Incest Sex Kahani परम-सुंदरी - Page 186 - SexBaba
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Incest Sex Kahani परम-सुंदरी

फ्रेंड,



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Take care, stay strong and God bless you.

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मित्र,




सबसे पहले तो आपकी सेहत के बारे में जानकर सचमुच बहुत चिंता हुई। आपकी स्थिति कितनी गंभीर है, यह पढ़कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि इस समय आपके लिए सबसे जरूरी चीज़ सिर्फ और सिर्फ आपका स्वास्थ्य है।

कहानी, अपडेट और बाकी सारी बातें बाद में भी होती रहेंगी। फिलहाल आप डॉक्टरों की सलाह के अनुसार पूरा आराम कीजिए और अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दीजिए। आपकी तरफ से कहानी को लेकर किसी तरह की चिंता या माफी की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।

और हाँ, आपने मेरी कहानी के बारे में इतना प्यारा संदेश लिखा और अपनी परिस्थितियों के बावजूद अपना प्यार, समर्थन और प्रोत्साहन दिया, इसके लिए मैं दिल से आपकी आभारी हूँ। एक लेखिका के लिए इससे बड़ी बात और क्या होगी कि पाठक कहानी से जुड़े रहने के साथ-साथ लेखक को भी अपना मानते हैं।

आप अभी मेरी कहानी पढ़ नहीं पा रहे हैं, इसकी मुझे कोई शिकायत नहीं है। जब आप पूरी तरह स्वस्थ होकर वापस आएँगे, तब आराम से पढ़िएगा। कहानी कहीं भाग नहीं रही है। ना आपकी, नाही मेरी, नाही किसी और की।

अभी बस एक ही इच्छा है कि आने वाले ये कुछ महीने आपके लिए अच्छे स्वास्थ्य और सकारात्मकता लेकर आएँ। ईश्वर आपको शक्ति दे, उपचार सफल हो और आप जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ होकर अपनी सामान्य जिंदगी में वापस लौटें।

अपना बहुत-बहुत ध्यान रखिए। बाकी सब बाद में।

मेरी तरफ से ढेरों शुभकामनाएँ और प्रार्थनाएँ आपके साथ हैं।




टेक केयर, स्टे स्ट्रांग एंड गॉड ब्लेस्स यू.


🙏🙏
 
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।



सच कहूँ तो जब कोई पाठक यह कहता है कि उसने मेरे सारे अपडेट पढ़े और इस बार खुद को टिप्पणी करने से रोक नहीं पाया, तो लेखिका के लिए इससे बड़ी खुशी और क्या हो सकती है। मुझे तो बहोत ख़ुशी होती है दोस्त।

लेखक तो बस अलग-अलग किरदारों की मानसिकता को समझकर उन्हें अपनी कल्पना और लेखनी के माध्यम से पाठकों तक पहुँचाता है। यह आपने सही कहा था दोस्त।

आपने मुझे
“ग्रेट राइटर” कहा, यह आपका बड़प्पन है दोस्त। वरना मैं तो लेखनी की दुनिया में या फिर इस फोरम पर ताज़ी जन्मी हुई बच्ची मात्र ही हूँ। यह मेरे लिए सिर्फ तारीफ़ नहीं बल्कि आगे और बेहतर लिखने की प्रेरणा और चेलेंज है। दिल से आभार।



बस इसी तरह अपना स्नेह, साथ और विचार साँझा करते रहिये। एक लेखक के लिए पाठक की ऐसी प्रतिक्रियाएँ ही उसकी असली ऊर्जा होती हैं।
 
जेंट्स एरिया वाले कमरे में

छोटू ने जोर का धक्का लगाया और बोला,

“मैं विमला को मना लूँगा। आपको भाभी को मनाना पड़ेगा। वैसे भी तीन भाभी में से दो के चूत का मजा कई बार ले चुका हूँ। जल्दी ही तीसरी भाभी को भी मना लूँगा कि वो मेरा लौड़ा खाए।”
प्रस्तुतकरता फनलवर है।

सुंदरी को छोटू का बोल्डनेस बहुत पसंद आया। उसे अच्छा लगा कि परम की तरह छोटू भी अपनी भाभी को लंड से मार चुका है और अभी उसे चुदाई का पूरा मजा दे रहा है। सुंदरी ने कूल्हे उछालकर छोटू के धक्के का जवाब दिया।

“क्यों सुंदरी रानी, मजा आ रहा है ना?” छोटू ने पूछा।

“बस, जमकर चुदाई करते रहो। बात मत करो, लंड के धक्को को बढाओ।” सुंदरी ने कहा और छोटू को अपनी बाँहों व टाँगों में कसकर पकड़ लिया। फिर उसने छोटू को प्यार से चूमा।

बाकी तीन भाई सुंदरी को चोदने के लिए बेताब थे। सभी भाइयो के लंड अब पूरी तरह सीना तान के खड़े थे। कोई अपने लंड को मसल रहा था तो कोई शांत करने की कोशिश करता था। एक भाई ने सुंदरी का सिर अपनी गोद में रखा और तकिये पर जमा दिया। उसने उसे पूरा नंगा कर दिया, अपना लंड निकाला जो लगभग छोटू जितना ही था, और उसे सुंदरी के गालों व होंठों पर रगड़ने लगा।

सुंदरी ने बिना विरोध के उसे अपना चेहरा इस्तेमाल करने दिया। फिर उसने दोनों तरफ बैठे भाइयों के लंड की तरफ हाथ बढ़ाए। वे उसकी निपल्स चूस रहे थे और दबा रहे थे। सुंदरी ने उनकी धोतियों में हाथ डालकर दोनों लंड बाहर खींच लिए और मुठ मारने लगी। तीसरा भाई अभी भी उसके चेहरे पर अपना लंड घुमा रहा था।

छोटू लगातार जोर-जोर से धक्के मार रहा था। अपने सबसे बड़े भाई को सुंदरी के गालों पर लंड रगड़ते देखकर वह बोला,

“सुंदरी रानी, बड़ी भाभी बड़े प्यार से मेरा लौड़ा चूसती है। तुम भी भैया का लंड चूसकर उन्हें मजा दो।”

“छोटू, तू बहुत अच्छी चुदाई कर रहा है। इसलिए तेरी बात मान रही हूँ। वैसे मुझे लंड चूसने में ज्यादा मजा नहीं आता,” सुंदरी ने बड़े भाई का लंड जड़ से पकड़ा और उसके सिरे को चूसने लगी। असल में तो वह खुद ही चाहती थी की बाकी लोदो में से कोई एक उसके मुंह को चोदे और प्यारा सा माल उसके गले में उतारे।

सुंदरी को लंड चूसते देखकर सभी भाई और उत्तेजित हो गए। उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि बड़ी भाभी ने कभी छोटे देवर का लंड मुँह में लिया होगा, क्योंकि उन्होंने खुद कभी अपने पतियों का लंड मुँह में नहीं लिया था। सुंदरी मुस्कुराती हुई, आँखें बड़ी करके लंड का ऊपरी हिस्सा चूस रही थी।

उसने कूल्हे झटके से हिलाए तो बड़े भाई बोले,

“छोटू, क्या तू अकेला ही रात भर चोदता रहेगा? हमें भी इस मलाई जैसी चूत और मस्त जवानी का मजा लेना है।”

सुंदरी ने लंड मुँह से निकाला और कहा,

“कोई बात नहीं छोटू। जितना चोदना है चोदो। जल्दबाजी मत करो। तू जमकर मुझे चोद। और तुम सभी आराम से देखो सब की बारी-बारी मेरे छेद को भरने का मौक़ा मिलेगा।”

फिर उसने दोबारा बड़े भाई का लंड मुँह में ले लिया और बाकी दोनों लंड अपने खाली हाथों में थाम लिए। चारों भाई हैरान रह गए। वे वेश्याओं के पास जाकर चुदाई तो कर चुके थे, लेकिन कभी किसी औरत को एक साथ चार लंड संभालते नहीं देखा था।

सुंदरी एक हाथ से एक लंड सहला रही थी, दूसरे हाथ से दूसरा, मुँह में तीसरा था और चौथा (छोटू का) उसकी चूत में धँस रहा था। कमरे में सिर्फ कराहें, चप-चप की आवाज़ और भारी साँसें गूँज रही थीं।
फनलवर की रचना।

“आह्ह्ह... छोटू... और जोर से... मेरी चूत फाड़ दो...” सुंदरी ने मुँह से लंड निकालकर चीखा, फिर तुरंत बड़े भाई का लंड फिर से मुँह में ले लिया।

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जुड़े रहिये दोस्तों।


फनलवर की प्रस्तुति।
 
जेंट्स एरिया वाले कमरे में



बड़े भाई ने अपना लंड सुंदरी के मुँह में ठूँसा हुआ था और छोटू उसकी चूत में जोर-जोर से धक्के मार रहा था। दोनों एक साथ झड़ गए।

छोटू ने सुंदरी की चूत को गरम वीर्य से भर दिया। उसी समय सभी ने देखा कि सुंदरी के होंठों के कोनों से सफेद, गाढ़ा वीर्य निकल रहा है। जाहिर है कुछ वीर्य उसके मुँह के अंदर भी चला गया था। सुंदरी ने अपना मुँह खोला। सभी ने देखा कि उसका मुँह वीर्य से भरा हुआ है। उसने सारा वीर्य चबाकर निगल लिया।
फनलवर की पेशकश।

सारा वीर्य निगलने के बाद उसने बड़े भाई के ढीले लंड को सहलाया और बोली,

“मेरी बात सुनो... अगर तुम लोग चाहते हो कि तुम्हारी बीबी हमेशा जवान रहे और तुम लोगों को चुदाई का मजा देती रहे... तो उसे भी रोज अपना लौड़ा का माल पिलाओ। उनका शरीर भी मेरे जैसा मस्त और हमेशा जवान रहेगा...” वह एक के बाद सभी लोडो को सहलाती हुई बोली।

उसने छोटू को नीचे आने के लिए कहा और दूसरे भाई को इशारा किया, जो अपना धड़कता हुआ लंड पकड़े खड़ा था,

“आओ... और मेरे माल को चोदो...चलो अब मेरी चूत के अन्दर से दर्शन करवाओ अपने इस लंड को।”

एक भाई ने सुंदरी को थोड़ा सा पलटाया और दूसरे से कहा,

“भाई, तुम अपनी चुदाई जारी रखो... मैं अपना काम खुद करता हूँ...” वह सुंदरी के पीछे चला गया।

इतना कहकर उसने सुंदरी के नितंबों को और फैला दिया और अपने लंड को सुंदरी की गांड के छेद से टकराया। हालाँकि सुंदरी की चुदाई हो रही थी, इसलिए वह पूरी तरह से धक्कों की मार खाती हुई आगे-पीछे हो रही थी। इस वजह से उसे अपना लंड गांड में जाने देने में तकलीफ हो रही थी। उसने इशारा किया कि थोड़ा रुको।

चुदाई रुकी। उसने अपना लंड सुंदरी की गांड में टिका दिया। बिना किसी अवरोध के सुंदरी की गांड ने उस लंड को अपने में समा लिया। और जाता भी क्यों नहीं... आखिर मुनीम का लंड तो उस गांड को सालों से परोसता रहा था। अब मुनीम जैसा या उस से बेहतर तो गाँव में लंड ही कहा था जो सुंदरी की गांड को और अधिक फाड़ सके।

अब सुंदरी की गांड और चूत दोनों एक साथ दो लंड की मार खा रही थीं। सुंदरी काफी उन्माद में आ गई थी। उसकी कराहें कमरे में गूँज रही थीं। सुंदरी खुद ही अपनी गांड को आगे-पीछे कर के खुद की गांड मरवा रही थी और साथ-साथ उसकी चूत भी मरवा रही थी और आगे एक भाई का लंड उसका मुख चोदन में व्यस्त रहा था। सुंदरी ना आगे जा सकती थी ना पीछे। हिलती तो कही न कही कोई एक लंड उसकी बजता रहा। सुदरी को काफी मजा आ रही थी। वह जी जान से अपने छेदों को मरवा रही थी और साथ में उन सभी लंड को उकसा भी रही थी।
संपादिका मैत्री पटेल।

इस तरह वह तीन घंटे से अधिक समय तक उसी स्थिति में पड़ी रही। उसने गिनती करना बंद कर दिया कि उन लोगों ने उसे कितनी बार चोदा। लेकिन पका तय था की अगले दो दिन तक उन सभी लोडो में कोई दम नहीं रहा था उस तरीके से सुंदरी ने सभी लंड को निचोड़ दिया था। किसी भी लंड में उतना दम नहीं था की अब अगला राउंड ले सके। सभी जैसे सालो से ढीले पड़े हुए लंड थे। किसी भी लंड में कोई जान नहीं थी। सुंदरी ने देखा अब कोई लंड उसकी सेवा नाह इकार सकता तो उठ खड़ी हुई और अपने वस्त्रो से अपने शरीर को ढका और मुस्कुराती हुई बहार की और चल दी।

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सुबह

अच्छी और संतुष्टिदायक चुदाई के बाद जब सुंदरी उस कमरे से बाहर निकली तो लगभग बुधवार की सुबह हो रही थी। उसने अपने पल्लू में पैसे बाँधे और परम के कमरे में आई।

वहाँ उसने देखा कि छोटी बहू परम को पकड़कर नंगी सो रही है। सुंदरी छोटी बहू की चूत सहलाने के लोभ से खुद को रोक नहीं पाई। उसने धीरे से छोटी बहू की टाँगें फैलाईं और उसकी चूत पर हाथ फेरने लगी।

कुछ देर बाद परम जाग गया। सुंदरी ने अपनी चुदाई की पूरी कहानी परम को सुनाई, कैसे चार भाइयों ने उसे बारी-बारी से चोदा, कैसे उसकी गांड और चूत दोनों एक साथ भरी गईं, और कैसे उसने सबका वीर्य निगला।

परम यह सब सुनकर बहुत उत्तेजित हो गया। उसने माँ को नीचे लिटाया और अपनी चूत को अपने वीर्य से भर दिया।

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बने रहिये दोस्तों।



फनलवर की रचना।





 
परम के कमरे में सुबह-सुबह...



सुंदरी ने छोटी बहू की चूत सहलाते हुए परम को जगाया। परम की आँखें खुलीं तो उसने देखा कि उसकी माँ नंगी खड़ी है, शरीर पर अभी भी चार भाइयों की चुदाई के निशान और वीर्य की चमक बाकी है।

“माँ... कहाँ थी इतनी देर?” परम ने नींद भरी आवाज में पूछा।
रचयिता फनलवर है



सुंदरी ने मुस्कुराते हुए छोटी बहू को एक तरफ सरकाया और परम के ऊपर चढ़ गई।

“बेटा... तेरे चार छोटे मामाओं ने रात भर मेरी चूत और गांड दोनों फाड़ दी... अब तेरी बारी है...”

परम का लंड तुरंत तन गया। सुंदरी ने उसे पकड़कर अपनी चूत पर रगड़ा, जो अभी भी गीली और चिपचिपी थी।

“आह्ह्ह... माँ... तेरी चूत अभी भी कितनी गर्म है...” परम ने कराहते हुए कहा।

सुंदरी ने कूल्हे नीचे किए और परम का पूरा लंड अपनी चूत में समा लिया। दोनों एक साथ कराह उठे।

“चोदो बेटा... अपनी माँ की चूत को फिर से फाड़ दो... चार लंडों के बाद भी तेरा लंड सबसे मस्त लगता है...” सुंदरी ने कहा और तेजी से कूल्हे हिलाने लगी।

परम ने माँ की कमर पकड़ ली और नीचे से जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के के साथ सुंदरी के भारी स्तन उसके चेहरे पर झूल रहे थे। परम ने एक निप्पल मुँह में ले लिया और जोर से चूसने लगा।

“आह्ह्ह... परम... और जोर से... मेरी चूत फाड़ दो...” सुंदरी चीखी।

परम ने सुंदरी को पलटा और कुत्ते की पोजीशन में कर दिया। उसने माँ की गांड को दोनों हाथों से फैलाया और अपना लंड फिर से चूत में ठेल दिया। इस बार धक्के और भी जोरदार थे।

“माँ... तेरी गांड भी तो फाड़ी होगी उन्होंने... दिखा...” परम ने कहा।
कथाकार फनलवर

सुंदरी ने कूल्हे और पीछे किए। परम ने लंड निकालकर गांड के छेद पर रखा और धीरे-धीरे अंदर घुसाया। सुंदरी की गांड मुनीम और चार भाइयों की वजह से पहले से खुली हुई थी, इसलिए लंड आसानी से अंदर चला गया।

“आआह्ह्ह... बेटा... गांड में भी डाल दो... पूरी रात चार लंड सहे... अब तेरा भी सह लूँगी...” सुंदरी ने कहा।

परम ने गांड में जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। एक हाथ से वह माँ की चूत सहला रहा था, दूसरे हाथ से उसकी चूची दबा रहा था।

कुछ देर बाद उसने फिर से चूत में लंड डाल दिया और मिशनरी पोजीशन में माँ को लिटाकर चोदने लगा। सुंदरी की टाँगें उसके कंधों पर थीं। हर धक्के के साथ बिस्तर चरमरा रहा था।

“माँ... मैं झड़ने वाला हूँ...” परम ने हाँफते हुए कहा।

“अंदर छोड़ दे बेटा... अपनी माँ की चूत में अपना वीर्य भर दे...” सुंदरी ने कूल्हे ऊपर उठाकर कहा।

परम ने आखिरी जोरदार धक्के मारे और माँ की चूत के गहरे हिस्से में गरम-गरम वीर्य की मोटी धार छोड़ दी। सुंदरी भी उसी समय झड़ गई। दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से लिपटे पड़े रहे।

परम ने माँ के बाल सहलाते हुए पूछा,

“माँ... सच में चारों ने बारी-बारी से चोदा?”

सुंदरी मुस्कुराई और बोली,

“हाँ बेटा... चूत में भी... गांड में भी... मुँह में भी... और सबका वीर्य भी निगला... अब तेरा भी निगल लूँ क्या?”

परम का लंड फिर से तनने लगा।

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बस यही तक दोस्तों।

फिर मिलेंगे अगले अपडेट में जब आपके कोमेंट्स आयेंगे।

तब तक के लिए हमेशा की तरह
फूँलवर की तरफ से जय भारत।।





 
चलिए अब आप मेरी और मेरे रीडर की तरफ से दांत खाइये. यह सिंपल और स्ट्रांग दांत समजिये.

चलिए अब आप मेरे और मेरे पाठकों की तरफ से फायरिंग खाइये। यह सरल और मजबूत फायरिंग समाजिये।

Aap bilkul story ki ya kisi bhi update ki tension mat lijiye. Is waqt sabse important aapki health aur recovery hai.

Aapko jitna time chahiye, please utna time dijiye khud ko.

Meri, aapki aur kisi bhi stories gai bhaad me. Stories aur writing baad mein bhi ho sakti hain, lekin health ko priority dena bahut zaroori hai.

Aur honestly, main bilkul agree karti hoon ki abhi story complete karna aapki least priority honi chahiye. Abhi aapki ya kisi bhi stories ko bhul jayiye.

Bas aap aaram kijiye, doctors ki advice follow kijiye aur apna khayal rakhiye.

Story complete ho ya na ho, uski bilkul chinta mat kijiye.

As a reader, hum aapki situation samajh sakte hain aur aapki recovery ke liye dil se dua karte hain.

Jab bhi aapka mann ho, jab bhi aap comfortable feel karein, tab likhiye. No pressure, no expectations and no excuses.

Aap jaldi se healthy aur strong hokar wapas aayein, bas yahi meri aur mere sabhi readers ki wish hai.

🙏

Iska reply dene ki bhi jarurat nahi hai.....

 
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