Incest Dil ka raja ( incest magic adultery ) - Page 19 - SexBaba
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Incest Dil ka raja ( incest magic adultery )

अपडेट. 150

रुक्मणि ......नहीं बीटा मई. उसे उसके बाप जैसा नहीं बनने दूंगी

गीता ठाकुर ......बीटा खाने का वक़्त हो गया है खाना खा कर जाना अब से ये भी तुम्हारा घर है

सूर्य ......जोर चची जी खाना भी खाऊंगा पैर तब जब आप चारो वह आएंगे पहले

गीता ठाकुर ......जरूर आउंगी बीटा जल्दी हे

सूर्य ......अभी मैं कुछ दिनों के लिया बहार जा रहूं हूँ आते हे कॉल करता हूँ

गीता ठाकुर .......ठीक है बीटा अपना ख्याल रखना

गीता रुक्मणि विधि गायत्री एक बार आवर सूर्य से गले मिल उसे विदा करती है

सूर्य अपनी बाइक उठा सूर्यगढ़ की तरफ निकल जाता है .................

अब आगे ........

सूर्य जब जंगल से अपना अभ्यास कर लौटा तो थोड़ा परेशान था

जिसे देखते हे शालिनी जी समाज जाती है की कोई बड़ी बात जरूर है वर्ण सूर्य परेशान नहीं होता

सूर्य सीधा अपने रूम में जाता है आवर फ्रेश होने लगता है

पीछे पीछे शालिनी जी भी सूर्य के रूम में गुस्स जाती है

पैर तब तक सूर्य बाथरूम में गुस्सा चूका था

उसे तो ये भी ज्ञात नहीं था की उसकी माँ भी उसके पीछे पीछे रूम में आई है

सूर्य बाथरूम में गुस्ते हे शावर ों कर उसे निचे खड़ा hi एक एक करके अपने कपडे उतरने लगता है

सूर्य काफी देर तक शावर के निचे आँखे बंद किये खड़ा रहता है

शालिनी जी .......ये सूर्य आज इतना टाइम क्यों लगा रहा है फ्रेश होने में कोई बात नहीं बाद में बात करती हूँ

शालिनी जी जब बहार जाने लगी तभी उनकी नजर बाथरूम के खुले गेट पे पड़ी

शालिनी जी .....ये भी न इतना बड़ा जो गया है पैर ये पता नहीं की नहाते वक़्त गेट बंद रखना चाइये

शालिनी जी जैसे हे गेट बंद करने के लिया दरवाजा खींचने के लिया हाथ बढाती है ांयश हे उनकी नजर सामने सूर्य पे पद जाती है






सूर्य अभी भी आँखे बंद किये शावर के निचे खड़ा था

शालिनी जी की नजर अपने बेटे के विक्रम लैंड को देख कुछ पल इस्पे हे रुक जाती है






जो की इस वक़्त हाफ ेरेक्ट हालत में हे काफी खुखार लग रहा था

शालिनी जी का दिल डाक डाक करने लगता

शालिनी जी जल्दी से पीछे होती है आवर बिना कोई आवाज किये बाथरूम. को खुला छोड़ रूम को बहार से लॉक कर चुप चाप अपने रूम में आ जाती है

शालिनी जी ......ओह माय गॉड मेनका दीदी सच कह रहे थे ये तो बड़ा खतरनाक है वह से बागवान हे जाने क्या होगा उसका जो इसकी बीबी बनेगी इतना बड़ा तो शिव का भी नहीं है

ची छू ये मैं क्या सोच रही हूँ ओह सहित ये मेरे पंतय क्यों गीली जो गई है

शालिनी जी जल्दी से अपना रूम लॉक करती है आवर अपना लहंगा उतर कर वही बीएड पे अपने पंतय हटा कर देखती है जो की बहुत ज्यादा गीली हो चुकी थी






शालिनी जी .......ये क्या ये तो पूरी भिगान चुकी है उसके देखते हे इतना तो सेक्स करते वक़्त भी नहीं होती थी

अब मुझे फिर से नहाना पड़ेगा

शालिनी जी वही अपने कपडे उतर ब्रा पंतय में हे बाथरूम में गुस्स जाती है

उनकी आँखों के सामने बार सूर्य का लैंड गम रहा था

शालिनी जी .....बार बार मेरी आँखों के सामने वही दृश्य क्यों गम रहा है

शालिनी जी को पता भी नहीं चला कब उनकी ऊँगली या हरकत में आती है आवर कब वो अपनी छूट में ऊँगली करने लगती है

आखिर में शावर के निचे सूर्य का नाम लेते हुए भभला कर झड़ने लगती है

सूर्य अपने रूम से निकल कर निचे अपने दादा जी के रूम में पंहुचा है जो इस वक़्त अपने दोस्त समधी विक्रम सिंह राणा जी से फ़ोन पे बात कर रहे थे

सूर्य को परेशान देख वो बाद में बात करने का बोल कर फ़ोन कट कर देते है

दादा जी ......क्या बात है आज मेरे शेर बेटे का चेहरा जो हमेशा खिला रहता है आज वो मुरझाया हुआ क्यों है

दादी जी .......ीदार आ मेरे बचे मेरे पास

सूर्य अपनी दादी जी के बगल में जा बैठा

दादी जी सूर्य का सर अपने ग्लैड में रख उसके बालो में प्यार से हाथ फिरने लगती है

दादी जी ......क्या बात है बीटा कोई परेशानी है क्या

सूर्य .....जी नहीं दादा कोई परेशानी नहीं है वो मैं माँ के साथ बहार जा रहा हूँ कुछ देर में लौट आऊंगा

दादी जी ......ठीक है बीटा आराम से आना आवर दूप है तो ज्यादा दूप में गुमना फिरना नहीं

सूर्य .....जी दादी जी अच्छा दादा जी मैं चलता हु

सूर्य वह से निकल कर अपनी माँ को त्यार होने का बोल देता है आवर राधा सपना किरण पायल प्रीती अलीना मानसी कोमल को मैसेज कर अपने रूम में आने को कहता है

राधा ......क्या हुआ सूर्य आपने हम सब को यहाँ क्यों बुलाया है

सूर्य ......पहले गेट बंद करो फिर बताया हूँ

पायल गेट को लॉक कर देती है सभी सूर्य को चारो तरफ से घेर कर बेथ जाती है

सूर्य ......आज सैम को हम सब बहार जा रहे है कुछ दिनों के लिया तुम सब त्यार रहना

किरण .........क्या मम्मी पापा इतने दोनों के किये मन जायेंगे

राधा ......क्या हम कही पिकनिक पे जा रहे है

सूर्य .....है ऐसा तुम समाज सकती हो राधा रानी सब को नहीं ले कर जा सकते है

अलीना .....वैसे कोनसी जगह जा रहे है हम सब ताकि वह के लिया अच्छे प्लान बना ले

सूर्य एक बार सबके चेहरे को देखता है जो सब सूर्य को हे देख रहे थे

सूर्य ........परीलोक

किरण पायल अलीना प्रीती सपना .....क्या सच में हम सब परीलोक जा रहे है

सूर्य ......है ये सच है हम सब परीलोक जा रहे है

मानसी ......पैर आप तो इंसान है न फिर वह कैसे जा सकते है

किरण ......ये आपको वह जा कर पता चल जायेगा वैसे कोण कोण जा रहा है हमारे साथ वह

सूर्य .........गुरुदेव का कहना है की हमारे परिवार को हमारी सचाई का पता चल जाना चाइये ताकि उन्हें हमारे रिश्ते को सवीकार करने के लिया पर्याप्त समय मिल जाये

किरण ......आपने क्या सोचा है फिर इस बारे में

सूर्य .....मैं सोच रहा हूँ पहले दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी के साथ साथ दोनों ममी माँ मम्मी आवर बुआ को ले कर चालू

अलीना .....आवर मेर्री दीदी उनका क्या उनके बिना मैं नहीं जाउंगी पहले कह देती हूँ

सूर्य ........एक बार फिर सोच लो मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है

तभी सूर्य के मस्तिष्क में गुरुदेव की आवाज सुनाई पड़ती है

( गुरुदेव .....पुत्र मेर्री का आना जरुरी है पुत्र

सूर्य ......जैसा आपका आदेश गुरुदेव )

किरण .....क्या कहा गुरुदेव ने

सूर्य ......तुम्हे कैसे पता स्वीटी

किरण ......आपकी आँखे बंद होते हे समाज गई थी की जरूर गुरुदेव का सन्देश मिला होगा आपको

सूर्य .......ठीक हल अलीना मेर्री को साथ ले चलना पैर याद रहे वह जो कुछ भी पता चले तुम सब नाराज नहीं होगी मुझसे

किरण .....हहहहए ये आपको पहले सोचना चाइये था वैसे पापा लोगो का क्या क्या उन्हें हमारे सच का पता नहीं चलना चाइये

सूर्य ....वो वह चल कर देखेंगे इन सब को त्यार करने का काम तुम लोगो का है इन्हे बिना सच पता चले

मैं बहार जा रहा हूँ माँ को ले कर उन्हें मैं सच बता दूंगा थोड़ा बहुत

kiran........ok दादा जी दादी जी को मानाने की जिम्मेदारी मेरी

कोमल .....माँ को मैं मन लुंगी

पायल ......मेरी माँ को कैसे मन्ना है मैं जानती हूँ

सूर्य ......स्वीटी दादा जी को बोल कर सूर्यगढ़ से सबको यही बुला लेना

किरण ......ठीक है

तभी बहार से शालिनी जी की आवाज सुनाई देती है

सूर्य ......ok अब मैं निकलता हूँ तुम सब लग जाओ काम पे

सूर्य सबको समजा कर अपनी माँ को ले कर बहार निकलता है

सूर्य गेराज से कार निकलता है

शालिनी जी .....हम तो बाइक से जाने वाले थे न

सूर्य .......माँ दूप बहुत तेज है आपकी तबियत ख़राब हो जाएगी कार से हे चलते है

वैसे भी पापा ने जो कार बर्थडे पे गिफ्ट की अब तक उसका टेस्ट ड्राइव भी नहीं हुआ है आप हे उसका टेस्ट ड्राइव कीजिये

सूर्य अपनी बंव की चाबी अपनी माँ को दे देता है

शालिनी जी .....नहीं बीटा तुम हे चलाओ इसे तुम्हारे पापा ने तुम्हे पहली कार गिफ्ट की है

सूर्य .......अब तो आप हे इसे ड्राइव करेंगे नहीं तो इसे मैं हाथ भी नहीं लगाऊंगा

सूर्य को ज़िद पे अड़ता देख शालिनी जी खुद ड्राइविंग सीट संभालती है वही सूर्य उनकी बगल में जा बैठा

यहाँ आने के बाद उनका ये दूसरा मोमा था जब वो खुद कार ड्राइविंग कर रहे थे सूर्य अपने माँ के चेहरे पे आई ख़ुशी को देख रहा था

दरशल शालिनी जी को नई कार्स ड्राइविंग काटना उनको काफी पसंद था सूर्य ुए बात जनता था की उसकी माँ कार्ड ड्राइव करेंगे तो काफी कुछ होगी

शालिनी जी फटते से बड़ी हे सफाई से कार को 100 से ऊपर डॉटा हे हुए सूर्य ग्रह से निकल गई सक्तिपुर की तरफ

सूर्य ..........माँ कैसे लग रहा इतने दिनों बाद खुल कर कार ड्राइव करते हुए

शालिनी जी ......बहुत अच्छा लग रहा है बीटा थैंक्स बीटा

सूर्य ......it's ok माँ मैं जनता हूँ आपको कार ड्राइव कर्जा कितना पसंद है

शालिनी जी .......वैसे तुम्हारे पापा को मैंने हे कहा था की तुम्हे यही कार गिफ्ट करे ये मेरी फवोरिट कार्स में से एक है तुम पसंद आई

सूर्य ......आपकी चॉइस बहुत कमल की है माँ कार्स को ले कर के

कुछ हे देर में शालिनी सक्तिपुर क्रॉस करते हे आगे निकल गई

सूर्य ........माँ आपको कुछ बताना था

शालिनी जी ......क्या अभी जरुरी है मैं ड्राइव एन्जॉय कर रही हूँ

सूर्य .......ok माँ बाद में बात करता हूँ

शालिनी जी .....हहहहए it's ok बीटा आप स्व भाड़ कर नहीं है मेरी ख़ुशी चलो बोलो

सूर्य .....वो माँ मुझे कुछ दिनों के लिया बहार जाना था साम को

सूर्य की बात सुन कर शालिनी जी स्पीड काम कर देती है ऑलमोस्ट 50

शालिनी जी .......क्या जाना जरुरी है बीटा अभी तो तुम लौटे हो बहार से

सूर्य ......माँ जरुरी नहीं होता तो क्या आपसे दूर जाता मैं

शालिनी जी .....कब तक लौट कर आओगे

सूर्य ........पता नहीं माँ वह कितना समय लग सकता है

शालिनी कार को सिटी 1 से थोड़ा पहले हे रोड के साइड में एक पेड के निचे कड़ी कर देती है

शालिनी जी ......इस लिया हे मैंने तुम्हे आर्मी ज्वाइन नहीं करना देना चाहती थी.


तुम आर्मी छोड़ दो बीटा क्या कमी है हमें

सूर्य .......माँ आर्मी के काम से नहीं जा रहा हूँ इस बार

आवर माँ मैं आर्मी पैसो के लिया ज्वाइन नहीं किया था

ये आप भी जानती है इन सब में आने के पीछे यही वजह थी की अपने परिवार को सुरक्षित रखने योग्य बन सकू

शालिनी जी ......फिर कहा जा रहे हो तुम आवर अब तो तुम उस काबिल हो को हम सबकी रक्षा कर सको

सूर्य .....माँ मैंने आपसे बहुत कुछ छुपाया है जो आज आपको बॉटने जा रहा हूँ सायद आपको यकीं न हो पैर जी कहूंगा वो सच है माँ

शालिनी जी .....बीटा तुम मुझे डरा रहे हो ऐसे बाते करके ऐसा क्या है जो तुमने छिपाया है है

सूर्य .......माँ आज मैं अकेला नहीं आपको भी मेरे साथ चलना है कल जो ऋषि आये थे उनमे से एक जिन्होंने सफ़ेद वस्त्र दर्जन किये थे वो मेरे गुरुदेव है परीलोक के राजगिरि आवर साध्वी जी जो की एक पारी है वो उनकी हे पुत्री है

शालिनी ji.......hehehe अच्छा जोके था बीटा अब चले

सूर्य .....मुझे पता था आप ऐसा हे कुछ कहेंगे

जरा अपने सामने देखना आप

शालिनी जी .....सामने क्या है खली सड़क आवर कुछ है भी तो नहीं

सूर्य .......वयोम सकती कहा हो आप दोनों अपने वास्तविक रूप में माँ के सामने आओ

सूर्य की बात पूरी होते हे कार के सामने वयोम अपनी जिनि रूप में आवर सकती अपने एंगेल रूप में प्रकट हो सूर्य के सामने जुख कर सामान करते है

शालिनी जी वयोम का विशाल जिनि रूप देख दर जाती है आवर जल्दी से सूर्य के सीने में अपना सर छिपा लेती है

सूर्य ......माँ डरो नहीं ये हमारे अपने है वयोम आवर सकती देखो तो उन्हें उनसे डरने की जरुरत नहीं है

शालिनी जी सूर्य स्व चिपके हुए डेरी डेरी दोनों को देखती है

सूर्य ....आप दोनों पहले वाले रूप में आ जाओ

वोयोम आवर सकती अपने परतविलोक के रूप में आ जाते है

शालिनु जी ........क्या तुम सच कह रहे थे

सूर्य .....आपकी कसम माँ ये सब सच है आवर मैं सच कह रहा था वयोम जिनलोक से है आवर सकती परीलोक से है जो हमारे घर में साध्वी जी थी वो दरशल एक पारी है है दादी जी आवर दादा जी ये बात जानते है आवर सायद कुछ हद तक मेरी वास्तविक सचाई भी जानते है

शालिनी ji.....tumhari वास्तविक सचाई कुछ नहीं है तुम मेरे बेटे मेरे जिगर के टुकड़े हो सूर्य यही तुम्हारी सचाई है आवर कुछ नहीं

शालिनी जी के मन में अचानक से अपने बेटे को खो देने का दर घर करने लगता है

सूर्य .....वयोम सकती साम को मिलते है परीलोक जाने के वक़्त

वयोम सकती ......ठीक है सूर्य हम चलते है

दोनों वह से गायब हो जाते है

सूर्य .........माँ आप चिंता न करे आपसे मुझे कोई नहीं चीन सकता है मेरी सचाई कुछ भी हो पैर मैं आपका बीटा हूँ आप पहले भी मेरी माँ थी आवर अभी भी आवर आगे भी

शालिनी जी ....तू सच कह रहा है न बीटा मुझे इन सब से दर लगता है

सूर्य .....माँ आवर भी बहुत कुछ है जो आपको जानना होगा

शालिनी जी .......क्या तुम भी उनमे से एक हो

सूर्य ......किनमे से माँ

शालिनी जी ......वयोम आवर सकती में से

सूर्य ......हाहाहाहा माँ आप भी न मैं उनके जैसा नहीं हूँ माँ जैसा मैं दिख रहा हूँ उस से बस थोड़ा सा अलग हूँ

शालिनी जी .....फिर वो तुम्हारे कहने पे तुम्हारे सामने आ गए आवर वो दोनों तुम्हारे सामने जुखे क्यों थे

सूर्य ......क्युकी मैं जिनलोक आवर परीलोक का होने वाला राजा हूँ माँ वो बस अपने होने वाले राजा के सामने जुल्हे थे न की मेरे सामने

शालिनी जी ......ये कैसे हो सकता है तुम आवर उनके राजा

सूर्य ........सॉरी माँ वो क्या है न की परीलोक की राजकुमारी मुझसे प्यार करती है आवर जिनलोक की राजकुमारी से मेरी सगाई हो चुकी है

शालिनी जी .........क्याआ कया कहा तूने तुमने सगाई भी कर ली आवर मुझे बताया तक नहीं क्या यही तुम्हारा प्यार है अपनी माँ तक को नहीं बताया तुमने

सूर्य .....माँ मेरी पूरी बात तो सुन लीजिये शालिनी जी .......मुझे कुछ नहीं सुन्ना बात मत करो मुझसे मुझे घर जाना है अभी के अभी

सूर्य .......माँ प्लेसेस मेरी बात सुन लीजिये

शालिनी जी .....मुझे कुछ नहीं सुन्ना है तुमने मुझसे ये सच छुपाया तुम्हारी माँ तुम्हारे लिए मर.......

सूर्य ........मुआमममममम

सूर्य के जोर से छिलने से शालिनी जी का सबर टूट जाता है आवर उनकी आँखों से बेहहीनता आंसू बहने लगते है

सूर्य ........माँ दुबारा मरने की बात मत काटना पहले भी एक बार आपको आवर पापा को खो कर बहुत रोया हूँ मई. फिर से आपको खोना बर्दास्त नहीं कर पाउँगा

कैसे बताता आप दोनों को आप दोनों तो पहले मर चुके थे मुझे अनाथ बना कर जा चुके थे

सूर्य की बात ख़तम भी नहीं हुई थे की शालिनी जी का जनतेदार चांटा सूर्य के गलो पे अपना नक्शा चाप चूका था

सूर्य को इस चांटे में भी अपने माँ का अपने पापा के पार्टी प्यार नजर आया

शैलिंजी जी ......तुम्हे जरा भी सरम नहीं आई अपने माँ डैड के जिन्दा होते हुए उन्हें मारा हुआ बोलते हुए

सूर्य .......माँ आपने आज फिर वही गलती की है जो उस दिन की थी आज भी आपने मेरी पूरी बात नहीं सुनी आवर मुझे कसूरवार मन सजा देती

आप जो पिछले कुछ दिनों से सपनो में जो जिंदगी जी रही है वो कोई सपना नहीं है माँ वो आपका पिचका जनम था पिछले जनम में भी मैं आपकी हे खोख से जनम लिया था आपकी सदी पापा से हे हुए थे पैर आप दोनों हे मुझे अनाथ बना कर चले गए

क्या आपने कभी सोचा उस बचे के साथ क्या हुआ होगा जिसने जनम के कुछ समय बाद हे अपने माँ को खो दिया हो आवर कुछ समय बाद अपने पापा को भी खो दिया हो

भरा पूरा परिवार होते हुए भी मैं अनाथ हो गया था कहा से आपको सच बताता की मैं कोण हूँ क्यों मैंने सगाई की

शालिनी जी को तो जैसे सांप हे सुंग गया हो सूर्य की बाते सुन कर उनका पूरा सरीर कलने लगता है उनकी ाँसे भरी होने लगती है

सूर्य जब अपने माँ की हालत देखता है तो जल्दी से उन्हें अपने सीने से लगा संत करने लगता है

शालिनी जी ......मुझे माफ कर दे बीटा मैं बहुत बुरी हूँ मुझे माफ कर दे मैंने तुम्हे फिर से मारा

सूर्य ......िस्स्सस्स्स्स संत हो जाओ माँ आपकी थपड में भी पापा के लिया आपका प्यार हे था आपको कुछ भी कहने की जरुरत नहीं है माँ

शालिनी जी जब खुद को थोड़ा संत करती है तो वह सूर्य के पुरे चेहरे को चुम्मे लगती है

सूर्य .....बस कीजिये माँ क्या पिछले जनम का प्यार आज हे लुटा देंगे कुछ अपने होने वाली बहुओ के लिए भी बचा कर रखो

शालिनी जी ......मुझे मेरी बहुओ से मिलना है

सूर्य ......वह रे दुनिया अभी अभी इतना प्यार लुटाता जा रहा था बेटे पे आवर अब्बी सारा प्यार भूल के लिया

शालिनी जी .......तू तो मेरी जान है मेरे जिगर का टुकड़ा है

वैसे मेरी कितनी बहुते है इन दोनों के अलावा सच बताना

सूर्य .......फिर से तो नहीं मारेंगी न आपका हाथ बहुत भरी है हम माँ

शालिनी जी की फिर से एक बार आँखे नाम हो जाती है

शालिनी जी सूर्य के गलो पे अपनी उंगलियों के नीसाण साफ साफ दिख रहे थे

जिन्हे शालिनी जी चुम चुम कर सूर्य को आराम दे रहे थे अपने दिए दर्द से

सूर्य .....it's ok माँ ज्यादा दर नहीं है

शालिनी जी ......चल अभी बता कब मिलवा रहा मेरी बहुओ से

सूर्य अपने दोनों गमो पे हाथ रख कर

सूर्य ......कुछ बहुओ से तो आप रोज हे मिलती है माँ

शालिनी जी छोटे हुए सूर्य को देखती है

शालिनी जी .......क्या मतलब है तुम्हारा मैं किस स्व रोज मिलती हूँ मुझे तो हवेली से बहार निकले हे काफी समय हो गया है

सूर्य .......वो वो कोमल किरण सपना राधा पायल प्रीती अलीना मानसी इन सब से तो रोज मिलती हो न आप

शालिनी जी ......है तो क्या हुआ मैं अपने बहुओ के बारे में पूछा है बहनो आवर बुआ के बारे में नहीं एक मिनट्स

सूर्य जल्दी से गेट खोल बहार निकलता है

शालिनी जी ......किरण .मतलब स्वीटी राधा सपना ओह्ह गॉड रुक तू अपनी हे बहनो को निर्लज बेसरम कही के

सूर्य ......माँ मैंने कहा था न आपसे आवर इनका भी पुनर जनम है माँ

शालिनी जी .......हे बागवान ये कैसे कैसे दिन दिखा रहे हो आप मुझे अपनी हे बेटियों को अपनी हे बहु मैंने को

सूर्य ........माँ आप प्लेसेस कल तक रुक जाइये आपको कुछ भी पता नहीं कल तक आपको सब पता चल जायेगा प्लेसेस माँ आवर आपको लगे की इसमें मेरी जरा से भी गलती है तो आपकी सेंडल आवर मेरा सर

शालिनी जी .....ऐसा क्या हो जायेगा क्या सबकुछ बदल जायेगा

सूर्य ........आपको पता है माँ दादी जी ने मेरा तिलक स्वीटी आवर कोमल से क्यों करवाया था

शालिनी जी ......है पता है क्युकी तुम कुछ बहुत अच्छा काम कर के लूटे थे ऐसा उन्होंने कहा था

सूर्य .......वो अदा सच है माँ आपको पता है जिस दिन में घर आया था ुशी दिन न्यूज़ में बहुत से आतंकियों के कैंप तबाह किये थे काल नाम के युवक ने

शालिनी जी .....है तो उस से इस बात का क्या लेना देना है वो तो पकिस्ता में हुआ था न

सूर्य .......क्युकी काल कोई आवर नहीं मैं हे हूँ माँ आवर दादी जी मेर्री अलीना भी ये बात जानती है आवर ये भी भी की जो माँ दुर्गा के मंदिर में कोमल आवर मेरे बिच जो कुछ घटना हुई वो कोई दुर्घटना नहीं थी कोमल को माँ दुर्गा ने मेरी पत्नी के रूप में चुना है क्युकी कोमल कोई सदर्न लड़की नहीं है माँ वो नागलोक की राजकुमारी कोमलांगी है जिसको मेरी वजह से फिर से जनम लेना पड़ा क्युकी नियति ने उसे मेरी पत्नी के रूप में चुना है इस लिया दादी जी ने कोमल को मेरी पत्नी होने के आदिकर्ता दिया आवर मेरा तिलक उसके हटो करवाया क्युकी इस जनम में कोमल हे एक ऐसे है जिसके मान मेरे हाथो भरी जा चुकी है आवर स्वीटी वो मेरा हे एक भाग है

शालिनी जी ......सूर्य मेरा सर दर्द कर रहा है मुझे घर जाना है

सूर्य ......मैं जनता हूँ माँ आप क्या सोच रही है आपके मंद में जो चल रहा वो मैं सुन सकता हूँ माँ. आवर सुबह के लिया सॉरी

शालिनी जी ......सुबह तुमने क्या किया था जो सॉरी बोल रहा है

सूर्य ........वो बाथरूम को लॉक काटना भूल गया था उसके लिया सॉरी

शालिनी जी ..........क्याआआआ इसका मतलब

सूर्य .........aaaaahhhhhhhhhh माँ दर्द हो रहा है...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ................

फ्रेंड्स कल जो लास्ट अपडेट था वो गलती से अपडेट no.148 कर दिया था वो 149 था जो अभी करेक्ट किया है ........

कोशश करूँगा एक आवर अपडेट दे सकू
 
अपडेट 151

शालिनी जी ......सूर्य मेरा सर दर्द कर रहा है मुझे घर जाना है

सूर्य ......मैं जनता हूँ माँ आप क्या सोच रही है आपके मंद में जो चल रहा वो मैं सुन सकता हूँ माँ. आवर सुबह के लिया सॉरी

शालिनी जी ......सुबह तुमने क्या किया था जो सॉरी बोल रहा है

सूर्य ........वो बाथरूम को लॉक काटना भूल गया था उसके लिया सॉरी

शालिनी जी ..........क्याआआआ इसका मतलब

सूर्य .........aaaaahhhhhhhhhh माँ दर्द हो रहा है...............

अब आगे ........

परीलोक .........

कल सुबह होने वाली महाकाल मांगा पूजा की लगभग सभी तयारिया पूर्ण हो चुकी थी

परीलोक पहले भी बहुत खूबसूरत थापर आज तो जैसे पुरे परीलोक को हे दुल्हन के जैसे सजा दिया गया था

चारो तरफ खुशियों का माहौल बना हुआ था परीलोक राजमहल को भी पूरी तरह से सजता गया था आवर अभी भी महकक मंदिर आवर पारी महल को सजाने में परियो के साथ साथ जिन भी लगे हुए थे

जिनिशा ......देखो सखी आज तो परीलोक को पूरी तरह से किसी खूबसूरत दुल्हन के जैसे सजाया जा रहा है

पारिजात .......आज हमें भी ऐसे हे श्रीनगर करना है क्युकी गुरुदेव से पता चला है आज पार्थवी लोक से उनके साथ साथ हमारी होने वाली सासु माँ भी आ रही है

जिनिशा .......क्या सच में शालिनी माँ आ रही है

जिनात .....क्या तुम उनसे मिल चुकी हो जिनिशा

जिनिशा .....नहीं जिनात बस ये समाज लो जब से उनके बारे में पता चला है तब से उनसे मिलने का बहुत दिल करता है

रिद्धि ......वो वाकई बहुत प्यारी है जिनिशा दिल से भी आवर वैसे भी

जिनिशा .....है मैंने आपकी यादो में उनकी तस्वीर देखि थी उस दिन जब आपने सरताज के परिवार का परिचय दिया था

पारिजात ......चिंता न कर सखी साम से पहले वो महल में होंगी दिल खोल कर मिल लेना शालिनी माँ से

रिद्धि ......चलो मैं चलती हूँ मुझे भी त्यार होना है उन सब के सामने पहली बार अपने वास्तविक रूप में जो आउंगी मैं नहीं तो वही साध्वी भेष में मिली हूँ उनसे

जिनिशा .....वैसे सखी आप उस रूप में भी बहुत प्यारी लगती है

रानी पारी ......क्या कर रही है मेरी प्यारी राजकुमारिया

चारो रानी पारी को जूझ कर सामान करती है

रानी पारी....... कितनी बार कहा है तुम सबको जब हम सभा में हो तभी हमें ये सामान दिया करो बाकि समय हम केवल एक माँ है

रिद्धि .....रानी माँ भले आप बाकि समय माँ के रूप में रहती है पैर आपके सर पे जो ये ताज है हमें आपके साथ साथ इनका भी सामान करना पढता है

रानी पारी ......परतविलोक जा कर मेरी ये पुत्री कुछ ज्यादा हे समझदार हो गई है कोई अच्छा वर मिला की नहीं वह मेरी पुत्री को या फिर यहाँ कोई परीलोक में तो पसंद नहीं है हमें बताओ ताकि जल्दी आपके विवाह कर सके

जिनिशा .......रानी माँ आपको नहीं पता क्या इनके दिल में भी किसी ने अपना आकाश उकेर दिया है हमें तो नहीं बता रही है आपको सायद कुछ बता दे

रिद्धि ......जीनु की बची हमने कब कहा मि हम किसी से पर्म करते है

रानी माँ ऐसा कुछ नहीं है जब भी हमें कोई पसंद आएगा हम सर्व प्रथम आपको हे बताएंगे

रानी पारी ......वैसे कल पुरे परीलोक से आवर जिनलोक सभी युवा यही होंगे कोई अपनी इच्छा अनुसार अपनी जीवन साथ के लिया चुन लो पुत्री आवर पुत्री जिनात आपसे भी यही कहेंगे

जिनिशा ......रानी माँ आप परतविलोक से जो आ रहे है उनके विषय में बताना भूल गई सायद

पारिजात .......है बिलकुल रानी माँ क्यों सखी रिद्धि

रिद्धि ......तुम दोनों हमारी सखी हो कर हमारा हे उपहास ुधा रही हो

जिनिशा ......क्या हम ऐसा कर सकते है आप तो हमारी सबसे अच्छी सखी हो

जिनिशा पारिजात को इसरा करती जो रानी पारी के साथ साथ रिद्धि भी देख लेती है

रिद्धि ......इन इसरो का मतलब हम भी समझते है हमने भी परतविलोक पे कुछ समय बिता है

रानी पारी ......अच्छा हम चलते है राजगिरि जी पृथ्वीलोक के लिया निकल गए है

jinisha......kya गुरुदेव सरताज को लेन के लिया चले भी गए

रानी पारी ......सूर्य अकेला नहीं आ रहा

रानी पारी की बात सुनते हे तीनो फ़ौरन वह से गायब हो गई

रानी पारी .....निजात बेटी आपको त्यार नहीं होना है

जिनात ......जी रानी माँ हम भी जा रहे है

सूर्यगढ़ ......

सूर्य वही से शालिनी जी को ले कर वापिस सूर्यगढ़ की तरह निकल गया

इस बार कार खुद सूर्य ड्राइव कर रहा था

शालिनी जी अपनी आखे बंद किये किसी गाह्रो सोच में दू भी हुई थी

सूर्य .......माँ आप चिंता न कीजिये आपको ऐसे देख कर मुझे नहीं लग रहा है प्लेसेस माँ बस कल तक के लिया सब खुश भूल जाइये आपको कल तक सब पता चल जायेगा

शालिनी जी .......बीटा कहना आसान है पैर इतनी आसानी से सब कुछ भुलाया नहीं जा सकता है

कुछ वक़्त दो मुझे तुम्हारे सच को हजम करने के लिया खुद को त्यार कर सकू कल के लिया

सूर्य .........माँ अगर इन सब को टालना मेरे बस में होता तो अवश्य ऐसा कर देता

कुछ हे देर में सूर्य वापिस हवेली पहुंच जाता है जहा 2 कार्स आवर भी कड़ी थी

जो की सूरजगढ़ से थी यानि की सूर्य के नाना जी भी यहाँ आ चुके है

सूर्य .....माँ रुकिए

सूर्य वही बहार कार पार्क कर शालिनी जी का हाथ पकड़ कर सीधा अपने रूम में ले जाता है

शालिनी जी ....यहाँ क्यों ले कर आये हो बीटा

सूर्य ......आप यही रुकिए मैं अभी आया

सूर्य वह से सीधा अपनी दादी जी के रूम में पहुँचता है जहा दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी बे थे हुए थे

सूर्य अपनी नानी जी आवर नाना जी के पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है

दादी जी .....बीटा तुम तो शालिनी बेटी के साथ बहार गए थे न फिर इतनी जल्दी वापिस कैसे

सूर्य ......दादी जी वो मैं आवर माँ रस्ते से लौट आये

दादा जी .......क्या हुआ बीटा सब ठीक है न

सूर्य .......दादी जी आप मेरे साथ चलिए कुछ काम है आपसे दादा जी मैं अभी आता हूँ

सूर्य अपनी दादी जी का हाथ पकड़ कर अपने रूम में ले आता है आवर रूम को लॉक कर देता है

सूर्य ......दादी जी आप मेरे बारे में क्या क्या जानती है जो बाकि को नहीं जनता है

दादी जी .....क्या मतलब बीटा

सूर्य ......दादी जी मैं जनता हूँ आपको रिद्धि पारी ने बहुत कुछ बताया है मेरे बारे में वही सच मैंने आज माँ को बताया तो इन्हे यकीं हे नहीं हो रहा आवर तन से देखो ये उदाश है

दादी जी ......ये क्या है बेटी शालिनी

शालिनी जी ......माँ सा क्या आप जानती थी सूर्य के बारे में आवर इनकी पत्नियों के बारे में

दादी जी ......सब कुछ तो मैं भी नहीं जानती हूँ सूर्य के बारे में आवर न पूरी तरह इसकी होने वाली पत्नियों के बारे में

शालिनी जी .....किस किस के बारे में जानती थी फिर आप आवर क्या आपने कोमल बेटी को सूर्य के पत्नी के अदिकार से तिलक करवाया था

दादी जी ......है मैं कोमल राधा सपना किरण के बारे में जानती हूँ आवर जिनिशा आवर पारिजात के बारे में भी उन दोनों से मैं अभी मिली नहीं हूँ

मुझे बहुत पहले हे रिद्धि पारी में बता दिया था जब सूर्य 8 दिन के लिया यहाँ से गया था

उसके कुछ दिन पहले हे रिद्धि पारी ने मुझे बताया था इस लिया हे मैंने सूर्य को वह जाने से नहीं रोका था

सूर्य .....दादी जी अब आप हे समझाइये इनको

दादी जी .....देख बेटी मानती हूँ की सूर्य के ये जो रिश्ते है वो समाज स्वीकार नहीं करेगा पैर तुम अभी ये नहीं जानती हो की सूर्य है कोण ये समाज आवर नियम से परे है आवर वैसे भी आज तुम परीलोक जा रही हो तो वह तुम्हे सबकुछ पता चल हे जायेगा

या फिर अपने बेटे अपने ढूढ पे हे भरोषा नहीं रहा बेटी

शाकिनी जी .......माँ ऐसा न कहो आप मन गई हो पैर बाकि सब कभी नहीं मानेंगे

दादी जी .....जिसको पत्नी चाइये वो खुद मनाये तुम क्यों चिंता करती हो मेरी बच्ची

सूर्य ......क्या मैं .मैं कैसे मनाऊंगा उन्हें ये सब आपको हे काटना होगा दादी जी

दादी जी .....जा बहार जा अपनी बीबियो के पास मुझे कुछ बात करनी है

सूर्य .....ठीक है आवर है माँ को खाना खिला दीजियेगा

सूर्य वह से निकल कर कोमल के हाथो अपनी माँ के लिया खाना भिजवा देता है आवर खुद निकल कर खाना खाने लगता है

सूर्य के जाने कुछ देर बाद हे कोमल खाना ले कर आती है

आवर दादी जी को खाना दे कर जाने लगती है

दादी जी ......कोमल यहाँ बैठो बेटी

कोमल ......जी दादी कहिये

दादी जी .......बेटी मैं जो पुछु सच बताना मैं जानती हूँ की तुम कोण हो बेटी

कोमल दादी जी को देखने लगती है साथ हे शालिनी जी को भी

दादी जी .....बेटी जो मंदिर में हुआ क्या तुम उसे माता रानी का आशीर्वाद मानती हो या फिर वो महज एक दुर्गटना समझती हो

कोमल अपने सर के बात थोड़े साइड कर भ भरी मांग दादी जी आवर शालिनी जी को दिखा देती है

दादी जी ......बेटी क्या तुम दिल से इसे स्वीकार करती हो

कोमल ......दादी जी मम्मी आपको मेरी बात सुन कर गुस्सा आये आवर मुझे मरने का दिल भी करे पैर ये सच है मंदिर में हुई घटना से पहले हे मैं सूर्य से प्यार करने लगी थी पैर सच कभी किसी से भी कह नहीं पायी डर्टी थी कहि किसी को पता चला तो मेरे परिवार का मान सामान मिट जायेगा इस लिया अंदर हे अंदर सूर्य को खोने के दर से चुप चुप कर रोटी थी मैं हे नहीं राधा बुआ भी सूर्य से प्यार करती

दादी जी .......सबाह मेरी बची अब बता बेटी शालिनी क्या तू इसे इसके प्यार से दूर कर गूथ गूथ कर रोने देगी या अपना आशीर्वाद आवर प्यार दे कर अपनी बची की खुशिया देगी

शालिनी जी ........कोमल को अपने गले से लगा लेती है

कोमल ......मुझे माफ कर दीजिये मम्मी मैंने बहुत कोशिश की सूर्य से दूर रहने की उसे इग्नोर करने की पैर उस से दूर नहीं रह सकती

शालिनी जी .....चुप होजा तू तो मेरी सबसे प्यारी बेटी है मेरी सबसे नाजुक बेटी अब रोना बंद कर नहीं तो देख से हमेशा बेटी बना कर ऐसे हे रखूँगी

दादी जी .....हहहहए ले बेटी कोमल थे तुम्हारी सास से सवीकार कर लिया है

शालिनी जी ......सास आप हे बनिए मैं तो इसकी मम्मी हु आवर ये मेरी प्यारी बेटी

शालिनी जी की बात सुन कोमल की भीगी आँखों में जहा कुछ देर पहले. थोड़ा दर था वही अब उसकी आँखों में सब कुछ पा लेने की ख़ुशी

कोमल जल्दी शालिनी जी को गले से लगा लेती है

शालिनी जी .......देख अभी किसी को कुछ मत बताना आवर अपने उसकी तो बिलकुल भी नहीं उसकी खबर तो मैं अच्छे से लुंगी मेरी बच्ची को रुलाया उसने

दादी जी .....बड़ी आई खबर लेने वाली वो मेरा बीटा है देखती हूँ कैसे खबर लेती हो तुम दोनों सास बहु

दादी जी की बात सुन कोमल जहा सरकनर लगती है वही शालिनी जी की के इतने देर से मुजरजाये हुए चेहरे पे फिर से वही चित परिचित मुस्कान आने लगती जो उनकी खूबसूरत चेहरे की सुंदरता में हमेशा चार चाँद लगा देती थी

कोमल अपने हाथो से एक निवाला बना कर शालिनी जी को खिलाती है आवर एक निवाला दादी जी को भी दोनों ने बिना किसी एतराज के कोमल द्वारा खिलाया निबला खा कर कोमल के सर पे प्यार से हाथ फिर दिया

शालिनी जी ......देखा माँ ये है मेरी बेटी कोमल

दादी जी .....सही कहा बेटी शालिनी कोमल बीटा अब तुम भी जाओ आराम करो साम को सबको परीलोक भी तो जाना है

कोमल .....जी दादी जी

कोमल वह से चली जाती है दादी जी फिर से रूम बंद कर शालिनी जी को बहुत कुछ बिताती है जिसे सुन कर डेरे डेरे उनके मन से समाज को ले कर जो दर ता वो ख़तम हो जाता है

सूर्य अपना खाना ख़तम कर रेखा जी के रूम की तरफ जाता है जहा रेखा जी मेनका जी सन्ति ममी आवर प्रिय ममी जी बैठी बाते कर रही थी

सूर्य आगे बढ़ अपनी दोनी मामियो के पेअर छू कर आशीर्वाद लेता है

प्रिय जी .......आ गए बीटा तुम तुम तो शालू के साथ बहार गए थे न

सूर्य वही मेनका जी की गॉड में सर रख लेट जाता है

सूर्य .....वो ममी जी माँ का गुमने का मन नहीं था तो बस छोटी सी ड्राइव कर वापिस लौट आये वो माँ अभी मेरे रूम में है दादी जी के साथ

सन्ति जी .....मेनका दीदी लगता है सूर्य आपको बहुत प्यार करता है

मेनका .......मेरा बीटा जो है

मेनका जी सूर्य के सर में हाथ फिरने लगती है जिस से सूर्य की आँखि हलकी हलकी बंद होने लगती है एक तो गर्मी के समय दोपहर की नींद आना ऊपर से मेनका जी द्वारा मिल रहे प्यार से सूर्य की आँख लग जाती है

रेखा जी ......चल ीदार आ अपनी बुआ सा को क्यों परेशान कर रहा है

मेनका जी ......लेटने दो न भाबी कभी कभी तो इसकी बहने इसे अकेला छोड़ती है

थोड़ा सा वक़्त इसे बहाने मेरे साथ भी काट जायेगा

सन्ति जी .....लगता है सूर्य थका हुआ था देखो लेटने के साथ हे नींद आ गई

रेकगा जी .......ये मेनका दीदी का कमल है उनके हाथ जो सूर्य को सुकून दे रहे है

सूर्य नींद में हे करवट बदल लेता है अब सूर्य का मुँह मेनका जी के नंगे पेट पे था सूर्य की गरम ाँसे ठीक अपनी नाभि पे मह्सुश कर मेनका जी के हाथो के रोये खड़े होने लगे

प्रिय जी ......क्या हुआ दीदी कुछ परेशानी है क्या

मेनका जी ......नहीं भाबी कोई परेशानी नहीं है ी ऍम ok

चारो महिलाये फिर से अपने गैप सैप में लग जाती है

सूर्य को कब मेनका जी ने बीएड पे सुलाता उसे भी पता नहीं चला

साम रेखा जी ने सूर्य को उठाया

रेखा जी .....बीटा उठ जाओ साम हो गई है

सूर्य .....जी मम्मी आपके बीएड पे बहुत अच्छी नींद आयी

रेखा जी .....ये बीएड का कमल नहीं है मैंने तुम्हारी सर में ताल मालिश की थी जब तू सो गया था तब

सूर्य ......उम्म्म्म थैंक यू मम्मी

रेखा जी .......चल अब जल्दी त्यार हो जा वो बहार कल जो ऋषियों के साथ ऋषि आये थे वो आये हुए है

सूर्य .....क्या गुरुदेव. यहाँ पे ओह मैं तो भूल हे गया हमें निकलना भी है

सूर्य जब बहार निकला तो लगभग सब त्यार थे

शालिनी जी .....तुम अभी त्यार नहीं हुई चक जा जल्दी त्यार हो मैं कपडे निकल कर देती हु हूँ

सूर्य .......ok माँ

शालिनी ....गेट बंद कर लेना

सूर्य ......क्या

शालिनी .....कुछ नहीं जल्दी जा आवर त्यार जो जा

सूर्य सीधा बाथरूम में गुस्स जाता है पीछे से शालिनी जी एक खूबसूरत से ड्रेस सूर्य के लिया निकल कर कोमल के हाथो बेज देती है

सूर्य जब बहार निकलता है तो सामने बीएड पे कोमल बैठी हुई थे फ्रेश लिए हुए

सूर्य ......कोमल आप यहाँ

कोमल ......वो मम्मी ने आपके कपडे भेजे थे

सूर्य ......ok रख दो मैं पहन लेता हूँ बाकि सब त्यार है

कोमल ......है बाकि सब त्यार है गुरुदेव बस आपका हे इतंजार कर रहे है

सूर्य फटाफट त्यार हो कर्णिका पहुँचता है जहा गुरुदेव भी सभी के साथ थी

शिव महेंद्र जोरावर संजय को छोड़ बाकि सभी यही थे

सूर्य .....परनाम गुरुदेव क्षमता करे मुझे समय का पता नहीं चला

गुरुदेव ......कोई बात नहीं पुत्र वैसे भी पूजा कल है

सूर्य ......क्या यही से चले

गुरुदेव ......है पुत्र यही से चलते है

गुरुदेव सबके के सर से एक एक बॉल ले ेते है

आवर कुछ मंत्र दिखने के बाद उन बल्लो को वही हवा में उछाल देते है

गुरुदेव .........आ सब त्यार है न

सूर्य सबको एक बार देखता है जिनके चेहरों पे बहुत से सवाल थे

सूर्य .....बहुत जल्द आपको बहुत कुछ पता चलेगा गुरुदेव सब यही पे है पापा आवर मां जी को बाद में ले चलेंगे

गुरुदेव .....उचित है पुत्र

गुरुदेव कुछ मंत्र का उच्चारण करते है आवर देखते हे देखते सबके चारो तरफ अदृश्य रेखा से बन जाती है आवर अगले हे पल सब गायब हो चुके थे परीलोक के लिया ...........

अपडेट पोस्ट फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...........
 
अपडेट. 152

गुरुदेव ......कोई बात नहीं पुत्र वैसे भी पूजा कल है

सूर्य ......क्या यही से चले

गुरुदेव ......है पुत्र यही से चलते है

गुरुदेव सबके के सर से एक एक बॉल ले ेते है

आवर कुछ मंत्र दिखने के बाद उन बल्लो को वही हवा में उछाल देते है

गुरुदेव .........आ सब त्यार है न

सूर्य सबको एक बार देखता है जिनके चेहरों पे बहुत से सवाल थे

सूर्य .....बहुत जल्द आपको बहुत कुछ पता चलेगा गुरुदेव सब यही पे है पापा आवर मां जी को बाद में ले चलेंगे

गुरुदेव .....उचित है पुत्र

गुरुदेव कुछ मंत्र का उच्चारण करते है आवर देखते हे देखते सबके चारो तरफ अदृश्य रेखा से बन जाती है आवर अगले हे पल सब गायब हो चुके थे परीलोक के लिया ...........

अब आगे ..........

परीलोक .......

जैसे हे सभी सूर्यगढ़ हवेली से गायब हुए

सब परीलोक महल के सामने मुख्या मार्ग पे अप्पर होते है

सूर्य किरण सपना पायल प्रीती अलीना को छोड़ कर सभी चौंक जाते है है

सबकी आँखे उस खूबसूरत नज़ारे को देख रही थे

पूरा पारी महल सजाया हुआ था फुल्लो की खुसबू से पूरा परीलोक महक उठा था





चारो तरफ खूबसूरत परिया आकाश में स्थित सूर्य फॅमिली पे फुल्लो की वर्षा कर रही थी

गुरुदेव .......आप सबका परीलोक महल में स्वागत है

सबसे ज्यादा कोई चौंका था तो वो थी सूर्य की नानी जी उन्हें इतने खूबसूरत नज़ारे की कभी कल्पना भी नहीं की थी

तभी सामने से रानी पारी आते हुए दिखाई देती है अपने सही सेविकाओं आवर सेनिको के साथ





रानी पारी के पास में पहुंचते हे हे सूर्य उनके सामान में जुख जाता है

रानी पारी ......उठो पुत्र सूर्य हमने कितनी बार कहा की आप हमारे सामने न जुखा करो आप हमारे लिया पुत्र सामान है

रानी पारी आगे बढ़ सूर्य को उठा कर अपने सीने से लगा लेती है

गुरुदेव .......ये है परीलोक की महारानी रानी पारी

रानी पारी ......पुत्री किरण सपना क्या आप को हम से मिल कर ख़ुशी नहीं हुई पुत्री

किरण ......क्या कभी ऐसा हो सकता है रानी माँ

रानी पारी सूर्य से मिलने के बाद किरण सपना पायल प्रीती सब से मिलती है

सूर्य ......रानी माँ ये मेरी माँ है शालिनी जी ये मेरे दादा जी दादी जी नाना जी नानी जी ये मेरी बड़ी मम्मी आपने इन्हे तो पहचान हे लिया होगा आवर ये है मेरी बड़ी ममी प्रिय जी सपना को माँ आवर ये छोटी ममी जी सन्ति जी स्वीटी की माँ आवर ये मेर्री जी आवर मानसी जी

रानी पारी अपना मुकुट उतर कर दादी जी आवर नानी जी के पेअर चुटी है

दादी जी ......रानी पारी जी ये आप क्या कर रही है

रानी पारी .......क्या एक बेटी को अपनी माँ के पेअर छू उनसे आशीर्वाद लेने का हक़ नहीं है

दादी ji.......jeeti रहो बेटी

गुरुदेव .......हमें महल में चलना चाइये रानी पारी

रानी पारी ......जी राजगुरु जी

रानी पारी सबकी को ले कर उस भव्य दिव्या महल में पंक्ति है जहा कोमल को सुरप्रीसेड मिलने वाला था

जैसे सभी महल में परवेश करते है

सामने हे जिनिशा पारिजात रिद्धि आवर जिन्नात कड़ी थी हाथो में तिलक थल लिए

जिनिशा आवर परिणत आगे बढ़ सूर्य का तिलक करती है आवर दोनों हे एक दूसरे को देख सूर्य के पेअर चुटी है

गुरुदेव .........आज लगता है परीलोक में परतविलोक के सभी रीती रिवाज पूर्ण किये जा रहे है

सूर्य की फॅमिली ये सब देख रही थी उन्हें अभी भी समाज नहीं आ रहा था की ये हो क्या रहा है

शालिनी जी ......ये खूबसूरत परिया कोण है आवर सूर्य के पेअर क्यों छू रही है





गुरुदेव ........पुत्री शालिनी ये कोई आवर नहीं परीलोक की राजकुमारी पारिजात है रानी पारी की पुत्री

आवर ये दूसरी कन्या है जिनलोक की राजकुमारी जिनिशा





आवर ये दोनों है राजकुमारी जिन्नात प्रेतलोक से आवर ये मेरी पुत्री रिद्धि है जो आपके साथ साध्वी के रूप में पीछे कुछ समय से थी





( रिद्धि )





(जिन्नात )

चारो आगे भध सभी बड़ो के ऊपर चुटी है है

तभी वह प्रेतराज j.king आवर नागराज महावीर आवर नागरानी पूर्वी के साथ महल में पदारते है

कोमल की जैसे हे नजर अपने माता पिता पर पड़ती है वह दौड़ कर पूर्वी के गले लग जाती

रेखा जी .......बीटा ये कोण है जिनसे कोमल गले मिल रही है

सूर्य गुरुदेव को देखता है की वो क्या जबाब दे

गुरुदेव ......पुत्री रेखा ये नागराज महावीर आवर नागरानी पूर्वी है नागलोक के वासुकि वंश के महाराज

रेखा जी .......बाबा ये कोमल कैसे जानती है इनको

गुरुदेव ......पुत्री ये एक बहुत बड़ा सत्य है जो आप सब नहीं जानते है आवर यही कारन है की आप सबको यहाँ लाया गया है ताकि आप सब को उस सत्य का ज्ञान हो

रानी पारी .......आप सब में से सायद सूर्य के दादा जी आवर दादी जी हे जिनको सूर्य का सत्य पता हो

दादी जी .......अब शालिनी बेटी भी जानती है

गुरुदेव .......पुत्री शालिनी तुम्हारा पुनर जनम हुआ है

जैसे बाकियो का हुआ कुछ को छोड़ कर

जैसे इस जनम में सूर्य तुम्हारा पुत्र है वैसे हे उस जनम में भी तुम्हारा पुत्र था

किन्तु तुम्हारा आवर तुम्हारे पति की जीवन रेखा बहुत काम थी

समय आने पे तुमने अपनी देह का त्याग कर दिया कुछ समय बाद एक सडयंत्र के तहत शिव की भी मृत्यु हो गई थी किन्तु उस से पूर्व शिव अपने माता पिता के कहने पे दूसरा विवाह करता है जिसके कुछ समय बाद उसके हे छोटे भाई दुर्जन सिंह द्वारा रचे सडयंत्र के चलते उन्हें भी सूर्य को अपनी दूसरी पत्नी के सहारे छोड़ भू लोक का त्याग करना पड़ा

शैलिंज जी .......क्या शिव ने जिस से विवाह किया क्या उसका भी जनम हुआ है

गुरुदेव .......है पुत्री किन्तु इस जीवन कल में उसका आवर शिव का कोई सम्बंद नहीं है शिव आवर उनका उस जनम तक का हे साथ था या ये कहे की सूर्य को माँ का प्रेम देने के लिया नियति ने हे वो सब नियत किया था

तुम दोनों की मृत्यु के बाद उस कन्या ने हे सूर्य को माँ का प्रेम दिया पैर नियति को कुछ आवर हे मंजूर था दुर्जन सिंह की बुरी नियत शिव की दोस्ती पत्नी पे ख़राब हो जाती है आवर वह उसके साथ दुराचार करता है सूर्य अपनी छोटी माँ की सहायता कर उनको ले कर वह से भाग जाता अपनी आवर उनकी जान बचने के लिए

जहा उनकी मुलाकात मेरे हे शिष्या से होती है जंगल में सूर्य आवर उसकी छोटी माँ वही मेरे शिष्या के साथ 11 वर्ष जंगल में बिताते है जहा सूर्य को जिनलोक आवर प्रेतलोक की सकती प्राप्त होती है जो की मेरे डस्ट भाई ने प्रेतलोक आवर जिनलोक से चीरा कर परतविलोक के ुशी जंगल में जा कर अपने सद्यन्त्राव को अंजाम देने की तयारी कर रहा था जिसको सूर्य की मदद से विफल किया हमने

जब सूर्य अपनी छोटी माँ के साथ जंगल में पहुंच गया तो दुर्जन के आदमी दर की वजह से आगे नहीं बढे

ुशी दिन ुशी गांव के मंदिर में रहने वाली एक कन्या जो की मानसिक रूप से विक्षिप्त थी उसकी मृत्यु हुई थी दुर्जन के आदमी उस कन्या का चेहरा ख़राब कर उसके साथ दुष्कर्म करते है

आवर उस मेरिट सरीर को सूर्य की छोटी माँ का सरीर बता कर दुर्जन को सौंप दिया जाता है जहा दुर्जन ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया

उस कन्या की आत्मा अपने मेरिट सरीर के साथ हुए दुष्कर्म से आहात हो शिव के पुरे खंडन को श्राप दे देती है की उस खंडन की हर कन्या हर स्त्री उसे खंडन के अगली वरिष्ठ से शारीरिक सम्बंद बनाएंगी आवर जिसने उसके सरीर के साथ दुष्कर्म किया वो सब अपनी मर्दानगी खो देंगे

तभी गुरुदेव के नजर राधा पे पड़ती है जिसका पूरा चेहरा आसुओं से भीगा हुआ था

आंसू तो सबके निकल रहे थे पैर राधा किरण सपना इन तीनो के कुछ ज्यादा हे

गुरुदेव ........पुत्री राधा खुद को सम्भालो जो बिट गया उसे अब कोई नहीं बदल सकता है

राधा ......कैसे सँभालु गुरुदेव उन पापियों ने जो मेरे मृत सरीर के साथ किया आज फिर एक बार मेरी आँखों के सामने आ गया

गुरुदेव ......पुत्री उन सबको अपने किये कर्मो का दंड मिल चूका है तुम्हारे द्वारा दिए श्राप के चलते उनकी आत्मा आज भी प्रेतलोक में लास्ट भोग रही है

शालिनी जी .......क्या वो श्राप राधा ने दिया था गुरुदेव

गुरुदेव .......है पुत्री राधा कोई आवर नहीं शिव की बहन थी उस जनम में भी आवर इस जनम में भी शिव के पिता ने एक आवर विवाह किया था जिनसे उन्हें राधा पुत्री की प्राप्ति हुई थी एक दुर्घटना में उसके सर पे गाज्रि चौथ लगने से वह अपना मानसिक संतुलन खो चुकी थी

राधा से मिले श्राप के चलते सभी के सम्बन्ध सूर्य से बनने थे क्युकी उस वक़्त केवल सूर्य हे एक अकेला लड़का था जो शारीरिक आवर मानसिक रूप से सक्षम था शिव के बड़े भाई को भी एक पुत्र था किन्तु वो जनम से हे मानसिक रूप से अविकसित था जिस से उस पे राधा के श्राप का प्रभाव नहीं हुआ

समय अपने गति से चलता रहा सूर्य आवर उसकी छोटी माँ जंगल में रह कर अपना जीवन बिताने लगे वही सूर्य की छोटी माँ ने शिव के अंश को जनम दिया जो की पुत्री किरण थी

कुछ समय बाद राधा को मुक्ति दिलाने के लिया उसे सूर्य की छोटी माँ के सरीर में परवेश कर सूर्य के साथ उनका विवाह करवाया क्युकी राधा भी खुद के दिए श्राप से बच नहीं सकती थी क्युकी वो भी ुशी खंडन की पुत्री थी इस तरह सूर्य का विवाह अपनी हे छोटी माँ आवर राधा से हुआ

डेरी डेरी सूर्य के प्रेम आवर राधा के श्राप से सूर्य के सम्बन्ध बाकि स्त्रियों से आवर कन्याओ से भी बने किन्तु सूर्य से उन्हें प्रेम होने के चलते उनका जनम फिर से सूर्य के साथ हुआ है जो इस जनम में सूर्य की पत्नी बनने का अदिकार रखती है

राजकुमारी जिनिशा की जब सगाई हुई जिनलोक में तब एक बार फिर मेरे भाई चांडाल ने सडयंत्र रचा जो असुरलोक के असुरराज नरकासुर के साथ मिल सडयंत्र को अंजाम दिया जिसमे उन्होंने पुत्री कोमल को अपने वश में कर सूर्य को अपने सडयंत्र में फसाया जिसका नतीजा ये हुआ की सूर्य को अपनी मृत्यु को गले लगाना पड़ा

गुरुदेव .........यही सत्य है सूर्य के पूर्व जनम का क्युकी सूर्य उस जनम में अपने जनम का उद्देश्य पूर्ण नहीं कर पाया था इस किया उसे एक बार फिर जनम लेना पड़ा अपने जनम के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए जो है असुरराज नरकासुर का अंत सूर्य आवर किरण के हाथो होना

दादी जी रोटी हुए ये सब मेरे उस डस्ट बेटे दुर्जन सिंह को वजह से हुआ है

सूर्य ......खुद को दोष न दीजिये दादी जी मैंने अपनी शक्तियों को कभी उचित प्रयोग नहीं किया केवल उनका दुरूपयोग हे किया जिसकी सजा मुझे मिली पैर मेरे साथ आप सबको भी मिली

काफी देर तक वह सन्ति छायी रही इस सन्ति को भांग किया दादी जी ने

दादा जी ......गुरुदेव क्या उन सबका सूर्य के साथ विवाह होना जरुरी है

गुरुदेव ......है पुत्र परताप ये देवी माँ आवर परबु की इच्छा है उसे कोई नहीं बदल सकता आपकी चिंता जो है वो मैं समाज रहा हूँ पुत्र किन्तु जिनके एक इसारे पे ये पूरा भारमंद नतमस्तक होता उनकी इच्छा के आगे किसी का कोई वश नहीं आप अपनी चिंता परबु महाकाल पे छोड़ दीजिये

शालिनी जी .....बाबा पैर हमें रहना तो ुशी समाज में है न

गुरुदेव ......पुत्री जिस समाज की तुम बात कर रही हो उस समाज का अभी तक तुमने असली चरित्र देखा नहीं है

ये कलयुग है पुत्री जहा परदे के पीछे पिता अपनी पुत्री को भाई अपनी बहन को बीटा अपनी माँ को वासना भरी दृस्टि से देखता है

जब त्रिदेवो ने परतविलोक का निर्माण किया उस समय त्रिदेवो ने हर जिव का एक एक जोड़ा पार्थवी पे भेजा था जिनसे आगे पार्थिव लोक पे जीवो का विस्तार हुआ

ुशी तरह मनुष्यो का विस्तार ुशी एक नर नारी जोड़े से हुआ

उस तरह से देखा जाये तो परतवि पे जनम लेने वाला हर स्त्री पुरुष में रकत सम्बंद है

जैसे जैसे समाज का विस्तार हुआ ज्ञान प्राप्त हुवा वैसे वैसे समाज में नियम स्थापित होने लगे

नाना जी ......गुरुदेव आपका कहना सही है पैर हमें रहना तो ुशी समाज में है न

रानी पारी .........क्या आप सूर्य के साथ नहीं रहेंगे जहा वो रहेगा आप भी तो वही रहेंगे

शालिनी जी ......क्या मतलब रानी पारी

रानी पारी ......शालिनी जी पुत्र सूर्य के विवाह के पश्चात सूर्य परीलोक जिनलोक का सम्राट बनेगा तब क्या आप उनके साथ नहीं रहेंगे

गुरुदेव ......रानी पारी आप भूल रही है यहाँ 3 लोको की राजकुमारी आवर है जिनका विवाह पुत्र सूर्य से होगा

गुरुदेव की बात सुन सब जिनात को देखने लगते है

पारिजात ......गुरुदेव एक तो सखी जिनात है किन्तु दूसरी आवर तीसरी कोण है

गुरुदेव .....पुत्री क्या तुम भूल गई की राजकुमारी कोमलांगी नागलोक की राजकुमारी है आवर तीसरी कोण है कल पता चल जायेगा पूजा में

रानी पारी .....मैं जानती हूँ आप सब के मन में अभी भू बहुत से सवाल है पैर वक़्त के साथ सभी को अपने सभी जबाब मिल जायेंगे

मेनका जी ......गुरुदेव आपने बताया नहीं की किस किस का पुनर जनम हुआ है

गुरुदेव ....हाहाहाहा पुत्री तुम्हारे मन की डंका उचित है तुम तुम्हारी दोनों पुत्री आवर विजय का पुनर जनम है शिव शालिनी का भी किरण सपना कोमल राधा आवर पुत्री अलीना आवर मेर्री का

भी रेखा आवर महेंद्र का भी आवर आप दोनों तो जान हे गए है आज रात आप सबको अपने जीवन से जुड़े सच पता चल जायेंगे

रानी पारी ......अब आप चलिए सब भोजन करते है फिर विश्राम कीजिये कल पूजा है

गुरुदेव ........पुत्र सूर्य तुम मेरे साथ चलो

सूर्य .........जी गुरुदेव .......

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स .........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स ...............
 
अपडेट. 153

रानी पारी .....मैं जानती हूँ आप सब के मन में अभी भू बहुत से सवाल है पैर वक़्त के साथ सभी को अपने सभी जबाब मिल जायेंगे

मेनका जी ......गुरुदेव आपने बताया नहीं की किस किस का पुनर जनम हुआ है

गुरुदेव ....हाहाहाहा पुत्री तुम्हारे मन की डंका उचित है तुम तुम्हारी दोनों पुत्री आवर विजय का पुनर जनम है शिव शालिनी का भी किरण सपना कोमल राधा आवर पुत्री अलीना आवर मेर्री का

भी रेखा आवर महेंद्र का भी आवर आप दोनों तो जान हे गए है आज रात आप सबको अपने जीवन से जुड़े सच पता चल जायेंगे

रानी पारी ......अब आप चलिए सब भोजन करते है फिर विश्राम कीजिये कल पूजा है

गुरुदेव ........पुत्र सूर्य तुम मेरे साथ चलो

सूर्य .........जी गुरुदेव .......

अब आगे .......


असुर कबीला ........

दो दिनों से विक्रम असुर काबिले में रेस्ट कर रहा अब तक उसका दर कुछ हद तक काम हो चूका था

साथ हे उसके सरीर पे लगे जखम भी कुछ हद तक ठीक हो चुके थे

किन्तु अभी भी विक्रम ने असुर कबीले से बहार जाने की हिमत नहीं हो प् रही थी

दोपहर के बाद विक्रम घूमते हुए गुफा की आवर चला जाता है

विक्रम .......अब आ हे गया हूँ तो क्यों न गुरु जी ( k.asur ) से अपने घावों पे ॉधी लग्गा लूँ आवर उनसे कुछ बात भी कर लेता हूँ

विक्रम बिना किसी आज्ञा के गुफा में प्रवेश कर जाता है

बिखु सायद कही गया हुआ था जो ज्यादातर समय गुफा के बहार रह कर किसी को भीतर जाने से रोकता था

विक्रम जब अंदर पंहुचा तो वह कोई नहीं था

विक्रम ......गुरु जी तो यहाँ है हे नहीं लगता है कही बहार गए है

लगता है उनसे मिलने बाद में आना पड़ेगा

विक्रम बहार जाने के लिया मुदा हे था की उसके कानू में मादक सिसकारियां सुनाई देती है

विक्रम ध्यान से सुन कर ुशी दिशा में भध जाता है जहा कामुक सिसकिया गूंज रही थी

जैसे जैसे विक्रम आगे जा रहा था वैसे वैसे मदहोश कर देने वाली सिसकियों के साथ अब तप तप पैट पैट की आवाज भी हो रही थी

जैसे विक्रम गुफा में बने कक्ष के सामने पंहुचा अनादर k.asur विसुद्धि को घोड़ी बनाये अपना बुसनद कला नाग विसुद्धि की फुल्ली हुई योनि में पूरी रफ़्तार से पेल रहा था

दोनों के सरीर टकराने पे थप ताहप पैट पैट की आवाजे गूंज रही थी

वही k.asur नगीना को अपने कंदो पे उठाये नगीना की योनि बड़े हे मज़े से चाट रहा था

नगीना k.asur के बड़े बालो में अपनी उंगलियां फसते अपने बड़े बड़े खुल्हो को हिलाते हे k.asur के मुँह पे अपने योनि रगड़ रही थी

अंदर का नजर बड़ा हे कमुख था जिसे देख विक्रम खुद को गरम होने से नहीं रोक पाया

नगीना की नजर जैसे हे विक्रम पे पड़ी एक बार तो उसे बहुत गुस्सा आया पैर फिर अचानक से उसके होंटो पे कुटिल मुस्कान च गई

नगीना ......कोण हो तुम आवर यहाँ क्या कर रहे हो

विक्रम नगीना को अपनी तरफ देख कर बोलने से सपकपा जाता है

k.asur ......सन्ति से वही खड़े रहो विक्रम

विक्रम ......जी गुरु जी मुझे माफ करे मैं आपसे मिलने आया था यहाँ से जा हे राग था की कुछ आवाजे सुन कर इस तरफ चला आया मुझे माफ कर दीजिये

नगीना k.asur के कंडे से उतर कर सामने बड़े से पत्थर पे अपने टंगे छोड़ी कर लेट जाती है

नगीना .......यहाँ आओ हमारे पास

विक्रम का मन तो था पैर k.asur के आदेश बिना वो आगे भध नहीं सकता था

विक्रम ........गुरु जी का आदेश है मई यहाँ से आगे नहीं आ सकता हूँ

k.asur ......जाओ जो वो कहती है वही करना

विक्रम फ़ौरन आगे भध जाता है

आवर नगीना के सामने जा खड़ा होता है

नगीना विक्रम का हाथ पकड़ कर अपने खुले पैरो के बिच खड़ा करती है

आवर विक्रम के दोनों हाथ अपनी बड़ी बड़ी 38 की चूचियों पे रख देती है

विक्रम डेरी डेरी नगीना की बड़ी चूचियों को दबाने लगता है

नगीना ......हाथो में ताकत नहीं है क्या तुम्हारे जोर से मसलो इन्हे

विक्रम .....जी जी

नगीना अपना हाथ आगे बढ़ा कर विक्रम की पेण्ट निचे कर देती है जिसमे विक्रम का 7 इंची लैंड हवा में जुलते हुए सीधा नगीना की योनि पे लगता है

नगीना विक्रम के लैंड को अपने हाथो से पकड़ कर लिंग मुंड को अपनी फुल्ली हुई योनि पे रगड़ने लगती है

k.asur ......तुम्हे आज ये कैसे इच्छा हुई है नगीना क्या तुम हमसे संतुस्ट नहीं हो

नगीना .......हमें केवल आप हे संतुस्ट कर पते है भाई

नगीना के मुँह से भाई सुन कर विक्रम को बड़ा जतका लगा ये सोच कर की क्या सच में ये भाई बहन है

k.asur .....फिर ये सब क्यों

नगीना .......हम कुछ नया अनुभव काटना चाहते है वैसे भी यहाँ गुफा में कोई आता नहीं है आज हमें नया अनुभव लेंगी

k.asur .....किन्तु याद रहे कभी कभी

नगीना ......जी भाई

नगीना विक्रम का मुँह अपनी गीली योनि पे टिका देती है विक्रम ख़ुशी ख़ुशी नगीना की पाव रोटी जैसे फुल्ली योनि की दोनों फैंको को बरी बरी से चूसने लगता है

विसुद्धि .....भाई हमें आपके साथ एक आवर लिंग का अनुभव लेना है

k.asur ......विक्रम पूर्ण नग्न हो कर विसुद्धि की योनि में अपना लिंग दाल कर सम्भोग करो

विक्रम नगीना की योनि से अपना मुँह हटा कर

अपने पुरे कपडे उतर कर पत्थर पे जा लेता

विसुद्धि विक्रम के लिंग पे बेथ कर उसके सरीर पे लेट जाती है

पीछे से k.asur अपना बुसनद नाग विसुद्धि के गुदाद्वार में उतर देता है

विक्रम के लिया ये एक नया अनुभव था भले हे विसुद्धि की योनि कुछ देर पहले हे k.asur लिंग से छोड़ी हो गई थी पैर कुछ हे देर में विसुद्धि की योनि में कसबत आ जाती है जिस से विक्रम को कुछ जयादा में मजा आता है आवर वह कुछ हे देर में विसुद्धि की योनि में झाड़ जाता है

किन्तु विक्रम का लिंग मुरझाने की जगह आवर अकड़ जाता उसके लिंग की बारीक़ से बारीक़ नसे भी फूल कर बारीक़ राशियों के जाल जैसे नजर आ रही थी

विक्रम के झड़ते हे k.asur विसुद्धि को साइड कर गुदाद्वार भेदन जारी रखता है

नगीना आगे भाड़ विक्रम के लिंग को मुँह में भर लेती है

कुछ देर अच्छे से चाट कर साफ करने के बाद नगीना फिर से अपने पाई चोदे कर लेती जाती है

विक्रम लगभग नगीना पे किसी भूखे भेड़िया जैसे टूट पड़ता है विक्रम का जंगलीपन नगीना को आवर उत्तेजित करने लगता है

मनो विक्रम के अंदर किसी ने हवश भर दी हो

विक्रम को अपने सरीर में सेक्स की भूक के साथ कुछ आवर भी महसूस हो रहा ठगा

विक्रम तब तक नगीना को भोग्य रहा जब तक नगीना अपने चरम पे पहुंच विक्रम के लिंग को अपनी योनि राश से न भिगो दिया हो

जैसे हे नगीना ने विक्रम के लिंग पे अपना कमरष छोड़ा विक्रम का लावा भी ुशी वक्त नगीना की योनि में फुट पड़ता है

k.asur .......ये कैसे संभव हो सकता है

विसुद्धि .....क्या हुआ भाई

k.asur ......विक्रम ने नगीना को चरम सुख कैसे प्रदान कर सकता है जबकि वो तो मानव है

विक्रम इस वक़्त नगीना की बहो में लगभग अचेत हे हो चूका था अपने चरम सुख से

कुछ देर बाद शी चुदाई का डोर ख़तम हुआ तो k.asur ने विक्रम को वह से भेज दिया

नगीना .......क्या सोच रहे है भाई आप

k.asur .......यही की विक्रम ने तुम्हे सम्भोग संतुस्ती कैसे प्रदान की

नगीना .......क्युकी वो मुझसे पहले विसुद्धि से सम्भोग किया था उसके वीर्य को विसुद्धि ने दर्जन किया था जिस कारन उसकी सम्भोग सकती भध चुकी है हमारे असुर भाषा में कहे तो उसकी हवश पहले से आदिक भाड़ चुकी है आवर उसका सम्भोग अस्त्र भी

K.asur ......अथार्त सदर्न मनुष्य तुम्हारे साथ सम्भोग करेगा तो उसके भीतर छुपी हवश कामशक्ति भध जाएगी

नगीना .....जी भाई अब आपके अलावा वही एक है जो हमें संतुस्ट कर सकता है

विसुद्धि ......वैसे एक बात है भाई मानवो का लिंग भले हे छोटा हो पैर मज़ा उस से भू बहुत आता है सम्भोग करने में

k.asur .....किन्तु याद रहे तुम दोनों मेरी पत्नी हो उसकी नहीं

नगीना ......आप को भी मानवो की तरह जनन हो रही है हेहेहे आप चिंता न कीजिये हमारा सब कुछ केवल आपका है बस कभी कभी उसके साथ नया अनुभव लेंगी क्यों विसुद्धि पैर उस वक़्त आप भी वही होंगे.......

परीलोक .........

गुरुदेव सूर्य को ले कर परबु मंदिर पहुंचे जो की पूरी तरह से सजाया हुआ था

जो भी रस्ते में मिलता वह गुरुदेव को परनाम कर आगे भध जाता

गुरुदेव .........पुत्र सूर्य अब सिगरा हे तुम्हे ड्रैगन प्लेनेट जाना होगा पुत्री मानसी आवर पुत्री किरण को ले कर के

सूर्य ......स्वीटी क्यों गुरुदेव

गुरुदेव .......क्युकी किरण पुत्री गोल्डन ड्रैगन प्रिंसेस है उसे गोल्डन ड्रैगन से अपने मालिक के रूप में चुना है जैसे वाइट ड्रैगन ने तुम्हे आवर ब्लैक ड्रैगन ने मानसी पुत्री को

सूर्य ......किन्तु स्वीटी ने तो मुझे इस बारे में कुछ बताया हे नहीं

गुरुदेव ......क्युकी उसे अभी इस सत्य का ज्ञान नहीं है पुत्र उसकी पीठ पे बने गोल्डन ड्रैगन को वो कोई सदर्न सकती समाज रही है किन्तु वो सदर्न नहीं है पुत्र गोल्डन ड्रैगन की सकती बहुत हे प्राचीन सकती होती है जो लाखो करोडो ड्रैगन में से किसी एक को चुनती है

सूर्य .......जैसी आपकी की आज्ञा गुरुदेव जब आपका आदेश होगा हम ड्रैगन प्लेनेट के लिया अपने सफर पे निकल जायेंगे

गुरुदेव. .......यही उचित है पुत्र क्युकी भविष्य में होने वाले योध के लिया अभी से तयारी करनी होगी

सूर्य ......जैसा आप कहे गुरुदेव

गुरुदेव ......कुछ आवर भी पूछना चाहते हो पुत्र सूर्य

surya......ji गुरुदेव मुझे अपनी सकतिया प्राप्त हो चुकी है आवर जागृत भी किन्तु स्वीटी

गुरुदेव ......कल के पूजा के बाद पुत्री किरण के साथ सभी की सक्रिय जागृत हो जाएँगी पुत्र

सूर्य ......क्या सपना राधा की भी

गुरुदेव .....पायल प्रीती अलीना की भी पुत्र आवर पुत्री मेर्री की भी

सूर्य .....क्या मेर्री जी की किन्तु वो कैसे क्या उनका जीवन चक्र मुझसे जुड़ा है

गुरुदेव ........तुम्हारे इस प्रश्न का उतर तुम्हे कल पूजा के बाद प्राप्त होगा पुत्र सूर्य अब महल चलो

सूर्य ......गुरुदेव क्या.....

गुरुदेव .....चिंता न करो पुत्र सिगरा हे उन्हें भी तुम्हारे सत्य का ज्ञात हो जायेगा

सूर्य आवर गुरुदेव पारी महल लौट आते है जहा किरण सूर्य को अपने साथ भोजन कक्ष में ले जाती है

सभी गुरुदेव आवर सूर्य का हे इंतजार कर रहे थे

गुरुदेव आवर सूर्य के आते हे विशाल भोजन कक्ष तरह तरह के 56 भोग थल सबके सामने प्रकट होते है सभी महाकाल का नाम ले भोजन आरम्भ करते है

सभी दिल खोल कर भोजन की तरफ करते है भोजन के बाद किरण सूर्य को अपने साथ एक कक्ष में ले कर जाती है जहा एक एक कर सभी लड़किया राजकुमारी आ कर सूर्य को घेर लेती है

सूर्य ......तुम लोग मुझे ऐसे क्यों देख रही हो

किरण .......आपने हमें क्यों नहीं बताया जब जिनिशा हमारी हवेली आई थी

सूर्य जिनिशा को देखता है जो मंद मंद मुस्कुरा रही थी

सूर्य .......इसमें मेरी कोई गलती नहीं है स्वीटी ये सब जीनु का किया धरा है इसने हे कहा की वक़्त काम मिला है पूजा में सभी से मिल लुंगी

किरण .......क्या आप सच कह रहे है फिर जिनिशा ने ऐसा क्यों कहा

सूर्य ......क्या कहा इसने

किरण .....यही की आपने हमसे मिलने से मन किया था

सूर्य ......क्या मैं ऐसा कर सकता हूँ ये सब इस जिनिशा की चल है देखो हम दोनों को लड़ा लार कैसे मुस्कुरा रही है

जिनिशा ......सॉरी सॉरी वो हम सबको देखना था की आज भी आप स्वीटी से डरते है की नहीं

किरण ......सच में ये ाचा मजाक नहीं था जिनिशा आपको तो मजाक कर न भी नहीं आता है इन्होने मुझे पहले हे बता दिया था

सूर्य .....क्या बात है रिद्धि जी आप कहा खोई है

जिनिशा ......आवर कहा परतविलोक में इनके दिल को कोई भ गया है अपने ुशी रामकुमार के सपने देखती है आजकल खुली आँखों से

सूर्य .....क्या बात है फिर तो आप सबसे पहले हमें जरूर मिलवा न उनसे हमें भी आपके सपने के रामकुमार से मिल कर ख़ुशी होगी

रिद्धि ......ऐसा कुछ नहीं जिनिशा बस ऐसे मजाक कर रही है

सूर्य ......ये कोमल कहा है आवर मेर्री जी भी नहीं दिखाई दे रही है

किरण .....कोमल अपने माता पिता के साथ है आवर मेर्री जी अभी बुआ के साथ है

वही एक कक्ष में कोमल अपने माँ महरौनी पूर्वी की गॉड में सर रखे लेती हुई थी

पास में नागराज महावीर आवर एक लड़का भी बैठा
थाजो दिखने में 18 ,19 इयर्स का लग रहा था

n.purvi ......पुत्री कोमलांगी हमें माफ कर देना अगर हम उस समय तुम्हे अनिरुद्ध पूजा के लिए नहीं भेजते तो क्या पता ये सब होता हे नहीं


N.veer ........नहीं महारानी हमारी पुत्री के भाग्य जो नियति द्वारा निर्धारित था उस से पुत्री कोमलांगी कैसे भाग सकती थी

चाहे मानव हो या नाग देव हो दानव अपने कर्मो से भाग नहीं सकता किसी न किसी रूप में अपने कर्मफल को प्राप्त करता हे है

कोमल ......पिता श्री उचित कह रहे है माता श्री

तभी महारानी पूर्वी की नजर कोमल के बालो के पीछे भरी हुई मांग नजर आती है

n.purvi ......पुत्री तुम्हारी सुहाग रेखा में ये क्या है क्या तुम्हारा विवाह हो चूका है

कोमल जल्दी से अपनी मांग चिपटी है पैर तब तक उसके पिता की भी नजर पद चुकी थी

n.veer .......पुत्री कोण है हमारे जमता जिनका तुमने वरन किया है

कोमल ......जिनके ताकत से उस जनम मेरे सुहाग रेखा भरी थे पिता श्री वही है आपके जमता सूर्य ठाकुर

n.purvi .........पुत्री क्या हम इतने पराये हो गए की हमें अपने विवाह तक में सम्मलित नहीं किया

कोमल ......ऐसा न कहिये माता श्री हमें तो खुद अपनी सत्यता अभी कुछ समय पूर्व हे पता चली है की हम कोण है

किन्तु उस से पहले माँ दुर्गा के आशीर्वाद स्वरुप उनके कुमकुम से जिनसे हम प्रेम करते थे उन्हें के हाथो हमारी मांग भरी जा चुकी वो सब अनजाने में हे हुआ था पैर हम उन्हें अपना स्वामी अपना सर्वस्व ा मानते है

कोमल मंदिर में हुए घटना n.purvi आवर n.veer को विस्तार से भाटी है

लड़का .....दीदी इसका मतलव वो हमारे जीजा श्री हुए

कोमल ......है अनुज तुषार वो आपके जीजा श्री है किन्तु विधि पूर्वक विवाह अभी हमारा नहीं हुआ है आवर उन्होंने हमें मन से अपने पत्नी सवीकार किया है

n.veer .........हमें उनसे उत्तम वर हमारी पुत्री के लिए ढूंढ़ने से भी नहीं मिलता हमें आपके वर के रूप में पुत्र सूर्य स्वीकार है पुत्री हम उन्हें महादेव को साक्षी मान अपना जमता सवीकार करते है जल्द हे आप दोनों का विवाह नागलोक में पूर्ण रीती रिवाज से होगा

कोमल ......नहीं पिता श्री आप सिगरता न कीजिये उन्हें पता है कब क्या कर न है सबसे पहले उनका विवाह स्वीटी जिनिशा पारिजात सपना से होगा उसके बाद हे हम विवाह करेंगे या जब तक गुरुदेव इस विषय पे कोई चर्चा नहीं करते है आप भी इस विषय पे कोई चर्चा नहीं करेंगे

n.purvi .......जैसा तुम चाहोगी वही होगा पुत्री हमें तुम मिल गई वही काफी है तुम्हारी ख़ुशी भाड़ कर कुछ नहीं

कोमल ......माता श्री आपको ज्ञात है न हम आपके साथ ज्यादा वक़्त नहीं बिता सकते भले हे पूर्व जनम में हम आपकी पुत्री रही है पैर इस जनम में हम पे किसी आवर का आदिकर्ता है

रेखा जी जो काफी देर से सुन रही थी उनसे रहा नहीं गया आवर वो कक्ष के अंदर आ जाती है

रेखा जी .......किसने कहा की इनका अदिकार नहीं है कोमल बेटी ये तुम्हारी माँ है उनका भी उतना हे हक़ है जितना की तुम पैर मेरा सामजी

क्या एक बेटी की दो माँ नहीं हो सकती है बेटी

n.purvi .....बहम आप यहाँ

रेखा जी .....माफ कर्मा बहन कोमल के न मिलने पे उसे खोजते हुए ीदार आई तो आपकी बात सुनी तो खुद को बोलने से रोक नहीं पाई

n.purvi ......कोई बात नहीं बहन अब तो कोई समस्या नहीं है न पुत्री कोमलांगी

कोमल .....मुझे क्या प्रॉब्लम होगी माँ उल्टा मुझे तो 2 ,2 माओ का प्यार मिलेगा

तुषार ......दीदी के साथ साथ मुझे भी

रेखा जी .....बिलकुल आप भी मेरे बेटे हो वैसे आपका नाम क्या है

तुषार .......हमारा नाम नाग यौवरा तुषार है माता आप हमें तुषार कह सकती है

तुषार आगे भाड़ रेखा जी के पेअर चुत
ा है

रेखा जी ....हमेशा खुश रहो बीटा इस्वर तुम्हे लम्बी उम्र दे


रेखा जी की n.veेर आवर n.purvi से काफी देर तक बात होती है फिर रेखा जी वह से अपने कक्ष में चली जाती है कोमल आज n.purvi के साथ सोने का आग्रह करती जिस पे रेखा जी ने ख़ुशी ख़ुशी कोमल का माथा चुम कर स्वीकृति दे दी वह रुकने की

रेखा जी जब अपने रूम की तरफ जा रही थी तभी रस्ते में उन्हें अलीना मिल गई

रेखा जी .....क्या हुआ बेटी अलीना

अलीना .....आंटी वो दीदी को देख रही थी

रेखा जी .....बीटा वो तो मेनका के साथ सोने वाली है चलो आज तुम मेरे साथ सो जाओ


अलीना ....आपको प्रॉब्लम तो नहीं होगी न

रेखा जी .....कोई प्रॉब्लम नहीं होगी

रेखा जी अलीना को अपने साथ रूम में ले जाती है जहा दोनों बात करते करते सो जाती है

दोनों को हे सुबह बड़ा सुरप्रीसेड मिलने वाला था जब दोनों की सुबह आगे खुलेंगी ............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................

फ्रेंड्स कल एक छोटा सा काम आ गया है हो सकता है सायद कल कोई अपडेट न आये ......
 
अपडेट अभी लिखना सुरु करूंगा पूरा होती हे पोस्ट करुगा फ्रेंड्स

ज्यादा वेट नहीं कराऊंगा .........
 
अपडेट 154

रेखा जी जब अपने रूम की तरफ जा रही थी तभी रस्ते में उन्हें अलीना मिल गई

रेखा जी .....क्या हुआ बेटी अलीना

अलीना .....आंटी वो दीदी को देख रही थी

रेखा जी .....बीटा वो तो मेनका के साथ सोने वाली है चलो आज तुम मेरे साथ सो जाओ

अलीना ....आपको प्रॉब्लम तो नहीं होगी न

रेखा जी .....कोई प्रॉब्लम नहीं होगी

रेखा जी अलीना को अपने साथ रूम में ले जाती है जहा दोनों बात करते करते सो जाती है

दोनों को हे सुबह बड़ा सुरप्रीसेड मिलने वाला था जब दोनों की सुबह आगे खुलेंगी ............

अब आगे .........

आज सुबह परीलोक में समय से कुछ जल्दी हे हो चुकी थी

सूर्य अपने नियम से फ्रेश हो ध्यान में लीं हो जाता है

सूर्य को अपने भीतर आज अलग हे ऊर्जा मह्सुश हो रही थी सायद परीलोक की दिव्या ऊर्जा से या किसी अन्य कारन से

सूर्य जब अपने ध्यान से बहार निकला तो सामने गुरुदेव खड़े मुस्कुरा रहे थे

सूर्य ......परनाम गुरुदेव

गुरुदेव ......कल्याण हो पुत्र सूर्य पूजा के लिया त्यार हो जाओ पुत्र कुछ समय पश्चात पूजा आरम्भ होगी

सूर्य .....जी गुरुदेव मैं अभी त्यार होता हूँ

गुरुदेव ......कुछ पूछना चाहते हो पुत्र

सूर्य ......जी गुरुदेव वो आज ध्यान करते वक़्त अपने भीतर कुछ विचित्र ऊर्जा को मह्सुश किया

गुरुदेव ........पुत्र वो ऊर्जा वाइट ड्रैगन की ऊर्जा थी जो परीलोक की वाइट ऊर्जा के सम्पर्क में आने से जागृत हो चुकी है

तुम्हे अपने सरीर में बदलाव मह्सुश नहीं हो रहा है क्या पुत्र

सूर्य ......जी गुरुदेव मुझे ऐसा लग रहा जैसे मेरा सरीर लोहे के सामान हो चूका है

गुरुदेव ......हाहाहा पुत्र लोहा केवल एक मजबूत दतु है लोहे से भी मजबूत इस भारमंद में आवर भी दतु है

गुरुदेव अपने जादू से एक सोर्ड का निर्माण करते आवर सूर्य के सीने पे पूरी ताकत से वॉर करते है

सूर्य के सरीर पे लगते हे सोर्ड के टुकड़े टुकड़े हो जाती जाते है

गुरुदेव .....वाइट ड्रैगन की ऊर्जा ने तुम्हारे सरीर को बहुत मजबूत बना दिया पुत्र जैसे हे तुम वाइट ड्रैगन से जुड़ जाओगे तुम्हारा सरीर किसी भी सदर्न अस्त्र सत्र से सुरक्षित हो जायेगा

surya......ji गुरुदेव

गुरुदेव ......तुम पूजा के लिया त्यार हो जाओ पुत्र तुम्हारे मां जी आवर तुम पिता भी वयोम आवर सकती के साथ परीलोक पहुंच चुके है

सूर्य .....जी गुरुदेव किन्तु क्या वो इतनी जल्दी इस सत्य को स्वीकार करेंगे

गुटूदेव ......तुम्हारे पापा आवर बड़े पापा को कल रात उनके पूर्व जनम की यादे मिल चुकी है जैसे बाकि सभी की उनकी तुम चिंता न करो पुत्र परबु की इच्छा से सब उचित हे होगा

सूर्य .....जी गुरुदेव

वही रात में .मेनका जी शालिनी जी रेखा जी दादा जी दादी जी को अपनी यादे मिल चुकी थी

वही रेखा जी के रूम में ........

रेखा जी आवर अलीना दोनों एक दूसरे को बहो में भर कर सुकून की नींद सो रहे थे वही एक सकाश अपनी भीगी पलकों से बड़े प्यार से दोनों देख रहा था

ये साक्ष कोई आवर नहीं सूर्य के बड़े पापा महेंद्र सिंह ठाकुर थे जो अपने बेटी प्रिय पुर रेखा जी को बड़े प्यार से अपनी भीगी हुई आँखों से देख कर खुश हो रहे थे

महेंद्र जी .......इतने समय से मेरी बची मेरे साथ रही फिर भी मैं उसे पहचाना नहीं पाया

कैसा अभागा पिता हूँ मई जो अपनी हे बची को पहचाना नहीं पाया

बेखयाली में ये बात महेंद्र जी में मन में सोचने की बजाय मुँह से बोल दिया महेंद्र जी की आवाज सुन रेखा जी की आँखे खुल जाती सामने अपने पति को बीएड के सिरहाने बैठे अलीना को देखते हुए पति है

जैसे रेखा जी अलीना का चेहरा गौर से देखती है उनकी आँखे भी नाम हो जाती है

रेखा जी ....मेरी बची पिरया सुनिए जी ये हमारी बेटी पिरया है

महेंद्र जी का ध्यान रेखा जी की आवाज से उनकी तरफ जाता है

महेंद्र जी ......है रेखा देखो हमारी बेटी प्रिय हरे पास हे थे आवर हम उसे पहचाना भी नहीं पाए

रेखा जी ......आप बिलकुल ठीक कह रहे है इतने दिनों से हमारी बची साथ में थी फिर भी हम उसे पहचान नहीं पाए

महेंद्र जी आवर रेखा जी की आवाज से अलीना भी जाग जाती है वैसे भी सुबह हो चुकी थी

अलीना .....अंकल आप यहाँ आवर आप दोनों रो क्यों रहे है

महेंद्र जी ......प्रिय बेटी है तुम्हारा पापा हूँ बेटी

रेखा जी ......है बेटी अलीना तुम हमारी बेटी पिरया हो

अलीना ......ये आप क्या कह रहे हो एक मिनट्स क्या आपको सब याद आ गया माँ डैड

रेखा जी आवर महेंद्र जी दोनों अलीना को अपने गले स्व लगा लेते है

ालीना ........ आज मैं बहुत खुश हु मैं अनाथ नहीं हूँ मेरे भी माँ डैड है माँ डैड मुझे यकीं था आप मुझे एक न एक दिन पहचान लेंगे

महेंद्र जी ......क्या मतलब पहचाना लेंगे क्या तुम पहले से जानती थी सब

अलीना .....यस डैड मुझे कुछ दिन पहले हे पता चला की पिछले जनम में मैं आपकी बेटी थी आवर आप मेरे माँ डैड

रेखा जी .......फिर तुमने हमें बताया क्यों नहीं बेटी की तुम हमारी बेटी हो

अलीना ......क्या आप यकीं करते इन सब बातो पे आवर फिर मुझे सूर्य ने मना किया था आपकी बॉटने से

महेंद्र जी ......इस सूर्य को तो मैं देखता हूँ

रेखा जी .....खबरदार जो मेरे बेटे को कुछ भी कहा तो

अलीना .....डैड प्लेसेस उनसे कुछ न कहिये उनको पता था जब वक़्त आएगा तो खुद हे सचाई सामने आ जाएगी अगर उस वक़्त वो मना नहीं करते तो मैं आपको सब बॉटने वाली थी पैर क्या उस वक़्त आप यकीं करते मुज पे

रेखा जी .......प्रिय सच कह रही है जी हम कभी अपनी बेटी की इस बात पे यकीं नहीं करते

महेंद्र जी ......हमारी दूसरी बेटी कहा है उसे भी तो अपनी बहन से मिलना चाइये

अलीना ......डैड कोमल को सब पता है मेरे बारे आवर वो आपकी बेटी होने के साथ साथ नागरानी पूर्वी जी की भी बेटी है

रेखा जी महेंद्र को पूरी बात बिताती है

रेखा जी ......सुनिए जी आप इस बार ऐसा कुछ नहीं कहेंगे जिस से मेरे बचो को दुःख हो पिछले बार भी आपने सूर्य से सदी का विरोध किया था आवर देखो फिर क्या हुआ

महेंद्र जी .....पैर समाज को कैसे समझेंगे

अलीना .....डैड आप सूर्य को नहीं जानते है आपने अभी तक उसका एक हे रूप जाना है आवर डैड गुरुदेव है न वो सब संभल लेंगे बस आप सूर्य को कुछ न कहना

महेंद्र जी .....ठीक है बेटी तुम्हारी ख़ुशी से भध कर मेरे लिया कोई समाज नहीं जैसा तुम आवर कोमल चाहोगी वही होगा

अलीना .......लव यू डैड लव यू माँ

महेंद्र जियर रेखा जी बारी बारी से दोनों अलीना का माथा चुम अपना प्यार देते है

अलीना ......माँ डैड को कोमल के बारे में भी बता दीजिये

महेंद्र जी .....क्या बताना है कोमल के बारे में

रेखा जी ......वो कोमल की सदी हो चुकी है सूर्य से

महेंद्र जी .......क्याआआआ रेखा क्या बकवाश कर रहे हो सुबह सुबह दिमाग तो ख़राब नहीं हो गया है तुम्हारा

रेखा जी ......पहले पूरी बात सुन लीजिये दर्शक हुआ ऐसे की ......... ........... ............ ..........रेखा जी महेंद्र को मंदिर वाली घटना बिताती है तब जा कर महेंद्र जी संत हुए

महेंद्र जी ......तुमने तो मुझे डरा हे दिया था मुझे लगा सूर्य ने कोमल से हमें बिना बताये हे सदी कर ली

रेखा ji......bibi तो कोमल बेम चुकी है सूर्य को बस रीती रिवाजो के साथ फिर से सदी होगी उनकी आप अपने मन को साफ रख दिल से इस रिश्ते को स्वीकार कीजिये

महेंद्र जी ........मुझे मेरे बचो की ख़ुशी चाइये आवर कुछ नहीं

वही शिव सीधा अपने माँ पापा से मिलता है तीनो काफी देर चर्चा करते है जिसमे दादी जी शिव को सब कुछ बता देती है सूर्य को ले कर के

पहले तो शिव को यकीं हे नहीं हुआ की ऐसा भी हो सकता है

शिव ......पैर माँ सा सूर्य हे क्यों क्या सब इसे स्वीकार करेंगे कोई भी माता पीटते नहीं चाहता की उसकी बेटी की सदी किसी ऐसे लड़के से हो जिसकी एक नहीं अनेक सदी होंगी

दादी जी .......तुम्हे किस को ले कर ऐसा संदेह है शिव

शिव .......मुझे नहीं लगता कोई भी ऐसे रिश्ते को स्वीकार करेंगे

दादा जी ........ठीक है फिर आज पूजा के बाद सब बड़े बेथ कर बात कर लेते है किसको किसको इस से एतराज है आवर क्यों ये भी पता चल हे जायेगा

दादा जी ......अब जाओ शालिनी बेटी से भी मिल लो फिर पूजा के लिया निकलना है आवर मेरी बात का ध्यान रखा पूजा में जो कुछ भी हो मून रहना शिव

शिव ......ठीक है पापा जैसा आप कहो आपके रहते मुझे कुछ भी बोलने की जरुरत नहीं जब आप को किसी बात से आपत्ति नहीं तो फिर मैं क्यों आपत्ति करूँगा

दादा जी .....बीटा मैं जनता हूँ तुम्हे सब कुछ अपनाने में वक़्त लगेगा पैर बीटा ये जो कुछ हो रहा उसके पीछे बहुत बड़ी वजह है नहीं तो हम सबको फिर से जनम नहीं लेना पड़ता

शिव .....ठीक है पापा वैसे ये आपके राजकुमार है कहा

सूर्य .....hello डैड मई. यहाँ हूँ

कक्ष में आते हे सूर्य सीधा अपने पापा से गले मिलता है आवर अपने दादा दादी जी के पेअर छू आशीर्वाद लेता है

सूर्य .....कैसे है डैड आप

शिव ........मैं तो अच्छा हूँ पैर तुम कुछ बदले बदले लग रहे हो मुझे

सूर्य ......ऐसा कुछ नहीं है डैड अभी आप जा कर त्यार हो जाइये आवर आप भी दादा जी दादी जी पूजा के लिया महाकाल मंदिर जाना है

शिव .....ठीक है तुम्हे बाद में देखता हूँ क्या क्या कांड किये है तुमने

सूर्य वह से हस्ते हुए बहार निकल जाता है

शिव ......देखो तो कैसे हैश रहा जैसे इसे कोई फ़िक्र हे नहीं है

दादी जी ......उसे क्यों फ़िक्र होगी फ़िक्र करने के लिया इतनी बिबिया जो मिली है उसे

कुछ देर बाद सब त्यार हो महाकाल मंदिर की तरफ रवाना हो जाते है

सूर्य का पूरा परिवार रानी पारी पारिजात जीनत जिनिशा रिद्धि नागराज .वीर नागरानी पूर्वी तुषार प्रेतराज सभी पारी लोक के साही सवारी से आकाश मार्ग से होते हुए परीलोक की भव्य सुंदरता को देखते हुए महाकाल मंदिर पहुंचे जहा

गुरुदेव के साथ साथ ऋषि दूर्वा बाकि 5 ऋषियों के साथ वह पहले से मौजूद थे

सूर्य .....परनाम ऋषिवर

ऋषि दूर्वा .....कल्याण हो पुत्र सूर्य

सूर्य .....आप अभी ऋषियों को परनाम

5.ऋषि .......यसस्वी भाव पुत्र सूर्य

पारिजात जिनिशा रिद्धि जीनत किरण सपना राधा अलीना पायल प्रीती कोमल मानसी मेर्री जी आगे भाड़ सभी ऋषियों से आशीर्वाद लेती है

गुरुदेव .......आप सभी अन्य लोको से परबु की पूजा में समलित होने यहाँ पधारे है

आप सभी का धन्यवाद

पुत्र सूर्य पुत्री किरण तुम दोनों आगे आओ

सूर्य आवर किरण आगे जा गुरुदेव के सामने खड़े हो जाते है

गुरुदेव ....पुत्र सूर्य आवर पुत्री किरण तुम दोनों मंदिर में बने सरोवर में सनान कर इन वस्त्रो को दर्जन करो

सूर्य किरण .....जी गुरुदेव

सूर्य आवर किरण गुरुदेव से वस्त्र ले मंदिर में एक तरफ बने सरोवर की आवर चल देते है

किरण आवर सूर्य वही सरोवर के पास में बड़े से पत्थर पे वस्त्र रख दोनों सरोवर में उतर जाते है जो की ढूढ के सामान सफ़ेद जल से भरा हुआ था

सूर्य आवर किरण के सरोवर में उतारते हे वो सफ़ेद जल डेरी डेरे गोल्डल कलर में बदलने लगता है

जैसे हे किरण आवर सूर्य सरोवर में डुबकी लगते है सूर्य आवर किरण को कुछ दृश्य दिखाई देते है आवर सूर्य की पीठ पे किसी तरह का नक्शा उभरने लगता है

कुछ देर बाद दोनों बहार निकलते है

किरण .....क्या आपने भी वो सब देखा

सूर्य ......है स्वीटी वो कुछ आवर नहीं गोल्डन ड्रैगन जो तुम्हारी पीठ पे बना हुआ है उस तक पहुंचने का मार्ग था उसका नक्शा मेरी पीठ पे बन चूका है

किरण .......आप उस तरफ अपना चेहरा कर वस्त्र बदल लीजिये

सूर्य .........सूर्य ठीक है आज नहीं तो कल मुझे देखना हे है कुछ समय पुर इन्तजार सही

किरण ......जल्दी कीजिये सब परीक्षा कर रहे है

सूर्य दूसरी तरफ अपने चेहरा कर एक एक कर अपने वस्त्र उतरना है किरण भी अपने सभी विस्तार उतर दोनों गुरुदेव द्वारा दिए वस्त्र पहन लेते है

सूर्य ......चले स्वीटी

kiran......ha चलिए

सूर्य आवर किरण दोनों सरोवर से निकल कर गुरुदेव के सामने जा पहुंचते है

गुरुदेव ......पुत्र सूर्य पुत्री किरण अब तुम दोनों पूर्ण मन से आत्मा से परबु आवर देवी माँ की पूजा आराम करो

सूर्य किरण गुरुदेव आज्ञा अनुसार देवी माँ आवर परबु की पूजा आरम्भ करते है

किरण सूर्य देवी माँ की स्तुति आराम करते है उसके पश्चात परबु की स्तुति आरम्भ करते है जैसे जैसे स्तुति पूर्णत की आवर भाड़ रही थे वैसे वैसे सूर्य आवर किरण की 7 कुंडली जागृत हो रही थी

जैसे हे स्तुति पूर्ण होती है अचानक से समय रुक जाता है

आवर सामने पारदर्शी रूप में देवी माँ आवर परबु
खड़े थे जिन्हे देख गुरुदेव सूर्य किरण तीनो अपने हाथ जोड़ घुटनो पे आ जाते है

सूर्य kiran......parnam माँ परनाम परबु

देवी माँ ......यशश्वी भाव पुत्र अहोभाग्य आती भाव पुत्री किरण


Parbu.....dirgayoush मान भाव पुत्र पुत्री

गुरुदेव ........परनाम माँ परनाम परबु आज आप दोनों के एक साथ दर्शन कर मेरा जीवन सर्तक हुआ देवी माँ परबु

माँ .परबु ......कल्याण हो पुत्र तुमने अपना दायित्व पूर्ण निष्ठां से निर्भया पुत्र तुम हमारे दर्शन के पत्र हो पुत्र

परबु ......पुत्र सूर्य तुमने अपने पूर्व जनम से अपनी गलतियों का सुधर कर तुम उन शक्तियों का प्रयोग करने योगयो हो चुके है अब तुम अपनी इच्छा से अपनी शक्तियों का प्रयोग कर सकते हो पुत्र किन्तु अनुचित प्रयोग किया तो उसका दंड भी नियति तुम्हे अवश्य प्रदान करेगी पुत्र नियति से त्रिदेव भी बन्दे हुए है

सूर्य .......परबु एक बार मैंने अपनी अज्ञानता में इन दिव्या शक्तियों का दुरूपयोग कर चूका हूँ फिर भी आपने मुझे एक मौका आवर दिया अपने उद्देश्य को पूर्ण करने के लिया फिर वही भूल कर मैं आपके आशीर्वाद का अपमान नहीं कर सकता

देवी माँ .......पुत्र सूर्य हमें तुमसे यही अपेक्षा है पुत्र साथ हे ये तुम्हारा दायित्व है की तुमसे जुडी तुम्हारी संगनी भी अपने दायित्व को समाज अपनी सकती का जान कल्याण के लिया उचित प्रयोग करे

पुत्री किरण अब तुम्हारी सक्रिय जागृत हो चुकी है तो तुम्हे भी अपनी शक्तियों का प्रयोग सोच समाज कर करना होगा

किरण .....जी माँ जैसी आपकी आज्ञा माँ

देवी माँ
........क्या हुआ पुत्र किस गहन विचार में खोये हुए हो

गुरुदेव ......माँ आपसे इस भ्रमण में कुछ छुपा है क्या जो आप मेरे मन की स्थिति को नहीं जान सकती

देवी माँ गुरुदेव को एक मोली का धागा देती है

माँ ......पुत्र तुम्हारे मन में जो संशय है उसका समाधान ये है पुत्र यज्ञ से पूर्व इस मोली को सबकी कन्याओ के हाथ में बन देना जिसका मोली लाल से सवेट हो वो पुत्र सूर्य के जीवन संगिनी होगी उसे यज्ञ में आहुति देने का अदिकार होगा किनत किसी को भी इस सत्य का ज्ञान हो हो पुत्री किरण आवर सूर्य को भी नहीं समय आने पे स्वयं नियति उन्हें पुत्र सूर्य के जीवन में उनका स्थान देंगी

गुरुदेव .....जो आपका आदेश देवी माँ
आवर प्रभु गुरुदेव सूर्य किरण के साथ साथ सबको आशीर्वाद दे अंतर्ध्यान हो गए....... ....

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रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .................
 
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गुरुदेव ......माँ आपसे इस भ्रमण में कुछ छुपा है क्या जो आप मेरे मन की स्थिति को नहीं जान सकती

देवीमा गुरुदेव को एक मोली का धागा देती है

माँ ......पुत्र तुम्हारे मन में जो संशय है उसका समाधान ये है पुत्र यज्ञ से पूर्व इस मोली को सबकी कन्याओ के हाथ में बन देना जिसका मोली लाल से सवेट हो वो पुत्र सूर्य के जीवन संगिनी होगी उसे यज्ञ में आहुति देने का अदिकार होगा किनत किसी को भी इस सत्य का ज्ञान हो हो पुत्री किरण आवर सूर्य को भी नहीं समय आने पे स्वयं नियति उन्हें पुत्र सूर्य के जीवन में उनका स्थान देंगी

गुरुदेव .....जो आपका आदेश माता

देवी माँ आवर प्रभु गुरुदेव सूर्य किरण के साथ साथ सबको आशीर्वाद दे अंतर्ध्यान हो गए....... ......

अब आगे .......


गुरुदेव ......ऋषि दूर्वा आपसे अनुरोध है की आप इस यज्ञ को सम्पन करे

ऋषि दूर्वा ......किन्तु ये कैसे संभव है राजगुरु सूर्य आपका शिष्या है फिर हम कैसे

गुरुदेव ......वो आपका भी शिष्या है ऋषि दूर्वा गुरु सदैव अपने शिष्या को उचित ज्ञान के साथ साथ उचित मार्ग भी दिखता है आवर कठिन समय में उसकी शांतता भी करता है आप सभी ऋषियों ने सूर्य की हमिलया में सहायता कर ये साबित भी कर दिया है अतः आपसे निवेदन है की इस यज्ञ की आहुति आप दे आवर यज्ञ का सुभाआराम करे

ऋषि दूर्वा .......उचित है राजगुरु आपने ये सामान हमें दिया है इस सामान को हम सभी ऋषि आपको जा
एस्ट गुरु भाई मान कर सहर्ष स्वीकार करते है

गुरुदेव .......अब यज्ञ आराम करे ऋषि दूर्वा

ऋषि दूर्वा 5 ऋषियों को साथ ले यज्ञ आरम्भ करते है

वही गुरुदेव माँ से प्राप्त दिव्या मोली किरण सपना पारिजात जिनिशा पायल प्रीती अलीना राधा कोमल जीनत मानसी को बंद देते है

( गुरुदेव ......क्या पुत्री रिद्धि को भी माँ द्वारी दी मोली को बांधना चाइये आवर पुत्री मेर्री के विषय में हम माँ महाकाली पैर हे छोड़ देते है )

गुरुदेव अपनी पुत्री रिद्धि आवर मेर्री जी के हाथ में भी मोली बंद देते है

ऋषि दूर्वा ......पुत्र सूर्य पुत्री किरण आप दोनों यहाँ आसान ग्रहण करो

सूर्य आवर किरण दोनों ऋषि देउवा के बताये स्थान पे बेथ जाते है

ऋषि दूर्वा जैसे जैसे मंत्रो उच्चारण के साथ किरण आवर सूर्य से यज्ञ में आहुति डलवा रहे थे वैसे वैसे किरण आवर सूर्य के सरीर से निकली अदृश्य ऊर्जा यज्ञ में समाहित हो रही थी

ऋषि दूर्वा ......पुत्री किरण अब आप यज्ञ को परनाम कर उठ सकती है

किरण ....जी ऋषिवर

किरण यज्ञ को परनाम कर यज्ञ विधि से हैट जाती है

गुरुदेव .......पुत्री पारिजात अब तुम जाओ आवर यज्ञ में आहुति डालो

पारिजात गुरुदेव के आदेश पे सूर्य के बगल में जहा पहले किरण थे वह आ कर बेथ जाती है कुछ देर बाद पारिजात के सरीर से वाइट ऊर्जा निकल कर यज्ञ में समाहित हो जाती है

ऐसे हे जिनिशा के साथ होता है उसके पश्चात जीनत द्वारा भी यज्ञ में आहुति दी जाती है जिसके सरीर से रीड ऊर्जा निकलती है आवर यज्ञ में समाहित हो जाती है

गुरुदेव ......पुत्री मानसी अब तुम जा कर यज्ञ में आहुति दो

मानसी .....जी गुरुदेव

मानसी ख़ुशी ख़ुशी यज्ञ में आहुति देती है जिस से सूर्य के सरीर से रेड ऊर्जा निकल कर यज्ञ में समाहित हो जाती है फिर ुशी यज्ञ से मानसी में ( ये मानसी की हे ऊर्जा सकती थी जो उसे वापिस मिली थी )

गुरुदेव .......पुत्री कोमल अब आप जाओ

जैसे हे कोमल यज्ञ की आवर भड़ती है नागलोक में हलचल होने लगती कोमलांगी द्वारा अर्पित नागमणि शिवलिंग से निकल कर गायब हो जाती है

िस्दार जैसे हे कोमल ने पहली आहुति यज्ञ में सूर्य के साथ दी वैसे पुरे मंदिर में आँखे चुडिया देने वाली रौशनी पुरे मंदिर में फ़ैल जाती है जो डेरी डेरे कोमल के सरीर में समाहित हो जाती है

नागराज वीर .....गुरुदेव ये तो वही

गुरुदेव .......है नागराज महावीर ये वही नागमणि है जो राजकुमारी कोमलांगी ने परबु को अर्पित की थी किन्तु ये पहले से आदिक सकती सम्पन है पुत्री कोमल को परबु के आशीर्वाद से फिर से नागमणि मिल चुकी है

कोमल के सरीर से कुछ ऊर्जा निकल कर यज्ञ में समाहित हो जाने के बाद राधा को भेज हे रहे थे की रिद्धि के हाथ में बंधे मोली धागे पे गुरुदेव की सृस्टि अचानक से पड़ती है

(गुरुदेव .......क्या मेरी पुत्री रिद्धि का जीवन चक्र भी सूर्य से जुड़ा हुआ है या फिर ये किसी आवर घटना का संकेत है किन्तु ये दिव्या मोली तो माँ ने मुझे इसे लिया दिया ताकि सूर्य से जुड़े सभी यज्ञ में आहुति दे सके )

गुरुदेव .....पुत्री रिद्धि अब आप यज्ञ में सूर्य के साथ भेट जाओ पुत्री

रिद्धि .....पैर पिता जी मैं कैसे

गुरुदेव ........पुत्री मैं नहीं जनता किन्तु तुम्हे यज्ञ में आहुति प्रदान करनी होगी अब जाओ आवर यज्ञ में पुत्र सूर्य के साथ यज्ञ आहुति दो

रिद्धि .....जो आज्ञा पिता श्री

रिद्धि सूर्य के साथ बेथ यज्ञ में आहुति देने लगती है

(रिद्धि .....पिता श्री ने मुझे इनके साथ यज्ञ में बैठने को क्यों कहा जबकि इस यज्ञ में वही बेथ सकती है जिनका जीवन चक्र किसी रूप में इनके साथ जुड़ा है

कहि मेरा भी जीवन चक्र इन से तो नहीं जुड़ा है जब से इनका वो दिव्या रूप देखा है मैं इनपे मोहित हो राहु हु जैसे इनके बिना जीवन जीना निरर्थक है

हे परबु अब मेरा जीवन आपके हे आशीर्वाद पे निर्भर करता है मैं नहीं जानती मैं इनसे प्रेम करती हूँ या ये कुछ आवर है )

रिद्धि हुशि ख़ुशी यज्ञ आहुति दाल अपने स्थान पे चली जाती है

उसकी पश्चात राधा सपना पायल प्रीती अलीना

सूर्य के साथ यज्ञ में आहुति देती है जिस यज्ञ से ऊर्जा निकल इन सबके सरीर में समाहित हो जाती है

ऋषि दूर्वा .....राजगुरु क्या कोई अन्य भी है जिन्हे आहुति प्रदान करनी है यज्ञ में

( मेर्री जी ........क्या मुझे भी यज्ञ में आहुति डालने का अवसर मिलेगा )

गुरुदेव ......ऋषि दूर्वा सभी ने यज्ञ में आहुति दे दी है

ऋषि दूर्वा .......नहीं राजगुरु अभी भी कोई बचा है जिसकी आहुति के बिना यज्ञ सम्पन नहीं हो सकता है

किरण ......मैं जानती हूँ वो कोण है गुरुदेव मेर्री जी है जिनकी आहुति के बाद हे यज्ञ सम्पन होगा

गुरुदेव मेर्री के हाथ में बंधे मोली को देखते है जिसका रंग पीला था

( गुरुदेव .....पुत्री मेर्री का मोली न सफ़ेद है न लाल फिर पुत्री मेर्री को यज्ञ आहुति देने का मतलब

किरण ......गुरुदेव मेर्री जी वो है जिन्होंने सूर्य को नर नारी के प्रथम मिलान का ज्ञान वह सुख दिया है इनकी आहुति के बिना यज्ञ पूर्णत प्राप्त नहीं करेगा

गुरुदेव ......क्या तुम इस सत्य को पहले से जानती हो पुत्री

किरण ......जी गुरुदेव मेर्री जी का परीलोक में होने का मुख्या कारन हे यही है

गुरुदेव ......उचित है पुत्री )

गुरुदेव ........पुत्री मेर्री तुम्हे भी यज्ञ में आहुति देने होगी पुत्र सूर्य के साथ

दादी जी .......जाओ बेटी मेर्री गुरुदेव जो कह रहे है वही करो

मेर्री जी कुछ असहज थी इन सबको ले कर के क्युकी मेर्री जी को ले कर गुरुदेव को संशय था जबकि किसी आवर के वक़्त कोई शंशय नहीं था

सूर्य ......मेर्री जी अपने मन से सभी सोच को निकल दीजिये आवर सच्चे मन से यज्ञ में आहुति दीजिये

मेर्री जी गर्दन है में हिला कर सूर्य के साथ यज्ञ आहुति डालती है कुछ समय बाद यज्ञ से एक ऊर्जा निकल मेर्री जी के सरीर में जाने लगती है जिस से मेर्री की आँखे बंद हो जाती है

जिसे देख सूर्य किरण दोनों के होंटो पे मुस्कान आ जाती है वही गुरुदेव थोड़े चिंतित लग रहे थे

जैसे मेर्री जी यज्ञ विधि से उठी यज्ञ ने अपने संकेत दे दिए की यज्ञ सम्पन हुआ

ऋषि दूर्वा .....राजगिरि यज्ञ सम्पन हुआ

पुत्र सूर्य यज्ञ ऊर्जा को दर्जन करने को सज हो पुत्र

सूर्य ......जी गुरुदेव

सूर्य यज्ञ के सामने हाथ जोड़ अपने आँखे बंद कर लेता है

तभी यज्ञ से तेज प्रकाश पुंज निकल कर सूर्य के मस्तिकाः के मद्य भाग में समाहित होने लगता है

प्रकाश पुंज से निकल रही रौशनी को कुछ हे लोग थोड़ा बहुत देख प् रहे थे जैसे की किरण रानी पारी गुरुदेव j.king प्रेतराज .नागराज वीर आवर ऋषि दूर्वा पारिजात जिन्नात रिद्धि जिनिशा कोमल

कुछ देर बाद जब रौशनी काम हुई तो सभी की सृस्टि सूर्य के इस दिव्या तेज़ाब रूप पे हे ातक गई थी

इस वक़्त सूर्य को जो भी देखता उस से अपने नजरे हे नहीं हटा प् रहा था

किरण .....वाओ मेरी जान क्या लग रहे हो अगर ऐसे हे आप इस रूप में रहे तो यहाँ बाकि लड़कियों क्या होगा लड़किया छोड़िये बाकि सदी सुधार है उनकी क्या हालत हो रही है

किरण जल्दी से आगे भध सूर्य का हाथ थम लेती है जिस से सूर्य की आँखे खुल जाती है

सूर्य जब सामने सबको देखता है तो सभी उसे हे प्यार से देख रही थी

किरण ....अपनी सम्मोहन सकती को रोकिये वर्ण सदी की लिस्ट भाड़े न बढे आपकी प्रेम दिवानियो की लिस्ट जरूर भध जाएगी

सूर्य मुस्कुरा कर किरण को देखता है सूर्य की मुस्कराहट से तो स्वयं किरण भी नहीं बच पति है

किरण ......बहुत खूबसूरत है आपकी मुस्कराहट......

पैर आप मुस्कुराते बहुत काम हो ......

चाहते है यही मुस्कुराते हुए देखे हम आपको ......

पैर आप तो ईद के चाँद है जो नजर हे काम आते हो.........

सूर्य अपनी पलके जपका कर अपनी सम्मोहन सकती को बंद करता है पैर फिर से सूर्य का तेज आज पहले के मुकाबले काफी भध चूका था

गुरुदेव ......अब आप सभी आ कर यज्ञ में आहुति दे सकती है

गुरुदेव के कहने के बाद सभी बड़े यज्ञ में आहुति देती है जहा सूर्य को फिर मेनका जी के साथ आहुति देनी पड़ती है आवर रानी पारी के साथ भी

सुबह से चले इस परबु पूजा दोपहर तक चलती है

रानी पारी .......परबु पूजा में सम्मिलित सभी महाकाल भक्तगणों से आग्रह है की वो सबकी परबु का पार्षद ग्रहण करने के बाद हे अपने लोक के लिए निकले

गुरुदेव ......आप सब महल चलिए

सूर्य ......गुरुदेव हम सभी भी इन सबके बिच इन सभी के साथ यही परबु का पार्षद ग्रहण करे

परबु की नजरो में सब एक सामान है फिर हम परिमहल में पार्षद ग्रहण करे ये उचित नहीं

ऋषि दूर्वा .....सत्य वचन पुत्र सूर्य परबु अपने भक्तो में कभी भेद भाव नहीं करते उनके सामने क्या राजा क्या रैंक सब एक सामान है सब उनकी इच्छा के ादिन है

सूर्य के परिवार के साथ साथ नागराज वीर का परिवार प्रेतराज j.king आवर बाकि सभी वही परबु के पार्षद रूपी भोजन कर परबु को परनाम कर पारी महल लौट आते है

गुरुदेव ........पुत्र सूर्य पुत्री किरण हमें आपसे कुछ विशेष चर्चा करनी है

सूर्य किरण .....जी गुरुदेव.

सूर्य किरण गुरुदेव के साथ एक कक्ष की आवर निकल जाते है

गुरुदेव .......पुत्री किरण क्या तुम पुत्री मेर्री के विषय में जानती थी

किरण ......जी गुरुदेव इन्होने मुझे सब सत्य बता दिया था

सूर्य ......किन्तु आप कुछ विचलित दिखाई दे रहे है गुरुदेव

गुरुदेव ......है पुत्र हम चिंतित है क्युकी पुत्री मेर्री का विवाह तुमसे नहीं हो सकता है फिर यज्ञ ने पुत्री मेर्री की आहुति क्यों स्वीकार की हम ये समाज नहीं प् रहे है

किरण .....गुरुदेव आपकी चिंता वे अर्थ है क्युकी यज्ञ में मेर्री जी द्वारा दी गई आहुति अनिवार्य थी

क्युकी उन्होंने अपना कौमार्य सूर्य को प्रेम स्वरुप भेट किया था

वो पहली कन्या थी जिन्होंने सूर्य को सृस्टि सृजन का ज्ञान दिया है इस यज्ञ ने उन्हें ुशी त्याग आवर प्रेम का पुरूस्कार दिया है

भले हे उनका विवाह न हो सूर्य से किन्तु इनके सम्बन्ध भविष्य में भी बनते रहेंगे जब तक इन दोनों की इच्छा होगी इनके बिच प्रेम होगा न की हवश तब तक इन दोनों का मिलान होता रहेगा

गुरुदेव .......फिर तो तुम्हे ये भी पता होगा पुत्री की पुत्री मेर्री को यज्ञ स्व क्या सकती प्राप्त हुई है

किरण .....पता है गुरुदेव वो सकती कोई आवर नहीं उन्हें शारीरिक आवर मानसिक बल वृद्धि सकती मिली है

गुरुदेव ......उचित है पुत्री हम व्यर्थ हे चिंतित हो रहे थे

कुछ डेड बाद सूर्य किरण गुरुदेव तीनो कक्ष से बहार निकलते है

शालिनी जी रेखा जी सन्ति जी प्रिय जी मेनका पूर्वी नानी जी दादी जी रानी पारी

सभी एक कक्ष में बैठे आज के हे बारे में चर्चा कर रहे थे

रानी पारी ......शालिनी जी फिर आज आपने अपने बेटे की होने वाली सभी जीवन संगिनियों से प्राच्या कर लिया

शालिनी जी .....मुझे तो कुछ समाज नहीं आ रहा है उनमे से कोण सूर्य की होने वाली पत्नी थी आवर कोण नहीं

रानी पारी ......हम पूरा सत्य तो नहीं जानते है पैर इतना जागीर जानते है जितनी भी कन्या यज्ञ में आहुति दी उनमे से लगभग सभी का विवाह सूर्य से होगा

रेखा जी ......मुझे कोई फरक नहीं पड़ता की मेरे बेटे की कितनी पत्नियां होंगी क्युकी मैं जानती हूँ सूर्य उन सब का अच्छे से ख्याल रखेगा क्युकी वो सभी से प्रेम करता है

मेनका .......आपको कुछ ज्यादा हे पता है भाबी

रेखा जी .......क्यों तुम भी तो उसके प्रेम को मह्सुश कर चुकी हो पिछले जनम में

शालिनी जी .....क्या मतलब दीदी आपका

रेखा जी .....तुम भूल गई क्या राधा द्वारा मिले श्राप का सीकर पहली यही थी

मेनका जी ......क्या भाई आप भी कहा की बात कहा ले कर जा रही हो

प्रिय जी .....मैंने आपसे कहा था न शालू की सूर्य सपना किरण के बिच कुछ तो तीस्ता है

अब पता चला की वो दोनों तो पहले से हे उसकी है

आवर सपना के पापा ने तो पहले हे कह दिया था की वो अपनी दोनों बेटियों की ख़ुशी के बिच किसी को नहीं आने देंगे

मेनका जी ......देखो मैं नहीं जानती की आप सब क्या सोचती है आवर क्या नहीं पैर मैं अपनी बेटियों की सदी सूर्य स करुँगी फिर चाइये कोई कुछ भी कहे

शालिनी जी ........ठीक है फिर मुझे क्या एतराज होगा मेरी सभी बचाया हमेशा मेरे साथ रहेंगी आवर क्या चाइये मुझे

वही दूसरे कक्ष में दादा जी नाना जी महेंद्र शिव संजय जोरावर गुरुदेव j.king प्रेतराज नागराज महावीर भी इसी चर्चा में लगे हुए थे

n.veer ....... आप सबसे एक निवेदन है की पुत्री कोमल का विवाह नागलोक से हो

दादा जी ......महाराज महावीर ......

n.veer ........आप इस जनम में मेरी पुत्री के दादा श्री है इस नाते आप मेरे पिता तुल्य हुए आप मुझे बीटा या वीर कह कर सम्बोधित करे तो मुझे भी अच्छा लगेगा

दादी जी ......ठीक है बीटा वीर जैसा की आपने कहा की आप कोमल बेटी का विवाह नागलोक में करना चाहते है इसका फैसला केवल महेंद्र आवर बेटी रेखा हे कर सकती है भले हे वो आपकी भी पुत्री है पैर जनम उसे रेखा बेटी ने दिया है

महेंद्र ......आप क्या कहते है पिता जी बाउजी

दादा जी .....बीटा तुम भी कोमल के पिता हो आवर वीर भी मेरा तो यही मन्ना है तुम दोनों हे कोमल का कन्यादान कर कोमल का हाथ सूर्य को सौंप दो

महेंद्र .....ठीक है पापा फिर कोमल आवर प्रिय का विवाह नागलोक में होगा एक हे दिन जहा मैं आवर वीर भाई सा दोनों का कन्यादान करेंगे

नाना जी ......ये बहुत अच्छा किये बीटा महेंद्र इस से कोमल आवर अलीना को 2 ,2 माँ के साथ 2 ,2 पिता का आशीर्वाद भी मिलेगा

जोरावर .....पैर मैं चाहता हूँ की किरण आवर सपना का विवाह सूरजगढ़ से हो

नाना जी .....जैसा तुम चाहते हो वो हो सकता है बीटा क्युकी ....

गुरुदेव .......ये संभव नहीं है

क्युकी सबसे पहले किरण आवर सूर्य का विवाह होगा ठीक उसके बाद जिनिशा पारिजात आवर जिन्नात का विवाह होगा उसके बाद हे कोमल पुत्री का विवाह होगा उसके बाद बाकि सब का

दादा जी ......फिर आप हे बताइये की क्या करे

गुरुदेव ........कल सूर्य किरण आवर मानसी पुत्री अपने सफर पे निकल रहे है उनके लौटने पे पुत्री किरण का विवाह होगा तभी आप सभी को आपकी पुत्रियों के विवाह की समय बताया जायेगा

जोरावर .....क्या इतनी जल्दी स्वीटी का विवाह

गुरुदेव ........समय की चल को संजो पुत्र जोरावर तुम अभी भी नहीं जानते हो की पुत्री किरण आवर सूर्य का जनम क्यों हुआ है

जोरावर ......ऐसा क्या रहश्य है उनके जनम के पीछे

गुरुदेव .......सूर्य आवर किरण जनम असुरराज नरकासुर के वरदान फलसवरूप हुआ है

नरकासुर ने कठोर तप कर परबु से से वरदान प्राप्त किया उस वरदान से नरकासुर बहुत सकती साली हो गया उसने उसने अपने हे असुरराज का चल पूर्वक वध कर असुरलोक के सिंघासन पे काबिज हो गया

डेरी डेरी उसने अन्य लोको पे भी आकर्मण कर निर्दोष जीवो को प्रताड़ित कारनामे सुरु कर दिया उसने अपने नाम के अनुसार हे जिस लोक से गुजरता वह केवल नरक जैसा दृश्य पीछे रह जाता

चारो तरफ नरकासुर ने हत्याचार दुराचरण का साम्राज्य फैला दिया था

अनेको बार देवो से भू उसका योध हुआ किन्तु न देव प्रणीत हुए आवर न असुर क्युकी नरकासुर अपने वरदान के चलते सुरक्षित था पैर देवो की सकती से से हर योध के बाद उसे अपनी सक्रिय पाने हेतु कन्याओ की बलि देने पड़ती थी अंत में महाकाल की इच्छा से उस वरदान के तोड़ के रूप में सूर्य आवर किरण का जनम हुआ

गुरुदेव ......शिव क्या तुम जानते हो किरण पुत्री पिछले जनम में तुम्हारी पुत्री थी

शिव .....क्या ये आप क्या कह रहे है

महेंद्र जी ....गुरुदेव सच कह रहे है शिव किरण तुम्हारी हे बेटी थी

शिव .....पैर शालिनी तो मर चुकी थी

महेंद्र जी .....शालिनी से नहीं तुम्हारी दूसरी पत्नी से

शिव .....पैर मुझे कुछ याद क्यों नहीं है

गुरुदेव ......क्युकी नियति नहीं चाहती तुम्हे या किसी आवर को इसका ज्ञान हो की तुम्हारी दूसरी पत्नी कोण थी ...........

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अपडेट. 156

गुरुदेव ......शिव क्या तुम जानते हो किरण पुत्री पिछले जनम में तुम्हारी पुत्री थी

शिव .....क्या ये आप क्या कह रहे है

महेंद्र जी ....गुरुदेव सच कह रहे है शिव किरण तुम्हारी हे बेटी थी

शिव .....पैर शालिनी तो मर चुकी थी

महेंद्र जी .....शालिनी से नहीं तुम्हारी दूसरी पत्नी से

शिव .....पैर मुझे कुछ याद क्यों नहीं है

गुरुदेव ......क्युकी नियति नहीं चाहती तुम्हे या किसी आवर को इसका ज्ञान हो की तुम्हारी दूसरी पत्नी कोण थी ...........

अब आगे .........

असुरलोक ..........जब से असुरगुरु को k.asur का वातापी द्वारा सन्देश मिला था तब से हे असुरगुरु k.asur को ले कर चिंतित थे

असुरमहल में हो रहे हर षड़यंत्र का उन्हें वातापी द्वारा समय रहते ज्ञान हो जाता क्युकी उन्होंने लगभग असुर महल जाना हे बंद कर दिया था

अभी असुरगुरु माँ पटल भैरवी की पूजा आदि कर बहार निकले हे थे की उनके सामने रकत सन्देश प्रकट होता है

असुरगुरु ........क्या सन्देश है

R.sandesh ........(वातापी )..पिता श्री असुरमहल में आपके खिलाफ सडयंत्र रचा जा रहा है द्वारिका द्वारा वो चाहती है की आपसे असुरगुरु पढ़ चीन लिया जाये

किन्तु असुरराज नरकासुर इस से सहमति नहीं है नीलसूर को भी आपके खिलाफ हो रहे षड्यंत्र का ज्ञान है

असुरगुरु .......तो ये सब सडयंत्र रच रही है मूरख द्वारिका हमने पहले भी सावधान किया था तुम्हे किन्तु तुम अपने अहंकार में अभिमान में चूर हो चुकी हो तुम्हे सिगरा हे इसका दंड मिलेगा

मैंने असुरमहल का त्याग कियाथा किन्तु अब तुम्हारी आँखों के सामने रह कर हे तुम्हे दंड दूंगा

असुरमहल .......

n.wife ( नीलसूर वाइफ ).....क्या बात है स्वामी आप कुछ समय से चिंतित है जबकि अब तो पिता श्री असुरराज नरकासुर भी असुरलोक लौट आये है

neelasur........ham माता द्वारिका को ले कर चिंतित है पिता श्री के लौट आने पे जहा उनको पिता श्री की सेवा करनी चाइये वही वो अपने हे सडयंत्र रच रही है

n.wife .......ये आप कैसे बाते कर रहे है स्वामी वो माता है आपकी

नीलसूर ........यही तो चिंता है हमारी क्युकी हम उनसे कुछ भी कहने में असमर्थ है

जानती हो माता द्वारिका चाहती है की पिता श्री द्वारा असुरगुरु से उनका पढ़ चीन लिया जाये जभी असुरगुरु ने पिता श्री को अपनी पत्नी की हत्या के दोष से भी मुक्त कर दिया

n.wife .........ये आप क्या कह रहे क्या इस लिया हे वो असुरमहल से दूर रहते है

नीलसूर .........हमें भी यही लगता है यहाँ इस महल से उनकी दुखद गड़े जुडी है इस लिया हे वो यहाँ महल में न रह कर उस गुफा में निवेश करते है

नरकासुर ........द्वारिका अभी तक हमारी दोनों पुत्रिया हमसे भेट करने नहीं आई न पुत्र कंटकासुर हमसे मिलने आये

द्वारिका .......स्वामी वो तीनो हे असुरलोक में नहीं है

नरकासुर ......क्या फिर वो तीनो कहा है आवर अग्निमुखासुर का तप कब पूर्ण हो रहा है

द्वारिका ......नगीना कंटकासुर विसुद्धि तीनो परतविलोक पे है स्वामी आवर जैस्ट पुत्र अग्निमुखासुर का तप आने अंतिम चरण पे है स्वामी वह कभी भी अपने तप से बहार आ सकता है

नरकासुर ........हम उन तीनो से भेट करना चाहते है उन्हें सन्देश भेजा जाये

द्वारिका .......जैसा आप कहे स्वामी

अभी नरकासुर आवर द्वारिका बात कर आहे थे की एक असुर सैनिक कक्ष के बहार से हे नरकासुर को असुरगुरु के असुरमहल में आने की सूचना देते है

द्वारिका .......ये अब यहाँ क्यों आया है

नरकासुर .......में रहो द्वारिका भुला मत वो असुरगुरु है अपनी मर्यादा में रहो

द्वारिका गुस्से में कक्ष से निकल जाती है

द्वारिका .......एक दिन इस असुरगुरु को देखे मार कर असुरलोक से न निकला तो मैं असुर महारानी द्वारिका नहीं

असुरगुरु ........अब आपका स्वस्थ्य कैसा है असुरराज

नरकासुर .......असुरगुरु अभी हम पूर्ण रूप से स्वस्थ है अभी हम आपके विषय में चर्चा कर रहे थे

असुरगुरु .......हमारे विषय में फिर तो अवश्य कुछ महत्वपूर्ण चर्चा हो रहे होगी

नरकासुर ......असुरगुरु क्या महाकाल अंश का कुछ पता चला किस लोक में उसका जनम हुआ है

असुरगुरु .....नहीं असुरराज नरकासुर अभी कुछ भी ज्ञात नहीं हुआ है उसके विषय में जब तक वह अपनी सक्रिय इस्तेमाल नहीं करता है हमें कुछ ज्ञात नहीं हो सकता है

नरकासुर .......असुरगुरु हम चाहते है आप परतविलोक जाइये आवर वह उसके विषय में पता कीजिये आवर हमारे पुत्र कंटकासुर आवर दोनी पुत्रिया नगीना आवर विसुद्धि को असुरलोक वापिस आने को कहिये हम कुछ समय उनके साथ बिताना चाहते है

असुरगुरु .......हम भी आपसे यही चर्चा करने आये थे की हम कुछ समय के लिया पृथ्वीलोक जा रहे है

नरकासुर .......आपको पृथ्वीलोक में क्या कार्य आ गया असुरगुरु

असुरगुरु ........हमें किसी के विषय में पता करना था खेर हम सिगरा हे पृथ्वीलोक के लिया निकल रहे पुत्र कंटकासुर आवर पुत्री नगीना वह विसुद्धि को आपका सन्देश दे देंगे

नरकासुर .....धन्यवाद असुरगुरु .........

परीलोक ........

किरण जिनिशा पारिजात जीनत रिद्धि अभी पाछो पारिजात के कक्ष में बैठी बाते कर रहे थे

जिनिशा .......सखी रिद्धि अब तो आप खुश है न

रिद्धि ......अब से क्या मतलब है सखी हम तो पहले भी खुश हे थे

किरण .......अरे दीदी आप जिनिशा की बात नहीं सामजी है इनका कहने का मतलब है आज आप काफी खुश है कोई खाद वजह है क्या इस खूबसूरत मुस्कराहट के पीछे

रिद्धि .......तुम दोनों को हुआ क्या है

पारिजात ........अब आप सखी से सौतन जो बनने जा रही है आपकी सिंदूर रेखा उनके हे नाम से सुस्सजित होने वाली है जिनकी तस्वीर आपने अपने मन मंदिर में बना कर राखी है

किरण .......अब काबुल कर भी लीजिये की आपको सूर्य से प्रेम है भले हे आपने किसी को न बताया हो पैर सत्य सामने आ हे गया आवर फिर प्रभु महाकाल ने आपके दिल की बात सुन हे ली

रिद्धि ........है हम बहुत खुश है स्वीटी क्युकी हम उनसे प्रेम करते है पैर हमारे मन में एक दुविद्या है

जीनत ......सखी जहा प्रेम हो वह संशय का कोई स्थान नहीं होता है

किरण .....बिलकुल सही कहा आपने जीनत वैसे आप कब से प्रेम करती है सूर्य से

जीनत ......हम नहीं जानते की हम उनसे प्रेम करते है या नहीं पैर आज जब उनके उस दिव्या रूप को देखा तब से हे हमें हर पल उनके साथ रहने की इच्छा हो रही है

किरण ......क्या आपने उन्हें अभी भी नहीं पहचाना जीनत भाबी जान यही कह कर तो वो आपको सम्बोधित करते थे

जिनिशा ......स्वीटी क्या ये वही तो नहीं जो मैं सोच रही हूँ

किरण ......है जीनु डार्लिंग ये वही है आवर ये हमारी प्यारी सखी परिणत आवर कोई नहीं हमारी वही नकचढ़ी सखी है परिधि आवर ये जीनत भाबी जान उर्फ़ सूर्य की जानत

पारिजात .......स्वीटी साफ साफ बताओ आखिर बात क्या आवर तुम दोनों किस बारे में बात कर रहे हो

किरण .....गुरुदेव प्रेतराज कहा है आप हमें आपकी सहायता चाइये

कुछ हे पल बाद गुरुदेव आवर प्रेतराज दोनों कक्ष में थे

किरण ....परनाम गुरुदेव परनाम प्रेतराज

गुरुदेव प्रेतराज .....कल्याण हो पुत्री

गुरुदेव ........कहो पुत्री क्या सहायता चाइये तुम्हे

किरण ......गुरुदेव आपको सखी पारिजात की वो यदि उन्हें लौटानी है जो परतविलोक से जुडी है

गुरुदेव .....किन्तु पुत्री

किरण ......गुरुदेव अब उन यादो से इनके जीवन पे कोई दुस्प्रभाव नहीं होगा

गुरुदेव ......उचित है पुत्री हमारा मुख्या उद्देश्य जो था वो पूर्ण हो चूका है

गुरुदेव आगे भध पारिजात के सर पे हाथ रख कुछ मंत्र बुदबुदाते है गुरुदेव के हाथ से छोटी से रौशनी निकल कर पारिजात के मस्तिष्क में समाहित हो जाती है

डेरी डेरी पारिजात को पृथ्वीलोक पे परिधि के रूप में बिताये हुए लम्हे याद आने लगते है

जिसमे कैसे उसने सूर्य को परेशान किया था कैसे उसकी किरण मनीषा मोनिका जिनिशा आदि से दोस्ती हुई थी

गुरुदेव .......प्रेतराज आप भी पुत्री जिन्नात को उनकी यादे लौटा दीजिये

जीनत ......गुरुदेव पिता श्री क्या हमारी वो यदि इनसे जुडी है

प्रेतराज . ......है पुत्री तुम्हारी उन यादो में कुछ अच्छी कुछ बुरी यादे है जो गुरुदेव के कहने पे हमने आपकी मस्तिष्क से मिटा दी थी

प्रेतराज भी वही किर्या दोहराते है जो गुरुदेव ने पारिजात के साथ किया था

जैसे जइसे जीनत अपने उन भूली हुई यादो को देख रही थे वैसे वैसे उसकी आँखों से आंसू बाह रहे थे

जिनात ने जैसे हे अपने आँखे खोली उसकी आँखे गुस्से में लाल थी

जीनत ....पिता श्री ये आपने अच्छा नहीं किया हमसे हमारे जीने की वजह हे आपने चीन ली थी

किरण .....जीनत संत हो जाओ ये क्या तरीका हुआ अपने पिता श्री से बात करने क्या तुम ये भी बुल गई की ये आपके पिता है

जीनत .....हम कुछ नहीं भूले है किरण इन्होने हमसे हमारी यादे चींटी हमारे हे प्रेम से हमें दूर कर दिया

किरण ........इन्होने नहीं आपने खुद अपने प्रेम को दूर किया था

वो खुद आये थे आपके पास अपने प्रेम को स्वीकार करने पैर आपने क्या किया क्या नाम दिया आपने उनके प्रेम को

किरण का डेरी डेरी गुस्सा भड़ता जा रहा था वही गुरुदेव को दर था की कही किरण गुस्से में कुछ अनिष्ट न कर दे

( गुरुदेव .......पुत्र सूर्य सिगरा अति सिगरा हमारे पास पहुंचो अन्यथा अनिष्ट हो जायेगा पुत्र )

सूर्य जो इस वक़्त अपने ध्यान में लीं था उसे जैसे गुरुदेव का चिंतित स्वर सुनाई दिया सूर्य ुशी पल गायब हो गुरुदेव के समकक्ष पहुंच जाता है

सूर्य यहाँ का माहौल देख कर हे समाज जाता है की बात कुछ जरूर है बड़ी है

सूर्य आगे भध किरण को अपने सीने लगा लेता है

सूर्य के आलिंगन में आते हे किरण का सारा गुस्सा एक पल में हवा हो जाता है

सूर्य .......क्या हुआ स्वीटी इतना गुस्सा किस पे किया जा रहा है

किरण ......सॉरी भाई वो पता नहीं कब मुझे गुस्सा आने लगा

सूर्य ......कोई बात नहीं होता है कभी कभी अब संत हो जाओ

सूर्य अभी बोल हे रहा था के पीछे से आकर के जीनत सूर्य से काश कर चिपक जाती है

जीनत ......हमें माफ कर दीजिये हमारे द्वारा किये ब्यवहार के लिया चाहे तो हमें दंड दीजिये पैर हमें फिर से खुद से दूर न कीजिये

सूर्य ........हमने तो आपको पहले भी कभी खुद से दूर नहीं किया था जानत

दूर होने का फैसला भी आपका हे था हमारा नहीं हमने तो जो फैसला आपने किया उसे आपकी ीचा मन सवीकार किया

जीनत .....वो हमारी सबसे बड़ी भूल थी हमें माफ कर दीजिये या फिर दंड दीजिये

सूर्य जीनत को अलग कर उसकी आवर पलट कर देखता है तो सामने जीनत अपने हाथ जोड़े भीगी हुई आँखों से सूर्य को उम्मीद भरी नजरो से देख रही थी

सूर्य ........क्या चाहती है जीनत जी आप हमसे आज भी हम वही है जो पहले थे आज भी हमारे पहले से अन्य लड़कियों से सम्बन्ध है आवर आगे भी होने वाले है हम पहले से हे सदी सुधा है आवर जो आपके अस्सपस्स आपकी सखियाँ कड़ी है उनसे भी सिगरा हे हमारा विवाह होगा

कुछ भी तो नहीं बदला है फिर क्यों आप हमसे माफी मांग रही है कल भी आपने हम पे अपना एकाधिकार चाहा था जो संभव नहीं था आवर न आगे कभी संभव होगा

सूर्य की बात गुरुदेव प्रेतराज आवर किरण जिनिशा के अलावा किसी को कुछ भी समाज नहीं आ रही थी

प्रेतराज ......पुत्र सूर्य वो .....

सूर्य .......क्षमा करे प्रेतराज आज आप कुछ भी नहीं कहेंगे

जीनत .......हमें इतनी बड़ी सजा न दीजिये की हम जी भी न पाए हमें हमारी भूल का अहसास हो चूका है

सूर्य ......अभी भी वक़्त है सोचने समझने के लिया आज भी फैसला आपको करना है हमें आपका हर फैसला मंजूर होगा किन्तु एकाधिकार हम पे किसी का भी नहीं हो सकता चाहे फिर वो मेरी आत्मा से जुडी मेरी स्वीटी हे क्यों न हो स्वीटी मेरे मन मंदिर की देवी है किन्तु मुझपे एकाधिकार तो कभी खुद स्वीटी ने नहीं रखा फिर आपने कैसे सोच लिया की ये संभव होगा

जीनत जैसे हे सूर्य के पैरो में गिरने लगे किरण उसको रोक लेती है

किरण .....ये आप क्या कर रही है जीनत

जीनत ......अपनी किया कर्मो की माफी मांग रहे है

किरण .......आज भी आप उन्हें समाज नहीं पायी है उन्होंने तो आपको कबका माफ कर दिया है जरा देखो उनके चेहरे को उनकी आँखों में देखो जहा आज भी वो आपसे प्रेम करते है

जीनत जैसे हे सामने देखती है तो सूर्य भीगी हुई आँखों से जीनत को देख रहा था

जीनत कुछ देर सूर्य की आँखों में देती है फिर सूर्य के पुरे चेहरे पे चुम्बनों की बिछड़ कर देती है जिसे देख प्रेतराज आवर गुरुदेव वह से गायब हो जाते है

जीनत .....हमें माफ कर दीजिये फिर से हम ऐसी भूल नहीं करेंगे

सूर्य .......क्या मैं अपनी जानत पे गुस्सा हो सकता हूँ सूर्य काश कर जीनत को अपने सीने से लगा लेता है

जिनिशा ......डार्लिंग हम भी यही पे मौजूद है

सूर्य जिनिशा की अपने आवर खींच कर उसे भी सीने लगा लेता है

किरण ........क्या बात है नयी गफ मिली तो हमें हे भूल गए

सूर्य .......सूर्य कभी अपनी किरण को भूल सकता है क्या जिस किरण से उसका अस्तित्व जुड़ा हो जो सूर्य को जीवन देती है क्या वो सूर्य अपनी हे तपिश अपनी हे किरण को भूल सकता है भला

सूर्य .....अब संत हो जाओ देखो मेरा शर्ट भी गिला कर दिया जानत आपने अपने आसुओं ये

जीनत. ....बस कुछ देर आवर

सूर्य ......ठीक है आज रत आप मेरे साथ सो जाना फिर कोई नहीं रोकेगा आपको

परीजिअत .......मैं भी

सूर्य .....थीम है अभी तुम सब लोग आराम से बाटे करो मुझे परतविलोक जाना होगा मानसी की ले कर मैं कुछ समय बाद लौट आऊंगा

किरण ......क्या हुआ कुछ काम है क्या वह

सूर्य ......असुरगुरु का सन्देश मिला था उनको मानसी आवर मुझसे भेट करनी है

किरण .....आप सतर्क रहना

सूर्य .......उम्मम्मम्हा आप चिंता बहुत करती है

पारिजात .........स्वीटी दीदी उचित कह रही है

सूर्य ......क्या कहा स्वीटी दीदी

पारिजात ......वैसे भी उनका पढ़ बिना मुकुट के भी बहुत ुचा है क्युकी ये आपके दिल की मलिका है आवर वैसे भी इनसे आपका विवाह सर्वप्रथम होने जा रहा है तो वैसे भी हम सब इनसे इस रिश्ते में भी छोटे है

सूर्य .....है ये सच की मैं आप सब से बराबर प्रेम करता हम पैर जहा बात स्वीटी की हो तो वो मेरी आत्मा है उसका स्थान कोई नहीं ले सकता है

अब आप सब सखी बहने या सौतने आराम से चर्चा करो मैं परतविलोक जा कर आता हूँ रात के डिनर पे मिलता हूँ आप सभी से

सूर्य किरण जिनिशा जीनत पारिजात के होंटो पे किश कर वह से निकल जाता है

किरण ......रिद्धि आपको खुद अपना प्रेम स्वीकार कारनामे होगा वो कभी सामने से पहल नहीं करेंगे

पारिजात ......स्वीटी दीदी सच कर रही है दीदी आपको अपने प्रेम के बारे में उन्हें बोल देना चाइये देखो उनके एक किश ने जीनत को जानत की हूर का नूर दे दिया अभी कुछ वक़्त पहले जो चेहरा मुरझा हुआ था अब देखो कैसे तजा गुलाब की जैसे खिला हुआ है ...........

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ...........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स.................
 
कल के लिए सॉरी फ्रेंड्स कल किसी कारणवश सेकंड अपडेट नहीं दे पाया था उसके लिया सॉरी

कोशिश करुगा की उसकी भरपाई आज कर सकू .........
 
अपडेट 157

सूर्य .....है ये सच की मैं आप सब से बराबर प्रेम करता हम पैर जहा बात स्वीटी की हो तो वो मेरी आत्मा है उसका स्थान कोई नहीं ले सकता है

अब आप सब सखी बहने या सौतने आराम से चर्चा करो मैं परतविलोक जा कर आता हूँ रात के डिनर पे मिलता हूँ आप सभी से

सूर्य किरण जिनिशा जीनत पारिजात के होंटो पे किश कर वह से निकल जाता है

किरण ......रिद्धि आपको खुद अपना प्रेम स्वीकार कारनामे होगा वो कभी सामने से पहल नहीं करेंगे

पारिजात ......स्वीटी दीदी सच कर रही है दीदी आपको अपने प्रेम के बारे में उन्हें बोल देना चाइये देखो उनके एक किश ने जीनत को जानत की हूर का नूर दे दिया अभी कुछ वक़्त पहले जो चेहरा मुरझा हुआ था अब देखो कैसे तजा गुलाब की जैसे खिला हुआ है ...........

अब आगे ........

सक्तिपुर......

सूर्य आवर मानसी से की उस मुलाकात ने गीता ठाकुर आवर रुक्मणि ठाकुर को पूरी तरह से बदल कर एक अच्छी सोच उन्हें दी

इसका असर जल्दी हे सक्तिपुर में दिखाई देने वाला था

रुक्मणि ......दीदी हमने आज तक सब कुछ जन्मे के बाद भी लोगो के साथ गलत हे किया पहले हमारे पति फिर हम सब भी उनके हे नक्से कदम पे चलने लगे जबकि हम सब को ये अच्छे से पता था की इसका अंत क्या होने वाला है

गीता ठाकुर ........सच कहा मेरी बहन क्या क्या जुलम नहीं किये हमारे पतियों आज जब उनके बारे में सोचती हूँ तो कुढ़ से घिरना होती है

ठाकुरो के नाम पे कलंक थे हमारी पति उनकी सोच आवर उनके कुकर्मो से न जाने कितने हे परिवार बर्बाद हुए है उनकी बद्दुआ हमें मिली है

रुक्मणि .......दीदी अब जो हो चूका है हम वो सब तो बदल नहीं सकते है पैर आगे से हमारी बझा से किसी के साथ कुछ गलत न हो ये जिम्मेदारी अब हमें लेनी होगी लोगो के मदद कर हम अपने बुरे कर्मो का प्रयाश्चित प्रयाश्चित तो कर सकती है दीदी

गीता ठाकुर ........वैसे सूर्य एक बहुत अच्छा लड़का है रुक्मणि वो चाहता तो हमारे साथ कुछ भी कर सकता था उसे कोई नहीं रोक सकता था फिर भी उसने हमें एक मौका दिया ताकि हम अच्छे इंसान बन सके

रुक्मणि ......दीदी क्यों न गायत्री आवर विधि की सदी सूर्य से कर के इस दुश्मनी को रिस्तेदारी में बदल दे

मन की हम दोनों बदल चुकी है पैर विक्रम आवर अजय अभी भी ुशी रस्ते पे है दीदी वो कुछ न कुछ गलत जरूर करेंगे मुझे ऐसा लगता है अगर सूर्य का विवाह दोनों से हो जाता है तो वो छह कर भी कुछ नहीं करेंगे

गीता ठाकुर ........तुम कह तो सही रही हो पैर दोनों की सदी कैसे

रुक्मणि ......दीदी सूर्य भी ठाकुर खंडन से है ठाकुरो में एक से ज्यादा विवाह आज भी होते है

मैंने विधि की आँखों में सूर्य के लिया प्यार देखा है दीदी आवर वैसे हे कुछ गायत्री के दिल में भी है

गीता ठाकुर ........पहले हमें गायत्री आवर विधि से बात करनी होगी उसके बाद सूर्य से तभी आगे रिश्ते की बात करेंगे अभी तुम दोनों के दिल में क्या है वो पता करो

रुक्मणि ......ठीक है दीदी जैसा आप कहो मई. पता कर के आपको बिताती हु.

गीता ठाकुर .......वैसे है कहा हमारी दोनों बेतिया

रुक्मणि ..........दीदी आजकल दोनों अपने हे रूम में गुस्सी रहती है पता नहीं क्या करती रहती है

गीता ठाकुर .....अब उनकी उम्र हे ऐसी है जहा लड़किया इस ुमार में अपने रामकुमार के खुली आँखों से सपने देखती है

देखने दे उन्हें सपने उनकी किस्मत में उनका रामकुमार लिखा होगा तो जरूर मिलेगा बाकि सब ऊपर वाला जाने

चल हम खाना बनाते है

रुक्मणि ......आप आराम कीजिये दीदी मैं बना लुंगी खाना वैसे भी बाकि सब काम तो नौकर कर लेते है

गीता ठाकुर .......ठीक है आवर ये अजय कहा है

रुक्मणि .......पता नहीं दीदी मेरी तो वो सुनता हे नहीं है जब देखो घर से बहार रहता है रत रत भर

गीता .......सूर्य की बात याद है न उसकी सांगत से उसे दूर रखना होगा

रुक्मणि ......दीदी मैंने उसे समझाया था वो उल्टा मुज पे हे गुस्सा हो गया

गीता ठाकुर .....आने दे उसे मैं देखती हु उसका खर्चा काम करो ताकि इसके आवारा दोस्त उस से दूर रहे

रुक्मणि .....दीदी आपको हे अब इस घर के सब फैसले लेने होंगे किसको क्या कितना आवर कब देना है ये आप हे तय कीजिये मैं आपके साथ हूँ

गीता ठाकुर ......ठीक है मैं देख लुंगी चल खाना बना मैं भी आती हूँ कपडे बदल कर

रुक्मणि किचन की आवर निकल जाती है वही गीता ठाकुर गायत्री की रूम की तरफ भाड़ जाती है

जहा दोनों की बात सुन गीता ठाकुर की आँखे छोड़ी हो जाती है ...........

वही सक्तिपुर से दूर ुशी जंगल में जहा काल आवर असुरगुरु की पहली मुलाकात हुई थी

असुरगुरु वह किसी का इंतजार कर रहे थे

कुछ देर बाद वह काल आवर मानसी प्रकट होते है

काल .......परनाम गुरुवार

असुरगुरु .....कल्याण हो पुत्र काल

मानसी आगे भध असुरगुरु से गले लग मिलती है

मानसी ......कैसे है बाबा आप

असुरगुरु .......अच्छा हूँ पुत्री तुम कैसे हो तुम तो पूर्ण रूप से बदल चुकी हो पुत्री

मानसी ......ये सब इनकी वजह से है बाबा इन्होने आपसे जो कहा था वो कर दिखाया अब कोई भी मुझे कुछ नहीं कर सकता है बाबा

असुरगुरु .......वो तो हम भी देख प् रहे है पुत्री तुम्हारी आसुरी ऊर्जा लगभग ख़तम हो चुकी है पैर ये कैसे संभव किया तुमने पुत्र काल

काल ........ये मैंने नहीं मेरे गुरुदेव ने किया है उन्होंने असुर सुधि यज्ञ कर मानसी जी की का सुधिकरण किया है

असुरगुरु .......क्या पैर ये तो तभी संभव है जब असुर ऊर्जा को कोई आवर ग्रहण करे तभी हे संभव हो सकता है किन्तु इस किर्या में बहुत पीड़ा होती है यहाँ तक की मृत्यु भी हो सकती है

मानसी ........बाबा इन्होने हे मेरी समस्त ऊर्जा को दर्जन किया था

असुरगुरु ......असंभव क्या ये सच है पुत्र काल क्या तुमने हे मानसी पुत्री की ऊर्जा दर्जन की है

काल .......है गुरुवार इसके अलावा आपको दिए सहायता वचन को पूर्ण करने का मेरे पास कोई अन्य मार्ग नहीं था

असुरगुरु ......किन्तु पुत्र इसमें तुम्हारी जान भी जा सकती थी

काल .......अपने वचन का मान नहीं रख पता तो वैसे भी जान तो जाने वाली थी गुरुवार

असुरगुरु .......किन्तु जहा तक हम तुम्हारी ऊर्जा को मह्सुश कर प् रहे है

हमें किसी आसुरी सकती का अहसास तुमसे नहीं हो रहा है आवर नहीं पुत्री मानसी से क्या तुमने आसुरी सकती का त्याग कर दिया है पुत्र

काल ......गुरुवार वो आसुरी सकती अब पवित्र सकती में बदल चुकी है आवर मैंने उसे पुनः मानसी जी को लौटा दी है

मानसी ......बाबा ये सच कह रहे है इन्होने जो आसुरी ऊर्जा दर्जन की थी वो फिर से हमें लौटा दी है

असुरगुरु ......उचित है पुत्र अब हमें यहाँ बुलाने का कारन भी बता दो पुत्र काल

काल ......गुरुवार हम दुविधा में है उस दुविधा से निकलने का मार्ग आपके पास हे है

असुरगुरु .......हम समजे नहीं पुत्र कैसे दुविधा आवर इस से हम कैसे निकल सकते है

काल .......गुरुवार आपकी पुत्री मानसी हमसे विवाह करना चाहती है किन्तु हमारे पास इनके प्रस्ताव का कोई समाधान नहीं है

इन्होने हमारे गुरुदेव आवर ऋषि दूर्वा से आशीर्वाद में हमसे विवाह की मांग राखी है हम उन्हें रोकते उस से पूर्व वो आपकी पुत्री मानसी आशीर्वाद दे चुके थे अब आप हे हमें इस दरम संकट से निकल सकते है

असुरगुरु .......पुत्री मानसी क्या ये सत्य है क्या आपने ऐसे आशीर्वाद की कामना काल की गुरुदेव आवर ऋषियों से की है

मानसी ......हमें क्षमा करे बाबा किन्तु हम इनसे प्रेम करने लगे है आवर इनसे विवाह करना चाहते है इस लिया हमने उनसे ऐसे आशीर्वाद की मांग की

असुरगुरु .......पुत्री मानसी तुम जानती हो न की तुम एक असुर कन्या हो

मानसी .......बाबा क्या असुर कन्या को प्रेम करने का अदिकार नहीं है

हमने इन्हे अपने सब कुछ मन लिया है बाबा किन्तु ये हमें तब तक स्वीकार नहीं करेंगे जब तक आप इनको अनुमति नहीं देंगे

आपने हमें जीवन दिया बाबा आपने हमेशा हमारा ख्याल रखा है हम अपने जीवन की सुरुहत आपके आसिष बिना आरम्भ नहीं कर सकते है

भले हे हम इनसे प्रेम करते है पैर हमारा मिलान तभी संभव है जब आप हमें अनुमति स्वरुप आपने आशीर्वाद दे

असुरगुरु ........पुत्र काल तुम क्या चाहते हो हमसे

काल .......गुरुवार ये अदिकार केवल आपका है क्युकी मानसी आपकी पुत्री है बस इतना आग्रह आपसे अवश्य करूँगा की जो भी आपका निर्णय हो उस से आपकी पुत्री आवर आपको ख़ुशी मिले न की दुःख

असुरगुरु ........उचित है पुत्र काल मुझे अपनी पुत्री मानसी के लिया तुम स्वीकार हो

किन्तु तुम दोनों विवाह असुर निति से हे हो सकता है

भले हे अब पुत्री मानसी पूर्ण रूप से असुर कन्या नहीं है कित्नु तुम दोनों का विवाह ुशी नियम से होगा जिस नियम से असुरलोक में होता है

काल ......हमें आपका आदेश मान्य है गुरुवार

असुरगुरु ......पुत्री मानसी अब तो खुश हो न तुम

मानसी .......जी बाबा हमें आपका आशीर्वाद मिलने वाला है उस से भाड़ कर क्या ख़ुशी होगी

काल ......गुरुवार कुछ समय बाद आपसे सम्पर्क करता हूँ तब आप अपनी असुरलोक नियम अनुसार विवाह की तयारी कर सकते है अभी कुछ समय के लिया मुझे कही आवर जाना है

asurguru........putra काल तुम जो कुछ भी कर रहे हो सिगरता से अपना कार्य पूर्ण करो क्युकी असुरलोक में परतविलोक को ले कर सडयंत्र बनना आराम हो चुके है

काल .......जब तक आपका आशीर्वाद है सब मंगल हे होगा गुरुवार

असुरगुरु ........पुत्री मानसी मैंने तुमसे 2 सत्य छिपाये है पुत्री जिसमे से आज एक सत्य तुम्हे बॉटने जा रहा हूँ

मानसी .......ऐसा कोनसा सत्य है बाबा जो आपको अपनी हे पुत्री से छुपाना पड़ा

असुरगुरु ........पुत्री तुम्हारा एक भाई आवर भी है जो परतविलोक पे हे है उसका नाम है कंटकासुर

मानसी ......बाबा आपने हमें पहले क्यों नहीं बताया हमारा को भाई भी है

असुरगुरु ......क्युकी हम नहीं चाहते थे की तुम्हे इस सत्य का ज्ञान हो

मानसी .....हम अपने भाई से मिलना चाहते है बाबा

असुरगुरु .......अभी नहीं पुत्री क्युकी वो आज हे असुरलोक गया है

कुछ समय बाद जब वह लौट आये तब उस से भेट कर लेना तुम

मानसी ......ठीक है बाबा जब आप स्वयं उनसे मिलने को कहेंगे हम तभी उनसे भेट करेंगी

असुरगुरु .......पुत्र काल एक पिता अपने पुत्र के लिया तुमसे निवेदन करना चाहता है पुत्र कनकसुर में एक असुर गन की अधिकता है जिसके चलते वो बहुत से पाप कर चूका है

तुमसे बिनती है उसे उसके कर्मो की सजा देने से पहले एक अवसर उसे सुधरने का अवश्य देना

काल .........अगर आप एक गुरु के रूप में ये आदेश देते तो हम सायद आपका ये निवेदन अस्वीकार कर देते किन्तु आपने एक पिता के रूप में अपने पुत्र के लिया एक अवसर माँगा है तो हम आपके पुत्र कंटकासुर को एक अवसर अवश्य देंगे

तय उसे करना है की वो किस मार्ग का चुनाव करता है

अगर उसने उचित मार्ग का चुनाव कर अपने पाप कर्मो को रोक दिया तो वो हमसे सुरक्षित रहेगा अन्यथा हम अभी से आपसे माफी मंगाते है दूसरा अवसर पाने के लिया हम उसे जिन्दा नहीं छोड़ेंगे

असुरगुरु .........कल्याण हो पुत्र काल तुमने एक पिता के निवेदन का मान रखा

काल ......अब आज्ञा दे गुरुवार हमें प्रस्थान कारनामे होगा

असुरगुरु ......कल्याण हो पुत्र माँ पटल भैरवी तुम दोनों पे आशीर्वाद बनाये रखे

मानसी ......चलती हूँ बाबा आप एक बार भाई से बात कर उन्हें अवश्य संजय भले हे आपने हमारे विवाह को स्वीकृति प्रदान की है

किन्तु इनके कर्त्तव्य के बिच भाई कंटकासुर भी आये तो मैं इनके विरुद्ध नहीं जा सकती हूँ

असुरगुरु ......जनता हु पुत्री इस लिया तुमने न कह कर पुत्र काल से उसके लिया एक जीवन दान माँगा

काल आवर मानसी दोनों वह से गायब हो जाते है

असुर कबीला ......

कुछ समय पहले जब असुरगुरु सूर्य के सन्देश मिलने पे परतविलोक पहुंचे तो वह सर्वे पार्टम

असुर कबीले पहुंच कर कंटकासुर से भेट करते है

k.asur ......परनाम पिता श्री आप यहाँ परतविलोक पे

असुरगुरु .......है पुत्र कंटकासुर हम किसी कार्य हेतु कुछ समय परतविलोक में हे रहने वाले है

k.asur .......ये तो बहुत हे अच्छा है पिता श्री मुझे भी आपके साथ समय बिताने का अवसर प्राप्त होगा

असुरगुरु ......नहीं पुत्र हम यहाँ नहीं रुक सकते है क्युकी तुम्हे नगीना आवर विसुद्धि के साथ कुछ समय असुरलोक में व्यतीत करना है

असुरराज नरकासुर का आदेश तुम तीनो के लिया वो चाहते है की तुम तीनो कुछ समय उनके साथ भी बिताओ असुरलोक में

k.asur ......आपको पता है न पिता श्री मुझे उस महल में समय बॉटने की किंचित भी इच्छा नहीं है मैं यही असुर कबीले में ठीक हूँ

असुरगुरु ......भूलो मत वह तुम्हारी पत्नी भी है आवर तुम असुरराज के पुत्र हो भले हे सत्य कुछ आवर है

k.asur .......ठीक है पिता श्री में वातापी के लिया वह जाऊंगा

असुरगुरु .......किन्तु याद रहे पुत्र तुम जब तक वह हो नगीना आवर विसुद्धि से काम क्रीड़ा नहीं करोगे उनसे असुरलोक में कोई सम्बन्ध नहीं बनाओगे

k.asur ......ठीक है पिता श्री कब निकलना है हमें

असुरगुरु .....अभी निकलो तुम तीनो यहाँ से ( यहाँ काल पहुंचे उस से पहले तुम तीनो को चले जाना चाइये )

k.asur ......जैसा आपका आदेश पिता श्री आज्ञा दीजिये

k.asur नगीना आवर विसुद्धि को जब असुरगुरु का सन्देश देता है तो पहले तो वह जाने को बिलकुल भी त्यार नहीं थी

किन्तु जब k.asur ये बताता है की ये आदेश नरकासुर का है तब न चाहते हुए भी दोनों बहने असुरलोक जाने को त्यार हो जाते है

कुछ समय में तीनो वह से असुर लोक के लिया प्रस्थान कर जाते है ...............

अपडेट पोस्टेड फ्रेंड्स ..........

रीड एंड एन्जॉय फ्रेंड्स .............
 
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