गुड्डी ने शरमाते हुए, लेकिन आँखों में शैतानी भरकर जवाब दिया,
“सब देवर ऐसा ही करते हैं अपनी-अपनी भाभी के साथ... पीछे से पकड़ना, गले लगाना, छूना... कभी-कभी तो...”
“अरे वाह! तुमको कैसे मालूम?” बड़े भाई ने मुस्कुराते हुए पूछा और साहसपूर्वक गुड्डी का एक हाथ पकड़कर अपने दोनों हाथों के बीच ले लिया। फिर जानबूझकर उसका हाथ अपनी जाँघ पर रख दिया — ठीक उस जगह के पास जहाँ उसका लंड अंडरवियर में फड़क रहा था।
गुड्डी का हाथ गरम हो गया। वह शर्मा गई, लेकिन हाथ हटाने की कोशिश भी नहीं की। फनलवर की प्रस्तुति।
दूसरी लड़की (दीदी) ने छोटे भाई की तरफ देखकर हँसते हुए कहा,
“गुड्डी ठीक ही तो कहती है... सब देवर भाभी के साथ थोड़ा-बहुत मज़ाक, मस्ती तो चलती ही है...”
उसने छोटे भाई की ओर देखा और शरारत भरी आवाज़ में बोली,
“छोटे भैया... आप भी तो अपनी भाभी के साथ खूब खुशियाँ मनाते थे... मुझे सब मालूम है...”
“अच्छा! छोड़ो...” छोटे भाई ने हँसते हुए पूछा, “ये बताओ तुम दोनों अपने पति से खुश हो?”
दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराईं और फिर शर्मा गईं। उनके चेहरे लाल हो गए। साफ़ झलक रहा था कि बात सेक्स की तरफ जा रही है।
बड़े भाई ने गुड्डी को और करीब खींचते हुए पूछा,
“शरमाती क्यों हो? अब तो तुम लोगों की शादी हो चुकी है। बोलो ना... तुम्हारे पति तुम्हें खुश रखते हैं कि नहीं? रात में... अच्छे से चोदते हैं या बस अपना काम करके सो जाते हैं?”
दीदी ने शर्मा कर सिर झुका लिया, लेकिन गुड्डी ने हिम्मत करके कहा,
“रोज़ तो चोदते हैं... लेकिन...”
“लेकिन क्या?” छोटे भाई ने दीदी की कमर पर हाथ रखते हुए पूछा और उसे अपनी ओर खींच लिया। अब दीदी उसकी गोद के बहुत करीब थी।
गुड्डी ने शर्माते हुए कहा,
“हालाँकि मेरा पति मुझे रोज़ चोदता है... लेकिन मुझे और ज़्यादा... और ज़ोरदार चुदाई चाहिए... वो जल्दी झड़ जाता है...”
दीदी भी अब बोल पड़ी,
“मेरा पति तो मेरी मर्ज़ी के मुताबिक़ अंदर तक नहीं रख पाता... बस दो-तीन धक्के और...”
दोनों भाईयों की आँखें चमक उठीं। बड़े भाई ने गुड्डी की जाँघ पर हाथ फेरते हुए कहा,
“तो फिर तुम लोग क्या चाहती हो? हम जैसे देवरों से...?”
गुड्डी ने शरमा कर छोटे भाई की तरफ देखा और बोली,
“भैया... आप लोग तो खूब मस्ती करते हैं... कोलकाता में... अपनी रखैलों और रंडियों के साथ... हमें सब मालूम है...”
“क्या मतलब? कैसी मस्ती?” बड़े भाई ने जानबूझकर पूछा। निर्मात्री फनलवर है।
“अब बनिए मत... हम लोगों को सब मालूम है,” दीदी ने खुलकर कहा, “भैया, बहाना मत बताइए... बताइए ना... आप लोग कोलकाता में अपनी रखैल और रंडी के साथ क्या-क्या मस्ती करते हैं? वो औरतें क्या-क्या करती हैं जो हम घर की औरतें नहीं कर पातीं?”
बड़े भाई ने गुड्डी की जाँघ को और ऊपर सहलाते हुए, गंदी मुस्कान के साथ बोला,
“वो औरतें सब कुछ करती हैं... लंड चूसती हैं, गांड मरवाती हैं, एक साथ दो-तीन लंड लेती हैं... रस पीती हैं... नंगी होकर नाचती हैं... जो तुम गृहणियाँ शर्म के मारे नहीं कर पातीं...”
छोटे भाई ने दीदी की कमर पर हाथ फेरते हुए कहा,
“अगर तुम औरतें भी वो सब करो जो हम मर्दों को अच्छा लगता है, तो फिर क्यों हम चुदाई के लिए दूसरी औरतों के पास जाएँगे?”
दोनों लड़कियाँ एक-दूसरे को देखकर शर्मा गईं, लेकिन उनकी साँसें तेज़ हो गई थीं। उनकी चूतें गीली होने लगी थीं।
गुड्डी ने धीरे से पूछा,
“क्या-क्या करती हैं वो औरतें...?” फनलवर की रचना।
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