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- Dec 5, 2013
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राधा आगे बाद कर सपना के सरीर में समां गई इस दौरान सपना के साथ में किरण ने बे हाथ पकड़ा हुवा था जिस कर दोनों माँ बेटी को जटके लगे
जब राधा की सकती सपना में समाहित हो रहे थी थे कुछ अंश किरण के सरीर में बे समाहित हो गयी...........
अब आगे ......
नाना ji......gurudev सपना बेटी आवर राधा बेटी का कन्यादान में करना चाहता हु
गुरुदेव .....तुम जानते हो न पुत्र तुमने ऐसा किया तो क्या होगा
सपना ....बाबा हे गुरुदेव क्या कह रहे है हमें बे कुछ बताओ न आप
gurudev...beti सपना आपके बाबा आपका कन्यादान कर्मा चाहते है
sapna...to इसमें गलत क्या है मेल बे यही चाउंगी की बाबा हे मेरा एक पिता में रूप में कन्यादान करे
गुरुदेव ...किन्तु पुत्री..
बिच में हे गुरुदेव को रोक देते है
baba...gurudev मेल अपने एक पुत्री का विवाह नै कर पाया अबे दूसरी पुत्री में विवाह का शोभाग्य मुजगे इस्वर कारण से मिला है मेरी इच्छा का मन रखिये
गुरुदेव ....ठीक है पुत्र जैसे इस्वर की इच्छा
गुरुदेव आवर बाबा ने मिल कर सब तयारी कर ली मंदिर में
तबे मंदिर के बहार से किसी की आवाज गुरुदेव को सुनाई दी
गुरुदेव बहार चले गए कुछ समय बाद दूल्हे आवर दुल्हन की सदी का जोड़ा ले कर अंदर आये
गुरुदेव ...सूर्य आवर सपना आप दोनों ये वस्त्र दर्जन कर के विवाह वेदी पे आ जाओ


सूर्य आवर सपना जल्दी हे दूल्हे दुल्हन के रूप में आ कर विवाह वेदी पे बेथ गए
गुरुदेव ने मंत्रो उच्चारण से दोनों का विवाह पुराण करवाया
नाना जी ...ने सपना का कन्यादान किया उनकी आँखों में आंसू थे किन्तु होंटो पे सब कुछ प् लेने वाली मुस्कान
दोनों ने आगे बाद कर सबसे आशीर्वाद लिया
नाना जी गुरुदेव ....कल्याणम अस्तु सौभाग्य आती भाव
चिरयौवन प्राप्त हो तुम सूर्य पुत्र आवर तुम जिसे सवच्छ मन से चाहो उसको बे चिरयौवन प्राप्त हो
गुरुदेव ....पुत्री अब हम दोनों के जाने का समय हो गया है
नाना जी ...है सपना बेटी मेरी जीवन कल का उद्देश्य पूरा हुवा अब मेरा देह त्याग करने का समय आ गया है
सूर्य ....ये आप क्या कह रहे हो नाना जी
नाना जी ....है पुत्र मेरी अंतिम इच्छा यही थी की मई अपनी पुत्री का कन्यादान कृ
तुम्हारा कन्यादान कर के मुझे मोक्ष की प्राप्ति हुए
सपना रोटी हुए आप मुझे छोड़ कर नै जा सकते बाबा हमारा आपके बिना है हे कोण
नाना जी ....तुम ऐसा क्यों सोचती हो पुत्री मेरा सिर्फ सरीर नस्ट हो रहा है आत्मा नै आवर वैसे बे तुम मुझे जब बे दिल से याद करोगी मई आत्मा रूप में तुम्हारे सामने आ जाऊंगा
सूर्य ....सपना गुरुदेव उचित कह रहे है
जिनका जीवन कल समाप्त हो जाता है उनको इस्वर में विलीन होना हे पड़ता है
गुरुदेव ....उचित खा पुत्र तुमने अब हम दोनों चलते है
समय आने पे फिर मुलाकात होगी
आवर बहार तुम्हे अपनी छोटी बहन मिलेगी सपना बेटी उस से बे मिल लेना
सपना सूर्य आवर किरण ने दोनों बाबाओ को परनाम किया
दोनों हवा में गायब हो गयी
तीनो ने मंदिर में स्थापित प्रतिमा को परनाम किया आवर बहार लौट आये
बहार आते हे उनको एक झटका लगा
बहार एक बहुत हे खूबसूरत लड़की
सूर्य को देखते हे घुटनो पे झुक गई

लड़की ....मेरे बादशाह को उनकी गुलाम
जिनलोक की राजकुमारी ...जिनिशा का परनाम स्वीकार हो
सपना ....क्या खा तुमने बादशाह
यहाँ पे कोण बादशाह है आपका
( सूर्य ने उसको पहचान लिया था की ये जिनलोक की राजकुमारी जिनिशा है
जिनलोक की पावर मिलते हे पता चल गया था जिनलोक के बारे में)/
सूर्य पास खड़ा मुस्कुरा रहा था
जिंशा ....है दीदी जो आपके साथ खड़े है ये है बादशाह जिनलोक के आवर मेरे होने वाले स्वामी
किरण ....क्या भाई अबे अबे एक भाबी मिली है आपको अबे एक आवर आने वाली है
सपना ....क्या खा तुमने मुझे भाबी
पागल लड़की मई माँ हु तुम्हारी
किरण ....आप भूल रहे हो मेरी माँ के साथ में मेरी भाबी बे बन गयी है आप
अब आप मुझे नै दन्त सकती है समझी आप
सूर्य ...ः हाहाहा सच खा छोटी तुमने अब सपना तुमने नै डाँटेगी अपनी भाबी को ऐसे हे तंग करना
सपना ...क्या तुमने सूर्य
सूर्य ....क्या बोलै आपने फिर से बोलना जरा
जिनिशा ....हहै हेहेहे दीदी अब वो आपके सरताज है उन्हें ऐसा न बुलाओ
किरण ....भाबी भइया को नाम से जुलती है ओह्ह्ह्हह्ह हो भाई भाबी से बच कर रहना
सपना ....रुक तू अबे बिताती हु तुझे तो मई
किरण जल्दी से सूर्य के पीछे चुप गई
किरण ...आप भूल रहे है माँ मई आपकी ननद बे हु अबसे वो बे एकलौती
सूर्य ...खो जिनिशा कैसे आना हुवा तुम्हारा यहाँ पे
जिनिशा .....आपको आवर दीदी को विवाह की सुभकामना देने आयी थे मई तो
आवर आपका सुक्रिया बे ऐडा करना था
सूर्य ...सुक्रिया किस लिया जिनिशा
jinisha....aapne मुझे उस शैतान जादूगर की कैद से आजाद जो करवाया है
अपने होने वाले सरताज को देखना था मुझे
सूर्य ....सुक्रिया की कोई बात नै आवर वो बे अपनी होने वाली बीबी के मुँह से अच्छा नै लगता है
सपना ...क्या ये बे आपकी बीबी बनेगी
जिनिशा ...है दीदी किन्तु आपकी मर्ज़ी के बिना तो बिलकुल बे मई सरताज से विवाह नै करुँगी
आवर एक बात दीदी इनका काफी लड़कियों से विवाह होगा आपको सबको स्वीकार करना होगा
राधा दीदी ने जो सराफ दिया है उस वजह से आपका विवाह इनके साथ नियति ने झोड़ दिया नै तो इनके 4 विवाह हे होने थे
किरण ....क्या मेरी चार भाबी होती अगर राधा भूसा ने ऐसा नहीं किया होता तो
वैसे होने वाली भाई अब कितने भाबी होंगी मेरी आपको मिला कर के
जिनिशा ...तुम्हे मिला कर के 8 '10 तो हो हे जाएगी मेरी सहजादी हहहहए
kiran...kya मई भाई की बीबी बानगी
यहूऊओ अब आएगा मज़ा
अब देखना भाबी ( सपना ) भैया आपके अकेले के नै है
sapna.surya...ye तुम क्या बोल रहे हो जिनिशा
राधा इन वौइस् चेंज ट्रू सपना
s.radha....surya जिनिशा सच बोल रहे है मेरे दिए हुए सराफ के कारन तुम हमारे वंश से जुडी हुए जिनगी बे लड़की या सदी सुधा महिलाये है उन सब से सम्बन्ध बुनना होगा
तो क्या तुम छोटी के साथ बिना सदी किया सम्बन्ध बिना कर किसी आवर से विवाह करवा डोज क्या छोटी का
jinisha....sartaj ये एक अटल सत्य है जो आपकी इच्छा हो या न हो आपको स्वीकार करना हे होगा
एक छोटा सा बॉक्स खोल कर सूर्य के सामने करते हुए
जिनिशा ...सरताज आज आपकी मिलान की रात है
जिनलोक के होने वाले राजा को समस्त जिनलोक के वासियो की आवर से ये उपहार है स्किनर करे इसको
sapna.surya....jinisha ये क्या है
जिनिशा ...वैसे तो ये आपकी हे है किन्तु आपको ये तब प्राप्त होती जब आप जिनलोक के सिंघासन पे विराजते
किन्तु मेरी इच्छा आपको आपके पथम विवाह के उपहार में देना था
ये है आकर्षण कुंजी
ये आपके आकर्षण को बढ़ाएगी आवर आपको लम्बी उम्र पर्दैन करेगी
हम जिनियो के लिया ये किसी अमृत से काम नै
इसको ग्रहण कर आप दीदी से मिलान करोगे तो उनमे बे मुज जैसे किन्तु थोड़ी काम सकतिया आवर आकर्षण प्राप्त होगा वो बे आपकी आयु से झुंड जाएगी
किरण ...भाई ये आपको ले लेनी छाए वर्ण आप इतनी बीबियो को नै संभल पाओगे
क्यों भाबी जी हेहेहे
सूर्य ..ठीक है जिनिशा हम आकर्षण कुंजी को स्किनर करते है
जिनिशा ....ऐसे नै सरताज आपको पुरे मन से दिल से इस उपहार आवर हमें अपनी बीबी के रूप में स्वीकार करना होगा विवाह हम सपना दीदी की स्वीकृति मिलने पे हे करेंगे
सूर्य अपना की आवर देखता है सपना ने हां में इसरा किया
सूर्य ....मई सूर्य ठाकुर .पुत्र श्री शिव ठाकुर जिनलोक का होने वाला बादशाह जिनिशा को पुरे दिल से अपनी पैंटी के रूप में चुनता हु साथ में जिनलोक के होने वाले बादशाह के अदिकार से आकर्षण कुंजी को पुरे मन से दर्जन करता हु
सूर्य के इतना बोलते हे जोरो से बिजली लड़की आँधिया चलने लगी
उस बॉक्स से निकल कर वो हिली रौशनी सूर्य में समां गई
तबे आसमान से कुछ रंग बिरंगी रौशनी सूर्य से टकराई


कुछ कुछ ऐसा हो रहा था
जिनिशा के सरीर से निकल कर सूर्य के सरीर में समां गई
कुछ पल बाद सब कुछ पहले जैसा हो गया था
सूर्य को अपने अंदर बहुत अच्छा फेल हो रहा था एक एनर्जी जो सूर्य के नस नस में बाह रहे हो ऐसा महसूस हो रहा था
सूर्य ...ने आँखे खोली तो दूर दूर तक जहा उसकी नज़र जा रहे थी वह तक उसको अपने सामने जिन आवर जिनि हे नज़र आ रहे थे सब घुटनो के बल थे
इस वक़्त सूर्य का पूरा रूप बदल चूका था पहले तो वो बहुत क्यूट हुवा करता था अब क्यूट के साथ हॉट एंड सेक्सी माचो में लग रहा था

सूर्य ने सबको खड़ा होने को खा
सूर्य ....जिनलोक के वासियो आप सब मेरे विवाह के उपलक्ष्य पे यहाँ पादरी उसके लिया आपका बहुत बहुत धन्यवाद
जिन ...बादशाह आप हमें धन्यवाद् न दे हम आपके गुलाम है आवर आप हमारे बादशाह
surya....tum सब मेरा परिवार हो न की गुलाम मुझे अपना दोस्त संजो
jin....badshaah सदा सलामत रहे बादशाह की उम्र लम्बी हो ऐसे हे बोलते हुए निकल गए
सूर्य ....सपना अब हम यहाँ नै रहा सकते है हमें सहर में रहना होगा
छोटी को स्कूल में डालना है राधा आपका आवर बाबा का बदला लेना है अब
सपना ...परतु हमारा घर ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स
शेयर योर सुग्गेस्टियन्स
कीप सपोर्ट माय स्टोरी
राधा आगे बाद कर सपना के सरीर में समां गई इस दौरान सपना के साथ में किरण ने बे हाथ पकड़ा हुवा था जिस कर दोनों माँ बेटी को जटके लगे
जब राधा की सकती सपना में समाहित हो रहे थी थे कुछ अंश किरण के सरीर में बे समाहित हो गयी...........
अब आगे ......
नाना ji......gurudev सपना बेटी आवर राधा बेटी का कन्यादान में करना चाहता हु
गुरुदेव .....तुम जानते हो न पुत्र तुमने ऐसा किया तो क्या होगा
सपना ....बाबा हे गुरुदेव क्या कह रहे है हमें बे कुछ बताओ न आप
gurudev...beti सपना आपके बाबा आपका कन्यादान कर्मा चाहते है
sapna...to इसमें गलत क्या है मेल बे यही चाउंगी की बाबा हे मेरा एक पिता में रूप में कन्यादान करे
गुरुदेव ...किन्तु पुत्री..
बिच में हे गुरुदेव को रोक देते है
baba...gurudev मेल अपने एक पुत्री का विवाह नै कर पाया अबे दूसरी पुत्री में विवाह का शोभाग्य मुजगे इस्वर कारण से मिला है मेरी इच्छा का मन रखिये
गुरुदेव ....ठीक है पुत्र जैसे इस्वर की इच्छा
गुरुदेव आवर बाबा ने मिल कर सब तयारी कर ली मंदिर में
तबे मंदिर के बहार से किसी की आवाज गुरुदेव को सुनाई दी
गुरुदेव बहार चले गए कुछ समय बाद दूल्हे आवर दुल्हन की सदी का जोड़ा ले कर अंदर आये
गुरुदेव ...सूर्य आवर सपना आप दोनों ये वस्त्र दर्जन कर के विवाह वेदी पे आ जाओ


सूर्य आवर सपना जल्दी हे दूल्हे दुल्हन के रूप में आ कर विवाह वेदी पे बेथ गए
गुरुदेव ने मंत्रो उच्चारण से दोनों का विवाह पुराण करवाया
नाना जी ...ने सपना का कन्यादान किया उनकी आँखों में आंसू थे किन्तु होंटो पे सब कुछ प् लेने वाली मुस्कान
दोनों ने आगे बाद कर सबसे आशीर्वाद लिया
नाना जी गुरुदेव ....कल्याणम अस्तु सौभाग्य आती भाव
चिरयौवन प्राप्त हो तुम सूर्य पुत्र आवर तुम जिसे सवच्छ मन से चाहो उसको बे चिरयौवन प्राप्त हो
गुरुदेव ....पुत्री अब हम दोनों के जाने का समय हो गया है
नाना जी ...है सपना बेटी मेरी जीवन कल का उद्देश्य पूरा हुवा अब मेरा देह त्याग करने का समय आ गया है
सूर्य ....ये आप क्या कह रहे हो नाना जी
नाना जी ....है पुत्र मेरी अंतिम इच्छा यही थी की मई अपनी पुत्री का कन्यादान कृ
तुम्हारा कन्यादान कर के मुझे मोक्ष की प्राप्ति हुए
सपना रोटी हुए आप मुझे छोड़ कर नै जा सकते बाबा हमारा आपके बिना है हे कोण
नाना जी ....तुम ऐसा क्यों सोचती हो पुत्री मेरा सिर्फ सरीर नस्ट हो रहा है आत्मा नै आवर वैसे बे तुम मुझे जब बे दिल से याद करोगी मई आत्मा रूप में तुम्हारे सामने आ जाऊंगा
सूर्य ....सपना गुरुदेव उचित कह रहे है
जिनका जीवन कल समाप्त हो जाता है उनको इस्वर में विलीन होना हे पड़ता है
गुरुदेव ....उचित खा पुत्र तुमने अब हम दोनों चलते है
समय आने पे फिर मुलाकात होगी
आवर बहार तुम्हे अपनी छोटी बहन मिलेगी सपना बेटी उस से बे मिल लेना
सपना सूर्य आवर किरण ने दोनों बाबाओ को परनाम किया
दोनों हवा में गायब हो गयी
तीनो ने मंदिर में स्थापित प्रतिमा को परनाम किया आवर बहार लौट आये
बहार आते हे उनको एक झटका लगा
बहार एक बहुत हे खूबसूरत लड़की
सूर्य को देखते हे घुटनो पे झुक गई

लड़की ....मेरे बादशाह को उनकी गुलाम
जिनलोक की राजकुमारी ...जिनिशा का परनाम स्वीकार हो
सपना ....क्या खा तुमने बादशाह
यहाँ पे कोण बादशाह है आपका
( सूर्य ने उसको पहचान लिया था की ये जिनलोक की राजकुमारी जिनिशा है
जिनलोक की पावर मिलते हे पता चल गया था जिनलोक के बारे में)/
सूर्य पास खड़ा मुस्कुरा रहा था
जिंशा ....है दीदी जो आपके साथ खड़े है ये है बादशाह जिनलोक के आवर मेरे होने वाले स्वामी
किरण ....क्या भाई अबे अबे एक भाबी मिली है आपको अबे एक आवर आने वाली है
सपना ....क्या खा तुमने मुझे भाबी
पागल लड़की मई माँ हु तुम्हारी
किरण ....आप भूल रहे हो मेरी माँ के साथ में मेरी भाबी बे बन गयी है आप
अब आप मुझे नै दन्त सकती है समझी आप
सूर्य ...ः हाहाहा सच खा छोटी तुमने अब सपना तुमने नै डाँटेगी अपनी भाबी को ऐसे हे तंग करना
सपना ...क्या तुमने सूर्य
सूर्य ....क्या बोलै आपने फिर से बोलना जरा
जिनिशा ....हहै हेहेहे दीदी अब वो आपके सरताज है उन्हें ऐसा न बुलाओ
किरण ....भाबी भइया को नाम से जुलती है ओह्ह्ह्हह्ह हो भाई भाबी से बच कर रहना
सपना ....रुक तू अबे बिताती हु तुझे तो मई
किरण जल्दी से सूर्य के पीछे चुप गई
किरण ...आप भूल रहे है माँ मई आपकी ननद बे हु अबसे वो बे एकलौती
सूर्य ...खो जिनिशा कैसे आना हुवा तुम्हारा यहाँ पे
जिनिशा .....आपको आवर दीदी को विवाह की सुभकामना देने आयी थे मई तो
आवर आपका सुक्रिया बे ऐडा करना था
सूर्य ...सुक्रिया किस लिया जिनिशा
jinisha....aapne मुझे उस शैतान जादूगर की कैद से आजाद जो करवाया है
अपने होने वाले सरताज को देखना था मुझे
सूर्य ....सुक्रिया की कोई बात नै आवर वो बे अपनी होने वाली बीबी के मुँह से अच्छा नै लगता है
सपना ...क्या ये बे आपकी बीबी बनेगी
जिनिशा ...है दीदी किन्तु आपकी मर्ज़ी के बिना तो बिलकुल बे मई सरताज से विवाह नै करुँगी
आवर एक बात दीदी इनका काफी लड़कियों से विवाह होगा आपको सबको स्वीकार करना होगा
राधा दीदी ने जो सराफ दिया है उस वजह से आपका विवाह इनके साथ नियति ने झोड़ दिया नै तो इनके 4 विवाह हे होने थे
किरण ....क्या मेरी चार भाबी होती अगर राधा भूसा ने ऐसा नहीं किया होता तो
वैसे होने वाली भाई अब कितने भाबी होंगी मेरी आपको मिला कर के
जिनिशा ...तुम्हे मिला कर के 8 '10 तो हो हे जाएगी मेरी सहजादी हहहहए
kiran...kya मई भाई की बीबी बानगी
यहूऊओ अब आएगा मज़ा
अब देखना भाबी ( सपना ) भैया आपके अकेले के नै है
sapna.surya...ye तुम क्या बोल रहे हो जिनिशा
राधा इन वौइस् चेंज ट्रू सपना
s.radha....surya जिनिशा सच बोल रहे है मेरे दिए हुए सराफ के कारन तुम हमारे वंश से जुडी हुए जिनगी बे लड़की या सदी सुधा महिलाये है उन सब से सम्बन्ध बुनना होगा
तो क्या तुम छोटी के साथ बिना सदी किया सम्बन्ध बिना कर किसी आवर से विवाह करवा डोज क्या छोटी का
jinisha....sartaj ये एक अटल सत्य है जो आपकी इच्छा हो या न हो आपको स्वीकार करना हे होगा
एक छोटा सा बॉक्स खोल कर सूर्य के सामने करते हुए
जिनिशा ...सरताज आज आपकी मिलान की रात है
जिनलोक के होने वाले राजा को समस्त जिनलोक के वासियो की आवर से ये उपहार है स्किनर करे इसको
sapna.surya....jinisha ये क्या है
जिनिशा ...वैसे तो ये आपकी हे है किन्तु आपको ये तब प्राप्त होती जब आप जिनलोक के सिंघासन पे विराजते
किन्तु मेरी इच्छा आपको आपके पथम विवाह के उपहार में देना था
ये है आकर्षण कुंजी
ये आपके आकर्षण को बढ़ाएगी आवर आपको लम्बी उम्र पर्दैन करेगी
हम जिनियो के लिया ये किसी अमृत से काम नै
इसको ग्रहण कर आप दीदी से मिलान करोगे तो उनमे बे मुज जैसे किन्तु थोड़ी काम सकतिया आवर आकर्षण प्राप्त होगा वो बे आपकी आयु से झुंड जाएगी
किरण ...भाई ये आपको ले लेनी छाए वर्ण आप इतनी बीबियो को नै संभल पाओगे
क्यों भाबी जी हेहेहे
सूर्य ..ठीक है जिनिशा हम आकर्षण कुंजी को स्किनर करते है
जिनिशा ....ऐसे नै सरताज आपको पुरे मन से दिल से इस उपहार आवर हमें अपनी बीबी के रूप में स्वीकार करना होगा विवाह हम सपना दीदी की स्वीकृति मिलने पे हे करेंगे
सूर्य अपना की आवर देखता है सपना ने हां में इसरा किया
सूर्य ....मई सूर्य ठाकुर .पुत्र श्री शिव ठाकुर जिनलोक का होने वाला बादशाह जिनिशा को पुरे दिल से अपनी पैंटी के रूप में चुनता हु साथ में जिनलोक के होने वाले बादशाह के अदिकार से आकर्षण कुंजी को पुरे मन से दर्जन करता हु
सूर्य के इतना बोलते हे जोरो से बिजली लड़की आँधिया चलने लगी
उस बॉक्स से निकल कर वो हिली रौशनी सूर्य में समां गई
तबे आसमान से कुछ रंग बिरंगी रौशनी सूर्य से टकराई


कुछ कुछ ऐसा हो रहा था
जिनिशा के सरीर से निकल कर सूर्य के सरीर में समां गई
कुछ पल बाद सब कुछ पहले जैसा हो गया था
सूर्य को अपने अंदर बहुत अच्छा फेल हो रहा था एक एनर्जी जो सूर्य के नस नस में बाह रहे हो ऐसा महसूस हो रहा था
सूर्य ...ने आँखे खोली तो दूर दूर तक जहा उसकी नज़र जा रहे थी वह तक उसको अपने सामने जिन आवर जिनि हे नज़र आ रहे थे सब घुटनो के बल थे
इस वक़्त सूर्य का पूरा रूप बदल चूका था पहले तो वो बहुत क्यूट हुवा करता था अब क्यूट के साथ हॉट एंड सेक्सी माचो में लग रहा था

सूर्य ने सबको खड़ा होने को खा
सूर्य ....जिनलोक के वासियो आप सब मेरे विवाह के उपलक्ष्य पे यहाँ पादरी उसके लिया आपका बहुत बहुत धन्यवाद
जिन ...बादशाह आप हमें धन्यवाद् न दे हम आपके गुलाम है आवर आप हमारे बादशाह
surya....tum सब मेरा परिवार हो न की गुलाम मुझे अपना दोस्त संजो
jin....badshaah सदा सलामत रहे बादशाह की उम्र लम्बी हो ऐसे हे बोलते हुए निकल गए
सूर्य ....सपना अब हम यहाँ नै रहा सकते है हमें सहर में रहना होगा
छोटी को स्कूल में डालना है राधा आपका आवर बाबा का बदला लेना है अब
सपना ...परतु हमारा घर ........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स
शेयर योर सुग्गेस्टियन्स
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