Incest Lawaaris - Page 4 - SexBaba
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Incest Lawaaris

UPDATE - 25

काय के हाथ का जोरदार थप्पड़ गाल पैर पड़ते hi मीणा की हिम्मत नहीं हुई की वो कुछ और कह पाती इसलिए चुप चाप वह से उठ कर अपने कमरे में चली गयी जिसके जाते hi काय राम को देखते हुए बोली

काय- माफ़ कर न मेरे लाल ये सब मेरी hi गलती का नतीजा है जो तुझे इतना सुन ने को मिला

राम- ससष्ठ शांत हो जाइये आप सब ठीक हो जायेगा आप बस मुस्कुराती रहा करो दर्द में तो आप बिस्टेर पैर hi अछि लगती हो वो भी बिना कपड़ो के मेरी प्यारी माँ😜😜

राम की बात का मतलब समझ आते hi काय के गालो पैर शर्म की लाली चा गयी और मुँह पैर हाथ रखते हुए बोली

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काय- कुछ भी बोल देता है बिना सोचे पागल लड़के अगर कोई सुन लेता तो क्या होता पता है न चल अब जा मुझे काम कर ने दे

राम- हां तो कर लो में कोण सा आपको पकड़ कर खड़ा हु वैसे पागल भी आप ने hi बनाया है अपना ये गदराया जिस्म दिखा कर जिसे देखते hi होश खो जाते है

काय- तू न बहुत बिगड़ गया है तेरी पिटायी कर नई पड़ेगी समझा तू

कहने को तो काय राम को डाट रही थी पैर अंदर hi अंदर राम की बाते सुनकर उसकी राम काली भी गीली हो ने लगी थी जिस का एहसास होते hi वो अपने कमरे की तरफ दौड पड़ी जिसे देख कर राम भी अपनी गदरायी माँ के पीछे पीछे हो लिया और रूम के दरवाज़े पैर hi उसे दबोचते हुए बोलै

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राम- इतनी भी जल्दी क्या है माँ जो मेरी बात भी पूरी नहीं होने दी हम्म्म

काय- आअह्ह्ह राम छोड़ बीटा दरवाज़ा खुला है कोई भी देख सकता है ऊऊफफफफ हैट जा जो कर न है रात को कर लियो पैर अभी के लिए रुक जा

राम- स्स्स्सस्छ्हःहः एक दम शांत प्ल्ज़ माँ बस मेरी आँखों में देखो जहा प्यार hi प्यार है आप के लिए

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काय- में जानती हु मेरे बच्चे पैर अभी सही वक़्त नहीं है दूसरा वो कलमुही भी आयी हुई है

राम- उसकी फ़िक्र मत करो आप उसका इलाज़ है मेरे पास देख न कैसे ठीक करता हु उसे भी फिलहाल तो बस अपने होठो का रसपान कर ने दो

काय कुछ और कहती उस से पहले hi राम ने उसके होठो को अपनी गिरफ्त में ले लिया और उन कपट होठो को धीरे -2 चूस ने लगा

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अपने होठो पैर राम के गरम होठो का एहसास होते hi काय के जिस्म हज़ारो वाट बिजली के झटके से लगे और वो भी राम के प्यार में बहती सी चली गयी

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दोनों माँ बेटे दुनिया से बेखबर एक दूसरे के जिस्म से खेलते हुए न जाने किस और बढ़ जाते की तभी निचे से आवाज़ें आने लगी जिन्हे सुनते hi दोनों झटके से अलग हुए और खुद नियंत्रित कर के निचे की तरफ गए जहा वीरा के साथ किशोर खड़ा हुआ कुछ बातें कर रहा था

किशोर- पैर ऐसा कैसे हो सकता है वीरा वो ज़मीन तो हमारी हद में आती है फिर ये सब कैसे हुआ

वीरा- वो जिस किसान की थी उसे मार कर उसने अपने नाम करवा लिया था मालिक

किस ने क्या नाम करवा लिया वीरा बाबा ( पीछे से आता हुआ राम बोलै जिस की बात का जवाब किशोर ने सब कुछ बता कर दिया)

राम- कोई बात नहीं पापा इस में इतनी टेंशन लेने की क्या बात है

वीरा- बात है राम बीटा दरसल नदी का बहाव उधर से घूमता है और अगर उन्होंने उसे रोक दिया तो हमारे गांव में पानी की किलत हो जाएगी

राम- आप निश्चित रहे ऐसा कुछ नहीं होगा में हु न

किशोर- पैर बेटे कैसे कुछ नहीं होगा ज़मीन उनके अधीन होगी तो हम कुछ कह भी नहीं पाएंगे

राम- ज़मीन अधीन होगी तब न पापा जी और अगर में कहु की उस ज़मीन के कागज़ मेरे पास है तो

किशोर- क्या पैर कैसे वीरा तो कह रहा है उन्होंने उसके मालिक को मार दिया था और कागज़ अपने नाम करवा लिए

राम- जैसे उन्होंने उसे मारा ऐसे hi उन्हें मैंने मारा बात ख़तम अब जाइये और टेंशन फ्री रहिये

राम की बात सुनकर वीरा और किशोर के चेहरे पैर मिले जुले भाव आये और वो दोनों अपनी राह पे निकल गए जिस के बाद राम मीणा के कमरे की तरफ निकल पड़ा जहा एंटर करते hi सोफे पैर बैठी मीणा दिखी जो उसे खा जाने वाली नज़रो से देख रही थी

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राम- में अंदर आ सकता हु क्या मौसी जी

मीणा- तुझे कहा था न मौसी में प्रिय और पीहू की हु तेरी नहीं मनहूस कही के

राम- चलो ाचा है आप ने पहले hi क्लियर कर दिया की आप मुझे अपना नहीं मानती अब बात कर ने में जायदा आसानी होगी

मीणा- आसानी गयी भाड़ में पहले तू मेरे कमरे से बहार निकल समझा वर्ण धक्के मार कर निकाल दूंगी

राम- शायद आप प्यार की भाषा समझना नहीं चाहती तो यही सही और अब दूसरी बात ये घर मेरा है न की तेरे बाप तो इसलिए अब चुप चाप मेरी बात सुन वर्ण तेरी छूट का भोसड़ा बना ने में मुझे ज्यादा देर नहीं लगेगी समझी

मीणा- क्या बोलै तू कुत्ते तू मीणा की छूट का भोसड़ा बनाएगा अरे तेरे जैसे न जाने कितने निगल गयी में और डकार तक नहीं ली और तू मीणा को धमकी दे रहा है ( आँखों को नाचते हुए )

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राम- निगल गयी होगी क्यों की तेरा पाला अब तक राम से नहीं पड़ा था पैर आज के बाद तू चुदाई के नाम से भी डरेगी और हर वक़्त खुद को कोसेगी की क्यों तू यहाँ आयी

मीणा- बड़ा घमंड है तुझे अपनी मर्दानगी पे तो चल तू भी क्या याद रखेगा की जिस मीणा की पेअर की जुटी के बराबर भी नहीं है तू वो तुझे आज एक मौका देती है अपनी मर्दानगी दिखने का और साथ hi ये वचन भी की अगर तू सच में मीणा को हरा पाया तो ये मीणा तेरी गुलाम बन कर रहेगी उम्र भर (राम को इशारे से आगे बढ़ ने का कहते हुए)

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राम- गलती कर दी मीणा रानी बिना सोचे समझे वचन दे कर गलती कर दी जिस का एहसास तुझे बहुत जल्द होगा ( अपने लुंड को देखते हुए जो जीन्स में भी बड़ा खतरनाक लग रहा था जिसे देख कर एक बार को मीणा ने भी थूक जातक लिया)

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दोस्तों अपडेट दे दिया है और एक बात अपडेट उतने hi दे पाउँगा जितना समय होगा पैर हां स्टोरी कम्पलीट जरूर होगी धीरे धीरे hi सही
 
अपडेट -26

राम की पेण्ट बने तम्बू को देख कर जहा एक बार को मीणा घबरा गयी थी तो दूसरे hi पल उसकी आँखों में चमक आ गयी और राम को से बोली

Meena-agar सौदा फायदे का हो तो मीणा जरा सा भी सोच विचार नहीं करती और यहाँ तो मुझे लाटरी लग ने के आसार दिख रहे तो जरा देखु तो आखिर क्या लिखा है आज मेरी किस्मत (राम के पेण्ट को अपने हाथो से खोलते हुए)

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राम- निराश नहीं हो ने वाली तुम यकीन नहीं तो खुद hi देख लो वैसे भी तुम्हारी बेचैनी देख कर hi पता चलता है कई दिनों से चूड़ी नहीं हो

मीणा- सही कहा तुम ने पैर मुद्दा अभी ये है की तुम कितने बड़े खिलाडी हो और तुम्हारा आह्हः ये तो मेरी उम्मीद से बढ़ कर निकला आज तो मजा आ जायेगा मीणा रानी उफ्फ्फ कितना मोटा है राम तुम्हारा लुंड

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राम- तुम्हारे लिए hi इस से hi तुम्हारा घमंड टूटेगा

मीणा- वो तो इसे देखते hi चक न चूर हो गया बस अब इसे अपनी छूट में लेना है मुझे पैर ये जायेगा कैसे मैंने आज तक इतना मोटा लुंड नहीं लिया उफ्फ्फ्फ्फ़ कितना गरम है ( लुंड को हाथ से ऊपर निचे कर के देखते हुए बोली )

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राम- वो तो पता चल hi जायेगा मेरी प्यारी मौसी पैर उस से पहले तुम्हे चेक तो कर लू की तुम भी इस के लायक हो की नहीं

मीणा- मीणा के जिस्म का दीवाना तो सारा गाओं है लड़के बुद्धा भी देख ले न तो वो मचल जाए समझा के नहीं

राम- ाचा फिर तो चेक करना बनता है जरा घूम तुझे अचे से देखु तो सही (मीणा की गांड पे चपत लगते हुए बोलै )

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मीणा- ाःह ये कर रहा है कमीने दर्द हो रहा है मा

राम- अभी से माँ याद आ गयी तुझे अभी तो तुझे मेरी बड़ी माँ की बेज़्ज़ती का जुरमाना भी देना है

मीणा- तो क्या मेरी जान लेगा देख चुदाई की बात हुई थी ये मार पीट मत कर समझा न वर्ण ठीक नहीं होगा बोल देती हु

राम- अब सब ठीक होगा मेरी छिनाल माल तो ठीक ठाक है तू बड़ी गांड बड़े चुके और तेरी ये फटी छूट हम्म मजा आएगा तुझे छोड़ ने में ( छूट के छेद को हाथ से फैला कर देखते हुए बोलै)

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मीणा- आअह्ह्ह क्या छान बीन सी कर रहा है तू तेरा लुंड पसंद न आता न तो तुझे हाथ भी न लगा ने देती

राम- ाचा घमंड गया नहीं अभी तेरा तो चल पहले उसे hi दूर करता हु कड़ी हो और निकाल अपने कपडे में भी देखु उस बदन को जिसे देख कर बुड्ढे का भी खड़ा हो जाता है

मीणा-- हां तो ले देख ले ऐसा जिस्म तूने सपनो में भी नहीं देखा होगा( अपने कपडे खोल ते हुए )

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मीणा का बदन राम की आँखों के सामने था वो उसे न देख कर मीणा को देखते हुए बोलै

राम- सारा मजा कीर किरा कर दिया तूने तो ये लटकी हुई चुकी फटी हुई सीई छूट इस बदन पैर इत्र रही थी तू छिनाल कही की चल हैट फिलहाल तो मूड ओफ़्फ़्फ़ कर दिया तूने फिर कभी सोचूंगा की तेरी छूट मारनी है के नहीं

मीणा के तो बल्ब hi फ्यूज हो गए जब उसके नंगे बदन को देख ने बाद राम ने सिरे से नकार दिया उसे ये अपनी तौहीन लगी और वो गुस्से में राम से बोली( अपनी टांग उठा कर अपनी छूट दिखते हुए )

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मीणा- राम तुम मेरी बेज़्ज़ती कर रहे जरा गौर से देखो और दोबारा बोलो आखिर क्या कमी है मुझ में जो तुम ने ऐसा बोलै

राम- बेज़्ज़ती उसकी होती है जिसकी कोई इज़्ज़त हो और तुम तो वैसे भी सब के सामने टांग खोल ने वाली रंडी हो जिस ने न जाने किट ने hi लुंड खाये होंगे पैर अफ़सोस तुम मुझे नहीं खुश कर पायी पैर हां एक शर्त पैर में तुम्हारी चुदाई कर सकता हु अगर तुम मेरी बड़ी माँ से पेअर पकड़ कर माफ़ी मांग लो

मीणा- राम में चहु तो अभी शोर मचा कर सब को इकट्ठा कर के तुम्हारी इज़्ज़त के धज़्ज़िया उदा सकती हु समझे तुम इस लिए कहती हु प्यार से मान जाओ और जो शुरू किया है उसे ख़तम करो

राम- खूब गांड का जोर लगा कर शोर मचा ये मेरा घर है और इस घर में अब मेरा परिवार रहता है समझी

मीणा कुछ कहती उस से पहले hi राम वह से निकल गया मीणा को गुस्से में तमतमाती हुई को जो मैं में बड बुडते हुए बोली

मीणा- आज दूसरी बार मेरी इतनी बेज़्ज़ती हुई है पहले इस के बाप ने मेरा रिश्ता ठुकरा कर किया था और आज उस के पिल्लै ने हम्म्म ये तुम ने सही नहीं किया राम

राम मस्त में गन गुणता हुआ अपने कमरे में जा कर सोऊ गया साड़ी बातो से बेखबर

अपडेट छोटा है दोस्तों जानता हु और उसके लिए माफ़ी चाहूंगा वक़्त की कमी है थोड़ी इस लिए ऐसा हो रहा है ये बस स्टोरी को रनिंग में रख ने के लिए आगे भविस्ये में बड़े अपडेट भी दूंगा शुक्रिया आप सभी का
 
अपडेट-27

राम तो अपने रूम में जा कर चैन से सो गया मगर अब मीणा को चैन नहीं मिल रहा था उसे बार बार राम का वो गरम मुसल याद आ रहा था जिसे याद कर के उसकी छूट की खुजली बढ़ती जा रही जिसे खुद से रगड़ती वो बुदबुदाए जा रही थी

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मीणा- राम ये तू ने ठीक नहीं किया मेरे साथ आअह्ह्ह क्या कमी है मुझ में एक बार मुझे मौका देता तो तुझे खुस कर देती ऊम्मम मम्माआ मेरी छूट इसकी खुजली तो काम होने की बजाये और बढ़ती जा रही है ोुह्ह्ह्ह कुछ भी हो जाये अब तो तेरा लुंड में लेकर hi रहूंगी राम आअह्ह्ह्ह हां

मीणा की बेचैनी बढ़ती जा रही थी जिस में मचलती हुई वो कभी सीढ़ी तो कभी उलटी हो कर अपनी छूट में ऊँगली करते करते कब सो गयी उसे भी

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पता न चला

शाम को राम की आँख खुली तो बिस्टेर से उठ कर फ्रेश हुआ और काय को बहार घूम ने का बोल कर गोअन की तरफ निकल गया जहा घूमते हुए पहले वो अपने उस्ताद जी मिला जिनसे मिल कर वो घर की तरफ जाने hi लगा था की कुछ सोच कर नदी की तरफ निकल गया और चलते चलते उसे भी पता न चला कब वो वीरभान की शरद में दाखिल हो गया उसे तो बस सामने एक सुन्दर सा भाग नज़र आ रहा था जो फलो से लड़ा हुआ था

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जहा आम और नासपाती पैदा पैर लड़ी हुई थी जिन में कुछ कच्ची पाकी शामिल थी जिन्हे देख कर राम का दिल उन्हें तोड़ कर खाने का हुआ और वो उन्हें तोड़ कर खा ने लगा की तभी पीछे से किसी के आने की आहत हुई तो उस ने पीछे मुड़कर

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देखा तो एक लड़की कड़ी थी जो उसे घर कर देख रही थी जिसे देख कर एक बार तो राम भी उस में खो सा गया और एक टुक्क उसे hi देख ने लगा जिस से यु खुद को घूरते हुए राम को देखते हुए बोली

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लड़की- ऐ कोण हो तुम और हमारे भाग में क्या कर रहे हो तुम क्या तुम्हे पता नहीं की ये ठाकुर वीरभान की जगह है

राम- ओह्ह माफ़ कीजियेगा आप के भाग की सुंदरता देख कर में इस और खींचा चला आया

लड़की- ठीक है ठीक है चलो अब निकलो यहाँ से और दोबारा इधर मत आना वर्ण जान से जाओगे समझे तुम( हाय कितना हैंडसम है ये काश ये मेरा बॉयफ्रेंड होता )(प्यार से राम को देखते हुए )

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राम- ाचा इतने खतरनाक लोग रहते है यहाँ मुझे तो पता hi नहीं था वर्ण में यहाँ कभी आता hi नहीं वैसे क्या में आप का नाम जान सकता हु अगर आपको बुरा न लगे

लड़की- सुहानी ठाकुर नाम है हमारा अब निकल जाओ यहाँ से इस पहले की कोई आ जाए( जी हां ये सुहानी hi थी जो अक्सर भाग में घूम ने चली आती थी)

राम- हम्म बहुत खूबसूरत नाम है आप का बिलकुल आप की तरह

राम से बाते कर के लग तो सुहानी को भी ाचा रहा था मगर उसे दर भी था की कोई आ गया तो राम को छोड़ेगा नहीं इसलिए न चाहते हुए भी वो राम से बोली

सुहानी- शुक्रिया पैर प्ल्ज़ तुम चले जाओ में नहीं चाहती कोई आये और तुम्हे मार डाले

राम- सच कहु तो जाना में चाहता हु पैर क्या करू आप के बड़े बड़े आम देख कर दिल कर रहा है इन्हे नहीं चखा तो क्या फायदा इतनी दूर आने का क्यों सुहानी जी ( सुहानी की मोती मोती चूचियों को घर कर देखते हुए बोलै)

राम के शब्द और उसकी नज़र देख कर सुहानी के जिस्म में एक गुदगुदी सीई मच गयी क्युकी आज पहली बार कोई लड़का उस से ऐसी बाते कर रहा था इसलिए वो घबरा सीई गयी और लड़खड़ाती हुई आवाज़ में बोली

सुहानी- कोई आम वाम नहीं मिलेगा अब जाओ यहाँ से वर्ण में शोर मचा दूंगी फिर तुम्हारा जो हाल होगा तुम सोच भी नहीं सकते

सुहानी की बात सुनकर राम की हसी निकल गयी और वो मुस्कुरा कर उसे देखते हुए बोलै

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राम- मेरी हालत की फ़िक्र छोड़िये सुहानी जी आप अपनी हालत देखिये कैसे घबरा रही है आप अरे में कोई चोर लुटेरा नहीं में तो ख़ूबसूरती की तारीफ कर ने वाला एक मुसाफिर जो आपकी तरफ खींचा चला आया और अब तो में आप के आम खाने के बाद hi जाऊंगा क्युकी मुझे पता है आप बस दर रही है वर्ण दिल तो आप का भी की में आप के आम चख कर hi जाऊ क्यों 😜

सुहानी की जान hi हलक में आ गयी राम का सीधा सीधा बोल न आज उसे पता चल रहा था सोच न अलग है पैर जब सच में कोई लड़का सामने हो तो शर्म किसे कहते खासकर राम जैसा नौजवान मर्द

राम- क्या हुआ कुछ तो कहो

सुहानी की समझ में तो कुछ आ hi नहीं रहा था वो तो बस राम को देखे जा रही थी जो उसकी और hi बढ़ता आ रहा था जिसे देख कर वो मैं में सोच ने लगी

सुहानी- ये मेरे करीब क्यों आ रहा है कही ये मेरे साथ कुछ कर ने तो वाला नहीं

दिल- तो कर ने दे न आखिर तू भी तो कब से यही चाहती थी की कोई तुझे भी प्यार करे

सुहानी- हां पैर किसी अजनबी के साथ नहीं

वो काश मैश में थी और जल्दी से बोली

सुहानी- देखो रुक जाओ हमारे करीब मत आओ आखिर कोण हो तुम

राम- दिल और आंखे तो कुछ और hi कह रही है तुम्हारी और में दिल की बात हमेशा मानता हु सुहानी और हां बेफिक्र रहो तुम मेरा नाम अब अपने घर में सुनती रहोगी क्युकी में हु राम तुम्हारा आशिक़

इतना कहते hi राम ने अपने होठ सुहानी के कापते होठो पैर रख दिए जिसके एहसास से hi सुहानी की जिस्म चीटिया सीई रेंग ने लगी और मदहोश सी राम की बाहो में झूल गयी

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हल्का हल्का अँधेरा अब बढ़ ने लगा था जिसका असर घने पैदा में अधिक hi दिख रहा था इसलिए अब किसी के देख ने का भी दर नहीं था इसलिए राम बड़े सकूं से सुहानी मीठे होठो का रसपान बड़े आराम से कर रहा था जिस में सुहानी भी मदहोशी में खोयी पूर्ण सहयोग कर रही थी आज उसे समझ आ गया था की जिस्म की प्यास जिस्म से hi मिट टी है जो सकूं वो ऊँगली में ढून्ढ रही थी वो उसे राम की बाहो में मिल रहा था जिस से उसकी मुनिया भी पानी छोड़ कर उसे गीलेपन का एहसास दिला रही थी उसी सुख में खोयी जब वो राम से अलग हुई तो दोनों एक दूसरे को देख ने लगे प्यार से

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राम- चलो तुम्हे घर छोड़ देता हु अँधेरा काफी हो गया है सुहानी

राम की आवाज़ से सुहानी होश में आयी और राम से बोली

सुहानी- नहीं आप चले जाइये में चली जाउंगी ( नज़र झुका कर जैसे राम की बीवी हो)

राम- नहीं अँधेरा जायदा है कोई जंगली जानवर भी आ सकता है अब तुम चलो में तुम्हे छोड़ कर hi घर जाऊंगा अब चलो चुप चाप

सुहानी कुछ न बोली और राम का हाथ थामे चुप चाप चल ने लगी

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थोड़ी देर चल ने के बाद जब हवेली नज़र आयी तो सुहानी बोली

सुहानी- राम अब आप लौट जाइये में चली जाउंगी

राम- वैसे तुम्हे बुरा तो नहीं लगा मेरा तुम्हे प्यार करना

सुहानी- नहीं हम तो आपको देख कर hi दिल दे बैठे थे बस दर रहे थे की अगर किसी ने देख लिया तो क्या होगा पैर अब जब हम जान चुके है की आप कोण है तो निश्चित है की आप से भेंट होती रहेगी

राम- ाचा जी और में समझ रहा था की में hi तुम पैर फ़िदा हो गया वैसे तुम्हे बुरा नहीं लगा की मैं वही हु जिसकी दुश्मनी तुम्हारे पिता जी से

सुहानी- नहीं बिलकुल नहीं सुरीली बुआ ने हम पहले hi सब बता दिया था जब वो आप से मिली( इतना कहते hi सुहानी के गाल लाल हो गए क्युकी उसे याद आ गया था की वो मुलाकात कैसी थी)

राम- हम्म फिर तो आप से भी वैसी मुलाकात जल्द hi करनी होगी क्यों

राम की बात से सुहानी शर्मा गयी और प्यार से राम को देख कर उसके होठो को चुम कर बोली

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सुहानी- अब जाइये हमे इंतज़ार रहेगा उस मुलाकात का

बस फिर न रुकी वो वह और तेज़ कदमो से चलती वो अँधेरे में गायब हो गयी
 
अपडेट-28

सुहानी को छोड़ कर राम अपने घर चला आया और जैसे hi घर में कदम रखा तो उसकी नज़र काय पैर पड़ी जिसकी बड़ी बड़ी चूचिया टेबल साफ़ करते हुए बहार आने को आतुर थी जिन्हे देखता हुआ वो काय के पास जा कर धीरे से बोलै

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राम- क्या कर रही हो माँ

काय- बस बीटा डिनर की तैयारी कर रही हु तू बता कहा से आ रहा है

राम- बस ऐसे hi खुली हवा में टहल ने चला गया था ( काय की चूचियों को घूरते हुए)

काय- बस भी कर कितना घूरेगा इन्हे अब तो तू मसल भी चूका है कितनी बार आह्हः छोड़ कोई देख लेगा

राम- क्या करू माँ इन्हे देखते hi इन्हे मसल ने का मैं कर ने लगता है देख कितने बड़े है ये( ब्लाउज को निचे करते हुए)

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काय- चल हैट पगला कही का कही भी शुरू हो जाता है ये भी नहीं देखता की अगर किसी ने देख लिया तो क्या होगा अब हैट और फ्रेश हो जा आज तेरे बड़े पापा भी घर पे है आज कुछ नहीं मिल ने वाला

राम- क्या हे भगवान् इतना जुल्म क्यों माँ कुछ आईडिया निकालो

काय- सॉरी पैर आज कुछ नहीं हो सकता अब जा ऊपर और जब बुलाऊ तो आ जाना समझा

अब बेचारा बोलता भी तो क्या चुप चाप ऊपर चला गया पीहू के रूम जहा पीहू बीएड पैर बैठी कुछ सोच रही थी जो राम को देख कर मुस्कुराते हुए बोली

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पीहू- तो मिल गयी फुर्सत अपनी दीदी के पास आने की हम्म

राम- मुझे तो फुर्सत hi फुर्सत है आप बताओ क्या सोच रही थी

पीहू- तेरे बारे में hi सोच रही थी की पता नहीं आएगा भी या नहीं

राम- ऐसा कैसे हो सकता है की में सुबह शाम आपके सामने हाजरी न लागू ( पीहू बहार झांकती हुई चुकी को देख कर बोलै)

पीहू- इतने अचे लग रहे है तो दूर से क्यों देख रहा है पास आकर छू ले तुझे मना है क्या( नशीली आँखों से राम को इन्विते करते हुए)

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राम- पास तो आ जाऊ दीदी बस दर लगता है कही गलती न कर बैठु आप के पास आ कर

पीहू- तेरी सब गलती माफ़ बस मुझे अपना प्यार दे दे थोड़ा सा बहुत मैं है मेरा

राम- मैं तो मेरा भी बहुत है पैर आप समझो अगर हम दोनों बहक गए तो कही कुछ गलत न हो जाए

पीहू- सही और गलत बहुत पीछे छूट गया राम अब बस प्यार है तेरे लिए और ये जिस्म जिस पे तेरा हक़ अब आजा और थोड़ा सा प्यार दे दे अपनी बहिन को( कपडे उतारते हुए)



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काली ब्रा पेंटी में पीहू का जिस्म हीरे सा चमक रहा था जिसे देखते hi राम के कदम खुद बा खुद उसकी तरफ चल पड़े जबकि पीहू राम को अपनी तरफ आता देख एक सेक्सी स्माइल दे कर अंदर वाले रूम दाखिल हो गयी

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राम समझ चूका था की पीहू का इरादा आज प्यार पाने का और वो कोई गलती नहीं चाहती इसलिए वो भी रूम का लॉक कर के धीरे से अंदर दाखिल हुआ जहा पीहू ऊपर से नंगी पोस्टर पैर लेती हुई थी जिसे देख कर राम भी अपने कपडे निकाल कर उसकी मुलायम जांघो से खेलता हुआ आगे बढ़ा तो पीहू सिसकते हुए बोली

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पीहू- ओह्ह्ह राम आ गए तुम ससष्ठ आअह्ह्ह ऐसे धीरे धीरे प्यार करो मुझे ऊऊफफफफ बहुत ाचा लग रहा है आअह्ह्ह्ह ऐसी hi चुसो इन्हे मसल डालो मेरे राम ूउम्मम्म माआ कितना ाचा लग रहा है आअह्ह्ह राममम मस्लोवो ना बाबू आअह्ह्ह अपनी बहिन के जिस्म को मसल डालो आअह्ह्ह्ह आईसीए हीई

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पीहू पूरी मदहोश हो चुकी थी आज उसके अनछुए जिस्म में एक अलग hi अनुभूति हो रही थी जिस में खोटी वो राम को खुद से चिपकाये जा रही थी तो वही राम उसकी चूचियों मुँह में दबाये पूरी सिद्दत से चूसे जा रहा था जिसका हर लम्हा महसूस करती पीहू पागल हो रही थी उसके जिस्म में चीटिया रेंग ने लगी थी

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पीहू- आअह्ह्ह्हह मम्माआ राम मेरे भईई कहा जाए इन्हे ये बहुत तंग करती है तेरी बहिन कोऊ ोोोुक्कझ आए हहहह आरममम से मेरी भाई आआह्ह्ह्ह कितना सकूं मिल रहा है आअह्ह्ह्हह भाई हैट ज़रा तुझे एक जगह और दिखानी है जो मुझे बहुत तंग करती है प्ल्ज़ जल्दी से वह भी कुछ कर दिए आआह्ह्ह्हह( पेंटी टांगो से निकालते हुए बोली )

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पेंटी निकल ते hi राम के मुख से खुद बा खुद सिर्फ एक hi शब्द निकला

राम- वाह्ह्ह क्या मस्त छूट है दीदी तुम्हारी आज तो मजा आएगा इस से खेल ने मी

पीहू - जो खेल न है खेल बस इसकी खुजली मिटा दे वर्ण में इसे रगड़ रगड़ के पागल हो जाउंगी मेरे भाई देख कितनी गीली हो रही है

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राम- आज में इसकी साड़ी खुजली मिटा दूंगा दीदी बस आप थोड़ा दर्द सेह लेना

पीहू- मुझे हर दर्द मंजूर है बस तू आज मुझे इस सकूं दिला दे हमेशा के लिए आअह्ह्ह यी क्या कर रहा है भाई ऊऊफफफफफ बहुत ाची आईसीए होई चाट आआह्ह्जः म्मम्माआआ मेईयरररीई छुटत खहा जा मेरे भाई साबाशहठ

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अपनी छूट पैर राम की जीभ का एहसास होते hi पीहू मछली की तरफ फड़फड़ा ने लगी आज उसकी छूट आग सीई पैदा हो गयी थी जिस में जलती वो न जाने क्या बड़बड़ा रही थी उसे खुद नहीं पता था वो तो बस चुसाई का आनंद ले रही थी और जल्दी hi उसकी छूट का बाँध टूट गया और वो राम का मुँह अपनी छूट में दबा कर झाड़ ने लगी

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pihu-aaaaahhhhhh मेई गईई मेरी भाई आआह्ह्ह्हह ममअअअअअअअ स्स्स्सह्ह्ह्हह्ह्ह्ह oooohhhhhhhhhh मुझी कुछ हो रहा हैई मुझे संभल मेरे भाई आआह्ह्ह्ह

पीहू डीई क्या हो रहा है कुछ बोलो में हु ना बोलो क्या हुआ पीहू डीई

अपना नाम तेज़ तेज़ आवाज़ में सुनकर पीहू जैसे किसी नींद से जाएगी और हालत समझते hi शर्मा कर बाथरूम में घुस गयी और बाथटब में लेटकर खुद को साफ़ करते हुए सोच ने लगी जो कुछ अभी हुआ

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पीहू- कितना प्यारा सपना था ऊऊफफफ कितना मजा आ रहा था काश ये सच होता तो और कितना मजा आता छी में भी ये क्या सोच ने लगी राम क्या सोच रहा होगा

दिल- सोच ने दो आज नहीं तो कल तो ये होकर hi रहेगा

पीहू- हां वो ठीक है पैर ये कुछ जल्दी नहीं हो रहा

दिल- अपनी बता मुझसे मत पूछ क्या नहीं कर न तुझे ये सब राम के साथ

पीहू के फेस एक स्माइल आ गयी ये सोच कर hi

वही राम भी पीहू के जाने के छत्त पैर चला टहल ने जहा काफी अँधेरा था जिस में उसे कोई खड़ा दिखाई दिया जिसे देखते hi वो उसकी तरफ चल पड़ा
 
अपडेट -29

पीहू न जाने कितनी देर पानी में नहाती रही खुद से बाते करती तो वही दूसरी तरफ सुहानी अपने पहले चुम्बन का एहसास लिए जब हवेली में दाखिल हुई तो सुरीली की नज़र अपनी भतीजी पैर पड़ी जो मंद मंद मुस्कुराती अपने कमरे की तरफ जा रही थी जिसे देख कर सुरीली भी उसी तरफ चल दी और कमरे में पहुंचते hi बोली

सुरीली - क्या बात है आज बड़ी खिली खिली सी लग रही है हम्म ऐसा क्या मिल गया हमे भी तो बता

सुहानी- ओह्ह्ह बुआ आप हो में तो दर hi गयी थी

सुरीली- ाचा जी ऐसा क्या कर के आ रही हो की दर गयी हम्म कही किसी का डंडा तो नहीं डलवा आयी मेरी बन्नो ( प्यार से छेड़ते हुए बोली)

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सुहानी- क्या बुआ आप भी कुछ भी बोलती हो ऐसा कुछ नहीं किया मैंने

सुरीली- चल मान लिया कुछ नहीं किया पैर बात तो कुछ जरूर जो तो बता नहीं रही

सुहानी- आपको पता है आज में किस से मिली

सुरीली- किस से बता न देख में भी तुझे सब बताती हु न अगर तूने मुझे नहीं बताया तो फिर में भी कभी कुछ नहीं बता ने वाली समझ ले

सुहानी- अरे शांत हो जाओ अगर आप को नहीं बताउंगी तो और किस को बताउंगी

सुरीली- तो बता न जल्दी से आखिर ऐसा कोण है वो जो मेरी बन्नो को इतना खुश कर गया

सुहानी- वही जो आप के दिल में भी एक मीठी याद बना हुआ है वही राम

सुरीली- क्या सच तुझे कहा मिल गया वो प्यार का सौदागर और क्या किया उस ने तेरे साथ

सुहानी- कुछ किया hi कहा बुआ वो तो बस अपने तपते होठो की गर्माहट मेरे नाज़ुक होठो पैर मह्सूस करा कर hi मेरा सब कुछ लूट ले गया हाय आई ये हवा भी उसकी महक लिए घूम रही है हवेली की ठण्ड हवाओ में
खास कुछ पल और मिल जाते उस के साथ तो आज ज़िन्दगी सफल हो hi गयी थी

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सुरीली- हाय काश तेरी जगह में होती तो मुसल डलवाये बिना न जाने देती उस चलिए को

सुहानी- सच कहा बुआ वो है तो चलिए hi जो अपनी बातो से आप के दिल को चाल जाता है और कम्भख्त खबर भी नहीं होने देता

सुरीली- चल मैं छोटा मत कर जल्द hi मुलुकात होगी बस वो जीत जाए मेरी तो यही दुआ है भगवान् से

सुहानी- वो जरूर जीतेगा बुआ उसकी आँखों में उसकी जीत साफ़ नज़र आती है बिलकुल बेखोफ सा जैसा डरना तो वो जानता hi न हो

सुरीली- हम्म काश ऐसे hi हो अब में चलती हु तू आराम कर रात को डिनर पैर मिलते है

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चाट पैर अकेले रह ने की आदत गयी नहीं तुम्हारी हम्म्म

अपने पीछे से आती आवाज़ सुनकर राम ने पीछे मुड़कर देखा तो सामने वाले को देख कर मुस्कुराते हुए बोलै

राम- और आप की चुपके से आ कर पीछे खड़े हो ने की चची

शांति - ाचा बचा तो हाजिर जवाब भी हो गया है

राम- बच्चे को बड़ा कर ने वाली भी आप हो चची

शांति- हम्म वैसे आज मौसम वाकई बहुत ाचा है देखो तारे भी कितने साफ़ दिख रहे है आज
( आश्मान की तरफ देखते हुए)



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राम- तारे तो आप देखो में तो अपना चाँद देखो

शांति- रह ने दो मस्का मत लगाओ इतना चाँद से लगाव होता तो खुद आते चाँद से मिल ने
हां नहीं तो

आह्हः क्या कर रहे हो राम कोई देख लेगा ऊऊफफफफफ मा मेरा हाथ

पीछे मुड़कर जाती शांति को राम ने झटके में अपनी तरफ खींच कर अपने होठ उसके होठो से मिला दिए जिनका एहसास होते hi शांति का सारा विरूद्ध पल भर में छू मंतर

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जिस्म के हर हिस्से से एक hi आवाज़ गूंज रही थी शांति आज अधूरा नहीं रहना समां ले राम को खुद में और बन जा उसके बच्चे की माँ ये ख्याल आते hi शांति एक नए जोश के साथ राम के होठो पैर टूट पड़ी

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शांति का जिस्म उसका साथ छोड़ता जा रहा जिस में मदहोश होती वो राम के होठ छोड़ कर सिसकते हुए बोली

शांति- आअह्ह्ह राम मेरे जिस्म तप रहा प्ल्ज़ आज अपनी चची को पूर्ण रूप से अपना ले वर्ण तेरी चची पागल हो जाएगीइ ूउम्म्म आअह्ह्ह्हह आराम से काट तो मत ऊऊफफफफ आआह्ह्ह्हह्ह आईसीए हीई चूस इन्हे निकाल दे इनका सारा रास आआह्ह्ह्हह्ह

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शांति गोल मटोल चूचिया राम के होठो में कैद थी जिन्हे राम पूरी सिद्धांत से चूस ने में लगा हुआ था की तभी अचानक से उस ने शांति पलट दिया और निचे बैठ कर उसकी फूली हुई छूट को मुँह में भर कर चूस ने लगा शांति के तो पेअर काँप उठे उसे लगा वो अभी गिर जाएगी

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शांति - आआह्ह्ह्ह माआ राम में गिर जाउंगी बच्चे आअह्ह्ह्ह ये सब कभी फुर्सत में कर लेना आज तो बस अपना वो मुसल मेरी मुनिया में दाल दे आअह्ह्ह्ह खहा जायेगा क्या आआह्ह्ह ससससस ऊऊओह्ह्ह्हह राममममम रुक्खक्क जाए में ऐसे नहीं झड़ना चाहती आआह्ह्ह्ह अब दाल भी दे ना अपना मुसल्ल अपनी चची की छुटत मेई ऊऊह्ह्हह्ह

शांति पुकार सुनते hi राम ने निचे से झटका मारा और आधा सूपड़ा शांति छोटी सीई छूट को चीरता हुआ अंदर जा धसा

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लुंड का एहसास अपनी छूट में होते hi शांति की आँखे चढ़ गयी दर्द की इंतहा न पूछो मगर वो फिर भी सिसकते हुए बोली

शांति- मम्माआ राम पूरा दाल दे आज आधा अधूरा नहीं चलेगा ूउम्म्म मार और तेज़ धक्का मार और फाड़ दे इसे बहुत तड़पाया है इस ने आज दर्द झेल ने की बारी इसकी है माआआ आआह्ह्ह्हह ऐसी ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ मम्माआ मर्डर गयीईइ

राम- चची अगर दर्द जायदा है तो थोड़ा रुक जाता हूँ वैसे भी तुम्हारी छूट बहुत टाइट है

शांति- तेरे लिए hi है और रुक न मत मेरे लाल पहले hi बहुत रुक चुके हम आज तो अंजाम तक पहुंच न चाहती हु तू बस धक्के लगा दर्द की परवाहहह मत्तट कररर आआह्ह्ह ऐसी हीई मेरे शेर उउउउम्मम्म मार गयीईइ( दर्द के बावजूद भी राम को मुस्कुरा कर देखते हुए)

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राम- आप सच में बहुत हिम्मत वाली हो चची कसम बहुत मजा दे रही आप की छूट ऊऊफफफफ कितनी टाइट है

शांति- आअह्ह्ह्ह आईसीए हीई मार इसे सारे बदले ले ले आअह्ह्ह्ह एआईईईई मम्माआ आअज्ज्ज्ज तो फात गयीईईई री उउउउउम्मम्मम ह्ह्ह्हह्हह्ज साबआशःह्ह मेरी बच्ची आआह्ह्हह्ज आईसीई हीई छोड़ अपनी चची कोऊ उउउउम्मम्मम hhhhhhhhhh

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राम- ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह चचहहीी धीरी से आवाज़ करूओ कोई सुन लेगा आह्ह्ह्ह क्या मस्त छूट हीी उउउउम्म्म बहुत मजा आ रहा हीी

शांति- आआह्ह्ह नीची कोई नाहीइ हीी तू जोरर लगा कर छोड़ आअह्ह्ह्ह तभी तो में ऐसे खुले में छोड़ ने को मान गायियीईई आअह्ह्ह्हह में ाअरररीईई हूउउ आआह्ह्ह्हह रामममम

शांति की छूट की गर्मी उसकी

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टांगो से बह रही थी जबकि राम अभी भी उसकी छूट का बजा बजाने में लगा हुआ था

शांति - आआह्ह्ह्ह राम मेरी टाँगे दुःख ने लगी है अभी और कितना करेगा आआह्ह्ह्ह मायआ ूउसस्शह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्हह ाआरामममम सीईई ममममायआ अंदर तक जाए के लग रहा हैईईई उउउउउइइइइइइ ऊऊह्ह्ह्हह्ह

राम - बुसस थोड़ी देर और मेरी

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प्यारी चची आअह्ह्ह्हह बस्सस आगया मेंननं भी

शांति की छूट दोबारा से रोने वाली थी जिस की वजह से वो जोर जोर से सिसकिया भर रही थी

शांति- आआह्ह्ह्ह रेहम कर बक्श दे बहुत दर्द हो रहा है आअह्ह्ह्ह ररुकक्क जाए रीई मार hi डालेगा क्या( राम की आँखों में देखते हुए )

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शांति की बात सुनता राम तेज़ तेज़ झाके मारता हुआ शांति के साथ hi झाड़ गया और झटके से लुंड बहार खींच लिया जिस के निकलते hi दोनों प्रेमरस बह कर निचे गिर ने लगा जिस का एहसास hi शांति को सच में शांति और सकूं देने लगा

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शांति - आअह्ह्ह्ह आअज तो लगा था में मर hi जाउंगी राम सच में तुमने आज तुम ने मुझे लड़की से औरत बना दिया मेरे बच्चे ी लव यू सोऊ मच

राम- लव यू ताऊ चची अब कपडे पहनो कही ऐसा न हो कोई आ जाईए

शांति- तू जाए में आती हु थोड़ी देर में आअह्ह्ह्ह मा बहुत दर्द कर रहा हैई ऊऊफफफफ

शांति की बात मान कर राम निचे चला गया और उस साथ कोई और भी जो ये लीला बहुत देर से देख कर अपनी छूट मसल रहा था
 
अपडेट-30

राम और शांति की काम लीला देख ने वाली कोई और नहीं उसकी तै काय hi थी जो राम को बुलाने आयी थी मगर अपनी देवरानी की प्यासी बातें सुनकर उस के कदम वही जैम गए क्युकी जिस्म की गर्मी से वो भलीभांति परिचित और अब अपनी साँसों को नियंतर कर ने में लगी थी और अंदर hi अंदर मुस्कुरा भी रही थी जबकि राम अपने कमरे में पहुंचते hi बिस्तर पैर ढेर हो गया

सुबह उठ ते hi राम अपने अखाड़े में नियम रूप से कसरत कर ने के बाद घर लौटा तो सब उसका hi इंतज़ार कर रहे थे नास्ते पैर जहा मीणा भी मजूद थी जो राम को एक टूक घूरे जा रही थी जिसे राम ने इग्नोर किया और प्रिय के बगल में जा कर बैठ गया

प्रिय- हम्म तो अब फुर्सत मिली है जनाब को

राम- ऐसा नहीं है दीदी में आया था आप से मिल ने पैर आप सू रही थी तो मैंने जगाया नहीं

प्रिय- चल कोई नई तू नास्ता कर पहले फिर मेरे रूम में चल कर खूब बातें करेंगे

मीणा जो कब से इनकी बाते सुनकर जल भून रही थी एक दम से बोली

मीणा- ये कोई बच्चा है क्या जो जवान लड़कियों के कमरे में अकेला जाये अब तुम बड़ी हो गयी हो ऐसे अकेले बंद कमरे में तुम दोनों को सौभा नहीं देता समझी तुम यही करो जो बात करनी है

काया- तुम्हारे मुँह से ऐसी बाते अछि नहीं लगती समझी तो तुम तो ज्ञान मत hi दो मेरे बच्चो को उनका जो मैं होगा वो वही करेंगे तुम अपने नास्ते पैर ध्यान दो

मीणा- में तो भलाई के लिए कह रही थी कही गलत रस्ते पैर न चल ने लगे बाकि तुम्हारी मर्ज़ी

काया- वो अपना भला बुरा अचे से जानते है और वैसे भी तुम कब से किसी का भला सोच ने लगी

मीणा- तुम्हारा तो हमेशा hi सोचा है दीदी अब तुम बदल गयी तो में क्या करू वैसे अगर ये गलत रस्ते निकल गए तो क्या करोगी

काय- वो मेरी टेंशन है तेरी नहीं समझी इसलिए अपना दिमाग काम चला और जल्दी से नास्ता कर के चलती बन ले बीटा राम दूध पि ले केसर पिस्ता डाला है इस में

मीणा- बड़ा प्यार आ रहा है वैसे अगर इतना hi प्यार आ रहा है तो इस के ननिहाल वालो को भी बुलवा लो

काय समझ गयी थी ये फिर से फुट डलवाने hi आयी है इसलिए इस बात को बढ़ा न नहीं चाहती थी

काय- वो राम की मर्ज़ी जो चाहे वो करे

मीणा- देख लेना बहुत जल्द पछतावा होगा तुम्हे इन सबको सर चढ़ा ने का वैसे वो महारानी नहीं दिख रही

काय- कोण और तुम्हे मतलब क्या है हमारे परिवार से जाती क्यों नहीं हो यहाँ से

मीणा- अब तो परिणाम देख कर hi जाउंगी उस शांति की बात कर रही हु वो नहीं दिख रही

शांति चची की तबियत ख़राब है मौसी जी और अगर आप नहीं चाहती की आप की ख़राब हो तो माँ से तमीज़ से बात करिये कही ऐसा न हो में अपनी हद भूल जाऊ( राम गुस्से से देखते हुए बोलै)

मीणा- देख रही हो तुम्हारे सामने कैसे बतमीजी से बात कर रहा है ये

काय- सही कह रहा है और अब तुम या तो अपने कमरे में जाऊ नहीं तो धक्के दे कर हवेली से बहार फिकवा दूंगी समझी

मीणा डाट पिस्टे हुए वह से निकल गयी अब वह सिर्फ राम और काया थे

काय- क्या हुआ तेरी प्यारी चची को हम्म

राम- आप सब देख चुकी हो माँ फिर भी पूछ रही वैसे कर के बता सकता हु आप को अगर आप का इतना hi मैं है जान ने का😜

काय- हम्म तो तुझे पता था में देख रही हु फिर कितनी बेरहमी से लगा हुआ था उसके साथ

राम- आप कहो तो आप के साथ लग जाऊ अभी वैसे भी आज गज़ब लग रही हो

काय- मैं तो मेरा भी है पैर अभी वो चुड़ैल है न इस घर में

राम- उसकी टेंशन मत लो उसकी तो ऐसी हालत करूँगा न की ज़िन्दगी भर याद करेगी

काय- हम्म तेरे हालत देख कर मुझे भी लगा था की कुछ तो चल रहा है तेरे दिमाग में वैसे वो आसानी से पेअर खोल देगी😜

राम- खोल दिए थे मैंने hi कुछ नहीं किया ( उसके बाद राम काय को सब बता देता है जो मीणा और उसके बिच हुआ)

काय- क्या तूने सिर्फ मेरे प्यार के लिए उसे छोड़ दिया और में पागल इतने साल तुझसे घिन्न करती रही तू सच में हीरा है रे मेरे बच्चे भगवान् तुझे मेरी भी उम्र दे

राम- अपनी उम्र अपने पास रखो मुझे तो बस अपनी मुनिया दे दो😜

काय- वो तो कब की तेरी हो चुकी मेरे लाल जब चाहे ले लियो फिलहाल मुझे काम है बाद में सोचते है कुछ

काय वह से चली गयी और राम फिर से घर से बहार निकल गया

दोस्तों पिक्स अपलोड नहीं हो रहे है साइट में कुछ दिक्कत है इसलिए आज मजा नहीं आ रहा लिख ने में जैसे hi साइट सही से चलेगी हाज़िर हो जाऊंगा आप सब के बिच तब तक अपना ध्यान रखिये और अपनी छतो पैर पानी रखिये प्यासे पंछियो के लिए गर्मी बहुत है 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
 
अपडेट -31

राम बीटा कहा हो निचे आओ (घर में दाखिल हुआ किशोर जोर से आवाज़ लगते हुए बोलै)

काय- वो तो बहार गया है जी क्या हुआ

kishor-are हुआ तो कुछ नहीं उसे सेहर भेजना था कुछ काम से

काय- गाओं के हालात पता है आप को फिर भी आप उसे सेहर भेज रहे दिन hi कितने बचे है कुस्ती के

किशोर- तुम फ़िक्र मत करो वो शेर है कुछ नहीं होगा उसे एक काम करो गाओं में भेजो किसी को उसे बुलाने

काय- ठीक है जैसे आप कहे में अभी भेजती हु किसी को

ठाकुर आज सुबह hi पीने बैठ गया था जिसका नास्ता सुरीली को देकर मल्टी उसे दे आना का बोली

सुरीली जैसे hi खाने की थाली ठाकुर दे ने लगी तो नशे में धुत ठाकुर ने उसका हाथ पकड़ लिया जिस से सुरीली का पल्लू निचे गिर गया जिसे देख कर वो घबराते हुए बोली

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सुरीली- ये क्या कर रहे भैया हाथ छोड़िये मेरा शर्म नहीं आती आप को हम बहिन है आपकी

ठाकुर तो सुरीली की आवाज़ सुन hi नहीं रहा था वो तो एक टुक्क उसकी बहार आती चूचियों में खोया हुआ था आंखे हवस से लाल हो चुकी इस वक़्त बस उसे सुरीली को भोग ने की छह थी जिस पूरा कर ने के लिए वो सुरीली को वही फर्श पैर गिरा कर उसके ऊपर चढ़ते हुए बोलै

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ठाकुर- कब तक ऐसे जलते हुए जियोगी मेरी बहिन हम है न हम तुम्हारा पूरा ख्याल रखेंगे बस तुम अपने भाई की बात मान जाओ

सुरीली- आअह्ह्ह्ह भाभी बचाओ हमे

सुरीली बेबश उसके निचे दबी हुई खुद बहुत कमजोर महसूस कर रही थी आँखों से आंसू गिर रहे थे वो बस दुआ कर रही थी की कोई उसे बचा ले पैर यहाँ कोण सुनता उसकी

ठाकुर- क्यों चिल्ला रही है हम कोई गैर थोड़ी है चल कड़ी हो आज तुझे जन्नत की सैर करवाता हु

सुरीली घबरा रही थी पैर कही न कही वो जान चुकी थी की अगर हिम्मत नहीं की तो ये जानवर उसे नौच डालेगा इसलिए हिम्मत कर के कड़ी हुई और एक जोरदार थप्पड़ ठाकुर के गाल पैर झड़ते हुए बोली

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सुरीली- थू है तुझ पैर तू इतना निचे गिर गया की अपनी hi बहिन के साथ छी मुझे शर्म आती है की तू मेरा भाई है आज के बाद मुझे छू ने की कोशिश भी की न तो हाथ काट दूंगी तेरा समझा गति इंसान

ठाकुर का तो सर चक्र गया थप्पड़ पड़ते hi पैर बात यही ख़तम हो जाती तो क्या बात थी गुस्से में तमतमाए ठाकुर पलट कर एक जोर छाता सुरीली के गाल पैर मारा

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ठाकुर- साली कुटिया तेरी ये मज़ाल तू ठाकुर पैर हाथ उठाये तेरी तो में खाल खींच लूंगा आज मुझे मना करती है तू देख में तेरा क्या हाल करता हु

क्या करोगे हां शर्म नाम की चीज़ नहीं और घर की बेटियों पैर हाथ उठा रहे हो मुझे दिखाओ कितनी मर्दानगी छुपी है तुम्हारे लो नौचो मेरे जिस्म को और दिखाओ की ठाकुर में कितना दम है( अपनी छाती पैर से पल्लू निचे गिरते हुए गुस्से में मल्टी बोली)

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सामने मल्टी को देख कर ठाकुर का गुस्सा गायब हो गया और वो पीछे हैट ने लगा क्युकी वो मालती के गुस्से से भली भाति परचित था

ठाकुर- ये हम से जुबान लड़ा रही थी तुम बेवजह गुस्सा मत दिखाओ कही ऐसा न हो हमारा हाथ तुम पैर भी उठ जाए

मालती- ये रुबाब गरीब गाओं वालो पैर दिखाना ठाकुर मुझ पैर नहीं क्युकी तू क्या है ये में अचे से जानती हु ( ठाकुर की तरफ बढ़ते हुए)

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ठाकुर ने निकल ने में hi भलाई समझी और बड़बड़ाते हुए वह से निकल गया जब की सुरीली भाग कर मालती के गले लग गयी रट हुए

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मालती- मुझे माफ़ कर दे सुरीली में नहीं जानती थी की ये आदमी इस हद तक गिर जायेगा

सुरीली- आप मत माफ़ी मांगो भाभी आपकी वजह से hi में आज बची हुई हु वर्ण ये दोनों बाप बेटे कब का मुझे और सुहानी को नौच खाते

मालती- जानती हु पैर शायद अब और ध्यान देने की जरुरत है मुझे मेरी दोनों बेटियों पैर

सुरीली- हम्म

मालती- चल आज तुझे सेहर घुमा कर लाती हु तेरा दिल भी हल्का हो जायेगा

सुरीली- सुहानी को भी ले चलते है मुझे अब जरा भी भरोसा नहीं ें पैर

मालती- वो अपनी सहेली के यहाँ गयी है शाम तक आ जाएगी तू फटाफट तैयार हो फिर चलते है वैसे भी बहुत दिन हो गए कही गए हुए

माँ ो माँ कहा हो आप ( काय आवाज़ लगता राम जब उसके कमरे में पंहुचा तो काय की पीठ थी उसकी तरफ तो राम नज़दीक पहुंच कर उसकी गांड को दबाते हुए बोलै)

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राम- क्या बात है माँ आज दिन में hi बुला लिया जायदा मैं कर रहा है क्या

काय- आते hi शुरू हो गया चल हैट मुझे काम कर ने दे और निचे अपने बड़े पापा से मिल ले उन्होंने बुलाया है तुझे मैंने नहीं

राम- हम्म पैर क्या आप नहीं चाहती की में रुकू आप के पास हआ( पीछे से गर्दन को चूमते हुए)

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काय- ऊऊफफफफफ तू पागल कर देगा मुझे मान जा अभी सही वक़्त नहीं है बाद जी भर कर लेना अभी जाए आह्ह्ह्ह मत कर तुझे मेरी कसम

राम- क्या माँ हर बात पे कसम ठीक है अभी तो जा रहा हु पैर अगली बार इन्हे कास के मसलूंगा हां नहीं तो

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( काय की गांड को मसलते हुए बोलै)

काय- पगला कही का अभी भी तो मसल कर hi गया है ( खुद में मुस्कुराते हुए)

निचे पहुंच कर राम किशोर से मिल कर सेहर चला गया🙏🏻🙏🏻🙏🏻
 
अपडेट-32

राम सेहर में किशोर के दिए काम को निपटा कर बाजार में खरीदारी करने के लिए निकल गया जहा उसे दो निगाहें बड़ी गौर से देख रही थी और मैं hi मैं बुदबुदा रही थी

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लेडी- कितना मजबूत जिस्म है इतनी काम उम्र में भी काश ये मेरे जिस्म से खेलता तो कितना मजा आता

अभी वो ये सोच hi रही थी की पीछे से सुरीली उसकी नज़रो का पीछा कर के राम को देख कर खुश होते हुए बोली

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सुरीली- मस्त गबरू जवान है न भाभी आपकी तो फाड़ के रख देगा

मालती- क्या बक रही पगली में कुछ और सोच रही थी और तू पता नहीं क्या क्या बोलती रहती है चल जल्दी से खरीदारी करते काफी देर हो गयी है पहले hi

सुरीली- ाचा जी अब आप मुझसे भी झूट बोलोगी वैसे में जानती हु उसे कसम बहुत तगड़ा हथ्यार है जब अंदर डालता है न तो पूछो मत दिन में तारे दिखा देता है

मालती- तू ऐसे बोल रही है जैसे इस से चूड़ी हो मैंने तो इसे अपने गाओं में भी नहीं देखा फिर तो कैसे जानती है इसे और वैसे भी कितना मासूम लग रहा है देख ने में
( गौर से राम को देखते हुए बोली)



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सुरीली- मासूम लगता है पैर है नहीं एक बार इस के निचे लेत गयी न तो हाथ जोड़ती फिरोगी वैसे भी जिस दिन से इस चूड़ी हु न भाभी कसम से इसके hi सपने आते है मुझे

सुरीली की बाते सुनकर मालती की छूट भी गीली होने लगी थी आखिर वो भी तो एक गदराये जिस्म की मालकिन थी और प्यासी भी पैर उसे अभी भी यकीन नहीं हो रहा था क्युकी उस ने आज से पहले कभी राम देखा जो नहीं था इस एक बार और गौर से राम को देखते हुए बोली

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मालती- नहीं ये हमारे गाओं का नहीं है और बहार तुम कही जाती नहीं सिवाए नदी के तो फिर तुम कहा चूड़ी इस से सच बता मुझे छेद रही है न

सुरीली- आपकी कसम में सच बोल रही हु भाभी आप से छुपाया क्युकी जरुरी था मगर जब मैंने अभी आप की आँखों में प्यास देखि तो आपकी तड़प का एहसास हुआ इसलिए सच बता दिया अब आप अगर कहे तो में बात कर सकती हु और यकीन कीजिये बहुत ाचा लड़का है आपकी प्यास भी बुझा देगा और किसी को कुछ कहेगा भी नहीं

मालती- तुम सच में बहुत प्यारी हो सुरीली और सच कहु तो एक औरत hi औरत के दर्द को समझ सकती है पैर तूने ये क्यों कहा की छुपाना जरुरी था

सुरीली- वो इस लिए भाभी क्युकी ये hi राम जिस ने इस बार खुलती की ललकार दी है

मालती- क्या ये मासूम नहीं सुरीली में नहीं मानती पैर ये सच है तो ठाकुर इसे मरवा देगा तुझे तो पता है कितना निर्दयी है वो

सुरीली- मैंने कहा न ये सिर्फ मासूम दीखता है है नहीं कहो तो आज रात तुम्हे तुम्हारे कमरे में hi छुड़वा दू

मालती तो छुड़वाने के नाम से hi गीली हो गयी पैर जल्द hi खुद को सँभालते हुए बोली

मालती- नहीं नहीं हवेली पैर नहीं वही ठीक रहेगा जहा तू चूड़ी थी इस से

सुरीली- हम्म तो छूट खुजली हो ने लगी तो बताओ आज चुद न है या कल

मालती- कल hi ठीक रहेगा बस इसे ये मत बताना की में कोण हु

सुरीली- ठीक है नहीं बताती पैर फिलहाल मिल तो सकती हो न आप उस से

मालती- यहाँ नहीं किसी ने देख लिया तो पन्गा हो जायेगा कल hi मिल लुंगी

सुरीली- ठीक है में उसे बोल कर आती हु कल उसी जगह पैर मिल ने के लिए आप रुको

मालती को वही छोड़ सुरीली राम के पास गुजरते हुए चेंजिंग रूम की तरफ इशारा करके खुद उधर चली गयी और राम के आते hi उस से चिपकते हुए बोली

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सुरीली- क्या बात है दोबारा मिल ने भी नहीं आये हम्म

राम- ऐसा कुछ नहीं है मेरी जल पारी बस थोड़ा सा बिजी था तुम बताओ यहाँ कैसे

सुरीली- सहेली के साथ शॉपिंग कर ने आयी थी तुम्हे देखा तो सोचा तुमसे भी मिल लू क्यों तुम्हे बुरा लगा kya(ram की आँखों में देखते हुए)

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राम- नहीं बुरा क्यों लगेगा तुम जब चाहो मुझसे मिल सकती हो

सुरीली- ाचा अगर ये बात है तो कल वही मिलते है जहा तुम ने मुझे प्रेमसुख का एहसास कराया था और मना मत कर न प्ल्ज़

राम- वादा नहीं करता पैर कोशिश करूँगा अभी चलता हु ख्याल रखना अपना( दूर के पास जाते हुए)

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राम के जाते hi सुरीली मालती के पास वापस चली गयी जहा से वो दोनों वापस घर के लिए निकल गयी

माँ ो माँ कहा हो ( घर में दाखिल होते hi राम काय को बुलाने लगा )

छोटी मालकिन और दीदी तो मंदिर गयी है मालिक और बड़ी बीबी जी अपने रूम में आराम कर रही है ( घर में नौकरी कर ने वाला नौकर राम को सब बताते हुए बोलै)

नौकर की बात सुनकर राम सीधा अपनी माँ के कमरे में दाखिल हुआ तो देखा काय चादर ओढ़ कर सोई हुई है जिसे देखते hi राम ने रूम को लॉक किया और धीरे से काय की चादर को खींच कर उसके बदन से अलग कर ने लगा जहा नज़र बड़ा hi कामुक था चादर के अंदर काम की देवी काय ब्रा पेंटी में सोई हुई थी जिस से उसकी मोती उभर कर बहार को निकली हुई थी

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काय की गोरी गांड देख कर राम हाथ काबू से बहार हो ने लगे और वो काय की मोती गांड पैर धीरे हाथ फिरने लगा जिस में उसे एक अलग hi मजा आ रहा था

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थोड़ी देर यही काय की गांड को सहलाने के बाद उस ने धीरे से काय की पेंटी निचे सरका दी और जोर जोर से मसल ने लगा और अचानक hi उसे पता नई क्या सुझा की काय की गांड में अपना अंगूठा घुसेड़ दिया जिस से काय की नींद खुल गयी और वो सामने राम को देखते हुए बोली

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काय- आअह्ह्ह क्या कर रहा है शैतान चैन से सोने क्यों नहीं देता हम्म

राम- आपकी खूबसूरत गांड ने मेरे लुंड को जगाया तो मैंने आपको जगा दिया वैसे भी आपके ये निचे के दोनों चाहते है की इन्हे में थोड़ी देर के लिए अलग अलग करदु देखो कैसे चिपके पड़े है बेचारे( काय की छूट को प्यार से मसल कर अलग करते हुए )

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काय- ऊऊफफफफ मत राम कोई भी आ जायेगा अभी और में प्यासी नहीं रहना चाहती ोूछह देख में गुस्सा हो जाउंगी अगर तू नहीं माना तो

राम- सच में गुस्सा हो जाओगी आप पैर अगर में हैट गया तो आपकी ये रसभरी भी तो गुस्सा हो जाएगी न माँ देखो कैसे रोने लगी सलापपपपप( जीभ से चाट ते हुए

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काय- आआह्ह्ह्हह स्स्स्सस्शह्ह्ह्ह राम मत कर बीटा ऊऊफफफफ्फ्फ्फ़ आअह्ह्ह्ह रुक जा वर्ण में खुद को रोक नहीं पाऊँगी ूउम्मम्मम स्स्स्सस्छ्हःहः ाचा अगर कर न hi है तो सीधा अंदर दाल दे ें सब में टाइम बर्बाद मत कर आआह्ह्ह मां जाआ राम

काय की बात मान कर राम उसकी दोनों टांगो के बिच में आया और लुंड को धीरे से घिसते हुए काय की छूट में अंदर घुस गया

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काय- आआह्ह्ह्ह कितना सकूं मिला है ऊऊफफफफफ छोड़ अब अपनी माँ को जोर जोर से आआह्ह्ह राम मेरे बच्चे ऐसे hi उउउउ कब से तड़प रही थी माआ

राम धीरे धीरे काय को छोड़ ने लगा और काय धीरे से उसके होठो को चुम ने के बाद उसे खुद में समां ने लगी असीम संतुस्ती उसके चेहरे पैर झलक रही थी जो बया करती थी की वो किस अनंत सुख के दमन में है

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काय- आआह्ह्ह्ह आआह्ह्ह्ह ऊऊह्ह्ह्ह राम मेरे बच्चे ऐसी hi जोर जोर से छोड़ अपनी मा को ूउम्म्म आआह्ह्ह्हह्ह ssshhhhhhhhhh आआह्ह्ह्ह राम तेरी माँ गयी री आअह्ह्ह्हह

काय झाड़ चुकी थी जिसके लबो को मुँह में भर कर राम उसे उसके संखलित होने का पूरा मजा दे रहा था
उसके ऊपर चढ़ कर

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थोड़ी देर यही राम के धक्के काय की छूट के अंदर बहार लगते रहे जिन में पूर्ण प्रेम मिला था जिस के आनंद में खोयी काय की सिसकिया पुरे कमरे में गूंज रही थी

काय- आअह्ह्ह्ह मा मर गयी रे राम और कितना करेगा मेरी छूट फिर से कोई सैलाब उतर ने को है आआह्ह्ह्ह स्स्स्सह्ह्हह्ह ऊऊफफफफफफ

राम- बस माँ हो गया आअह्ह्ह कितनी आग भरी है माँ तुझ में देख कैसे लावा बनकर बहार आ रहा तेरा मेरा रास आह्हः

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काय की छूट में अपना सारा माल निचोड़ ने के बाद राम काय से चिपक

कर सो गया
 
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