सुबह: छोटी बहू के कमरे में।
“तू जानता है, मैं जब इस रूम में आई तब तक तेरे सेठजी इसको चोद चुके थे और दोनों नंगे सो रहे थे। तुम्हारा सेठ भी साला हरामी है... उसको मौका मिलेगा तो अपनी बेटी रेखा को भी चोद डालेगा। क्या पता चोद भी चुका हो!”
छोटी बहू ने परम की छाती पर सिर रखते हुए कहा। फनलवर की प्रस्तुति।
परम ने बहू की नंगी कमर पर हाथ फेरते हुए जवाब दिया,
“नहीं भाभी... रेखा आज भी वर्जिन है, बिल्कुल कुँवारी... और हाँ, रेखा को कोई और टच करेगा तो मैं उसकी जान ले लूँगा... चाहे वो रेखा का बाप हो या मेरा बाप... रेखा सिर्फ मेरी है और सिर्फ मेरा माल है। उसके माल पर सिर्फ और सिर्फ मेरे इस लंड का अधिकार है...”
परम ने छोटी बहू को सहलाते हुए कहा,
“चलो अब आँख बंद कर लो... सोते हैं...”
“मैं भी साला बुद्धू हूँ... आज भी रेखा चोदने के लिए खुशामद कर रही थी... लेकिन सब कुछ किया... सिर्फ चूत में मेरा लंड नहीं पेला... उसके बदले बड़ी बहू को रेखा के सामने जमकर चोदा... रेखा ने ही कहा उसे चोदने के लिए... और रेखा ने ही उसकी भाभी की चूत फैलाई... मैं क्या करता!”
परम छोटी बहू को सहलाता रहा और पूछता रहा कि क्या उसे उसे चोदना चाहिए। लेकिन छोटी बहू ने कहा,
“आज छोड़ दे... आज तेरे भैया ने मेरी चूत को बहुत बुरी तरह से चोदा है... इसलिए उसने खुद को माफ कर दिया...”
उसने परम को जोश से चूम लिया।
“परम... अब थोड़ी देर मुझे अपनी बाहों में लेकर सुला दे...”
हालाँकि दरवाज़ा बंद था, लेकिन दोनों अंदर से कुंडी लगाना भूल गए थे।
सुंदरी का आगमन
कुछ देर बाद सुंदरी कमरे में आई। उसने अंदर का दृश्य देखा तो उसकी चूत तुरंत गीली हो गई।
परम, किरण और छोटी बहू, तीनों नंगे, एक-दूसरे से लिपटे गहरी नींद में सो रहे थे। परम का एक हाथ छोटी बहू की छोटी, कसी हुई चूचियों पर था। किरण की जवान, मस्त चूत अभी भी परम के वीर्य से चिपचिपी थी। निर्मात्री फनलवर है।
सुंदरी को छोटी बहू की पतली जाँघों के बीच का छोटा सा, गुलाबी त्रिकोण बहुत पसंद आया। उसने छोटी बहू को पहले कभी पूरी तरह नंगी नहीं देखा था।
सुंदरी खुद को रोक नहीं पाई। वह धीरे से घुटनों के बल छोटी बहू के पास बैठ गई। उसने चारों ओर देखा, सब गहरी नींद में थे।
उसने धीरे से परम का हाथ और पैर छोटी बहू के शरीर से हटाए। फिर उसने छोटी बहू की टाँगें हल्के से अलग कीं। छोटी बहू की चूत थोड़ी खुल गई।
सुंदरी ने दोनों हाथों से चूत के होंठों को अलग किया और चौड़ा कर दिया। गुलाबी, नरम छेद दिखाई दिया। सुंदरी ने अपनी गर्म जीभ निकाली और छोटी बहू की चूत पर रख दी।
धीरे-धीरे उसने जीभ अंदर डाली और चाटने लगी। छोटी बहू की चूत अभी भी मुनीम के वीर्य और अपनी चुदाई के रस से भरी हुई थी। सुंदरी ने सब चाट लिया।
उसने अपनी एक उँगली छोटी बहू की चूत में डाली और धीरे-धीरे हिलाने लगी। दूसरा हाथ खुद की चूत पर था। सुंदरी खुद को सहला रही थी।
छोटी बहू नींद में ही हल्की-हल्की कराह रही थी, लेकिन जाग नहीं रही थी।
सुंदरी ने सोचा, “यह कुतिया कितनी टाइट और स्वादिष्ट है... मुनीम ने इसे खूब चोदा होगा...मेरा मुनीम चोदने में तो काबिल है मुझे मेरे पति पर और उसके लंड पर गर्व है।”
(यह बात उन दोनों के बीच ही रहेगी, जैसा कि दोनों ने तय किया था। छोटी बहू ने किसी को नहीं बताया कि मुनीम ने उसकी चूत को बहुत मारा था। उसकी चूत दो दिन तक ठीक से मूत तक नहीं पाई थी, आप भी किसी को ना बताये, यह सब मैं सिर्फ आपको ही बता रही हूँ।)
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जुड़े रहिये दोस्तों आगे और बहोत है।
फूँलवर.