Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 15 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 115

कोमल .........अपनी राधा से पूछो वही हटाएगी मैं जा रही हूँ शालिनी मम्मी के साथ जाना है आपको सूरजगढ़ तो त्यार हो कर निचे आओ

कोमल तो वह से निकल गई

सूर्य .....ये दी क्या बोल रही थी

राधा .....सही तो बोल रही थी तुम्हारा हाथ मेरे टॉप में मेरे सीने पे था उसने सं देख लिया ऊपर से रूम भी खुला था वो तो अच्छा है कोई आवर नहीं आया

सूर्य .........ओह सहित ये क्या कर दिया अब दी का सामना कैसे करुगा मैं

राधा ......तब तो बड़े मज़े ले रहे थे नींद में अब करो भरपाई ........

अब आगे .......

असुरलोक ......

कंटकासुर अभी अपनी पत्नी के साथ सेक्स कर रहा था बड़े हे दुहदार तरीके से जिसमे उसकी पत्नी पूरा सहयोग कर रही थी

वातापी ......आआअह्ह्ह्ह स्वामी आवर जोर से अह्ह्ह बर्षो बाद आपके संग सम्भोग सुख प्राप्त कर हम तृप्त हो जाना चाहते है स्वामी

कंटकासुर बड़ी बेहरहमी से वातापी को घोड़ी बनाये पीसतिओं के भाटी वातापी की छूट की धजिया ुधा रहा था





नगीना ......देखो विशुद्धि वातापी आवर ब्रता कंटकासुर सम्भोग किर्या का आनंद ले रहे है

विशुद्धि ......हम कर हे क्या सकते है नगीना हम जब भी किसी के समीप जाते है सामने से असुर भाग जाते है

नगीना .......लगता है जब तक पिता श्री आज़ाद नहीं होते हमारा विवाह भी संभव नहीं है

नगीना .......यहाँ बरताओ को सम्भोग करते देख सरीर में तीव्रता से सम्भोग की इच्छा होती है

कंटकासुर वातापी के छूट से अपना लम्बा तगड़ा लैंड निकल कर लेट जाता है

कंटकासुर का भयंकर लैंड देख विसुद्धि आवर नगीना अपनी छूट को सहलाये बिना न रुक सकीय

( वातापी .....तो दोनों चुड़ैल यही पे चुप कर देख रही है अब आएगा मज़ा तुम दोनों को बहुत मज़ा आता है न मेरे स्वामी की बुराई कर उनका मखुल (मजाक ) ुधा कर आज तुम दोनों की छूट की खुजली न बढ़ा दी तो वातापी मेरा नाम नहीं एक दिन मेरे सामने तुम दोनों अपने इस भाई से सम्भोग करोगी )

कंटकासुर .....कहा खोये हो वातापी हम प्रतीक्षा कर रहे है

वातापी आगे भाड़ कंटकासुर के विशाल लिंग पे अपनी खुली हुए छूट तीखा कर बेथ जाती है सरदारस्य हुआ पूरा लैंड 2 हे जातको में वातापी अपनी छूट में निगल लेती है

( नगीना ....कस यहाँ वातापी के स्थान पे ब्रता कंटकासुर मुझे भोग रहे होते उम्म्म्महहह कितना आनंदमयी होगा वो पल जब ब्रता कंटकासुर का विशाल लिंग मेरा को मर्या भांग कर मुझे सवर्गीय सम्भोग आनद प्रदान करेंगे )





वातापी ......सवामी आप क्रोधित न हो तो आपसे हम कुछ पूछे

कंटकासुरी अपने लिंग को वातापी की योनिकुंड में अंदर बहार करते हुए वातापी की बड़ी बड़ी चुचुईयो को मसलते हुए

कंटकासुर ......हम आप पे कभी क्रोधित नहीं होते वातापी पूछो क्या पूछना है आपको

वातापी .....आप सम्भोग किये बिना रह नहीं सकते है फिर आप इतने लम्बे समय परतविलोक पे कैसे रहे

कंटकासुर .....हम वह भी अपनी इच्छा अनुसार सम्भोग करते है वह महिलाओ की आवर कन्याओ की कोई कमी नहीं है जब हमारी इच्छा हो हम सम्भोग करते है

वातापी .........आपको नगीना आवर विसुद्धि को देख सम्भोग करने की इच्छा होती है क्या

कंटकासुर .....ये कैसा वायरत अनर्गल वार्तालाप कर रही हो वो बहने है हमारी

वातापी ....हम्म्म समाज गई स्वामी

कंटकासुर ....क्या समाज गई तुम

वातापी .....यही की आप अपनी दोनों वाहनों को भी भोगना चाहते है

( वातापी आवर कंटकासुर के बाते दोनों बहने बड़े हे ध्यान से सुन रही थी )

कंटकासुर ......ऐसे मूर्खतापूर्ण बाते न करो हमें कब कहा

वातापी अपने लम्बे नाखुनो से कंटकासुर की गांड को कुरेदने लगती है जिस से कंटकासुर आवर तीव्रता से वातापी को चिढ़ने लगता है

वातापी .....अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसे हे स्वामी अपनी परचंड लिंग से हमारी योनि में प्रहार कीजिये

इस वक़्त हम नहीं हमारे स्थान पे आपकी बहन नगीना से आप सम्भोग कर रहे है उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह

वातापी की बात सुन कंटकासुर बड़ी बेहरहमी से वातापी की छूट मरते हुए उसके बड़ी बड़ी चूचियों को काटने लगता है जिनसे हल्का हलके रकत भी कंटकासुर के मुँह में जाने लगता है

कंटकासुर .......अह्ह्ह्हह नगीना मेरी बहन जब से तुम्हारी जवानी की खुसबू ले है मैं तुम्हे भोगना चाहता हूँ

नगीना( वातापी ) .......आवर जोरो से काटिये अपनी नगीना के वक्षो को ब्रता कंटकासुर हम भी आपको भोगने को तड़प रहे है भारत श्री

कंटकासुर अपनी पत्नी के स्थान पे अपनी बहन नगीना को देख रहा था

1 गुंथे से ऊपर कंटकासुर से पूरी जान लगा कर वातापी को नगीना समाज कर इस कदर छोड़ा की वातापी की फटी हुई छूट से खून बहने लगा जैसे

वहीँ नगीना आवर विसुद्धि कंटकासुर आवर वातापी की सम्भोग आवर अपनी पार्टी अपने भाई का पागलपन देख न जाने कितनी बार बिना छूट को चूहे हे पानी बहती रही जब कंटकासुर का सम्भोग शास्त्रार्थ ख़तम हुआ तो दोना वह से अपने कक्ष में लौट गई

कंटकासुर .......हमें माफ कर दे वातापी हमने आपकी योनि ( छूट ) आवर वक्षो ( चूचियों ) को जख्मी कर दिया

वातापी ......आप चिंतित न हो स्वामी हम अभी खुद को ठीक कर लेंगे

वातापी अपनी माया का प्रयोग कर कंटकासुर के सामने भरम पैदा करती है जिस से कंटकासुर को लगता है की वातापी पूर्ण रूप के ठीक हो गई

वातापी .....देखिये सभी जखम भर चुके है

अब बताये क्या सत्य में आप अपनी बहनो को भोगना चाहते है

कंटकासुर ........है ये सत्य है जब हमने उन्हें वर्षो बाद देख तो हम उनकी तरफ भोगने के लिया आकर्षित होने से खुद को रोक नहीं पाए हमें माफ कर दे हम आपसे हे प्रेम करते है किन्तु हम सम्भोग से दूर भी नहीं रह सकते है

वातापी ......फिर हम आपसे कुछ मांगे आप मना तो नहीं करेंगे न हमें

कंटकासुर .......सम्भोग को छोड़

आप कुछ भी मांग लीजिये हम सम्भोग करना बंद नहीं कर सकते है

वातापी ......हम ऐसा कुछ नहीं मांगेगे जिसके चलते आपको कोई परेशानी हो हम बस आपको ये कार्य करने को हे कह रहे है स्वामी ******* ******* ******

******* ******** ***********

कंटकासुर .......क्या मतलब आप जो कह रही है वो सत्य नहीं हो सकता है

वातापी .......यही सत्य है स्वामी आप भले हे न मनो पैर सत्य चुप नहीं सकता है

वातापी सामने दीवार पे कुछ दृश्य चला कर कंटकासुर को दिखती है जिसने देख कंटकासुर दुखी हो कटा है

कंटकासुर ......हमें माफ कर दे वातापी हम आपकी पीड़ा को समाज हे नहीं पाए अब जैसा आप कहेंगी हम वैसा हे करेंगे

वातापी ......किन्तु किसी आवर को इसका पता नहीं चलना चाइये स्वामी

अभी ये लोग बात कर हे रहे थे की किसी ने इनके दूर को नॉक किया

वातापी ....हम बाद में इस विषय पे चर्चा करेंगे स्वामी आप सबके साथ पहले जैसा हे व्यव्हार कीजिये

कंटकासुर ........हम्म्म हम चलते है माता श्री ने बुलाया है.......

सूरजगढ़ ...........

नानी जी .....बेटी प्रिय ये आज इन दोनों को क्या हुआ है

प्रिय ......क्या हुआ माँ सा किसको क्या हुआ है

प्रिय अपने रूम से बहार निकल कर अपनी सास से पूछती है

नाना जी ........देखो तो जो कभी खुद की चाय कॉफ़ी तक नहीं बनती है वो दोनों किचन में कब से लगी हुई है पता नहीं क्या बना रही है

मां जी ...... मैं देखती हूँ माँ सा

इनका पता नहीं किचन का क्या हॉल किया होगा इन दोनों ने

प्रिय ममी जी जब किचन में पहुंची तो किरण आवर राधा खाना बनाने के सामान की लिस्ट त्यार कर रही थी

प्रिय ममी जी ......तुम दोनी किचन में क्या कर रही हो

सपना ....मम्मी आज खाना हम दोनों बनाएगी आप बहार जाये

सन्ति ममी जी ......देखो न जीजी इन दोनों ने मुझे भी किचन से बहार कर दिया है

प्रिय ममी जी सपना के हाथ से लिस्ट ले कर देखती है

प्रिय ममी जी ......आज कोई स्पेशल गेस्ट आ रहे है क्या घर पे तुम दोनों के

अपनी मम्मी की बात सुन सपना आवर किरण एक दूसरे को देखने लगती है

प्रिय ममी जी .....मुझे बताओ क्या क्या बुनना है मैं बना देती हूँ

किरण ......नहीं मम्मी आज का खाना हम हे बनाएगी प्लेसेस आप कुछ नहीं कहेंगी

सन्ति ममी जी ....पैर तुम दोनों को खाना कहा बनाना आता है

kiran........wo आप हम पे छोड़ दे मम्मी हम बना लेंगे

प्रिय ममी जी .....ठीक है स्वीटी मुझे यकीं है तुम दोनों अच्छा हे खाना बनाओगी आल थे बेस्ट चलो छोटी इनको करने दो जो ये कर रही है

किरण ......थैंक यू मम्मी प्लेसेस ये सामान मंगवा दीजिये

प्रिय ममी जी लिस्ट ले कर बहार जाती है आवर नौकर से बोल सामान लेन को कहती है

नानी जी बहार नाना जी के पास चली जाती है

नानी जी .....पता है आपको आज आपकी दोनों पोटिया ने क्या किया है

नाना जी ....... अब क्या कर दिया उन दोनों ने देखो तुम उनपे गुस्सा नहीं करोगी जब देखो तब उनपे भड़कती रहती हो

नानी जी ........मैं कहा गुस्सा करती हूँ आप बे बझा हे पीछे पड़े रहते हो

नाना जी ........क्या किया उन दोनों ने

नानी ji......aaj उन दोनों ने अपनी अपनी माँ की किचन से बहार कर दिया ये बोल कर के की आज का खाना वो दोनों बनाएगी

नाना जी ........तो क्या हुआ वो मेरी पोटिया है कुछ भी कर सकती है

नानी जी ........पता है आपकी पोटिया है इस लिया हे उन्हें सर पे बैठा रखा है आपने

तभी वह हवेली में एक कार आ कर रिक्ति है

नानी जी .......ये किसकी कार है जी कोण आया है

नाना जी ......ये तो जमाई सा शिव की कार है

तभी पिछले दूर से कार में से कोमल आवर शालिनी उतरती है

आवर अगला दूर खोल सूर्य बहार निकलता है

नानी जी ......ये तो मेरी बची शालू है जी

नाना जी .......मेरा शेर आया है साथ में

नाना जी आवर नानी जी दोनों हे कार की तरफ भाड़ जाते है

सूर्य आगे भाड़ अपनी नानी जी के पेअर चउथा है

सूर्य .....परनाम नानी जी कैसे है आप

नानी जी ........जीते रहो बीटा सूर्य

सूर्य .....परनाम ननु कैसे है आप लगता है नानी जी अभी भी आपकी क्लास लगा रही है

नाना जी .......सुन लिया ठकुराइन अब तो ये भी मेरी टंगे कीच रहा है

कोमल आगे भाड़ नाना जी आवर नानी जी के पेअर चुटी है

नाना जी .....कैसे है मेरी बच्ची कोमल

कमल ....मैं ठीक हूँ नाना जी आप कैसे है

नाना जी ......सब अच्छा है बेटी चलो अंदर चलते है

शालिनी ......बाउजी बाकि सब कहा है

नानी जी .......तुम्हारी दोनों भाबी अंदर है आवर भतीजियां भी बाकि तुम्हे पता हे है

नाना जी ......हवेली में सब कैसे है बेटी

शालिनी ......हेहेहे बाउजी भी अच्छे है पापा कल साम को आएंगे वो आपको याद कर रहे थे

पाछो लोग अंदर आ जाते है

कोमल .........नानी जी सपना दी आवर किरण कहा है

कोमल की आवाज सुन किरण बहार निकलती है

सामने सूर्य को खड़ा देख वही किरण के पेअर खुद बा खुद रुक जाते है

जैसे हे शालिनी की नजर किरण पे पड़ी वह उस तरफ भाड़ गई जब पास से देखा तो कपड़ो पे हल्दी चिली पाउडर आवर आता लगा हुआ था जिसे देखते हे शालिनी के चेहरे के भाव बदलने लगे

शालिनी ..........ये क्या है माँ पापा घर में नौकर नहीं है क्या जो आपने मेरी बच्ची को किचन में लगा रखा है

शालिनी अपना रुमाल निकल किरण का चेहरा साफ करती है

नानी जी ......बेटी इन्होने जिद करि की आज वही खाना बनाएगी

शालिनी ......आवर आपने इनको इजाजत दे दी क्यों यही न

आवर आप दोनी भाबी सा आपने भी नहीं रोका इनको स्वीटी सपना जावा जा कर कपडे बदल कर आओ

किरण .....बुआ सा आप गुस्सा मत कीजिये मैंने आवर दीदी ने हे जिद की थी की आज का डिनर हम त्यार करेंगे बस थोड़ा सा रहा है प्लेसेस उसके बाद हम कपडे भी बदल लेंगे

शालिनी ......चुप चाप जाओ दोनों आवर कहा कर कपडे बदल कर आओ कोमल बेटी ेंजो ले कर जाओ

कोमल .....जी मम्मी

सूर्य तो बस अपनी माँ को देखे जा रहा था सूर्य को उनपे बहुत प्यार आ रहा था जिस तरह किरण के लिया फ़िक्र आवर प्यार दिखाया

कोमल किरण सपना तो निकल गई रूम

प्रिय ममी जी .....शालू अब गुस्सा थूक भी दे उन्होंने ये सब तुम्हारे लिया किया दन्त हमें पद गई

शालिनी .....भाबी सा जो भी हो पैर आपने उनको अकेले तो ये नहीं करने देना चाइये था

नाना जी .....शालू अब छोड़ इनको बेटी प्रिय जाओ आवर बाकि खाना त्यार करो चल सूर्य तुम मेरे साथ चल

सूर्य अपने नाना जी के साथ बहार निकल जाता है

अभी खाना खाने में वक़्त था थोड़ा

सूर्य .....नाना जी दोनों मां जी घर कब आते है

नानी जी .....बीटा संजय तो रोज घर आ जाता है पैर जोरावर कभी कभी हे आता है

सूर्य ......आपको दादू बहुत याद कर रहे थे

नाना जी ......कोई नहीं कल आ तो रहा हे है मेरा दोस्त आवर न भी आता तो मैं चला जाऊंगा

कुछ देर बहार टहलने के बाद सूर्य आवर नाना जी घर लौट आते है

संजय मां जी भी घर लौट आये थे

सबने मिल कर खाना खाया

सूर्य .....स्वीटी खाना बहुत हे अच्छा बना है

शालिनी .......है बेटी खाना वाकई में बहुत स्वादिस्ट है खाश कर ये पालख पनीर गोभी के पराठे यहाँ पे ज्यादा तर डिश सूर्य को बहुत पसंद है

नाना जी ......ये तो सच कहा बेटी तुमने आज पहले बार मेरी पोतियो ने किचन में पेअर रखा आवर पहली बार में हे सबका दिल खुश कर दिया

प्रिय ममी जी ....बाउजी खाना जो स्पेशल बनाया है दोनों तो स्वादिस्ट तो बनना हे था क्यों स्वीटी सपना तुम दोनों को पहले से पता था न की शालू आवर सूर्य यहाँ आ रहे है हमें क्यों नहीं बताया

शालिनी ......उन्हें मैंने हे मना किया था भाबी सा

नानी जी ........अब समाज आई बात तो ये सब तयारी तुम्हारे स्वागत में हो रही थी

शालिनी .....आपको कोई शक है क्या माँ सा दोनों मेरी बछिया है आवर आप इनपे गुस्सा कारनामे काम करो बुढ़ापे में बप हाई हो जायेगा आपका

नानी जी ......मैं कहा कुछ बोलती हूँ इनको

नानी की बात सुन सबकी हाशि चुत जाती है ........

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अपडेट 116

प्रिय ममी जी ....बाउजी खाना जो स्पेशल बनाया है दोनों तो स्वादिस्ट तो बनना हे था क्यों स्वीटी सपना तुम दोनों को पहले से पता था न की शालू आवर सूर्य यहाँ आ रहे है हमें क्यों नहीं बताया

शालिनी ......उन्हें मैंने हे मना किया था भाबी सा

नानी जी ........अब समाज आई बात तो ये सब तयारी तुम्हारे स्वागत में हो रही थी

शालिनी .....आपको कोई शक है क्या माँ सा दोनों मेरी बछिया है आवर आप इनपे गुस्सा कारनामे काम करो बुढ़ापे में बप हाई हो जायेगा आपका

नानी जी ......मैं कहा कुछ बोलती हूँ इनको

नानी की बात सुन सबकी हाशि चुत जाती है ........

अब आगे ........

विक्रम ......गुजर सिंह जी अचानक से ये सब क्या हो रहा है हमारे साथ

गुजर सिंह ........पता नहीं जब से वो सूर्य नाम का शनि मेरी लाइफ में आया है तब से मैं बर्बाद हे हो रहा हूँ

विक्रम .....बिलकुल ठीक कहा आपने अब देखो यहाँ जेल में बे थे है वो भी बिना किसी क्राइम किये

गुजर सिंह .......न जाने कितने हे लोगो का खून किया रेआप भी किया जमीं कब्ज़ा किया सब कुछ करने के बाद भी कभी जेल नहीं गया आवर आज देखो बिना कोई क्राइम किया हम यहाँ बे थे है इन नसीडियो आवर पॉकेटमारों के बिच ये चंपा रानी के कोठे पे भी आज हे छापा पड़ना था क्या

थोड़ा फ्लैशबैक में पीछे चलते है .....

गुजर .....विक्रम मेरी उन लोगो से बात हो चुकी है आवर वो उन पांचो लड़कियों की किडनैपिंग भी करने को त्यार है

विक्रम .....कीमत क्या ले रहे है

वो लोग आवर क्या उन्होंने इतने बड़े काम को पहले भी अंकन दिया है या ये उनका पहला काम है

गुजर .......उन्होंने ये काम पहले भी किया है कई बार

विक्रम ......देखो मुझे जब उसपे भरोषा होगा तभी हम उन्हें अदा पैसा देंगे नहीं तो एक पैसा नहीं मिलेगा

गुजर सिंह ......ठीक है उनसे मिलने चले

विक्रम .....ठीक है कहा मिलना है उनसे कई ये कोई ट्रेप न हो

गुजर सिंह ......यहाँ हमें कोई जनता हे नहीं है तो फिर कैसा ट्रेप कर सकता है हमें

विक्रम बैग में से कुछ पैसे निकल कर अलग रख लेता है

विक्रम .........चलो चलते है कार तुम ड्राइव करो तुम्हे पता है कहा चलना है

गुजर आवर विक्रम निकल गया अपनी कार से जो उन्होंने कुछ दिनों के लिया किराये पे ली थी

कुछ 20 मिनट्स बाद

विक्रम ......ये क्या ये यो वही जगह है

गुजर सिंह .....उन्होंने यही मिलने का बोलै था

अब चलो वो यही मिलने वाले है

विक्रम गुजर के पीछे पीछे रंडीखाने में गुस्स गया जहा दोनों हर रात रंडियों को पानी पिलाने दोनों आया करते थे

यहाँ साम के समय से हे भीड़ लग्न सुरु हो जाता क्या जवान क्या बूढ़ा क्या गोरा क्या कला सैम को चारो तरफ यहाँ एक अलग हे मौसम हो जाता है

विक्रम गुजर के पीछे चलते हुए एक कोठे में जा गोशे जहा पे कुछ लड़किया आवर कुछ टपोरी टाइप के बड़ी उम्र के लड़के आवर उनके बिच एक 50 .55 साल की औरत जो सायद इस कोठे के मालकिन थी

मालकिन .....पधारिये सर्कार चंपा रानी के कोठे पे आपको एक से एक मस्त मॉल मिलेगा बोलो किस उम्र की किस सहर की लड़की चाइये

गुजर .....वो भी देख लेंगे पहले कोई काम की बात तो कर ले चंपा रानी

चंपा रानी ......उस कमरे में जाओ वही बात होगी

एक रूम की आवर इसरा करते हुए चंपा रानी वह से सबको हाकल दिया ये बोल के की जा कर कस्टमर को खुश करो

विक्रम गुजर जब रूम में पहुंचे तो वह एक 40 ,45 की उम्र का आदमी तगड़ा सरीर बड़ी बड़ी मुचे बीटा सरब पि रहा था वही एक लड़की उसकी गॉड में बैठी सदन पीला रही थी अपने हाथो से

आदमी विक्रम आवर गुजर को देखते हुए उस लड़की जो की 19 ,20 साल की होगी उसकी ब्रा निकल ऊपर का हिंसा पूरा नंगा कर अपने पंजो में भर दबाने लगता है

आदमी .........आओ बैठो कहो कोण हो तुम आवर किस काम से आये हो

गुजर ...........सलाम कलां भाई मैंने दोपहर में आपसे बात की थी गुजर सिंह हूँ मैं

कलां .......ओह्ह तो तुम हो गुजर सिंह आओ बैठो आवर ये चिकना लौंडा कोण है तुम्हारे साथ कई कोई कबरई तो नहीं है न

गुजर सिंह ......जी नहीं भाई ये मेरा पार्टनर है ये समाज लीजिये

कलां ......चल छमिया मेहमानो के लिया पेग बनाओ

विक्रम .....माफ कीजियेगा मैं सरब नहीं पिता है अगर बेयर है तो ठीक है

कलां ......तुम सच में छीने हो लौंडे छमिया फ्रीज़ से बेयर निकल लड़के के लिया

गुजर सिंह .....भाई हमें 5लड़कियों का किडनैप करवाना है

कलां .....क्या बात है कही कोई आवर धंधा तो नहीं खोल रहे हो

विक्रम ......जी ऐसा नहीं है हमारी कुछ पर्सनल दुश्मनी है उनसे कीमत आप जो कहो पैर लड़कियों को एक भी खरोच नहीं आणि चाइये इस बात की आपको गारंटी देनी होगी

कलां .......कीमत लड़कियों की जानकारी के बाद हे तय होगी

विक्रम लड़कियों की जानकारी आवर उनकी फोटो कलां को देता है

कलां .....हम्म लड़किया तो अच्छी है आवर ज्यादा लफड़ा भी नहीं होगा 5 की कीमत है 35 लाच

इन दो के बैकग्राउंड थोड़ा स्ट्रांग है तो इनके 10 ,10 लाच बाकि 3 के 5 ,5 लाच लगेंगे

विक्रम .......40 लाच दूंगा पचि के पैर उनके बदन पे एक क्रोचे भी नहीं आणि चाइये अगर उनके बदन पे एक क्रोचे भी दिखी तो आपको एक पैसा भी नहीं मिलेगा ये 25 लाच रखो बाकि काम होने के बाद

कलां ......तुम लोगो ने कीमत काम से बढ़ कर दी है तो कलां भी जुबान देता है इनके सरीर पे एक क्रोच तक नहीं आएगी

विक्रम ....आप जिनसे भी काम कराओ हमें कोई मतलब नहीं पैर उनसे ये जरूर कह देना इनका किडनेप करने के बाद गलत करने की सोचे भी न ये आपकी जुबान है

गुजर सिंह ....जी कलां भाई लड़का थोड़ा इमोशनल है आप समाज हे गए होंगे

कलां ......हाहाहा गुजर भी यही तो दिन है लौंडे के जवानी के मज़े लेने के चिंता न करो कोई भी लड़का बुरी नियत नहीं करेगा उनपे

गुजर सिंह .....फिर कोई माल तो दिखाओ क्या कलां भाई आपकी महफ़िल में सरब तो है पैर कबाब नहीं

कलां .....चंपा रानी जरा मेहमानो के लिया आइटम्स तो भेज मेहमानो को खुश करना है

गुजर सिंह ......ये हुआ न बात

कुछ हे देर में चंपा रानी 5 ,6 लड़कियों के साथ अंदर आती है

कलां .....तुम दोनों इनके साथ मज़े करो तुम्हारा काम 3,4 दिन में हो जायेगा बाकि फ़ोन पे बात होती रहेगी अभी मैं निकल रहा हूँ चंपा रानी चलता हूँ ये ले पैसे किसी के हाथो अड्डे पे पंहुचा दे

कलां वह से निकल गया कुछ देर बार चंपा रानी दोनों के लिया 4 लड़किया छोड़ वह भी निकल गई

गुजर आवर विक्रम ने खूब बदल बदल 2 जानते मज़े लिया उन लड़कियों के

फिर नंगे हे लेट गए सरब के नशे में उनके साथ

रात 11 बजे के करीब पुलिस ने चंपा रानी के कोठे पे छापा मारा आवर सभी मर्दो को उठा कर ठाणे में ला लॉकअप में दाल दिया

प्रेजेंट टाइम ......

विक्रम .....अब कुछ नहीं हो सकता कल इन लोगो से बात करते है

गुजर सिंह .....चलो रे जगह दो मुझे सोना है

गुजर तो कुछ देर में वही जमीं पे लेट खर्राटे मरने लगा उसे तो जेल का एक्सपीरियंस था विक्रम कोने में दिवार का सहारा ले जप किया लेने लगा .......

सूरजगढ़ .......

देर रात तक सब लोग बे थे बाते करते रही जोरावर आज भी बहार हे था

सूर्य ........माँ मुझे नींद आ रही है देखो तो 11 बज गए है

शालिनी .....ठीक है बीटा सो जाओ जा कर आवर सुबह जल्दी उठने की जरुरत नहीं है

सूर्य ......ok माँ गूडनिघत एवरीवन ममी जी मुझे रूम बताये कहा सोना है मुझे

प्रिय .......बीटा वो स्वीटी के बगल में जो रूम है वही सो जाओ जा कर मैं बीएड लगा दिया है

सूर्य ....ok ममी जी माँ अब आप भी सो जाये बाकि सुबह कर लेना बाते

सूर्य वह से निकल कर रूम में आता है

बाथरूम में नाहा कर सूर्य जब लोअर दाल कर बहार आता है तो सामने बीएड पे कोमल आराम से लेती हुए थे





सूर्य .....अरे ये कोमल दी कब यहाँ आ कर सो गई अब क्या कृ

इनको उठा भी नहीं सकता पुरे दिन इनसे किसी तरह नाचता रहा

सूर्य घडी की तरफ देखता है जिसमे 11:20 पं हो रहे थे

सूर्य .......अब तो सोने में हे भलाई है

सूर्य कोमल के बगल में जा कर चादर हटा कर लेट जाता है जिस से कोमल के ऊपर से भी चादर हैट जाती है

सूर्य ये क्या कोमल दी ने क्या पहना है पता नहीं आजकल इनके दिमाग में भी क्या क्या चलता रहता है इनका भाई हूँ फिर भी देखो कैसे कपड़ो में सो रही है

सूर्य दूसरी तरफ करवार बदल कर सो जाता है





कुछ देर बाद कोमल अपनी आँखे खोलती है एक बार सूर्य को देख मुस्कुरा कर दूसरी तरफ करवट ले कर सो जाती है

कुछ देर में हे सूर्य सो जाता है

कोमल उठ कर बाथरूम जाती है कुछ 10 मिनोइट्स बाद बहार निकल कर सूर्य के साथ लेट गई

पुरे रूम में एक अजीब से खुसबू फ़ैल जाती है जो की कोमल के बॉडी से आ रही थी

इसका असर सायद सूर्य पे भी हुआ जो सूर्य खुसबू को सूंघते हुए कोमल से आ चिपका





सूर्य को अपने सरीर से नंगा चिपका मह्सुश करते हे कोमल के चेहरे के मुस्कान भाड़ जाती है आवर डेरी से करात बदल लेती है

सूर्य किसी नर हिरन के भाटी कोमल की मादा खुसबू से खींचा उसको पीछे से चिपक जाता है





( कोमल .....आज के लिया इतना काफी है)

कोमल अपने हाथ से सूर्य का हाथ डेरी से पकड़ कर अपने हाथ से हे अपनी चुकी पे रख कर थोड़ा पीछे किसक कर सो जाती है

सूर्यगढ़ .......

साध्वी जी ........ये तुमने अच्छा काम किया वयोम परन्तु अब तुम्हे कलां को भी रोकना होगा विक्रम आवर गुजर किसी न किसी तरह वह से निकल जायेंगे

वयोम ......विक्रम आवर गुजर को आप मुझे मरने से क्यों रोक रही है

साध्वी जी .....जिसका समय पूरा न हो तुम उन्हें मार कर क्यों पाप के भागी बनना चाहते हो

जब इनका वक़्त आएगा तो ये भी अपने पाप को भोगने से बच नहीं सकते है

वयोम ......जैसा आप कहे साध्वी जी तो आप आज रात्रि को परीलोक के निकल जाएँगी

सकती ......साध्वी जी आप उन लड़कियों की आवर सूर्य के परिवार की चिंता न करे मैं उनकी सुरक्षा की पूरी तयारी कर दी है

साध्वी जी .....ये आपने बहुत अच्छा किया सकती तुम्हारे इस प्रयाश से हमारा कार्य भी हो जायेगा आवर उनको भी हनक नहीं होगी वो ये समझेंगे की उनका कार्य बिना किसी समस्या के हो गया ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स.............
 
अपडेट. 117

साध्वी जी .....जिसका समय पूरा न हो तुम उन्हें मार कर क्यों पाप के भागी बनना चाहते हो

जब इनका वक़्त आएगा तो ये भी अपने पाप को भोगने से बच नहीं सकते है

वयोम ......जैसा आप कहे साध्वी जी तो आप आज रात्रि को परीलोक के निकल जाएँगी

सकती ......साध्वी जी आप उन लड़कियों की आवर सूर्य के परिवार की चिंता न करे मैं उनकी सुरक्षा की पूरी तयारी कर दी है

साध्वी जी .....ये आपने बहुत अच्छा किया सकती तुम्हारे इस प्रयाश से हमारा कार्य भी हो जायेगा आवर उनको भी हनक नहीं होगी वो ये समझेंगे की उनका कार्य बिना किसी समस्या के हो गया ............

अब आगे ........

असुर लोक .......कंटकासुर अपनी माँ द्वारिका के आदेश पे नगीना आवर विशुद्धि को साथ ले कर असुरगुरु से मिलने उस गुड्डा में पहेचे जहा असुरगुरु अपनी पूजा पथ इत्यादि कार्य सम्पन किया करता था

कंटकासुर .....परनाम असुरगुरु

नगीना विसुद्धि .....परनाम असुरगुरु

असुरगुरु .....कल्याण हो पुत्र कंटकासुर कल्याण हो पुत्री नगीना विसुद्धि

कंटकासुर .....असुरगुरु माता श्री ने हमें आपके पास भेजा है आपने हमें यहाँ आने को कहा था

असुरगुरु .....पहले तुम सब बैठो यहाँ हम अपनी पूजा समापन कर आपसे मिलते है

कंटकासुर .........जी असुरगुरु हम आपकी प्रतीक्षा करते है आप अपनी पूजा सम्पन करे

असुरगुरु वही तीनो को गुफा में बने एक कक्ष में छोड़ अपनी पूजा पूरी करने चल दिए

नगीना .......ब्रता कंटकासुर ये तो असुरगुरु है न फिर ये महल में न रह कर यहाँ इस निर्जन स्थान पे इस गुफा में क्यों निवेश करते है

कंटकासुर .......क्युकी वो संत स्थान पे रहना पसंद करते है जहा उनके ध्यान पूजा आदि में कोई वीगन न आये महल में ये सब संभव नहीं है नगीना इस लिया वो मोह माया भोग विलाश जैसे कार्यो से सन्याश ले ऐसे स्थान पे रहना ज्यादा पसंद करते है

Visudhi........kya इनका कोई परिवार नहीं है

आवर भोग विलाश तो हम असुरो का प्रिय कार्य है

कंटकासुर .....हाहाहा है ये सत्य है असुर भोग विलाश बिना नहीं रह सकते है किन्तु जो अपनी इन्द्रियों को नियंत्रित कर लेते है वो अपनी इच्छा अनुसार अपना जीवन यापन कर सकते फिर चाहे वो कोई भी असुर क्यों न हो

नगीना ......क्या आपका अपनी इन्द्रियों पे नियंत्रण नहीं है ब्रता श्री

कंटकासुर .......है मैं अपने क्रोध पे नियंत्रण कर सकता हूँ किन्तु ......

नगीना ......किन्तु क्या ब्रता श्री

कंटकासुर .....मैं अपनी सम्भोग की इच्छा को नियंत्रित नहीं कर सकता

विसुद्धि अपने स्थान से उठ कर कंटकासुर के गॉड में आ बैठी

विसुद्धि ......इसमें हम दोनों आपकी सहायता कर सकते है ब्रता श्री

क्यों नगीना

नगीना .....है बिलकुल ब्रता श्री

कंटकासुर अपने लिंग पे विसुद्धि की बड़ी नरम ार्डनङ्गी गांड को मह्सुश कर गरम होने लगता है

खुद बा खुद कंटकासुर का हाथ विसुद्धि की जंगो पे योनि के आसपास हाथ गुमने लगता है

नगीना ......ब्रता श्री आप इतने समय परतवि पे थे क्या आपने वह किसी अन्य स्त्रियों से सम्भोग किया है

कंटकासुर .....ये तुम दोनों कैसे वार्ता कर रही हो भूलो नहीं हम आपके जीएस्ट ब्रता है

नगीना अपने स्थान से उठ कर कंटकासुर के पीछे जा कर अपनी अंगवस्त्रो को हटा कर अपनी दोनों बहे कंटकासुर के चोदे सीने पे काश लेती है आवर पीछे से डेरी डेरी अपनी चूचियों कंटकासुर के पीठ में रगड़ने लगती है

वही दूसरे कक्ष में बैठा असुरगुरु ध्यान में ये सब देख मुस्कुरा रहा था

असुरगुरु अपनी आँखे खोल

असुरगुर .....अभी मुझे इन्हे दिखना होगा नगीना आवर विसुद्धि ने अगर यहाँ सम्भोग किया तो द्वारिका को पता चल सकता है

इनको पार्टम मिलान परतविलोक में हे उचित है

असुरगुरु एक संदूक में से कुछ विचित्र प्रकार के तरल से भरी एक बोतल निकलता है उसपे कुछ मंत्रो का प्रयोग करता है जिस से देखते हे देखते उस बोतल में रखे तरल का कलर चेंज होने लगता है

असुरगुरु ..........सम्भोग उत्तेजना द्रव्य त्यार है है

असुरगुरु .....पुत्र कंटकासुर नगीना विसुद्धि यहाँ आना

तीनो उस कक्ष में आ जाते है जहा असुरगुरु थे

असुरगुरु .....तुम तीनो को यहाँ इस लिया बुलाया है की कल आज रात्रि तुम तीनो को परतविलोक जाना होगा

कुछ समय तुम तीनो वही रहोगे अब अपना दाहिना हाथ आगे करो

तीनो अपना अपना दाहिना हाथ आगे कर देते है असुरगुरु तीनो के हाथ पे कला सभा बंद कर मंत्रो से अभिमंत्रित जल उन तीनो के हाथ पे छिड़कते है

देखते हे देखते वो तीनो दाग़े उन्हें सरीर में समाहित हो जाते है

असुरगुरु ........तुम ये सोच रहे हो न की ये हमने क्या किया है इस से तुम अपनी शारीरिक सकती का प्रयोग परतविलोक पे भी कर सकते हो

ये को पुत्र कंटकासुर इस दिव्या द्रव्य को संभल कर रहना ये तुम तीनो को परतविलोक पे जा कर गठन कारनामे है

नगीना .....इसमें ऐसा क्या है असुरगुरु जो आप हमें सौंप रहे है

असुरगुरु .......ये तुम दोनों के लिया है पुत्री तुम पहले बार परतविलोक जा रही हो न तो ये तुम्हे वह के अनुकूल डालने में सहायक होगा ये एक विशेष मदिरा है पुत्री

मदिरा का नाम सुनते हे नगीना आवर विसुद्धि की आँखों की चमक भाग गई

नगीना उस बोतल को खोलने की कोशिश करती है किन्तु वो खुलती नहीं

असुरगुरु .......मुझे ज्ञात है पुत्रियों तुम्हे मदिरा बहुत प्रिय है परन्तु ये कोई सदर्न मदिरा नहीं इस लिया इसका प्रयोग सोच समाज कर्जा अब तुम बहार जाओ मुझे पुत्र कंटकासुर से एकांत में चर्चा करनी है

विसुद्धि आवर नगीना कक्ष से बहार निकल जाते है

कंटकासुर आगे भाड़ असुरगुरु के पेअर छूटा है

कंटकासुर .....परनाम पिता श्री

असुरगुरु .....तो आखिर तुम जान हे गए की हम तुम्हारे पिता है

कंटकासुर .....आपका हे रकत मेरे सरीर में दौड़ रहा है पिता जी पहचानुगा कैसे नहीं

असुरगुरु .....******** ******* ******* ये कार्य तुम्हे सिगरा हे करबा होगा पुत्र नरकासुर के जागने से पूर्व

कंटकासुर ......जी पिता श्री आप चिंता न करे मैं बाकि सब कार्य छोड़ पहले यही कार्य करूँगा परतविलोक पहुंच कर

असुरगुरु .....किन्तु उन्हें इसका पता न चले

कंटकासुर ....जी पिता श्री ऐसा हे होगा आपका ये उपहार इसमें मेरी मदद करेगा

असुरगुरु. ......अब तुम जाओ पुत्र आवर महल में ज्यादा समय न रखना आवर परतविलोक लौट जाना

कांतजासुर असुरगुरु को परनाम कर नगीना विसुद्धि को ले कर वह से महल लौट गया

कंटकासुर अपनी पत्नी वातापी आवर बाकि सब से मिल कर रात्रि में हे नगीना आवर विसुद्धि को ले कर परतविलोक के लिया निकल गया ..........

सूरजगढ़ ........

सूर्य .......माँ बड़ी ममी जी छोटी ममी जी आवर कितना टाइम लगेगा आपको हम लोग मंदिर हे जा रहे है न

शालिनी .......तुम अपनी बहनो को कहो वो त्यार हुई की नहीं

कोमल .....मम्मी हम सब त्यार है आप त्यार हो तो चले हम

कुछ देर में शालिनी आवर दोनों ममी त्यार हो कर बहार निकलती है

सूर्य ......वाओ ममी जी बहुत हॉट लग रही हो

ी मैं बहुत खूबसूरत लग रही है आप दोनों

बड़ी ममी ......चल बदमाश अपनी मामियो का मजाक ुद्धता है

सूर्य .....सच में ममी जी आप बहुत खूबसूरत लग रही है

नाना जी ......चलो भाई संजय का फ़ोन कितनी बार आ चूका है

सूर्य .....नाना जी आप माँ आवर कमियों को ले कर चलिए मैं दी आवर बाकि सब को ले आता हूँ आपके पीछे हे

कुछ हे देर में सब 2 कार्स में मंदिर की तरफ निकल जाते है

जो सूरजगढ़ से थोड़ी हे दुरी पे देवी मंदिर था

नाना जी ने ये सूर्य किरण सपना आवर कोमल यानि के सभी बच्चो के नाम से राखी थी

पंडित जी ......आप सब मंदिर की परिकर्मा कीजिये तब तक मैं बच्चो से पूजा करवा देता हूँ

पंडित जी सूर्य सपना कोमल किरण को लेक के अंदर पहुंचे जहा पूजा की पूरी वय्वस्ता की गई थी

देवी की प्रतिमा के सामने

पंडित जी कुछ देर पूजा की विधि उनको समझते है

पंडित जी........ देवी के पैरो में रखे सिंदूर का तिलक करलो तुम पे देवी सदैव कृपा करेगी के पवित्र सिंदूर को अपने मस्तक पे बिंदी के रूप में दर्जन करने पे देवी की असीम अनुकम्पा तुम बच्चियों पे सदैव रहेगी सिंदूर को दर्जन कर अपने सच्चे मन से जो भी कम्मा करोगी देवी अवश्य तुम बच्चियों की प्राथना सुनेगी आवर तुम्हे इच्छित वर की मनोकामना पूर्ण होगी

कोमल किरण सपना पंडित जी की बात सुन सूर्य को देखती है

सपना आगे बढ़ सिंदूर उठा अपने माथे पे बिंदी बना लेती है फिर किरण फिर कोमल

पंडित जी .....बच्चो ये पूजा की थल को आवर देवी की पूजा करो बेटी तुम तीनो भी पूजा थल को थम को

सूर्य पूजा की थल ले कर पूजा करने लगता है

इतने में नाना जी नानी जी ममी जी संजय मां शालिनी सब वही आ पहुंचे

सूर्य एक तरफ कोमल दूसरी तरफ किरण आवर सपना पूजा थल को हाथ लगा राखी थी

कोमल का पूरा ध्यान पूजा में हे था

तभी कोमल के पैरो में कुछ चुभा जिस से कोमल जल्दी से निचे बैठने के चाकर में कोमल का हाथ सूर्य के हाथ से टकरा गया जिस से थल में राखी सिंदूर की डिबिया निचे गिरने लगी थल किरण ने संभल लिया पैर सूर्य के हाथ में हे सिंदूर की डिबिया खुक गई जिस से पूरा सिंदूर सूर्य के हाथ से कोमल के माथे पे आ गिरा





सूर्य जैसे हे कोमल के माथे से सिंदूर पूछने लगा वैसे हे पंडित जी ने सूर्य का हाथ थम लिया

पंडित जी ......ये क्या कर रहे हो बीटा ये देवी का पवित्र सिंदूर है इसको मिटाना संभव नहीं है

सूर्य ......पंडित जी मैं जनता हूँ ये देवी का सिंदूर है मैं बस चेहरा साफ कर रहा हूँ

नाना जी ......ये तो अनरथ हो गया बीटा सूर्य

सूर्य .....इसमें क्या अमरथ हो गया नानी जी दी आप जाओ बहार जा कर अपना चेहरा साफ कर आओ

नानी जी .....लड़की की मांग भरी गई तुम्हारे हाथो

सूर्य ......ये क्या बेहूदी बाते कर रही हो नानी सा आप आज भी किस योग की विचार डरहो में ुलजी हुए है

शालिनी .....पैर बीटा

सूर्य .....क्या माँ आप भी किरण कोमल को ले कर जाओ

कोमल बहार चली जाती है ीदार अंदर ये लोग खुसर फुसर करने लगते है जिस से सूर्य गुस्से में मंदिर से बहार निकल जाता है

नाना जी ......शालिनी बीटा जाओ उसके पास जाओ जो होना था वो हो चूका है जो माता रानी चाहेगी वही होगा

प्रिय ममी जी .....शालू तुम कोमल के पास जाओ सूर्य को मैं संभालती हूँ

शालिनी कोमल के पास पहुंची कोमल अपना चेहरा अच्छे से साफ कर चुकी थी जिसने देख शालिनी को रहत मिली

ममी जी ......सूर्य ऐसे बड़ो पे गुस्सा नहीं होते बीटा

सूर्य ......ये लोग आज भी किन किन मान्यताओं में उलझे हुए है ममी जी

ममी जी .......हमारे सस्त्र तो यही कहते है बीटा सस्त्रो के अनुसार तो कोमल से अब तुम्हारा रिस्ता बदल चूका है भले हे तुम दोनों मनो या न मनो पैर सच यही की वो अब तुम्हारी पतन....

सूर्य .....चुप बिलकुल चुप ममी जी मुझे अकेला छोड़ दीजिये आप लोग

ममी जी .....चलो कोई तुम्हे कुछ नहीं कहेगा अब गुस्सा सांत कर आवर चल वह कोमल भी परेशान हो रही होंगी तुम्हारी तरह

सूर्य को कोमल का ध्यान आते हे वह वापिस मंदिर लौट आया

कोमल ने भले हे चेहरा साफ कर लिया था पैर शालिनी की नजरो से कोमल की मन बच न सकीय जिसको कोमल ने बड़ी सफाई से बालो के निचे छुपा दिया था

सूर्य को देख सब जो अभी तक कुछ न कुछ बोल रहे थे सब चुप हो गए

सूर्य ......माँ मुझे घर जाना

शालिनी ......सूर्य चुपचाप पूजा ख़तम करो फिर जहा जाना है चले जाना

शालिनी की बात सुन सूर्य चुप हो गया आवर बाकि सबके भी मुँह बंद हो गए

आधे जानते बाद सब सूरजगढ़ के लिया निकल गए इस बार शालिनी सूर्य की कार में थे

शालिनी ........सॉरी बीटा तुम्हारी कोई भी गलती न होने पे भी मैंने वह तुम पे गुस्सा नहीं होती तो बाकि सब तुम्हे कुछ न कुछ बोलते रहते

सूर्य .....it's ok माँ पैर क्या आज भी हमारे देश में ये सब मानते है

शालिनी ......अभी हम मंदिर गए थे तुम्हे वह माता की मूरत के सामने माथा क्यों टेका उन्हें परनाम क्यों किया

सूर्य .....क्युकी वो इस्वर है

शालिनी .......क्या तुमने उन्हें वह देखा

सूर्य .....ये कैसे हो सकता है माँ

शालिनी ......आस्था आवर विश्वाश ने तुम्हे उनके चरणों में दुखाया तुम्हे विश्वाश था ये वो देवी है मनो तो पत्थर भी बागवान न मनो तो केवल पत्थर

सूर्य .....तो क्या गलती से हाथ से गिरे सिंदूर से हमारा भाई बहन का रिस्ता बदल कर पति पत्नी का रिस्ता हो जायेगा

शालिनी ........ये सब विश्वाश आवर आस्था पे निर्भर है बीटा तुम ज्यादा न सोचो हम बाद में बात करते है

सूर्य .....माँ मुझे घर जाना होगा रात को मुझे कुछ दिनों को लिया बहार जाना है

शालिनी .....अब फिर से तुम कहा जा रहे हो

सूर्य ......साध्वी जी के साथ जा रहा हूँ माँ

कोमल ......सूर्य तुम मेरी वजह से जा रहे हो न जो कुछ मंदिर में हुआ उसकी वजह से जा रहे हो न सॉरी सूर्य मुझे नहीं पता था ये हो जायेगा

कोमल बोलते हुए सिसकने लगती है सूर्य कार रोक कार कोमल को बहार निकल अपने सीने से लगा लेता है

सूर्य .....िस्स्सस्स चुप हो जाये मैं आपकी वजह से कही नहीं जा रहा हूँ कोमल दी आप रोना बंद कीजिये

कोमल .....मुझे माफ कर दो सूर्य मेरी बाजवा से तुम्हे .....

शालिनी .....नहीं बेटी तुम्हारी बाजवा से कुछ नहीं हुआ है जो हुआ उसमे किसी की कोई गलती नहीं थी अब चुप हो जा कोमल तू तो मेरी समंदर बेटी है न

सूर्य पुर शालिनी कुछ देर में किसी तरह कोमल को संत करती है कुछ देर में सब लोग सूरजगढ़ हवेली पहुंच जाते है

हवेली में फिर वही राम कहानी देख सूर्य का वह बिलकुल भी मन नहीं लग रहा था

सूर्य बिना किसी को कुछ बताये वह से पैदल हे सूर्यगढ़ के तरफ निकल गया

किसी को इस आवर ध्यान तक नहीं गया

की सूर्य यहाँ से जा चूका है

साम को जब सभी कॉफ़ी पे रहे थे तभी वह कोमल आती है

कोमल .....मम्मी भाई कहा है वो अपने रूम में भी नहीं है आवर न पूरी हवेली में कही है

शालिनी .....क्या मुझे लगा वो रूम में होगा आराम कर रहा होगा

अब जा कर सबको सूर्य की फ़िक्र हुई सूर्य अब तक सूर्यगढ़ आ चूका था

सूर्य को हवेली में सबसे पहले रेखा ने देखा सूर्य को देखते हे रेखा समाज गई की सूर्य का चेहरा उतरा हुआ है

रेखा जी .....बहार देखते है ये सोच कर की शालिनी से पूछती हूँ की सूर्य को क्या हुआ है

पैर बहार न तो कार थी न शालिनी आवर कोमल रेखा जी हवेली का गेट लॉक कर वापिस आती है

रेखा जी सूर्य के रूम की तरफ भाड़ गई

रेखा जी जब अंदर आई तो देखा सूर्य ऐसे हे बीएड पे लेता है

रेखा जी .......सूर्य क्या हुआ बीटा तुम अकेले हे आये हो क्या

सूर्य रेखा जी को कोई जबाब नहीं देता है जिस से रेखा जी

सूर्य के पास जा कर देखती है तो सूर्य की आँखों के पास हलकी नमी देख वह समाज जाती है की कुछ बात जरूर है

भले हे सूर्य रेखा जी का सघा बीटा नहीं पैर कोमल से ज्यादा रेखा जी सूर्य को प्यार करती है

रेखा जी सूर्य के आंसू पूछने के लिए जैसे हे हाथ लगाती है उन्हें ऐसा लगता है जैसे सूर्य का सरीर गरम भाफ छोड़ रहा हो

रेखा ......हे बागवान सूर्य को तो तेज बुखार है

सूर्य उठो बीटा क्या हुआ तुम्हे सूर्य उठो न

सूर्य जो की नींद की टेबल ले कर सोया था

रेखा जी जल्दी से जा कर साध्वी जी को बुला कर लती है

साध्वी जी ....जबरन की बात नहीं है सर दर्द के कारन सूर्य को भुखार हुआ है आवर सायद ये दूप में हे बहार से आया है

इस वजह से इसका सरीर भी कुछ ज्यादा हे गरम है

रेखा जी .....आप कुछ कीजिये न मेरे बेटो को तकलीफ हो रही है

रेखा जी सूर्य का सर अपनी गॉड में रख नींद में निकलते आंसू पूछने लगती है

साध्वी जी कुछ जड़ी नीतियों का लेप सूर्य के माथे पे लगा देती है

साध्वी जी .....सूर्य को आराम करने दीजिये कुछ देर में ये ठीक हो जायेगा सायद किसी बात से सूर्य काफी परेशान है इसने सायद गलती से सर दर्द की जगह नींद की दवाई भी खा ली है

रेखा जी काफी देर तक सूर्य का सर अपने गॉड में लिए बैठी रही तभी सूर्य के जेब में रखा फ़ोन बजने लगा

रेखा जी जब फ़ोन देखते है तो कॉल शालिनी का था

शालिनी ....hello सूर्य बीटा कहा हो तुम हविले में भी नहीं हो

रेखा ......अब जा कर तुम्हे बेटे की याद आई है शालिनी मुझे पता होता की उसकी वह जा कर ऐसे हालत हो जाएगी तो मैं उसे वह भेजती हे नहीं

शालिनी ......दीदी सूर्य कहा है मेरी उस से बात क्रो आवर सूर्य को क्या हुआ है

रेखा .......सूर्य अभी सो रहा है उसे बहुत तेज सर दर्द आवर भुखार है वो जब हविले पंहुचा तो बहुत परेशान था आते हे वह नींद की दवाई खा कर सो गया

मुझे बताओ वह क्या हुआ था सूर्य के साथ

शालिनी .....दीदी मैं अभी घर आ रही हूँ आप सूर्य का ख्याल रखो

शालिनी इतना बोल फ़ोन कट कर देती है ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........
 
अपडेट. 118

शालिनी ......दीदी सूर्य कहा है मेरी उस से बात क्रो आवर सूर्य को क्या हुआ है

रेखा .......सूर्य अभी सो रहा है उसे बहुत तेज सर दर्द आवर भुखार है वो जब हविले पंहुचा तो बहुत परेशान था आते हे वह नींद की दवाई खा कर सो गया

मुझे बताओ वह क्या हुआ था सूर्य के साथ

शालिनी .....दीदी मैं अभी घर आ रही हूँ आप सूर्य का ख्याल रखो

शालिनी इतना बोल फ़ोन कट कर देती है ............

अब आगे ........

सूर्यगढ़ .......रेखा द्वारा सूर्य की तबियत ख़राब हो जाने की खबर सुन शालिनी कोमल आवर नाना जी तीनो सूर्यगढ़ के लिया निकल गए

किरण ......दी क्या कोमल वाकई में उनकी पत्नी बन गई है वो तो उनकी बहन है न

सपना .....स्वीटी अपने दिल पे हाथ रख कर बताओ क्या तुम उनसे प्यार करती हो

किरण ......ये कैसा जबाब हुआ जबकि आप अच्छे से जानती है मेरे बारे में

सपना .....फिर उस रिश्ते से बहन तो हम भी हुई तो क्या हम सूर्य को प्यार करना बंद कर देंगी

किरण .....प्यार करना आवर पत्नी बन जाना दोनों अलग बात है

सपना ......कुछ अलग नहीं है प्यार की मंजिल हे विवाह होती जब विवाह हो जाता है तब केवल दो जिस्मो का हे मिलान नहीं होता है जहा प्यार होता है वह दो आत्माओ का भी मिलान होता है फिर जिसम भले दो हो पैर आत्मा उनकी एक हो जाती है

किरण ......फिर दादी सा ने इतना बखेड़ा क्यों खड़ा किया वो भी दादी सा की बातो से दुखी हो कर बिना बताये चले गए ऊपर से उनकी तबियत भी ख़राब हो गई

सपना .....तुम उदाश न हो मैं अभी अलीना को कॉल कर पता करती हूँ

किरण ......अभी नहीं दी मुझे लगता है ाहभी माहौल ठीक नहीं होगा अभी

सपना .....है ये भी है मुझे ख़ुशी होगी अगर वो कोमल को अपना लेते है तो

किरण .......मुझे तो कोई एतराज़ नहीं है आखिर है तो वो भी हमारी हे बहन खून का रिस्ता हे जरुरी तो नहीं

आवर फिर एक फायदा आवर भी तो है कोमल उनकी पत्नी बनती है तो

सपना .....कैसा फायदा स्वीटी

किरण .........कोमल आवर उनका रिस्ता सब मान लेते है तो हमारा रास्ता भी क्लियर हो जायेगा ठाकुरो में एक से अनेक विवाह करने ये तो कोई मसला नहीं बस भाई बहन के रिश्ते से प्रॉब्लम हो सकती है हमारा समाज इसकी इजाजत नहीं देता है

प्रिय जी .......तो तुम दोनों का ये प्लान चल रहा है यहाँ पे

सपना ....वो मम्मी सॉरी

प्रिय जी ........तुम्हारी दादी सा ने सुना तो तुम दोनों को जान से मार देगी वो काम से काम रूम तो बंद कर लिया करो

किरण सपना ...सॉरी मम्मी

प्रिय जी ......देखो बीटा मुझे आवर तुम्हारे बड़े पापा को तो कोई भी प्रॉब्लम नहीं पैर इसका ये भी मतलब नहीं है की तुम दोनों ऐसे लापरवाह हो जाओ

किरण .....आगे से हम ध्यान रखेंगी मम्मी क्या कोमल सच में अब उनकी पत्नी है मम्मी

प्रिय जी ....है बेटी भले हे समाज की नजरो में ये पाप है पैर माँ दुर्गा के आशीर्वाद से कोमल की मांग में सूर्य ठाकुर के नाम का सिंदूर भरा जा चूका है हमारे वेदो आवर पुराणों के आदर पे तो वो अब से पीटीआई पत्नी बन चुके है

सपना .....फिर तो हमारी भी सदी उनसे हो सकती है

प्रिय. ....चुप करो तुम दोनों आवर ये सब किसी से भी न कहना अब चलो खाना खाने तुम्हारे बड़े पापा भी आ गए है

किरण ......मम्मी मुझे भूख नहीं है प्लेसेस

सपना .....माँ मुझे भी भूख नहीं है

जोरावर .....क्या हुआ मेरी दोनों बच्चियों को भूख क्यों नहीं है

किरण आगे भाड़ जोरावर के गले लग जाती है

किरण .....आज कल न आप बहुत ज्यादा बहार रहने लगे है बड़े पापा

जोरावर .....अब कुछ दिन यही पे हूँ बेटी चिंता न करो तुम दोनों अब चलो खाना खाओ आओ मेरे साथ

जोरावर दोनों को ले कर निचे आता है जहा नाना जी को छोड़ कर बाकि सब भी थे

नानी जी .....जोरावर बीटा जरा पता कर न सूर्य कैसा है

जोरावर ......माँ सा आपको क्या जरुरत थी इतना बखेड़ा खड़ा करने की सुकर मनाओ सूर्य पहले वाला सूर्य नहीं था जो वो चुप चाप बिना कुछ कहे बिना बताये यहाँ से चला गया

बच्चे थे दोनों कोई जानबुज कर तो उन्होंने कुछ किया नहीं

नानी जी ..........कल को इन दोनों ने कहा या ऐसा हे सूर्य के हाथो इनके साथ हुआ तब क्या करेगा

जोरावर ......अगर ऐसा हुआ तो मुझे समाज से ज्यादा मेरी दोनों बेटियों की ख़ुशी ज्यादा प्यारी है

प्रिय जी .....लीजिये माँ सा मजी फ़ोन पे है

सूर्यगढ़ .......

रेखा जी से बात करने के आधे जानते के अंदर हे

शालिनी कोमल नाना जी साम को करीब 5 बजे सूर्यगढ़ हवेली पहुंचे

शालिनी आवर कोमल दौड़ते हुए सूर्य के कमरे में पहुंची जहा अलीना राधा आवर रेखा जी बे थे हुए थे

शालिनी .....दीदी अभी कैसा है मेरा बीटा सूर्य

रेखा जी ......खुद हे देख को आ कर

शालिनी आगे भाड़ सूर्य के माथे को छू कर देखती है जो अभी भी हल्का हल्का गरम था

rekha......shalini तुम मेरे साथ आओ जरा मेरे रूम में

कोमल राधा अलीना बीटा सूर्य का ध्यान रखना

रेखा जी शालिनी को अपने साथ अपने रूम में ले कर गई आवर गेट लॉक कर दिया

रेखा जी .....अब बताओ वह क्या हुआ जो एक दिन भी नहीं गुजरा आवर सूर्य वह तुम्हे बिना बताये यहाँ आ गया जानती भी हो सूर्य वह से पैदल चल कर आया थे परेशान सा उसे तो ये भी नहीं पता था की उसके सामने मैं कड़ी हूँ

शालिनी .....मुझे माफ कर दो दीदी मुझे नहीं पता था माँ सा की बातो से मेरा बीटा इतना दुखी हो जायेगा

रेखा जी .....मुझे तुम्हारी माफी नहीं चाइये मुझे वो कारन जानना है जिसकी वजह से मेरे बेटी की आँखों में आंसू आ गए

शालिनी मंदिर में जो गठन हुआ उसका पूरा विवरण देती है फिर जब हवेली पहुंचे तो वह जो बाते हो रही थे सब रेखा जी की बता कर किसी अपराधी की तरह रेखा जी के सामने सर जुखा कर शालिनी रोने लगी

आंसू तो रेखा जी के आँखों से भी बाह रहे थे

तभी गेट नॉक होता है

रेखा आवर शालिनी जी अपने आंसू पांच कर गेट खोलती है तो सामने साध्वी जी आवर दादी जी खड़े थे

दादी जी .....बेटी जो हो चूका है वो बदला नहीं जा सकता है पैर तुम्हे मेरे बचे को डांटना नहीं चाइये था तुम्हे पता है न वो तुम्हारा गुस्सा होना दिल पे ले लेता है

शालिनी ......माँ सा मुझे माफ कर दीजिये पैर मैं क्या करती माँ सा वह सभी सूर्य आवर कोमल को हे गलत समाज रहे थे जभी वो सब गलती से हुआ था

गलती से माँ का सिंदूर निचे गिरने से बचते वक़्त सूर्य के हाथो से सिंदूर कोमल बिटिया के मांग में भरा गया

दादी जी ......तुम्हारे पापा ने मुझे सब बता दिया है बेटी इसमें किसी की कोई गलती है नहीं

साध्वी जी .....जो भी माँ के मंदिर में हुआ वो उनकी इच्छा से हे हुआ है उनकी इच्छा के बिना ये सब संभव नहीं है जो रिस्ता माँ ने जोड़ा है उसे हम में से कोई नहीं बदल सकता है

शालिनी .....ये आप क्या कह रही है साध्वी जी आवर माँ सा एक बात आवर भी है जो मुझे समाज नहीं आ रहा की आपको कैसे बोले

दादी जी .....मैं जानती हूँ बेटी तुम क्या कहना चाहती हो

शालिनी ....नहीं माँ सा आप नहीं जानती वो कोमल ने.....

दादी जी ......कोमल ने अभी भी मांग भर राखी है सबसे छुपा कर यही कहना चाहती हो न

रेखा आवर शालिनी का मुँह खुला का खुला रह गया दादी की बात सुन कर दोनों का रिएक्शंस एक हे था पैर वजह अलग अलग

साध्वी जी ......कोमल को मांग मिटना के लिया आप में से कोई नहीं कहेगा

rekha.......ye आप क्या कह रही है आप जानती भी है अगर समाज में किसी को पता चला तो क्या होगा

हम किसी को मुँह दिखने के काबिल नहीं रहेंगे

साध्वी जी ......आपकी परेशानी जानती हूँ मैं पैर आप आज के बारे में सोच कर परेशान है आप आने वाला कल नहीं देख प् रही है

दादी जी ......है बेटी रेखा आज तुम दोनों को एक सच मैं बता देती हूँ राधा की सदी भी सूर्य के साथ हे होगी

रेखा शालिनी .....क्याआआ ये आप क्या कह रही है राधा सूर्य की बुआ है भले हे खून का रिस्ता न हो पैर है तो बुआ हे न

साध्वी जी ......क्या पता किसका किस जनम का कैसा रिस्ता हो ठकुराइन आप ख्याल रखे की कोमल सूर्य के नाम का सिंदूर मिटाये न नहीं तो सूर्य के लिया वही सिंदूर संकट बन जायेगा आप समाज हे गई होंगी मेरी बात को

भले से कोमल सबकी नजरो से बच्चा कर या सिंदूर तिलक के रूप में हे क्यों न लगाए

दादी जी .......मैं अपनी बची से बात करती हूँ तुम दोनों भी इस बात का ध्यान रखना आवर कोई भी कोमल से इस बारे में कुछ नहीं पूछेगा

रेखा .जी ....पैर माँ सा वो दोनों भाई बहन है

साध्वी जी .....इस्वर ने जब परतविलोक को बनाया था तब आवर भी ग्रहो का निर्माण किया था

परतवि पे इंसानो के वंसज थे मनु आवर धरा जिनसे बाकि इंसानो की उत्पति हुए एक तरह से हर पति पत्नी कही न कही भाई बहन है पैर इंसान का विकाश होता गया नयी सोच के साथ नए नियम बनाते गए

कुछ देर आवर ऐसे इनकी बाते होती रही

शालिनी जी फिर से सूर्य के पास लौट गयी

साध्वी जी आवर दादी जी काफी टाइम तक कोमल से अकेले में बात करते रहे

कोई आधे जानते बाद कोमल जब बहार निकली तो उसकी आँखों में बहिनथा ख़ुशी थी चेहरे पे रूम में जाते वक़्त जो दर था अब वह किसी ताजे खिले गुलाब की रौनक थी.

7 बजे के करीब सूर्य उठा जब आँखे खोली तो सबसे पहले शालिनी का चेहरा नजर आया

शालिनी .....उठ गया बीटा अब तेरा सर दर्द कैसा है बीटा

सूर्य चारो आवर नजर गुन्हा कर देखा है तो अलीना कोमल राधा भी वही थी

सूर्य .....अब सर काफी हल्का हल्का मह्सुश हो रहा है माँ आप कब आई सूरजगढ़ से

सॉरी वो आप लोगो को बिना बताये हे मैं वह से लौट आया

shalini......koi बात नहीं बीटा

सूर्य ......दी एक कॉफ़ी मिलेगी कड़क से तब तक मैं फ्रेश हो कर आता हूँ

कोमल .....ठीक है मैं अभी बना कर लती हूँ

सूर्य .....राधा मेरे कपडे निकल दो अलमारी से आवर माँ आप कुछ कपडे मेरे बैग में पैक कर दीजिये रात को मुझे साध्वी जी के साथ जाना है कुछ दिनों के लिया

राधा .....ये क्या बात हुई सूर्य अभी ठीक से दो दिन भी नहीं हुआ आवर तुम फिर से जा रहे हो

सूर्य .....आपसे फ्रेश हो कर बात करता हूँ

सूर्य वह से टॉवल ले बाथरूम में गुस्स गया

शालिनी जी साध्वी जी मिलने उनके रूम में गई

शालिनी ...साध्वी जी क्या सूर्य का आपके साथ वह जाना आज हे जरुरी है क्या

साध्वी जी .....है ये बहुत जरुरी है अगर ऐसा नहीं हुआ तो कुछ दिन बाद सायद आप सूर्य को हमेशा के लिया खो देंगी

शालिनी .....नहीं नहीं ऐसा नहीं हो सकता है मेरे बेटे को कुछ नहीं होगा

साध्वी जी .....इस लिया कोई कुछ भी कहे आज सूर्य को जाना हे होगा नहीं तो आने वाला समय आप सबकी बर्बादी अपने साथ ले कर आ रहा जिस से केवल सूर्य हे अपने परिवार को बच्चा सकता है पैर ये तभी होगा जब सूर्य उचित समय पे वह पहुंचेगा

शालिनी जी ......जी ठीक है मैं उसकी पैकिंग कर देती हूँ

साध्वी जी .....उसकी जरुरत नहीं है

बस आप इस बात का ध्यान रखना की सूर्य को कोई भी किसी वजह से रोके न

शालिनी .....जी ठीक है मैं ध्यान रखूंगी

सूर्य फ्रेश हो कर त्यार हो चूका था सामने कोमल बैठी हुई थे

राधा ......तुम्हे क्या हुआ था सूर्य तुम तो कभी ऐसे बीमार नहीं पड़ते हो

सूर्य .....कुछ नहीं बस सर दर्द था जिसकी वजह से ऐसा हो गया

राधा ......सच बोल रहे हो न तुम मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की बात कुछ आवर है

सूर्य ....हम्म

राधा ....हम्म्म क्या साफ़ साफ़ बोलो न

सूर्य ......आप कोमल दी से पूछ लेना वो आपको बता देगी

कोमल ....... आपका जाना इतना जरुरी है क्या जो आप इस हालत में जा रहे हो

सूर्य ......है जाना जरुरी है आवर अब मैं बिलकुल ठीक हूँ देखो

सूर्य कमल का हाथ पकड़ अपने माथे पे रखता है

कोमल सूर्य के गालो को सहला कर अपना हाथ पीछे कर लेती है

कोमल .......ठीक है पैर अपना ख्याल रखना वह पे वैसे आप जा कहा रहे है

सूर्य .......पता नहीं साध्वी जी को हे पता है

राधा ......वापिस कब आओगे

सूर्य ......पता नहीं कितना वक़्त लगने वाला है

शालिनी .....बीटा चलो चल कर खाना खा लो तुम्हे जाना भी है न तुम्हारे बड़े पापा आवर पापा इन्तजार कर रहे है आवर तुम तीनो भी चलो

अलीना .....आप चलो मैं आती हूँ

सबके जाने के बाद

अलीना ......सूर्य काम से काम मुझे या दीदी को तो अपने साथ ले जा सकते हो वह तुम्हारा ख्याल कोण रखेगा

सूर्य ......मेरी इतनी चिंता क्यों अलीना आवर वैसे भी मैं कोई मिशन पे थोड़े हे जा रहा हूँ वह किसी से मुझे मिलना है फिर वापिस आ जाऊंगा

अलीना ......पहुंचते हे फ़ोन करना

सूर्य .....हम्म ठीक है कुछ आवर भी कहना है

अलीना बिना कुछ कहे सूर्य के होंटो पे हल्का सा किश कर बहार भाग जाती है

सूर्य मुँह फाड़े खुले दूर को देखता है

सूर्य .....अब इसे क्या हो गया है कही ये भी तो

सूर्य अपने दिमाग में उठे खयालो को जातक कर बहार चल देता है

सबके मिल कर खाना कहते है फिर कुछ देर बाद साध्वी जी सबसे जाने की एकानत मांगती है

सूर्य एक एक कर सबसे मिलता है आवर जल्दी लौट आने का वादा कर साध्वी जी के साथ हवेली से निकल जाता है

साध्वी सूर्य कार से जंगल पहुंचे जहा पहले हे सकती आवर वयोम इनका इंतजार कर रहे थे

साध्वी जी .....सूर्य त्यार हो तुम

सूर्य .....किस लिया आवर हम लोग यहाँ क्यों है

सकती ......वो तुम्हे साध्वी जी बता देंगी वह पे आवर याकि चिंता बिलकुल मत कर

साध्वी ji......sakti वयोम जो मैंने कहा उस बात का ध्यान रखना मैं सूर्य को वह पंहुचा कर कुछ हे समय में लौट आउंगी

सकती वयोम .....जी हम इंतजार करेंगे

सकती आगे भाड़ अपने हाथो से कोई ऊर्जा छोड़ता है जो सामने के बड़े से पत्थर पे लगते हे वह एक दरवाजा बनने लगता है

साध्वी जी ......चौकाने के जरूरत नहीं है सूर्य आगे तो आवर भी बहुत कुछ है जिसने देख तुम चौंक जाओगे

साध्वी जी सूर्य का हाथ पकड़ कर उसे ले कर उस द्वार (दरवाजे ) में परिवेश कर जाती है उनके अंदर जाते हे वो दरवाजा बंद हो जाता है

सकती आवर वयोम वापिस लौट जाते है कार को गायब कर ........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ............
 
कोंग्रटुलतिओन्स आल ऑफ यू फॉर कम्पलीट 600 पेजेज

थैंक्स आप सभी ने स्टोरी को जो सपोर्ट आवर प्यार दिया उसके लिया आप सबका शुक्रिया दोस्तों

आज इस स्टोरी के 600 पेजेज पुरे हो गए इसमें आप सब का बहुत सहयोग रहा है

इस लिए दिल से आप सभी को धन्यवाद कहता हूँ

उम्मीद है आगे भी आप सभी का सहयोग मुझे ऐसे हे मिलता रहेगा

थैंक्स आल ऑफ यू माय फ्रेंड्स ......

नेक्स्ट अपडेट के बाद फ्लैशबैक स्टार्ट हो जायेगा मेरी रे है की मैं फ्लैशबैक सॉर्ट में फिनिश कर दूँ

आप सब भी अपनी रे अवश्य दे ताकि उस हिसाब से फ्लैशबैक अपडेट लिखूं

शुक्रिया दोस्तों ......
 
सूर्य फॅमिली इंट्रो ....

( पहले जनम की फॅमिली )

1 ....दादा जी सुजीत ठाकुर ( डेड )

2....सन्ति ठाकुर( दादी जी )

3 ....माया ठाकुर ( बुआ जी )

4 ....राजेश ठाकुर ( फूफा जी )

5....मोनिका ठाकुर ( दीदी )

6 ....मनीषा ठाकुर ( दीदी )

7 ......मानवी ठाकुर ...(छोटी बुवा )

8 ...सुजीत ठाकुर ( फूफा जी )

9....रुपाली ठाकुर ( दीदी )

10 .....दीपाली ठाकुर ( दीदी )

11.....रणजीत ठाकुर ( बड़े चाचा )

12 ....मधु ठाकुर ( बड़ी चची)

13.....प्रिय ठाकुर ( दीदी )

14 ...परतवि ठाकुर ( भाई )

15.....शिव ठाकुर ( माय डैड डेड )/

16 ...सोनाली ठाकुर (माय रियल माँ डेड )/

17 ....सपना ठाकुर (माँ + माय फर्स्ट वाइफ )

18 ...सूर्य ठाकुर

19 ...किरण ठाकुर

20 ...... दुर्जन ठाकुर .. ( छोटे चाचा ) कमीना

21 ...कामिनी ठाकुर ( छोटी छाछ

22....काव्य ठाकुर ( दीदी ..कामिनी आवर दुर्जन की बेटी )

23 ....काम्य ठाकुर ...( कामिनी की बेटी )

सूर्य फ्रेंड्स .....

1 .......जिनिशा .....प्रिंसेस ऑफ जिनलोक

सूर्य लव

2.....हिना खान ...सप ऑफ पुलिस

3 ......परिधि ( प्रिंसेस ऑफ़ परीलोक ) कॉलेज फ्रेंड

4 ......जीनत ......सोल्लगे प्रोफेससर ( प्रिंसेस ऑफ प्रेतलोक

5......तानिया ....सूर्य मॉल पार्टनर्स एंड फ्रेंड्स

6 .....तनु ..तानिया सिस्टर एंड सूर्य किरण कॉलेज फ्रेंड

सूर्य सेकंड लाइफ फॅमिली इंट्रो

1 ......परताप ठाकुर दादा जी

2 ......जानवी ठाकुर दादी जी

3 ......मेनका ठाकुर. बुआ जी

4 ......विजय ठाकुर फूफा जी

5........पायल ठाकुर दीदी

6. ......प्रीती ठाकुर दीदी

7 ......महेंद्र ठाकुर. बड़े पापा ( मेनका ट्विन्स )

8 .......रेखा ठाकुर बड़ी मम्मी

9 .....कोमल ठाकुर. दीदी

10 ........शिव ठाकुर. सूर्य डैड

11 .......शालिनी राणा ठाकुर सूर्य माँ

12 ......सूर्य ठाकुर ( मैं )

13 ....... राधा ठाकुर ( बुआ + लवर + फ्यूचर वाइफ

14 .......मेर्री ....सूर्य नई फॅमिली मेंबर्स

15 ......अलीना ....सूर्य नई फॅमिली मेंबर्स

अन्य किरदार

साध्वी जी

सकती

वयोम

करना

मेजर जनरल ..सूर्यकांत सर

सुरभि सूर्य आर्मी कैंप फ्रेंड

सुरभि दिल्ली कमिश्नर डॉटर

सोहेल खान सूर्य फ्रेंड

सानिया ....सोहेल सीस

सोफ़िया... सोहेल सीस

शालिनी फॅमिली ( सूरजगढ़)

1 ....विक्रम सींग राणा नाना जी

2 .....रूपा देवी. नानी जी

3 ....जोरावर सिंह राणा मां जी

4 .....प्रिय सिंह राणा ममी जी

5 .....सपना राणा (दीदी +लवर +फ्यूचर वाइफ )

6 .......संजय राणा मां जी

7 ......सन्ति राणा ममी जी

9 .......किरण राणा ( दीदी + लवर +फ्यूचर वाइफ )

10 .....विजय सिंह ठाकुर मां जी

सक्तिपुर .....

1 ...दुर्जन सिंह ठाकुर ( मर चूका है )

2 ....गीता ठाकुर ..दुर्जन वाइफ

3 ....विक्रम सिंह ठाकुर दुर्जन सिंह का बीटा

4 .....गायत्री ठाकुर ..दुर्जन सिंह की बेटी

5 ...दुष्यंत ठाकुर ( मर चूका है )

6 ....रुक्मणि ठाकुर दुष्यंत वाइफ

7 .....विधि ठाकुर रुकनी की बेटी

8 .....अजय ठाकुर दुष्यंत का बीटा

9 ....सकती सिंह मर चूका है दुर्जन सिंह का भाई

10 .....राणा ठाकुर दुर्जन सिंह का खाश आदमी

असुर lok....intro

1 .....नरकासुर ....असुरराज असुरलोक

2 .....महारानी द्वारिका नरकासुर वाइफ

3 .....अग्निमुखासुर नरकासुर का बड़ा बीटा

4 .....नीलसूर ....नरकासुर का बीटा

5 .....वज्रासुर ....नरकासुर का बीटा

6 .....भयासुर .....नरकासुर का बीटा

7 ......कंटकासुर ( असुरगुरु का बीटा ) नरकासुर का बीटा

8 .....वातापी कंटकासुर की पत्नी

9 .....नगीना नरकासुर की पुत्री

10 ......विसुद्धि नरकासुर की बेटी

11 .....असुरगुरु

12 ......मानसी ( जो लड़की असुरगुरु के पास है द्वारिका की पुत्री )

गुजर सिंह गुजर क्ष ..m.l.a ....

अन्य लोक

गुरुदेव

रानी पारी

प्रेतराज

ज .किंग (जिनलोक किंग )
 
अपडेट 119

सकती वयोम .....जी हम इंतजार करेंगे

सकती आगे भाड़ अपने हाथो से कोई ऊर्जा छोड़ता है जो सामने के बड़े से पत्थर पे लगते हे वह एक दरवाजा बनने लगता है

साध्वी जी ......चौकाने के जरूरत नहीं है सूर्य आगे तो आवर भी बहुत कुछ है जिसने देख तुम चौंक जाओगे

साध्वी जी सूर्य का हाथ पकड़ कर उसे ले कर उस द्वार (दरवाजे ) में परिवेश कर जाती है उनके अंदर जाते हे वो दरवाजा बंद हो जाता है

सकती आवर वयोम वापिस लौट जाते है कार को गायब कर ........

अब आगे ........

कंटकासुर मध्य रात्रि को परतविलोक पंहुचा नगीना आवर विसुद्धि को अपने साथ ले कर के

नगीना .....ये कैसा स्थान है ब्रता श्री

कंटकासुर .....ये परतविलोक है हम अभी जहा है वो एक गुफा है जहा पिछले 18 सालो से मैं रह रहा हूँ

आवर अब यहाँ पे तुम दोनों भी रहोगी इस लिया यहाँ की भाषा का प्रयोग करो

विसुद्धि .....किन्तु हमें तो यहाँ की भाषा का कोई ज्ञान नहीं है

कंटकासुर .....कक्ष से बहार निकलते हे तुम्हे यहाँ का ज्ञान भी मिल जायेगा आवर तुम दोनों को मानव रूप भी मिल जायेगा

कंटकासुर असुर लोक का द्वार बंद कर दोनों को बहार ले कर जाता है

कक्ष से बहार निकलते हे

कंटकासुर आवर नगीना विसुद्धि का रूप परिवर्तित हो जाता है





कंटकासुर





विसुद्धि





नगीना

विसुद्धि ........ये कैसे कपडे है आवर ये कैसा रूप मिला है हमें

कंटकासुर ......कुछ समय इंतजार करो तुम्हारे सर से असुरो का पार्टीको अपने आप गायब हो जायेगा

नगीना .....भाई ये कपडे बहुत ज्यादा काशी हुए है

k.asur ......तुम चाहो तो कपडे बदल सकती हो यहाँ पे मानव ऐसे हे कपडे पहनते है

विसुद्धि ......पता नहीं क्यों पैर मुझे भूख आवर प्यार लग रही है

k.asur .....दोनों रुको मैं अभी बिखु से बोल कर खाने की व्यवस्ता कराता हूँ

k.asur गुफा से बहार चला गया

नगीना ......यहाँ हम आ तो गए है पैर बिना अपनी सक्तियो के कैसे रहेंगे यहाँ पे

विसुद्धि ......अभी तो भूख से बुरा हल है बाकि सब बाद में देखते है

विसुद्धि पास पड़ी मटकी जिसमे असुर कबीले द्वारा बुनाई गई मदिरा पड़ी थी

विसुद्धि गटागट एक छोटी मटकी पि कर ख़तम कर देती है

विसुद्धि .....ये जल तो बहुत स्वादिस्ट है जैसे जान न हो कर मदिरा हो

मदिरा का नाम सुनते हे नगीना न भी दूसरी मटकी उठा ली

आवर मुँह लगा का गाठ गाठ पिने लगी

कुछ हे देर में k.asur बिखु के साथ भोजन आवर मदिरा ले कर गुफा में पंहुचा

k.asur .....बिखु ये दोनों मेरी छोटी बहने है इनका अच्छे से ख्याल रखना

बिखु .....जी गुरु जी जैसा आप कहे आप भोजन कीजिये मैं अभी चलता हम सुबह मिलता हूँ

k.asur ......हमारी आज्ञा के बिना कोई अंदर न परिवेश करे

बिखु .....जी गुरु जी

बिखु गुफा से अपने घर लौट गया

k.asur अपने साथ लाये हुई असुरगुरु द्वारा दी बोतल में से कुछ मदिरा अपने लिया आवर अपनी दोनों बहनो के लिया निकल कर उन्हें देता है

k.asur .......इस मदिरा का सेवन करने से तुम दोनों यहाँ पे कोई भी परेशानी नहीं होगी क्युकी ये असुर लोक की मदिरा है तो इस से तुम्हे शुरुआत में मानव रूप में कुछ अजीब लगेगा

दोनों बहने आवर कंटकासुर चुप चाप मदिरा पि कर थाली में रखा मांसाहारी भोजन करने लगते है

कुछ तो माबिले की मदिरा आवर कुछ k.asur द्वारा दी विशेष मदिरा जिसके चलते दोनों पे कुछ ज्यादा हे असर हो गया

तीनो खाना खा कर गुफा के कक्ष में निचे जमीं पे लगे बिस्तर पे जा कर लेट गए

k.asur केवल लंगोट में सो गया वही नगीना आवर विषूदि उन्ही कपड़ो में होने के कारन उनके सरीर से पसीना आने लगा

विषूदि .....भाई मुझे बहुत गर्मी लग रही

k.asur .....जनता हूँ एक तो परतविलोक पे मौसम गर्मी का है ऊपर से तुम्हे यहाँ के अनुकूल होने में कुछ वक़्त लगेगा इस लिया कपडे निकल कर दो जाओ

नगीना .....पैर आपके सामने कैसे

K.asur .....सुबह देख लेना ये असुर कबीला है यहाँ महिलाये पूर्ण नग्न गुमटी है

ज्यादा सोचो नहीं अगर तुम्हे नग्न होने में कोई परेशानी है तो मैं भी नग्न हो जाता हूँ कहते हुए k.asur ने अपने सरीर से आखरी कपडा भी निकल फेंका

कुछ देर बाद नगीना आवर विसुद्धि भी सरमते हुए कपडे निकल केवल ब्रा पंतय में लेट गई

दोनों का बार बार k.asur के लिंग पे नजर जा रही थी

k.asur समाज जाता है की उसकी बहने क्या देख रही है आवर क्या करने का सोच रही है

k.asur जांभोज कर खतरे मरने लगता है

कुछ देर बाद विसुद्धि हिमत कर k.asur के लिंग को थम लेती है

जो पूरी तरह से लोहे को रोड के जैसे टाइट था आवर गरम भी

( k.asur ....पिता श्री आपकी मदिरा के असर से इन् दोनों का सरीर जल रहा है पैर इतनी सिगरता से इनकी आग भुजा दी तो आपने जो सोचा वो हो नहीं पायेगा इस लिया कुछ समय इनको तड़पने हे उचित है )

विसुद्धि को देख नगीना भी दूसरी तरफ से k.asur का 8,9 इंच का कला घोड़े जैसा लैंड थम लेती है

कुछ देर दोनों बहने k.asur के लैंड को पकडे रहती है

फिर हिमत कर नगीना अपना मुँह खोल k.asur का लैंड अपने मुँह में भर लेती है

( क .असुर हम्म्म अह्ह्ह लगता है ये दोनों आज हे अपना कौमार्य भांग करवा कर मानेगी )

k.asur आँखे बंद किये नाटक करता रहता है

नगीना बड़ी तेजी से क .असुर के लैंड को चुस्ती रहित है

विसुद्धि की छूट इस दृश्य को देख कुछ ज्यादा हे बहने लगती है

विसुद्धि अपनी छूट को अपनी हे ऊँगली से सहलाते हुए

k.asur के मोठे मोठे ांडो को चाटने चूसने लगती है

अब दोनों बहने बदल बदल कर k.asur का लैंड चूस रही थी

आवर साथ हे एक दूसरे की छूट में ऊँगली कर पानी निकल रही थी

एक जानते तक चली इस चूसै से k.asur का सबर टूट गया आवर वह विसुद्धि के मुँह को लैंड पे जोर डालते हुए उसके मुँह में हे अपना वीर्य भरने लगा

अनगिनत पिचारिया विसुद्धि के मुँह में जाती रही आवर वह पीती रही

कुछ 2 मिनट बाद k.asur ने विसुद्धि के सर से हाथ हटाया आवर सोने का नाटक जारी रखा

नगीना विसुद्धि के मुँह पे आवर बाकि जगह लगे k.asur के वीर्य को चाट पूछ का साफ कर दोनों बहने पूरी नंगी हे k.asur से चिपक कर सो जाती है

परीलोक ......

सूर्य साध्वी जी जब उस द्वार से हो कर बहार निकले तो सामने बहुत हे खूबसूरत नजारा था

साध्वी जी ने जैसे हे परीलोक की जमीं पे अपना पेअर रखा वो अपने वास्तविक रूप में आ गयी





सूर्य साध्वी जी के ऐसे रूप में देख का बहुत चकित हुआ उसे ये तो पता था की साध्वी जी की वास्तविकता जो वो दिखा रही है वो नहीं है

पैर ऐसा कुछ होने को उम्मीद तो सूर्य को बिलकुल नहीं थी

अभी सूर्य साध्वी जी को हे देख रहा था तभी आसमान से बहुत तेजी से आग का गोला आता है





आवर सूर्य से टकड़ा जाता है जिस से सूर्य थोड़ा पीछे जा गिरता है

सूर्य की गिरते हुए नजर आकाश में अपनी आवर आती हुई परियो पे पड़ती है

सूर्य पे अग्नि वॉर किये जाने से रोधी पारी भी गुस्से में आ चुकी थी





रिद्धि आगे बढ़ सूर्य को उठती है

रिद्धि ....सूर्य आप ठीक तो है न आपको कुछ हुआ तो नहीं न

सूर्य पे हुए प्रहार से सूर्य का शर्ट का वो हईशा जल चूका था जहा पे वॉर लगा था

रिद्धि अपना हाथ आगे कर सूर्य के जाली हुई चमड़ी को हील कर गुस्से में पलटी है

रिद्धि ........तुम्हारी हिमत कैसे हुई पहाड़ी इनपे प्रहार करने की

पहाड़ी .........रोधी पारी आप इस मानव के साथ यहाँ क्या कर रही है

क्या आप ये भी भूल गई की मानव का परीलोक में परिवेश वर्जित है

रिद्धि पारी आगे भाड़ पहाड़ी पारी को चांटा जड़ देती है

रिद्धि पारी ........तुमने इनपे प्रहार कर उचित नहीं किया बिना सोचे समजे तुमने जो पाप किया है उसका दंड तुम्हे मरतु दंड के रूप में प्राप्त होगा

सूर्य .....संत हो जाये रिद्धि पारी जी इनमे इनकी कोई गलती नहीं है ये केवल अपना कार्य कर रही है

रिद्धि पारी .....मुझे माफ कर दो सूर्य जहा तुम्हारा सत्कार होना था वही तुमपे प्रहार हुआ

सूर्य .....जो हो चूका है हम उसको बदल नहीं सकते है

आवर आप जो भी आपका नाम है आपको बिना जाँच किये ऐसे हे किसी पे प्रहार नहीं कर्जा चाइये फिर चाहे वो आपका सत्रु हे क्यों न हो

पहरि .....मुझे माफ कर दे मुझे ज्ञात नहीं था की तुम रिद्धि पारी के साथ आये हो

रिद्धि पारी .....तुम नहीं आप सामजी तुम

सूर्य ......अब आप दोनों झगड़ना बंद करो जिस कार्य के लिया आये है उसपे ध्यान दे

रिद्धि पारी .....पहले हम महल चलते है

सूर्य ......क्या वो हमें वही मिलने वाले है जिनसे हम मिलने आये है

रिद्धि पारी .....नहीं वो वह नहीं है उन्हें सामने आने में कुछ वक़्त अभी बाकि है

सूर्य .....आप कही ऐसे स्थान पे चलिए जहा सन्ति हो मुझे कुछ अजीब सा लग रहा मन असंत है मेरा

रिद्धि पारी .....आप मेरे पीछे पीछे आये आपके पांच तत्वा यहाँ पूरी तरह जागृत है आप हवा की मदद से ुध सकते है

रिद्धि पारी आगे आगे सूर्य उनके पीछे पीछे

परीलोक के राजमहल्की तरफ बढ़ने लगा परीलोक के खूबसूरत नज़ारे को देखते हुए







सूर्य चारो तरफ देखते हुए आगे बढ़ रहा था

सूर्य .....आपका परीलोक तो बहुत खूबसूरत है आपने इतने समय तक मुझे अपने बारे में क्यों नहीं बताया

रिद्धि .........जितना मुझे आदेश मिला मैं उतना हे किया फिर मैं कैसे आपको सचाई बताती की मैं एक पारी हूँ क्या आप मेरी बात का यकीं करते

सूर्य .....ये भी सही है फिर तो आप मेरे बारे में भी अच्छी तरह जानती होगी क्या आप मुझे बताएंगे

रिद्धि पारी ......आज रात आप किनसे मिलने वाले है उनसे मिलने के बाद आपको सब कुछ पता चल जायेगा मुझे या किसी आवर को बॉटने की कोई आव्सय्कता हे नहीं होगी

सूर्य .....क्या यही राजमहल है





रिद्धि पारी ......है यही है परीलोक का राजमहल यहाँ से ये इतना खूबसूरत नहीं लगता जितना पास से है

पहाड़ी .....मुझे रानी माँ को इनके विषय में बताना होगा

रिद्धि पारी ......ठीक है जाओ तुम

पहाड़ी वह से निकल जाती है

वही रिद्धि पारी सूर्य को एक खूबसूरत उद्यान में ले कर जाती है

सूर्य .....ये तो बहुत हे संत आवर खूबसूरत जगह है रिद्धि पारी जी

रिद्धि ....मैं यहाँ अक्सर आती थी पिता जी के साथ मैंने यही पे ध्यान लगाना सीखा था

सूर्य ....ठीक है मैं यही पे ध्यान लगता हूँ आप देख लीजिये कोई परेशानी न हो

सूर्य वही जमीं पे आसान लगा कर बेथ जाता है..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .........

इस अपडेट से जुड़ा एक आवर भाग है अगर अभी लिख पाया तो पोस्ट करूँगा नहीं तो सुबह हे पोस्ट करूँगा सोचा था उस से थोड़ा बड़ा हो गया ये भाग .....
 
अपडेट. 120

वही रिद्धि पारी सूर्य को एक खूबसूरत उद्यान में ले कर जाती है

सूर्य .....ये तो बहुत हे संत आवर खूबसूरत जगह है रिद्धि पारी जी

रिद्धि ....मैं यहाँ अक्सर आती थी पिता जी के साथ मैंने यही पे ध्यान लगाना सीखा था

सूर्य ....ठीक है मैं यही पे ध्यान लगता हूँ आप देख लीजिये कोई परेशानी न हो

सूर्य वही जमीं पे आसान लगा कर बेथ जाता है..........

अब आगे ...........

परीलोक ......

पहाड़ी रिद्धि पारी से आज्ञा ले राजमहल राजसभा में पहुंची जहा इस वक़्त परीलोक की महारानी अपने सिंघासन पे विराजमान अपने सभासदो से किसी विषय पे चर्चा कर रही थी

पहाड़ी सभा में पहुंच रानी पारी को जुख कर सलाम करती है

पहाड़ी .....रानी पारी को पहाड़ी दिशा पारी का सलाम

रानी पारी .....कहो दिशा पारी तुम्हारा यहाँ आने का कारन

दिशा पारी ......माफ करे रानी पारी राजगुरु पुत्री रिद्धि पारी परीलोक में किसी मानव को अपने साथ ले कर आई है

रानी पारी ....कया मानव वो भी परीलोक में ये संभव नहीं है

कहा है रिद्धि पारी उन्हें हमारे सामने सर सामान पेश कीजिये

दिशा पारी .....माफ करे रानी पारी वो इस वक़्त इसी मानव के साथ दक्षिणी दिशा के सही उद्यान में उस मानव का ध्यान रख रही है

ताकि कोई उसके ध्यान को भांग न करे

रिद्धि पारी तो यहाँ आना चाहती थी किन्तु उस मानव ने महल में आने से मना कर दिया

दिशा पारी की बात सुन सबको यही लगा की जैसे सूर्य ने यहाँ न आ कर के परीलोक आवर उनका अपमान किया

सभासद .......उस मानव का इतना दुशाहस की वो यहाँ आने से मना कर दिया

तभी वह एक सेविका दौड़ती हुई आती है

सेविका ....रानी पारी वो राजकुमारी पारिजात......

रानी पारी .....क्या हुआ हमारी पुत्री को

सेविका .....रानी पारी वो अच्चानक जोरो से किसी का नाम पुकारते हुए मूर्छित हो गई

रानी पारी ......पता नहीं क्या हो रहा हमारी पुत्री को आज उन्हें कितना समय हो गया है किसी से बात भी नहीं करती आवर क्या नाम लिया उन्होंने

सेविका .... ....राजकुमारी बार बार यही कह रही थी की सूर्य आप लौट आये सूर्य आप लौट आये

रानी पारी .....क्या खा सूर्या

दिशा पारी .....रानी पारी रिद्धि पारी के साथ जो मानव है उसका परिचय भी रिद्धि पारी ने सूर्य के नाम से हे दिया है

रानी पारी ......वह से गायब हो राजकुमारी पारिजात के पास पहुंची जो अभी भी मूर्छित अवस्था में थी

रानी पारी .....उठो पुत्री देखो तो आज वो लौट आये है परीलोक में जिनकी तुम इतने वर्षो से प्रतीक्षा कर रही थी वो लौट आये है

रानी पारी काफी प्रयाश करती है किन्तु पारिजात की मूर्छा भांग ी होती है

रानी पारी .....सेविका राजवैद्य को बुलाओ आवर राजकुमारी का इलाज करवाइये

सेविका .....जो आज्ञा रानी पारी

रानी पारी ....हमें उनसे मिलना होगा क्या ये वही है या कोई आवर किन्तु उनके अलावा महाकाल के कवच को भेद कर कोई मानव परीलोक में प्रवेश नहीं कर सकता हमें पता कारनामे हे होगा

रानी पारी वह से गायब हो दक्षिणी दिशा उद्यान में पहुंची जहा सूर्य ध्यान में लीं था रिद्धि पारी वही पास में बैठी सूर्य को देख रही थी

तभी रिद्धि पारी को किसी का अपनी आवर आने का अहसास होता है

रिद्धि ......परनाम रानी माँ आप यहाँ पे

रानी पारी .....कल्याण हो पुत्री यही हमें आपसे पूछना है की आप महल न आ कर के यहाँ पे क्या कर रही है

रिद्धि .....आप मेरे साथ आइये

रिद्धि रानी पारी को सूर्य से कुछ दूर ले कर जाती है

रिद्धि .....हम क्या करते रानी माँ जिनका स्वागत परीलोक के सबसे उत्तम पुष्पों की वर्षा कर कारनामे चाइये था उनपे हे परीलोक में अग्नि प्रहार से स्वागत किया गया तो आप हे बताये हम उन्हें किस मुँह से महल में चलने का आग्रह करते

रानी पारी ......ये तुम क्या कह रही हो पुत्री किसने तुमपे अग्नि प्रहार किया हम उसे मरतूदण्ड देंगे

रिद्धि .....रानी माँ हम पे अग्नि प्रहार होता तो हमें इतना दुःख नहीं होता किन्तु जिनका वर्षो से परीलोक पलके बिछाये इन्तजार करता रहा उन्ही सूर्य शिव ठाकुर का स्वागत उनके हे सीने पे अग्नि प्रहार से होता है

रानी पारी ......कहा है हमारा पुत्र सूर्य हम उनसे माफी मांगना चाहते है हम उन्हें महल में ले जाने के लिया आये है

रिद्धि .....वो रहे आपके पुत्र आवर जमता सूर्य ठाकुर

रिद्धि सूर्य की आवर इसरा करती है जहा सूर्य ध्यान में लीं था

रानी पारी को एक पल नहीं लगा सूर्य के वास्तविकता को पहचानने में

रानी पारी .......ये वही है उनके अंश सूर्य के सामान ऊर्जावान तेजमयी से

क्या इनकी सकती इनके साथ नहीं आई रिद्धि बेटी

रिद्धि ......आप किस सकती की बात कर रही है रानी माँ

रानी पारी ......जो इनका कवच जिनके साथ होने भर से ये अजर अमर अविजित हो जाते है

रिद्धि .....हम अब भी कुछ नहीं समजे रानी माँ

रानी पारी .....इनकी सकती इनकी बहन या इनकी अर्धांगिनी किरण

रिद्धि .......क्याआ किरण इनकी पत्नी है

रानी पारी .....अथार्त तुम अभी इस रहश्य से अनजान हो वो इनकी पत्नी नहीं थी पैर होने वाली अवश्य थी

रिद्धि .......मैं इतने समय उनके साथ थी किन्तु मैं उन्हें फुलचन हे नहीं पाई

रानी पारी ........परबु की इच्छा के बिना हवा तक नहीं चलती फिर तुम कैसे जान पति उनकी ुचा के विरुद्ध

रानी पारी .....चलो पुत्री महल चलो वह तुम्हारी सखी पारिजात सायद तुम्हे देख ठीक हो जाये

ridhi......rani माँ क्या हुआ पारिजात को

रानी माँ .....जब से मंदिर अंतर्ध्यान हुआ है तब से उसे पता नहीं क्या हुआ है न किसी से कुछ बोलती है हर वक़्त बस अपने कक्ष से इसी स्थान को देखती रहती है जहा मंदिर विराजमान थे

रिद्धि .......मुझे माफ करे रानी माँ किन्तु अभी हम महल नहीं लौट सकते क्युकी परबु का मंदिर किसी भी समय सबके सामने दृष्टिगोचर हो सकता है आवर सूर्य का वह उचित समय पे पहुंचना जरुरी है अनन्यता हम सूर्य आवर पिता श्री दोनों को एक बार फिर से खो सकते है

रानी पारी .......क्या आज हे वो समय है

रिद्धि ......जी रानी माँ बस किसी भी समय मंदिर प्रकट हो सकता है

तभी सूर्य अपने ध्यान से बहार निकलता है

आवर गॉड मि स्तुति करने लगता है

सूर्य की स्तुति पूर्ण होने पैर भी कोई प्रभाव नहीं पड़ा

रिद्धि ......रानी माँ ये क्या सूर्य के स्तुति करने के बाद भी महल दर्शन नहीं दे रहे है

तभी वह पारिजात आ जाती है

पारिजात .......परबु ऐसे प्रश्न नहीं होंगे सखी रिद्धि

पारिजात की आवाज सुन जाने अनजाने हे सही पैर सूर्य की दिल की धड़कन अच्चानक से किसी अपने को प् लेने की ख़ुशी में भद्दे से गई

रानी पारी .......पुत्री पारिजात आप यहाँ पे कैसे

पारिजात .......मेरे परबु का आदेश है रानी माँ भला उनकी इच्छा कैसे ताल सकती हूँ

रिद्धि आगे भाड़ पारिजात से गले मिलती है

पारिजात ......अभी समय नहीं है मेरी बहन

पारिजात आगे भद्दे सूर्य के पेअर चुटहि है

सूर्य की आँखों से एक बून्द आंसू बाह कर परिणत के माथे पे गिरता है जब परिणत पेअर चुने के लिया जुखति है

सूर्य ......कोण है आप आपको देख हमारा मन इतना खुश क्यों है क्या रिस्ता है हमारा आप से क्यों आप हमें अपनी लगती है

पारिजात .......हम नहीं जानते क्या रिस्ता है आपसे हमारा पैर हम अपना बाकि का जीवन परबु की इच्छा से आपके चरणों में बिताना चाहते है

सूर्य .........हम नहीं जानते आपके इन वचनो क्या उतर दे

पारिजात .......मेरे परबु महाकाल मुझे मेरा उतर सवयं दे देंगे

अभी हमें उन्हें प्रश्न करना है

सूर्य आवर पारिजात दोनों एक साथ परबु वंदना आरम्भ करते है

जैसे जैसे दोनों की परबु वंदना आगे भाड़ रही थे वैसे वैसे परीलोक का मौसम भी परिवर्तित हो रहा था

चारो तरफ एक अलग हे खुशियों भरी खुसबू से फल रही थी

पसु पक्षी जुम्मे लगे मधुर कलरव में अपनी मीठी सांई में जैसे पक्षी भी परबु की वंदना कर सूर्य आवर पारिजात की सहायता कर रहे हो

डेरी डेरी सभी परिया उद्यान में एकत्रित होने लगी हिरन मोरे कोयल चिड़िया भाटी भाटी के जीवो से उद्यम पूरा भर गया

तभी वो हुआ जिसकी सब प्रतीक्षा कर रहे थे

जहा पहले मंदिर हुआ करता था वह तेजी से दुहा हे दुहा फ़ैलाने लगा उस दुहे से आती खुसबू से सब मंत्रमुग्ध हो उस तरफ भेदने लगे

कुछ हे देर बाद दुहा जब वह से हाथ तो वही मंदिर सबके सामने था

सूर्य ......अब आपको लौटना होगा देवी आवर आप सभी को भी

रिद्धि ......सूर्य क्या हम अंदर नहीं आ सकते है

हम भीपरबु के दर्शन करना चाहते है

सूर्य ........मैं जनता हूँ रिद्धि जी आप अपने पिता राजगुरु जी को देखना चाहती है किन्तु ये अभी संभव नहीं है इस वक़्त केवल मुझे वह जाने की इजाजत है

जब तक गुरुदेव या मैं बहार नहीं आते रानी पारी इस मंदिर में कोई भी परिवेश न करे ये आपके लिया आदेश है गुरुदेव का

रानी पारी ......उचित है पुत्र सूर्य आप जाइये

सूर्य वह से विदा ले मंदिर में परिवेश कर जाता है

जैसे सूर्य मंदिर में परिवेश करता है मंदिर के बहार एक पहरेदार उपस्थित हो जाता है जो बहुत हे भयानक लग रहा ठगा

सूर्य के अंदर जाते हे गुरुदेव की आवाज सूर्य के कानो में पड़ती है

सूर्य सवर्ण ( गोल्ड ) प्रतिमा के सामने जा कर गुरुदेव को परनाम करता है

सूर्य ......परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्र सूर्य आज मेरा प्रायश्चित पूर्ण हुआ

सूर्य .....अभी नहीं गुरुदेव अभी कुछ समय प्रतीक्षा कीजिये

सूर्य वह से उठ मंदिर में बने सरोवर में सनान कर स्वच्छ हो परबु की प्रतिमा को सावच जल से सावच कर पूजा करता है

पूजा समाप्त होने के बाद सूर्य गुरुदेव के समीप हे परबु नाम ले दिव्या यन्त्र का आह्वान करता है

जो अगले हे पल परबु दिव्या यन्त्र जमीं पे स्थापित हो जाता है

सूर्य परबु के यन्त्र को परनाम कर परबु यन्त्र में ध्यान अवस्था में बेथ

परबु का समरण करने लगता है

डेरी डेरी सूर्य के सरीर से बहुत तेज परकास फूटने लगता है

गुरुदेव ......पुत्र अपनी कुण्डलिनी चाकरी को जागृत करो

सूर्य ......जी गुरुदेव ........@@....

सूर्य के मुँह बंद था किन्तु पूरा mandir..@@..ke नाद से गूंजने लगा

डेरी डेरी सूर्य के कुण्डलिनी चक्र जागृत होने लगे

देखते हे देखते सूर्य के 7 कुण्डलिनी चक्र जागृत होने लगते है

मंदिर के अंदर एक नहीं हे दुनिया बन गई सूर्य मंदिर में नहीं बल्कि अंतरिक्ष में ध्यान कर रहा हो

सूर्य के सरीर से निकल रहे प्रकाश से गुरुदेव के सरीर पे चढ़ी सवर्ण परत पिंगल कर कर एक स्थान पे एकत्रित होने लगी

कुछ एक जानते बाद गुरुदेव उस सदर्न परत से मुख हो चुके थे उनका पूरा सरीर दूप में रखे सोने जैसे चमक रहा था

गुरुदेव .......धन्यवाद पुत्र सूर्य आज मेरा प्रायश्चित पूरा हुवा हो सके तो मुझे माफ कर देना पुत्र

गुरुदेव वह से उठ कर उस सवर्ण को एकत्रित कर परबु की प्रतिमा के सामने रख देते है

जो डेरी डेरी किसी अस्त्र का रूप दर्जन करने लगती है

गुरुदेव उसे लाल कपडे से पूरी तरह चख देते है

गुरुदेव ......पुत्र सूर्य अब तुम अपनी ध्यान में अपनी पूर्व जनम की यादो के साथ साथ अपनी सभी योध विद्या आवर सभी शक्तियों का प्रयोग कैसे करना जान जाओगे जब तक तुम अपनी सब शक्तियों आवर उनको उचित प्रयोग करना नहीं शिख जाओगे तुम छह कर भी ध्यान से बहार नहीं आ सकते

पूर्व जनम में तुमने अपनी सक्तियो को गलत प्रयोग किया जो की एक गुरु होने के नाते मुझे तुम्हे उचित मार्ग दिखाना चाइये था जिसमे मैं असफल रहा

मैंने कभी तुम्हे अपनी सक्तियो अपने दायित्वों के पार्टी सावधान नहीं किया तुम्हारे जनम के उद्देश्य से भटकने में सबसे बड़ा अपराधी मैं हे हूँ पुत्र

एक गुरु का जो दायित्वा था मैंने उसे हे बुला तुम्हे उचित अनुचित तुम्हारे इच्छा अनुसार करने दिया

जिसका मैं सालो से प्रायश्चित कर रहा था जो आज पूर्ण हुआ है आज अगर तुम नहीं आते तो मेरी आत्मा भी मेरा सरीर त्याग चुकी होती

गुरुदेव कुछ देर सूर्य के सामने बे थे रहे फिर पुरे मंदिर की साफ सफाई की अपने हाथो से न की जादू से

डेरी डेरी सूर्य रौशनी का पीछा करते हुए पता नहीं अपनी मस्तिक्ष के किस हिस्शे में खोता जाता रहा था

वही परतविलोक पे

कुछ आवर हे गठन घाट रही थी

किरण आवर सपना कोमल के साथ साथ कोई आवर भी गहरी नींद में जा चूका था ..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .......

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..........

दोस्तों नेक्स्ट अपडेट जो आएगा वो फ्लैशबैक से जुड़ा होगा तो सायद कल कोई अपडेट पोस्ट नहीं कर पाउँगा क्युकी मुझे एक बार फिर से 51 अपडेट पे नजर डालनी होगी

फ्लैशबैक सॉर्ट में रखते हुए जो जरुरी होगा स्टोरी में वही ऐड करूँगा

गुड नाईट फ्रेंड्स .....
 
अपडेट 121

सूर्य फर्स्ट लाइफ मेमोरी } फ्लैशबैक स्टार्ट .......

परबु के मंदिर में काफी समय तक पूजा चलती रही जिनिशा आवर सूर्य गुरुदेव के आज्ञा अनुसार पूजा करते रहे

कुछ 2 हर के बाद गुरुदेव ने पूजा पुराण होने को घोषणा की

गुरुदेव .......पुत्र सूर्य पुत्री जिनिशा पूजा संपन्न हुई परबु आप आवर आप से जुड़े सभी को सुख समृद्धि प्रदान करे

दादी ....गुरुदेव क्या अभी भी कोई आवर रसम बची है या कोई आवर पूजा तो बाकि नहीं है

गुरुदेव ......जी नहीं सभी रस्मे पूरी हुई आवर परबु की पूजा भी पूर्ण हो चुकी है

अब आप सब महल लौट चलिए मुझे सूर्य से एकांत में कुछ चर्चा करनी है

डेरी डेरी सभी परबु के मंदिर से महल लौट गया आवर वह से अपने अपने स्थान पे क्युकी जिनिशा आवर सूर्य की सगाई समारोह संपन्न हो चूका था

निमिषा आज बहुत खुश थी आवर ये ख़ुशी उसके मुख मंडल का तेज आवर भी बढ़ा रही थी

किरण .......जिमिषा भाबीजां आज आपको लइसेंस मिल हे गया खुश तो बहुत होंगी आप

जिनिशा .....है स्वीटी आज मैं बहुत खुश हूँ आज मेरी सबसे बड़ी इच्छा जो पूरी हो गई है

आवर भला मुझे क्या चाइये

सपना .........सच कहा मेरी बहन जीनु तुमने अब तो कोई दर नहीं है न उनको खो देने का

जिनिशा ......नहीं दीदी दर तो कृषि दिन ख़तम हो गया था जब उन्होंने मुझे दिल से सवीकार कर लिया था

बस जो कुछ थोड़ी बहुत आशंकाए थी उन्हें खो देने की वो भी अब ख़तम हो गई

गुरुदेव ........पुत्र सूर्य यहाँ मेरे सामने बैठो तुम

सूर्य गुरुदेव के कहने पे वही उनके सामने बेथ जाता है

गुरुदेव सूर्य के माथे पे हाथ रख मंत्रो का उच्चारण करने लगते है

कुछ देर बाद सूर्य के सर से एक लाल लाल रंग की बहुत हे हलकी ऊर्जा निकलती है जिसे गुरुदेव अपने हाथ में बंद कर लेते है

गुरुदेव ......पुत्र तुम अब महल लौट जाओ मैं तुमसे कुछ समय पश्चात भेट करता हूँ

सूर्य .....जी गुरुदेव जैसा आप कहो

सूर्य गुरुदेव को आवर परबु को परनाम कर महल की आवर निकल जाता है

पीछे से गुरुदेव सूर्य के मस्तिष्क से निकली ऊर्जा को एक बड़े से





डायमंड्स पे उस ऊर्जा को छोड़ता है

ऊर्जा डेरी डेरे उस डायमंड में सामने लगती है

जिस से वह डायमंड लाल डायमंड में बदल जाता है

गुरुदेव उसे एक बॉक्स में रख देते है





गुरुदेव ......रतन का कला पड़ना मतलब सूर्य अभी भी उस काली सकती से प्रभावित है

उस काली सकती से प्रभावित हो कर पहले हे सूर्य प्रिय का कौमार्य भांग कर एक पाप कर चूका है

क्या मुझे सूर्य को इस विषय में बताना चाइये

गुरुदेव एक जादुई बॉक्स परगट करते है आवर उस डायमंड बॉक्स को दूसरे बॉक्स में बंद कर देते है





गुरुदेव ......हे परबु कोई मार्ग दिखाए जिस से सूर्य को कोई आवर पाप का भागी बनने से रोका जा सके

गुरुदेव वही परबु प्रतिमा के सामने बेथ कर ध्यान करने लगते है

काफी समय बिट जाने के बाद भी गुरुदेव जब महल नहीं लूटे तो रानी पारी परबु मंदिर पहुंची

जहा गुरुदेव को ध्यान में लीं देख वह उनके समीप पहुंची किन्तु जब पास पहुंची तब उनका सरीर पीला पड़ने लगा था

तभी रानी पारी के सामने एक रौशनी होती है डेरी डेरी रौशनी एक रूप दर्जन करती है

वो रूप कोई आवर नहीं गुरुदेव का हे रूप था

रानी पारी .......गुरुदेव ये क्या हो रहा है आपको आवर आपने अपने सरीर का त्याग क्यों किया है

गुरुदेव ........रानी पारी हमें परबु से जो दायित्व की प्राप्ति हुई थी हम उस में असफल रहे इस लिया ये हमारा दंड भी है आवर प्रायश्चित भी है

रानी पारी .....नहीं गुरुदेव ये नहीं हो सकता आप इस तरह अपने दायित्वों से विमुख नहीं हो सकते है

गुरुदेव .....संत हो जाये रानी पारी हम अपने दायित्व से विमुख नहीं हो सकते न हे अपना सरीर त्याग सकते है हमारी बात ध्यान से सुनिए आवर आवर किसी से भी यहाँ जो कुछ भी बाते होंगी उनकी चर्चा न कीजियेगा जब तक हम आपसे सम्पर्क न करे

रानी पारी ......जी गुरुदेव हम आपकी आज्ञा को परबु का आदेश मान पालन करेंगे

गुरुदेव ........अभी हमें पता नहीं है की हम कब तक इस अवस्था में ध्यान में लीं रहेंगे अब आपको हे परीलोक का संपूर्ण दायित्व संभालना होगा

रानी पारी .....ऐसा न कहे गुरुदेव हम अकेले ये जिम्मेदारी नहीं संभल सकते है

गुरुदेव ......हम जानते है कुछ समय बाद हमारी पुत्री रिद्धि का तप पूर्ण हो जायेगा तो वो अपने पिता की जिम्मेदारी संभल लेगी तब तक जब तक हम अपना दंड पूर्ण नहीं कर लेते

रानी पारी. .....किन्तु हम रिद्धि पुत्री को आपके विषय में कैसे बताएंगे

गुरुदेव .....उसकी कोई आवशयकता नहीं है समय आने पे हम सवयं रिद्धि पुत्री से बात करेंगे

रानी पारी. ......किन्तु बाकि सभी को तो आपके विषय में जबाब देना होगा न गुरुदेव

गुरुदेव .....हमारी बात ध्यान से सुनिए जिनलोक में किसी अन्य गुरु की स्थापना कीजिये हमारे विषय में सब से कह दीजिये की हम चिर ध्यान में लीं है जिसकी कोई अवधि नहीं है की हम कब ध्याकर से बहार आएंगे

रानी पारी ......जी गुरुदेव जैसी आपकी आज्ञा

गुरुदेव .......आपको एक आवर कार्य करना जो की बहुत हे महत्वपूर्ण है

रानी पारी ........आदेश करे गुरुदेव

गुरुदेव ...........अब जो हम आपको बॉटने जा रहे है उसके विषय में किसी को ज्ञात न हो आपके सिवाय न ज किंग को नहीं प्रेतराज को

रानी पारी .....हम आपको वचन देते है गुरुदेव

गुरुदेव ........कुछ समय बाद सूर्य की मरतु का योग बन रहा है जिसको टाला नहीं जा सकता है रानी पारी जब तक सूर्य जिनलोक में रहेगा वो सुरक्षित रहेगा

रानी पारी .....नहीं गुरुदेव ये कैसे संभव है नहीं ऐसा नहीं हो सकता है आपने हे तो कहा था की सूर्य परबु का अंश है

गुरुदेव ........परबु का अंश है तभी तो उसके पाप का दंड भी उसे इतना बड़ा मिल रहा है सूर्य के अंदर छुपी काली सकती का अंश दिन बा दिन सूर्य को पाप करने के लिया उकसायेगा यही वजह है की सूर्य के निकट भविष्य में नियति ने ऐसा योग बनाया है जिस से सूर्य बच नहीं सकता है

रानी पारी .....ये उचित नहीं है गुरुदेव आवर आप किस पाप की बात कर रहे है ऐसा कोनसा पाप सूर्य ने कर दिया जो उसको उस पाप का इतना बड़ा दंड मिलने जा रहा है

तभी वो डायमंड बॉक्स ुद्धता हुआ रानी पारी के सामने आ जाता है

गुरुदेव ....इस बॉक्स में रखे उस रतन में छुपा है वो पाप

दृश्य

रानी पारी उस बॉक्स को खोल कर उस डायमंड को चुटी है

उनके छूटे हे उनके आँखे बंद हो जाती है

आवर उनके बंद आँखों के सामने सूर्य द्वारा प्रिय का कौमार्य भांग किये जाने वाला दृश्य चलने लगता है

रानी पारी .......ये क्या है गुरुदेव इसमें जो कुछ भी दृश्य है उसमे ऐसा क्या है जिसका सूर्य को इतना बड़ा दंड मिलने जा रहा है

गुरुदेव .....रानी पारी आपने दृश्य तो देख किन्तु प्रिय के अंदर छुपी उस काली सकती को नहीं देखा जो प्रिय के सरीर में थी

रानी पारी एक बार फिर से देखती है तब उन्हें प्रिय के चेहरे में किसी अन्य स्त्री का चेहरा नजर आता है जो की देखने से किसी राक्षशी जैसे लग रही थी

रानी पारी ......ये कोण है गुरुदेव जिसके चलते सूर्य द्वारा ये पाप हुआ

गुरुदेव .......ये चांडाल द्वारा भेजी गई राक्षशो मोहिनी है जिसने प्रिय आवर सूर्य को सम्मोहित कर ये पाप करम करवाया यही करम दोनों की सहमति से हुआ होता तो इसका दोष किसी को नहीं लगता किन्तु जिस वक़्त ये करम हुआ उस वक़्त प्रिय पूर्ण रूप से सम्मोहित थी

रानी पारी .....किन्तु सूर्य तो खुद को रोक सकता था उसके पास तो जिनलोक आवर प्रेतलोक की सक्रिय थी न गुरुदेव

गुरुदेव .....यही तो मेरी असफलता है रानी पारी सूर्य को मैंने सकतिया तो प्रदान की किन्तु उनका प्रयोग करना नहीं शिखाया समय रहते सूर्य के पास सक्रिय होते हुए भी वो मोहिनी के सम्मोहन के सामने कमजोर हो गया

आवर मोहिनी के हवश में पद कर ये पाप सूर्य के द्वारा हो गया

चांडाल ने जो मायाजाल रचा था उसमे वह सफल हुआ आवर मैं पराजित हो गया

रानी पारी ......क्या इस पाप से मुक्त होने का कोई मार्ग नहीं है सूर्य के लिया गुरुदेव

गुरुदेव .....नहीं रानी पारी भले हे सूर्य से ये सब अनजाने में हुआ प्रिय आवर सूर्य को तो ज्ञात भी नहीं है की उन दोनों ने क्या किया है पैर इसका दंड सूर्य के साथ साथ उस से जुड़े सभी को मिलेगा

रानी पारी .......नहीं गुरुदेव ऐसा नहीं होना चाइये आप हे कुछ कर सकते है गुरुदेव

गुरुदेव .......आप या मैं अब कोई कुछ नहीं कर सकता है

जब तक हो सके सूर्य को यही पर रोकने की कोशिश करो ताकि वो सुरक्षित रह सके

अगर सूर्य जिनलोक से बहार निकला तो चांडाल उसपे प्रहार जरूर करेगा आवर सूर्य अपनी सुरक्षा नहीं कर पायेगा क्युकी नियति ने सूर्य के भाग्य में अकाल मृत्यु लिख दी है

रानी पारी .....गुरुदेव हम पूर्ण कोशिश करेंगे की सूर्य आवर उसके परिवार को सुरक्षित रख सके

गुरुदेव .........अब आप जाइये सब आपकी प्रतीक्षा कर रहे है

रानी पारी .........परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ........कल्याण हो रानी पारी

रानी पारी गुरुदेव से आज्ञा ले जिनलोक महल लौट गई

जिनिशा ......क्या बात है सखी पारिजात मैं देख रही हूँ तुम कुछ परेशान हो

पारिजात .......क्या बताये सखी तुम्हे कुछ समय से बार बार हमें कुछ अजीब से दृश्य दिखाई देते है जिन्हे हम समाज नहीं प् रहे है

जिनिशा .......ऐसे कोनसे दृश्य है जिन्हे देख मेरी सखी परेशान हो गई

पारिजात ........तुम तो जानती हो सखी हम मर्दजात से नफरत करते है

जिनिशा .....हम जानते है आवर इसकी वजह भी जानते की क्यों आप मर्दजात से नफरत करती है ये सब उस चांडाल चंद्रेश की वजह से हे हो रहा है

पारिजात .......पैर अब बात कुछ आवर है पता नहीं क्यों पिछले कुछ समय से हमें किसी इंसान का चेहरा नजर आता है जिसने देख हम विचलित हो जाते है

जिनिशा ......कही उस चेहरे से तुम्हे प्रेम तो नहीं हो गया कही वो आपके सपना का शहजादा तो नहीं है

पारिजात .....हमें नहीं पता पैर उनका अक्ष तुम्हारे प्रेमी सूर्य जैसा है हम उनकी तरफ न चाहते हुए भी खींचे चले जाते है हमें माफ करना सखी

जिनिशा .........माफी न मानगो सखी क्या पता वही आपके जीवनसाथी हो हहहहए

पारिजात ........परिहास न करो सखी है जो कह रहे सच कह रहे है

जिनिशा .....हम परिशेष नहीं कर रही है सखी आप सखी होने के साथ साथ हमारी गुरु बहन भी है क्युकी हम दोनों ने गुरुदेव से शिक्षा ली है

अगर सरताज आपके जीवनसाथी बनते भी है तो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं दोनों बहने साथ में रहेंगी उनसे विवाह करके

सपना अंदर आते हुआ

सपना ......किसके विवश की बाते हो रही है जीनु

जिनिशा ......आइये दीदी किसी की नहीं हम अपनी सखी पारिजात से बात कर रहे थे दीदी सरताज कहा है वो दिखाई नहीं दे रहे है

सपना .....इतनी भी क्या जल्दी है रात में उनके साथ हे रुक जाना जयादा हे जल्दी है तो

जिनिशा ......ऐसा कुछ नहीं है दीदी वो वही गुरुदेव के साथ थे न गुरुदेव आवर सरताज लौट आये है

सपना .......है वो किरण मनीषा आवर जीनत के साथ है उद्यान में

जिनिशा .....चलिए फिर हम भी वही चलते है ..........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
 
अपडेट ........122

जिनिशा ......आइये दीदी किसी की नहीं हम अपनी सखी पारिजात से बात कर रहे थे दीदी सरताज कहा है वो दिखाई नहीं दे रहे है

सपना .....इतनी भी क्या जल्दी है रात में उनके साथ हे रुक जाना जयादा हे जल्दी है तो

जिनिशा ......ऐसा कुछ नहीं है दीदी वो वही गुरुदेव के साथ थे न गुरुदेव आवर सरताज लौट आये है

सपना .......है वो किरण मनीषा आवर जीनत के साथ है उद्यान में

जिनिशा .....चलिए फिर हम भी वही चलते है ..........

अब आगे ........

श्री लंका ...........चांडाल चंद्रेश पटल भैरवी के सामने ध्यान में लीं था तभी वह हस्ते हुए ध्यान से बहार आता है

चांडाल ......जय माँ पटल भैरवी जय माँ पटल भैरवी

राजगुरु देखा मेरा मायाजाल मुझे परीलोक से बेधकाल करने का परिणाम अभी तो केवल सुरुवात है आवर तुम अभी से विचलित हो उठे

चांडाल वही माँ पटल भैरवी के सामने बेथ जमीं पे कुछ मंत्री उच्चारण करने लगता है

कुछ हे देर में चांडाल के सामने जमीं पे किसी की कुंडली बनने लगती है

जिसे देख चांडाल बहुत खुश होता है

काफी वक़्त तक चांडाल उस कुंडली को देख उँगलियों पे कोई गणना ( गिनती ) जैसा कुछ करता है

आवर साथ हे साथ हाथ के इसारे से कुंडली में कुछ बदलाव करने लगता है

चांडाल ......हाहाहा सूर्य मेरे षड्यंत्र से देखो तुम कहा से कहा पहुंच गए

अब तुम्हारे हाथो से केवल एक पाप करम करवाना है फिर तुम्हारी मृत्यु निश्चित है फिर तुम्हारी मृत्यु होने से कोई नहीं ताल सकता है

चांडाल के हाथ के इसारे से उस कुंडली का प्रतिबिम्ब हवा में बन गया





चांडाल ..........मोहिनी मेरे सामने प्रकार हो मुझे तुम्हारी आव्सय्कता है

तभी मोहिनी चांडाल के सामने प्रकट होती है

मोहिनी .........कहो मुझे क्यों याद किया है चांडाल

चांडाल .....मुझे तुम्हारी शाहयता चाइये मुझे असुरलोक का द्वार ढूंढ़ने आवर खोलने में तुम्हारी सहायता चाइये

मोहिनी .....जब तक तुम मुझे अपने बंधन से मुक्त नहीं करते मैं तुम्हारी कोई सहायता नहीं करुँगी

चांडाल .......मूरख आसुरी आत्मा तुम भूल रही हो तुम एक आत्मा आवर आवर वो भी मेरी गुलाम आत्मा

चांडाल अपना हाथ अपने माथे पे रख किसी मंत्र का उच्चारण करता है आवर कुछ लाल रेट जैसा कुछ मोहिनी की आत्मा पे फेंकता है

जैसे हे मोहिनी पे वो लाल रेट गिरती है उसके चारो तरफ आग की लपटे निकलने लगती है





सुरु में तो मोहिनी को कुछ नहीं हुआ पैर कुछ हे देर में मोहिनी की चीखे गूंजने लगी

मोहिनी ........अह्ह्ह्हह अह्ह्ह चांडाल मुझे इस अग्नि के कैद से मुक्त करो

तुम जो कहोगे मैं करुँगी मुझे इस पीड़ा से मुक्त करो चांडाल

चांडाल ......चांडाल नहीं मालिक चांडाल कहो

मोहिनी ......अह्ह्ह मालिक मालिक चांडाल मुझे माफ कर दे मुझे इस अग्नि के तप से मुक्त करो मैं आपकी गुलाम हूँ

चांडाल ........दुबारा मुझे इंकार किया तो तुम्हारी आत्मा को भी जला दूंगा मोहिनी

मोहिनी .......मुझे माफ कर दो मालिक चांडाल

चांडाल मोहिनी की कल्टी हुई आत्मा को अग्नि से मुक्त कर देता है

चांडाल .....अब मुझे बताओ इस महल में वो स्थान कहा है जहा असुर लोक में परिवेश करने का द्वार है

आवर उसे कैसे खोला जा सकता है

मोहिनी ........इस महल के दक्षिणी दिशा में स्थित एक कक्ष में वो द्वार है किन्तु उसे खोला कैसे जाता है उसके विषय में मुझे कोई ज्ञान नहीं है

चांडाल .....मुझे वह ले कर चलो

मोहिनी आगे आगे चांडाल उसके पीछे पीछे चलते हुए दक्षिणी दिशा में उस कक्ष में सामने पहुंचे





चांडाल .......क्या यही वो द्वार है जिस में परिवेश कर असुरलोक पंहुचा जा सकता है

मोहिनी ......जी नहीं मालिक इसके अंदर है वो द्वार जिस से असुर लोक पंहुचा जा सकता है

chandal.....kholo इसको

मोहिनी .....मैं एक आत्मा हूँ मैं इसे नहीं खोल सकती हूँ इसे आपको हे खोलना होगा

चांडाल आगे भाड़ उस दरवाजे को जोर लगा कर खोलने की कोशिश करता है किन्तु वह नहीं खुलता

चांडाल ......ये खुल क्यों नहीं रहा है कही तुम मेरे साथ कोई चाल तो नहीं कर रही हो

मोहिनी .....नहीं मैं कोई चाल नहीं कर रही हूँ इसे मंत्रो सकती से हे खोला जा सकता है आपके पास जो रक्ष किताब है उस में इसको खोलने का मंत्र जरूर होगा

चांडाल उस किताब का आह्वान करता है





अगले हे पल बुक चांडाल के हाथो में थे

कुछ देर चांडाल बूब में से उस मंत्र का पता करता जिस से ये द्वार खोला जा सके

कुछ हे देर में चांडाल को वो मंत्र मिल जाता है जिसका उच्चारण करने पे वह द्वार खुल जाता है

चांडाल ........चलो मेरे साथ भीतर

मोहिनी चांडाल के पीछे पीछे उस कक्ष में परिवेश कर जाती है





चांडाल जब कक्ष के अंदर जाता है तो बहार से छोटा सा दिखने वाला कक्ष अंदर से किसी विशाल गुफा जैसा था

चांडाल ....अद्भुत दृश्य है ये तो

मोहिनी ......यही द्वार है असुर लोक में परिवेश करने के लिया

चांडाल आगे बढ़ उस द्वार को बहुत हे ध्यान से देखता है

फिर उस बुक से उस द्वार को खोलने का मंत्र ढूंढ़ने लगता है काफी कोशिशों के बाद भी उसे निराशा हे हाथ लगती है

चांडाल ......इस बुक में तो इस द्वार को कैसे खोला जा सकता इसके बारे में कुछ भी नहीं लिखा है

मोहिनी ......इस द्वार को कैसे खोला जा सकता है इस विषय में मैंने जो सुना है उसके अनुसार कोई असुर हे खोल सकता है वो भी उच्च असुर कुल का खून हो

चांडाल ......ये क्या बकवाश है अब परतविलोक पे असुर कहा से ले कर औ इसे खोलने के लिया वो भी उच्च असुर रकत

मोहिनी .......इसका मार्ग तो अब आपको हे ढूंढ़ना होगा माँ पटल भैरवी हे आपकी कोई सहायता कर सकती है

चांडाल ......चलो फिर तुम जाओ यहाँ से

मोहिनी चांडाल का आदेश पते हे वह से गायब हो जाती है .....

जिनलोक .....

इस वक़्त सूर्य सपना के साथ में सोया हुआ था दूसरी तरफ जिनिशा सो रही थी तभी सूर्य को कुछ दृश्य दिखाई देते है साणे जिसने देख सूर्य की नींद खुल जाती है

सूर्य का पूरा सरीर पसीने से भीग चूका था

सूर्य वह से उठ कर कक्ष से बहार चला जाता है

सूर्य .....ये कैसा स्वपन था कितना भयानक दृश्य था वो किसका था वो डरावना चेहरा या ये केवल मेरा भरम था या भविष्य में होने वाली किसी घटना का संकेत था ये

कुछ देर सूर्य बहार परेशां सा घूमता रहता है फिर पता नहीं सूर्य को क्या इच्छा होती है की वह कामिनी चची की कक्ष की आवर भाड़ जाता है जिनलोक की मदिरा अपने साथ ले

सूर्य जब कक्ष में पंहुचा तो वह काव्य कामिनी काम्य तीनो सोये हुए थे

सूर्य .....यहाँ तो काम्य आवर काव्य भी है

सूर्य अपनी सकती का प्रयोग कर काव्य आवर काम्य को गहरी नींद में सुला देता है आवर एक दूसरा बीएड भी लगा देता है

सूर्य .........चची उठो चची उठो न

कामिनी आँखे खोल सूर्य को देख चौंक जाती है

कामिनी ......क्या हुआ बीटा तुम यहाँ कैसे वो भी इतनी रात को

सूर्य .....नींद नहीं आ रही थी तो आपके पास चला आया

कामिनी .......ठीक है बैठो यहाँ

सूर्य .....यहाँ काव्य आवर काम्य सो रही है दूसरे बीएड पे चलो

कामिनी ......ये दूसरा बीएड खा से आ गया यहाँ

सूर्य .........आप अभी जिनलोक में है चची भूल गई क्या

सूर्य कामिनी का हाथ पकड़ उन्हें उठता आवर दूसरे बीएड पे ले कर जाता है

सूर्य .....चची क्या मेरे साथ मदिरा पीना चाहोगी

कामिनी ......इतनी रात को कोण सरब पिता है

सूर्य .......ठीक है फिर मैं हे पिता हूँ

सूर्य गटागट 2,3 बड़े बड़े पग लगा लेता है

कामिनी का भी मदिरा के स्मेल से पिने का दिल करने लगा

कामिनी .......मुझे भी पीना है

सूर्य कामिनी को भी दो पग पीला देता है

सूर्य ......आपको पता है चची आप बहुत खूबसूरत है

कामिनी .......इस लिया हे तुमने कल रात मेरी फाड़ कर रख दी

सूर्य .....वो तो मैं आज भी फाड़ूंगा आपकी

इतना बोल सूर्य कामिनी के होंटो पे टूट पड़ता है

देखते हे देखते दोनों पुरे नंगे हो एक दूसरे के अंगो को चाटने चूसने लगते है

कामिनी .......आए सूर्य कल रात मेरी सबसे अच्छी रात थी एक बार फिर अपनी कमीनी को खुश कर दे अब तेरा हे सहारा है

सूर्य अपने लैंड को मदिरा में भिगो कर कामिनी के छूट पे सेट कर जतका मर देता है

कामिनी के चिक निकल गई सूर्य ने फ़ौरन कामिनी के मुँह को अपने मुँह से बंद कर जटके मरने लगता है

सूर्य तब तक कामिनी को अलग अलग आसान में चुदाई करता है जब तक कामिनी की छूट अपने गरम वीर्य से भर नहीं देता है

कामिनी .....उमंमाहा सूर्य तुम्हारे आते हे मेरी जिंदगी में खुशियों फिर से लौट आई

सूर्य ......कहो तो एक राउंड आवर हो जाये कमीनी

कामिनी ......नहीं अब आवर नहीं देखो मेरी पूरी छूट तुम्हारे घोड़े ने गायक कर दी है

सूर्य कामिनी को छूट को देखता जो की कुछ कुछ सूज चुकी थी सूर्य के हाथ लगते वह ठीक हो गई

कामिनी ......ये कैसे किया ओह्ह मैं तो भूल गई तुम्हारे पास भी तो सकतिया है

सूर्य .......अब आप काम्य काव्य के पास सो जाइये मैं सुबह मिलता हूँ

कामिनी अपनी निघ्त्य दाल सूर्य को छोटा सा किश कर दूसरे बीएड जिसपे काम्य काव्य सोई हुई थी उसपे जा कर लेट जाती है

सूर्य वह से निकल कर टहलते हुए अपने रूम में आ जाता है

जहा सपना आवर निमिषा दोनों सोये हुए थे एक दूसरे को बहो में भरे हुए

सूर्य निमिषा के पीछा जा कर निमिषा सही सपना को बहो में भर का सो जाता है ...........

अपडेट पोस्ट फ्रेंड्स ........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स..........

अपडेट थोड़ा छोटा है उसके लिया सॉरी फ्रेंड्स .....
 
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