Incest Lawaaris - Page 2 - SexBaba
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Incest Lawaaris

अपडेट -7

जब खुशिया घर आती है तो माहोल खुद बा खुद आनंदमय हो जाता जिसे सब को अपनाना चाहिए पैर इस घर में अभी भी 2 जान ऐसे थे जिन्हे ये खुशिया रास नहीं आ रही थी जिन में एक था विनोद जिसके छह ने या न छह ने से कोई जायदा फर्क नहीं पद ने वाला था पैर पीहू की कड़वाहट दूर कर न जरुरी था जिसका अंदाज़ा काय को हो चूका था क्युकी किशोर के इतने दिनों बाद घर आने पैर भी पीहू निचे नहीं आयी थी इसलिए काय hi उसके रूम में गयी जहा पीहू अपनी माँ को देख कर बोली

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पीहू- हां माँ बोलिये अब किस लिए आयी है आप आपका परिवार तो पूरा हो गया न

काय- अभी नहीं क्युकी मेरे परिवार का एक सद्श्ये अभी खुशियों में शामिल नहीं हुआ है और में उसे hi लेने आयी हु

पीहू- रहने दो माँ ये झूठा प्यार किसी और को दिखाना मुझे नहीं अगर आप मुझसे प्यार करती तो उस मनहूष के लिए मुझे थप्पड़ नहीं मारती आप जाओ यहाँ से मुझे किसी से कोई बात नहीं करनी

काय- तुम अपनी जगह ठीक हु मेरी बच्ची क्युकी ये सब मैंने hi तो सिखाया है तुम्हे में hi अपनी गलती को छुपा कर उसे मनहूष मानती रही हु तो तुम भी वही सब देख कर मेरा साथ देती रही पैर मेरी बच्ची गलती तो बड़ो से भी हो जाती है न और फिर तो ये तो सोच जिसे हम साड़ी ज़िन्दगी बुरा भला कहते रहे उसके दिल में हमारे लिए जरा सा भी शिकवा नहीं तो क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता की हम भी अपनी भूल को सुधार कर आगे बढे

पीहू- कैसे आगे बधु माँ कैसे आप ने जो शिखाया वो शिखति गयी जो कहा वो करती गयी फिर कैसे अब उस से नज़र मिलौ जिसे ज़िन्दगी भर कोष्टी आयी हु क्या मुँह लेकर जाऊ उसके सामने आप hi बताओ ( सुबक ते हुए )

पीहू को यु सुबकते हुए रोटा देख कर काय उसे गले से लगा कर प्यार से बोली

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काय - बस मेरी बच्ची चुप हो जा और तुझे किस बात की फ़िक्र है तो जा और हक़ से उसे गले लगा कर जन्मदिन की बधाई दे फिर देख तुझे कुछ कह ने या कर ने की जरुरत नहीं पड़ेगी वो खुद तुझे प्यार देगा और फिर किस भाई बहिन में लड़ाई नहीं होती वैसे भी इस वक़्त तो उसे और भी जायदा जरुरत है हम सब के साथ की है न तो मेरी अछि गुड़िया की तरह मेरी ये बात भी मान कर अपने भाई से मिल चल

पीहू अपनी माँ की बात मान अपना चेहरा साफ़ करती हुई उनके साथ निचे चल दी पैर घबराहट अभी भी थी जो होनी भी चाहिए आखिर बर्ताव जो ऐसा किया था आज तक उस ने राम के साथ इसलिए थोड़ी सी हिम्मत जुटती हुई वो निचे राम के सामने जा कर बैठ गयी और बहुत hi धीमी आवाज़ में बोली

पीहू- मुझे माफ़ कर दे भाई में बहुत शर्मिंदा हु अपने बर्ताव के लिए और जन्मदिन की बधाई हो बहुत बहुत

राम- आप प्यारी दीदी हो मुझे कोई शिकायत नहीं है आप से वैसे भी आप खिली खिली सी अछि लगती हो न की यु रोंदू टाइप ( इतना कहते hi राम ने प्यार से उसकी नाक को खींचा और गले से लगा लिया)

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जैसे hi राम ने पीहू को गले से लगाया तो पीहू जो खुद को संभाले हुई थी उसकी आँखों से आंसू चालक उठे और वो अपने भाई के गले से लगी हुई जोर से रोने लगी तो राम ने उसको तिघ्टलय हुग कर लिया और प्यार से उसके माथे को चूमते हुए बोलै

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राम- बस दीदी शांत हो जाओ सब ठीक है में बिलकुल नाराज़ नहीं हु और आप न रो कर ये मत समझना की में अपना गिफ्ट भूल जाऊंगा समझी न चलो अब रोना बंद करो यार मेरा जन्मदिन रो कर मानना है क्या

राम की बात सुनकर सब है पड़े तो पीहू की भी हसी छूट गयी और वो राम से अलग हो कर अपने पापा के पास गयी तो राम प्रिय के पास जा कर बोलै जो सब को खुश देख कर बहुत खुश हो रही थी

राम- आप हस्ती हुई बहुत अछि लगती हो हमेशा हस्ती रहा करो और थैंक यू मेरे लिए मंदिर में दुआ कर ने के लिए

प्रिय ने राम को देखा और फिर मुस्कराते हुए बोली

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प्रिय- ये मुस्कान भी तूने hi दी है राम वैसे सच कहु तो ऐसा hi परवार चाहती थी में हमेशा से जिस में प्यार हो अपनापन हो आज ये जो भी हुआ है न सब तेरी वजह से हुआ थैंक्स तो तुम्हे बोल न था मुझे

राम- मुझे भी ऐसा परिवार चाहिए था जो अब मिल गया है जिस में 2 क्यूट सी बहने जिनके प्यार के लिए में आज तक तड़पता रहा पैर अब में खुश की भगवान् ने मेरी सुन ली

प्रिय- हां सुन ली है और अब तुझे बहुत प्यार मिलेगा सब से और मुझसे मेरे स्वीट भाई ( मुस्कुराकर राम को देखते जिसे देख राम भी मुस्कुराने लगा )

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विनोद आज भी खेत पैर पी के टुन्न था जिसका खाना शांति ने भिजवा दिया था मजदुर के हाथ बाकि सब ने साथ मिलकर खाना खाया और अपने अपने कमरों में चले गए सो ने के लिए जहा रूम में जाते hi किशोर ने काय को बाहो में भर लिया जिसका एहसास होते hi काय मुस्कुराते हुए बोली

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काय- क्या बात है आज बड़ा प्यार आ रहा है आपको वैसे खबर भी न ली मेरी कभी

किशोर- वो मेरी गलती थी काय जो तुम सबसे दूर हो गया पैर अब नहीं अब में तुम्हे बहुत प्यार दूंगा इतना प्यार की तुम सब पुराणी बाते भूल जाओगी

किशोर की बाते सुन कर काय भी गरम हो ने लगी आखिर उसे भी तो चूड़े हुए कितने साल हो गए थे तो उसने भी देर न करते हुए किशोर के होठो को अपने होठो की कैद में ले लिया और बेतहाशा चूम ने लगी जिसकी गरम सांसें महसूस करते hi किशोर भी अपने कपडे खोलते हुए उसका साथ देने लगा

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कमरे का तापमान अचानक से बढ़ गया जिस में दोनों पागल हुए जा रहे थे काय के गोर जिस्म से किशोर एक एक करके सरे कपडे उतरता चला और अब बरी थी की उसकी मोती सी गांड पैर चिपकी छोटी सी पेंटी की जिसे किशोर ने दोनों उंगलियों में फसा कर निकाल फेका

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काय - ोुह्ह्ह किशोर बस अब दाल दो बहुत तरसाया है तुम ने मुझे आअह्ह्ह माआ किशोर आआह्ह्ह ऐसी हीई छोड़ो अपनी काय को जैसे पहले छोड़ते थे ूऊईममममहहहहहाआआअह्हह्ह्ह्हह कितनी दिनुओ बाददद कितना ाचा लग रहा आआह्ह्हझझहहहहहहसससससहहहहहह

किशोर- हआ काया कितने सालो बाद उउउउउफफ्फ तुझे छोड़ रहा हु पैर तेरी छूट तो पहली से भी जायदा गरम लग रही है आआअह्हह्ह्ह्ह देख कैसे फास्ट हुए जा रहा है aaaahhhhhhhhhh( बाल पकड़ के काय की छूट में धक्के लगते हुए बोलै)

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काय- ोुह्ह्ह्ह माआआ मर गयी किशोर आप नहीं जानते कितना तदपि हु में आप की बिना आअह्ह्ह्ह आज साड़ी तड़प मिटा दोऊ ोोोूस्सस्सशःह्ह्हूँउउम्मम्मम्मम आआह्ह्ह्हह्ह और जोररर सीए किशोर ऑर्डर जोर सीई आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत खुजली हो रही हीी किशोरररर आआआहहहहहहह कुछःह करो नाआआ क्या हुआए किशोरर रुक क्यों गए ोुह्ह्ह्ह

पैर किशोर झाड़ चूका था इतने दिनों बाद छूट गर्मी जायदा देर सेहन नहीं कर पाया और अब उम्र भी हो चुकी थी रखे हुए लोहे को जुंग लग चूका था इसलिए सारा माल काय की छूट में भरने के बाद धीरे से लुंड बहार खेचते हुए बोलै

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किशोर - ोुह्ह्ह्ह काय तुम्हारी छूट बहुत गरम है में सेह नहीं पाया अगली बार अचे से करूँगा आअह्ह्ह अब थक गया हु में

किशोर की बात सुनकर काय को गुस्सा तो बहुत आया पैर कर भी क्या सकती थी पति इतने दिनों बाद घर आया था इसलिए किशोर का दिल रखते हुए बोली

काय- कोई बात नहीं जी आप लौट आये ये hi बहुत है आप आराम करो में बाथरूम हो कर आती हु

कमरे में बने बाथरूम में घुसते hi काय ठन्डे पानी के निचे कड़ी हो कर अपनी मोती मोती चूचिया मसलते हुए बोली

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काय- इतने सालो में लुंड मिला और वो भी प्यास न बुझा सका उउउउउफफ्फ्फ अब क्या करू इनका जिन्हे मसल ने वाले हाथ अब कमजोर हो चुके ही सस्शह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ममअअअअ मेरी छूट आज भी सुखी hi रह गयी आअह्हह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्ह आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह्हुह्ह्ह अब ऊँगली का hi सहारा ही ूउम्मंहहहह( कोने में बैठी अपनी छूट तेज़ तेज़ ऊँगली करते हुए बोली )

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तेजी से उंगलिया अंदर बहार करते हुए काय झड़ने के करीब थी की तभी उसके दिमाग में उस दिन वाला सन आज्ञा जो उस ने देखा था उसे याद करती वो जोर जोर से अपनी छूट में ऊँगली करते हुए बड़बड़ा ने लगी

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काय - आआह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह मम्माआ क्या लुंड था वोओओओ ऊऊफफफफफ मेरे राम मेरे बच्ची आआह्ह्ह्हह देख तेरी माँ तड़प रही है तेरे लीईई ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह मिटा दिए अपनी मा की तदापपप आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह mmmmaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

झड़ते hi काय निढाल सीईई हो कर वही पसर गयी और तेज़ तेज़ सांसें भर ने लगी और उसकी छूट अपना रास बहती रही

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अपडेट - 8

अगली सुबह सब नास्ते की टेबल पैर साथ होते है जो की बहुत सालो बाद हो रहा था जहा काय राम के लिए बादाम और केसर वाला दूध लायी थी जिसे देख कर पीहू बोली

पीहू- क्या बात है छोटे तेरी तो निकल पड़ी अब तो तेरी hi सेवा हो रही है हम गरीब को तो कोई पूछ भी नहीं रहा

काय- जायदा नौटंकी मत कर तेरे लिए भी लायी हु चुप नास्ता कर ( सर पैर धीरे से चपत लगते हुए बोली)

राम- में क्या कह रहा था की वो वकील अंकल जो चेक दे गए थे उन्हें बैंक लगा आता हु आप के खाते में

काय - नहीं राम वो तेरे पापा का प्यार है जो उन्होंने तेरे लिए संभाल कर रखा इतने साल उसे तू अपने hi खाते में जमा कर और वैसे भी पैसे की कमी थोड़ी है बहुत पैसा है इतना की जीवन भर ख़तम न हो क्यों जी( किशोर को पराठा देते हुए बोली )

किशोर- बिलकुल तुझे फ़िक्र करने की कोई जरुरत नहीं वैसे भी तेरा ताऊ है न

राम- फिर ताऊ ये क्या है क्या आपको मेरा पापा कहना ाचा नहीं लगता

किशोर- ओह्ह भूल गया था माफ़ कर दे अपने पापा को आगे से नहीं होगा

राम- अब माफ़ी क्यों मांग रहे हो आप

किशोर- ः पागल है तू एक दम वैसे सेहर जा रहा है तो एक काम कर ये चेक तो बैंक में जमा कर दियो और वह से आते वक़्त अपने लिए नई बाइक ले आना जो तुझे अछि लगती हो

राम- मुझे तो बुलेट पसंद है पापा

किशोर - तो बुलेट ले लेना काय राम 2.5 लाख रुपये दे देना

काय- अभी देती हु पहले नास्ता कर लो आप सब राम नास्ता करके मेरे कमरे में आ जाना तब तक में कपडे बदल लू पसीने में सब भीग गए है

राम को कमरे का कह कर काय वह से चली गयी तो प्रिय जो राम को hi देखे जा रही थी वो किशोर से बोली

प्रिय - पापा क्या में राम के साथ सेहर चली जाऊ मुझे भी अपने लिए कपडे लाने है

किशोर- हां बीटा चली जाओ इस में पूछ ने की क्या बात है

किशोर की बात सुनते hi प्रिय अपने कमरे की तरफ दौड गयी सच में खुशिया वही है जहा परिवार मिलकर रहता हो नहीं तो महल भी जंगल लगता है

सब मस्ती मज़ाक के बीच नास्ता कर रहे थे की तभी घर में लड़खड़ाता हुआ विनोद चिल्लाते हुए बोलै क्युकी उसे नहीं पता था की किशोर घर में है

विनोद- ो राम के बच्चे कहा मर गया तू खेतो पे काम क्या तेरा बाप करेगा

इतना सुन न था की किशोर खड़ा हुआ और विनोद के गाल पैर 3/4 थप्पड़ रसीद करते हुए बोलै

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किशोर- नालायक में घर से बहार क्या गया तू छोटे बड़ो से बोल ने की तमीज भूल गया बोल क्या काम कर न है में हु उसका बाप मुझे बता

थप्पड़ पड़ते hi विनोद का सारा नशा पल भर में उतर गया और वो सर झुकाये बोलै

विनोद- गलती हो गयी भाई साब में तो बस ये कह रहा था की खेतो पे काम कर न है

किशोर- तो उसके लिए मजदूर रख समझा राम कोई नौकर नहीं है वो सिर्फ खुलती पैर ध्यान देगा अब से समझा क्युकी तुझे तो नशे में ये भी नहीं पता होगा की अब की बार मेले में खुलती की ललकार इस हवेली से गयी

विनोद- हवेली से किस ने दी

किशोर- मेरे बेटे ने मेरे अशोक के खून राम ने इसलिए आज से उसका खेतो पैर काम कर न बंद और तू भी ये नशे की लत छोड़ दे समझा चल अब नास्ता कर

विनोद- क्या राम ने ये तो कमाल हो गया भाईसाब बरसो बाद हवेली से ललकार सुनकर तो वीरभान का कलेजा जल उठा होगा वाह मजा आ गया ये खबर सुनकर फिर तो भाईसाब राम की सुरक्षा बडहनि होगी उस कमीने का कोई भरोषा नहीं

विनोद का कहना भी सही था क्युकी वो भी उस हादसे के बाद से hi नशे में डूबा था वर्ण वो बहुत hi शातिर दिमाग का खिलाडी थी किसी समय पैर

किशोर- हम्म तुम सही कह रहे रहे हो इसलिए मैंने पहले hi वीरा को संदेसा भिजवा दिया है अब से वो राम के साथ hi रहेगा और इसलिए तुझे भी कह रहा हु इस नशे से दूर रह समझा अब घर की भी देखभाल कर नई

वीरा

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वीरा की कई पुष्टि इस हवेली की रखवाली करती आयी है पैर जब राम के पिता की मौत हुई तो किशोर ने hi वीरा को मना कर दिया था पैर पैसे हर महीने उसके घर पंहुचा दिए जाते थे जिन्हे कई बार वीरा ने लेने से इंकार भी किया पैर किशोर की जिद के आगे कुछ न कह पाया क्युकी वो भी किशोर को बड़ा भाई hi मानता था अब जब संदेसा मिला तो ख़ुशी का ठिकाना न रहा उसकी

विनोद- में पूरी कोशिश करूँगा भाईसाब की अब ें सब से दूर राहु और राम मुझे माफ़ करना मैंने भी तुझे बहुत सताया है पैर मुझे नाज़ है की मेरा भतीजा इस हवेली को फिर से रोशन कर ने जा रहा है

राम- ऐसा मत कहिये चाचा जी ये सब आपकी वजह से hi कर ने लायक हुआ हु में अगर आप मुझे डाट ते नहीं तो में आपकी डाट से बचने के लिए अखाड़े में जा कर छुपता और न में खुलती सीख पता इसलिए आप खुद दोसी मत समझो और पापा वीरा जी जो भी है वो घर की रखवाली करेंगे मेरी नहीं आपका बीटा शेर है और शेर को सुरक्षा की जरुरत नहीं

किशोर- पैर राम तू उन्हें नहीं जानता वो खाघ है

राम- में उन्हें जानता हु पापा और बहुत अचे से जानता हु पैर आप अपने बेटे को नहीं जानते बहुत बार धोया उसके आदमियों को कपड़ो की तरह बस आमना - सामना अब होगा उस से

विनोद- भाईसाब हम एक बात भूल hi गए अगर ललकार उस तक पहुंच गयी है जो की पहुंच hi गयी होगी तो इस का मतलब है वो भी पूरी तैयारी से आएगा

राम- चाचू आप फ़िक्र न करो और नास्ता करो उस्ताद जी ( समशेर )सब पैर नज़र बनाये हुए है मुझे पल पल की खबर मिलती रहती है इसलिए आप और पापा आप भी टेंशन बिलकुल मत लो और अब मुझे इज़ाज़त दो में जा रहा अपनी बाइक लेने

दोनों को समझा कर राम काय के कमरे की तरफ बढ़ गया जहा काया बीएड पैर झुकी अपने कपडे उठा रही जिस से उसकी छोड़ी गांड खुल के अपना जलवा बिखेर रही थी तो वही राम आवाज़ लगता हुआ उसके कमरे में दाखिल हुआ

राम- क्या कर रही हो मुझे पैसे दे....

आगे शब्द राम के मुँह में hi रह गए सामने का नज़ारा देख कर और वो एक दम से बहार भाग गया

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थोड़ी देर बाद काय ने उसे आवाज़ दी तो वो अंदर गया और जाते hi काय से बोलै

राम- मुझे माफ़ कर दो माँ मुझे नहीं पता था की आप कपडे बदल रही हो इसलिए वो सब हो गया

राम बोलता जा रहा था और काय उसे हलकी मुस्कान लिए सुनती जा रही थी जब राम चुप हुआ तो काय उसकी आँखों में देखते हुए बोली

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काय- हो गया तेरा तो अब में बोलू ले पकड़ पैसे और जा बाकि कुछ मत सोच समझा तेरी कोई गलती नहीं है मैंने hi तुझे बुलाया था और में hi दरवाज़ा बंद कर न भूल गयी

राम- आप सच में गुस्सा नहीं हो की मैंने आप को नंगा माफ़ करना वो बिना कपड़ो के देखा

काय- नहीं तू मेरा बीटा है तुझसे कैसी शर्म मैंने भी तो तुझे बचपन कई बार नंगा देखा है तो इस इतनी बड़ी बात क्या हो गयी और तुझे फिर भी शक है तो दोबारा कपडे उतारू तेरे सामने मेरे भोलू राम

राम- वो तो तब में छोटा था माँ पैर सच में आप बहुत अछि हो

काय- तू भी बहुत ाचा है अब जा वर्ण लेत हो जायेगा

राम ने पैसे पकडे और प्रिय संग निकल सेहर के लिए बस से वैसे तो कार भी थी पैर बाइक जो लानी थी इसलिए बस से hi सफर 2 घंटे का था और इस बिच प्रिय को नींद आ गयी और वो राम के कंधे पैर सर टिका के उस से चिपक कर सो ने लगी जिसे देख के राम के चेहरे पैर भी मुस्कान आ गयी और वो थोड़ा हो गया मगर तभी प्रिय ने उसके हाथ को मजबूती से पकड़ लिया नींद में hi

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राम- ये दीदी भी नींद में है पैर पकड़ के पूरी मजबूती से रखा है और देखो तो लाल सूट में कितनी प्यारी लग रही और कितनी गोरी है ये

मैं hi मैं मुस्कुराता राम खिड़की से बहार देखता हुआ सफर मजा लेता हुआ सेहर की और बढ़ ने लगा

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यही सब सोचता हुआ वो सेहर पहुंच गया तो उस ने धीरे से प्रिय को उठाया और बोलै

राम- दीदी उठो सेहर आ गया है कितना सोती हो आप

राम की आवाज़ सुनकर प्रिय नींद से जगी तो खुद को राम से चिपका आया और अंदर hi अंदर शरमाते हुए बोली

प्रिय- इतनी जल्दी सेहर आ गया

राम- हां तो सोती रहोगी तो जल्दी hi लगेगा न मुझसे पूछो जो आपको लाड कर लाया हु पूरे सफर में सच में आप कुम्करण हो बड़े वाली

प्रिय- क्या कहा तूने कुम्करण और हां लाड कर लाया है रुक तुझे अभी बताती हु

वही राम बस हसे जा रहा था तो प्रिय की भी हसी निकल गयी उसे यु खिलखिलाता देख कर तो उसके कंधे पैर प्यार मारते हुए बोली

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प्रिय- मुझे नहीं पता था तू इतना शैतान है चल अब वर्ण लेत हो जायेंगे

प्रिय की बात सुनकर राम को भी एहसास और फिर दोनों भाई बहिन पहले बैंक गए उसके बाद शोरूम से बाइक ली जिस के बाद प्रिय के कहने पैर दोनों मंदिर गए जहा दिल से पूजा की और वापस चल दिए तो राम चलते हुए प्रिय को देख कर बोलै

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राम- क्या हुआ दीदी आप इतनी शांत क्यों हो गयी

प्रिय- कुछ नहीं बस कुछ सोच रही थी

राम- क्या सोच रही थी

प्रिय- यही की अगर हम बचपन से साथ में हस्ते बोलते तो कितना ाचा होता आज हमारी बॉन्डिंग और भी बेहतर होती

राम- अब भी बेहतर है और मुझे देखिये कल तक जो मुझे लावारिश समझते थे अब उन्हें भी पता चल गया की में लावारिश नहीं हु मेरा भी परिवार है

बात करते करते दोनों बाइक तक पहुंच गए तो प्रिय जो कब से राम को देख रही थी उसकी बाइक पैर पीछे बैठ कर उसके उदास चेहरे को देखते हुए मुस्कुरा कर बोली जिसे सुनकर राम के फेस पे भी स्माइल आ गयी

प्रिय- चल में लड़ गयी या यही रहना है बन्दर तुझे और अब न सत्य न हुआ कर वर्ण तुझे बहुत पिटूंगी

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राम हस्ते हुए बाइक चलते हुए वह से चल दिया और सीधा घर जा कर hi रुका जहा प्रिय अपना सामान लेकर ऊपर अपने कमरे में चली गयी और राम छत्त पैर क्युकी आते आते उन्हें हल्का अँधेरा हो गया था
 
अपडेट - 9

राम सीढिया चढ़ता हुआ हवेली छत्त पैर जा पंहुचा जहा उसे कोई खड़ा हुआ लगा पास जा कर देखा यो वो कोई और नहीं शांति थी जो उसकी आहत होने से उसकी तरफ hi देख रही थी


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जिसे देखते hi राम को वो लम्हा याद आ गया जो उसने शांति के संग बिताया था जिस में उसकी प्यारी चची अचानक उसे तनहा छोड़ गयी थी वो सब याद आते hi वो बहार की तरफ देखते हुए शांति से

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राम- इतना नाराज़ हो गयी आप की मुझसे बात तक नहीं की आप ने अगर कोई बात बुरी लगी थी तो मुझे समझा देती या मार लेती

शांति- तुम्हे ऐसा क्यों लगता है की में तुमसे नाराज़ हु तैयारी और इतनी खुशियों के बीच तुम्हे खुश देख कर मैं नहीं किया तुम्हे छेड़ ने का

राम- ये बहा ने किसी और को सुनाओ आप मेरी राग राग में बसी हो और आपके दिल की बात आप से बेहतर समझता हु में

शांति - ाचा अगर इतना hi समझते हो तो फिर तो वजह भी पता होनी चाहिए तुम्हे क्यों ( हल्का सा उसकी तरफ मुद के देखते हुए बोली )

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राम - पता है वजह मेरा हाथ गलती से आप वह चला गया था पैर आप की कसम मैंने वो सब जान बुझ कर नहीं किया था पता नहीं कैसे आपके होठो को चूमते हुए अपने आप hi सब हो गया उसके लिए मुझे माफ़ कर दो आगे से ऐसा कुछ नहीं चची

शांति- हम्म तो जनाब जानते है की क्यों में वह से चली आयी थी फिर भी मुझे मानाने की जरुरत नहीं समझी है न

राम- उस वक़्त समझ नहीं आया था पैर जब आप ने बात नहीं की तो महसूस हुआ पैर सेहर जाना था तो मिल नहीं पाया पैर मुझे क्या पता था अनजाने में हुई गलती आप को मुझसे दूर कर देगी

शांति- मुझे तुमसे दूर कोई नहीं कर सकता तुम भी नहीं और वो सब अनजाने में नहीं हुआ था उत्तेजना में हुआ क्युकी तुम पहली बार किसी औरत के संपर्क में आये थे समझे भोलू राम अब निचे आओ मेरे कमरे में तुमसे कुछ बात करनी है वैसे भी ठण्ड बढ़ रही है( सीडीहीयो के दरवाज़े पैर रुकते हुए बोली )

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शांति निचे जा चुकी थी पैर राम अभी उसकी बातो में उलझा हुआ वही खड़ा हुआ था और फिर जब कुछ समझ न आया तो वो शांति के कमरे की और चल दिया जहा शांति बीएड पैर लेती हुई उसका इंतज़ार कर रही थी और जैसे hi राम अंदर आया तो बिस्टेर पैर आने का इशारा हाथ से करते हुए बोली

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शांति- दरवाज़े की कड़ी लगा दो और मेरे पास आओ बिस्टेर पैर

राम ने दरवाज़े के कड़ी लगाई और धीरे से चलते हुए शांति के बिस्टेर के पास जा कर खड़ा हो

शांति - राम मेरे पास लाइटों आज तुम्हे तुम्हारे जन्मदिन का पूरा तोफहा मिलेगा जो उस दिन अधूरा रह गया था( राम के चेहरे को दोनों हाथो में भरते हुए बोली)

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इस से पहले की दोनों के होठ मिलते राम घबराई सी आवाज़ में बोलै

राम - फिर से नाराज़ तो नहीं हो जाओगी न आप

शांति - नहीं आज में इस सब के लिए तैयार हु और अब तुम मुझे अकेले तुम कहोगे आप नहीं समझे और कोई जल्दबाज़ी नहीं मेरे राम

इतना सुनते hi राम शांति के होठो की तरफ झुकता चला गया जिसका स्वागत शांति ने भी दिल खोल कर किया जिस से दोनों के होठ जुड़ गए

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होठो का स्पर्श होते hi दोनों के बदन ने झटका सा खाया और एक दूसरे के लाबू को प्यार से चूस ने लगे राम के लिए ये एक नया एहसास था जिस में उसकी प्यारी चची उसके निचे दबी उसे अपने रसीले होठो का रसपान करा रही थी फिर कैसे न राम बहकता और कैसे शांति खुद को संभालती जिस्म एक आग जिस में ये दो जिस्म अब झुलसने लगे थे जिस में शांति ने एक माहिर खिलाडी की भूमिका निबटे हुए अब राम को अपने निचे ले लिया था और उसके होठो को जोर जोर से चूसे जा रही थी तो वही राम का हाथ अब उसकी मोती गांड को सेहला रहा था ये वही राम था जिस ने आज तक ें चीज़ो को जाना भी नहीं था पैर अब बिलकुल खिलाडी की तरह शांति के जिस्म की पिच पैर हर और से खेल ने लगा हुआ था पैर वक़्त अब आगे बढ़ ने का था जिसकी पहल शांति ने की राम की शर्ट उतार के

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शांति- राम आज अपनी चची को अपना बना लो नहीं सही जाती मुझसे अब तड़प आज मेरी साड़ी प्यास बुझा दो

राम- पैर मुझे तो कुछ......

शांति- स्स्स्सह्ह्ह में हु न सब सीखा दूंगी बस तुम जल्द बाज़ी मत करना

राम का जिस्म काँप रहा था ये सब उसके लिए नया था पैर जैसे hi शांति ने उसका लोअर उतार कर उसके लुंड पैर हाथ फिराया उसके मुख सी एक मीठी आह्हः निकल गयी जिसे सुनके शांति होठो पैर जीभ और लुंड पैर हाथ फिर का धीरे से बोली

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शांति- ओह्ह्ह मेरे राम ये तो बहुत hi प्यारा है कसम से

राम- ऊऊह्ह्ह चची ये कैसा अनुभव इस में तो बहुत चैन मिल रहा है आआह्ह्ह ऐसे hi चची जोर जोर से करो ोूमंम्हह

शांति- जल्द बाज़ी नहीं राम अभी तो बहुत मजा आना बाकि है तू नहीं जानता इस पल के लिए मैंने कितना इंतज़ार किया तेरे लिए hi ें गोरी चूचियों को संभल कर रखा था तू इन्हे देख कैसी है और इसका सुवाद चखती हु( राम की आँखों में देख कर उसके लुंड को मुँह में भरते हुए बोली )

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राम की हालत hi ख़राब हो गयी जब शांति के लबो ने उसके लुंड को अपने अंदर छुपाया तो वो बस इतना hi बोल पाया

राम- आअह्ह्ह्ह चची में पागल हो जाऊंगा आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़ ये मुझे क्या हो रहा है उउउउम्म्म कितना ाचा लग रहा है उफ्फ्फ्फ्फ़

शांति को तो जैसे कुछ सुन hi नहीं रहा था वो तो बस राम पैर चढ़ी हुई उसके लुंड को चूसे जा रही थी

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कुछ देर राम का लुंड चूस ने के बाद वो कड़ी हुई और राम को देखते हुए बोली

शांति - लो राम आज अपनी अमानत मुझसे लेलो जो तुमसे मसल ने के लिए न जाने कब से तड़प रही है

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ऊऊफफफफ क्या गोरी चूचिया है जिन्हे देख कर किसी की भी नियत दोल जाए और ये चूचिया राम को तोहफे में मिल रही थी जिन्हे वो आँख फाड़े घूरे जा रहा था तो शांति ये देख कर प्यार से बोली

शांति- आज तो ये तुम्हारी हो गयी राम क्या आज भी सिर्फ घुरोगे इन्हे चुसोगे नहीं आओ राम और इनका सारा रास निचोड़ डालो मसल डालो अपनी शांति की चूचियों को आअह्ह्ह आईसीए hi चुसो राम मम्माह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्ह्ह बहुत इंतज़ार करवाया राम तुम ने बहुत इंतज़ार करवाया बस आज सारा इंतज़ार ख़तम कर दो ऊऊह्ह्ह्हह्ह( राम की गरम गरम जीभ को अपनी चूचियों पैर महसूस करते हुए बोली )

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ये खेल अपने अंतिम पड़ाव पैर जाता उस से पहले hi काय की आवाज़ आयी जो राम को खाने के लिए बुला जिसे सुनते hi राम खड़ा हो गया तो शांति भी खुद सँभालते हुए बोली

शांति - तुम जाओ में आती हु अभी और हां ये पूरा करना है तुम्हे जिसे तुम अधूरा छोड़े जा रहे हो वर्ण में पागल हो जाउंगी राम

राम- हां चची में पूरा करूँगा

इतना कहते hi राम निचे दाऊद गया खुद ठीक करता हुआ और रह गयी शांति अकेली अपने कमरे में जो बहुत जायदा गरम हो चुकी थी जिसकी गर्मी को शांत कर ने की कोशिश में वो नंगी हो कर अपनी छूट तकिये से न जाने कितनी देर घिष्टि रही

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अपडेट-10

राम नीचे हॉल में आया जहा सभी मजूद थे जिन में सबसे पहले काय की नज़र उसपर गयी जो सबको खाना परोस रही थी जिस वजह से उसकी भरी भरकम चूचिया ब्लाउज फाड़ कर बहार आने को मचल रही थी जिन्हे देखते hi राम को शांति की चूचिया याद आ गयी जिन्हे अभी अभी वो मसल कर आ रहा था

राम की नज़र समझ ने में देर न लगी काय को जो उसे hi मुस्कुरा कर देखे रही थी पैर अभी सब थे तो ये वक़्त ें सब बातो का नहीं था इसलिए वो राम को आवाज़ देते हुए बोली

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काय- अब खड़ा hi रहेगा क्या आजा बैठ खाना ठंडा हो रहा है

काय की आवाज़ सुनकर प्रिय जो चुप चाप बैठी खाना खा रही थी उसकी भी नज़र राम पैर गयी तो वो भी मुस्कुरा कर उसे देख ने लगी

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राम भी देर न करते हुए प्रिय के पास hi बैठ गया तो प्रिय धीरे से बोली

प्रिय- क्या कर रहा था जो इतनी देर से आया पता है में कितनी देर से इंतज़ार कर रही थी

राम- क्यों कोई काम था क्या दीदी

प्रिय- क्यों कोई काम होगा तब hi बात करेगा तू मुझसे

राम- नहीं वो बात नहीं है आदत नहीं है न धीरे धीरे पद जाएगी

प्रिय - हम्म ये तो है चल जल्दी से खाना ख़तम करते है फिर मेरे कमरे में बाते करेंगे

प्रिय की बात सुनकर राम को बहुत ख़ुशी हुई पैर जब नज़र सामने कड़ी शांति पैर गयी जो उसे hi देख रही थी तो उसे वो पल याद आगये जो अभी दोनों ने बिताये थे और वो बात भी जेहन में घूम गयी जो शांति ने उसे आते हुए बोली थी( जो अधूरा छोड़ा है उसे तुम्हे hi पूरा करना है) और वही बात उसकी आँखें अब भी कह रही थी जिनकी गहरायी देख कर hi राम के जिस्म में 440 वाल्ट का झटका सा लगा और वो प्रिय से बोलै

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राम- आज नहीं दीदी कल करेंगे न आज बहुत थक गया हु सेहर की भाग दौड से

प्रिय का तो चेहरा hi उतर गया राम की बात सुनकर मगर कहती भी तो क्या इसलिए मुर्झाहये चेहरे से उसे देखते हुए बोली

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प्रिय- कोई बात नहीं भाई तू आराम कर हम कल बात करेंगे

प्रिय का मैं नहीं किया अब और खाने का तो वो अपनी प्लेट किचन में रख कर सोने का बोल के अपने रूम में चली गयी जिसके जाने के बाद राम जल्दी जल्दी खाना खाने लगा आखिर आज उसे जिस्म की गर्मी का एहसास जो कराया था शांति ने वही शांति भी उसे ऐसे खाना खाता देख मैं में मुस्कुराते हुए सोच ने लगी

शांति- कितनी जल्दी है अपनी चची पे चढ़ ने की खाना भी आराम से नहीं खा रहा सच में बहुत प्यारा है तभी इस पैर अपना सब कुछ लुटा देने का मैं करता है आह्हः कैसे बच्चो की तरह चूस रहा था मेरी छाती को पता नहीं जब इसका वो अंदर लुंगी तो कैसा लगेगा बस जल्दी से सब अपने कमरे में जाए और में राम में समै जाऊ ( राम को मुस्कुराते हुए देख कर )

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राम खाना ख़तम करके उठा hi था की राम और शांति की खुशियों को ग्रहण लगता विनोद वह आ गया जो आज बिना पिए घर आया था जिसे देख कर किशोर बोलै

किशोर- शाबाश विनोद मुझे तुमसे यही उम्मीद थी आओ खाना खाओ

विनोद- जी भाईसाब इतनी हिम्मत तो जुटानी hi होगी अगर नशे से दूर जाना है तो

राम और शांति का सपना शीशे की तरह टूट गया पैर एक आस थी की शायद विनोद खाना खा कर वापस खेत जाए इसलिए शांति hi आगे बढ़ कर उसे खाना देते हुए बोली( जो किशोर से बात कर रहा था)


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शांति- खाना खा लीजिये रात हो गयी है आपको वापस भी तो जाना होगा न

विनोद- नहीं शांति आज घर पैर hi रुकूंगा तुम आराम से परोस दो

💔

शांति का दिल hi टूट गया उसकी बात सुनकर वही राम भी ये सुनते hi चुप चाप ऊपर जाने लगा जिसे शांति ने भी तिरछी नज़रो से देखा और मैं में बुदबुदाते हुए बोली जो निचे गिरी हुई प्लेट उठा रही थी

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शांति - आज इन्हे भी रुक न था खुद तो मुझे सुख दे नहीं पाए और अब मैंने ढूंढा तो उसे भी नज़र लगा ने आ गए नसेड़ी कही के

राम अपने कमरे में पंहुचा और बीएड पैर लेत गया पैर कहते है न जब लुंड आग लगी हो तो वो चैन से नहीं बैठ ने देता यही कुछ हाल राम का भी था उसे समझ hi नहीं आ रहा था की वो क्या करे और क्या नहीं ऐसी उलझन में वो कमरे में इधर से उधर टहल ने लगा और जब कुछ न समझ आया तो बाथरूम में जा कर ठन्डे पानी से नाहा कर खुद को शांत कर के आया जिसे उसे कुछ हद तक रहत मिली तो अपना ध्यान शांति से हटा ने के लिए वो प्रिय के कमरे की तरफ बढ़ गया आखिर प्रिय ने उसे इतने प्यार से बुलाया था

यही सोच कर राम जब प्रिय के कमरे पहुंच कर दरवाज़ा खोलता अंदर गया तो अंदर का नज़ारा शॉकिंग था अंदर प्रिय अभी अभी नाहा कर निकली थी और खली एक टॉवल में थी जिस में से उसकी गोरी चुकी पूरी नुमाया हो रही थी वही दरवाज़े की आवाज़ सुनकर जैसे hi प्रिय ने राम और राम ने प्रिय को देखा तो दोनों घबरा गए और प्रिय राम को अपनी चुकी ढकते हुए बोली

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प्रिय- राम बहार जाओ बत्तमीज़

राम प्रिय की आवाज़ सुनते hi वह से चुप चाप चला गया उसे बहुत बुरा लग रहा था की वो बिना खटखटाये आखिर अंदर गया hi क्यों वही प्रिय ने थोड़ी देर बाद पीछे मुड़कर देखा की राम गया या नहीं जब उसे राम नहीं दिखा तो मैं में बोली

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प्रिय- चला गया हे भगवान् ये क्या हो रहा है उस दिन मैंने गलती से उसका वो देख लिया था और आज उसने शायद मेरी छी बोलते हुए भी शर्म आ रही है पैर वो आया क्यों उस ने तो मना किया था पता नहीं बेचारा क्या सोच रहा होगा मैंने खामखा उसे इतनी जोर से डाट दिया कही वो मुझसे नाराज़ न हो गया हो नहीं नहीं में अभी जा कर उस से माफ़ी लेती हु इतने सालो में तो भाई मिला है मुझे वो भी कितनी केयर कर ने वाला

यही सोचते हुए वो तैयार हुई जल्दी से और राम के कमरे की और चल दी
 
अपडेट -11

प्रिय राम के कमरे पहुंची तो देखा की राम पीठ घुमाये खड़ा था उसे कोई सुध hi नहीं थी की कोई उसके कमरे में आया है वही प्रिय को समझ नहीं आया की वो करे तो पीछे से जा सीधा उसे बाहो में भर कर बोली

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प्रिय - माफ़ कर दे भाई मुझे ऐसे बर्ताव नहीं करना चाहिए वैसे भी तुझे थोड़ी पता था की में अंदर किस हालत में हु और मैंने गुस्से में तुझे डाट दिया

राम- आप माफ़ी मत मांगो गलती मेरी hi है जो बिना खटखटए अंदर घुस गया मुझे समझना चाहिए था की वो एक लड़की का कमरा है

प्रिय- स्सश्ह कुछ मत बोल मेरे भाई मैंने कहा न तुझे नहीं पता था और वैसे भी तू मेरा भाई है जब चाहे आ जा सकता है तुझे दरवाज़ा खटखटा ने की कोई जरुरत नहीं मैं आगे से ध्यान रखूंगी गेट लॉक करके hi ड्रेस चेंज करू ( प्यार से राम को गले लगाए हुए बोली )


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राम - आप बहुत अछि हो दीदी सच में और सच कहु तो इस प्यार के लिए में बहुत तड़पा हु इसलिए डरता हु कही ये प्यार ये अपनापन अपनी किसी गलती से खो न दू

प्रिय- जो खो न था वो खो चुके अब तुम सिर्फ प्यार के हक़दार और वो तुम्हे बहुत मिलेगा मुझसे तो बहुत मिलेगा पक्का

प्रिय की बात सुनकर राम ने उसकी आँखों में देखा जहा प्यार hi प्यार था जिसे महसूस करता वो प्रिय की आँखों में देखते हुए उसके माथे को चुम कर बोलै

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राम- में भी आप से बहुत प्यार करता हु दीदी बस आप मुझसे नाराज़ मत होना चाहे मार लेना मुझे गलती हो ने पैर

प्रिय बस उसकी आँखों में hi देखे जा रही थी आज पहली बार उसे किसी लड़के ने चूमा था भले माथे पैर hi पैर ये एहसास और इतनी देर से राम की बाहो में रहकर उसके जिस्म एक अनजानी सीई बेचैनी हो रही थी वो क्या था ये वो समझ नहीं पा रही थी जिसे और करीब से महसूस करने की तालाब उसे राम की तरफ खींचे जा रही थी जिसमे डूबी वो कब राम के इतने करीब सिमट गयी जहा राम की गरम सांसें उसे अपने चेहरे पैर होठो पैर महसूस होने लगी उसे पता hi न चला और वो उसी बेचैनी में बेचैन हो कर राम के गले में प्यार से हाथ फेर ने लगी उसके लरजते होठ राम के होठो से मिल जाना चाहते थे पैर एक शर्म एक ादृश्ये दिवार उसे रोके हुए थी जिस में खुद को भांडते हुए वो धीरे से बोली

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प्रिय- अब मुझे चल न चेहये राम बहुत रात हो गयी है तुम भी सू जाओ सुबह मिलते है

प्रिय की आवाज़ सुनकर राम भी जैसे होश में आया और प्रिय से अलग हो कर बोलै

राम- जैसा आप को ठीक लगे वैसे क्या सच में आप मुझे छोड़ कर जाना चाहती है

राम के छोड़ कर जाने के ये शब्द जैसे बानो से चुभे प्रिय को और उसे लगा की जैसे उसके जिस्म से किसी ने उसके प्राण खींच लिया हो वो एक दम गहराई हुई सी एक टूक राम को देख ने लगी और अगले hi पल उसके होठ राम के होठो से जा मिले उसने ऐसा क्यों किया ये भी नहीं जानती पैर अब दो प्रेमियों को मिलान टॉय था

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राम को उम्मीद hi नहीं थी की प्रिय ऐसा कुछ करेगी पैर अब तूफ़ान तो आ चूका था कुछ ज्ञान उसे शांति दे चुकी बाकि दोनों के गरम जिस्म और प्रिय का साथ देने वाला था जिस में बहते हुए वो एक दूसरे को बेतहासा चुम ने लगे दिमाग ने काम कर न बंद कर दिया था अब तो बस जिस्म एक दूसरे से बात कर रहे थे

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कमरे का तापमान बढ़ चूका था जिस में दो जवान जिस्म प्यार की आग में जलने लगे थे जिसकी तपिस न बर्डस होते देख राम ने एक झटके में प्रिय के जिस्म से उसका कुरता उतार फेका जिस में प्रिय का पूरा सहयोग था पैर जैसे hi प्रिय को महसूस हुआ की वो राम के सामने नग्न अवस्था में है उसे शर्म और घबराहट दोनों महसूस होने लगी

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एक दम से उसे लग ने लगा की ये ठीक नहीं कैसे वो अपने भाई के साथ ये सब कर बैठी पैर दूसरी तरफ राम उसके जिस्म को प्यार से चूमे जा रहा था जो प्रिय को चाहते हुए भी पीछे हैट ने नहीं दे रहा था ऐसी उधेड़बुन में वो कब उसकी उंगलिया राम के बालो को सेहला ने लगी उसे भी पता न अब बस कमरे दोनों की तेज़ चलती सांसें hi सुनाई दे रही थी

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वही राम प्रिय के जिस्म पैर अपनी चाप चोदे जा रहा था जिस में पहली बार प्रिय की मुँह से आनंद की एक मीठी सी सिसकी सुनाई दी जो बता रही थी को आनंद की चरम सिमा कभी भी पार कर जाएगी अगर राम ने उसे नहीं छोड़ा और हुआ भी कुछ ऐसा hi इतनी देर से राम के मसले जाने और चूमने से प्रिय का जिस्म बिना चूड़े hi अकड़ ने लगा और वो मीठी सिसकिया भरते हुए राम से बोली

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प्रिय- उउउउउम्मम्महहहहह रामममम भऐई बुसस करररर आआह्ह्ह्हह्ह मुझे कुछ हो रहा है आआह्ह्हह्ह्ह्ह माआआ स्स्स्सह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह आअह्हह्ह्ह्हह ममम

प्रिय झाड़ चुकी थी और राम के निचे दबी उसके लुंड को अपनी छूट पैर महसूस कर पा रही थी तो वही राम अधूरे ज्ञान के साथ लुंड को प्रिय की छूट पैर ऊपर से hi जोर जोर से रगड़ रहा था जिस से अब प्रिय को अजीब सा महसूस हो रहा था और दर्द भी करने लगी थी उसकी छूट इसलिए वो कराहते हुए राम से बोली

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प्रिय- राम प्ल्ज़ हैट जा मुझे दर्द हो रहा है आअह्ह्ह हैट जा न भाई प्ल्ज़

राम बहुत बेचैनी महसूस कर रहा था क्युकी ये दूसरी बार था जब वो फुल उत्तेजित हुआ था और उसे पीछे हैट न पद रहा था पैर अब वो करता भी तो क्या प्रिय उसे रोक रही थी इसलिए न चाहते हुए भी उसने प्रिय को छोड़ दिया और खड़ा हो गया

जिसके दूर होते hi प्रिय कड़ी हुई और खुद को चादर से ढकते हुए बोली

प्रिय- ये ठीक नहीं हुआ राम हम भाई बहिन पैर गलती तुम्हारी भी नहीं शुरुवात मैंने hi की और फिर खुद को संभाल नहीं पायी प्ल्ज़ मुझे गलत मत समझना में खुद नहीं जानती ये सब कैसे हो गया बस खुद को नहीं पायी

राम- आप ने सिर्फ प्यार किया है दीदी और कुछ नहीं और यकीन मानो ये हम दोनों के बीच hi रहेगा और अगर आप का फिर कभी अपने भाई को प्यार कर ने का दिल हो तो बेझिझक आ जाना समझी आप( प्यार से प्रिय का माथा चूमते हुए )

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प्रिय उसके आगे कुछ न बोली बस चुप चाप अपने कमरे में जा कर अभी अभी जो आनंद उस ने प्राप्त किया था उसे सोचते हुए गहरी नींद के आगोश में खो गयी जिसके बाद सीधा सुबह hi उठी आज उसे अपना जिस्म बहुत हल्का हल्का महसूस हो रहा था और एक अलग hi रौनक उसे देखते hi बनती थी जिसे संजोये हुए वो निचे हॉल में आयी जहा काय सब को नास्ता परोस रही थी जो प्रिय को देखते हुए बोली

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काय- क्या बात है गुड़िया आज बहुत देर तक सोती रही हम्म्म तबियत तो ठीक है न

प्रिय - जी माँ बिलकुल ठीक है वो बस रात को देर से सोई थी ( रात का जिक्र होते hi उसके चेहरे पैर शर्म के मिले जुले भाव थे जिन्हे राम भी देख रहा था )

राम- इतना मत सोया करो दीदी वर्ण सब आप को कुम्ब्करण कहेंगे और मैं नहीं चाहता कोई मेरी प्यारी सी दीदी को कुम्ब्करण कहे क्यों आप तो स्वीट हो न ( सबसे नज़रे चुरा कर प्रिय की जांघ पैर हाथ फेरते हुए बोलै )

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प्रिय को एक दम से धसका लग गया राम की हरकत से तो वो सर झुका कर पानी पीने लगी उसे उम्मीद नहीं था राम सब के सामने ऐसी हरकत कर देगा तो वही दूसरी तरफ शांति आज खूब सज सवार रही थी आज उसने फुल मेकअप किया हुआ था जिस में वो और भी केहर ध रही थी जिसे देख कर विनोद बोलै

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विनोद- बहुत खूबसूरत लग रही हो शांति ऐसे बन सवार कर रहा करो वैसे भी में अब तुम्हे टाइम दिया करूँगा

शांति - नहीं आप अपना काम देखिये मेरी वजह से नुकशान मत उठाइये में अपना ध्यान खुद रख लुंगी

इतना कहते hi शांति वह से चली गयी बिना विनोद का जवाब सुने

किशोर खाना खा कर दफ्तर के लिए निकल चूका था और राम थोड़ी छेड़खानी कर ने के बाद बहार निकल गया जहा उसे सुमित मिला जो उसे देखते hi बोलै

सुमित- क्या बात है बे बड़ा खुश दिखाई दे रहा है और तूने खुश्ती में ललकार दी है मैंने सुना

राम- हां तो क्या हुआ दे दी तो दी और खुश क्यों न दिखू मुझे मेरा परिवार जो मिल गया

सुमित- क्या चल साले झूट मत बोल तेरे घर वाले तुझे अपना ले यानि गंगा उलटी बाह ने लगी में नहीं मानता

राम- मत मान साले मुझे क्या वैसे तू कहा था दिखा नहीं में तेरे घर गया था

सुमित- अरे हां यार कुछ काम था ाचा सुन न तुझे माँ ने बुलाया है तू घर चल में अभी आया

घर का नाम सुनते hi राम को उस दिन की घटना याद आ गयी तो वो तुरंत सुमित से बोलै

राम- नहीं यार अभी मुझे कुछ काम है बाद में मिल लूंगा

सुमित- यानि सच में तुझे तेरा परिवार मिल गया है तभी तो अब इस गरीब के घर जाने में शर्म आ रही है तुझे कोई नहीं मत जा में माँ को समझा दूंगा भाई ( इमोशनल करते हुए )

राम- साले ऐसा कुछ नहीं है जा रहा हु पैर तू जल्दी आना समझा

सुमित - हम्म ठीक है

राम वह से सुमित के घर के लिए निकल गया ये सोच कर की चलो सुमित की माँ वह है तो कजरी कुछ नहीं करेगी यही सोच कर वो घर में दाखिल हुआ और जैसे अंदर वाले कमरे की तरफ बढ़ा दरवाज़े पैर hi नंगी कड़ी कजरी को मुस्कुराते पाया जिस देख कर वो वापस पलटा hi था की कजरी की आवाज़ आयी

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कजरी- बिना बात सुने अगर आज तुम गए तो मेरी मौत के ज़िम्मेदार भी तुम hi होंगे
 
अपडेट - 12

कजरी बात सुनकर राम के कदम वही रुक गए और वो बिना कजरी की तरफ को देखे बोलै

राम- में आपकी हर बात सुन ने को तैयार हु पैर पहले आप कपडे पहनो फिर हम बात करेंगे

कजरी - अब तुम घूम सकते हो मैंने कपडे पहन लिए है( एक पतली सी निघ्त्य टाइप कपडे से खुद को ढकते हुए बोली)

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कजरी की आवाज़ सुनकर राम उसकी तरफ देख कर बोलै

राम- बोलिये अब क्या बोल न है आप को

कजरी- तुम मुझे बहुत गिरी हुई लड़की समझते होंगे न जो हर बार तुम्हे अपना नंगा जिस्म दिखाती रहती है पैर तुम hi बताओ क्या काला रंग होना मेरी गलती है जो कोई भी मुझे अपना जीवन साथी नहीं बनाना चाहता तो तुम hi बताओ में इस जिस्म की जरुरत कैसे पूरी करू

राम- तो इस का मतलब है की आप किसी के सामने भी कपडे खोल कर कड़ी हो जाओगी में मानता हु आप की भी कुछ ख़ुवैशे होंगी की आप की शादी हो बच्चे हो पैर इस तरह तो नहीं हो सकती न ये सब

कजरी- किसी के भी सामने कपडे खोल ने होते न राम बाबू तो तुम्हारे सामने गिड़गिड़ाती नहीं समझे तुम पैर भरोषा करती हु और यकीन है की अगर तुम ने मेरे साथ कुछ किया भी तो इसका पता नहीं चलेगा किसी को इसलिए तुमसे उम्मीद लगाए बैठी हु अब आगे तुम्हारी मर्ज़ी तुम जाना चाहो तो जा सकते हो में जी लुंगी इस आग में जलती हुई

कजरी की बाते दिल से निकल रही थी और जब बात दिल से निकलती है तो थोड़ा hi सही पैर असर जरूर करती है वही राम के साथ हुआ जो कजरी की बात सुनकर उसके सावले पतले होठ एक टुक्क निहार ने लगा

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राम का दिल पिघल ने लगा था और कदम कजरी की तरफ बढ़ रहे थे जिसे आगे आता देख वो कजरी जो पल भर पहले बेशर्मो की तरह नंगी कड़ी थी वही अब घबराने और शर्मा ने लगी उसकी धड़कन बढ़ ने लगी और फिर जैसे hi राम कजरी के पास पंहुचा तो उसने उसके होठो से होठ जोड़ कर उसे गोदी में उठा लिया जिस में सहयोग देते हुए कजरी ने अपने पेअर तीर कमान की तरह राम के पैरो में फसा लिए और राम उसे गॉड में उठाये अंदर की तरफ बढ़ ने लगा

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कजरी का रोम रोम काँप रहा था पैर मजे की तरंग उसके जिस्म को रहत दे रही थी जिस में वो डूबती चली जा रही थी आज उसे उसकी मुँह मांगी मुराद जो मिल गयी थी इसलिए वो भी बड़े प्यार से राम के होठो का रसपान करते हुए राम के उस आंग को बहार निकाल कर उसकी मोटाई और लम्बाई का जायज़ा ले रही थी जिसे वो अपने अंदर समां लेना चाहती थी

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कजरी के हाथ स्पर्श पाते hi राम के खून का दौरा दुगनी रफ़्तार से उसके लुंड में बह ने लगा था जिस से उसकी आँखें मजे में बंद हो गयी थी और आंख जब खुली तो देखा उसका लुंड कजरी बड़े प्यार से चूस रही है जैसे कोई बच्चा लोल्लयपोप चुस्त है

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राम- ओह्ह्ह्ह कजरी दीदी बहुत मजा आ रहा है ऊऊफफफफफफ एआईसीए होई जोर जोर से चुसो uuuummmmaaaahhhhhhhhhhh

कजरी का ध्यान राम की बातो पैर नहीं बल्कि उसके लुंड पैर था जिसे वो बड़े प्यार से सहलाते हुए उसकी गोलियों को भी चूस ने में लगी हुई थी जिस की वजह राम को बेइन्ताह मजा आ रहा था

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आज उसे ये मुसल लुंड अपनी छूट में लेना था और वो जानती भी थी की अभी राम जोश में है तो ये हो भी जायेगा पैर अगर राम झाड़ गया तो फिर शायद वो शर्मिंदगी उसे प्यास न छोड़ कर चला जाये इस लिए वो कड़ी हुई और राम के सामने अपनी छूट फैला कर लेत गयी और प्यार से राम की तरफ देखते हुए बोली

कजरी- इसे चाटो राम खा जाओ इसे ऊऊफफफफ हआ राम ऐसे hi पूरा मुँह में भर कर चाटो आअह्ह्ह्ह सस्शह्ह्ह्ह उउउउउइइइइइइइ मम्माआआ

कजरी की आज्ञा का पालन करते हुए राम कजरी की सावली छूट पैर जीभ फिर ने लगा पहले तो उसे अजीब लगा पैर जल्द hi उसे ये नमकीन सा स्वाद ाचा लग ने तो वो भी मजा लेते हुए तेज़ तेज़ जीभ चलने लगा जिस से कजरी चटपटा ते हुए तेज़ तेज़ सिसकिया भर ने लगी

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कजरी- हाईए राम बहुत मजा आ रहा हैई आआह्ह्ह्ह ाआईसीए होई चुसो ना मम्माआ मारररर गायियीईइ उउउउम्म्म स्स्स्सह्ह्ह्हह्ज ओह्ह्ह्ह राम आआह्ह्ह्ह क्या जादू है तुम्हारी जीभ मई ूउम्मंहहहह बुस्स्सस कर्रू वर्ण में बिना चूड़े hi झाड़ जौंगीय ( राम को खुद से अलग करते हुए बोली )

राम को तो समझ hi नहीं आया की आखिर कजरी ने उसे हटा क्यों दिया जब उसे मजा आ रहा था पैर एक बात वो ये भी जान गया था की औरत की छूट को भी छाता जाता है वो ये सब सोच hi रहा था की कजरी उस से बोली

कजरी - खड़े क्यों हु राम अब छोड़ो भी मुझे

राम- कर तो रहा था तुम ने hi तो हटाया है

कजरी- अरे मेरे भोले सनम वो नहीं अब अपना ये लुंड मेरी छूट में डालो और मेरी प्यास बुझाओ

राम- मैंने पहले नहीं किया है तुम ने किया है तो तुम hi बताओ कहा डालना है

कजरी- अरे बुद्धू किया तो मैंने भी नहीं पैर अम्मा को बाबा से चुड़ते देखा है जब वो ज़िंदा थे इसलिए अब देर मत करो और मेरी दोनों टांगो की बीच आओ और यहाँ अपना लुंड रख कर अंदर को दबाओ

कजरी की बात समझते hi राम उसकी टांगो के बिच आया और अपने लुंड को उसकी छूट पैर टिका कर अंदर की तरफ दबाव बनाया तो वो ऊपर की और फिसल गया राम ने फिर से कोशिश और इसबार उसका मोटा लुंड कजरी की छूट को चीरता हुआ अंदर दाखिल हो गया जिसके एहसास से hi कजरी की जान निकल गयी पैर फिर भी वो दर्द सेहती हुई राम से बोली

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कजरी- आअह्ह्ह्ह मा राम मार दिया तुम ने तो कसम से बस अब रुकना मत तेज़ी से अंदर बहार करो आअह्हह्ज माआआआ उउउउम्मम्मम आआअह्ह्ह्हह मारर्र जायईईई री राम तूने तो मेरी छूट फाड़ डाली आआअह्ह्जः आईसीए होई मेरे दर्द की परवाह मत कर और तेज़ कर आआह्ह्ह्ह ससष्ठ देखो कोई में कुंवारी नहीं रही मेरी भी चुदाई हो रही है आआअह्ह्ह्ह साले सब छोड़ कर चले जाते थे ऊऊह्ह्हह्ह पैर राम ने मुझे उउउउउम्म्मह्ह्ह्ह कली सी फूल बना hi दिया aaaaghhhhhhhhhh( राम की आँखों में देखते हुए )

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राम ने आज वो सुख पा hi लिया था जिसके लिए वो कल रात से तड़प रहा था आज कजरी ने उसे चुदाई सीखा दी थी जिसे छोड़ते वक़्त वो शांति को कैसे संतुस्ट कर न है ये सब सोचते हुए बोले

राम- ओह्ह्ह कजरी दीदी इस में तो बहुत मजा आता ही आआह्ह्ह सच बड़ी मस्त चीज़ है ये छूट और लुंड की घिसाई भी ोुह्ह्ह अब कभी मना नहीं करूँगा तुम्ही जब कहोगी तब तब छोडूंगा तुम्हे आअह्ह्ह बस सुमित को मत बताना आअह्ह्ह

कजरी- उउउउइइइइइ ममअअअअ आअह्ह्ह्हह उसे सब पता है उसे hi तो भेजा था तुम्हे बुलाने को आअह्ह्ह्ह फ़िक्र मत करो वो तुमसे कुछ भी नाहीबाआआआअह्ह्ह्हह आईसीई हीई आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह स्स्स्सह्ह्ह ोुह्ह्ह्हह्ह आअह्ह्ह्ह शायद मेरा होने वाला हीी रामममममम आआआह्ह्ह्हह्ह बुस्स्सस्स्स्सस्स बुस्स्सस्स रामममम आअह्हह्ह्ह्ह मीटी

gaayiiiiiiiiiiiiiiiii रईईई मेरी पहली चुदाई हो गयीईइ आआह्ह्हह्ह्ह्ह

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ह ृक्क जाओ( राम को हाथ से रोकते हुए)

पैर राम अब रुक ने वाला नहीं था वो तो अब मंज़िल पैर पहुंच कर hi रुक ने वाला था इसलिए उसने कजरी की कमर को दोनों हाथो से पकड़ा और तेज़ तेज़ धक्के लगते हुए बोलै

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राम- अभी नहीं कजरी दीदी अभी तो मजा आना शुरू हुआ है अब तो तुम बस मजे लो आआह्ह्ह्हह क्या मस्त छूट है आठ मुझे पहले पता होता की चुदाई में इतना मजा आता है तो में बहुत पहले hi कर चूका होता पैर आज से में नहीं रुक ने वाला आआह्ह्ह्ह ोूहहहजह कितनी गरम छूट है तुम्हारी आआह्ह्ह्ह

कजरी की हालत ख़राब हो रही थी राम के हर झटके के साथ वही उसकी छूट दोबारा झड़ने के कगार पैर थी जिस से वो मजे में सिसकिया भरते हुए बोली

कजरी- ऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्माआआ कहा फास गयीईई सस्शह्ह्ह राममम मेरी छूट फिर से बहने वालीए आआअह्हह्ह्ह्हह्ज आआह्ह्ह्हह अब ताऊ रुकक्क जाहूऊओ aaaaahhhhhhhhhhhhhhh ममममननननाहीईई बुऊसस्सस्स्स्स बुस्स्सस्स्स( राम को फिर से रोकते हुए)

राम- बस मेरी प्यारी कजरी दीदी थोड़ी देर और कर ने दो मुझे भी कुछ हो रहा है आअह्हह्ह्ह्ह कितनी मुलायम है तुम्हारी चुकी इन्हे तो मैंने छुआ hi नहीं था आअह्ह्ह्ह अगली बार इन से भी खेलूंगा aaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh( कजरी की चुकी को जोर से दबा कर बोलै)

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कजरी- आअह्ह्ह रामम बुसस कर अब और हिम्मत नहीं है देख अगली बार कुटिया बनूँगी तब छोड़ लेना

राम- आआह्ह्ह्ह चुप हो जोऊ मुझे बहुत मजा आ रहा है और मुझे सारा मजा लेना हैई aaaahhhhhhhhhh ऊम्मम पहले तुम्हे hi कर न था न और अब मुझे मजा आ रहा है तो रुक ने का बोल रही हो चुप एक दम चुप्प आआह्ह्ह्हह( कजरी का मुँह हाथ से दबा कर तेज़ तेज़ झटके लगते हुए बोलै)

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कजरी की आंखें चढ़ गयी थी उसे सांस लेना भी मुश्किल हो रहा था इसलिए हिम्मत कर के राम का हाथ हटाया और तेज़ तेज़ सांसें लेते हुए बोली

कजरी- कमीने छूट के साथ जान भी लेगा क्या आअह्ह्ह्ह जल्दी झाड़ जाए नाआ आआह्ह्ह्ह और कितना करेगा मममहहहहहह

कजरी की छूट प्रेम रास हर झटके से बहार निकल कर गिर रहा था और राम उसके ऊपर सांड सा चढ़ा हुआ धक्के लगाए जा रहा था

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कजरी का हाल बुरा था मजे के बाद सजा मिल रही थी जिस से वो छह कर भी बच नहीं सकती थी

कजरी- आअह्ह्ह्ह राम रेहम कर मेरी छूट को बक्श दे में तेरा मुँह में लेकर निकाल देती हु आअह्ह्ह्ह सस्शह्ह्ह्हह्ह

राम को शायद उस पैर दया आ गयी इसलिए वो उसकी बात मान गया और कजरी रास से भीगा लुंड उसकी छूट से निकाल कर उसके मुँह में दे दिया जिसे कजरी ने भी तुरंत लपका लिया

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मजे की इंतहा थी आज राम के जीवन जिसकी मंज़िल उसे जल्द hi हासिल हुई और वो कजरी का मुँह अपने गरम गरम रास से भर ने लगा जिसे कजरी ने जितना हो सका अपने अंदर लिया बाकी उसके से बेहटा हुआ निचे गिरने लगा आज का अनुभव राम के जीवन में नए बदलाव लेकर आया था जिस में अब न जाने कितने नाम जुड़ने थे

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कजरी की मस्त चुदाई कर के राम कुछ देर उसके पास रुका जिस में कजरी ने उसे डॉगी स्टाइल के साथ कई और तरीके समझाए और फिर अपनी सूजी हुई छूट के साथ राम को अलविदा करती वो स्नानागार में घुस गयी तो वही दूसरी तरफ हवेली में भी कोई बहुत बेचैन था जिसे उसकी छूट की गर्मी आज बहुत जायदा परेशान कर रही थी

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अपडेट - 13

राम कजरी की चुदाई कर के आज बहुत खुश था और उसी ख़ुशी में झूमता हुआ वो घर पंहुचा जहा शांति ने उसे बताया की काय उसके बारे में कई बार पूछ चुकी है तो पहले वो काय से मिल ले शांति की बात मान कर राम काय से मिलने उसके कमरे में दाखिल हुआ तो सामने का कामुक दृश्ये देख कर वापस जाने लगे जहा काय एक शार्ट ड्रेस में कड़ी अपने पैरो की मालिश कर रही थी जिस से उसकी मसल जंघे और मोती चूचियों के पूर्ण दरसन हो रहे थे इसलिए राम ने वह रुकना ठीक नहीं समझा और जाने hi लगा था की काय की आवाज़ ने उसके बढ़ते कदम रोक दिए

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काय- कहा जा रहे हो अपनी माँ से मिले बिना हम्म

राम- वो माँ आप काम में व्यस्त थी और आप शायद कपडे भी बदलोगी इसलिए मैंने सोचा बाद मिल लूंगा

काय- कपडे बदल रही भी होती तो तुझे जाने की क्या जरुरत है मैंने उस दिन भी कहा था न की में तो तेरे सामने भी कपडे बदल सकती हु फिर भी तू मुझसे बिना बोले जा रहा था

राम- ऐसा नहीं है माँ मुझे शर्म आती है

काय- शर्म आती है या में मोती हु इसलिए तुझे तेरी माँ अछि नहीं लगती हां

राम- ये क्या बोल रही हो माँ आप तो बहुत सूंदर हो और आप मुझे बहुत अछि लगती हो सच में

काय - रहने दे मस्का मत लगा अगर इतनी अछि तो अपनी माँ से इतना दूर दूर थोड़ी रहता ( साद सा फेस बना कर)

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बीएड पैर बैठ ने से काय की चूचिया ब्लाउज फाड़ कर बहार आने को मचल रही थी जिन पैर बार बार राम की नज़र जा रही थी जिन्हे काय भी देख रही थी और मंद मंद मैं में hi मुस्कुराते हुए राम से बोली

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काय- देख ले अभी भी दूर hi खड़ा है न ये नहीं की अपनी माँ को गले से लगा कर जताये की कितना प्यार करता है पैर तू ऐसा करेगा hi नहीं क्यों की तुझे तेरी माँ अछि hi नहीं लगती

काय की बात सुनकर राम होश में आया जो काय की मोती चूचियों में खोया हुआ था और खोता भी क्यों नहीं आखिर आज पहली बार उसने मर्द और औरत के रिश्ते को जो समझा था

राम- ओह्ह्ह माँ ऐसा कुछ भी नहीं है में तो इसलिए आप के पास नहीं आ रहा था की कही फिर से आप मुझसे नाराज़ न हो जाए वर्ण में तो आप से चिपका राहु हमेशा ( काय को पीछे से बाहो में भरते हुए बोलै )

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राम के ऐसा कर ने से काय को अपनी गर्दन पैर उसकी गरम सांसें महसूस हुई जिस से उसके जिस्म और छूट में हजारो चीटिया एक साथ रेंग ने लगी और वो खुद को संभालते हुए राम से बोली

काय- तू पागल है तू मेरे पास आएगा तो में नाराज़ क्यों हो ने लगी बल्कि मुझे तो बहुत ाचा लगता है जब तो मेरे पास होता है आगे से कभी भी ऐसा मत सोच न समझा जो भी दिल हो मुझे बताया कर में तेरी माँ हु और बच्चे माँ से कुछ नहीं छुपाते समझा

राम- हां माँ समझ गया और आगे से कभी भी कुछ नहीं छुपाऊंगा

काय- ाचा अगर ऐसी बात है तो सच बोल अभी थोड़ी देर पहले तू क्या देख रहा था

अपनी चोरी पकडे जाने पैर राम घबराते हुए बोलै

राम- वो माँ गलती से नज़र चली गयी थी में जान बुझ कर नहीं देख रहा था

काय- क्यों देख रहा था ये नहीं पूछ रही क्या देख रहा था वो पूछ रही हु

राम- वो माँ आपकी बहुत बड़ी है न तो नज़र चली जाती है में जान बुझ कर ऐसा नहीं करता

काय- तो इतना घबरा क्यों रहा है तूने तो कई बार इन्हे बिना कपड़ो के भी देखा है फिर आज ें में नया क्या लग गया

राम- तब में बहुत छोटा था न माँ अचे से याद नहीं और अब जब भी इनकी हलकी सी झलक दिखती है तो न जाने क्यों इन में खो सा जाता हु

काय- ाचा तुझे इतनी पसंद है तो मुझे क्यों नहीं बोलै में अपने बेटे को कपडे खोल कर दिखा देती

राम- क्या सच में में इन्हे देख सकता हु माँ

काय- क्यों नहीं जा तू दरवाज़ा बंद कर तब तक में कपडे निकालती हु( कपडे खोलते हुए बोली

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काय बहुत बेचैन थी आज उसे ऊँगली कर के भी संतुस्ती नहीं मिली थी उसे तो बस हर जगह राम का वो मोटा मुसल दिख रहा था जिसे वो अपनी छूट की गहरायी में उतार न चाहती थी इसलिए बिना देर किये वो कपडे खोल ने लगी वही राम जैसे hi गेट लॉक कर के घुमा तो उसकी आखे फटी रह गयी काय की मोती मोती चूचिया देख कर जो कजरी की चूचियों के मुक़ाबले कुछ जायदा hi बड़ी थी जिन्हे वो खा जाने वाली नज़रो से देख रहा था जिसे देख कर काय अंदर hi अंदर मुस्कुरा रही थी उसे अभी से अपनी जीत दिखाई देने लगी थी इसलिए देर न करते हुए वो राम को कामुक नज़रो से देखते हुए बोली

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काय- क्या हुआ ऐसे क्या देख रहा है दूर से पास आ कर इन्हे छू कर देख तेरे लिए hi तो इन्हे आज़ाद किया है

राम को यकीन hi नहीं हो रहा था की ये वही काय है जो कुछ दिन पहले तक उसे देख न भी पसंद नहीं करती और आज नंगी कड़ी उसे अपने जिस्म की दावत दे रही है कजरी को छोड़ ने के बाद राम इतना तो समझ चूका था की उसकी तै जो आज माँ बन गयी थी उसकी वो भी कजरी की तरह प्यासी है और राम से अपनी प्यास बुझ ने के लिए hi उसे निमतरं दे रही है इसलिए उस ने भी बिना कोई पल गवाए काय की चूचियों को दोनों हाथो में थाम लिया और जोर जोर से मसल ने लगा वही काय राम के शाक्त हाथो के एहसास से hi सिसकिया भर ने लगी

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काय- ओह्ह्ह मेरे राम ऐसे hi मसल इन्हे ऊऊफफफफ कितना सकूं मिल रहा तेरे हाथो से और जोर से मेरे लाल आअह्ह्ह अपनी माँ की तड़प तू hi मिटा सकता है आह्हः सबाश्ठ मेरे बेटे ऐसे होई ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ उउउउम्म्म

राम- ओह्ह्ह माँ कितने बड़े है ये हाथ में भी नहीं आ रहे और मुलायम की तो बात hi मत पूछो इनसे तो अब में रोज़ खेलूंगा माँ खेल ने डौगी न इनके साथ बोलो माँ ( काय की चूचियों को जोर जोर से मसलते हुए)

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काय आज एक नए सुख का आनंद ले रही थी उसकी शुरू से चाहत थी की उसका पति उसके जिस्म से खेले पैर ये चाहत आज तक अधूरी hi थी पैर आज राम उसे पूरी कर रहा था जिसका आनंद वो आंख बंद करके मजे से सिसकिया भरते हुए बोली

काय- आअह्ह्ह्ह हआ मेरे बच्चे तेरा जो मैं करे करना आज से में पूरी की पूरी तेरी हु बस तू पहले मेरी साड़ी खुजली दूर कर दे अब और इंतज़ारत करवा अपनी माँ को पहले से hi बहुत तड़प रही हु मेरे लाल आअह्ह्ह अपने उस हथ्यार को दाल दे अपनी माँ की गहरायी में और करदे खुदाई

राम- क्या दाल दू माँ और कहा दालु कुछ बताओ तो सही ( नाटक करते हुए )

काय- ओह्ह मेरे भोले बच्चे में तेरे लुंड की बात कर रही हु जो तूने अपनी पेण्ट में छुपाया हुआ है

राम- मैंने कुछ नहीं छुपाया यकीन न हो तो खुद देख लो आप

राम के कहते hi लुंड की प्यासी काय ने झटके से राम की पेण्ट निचे कर दी और जो सामने आया उसे देख कर उसका मुँह और आंखे दोनों खुल गयी

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काय- हे भगवान् ये तो मेरे अंदाज़े से भी बड़ा निकला माँ ये तो मेरी फाड़ देगा ऊह्ह्ह्ह राम अब देर मत कर तुझे जो भी कर न है कर लियो मेरे बच्चे बस पहले इसे मेरी छूट में दाल दे अब और देर मत कर वर्ण तेरी माँ पागल हो जाएगीइ आआह्ह्ह्हह सस्शह्ह्हजहह

राम कुछ करता उस से पहले hi काय ने दोनों टाँगे फैलाई और राम के लुंड को अपनी छूट में हाथ से दबती हुई पूरा लुंड अपनी छूट में दाल कर सिसकते हुए बोली

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काय- आअह्ह्ह्हह माआ मर गाय्यीइइइइइइ तेरी मा मेरे राम ऊऊफफफफफ मम्माआआ मेई gayyyiiiiiiiiiiiiiiiiii आआह्ह्ह्ह

इतनी आवाज़ निकलते hi काय का जिस्म अकड़ गया और उसकी आँख खुल गयी और उसका हाथ उसकी छूट पैर कास गया और बिस्टेर पैर नंगी लेती काय सिसकते हुए बोली

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काय- आआह्ह्ह कितना हसीं सपना था ऊऊफफफ जब सच होगा तो कितना सकूं देगा

धक् धक् माँ ो माँ दरवाज़ा खोलो क्या हुआ है आप को

काय के कानो में जब राम की आवाज़ पड़ी तो वो मैं में hi मुस्कुराने लगी और अंदर बीएड पड़े हुए hi बोली

काय- कुछ नहीं हुआ ठीक हु में अभी जाओ तुम बाद में बात करुँगी अभी आराम कर ने दो

काय की बात सुनकर राम प्रिय के पास चला गया और जाते hi अपने होठ प्रिय के होठो से जोड़ कर प्यार से उन्हें चूस ने लगा जिस में प्रिय ने भी साथ दिया और एक अलग hi दुनिया में खो गयी

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ये नया एहसास उसे ाचा लग ने लगा और वो उसी में अपनी दुनिया सजा ने के सपने देख ने लगी थी इसलिए प्यार से राम के कान में बोली

प्रिय- मुझे नहीं पता राम ये सही है या गलत है और शायद गलत hi है पैर मुझे अब ये ाचा लग ने लगा है और में अब साड़ी ज़िन्दगी तुम्हारी बाहो में गुज़ार न चाहती हु प्ल्ज़ कभी मुझसे दूर मत करना

राम- में भी आप के बिना नहीं जी सकती दी पता नहीं क्यों आप के पास आते hi में सब भूल जाता हु और दूर वो भी आप से ये तो कभी नहीं हो सकता बल्कि में तो आज आप के साथ hi सोने वाला हु वो भी आप की बाहो में चलिए बीएड पैर चलते है ( प्रिय को गॉड में उठा कर ले जाते हुए बोलै)

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प्रिय- ाःह गिर जाउंगी राम प्ल्ज़ आह्हः मम्मा ये लड़का भी ना
 
अपडेट - 14

राम प्रिय को बाहो में लेकर उसके बीएड पैर आज्ञा जहा दोनों बहिन भाई एक दूसरे के साथ मस्ती कर ने लगे इस मस्ती कभी राम तो कभी प्रिय ऊपर हो जाती जिस से दोनों hi खिल खिला कर है रहे थे

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कुछ देर यु hi मस्ती मज़ाक कर ने के बाद दोनों एक दूसरे की बाहो में लिपटे हुए बाते कर ने लगे जिस पैर प्यार से खिलखिलाती प्रिय राम से बोली

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प्रिय- कितना ाचा लगता है जब तुम मेरे पास होते हो सच में बहुत से हस्सें पल हमारी यादो में जुड़े बिना रह गए न राम

राम- जो होता है अचे के लिए होता है दीदी वैसे उस वक़्त में छोटा था तो आप को ये एहसास महसूस hi नहीं होता क्यों 😜

प्रिय- छियई गंदे में उस एहसास की बात नहीं कर रही में तो आह्हः क्या कर ने का इरादा है तुम्हारा हम्म्म( राम को अपने ऊपर होता हुआ देख कर बोली)

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राम- आपको गन्दा कर ने का मेरी प्यारी दीदी बोलो कर दू आपको भी गन्दा हम्म( प्यार से प्रिय की खुली आँखों में देखते हुए बोलै)

प्रिय- मना करुँगी तो मान जाओगे

राम- आपको कह कर तो देखो में तो अपनी जान भी दे दू

प्रिय- वो अब मेरी जान है इसलिए दोबारा ये बोल न भी मत राम पता नहीं क्या हुआ है मुझे जो तुम्हारे बिना रहा hi नहीं जाता अब मुझसे तुम घर पैर नहीं दीखते तो दिल घबराता है पहले ऐसा कुछ नहीं था पैर अब तुमसे दूर हो..... हम्म्म्म आआह्ह्ह्हह्ह राम ये क्या कर रहे हो ऊऊफफफफ आअह्ह्ह्हह मुझ में समां जाओ राम आअह्हह्ह्ह्ह माआआआ ऐसे hi प्यार करो अपनी प्रिय को आअह्ह्ह्ह

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राम की गरम सांसें प्रिय को और भी पागल कर रही थी जिस से वो और भी मदहोश हो ने लगी उसका जिस्म उसके बस में नहीं था वो तो बस राम के प्यार में खोयी हुई राम का साथ दिए जा रही थी तो वही राम के हाथ उसकी मोती चूचिया मसल रहे थे जिस से प्रिय के जिस्म और भी जायदा उत्तेजना बढ़ ने लगी थी जिस में मदहोश वो बस सिस्किए भरते हुए राम से बोली

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प्रिय - आअह्ह्ह राम आराम से ऊऊफफफफ दर्द होता है जोर से ूउम्महहह में पागल हो जाउंगी राम आआह्ह्ह मा एआयईईई ममअअअ आअह्ह्ह नहहीइ राम आअह्ह्ह ये मत करो मुझे कुछ हो रहा है ऊऊफफफफ आआह्ह्ह्ह मम्मा( राम को अपनी नंगी चुकी चूसते देख कर बोली)

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राम ने प्रिय की आवाज़ नहीं सुनी और वो प्यार से उसकी गोरी चूचिया चूसते हुए उसकी गोल नाभि तक जा पंहुचा जिस से प्रिय मदहोश होते हुए बोली

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प्रिय - आआअह्ह्ह राम ये क्या हो रहा मुझे ऊऊफफफफफफफ मा में पागल हो जाउंगी राम आअह्ह्ह्हह स्स्स्सह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह राम आअह्ह्ह्ह वहा नहीं आअह्ह्ह रम्म काटो मत उफ्फ्फ्फ़ मा सस्शह्ह्ह आराम से राम आह्हः बहुत ाचा लग रहा है

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ये वही प्रिय थी जिस ने कभी किसी को देख न तो दूर कभी ऐसा सोचा भी नहीं होगा जो आज अपने छोटे भाई सामने नंगी बिस्तर पैर लेती अपनी जवानी का रास चखा रही थी वही भाई भी अपनी प्यारी दीदी की चूचिया का रास चकता हुआ उसके योनि दुवार तक जा पंहुचा था जिसकी दस्तक से hi प्रिय सम्पूर्ण जिस्म काँप उठा और वो सिसकते हुए राम का हाथ पकड़ते हुए बोली

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प्रिय- ूऊमम्महहहह राम मर जाउंगी प्ल्ज़ ऊऊफफफफफ आआअह्ह्ह्ह ये कैसा एहसास है आआह्ह्हह्ज राम बहुत ाचा लग रहा है आआह्ह्हह्ह्ह्ह ूउम्मंहहहहहाआअह ऊऊफफफ आअह्ह्ह्हह राम में पागल हो जाउंगी आह्ह्ह्ह aaaaahhhhhhhhhhh क्या जादू कर दिया तूने अपनी दीदी पे आअह्हह्ह्ह्ह मम्माआआआ ाअस्स्सह्ह्ह्हह्ह आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

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प्रिय की छूट में एक सैलाब सा उमड़ रहा था जो कभी भी फैट सकता था जिस में मदहोश हो कर प्रिय का सर जोर से अपनी छूट पैर दबाते हुए बड़बड़ा ने लगी

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प्रिय- आअह्ह्ह आअह्ह्ह्ह स्स्स्सह्ह्हह्ह ोुह्ह्ह्हह्ह राम मेरे प्यारे भाई ये क्या कर दिया तूने ऊऊफफफफफफ म्मम्माआआ मुझे कुछ हो रहा है राम aaaahhhhhhhhhhh आआआहहहहहहह राम मुझे कुछ हो रहा है मेरे अंदर कुछ फैट ने को है aaaahhhhhhhhhh maaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaa

एक तेज़ सिसकी के साथ प्रिय का जिस्म अकड़ ने लगा उसकी टाँगे कपकपा रही थी और राम उसकी छूट से निकलते नमकीन पानी को बड़े मजे से चाट ने में लगा हुआ था जिसके चलते प्रिय की छूट का जवालामुखी फैट पड़ा जिसे राम ने अमृत समझ कर साफ़ कर दिया

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प्रिय झाड़ चुकी थी और बेजान से बिस्तर पैर पड़ी हुई लम्बी लम्बी सांसें ले रही थी जैसे मिलो दौड़ कर आयी हो जब की राम अब प्रिय की छूट में होता लगा ने की सोच रहा था और यही सोच कर उस ने प्रिय की छूट पैर लुंड रख कर जैसे hi उसे अपने मुसल से रगड़ा प्रिय होश में आते हुए बोली

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प्रिय - प्ल्ज़ राम अभी नहीं मैंने उस के लिए कुछ और सोच रखा है अगर तुम्हे बुरा न लगे

प्रिय की बात सुनकर राम एक दम से पीछे हैट गया और बड़े hi प्यार से बोलै

राम- आपको प्ल्ज़ कह ने की जरुरत नहीं है दीदी जब आप इस के लिए तैयार होंगे में तभी आगे बढूंगा मुझे सिर्फ आपका जिस्म नहीं चाचिये आप का प्यार चाहिए

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राम की बात सुनकर प्रिय ने नंगे बदन hi राम को गले से लगा लिया और प्यार से उसके सर में हाथ फेरते हुए बोली

प्रिय- तुम सच में बहुत प्यारे हो राम मेरी हर बात बिना कुछ कहे मान लेते हो पैर सच में तुम यकीन करना ये प्रिय अब सिर्फ तुम्हारी है और इस पैर सिर्फ तुम्हारा हक़ है और ये तुम्हे hi मिलेगी ये तुम्हारी प्रिय का तुमसे वादा है

राम- मुझे पता है दीदी वैसे एक बात तो है जितने आप के होठ मीठे है न उतनी hi आपकी छूट नमकीन दोनों को चूस ने में मजा आज्ञा

प्रिय- धत्त गंदे बच्चे ऐसी बाते मत कर मुझे शर्म आती है🤫

राम- और मुझे मजा आता है 😝

राम की बात सुनकर प्रिय कुछ नहीं बोली बस राम से चिपक गयी जिसके बाद राम भी कुछ नहीं बोलै बस अपनी प्यारी दीदी की पीठ सहलाते हुए न जाने कब नींद के आगोश में चला गया

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सुबह प्रिय की नींद पहले खुली तो खुद को नंगा राम की बाहो में देख कर पहले तो शर्मा गयी फिर गौर से राम को देखा जो बहुत मासूम लग रहा था सोता हुआ तो मैं में सोच ने लगी

प्रिय- कितना प्यारा है मेरा भाई नहीं मेरा लवर जिस में हवस बिलकुल भी नहीं सिर्फ है तो प्यार तभी तो मुझे भी पता नहीं चला कब प्यार कर बैठी 😘😘😘

थोड़ी देर यु hi राम को निहार ने के बाद प्रिय प्यार से उसका गाल सहलाते हुए धीरे से बोली

प्रिय- गुड मॉर्निंग मेरी जान सुबह हो गयी है उठ जाओ

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प्रिय की मीठी आवाज़ सुनकर राम कुनमुनाते हुए खड़ा हुआ और प्यार से प्रिय को देखते हुए बोलै

राम- गुड मॉर्निंग दीदी कैसी नींद आयी आप को रात

प्रिय- बहुत अछि तुम्हारी बाहो सोते हुए ऐसा लगा जैसे जन्नत है तो यही है इतना सकूं कभी नहीं था जितना कल रात मिला सच में

राम- अछि बात है तो फिर अब जब भी मौका मिलेगा में आपको सकूं दे ने आ जाया करूँगा ok

प्रिय- हम्म अब उठ जाओ और अखाड़े जाओ जल्दी से

राम- ok प्रिय डार्लिंग😜

प्रिय- मेरा नाम लिया तुम ने

राम- हां तो बड़े पापा भी तो माँ का नाम लेते है

प्रिय- तो वो तो हस्बैंड है न

राम- ाचा तो फिर जैसे हम सोये रात को तो हम क्या हुए 🤣🤣🤣

राम की बात सुनकर प्रिय शर्मा गयी आखिर सच hi तो कह रहा था राम रात भर नंगी चिपक कर hi तो सोई थी प्रिय इसलिए कुछ न बोली और उठ कर बाथरूम में चली गयी और राम फ्रेश हो कर अखाड़े चला गया जहा से फ्री हो कर वो सीधा शांति के कमरे में गया जहा शांति किसी सोच में गम कहदी थी जिसे यु गम शूम देख कर राम पीछे से उसे गले लगते हुए बोलै

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राम- क्या हुआ मेरी प्यारी चची को किस सोच में गम हो

शांति- आह पागल कोई देख लेगा हैट छोड़ मुझे ऊऊफफफ राम मत कर निचे दीदी बुला रही है मुझे अभी टाइम और जगह दोनों ठीक नहीं( राम से बच के निकलते हुए बोली)

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राम तो बस जाते हुए अपनी चची की गोरी चूचिया hi देखता रह गया
 
अपडेट - 15

राम के जाने बाद प्रिय फ्रेश हो कर बाथरूम से निकली तो सामने पीहू को खड़ा पाया जो किसी समस्या में लग रही थी जिसे देख कर प्रिय बोली

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प्रिय- क्या पीहू क्या सोच रही है और सुबह सुबह मेरे कमरे में क्या बात है

पीहू- वो क्या है न दीदी मैंने अभी थोड़ी देर पहले राम को आप के कमरे से निकलते देखा क्या वो आप के साथ सोया था रात भर

प्रिय- हां यही सोया था पैर तू क्यों पूछ रही है

पीहू- आप को नहीं लगता की ये सही नहीं है अब वो बड़ा हो गया है और ये सब माँ और पिता जी को शायद ठीक न लगे

प्रिय- बड़ा हुआ तो क्या हुआ है तो वो हमारा भाई hi और वैसे भी किसी को क्या लगता है मुझे फर्क नहीं पड़ता वैसे भी बहुत दुःख झेले है मेरे राम ने अब और नहीं अब बस मुझे उसके चेहरे पैर सिर्फ मुस्कान चाहिए वैसे भी भाई तो वो तेरा भी है अगर वो तेरे पास सोना चाहे तो क्या तू मना कर देगी

pihu-mein क्यों मना करुँगी पैर वो आये तो वो तो बात भी नहीं करता शायद अभी भी नाराज़ है वो मुझसे हम्म खैर छोड़ो उसकी मर्ज़ी जिस से चाहे बात करे और जिसके साथ चाहे सोये आप चलो निचे चल कर नास्ता करते है

प्रिय- हम्म तो ये बात है वो तेरे पास नहीं आया इसलिए तुझे बुरा लगा चल कोई नई में कह दूंगी उस से की पीहू का मैं है तेरे साथ सोने का 😜

पीहू- की दीदी मैंने ऐसा कब कहा वो भाई है मेरा न की कोई लवर और आप hi सुलाओ उसे में तो जा रही हु

पीहू को चीड़ कर जाता देख प्रिय मैं में मुस्कुराते हुए बोली

प्रिय- तेरी गलती नहीं है पीहू रानी राम है hi ऐसा की कोई भी उसके साथ उसके पास होना चाहता है तभी तो में पागल हो गयी हु उसके प्यार में

वही राम खाने की टेबल पैर बैठा था जिसे काय खाना परोस रही थी जिसका पल्लू झुक ने की वजह निचे को सरक गया था जिस से उसकी गहरी खायी राम के सामने अपनी आभा बिखेर रही थी जिसका एहसास काय को हुआ तो वो मुस्कुरा कर राम को देखते हुए धीरे से बोली

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काय- बदमाश नास्ते पैर ध्यान दे माँ की छाती पैर नहीं और इतनी hi देख ने की इच्छा है तो अपनी माँ से बोल न पगले में मना थोड़ी करुँगी तुझे चल अब नास्ता कर अचे से तेरे चाचा और पापा तेरी सेहत का ख़याल रख ने को कह के गए है

राम- नहीं माँ वो गलती से हो गया और क्या पापा कह कर गए सिर्फ इसलिए आप ये सब कर रही है क्या आप मुझे प्यार नहीं करती

काय- बहुत प्यार करती हु मेरे बच्चे तू कह कर तो देख तुझे क्या चाहिए तेरी माँ सब कुछ नौछवर कर देगी तेरे लिए

राम- आप मिल गयी मुझे सब मिल गया माँ और कुछ नहीं चाहिए मुझे

काय- ाचा तो सच बता तू मेरी छाती क्यों घर रहा था हम्म

राम- में घर नहीं रहा था माँ वो ये है hi....

काय- क्या है ये बोल न

राम- बड़े है माँ की नज़र चली गयी अपने आप hi सच में

काय- हम्म मेरा प्यारा बीटा सच बहुत प्यारा है वैसे तुझे देख ने हो तो मुझसे कह देना में दिखा दूंगी तुझे बस ऐसे सब के सामने मत घुरा कर चल अब नास्ता कर पीहू आ रही है ( कामुक ऐडा से राम की आँखों में देखते हुए बोली )

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अपनी माँ की बात सुनकर राम की जिस्म में भी जहर झूरी सी उठ गयी यही सोच कर की उसकी माँ उसे अपनी मोती मोती गदरायी चूचियों के दर्शन करा न चाहती है ये सब सोच कर hi उसके दिमाग में काय की नंगी चूचियों की तस्वीर घूम ने लगी और उसके मुँह एक मीठी आह निकल गयी जिसे पीहू ने सुन लिया और वो राम को सपनो की दुनिया से बहार लाते हुए बोली

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पीहू- राम क्या हुआ तुझे सिसक क्यों रहा है

राम- है वो नहीं कुछ नहीं दीदी ाचा में चलता हु मुझे कुछ काम है

पीहू- सुबह सुबह क्या काम है तुझे और तुम मुझसे बात क्यों नहीं कर रहे नाराज़ हो क्या अभी भी हां बोलो ( रुवासी सी हो कर राम की आँखों में देखते हुए बोली )

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राम- ससष्ठ बिलकुल नहीं दी आप से नाराज़ हो कर कहा जाऊंगा इतनी मुश्किल से तो आप सब का प्यार मिला है में कोई पागल हु जो उसे यही खो दूंगा

राम की बात पूरी हो ने तक आखिर पीहू का दर्द चालक hi उठा और वो अंशु बहते हुए राम से बोली

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पीहू- अगर नाराज़ नहीं था तो मुझसे मिला क्यों नहीं अब ये तो बिलकुल मत कहना की टाइम नहीं मिला

राम- बिलकुल नहीं कहूंगा बस आप रोना बंद करो प्ल्ज़ और आज से में रोज़ सुबह शाम आपके सामने हाजरी लगाऊंगा प्रॉमिस

पीहू- पक्का न झूट तो नहीं बोल रहा

राम- पक्का मेरी जंगली बिल्ली दीदी बस आप पंजा मत मार न😝😝

राम की बात सुनकर पीहू मुस्कुराते हुए उसे देख कर बोली

पीहू- में बिल्ली हु तो तू कोनसा बन्दर से काम है जो हर वक़्त कूदता रहता है

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राम- हे हे में मज़ाक कर रहा था अब चलता हु आप नास्ता करो

पीहू राम को जाते हुए देख कर तब तक मुस्कुराती रही जब तक प्रिय ने आ कर उसे टोका नहीं जिस पैर पीहू मुस्कुराते हुए प्रिय से हस्ते हुए बोली

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पीहू- आप ने सच hi कहा था दी इसके चेहरे पैर मुस्कान hi अछि लगती है

प्रिय- हम्म क्या बात है आपको भी मुस्कान अछि लग ने लगी कही दिल तो नहीं आ गया मुस्कान पैर

पीहू- क्या दीदी कुछ भी ऐसा कुछ नहीं है भाई है वो हमारा

प्रिय- हम्म भाई तो है पैर प्यारा भी बहुत है पीहू रानी 😜

पीहू- ये आप hi हो न या फिर चेंज हो गयी हो आप तो ऐसी न थी

प्रिय- मुस्कान से प्यार कर के तो देख तू भी ऐसी नहीं रहेगी

पीहू- वैरी फनी हां नई तो ( हस्ते हुए )

दोनों बहने खिखिला कर हसने लगी तो वही राम आज नदी की तरफ निकल गया था जहा चलते हुए उसे पता hi नहीं चला कब वो घूमता हुआ क्सक्सक्स की सरहद के नज़दीक जा पंहुचा जहा नदी में सुरीली ( वीरभान की बहिन )

आज फिर अपने जिस्म की गर्मी को शांत कर ने आयी थी जिस ने इस वक़्त सिर्फ एक पेटीकोट पहना हुआ था जो उसकी छाती पैर बंधा था

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सुरीली का गोरा भरा हुआ जिस्म देख कर राम के लिंग तनाव आने लगा और वो उसे दूर से hi मैं में बड़बड़ाता हुआ निहार ने लगा

राम- बड़ी मोती मोती चूचिया है इसकी भी ऊपर से मस्त गदरायी हुई काश में इसे छू पाटा ( सुरीली की मस्त अदाओ को ताड़ते हुए बोलै )

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सुरीली को आये हुए बहुत देर हो चुकी थी जिस से उसे अब नदी में ठण्ड लग रही थी इसलिए वो घर चल ने का सोच कर कड़ी हुई और अपना जिस्म साफ़ करने लगी

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राम अभी एक तुक उसे hi घूरे जा रहा जबकि सुरीली नदी से बहार निकल कर अपने कपडे उतःये अपने घर को जा रही थी की तभी उसकी नज़र राम पैर पड़ी जो उसे hi घूरे जा रहा था

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सुरीली- ऐ लड़के कोण हो तुम और यहाँ क्या कर रहे हो

राम उसकी आवाज़ सुनकर होश में आया और उसे देखते हुए बोलै

Ram-kar तो कुछ नहीं रहा बस घूमते हुए इधर को चला आया

सुरीली- ाचा तो घर क्यों रहे थे मुझे

राम- घर नहीं रहा था जी में तो निहार रहा था खुदा की कारीगिरी को

सुरीली- बद्तमीज़ तुम्हे पता भी है में कोण हु जो ऐसी ओछी बाते कर रहे हो

राम- जरूर स्वर्ग से उत्तरी हुई कोई अप्सरा hi हो आप बाकि बेहतर आप बता दो मुझे तो वैसे भी आपका नशा सा हो रहा है

सुरीली भी औरत थी तो उसे तारीफ़ कैसे पसंद न आती इसलिए बनावटी गुस्सा दिखा कर राम की आँखों में देखते हुए बोली

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सुरीली- अचे घर के लगते हो इसलिए माफ़ करती हु मगर दोबारा इधर नज़र आये तो जान से जाओगे

राम- माफ़ कर ने की जगह अगर प्यार करते तो ाचा होता और रही बात दोबारा यहाँ आने की तो अब तो रोज़ इंतज़ार होगा यही पैर फिर से जलपरी के दर्शन पाने के लिए

राम की बात सुनकर सुरीली शर्मा गयी और मुस्कुराते हुए बोली

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सुरीली- बहुत थित हो पैर हिम्मत वाले भी लगते हो जो वीरभान की विधवा बहिन से छेड़खानी कर रहे हो

वीरभान का नाम सुनते hi राम के फेस कुटिल मुस्कान आ गयी और वो सुरीली के करीब हो कर बोलै

राम- आप जैसी सुंदरता की मूरत को छू ने बदले जान भी चली जाये तो सौदा सस्ता hi है वैसे बहुत किस्मत वाला था आप का पति जिस ने इस कामुक काय को भोगा होगा काश उसकी जगह में होता तो हर आंग चूमता आपका

राम की बात से सुरीली पूरी लाल हो गयी और शर्म से मुँह पैर हाथ रख के राम को देख ने लगी

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कुछ देर यही राम को देख ने के बाद अपनी साड़ी का पल्लू थामे वो वह से भाग कर जाने लगी जिसे पीछे से देखता राम जोर से बोलै

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राम- कल यही इंतज़ार करूँगा में जलपरी का
 
अपडेट - 16

सुरीली नदी से भागती हुई सीधा अपने कमरे में जा कर रुकी उसकी सांसें किसी रेलगाड़ी की तरह धक् धक् कर रही थी और अंदर hi अंदर उसे राम की कही बातें याद आ रही थी की वो कल फिर उसका वही इंतज़ार करेगा ऐसा नहीं था की राम ने सुरीली को नंगा देखा था पैर फिर भी सुरीली को बहुत शर्म आ रही थी की उसकी आधी उम्र का लड़का उसे फिर से देख ने को पागल हुआ जा रहा था यही सब सोचती वो शीशे के सामने कड़ी हो कर अपने कपडे खोल ने लगी जिस से ब्रा में कैद उसकी मोती चूचिया बहार निकल कर झूल ने लगी और सुरीली एक बार खुद के जिस्म को देख कर मैं में सोच ने लगी

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सुरीली - अभी बहुत आग बाकि है सुरीली तुझ में नहीं तो क्यों वो लड़का तेरी जवानी का कायल हो कर कल फिर से मिल ने को बोलता

दिल- अरे मर्द जाट तो होती hi ऐसी है जहा कोई जवान लड़की या औरत देखि नहीं की चले आते है लार टपकते हुए

सुरीली- नहीं वो ऐसा नहीं था देखा नहीं कितनी तारीफ कर रहा था और वैसे भी उस ने कोई उलटी हरकत नहीं की मेरे साथ

दिल- हरकत तो वो बाद में करेगा जब तेरी मुनिया अपना लुंड दाल कर छोड़ेगा समझी

सुरीली - हां तो क्या हुआ वो एक जवान मर्द है और में एक प्यासी जिसे भैया की वजह से अपनी जवानी यही तड़पते हुए बितानी पद रही है पैर अब और नहीं अब तो अगर वो लड़का मुझे फिर से मिला तो में भी पीछे नहीं हटूंगी आखिर मेरे भी जज़्बात है जिन्हे में और दबा कर नहीं रख सकती ( कमरे में नंगी बैठी खुद से बोली)

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राम के बारे में सोच ने भर से सुरीली की छूट में गीलापन आ गया था पैर वो मजबूत दिल के साथ कड़ी हुई और शीशे में खुद को देखते हुए बोली


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सुरीली- नहीं अब और ऊँगली नहीं अब तो तेरी खुजली में लुंड से hi मिटवाउंगी बस भगवान् उसका लुंड भी उसकी तरह मजबूत हो नहीं तो फिर से तड़प न पड़ेगा मुझे यही सब सोचती हुई वो अपने बिस्तर पैर पारस गयी तो वही सुरीली का गोरा बदन देख कर राम भी अपनी पेण्ट में तनाव महसूस कर रहा था जिसे काम कर ने का तरीका सोचते हुए उसके कदम कजरी के घर की तरफ मुद गए पैर वो अभी कुछ hi कदम बढ़ा था की सामने से कजरी आती दिखाई दी जो राम की तरफ hi देखती हुई आ रही थी जिसे देख कर राम बोलै

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राम- अरे कजरी दीदी आप में तो खुद आप के पास hi आ रहा था

कजरी- क्यों राम बाबू लहू मुँह लग न पैर आज कुछ न हो पायेगा घर में माँ है

राम- ऐसे न कहो दीदी पहले से hi बहुत अकड़ रहा है अब तो इसे ठंडा करो कुछ भी कर के

कजरी- देखो राम यहाँ कुछ हो नहीं सकता और घर पैर माँ है इसलिए आज के लिए माफ़ी कल जितना मर्ज़ी छोड़ लेना बिलकुल भी मना नहीं करुँगी

राम- आग तो अभी लगी है और आप हो की कल बुझा ने की बात कर रही हो

कजरी- तो तुम क्या चाहते हो यही खुले में नंगी हो टाँगे फैला दू( ज़मीन पैर बैठी राम को देखते हुए बोली)

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राम- हां तो यहाँ कोण आएगा इस वक़्त और यहाँ दर लग रहा है तो और भीतर चलते है जंगल के

कजरी- में सब कुछ कर देती राम तुम्हारे लिए पैर अभी मेरे पास वक़्त नहीं है मुझे पानी लेकर घर जाना है कुछ लोग आ रहे है पैर कल पक्का

राम समझ गया आज कुछ नहीं मिलने वाला इसलिए बिना कुछ कहे घर की और चल दिया यही सोच कर की कुछ देर आराम करूँगा तो खुद बा खुद तनाव काम हो जायेगा

राम हवेली में दाखिल हुआ तो कोई भी नज़र नहीं आ रहा था घर में यु सन्नाटा देख कर वो पता कर ने के लिए पीहू के कमरे में जाने लगा जहा पहुंच कर उसके लुंड में और तनाव आ गया क्युकी वह पीहू कपडे बदल रही थी जिसे देखते hi राम उलटे पाँव वह से बहार आ गया

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अब तो राम का लुंड फटने को तैयार था जिसे शांत करना hi था कुछ भी कर के जिसका सिर्फ एक मात्र सहारा था शांति के पास जिसका ख्याल आते hi राम उसके कमरे की तरफ बढ़ा और कुछ कदम बढ़ते hi उसके कदम न जाने क्यों काय के कमरे की तरफ बढ़ चले जहा काय अभी थोड़ी देर पहले hi अपनी छूट को रगड़ कर बाथरूम से बहार आयी थी क्युकी उसे ऊँगली करने से भी सकूं नहीं मिला था और बहुत बेचैन थी और फिर जैसे hi उसकी नज़र राम पैर पड़ी वो उसके कलर पकड़ कर उसकी आँखों में देखते हुए बोली

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काय- क्यों दूर दूर रहता है तू अपनी माँ से हां बता क्या तुझे अपनी की तड़प और बेचैनी नहीं दिखती क्यों तू नज़र अंदाज़ कर रहा है मुझे कितनी बार कहा है की मेरे पास आ पैर तू है की समझता hi नहीं

राम- समझता हु माँ तभी तो आया हु वैसे क्या सच में आप मुझे कपडे उतार के दिखाओ........

आगे शब्द राम के मुँह में hi रह गए क्युकी काय खुद पैर काबू नहीं कर पायी और राम के होठो को मुँह में भर कर चूस ने लगी जिस में राम ने भी अपनी प्यासी का पूरा साथ दिया

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काय जिस्म किसी भट्टी की तरह तप रहा था पैर राम के होठ चूसते हुए उसे यकीन था की आज ये साड़ी जलन वो ख़तम कर के रहेगी वो भी जल्दी इसलिए राम को सोफे पैर बैठा टी वो उसकी आँखों में देखते हुए बोली

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काय- तू फ़िक्र मत मेरे लाल आज तुझे तेरी माँ सब कुछ दिखाएगी बस तू पीछे मत हटना समझा न

राम- हां माँ समझ गया में आपका पूरा साथ दूंगा

काय- तो प्यार कर न अपनी माँ को चुम ले मेरे जिस्म के हर आंग को मसल दाल आज अपनी माँ बहुत प्यासी है तेरी माँ आअह्ह्ह आराम सीए ऊऊफफफफफ स्स्स्सह्ह्हह्ह

काय की बात पूरी हो ने से पहले hi राम उस पैर टूट पड़ा एक तो वो वैसे hi गरम हो कर आया था उस पैर काय के चुम्बन और उसका गदराया जिस्म जिस पैर से कपड़ो की दीवार हटा कर वो बेटाःसा चुम ने

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काय का रोम रोम खिल उठा वो तो मजे से सिसकिया भर ने लगी आज उसे वो मुसल अपनी छूट में महसूस होने वाला था जिस के दर्शन मात्र से वो पागल सीई हो गयी थी की तभी राम ने उसकी पेंटी में हाथ घुसा कर उसकी छूट को मुट्ठी में भर लिया और काय की फूली हुई छूट में ऊँगली करते हुए बोलै

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राम- ओह्ह्ह माँ कितनी गरम है ये और चिप छिपी भी लगता है पापा ठंडा नहीं कर पाते है आप को

काय- कुछ मत बोल मेरे लाल बस जो कर रहा है करता रह उउउउम्मम्म स्स्स्सह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह ूयुफ्फफ्फ्फ़ मसल दे मेरे जिस्म को आअह्ह्ह्ह बहुत प्यासी है तेरी मा aaaaahhhhhhhhhhh

राम- सब करूँगा माँ पैर पहले मुझे आपको देखना है जो आप ने hi वादा किया था

राम का इतना कहना था की काय पालक झपकते hi पूरी नंगी हो गयी और मुस्कुराते हुए राम से बोली

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काय- ले देख ले जितना देख न है और फिर मेरी इच्छा पूरी कर दे

राम- बोलो क्या करना है माँ

काय- अपना ये मोटा कहता अपनी की गहरायी में उतार दे

काय ने अपनी छूट को दोनों हाथो से फैला कर इतना hi कहा था की राम भी किसी आज्ञाकारी पुत्र की तरह अपनी माँ की बात मानते हुए लुंड को काय की छूट में उतारता चला गया

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काय- आआअह्ह्ह्हह म्मम्माआआ
 
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