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- Dec 5, 2013
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अपडेट- 29
शाम को मैं सो कर उठा. अपना मोबाइल चेक किया तो मीरा वाली ईद की फ्रेंड रक्स्ट पुरे तीन दिन बाद सरिता दीदी ने एक्सेप्ट कर ली थी. लेकिन उस समय दीदी ऑनलाइन नहीं थी तो मैंने सविता दीदी के व्हाट्सप्प पर मश्ग किया थोड़ी देर बाद दीदी का रपल्य आया.
मैं- Hi दीदी.
सविता दी- ही अभी
मैं- और बताइये कैसी रही शॉपिंग.
सविता दीदी- हां बहुत बढ़िया रही.
मैं- मज़ा आया था आपको अपने भाई के साथ बहार जेने और शॉपिंग करने में.
सविता Didi-…………………………….Koi रपल्य नहीं.
मैं- (कुछ देर बाद). लगता है आपको मेरे साथ शॉपिंग करने जाना अच्छा नहीं लगा. ठीक है अगली बार से अकेले hi चली जाना.
सविता दीदी- नहीं अभी ऐसी बात नहीं है मुझे बहुत मज़ा आया तेरे साथ बहार जाने और शॉपिंग करने में. लेकिन अगली बार से बस से नहीं चलेंगे. सड़क में बहुत गद्दे हैं. तो परेशानी होती है.
मैं- हाँ दीदी मैंने भी देखा बहुत बड़े बड़े थे…. गड्ढे..
सविता दी- (हस्ते हुवे) तू बहुत कमीना है अभी.
मैं- अच्छा. लेकिन मैं तो बहुत सीधा हूँ. अपने भाई की कमीना बोल रही हो आप.
सविता दी- हाँ मुझे पता है की तू कितना सीधा है.
मैं- अच्छा ठीक है अब मैं रखता हूँ बाद में बात करेंगे.
उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ. रात में खाना खाकर मैं अपने रूम में आ गया. आज मैं थका हुआ था तो बिस्टेर पर लेट गया और थोड़ी देर में नींद आ गयी. कुछ देर बाद जब सविता दीदी छत पर आयी तो आज मैं वह नहीं था. सविता दीदी थोड़ी देर छत पर रही इस इंतज़ार में की शायद मैं औ. लेकिन मैं तो सो चुक्का था तब वो निचे जाने लगी. उनके कदमो की आहात से मेरी नींद खुल गयी. जब मैं कमरे से बाहर आया तो. वो अपने कमरे में जा रही हैं तो मैं भी वापस कमरे में आ गया और अपने मोबाइल से मीरा वाली फेसबुक ईद ओपन कर ली उस समय सरिता दीदी ऑनलाइन थी तो मैंने उन्हें मश्ग कर दिया.
(यहाँ मैं मीरा को म लिखूंगा)
म- ही
कुछ देर बाद सरिता दीदी का मश्ग रपल्य आया.
सरिता di-Hii.
म- कैसी हैं आप.
सरिता दी- मैं ठीक हूँ.
म- और आप क्या करती हैं.
सरिता दी- काईन P.Hd कर रही हूँ घर से.
म- आपकी शादी हो गई है.
सरिता दी- पहले तुम ये बताओ की तुम सच में लड़की hi हो या लड़की बैंकर बात कर रहे हो.
म- ओफ़्कौर्से मैं लड़की hi हूँ. क्यों आपको कोई शक है क्या.
सरिता दी- हाँ मुझे लग रहा है की तुम लड़के हो.
M-thik है अगर आपको लगता है की मैं लड़का हूँ तो मैं आपको अब मश्ग नहीं करुँगी लेकिन उससे पहले एक बात आपको कहना चाहती हूँ. की सब को हमेशा शक की नज़र से नहीं देखना चाहिए. ये मेरी फोटो है. जो मेरी hi है ओरिजिनल. ये आपको नेट पर नहीं मिलेगी. क्योंकि ये मैं हूँ.
मैं कानपूर के कांत में रहती हूँ. आप चाहे तो किसी से पता करवा सकती हैं. अब मैं रखती हूँ. अगर आपको भरोषा हो जाए की मैं लड़की हूँ तो आप बात करिये गए और अगर भरोषा न हो तो मत करियेगा. Bye.
इतना कह कर मैं मीरा वाली ईद से लॉगआउट हो गया. मैंने दीदी को बोलने का मौका भी नहीं दिया. मैं अब सोचने लगा की पता नहीं दीदी उस ईद पर मुझसे बात करती हैं या नहीं. अगर उस ईद पर बात नहीं करेंगी तो इनको पटना बहुत hi मुश्किल होने वाला है. मुझे इनके लिए कोई और प्लान सोचना पड़ेगा.
लगभग 15 मिनट बाद मैं अपनी ओरिजिनल ईद से लॉगिन हुआ और दीदी को मश्ग कर दिया.
मैं- Hi दीदी.
सरिता दीदी- हाँ अभी बोलो.
मैं- कैसी हैं आप
सरिता दी- मैं ठीक हूँ. तुम कैसे हो.
मैं- मैं भी ठीक हूँ दीदी. बस आज मार्किट गया था तो थोड़ी थकन हो रही है.
सरिता दी- तो फिर तुझे आराम करना चाहिए.
मैं- अरे अपनी प्यारी दीदी से बात करने के लिए तो मैं चाहे जिस हालत में राहु बात करूँगा.
सरिता दी- (हस्ते हुवे). अच्छा बड़ा आया बात करने वाला. ( फिर कुछ सोचकर) अच्छा एक बात बता अभी.
मैं- हाँ दी बोलिये.
सरिता दी- मुझे फेसबुक पर किसी लड़की ने फ्रंद्र्कस्त भेजी है. और मुझसे बात करना चाहती है लेकिन मुझे लगता है की वह लड़क है.
मैं- अगर आपको ऐसा लगता है तो मत बात करो. और वैसे भी बहुत सी फेक फेसबुक ईद होती है. तो हो सकता है की वह फेक हो. लेकिन ऐसा भी हो सकता है की वो फेक न हो. ओरिजिनल हो. (ये बात मैं दीदी का विश्वास जितने के लिए कह रहा था.)
सरिता दी- लेकिन उसने जितने कॉन्फिडेंस से बात की. अपनी फोटो भी भेजी. अपना एड्रेस भी बताया. उससे मैं कंफ्यूज हो गई हूँ.
मैं- हो सकता है दीदी वो लड़की hi हो. अगर आपको बात करनी हो तो बात कर सकती हैं. भरोषा नाम की भी कोई चीज़ होती है. बाकि आपकी मर्ज़ी
सरिता दी- चल ठीक है मैं तेरे जीजा जी से बात करने जा रही हूँ अब रखती हूँ गुड नाईट.
उसके बाद दीदी लॉगआउट हो गई. और मैं भी सो गया.
इसी तरह एक हफ्ते और बिट गए. मैंने अपनी जॉब भी शुरू कर दी थी. मेरा और दीदियो के बिच जो बात चित होने लगी थी वो चल रही थी. सविता दीदी रोज की तरह छत पर आती और मैं उनकी चूचियों और गांड को ताड़ता रहता. लेकिन उनका रिएक्शन पहले की तरह रहता. इसके आगे अभी तक बात नहीं बड़ी थी.
अब सरिता दीदी की शादी को सिर्फ 15 दिन hi रह गए थे. लेकिन अभी भी मेरी कोशिश उनको पटाने की जारी थी. और सरिता दीदी ने मीरा वाली ईद पर अभी तक कोई रपल्य नहीं किया था तो मैं परेशां था की इनको पटाने के लिए कोई और प्लान सोचना पड़ेगा. इसके लिए मैं आगे क्या करना है वो सोचने लगा.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
शाम को मैं सो कर उठा. अपना मोबाइल चेक किया तो मीरा वाली ईद की फ्रेंड रक्स्ट पुरे तीन दिन बाद सरिता दीदी ने एक्सेप्ट कर ली थी. लेकिन उस समय दीदी ऑनलाइन नहीं थी तो मैंने सविता दीदी के व्हाट्सप्प पर मश्ग किया थोड़ी देर बाद दीदी का रपल्य आया.
मैं- Hi दीदी.
सविता दी- ही अभी
मैं- और बताइये कैसी रही शॉपिंग.
सविता दीदी- हां बहुत बढ़िया रही.
मैं- मज़ा आया था आपको अपने भाई के साथ बहार जेने और शॉपिंग करने में.
सविता Didi-…………………………….Koi रपल्य नहीं.
मैं- (कुछ देर बाद). लगता है आपको मेरे साथ शॉपिंग करने जाना अच्छा नहीं लगा. ठीक है अगली बार से अकेले hi चली जाना.
सविता दीदी- नहीं अभी ऐसी बात नहीं है मुझे बहुत मज़ा आया तेरे साथ बहार जाने और शॉपिंग करने में. लेकिन अगली बार से बस से नहीं चलेंगे. सड़क में बहुत गद्दे हैं. तो परेशानी होती है.
मैं- हाँ दीदी मैंने भी देखा बहुत बड़े बड़े थे…. गड्ढे..
सविता दी- (हस्ते हुवे) तू बहुत कमीना है अभी.
मैं- अच्छा. लेकिन मैं तो बहुत सीधा हूँ. अपने भाई की कमीना बोल रही हो आप.
सविता दी- हाँ मुझे पता है की तू कितना सीधा है.
मैं- अच्छा ठीक है अब मैं रखता हूँ बाद में बात करेंगे.
उसके बाद कुछ खास नहीं हुआ. रात में खाना खाकर मैं अपने रूम में आ गया. आज मैं थका हुआ था तो बिस्टेर पर लेट गया और थोड़ी देर में नींद आ गयी. कुछ देर बाद जब सविता दीदी छत पर आयी तो आज मैं वह नहीं था. सविता दीदी थोड़ी देर छत पर रही इस इंतज़ार में की शायद मैं औ. लेकिन मैं तो सो चुक्का था तब वो निचे जाने लगी. उनके कदमो की आहात से मेरी नींद खुल गयी. जब मैं कमरे से बाहर आया तो. वो अपने कमरे में जा रही हैं तो मैं भी वापस कमरे में आ गया और अपने मोबाइल से मीरा वाली फेसबुक ईद ओपन कर ली उस समय सरिता दीदी ऑनलाइन थी तो मैंने उन्हें मश्ग कर दिया.
(यहाँ मैं मीरा को म लिखूंगा)
म- ही
कुछ देर बाद सरिता दीदी का मश्ग रपल्य आया.
सरिता di-Hii.
म- कैसी हैं आप.
सरिता दी- मैं ठीक हूँ.
म- और आप क्या करती हैं.
सरिता दी- काईन P.Hd कर रही हूँ घर से.
म- आपकी शादी हो गई है.
सरिता दी- पहले तुम ये बताओ की तुम सच में लड़की hi हो या लड़की बैंकर बात कर रहे हो.
म- ओफ़्कौर्से मैं लड़की hi हूँ. क्यों आपको कोई शक है क्या.
सरिता दी- हाँ मुझे लग रहा है की तुम लड़के हो.
M-thik है अगर आपको लगता है की मैं लड़का हूँ तो मैं आपको अब मश्ग नहीं करुँगी लेकिन उससे पहले एक बात आपको कहना चाहती हूँ. की सब को हमेशा शक की नज़र से नहीं देखना चाहिए. ये मेरी फोटो है. जो मेरी hi है ओरिजिनल. ये आपको नेट पर नहीं मिलेगी. क्योंकि ये मैं हूँ.
मैं कानपूर के कांत में रहती हूँ. आप चाहे तो किसी से पता करवा सकती हैं. अब मैं रखती हूँ. अगर आपको भरोषा हो जाए की मैं लड़की हूँ तो आप बात करिये गए और अगर भरोषा न हो तो मत करियेगा. Bye.
इतना कह कर मैं मीरा वाली ईद से लॉगआउट हो गया. मैंने दीदी को बोलने का मौका भी नहीं दिया. मैं अब सोचने लगा की पता नहीं दीदी उस ईद पर मुझसे बात करती हैं या नहीं. अगर उस ईद पर बात नहीं करेंगी तो इनको पटना बहुत hi मुश्किल होने वाला है. मुझे इनके लिए कोई और प्लान सोचना पड़ेगा.
लगभग 15 मिनट बाद मैं अपनी ओरिजिनल ईद से लॉगिन हुआ और दीदी को मश्ग कर दिया.
मैं- Hi दीदी.
सरिता दीदी- हाँ अभी बोलो.
मैं- कैसी हैं आप
सरिता दी- मैं ठीक हूँ. तुम कैसे हो.
मैं- मैं भी ठीक हूँ दीदी. बस आज मार्किट गया था तो थोड़ी थकन हो रही है.
सरिता दी- तो फिर तुझे आराम करना चाहिए.
मैं- अरे अपनी प्यारी दीदी से बात करने के लिए तो मैं चाहे जिस हालत में राहु बात करूँगा.
सरिता दी- (हस्ते हुवे). अच्छा बड़ा आया बात करने वाला. ( फिर कुछ सोचकर) अच्छा एक बात बता अभी.
मैं- हाँ दी बोलिये.
सरिता दी- मुझे फेसबुक पर किसी लड़की ने फ्रंद्र्कस्त भेजी है. और मुझसे बात करना चाहती है लेकिन मुझे लगता है की वह लड़क है.
मैं- अगर आपको ऐसा लगता है तो मत बात करो. और वैसे भी बहुत सी फेक फेसबुक ईद होती है. तो हो सकता है की वह फेक हो. लेकिन ऐसा भी हो सकता है की वो फेक न हो. ओरिजिनल हो. (ये बात मैं दीदी का विश्वास जितने के लिए कह रहा था.)
सरिता दी- लेकिन उसने जितने कॉन्फिडेंस से बात की. अपनी फोटो भी भेजी. अपना एड्रेस भी बताया. उससे मैं कंफ्यूज हो गई हूँ.
मैं- हो सकता है दीदी वो लड़की hi हो. अगर आपको बात करनी हो तो बात कर सकती हैं. भरोषा नाम की भी कोई चीज़ होती है. बाकि आपकी मर्ज़ी
सरिता दी- चल ठीक है मैं तेरे जीजा जी से बात करने जा रही हूँ अब रखती हूँ गुड नाईट.
उसके बाद दीदी लॉगआउट हो गई. और मैं भी सो गया.
इसी तरह एक हफ्ते और बिट गए. मैंने अपनी जॉब भी शुरू कर दी थी. मेरा और दीदियो के बिच जो बात चित होने लगी थी वो चल रही थी. सविता दीदी रोज की तरह छत पर आती और मैं उनकी चूचियों और गांड को ताड़ता रहता. लेकिन उनका रिएक्शन पहले की तरह रहता. इसके आगे अभी तक बात नहीं बड़ी थी.
अब सरिता दीदी की शादी को सिर्फ 15 दिन hi रह गए थे. लेकिन अभी भी मेरी कोशिश उनको पटाने की जारी थी. और सरिता दीदी ने मीरा वाली ईद पर अभी तक कोई रपल्य नहीं किया था तो मैं परेशां था की इनको पटाने के लिए कोई और प्लान सोचना पड़ेगा. इसके लिए मैं आगे क्या करना है वो सोचने लगा.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..