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- Dec 5, 2013
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अपडेट-39
रात को खाना खाने कर थोड़ी देर t.v. देखा उसके बाद मैं छत पर चला गया. थोड़े देर इंतज़ार करने के बाद सविता दीदी छत पर आयी. उनको देखते hi मैं जैसे बेहोश होते होते बचा. सविता दीदी ने जो कपडा पहना था उसमे मुझे वो एकदम रंडी लग रही थी. मेरा मन तो किया की तुरंत इसके कपडे फाड़ दालु और इसी छत पर पटक पटक कर छोड़ू. लेकिन मैं सविता दीदी को प्यास को बढाकर उन्हें इतना मजबूर कर देना चाहता था की वो मेरे इशारे पर नाचे. क्योंकि मुझे नार्मल चुदाई में मज़ा नहीं आता था. मैं दीदी को छोड़कर उन्हें अपने इशारे पर नाचना चाहता था. और इसके लिए जरुरी था की अपने जिस्म की प्यास के आगे एकदम मजबूर हो जाये और मेरी हर बात मने.
दीदी ने आज जो कपडा पहना था वो झीना भी था और बगल से दीदी की चूचियों की गोलाई भी नज़र आ रही थी
मैंने उनकी आंको में देखते हुवे अपने लुंड पर हाँथ पैर दिया. जिसे दीदी ने भी देख लिया और उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. वो मेरे पास आकर रुकी और मेरी आँखों में देखते हुवे पूछा.
सविता दी- मैं कैसी लग रही हूँ अभी.
मैं- सच बताऊ या झूठ.
सविता दी- जो तेरा मन हो वो बता दे.
मैं- दीदी आप इन कपड़ो में एकदम मॉल लग रही हैं.
सविता दी- (सरमते हुवे)- तुझे तनिक भी शर्म नहीं आती. अपनी बड़ी बहन को कोई माल बोलता है क्या.
मैं- सबकी बहन आपकी तरह नहीं हैं. इसलिए नहीं बोलते हैं.
सविता दी- तेरे कहने का मतलब क्या है Abhi.(thoda नाराज़गी से)
मैं- अरे दीदी मेरे कहने का मतलब यह है की सब की बहने आप की तरह इतनी सुन्दर थोड़ी हैं की उनपर हर ड्रेस अच्छी लगे. लेकिन मेरी दीदी इतनी सुन्दर हैं की हर कपडे में हॉट और सेक्सी लगती हो (फिर हँसते हुवे) और किसी किसी कपड़ो में आप मॉल भी लगती हो
सविता दी मेरी मुंह से अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुस हुवी, मगर उन्होंने जाहिर नहीं होने दी और थोड़ा नाराज़गी से कहा.
सविता दी- लेकिन फिर भी तू मुझको मॉल मत बोलना आज से. मुझे अच्छा नहीं लगता.
मैं- अच्छा ठीक है जैसी मेरी सेक्सी दीदी चाहेगी वैसा hi होगा.
फिर दीदी और मैं एक दूसरे से इधर उधर की बात करने लगे. लेकिन दीदी को देखकर मेरा लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था और दीदी भी कभी कभी मेरे खड़े लुंड के उभर को लोअर के ऊपर से देख रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.
सविता दी- अच्छा अभी तू मेरी एक काम करेगा.
मैं- अरे दी ये भी कोई कहने की बात है मैं तो आप का काम करने के लिए मारा जा रहा हूँ. पता नहीं वो दिन कब आएगा.
सविता दी- मजाक मत कर अभी. मुझे सचमुच तुझसे एक काम है.
Main-(Serious होकर) बताइये दीदी क्या काम है.
सविता दी- वो क्या है न अभी की मेरे एक कान की बाली कही गिर गई है इसलिए मैंने दूसरे कण की बलि को निकल कर रख दिया है. मेरा कण का छेद बंद होने वाला है इसलिए इसमें मुझे सीक (जिसमे नीम की पत्तिया लगी रहती हैं उसे सीक कहते हैं) लेकर दे दे मैं उसे दाल लुंगी. और मेरी नाथ भी नाक में फास गयी है निकल नहीं रही है इसे भी निकलना हैं.
मैंने देखा तो सच में दीदी के कान खली थे और नाथ भी थोड़ी सी टेढ़ी हो गई थी सायद दीदी ने निकलने की कोशिस की थी मगर उनसे निकली नहीं. मैंने दीदी से कहा.
मैं- अरे दीदी आप बिलकुल भी चिंता मत कीजिए और आपको परेशां होने की कोई जरुरत नहीं है आपका ये भाई आपका छेड़ भी खोल देगा और आपकी नाथ भी उतर देखा. मैं आपसे वडा करता हूँ दीदी की जब आप आज छत से निचे जाएँगी तो आपका छेड़ खुल चुक्का होगा. आपकी नाथ आपके भाई ने उतर दी होगी.
मेरी बात सुनकर दीदी जोर जोर से हसने लगी. जिससे उनके गाल में डिंपल बन गए. मेरी दीदी हस्ते हुवे बहुत hi प्यारी लग रही थी. उनको हस्ते हुवे देखकर कुछ समय के लिए तो मेरे जेहन से दीदी के लिए ठरक एकदम शांत हो चुकी थी. ये बस थोड़ी देर के लिए hi था. मैं उनकी हंसी में खोया हुवा था की तभी मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई दी.
सविता दी- अरे अभी कहा खो गया.
मैं- कही नहीं दीदी आप हस्ती हुई बहुत प्यारी लगती हैं. मैं बस वही देख रहा था. अच्छा दीदी ये बताइये की पहले आप अपना छेड़ खुलवाना पसंद करेंगी या अपने भाई से अपनी नाथ उतरवाना.
मैंने ये बाते उनकी छूट की तरफ देखते हुवे कही थी. जिसे दीदी ने देख लिया और मुझे मुक्का मरते हुवे बोली.
सविता दी- अभी तू सच में बड़ा कमीना है. अपनी बहन से डबल मीनिंग बाते करता है. तू कभी नहीं सुधाने वाला.
फिर मैंने दीदी के चेहरे को अपने हांथो से पकड़ा और उसे ऊपर उठाया तो उन्होंने मेरी आँखों में देखा. मैं भी उनकी आँखों में देखने लगा.
थोड़े देर एक दूसरे की आँखों में देखने के बाद मैंने दीदी के होंठो पर उंगली फिरै. दीदी ने माधोसी में अपनी आँखे बंद कर ली कुछ देर होंठो पर ऊँगली फिरने के बाद दीदी के होंठ कपकपाने लगे
उनपर मदहोशी छ रही थी. फिर मैंने दीदी की नक् की नथनी को दोनों हांथो के ऊँगली और अंगूठे के नाख़ून से दोनों तरफ पकड़ा और खींचने लगा. जिससे दीदी को हल्का हल्का दर्द होने लगा. तो दीदी मुझे रोकने लगी, लेकिन मैं नहीं रुका. थोड़ी देर बाद ऐसी हो कोसिस करने के बाद भी जब नथनी नहीं निकली तो मैंने थोड़ा डैम लगाकर खींच दिया. नथनी निकल कर बहार आ गयी. नथनी फांसी हुई थी तो उसके निकलने पर दीदी को थोड़ा दर्द हुवा तो वो हल्का सा चिल्ला उठी और बोली.
सविता दी- AAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhh . अभी क्या कर रहा है मुझे दर्द हो रहा है.
मैं- अरे दीदी अब आपका दर्द ख़तम हो गया है ये देखो.
मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने उनके हाँथ में उनकी नथनी रख दी. तो दीदी ने कहा.
सविता दी- अरे अभी तुमने कैसे किया. मैंने तो कितनी कोशिश की इसे उतरने की लेकिन ये मुझसे उत्तरी hi नहीं.
मैं- अरे दीदी. लड़की अपनी नाथ कभी नहीं उतर सकती. उसकी नाथ उतरने के लिए मेरे जैसे सख्त मर्द की जरूरत पड़ती है.
सरिता दी- चल हैट बड़ा आया.
मैं- और क्या दीदी. लड़की की नाथ उतरने के लिए एक सख्त मर्द की जरुरत होती है. नाथ उतारते समय लड़की को बहुत दर्द होता है और वो छोड़ने के लिए कहती है. लेकिन अगर वो छोड़ दे तो वो दुबारा नाथ उतरवाने में आना की करती हैं. इसलिए मर्द को चाहिए की लड़की चाहे जितना भी रोये चिल्लाये. अगर उसकी नाथ आराम से उतर जाये तो ठीक है नहीं टी झटके से उसकी नाथ उतर देनी चाहिए. ये एक असली मर्द hi कर सकता है.
सरिता दी- अरे बात तो ऐसे कर रहा है जैसे बहुत लड़कियों की नाथ उतरी है.
मैं- अरे नहीं दी. अभी आपकी नाथ पहली बार उतरी है. और आप भी तो मुझे मन कर रही थी की रहने दू आपको दर्द हो रहा है. लेकिन मैंने आखिर आपकी नाथ उतर hi दी.
सविता दी- हाँ अभी बहुत दर्द हो रहा था. अब भी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है.
मैं- कोई बात नहीं दी धिरे धिरे दर्द ख़तम हो जाएगा. और एक बात आप जानती हैं की आप की नाथ अच्छे से केवल मैं hi उतर सकता हूँ. और मैं आपकी नाथ उतरने के लिए हमेशा तैयार रहूँगा. जब भी आपको अपनी नाथ उतरवानी होगी आप अपने भाई को याद कर लीजिएगा.
मैं जो भी बोल रहा था उसका मतलब दीदी अच्छी तरह से समझ रही थी. लेकिन वो इन बातो को इंजॉय कर रही थी. मुझे ये नहीं पता था की वो मुझसे छोड़ना चाहती हैं या ऐसी बात करके केवल अपना मन बहला रही हैं. लेकिन मैं तो उनको छोड़ने के लिए पूरा तैयार बैठा था.
इस पुरे घटना क्रम के दौरान मेरा लुंड खड़ा hi रहा. जिसका सविता दीदी भरपूर नज़ारा ले रही थी. और उनकी चूचियों को मैं इंजॉय कर रहा था. हम दोनों एक दूसरी की चुकी और लुंड देख रहे हैं ये हम दोनों को पता था. अभी मैं और भी कुछ कहता या करता. निचे से दीदी की बेटी के रोने को आवाज़ आने लगी. जिससे दीदी जल्दी से छत से जाने लगी. तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- दीदी अगर आप को अपने सभी छेड़ खुलवाने हो तो कल इसी समय छत पर आ जाइएगा आपका भाई आपके सरे छेड़ को खोल देगा.
मैं ये बात दीदी की मटकती गांड को देखकर लुंड को सहलाते हुवे बोल रहा था जब दीदी ने पलटकर मुझे देखा और मुझे लुंड सहलाते हुवे अपनी गांड को देखता हुवा पाया तो उनके चेहरा पर हंसी आ गयी और उन्होंने कहा.
सविता दी- ड्ढठ्हत्तत्तत. तू सचमुच बहुत कमीना है अभी. तू नहीं सुधरेगा.
इतना बोलकर दीदी निचे चली गयी और मैं अपने खड़े लुंड को सहलाता हुआ अपने कमरे में आ गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
रात को खाना खाने कर थोड़ी देर t.v. देखा उसके बाद मैं छत पर चला गया. थोड़े देर इंतज़ार करने के बाद सविता दीदी छत पर आयी. उनको देखते hi मैं जैसे बेहोश होते होते बचा. सविता दीदी ने जो कपडा पहना था उसमे मुझे वो एकदम रंडी लग रही थी. मेरा मन तो किया की तुरंत इसके कपडे फाड़ दालु और इसी छत पर पटक पटक कर छोड़ू. लेकिन मैं सविता दीदी को प्यास को बढाकर उन्हें इतना मजबूर कर देना चाहता था की वो मेरे इशारे पर नाचे. क्योंकि मुझे नार्मल चुदाई में मज़ा नहीं आता था. मैं दीदी को छोड़कर उन्हें अपने इशारे पर नाचना चाहता था. और इसके लिए जरुरी था की अपने जिस्म की प्यास के आगे एकदम मजबूर हो जाये और मेरी हर बात मने.
दीदी ने आज जो कपडा पहना था वो झीना भी था और बगल से दीदी की चूचियों की गोलाई भी नज़र आ रही थी
मैंने उनकी आंको में देखते हुवे अपने लुंड पर हाँथ पैर दिया. जिसे दीदी ने भी देख लिया और उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. वो मेरे पास आकर रुकी और मेरी आँखों में देखते हुवे पूछा.
सविता दी- मैं कैसी लग रही हूँ अभी.
मैं- सच बताऊ या झूठ.
सविता दी- जो तेरा मन हो वो बता दे.
मैं- दीदी आप इन कपड़ो में एकदम मॉल लग रही हैं.
सविता दी- (सरमते हुवे)- तुझे तनिक भी शर्म नहीं आती. अपनी बड़ी बहन को कोई माल बोलता है क्या.
मैं- सबकी बहन आपकी तरह नहीं हैं. इसलिए नहीं बोलते हैं.
सविता दी- तेरे कहने का मतलब क्या है Abhi.(thoda नाराज़गी से)
मैं- अरे दीदी मेरे कहने का मतलब यह है की सब की बहने आप की तरह इतनी सुन्दर थोड़ी हैं की उनपर हर ड्रेस अच्छी लगे. लेकिन मेरी दीदी इतनी सुन्दर हैं की हर कपडे में हॉट और सेक्सी लगती हो (फिर हँसते हुवे) और किसी किसी कपड़ो में आप मॉल भी लगती हो
सविता दी मेरी मुंह से अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुस हुवी, मगर उन्होंने जाहिर नहीं होने दी और थोड़ा नाराज़गी से कहा.
सविता दी- लेकिन फिर भी तू मुझको मॉल मत बोलना आज से. मुझे अच्छा नहीं लगता.
मैं- अच्छा ठीक है जैसी मेरी सेक्सी दीदी चाहेगी वैसा hi होगा.
फिर दीदी और मैं एक दूसरे से इधर उधर की बात करने लगे. लेकिन दीदी को देखकर मेरा लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था और दीदी भी कभी कभी मेरे खड़े लुंड के उभर को लोअर के ऊपर से देख रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.
सविता दी- अच्छा अभी तू मेरी एक काम करेगा.
मैं- अरे दी ये भी कोई कहने की बात है मैं तो आप का काम करने के लिए मारा जा रहा हूँ. पता नहीं वो दिन कब आएगा.
सविता दी- मजाक मत कर अभी. मुझे सचमुच तुझसे एक काम है.
Main-(Serious होकर) बताइये दीदी क्या काम है.
सविता दी- वो क्या है न अभी की मेरे एक कान की बाली कही गिर गई है इसलिए मैंने दूसरे कण की बलि को निकल कर रख दिया है. मेरा कण का छेद बंद होने वाला है इसलिए इसमें मुझे सीक (जिसमे नीम की पत्तिया लगी रहती हैं उसे सीक कहते हैं) लेकर दे दे मैं उसे दाल लुंगी. और मेरी नाथ भी नाक में फास गयी है निकल नहीं रही है इसे भी निकलना हैं.
मैंने देखा तो सच में दीदी के कान खली थे और नाथ भी थोड़ी सी टेढ़ी हो गई थी सायद दीदी ने निकलने की कोशिस की थी मगर उनसे निकली नहीं. मैंने दीदी से कहा.
मैं- अरे दीदी आप बिलकुल भी चिंता मत कीजिए और आपको परेशां होने की कोई जरुरत नहीं है आपका ये भाई आपका छेड़ भी खोल देगा और आपकी नाथ भी उतर देखा. मैं आपसे वडा करता हूँ दीदी की जब आप आज छत से निचे जाएँगी तो आपका छेड़ खुल चुक्का होगा. आपकी नाथ आपके भाई ने उतर दी होगी.
मेरी बात सुनकर दीदी जोर जोर से हसने लगी. जिससे उनके गाल में डिंपल बन गए. मेरी दीदी हस्ते हुवे बहुत hi प्यारी लग रही थी. उनको हस्ते हुवे देखकर कुछ समय के लिए तो मेरे जेहन से दीदी के लिए ठरक एकदम शांत हो चुकी थी. ये बस थोड़ी देर के लिए hi था. मैं उनकी हंसी में खोया हुवा था की तभी मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई दी.
सविता दी- अरे अभी कहा खो गया.
मैं- कही नहीं दीदी आप हस्ती हुई बहुत प्यारी लगती हैं. मैं बस वही देख रहा था. अच्छा दीदी ये बताइये की पहले आप अपना छेड़ खुलवाना पसंद करेंगी या अपने भाई से अपनी नाथ उतरवाना.
मैंने ये बाते उनकी छूट की तरफ देखते हुवे कही थी. जिसे दीदी ने देख लिया और मुझे मुक्का मरते हुवे बोली.
सविता दी- अभी तू सच में बड़ा कमीना है. अपनी बहन से डबल मीनिंग बाते करता है. तू कभी नहीं सुधाने वाला.
फिर मैंने दीदी के चेहरे को अपने हांथो से पकड़ा और उसे ऊपर उठाया तो उन्होंने मेरी आँखों में देखा. मैं भी उनकी आँखों में देखने लगा.
थोड़े देर एक दूसरे की आँखों में देखने के बाद मैंने दीदी के होंठो पर उंगली फिरै. दीदी ने माधोसी में अपनी आँखे बंद कर ली कुछ देर होंठो पर ऊँगली फिरने के बाद दीदी के होंठ कपकपाने लगे
उनपर मदहोशी छ रही थी. फिर मैंने दीदी की नक् की नथनी को दोनों हांथो के ऊँगली और अंगूठे के नाख़ून से दोनों तरफ पकड़ा और खींचने लगा. जिससे दीदी को हल्का हल्का दर्द होने लगा. तो दीदी मुझे रोकने लगी, लेकिन मैं नहीं रुका. थोड़ी देर बाद ऐसी हो कोसिस करने के बाद भी जब नथनी नहीं निकली तो मैंने थोड़ा डैम लगाकर खींच दिया. नथनी निकल कर बहार आ गयी. नथनी फांसी हुई थी तो उसके निकलने पर दीदी को थोड़ा दर्द हुवा तो वो हल्का सा चिल्ला उठी और बोली.
सविता दी- AAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhh . अभी क्या कर रहा है मुझे दर्द हो रहा है.
मैं- अरे दीदी अब आपका दर्द ख़तम हो गया है ये देखो.
मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने उनके हाँथ में उनकी नथनी रख दी. तो दीदी ने कहा.
सविता दी- अरे अभी तुमने कैसे किया. मैंने तो कितनी कोशिश की इसे उतरने की लेकिन ये मुझसे उत्तरी hi नहीं.
मैं- अरे दीदी. लड़की अपनी नाथ कभी नहीं उतर सकती. उसकी नाथ उतरने के लिए मेरे जैसे सख्त मर्द की जरूरत पड़ती है.
सरिता दी- चल हैट बड़ा आया.
मैं- और क्या दीदी. लड़की की नाथ उतरने के लिए एक सख्त मर्द की जरुरत होती है. नाथ उतारते समय लड़की को बहुत दर्द होता है और वो छोड़ने के लिए कहती है. लेकिन अगर वो छोड़ दे तो वो दुबारा नाथ उतरवाने में आना की करती हैं. इसलिए मर्द को चाहिए की लड़की चाहे जितना भी रोये चिल्लाये. अगर उसकी नाथ आराम से उतर जाये तो ठीक है नहीं टी झटके से उसकी नाथ उतर देनी चाहिए. ये एक असली मर्द hi कर सकता है.
सरिता दी- अरे बात तो ऐसे कर रहा है जैसे बहुत लड़कियों की नाथ उतरी है.
मैं- अरे नहीं दी. अभी आपकी नाथ पहली बार उतरी है. और आप भी तो मुझे मन कर रही थी की रहने दू आपको दर्द हो रहा है. लेकिन मैंने आखिर आपकी नाथ उतर hi दी.
सविता दी- हाँ अभी बहुत दर्द हो रहा था. अब भी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है.
मैं- कोई बात नहीं दी धिरे धिरे दर्द ख़तम हो जाएगा. और एक बात आप जानती हैं की आप की नाथ अच्छे से केवल मैं hi उतर सकता हूँ. और मैं आपकी नाथ उतरने के लिए हमेशा तैयार रहूँगा. जब भी आपको अपनी नाथ उतरवानी होगी आप अपने भाई को याद कर लीजिएगा.
मैं जो भी बोल रहा था उसका मतलब दीदी अच्छी तरह से समझ रही थी. लेकिन वो इन बातो को इंजॉय कर रही थी. मुझे ये नहीं पता था की वो मुझसे छोड़ना चाहती हैं या ऐसी बात करके केवल अपना मन बहला रही हैं. लेकिन मैं तो उनको छोड़ने के लिए पूरा तैयार बैठा था.
इस पुरे घटना क्रम के दौरान मेरा लुंड खड़ा hi रहा. जिसका सविता दीदी भरपूर नज़ारा ले रही थी. और उनकी चूचियों को मैं इंजॉय कर रहा था. हम दोनों एक दूसरी की चुकी और लुंड देख रहे हैं ये हम दोनों को पता था. अभी मैं और भी कुछ कहता या करता. निचे से दीदी की बेटी के रोने को आवाज़ आने लगी. जिससे दीदी जल्दी से छत से जाने लगी. तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- दीदी अगर आप को अपने सभी छेड़ खुलवाने हो तो कल इसी समय छत पर आ जाइएगा आपका भाई आपके सरे छेड़ को खोल देगा.
मैं ये बात दीदी की मटकती गांड को देखकर लुंड को सहलाते हुवे बोल रहा था जब दीदी ने पलटकर मुझे देखा और मुझे लुंड सहलाते हुवे अपनी गांड को देखता हुवा पाया तो उनके चेहरा पर हंसी आ गयी और उन्होंने कहा.
सविता दी- ड्ढठ्हत्तत्तत. तू सचमुच बहुत कमीना है अभी. तू नहीं सुधरेगा.
इतना बोलकर दीदी निचे चली गयी और मैं अपने खड़े लुंड को सहलाता हुआ अपने कमरे में आ गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..