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अपडेट. 123
सूर्य .......अब आप काम्य काव्य के पास सो जाइये मैं सुबह मिलता हूँ
कामिनी अपनी निघ्त्य दाल सूर्य को छोटा सा किश कर दूसरे बीएड जिसपे काम्य काव्य सोई हुई थी उसपे जा कर लेट जाती है
सूर्य वह से निकल कर टहलते हुए अपने रूम में आ जाता है
जहा सपना आवर निमिषा दोनों सोये हुए थे एक दूसरे को बहो में भरे हुए
सूर्य निमिषा के पीछा जा कर निमिषा सही सपना को बहो में भर का सो जाता है ...........
अब आगे ........
जिनिशा की जब आँख खुली तो वह सपना आवर सूर्य के बिच फाशी हुई थी
सुबह सुबह मॉर्निंग एरेक्शंस की वजह से सूर्य का घोडा अपने पुरे सबब पे था
जिसका चुंबन जिनिशा को अपनी योनि पे मह्सुश हो रहे थी
जिनिशा अपने जादू का प्रयोग कर सूर्य आवर सपना के बिच से गायब हो जाती है
सूर्य को जब अपनी नहो में खालीपन महसूस होता है तो वह उठ जाता है
सुबह सुबह सपना के खिले हुए चेहरे पे नजर पड़ते हे सूर्य सपना को कीच कर किश करने लगता है
किस करते हुए सूर्य सपना की योनि को सहलाने लगता है

कुछ देर किश करने के बाद सपना किश तोड़ कर सूर्य को देखती है
सपना ......रात में क्या हुआ था आपको आवर किस के पास गए थे आप
सूर्य ......कुछ नहीं तुम सो रही थी आवर मुझे सेक्स करने का दिल कर रहा था तो कामिनी चची के पास गया था
सपना .......उम्म्म्महहह मुझे उठा देते न
सूर्य .......कोई नै अभी रात की इच्छा पूरी कर देता हूँ
सपना .....वो तो मैं पूरी करुँगी हे
कहते हुए सपना निचे किशक कर सूर्य के कामदण्ड को चूमने लगती है

surya......ummmm मुझे यही अड्डा तो पसंद है तुम्हारी
सपना सूर्य के लैंड को थम कर चूसने लगती है
सूर्य के मुँह से सिसकारियां फूटने लगती है
सपना अपनी छूट को सहलाते हुए सूर्य के लैंड को ऊपर निचे कर चूसने चाटने लगती है

सूर्य ......उम्म्म्म अह्ह्ह्हह सपना. तुम नहीं होती तो न जाने मेरा क्या होता उम्म्म्म अह्ह्ह्हह सुबह सुबह हे मॉर्निंग की शुरुआत इतनी अच्छी है दिन का पता नहीं कैसा जायेगा
सपना ......उम् हम्म्म अह्ह्ह वो भी अच्छा हे जायेगा उम्म्म्म आप क्यों चिंता करते है मैं हूँ बुआ है चची है

सूर्य सपना को अपनी बगल में लिटा कर किश करते हुए सपना की सॉफ्ट सॉफ्ट चूचियों को मसलने लगता है
सपना जो अब तक काफी गरम हो चुकी थी
वह अपनी छूट को सहलाने लगती है
सपना .....उम्म्म्म. जान अब कुछ कीजिये ऐसा न कोई सुबह सुबह डिस्टर्ब करने आ जाये बिच में
सूर्य .....उम्म्म्म. अह्ह्ह्हह तुम ठीक कह रही हो जान
सूर्य सपना को सिदा लिटा कर सपना की छूट पे अपना लैंड सेट कर्त है

सपना .....अह्ह्ह्हह जान दिन पार्टी दिन आपका ये घोडा आवर तगड़ा हो रहा है
हर बार जब हे अंदर जाता है तो मीठा मीठा दर्द दे जाता है
सूर्य .....उम्म्म्म अह्ह्ह्हह क्यों केवल दर्द हे देता है मजा नहीं देता क्या
सूर्य डेरी डेरी सपना की छूट मरने लगता है
कुछ हे देर में सपना भी सूर्य का पूरा सहयोग करते हुए अपने छूट को सूर्य के लैंड पे मरने लगती है

सपना .....अह्हह्ह्ह्ह जान ऐसे हे छोड़ो अपनी सपना को अह्ह्ह्हह उम्म्म्म बहुत मज़ा आ रहा है सुबह सुबह उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह जान मैं आने वाली हूँ.
सूर्य इसी रफ़्तार में सपना की छूट पे प्रहार जारी रखता है
सूर्य ........उफ्फ्फ्फ़ ये तुम्हारी छूट ाजकुछ जल्दी नहीं बहने लगी
सपना सूर्य को अपने बहो में काश लेती है आवर सूर्य की कमर पे अपने पैरो का सिकंजा बना कर झाड़ने लगती है

सूर्य हलके हलके सखे मरते हुए सपना की माध्यम गति से चुदाई करने लगा
सपना .....hmmm.ahhhb जान अभी मुझे आपके घोड़े की सवारी करनी है
मुझे ऊपर आने दीजिये
सूर्य .....उम्मम्ममेहः क्यों नहीं जान ये लो
सूर्य सपना को लिए हुए पलट जाता है
अब सपना सूर्य की जगह ऊपर थे आवर सूर्य सपना की जगह निचे
सपना डेरी डेरी अपनी छूट को घिसते हुए सूर्य के लैंड की द्वारी करने लगी

सूर्य .....उम्म्म्म अह्ह्ह ऐसे क्या देख रही हो जान
सपना .....देख रही हूँ आजकल आप कुछ ज्यादा हे सेक्स करने के लिए उतावले रहने लगे है
सूर्य ......क्यों तुम्हे पसंद नहीं है क्या
सपना ....हम्म्म अह्ह्ह्हह हर पत्नी को ये पसंद होगा हे की उसका पीटीआई उसे प्यार करे फिर भला मुझे क्यों पसंद नहीं आएगा आपका प्यार करना

सूर्य सपना की कमर थम निचे से हौले हौले
सपना की छूट की घरहि को अपने लैंड से नापने लगता है
सूर्या ....उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह तुम्हे बस यही जिंदगी भर अपनी बहो में भर प्यार अह्ह्ह्हह करता राहु
सपना .....इस्स्स्सस्ठ्ठ्हब तो कीजिये न हम्म्म. अह्ह्ह्हह आपको किसने रोका है
एक बार फिर से सपना की छूट सूर्य के लैंड पे अपना माधव बने लगती है

सूर्य सपना के दोनों खुल्हो को थम मसलते हुए सपने गांड को अपने लैंड के ऊपर दबाने लगता है
सपना ......इससे अह्ह्ह्हह जवान थोड़ा तेज मैं फिर से चढ़ने वाली हूँ
अह्ह्ह्हह्हह माँ आपके साथ हर बार एक अलग हे अहसास आवर मज़ा मिलता है
कहते हुए sa0na सूर्य को किश करते हुए तेजी से अपनी छूट सूर्य के लैंड पे मरने लगती है
देखते हे देखते सपना का सरीर आनद जाता है आवर वह काप्टर हुए झाड़ने लगती है
सूर्य सपना को करवट के बल कर पीछे सपना की छूट की दनिया उधड़ने लगता है जब तक सूर्य अपना वीर्य सपना के योनिकुंड में भर नहीं देता है
फिर दोनों एक साथ फ्रेश हो बहार निकल जाते है
वही जिनलोक उद्यान में .....
पारिजात .......ये हमें उनसे मिलने की उन्हें देखने की इतनी इच्छा क्यों हो रही है
पता नहीं कहा है अब तो सुबह हुए भी काफी समय हो गया है
तभी एक पारी वह आती है
पारी .....राजकुमारी वो अभी अभी अपने कक्ष से निकले है आवर वो अभी उद्यान की तरफ हे आ रहे है
तभी पारिजात की नजर सूर्य आवर किरण पे पड़ती है जो दोनों उद्यान की आवर हे आ रहे थे
पारिजात ......तुम सब लोग जाओ यहाँ से
पारी ....जो आज्ञा राजकुमारी जी
सभी परिया पारिजात को वह छोड़ कर उद्यम से निकल जाती है
ीदार किरण उद्यम में सूर्य को रोक कर उसके किश करने लगती है
जिसे दूर से पारिजात देख रही थी

किरण द्वारा सूर्य को किश करने से पारिजात के दिल में चुंबन सी मह्सुश हुई
पारिजात .....इनको किसी आवर के साथ देख हमें क्यों बुरा लग रहा जैसे कोई हमसे हमारा सब कुछ चीन रहा है
सूर्य किरण को ले कर के वही एक बेंच पे बेथ जाता है

सूर्य को किरण दोनों मस्ती मजाक करते हुए बात कर रहे थे बिच बिच में कभी सूर्य तो कभी किरण सूर्य को चढ़ रही थी
पारिजात .......क्या हमें इनके पास जाना चाइये क्या हमें इनके एकांत के पालो में हस्तक्षेप कारनामे उचित होगा
कुछ देर पारिजात ऐसे हे अपने आपसे बाते करती रहती है फिर कुछ सोच कर वह सूर्य आवर किरण की आवर बढ़ जाती है
पारिजात .....शुभप्रभात सूर्य शुभप्रभात किरण
पारिजात की आवाज सुन दोनों का ध्यान उस आवर गया जहा पारिजात कड़ी दोनों को देख रही थी
सूर्य किरण .....शुभप्रभात राजकुमारी पारिजात
सूर्य थोड़ा साइड में हो परिणत के लिया भी जगह देता है
किरण ......कैसे है दीदी आप
पारिजात ........मैं अच्छी हूँ स्वीटी यही नाम रखा है न आपका इन्होने
किरण .....हेहेहे इनका नाम सूर्य है आप इन्हे नाम से पुकार सकती है
तभी वह एक जिनि सेविका आ जाती है
जिनि सेविका ......राजकुमारी किरण आपको राजकुमारी जिनिशा ने याद किया है
किरण .....ok चलिए आवर आप लोग बात कीजिये तब तक हम आते है
किरण वह से जिनि सेविका के साथ निकल जाती है
सूर्य .....अगर आपको एतराज न हो तो क्या आप कुछ वक़्त हमारे साथ बिताना चाहोगी
पारिजात को आवर क्या चाइये थे
पारिजात ......क्यों नहीं हमें ख़ुशी होगी आपके साथ वक़्त बोटा कर ( पारिजात .....हम मर्दो से नफरत करते है किन्तु इनका साथ हमें अच्छा लग रहा है इनके साथ हमें एक अलग हे ख़ुशी का अहसास हो रहा )
सूर्य ........आप जिनिशा की सखी है न इस नाते हम भी दोस्त बन सकते है अगर आपको कोई एतराज न हो तो
पारिजात .....हमें कोई एतराज नहीं हमें भी आपसे दोस्ती कर ख़ुशी होगी
सूर्य अपना हाथ आगे बढ़ता है
जिनिशा .........ये क्या है
सूर्य .......क्या आपको पता नहीं है
सूर्य परिणत का हाथ पकड़ कर हैंडशेक करता है
सूर्य .....हमारे यहाँ परतवि पे दोस्ती की सुरुहत हाथ मिला कर या गले मिल कर की जाती है
अब आप तो हमारे गले लगने से रही तो सोचा हाथ मिला कर हे दोस्ती की जाये हाहाहाहा
पारिजात ........हम क्यों नहीं गले मिलेंगे आपसे
पारिजात ने कहने को कह तो दिया पैर फिर खुद हे सरमने लगी
सूर्य कहा मौका गवाने वाला था सूर्य ने फ़ौरन पारिजात को खड़ा कर

खड़ा कर उसकी आँखों में देखने लगता है
पारिजात की जब नजरे सूर्य से टकराई तो सूर्य को वो आकर्षित सकती जो जिनिशा ने सूर्य को दी थी वो एक्टिव हो जाती है
पारिजात सूर्य की आँखों में खोने लगती है आवर अचानक से पारिजात की धड़कन तेज हो जाती है
सूर्य अगले हे पल पारिजात को अपनी बहो में कैद कर लेता है

पारिजात को अपनी बहो में भर सूर्य को बहुत सुकून मिलता है
ऐसा हे कुछ पारिजात के साथ भी होता है
( पारिजात ......वो आप हे है जिनका आकाश हमारे ख़्वाबों में आता है हम
आप हे है जिनके लिया हमारा दिल भेचेन रहता है
आपकी बहो में कैद हमें वो सुखुन मिला जिसके लिया हमने कितना इंतजार किया है अब हमसे दूर न होना हम आपके बिना रह नहीं पाएंगे )
कुछ देर बाद सूर्य पारिजात को अलग करता है
वही ये नजारा चुप करके जिनिशा आवर किरण भी देख रही थी सूर्य आवर पारिजात इस बात से अनजान एक दूसरे की आँखों में खोये हुए थे
किरण ........ये सब क्या है भाबी भाई पारिजात का क्या चाकर है
जिनिशा ......पारिजात भी सर्तक पे मोहित हो गई है वो उनसे प्यार करने लगी है स्वीटी पेट अभी तक उस प्यार से अनजान है जो मर्द जाट से हे नफरत करती है
वो देखो सरताज की आँखों में कैसे खोये हुए है
किरण ......मुझे लगता है मेरा no. तो ऐसे में आने से रहा अगर ऐसे हे भाई की लिस्ट भदरी रही तो हो गया कल्याण मेरा
जिनिशा ......नहीं स्वीटी सरताज की लाइफ में कोई भी आये वो तुम्हारा स्थान कभी नहीं ले सकती है
किरण .....जानती हूँ भाबी आवर मुझे इस बात की ख़ुशी भी है की भाई से जो भी प्रेम करती है भाई उन्हें निराश नहीं करता है
वो उनके प्रेम को स्वीकार करते है भले हे वो सभी को समय नहीं दे पते है
जिनिशा .....सही कहा स्वीटी अब हमें इन्हे अकेला छोड़ देना चाइये ताकि ये कुछ समय साथ में बिताये
जिनिशा किरण को ले कर महल लौट जाती है सूर्य आवर पारिजात को वही उद्यम में छोड़ कर ............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........
सूर्य .......अब आप काम्य काव्य के पास सो जाइये मैं सुबह मिलता हूँ
कामिनी अपनी निघ्त्य दाल सूर्य को छोटा सा किश कर दूसरे बीएड जिसपे काम्य काव्य सोई हुई थी उसपे जा कर लेट जाती है
सूर्य वह से निकल कर टहलते हुए अपने रूम में आ जाता है
जहा सपना आवर निमिषा दोनों सोये हुए थे एक दूसरे को बहो में भरे हुए
सूर्य निमिषा के पीछा जा कर निमिषा सही सपना को बहो में भर का सो जाता है ...........
अब आगे ........
जिनिशा की जब आँख खुली तो वह सपना आवर सूर्य के बिच फाशी हुई थी
सुबह सुबह मॉर्निंग एरेक्शंस की वजह से सूर्य का घोडा अपने पुरे सबब पे था
जिसका चुंबन जिनिशा को अपनी योनि पे मह्सुश हो रहे थी
जिनिशा अपने जादू का प्रयोग कर सूर्य आवर सपना के बिच से गायब हो जाती है
सूर्य को जब अपनी नहो में खालीपन महसूस होता है तो वह उठ जाता है
सुबह सुबह सपना के खिले हुए चेहरे पे नजर पड़ते हे सूर्य सपना को कीच कर किश करने लगता है
किस करते हुए सूर्य सपना की योनि को सहलाने लगता है

कुछ देर किश करने के बाद सपना किश तोड़ कर सूर्य को देखती है
सपना ......रात में क्या हुआ था आपको आवर किस के पास गए थे आप
सूर्य ......कुछ नहीं तुम सो रही थी आवर मुझे सेक्स करने का दिल कर रहा था तो कामिनी चची के पास गया था
सपना .......उम्म्म्महहह मुझे उठा देते न
सूर्य .......कोई नै अभी रात की इच्छा पूरी कर देता हूँ
सपना .....वो तो मैं पूरी करुँगी हे
कहते हुए सपना निचे किशक कर सूर्य के कामदण्ड को चूमने लगती है

surya......ummmm मुझे यही अड्डा तो पसंद है तुम्हारी
सपना सूर्य के लैंड को थम कर चूसने लगती है
सूर्य के मुँह से सिसकारियां फूटने लगती है
सपना अपनी छूट को सहलाते हुए सूर्य के लैंड को ऊपर निचे कर चूसने चाटने लगती है

सूर्य ......उम्म्म्म अह्ह्ह्हह सपना. तुम नहीं होती तो न जाने मेरा क्या होता उम्म्म्म अह्ह्ह्हह सुबह सुबह हे मॉर्निंग की शुरुआत इतनी अच्छी है दिन का पता नहीं कैसा जायेगा
सपना ......उम् हम्म्म अह्ह्ह वो भी अच्छा हे जायेगा उम्म्म्म आप क्यों चिंता करते है मैं हूँ बुआ है चची है

सूर्य सपना को अपनी बगल में लिटा कर किश करते हुए सपना की सॉफ्ट सॉफ्ट चूचियों को मसलने लगता है
सपना जो अब तक काफी गरम हो चुकी थी
वह अपनी छूट को सहलाने लगती है
सपना .....उम्म्म्म. जान अब कुछ कीजिये ऐसा न कोई सुबह सुबह डिस्टर्ब करने आ जाये बिच में
सूर्य .....उम्म्म्म. अह्ह्ह्हह तुम ठीक कह रही हो जान
सूर्य सपना को सिदा लिटा कर सपना की छूट पे अपना लैंड सेट कर्त है

सपना .....अह्ह्ह्हह जान दिन पार्टी दिन आपका ये घोडा आवर तगड़ा हो रहा है
हर बार जब हे अंदर जाता है तो मीठा मीठा दर्द दे जाता है
सूर्य .....उम्म्म्म अह्ह्ह्हह क्यों केवल दर्द हे देता है मजा नहीं देता क्या
सूर्य डेरी डेरी सपना की छूट मरने लगता है
कुछ हे देर में सपना भी सूर्य का पूरा सहयोग करते हुए अपने छूट को सूर्य के लैंड पे मरने लगती है

सपना .....अह्हह्ह्ह्ह जान ऐसे हे छोड़ो अपनी सपना को अह्ह्ह्हह उम्म्म्म बहुत मज़ा आ रहा है सुबह सुबह उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह जान मैं आने वाली हूँ.
सूर्य इसी रफ़्तार में सपना की छूट पे प्रहार जारी रखता है
सूर्य ........उफ्फ्फ्फ़ ये तुम्हारी छूट ाजकुछ जल्दी नहीं बहने लगी
सपना सूर्य को अपने बहो में काश लेती है आवर सूर्य की कमर पे अपने पैरो का सिकंजा बना कर झाड़ने लगती है

सूर्य हलके हलके सखे मरते हुए सपना की माध्यम गति से चुदाई करने लगा
सपना .....hmmm.ahhhb जान अभी मुझे आपके घोड़े की सवारी करनी है
मुझे ऊपर आने दीजिये
सूर्य .....उम्मम्ममेहः क्यों नहीं जान ये लो
सूर्य सपना को लिए हुए पलट जाता है
अब सपना सूर्य की जगह ऊपर थे आवर सूर्य सपना की जगह निचे
सपना डेरी डेरी अपनी छूट को घिसते हुए सूर्य के लैंड की द्वारी करने लगी

सूर्य .....उम्म्म्म अह्ह्ह ऐसे क्या देख रही हो जान
सपना .....देख रही हूँ आजकल आप कुछ ज्यादा हे सेक्स करने के लिए उतावले रहने लगे है
सूर्य ......क्यों तुम्हे पसंद नहीं है क्या
सपना ....हम्म्म अह्ह्ह्हह हर पत्नी को ये पसंद होगा हे की उसका पीटीआई उसे प्यार करे फिर भला मुझे क्यों पसंद नहीं आएगा आपका प्यार करना

सूर्य सपना की कमर थम निचे से हौले हौले
सपना की छूट की घरहि को अपने लैंड से नापने लगता है
सूर्या ....उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह तुम्हे बस यही जिंदगी भर अपनी बहो में भर प्यार अह्ह्ह्हह करता राहु
सपना .....इस्स्स्सस्ठ्ठ्हब तो कीजिये न हम्म्म. अह्ह्ह्हह आपको किसने रोका है
एक बार फिर से सपना की छूट सूर्य के लैंड पे अपना माधव बने लगती है

सूर्य सपना के दोनों खुल्हो को थम मसलते हुए सपने गांड को अपने लैंड के ऊपर दबाने लगता है
सपना ......इससे अह्ह्ह्हह जवान थोड़ा तेज मैं फिर से चढ़ने वाली हूँ
अह्ह्ह्हह्हह माँ आपके साथ हर बार एक अलग हे अहसास आवर मज़ा मिलता है
कहते हुए sa0na सूर्य को किश करते हुए तेजी से अपनी छूट सूर्य के लैंड पे मरने लगती है
देखते हे देखते सपना का सरीर आनद जाता है आवर वह काप्टर हुए झाड़ने लगती है
सूर्य सपना को करवट के बल कर पीछे सपना की छूट की दनिया उधड़ने लगता है जब तक सूर्य अपना वीर्य सपना के योनिकुंड में भर नहीं देता है
फिर दोनों एक साथ फ्रेश हो बहार निकल जाते है
वही जिनलोक उद्यान में .....
पारिजात .......ये हमें उनसे मिलने की उन्हें देखने की इतनी इच्छा क्यों हो रही है
पता नहीं कहा है अब तो सुबह हुए भी काफी समय हो गया है
तभी एक पारी वह आती है
पारी .....राजकुमारी वो अभी अभी अपने कक्ष से निकले है आवर वो अभी उद्यान की तरफ हे आ रहे है
तभी पारिजात की नजर सूर्य आवर किरण पे पड़ती है जो दोनों उद्यान की आवर हे आ रहे थे
पारिजात ......तुम सब लोग जाओ यहाँ से
पारी ....जो आज्ञा राजकुमारी जी
सभी परिया पारिजात को वह छोड़ कर उद्यम से निकल जाती है
ीदार किरण उद्यम में सूर्य को रोक कर उसके किश करने लगती है
जिसे दूर से पारिजात देख रही थी

किरण द्वारा सूर्य को किश करने से पारिजात के दिल में चुंबन सी मह्सुश हुई
पारिजात .....इनको किसी आवर के साथ देख हमें क्यों बुरा लग रहा जैसे कोई हमसे हमारा सब कुछ चीन रहा है
सूर्य किरण को ले कर के वही एक बेंच पे बेथ जाता है

सूर्य को किरण दोनों मस्ती मजाक करते हुए बात कर रहे थे बिच बिच में कभी सूर्य तो कभी किरण सूर्य को चढ़ रही थी
पारिजात .......क्या हमें इनके पास जाना चाइये क्या हमें इनके एकांत के पालो में हस्तक्षेप कारनामे उचित होगा
कुछ देर पारिजात ऐसे हे अपने आपसे बाते करती रहती है फिर कुछ सोच कर वह सूर्य आवर किरण की आवर बढ़ जाती है
पारिजात .....शुभप्रभात सूर्य शुभप्रभात किरण
पारिजात की आवाज सुन दोनों का ध्यान उस आवर गया जहा पारिजात कड़ी दोनों को देख रही थी
सूर्य किरण .....शुभप्रभात राजकुमारी पारिजात
सूर्य थोड़ा साइड में हो परिणत के लिया भी जगह देता है
किरण ......कैसे है दीदी आप
पारिजात ........मैं अच्छी हूँ स्वीटी यही नाम रखा है न आपका इन्होने
किरण .....हेहेहे इनका नाम सूर्य है आप इन्हे नाम से पुकार सकती है
तभी वह एक जिनि सेविका आ जाती है
जिनि सेविका ......राजकुमारी किरण आपको राजकुमारी जिनिशा ने याद किया है
किरण .....ok चलिए आवर आप लोग बात कीजिये तब तक हम आते है
किरण वह से जिनि सेविका के साथ निकल जाती है
सूर्य .....अगर आपको एतराज न हो तो क्या आप कुछ वक़्त हमारे साथ बिताना चाहोगी
पारिजात को आवर क्या चाइये थे
पारिजात ......क्यों नहीं हमें ख़ुशी होगी आपके साथ वक़्त बोटा कर ( पारिजात .....हम मर्दो से नफरत करते है किन्तु इनका साथ हमें अच्छा लग रहा है इनके साथ हमें एक अलग हे ख़ुशी का अहसास हो रहा )
सूर्य ........आप जिनिशा की सखी है न इस नाते हम भी दोस्त बन सकते है अगर आपको कोई एतराज न हो तो
पारिजात .....हमें कोई एतराज नहीं हमें भी आपसे दोस्ती कर ख़ुशी होगी
सूर्य अपना हाथ आगे बढ़ता है
जिनिशा .........ये क्या है
सूर्य .......क्या आपको पता नहीं है
सूर्य परिणत का हाथ पकड़ कर हैंडशेक करता है
सूर्य .....हमारे यहाँ परतवि पे दोस्ती की सुरुहत हाथ मिला कर या गले मिल कर की जाती है
अब आप तो हमारे गले लगने से रही तो सोचा हाथ मिला कर हे दोस्ती की जाये हाहाहाहा
पारिजात ........हम क्यों नहीं गले मिलेंगे आपसे
पारिजात ने कहने को कह तो दिया पैर फिर खुद हे सरमने लगी
सूर्य कहा मौका गवाने वाला था सूर्य ने फ़ौरन पारिजात को खड़ा कर

खड़ा कर उसकी आँखों में देखने लगता है
पारिजात की जब नजरे सूर्य से टकराई तो सूर्य को वो आकर्षित सकती जो जिनिशा ने सूर्य को दी थी वो एक्टिव हो जाती है
पारिजात सूर्य की आँखों में खोने लगती है आवर अचानक से पारिजात की धड़कन तेज हो जाती है
सूर्य अगले हे पल पारिजात को अपनी बहो में कैद कर लेता है

पारिजात को अपनी बहो में भर सूर्य को बहुत सुकून मिलता है
ऐसा हे कुछ पारिजात के साथ भी होता है
( पारिजात ......वो आप हे है जिनका आकाश हमारे ख़्वाबों में आता है हम
आप हे है जिनके लिया हमारा दिल भेचेन रहता है
आपकी बहो में कैद हमें वो सुखुन मिला जिसके लिया हमने कितना इंतजार किया है अब हमसे दूर न होना हम आपके बिना रह नहीं पाएंगे )
कुछ देर बाद सूर्य पारिजात को अलग करता है
वही ये नजारा चुप करके जिनिशा आवर किरण भी देख रही थी सूर्य आवर पारिजात इस बात से अनजान एक दूसरे की आँखों में खोये हुए थे
किरण ........ये सब क्या है भाबी भाई पारिजात का क्या चाकर है
जिनिशा ......पारिजात भी सर्तक पे मोहित हो गई है वो उनसे प्यार करने लगी है स्वीटी पेट अभी तक उस प्यार से अनजान है जो मर्द जाट से हे नफरत करती है
वो देखो सरताज की आँखों में कैसे खोये हुए है
किरण ......मुझे लगता है मेरा no. तो ऐसे में आने से रहा अगर ऐसे हे भाई की लिस्ट भदरी रही तो हो गया कल्याण मेरा
जिनिशा ......नहीं स्वीटी सरताज की लाइफ में कोई भी आये वो तुम्हारा स्थान कभी नहीं ले सकती है
किरण .....जानती हूँ भाबी आवर मुझे इस बात की ख़ुशी भी है की भाई से जो भी प्रेम करती है भाई उन्हें निराश नहीं करता है
वो उनके प्रेम को स्वीकार करते है भले हे वो सभी को समय नहीं दे पते है
जिनिशा .....सही कहा स्वीटी अब हमें इन्हे अकेला छोड़ देना चाइये ताकि ये कुछ समय साथ में बिताये
जिनिशा किरण को ले कर महल लौट जाती है सूर्य आवर पारिजात को वही उद्यम में छोड़ कर ............
अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........
रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........





















