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साक्षी राम की बाहो में अभी भी बिना कपड़ो के सोई हुई जैसे वो जानती थी की राम उसे कुछ नहीं करेगा यही विश्वाश शायद उसे रात से राम की तरफ और भी जायदा आकर्षित कर रहा था वो नींद में थी पैर राम जाग चूका था पैर साक्षी सोई थी तो इसलिए वो आराम से उठ कर जैसे hi जाने को हुआ तो साक्षी ने उसका हाथ पकड़ लिया और अँधेरे में hi उसकी तरफ देखते हुए बोली
साक्षी- बिना बताये जा रहे हो कुछ हुआ है क्या
Ram-nahi मामी ऐसा कुछ नहीं है आप सोई थी तो उठा न ठीक नहीं लगा वैसे भी बड़ा सकूं दिख रहा था आप फेस पैर
साक्षी- जब प्यार मिलता है तो सकूं खुद बा खुद आ जाता है राम वैसे तुम सोच रहे होंगे न की में कितनी गिरी हुई औरत हु जो पहली मुलाकात में hi बिस्तर पैर आ गयी
राम- आप बहुत प्यारी हो मामी और में आप की तकलीफ भी समझता हु मां महीनो घर से बहार होते है इसलिए आप इतनी बेचैन थी मगर फिर भी आप आगे नहीं बढ़ी
साक्षी- में सच में ऐसी नहीं हु राम जो किसी के भी साथ पैर तुम्हे देखते hi न जाने क्यों तुम्हारी तरफ झुकती चली गयी पहले तुम्हारा मुझे बिना कपड़ो के देख न और रात का तुम्हारा मुझे छू न न जाने क्यों बहुत ाचा लगा और में खुद को रोक नहीं पायी
राम- रोक तो लिए था आप ने मुझे नहीं तो ये महकता जिस्म देख कर कोई कैसे रुकता ( प्यार से साक्षी की पीठ सहलाते हुए)
साक्षी- ससष्ठ मत करो दोबारा शायद न रोक पाव खुद को
राम- तो क्यों रोक रही हो जब आप खुद चाहती हो
साक्षी- क्युकी में तुम्हारे साथ इस पल को खुल कर जीना चाहती हु मुझे पता है उस वक़्त कितना आनंद आएगा जब ये मेरे अंदर प्रवेश करेगा
राम- और ये आप इतनी विश्वाश से कैसे कह सकती है मुझे तो नहीं लगता
साक्षी- तुम्हे सब पता है अनादि नहीं हु तुम जिस तरह तुम ने मुझे रात को प्यार किया था में तभी समझ गयी थी की राम जी पक्के खिलाडी है
समझे बच्चू
राम- ाचा जी चली ठीक है फिर तो जब मौका मिलेगा तो अचे से बैटिंग करेंगे
साक्षी- बेटिंग नहीं आप पिच फाड़ कर रख डोज वैसे सच बताओ तुम ने रात को जब मेरे साथ प्यार किया तुम्हे दर नहीं लगा की अगर में चिल्ला ने लग जाती तो
राम- आपकी आँखों में प्यास देख ली थी मैंने( झूट) इसलिए मुझे पता था आप ऐसा कुछ नहीं करोगी और वैसे भी अभी आप ने hi तो कहा की पक्का खिलाडी हु तो इतना तो मुझे पता है की कोण सी पिच बेटिंग के लिए तैयार है मेरी सेक्सी मामी
साक्षी- मामी के बच्चे तू बहुत प्यारा है सच में काश पहले hi मिल गया होता तो जीवन खुसियो से भर जाता
राम- जीवन का तो पता नहीं पैर हां आप का कुआ जरूर भर देता
साक्षी- शैतान सब समझ रही हु में पैर अभी सिर्फ इस से hi काम चलाओ
राम के होठो को चूमते हुए
राम- जी मामी जी अब आप कपडे पहन लो में जाता हु आज बहुत बड़ा दिन है
साक्षी- मत करो राम ये सब अगर कही कुछ उल्टा हो गया तो मान जाओ न और हमारे साथ चलो( उदास सा चेहरा करते हुए)
राम- आप खामखा दर रही है आप सब भूल जाओ में जल्द मिलता हु आप से
साक्षी- हम्म ठीक है अपना ख्याल रखना प्ल्ज़
राम बिना कुछ कहे मुस्कुरा कर वह से सीधा छत पैर चला गया और कसरत कर ने लगा आज एक अलग hi तेज़ था उसके चेहरे पैर आँखों में एक आग जो शायद बहुत कुछ जला ने वाली थी
वही दूसरी तरफ वीरभान के सख्त चेहरे पैर कई भाव थे जिन्हे देख कर hi पता चल रहा था की वो कितना बेचान है हवेली में सूरज की किरणे देख वो खड़ा हुआ और अपनी बीवी मालती को आवाज़ देते हुए बोलै
वीरभान- अरे कहा मर गयी चाय नास्ता कुछ मिलेगा या नहीं
क्या हुआ क्यों चिल्ला रहे हो सुबह सुबह ठाकुर के सामने आते हुए( दुल्हन की तरह सजी हुई)
वीरभान- कुछ शर्म हाय बाकी है या सब बेच खायी बेशरम 2दिन भी नहीं हुए तेरा जवान बीटा मरे हुए
मालती- अगर वो ाचा इंसान होता तो छाती पीट कर रट पैर वो तेरे जैसा हैवान था उसकी मौत का क्या मातम मनौ
वीरभान- कुटिया है तू और आज उस कुत्ते की मौत के बाद तुझे सारे गाओं में नंगा न घुमाया तो मेरा नाम बदल देना
क्या रखना है वो भी बता दो वैसे भी आज के बाद तो तुम्हारी आवाज़ भी इस हवेली में नहीं गूंजेगी ठाकुर ( सामने से आती हुई सुरीली बोली जो खुद आज सजी हुई थी)
वीरभान- आ गयी कुटिया तू भी बहुत जबान चल रही है न तुम सब की तुम सब को आज रंडी बनाऊंगा और सब तुम्हारे नंगे जिस्म से खेलेंगे
मालती- अहम् ाचा पैर वहां नहीं ठाकुर शायद तुम ने कल से अपने गाओं की रौनक को नहीं देखा जो चिल्ला चिल्ला कर तेरे साम्राज्य के विनाश की गवाही दे रही है आखिर दे भी क्यों न उन्हें क्या काम सताया है तूने और तेरे वहसि बेटे ने खैर छोड़ो तुम अपना आखिरी नास्ता करो
वीरभान- साली कुटिया मेरे मर ने की बातें करती है तेरा वो हाल करूँगा की तू भीख मांगेगी अपनी ज़िन्दगी की पैर पहले उस हरामखोर से निपट लू जिस के दम पैर तुम दोनों कुटिया इतना भोक रही हो
पिता जी चाय पि लीजिये बातें तो होती hi रहेंगी( सुहानी चाय के कप लाते हुए बोली)
वीरभान सुहानी की बात और हाथ में चाय देख कर मुस्कुराते हुए बोलै
वीरभान- शाबाश मेरी बच्ची एक तू hi है जो अपने बाप की सौहरत को पहचानती है अब से सब तेरा hi है
सुहानी- जी पिता जी बाप के मरने के बाद सब औलाद को hi तो मिलता है तो ये सब तो मेरा hi होगा
वीरभान- क्या मतलब है तेरा क्या तू भी अपनी माँ की तरफ है( गुस्से से घूरते हुए)
सुहानी- में सच की तरफ हु और सच का पलड़ा राम की और झुक रहा है पिता जी इसलिए अभी भी वक़्त है उस से माफ़ी मांग लो वो माफ़ कर देगा बहुत नेक दिल है वो
वीरभान- रंडी की बेटी रंडी hi निकली और माफ़ी की तो बात hi उठ टी उसे तो आज उसके माँ बाप के पास भेजूंगा फिर तुम तीनो को देखता हु वो अभी तक छुपा हुआ था सामने नहीं आया था आज आएगा तो वापस नहीं जायेगा ठाकुर डर hi काफी है उसके लिए
सुहानी- विनाश काले विपरीत बुद्धि उसे डर होता तो कल भी वो यहाँ हवेली में मुझे छोड़ ने नहीं आया होता पैर हां आज आप जरूर डर का सामना करेंगे और में दुआ करुँगी की जायदा तड़पती मौत न मिले आप को चलो माँ चलो बुआ अखाड़े में भी चल न है राम आने वाले होंगे
वीरभान- जाओ सब जाओ अब तुम्हे वही से घसीट कर न लाया तो मेरा नाम भी ठाकुर वीरभान नहीं असरफ चलो निकल ने की तैयारी करो
दोनों गाओं एक अलग hi उत्साह था जैसे की आज दिवाली हो बूढ़ा क्या बच्चे क्या सब की आँखों में एक अलग hi चमक थी अखाड़े को दुल्हन की तरह सजाया गया था धीरे धीरे सभी ेखतथा होना शुरू हो गए थे राम के घर वाले को एक तरफ सुरक्षित बिठाया गया था जिसकी निगरानी समशेरा कर रहा था तो वही वीर बहन ठाकुर के आते hi उसके चमचे उसके नाम का जैकारा लगा ने लगे
ठाकुर साहब ज़िंदाबाद कुछ पल hi नारे लगे होंगे की अखाड़े में बैठे गाओं के लोग जोर जोर से चिल्ला ने लगे जिनकी आवाज़ सुनकर एक बार को ठाकुर की रूह भी काँप गयी
छोटे मालिक ज़िंदाबाद छोटे मालिक ज़िंदाबाद
सामने राम नहीं दिख रहा था किसी को भी सबकी नज़रे उसी तरफ थी जहा से राम को आना था और तभी हस्ता मुस्कुराता हुआ राम सभी गाओं वालो को हाथ जोड़ता हुआ सामने आया जिस के चेहरे पैर सिकन तक नहीं थी
साक्षी राम की बाहो में अभी भी बिना कपड़ो के सोई हुई जैसे वो जानती थी की राम उसे कुछ नहीं करेगा यही विश्वाश शायद उसे रात से राम की तरफ और भी जायदा आकर्षित कर रहा था वो नींद में थी पैर राम जाग चूका था पैर साक्षी सोई थी तो इसलिए वो आराम से उठ कर जैसे hi जाने को हुआ तो साक्षी ने उसका हाथ पकड़ लिया और अँधेरे में hi उसकी तरफ देखते हुए बोली
साक्षी- बिना बताये जा रहे हो कुछ हुआ है क्या
Ram-nahi मामी ऐसा कुछ नहीं है आप सोई थी तो उठा न ठीक नहीं लगा वैसे भी बड़ा सकूं दिख रहा था आप फेस पैर
साक्षी- जब प्यार मिलता है तो सकूं खुद बा खुद आ जाता है राम वैसे तुम सोच रहे होंगे न की में कितनी गिरी हुई औरत हु जो पहली मुलाकात में hi बिस्तर पैर आ गयी
राम- आप बहुत प्यारी हो मामी और में आप की तकलीफ भी समझता हु मां महीनो घर से बहार होते है इसलिए आप इतनी बेचैन थी मगर फिर भी आप आगे नहीं बढ़ी
साक्षी- में सच में ऐसी नहीं हु राम जो किसी के भी साथ पैर तुम्हे देखते hi न जाने क्यों तुम्हारी तरफ झुकती चली गयी पहले तुम्हारा मुझे बिना कपड़ो के देख न और रात का तुम्हारा मुझे छू न न जाने क्यों बहुत ाचा लगा और में खुद को रोक नहीं पायी
राम- रोक तो लिए था आप ने मुझे नहीं तो ये महकता जिस्म देख कर कोई कैसे रुकता ( प्यार से साक्षी की पीठ सहलाते हुए)
साक्षी- ससष्ठ मत करो दोबारा शायद न रोक पाव खुद को
राम- तो क्यों रोक रही हो जब आप खुद चाहती हो
साक्षी- क्युकी में तुम्हारे साथ इस पल को खुल कर जीना चाहती हु मुझे पता है उस वक़्त कितना आनंद आएगा जब ये मेरे अंदर प्रवेश करेगा
राम- और ये आप इतनी विश्वाश से कैसे कह सकती है मुझे तो नहीं लगता
साक्षी- तुम्हे सब पता है अनादि नहीं हु तुम जिस तरह तुम ने मुझे रात को प्यार किया था में तभी समझ गयी थी की राम जी पक्के खिलाडी है
राम- ाचा जी चली ठीक है फिर तो जब मौका मिलेगा तो अचे से बैटिंग करेंगे
साक्षी- बेटिंग नहीं आप पिच फाड़ कर रख डोज वैसे सच बताओ तुम ने रात को जब मेरे साथ प्यार किया तुम्हे दर नहीं लगा की अगर में चिल्ला ने लग जाती तो
राम- आपकी आँखों में प्यास देख ली थी मैंने( झूट) इसलिए मुझे पता था आप ऐसा कुछ नहीं करोगी और वैसे भी अभी आप ने hi तो कहा की पक्का खिलाडी हु तो इतना तो मुझे पता है की कोण सी पिच बेटिंग के लिए तैयार है मेरी सेक्सी मामी
साक्षी- मामी के बच्चे तू बहुत प्यारा है सच में काश पहले hi मिल गया होता तो जीवन खुसियो से भर जाता
राम- जीवन का तो पता नहीं पैर हां आप का कुआ जरूर भर देता
साक्षी- शैतान सब समझ रही हु में पैर अभी सिर्फ इस से hi काम चलाओ
राम के होठो को चूमते हुए
राम- जी मामी जी अब आप कपडे पहन लो में जाता हु आज बहुत बड़ा दिन है
साक्षी- मत करो राम ये सब अगर कही कुछ उल्टा हो गया तो मान जाओ न और हमारे साथ चलो( उदास सा चेहरा करते हुए)
राम- आप खामखा दर रही है आप सब भूल जाओ में जल्द मिलता हु आप से
साक्षी- हम्म ठीक है अपना ख्याल रखना प्ल्ज़
राम बिना कुछ कहे मुस्कुरा कर वह से सीधा छत पैर चला गया और कसरत कर ने लगा आज एक अलग hi तेज़ था उसके चेहरे पैर आँखों में एक आग जो शायद बहुत कुछ जला ने वाली थी
वही दूसरी तरफ वीरभान के सख्त चेहरे पैर कई भाव थे जिन्हे देख कर hi पता चल रहा था की वो कितना बेचान है हवेली में सूरज की किरणे देख वो खड़ा हुआ और अपनी बीवी मालती को आवाज़ देते हुए बोलै
वीरभान- अरे कहा मर गयी चाय नास्ता कुछ मिलेगा या नहीं
क्या हुआ क्यों चिल्ला रहे हो सुबह सुबह ठाकुर के सामने आते हुए( दुल्हन की तरह सजी हुई)
वीरभान- कुछ शर्म हाय बाकी है या सब बेच खायी बेशरम 2दिन भी नहीं हुए तेरा जवान बीटा मरे हुए
मालती- अगर वो ाचा इंसान होता तो छाती पीट कर रट पैर वो तेरे जैसा हैवान था उसकी मौत का क्या मातम मनौ
वीरभान- कुटिया है तू और आज उस कुत्ते की मौत के बाद तुझे सारे गाओं में नंगा न घुमाया तो मेरा नाम बदल देना
क्या रखना है वो भी बता दो वैसे भी आज के बाद तो तुम्हारी आवाज़ भी इस हवेली में नहीं गूंजेगी ठाकुर ( सामने से आती हुई सुरीली बोली जो खुद आज सजी हुई थी)
वीरभान- आ गयी कुटिया तू भी बहुत जबान चल रही है न तुम सब की तुम सब को आज रंडी बनाऊंगा और सब तुम्हारे नंगे जिस्म से खेलेंगे
मालती- अहम् ाचा पैर वहां नहीं ठाकुर शायद तुम ने कल से अपने गाओं की रौनक को नहीं देखा जो चिल्ला चिल्ला कर तेरे साम्राज्य के विनाश की गवाही दे रही है आखिर दे भी क्यों न उन्हें क्या काम सताया है तूने और तेरे वहसि बेटे ने खैर छोड़ो तुम अपना आखिरी नास्ता करो
वीरभान- साली कुटिया मेरे मर ने की बातें करती है तेरा वो हाल करूँगा की तू भीख मांगेगी अपनी ज़िन्दगी की पैर पहले उस हरामखोर से निपट लू जिस के दम पैर तुम दोनों कुटिया इतना भोक रही हो
पिता जी चाय पि लीजिये बातें तो होती hi रहेंगी( सुहानी चाय के कप लाते हुए बोली)
वीरभान सुहानी की बात और हाथ में चाय देख कर मुस्कुराते हुए बोलै
वीरभान- शाबाश मेरी बच्ची एक तू hi है जो अपने बाप की सौहरत को पहचानती है अब से सब तेरा hi है
सुहानी- जी पिता जी बाप के मरने के बाद सब औलाद को hi तो मिलता है तो ये सब तो मेरा hi होगा
वीरभान- क्या मतलब है तेरा क्या तू भी अपनी माँ की तरफ है( गुस्से से घूरते हुए)
सुहानी- में सच की तरफ हु और सच का पलड़ा राम की और झुक रहा है पिता जी इसलिए अभी भी वक़्त है उस से माफ़ी मांग लो वो माफ़ कर देगा बहुत नेक दिल है वो
वीरभान- रंडी की बेटी रंडी hi निकली और माफ़ी की तो बात hi उठ टी उसे तो आज उसके माँ बाप के पास भेजूंगा फिर तुम तीनो को देखता हु वो अभी तक छुपा हुआ था सामने नहीं आया था आज आएगा तो वापस नहीं जायेगा ठाकुर डर hi काफी है उसके लिए
सुहानी- विनाश काले विपरीत बुद्धि उसे डर होता तो कल भी वो यहाँ हवेली में मुझे छोड़ ने नहीं आया होता पैर हां आज आप जरूर डर का सामना करेंगे और में दुआ करुँगी की जायदा तड़पती मौत न मिले आप को चलो माँ चलो बुआ अखाड़े में भी चल न है राम आने वाले होंगे
वीरभान- जाओ सब जाओ अब तुम्हे वही से घसीट कर न लाया तो मेरा नाम भी ठाकुर वीरभान नहीं असरफ चलो निकल ने की तैयारी करो
दोनों गाओं एक अलग hi उत्साह था जैसे की आज दिवाली हो बूढ़ा क्या बच्चे क्या सब की आँखों में एक अलग hi चमक थी अखाड़े को दुल्हन की तरह सजाया गया था धीरे धीरे सभी ेखतथा होना शुरू हो गए थे राम के घर वाले को एक तरफ सुरक्षित बिठाया गया था जिसकी निगरानी समशेरा कर रहा था तो वही वीर बहन ठाकुर के आते hi उसके चमचे उसके नाम का जैकारा लगा ने लगे
ठाकुर साहब ज़िंदाबाद कुछ पल hi नारे लगे होंगे की अखाड़े में बैठे गाओं के लोग जोर जोर से चिल्ला ने लगे जिनकी आवाज़ सुनकर एक बार को ठाकुर की रूह भी काँप गयी
छोटे मालिक ज़िंदाबाद छोटे मालिक ज़िंदाबाद
सामने राम नहीं दिख रहा था किसी को भी सबकी नज़रे उसी तरफ थी जहा से राम को आना था और तभी हस्ता मुस्कुराता हुआ राम सभी गाओं वालो को हाथ जोड़ता हुआ सामने आया जिस के चेहरे पैर सिकन तक नहीं थी