Incest Lawaaris - Page 5 - SexBaba
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Incest Lawaaris

अपडेट-34

राम घर से निकल कर नदी की तरफ चल पड़ा सुरीली से मिल ने पैर शायद आज कुछ और hi लिखा हुआ था उसकी किस्मत में

जंगल में घुसते hi राम को किसी के चीख ने की आवाज़ सुनाई दी जो लगातार और भी तेज़ होती जा रही थी जिसे सुनते hi राम ने तेज़ी से दौड लगा दी और सामने का मंजर देख कर उसका खून खोल गया क्युकी सामने वीरभान का बीटा और उसके आदमी एक लड़की को पकड़ ने की कोशिश कर रहे और वो लड़की जंगल के तरफ भागते हुए मदद के लिए चिल्ला रही थी

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लड़की साँसे फूल ने लगी थी उसे लग ने लगा था की अब वो इन से नहीं बच पाएगी की तभी एक जोर की आवाज़ हुई और पूरा जंगल एक दर्द भरी चीख से गूंज उठा जिस की आवाज़ सुन कर लड़की ने एक पेड की ओट से निकल कर सामने देखा तो ठाकुर का आदमी निचे पड़ा था और उसके मुँह खून निकल रहा था

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अपने आदमी की ऐसी हालत देख वीरभान का बीटा जोर से चिल्लाया

विजय- कोण है जिस ने ठाकुर के आदमियों से टकराने की जुर्रत्त की है दम है तो सामने आ

राम- में हमेशा सामने से hi मारता हु चूतिये फर्क इतना है की तू सामने टिक्क नहीं पायेगा

विजय- ाचा इतना hi दम है तो सामने भी आजा

राम- अब इतनी मिन्नत करेगा तो राम मिल hi जायेंगे बेसक हरकते तेरी रावण जैसी hi क्यों न हो
( विजय के सामने आते हुए बोलै)

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विजय- आ तो तू गया पैर वापस नहीं जायेगा पहले तुझे निपटाऊंगा फिर उस कुटिया को

राम- विनाश काले विपरीत बुद्धि आज तुझे मोक्ष दे hi देता हु वैसे भी कल करे सो आज कर आज करे सो अभी

राम की बात सुनते hi विजय और उसके आदमी उसकी तरफ झपटे hi थे की कोई ऊपर कोई निचे गिरता हुआ दिखा बस

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विजय को समझ hi नहीं आया की अभी क्या हुआ वो कुछ समझ पाटा तब तक वो और राम नदी के पल पैर आ चुके थे जहा विजय की हालत बहुत ख़राब हो चुकी थी पैर शायद राम रुक ने के मूड में नहीं था इसलिए गुस्से में पल को क्रॉस कर के आगे आया और विजय की छाती पे एक जोर दार लात पड़ी उसके बाद विजय उठा hi नहीं बस निचे पड़ा हुआ राम को देखते देखते दुनिया छोड़ गया

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राम ने एक बार उसे देखा और फिर वही पड़े हुए उसके आदमी के कान में बोलै

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राम- गेम इस ों बोल देना उस ठाकुर राम ने जुंग का आगाज़ कर दिया है और 2 दिन बाद उसे वही अखाड़े में दफ़न करूँगा समझा

राम की बात सुनते hi वो आदमी वह से लंगड़ाते हुए निकल गया जिस के जाते hi वो लड़की बहार आयी और राम को देखते हुए बोली

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लड़की- हम आप का शुक्रिया कैसे ऐडा ारे

राम- आप को कुछ कह ने की कोई जरुरत नहीं है वैसे आप की भासा कुछ अलग है मुझे नहीं लगता आप यहाँ से हो

लड़की- जी हम राजस्थान से है हम सेहर घूम ने आये थे अपनी सहेलियों के साथ वही पैर इनकी नज़र हम पैर पड़ी और ये जबरदस्ती हमें इस जंगल ले आये

राम- चलो ाचा हुआ ले आये वर्ण हम भी आप से न मिल पाते वैसे आप का नाम क्या है अगर आप बताना चाहो

लड़की- जी हमारा नाम ( जानकी ) है और हम राजस्थान के राज घराने से और आप

राम- बन्दे को राम कहते है और ये गाओं हमारा परिवार है जिसकी देख रेख मेरे बड़े पापा और चाचा जी करते है

जानकी- आप इतने अचे है तो फिर ये लोग कोण थे जो इतनी घटिया हरकत कर रहे थे आप के hi गाओं में लाकर

राम- ये पड़ोस के गाओं से है मतलब थे चलिए अब यहाँ से चलते है

जानकी- पैर हमारे फ्रेंड्स तो वह सेहर में है और हमारा फ़ोन भी गिर गया वो हमें ढून्ढ रहे होंगे

राम- आप अभी मेरे घर चलिए फिर में खुद आप को सेहर छोड़ कर आऊंगा

जानकी- आप घर पैर कैसे मतलब वो( डरते हुए)

राम- आप बेफिक्र रहिये में हु न आप सेफ हो वह भी ( जानकी का हाथ धीरे से अपने हाथ में लेते हुए बोलै )

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जानकी को राम का साथ ाचा लगा था और वो खुद को सुरक्षित भी महसूस कर रही थी इसलिए चुप चाप उसका हाथ थामे उसके साथ चल ने लगी

मालिक मालिक कहा हो आप अनर्थ हो गया मालिक

घर में शोर सुन्न सब बहार आ गए और वीरभान अपने आदमी को चिलाते देख जोर से बोलै

वीरभान- क्या हुआ है जो कुत्ते की तरह भूक रहा है

आदमी- मालिक वो उस ने छोटे मालिक को मार डाला

वीरभान- क्या बक रहा है किस की इतनी हिम्मत जो हमारे बेटे को छू भी सके( गुस्से से देखते हुए)

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आदमी- वो जंगल में था जब छोटे मालिक उस लड़की को पकड़ रहे थे तभी वो भी वह आ गया और छोटे मालिक को तड़पा तड़पा के मार डाला

वीरभान- और तू उसे वह अकेला मरने के लिए छोड़ आया कुत्ते के बच्चे ( जोर चीखते हुए)

मालती- उस पैर क्यों चिल्ला रहे हो जैसे करम थे उसके ये एक न एक दिन होना hi था और वैसे भी जैसा नीच बाप है वैसा hi बीटा था ाचा हुआ मुक्ति मिल गयी

वीरभान- तू माँ है या डायन यहाँ कोई तेरे बेटे को मार कर चला गया और तो उसकी जगह अपने hi बेटे को कोष रही है कुटिया साली

मालती- जबान को लगाम दो ठाकुर और क्या बीटा बीटा कर रहे हो ऐसी औलाद से तो बे औलाद hi ठीक है और मुझे सलाह मत दो अपनी फ़िक्र करो क्युकी तुम्हे भी अपने कर्मो की सजा भुगत नई है अभी

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अभी वीरभान कुछ कहता उस से पहले hi वो आदमी बोल पड़ा

आदमी- मालकिन सही कह रही है मालिक वो भी कुछ ऐसा hi कह रहा था हां याद आया वो कह रहा था की जुंग का आगाज़ हो चूका और 2 दिन बाद वो आप को भी उसी अखाड़े में गाड़ देगा

वीरभान- अरे आखिर वो था कौन

जिसके जवाब में आवाज़ ठाकुर के पीछे से आयी

सुरीली -- राम
 
अपडेट-35

राम जानकी को साथ लिए हवेली आया तो सबसे पहले उसकी नज़र काय पैर पड़ी जिसे देखते hi वो प्यार से आवाज़ देकर बोलै

राम- बड़ी माँ इधर देखिये जरा आपको किसी से मिलवाना है

काय ने राम को जब एक लड़की के साथ देखा तो पहले वो थोड़ी शॉक हुई पैर फिर जल्द hi नार्मल होते हुए बोली

काय- ये प्यारी बच्ची कोण है राम

राम- माँ इनका नाम जानकी है और ये राजस्थान से है( काय को साड़ी बात बताई शिव विजय की मौत के)

काय- ाचा किया तूने जो इस फूल सी बच्ची को उन दरिंदो के हाथो नहीं पड़ने दिया नहीं तो पता नहीं क्या करते वो लोग इस के साथ

राम- जी बड़ी माँ इसलिए में इन्हे घर hi ले आया ताकि ये फ्रेश हो सके फिर में इन्हे सेहर छोड़ आऊंगा

काय- अरे इतनी जल्दी क्या है पहले इसे कुछ खिला पीला तो दो क्या ऐसे hi बुखी छोड़ कर आएगा हैट तू आओ बेटी तुम मेरे साथ चलो और इसे अपना hi घर समझो और जब तक चाहो यहाँ रह सकती हो ( प्यार से मुस्कुरा कर जानकी को देखते हुए)

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जानकी- थैंक यू आंटी जी पैर हमें जल्दी निकल न होगा हमारी सभी फ्रेंड्स हमारी चिंता कर रही होगी बाकि अगली बार जरूर आप के हाथो का खाना खा कर जाउंगी

काय- ठीक है तो बेटी जैसे तुम्हे ठीक लगे पैर फ्रेश तो हो जाओ या ऐसे गंदे hi जाना है हम्म

जानकी - पैर हमारे पास और कपडे नहीं है आंटी जी

काय- तुम फ़िक्र मत करो मेरी बेटी भी तुम्हारी जितनी hi है तुम उसके कपडे पहन लेना चलो में लेके चलती हु

काय ऊपर चली गयी तो राम वही टेबल पैर बैठ गया की तभी किशोर और हीरा दौड़ते हुए हवेली में दाखिल हुए जिस में किशोर थोड़ा जायदा घबराया हुआ था और वो आते hi राम से बोलै

किशोर- ये क्या सुन रहा हु में राम

राम- ऐसा क्या सुन लिया बड़े पापा जो आप इतना घबरा रहे लीजिये पानी पीजिये और शांत हो कर बताइये की क्या बात है

किशोर- भोले न बनो राम तुम जानते हो में क्यों इतना घबरा रहा हु आखिर क्यों किया तुम ने ऐसा

ऐसा क्या कर दिया मेरे बच्चे ने जो आप ऐसे बोल रहे है ( किशोर की बात के बीच में आती हुई काय बोली)

राम- कुछ नहीं माँ बड़े पापा तो यु hi घबरा रहे है और हीरा काका पहरेदारी डबल करवा दो कोई भी मतलब कोई भी हवेली के आस पास नहीं दिख न चाहिए ठीक है

हीरा - जी छोटे मालिक अभी में इंतज़ाम करता हु सब

राम- ये छोटे मालिक क्या होता है में भी तो आपके बेटे जैसा hi तो हु इसलिए आप सिर्फ मुझे राम कहा करो अब आप जाओ

काय- आखिर कोई बताएगा की हुआ क्या है और क्यों घर की पहरेदारी बढ़वाई जा रही है

किशोर- राम ने वीरभान के बेटे विजय को मार दिया है काय इस लिए मुझे टेंशन हो रही है और एक ये है कितने आराम से बैठे

Kaaya/sandhya/priya सब एक साथ

KYaaaaaaaaaa

राम- मैंने किसी को नहीं मारा उसके कर्मो ने उसे मरवाया और रही बात में जुंग का आगाज़ कर चूका हु बड़े पापा और इस में वो सब बलि चढ़ेंगे जो मेरे पापा के हत्यारे या किसी भी तरह इन सब से जुड़े हुए है

काय- पैर मेरे बच्चे वो कमीना अब चुप नहीं बैठेगा वो आता hi होगा यहाँ उस कमीने अशरफ के साथ

राम- नहीं आएगा बड़ी माँ क्युकी वो चुप कर वार कर ने वालो में से है सामने से नहीं और वैसे भी उसे अब तक मेरा सन्देश मिल चूका होगा

संधया - कैसा सन्देश राम जल्दी बताओ हमारा दिल बहुत घबरा रहा है

राम- यही की आज से 2 दिन बाद उसे उसी अखाड़े में गाड़ दूंगा जहा उसने कई बेगुनाह को मारा था अब टेंशन मत लीजिये और बड़े पापा अबसे 2 दिन तक कोई हवेली से बहार नहीं जायेगा

काय- तो फिर तू क्यों जा रहा है

किशोर- अब तुम कहा जा रहे हो जब की सबसे ज्यादा खतरा तो तुम्हे hi है

राम- आप टेंशन मत लीजिये में यु गया और यु वापस आया जानकी जी को छोड़ कर

अभी कोई कुछ कहता की जानकी निचे आयी और बोली

जानकी- राम जी चले अगर आप फ्री हो तो

जानकी मिट्ठी आवाज़ सुन कर सबका ध्यान उस तरफ गया तो क्यूट सी स्माइल गुलाब सा खिला चेहरा देख कर सब उस में hi खो से गए
जिस से जानकी नज़र शर्म से झुक गयी

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राम- जी जानकी जी चलिए बड़ी माँ में बस यु गया और यु आया ok

अब कोई क्या कहता इसलिए सब अपने कमरों में चले गए और राम जानकी को लेकर सेहर के लिए निकल गया जिस में रस्ते भर जानकी की और उसकी बाते चलती रही

कोण राम सुरीली और तुम इतने दावे से कैसे कह सकती हो की वो वही है ( वीरभान चिल्लाते हुए बोलै)

सुरीली- क्युकी वो एक सच्चा मर्द है तुम्हारी तरह डरपोक नहीं अब तुम्हारा समय निकट आ चूका है ठाकुर अब तो बस 2 दिन और फिर तुम्हे तुम्हारे हर गुनाह की सजा मिलेगी जैसे तुम्हारे नीच बेटे को मिली है

वीरभान- साली कुटिया मेरा नाम लेती है भूल गयी इस ठाकुर के hi टुकड़ो पैर पल कर तेरी जुबान इतनी लम्बी हुई है

सुरीली- तेरे नहीं अपने बाप के जिसे तूने धोके से हड़प लिया था पैर अब मुझे कोई दर नहीं क्युकी तुझ जैसे दोस्तो को दंड देने के लिए राम खुद आये है

वीरभान- है ः तुझे क्या लगता है वो पिल्ला वीरभान का सामना करेगा उसे तो वही अखाड़े में दफ़न करेगा मेरा असरफ जिस के बाद तुझे नंगा घुमाऊंगा साली कुटिया मेरे बेटे को नीच बोलै था न अब तू देख न कोण मरता है 2 दिन बाद

मालती- तुझसे और उम्मीद भी क्या हो सकती है तेरा बस चले तो बहिन बेटी को भी छोड़े

वीरभान- ये तम्मना भी पूरी करूँगा तेरी ठुकराएँ बस 2 दिन अब जो भी होगा उस कुत्ते की मौत के बाद hi होगा जाओ अशरफ को बुला कर लाओ फ़ौरन

इधर राम हवेली पंहुचा तो सीधा प्रिय के रूम में चला गया जहा प्रिय अभी अभी बाथरूम से निकली थी जिसे पीछे से अपनी बाहो भर कर उसके कान चूमते हुए बोलै

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राम- उफ्फ्फ ये खुशबू कितना मिस किया आज सुबह से इसे मैंने

प्रिय- और कोई नया बहाना नहीं है जनाब के पास देर से आने के लिए

राम- सच में दी मिस किया तभी तो सीधा अपनी प्यारी दी के पास आया घर आते hi

प्रिय- शुक्रिया जी आप का बहुत बहुत अब बताएँगे सुबह से कहा थे ( प्रिय को आज के बारे में कुछ नहीं पता था)

राम- कुछ नहीं बस खेतो पैर गया था आप आओ न मेरे पास वह कहा जा रहे हो ( प्रिय को अंदर दूसरे रूम जाता देख आधा hi बोल पाया था की टॉवल को निचे गिरती प्रिय बिना जवाब दिए दूसरे रूम में घुस गयी)

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ये मेरी जान लेकर hi मानेंगी कर ने कुछ देती नहीं है ऊपर से ऐसी हरकतें करती है की बस क्या hi करू

राम- ये क्या दीदी क्यों करती हो आप ऐसा हां( प्रिय के पास जा कर बोलै)

प्रिय- अब मैंने क्या किया बाबू में तो बस कपडे पहन रही हु बस

राम- और अभी बहार जो टॉवल गिराया था वो क्या था हम्म्म

प्रिय- वो हाथ से छूट गया था इसलिए सीधा इधर hi आ गयी और तुम्हे क्या लगा

राम- सब समझता हु में समझी आप देख लेना गईं गईं कर बदले लूंगा आप से और आप की ें मोती चूचियों से समझी आप ( टीशर्ट को निचे खिसकते हुए)

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प्रिय- हप्प गन्दा लड़का चल अब मुझे थोड़ा आराम कर ने दे और तू भी जा कर सू जा

राम- नींद उदा कर बोलती हो सू जा कोई नई देख लूंगा आप को अभी आप आराम करो

प्रिय- अले ले मेला प्यार भाई गुस्सा हो गया आ मेरे पास hi आराम कर ले बस ये सदा सा मुँह मत बना
( राम को अपने पास लिटाते हुए)



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राम- बहुत बदमासी कर ने लगी हो आज कल आप देख रहा हु

प्रिय- अब तुझसे भी छेड़खानी नहीं करुँगी तो फिर किस से करुँगी एक तू hi तो है मेरा प्यार मेरा दोस्त मेरा सबकुछ

राम- हम्म तभी कुछ नहीं कर ने देती हो आप

प्रिय- सब तेरा बस थोड़ा सा वेट और कर ले तब तक के लिए उम्मम्माह्ह्ह( होठो को होठो से चूमते हुए)

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अपडेट- 36

वीरभान की हवेली बहार से जितनी शांत दिख रही थी अंदर उतना hi शोर था बस फर्क इतना था की सब अलग अलग मुद्दे पैर बातें कर रहे थे

Surili-bhabhi सच में आप बहुत हिम्मत वाली हो वर्ण जिसका जवान बीटा गुज़रा हो वो माँ तो टूट जाती है

मालती- में भी टूट जाती सुरीली अगर वो अपने बाप जैसा नीच न होता तुझे पता है हर रात उसके कमरे से बच्चियों के चिल्ला ने की आवाज़े आती थी पैर में कुछ न सकीय पैर शायद भगवान् ने सुन ली थी किसी की आवाज़ इसलिए जो हुआ ठीक हुआ और आगे भी सब ठीक होगा

सुरीली- हम्म सच कहा भाभी पैर अब मुझे राम की फ़िक्र हो रही है क्युकी भाई अब हर घिनौनी चाल चलेंगे और अगर वो कामयाब हो गए तो हमारा क्या होगा

मालती- सब ठीक होगा वैसे भी उस लड़के ने वो कर दिया जो ठाकुर ने भी नहीं सोचा होगा

सुरीली- हां दम तो है मेरे राम में कसम से लड़ता भी उतने hi दम से जिस दम से बीएड पे हालत बुरी करता है उफ्फ्फ याद करते hi खुजली शुरू हो जाती है भाभी कसम से

मालती- शर्म कर भाभी हु तेरी चल अब सू जा मुझे भी नींद आ रही है

सुरीली- आप से कैसी शर्म भाभी आपकी छूट में तो खुद पकड़ कर डालूंगी उसका मुसल

मालती- मत कर सुरीली ऐसी बातें जब कुछ होना नहीं है

सुरीली- होगा भाभी जरूर होगा तब दोनों नंगी हो कर एक साथ छोड़ेंगी राम से

मालती- श चुप हो जा और जा मुझे नींद आ रही है

सुरीली- साड़ी नींद उदा देगा भाभी जब आप की इस मोती गांड में अपना मुसल दाल के पलेगा ( मालती की गांड सहलाते हुए)

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मालती- आह क्या कर रही है चल हैट अब बहुत हुआ तंग मत कर एक तो वो आया नहीं वादा कर के और एक तू है की आग भड़का रही है कामिनी कही की और हां सुहानी के कमरे में hi सोना अंदर से दरवाज़ा लॉक करके मुझे अब बिलकुल भरोसा नहीं है तेरे भाई पे( सुरीली से खुद को अलग करते हुए बोली)

सुरीली- हम्म में ख्याल रखूंगी भाभी आप भी अपना ध्यान रखना

ये दो रातें शायद कुछ जायदा hi भारी होने वाली थी पैर जिसकी वजह से हो रही थी वो अपनी प्रिय के आगोश चैन की नींद सो रहा था

वही यहाँ से दूर रंपुरा की हवेली में एक बुजुर्ग और उनका बीटा सुखबीर सिंह गहरे वार्तालाब में खोये हुए थे( राम का ननिहाल )

(नई इंट्रो)

करम singh(nana जी)

रंपुरा के सरपंच और एक अछि सोच के इंसान जिस की वजह से गाओं में हर कोई इनका सम्मान करता है

सुखबीर( बड़े मां )

राम की माँ को बहुत प्यार करते थे इसलिए राम को वह छोड़ ने के हक़ में भी नहीं थे पैर अपने पिता जी के आगे कुछ न बोल सके

सोभा ( बड़ी मामी 34/34/36)

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अपने नाम की तरह hi घर की शोभा बढाती है निर्मल और शांत व्यवहार वाली कुसल ग्रहणी जो अपनी ीचा भी कभी किसी के सामने प्रस्तुत नहीं करती बस अपने बच्चो में hi अपनी खुशिया तलाशती रहती है

रूही( सोभा की बड़ी बेटी)34/32/34)

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सोल्लगे कम्पलीट कर अपनी डॉक्टर की प्रैक्टिस कर रही है अपने hi गाओं में बहुत नाइक दिल है अपनी माँ की तरह

बुलबुल( सोभा की छोटी बेटी 32/30/34)

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सोल्लगे के फाइनल ईयर में है और अपने नाम की तरह चुलबुली है थोड़ी शरारती है

राजेश( छोटे मां)

फौज में है साल एक या 2 बार hi आते है

Sakshi(choti ममी 34/32/36)

सब का ख्याल रखती है और सोभा को अपनी बड़ी बहिन मानती है बस पति की दुरी रातो को जरूर थोड़ा विचलित करती है

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स्नेहा-( साक्षी की बेटी 30/32/32)

सोल्लगे के 1सत ईयर में है और शरारत कर ने नंबर ओने सबसे छोटी है इसलिए सब की चाहती है

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राधा( राम की मौसी 36/34/38)

विधवा है और अपने पिता जी के पास hi रहती है सोभा भी इसे अपनी बेटियों की तरह hi ट्रीट करती है जिस के प्यार के चलते इस ने भी दूसरी शादी से मुँह मूड लिया पैर इस का ये मतलब नहीं की जिस्म ठंडा पद गया है क़यामत है जिसे बेचारी उंगलियों की मदद से कभी कभी ठंडा कर लेती है

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सुखबीर- देख लिया आप ने क्या कर रहे है वो हमारे भांजे के साथ जवान होते hi उतार दिया उसे मौत के कुए में क्या सोचती होगी सुमन( राम की माँ)

की उसकी आखिरी निसानी तक हम बचा नहीं पाए और ये सब आपकी वजह से हो रहा है पिता जी

करम सिंह- हम ने पता करवाया है सुखबीर ये ललकार खुद तुम्हारे भांजे ने दी है और तुम ये कैसे भूल सकते हो की उसकी रगो में उसके बाप का खून दौड़ रहा है

सुखबीर- आप आज भी उन्ही की तरफ है पैर इस बार में आप की ज़िद्द नहीं मान सकता क्युकी अगर उसे कुछ हुआ तो खुद की नज़रो में hi गिर जाऊंगा

करम सिंह- तुम जज्बाती हो रहे हो बेटे वह सब है उसके साथ

सुखबीर- वो तब भी थे जब अशोक मारा गया था तब क्या कर लिया था उन्होंने जो आज कर लेंगे अब तो वैसे भी उनकी उम्र ढल चुकी है

करम सिंह- तो क्या तुम खुद जवान समझते हो

सुखबीर- जवान नहीं सही पिता जी पैर अंदर जो आग इतने वर्षो से जल रही है वो काफी है मेरे बेटे को वापस लाने के लिए और अब कोई बात नहीं होगी में जा रहा हु उसे लेने और न ला पाया तो समझ लेना की आप का एक hi बीटा है

करम सिंह- खामोश हो जाओ तुम एक दम समझे क्या अब में अपने बच्चो की लासे देखु इस उम्र में ठीक है चलो हम भी चलते है पैर तुम अपने गुस्से पैर काबू रखोगे जब तक हम न कहे

सुखबीर- जी बिलकुल जैसा आप कहे ( खुश होते हुए)

खाना बन गया है पिता जी आप कहे तो लगा दू( शोभा प्यार से करम सिंह जी कहते हुए )

सुखबीर- हां सोभा लगाओ और कुछ मीठा भी रखना खाने के बाद में और पिता जी राम को लेने जा रहे है हमारे सुमन के बेटे को ( करम सिंह से पहले hi उत्साह दिखते हुए)

सौभा- जी बिलकुल में मीठा लाती हु वो तो बहुत बड़ा हो गया होगा न जी

सुखबीर- हम्म

खुश होती सौभा रसोई घर में दाखिल हुई तो साक्षी उसे मुस्कुराता देख पूछ बैठी

साक्षी- क्या बात है दीदी बहुत खुश नज़र आ रही हो ऐसा क्या कह दिया जेठ जी ने

सौभा- ख़ुशी की hi तो बात है वो और बाबू जी राम को लेने जा रहे है

साक्षी- कोण राम दीदी और आप इतना खुश हो उसके आने से

सौभा- वो सुमन दीदी का बीटा है साक्षी तुम ने नहीं देखा उसे बहुत hi प्यारा है उसकी नीली आंखे और जब प्यार से तुतलाते हुए वो मुझे मामी की जगह मम्मी कहता था न तो ऐसा लगता था की किसी ने कानो में मिश्री घोल दी हो

साक्षी- ाचा तो फिर इतने सालो में कभी उसका जिक्र क्यों नई हुआ

सौभा- बाबू जी के कारण साक्षी वो बेचारा तो बचपन में hi लावारिस सा हो गया था माँ बाप के जाने के बाद पैर आज इन्होने कहा की वो जा रहे है तो उसकी वही छवि आँखों में उतर आयी चल जल्दी से खाना लगा बाबू जी आ गए होंगे

साक्षी- ओह्ह माफ़ कर न दीदी मुझे तो कुछ पता hi नहीं था

क्या नहीं पता था मेरी छोटी भाभी को( राधा रसोई घर में आते हुए बोली)

साक्षी- वो दीदी राम के बारे में बता रही थी राधा दीदी

राधा- उस बेचारे के बारे में क्या बताना भाभी पता नहीं मेरा बच्चा कैसा होगा बाबू जी के वाडे ने सबसे दूर कर दिया उसे अब तो कोई उम्मीद hi नहीं की उसे देख भी पाएंगे या नहीं ऊपर से सुन ने में आया है की इस बार उसे उन जालिमो ने मौत की खुलती में उतार दिया है भगवान् रक्षा करे उसकी ( उदास होते हुए)

सौभा- मेरी बच्ची दिल छोटा मत कर तेरे भैया और बाबू जी जा रहे है उसे लेने फिर जी भर कर देखती रहना

क्या सच में ये कैसे हुए ( खुश होते हुए)

इंसान को उम्मीद दे दो तो वो मौत से भी लड़ जाए यही हाल यहाँ सब का था जिन्हे सुखबीर ने उम्मीद दे दी थी की वो राम को ले आएगा पैर क्या सच में ला पायेगा
 
अपडेट -37

रंपुरा जो हलकी फुलकी खुशिया दिख रही थी वो ये बात बया करती थी की राह तो वो भी तकते रहे है अपने राम की इसलिए जब आज हल्का सा इशारा मिला तो पूरा घर खुशियों से झूम उठा जिसकी खबर घर की तीन देवियो को भी हुई जो इस बात से अनजान की आखिर क्या वजह है जो सब के चेहरे इतने खिले हुए ख़ास कर उनके पापा सुखबीर जी

रूही- क्या बात है माँ आज पापा बहुत खुश नज़र आ रहे है ऐसा क्या हो गया

सोभा- तेरे दादा जी राम को लाने के लिए मान गए है इसलिए कल ये दोनों उनके गाओं जा रहे है उसे लाने

रूही- पैर क्यों माँ क्या जरुरत है उसे यहाँ लाने की जब पहले hi आप सब उसके साथ इतना कुछ कर चुके हो अब तो वैसे भी वो बेचारा जैसे तैसे अपने नाज़ुक दिनों को काट चूका है

सुखबीर- ये क्या कह रही हो रूही और तुम्हे दिक्कत क्या है उसके आने से आखिर वो तुम्हारी सुमन बुआ की आखिरी निसानी है

रूही - सच में पापा आपको लगता है मुझे दिक्कत है उस से बहुत खूब अरे आप लोगो ने चीन था उसे मेरी गॉड से वो तो मेरा खिलौना था मेरा छोटू था उस वक़्त में छोटी थी सो चुप रह गयी पैर अब आप लोग दोबारा उसकी ज़िन्दगी से खेले न तो में चुप नहीं रहूंगी

सुखबीर- दिमाग ख़राब हो गया है इस लड़की का बड़ो से बात कर ने की तमीज तक भूल गयी है जो कुछ भी जाने बिना बोले जा रही है उस वक़्त भी में खिलाफ था उस मासूम को उन लोगो के साथ भेज ने लिए समझी और आज भी खिलाफ हु पैर अभी सबसे पहले उसे बचाना है नहीं तो वो उसे उस अखाड़े की भेंट चढ़ा देंगे खुलती के नाम पैर

रूही- अगर ये बात है तो में भी चलूंगी आपके साथ ताकि इस बार आप लोग कोई झूटी सच्ची कहानी न सुना पाओ

सुखबीर- ये बात अपने दादा जी पूछो वही जाने ले जाना है या नहीं

बुलबुल और स्नेहा वही थे उन्हें जायदा तो कुछ समझ नहीं आया पैर ये जरूर समझ गयी थी की कोई ख़ास है जिसके लिए उसकी दीदी लड़ रही है इसलिए वो भी बात चित का हिस्सा बनते हुए बोली

बुलबुल- माँ पापा आखिर कौन है जिसके लिए घर में जुंग छिड़ी हुई है

सोभा- तेरा बड़ा और रूही का छोटा भाई राम तेरी सुमन बुआ का लड़का

स्नेहा- है ये कोण है जिसका कभी जिक्र तक न सुना और आज उसे लाने के लिए लड़ाई हो रही है

सोभा- वो जनम से hi बदनसीब है बेचारा अब शायद उसका भाग्य बदल जाए इसलिए आखिरी कोशिश कर रहे है

बुलबुल- ऐसा है तो फिर हम सब चलेंगे दादा जी कहा हो आप

सुखबीर- अब पिता जी फास गए सोभा अब तो तुम सब तैयारी करो क्युकी ये दोनों शैतान नहीं रुक ने वाली अब

वही राम अपनी चची संध्या के कमरे में था

संध्या- हम्म मिल गयी फुर्सत जनाब को अपनी चची के पास आने की

राम- आप तो सब जानते हो फिर भी ऐसी बातें करती हो आप को पता है न में आप से बहुत प्यार करता हु

संध्या- आठ क्या कर रहे हो कोई आ जायेगा राम सष्ठ

राम- कोई नहीं आएगा उफ्फ्फ ये तो पहले से भी टाइट लग रहे है चची( संध्या की गोलाइयों को मसलते हुए)

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संध्या- आअह्ह्ह प्ल्ज़ आराम से ना ऊऊफफफ में कही भागी थोड़ी जा रही हु ूउम्म्म करो ऐसे hi आअह्ह्ह कितना सकूं मिल रहा है उफ्फ्फ दबाओ राम अपनी संध्या के दूध दबाओ बहुत तंग करते है यी आअह्ह्ह्ह आईसीए होई माआआआ में पागल हो जाउंगी

राम- कुछ नहीं होगा आप को आज आपको बहुत प्यार दूंगा बस पहले इन्हे बेपर्दा तो कर ने दो बहुत दिनों से इनके दरसन नहीं हुए उफ्फ्फ्फ़ आपकी ये

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दूध सी गोरी काय चची उम्मंहहहह

संध्या- आअह्ह्ह सब तुम्हारा hi है मा आराम से ना मेरी जान

राम- आराम से करूँगा तो ये बुरा मान जाएँगी और में भी मुझे बस प्यार कर ने दो वैसे भी बहुत दिन हो गए सशहज देखो कैसे मचल रही है हाथो में आते hi

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संध्या- ऊऊफफफफ में पागल हो जाउंगी मत तड़पाओ अपनी जान को ाःह

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ह राम नहीं ऊऊफफफफ ऊँगली नहीं रम्म माआ आअह्ह्ह क्या कर देते हो तुम आअह्ह्ह्ह मुझसे नहीं सहा जा रहा राम आह्ह्ह्हह

राम के हाथो की छुअन संध्या को पागल करती जा रही थी जिस में डोबी वो कब नंगी हुई उसे पता भी न चला उसके हाथ तो बस राम के सर को दबाये जा रहे जैसे कह रही हो की खा जाओ इस निगोड़ी छूट को

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संध्या- आआह्ह्ह्ह मायआ मीयेंन गयीईई राम मुझे कुछ हो रहा है ऊऊफफफफफफ माहिई स्स्स्सस्ठ्ठ आआह्ह्ह्ह आईईसीई हठीीी ऊऊफफफफफफ कहा जाऊओऊ नाआआ aaaahhhhhhhhhhhh आअह्ह्ह आआह्ह्हह्ह्ह्ह रामममममम मीटी गयीइइइइइइइइइ aaaaahhhhhhhhhh

संध्या झाड़ चुकी थी पैर उसे पता था असली खेल तो अभी बाकि है यही

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सोच कर उसकी छूट भी फड़फड़ा रही थी जिसे देख राम बोलै

राम- ये तो अभी सी ठिठुरने लगी चची आगे क्या होगा

संध्या - मुझे नहीं पता गन्दा कही का खुद सब करता है और फिर मुझे छेड़ता है जा मुझे कुछ नहीं कर न अब

राम- ऐसे कैसे इधर आओ

कहते hi संध्या की छूट पैर लुंड लगते hi एक झटके में पूरा लुंड अंदर घुसा दिया

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संध्या- आआह्ह्ह्ह मा मार गयी री तुझे तो गाली भी नहीं सकती ऊऊफफफफफ आआअह्ह्ह्हह आराम सीए ना आअह्ह्ह्हह मार डालेगा री मायआ फैट गेयीईइ आआह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह राम ारांम सीए मेरी जाएं आआह्ह्ह्हह्ह

राम- आराम से करूँगा तो दोनों प्यासे रह जायेंगे चची अभी बस चुदाई का मजा लो आआह्ह्ह देखो कैसे

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सरपट दौड़ रहा है आअह्ह्ह्ह कितना मजा आ रहा है( संध्या की गर्दन दबाये जोर के झटके मारता हुआ )

संध्या- प्यासे का तो पता नहीं आअह्ह्ह्ह पैर में मर जरूर जाउंगी ऐसी आआह्ह्ह्हह मम्माआ राममम मेरी जान निकल जाएगीइ आअह्ह्ह्ह रुकक्क जाआआ मायआ( राम को अपनी

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बाहो में जकड़ते हुए)

आआह्ह्ह्ह मारर्र गयीईई रईईए आआह्ह्ह्ह मुझे कुछ हो रहा हीी aaaahhhhhhhhhhh

पूरा ठप्प ठप्प की आवाज़ से गूंज़ज़ज़ रहा था जिस में तृप्त होती संध्या की आवाज़ धीमी होती जा रही थी तो वही राम अपने अंतिम पड़ाव पैर था और जोर जोर से संध्या को छोड़ते हुए बड़बड़ाये जाए रहा था

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राम- बूस्स्स्स छाछीइ आया में भी आआह्ह्ह्हह्ह आअह्ह्ह्ह क्या छूट है तुम्हारिई कसम से पूरा कास के जाता हैई

संध्या जो दूसरी बार झाड़ ने की कगार पैर थी वो बस सांसें ले रही थी जान तो जैसे उस में बची hi नहीं थी

संध्या- ग्घूउउउउ आआह्ह्ह्हहजसससससष्ठ ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह mmmmmmaaaaaaaaaa बाएच्हाऊऊऊऊओ aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh

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कुछ देर बाद दोनों तेज़ तेज़ हाफ रहे थे तो राम संध्या की छूट पैर लुंड हिला रहा जिस से एक मिट्ठी तीस उठा रही थी संध्या की जिस्म में

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राम- ाःह कैसा लगा चची जान

संध्या- कुछ मत बोल बस सू जा ऐसे hi ( राम को बाहो में भर आंखे बंद करते हुए बोली)❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️
 
अपडेट 38

राम सो कर उठा तो वो अकेला था बीएड पैर संध्या निचे जा चुकी थी तो राम भी उठा और निचे चल दिया फ्रेश हो कर जहा सभी मौजूद थे नास्ते की टेबल पैर तो वो भी वही पीहू को हुग करके खड़ा हो गया

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काया- क्या हुआ खड़ा क्यों है नास्ता कर बच्चे आ बैठ यहाँ आ कर

ये बच्चा तुम सब को मरवाएगा एक दिन देख लेना ( पीछे से आती हुई मीणा बोली)

काय- तू फिर शुरू हो गयी आखिर तुझे दिक्कत क्या है जाती क्यों नहीं यहाँ से

मीणा- में चली जाउंगी दीदी पैर तुम भी तो सोचो कल ये हार गया तो क्या होगा वो ठाकुर तुम्हारी बच्चियों को नंगी कर के घुमायेगा पुरे गाओं में देख लेना अभी वक़्त है इस मनहूस को निकाल दो इस gh...aaahhhh


दीदी के बहिन इसलिए कुछ कहा नहीं तो कुछ भी बोलेगी निकल यहाँ से( ये शांत सी दिख ने वाली संध्या थी जिसका ये रूप आज तक किसी ने नहीं देखा था)

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मीणा- आठ छोड़ संध्या वर्ण मुझसे बुरा कोई नहीं होगा

संध्या- तुझसे बुरा कोई हो भी नहीं सकता कितने सालो बाद घर में खुशिया आयी है और तू है की हर वक़्त अपशुगन बक्ति रहती खबरदार अगर मेरे राम के खिलाफ कुछ भी कहा तो

मीणा- दीदी आप क्या वह चुप चाप कड़ी अपनी बहिन की बेजत्ती करवा रही हो

काय- तू ऐसी लायक है काश ये मैंने किया होता

किशोर- संध्या बहु छोड़ दो उसे और नास्ता करो सुबह सुबह ये कलेश ाचा नहीं है

किशोर की बात मान कर संध्या और मीणा दोनों वह से चली गयी

राम- अब आप क्या सोच ने लगी बड़ी माँ

काय- मुझे माफ़ कर दे राम मेरी वजह से तुझे ये सब सुन न पड़ा काश उस वक़्त इस की न सुनी होती तो( रट हुए)

राम- सष्ठ बिलकुल भी नहीं रोना वर्ण में गुस्सा हो जाऊंगा आप मेरी प्यारी बड़ी माँ हो समझी आप

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काया- नहीं मेरे लाल तू नाराज़ मत होना वर्ण तेरी बड़ी माँ भी .....

राम- गन्दी बात नहीं करते वैसे भी आप रट हुए बिलकुल भी अछि नहीं लगती हां बिना कपड़ो के एक दम मस्त लगती हो( धीरे से कान में बोलते हुए)

काय- हैट गन्दा कही का चल नास्ता कर

राम- हम्म ये हुई न बात

सब नास्ता कर के उठे थे की वीरा अंदर आते हुए बोलै

वीरा- किशोर बाबू आज तो कमाल हो गया है सच में

किशोर- ऐसा क्या हो गया वीरा

वीरा- वो बाबू गाओं वालो ने गाओं को बिलकुल उसी तरह सजाया है जैसे अशोक बाबू के समय सजाते थे जब वो खुलती लड़ते थे चारो तरफ जोर शोर से तैयारी चल रही है कल के मेले और खुश्ती की सच में बहुत सालो बाद इतना खुशनुमा माहोल देख कर आया हु

किशोर- ये तो सच में ख़ुशी की बात है की गाओं वाले भी साथ है

वीरा- वो तो हो ने hi थे न आखिर राम हमारे अशोक का खून जो है

राम- आप लोग अपना ध्यान घर की सुरक्षा पैर रखना वीरा काका उस में कोई चूक नहीं होनी चाहिए

किशोर- सही का राम ने और जश्न कल रात होगा वीरा

वीरा- जी बिलकुल आप बेफिक्र रहे हवेली पूरी तरह से सुरक्षित है और अखाडा भी

राम- ये हुई न बात अब आईये और नास्ता कीजिये

वीरा- में कर लूंगा अभी बहार सबके साथ

राम- आप यहाँ नास्ता करेंगे परिवार संग समझे आप और अब से आप हवेली में रहेंगे बहार नहीं

वीरा- पैर छोटे मालिक में यहाँ कैसे नहीं नहीं में आप का नौकर हु आपकी बराबरी बिलकुल नहीं

राम- आप मेरे पिता जी के साथ साया बन कर रहे थे तो आप मेरे लिए क्या है ये आप सोच भी नहीं सकते

वीरा- में आप के प्यार और इज़्ज़त के लिए आभारी हु पैर वो मेरा फ़र्ज़ था जिसकी मुझे अछि तन्खा मिलती थी छोटे मालिक

राम- अब मान भी जाओ न ताऊ जी अपने भतीजे की बात

राम के मुँह से ताऊ सुनकर वीरा की आँखे भर आयी और चुप चाप नास्ते की टेबल पैर बैठ गया

राम- ये हुई न बात बड़ी माँ ताऊ जी को नास्ता दो वो भी गरमा गरम

कल वो पिल्ला बच न नहीं चाहिए अशरफ हमारा मान सम्मान सब दो पैर लगा हुआ है ( बंद कमरे अशरफ को समझते हुए बोलै वीरभान(

अशरफ- आप बेफिक्र रहिये कल वो इस दुनिया को अलविदा कहेगा अपने बाप की तरह

वीरभान- अगर ऐसा हुआ न असरफ तो तुझे सुरीली दूंगा जश्न मानाने के लिए

अशरफ- नहीं ठाकुर मुझे कुछ नहीं चाहिए मुझे बस उसकी आँखों में खोफ्फ़ देख न है जब में उसे मरूंगा और यही मेरा इनाम होगा जो में खुद को दूंगा

वीरभान- शाबाश हमें यही उम्मीद थी तुमसे तुम सच में हमारे वफादार नौकर हो जो मालिक के लिए जान देने से भी पीछे नहीं हैट ता

वही करम सिंह का काफिला तेज़ी से चलता हुआ राम की तरफ आ रहा था जब की राम अपनी पीहू की बाहो में था जहा पीहू उसके ऊपर छड़ी हुई अपने हिस्सा का प्यार उसके होठो को चूस कर वसूल कर रही थी

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दोनों एक दूसरे में समां जाने को बेताब थे पैर वक़्त सही नहीं इसलिए जितना हो सकता उतने में खुश थे

कुछ देर यही होठो को चूस ने के बाद पीहू ने छोटी सी किश और की राम के होठो पैर प्यार से देखते हुए बोली

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पीहू- अपना वादा याद रखना राम तू खुद को कुछ नहीं होने देगा वर्ण में भी अपनी जान दे दूंगी याद रखना

राम- मुझे सब याद है आप टेंशन न लो मुझे कुछ नहीं होगा ok अब में चलता हु आप भी निचे आ जाओ

पीहू- हम्म तुम चलो में आती हु चेंज कर के

राम- क्यों गीली हो गयी क्या आप😜

पीहू- हे हे वैरी फनी बदमाश कही जब हाथ इधर उधर लगाएगा तो गीली तो होउंगी न अब जा

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पीहू को हस्ता छोड़ कर राम निचे hi चला गया जहा जाते hi वो भी चौक गया
 
अपडेट-39

राम नीचे आया तो इतने लोगो को एक साथ देख कर चौक गया और हैरानी से उन सब को देखते हुए बोलै

राम- आप सब कौन है और किस से मिलना है

किशोर- ये तुम्हारे ननिहाल वाले है राम तुमसे मिलने आये

राम- ाचा बड़ी जल्दी याद आयी मेरी आप सबको

करम सिंह- तुम्हारा गुस्सा जायज़ है मेरे बच्चे पैर इस में ें सब का कोई दोष नहीं ये हमारे वचन के कारण चाहते हुए भी तुमसे मिल नहीं सके

राम- तो आज कहा गया आप का वचन अंकल जी

करम सिंह- जब इन्हे पता चला की ये तुम खुलती लड़ने वाले हो तो ये खुद को रोक नहीं पाए और जिद कर ने लगे इसलिए मुझे भी इनकी बात मान नई पड़ी और तुम्हे लेने चला आया

किशोर- इनकी कोई गलती नहीं है तुम्हारा कसूरवार में हु में hi तुम्हे जबरदस्ती यहाँ लाया था करम सिंह जी वचन लेकर

कोई और कुछ कहता की तभी रूही बिच में बोल पड़ी

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रूही- बोल न छोटू और कुछ बोल बहुत ाचा लग रहा है तू बोलता हुआ मेरे तो कान तरस गया थे तेरी आवाज़ सुन ने के लिए पैर सिर्फ एक बात जरूर बता मुझे क्या तू जानता है में कोण हु

रूही की बात सुनकर राम एक टूक रूही देखता रहा और फिर बोलै

राम- आप मेरी रूही दीदी हो जो बिछड़ते वक़्त मेरा हाथ नहीं छोड़ रही थी

इतना सुनते hi रूही खुद को नहीं पायी और दौड़ कर राम को गले से लगा लिया

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रूही- मेरा दिल कह रहा था की तू मुझे पहचान लेगा चाहे कितनी भी दुरी रही हो

राम- आप को क्या लगता में ने आपको याद नहीं किया एक आप hi तो थी जो दिन भर मुझे हसती रहती थी और अब देखो इतनी बड़ी हो कर कैसे बच्चो की तरह रो रही हो

रूही- ये तो ख़ुशी के आंसू है तू बता कैसा है तू

हम तो कोई देख भी नहीं रहा जब की सब को लाने वाले hi हम क्यों स्नेहा( बुलबुल जो सब देख रही थी आखिर बोल hi पड़ी)

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रूही- आजा में मिलवाती हु तुझे वर्ण बोलती रहेगी राम ये तुम्हारी छोटी बहिन बुलबुल है और वो स्नेहा साक्षी चची की बेटी

राम ने बुलबुल की तरफ देखा जो साद सा मुँह बनाये कड़ी थी तो उसने बुलबुल को गॉड में उठा लिया जिस से बुलबुल भी मुस्कुराने लगी

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राम- सॉरी मेरी छोटी पारी मुझे पता नहीं आप भी आयी हो

बुलबुल- आए गिर जाउंगी भैया प्ल्ज़ निचे उतरो

स्नेहा - भैया में भी हु

राम- हम्म 2ंद छोटी पारी आपका भी वेलकम है और छोटी मामी जी आपका भी

राम के मुँह से छोटी मामी सुनकर साक्षी कुछ नहीं बोली बस राम को एक टूक निहार ने लगी

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सब को देख लिया सबको मिल लिया बस में hi नज़र नहीं आयी न तुझे आखिर में तेरी लगती hi क्या हु( भीगी आखो से राम को देखते हुए सोभा बोली)

राम- ऐसा नहीं है आप तो मेरी प्यारी सी मम्मी हो न चुप हो जाओ( सोभा को गले लगते हुए बोलै)

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सोभा- कितना रुलाया है तूने मुझे और रूही को एक बार भी वापस आ कर नहीं देखा की हम जी रहे है या मर गए

राम- आपको लगता है में ऐसा कर सकता हु मम्मी आपको याद पिछली दिवाली पैर आप को दरवाज़े पैर मिठाई का डब्बा मिला था जिस लेकर आप इधर उधर देख रही थी और फिर उसे वही दीवार पैर छोड़ कर चली गयी थी....

सोभा- वो तूने रखा था तो मिला क्यों नहीं मुझसे क्या इतनी नफरत कर ने लगा था

राम- वो तो में कभी भी नहीं कर सकता आप से बस हिम्मत नहीं कर पाया

सोभा- मेरा कितना बड़ा और हैंडसम हो गया है किसी की नज़र न लगे

दोनों अपनी बातो में ये भी भूल गए की और लोग भी है जो इन्हे hi देख रहे है ध्यान जब गया जब सुखबीर की आवाज़ कानो में पड़ी

सुखबीर- देखो किशोर में साफ़ और सीधी बात कहूंगा हम राम को वापस लेने आये है क्युकी हम नहीं चाहते की मेरी बहिन की आखिरी निसानी भी आप लोगो की दुश्मनी की भेंट चढ़ जाए

राम- मां जी कोई कुछ कहे उस से पहले मेरी बात सुन लीजिये ें बातो से बड़े पापा या किसी का भी कोई लेना देना नहीं है ये मेरे पापा की इच्छा थी जिस में खुद पूरी कर न चाहता हु

सुखबीर- पैर मेरे बच्चे वो लोग मार देंगे तुझे जैसे तेरे पापा को मारा था धोके से असरफ ने

राम की ये सुनते hi आँखे लाल हो गयी पैर फिर भी खुद को कण्ट्रोल करते हुए बोलै

राम- आप को कैसे पता मां जी ये बात की असरफ ने hi पापा को मारा था

सुखबीर- क्युकी अशोक ने मुझे वह मिलने बुलाया था और जब में वह जा रहा था तो रस्ते में मैंने असरफ को hi देखा था उस रस्ते पैर पर में जल्दी में था तो जायदा ध्यान नहीं दिया और आगे बढ़ गया जहा मेरा अशोक और सुमन आखिरी साँसे गईं रहे थे क्यों किशोर तुम ने बताया नहीं राम को( किशोर की तरफ देखते हुए)

राम- क्या ये सच है बड़े पापा की आप जानते थे

किशोर - हां में जानता था राम और में तुम्हे खुलती वाले दिन बताने वाला था

राम- पैर आप ने पहले क्यों नहीं बताया बड़े पापा

किशोर- क्युकी में नहीं चाहता था की उसकी मौत गुमनाम हो क्युकी में चाहता हु की सारा गाओं उस दरिंदे को तड़पता हुआ मरता देखे

राम- अगर आप यही चाहते है तो कल यही होगा बड़े पापा कल पूरा गाओं उसकी चीखे सुनेगा उसके बाद उस ठाकुर की

सुखबीर- ऐसा मत कर राम छोड़ ये सब और हमारे साथ चल वह खतरा है मेरे बच्चे तेरा ये मां अब और दुःख नहीं झेल पायेगा

राम- ये युद्ध तो आप को अपनी आँखों से देख न है मां जी आखिर आप की भी इच्छा होगी न की जिस ने आपकी बहिन और मेरी माँ को मारा वो भी वैसे hi तड़पते हुए मरे

सुखबीर- हां है मेरे बेटे पैर तुझे डाव पैर लगा कर नहीं अगर खुलती hi आखिरी हल है तो कल तू नहीं तेरा मां लड़ेगा जो भी होगा मुझे होगा पैर तू नहीं

राम- ये आप का प्यार है मां जो दर रहा है कल आप के hi कंधो पैर बैठ कर जीत का परचम लहराएगा आपका राम और उसके बाद दोनों मां भांजे जश्न मनाएंगे क्यों नाना जी क्या कहते हो

राम के मुँह से नाना सुनकर करम सिंह भावुक हो गए और राम को गले लगते हुए बोले

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करम सिंह- तेरे मुँह से नाना सुन लिया मेरा जीना सफल हो गया अब चाहे ऊपर वाला उठा भी ले तो कोई शिकायत नहीं मुझे

राम- ऐसे कैसे नाना जी अभी तो मस्ती का टाइम आया है और आप अभी से ऐसी बाते कर रहे है ू बड़ी माँ जरा सब के लिए गरमा गरम चाय तो लाओ

पूरा परिवार हॉल में ख़ुशी ख़ुशी बातो में मसरूफ थे की तभी वह मीणा आ गयी जिसे देख कर राम खड़ा हुआ और मीणा को गले लगा कर उसके कान में बोलै

राम- आज कुछ भी गलत बोलै तो में तेरा वो हाल करूँगा की तुझे पछतावा होगा की तू यहाँ आयी hi क्यों

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मीणा- में नहीं डर्टी समझा पैर हां तूने जो अधूरा छोड़ा था अगर वो पूरा कर ने का वादा करता है तो आज क्या कभी भी तेरे खिलाफ नहीं बोलूंगी ये मेरा वादा है( राम की तरह राम के कान में मुस्कराते हुए बोली )

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राम- हम्म ठीक है आज रात तेरी साड़ी खुजली मिटा दूंगा

मीणा- ये हुई न बात आज चैन मिलेगा मुझे

राम- जरूर बहुत सकूं दूंगा तुझे आज आज तेरे तीनो दरवाज़े टूट जायेंगे मेरी मीणा मौसी

राम क्या बाते हो रही है भाई हमें भी बता दो ( किशोर दोनों को देखते हुए बोलै)

मीणा- कुछ नहीं जीजा जी मेरी कुछ चीज़ राम के पास वही मांग रही थी( राम से अलग हो कर किशोर को देखते हुए बोली)

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काय- दे देगा वो बा शर्त तू संभल पाए उसे( दोहरे ार्थ में बोलते हुए)

मीणा- आप बेफिक्र रहो दीदी में संभल लुंगी

काय- हां पता है मुझे और तुम अपनी पैकिंग भी कर लेना कल शाम को वीरा तुझे छोड़ आएगा खुलती के बाद

मीणा- कल क्यों

संध्या- वो इसलिए की जीजा जी भी परेशान होंगे आप के लिए इतने दिन जो हो गए क्यों दीदी( काय की तरफ देख कर)

काय- हम्म सही कह रही है संध्या चलो अब सब नास्ता करो राम तुम मेरे साथ आओ जरा
 
अपडेट -40

राम माया के साथ कमरे में जाते hi काय को दीवार से लगा उसकी आँखों में देखते हुए बोलै

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राम- क्या बात है बड़ी माँ इतने लोग घर में है और आप मुझे कमरे में ले कर आ गयी

काय- हैट बदमाश कही का हर वक़्त तंग करता रहता है

राम- जिसकी इतनी सेक्सी माँ हो तो वो तंग तो करेगा hi न

काय- बड़ा आया तंग करने वाला अब मुझे देखेगा भी नहीं नीचे नयी हसीनाएं जो आ गयी है और वो साक्षी कैसे घर रही थी सब देखा मैंने

राम- अब किसी को देख ने से तो नहीं रोक सकता न बड़ी माँ

काय- रहने दे जानती हु तुझे पैर अभी वो सब छोड़ और उस मीणा को लेकर जा खेत वाले घर में और आज उसकी साड़ी अकड़ निकाल कर hi वापस लाना कल वो मुझे यहाँ नहीं दिख नई चाहिए

राम- आप फ़िक्र न करो उसका इलाज़ कर के hi वापस आऊंगा पैर उस से पहले मुँह तो मीठा कर लू( काय के होठो को चूमते हुए )

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काय- क्यों तंग कर रहा ये मिठाई की दूकान पूरी की पूरी तेरी है जब दिल चाहे मुँह मीठा कर लियो पैर पहले उसे लेकर जा मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है उस पैर

राम- ठीक है में जाता हु और उसे सबक शिखा कर hi वापस लाऊंगा

वही राम के जाते hi साक्षी बाथरूम में चली गयी थी फ्रेश होने का बोल कर पैर असल बात तो ये थी की वो राम की सुंदरता में खो सी गयी ऊपर से 6 महीने से जायदा चूड़े हुए हो गए थे

इसलिए बाथरूम नंगी कड़ी अपनी छूट की गर्मी को शांत कर ने में लगी हुई थी पैर बेचैनी काम होने की बजाये और बढ़ती जा रही थी

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जिसका इलाज़ जिसके पास था वो घर से दूर खेतो में मीणा के साथ खड़ा था जिसे देख कर मीणा बोली

मीणा- अब क्या खड़े hi रहोगे कुछ करोगे नहीं राम

राम - करूँगा पहले इसे चूस तो सही

मीणा- वो तो में करुँगी hi पैर क्या तेरा दिल नहीं है मेरी जवानी के साथ खेल ने का हम्म( नंगी चूचियों को दिखते हुए)

राम- जवान और तू कहा से हर जगह से लटकी हुई है तुझे छोड़ रहा हु यही बहुत है समझी

मीणा- तू मेरी तुहीं कर रहा है राम पैर फिर भी में तुझे माफ़ करती हु क्युकी मीणा आज तुझे इतना मजा देगी की तू दीवाना हो जायेगा मीणा का( नंगी होकर राम का लुंड चूसते हुए )

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राम- अचे से चूस न रंडी या तुझे चूस न भी सीखना पड़ेगा हम्म

मीणा कुछ न बोली बस लुंड को धीरे-2 चुस्ती रही और फिर लुंड पैर प्यार जीभ फिरते हुए बोली

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मीणा- बहुत मस्त लुंड है तेरा सच में बहुत मजा आने वाला आज

राम- मजा तो ौएगा hi मेरी कुटिया पैर उस से पहले तुझे लुंड चूस न सीखा न पड़ेगा

इतना कहते hi मीणा का सर पकड़ा और लुंड को तेज़ी से अंदर बहार करने लगा जिस से मीणा के मुस्कुराते चेहरे पैर दर्द चालक ने लगा और वो खुद को छुड़ाने की कोशिश कर ने लगी पैर की मजबूत पकड़ के आगे बेचारी कुछ न कर पायी उसका पूरा मुँह थूक और लार से भर चूका था जो बह कर बहार आ रहा था जिसे देख कर राम मुस्कुराते हुए बोलै

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राम- वाह मेरी रंडी मौसी क्या लुंड चूस रही है मजा आ गया चल अब तेरी छूट की कुटाई करते है देखे तो सही कितनी जवानी बाकी है

मीणा- सांस तो लेने दे मुझे तूने तो मार hi डाला था उउइइइइ मायआ( लुंड का शीरा छूट में महसूस होते hi चीख निकल गयी)

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राम- अभी से चीख ने लगी तूने तो बहुत से लुंड खाये है रंडी मौसी

मीणा- देख बार बार रंडी मत बोल ऊह्ह्ह्ह आराम सी आअह्ह्ह्हह तेरा लुंड नहीं ाअय्यियीईइई मा मर गयीईइ आराम से नहीं दाल सकता था क्या aaaahhhhhhhhhh रुक्क जाए नाहा ममममनाआआआ मत कर आईस्रीई जहां निकल रही हीी aaaaahhhhhhhhhh मममममअअअअ कहा फास गयी meeeeeeeeee
फैट जाएगीइइइइ स्स्स्सह्ह्हह्ह रुकक्क जाए राम हाथ जोड़ती हु तेरे aaaahhhhhhhhhhh aaaahhhhhhhhhhhhhh

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राम- अभी खेल शुरू हुआ है मेरी रंडी मौसी आज देख तुझी कितना मजा दूंगा तू भी याद करीजीई हहह हहहह ( जोर जोर से मीणा की छूट में धसकके लगता हुआ)

मीणा- आअह्ह्ह्ह छोड़ दिए राम मुझे नहीं करवानी ऐसे जानवरो की तरह आअह्ह्ह्हह मम्माआआ मेरा निकल ने वाला है राम थोड़ा धीरी आअह्ह्ह्ह नाहठियई और तेज़ नहीं रईईए mmmmnaaaaaaaaaaaaahbhhhhhhhhh आआआहभहहहह

राम- तू आज बहुत झाड़ेगी मेरी कुटिया और में तुझे ऐसे झड़ते हुए hi और तेज़ तेज़ छोडूंगा ( रोटी हुई मीणा के बाल पकड़ कर तेज़ धक्के लगते हुए)

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मीणा की हालत खराब हो चुकी थी उसे अब दर लग रहा था और पछतावा भी हो रहा था की आखिर क्यों वो घर से दूर चुद ने आयी घर पैर होती तो काम से काम कोई चीख सुन कर उसे बचा तो लेता

राम- क्या हुआ मजा नहीं आ रहा क्या मेरी कुटिया को हम्म्म मनहूस के साथ

मीणा- आअह्ह्ह नही राम मुझसे गलती हो गयीईइ आआअह्ह्ह मुझे छोड़ दी में आज hi चली जौंगीय आअह्ह्ह्हह मम्माआ बक्श दी मुझे ऊऊओह्ह्ह्हह मम्माआ म्मीीरररररर गाआयीइइइइइइइ reeeeeeeeeeeee( मीणा की हालत इतनी ख़राब हो गेज की उसका मूट निकक गया पैर राम के धक्के चालू रहे )

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राम- तू तो मूट ने लगी रंडी मौसी कोई अभी तो हुगेगी भी जब लुंड तेरी गांड में जाएगा क्यों

मीणा- आअह्ह्ह मम्मा नाहीइ राम गांड मी नहीं आअह्ह्ह मत कर नाहा प्ल्ज़ आआह्ह्ह्ह देख में हाथ जोड़ती हुऊ नाहीइइइइइइइ मममममअअअअअअअ मर गायीइइइइइइइइ मेंननं कुट्टी मेरी गांड फाड़ दी कमीने नीई( लुंड गांड में घुसते hi जोर चीखते हुए)

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Ram-cheekh और जोर से चीख बहुत सकूं मिल रहा है तेरी चीख सुन कर ये चीखे भी बड़ा सकूं देती है न मीणा डार्लिंग कभी तुझे दे रही थी जब मेरी माँ चीख रही थी आज मुझे दे रही है क्यों सच कहा न तू वही थी न जब मेरी माँ दर्द से मरते हुए चीख रही थी

मीणा की ये सुनते hi आवाज़ बंद हो गयी पैर जल्द hi खुद को नार्मल करते हुए बोली

मीणा- ये झूट है में में वह नहीं थी राम आअह्ह्ह ममअअअ रेहम कर दे बहुत दर्द हो रहा है आआअह्ह्ह्हह न

राम- जब तक सच नहीं बोलेगी ऐसे hi दर्द मिलता रहेगा तुझे साली कुटिया बोल थी न वही

मीणा के दर्द की इस वक़्त कोई सीमा नहीं थी जो पल पल और बढ़ता जा रहा था जिसे सहना जब असहनीय हो गया तो राम के तेज़ धक्के खाती हुई रट हुए बोली

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मीणा- मुझे माफ़ करदे राम में थी वह पैर मैंने कुछ नहीं किया मुझे नहीं पता था वो मार देगा आअह्ह्ह्ह अब मुझे छोड़ दे राम

राम- तुझे सब पता था साली रांड पैर तू फ़िक्र मत कर में तुझे नहीं मरूंगा पैर हां आज तेरी वो हालत करूँगा की तू मुझे याद कर ने से भी डरेगी चुद ने का शोक है न तुझे तू चुद रट हुए hi चुद( तेज़ धक्के मीणा की गांड में लगते हुए बोलै)

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मीणा- नाहीइ रूककक जाआ बस्सस ऑर्डर जान नहीं है मुझ में में कसम खाती हु में चली जाउंगी और फिर कभी तेरे सामने तक नहीं आउंगी बस मुझे बक्श दे आआ मम्माआआ

कुछ देर और यही मीणा की गांड कुटाई कर ने के बाद राम मीणा की गांड में hi झड़ने के बाद लुंड को बहार खींच लिया जिसके उसका गाढ़ा वीर्य भी बहार की और बह निकला पैर मीणा की हिम्मत अभी भी उठ ने लायक नहीं थी इसलिए वो ऐसे hi पड़ी रही

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राम-- और चुद न है या फिर दिल भर गया रंडी मौसी

मीणा कुछ न बोली बस कड़ी हो गयी जिसके खड़े होते राम का और उसका पानी उसकी जांघो से बहने लगा

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राम- क्या हुआ आवाज़ भी फैट गयी क्या

मीणा- तुम जाओ राम अब तुम्हे मेरी सकल कभी नहीं दिखेगी ये वादा है मेरा और कल अपना ध्यान रखना वो कुछ भी कर सकते है अभी तुम नहीं जानते

राम- वो में देख लूंगा और शुक्रिया सलाह देने के लिए अब में चलता हु

राम को जाता देख मीणा ने अपने कपडे पहने और जंगल के रस्ते hi जंगल में ओझल हो गयी मैं में बुदबुदाते हुए( मुझे ज़िंदा छोड़ ने के लिए शुक्रिया राम दर्द hi सही पैर तुम्हे पा कर hi जा रही हु )

वही राम घर पंहुचा तो काय ने पूछा

काय- वो कहा है

राम- वो अब कभी नहीं दिखेगी बड़ी माँ

काय- कही तूने उसे मार तो माहि दिया

राम- इंसान हु जल्लाद नहीं चलो खाना खाते है

काय हम्म ठीक है पैर पहले अपनी साक्षी मामी को बुला ला तेरे रूम में है

काय की बात मान कर राम अपने कमरे की तरफ चल दिया जहा राम की मामी साक्षी 2 घंटे ठन्डे पानी में रह ने के बाद टॉवल लपेट कर बहार निकली थी कपडे बदल ने के लिए

साक्षी ने बहार आते hi टॉवल निचे गिरा दिया और बालो को सही कर ने लगी

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और तभी राम ने दरवाज़ा खोल दिया जहा का नज़ारा देखते hi वो तुर्रंत बहार हो गया तो साक्षी को मानो काटो तू खून नहीं तभी उसके कानो में राम की आवाज़ आयी

राम- सॉरी ममी मुझे नहीं पता था में तो आपको खाने के लिए बुला ने आया था

साक्षी- गलती मेरी भी है मुझे रूम लॉक कर न चाहिए था राम तुम जाओ में आती हु और प्ल्ज़ किसी से कुछ मत कहना( शर्म से सर निचे झुकाये राम की तरफ पीठ करते हुए)

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अपडेट- 41

राम के जाते hi साक्षी ने अपने आप को शीशे में देखा और खुद से hi शतमाते हुए बोली

साक्षी- ये क्या हो गया उस ने तो मुझे बिना कपड़ो के देख लिया पता नहीं क्या सोच रहा होगा मेरे बारे में

दिल- शायद वही जो तू उसके बारे में सोच कर बाथरूम में कर रही थी

साक्षी- धत्त ममी हु उसकी वो ऐसा कैसे सोच सकता है मेरे बारे

दिल- क्यों जब तू सोच सकती है तो वो क्यों नहीं वैसे भी न्य न्य जवान हुआ है

साक्षी- में तो बहक गयी थी उसके प्यारे से चेहरे को देख कर ऊपर से इन्हे भी गए हुए कितने महीने हो गए तो गलतो हो गयी वैसे भी सकूं कहा मिला इतनी देर तक कर ने के बाद भी

दिल- सकूं चाहिए तो राम को रिझा अब तो वो hi तेरी मुनिया की कुटाई करे तो सकूं मिले

साक्षी - नहीं नहीं सोभा दीदी को पता चला तो बहुत गुस्सा होंगी और वैसे भी वो मेरे बेटे जैसा है

दिल- बेटे जैसा है तो क्या हुआ है तो मर्द hi वो भी जवान एक बार कोशिश तो कर क्या पता कुछ हो hi जाये और रही बात सोभा की तो उसे बता ने की क्या जरुरत है

साक्षी- पैर क्या वो मुझ पैर ध्यान भी देगा मुझे तो नहीं लगता देखा नहीं नंगी देख कर कैसे मुँह फेर कर चला गया

दिल- तो क्या पहली मुलाकात में hi तुझे रगड़ देता पगली आज hi तो मिली है बात चीत कर धीरे उसे अपने पास ला फिर देखना तेरी ें मोती चूचियों को कैसे रगड़ेगा जिन्हे देख कर कोई भी पागल हो जाए

साक्षी- नहीं नहीं में ऐसी नहीं हु तू मुझे बहका रही है और इन पैर सिर्फ स्नेहा के पापा का हक़ तू मुझे गलत राह पैर मत लेजा ( चूचियों को साड़ी के पल्लू से ढकते हुए बोली)

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दिल- ठीक है तो मत मान पैर मुझे नहीं लगता तू खुद को रोक पायेगी

साक्षी- मुझे कुछ नहीं सुन्न न चुप कर में चली निचे

इतना कह कर साक्षी निचे की और चल दी पैर निचे जाते हुए जैसे hi राम पैर नज़र पड़ी तो फिर से बेचैन हो ने लगी और प्यासी नज़रो से राम को एक टूक निहार ने लगी वही कड़ी कड़ी

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अरे मामी जान अब आ भी जाओ आप की hi इंतज़ार हो रहा है देखो काय आंटी ने कितना मजेदार खाना बनाया है की मुँह में पानी आ रहा है( खाने की तरफ इशारा करती बुलबुल बोली)

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साक्षी- तुम्हारे मुँह में तो हमेशा पानी hi आता रहता है चलो शुरू करो( राम से नज़रे चुराते हुए)

सब चुप चाप खाना खाने लगे जिसके बाद राम अपने कमरे में चला गया जिसके जाते hi रूही कड़ी हुई और काय से राम के रूम का पूछ कर उसके कमरे में चल दी और दरवाज़े पैर पहुंच कर आवाज़ देते हुए बोली

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रूही- क्या में अंदर आ सकती हु अगर तुम्हे बुरा न लगे तो

रूही को देखते hi राम खड़ा हुआ और उसे प्यार से देखते हुए बोलै

राम- बिलकुल और आप ऐसे पूछ क्यों रही हो आओ यहाँ बैठो( रूही बैठते हुए)

रूही- वो इसलिए की खाना कहते hi चले आये न कोई बात चीत सीधा अपने रूम में ( राम के रूम में नज़रे घामते हुए)

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राम- ऐसा कुछ नहीं वो तो आप लोग लम्बे सफर से आये हो तो मुझे लगा की आप आराम कर न चाहोगे बस इसलिए

रूही- हम्म तो आराम तो यहाँ भी कर सकती हु न या फिर तुझे अब मुझसे वो लगाव नहीं रहा जो बचपन में था

राम- ऐसा नहीं है दी वो बस अब बड़े हो गए है तो मुझे लगा की शायद आप को भी ाचा न लगे

रूही- ओह्ह तो साहब बड़े हो गए हां भाई अब हमारी क्या जरुरत वैसे भी इतने साल दूर जो रहे है तो लगाव कहा से होगा

राम- ऐसा कुछ नहीं है दी अब आप को कैसे संजो

रूही- कुछ मत समझा में सब समझ गयी मेरी hi गलती है जो यहाँ आयी तू आराम कर और सॉरी अगर तुझे डिस्टर्ब किया हो तो में चलती हु( खड़े होते हुए बोली)

राम- सोचना भी मत बहार जाने की आप कब से बोले जा रही है जो भी दिल में आ रहा है अब सुनिए आप मेरी प्यारी रूही दीदी हो हो समझी और में आप से उतना hi प्यार करता हु जितना आप करती है पैर अब आप बड़ी हो गयी है जायदा क्लोज रहेंगे तो 100 बाते होंगी समझी मेरी गुस्सैल दीदी( प्यार से उसकी आँखों में देख कर और उसके बाल और गाल सहलाते हुए)

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रूही - जायदा न होश्यारी न दिखा पता है कितना कुछ सोच कर आयी थी पैर तू तो ऐसे इग्नोर कर रहा है जैसे में कोई गैर हु

राम- तो आप hi बताओ क्या करू जो मेरी दीदी खुश हो जाये हम्म

रूही- गले से लगा ले यार बहुत तदपि है तेरी दीदी तेरे बिना

राम- हुग तो ठीक पैर बाद में ये न कहना की किश भी करनी

रूही- में यहाँ तड़प रही हु और तुझे मज़ाक सूझ रहा है इधर आ तुझे में बताती हु बहुत बिगड़ गया है न

राम- ाचा ाचा सॉरी बाबा इधर आओ आप ( प्यार से बाहो में लेकर माथे पे किश करते हुए बोलै)

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राम के गले लगते hi रूही को ऐसा लगा जैसा खज़ाना मिल गया हो काफी देर उस के गले लगी रही

रूही- सच में बहुत सकूं मिल रहा है काश हम दूर न हुए होते

राम- अब तो पास है न तो पिछली बातो को क्यों याद रखना

रूही- तो क्या तूने सब कुछ भुला दिया हमारी वो मिट्ठी यादें सब कुछ

राम- नहीं सिर्फ दर्द भरे लम्हे बाकी सब याद जैसे मेरा रोना और आप का मुझे झूट मूत का दूध पिलाना

दूध सब्द सुनते hi रूही गाल लाल हो गए और वो शर्म से मुँह पैर हाथ रखते हुए बोली

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रूही- छी गंदे वो बाते भी कोई याद रख ने वाली है वो में भी छोटी थी और तुझे चुप करा ने के लिए करती थी जैसे बुआ करती थी

राम- इस में गन्दा कहा से हो गया जो सच है वो सच है

रूही- शट उप अब उस बारे में कोई बात नहीं होगा तू आराम कर में चलती हु

राम- आराम तो यहाँ भी कर सकती हो आप ने hi कहा था फिर अब क्यों जाना है

राम की सुनकर जाते हुए पलटी और मुस्कुराते हुए बोली

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रूही- क्युकी तब मुझे पता नहीं था न की मेरा छोटू गन्दा बच्चा हो गया है

राम- तो क्या छोड़ डौगी अपने छोटू को और में गन्दा कहा से हो गया( पीछे रूही को गले लगते हुए बोलै)

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राम की गरम सांसें अपनी गर्दन पैर महसूस करते hi रूही के जिस्म में कपकपी सी छूट गयी जिसे कण्ट्रोल करते हुए बोली

रूही- छोड़ दे भाई प्ल्ज़ जाने दे बाद में आउंगी

राम - नहीं मुझे आप की गॉड में hi सोना है जैसे पहले सोता था

रूही- ाचा ठीक है चल बीएड पैर चल वह आराम से लेत जाना अपनी दीदी की गॉड में

राम- ये हुई न बात आज बहुत दिनों बाद अछि नींद आने वाली है

रूही बस मुस्कुरा दी क्युकी उस के अंदर भी यही सब महसूस हो रहा था यही सोचते हुए वो राम के साथ बिस्तर पैर लेत

गयी जहा राम उसे सीने पैर लिटाते hi कब सोया उसे खुद न पता चला शायद यही प्यार था दोनों के बीच जो आज कई सालो बाद दोनों महसूस करते न जाने कितनी देर एक दूसरे से चिपके सोते रहे

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कब तक सोते रहे दोनों को नहीं पता चला रूही की आँख खुली तो राम उसके सीने से चिपका हुआ था जिसे देख कर रूही प्यार से उसके बालो को सहलाते हुए मैं में सोच ने लगी

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रूही- सच में ये मेरा छोटू hi है सात्ज सोने की आदत अभी तक नहीं गयी पैर इतने साल कैसे अकेले गुज़ारे होंगे बेचारे ने बस भगवान् अब और परीक्षा मत लेना मेरे भाई की

कुछ देर यही राम की बालो से खेलती हुई वो कड़ी हुई और उसके माथे को चुम कर जाते हुए बोली

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रूही- बहुत प्यार दूंगी अपने छोटू को लव यू सो मच

राम जब उठा तो वो बीएड पैर अकेला था तो उठ कर सीधा जंगल की तरफ निकल गया

वही एक लड़की जंगल में कड़ी हुई थी जो किसी के कदमो की आहत को सुनकर उसे पलट कर देखते हुए बोली

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लड़की- आप आज और इस वक़्त यहाँ क्या कर रहे है
 
अपडेट-42

सामने खड़े साक्ष को देख कर लड़की हैरान भी थी और शायद खुश भी पैर सबसे जायदा उसे दर था की कही कोई उस साक्ष को यहाँ न देख ले इसलिए दोबारा बोली

लड़की- में कुछ पूछ रही हु आप से बोलिये न आप इस वक़्त यहाँ क्यों आये राम (जी ये राम था और सामने थी ठाकुर की बेटी सुहानी )

राम- ये बात तो में भी पूछ सकता हु की आप यहाँ क्या कर रही है

सुहानी- में मी में तो बगीचे में घूमते हुए यहाँ तक आ गयी अब वापस hi जा रही थी

राम- दोस्ती में झूट नहीं बोलते सुहानी सच तो ये है की तुम यहाँ मेरे लिए आयी थी की शायद उस दिन की तरह में फिर से तुम्हे मिल जाऊ क्यों

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सुहानी- हां ठीक है पैर आप क्यों आये आपको पता है न आप ने क्या किया है फिर भी आप यहाँ नहीं प्ल्ज़ आप जाइये

राम- तुम्हे बुरा नहीं लगा मैंने तुम्हारे भाई को मारा

सुहानी- हां भी और नहीं भी हां इसलिए क्युकी भाई था पैर ना इसलिए क्युकी वो डेसेर्वे करता था मैंने भी कई बार उसे लड़कियों के साथ देखा था जिनकी लाशें भी नहीं मिली कभी

राम- हम्म और अगर में ये कहु की यही में तुम्हारे पिता जी के साथ कर ने वाला हु तो

सुहानी- मुझे पता है और मुझे ख़ुशी होगी वो शैतान है उन्होंने बुआ तक के साथ और मेरे बारे में छी मुझे तो सोच कर भी शर्म आती है की वो मेरा बाप है

राम- ये सब छोडो कर न तुम्हारे साथ भी है कुछ

राम की बात सुनकर सुहानी की साँसे तेज़ चल ने लगी और वो राम की आँखों में घबरा कर देखते हुए बोली

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राम- कर के बताऊ या ऐसे hi बोलो

राम की बात सुनकर सुहानी पहले शर्मायी फिर चौकते हुए बोली

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सुहानी- क्या मतलब है इस बात और क्या कर ने वाले हो देखो कुछ भी मत सोचो और यहाँ से जाओ प्ल्ज़ में नहीं चाहती की तुम्हे को.............

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राम होठो का एहसास होते hi सुहानी की धड़कन रेलगाड़ी की रफ़्तार से धड़कने लगी उसे उम्मीद hi नहीं थी की कुछ ऐसा होगा पैर जब महसूस हुआ तो खुद बा खुद उसके होठो राम के होठो संग खेल ने लगे और तभी रुके जब सांसें उखड ने लगी

सुहानी- ये क्या जादू करते हो तुम में तो किसी और hi दुनिया में चली गयी थी सच में यू र सू स्वीट राम काश तुम जीवन भर साथ रहते तो कितना ाचा रहता
( पयार से गाल को सहलाते हुए)

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राम- अभी भी साथ hi हु और तुम चाहो तो और भी कुछ कर सकता हु तुम्हारे लिए

सुहानी- में भी चाहती हु राम पैर अभी कल को लेकर मैं में दर है इसलिए उस तरह महसूस न कर पाव जैसा चाहती हु पैर हां उसके बाद में खुद तुम्हे नहीं छोड़ ने वाली

राम- तुम टेंशन मत लो जैसा तुम्हारा दिल करेगा वैसे करेंगे वैसे भी तुम्हारे बाग़ के आम काफी रसीले है इन्हे निचोड़ ने में और भी मजा आएगा😜

राम की बात का मतलब समझते hi सुहानी उसे झूठे गुस्से से चपत लगा कर बोली

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सुहानी- की बहुत गंदे हो तुम

राम- अभी तो ऐसा कुछ किया भी नहीं मैंने

सुहानी- रहने दो तुम जाओ मुझे कोई बात नहीं कर नई ( एक दम से इमोशनल होते हुए)

राम- हे क्या हुआ सॉरी यार अगर तुम्हे बुरा लगा हो तो( प्यार से गले लगते हुए)

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सुहानी कुछ नहीं बोली बस राम के गले लगी रही

राम- क्या हुआ बताओ मुझे

सुहानी- कुछ नहीं बस यु hi तुम जाओ अगर कोई यहाँ आ गया तो बस यही सोच कर घबरा गयी थी

राम- पागल हो तुम कुछ नहीं होगा मुझे चलो तुम्हे आगे तक छोड़ देता हु अँधेरा हो ने वाला है

सुहानी- में चली जाउंगी

राम- चुप चाप चलो समझी वर्ण आज hi तुम्हारे आम चूस लूंगा

सुहानी- चूस लेना तुम्हारे लिए hi है

राम - पता है तभी तो दिखती भी नहीं हो

राम की बात सुनते hi सुहानी अलग हुई और अपनी गोल गोल मोती चूचियों बेपर्दा करते हुए बोली

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सुहानी- लो कर लो जो करना है पैर दोबारा ये मत कहना की मैंने नहीं देख ने दिए मेरे जिस्म पैर तुम्हारा हक़ है समझे

राम- में तो मज़ाक कर रहा था चलो पागल कही की

सुहानी- कही की नहीं राम की बुद्धू

यही बात करते हुए दोनों हवेली के नज़दीक पहुंच गए तो राम बोलै

राम- जाओ कल मिलते है

सुहानी- हम्म अपना ख्याल रखना प्ल्ज़ अभी बहुत से लम्हे जीना चाहती हु तुम्हारे साथ

राम- जरूर जियेंगे फ़िक्र न करो

सुहानी- हम्म bye (राम को देख कर गहरी सांस छोड़ते हुए)

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राम- bye

राम से विदा ले सुहानी अपने घर चली गयी तो राम घर में आते hi सीधा छत्त पैर चला गया जहा अँधेरा पसरा हुआ था वही दीवार के साथ खड़ा हो कर सितारों को निहार ने लगा और खुद से मैं में बोलै

राम- कल आप का कातिल आप के पास होगा पिता जी उसे वैसे hi तड़पा कर मरूंगा जैसे उस ने आप को तड़पाया था( खुद से न जाने क्या क्या सोच ता वो. न जाने कितनी देर बड़बड़ाता रहा)

किस से बाते कर रहा है अकेले खड़ा हुआ( प्रिय छत्त पैर आते हुए बोली)

राम- किसी से नहीं दीदी बस ऐसे टहल रहा था चलो निचे चलते है

प्रिय- हम्म चल तुझे hi बुला ने आयी थी

दोनों निचे आये जहा सभी ने खाना खाया और अपने कमरों में सोने जाने लगे तो राम को काय ने बुलाया

काय- सुन राम तेरे कमरे में तेरी मामी की बेतिया सो ने वाली है तो किसी और रूम में सू जाना तिल है

राम- ठीक है बड़ी माँ पैर इतने कमरे है तो मेरा कमरा क्यों दिया

काय- वो इस्तमाल नहीं होते न तो साफ़ सफाई करवानी पड़ेगी पहले इस लिए अब जा में भी जाती हु तेरे बड़े पापा घर hi है

राम- मतलब आज रात हाहाहा

राम की बात सुन्न काय मुस्कुराती हुई चली गयी बिना कुछ कहे तो वही राम ने सोचा क्यों न अपनी चची के रूम में hi सो ने चला जाए यही सोच कर वो संध्या के रूम में चला गया जहा हलकी रौशनी थी और बीएड पैर संध्या सिर्फ ब्रा पेंटी पहने उलटी लेती हुई थी जिस से उसकी गोरी मोती गांड साफ़ नज़र आ रही थी जिसे देखते hi राम का बाबू रओ जाग गया

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राम- हाय मेरी चची जान नशा हो गया तुम्हारी गांड देखते hi अब तो तुम्हे प्यार कर करके hi ये नशा उतरेगा( गांड को देख कर लुंड सहलाते हुए)

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वही जिसे राम संध्या समझ कर लुंड सेहला रहा था उसकी आँख राम की फुसफुसाहट से खुल गयी थी और जब सामने राम का खड़ा मुसल देखा तो हलक सुख गया वो उठ कर भाग जाना चाहती थी पैर खुद की हालत ऐसी थी की बहार भागती तो कैसे कपडे तो उतरे हुए थे वो इन्ही खयालो में गम थी की तभी राम नई पीछे से उसकी पेंटी साइड में सरका कर अपनी जीभ उसकी तड़पती छूट में घुसा दी जिस के एहसास से hi उसके जिस्म चीटिया सी रेंग ने लगी पैर राम यही पैर रुक ने वाला नहीं थी वो छूट को चूसते हुए उसकी ब्रा खोल ने लगा जिस में न चाहते हुए भी वो कुछ नहीं कर पा रही थी

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और वही राम की हरकते उसके जिस्म पैर बढ़ती जा रही और तभी राम के हाथ उसकी गोलाईओ पैर पहुंच गए जिन्हे पकड़ते hi राम समझ गया की ये उसकी चची नहीं ये समझ आते hi वो पीछे हैट न चाहता था पैर अचानक hi उसके दिमाग ने कहा

दिमाग- मत रुक न राम वर्ण जो अभी मजे में शांत है वो चिल्ला भी सकती है इसलिए जो हो रहा है होने दो क्युकी ये जो कोई भी है वो भी यही चाहती है वर्ण तुझे पहले hi रोक देती

राम ने भी आगे बढ़ना hi सही समझा और उसकी छूट को जोर जोर से चूसते हुए उसकी गांड को सहलाते हुए उसे सीधा कर ने लगा जिस में वो जल्द hi कामयाब हुआ और चेहरा सामने आया वो कोई और नहीं साक्षी थी जिसे देखते hi राम उसे चुम ने लगा और उसकी मोती चुचिओ को चूस ने लगा

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साक्षी का जिस्म उसका साथ छोड़ चूका था इतनी देर से राम के निचे मचलती हुई वो अब काम अग्नि तड़प उठी और राम को अपनी बाहो में भर ने की कोशिश करने लगी जिस में राम ने भी साथ दिया और उसके होठ चूस ने लगा

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साक्षी बहुत बेचैन हो चुकी थी जो बेचैनी में पगली वाली हरकते कर रही थी तो वही राम उसकी बेचैनी को देख कर उसकी टांगो के बिच आ कर उसकी छूट को जोर जोर से चूस ने लगा जिस में खोटी हुई वो और जोर से सिसकिया भरते हुए बड़बड़ाने लगी

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साक्षी- आअह्ह्ह्ह कहा जाओ राम बहुत परेशान किया इस ने मुझे आआह्ह्ह्हह ाइससेई हीई जोर जोर से चुसो ऊऊफफफफफ क्या जादू किया है तुम ने जब से तुम्हे देखा है कई बार ऊँगली कर चुकी हु आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह रामममम कुछःह हो राहाआआ हैईईई aaaaahhhhhhhhhhh mmmmmmmaaaaaaaaaaaaa

साक्षी का जिस्म अकड़ ने लगा और कुछ hi पालो में वो निढाल हो कर गिर गयी

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राम आगे बढ़ता की साक्षी उखड़ी संसू से उसे देखते हुए बोली

साक्षी- शुक्रिया राम पैर इस से आगे नहीं प्ल्ज़ तुम्हारा बहुत बड़ा है में झेल नहीं पाऊँगी बाकि का फिर कभी

राम- ठीक है ममी जैसे आप कहो अब आप आराम करो में चलता हु

साक्षी- साक्षी नाम है मेरा और क्या तुम मेरे पास नहीं सो सकते प्ल्ज़

राम - सू सकता हु पैर बाद में मत कहना की ये क्या हो गया

साक्षी- ok
 
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