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रुचिका ने मोहनलाल को देखकर कहा 'मैं अब नए रिश्ते के लिए तैयार हु' और इस बात को पक्का करने के लिए उसने अपना हाथ मोहनलाल के हाथ पर रख दिया और उससे कहा की 'आप चिंता न करो किसी को भी नहीं पता लगेगा की मैं आपकी बीवी नहीं हु, बल्कि हर कोई आपकी तारीफ करेगा' फिर रुचिका ने अपने पर्स में से कुछ कुछ निकलकर अपना मेकअप ठीक करने लगी. फिर ट्रैन रुकने के बाद दोनों ट्रैन से नीचे आये और रुचिका ने मोहनलाल के हाथ को इस तरह से पकड़ा हुआ था जैसे की नै नवेली दुल्हन अपने पति का हाथ पकड़ कर चलती हो
दोनों चलते हुए बहार आये तू वंहा उनको लेने के लिए एक टैक्सी आयी हुई थी तू दोनों को ड्राइवर ने ग्रीट किया और उनका सामान रखा और दोनों टैक्सी में बैठकर उस होटल में पंहुच गए जंहा उनके नाम से बुकिंग थी. वो टैक्सी से उत्तरकार रिसेप्शन पर पंहुचे और उनका सामान एक वेटर लेकर आ गया.
रिसेप्शन पर पंहुच कर उन्हें उनके कमरे के बारे में बताया गया और लिफ्ट से वो दोनों कमरे में आ गए और वेटर उनका सामान छोड़ कर जाने लगा तू उससे मोहनलाल ने टिप दी और उसके जाने के बाद कमरे को अंदर से बंद कर दिया.
रुचिका तू पहली बार किसी होटल में आयी थी तू होटल जो की एक फाइव स्टार होटल था को देखकर उसकी आँखें चुंघियां गयी थी और जब कमरे में पंहुचती है तू उस कमरे को देखकर मन में सोचती है की क्या कमरा ऐसा भी हो सकता है क्योंकि वो आज तक अपने घर के कमरे को hi सबसे अच्छा मानती थी और वो इतनी सफाई पसंद थी की उससे अपने कमरे में सबकुछ स्पीक एंड सपं (बेदाग़ सफाई) रखती थी लेकिन ये कमरा तू उसकी उम्मीद से काम से काम सौ दर्जे बेहतर था.
इस तरह का कमरा तू उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था क्योंकि वो बेचारी तू 5 स्टार तू बहुत दूर की बात है कभी किसी छोटे होटल में भी नहीं गयी थी तू उससे अच्चम्भा होना तू अवश्यम्भावी था. वो कमरा बहुत बड़ा था जिसमे आप टहल भी सकते थे, हर सुख सुविधा से परिपूर्ण था, जिसमे किंग साइज का बीएड जिस पर 12 इंच मोठे गद्दे और उसपर बहुत hi शानदार चादर बिछी हुई थी और बहुत सरे तकिये लगे हुए थे, साइड टेबल्स उनपर बहुत बढ़िया लैम्प्स, कीमती सोफे सेंटर टेबल, बहुत बड़ी खिड़की जिनपर बहुत उत्तम क्वालिटी के परदे और बालकनी, बाथरूम, फ्रिज, 65 इंच एलसीडी टीवी, केतली, बहुत साडी टोकरियां जिनमे ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट्स, बिस्किट्स और बहुत कुछ था. बाथरूम में हर तरह की सुविधा, कई तरह के साबुन, शैम्पू और ब्यूटी ट्रीटमेंट्स के लोशन्स. ये सब देखकर तू रुचिका ने मन में सोचा की उसने सही फैसला किया की वो अपने पापा की पत्नी बनकर आयी है, ये ख्याल आते hi उसके मन में गुदगुदी होने लगती थी. अभी वो कमरे की खूबसूरती में खोयी हुई थी की दूर पर नॉक हुआ तू मोहनलाल ने देखा की वेटर उनके लिए अनार का जूस लेकर आया है और बोलै की 'वेलकम ड्रिंक' और रखकर चला गया.
उसके जाने के बाद मोहनलाल ने रुचिका से पूछा 'कैसा लगा' तू उसने कहा 'बहुत hi अच्छा, मैं तू यह सोच रही हु की क्या कमरा ऐसा भी होता है, ये तू लाजवाब है"
उसकी बात सुनकर मोहनलाल ने उसके चेहरे पर आयी ख़ुशी को देखा तू कहा "चलो अच्छा है की मेरी बीवी को कमरा पसंद आया, यह तू अभी शुरुआत है और अब तुम मजे लेने के लिए तैयार हो जाओ"
उसके बाद मोहनलाल उसका हाथ पकड़कर उससे सोफे पर बैठ कर जूस का गिलास लाया और उसके मुंह से लगाकर उसे सिप करने का इशारा किया तू उसने सिप लिया और फिर गिलास को मोहनलाल के मुंह की तरफ लेजाकर उसको पीने के लिए कहा लेकिन मोहनलाल ने उसके हाथ के ऊपर हाथ रखकर गिलास को रुचिका के मुंह की तरफ वापिस लेजाकर उसे पीने के लिए कहा तू उसने अपने मुंह को हटा लिया तू मोहनलाल ने अपने दूसरे हाथ से उसका चेहरा पकड़कर बड़े प्यार से कहा "मेरी बीवी को इसकी जरुरत ज्यादा है"
रुचिका मुस्कराते हुए 'आप तू कह रहे थे की पति पत्नी में कोई फरक नहीं होता तू सिर्फ मैं hi क्योँ लू'
मोहनलाल ने उसके गाल को सहलाते हुए 'यही तू मैं कह रहा हु की तुमने लिया या मैंने लिया, बात तू एक hi है' और आँखों से इशारा करते हुए उससे पीने के लिए कहा तू रुचिका ने जूस के गिलास पर मुंह लगाकर बड़े प्यार से कनखियोँ से मोहनलाल को देखते हुए सिप करने लगी और जब कोई एक चौथाई बच गया तू रुचिका ने अपना मुंह हटा लिया और ज़िद करके गिलास को मोहनलाल के मुंह से लगा दिया. मोहनलाल ने रुचिका का हाथ पकड़े पकड़े hi पीने लगा और जूस पीते हुए वो बहुत hi प्यार भरी नजरो से रुचिका को देख रहा था, जिसका ताव रुचिका न ला पाई और आँखों की पलके झुका ली, लेकिन उसका मन अब मोहनलाल को देखने का कर रहा था तू उसने अपनी कनखियोँ से उससे देखा तू वो उससे hi देख रहा था. ये जानकर उसने अपनी पलके फिर झुका ली और थोड़ी थोड़ी देर बाद वो मोहनलाल को देखती तू वो हर वक़्त उससे hi देख रहा होता तू उसके दिल की धड़कन बढ़नी शुरू हो गयी थी.
रुचिका को उसके इस तरह देखते रहने से शर्म भी आ रही थी लेकिन मोहनलाल था की अपनी नज़रे उसके चेहरे से बिलकुल हटा नहीं रहा था तू रुचिका वंहा से कड़ी होकर जाने लगी तू मोहनलाल ने उसका हाथ छोड़ा hi नहीं और उससे वापिस बैठने के लिए कहा तू रुचिका ने अपनी झेंप मिटने के लिए कहा 'जूस लेकर आती हु' तब मोहनलाल ने सीरियस होते हुए उससे बैठने को कहा तू रुचिका पता नहीं क्या सोचकर बैठ गयी तू मोहनलाल ने उसका दूसरा हाथ भी अपने हाथ में लेकर पूछा 'क्या तुम वाकई मेरी पत्नी बनकर लोगों के सामने आना चाहती हो'
रुचिका 'क्या अब भी इस बात का कोई मतलब है'
मोहनलाल 'हाँ, बिलकुल है, क्योँकि अभी तक तुम्हारे बारे में कोई नहीं जनता, लेकिन मैंने तुम्हे एक बार ये कह कर इंट्रोडस करवाया की तुम मेरी वाइफ हो तू ये ओने वे ट्रैफिक है, फिर चाहे कुछ भी हो जाये हम दोनों hi इस बात से इंकार नहीं कर पाएंगे की हम पति पत्नी नहीं हैं'
रुचिका 'हम होटल वालो को तू बता hi चुके हैं की हम पति पत्नी हैं'
मोहनलाल 'होटल वालो को सिर्फ ये पता है की हम कपल बनकर आये हैं, लेकिन अभी तक उनको हमारे रिश्ते के बारे में नहीं पता. तुम अगर कहो तू मैं अभी जाकर उनको बता दूंगा की तुम मेरी बेटी हो और जो भी खर्चा होगा उसका 50% उनको दे दूंगा'
रुचिका 'पहली बात की तीन दिन का खर्चा कितना होगा और दूसरा क्या वो मान जायेंगे की आप अपनी बेटी के साथ फ्री वाले कमरे में रहो'
मोहनलाल 'तीन दिन का आधा खर्चा काम से काम 25 हज़ार होगा और दूसरी बात के लिए उनसे बात करनी पड़ेगी'
रुचिका 'ये तू बहुत महंगा है'
मोहनलाल 'ये भी डिस्काउंटेड रेट है नहीं तू रेट डबल होता, तुम खर्चे की चिंता न करो बल्कि ये सोचो की तुम क्या चाहती हो'
रुचिका 'मुझे तू एन्जॉय करना है, लेकिन इतना खर्चा सोचकर hi मेरा एन्जॉयमेंट ख़तम हो जाता है और मैं अपने आप को कुलप्रीत समझने लगाती हु'
मोहनलाल 'देखो अपने आप को दोषी मत मनो और तुम यही बैठो मैं बात करके आता हु और पैसे की बिलकुल चिंता न करो, वो तू हम और कमा लेंगे'
रुचिका 'नहीं, मैंने डीडे कर लिया है की मैं अब आपकी पत्नी बनकर hi लोगों से मिलूंगी, चाहे कुछ भी हो जाये, पीछे नहीं हटूंगी'
मोहनलाल 'रुचिका तुम इस सब का मतलब समझ नहीं रही हो'
रुचिका 'मैं सोच समझ कर hi कह रही हु'
मोहनलाल 'फिर कनिह कपल की डेफिनिशन की पहले की तरह समझ आ गया है और बाद में पछताना पड़े'
रुचिका 'मैं तू तैयार हु, अगर आपको मुझे वाइफ कहने में कोई तकलीफ है तू बात दूसरी है'
मोहनलाल 'मुझे तकलीफ इस बात से होगी की कहीं तुम बाद में दुखी न हो जाओ. मैं तुम्हे किसी भी हालत में दुखी नहीं देख सकता उसके लिए चाहे मुझे पूरी दुनिया से hi क्योँ न लड़ना पड़े'
रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर बहुत भावुक हो गयी और अपनी बांहे मोहनलाल के गले में डालकर उससे चिपक गयी और बड़े प्यार से कहने लगी 'आप मुझे इतना प्यार करते हो' उसकी बात सुनकर मोहनलाल के मुख से निकला
'इतना प्यार तू मैंने खुद से भी नहीं किया जितना तुम से हो गया है'
रुचिका ने जैसे hi मोहनलाल की बात सुनी तू उसने मोहनलाल के गले में जो बांहे डाली हुई थी उससे उसका चेहरा अपनी तरफ करके और जोर से कास लिया. ऐसा करने से दोनों इतने नजदीक हो गए की एक दूसरे की साँसों को सुन सकते थे. रुचिका के उभारों ने मोहनलाल को बहकाने पर मजबूर कर दिया फिर भी उसने बस इतना hi किया की अपने हाथों को उसकी पीठ पर लेजाकर कास लिए और उससे ये हुआ की रुचिका के उभर तू मोहनलाल की छथि में धंस hi गए और उसके नरम नरम गालों ने पहली बार मोहनलाल के सख्त गलों का स्पर्श किया तू दोनों को एक झटका लगा और अपने गलों को थोड़ा सा पीछे करते हुए उखड़ती हुई साँसों से इतना hi कहा 'मुझे कोई तकलीफ नहीं होगी और आप मुझे अपनी वाइफ की तरह इंट्रोडस करवा सकते हैं'
मोहनलाल 'ये तुम्हारा आखिरी फैसला है'
रुचिका 'बिलकुल अब इस में कोई गुंजाईश नहीं है'
मोहनलाल उसकी पीठ को सहलाते हुए 'तू ठीक है फिर चलो तैयार हो जाओ और तुम्हे अपनी वाइफ बनाते हैं'
रुचिका 'क्या मैं आपकी वाइफ नहीं लगाती'
मोहनलाल उसकी पीठ को सेहला रहा था तू एक बार फिर से उसके हाथों को ब्रा के स्ट्राप का एहसास हुआ तू इस बार उस हिस्से को अच्छे से सहलाते हुए उसके कान के पास अपने मुंह को लेजाकर 'तुम खूबसूरत हो, लेकिन मेरी वाइफ को सबसे जयादा खूबसूरत लग्न चाहिए, इसलिए चलो तुम्हारा हुलिया बदलते हैं'
मोहनलाल ने रिसेप्शन पर फ़ोन करके टैक्सी के लिए बोलै तू कहा गया की नीचे आ जाइये तू उसने रुचिका को कहा 'चलो' और फिर वो दोनों नीचे आये तू रिसेप्शन पर कहा गया की 'आप बैठए, टैक्सी आ रही है'. वो दोनों आकर वंहा पड़े सोफे पर जाकर बैठ गए और दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा हुआ था.
वो दोनों वेट कर hi रहे थे की एक आदमी वंहा पर रिसेप्शन पर लड़ रहा था तू पता लगा की उसका भी फ्री कपल टूर था और वो अपनी बहिन के साथ आ गया और उसने ये बात बताई तू होटल वालो ने कहा की उनको कपल वाला रूम नहीं मिल सकता और फ्रेश बुकिंग करनी पड़ेगी. उसने जब चार्जेज पूछे तू पता लगा की 3 दिन का पैकेज दो लोगों के लिए करीब एक लाख का था तू उसने कहा की रेट तू काम था, तू पता लगा की पहले से हुई बुकिंग पर डिस्काउंट था, लेकिन उससे नै बुकिंग पुरे रेट पर करनी पड़ेगी. वो कह रहा था की पुराणी बुकिंग का 50% दे देगा तू होटल वो ने साफ़ साफ़ मन कर दिया और कहा की आप अपनी वाइफ के साथ आइये तू कोई भी चार्ज नहीं है.
उसकी और होटल वाले की बातें उन दोनों के कानो में पद रही थी और जैसे जैसे बात समझ आ रही थी तू रुचिका का मोहनलाल की वाइफ बनने का निर्णय पक्का होता जा रहा था और उसने अपने दांये हाथ को मोहनलाल के बांये हाथ के नीचे से निकलकर उसकी बाजु को कसकर पकड़ लिया तू उसका दांया उरोज मोहनलाल की बाजु पर धंस रहा था. वो ये इसलिए कर रही थी की वंहा पर जो भी बैठा हो तू यही समझे की वो दोनों कपल हैं. मोहनलाल को रुचिका का इस तरह करना एक सुखद एहसास हो रहा था.
तभी एक आदमी आया और उसने 3 दिन के प्रोग्राम का एक पेपर दिया और ये कहा 'सर कल शाम को कपल्स के लिए स्पेशल प्रोग्राम है और उसके लिए ड्रेस कोड इस पेपर पर लिखा हुआ है' तू आप ेंसुरे कर लीजिये की वो ड्रेस आपके पास है नहीं तू उस प्रोग्राम में एंट्री नहीं होगी. ये कहकर वो चला गया.
टैक्सी से वो एक बड़े से मॉल में आ गए और वंहा पर सबसे पहले एक ब्यूटी पार्लर का पता किया और रुचिका को मेकओवर के लिए वंहा छोड़ दिया और मोहनलाल मॉल में घूमते हुए वंहा की दुकानों का निरिक्षण कर रहा था तू एक अच्छी सी गारमेंट्स की दूकान पर जाकर उस ड्रेस के बारे में पूछा तू वंहा की सलेसगिरल ने कहा की मिल जाएगी और साइज पूछने लगी तू बेचारे मोहनलाल को कैसे पता होता. उसने सलेसगिरल से कहा की अभी उसकी वाइफ आएगी, वो थोड़ी शाय है तू आप उसकी मदद कर देना, तू उस सलेसगिरल ने आश्वासन दिया की वो ड्रेस फाइनल करा देगी और जब उसने इनरवेअर के लिए पूछा तू मोहनलाल ने उससे कहा की आप मेरी हेल्प कीजिये और मेरी वाइफ को समझा कर उससे hi ये सब लेने के लिए ेन्सॉरगे करना है और जो ठीक लगे उससे लेने के लिए कहना है और इतना कहकर उसने सलेसगिरल को अच्छी सी टिप दी तू वो खुश हो गयी और बोली 'सर आप चिंता न करो, मैं सब संभल लुंगी'
मोहनलाल वंहा से निकलकर एक ज्वेलरी शॉप में गया और वंहा से खरीददारी के बाद वो वापिस ब्यूटी पार्लर गया और रुचिका को देखा तू उससे विश्वास hi नहीं हुआ की वो रुचिका hi है, वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. मोहनलाल ने उसकी तारीफ की तू वो ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी और उससे पहली बार ऐसा लग रहा था की खुद को खूबसूरत बनाने के लिए भी म्हणत करनी पड़ती है.
मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लेजाकर उस गारमेंट्स की दूकान पर ले गया और वंहा पर जैसे hi अंदर गए तू वही सलेसगिरल उनके पास आयी और कहा 'मई ी हेल्प यू' तू मोहनलाल ने उससे कहा की 'मेरी वाइफ के लिए कुछ अच्छी सी ड्रेस दिखाए', रुचिका के चेहरे पर मुस्कान थी की उससे नयी ड्रेसेस मिलाने वाली है और वो भी बहुत बड़े स्टोर से.
सलेसगिरल उन्हें एक काउंटर पर ले गयी और पूछा 'कोई पर्टिकुलर ड्रेस' तू रुचिका ने कहा 'सूट दिखाइए' तू वो सूट दिखाए उससे पहले hi मोहनलाल ने उससे थीम ड्रेस के बारे में पूछा तू सलेसगिरल ने कहा 'सर मिल जाएगी आप साइज बताइये' तू मोहनलाल ने रुचिका की और इशारा किया तू सलेसगिरल ने मज़े लेते हुए कहा 'क्या सर आपको आपकी वाइफ का साइज भी नहीं पता'
सलेसगिरल ने तू वो बात बहुत hi नार्मल तरीके से कही थी लेकिन उस बेचारी को क्या पता था की ये दोनों पति पत्नी नहीं, बल्कि बाप बेटी हैं और उसकी इस बात ने उन दोनों को ऐसी स्थिति में ला दिया था की दोनों को बहुत शर्म आने लगी.
रुचिका ने तू अपना चेहरा hi झुका लिया क्योँकि उसने तू इस तरह की सिचुएशन के बारे में अपने आप को तैयार hi नहीं किया था. मोहनलाल ने हिम्मत करते हुए सलेसगिरल से कहा 'आप इनका नाप ले लीजिये और उसके हिसाब से ड्रेस दे दीजिये'
सलेसगिरल इंची टेप लेकर उसका माप लेने के लिए उसने रुचिका से दुपट्टा हटाने के लिए कहा तू रुचिका उससे कहने लगी 'सेपरेट रूम नहीं है'
सलेसगिरल उससे चेंजिंग रूम में ले गयी और उसका माप लेने लगी तू जान भुजकर टेप को टाइट करके उसकी चूचियों को दबाया तू रुचिका के मुंह से 'आह' निकला तू सलेसगिरल ने कुटिल मुस्कान से कहा 'मैडम अगर अपने पति को रिझाना है तू थोड़ा सा टाइट नाप ले लू, जिससे आपकी चूचियां उभरकर दिखाई देने लगेंगे और आपका पति आप पर लट्टू हो जायेगा' तू रुचिका ने बस इतना hi कहा 'नहीं, बस नार्मल hi माप लो' तू सलेसगिरल ने उससे कहा 'मैडम आपके बूब्स की शेप बहुत hi बढ़िया है, परफेक्ट शेप में हैं और ऐसे बूब्स बहुत hi काम लेडीज के होते हैं, मेरा आप को सुझाव है की आप थोड़ी सी टाइट फिटिंग की ड्रेस लेंगी तू आप पर वो बहुत अच्छी लगेगी और आप कुछ जयादा खूबसूरत दिखाई देंगी'
रुचिका 'टाइट फिटिंग से उनकंफर्टबले होगा, इसलिए नार्मल साइज hi लो' तब सलेसगिरल ने उससे सुझाव दिया 'मैडम मेरी बात अगर मनो तू आप नार्मल साइज ले लो, लेकिन एक ड्रेस काम से काम थोड़ी टाइट ले लो और फिर देखना की उस ड्रेस में आपका पति आप के आगे पीछे कैसे घूमेगा'
रुचिका दुविधा में आ गयी तू उसने कुछ सोचकर उससे एक ड्रेस टाइट लेने के लिए हाँ कर दी. उसके बाद सलेसगिरल ने उसकी कमर और जब हिप्स का माप लेने लगी तू यंहा भी उसके नितम्बों को अच्छे से हाथों से सेहला लिया और उसके नितम्बों के बीच की लाइन पर उंगलियां भी फेर ली जिससे रुचिका को नशा छाने लगा. सलेसगिरल ने माप लेकर उसकी बहुत तारीफ की और उससे अच्छी वाली इनरवेअर लेने का भी सुझाव दिया और कहा 'मैडम आप इतनी खूबसूरत है और आपका फिगर एकदम परफेक्ट है, आपको तू कोई मॉडल होना चाहिए था, आप ये पुराने ज़माने की ब्रा पहनाने छोड़ दीजिये'
रुचिका 'मेरी ब्रा अच्छी तू है और कम्फर्टेबले भी' सलेसगिरल को लगा की शायद वो नाराज हो गयी तू उसने बड़ी चापलूसी से कहा 'मैडम मैं ये नहीं कह रही की आपकी ब्रा अच्छी hi नहीं है, मैंने तू बस इतना सुझाव दिया है की मॉडर्न ज़माने में ऐसी ब्रा आजकल की साधारण लेडीज भी नहीं पहनती और आप तू बहुत स्पेशल है. मेरे पुरे करियर में मैंने .आप जैसी खूबसूरत लेडी नहीं देखि है. मेरा काम तू सुझाव देना है, बाकि आपकी मर्जी'
रुचिका ने उसकी बात सुनकर अपने आप पर नाज़ करने लगी और करे भी क्योँ नहीं. तारीफ hi तू हर लेडी की कमजोरी होती है तू उसने कहा 'ठीक है, लेकिन एक रिक्वेस्ट है की मुझे इनरवेअर अकेले में दिखाना' सलेसगिरल ने मुस्कराते हुए कहा 'मैं समझ गयी आप अपने पति से बहुत शर्माती हो, अरे उनसे क्या शर्माना, ये शरीर उनके लिए hi तू है, अगर वो इसका मज़ा नहीं लेंगे तू कौन लेगा. आप उनसे शर्माना छोड़िये और अपने शरीर के जलवो से उनको बांध कर रखिये, नहीं तू पता नहीं कब दूसरी औरत के चक्कर में पद गए तू आपके आशियाने से उड़द जायेंगे और फिर आपको जयादा दिक्कत होगी'
रुचिका ने उसकी बात सुनी और उससे कहा 'सब ठीक है, लेकिन अभी आप मुझे अकेले में hi दिखाना' और सलेसगिरल बस मुस्करा दी और जब चेंजिंग रूम से बहार आने लगे तू रुचिका दुप्पट्टा उड़ने लगी तू सलेसगिरल ने कहा 'मैडम आप इसके बगैर जयादा खूबसूरत लगाती हैं, तू उससे न ूड़िये' , रुचिका ने उसकी तरफ देखा और स्माइल देते हुए कहा 'मुझे शर्म आती है' तब सलेसगिरल ने कहा 'मैडम अपने पति से भी क्या शर्माना, अपना खजाना उन्हें नहीं दिखाओगी तू किसको दिखाओगी'
रुचिका उसकी बात सुनकर एकदम से शर्मा गयी और फिर उसने बस इतना hi कहा 'आज नहीं, फिर कभी'. ये कहकर दोनों बहार आ गए और सलेसगिरल ने मोहनलाल से कहा 'सर यू अरे वैरी लकी तो हैवे सुच ा ब्यूटीफुल वाइफ, इनकी फिगर लाजवाब है, इन्हे तू कोई मॉडल होना चाहिए था'
रुचिका ने मोहनलाल को देखकर कहा 'मैं अब नए रिश्ते के लिए तैयार हु' और इस बात को पक्का करने के लिए उसने अपना हाथ मोहनलाल के हाथ पर रख दिया और उससे कहा की 'आप चिंता न करो किसी को भी नहीं पता लगेगा की मैं आपकी बीवी नहीं हु, बल्कि हर कोई आपकी तारीफ करेगा' फिर रुचिका ने अपने पर्स में से कुछ कुछ निकलकर अपना मेकअप ठीक करने लगी. फिर ट्रैन रुकने के बाद दोनों ट्रैन से नीचे आये और रुचिका ने मोहनलाल के हाथ को इस तरह से पकड़ा हुआ था जैसे की नै नवेली दुल्हन अपने पति का हाथ पकड़ कर चलती हो
दोनों चलते हुए बहार आये तू वंहा उनको लेने के लिए एक टैक्सी आयी हुई थी तू दोनों को ड्राइवर ने ग्रीट किया और उनका सामान रखा और दोनों टैक्सी में बैठकर उस होटल में पंहुच गए जंहा उनके नाम से बुकिंग थी. वो टैक्सी से उत्तरकार रिसेप्शन पर पंहुचे और उनका सामान एक वेटर लेकर आ गया.
रिसेप्शन पर पंहुच कर उन्हें उनके कमरे के बारे में बताया गया और लिफ्ट से वो दोनों कमरे में आ गए और वेटर उनका सामान छोड़ कर जाने लगा तू उससे मोहनलाल ने टिप दी और उसके जाने के बाद कमरे को अंदर से बंद कर दिया.
रुचिका तू पहली बार किसी होटल में आयी थी तू होटल जो की एक फाइव स्टार होटल था को देखकर उसकी आँखें चुंघियां गयी थी और जब कमरे में पंहुचती है तू उस कमरे को देखकर मन में सोचती है की क्या कमरा ऐसा भी हो सकता है क्योंकि वो आज तक अपने घर के कमरे को hi सबसे अच्छा मानती थी और वो इतनी सफाई पसंद थी की उससे अपने कमरे में सबकुछ स्पीक एंड सपं (बेदाग़ सफाई) रखती थी लेकिन ये कमरा तू उसकी उम्मीद से काम से काम सौ दर्जे बेहतर था.
इस तरह का कमरा तू उसने कभी सपने में भी नहीं सोचा था क्योंकि वो बेचारी तू 5 स्टार तू बहुत दूर की बात है कभी किसी छोटे होटल में भी नहीं गयी थी तू उससे अच्चम्भा होना तू अवश्यम्भावी था. वो कमरा बहुत बड़ा था जिसमे आप टहल भी सकते थे, हर सुख सुविधा से परिपूर्ण था, जिसमे किंग साइज का बीएड जिस पर 12 इंच मोठे गद्दे और उसपर बहुत hi शानदार चादर बिछी हुई थी और बहुत सरे तकिये लगे हुए थे, साइड टेबल्स उनपर बहुत बढ़िया लैम्प्स, कीमती सोफे सेंटर टेबल, बहुत बड़ी खिड़की जिनपर बहुत उत्तम क्वालिटी के परदे और बालकनी, बाथरूम, फ्रिज, 65 इंच एलसीडी टीवी, केतली, बहुत साडी टोकरियां जिनमे ड्राई फ्रूट्स, चॉकलेट्स, बिस्किट्स और बहुत कुछ था. बाथरूम में हर तरह की सुविधा, कई तरह के साबुन, शैम्पू और ब्यूटी ट्रीटमेंट्स के लोशन्स. ये सब देखकर तू रुचिका ने मन में सोचा की उसने सही फैसला किया की वो अपने पापा की पत्नी बनकर आयी है, ये ख्याल आते hi उसके मन में गुदगुदी होने लगती थी. अभी वो कमरे की खूबसूरती में खोयी हुई थी की दूर पर नॉक हुआ तू मोहनलाल ने देखा की वेटर उनके लिए अनार का जूस लेकर आया है और बोलै की 'वेलकम ड्रिंक' और रखकर चला गया.
उसके जाने के बाद मोहनलाल ने रुचिका से पूछा 'कैसा लगा' तू उसने कहा 'बहुत hi अच्छा, मैं तू यह सोच रही हु की क्या कमरा ऐसा भी होता है, ये तू लाजवाब है"
उसकी बात सुनकर मोहनलाल ने उसके चेहरे पर आयी ख़ुशी को देखा तू कहा "चलो अच्छा है की मेरी बीवी को कमरा पसंद आया, यह तू अभी शुरुआत है और अब तुम मजे लेने के लिए तैयार हो जाओ"
उसके बाद मोहनलाल उसका हाथ पकड़कर उससे सोफे पर बैठ कर जूस का गिलास लाया और उसके मुंह से लगाकर उसे सिप करने का इशारा किया तू उसने सिप लिया और फिर गिलास को मोहनलाल के मुंह की तरफ लेजाकर उसको पीने के लिए कहा लेकिन मोहनलाल ने उसके हाथ के ऊपर हाथ रखकर गिलास को रुचिका के मुंह की तरफ वापिस लेजाकर उसे पीने के लिए कहा तू उसने अपने मुंह को हटा लिया तू मोहनलाल ने अपने दूसरे हाथ से उसका चेहरा पकड़कर बड़े प्यार से कहा "मेरी बीवी को इसकी जरुरत ज्यादा है"
रुचिका मुस्कराते हुए 'आप तू कह रहे थे की पति पत्नी में कोई फरक नहीं होता तू सिर्फ मैं hi क्योँ लू'
मोहनलाल ने उसके गाल को सहलाते हुए 'यही तू मैं कह रहा हु की तुमने लिया या मैंने लिया, बात तू एक hi है' और आँखों से इशारा करते हुए उससे पीने के लिए कहा तू रुचिका ने जूस के गिलास पर मुंह लगाकर बड़े प्यार से कनखियोँ से मोहनलाल को देखते हुए सिप करने लगी और जब कोई एक चौथाई बच गया तू रुचिका ने अपना मुंह हटा लिया और ज़िद करके गिलास को मोहनलाल के मुंह से लगा दिया. मोहनलाल ने रुचिका का हाथ पकड़े पकड़े hi पीने लगा और जूस पीते हुए वो बहुत hi प्यार भरी नजरो से रुचिका को देख रहा था, जिसका ताव रुचिका न ला पाई और आँखों की पलके झुका ली, लेकिन उसका मन अब मोहनलाल को देखने का कर रहा था तू उसने अपनी कनखियोँ से उससे देखा तू वो उससे hi देख रहा था. ये जानकर उसने अपनी पलके फिर झुका ली और थोड़ी थोड़ी देर बाद वो मोहनलाल को देखती तू वो हर वक़्त उससे hi देख रहा होता तू उसके दिल की धड़कन बढ़नी शुरू हो गयी थी.
रुचिका को उसके इस तरह देखते रहने से शर्म भी आ रही थी लेकिन मोहनलाल था की अपनी नज़रे उसके चेहरे से बिलकुल हटा नहीं रहा था तू रुचिका वंहा से कड़ी होकर जाने लगी तू मोहनलाल ने उसका हाथ छोड़ा hi नहीं और उससे वापिस बैठने के लिए कहा तू रुचिका ने अपनी झेंप मिटने के लिए कहा 'जूस लेकर आती हु' तब मोहनलाल ने सीरियस होते हुए उससे बैठने को कहा तू रुचिका पता नहीं क्या सोचकर बैठ गयी तू मोहनलाल ने उसका दूसरा हाथ भी अपने हाथ में लेकर पूछा 'क्या तुम वाकई मेरी पत्नी बनकर लोगों के सामने आना चाहती हो'
रुचिका 'क्या अब भी इस बात का कोई मतलब है'
मोहनलाल 'हाँ, बिलकुल है, क्योँकि अभी तक तुम्हारे बारे में कोई नहीं जनता, लेकिन मैंने तुम्हे एक बार ये कह कर इंट्रोडस करवाया की तुम मेरी वाइफ हो तू ये ओने वे ट्रैफिक है, फिर चाहे कुछ भी हो जाये हम दोनों hi इस बात से इंकार नहीं कर पाएंगे की हम पति पत्नी नहीं हैं'
रुचिका 'हम होटल वालो को तू बता hi चुके हैं की हम पति पत्नी हैं'
मोहनलाल 'होटल वालो को सिर्फ ये पता है की हम कपल बनकर आये हैं, लेकिन अभी तक उनको हमारे रिश्ते के बारे में नहीं पता. तुम अगर कहो तू मैं अभी जाकर उनको बता दूंगा की तुम मेरी बेटी हो और जो भी खर्चा होगा उसका 50% उनको दे दूंगा'
रुचिका 'पहली बात की तीन दिन का खर्चा कितना होगा और दूसरा क्या वो मान जायेंगे की आप अपनी बेटी के साथ फ्री वाले कमरे में रहो'
मोहनलाल 'तीन दिन का आधा खर्चा काम से काम 25 हज़ार होगा और दूसरी बात के लिए उनसे बात करनी पड़ेगी'
रुचिका 'ये तू बहुत महंगा है'
मोहनलाल 'ये भी डिस्काउंटेड रेट है नहीं तू रेट डबल होता, तुम खर्चे की चिंता न करो बल्कि ये सोचो की तुम क्या चाहती हो'
रुचिका 'मुझे तू एन्जॉय करना है, लेकिन इतना खर्चा सोचकर hi मेरा एन्जॉयमेंट ख़तम हो जाता है और मैं अपने आप को कुलप्रीत समझने लगाती हु'
मोहनलाल 'देखो अपने आप को दोषी मत मनो और तुम यही बैठो मैं बात करके आता हु और पैसे की बिलकुल चिंता न करो, वो तू हम और कमा लेंगे'
रुचिका 'नहीं, मैंने डीडे कर लिया है की मैं अब आपकी पत्नी बनकर hi लोगों से मिलूंगी, चाहे कुछ भी हो जाये, पीछे नहीं हटूंगी'
मोहनलाल 'रुचिका तुम इस सब का मतलब समझ नहीं रही हो'
रुचिका 'मैं सोच समझ कर hi कह रही हु'
मोहनलाल 'फिर कनिह कपल की डेफिनिशन की पहले की तरह समझ आ गया है और बाद में पछताना पड़े'
रुचिका 'मैं तू तैयार हु, अगर आपको मुझे वाइफ कहने में कोई तकलीफ है तू बात दूसरी है'
मोहनलाल 'मुझे तकलीफ इस बात से होगी की कहीं तुम बाद में दुखी न हो जाओ. मैं तुम्हे किसी भी हालत में दुखी नहीं देख सकता उसके लिए चाहे मुझे पूरी दुनिया से hi क्योँ न लड़ना पड़े'
रुचिका मोहनलाल की बात सुनकर बहुत भावुक हो गयी और अपनी बांहे मोहनलाल के गले में डालकर उससे चिपक गयी और बड़े प्यार से कहने लगी 'आप मुझे इतना प्यार करते हो' उसकी बात सुनकर मोहनलाल के मुख से निकला
'इतना प्यार तू मैंने खुद से भी नहीं किया जितना तुम से हो गया है'
रुचिका ने जैसे hi मोहनलाल की बात सुनी तू उसने मोहनलाल के गले में जो बांहे डाली हुई थी उससे उसका चेहरा अपनी तरफ करके और जोर से कास लिया. ऐसा करने से दोनों इतने नजदीक हो गए की एक दूसरे की साँसों को सुन सकते थे. रुचिका के उभारों ने मोहनलाल को बहकाने पर मजबूर कर दिया फिर भी उसने बस इतना hi किया की अपने हाथों को उसकी पीठ पर लेजाकर कास लिए और उससे ये हुआ की रुचिका के उभर तू मोहनलाल की छथि में धंस hi गए और उसके नरम नरम गालों ने पहली बार मोहनलाल के सख्त गलों का स्पर्श किया तू दोनों को एक झटका लगा और अपने गलों को थोड़ा सा पीछे करते हुए उखड़ती हुई साँसों से इतना hi कहा 'मुझे कोई तकलीफ नहीं होगी और आप मुझे अपनी वाइफ की तरह इंट्रोडस करवा सकते हैं'
मोहनलाल 'ये तुम्हारा आखिरी फैसला है'
रुचिका 'बिलकुल अब इस में कोई गुंजाईश नहीं है'
मोहनलाल उसकी पीठ को सहलाते हुए 'तू ठीक है फिर चलो तैयार हो जाओ और तुम्हे अपनी वाइफ बनाते हैं'
रुचिका 'क्या मैं आपकी वाइफ नहीं लगाती'
मोहनलाल उसकी पीठ को सेहला रहा था तू एक बार फिर से उसके हाथों को ब्रा के स्ट्राप का एहसास हुआ तू इस बार उस हिस्से को अच्छे से सहलाते हुए उसके कान के पास अपने मुंह को लेजाकर 'तुम खूबसूरत हो, लेकिन मेरी वाइफ को सबसे जयादा खूबसूरत लग्न चाहिए, इसलिए चलो तुम्हारा हुलिया बदलते हैं'
मोहनलाल ने रिसेप्शन पर फ़ोन करके टैक्सी के लिए बोलै तू कहा गया की नीचे आ जाइये तू उसने रुचिका को कहा 'चलो' और फिर वो दोनों नीचे आये तू रिसेप्शन पर कहा गया की 'आप बैठए, टैक्सी आ रही है'. वो दोनों आकर वंहा पड़े सोफे पर जाकर बैठ गए और दोनों ने एक दूसरे का हाथ पकड़ा हुआ था.
वो दोनों वेट कर hi रहे थे की एक आदमी वंहा पर रिसेप्शन पर लड़ रहा था तू पता लगा की उसका भी फ्री कपल टूर था और वो अपनी बहिन के साथ आ गया और उसने ये बात बताई तू होटल वालो ने कहा की उनको कपल वाला रूम नहीं मिल सकता और फ्रेश बुकिंग करनी पड़ेगी. उसने जब चार्जेज पूछे तू पता लगा की 3 दिन का पैकेज दो लोगों के लिए करीब एक लाख का था तू उसने कहा की रेट तू काम था, तू पता लगा की पहले से हुई बुकिंग पर डिस्काउंट था, लेकिन उससे नै बुकिंग पुरे रेट पर करनी पड़ेगी. वो कह रहा था की पुराणी बुकिंग का 50% दे देगा तू होटल वो ने साफ़ साफ़ मन कर दिया और कहा की आप अपनी वाइफ के साथ आइये तू कोई भी चार्ज नहीं है.
उसकी और होटल वाले की बातें उन दोनों के कानो में पद रही थी और जैसे जैसे बात समझ आ रही थी तू रुचिका का मोहनलाल की वाइफ बनने का निर्णय पक्का होता जा रहा था और उसने अपने दांये हाथ को मोहनलाल के बांये हाथ के नीचे से निकलकर उसकी बाजु को कसकर पकड़ लिया तू उसका दांया उरोज मोहनलाल की बाजु पर धंस रहा था. वो ये इसलिए कर रही थी की वंहा पर जो भी बैठा हो तू यही समझे की वो दोनों कपल हैं. मोहनलाल को रुचिका का इस तरह करना एक सुखद एहसास हो रहा था.
तभी एक आदमी आया और उसने 3 दिन के प्रोग्राम का एक पेपर दिया और ये कहा 'सर कल शाम को कपल्स के लिए स्पेशल प्रोग्राम है और उसके लिए ड्रेस कोड इस पेपर पर लिखा हुआ है' तू आप ेंसुरे कर लीजिये की वो ड्रेस आपके पास है नहीं तू उस प्रोग्राम में एंट्री नहीं होगी. ये कहकर वो चला गया.
टैक्सी से वो एक बड़े से मॉल में आ गए और वंहा पर सबसे पहले एक ब्यूटी पार्लर का पता किया और रुचिका को मेकओवर के लिए वंहा छोड़ दिया और मोहनलाल मॉल में घूमते हुए वंहा की दुकानों का निरिक्षण कर रहा था तू एक अच्छी सी गारमेंट्स की दूकान पर जाकर उस ड्रेस के बारे में पूछा तू वंहा की सलेसगिरल ने कहा की मिल जाएगी और साइज पूछने लगी तू बेचारे मोहनलाल को कैसे पता होता. उसने सलेसगिरल से कहा की अभी उसकी वाइफ आएगी, वो थोड़ी शाय है तू आप उसकी मदद कर देना, तू उस सलेसगिरल ने आश्वासन दिया की वो ड्रेस फाइनल करा देगी और जब उसने इनरवेअर के लिए पूछा तू मोहनलाल ने उससे कहा की आप मेरी हेल्प कीजिये और मेरी वाइफ को समझा कर उससे hi ये सब लेने के लिए ेन्सॉरगे करना है और जो ठीक लगे उससे लेने के लिए कहना है और इतना कहकर उसने सलेसगिरल को अच्छी सी टिप दी तू वो खुश हो गयी और बोली 'सर आप चिंता न करो, मैं सब संभल लुंगी'
मोहनलाल वंहा से निकलकर एक ज्वेलरी शॉप में गया और वंहा से खरीददारी के बाद वो वापिस ब्यूटी पार्लर गया और रुचिका को देखा तू उससे विश्वास hi नहीं हुआ की वो रुचिका hi है, वो बहुत hi खूबसूरत लग रही थी. मोहनलाल ने उसकी तारीफ की तू वो ख़ुशी से फूली नहीं समां रही थी और उससे पहली बार ऐसा लग रहा था की खुद को खूबसूरत बनाने के लिए भी म्हणत करनी पड़ती है.
मोहनलाल ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने साथ लेजाकर उस गारमेंट्स की दूकान पर ले गया और वंहा पर जैसे hi अंदर गए तू वही सलेसगिरल उनके पास आयी और कहा 'मई ी हेल्प यू' तू मोहनलाल ने उससे कहा की 'मेरी वाइफ के लिए कुछ अच्छी सी ड्रेस दिखाए', रुचिका के चेहरे पर मुस्कान थी की उससे नयी ड्रेसेस मिलाने वाली है और वो भी बहुत बड़े स्टोर से.
सलेसगिरल उन्हें एक काउंटर पर ले गयी और पूछा 'कोई पर्टिकुलर ड्रेस' तू रुचिका ने कहा 'सूट दिखाइए' तू वो सूट दिखाए उससे पहले hi मोहनलाल ने उससे थीम ड्रेस के बारे में पूछा तू सलेसगिरल ने कहा 'सर मिल जाएगी आप साइज बताइये' तू मोहनलाल ने रुचिका की और इशारा किया तू सलेसगिरल ने मज़े लेते हुए कहा 'क्या सर आपको आपकी वाइफ का साइज भी नहीं पता'
सलेसगिरल ने तू वो बात बहुत hi नार्मल तरीके से कही थी लेकिन उस बेचारी को क्या पता था की ये दोनों पति पत्नी नहीं, बल्कि बाप बेटी हैं और उसकी इस बात ने उन दोनों को ऐसी स्थिति में ला दिया था की दोनों को बहुत शर्म आने लगी.
रुचिका ने तू अपना चेहरा hi झुका लिया क्योँकि उसने तू इस तरह की सिचुएशन के बारे में अपने आप को तैयार hi नहीं किया था. मोहनलाल ने हिम्मत करते हुए सलेसगिरल से कहा 'आप इनका नाप ले लीजिये और उसके हिसाब से ड्रेस दे दीजिये'
सलेसगिरल इंची टेप लेकर उसका माप लेने के लिए उसने रुचिका से दुपट्टा हटाने के लिए कहा तू रुचिका उससे कहने लगी 'सेपरेट रूम नहीं है'
सलेसगिरल उससे चेंजिंग रूम में ले गयी और उसका माप लेने लगी तू जान भुजकर टेप को टाइट करके उसकी चूचियों को दबाया तू रुचिका के मुंह से 'आह' निकला तू सलेसगिरल ने कुटिल मुस्कान से कहा 'मैडम अगर अपने पति को रिझाना है तू थोड़ा सा टाइट नाप ले लू, जिससे आपकी चूचियां उभरकर दिखाई देने लगेंगे और आपका पति आप पर लट्टू हो जायेगा' तू रुचिका ने बस इतना hi कहा 'नहीं, बस नार्मल hi माप लो' तू सलेसगिरल ने उससे कहा 'मैडम आपके बूब्स की शेप बहुत hi बढ़िया है, परफेक्ट शेप में हैं और ऐसे बूब्स बहुत hi काम लेडीज के होते हैं, मेरा आप को सुझाव है की आप थोड़ी सी टाइट फिटिंग की ड्रेस लेंगी तू आप पर वो बहुत अच्छी लगेगी और आप कुछ जयादा खूबसूरत दिखाई देंगी'
रुचिका 'टाइट फिटिंग से उनकंफर्टबले होगा, इसलिए नार्मल साइज hi लो' तब सलेसगिरल ने उससे सुझाव दिया 'मैडम मेरी बात अगर मनो तू आप नार्मल साइज ले लो, लेकिन एक ड्रेस काम से काम थोड़ी टाइट ले लो और फिर देखना की उस ड्रेस में आपका पति आप के आगे पीछे कैसे घूमेगा'
रुचिका दुविधा में आ गयी तू उसने कुछ सोचकर उससे एक ड्रेस टाइट लेने के लिए हाँ कर दी. उसके बाद सलेसगिरल ने उसकी कमर और जब हिप्स का माप लेने लगी तू यंहा भी उसके नितम्बों को अच्छे से हाथों से सेहला लिया और उसके नितम्बों के बीच की लाइन पर उंगलियां भी फेर ली जिससे रुचिका को नशा छाने लगा. सलेसगिरल ने माप लेकर उसकी बहुत तारीफ की और उससे अच्छी वाली इनरवेअर लेने का भी सुझाव दिया और कहा 'मैडम आप इतनी खूबसूरत है और आपका फिगर एकदम परफेक्ट है, आपको तू कोई मॉडल होना चाहिए था, आप ये पुराने ज़माने की ब्रा पहनाने छोड़ दीजिये'
रुचिका 'मेरी ब्रा अच्छी तू है और कम्फर्टेबले भी' सलेसगिरल को लगा की शायद वो नाराज हो गयी तू उसने बड़ी चापलूसी से कहा 'मैडम मैं ये नहीं कह रही की आपकी ब्रा अच्छी hi नहीं है, मैंने तू बस इतना सुझाव दिया है की मॉडर्न ज़माने में ऐसी ब्रा आजकल की साधारण लेडीज भी नहीं पहनती और आप तू बहुत स्पेशल है. मेरे पुरे करियर में मैंने .आप जैसी खूबसूरत लेडी नहीं देखि है. मेरा काम तू सुझाव देना है, बाकि आपकी मर्जी'
रुचिका ने उसकी बात सुनकर अपने आप पर नाज़ करने लगी और करे भी क्योँ नहीं. तारीफ hi तू हर लेडी की कमजोरी होती है तू उसने कहा 'ठीक है, लेकिन एक रिक्वेस्ट है की मुझे इनरवेअर अकेले में दिखाना' सलेसगिरल ने मुस्कराते हुए कहा 'मैं समझ गयी आप अपने पति से बहुत शर्माती हो, अरे उनसे क्या शर्माना, ये शरीर उनके लिए hi तू है, अगर वो इसका मज़ा नहीं लेंगे तू कौन लेगा. आप उनसे शर्माना छोड़िये और अपने शरीर के जलवो से उनको बांध कर रखिये, नहीं तू पता नहीं कब दूसरी औरत के चक्कर में पद गए तू आपके आशियाने से उड़द जायेंगे और फिर आपको जयादा दिक्कत होगी'
रुचिका ने उसकी बात सुनी और उससे कहा 'सब ठीक है, लेकिन अभी आप मुझे अकेले में hi दिखाना' और सलेसगिरल बस मुस्करा दी और जब चेंजिंग रूम से बहार आने लगे तू रुचिका दुप्पट्टा उड़ने लगी तू सलेसगिरल ने कहा 'मैडम आप इसके बगैर जयादा खूबसूरत लगाती हैं, तू उससे न ूड़िये' , रुचिका ने उसकी तरफ देखा और स्माइल देते हुए कहा 'मुझे शर्म आती है' तब सलेसगिरल ने कहा 'मैडम अपने पति से भी क्या शर्माना, अपना खजाना उन्हें नहीं दिखाओगी तू किसको दिखाओगी'
रुचिका उसकी बात सुनकर एकदम से शर्मा गयी और फिर उसने बस इतना hi कहा 'आज नहीं, फिर कभी'. ये कहकर दोनों बहार आ गए और सलेसगिरल ने मोहनलाल से कहा 'सर यू अरे वैरी लकी तो हैवे सुच ा ब्यूटीफुल वाइफ, इनकी फिगर लाजवाब है, इन्हे तू कोई मॉडल होना चाहिए था'