- Joined
- Dec 5, 2013
- Messages
- 99,463
अपडेट-27
थोड़े देर बाद दीदी भी तैयार होकर हाल में आ गई मैं तो बस उन्हें देखता hi रह गया. आज उन्होंने सलवार शट पहना हुआ था. जिसके गले के पास का कपडा एकदम झीना था. जिससे उनकी चूचियों की गहराई दिख रही थी. उन्होंने दुपट्टा भी लिया था लेकिन उस समय दुपट्टा उनके गले में था. हम दोनों नाश्ता करके मार्किट जाने के लिए निकल गए. जब हम घर से बहार आये तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- दी लगता है आज लोग मेरी किस्मत से जलने वाले हैं
सविता दी- वॉक योन
मैं- अरे जब इतनी सुन्दर और खूबसूरत लेडी मेरे साथ होगी तो लोग तो जलेंगे hi न मुझसे.
सविता दी- ज्यादा मस्का मत मार. मैं इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ.
मैं- वो आप मेरी नज़र से देखो की आप कितनी खूबसूरत हैं.
सविता दी- थैंक्स अभी.
फिर जब हम घर से बहार आये तो दीदी ने बाइक न कार से चलने के लिए कहा. लेकिन मैं दीदी के साथ आगे अपनी किस्मत आजमाना चाहता था इसलिए बस से जाना दिसदे किया. थोड़ी देर न नुकुर के बाद दीदी भी बस से मार्किट चलने के लिए मन गई. फिर हम पैदल hi बस स्टैंड पर आ गए. जो हमारे घर से पैदल 15 मिनट के राष्ट था. बस स्टैंड पर आकर हम बस का वेट करने लगे.
बस स्टैंड पर जितने भी मर्द थे सभी दीदी को घूर कर देख रहे थे. मैंने दी को इशारा किया की देखो मैंने सही कहा था न. तो दीदी शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी.
कुछ देर बाद बस आ गयी. बस में बहुत भीड़ थी. दीदी ने तो बस में चढ़ने से इंकार कर दिया. लेकिन मेरे बहुत कहने वह बस पर चढ़ी.
हम बस के बिच में आकर खड़े हो गए. बस स्टॉप पर बहुत से यात्री थे तो सब के बस पर चढ़ जाने के कारन बस में भीड़ और ज्यादा बढ़ गई थी. कुछ दूर बस के चलने के बाद अचानक ड्राइवर ने ब्रेक मारा. मैं दीदी के पीछे खड़ा था तो पीछे से दीदी से पूरा सात गया
लेकिन मैं जल्दी से पीछे हैट gaya.sadak पर गड्ढे बहुत थे तो ड्राइवर बार बार ब्रेक मरता था और मैं पीछे से धक्का लगने से दीदी से पीछे से पूरा सात जाता था और कुछ सेकंड बाद जगह बना कर पीछे हैट जाता था. सी पर दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.
सविता दी- क्या कर रहा है अभी ठीक से खड़ा नहीं रह सकता क्या.
में- मैं क्या करू दीदी एक तो इतनी भीड़ है और ऊपर से ड्राइवर बार बार ब्रेक मार रहा है. आप ऐसा करो की ऊपर का हैंडल कसकर पकड़ लो. ताकि अगर अबकी बार मैं आपके ऊपर गिरु तो आप मुझे संभल सको.
सविता दी- (मुस्कुराते हुवे). मैं तुझको कैसे सम्भालूंगी. संभालना तो तुझको मुझे चाहिए.
मैं- मैं तो आपको साडी ज़िन्दगी सँभालने के लिए तैयार हूँ.
सविता दी- बड़ा आया साडी ज़िन्दगी सँभालने वाला. जब मुझे तेरी जरुरत होगी तब देखूंगी की तू मुझे संभालता है या नहीं.
मैं- देख लेना दीदी. मैं इतनी अच्छी तरह से आपको सम्भालूंगा की आप मुझे कभी भूल नहीं पाओगी.
सविता दी- वो तो समय बताएगा.
ये बाते हम लोग धीरे धीरे कर रहे थे जो हम दोनों के आलावा कोई नहीं सुन रहा था. अभी बस कुछ hi आगे बढ़ी तो ड्राइवर ने फिर से ब्रेक मार दी. इस बार मैं फिर से दीदी से पीछे से चिपक गया लेकिन इस बार मैं पीछे नहीं हटा और दीदी से चिपका रहा. अब जब जब बस में हल्का सा झटका भी लगता तो मैं दीदी से और ज्यादा चिपकता जाता. अब हम दोनों इतने चिपक गए थे की दोनों के बिच से हवा भी नहीं निकल सकती थी. दीदी से लगातार चिपकने के कारन मेरा लुंड भी कड़ा हो गया था जो दीदी के चुतरो को टच हो रहा था. दीदी को भी शायद इसका एहसास हो गया था. इसलिए उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा
सविता दी- अभी थोड़ा पीछे हैट जा.
मैं- पीछे जगह hi नहीं है दीदी तो कहा हैट कर जाओ.
अब तक लुंड पंत में पूरा तन चूका था और बस की हिलने से लगातार दीदी के चुतरो पर झटके मार रहा था. मैं भी मौके का पूरा फायदा उठाकर अपने लुंड का प्रेशर दीदी के चूतड़ों पर बनाये हुवे था.
दीदी भी जान गयी थी की उनके चूतड़ों पर क्या चुभ रहा है इसलिए वो अपनी गांड इधर उधर कर मेरे लुंड से बचने की कोशिश कर रही थी. इस बार जब ड्राइवर ने ब्रेक मरी तो मैं अपने दोनों हाँथ को उनके पेट पर रखकर पूरी तरह उनपर लड़ गया. जिससे उनके मुंह से sssssssssssiiiiiiiiiiiiissssssssss….. की आवाज़ निकल गयी.
मैं अभी भी दीदी की गांड पर अपने लुंड का दबाव बनाकर खड़ा था. कुछ देर बाद दीदी ने पीछे मुड़कर मेरी आंको में dekha.mujhe उनकी आँखे हलकी सी सुर्ख नज़र आयी और साँस भी उब्नोर्मल हो गई थी. मैंने उनकी आंको में देखते हुवे अपनी नज़र कंधे के ऊपर से उनकी चूचियों पर जमा दी. और दीदी से कहा.
मैं- वैसे दीदी. बहुत बड़े बड़े हैं.
सविता दी- (चौकते हुवे) क्या बड़े बड़े हैं.
Main-(unki चूचियों के देखते हुवे) सड़क के गड्ढे. वैसे आपने क्या समझा दीदी.
सविता दी- मुझे क्या समझना है. सही कह रहा है तू. तभी बार बार ड्राइवर ब्रेक लगा रहा है.
मैंने क्या कहा था इसका मतलब दीदी ने अच्छी तरह समझ लिया था की मैं उनकी चूचियों की बात कर रहा हूँ. तभी तो मेरे बात बदल देने से उनके चेहरे पर एक मुस्कराहट आकर चली गयी. मैंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवा कहा
मैं- वैसे दीदी मैंने आपसे कहा था की आप मुझे संभल लोगी.
सविता दीदी- हाँ और देख मैंने तुझे संभाला हुआ है.
मैं- हाँ दीदी मेरा तो बस आप hi संभल सकती हैं
मेरा आप hi संभल सकती हैं मैंने जोर देकर कहा. ऐसा बोलने पर दीदी फिर से मेरी आंको में देखने लगी और मैं भी उनकी आंको में देखने लगा. 10 सेकंड तक हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते रहे और एक दूसरे की आंको को पढ़ने की कोसिस करते रहे. तभी ड्राइवर ने फिर से ब्रेक मेरी दीदी ने रोड छोड़ दी थी जिसके कारन ब्रेक लगने से दीदी आगे को गिरना लगी तो मैंने जल्दी से उन्हें थामना चाहा. लेकिन इस चक्कर में जल्दबाज़ी में मैंने दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा. अब हालत ये थे की मेरा लुंड पीछे से दीदी की गांड में प्रेशर बनाये हुवे था और मेरे दोनों हाँथ में दीदी की रसभरी चूचिया थी जिन्हे मैंने मध्यम प्रेशर के साथ पकड़ा था. मन तो कर रहा था की उनके कपडे को यही फाड़ दूँ और उनकी चूचियों का रा चूस लू. थोड़ी देर तो हम दोनों को कुछ समझ नहीं आया. थोड़ी देर बाद दीदी को होश आया तो उन्होंने मेरे हाँथ को अपनी चूचियों से हटाने के लिए कहा.
सविता दी- अभी अपना हाँथ हटा.
मैं- सॉरी दीदी. वो गलती से हो गया.
इतनी देर में हमारा स्टॉप आने वाला था तो हम दोनों गेट पर आ गए. लेकिन मेरा लुंड अभी भी खड़ा हुआ था. उसको कैसे छुपाऊ समझ में नहीं आ रहा था. इसने में hi बस रुक गई और मुझे और दीदी को उतरना पड़ा. जब हम दोनों निचे उतरे तो अचानक दीदी की नज़र मेरे पंत पर पद गई. लुंड अभी तक बैठा नहीं था तो उसका पूरा शाप दीदी को जज़र आने लगा. लुंड के शाप को देख कर दीदी की आँखे बड़ी हो गई. दीदी कभी मेरी आँखों में देखती तो कभी मेरे लुंड के शाप को. जब मैंने देखा की दीदी मेरे लुंड को देख रही हैं तो मैंने उनसे कहा. तो मैंने उन्हें छेड़ते हुवे कहा
मैं- क्या देख रही हो दीदी.
सविता दीदी………………. कोई जवाब नहीं.( शायद उन्होंने सुना नहीं की मैं क्या पूछ रहा हूँ.
मैं- दीदी… दीदी.
सविता दीदी- (हड़बड़ा कर). हाँ अभी क्ययया हुआ.
मैं- अरे मैंने पूछा क्या देख रही हैं लेकिन आपने कोई जवाब नहीं दिया.
सविता दी- (क्या जवाब देती की तेरे लुंड को देख रही थी. कुछ देर बाद वो बोली)
सविता दी- कुछ भी नहीं देख रही थी. चल जल्दी जो करना आये है पहले वो कर ले.
मैं- हाँ दीदी चलो (इतनी देर में लुंड में तनाव कुछ काम हो गया था.)
फिर मैं और दीदी लैपटॉप खरीदने इलेक्ट्रॉनिक की शॉप पर चले गए.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
थोड़े देर बाद दीदी भी तैयार होकर हाल में आ गई मैं तो बस उन्हें देखता hi रह गया. आज उन्होंने सलवार शट पहना हुआ था. जिसके गले के पास का कपडा एकदम झीना था. जिससे उनकी चूचियों की गहराई दिख रही थी. उन्होंने दुपट्टा भी लिया था लेकिन उस समय दुपट्टा उनके गले में था. हम दोनों नाश्ता करके मार्किट जाने के लिए निकल गए. जब हम घर से बहार आये तो मैंने दीदी से कहा.
मैं- दी लगता है आज लोग मेरी किस्मत से जलने वाले हैं
सविता दी- वॉक योन
मैं- अरे जब इतनी सुन्दर और खूबसूरत लेडी मेरे साथ होगी तो लोग तो जलेंगे hi न मुझसे.
सविता दी- ज्यादा मस्का मत मार. मैं इतनी भी सुन्दर नहीं हूँ.
मैं- वो आप मेरी नज़र से देखो की आप कितनी खूबसूरत हैं.
सविता दी- थैंक्स अभी.
फिर जब हम घर से बहार आये तो दीदी ने बाइक न कार से चलने के लिए कहा. लेकिन मैं दीदी के साथ आगे अपनी किस्मत आजमाना चाहता था इसलिए बस से जाना दिसदे किया. थोड़ी देर न नुकुर के बाद दीदी भी बस से मार्किट चलने के लिए मन गई. फिर हम पैदल hi बस स्टैंड पर आ गए. जो हमारे घर से पैदल 15 मिनट के राष्ट था. बस स्टैंड पर आकर हम बस का वेट करने लगे.
बस स्टैंड पर जितने भी मर्द थे सभी दीदी को घूर कर देख रहे थे. मैंने दी को इशारा किया की देखो मैंने सही कहा था न. तो दीदी शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी.
कुछ देर बाद बस आ गयी. बस में बहुत भीड़ थी. दीदी ने तो बस में चढ़ने से इंकार कर दिया. लेकिन मेरे बहुत कहने वह बस पर चढ़ी.
हम बस के बिच में आकर खड़े हो गए. बस स्टॉप पर बहुत से यात्री थे तो सब के बस पर चढ़ जाने के कारन बस में भीड़ और ज्यादा बढ़ गई थी. कुछ दूर बस के चलने के बाद अचानक ड्राइवर ने ब्रेक मारा. मैं दीदी के पीछे खड़ा था तो पीछे से दीदी से पूरा सात गया
लेकिन मैं जल्दी से पीछे हैट gaya.sadak पर गड्ढे बहुत थे तो ड्राइवर बार बार ब्रेक मरता था और मैं पीछे से धक्का लगने से दीदी से पीछे से पूरा सात जाता था और कुछ सेकंड बाद जगह बना कर पीछे हैट जाता था. सी पर दीदी ने मेरी तरफ देखते हुए कहा.
सविता दी- क्या कर रहा है अभी ठीक से खड़ा नहीं रह सकता क्या.
में- मैं क्या करू दीदी एक तो इतनी भीड़ है और ऊपर से ड्राइवर बार बार ब्रेक मार रहा है. आप ऐसा करो की ऊपर का हैंडल कसकर पकड़ लो. ताकि अगर अबकी बार मैं आपके ऊपर गिरु तो आप मुझे संभल सको.
सविता दी- (मुस्कुराते हुवे). मैं तुझको कैसे सम्भालूंगी. संभालना तो तुझको मुझे चाहिए.
मैं- मैं तो आपको साडी ज़िन्दगी सँभालने के लिए तैयार हूँ.
सविता दी- बड़ा आया साडी ज़िन्दगी सँभालने वाला. जब मुझे तेरी जरुरत होगी तब देखूंगी की तू मुझे संभालता है या नहीं.
मैं- देख लेना दीदी. मैं इतनी अच्छी तरह से आपको सम्भालूंगा की आप मुझे कभी भूल नहीं पाओगी.
सविता दी- वो तो समय बताएगा.
ये बाते हम लोग धीरे धीरे कर रहे थे जो हम दोनों के आलावा कोई नहीं सुन रहा था. अभी बस कुछ hi आगे बढ़ी तो ड्राइवर ने फिर से ब्रेक मार दी. इस बार मैं फिर से दीदी से पीछे से चिपक गया लेकिन इस बार मैं पीछे नहीं हटा और दीदी से चिपका रहा. अब जब जब बस में हल्का सा झटका भी लगता तो मैं दीदी से और ज्यादा चिपकता जाता. अब हम दोनों इतने चिपक गए थे की दोनों के बिच से हवा भी नहीं निकल सकती थी. दीदी से लगातार चिपकने के कारन मेरा लुंड भी कड़ा हो गया था जो दीदी के चुतरो को टच हो रहा था. दीदी को भी शायद इसका एहसास हो गया था. इसलिए उन्होंने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा
सविता दी- अभी थोड़ा पीछे हैट जा.
मैं- पीछे जगह hi नहीं है दीदी तो कहा हैट कर जाओ.
अब तक लुंड पंत में पूरा तन चूका था और बस की हिलने से लगातार दीदी के चुतरो पर झटके मार रहा था. मैं भी मौके का पूरा फायदा उठाकर अपने लुंड का प्रेशर दीदी के चूतड़ों पर बनाये हुवे था.
दीदी भी जान गयी थी की उनके चूतड़ों पर क्या चुभ रहा है इसलिए वो अपनी गांड इधर उधर कर मेरे लुंड से बचने की कोशिश कर रही थी. इस बार जब ड्राइवर ने ब्रेक मरी तो मैं अपने दोनों हाँथ को उनके पेट पर रखकर पूरी तरह उनपर लड़ गया. जिससे उनके मुंह से sssssssssssiiiiiiiiiiiiissssssssss….. की आवाज़ निकल गयी.
मैं अभी भी दीदी की गांड पर अपने लुंड का दबाव बनाकर खड़ा था. कुछ देर बाद दीदी ने पीछे मुड़कर मेरी आंको में dekha.mujhe उनकी आँखे हलकी सी सुर्ख नज़र आयी और साँस भी उब्नोर्मल हो गई थी. मैंने उनकी आंको में देखते हुवे अपनी नज़र कंधे के ऊपर से उनकी चूचियों पर जमा दी. और दीदी से कहा.
मैं- वैसे दीदी. बहुत बड़े बड़े हैं.
सविता दी- (चौकते हुवे) क्या बड़े बड़े हैं.
Main-(unki चूचियों के देखते हुवे) सड़क के गड्ढे. वैसे आपने क्या समझा दीदी.
सविता दी- मुझे क्या समझना है. सही कह रहा है तू. तभी बार बार ड्राइवर ब्रेक लगा रहा है.
मैंने क्या कहा था इसका मतलब दीदी ने अच्छी तरह समझ लिया था की मैं उनकी चूचियों की बात कर रहा हूँ. तभी तो मेरे बात बदल देने से उनके चेहरे पर एक मुस्कराहट आकर चली गयी. मैंने अपनी बात आगे बढ़ाते हुवा कहा
मैं- वैसे दीदी मैंने आपसे कहा था की आप मुझे संभल लोगी.
सविता दीदी- हाँ और देख मैंने तुझे संभाला हुआ है.
मैं- हाँ दीदी मेरा तो बस आप hi संभल सकती हैं
मेरा आप hi संभल सकती हैं मैंने जोर देकर कहा. ऐसा बोलने पर दीदी फिर से मेरी आंको में देखने लगी और मैं भी उनकी आंको में देखने लगा. 10 सेकंड तक हम दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते रहे और एक दूसरे की आंको को पढ़ने की कोसिस करते रहे. तभी ड्राइवर ने फिर से ब्रेक मेरी दीदी ने रोड छोड़ दी थी जिसके कारन ब्रेक लगने से दीदी आगे को गिरना लगी तो मैंने जल्दी से उन्हें थामना चाहा. लेकिन इस चक्कर में जल्दबाज़ी में मैंने दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और अपनी तरफ खींचा. अब हालत ये थे की मेरा लुंड पीछे से दीदी की गांड में प्रेशर बनाये हुवे था और मेरे दोनों हाँथ में दीदी की रसभरी चूचिया थी जिन्हे मैंने मध्यम प्रेशर के साथ पकड़ा था. मन तो कर रहा था की उनके कपडे को यही फाड़ दूँ और उनकी चूचियों का रा चूस लू. थोड़ी देर तो हम दोनों को कुछ समझ नहीं आया. थोड़ी देर बाद दीदी को होश आया तो उन्होंने मेरे हाँथ को अपनी चूचियों से हटाने के लिए कहा.
सविता दी- अभी अपना हाँथ हटा.
मैं- सॉरी दीदी. वो गलती से हो गया.
इतनी देर में हमारा स्टॉप आने वाला था तो हम दोनों गेट पर आ गए. लेकिन मेरा लुंड अभी भी खड़ा हुआ था. उसको कैसे छुपाऊ समझ में नहीं आ रहा था. इसने में hi बस रुक गई और मुझे और दीदी को उतरना पड़ा. जब हम दोनों निचे उतरे तो अचानक दीदी की नज़र मेरे पंत पर पद गई. लुंड अभी तक बैठा नहीं था तो उसका पूरा शाप दीदी को जज़र आने लगा. लुंड के शाप को देख कर दीदी की आँखे बड़ी हो गई. दीदी कभी मेरी आँखों में देखती तो कभी मेरे लुंड के शाप को. जब मैंने देखा की दीदी मेरे लुंड को देख रही हैं तो मैंने उनसे कहा. तो मैंने उन्हें छेड़ते हुवे कहा
मैं- क्या देख रही हो दीदी.
सविता दीदी………………. कोई जवाब नहीं.( शायद उन्होंने सुना नहीं की मैं क्या पूछ रहा हूँ.
मैं- दीदी… दीदी.
सविता दीदी- (हड़बड़ा कर). हाँ अभी क्ययया हुआ.
मैं- अरे मैंने पूछा क्या देख रही हैं लेकिन आपने कोई जवाब नहीं दिया.
सविता दी- (क्या जवाब देती की तेरे लुंड को देख रही थी. कुछ देर बाद वो बोली)
सविता दी- कुछ भी नहीं देख रही थी. चल जल्दी जो करना आये है पहले वो कर ले.
मैं- हाँ दीदी चलो (इतनी देर में लुंड में तनाव कुछ काम हो गया था.)
फिर मैं और दीदी लैपटॉप खरीदने इलेक्ट्रॉनिक की शॉप पर चले गए.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..