Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 5 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-39

रात को खाना खाने कर थोड़ी देर t.v. देखा उसके बाद मैं छत पर चला गया. थोड़े देर इंतज़ार करने के बाद सविता दीदी छत पर आयी. उनको देखते hi मैं जैसे बेहोश होते होते बचा. सविता दीदी ने जो कपडा पहना था उसमे मुझे वो एकदम रंडी लग रही थी. मेरा मन तो किया की तुरंत इसके कपडे फाड़ दालु और इसी छत पर पटक पटक कर छोड़ू. लेकिन मैं सविता दीदी को प्यास को बढाकर उन्हें इतना मजबूर कर देना चाहता था की वो मेरे इशारे पर नाचे. क्योंकि मुझे नार्मल चुदाई में मज़ा नहीं आता था. मैं दीदी को छोड़कर उन्हें अपने इशारे पर नाचना चाहता था. और इसके लिए जरुरी था की अपने जिस्म की प्यास के आगे एकदम मजबूर हो जाये और मेरी हर बात मने.

दीदी ने आज जो कपडा पहना था वो झीना भी था और बगल से दीदी की चूचियों की गोलाई भी नज़र आ रही थी



मैंने उनकी आंको में देखते हुवे अपने लुंड पर हाँथ पैर दिया. जिसे दीदी ने भी देख लिया और उनके चेहरे पर एक मुस्कान आ गई. वो मेरे पास आकर रुकी और मेरी आँखों में देखते हुवे पूछा.

सविता दी- मैं कैसी लग रही हूँ अभी.

मैं- सच बताऊ या झूठ.

सविता दी- जो तेरा मन हो वो बता दे.

मैं- दीदी आप इन कपड़ो में एकदम मॉल लग रही हैं.



सविता दी- (सरमते हुवे)- तुझे तनिक भी शर्म नहीं आती. अपनी बड़ी बहन को कोई माल बोलता है क्या.

मैं- सबकी बहन आपकी तरह नहीं हैं. इसलिए नहीं बोलते हैं.

सविता दी- तेरे कहने का मतलब क्या है Abhi.(thoda नाराज़गी से)

मैं- अरे दीदी मेरे कहने का मतलब यह है की सब की बहने आप की तरह इतनी सुन्दर थोड़ी हैं की उनपर हर ड्रेस अच्छी लगे. लेकिन मेरी दीदी इतनी सुन्दर हैं की हर कपडे में हॉट और सेक्सी लगती हो (फिर हँसते हुवे) और किसी किसी कपड़ो में आप मॉल भी लगती हो



सविता दी मेरी मुंह से अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुस हुवी, मगर उन्होंने जाहिर नहीं होने दी और थोड़ा नाराज़गी से कहा.

सविता दी- लेकिन फिर भी तू मुझको मॉल मत बोलना आज से. मुझे अच्छा नहीं लगता.

मैं- अच्छा ठीक है जैसी मेरी सेक्सी दीदी चाहेगी वैसा hi होगा.

फिर दीदी और मैं एक दूसरे से इधर उधर की बात करने लगे. लेकिन दीदी को देखकर मेरा लुंड बैठने का नाम hi नहीं ले रहा था और दीदी भी कभी कभी मेरे खड़े लुंड के उभर को लोअर के ऊपर से देख रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.



सविता दी- अच्छा अभी तू मेरी एक काम करेगा.

मैं- अरे दी ये भी कोई कहने की बात है मैं तो आप का काम करने के लिए मारा जा रहा हूँ. पता नहीं वो दिन कब आएगा.

सविता दी- मजाक मत कर अभी. मुझे सचमुच तुझसे एक काम है.

Main-(Serious होकर) बताइये दीदी क्या काम है.

सविता दी- वो क्या है न अभी की मेरे एक कान की बाली कही गिर गई है इसलिए मैंने दूसरे कण की बलि को निकल कर रख दिया है. मेरा कण का छेद बंद होने वाला है इसलिए इसमें मुझे सीक (जिसमे नीम की पत्तिया लगी रहती हैं उसे सीक कहते हैं) लेकर दे दे मैं उसे दाल लुंगी. और मेरी नाथ भी नाक में फास गयी है निकल नहीं रही है इसे भी निकलना हैं.

मैंने देखा तो सच में दीदी के कान खली थे और नाथ भी थोड़ी सी टेढ़ी हो गई थी सायद दीदी ने निकलने की कोशिस की थी मगर उनसे निकली नहीं. मैंने दीदी से कहा.

मैं- अरे दीदी आप बिलकुल भी चिंता मत कीजिए और आपको परेशां होने की कोई जरुरत नहीं है आपका ये भाई आपका छेड़ भी खोल देगा और आपकी नाथ भी उतर देखा. मैं आपसे वडा करता हूँ दीदी की जब आप आज छत से निचे जाएँगी तो आपका छेड़ खुल चुक्का होगा. आपकी नाथ आपके भाई ने उतर दी होगी.

मेरी बात सुनकर दीदी जोर जोर से हसने लगी. जिससे उनके गाल में डिंपल बन गए. मेरी दीदी हस्ते हुवे बहुत hi प्यारी लग रही थी. उनको हस्ते हुवे देखकर कुछ समय के लिए तो मेरे जेहन से दीदी के लिए ठरक एकदम शांत हो चुकी थी. ये बस थोड़ी देर के लिए hi था. मैं उनकी हंसी में खोया हुवा था की तभी मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई दी.



सविता दी- अरे अभी कहा खो गया.

मैं- कही नहीं दीदी आप हस्ती हुई बहुत प्यारी लगती हैं. मैं बस वही देख रहा था. अच्छा दीदी ये बताइये की पहले आप अपना छेड़ खुलवाना पसंद करेंगी या अपने भाई से अपनी नाथ उतरवाना.

मैंने ये बाते उनकी छूट की तरफ देखते हुवे कही थी. जिसे दीदी ने देख लिया और मुझे मुक्का मरते हुवे बोली.

सविता दी- अभी तू सच में बड़ा कमीना है. अपनी बहन से डबल मीनिंग बाते करता है. तू कभी नहीं सुधाने वाला.

फिर मैंने दीदी के चेहरे को अपने हांथो से पकड़ा और उसे ऊपर उठाया तो उन्होंने मेरी आँखों में देखा. मैं भी उनकी आँखों में देखने लगा.



थोड़े देर एक दूसरे की आँखों में देखने के बाद मैंने दीदी के होंठो पर उंगली फिरै. दीदी ने माधोसी में अपनी आँखे बंद कर ली कुछ देर होंठो पर ऊँगली फिरने के बाद दीदी के होंठ कपकपाने लगे



उनपर मदहोशी छ रही थी. फिर मैंने दीदी की नक् की नथनी को दोनों हांथो के ऊँगली और अंगूठे के नाख़ून से दोनों तरफ पकड़ा और खींचने लगा. जिससे दीदी को हल्का हल्का दर्द होने लगा. तो दीदी मुझे रोकने लगी, लेकिन मैं नहीं रुका. थोड़ी देर बाद ऐसी हो कोसिस करने के बाद भी जब नथनी नहीं निकली तो मैंने थोड़ा डैम लगाकर खींच दिया. नथनी निकल कर बहार आ गयी. नथनी फांसी हुई थी तो उसके निकलने पर दीदी को थोड़ा दर्द हुवा तो वो हल्का सा चिल्ला उठी और बोली.

सविता दी- AAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhh . अभी क्या कर रहा है मुझे दर्द हो रहा है.

मैं- अरे दीदी अब आपका दर्द ख़तम हो गया है ये देखो.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने उनके हाँथ में उनकी नथनी रख दी. तो दीदी ने कहा.

सविता दी- अरे अभी तुमने कैसे किया. मैंने तो कितनी कोशिश की इसे उतरने की लेकिन ये मुझसे उत्तरी hi नहीं.

मैं- अरे दीदी. लड़की अपनी नाथ कभी नहीं उतर सकती. उसकी नाथ उतरने के लिए मेरे जैसे सख्त मर्द की जरूरत पड़ती है.

सरिता दी- चल हैट बड़ा आया.

मैं- और क्या दीदी. लड़की की नाथ उतरने के लिए एक सख्त मर्द की जरुरत होती है. नाथ उतारते समय लड़की को बहुत दर्द होता है और वो छोड़ने के लिए कहती है. लेकिन अगर वो छोड़ दे तो वो दुबारा नाथ उतरवाने में आना की करती हैं. इसलिए मर्द को चाहिए की लड़की चाहे जितना भी रोये चिल्लाये. अगर उसकी नाथ आराम से उतर जाये तो ठीक है नहीं टी झटके से उसकी नाथ उतर देनी चाहिए. ये एक असली मर्द hi कर सकता है.

सरिता दी- अरे बात तो ऐसे कर रहा है जैसे बहुत लड़कियों की नाथ उतरी है.

मैं- अरे नहीं दी. अभी आपकी नाथ पहली बार उतरी है. और आप भी तो मुझे मन कर रही थी की रहने दू आपको दर्द हो रहा है. लेकिन मैंने आखिर आपकी नाथ उतर hi दी.

सविता दी- हाँ अभी बहुत दर्द हो रहा था. अब भी थोड़ा थोड़ा दर्द हो रहा है.

मैं- कोई बात नहीं दी धिरे धिरे दर्द ख़तम हो जाएगा. और एक बात आप जानती हैं की आप की नाथ अच्छे से केवल मैं hi उतर सकता हूँ. और मैं आपकी नाथ उतरने के लिए हमेशा तैयार रहूँगा. जब भी आपको अपनी नाथ उतरवानी होगी आप अपने भाई को याद कर लीजिएगा.

मैं जो भी बोल रहा था उसका मतलब दीदी अच्छी तरह से समझ रही थी. लेकिन वो इन बातो को इंजॉय कर रही थी. मुझे ये नहीं पता था की वो मुझसे छोड़ना चाहती हैं या ऐसी बात करके केवल अपना मन बहला रही हैं. लेकिन मैं तो उनको छोड़ने के लिए पूरा तैयार बैठा था.

इस पुरे घटना क्रम के दौरान मेरा लुंड खड़ा hi रहा. जिसका सविता दीदी भरपूर नज़ारा ले रही थी. और उनकी चूचियों को मैं इंजॉय कर रहा था. हम दोनों एक दूसरी की चुकी और लुंड देख रहे हैं ये हम दोनों को पता था. अभी मैं और भी कुछ कहता या करता. निचे से दीदी की बेटी के रोने को आवाज़ आने लगी. जिससे दीदी जल्दी से छत से जाने लगी. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी अगर आप को अपने सभी छेड़ खुलवाने हो तो कल इसी समय छत पर आ जाइएगा आपका भाई आपके सरे छेड़ को खोल देगा.

मैं ये बात दीदी की मटकती गांड को देखकर लुंड को सहलाते हुवे बोल रहा था जब दीदी ने पलटकर मुझे देखा और मुझे लुंड सहलाते हुवे अपनी गांड को देखता हुवा पाया तो उनके चेहरा पर हंसी आ गयी और उन्होंने कहा.



सविता दी- ड्ढठ्हत्तत्तत. तू सचमुच बहुत कमीना है अभी. तू नहीं सुधरेगा.

इतना बोलकर दीदी निचे चली गयी और मैं अपने खड़े लुंड को सहलाता हुआ अपने कमरे में आ गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-40

मैं कमरे में आ कर अपने बीएड पर लेट गया और सविता दीदी के साथ अभी हुई बातचीत के बारे में सोचने लगा फिर मैंने अपने मन में कहा.

मैं- मैंने आज जो भी डबल मीनिंग बात की उसका मतलब तो दीदी अच्छी तरह से समझ रही हैं की मेरा इशारा किस तरफ है लेकिन वो ऑब्जेक्शन नहीं ले रही हैं मेरी किसी भी बात का. उनके भी मन में कुछ न कुछ तो चल रहा है. बस कुछ दिन और मुझे उनको इसी तरह ट्रीट करना है उसके बाद तो मेरी हो हो जाएंगी.

मैं इन खयालो से बहार निकला और अपनी मीरा वाली ईद ओपन कर ली देखा तो दीदी ऑनलाइन थी. तो मैंने उन्हें मश्ग किया.

म- ही.

सरिता दी- ही.

म- कैसी हैं आप

सरिता दी- मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो.

म- मैं भी ठीक हूँ.

सरिता दी- कल बड़ी जल्दी चली गयी थी.

म- हाँ वो भाई ने बुला लिया था उसे कुछ काम था इसलिए चली गई.

उसके बाद हम दोनों में बहुत इधर उधर की बाते हुई. पढाई से सम्बंधित भी बहुत सी बाते हुई उसके बाद मने कहा.

म- अच्छा अब रखती हूँ. भाई बुला रहा हैं. Bye.

सरिता दी- ोकक bye.

उसके बाद मैंने सोचा की एक बार सरिता दीदी के कमरे में फिर देखा जाए की वो क्या कर रही हैं. लेकिन फिर मैंने सोचा की अभी ज्यादा लालच मत कर. अगर पकड़ा गया तो जो कुछ भी मिल रहा है उससे भी हाँथ धो बैठेगा.

उसके बाद मैं सो गया. सुबह नियमित समय पर utha.apni एक्सेरसीज़े पूरी की. बहार आया तो सविता दी भी छत पर थी और आज उनके साथ मनीषा थी तो उन्होंने अपना ड्रेस सलीके से पहना हुआ था. मैंने दोनों को गुड़ मॉर्निंग विश किया और बाथरूम में फ्रेस होकर निचे हाल में आ गया. नाश्ते के समय नाश्ता किया और अपने काम के लिए बहार निकल गया. पूरा काम समेत कर मैं घर आया और अपने कमरे में बैठकर काम करने लगा.

मेरा काम फिनिश होने hi वाला था की तभी सविता दीदी का मश्ग व्हाटप्प पर आया. मैंने पहले अपना काम फिनिश किया फिर उनको रपल्य दिया.

मैं- हां दीदी बताओ कैसे याद किया.

सविता दी- अभी अगर फ्री हो तो मेरे कमरे में आना थोड़ी देर के लिए.

मैं- ठीक है दीदी अभी आ रहा हूँ.

मैं बाथरूम जाकर सुसु किया और दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. मैंने डोर नॉक किया तो वो खुल गया. जब मैं अंदर गया तो देखा दीदी बिस्तर पर पेट के बल दरवाज़े की तरफ मुंह करके लेती हुई हैं. जिससे उनकी चूचिया बहार निकलने के लिए बेताब दिख रही थी. दीदी ने मेरी तरफ देखा. लेकिन मैं उनकी चूचियों को hi देख रहा था. थोड़ी देर उनकी चूचियों को देखने के बाद मैं दीदी के पास जाकर उनके सामने कुर्सी पर बैठ गया तो दीदी ने कहा.



सविता दी- अरे अभी वह क्यों बैठ रहा है आ बीएड पर बैठ मेरे पास.

मैं- अरे दीदी मैं यही ठीक हूँ. यहाँ से पूरा व्यू मिल रहा है.

सविता दी- (मुस्कुरा कर) कौन सा व्यू मिल रहा है तुझे.

मैं- (उनकी चूचियों को सर आगे करकर देखते हुवे). कमरे का व्यू पूरा मिल रहा है.

सविता दी- अच्छा ये सब छोड़. मैंने तुझे इसलिए बुलाया है की कल तूने आम और केले लाये थे लेकिन न तुमने मुझे बताया और न hi तूने खाया.

मैं- वो हाँ दीदी मैं तो भूल hi गया था.

सविता दी- इसीलिए तो तुझे बुलाया है. रुक मैं लती हूँ फिर दोनों मिलकर खाएंगे.

उसके बाद दीदी आम और केला लेने बाहर जाने लगी तो मैं उनकी मटकती गांड को देखने लगा. दीदी दरवाज़े तक पहुंच कर पीछ मुड़कर मुझे देखा और अपनी गांड को घूरता हुवा पाकर बिना कुछ बोले है कर निचे चली गयी.





थोड़ी देर बाद दीदी वापस आयी और मेरे सामने झुककर प्लाट बिस्टेर पर रखने लगी. उनके झुकने से उनकी कातिल चूचिया छलक कर ब्रा से बहार निकलने को हो गयी. वो लगभग 10 सेकंड तक झुकी मुझे अपनी चूचिया दिखती रही. फिर मुझसे पूछा.



सविता दी- कैसा लगा अभी.

मैं- बहुत hi बड़े बड़े हैं दीदी. और बहुत मस्त भी हैं.

सविता di-(hans कर) अरे मैं आम की बात कर रही हूँ.

मैं- (उनकी चूचियों को घूरकर) मैं भी आपके आम की hi बात कर रहा हूँ.

उसके बाद दीदी बीएड पर बैठ गई और मुझे भी अपनी बगल में बैठ लिया और जब खाने के लिए आम उठाने लगा तो दीदी ने मेरे हाँथ पर एक चपत लगाई और कहा.

सविता दी- जब इसको मैं ले हूँ किचन से तो मैं दूंगी तुझे खाने के लिए तू क्यों उठा रहा है. उसके बाद दीदी ने एक आम मुझे खाने के लिए दिया और हम खाने लगे. तो मैं उनकी चूचियों की तरफ इशारा करके बोलै बोलै.

मैं- दीदी आपको मालूम हैं मुझे आम बहुत पसंद हैं और खासकर तब जब इतने बड़े बड़े और रसीले हो.



दीदी मेरी बातो का मतलब अच्छी तरह से समझ रही थी. लेकिन वो भी मज़ा लेते हुवे बोली.

सविता दी- तुझे कैसे पता की बड़े बड़े आम रसीले होते हैं.

मैं- (चूचियों को घूरते हुवे). अभी तो मैंने आपके आम को चखा तो नहीं हैं लेकिन आपके आम को देखकर ऐसा लग रहा है की बहुत रसीले होंगे.

तभी दीदी आम को चाकू से काटने लगी तो मैंने उन्हें रोकते हुवे कहा.

मैं- अरे दीदी आप इतनी बड़ी हो गई हैं और आपको आम खाना भी नहीं आता.

सविता दी- आम तो ऐसे hi खाया जाता है.

मैं- नहीं दीदी अभी आपको आम खाना आता hi नहीं.

उन्होंने मुझे एक आम दिया और बोली.

सविता दी- चल बता कैसे खाया जाता है

मैंने उनकी चूचियों को देखता हुवा आम ले लिया और दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.



मैं- दीदी. मैं पहले आपके बड़े बड़े आम को पकड़कर उसके कड़कपन का अंदाज़ा लगाऊंगा फिर उसको धीरे धीरे दबाकर उन्स्की घुंडी को अपने अंगूठे से कुरडुंगा. उसके बाद आप के आम को पूरी ताकत से तब तक दबाऊंगा जब तक आपके आम ढीले न हो जाये. उसके बाद मुंह में भरकर आपके आम की घुंडियो को काटूंगा. और फिर मुंह में भरकर आपके बड़े बड़े आम को तब तक चूसूंगा जब तक उसका पूरा रास न निचोड़ लू. तो अब पता चला आपको की आम खाने का सही तरीका क्या है.

मेरी बाते सुनकर दीदी की आँखे एकदम नशीली हो गई थी. वो एकटक मेरी आँखों में देख रही थी. उनका चेहरा सुर्ख हो गया था. फिर मैंने दीदी से कहा.

मैं- वैसे दीदी आपको केला खाना पसंद है.

सविता दी- (भरी सांसो के साथ)- नहीं अभी मुझे केला पसंद नहीं है.

मैं- लेकिन क्यों दीदी-

सविता दी- आजकल केले पता नहीं कैसे होते हैं की एकदिन न खाओ तो ढीले हो जाते हैं. उनमे कड़कपन रह hi नहीं जाता.

मैं- लेकिन दीदी मेरा केला तो हमेशा कड़ा रहता है (ये मैंने अपने लुंड की तरफ इशारा करते हुवे कहा).

सविता दी- (मेरे इशारे को समझकर) क्या मतलब है तेरा.

मैं- अरे दीदी मैं जो कल केला लाया था वो हमेशा कड़ा रहेगा. ढीला नहीं होगा. और दीदी वैसे भी मेरा केला इतना बड़ा और स्वादिष्ट है की एक बार आप अपने मुंह में ले लोगी तो ज़िन्दगी भर लेने के लिए तड़पोड़ि. और मुझसे कहोगी की भाई मुझे अपना लम्बा और मोटा केला किला दे.

मेरी ऐसी कामुक बातो से दीदी पर जैसे नशा कर दिया हो. वो मुझे बहुत hi कामुक तरीके से देख रही थी. मेरा भी लुंड अबतक टैंकर पंत में हचकोले मर रहा था. मैं और सरक कर उनके पास गया और अपना हाँथ बढाकर उनके कंधे पर रख दिया और सहलाने लगा. मेरे हाँथ कंधे पर पड़ते hi दीदी ने मेरी आँखों में देखा और फिर मेरे लुंड की तरफ देखने लगी. मैं उनकी कंधे को सहलाते हुवे अपना हाँथ उनकी पीठ पर फेरने लगा. मेरे ऐसा करने से उनके शरीर में एक झुरझुरी सी दौड़ गई. फिर मैं उठकर कुर्सी पर बैठ गया और दीदी को उठाकर अपनी गड में बिठा लिया. वो मेरी गॉड से उठने की कोसिस करने लगी, लेकिन मैंने अपने दोनों हाँथ से उनके पेट को पकड़कर अपनी तरफ भिज लिया था. फिर मैं उनके उनकी गार्डन से बाल हटाकर उनकी गार्डन पर एक किस कर लिया.



दीदी के मुंह से sssssss………..sssssss……. की आवाज़ आयी और उन्होंने पीछे मुड़कर मुझे देखा. मैंने भी उनकी आँखों में देखा तो उनको आंको में मुझे एक प्यास दिखी.

मैं उनके पेट को लगातार सहलाये जा रहा था. और पाना हाँथ धीरे धीरे उनकी चूचियों की तरफ बढ़ने लगा. अब मेरा हाँथ उनकी चूचियों के जस्ट निचे पहुंच गया था. दीदी के सांसे भी अब सामान्य से तेज़ चलने लगी थी. फिर दीदी ने मदहोशी में कहा.

सविता दी- स्स्स्सस्स्स्स------ अभी क्या कर रहा है. हाँथ हटा न.

मैं- कुछ नहीं दीदी. बस आपको प्यार कर रहा हूँ. क्या आपको अच्छा नहीं लग रहा है.

सविता दी- नहीं अभी ये गलत है हम दोनों भाई बहन हैं.

दीदी ने अभी इतना hi कहा था की मैंने अपने होंठो से उनके गाल गार्डन लगातार चूमने लगा और अपना हाँथ बढाकर उनकी दोनों चूचियों पर रख कर हलके से दबा दिया. मेरी इस हारकर पर दीदी एकदम उछलकर कड़ी हो गई और मुझे देखते हुवे थोड़ा नाराज़गी जताते हुवे बोली.



सविता दी- ये क्या बदतमीज़ी है अभी. मैं तेरी बहन हूँ और तू अपनी बहन के साथ ऐसा कैसे कर सकता हैं.

अभी मैं दीदी को कोई जवाब देता. इससे पहले hi मनीषा की आवाज़ आयी. वो दीदी को बुला रही thi.to मैं अपने कमरे में जाने लगा और दरवाज़े पर पहुंचकर मैंने दीदी की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. फिर मैंने अपना मुंह गोल बनाकर उनकी चूचियों को देखकर एक चुम्मे का इशारा किया और अपनी एक आँख मार्कर कमरे से बहार निकल गया. कमरे से निकलने से पहले मैंने एक नज़र दीदी को देखा तो उनके चेहरे पर एक मुस्कान तैर रही थी. मैं वह से सीधा अपने कमरे में चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-41

उस दिन और कुछ खास नहीं हुआ. रात में खाना खाने के बाद मैं छत पर चला गया और दीदी का इंतज़ार करने लगा. बहुत देर इंतज़ार करने के बाद भी जब दीदी नहीं आयी तो मैं अपने कमरे में जाने लगा. अभी मैं दरवाज़ा खोल hi रहा था की दीदी छत पर आ गई लेकिन मैं कमरे में चला गया. थोड़ी देर दीदी ने मेरा इंतज़ार किया और जब मैं बहार नहीं आया तो दीदी दरवाज़े के पास आयी और बोली.

सविता दी- अभी क्या हुवा आज बात करने का मन नहीं है क्या.

मैं- (पता नहीं मुझे किस बात पर गुस्सा आ रहा था. मालूम hi नहीं था) हाँ नहीं करनी बात.

मेरी आवाज़ में गुस्सा दीदी ने महसूस कर लिया इसलिए वो मेरे कमरे में आई और मुझसे बोली.

सविता दी- लगता है मेरा भाई मुझसे नाराज़ है.

मैं- मैं क्यों नाराज़ होऊंगा आपसे. आप जाओ मुझे सोना है.

सविता दी- मुझे पता है तू किस बात से नाराज़ है लेकिन तू भी समझा कर की मैं तेरी बहन हूँ. जो तू मेरे साथ कर रहा था न वो गलत है.

मैं- कुछ गलत नहीं है मैं तो आपको प्यार करना चाहता हूँ. लेकिन आप मुझसे प्यार hi नहीं करती.

सविता दी- मैं अपने भाई से बहुत प्यार करती हूँ. अब चल ज्यादा नखरे न कर और बहार आजा.

Main-(muskurate हुवे) मेरी प्यारी दीदी मैं आपके साथ कही भी जा सकता हूँ

सविता दीदी आज t-shirt और लोअर पहन कर आई थी. T-shirt का गाला इतना ज्यादा खुला था की उनकी जान्मारु चूंडियों के तक पूरी t-shirt से बहार नज़र आ रही थी. उनकी t-shirt चिचुयों को घुंडियों के थोड़ा सा ऊपर तक थी.



जिससे उनकी चूचिया बहुत की कामुक माहौल बना रही थी. दीदी ने दुपट्टा नहीं लिया था. मेरा लुंड तो दीदी के इस हाहाकारी जिस्म को देखकर hi तन गया था. मैंने दीदी को बहार चलने के लिए कहा. जब दीदी बहार निकल गई तो मैंने जल्दी से लोअर उतर कर चड्ढी भी उतर दिया और फिर बिना चढी के लोअर पहन लिया. अब मेरा लुंड बिना चड्ढी के एकदम पुरे आकर में तना हुवा था. जब मैं कमरे से बहार निकला तो दीदी की नज़र मेरे लुंड पर पड़ी जी मेरे चलने से इधर उधर लहरा रहा था. दीदी ने लुंड देखते हुवे अपने होंठो पर जीभ फिरै और मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.



सविता दी- कितना लम्बा है न अभी.

मैं दीदी के मुंह से ऐसी बाटे सुनकर चौक गया. दीदी ने पहली बार ऐसा बोलै था तो मैंने उनकी आँखों में देखकर पूछा.

मैं- क्या लम्बा है दी.

सविता दी- (मेरे लुंड की तरफ देखते हुवे). अरे मैं ये सींक लाइ हूँ. जो बहुत लम्बी हैं. कल मैंने तुमसे कहा था न की मेरे कान का छेड़ बंद हो रहा है. तो उसमे सींक डालनी हैं.

मैं- (दीदी की चतुराई भरी बात सुनकर)- हाँ दीदी और मैंने भी आपसे कहा था की आपको अपने भाई से अगर अपना छेड़ खुलवाना है तो रात में आ जाइएगा.

सविता दी- (धीरे से) छेड़ खुलवाने hi तो आई हु.

मैं- वैसे एक बात तो है आज आप बहुत hi सेक्सी और जबरदस्त मॉल लग रही हो.

सविता दी- चुप बेशरम. अपनी बहन को मॉल बोलता है. शर्म कर शर्म

फिर दीदी ने मुझे सींक दी. उस सींक से मैंने एक छोटा सा टुकड़ा तोडा और दीदी के पास आ गया. और बोलै.

मैं- दीदी मैं पीछे से आपके छेड़ में डालूंगा.

सविता दी- जैसा तुझे ठीक लगे अभी. बस मेरा छेड़ बड़ा कर दे.

मैं- आप बिलकुल भी फ़िक्र मत कीजिए दीदी. आज आपका ये भाई आपके सरे छेड़ खोल देगा.

सविता दी- क्या मतलब. सरे छेड़.

मैं- अरे दीदी मतलब दोनों कान के छेड़.

उसके बाद मैं दीदी के पीछे आ गया और उनके कंडे पर हाँथ रख दिया. मेरा हाँथ कंधे पर महसूस करते hi दीदी के शरीर में एक झुरझुरी हुई जिसे मैंने भी महसूस किया. मैंने दीदी के कंधे और गार्डन पर हाँथ फिरने लगा.



और धीरे धीरे उनके गार्डन पर आगे की तरफ भी हाँथ फेरने लगा. ऐसे काफी देर हाँथ फेरने के बाद मैंने अपना हाँथ दीदी के चूचियों और क्लीवेज की तरफ बढ़ने लगा. जिससे दीदी का शरीर एक बार कंपा और उन्होंने मेरे हाँथ पर अपना हाँथ रख लिया और कनपटी आवाज़ में कहा.

सविता दी- नंनाही. अभीइइइइइइइ. ये मत कर. तू सींक दाल. मुझे निचे जाना है.

फिर मैंने अपने बढ़ते हाँथ को पीछे खींच लिया और वापस उनके कंधे को सहलाने लगा. मैं अब दीदी से एकदम सात गया. जिससे मेरे लुंड ने दीदी के गांड की दरार में ठोकर मरी तो दीदी ने अपनी गांड थोड़ा आगे की तरफ कर ली और कुछ सेकंड बाद वापस अपनी जगह पर पीछे कर ली. अब मेरा खड़ा लुंड दीदी की गांड की दरार पर लगा हुआ था.



फिर मैंने उनके कान के पास से उनके बाल हटाए और सीक को उनके कण के छेड़ पर रखकर अंदर डालने लगा. लेकिन वो अंदर नहीं जा रहा था तो मैंने थोड़ा जोर लगाया तो दीदी को दर्द हुआ और उन्होंने कहा.

सा

वीटा दी- अभी धीरे से. दर्द हो रहा है.

मैं- मैं क्या करू दीदी. आपका छेड़ इतना छोटा है की जा hi नहीं रहा है. थोड़ा जोर लगाना पड़ेगा.

सविता दी- देख ले भाई क्या करना है तेरी बहन को दर्द नहीं होना चाहिए.

फिर मैं दीदी से और सात गया जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड की दरार में घुस गया. जिससे दीदी अपनी गांड इधर उधर करने लगी मेरा लुंड निकलने के लिए तो मैंने दीदी से कहा.



मैं- क्या कर रही हो दीदी. ऐसे हिलोगो दूलोजी तो छेड़ कैसे कुलवाओगी. थोड़ी देर शांत रहो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने हिलना डुलना बंद कर दिया अब मेरा लुंड उनकी गांड की दरार में फंसा था जिसपर मैंने अपना दबाव बढ़ा दिया था. जिससे दीदी आगे की तरफ झुककर रेलिंग की पकड़ लिया. अब पोजीशन ये थी की दीदी रेलिंग पकड़ कर झुकी हुई कड़ी थी और मैं दीदी की गांड में कपडे के ऊपर से लुंड घुसाए खड़ा था. फिर मैं दीदी की गार्डन के निचे किश करने लगा और अपने हाँथ को आगे बढाकर दीदी को पेट से कसकर अपने तरफ खींच लिया. जिससे दीदी की गांड की दरार में मेरा लुंड और अंदर घुस गया और दीदी की मुंह से aaaaaahhhhhhhhhhh अभी की आवाज़ निकल गई.



फिर मैं अपना हाँथ से उनके पुरे पेट को t-shirt के ऊपर से सहलाने लगा. और पीछे से उनके कान की लाओ को चाटने लगा. जिससे दीदी की हालत ख़राब होने लगी वो लगातार मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी. मेरी पकड़ से निकलने की कोसिस कर रही थी लेकिन मैं उन्हें अपनी कैद से निकलने नहीं दिया. मैंने उनके कान की लौ को चाहते हुवे निचे गार्डन की तरफ डाढ़ने लगा. और मेरा हाँथ ऊपर दीदी की चूचियों की तरफ. अब दीदी की छटपटाहट काम हो गई थी. फिर मैंने अपना एक हाथ उनके पेट से हटाकर धीरे से उनकी गांड पर रख दिया.



उनकी गांड इतनी नरम और गरम थी की जैसे मेरे हाँथ hi पिघल जाएंगे. मैं उनकी गांड पर एक हाँथ फेर रहा था. एक हाँथ उनकी चूचियों के निचे हरकत कर रहा था मेरा लुंड आलरेडी उनकी गांड में घुसा हुवा था और मैं उनके पीठ के खुले हिस्से को लगातार चुम चाट रहा था. मेरे एकसाथ इतने हमले से दीदी एकदम से मदहोस हो गई थी और अपनी आँखे बंद कर ली थी.

जब मैंने देखा की दीदी अब मदहोश हो रही हैं तो मैंने अपना एक हाँथ जो उनकी चूचियों के निचे था उसे उठाकर उनकी एक जालिम चूचियों पर रख दिया. जब दीदी को ये एक्सेस हुवा तो उन्होंने अपना एक हाँथ उठाकर मेरे हाँथ को हटाने की कोशिश करने लगी, लेकिन मैंने अपना हाँथ नहीं हटाया कुछ देर ऐसे hi हाँथ रखे रहने के बाद मैंने अपने हाँथ का प्रेशर उनकी चूचियों पर बढ़ाया. निचे से अपने लुंड को उनकी गांड में दबाया. एक हाँथ से उनके भरी भरकम नरम चुतर को दबाया और अपना मुंह खोलकर उनकी गार्डन को अपने मुंह में भर लिया और हल्का हल्का बाईट करने लगा. मेरे इस चौतरफा हमले से दीदी सिसकिया भरने लगी. और सिसकते हुवे दीदी ने कहा.



सविता दी- आआआबभीइ…. क्यययय्यआआ. कक्कर रररः है. जल्दी डाल दी. मुज्ज्ज्जी नीछठी जाना हाइइइइइइ…

मैं- अरे दीदी आपका छेड़ बहुत छोटा है और मेरा डंडा बड़ा और मोटा है. जो आप झेल नहीं पाओगे. इसलिए आपको गरम कर रहा हूँ. एक बार आप गरम हो गई तो मेरे डंडे को आराम से आप झेल लोगी.

मैं क्या बोल रहा हु ये दीदी भी समझ रही थी लेकिन इस समय वो गरम हो गाइट hi इसलिए उन्होंने कहा.

सविता दी- अभी अब दाल भी दे मैं गरम हो गई हूँ. अब पूरा जोर लगाकर दाल दे. मुझे दर्द नहीं होगा.

तो मैंने अपने मुंह उनकी कण के पास ले गया और कण की लौ को चाहता हुवा दीदी से बोलै.

मैं- थोड़ी देर और रुक जाओ दीदी उसके बाद मैं आपको छेड़ खोलता हूँ.

फिर मैंने दीदी को घुमाकर अपनी तरफ कर लिया. जब मैंने दीदी को घुमाया तो दीदी की तरफ देखा तो दीदी की आँखे उत्तेजना से लाल हो गई थी, उनका चेहरा सुर्ख हो गया था और उनके होंठ उत्तेजना से कैंप रहे थे. मैं भी दीदी के इस रूप को देखकर मदहोश हो गया और अपना होंठ बढाकर दीदी के होंठो पर और अपने हाँथ दीदी की चूचियों पर रख दिया.







और दीदी को धकेलते हुवे छत की दीवाल के सहारे खड़ा कर दिया. मेरे होंठो का स्पर्श पाकर दीदी ने अपनी आँखे बंद कर ली. मैं उनके होंठो को चूमने लगा और अपने हांथो से उनकी दोनों रसभरी चूचियों को दबाने लगा. तभी निचे से दीदी की बेटी की रोने की आवाज़ सुनाई देने लगी. जिससे दीदी होश में आई और मुझसे खुद को छुड़ाने लगी. मैंने भी दीदी को छोड़ना hi ठीक समझा, लेकिन छोड़ने से पहले मैंने दीदी की दोनों चूचियों को अपने हांथो में भरा और पूरी ताकत से मसल दिया. जिसके कारन दीदी के मुंह दर्द और मज़े की मिश्रित एक जोरदार चीख निकल गई



सविता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मां मर गई.

और उन्होंने मुझे धक्का देखर अपने से दूर कर दिया और मेरी तरफ देखते हुवे थोड़ा गुस्से से बोली.

सविता दी- तू पागल है. कोई इतनी जोर से दबाता है क्या. ( और जब उन्हें ये एहसास हुवा की उन्होंने क्या कह दिया तो वो शर्म से सर निचे झुककर हल्का हल्का मुस्कुराने लगी.)

मैं- अभी आपने देखा hi क्या है मैं तो इससे भी बुरी तरह दबाता हूँ. धीरे धीरे आपको भी इसकी आदत हो जाएगी.

मेरी बात सुनकर सरिता दी ने नखरा दिखते हुवे मुझे जीभ निकलकर चिढ़ाया तो मैंने अपने खड़े लुंड को उन्ही आँखों में देखते हुवे मसल दिया. जिसे दीदी ने देख लिया और कहा.



सविता दी- इतना बड़ा डंडा रखने से क्या फायदा अभी जब तू एक छेड़ भी नहीं खोल पाया तो.

मैं- अरे दीदी अगर आपकी बेटी ने डिस्टर्ब नहीं किया होता तो मैं अपने डंडे से आज आपके एक एक छेड़ को खोलकर रख देखा. पर कोई बात नहीं कल आप आइयेगा अपना छेड़ खुलवाने के लिए.

मेरी बात सुनकर दीदी ने जीभ निकलकर मुझे चिढ़ाया और निचे जाने लगी. मैं फिर से उनकी कातिल गांड को घूरने लगा और अपने लैंड को मसलने लगा. दीदी निचे उतरने से पहले पलटकर मुझे देखा और मुझे लुंड मसलते हुवे अपनी गांड को घूरते हुवे देखा तो उनके चेहरे पर हंसी आ गयी और उन्होंने हस्ते हुवे कहा.



सविता दी- तू सच में बड़ा कमीना है. अपनी दीदी के साथ कोई ऐसा करता है क्या.

इतना बोलकर दीदी हंसती हुई निचे चली गयी. और मैं अपने खड़े लुंड को सहलाता हुवा अपने बिस्टेर पर जाकर लेट गया

इसके आगे के कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-42

कमरे में आकर मैंने आकर मैंने मीरा वाली ईद ओपन की और सावृता दीदी से बात करने लगा.

M-Hii. कैसी हैं आप

सरिता दी- ही. मैं ठीक हूँ. आप बताओ.

म- मैं भी ठीक hi हूँ.

सरिता दी- क्यों क्या हो गया.

म- अरे कुछ नहीं यार भाई आज मुझसे नाराज़ हो गया है

सरिता दी- क्यों क्या बात है क्यों नाराज़ हो गया है.

म- वो मुझसे कुछ मांग रहा था और मैंने नहीं दिया इसलिए नाराज़ हो गया हैं.

सरिता दी- अरे कैसे बहन हो. जो भाई को नाराज़ कर दिया. जो मांग रहा था ो दे देना चाहिए था.

म- अच्छा. अगर आप का भाई आपसे कुछ मांगे तो आप उसे दे डिंगी.

सरिता दी- हाँ क्यों नहीं दूंगी आखिर भाई हैं मेरा.

म- कुछ भी दे देंगी उसे.

सरिता दी- हाँ कुछ भी मांगे मैं उसे दे दूंगी.

म- वो तो समय बताएगा की देती हो की नहीं.

इसके बाद हम दोनों में बहुत सी बाते हुई. कुछ जोक्स वगैरह भी फॉरवर्ड हुवे दोनों के बिच. उसके बाद मैंने उनसे उनका साइज पूछा.

म- वैसे एक बात बताओ आपके साइज क्या हैं.

सरिता दी- क्या यार क्या पूछ रही हो. मुझे शर्म आती हैं.

म- लो गई लड़की से भी शर्मा रही हो.

सरिता दी- 34 30 36 और तुम्हारे

म- मेरे 36 28 36

सरिता दी- अरे वाह उम्र में मुझसे छोटी और इतने बड़े बड़े.

म- हाँ किसी की म्हणत का नतीजा है.

सरिता दी- अच्छा बॉयफ्रेंड.

उसके बाद हम दोनों में कुछ सेक्सी बाते भी हुई. उसके बाद मैंने उनसे कहा.

म- अच्छा अब मैं फ़ोन रख रही हूँ. भाई बुला रहा है.

उसके बाद मैं सो गया. सुबह की वही दिनचर्या थी. अब दीदी की शादी को केवल 9 दिन hi बचा था. मैं अपने काम को लेकर घर आया और अपने रूम में काम करने लगा. तभी मेरे रूम में सविता दीदी आ गयी. वो आज बहुत hi क़यामत बैंकर आई थी. उन्हें देखते hi मेरा लुंड तन्न से खड़ा हो गया उन्होंने आज सदी ब्लाउज पहना हुआ था. ब्लाउज की देसिने ऐसी थी की उसका कट चूचियों के निचे तक था. और ऊपर से सदी इतनी पतली थी की उसे पहनना और न पहनना एक सामान था. मैं दीदी की चुहकइया घूरने लगा. लेकिन उन्हें कुछ कहा नहीं. थोड़ी देर तक जब कुछ नहीं बोलै तो दीदी ने कहा.





सविता दी- अभी आज मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या.

मैं- नहीं दीदी आप अच्छी लग रही हैं.

सविता दी- सिर्फ अच्छी लग रही हूँ और कुछ नहीं.

मैं समझ गया की दीदी मेरे मुंह से क्या सुन्ना चाहती हैं तो मैंने उनकी चूचियों को देखता हुवे कहा.

मैं- अरे दीदी आज तो आप एकदम कड़क माल लग रही हो.

सविता दी- चल हैट अपनी बहन को मॉल बोलता है.

मैं- अब मॉल को मॉल hi तो बोलेंगे न.

सरिता दी- मैं कहा से तुझे मॉल लगती हूँ. मैं तो गोरी भी नहीं हूँ. लड़के तो गोरी लड़कियों को पसंद करते हैं.

मैं- अरे दीदी. लोगो का तो मुझे पता नहीं लेकिन मुझे तो आप बहुत अच्छी लगती हैं. और आप जैसे कपडे पहनती हैं उससे तो आप एकदम मस्त मॉल नजर आती हैं. मैं तो चाहता हूँ की जब भी आप मुझसे मिलने आये तो ऐसे hi कपडे पहन कर आये. और वैसे भी लड़को को गोरी काली से मतलब नहीं होता. बस लड़की के बड़े बड़े होना चाहिए.

सरिता दी- क्या बड़े बड़े होना चाहिए.

मैं- (उनकी चूचियों पर ऊँगली रखकर). उनके संतरे बड़े बड़े होना चाहिए.



सरिता di-(sharmakar) धत बेशरम.

मैं एकदम दीदी से सत्कार बैठ गया और अपने हाँथ को उनके कंडे पर रख दिया. दीदी ने नज़र उठाकर मेरी तरफ देखा. तो मैंने उनकी आँखों में देखकर उनकी चूचियों को देखते हुवे कहा.

मैं- दीदी आज से रोज़ रात को मुझे दूध पीना हैं.

सविता दी- लेकिन अभी तुझे तो दूध पसंद hi नहीं है.

मैं- हाँ दीदी अभी तक तो नहीं पसंद था लेकिन जब से आपके देखे हैं. पिने का बहुत मन करता हैं.

सविता दीदी समझ रही थी की मैं उनकी चूचिया पिने की बात कर रहा हूँ लेकिन वो भी मज़ा लेती हुई बोली.



सविता दी- मेरी देखि है. तू कहना क्या चाहता है.

मैं- अरे दीदी आप सबको रात में पिने के लिए दूध देती हैं तो अब मेरा भी मन कर रहा है की आपके दूध पीयू.

इतना कहकर मैंने दीदी को उठाकर अपनी गॉड में बैठा लिया और उनके कंधे को चूमने लगा. दीदी के मेरी गॉड में बैठने से मेरा खड़ा लुंड उनकी गांड के निचे डाब गया जिसकी चुभन दीदी ने भी महसूस कर ली. इसलिए वो छूटने के लिए कसमसाने लगी. तो मैंने दीदी के कंधे को चूमते हुवे कहा.





मैं- क्या दीदी आपको मेरी गॉड में बैठना अच्छा नहीं लगता क्या. जब भी मैं आपको गॉड में बैठता हूँ आप उठकर भागने लगती हो.

सविता दी- लेकिन तू मुझे अपनी गॉड में क्यों बैठता हैं. मुझे अच्छा नहीं लगता.

मैं- आपको याद है दीदी बचपन में आप मुझे अपनी गॉड में बैठकर मुझको खिलाती थी. मेरे साथ खेलती थी. तब मैं छोटा था तो मैं आपको अपनी गॉड में नहीं बैठा सकता था. लेकिन अब मैं बड़ा हो गया हूँ तो अब मैं अपनी दीदी को अपनी गॉड मैं बैठकर खेलूंगा.

ये सब बात कहते कहते मैंने अपने हाँथ से दीदी की नाभि को सहलाने लगा.



दीदी की नाभि बहुत गहरी थी. मैंने उनकी नाभि में अपनी बिच वाली ऊँगली घुसा दी. और ऐसे अंदर बहार करने लगा जैसे उनकी छूट में लुंड पेल रहा हूँ. मेरा ऐसे लगातार करने से दीदी ने भी मचलना बंद कर दिया. अब मैंने अपने हाँथ को निचे की तरफ खिसकने लगा और एक हाँथ को ऊपर की तरफ और पीछे से मैंने उनके कण को मुंह में भर लिया और चूसने लगा. दीदी भी अब गरम हो रही थी. उनकी साँस अब तेज़ चलने लगी थी. थोड़े देर मैंने अपना एक हाँथ उनके पेट पर फिरता रहा और वापस उनके कंधे को चूमना शुरू कर दिया. और एक हाँथ से उनकी सदी के ऊपर से उनकी जांघ पर फिरने लगा. जिससे दीदी की आँखे बंद होने लगी.

फिर मैंने जो हाँथ निचे उनकी जांघ को सहला रहा था उसको वह से हटाकर दीदी का चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया तो दीदी ने आँखे खोलकर मेरी तरफ देखा. उनकी आँखे वासना से लाल हो गाइट hi होंठ हलके से खुले थे .दीदी का चेहरा बहुत कामुक लग रहा था. मैंने अपने होंठ दीदी के गाल पर रख दिए तो दीदी की एक आह निकल गई और उन्होंने कहा.



सविता दी- आआअह्हह्ह्ह्हह अभी मत कर भाई.

मैं- क्या आपको अच्छा नहीं लगा रहा है दीदी.

सविता दीदी मेरी आँखों में देखने लगी लेकिन बोली कुछ नहीं. तो मैं दीदी के गलो को चाटने लगा. और निचे जो हाँथ था उसको उठाकर उनकी एक चूचियों पर रख दिया. जिससे दीदी के शरीर ने एक झटका खाया. उन्होंने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली. फिर मैंने आहिस्ता से उनके गाल को चाटते हुए उनको होंठो को भी एक बार चाट लिया. क्या बताऊ दोस्तों क्या स्वाद था. उनके होंठ शहद की तरह मीठे थे. मैं तो उनके होंठ को चाटकर मस्त हो गया. उसके बाद मैंने दीदी के होंठो पर होंठ रख दिए और अपने एक हंट से उनकी चूचिया हल्का सा दबा दी. दीदी ने तुरंत hi मेरे हाँथ पर अपना हाथ रख दिया और अपने होंठो को छुड़ाकर बोली.



सविता दी- नहीं अभी. ये गलत है हम भाई बहन हैं. ये पाप है मेरे भाई.

मैं उनकी आँखों में देखने लगा. उनकी आँखों में देखते हुवे मैंने अपना दूसरा हाँथ भी उनकी चूचियों पर रख दिया और दबा दिया.

सविता दी- आह्हः हह अभी. मत कर भाई ये पाप है.

पर मैंने चूचियों पर से हाँथ उठाकर फिर से उनके चेहरे को अपनी तरफ किया और डायरेक्ट उनको होंठ पर अपना होंठ रख दिया और एक हाँथ से चूचियों को दबाने लगा. दीदी मचलकर छूटने का पूरा प्रयाश कर रही थी लेकिन मैंने उन्हें अपने से सटाकर पकड़ रखा था. मैं लगातार उनके होंठो को चुस्त रहा और एक हाँथ से उनकी चूचियों को दबाता रहा. लगभग 2 मिनट तक मैं लगातार ऐसा hi करता रहा तो दीदी ने भी मचलना बंद कर दिया. फिर मैंने उनके होंठो को बाईट करने लगा और उनके चेहरा से हाँथ उठाकर उनकी दूसरी चुकी पर रखकर दोनों हांथो से उनकी रसभरी चूचिया दबाने लगा. मैंने अपना हाँथ हटा लिया था लेकिन दीदी ने अपना चेहरा आगे नहीं किया. शायद उन्हें भी अच्छा लग रहा था.



अब मैं और आगे बढ़ने की सोचने लगा. अभी मैं और कुछ करता इससे पहले hi निचे से कुछ खटपट की आवाज़ आई. तो मैं और दीदी तुरंत अलग हो गए. लेकिन अलग होने से पहले मैंने दीदी को दोनों चूचियों को अपनी मुठी में भरा और पूरी ताकत से मसल दिया. जिससे दीदी चीख पड़ी. और नाराज़गी से बोली.





सविता दी- AAAAAAAAAAHHHHHHHHHHHH. मार साला रे. अभी तुम जानवर हो क्या. कोई इतनी तेज़ से दबाता है क्या. मुझे दर्द हो रहा है

मैं- अभी आपने देखा hi क्या है. मैं तो इससे भी ज्यादा तेज़ी से दबाता हूँ और बहुत दर्द देता हूँ.

सविता दी- तू बहुत बड़ा कमीना है.

फिर सविता ने अपने कपडे ठीक किये और दरवाज़े से बहार निकलने लगी तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी आज रात में आप मुझे भी अपना दूध पिलाना. ताज़ा ताज़ा.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मुझे जीभ निकलकर चिढ़ाया. मेरे खड़े लुंड को देखा और कमीना बोलकर निचे चली गयी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-43

दीदी के निचे जाने के बाद मैं अपने बिस्तर पर लेता और अपनी मीरा वाली ईद ओपन की और सरिता दी को मश्ग क्र दिया. थोड़ी देर बाद दीदी का भी रपल्य आ गया.

म- ही सेक्सी.

सरिता दी- ही. लेकिन ये सेक्सी कौन है.

म- आप हो और कौन.

सरिता दी- तुमको कैसे पता की मैं सेक्सी हूँ.

म- जो लड़किया अच्छी बाते करती हैं वो अक्सर सेक्सी hi होती हैं.

सरिता दी- (हँसते हुवे) तुम भी न क्या कांसेप्ट निकला है. एकदम नई.

फिर हम दोनों ने काफी देर इधर उधर की बाते की. फिर मैंने दी से पूछा.

म- अच्छा एक बात बताओ. आपका कोई बॉयफ्रंड है

सरिता दी- ये कैसा सवाल है. मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूँ जो बॉयफ्रंड बनती फिरू.

म- अरे यार आप तो नाराज हो गई. मैं तो इसलिए पूछ रही थी की आप जैसे सेक्सी लड़की का बॉयफ्रंड तो होगा hi. लेकिन आप जो बता रही हैं उससे तो विश्वास hi नहीं होता की आपका कोई बॉयफ्रंड नहीं है.

सविता दी- हाँ नहीं है बॉयफ्रंड. और अब तो मेरी शादी होने वाली है 8 दिन बाद तो अब बॉयफ्रंड की जरूरत भी नहीं है. और तुम्हारा कोई बॉयफ्रंड है

म- हाँ मेरा तो अभी वाला दूसरा बॉयफ्रंड है.

सरिता दी- अरे वाह बड़ी चालू हो तुम. किसी को एक नहीं मिल रहा है और तुमने दूसरा भी पता लिया.

म- हाँ कुछ मज़बूरी थी इसलिए इसको पटना पड़ा.

सरिता दी- अच्छा मुझे भी तो बताओ कौन सी मज़बूरी थी.

म- वो फिर किसी दिन बताउंगी. अभी भाई बुला रहा है बाद में बात करती हूँ. Bye.

सरिता दी- Bye.

उसके बाद मैं सो गया. फिर रात खाना खाने बाद मैं छत पर चला गया और सविता दीदी का इंतज़ार करने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी छत पर आयी. मेरा तो उनको देखते hi लुंड खड़ा हो गया. क्या मॉल बैंकर आयी थी दीदी. दीदी को देखकर ऐसा लग रहा था की जैसे कोई रंडी अपने ग्राहक को रिझाने आयी हो. दीदी भी केवल ब्रा और सदी पहन कर आयी थी. उन्होंने ब्लाउज नहीं पहना था.



दीदी को इस रूप को देखकर मेरा हाँथ मेरे लुंड पर चला गया. मैं अपने लुंड को सहलाने लगा. जो दीदी ने देख लिया. वो मेरे खड़े लुंड को देखते हुवे मेरे पास आयी तो मैंने उन्हें कसकर अपनी बहो में भर लिया.



जिससे उनकी कड़ी हाहाकारी चूचिया सीधे मेरे साइन से जा टकराई. उनको बहो में भरकर मैंने एप होंठ सीधे उनकी गार्डन पर रख दिए और चाटने लगा.



दीदी मुझे अपने से दूर धकेल रही थी. लेकिन मैंने दीदी को नहीं छोड़ा और उन्हें घुमाकर पीछे से अपनी बहो में कास लिया. तो दीदी दीदी ने कहा.

सविता दी- क्या कर रहा है अभी. छोड़ न. क्यों तंग कर रहा है. मैं जा रही हु निचे.

उसके बाद दीदी ने झटके से मुझसे अपने आपको छुड़ाया और जाने लगी तो मैंने उनका हाँथ पकड़ लिया और कहा.

मैं- कहा जा रही हो दीदी. मैं कब से आपका इंतज़ार कर रहा हूँ और आप अभी आई और अभी चल दी.

सविता दी- तो तुम मुझे परेशां क्यों कर रहे हो.

मैं - मैं तो अपनी दीदी को प्यार कर रहा था. आप इतनी सेक्सी लग रही हैं की मैं अपने आपको कण्ट्रोल नहीं कर पाया.

सविता दी- मैं तो तुझे हमेशा hi सेक्सी लगती हूँ.

मैं- वैसे दीदी आज आप मुझे अपना दूध पिलाने वाली थी.

सविता दी- हाँ मुझे याद हैं. इसीलिए तो मैं यहाँ आई हु.

मैं- (ख़ुशी से) तो देर क्यों कर रही हैं दीदी. पिलाइये न.

सविता दी- वो तो तुझे खुद पीना होगा लेकर. मैंने किचन में गरम करके गिलास में रख दिया है. जाकर पि ले.

मैं- (उनकी चूचियों को देखते हुवे) लेकिन मुझे तो ताज़ा ताज़ा पीना था.

सविता दी- अब इतनी रात में ताज़ा दूध कहा से ले औ.

मैं- वो तो आपके पास hi है. अगर आप पिलाना चाहे तो पीला दीजिए.

सविता दी- मार खायेगा तू अब मुझसे.

मैं और दीदी इस समय चाट पर रेलिंग के सहारे सत्कार खड़े थे. मेरा लुंड पूरा तना हुवा लोअर से नज़र आ रहा था. जिसे दीदी भी बिच बिच में देख ले रही थी. फिर मैं दीदी के पीछे आकर उनसे सत्कार खड़ा हो गया और उनके कंडे पर अपने हाँथ रख दिए और धीरे धीरे सहलाने लगा. साथ hi अपने होंठो से उनके दोनों कंदो पर किश करना शुरू कर दिया और दीदी से कहा.



मैं- वैसे दीदी उसदिन आपने कहा था की आप मुझे उस लड़की को कैसे सेट करना है उसका तरीका बताएंगी.

सविता दी- हाँ कहा तो था, लेकिन अब नहीं बताउंगी.

मैं- क्यों दीदी. क्यों नहीं बताओगी.

सविता दी- जब तक तू मुझे उसका नाम नहीं बताएगा तब तक मैं तुझे उस लड़की को सेट करने का तरीका नहीं बताउंगी.

मैं- ऐसा मत करो दी. ये तो ब्लैकमेलिंग है. आप ये अच्छा नहीं कर रही हो.

ये सब बोलते हुवे मैंने अपने हांथो से उनके जिस्म पर फिरने लगा. मैंने अपना हाँथ उनके पेट पर डालकर उन्हें अपने से और सत्ता लिया. जिससे मेरा खड़ा लुंड सीधे दीदी की की गांड की दरार में धस गया. जिससे दीदी के मुंह से एक सिसकारी निकल गयी.

सविता दी- AAAAaaaaahhhhhhhhhhh. अभी. अब चाहे तू इसे ब्लैकमेलिंग समझ. या कुछ और लेकिन बिना नाम बताये मैं कुछ भी बताने वाली नहीं हूँ.

फिर मैंने अपने अपने हांथो से दीदी से बाल को पड़कर उनके कंदो से आगे कर दिया जिससे उनकी पीठ नंगी हो गई. मैंने अपनी जीभ निकली और उनकी नंगी पीठ को चाटने लगा और एक हाँथ से उनके पेट को सहलाने लगा और एक हाँथ की दो उंगलियों से उनकी गहरी नाभि को पेलने लगा. जिससे दीदी गरम होने लगी. साथ साथ मैं अपनी बात भी करता जा रहा था.



मैं- अच्छा ठीक हैं. आप पहले मुझे उसे पटाने का तरीका बराइये. आपके तरीका बता देने तुरंत बाद मैं उसका नाम बता दूंगा. ये मेरा वडा है आपसे.

इतना बोलकर मैं फिर से दीदी की पीठ को चाटने लगा. मैं उनके कंधे से चेतना शुरू करता और उनकी कमर तक उनकी पीठ छत्ता और फिर कमर से शुरू करता और उनके कंधे तक छत्ता. मेरे ऐसा करने से दीदी एकदम मदहोश होने लगी. उनकी सांसे भरी होने लगी. मैंने अपने एक हाँथ की मुट्ठी में दीदी के पेट की मांस को भरा और पूरी ताकत से दबा दिया. जिससे दीदी को दर्द हुवा और वो बोली.

सविता दी- AAAAAAANNNNNNNNNNN मां. क्या करता है तू. दरररररररद होता है मुझीऐ. तू सच कह राहः है न की उसे पटाने का तरीका तुझे बताउंगी तो तू मुझे उसका नाम बता देगा.

मैं- हाँ दीदी मैं सच कह रहा हु. मैं आपको नाम बता दूंगा.

अब मैंने अपने एक हाँथ को सरकते हुवे उनके चूचियों के पास रख दिया और सहलाने लगा और एक हाँथ की उंगलियों से दीदी के पंखुड़ी जैसे होंठो पर फिरने लगा



और पीछे से अपने लुंड का दबाव पूरी तरह से दीदी की गांड में बनाये हुवे था और लगातार उनकी पिच को चाट रहा था. कुछ देर बाद उनके रसभरे होंठो पर हाँथ फेरने के बाद मैंने उनके होंठो को अपने अंगूठे और उंगलियों के बिच ले कर मसल दिया और निचे से अपने लुंड को हल्का सा आगे की तरफ दक्का दिया. जिससे मेरा लुंड दीदी की गांड की दरार में और घुस गया. दीदी के मुंह से एक मादक सिसकी निकल गयी.





सविता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अभी Aaaaaahhhhhhhhhhhh……. मत कर दर्द होता है.

मैं- दीदी बताओ न मैं उसे कैसे पतौ. उसे कैसे एहसास करौ की मैं उसे चाहता हूँ. कैसे बताऊ की मैं उसे अपनी गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता हूँ.

इतना बोलकर मेरा जो हाँथ दीदी की चूचियों के निचे था उसे उठाकर दीदी की चूचियों पर रख दिया और जो हाँथ उनके होंठ पर था उसे उठाकर दीदी के कंडे पर रखा और उनकी ब्रा की स्ट्रिप में अपनी ऊँगली फसे और उनकी पीठ को चाटते हुवे उनकी गार्डन पर आ कर रुका और गार्डन की मांस को अपने दांतो में भर लिया. फिर दीदी के शरीर पर तीन लज्जत भरे हमले किये.

पहले मैंने उनकी चूचियों को अपनी हथेली में भरकर दबाया. फिर उनकी ब्रा की स्ट्रिप को पूरा ऊपर खींचकर छोड़ दिया और अपने दांतो से उनकी गार्डन पर काट लिया. मेरे इन 3 प्रहार से दीदी एकदम मचल गई और उनके जिश्म में एक सनसनाहट हुई. और एक बहुत hi मादक और कमुख चीख धिरे से निकली.



सविता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhreeeeeeeee Abhiiiiiiiiiii AAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh maaammmmyyyyyyyyyyyyyy. Mmmmmmmmmmmmmaaaaaaarrrrrrr दालाआआआआ kkkkkkkkkkkkammmmmmmmmiiiiiiiineeeeeeeeee.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-44

दीदी ने पीछे मुड़कर मेरी आँखों में देखा और कुछ देर मेरी आँखों में देखने के बाद कहा.

सविता दी- (नरम लहज़े में) पहले मुझे छोड़ फिर बताती हूँ

मैं- नहीं ऐसे hi बताओ न. मैं कुछ कर थोड़े रहा हूँ.

मैं अभी भी उनकी चूचियों को दबा रहा था. और मैंने अपने मुंह को उनके बालो में दाल दिया और एक लम्बी साँस ली और दीदी से बोलै.

मैं- दीदी आपके बालो की खुशबु बहुत अच्छी है. कौन सा सम्पू लगाती हो.

सविता दी- जो सब लगते हैं. और ऐसी hi तारीफ तू उसकी किया कर.

मैं- कैसी तारीफ दीदी जरा खुलकर बताइये.

मैं वापस से उनकी पीठ को चाटने लगा. चाटते चाटते बिच बिच में मैं उनकी पीठ पर बाईट भी करने लगा था. जब मैं पीठ चाटते हुवे बाईट करता तो दीदी के मुंह से सिसकारी निकल जाती साथ साथ मैं अपने एक हाँथ से दीदी की चूचिया भी दबा रहा था.

सविता दी- किसी भी लड़की को पटाने को पटाने के लिए उससे हमेशा प्यार से बात करनी चाहिए. हमेशा उसकी छोटी छोटी खुशियों का ख्याल रखना चाहिए.

मैं- मैं तो उससे बहुत प्यार से बात करता हूँ. उसकी हर ख़ुशी का ख्याल रकने की कोशिश करता हूँ.

फिर मैंने दोबारा से वही किया. एकक हाँथ उनकी चूचियों को मुठी में भरा. एक हाँथ की ऊँगली से उनके कंधे से ब्रा के स्ट्रेप में फसाया और ऊपर खींच लिया और अपने मुंह में उनके कंडे की मांस को भर लिया. दीदी भी समझ गई थी की मैं क्या करने वाला हूँ तो उन्होंने खुद को सँभालने की कोशिश करने लगी. तभी मैंने उनकी चूचियों को जोर से दबाया. ब्रा की स्ट्रेप को छोड़ दिया और उनके कंधे पर दन्त काट लिया. तीनो हरकत मैंने एक साथ की. दीदी के मुंह से फिर एकबार जोर से चीख निकली.

सविता दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhreeeeeeeee Abhiiiiiiiiiii कामिनी. AAAAAAAAAAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh maaammmmyyyyyyyyyyyyyy. Mmmmmmmmmmmmmaaaaaaarrrrrrr दालाआआआआ िस्नीटी kkkkkkkkkkkkammmmmmmmmiiiiiiiineeeeeeeeee. बभःहःहूटत जजजजजाआईईईइम hhhhhhhhhhai टटटूउउउउ.

मैं फिर से दीदी को चूमने लगा मैंने उनकी पूरी पीठ पर चुम्म्नो की बौछार कर दी. और एक हाँथ से उनकी चूचियों के लगातार दबाता रहा. और अपने लुंड को उनकी गांड की दरार में पेल दिया. जिससे दीदी की हालत ख़राब होने लगी. अब वो लगातार मदहोशी में सिसक रही थी. फिर मैंने उनसे पूछ.

मैं- हां दीदी अब आगे बताओ और क्या करू उसको पटाने के लिए.

सविता दी- (सिसकते हुवे) टू उसे बहार घूयमाने लल्ले जाय कर. उस्सको शॉपिंग भी कब्भी कब्भी करा दिया कार. Haaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiii ddddddaaaaaaaaiiiiiiiiiiyaaaaaaaaa मर गई मैं. क्या कररररररर ररररररहा है तू. मुउउउउउउझह्हे ड्डड्डड़रररर्ड होऊता हाऐ नाआआआ.

अभी दीदी ये बोल hi रही थी की मैंने उनकी दोनों चूचिया जोर से दबा दी. अब दीदी एकदम मदहोश हो चुकी थी तो मैंने थोड़ा आगे बढ़ने की सोची. तो मैंने अपने हाँथ को उनकी चूचियोंसे ऊपर की तरफ खिसकने लगा. और चूचियों के ऊपरी भाग को सहलाने लगा. कभी कभी मैं अपनी उंगलियों को उनके क्लीवेज के अंदर भी सहला देता था. दीदी ने मदहोशी में अपने सर को मेरे कंधे पर टिका दिया और आँखे बंद कर ली. जब दीदी ने अपना सर मेरे कंडे पर रखा तो मैंने अपने चेहरा दीदी के कंधे से आगे करके उनकी गार्डन को आगे से चाटने लगा. बाईट भी करने लगा. जिससे दीदी के मुंह से मादक सिसकारियां निकल रही थी.



सविता दी- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभी आआआहहहहहहह आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह रईईईई आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मम्म्मूउउउउम्मम्मम्मम्मीयिययियीय.

मैं- हाँ दीदी आगे बताओ मुझे और क्या करना चाहिए.

सविता दी- कभी कभी तू उसका हाँथ प्याआआआआ से पकड़ लिया काआररररर. कभी कभी प्यार से किस भी कर लिया काआआर. Uuuuuuuuuussssssssssssea अपनी बाँहों मीटी ली लीयाआ कर. ताकि उसे पता चले की तेरे मन में ुस्सस्स्स्खे लिए कककयाआ फफफ्फ़ीलिंग हैं

ये सब दीदी मदहोशी में बोल रही थी. उनकी जुबान लागखादा रही थी. उनके शब्द ठीक से निकल नहीं रहे थे. मैंने अपने जुबान से अब दीदी के गाल चाटने लगा मेरे थूक से दीदी का कन्धा गार्डन और गाल सब सं गए थे. जो लाइट में चमक रहा था. मैंने अब मैंने और आगे बढ़ने की सोची और अपने हाँथ हटाकर दीदी के कंधे के ऊपर से डालकर उनकी ब्रा में घुसाने लगा. और लुंड को एक और झटका दे दिया जिससे मेरा लुंड दीदी की कपडे समेत उनकी गांड के छेड़ पर जाकर टिक गया.



जिससे दीदी का शरीर कैंप गया. फिर मैंने अपने हाँथ की उंगलियों को ब्रा की कप में अंदर कर दिया. अभी मेरी उंगलिया चूचियों की घुंडियो को ढूढ़ने लगी. तो दीदी ने मेरे हाँथ पर तुरंत अपना हाँथ रख दिया और लड़खड़ाती जुबान में कहा.



सविता दी- उसको पाटननने के लिए ुस्स्स्सके साथ कबबबबबबबभी जाबाआरदस्ती नाही करना अभी. उउउउस्ससे डोममममिनाते ककरने कककककी कोशिश मत करनाआआआ.

Main-Lekin दीदी मुझे लड़की को डोमिनाते करना कसंद है. मुझे तब अच्छा लगता है जब लैब लड़की मेरे साडी बात मने. कुछ लड़किया भी होती हैं जिन्हे नार्मल प्यार पसंद नहीं आता.

इतना कहने पर दीदी ने अपनी आँखे खोलकर मेरी तरफ देखा. मैं दीदी की गार्डन को उस समय बाईट कर रहा था. उन्होंने अपनी नशीली आँखों से मेरी आँखों में देखता हुवे कहा.



सविता दी- बात तो तू सही कह रहा है लेकिन जरुरी तो नहीं है की जिसे तू प्यार करता है वो नार्मल प्यार चाहती हो तुमसे.

मैं- हां दीदी आपकी बात तो सही है लेकिन ऐसा भी तो हो सकता है की उसे मेरा नार्मल प्यार न पसंद हो.

ये सब मैंने दीदी की मदभरी आँखों में देखते हुवे कहा था. मेरी बात सुनकर दीदी ने फिर से अपनी आँखे बंद कर ली. लेकिन अपना हाँथ मेरे हाँथ से अभी तक नहीं हटाया था. तो मैंने अपने एक हाँथ उनके हाँथ के निचे से निकला और उनके चेहरे को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया और अपने होंठ उनके कपकपाते होंठो पर एक किश कर दी और उनके चेहरे को देखने लगा. उनका चेहरा उत्तेजना से पूरा लाल हो गया था. मैंने दोबारा से उनके होंठ को चुम लिया और अपना हाँथ उनके चेहरे से हटाकर उनकी कमर पर रख दिया. दीदी ने अपना चेहरा नहीं घुमाया. तो मैंने उनको सुर्ख लाल होंठो पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगा. लेकिन दीदी कोई रिस्पांस नहीं दे रही थी. फिर मैंने अपना होंठ उनके होंठो से हटाया और दीदी से फिर पूछा.





मैं- दीदी और कुछ बताइये उसे पटाने के लिए.

सविता di-(didi आंखे बंद किये हुवे). यही सब एक लड़की को अच्छा लगता है. तू यही सब कर. देखना एक दिन तू उसका दिल जीत लेगा.

मैं- अच्छा दीदी मैं पूरी कोसिस करूँगा उसका दिल जीतने की.

मेरे हांथो पर दीदी ने अभी भी अपना हाँथ रखा था. तो मैंने जोर लगाकर अपना हाँथ उनकी चूचियों को ब्रा के अंदर से टटोलने लगा और कुछ hi देर में मैंने चुकी की घुंडी कर ऊँगली गोल गोल चलने लगा.





मेरा जो हाँथ उनकी कमर पर था उसको जोर से सहलाते हुवे उसे उनकी गद्देदार गांड की तरफ बढ़ने लगा. और अपने होंठ को दीदी के होंठ पर रखकर किश करने लगा. दीदी की सांसे फिर से भारी होने लगी. मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी.



सविता दी- आआअह्ह्ह्हह अच्छा अभी अब तो बता दे की वो कौन है.

Main-(unke होंठो से अपने होंठ हटते हुवे) मैंने बताया तो था की उसका नाम स से शुरू होता है

सविता दी- लेकिन इस शहर में स नाम की तो बहुत लड़किया हैं. आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह

मैं- हाँ दीदी वो तो है. अच्छा एक बात और है वो शादीशुदा है.

इतना बोलकर मैंने उनकी कमर को सहलाते हुवे उनकी गद्देदार गांड पर अपने हाँथ रख दिए और हल्का सा दबा दिया. और चूचियों की घुंडियो को भी दो उंगलियों में लेकर मसल दिया. दीदी के मुंह से एक कामुक चीख निकल गयी.







सविता दी- aaaaaaaaahahhhhhhhhhhh. हाय्ययी ममममममममममममय aaaaaaaaaaaayyyyyyyyyeeeeeeeee अभ्ठीई. ढहिएएरीई स्स्स्सस्स्स्सीीीे. लेकिननननन ईई तू गलाआआअट है वो शादीशुदा है. ुस्सस्स्स्सकीय ज़्ज़्ज़्ज़्ज़िंन्दगी बराहाबाद ममत करो.

मैं- लेकिन अगर उसे मुझसे प्यार करने में कोई परेशानी नहीं है तो मुझे क्या दिक्कत हो सकती हैं

इतना कहकर मैंने दीदी के होंठो को फिर से किश करने लगा. लेकिन इस बात फोरस्फुल्ली किश कर रहा था. मैंने अपने दांतो से उनके होंठ काट लिए जिससे दीदी की चीख निकली लेकिन मैंने अपने होंठ नहीं हटाए. दीदी ने माधोसी में अपने हाथ मेरे गर्दन में दाल दिया और मेरे सर को अपने चेहरे की तरफ पुश करने लगी. मेरे काटने से दीदी के होंठो में खून निकल आया जिसे मैंने जीभ निकल कर छत लिया. मेरे फोरस्फुल्ली किश करने से दीदी को थोड़ा तकलीफ हो रही थी.



दीदी ने अभी तक मेरे साथ देना शुरू नहीं किया था. फिर मैंने दोबारा से उनकी गांड पर जो हाँथ रखा तह उससे उनकी गांड को मुठी में भरा. जो हाँथ दीदी की चूचियों में ब्रा के अंदर था उसकी उंगलियों से घुंडियों को पकड़ लिया. और अपने होंठ को दीदी के होंठ को किश करते हुवे. उनकी गांड और घुंडियो को जोर से दबा दिया. जिससे दीदी मचल गयी. उन्होंने अपना चेहरा मेरे होंठो से अलग किया और मौन करते हुवे चीख पड़ी

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh कामींणीई oooooooooooouuuuuuuuuuuuuuccccccchhhhhhhhhh. धीरीईए डारडडडड होता है.

मैं- दीदी क्या आपको अच्छा नहीं लग रहा है.

सविता दी- मुझे नहीं पता. लेकिन तू ये सब मेरे साथ क्यों कर रहा है. जाकर उस लड़की के साथ कर जिसे तू पता रहा है.

मैंने इस बार उनकी पूरी चुकी को ब्रा के अंदर से hi अपनी पूरी हथेली में भरा. उनकी गद्देदार गांड को अपनी मुट्ठी में लिया. फिर जोर से उनकी गाड़ और चूचियों को दबाकर अपने जुबान से उनके कान को चाटते हुवे उनके काम में धीरे से कहा.





मैं- मैं उसी लड़की के साथ तो ये सब कर रहा हु. वो लड़की कोई और नहीं आप को दीदी आप.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-45

दीदी को भले hi पहले से शक था की वो लड़की वह खुद हैं लेकिन मेरे मुंह से ये सुनाने के बाद की मैं उन्हें hi पटना चाहता हूँ तो वो एक झटके से सीढ़ी कड़ी हो गई और मेरी गिरफ्त ने निकल कर दिवार की तरफ थोड़ी दूर कड़ी हो गई और मुझे घूर घूर कर देखने लगी. उनके ऐसे देखने से मैं कंफ्यूज हो गया था. मुझे ये समझ नहीं आ रहा था की आखिर दीदी ऐसा रिएक्शन क्यों दे रही हैं. थोड़ी देर मुझे घूरने के बाद दीदी ने कहा.

सविता दी- ये तू उलटी सीधी बात कर रहा है. तेरा दिमाग तो ठिकाने पर हैं.

मैं- मैंने कौन से उलटी सीधी बात की जो सच है वही तो कहा. आप भी तो जानना चाहती थी की मैं किस लड़की को पता रहा हूँ.

सविता दी- लेकिन मैं तेरी बहन हूँ और तो मुझे इस नज़र से देखता है.

दीदी ये बात कर तो रही थी लेकिन उनके चेहरे पर गुस्से जैसा कोई भाव नहीं था तो मैं धीरे धीरे दीदी के पास जाने लगा. दीदी दीवाल से सात कर कड़ी हुई थी. मैं जाकर दीदी से सामने खड़ा हो गया और उनके कंधे पर हाँथ रख दिया. और कहा

मैं- नहीं दी मैं आपको इज़्ज़त की नज़र से देखता हूँ. आपकी इज़्ज़त अब मेरी इज़्ज़त है. आप मुझे गलत समझ रही हैं.

सविता दी- खूब समझ रही हूँ मैं तुझे. तू बहुत बड़ा कमीना है. जो अपनी बहन को hi पाटकर अपनी गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता है

मैं- तो बन जाइये न मेरी गिर्ल्फ्रेंड. इसमें बुराई क्या है.

सविता दी- तू सच में बहुत कमीना है तुझे शर्म नहीं आती अपनी बहन को बोलने में की मैं तेरी गिर्ल्फ्रेंड बन जाऊ.

मैं- अगर शर्म करूँगा तो आपको अपनी गिर्ल्फ्रेंड कैसे बनोंग.

ये सब बाते करते हुवे मैं दीदी के कंडे को अपने हांथो से लगातार सहला रहा था. जिससे दीदी के शरीर में फिर से गर्मी भरने लगी थी. उनके कंधे को सहलाते हुवे मैंने अपना एक हाँथ ऊपर उनके चेहरे की तरफ और एक हाँथ निचे उनकी चूचियों की तरफ बढ़ने लगा. मैंने अपने हाँथ से उनके गलो को सहलाने लगा. एक दौरान दीदी लगातार मेरी आँखों में देख रही थी और मैं उनकी आँखों में. उनकी चेहरा फिर से सुर्ख लाल होने लगा. मैंने उनके गलो को सहलाते हुए अपनी उंगलियों से उनको रसीले होंठो पर भी फिरने लगा. निचे वाले हाँथ को मैंने उनकी चूचियों पर ब्रा के ऊपर से रख दिया और दबाने लगा. दीदी की आँखे बंद होने लगी और साँस भी भरी होने लगी. तभी मुझे दीदी की आवाज़ सुनाई पड़ी.



सविता दी- लेकिन ये गलत है तू मुझे गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता है. मुझे तेरी नियत ठीक नहीं लग रही है.

मैं- मेरी नियत बिलकुल ठीक है.

सविता दी- लेकिन तू मुझे अपनी गिर्ल्फ्रेंड क्यों बनाना चाहता है.

मैं- क्योंकि आप मुझे बहुत खूबसूरत और सेक्सी लगती हैं. और इन कपड़ो में तो आज आप मुझे गरम माल राग रही हैं.

ये सब बोलते हुवे मैंने उनकी चुकी को जोर से मसल दिया और उनके होंठो को भी दूसरे हाँथ से दबा दिया. जिससि दीदी के मुंह से एक SSSSSSSSSSSsssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhh की आवाज़ निकल गई अब मेरा लुंड फिर से पूरा तन चुक्का था. मैं अब दीदी से और ज्यादा सात गया जिससे मेरा लुंड दीदी के पेट से थोड़ा निचे टकरा गया. जिससे दीदी के शरीर में झुरझुरी दौर गई. मैंने अपने होंठो को दीदी के कंधो पर रखा और किश करने लगा एक हाँथ मेरा दीदी की पीठ पर था जिसे मैं ऊपर से निचे पूरी पीठ पर फिर रहा था. और एक हाँथ से दीदी की चूचियों को सख्ती से दबा रहा था जिससे दीदी को हल्का हल्का दर्द भी हो रहा था. तो दीदी ने कहा.



सविता दी- मैं जब से आई हु तब से तू मेरे साथ यही सब हरकते कर रहा है. ये गलत है भाई. छोड़ दे मुझे.

मैं- क्या अब मैं अपनी गिर्ल्फ्रेंड को प्यार भी नहीं कर सकता.

सविता दी- लेकिन अभी मैं तेरी गिर्ल्फ्रेंड नहीं हूँ समझे.

इससे पहले की दीदी कुछ और बोलती मैंने अपने होंठ दीदी के होंठो पर रख दिए. दीदी अपना सर इधर उधर करने लगी. लेकिन मैं उन्हें किश करना बंद नहीं किया. और उनकी चूचिया लगातार सहलाता रहा और पीछे से उनके पीठ भी सहलाता रहा. फिर मैंने उनकी पीठ पर ब्रा स्ट्रेप में ऊँगली फसे और खींच कर छोड़ दी. जिससे दीदी की चीख निकल गई. अभी दीदी की पहली चीख पूरी होती उससे पहले hi मैंने उनको चूचियों को ब्रा के ऊपर से hi थोड़ा सख्ती से दबा दिया. दीदी दर्द के कारन दोहरी हो गई और थोड़ा गुस्से से बोली.



सविता दी- AAAAAAAAAAAAAHHHHHHHHHHHHHHHHHhhhh oooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhh. Dddddaaaaaaaaaaiiiiiiiiyaaaaaaaaaa. Mmmmmmmmaaaaaaaaaaaarrrrrrrrrrrrr गइईईई मैईयीं. तू एकदममममम janwaaaaaaaaaaaaar हैं कययआआआ. ममममुझी कितना दर्द हो रहा थाई.

मैं- सॉरी दीदी वो गलती से हो गया.

सविता di-(Muskura कर) हां तुझसे तो सब कुछ गलती से hi हो जाता है.

फिर मैं वापस से उन्हें किश करने लगा. अबकी बार दीदी ने भी थोड़ा रिस्पांस किया. वो भी अब मुझे किश करने लगी थी. तो मैं और जोर से दीदी से सात गया जिससे मेरा खड़ा लुंड दीदी के पेट के निचे प्रेशर से दबने लगा. फिर मैंने अपने दोनों हाथ दीदी की गद्देदार गांड पर रख दिए और उन्हें मसलने लगा. हम दोनों एक दूसरे को किश कर रहे थे दीदी तो नार्मल किश कर रही थी लेकिन मैं दीदी को वाइल्ड तरीके से किश कर रहा था. और तेज़ी से दीदी की गद्देदार गांड दबा रहा था. अब दीदी के मुंह से आनंद के कारन सिसकिया निकलने लगी थी जो मेरे मुंह में दबकर निकल रही थी.



सविता दी- gggggggguuuullllllllllllllll. Sssssssiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh

लगभग 5 मिनट तक हम दोनों लगातार एक दूसरे को किश करते रहे और इस दौरान मैं दीदी की गांड को सख्ती से दबा भी रहा था. 5 मिनट बाद हम दोनों ने किस थोड़ा तो दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- अभी क्या सच में वो लड़की मैं hi हूँ जिसे तू गिर्ल्फ्रेंड बनाना चाहता था.

मैं- हाँ दीदी वो लड़की आप hi हो.

सविता दी- लेकिन तू मुझे अपनी गिर्ल्फ्रेंड क्यों बनाना चाहता है. तुझे तो और भी सुन्दर लड़किया मिल जाएंगी. जबकि मैं सांवली हूँ. मुझमे कोई कशिश नहीं है की मैं किसी को अपनी और आकर्षित कर सकू.

बस फिर क्या था दीदी की ये बात सुनकर मुझे ताव आ गया और मैंने इसी ताव और जोश में भरकर वो कर दिया जिससे मुझे दीदी की छूट की लिए और लम्बा इंतज़ार करना पड़ा.

जैसे hi दीदी ने मुझसे ये कहा. मैंने टो में आकर दीदी का हाँथ पकड़ा और खींचते हुवे अपने कमरे में ले जाने लगा ये कहता हुवे. (मैं अपने जोश में दीदी को अब आप से तुम कहने लगा)

में- तुम क्या चीज हो दीदी आओ मैं आज तुम्हे दिखा hi देता हूँ. तुम रोज रोज बोलती हो की तुम सांवली हो हॉट और सेक्सी नहीं हो. आज मैं आपको दिखता हूँ की आप कितनी कड़क मॉल हो.

इतना बोलकर मैं दीदी को अपने कमरे में ले जाकर शीशी के सामने खड़ा कर दिया. दीदी जो आज ब्रा और सदी पहनकर मुझसे मिलने चाट पर आई थी. वह अपने इस रूप को शीशे में देखकर शर्माने लगी. मैं भी दीदी को शीशे में इस रूम में देखकर अपना लौंद मसलने लगा जिसे दीदी ने भी साफ देख लिया. फिर मैं दीदी के बगल में जाकर खड़ा हो गया और कहा.



मैं- दीदी तू अपने आपको शीशे में देखो और बताओ की तुजमे क्या कमी दिख रही है तुझे. मुझे तो कोई कमी नहीं दिख रही है. एकदम कड़क माल लग रही हो. (फिर उनके बालो में उंगलिया फिरकर) अपने बालो को देखो रेशम की तरह मुलायम हैं. जब ये लहराते हैं तो लगता है की जैसे आसमान में घटा छ गई

है.



मैं- (उनके गलो को सहलाते हुवे) अपने गालो को देखो एकदम टमाटर की तरह लाल लाल हैं. जिसे देखने के बाद मन करता है की पुरे गाल अपने मुंह में भरकर चबा जाओ.



मैं- (उनके होंठो मो मसलता हुवे) अपने गुलाब की पंखुड़ियों जैसे गुलाबी होंठो को देखो. ऐसे लगता है की जैसे इसमें से शहद टपक रहा हो. तुम्हारे होंठो को हर कोई पाना चाहे.





मैं- (उनकी आँखों में देखते हुवे) अपनी इन कजरारी मदभरी हिरणी जैसी आँखों को देखो. इन आँखों में झील सी गहराई हैं जिसमे हर कोई डूबना चाहता हैं. तुम्हारी एक मदहोश नज़र से यहाँ लाखो क़त्ल हो सकते हैं और तुम कह रही हो की हॉट और सेक्सी नहीं हो.





मेरे मुंह से अपनी इतनी मादक और खुले शब्दों में तारीफ सुनकर दीदी शर्मा भी रही थी और मुस्कुरा भी रही थी. फिर मैंने बात को आगे बढ़ाते हुवे कहा.

Main-(Unki गार्डन पर किस करके मसलते हुवे) अपनी गार्डन को देखो एकदम कामुक और सुराहीदार गार्डन है तुम्हारी. इसको चाटने के लिए हर कोई बेताब हो जाए.



फिर मैंने अपने हैंतो को उनक चूचियों पर रख दिया जिससे दीदी की आँखे मदहोशी से बंद हो गई मैंने दोनों हांथो से उनकी चूचियों को मसलते हुवे कहा कुल शब्दों में कहा.

मैं- अपनी इन गदराई चूचियों को देखो. कितनी बड़ी बड़ी और कठोर हैं ये. एकदम पर्वत की छोटी की तरह कड़ी हुई. एक बच्चा होने के बाद भी इनके कोई लचक नहीं है. कोई ढीलापन नहीं है. देखो उनको (उनकी आँखों में देखते हुवे उनकी चूचियों को दबाते हुवे.) कितना रास भरा है इसमें. जब ये ब्रा के ऊपर से hi इतना कहर ध रही हैं.



तुझको इस रूप में देखकर लोग तेरी चिचियो का रास पिने के लिए मचल जाये. तुझको इस रूम में देखकर मेरा भी मन करता है की तेरी चूचियों को ब्रा से निकल कर मैं इनको निचोड़ कर पि जाऊ. जब तू ब्रा में hi इतना कहर ढाती है तो तू सोच की अगर तू बिना ब्रा की लोगो के सामने आ जाये तो लोग तेरे लिए एक दूसरे की जान ले ले.



मेरे मुंह से अपनी इतने खुली तारीफ सुनकर दीदी का मुंह खुला का खुला रह गया. उनका चेहरा शर्म से लाल हो गया था. एक लड़की को अपनी तारीफ सुनना बहुत अच्छा लगता hai.wo बिना कुछ बोले अपनी तफ़ीफ़ चुपचाप सुन रही थी. भले hi वो थोड़ी ौड hi थी

मैं- (उनकी छूट की तरफ इशारा करते हुवे)- इसके बारे में तो मैं ज्यादा कुछ नहीं कह सकता क्योंकि इसे मैंने कभी महसूस नहीं किया है इसके बारे में आप ज्यादा अच्छी तरह जानती हैं. लेकिन इतना दावे के साथ कह सकता हूँ की जो लड़की इतनी जबरदस्त मॉल है उनकी ये भी बहुत hi जबरदस्त होगा. जिसका हर कोई दीवाना बन जाए.



Main(baithte हुवे उनकी टैंगो पर हाँथ फिरते हुवे). और तुम अपनी टंगे देखो. केले के तने जैसी चिकनी चिकनी हैं ये. इन टैंगो को चाटने के लिए लोग मर आपस में लड़ने लगे.



मेरे मुंह से इतनी गन्दी और खुली तारीफ सुनकर दीदी एकदम मदहोश हो गई थी उनका चेहला एकदम लाल हो गया था. उनके होंठ थरथरा रहे थे. उनकी साँस भरी हो गई थी फिर मैं उनके पीछे आ गया और उनकी गद्देदार गांड को दोनों हाथो में पकड़ कर जोर से मसल कर लगातार 3 थप्पड़ सदी के ऊपर से hi मर दिए. जिससे दीदी की मुंह से दर्द भरी आह निकल गई.



सविता दी- hhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyy.aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhha. धिर्र्र्रीीी अभीइइइइइइ डीईईडीएएएएए.

मैं- अपनी इस गद्देदार गांड को देखो तुम. कितने कातिलाना गांड है. बहार को निकली हुई. जब तुम कपडे पहकर बहार जाती हो तो लोग इसे खा जाने वाली नजरो से देखते हैं. जब तुम चलती हो तो तुम्हारी मस्त कातिलाना गांड जब इधर उधर हिलती है तो लोगो के दिल पर छुरिया सी चल जाती है.







फिर मैंने अपने दिनों हांथो से उनकी चूचियों को मुठी में पकड़ा और लुंड को सदी के ऊपर से उनकी गांड की दरार में फसाया और जोश जोश में दीदी से वो सब बोल दिया जो मुझे नहीं बोलना चाहिए था .

मैं- अब सोचो तुम की तुम क्या हो. अगर तुम नंगी रोड पर नीलाल जाओ तो लोग तुम्हे वही पटक कर रंडी बनाकर छोड़ डेल.







मेरे इतना कहते hi दीदी ने गार्डन घुमाकर मेरी तरफ देखा. मैंने उनके चेहरे पर गुस्सा साफ महसूस किया. लेकिन उस समय मैं जोश में था इसलिए उनकी चूचियों को पूरी ताकत से दबाकर मसल दिया और पीछे से लुंड पूरी ताकत से उनकी गांड में पेल दिया और अपनी धुन में बोलता चला गया.

मैं- अरे दीदी तुम लोगो की छोडो तुम मुझे इन कपड़ो में एकदम छुडासी मॉल और प्यासी रैंड नज़र आती हो. तुम्हे देखकर मेरा hi मन करता है की मैं तुम्हारे सरे कपडे फाड् दालु और तुम्हे पटक पटक कर कुटिया बनाकर रंडी की तरह छोड़ू.





मेरे गांड में लुंड पेलने और चूचियों के दबाने से दीदी चीख पड़ी और उसमे मेरी बात ने आग में गहि का काम किया. दीदी चीख कर झटके से पलटी. और जब तक मैं कुछ समझ पता एकक झन्नाटे दर थप्पड़ मेरे गलो पर पड़ा. थप्पड़ इतना जोरदार था की उसकी गूँज पुरे कमरे में फ़ैल गई. मैं अपने गाल को हाँथ से सहलाने लगा. मुझे तो कुछ समझ में hi नहीं आ रहा था की आखिर बात क्या है. फिर दिमाग पर जोर डालने पर समझ में आया की मैं जोश जोश में क्या बोल गया हूँ. जब मैंने दीदी की तरफ देखा तो उनकी आँखों में आँशु से. वो मुझसे रट हुवे बोली.

सविता दी- कमीने कुत्ते. तुझे शर्म नहीं आती. तू मेरे बारे में इतनी घटिया सोच रखता है. छियई. मैं तुझे पहले गलत समझती थी लेकिन बाद में पता चला की मेरा भाई दुनिया का सबसे अच्छा भाई है. लेकिन मैं गलत थी. तू तो अपनी ठरक में इतना अँधा हो गया है की अपनी बहन को रंडी बनाना चाहता है. थू है तुझपर.

मैं- सॉरी दी. वो अनजाने में hi मेरे मुंह से पता नहीं कैसे ये सब निकल गया.

सविता दी- अच्छा हुआ अनजाने में निकल गया तेरे मुंह से क्योंकि यही सब तेरे मन में था मेरे लिए. आज के बाद मुझसे बात करने की कोशिश भी की तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा

और इतना बोलने के बाद सविता दी रट हुवे निचे चली गयी. मैं पीछे से उनसे माफ़ी मांगता रहा. लेकिन वो रूखी नहीं. मैं जैसे लुटा पिता अपने बिस्टेर पर बैठ गया.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-46

दीदी के जाने के बाद मैं कमरे में आकर बैठ गया और अभी जो हुवा उसके बारे में सोचने लगा. सबकुछ अच्छा hi जा रहा था. तो दीदी ने ऐसे रिएक्शन क्यों दिया. कही दीदी को मेरी रंडी वाली बात तो बुरी नहीं लगी अब ये तो पता नहीं की क्या हुआ दीदी को. लेकिन अगर मैंने जोश में आकर रंडी नहीं बोलता तो जिस तरह से दीदी साथ दे रही थी उस हिसाब से वो ज्यादा से ज्यादा 1 हफ्ते के अंदर मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर उछाल रही होती. लोग तो अपने पेअर पर कुल्हाड़ी मरते हैं. लेकिन मैंने तो अपने लुंड पर कुल्हाड़ी मार ली थी.

फिर मैंने सोचा की हो सकता है की उनका पतिब्रता धर्म जग गया हो. उनको ये एहसास हो गया हो की वो गलत कर रही हैं. अपने पति को धोखा दे रही हैं. और सबसे बड़ी बात अपने भाई के साथ ये सब कर रही हैं. मेरा तो इस समय दिमाग hi काम नहीं कर रहा था तो मैंने इस बात को दिमाग से निकलने की सोची तभी मेरे मोबाइल की मश्ग टन बजी. मैंने देखा की मीरा वाली ईद पर सरिता दीदी का मश्ग है. मैं उनसे बात तो नहीं करना चाहता था. लेकिन मैंने सोचा की एक छूट तो मेरी बकचोदी की वजह से हाँथ से गई. लेकिन इस छूट को क्यों जाने दू तो मैंने दीदी को रपल्य किया.

म- ही सेक्सी.

सरिता दी- कैसी हो आप.

म- ठीक हूँ. आप कैसी हो.

सरिता दी- मैं भी ठीक हूँ. और बताओ क्या हो रहा है.

म- कुछ नहीं बस अभी भाई के साथ थी. अभी फुर्सत मिली तो बैठी हुई थी और आप क्या कर रही हैं.

सरिता दी- कुछ नहीं बस अभी फिऑन्स से बात हो रही थी. फुर्सत मिली तो सोचा तुमसे बात कर लू.

म- अरे वाह क्या बाते हो रही थी दोनों फ्यूचर कपल्स के बिच.

सरिता दी- अरे कुछ खास नहीं बस वही रोज की बाते. हसी मज़ाक बस और क्या बात होगी.

म- बस केवल हंसी मज़ाक और वो वाली बात नहीं करती क्या दोनों लोग.

सरिता दी- वो वाली कौन सी बात ( हँसते हुवे)

म- अरे वही. प्यार मोहब्बत वाली बात. शादी के बाद क्या क्या करना है. कहा कहा करना है. कैसे कैसे करना है. कब कब करना है. हनीमून की बाते. मेरा मतलब है गन्दी वाली बाटे.

सरिता दी- चल हैट बेशरम. कोई ऐसी बाते भी करता है क्या.

म- चल झूठी. मुझे बना रही है. चल बता न क्या क्या प्लान बनाया है शादी के बाद का.

सरिता दी- अरे कुछ ज्यादा खास नहीं. बस रोज कहते हैं. की तुम्हारे साथ ये करूँगा. तुम्हे इनरवेरे में hi घर में रखूँगा. और ऑफिस नहीं जाऊंगा दिन भर तुम्हारे साथ घर में hi रहूँगा. होनीमून के लिए शिमला नैनीताल और मसूरी जाना तय हुआ है.

म- हाउ रोमांटिक. तब तो बहुत मज़ा आने वाला है आपको (हँसते हुवे)

सरिता di-(sharmate हुवे). चल हैट बेशरम. शर्म नहीं आती ऐसा बोलते हुवे.

म- अच्छा अब रखती हूँ. भाई बुला रहा है.

मैं रोज रोज फ़ोन रखने से पहले यही बोलता था की भाई बुला रहा है तो आज दीदी ने पूछ hi लिया.

सरिता दी- एक मिनट. जरा रुको तो.

म- हाँ बताओ क्या हुआ.

सरिता दी- अच्छा ये बताओ रोज तुमको इस वक्त तुम्हारा भाई क्यों बुलाता है उसको इतनी रात को क्या काम रहता है तुमसे. तुम रोज उसके बुलाने के बाद bye बोलकर चली जाती हो.

म- अभी तो नहीं बता सकती जल्दी में हूँ. बाद में आपको बताउंगी. Bye.

उसके बाद मैंने फ़ोन रख दिया और सोने की कोशिश करने लगा. थोड़े देर बाद मुझे नींद आ गयी.

सुबह मैं देरी से सोकर उठा. आज सविता दीदी ने भी मुझे नहीं जगाया. खैर वो तो कल रात से गुस्सा hi थी. मैं फ्रेश होकर निचे आया. और सोफे पर बैठ गया. वह पर मम्मी पापा मनीषा और सरिता दी थे. आज किचन में सविता दी थी. जब मैं वह बैठा तो सरिता दीदी ने पूछा.

सरिता दी- किससे मार खा कर आ रहा है अभी.

उनकी बात सुनकर मैं चौक गया. मैंने सोचा इन्हे कैसे पता की कल दीदी ने मुझे थप्पड़ मारा. कही दीदी ने बता तो नहीं दिया. नहीं नहीं अगर दीदी ने बता दिया होता तो घर का माहौल दूसरा होता. जब मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो सरिता दी ने फिर पूछा.

सरिता दी- तुमने जवाब नहीं दिया अभी. इतनी सुबह सुबह किससे मार खा कर आ रहा है.

मैं- मतलब मुझे कौन मरेगा. और आपको कैसे पता की मैंने मार खायी है.

सरिता दी- अपना गाल देख एकदम लाल पड़ा हुवा है जैसे किसी ने बहुत जोर से थप्पड़ मारा हो.

मैंने शीशी में जब अपना चेहरा देखा तो एकदम एक तरफ एकदम लाल हो गया था. तो मैंने धीरे से बुदबुदाया.

मैं- एक जंगली बिल्ली ने बहुत जोर का मारा है.

सरिता दी- क्या बड़बड़ा रहा है. सुनाई नहीं पद रहा है.

मैं- अरे दीदी वो क्या है कल रात कमरे में 2-3 मच्छर आ गए थे. वो बार बार मेरे चेहरे पर बैठ रहे थे और मैं नींद में था. तो उन्हें मरने के लिए हाँथ चला रहा था. शायद कुछ ज्यादा तेज़ी से हाँथ चल गया इसलिए मेरे गाल लाल हो गए हैं.

मैं अपने कमरे में चला गया. आज मेरा बहार जाने का मूड नहीं था तो मैं अपने कमरे में बैठकर अपने लैपटॉप पर सेक्सी कहानिया पढ़ने लगा. लगभग 3 हॉर्स बाद मुझे प्यास लगी तो मैं पानी लेने किचन में जा रहा था. उसी समय सरिता दी बाथरूम से नहाकर बहार निकली. तो उन्होंने अपने शरीर पर एक टॉवल लपेटा हुवा था. वो टॉवल उनकी जांघो तक आ रहा था. दीदी के बाल भीगे हुवे थे. शरीर में पानी की हलकी हलकी बुँदे चमक रही थी. उनके गाल होंठ पानी की बूंदो के करना बहुत कामुक लग रहे थे. उनके बालो से पानी की बुँदे उनकी गार्डन पर गिरकर सरकती हुई उनकी ृषभरी चूचियों की घाटी में ऐसे गायब हो रही थी जैसे नदिया समुन्दर में गायब हो जाती थी.



सेक्सी कहानी पढ़कर मेरा लुंड वैसे भी खड़ा था परनतु दीदी का ऐसा कामुक और मादक रूप देखकर वह झटके मरने लगा. मेरे इस तरह अचानक सामने आ जाने से दीदी एकदम चौक गाइट hi. उनके हाँथ पांव एकदम जैम हो गए थे उन्हें कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे.

मैं एकटक दीदी के शरीर को घूरने लगा. दीदी ने भी जब ये देखा की मैं उनके शरीर को घूर रहा हूँ तो वह शर्माकर इधर उधर देखने लगी.



फिर एकाएक दीदी की नज़र मेरे खड़े लुंड पर पड़ी तो दीदी एकदम सोक रह गयी. मेरा लुंड पुरे आकर में दीदी के सामने से. जिसे दीदी बस मुंह फाडे मेरे लुंड को घूरे जा रही थी. लगभर ऐसे hi 30 सेकंड तक मेरे लुंड को घूरने के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा तो मुझे जैसे होश आया और मैंने कहा.

मैं- सॉरी दीदी वो मुझे प्यास लगी थी तो मैं पानी पिने आया था. मुझे नहीं पता था की वो आप……. Matlab………wo…………

सरिता दी- कोई बात नहीं अभी. लेकिन अपने नज़रो को थोड़ा अपने काबू में रखना सीख ले.

इतना कहने के बाद वो तेज़ी से दौड़कर अपने कमरे में चली गई और मैं पीछे से उनकी मटकती गांड को देखने लगा. उसके बाद मैं पानी पीकर अपने कमरे में आया. मेरा मन नहीं लग रहा था तो मैं कपडे पहनकर थोड़ा फ्रेस होने के लिए बहार निकल आया

लगभर 3 हॉर्स बाद मैं जब घर वापस आया तो घर देखा की घर में मां, पापा, मैश और सविता दीदी हॉल में hi बैठे थे. घर में जैसे मातम चाय हुआ था. सबके चेहरा पर एक उदासी थी थी. मुझे देखते hi पापा ने तेज़ आवाज़ में पूछा.

पापा- अभी कहा गया था तू. हम कब से तेरी रह देख रहे हैं.

पापा के मुंह से ये सुनकर मेरी तो गांड फटकार चौराहा हो गई. मुझे पक्का विश्वास हो गया की दीदी ने पापा को सबकुछ बता दिया है. और आज मेरी सहमत आयी है. तो मैंने डरते डरते पापा से कहा.

मैं- सॉरी पापा वो मुझसे गलती हो गयी. मैंने जानबूझकर ऐसा नहीं किया.

पापा- अरे नालायक. सरिता की शादी पोस्टपोन हो गई है.

पापा की बात सुनकर मुझे ये तो रहत हुई की सविता दीदी ने पापा को कुछ नहीं बताया है. लेकिन सरिता दीदी को शादी पोस्टपोन हो गई है ये सुनकर मुझे जैसे झटका सा लगा. मैंने चौकते हुवे कहा.

मैं- क्या.. Kaise..Kisliye…..

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-47

(ये अपडेट नार्मल है.)

शादी पोस्टपोन होने की खबर सुनकर मैं चौक गया और मेरे मुंह से निकला.

मैं- क्या.. कैसे.. किसलिए…..

पापा- अरे उनका जो बिज़नेस था उसमे उनको बहुत बड़ा नुकसान हो गया है. जिससे उनकी साडी जमा पूंजी ख़तम हो गयी है और सरिता की सास भी हॉस्पिटल में हैं तो उनका भी इलाज में पैसे लग रही हैं. इस समय उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है. पैसो की तंगी के कारन hi वो शादी पोस्टपोन कर रहे हैं 6-7 महीने बाद hi ये शादी होगी.

मैं- अरे ऐसे कैसे कर सकते हैं वो लोग. अब शादी में सिर्फ 7 दिन hi बाकि हैं. सब व्यवस्था हो गई है. और मेरी बहन के भी सपने हैं कुछ उसका तो ख्याल रखना चाहिए था न उनको.

पापा- अरे बीटा उसका hi ख्याल रखकर hi तो उन्होंने इस शादी को पोस्टपोन किया है. अब तुम hi बताओ अभी उनके यहाँ कितनी टेंशन का माहौल है. अगर इस टेंशन के माहौल में सरिता की शादी हो जाती है तो वो खुश नहीं रहेगी. इसलिए तुम्हारे जीजा ने बहुत सोच समझकर ये निर्णय लिया है. इस सेतुएशन में मुझे भी ऐसा hi लगता है की ऐसे माहौल में शादी को पोस्टपोन कर देना hi ठीक है.

मुझे भी पापा की बात सही लग रही थी की ऐसे माहौल में अगर दीदी की शादी हो भी गयी तो इस टेंशन के माहौल में दीदी खुश कैसे रहेंगी. हो सकता है की इस टेंशन के माहौल में जीजा जी से उनकी कहासुनी न हो जाये.

मैं- सरिता दी कहा हैं और क्या उनको इस बारे में पता है.

पापा- हाँ उसे पता है और वो अपने कमरे में है. थोड़ी अपसेट हो गई है ये सुनकर.

मैं भी वही सब के साथ सोफे पर बैठ गया और सरिता दीदी के बारे में सोचने लगाकि दीदी ने कितने अरमान शादी के लिए सजा कर रखे थे. उन्होंने इस शादी के लिए एक एक दिन गईं कर कटा है. वो कितना परेशां होंगी. उनको कितना दुःख पंहुचा होगा ये सुनकर की उनकी शादी अभी नहीं हो रही है. मैं कुछ देर निचे बैठा ये सब सोचता रहा फिर उठकर सरिता दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. जब मैं वह पंहुचा तो दीदी फ़ोन पर जीजा जी से बात कर रही थी. जीजा जी को मन रही थी. जीजा जी भी दीदी को समझा रहे थे, लेकिन दीदी थी की समझने की कोशिश hi नहीं कर रही थी. जिससे झुंझलाकर जीजा जी ने फ़ोन रख diya.main कुछ देर बहार hi खड़ा रहा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी को आवाज़ लगाई.

मैं- दीदी क्या मैं अंदर आ जाऊ.

और इतना कहकर मैं अंदर चला गया. दीदी मुझे देखते hi दौड़कर मेरे गले लग गई.



दीदी की t-shirt आज भी डीप नैक की थी और दौड़ने से उनकी चूचिया जम्प करके इधर उधर हिल रही थी. जब वो मेरे गले से लगी तो उनकी चूचिया सीधे मेरे साइन में धस गई. लेकिन आज मेरे मन में कोई भी ठरक जैसे चीज़ नहीं थी. मैं आज उन्हें एक बहन की नज़र से देख रहा था. इसलिए मैंने इस बात पर ज्यादा दयँ नहीं दिया. दीदी मेरे गले लगकर डबडबाई आँखों से मुझे देखते हुवे कहा.

सरिता दी- देख न अभी. तेरे जीजा जी ने शादी पोस्टपोन कर दी है.

मैं- हाँ दीदी मुझे भी पापा ने बताया है. लेकिन आप इतना परेशां क्यों हैं. हम सब हैं न आपके साथ.

सरिता दी- हाँ लेकिन उन्होंने शादी क्यों पोस्टपोन की. शादी तो हो सकती थी न. मैंने पैसे के लिए तो उनसे नहीं कहा की मुझे पैसे चाहिए. फिर क्यों.

मैं- दीदी बात पैसे की नहीं है. जीजा जी को आपकी फ़िक्र है. इसलिए वो आपको टेंशन में नहीं डालना चाहते थे. अभी उनके घर में बहुत टेंशन है. इसलिए उन्होंने शादी को आगे बढ़ाया है.

सरिता दी- लेकिन मुझे तो कोई प्रॉब्लम नहीं थी ऐसे हालत में भी शादी करने में.

मैं- मैं समझ सकता हूँ दीदी. लेकिन आप भी समझिये की अगर ऐसे हालत में शादी हो गई और तो आप भी हर वक्त टेंशन में रहेंगी और आपको टेंशन में देखकर जीजा जी को बहुत तकलीफ होगी.

सरिता दी- लेकिन अभी………

मैं- (उनकी बात काटकर) अच्छा एक बात बताइये दीदी अगर मैं, सविता दीदी, मनीषा या मां पापा में से कोई बहुत बीमार हो गया और होस्पिटलिज़्ड हो गया तो क्या आप शादी कर लेती.

सरिता दी- मैं आप सब के बिना शादी कैसे करती.

मैं- वही तो मैं कह रहा हूँ की उनकी मां होस्पिटलिज़्ड है. तो ऐसे में जीजा जी का हालत समझने की कोशिश कीजिए. वो कितने परेशां होंगे और आपने उन्हें और परेशां कर दिया फ़ोन पर. चलिए अभी फ़ोन करिये जीजा जी को और माफ़ी मांगिये उनसे मेरे सामने.

मेरे समझने से सरिता दीदी को भी ये समझ में आ गया की इस हालत में शादी तो नहीं की जा सकती इसलिए उन्होंने जीजा जी को फ़ोन लगाया और उनसे माफ़ी मांगी और फिर फ़ोन रख कर मेरी तरफ देखने लगी.

मैं- ये हुई न अच्छी बहन वाली बात. अब अपने आंसू साफ करो और जल्दी से निचे आओ. मैं निचे जा रहा हूँ.

मैंने निचे जाकर बताया की सरिता दी को मैंने समझा दिया है अब वो थोड़ा नार्मल हो गई हैं. उसके बाद मैं अपने कमरे में चला गया. इसी तरह लगभग 1 वीक निकल गए. इन 1 सप्ताह में सविता दीदी ने मुझसे बात नहीं की जबकि मैंने एक दो बार माफ़ी भी मांगी. सरिता दीदी को भी मीरा वाली ईद से कई मश्ग किये लेकिन कोई रपल्य नहीं आया. सरिता दी से नॉर्मली रोज मैं बातचीत करता था. लेकिन अब पहले जैसा माहौल नहीं बन प् रहा था.

1 वीक बाद एक रात को मैं बीएड पर लेता हुआ था तभी सरिता दी का मश्ग मीरा वाली ईद पर आया. मैंने तुरंत उन्हें रपल्य किया.

म- ही कैसी है आप.

सरिता दी- ठीक hi हूँ. तुम बताओ कैसी हो.

म- मैं ठीक हूँ लेकिन आपको क्या हो गया है. 1 हफ्ते से कोई कॉन्टैक्ट नहीं. सब ठीक तो है न.

सरिता दी- कुछ ठीक नहीं है यार. इसीलिए तो कुछ दिन ऑनलाइन नहीं आई.

म- क्यों क्या हो गया. बताओ मुझे.

सरिता दी- मेरी शादी पोस्टपोन हो गई.

म- (चुकने का नाटक करते हुवे) क्यों. किसलिए कैसे.

फिर सरिता दी ने पूरी बात मीरा को बता दी. जो मुझे पता थी.

म- तो इसमें इतना परेशां होने की क्या बात है आज नहीं तो 6 मंथ बाद hi सही.

सरिता दी- तुम समझ नहीं रही हो. मेरी क्या हालत है इस समय.

म- क्या हुवा है आपको. तबियत तो ठीक हैं न आपकी.

सरिता दी- हाँ तबियत तो ठीक है. लेकिन इस शादी को लेकर मैंने कितने सपने देखे थे. मैंने एक एक दिन गईं कर काटे थे. लेकिन लगता है मेरे नसीब में खुशिया है hi नहीं.

म- ऐसा क्यों कह रही हो. घर में सभी हैं अच्छा खासा परिवार है. तो इससे बढ़कर ख़ुशी की बात और क्या हो सकती हैं.

सरिता दी- तुम समझ नहीं रही हो. मेरा मतलब हैं मेरी भी कुछ जरूरते हैं. जो शादी के बाद पूरी हो सकती थी.

म- हाँ वो तो है. शादी के बाद पति मिलता और उसके पैसो पर ऐश करती. खूब खर्चा करती. (हँसते हुवे)

सरिता दी- तुम एकदम झल्ली हो. अब तुम्हे मैं कैसे समझौ. पता नहीं तुम मेरे बारे में क्या सोचो.

म- अरे यार हम अचे दोस्त हैं तो जो भी हो मुझे बता दो मैं आपकी पूरी मैडम hi करुँगी.

सरिता दी- अरे मेरा मतलब है की मेरे जिस्म की भी कुछ जरूरते हैं. जो शादी के बाद पूरी हो सकती थी.

म- (हँसते हुवे) अच्छा तो आग लगी है मेरी सेक्सी फ्रंड के जिस्म में. इसलिए बहुत परेशां हो.

सरिता दी- लेकिन लगता है अब 6 महीने मुझे ऐसे hi जल जल के रहना होगा.

म- अरे इसमें टेंशन लेने की क्या बात है. आगे तुम्हे बुरा न लगे तो मैं कुछ सलाह दू.

सरिता दी- हाँ बताओ. तुम्हे पूछने की कोई जरुरत नहीं हैं.

म- इस जिस्म की तड़प को सदी हो या न हो कभी भी बुझाया जा सकता है.

सरिता दी- अच्छा……. वो कैसे. (फिर कुछ सोचकर) कही जो मैं समझ रही हु. तुम वो तो नहीं कहना चाहती हो.

म- अब आप क्या समझ रही हैं ये तो मुझे नहीं पता. लेकिन इस समय आपको एक बर्फ की सख्त जरुरत है.

सरिता दी- ये कैसी बात कर रही हो तुम. मैं उस टाइप की लड़की नहीं हूँ.

अब मैं यहाँ अपना गेम खेलना शुरू कर दिया था. मुझे लग रहा था की दीदी के जिस्म की जो प्यास है उसको और भड़काना होगा. ताकि दीदी चुदाई करने के लिए मज़बूर हो जाये. लेकिन उनको चुदाई के लिए अपनी तरफ भी. मोड़ना था ताकि वो कोई बर्फ न बनाये बल्कि मुझसे चुदाई करे. इसलिए मैंने बात को आगे बढ़ाया.

म- तो मैंने कब कहा की आप उस टाइप की लड़की हो. मैं तो बस ये कह रही थी जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक एक बर्फ बना लो और मौज करो. आपकी जरुरत भी पूरी हो जाएगी. और आपको तड़पना भी नहीं पड़ेगा.

सरिता दी- लेकिन मैं ये सब कैसे कर सकती हूँ. नहीं मुझसे ये नहीं होगा.

म- ठीक है जैसी तुम्हारी मर्ज़ी. वैसे एक राष्ट और है. लेकिन पता नहीं आप कर पाएगी या नहीं. और हो सकता है की वो बात सुनाने के बात आप मुझसे दोस्ती भी तोड़ दो.

सरिता दी- ऐसी कौन सी बात है जो तुम ऐसे बात कर रही हो.

म- बात ये है की…………. अच्छा बही रखती हूँ भाई बुला रहा है बाद में बात करती हूँ.

सरिता दी- अरे कहा चली सुनो तो.

मैंने दीदी का मश्ग देखा लेकिन रपल्य नहीं किया. मैं दीदी को सस्पेंस में रखना चाहता था. इसलिए मैंने मोबाइल साइड में रखा और बीएड पर लेट गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका।

आपने जितनी तारीफ कर दी अभी फिलहाल उतनी तारीफ के हकदार नहीं है।

जहां तक फ़ोटो की बात है तो मुझे भी लगता है कि कम से कम फ़ोटो का प्रयोग होना जरूरी है। इसलिए अब ज्यादा फ़ोटो नहीं डालेंगे।

पूरी पूरी कोशिश करूँगी कि आगे भी आप सभी को कहानी अच्छी लगे।

बस इसी तरह से अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा करते रहिए।

धन्यवाद बहुत बहुत
 
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