे
जैसे हे सभी को बारात द्वार पे आने की खबर मिली
किरण तेजी से अपने रूम से बहार निकल द्वार पे घोड़ी पे स्वर सूर्य को देखती है

पायल ....... अरे स्वीटी आराम से इतनी भी जल्दी क्या है वो तुम्हारे लिया हे आया है
किरण सब बाटी को नजर अंदाज कर बस घोड़ी पे स्वर सूर्य को हे देख रही थी
सूर्य भी घोड़ी पे बैठा ीदार उधर देख रहा था
तभी सूर्य हवेली की पूरी मंजिल पे देखता है
सूर्य की नजर अपनी आवर उत्ते देख किरण फ़ौरन सपना की यह में चुप जाती है
सपना ...... तुमने तो देख लिया स्वीटी अब उन्हें भी देख लेने दो खुद को
किरण न में गर्दन हिला देती है
राधा ...... तुम समाजी नहीं सपना अपनी स्वीटी सूर्य के साथ आँख मिचोली खेल रही है सुहागरात से पहले वाली
कितन थोड़ा जोर से राधा के कूल्हों पे चिकोटी काट लेती है
राधा ........ अह्हह्ह्ह्ह स्वीटी
कोमल ....... क्या हुआ बुआ
राधा ........ कुछ नहीं बुआ की बची
उदार सूर्य सपना को इसरा करता है सामने से हटने का पैर किरण के मन करने पे सपना न में गर्दन हिला देती है
वही द्वार पे प्रिय जी सन्ति जी कुछ महिलाओ के साथ द्वार पे पहुंची है तिलक थल ले कर वर का स्वागत करने के लिया
सूर्य घोड़ी से उतर द्वार पे सुसज्जित चौकी पे आ खड़ा होता है
सन्ति जी की एक तो हिघ्त सूर्य से काम थी ऊपर से सूर्य चिकि पे खड़ा था था जिस से सूर्य के माथे तक हाथ नहीं जा प् रहा था
प्रिय जी ..... जमाई सा थोड़ा निचे जुखो
मेनका जी ...... नहीं सूर्य अभी से जखन मत
सन्ति जी ...... शालिनी दीदी आप हे कहो न
मेनका जी ....... आज वो आपकी ननद बाई सा नहीं आपकी संदन जी है
शालिनी जी ....... सूर्य
सूर्य जी ..... माँ पैर पहले तिलक बड़ी मम्मी करेगी तभी जुखुन्गा
रेखा जी ......मैं क्यों बीटा
शालिनी जी ......ठीक है प्रिय भाबी सा आप तिलक कीजिये वो आपके लिया कह रहा है
प्रिय जी .....पैर मैं कैसे रीती अनुसार तो जमाई सा का तिलक उसकी सास करती है दीदी
दादी जी बिच में आते हुए
दादी जी ....... बेटी किरण तुम दोनों की बेटी है इसमें इतना सोचना क्या आवर तुम दोनों के सामने तुम्हारा जमाई नहीं तुम दोनों का बीटा खड़ा है अब तिलक करो यही पे रोके रखना है क्या
प्रिय जी ....... जी माँ सा
प्रियाजी थल में रखे तिलक से सूर्य का तिलक कर चावल आदि लगा कर रीती पूर्ण करती है उसके बाद सन्ति जी तिलक कर सूर्य का नक् पकड़ कर खिचड़ी है
( ये भी एक रसम है जो सास द्वारा पूरी की जाती है )
सन्ति जी सूर्य हाथ थम उसे दवार के भीतर प्रवेश करती है
सूर्य को रोहन सोहेल आवर मनु एक तरफ बने भव्य स्टेज पे ले जाते है
जहा पहले से कुछ सोफे आवर दो सिंघासन लगे हर थे उनके से एक पे सूर्य को बैठा दिया जाता है
कुछ हे देर बाद वह ऋषि वर आते है आवर कुछ विधि पूरी कर दुल्हन को वरमाला के लिया आमंत्रित किया जाता है
कुछ देर बाद सभी लड़कियों के बिच घिरी घूंघट निकले किरण को स्टेज पे लाया जाता है
सूर्य ने भरकश प्रयाश किये किन्तु वह किरण के चेहरे को नहीं देख पाया
रोहन .......भाई इतना उतावला पैन ठीक नहीं वो सिर्फ तुम्हारी है अब जीवन भर का साथ है देखते रहना उन्हें
सूर्य ....... ऐसी बात नहीं है रोहन भाई
रोहन ......भाई मैं भी इस डोर से गुजर चूका हूँ हाहाहा समाज सकता हूँ तुम्हारी इस्थिति
सभी लड़किया किरण को ले स्टेज पे सूर्य के सामने कड़ी हो जाती है
सपना ...... कितने उतावले हो रहे है स्वीटी को देखने के लिया
अब जी भर के देख लीजिये अपनी स्वीटी को जीजा सा
सूर्य ........ क्या कहा जीजा सा
सपना .....क्यों जेब खली करने से बचना चाहते हो मुँह दिखाई तभी होगी जब 51000 रस नेग में मिलेगा हमें
रोहन ........हहहह भाई लो करलो दर्शन दुल्हन के 51000 रस है एक जलक देखने के
सूर्य सोहेल को देखता
सोहेल ....... ठीक है भाई अभी लता हूँ
सोहेल तेजी से एक तरफ जाता है आवर एक बेग ले कर आता है
सोहेल उसे खोल कर उसमे से एक 500 की गाड़ी निकल कर गिने लगता है
सपना सोहेल के हाथ से नोटों की गाड़ी ले लेती है आवर किरण के सर से वॉर कर घोड़ी वाले को दे देती है
सपना ......हमें पैसे नहीं चाइये वो तो हम बस परख रहे थे
सूर्य ...... कभी अकेले में मिलना फिर बताऊंगा अब तो देखने दो
सभी किरण को सूर्य के सामने छोड़ थोड़ा पीछे हो जाती है
किरण मुस्कुराते हुए अपना गुणगाहट ऊपर करती है

सूर्य तो बस उस खूबसूरत चंद्र सामान तेज दमकते हुए खूबसूरत चेहरे में खो चूका था जैसे हे सूर्य की नजरे किरण की नजरो से मिली
सूर्य का हाथ खुद बा खुद किरण के गुलाबी गलो की तरफ भाड़ चले
पैर ही रे किस्मत सपना फिर से किरण को पीछे खींच लेती है
सपना ......नेग मुँह दिखाई का था न की फ़िलहाल दुल्हन को चुने का
ऋषि वर ...... बच्चो वरमाला का समय हो चूका है
सूर्य किरण सपना को घर के देखते है जैसे दोनों की चाहत के बिच सपना आ गई हो
सपना ......ऐसे क्या घर रहे हो साली हूँ इतना हक़ तो बनता है
रोहन ........ भाई साली तो आदि घरवाली भी होती है न
सपना ...... है होती है पैर आदि नहीं पूरी बनाने की निकट करो तब जाने क्यों जीजा श्री
सूर्य ...... वो वक़्त भी आएगा आवर याद है न मेरा वादा
सपना ......कोनसा वडा
सूर्य आगे जुक कर सपना के कान में डेरी से कुछ कहता है
जिसे सायद किरण ने भी सुन लिया था दोनों के चेहरे सरम से लाल हो जाती है
ऋषि वर दोनों को वरमाला देते है एक दूसरे को पहनने के लिया

ऋषि वर ......पुत्री किरण वर को जैमल ा पहनाओ
रोहन आवर सोहेल दोनों सूर्य को ऊपर उठा लेते है
रोहन ..... अब डालो वरमाला
किरण सूर्य की आवर देखती है
सूर्य...... भयो क्यों मेरा घर बसने से पहले जगदा करवाना चाहते हो
तभी कही से वयोम महाशय आते है स्टेज पे
वयोम ...... आप को एतराज न हो तो मैं उठा लूँ आपको जैसे मानसी मेरी बहन है वैसे हे आप भी
किरण सूर्य को देखती है जैसे इजाजत लेना चाहती हो
सूर्य के है में पलके झपकते हे किरण है में इसरा करती है वयोम बहुत सभ्य तरीके से किरण को ऊपर उठा कर वरमाला डलवाता है सूर्य भी किरण को जैमल ा पहना देता है
दोनों को निचे उतर ते हे स्टेज के चारो तरफ लगी आतिश बजी से एक्के बाद एक दमके आकाश में होते है
बाकि सभी दोनों पे गुलाब की पंखुड़ियों की पुष्प वर्षा करने लगते है

ऋषि वर जयमाला पूर्ण करवा वह से फैरो की तयारी के लिया हवन बेचीं की आवर निकल जाते है किरण वह सूर्य को वही दोनों सिंघासन पे बैठाया जाता है बाकि सब भोजन आदि या किसी न किसी विशेष कार्य में लग जाते है कुछ एक घंटे बाद
किरण को भीतर ले जाया जाता है फैरो के लिया त्यार करने हेतु ीदार शिव सूर्य को विवाह विधि पे ले जाते है
जहा ऋषि वर दशहरा मंत्रो उच्चारण के साथ सूर्य विवाह बेचीं अग्नि में आहुति देता है
कुछ आधे जानते चले इस सिलसिले के बाद ृषिव वर फैरो के लिया कन्या को आमंत्रित करते है
सभी बड़े बुज़ुर्ग इस वक़्त विवाह विधि के पास मौजूद थे क्युकी फैरो का समय हो चूका था
कुछ आवर विधि पूर्ण करने के पश्चात प्रिय जी वह सन्ति जी बाकि महिलाओ के साथ लोकगीत गाते हुए किरण को सूर्य लेफ्ट साइड में बैठा दिया जाता है

ऋषि वर विवाह फैरो के मंत्र उच्चारण कर विवाह विधि सुरु करते है
ऋषिवर के कहे अनुसार सूर्य किरण का घटजोड़ किया जाता है जो संजय जी के आग्रह पे प्रिय जी आवर जोरावर जी करते है
दोनों भयो का एक दूसरी के पार्टी ये प्रेम हे तो था जहा पिता अपनी पुत्री के विवाह में होने वाला हर अदिकार अपनी पिता सामान बड़े भाई वह माँ सामान भाभी को दे रहा था
ऋषिवर....... वधि के माता पिया आगे आये आवर कन्यादान विधि को पूर्ण करे
जोरावर जी ......संजय भौ दांतो आगे आओ ये विधि तुम्हे हे पूर्ण करनी है
संजय .......भाई सा आप हे विधि पूरी कीजिये किरण हमारी बेटी अवश्य है पैर वो हमेशा हम से ज्यादा आपके दिल के करीब रही है हम से ज्यादा आप दोनों का हक़ है इस विधि पे
नाना जी .....मुझे ख़ुशी है की तुम दोनों मेरे बचे हो पैर बीटा रीती तिवाज अपने नियम से चलते है तुम दोनों को हे किरण का कन्यादान ( वाग्दान ) करना चाइये
ऋषिवर ....... आप दोनों इस विधि को पूर्ण कर सकते है किन्तु जिन्होंने जनम दिया उनका इस पे पहला हक़ है
ऋषिवर की बात सुन जोरावर संजय सन्ति जी प्रिय जी चारो मिल कर किरण का हाथ सूर्य के हैंतो में सौंप ते है आवर ऋषिवर के कहे अनुसार सूर्य किरण के हठी में जल वह ढूढ से इस विधि को पूर्ण करते है
विधि पूर्ण होते हे शालिनी जी एक थाल आगे बढाती है जिसमे एक खुला बॉक्स रखा हुआ था जिसमे एक खूबसूरत डायमंड लगा मंगलसूत्र था
सूर्य मंगलसूत्र उठा किरण के गले में बंद देता है
ऋषिवर ........वर कन्या की मांग को सिंदूर से सुसज्जित कर फैरो के लिया खड़े हो जाये

सूर्य सोने के सीके से पे सिंदूर ले किरण की मांग भर देता है
कुछ कतरे सिंदूर के किरण के चहरे पे आ गिरते है
जिन्हे बड़ी सफाई से कोमल आगे भाड़ अपने रूमाना से बिना मेकउप करण किया साफ कर देती है
ऋषिवर के मंत्रो उच्चारण के साथ हे सूर्य किरण के फेरे सुरु हो जाते है

ऋषिवर के कहे अनुसार फैरो के साथ साथ सूर्य किरण एक दूसरे को वचन देते हुए फेरे पूर्ण करते है
फेरे पूर्ण होते हे सभी दोनों पे पुष्पों की वर्षा कर दोनों को आसिष देते है
विवाह पूर्ण होते हे सूर्य किरण को मंडप से एक बार फिर स्टेज पे ले जाया जाता है जहा
सभी बड़े बुजुर्ग उपहार आदि के साथ इन दोनों नए जीवन के लिया ढेरो सुभकामनाये आवर अपना अमूल्य आशीर्वाद देते हुए पिछ आदि बनाये है
कोई एक एक घंटे से ऊपर चले आशीर्वाद कार्यक्रम के बाद किरण वह सूर्य को हवेली के भीतर ले जाया जाता है
आवर बाकि जो कुछ रस्मे बची थी उसे पूरी कर भोजन के लिया बैठा दिया जाता है
इन सब में रात का एक बज गया था सूर्य को रुक्मणि वह गीता जी के आने के बारे में फैरो के वक़्त पता चला था जब दोनों सूर्य से लेट आने की मांफी मांगी थी
( कल के अपडेट में मैंने एक विवाह रसम को नहीं लिखा था जो थोड़ी विचित्र थी हमारे यहाँ राजस्थान में बहुत से इलाको में विवाह में इस रसम को भी मन जाता है आवर कुछ इलाको में नहीं
दूल्हा जब घर से निकलता है घोड़ी पे स्वर हो कर तब अपनी माँ का स्तन पैन करता है ये एक रिवाज है केवल रिवाज पूरा करने के लिया एक बार अपनी माँ के स्तन ( बूब्स निप्पल्स )/को मां में ले कर इस रसम को निभाया जाता है
)
कल के अपडेट में इसे ऐड करना भूल गया था )
परीलोक .......
सूर्य की विवाह स्टाल पे पहुंचने के कुछ देर पश्चात हे किरण पालकी में स्वर हो विवाह स्टाल पे पहुँचती है
जहा गुरुदेव वह ऋषि वर द्वारा दोनों को वरमाला आदि रीती पूर्ण करवाने के बाद मंत्रो उच्चारण के साथ किरण वह सूर्य की विवाह विधि आराम कर दी जाती है
किरण वह सूर्य को विवाह विधि पे बैठा दोनों से हवन में आहुति डलवाई जाती है
फिर वही वाग्दान ( कन्यादान ) की विधि के पश्चात
वचनो के साथ विवाह के फेरे लिए जाते है
इसी तरह सूर्य किरण को मंगलसूत्र पहना कर किरण की मांग भर जन्मो जनम के लिया किरण को अपनी जीवन संगिनी बना चूका था
किरण वह सूर्य सभी ऋषि गुरुदेव वह अपने बड़े बुजुर्ग का आशीर्वाद ले गुरुदेव के साथ मंदिर की आवर निकल जाते है जहा पूजा आदि कर परबु वह देवी माँ का आशीर्वाद लेते है
गुरुदेव ......पुत्र सूर्य पुत्री किरण तुम दोनों का विवाह बिना किसी विज्ञानं के परबु की इच्छा से पूर्ण हुआ
अब तुम दोनों हे अपने इस नए जीवन की सुरुहत करने जा रहे हो
इस लिया मेरा वचन याद रखा पुत्र सूर्य पुत्री किरण पति पत्नी के सम्बन्ध बहुत से चुनौती तुम दोनों के जीवन में आएगी पैर तुम्हे कभी भी घबराना नहीं है बल्कि एक दूसरे का पूरे बन हर आने वाली समस्या का समाधान करना है
सूर्य ...... जी गुरुदेव
गुरुदेव ....... पुत्री किरण तुम ये तो जानती हो की पुत्र सूर्य के जीवन में बहुत सी पत्नियों का योग है
किरण ......जी गुरुदेव मैं जानती हूँ ये सत्य
गुरुदेव ....... पुत्री भले हे वो सब तुमसे उम्र आवर अनुभव में बड़ी हो सकती है किन्तु पुत्र सूर्य की पत्नी के रूप में वो सभी तुमसे छोटी तुम्हारी छोटी बहनो के रूप में होंगी तुम्हे सभी को अपनी छोटी बहन मन सभी को एक रिश्ते में बाँड्ने है जहा एक दूसरे के पार्टी केवल प्रेम भाव हो विश्वाश हो जनता हु बहुत से मुस्किले होंगी पैर तुम दोनों हर उस मुश्क का सामना कर सकते हो मुझे यकीं है बस कभी भी किसी के बिच मतभेद भले हे आ जाये पैर मनभेद नहीं आने चाइये कभी कभी घाटी नक्षत्र के प्रभाव से हम भी परववित हो गलत को उचित तहत देते है इस लिया जब भी बात अपनों की हो एक न हजार बार सोच के बाद हे अपना फैसला सबके सामने रखना बेटे क्युकी एक गलत फैसा एक भरे पुरे परिवार को तबाह कर देता है
बाकि परबु आवर देवी माँ का आशीर्वाद सदैव तुम दोनों पे बना रहेगा
किरण ....जी गुरुदेव मैं हमेशा आपकी बात का मान रखूंगी
सूर्य .......जब तक परबु आवर देवी माँ के आशीर्वाद के साथ साथ आपका आशीर्वाद है गुरुदेव हम हर मुश्किल का सामना कर सकते है
गुरुदेव ......आप दोनों से यही अपेक्षा थी पुत्र सूर्य पुत्री किरण
मेरा आसिष हमेशा तुम सभी के साथ है सदैव सौभाग्यवती भाव पुत्री चिरयावन प्राप्ति अस्तु पुत्र सूर्य
गुरुदेव दोनों को ले कर विवाह मंडप में पहुंचते है जहा पे किरण की विदाई की तयारी चल रही थी
रानी पारी के आग्रह पे किरण की विदाई रानी महल से होने वाली थी सूर्य महल के लिया
जहा शालिनी जी रेखा जी आवर दादी जो ने पहले से हे पूरी तयारी कर ली थी ..........
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ....................
दोस्तों कल की सदी है तो सायद अपडेट नहीं दे पाउँगा ...............









































