Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 30 - SexBaba
  • From this section you can read all the hindi sex stories in hindi font. These are collected from the various sources which make your cock rock hard in the night. All are having the collections of like maa beta, devar bhabhi, indian aunty, college girl. All these are the amazing chudai stories for you guys in these forum.

    If You are unable to access the site then try to access the site via VPN Try these are vpn App Click Here

Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

कॉंग्रट्स Xabhi भाई बेस्ट reader's ऑफ़ मंथ चुने जाने के लिया
 
अपडेट 241

सूर्य सीधा सैमसन भूमि पहुंचा जहा लक्समी का आत्म संस्कार होने हे वाला था

राजीव पंडित जी के कहे अनुसार सरीर विधि कर लक्समी की चिटा को अग्नि देता है है

लक्समी ........अलविदा मेरे मसीहा अब मैं मुक्ति प् सकती हूँ

देखते हे देखते लक्समी की आत्मा रौशनी में बादल गायब हो गयी

राजीव को बता कर सूर्य वह से लक्समी की चिटा की रख ले हरिद्वार पहुंचा वह गंगा में रख प्रवाहित कर सनान कर वह से गायब हो सूर्यगढ़ आ गया ..................

अब आगे ..........

सूर्यगढ़ .......... सूर्य दोपहर के खाने के समय से कुछ पहले सूर्यगढ़ पहुंचा

सूर्य सीधा अपनी माँ के रूम में अप्पेअर हुआ शालिनी जी अपने अलमारी से कुछ निकल रही थी

तभी सूर्य पीछे से उन्हें बहो में भर लेता है

शालिनी जी ....... तो मेरे बेटे को मेरी याद आ हे गयी इतने टाइम बाद

सूर्य ........... याद उन्हें किया जाता है माँ जिन्हे हम हल जाते है आप तो यहाँ रहती है फिर भला आपको कैसे भूल सकता हूँ

शालिनी जी उसे तरह सूर्य के गाल चुम अपने गाल उसके गाल से सत्ता देती है

शालिनी जी ....... तो मेरे दूसरे बेटे ने दिल्ली को हिला कर रख दिया हम्म्म

सूर्य ....... आपसे क्या छुपा है माँ वैसे आपका बीटा अब कभी भी आप से मिल सकता है

शालिनी जी ...... मतलब मैं समाजी नहीं बीटा

सूर्य ....... वो मैं आपको रात में विस्तार से बताऊंगा माँ बड़ी जोरो की भूख लगी है माँ आवर आज आपके हाथो का बना कुछ स्पेशल खिला दीजिये फिर आपको एक खुसखबरी दूंगा मैं

शालिनी जी ....... ठीक है मैं बनती हूँ कुछ इतने फ्रेश हो जा पैर पहले सब स्व मिल तो ले

सूर्य ........ जी माँ लव यू माँ ुम्मम्हा

शालिनी जी ........है है माखन लगा लिया तो जा अब ुम्म्हा लव यू बीटा

सूर्य रूम से निकल रेखा जी आवर मेनका जी से मिलता है दोनों किचन में दोपहर का खाना बना रही थी

रेखा जी ...... आ गया बीटा

सूर्य ......जी मम्मी आपसे ज्यादा दिन दूर रह सकता हूँ क्या

मेनका जी .....कई भाबी सा क्या तुझे अपने थान से ढूढ पिलाती है जो दूर नहीं रहा गया

सूर्य ...... देखो न बड़ी मम्मी बुआ सा कैसे बात कर रही है

रेखा जी ...... इन्हे बोल दे बीटा जो भी बोलना है तुम जा कर बाकि सब से मिल को फिर खाना खाओ

सूर्य .....जी बड़ी मम्मी

सूर्य जाते जाते रेखा जी से नजरे बचा कर मेनका जी के वो मायके जैसे खुल्बे सायला कर निकल गया

रेखा जी ....... दीदी कुछ तो आसाराम किया कीजिये कुछ भी बोल देती है वो सब समझता है बचा नहीं रहा अब

मेनका जी ...... वो समझता है तभी तो कहा उसे वैसे तरय करके देख लीजिये क्या पता फिर से ढूढ उतर आये इनमे

रेखा जी ........ आपको हे मुबारक हो आप हे कीजिये उसके साथ तरय मुझे नहीं करना

सूर्य अपने दादा जी दादी जी से मिल मेर्री जी के साथ कुछ देर बात कर अपने रूम में पहुंचा तो वह तो पूरा जमघट लगा था

कोमल अलीना राधा जुली मानसी पाछो यही डेरा जमाये बैठी थी

सूर्य ......क्या बात सब एक साथ क्या प्लानिंग चल रही है

सूर्य को देखते हे राधा तो बीएड स चालत लगा सूर्य की गॉड में आ छड़ी

सूर्य ......बुआ कुछ तो आराम करो कैसे बंदरो के जैसे उछाल कूद कर रही है

राधिका .....दुबारा बुआ कहा न तो दन्त तोड़ दूंगी तुम्हारे

सूर्य ......क्या बात है आज मेरी राधा तो बड़ी शेरनी बन रही है

राधा सूर्य से गले मिल पीछे हैट जाती है कोमल फिर अलीना फिर जुली एक एक कर सूर्य से गले लग मुक्ति है

कोमल ......मानसी दीदी हमारे सामने कैसे आसाराम हम सब एक हे कस्ती के स्वर है

मानसी ......वो बात नहीं है मैं. बस अपनी बरी का इन्तजार कर रही थी

सूर्य .......कोमल जरा कपडे निकल दो मेरे नहाना है आवर आपको अलग से इन्विते करना होगा क्या

मानसी भी कुछ सरम के साथ सूर्य के गले लग जाती है

सूर्य ....... देखो तुम सब एक साथ रहो तो ज्यादा फॉरमिलती न किया करो है बहार किसी को पता न चले आवर है परषो दिल्ली सिफत हो रहे है हम सब आप लोगो का वही दिल्ली एडमिशन होना है

कोमल ........पैर घर तो अभी बना हे नहीं है

सूर्य ....... परषो दोपहर जमीं का सुधिकरण कर दादी जी दादा जी के हाथो पूजा के बाद से घर का काम सुरु हो जायेगा जिसमे ज्यादा समय नहीं लगेगा ज्यादा से ज्यादा एक मंथ

राधा .....तब तक सब वह कह रहेंगे

सूर्य .....क्यों मुझे जो आर्मी से अलॉट हुआ घर है न

अब निचे जा कर खाना लगाओ मैं आता हूँ

सूर्य अपना टॉवल ले बाथरूम में चला गया लड़किया भी निचे चल दी मानसी को यही छोड़

कुछ 15 मिनट्स में सूर्य कहा कर बहार आया

मानसी ......यहाँ बैठिये आप

मानसी सूर्य को बीएड पे बैठा दूसरे टॉवल से सूर्य के गीले बाल पांच ने लगती hi सूर्य मस्ती करते हुए मानसी के साड़ी पेट से हाथ वह गुदगुदी करने लगता है

मानसी .....क्या करते हो जी गुदगुदी हो रही है

सूर्य .....तभी तो ऐसा कर रहा हूँ वैसे ये अपनी दोनों शैतान कहा है दिखाई नहीं दे रही है

मानसी ........ कोण पायल दीदी प्रीती दीदी क्या

सूर्य ....है वही दोनों तो गायब है घर से

मानसी ......वो दोनों दीदी किरण दीदी के यहाँ गयी है सुबह से

सूर्य .....अब निचे जाओ आवर खाना खाओ मैं भी आता हु. निचे

मानसी सूर्य को एक छोटा सा किश कर मुस्कुराते हुए निचे चली गयी

कुछ देर बाद सूर्य भी त्यार हो निचे चला गया

सभी एक साथ बाते करते हुए खाना खाने लगते है दोपहर को दादा जी दादी जी दोनों अपने हे रूम में खाना कहते थे

सूर्य ....... बुआ सा फूफा जी कब आ रहे है परषो दिल्ली भी जाना है हमें

मेनका जी ......बीटा वो कल साम को यहाँ आ जायेंगे मेरी सुबह हे बात हुई थी उनसे आवर है बीटा वो जेनी का कॉल आया था मुझे उसे कुछ बात करनी थी तुमसे तुमसे उसने तुम्हारा फ़ोन तरय किया पैर तुमने उठाया नहीं

सूर्य ........ उस से मेरी बात हो गयी है बुआ उसे हॉस्पिटल को ले कर कुछ बात करनी थी तो मैंने डैड का no. दे दिया है उसे

मेनका जी .....आवर है बीटा वो तुम्हारे फीफा जी ने कंपनी का प्रॉफिट तुम्हारे अकाउंट में ट्रांसफर कर दिया है

सूर्य .....मुझे क्या जरुरत है बुआ इतने पैसो की पापा बड़े पापा मां जी ने पहले हे मेरे अकाउंट में बहुत पैसे दाल रखे जबकि मैं उन्हें काम में भी नहीं लेता हूँ

शालिनी जी ...... मेरी सभी बेटियों की शॉपिंग करवा देना दिल्ली में कॉलेज खुलने से पहले

सूर्य ....... सॉरी माँ इन्हें कार्ड दे दूंगा पैर शॉपिंग इनके साथ मुझसे नहीं होने वाली आप जानो आवर आपकी बेतिया इनके आने की खबर सुन वह सुनिधि सोफी राधिका भाई भी कोई न कोई प्लान बना भी लिया होगा

कोमल ......सानिया दी आवर माया को भूल गए आप

सूर्य ......उनसे तो मिला भी नहीं न हे बात कर पाया जाने क्या हालत करने वाली है

जुली ......मुझे भी कॉलेज जाना है सबके साथ

सूर्य ........ क्या तुम्हे ड्रैगन लोक नहीं जाना वापिस

जुली ....... जाना है पैर कोमल ने बताया की रोज कॉलेज जाना जरुरी नहीं बिच में वह भी चली जाउंगी

सूर्य ....... मानसी तुम क्या कहती हो

मानसी .........मुझे माँ के साथ हे रहना है मुझे नहीं जाना कॉलेज

शालिनी जी ......बेटी पुरे दिन थोड़े न रहना है कॉलेज में बस कुछ घंटे आवर उसके बाद फिर लौट आना सब के साथ तुम्हे वह अच्छा लगेगा

रेखा जी ......वैसे भी बेटी तुम इन सब शेतानो की मण्डली के बिना बोर हो जाओगी घर में हमारे साथ

मानसी ........ठीक है मम्मी जैसा आप लोग कहो

सूर्य ........ मेरा हो गया मैं कुछ देर आराम करता हूँ बुआ पायल प्रीती को बोल देना वो अकेले न आये साम को मैं सूरजगढ़ जाऊंगा तो ले आऊंगा उन्हें

मेनका जी .......ठीक है बीटा

सूर्य वह से निकल रेखा जी के रूम में चला गया आवर लेट गया .......

सूरजगढ़ ..........

साम करीब 6 बजे सूर्य मानसी के साथ सूरजगढ़ पहुंचा

शालिनी जी के जिद पे हे सूर्य मानसी को अपने साथ सूरजगढ़ ले कर गया था सूर्य को मानसी को वह देख सभी खुश होते है सूर्य अपना नाना जी नानी जी के चरण स्पर्श कर आसिष लेता है

सूर्य ....... कैसे है आप नाना जी नानी जी

नाना जी .....अच्छा हूँ बीटा तुम कब आये दिल्ली से आवर वह के काम का क्या हुआ

सूर्य........ दोपहर को आया था नाना जी काम भी लगभग पूरा हो हे गया है

नानी जी ........ चलो बीटा अंदर सबसे से मिल लो

सूर्य ........जी नानी जी

सूर्य नानी जी के साथ हवेली के अंदर की तरफ निकल गया

सूर्य प्रिय जी आवर सन्ति जी दोनों के पेअर छू कर उनका आशीर्वाद लेता है

सूर्य ......कैसे हो बड़ी मम्मी छोटी मम्मी

प्रिय जी ......हम सब अच्छे है बीटा तुम कैसे हो

सूर्य ........मैं भी अच्छा हूँ संजय मां जी बहार है क्या

प्रिय जी ....... नहीं बीटा वो यही किसी से मिलने गया है रात तक लौट आएंगे तब मिल लेना

सूर्य ...... नहीं मम्मी मैं अभी कुछ देर बाद वापिस लौट जाऊंगा पायल प्रीती यही पे थी तो सोचा आप सब से भी मिल लूंगा आवर उन्हें भी ले जाऊंगा

प्रिय जी ....... ये क्या बात हुई बीटा अभी आये आवर अभी जाने को कह रहे हो

सूर्य ....... कुछ दिनों की बात है मम्मी फिर सब साथ हे रहने वाले है न वैसे भी परषो दिल्ली चलना है सबको तो उसकी तयारी भी करनी है न

सन्ति जी ......ये लो बीटा कॉफ़ी पिलो आवर वो सब ऊपर हे है जा कर उन से भी मिल लो

आवर है खाना खाने के बाद चले जाना घर मैं दीदी को कॉल कर के बोल दिया है

सूर्य ....... ठीक है पैर उस दिन की तरह ज्यादा प्यार मत लुटा देना हालत ख़राब हो जाती है मेरी

प्रिय जी ....... वो तुम जानो बीटा चलो सन्ति खाने की तयारी करते है

सूर्य कॉफ़ी का मैग लिया ऊपर की आवर चल देता

सपना ........ क्या बात है इतनी जल्दी पीछा छुड़वा लिया अपनी सास से

सूर्य ....... साली से जो मिलना था सोचा थड़ा लाइन हे मर लूँ क्या पता कुछ खता मीठा मिल जाये

सपना सूर्य को साथ ले अपने रूम की आवर भाड़ गयी जहा किरण पायल प्रीती के साथ मानसी भी बैठी थी

सूर्य जाते हे किरण को गले से लगा लेता है

सूर्य ........ कैसे है मेरी स्वीटी

किरण ........ अब जा कर स्वीटी की याद आई

सूर्य .......... क्या कृ याद तो बहुत आई पैर तुम्हे तो सब पता है

किरण ....... है सब पता है आप जहा भी जाते हो कुछ न कुछ कांड करके हे आते हो न

पायल ......क्या कांड कर दिया इन्होने अब

सूर्य ........ कुछ नहीं स्वीटी मजाक कर रही है बस अरे वो मेरी जूठी कॉफ़ी है पायल

पायल ......कोई बात नहीं चलेगी मुझे

सूर्य ........ आप दोनों कब आई यहाँ

प्रीती .....जैसे की आपको कुछ पता हे न हो

सूर्य कुछ देर सबसे बात करता है फिर किरण को लिया छठ पे निकल गया कुछ बात करने के लिया

छठ पे पहुंचने हे किरण सूर्य के सीने से लग गयी

सूर्य ........ क्या हुआ स्वीटी तुम कुछ बदली बदली सी लग रही हो

किरण ......वो वो मुझे कुछ कहना था

सूर्य .......... है तो कहो न रोका किसने है

किरण ........ वो कल सुबह से मुझे थोड़ा अजीब सा लग रहा है आवर अच्छा भी

सूर्य ....... मैं कुछ समजा नहीं आवर तुम्हारी ऊर्जा में भी परिवर्तन मह्सुश कर रहा हूँ तुम्हारी ऊर्जा के साथ साथ किसी अन्य ऊर्जा का समावेश हुआ है क्या

कितन ........... वो कल से मुझे भी लग रहा है ऐसा हे आवर एक बात आवर है जब भी मैं. सुबह ध्यान करती हूँ ऐसा लगता है की कोई मेरे साथ ध्यान में रह कर मंत्र उच्चारण कर रहा है

सूर्य ....... ये तो बड़ी अजीब बात है तुमने पता करने की कोशिश की इसके विषय में

किरण ........ की थी पैर वह केवल प्रकाश पुंज के अलावा कुछ नजर नहीं आता जब मैं उसके नजदीक जाने लगती हूँ तो एक बहुत हे प्यारा सा अलग सा खिचाव मह्सुश करती हूँ जैसे वो ऊर्जा पुंज मुझे अपने पास बुला रहा है

सूर्य ........ एक काम करते है कल ध्यान के समय मैं भी तुमसे जुड़ कर उस ऊर्जा पुंज को मह्सुश करके देखता हूँ ऐसा क्या है उसमे

चलो निचे चलते है मानसी आ रही है खाने पे बुलाने के लिया

सूर्य किरण निचे चल दिया सभी के साथ खाना खा कर सूर्य मानसी पायल प्रीती चारो सूर्यगढ़ के लिया निकल गए

सूर्य अपने पापा आवर बड़े पापा से मिल कर कुछ कुछ देर बात करता है कुछ बिज़नेस रिलेटेड आवर दिल्ली जाने के बारे में भी

शिव ......अब जाओ बीटा सोने का वक़्त हो गया है

सूर्य .......जी पापा गुड नाईट

शिव ......गुड नाईट बीटा

महेंद्र जी ........ बीटा सूर्य कल जब भी फ्री हो तो मॉल आना कुछ काम है तुमसे वह

सूर्य .......जी बड़े पापा गुड नाईट

महेंद्र जी ......गुड नाईट बीटा अब जाओ जा कर सो जाओ

सूर्य वह से निकल रूम में आ गया जहा मानसी उसका हे इन्तजार कर रही थी

मानसी ...... आप आ गए कुंवर जी

सूर्य ........ क्या हुआ मानसी कुछ काम था क्या

मानसी ...... जी नहीं वो ऐसे हे पूछ लिया

सूर्य ......... तुम आराम करो मैं अभी आया

कुछ देर बाद सूर्य ुंडेरवार में मानसी की बगल में आ लेता

मानसी सूर्य के बीएड पे लेट ते हे किसाख कर सूर्य के बाजु का तकिया बना कर लेट जाती है

और सूर्य के सीने को अपने नाख़ून से कुरेधने लगती है

सूर्य मानसी की मनोस्थितित समाज जाता है की मानसी को क्या चाइये

सूर्य मानसी की निघ्त्य से उन ठोस उभरे बूब्स से निघ्त्य हटा उन्हें सहलाते हुए एक चुकी के चूचक मो मुँह में भर कर चूसने लगा

मानसी सूर्य की छोड़ी छथि पे हाथ फिरते हुए निचे की तरफ ले जाती है आवर सूर्य की शार्ट में हाथ दाल सूर्य के आधुतजित गरम लिंग को पकड़ कर मुठ मरने लगती है

मानसी के कोमल स्पर्श से सूर्य का लिंग की सकत होने लगता है मानसी लिंग के साथ साथ सूर्य के अंडकोष को भी सहला देती

सूर्य मानसी की चूचियों को चुस्त हुए अपनी कमर उठा कर अपनी अंडरवाटर खिसका कर लैंड को खुली हवा में चढ़ देता है जो आज़ादी होते हे छठ की तरफ मुँह उठाये खड़ा हो गया

सूर्य मानसी के जिसम से उसकी निघ्त्य हटा मानसी को अपनी ऊपर ले लेता है





लड़कियों में केवल राधा आवर मानसी हे ऐसे थे जिसकी चूचिया बाकियो से थोड़ी बड़ी थी

मानसी अपनी चूचिया सूर्य के सीने पे रगड़ते हुए उसे किश करने लगती है

सूर्य भी उतनी हे सीडट से मानसी की जज़बान के सात मुखरास चूसने लगता है

मानसी अपनी चूचक सूर्य के सीने पे घिसते हुए अपनी नाम मरता की पेंटी के साथ सूर्य के लिंग पे अपनी योनि रगड़ ने लगती

सूर्य मानसी को गॉड में लिया हुए कुछ देर स्तनपान करता है





सूर्य ....... मनु तुम्हारी ये जो चूचिया है ये जितनी बड़ी है उतनी हे सॉफ्ट बिलकुल रूही के जैसे

मानसी .........उम्म्म्म आपको ये इतनी पसंद है

सूर्य .......उम्म्म्म बहुत ज्यादा

सूर्य मानसी की पेंटी निकल साइड में रख देता है

मानसी सूर्य की गॉड से हाथ सूर्य को बीएड पे हाथ दबाब से लेट ने का इशारा करती है आवर जांघों के बिच जा सूर्य की आँखों में देखते हुए लिंगमुण्ड को चाटने लगती है

जब लैंड पर्याप्त गिला हो गया तो अपने टंगे फैलाये सूर्य का मोठे सूपड़ा पे अपना योनिकुंड टिकते हुए डेरी डेरे बेथ जाती है

सूर्य मानसी को अपनी आवर जुखाते हुए हलके देखे के साथ आधे लैंड को मानसी की सकरी चिकनी गुफा में गुसाई अंदर बहार करने लगा





मानसी ......उम्म्म्म अह्हह्ह्ह्ह ये जब भी अंदर जाता है पता नहीं अह्ह्ह्हह्हह मुझे कुछ होने लगता है कुंवर जी जैसे मैं खुद पे काबू खोने लगती हूँ

सूर्य ......उम्म्म्म ये केवल तुम्हारे साथ हे नहीं होता मनु सम्भोग के समय जब कोई स्त्री अपने चरम सुख की आवर बढ़ती है तो ऐसा मह्सुश होना नार्मल है पैर तुम असुरकन्या हो तो इसका तुम पे असर कुछ आदिक होता है





बातो बातो में सूर्य मानसी की छूट में अपना पूरा लैंड उतर

अपनी कमर को तेजी से चलते हुए मानसी को इस मिलान प्रथम चरम सुख के नजदीक पहुंचा चूका था

अपनी लिंग पे मानसी की योनि का कसाव मह्सुश कर सूर्य मानसी की बूब्स को थोड़ा सख्ती से दबाते हुए देखे मरने लगता है

जैसे हे मानसी जड़ने के करीब पहुंची उसके नाख़ून सूर्य के सीने पे जहा लड़कियों के बूब्स होते है बड़ी सकती से पकाते हुए झड़ने लगी आवर सूर्य पे निढाल हो गई

कुछ देर बाद मानसी खुद हे सूर्य के ऊपर से हैट बगल में लेट जाती है

सूर्य मानसी के पैरों को फैलाये मानसी की बुरी तरह से गीली छूट पे अपना लैंड जिसने लगा





जिस से मानसी एक बार फिर से हराम होम लगती है

मानसी .....उम्म्म अह्ह्ह्हह कुंवर जी अब अंदर दाल भी दीजिये

सूर्य ....... क्या डालना है अंदर मनु आवर कहा डालना है

मानसी ......आपको सब पता है अब दाल दीजिये न हमारे अंदर

सूर्य .........जहा डालना है आवर जो डालना है उसका नाम लीजिये तभी डालूंगा

मानसी ........ उफ्फ्फ अह्ह्ह्हह हमारी योनि में आपका बड़ा से लिंग दाल दीजिये





सूर्य अपना लैंड एक हे जटके में मानसी की छूट में लगभग पूरा दाल देता है

मानसी के मुँह से एक हलकी सी दर्द भरी आह्ह्ह्हह निकल जाती है

सूर्य ......इनको दूसरी भाषा में लैंड और छूट भी कहा जाता है

मानसी ....उम्म्म्म अह्ह्ह्हहब उफ्फ्फ्फ़ कुंवर जी हम. जानते है आप बस चुदाई कीजिये

सूर्य मानसी पे लेट बुरी तरह से मानसी की चुदाई करने लगता जैसे जैसे चुदाई की गति भड़ी मानसी की सरीर की गर्मी भी

मानसी अपनी दोनों पैरों को सूर्य के कूल्हों पे कास खुद भी निचे से अपनी छूट सूर्य के लैंड पे उछलने लगती बस दोनों के सांसो के साथ मानसी की चित्रांश से लोथड़ा सूर्य का लैंड जब भी अंदर बहार होता फिक्की फिछह पूछ पूछ की आवाज हे निकल रही थी

मानसी के झड़ते हे सूर्य मानसी को डोगग्य स्टाइल में करनीचे खड़े खड़े पूरा लैंड अंदर बहार करते हुए तब तक लगा रहा जब तक मानसी की बच्चेदानी को अपने वीर्य से लाभ लैब न कर दिया

मानसी की पेंटी से अपने लैंड पे लगे वीर्य को साफ कर मानसी की योनि से बहार निकला वीर्य भी साफ कर सूर्य पानी पि कर मानसी की बगल में लेट जहा है

मानसी सूर्य के जिसम से एक बार फिर से लिपट जाती है पैर अब सुकून से चिपके हुए वो बस सूर्य को मह्सुश कर रही थी सरीर की गर्मी जो निकल गयी थी

सूर्य मानसी के सोने के बाद शालिनी जी के पास काने वाला था पैर जब सूर्य शालिनी के साथ अपने पापा को सोया हुआ देखा तो उसने जाना कैंसिल कर मानसी को बहो में भर कर सो गया .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..................
 
अपडेट 242

मानसी की पेंटी से अपने लैंड पे लगे वीर्य को साफ कर मानसी की योनि से बहार निकला वीर्य भी साफ कर सूर्य पानी पि कर मानसी की बगल में लेट जहा है

मानसी सूर्य के जिसम से एक बार फिर से लिपट जाती है पैर अब सुकून से चिपके हुए वो बस सूर्य को मह्सुश कर रही थी सरीर की गर्मी जो निकल गयी थी

सूर्य मानसी के सोने के बाद शालिनी जी के पास काने वाला था पैर जब सूर्य शालिनी के साथ अपने पापा को सोया हुआ देखा तो उसने जाना कैंसिल कर मानसी को बहो में भर कर सो गया .................

अब आगे ............

सुक्रलोक ......... असुरगुरु को यहाँ आये हुए काफी समय हो चूका था किन्तु अभी तक प्रथम असुरगुरु शुक्र से उनकी भेंट नहीं हुई थी

कारन था असुरगुरु शुक्र का तप में लीं होना

( यहाँ असुरगुरु शुक्र को असुरगुरु आवर असुरगुरु व्योमासुर को उनके नाम से लिखूंगा )

व्योमासुर ......... पता नहीं गुरुदेव का तप कब पूर्ण होगा आवर मैं उनसे कब भेंट कर पाउँगा बिच बिच पता नहीं वो डस्ट नरकासुर अब न जाने किस षड़यंत्र को पूर्ण करने में लगा होगा

तभी असुरगुरु का परम शिष्य वह आ व्योमासुर को असुरगुरु के तप से बहार आने की सुचना देता है और उन्हें असुरगुरु ने याद किया है ये सन्देश भी देता है

व्योमासुर ....... उचित है हम अतिसिगरा उनके सम्मुख होंगे

व्योमासुर वह से असुरगुरु जहा मौजूद थे उस आवर बड़ी तेजी से भाड़ गया वर्षों बाद व्योमासुर अपने गुरु से भेंट करने वाले थे उनके मन में ख़ुशी आवर संशय दोनों थे

असुरगुरु ....... आप पुत्र व्योमासुर हम तुम्हारे आने की हे प्रतीक्षा कर रहे थे

व्योमासुर ......परनाम गुरुदेव

असुरगुरु ............ कल्याण हो पुत्र व्योमासुर

असुरगुरु के इस अरे पे व्योमासुर असुरगुरु के सम्मुख जमीं पे आसान लगा कर बेथ जाते है

असुरगुरु ....... अपनी पुत्री मानसी के विवाह की ढेरो शुभकामनाये पुत्र व्योमासुर किन्तु एक मानव से असुर कन्या का विवाह

व्योमासुर की असुरगुरु की बात सुन अपना शीश जुखा लेता है जैसे उनके आशीर्वाद में भी उनके लिया कोई तंज छुपा हो

व्योमासुर ....... हमें क्षमा करे गुरुदेव किन्तु हम आपको सत्य से अवगत नहीं करवा सकते हम

वचनवाद है

असुरगुरु ....... क्षमा मांगने की आव्सय्कता नहीं है तुम हमारे परम शिष्यों में से एक हो जिन्होंने सदैव हमारे पढ़ का मान बढ़ाया है पुत्र हमें कुछ कुछ आभाष है अवयश्य वो बालक असाधारण है हम स्वयं उसकी वास्तविकता ज्ञात नहीं कर प् रहे है किन्तु वो दिव्या अंश किसी न किसी रूप में परबु सवयंभु से जुड़ा है

व्योमासुर ........ गुरुदेव हमें आपके मार्गदर्शन की आव्सय्कता है ाँ पड़ी है हम अपने पढ़ का मान नहीं रख प् रहे है अगर पढ़ के पार्टी अपना दायित्व निभाते है तो अपना दिया वचन भांग कर अपने तप से अर्जित तपोबल नस्ट कर देंगे

असुरगुरु ....... ये तो तुम्हे उस समय सोचना चाइये था पुत्र जब तुमने बिना विचार के वचन दिया था अब अपने हे वचन को भांग कर स्वयं को कलंकित करना चाहते हो वैसे हे असुरजती अपने दुष्कर्मो से स्वयं को कॉनकित करते आ रही है

व्योमासुर ........ हमारे वचन भांग होने से आप हे बचा सकते है गुरुदेव हमें आपकी मार्गदर्शन की आव्सय्कता है गुरुदेव

असुरगुरु ........ उचित है इसका केवल एक हे मार्ग है पुत्र जो तुम्हे ज्ञात है

व्योमासुर ....... मैं असुरगुरु पढ़ त्यागने को सज हूँ गुरुदेव आप ये दायित्व किसी आवर को सौंप दीजिये अगर हम इस पढ़ पे बने रहे तो किसी एक के साथ अन्याय कर देंगे

असुगुरु ....... यही उचित मार्ग है पुत्र कर्त्तव्य या वचन दोनों में से किसी एक के साथ हे नहाय कर सकते हो हम असुरगुरु शुक्र तुम्हे असुरगुरु पढ़ विमुख करते है किन्तु साथ तुम्हे दण्डित भी होना होगा पुत्र तुमने अपने पढ़ उसकी गरिमा को दुर्मिळ किया है

व्योमासुर ...... मुझे आपका दिया हर दंड स्वीकार है गुरुदेव बस एक विनती है आपसे

असुगुरु ...... कहो क्या विनती करना चाहते हो तुम

व्योमासुर ....... पुत्री वातापी को किसी भी तरह का कोई कास्ट न हो ये दायित्व आपके श्री चरणों में गुरुदेव

असुरगुरु ........ उचित है पुत्री वातापी को कोई कास्ट नहीं होगा उसका दायित्व हम लेते है तुम्हारा दंड है तुम 11 वर्ष तक असुरलोक से निष्कासित रहोगे

व्योमासुर ......... मुझे आपका दंड सहर्ष स्वीकार है गुरुदेव

असुरगुरु ........ हम उस दिव्या अंश रूपी बालक से भेंट करना चाहते है पुत्र व्योमासुर किन्तु हम श्रापित है इस लिया पृथ्वीलोक जा नहीं सकते हमारी भेंट का माध्यम तुम्हे हे बनना होगा पुत्र

व्योमासुर असुरगुरु की बात सुन कुछ विचार करने लगता है

असुरगुरु ......चिंतित होने की आव्सय्कता नहीं है पुत्र व्योमासुर आवर न इतने घंटा से विचार करने की

हमसे उसे कोई खतरा नहीं होगा पुत्र किन्तु हमने जो भविष्ये के दृश्ये देखे वो बहुत हे चिंताजनक है

व्योमासुर ........ गुरुदेव जो आपने देखा क्या उसे बदला नहीं जा सकता

गुरुदेव ....... नहीं पुत्र हम सब अपनी नियति से बन्दे है हम केवल अपना करम कर सकते है बाकि सब नियति की इच्छा नियति के विरुद्ध तो वो स्वयंभू भी नहीं जा सकते

व्योमासुर ........ मेरे लिया कोई और आज्ञा गुरुदेव

असुगुरु ....... नहीं पुत्र अब तुम पृथ्वीलोक लौट सकते हो आवर तुम्हारी पुत्री मानसी वह उसके वर को सुक्रलोक लेन की थी करो ज्ञात नहीं क्यों पैर हमारे हृद्या में उस बालक से भेंट करने की तीव्र इच्छा उत्पन्न हो रही है

व्योमासुर ....... जी गुरुदेव जैसे आपकी आज्ञा .आज्ञा दीजिये परनाम गुरुदेव

असुरगुरु ...... यशश्वी भाव पुत्र

व्योमासुर के जाने के बाद असुरगुरु एक बक्शा नुमा बॉक्स खोलते है उसमे से एक कुंडली जैसा पत्र निकलते है आवर बड़े गौर से उसे देखने लगते है

असुरगुरु ...... हमें जिस विचार को ले कर चिंता थी वही होने वाला है असुरलोक की कुंडली में शैतान का प्रभाव भिवष्य में और आदिक प्रबल होने वाला है हे परबु अब आप हे कोई मार्ग दिखाए

असुरगुरु एक और ुशी बॉक्स में से एक आवर कुंडली निकलते है

उसका ध्यान से अध्यन करने के बाद उनकी चिंता आवर आदिक भाड़ जाती है आवर वो कुंडली उनके हाथ से चुत कर गिर जाती है

असुरगुरु की आँखों में अचानक से नमी उभरने लगती है

वो उस कुंडली को उठा कर दोनों को फिर से उस बॉक्स में रख देते है

आवर कोई मंत्री उच्चारण करने लगते कुछ देर बाद वह हवा में एक बड़ा सा बॉक्स प्रकार होता है

असुरगुरु उसे निचे रख कर खोलते है तो उसमे सोर्ड , ढल , कवच , तीर कमान , आदि मौजूद थे असुरगुरु बड़े हे सनेह पुराण उन सस्त्रो पे अपने हाथ फिरते हुए अपनी आँखे बंद कर जैसे कुछ मह्सुश करने लगते है

असुरगुरु ....... हमने बहुत इन्तजार किया है पुत्र तुम्हारा हमें हमारे परबु पे विश्वाश था की एक दिन तुम अवश्य आओगे पुत्र ...........

पृथ्वीलोक ........

सूर्य सुबह सभी के साथ ध्यान पूर्ण कर जब घर लौटा तो वो बहुत खुश था

सूर्य ने आज किरण के साथ जुड़ उस ऊर्जा पुंज के विषय में जानने की कोशिश की किन्तु उसे ज्यादा सफलता नहीं मिली फिर भी उसका अंतर्मन बहुत परशान था जैसे उसने कुछ न प् कर भी बहुत कुछ प् लिया हो

दादा जी ......क्या बात है आज मेरा शेर काफी खुश लग रहा है बात क्या है बेटे

सूर्य ....... पता नहीं बाउजी पैर आज सच में मुझे अजीब से ख़ुशी हो रही है कारन क्या है ये तो मैं भी ठीक से समाज नहीं प् रहा हूँ

दादा जी ....... ये क्या बात हुई बीटा इतनी सक्तियो के बात भी तुम ये कह रहे हो की तुम्हे पता नहीं की इस ख़ुशी का कारन क्या है

सूर्य ........ बाउजी सक्तियो से मैं किसी की रक्षा कर सकता हूँ या किसी का अंत पैर जो समाज से परे हो उसका क्या कर सकता हूँ

दादा जी ........अगर समाज नहीं आ रहा है तो अपने गुरुदेव से सहायता लोट बीटा क्या पता वो तुम्हारे इस ख़ुशी के कारन का पता कर सके

सूर्य ...... आपने सही कहा बाउजी कल गुरुदेव आ रहे तभी उनसे इस विषय पे बात करता हूँ

दादा जी ...... आवर एक बात बेटे

सूर्य .....जी दादा जी कहिये

दादा जी ....... बीटा हम लोग पूजा के बाद वापिस लौट आएंगे दिल्ली से वह केवल तुम बचे हे रहोगे जब तक घर बन नहीं जाता पूरी तरह से

सूर्य ......ये क्या बात हुई बाउजी

दादा जी ......... बीटा समजा करो इतने लोग उस एक छोटे से घर में नहीं आ सकते आवर फिर वह से यहाँ आना भी ठीक नहीं कब कोई आ जाये जिसके सामने तुम सब का भेद खुल सकता है अपना घर बन जायेगा तब चलेंगे सब वह

सूर्य ...... ठीक है बाउजी पैर मैं आपकी बात तब तक हे मानुगा जब तक घर बन नहीं जाता मैं जनता हूँ आपको उस हवेली से बहुत लगाव है

दादा जी ....... बीटा हवेली भले बदल गयी पैर इस जगह से मेरा बचपन जवानी आवर बुढ़ापा जुड़ा हुआ है लगाव तो होगा हे

सूर्य ....... ठीक है बाउजी इस बारे में फिर कभी सोचेंगे मैं फ्रेश हो कर आता हूँ

सूर्य फ्रेश हो सभी के साथ नास्ता कर कोमल को त्यार होने का बोल अपनी बाइक जो काफी समय से उसने उसे में नहीं ली थी उसकी साफ सफाई करता है

कुछ देर बाद कोमल त्यार हो कर बहार आती है

कोमल ....... चले हम

कोमल चुस्त jean's आवर शार्ट टाइप टॉप में बाला की खूबसूरत लग रही थी

सूर्य ....... है है किसी को कुछ चाइये तो नहीं पूछ लेना सब से

कोमल ......मैंने पूछ लिया जिसको जो चाइये वो वह दिल्ली में ले लेंगी जो अभी जरुरी है वो मैं ले लुंगी आप चलिए

सूर्य बाइक पे बेथ उसे स्टार्ट करता है तो कोमल दोनों तरफ पेअर कर सूर्य के पीछे चिपक कर बेथ जाती है जिस से सूर्य की पीठ पे कोमल की वो दो मांश के भरे कोमल गोले सूर्य पीठ से चिपके सूर्य को अलग हे आनंद दे रहे

सूर्य बाइक आगे बढ़ा देता है जैसे हे कोमल सूर्य सूर्यगढ़ से बहार निकले कोमल अपने दोनों हाथ सूर्य कमर में काश लेती है

एक तो वो स्पोर्ट बाइक जिसकी पीछे की सहित वैसे हे ऊपर रहती है ऊपर से कोमल केस तरह से चिपकने से कोमल के दोनों उभर बुरी तरह से सूर्य कज पीठ की सिकाई करने लगते है

सूर्य सक्तिपुर से बाईपास ले सीधा सिटी 1 की तरफ बाइक दौड़ा देता है

सूर्य ........ थोड़ा आराम से बैठो कोमल पीठ पे कुछ नरम नरम चुंबन हो रही

कोमल ......क्या हुआ मैं तो आराम से बैठी हूँ

सूर्य ........ तुम तो आराम से बैठी हो पैर तुम्हारे जो उभर है वो मेरी परेशानी का कारन बन रहे है

कोमल ....... ये आपकी परेशानी है न की मेरी

सूर्य बाइक को एक साइड में लगा देता है सूर्य ....... निचे उतरो कोमल

कोमल को लगा सूर्य गुस्सा हो गया है कोमल उदाश मन से निचे उतर जाती है

सूर्य निचे उतर उठा कर बाइक पे कोमल को बैठा देता है.





कोमल ....... सॉरी मुझे माफ कर दीजिये

सूर्य .....हाहाहा तुम्हारा चेहरा क्यों उतर गया कोमल अब बाइक तुम चलोगी आवर मैं मज़े लूंगा पीछे बेथ कर

सूर्य कोमल के पीछे बेथ जाता है

कोमल ...... आप गुस्सा नहीं है न आवर मुझे बाइक नहीं चलनी आती है

सूर्य ....... मैं क्यों गुस्सा होऊंगा आवर बाइक चलना बहुत आसान है

सूर्य कोमल को बेसिक तरीका समजा देता है

डेरी डेरी कोमल बाइक को आगे बढ़ा देती है अब सूर्य के हाथ कोमल की नंगी कमर से होते हुए कोमल के कोमल पथ पे थे

बाइक को सूर्य अपने मंद से कण्ट्रोल कर रहा था जबकि कोमल को लग रहा था की बाइक चलना उसके लिया बाये हाथ का काम है हो भी सकता है पैर पहली हे बार में इतना आसान नहीं होता

सूर्य ......कहा था न बहुत आसान है बस मंद को भटक ने मत देना

सूर्य डेरी डेरी अपनी हाथ की उँगलियाँ कोमल के टॉप में हलकी गुदा देता है आवर अपनी उँगलियाँ वह फिरना सुरु कर देता है जहा से कोमल के सीने का निचे की तरफ से उठान सुरु होता है

कोमल .....अपने हाथ हटाइये न वह से हमें परेशानी हो रही है

सूर्य ....... ये तुम्हारी परेशानी है न की मेरी तुम जानो आवर तुम्हारी परेशानी मुझे क्या मुझे तो मज़ा आ रहा है

कोमल छह कर भी बाइक से हाथ हटा नहीं सकती थी आवर सूर्य ऐसे रुकने वाला था नहीं

सूर्य कोमल की गर्दन से बाल साइड कर कोमल की गर्दन पे घूमने लगता है

कोमल की गर्दन पे हलके हलके जो रोये थे वो खड़े होने लगते है

साथ हे कोमल के सरीर में जुरजूरी से उत्पन्न होने लगती है

हिमत कर सूर्य ने जैसे हे कोमल के ब्रा के अंदर हाथ दाल उन रूही के गोले को थमा तो कोमल का साबरा जबाब दे गया इतनी देर से खुद को रोके कोमल का सरीर आकडने लगा मस्ती मस्ती में कोमल चरम पे पहुंची आवर अपनी पेंटी गीली कर बैठी

सूर्य कोमल को उठा खुद बाइक ड्राइव करने लगा आवर कोमल को अपनी जगह पीछे बैठा दिया

कोमल ........ पता है आपने क्या किया

सूर्य .......... पता है मुझे क्या अच्छा नहीं लगा क्या

कोमल ....... अगर बाइक गिर जाती तो छोटू लग जाती पैर आपको क्या आपको तो मज़ा आ रहा था

सूर्य ....... मज़ा तो आपको भी आ रहा था तभी तो बाइक की सीट गीली कर दी हाहाहा

कोमल नारंगी दिखते हुए सूर्य की पीठ पे हलके से हाथ जमा देती है पैर चेहरे पे सरम आवर पहाड़ी से मुस्कान थी

सूर्य थोड़ा सा मैजिक का प्रयोग करते हुए कोमल के निचेस्का गीलापन ठीक कर देता है

दोनी सिटी 1 में इंटर करने हे वाले थे इस लिया दोनों ने मस्ती बंद कर गफ बर्फ की तरह बेतबे मॉल की तरफ भाड़ गए

सूर्य अपने बड़े पापा से मिल उन्होंने जिस काम के लिया बुलाया वो फिनिश करने लगता है वही कोमल उस लड़की के साथ कुछ शॉपिंग करने लगती है जिसकी सेल्लेरी सूर्य ने खुश हो कर बधाई थी

करीब 1: 30 जानते बाद सूर्य महेंद्र जी की केबिन से बहार निकला

कोमल की शॉपिंग अभी भी चालू हे थी

करीब 20 मिनट्स बाद कोमल ढेर सरे बैग्स के साथ सूर्य को अपनी आवर आते दिखाई दी

सूर्य ...... इतना टाइम लगा दिया शॉपिंग में आवर इतना क्या लिया है

कोमल ..... ज्यादा कुछ नहीं सभी की कुछ जरुरी जरुरत का सामान है बस

सूर्य ....... चलो अच्छा है दिल्ली में ज्यादा जेब खली नहीं होगी

कोमल .....किसने कहा आपसे ऐसा

सूर्य ......ठीक है समाज गया अब जाओ आवर बड़े पापा को दे आओ बाइक से तो कुछ भी जाने वाला है नहीं

कोमल सारा सामान अपने पापा को दे कर जब लौट रही थी तभी उसकी नजर किसी पे पड़ती है

जिसे देख कोमल उसकी तरफ भाड़ गयी

सूर्य .....अब ये कोमल कहा चली उस तरफ

कोमल ...... Hi आप यहाँ पे कैसे

लड़की कोमल की आवाज सुन उस की तरफ पलटी तो उसने फ़ौरन कोमल को पहचान लिया

( ये कोई आवर नहीं नंदिता थी अजय के उस दोस्त पंकज की बड़ी बहन )

नंदिता ......कोमल जी आप यहाँ पे कैसे

कोमल .......ये मॉल हमारा हे है पैर आप

नंदिता ......कॉलेज ओपन होने वाले है कुछ शॉपिंग करने आयी थी माँ के साथ वो देखो माँ उदार हे आ रही है

कोमल .....नमस्ते मधु आंटी

मधु .....नमस्ते कोमल बेटी

सूर्य ....... नमस्ते आंटी जी कोमल हमें घर चलना चाइये

कोमल ..... है चलते है इनसे मिलो ये है मेरी फ्रेंड नंदिता आवर ये उनकी माँ आवर नंदिता यही है वो जिनके बारे में आप पूछ रही थी

नंदिता .....तो आप है सूर्य ठाकुर जी

सूर्य ....... जी आप सूर्य कह सकती है पैर आप मेरे बारे में कोमल से क्यों पूछ रही थी

मधु ....... बीटा मैं अपने बेटी की गलती के लिया माफी मांगती हूँ

सूर्य ......मुझे नहीं पता आंटी आप किस लिया कोनसी गलती की माफ़ी मांग रही है जो कुछ भी हुआ उसे भूल जाये बस जो कुछ हुआ वो दुबारा न हो ( सूर्य ने यहाँ जूठी कहा था ताकि उन आंटी को शर्मिंदा न होना पड़े ) जिस से आपको किसी क्र सामने शर्मिंदा होना पड़े कोमल हमें चलना चाइये चलता हूँ आंटी जी नंदिता जी

सूर्य कोमल को लिया बहार निकल गया

नंदिता .....इनको देख कर तो नहीं लगता की ये उतने खतरनाक है या उन्हें कुछ पता भी होगा मम्मी

मधु ....... नहीं बेटी तुम गलत हो तुमने वो नहीं देखा जो मैंने देखा सूर्य को सब पता है बस वो नहीं चाहता था की मैं उस से माफ़ी मांगू या उसके सामने अपने बेटे की गलती के लिया शर्मिंदा होऊं

नंदिता ......ये आप कैसे कह सकती है मम्मी जबकि उन्होंने तो ऐसा कुछ नहीं कहा

मधु ...... "आँखे " आँखे इंसान का आइना ( मिरर ) होती है बेटी जब मैंने माफ़ी मांगी तब उसकी आँखों में जो प्यार था वो एक माँ की नजरो से नहीं चुप सका बेटी वही प्यार जो शालिनी बहन की आँखों में मैंने उस दिन देखा था जब जब उनके इस बेटे का जीकर हुआ था

नंदिता .......पता नहीं आप क्या बोल रही है मम्मी चलिए हमारी शॉपिंग अभी भी बाकि है

कोमल ....... आपको क्या हुआ था वह जो अचानक से जूथ बोल दिया

सूर्य ......मुझे उनका माफ़ी मांगना अच्छा नहीं लग रहा था किसी आवर के कर्मो की सजा वो क्यों बुगते वो एक अच्छी औरत है बस अपने नालायक बेटे से कुछ ज्यादा हे प्यार करती है एक माँ को मैं भला कैसे शर्मिंदा होने देता इस लिया मैं जूथ बोलै ताकि उनके सम्मान को कोई टेश न पहुंचने

सूर्य कोमल बात करते करते घर पहुंचने गए

सूर्य सभी की सुबह 6 ऍम की दिल्ली की टिकट कन्फर्म करवा ली आवर ये खबर सूरजगढ़ भी दे दी थी कल सभी की ाब्याश आवर ध्यान आदि से चिठ्ठी थी

रात को डिनर के वक़्त सूर्य ने सभी को कल सुबह के बता दिया था

सूर्य डिनर के वक़्त शालिनी जी को अपनी आवर बार बार देखते देख उनके साथ हे रात में सोने का फैसला किया

सूर्य मानसी के साथ एक प्यार भरा संगम कर मानसी को बता कर निचे चला गया

अलीना ......क्या हुवा नींद नहीं आ रही क्या

दरशल अलीना अभी कोमल के रूम से निकल अपने रूम की तरफ हे जा रही थी तो सूर्य को निचे आता देख उसने बात छेद दी

सूर्य .....नहीं वो बस आज माँ के पास सोने का मन था तो उन्ही के पास जा रहा हूँ

अलीना ....... क्या मैं भी चल सकती हूँ मम्मी के पास सोने

सूर्य ........ इसमें पूछने वाली कोनसी बात है चलो उन्हें भी अच्छा लगेगा

अलीना ......ok मैं कपडे बदल कर अभी आई

सूर्य वह से शालिनी जी की रूम की आवर भाड़ गया

शालिनी जी लेते लेते कोई बुक पद रही थी

सूर्य ......मुझे लगा आप सो गई होंगी माँ

शालिनी जी ......नहीं बीटा बस ऐसे हे कोई पुराणी बुक पद रही थी प्रिय भी आ रही है न यहाँ सोने के लिया

सूर्य ...... है उसने इच्छा जाहिर की तो

शालिनी जी .......कोई बात नहीं वो भी मेरी बेटी है उसका भी हक़ बनता है आओ इस तरफ लेट जाओ

सूर्य अपने t-shirts उतर शालिनी जी के बगल में लेट जाता है

कुछ देर बाद अलीना (प्रिय ) भी नाईट ड्रेस पहने वह आ गई

शालिनी जी ......प्रिय बेटी दूर लॉक कर देना बेटी

अलीना .....जी मम्मी जी सॉरी वो मेरा भी मन......

शालिनी जी ...... अगर दुबारा फिर से कभी सॉरी कहा न तो कान खींच खींच कर लम्बे कर दूंगी एक बेटी को अपनी माँ के पास सोने के लिया भी इतना सोचना पड़ता है क्या चल आ उदार मेरी बची

अलीना शालिनी की बगल में लेट गई एक तरफ सूर्य आवर एक तरफ अलीना

अलीना ...... आगे से ध्यान रखूंगी मम्मी

शालिनी जी ......... देखो बेटी प्रिय तुम सभी मेरी लिया एक हो जैसी कोमल या स्वीटी वैसी हे बाकि सब मेनका दीदी रेखा दीदी या मैं जब भी जिस किसी के साथ वक़्त बीनने का मन हो या तुम्हारी कोई स्पेशल डिमांड हो तो बे जीजाक कह दिया करो बेटी ये परिवार ये घर जितना सूर्य कोमल का है उतना हे तुम्हारा भी मेरी बची

अलीना ........ सुन रहे है न आप मर .जितना आपका हक़ मम्मी पे है उतना हे मेरा भी है

सूर्य ...... मैंने कब कुछ कहा मुझे क्यों बिच में फशा रही हो अलीना

अलीना ........... मम्मी आपको पता है जब हम रूस गए थे तब इन्होने बहुत हुकुम चलाया था मुज पे

सूर्य ......नहीं माँ मैंने ऐसा कुछ नहीं किया अब प्लान के हिसाब से न चले तो किसी को कुछ भी हो सकता है बस मैंने इसे आवर मेर्री जी को खतरे से दूर रखने के लिया ऐसा किया था

अलीना ......देखा मानते हो न

शालिनी जी ......अब तुम दोनों ये नौटंकी बंद करो आवर बेटी जहा बात किसी अपने की जान पे खतरे की हो तो वह हमें हर पहलु पे सोच विचार कर हे निर्णय लेना चाइये निर्णय से याद आया तुम्हारा क्या निर्णय है बेटी तुमने तो पहले हे पढाई पूरी कर ली थी

सूर्य ....... इनको अब अपनी ड्यूटी ज्वाइन करनी होगी माँ दिल्ली पहुंच कर सूर्यकांत सर ने कुछ आवर भी सोचा इनके बारे में क्यों की इनकी जो स्किल्स है उसका उसे किसी आवर जगह ज्यादा होता है

अलीना ........मतलब क्या है आपका

सूर्य ...... अभी कन्फर्म नहीं हुआ है जल्दी हे पता लग जायेगा

शालिनी जी ......तुम दोनों सोने आये हो या अपनी मिलिट्री मेटिंग करने दोनों चुप चाप केम्प बंद करो आवर लेट जाओ

सूर्य ....... ुम्मम्हा गुड नाईट माँ.

शालिनी जी. ..... गुड नाईट बीटा

सूर्य अलीना के गाल खींच उसे भी गुड नाईट बोल अपनी तरफ का लेम्प बंद कर देता है

अलीना एक बार सूर्य को घर कर देखती है आवर वो भी अपनी साइड का केम्प बंद कर शालिनी जी की आवर खिसक कर करवट के बल लेट शालिनी जी का हाथ अपने पेट पे रखे लेट जाती है .............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ..............
 
अपडेट. 243

अलीना ........मतलब क्या है आपका

सूर्य ...... अभी कन्फर्म नहीं हुआ है जल्दी हे पता लग जायेगा

शालिनी जी ......तुम दोनों सोने आये हो या अपनी मिलिट्री मेटिंग करने दोनों चुप चाप लेम्प बंद करो आवर लेट जाओ

सूर्य ....... ुम्मम्हा गुड नाईट माँ.

शालिनी जी. ..... गुड नाईट बीटा

सूर्य अलीना के गाल खींच उसे भी गुड नाईट बोल अपनी तरफ का लेम्प बंद कर देता है

अलीना एक बार सूर्य को घर कर देखती है आवर वो भी अपनी साइड का केम्प बंद कर शालिनी जी की आवर खिसक कर करवट के बल लेट शालिनी जी का हाथ अपने पेट पे रखे लेट जाती है .............

अब आगे ............


दिल्ली ....... सूर्य सुबह सुबह अपने पुरे परिवार ( बुआ जी एंड नाना जी ) के साथ करीब 8 बजे दिल्ली एयरपोर्ट से बहार निकला तो सामने हे जोरावर जी अपनी फुल सिक्योरिटी के साथ इन्हें लेने के लिया खड़े थे

सूर्य आगे भाड़ अपने मां जी के पेअर चउथा है आवर उनके गले लग मिलता है

जोरावर जी ...... कैसे हो बेटे सूर्य

सूर्य ....... मैं अच्छा हूँ मन जी आप भी बच्चे हे लग रहे है लगता है दिल्ली कुछ ज्यादा हे राश आ गई आपको

जोरावर जी ..... ऐसा कुछ नहीं है बीटा चाको सब कार्स में बैठो 9 बजे की पूजा है पहुंचने में भी टाइम लगेगा

सभी अपनी इच्छा अनुसार जोरावर जी के साथ आई कार्स में बेथ कर निकल जाते है करीब पौने 9 बजे के आस पास सभी लोग उस जमीं पे पहुंचे जहा नए घर की नीव राखी जनि थी

परीलोक से गुरुदेव आवर शिल्पी जी पहले से वह मौजूद थे राजीव जी भी अपने परिवार के साथ सूर्य के परिवार के साथ हे वह पहुंचने थे पूरी जमीं को साफ़ सुथरा किया जा चूका था कल साम को हे वो कारखाना भी वह से हटा दिया गया था

सूर्य सहित सभी लोग गुरुदेव से आशीर्वाद लेते है

सूर्य ......गुरुदेव हम लेट तो नहीं है न

गुरुदेव ......नहीं पुत्र तुम सब समय पे हे पहुंच गए

सूर्य ......बाकि लोग नहीं दिखाई दे रहे गुरुदेव

गुरुदेव ....... वो भी बस पहुंचते हे होंगे पुत्र

तभी दीप्ती जी सूर्यकांत सर राधिका जी के साथ वह पहुंचते है

सूर्य ...... गुड मॉर्निंग अंकल कैसे है आप आवर आंटी जी नहीं आई आपके साथ में

सूर्यकांत जी ...... माफ करना बीटा वो तुम्हारी आंटी की तबियत ठीक नहीं है इस लिया वो नहीं आ पाई

सूर्य .......आवर बाकि सब कहा है भाबी जी

राधिका जी ...... वो भी बस आती हे होंगी देवर जी कुछ देर में

सूर्य का इशारा सानिया माया सुनिधि सोफिया की तरफ था

सूर्य ......अंकल इनसे मिलते ये राजीव अंकल है जिनसे पापा ने ये जमीं खरीदी आवर ये है मेरे गुरुदेव

सूर्यकांत जी गुरुदेव को देख देख अचंबित थे उनकी पेट तक जुलती वो सफ़ेद दाढ़ी आवर वो घने चंडी जैसे सफ़ेद बाल सरीर से अभी भी किसी पहलवान जैसे जैसे वो दाढ़ी आवर लम्बे सफ़ेद केश उनकी उम्र दर्शा रहे थे वही सरीर उम्र को नकार रहा था

सूर्यकांत जी ....... परनाम गुरु जी

गुरुदेव ......यशश्वी भाव पुत्र

सूर्य के इसारे पे राधिका जी भी उनके चरण स्पर्श करती है

गुरुदेव ...... पुत्रवती भाव पुत्री राधिका सिगरा हे तुम्हे पुत्र रतन की प्राप्ति होगी पुत्री तुम माँ बनने वाली हो पुत्री राधिका

सूर्यकांत जी ........ क्या ये सच है गुरु जी

गुरुदेव ......... है पुत्र पुत्री राधिका गर्भ से है

सूर्यकांत जी ....... ये तो आपने बहुत हे सुबह समाचार दिया गुरु जी

सूर्य ........ गुरुदेव भूमि सुधाकरन का समय हो गया है

गुरुदेव ....... है पुत्र बस सकती आता हे होगा पवित्र नदिया का जल ले कर

कुछ देर बाद सकती रानी पारी रिद्धि जिनिशा परिधि जीनत के साथ रानी पारी भी वह पहुँचती तभी दो लोग आवर बहार निकलते है

ये कोई आवर नहीं विधि आवर गायत्री थी जिन्हे देख सूर्य आवर भी खुश हो गया

सकती गुरुदेव को वो नदिया का पवित्र जल सौंप देता है

सूर्य ....... दादा जी दादी जी मैं चाहता हूँ की पूजा में आप दोनों बैठो नाना जी नानी जी के साथ

शिव ...... है बाउजी आप बड़ो के होते हुए हमारा वह बैठना ठीक नहीं है

दादा जी ...... ठीक है बीटा अब तुम सब की यही इच्छा है तो यही सही

कुछ देर पूजा करने के बाद गुरुदेव वह जल सकती को पूरी भूमि पे छिड़कने के लिया बोल फिर से पूजा सुरु करते है इस बार दादा जी नाना जी पूजा में बे थे थे अपनी जीवन संगिनियों के साथ

ीदार एक कार आवर आ कर रूकती है जिसमे से सानिया सोफिया माया सुनिधि आई थी

शालिनी जी ........ तो तुम लोगो का मेकउप अब जा कर पूरा हुआ है क्या

सानिया ........सॉरी आंटी इस सोफिया ने टाइम लगा दिया

सोफिया ........ नहीं आंटी जी ये माया दीदी आवर सानिया दीदी ने हे लेट कर दिया मैं तो कब से आपसे मिलने के लिया रेडी हो गई थी

शालिनी जी ........ हाहाहा कोई बात नहीं बीटा तुम सब बैठो जूस पियो पूजा बस कुछ देर में ख़तम होने वाली है

पूजा से एक तरफ सूर्य सकती से कुछ बात कर रहा था

सूर्य ....... सकती भाई ये काम जल्द से जल्द पूरा होना चाइये आवर इस तरह की किसी को कोई संदेह न हो

सकती ....... भाई आपने हे रोका है वर्ण शिल्पी जी के लिया .........

सूर्य ........... भाई समजा करो ये परीलोक नहीं है पृथ्वीलोक है रातो रात काम हुआ तो कितनो की यादें बदलोगे उस से अच्छा है हम थोड़ा समय लेते है

सकती ........ ठीक है भाई

सूर्य .......... ये वयोम भाई कहा है

सकती ........... वो मुंबई में है भाई सभी 2 no. वालो की कुंडली निकल रहा है

सूर्य ........ आवर इन नेता लोगो का क्या हुआ भाई

सकती ....... कल तक इनका काम भी हो जायेगा भाई पैर समाज नहीं आया आप इनके साथ इतनी नरमी से क्यों पेश आ रहे है

सूर्य ....... इन्हें मारा नहीं जा सकता भाई अगर इन्हें जान से मरता हूँ तो रातो रात देश की ग्रोथ 25 ,30 साल पीछे चली जाएगी फिर से पुरे देश में रे- इलेक्शन होगा जिस का आसार अमीरी पे काम आवर देश की आम जनता पे ज्यादा असर होगा ऐसे में इनको एक एक कर उखाड़ना होगा

सकती ....... फिर क्या सोचा है आपने

सूर्य ....... सोचना क्या है हर एक नेता के बिच एक ईमानदार आदमी को भेजो जो अपनी ईमानदारी से कभी न दिघे कैसे जैसे एक को उखाड़ेंगे वैसे वैसे वो इनकी जगह लेंगे कह सकते हो एक बुरे पेड़ को उखड कर उसकी जगह एक अच्छे पेड़ को लगाया जाये इसमें थोड़ा समय लगेगा पैर यही अच्छा आवर आसान तरीका है

सकती ......... आपके कहे अनुसार मैंने अपना काम सुरु कर दिया है भाई

सूर्य ........ इन सब की जितनी बे बेनामी अकाउंट है फिर चाहे वो किसी भी कंट्री में हो वो खली करना सुरु करो जिस डिपार्टमें से जो घपला किया है उतना उस डिपार्टमें में पहुंचा दो बाकि एक अकाउंट में जिनसे आगे वही ईमानदार लोग विकाश कर सकेंगे गरीबो का

सकती ....... लगता है पूजा पूरी होने वाली है हमें वह चलना चाइये

सूर्य ....... ठीक कहा आपने आवर इन सभी के लिया नास्ते पानी का इंतजाम कर दीजिये

सकती ......वो मैंने पहले हे पास वाले होटल में कर दिया है यहाँ तो अभी से काम सुरु हो जायेगा ऊपर से गर्मी भी भढने वाली है

सूर्य सकती बाकि सभी के पास आ जाते है करीब 10 बजे पूजा पूर्ण होती है तो गुरुदेव के बताये हुए स्थान पे नए घर की नीव राखी जाती है दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी के हाथो नए घर की नीव राखी जा चुकी थी

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य हमारा कार्य सम्पन हुआ अब हम सभी से इजाजत चाहेंगे

सूर्य ........ गुरुदेव आपसे किसी आवर विषय पे भी खाश चर्चा करनी थी

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य उसके लिया तुम्हे हमारे पास आना होगा

सूर्य ...... जी गुरुदेव मैं समाज गया

सूर्यकांत सर ...... बीटा हमें भी चलना होगा है राधिका बेटी तुम लोगो के साथ कुछ वक़्त रहना चाहती है मैं आवर दीप्ती अभी निकल रहे है ड्यूटी भी जाना है

सूर्य ...... ठीक है अंकल साम को मिलता हूँ

सूर्यकांत सर आवर दीप्ती दोनों हे घर के लिया निकल गए राधिका को चढ़ कर

सूर्य ...... पापा आप सभी पास में जो क्सक्सक्स होटल है वह चल कर चाय नास्ता कीजिये मैं अभी आता हूँ

शालिनी जी ....... ठीक है बीटा जल्दी आना चलिए आप सब

राजीव की फॅमिली भी सूर्य की फॅमिली के साथ निकल गई

सकती ......भाई मुझे यहाँ कुछ गड़बड़ लग रही है

सूर्य ....... हाहाहा भाई कोई गड़बड़ नहीं है सब सही है

सकती .....यहाँ हमारे आसपास कोई आसुरी सकती है मुझे आभाष हो रहा है पैर देख नहीं प् रहा हूँ

सूर्य .......गुरुदेव अब आप सामने आ सकते है

सूर्य के पुकारे जाने पे असुरगुरु व्योमासुर सकती आवर सूर्य के सामने आते है

सूर्य .....परनाम गुरुवार आपने आने का कास्ट क्यों किया मुझे सन्देश भेज दिया होता

व्योमासुर ........ पुत्र अब हम असुरगुरु नहीं है हमने उस पढ़ का त्याग कर दिया है तुम हमें बाबा कह सकते हो पुत्र सूर्य

सूर्य ....... सूर्य भले हे आपने पढ़ का त्याग कर दिया पैर उस से आपका स्थान तो नहीं बदल जाता है न जब आप एक पिता पुत्र की तरह भेंट करने आएंगे तब बाबा भी कहूंगा पैर अभी आपकी मस्तक पे उभरी चिंता की रेखाएं किसी आवर हे इशारा कर रही है बताये गुरुदेव ऐसा कोनसा विषय है जिसके चलते आप चिंतित है

असुरगुरु ........ पुत्र सूर्य हमें किसी एकांत में चलना चाइये यहाँ वार्ता करना उचित नहीं

सूर्य ....... सकती भाई यहाँ का आप संभाईलिये आवर आज हे कार्य आराम करवा दीजिये मैं जल्दी हे लौट आऊंगा

सूर्य असुरगुरु के साथ वह से गायब हो किसी अन्य स्थान पे अप्पेअर हुए जहा असुरगुरु के बाकि शिष्य भी मौजूद थे

असुगुरु ...... पुत्र अस्व हमें कुछ समय एकांत चाइये

असवासुर ......जी गुरुदेव

सूर्य ....... अब बताइये गुरुदेव आप किस बात को ले कर चिंतित है

असुगुरु ........ पुत्र मुझे पढ़ त्यागने के साथ हे दण्डित भी किया गया है

सूर्य ....... क्या परन्तु आपको दण्डित कोण कर सकता है

असुरगुरु ........ गुरुदेव शुक्राचार्य आवर मुझे भी उनका दंड स्वीकार है

सूर्य ...... मैं कुछ समजा नहीं गुरुदेव

असुरगुरु ...... पुत्र मुझे असुरलोक से निष्कासित कर दिया गया है किन्तु चिंता का विषय ये नहीं है पुत्र मुझे इस दंड से कोई आपत्ति नहीं है इसके उलट मुझे ये दंड नहीं उनका अपने शिष्य के पार्टी आशीर्वाद हे है अब मैं पृथ्वीलोक पे रह कर तप करूंगा परबु भक्ति में लीं हो पाउँगा

सूर्य ....... जैसा आप उचित सामने गुरुदेव

असुरगुरु ....... किन्तु पुत्र असुरगुरु शुक्र चाहते है की मैं पुत्री मानसी आवर तुम्हे उनके समक्ष ले कर जॉन वो तुम दोनों से भेंट करना चाहते है

( निर्भयासुर ...... स्वामी उन्हें स्पष्ट मन कर दो

सूर्य ...... संत रहो निर्भयासु वो गुरु है भले हे असुरगुरु क्यों न हो उनका इस तरह अनादर करना उचित नहीं उनका क्या किसी भी गुरु का अनादर नहीं करना चाइये भले हे फिर गुरु हमारे सत्रु पक्ष का हे क्यों न हो

निर्भयासुर....... ठीक है स्वामी किन्तु सावधान रहना आवर उनसे किसी एकांत स्थान पे हे भेंट करना न की सुक्रलोक में )

असुरगुरु ...... क्या हुआ पुत्र सूर्य किस विचार में दुब गए

सूर्य ......कुछ नहीं गुरुदेव किन्तु वो मुझसे भेंट क्यों करना चाहते है मुझे समाज नहीं आया

असुरगुरु ....... ये तो हम भी समाज नहीं प् रहे है पुत्र

सूर्य ...... ठीक है गुरुदेव मैं गुरुदेव से इस विषय में चर्चा कर आपको सन्देश भेजता हूँ

असुरगुरु ....... क्या तुम सच में वह जाना चाहते हो ये जानते हुए भी की असुरगुरु शुक्र असुर हितेषी है

सूर्य ....... हाहाहा गुरुदेव ये आप मुझसे भी बेहतर जानते है की असुरगुरु शुक्र भले हे कितने हे बड़े असुर हितेषी हो किन्तु घर आमंत्रित कर वॉर करने वाला व्यक्तित्व नहीं है उनका आवर आप भी अपनी संकाय मिटा दीजिये

असुरगुरु ........ वो मेरे भी गुरु है पुत्र नहीं मैं उनके व्यक्तिवा पे सन्देश कर रहा हूँ आवर न उनके चरित्र पे कोई सवाल उठा रहा हूँ मेरी चिंता का विषय वो नहीं वह मौजूद अन्य असुर शिष्य है

सूर्य ....... ये बात असुरगुरु शुक्र भी जानते है इस लिया इस विषय में स्वयं निर्णय ले तो उचित है

असुरगुरु ....... उचित है पुत्र अब से मेरा यही स्थायी स्थान है पुत्र यहाँ रह कर परबु बक्ति करना हे मेरा प्रथम उद्देश्य होगा

सूर्य ....... उचित है फिर तो मानसी भी जब चाहे आपसे भेंट करने यहाँ आ सकती है

असुरगुरु ....... उचित कहा पुत्र

सूर्य ........ असुरलोक से कोई सुचना गुरुदेव

असुरगुरु ....... है पुत्र नीलसूर आवर द्वारिका के बिच कुछ समय पूर्व हुए मतभेद में नीलसूर ने असुर महल का त्याग कर किसी अज्ञात स्थान पे चला गया है

सूर्य ....... क्षमा करे गुरुदेव अवश्य इसके पीछे नरकासुर का कोई सद्यन्त्र भी हो सकता है

असुरगुरु ....... हो सकता है पुत्र क्यों की नीलसूर एक अच्छा महायोद्धा है आवर इस समय नरकासुर किसी भी ऐसे योद्धा को किसी भी कारणवश स्वयं से दूर नहीं करेगा फिर ये तो उसका पुत्र है

सूर्य ........ कंटकासुर के विषय में कुछ ज्ञात हुआ गुरुदेव

असुरगुरु. ...... नहीं पुत्र हमने अपनी आवर से पूर्णतया स पर्यटन किया किन्तु हमें कही भी उसके या नगीना विसुद्धि का होने का आभाष भी नहीं हुआ

सूर्य ....... अब आज्ञा चौंगा गुरुदेव सिगरा हे आपको सूचित करता हूँ मैं परनाम गुरुदेव

असुरगुरु ........ उचित है पुत्र तुम्हारा कल्याण हो पुत्र

सूर्य असुरगुरु से भेंट करवापिश अपने परिवार के पास लौट गया

दादी जी ...... बीटा इतना समय कहा लगा दिया था तुमने

सूर्य .......सॉरी माँ सा वो मई जरुरी काम से कही आवर चला गया था

दादी जी ....... जा जा कर सब से मिल लो वो लोग वापिस जाने की बात कर रहे है

सूर्य ...... ठीक है मैं मिलता हूँ सब से

सूर्य वह से सीधा रानी पारी के पास पहुंचा

सूर्य ...... परनाम रानी माँ मैंने सुना आप लोग अभी वापिस जा रहे है

रानी पारी ...... है पुत्र सूर्य हमें वापिस लौटना होगा यहाँ कार्य भी पूर्ण हुआ

सूर्य ...... पैर मैं तो किसी से भी ठीक से मिल भी नहीं पाया

रानी पारी ...... कोई बात नहीं पुत्र परीलोक आ जाना वह सब से मिल लेना

सूर्य ...... ठीक है रानी माँ अभी तो आपको नहीं रोकूंगा किन्तु जब अगली बार आना हुआ तो कुछ समय जरूर आपको रुकना होगा

रानी पारी ........ अवश्य पुत्र जाओ जा कर बाकि सब से भी मिल लो

सूर्य सभी के साथ कुछ समय तक बात करता है

जिस से वो सभी भी खुश हो गयी

दोपहर के समय रानी पारी पारिजात जिनिशा रिद्धि विधि गायत्री जीनत वापिस परीलोक लौट गए

द्रगोंलोक ..........

पिछले कुछ समय से ड्रैगन लोक में बहुत सी अजीबो गरीब घटनाये घाट रही थी

अच्चानक से राइडर्स का अपने ड्रैगन से सम्पर्क टूट जाना

कितनी हे कोशिश के बावजूद अपने ड्रैगन पे हे नियंत्रण खो देना

ड्रैगन अपने हे राइडर्स पे अचानक से हमला करने लगते है जैसे की वो किसी आवर के नियंत्रण में हो

डेरी डेरी गोल्डन ड्रैगन सिटी के लोगो वह ड्रैगन सिटी के लोगो का सवास्या गिरना लगा वह अपने हे ड्रैगन की तरह उग्र रूप ले किसी पे भी बिना बात के हमला बोल देना

सुरु सुरु में इस आवर किसी का ध्यान नहीं गया क्यों की ड्रैगन अकसर गुस्से में ऐसा कर देते थे पैर जब गोल्डन ड्रैगन सिटी के लोगो में इस तरह का परिवर्तन आने लगा तो ये चिंता का विषय बन गया

गोल्डन ड्रैगन प्लेस ............. गोल्डन ड्रैगन प्लेस में इस वक़्त इस मुद्दे पे चर्चा हो रही थी जिसमे डेवलिन देवसफ्फी नियों किंग तीनो हे शामिल थे

डेविल ......हमें समाज नहीं आ रहा है अचानक से ये सब घटनाये क्यों आरम्भ हो गयी है

किंग ....... है देवसफ्फी हमने इस से पहले अपने जीवनकाल में इस तरह की कोई घटना नहीं देखि फिर अब अच्चानक से ये सब एक के बाद एक घटना हमारे ड्रैगन समुदाय में कैसे होने लगी

देवसफ्फी ( नियों ) ........ ये तो होना हे था किंग भले हे आप किंग है किन्तु आपने आवर क्वीन ने इस राजसिंहासन का पारी त्याग कर इसका दायित्व प्रिंसेस जूलिया को सौंप दिया था

डेवलिन. ...... किन्तु उस से तो ये सब घटनाये आराम नहीं हुई ऐसा मेरा मन्ना है देवसफ्फी

नियों ....... आपका कथन उचित है किन्तु ये भी सत्य है की किसी भी राजसिंहासन को ज्यादा समय तक रिकत रखना अशुभ होता है जब तक प्रिंसेस जो लिया या प्रिंसेस किरण वह मानसी में से कोई एक राजमुकुट दर्जन नहीं करती या प्रिंस सूर्य या उनका कोई ुत्रादिकारी इस राजसिंहासन पे आसीन नहीं होता हमें इन प्रशसनियो का सामना करना हे होगा

किंग ....... फिर तो हमारे सामने बस एक हे मार्ग हमारे समुदाय वह ड्रैगन लोक की परजा को इन परेशानियों से बचने का हमें किसी एक प्रिंसेस का राज तिलक करना हे होगा

नियों ....... प्रिंसेस' जूलिया का अभी राजतिलक नहीं किया जा सकता ये आप भी जानते है हम उन्हें केवल ुत्रादिकारी हे घोषित कर सकते है जो कर चुके है केवल प्रिंसेस किरण आवर प्रिंसेस मानसी यही दोनों प्रिंसेस विवाहित है ऐसे में दोनों में से किसी एक का राजतिलक करना होगा

डेवलिन ....... फिर इस विषय पे आप हे कोई निर्णय ले देवसफ्फी होने के नाते ये आपका हे अदिकार है

नियों ....... नहीं डेवलिन ये अधिकार केवल प्रिंस सूर्य वह प्रिंसेस किरण के पास है आप भूल रहे princess's जूलिया ने रकत बंदन जोड़ कर प्रिंसेस किरण को बड़ी बहन मन है ऐसे में प्रिंसेस किरण का निर्णय सभी को मान्य होगा

किंग ....... फिर आपको सिगरा हे पार्थिव लोक जाना चाइये देवसफ्फी

नियों ........ हमें पृथ्वीलोक नहीं परीलोक जाना होगा प्रिंस सूर्य के गुरुदेव के समक्ष उनसे प्रिंसेस जो लिया के विवाह पे भी चर्चा करनी होगी

किंग ....... आपको सिगरता करनी होगी देवसफ्फी ड्रैगन समुदाय के लोहा का स्वस्थ्य दिन प्रतिदिन बूढी से उग्र आवर सरीर से कमजोर पड़ता जा रहा है साथ हे हमारे ड्रैगन से भी हमारा नियंत्रण समाप्त होता जा रहा है कही ऐसा न हो की पुरे ड्रैगन लोक को इसका दुष्परिणाम भोगा पड़े

नियों ....... हम आज रात्रि हे परीलोक के लिया परस्थान करते है किंग तब आप ड्रैगन सिटी सन्देश पहुंचा दीजिये के जितना हो सके राइडर्स अपने ड्रैगन से सम्पर्क काम करे

किंग ....... हम अभी पुरे ड्रैगन सिटी आवर गोल्डन ड्रैगन सिटी में ये सन्देश भिजवाते है

कुछ आवर विषय पे चर्चा करने के बाद किंग आवर डेवलिन देवसफ्फी नोयों के साथ बहार निकल गए ................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........🌹..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................🌹............
 
अपडेट 244

किंग ....... आपको सिगरता करनी होगी देवसफ्फी ड्रैगन समुदाय के लोहा का स्वस्थ्य दिन प्रतिदिन बूढी से उग्र आवर सरीर से कमजोर पड़ता जा रहा है साथ हे हमारे ड्रैगन से भी हमारा नियंत्रण समाप्त होता जा रहा है कही ऐसा न हो की पुरे ड्रैगन लोक को इसका दुष्परिणाम भोगा पड़े

नियों ....... हम आज रात्रि हे परीलोक के लिया परस्थान करते है किंग तब आप ड्रैगन सिटी सन्देश पहुंचा दीजिये के जितना हो सके राइडर्स अपने ड्रैगन से सम्पर्क काम करे

किंग ....... हम अभी पुरे ड्रैगन सिटी आवर गोल्डन ड्रैगन सिटी में ये सन्देश भिजवाते है

कुछ आवर विषय पे चर्चा करने के बाद किंग आवर डेवलिन देवसफ्फी नोयों के साथ बहार निकल गए ................

अब आगे ...........

दिल्ली ........... ढेरो कटी फटी अधजली उन लाशो के बिच खड़ा सूर्य किसी पसन् की तरह आंसू बहा रहा था

आकाश से अभी भी उन अग्नि उल्कापिंडो की पृथ्वीलोक पे वर्षा हो रही थी जिसने सम्पूर्ण पृथ्वीलोक पे रातो रात लाखो करोड़ो लोगो को मौत की नींद सुला दिया था अभी भी

ुशी तरह वो अग्नि उल्कापिंड पृथ्वीलोक पे तबै मचा रहे थे

सूर्य के चारो तरफ लाशे हे लाशे नजर आ रही थी कुछ लोग अभी भी बिल्डिंग्स का मलबा हटा कर वह से लोगो को निकल रहे थे जिनकी हालत काफी बुरी थी वो भयानक मंजर देख सूर्य की आँखे हे पत्र गई थी

ऐसा हे मंजर पृथ्वीलोक पे बहुत से बड़े बड़े महानगरों का था जहा एक हे रात में लाखो लोग अपनी जान गवा चुके थे

किरण ...... ये सबका आपका दोष है इन सभी की मौत की जिम्मेदार आप हो आपके हाथ इन मासूमो के खून से रेंज है

सूर्य .......मुझे माफ कर दो स्वीटी मैंने कुछ नहीं किया मैं इन मासूमो की मौत की वजह नहीं हूँ

किरण ......आपकी स्वीटी ुशी पल मर गई जब आपकी वजह से इतने मासूम बे मौत मरे गए

क्या कहा आपने की आप इनकी वजह नहीं है किसने कहा था आपको प्रकर्ति के कार्य में बड़ा बनने को ये सब ुशी कारन हो रहा है पाप को मिटने निकले थे मनुष्य जाती को हे मिटा दिया आपने प्रकृति के कार्य में हस्तक्षेप कर प्रकर्ति के नियमो भांग किया जिसका फल इन मासूमो की भोगा पद रहा है

ऐसे भयानक मंजर को देख सूर्य के सरीर में जैसे जान हे न बची ऊपर से इन सभी का जिम्मेदार खुद को ठहराए जाने पे जैसे सूर्य का अस्तिव्वा हे डगमगा गया हो

सूर्य से अपने सरीर का भर तक नहीं संभाला जा रहा था जैसे उसकी आत्मा हे उसे डिजारने लगी हो

सूर्य लड़खड़ा कर निचे गिर जाता है

सूर्य ........ मैं हत्यारा हूँ मैंने इन सब मासूमो की जान ले है मुज जैसे पापी को तो जीने का हक़ भी नहीं

किरण ....... आपके पाप इतने ज्यादा है की मौत भी आपको उनसे मुक्ति नहीं दे सकती

सूर्य अपने पास पड़ी अपनी सोर्ड उठा कर खुद के हे गले पे लगा लेता है

किरण .......... स्वयं को ख़तम करने से पहले अपने हाथो हमें भी मौत की नींद सुला दो ताकि इस जीवन से हमें भी मुक्ति मिले

सूर्य ....... मैं ऐसा नहीं कर सकता स्वीटी तुम्हे तकलीफ पहुंचने से पहले मैं हजार मौत मरने को त्यार हूँ

किरण आगे भाड़ सूर्य से वो सोर्ड चीन अपने सीने में उतर लेती है

सूर्य....... नहीं ये नहीं हो सकता तुम मुझे छोड़ कर नहीं जा सकती स्वीटी मुझे इतनी बड़ी सजा मात दो

किरण ........ हम आपको कैसे सजा दे सकते है स्वामी हम जिस प्रकर्ति का सञ्चालन माँ करती है ुशी माँ के अंश है हम आपके द्वारा किये प्रकृति के नियोमा के उलंगन की सजा हमें हे भोगी होगी

किरण के सीने आवर मुँह से बहता खून देख सूर्य में जैसे जीने की बची खुची हिमत भी टूट चुकी थी

सूर्य .......... तुम मुझे चढ़ कर नहीं जा सकती स्वीटी तुमने वडा किया था तुम अपना वडा तोड़ नहीं सकती

सूर्य की गौड़ में किरण की डूबती सांसे कुछ हिचकियो के बाद सुण्या हो गई

सूर्य ........स्वीइट्य तुम मुझे छोड़ कर नहीं जा सकती .......

शालिनी ........ सूर्य सूर्य क्या हुआ मेरे बचे अपनी आँखे खोल बीटा सूर्य उठ बेटे तुम्हे ये क्या हो रहा है

शालिनी जी अपने साथ सोये सूर्य की हालत देख बुरी तरह स्व घबरा जाती है सूर्य का पूरा बदन अचानक से लाल आवर गरम होने लगता पूरा सरीर लोहे की तरह आकद जाता है

शालिनी जी सूर्य की हालत देख बहुत घबरा जाती है सूर्य अभी भी ...स्वीटी तुम मुझे चढ़ कर नहीं जा सकती .... यही सबद बार बार बड़बड़ा रहा था

उदार दूसरे कमरे में सोई किरण की भी हालत कुछ अलग नहीं थी उसका पूरा सरीर पसीने से भीगा हुआ था अचानक से सूर्य का लेते हुए किरण चीख कर उठ जाती है

शालिनी जी ........मुझे सूर्य को गुरुदेव के पास ले जाना होगा

किरण ........ मम्मी क्या हुआ इन्हें

शालिनी जी ......( रोटी हुए ) देख न बेटी सूर्य को क्या हुआ आवर इसका सरीर किरण जल्दी से सूर्य का हाथ ताम लेती

किरण ....... मम्मी कुंवर जी को गुरुदेव के पास ले जाना होगा हमें पता नहीं इन्हें क्या हुआ है

शालिनी जी किरण सूर्य को वह से ले परीलोक के लिया गायब हो गई

इनके जाते हे अचानक से मानसी की भी आँखे खुल जाती है

मानसी ....... ये कैसा भव्य दुस्वपन था जिसने देख हमारी रूह तक कैंप उठी हमें इस बारे में कुंवर जी से बात करनी होगी वैसे भी होने वाली है पैर आज कुंवर जी अब्बी तक उठे नहीं वर्ण वो सबसे पहले उठ जाते है

मानसी बाथरूम से फ्रेश हो कर निकली त्यार हो शालिनी जी का रूम नॉक करती है पैर अंदर कोई हो तब न जबाब दे

मानसी ....... मम्मी जी भी अभी तक सो रही है क्या

मानसी सूर्य के मानसिक सम्पर्क करने की कोशिश करती है पैर नाकाम रहती है

मानसी ......बड़ी अजीब बात है ऐसा पहले तो कभी नहीं हुआ

मानसी अपने तेज नजरो से रूम के भीतर देखती तो वह न शालिनी जी थी आवर न सूर्य

मानसी ......अब मम्मी जी आवर कुंवर जी सुबह सुबह कहा चले गए उन्होंने तो कुछ बताया भी नहीं

कोमल ....... क्या हुआ मानसी दीदी आप यहाँ क्यों कड़ी है

मानसी ....... वो कुंवर जी उठे नहीं तो उन्हें हे उठाने आई थी पैर मम्मी जी आवर कुंवर जी दोनों हे यहाँ नहीं है आवर न कुंवर जी से कोई सम्पर्क हो रहा है मुझे चिंता हो रही है

कोमल ....... तो इसमें चिंता की क्या बात है स्वीटी को पता होगा मैं अभी पूछती हूँ उनसे

कोमल सपना के रूम की तरफ भाड़ जाती है पैर वह किरण के न मिलने से अब कोमल को भी चिंता होने लगती है

मानसी .....किरण दीदी भी नहीं है यहाँ पे बाकि घर में भी वो कही नहीं है

कोमल ...... जरूर कुछ हुआ है जिसका हमें पता नहीं मैं स्वीटी से बात करती हूँ

कोमल मानसिक संपर्क कर किरण से जुड़ जाती है

कोमल ...... स्वीटी दीदी आप कहा पे हो

किरण ........ कोमल हम लोग परीलोक आये है कुंवर जी आवर मम्मी के साथ

कोमल ....... क्या हुआ दीदी आप गाब्री हुई लग रही है

किरण ...... पता नहीं कुंवर जी को कुछ हुआ है मैं बाद में बात करती

किरण इतना बोल कोमल से मानसिक सम्पर्क ख़तम कर देती है .......

परीलोक ..........

शालिनी जी किरण सूर्य को ुशी स्वस्थ में लिया गुरुदेव के पास मंदिर में पहुंचते है

गुरुदेव अभी सनान आदि से निवृत्त हो परबु की पूजा आदि की तयारी कर रागे थे तभी वह किरण आवर शालिनी जी सूर्य को लिए पहुँचती है

सूर्य की हालत देख गुरुदेव भी चिंतित हो उठे

गुरुदेव ....... पुत्री क्या हुआ पुत्र सूर्य को इसे यहाँ लिटाओ सावधानी से

शालिनी जी ........ गुरुदेव देखिये न मेरे बेटे को क्या हुआ है

जब से किरण ने सूर्य को इस स्थित hi में चूहा था तब से सूर्य के सरीर की अकड़न तो सामान्य स्थिति में आने लगी थी पैर तप अभी भी ुशी तरह बढ़ता जा रहा था

किरण .......... पता नहीं गुरुदेव इन्हें क्या हुआ है कब से बस यही बात दोहरा रहे है

गुरुदेव ....... चिंतित न हो पुत्री अवश्य तुमसे जुड़ा कोई दुस्वपन देखा है पुत्र सूर्य ने जिस से पुत्र सूर्य को मानसिक आघात पहुंचा है
हम अभी देखते है पुत्री

गुरुदेव सूर्य के मस्तिष्क पे हाथ रख आँखे बंद कर ध्यान के माध्यम से उस दसवपन को देखते है जिसके कारन सूर्य इस अचेतन स्वस्थ में पहुंचा था

पुरे दृष्टि को देखने के बाद जब गुरुदेव ने आँखे खोली तो अब वो भी किसी गहन चिंता में दुब गए थे

शालिनी जी ...... क्या हुआ गुरुदेव आप इस तरह से में क्यों है क्या हुआ है मेरे बेटे को

गुरुदेव .......... हमें ये कहते हुए बहुत खेद हो रहा है की पुत्र सूर्य ने जो दुस्वपन देखा उस से उसके हृद्या पे बहुत बड़ा आघात लगा है पुत्री शालिनी भले हे वो दुस्वपन था किन्तु उसमे जो उसने देखा उसे हे सत्य मन पुत्र सूर्य ने जीने की छह छोड़ दी है

गुरुदेव की बात सुनते हे शालिनी जी आवर किरण किसी कटे वृक्ष सामान धरा पे मूर्छित हो कर गिर जाती है

गुरुदेव जल्दी से आगे भाड़ शालिनी जी आवर किरण को सँभालते है

साथ हे रनो पारी आवर रिद्धि को जल्द से जल्द यहाँ आने का सन्देश भी देते है

अगले हे पल रानी पारी आवर रिद्धि दोनों गुरुदेव के समक्ष थी

सूर्य को देखते हे रिद्धि के पेअर वही जैम गए

रानी पारी ....... क्या हुआ गुरुदेव आवर ये पुत्र सूर्य की ऐसे स्वस्थ आवर शालिनी जी आवर पुत्री किरण

गुरुदेव ........... अभी उचित समय नहीं है आपके प्रशनो का पहले इन्हें सँभालने में हमारी सहायता कीजिये रानी पारी पुत्री रिद्धि स्वयं को सम्भालो आवर हमारी सहायता करो पुत्री

रानी पारी शालिनी जी को सभालती है आवर रिद्धि किरण को

रिद्धि ......( रोटी हुए ) इन्हें क्या हुआ है पिता श्री

गुरुदेव ....... पुत्री हम ध्यान में जा रहे है जब तक हम ध्यान से बहार न आये आप दोनों को इनका ख्याल रखना होगा

फ़िलहाल पुत्री किरण वह पुत्री शालिनी को अभी मूर्छित हे रहने दो यो ये चन्दन लेप पुत्र सूर्य के मास्टिन वह हाथ पैरों पे निरंतर बिना रुके लगते रहना जब तक सूर्य का ताप आवर रंग सामान्य इस्थिति में न लौट आये पुत्री पारिजात अभी आती हे होगी

गुरुदेव दोनों को सब समजा वही परबु की प्रतिमा के समक्ष ध्यान में बेथ जाते है

कुछ देर बात वह पारिजात पहुँचती है उसकी भी हालत सूर्य को देखने के बाद बिगड़ जाती है पैर रानी पारी द्वारा समझाए जाने पे खुद को संभल वो गुरुदेव द्वारा दिया चन्दन लेप सूर्य के माथे हथेली वह पैरों के तलवे में लगा देती है

जो देखते हे देखते पल भर में सुख जाता फिर से वही क्रिया करती घंटे भर में सूर्य का ताप वह लाल रंग सामान्य अवस्था में आने लगता है

दिल्ली .........

कोमल किरण से बात कर फ़ौरन सूर्य के उस रूम में पहुंची जहा सूर्य शाकिनी जी के साथ सोया था

कोमल अपनी नागमणि का आह्वान करती है

अगले हे पल नागमणि कोमल के हाथ में थी

कोमल ....... नागमणि मुझे वो दृश्य दिखाओ जो जिसमे सूर्य के साथ कुछ अप्रिय घटना घाटी थी इस कक्ष में

देखते हे देखते कोमल के सामने कुछ दृश्य आने लगते है 4,5 मिनट्स चले उस दृश्य ने कोमल को कमजोर कर रख दिया था

कोमल की आँखों में जैसे बाद आ चुकी हो आसुओं की

मानसी ....... क्या हुआ कोमल तुम रो क्यों रही हो आवर तुमने ऐसा क्या देख लिया बताओ मुझे क्या देखा तुमने आवर किरण दीदी ने क्या कहा

कोमल ने जैसे मानसी कोई भी बात सुनी हे न हो कोमल को इस तरह खड़ा देख मानसी का गुस्सा भड़ने लगता है मानसी कोमल को जनजोर कर होश में लती है

मानसी ........ कोमल जबाब दो क्या हुआ है उन्हें तुम चुप क्यों हो कुछ तो बोलो मेरे साबरा का बांड टूट रहा है कोमल

कोमल ........ वो वो बहुत पीड़ा में है दीदी मुझे उनके पास जाना है

मानसी ....... कुंवर जी है खा आवर उन्हें क्या हुआ है

कोमल .......वो परीलोक में है उन्हें क्या हुआ मैं नहीं जानती मुझे बस उनके पास जाना है

कोमल को इस तरह रोटा देख आँखे तो मानसी की भी बाह रही थी पैर खुद को मजबूत रख उसने कोमल को अपने सीने से लगा उसे संत करने लगती है


मानसी ........ उन्हें कुछ नहीं होगा वो इतने कमजोर नहीं जिन्हे छोटी मोती बढ़ाया अपने साथ बहा ले जाये हम सभी लोग चलते है बस रोना नहीं ऐसे हिमत नहीं हारते कोमल

कोमल ......मुझे बस उनके पास जाना है दीदी

मानसी ....... वयोम भाई कहा हो आप मुझे आपकी जरुरत है

वयोम अगले हे पल मानसी के सामने था

वयोम ......क्या हुआ मानसी मेरी बहन तुम रो क्यों रही हो

मानसी ......भैया उन्हें कुछ हो गया हम सब लोग परीलोक जा रहे है आप पीछे से सब संभल लेना

वयोम ...........यहाँ की चिंता न करो मैं सब संभल लूंगा मैं भी आप लोगो के साथ चलता हूँ

मानसी पायल दी प्रीती दी राधा दी सपना दी अलीना दी कहा हो आप सब जल्दी यहाँ आओ

मानसी की आवाज सुन सब ुशी कक्ष में आ जाती है

मानसी ....... कुंवर जी की तबियत ठीक नहीं है हम लोग परीलोक चल रहे है

सपना ......आवर ये आप अब बता रही है मानसी दीदी

मानसी ........ मुझे अभी पता चला है वयोम भाई हम सभी के क्लोन बना कर यहाँ छोड़ दीजिये ताकि किसी के सामने भेद न खुले

वयोम .......ठीक है मैं सब देख लूंगा आप सब जाओ मैं भी कुछ देर में आता हूँ

मानसी सभी को ले परीलोक के लिया निकल गयी

ीदार वयोम अपने मैजिक के सभी के डुप्लीकेट बना कर खुद सूर्य बन किरण शालिनी जी के डुप्लीकेट के साथ कार से बहार निकल गया ताकि कोई इनके न रहने पे सवाल माँ उठाये

परीलोक ....... गुरुदेव करीब एक घंटे बाद अपने ध्यान से निकलते है तो वह सभी को देख एक बार को छिनक जाते है चोकने की वजह थे देवसफ्फी नोयों जो इस वक़्त सभी के साथ वह मौजूद थे

गुरुदेव आगे भाड़ शालिनी जी आवर मानसी को होश में ले कर आते है

शालिनी जी ........सूर्य मेरा बीटा

गुरुदेव ......... संत हो जाओ पुत्री शालिनी पुत्र सूर्य को कुछ नहीं होगा

किरण को जैसे किसी चीज़ का होश न था अभी भी वो बस ुशी तरह लेती हुई थी होश में आने के बाद भी बस एक परिवर्तन आया था किरण में अब उसकी आँखों से सुण्या भाव में भी निरंतर अश्रुधारा बाह रही थी

गुरुदेव ........ पुत्री किरण होश में आओ पुत्र सूर्य को कुछ नहीं होगा अगर पुत्र सूर्य को वापिस पाना है तो आप दोनों को इस दुःख से बहार निकलना होगा

केवल पुत्री शालिनी आवर तुम हे सूर्य को उस अनंत निद्रा से वापिस लौटा ला सकती हो पुत्री

अगर आप दोनों ने समय रहते ये कार्य नहीं किया तो साधा के लिया पुत्र सूर्य चिर निद्रा ( हमेशा के लिया गहरी नींद में,) में जा सकता है

गुरुदेव की बात सुन शालिनी जी किसी तरह कुढ़ को संत करती है आवर किरण को भी किसी तरह वर्तमान इस्थिति में लती है

शालिनी जी ....... हमें क्या करना है गुरुदेव

गुरुदेव ...... पुत्री आप दोनों ध्यान के माध्यम से सूर्य तक पहुंचना होगा आवर उसे उस दसवपन के भ्रम जाल स बहार निकल वास्तविकता में लाना होगा ये इतना भी आसान नहीं होने वाला पुत्री क्यों की पुत्र सूर्य उस दसवपन को हे सत्य मन चूका है आप दोनों को उसे किसी भी तरह उस मायाजाल रूपी भ्रम से बहार निकल सत्यता से अवगत करना होगा

किरण ........ वो वो उस दसवपन में ऐसा क्या देखा इन्होने की इनपे उसका इतना गहरा प्रभाव पड़ा

गुरुदेव ....... तुम्हारे द्वारा उस दसवपन में कहे गए वो हृद्या विदारक कटु वचन आवर अंत में तुम्हारा स्वयं के पुत्र सूर्य की बहो में प्राण त्यागना वो आघात तुमसे बिछड़ना पुत्र सूर्य सहन नहीं कर पाया आवर वो इस स्वस्थ में पहुंचने गया जहा तुम्हारे बिना जीने की उसकी इच्छा हे समाप्त हो चुकी है

गुरुदेव वही भव्य दसवपन सभी के समक्ष किसी चलचित्र के भाटी चला देते है

वो भव्य नजारा वो लाशे वो तबाही भरा मंजर देख सभी के रोंगटे खड़े हो जाते है तभी सभी की दृस्टि सूर्य पे पड़ती है जो किसी पसन् पत्थर के जैसा खड़ा देख रहा था

कुछ देर किरण आवर सूर्य का वही वाद संवाद चलता है आवर सूर्य का अपनी सोर्ड गले पे लगा खुद की ख़तम करने की इच्छा ने इस दृश्यों को देख रही सभी लड़कियों की जान बालक में अटका दी फिर किरण का सोर्ड लेना आवर खुद के सीने में उतर लेना आवर तड़पते हुए सूर्य की गौड़ में डैम तोड़ देना

किरण ......( रोटी हुए ) ये मैंने क्या कर दिया मम्मी मेरी वजह से ये सब हुआ है मैं ऐसा कैसे कर सकती हूँ इनके साथ मैं इनसे प्यार करती हूँ वो मेरे सब कुछ है इन्हें कुछ हुआ तो मैं भी जिन्दा नहीं रहूंगी एक बार पहले हे खो चुकी हूँ इन्हें अब दुबारा मैंने हे ये मैंने क्या......

शालिनी जी ...... नहीं मेरी बची चुप हो जाओ वो तुम नहीं हो बेटी सूर्य को कुछ नहीं होगा हम उसे वापिस लाएंगे इस तरह हिमत नहीं हारते बेटी

गुरुदेव ........ संत पुत्री सात हम सब जानते पुत्री की तुम वो नहीं हो आवर न तुम कभी पुत्र सूर्य को स्वपन में भी ऐसे कटु वचन कह सकती हो पुत्री स्वयं को सम्भालो आवर पुत्र सूर्य को वापिस वास्तविकता में लाना है ये मत भूलो पुत्री

सपना ....... मेरी स्वीटी इतनी कमजोर नहीं जो इतनी आसानी से हर मन हाथ पे हाथ धरे बैठी रहे क्या तुम वही किरण हो जिसने इनके लिया स्वयं परबु पे अस्त्र उठा दिए थे या आज तुम्हारा प्रेम मर चूका है किरण
तुम तो कभी इतनी कमजोर न थी की इन छोटी छोटी बढ़ाओ से दर कर अपने कदम पीछे हटा लो

शालिनी जी .......सपना ये तुम क्या कह रही हो

सपना ....... मुझे बोलने दीजिये मम्मी क्या कहते है वो तुम्हे है ...सूर्य की किरण ... यही कहते है न वो तुझे आवर क्या कहते है है .... सूर्य का अस्तित्व उसकी किरण से है आवर उसकी किरण का अस्तित्व सूर्य से ....

भले हे तुम वो नहीं हो किरण किन्तु उसे हे सत्य मन उन्होंने अपने जीने की इच्छा हे त्याग दी अब फैसला तुम्हे करना है की उन्होंने जो कहा वो सत्य था या मिथ्या उन्होंने तो अपनी किरण के बिना उदय होना भी अस्वीकार कर दिया अब तुम्हारे वचनो की बारे है की कैसे ये कुरान अपने सूर्य को फिर से अस्तित्व में लती है अब तुम्हारा मुख तभी देखूंगी जब उन्हें तुम वापिस सही सलामत ले कर लौटोगी वर्ण मेरे सामने कभी मत आना

सपना क्या कह रही थी उसे खुद गुस्से आवर पीड़ा में पता नहीं चल रहा था पैर जाने अनजाने हे उसने उस चिंगारी को हवा दे दी जिसने पल भर में किरण को जनजोर कर रख दिया जहा कुछ पल पहले किरण के चेहरे पे पीड़ा आवर मायूसी के अलावा कुछ नहीं था वही अब एक दृढ संकलप था जैसे सपना ने उस सोई हुए किरण को जगा दिया हो

( गुरुदेव ........ उत्तम पुत्री सपना हम सब जो नहीं कर पते वो तुमने कर दिखाया पुत्री तुमने पुत्री किरण के प्रेम को उसके अस्तित्व को चुनौती दे डाली अब इस किरण को अपने सूर्य से मिलने से कोई बढ़ा कोई रुकावट कोई मायाजाल नहीं रोक सकता धन्यो पुत्री तुम आवर तुम्हारा प्रेम )

किरण ..... मुझे माफ कर देना दीदी मैं अपनी भावनाओ में बाह कर खुद को हे दोषी मान लिया था पैर आपने मेरे प्रेम को हे चुनौती दे दी अब आपकी ये स्वीटी आपको तभी अपना चेहरा दिखायेगा जब कुंवर जी को अपने साथ ले कर लौटूंगी वर्ण ये चेहरा कभी आपके सामने नहीं आएगा

सपना किरण की तरफ पीठ किये मून मुख से आंसू बहा रही थी

रानी पारी सपना को अपने गले से लगा लेती है एक माँ से भला बेटी का दर चुप सकता है एक माँ को पता होता है की कब एक बेटी को उसकी माँ के कंधे की जरुरत है

गुरुदेव ........ पुत्री शालिनी पुत्री किरण तुम दोनों को सनान कर ध्यान में बैठना होगा आवर आप सभी को कुछ समय के लिया यहाँ से जाना होगा

शालिनी जी किरण दोनों मंदिर के पीछे बने सरोवर में सनान कर जल्दी हे वस्त्र बदल वह आ जाती है इस बिच गुरुदेव के आदेश पैर रानी पारी सभी को पारी महल ले जाती है

गुरुदेव .......पुत्री किरण पुत्री शालिनी आप दोनों को ध्यान के माध्यम से सूर्य से जुड़ना होगा जनता हूँ ये इतना आसान नहीं होगा बिना पुत्र सूर्य की अनुमति के पैर आप दोनों को ये करना हे होगा आवर पुत्र सूर्य को यकीं दिलाना होगा की वो सिर्फ एक दसवपन था केवल भ्रम न की वास्तविक सत्य पुत्री शालिनी तुम्हे ये रूप त्यागना होगा पुत्री क्यों की वह कितना समय लगेगा हम भी नहीं जानते तुम्हारा ये सरीर उतने समय ध्यान में नहीं रह सकता

शालिनी जी ....... जी गुरुदेव

शालिनी जी अपने पारी रूप में आ जाती गुरुदेव दोनों को सूर्य के दोनों तरफ बैठा सूर्य का एक एक हाथ मोली से किरण पुर शालिनी जी के साथ बंद देता है

शालिनी जी आवर किरण दोनों हे ध्यान में लीं हो जाती है

गुरुदेव ने जो कहा वही हुआ शालिनी जी आवर किरण को सूर्य से जुड़ने में बहुत परेशानी हुई आवर काफी समय भी लगा करीब 1 हर बाद जब शालिनी जी आवर किरण के सरीर से हलकी ऊर्जा प्रवाहित होने का आभाष गुरुदेव को हुआ तो उन्होंने तीनो पे अपने सकती से किसी तरह का कवच नुमा पर्दा दाल दिया अब दोनों की ऊर्जा ुशी घेरे में थी उस घेरे से बहार नहीं आ प् रही थी

गुरुदेव ....... क्षमा करे परबु आज आपकी पूजा में विलम्ब हुआ उसके लिया

गुरुदेव अपनी पूजा पूर्ण कर वही परबु पार्टीका के सामने ध्यान में बेथ जाते है

ध्यान में भी बार बार वही दू स्वपन देख रहे थे

कुछ हे देर बाद अचानक से उनकी आँखे खुल जाती है

गुरुदेव .......... हे परबु ये हमने क्या कर दिया

हम केवल मात्रा इसे एक दुस्वपन हे समाज रहे थे हमसे इतनी बड़ी चूक कैसे हो गयी

आज फिर एक बार हमसे चूक हुई जिसका दंड पुत्र सूर्य भोग रहा है हमें सिगरा हे कोई उपाय करना होगा

किन्तु क्या करे हम अगर फिर से हमसे चूक हुई तो उसका परिणाम बहुत भव्य (भयानक ) होगा हे परबु अपने भक्त को क्षमा कर हमारी सहायता कीजिये परबु

गुरुदेव ...... ये हमने कैसे नहीं विचार किया पुत्र सूर्य के इस करम से प्रकर्ति के नियम भांग हुए है यहाँ हम कैसे चूक कर गए चूक हमसे हुई है माँ पराशक्ति आपके निर्धारित प्रकर्ति नियमो का उलंगन भले हे पुत्र सूर्य से हुआ है माँ प्रकर्ति किन्तु गुरु होने के नाते उचित मार्ग सूजने में चूक हम से हुई है तो दंड भी हमें हे दीजिये माँ प्रकर्ति पुत्र सूर्य पे अपनी ममता भरी दया दृस्टि कीजिये माँ

गुरुदेव दंडवत हो कर परबु के श्री चरणों में अपने द्वारा की भूल की क्षमा मांग रहे थे उनकी आँखों से भी आंसू बाह रहे थे जिसका प्रभाव पुरे परीलोक में हो रहा था

अच्चानक से पुरे परीलोक में जहा पहले हर समाया उमंग भर खुशनुमा खूबसूरत काहिल रहता था वह अचानक से घने काले बदलो ने तांडव मचाना सुरु कर दिया साथ बहुत जोरदार तेज वर्षा आरंभ हो गयी

रानी पारी ......... ये अचानक से परीलोक में इस तरह से वातावरण कैसे परिवर्तन हो गया अच्चानक से परीलोक में ये मायुशि का कैसा मंजर नजर आ रहा परीलोक की भव्यता अच्चानक से कहा खो गयी

कही ये कोई अनिष्ट घटना करम का आरम्भ तो नहीं है परीलोक पे कोई संकट तो नहीं आने वाला है गुरुदेव वही इस विषय में कुछ कर सकते है किन्तु उन्होंने तो अभी किसी का भी वह आना वर्जित किया हुआ है कही ये किसी असुर की माया या कोई भरमजाल तो नहीं है

रानी पारी अपनी जादुई छड़ी का इस्तेमाल कर अचानक से आये बदलाव की वास्तविकता जाचनी चाही की ये कोई माया या भ्रम तो नहीं

रानी पारी ....... ये कोई माया या भ्रम नहीं गुरुदेव से हम इस वक़्त मिल नहीं सकते अब केवल एक हे मार्ग है जिस से हम इसके मुख्या कारन तक पहुंचने सके

रानी पारी तेजी से एक कक्ष की आवर भाड़ गई

जहा महावीर दर्पण रखा हुआ था

राण पारी ...... हे मायावी दर्पण परीलोक में आये इस परिवर्तन का मुख्या कारन कोण है क्या है

तभी रानी पारी को महावीर दर्पण मंदिर का बहरी दृश्य दिखता है दर्पण में

रानी पारी ........ ये तो परीलोक का हे मंदिर है इसका तात्पर्य है की जो भी बदलाव या घटना घाट रही है उसकी वजह पुत्र सूर्य पुत्री किरण या फिर गुरुदेव आवर शहालिनी जी इनमे से हे कोई एक है हमें वह जाना हे होगा गुरुदेव के आज्ञा के विरुद्ध अगर ये ऐसे हे निरंतर बदलाव आते रहे तो परीलोक में कुछ समय बाद तबाही सुरु हो जाएगी

उदार मंदिर में गुरुदेव क्षमा याचना करते रहे आखिर परबु ने उनकी पुकार सुन हे ले

गुरुदेव अभी परबु चरणों में गिरे हुए उनसे क्षमा सूचना कर रहे थे तभी उनके मस्तिष्क में आवाज सुनाई देती है

आवाज ......उठो पुत्र अपने चित को संत करो पुत्र अन्यथा परीलोक संकट में पद जायेगा

गुरुदेव ....... परबु मुझे क्षमा कर दीजिये पुत्र सूर्य की इस परिस्थिति का कारन मेरी भूल है उसे इस दंड से मुक्त कर मुझे दंड दीजिये परबु

आवाज ......... पुत्र करम जिसका हो फाल भी उसे हे प्राप्त होता है किसी आवर के अचे कर्मो का फाल किसी तुम्हे प्राप्त नहीं हो सकता ुशी तरह किसी की भूल का दंड भी तुम्हे नहीं दिया जा सकता

गुरुदेव ........ गुरु होने के कारन शिष्य के हर अच्छे करम हर उपलब्धि का श्रेय गुरु को मिलता है फिर गुरु से हुए भूल का दंड उसके शिष्यों को क्यों परबु

आवाज .......वाटस तुम परम ज्ञानी हो किन्तु इस समय अपने पुत्र मोह के चलते तुम अपने चित को संत नहीं कर प् रहे हो तुमने हमारे अंश को सदैव शिष्य से भाड़ कर अपने हृदय में पुत्र से भी उच्च स्थान दिया आज उसे इस दयनीय अवस्था में देख कर तुम्हे जो पीड़ा हो रही है उसको हम स्वयं मह्सुश कर प् रहे है तुम्हारी पीड़ा से केवल तुम हे पीड़ित नहीं हो पुत्र अपितु सम्पूर्ण परीलोक तुम्हारी पीड़ा से स्वयं को पीड़ित मह्सुश कर रहा है इस लिया स्वयं को सयमित कर अपने चित आवर मन को एकाग्र करो पुत्र

गुरुदेव ......... मुझे क्षमा करे परबु आपने उचित कहा मैं पुत्र मोह से ग्रषित हो बूढी के स्थान पे मन से विचार करने लगा

आवाज ........ हमें तुमसे यही आसा थी पुत्र मुश्किल परिस्थितियों में जो व्यक्ति बूढी आवर सयम से से काम ले उसे कोई बाढ़ ा नहीं रोक सकती

गुरुदेव कुछ देर ध्यान लगा कर कुढ़ को संत करते है

गुरुदेव ....... परबु पुत्र सूर्य से प्रकर्ति द्वारा निर्धारित नियमो का उलंघन हुआ है इसमें हमसे भी भूल हुई है जो समय रहते हमने उसे उचित मार्ग नहीं दिखा पाए

आवाज ........ पुत्र ये सत्य है की पुत्र सूर्य का दृष्टिकोण उचित था किन्तु उसका मार्ग अनुचित था पापी तो के साथ साथ अच्छे आवर सच्चे नेक इंसानी में भी पुत्र निर्भय असुर का भय सम्पूर्ण मानव जाती में व्याप्त हो गया केवल भय या मृत्यु दंड से मानव जाती में अच्छा परिवर्तन नहीं आ सकता है

किसी भी पापी मानव को मृत्यु दंड डेन से उसके किये बुरे कर्मो का दंड नहीं मिल जाता अपितु ऐसा कर पुत्र सूर्य उनके इस जीवन काल से समय से पूर्व मुक्ति दे रहा है दंड ऐसा दो की उस से समाज को पाप से दूर रहने की प्रेरणा मिले वो स्वयं पाप कर्मो का त्याग कर अच्छे का मार्ग चुनेगे

गुरुदेव ........ किन्तु जो घटना घाट चुकी है उसे तो पुत्र सूर्य बदल नहीं सकता परबु

आवाज .......... भूतकाल समय यात्रा

गुरुदेव ...... अथार्त पुत्र सूर्य को भूतकाल के में जाना होगा समय यात्रा पूर्ण कर किन्तु ये पुत्र सूर्य के लिया कैसे संभव होगा परबु

आवाज....... एकाकी ( अकेले ) पुत्र सूर्य के लिया संभव नहीं है किन्तु किसी आवर के लिया असंभव नहीं जो सवयं समय चक्र को गतिमान रखती है

गुरुदेव .......... परबु क्या संपूर्ण गटनाक्रम

आवाज ....... नहीं जो मुक्ति प् चुके है पांच तत्वा में विलीन हो चुके है उस घटना करम को बदला नहीं जा सकता अपितु जो घटना करम आगे घटित हो उसे रोकना अनिवार्य है

गुरुदेव ....... धन्यवाद परबु जो आपने अपने इस भक्त पे कृपा दृस्टि की

आवाज ....... अभी भी तुम्हारे मन में ढेरो जिज्ञासाएं शह है पुत्र

गुरुदेव ........ परबु पुत्री शालिनी सूर्य

आवाज ....... ये चयन पुत्री शालिनी का था पुत्र जब अपने तप को पूर्ण कर हमसे वरदान स्वरुप हमारे अंश को की जननी बनना स्वीकार किया ुशी समय अपने मन के भीतर छुपी अपनी इच्छाओ का दमन नहीं कर पायी पुत्री शालिनी

गुरुदेव ......... अथारत परबु पुत्र सूर्य शालिनी

आवाज ........ समय चक्र समय से चलता है वाटस भविष्य को आज में बदला नहीं जा सकता

गुरुदेव ........ परबु पुत्र सूर्य

आवाज .......... प्रकर्ति दवारा निर्धारित दंड पूर्ण कर वो लौट आएगा सिगरा हे उसे सुक्रलोक असुरगुरु शुक्र से भेंट करने के लिया यात्रा करनी होगी किन्तु पुत्री किरण का उसके साथ होना अनिवार्य है

गुरुदेव ....... सुक्रलोक वह किस.......

आवाज .......... सयम रखो वाटस हर सत्य के उजागर होने का एक समय नियति निर्धारित है

गुरुदेव ......जी परबु आपको कोटि कोटि नमन परबु

रानी पारी ........गुरुदेव वो परीलोक

गुरुदेव ......... आइये रानी पारी हम जानते है परीलोक में जो कुछ भी हुआ उसके जिम्मेदार हम है रानी पारी हम

रानी पारी ........ आप किन्तु कैसे गुरुदेव

गुरुदेव ......... आपने जो बहार बदलाव देखे वो हमारे भीतरी मन में चल रहे दावन्द का परिणाम था रानी पारी

रानी पारी ....... हमें लगा जैसे ये घ्यातना परीलोक में होने वाले किसी अनिष्ट का संकेत है

गुरुदेव ........ अब न परीलोक पे आवर न पुत्र सूर्य पे किसी प्रकार का कोई संकट आएगा .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................
 
अपडेट 245

आवाज .......... सयम रखो वाटस हर सत्य के उजागर होने का एक समय नियति निर्धारित है

गुरुदेव ......जी परबु आपको कोटि कोटि नमन परबु

रानी पारी ........गुरुदेव वो परीलोक

गुरुदेव ......... आइये रानी पारी हम जानते है परीलोक में जो कुछ भी हुआ उसके जिम्मेदार हम है रानी पारी हम

रानी पारी ........ आप किन्तु कैसे गुरुदेव

गुरुदेव ......... आपने जो बहार बदलाव देखे वो हमारे भीतरी मन में चल रहे दावन्द का परिणाम था रानी पारी

रानी पारी ....... हमें लगा जैसे ये घ्यातना परीलोक में होने वाले किसी अनिष्ट का संकेत है

गुरुदेव ........ अब न परीलोक पे आवर न पुत्र सूर्य पे किसी प्रकार का कोई संकट आएगा .................

अब आगे .........

राधा ........ क्या हुआ सपना तुम्हारी आँखे तुम अभी भी दुखी हो गुरुदेव ने कहा है न की वो जल्दी हे ठीक हो जायेंगे

सपना ...... मुझे पता है उन्हें कुछ नहीं होगा आवर न स्वीटी उन्हें कुछ होने देगी

राधा ...... फिर किस बात को ले कर दुखी हो तुम दुःख हम सब को भी उतना हे उनके साथ ऐसा कुछ होगा हमने नहीं सोचा था पैर ऐसे निकट हरने से कुछ नहीं होगा सपना

सपना ....... आप समाज नहीं रही है मैंने गुस्से में अपनी स्वीटी को

बोलते बोलते हे सपना की आँखों से फिर से आंसू भने लगते है सपना पहले से हे अकेले में रो रो कर अपनी आँखे लाल कर चुकी थी

राधा सपना के आंसू पांच बड़ी बहन के जैसे सपना को सांत्वना देने लगती है

राधा ....... देख सपना हम सब जानते है की तुम्हारा आवर स्वीटी के बिच का रिस्ता कितना गहरा है तुम दोनों के बिच बहा no से ज्यादा माँ बेटी का रिस्ता है पैर उस समय जो तुमने किया वो जरुरी था सपना वर्ण हम सब सायद .....

सपना ....... नहीं ऐसा सोचना भी नहीं आप उन्हें कुछ नहीं होगा मेरी स्वीटी उन्हें ले कर हे लौटेगी

राधा ....... ये hello बेटी वो तुम्हारी पिछले जनम में थी समाजी बड़ी आई मेरी स्वीटी वो हम सब की स्वीटी है समाजी आवर वो हमारे स्वीटू को ले कर हे आएगी

राधा भले हे खुद अंदर से आहात थी पैर यहाँ वो जूठी हाशि से हे सही पैर सपना के दुःख को कुछ हल्का करने में कामयाब हो रही थी

सपना ...... वो स्वीटी के स्वीटू है हमारे अभी पूरी तरह से बने नहीं है

राधा ....... कोई नहीं जल्दी हे बन जायेंगे तब तेरी इसको बचा कर रखना समाजी मेरी सपना डार्लिंग

सपना ....... आउच राधा बुआ क्या कर रही हो कोई ऐसे भी करता है क्या

दरशल राधा बात करते करते सपना के नरम खुल्हो पे हाथ फिर कर दबा देती है थोड़ी सख्ती से

राधा ......हेहेहे अभी से दर्द हो रहा है पैर जब उनका वो बड़ा वाला इजेक्शन यहाँ लगेगा तब क्या होगा याद तो होगा न कैसा था पिछले जनम इस बार तो आवर भी बड़ा है हेहेहे

सपना ....... आप तो ऐसे बोल रही है जैसे आपने देखा हो

राधा .......डार्लिंग इतना तो पहली गर्लफ्रेंड का हक़ बनता है

सपना ...... मतलब आप ने सब चेक किया है

राधा की बातो आवर मज़ाक से सपना पहले से काफी बेहतर इस्थिति में आ चुकी थी

उदार एक दूसरे कक्षा में कोमल अकेले में अपने हे विचारों में खोये हुए थी

( कोमल ...... क्या हमने जो देखा वो सच था या हमारा कोई भरम था पैर नागमणि हमें गलत क्यों दिखाएगी सोच सोच कर सर भी दर्द करने लगा है किस से पूछे अगर किसी आवर के सामने बात खुली तो अनर्थ हो जायेगा क्या उनसे पूछे पैर क्या उनसे पूछना सही होगा स्वीटी पैर अगर उसे पता नहीं हुआ तो वो क्या सोचेगी

इस से अच्छा तो हम वो सब देखते हे न हमारी हालत तो उस नाग जैसे हो गई जो नेवले को निगला तो मारा आवर बहार उगला तो मारा क्या करे कुछ समाज नहीं आ रहा है )

अलीना ......कोमल ..... कोमल क्या हुआ तुम्हे कहा खोई हुई हो कब से आवाज दे रही हूँ तुम्हे

कोमल ....... क्या हुआ अलीना दीदी

अलीना ........ तुम बताओ तुम्हे क्या हुआ है कहा खोई हो इतनी गहराई से

कोमल ....... कुछ नहीं वो बस उनके बारे में सोच रही थी

अलीना ........ अब तुम मुझसे जूठी बोल रही हो कोमल मन की मैं उनकी तरह किसी का दिमाग रीड नहीं कर सकती पैर ध्यान आवर ट्रेनिंग से इतना तो शिखा की जूठी बोलते हुए चेहरे के भाव कैसे होते है

कोमल ....... आपने सच कहा मैं किसी आवर बात को ले कर सोच रही थी

अलीना ....... क्या हुआ कोमल कोई सीरियस मटर है क्या

कोमल ....... कोमल क्या इन्सेस्ट जायज है

अलीना ....... तो तुम इन बातो में खोई हुई हो तुम्हारा दिमाग तो ठीक है न

कोमल ....... बताओ न क्या इन्सेस्ट जायज है

अलीना ....... है भी आवर नहीं भी

कोमल .......क्या मतलब

अलीना ............ किसी ज़माने में इसे सबसे बड़ा पाप मन जाता था पैर आज देखो आज के वक़्त में परदे के पीछे पूरी दुनिया में इन्सेस्ट सम्बन्ध बन रहे है किसी आवर का क्यों हमारा हे देख लो पिछले जनम में मैं उनकी बहन थी वजह कुछ भी भी रही पैर हमारा शारीरिक सम्बन्ध बना इस जनम में आप उनकी रिश्ते से बहन भी हो फिर भी सम्बन्ध आप दोनों का पति पत्नी का है स्वीटी को देख लो

कोमल ....... आवर अगर कोई सदी सुधा हो फिर भी किसी आवर के साथ सम्बन्ध रखे तो क्या वो गलत नहीं होगा

अलीना ......... तुम सूर्य की बात कर रही हो न कोमल सच बताना तुम्हे मेरी कसम

कोमल ....... आपने कसम दी इस लिया बता रही हम पैर वजह मत पूछना आपको मेरी कसम

है मैं उनकी हे वजह से हे पूछ रही हूँ

अलीना कोमल के पास बेथ उसका हाथ थम लेती है

अलीना ....... देखि कोमल मुझे ये तो पता नहीं की तुम ये सब कुछ सोच रही हो इसकी वजह क्या है ये भी मुझे नहीं जानना उनका जिसके साथ भी सम्बन्ध बनता है उसके पीछे कोई न कोई कारन या उदेश्यस होता है अब तुमने बात उनपे उठाई है तो मैं भी एक सच बता देती हूँ तुम्हे

कोमल .......कैसा सच क्या आपने उन्हें किसी आवर के साथ ....

अलीना ......चुप कर पागल ऐसा कुछ नहीं देखा मैंने सायद तुम्हे पूरा पता नहीं है पैर अपनी जो राधा बुआ उर्फ़ राधा दीदी है न पिछले जनम में जो सूर्य के सम्बन्ध बने वो इनकी वजह से बने इनके द्वारा दिए सराफ के चलते अब जब सम्बन्ध बने थे तो जब उनकी यादें मिली तो उन्हें वो सब भी स्मरण हुआ हे होगा ऐसे में उनका सूर्य की आवर आकर्षित होना आवर उनसे सम्बन्ध बनना लाज़मी है क्यों की जो एक बार उनसे सम्बन्ध बन गया फिर छह कर भी पीछे हटना आसान नहीं

कोमल ........ मतलब ये आपका अंदेशा है आपने किसी को देखा नहीं किसी के बारे में सुना

अलीना ...... है ऐसा तुम कह सकती

कोमल ....... मतलब आप कुछ जानती है

अलीना ...... है जानती पैर उसे अपने तक हे सिमित रखना चाहती हूँ क्यों की वो भी हमारे परिवार से हे है

अब कोमल के मन में आवर भी जिज्ञाषा उठने लगी थी

अलीना ...... ज्यादा न सोचो वो जो कुछ भी करते है या किसी से सम्बन्ध बनाते है उसका पता स्वीटी को होता है उनसे वो कुछ नहीं छुपाते जब उन्होंने उन्हें परमिशन दी है तो हम कोण होते है सवाल उठाने वाली हम सब ने उन्हें बड़ी बहन मन कर सभी फैसले उनके हवाले किये है ऐसे में किसी के साथ उनका सम्बन्ध बनता भी है तो जरूर किसी ठोस कारन से हे ऐसा होगा अब ज्यादा न सोचो आवर चलो सब के साथ बैठो यहाँ अकेले में सर खपा रही हो.

वही किरण आवर शालिनी जी ध्यान के माध्यम से सूर्य से जुड़ उसके मंद में पहुंच चुकी थी

शालिनी जी ....... ये हम कहा है स्वीटी कैसी विचित्र जगह है ये

किराम ......माँ हम इस समय उनके दिमाग के किसी कोने में है हमें उनके अचेतन मस्तिष्क में पहुंच उसे जागृत करना होगा जो इतना आसान नहीं होने वाला

शालिनी जी ....... क्या मतलब स्वीटी आवर हमें कैसे ज्ञात होगा की हम उचित दिशा में भाड़ रहे है की नहीं

किरण ........ इस वक़्त कुंवर जी गहरी निद्रा में है ऐसे में उनका दिमाग पूरी तरह से सुप्त स्वस्थ में होगा जहा हम बिना उनकी इच्छा से यहाँ आये है किसी सत्रु की तरह गुस्पेट करके उनकी सकतिया उनकी सुरक्षा करने के लिया हमें भी हानि पहुंचा सकती है इस लिया सावधानी से हमें आगे भढना होगा

शालिनी जी ....... ठीक है बेटी पैर हम आगे भिड़ेंगे कैसे आवर किस दिशा में

किरण ....... आप यही रुकिए मैं ध्यान लगा कर देखती हूँ उनसे जुडी किसी भी ऊर्जा का आभाष होता है क्या मुझे

किरण वही बेथ कर ध्यान लगाती है

काफी समय बाद जब उसकी आँखे खिलती है तो उसके चेहरे पे कुछ उम्मीद नजर आई

किरण ...... माँ हमें ुशी दिशा में निरंतर आगे भढना होगा मुजमुझे निर्भया की ऊर्जा का आभाष इस आवर से हे मिल रहा है

शालिनी जी आवर किरण दोनों किरण द्वारा बताई दिशा की आवर भढने लगती है

काफी आगे बढ़ने के बाद किरण एक स्थान पे रुक जाती है

शाकिनी जी ...... क्या हुआ स्वीटी तुम रुक क्यों गयी

किरण .....माँ यहाँ से आगे निर्भया की ऊर्जा का आभाष नहीं हो रहा है

किरण कुछ कदम पीछे जाती तो उसे फिर से निर्भया की ऊर्जा का आभाष होता है

किरण ...... ये कैसा मायाजाल है

शालिनी जी ....... क्या हुआ स्वीटी

किरण .......माँ हम लोग किसी मायाजाल में फर्श चुके है

तभी किरण आवर शालिनी जी की सामने कुछ दुरी पे निर्भयासुर प्रकट होता है

किरण .....निर्भयासुर ये कैसे माया रच राखी है तुमने

किरण निर्भयासुर की आवर बढ़ी तो शालिनी जी ने उसका हाथ पकड़ कर रोक दिया

शालिनी जी ......रुको बेटी ये निर्भया नहीं है उसके भेष में कोई आवर हे है उसकी आँखे देखो गौर से

किरण शालिनी जी की बात मान वही रुक जाती है आवर निर्भयासुर को गौर देखती है चेहरे से निर्भयासुर प्रतीत हो रहा था किन्तु आँखे किसी आवर की

किरण .......कोण हो तुम तुम निर्भयासुर नहीं हो सकते

किरण अपनी गोल्डन ड्रैगन सोर्ड को याद करती है जो अगले हे पल उसके हाथ में थी

निर्भयासुर ........ हाहाहा मैं ुशी निर्भयासुर का अक्ष हूँ पैर उस से विपरीत वो असुर पे कलंक है उसने बुराई पाप का त्याग कर सच्चाई को चुना आवर मेरा दमन किया मुझे कैद में रखा पैर अब मैं आजाद हूँ पहले से ज्यादा सक्तिसाली

( इस निर्भासुर को बुरा निर्भयासुर ( b.nirbhasur ) लिखूंगा )

किरण ....... निर्भयासुर कहा है क्या किया तुमने उसके साथ

b.nirbhayasur .......... उस तक पहुंचने है तो मेरा सामना करना होगा हाहाहाहा मुझे मिटाना इतना भी आसान नहीं

किरण ....... माँ आ पीछे हो जाइये इसे मैं देखती है

शालिनी जी वह से थोड़ा पीछे हैट जाती है

किरण अपनी गोल्डन ड्रैगन सोर्ड ले b.nirbhayasur से भीड़ जाती है

दोनों में जोरदार योध आराम होने लगता है

( परीलोक में ध्यान में बे थे गुरुदेव का अचानक से ध्यान भांग हो जाता है

गुरुदेव ....... ये क्या हो रहा है पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण को इन दोनों के सरीर में ये कम्पन कैसा हम इनके समीप भी नहीं जा सकते अगर हमने सुरक्षा चक्र हटाया तो दोनों की ऊर्जा परीलोक में फ़ैल जाएगी बिना बताये हम कोई भी सहायता कर नहीं सकते

गुरुदेव परबु चरणों में रखा सरवन कलश हाथ में ले कुछ मंत्री उच्चारण करते है आवर उस धुर्वा ( दुब ) से अभी आमंत्रित जल सुरक्षा कवच पे छिड़कते हुए मंत्र उच्चारण करने लगते है )

किरण आवर b.Nirbhayasur दोनों के तलवार जब आपस में टकराती तो चिंगारी या निकलने लगती

( शालिनी जी ........... इसमें जीवित होने के कोई भी लक्षण नजर नहीं आ रहे केवल एक स्थान को चढ़ कर वह ऐसा क्या है क्या स्वीटी को इसके विषय में पता है या मुझे उसे संकेत देना होगा )

किरण जोरदार वॉर b.nirbhaya का हाथ एक हे करके में उसके कंधे से अलग हो जमीं पे आ गिरा पैर अगले हे पल हाथ जमीं से उड़ता हुआ फिर से जा जुड़ा

b.nirbhayasur ........ हाहाहा मुर्ख कन्या निर्भयासुर हूँ मैं तुम्हारे इन छोटे मोठे वॉर से मुझे कोई हानि नहीं होगी

डेरी डेरी किरण का क्रोध बढ़ता जा राग था आवर उसका सयम जबाब दे रहा था

शालिनी जी किरण की बार बार अपने सीने की लेफ्ट साइड की आवर खंजर लगा कर इशारा दे रही थी

इसी में किरण का ध्यान भटक गया आवर b.nirbhayasur की सोर्ड किरण के बाजु को जख्मी कर के निकल गयी

b.nirbhayasur ....... हाहाहा देखा निर्भयासुर की तलवार की धार

किरण ....... तुमने अपनी जीवनकाल की सबसे बड़ी गलती है डस्ट असुर

शालिनी जी ........... स्वीटी जगा मैंने बताया वही वॉर करो

किरण ...... जी माँ

किरण ने इस बार जो पथरी में तेजी आवर ताकत दोनों की सीमा बढ़ा दी थी जिस से एक बार तो b.nirbhayasur को भी पीछे कदम लेने पड़े पैर अब जैसे किरण पे जूनून सवार हो चूका था

बार बार अपने चेस्ट के लेफ्ट साइड पे होते वॉर को देख b.nirbhayasur भी जबरन लगा

b.nirbhayasur ......... अगर मेरी मृत्यु हुई तो वो भी नहीं बचेगा जिसे तुम बचने आई हो

किरण ....... उनकी तुम चिंता न करो तुम जैसे उनके लिया कोई मायने नहीं रखते बहुत हुआ खेल अब तुम्हारी बुराई का अंत होगा हमेशा के लिया

किरण तेजी से b.nirbhayasur के सीने पे वॉर करती है जिसे रोकने के लिया b.nirbhayasur अपनी सोर्ड अपने सीने का बचाव करने के लिया धमाल के रूप में प्रयोग करता है

पैर यही पे उस से चूक हो गयी आवर किरण बिच में हे वॉर की दिशा बदल b.nirbhayasur के कुछ भी समझने से पहले हे उसकी गर्दन हे सरीर से अलग कर देती है

जैसे हे सर जमीं पे गिरा किरण अपने पेअर की ठोकर से उसे दूर फेंक देती आवर पीठ की तरफ से b.nirbhayasur के सीने में लेफ्ट साइड से अपने सोर्ड आरपार निकल देती है

b.nirbhayasur के सरीर में एक मात्रा जिन्दा अंग उसका वो कला बुराई से कलुषित दिल सोर्ड में अटका हुआ बहार आ जाता है

पैर अगले हे पल वो दिल साद कर गायब हो जाता है अब उसके स्थान पे कोई कला स्टोन था जिसके आरपार किरण की गोल्डन सोर्ड निकली हुई थी

b.nirbhayasur के दिल के साथ साथ उसका बाकि का सरीर भी गायब हो चूका था आवर ुशी के साथ वह का मायाजाल भी हैट चूका था

शालिनी जी ....... बेटी ये क्या है

निर्भयासुर ........ माता उस खंडित मणि का स्पर्श नहीं करना

किरण .....निर्भया तुम

निर्भयासुर ......जी देवी इसके अंत के साथ हे मेरे बुरा असुर अंश भी नस्ट हो गया आवर मैं इसकी कैद से मुक्त हो गया

निर्भयासुर अपनी सोर्ड निकल उस ब्लैक मणि को अपनी सोर्ड के वॉर से नस्ट कर देता है

एक दमके के साथ हे उस मणि का अस्तित्व समाप्त हो जाता है

किरण ........ तुम इस्त्ने सक्तिसाली हो कर भी इस डस्ट की कैद में कैसे आ गए

निर्भयासुर ...... क्षमा करे देवी जी किन्तु स्वामी के अचेतन स्वस्थ में पहुंचते हे मेरी ऊर्जा सकती शीन हो गयी मेरा अस्तित्व स्वामी के बिना नहीं है मेरे इस बुरे असुर अंश के अंत के साथ हे स्वामी की अचेतन मस्तिष्क फिर से सुचारु रूप से कार्य करना आराम हो चूका है

शालिनी जी ........... क्या सूर्य अब नींद से जाग जायेगा पुत्र निर्भया

निर्भयासुर ...... क्षमा करे माता किन्तु अभी आपको कुछ पड़ाव आवर पर करने होंगे तभी आप स्वामी को उस अवस्था से बहार निकल सकते है किन्तु देवी आपको उस पूर्व स्वयं स्वामी को खुद से जोड़ कर उनकी कुण्डलिनी सकती चक्र जागृत करने होंगे तभी आप उन्हें पूर्ण रूप से इस अवस्था से बहार निकल पाएंगे

किरण .......... आवर तुम्हारा क्या निर्भयासुर

निर्भयासुर ........ देवी अब आप मुझे निर्भया कह सकती है क्यों की आपकी कृपा से मेरे बुरे असुर अंश का नाश हो चूका है

किरण ....... हम्म्म किन्तु अभी भी तुम मूल अंश से असुर हो ये मत भूलो निर्भया

निर्भया ......जी देवी जी माता मुझे अपने स्थान पे लौटना होगा आप उस द्वार से आगे भेड़िये कुछ बढ़ाये आपके रस्ते की रुकावट बनेगी किन्तु देवी जी उन बड़ाई को हटाने सक्षम है आज्ञा दीजिये

निर्भया शालिनी जी के पेअर छू किरण को परनाम कर गायब हो गया

किरण ....... माँ आपका दूसरा बीटा भी बुराई से मुक्त हो चूका है

शालिनी जी ....... बेटी वो पहले भी बुरा नहीं था पैर जब भी इसकी आँखों में देखती हूँ तो इसके भीतर एक खालीपन सा मह्सुश होता है जैसे अपने सीने में इसने कोई गहरा राज़ दफ़न किये हुए है

किरण ........ माँ उस राज़ के खुलने का समय भी आएगा अभी हमें आगे भढना चाइये

किरण शालिनी जी को लिए उस द्वार की आवर भाड़ जाती है

जैसे हे दोनों द्वार से दूसरी तरफ निकले पीछे से द्वार गायब पूरा दृश्य हे चेंग हो गया

शालिनी जी .......... अचानक से यहाँ इतनी गर्मी क्यों भाड़ गयी और ये बंजर जमीं जैसा हे कुछ है पैर ये पूरी तरह से काली है

किरण .......... वो देखिये दूर उन पहाड़ो की तरफ माँ जैसे कोई ज्वालामुखी दादाक रही हो पैर ये सच नहीं है ये भी इनके दिमाग की सुरक्षा में रचा हुआ कोई मायाजाल है हमें संभल कर आगे बढ़ना होगा आवर ये जो जमीं है सायद इस गर्मी की कारन हे बंजर काली हो चुकी है

शालिनी जी ........ पता नहीं क्या सच है और क्या भरम है इसने तो दिमाग में एक अलग हे दुनिया बसा राखी है

शालिनी जी किरण दोनी सावधानी से आगे भढने लगी

जैसे जैसे दोनों आगे भाड़ रही थी वैसे वैसे वह की गर्मी भी भाड़ रही थी

कुछ आवर आगे बढ़ने पे किरण आवर शालिनी जी के सामने एक आवर समस्या आ कड़ी हुई अचानक से उनकी आँखों के सामने सब कुछ बदल जाता है पहले जहा वो काली बंजर जमीं जैसा कुछ था वही अब किसी पथरीले कुछ उबैद खाबड़ समतल पहाड़ जैसा स्थान पे पहुंच चुकी थी जो लावे में विषय मैदान का आकर लिया तैर रहा था

इनसे कुछ हे दुरी पे कुछ लावा उगलते झरने नुमा पहाड़ थे

किरण ........ इन्हें देख ड्रैगन लोक का दृश्य सखी के सामने नजर आने लगा

किरण और शालिनी चलते चलते उस तैरते हुए पर्थरीले मैदान के अंतिम किनारे तक आ पहुंची

किरण ......माँ मुझे कुछ आभाष हो रहा है हमें उन पहाड़ो की तरफ आगे बढ़ने का कोई मार्ग खोजना होगा क्युकी आभाष उस आवर से हे हो रहा है

शालिनी जी ....... हम ुध कर भी तो जा सकते है

शालिनी जी अपने पंख फैला कर उड़ने हे वाली थी की किरण ने उन्हें रोक दिया

किरण ....... माँ ये इतना आसान नहीं आप भूल रही है की ये मायाजाल है बिना जानकारी के आगे कदम बढ़ाना हमें हे खतरे में दाल देगा

शालिनी जी ........ सही कहा स्वीटी हमारा एक गलत कदम हमें संकट में दाल सकता है

किरण ........ मैं अपने पांच तत्वा का प्रयोग करके देखती हम माँ सायद कोई मार्ग मिल जाये

किरण अपने पांच तत्वा में से पार्थवी तत्वा का प्रयोग उस लावे पे करती है जो कुछ समय तो लावे पैर किसी छोटे पगडण्डी के जैसे रुके पैर कुछ देर नाद हे वो पत्थर मिटटी सब उस लावे में जैसे गायब हो गए

एक के बाद एक सभी तत्वा का प्रयोग किरण उस लावे पे करती है पैर कोई लैब नहीं हुआ

शालिनी जी ....... बेटी इस तरह अपनी ऊर्जा ख़तम न करो हमें कोई आवर तरीका निकलना होगा

किरण ...... क्या माँ कुछ भी समाज नहीं आ रहा है पता नहीं उनकी हालत क्या होगी कितना टाइम हमें यहाँ आये हुए हो चूका है वो भी पता नहीं

शालिनी जी ....... बेटी गुस्सा मत हो गुस्से से से समस्या सुलझती नहीं बल्कि और उलझ जाती है कभी कभी समस्या का सामदाम हमारी आँखों के सामने हे होता है पैर हम अपने गुस्से में अस्नात मन से देख नहीं पते

किरण ........ क्या मतलब माँ

शालिनी जी ....... तुमने एक बात पे गौर किया स्वीटी हम कब से इस बड़े से पथरीले मैदान पे चलते हुए यहाँ तक पहुंचने है जबकि ये लावे पे तैर रहा है इसे इस लावे से कोई प्रभाव नहीं पद रहा है

किरण ........ मैंने इस आवर ध्यान हे नहीं दिया माँ हम इस मैदान के पथरो का प्रयोग कर सकते थे

किरण एक बड़े से पत्थर को लावे में गिरती है जो लावे पे तैरने लगता है

शालिनी जी ..... देखा स्वीटी कभी कभी बड़ी से बड़ी समस्या का हल हमारे आस पास हे होता है की हम उस समस्या में उलझ उसे नजर अंदाज कर देते है जब उस समस्या से बहार निकल कर संत हो कर बूढी का प्रयोग करे तो समस्या का हल भी हमारी आँखों के सामने हे होता है

किरण ...... पैर माँ इसमें तो बहुत समय आवर ऊर्जा नस्ट होगी हमारी

शालिनी जी ........ है पैर हमारे सामने यही एक रास्ता है स्वीटी यहाँ से वह पहुंचने का

किरण ........ एक रास्ता और है माँ जिस से ये काम जल्दी आवर आसानी से हो जायेगा

शालिनी जी ........ ऐसा कोनसा रास्ता है स्वीटी

किरण .......... रास्ता ये है माँ

शालिनी जी ......... तुम्हारी ये सोर्ड

किरण ........ है माँ मेरी ये गोल्डन ड्रैगन सोर्ड ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................
 
अपडेट 246

किरण ...... पैर माँ इसमें तो बहुत समय आवर ऊर्जा नस्ट होगी हमारी

शालिनी जी ........ है पैर हमारे सामने यही एक रास्ता है स्वीटी यहाँ से वह पहुंचने का

किरण ........ एक रास्ता और है माँ जिस से ये काम जल्दी आवर आसानी से हो जायेगा

शालिनी जी ........ ऐसा कोनसा रास्ता है स्वीटी

किरण .......... रास्ता ये है माँ

शालिनी जी ......... तुम्हारी ये सोर्ड

किरण ........ है माँ मेरी ये गोल्डन ड्रैगन सोर्ड ...............

अब आगे ............

परीलोक ..............

सुबह से रात होने को आयी थी पैर किसी ने भी शुबा से गले के निचे अन्न का दाना तक नहीं उतरा था

इन सब से रानी पारी काफी चिंतित थी चिंता उन्हें सूर्य शालिनी जी आवर किरण की भी थी पैर उन्हें इन सब को भी संभालना था

रानी पारी ....... सेविका का क्या हमारी पुत्रियों में किसी ने कुछ भोजन ग्रहण किया क्या

सेविका ..... .... जी नहीं रानी पारी किसी ने भोजन के थल को चूहा तक नहीं सुबह से जैसे उन्होंने अन्न जल का त्याग कर दिया हो

रानी पारी ....... ठीक है तुम भोजन कक्षा में सभी के लिया भोजन थल लगाओ हम अभी आते है

सेविका ...... जी रानी पारी

रानी पारी अपने कक्ष से निकल कर पारिजात के कक्ष की आवर भाड़ जाती है

जहा कोमल अलीना रिद्धि गायत्री पारिजात मौजूद थी

रानी पारी ....... बच्चो तुम सबने सुबह से कुछ भी भोजन ग्रहण नहीं किया है रात्रि पहर भी सुरु हो चूका है ऐसे अन्न जल का त्याग करने से तुम सब पुत्र सूर्य की पीड़ा आवर बढ़ा रही हो

पारिजात ....... रानी माँ हमें भोजन की जरा भी इच्छा नहीं है

कोमल ...... रानी माँ उन्हें इस हाल में देख कर हम कैसे भोजन कर सकते भोजन का निवाला गले से भी नहीं उतरेगा

रानी पारी ........ मैं जानती हम मेरी बची पैर जब पुत्र सूर्य को इस बारे में प्या चलेगा तो क्या ुचे अच्छा लगेगा बाकि तुम सब समझदार हो इस वक़्त तुम सभी को बहनो की तरह एक दूसरे का ख्याल रखना चाइये एक दूसरे की ताकत बनना चाइये पैर तुम सब तो खुद को हे नहीं संभल प् रही हो पुत्र सूर्य की ताकत बनने की जगह तुम उसकी कमजोरी बन रही हो आवर उसे अपनी कमजोरी बना रही हो

पारिजात ...... ये आप क्या कह रही है रानी माँ

रानी पारी ...... उचित कह रहे है हम स्त्री चाहे कही पे भी रहे घर में रहे तो लक्समी बन कर रहे रणभूमि में रहे तो चंडी बन के पुत्री कोमल तुम स्वयं को पुत्र सूर्य की पत्नी मानती हो न

विधि गायत्री ये बात सुन के जैसे उछाल पादरी है की कोमल तो सूर्य की बहन है फिर पत्नी कैसे बहुत से सवाल उठ खड़े थे दोनों के मन में

कोमल बोलने की बजाय है में गर्दन हिला कर गर्दन जुखा लेती है

रानी पारी ......... पति की घेरमोजुदगी में पत्नी का बाकि परिवार के लिया क्या धरम होता है तुम ये भी भूल गयी पुत्री

रानी पारी आगे भाड़ कोमल के समीप जा बैठी आवर प्यार से कोमल के सर को सहलाने लगती है

रानी पारी ....... पुत्री पति जब किसी कारणवश हमसे दूर हो तो एक पत्नी का धरम होता है अपने परिवार का ख्याल रखे उसे एक जुट रखे सबकी सुरक्षा सुनिश्चित करे न की उसकी घेरमोजुदगी में खुद को एकांत में उसके वियोग में खुद को पीड़ा पहुचाये स्वयं को पत्नी मैंने से पत्नी धरम नहीं निभाया जाता अपितु पत्नी के जो दायित्व होते उन्हें पूर्ण करके पत्नी धरम निभाया जाता है अब जाओ आवर अभी अपनी सभी बाँहों को भोजन कक्ष में ले कर आओ आवर सबको भोजन कराओ अपने आंसू पांच को बेटी पुत्र सूर्य को कुछ नहीं होगा परबु का आसिष उसके साथ फिर भला अपने पुत्र का कुछ अहित कैसे होने देंगे वो

कोमल अपना भीगा हुआ चेहरा साफ़ कर रानी माँ के गले लग बाकि सभी को भोजन करने के लिया मानाने चल दी

विधि ....... रानी माँ क्या सच में कोमल दीदी उनकी पत्नी है

रानी पारी ...... है पुत्री विधि कोमल पुत्र सूर्य की पत्नी बनेगी

गायत्री .......क्या मतलब बनेगी पैर आपने अभी तो कहा की कोमल दीदी खुद को उनकी पत्नी मानती है

रानी पारी .......पुत्री गायत्री ये तुम खुद पुत्री कोमल से पूछ लेना की क्यों वो स्वयं को पुत्र सूर्य की पत्नी मानती है

अब चलो चल कर भोजन ग्रहण करो पुत्री रिद्धि

रिद्धि ...... जी रानी माँ हम अभी आते है

रानी पारी वह से बहार को निकल जाती है

+++++++++++++++***+++++++++++++++++

शालिनी जी ........ तुम्हारी तलवार से क्या होगा बेटी

किरण ........ माँ मेरी तलवार के वॉर से इस मैदान रूपी चेतन के टुकड़े टुकड़े हो जायेंगे जिनका प्रयोग कर हम आगे भाड़ सकते है

शालिनी जी ....... संभल कर बेटी कही कोई संकट न उठ खड़ा हो

किरण ....... इसके सिवाय कोई आवर रास्ता भी नजर नहीं आ रहा है माँ जोखिम तो उठाना हे होगा

शालिनी जी ....... ठीक है बेटी अब जो भी होगा देखा जायेगा कोई आवर रास्ता भी नहीं है

किरण शालिनी जी की बात मान अपनी ऊर्जा को अपनी सोर्ड से जोड़ कर एक तेज प्रहार के साथ उस मैदान में एक जगह पे वॉर करती है

कुछ पल तो कोई असर होता हूँ नजर नहीं आया

शालिनी जी ....... लगता है इस्पे तलवार के वॉर का कोई असर नहीं हो रहा है

किरण ....... नहीं माँ मेरा वॉर इस तरह बेकार नहीं जा सकता है

तभी उस मैदान में कुछ हलचल सी होने लगती है देखते हे देखते जहा टावर उस मैदान में गाढ़ी हुई थे वह से चारो तरफ क्रैक हे क्रैक नजर आने लगते है

अगले 2 मिनट्स से काम वक़्त में वो मैदान छोटी छोटी सीलाओ में बदल चूका था

किरण को डगमगाता देख शालिनी जी ने जल्दी से किरण का हाथ पकड़ संभाला

शालिनी जी ....... संभल कर बेटी ये चाटने अब इस्थिर नहीं रही हमें सावधान रहना होगा

तभी किरण आवर शालिनी जी से कुछ दुरी पे एक दमका होता है

किरण .......ये कैसी आवाज थी माँ वो भी इतनी देर बाद

तभी उन ज्वालामुखी से किसी के दहाड़ ने की जोरदार गर्जना होती

शालिनी जी ....... उदार देखो बेटी वह कुछ हो रहा है

शालिनी जी के साथ साथ किरण की नजरे भी ज्वालामुखी से उठ रहे दुहे के गुबार पे जैम जाती है

किरण ........ नहीं ये नहीं हो सकता

शालिनी जी ....... यकीं तो मुझे भी नहीं हो रहा है बेटी की ये सच है पैर आँखों के सामने तो वही है

किरण ...... है पैर ये जरूर कोई माया या भरण है हमारा ब्लैक ड्रैगन यहाँ कैसे हो सकता ये हमारे पीछे कैसी हलचल

किरण जल्दी से पीछे पलट कर देखती है तो उसे दूर से हे कुछ चमकती हुई चीज़ अपनी और आती हुई नजर आती है

किरण ......ये क्या हो सकता है जो हमारी आवर भाड़ रहा है

शालिनी जी किरण की बात सुन उस आवर देखती है जहा से वो चमकती हुई चीज़ इनकी आवर भाड़ रही थी

शालिनीन जी ...... ये मुझे यहाँ पैर मेरी ऊर्जा का आभाष क्यों हो रहा है वो भी सूर्य के मंद में

किरण .......ये आप कैसे कह सकती है

अब तक वो चमकती हुई चीज़ जो दरअशल पुरे वाइट क्रिस्टल था वो शालिनी जी के सामने आ रुका आवर पीछे से इनके ब्लैक ड्रैगन इनकी आवर भाड़ रहा था

शालिनी जी ........ ये मेरी हे पारी रूप की ऊर्जा है स्वीटी पैर सूर्य के पास कैसे आ सकती है

किरण ........वो वो आपका आवर उनका मिलान कही उस से आपकी ऊर्जा

किरण इस से आगे आसाराम से कुछ भी बोल नहीं पायी

शालिनी जी सरमसर तो हो चुकी थी अपना भेद खुलने पैर फिर भी उन्होंने उस क्रिस्टल को अपना हाथ आगे बढ़ा कर थम लिया

ब्लैक ड्रैगन ........ कोण हो तुम आवर मेरे क्षेत्र में आने का दशांश कैसे किया

किरण आवर शालिनी जी फ़ौरन सजकता से अपन अपनी हथियार चढ़ी आवर सोर्ड पे पंजा काश लेती है

किरण ....... तुम कोण हो आवर यहाँ क्या कर रहे हो कुंवर जी के दिमाग में

ब्लैक ड्रैगन ........ मैं ब्लैक ड्रैगन हूँ ड्रागोनो में सबसे शक्तिशाली ड्रैगन तुम मेरे अधिकार क्षेत्र में बिना मेरी अनुमति के प्रवेश कर गुस्पेट की है इसका दंड तुम दोनों को मेरा भोजन बन कर भोगा होगा

किरण ....... नहीं तुम ब्लैक ड्रैगन नहीं हो सकते वो तुम्हारी तरह कुरूप नहीं है

ब्लैक ड्रैगन गुस्से में किरण आवर शालिनी जी पे अपनी अग्नि का पर्वत करता है जिस से समय रहते दोनों वह से कूद कर दूसरी चेतन पे जम्प कर जाती है जिस से उन्हें कोई हानि नहीं होती है

शालिनी जी ....... बेटी ये ब्लैक ड्रैगन हे है

किरण ......नहीं माँ उसकी ऊर्जा मैं पहचानती हूँ ये वो नहीं है

शालिनी जी ...... नहीं बेटी ये वही है मेरा मतलब सूर्य का वाइट ड्रैगन ाचै का प्रतीक है पैर ये उसका पार्टीभिम है बुराई का अक्ष

किरण ....... मतलब b.nirbhayasur के जैसे

शालिनी जी ....... नहीं इसमें जीवन के कोई अंश नहीं है जबकि उसमे उसका दिल जिन्दा था जिसको नस्ट करते हे उसकी मृत्यु हो गई इसमें ऐसा कुछ भी जीवित अंश नहीं है

किरण आवर शालिनी जी एक से दूसरी चयन पे कूद कर कूद को उसकी अग्नि से बचा रही थी

किरण ....... पैर इसे मरेंगे कैसे माँ जब इसमें कुछ भी जीवित अंश है हे नहीं है तो

शालिनी जी ........ पता नहीं स्वीटी

किरण ......... आप इसकी कोई कमजोरी देखिये मैं इसे ुलजाति हूँ पैर जल्दी करना माँ

किरण शालिनी जी को छोड़ दूसरी तरफ चटानो पे से होते हुए उन से कुछ दुरी बना लेती है ताकि शालिनी जी पे से ब्लैक ड्रैगन का ध्यान अपनी आवर कर ुलजाये रख सके

शालिनी जी ........ इसमें कुछ भी विचित्र नजर नहीं आ रहा इसके रोका कैसे जाये ये सब सूर्य के मंद में हो रहा है मतलब इसके अंत का रास्ता भी यही कही है

बस वो नजरो से छुपा हुआ है पैर क्या

किरण अपनी तलवार से ब्लैक ड्रैगन पे तेज बिजली का प्रहार करती है पैर जैसे बिजली ब्लैक ड्रैगन के लिया कुछ मायने हे नहीं रखती

उसे खरोच तक नहीं आई उस तेज बिजली के प्रहार से

b.dragon ....... तुम्हारे ये मामूली विद्युत् के प्रहार मुझे नुकसान नहीं पहुंचा सकते पैर मेरी अग्नि तुम्हे स्वः कर सकती है

किरण ........ आज तक कोई ऐसे अग्नि उत्पन नहीं हुई जो मुझे स्वः ( भसम ) कर सके माँ कोई रास्ता मिला क्या

शालिनी जी ...... अभी नहीं स्वीटी

किरण .....जल्दी कीजिये माँ

b.dragon ......... ओह तो मुझसे तुम यहाँ छुपी हो सुपना बेकार है

b.dragon किरण से ध्यान हटा शालिनी जी की आवर भाड़ हाय

B.dragon को शालिनी जी की आवर जाता देख किरण तेजी से उसकी आवर जम्प कर उसके एक विंग ( पंख ) को सोर्ड से अलग कर शालिनी जी की आवर भाड़ जाती है

b.dragon .......... अह्हह्ह्ह्ह मुर्ख लड़की अभी एक मैं तुम दोनों से केवल मनोरंजन कर रहा था देखते हे देखते वह एक नया पंख निकल आता है

किरण ....... माँ आप मेरे पीछे रहिये

किरण आँखे बंद कर गोल्डन ड्रैगन शील्ड का इस्तेमाल करती है जो गोल्डन ड्रैगन की ऊर्जा सकती से निर्मित होती है

b.dragon गुस्से से उसपे अग्नि वर्षा कर देता है जिसका कोई असर उस शील्ड पे नहीं हो रहा था जिसके चलते वो गुस्से में अपने पंजे वह सर उस शील्ड पे मरने लगता है

किरण ....... माँ मेरी शील्ड इसे ज्यादा देर रोक नहीं पायेगी

शालिनी जी जैसे किरण की बात सुन हे नहीं रही थी शालिनी जी बार बार शील्ड पे अपने सर से वॉर करते b.dragon को देख रही

किरण ....... माँ ऐसे समय में आप कहा खो गई

शालिनी जी ....... उसके माथे के बिच देखो स्वीटी वो नीसाण इस क्रिस्टल जैसा हे है

अब किरण की नजर b.dragon के माथे के बिच पूरी तरफ पड़ती है जहा बिलकुल ठीक उस क्रिस्टल जैसा हे गहरा नीसाण बना हुआ था

किरण ....... है माँ ये जरूर आपकी इस ऊर्जा क्रिस्टल से जुड़ा हुआ है इस क्रिस्टल का हमारे पास होने का कारन यही है की सायद इसी से इसका अंत किया जा सकता है

शालिनी जी ....... है पैर इसे वह लगाना इतना आसान नहीं होगा

किरण ...... है माँ जानती हूँ इसे आप वह लगाना जब ये अपने सर का प्रहार फिर से शील्ड पे करे तभी मैं शील्ड हटा कर इसकी दोनों आँखों में एक साथ बिजली का वॉर करती हूँ हमारे पास एक हे मौका होगा इसे ख़तम करने का इस लिया खुद को त्यार कर लीजिये हमारे बिच थोड़ी दुरी बनानी होगी ताकि वॉर खली भी जाये तो इस से हमें ज्यादा नुकसान नहीं हो

शालिनी जी ...... मैं त्यार हूँ स्वीटी

शालिनी जी किरण से थोड़ी दुरी बना कर अपने हाथ में वो क्रिस्टल छुपाये कड़ी हो जाती

इस बार जैसे हे b.dragon गुस्से में शील्ड पे अपने बड़े से सर का वॉर करता है शील्ड पे वॉर होते हे किरण शेड हटा b.dragon की दोनों आँखों में एक साथ बिजली छोड़ती है

ठीक ुशी पास b.dragon की आँखे बंद होते हे शालिनी जी बड़ी स्फूर्ति से b.dragon की गर्दन पे जम्प कर उसके शिंजो को पकड़ वो क्रिस्टल उस नीसाण पे लगा देती इसमें शालिनी जी b.dragon के सींग से थोड़ी गायक भी हो जाती है

जैसे क्रिस्टल b.dragon के माथे पे लगता है वो चिह्न लगता है उसका पूरा सरीर डेरी डेरी पत्थर में बदलने लगता है

कुछ हे देर में वो पूरी तरह से पत्थर का बदल चूका था आवर उसमे क्रैक्स आने लगते

किरण ....... माँ वह से हटिये ये फटने वाला है

आवर हुआ भी कुछ ऐसा हे शालिनी जी के हैट ते हे b.dragon दमके के साथ छोटे छोटे मलबे में बदल जाता है

साथ हे वो पूरा लावा वो पहाड़ सब गायब हो जाते है आवर वह खूबसूरत हरा भरा मैदान बन जाता जहा चारो तरफ जैसे सफ़ेद ऊर्जा बाह रही हो तभी दूर से हे किरण को वाइट ड्रैगन आता हुआ नजर आता है

किरण ........ माँ हमने कर दिखाया वो देखो कुंवर जी का वाइट ड्रैगन आ रहा है माँ आपका तो हाथ घायल है

शालिनी जी ...... वो पकाते वक़्त उसका सींग लग गया ुशी से ये जख्मी हुआ है सायद

w.dragon ....... आप चिंतित न हो माते आपका जखम अभी ठीक हो जायेगा

वाइट ड्रैगन शालिनी जी के पास आते आते युवक में बदल गया

किरण ........ ये तुम तुम इंसान में कैसे बदल गए

वाइट ड्रैगन ....... मालकिन ये मेरा लोक है जहा मेरी इच्छा अनुरूप कोई भी रूप धार सकता हूँ मैं आपकी ड्रैगन सोर्ड मिलेगी मुझे

किरण ........ ठीक है ये को पैर तुम इसका क्या करने वाले हो

वाइट ड्रैगन ..... चिंतित न हो आप मैं कोई अक्ष या पार्टीभिम माया नहीं हूँ

किरण ....... मैं जानती हूँ तुम्हारी ऊर्जा को जब ये तुम्हारा लोक है जहा सब कुछ तुम्हारी इच्छा से होता है फिर वो ब्लैक ड्रैगन यहाँ कैसे था

वाइट ड्रैगन अपने हाथ को किरण की सोर्ड से जख्मी कर अपने रकत की कुछ बुँदे शालिनी जी के हाथ के जख्म पे गिरता है

कुछ हे पालो में जैसे वह कोई जख्म था हे नहीं न कोई जख्म न कोई नीसाण शालिनी जी को अपने सरीर के भीतर एक अलग हे ऊर्जा का अहसास हो रहा था जो की वाइट ड्रैगन की ब्लड से उन्हें मिली थी पुरे वाइट एनर्जी

w.dragon ....... मालिक के अचेतन स्वस्थ में पहुंचने से मैं भी उनसे जुड़े होने के कारन अचेतन स्वस्थ में पहुंचने गया आवर मेरी परछाई ने मेरा विपरीत स्थान ले लिया

शालिनी जी ...... ये मुझे इतना अच्छा अनुभव क्यों हो रहा है

w.dragon ....... वो आपके जखम को ठीक करने के लिया मेरा जो ब्लड का प्रयोग हुआ ुशी की ऊर्जा है जो अब आपके भीतर है एक तरह से आप भी मेरी माता के साथ साथ मालकिन बन चुकी है

किरण ....... कुंवर जी तक पहुंचने के लिया अगला पड़ाव कोनसा है

w.dragon ....... अंतिम पड़ाव जहा आपको उनकी 7 चक्र जागृत कर उन्हें चेतना में लाना होगा आवर उस भरण को मिटाना होगा

किरण ....... क्या तुम बहरी दुनिया में भी मानव रूप ले सकते हो

w.dragon. ...... मालिक की इच्छा से ये संभव है अब मुझे जाना होगा उस द्वार से आप आगे भाड़ सकती है

w.dragon के इसारे पे वह एक वाइट द्वार उत्पन्न हो जाता है

शालिनी जी ....... चलो स्वीटी आवर तुम तुमसे मैं बहार मुलती हूँ

w.dragon ...... जी माता

वाइट ड्रैगन वह से गायब हो जाता है वही किरण आवर शालिनी जी अगले द्वार में प्रवेश कर जाती है

परीलोक ..........

रानी पारी सभी को थोड़ा बहुत भोजन करवाने के पश्चात गुरुदेव से भेंट करने मंदिर पहुंची उन्होंने लड़कियों को तो संजय था किन्तु वो खुद भी सूर्य को ले कर चिंतित थी इसी लिया वो सभी को भोजन करवाने के पश्चात यहाँ चली आई थी साथ में उनके नोयों भी उनके साथ चला आया था

रानी पारी के साथ नियों को देख गुरुदेव ने उन्हें एक तरफ आसान ग्रहण करने का इशारा करते हुए खुद भी आसान ग्रहण करते है

नियों ....... अब इनका स्वस्थ्य सुधर कैसा है देवसफ्फी ( गुरुदेव ) पहले से बेहतर प्रतीत हो रहे है

गुरुदेव ............ इस समय तक पुत्र सूर्य की दो ऊर्जा सकती जागृत हो चुकी है आशा है कल सूर्यौदय के साथ साथ पुत्र सूर्य अपनी अचेतन गहरी निद्रा अवस्था से बहार निकल चूका होगा

रानी पारी ....... ये तो शुभ समाचार है गुरुदेव

किन्तु इस घटना करम का कारन क्या था गुरुदेव

इतनी दिव्या सक्तियो सम्पन पुत्र सूर्य को इतनी पीड़ा क्यों साहनी पद रही है

गुरुदेव ........ कोई भी घटना करम ाकरण हे आरम्भ नहीं होता है रानी पारी

हम अपने सामान्य ज्ञान के चलते उसे समाज नहीं पते हर एक घटना करम समय चक्र से जुड़ा होता

जिसके कारन हमारे द्वारा किया परतयेक कार्य किसी अन्य घटना करम की उत्पत्ति का कारन बनता है

या प्रभावित करता है यही पुत्र सूर्य के साथ हुआ पुत्र सूर्य दिव्या सक्तियो से सम्पन है किन्तु .समय चक्र. प्रकर्ति. नियति . पे इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता जो इनके नियमो का उलंगन करेगा िंहके कार्य में बादक बनेगा ये उन्हें दण्डित करेंगे हे फिर चाहे वो दिव्या अंश हो या सामान जिव जंतु इनके समक्ष सभी एक है

नियों ....... देवसफ्फी आपके कथन अनुसार प्रिंस सूर्य से किसी ऐसी घटना करम का आरम्भ हुआ लगता है जिस से समय चक्र प्रभावित हुआ हो किन्तु ऐसी कोनसी घटना प्रिंस द्वारा आराम हुई है

देवसफ्फी नियों की बात सुन गुरुदेव रानी पारी की आवर देखते है

रानी पारी ...... क्या हुआ गुरुदेव

गुरुदेव ........पुत्र सूर्य ने कुछ समय पूर्व पृथ्वीलोक पे जो कुछ भी पुत्र निर्भयासुर के हठी पापियों का जो नरसंघार हुआ था ुशी में पुत्र निर्भयासुर से प्रकर्ति के निर्धारित नियमो उलंगन हुआ है उसकी करम का दंड पुत्र सूर्य प्रकर्ति द्वारा भोग रहा है इस सम्पूर्ण घटना करम के पीछे देवी प्रकर्ति है

नियों .......... निर्भयासुर ये तो कोई असुर परतीत होता है उसके किये करम का प्रिंस सूर्य के साथ क्या सम्बन्ध देवसफ्फी

गुरुदेव ....... सम्बन्ध है देवसफ्फी नियों बहुत गहरा सम्बन्ध है पुत्र सूर्य का क्युकी दंडनायक निर्भयासुर पुत्र सूर्य का असुर अंश है जिसके परतयेक अच्छे बुरे करम का दायित्व पुत्र सूर्य पे आता है क्यों की निर्भयासुर का ये रूप पुत्र सूर्य का हे दूसरा रूप है

नियों ........ क्षमा करे देवसफ्फी हम आपके कथन को समाज पाने में समर्थ है कृपया विस्तार से इस अंश के विषय में बताइये हमें

गुरुदेव ....... आपकी तृतीया प्रिंसेस है न पुत्री मानसी वो एक असुरकन्या है असुरलोक असुरगुरु व्योमासुर की पुत्री है मानसी जिसका विवाह अभी कुछ दिवश पूर्व हे हुआ था पुत्र सूर्य से हमने हे दोनों का मानव विधि से विवाह कराया था किन्तु पुत्री मानसी असुरकन्या होने के कारन उसका विवाह पुत्र सूर्य से असुर विधि से भी हुआ है जो स्वयं पुत्री मानसी के पिता असुरगुरु व्योमासुर जी ने हे कराया था

पुत्री मानसी आवर पुत्र सूर्य के प्रेम मिलान से पुत्री मानसी से पुत्र सूर्य को जो असुर अंश प्राप्त हुआ ुशी का स्वरुप है पुत्र दंडनायक निर्भयासुर उसके परतयेक बुरे करम का दंड उसके साथ साथ पुत्र सूर्य को भी भोगा होगा वही उसके अच्छे कर्मो का फल उसके साथ साथ पुत्र सूर्य को भी प्राप्त होगा

रानी पारी ....... हम ये तो समाज गए किन्तु अभी भी हम कुछ जानना चाहते है गुरुदेव

गुरुदेव ....... हम जानते है रानी पारी आप के मन में बहुत से परशान है अभी भी इस घटना करम से जुड़े जो आप जानना चाहती है

रानी पारी ...... जी गुरुदेव हम भी यही जानना चाहते की पुत्र निर्भयासुर ने जो दंडनायक स्वरुप में पापियों को दंड दिया उस से नियति या प्रकर्ति के नियम किस तरह खंडित हुए जबकि किसी भी पापी को उसके पापो का दंड देना तो अच्छा करम है फिर पुत्र सूर्य को प्रकर्ति द्वारा दण्डित करना हमारी समाज से तो अनुचित है

गुरुदेव ......... रानी पारी समय हमारी सोच से विचारधारा से गतिमान नहीं होता है

परतयेक घटना करम का फाल या दंड समय निर्धारित करता है की कब किसी कितने अनुपात में दंड भोगा होगा या फाल की प्राप्ति होगी पुत्र निर्भयासुर द्वारा दण्डित सभी पापी दुराचारी लोग थे किन्तु पुत्र निर्भयासुर ने उन्हें मृत्यु दे कर अनुचित करम किया क्यों की उनके से बहुत से पापियों को अपने पापो का दंड जीवित रहते हुए भोगना था यही पुत्र निर्भयासुर से प्रकर्ति के नियमो का उलंगन हुआ उन्हें आसान मृत्यु या समय से पूर्व मृत्यु दे कर पुत्र निर्भयासुर प्रकर्ति के क्रोध का पत्र स्वयं बन गया हम स्वयं इसके दोषी है हमने अपने शिष्य को उचित मार्ग दिखने में अक्षम रहे जो दंड हमें प्राप्त होना था वो हमारा पुत्र सूर्य भोग रहा है

कहते कहते गुरुदेव की आँखे फिर से सजल हो उठी

नियों ........ क्षमा करे देवसफ्फी हम आपके इस कथन से सहमत नहीं है की आपसे कोई भूल हुई है

आप जैसे तपस्वी ज्ञानी देवसफ्फी से ऐसा होना मुमकिन नहीं आपने हे कहा था न की किसी भी घटना करम का आराम किसी अन्य घटना के आराम का कारन बनता है अवश्य इस घटना करम से किसी अन्य घटना करम का आरम्भ जुड़ा है

गुरुदेव ....... आपका कथन उचित हो सकता है हमें भी कुछ कुछ आभाष हो रहा है की जैसे कुछ परिवर्तन आने वाला है पुत्र सूर्य से जुड़ा आपका परीलोक में अचानक से आना अवश्य कोई गंभीर कारन रहा होगा

नियों ...... जी देवसफ्फी ड्रैगन लोक में कुछ समय से कुछ विचित्र घटनाये गठित हो रही जो पहले कभी गठित नहीं हुई थी

नियों गुरुदेव आवर रानी पारी को ड्रैगन लोक की सम्पूर्ण घटना विस्तार से उनके सामने रखते है

गुरुदेव ........ तो आपका मत है की ये सभी घटनाओ के पीछे कारन है राजसिंघण का रिकत होना

नियों ....... जी देवसफ्फी हमारा ज्ञान तो यही संकेत दे रहा है हमें

गुरुदेव ....... देखा जाये तो इस तरह राजसिंघण को रिकत रखना असुब मन जाता है तो आपका कथन उचित भी हो सकता है देवसफ्फी नोयों आपकी क्या रे है रानी पारी इस विषय में

रानी पारी ...... हम देवसफ्फी नियों से सहमत है गुरुदेव किन्तु साथ हे हमें किसी बड़े संकट का ड्रैगन लोक की आवर आने का आभाष भी हो रहा है अगर ये सभी घटनाये राजसिंघहन के रिकत होने से आरम्भ हुई होती तो एक समय बाद हे इसका असर सब पे होना आरम्भ हो चूका होता किन्तु इनका कहना है की सभी ड्रैगन या वह की परजा में इसका एक सामान प्रभाव नहीं है तो अवश्य इनकी नजरो से कुछ छुपा है या छुपाया जा रहा है

गुरुदेव ....... पुत्री जुली अभी राजमुकुट दर्जन नहीं कर सकती क्यों की राजसिंघण तभी पूर्ण रूप से उसे स्वीकार नरेगा जब वो अपने जीवन साथी के साथ उसपे सुसज्जित हो किन्तु अभी पुत्री जूलिया आवर पुत्र सूर्य के विवाह में कुछ समय शेष है ऐसे में पुत्र किरण आवर पुत्री मानसी हे प्रबल दावेदार रहती है किन्तु पुत्री किरण के होते हुए पुत्री मानसी का राजतिलक होना उचित नहीं पुत्री मानसी योग्य है किन्तु पुत्री जूलिया ने जो रकत सम्बन्ध जोड़ कर पुत्री किरण को बड़ी प्रिंसेस का बड़ी बहन का सम्मान दिया है अधिकार दिया है तो पुत्री किरण का हे राजतिलक होना उचित है समय आने पे पुत्री किरण ये दायित्व पुत्री जूलिया को पुत्र सूर्य से विवाह के पश्चात सौंप देगी तब तक ये दायित्व पुत्री किरण ड्रैगन लोक क्वीन बन कर बखूभी निभा सकती है

रानी पारी ......... आपका नुरणाय सर्वथा उत्तम आवर उचित है गुरुदेव हम आपके इस मत से पूर्ण रूप से सहमत है गुरुदेव क्या पुत्री किरण को परीलोक का दायित्व

गुरुदेव .......... नहीं रानी पारी ये संभव नहीं है आवर न हे उचित है पुत्री किरण कभी इसे स्वीकार नहीं करेगी

रानी पारी ...... पैर क्यों गुरुदेव हम अपनी इच्छा से ये दायित्व सौंपना चाहते इसमें पुत्री किरण को क्या आपत्ति हो सकती

गुरुदेव .......... क्यों की पुत्री किरण अपनी बहन पारिजात का अधिकार कभी खुद के लिया स्वीकार नहीं करेगी आवर दूसरा कारन भी है जो समय आने पे आपको ज्ञात हो जायेगा रात्रि बहुत हो चुकी है अब आपको महल लोट जाना चाइये सुबह सब के साथ सूर्यौदय के बाद आप लौट आना

रानी पारी ...... जी गुरुदेव आज्ञा दीजिये

नियों ........ हमें भी आज्ञा दीजिये देवसफ्फी हम प्रातकाल आपसे फिर भेंट करने आते है

गुरुदेव ....... अवश्य रानी पारी देवसफ्फी नियों अब आप लोग जाइये ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................

सॉरी फॉर लेट अपडेट दोस्तों यहाँ लाइट का कुछ प्रॉब्लम था आज इसी लिया अपडेट देने में टाइम लग गया .......
 
अपडेट. 247

रानी पारी ...... पैर क्यों गुरुदेव हम अपनी इच्छा से ये दायित्व सौंपना चाहते इसमें पुत्री किरण को क्या आपत्ति हो सकती

गुरुदेव .......... क्यों की पुत्री किरण अपनी बहन पारिजात का अधिकार कभी खुद के लिया स्वीकार नहीं करेगी आवर दूसरा कारन भी है जो समय आने पे आपको ज्ञात हो जायेगा रात्रि बहुत हो चुकी है अब आपको महल लोट जाना चाइये सुबह सब के साथ सूर्यौदय के बाद आप लौट आना

रानी पारी ...... जी गुरुदेव आज्ञा दीजिये

नियों ........ हमें भी आज्ञा दीजिये देवसफ्फी हम प्रातकाल आपसे फिर भेंट करने आते है

गुरुदेव ....... अवश्य रानी पारी देवसफ्फी नियों अब आप लोग जाइये ...............

अब आगे ...........

शालिनी जी किरण वाइट ड्रैगन द्वारा दिखाए द्वार से होते हुए अंतिम पड़ाव की आवर भाड़ जाती है

जैसे हे दोनों द्वार में प्रवेश कर दूसरी आवर निकलती है द्वार अपने साथ से गायब हो जाता है

दोनों के सामने एक हे जैसे असंख्य मार्ग नजर आ रहे थे आसपास के वातावरण मायुशि वह नकारात्मकता फैली हुई थी थोड़ा अंडकार मई स्थान था ये

किरण ....... माँ ये कैसा स्थान है यहाँ आते हे अचानक से गठन से हो रही है जैसे ये स्थान पूरी तरह से नकारत्मक ऊर्जा से भरा हो

शालिनी जी के तो यहाँ आने के साथ हे उनके बाईट हुए दुःख भरे दिन उनकी आँखों के सामने किसी फिल्म के दृश्य के जैसे चलने लगते है

उनकी आँखों से आंसू भने सुरु हो चुके थे

किरण ...... माँ mom.aap रो क्यों रहे है क्या हुआ आपको

शालिनी जी ............ मैंने पापा की ेजात मिटी में मिला दी भाई सा माँ सा को कितने दुःख दिए

किरण ....... ये आप किस तरह की बात कर रही हो माँ होश में आइये आप भूल रही है हम यहाँ किस लिए आये है

शालिनी जी ....... मुझे माफ कर दीजिये माँ सा बाउजी

( किरण ....... लगता है यहाँ की सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव माँ पे होना आरम्भ हो चूका है इस से पहले की ये पूरी तरह उस नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में आये मुझे कुछ करना होगा इन्हें यहाँ आने के मुख्या कारन से भटक ने नहीं दे सकती मैं )

किरण ........ माँ आपको माफी मांगनी है दादा जी दादी जी पापा से तो हमें यहाँ से निकलने के बाद मांग लेना अभी हम यहाँ कुंवर जी आपके बेटे सूर्य के लिया आये है उन्हें यहाँ से उनके दुःख से निकलना होगा भूलो मत आप आपके बेटे के जिसमे आपकी जान बस्ती है उसकी जान खतरे में है आपने देरी की तो हम उन्हें खो देंगे माँ प्लेसेस होश में आइये

किरण शालिनी को जैसे जनजोर कर नींद से जगती है

शालिनी जी ...... क्या हुआ बेटी

किरण ....... माँ हमें यहाँ से जल्दी निकलना होगा आप पे यहाँ की ऊर्जा का असर होना सुरु हो चूका है इस से पहले की हम उस ऊर्जा के प्रभाव में आये हमें कुंवर जी तक किसी भी हाल में जल्द से जल्द पहुंचना हे होगा

किरण ........ यहाँ तो एक जैसे बहुत से मार्ग है किस पे आगे भद्दे हम माँ

शालिनी जी ...... मुझे नहीं पता बेटी किस रस्ते आगे भढना है पैर यहाँ से जल्दी चलो मुझे गठन हो रही है यहाँ

किरण ......... आप परबु के इस मूल मंत्र का उच्चारण कीजिये इस से आप इस नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव से सुरक्षित रहेंगी मैं कोई मार्ग देखती

शालिनी जी वही रह कर किरण द्वारा बताये मंत्र का उच्चारण करने लगती है

वही किरण उन 7 द्वारा के बहार से हे उनका बारीकी से निरक्षण करती है पैर ये कोई सदर्न माया नहीं थी जो इतनी आसानी से उचित मार्ग का ज्ञान हो जाये

किरण ..... इन 7 दवार के बहार तो इंसान के 7 कुण्डलिनी चक्र

(1).मूलदार चक्र

(2 )..स्वदिस्थान चक्र

(3 )मणिपुर चक्र

(4) अनहद चक्र

(5 ) विसुध चक्र

( 6 )आज्ञा चक्र

( 7 )सहस्त्रार चक्र

के नीसाण बने हुए हुए है पैर इनके यहाँ होने का कारन क्या है आवर ये सभी नीसाण कही कुंवर जी के कुण्डलिनी चक्र से तो नहीं जुड़े है

किरण के दिमाग में अचानक से गुरुदेव की कही बात का स्मरण हो आया की उसे आवर शालिनी जी को अपनी कुण्डलिनी सकती जागृत कर सूर्य की सुप्त कुण्डलिनी चक्र से जुड़ उन्हें जागृत करना होगा

किरण ...... िसकमा मतलब ये कुंवर जी की वो 7 कुण्डलिनी चक्र है जो कुंवर जी के अचेत स्वस्थ में जाने से सुप्त अवस्था में जा चुके है इन्हें जागृत करके हे कुंवर जी तक पहुंचा जा सकता है माँ हमें रास्ता मिल गया है माँ कुंवर जी तक पहुंचने का

शालिनी जी मंत्र उच्चारण करना बंद कर किरण को ख़ुशी से गले से लगा लेती है

शालिनी जी ....... स्वीटी अब जो भी करना है जल्दी करो बेटी मुझे अपने सूर्य से मिलना है जल्द से जल्द

किरण ...... अपने उन से नॉट बाद माँ आप तो बहुत फ़ास्ट है हेहेहे

शालिनी जी ख़ुशी ख़ुशी में भावनाओ में बाह कर बहुत कुसग बोल दिया पैर अपनी कही बात का मतलब समाज आता तब तक किरण ने उन्हें लपेट लिया था

शालिनी जी ....... वो मेरा मतलब था की

किरण ...... माँ हम इस बारे में बाद में अकेले में बात करेंगे अभी जो जरुरी है वो करते है आपको भी इसमें मेरा पूरा साथ देना होगा तभी हम उन तक पहुंचने पाएंगे

शालिनी जी .......ठीक है बेटी

किरण मंत्र उच्चारण कर वही उन द्वारा के सामने अपने आवर शालिनी जी के 7 कुंडली चक्रो से जुड़े चिन्हो को वही जमीं पे उकेर देती है आवर दोनों को आपस में जोड़ देती है

किरण ........ माँ ये हमारे 7 कुण्डलिनी चक्र के प्रतीक है इसे कुण्डलिनी घेर में ध्यान लगा कर हमें अपने 7 कुण्डलिनी चक्र जागृत करने है आवर उनसे जुडी उनकी ऊर्जा को अपने नियंत्रण से मुक्त करना होगा ुशी से हम कुंवर जी से जुड़ पाएंगे पूर्ण उनकी कुण्डलिनी चक्र जागृत कर पाएंगे

शालिनी जी ...... ठीक है बेटी स्वीटी

किरण आवर शालिनी जी अपने अपने कुण्डलिनी चक्र में बेथ जाती है आवर ध्यान लगाने लगती है

जैसे हे जैसे दोनों ध्यान में जा रही थी उनके आसपास पीले रंग की ऊर्जा एकत्रित होने लगती है

साथ हे दोनों के कानो में किसी के चिन्खो की आवाज भी गूंजने लगती है

शालिनी जी से वो आवहे बर्दाश्त नहीं हुई आवर उन्होंने अपनी आँखे खोल दी

किरण ........ क्या हुआ माँ आपने बिच में हे ध्यान भांग क्यों कर दिया

शालिनी जी........ स्वीटी वो चीखे वो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रही जैसे सूर्य

किरण ........ माँ आपको क्या लगता है वो सच है वो सब एक भरण है हमें भटका ने के लिया ताकि हम उन्हें इस नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त न कर पाए आपको निकट रख आगे भढना होगा अभी तो सुरुहत है आप अभी स विचलित हो गयी जबकि 7 वे चक्र पे

शालिनी जी ....... ठीक है बेटी मैं सब कुछ नजर अंदाज कर ध्यान लगाती हूँ

एक बार फिर से किरण आवर शालिनी जी ध्यान में लीं हो अपने मूलाधार चक्र को जागृत करती है दोनों की मूलाधार चक्र के पूर्ण रूप से जागृत होने पे दोनों की ऊर्जा एक साथ जुड़ परहम द्वार से होते हुए गायब हो गयी अब प्रथम द्वार जिसपे मूलाधार चक्र पार्थिक था वो किसी सरवन द्वार के जैसे चमक ने लगा

जैसे जैसे उनकी कुण्डलिनी चक्र जागृत होते उनकी ऊर्जा उन कुण्डलिनी प्रतीक द्वारा से होते हुए गायब हो जाती आवर वो द्वार चमकने लगते

िस्दार शालिनी जी आवर किरण के कानो में वो चीखे निरंतर आवर तेज होती का रही थी अब तो उन चीखो में उनका उनके नाम से जैसे सूर्य मदद के लिया पुकार रहा हो आवर ये सच भी था किन्तु किरण आवर शालिनी जी इसे केवल भ्रम समाज रही थी

वही उन द्वार के उस पार सूर्य एक स्थान पे बंदक बना हुआ था उसके चारो आवर भी वही 7 कुण्डलिनी चक्र बने हुए थे जो बहार किरण ने मंत्र उच्चारण से बनाये था

किरण आवर शालिनी जी की सम्मिलित कुण्डलिनी ऊर्जा सकती दोनों से निकल द्वार के माध्यम से सूर्य तक पहुंच रही थी आवर उसकी कुण्डलिनी चक्रो को बिना सूर्य की इच्छा के जागृत कर रही थी जिसके कारन सूर्य को अत्यधिक पीड़ा भोगी पद रही थी आवर वो उस दर्द तकलीफ से चीख रहा था

( वही परीलोक मंदिर में सूर्य की इस्तिथि अचानक से बिगड़ने लगती है बार बार सूर्य का सरीर हवा में उठना आवर फिर से निचे गिर जाना किसी सर कटी लाश की तरह तड़फना गुरुदेव के लिया भी असहनीय पीड़ा का कारन बन रही थी

गुरुदेव की आँखों से आंसू टपक रहे थे पैर वो कुछ कर नहीं सकते थे सिवाय देखने के )

काफी लम्बे समय ध्यान में रहने के बाद जब किरण आवर शालिनी जी एक के बे एक चक्र जागृत करते हुए अंतिम कुंडली चक्र ( 7 -सहस्त्रार चक्र ) में पहुंचे तब जा कर शालिनी जी आवर किरण के कानो में वो चीखे सुनाई देने बंद हुई आवर उदार सूर्य भी डेरी डेरी संत होने लगा

जैसे हे किरण आवर शालिनी जी 7 चक्र सम्मिलित ऊर्जा द्वार 7 से होते हुए सूर्य के 7 कुण्डलिनी चक्र को जागृत किया वो 7 द्वार वह से गायब हो गए आवर वह जितनी भी नकारात्मक मायुशि थी वो एक पल में हे गायब हो गयी अब उन 7 द्वार के स्थान पे सूर्य अभी भी ुशी चक्र में बैठा हुआ था

सूर्य अपने बहरी बंदनों से तो मुक्त हो चूका था पैर भीतर जैसे अभी भी कोई दावन्द चल रहा था उसके

जैसे किरण आवर शालिनी जी को सूर्य की ऊर्जा का आभाष हुआ दोनी की आँखे खुल जाती है

दोनों की नजर अपने से कुछ हे दुरी पे अपनी गर्दन जुखाये गुथनो के बल बे थे सूर्य पे पड़ती है

शालिनी जी
किरण ....... सूर्य कुंवर जी

शालिनी जी किरण के ध्यान से बहार निकलते हे तीनो के 7 कुण्डलिनी चक्र के प्रतीक 3 घेरे भी नस्ट हो जाते है

किरण आवर शालिनी जी दोनों दौड़ कर रोटी हुए सूर्य को काश कर दोनों तरफ से गले लगा लेती है

किरण ....... आपने ऐसा क्यों किया कुंवर जी आपने एक बार भी हमारे बारे में नहीं सोचा एक भरम को कैसे आप सत्य मन सकती है

सूर्य ....... मैं कोण हूँ और तुम लोग कोण हो दूर हटो मुझसे वर्ण तुम भी मरी जाओगी जैसे मेरी स्वीटी .मैंने मेरी स्वीटी को मार दिया .मेरी स्वीटी मुझे चढ़ कर चली गई .मैंने उसे मार दिया इन्ही हठी में उसने उसने अपने प्राण त्याग दिया मैं क्यों जीवित हूँ तुम मुझे मार दो मुझे मेरी स्वीटी के पास जाना है

सूर्य की बाते सुन शालिनी जी किरण दोनों की आँखों से जैसे रकत के आँशु बाह रहे हो जैसे सूर्य के सबद उनके दिल पे किसी तेज धार क़तर के सामान लग रहे थे

किरण. ..... कुंवर जी आपकी स्वीटी आपके सामने है देखिये मुझे आपकी स्वीटी आपने कुंवर जी को छोड़ कर कभी नहीं जा सकती देखिये न कुंवर जी

शाकिनी जी ...... सूर्य देखो तुम्हारी स्वीटी कैसे रो रही है नजरे उठा कर देखो उसे

पैर जैसे सूर्य पे कोई असर हे नहीं हो रहा था शालिनी जी या किरण की बात का

सूर्य ...... मैं सूर्य नहीं हूँ मैं कोण हूँ मेरी स्वीटी मुझे अकेला छोड़ गयी मैं किसके लिया जिन्दा हूँ

शालिनी जी .....(रोटी हुए) स्वीटी बेटी ये ऐसा क्यों कर रहा है ये हमें पहचान क्यों नहीं रहा आवर न हे अपना सर उठा कर हमें देख रहा है कुछ करो बेटी

किरण ........ सुबक... सुबक........ माँ मुझे नहीं पता इन्हे क्या हो रहा है ये हमें पहचान क्यों नहीं प् रहे है अब आवर बर्दाश्त नहीं होता मुझसे माँ और जीनत नहीं बची है मुजमे इन्हें ऐसी हालत में नहीं देख सकती

शालिनी जी ....... नहीं बेटी तुम इस पड़ाव पे हिम्मत नहीं हार सकती तुमने अगर आस छोड़ दी तो सब कुछ ख़तम हो जायेगा बेटी

किरण ....... आप हे बताइये माँ मैं क्या कृ कुंवर जी उदार देखिये आपकी स्वीटी यही है आपके सामने वो भी जिन्दा वो मरी नहीं है आप हे तो कहते थे की सूर्य के बिना किरण का कोई अस्तित्व नहीं किरण के बिना सूर्य का को भविष्य नहीं फिर आपने कैसे सोचा की आपकी किरण आपको चढ़ कर जा सकती है क्या आप उसके बिना जिन्दा रह सकते थे या वो आपके बिना

शालिनी जी ....... देख सूर्य तेरी स्वीटी तेरे सामने हे एक बार देख तो सही नजरे उठा कर

इस बार जैसे शालिनी जी ने सूर्य को पकड़ कर जनजोर दिया था जिसका कुछ असर भी सूर्य पे चरण हुआ

सूर्य गुस्से में दहकती आँखों से शालिनी जी को देखता है

सूर्य की लाल आँखे आवर क्रोध में ताम तमतमाया चेहरा देख शालिनी जी के कदम पीछे हैट जाते है

सूर्य क्रोध में शालिनी जी की आवर बढ़ा तो जल्दी से किरण उन दोनों के बिच आ कड़ी होती

सूर्य की नजरे किरण के चेहरे पे पड़ते हे सुरता दो कदम पीछे हो जाता है

किरण ........ आपको हुआ क्या है वो माँ है आपकी आप इतने कमजोर कब से हो गए जो आपको एक भरण ने इतना आघात पहुंचा दिया

सूर्य तो बस किरण को हे देखे जा रहा था

तभी किरण को अपने भीतर से अपने अंतर मन से कुछ आवाज सुनाई देती है

किरण आँखे बंद कर उस आवाज पे ध्यान लगाती है तो वो कोई संस्कृत आवर किसी अन्य भाषा का मिला जुला मंत्र था उच्चारण था

( किरण. ....... ये कैसा मंत्र उच्चारण है आवर किस भाषा में आवर मुझे क्यों सुनाई दे रहा है )

किरण एक बार फिर से उस मंत्र को गौर से सुनती है

आवर उस मंत्र को ुशी तरह दोहराती है कुछ हे पल बाद किरण के मस्तिष्क से ऊर्जा निकल सूर्य के मस्तिष्क से तराने लगी

देखते हे देखते सूर्य की आँखे बंद हो जाती है साथ हे किरण की

दोनों के बंद आँखों के सामने पिछले जनम से ले कर अब तक के जीवन काल का दृश्य हमने लगते है

कुछ देर ये पर्किर्या चलती रही फर किरण की आँखे खुल जाती है पैर सूर्य का सर दर्द से फटने लगता है

साथ हे वह जैसे भूकम आ चूका हो

किरण ....... माँ सिगरा हे इस मंत्र का उच्चारण कीजिये आप

इनकी स्मृतिया दुर्मिळ हो चुकी है इनको हमसे जुडी सभी यादें याद दिलानी होगी

शालिनी जी बिना किसी परशान के किरण द्वारा बताये मंत्र का उच्चारण करने लगती है

उनके साथ भी वही हुआ उनके मस्तिष्क से निकली ऊर्जा सूर्य के मस्तिष्क में समाहित होने लगती पहले से हे दर्द में तड़प रहा सूर्य का दर्द आवर ज्यादा भाड़ जाता है आवर वह का माहौल बाद से बदतर होता चला गया


शालिनी जी ....... ये ये क्या हो रहा है बेटी स्वीटी

किरण ....... माँ मुझे लग रहा है हम सफल रहे ये उस गहरी निद्रा से बहार आ रहे है

ीदार डेरे डेरे सूर्य कर सार्ड दर्द भाड़ रहा था वही आस पास में जो कुछ भी था वो सब नस्ट होने लगता है जैसे इस स्थान का अंत होने वाला हो हो

किरण ........ माँ आपका सरीर .......

किरण आगे कुछ कहती उस से पहले हे जैसे सब कुछ थम सा गया हो अचानक से सब अपने स्थान पे हे रुक गया सूर्य का सर दर्द वो चीखे सब

सूर्य ....... ये मैं कहा हूँ मैं यहाँ क्या कर रहा मेरी स्वीटी

तभी सूर्य की नजर किरण आवर शालिनी जी पे पादरी है सूर्य तेजी से किरण की आवर भड़ता है आवर उसे गेम लगाने की कोशिश करता है

कोशिश इस लिया क्यों की सूर्य किरण को गले नहीं लगा प् रहा था उसके हाथ किरण के सरीर के आर पार हो रहे थे ऐसा हे शकुनि जी के साथ करने पे हुआ

सूर्य ....... ये हो क्या रहा है माँ आवर स्वीटी यहाँ इस रूप में क्यों है आवर मैं कहा हूँ मैं यहाँ क्या कर रहा कोनसी जगह है ये मैं तो माँ के साथ सोया था रात में

तभी सूर्य को अपने पीछे किसी के होने का आभाष होता है

सूर्य जैसे हे पीछे पलट कर देखता है वह कोई स्त्री कड़ी थी देखने से तो सदर्न किन्तु उनके मस्तिक्ष का तेज बता रहा था की वो कोई देवी है

सूर्य न जाने क्यों उन्हें देखते हे अपने गुथनो पे जुख जाता है आवर अपने आप हे उसके हाथ उनके सामने जुड़ जाते है

सूर्य ...... परनाम माता आप कोण है


स्त्री ........ उठो पुत्र सूर्य तुम हमारे समक्ष इस तरह हाथ जोड़ क्यों जुखे हो हमारा परिचित कोई मायने नहीं रखता हम एक सदर्न स्त्री है

सूर्य ...... क्षमा करे माता मेरी अज्ञाक्त वश किये अनुचित परशान के लिया किन्तु आप कोई सदर्न स्त्री नहीं हो सकती माता आपके ललाट ( माथे ) का तेज किसी योग देवी तुल्य है आपके मुख मुखमण्डल पे सौम्यता आपकी दृस्टि में चमकता मातृत्व से पारी पूर्ण प्रेम दृस्टि आपकी ये सभी के जीवन सकारात्मकता भर देने वाली मुस्कान कही से भी आप सदर्न स्त्री नहीं हो सकती माता कृपया कर अपने इस पुत्र पे अपनी ममता कई दृस्टि कीजिये माता आवर आपके समय दिव्या रूप के दर्शन देने की कृपा करे माता

वो स्त्री कुछ हे पालो में वो रूप त्याग अब देवी रूप में कड़ी थी उनके आस पाश बहुत से खूबसूरत पशु पक्षी जिव जंतु थे आवर उनका वो दिव्या समय ममता कई सवरूप जैसे सूर्य उनके तेज में अपना सब कुछ भुला कर किसी छोटे बचे के जैसे उनके चरणों में जा बैठा

स्त्री ........ हम प्रकर्ति है पुत्र सूर्य यही हमारा समय स्वरुप है पुत्र तुमने झुक वश हमारे नियम को खंडित किया जिसके फलसवरूप हमें तुम्हे दण्डित करना पड़ा पुत्र जो तुमने स्वपन में देखा वो हमारी माया थी पुत्र तुम्हे दण्डित करने के लिया रची गयी थी

सूर्य ....... मुझे क्षमा करे माता मुझसे बहुत बड़ा पाप हुआ जो आपके नियमो उलंगन कर आपको क्रेडिट किया

देवी प्रकर्ति ...... पुत्र भूल सभी से होती है आवर समय आने पे उसका दंड भी करम अनुसार सभी को भोगना पड़ता है फिर चाहे वो देव अंश हो या सदर्न जान सभी के कर्मो का उचित समय पे उचित फाल मिलना या दंड मिलना ये देवी नियति निर्धारित करती समय चक्र आवर हम देवी प्रकर्ति उन्ही के ादिन है ये उनके कार्य केषट्रा में आता है किन्तु तुम्हारी प्रथम भूल थी इस लिया समय चक्र की मांग पे तुम्हे दण्डित करने का दायित्व देवी नियति ने हमें सौंपा

सूर्य ....... माता अपने इस पुत्र पे दया कर माता नियति के कार्य प्रणाली का ज्ञान देने की कृपा करे माता

देवी प्रकर्ति ....... ये संभव नहीं है पुत्र समस्त भारमंद का ज्ञान ग्रहण करने पश्चात भी देवी नियति की कार्य प्रणाली का ज्ञान तुम गठन नहीं कर सकते पुत्र इस लिया अनुचित मांग कर हमें दुविद्या में न डालो पुत्र

सूर्य ...... क्षमा करे माता मेरी ुनिचित मांग के लिया

देवी प्रकर्ति ....... पुत्र तुम्हारे विचार सभी जीवो के पार्टी सकारात्मक है तुम सभी को सुखी देखना चाहते हो आवर उसमे सहयोग भी करते हो किन्तु जाने अनजाने तुम गलतियां भी कर देते हो जिस कारन तुम्हे पीड़ा भी उठानी पड़ती है

सूर्य ...... किसी का जीवन सवारने वह ख़ुशी देने के लिया स्वयं को पीड़ा उतनी पड़े तो भी मुझे स्वीकार है माता उनके उनका सुखी खुशाल जीवन उनकी ख़ुशी हे मेरी पीड़ा के लिया मल्हन बन जाती है

देवी प्रकर्ति ..... हेहेहे पुत्र तुम्हारी इसी सरल हृद्या ने तुम्हारे जीवन में इतनी संगिनियों का प्रेम भर दिया

अब सूर्य भला उनके परिशेष का क्या जबाब देता

देवी प्रकर्ति ..... तुम्हारे लौटने का समय हो चूका है पुत्र सदैव अपने गुरुओ की आज्ञा का पालन करना पुत्र मेरा आशीर्वाद सदैव तुम्हारे साथ है ये को पुत्र तुम्हारी माता की आवर से आशीर्वाद स्वरुप ये भेंट स्वीकार करो इसे वर्तमान में स्वयं को सौंप देना

सूर्य उनसे वो लॉकेट नुमा उपहार ले लेता है

सूर्य ...... मैं कुछ समजा नहीं माता स्वयं को सौंप देना मतलब समय आने पे तुम समाज जाओगे पुत्र ये तुम्हारे दंड चक्र को सही दिशा प्रदान करेगा

सूर्य ...... परनाम माता

देवी प्रकर्ति ........ दीर्घायुष्मन भाव पुत्र

अगले हे पल सब कुछ रुका हुआ फिर से सुरु हो गया आवर देवी प्रकर्ति से सूर्य को दंड आवर उपहार दोनी की प्राप्ति होते हे देवी प्रकर्ति वह से गायब हो गयी

ीदार शालिनी जी आवर किरण का सरीर डेरी डेरी अपनी आँखों के सामने गायब हटा देख सूर्य जोरो से चीख पड़ता है

एक तेज रमना आवर सब कुछ संत ........

परीलोक ........

गुरुदेव को रातभर विश्राम का भी समय न मिला था जागते हुए हे उन्होंने चिंता में पूरी रात निकल दी थी

भरममुहूरत के समय गुरुदेव एक नजर सूर्य शालिनी जी किरण पे दाल पीछे िस्थित सर्वर में सनान कर अपनी पूजा के लिया पुष्प एकत्रित कर जब मंदिर लौटे तो वह पहले से हे सपना कोमल रिद्धि पारिजात मौजूद थी

चारो गुरुदेव को परनाम करती

गुरीदेव .......... कल्याण हो पुत्रियों आप सब यहाँ वो भी इस समय

कोमल ....... वो हम रात भर इनके बारे में सोचते सोचते निकल दी ध्यान आदि का समय होने पे हम सभी यही आ गए हमें क्षमा करे गुरुदेव

गुरुदेव अपने हाथो में पकड़ी छोटी पुष्प टोकरी पर भी चरणों में रख कोमल के सर को सनेह से सहला देते है

गुरुदेव ....... नहीं पुत्री तुम सब ने कुछ भी अनुचित नहीं किया इस लिया क्षमा न मानगो पुत्री हम आप सभी की पुत्र सूर्य के पार्टी जो चिंता है उसे समझते है

चलो हमारे साथ परबु पूजा में शामिल हो परबु आराधना करो तुम सभी का मन आउट चित संत हो जायेगा

कुछ हे दी बाद गुरुदेव पूजा आरम्भ कर देते है कोमल सपना पारिजात रिद्धि भी गुरुदेव के साथ पूजा करती है

ीदार जैसे हे गुरुदेव की पूजा पूर्ण हुई किरण और शालिनी जी की आँखे खुल जाती है किन्तु इतने लम्बे समय स्व ध्यान में रहने से दोनों की हालत ख़राब थी

सूर्य ........ ममममम ...... स्वीटीएयय......

एक जोरदार चिक के साथ पु करते हुए सूर्य की आँखे खुल जाती है साथ हे सूर्य उठ कर बेथ जाता है

सूर्य की चीख सुन सभी की नजर सूर्य पे जा पड़ती है जो शालिनी जी आवर किरण को अपने सीने से लगाए आँशु बहा रहा था

गुरुदेव ..... ही परबु आपको कोटि कोटि नमन आपने अपने इस भक्त की भक्ति की लाज रख ली परबु

चारो लड़किया सूर्य शालिनी जी किरण को घेर लेती है सभी की आँखे भीगी हुई थी पैर ये ख़ुशी के आंसू थे

शालिनी जी ...... तू ठीक है न मेरे बचे तुम्हे कुछ हुआ तो नहीं न

सूर्य ....... मैं ठीक हूँ माँ सॉरी माँ मुझे माफ कर दीजिये मेरी वजह से आपकी कितना दुःख सहना पड़ा

किरण ...... कुंवर जी

सूर्य ......सॉरी स्वीटी तुम भी मुझे.....

किरण ....... इस्सस आप आप ठीक है न कुंवर जी

किरण इस से आगे कुछ बोलती उस से पहले हे उसकी आँखे बंद हो जाती जिसे देख सूर्य घबरा जाता है

सूर्य ...... स्वीटी स्वीटी देखो आँखे खोलो फिर से मुझे घोष कर मत जाओ स्वीटी

किरण ..... मैं यही हूँ आपको चढ़ कर कभी नहीं जाउंगी

सपना ....... स्वीटी मेरी गुड़िया

किरण ...... दीदी देखो मैं ले आई इनको अपने साथ अब तो आप मुझसे नाराज नहीं है न मुझसे अपना चेहरा तो नहीं छुपाओगी न दीदी

ककीरण ने ये जिस तरह से रोटी हुए एक आशा से सपना से कहा जिसे देख सभी की आँखे बाह उठी

सभी को इन दोनों के बिच के उस अटूट अदृश्य प्रेम नंदन का अनुभव हो रहा था

सपना निचे गुथनो पे बेथ किरण को रोटी हुए अपने सीने से लगा लेती है जैसे एक माँ अपनी मासूम गुड़िया को अपने सीने से लगाती है ुशी तरह

गुरुदेव ........ तुम सभी का प्रेम इशू तरह अटूट आवर निरसवार्थ बना रहे बस परबु से यही कामना है

सपना ....... मुझे माफ कर दे मेरी गुड़िया मैंने जो कुछ भी तुम्हे बुरा भला कहा उसके लिया पैर एक तू हे तो है जिसे देख हम सबकी हिम ात बढ़ती है तुझे उस तरह टुटा हुआ देख मैं खुद को रोक नहीं पायी मुझे माफ कर दे मेरी गुड़िया

गुरुदेव ....... पुत्री सपना अभी पुत्री किरण आवर पुत्र सूर्य शालिनी को विश्राम की आव्सय्कता है उन्हें सूर्य महल ले जाओ मैं कुछ हे देर में वह आता हूँ

शालिनी जी तो सूर्य के सीने से लगे लगे न जाने कब तकन से सुकून भरी नींद में चली गई थी

उदार रानी महल में भी रानी पारी आवर बाकियो को सूर्य के होश में आ जाने की जानकारी मिल चुकी थी

कोमल रिद्धि पारिजात सपना सूर्य किरण शालिनी जी सभी वह से सूर्य महल के सूर्य के नक्श में प्रकट हुई

सूर्य शालिनी जी को गौड़ में से उस बड़े से दुबले किंग साइज बीएड पे लिटा देता है आवर उनके पास हे किरण को भी

सूर्य कोमल सपना रिद्धि पारिजात से गले मिल कुछ देर आराम करने को कहता है

सभी इस्थिति को समाज न चाहते हुए भी तीनो को नक्श में छोड़ बहार निकल जाती है

सूर्य सनलिनी जी आवर किरण के बिच लेट दोनों को अपने आवर कर माथे को चुम कर निहारने लगता है न जाने कब सूर्य की भी आँखे लग जाती है उन्हें निहारते निहारते

उदार सभी के निकलने के बाद गुरुदेव प्रभु का धन्यवाद कर जब बहार की आवर निकले तभी उनकी नजर पड़े उस लॉकेट पे पड़ती है

गुरुदेव ....... ये किसका लॉकेट है आवर यहाँ कैसे आया यहाँ तो सायद किसी पुत्री का होगा भूल वश यहाँ रह गया हो मैं उन्हें लौटा देता हूँ बड़ा हे प्यारा है ये

गुरुदेव जैसे हे उस लॉकेट को टच करते है उन्हें एक झटका लगता है आवर उनके आँखों के सामने सूर्य आवर देवी प्रकर्ति के बिच जो संवाद हुआ उसका ज्ञान होता है

गुरुदेव ........ तो ये माता प्रकर्ति का दिया हुआ उपहार है पुत्र सूर्य को भेंट स्वरुप क्षमा करना माता हम समाज गए हम इसे छू नहीं सकते है ये पुत्र सूर्य को प्राप्त आपका आशीर्वाद है

गुरुदेव ....... माता प्रकर्ति के दिव्या आशीर्वाद कर्प्या आप अपने नियत स्थान पे जाये भूल वश पुत्र सूर्य आपको यही छोड़ गया

लॉकेट उड़ता हुआ मंदिर से बहार निकल जाता है

आवर सोये हुए सूर्य के गले में पहुचन जाता है

आवर उस से तीन ग्रीन ऊर्जा निकल किरण शालिनी जी आवर सूर्य में सम्माहित हो जाती है जिस से उनका तेज फिर से लौट आता है

गुरुदेव जब सूर्य महल पहुंचने तो वह नियों रानी पारी राधा अलीना रिद्धि गायत्री पायल प्रीती मानसी जुली सभी बहार बड़े से हॉल में सोफे पे विराजमान थे कोमल सपना रिद्धि पारिजात के साथ

तभी वह जीनत आवर जिनिशा आती अपने अपने पिता के साथ

जीनत ....... रिद्धि दीदी वो कहा है आवर आपने कुछ बताया क्यों नहीं हमें

गुरदेव ....... पुत्री जीनत संत हो जाओ पुत्र सूर्य ठीक है अब पर आप सही यहाँ आपको तो मैंने मना किया था न

राण पारी ........ वो गुरुदेव कल से हे पुत्री जीनत आवर पुत्री जिनिशा काफी बार पुत्र सूर्य के विषय में सवाल कर चुकी थी जब मुझे पुत्र सूर्य के होश में आने की जानकारी मिली तो मैंने इन दोनों को सन्देश दे यहाँ बुलवा लिया

गुरुदेव ....... उचित किया आपने रानी पारी पुत्री जीनत जिनिशा अभी पुत्र सूर्य पुत्री शालिनी आवर किरण विश्राम कर रहे है कुछ समय बाद उनसे भेंट कर लेना

जीनत .......जी गुरुदेव

प्रेतराज ...... गुरुदेव ये सब हुआ कैसे पुत्र सूर्य के साथ

गुरुदेव j.king प्रेतराज आवर बाकि सभी को विस्तार से इस विषय पे खुल कर बताते है

प्रेतराज ......... अगर प्रकर्ति के नियम भांग हुए है तो फिर तो दण्डित होना लाज़मी है आवर पुत्र सूर्य के साथ भी वही हुआ है .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................
 
अपडेट .... 248

राण पारी ........ वो गुरुदेव कल से हे पुत्री जीनत आवर पुत्री जिनिशा काफी बार पुत्र सूर्य के विषय में सवाल कर चुकी थी जब मुझे पुत्र सूर्य के होश में आने की जानकारी मिली तो मैंने इन दोनों को सन्देश दे यहाँ बुलवा लिया

गुरुदेव ....... उचित किया आपने रानी पारी पुत्री जीनत जिनिशा अभी पुत्र सूर्य पुत्री शालिनी आवर किरण विश्राम कर रहे है कुछ समय बाद उनसे भेंट कर लेना

जीनत .......जी गुरुदेव

प्रेतराज ...... गुरुदेव ये सब हुआ कैसे पुत्र सूर्य के साथ

गुरुदेव j.king प्रेतराज आवर बाकि सभी को विस्तार से इस विषय पे खुल कर बताते है

प्रेतराज ......... अगर प्रकर्ति के नियम भांग हुए है तो फिर तो दण्डित होना लाज़मी है आवर पुत्र सूर्य के साथ भी वही हुआ है .................

अब आगे .........

परीलोक ........ दोपहर से कुछ पूर्व शालिनी जी की आँखे खिलती है सबसे पहले जो उनके नजरो के सामने चेहरा था वो उनके जिगर के टुकड़े सूर्य आवर उसकी जान किरण का था

शालिनी जी कक्ष में नजरे दौड़ा कर जैसे जानना छह रही थी की हम है कहा ये की स्वपन या भरम तो नहीं है

जब उन्हें यकीं हुआ की ये कोई भरम या किसी तरह का स्वपन नहीं अपितु वास्तविकता है तो उन्होंने फिर से अपना चेहरा सूर्य के सीने पे रख गर्दन को चुम लिया

शालिनी जी ........ अब जा कर दिल को दण्डक मिली है पता नहीं ऐसा क्या है इसमें जो माँ होते हुए भी अपनी गधे हल जाती हूँ इसके साथ में जैसे बाकि सब भूल इसकी बहो का हार बन इसके सीने से लगी रहूं

किरण ....... माँ ये कुछ ज्यादा नहीं हो रहा है

शालिनी जी भूल वश जो अपने मन में सोचना था वो बोल जाती है आवर किरण वो सब सुन खुद को बोलने से नहीं रोक पति

शालिनी जी ..... तुम तुम कब उठी स्वीटी

किरण शालिनी जी के गालो पे हक्लि की चिकोटी काट जैसे उन्हें छेद रही हो

किरण ....... जब आप अपने दिल की बात जुबा स बड़बड़ाते हुए बया कर रही थी माँ तभी उठी

शालिनी जी ....... हमें इस बारे में बात करनी है स्वीटी

किरण ....... चील माँ मैं सब जानती हूँ आवर मुझे इसमें कुछ गलत नहीं लगता आवर वैसे भी ये आपसे जितना प्यार करते है सायद उतना मुझे भी नहीं करते इनका आवर आपका कुछ अलग हे प्रेम परशंग है जिसके बिच न मैं आउंगी न किसी को आने दूंगी

शालिनी जी ...... फिर भी हमें बात करनी चाइये

किरण ....... Ok माँ हम जल्दी हे इस बारे में बात करेंगे मैं फ्रेश हो कर आती हूँ आप भी फ्रेश हो जाइये माँ आवर इन्हें भी उठा दीजिये

किरण सोये हुए सूर्य का माथा चुम बाथरूम की आवर भाड़ गई वही शालिनी जी किरण के अंदर जाते हे सूर्य के कमर पे बेथ उसके होंटो का रशपाण करने लगती है

किरण एक बार बाथरूम से ये दृश्य देखती है आवर मुस्कुराने लगती है जैसे उसे पहले से इसका अंदाजा हो चूका हो

सूर्य शालिनी जी अपनी उखड़ी हुई सांसे सँभालते हुए एक दूसरे को देखते है

सूर्य ....... क्या हुआ माँ

शालिनी जी ....... कुछ नहीं बीटा चल उठ फ्रेश हो जा दोपहर हो गयी है आवर तुम्हारे गले में लॉकेट कैसे बीटा

सूर्य को नजर लॉकेट पे पादरी है तब उसे अपने साथ जो कुछ भी हुआ उस घटना का स्मरण होता है साथ किरण शालिनी जी के अपने लिया किया प्रयाश आवर बढ़ाओ को पार कर उसे फिर से एक नया जीवन देने के विषय में पता चलता है सूर्य की आँखे अपने आप हे नाम हो जाती

शालिनी जी ....... क्या हुआ बीटा तुम रो क्यों रहे हो कोई तकलीफ है तो मुझे बता बीटा इस तरह रोटी नहीं

सूर्य ....... सॉरी माँ मेरी वजह से आपको आवर स्वीटी को कितनी पीड़ा कितना कुछ सहना .......

शालिनी जी ....... स्स्स्सह्ह्ह्ह बिलकुल चुप वो तुम्हारी पत्नी है आवर मई तुम्हारी माँ हम दोनों ने हे अपना अपना धरम निभाया है बीटा पीड़ा तो हमें तुम्हे उस हालत में देख कर हुई थी जिसमे हम सब ने तुम्हे स्वीटी के लिया तड़पता देखा

सूर्य ........ सॉरी माँ मैंने जो देखा उसे हे सच मान लिया था

शालिनी जी ....... इस बात का आगे से ड़याँ रखना बीटा तुम्हारी रह इतनी आसान नहीं बहुत से ऐसे भरम सवपन या किसी द्वारा किया चाल भविष्य में तुम्हारे सामने आएंगे तुम अगर इस तरह टूट गए तो हम सब का क्या होगा

सूर्य ........ सॉरी माँ आगे से मैं ध्यान रखूँगा

शालिनी जी ........ सॉरी नहीं चाइये मुझे वादा करो मुझे को भविष्य में ऐसा कुछ भी हुआ तुम इस तरह टूट कर नहीं भीक्रोगे बीटा हम सब तुम्हारी सबसे बड़ी ताकत बनना चाहते है न की तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी फैसला तुम्हे करना है प्रेम सब से करो बीटा न किसी से काम न ज्यादा सबको एक सामान प्रेम आवर हक़ दो पैर खुद को भी मजबूत बनाओ

सूर्य ....... माँ ये संभव नहीं है आप आवर स्वीटी जितना मैं किसी को प्रेम नहीं कर सकता आप दोनों का जो स्थान है वो किसी आवर को नहीं दे सकता जनता हूँ बाकि सब के साथ मैं अन्याय कर रहा हूँ पैर मैं ऐसा करने की सोचता भी हूँ तो खुद को विवश मह्सुश करता हूँ

शालिनी जी ........ चलो उठो आवर फ्रेश हो कर बहार जाओ सब तुम्हारी प्रतीक्षा कर रहे है

सूर्य ....... मैं माँ सा बड़ी मम्मी बुआ से बात कर के आता हूँ आप चलिए

आधे घंटे बाद जब सूर्य अपने कक्ष से त्यार हो कर बहार निकला तो सबसे पहले उसका सामना कोमल से हुआ जो किसी की परवाह किये बिना सूर्य के सीने से लग सुबकने लगी

कोमल ...... आपने ऐसा क्यों किया आपने एक बार भी हम सब का नहीं सोचा आपके बिना हमारा क्या होता क्या आप हमसे प्रेम नहीं करते व फिर स्वीटी दीदी हे आपकी सब कुछ है

सूर्य ........ तुम्हारी भावनाओ को समझता हम कोमल पैर तुम गलत सोच रही हो कोमल यहाँ बात स्वीटी की तुमने की है तो एक सच ये भी जान लो मैं तुम सब से एक सामान प्रेम करता हूँ पैर माँ आवर स्वीटी का जो स्थान है वो किसी को नहीं दे सकता हूँ फिर चाहे वो तुम हो या बाकि आवर आवर जनता हूँ मेरी बात तुम्हे तकलीफ देगी पैर जूथ बोल कर तुम सब की तकलीफ आवर नहीं बढ़ा सकता ये एक ऐसा सच है जो मैं छह कर भी बदल नहीं सकता

कोमल........ मुझे नाफ्फ कर दीजिये मैं सब जानते हुए भी न जाने क्यों आप पे गुस्सा थी

सूर्य ....... जनता हूँ तुम्हारे गुस्से की वजह पैर ये जो तुम्हारे मन में सवाल है उनका जबाब तुम गुरुदेव से लेना

कोमल ....... मतलब जो देखा वो सब

सूर्य ......... है वो सब सच था माँ आवर मेरा सम्बंद सच है पैर इसकी वजह भी है जो गुरुदेव तुम्हे मुझसे बेहतर समजा देंगे अगर अभी भी मन में कोई सवाल है तो

कोमल ....... नहीं आपने स्वीकार कर लिया यही बहुत है मुझे कुछ नहीं जानना

सूर्य ....... चलो बाकि सब के पास चलते है

सूर्य कोमल को साथ लिए बाकि सभी के पास आ जाता है

सूर्य ........ परनाम गुरुदेव रानी पारी प्रेतराज j.king देवसफ्फी नियों

गुरुदेव ........ आयुष्मान भाव पुत्र

रानी पारी सूर्य को देखते हे उसे गले से लगा लेती है

रानी पारी ....... पुत्र सूर्य अब आपका स्वस्थ्य कैसा है

सूर्य ...... जी रानी माँ मैं बिलकुल स्वस्थ हूँ पहले से भी आदिक खुद को स्वस्थ मह्सुश कर रहा हूँ

गुरुदेव ........ पुत्र सूर्य पुत्री किरण यहाँ बैठो हमारे समक्ष

सूर्य आवर किरण गुरुदेव के सामने के सोफे पे बेथ जाते है

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य तुम्हारे गले में दिव्या लॉकेट है तुम जानते हो वो क्या है आवर किसने तुम्हे भेंट किया

सूर्य अपने गले से हार निकल कर गुरुदेव के सामने करता है

गुरुदेव ....... नहीं पुत्र हम इसे स्पर्श नहीं कर सकते है ये केवल तुम्हारे लिया है

सूर्य ........ मैं जनता हूँ गुरुदेव िशने आपको स्वयं को चुने नहीं दिया किन्तु उस समय हम इसे वही भूल आये थे आवर बिना हमारी इच्छा के इसे स्वीटी भी नहीं छू सकती ये माता प्रकर्ति ने भेंट स्वरुप हमें प्रदान किया था किन्तु अब आप इसे छू सकते है

गुरुदेव सूर्य के हाथ से उस लॉकेट को ले कर देखते है इस बार बड़ी आसानी से बिना किसी अवरोध के उन्हें ने उसे चूहा हे नहीं बल्कि अपने हाथो में उठा कर अच्छे से देखा भी

गुरुदेव ........ पुत्र ये माता प्रकर्ति की दिव्या सकती से उत्पन्न हुआ दिव्या लॉकेट है किन्तु ये केवल एक लॉकेट हे नहीं है बल्कि उनके एक सकती है ये

सूर्य ........ जी गुरुदेव किन्तु उन्होंने कुछ आवर भी कहा था हमसे किन्तु हम समाज नहीं पात्र गुरुदेव उनके कहने का तात्पर्य

गुरुदेव ........ ऐसा क्या कहा था देवी प्रकर्ति ने पुत्र

सूर्य ....... गुरुदेव उन्होंने कहा था की ये लॉक्ड "वर्तमान में इसे स्वयं को सौंप देना "

"ये तुम्हारे दंड चक्र को सही दिशा प्रदान करेगा "

इसका क्या मतलब हुआ गुरुदेव आप हे कुछ समझाइये आवर ये जो कुछ भी हुआ थोड़ा बहुत मैं समाज गया हूँ की मुझसे अनजाने में हल हुई जिसके कारन नियति ने मुझे दण्डित करना चाहा आवर समय चक्र की मांग पे ये दायित्व माँ प्रकर्ति को प्राप्त हुआ किन्तु ऐसा क्यों हुआ गुरुदेव आवर जब मैंने माता प्रकर्ति से देवी नियति के कार्य प्रणाली का ज्ञान प्रदान करने का आग्रह किया तो उन्होंने मुझे अयोग्य घोषित कर दिया इसका क्या कारन हुआ क्या मैं इस योग्य नहीं हूँ गुरुदेव

गुरुदेव .......... पुत्र सूर्य तुम्हारे अंतिम परशान का जबाब ये है पुत्र की पुरे भारमंद में जो भी घटना घटित होती है वो सब देवी नियति की ादिन उनकी इच्छा से होतो है समय चक्र देवी नियति यथार्थ ( देवी प्रसक्ति )देवी k**li के ादिन होता उनकी इच्छा से गतिमान होता है एक तरह से उनके कार्य प्रणाली में समाया चक्र उनका सहायक होता है जिस तरह देवी प्रकर्ति उनकी सहायक की भूमिका निभाती है आज तक कोई भी जन्मा ा जन्मा प्राणी देव दानव मानव उनके कार्य प्रणाली का ज्ञान प्राप्त नहीं कर सका क्यों की उनसे ज्ञान प्राप्त कर सके इस योग्य कोई आज तक हुआ हे नहीं जिनके पालक जपकाने मात्रा से हे सम्पूर्ण भारमंद का सृजन आवर विनाश होता है क्या तुम या कोई अन्य इस योग्य हो सकते जो उनके ज्ञान को प्राप्त कर सके जिसका न कोई अंत है न कोई आरम्भ त्रिदेव भी उनकी इच्छा के विरुद्ध नहीं जा सकते

सूर्य ......... यथार्थ भरमेंट में मौजूद सभी आकाश गंगाओ या अन्य जो कुछ भी मौजूद है वो सब उनकी इच्छा से है निर्मित होते है आवर अपने समय सीमा पूर्ण कर जिस कार्य हेतु उनका निर्माण हुआ पूर्ण होने के पश्चात उनकी हे इच्छा से विलीन या नस्ट हो जाता है गुरुदेव

गुरुदेव ........ है पुत्र यही सत्य है भारमंद में केवल यही 14 नुवान यथार्थ 14 लोक नहीं है ये केवल एक आकाश गंगा तुम्हारी भाषा में गैलेक्सी कहा जाता है यही मौजूद नहीं है असंख्य आकाश गंगा है उनके असंख्य परीलोक पृथ्वीलोक जिन लोक आवर न जाने कोण कोण से लोक है जिन्हे किसी अन्य लोक या गाढ़ा के नाम से सम्बोधित किया जाता है

सूर्य .......... क्या हमारी आकाश गंगा से अन्य आकाश गंगा में जाया जा सकता है गुरुदेव

गुरुदेव ........ अवश्य पुत्र पूर्व में भी ऐसा हो चूका है आवर भविष्य में भी संभव है पुत्र रही बात देवी प्रकर्ति द्वारा कहे वचनो का अर्थ समझने की तो उनका कथन था की ये " लॉकेट वर्तमान में तुम्हे स्वयं को सौंपना होगा जिस से तुम्हारा दंड चक्र को सही दिशा का ज्ञान होगा "

सूर्य .......जी गुरुदेव

गुरुदेव ........ पुत्र तुम्हे आवर पुत्री किरण को समय यात्रा कर भूतकाल में जाना होगा आवर भूतकाल में पुत्र सूर्य को तुम्हे ुए लोक सौंपना होगा जिस से बिना किसी नियम को भांग किये वो पापियों को उनके किये पापो का दंड दे सकेगा

इसमें ये माता प्रकर्ति की दिव्या सकती उसकी सहायता करेगी जिस से उनके कर्मो का दंड निर्धारित करने में किसी भी नियम का उलंगन न हो तुमसे पुत्र

सूर्य .....पैर ये संभव कैसे होगा गुरुदेव क्या भूतकाल या भविष्य में ऐसे हे जाया जा सकता है

गुरुदेव ........ नहीं पुत्र इतना सरल मार्ग होता तो कोई भी कभी भी भूतकाल या भविष्य में जा कर समय चक्र को प्रभावित कर देता क्यों की समय यात्रा करने पे समय चक्र प्रभावित होता है क्यों की भविष्य या भूतकाल के लिया जब भी कोई समय यात्रा करता है तो उस से जुड़े लोगो के भविष्य में समय चक्र द्वारा परिवर्तन आता है वर्तमान आवर भविष्य बदल जाता है

सूर्य ........ फिर तो समय यात्रा करना प्रकर्ति के नियम के विरुद्ध है गुरुदेव

गुरुदेव ........ सत्य वचन पुत्र किन्तु जब समय यात्रा स्वयं देवी नियति की इच्छा से हो तो नियम का उलंगन नहीं होता है भविष्य में कुछ परिवर्तन अवश्य होंगे जो तुम्हारे समय यात्रा करने पे भी होगा अच्छा या बुरा वो देवी नियति की इच्छा पे होगा

किरण ........ किन्तु हम वह जायेंगे कैसे ी मैं समय यात्रा करेंगे कैसे आवर हमें कैसे पता होगा की हम उचित समय में पहुंचने है

गुरुदेव ......... इसमें ये दिव्या लॉकेट तुम लोगो की सहायता करेगा पुत्री किरण सायद इसी लिया देवी प्रकर्ति ने ये भेंट स्वरुप सूर्य को सौंपा है ताकि बिना नियमो के भांग किये आवर समय चक्र को ज्यादा प्रभावित किया बिना ये समय यात्रा पूर्ण कर पाओ उचित स्थान आवर उचित समय पे स्वयं तुम दोनों को पहुंचा देगा आवर जैसे हे तुम ये लॉकेट भूतकाल पुत्र सूर्य को सौंप देते हो तुम दोनों अपने इस समय काल में लौट आओगे सायद ये घटना भी हम सब को िस्मराम न रहे जो सूर्य के साथ घठित हुई थी या कुछ आवर भी घटना आराम हो सकती है जो देव नियति की इच्छा

सूर्य ....... हमें कब निकलना होगा गुरुदेव

गुरुदेव ......... आज रात्रि पुत्र सूर्य

रानी पारी ....... पुत्र सूर्य बाकि चर्चा बाद में करना भोजन का समय हो चूका आवर तुम्हारी इन प्रेमिकाओ ने कल से ठीक से भोजन भी नहीं किया है

गुरुदेव ...... हाहाहा उचित कहा रानी पारी आपने हमें कुछ कार्य है पुत्र भोजन के पश्चात कुछ विश्राम कर हमसे भेंट करना

सूर्य ......जी जी गुरुदेव

गुरुदेव के साथ देवसफ्फी नियों भी बहार को चल दिया

ज. किंग ....... पुत्र सूर्य हमें भी निकलना है अपने लोक के लिया पुत्री जिनिशा कुछ समय यही रहना चाहती है

सूर्य ....... जी पिता श्री जैसे आपकी इच्छा बाकि जीमलोक में सब कुशलमंगल पिता श्री

ज. किंग ....... है पुत्र सब कुशल मंगल है पुत्र समय मिले तो जिनलोक आओ पुत्र

सूर्य ...... जी अवस्य पिता श्री मैं सिगरा हे कुछ समय के लिया जिनलोक आऊंगा किन्तु अभी बहुत से कार्य निपटने है उन्हें पूर्ण करने के बाद हे आ सकता हूँ

j.king ....... उचित है पुत्र आज्ञा दीजिये रानी पारी

रानी पारी ........ आज्ञा है किन्तु भोजन ग्रहण करने पश्चात हे आप जा सकते है हमारी सभी पुत्रियों ने इतने प्रेम से भोजन बनाया है आप बिना ग्रहण किया तो जा नहीं सकते आवर न हम जाने की इजाजत देंगे

प्रेतराज ........ आपने उचित कहा रानी पारी अपनी पुत्रियों के प्रेम से बनाये भोजन को बिना ग्रहण किये मैं तो नहीं जाने वाला आवर आप भी ऐसे नहीं चाहेंगे की आपसे हमारी कोई भी पुत्री नाराज हो हाहाहाहा

j.king एक बार नजर उठा कर सभी को देखते है तो सभी लड़किया उन्हें हे देख रही थी

( j.king ....... भोजन ग्रहण करने में हे समझदारी है इनके समक्ष पुत्र सूर्य की नहीं चलती फिर जिनलोक के राजा की क्या मजाल )

j.king ...... अब इतने प्रेम से हमारी पुत्रियों ने अपने कोमल हाथो से भोजन बनाया है तो उनके परिश्रम आवर प्रेम को अनादर तो मैं कर नहीं सकता

j.king ये भूल गए थे की वो किसके सामने मक्खन लगा रहे है बाकि सब से तो बच भी जाते पैर यहाँ किरण के दिमाग में मस्ती भरी शैतानी सोच जनम ले चुकी थी

किरण ....... अच्छा तो पिता श्री आप ये सोचते है कुंवर जी आवर हमारे बारे में

किरण के बोलते हे सभी की दृष्टि किरण पे आ तिकी

रानी पारी ......क्या हुआ पुत्री किरण

किरण ....... देखिये न रानी माँ पिता श्री क्या सोच रहे है " भोजन ग्रहण करने में हे समझदारी है इनके समक्ष पुत्र सूर्य की नहीं चलती फिर जिनलोक के राजा की क्या मजाल "

किरण के वर्ड बी वर्ड j.king के सोचते हुए बोले सब्दो को सबके सामने ला दिया

जिनिशा ....... पिता श्री ये क्या है

सूर्य ....... स्वीटी ये सब क्या है तुम्हे ऐसा नहीं करना चाइये पिता श्री के साथ

किरण ....... क्यों नहीं कर सकती क्या वो केवल जिनिशा के हे पिता है क्या मैं उनकी पुत्री नहीं

j.king ......क्षमा करना पुत्री किरण तुम भी हमारी पुत्री हो

सूर्य ....... ये क्या पिता श्री आप क्षमा क्यों मांग रहे है स्वीटी ने केवल आपसे मजाक करने के लिया ऐसा कहा है

किरण ....... है पिता श्री हमने केवल मजाक किया था वो भी इस लिया की आपने इनको जिनलोक आने का निमंत्रण दिया आवर हम सब का क्या

अब j.king को अपनी अनजाने हुई भूल का अहसास हुआ की उन्होंने केवल सूर्य को हे जिनलोक आने के लिया आमंत्रित किया जबकि यहाँ सभी लोग मौजूद थे

j.king ....... पुत्री किरण हमारी भूल का आभाष करवाने के लिया शुक्रिया पुत्री आवर क्षमा भी करना जो हमने हमारी सभी पुत्रियों को आमंत्रित नहीं किया

सूर्य .....हाहाहाहाहा पिता श्री इस स्वीटी ने फिर से आपकी तंग कीचै कर दी जबकि आपको भी पता होता है की मैं आऊंगा तो ये सब भी आएँगी हे न हाहाहाहा

शालिनी जी ........ स्वीटी ऐसे नहीं बोलते बीटा वो तुमसे बड़े है न

किरण ...... सॉरी माँ माफ कीजिये पिता श्री

j.king ...... नहीं पुत्री किरण माफी न मानगो हमसे गलती तो हमसे भी हुई है

शालिनी जी ...... चलो चल कर सब भोजन करते है भोजन का समय हो गया है

सभी एक एक कर भोजन कक्ष की आवर भाड़ जाते है जहा सेविकाएं सभी का भोजन थल लगा देती है

भोजन कक्ष स्वादिस्ट खाने की ख़ुशी से महक उठा था

सभी ने बड़े हे चाव से भर पेट भोजन किया

उसके बाद j.king आवर प्रेतराज आने लोक के लिया निकल गए आवर रानी पारी शालिनी जी पारी महल ताकि बचे आपस में सब बात कर सके समय बिता सके

सभी ने सूर्य के रूम में हे सभा लगा राखी थी

सभी बहुत खुश थे सभी के चेहरे खिले हुए थे सिवाय जुली के

सूर्य ....... क्या हुआ जुली तुम कुछ परेशान हो कुक हुआ है क्या

जुली ...... नहीं तो हम कहा परेशान है आपके रहते हम क्यों परेशान होंगे

सूर्य ........ सायद देवसफ्फी नियों जी के आने के पीछे अवश्य कोई कारन होगा जिस से तुम भी परेशान हो गयी हो

जुली है में गर्दन हिला देती है

किरण ....... क्या हुआ जुली ड्रैगन लोक में सब ठीक तो है न

जुली ....... नहीं दीदी वह कुछ ठीक नहीं है देवसफ्फी नियों ने बताया की वह कुछ समय से ड्रैगन आवर उनके राइडर्स के बिच का सम्बन्ध अचानक से ख़राब हो चुके है वो अपने हे राइडर्स पे हमला कर उन्हें घायल कर देते है आवर इंसानो का भी संभव परिवर्तित हो कर उग्र निंदक हो जाता है

सूर्य ....... इस तरह अचानक से ये कैसे हो सकता है

जुली ...... देवसफ्फी जी का मन्ना है की ये सब राजसिंहासन के रिकत रहने से हो रहा है

सूर्य ........ है ये हो सकता है पैर इसका असर केवल ड्रैगन्स पे हो सकता है न की वह के लोगो पे

किरण ........ नहीं ऐसा हो सकता है वह के लोगो पे भी क्यों जहा तक हम जानते है हर एक इंसान के जनम के साथ उस से जुड़ा उसके ड्रैगन का भी जनम होता है किसी एक पे इसका प्रभाव हो तो दूसरा कैसे उस प्रभाव से बच सकता है

सूर्य ....... ये बात भी सही है पैर कुछ आवर भी है जिसका अभी हमें या किसी आवर पता नहीं चल रहा है

जुली ........ वो पिता श्री चाहते है की हम कुछ समय ड्रैगन लोक चले आये पैर हम आपसे दूर नहीं जाना चाहते है

सूर्य ......तो ये कारन है तुम्हारी ुदशी का कोई बात जुली तुम्हे जाना चाइये वो पिता है तुम्हारे उन्हें भी अपनी बेटी का साथ चाइये वैसे भी आप दोनों ने साथ में समय हे कितना बिताया है आवर फिर तुम जब चाहो आ भी तो सकती हो लाइटिंग ड्रैगन के मदद से तुम जब चाहो हमारे पास आ सकती हो इस वक़्त ड्रैगन लोक आवर वह के लोगो को तुम्हारी जरुरत है

जुली ........मैं एक शर्त पे जाउंगी

सूर्य ....... आवर वो क्या है

जुली .......पहले वादा कीजिये

सूर्य ...... क्या यकीं नहीं है जो वादा चाइये

जुली ....... जिस दिन ऐसा हुवा तो जुली तो होगी पैर उसकी धड़कन नहीं

सूर्य ....... अच्छा ठीक है वादा किया

जुली ....... आप आवर स्वीटी दीदी को राजतिलक करवाना होगा आपको आवर दीदी को ड्रैगन लोक के राजसिंहासन पे विराजमान होना होगा

किरण ...... नहीं ये उचित नहीं है उसपे केवल तुम्हारा अधिकार है जुली मैं कभी इसे स्वीकार नहीं करुँगी

सूर्य ...... ठीक है जुली मैं वादा करता हूँ स्वीटी राजसिंगशान आवर ड्रैगन लोक की जिम्मेदार संभालेगी .....

किरण .....कुंवर जी ये आप क्या कह रहे है जानते भी है न की वो हक़ मेरा नहीं है

सूर्य ...... जनता हूँ स्वीटी मेरी पूरी बात सुन लो जुली जब तक हमारा विवाह नहीं होता स्वीटी तभी तक राजसिंहासन पे विराजमान रहेगी विवाह के पश्चात ये दायित्व तुम्हे संभालना होगा

जुली ....... क्यों दीदी हमेशा के लिया ड्रैगन लोक की क्वीन क्यों नहीं रह सकती इनका हक़ मुझसे ज्यादा है राजमुकुट पे

ये बड़ी प्रिंसेस है ड्रैगन लोक की

सूर्य ...... है ये सच है पैर जो तुम्हारा भाग्य में लिखा है वो किसी आवर के भाग्य में तो नहीं लिख सकता न

कल को परिधि जीनत जिनिशा कोमल ने ये मांग उठाई तो बड़ी बहन तो इन्होने भी मन है आवर जहा ताज मैं जनता हूँ रानी पारी इस विषय पे सायद चर्चा भी करने वाली है हमारे विवाह के बाद

पारिजात .......आप सच कह रहे है रानी माँ ने इस विषय पे मुझसे भी बात की थी मैंने भी कह दिया जैसा उन्हें आवर आपको उचित लगे

सूर्य ....... नहीं परिधि जो जिसका हक़ है वो उसे हे मिलेगा यहाँ भी जुली के कारन स्वीटी को कुछ समय के लिया ड्रैगन लोक की जिम्मेदारी सँभालने है जैसे हे जुली का आवर मेरा विवाह हुआ स्वीटी राजसिंहासन का त्याग कर जुली को सौंप देगी

काफी समय तक सूर्य सभी से बाते करता है आवर साम को बाकि सभी को पृथ्वीलोक भेज खुद गुरुदेव से भेंट करने चल देता है .................

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
 
अपडेट 249

पारिजात .......आप सच कह रहे है रानी माँ ने इस विषय पे मुझसे भी बात की थी मैंने भी कह दिया जैसा उन्हें आवर आपको उचित लगे

सूर्य ....... नहीं परिधि जो जिसका हक़ है वो उसे हे मिलेगा यहाँ भी जुली के कारन स्वीटी को कुछ समय के लिया ड्रैगन लोक की जिम्मेदारी सँभालने है जैसे हे जुली का आवर मेरा विवाह हुआ स्वीटी राजसिंहासन का त्याग कर जुली को सौंप देगी

काफी समय तक सूर्य सभी से बाते करता है आवर साम को बाकि सभी को पृथ्वीलोक भेज खुद गुरुदेव से भेंट करने चल देता है .................

अब आगे ..........

परीलोक मंदिर ....... सूर्य ......परनाम गुरुदेव परनाम देवसफ्फी नियों

गुरुदेव ....... यशश्वी भाव पुत्र सूर्य

नियों ........प्रिंस सूर्य ईश्वर आपकी हर मनोकामना पूर्ण करे

गुरुदेव ....... आओ पुत्र बैठो यहाँ तुमसे कुछ जरुरी विषय पे चर्चा करनी है

सूर्य ....... जी गुरुदेव आदेश करे

गुरुदेव ....... पुत्र सूर्य पुत्री जुली से तुम्हे ड्रैगन लोक की समस्या का तो ज्ञान हो हे चूका है उस विषय पे तुम्हारे क्या विचार है

सूर्य....... जी गुरुदेव मुझे जुली ने ड्रैगन लोक की समस्या के बारे में बताया पहले मुझे भी यही लगा था की संभव हो की ये सब राजसिंघषण को रिकत रहने से वो सभी घटनाये आरम्भ हुई हो किन्तु स्वीटी ी मैं किरण ने जो कहा उस से मुझे भी लगता है की इसके पीछे कारन कुछ आवर है गुरुदेव

नियों ........ ऐसा क्या कहा प्रिंसेसेस किरण ने प्रिंस सूर्य

सूर्य ....... किरण का कहना है की अगर राजसिंघण के रिकत रहने से हे इन घटनाओ का आरम्भ हुआ होता तो ड्रैगन्स में परिवर्तन आना संभव हो सकता है किन्तु ड्रैगन लोक की प्रजा में इसका प्रभाव पड़ना संभव नहीं जो की मुझे भी उचित कारन लगता है गुरुदेव

गुरुदेव ........ उचित कहा पुत्री किरण ने पुत्र पहले हमें भी ये घटनाये सामान्य लगी किन्तु जितना साफ ये घटनाये घाट रही है उतनी साफ है नहीं आवर इस लिया तुम्हे ड्रैगन लोक जाना होगा पुत्री किरण मानसी आवर जुली के साथ में

सूर्य .....जी गुरुदेव जैसा आपका आदेश

नियों ....... गुरुदेव राजतिलक किस प्रिंसेस का करना उचित होगा

गुरुदेव ....... ये दायित्व पुत्र सूर्य का है पुत्री जूलिया का अभी राजतिलक होना संभव नहीं है ऐसे में केवल पुत्री किरण आवर मानसी में से किसी एक का चयन करना होगा

सूर्य ....... गुरुदेव मानसी अभी परिपक्व नहीं है की जो ड्रैगन लोक का सम्पूर्ण दायित्व संभल सके अभी बहुत कुछ उसे शिखना होगा

गुरुदेव ........ उचित निर्णय है पुत्र हमारा भी यही निर्णय है की पुत्री किरण इस योग्य है की वो ड्रैगन लोक के दायित्व को अपनी सूज भुज से संभल सके

सूर्य ...... गुरुदेव एक विनती है

गुरुदेव ....... कहो पुत्र क्या कहना चाहते हो.

सूर्य ....... गुरुदेव किरण तब ताज हे ये दायित्व संभालेगी जब तक जूलिया इस योग्य न हो जाये उचित समय आने पे किरण अपना दायित्व आवर अधिकार जूलिया को सौंप देगी

नियों ....... किन्तु इसकी आव्सय्कता क्या है प्रिंस सूर्य आप हे कुछ कहे गुरुदेव

गुरुदेव ........ तुमने ऐसी इच्छा जाहिर की है तो मंतव्य भी स्पष्ट करो पुत्र आवर देवसफ्फी नियों की उत्सुकता वह संदेह को दूर करो

सूर्य ........ जी गुरुदेव जब हम ड्रैगन लोक के सफर पे निकले आवर अंतिम पादप पे जूलिया ने भले हे किरण को जूलिया ने अपनी बड़ी बहन मान बड़ी प्रिंसेस का अधिकार दिया वो उसका किरण के पार्टी प्रेम था यहाँ तक सब उचित है गुरुदेव किन्तु किसी आवर का अधिकार किसी आवर को सौंपना उचित तो हो नहीं सकता जो अधिकार जुली है है वो किरण कभी स्वीकार नहीं करेगी भले हे जूलिया अपने अदिकार ख़ुशी ख़ुशी किरण को सौंपना चाहे राजतिलक के पश्चात किरण भले हे ड्रैगन लोक की क्वीन बन जाये पैर जैसे हे उचित समय आएगा वो जुली को उसका अधिकार सौंप कर उस पढ़ से मुक्त हो जाएगी

गुरुदेव. ....... सर्वथा उचित कहा पुत्र तुमने पुत्री किरण का जो संभव है वो किसी के अधिकार को स्वयं ग्रहण नहीं करेगी फिर चाहे सामने वाला अपनी इच्छा से अपनी ख़ुशी से हे वो अधिकार पुत्री किरण समर्पित करे

देवसफ्फी नियों ....... उचित है गुरुदेव हम प्रिंस सूर्य का मंतव्य समाज चुके है अब आप हे कोई उचित समय देख सुबह मुहूर्त निकालिये आप को हे अपने हाथो से राजतिलक की विधि पूर्ण करनी होगी

गुरुदेव ....... नहीं देवसफ्फी नियों जो अधिकार आपका उसे हम ग्रहण नहीं कर सकते ड्रैगन लोक के देवसफ्फी होने के नाते ये अधिकार भी आपका हे है

सूर्य ........ गुरुदेव मुझे आपसे किरण को ले कर कुछ बात करनी थी

गुरीदेव ...... अवश्य पुत्र कहो

सूर्य ........ यह घटना चाटने से पूर्व मैं आपसे भेंट करने आने वाला था कुछ समय से किरण को ध्यान में एक ऊर्जा का आभाष होता है जिसमे से हर समय विचित्र मंत्र उच्चारण दौनी किरण को सुनाई देती है मैं स्वयं भी उस ऊर्जा किरण से ध्यान में जुड़ कर के मह्सुश कर चूका हूँ आवर उन मंत्रो का उच्चारण भी सरवन ( सुन ) कर चूका हूँ

गुरुदेव ....... बड़ी हे विचित्र बात है ये तो पुत्र हमें भी पुत्री किरण से कुछ ऊर्जा का आभाष हुआ था किन्तु हम पता करते उस से पूर्व हे वो ऊर्जा विलुप्त हो चुकी थी फिर हमारा इस आवर ध्यान नहीं गया तुम्हारी स्वस्थ के चलते हम पता करते है पुत्र

सूर्य .....जी गुरुदेव

गुरुदेव ......... पुत्र आज मध्यरात्रि तुम्हे यहाँ परीलोक में पुत्री किरण के साथ उपस्थित होना है भूतकाल समय यात्रा के लिया

सूर्य ....... जी गुरुदेव जैसा आप कहे

गुरुदेव सूर्य को कुछ सोचता देख फिर से बोल उठे

गुरुदेव. ....... क्या हुआ पुत्र किस गहन विचार में खोने लगे

सूर्य ....... गुरुदेव भूमिपूजन के समय मेरी असुरगुरु जी से भेंट हुई थी आवर उन्होंने एक आग्रह भी किया है

गुरुदेव ........ कैसा आग्रह पुत्र सूर्य ऐसा क्या कहा उन्होंने

सूर्य ........ गुरुदेव कुछ समय पूर्व वो सुक्रलोक अपने गुरु शुक्राचार्य से भेंट करने गए थे असुरगुरु के पढ़ का त्याग करने आवर उस पे असुरगुरु शुक्र से भेंट करने

गुरुदेव ........ ये तो होना हे था पुत्र आज नहीं तो कल तुम्हारे वचन ने उनके समक्ष कोई आवर मार्ग छोड़ना भी नहीं देखा जाये तो ये उचित निर्णय था उनका क्यों की जब उन्हें देवी मोहिनी के वास्तविकता सत्य का ज्ञान हमसे हो चूका था तो उनके लिया नरकासुर के पार्टी जो क्रोध घृणा था वो उनके असुरगुरु पद की छवि दुर्मिळ कर देता

किसी भी व्यक्ति का अपने पढ़ पे रह कर कर्त्तव्य निष्ठां से अपने कार्य न करना उस पद की छवि को कलंकित करना होता है उन्होंने उचित समय पे उचित निर्णय लिया

सूर्य ....... जी गुरुदेव किन्तु असुरगुरु शुक्र ने उन्हें असुरगुरु पद से मुक्त करने के साथ साथ दंड सवरूप असुरलोक से निष्कासित भी कर दिया है अब उन्होंने पृथ्वीलोक पे रह कर हे भक्ति भाव में हे अपना जीवन बिताने का सोचा है

गुरुदेव ....... ये तो सर्र्वथा उचित निर्णय है ये दंड नहीं है पुत्र उनके लिया एक सवर्णिम अवसर है किन्तु यही कारन तो नहीं हो सकता जिस से तुम समस्या में हो पुत्र

सूर्य ...... जी गुरुदेव असुरगुरु शुक्र ने मुझसे पुर मानसी से भेंट करने की इच्छा जाहिर की है आवर आप तो जानते है गुरुदेव की असुरगुरु शुक्र असुरो के गुरु हितेषी है किन्तु साथ हे वो पर भी भक्त भी है एक सिद्ध तपस्वी अमूल्य ज्ञान के बन्दर जिनकी भक्ति से परशान हो परबु ने उन्हें वरदान स्वरुप संजीवनी विद्या जैसा दिव्या ज्ञान दिया है

नियों ........ उनके विषय में हमने भी बहुत सुना है

गुरीदेव ............ तुम्हे ज्ञात है पुत्र असुरगुरु शुक्र का प्रथम नाम शुक्र नहीं था उनका प्रथम नाम उष्ण था वो ऋषियों में शेठ महृषि भृगु के वह हरिण्यकश्यपु की पुत्री दिव्या के पुत्र थे राजा विमोचन वह महँ राजा बाली के गुरु भी थे असुरगुरु शुक्र इनकी पहली पत्नी खेती जिनसे इन्हें दो पुत्र को प्राप्ति हुई देता आवर विदथा की

जब उनके ज्ञान के अनुरूप उन्हें पद की प्राप्ति नहीं हुई तब उन्होंने असुरो का गुरु बनने का संकल्प लिया जबकि ज्ञान में ये देव गुरु से काम नहीं थे किन्तु समय चक्र ने उनके भाग्य में असुरो का गुरु बनना लिखा था इनके हे ज्ञान वह बूढी के कारन असुरो ने अनेक बार देवासुर संग्राम जैसे महाविनाशकारी योध में असुरो ने विजयी प्राप्त की किन्तु आज तक जिस शिष्य की तलाश में थे उनको ऐसा एक भी शिष्य नहीं मिला जो उनके ज्ञान को गठन कर सके असुरो में सयम नहीं होता पुत्र जिसके चलते गलत निर्णय लेना गुरु आज्ञा का उलंगन करना इनकी एक पुत्री थी देवयानी जिनका प्रेम देव गुरु bhara***ti के पुत्र कच से था दोनों का प्रेम विवाह हुआ था

सूर्य ....... जी गुरुदेव अब आप हे बताइये गुरुदेव मुझे उनसे भेंट करने जाना चाइये या नहीं

गुरुदेव ........ तुम्हारा मत क्या है इस विषय पे पुत्र सूर्य

सूर्य ........ गुरुदेव भले हे वो असुरगुरु है किन्तु एक सिद्ध तवशवि भी अगर उनके नाम से असुरगुरु हटा दिया जाये तो उनके समक्ष कोई ज्ञानी विद्वान् नहीं मैं भी उनसे भेंट करने का इच्छुक हूँ गुरुदेव उनके सानिध्य में अवश्य उनके ज्ञान भंडार से कुछ अमूल्य ज्ञान के कतरे मुझे भी प्राप्त होंगे किन्तु आपकी आज्ञा के बिना उनसे मैं भेंट नहीं कर सकता गुरुदेव

गुरुदेव ....... तुमने उचित कहा पुत्र सूर्य वो उनके पास अनमोल ज्ञान भंडार है जिसके विषय में हम जानते तक नहीं तुमने उनके असुरगुरु को नहीं बल्कि एक गुरु एक सिद्ध तपस्वी ऋषि को देखा आवर उनसे ज्ञान गठन करने की इच्छा व्यक्ति की हमें उस से पर्शान्ता है पुत्र ज्ञान किसी से भी प्राप्त हो उसे गठन करना चाइये ज्ञान बुरा या अच्छा नहीं होता पुत्र अच्छा या बुरा होता है वो जो उस ज्ञान को ग्रहण करता है आवर उसका किस तरह प्रयोग करता है हमें ख़ुशी होगी अगर तुम उन्हें वही मान सामान आवर आदर डोज जो हमें देते हो तो

सूर्य ...... जी गुरुदेव जैसे आपकी इच्छा

गुरुदेव ....... अब जाओ पुत्र पुर रात्रि को उचित समय लौट आना हम तुम्हे भूतकाल में भेजने की तयारी करते है

सूर्य .....जी गुरुदेव परनाम गुरुदेव परनाम देवसफ्फी

सूर्य गुरुदेव आवर देवसफ्फी नियों से आज्ञा ले परिमहल पहुंचा आवर सभी से भेंट कर पृथ्वीलोक के लिया निकल गया

सूर्यगढ़ ......... रेखा जी ........ मुझे तुमसे ये उम्मीद नहीं थी शालिनी इतना सब कुछ हो गया आवर तुमने बताया तक नहीं हमें

शालिनी जी ........ सॉरी दीदी पैर उस समय आप समाज सकती है मेरी क्या हालत हुई होगी वो तो सपना ने समय रहते किरण को उस पीड़ा से बहार निकला आवर गुरुदेव के आज्ञा अनुसार हमने किसी तरह सूर्य को उस आघात से बहार निकला वर्ण मैंने तो उम्मीद हे खो दी थी दीदी

रेखा जी ......... रोटी नहीं शालिनी ईश्वर कभी अच्छे लोगो के साथ बुरा नहीं करते तुम्हारी क्या हालत हुए होगी ये तो मैं केवल कल्पना हे कर सकती हूँ मेरी बहन भले हे मैं सूर्य को कोमल से आदिक प्रेम करती हूँ पैर तुम्हारी तुम्हारी तो उसमे सांसे बस्ती है उसे उस हाल में देख तुम पे क्या बीती होगी उसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है

शालिनी जी ........ माँ सा को इस बारे में कुछ भी न बिताना दीदी आप सायद वो ये सब सुन कर

रेखा जी ........ नहीं बताउंगी किसी को भी मैं कुछ भी तुम आराम करो मैं बच्चियों से मिल कर आती हूँ

शालिनी जी ....... यहाँ केवल स्वीटी आई है बाकि सब को दिल्ली हे छोड़ कर आई हूँ मैं

रेखा जी ........ ठीक है तुम आराम करो मैं माँ सा बाउजी को चाय दे कर आती हूँ आवर मनका दीदी को भी उठा देती हूँ

रेखा जी अपना भीगा हुआ चेहरा साफ कर बहार किचन में जा कर चिअ बनाने लगती है उदार किरण मेर्री जी के कमरे में उनसे कुछ बाते कर रही थी

साम को करीब 7 बजे सूर्य भी सूर्यगढ़ आ पहुंचा

दादा जी ....... क्या बात है बरखुरदार आजकल अपने दादा से नाराज हो क्या जो दिखाई देना तो दूर बात भी नहीं करते

सूर्य ....... ऐसा कुछ नहीं है दादा जी वो गुरुदेव से मिलने परीलोक गया था अभी सीधा यही आ रहा हूँ रात को दिल्ली जाना है फिर कुछ समय फिर से बिजी हो जाऊंगा ये लीजिये आपकी मन पसंद चीज़

दादाजी सूर्य के हाथ में वैसा हे सुराही देख कर चहक उठे उनकी नारंगी एक पल में गायब हो गयी पैर फिर भी जूठी नाराजगी दिखते हुए उन्होंने वो मदिरा से भरी सुराही ले कर एक तरफ रख दी जैसे उन्हें कोई दिलचस्पी हे न हो

दादा जी ....... इस रिस्वत से मेरी नाराजगी ख़तम नहीं होने वाली समजे तुम बीटा काम से काम दिन में एक बार तो मिल सकते हो भले हे 5 मिनट्स हे सही

सूर्य ....... सॉरी न बाउजी सच में बहुत बिजी था नहीं तो आपको नाराज कर सकता हूँ क्या भला अभी दादी जी से भी नहीं मिला सीधा आपके पास हे आया हूँ आवर है कुछ दिन बिजी रहूँगा तो अभी से बता रहा हूँ

दादा जी ........ ठीक है पैर ैदा क्या कर रहा है जो इतना बिजी हो जायेगा

सूर्य ........ बाउजी अभी तो मुझे आवर मानसी को कही जाना है वह कितना समय लगेगा पता नहीं उसके बाद ड्रैगन लोक जाना है है वह कुछ प्रॉब्लम हो रही है आवर आपकी बेटी किरण का राजतिलक होना है

दादा जी ....... क्या मतलब

सूर्य ....... दर्शक बाउजी जूलिया ड्रैगन लोक की प्रिंसेस है आवर अभी उसकी सदी नहीं हुई है न तो उसका राजतिलक हो नहीं सकता ऐसे में ड्रैगन लोक के रानी किरण को बनना पड़ेगा जब तक जूलिया की सदी न हो जाये आवर वो ये दायित्व ठीक से सँभालने के योग्य न हो जाये

दादा जी ...... मतलब किरण बेटी वह की रानी बनेगी आवर तुम वह के राजा

सूर्य ..... है ऐसा हे पैर कुछ समय के लिया हे

दादा जी ....... है पर तुम तो राजा हे रहोगे न क्यों की जूलिया की सदी भी तो तुमसे हे होगी न

सूर्य .....जी दादा जी

दादा जी ....... ठीक है बीटा अब जा कर अपनी दादी जी से भी मिल लो नहीं तो खेर नहीं तुम्हारी

सूर्य ..... जी दादा जी आवर है इसे संभल कर रखना ये जादुई सुराही है इसमें से वो कभी ख़तम नहीं होगी पैर आपको उतनी हे मिलेगी जितनी आपके लिया उचित है

दादा जी ....... नहीं बीटा ये सुंडी को हे लूंगा अपने यार के साथ अभी नहीं

सूर्य अंदर जा अपनी दादी जी से मुलता है आवर काफी देर बात करता है फिर रेखा जी आवर मेनका जी के साथ भी

मेनका जी सूर्य को साथ ले उपरवाले रूम में जा पहुंची आवर रूम लॉक कर सूर्य को बे थषा चूमने लगती है

सूर्य ...... रात तक का इन्तजार तो कर लिया होता बुआ सा

मेनका जी ..... रात को तेरी स्वीटी आवर मनु तुम्हे छोड़ने वाली नहीं मेरे लिया आवर रात में तेरे फूफा जी भी होते है

मेनका जी सूर्य को बीएड पे गुरा उसकी बेल्ट खोल पेण्ट को अंडरवियर सहित उस से अलग कर खुद भी ब्रा पेंटी में आ जाती है

सूर्य के ार्ड उत्तेजित लिंग को अपने कोमल हाथो में थम मुँह में भर चूसने लगती है

सूर्य खुद से हे अपनी t-shirts उतर कर साइड में रख देता है





सूर्य ...... क्या बात है बुआ सा आप कुछ ज्यादा हे जल्दी में लग रही है लगता है आपकी गर्मी कुछ ज्यादा हे भाड़ चुकी है

मेनका जी ....... हम औरतो को इसी उम्र में तो आ कर सरीर की गर्मी भड़ती है आवर मर्द लोग इस उम्र में औरतो से दुरी बनाने लगते है

ऐसे में हम औरतो पे क्या गुजरती है ये हम हे जानती है

सूर्य ....... ये बात भी सही है आपकी फूफा जी से सम्बन्ध बहाया नहीं क्या अपनी इन दिनों.

मेनका जी सूर्य का लैंड मुँह से निकल ब्रा पेंटी उतर उसके सामने लेट जाती

सूर्य बीएड से खड़ा हो मेनका जी के थूक से भीगा लैंड उनकी गरम भल चिश्ती छूट पे जिसशने लगता है

मेनका जी ...... उम्मम्मम अह्हह्ह्ह्ह अब गुस्सा भी दे ज्यादा टाइम नहीं है कोई भी आ सकता है आवर तेरे फूफा जी के साथ अब वो मज़ा नहीं आता एक तो उनकी उम्र हो चली है ऊपर सेटेरे जैसा नहीं है जा उनका अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आराम से इसको एक बार लेने लायक अभी भी नहीं हुई हूँ





सूर्य मेनका जी से बाते करता हुआ डेरी डेरी उनकी छूट चुदाई करने लगता है

मेनका जी की छूट में कुछ आदिक हे मात्रा में कमरष का बहाव हो रहा था जिस के चलते सूर्य जल्दी हे अपनी ले पाकर मेनका जी की छूट से अपने अंडकोष भिड़ते हुए पुरे जोश में मेनका जी की गर्मी संत करने लगता है

जैसे हे मेनका जी ने अपना कामराह छोड़ना सूर्य चुदाई रोक उन्हें चूमने लगता है





मेनका जी ....... उम्म्म. अह्ह्ह्ह सूर्य तुम्हारे सामने पता नहीं क्यों मैं पल भर भी ठीक नहीं पति हूँ उम्मम्मम आवर तुम्हारे फूफा मुझे ठीक से संत नहीं कर पते खुद झाड़ जाते है

सूर्य....... अब आप पायलट जाइये बुआ सा

सूर्य के काने पे मेनका जी वही बीएड पे सूर्य के सामने कुटिया बन जाती है

फिर जो सूर्य ने मेनका जी की आधे घंटे तक चुदाई की मेनका जी का अंग अंग चरमरा उठा

मेनका जी ........ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह बस कर सूर्य मेरी छूट में जलन सुरु हो गयी

सूर्य ....... अह्हह्ह्ह्ह कुछ देर आवर बुआ बस मेरा भी होने हे वाला है

मेनका जी ......अब अगर एक मिनट्स भी तुम्हारा ये मुसल चला तो सायद खून हे निकल आये मैं सब के सामने चल भी नहीं पाऊँगी अह्ह्ह्हह बस कर सूर्य

सूर्य अपना लैंड उनकी छूट से निकल देता है मेनका जी अपनी दुखती छूट का दर्द भुला कर सूर्य के लैंड को चूसने लगती ताकि सूर्य भी सिगरा हे झाड़ जाये

कुछ देर बाद सूर्य के लैंड से निकली वीर्य की बौछार मेनका जी के चेहरे आवर बड़े बड़ी चूकिए को सफ़ेद पानी से नहला चुकी थी

मेनका जी ....... ये क्या किया मुझे पूरा गन्दा कर दिया तुमने

सूर्य ..........आपने हे तो बहार निकला न मई तो आपकी मटकी भरने वाला था

मेनका जी ....... आवर अगर उस से मैं प्रेग्नेंट हो जाती तो क्या

सूर्य ....... आपने वो रास्ता पहले हे बंद कर रहा है बुआ सा

मैं जनता हूँ प्रीति के समय जो प्रॉब्लम हुई थी उस से आपकी फूफा जी ने नसबंदी करवा दी थी ताकि फिर से कोई बचा न हो आवर न आपको फिर से वो सब सहना पड़े अब जाइये आवर फ्रेश हो जाएये

मेनका जी ...... आवर तुम तुम्हारा क्या

सूर्य ............ मैं अपने रूम में फ्रेश हो जाऊंगा उम्म्म्महा

सूर्य अपने कपडे पहन वह से निचे अपने रूम की आवर निकल जाता है ..............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .............

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...................

सॉरी दोस्तों आज टाइपिंग एरर बहुत हो रहा है साथ हे पिछ अपलोड करने में भी प्रॉब्लम हो रही है इस लिया अपडेट थोड़ा सॉर्ट हे पोस्ट कर रहा हूँ ..........
 
Back
Top