Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 7 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

धन्यवाद aapka.kahani पसंद करने के लिए.

आपने gif और फोटो के लिए जो सुझाव दिया है. वो बिलकुल सही है.

लेकिन पारा के बिच में फोटो या gif डालने से रीडिंग का फ्लो चला जाता है. ऐसा मुझको लगता था इसलिए मैं पैराग्राफ एन्ड होने के बाद फोटो और gif डालती हूँ.

लेकिन आप रीडर हैं. और अगर आपने ये सुझाव दिया है तो हम इस पर विचार जरूर करेंगे.

कहानी में साथ बने रहिएगा.
 
अपडेट-54

दीदी से बात करने के बाद मैंने अपने मोबाइल को साइड में रखा और उठकर बाथरूम चला गया. जब मैं वापस कमरे में आया तो मोबाइल की स्क्रीन जल रही थी. मैंने सोचा सायद सविता दीदी का मश्ग है तो मैंने तुरंत मोबाइल उठा लिया और जब लॉक खोलकर देखा तो मेरे चेहरे पैर एक मुस्कान आ गयी. ये मश्ग सरिता दीदी का था जो उन्होंने मीरा वाली ईद पर भेजा था.

जब मैंने ईद लॉगिन करके देखा तो सरिता दीदी के 3 मश्ग आये हुवे थे. ऐसा लगता था की वो मुझसे बात करने के लिए बहुत बेताब हो. मैंने भी उन्हें रपल्य कर दिया.

म- ही सेक्सी.

सरिता दी- ही कैसी हो तुम.

म- मैं ठीक हूँ. आप कैसी हैं.

सरिता दी- मैं भी ठीक hi हूँ.

म- आज मेरी याद कैसे आ गयी आपको.

सरिता दी- नाराज़ हो मुझसे तुम.

म- अरे मैं क्यों नाराज होउंगी आपसे.

सरिता दी- वो उस मैंने आपको बहुत कुछ उल्टा सीधा बोल दिया था न.

म- उन बातो को छोडो. ये बताओ की आपने मुझे मश्ग क्यों किया.

सरिता दी- क्या यार हम दोनों दोस्त हैं तो दोस्त को मश्ग नहीं कर सकते क्या.

म- लेकिन उस दिन तो मैं बेशरम थी. बद्तमीज़ थी. आज दोस्त कैसे हो गई.

सरिता दी- अरे यार उस दिन के लिए सॉरी. वो तुमने अचानक से ऐसी बात कह दी की मुझे गुस्सा आ गया इसलिए ऐसा बोल दिया. माफ़ भी कर दे न यार.

म- अच्छा चलो ठीक है माफ़ किया लेकिन फिर से अगर आपने मुझसे ऐसी बात की तो फिर मैं आपको कभी माफ़ नहीं करुँगी.

सरिता दी- ठीक है अब ऐसा नहीं होगा. मुझे आपसे कुछ पूछने है.

म- हां तो पूछिए न.

सरिता दी- मुझे समझ में नहीं आ रहा है की मैं कैसे पुछु आपसे पता नहीं आप मेरे बारे में क्या समझे.

म- अरे यार हम अचे दोस्त हैं तो जो भी पूछने है वो बिंदास होकर पूछ.

सरिता दी- वो जो स्टोरी में दिया था. वो भाई बहन के बिच. मतलब उनके बिच सेक्स का क्या वो सच है.

म- हाँ और क्या सच है तभी तो इतनी साडी कहानिया हैं भाई बहन के बिच चुदाई के ऊपर.

सरिता दी- अरे यार गन्दी बाटे तो मत करो.

म- अरे यार अब चुदाई को चुदाई hi तो बोलेंगे. और वैसे भी अब आप भी ये बिंदास होकर बोलिये. नहीं तो मैं जा रही हूँ.

सरिता दी- नहीं नहीं जाओ मत मैं बोलूंगी. (कुछ सोचकर) लेकिन एक भाई बहन के पवित्र रिश्ते को कलंकित कर कैसे दोनों छू…….. कर सकते हैं.

म- अरे पूरा बोलो की चुदाई कर सकते हैं. तो मैं आपको पहले ये बता देना चाहती हूँ की ये जो जिस्म की प्यास है ये कोई रिश्ते नाते नहीं देखती. इसको बस लुंड छूट से मतलब है फिर वो चाहे किसी का भी हो.

सरिता दी- छी. कितनी गन्दी बात करती हो तुम.

म- इन्ही गन्दी बातो में hi तो मज़ा आता है मेरी सेक्सी दोस्त.

सरिता दी- लेकिन एक भाई बहन ये सब कैसे कर लेते हैं. उन्हें शर्म नहीं आती. अरे इससे अच्छा तो बहार कोई बर्फ बना ले.

म- बहन जितना सेफ भाई के साथ छुड़वा कर रहती है उतना बॉयफ्रंड के साथ नहीं. बॉयफ्रंड के साथ चुदाई में एक तो जगह और समय की कमी हमेशा रहती यही और अगर ये मैनेज भी हो जाता है तो एक दर हमेशा लगा रहता है की कही बर्फ चुदाई की विडिओ तो नहीं बना रहा. जिससे वो बाद में लड़की को ब्लैकमेल करे या उनको बदनाम करे कितनी लड़कियों की ज़िन्दगी तो उनके बॉयफ्रेंड ने चुदाई की वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करके और बदनाम करके बर्बाद कर दी.

सरिता दी- हाँ ये बात तो सही कह रही हो तुम.

म- लेकिन अगर बहन अपने भाई से चुदवाती है तो दोनों के जिस्म की प्यास भी बुझ जाती है और ब्लैकमेलिंग का दर भी नहीं रहता. और अपनी बहन को बदनामी से भी बचाएगा क्योंकि अगर बहन की बदनामी हुई तो वो भी बदनाम होगा. इसलिए आज के समय में भाई से hi चुदाई करवाना सबसे सेफ रास्ता है. सबसे बड़ी बात जितना मज़ा और आनंद भाई से छुड़वाने में आता है उतना मज़ा और आनंद बॉयफ्रंड से छुड़वाने में नहीं आता.

सरिता दी- लेकिन अगर बहन चुदाई के बाद प्रेग्नेंट हो गई तो. तब तो मुसीबत हो जाएगी.

म- आप एकदम झल्ली हो. कोई भी भाई अपनी बहन को प्रेग्नेंट नहीं करेगा क्योंकि अगर वो प्रेग्नेंट हो गई तो बदनामी तो भाई की भी होगी न. इसीलिए भाई से hi चुदाई करना सबसे सेफ है. और सबसे बड़ी बात. जगह और टाइम की कोई बॉउंडेशन नहीं है. जब घर में कोई न हो चुदाई करवा लो. रात में उसके कमरे में जाकर चुदाई करवा लो. वो तुम्हारे कमरे में आकर तुम्हे छोड़ लो. अब तुम hi बताओ ऐसे आज़ादी बॉयफ्रंड से छुड़वाने में मिलेगी क्या. इसलिए मैं तो कहूँगी की अगर कोई बहन छुड़वाना hi चाहती है तो वो अपने बर्फ की बजाय अपने भाई से hi अपनी शील खुलवाए.

सरिता दी- हाँ बात तो आपकी सही है की भाई के साथ बदनामी का कोई दर नहीं होता.

सरिता दी- अच्छा बहुत ज्यादा जानकारी है आपको की भाई को कैसे पटाया जाता है. बात क्या है. सच सच बताना

म- अरे कुछ नहीं. बस ऐसे hi वो आप ने एक दिन मुझसे पूछा था की इतनी रात को आपके भाई को रोज क्या जरुरत पद जाती है जो आपको बुलाते हैं.

सरिता दी- हां पूछा था लेकिन तुमने बताया hi नहीं.

म- वो इसलिए की भाई मुझको रोज छोड़ने के लिए बुलाता है.

सरिता दी- (आश्चर्य से). क्या. मतलब तुम भी अपने भाई से चुदवाती हो.

म- हाँ और नहीं तो क्या दरअसल मेरा भाई hi मेरा बॉयफ्रेंड है. वो रत में hi मौका मिलता है चुदाई करने का इसलिए हर रत वो मुझको बुलाता है.

सरिता दी- हां पूछा था लेकिन तुमने बताया hi नहीं.

म- वो इसलिए की भाई मुझको रोज छोड़ने के लिए बुलाता है.

सरिता दी- (आश्चर्य से). क्या. मतलब तुम भी अपने भाई से चुदवाती हो.

म- हाँ और नहीं तो क्या दरअसल मेरा भाई hi मेरा बॉयफ्रेंड है. वो रत में hi मौका मिलता है चुदाई करने का इसलिए हर रत वो मुझको बुलाता है.

सरिता दी- अरे यार मैं भी कितनी बड़ी झल्ली हु. मुझे खुद hi समझ जाना चाहिए था की वो तुमको इतनी रात को क्यों बुलाता है.

म- अगर आप इतनी hi समझदार होती तो अब तक अपने भाई का मुसल अपनी छूट में लेकर चुदाई करवा चुकी होती और वो ज्ञान मुझे दे रही होती समझ मेरी सेक्सी फ्रेंड.

सरिता दी- चुप कर बेशरम.

म- लेकिन एक बात बताओ आज आपको भाई बहन की चुदाई में इतना इंट्रेस्ट क्यों आ रहा है.

(यहाँ मीरा और सरिता दी की बात मश्ग से हो रही है लेकिन इस चाट को ज्यादा लुस्फुल्ल बनाना के लिए मैं ऐसे लिखूंगी की जैसे दोनों फ़ोन पर बात कर रहे हैं और जब भी मीरा और सरिता दी की मश्ग से बात होगी तो पाठक गड ये फील करना की दोनों फ़ोन पर बात कर रहे हैं)

सरिता दी- (सकपका कर) वो मैं…… बस ऐसे hi पूछ लिया आपसे.

म- नहीं आप ऐसे हो तो पूछने वालो में से तो नहीं हैं जरूर कोई बात है.

सरिता दी- नहीं वो बस ऐसे hi पूछ लिया कुछ जानना था तो बस..

म- झूठ बोल रही हैं आप. मुझे ऐसा क्यों लग रहा है की आप भी अपने भाई को पटना चाहती हैं और उसके साथ छू…………

सरिता दी- (एकदम शरमाते हुवे) नहीं ऐसा कुछ नहीं है. मई तो बस ऐसे hi पूछ रही थी.

म- ठीक है आपको नहीं बताना तो फ़ोन रख दीजिये फिर. Bye.

सरिता दी- अरे यार सुनो तो. तुम यार बात बात पर नाराज़ हो जाती हो.

म- जब हम दोनों दोस्त हैं. फिर भी आप मुझसे झूठ बोलती हैं और बात छुपा रही हैं तो क्या करू फिर.

सरिता दी- बात नहीं छुपा रही हूँ यार मैं तो बस ये पूछ रही थी की अगर मैं भी….. मेरा मतलब है की……… अरे यार कैसे कहु मैं. तुम समझ जाओ न.

म- अब जब आप कुछ बोलोगी तभी तो मैं समझूंगी की आप कहना क्या चाहती हैं.

सरिता दी- अरे यार तुम न एकदम……….. मैं ये कह रही थी की क्या मैं भी अपने भाई के साथ… मतलब तुम समझ जाओ न यार मुझे शर्म आ रही है.

म-( ख़ुशी से ) क्या कहा. फिर से एक बार कहो तो मैंने ठीक से समझा नहीं.

सरिता di-(Sharma कर) मैं ये कह रही थी की क्यों न मैं भी अपने भाई को पता कर अपनी इच्छा पूरी करू.

दीदी के मुंह से ये सुनकर मैं ख़ुशी से उछाल पड़ा. मुझे भरोषा था की भाई बहन की चुदाई वाली कहानिया पढ़ने के बाद दीदी के मन में भी भाई से छुड़वाने का ख्याल जरूर आएगा. मैं बहुत खुश था और ख़ुशी की hi बात थी की एक ांचुडी, शिल्पक मॉल खुद मुझे अपनी शिल्पक छूट खुलवाने के लिए बुलाने वाली है. मैंने दीदी को रपल्य किया.

म- अरे वाह मेरी जान, मेरी छम्मक छल्लो क्या बात है. इतनी ज्यादा आग लगी है की अपने भाई से hi छुड़वाना चाहती है.

सरिता दी- देखो अब तुम मेरा मज़ाक न बनाओ. मुझे शर्म आ रही है.

म- अच्छा मुझसे शर्म आ रही है और भाई का लुंड छूट में लेने के लिए तैयार बैठी हो. हे भगवन क्या जमाना आ गया है.

सरिता दी- चल अपनी नौटंकी बंद कर और कुछ सलाह दे मुझे.

म- अरे इसमें सलाह की क्या जरुरत है. जा अपने भाई के सामने अपनी छूट खोलकर बैठ जा और बोल दो की भाई मुझे कास कास के रगड़ रगड़ के छोड़ो. तुम्हारी बहन बहुत प्यासी है.

सरिता दी- अब तू अपनी बकवास बंद करेगी या मैं जाऊ.

म- अच्छा ठीक है ठीक है. बोलो मैं क्या मदद कर सकती हूँ.

सरिता दी- क्या मैं अपने भाई को पता पाऊँगी.

म- यार कैसी बात कर रही हो. आप इतनी जबरदस्त मॉल हो. तुम्हारा भाई तो तुम्हे कपड़ो के ऊपर से भी छोड़ देगा.

सरिता दी- अरे यार यहाँ मैं सीरियस हूँ और तुम्हे मजाक सूझ रहा है.

म- अच्छा अब नहीं करती. क्यों नहीं पता पाओगी क्या कमी है आपमें.

सरिता दी- वो बात नहीं है बात ये है की मेरा भाई अभी अभी बहुत छोटा है. तो क्या ये सही रहेगा.

म- जहा तक मुझे याद है आपने बताया था की आपका भाई अभी 24-25 साल का है. और आपको ये छोटा लग रहा है. अरे एक बार तुम्हरे भाई ने तुमको हचक हचक के छोड़ दिया तो 9 महीने बाद उसके बच्चे की अम्मा बन जाओगी और कह रही हो की अभी वो छोटा hai.(ye बात हँसते हुवे कही)

सरिता दी- अरे यार फिर मज़ाक करने लगी तुम.

म- मैं मज़ाक नहीं कर रही हूँ. आप उसको छोटा समझ रही हैं. अच्छा ये बताओ क्या तुम्हारा भाई तुममे इंट्रेस्ट लेता है.

सरिता दी- अब ये मुझे कैसे पता होगा.

म- अच्छा अभी वो कहा है.

सरिता दी- अपने कमरे में है क्यों,

म- तो आपको अभी उसके कमरे में जाना होगा. क्योंकि पहले ये पता लगाना होगा की वो आपमें इंट्रेस्ट लेता है या नहीं. तभी मैं कुछ मदद कर सकती हूँ

सरिता दी- मैं कन्फर्म तो नहीं हूँ इस बारे में. लेकिन इस समय. वो सो गया होगा.

म- तुम एक बार जाओ तो सही हो सकता है वो जग रहा हो.

सरिता दी- अगर वो जग रहा होगा तो मैं उससे क्या कहूँगी की इस समय मैं उसके कमरे में क्यों आई हूँ.

M-(kuchh सोचने का नाटक करते हुवे) एक काम करिये आप उसे पानी देने के बहाने से चली जाइये. और जाते हुवे कोई बड़े गले का शट या टीशर्ट पहन कर जान. लेकिन दुपट्टा मत लेना. मैं फोटो भेज रही हूँ.



सरिता दी- लेकिन बड़े गले का hi क्यों.

म- मैं जितना कह रही हूँ पहले उतना करिये. उसके बाद लौटकर मुझे बताइये. उसके बाद आगे क्या करना है वो सोचेंगे.

सरिता दी- ठीक है ऑनलाइन hi रहना. मैं आती हूँ कुछ देर में.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-55

दीदी से बात करने के बाद मैंने अपना मोबाइल साइड पर रख दिया और एक किताब निकल कर पढ़ने लगा. कुछ देर बाद किसी के कदमो की आहात सुनाई दी . मैं समझ गया की सरिता दी hi आ रही हैं. कुछ देर बाद दरवाज़े पर नॉक हुवा और दीदी की आवाज़ आई.

सरिता दी- अभी ो अभी.

मैं- कौन है अंदर आ जाओ.

सरिता दी जब अंदर आई तो मैंने देखा की उन्होंने सलवार कमीज पहनी हुई है उनकी कमीज का गाला डीप था और उन्होंने दुपट्टा भी नहीं लिया हुवा था. मतलब मैंने जैसा कहा था दीदी वैसे hi मेरे रूम में आई थी.

म- अरे दीदी आप और इस वक़्त. कुछ काम था क्या.

सरिता दी- क्यों मैं बिना काम के तुम्हारे पास नहीं आ सकती क्या. अगर तुझे कोई पॉब्लम है तो मैं जा रही हूँ.

म- अरे मेरी प्यारी दी आप तो नाराज़ हो गई. सॉरी.

सरिता दी- वो मैं तुझे पानी देने आई थी.

और इतना कहकर वो मेरे बीएड के पास आ गई और झुककर पानी के जग को छोटी सी टेबल पर रखने लगी. उनके झुकने से उनकी चूचियों की गहराई कमीज से नजर आ रही थी.



दीदी वैसी hi झुकी हुई थोड़ी देर कड़ी रही. फिर उन्होंने अपने हाँथ से मोबाइल निचे गिरा दिया. वो मोबाइल उठाने के लिए और ज्यादा झुक गई जिससे उनकी आधी चूचिया उनके गले से बहार आने को बेताब हो गई. दीदी के इस रूप को देखकर मेरा लुंड भी ुंडेरवेरे में अंगड़ाई लेने लगा. दीदी झुक कर मोबाइल उठाते समय मेरे चेहरे की तरफ देखा तो मैं उनकी चूचियों को hi देखा रहा था. मेरी नज़ारे अपनी चूचियों पर देखा उनके चेहरे पर मुस्कान आ गई. कुछ देर अपनी चूचियों को दिखने के बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- अभी और कितना टाइम लगेगा तुम्हे. मैं कब तक ऐसे hi रुकू यही पर.

में- (उनकी चूचियों को देखते हुवे) किस बात के लिए दीदी. आपको ऐसे रुकने की जरुरत नहीं है.

सरिता दी- अरे मैं पूछ रही हूँ की तुम कितनी देर में सोने वाले हो.

मैं- अभी कहाँ दीदी अभी तो मैं एक इंट्रेस्टिंग कहानी पढ़ रहा हूँ उसको फिनिश करके hi सोऊंगा.

सरिता दी- ठीक है तब तक मैं ऐसे hi रहती हूँ.

मैं- वैसे दीदी पानी तो पहले से hi मैं लाया था और अगर आपको पिलाना hi था तो अपना दूध पिता देती.

मने ये बात दीदी की चूचियों को देकते हुवे कही थी. जिसपर दीदी ने चौकने का नाटक करते हुवे कहा.

सरिता दी- मेरा दूध. तू कहना क्या चाहता है.

मैं- अरे दी मेरा कहने का मतलब था की अगर आप दूध लेकर आती तो ज्यादा अच्छा रहता.

सरिता दी- तू कहे तो मैं अभी लेकर औ.

मैं- (उनकी चूचियों के देखते हुवे) लेन की कोई जरुरत नहीं हैं वो तो आपके पास hi हैं.

सरिता दी- तू क्या कह रहा है मेरी तो कुछ समझ में hi नहीं आ रहा है. अच्छा तू अपनी कहानी पढ़ में चली सोने. गुड नाईट.

मैं- गुड नाईट दी.

इतना कहकर दीदी जाने लगी. दरवाज़े पर पहुंचकर उन्होंने एक नज़र मेरी तरफ देखा तो मैं उनकी गांड को घूर रहा था. उनके पलटने पर मैंने उनकी चेहरे की तरफ देखा. हम दोनों की आँखे मिली. कुछ देर एक दूसरे की आँखों में देखने के बाद वो जल्दी से बहार चली गई. थोड़ी देर बाद मुझे मीरा वाली ईद पर दीदी का मश्ग आया.

सरिता दी- र ु तेरे.

म- हाँ सेक्सी दोस्त. दिखा आयी अपनी भाई को अपनी गदराई चूचिया.

सरिता दी- तुमको कैसे पता.

म- ले कर लो बात. अब आप बड़े गले की शट या t-shirt पहन कर बिना दुपट्टे के अपने भाई के पास इतनी रात में जाओगी. तो भजन करने जाओगी नहीं. वैसे हुवा क्या ये बताओ.

सरिता दी- अरे यार जब मैं पानी लेकर उसके कमरे में गई तो वो जग रहा था. मैं जब पानी रखने के लिए झुकी तो वो मेरी चूचियों को देख रहा था. फिर मैंने मोबाइल बहाने से गिरा दिया और जब उसे उठाने झुकी तो मेरी चूचिया और बहार निकल आई वह तो मेरी चूचियों को hi घूरे जार अहा था. और बोल रहा था की दीदी मुझे अपना दूध पीला दो.



म- इसका मतलब आपका भाई आपमें फुल इंटरेस्टेड है. आपका काम आसान हो गया है.

सरिता दी- तो मैं जाओ फिर.

म- कहाँ जाना है अब.

सरिता दी- अभी के पास.

म- अब क्या करने जाना है.

सरिता दी- वो आपने बोलै न की काम आसान है तो मैंने सोच रही हूँ की आज hi………….(aur शर्मा गई)

सरिता दीदी की बात सुनकर मैं चौंक गया. मैं मन में- दीदी इतनी उतावली हो रही चाय छुड़वाने के लिए की वो मेरे हलके इसरार से hi छोड़ने के तैयार हो गई. मैं उनको छोड़ भी सकता tha.lekin हो सत्ता है चुदाई के बाद उनको गिल्ट फील हो और वो अपने साथ कुछ गलत न कर दे. या फिर मेरा सामना भी न करे. ये सब मैं नहीं चाहता था. मैं चाहता था की मैं उन्हें िस्ता मज़बूर कर दू चुदाई के लिए की जब वो मुझसे चुदाई करे तो उनके मन में कोई गिल्ट फील न हो. मैं अभी इस सेतुएशन को कैसे हैंडल करना है यही सब सोच रहा था की दीदी का मश्ग आ गया.

सरिता दी- अरे कहा हो यार. क्या हुआ. कुछ जवाब दो.

म- आप एकदम झल्ली हो क्या. कभी कभी दिमाग भी लगाया करो. हो सकता है की आपके झुकने से आपकी चूचिया उसे दिख गई और वो देखने लगा. भला ऐसा कौन सा आदमी है जो इस सुन्दर नज़ारे को अपनी आँखों में कैद न करना चाहे फिर वह भाई hi क्यों न हो. हो सकता है की यह उसका आकर्षण हो. आप बहन हो उसकी. तो आपको क्या लगता है की आप जाकर उसके सामने अपनी छूट खोलकर बैठ जाओगी और वो आपको छोड़ देगा. कही ऐसा न हो की जल्दबाज़ी में आपको अपने भाई की नज़रो में हमेशा शर्मिंदा होना पड़े. और उसे ऐसा भी नहीं लग्न चाहिए की आप एक छुडासी लड़की हो. जो अपने भाई से भी छोड़ने के लिए अपनी छूट खोलकर आ गई.

सरिता दी- तो क्या मैं अभी को नहीं पता पाऊँगी.

म- मैंने ऐसा कब कहा की उसे नहीं पता पाओगी. लेकिन जल्दबाज़ी में सारा काम ख़राब हो सकता है. उसे आप धीरे धीरे सडके करो. उसके आपपास ज्यादा से ज्यादा रहो. उसके साथ अपनी नजदीकियां बढ़ाओ. उससे डबल मीनिंग बाते करो. घर में बड़े गले का कपडा पहनना शुरू कर दो और दुपट्टा लेना बंद कर दो उसके सामने और ज्यादा से ज्यादा उसको अपने शरीर का नज़ारा कराओ. फिर देखते हैं क्या होता है.

सरिता दी- लेकिन शुरुआत कैसे करू. कुछ बताओ.

म- पहले ये बताओ की उसकी दिनचर्या क्या क्या है

सरिता दी- वो सुबह उठकर जिम करता है बाकि और कुछ नहीं. हाँ लेकिन वो छत पर एक सेपरेट रूम में रहता है.

म- और कुछ ऐसी बाते हो जिससे आप दोनों ज्यादा नज़दीक आ सको.

सरिता दी- हाँ याद आया. एक दिन भाई को बोलै था शॉपिंग चलने के लिए तो उसने बोलै था की खुद गाड़ी चलना सीख लो और अपने से जाया करो.

म- तो आप अपने भाई को अपने करीब करने के लिए उससे खूब प्यार से बाते करिये. उसका कुछ काम कर दीजिए. जैसे उसके कमरे की सफाई करना. उसके कपडे दो देना. और कल से आप उसे जिम सिखने के लिए मन लीजिए. और हो सके तो गाड़ी सीखने के लिए बोल दीजिए.

सरिता दी- लेकिन उससे होगा क्या. वो जिम करा देगा और गाड़ी सीखा देगा लेकिन मेरे काम इसमें कैसे होगा.

म- अरे यार बस तुम उसके साथ पहले थोड़ा फ्री तो हो जाओ उसके बाद आपको कुछ करने की जरुरत नहीं पड़ेगी.

सरिता दी- आगे कोई प्रॉब्लम तो नहीं होगी न.

म- हाँ प्रॉब्लम तो होगी

सरिता दी- क्या प्रॉब्लम होगी.

म- अरे यही की जब आपका भाई आपको छूट में अपना लुंड दाल कर रगड़ रगड़ कर छोड़ेगा तो आप काम से काम 1 हफ्ते चल नहीं पाओगी.



सरिता दी- अरे यार तुम डराओ मत. नहीं तो मैं ये कैसे करुँगी.

म- अरे यार मैं तो मज़ाक कर रही थी.

सरिता दी- ठीक है अब रखते हैं फिर.

म- ठीक है रखिये और हाँ कल सुबह से hi भाई से छूट चुदाई के मिशन पर लग जाइये.

सरिता दी- तुम नहीं सुधरेगी. गुड नाईट.

म- गुड नाईट.

उसके बाद मैंने मोबाइल साइड में रखा और सो गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका।

आपका सुझाव सही है, लेकिन इस कहानी में अब कोई और पात्र नहीं जोड़ सकते हैं।

और जहां तक पाठकों की पसंद का सवाल है तो पाठक मेरी इस कहानी को पसंद कर रहे हैं तो सभी पाठकों का तहे दिल से धन्यवाद।

जैसा आपने कहा है कि चचेरी/चचेरे, फुफेरी/फुफेरे, ममेरी/ममेरे भाई बहनों के बारे में तो अगर आप सब पाठकगण चाहेंगे तो इस कहानी का दूसरा भाग जरूर लिखेंगे।लेकिन इस कहानी के खत्म होने के बाद।

साथ बने रहिएगा।
 
अपडेट-56

रात में देर तक जागने के कारन मैं देर से था. फ्रेस होकर निचे आया तो सभी हाल में बैठे थे. सरिता दीदी रसोई में थी. थोड़ी देर बाद सब नाश्ता करने लगे तो सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- पापा एक बात कहनी है आपसे. प्ल्ज़ नाराज़ मत होना.

पापा- अरे बीटा कहो क्या बात है.

सरिता दी- पापा वो क्या है न की मेरी शादी तो अभी 6-7 महीने होने से रही तो मैं सोच रही हूँ की तब तक मैं थोड़ा जिम में एक्सेरसीज़े hi कर लून. कही बैठे बैठे शादी तक मोती न हो जाऊ.

पापा- अरे ये तो अच्छी बात है अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए.

मैं- ये आपने बिलकुल सही सोचा दीदी. वैसे भी आप मोती हो गई ho.(unki साइन को एक नज़र देखकर). चलिए मैं आपको किसी अचे जिम में एडमिशन करवा दूंगा.

सरिता दी- तो उसके लिए बहार क्या जाउंगी. तुम्हारे कमरे में है न जिम का सामान तो मैं उसी से कर लुंगी और तू मुझे सिखाएगा.

Main(bahana मरते हुवे)- मैं कैसे. मुझे समय नहीं है. और इतनी मोती हो की आप अपनी फिटनेस के चक्कर में मेरी फिटनेस ख़राब कर देंगी.

सरिता दी- पापा आप कहिये न भी से की मुझे सिखाये.

पापा- अभी तुम्हारी दीदी ठीक कह रही है. बहार जाकर जिम करने से अच्छा है की उसे घर में तुम hi गाइड कर दो.

सरिता दी- थैंक यू पापा. एक बात और करनी थी पापा.

पापा- हाँ बोलो बीटा.

सरिता दी- वो मैं ये बोल रही थी की जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक आप मुझे फोर व्हीलर चलना सीखा दे तो अच्छा था.

पापा- देखो बीटा. मेरे पास तो समय है नहीं. तुम ऐसा करो अभी के साथ चली जाना सिखने.

मैं- अब ये भी मैं hi करू. लेकिन मुझे समय hi कहा रहेगा.

पापा- तुम उसे शाम को ले जाना गाड़ी सीखने.

मैं- ठीक है पापा जैसा आप कहे.

सरिता दी- थैंक यू पापा.

मैं- और मुझको थैंक यू कौन बोलेगा. आखिर मैं hi तो आपको सिखाऊंगा सब कुछ.

सरिता दी- जब मुझको सबकुछ सीखा डोज तो तुमको भी थैंक यू बोल दूंगी.

उसके बाद सभी ने अपना नाश्ता फिनिश किया मैं अपने कमरे में आ गया और बहार जाने के लिए तैयार होने लगा. तभी सरिता दी मेरे कमरे में आयी. उनके हाँथ में झाड़ू और पोछा था. वो मेरे कमरे की सफाई करने आयी थी. मैंने जब उनको देखा तो उनसे कहा.

मैं- क्या बात है दीदी आपकी तबियत तो ठीक है न (इतना बोलकर मैंने उनके माथे पर अपनी हथेली रख दी)

सरिता दी- हाँ मेरी तबियत को क्या होना है.

मैं- मुझे लगा शायद आपकी तबियत ख़राब है क्योंकि आज शायद आप पहली बार मेरे कमरे की सफाई करने आई हैं.

सरिता di-(narazgi के साथ) अगर तुझे मेरा आना अच्छा नहीं लगा तो मैं जा रही हूँ.

मैं- अरे मेरी प्यारी दीदी आप तो बात बात पे नाराज़ हो जाती हैं मैं तो ये कह रहा था की मैं अपने कमरे की सफाई कर दी हैं.

सरिता दी- आज के बाद तू अपने कमरे की सफाई नहीं करेगा. अब ये काम मैं करुँगी.

मैं- अरे वाह दीदी. आपमें इतना बदलाव. आखिर छककर क्या है.

सरिता di-Koi चक्कर नहीं है. वो कुछ दिन बाद मेरी शादी हो जाएगी. तो मैं तुमसे दूर हो जाउंगी. और तो मुझे भूल जाएगा मैं चाहती हूँ की जाने से पहले अपने भाई को हर ख़ुशी दूँ. इतना प्यार दूँ की वो मुझे कभी भी भूल न पाए.

मैं- इतना प्यार करती हो कुझसे आप और ये कैसी बाते कर रही हैं आप दी. आप कोई भूलने की चीज़ हो क्या जो मैं आपको भूल जाऊंगा.

सरिता दी- अच्छा. मैं कोई चीज़ हूँ क्या

मैं- अरे दीदी वही तो मैं कह रहा हूँ की क्या आप कोई चीज़ हो जो मैं आपको भूल जाऊंगा. आप तो मेरी प्यारी बहन हैं आपको मैं कभी नहीं भूल सकता.

सरिता दी- तो ठीक है. आज के बाद तुम्हारे सरे काम मैं करुँगी.

मैं- सरे काम करेंगी मेरे.

सरिता दी- हाँ तेरे सरे काम करुँगी. तेरे कपडे वगैरह सब धूल डोंगी.

इसके बाद दीदी झाड़ू लगाने लगी. उन्होंने एक लूसे और बड़े गले की t-shirt पहनी हुई थी. झुकने के कारन दीदी की जालिम चूचिया छलककर सामने आ गयी.



मैं उनकी चूचियों को देखने लगा. मैं आज बड़े ध्यान से उनकी चूचियों को देख रहा था. मैंने देखा की उनकी दोनों चूचियों पर शामे जगह पर टिल थे. जो उनकी चूचियों को और हसीं और कामुक बना रहे थे. उनकी चूचियों को देखते हुवे मेरा लुंड सर उठाने लगा. झाड़ू लगते हुवे दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मेरी नज़र अपनी चूचियों पर देख कर उनकी चेहरे पर एक हलकी मुस्कान की लकीर आकर चली गई. दीदी ने मुझे अपनी चूचियों को नज़ारा करते हुवे पूछा.



सरिता दी- बड़े बड़े हैं न अभी.

मैं- हाँ दीदी बड़े बड़े हैं. (फिर उनकी आँखों में देखकर) मगर क्या बड़े बड़े हैं.

सरिता दी- ये जो रखा हुवा है ये बड़े बड़े हैं न. वैसे क्या कहते हैं इनको.

मैं- ये डम्बल है दीदी. इसी से हाड़प्रक्टिस होती है.

सरिता दी- अच्छा मैं कल कितने बजे जिम करने के लिए औ.

मैं- पूरा दिन पड़ा है जब भी आपका मन हो आ जाइये गए. लेकिन अगर अर्ली मॉर्निंग आएँगे तो मैं आपकी थोड़ी बहुत मदद भी कर दूंगा सिखने में.

सरिता दी- ठीक है मैं कल सुबह जल्दी hi आ जोगी.

मुझसे बात करते हुवे. अपनी चूचियों को भरपूर दीदार मुझे करते हुवे दीदी ने तब तक झाड़ू लगा लिया था. उसके बाद वो बहार गई और बाल्टी में थोड़ा पानी और कपडा लेकर आयी और पोछा लगाने के लिए बैठ गयी. अब जो नज़ारा मेरी आँखों के सामने था उसे देखकर तो मेरे लैंड ने एक साथ कई झटके खाये सरिता दीदी ने पोछा लगते समय अपने एक पेअर के घुटने पर अपनी एक चुकी का भार रख दिया था. दीदी की इतना जालिम चूचियों का भार शायद उनका घुटना संभल नहीं सका इसलिए उनकी एक चुकी ब्रा समेत t-shirt से उनके गले की तरफ चली गाइट hi. दीदी कभी कभी नज़र उठाकर मेरी तरफ देख लेती थी और फिर अपने काम में लग जाती. थोड़ी देर ऐसे hi उनकी चूचियों को देखने के बाद मैंने कहा.



मैं- बहुत hi अचे हैं दीदी. एकदम तारीफ के काबिल.

सरिता दी- क्या कहा.

मैं- मैं ये बोल रहा हूँ की आपकी सफाई बहुत अच्छी है एकदम तारीफ के काबिल.

सरिता दी- हाँ मुझे हर चीज़ में साफ सफाई बहुत पसंद है. मुझे हर चीज़ चमकती हुई अच्छी लगती हैं.

मैं- हाँ दीदी वो तो दिख रहा है बहुत ज्यादा.

सरिता दी- क्या कहा तूने.

मैं- साफ़ सफाई बहुत ज्यादा दिख रही है. और आपको हो क्या गया है. आप कोई बात समझ hi नहीं पति.

सरिता दी- (हँसते हुवे). अब मैं तेरी तरह समझदार नहीं हूँ न. इसलिए जल्दी समझ में नहीं आती.

मैं- अच्छा दीदी एक बात बताओ आपकी शादी तो हो नहीं पाई तो क्या आपको जीजा जी की याद आती है. आप उनको कितना प्यार करती हैं

सरिता दी- हाँ आती है न. आखिर वो मेरे होने वाले पति हैं. और पति को प्यार तो करते हैं न.

मैं- ये तो गलत है दीदी. जो यहाँ है उसे तो आप प्यार नहीं करती और जो दूर है उसे आप प्यार करती हैं.

सरिता दी- मैं तो तुमसे भी बहुत प्यार करती हूँ. लेकिन लगता है की तुम मुझसे प्यार नहीं करते.

मैं- अब आप बिलकुल भी चिंता मत करे दीदी. मैं पागल था जो आपके प्यार को समझ नहीं पाया. लेकिन मैं अब आपको इतना प्यार करूँगा की आप जीजा जी को भूल जाएंगी.

मैं दीदी से बात भी कर रहा था. और उनकी चूचियों को भी देख रहा था. और तैयार भी हो रहा था. मैं तैयार होते हुवे अपने बालो में लगाने के लिए क्रीम नकली और जैसे hi मैं उसको लगाने लगा क्रीम मेरी उंगली से फिसलकर सीधे दीदी की गले तक निकली आधी चूचियों पर जा गिरी. जिसे दीदी ने भी देखा और मेरी तरफ देखने लगी. तो मैंने भी एक बोल्ड स्टेप लिया और झुककर उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी हथेली को दीदी की चूचियों पर रखा. दीदी भी मेरी आँखों में देख रही थी. मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी हथेली को उनकी चूचियों पर रगड़ते हुवे क्रीम उठा ली. मेरे ऐसा करने से दीदी के सरीर में एक सिहरन दौड़ गई. उनका जिस्म कांप गया. वो मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.



सरिता दी- ये क्या बदतमीज़ी थी अभी.

मैं- मैंने क्या बदतमीज़ी की दीदी. वो क्रीम गिर गई थी तो उसी को उठा रहा था.

सरिता दी- (अपनी चूचियों की तरफ इशारा करके) लेकिन यहाँ से उठाना जरुरी था क्या. तू फिर से नहीं निकल सकता था क्रीम.

मैं- आप अगर कहे तो मैं आपके लिए हमेशा क्रीम निकल सकता हूँ. लेकिन वो क्या है न दीदी की मैं आपकी साफ सुथरी चीज़ को गन्दा नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने क्रीम उठा ली. अगर आपको बुरा लगा हो तो सॉरी.

सरिता दीदी मेरी इस बात को सुनकर हंसने लगी. उनके साथ मैं भी हंसने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने उनकी चूचियों को फिर से देखते हुवे कहा.

मैं- अच्छा दीदी अब मैं जा रहा हूँ. Bye.

उसके बाद मैं घर से बहार आया और अपने काम पर चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-57

मैंने अपने काम को लगभह एक हॉर्स वही किया उसके बाद काम समेत कर घर को आ गया. घर आने के बाद मैं अपने कमरे में काम करने laga.kaam ख़तम करने के बाद मैंने जो गिफ्ट सविता दीदी के लिए ख़रीदा था वो लेकर सविता दीदी के कमरे की तरफ चल दिया.

मैंने दरवाज़े पर नॉक किया तो दीदी ने दरवाज़ा खोला और मैं कमरे के अंदर चला गया और दरवाज़ा बंद कर लगा तो सविता दी ने कहा.

सविता दी- दरवाज़ा क्यों बंद कर रहे हो.

मैं- उनकी आँखों में देखते हुवे) आपको नहीं पता क्यों बंद कर रहा हूँ.

मेरे इतना कहने के बाद दीदी कुछ नहीं बोली और चुपचाप अपने बिस्टेर पर बैठ gayi.main भी दरवाज़ा बंद कर के उनके बिस्टेर पर उनसे सत्कार बैठ गया. कुछ देर तक दीदी कुछ नहीं बोली तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या बात है दीदी. आप इतनी गुमसुम क्यों हैं.

सविता दी- नहीं ऐसा कुछ नहीं है. वो कल जो भी हुवा उसके बारे में सोच सोच कर परेशां हूँ.

Main-Kal क्या हुवा था दीदी.

सविता दी- तू कितना बड़ा कमीना है अभी. इतना सबकुछ करने के बाद पूछ रहा है की क्या हुवा.

मैं- (दीदी का हाँथ अपने हाँथ में लेकर) आपको अच्छा नहीं लगा क्या दीदी.

सविता दी- ऐसी बात नहीं है. लेकिन हम दोनों भाई बहन हैं. तो ये सब अच्छा नहीं लगता.

मैं- आप ये भूल जाओ दीदी की भाई बहन हैं. बस इतना याद रखो की आप एक औरत हैं और मैं एक मर्द. हम दोनों को इस समय एक दूसरे की जरुरत है.

फिर मैंने दीदी को उठाकर अपनी गॉड में बैठा लिया. दीदी ने इस समय t-shirt और लेग्गी पहनी हुई थी. जिसमे से उनकी पहाड़ जैसी चूचिया बहार निकली हुई थी. मैं दीदी को अपनी गॉड में बैठकर अपना चेहरा आगे बढाकर उनके गाल से अपना गाल रगड़ने लगा. और अपने हाँथ को उनके पेट पर रखकर उसे सहलाने लगा. थोड़ी देर पेट सहलाने के बाद मैंने ऊँगली से उनकी नाभि को कुरेदने लगा. ऐसा करने से दीदी मचलने लगी. मैं अब उनके गाल और गार्डन को जीभ निकल कर चाटने लगा. दीदी को भी ये सब अब पसंद आने लगा. वो भी अब मेरे गाल से अपना गाल रगड़ने लगी. फिर मैंने अपने एक हाँथ को ऊपर सरकते हुवे उनकी चूचियों पर रख दिया और एक हाँथ सरकते हुवे उनकी जांघो पर रखा और उसे सहलाने लगा.

मैंने दीदी की चूचियों को हौले हौले दबाना शुरू किया. और उनकी जांघ को सहलाते हुवे अपना हाँथ उनकी छूट पर लेग्गी के ऊपर से रख दिया. जिससे दीदी के मुंह से हलकी सी आह्ह्ह्ह निकल गयी. उन्होंने तुरंत अपने एक हाँथ को मेरे बुर के ऊपर वाले हाँथ पर रख दिया और न में गार्डन हिलाते हुवे बोली.

सविता दी- नहीं अभी हाँथ हटाओ अपना.

Main-Kyon दीदी. कबतक अपने इस कीमती खजाने को छुपा कर रखोगी. अपने इस कीमती खजाने का दर्शन अपने भाई को कराकर उसको धन्य कर दो दीदी.

सविता दी- ये खजाना तेरा नहीं है. तेरे जीजा जी का है.

मैं- अरे कौन से जीजा जी. जो आपको सुख नहीं दे प् रहे हैं. मेरी दीदी यहाँ अकेले तड़प रही हैं और वो पैसा कमाने में जुटे हैं.

सविता दी- तुमसे ऐसा किसने कहा की वो मुझे सुख नहीं दे प् रहे हैं. वो मुझको बहुत खुस रखते हैं.

मैं- मुझे पता है दीदी की वो आपको कितना कुश रख रहे हैं. वो आपके जिस्म की प्यास नहीं बुझा प् रहे हैं. आपके जिस्म की प्यास आपकी आँखों में साफ दिखती हैं.

सविता दी- तू कब से आँखे पड़ने लगा. बड़ा आया आखो में प्यास देखने वाला.

मैं- अरे दीदी आप अपने आप को मत तड़पाओ. मैं आपको वो सरे सुख दूंगा जो जीजा जी आपको नहीं दे प् रहे हैं.

इन सब बातो के दौरान मैं अपने एक हाँथ से लगातार दीदी की चूचियों को दबा रहा था. और छूट वालो हाँथ से उनके छूट रब करने की कोसिस कर रहा था. दीदी ने मेरा हाँथ अपनी छूट के ऊपर कसकर पकड़ा था. मैं जोर लगाकर उनकी छूट रब कर रहा था लिकेन ठीक से रब नहीं कर प् रहा था फिर मैंने उस हाँथ को ऐसे hi रहने दिया और. एक हाँथ से दीदी की चूचिया जोर जोर से दबाने लगा और दीदी के कण को मुंह में लेकर चूसने लगा. जिससे दीदी मदहोश होने लगी. मैं लगातार 2 मिनट तक दीदी को चूचियों को जोर लगाकर मसलता रहा और उनकी कण कंधे को कभी चूमता तो कभी बाईट करता तो कभी चाट लेता. मेरे ऐसा करने पर दीदी के हाँथ की पकड़ मेरे निचे वाले हाँथ पर ढीली पद गई तो मैंने उनकी बुर को मुठी में जकड कर मसलने लगा जिससे दीदी के मुंह से चीख निकल गई.



सविता दी- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह oooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii. हाँथ हटा वह से.

मैं- क्यों दीदी अच्छा नहीं लग रहा है क्या.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने एक नज़र मेरी आँखों में देखा और फिर अपनी गार्डन सीधी कर ली. अब मैं लगातार एक हाँथ से उनकी चुकी को मसलता और एक हाँथ से उनकी बुर को मसलता. मेरे इस लगातार हमले से दीदी की छूट पनिया गई. फिर मैंने दीदी को अपनी गॉड से उठाकर खड़ा कर दिया और ुकि t-shirt को पकड़कर ऊपर उठाने लगा. थोड़ी na-nukur करने के बाद दीदी ने अपने हाँथ ऊपर कर लिए. तो मैंने t-shirt निकल कर बिस्टेर फेंक दिया.

t-shirt उतरने के बाद मैंने फिर से दीदी की दोनों चूचियों को अपने हाथ में लेकर जोर लगा कर मसल दिया. दीदी की मुंह से आनंद मिश्रित चीख निकल गई.



सविता दी- AAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaarrrrr गएआईई रररररररीीीी.

मैं- अरे दीदी मैं ऐसे कैसे आपको मरने दूंगा. अभी तो मुझे आपको छोड़ना है. बिना चोदे मरने नहीं दूंगा.

सरिता दी- (मेरी आँखों में देखते हुवे). उसके बाद चाहे मैं मर hi जाओ.

मैं- अरे नहीं दीदी मुझे तो आपको साडी ज़िन्दगी छोड़ना हैं तो मैं आपको ऐसे मरने थोड़ी दूंगा.

फिर मैंने अपना मुंह दीदी के क्लीवेज पर रखकर चाटने लगा. और उनकी चूचियों को दबाता रहा. दीदी मस्ती में आहे भर रही थी. उनकी सांसे भरी होने लगी थी. फिर मैं अपना होंठो से दीदी के क्लीवेज को चाहते हुवे ऊपर की तरफ बढ़ने लगा और उनकी गार्डन पर आकर रुक गया गार्डन को चैहटन लगा. साथ साथ अपने दांतो से हल्का हल्का काटने भी लगा. जिससे दीदी को बहुत मज़ा आ रहा था. दीदी एकदम मदहोस हो गई उन्होंने अपने हाँथ से मेरे सर को अपनी तरफ खींचना सुरु कर दिया. फिर मैंने एक हाँथ उठाकर उनकी छूट पर रख दिया. मैंने महसूस किया की उनकी छूट की जगह की लेग्गी गीली हो गई थाई. मैं उनकी छूट को सहलाने लगा और एक हाँथ से उनकी चूचियों को दबाने लगा.

कुछ देर छूट सहलाने और चूचिया दबाने के बाद मैंने अपने होंठ को दीदी के गार्डन से उठाकर उनकी एक चुकी को मुंह में भर लिया( जहा से चुकी के उभर शुरू होते हैं). एक हाँथ से एक चुकी को पकड़ लिया और उनकी छूट को मुट्ठी में भर लिया. और एक साथ हमला कर दिया. मैंने पहले उनकी चुकी को जोर से दांत काट लिया एक चुकी को डैम लगाकर मसल दिया और छूट को मुट्ठी में भरकर दबा दिया. मेरे इस तीन तरफ़ा हमले से दीदी की हालत बहुत ख़राब हो गयी और उनके मुंह से एक मादक सिसकारी निकल गई.



सविता दी- hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. AAAAAAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh.OOOOOOOOoooooohhhhhhhhhhhhh मम्मूउऊउउउम्म्मम्म्म्मिययी ममममममआयरररररर गाआआआई mainnnnnnnnnnnn. कोइइइइइइ बाआआअच्छाआआआआ ममुज्जज्जहीीी. ह्ह्ह्हीईई अभी dddddddhiiiiiiireeeeeeeeee मीटीएडीईई भाआआआईईई dhiiiiiiiiiiireeee.

मैं- क्या बात है दीदी बढ़ी छुडासी होती जा रही हो.

सविता di(banavati गुस्से के साथ)- ये सब तेरे कारन hi हुवा है. तू मेरे साथ ऐसी हरकत कर रहा है और मुझको छहःछहूऊऊऊ……. बोल रहा है.

मैं- मैं क्या बोल रहा हूँ. पूरा बताओ तो.

सविता दी- मुझे छुडासी बोल रहा है. मैं बहन हूँ तेरी. और इतनी जोर से दांत गदा दिया. बहन के साथ कोई एशिया करता है क्या.

मैं- आप बहन हो मेरी इसलिए अभी अपनी चूचियों को मसला hi है. नहीं तो नताशा की चूचिया तो मैं मार मार कर लाल कर देता था. और आपकी चूचियों पर मैंने अपनी मोहर लगा दी है. ताकि जब भी आप इसे देखो तो आप को ये याद रहे की अब आप अपने भाई की गिर्ल्फ्रेंड बन गई हो. उसकी मॉल बन गई हो.

सविता दी- चाल हैट बेशरम, लगता है तू मुझे बर्बाद करके hi मानेगा.

मैं- नहीं दीदी. मैं आपको बर्बाद नहीं आबाद करना चाहता हूँ. बर्बाद तो आपको जीजा जी ने किया है. मेरी इतनी मस्त गदराई हुई और छुडासी दीदी को वो छोड़ते hi नहीं. इसलिए मैं अब जीजा जी की जगह लेकर आपकी इस गदराई जवानी को छोडूंगा.

सविता दी- तू कितना गन्दा बोलता है. थोड़ी अच्छी लैंग्वेज का उसे नहीं कर सकता है क्या.

मैं- अरे दीदी ये ऐसा खेल है जिसमे जितना गन्दा गन्दा बोलोगे उतना ज्यादा मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैं फिर से दीदी की छूट और चुकी को दबाने लगा और अपना होंठ उनकी होंठो पर रखकर उन्हें किश करने लगा. थोड़ी देर बाद किश करते हुवे मैंने अपना हाँथ उनकी ब्रा में दाल दिया और नंगी चुकी पर हाँथ फेरने लगा. फिर मैंने अपने हाँथ को उनकी छूट से हटाया और उनकी लेग्गी के अंदर डालने लगा. ऐसा करने से दीदी कसमसाने लगी. थोड़ी कोशिश करने के बाद मेरे हाँथ उनकी लेग्गी में चला गया.

लेग्गी में हाँथ डालकर मैंने उनकी छूट को पंतय के ऊपर से मुठी में भर लिया और तेज़ी से दबाकर छोड़ दिया जिससे दीदी का शरीर हिल गया. मैं उनको किश कर रहा था इसलिए उनकी सिसकी मेरे मुंह में hi डाब बाई लेकिन ggggggggggggguuuuuuuuuu ggggggggggguuuuuuuuuuu की आवाज़ बहार आई.



मैं एक हाँथ से उनकी छूट को पंतय के ऊपर से मसल रहा था और एक हाँथ से उनकी चुकी को जोर और से दबा रहा था. दीदी एकदम माधोसी के आलम में मेरा साथ होंठ चूसने में देने लगी. जब मैंने देखा की दीदी एकदम मदहोश हो गई हैं तो मैंने दीदी का एक हाँथ पकड़ा और अपने लोअर पर रख दिया. अब तक मेरा लुंड पूरा खड़ा हो चुक्का था और लोअर पर हाँथ पड़ते हो लुंड ने लगातार कई झटके मरे. जिससे दीदी ने अपने हाँथ वापस खींच लिए.

मैं एक हाँथ से उनकी छूट को पंतय के ऊपर से मसल रहा था और एक हाँथ से उनकी चुकी को जोर और से दबा रहा था. दीदी एकदम माधोसी के आलम में मेरा साथ होंठ चूसने में देने लगी. जब मैंने देखा की दीदी एकदम मदहोश हो गई हैं तो मैंने दीदी का एक हाँथ पकड़ा और अपने लोअर पर रख दिया. अब तक मेरा लुंड पूरा खड़ा हो चुक्का था और लोअर पर हाँथ पड़ते हो लुंड ने लगातार कई झटके मरे. जिससे दीदी ने अपने हाँथ वापस खींच लिए.

फिर मैं दीदी की छूट को कुरेदने लगा. उनकी छूट के ऊपर हाँथ रगड़कर अपना हाँथ उनकी छूट से निकल कर उनकी गद्देदार गांड पर रख दिया और उनकी गांड को दबाने लगा. कुछ देर गांड दबाने के बाद मैंने मैंने अपनी मुठी में उनकी गांड को थमा और दबा दिया. एक हाँथ के अंगूठे और उंगली से उनकी चुकी की घुंडी को पकड़ा और मसल दिया और अपना मुंह उनके होंठो से उठाकर उनके गाल को मुंह में भर लिया और दांतो से दबा दिया. मैंने ये तीनो काम एकसाथ किये. जिससे दीदी के मुंह से जोरदार मादक सिसकारी निकल गई.

सविता दी- AAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mammyyyyyyyyyy hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyy बाआआअच्छह्ह्हह्हह्हआआआओ मममुझेई. हहहहहहहहहाआईईईई ाबबबबबबभीइइइइइइइ काहामीईनेई. ममममममममीएटीएडीइइइइइइइ जाहाआनंनं लललललेगा kkkkkkkkkkkyaaaa. ड़ड़ड़ड़ड़डीईईडीए सी नाही ड्डड्डड्डड्डाआबाएआ साआआक्ताआ क्याआआआ.

इतना बोलकर वह मुझे धक्का देकर दूर कड़ी हो गई.

मैं- अरे दीदी जो मज़ा जोर से दबाने में है वो मज़ा धीरे से दबाने में कहा. और क्या आपको मज़ा नहीं आ रहा है क्या.

इतना कहकर मैंने आगे बढ़कर फिर से दीदी को बहो में भर लिया और उनकी हाँथ पकड़कर अपने लुंड पर रख दिया. दीदी ने हाँथ हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने उनके हाँथ को मजबूती से पकड़कर अपने लुंड पर लोअर के ऊपर से फिरने लगा.



मैंने एक हंट उनकी चुकी पर रखा और अपने मुंह को उनके क्लीवेज के आसपास रखकर जीब फिरने लगा. कुछ देर दीदी के हाँथ को अपने हाँथ से अपने लुंड पर फिरने के बाद मैंने अपना हाँथ उनके हंट से हटा लिया और उनकी गांड पर रख दिया. कुछ देर उनकी गांड को सहलाता रहा. उसके बाद उनकी गांड को जोर से दबाया. उनकी चुकी को मसल दिया और उनकी क्लीवेज के पास दन्त से काट लिया. जिससे दीदी जोर से सीसकरते हुवे चिल्ला उठी.

सविता दी- AAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mammyyyyyyyyyy hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyy बाआआअच्छह्ह्हह्हह्हआआआओ मममुझेई. हहहहहहहहहाआईईईई ाबबबबबबभीइइइइइइइ काहामीईनेई. ममममममममीएटीएडीइइइइइइइ जाहाआनंनं लललललेगा kkkkkkkkkkkyaaaa. ड़ड़ड़ड़ड़डीईईडीए सी नाही ड्डड्डड्डड्डाआबाएआ साआआक्ताआ क्याआआआ Kutttttttttttteeeeeeeeeeee काआआअआमिनीई.

और इतना बोलकर दीदी ने मेरे लुंड को जोर से दबा दिया. जिससे मैं चिल्ला उठा और मैंने दीदी से कहा.

मैं- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh अरे साली लुंड उखाड़ देगी क्या मेरा.

इतना बोलकर मैं दीदी की तरफ देखने लगा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-58

जब दीदी ने मेरे लुंड को तेज़ी से दबाया तो मैंने चिल्लाकर कहा.

मैं- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh अरे साली लुंड को उखाड़ देगी क्या….

सरिता di-(Hanste हुवे) दर्द हुवा क्या अभी. मज़ा नहीं आया क्या.

मैं- इतनी जोर से दबती हो और पूछती हो की मज़ा नहीं आया क्या.

सविता दी- तू भी तो इतनी जोर से दबाता है तो मुझे मज़ा कैसे आएगा. बहुत दर्द देता है तू.

मैं- क्यों झूट बोलती हो दीदी अगर मज़ा नहीं आता आपको तो आपकी छूट पानी नहीं छोड़ती. ये देखो आपने मज़ा ले ले कर इतना पानी अपनी छूट से गिराया है की आपकी लेग्गी गीली हो गई है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने शर्म से अपना चेहरा निचे कर लिया और हल्का हल्का शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी. फिर मैंने अपना लाया हुवा गिफ्ट दीदी को देते हुवे कहा.

मैं- आपको याद है दीदी की मैं जब आपके साथ बाजार गया था तो एक गिफ्ट ख़रीदा था अपनी गिर्ल्फ्रेंड के लिए. और आपको बताया था की जब मैं उसे पता लूंगा तो मैं उसे ये गिफ्ट दूंगा. तो मैं ये गिफ्ट आपको दे रहा हूँ. क्योंकि मैंने ये गिफ्ट आपके लिए hi लिया था. अब आप इसको पहन कर मेरे पास आइयेगा.

सविता दी- (नखरा दिखते हुवे) मैं नहीं लुंगी ये गिफ्ट और मैं क्यों पहनूंगी इसे.

मैं- अरे दीदी आप इसको इसलिए पहनेगी क्यों की आपके भाई ने आपको ये गिफ्ट किया है.

सविता दी- अच्छा इतना कॉन्फिडेंस.

मैं- और नहीं तो क्या. मैं जनता हूँ अपनी दीदी को. मेरी दीदी इस समय बहुत गरम हो गई है. और मैं चाहता हूँ की आप अपनी गरम जवानी को इस कपडे में कैद करके रात में मेरे पास आये. ताकि मैं आपके इस गदरायी और छुडासी जवानी को रगड़ रगड़ अपने लुंड से छोड़ू और आपके इस गरम जवानी को ठंडा करू.

सविता दी- (शर्मा कर). कितनी गन्दी गन्दी बाते बोलता है तू अभी वो भी अपनी बहन के सामने.

मैं- इसमें गन्दा क्या है दी. जब बहन इतनी गदरायी हुई मस्त और चुड़क्कड़ माल हो तो गन्दी गन्दी बाते करनी पड़ती हैं.

सविता दी- (थोड़ा नाराज़गी के साथ) मैं कोई चुड़क्कड़ माल नहीं हूँ समझे.

Main-aachha ठीक है. गलती हो गयी मुझसे जो आपको चुड़क्कड़ मॉल बोल दिया. आप तो मेरी हॉट एंड सेक्सी मॉल हो न दीदी.

सविता di-(smile के साथ) अपनी बहन को सेक्सी बोल रहा है.

मैं- वो तो आप हो hi. दम्म सेक्सी. अच्छा अब मैं जा रहा हूँ. आप रत में ये कपडे पहनकर ऊपर आइयेगा. इसके निचे कुछ मत पहनना.

सविता दी- मैं नहीं आउंगी ऊपर.

मैं- मैं जनता हूँ दीदी की आप अपने भाई को निराश नहीं करोगी.

सविता दी- मैं नहीं आउंगी

मैं- देहेंगे.

सविता दी- देख लेना.

उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और सो गया.

शाम को मैं उठा और हॉल में आकर पापा लोगो के साथ बातचीत करने लगा और t.v. देखने लगा. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी हाल में आई और मुझसे बोली.

सरिता दी- तो चले अभी.

मैं- कहा चलना है वो भी इस समय

सरिता दी- अरे गाड़ी चलना सीखने के लिए. और कहा.

मैं- (मेरे मन में लड्डू फुट रहे थे लेकिन मैंने बहाना बनाया) मैं नहीं जाऊँगा सीखने.

सरिता दी- देखिये न पापा. ये मन कर रहा है.

पापा- अभी दीदी की बात माननी चाहिए. चलो जाओ एक अचे भाई की तरह रोज इसे सिखाओ.

मैं- ठीक है पापा. (दीदी को जीभ दिखाकर) चलो रानी साहिबा.

मेरी बात सुनकर सब हंस पड़े. मैं और सरिता दी बहार आये तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- तो दीदी ये बताओ पहले छोटे की सवारी करना चाहोगी या बड़े की.

सरिता दी- मतलब.

मैं- मतलब ये की पहले बाइक चलना सिखोगी या कार चलना.

सरिता दी- पहले कार चलना. क्योंकि उसमे से मैं गिरूँगी नहीं.

मैं- अच्छा ठीक है चलो फिर.

फिर सरिता दीदी और मैं कार में बैठकर एक मैदान की तरफ निकल गए. वो मैदान ज्यादा दूर नहीं था लेकिन उधर इक्का दुक्का लोग hi आते जाते थे लेकिन खतरे जैसी कोई बात नहीं थी उधर . जब हम मैदान में पहुंचे तो दीदी ने अपना दुपट्टा उतर कर कार की पिछली शीत पर फेक दिया. मैं तो बस दीदी को देखता hi रह गया. क्या माल बैंकर आई थी दीदी. चूँकि उन्होंने शॉल को दुपट्टे के रूप में उसे किया था तो घर किसी को पता नहीं चला की दीदी किस तरह अपने भाई के साथ कार सिखने जा रही हैं. लेकिन दुपट्टा हटाकर दीदी ने अपने हाहाकारी जिस्म को अपने भाई के सामने परोक्ष दिया.



मैं तो बस एकटक उन्हें hi देखता जा रहा था. दीदी ने एक एकदम फिटिंग की t-shirt वो भी डीप नैक पहनी हुई थी. उनकी हाहाकारी चूचिया t-shirt फाड़कर बहार आने को मचल रही थी. क्लीवेज से उनकी चूचियों की गहराई खूब नजर आ रही थी. 2 मिनट तक मुझे अपनी चूचियों का अचे से दीदार करवाने के बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- क्या देख रहा है अभी इतने ध्यान से.

मैं- पूछो मत दीदी. आप इतनी ज्यादा खूबसूरत हैं. मुझे तो पता hi नहीं था. यू अरे सो सो सो बेऔतीफुल्ल.

सरिता दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई. उनके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ गई. उन्होंने मुझसे कहा.

सरिता दी- मैं तो बचपन से hi खूबसूरत हूँ. तुमने आप तक देखा hi नहीं था.

मैं- कैसे देखता दी. आप ने कभी अपनी खूबसूरती मुझे दिखाई hi नहीं थी.

सरिता दी- आज से तो मैं शाम को तेरे साथ hi रहूंगी. तो तू रोज मेरी खूबसूरती देखना.

मैं- केवल शाम को hi मुझे अपनी ख़ूबसूरती दिखाएंगी. दिन में नहीं दिखाएंगी.

सरिता दी- नहीं मेरे प्यारे भाई. मैं तो तुझे हमेशा अपनी खूबसूरती दिखाउंगी.

मैं- थैंक्यू दीदी. मुझे अपनी खूबसूरती दिखने के लिए.

इसके बाद मैंने दीदी को एक हॉर्स तक गाड़ी सिखाता रहा. चूँकि दीदी को इसके पहले भी मैंने 15 दिन गाड़ी सिखाई थी. फिर किसी कारणवस दीदी ने मन कर दिया सिखने से. इसलिए मुझे आज दीदी को समझने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. सबकुछ बताने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- अब आप ड्राइविंग शीट पर आइये और स्टेरिंग सम्भालिये मैं उस शीट पर आता हूँ.

सरिता दी- अरे पहले hi दिन मुझे वह बैठा रहे हो. आज रहने दो कल से बैठूंगी.

मैं- नहीं आप आइये यहाँ. और चलाइये.

उसके बाद दीदी उतर कर ड्राइविंग शीट पर आ गई और मैं बगल वाली शीट पर बैठ गया. फिर दीदी ने गाड़ी आगे बधाई. गाड़ी थोड़ा आगे जाने के बाद दीदी ने एक्सेलेटर ज्यादा दबा दिया. जिसके करना गाड़ी झटके से तेजी से आगे बढ़ने लगी ये देखकर दीदी ने जल्दी से ब्रेक मार दिया. जिसके कारन गाड़ी एकदम से रुक गई. जिससे दीदी सीधा स्टेरिंग पर झुक gai.aur मैं भी आगे की तरफ झुक gaya(dono ने शीट बेल्ट लगाई हुई थी) मैंने दीदी से कहा.

मैं- अरे दीदी इस तरह चलाएंगी तो कही लड़ भीड़ जाएंगी.

सरिता दी- मैंने कहा था की मैं कल चलाऊंगी लेकिन तुमने ज़िद की और अब देखो

मैं- कोई बात नहीं . चलो मैं आपकी हेल्प करता हूँ.

उसके बाद मैं ुकि शीट की तरफ खिसक गया और ड्राइविंग शीट पर अपने चुतर टीकाकार दीदी से सत्कार बैठ गया. जिसके कारन उनकी चूचिया बहुत नज़दीक से मेरी आँखों के सामने थी. मैं उनकी चूचियों को देखने लगा. जब मैं काफी देर उनकी चूचिया देखता रहा तो दीदी न कहा.

सरिता दी- अभी. तेरा ध्यान कहा है. अब ख्वाबो की दुनिया से बहार आ और मुझको कार चलना सीखा.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनके चेहरे की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. फिर मैंने उनके एक्सेलेटर वाले पेअर पर अपने एक पेअर रख लिए. और एक पेअर बढाकर उन्होंने जो पर क्लुछ पर रख था उस पेअर पर रख दिया. मेरे पेअर को अपने पेअर पर महसूस करते hi दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने भी उनकी आँखों में देखा और उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी नज़र उनकी चूचियों पर टिका दी.

फिर मैंने अपना एक हाँथ उनके गियर वाले हाँथ पर रखा और एक हाँथ से हलके से स्टेरिंग को पकड़ लिया. जिससे मेरे कोहनी दीदी की चूचियों पर लग गई मैं लगातार दीदी की चूचियों को देख रहा था और दीदी मुझे. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अगर देख लिया हो तो गाड़ी चलाये.

मैं- अभी नहीं देखा दीदी. चलो गाड़ी चलाइये.

सरिता दीदी- ठीक है और कल देख लेना.

उसके बाद दीदी ने गाड़ी आगे बधाई. मैं अपने पेअर से क्लुछ और एक्सीलेटर को दीदी के पेअर के ऊपर से संभल रहा था और गियर वाले हाँथ को दीदी के हाँथ पर दबा रहा था. जो हाँथ स्टेरिंग पर था उससे स्टेरिंग को मोड़ने पर मैं दीदी की चूचियों पर अपनी कोहनियो का दबाव जानबूझकर देता था. थोड़ी देर इसीतरह दीदी को हेल्प करने के बाद मैंने अपना पेअर एक्सीलेटर से हटा लिया.

एक्सीलेटर से अपना पेअर हटा लेने के कुछ देर बाद दीदी ने फिर से एक्सीलेटर बढ़ा दिया. उसके बाद ब्रेक मार दी जिससे कार तुरंत रुक गई. झटके से रुकने के करना दीदी का गियर वाला हाँथ फिसलकर मेरे लुंड पर आ गया मैंने भी इस मौके का फायदा उठाकर अपनी कोहनी को जोर से दीदी की चूचियों पर दबा दिया. दीदी के मुंह से एक चीख निकल गई…



सरिता दी- AAAAAAAaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मी.

आज का मेरा काम पूरा हो गया था. तो मैंने दीदी से घर चलने के लिए कहा और हम दोनों घर वापस आ गए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
बात यहां बुरा लगने की नहीं है।

आपको कहानी पसंद नहीं आ रही है। उसके बारे में लिखिए कि आपको कहानी पसंद नहीं आ रही है।

लिखने वाला उसपर विचार करेगा।

आपके कोई सुझाव हो तो आप अपने सुझाव दीजिए।

लिखने वाला उसपर विचार करेगा।

लेकिन इस site पर आकर यहां कहानियों में हकीकत तलाश रहे हैं।

दरअसल आप यहां कहानी पढ़ने नहीं आते।

आपकी हर टिप्पणी चाहे किसी भी कहानी पर हो।

ऐसी हो होती है।

आप लिखने वाले का मनोबल बढ़ाने के बजाय उसका मनोबल गिराते हैं।

अगर आपको हमारी कहानी पसंद नहीं आ रही है तो मत पढ़िए।
 
अपडेट- 59

घर आने के बाद थोड़ी देर बाद सबने खाना खाया. खाना खा कर मैं हाल में hi कुछ देर बैठा रहा. तभी सरिता दीदी मेरे पास आई और बोली.

सरिता दी- तू अभी तक यही बैठा है. सोना नहीं है क्या.

मैं- मुझे दूध पीना है आज.

सरिता दी- तू रुक मैं लती हूँ.

मैं- मैं ऊपर जा रहा हूँ. वही पर ले आइये.

इतना कहकर मैं अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद जब सरिता दीदी दूध ले कर आई थो उन्होंने कपडे बदल लिए थे. इस समय उन्होंने बहुत hi सेक्सी ड्रेस पहनी हुई थी उन्होंने दुपट्टा भी नहीं लिया था. जिसका क्लीवेज बड़ा था. दीदी मेरे पास आकर मुझे झुक ार दूध देने लगी. उनके झुकने के कारन उनकी चूचिया अंदर तक मुझे दिखने लगी. मैं उनकी चूचियों को देखने लगा. थोड़ी देर तक अपनी चूचियों को दिखने के बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- दिखने में अचे हैं न.

Main-(unki चूचियों को देखते हुवे). बहुत अचे हैं दी.

सरिता दी- और मीठे भी बहुत हैं.

मैं- अब मीता हैं या नहीं. ये मुझे कैसे पता. जब आप पिलाओगी तभी तो पता चलेगा.

सरिता di-(Abhi भी झुकी हुई मुझे अपनी चूचिया दिखते हुवे) तो पि ले रोका किसने है. कब से हाँथ में गिलास लिए बैठा है.

मैं- लेकिन ये तो ताज़ा दूध नहीं है.

सरिता दी- अब ताज़ा दूध कहा से लौ तेरे लिए.

मैं- (उनकी चूचियों को देखकर उनकी आँखों में देखते हुवे) वो तो आपके पास hi है. आज तो मैं ये पि ले रहा हूँ लेकिन कल से मुझे ताज़ा और एकदम खालिस दूध चाहिए.

दीदी की चूचियों को देखकर मेरा लुंड भी लोअर में खड़ा हो गया था. मैंने दूध पि कर गिलास दीदी को न देखर अपने पैरो के पास फर्श पर रख दिया. दीदी मेरी आँखों में देखते हुवे और निचे झुककर गिलास उठाने लगी. झुकने के कारन उनकी चूचिया और भी अंदर तक दिखने लगी.



मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे चूचियों को देखने लगा. मेरा लैंड दीदी की चूचियों को देखकर एकदम टैंकर खड़ा हो गया. जिसका तम्बू लोअर के ऊपर से नजर आने लगा. दीदी ने जब गिलास उठाने के लिए अपनी नज़र निचे की तो उनकी नज़र सीधे मेरे लोअर के तम्बू पर पड़ी. तो वो झुकी झुकी वही पर रुक गई.

मेरा लुंड बिच बिच में एक दो झटके भी मार रहा था.



फिर दीदी ने नज़र उठाकर मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी चूचिया देखता पाकर वो फिर से मेरे लुंड को देखने लगी. मेरे लुंड और दीदी के मुंह के बिच बस 1 फिट की दुरी थी. लुंड को देखकर दीदी की साँस भी तेज़ चलने लगी. थोड़ी देर चूचियों को देकने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी अब सीधी हो जाओ कब तक ऐसे झुकी रहोगी. आपकी कमर दर्द करने लगेगी. आगे चलकर आपको ऐसे कई बार झुकना पड़ेगा.

मेरी बात सुनकर दीदी झटके में कड़ी हो गई और मुझसे कहा.

सरिता दीदी- कई बार झुकना पड़ेगा. तेरा मतलब क्या है.

मैं- अरे दीदी अब मेरा सारा काम करने की जिम्मे दरी आप ने ले ली है. तो सब काम बैठ कर तो कर नहीं सकती आप. मेरा कुछ काम करने के लिए आपको झुकना पड़ेगा. यही बोल रहा था मैं.

सरिता दी- हाँ तू सही कह रहा है. अच्छा अब मैं चलती हूँ. गुड नाईट.

इतना बोलकर सरिता दीदी. निचे चली गई 10 मिनट बाद मीरा वाली ईद पर उन्होंने मश्ग किया.

सरिता दी- ही.

M-Hii कैसी हो.

सरिता दी- मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो.

म- मैं भी ठीक हूँ. और बताओ क्या प्रोग्रेस है.

सरिता di-(khushi से) हाँ वही बताने के लिए तो आपसे बात कर रही हूँ.

म- अरे वाह बड़ी खुश हो आज. कही तुम्हारे भाई ने तुम्हे पटक कर पेल तो नहीं दिया.

सरिता दी- अरे यार अपनी बकबक बाद में कर लेना पहले पूरी बात तो सु लो.

म- अच्छा बताओ फिर.

सरिता दी- तुम्हे पता है अभी तो मुझपर फुल इंटरेस्टेड है.

म- अच्छा पूरी बात क्या है बताओ.

सरिता दी- अरे यार आज मैंने उसे सडके करने के लिए जब भी उसके पास जाती तो बड़े गले का कपडा पहन कर जाती. वो तो बस जब भी मौका मिलता मेरी इनको hi देखता रहता. और तो और मेरी इनको देख कर बोल रहा था की मुझे ताज़ा दूध पीना है.

और इसके बाद दीदी ने साडी बाते मीरा को यानि मुझे बता दी जो आज दिन भर में उनके और मेरे बिच में हुवा था.

म- अरे वाह ये तो बहुत अच्छा हुवा. और ये इनको इनको क्या लगा रख है. इसे चुकी कहते हैं. भाई का लुंड लेने के लिए मरी जा रही है. और चुकी को इनको इनको बोल रही है. ओह्ह सॉरी यार लैंग्वेज थोड़ा…

सरिता दी- अच्छा मेरी माँ. मेरी चुकी को देख कर कह रहा था अभी. अब खुश. अरे कोई बात नहीं तुम मेरी दोस्त हो तो तुम मुझे तू या तुम कहकर बात कर सकती हो.

म- मतलब की तुम्हारा काम बहुत तेज़ी से हो रहा है. बहुत जल्दी तुम्हारे भाई का लुंड तुम्हारी छूट में होगा. अभी ते तेल लगाकर अपनी छूट को तैयार कल लो, बहुत जल्दी तुम्हारी छूट में लुंड जाने वह है.

सरिता दी- क्या यार. तुम भी न फिर से शुरू हो गई. जाओ मैं बात नहीं करती.

म- देखो देखो. कैसे नखरे दिखा रही है. अच्छा चल नहीं कहती कुछ अब.

सरिता दी- अब आगे क्या करना है वो बताओ.

म- बस जो जैसा चल रहा है वैसे hi चलने दो बस थोड़ा और ज्यादा अपनी चूचियों को अपने भाई को दिखाओ और जितना हो सके उसके शरीर से अपने शरीर को टच करवाओ. फिर देखो क्या होता है.

सरिता दी- एक बात तो मैं बताना भूल hi गई. आपने जो कहानी भेजी थी. उसे पढ़ने के लिए मैंने अभी का लैपटॉप लिया था तो उसमे उसने एक फोल्डर बनाया था. मेरी प्यारी bahan.to मैंने सोचा की मेरा भाई हम बहनो से कितना प्यार करता है. उनकी फोटो अपने पास रखता है वो भी उनके नाम के फोल्डर में. लेकिन जब मैंने उस फोल्डर को ओपन किया तो मैं चौक गई.

म- अरे ऐसा क्या था उस फोल्डर में जो तुम चौक गई.

सरिता दी- अरे यार वो बहुत hi गन्दा फोल्डर था. उसमे बहुत सी सेक्सी कहानिया थी.

म- तो क्या हुवा. उसकी उम्र हो गई है . तो पढता होगा सेक्सी कहानिया.

सरिता दी- अरे तुम समझी नहीं. उसमे साडी कहानिया भाई बहन की चूड……… वाली थी.

म- अरे वाह क्या बात है. वैसे एक बात तो है. तुम्हारा भाई वाकई तुम बहनो से बहुत प्यार करता है. तभी तो उसने फोल्डर का नाम भी मेरी प्यारी बहन रखा. इसका मतलब जानती हो. वो तुम बहनो को छोड़ना चाहता है.

सरिता दी- अच्छा अच्छा. अब अपनी बकवास बंद कर. बहुत बोलने लगी हो तुम.

म- सच hi तो कह रही हूँ. बहन के नाम के फोल्डर में भाई बहन की चुदाई की कहानी. वो तो तुम बहनो को चढ़ना चाहता है. बहुत hi जल्दी वो तुमको छोड़ भी देगा.

सरिता दी- अच्छा तुझे बहुत पता है इन सब का. अच्छा अब फ़ोन रखती हूँ. कल फिर बात करुँगी.

उसके बाद सयरता दीदी ने फ़ोन रख दिया और मैं सोचने लगा की दीदी ने फोल्डर की साडी कहानी पढ़ ली. तभी तो उनकी छूट में बहुत आग लगी है. कुछ दिन बाद तो तुझे मैं छोड़ हो दूंगा सरिता. कुछ देर तक सरिता दीदी के बारे में सोचने के बाद मैंने अपने दिमाग को झटका और अभी जो छूट मिलने वाली थी उसके बारे में सोचने लगा.

काफी देर इंतज़ार करने के बाद जब सविता दीदी नहीं आई तो मुझे बहुत गुस्सा आया. मैंने उन्हें मश्ग किया की कहा है तो उनका कोई रपल्य नहीं आया. तो मैंने मोबाइल साइड में रखा और सोने की कोशिश करने लगा.

अभी मुझे हलकी हलकी नींद आई थी की तभी कोई मुझे जगा रहा था. जब मैंने आँख खोल कर देखा तो वो सविता दीदी थी. मैं उठकर बैठ गया. और जब उन्हें ध्यान से देखा तो वो मेरे दिए हुवे कपड़ो में नहीं थी. उनकी शरीर पर उस समय लबेदा टाइप कुछ पहना हुवा था. मुझे ये देखकर और ज्यादा गुस्सा आया की एक तो इतनी लेट आई हैं और ऊपर से मेरा गिफ्ट भी पहनकर नहीं आई हैं तो मैंने थोड़ी नाराज़गी दिकहि और उनसे बोलै.

मैं- अब क्यों आई हो यहाँ पर. जाओ मुझे नींद लग रही है.

सविता दीदी- अरे अभी वो बाबू सो नहीं रही थी तो उसे सुलाने में देर हो गई.

मैं- चलो ठीक है वो तो समझ में आता है की आप बेबी की वजह से लेट आई हैं लेकिन मैंने और भी कुछ कहा था आपसे.

सविता दी- और क्या कहा था. तूने बोलै था आने के लिए. देख आ गई मैं.

मैं- (नाराज़गी से) अच्छा आप जाइये .मुझे सोना है.

सविता दी- लगता है मेरा भाई मुझसे नाराज़ हो गया है.

मैं- मैं नाराज़ नहीं हूँ. बल्कि मुझे नींद आ रही है.

सविता दी- अच्छा तुम्हारी नींद मैं चुटकी बजाकर दूर कर देती हूँ.

इतना बोलकर दीदी ने अपने जिस्म पर डाला हुवा लबेदा हटा दिया. लबेदा जिस्म से हटते hi मेरी आँखे बड़ी बड़ी हो गई. मेरा मुंह एकदम खुल गया. लोअर में लुंड ने एक झटका मारा तो मैंने अपना एक हाँथ अपने लुंड पर रख दिया और मेरे मुंह से एक आवाज़ निकली



मैं- क्या लग रही हो दीदी. बोले तो एकदम चुड़क्कड़ मॉल.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-60

जब दीदी ने अपने शरीर से अपना लबेदा उतारा तो उन्हें देखकर मेरे मुंह से निकल गया.

मैं- क्या लग रही हो दीदी. एकदम चुड़क्कड़ मॉल.

मेरी बात सुनकर दीदी ने पहले मेरी और घूर कर देखा फिर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी. उन्होंने धीरे से कहा.

सविता दी- बस इतना hi. वो तो तू वैसे भी बोलता रहता है.

मैं अपने बिस्टेर से उठकर उनके पास आकर खड़ा हो गया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी भी मेरी आँखों में देख रही थी. कुछ देर उनकी आँखों में देखने के बाद मैंने उनके चारो तरफ गोल गोल चक्कर लगाकर उनके शरीर का मुआयना करने लगा. मैंने दीदी को जो कपडा दिया था वह ट्रंसपानेन्ट्स था. और वही कपडा दीदी पहनकर आई थी. दीदी ने ऊपर ब्रा नहीं पहनी थी लेकिन निचे उन्होंने पंतय पहन राखी थी ब्रा न पहनने के कारन दीदी की रसभरी बड़ी बड़ी चूचिया एकदन नंगी दिख रही थी. मैंने ये गिफ्ट इसीलिए लिया था. क्योंकि इसको पहनना और न पहनना दोनों बराबर होता है.



मेरा तो लुंड दीदी को इस रूप में देखकर hi लोअर फाड़कर बहार आने को मचलने लगा. थोड़ी देर उनके पुरे शरीर का मुआयना करने के बाद मैंने दीदी की आँखों में आँखे डालकर कहा.

मैं- आप क्या लग रही हैं मैं आपको कैसे बताऊ. आप नाराज़ बहुत जल्दी हो जाती हैं.

सविता दी- मैं नाराज़ नहीं होउंगी. आज तू मेरी खुलकर तारीफ कर सकता है.

मैं- आज आप एकदम रंडी लग रही हैं. जो ऐसे कपडे पहनकर अपने ग्राहकों को रिझाती है छुड़वाने के लिए.



सविता di-(mujhe आँखे दिखाकर). तू कभी मेरी अच्छी लैंग्वेज में तारीफ नहीं कर सकता क्या. हर समय उलटी सीधी तारीफ करता है.

मैं- तो मैं कौन सा किसी और के सामने आपकी तारीफ कर रहा हूँ मैं तो आपके सामने hi आपकी तारीफ कर रहा हूँ. क्योंकि आप मुझे ऐसी hi लग रही हैं.

सविता दी- लेकिन तू मेरी तारीफ ठीक से किया कर अच्छी लैंग्वेज में. ये गंदे लैंग्वेज मुझे अच्छा नहीं लगता.

मैं- अगर आपको मेरे साथ रहना है तो इस गन्दी लैंग्वेज की आदत डालनी होगी आपको. क्योंकि मुझे चुदाई के समय गन्दी लैंग्वेज hi पसंद है.

सविता दी- अब तू मुझसे मार खायेगा अभी.

मैं- लेकिन मैं अभी आपसे नाराज़ हूँ.

सविता दी- मैंने तेरी ख़ुशी के लिए ये सब किया और तू अभी भी मुझसे नाराज़ है.

मैं- मैं इसलिए आपसे नाराज़ हूँ क्योंकि मैंने आपके अंदर कुछ भी न पहनने के लिए कहा था लेकिन आपने अंदर पंतय पहनी है.

इतना कहकर मैंने झूठी नाराज़गी दिखते हुवे उनकी तरफ पीठ कर के खड़ा हो गया. दीदी ने देखा की मैं उनसे नाराज़ हूँ तो वो मेरे पास आई और मेरे कंधे पर हाँथ रख कर कहा.

सविता दी- अभी तू नाराज़ न हो मेरे भाई. तू समझने की कोशिश kar.mujhe बहुत शर्म आ रही थी इसलिए मैंने पंतय पहन ली.

मैं- लेकिन मैंने तो आपको मन किया था अंदर कुछ भी पहनने के लिए. फिर भी.

सविता दी- अभी तू चाहता क्या है. मैं तेरी बहन हूँ. और मैं तेरी तरह इतनी बेशर्म नहीं हूँ की पुरे घर में ऐसे कपडे पहन कर घुमु. वो तो तूने मेरे लिए इतने प्यार से लाया था ये गिफ्ट. इसलिए मैंने पहन लिया. लेकिन तू खुश होने की जगह नाराज हो रहा है. ठीक है तू नैरा रह मैं जा रही हूँ निचे.

जैसे hi दीदी ये कहकर जाने लगी मैंने दीदी का हाँथ पकड़ लिया और एक झटके में अपनी तरफ खींच लिया. जिससे दीदी मेरी बहो में आ गयी और उनकी लगभग नंगी रसीली चूचिया सीधे आकर मेरी साइन से टकराई. तो हम दोनों के मुंह से aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh निकल गई.



मेरी बहो में आकर दीदी शर्म से अपना सर निचे झुका लिया. मैंने दीदी की चिक हो पकड़कर उनका सर ऊपर किया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आंको में इस वक्त सिर्फ प्यास hi प्यास थी. कुछ देर उनकी आँखों में देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- अरे मेरी प्यारी सेक्सी एंड हॉट दीदी. आप तो मुझसे नाराज़ हो गई. सॉरी माफ़ कर दीजिये अपने इस कमीने भाई को.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई कुछ देर तक दीदी की आँखों में देखने के बाद मैंने उनके माथे को किश कर लिया और दीदी से बोलै.

मैं- दीदी मैं आपसे कभी नाराज़ नहीं हो सकता. मैं अपनी दीदी से बहुत प्यार करता हूँ. मैं तुम्हे वो हर ख़ुशी देना चाहता हूँ. जिसके लिए अभी तक तुम तरस रही हो.

सविता दी- मैं किसी ख़ुशी के लिए नहीं तरस रही hoon.main तो बहुत खुश हूँ.

मैं- (उनके गाल को चूमकर) वो तो आपकी आँखों में देखकर hi पता चल जाता है की आप कितनी खुश हो. मैं वही ख़ुशी आपको देना चाहता हूँ जो जीजा जी ने आज तक आपको नहीं दी.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी में मेरी आँखों में देखा. लेकिन कहा कुछ नहीं. कुछ देर उनकी आँखों में देखते हुवे मैंने अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिया और किश करने लगा. मेरे किश करने से दीदी की धड़कन बढ़ने लगी. मैं दीदी को किश करते हुवे अपने हाँथ उनकी पीठ पर रख दिया और सहलाने लगा. कुछ देर तक तो दीदी ने कोई रिस्पांस नहीं किया फिर वो भी किश में मेरा साथ देना लगी और मेरे मेरी गार्डन पर अपनी बहे दाल दी. हम दोनों पसनते किश में डूब गए. किश करते हुवे मैं लगातार दीदी की पीठ को सहला रहा था लगभग 5 मिनट तक हम दोनों किश करते रहे. फिर मैंने अपना होठ उनके होंठो से हटाकर उनकी आँखों में देखते हुवे पूछा.



मैं- दीदी तुमको कैसा लग रहा hai(main अब दीदी को तुम कहने लगा था)

सविता दी- (शरमाते हुवे) अब तू मुझको आप से तुम कहने लगा (मेरी बातो को बदलते हुवे.)

मैं- आपको बुरा लगा क्या दीदी.

सविता दी- नहीं तू मुझे कुछ भी कह सकता है.

मैं- कुछ भी दीदी. सोच लो.

सविता di-(mere कंडे पर मरती हुवी.) अभी तू न किसी दिन मार खायेगा मुझसे.

मैं- तुम तो मुझको किसी दिन मरोगी लेकिन मैं तो आज hi तुम्हारी मरूंगा.

इतना कहकर मैंने फिर से अपने होंठ दीदी के होंठो पर चिपका दिए और किश करने लगा दीदी ने अभी भी अपनी बांहे मेरी गार्डन पर डाली हुई थी. मेरे दोनों हाँथ दी की पीठ पर अभी भी चल रहे थे. कुछ देर बाद मैंने उनके होंठो पर अपनी जीभ फिरने लगा. और जीभ से दीदी के होंठो पर दबाव देने लगा. थोड़ी देर जीभ फेरने के बाद दीदी ने अपने मुंह हल्का सा खोला तो मैंने अपनी जीभ उनकी मुंह के अंदर सरका दी और उनके मुंह में चारो तरफ घूमने लगा. मैंने अपने हाँथ को उनकी पीठ से सरकते हुवे निचे ले जाकर उनकी कातिल गांड पर रख दिया और दबाने लगा.

दीदी की सांसे भरी होने लगी. उनकी चूचिया हर साँस के साथ ऊपर निचे होने लगी जो मेरे साइन पर रगड़ खा रही थी. कुछ देर बाद दीदी ने रिस्पांस दिया और मेरी जीभ को चूसने लगी. मेरी तो मज़े में आँखे बंद हो गई. मैं उनकी गांड को मुठी में भर कर जोर जोर से दबा रहा था. मच देर बाद दीदी ने खींच खींच कर मेरी जीभ को चूसना चालू कर दिया. मैंने भी अपने हांथो से जोर जोर से दीदी की गांड को दबाने लगा. दीदी के मुंह से सिसकारी की रूप में सिर्फ gggggggggggggguuuuuuuuuuuuuuuuu gggggggggggguuuuuuuuuuuuuuuuu की hi आवाज़ आ रही थी.



थोड़ी देर बाद दीदी मेरी जीभ को दबाव देखर अपने मुंह से बहार निकल दिया और अपनी जीभ से मेरे होंठो को चाटने लगी. जब वो मेरे होंठो को चाट रही थी तो मैंने उनकी गांड को मुठी में भरा और कसकर मसल दिया जिससे दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गई.

सविता दी- AAAAAAAaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh Aabhiiiiiiiiii द्वीीीेरे म्मीीीेरररररररे bbbbhaaaaaaaaaaaaiiiiii hhhhhhhhhhhhheeeeeeeyyyyyyyyyy डरडडडडडडड होऊता हैईईई.

इतना बोलकर दीदी ने फिर से मेरे होंठो को चेतना सुरु कर दिया होंठ चाटते चाटते मेरे मुंह में अपनी जीभ दाल दी. मैंने तो जैसे दीदी की जीभ पर टूट पड़ा और पूरी ताकत से उनकी जीभ को चूसने लगा. दीदी के मुंह से हलकी हलकी सिसकी निकल रही थी मेरा लैंड अबतक एकदम कड़ा होकर उनके जांघो के बिछ ठोकर मर रहा था. लगभग 10 मिनट तक उनकी जीभ को चुस्त रहा. जब हम दोनों की सांसे उखाड़ने लगी तो मैंने एक बार फिर दीदी की गांड को डोर से बाबा दिया. अपनी कमर को आगे की तरफ एक धक्का दिया और उनकी जीभ को अपने मुंह से निकल दिया. दीदी के मुंह से एक बार फिर आनंद दायक सिसकी निकल गई.



सविता di-AAAAAAAAaaaaaahhhhhhhhhhhhh MMMMaaaaaaaaaaaammmmmmmmmyyyyyyyyyyyy. Ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh धीरीईईए मीटीईडीएएएएएएए bhaaaaaaaaaaiiiiiii tttttuuumaaaaaaaaaaahrrrrrri डीडीई कोऊ डरडडडडडड होताआ हैईईई. Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh अब्बब्बबबबबभीइइइइइ.

मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे पूछा.

मैं- क्यों दीदी अच्छा नहीं लग रहा है क्या.

दीदी ने मेरी बात का जवाब दिया बिना मेरी देखते हुवे मेरे चेहरे को किश करना शुरू कर दिया. किश करते हुवे दीदी निचे आने लगी. दीदी मेरी गार्डन पर किश करने लगी. और किश करते हुवे मेरी t-shirt को निचे से पकड़ कर ऊपर उठाने लगी. मैंने भी अपना हाँथ ऊपर कर लिया. दीदी ने मेरी t-shirt उतारकर निचे फेक दी और अपनी नशीली आँखों से मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे साइन पर हाँथ फिरने लगी. और कहा.

सविता दी- क्या बात है अभी. बहुत डोले शोले बना रखे हैं तुमने. जिससे तुम्हारी शादी होगी उन्स्की तो मौज हो जाएगी.

मैं- दीदी डोले शोले तो जीजा के भी हैं. लेकिन तुमको देखकर लगता नहीं की आपकी मौज़ है.

सविता दी- (थोड़ा उदास होकर)- हाँ अभी तू सही कह रहा है. उनके बस डोले शोले hi देख लो. बाकि तो बस………

मैं- सिर्फ डोले शोले से कुछ नहीं होता दीदी. जिसके हथियार में ताकत होती है उसकी बीबी उससे खुश रहती है. और तुमने अपनी बात पूरी नहीं की.

सरिता दी- वो सब तू छोड़. तू किस हथियार की बात कर रहा है.

मैं- (अपने लुंड की तरफ इशारा करके लुंड को सहला कर). मैं इसकी बात कर रहा हूँ. इसमें ताकत होनी चाहिए डोले सोले में कुछ नहीं रखा.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्माकर अपना सर दूसरी तरफ कर लिया और मुस्कुराने लगी. फिर मैंने दीदी का चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ किया और उनकी नशीली आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- तुम बिलकुल भी चिंता मत करो दीदी. जीजाजी के हथियार में ताकत नहीं है तो क्या हुवा. तुम्हारे भाई के हथियार में बहुत ताकत है ये आपको पूरी तरह खुश रखेगा.

सरिता didi-(sharmakar) बड़ा आया मुझे खुश रखने वाला. बड़ा गुमान है तुझे अपने हथियार पर. पता चला सही मौके पर धोका दे दिया.

मैं- ये गुमान नहीं है दीदी. इसकी ताकत के बार में जाकर नताशा से पूछो. वो आपको बताएगी इसकी ताकत. मैं उसको बहुत रगड़ रगड़ कर घंटो तक छोड़ता था. तभी तो वो मेरी गुलाम बन गई थी. जो मैं बोलता था वही करती थी वो. तुम चींथ मत करो दीदी. एक बार मैंने आपको रगड़ कर छोड़ दिया तो तुमको भी मेरे हथियार की ताकत पता चल जाएगी. और तुम भी मेरी गुलाम बन जाओगी. और मुझसे छोड़ने के लिए रोज तड़पती रहोगी.



सविता दी- छियईईई अभी तू कितने गन्दी बाटे करता है. मैं बहन हूँ तेरी.

मैं- नहीं अब तुम मेरी गिर्ल्फ्रेंड हो. मेरी चुड़क्कड़ मॉल हो.

मेरी ये बात सुनकर दीदी ने घूर कर मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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