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- Dec 5, 2013
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अपडेट-56
रात में देर तक जागने के कारन मैं देर से था. फ्रेस होकर निचे आया तो सभी हाल में बैठे थे. सरिता दीदी रसोई में थी. थोड़ी देर बाद सब नाश्ता करने लगे तो सरिता दीदी ने कहा.
सरिता दी- पापा एक बात कहनी है आपसे. प्ल्ज़ नाराज़ मत होना.
पापा- अरे बीटा कहो क्या बात है.
सरिता दी- पापा वो क्या है न की मेरी शादी तो अभी 6-7 महीने होने से रही तो मैं सोच रही हूँ की तब तक मैं थोड़ा जिम में एक्सेरसीज़े hi कर लून. कही बैठे बैठे शादी तक मोती न हो जाऊ.
पापा- अरे ये तो अच्छी बात है अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए.
मैं- ये आपने बिलकुल सही सोचा दीदी. वैसे भी आप मोती हो गई ho.(unki साइन को एक नज़र देखकर). चलिए मैं आपको किसी अचे जिम में एडमिशन करवा दूंगा.
सरिता दी- तो उसके लिए बहार क्या जाउंगी. तुम्हारे कमरे में है न जिम का सामान तो मैं उसी से कर लुंगी और तू मुझे सिखाएगा.
Main(bahana मरते हुवे)- मैं कैसे. मुझे समय नहीं है. और इतनी मोती हो की आप अपनी फिटनेस के चक्कर में मेरी फिटनेस ख़राब कर देंगी.
सरिता दी- पापा आप कहिये न भी से की मुझे सिखाये.
पापा- अभी तुम्हारी दीदी ठीक कह रही है. बहार जाकर जिम करने से अच्छा है की उसे घर में तुम hi गाइड कर दो.
सरिता दी- थैंक यू पापा. एक बात और करनी थी पापा.
पापा- हाँ बोलो बीटा.
सरिता दी- वो मैं ये बोल रही थी की जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक आप मुझे फोर व्हीलर चलना सीखा दे तो अच्छा था.
पापा- देखो बीटा. मेरे पास तो समय है नहीं. तुम ऐसा करो अभी के साथ चली जाना सिखने.
मैं- अब ये भी मैं hi करू. लेकिन मुझे समय hi कहा रहेगा.
पापा- तुम उसे शाम को ले जाना गाड़ी सीखने.
मैं- ठीक है पापा जैसा आप कहे.
सरिता दी- थैंक यू पापा.
मैं- और मुझको थैंक यू कौन बोलेगा. आखिर मैं hi तो आपको सिखाऊंगा सब कुछ.
सरिता दी- जब मुझको सबकुछ सीखा डोज तो तुमको भी थैंक यू बोल दूंगी.
उसके बाद सभी ने अपना नाश्ता फिनिश किया मैं अपने कमरे में आ गया और बहार जाने के लिए तैयार होने लगा. तभी सरिता दी मेरे कमरे में आयी. उनके हाँथ में झाड़ू और पोछा था. वो मेरे कमरे की सफाई करने आयी थी. मैंने जब उनको देखा तो उनसे कहा.
मैं- क्या बात है दीदी आपकी तबियत तो ठीक है न (इतना बोलकर मैंने उनके माथे पर अपनी हथेली रख दी)
सरिता दी- हाँ मेरी तबियत को क्या होना है.
मैं- मुझे लगा शायद आपकी तबियत ख़राब है क्योंकि आज शायद आप पहली बार मेरे कमरे की सफाई करने आई हैं.
सरिता di-(narazgi के साथ) अगर तुझे मेरा आना अच्छा नहीं लगा तो मैं जा रही हूँ.
मैं- अरे मेरी प्यारी दीदी आप तो बात बात पे नाराज़ हो जाती हैं मैं तो ये कह रहा था की मैं अपने कमरे की सफाई कर दी हैं.
सरिता दी- आज के बाद तू अपने कमरे की सफाई नहीं करेगा. अब ये काम मैं करुँगी.
मैं- अरे वाह दीदी. आपमें इतना बदलाव. आखिर छककर क्या है.
सरिता di-Koi चक्कर नहीं है. वो कुछ दिन बाद मेरी शादी हो जाएगी. तो मैं तुमसे दूर हो जाउंगी. और तो मुझे भूल जाएगा मैं चाहती हूँ की जाने से पहले अपने भाई को हर ख़ुशी दूँ. इतना प्यार दूँ की वो मुझे कभी भी भूल न पाए.
मैं- इतना प्यार करती हो कुझसे आप और ये कैसी बाते कर रही हैं आप दी. आप कोई भूलने की चीज़ हो क्या जो मैं आपको भूल जाऊंगा.
सरिता दी- अच्छा. मैं कोई चीज़ हूँ क्या
मैं- अरे दीदी वही तो मैं कह रहा हूँ की क्या आप कोई चीज़ हो जो मैं आपको भूल जाऊंगा. आप तो मेरी प्यारी बहन हैं आपको मैं कभी नहीं भूल सकता.
सरिता दी- तो ठीक है. आज के बाद तुम्हारे सरे काम मैं करुँगी.
मैं- सरे काम करेंगी मेरे.
सरिता दी- हाँ तेरे सरे काम करुँगी. तेरे कपडे वगैरह सब धूल डोंगी.
इसके बाद दीदी झाड़ू लगाने लगी. उन्होंने एक लूसे और बड़े गले की t-shirt पहनी हुई थी. झुकने के कारन दीदी की जालिम चूचिया छलककर सामने आ गयी.
मैं उनकी चूचियों को देखने लगा. मैं आज बड़े ध्यान से उनकी चूचियों को देख रहा था. मैंने देखा की उनकी दोनों चूचियों पर शामे जगह पर टिल थे. जो उनकी चूचियों को और हसीं और कामुक बना रहे थे. उनकी चूचियों को देखते हुवे मेरा लुंड सर उठाने लगा. झाड़ू लगते हुवे दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मेरी नज़र अपनी चूचियों पर देख कर उनकी चेहरे पर एक हलकी मुस्कान की लकीर आकर चली गई. दीदी ने मुझे अपनी चूचियों को नज़ारा करते हुवे पूछा.
सरिता दी- बड़े बड़े हैं न अभी.
मैं- हाँ दीदी बड़े बड़े हैं. (फिर उनकी आँखों में देखकर) मगर क्या बड़े बड़े हैं.
सरिता दी- ये जो रखा हुवा है ये बड़े बड़े हैं न. वैसे क्या कहते हैं इनको.
मैं- ये डम्बल है दीदी. इसी से हाड़प्रक्टिस होती है.
सरिता दी- अच्छा मैं कल कितने बजे जिम करने के लिए औ.
मैं- पूरा दिन पड़ा है जब भी आपका मन हो आ जाइये गए. लेकिन अगर अर्ली मॉर्निंग आएँगे तो मैं आपकी थोड़ी बहुत मदद भी कर दूंगा सिखने में.
सरिता दी- ठीक है मैं कल सुबह जल्दी hi आ जोगी.
मुझसे बात करते हुवे. अपनी चूचियों को भरपूर दीदार मुझे करते हुवे दीदी ने तब तक झाड़ू लगा लिया था. उसके बाद वो बहार गई और बाल्टी में थोड़ा पानी और कपडा लेकर आयी और पोछा लगाने के लिए बैठ गयी. अब जो नज़ारा मेरी आँखों के सामने था उसे देखकर तो मेरे लैंड ने एक साथ कई झटके खाये सरिता दीदी ने पोछा लगते समय अपने एक पेअर के घुटने पर अपनी एक चुकी का भार रख दिया था. दीदी की इतना जालिम चूचियों का भार शायद उनका घुटना संभल नहीं सका इसलिए उनकी एक चुकी ब्रा समेत t-shirt से उनके गले की तरफ चली गाइट hi. दीदी कभी कभी नज़र उठाकर मेरी तरफ देख लेती थी और फिर अपने काम में लग जाती. थोड़ी देर ऐसे hi उनकी चूचियों को देखने के बाद मैंने कहा.
मैं- बहुत hi अचे हैं दीदी. एकदम तारीफ के काबिल.
सरिता दी- क्या कहा.
मैं- मैं ये बोल रहा हूँ की आपकी सफाई बहुत अच्छी है एकदम तारीफ के काबिल.
सरिता दी- हाँ मुझे हर चीज़ में साफ सफाई बहुत पसंद है. मुझे हर चीज़ चमकती हुई अच्छी लगती हैं.
मैं- हाँ दीदी वो तो दिख रहा है बहुत ज्यादा.
सरिता दी- क्या कहा तूने.
मैं- साफ़ सफाई बहुत ज्यादा दिख रही है. और आपको हो क्या गया है. आप कोई बात समझ hi नहीं पति.
सरिता दी- (हँसते हुवे). अब मैं तेरी तरह समझदार नहीं हूँ न. इसलिए जल्दी समझ में नहीं आती.
मैं- अच्छा दीदी एक बात बताओ आपकी शादी तो हो नहीं पाई तो क्या आपको जीजा जी की याद आती है. आप उनको कितना प्यार करती हैं
सरिता दी- हाँ आती है न. आखिर वो मेरे होने वाले पति हैं. और पति को प्यार तो करते हैं न.
मैं- ये तो गलत है दीदी. जो यहाँ है उसे तो आप प्यार नहीं करती और जो दूर है उसे आप प्यार करती हैं.
सरिता दी- मैं तो तुमसे भी बहुत प्यार करती हूँ. लेकिन लगता है की तुम मुझसे प्यार नहीं करते.
मैं- अब आप बिलकुल भी चिंता मत करे दीदी. मैं पागल था जो आपके प्यार को समझ नहीं पाया. लेकिन मैं अब आपको इतना प्यार करूँगा की आप जीजा जी को भूल जाएंगी.
मैं दीदी से बात भी कर रहा था. और उनकी चूचियों को भी देख रहा था. और तैयार भी हो रहा था. मैं तैयार होते हुवे अपने बालो में लगाने के लिए क्रीम नकली और जैसे hi मैं उसको लगाने लगा क्रीम मेरी उंगली से फिसलकर सीधे दीदी की गले तक निकली आधी चूचियों पर जा गिरी. जिसे दीदी ने भी देखा और मेरी तरफ देखने लगी. तो मैंने भी एक बोल्ड स्टेप लिया और झुककर उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी हथेली को दीदी की चूचियों पर रखा. दीदी भी मेरी आँखों में देख रही थी. मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी हथेली को उनकी चूचियों पर रगड़ते हुवे क्रीम उठा ली. मेरे ऐसा करने से दीदी के सरीर में एक सिहरन दौड़ गई. उनका जिस्म कांप गया. वो मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.
सरिता दी- ये क्या बदतमीज़ी थी अभी.
मैं- मैंने क्या बदतमीज़ी की दीदी. वो क्रीम गिर गई थी तो उसी को उठा रहा था.
सरिता दी- (अपनी चूचियों की तरफ इशारा करके) लेकिन यहाँ से उठाना जरुरी था क्या. तू फिर से नहीं निकल सकता था क्रीम.
मैं- आप अगर कहे तो मैं आपके लिए हमेशा क्रीम निकल सकता हूँ. लेकिन वो क्या है न दीदी की मैं आपकी साफ सुथरी चीज़ को गन्दा नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने क्रीम उठा ली. अगर आपको बुरा लगा हो तो सॉरी.
सरिता दीदी मेरी इस बात को सुनकर हंसने लगी. उनके साथ मैं भी हंसने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने उनकी चूचियों को फिर से देखते हुवे कहा.
मैं- अच्छा दीदी अब मैं जा रहा हूँ. Bye.
उसके बाद मैं घर से बहार आया और अपने काम पर चला गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
रात में देर तक जागने के कारन मैं देर से था. फ्रेस होकर निचे आया तो सभी हाल में बैठे थे. सरिता दीदी रसोई में थी. थोड़ी देर बाद सब नाश्ता करने लगे तो सरिता दीदी ने कहा.
सरिता दी- पापा एक बात कहनी है आपसे. प्ल्ज़ नाराज़ मत होना.
पापा- अरे बीटा कहो क्या बात है.
सरिता दी- पापा वो क्या है न की मेरी शादी तो अभी 6-7 महीने होने से रही तो मैं सोच रही हूँ की तब तक मैं थोड़ा जिम में एक्सेरसीज़े hi कर लून. कही बैठे बैठे शादी तक मोती न हो जाऊ.
पापा- अरे ये तो अच्छी बात है अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए.
मैं- ये आपने बिलकुल सही सोचा दीदी. वैसे भी आप मोती हो गई ho.(unki साइन को एक नज़र देखकर). चलिए मैं आपको किसी अचे जिम में एडमिशन करवा दूंगा.
सरिता दी- तो उसके लिए बहार क्या जाउंगी. तुम्हारे कमरे में है न जिम का सामान तो मैं उसी से कर लुंगी और तू मुझे सिखाएगा.
Main(bahana मरते हुवे)- मैं कैसे. मुझे समय नहीं है. और इतनी मोती हो की आप अपनी फिटनेस के चक्कर में मेरी फिटनेस ख़राब कर देंगी.
सरिता दी- पापा आप कहिये न भी से की मुझे सिखाये.
पापा- अभी तुम्हारी दीदी ठीक कह रही है. बहार जाकर जिम करने से अच्छा है की उसे घर में तुम hi गाइड कर दो.
सरिता दी- थैंक यू पापा. एक बात और करनी थी पापा.
पापा- हाँ बोलो बीटा.
सरिता दी- वो मैं ये बोल रही थी की जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक आप मुझे फोर व्हीलर चलना सीखा दे तो अच्छा था.
पापा- देखो बीटा. मेरे पास तो समय है नहीं. तुम ऐसा करो अभी के साथ चली जाना सिखने.
मैं- अब ये भी मैं hi करू. लेकिन मुझे समय hi कहा रहेगा.
पापा- तुम उसे शाम को ले जाना गाड़ी सीखने.
मैं- ठीक है पापा जैसा आप कहे.
सरिता दी- थैंक यू पापा.
मैं- और मुझको थैंक यू कौन बोलेगा. आखिर मैं hi तो आपको सिखाऊंगा सब कुछ.
सरिता दी- जब मुझको सबकुछ सीखा डोज तो तुमको भी थैंक यू बोल दूंगी.
उसके बाद सभी ने अपना नाश्ता फिनिश किया मैं अपने कमरे में आ गया और बहार जाने के लिए तैयार होने लगा. तभी सरिता दी मेरे कमरे में आयी. उनके हाँथ में झाड़ू और पोछा था. वो मेरे कमरे की सफाई करने आयी थी. मैंने जब उनको देखा तो उनसे कहा.
मैं- क्या बात है दीदी आपकी तबियत तो ठीक है न (इतना बोलकर मैंने उनके माथे पर अपनी हथेली रख दी)
सरिता दी- हाँ मेरी तबियत को क्या होना है.
मैं- मुझे लगा शायद आपकी तबियत ख़राब है क्योंकि आज शायद आप पहली बार मेरे कमरे की सफाई करने आई हैं.
सरिता di-(narazgi के साथ) अगर तुझे मेरा आना अच्छा नहीं लगा तो मैं जा रही हूँ.
मैं- अरे मेरी प्यारी दीदी आप तो बात बात पे नाराज़ हो जाती हैं मैं तो ये कह रहा था की मैं अपने कमरे की सफाई कर दी हैं.
सरिता दी- आज के बाद तू अपने कमरे की सफाई नहीं करेगा. अब ये काम मैं करुँगी.
मैं- अरे वाह दीदी. आपमें इतना बदलाव. आखिर छककर क्या है.
सरिता di-Koi चक्कर नहीं है. वो कुछ दिन बाद मेरी शादी हो जाएगी. तो मैं तुमसे दूर हो जाउंगी. और तो मुझे भूल जाएगा मैं चाहती हूँ की जाने से पहले अपने भाई को हर ख़ुशी दूँ. इतना प्यार दूँ की वो मुझे कभी भी भूल न पाए.
मैं- इतना प्यार करती हो कुझसे आप और ये कैसी बाते कर रही हैं आप दी. आप कोई भूलने की चीज़ हो क्या जो मैं आपको भूल जाऊंगा.
सरिता दी- अच्छा. मैं कोई चीज़ हूँ क्या
मैं- अरे दीदी वही तो मैं कह रहा हूँ की क्या आप कोई चीज़ हो जो मैं आपको भूल जाऊंगा. आप तो मेरी प्यारी बहन हैं आपको मैं कभी नहीं भूल सकता.
सरिता दी- तो ठीक है. आज के बाद तुम्हारे सरे काम मैं करुँगी.
मैं- सरे काम करेंगी मेरे.
सरिता दी- हाँ तेरे सरे काम करुँगी. तेरे कपडे वगैरह सब धूल डोंगी.
इसके बाद दीदी झाड़ू लगाने लगी. उन्होंने एक लूसे और बड़े गले की t-shirt पहनी हुई थी. झुकने के कारन दीदी की जालिम चूचिया छलककर सामने आ गयी.
मैं उनकी चूचियों को देखने लगा. मैं आज बड़े ध्यान से उनकी चूचियों को देख रहा था. मैंने देखा की उनकी दोनों चूचियों पर शामे जगह पर टिल थे. जो उनकी चूचियों को और हसीं और कामुक बना रहे थे. उनकी चूचियों को देखते हुवे मेरा लुंड सर उठाने लगा. झाड़ू लगते हुवे दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मेरी नज़र अपनी चूचियों पर देख कर उनकी चेहरे पर एक हलकी मुस्कान की लकीर आकर चली गई. दीदी ने मुझे अपनी चूचियों को नज़ारा करते हुवे पूछा.
सरिता दी- बड़े बड़े हैं न अभी.
मैं- हाँ दीदी बड़े बड़े हैं. (फिर उनकी आँखों में देखकर) मगर क्या बड़े बड़े हैं.
सरिता दी- ये जो रखा हुवा है ये बड़े बड़े हैं न. वैसे क्या कहते हैं इनको.
मैं- ये डम्बल है दीदी. इसी से हाड़प्रक्टिस होती है.
सरिता दी- अच्छा मैं कल कितने बजे जिम करने के लिए औ.
मैं- पूरा दिन पड़ा है जब भी आपका मन हो आ जाइये गए. लेकिन अगर अर्ली मॉर्निंग आएँगे तो मैं आपकी थोड़ी बहुत मदद भी कर दूंगा सिखने में.
सरिता दी- ठीक है मैं कल सुबह जल्दी hi आ जोगी.
मुझसे बात करते हुवे. अपनी चूचियों को भरपूर दीदार मुझे करते हुवे दीदी ने तब तक झाड़ू लगा लिया था. उसके बाद वो बहार गई और बाल्टी में थोड़ा पानी और कपडा लेकर आयी और पोछा लगाने के लिए बैठ गयी. अब जो नज़ारा मेरी आँखों के सामने था उसे देखकर तो मेरे लैंड ने एक साथ कई झटके खाये सरिता दीदी ने पोछा लगते समय अपने एक पेअर के घुटने पर अपनी एक चुकी का भार रख दिया था. दीदी की इतना जालिम चूचियों का भार शायद उनका घुटना संभल नहीं सका इसलिए उनकी एक चुकी ब्रा समेत t-shirt से उनके गले की तरफ चली गाइट hi. दीदी कभी कभी नज़र उठाकर मेरी तरफ देख लेती थी और फिर अपने काम में लग जाती. थोड़ी देर ऐसे hi उनकी चूचियों को देखने के बाद मैंने कहा.
मैं- बहुत hi अचे हैं दीदी. एकदम तारीफ के काबिल.
सरिता दी- क्या कहा.
मैं- मैं ये बोल रहा हूँ की आपकी सफाई बहुत अच्छी है एकदम तारीफ के काबिल.
सरिता दी- हाँ मुझे हर चीज़ में साफ सफाई बहुत पसंद है. मुझे हर चीज़ चमकती हुई अच्छी लगती हैं.
मैं- हाँ दीदी वो तो दिख रहा है बहुत ज्यादा.
सरिता दी- क्या कहा तूने.
मैं- साफ़ सफाई बहुत ज्यादा दिख रही है. और आपको हो क्या गया है. आप कोई बात समझ hi नहीं पति.
सरिता दी- (हँसते हुवे). अब मैं तेरी तरह समझदार नहीं हूँ न. इसलिए जल्दी समझ में नहीं आती.
मैं- अच्छा दीदी एक बात बताओ आपकी शादी तो हो नहीं पाई तो क्या आपको जीजा जी की याद आती है. आप उनको कितना प्यार करती हैं
सरिता दी- हाँ आती है न. आखिर वो मेरे होने वाले पति हैं. और पति को प्यार तो करते हैं न.
मैं- ये तो गलत है दीदी. जो यहाँ है उसे तो आप प्यार नहीं करती और जो दूर है उसे आप प्यार करती हैं.
सरिता दी- मैं तो तुमसे भी बहुत प्यार करती हूँ. लेकिन लगता है की तुम मुझसे प्यार नहीं करते.
मैं- अब आप बिलकुल भी चिंता मत करे दीदी. मैं पागल था जो आपके प्यार को समझ नहीं पाया. लेकिन मैं अब आपको इतना प्यार करूँगा की आप जीजा जी को भूल जाएंगी.
मैं दीदी से बात भी कर रहा था. और उनकी चूचियों को भी देख रहा था. और तैयार भी हो रहा था. मैं तैयार होते हुवे अपने बालो में लगाने के लिए क्रीम नकली और जैसे hi मैं उसको लगाने लगा क्रीम मेरी उंगली से फिसलकर सीधे दीदी की गले तक निकली आधी चूचियों पर जा गिरी. जिसे दीदी ने भी देखा और मेरी तरफ देखने लगी. तो मैंने भी एक बोल्ड स्टेप लिया और झुककर उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी हथेली को दीदी की चूचियों पर रखा. दीदी भी मेरी आँखों में देख रही थी. मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी हथेली को उनकी चूचियों पर रगड़ते हुवे क्रीम उठा ली. मेरे ऐसा करने से दीदी के सरीर में एक सिहरन दौड़ गई. उनका जिस्म कांप गया. वो मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.
सरिता दी- ये क्या बदतमीज़ी थी अभी.
मैं- मैंने क्या बदतमीज़ी की दीदी. वो क्रीम गिर गई थी तो उसी को उठा रहा था.
सरिता दी- (अपनी चूचियों की तरफ इशारा करके) लेकिन यहाँ से उठाना जरुरी था क्या. तू फिर से नहीं निकल सकता था क्रीम.
मैं- आप अगर कहे तो मैं आपके लिए हमेशा क्रीम निकल सकता हूँ. लेकिन वो क्या है न दीदी की मैं आपकी साफ सुथरी चीज़ को गन्दा नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने क्रीम उठा ली. अगर आपको बुरा लगा हो तो सॉरी.
सरिता दीदी मेरी इस बात को सुनकर हंसने लगी. उनके साथ मैं भी हंसने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने उनकी चूचियों को फिर से देखते हुवे कहा.
मैं- अच्छा दीदी अब मैं जा रहा हूँ. Bye.
उसके बाद मैं घर से बहार आया और अपने काम पर चला गया.
इसके आगे की कहानी अगले भाग में..