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सूर्य .....माँ आप कल से कुछ ज्यादा हे नहीं बदल गई हो
शालिनी जी ........हेहेहे बदलाव अच्छा हो तो अपना लेना चाइये वैसे तुम्हारी बुआ जब ऐसा करती है तब तो तुम खुश होते हो आवर मेरा ऐसा करने पे नखरा कर रहे हो
सूर्य ...... सॉरी उम्मम्मम्हा ok आप भी आ जाये जल्दी से
सूर्य खुद को त्यार कर बहार निकल जाता है रेखा जी का इस तरह से सीरियस तरीके से आंजना आवर शालिनी जी का इस तरह का चंचल रूप सूर्य को काफी हद तक ुदशी से बहार निकल चूका था
सूर्य सभी के साथ थोड़ी मस्ती थोड़ी मज़ाक के साथ नास्ता कर 11 बजे के आसपास सक्तिपुर निकल गया विधि रुक्मणि जी के साथ ........
अब आगे ............
सूर्य ने रस्ते में हे विधि आवर रुक्मणि जी को समजा दिया था की विक्रम के विषय में गीता जी से कुछ भी न कहे
दोनों सहमत भी थी इस बात से की अभी कुछ भी न बताना हे बेहतर है गीता ठाकुर को
ीदार सक्तिपुर हवेली में सुबह से गायत्री सूर्य का इन्तजार कर रही थी
जैसे हे रुक्मणि जी की कार हवेली में एंटर की गायत्री किसी चंचल हिरणी सामान अपने रूम से ख़ुशी से उछलते हुए निचे दौड़ गई
गीता जी ....... संभल कर बेटी कही को चोट न लगवा बैठना खुद को
गायत्री .....मम्मी विधि आ गई है
गीता जी .......ये ख़ुशी विधि के आने से तो हो नहीं सकती जरूर सूर्य भी साथ आया है जैसा उसने कल कहा था
सूर्य ....... नमस्ते चची जी कैसे है आप
सूर्य आगे भाड़ उन्हें गले से लगा लेता है
गीता जी .....अच्छी हूँ बीटा तुम कैसे हो सुबह से तुम्हारा इन्तजार हो रहा था आवर तुम अब आ रहे हो
सूर्य ........... घर पे कुछ मेहमान आये हुआ है चाही जी hello गायत्री कैसी है आप
गायत्री .....जी मैं अच्छी हूँ आप बैठिये न मैं कॉफ़ी ले कर आती हूँ
रुक्मणि जी .....दीदी आप बात कीजिये सूर्य से मैं दोपहर का खाना त्यार करती हूँ सूर्य खाना खाने के बाद हे जाना
सूर्य ......ok चची जी जैसा आप कहे पैर जल्दी करना मुझे कही आवर भी जाना है
गीता जी ...... विदेश से कब लौटे बीटा तुम
सूर्य ........वैसे तो दो दिन हो गए चची जी पैर घर पे कल साम को हे आया हूँ कुछ टाइम दिल्ली में रुक गया था
गीता जी ........ अच्छा किया बीटा यही उम्र होती है गुमने फिरने की बाद में कहा इन सब के लिया टाइम मिलता है घर घृस्ति परिवार बल बचे इन सब में हे कब बुढ़ापा दस्तक दे देता है कुछ भी पता नहीं चलता
सूर्य ........क्या चची आप खुद को अभी से बूढी मन रही हो क्या
गीता जी ....... इसमें मन्ना क्या है बीटा अब सर पे सफेदी आणि सुरु हो गई मतलब बुढ़ापा सुरु हो गया है
सूर्य ...... चची जी बुढ़ापा अगर अपनी सोच में आ जाये तो कुछ कहा नहीं जा सकता पैर अगर मन में चंचलता हो आवर चारो तरफ ख़ुशी फिर बुढ़ापा कोई मायने नहीं रखता बस हमेशा खुश रहना चाइये इंसान को जितना हो सके उतना सभी को ख़ुशी भटनी चाइये
गायत्री ...... ये लीजिये आपकी कॉफ़ी
सूर्य .......... सॉरी वो मैं भूल गया आप आवर विधि कार से बेग निकल लाएगी मैं वही भूल आया
गायत्री है में गर्दन हिला विधि को साथ ले बहार कड़ी कार से 2 बड़े से ट्राली बैग निकलती है आवर उन्हें ले कर अंदर चल देती है
गीता जी ........ ये सब क्या है बीटा इन बैग्स में
सूर्य .....ज्यादा कुछ नहीं चची जी बस कुछ कपडे है जो आप सब के लिया ले कर आया हूँ जब पुरे परिवार के लिया लिया तो आप लोगो के लिया कैसे न ले कर आता आप भी तो मेरा परिवार हो
सूर्य एक बैग गायत्री विधि की आवर कर देता है
सूर्य ...... इसमें जो भी है आप दोनों का हसि जैसा आपको दोनों को पसंद हो उस हिसाब से देख लेना
आवर इसमें आपके आवर रुक्मणि चची जी के लिया कुछ साड़ी आवर अजय के लिया कुछ जीन्स t-shirts आवर सुइट्स है
गीता जी .....इन सब की क्या जरुरत थी बीटा
सूर्य .....जरुरत आपको नहीं थी पैर मुझे थी तुम दोनों अंदर ले जा कर देख को
गीता जी ......ठीक है बीटा ान तुम्हे मन तो कर नहीं सकती
रुक्मणि जी कोई आधे घंटे में सभी का खाना त्यार कर चुकी थी पाछो ने मिल कर खाना खाया खाने में ज्यादा वैरायटी यो नहीं थी पैर इतने समय में जो भी बना काफी स्वादिस्ट था
सूर्य .......चची जी खाना काफी अच्छा था
विधि ......आप कुछ अपने बारे में बताने वाले थे न बड़ी मम्मी आवर हम सब को
सूर्य आप दोनों तो जान चुकी हो आवर सुबह देख भी चुकी है सब
गायत्री .....क्या मतलब विधि आवर ऐसा क्या देख लिया तुमने वह
विधि .......आपको पता है दीदी आज मैंने इनकी हवेली में एक दो नहीं बल्कि 3 रियल पारी देखि वो बहुत खूबसूरत थी
गायत्री ....... तुमने खाना ज्यादा तो नहीं खा लिया है चची जी आपने इसके खाने में कही भांग तो नहीं मिला दिया है
रुक्मणि जी ....... बेटी गायत्री विधि सच कह रही है हमने सच में उन्हें देखा है आवर बात भी की है एक परीलोक की रानी थी आवर एक उनकी बेटी राजकुमारी पारिजात आवर एक सूर्य के गुरुदेव की बेटी रिद्धि पारी
गीता जी ......क्या सच में परिया होती है मुझे तो यकीं हे नहीं हो रहा मुझे तो हमेशा लगता था की ये बच्चो को बहलाने वाली कहानिया है पैर वो तुम्हारी हवेली में कैसे बीटा
रुक्मणि जी ....... दीदी जिन दो परियो से हम मिले उन दोनों की सदी सूर्य से होने वाली है वो इनसे हे मिलने यहाँ आये थे
गीता जी .....पैर तुम्हारी सदी तो किरण से हुई है अभी अभी
सूर्य ......... बहुत लम्बी लिस्ट है चची जी
10 ,12 तो होंगी हे
रुक्मणि जी ........ दीदी आपको पता है सूर्य कोई सदर्न इंसान नहीं है इसके पास बहुत सी जादुई सकतिया है जिनका इस्तेमाल ये बुराई को मिटने के लिया करता है
गीता जी ....... क्या सच में पैर तुम इंसान हो फिर तुम्हारे पास ऐसे सकतिया कैसे
सूर्य ....... चची जी हूँ तो इंसान हे पैर मेरा जनम किसी विशेष कार्य के लिया हुआ है ुशी कार्य को पूरा करने के लिया मुझे ये सकतिया मिली इन सक्तियो के साथ साथ बहुत सी जिम्मेदारिया भी मिली है इनका इस्तेमाल मैं अपने निजी जीवन में नहीं कर सकता हूँ आवर आप भी इस बात का जिक्र किसी से न कीजियेगा अजय से भी नहीं
गीता जी ....... ठीक है बीटा वैसे भी इस बारे में जितने काम लोग जाने उतना अच्छा है कभी भी अपनी सकतिया का गलत प्रयोग न करना बीटा
सूर्य जी ....... चची जी अब मैं चलता हूँ आवर है कल रात को घर पे पार्टी है आप सब को आना है
विधि ......कैसे पार्टी हमें तो किसी ने कुछ बताया हे नहीं इस बारे में
सूर्य ....... आज माँ का बर्थडे है उनके लिया सरप्राइज पार्टी राखी है इस लिया अभी किसी को भी इसके बारे में बात करते नहीं सुना ताकि माँ को पता न चले
गीता जी ........ हम जरूर आएंगे बीटा पैर बीटा अजय को हम लोग साथ में नहीं ला सकते
सूर्य ......मैं जनता हूँ चची जी सब अभी उसे इन सब से दूर रखना हे अच्छा है
रुक्मणि जी .....बीटा तुम उसकी बुरी आदत.....
सूर्य ......नहीं चची जी मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ अजय को खुद से बदलना होगा ये मेरे लिया कोई मुश्किल कार्य नहीं है पैर इस तरह से करना गलत होगा अजय को कुछ वक़्त दो वह खुद में बदलाव ला रहा है
रुक्मणि जी .......सॉरी बीटा
सूर्य .....कोई बात नहीं चची जी मैं चलता हूँ
गीता जी ...... कुछ देर बच्चियों के साथ रम काट फिर चले जाना बीटा अगर ज्यादा हे जरुरी है तो नहीं तो कुछ वक़्त आराम कर को दूप बहुत है बहार
चल रुक्मणि तू भी आराम कर ले
रुक्मणि जी ......जी दीदी विधि सूर्य को रूम में ले जाओ वह आराम भी कर लेना तुम लोग आवर बात भी कर लेना
विधि बड़े हे हक़ से सूर्य का हाथ पकड़ ऊपर ले अति है साथ में गायत्री भी चल देती है ऊपर विधि के रूम में
करीब एक घंटा दोनों के साथ बीतता है सूर्य जिस से दोनों काफी खुश थी
साथ हे सूर्य ने जो शॉपिंग की वो भी बहुत पसंद आई दोनों को हे
सूर्य करीब 01:30 को हवेली से निकला आवर सीधा फार्महाउस जा पंहुचा
सूर्य .......वयोम भाई कैसा चल रहा है सब
वयोम ....... भाई पूछो हे मत विक्रम की जो हालत इन तीनो ने की है उसे देख कर मुझे ख़ुशी तो हो रही है पैर साथ हे दुःख भी
सूर्य ........समाज सकता हूँ हर कोई विक्रम के जैसा क्रूर तो हो नहीं सकता न
वयोम सूर्य को वह उस रूम में ले कर गया जाया इस वक़्त फीमेल विक्रम अकेला हे था सूर्य को देखते हे उसने बीएड से उठने की कोशिश की पैर कल रात भर से तीनो ने जो कहर फ. विक्रम पे ढहाया था उस के कारन f.vikram उठना तो दूर हिल भी नहीं प् रहा था
f.vikram सूर्य को देखते हे हाथ जोड़ देता है
सूर्य....... देख लिया एक लड़की के साथ जब तुम बलपूर्वक अपनी हवश मिटते थे तब उसे कैसा मह्सुश होता था आज तक तुमने जो किया आज वही सब तुम्हारे साथ हो रहा है
F.vikram ...... मुझे माफ कर दो चाहे तो मुझे जान से मार दो पैर इस तरह तड़पा तड़पा कर मत मारो
सूर्य ......... बाकि सभी पापो के लिया मैं तुम्हे आसान मौत दे भी देता पैर तुमने एक मासूम बचे की बलि दी किस लिया इन कुछ काली सक्तियो के लिया
मैंने तुम्हे ुशी दिन मार देना चाइये था जिस दिन गुजर सिंह को मानसी के हाथो मरवाया था पैर उस दिन तुम्हारी सुरक्षा तुम्हारी माँ आवर बहनो के प्रेम ने की थी मैं चाहता तो ुशी दिन तुम्हारा अंत कर देता पैर उस वक़्त ऐसा करता तो एक माँ की ममता की हत्या का पाप मुझे लगता दूसरा सबसे बड़ा पाप किया तुमने ुशी माँ की ेजात पे हाथ दाल कर
f.vikram ........ मुझसे पाप हो गया मुझे माफ कर दो
सूर्य ...... नहीं तुम्हे माफी नहीं मिल सकती अगर तुम किसी स्त्री के साथ उसकी सहमति से सम्बन्ध बनाते फिर चाहे वो तुम्हारी मम्मी हे क्यों न हो या फिर रुक्मणि चची जी जिनके साथ तुम्हारे शारीरिक सम्बन्ध थे अगर उन दोनों की सहमति से सब होता तो तुम्हे इतनी कठिन सजा नहीं मिलती
ऊपर से तुमने अपनी बहन विधि पे हे बुरी नजर डाली वयोम वो तीनो कहा है
वयोम .....भाई वो तीनो दूसरे रूम में है
सूर्य ...... F.vikram अब इस सजा से तुम्हे उनकी माफी हे मुक्त कर सकती है उम्मीद करो की वो तीनो तुम्हे माफ कर दे
सूर्य वह से वयोम के साथ निकल गया
दूसरे रूम में जहा तीनो मर्दो के रूप में बैठे थे
सूर्य को देखते हे तीनो खड़े हो हाथ जोड़ लेते है
तभी वह किसी को देख सूर्य चौंक जाता है
सूर्य ....... आप लोग कोण है आवर यहाँ पे कैसे
सामने दो अदृश्य परछाईया कड़ी थी
परछाई 1 ......हम यमदूत है तुम कोण हो आवर तुम हमें कैसे देख सकते हो
वयोम .....भाई आप किस से बात कर रहे है यहाँ पे तो हम पाछो के अलावा कोई नहीं है
सूर्य ....... आप लोग यहाँ किस लिया आये है
यमदूत 1 ...... हम इस स्त्री के आत्मा को लेने आये है इसका जीवन चक्र समाप्त होने वाला है
उनका इशारा था मल्टी सास की आवर
सूर्य ......क्या आप कुछ वक़्त रुक सकते है
यमदूत 2 ......... इनकी मृत्यु योग में केवल कुछ समय शेष है
सूर्य ...... आप तीनो का क्या निर्णय है अभी f.vikram को आवर सजा देनी है हैक्या आपको
मल्टी सास ...... नहीं बीटा हमने अपने गुस्से में पहले हे बहुत गलत कर चुके है अब आवर नहीं मैं उसे माफ करती हूँ उसे उसके किये की सजा ईश्वर देंगे
सूर्य .......आप दोनों का क्या विचार है
सुमन मल्टी ......हम भी माँ जी से सहमत है
सूर्य ...... ठीक है फिर एक बार विक्रम से मिल कर उसे माफ कर दीजिये ताकि वो अपनी अगली सजा भोग सके
सूर्य तीनो को ले कर f.vikram के पास पंहुचा
जहा विक्रम तीनो के पैरो में गिर कर माफी मांगता है
तीनो के माफ करते हे f.vikram को उसका पूर्ण रूप मिल जाता है वही मल्टी सुमन .m.saas को उनका स्त्री रूप
सूर्य ....... इसकी मृत्यु योग कब का है
यमदूत 2 ........ हमें इसकी इजाजत नहीं है की किसी की मृत्यु का समय किसी आवर को बताये
सूर्य .......मल्टी जी आपकी सास का अंतिम समय आ चूका है आप को जी भी बात करनी है जल्दी कर लीजिये
सूर्य अपनी आँखे बंद कर किसी को याद करता है
कुछ देर बाद वह प्रेतराज आ पहुंचे
सूर्य .....परनाम पिता श्री
प्रेतराज ....... चिरंजीवी भाव पुत्र आज हमें याद करने की क्या आव्सय्कता ाँ पड़ी पुत्र सूर्य यमदूत आप यहाँ पे
यमदूत 1 ,2 ......परनामी प्रेतराज हम इन स्त्री के प्राण हरण करने आये है
सूर्य ......पिता श्री आप विक्रम के कर्मो से तो परिचित हो चुके होंगे अब आगे का दंड आप हे इसे देंगे
प्रेतराज ...... नहीं पुत्र अभी विक्रम की कुछ सांसे बची हुई है उन साँसों की सीमा ख़तम होने पे हे हमारा दंड चक्र आरम्भ होगा
सूर्य ......जैसा आप उचित समजे पिता श्री ये अब आपकी जिम्मेदारी है
ीदार मल्टी सुमन अपनी म. सास से लिपट कर रो रही थी
कुछ हे पालो में यमदूत m.saas के प्राण हर लेते है
सुमन आवर मल्टी उस निर्जीव सरीर से लिपट कर फुट फिट कर रोने लगती है
सूर्य ..... वयोम इनकी विक्रम आवर हमसे जुडी सभी यादें मिटा दो ताकि ये अपने आगे का जीवन सुकून से जी सके
वयोम ....जी भाई
प्रेतराज ....... पुत्र मैं चलता हूँ आवर विक्रम को उसके कर्मो का उचित दंड मिल जायेगा
दोनों यमदूत प्रेतराज को परनाम कर m.saas की आत्मा ले कर वह से लौट गए विक्रम को प्रेतराज ले कर चले गए अब यहाँ वयोम सूर्य मल्टी सुमन आवर m.saas का निर्जीव सरीर बचा था
सूर्य ..... आपके पति को खबर कर दीजिये उनकी माँ की मौत की
मल्टी ......आप कोण है
सूर्य ...... जी मैं सूर्य ठाकुर हूँ सूर्यगढ़ से यहाँ विक्रम से मिलने आया था ये मेरे बड़े भैया है वयोम
सुमन रोटी हुए अपने जीजा को कॉल करती है वयोम की सहायता से सूर्य m.saas के निर्जीव सरीर को मल्टी के रूम तक पहुँचता है जो फार्महाउस के पीछे बने हुए थे
सूर्य .....भैया आप इनके साथ रुकना जब तक इनके पति न आ जाये मैं चलता हूँ
वयोम .....ठीक है भाई
सूर्य वह से घर की तरफ निकल जाता है वयोम को समजा कर
सूर्यगढ़ .........
दोपहर के भोजन के वक़्त सूर्य के नाना जी का परिवार भी सूर्यगढ़ आया हुआ था
सिवाय जोरावर जी को छोड़ कर क्यों की वो किसी राजनीतिक काम से बहार थे वैसे भी वो ज्यादातर समय बहार हे रहते है
रानी पारी वापिस परीलोक जा चुकी थी रिद्धि आवर परिधि को यही छोड़ कर
सूर्य के जाने के बाद शालिनी जी ने मेर्री जी से सदी की बात करने की कोशिश पैर मेर्री जी ने साफ साफ कह दिया की वो अभी सदी नहीं करेगी
शालिनी जी ने भी मेर्री जी पे कोई दबाब नहीं डाला
ीदार दोपहर के काने के बाद सभी लड़किया सूर्य के रूम में शालिनी जी के बर्थडे पार्टी को ले कर डिसकस कर रही थी
निचे दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी संजय जी पाछो किसी आवर हे चर्चा में लगे हुआ थे वही बाकि महिलस्य रेखा जी शालिनी जी मेनका जी प्रिय जी सन्ति जी शालिनी जी के रूम चर्चा में लगी हुई थे
2,30 के करीब सूर्य घर लौट जब वो अपने रूम में पंहुचा तो पूरा रूम फूल था
सूर्य ...... क्या बात है आज इतने साडी खूबसूरत परिया हमारे रूम में कैसे
कोमल ........ कही इतने साडी खूबसूरत परिया देख आपका इमां तो नहीं दोल गया हेहेहे
सूर्य .......... क्या बात है कोमलांगी देवी आज कल आप कुछ ज्यादा हे मस्ती करने लगी है
कोमल ..... आप जो नहीं करते हो
सूर्य .....देख रही हो स्वीटी ये कोमल क्या जह रही है
किरण ....... आप जाने आवर कोमल दी जाने
सूर्य ........ वैसे क्या डिस्कशन चल रहा है जो इतनी गुप्त मीटिंग राखी जा रही है
किरण. ...... माँ की बर्थडे पार्टी का प्लान कर रहे है
सूर्य ...... चलो अच्छा है आप सब देख लोगी तो मुझे कोई टेंशन नहीं होगी
किरण ........ पैर माँ को पता न चले इस पार्टी का इसका ध्यान आपको रखना होगा कुंवर जी तो आप पार्टी से पहले उन्हें सहर ले जाना ताकि उनके पीछे से हम सब तयारी कर सके
सूर्य ....... Ok ये मैं कर लूंगा आवर सुबह के लिया सबको सॉरी मेरी वजह से आप सभी का मूड भी मैंने ख़राब कर दिया आप लोग बात कीजिये मैं किसी आवर रूम में आराम करता हूँ फिर साम को मैं माँ को ले कर सहर चला जाऊंगा
किरण ....... है ये ठीक रहेगा आप उन्हें वही से ब्यूटी पारलर से त्यार कर लाना
सूर्य .....वो सब तो हो जायेगा पैर कोई उन्हें पहले विश न कर दे नहीं तो पूरा प्लान ख़राब हो जायेगा
किरण ......don't वैरी कुंवर जी मैं पहले हे सभी को समजा दिया था कल हे आवर कल रात मैं बड़े पापा को भी बता दिया था वो साम को सीधा यही पे आएंगे
सूर्य ......ok मैं कुछ देर आराम करता हूँ मुझे 5 बजे उठा देना ok
पायल .....मुझे भी थकन हो रही है मैं भी चलती हम आप मेरे साथ चलिए
प्रीती ......मैं भी आती हूँ पायल दीदी मुझे भी रेस्ट करना है
राधा ....... पायल प्रीती तुम दोनों यही रुको आप जाओ इनके साथ रिद्धि दी परिधि हम तो फिर भी इनके साथ रहते है आप लोग जाइये आवर कुछ समय बिताइए
किरण के है कहने पे रिद्धि आवर परिधि दोनों छठ पे बने रूम में चल दी जो पहले स्टोररूम हुआ करता था पैर अब वो एक अच्छा खासा रूम था जिसमे किंग साइज बीएड a.c सोफा सभी सुविधा मौजूद थी
किरण ...... सॉरी पायल प्रीती दी पैर राधा ने जो किया वो सही किया हम तो इतना समय इनके साथ रहते है पैर उन दोनों को तो इतना समय भी नहीं मिलता अभी मिला है तो उन्हें साथ में बिताना चाइये
पायल ....... स्वीटी तुम सही कह रही हो आवर सॉरी मत बोलो जो किया सही किया
जैसे हे सूर्य अंदर पंहुचा दोनों को एक एक किश कर अपने साथ बीएड पे सुला लेता है
कोई कुछ नहीं बोलता बस ख़ामोशी से तीनो चिपके हुए थे
काफी देर बाद सूर्य ने हे इस ख़ामोशी को भांग किया
सूर्य ....... सॉरी सुबह जो मैंने किया उसके लिया आप दोनों इतनी दूर से हम सब से मिलने आई आवर मैंने जिस तरह ......
रिद्धि ....... आपको कुछ भी कहने की जरुरत नहीं जरूर को कारन रहा होगा हमें नहीं जानना बस आप सन्ति से लेते रहिये आवर कुछ मत बोलिये
सूर्य दोनों को अपने सीने पे लेटाया रिद्धि आवर परिधि के बदन से आती मिटटी मिटटी भीनी भीनी खुशबु से न जाने कब उसकी आँख लगी उसे भी पता नहीं चला
रिद्धि आवर परिधि दोनों बस एक तक सूर्य को देखती रही जब तक किसी ने दूर पे नॉक न किया
परिधि .....दीदी इनके उतने का समय हो गया है
रिद्धि ......है माँ के साथ इन्हें बहार भी तो जाना है न
रिद्धि जल्दी से सूर्य को किश कर रूम के दूर की आवर भद्दी सामने कोमल हे थे
कोमल .....दीदी उन्हें उठा दीजिये ताकि वो फ्रेश हो जाये
रिद्धि ....... Ok मैं उठा देती हूँ
किरण वही से लौट जाती परिधि सूर्य को उठा देती है
सूर्य .....पता हे नहीं चला कब उस मीठी मिथ सोंधी खुसबू सूंघते हुए आँख लग गई
परिधि ......उठिये मम्मी जी के साथ आपको सहर जाना है न
सूर्य .....ok पैर पहले अच्छे से मुँह मीठा तो कर लूँ
सूर्य परिधि को अपने निचे ले किश करने लगता है कुछ 3,4 मिंटू बाद सूर्य अलग हुआ आवर रिद्धि की तरफ बढ़ा रिद्धि को उठा वही बीएड पे लिटा उसे किश करता है अभी किश करते हुए हे मिनट्स हुए थी की जूलिया तीनो की कॉफ़ी ले कर आती है
रिद्धि परिधि अपनी कॉफ़ी ले निचे चल देती है
सूर्य जूलिया को गौड़ में उठा बाथरूम में गेस गया आवर शावर ों कर देता है
सूर्य ........ उम्मम्मम्हा क्या बात है आज मेरी जुली कुछ उदाश है बात क्या है
जुली ...... वो पिता श्री की याद आ रही है
सूर्य ...... ऐसे बात है तो हम उन्हें अभी बुला लेते है साथ में किंग क्वीन आवर देवसूफ़ी नियों जी को भी
जुली ....... क्या सच में ऐसा हो सकता है
सूर्य ........ तुम्हे जो चाइये वो मिलेगा जुली पैर ऐसे उदाश होना अच्छी बात नहीं है इस से बचे पे गलत प्रभाव पड़ता है मैं जनता हूँ तुम्हारे साथ में वक़्त नहीं बिता पता हूँ पैर क्या कृ मेरी भी मज़बूरी है
जुली ......उम्म्म्महा आप ऐसा कुछ भी न सोचिये बस मेरे लिया इतना हे बहुत है की आप मेरी नजरो के सामने हो
सूर्य जुली के सरीर से चिपकी हुई वो पतली t-shirts उतर देता निचे ब्लैक ब्रा में कैद उन घोष से भरे माध्यम आकर की उन्नत उभारो के ऊपर हिस्से पे अपने होंठ चिपका उस भीगे हुए उभर के ऊपर हिशे को चूमते हुए पीछे से ब्रा का हुक खोल जुली के सरीर से अलग कर देता है आवर एक निप्पल्स को मुँह में भर चूसने लगता है
जुली....... उम्म्म्मममहहह पता नहीं कब से मैं यही चाहती थी पैर कहने की हिमायत नहीं ओह्ह्ह्हह्ह आराम से काटिये मत न
सूर्य एक हाथ से जुली की इलास्टिक वाली लेगी नीची किसका कर एक पल अलग हो अपना शार्ट आवर t-shirts उतर कर खुद भी निर्वस्त्र हो गया आवर जुली को भी कर दिया

जुली सूर्य के लिंग को पकड़ अपनी योनि कुंड पे अपने दोनों जांघो के बिच रख सूर्य की किश करने लगती है
सूर्य को अपने सीने पे जुली के आकड़े हुए निप्पल्स के साथ साथ उस कोमल मात्र के गोले का भी अहसास हो रहा था जो सूर्य के सीने से लगने से जैसे गोल से सपाट हो चूका हो
डेरी डेरी जुली अपनी कमर को आगे पीछे कर उस मोठे तगड़े लिंग पे अपनी योनि हो रही रगड़ का मज़ा लेने लगती है
रह रह कर जब सूर्य का फुला हुआ सूपड़ा जुली की योनि लिप्स को फैलाया हुआ योनि द्वार को रगड़ते हुए निकलता तो जुली के मुँह से मादक सिसकारियां निकल जाती

कुछ देर बाद जुली खुद से निचे बेथ सूर्य के लिंग को चूसने लगती है
जिसपे हल्का हल्का योनि राश भी लगा हुआ था
जिसे जुलु बड़े मज़े से साफ कर लिंग को चूसने लगती है

सूर्य ...... जुली मैं ऐसे संत नहीं हो सकता अभी केवल तुम्हे संत करना है
जुली .....क्या मतलब मैं कुछ सामजी नहीं
सूर्य .......मैं पूर्ण सेक्स के बिना संत नहीं हो सकता आवर पुराण सेक्स अभी कर नहीं सकता जब तक सदी नहीं हो जाती इस लिया यहाँ म्हणत करना बेकार है
सूर्य जुली को पलट कर पीछे से उसकी जंगो के बिच फिर से अपना लिंग गुस्सा कर जुली को योनि पे तेजी से लिंग गुस्ते हुए हलकी तेजी से अपने कमर आगे पीछे करने लगता है साथ हे जुली की चूचियों को मसलने लगता है

हर देखे के साथ जुली की योनि के होंटो को खोल जब वो मोटा गरम सूपड़ा आगे निकलता तो जुली को की योनि में में मस्ती से जलपान होने लगता आवर जब वही सूफड़ा गुदा द्वार को रगड़ते तो खुद बा खुद जुली की जंगे आपस में आवर आदिक चिपक जाती
कुछ देर बाद जुली कपड़े हुए अपने दूसरे चरमसुख को प्राप्त कर जाती है

सूर्य का लिंग अभी भी वैसे हे जल रहा था
जुली ......अब इसको कैसे संत करोगे आप
सूर्य .....जरुरत नहीं है खुद संत हो जायेगा ये
अब जल्दी से नाहा लोट फिर चलते है निचे
सूर्य आवर जुली दोनों कहा कर निचे चक देते है
क्युकी सूर्य को शालिनी जी को ले कर सहर जाना था ताकि पीछे से सभी खुल कर पार्टी की त्यार कर शालिनी जी को सरप्राइज कर सके
जुली के चेहरे की रौनक देख किरण माजरा समाज जाती है
किरण .......... चलिए मेरे साथ रूम में चलिए कुंवर जी
सूर्य. ......... उसकी जरुरत नहीं है स्वीटी अभी माँ के साथ बहार जा रहा हूँ बस माँ आ जाये तब तक कॉफ़ी पीला दो बढ़िया सी
किरण है बोल कर कॉफ़ी बनाने चल देती है कुछ हे देर में शालिनी जी भी आ जाती है सूर्य कॉफ़ी फिनिश कर अपनी कार से शालिनी जी को ले कर सहर की तरफ निकल गया
पिछसे लड़किया पूरी हवेली को सजाने में लग गई
तयारी करते करते कब सूर्यास्त होने लगा पता भी नहीं चला
अब सभी लड़किया भी त्यार होने लग गयी थी बहार लोने में सकती की देख रेखाओं में बाकि तयारिया भी पूरी हो चुकी थी दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी संजय महेंद्र जी बहार लोने में हे बे थे गैप सैप करने में लगे हुए थे कुछ हे देर बाद शिव आवर जोरावर जी भी हवेली पहुंच जाते लड़किया आवर बाकि परिवार की महिलाये भी लगभग सभी त्यार हो चुकी थी
करीब 8 बजे के गीता ठाकुर रुक्मणि जी गायत्री विधि में हवेली में पधार चुकी थी
चारो ने सूर्य द्वारा की गयी शॉपिंग ड्रेस आवर सरिया पहनी हुई थी जो की चारो पे बहुत खूबसूरत लग रही थी
तभी वह रानी पारी गुरुदेव की साथ जिनिशा जीनत j.king जुली के पिता जी नियों किंग एंड क्वीन भी आ पहुंचे
अब बस सूर्य आवर शालिनी जी का हे इन्तजार था जो सहर से कभी भी लौट सकते थे सब उनका हे इन्तजार कर रहे थे .............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................
सूर्य .....माँ आप कल से कुछ ज्यादा हे नहीं बदल गई हो
शालिनी जी ........हेहेहे बदलाव अच्छा हो तो अपना लेना चाइये वैसे तुम्हारी बुआ जब ऐसा करती है तब तो तुम खुश होते हो आवर मेरा ऐसा करने पे नखरा कर रहे हो
सूर्य ...... सॉरी उम्मम्मम्हा ok आप भी आ जाये जल्दी से
सूर्य खुद को त्यार कर बहार निकल जाता है रेखा जी का इस तरह से सीरियस तरीके से आंजना आवर शालिनी जी का इस तरह का चंचल रूप सूर्य को काफी हद तक ुदशी से बहार निकल चूका था
सूर्य सभी के साथ थोड़ी मस्ती थोड़ी मज़ाक के साथ नास्ता कर 11 बजे के आसपास सक्तिपुर निकल गया विधि रुक्मणि जी के साथ ........
अब आगे ............
सूर्य ने रस्ते में हे विधि आवर रुक्मणि जी को समजा दिया था की विक्रम के विषय में गीता जी से कुछ भी न कहे
दोनों सहमत भी थी इस बात से की अभी कुछ भी न बताना हे बेहतर है गीता ठाकुर को
ीदार सक्तिपुर हवेली में सुबह से गायत्री सूर्य का इन्तजार कर रही थी
जैसे हे रुक्मणि जी की कार हवेली में एंटर की गायत्री किसी चंचल हिरणी सामान अपने रूम से ख़ुशी से उछलते हुए निचे दौड़ गई
गीता जी ....... संभल कर बेटी कही को चोट न लगवा बैठना खुद को
गायत्री .....मम्मी विधि आ गई है
गीता जी .......ये ख़ुशी विधि के आने से तो हो नहीं सकती जरूर सूर्य भी साथ आया है जैसा उसने कल कहा था
सूर्य ....... नमस्ते चची जी कैसे है आप
सूर्य आगे भाड़ उन्हें गले से लगा लेता है
गीता जी .....अच्छी हूँ बीटा तुम कैसे हो सुबह से तुम्हारा इन्तजार हो रहा था आवर तुम अब आ रहे हो
सूर्य ........... घर पे कुछ मेहमान आये हुआ है चाही जी hello गायत्री कैसी है आप
गायत्री .....जी मैं अच्छी हूँ आप बैठिये न मैं कॉफ़ी ले कर आती हूँ
रुक्मणि जी .....दीदी आप बात कीजिये सूर्य से मैं दोपहर का खाना त्यार करती हूँ सूर्य खाना खाने के बाद हे जाना
सूर्य ......ok चची जी जैसा आप कहे पैर जल्दी करना मुझे कही आवर भी जाना है
गीता जी ...... विदेश से कब लौटे बीटा तुम
सूर्य ........वैसे तो दो दिन हो गए चची जी पैर घर पे कल साम को हे आया हूँ कुछ टाइम दिल्ली में रुक गया था
गीता जी ........ अच्छा किया बीटा यही उम्र होती है गुमने फिरने की बाद में कहा इन सब के लिया टाइम मिलता है घर घृस्ति परिवार बल बचे इन सब में हे कब बुढ़ापा दस्तक दे देता है कुछ भी पता नहीं चलता
सूर्य ........क्या चची आप खुद को अभी से बूढी मन रही हो क्या
गीता जी ....... इसमें मन्ना क्या है बीटा अब सर पे सफेदी आणि सुरु हो गई मतलब बुढ़ापा सुरु हो गया है
सूर्य ...... चची जी बुढ़ापा अगर अपनी सोच में आ जाये तो कुछ कहा नहीं जा सकता पैर अगर मन में चंचलता हो आवर चारो तरफ ख़ुशी फिर बुढ़ापा कोई मायने नहीं रखता बस हमेशा खुश रहना चाइये इंसान को जितना हो सके उतना सभी को ख़ुशी भटनी चाइये
गायत्री ...... ये लीजिये आपकी कॉफ़ी
सूर्य .......... सॉरी वो मैं भूल गया आप आवर विधि कार से बेग निकल लाएगी मैं वही भूल आया
गायत्री है में गर्दन हिला विधि को साथ ले बहार कड़ी कार से 2 बड़े से ट्राली बैग निकलती है आवर उन्हें ले कर अंदर चल देती है
गीता जी ........ ये सब क्या है बीटा इन बैग्स में
सूर्य .....ज्यादा कुछ नहीं चची जी बस कुछ कपडे है जो आप सब के लिया ले कर आया हूँ जब पुरे परिवार के लिया लिया तो आप लोगो के लिया कैसे न ले कर आता आप भी तो मेरा परिवार हो
सूर्य एक बैग गायत्री विधि की आवर कर देता है
सूर्य ...... इसमें जो भी है आप दोनों का हसि जैसा आपको दोनों को पसंद हो उस हिसाब से देख लेना
आवर इसमें आपके आवर रुक्मणि चची जी के लिया कुछ साड़ी आवर अजय के लिया कुछ जीन्स t-shirts आवर सुइट्स है
गीता जी .....इन सब की क्या जरुरत थी बीटा
सूर्य .....जरुरत आपको नहीं थी पैर मुझे थी तुम दोनों अंदर ले जा कर देख को
गीता जी ......ठीक है बीटा ान तुम्हे मन तो कर नहीं सकती
रुक्मणि जी कोई आधे घंटे में सभी का खाना त्यार कर चुकी थी पाछो ने मिल कर खाना खाया खाने में ज्यादा वैरायटी यो नहीं थी पैर इतने समय में जो भी बना काफी स्वादिस्ट था
सूर्य .......चची जी खाना काफी अच्छा था
विधि ......आप कुछ अपने बारे में बताने वाले थे न बड़ी मम्मी आवर हम सब को
सूर्य आप दोनों तो जान चुकी हो आवर सुबह देख भी चुकी है सब
गायत्री .....क्या मतलब विधि आवर ऐसा क्या देख लिया तुमने वह
विधि .......आपको पता है दीदी आज मैंने इनकी हवेली में एक दो नहीं बल्कि 3 रियल पारी देखि वो बहुत खूबसूरत थी
गायत्री ....... तुमने खाना ज्यादा तो नहीं खा लिया है चची जी आपने इसके खाने में कही भांग तो नहीं मिला दिया है
रुक्मणि जी ....... बेटी गायत्री विधि सच कह रही है हमने सच में उन्हें देखा है आवर बात भी की है एक परीलोक की रानी थी आवर एक उनकी बेटी राजकुमारी पारिजात आवर एक सूर्य के गुरुदेव की बेटी रिद्धि पारी
गीता जी ......क्या सच में परिया होती है मुझे तो यकीं हे नहीं हो रहा मुझे तो हमेशा लगता था की ये बच्चो को बहलाने वाली कहानिया है पैर वो तुम्हारी हवेली में कैसे बीटा
रुक्मणि जी ....... दीदी जिन दो परियो से हम मिले उन दोनों की सदी सूर्य से होने वाली है वो इनसे हे मिलने यहाँ आये थे
गीता जी .....पैर तुम्हारी सदी तो किरण से हुई है अभी अभी
सूर्य ......... बहुत लम्बी लिस्ट है चची जी
10 ,12 तो होंगी हे
रुक्मणि जी ........ दीदी आपको पता है सूर्य कोई सदर्न इंसान नहीं है इसके पास बहुत सी जादुई सकतिया है जिनका इस्तेमाल ये बुराई को मिटने के लिया करता है
गीता जी ....... क्या सच में पैर तुम इंसान हो फिर तुम्हारे पास ऐसे सकतिया कैसे
सूर्य ....... चची जी हूँ तो इंसान हे पैर मेरा जनम किसी विशेष कार्य के लिया हुआ है ुशी कार्य को पूरा करने के लिया मुझे ये सकतिया मिली इन सक्तियो के साथ साथ बहुत सी जिम्मेदारिया भी मिली है इनका इस्तेमाल मैं अपने निजी जीवन में नहीं कर सकता हूँ आवर आप भी इस बात का जिक्र किसी से न कीजियेगा अजय से भी नहीं
गीता जी ....... ठीक है बीटा वैसे भी इस बारे में जितने काम लोग जाने उतना अच्छा है कभी भी अपनी सकतिया का गलत प्रयोग न करना बीटा
सूर्य जी ....... चची जी अब मैं चलता हूँ आवर है कल रात को घर पे पार्टी है आप सब को आना है
विधि ......कैसे पार्टी हमें तो किसी ने कुछ बताया हे नहीं इस बारे में
सूर्य ....... आज माँ का बर्थडे है उनके लिया सरप्राइज पार्टी राखी है इस लिया अभी किसी को भी इसके बारे में बात करते नहीं सुना ताकि माँ को पता न चले
गीता जी ........ हम जरूर आएंगे बीटा पैर बीटा अजय को हम लोग साथ में नहीं ला सकते
सूर्य ......मैं जनता हूँ चची जी सब अभी उसे इन सब से दूर रखना हे अच्छा है
रुक्मणि जी .....बीटा तुम उसकी बुरी आदत.....
सूर्य ......नहीं चची जी मैं ऐसा नहीं कर सकता हूँ अजय को खुद से बदलना होगा ये मेरे लिया कोई मुश्किल कार्य नहीं है पैर इस तरह से करना गलत होगा अजय को कुछ वक़्त दो वह खुद में बदलाव ला रहा है
रुक्मणि जी .......सॉरी बीटा
सूर्य .....कोई बात नहीं चची जी मैं चलता हूँ
गीता जी ...... कुछ देर बच्चियों के साथ रम काट फिर चले जाना बीटा अगर ज्यादा हे जरुरी है तो नहीं तो कुछ वक़्त आराम कर को दूप बहुत है बहार
चल रुक्मणि तू भी आराम कर ले
रुक्मणि जी ......जी दीदी विधि सूर्य को रूम में ले जाओ वह आराम भी कर लेना तुम लोग आवर बात भी कर लेना
विधि बड़े हे हक़ से सूर्य का हाथ पकड़ ऊपर ले अति है साथ में गायत्री भी चल देती है ऊपर विधि के रूम में
करीब एक घंटा दोनों के साथ बीतता है सूर्य जिस से दोनों काफी खुश थी
साथ हे सूर्य ने जो शॉपिंग की वो भी बहुत पसंद आई दोनों को हे
सूर्य करीब 01:30 को हवेली से निकला आवर सीधा फार्महाउस जा पंहुचा
सूर्य .......वयोम भाई कैसा चल रहा है सब
वयोम ....... भाई पूछो हे मत विक्रम की जो हालत इन तीनो ने की है उसे देख कर मुझे ख़ुशी तो हो रही है पैर साथ हे दुःख भी
सूर्य ........समाज सकता हूँ हर कोई विक्रम के जैसा क्रूर तो हो नहीं सकता न
वयोम सूर्य को वह उस रूम में ले कर गया जाया इस वक़्त फीमेल विक्रम अकेला हे था सूर्य को देखते हे उसने बीएड से उठने की कोशिश की पैर कल रात भर से तीनो ने जो कहर फ. विक्रम पे ढहाया था उस के कारन f.vikram उठना तो दूर हिल भी नहीं प् रहा था
f.vikram सूर्य को देखते हे हाथ जोड़ देता है
सूर्य....... देख लिया एक लड़की के साथ जब तुम बलपूर्वक अपनी हवश मिटते थे तब उसे कैसा मह्सुश होता था आज तक तुमने जो किया आज वही सब तुम्हारे साथ हो रहा है
F.vikram ...... मुझे माफ कर दो चाहे तो मुझे जान से मार दो पैर इस तरह तड़पा तड़पा कर मत मारो
सूर्य ......... बाकि सभी पापो के लिया मैं तुम्हे आसान मौत दे भी देता पैर तुमने एक मासूम बचे की बलि दी किस लिया इन कुछ काली सक्तियो के लिया
मैंने तुम्हे ुशी दिन मार देना चाइये था जिस दिन गुजर सिंह को मानसी के हाथो मरवाया था पैर उस दिन तुम्हारी सुरक्षा तुम्हारी माँ आवर बहनो के प्रेम ने की थी मैं चाहता तो ुशी दिन तुम्हारा अंत कर देता पैर उस वक़्त ऐसा करता तो एक माँ की ममता की हत्या का पाप मुझे लगता दूसरा सबसे बड़ा पाप किया तुमने ुशी माँ की ेजात पे हाथ दाल कर
f.vikram ........ मुझसे पाप हो गया मुझे माफ कर दो
सूर्य ...... नहीं तुम्हे माफी नहीं मिल सकती अगर तुम किसी स्त्री के साथ उसकी सहमति से सम्बन्ध बनाते फिर चाहे वो तुम्हारी मम्मी हे क्यों न हो या फिर रुक्मणि चची जी जिनके साथ तुम्हारे शारीरिक सम्बन्ध थे अगर उन दोनों की सहमति से सब होता तो तुम्हे इतनी कठिन सजा नहीं मिलती
ऊपर से तुमने अपनी बहन विधि पे हे बुरी नजर डाली वयोम वो तीनो कहा है
वयोम .....भाई वो तीनो दूसरे रूम में है
सूर्य ...... F.vikram अब इस सजा से तुम्हे उनकी माफी हे मुक्त कर सकती है उम्मीद करो की वो तीनो तुम्हे माफ कर दे
सूर्य वह से वयोम के साथ निकल गया
दूसरे रूम में जहा तीनो मर्दो के रूप में बैठे थे
सूर्य को देखते हे तीनो खड़े हो हाथ जोड़ लेते है
तभी वह किसी को देख सूर्य चौंक जाता है
सूर्य ....... आप लोग कोण है आवर यहाँ पे कैसे
सामने दो अदृश्य परछाईया कड़ी थी
परछाई 1 ......हम यमदूत है तुम कोण हो आवर तुम हमें कैसे देख सकते हो
वयोम .....भाई आप किस से बात कर रहे है यहाँ पे तो हम पाछो के अलावा कोई नहीं है
सूर्य ....... आप लोग यहाँ किस लिया आये है
यमदूत 1 ...... हम इस स्त्री के आत्मा को लेने आये है इसका जीवन चक्र समाप्त होने वाला है
उनका इशारा था मल्टी सास की आवर
सूर्य ......क्या आप कुछ वक़्त रुक सकते है
यमदूत 2 ......... इनकी मृत्यु योग में केवल कुछ समय शेष है
सूर्य ...... आप तीनो का क्या निर्णय है अभी f.vikram को आवर सजा देनी है हैक्या आपको
मल्टी सास ...... नहीं बीटा हमने अपने गुस्से में पहले हे बहुत गलत कर चुके है अब आवर नहीं मैं उसे माफ करती हूँ उसे उसके किये की सजा ईश्वर देंगे
सूर्य .......आप दोनों का क्या विचार है
सुमन मल्टी ......हम भी माँ जी से सहमत है
सूर्य ...... ठीक है फिर एक बार विक्रम से मिल कर उसे माफ कर दीजिये ताकि वो अपनी अगली सजा भोग सके
सूर्य तीनो को ले कर f.vikram के पास पंहुचा
जहा विक्रम तीनो के पैरो में गिर कर माफी मांगता है
तीनो के माफ करते हे f.vikram को उसका पूर्ण रूप मिल जाता है वही मल्टी सुमन .m.saas को उनका स्त्री रूप
सूर्य ....... इसकी मृत्यु योग कब का है
यमदूत 2 ........ हमें इसकी इजाजत नहीं है की किसी की मृत्यु का समय किसी आवर को बताये
सूर्य .......मल्टी जी आपकी सास का अंतिम समय आ चूका है आप को जी भी बात करनी है जल्दी कर लीजिये
सूर्य अपनी आँखे बंद कर किसी को याद करता है
कुछ देर बाद वह प्रेतराज आ पहुंचे
सूर्य .....परनाम पिता श्री
प्रेतराज ....... चिरंजीवी भाव पुत्र आज हमें याद करने की क्या आव्सय्कता ाँ पड़ी पुत्र सूर्य यमदूत आप यहाँ पे
यमदूत 1 ,2 ......परनामी प्रेतराज हम इन स्त्री के प्राण हरण करने आये है
सूर्य ......पिता श्री आप विक्रम के कर्मो से तो परिचित हो चुके होंगे अब आगे का दंड आप हे इसे देंगे
प्रेतराज ...... नहीं पुत्र अभी विक्रम की कुछ सांसे बची हुई है उन साँसों की सीमा ख़तम होने पे हे हमारा दंड चक्र आरम्भ होगा
सूर्य ......जैसा आप उचित समजे पिता श्री ये अब आपकी जिम्मेदारी है
ीदार मल्टी सुमन अपनी म. सास से लिपट कर रो रही थी
कुछ हे पालो में यमदूत m.saas के प्राण हर लेते है
सुमन आवर मल्टी उस निर्जीव सरीर से लिपट कर फुट फिट कर रोने लगती है
सूर्य ..... वयोम इनकी विक्रम आवर हमसे जुडी सभी यादें मिटा दो ताकि ये अपने आगे का जीवन सुकून से जी सके
वयोम ....जी भाई
प्रेतराज ....... पुत्र मैं चलता हूँ आवर विक्रम को उसके कर्मो का उचित दंड मिल जायेगा
दोनों यमदूत प्रेतराज को परनाम कर m.saas की आत्मा ले कर वह से लौट गए विक्रम को प्रेतराज ले कर चले गए अब यहाँ वयोम सूर्य मल्टी सुमन आवर m.saas का निर्जीव सरीर बचा था
सूर्य ..... आपके पति को खबर कर दीजिये उनकी माँ की मौत की
मल्टी ......आप कोण है
सूर्य ...... जी मैं सूर्य ठाकुर हूँ सूर्यगढ़ से यहाँ विक्रम से मिलने आया था ये मेरे बड़े भैया है वयोम
सुमन रोटी हुए अपने जीजा को कॉल करती है वयोम की सहायता से सूर्य m.saas के निर्जीव सरीर को मल्टी के रूम तक पहुँचता है जो फार्महाउस के पीछे बने हुए थे
सूर्य .....भैया आप इनके साथ रुकना जब तक इनके पति न आ जाये मैं चलता हूँ
वयोम .....ठीक है भाई
सूर्य वह से घर की तरफ निकल जाता है वयोम को समजा कर
सूर्यगढ़ .........
दोपहर के भोजन के वक़्त सूर्य के नाना जी का परिवार भी सूर्यगढ़ आया हुआ था
सिवाय जोरावर जी को छोड़ कर क्यों की वो किसी राजनीतिक काम से बहार थे वैसे भी वो ज्यादातर समय बहार हे रहते है
रानी पारी वापिस परीलोक जा चुकी थी रिद्धि आवर परिधि को यही छोड़ कर
सूर्य के जाने के बाद शालिनी जी ने मेर्री जी से सदी की बात करने की कोशिश पैर मेर्री जी ने साफ साफ कह दिया की वो अभी सदी नहीं करेगी
शालिनी जी ने भी मेर्री जी पे कोई दबाब नहीं डाला
ीदार दोपहर के काने के बाद सभी लड़किया सूर्य के रूम में शालिनी जी के बर्थडे पार्टी को ले कर डिसकस कर रही थी
निचे दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी संजय जी पाछो किसी आवर हे चर्चा में लगे हुआ थे वही बाकि महिलस्य रेखा जी शालिनी जी मेनका जी प्रिय जी सन्ति जी शालिनी जी के रूम चर्चा में लगी हुई थे
2,30 के करीब सूर्य घर लौट जब वो अपने रूम में पंहुचा तो पूरा रूम फूल था
सूर्य ...... क्या बात है आज इतने साडी खूबसूरत परिया हमारे रूम में कैसे
कोमल ........ कही इतने साडी खूबसूरत परिया देख आपका इमां तो नहीं दोल गया हेहेहे
सूर्य .......... क्या बात है कोमलांगी देवी आज कल आप कुछ ज्यादा हे मस्ती करने लगी है
कोमल ..... आप जो नहीं करते हो
सूर्य .....देख रही हो स्वीटी ये कोमल क्या जह रही है
किरण ....... आप जाने आवर कोमल दी जाने
सूर्य ........ वैसे क्या डिस्कशन चल रहा है जो इतनी गुप्त मीटिंग राखी जा रही है
किरण. ...... माँ की बर्थडे पार्टी का प्लान कर रहे है
सूर्य ...... चलो अच्छा है आप सब देख लोगी तो मुझे कोई टेंशन नहीं होगी
किरण ........ पैर माँ को पता न चले इस पार्टी का इसका ध्यान आपको रखना होगा कुंवर जी तो आप पार्टी से पहले उन्हें सहर ले जाना ताकि उनके पीछे से हम सब तयारी कर सके
सूर्य ....... Ok ये मैं कर लूंगा आवर सुबह के लिया सबको सॉरी मेरी वजह से आप सभी का मूड भी मैंने ख़राब कर दिया आप लोग बात कीजिये मैं किसी आवर रूम में आराम करता हूँ फिर साम को मैं माँ को ले कर सहर चला जाऊंगा
किरण ....... है ये ठीक रहेगा आप उन्हें वही से ब्यूटी पारलर से त्यार कर लाना
सूर्य .....वो सब तो हो जायेगा पैर कोई उन्हें पहले विश न कर दे नहीं तो पूरा प्लान ख़राब हो जायेगा
किरण ......don't वैरी कुंवर जी मैं पहले हे सभी को समजा दिया था कल हे आवर कल रात मैं बड़े पापा को भी बता दिया था वो साम को सीधा यही पे आएंगे
सूर्य ......ok मैं कुछ देर आराम करता हूँ मुझे 5 बजे उठा देना ok
पायल .....मुझे भी थकन हो रही है मैं भी चलती हम आप मेरे साथ चलिए
प्रीती ......मैं भी आती हूँ पायल दीदी मुझे भी रेस्ट करना है
राधा ....... पायल प्रीती तुम दोनों यही रुको आप जाओ इनके साथ रिद्धि दी परिधि हम तो फिर भी इनके साथ रहते है आप लोग जाइये आवर कुछ समय बिताइए
किरण के है कहने पे रिद्धि आवर परिधि दोनों छठ पे बने रूम में चल दी जो पहले स्टोररूम हुआ करता था पैर अब वो एक अच्छा खासा रूम था जिसमे किंग साइज बीएड a.c सोफा सभी सुविधा मौजूद थी
किरण ...... सॉरी पायल प्रीती दी पैर राधा ने जो किया वो सही किया हम तो इतना समय इनके साथ रहते है पैर उन दोनों को तो इतना समय भी नहीं मिलता अभी मिला है तो उन्हें साथ में बिताना चाइये
पायल ....... स्वीटी तुम सही कह रही हो आवर सॉरी मत बोलो जो किया सही किया
जैसे हे सूर्य अंदर पंहुचा दोनों को एक एक किश कर अपने साथ बीएड पे सुला लेता है
कोई कुछ नहीं बोलता बस ख़ामोशी से तीनो चिपके हुए थे
काफी देर बाद सूर्य ने हे इस ख़ामोशी को भांग किया
सूर्य ....... सॉरी सुबह जो मैंने किया उसके लिया आप दोनों इतनी दूर से हम सब से मिलने आई आवर मैंने जिस तरह ......
रिद्धि ....... आपको कुछ भी कहने की जरुरत नहीं जरूर को कारन रहा होगा हमें नहीं जानना बस आप सन्ति से लेते रहिये आवर कुछ मत बोलिये
सूर्य दोनों को अपने सीने पे लेटाया रिद्धि आवर परिधि के बदन से आती मिटटी मिटटी भीनी भीनी खुशबु से न जाने कब उसकी आँख लगी उसे भी पता नहीं चला
रिद्धि आवर परिधि दोनों बस एक तक सूर्य को देखती रही जब तक किसी ने दूर पे नॉक न किया
परिधि .....दीदी इनके उतने का समय हो गया है
रिद्धि ......है माँ के साथ इन्हें बहार भी तो जाना है न
रिद्धि जल्दी से सूर्य को किश कर रूम के दूर की आवर भद्दी सामने कोमल हे थे
कोमल .....दीदी उन्हें उठा दीजिये ताकि वो फ्रेश हो जाये
रिद्धि ....... Ok मैं उठा देती हूँ
किरण वही से लौट जाती परिधि सूर्य को उठा देती है
सूर्य .....पता हे नहीं चला कब उस मीठी मिथ सोंधी खुसबू सूंघते हुए आँख लग गई
परिधि ......उठिये मम्मी जी के साथ आपको सहर जाना है न
सूर्य .....ok पैर पहले अच्छे से मुँह मीठा तो कर लूँ
सूर्य परिधि को अपने निचे ले किश करने लगता है कुछ 3,4 मिंटू बाद सूर्य अलग हुआ आवर रिद्धि की तरफ बढ़ा रिद्धि को उठा वही बीएड पे लिटा उसे किश करता है अभी किश करते हुए हे मिनट्स हुए थी की जूलिया तीनो की कॉफ़ी ले कर आती है
रिद्धि परिधि अपनी कॉफ़ी ले निचे चल देती है
सूर्य जूलिया को गौड़ में उठा बाथरूम में गेस गया आवर शावर ों कर देता है
सूर्य ........ उम्मम्मम्हा क्या बात है आज मेरी जुली कुछ उदाश है बात क्या है
जुली ...... वो पिता श्री की याद आ रही है
सूर्य ...... ऐसे बात है तो हम उन्हें अभी बुला लेते है साथ में किंग क्वीन आवर देवसूफ़ी नियों जी को भी
जुली ....... क्या सच में ऐसा हो सकता है
सूर्य ........ तुम्हे जो चाइये वो मिलेगा जुली पैर ऐसे उदाश होना अच्छी बात नहीं है इस से बचे पे गलत प्रभाव पड़ता है मैं जनता हूँ तुम्हारे साथ में वक़्त नहीं बिता पता हूँ पैर क्या कृ मेरी भी मज़बूरी है
जुली ......उम्म्म्महा आप ऐसा कुछ भी न सोचिये बस मेरे लिया इतना हे बहुत है की आप मेरी नजरो के सामने हो
सूर्य जुली के सरीर से चिपकी हुई वो पतली t-shirts उतर देता निचे ब्लैक ब्रा में कैद उन घोष से भरे माध्यम आकर की उन्नत उभारो के ऊपर हिस्से पे अपने होंठ चिपका उस भीगे हुए उभर के ऊपर हिशे को चूमते हुए पीछे से ब्रा का हुक खोल जुली के सरीर से अलग कर देता है आवर एक निप्पल्स को मुँह में भर चूसने लगता है
जुली....... उम्म्म्मममहहह पता नहीं कब से मैं यही चाहती थी पैर कहने की हिमायत नहीं ओह्ह्ह्हह्ह आराम से काटिये मत न
सूर्य एक हाथ से जुली की इलास्टिक वाली लेगी नीची किसका कर एक पल अलग हो अपना शार्ट आवर t-shirts उतर कर खुद भी निर्वस्त्र हो गया आवर जुली को भी कर दिया

जुली सूर्य के लिंग को पकड़ अपनी योनि कुंड पे अपने दोनों जांघो के बिच रख सूर्य की किश करने लगती है
सूर्य को अपने सीने पे जुली के आकड़े हुए निप्पल्स के साथ साथ उस कोमल मात्र के गोले का भी अहसास हो रहा था जो सूर्य के सीने से लगने से जैसे गोल से सपाट हो चूका हो
डेरी डेरी जुली अपनी कमर को आगे पीछे कर उस मोठे तगड़े लिंग पे अपनी योनि हो रही रगड़ का मज़ा लेने लगती है
रह रह कर जब सूर्य का फुला हुआ सूपड़ा जुली की योनि लिप्स को फैलाया हुआ योनि द्वार को रगड़ते हुए निकलता तो जुली के मुँह से मादक सिसकारियां निकल जाती

कुछ देर बाद जुली खुद से निचे बेथ सूर्य के लिंग को चूसने लगती है
जिसपे हल्का हल्का योनि राश भी लगा हुआ था
जिसे जुलु बड़े मज़े से साफ कर लिंग को चूसने लगती है

सूर्य ...... जुली मैं ऐसे संत नहीं हो सकता अभी केवल तुम्हे संत करना है
जुली .....क्या मतलब मैं कुछ सामजी नहीं
सूर्य .......मैं पूर्ण सेक्स के बिना संत नहीं हो सकता आवर पुराण सेक्स अभी कर नहीं सकता जब तक सदी नहीं हो जाती इस लिया यहाँ म्हणत करना बेकार है
सूर्य जुली को पलट कर पीछे से उसकी जंगो के बिच फिर से अपना लिंग गुस्सा कर जुली को योनि पे तेजी से लिंग गुस्ते हुए हलकी तेजी से अपने कमर आगे पीछे करने लगता है साथ हे जुली की चूचियों को मसलने लगता है

हर देखे के साथ जुली की योनि के होंटो को खोल जब वो मोटा गरम सूपड़ा आगे निकलता तो जुली को की योनि में में मस्ती से जलपान होने लगता आवर जब वही सूफड़ा गुदा द्वार को रगड़ते तो खुद बा खुद जुली की जंगे आपस में आवर आदिक चिपक जाती
कुछ देर बाद जुली कपड़े हुए अपने दूसरे चरमसुख को प्राप्त कर जाती है

सूर्य का लिंग अभी भी वैसे हे जल रहा था
जुली ......अब इसको कैसे संत करोगे आप
सूर्य .....जरुरत नहीं है खुद संत हो जायेगा ये
अब जल्दी से नाहा लोट फिर चलते है निचे
सूर्य आवर जुली दोनों कहा कर निचे चक देते है
क्युकी सूर्य को शालिनी जी को ले कर सहर जाना था ताकि पीछे से सभी खुल कर पार्टी की त्यार कर शालिनी जी को सरप्राइज कर सके
जुली के चेहरे की रौनक देख किरण माजरा समाज जाती है
किरण .......... चलिए मेरे साथ रूम में चलिए कुंवर जी
सूर्य. ......... उसकी जरुरत नहीं है स्वीटी अभी माँ के साथ बहार जा रहा हूँ बस माँ आ जाये तब तक कॉफ़ी पीला दो बढ़िया सी
किरण है बोल कर कॉफ़ी बनाने चल देती है कुछ हे देर में शालिनी जी भी आ जाती है सूर्य कॉफ़ी फिनिश कर अपनी कार से शालिनी जी को ले कर सहर की तरफ निकल गया
पिछसे लड़किया पूरी हवेली को सजाने में लग गई
तयारी करते करते कब सूर्यास्त होने लगा पता भी नहीं चला
अब सभी लड़किया भी त्यार होने लग गयी थी बहार लोने में सकती की देख रेखाओं में बाकि तयारिया भी पूरी हो चुकी थी दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी संजय महेंद्र जी बहार लोने में हे बे थे गैप सैप करने में लगे हुए थे कुछ हे देर बाद शिव आवर जोरावर जी भी हवेली पहुंच जाते लड़किया आवर बाकि परिवार की महिलाये भी लगभग सभी त्यार हो चुकी थी
करीब 8 बजे के गीता ठाकुर रुक्मणि जी गायत्री विधि में हवेली में पधार चुकी थी
चारो ने सूर्य द्वारा की गयी शॉपिंग ड्रेस आवर सरिया पहनी हुई थी जो की चारो पे बहुत खूबसूरत लग रही थी
तभी वह रानी पारी गुरुदेव की साथ जिनिशा जीनत j.king जुली के पिता जी नियों किंग एंड क्वीन भी आ पहुंचे
अब बस सूर्य आवर शालिनी जी का हे इन्तजार था जो सहर से कभी भी लौट सकते थे सब उनका हे इन्तजार कर रहे थे .............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .....................










































