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मेनका जी ....... ये क्या किया मुझे पूरा गन्दा कर दिया तुमने
सूर्य ..........आपने हे तो बहार निकला न मई तो आपकी मटकी भरने वाला था
मेनका जी ....... आवर अगर उस से मैं प्रेग्नेंट हो जाती तो क्या
सूर्य ....... आपने वो रास्ता पहले हे बंद कर रहा है बुआ सा
मैं जनता हूँ प्रीति के समय जो प्रॉब्लम हुई थी उस से आपकी फूफा जी ने नसबंदी करवा दी थी ताकि फिर से कोई बचा न हो आवर न आपको फिर से वो सब सहना पड़े अब जाइये आवर फ्रेश हो जाएये
मेनका जी ...... आवर तुम तुम्हारा क्या
सूर्य ............ मैं अपने रूम में फ्रेश हो जाऊंगा उम्म्म्महा
सूर्य अपने कपडे पहन वह से निचे अपने रूम की आवर निकल जाता है ..............
अब आगे ............
सूर्य साम को सक्तिपुर हवेली जा कर वह गायत्री जी आवर गीता जी से मिल का अजय से हाल चल जान. कर अभी हवेली लौटा हे था की उसके पापा भी उसके पीछे पीछे हवेली पहहचे थे
सूर्य ...... Hello पापा कैसे है आप
सूर्य शिव से गले लग कर मिलता है जिस से उन्हें भी ख़ुशी होती है
शिव ...... ी ऍम फाइन बीटा एंड यू
सूर्य ....... अच्छा हूँ पापा आवर काम कैसा चल रहा है अपना
शिव ....... ये तो मुझे तुमसे पूछना चाइये बीटा की काम कैसा चल रहा है
सूर्य ...... एक डैम बढ़िया पापा उम्मीद से पहले हे काम पूरा हो जायेगा
शिव ....... अच्छी बात है बीटा ये तो जल्दी हे मैं अपना बिज़नेस भी दिल्ली हे सिफत कर लूंगा कल u.s.a जा रहा हूँ तुम्हारे हॉस्पिटल को देखने
सूर्य ....... कुछ प्रॉब्लम हुई है क्या पापा
शिव ....... नहीं बीटा सब अच्छा चल रहा है कुछ आवर काम भी था जिसके लिया वह जाना पद रहा है तो सोचा हॉस्पिटल का काम भी एक बार देख लेता हूँ
सूर्य ........ Ok पापा जैसा आप ठीक संजो
शिव ........ आवर है बीटा दिल्ली जाने से पहले मुझसे मिल कर जाना
सूर्य ....... वो पापा मुझे आवर स्वीटी को किसी जरुरी काम से रात में हे परीलोक निकलना होगा सायद कुछ टाइम भी लग सकता है
शिव ....... Ok फिर डिनर के बाद बात करता हूँ या फिर तुम चले जाना जब भी एक दो दिन में तुम्हे टाइम मिले u.s.a
सूर्य ....... मेरा जाना जरुरी है क्या पापा
शिव ......... है बीटा वो दरशल तुम्हारे 10 बर्थडे पे मैंने तुम्हारी माँ को बिना बताये कुछ इन्वेस्टमेंट की थी कुछ कंपनी में तब तो उनकी मार्किट वेलु काम थी पैर अभी हाल फ़िलहाल में बहुत अच्छी पोजीशन पे है मैं तो भूल भी चूका था की मैंने इन्वेस्ट किया ऐसा कुछ भी वो तो आज किसी क्लाइंट ने कॉल कर शेयर खरीदने की बात की तब जा कर मुझे पता चला
सूर्य ....... ये तो बहुत अच्छी बात है पापा तो आपने क्या सोचा है शेयर सेल्ल करने है या कुछ आवर
शिव ........ अभी कुछ सोचा नहीं है बीटा वह जा कर शेरे देखता हूँ उसके बाद हे कुछ फैसला करूंगा
सूर्य ....... आपने जहा जहा इन्वेस्ट किया है उसकी जानकारी देना मुझे मैं देखता हूँ की शेरे बेचने चाइये या नहीं आप जा कर फ्रेश हो जाइये मैं जरा बाउजी को देखता हूँ
सूर्य वह से अपने दादा जी की रूम को आवर भाड़ जाता है थोड़ा अँधेरा हो चूका था इस लिया दादा जी इस वक़्त अपने रूम में हे थे
जैसे हे सूर्य रूम की तरफ बढ़ा किसी ने बड़ी तेजी से सूर्य को अंदर की आवर खींच लिया
सूर्य कुछ बोलता उस से पहले हे किसी ने अपने तपते हुए होंठ सूर्य के होंटो से जोड़ दिए
सूर्य मेर्री जी का चेहरा देख बिना किसी विरोध के उनके होंटो का राश पिने लगता है
मेर्री जी सूर्य का हाथ थम अपनी इलास्टिक वाली लेगी में अपनी पेंटी में दाल देती है
सूर्य जैसे हे अपने हाथ से मेर्री जी की क्लीन सेव योनि को टटोलते हुए फुल्ले हुए होंटो के बिच अपनी बड़ी वाली ऊँगली डालता है कच से किसी तरल में भीगते हुए बिना किसी अवरोध के सूर्य की ऊँगली मेर्री जी के कामराश से भीगी उनकी गरम नरम लचीली उमेश भरी गुफा में प्रवेश कर जाती है
सूर्य दूसरे हाथ से मेर्री जी मसल खुली को मसलते हुए उनके होंटो का राषपन करते हुए ऊँगली से हे मेर्री जी को चुदाई करने लगता है खड़े खड़े कुछ हे देर में मेर्री जी हफ्ते हुए सूर्य के होंटो से अलग हो सूर्य की हथेली को दबाते हुए झड़ने लगती है सूर्य की हथेली पूरी तरह से मेर्री जी के योनि राष से भीग चुकी थी
मेर्री जी .......... देखो तुम्हारी वजह से क्या हालत हो गयी है मेरी
सूर्य ....... अब आपको सदी कर लेनी चाइये ममी जी कब तक ऊँगली से खुद को संत करेंगी
मेरी जी सूर्य की पेण्ट के ऊपर से हे सूर्य का अर्श उत्तेजित मुसल थम कर दबा देती है
सूर्य ........ क्या करती हो ममी जी अभी ये जाग गया तो आपको हे भरी पड़ें वाला है है समाजी आप
मेर्री जी ........ मुझे कुछ नहीं पता तुम क्या करते हो या क्या नहीं मुझे आज रात ये चाइये
सूर्य ....... नाईट में तो मैं परीलोक जा रहा हूँ स्वीटी के साथ
मेर्री जी ........फिर मेरा क्या होगा
सूर्य .....एक काम करना आप दीनार के कुछ देर बाद छठ वाले रूम में चली आना जाने से पहले आपकी गर्मी भी निकल दूंगा उम्म्म्मः ठीक है
मेर्री जी ....... उम्म्म्मः ok मैं पहुंचने जाउंगी
सूर्य ....... आवर है अब आपको सदी कर लेनी चाइये मैं ये इस लिया नहीं कह रहा हम की आपसे मन भर गया है या पीछा छुड़ाना चाहता हूँ बल्कि इस लिया की एक पड़ाव पे इंसान को इस रिश्ते में बंद जाना चाइये बाकि जो आपकी इच्छा होगी वही होगा कोई आपको फाॅर्स नहीं करेगा जब तक आपकी इच्छा न हो
मेर्री जी ....... ठीक है पैर याद है न सदी के बाद भी तुम मुझसे प्यार करते रहोगे
सूर्य ...... ुम्मम्हा बिलकुल ये भी कोई कहने की बात है अभी आपकी इसका भी तो मज़ा लेना है हाहाहा
मेर्री जी ....... Ok मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है पैर सदी के बाद वैसे मुझे भी यहाँ तरय करना है
रेखा जी ...... तुम दोनों उदार क्या कर रहे हो डिनर नहीं करना क्या
सूर्य ...... कुछ नहीं बड़ी मम्मी मेर्री जी से कुछ जरुरी बात कर रहा था
रेखा जी ...... जो भी जरुरी बात करनी है वो बाद में कर लेना चलो डिनर करो आ कर सब वेट कर रहे है
सूर्य रेखा जी मेर्री जी तीनो हवेली के भीतर चल देते है
मेर्री जी अपने रूम में जा कर अपनी योनि को साफ़ करती है आवर दूसरी पेंटी पहन कर आती है
वही सूर्य हाथ मुँह दो कर सबके साथ डिनर करने लगता है
सभी बाटे करते हुए डिनर फिनिश करते है
शिव ....... बीटा जरा रूम में आना कुछ बात करनी है
सूर्य ....... आप चलिए पापा मैं आता हूँ कुछ देर में
शिव के जाने के बाद शालिनी जी सूर्य को देखती है
सूर्य ...... वो पापा को कुछ बात करनी थी माँ u.s.a वाले प्रोजेक्ट आवर किसी आवर बारे में
शालिनी जी ....... हम्म्म रात को कब जाने वाले हो तुम लोग परीलोक
सूर्य ....... करीब 11 बजे माँ कुछ काम था क्या
शालिनी जी ...... नहीं कुछ काम नहीं था स्वीटी बीटा तुम कपडे चेंज कर मेरे रूम में आना
किरण ...... जी माँ
रेखा जी ....... वैसे बीटा वह जा क्यों रहे हो साम को हे तो वह से लौटे थे
सूर्य ...... वो बड़ी मम्मी गुरुदेव ने आने का आदेश दिया है मुझे आवर स्वीटी को जरुरी कार्य है तो जाना पड़ेगा
विजय जी ...... वापिस कब आओगे बीटा
सूर्य ......सायद कल सुबह या फिर कुछ टाइम भी लग सकता है फूफा सा
विजय जी .... .... ठीक है बीटा आवर है अपना आवर स्वीटी का ख्याल रखना बीटा मेरा डिनर हो गया है वैसे तुम्हारी बुआ सा को क्या हुआ है जो डिनर पे भी नहीं आई बहार
शालिनी जी आवर किरण की नजर सूर्य पे जा तिकी
सूर्य ....... वो उनको फीवर आया है फुगा जी सुबह तक ठीक हो जाएँगी
विजय जी ....... उसने दवा ली की नहीं चलो मैं हे देखता हूँ
सूर्य ....... जी फूफा जी मेरा भी हो गया
सूर्य जल्दी से शालिनी जी आवर किरण की नजरो से पीछा चढ़ा अपने पापा के रूम में चला जाता है
सूर्य शिव से जानकारी ले कुछ टाइम लेपटॉप पे उन 3 कम्पनीज की जानकारी निकलने लगता है
करीब 15 ,20 मिनट्स सूर्य अपने पापा के साथ लेपटॉप पे दिखते हुए उनसे बात करता
शिव ....... ठीक है बेताब तुम जाओ बाकि मैं देख लूंगा
सूर्य ...... Ok पापा गुड नाईट
शिव ........गुड नाईट बीटा जा कर आराम करो
सूर्य अपने रूम की आवर निकल जाता है जहा किरण ड्रेस चेंगे कर शालिनी जी के पास हे जाने वाली थी
किरण ....... आप आ गए कुंवर जी वो मैं
सूर्य किरण को उठा साथ ले बीएड पे लेट जाता है आवर उसकी निघ्त्य कूल्हों से उठा माध्यम आकर के कूल्हों को मसलने लगता है
किरण ........ ये आप क्या कर रहे है मुझे माँ के पास जाना है आप मेर्री जी के पास जाइये
सूर्य ........ जनता हूँ बस कुछ देर ऐसे हे मेरा पास रहो बस
किरण सूर्य की आँखों में देखते हुए खुद से हे सूर्य के होंटो से अपने कोमल होंठ जोड़ देती है
कुछ देर दोनों एक दूसरे के मुखराश चूसने के बाद अलग होते है
किरण को अपनी योनि आवर नाभि पे सूर्य का काम दंड अकड़ता हुआ मेमसुश होता है
किरण ...... इसको थोड़ा कण्ट्रोल में रखा कीजिये बुआ सा की हालत ख़राब करने के बाद भी इसे चैन नहीं आया क्या
सूर्य ........ इसमें मेरी कोई गलती नहीं बुआ ने हे पहल की थी तो मैं क्या करता
किरण ........ उम्म्म्मः अब मैं चलती हम मेर्री जी ऊपर पहुंचने गई है थोड़ा जल्दी करना हमें परीलोक भी जाना है
सूर्य ......ह्म्म्मम्म ok मैं चलता हूँ जाते जाते सूर्य किरण के घोष उभारो को सायला देता और बहार की आवर निकल गया
किरण ....... ये कभी नहीं सुधरने वाले पैर इनका इस तरह इन्हें सालाना अच्छा भी लगता है अब फिर से पेंटी बदलनी होगी मुझे
सूर्य जब छठ पे पहुंचा तो उसे मेर्री जी कही नजर नहीं आई तो वह सीधा रूम की आवर भाड़ गया
रूम में पंहुचा तो मेर्री जी शार्ट निघ्त्य में कड़ी खुली खिड़की से बहार देख रही ठु सूर्य अपना ट्राउजर आवर t-shirts निकल चुके से मेर्री जी के पीछे पहुंचा
मेर्री जी ...... आ गए तुम सूर्य
सूर्य मेर्री जी को पीछे स्व हे अपनी बहो में जकड लेता है

सूर्य ........ उम्मम्मम नीस परफ्यूम ममी जी अब आप इतना याद करोगी तो आना तो पड़ेगा हे न
सूर्य बात करते करते मेर्री जी की गर्दन पे चुम्बन करते हुए उनकी 36 की गोश्त से भरपूर चूचियों को थम उन्हें सहलाने लगता है
मेर्री जी ............ उम्म्म्मः पीछे कुछ चूब रहा है
मेर्री जी अपना हाथ बढ़ा सूर्य का लैंड अंडरवियर के ऊपर से हे पकड़ कूल्हों की लकीर पे फिरने लगती है

सूर्य मेर्री जी को अपनी तरफ पलट उनकी निघ्त्य उनके गले निकल उन्हें नंगी कर किश करने लगता है
सूर्य ........ उम्मम्मम ज्यादा टाइम नहीं है हमारे पास
मेर्री जी ....... कभी तो प्यार से टाइम निकल कर वक़्त गुजरा करो
सूर्य मेर्री जी को लिए पास में पड़े सोफे पे आ लेता मेर्री जी सूर्य की अंडरवियर निकल सूर्य के टैंगो के बिच बेथुने लगती है तो सूर्य अपने ऊपर खींच कर 69 पोजीशन पे ले आता है
सूर्य ...... इस से एक साथ जल्दी हे दोनों त्यार हो जायेंगे
मेर्री जी ..... हम्म्म
मेर्री जी सूर्य के चेहरे के दोनों तरफ अपने फेयर फैला अपनी हलके बालो वाली फुल्ली हुए छूट सूर्य के बिलकुल नाक के पास कर देती है आवर खुद सूर्य के लैंड को मुँह ले आइसक्रीम के जैसे चूसने लगती है
मेर्री जी की योनि गंध सूर्य के नाक से होते हुए सांसो में भर सूर्य को उत्तेजित करने लगती है

सूर्य मेर्री जी के खुल्हो को विपरीत दिशा में अपने हाथो से फैलता हुआ मेर्री जी की गरम गुलाबी छूट पे अपनी जइब फिरते हुए फुल्ले हुए लिप्स को अपने होंटो में कैद कर चाटने चूसने लगता है
मर्री जी की योनि से निकल रहे हलकी हलकी कामराश की नमकीन बुँदे सूर्य बड़े मज़े से चूसने के साथ हे मेर्री जी के गुदाद्वार में अपनी एक ऊँगली से हल्का हल्का खुरचने लगता है इस से मेर्री जी को कितना आनंद मिल रहा था उसका अंदाजा तो वही लगा सकती थी पैर उसका असर मेर्री जी की छूट के फादफाते होंठ सूर्य को आवर उक्षा रहे थे
कुछ हे पालो में मेर्री की छूट से वो हल्का सफ़ेद तरल बहता हुआ सूर्य के चेहरे पे कुछ बुँदे टपका देता है
सूर्य मेर्री जी को अपने ऊपर से हटा उन्हें वही सोफे से उठा बीएड पे लिटा देता आवर खुद उनकी जांघों के बिच बेथ अपने मीठे तगड़े लैंड को मेर्री जी की कामराश से भीगी छूट पे मेर्री जी के थूक से लिसड़ा लैंड टिका अंदर पुस करता है

मेर्री जी ....... उम्म्म्मह्ह्ह्ह आराम से ये बहुत हैवी है मेरे लिया उम्म्म्मः हर बार मेर्री पुसी को चिर डालता है
सूर्य. ........... आपने सोचा है ममी जी क्या होगा जब आप मन जी से संतुष्ट नहीं हो पाओगी या उन्हें आप पे संदेह होगा तो
मेर्री जी ....... नहीं उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं चलना चाइये सूर्य ओह्ह्ह्हह्ह मार डाला हर बार मैं हे बेवकूफ बन जाती हूँ
सूर्य मेर्री जी को किश करते हुए उनकी बड़ी बड़ी चूचियों के अकड़े हुए पिंकिश निप्पल्स को उमेठने लगता हाउ जिस से उन्हें दर्द में कुछ आराम मिलने लगता है
जैसे जैसे छूट की पकड़ लैंड पे से काम होने लगती है सूर्य डेरी डेरी मेर्री जी की चुदाई सुरु कर देता है

सूर्य ........ उम्म्म्मः ममी जी आप बहुत गरम हो वाकई में अभी कुछ देर पहले हे आपने खुद को डिस्चार्ज किया था फिर से इतनी जल्दी गरम हो गई
मेर्री जी ...... उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तोडा तेज सूर्य अह्हह्ह्ह्ह तभी तो कहती हूँ कभी अच्छे से टाइम निकल कर मेरी साडी गर्मी निकल दो तुम्हारे मां जी से ये गर्मी नहीं निकलने वाली उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह फास्टर सूर्य फास्टर ी ऍम किंग नेक्स्ट टाइम
सूर्य मेर्री जी के पेअर को गुमा कर खुद मेर्री जी के बैक साइड में आ उनकी हिलती हुई मोती चूचियों को थम पूरी तेजी से सखे मरने लगता है

मेर्री जी ....... उफ्फ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह एसससस एससससस सूर्य फ़क में हार्ड प्लेसेस ओह्ह्ह्हह्ह गॉड ी ऍम किंग बेबी उम्मम्मम अहहहहजहह फ़क में लिखे बीच
मेर्री जी की पता नहीं की वो इस वक़्त क्या बोल रही है चरम सुख के नशे में मेर्री जी ने अनजाने में हे सूर्य को हवा दे दी थी
मेर्री जी की छूट से बहते कामराश सूर्य के लैंड से होते हुए उसके अंडकोष को भुट्टा हुए दोनों की जंगो के बिच आ पंहुचा
सूर्य कुछ पल मेर्री जी को अपने स्खलित होने का मज़ा लेने दिया जैसे हे मेर्री जी की सांसे संत हुए सूर्य ने उसे तरह लेते लेते मेरी जी को अपने ऊपर ले लेता है
मेर्री जी. ..... मेर्री जी अह्ह्ह्हह तुमने तो मुझे द्र हे दिया सूर्य
सूर्य ....... अब आपकी बारी त्यार हो जाइये

मेर्री जी के कमर को दोनों हाथो से थम सूर्य अपनी कमर उचकते हुए लैंड को मेर्री जी की छूट में अंदर बहार करने लगता है
मर्री जी भी खुद से अपने कूल्हों को सूर्य के नाभि पे जोर जोर से उछाल ते हुए सूर्य के लैंड को पूरी गहराई से अंदर बहार करने लगती है
इसमें मेर्री जी को हलकी तकलीफ भी हो रही थी जब जब सूर्य का मोटा सूपड़ा उनकी बच्चेदानी के मुँह पे अपने होने का अहसास करवाता
पर जल्दी हे ये दर्द मज़े में बदल गया जब सूर्य का टोपा मेर्री जी की गर भाष्य के भीतर परवेश करता तो मेर्री जी को जो आनंद प्राप्त होता वो अकल्पनीय था जैसे वो बदलो में शेयर कर रही हो किसी हवा के जोंखे की तरह

इस बार सूर्य के लैंड पे मेर्री जी की छूट की पकड़ काफी मजबूत थी सूर्य को भी अपने लैंड को अंदर बहार करने में जोर आजमाइशी करनी पद रही थी कारन था मेर्री जी के गर्भाशय की सूर्य के सूपड़ा पे मजबूत पकड़ होना मेर्री जी अचानक से बुरी तरह कपङे लगी आवर डैम से सूर्य के सीने पसर जाती है सूर्य को ऐसे लगा जैसे गरम फेल किसी ने उसके लिंग मुंड पे गिरा दिया हो अपनी लिंग पे इतना आदिक तरल मह्सुश कर सूर्य मेर्री जी की योनि आवर अपने लिंग को चेक करता है तो वह काफी आदिक मात्रा में मेर्री जी की योनि से निकला कामराश था
अभी भी रह रह कर सूर्य के लिंग मुंड पे मेर्री जी की बच्चेदानी अपनी पकड़ बना रही थी तो कभी ढीला छोड़ रही थी
सूर्य कुछ देर ुशी तरह लेता रहा ताकि मेर्री जी अपने चरम का पूरा मज़ा ले सके सूर्य अपने लिंग की उभरती नाशी आवर सुफेदे में आ रहे फुलाव को मेर्री जी की छूट में भी मह्सुश कर प् रहा था
कुछ देर बाद सूर्य मेर्री जी को अपनी बगल में वतर्ते हुए उन्हें घोड़ी बना देता है मेर्री जी कुछ बोलती उस से पहले हे सूर्य उनके हे कामराश से भीगा हुआ लिंग पूरा एक हे बार में मेर्री जी के गुफा में थोक देता है
मेर्री जी जैसे अभी भी किसी मज़े में कोई हुई थी जो सूर्य के इस तरह के पर्वत से वास्तविकता में लौटी
मेर्री जी ........ मुझे क्या हुआ था सूर्य
सूर्य .........उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह कुछ नहीं काफी समय से आपने सेक्स नहीं किया था तो आज एक साथ आप मल्टिपल डिस्चार्ज हो गयी थी जिस कारन आप कही आवर हे पहुंचने गयी थी मैंने भीबापको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समजा पैर जब आप काफी देर बाद भी उस मज़े से बहार नहीं निकलो तो मुझे ऐसा करना पड़ा

अगले 10 मिनट्स सूर्य ने मेर्री जी पे कोई रहम नहीं किया इस बिच एक बार फिर से मेर्री जी डिस्चार्ज हुई पैर इस बार जैसे कुछ हे बुँदे उस अमृत की टपकी थी
मेर्री जी ....... अह्हह्ह्ह्ह डेरी सूर्य मेर्री कमर
सूर्य ....... अह्हह्ह्ह्ह बस कुछ मिनट्स ममी जी मैं भी डिस्चार्ज हो रहा हूँ
मेर्री जी ...... उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अंदर नहीं सूर्य अभी सेफ टाइम नहीं है मेरा उम्मम्मम बहार हे निकल न
सूर्य मेर्री जी की बात सुन कुछ हे सखे मरने के बाद मेर्री जी की छूट से कामराश से भीगा लैंड निकल कर बीएड से निचे उतर जाता है
मेर्री जी बीएड से निचे उतर सूर्य को मुठ मरते हुए उसके लैंड को मुँह में भर चूसने लगती है
एक मिनट्स बाद हे सूर्य ने एक के बाद एक पिचकारी मेर्री जी के मुँह में छोड़ने लगता है
मेर्री जी कुछ स्पर्म तो सूर्य का निगल जाती है फिर भी बहुत सा वीर्य साइड से निकल निचे गिरने लगता है

आखरी बून्द तक मेर्री जी सूर्य के लैंड से चूस कर खली कर देती है
सूर्य वही बीएड पे फज़र लम्भी कभी सांसे लेने लगता है
मेर्री जी अपने होंटो पे लगे वीर्य को अपनी ऊँगली ये पे ले कर चूस लेते है
सूर्य ....... अब मुझे जाना होगा ममी जी आप यही नहाने के बाद रेस्ट करना आवर है इसकी थोड़ी सिकाई कर लेना नहीं तो सुबह चल नहीं पाओगी आप अभी आपको यहाँ ज्यादा दर्द नहीं है पैर हाला हल्का सूजन आना सुरु हो चूका है मैं निचे फ्रेश हो कर निकल रहा हूँ
मेर्री जी ......... सूर्य वापिस आने के बाद बाउजी से बात कर लेना
सूर्य ........ किस बारे में ममी जी
मेर्री जी ....... मैंने तुम्हारी बात पे सोचा तो मुझे भी लगा की मुझे सदी कर लेनी चाइये वैसे भी अभी तुम्हारी कुछ दिन बाद सदी है उसके बाद मैं सदी करुँगी पैर अपना प्रॉमिस याद रखना
सूर्य ...... Ok मैं आ कर आपसे बात करूँगा तब तक आप अच्छे से सोच लीजिये
मेर्री जी ........ है ये भी ठीक है
सूर्य मेर्री जी के माथे को चुम उनकी दोनों चूचियों को प्यार कर निचे चला जाता है आवर नहाने के बाद कपडे बदल शालिनी जी के रूम में जहा स्वीटी थी
सूर्य ......... स्वीटी जाओ जा कर रेडी हो जाओ हमें निकलना है
किरण ....... Ok मैं अभी आती हूँ कुंवर जी
सूर्य ........ माँ हम लोग सुबह तक लौट आएंगे सायद
शालिनी जी गेट लॉक कर सूर्य को किश करने लगती है
शालिनी जी ....... मुझे तुम्हारे लौटने का इन्तजार रहेगा सूर्य जल्दी आना
सूर्य ....... Ok माँ मैं जल्दी हे आ जाऊंगा आप सबका ख्याल रखना आवर है कल पापा u.s.a जा रहे है तो आप भी हो आइये उन्हें भी अच्छा लगेगा आवर आपको भी मन मत करना
शालिनी जी ......... क्या तुम सच में चाहते हो की मैं ऐसा कृ
सूर्य ....... जनता हूँ आप क्या कहना चाहती है पैर माँ वो आपके पति है उनका भी हक़ है मैं ये नहीं कहता की मैं आपसे प्यार नहीं करता पैर पापा वो भी आपसे बहुत प्यार करते है आप समाज रही है न
शालिनी जी ........ ठीक है तुम कहते हो तो मैं उनके साथ पुरे मन से जाउंगी ख़ुशी ख़ुशी पैर तुम्हे बुरा नहीं लगेगा
सूर्य ......... माँ अगर ये कहूं की नहीं तो जूठी होगा पैर उनका हक़ आपके प्यार पे मुझसे ज्यादा है है माँ मंटा हूँ की वो अब पहले की तरह अपना प्यार जाहिर नहीं करते पैर पहले वह हम तीन हे लोग थे पैर यहाँ पूरा परिवार है ऐसे में उनके अभी पहले से आदिक जीजाक आ चुकी है पहले जहा मर्ज़ी वो आप पे हक़ जताते थे जो आपको भी पसन् था पैर अब ऐसा मुमकिन नहीं फिर यहाँ के बिज़नेस के चलते वो ज्यादा बिजी रहने लगे है
शालिनी जी ....... ठीक है ठीक है समाज गयी तुम आराम से हो कर आओ सूर्य
शालिनी जी जा कर गेट खोल देती है कुछ हे देर बाद किरण भी आ जाती है
किरण ........ Ok माँ हम चलते है आप अपना ख्याल रखना इनका मैं रख लुंगी वह यहाँ आप रख लेना हेहेहे
शालिनी जी ........ तू बहुत शैतान होती जा रही है स्वीटी वह आओ फिर बताती हूँ तुम्हे तो मैं
सूर्य किरण शालिनी जी से गले मिल परीलोक के लिया निकल गए
परीलोक ...........
संध्याकाळ को जब सूर्य गुरुदेव से आवर देवसफ्फी नियों से भें कर के गया था उसके कुछ देर बाद हे नियों भी गुरुदेव से आज्ञा ले ड्रैगन लोक लौट जाते है
गुरुदेव नियों के जाने के बाद से हे ध्यान में लीं हो जाते है जो अभी तक भी ध्यान में हे लीं थे जैसे नहे रात्रि होने का आभाष तक न हुआ हो
सूर्य किरण सीधा सूर्यगढ़ से यही गुरुदेव के समक्ष पहहचे थे दोनों परबु को परनाम कर ध्यान में बे थे गुरुदेव को में परनाम कर एक आवर आसान लगा लेते है
कुछ देर बाद गुरुदेव ध्यान से बहार निकलते है
गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य पुत्री किरण आ गए आप लोग
सूर्य ........ जी गुरुदेव हमें विलम्भ तो नहीं हुआ न गुरुदेव आने में
गुरुदेव .......नहीं पुत्र हम भी तुम्हारे जाने के बाद से हे ध्यान में थे अभी तुम्हारे सामने हे ध्यान से बहार निकले है पुत्र सूर्य पुत्री किरण हमारे समीप आओ पुत्री
किरण वह से उठ कर गुरुदेव के सामने जा बैठी
गुरुदेव किरण के हाथ को थम उसकी नबज चेक करते है कुछ देर बाद ख़ुशी से उनका चेहरा खिल उठा
सूर्य ........क्या हुआ गुरुदेव सब ठीक तो है न
गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य सब मंगल हे मंगल है जिस ऊर्जा का आभाष तुम आवर पुत्री किरण कर रहे थे वो दरशल तुम दोनों के आने वाले पुत्र की ऊर्जा है पुत्र सूर्य पुत्री किरण गर्हब से है वो माँ बनने वाली है आवर तुम पिता बनने वाले हो पुत्र
सूर्य ........ क्या सच में गुरुदेव
सूर्य आगे बढ़ ख़ुशी से किरण को गौड़ में उठा कर जैसे नाचने हे लगता है
गुरुदेव .......... पुत्र पिता अभी बने नहीं हो बनने वाले हो अभी परहम मास्स हे चल रहा है पुत्री किरण का
सूर्य ........... मैं बता नहीं सकता गुरुदेव मैं कितना खुश हूँ थैंक यू स्वीटी तुमने ये ख़ुशी के पल दिए ख़ुशी का उस अनमोल खजाने से मेरी झोली खुशियों से भर दी
किरण ........ कुंवर जी ये हम सब के लिया बहुत बड़ी ख़ुशी है है माँ को पता चलेगा तो वो कितनी खुश होंगी
गुरुदेव ......... अभी किसी को भी बताना उचित नहीं पुत्री समय यात्रा पूर्ण कर लौट आओ फिर इस विषय में सभी को बताना उचित रहेगा
सूर्य ........ जी गुरुदेव जैसा आप कहे
गुरुदेव ....... पुत्र अपना वो लॉकेट देना जो देवी पर करती ने तुम्हे दिया था
सूर्य अपना लॉकेट गले से निकल गुरुदेव को दे देता है
गुरुदेव दोनों हाथो के मध्य लॉकेट को रख कोई मंत्र दोहराते है जिस से उस लॉकेट से ऊर्जा निकलने लगती है
गुरुदेव लॉकेट को वही जमीं पे रख पीछे हैट जाते है

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य पुत्री किरण आगे बढ़ो आवर इस दिव्या लॉकेट को एक साथ स्पर्श करो
सूर्य किरण गुरुदेव का आदेश मन वैसा हे करते है तो दोनों के हठी पे किसी तरह का पार्द अशी यन्त्र बनने लगता है

गुरुदेव ........ जो कोई भी इस लॉकेट के माध्यम से भूतकाल या भविष्य काल में जायेगा ये प्रदर्शित यन्त्र उसे पंहुचा देगा इस के बिना कोई भी इस लॉकेट के माध्यम से समय यात्रा नहीं कर सकता पुत्र हमेशा के लिया तुम दोनों इस से जुड़ चुके हो पुत्र किन्तु इसका मतलब ये नहीं की तुम जब चाहो समय यात्रा कर समाया चक्र को प्रभावित करो
सूर्य ........ जी गुरुदेव हम कभी भी इसका अनुचित प्रयोग नहीं करेंगे गुरुदेव बिमा आपकी इच्छा या आज्ञा के हम इसका प्रयोग नहीं करेंगे हम वचन देते है आपको
गुरुदेव ......उचित है पुत्र अब तुम अपने लॉकेट को आदेश दो की समय यात्रा प्रणाली सुरु करे
सूर्य ....... जी गुरुदेव
सूर्य लॉकेट को आदेश देता है तो उसमे से एक तेज निईली राग की रौशनी निकलती है आवर वह जमीं पे समय यन्त्र चक्र बनने लगता है

कुछ हे देर में समय यन्त्र पूर्ण हो जाता है आवर लॉकेट सूर्य के गले में आ जाता है
कुछ हे देर में समय यन्त्र चक्र बहुत तेजी से चमक ने लगता है

सूर्य........ गुरुदेव ये क्या हो रहा है
गुरुदेव ......... पुत्र समय यन्त्र चक्र अपनी अंतिम चरण में है बस कुछ पल की प्रतीक्षा है फिर समय द्वार खुल जायेगा
ोउ जैसा गुरुदेव ने कहा कुछ हे समय बाद समय यन्त्र चक्र से एक ऊर्जा निकल मंदिर के दिवार से तक रति है तो वह पे समय द्वार उत्पन्न हो गया

गुरुदेव ........ पुत्र तुम्हे ये लॉकेट भूतकाल में स्वयं को देना है आवर जो घटना घाट चुकी है उसे बदलने की चेष्टा न करना किन्तु इतना स्वयं को समजा देना की आगे ऐसा नरसंघार न हो इसके लिया ये दिव्या लॉकेट उसका मार्गदर्शन करेगा कर्म अनुसार दंड देने में खुलेआम कत्ले आम कर केवल भय भयापत होता है अगर उन्हें सुंदररना है तो पृथ्वीलोक के दंड वीरान अनुसार दंड दो सर्वप्रथम दंडविधान की कमियों को उसकी खामियों को दूर करो वह के सासको ( शासन करने वाले नेता ) को सुवर्ण होगा तभी प्रजा में सुधर आएगा अब जाने का समय हो चूका है पुत्र
सूर्य किरण .......जी गुरुदेव
सूर्य किरण का हाथ थम आगे बढ़ा बीटा की समाया यन्त्र से ेल सेंड वाच सूर्य के हाथ में आ जाती है

गुरुदेव ......... पुत्र ये समय यन्त्र जो तुम्हारे हाथ में है इसमें जो रेट है उतना हे समय तुम वह रह सकते हो इस से आदिक तुमने वह एक पल भी वयतीत किया तो उसका प्रभाव समय चक्र पे आदिक होगा
सूर्य ........... जी गुरुदेव परनाम
किरण .......... परनाम गुरुदेव
गुरुदेव .......... सफल मनोरथ भाव पुत्र सूर्य पुत्री किरण ईश्वर तुम दोनों के मंतव्य को पूर्ण करे
सूर्य आवर किरण दोनों एक दूसरे का हाथ थम समय द्वार में प्रवेश कर जाते है
उनके जाने के कुछ 3,4 मिनट्स बाद हे समय द्वार बंद हो जाता है आवर समय यन्त्र भी की ऊर्जा भी समय यन्त्र घेरे के मध्य भाग में केंद्रित हो जाती है
गुरुदेव ........ समय द्वार बंद हो चूका है अर्थात पुत्र सूर्य पुत्री किरण भूतकाल में पहुंच चुके है ...............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...................
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............................
मेनका जी ....... ये क्या किया मुझे पूरा गन्दा कर दिया तुमने
सूर्य ..........आपने हे तो बहार निकला न मई तो आपकी मटकी भरने वाला था
मेनका जी ....... आवर अगर उस से मैं प्रेग्नेंट हो जाती तो क्या
सूर्य ....... आपने वो रास्ता पहले हे बंद कर रहा है बुआ सा
मैं जनता हूँ प्रीति के समय जो प्रॉब्लम हुई थी उस से आपकी फूफा जी ने नसबंदी करवा दी थी ताकि फिर से कोई बचा न हो आवर न आपको फिर से वो सब सहना पड़े अब जाइये आवर फ्रेश हो जाएये
मेनका जी ...... आवर तुम तुम्हारा क्या
सूर्य ............ मैं अपने रूम में फ्रेश हो जाऊंगा उम्म्म्महा
सूर्य अपने कपडे पहन वह से निचे अपने रूम की आवर निकल जाता है ..............
अब आगे ............
सूर्य साम को सक्तिपुर हवेली जा कर वह गायत्री जी आवर गीता जी से मिल का अजय से हाल चल जान. कर अभी हवेली लौटा हे था की उसके पापा भी उसके पीछे पीछे हवेली पहहचे थे
सूर्य ...... Hello पापा कैसे है आप
सूर्य शिव से गले लग कर मिलता है जिस से उन्हें भी ख़ुशी होती है
शिव ...... ी ऍम फाइन बीटा एंड यू
सूर्य ....... अच्छा हूँ पापा आवर काम कैसा चल रहा है अपना
शिव ....... ये तो मुझे तुमसे पूछना चाइये बीटा की काम कैसा चल रहा है
सूर्य ...... एक डैम बढ़िया पापा उम्मीद से पहले हे काम पूरा हो जायेगा
शिव ....... अच्छी बात है बीटा ये तो जल्दी हे मैं अपना बिज़नेस भी दिल्ली हे सिफत कर लूंगा कल u.s.a जा रहा हूँ तुम्हारे हॉस्पिटल को देखने
सूर्य ....... कुछ प्रॉब्लम हुई है क्या पापा
शिव ....... नहीं बीटा सब अच्छा चल रहा है कुछ आवर काम भी था जिसके लिया वह जाना पद रहा है तो सोचा हॉस्पिटल का काम भी एक बार देख लेता हूँ
सूर्य ........ Ok पापा जैसा आप ठीक संजो
शिव ........ आवर है बीटा दिल्ली जाने से पहले मुझसे मिल कर जाना
सूर्य ....... वो पापा मुझे आवर स्वीटी को किसी जरुरी काम से रात में हे परीलोक निकलना होगा सायद कुछ टाइम भी लग सकता है
शिव ....... Ok फिर डिनर के बाद बात करता हूँ या फिर तुम चले जाना जब भी एक दो दिन में तुम्हे टाइम मिले u.s.a
सूर्य ....... मेरा जाना जरुरी है क्या पापा
शिव ......... है बीटा वो दरशल तुम्हारे 10 बर्थडे पे मैंने तुम्हारी माँ को बिना बताये कुछ इन्वेस्टमेंट की थी कुछ कंपनी में तब तो उनकी मार्किट वेलु काम थी पैर अभी हाल फ़िलहाल में बहुत अच्छी पोजीशन पे है मैं तो भूल भी चूका था की मैंने इन्वेस्ट किया ऐसा कुछ भी वो तो आज किसी क्लाइंट ने कॉल कर शेयर खरीदने की बात की तब जा कर मुझे पता चला
सूर्य ....... ये तो बहुत अच्छी बात है पापा तो आपने क्या सोचा है शेयर सेल्ल करने है या कुछ आवर
शिव ........ अभी कुछ सोचा नहीं है बीटा वह जा कर शेरे देखता हूँ उसके बाद हे कुछ फैसला करूंगा
सूर्य ....... आपने जहा जहा इन्वेस्ट किया है उसकी जानकारी देना मुझे मैं देखता हूँ की शेरे बेचने चाइये या नहीं आप जा कर फ्रेश हो जाइये मैं जरा बाउजी को देखता हूँ
सूर्य वह से अपने दादा जी की रूम को आवर भाड़ जाता है थोड़ा अँधेरा हो चूका था इस लिया दादा जी इस वक़्त अपने रूम में हे थे
जैसे हे सूर्य रूम की तरफ बढ़ा किसी ने बड़ी तेजी से सूर्य को अंदर की आवर खींच लिया
सूर्य कुछ बोलता उस से पहले हे किसी ने अपने तपते हुए होंठ सूर्य के होंटो से जोड़ दिए
सूर्य मेर्री जी का चेहरा देख बिना किसी विरोध के उनके होंटो का राश पिने लगता है
मेर्री जी सूर्य का हाथ थम अपनी इलास्टिक वाली लेगी में अपनी पेंटी में दाल देती है
सूर्य जैसे हे अपने हाथ से मेर्री जी की क्लीन सेव योनि को टटोलते हुए फुल्ले हुए होंटो के बिच अपनी बड़ी वाली ऊँगली डालता है कच से किसी तरल में भीगते हुए बिना किसी अवरोध के सूर्य की ऊँगली मेर्री जी के कामराश से भीगी उनकी गरम नरम लचीली उमेश भरी गुफा में प्रवेश कर जाती है
सूर्य दूसरे हाथ से मेर्री जी मसल खुली को मसलते हुए उनके होंटो का राषपन करते हुए ऊँगली से हे मेर्री जी को चुदाई करने लगता है खड़े खड़े कुछ हे देर में मेर्री जी हफ्ते हुए सूर्य के होंटो से अलग हो सूर्य की हथेली को दबाते हुए झड़ने लगती है सूर्य की हथेली पूरी तरह से मेर्री जी के योनि राष से भीग चुकी थी
मेर्री जी .......... देखो तुम्हारी वजह से क्या हालत हो गयी है मेरी
सूर्य ....... अब आपको सदी कर लेनी चाइये ममी जी कब तक ऊँगली से खुद को संत करेंगी
मेरी जी सूर्य की पेण्ट के ऊपर से हे सूर्य का अर्श उत्तेजित मुसल थम कर दबा देती है
सूर्य ........ क्या करती हो ममी जी अभी ये जाग गया तो आपको हे भरी पड़ें वाला है है समाजी आप
मेर्री जी ........ मुझे कुछ नहीं पता तुम क्या करते हो या क्या नहीं मुझे आज रात ये चाइये
सूर्य ....... नाईट में तो मैं परीलोक जा रहा हूँ स्वीटी के साथ
मेर्री जी ........फिर मेरा क्या होगा
सूर्य .....एक काम करना आप दीनार के कुछ देर बाद छठ वाले रूम में चली आना जाने से पहले आपकी गर्मी भी निकल दूंगा उम्म्म्मः ठीक है
मेर्री जी ....... उम्म्म्मः ok मैं पहुंचने जाउंगी
सूर्य ....... आवर है अब आपको सदी कर लेनी चाइये मैं ये इस लिया नहीं कह रहा हम की आपसे मन भर गया है या पीछा छुड़ाना चाहता हूँ बल्कि इस लिया की एक पड़ाव पे इंसान को इस रिश्ते में बंद जाना चाइये बाकि जो आपकी इच्छा होगी वही होगा कोई आपको फाॅर्स नहीं करेगा जब तक आपकी इच्छा न हो
मेर्री जी ....... ठीक है पैर याद है न सदी के बाद भी तुम मुझसे प्यार करते रहोगे
सूर्य ...... ुम्मम्हा बिलकुल ये भी कोई कहने की बात है अभी आपकी इसका भी तो मज़ा लेना है हाहाहा
मेर्री जी ....... Ok मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है पैर सदी के बाद वैसे मुझे भी यहाँ तरय करना है
रेखा जी ...... तुम दोनों उदार क्या कर रहे हो डिनर नहीं करना क्या
सूर्य ...... कुछ नहीं बड़ी मम्मी मेर्री जी से कुछ जरुरी बात कर रहा था
रेखा जी ...... जो भी जरुरी बात करनी है वो बाद में कर लेना चलो डिनर करो आ कर सब वेट कर रहे है
सूर्य रेखा जी मेर्री जी तीनो हवेली के भीतर चल देते है
मेर्री जी अपने रूम में जा कर अपनी योनि को साफ़ करती है आवर दूसरी पेंटी पहन कर आती है
वही सूर्य हाथ मुँह दो कर सबके साथ डिनर करने लगता है
सभी बाटे करते हुए डिनर फिनिश करते है
शिव ....... बीटा जरा रूम में आना कुछ बात करनी है
सूर्य ....... आप चलिए पापा मैं आता हूँ कुछ देर में
शिव के जाने के बाद शालिनी जी सूर्य को देखती है
सूर्य ...... वो पापा को कुछ बात करनी थी माँ u.s.a वाले प्रोजेक्ट आवर किसी आवर बारे में
शालिनी जी ....... हम्म्म रात को कब जाने वाले हो तुम लोग परीलोक
सूर्य ....... करीब 11 बजे माँ कुछ काम था क्या
शालिनी जी ...... नहीं कुछ काम नहीं था स्वीटी बीटा तुम कपडे चेंज कर मेरे रूम में आना
किरण ...... जी माँ
रेखा जी ....... वैसे बीटा वह जा क्यों रहे हो साम को हे तो वह से लौटे थे
सूर्य ...... वो बड़ी मम्मी गुरुदेव ने आने का आदेश दिया है मुझे आवर स्वीटी को जरुरी कार्य है तो जाना पड़ेगा
विजय जी ...... वापिस कब आओगे बीटा
सूर्य ......सायद कल सुबह या फिर कुछ टाइम भी लग सकता है फूफा सा
विजय जी .... .... ठीक है बीटा आवर है अपना आवर स्वीटी का ख्याल रखना बीटा मेरा डिनर हो गया है वैसे तुम्हारी बुआ सा को क्या हुआ है जो डिनर पे भी नहीं आई बहार
शालिनी जी आवर किरण की नजर सूर्य पे जा तिकी
सूर्य ....... वो उनको फीवर आया है फुगा जी सुबह तक ठीक हो जाएँगी
विजय जी ....... उसने दवा ली की नहीं चलो मैं हे देखता हूँ
सूर्य ....... जी फूफा जी मेरा भी हो गया
सूर्य जल्दी से शालिनी जी आवर किरण की नजरो से पीछा चढ़ा अपने पापा के रूम में चला जाता है
सूर्य शिव से जानकारी ले कुछ टाइम लेपटॉप पे उन 3 कम्पनीज की जानकारी निकलने लगता है
करीब 15 ,20 मिनट्स सूर्य अपने पापा के साथ लेपटॉप पे दिखते हुए उनसे बात करता
शिव ....... ठीक है बेताब तुम जाओ बाकि मैं देख लूंगा
सूर्य ...... Ok पापा गुड नाईट
शिव ........गुड नाईट बीटा जा कर आराम करो
सूर्य अपने रूम की आवर निकल जाता है जहा किरण ड्रेस चेंगे कर शालिनी जी के पास हे जाने वाली थी
किरण ....... आप आ गए कुंवर जी वो मैं
सूर्य किरण को उठा साथ ले बीएड पे लेट जाता है आवर उसकी निघ्त्य कूल्हों से उठा माध्यम आकर के कूल्हों को मसलने लगता है
किरण ........ ये आप क्या कर रहे है मुझे माँ के पास जाना है आप मेर्री जी के पास जाइये
सूर्य ........ जनता हूँ बस कुछ देर ऐसे हे मेरा पास रहो बस
किरण सूर्य की आँखों में देखते हुए खुद से हे सूर्य के होंटो से अपने कोमल होंठ जोड़ देती है
कुछ देर दोनों एक दूसरे के मुखराश चूसने के बाद अलग होते है
किरण को अपनी योनि आवर नाभि पे सूर्य का काम दंड अकड़ता हुआ मेमसुश होता है
किरण ...... इसको थोड़ा कण्ट्रोल में रखा कीजिये बुआ सा की हालत ख़राब करने के बाद भी इसे चैन नहीं आया क्या
सूर्य ........ इसमें मेरी कोई गलती नहीं बुआ ने हे पहल की थी तो मैं क्या करता
किरण ........ उम्म्म्मः अब मैं चलती हम मेर्री जी ऊपर पहुंचने गई है थोड़ा जल्दी करना हमें परीलोक भी जाना है
सूर्य ......ह्म्म्मम्म ok मैं चलता हूँ जाते जाते सूर्य किरण के घोष उभारो को सायला देता और बहार की आवर निकल गया
किरण ....... ये कभी नहीं सुधरने वाले पैर इनका इस तरह इन्हें सालाना अच्छा भी लगता है अब फिर से पेंटी बदलनी होगी मुझे
सूर्य जब छठ पे पहुंचा तो उसे मेर्री जी कही नजर नहीं आई तो वह सीधा रूम की आवर भाड़ गया
रूम में पंहुचा तो मेर्री जी शार्ट निघ्त्य में कड़ी खुली खिड़की से बहार देख रही ठु सूर्य अपना ट्राउजर आवर t-shirts निकल चुके से मेर्री जी के पीछे पहुंचा
मेर्री जी ...... आ गए तुम सूर्य
सूर्य मेर्री जी को पीछे स्व हे अपनी बहो में जकड लेता है

सूर्य ........ उम्मम्मम नीस परफ्यूम ममी जी अब आप इतना याद करोगी तो आना तो पड़ेगा हे न
सूर्य बात करते करते मेर्री जी की गर्दन पे चुम्बन करते हुए उनकी 36 की गोश्त से भरपूर चूचियों को थम उन्हें सहलाने लगता है
मेर्री जी ............ उम्म्म्मः पीछे कुछ चूब रहा है
मेर्री जी अपना हाथ बढ़ा सूर्य का लैंड अंडरवियर के ऊपर से हे पकड़ कूल्हों की लकीर पे फिरने लगती है

सूर्य मेर्री जी को अपनी तरफ पलट उनकी निघ्त्य उनके गले निकल उन्हें नंगी कर किश करने लगता है
सूर्य ........ उम्मम्मम ज्यादा टाइम नहीं है हमारे पास
मेर्री जी ....... कभी तो प्यार से टाइम निकल कर वक़्त गुजरा करो
सूर्य मेर्री जी को लिए पास में पड़े सोफे पे आ लेता मेर्री जी सूर्य की अंडरवियर निकल सूर्य के टैंगो के बिच बेथुने लगती है तो सूर्य अपने ऊपर खींच कर 69 पोजीशन पे ले आता है
सूर्य ...... इस से एक साथ जल्दी हे दोनों त्यार हो जायेंगे
मेर्री जी ..... हम्म्म
मेर्री जी सूर्य के चेहरे के दोनों तरफ अपने फेयर फैला अपनी हलके बालो वाली फुल्ली हुए छूट सूर्य के बिलकुल नाक के पास कर देती है आवर खुद सूर्य के लैंड को मुँह ले आइसक्रीम के जैसे चूसने लगती है
मेर्री जी की योनि गंध सूर्य के नाक से होते हुए सांसो में भर सूर्य को उत्तेजित करने लगती है

सूर्य मेर्री जी के खुल्हो को विपरीत दिशा में अपने हाथो से फैलता हुआ मेर्री जी की गरम गुलाबी छूट पे अपनी जइब फिरते हुए फुल्ले हुए लिप्स को अपने होंटो में कैद कर चाटने चूसने लगता है
मर्री जी की योनि से निकल रहे हलकी हलकी कामराश की नमकीन बुँदे सूर्य बड़े मज़े से चूसने के साथ हे मेर्री जी के गुदाद्वार में अपनी एक ऊँगली से हल्का हल्का खुरचने लगता है इस से मेर्री जी को कितना आनंद मिल रहा था उसका अंदाजा तो वही लगा सकती थी पैर उसका असर मेर्री जी की छूट के फादफाते होंठ सूर्य को आवर उक्षा रहे थे
कुछ हे पालो में मेर्री की छूट से वो हल्का सफ़ेद तरल बहता हुआ सूर्य के चेहरे पे कुछ बुँदे टपका देता है
सूर्य मेर्री जी को अपने ऊपर से हटा उन्हें वही सोफे से उठा बीएड पे लिटा देता आवर खुद उनकी जांघों के बिच बेथ अपने मीठे तगड़े लैंड को मेर्री जी की कामराश से भीगी छूट पे मेर्री जी के थूक से लिसड़ा लैंड टिका अंदर पुस करता है

मेर्री जी ....... उम्म्म्मह्ह्ह्ह आराम से ये बहुत हैवी है मेरे लिया उम्म्म्मः हर बार मेर्री पुसी को चिर डालता है
सूर्य. ........... आपने सोचा है ममी जी क्या होगा जब आप मन जी से संतुष्ट नहीं हो पाओगी या उन्हें आप पे संदेह होगा तो
मेर्री जी ....... नहीं उन्हें इस बारे में कुछ भी पता नहीं चलना चाइये सूर्य ओह्ह्ह्हह्ह मार डाला हर बार मैं हे बेवकूफ बन जाती हूँ
सूर्य मेर्री जी को किश करते हुए उनकी बड़ी बड़ी चूचियों के अकड़े हुए पिंकिश निप्पल्स को उमेठने लगता हाउ जिस से उन्हें दर्द में कुछ आराम मिलने लगता है
जैसे जैसे छूट की पकड़ लैंड पे से काम होने लगती है सूर्य डेरी डेरी मेर्री जी की चुदाई सुरु कर देता है

सूर्य ........ उम्म्म्मः ममी जी आप बहुत गरम हो वाकई में अभी कुछ देर पहले हे आपने खुद को डिस्चार्ज किया था फिर से इतनी जल्दी गरम हो गई
मेर्री जी ...... उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तोडा तेज सूर्य अह्हह्ह्ह्ह तभी तो कहती हूँ कभी अच्छे से टाइम निकल कर मेरी साडी गर्मी निकल दो तुम्हारे मां जी से ये गर्मी नहीं निकलने वाली उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह फास्टर सूर्य फास्टर ी ऍम किंग नेक्स्ट टाइम
सूर्य मेर्री जी के पेअर को गुमा कर खुद मेर्री जी के बैक साइड में आ उनकी हिलती हुई मोती चूचियों को थम पूरी तेजी से सखे मरने लगता है

मेर्री जी ....... उफ्फ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह एसससस एससससस सूर्य फ़क में हार्ड प्लेसेस ओह्ह्ह्हह्ह गॉड ी ऍम किंग बेबी उम्मम्मम अहहहहजहह फ़क में लिखे बीच
मेर्री जी की पता नहीं की वो इस वक़्त क्या बोल रही है चरम सुख के नशे में मेर्री जी ने अनजाने में हे सूर्य को हवा दे दी थी
मेर्री जी की छूट से बहते कामराश सूर्य के लैंड से होते हुए उसके अंडकोष को भुट्टा हुए दोनों की जंगो के बिच आ पंहुचा
सूर्य कुछ पल मेर्री जी को अपने स्खलित होने का मज़ा लेने दिया जैसे हे मेर्री जी की सांसे संत हुए सूर्य ने उसे तरह लेते लेते मेरी जी को अपने ऊपर ले लेता है
मेर्री जी. ..... मेर्री जी अह्ह्ह्हह तुमने तो मुझे द्र हे दिया सूर्य
सूर्य ....... अब आपकी बारी त्यार हो जाइये

मेर्री जी के कमर को दोनों हाथो से थम सूर्य अपनी कमर उचकते हुए लैंड को मेर्री जी की छूट में अंदर बहार करने लगता है
मर्री जी भी खुद से अपने कूल्हों को सूर्य के नाभि पे जोर जोर से उछाल ते हुए सूर्य के लैंड को पूरी गहराई से अंदर बहार करने लगती है
इसमें मेर्री जी को हलकी तकलीफ भी हो रही थी जब जब सूर्य का मोटा सूपड़ा उनकी बच्चेदानी के मुँह पे अपने होने का अहसास करवाता
पर जल्दी हे ये दर्द मज़े में बदल गया जब सूर्य का टोपा मेर्री जी की गर भाष्य के भीतर परवेश करता तो मेर्री जी को जो आनंद प्राप्त होता वो अकल्पनीय था जैसे वो बदलो में शेयर कर रही हो किसी हवा के जोंखे की तरह

इस बार सूर्य के लैंड पे मेर्री जी की छूट की पकड़ काफी मजबूत थी सूर्य को भी अपने लैंड को अंदर बहार करने में जोर आजमाइशी करनी पद रही थी कारन था मेर्री जी के गर्भाशय की सूर्य के सूपड़ा पे मजबूत पकड़ होना मेर्री जी अचानक से बुरी तरह कपङे लगी आवर डैम से सूर्य के सीने पसर जाती है सूर्य को ऐसे लगा जैसे गरम फेल किसी ने उसके लिंग मुंड पे गिरा दिया हो अपनी लिंग पे इतना आदिक तरल मह्सुश कर सूर्य मेर्री जी की योनि आवर अपने लिंग को चेक करता है तो वह काफी आदिक मात्रा में मेर्री जी की योनि से निकला कामराश था
अभी भी रह रह कर सूर्य के लिंग मुंड पे मेर्री जी की बच्चेदानी अपनी पकड़ बना रही थी तो कभी ढीला छोड़ रही थी
सूर्य कुछ देर ुशी तरह लेता रहा ताकि मेर्री जी अपने चरम का पूरा मज़ा ले सके सूर्य अपने लिंग की उभरती नाशी आवर सुफेदे में आ रहे फुलाव को मेर्री जी की छूट में भी मह्सुश कर प् रहा था
कुछ देर बाद सूर्य मेर्री जी को अपनी बगल में वतर्ते हुए उन्हें घोड़ी बना देता है मेर्री जी कुछ बोलती उस से पहले हे सूर्य उनके हे कामराश से भीगा हुआ लिंग पूरा एक हे बार में मेर्री जी के गुफा में थोक देता है
मेर्री जी जैसे अभी भी किसी मज़े में कोई हुई थी जो सूर्य के इस तरह के पर्वत से वास्तविकता में लौटी
मेर्री जी ........ मुझे क्या हुआ था सूर्य
सूर्य .........उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह कुछ नहीं काफी समय से आपने सेक्स नहीं किया था तो आज एक साथ आप मल्टिपल डिस्चार्ज हो गयी थी जिस कारन आप कही आवर हे पहुंचने गयी थी मैंने भीबापको डिस्टर्ब करना ठीक नहीं समजा पैर जब आप काफी देर बाद भी उस मज़े से बहार नहीं निकलो तो मुझे ऐसा करना पड़ा

अगले 10 मिनट्स सूर्य ने मेर्री जी पे कोई रहम नहीं किया इस बिच एक बार फिर से मेर्री जी डिस्चार्ज हुई पैर इस बार जैसे कुछ हे बुँदे उस अमृत की टपकी थी
मेर्री जी ....... अह्हह्ह्ह्ह डेरी सूर्य मेर्री कमर
सूर्य ....... अह्हह्ह्ह्ह बस कुछ मिनट्स ममी जी मैं भी डिस्चार्ज हो रहा हूँ
मेर्री जी ...... उम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अंदर नहीं सूर्य अभी सेफ टाइम नहीं है मेरा उम्मम्मम बहार हे निकल न
सूर्य मेर्री जी की बात सुन कुछ हे सखे मरने के बाद मेर्री जी की छूट से कामराश से भीगा लैंड निकल कर बीएड से निचे उतर जाता है
मेर्री जी बीएड से निचे उतर सूर्य को मुठ मरते हुए उसके लैंड को मुँह में भर चूसने लगती है
एक मिनट्स बाद हे सूर्य ने एक के बाद एक पिचकारी मेर्री जी के मुँह में छोड़ने लगता है
मेर्री जी कुछ स्पर्म तो सूर्य का निगल जाती है फिर भी बहुत सा वीर्य साइड से निकल निचे गिरने लगता है

आखरी बून्द तक मेर्री जी सूर्य के लैंड से चूस कर खली कर देती है
सूर्य वही बीएड पे फज़र लम्भी कभी सांसे लेने लगता है
मेर्री जी अपने होंटो पे लगे वीर्य को अपनी ऊँगली ये पे ले कर चूस लेते है
सूर्य ....... अब मुझे जाना होगा ममी जी आप यही नहाने के बाद रेस्ट करना आवर है इसकी थोड़ी सिकाई कर लेना नहीं तो सुबह चल नहीं पाओगी आप अभी आपको यहाँ ज्यादा दर्द नहीं है पैर हाला हल्का सूजन आना सुरु हो चूका है मैं निचे फ्रेश हो कर निकल रहा हूँ
मेर्री जी ......... सूर्य वापिस आने के बाद बाउजी से बात कर लेना
सूर्य ........ किस बारे में ममी जी
मेर्री जी ....... मैंने तुम्हारी बात पे सोचा तो मुझे भी लगा की मुझे सदी कर लेनी चाइये वैसे भी अभी तुम्हारी कुछ दिन बाद सदी है उसके बाद मैं सदी करुँगी पैर अपना प्रॉमिस याद रखना
सूर्य ...... Ok मैं आ कर आपसे बात करूँगा तब तक आप अच्छे से सोच लीजिये
मेर्री जी ........ है ये भी ठीक है
सूर्य मेर्री जी के माथे को चुम उनकी दोनों चूचियों को प्यार कर निचे चला जाता है आवर नहाने के बाद कपडे बदल शालिनी जी के रूम में जहा स्वीटी थी
सूर्य ......... स्वीटी जाओ जा कर रेडी हो जाओ हमें निकलना है
किरण ....... Ok मैं अभी आती हूँ कुंवर जी
सूर्य ........ माँ हम लोग सुबह तक लौट आएंगे सायद
शालिनी जी गेट लॉक कर सूर्य को किश करने लगती है
शालिनी जी ....... मुझे तुम्हारे लौटने का इन्तजार रहेगा सूर्य जल्दी आना
सूर्य ....... Ok माँ मैं जल्दी हे आ जाऊंगा आप सबका ख्याल रखना आवर है कल पापा u.s.a जा रहे है तो आप भी हो आइये उन्हें भी अच्छा लगेगा आवर आपको भी मन मत करना
शालिनी जी ......... क्या तुम सच में चाहते हो की मैं ऐसा कृ
सूर्य ....... जनता हूँ आप क्या कहना चाहती है पैर माँ वो आपके पति है उनका भी हक़ है मैं ये नहीं कहता की मैं आपसे प्यार नहीं करता पैर पापा वो भी आपसे बहुत प्यार करते है आप समाज रही है न
शालिनी जी ........ ठीक है तुम कहते हो तो मैं उनके साथ पुरे मन से जाउंगी ख़ुशी ख़ुशी पैर तुम्हे बुरा नहीं लगेगा
सूर्य ......... माँ अगर ये कहूं की नहीं तो जूठी होगा पैर उनका हक़ आपके प्यार पे मुझसे ज्यादा है है माँ मंटा हूँ की वो अब पहले की तरह अपना प्यार जाहिर नहीं करते पैर पहले वह हम तीन हे लोग थे पैर यहाँ पूरा परिवार है ऐसे में उनके अभी पहले से आदिक जीजाक आ चुकी है पहले जहा मर्ज़ी वो आप पे हक़ जताते थे जो आपको भी पसन् था पैर अब ऐसा मुमकिन नहीं फिर यहाँ के बिज़नेस के चलते वो ज्यादा बिजी रहने लगे है
शालिनी जी ....... ठीक है ठीक है समाज गयी तुम आराम से हो कर आओ सूर्य
शालिनी जी जा कर गेट खोल देती है कुछ हे देर बाद किरण भी आ जाती है
किरण ........ Ok माँ हम चलते है आप अपना ख्याल रखना इनका मैं रख लुंगी वह यहाँ आप रख लेना हेहेहे
शालिनी जी ........ तू बहुत शैतान होती जा रही है स्वीटी वह आओ फिर बताती हूँ तुम्हे तो मैं
सूर्य किरण शालिनी जी से गले मिल परीलोक के लिया निकल गए
परीलोक ...........
संध्याकाळ को जब सूर्य गुरुदेव से आवर देवसफ्फी नियों से भें कर के गया था उसके कुछ देर बाद हे नियों भी गुरुदेव से आज्ञा ले ड्रैगन लोक लौट जाते है
गुरुदेव नियों के जाने के बाद से हे ध्यान में लीं हो जाते है जो अभी तक भी ध्यान में हे लीं थे जैसे नहे रात्रि होने का आभाष तक न हुआ हो
सूर्य किरण सीधा सूर्यगढ़ से यही गुरुदेव के समक्ष पहहचे थे दोनों परबु को परनाम कर ध्यान में बे थे गुरुदेव को में परनाम कर एक आवर आसान लगा लेते है
कुछ देर बाद गुरुदेव ध्यान से बहार निकलते है
गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य पुत्री किरण आ गए आप लोग
सूर्य ........ जी गुरुदेव हमें विलम्भ तो नहीं हुआ न गुरुदेव आने में
गुरुदेव .......नहीं पुत्र हम भी तुम्हारे जाने के बाद से हे ध्यान में थे अभी तुम्हारे सामने हे ध्यान से बहार निकले है पुत्र सूर्य पुत्री किरण हमारे समीप आओ पुत्री
किरण वह से उठ कर गुरुदेव के सामने जा बैठी
गुरुदेव किरण के हाथ को थम उसकी नबज चेक करते है कुछ देर बाद ख़ुशी से उनका चेहरा खिल उठा
सूर्य ........क्या हुआ गुरुदेव सब ठीक तो है न
गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य सब मंगल हे मंगल है जिस ऊर्जा का आभाष तुम आवर पुत्री किरण कर रहे थे वो दरशल तुम दोनों के आने वाले पुत्र की ऊर्जा है पुत्र सूर्य पुत्री किरण गर्हब से है वो माँ बनने वाली है आवर तुम पिता बनने वाले हो पुत्र
सूर्य ........ क्या सच में गुरुदेव
सूर्य आगे बढ़ ख़ुशी से किरण को गौड़ में उठा कर जैसे नाचने हे लगता है
गुरुदेव .......... पुत्र पिता अभी बने नहीं हो बनने वाले हो अभी परहम मास्स हे चल रहा है पुत्री किरण का
सूर्य ........... मैं बता नहीं सकता गुरुदेव मैं कितना खुश हूँ थैंक यू स्वीटी तुमने ये ख़ुशी के पल दिए ख़ुशी का उस अनमोल खजाने से मेरी झोली खुशियों से भर दी
किरण ........ कुंवर जी ये हम सब के लिया बहुत बड़ी ख़ुशी है है माँ को पता चलेगा तो वो कितनी खुश होंगी
गुरुदेव ......... अभी किसी को भी बताना उचित नहीं पुत्री समय यात्रा पूर्ण कर लौट आओ फिर इस विषय में सभी को बताना उचित रहेगा
सूर्य ........ जी गुरुदेव जैसा आप कहे
गुरुदेव ....... पुत्र अपना वो लॉकेट देना जो देवी पर करती ने तुम्हे दिया था
सूर्य अपना लॉकेट गले से निकल गुरुदेव को दे देता है
गुरुदेव दोनों हाथो के मध्य लॉकेट को रख कोई मंत्र दोहराते है जिस से उस लॉकेट से ऊर्जा निकलने लगती है
गुरुदेव लॉकेट को वही जमीं पे रख पीछे हैट जाते है

गुरुदेव ......... पुत्र सूर्य पुत्री किरण आगे बढ़ो आवर इस दिव्या लॉकेट को एक साथ स्पर्श करो
सूर्य किरण गुरुदेव का आदेश मन वैसा हे करते है तो दोनों के हठी पे किसी तरह का पार्द अशी यन्त्र बनने लगता है

गुरुदेव ........ जो कोई भी इस लॉकेट के माध्यम से भूतकाल या भविष्य काल में जायेगा ये प्रदर्शित यन्त्र उसे पंहुचा देगा इस के बिना कोई भी इस लॉकेट के माध्यम से समय यात्रा नहीं कर सकता पुत्र हमेशा के लिया तुम दोनों इस से जुड़ चुके हो पुत्र किन्तु इसका मतलब ये नहीं की तुम जब चाहो समय यात्रा कर समाया चक्र को प्रभावित करो
सूर्य ........ जी गुरुदेव हम कभी भी इसका अनुचित प्रयोग नहीं करेंगे गुरुदेव बिमा आपकी इच्छा या आज्ञा के हम इसका प्रयोग नहीं करेंगे हम वचन देते है आपको
गुरुदेव ......उचित है पुत्र अब तुम अपने लॉकेट को आदेश दो की समय यात्रा प्रणाली सुरु करे
सूर्य ....... जी गुरुदेव
सूर्य लॉकेट को आदेश देता है तो उसमे से एक तेज निईली राग की रौशनी निकलती है आवर वह जमीं पे समय यन्त्र चक्र बनने लगता है

कुछ हे देर में समय यन्त्र पूर्ण हो जाता है आवर लॉकेट सूर्य के गले में आ जाता है
कुछ हे देर में समय यन्त्र चक्र बहुत तेजी से चमक ने लगता है

सूर्य........ गुरुदेव ये क्या हो रहा है
गुरुदेव ......... पुत्र समय यन्त्र चक्र अपनी अंतिम चरण में है बस कुछ पल की प्रतीक्षा है फिर समय द्वार खुल जायेगा
ोउ जैसा गुरुदेव ने कहा कुछ हे समय बाद समय यन्त्र चक्र से एक ऊर्जा निकल मंदिर के दिवार से तक रति है तो वह पे समय द्वार उत्पन्न हो गया

गुरुदेव ........ पुत्र तुम्हे ये लॉकेट भूतकाल में स्वयं को देना है आवर जो घटना घाट चुकी है उसे बदलने की चेष्टा न करना किन्तु इतना स्वयं को समजा देना की आगे ऐसा नरसंघार न हो इसके लिया ये दिव्या लॉकेट उसका मार्गदर्शन करेगा कर्म अनुसार दंड देने में खुलेआम कत्ले आम कर केवल भय भयापत होता है अगर उन्हें सुंदररना है तो पृथ्वीलोक के दंड वीरान अनुसार दंड दो सर्वप्रथम दंडविधान की कमियों को उसकी खामियों को दूर करो वह के सासको ( शासन करने वाले नेता ) को सुवर्ण होगा तभी प्रजा में सुधर आएगा अब जाने का समय हो चूका है पुत्र
सूर्य किरण .......जी गुरुदेव
सूर्य किरण का हाथ थम आगे बढ़ा बीटा की समाया यन्त्र से ेल सेंड वाच सूर्य के हाथ में आ जाती है

गुरुदेव ......... पुत्र ये समय यन्त्र जो तुम्हारे हाथ में है इसमें जो रेट है उतना हे समय तुम वह रह सकते हो इस से आदिक तुमने वह एक पल भी वयतीत किया तो उसका प्रभाव समय चक्र पे आदिक होगा
सूर्य ........... जी गुरुदेव परनाम
किरण .......... परनाम गुरुदेव
गुरुदेव .......... सफल मनोरथ भाव पुत्र सूर्य पुत्री किरण ईश्वर तुम दोनों के मंतव्य को पूर्ण करे
सूर्य आवर किरण दोनों एक दूसरे का हाथ थम समय द्वार में प्रवेश कर जाते है
उनके जाने के कुछ 3,4 मिनट्स बाद हे समय द्वार बंद हो जाता है आवर समय यन्त्र भी की ऊर्जा भी समय यन्त्र घेरे के मध्य भाग में केंद्रित हो जाती है
गुरुदेव ........ समय द्वार बंद हो चूका है अर्थात पुत्र सूर्य पुत्री किरण भूतकाल में पहुंच चुके है ...............
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