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अपडेट-34
राम घर से निकल कर नदी की तरफ चल पड़ा सुरीली से मिल ने पैर शायद आज कुछ और hi लिखा हुआ था उसकी किस्मत में
जंगल में घुसते hi राम को किसी के चीख ने की आवाज़ सुनाई दी जो लगातार और भी तेज़ होती जा रही थी जिसे सुनते hi राम ने तेज़ी से दौड लगा दी और सामने का मंजर देख कर उसका खून खोल गया क्युकी सामने वीरभान का बीटा और उसके आदमी एक लड़की को पकड़ ने की कोशिश कर रहे और वो लड़की जंगल के तरफ भागते हुए मदद के लिए चिल्ला रही थी
लड़की साँसे फूल ने लगी थी उसे लग ने लगा था की अब वो इन से नहीं बच पाएगी की तभी एक जोर की आवाज़ हुई और पूरा जंगल एक दर्द भरी चीख से गूंज उठा जिस की आवाज़ सुन कर लड़की ने एक पेड की ओट से निकल कर सामने देखा तो ठाकुर का आदमी निचे पड़ा था और उसके मुँह खून निकल रहा था
अपने आदमी की ऐसी हालत देख वीरभान का बीटा जोर से चिल्लाया
विजय- कोण है जिस ने ठाकुर के आदमियों से टकराने की जुर्रत्त की है दम है तो सामने आ
राम- में हमेशा सामने से hi मारता हु चूतिये फर्क इतना है की तू सामने टिक्क नहीं पायेगा
विजय- ाचा इतना hi दम है तो सामने भी आजा
राम- अब इतनी मिन्नत करेगा तो राम मिल hi जायेंगे बेसक हरकते तेरी रावण जैसी hi क्यों न हो ( विजय के सामने आते हुए बोलै)
विजय- आ तो तू गया पैर वापस नहीं जायेगा पहले तुझे निपटाऊंगा फिर उस कुटिया को
राम- विनाश काले विपरीत बुद्धि आज तुझे मोक्ष दे hi देता हु वैसे भी कल करे सो आज कर आज करे सो अभी
राम की बात सुनते hi विजय और उसके आदमी उसकी तरफ झपटे hi थे की कोई ऊपर कोई निचे गिरता हुआ दिखा बस
विजय को समझ hi नहीं आया की अभी क्या हुआ वो कुछ समझ पाटा तब तक वो और राम नदी के पल पैर आ चुके थे जहा विजय की हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी पैर शायद राम रुक ने के मूड में नहीं था इसलिए गुस्से में पल को क्रॉस कर के आगे आया और विजय की छाती पे एक जोर दार लात पड़ी उसके बाद विजय उठा hi नहीं बस निचे पड़ा हुआ राम को देखते देखते दुनिया छोड़ गया
राम ने एक बार उसे देखा और फिर वही पड़े हुए उसके आदमी के कान में बोलै
राम- गेम इस ों बोल देना उस ठाकुर राम ने जुंग का आगाज़ कर दिया है और 2 दिन बाद उसे वही अखाड़े में दफ़न करूँगा समझा
राम की बात सुनते hi वो आदमी वह से लंगड़ाते हुए निकल गया जिस के जाते hi वो लड़की बहार आयी और राम को देखते हुए बोली
लड़की- हम आप का शुक्रिया कैसे ऐडा ारे
राम- आप को कुछ कह ने की कोई जरुरत नहीं है वैसे आप की भासा कुछ अलग है मुझे नहीं लगता आप यहाँ से हो
लड़की- जी हम राजस्थान से है हम सेहर घूम ने आये थे अपनी सहेलियों के साथ वही पैर इनकी नज़र हम पैर पड़ी और ये जबरदस्ती हमें इस जंगल ले आये
राम- चलो ाचा हुआ ले आये वर्ण हम भी आप से न मिल पाते वैसे आप का नाम क्या है अगर आप बताना चाहो
लड़की- जी हमारा नाम ( जानकी ) है और हम राजस्थान के राज घराने से और आप
राम- बन्दे को राम कहते है और ये गाओं हमारा परिवार है जिसकी देख रेख मेरे बड़े पापा और चाचा जी करते है
जानकी- आप इतने अचे है तो फिर ये लोग कोण थे जो इतनी घटिया हरकत कर रहे थे आप के hi गाओं में लाकर
राम- ये पड़ोस के गाओं से है मतलब थे चलिए अब यहाँ से चलते है
जानकी- पैर हमारे फ्रेंड्स तो वह सेहर में है और हमारा फ़ोन भी गिर गया वो हमें ढून्ढ रहे होंगे
राम- आप अभी मेरे घर चलिए फिर में खुद आप को सेहर छोड़ कर आऊंगा
जानकी- आप घर पैर कैसे मतलब वो( डरते हुए)
राम- आप बेफिक्र रहिये में हु न आप सेफ हो वह भी ( जानकी का हाथ धीरे से अपने हाथ में लेते हुए बोलै )
जानकी को राम का साथ ाचा लगा था और वो खुद को सुरक्षित भी महसूस कर रही थी इसलिए चुप चाप उसका हाथ थामे उसके साथ चल ने लगी
मालिक मालिक कहा हो आप अनर्थ हो गया मालिक
घर में शोर सुन्न सब बहार आ गए और वीरभान अपने आदमी को चिलाते देख जोर से बोलै
वीरभान- क्या हुआ है जो कुत्ते की तरह भूक रहा है
आदमी- मालिक वो उस ने छोटे मालिक को मार डाला
वीरभान- क्या बक रहा है किस की इतनी हिम्मत जो हमारे बेटे को छू भी सके( गुस्से से देखते हुए)
आदमी- वो जंगल में था जब छोटे मालिक उस लड़की को पकड़ रहे थे तभी वो भी वह आ गया और छोटे मालिक को तड़पा तड़पा के मार डाला
वीरभान- और तू उसे वह अकेला मरने के लिए छोड़ आया कुत्ते के बच्चे ( जोर चीखते हुए)
मालती- उस पैर क्यों चिल्ला रहे हो जैसे करम थे उसके ये एक न एक दिन होना hi था और वैसे भी जैसा नीच बाप है वैसा hi बीटा था ाचा हुआ मुक्ति मिल गयी
वीरभान- तू माँ है या डायन यहाँ कोई तेरे बेटे को मार कर चला गया और तो उसकी जगह अपने hi बेटे को कोष रही है कुटिया साली
मालती- जबान को लगाम दो ठाकुर और क्या बीटा बीटा कर रहे हो ऐसी औलाद से तो बे औलाद hi ठीक है और मुझे सलाह मत दो अपनी फ़िक्र करो क्युकी तुम्हे भी अपने कर्मो की सजा भुगत नई है अभी
अभी वीरभान कुछ कहता उस से पहले hi वो आदमी बोल पड़ा
आदमी- मालकिन सही कह रही है मालिक वो भी कुछ ऐसा hi कह रहा था हां याद आया वो कह रहा था की जुंग का आगाज़ हो चूका और 2 दिन बाद वो आप को भी उसी अखाड़े में गाड़ देगा
वीरभान- अरे आखिर वो था कौन
जिसके जवाब में आवाज़ ठाकुर के पीछे से आयी
सुरीली -- राम
राम घर से निकल कर नदी की तरफ चल पड़ा सुरीली से मिल ने पैर शायद आज कुछ और hi लिखा हुआ था उसकी किस्मत में
जंगल में घुसते hi राम को किसी के चीख ने की आवाज़ सुनाई दी जो लगातार और भी तेज़ होती जा रही थी जिसे सुनते hi राम ने तेज़ी से दौड लगा दी और सामने का मंजर देख कर उसका खून खोल गया क्युकी सामने वीरभान का बीटा और उसके आदमी एक लड़की को पकड़ ने की कोशिश कर रहे और वो लड़की जंगल के तरफ भागते हुए मदद के लिए चिल्ला रही थी
लड़की साँसे फूल ने लगी थी उसे लग ने लगा था की अब वो इन से नहीं बच पाएगी की तभी एक जोर की आवाज़ हुई और पूरा जंगल एक दर्द भरी चीख से गूंज उठा जिस की आवाज़ सुन कर लड़की ने एक पेड की ओट से निकल कर सामने देखा तो ठाकुर का आदमी निचे पड़ा था और उसके मुँह खून निकल रहा था
अपने आदमी की ऐसी हालत देख वीरभान का बीटा जोर से चिल्लाया
विजय- कोण है जिस ने ठाकुर के आदमियों से टकराने की जुर्रत्त की है दम है तो सामने आ
राम- में हमेशा सामने से hi मारता हु चूतिये फर्क इतना है की तू सामने टिक्क नहीं पायेगा
विजय- ाचा इतना hi दम है तो सामने भी आजा
राम- अब इतनी मिन्नत करेगा तो राम मिल hi जायेंगे बेसक हरकते तेरी रावण जैसी hi क्यों न हो ( विजय के सामने आते हुए बोलै)
विजय- आ तो तू गया पैर वापस नहीं जायेगा पहले तुझे निपटाऊंगा फिर उस कुटिया को
राम- विनाश काले विपरीत बुद्धि आज तुझे मोक्ष दे hi देता हु वैसे भी कल करे सो आज कर आज करे सो अभी
राम की बात सुनते hi विजय और उसके आदमी उसकी तरफ झपटे hi थे की कोई ऊपर कोई निचे गिरता हुआ दिखा बस
विजय को समझ hi नहीं आया की अभी क्या हुआ वो कुछ समझ पाटा तब तक वो और राम नदी के पल पैर आ चुके थे जहा विजय की हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी पैर शायद राम रुक ने के मूड में नहीं था इसलिए गुस्से में पल को क्रॉस कर के आगे आया और विजय की छाती पे एक जोर दार लात पड़ी उसके बाद विजय उठा hi नहीं बस निचे पड़ा हुआ राम को देखते देखते दुनिया छोड़ गया
राम ने एक बार उसे देखा और फिर वही पड़े हुए उसके आदमी के कान में बोलै
राम- गेम इस ों बोल देना उस ठाकुर राम ने जुंग का आगाज़ कर दिया है और 2 दिन बाद उसे वही अखाड़े में दफ़न करूँगा समझा
राम की बात सुनते hi वो आदमी वह से लंगड़ाते हुए निकल गया जिस के जाते hi वो लड़की बहार आयी और राम को देखते हुए बोली
लड़की- हम आप का शुक्रिया कैसे ऐडा ारे
राम- आप को कुछ कह ने की कोई जरुरत नहीं है वैसे आप की भासा कुछ अलग है मुझे नहीं लगता आप यहाँ से हो
लड़की- जी हम राजस्थान से है हम सेहर घूम ने आये थे अपनी सहेलियों के साथ वही पैर इनकी नज़र हम पैर पड़ी और ये जबरदस्ती हमें इस जंगल ले आये
राम- चलो ाचा हुआ ले आये वर्ण हम भी आप से न मिल पाते वैसे आप का नाम क्या है अगर आप बताना चाहो
लड़की- जी हमारा नाम ( जानकी ) है और हम राजस्थान के राज घराने से और आप
राम- बन्दे को राम कहते है और ये गाओं हमारा परिवार है जिसकी देख रेख मेरे बड़े पापा और चाचा जी करते है
जानकी- आप इतने अचे है तो फिर ये लोग कोण थे जो इतनी घटिया हरकत कर रहे थे आप के hi गाओं में लाकर
राम- ये पड़ोस के गाओं से है मतलब थे चलिए अब यहाँ से चलते है
जानकी- पैर हमारे फ्रेंड्स तो वह सेहर में है और हमारा फ़ोन भी गिर गया वो हमें ढून्ढ रहे होंगे
राम- आप अभी मेरे घर चलिए फिर में खुद आप को सेहर छोड़ कर आऊंगा
जानकी- आप घर पैर कैसे मतलब वो( डरते हुए)
राम- आप बेफिक्र रहिये में हु न आप सेफ हो वह भी ( जानकी का हाथ धीरे से अपने हाथ में लेते हुए बोलै )
जानकी को राम का साथ ाचा लगा था और वो खुद को सुरक्षित भी महसूस कर रही थी इसलिए चुप चाप उसका हाथ थामे उसके साथ चल ने लगी
मालिक मालिक कहा हो आप अनर्थ हो गया मालिक
घर में शोर सुन्न सब बहार आ गए और वीरभान अपने आदमी को चिलाते देख जोर से बोलै
वीरभान- क्या हुआ है जो कुत्ते की तरह भूक रहा है
आदमी- मालिक वो उस ने छोटे मालिक को मार डाला
वीरभान- क्या बक रहा है किस की इतनी हिम्मत जो हमारे बेटे को छू भी सके( गुस्से से देखते हुए)
आदमी- वो जंगल में था जब छोटे मालिक उस लड़की को पकड़ रहे थे तभी वो भी वह आ गया और छोटे मालिक को तड़पा तड़पा के मार डाला
वीरभान- और तू उसे वह अकेला मरने के लिए छोड़ आया कुत्ते के बच्चे ( जोर चीखते हुए)
मालती- उस पैर क्यों चिल्ला रहे हो जैसे करम थे उसके ये एक न एक दिन होना hi था और वैसे भी जैसा नीच बाप है वैसा hi बीटा था ाचा हुआ मुक्ति मिल गयी
वीरभान- तू माँ है या डायन यहाँ कोई तेरे बेटे को मार कर चला गया और तो उसकी जगह अपने hi बेटे को कोष रही है कुटिया साली
मालती- जबान को लगाम दो ठाकुर और क्या बीटा बीटा कर रहे हो ऐसी औलाद से तो बे औलाद hi ठीक है और मुझे सलाह मत दो अपनी फ़िक्र करो क्युकी तुम्हे भी अपने कर्मो की सजा भुगत नई है अभी
अभी वीरभान कुछ कहता उस से पहले hi वो आदमी बोल पड़ा
आदमी- मालकिन सही कह रही है मालिक वो भी कुछ ऐसा hi कह रहा था हां याद आया वो कह रहा था की जुंग का आगाज़ हो चूका और 2 दिन बाद वो आप को भी उसी अखाड़े में गाड़ देगा
वीरभान- अरे आखिर वो था कौन
जिसके जवाब में आवाज़ ठाकुर के पीछे से आयी
सुरीली -- राम