Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 7 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-56

रात में देर तक जागने के कारन मैं देर से था. फ्रेस होकर निचे आया तो सभी हाल में बैठे थे. सरिता दीदी रसोई में थी. थोड़ी देर बाद सब नाश्ता करने लगे तो सरिता दीदी ने कहा.

सरिता दी- पापा एक बात कहनी है आपसे. प्ल्ज़ नाराज़ मत होना.

पापा- अरे बीटा कहो क्या बात है.

सरिता दी- पापा वो क्या है न की मेरी शादी तो अभी 6-7 महीने होने से रही तो मैं सोच रही हूँ की तब तक मैं थोड़ा जिम में एक्सेरसीज़े hi कर लून. कही बैठे बैठे शादी तक मोती न हो जाऊ.

पापा- अरे ये तो अच्छी बात है अपनी सेहत का भी ध्यान रखना चाहिए.

मैं- ये आपने बिलकुल सही सोचा दीदी. वैसे भी आप मोती हो गई ho.(unki साइन को एक नज़र देखकर). चलिए मैं आपको किसी अचे जिम में एडमिशन करवा दूंगा.

सरिता दी- तो उसके लिए बहार क्या जाउंगी. तुम्हारे कमरे में है न जिम का सामान तो मैं उसी से कर लुंगी और तू मुझे सिखाएगा.

Main(bahana मरते हुवे)- मैं कैसे. मुझे समय नहीं है. और इतनी मोती हो की आप अपनी फिटनेस के चक्कर में मेरी फिटनेस ख़राब कर देंगी.

सरिता दी- पापा आप कहिये न भी से की मुझे सिखाये.

पापा- अभी तुम्हारी दीदी ठीक कह रही है. बहार जाकर जिम करने से अच्छा है की उसे घर में तुम hi गाइड कर दो.

सरिता दी- थैंक यू पापा. एक बात और करनी थी पापा.

पापा- हाँ बोलो बीटा.

सरिता दी- वो मैं ये बोल रही थी की जब तक शादी नहीं हो जाती तब तक आप मुझे फोर व्हीलर चलना सीखा दे तो अच्छा था.

पापा- देखो बीटा. मेरे पास तो समय है नहीं. तुम ऐसा करो अभी के साथ चली जाना सिखने.

मैं- अब ये भी मैं hi करू. लेकिन मुझे समय hi कहा रहेगा.

पापा- तुम उसे शाम को ले जाना गाड़ी सीखने.

मैं- ठीक है पापा जैसा आप कहे.

सरिता दी- थैंक यू पापा.

मैं- और मुझको थैंक यू कौन बोलेगा. आखिर मैं hi तो आपको सिखाऊंगा सब कुछ.

सरिता दी- जब मुझको सबकुछ सीखा डोज तो तुमको भी थैंक यू बोल दूंगी.

उसके बाद सभी ने अपना नाश्ता फिनिश किया मैं अपने कमरे में आ गया और बहार जाने के लिए तैयार होने लगा. तभी सरिता दी मेरे कमरे में आयी. उनके हाँथ में झाड़ू और पोछा था. वो मेरे कमरे की सफाई करने आयी थी. मैंने जब उनको देखा तो उनसे कहा.

मैं- क्या बात है दीदी आपकी तबियत तो ठीक है न (इतना बोलकर मैंने उनके माथे पर अपनी हथेली रख दी)

सरिता दी- हाँ मेरी तबियत को क्या होना है.

मैं- मुझे लगा शायद आपकी तबियत ख़राब है क्योंकि आज शायद आप पहली बार मेरे कमरे की सफाई करने आई हैं.

सरिता di-(narazgi के साथ) अगर तुझे मेरा आना अच्छा नहीं लगा तो मैं जा रही हूँ.

मैं- अरे मेरी प्यारी दीदी आप तो बात बात पे नाराज़ हो जाती हैं मैं तो ये कह रहा था की मैं अपने कमरे की सफाई कर दी हैं.

सरिता दी- आज के बाद तू अपने कमरे की सफाई नहीं करेगा. अब ये काम मैं करुँगी.

मैं- अरे वाह दीदी. आपमें इतना बदलाव. आखिर छककर क्या है.

सरिता di-Koi चक्कर नहीं है. वो कुछ दिन बाद मेरी शादी हो जाएगी. तो मैं तुमसे दूर हो जाउंगी. और तो मुझे भूल जाएगा मैं चाहती हूँ की जाने से पहले अपने भाई को हर ख़ुशी दूँ. इतना प्यार दूँ की वो मुझे कभी भी भूल न पाए.

मैं- इतना प्यार करती हो कुझसे आप और ये कैसी बाते कर रही हैं आप दी. आप कोई भूलने की चीज़ हो क्या जो मैं आपको भूल जाऊंगा.

सरिता दी- अच्छा. मैं कोई चीज़ हूँ क्या

मैं- अरे दीदी वही तो मैं कह रहा हूँ की क्या आप कोई चीज़ हो जो मैं आपको भूल जाऊंगा. आप तो मेरी प्यारी बहन हैं आपको मैं कभी नहीं भूल सकता.

सरिता दी- तो ठीक है. आज के बाद तुम्हारे सरे काम मैं करुँगी.

मैं- सरे काम करेंगी मेरे.

सरिता दी- हाँ तेरे सरे काम करुँगी. तेरे कपडे वगैरह सब धूल डोंगी.

इसके बाद दीदी झाड़ू लगाने लगी. उन्होंने एक लूसे और बड़े गले की t-shirt पहनी हुई थी. झुकने के कारन दीदी की जालिम चूचिया छलककर सामने आ गयी.



मैं उनकी चूचियों को देखने लगा. मैं आज बड़े ध्यान से उनकी चूचियों को देख रहा था. मैंने देखा की उनकी दोनों चूचियों पर शामे जगह पर टिल थे. जो उनकी चूचियों को और हसीं और कामुक बना रहे थे. उनकी चूचियों को देखते हुवे मेरा लुंड सर उठाने लगा. झाड़ू लगते हुवे दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मेरी नज़र अपनी चूचियों पर देख कर उनकी चेहरे पर एक हलकी मुस्कान की लकीर आकर चली गई. दीदी ने मुझे अपनी चूचियों को नज़ारा करते हुवे पूछा.



सरिता दी- बड़े बड़े हैं न अभी.

मैं- हाँ दीदी बड़े बड़े हैं. (फिर उनकी आँखों में देखकर) मगर क्या बड़े बड़े हैं.

सरिता दी- ये जो रखा हुवा है ये बड़े बड़े हैं न. वैसे क्या कहते हैं इनको.

मैं- ये डम्बल है दीदी. इसी से हाड़प्रक्टिस होती है.

सरिता दी- अच्छा मैं कल कितने बजे जिम करने के लिए औ.

मैं- पूरा दिन पड़ा है जब भी आपका मन हो आ जाइये गए. लेकिन अगर अर्ली मॉर्निंग आएँगे तो मैं आपकी थोड़ी बहुत मदद भी कर दूंगा सिखने में.

सरिता दी- ठीक है मैं कल सुबह जल्दी hi आ जोगी.

मुझसे बात करते हुवे. अपनी चूचियों को भरपूर दीदार मुझे करते हुवे दीदी ने तब तक झाड़ू लगा लिया था. उसके बाद वो बहार गई और बाल्टी में थोड़ा पानी और कपडा लेकर आयी और पोछा लगाने के लिए बैठ गयी. अब जो नज़ारा मेरी आँखों के सामने था उसे देखकर तो मेरे लैंड ने एक साथ कई झटके खाये सरिता दीदी ने पोछा लगते समय अपने एक पेअर के घुटने पर अपनी एक चुकी का भार रख दिया था. दीदी की इतना जालिम चूचियों का भार शायद उनका घुटना संभल नहीं सका इसलिए उनकी एक चुकी ब्रा समेत t-shirt से उनके गले की तरफ चली गाइट hi. दीदी कभी कभी नज़र उठाकर मेरी तरफ देख लेती थी और फिर अपने काम में लग जाती. थोड़ी देर ऐसे hi उनकी चूचियों को देखने के बाद मैंने कहा.



मैं- बहुत hi अचे हैं दीदी. एकदम तारीफ के काबिल.

सरिता दी- क्या कहा.

मैं- मैं ये बोल रहा हूँ की आपकी सफाई बहुत अच्छी है एकदम तारीफ के काबिल.

सरिता दी- हाँ मुझे हर चीज़ में साफ सफाई बहुत पसंद है. मुझे हर चीज़ चमकती हुई अच्छी लगती हैं.

मैं- हाँ दीदी वो तो दिख रहा है बहुत ज्यादा.

सरिता दी- क्या कहा तूने.

मैं- साफ़ सफाई बहुत ज्यादा दिख रही है. और आपको हो क्या गया है. आप कोई बात समझ hi नहीं पति.

सरिता दी- (हँसते हुवे). अब मैं तेरी तरह समझदार नहीं हूँ न. इसलिए जल्दी समझ में नहीं आती.

मैं- अच्छा दीदी एक बात बताओ आपकी शादी तो हो नहीं पाई तो क्या आपको जीजा जी की याद आती है. आप उनको कितना प्यार करती हैं

सरिता दी- हाँ आती है न. आखिर वो मेरे होने वाले पति हैं. और पति को प्यार तो करते हैं न.

मैं- ये तो गलत है दीदी. जो यहाँ है उसे तो आप प्यार नहीं करती और जो दूर है उसे आप प्यार करती हैं.

सरिता दी- मैं तो तुमसे भी बहुत प्यार करती हूँ. लेकिन लगता है की तुम मुझसे प्यार नहीं करते.

मैं- अब आप बिलकुल भी चिंता मत करे दीदी. मैं पागल था जो आपके प्यार को समझ नहीं पाया. लेकिन मैं अब आपको इतना प्यार करूँगा की आप जीजा जी को भूल जाएंगी.

मैं दीदी से बात भी कर रहा था. और उनकी चूचियों को भी देख रहा था. और तैयार भी हो रहा था. मैं तैयार होते हुवे अपने बालो में लगाने के लिए क्रीम नकली और जैसे hi मैं उसको लगाने लगा क्रीम मेरी उंगली से फिसलकर सीधे दीदी की गले तक निकली आधी चूचियों पर जा गिरी. जिसे दीदी ने भी देखा और मेरी तरफ देखने लगी. तो मैंने भी एक बोल्ड स्टेप लिया और झुककर उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी हथेली को दीदी की चूचियों पर रखा. दीदी भी मेरी आँखों में देख रही थी. मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी हथेली को उनकी चूचियों पर रगड़ते हुवे क्रीम उठा ली. मेरे ऐसा करने से दीदी के सरीर में एक सिहरन दौड़ गई. उनका जिस्म कांप गया. वो मेरी आँखों में देखते हुवे बोली.



सरिता दी- ये क्या बदतमीज़ी थी अभी.

मैं- मैंने क्या बदतमीज़ी की दीदी. वो क्रीम गिर गई थी तो उसी को उठा रहा था.

सरिता दी- (अपनी चूचियों की तरफ इशारा करके) लेकिन यहाँ से उठाना जरुरी था क्या. तू फिर से नहीं निकल सकता था क्रीम.

मैं- आप अगर कहे तो मैं आपके लिए हमेशा क्रीम निकल सकता हूँ. लेकिन वो क्या है न दीदी की मैं आपकी साफ सुथरी चीज़ को गन्दा नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने क्रीम उठा ली. अगर आपको बुरा लगा हो तो सॉरी.

सरिता दीदी मेरी इस बात को सुनकर हंसने लगी. उनके साथ मैं भी हंसने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने उनकी चूचियों को फिर से देखते हुवे कहा.

मैं- अच्छा दीदी अब मैं जा रहा हूँ. Bye.

उसके बाद मैं घर से बहार आया और अपने काम पर चला गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-57

मैंने अपने काम को लगभह एक हॉर्स वही किया उसके बाद काम समेत कर घर को आ गया. घर आने के बाद मैं अपने कमरे में काम करने laga.kaam ख़तम करने के बाद मैंने जो गिफ्ट सविता दीदी के लिए ख़रीदा था वो लेकर सविता दीदी के कमरे की तरफ चल दिया.

मैंने दरवाज़े पर नॉक किया तो दीदी ने दरवाज़ा खोला और मैं कमरे के अंदर चला गया और दरवाज़ा बंद कर लगा तो सविता दी ने कहा.

सविता दी- दरवाज़ा क्यों बंद कर रहे हो.

मैं- उनकी आँखों में देखते हुवे) आपको नहीं पता क्यों बंद कर रहा हूँ.

मेरे इतना कहने के बाद दीदी कुछ नहीं बोली और चुपचाप अपने बिस्टेर पर बैठ gayi.main भी दरवाज़ा बंद कर के उनके बिस्टेर पर उनसे सत्कार बैठ गया. कुछ देर तक दीदी कुछ नहीं बोली तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या बात है दीदी. आप इतनी गुमसुम क्यों हैं.

सविता दी- नहीं ऐसा कुछ नहीं है. वो कल जो भी हुवा उसके बारे में सोच सोच कर परेशां हूँ.

Main-Kal क्या हुवा था दीदी.

सविता दी- तू कितना बड़ा कमीना है अभी. इतना सबकुछ करने के बाद पूछ रहा है की क्या हुवा.

मैं- (दीदी का हाँथ अपने हाँथ में लेकर) आपको अच्छा नहीं लगा क्या दीदी.

सविता दी- ऐसी बात नहीं है. लेकिन हम दोनों भाई बहन हैं. तो ये सब अच्छा नहीं लगता.

मैं- आप ये भूल जाओ दीदी की भाई बहन हैं. बस इतना याद रखो की आप एक औरत हैं और मैं एक मर्द. हम दोनों को इस समय एक दूसरे की जरुरत है.

फिर मैंने दीदी को उठाकर अपनी गॉड में बैठा लिया. दीदी ने इस समय t-shirt और लेग्गी पहनी हुई थी. जिसमे से उनकी पहाड़ जैसी चूचिया बहार निकली हुई थी. मैं दीदी को अपनी गॉड में बैठकर अपना चेहरा आगे बढाकर उनके गाल से अपना गाल रगड़ने लगा. और अपने हाँथ को उनके पेट पर रखकर उसे सहलाने लगा. थोड़ी देर पेट सहलाने के बाद मैंने ऊँगली से उनकी नाभि को कुरेदने लगा. ऐसा करने से दीदी मचलने लगी. मैं अब उनके गाल और गार्डन को जीभ निकल कर चाटने लगा. दीदी को भी ये सब अब पसंद आने लगा. वो भी अब मेरे गाल से अपना गाल रगड़ने लगी. फिर मैंने अपने एक हाँथ को ऊपर सरकते हुवे उनकी चूचियों पर रख दिया और एक हाँथ सरकते हुवे उनकी जांघो पर रखा और उसे सहलाने लगा.

मैंने दीदी की चूचियों को हौले हौले दबाना शुरू किया. और उनकी जांघ को सहलाते हुवे अपना हाँथ उनकी छूट पर लेग्गी के ऊपर से रख दिया. जिससे दीदी के मुंह से हलकी सी आह्ह्ह्ह निकल गयी. उन्होंने तुरंत अपने एक हाँथ को मेरे बुर के ऊपर वाले हाँथ पर रख दिया और न में गार्डन हिलाते हुवे बोली.

सविता दी- नहीं अभी हाँथ हटाओ अपना.

Main-Kyon दीदी. कबतक अपने इस कीमती खजाने को छुपा कर रखोगी. अपने इस कीमती खजाने का दर्शन अपने भाई को कराकर उसको धन्य कर दो दीदी.

सविता दी- ये खजाना तेरा नहीं है. तेरे जीजा जी का है.

मैं- अरे कौन से जीजा जी. जो आपको सुख नहीं दे प् रहे हैं. मेरी दीदी यहाँ अकेले तड़प रही हैं और वो पैसा कमाने में जुटे हैं.

सविता दी- तुमसे ऐसा किसने कहा की वो मुझे सुख नहीं दे प् रहे हैं. वो मुझको बहुत खुस रखते हैं.

मैं- मुझे पता है दीदी की वो आपको कितना कुश रख रहे हैं. वो आपके जिस्म की प्यास नहीं बुझा प् रहे हैं. आपके जिस्म की प्यास आपकी आँखों में साफ दिखती हैं.

सविता दी- तू कब से आँखे पड़ने लगा. बड़ा आया आखो में प्यास देखने वाला.

मैं- अरे दीदी आप अपने आप को मत तड़पाओ. मैं आपको वो सरे सुख दूंगा जो जीजा जी आपको नहीं दे प् रहे हैं.

इन सब बातो के दौरान मैं अपने एक हाँथ से लगातार दीदी की चूचियों को दबा रहा था. और छूट वालो हाँथ से उनके छूट रब करने की कोसिस कर रहा था. दीदी ने मेरा हाँथ अपनी छूट के ऊपर कसकर पकड़ा था. मैं जोर लगाकर उनकी छूट रब कर रहा था लिकेन ठीक से रब नहीं कर प् रहा था फिर मैंने उस हाँथ को ऐसे hi रहने दिया और. एक हाँथ से दीदी की चूचिया जोर जोर से दबाने लगा और दीदी के कण को मुंह में लेकर चूसने लगा. जिससे दीदी मदहोश होने लगी. मैं लगातार 2 मिनट तक दीदी को चूचियों को जोर लगाकर मसलता रहा और उनकी कण कंधे को कभी चूमता तो कभी बाईट करता तो कभी चाट लेता. मेरे ऐसा करने पर दीदी के हाँथ की पकड़ मेरे निचे वाले हाँथ पर ढीली पद गई तो मैंने उनकी बुर को मुठी में जकड कर मसलने लगा जिससे दीदी के मुंह से चीख निकल गई.



सविता दी- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह oooooooohhhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii. हाँथ हटा वह से.

मैं- क्यों दीदी अच्छा नहीं लग रहा है क्या.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने एक नज़र मेरी आँखों में देखा और फिर अपनी गार्डन सीधी कर ली. अब मैं लगातार एक हाँथ से उनकी चुकी को मसलता और एक हाँथ से उनकी बुर को मसलता. मेरे इस लगातार हमले से दीदी की छूट पनिया गई. फिर मैंने दीदी को अपनी गॉड से उठाकर खड़ा कर दिया और ुकि t-shirt को पकड़कर ऊपर उठाने लगा. थोड़ी na-nukur करने के बाद दीदी ने अपने हाँथ ऊपर कर लिए. तो मैंने t-shirt निकल कर बिस्टेर फेंक दिया.

t-shirt उतरने के बाद मैंने फिर से दीदी की दोनों चूचियों को अपने हाथ में लेकर जोर लगा कर मसल दिया. दीदी की मुंह से आनंद मिश्रित चीख निकल गई.



सविता दी- AAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaarrrrr गएआईई रररररररीीीी.

मैं- अरे दीदी मैं ऐसे कैसे आपको मरने दूंगा. अभी तो मुझे आपको छोड़ना है. बिना चोदे मरने नहीं दूंगा.

सरिता दी- (मेरी आँखों में देखते हुवे). उसके बाद चाहे मैं मर hi जाओ.

मैं- अरे नहीं दीदी मुझे तो आपको साडी ज़िन्दगी छोड़ना हैं तो मैं आपको ऐसे मरने थोड़ी दूंगा.

फिर मैंने अपना मुंह दीदी के क्लीवेज पर रखकर चाटने लगा. और उनकी चूचियों को दबाता रहा. दीदी मस्ती में आहे भर रही थी. उनकी सांसे भरी होने लगी थी. फिर मैं अपना होंठो से दीदी के क्लीवेज को चाहते हुवे ऊपर की तरफ बढ़ने लगा और उनकी गार्डन पर आकर रुक गया गार्डन को चैहटन लगा. साथ साथ अपने दांतो से हल्का हल्का काटने भी लगा. जिससे दीदी को बहुत मज़ा आ रहा था. दीदी एकदम मदहोस हो गई उन्होंने अपने हाँथ से मेरे सर को अपनी तरफ खींचना सुरु कर दिया. फिर मैंने एक हाँथ उठाकर उनकी छूट पर रख दिया. मैंने महसूस किया की उनकी छूट की जगह की लेग्गी गीली हो गई थाई. मैं उनकी छूट को सहलाने लगा और एक हाँथ से उनकी चूचियों को दबाने लगा.

कुछ देर छूट सहलाने और चूचिया दबाने के बाद मैंने अपने होंठ को दीदी के गार्डन से उठाकर उनकी एक चुकी को मुंह में भर लिया( जहा से चुकी के उभर शुरू होते हैं). एक हाँथ से एक चुकी को पकड़ लिया और उनकी छूट को मुट्ठी में भर लिया. और एक साथ हमला कर दिया. मैंने पहले उनकी चुकी को जोर से दांत काट लिया एक चुकी को डैम लगाकर मसल दिया और छूट को मुट्ठी में भरकर दबा दिया. मेरे इस तीन तरफ़ा हमले से दीदी की हालत बहुत ख़राब हो गयी और उनके मुंह से एक मादक सिसकारी निकल गई.



सविता दी- hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyyy. AAAAAAaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh.OOOOOOOOoooooohhhhhhhhhhhhh मम्मूउऊउउउम्म्मम्म्म्मिययी ममममममआयरररररर गाआआआई mainnnnnnnnnnnn. कोइइइइइइ बाआआअच्छाआआआआ ममुज्जज्जहीीी. ह्ह्ह्हीईई अभी dddddddhiiiiiiireeeeeeeeee मीटीएडीईई भाआआआईईई dhiiiiiiiiiiireeee.

मैं- क्या बात है दीदी बढ़ी छुडासी होती जा रही हो.

सविता di(banavati गुस्से के साथ)- ये सब तेरे कारन hi हुवा है. तू मेरे साथ ऐसी हरकत कर रहा है और मुझको छहःछहूऊऊऊ……. बोल रहा है.

मैं- मैं क्या बोल रहा हूँ. पूरा बताओ तो.

सविता दी- मुझे छुडासी बोल रहा है. मैं बहन हूँ तेरी. और इतनी जोर से दांत गदा दिया. बहन के साथ कोई एशिया करता है क्या.

मैं- आप बहन हो मेरी इसलिए अभी अपनी चूचियों को मसला hi है. नहीं तो नताशा की चूचिया तो मैं मार मार कर लाल कर देता था. और आपकी चूचियों पर मैंने अपनी मोहर लगा दी है. ताकि जब भी आप इसे देखो तो आप को ये याद रहे की अब आप अपने भाई की गिर्ल्फ्रेंड बन गई हो. उसकी मॉल बन गई हो.

सविता दी- चाल हैट बेशरम, लगता है तू मुझे बर्बाद करके hi मानेगा.

मैं- नहीं दीदी. मैं आपको बर्बाद नहीं आबाद करना चाहता हूँ. बर्बाद तो आपको जीजा जी ने किया है. मेरी इतनी मस्त गदराई हुई और छुडासी दीदी को वो छोड़ते hi नहीं. इसलिए मैं अब जीजा जी की जगह लेकर आपकी इस गदराई जवानी को छोडूंगा.

सविता दी- तू कितना गन्दा बोलता है. थोड़ी अच्छी लैंग्वेज का उसे नहीं कर सकता है क्या.

मैं- अरे दीदी ये ऐसा खेल है जिसमे जितना गन्दा गन्दा बोलोगे उतना ज्यादा मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैं फिर से दीदी की छूट और चुकी को दबाने लगा और अपना होंठ उनकी होंठो पर रखकर उन्हें किश करने लगा. थोड़ी देर बाद किश करते हुवे मैंने अपना हाँथ उनकी ब्रा में दाल दिया और नंगी चुकी पर हाँथ फेरने लगा. फिर मैंने अपने हाँथ को उनकी छूट से हटाया और उनकी लेग्गी के अंदर डालने लगा. ऐसा करने से दीदी कसमसाने लगी. थोड़ी कोशिश करने के बाद मेरे हाँथ उनकी लेग्गी में चला गया.

लेग्गी में हाँथ डालकर मैंने उनकी छूट को पंतय के ऊपर से मुठी में भर लिया और तेज़ी से दबाकर छोड़ दिया जिससे दीदी का शरीर हिल गया. मैं उनको किश कर रहा था इसलिए उनकी सिसकी मेरे मुंह में hi डाब बाई लेकिन ggggggggggggguuuuuuuuuu ggggggggggguuuuuuuuuuu की आवाज़ बहार आई.



मैं एक हाँथ से उनकी छूट को पंतय के ऊपर से मसल रहा था और एक हाँथ से उनकी चुकी को जोर और से दबा रहा था. दीदी एकदम माधोसी के आलम में मेरा साथ होंठ चूसने में देने लगी. जब मैंने देखा की दीदी एकदम मदहोश हो गई हैं तो मैंने दीदी का एक हाँथ पकड़ा और अपने लोअर पर रख दिया. अब तक मेरा लुंड पूरा खड़ा हो चुक्का था और लोअर पर हाँथ पड़ते हो लुंड ने लगातार कई झटके मरे. जिससे दीदी ने अपने हाँथ वापस खींच लिए.

मैं एक हाँथ से उनकी छूट को पंतय के ऊपर से मसल रहा था और एक हाँथ से उनकी चुकी को जोर और से दबा रहा था. दीदी एकदम माधोसी के आलम में मेरा साथ होंठ चूसने में देने लगी. जब मैंने देखा की दीदी एकदम मदहोश हो गई हैं तो मैंने दीदी का एक हाँथ पकड़ा और अपने लोअर पर रख दिया. अब तक मेरा लुंड पूरा खड़ा हो चुक्का था और लोअर पर हाँथ पड़ते हो लुंड ने लगातार कई झटके मरे. जिससे दीदी ने अपने हाँथ वापस खींच लिए.

फिर मैं दीदी की छूट को कुरेदने लगा. उनकी छूट के ऊपर हाँथ रगड़कर अपना हाँथ उनकी छूट से निकल कर उनकी गद्देदार गांड पर रख दिया और उनकी गांड को दबाने लगा. कुछ देर गांड दबाने के बाद मैंने मैंने अपनी मुठी में उनकी गांड को थमा और दबा दिया. एक हाँथ के अंगूठे और उंगली से उनकी चुकी की घुंडी को पकड़ा और मसल दिया और अपना मुंह उनके होंठो से उठाकर उनके गाल को मुंह में भर लिया और दांतो से दबा दिया. मैंने ये तीनो काम एकसाथ किये. जिससे दीदी के मुंह से जोरदार मादक सिसकारी निकल गई.

सविता दी- AAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mammyyyyyyyyyy hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyy बाआआअच्छह्ह्हह्हह्हआआआओ मममुझेई. हहहहहहहहहाआईईईई ाबबबबबबभीइइइइइइइ काहामीईनेई. ममममममममीएटीएडीइइइइइइइ जाहाआनंनं लललललेगा kkkkkkkkkkkyaaaa. ड़ड़ड़ड़ड़डीईईडीए सी नाही ड्डड्डड्डड्डाआबाएआ साआआक्ताआ क्याआआआ.

इतना बोलकर वह मुझे धक्का देकर दूर कड़ी हो गई.

मैं- अरे दीदी जो मज़ा जोर से दबाने में है वो मज़ा धीरे से दबाने में कहा. और क्या आपको मज़ा नहीं आ रहा है क्या.

इतना कहकर मैंने आगे बढ़कर फिर से दीदी को बहो में भर लिया और उनकी हाँथ पकड़कर अपने लुंड पर रख दिया. दीदी ने हाँथ हटाने की कोशिश की लेकिन मैंने उनके हाँथ को मजबूती से पकड़कर अपने लुंड पर लोअर के ऊपर से फिरने लगा.



मैंने एक हंट उनकी चुकी पर रखा और अपने मुंह को उनके क्लीवेज के आसपास रखकर जीब फिरने लगा. कुछ देर दीदी के हाँथ को अपने हाँथ से अपने लुंड पर फिरने के बाद मैंने अपना हाँथ उनके हंट से हटा लिया और उनकी गांड पर रख दिया. कुछ देर उनकी गांड को सहलाता रहा. उसके बाद उनकी गांड को जोर से दबाया. उनकी चुकी को मसल दिया और उनकी क्लीवेज के पास दन्त से काट लिया. जिससे दीदी जोर से सीसकरते हुवे चिल्ला उठी.

सविता दी- AAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh mammyyyyyyyyyy hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyy बाआआअच्छह्ह्हह्हह्हआआआओ मममुझेई. हहहहहहहहहाआईईईई ाबबबबबबभीइइइइइइइ काहामीईनेई. ममममममममीएटीएडीइइइइइइइ जाहाआनंनं लललललेगा kkkkkkkkkkkyaaaa. ड़ड़ड़ड़ड़डीईईडीए सी नाही ड्डड्डड्डड्डाआबाएआ साआआक्ताआ क्याआआआ Kutttttttttttteeeeeeeeeeee काआआअआमिनीई.

और इतना बोलकर दीदी ने मेरे लुंड को जोर से दबा दिया. जिससे मैं चिल्ला उठा और मैंने दीदी से कहा.

मैं- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh अरे साली लुंड उखाड़ देगी क्या मेरा.

इतना बोलकर मैं दीदी की तरफ देखने लगा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-58

जब दीदी ने मेरे लुंड को तेज़ी से दबाया तो मैंने चिल्लाकर कहा.

मैं- aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh अरे साली लुंड को उखाड़ देगी क्या….

सरिता di-(Hanste हुवे) दर्द हुवा क्या अभी. मज़ा नहीं आया क्या.

मैं- इतनी जोर से दबती हो और पूछती हो की मज़ा नहीं आया क्या.

सविता दी- तू भी तो इतनी जोर से दबाता है तो मुझे मज़ा कैसे आएगा. बहुत दर्द देता है तू.

मैं- क्यों झूट बोलती हो दीदी अगर मज़ा नहीं आता आपको तो आपकी छूट पानी नहीं छोड़ती. ये देखो आपने मज़ा ले ले कर इतना पानी अपनी छूट से गिराया है की आपकी लेग्गी गीली हो गई है.

मेरी बात सुनकर सरिता दीदी ने शर्म से अपना चेहरा निचे कर लिया और हल्का हल्का शरमाते हुवे मुस्कुराने लगी. फिर मैंने अपना लाया हुवा गिफ्ट दीदी को देते हुवे कहा.

मैं- आपको याद है दीदी की मैं जब आपके साथ बाजार गया था तो एक गिफ्ट ख़रीदा था अपनी गिर्ल्फ्रेंड के लिए. और आपको बताया था की जब मैं उसे पता लूंगा तो मैं उसे ये गिफ्ट दूंगा. तो मैं ये गिफ्ट आपको दे रहा हूँ. क्योंकि मैंने ये गिफ्ट आपके लिए hi लिया था. अब आप इसको पहन कर मेरे पास आइयेगा.

सविता दी- (नखरा दिखते हुवे) मैं नहीं लुंगी ये गिफ्ट और मैं क्यों पहनूंगी इसे.

मैं- अरे दीदी आप इसको इसलिए पहनेगी क्यों की आपके भाई ने आपको ये गिफ्ट किया है.

सविता दी- अच्छा इतना कॉन्फिडेंस.

मैं- और नहीं तो क्या. मैं जनता हूँ अपनी दीदी को. मेरी दीदी इस समय बहुत गरम हो गई है. और मैं चाहता हूँ की आप अपनी गरम जवानी को इस कपडे में कैद करके रात में मेरे पास आये. ताकि मैं आपके इस गदरायी और छुडासी जवानी को रगड़ रगड़ अपने लुंड से छोड़ू और आपके इस गरम जवानी को ठंडा करू.

सविता दी- (शर्मा कर). कितनी गन्दी गन्दी बाते बोलता है तू अभी वो भी अपनी बहन के सामने.

मैं- इसमें गन्दा क्या है दी. जब बहन इतनी गदरायी हुई मस्त और चुड़क्कड़ माल हो तो गन्दी गन्दी बाते करनी पड़ती हैं.

सविता दी- (थोड़ा नाराज़गी के साथ) मैं कोई चुड़क्कड़ माल नहीं हूँ समझे.

Main-aachha ठीक है. गलती हो गयी मुझसे जो आपको चुड़क्कड़ मॉल बोल दिया. आप तो मेरी हॉट एंड सेक्सी मॉल हो न दीदी.

सविता di-(smile के साथ) अपनी बहन को सेक्सी बोल रहा है.

मैं- वो तो आप हो hi. दम्म सेक्सी. अच्छा अब मैं जा रहा हूँ. आप रत में ये कपडे पहनकर ऊपर आइयेगा. इसके निचे कुछ मत पहनना.

सविता दी- मैं नहीं आउंगी ऊपर.

मैं- मैं जनता हूँ दीदी की आप अपने भाई को निराश नहीं करोगी.

सविता दी- मैं नहीं आउंगी

मैं- देहेंगे.

सविता दी- देख लेना.

उसके बाद मैं अपने कमरे में आ गया और सो गया.

शाम को मैं उठा और हॉल में आकर पापा लोगो के साथ बातचीत करने लगा और t.v. देखने लगा. थोड़ी देर बाद सरिता दीदी हाल में आई और मुझसे बोली.

सरिता दी- तो चले अभी.

मैं- कहा चलना है वो भी इस समय

सरिता दी- अरे गाड़ी चलना सीखने के लिए. और कहा.

मैं- (मेरे मन में लड्डू फुट रहे थे लेकिन मैंने बहाना बनाया) मैं नहीं जाऊँगा सीखने.

सरिता दी- देखिये न पापा. ये मन कर रहा है.

पापा- अभी दीदी की बात माननी चाहिए. चलो जाओ एक अचे भाई की तरह रोज इसे सिखाओ.

मैं- ठीक है पापा. (दीदी को जीभ दिखाकर) चलो रानी साहिबा.

मेरी बात सुनकर सब हंस पड़े. मैं और सरिता दी बहार आये तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- तो दीदी ये बताओ पहले छोटे की सवारी करना चाहोगी या बड़े की.

सरिता दी- मतलब.

मैं- मतलब ये की पहले बाइक चलना सिखोगी या कार चलना.

सरिता दी- पहले कार चलना. क्योंकि उसमे से मैं गिरूँगी नहीं.

मैं- अच्छा ठीक है चलो फिर.

फिर सरिता दीदी और मैं कार में बैठकर एक मैदान की तरफ निकल गए. वो मैदान ज्यादा दूर नहीं था लेकिन उधर इक्का दुक्का लोग hi आते जाते थे लेकिन खतरे जैसी कोई बात नहीं थी उधर . जब हम मैदान में पहुंचे तो दीदी ने अपना दुपट्टा उतर कर कार की पिछली शीत पर फेक दिया. मैं तो बस दीदी को देखता hi रह गया. क्या माल बैंकर आई थी दीदी. चूँकि उन्होंने शॉल को दुपट्टे के रूप में उसे किया था तो घर किसी को पता नहीं चला की दीदी किस तरह अपने भाई के साथ कार सिखने जा रही हैं. लेकिन दुपट्टा हटाकर दीदी ने अपने हाहाकारी जिस्म को अपने भाई के सामने परोक्ष दिया.



मैं तो बस एकटक उन्हें hi देखता जा रहा था. दीदी ने एक एकदम फिटिंग की t-shirt वो भी डीप नैक पहनी हुई थी. उनकी हाहाकारी चूचिया t-shirt फाड़कर बहार आने को मचल रही थी. क्लीवेज से उनकी चूचियों की गहराई खूब नजर आ रही थी. 2 मिनट तक मुझे अपनी चूचियों का अचे से दीदार करवाने के बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- क्या देख रहा है अभी इतने ध्यान से.

मैं- पूछो मत दीदी. आप इतनी ज्यादा खूबसूरत हैं. मुझे तो पता hi नहीं था. यू अरे सो सो सो बेऔतीफुल्ल.

सरिता दीदी अपनी तारीफ सुनकर बहुत खुश हुई. उनके चेहरे पर एक कातिल मुस्कान आ गई. उन्होंने मुझसे कहा.

सरिता दी- मैं तो बचपन से hi खूबसूरत हूँ. तुमने आप तक देखा hi नहीं था.

मैं- कैसे देखता दी. आप ने कभी अपनी खूबसूरती मुझे दिखाई hi नहीं थी.

सरिता दी- आज से तो मैं शाम को तेरे साथ hi रहूंगी. तो तू रोज मेरी खूबसूरती देखना.

मैं- केवल शाम को hi मुझे अपनी ख़ूबसूरती दिखाएंगी. दिन में नहीं दिखाएंगी.

सरिता दी- नहीं मेरे प्यारे भाई. मैं तो तुझे हमेशा अपनी खूबसूरती दिखाउंगी.

मैं- थैंक्यू दीदी. मुझे अपनी खूबसूरती दिखने के लिए.

इसके बाद मैंने दीदी को एक हॉर्स तक गाड़ी सिखाता रहा. चूँकि दीदी को इसके पहले भी मैंने 15 दिन गाड़ी सिखाई थी. फिर किसी कारणवस दीदी ने मन कर दिया सिखने से. इसलिए मुझे आज दीदी को समझने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई. सबकुछ बताने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- अब आप ड्राइविंग शीट पर आइये और स्टेरिंग सम्भालिये मैं उस शीट पर आता हूँ.

सरिता दी- अरे पहले hi दिन मुझे वह बैठा रहे हो. आज रहने दो कल से बैठूंगी.

मैं- नहीं आप आइये यहाँ. और चलाइये.

उसके बाद दीदी उतर कर ड्राइविंग शीट पर आ गई और मैं बगल वाली शीट पर बैठ गया. फिर दीदी ने गाड़ी आगे बधाई. गाड़ी थोड़ा आगे जाने के बाद दीदी ने एक्सेलेटर ज्यादा दबा दिया. जिसके करना गाड़ी झटके से तेजी से आगे बढ़ने लगी ये देखकर दीदी ने जल्दी से ब्रेक मार दिया. जिसके कारन गाड़ी एकदम से रुक गई. जिससे दीदी सीधा स्टेरिंग पर झुक gai.aur मैं भी आगे की तरफ झुक gaya(dono ने शीट बेल्ट लगाई हुई थी) मैंने दीदी से कहा.

मैं- अरे दीदी इस तरह चलाएंगी तो कही लड़ भीड़ जाएंगी.

सरिता दी- मैंने कहा था की मैं कल चलाऊंगी लेकिन तुमने ज़िद की और अब देखो

मैं- कोई बात नहीं . चलो मैं आपकी हेल्प करता हूँ.

उसके बाद मैं ुकि शीट की तरफ खिसक गया और ड्राइविंग शीट पर अपने चुतर टीकाकार दीदी से सत्कार बैठ गया. जिसके कारन उनकी चूचिया बहुत नज़दीक से मेरी आँखों के सामने थी. मैं उनकी चूचियों को देखने लगा. जब मैं काफी देर उनकी चूचिया देखता रहा तो दीदी न कहा.

सरिता दी- अभी. तेरा ध्यान कहा है. अब ख्वाबो की दुनिया से बहार आ और मुझको कार चलना सीखा.

दीदी की बात सुनकर मैंने उनके चेहरे की तरफ देखा तो वो मुझे hi देख रही थी. फिर मैंने उनके एक्सेलेटर वाले पेअर पर अपने एक पेअर रख लिए. और एक पेअर बढाकर उन्होंने जो पर क्लुछ पर रख था उस पेअर पर रख दिया. मेरे पेअर को अपने पेअर पर महसूस करते hi दीदी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने भी उनकी आँखों में देखा और उनकी आँखों में देखते हुवे अपनी नज़र उनकी चूचियों पर टिका दी.

फिर मैंने अपना एक हाँथ उनके गियर वाले हाँथ पर रखा और एक हाँथ से हलके से स्टेरिंग को पकड़ लिया. जिससे मेरे कोहनी दीदी की चूचियों पर लग गई मैं लगातार दीदी की चूचियों को देख रहा था और दीदी मुझे. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.

सरिता दी- अगर देख लिया हो तो गाड़ी चलाये.

मैं- अभी नहीं देखा दीदी. चलो गाड़ी चलाइये.

सरिता दीदी- ठीक है और कल देख लेना.

उसके बाद दीदी ने गाड़ी आगे बधाई. मैं अपने पेअर से क्लुछ और एक्सीलेटर को दीदी के पेअर के ऊपर से संभल रहा था और गियर वाले हाँथ को दीदी के हाँथ पर दबा रहा था. जो हाँथ स्टेरिंग पर था उससे स्टेरिंग को मोड़ने पर मैं दीदी की चूचियों पर अपनी कोहनियो का दबाव जानबूझकर देता था. थोड़ी देर इसीतरह दीदी को हेल्प करने के बाद मैंने अपना पेअर एक्सीलेटर से हटा लिया.

एक्सीलेटर से अपना पेअर हटा लेने के कुछ देर बाद दीदी ने फिर से एक्सीलेटर बढ़ा दिया. उसके बाद ब्रेक मार दी जिससे कार तुरंत रुक गई. झटके से रुकने के करना दीदी का गियर वाला हाँथ फिसलकर मेरे लुंड पर आ गया मैंने भी इस मौके का फायदा उठाकर अपनी कोहनी को जोर से दीदी की चूचियों पर दबा दिया. दीदी के मुंह से एक चीख निकल गई…



सरिता दी- AAAAAAAaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मी.

आज का मेरा काम पूरा हो गया था. तो मैंने दीदी से घर चलने के लिए कहा और हम दोनों घर वापस आ गए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 59

घर आने के बाद थोड़ी देर बाद सबने खाना खाया. खाना खा कर मैं हाल में hi कुछ देर बैठा रहा. तभी सरिता दीदी मेरे पास आई और बोली.

सरिता दी- तू अभी तक यही बैठा है. सोना नहीं है क्या.

मैं- मुझे दूध पीना है आज.

सरिता दी- तू रुक मैं लती हूँ.

मैं- मैं ऊपर जा रहा हूँ. वही पर ले आइये.

इतना कहकर मैं अपने कमरे में चला गया. थोड़ी देर बाद जब सरिता दीदी दूध ले कर आई थो उन्होंने कपडे बदल लिए थे. इस समय उन्होंने बहुत hi सेक्सी ड्रेस पहनी हुई थी उन्होंने दुपट्टा भी नहीं लिया था. जिसका क्लीवेज बड़ा था. दीदी मेरे पास आकर मुझे झुक ार दूध देने लगी. उनके झुकने के कारन उनकी चूचिया अंदर तक मुझे दिखने लगी. मैं उनकी चूचियों को देखने लगा. थोड़ी देर तक अपनी चूचियों को दिखने के बाद दीदी ने कहा.



सरिता दी- दिखने में अचे हैं न.

Main-(unki चूचियों को देखते हुवे). बहुत अचे हैं दी.

सरिता दी- और मीठे भी बहुत हैं.

मैं- अब मीता हैं या नहीं. ये मुझे कैसे पता. जब आप पिलाओगी तभी तो पता चलेगा.

सरिता di-(Abhi भी झुकी हुई मुझे अपनी चूचिया दिखते हुवे) तो पि ले रोका किसने है. कब से हाँथ में गिलास लिए बैठा है.

मैं- लेकिन ये तो ताज़ा दूध नहीं है.

सरिता दी- अब ताज़ा दूध कहा से लौ तेरे लिए.

मैं- (उनकी चूचियों को देखकर उनकी आँखों में देखते हुवे) वो तो आपके पास hi है. आज तो मैं ये पि ले रहा हूँ लेकिन कल से मुझे ताज़ा और एकदम खालिस दूध चाहिए.

दीदी की चूचियों को देखकर मेरा लुंड भी लोअर में खड़ा हो गया था. मैंने दूध पि कर गिलास दीदी को न देखर अपने पैरो के पास फर्श पर रख दिया. दीदी मेरी आँखों में देखते हुवे और निचे झुककर गिलास उठाने लगी. झुकने के कारन उनकी चूचिया और भी अंदर तक दिखने लगी.



मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे चूचियों को देखने लगा. मेरा लैंड दीदी की चूचियों को देखकर एकदम टैंकर खड़ा हो गया. जिसका तम्बू लोअर के ऊपर से नजर आने लगा. दीदी ने जब गिलास उठाने के लिए अपनी नज़र निचे की तो उनकी नज़र सीधे मेरे लोअर के तम्बू पर पड़ी. तो वो झुकी झुकी वही पर रुक गई.

मेरा लुंड बिच बिच में एक दो झटके भी मार रहा था.



फिर दीदी ने नज़र उठाकर मेरी तरफ देखा और मुझे अपनी चूचिया देखता पाकर वो फिर से मेरे लुंड को देखने लगी. मेरे लुंड और दीदी के मुंह के बिच बस 1 फिट की दुरी थी. लुंड को देखकर दीदी की साँस भी तेज़ चलने लगी. थोड़ी देर चूचियों को देकने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी अब सीधी हो जाओ कब तक ऐसे झुकी रहोगी. आपकी कमर दर्द करने लगेगी. आगे चलकर आपको ऐसे कई बार झुकना पड़ेगा.

मेरी बात सुनकर दीदी झटके में कड़ी हो गई और मुझसे कहा.

सरिता दीदी- कई बार झुकना पड़ेगा. तेरा मतलब क्या है.

मैं- अरे दीदी अब मेरा सारा काम करने की जिम्मे दरी आप ने ले ली है. तो सब काम बैठ कर तो कर नहीं सकती आप. मेरा कुछ काम करने के लिए आपको झुकना पड़ेगा. यही बोल रहा था मैं.

सरिता दी- हाँ तू सही कह रहा है. अच्छा अब मैं चलती हूँ. गुड नाईट.

इतना बोलकर सरिता दीदी. निचे चली गई 10 मिनट बाद मीरा वाली ईद पर उन्होंने मश्ग किया.

सरिता दी- ही.

M-Hii कैसी हो.

सरिता दी- मैं ठीक हूँ तुम कैसी हो.

म- मैं भी ठीक हूँ. और बताओ क्या प्रोग्रेस है.

सरिता di-(khushi से) हाँ वही बताने के लिए तो आपसे बात कर रही हूँ.

म- अरे वाह बड़ी खुश हो आज. कही तुम्हारे भाई ने तुम्हे पटक कर पेल तो नहीं दिया.

सरिता दी- अरे यार अपनी बकबक बाद में कर लेना पहले पूरी बात तो सु लो.

म- अच्छा बताओ फिर.

सरिता दी- तुम्हे पता है अभी तो मुझपर फुल इंटरेस्टेड है.

म- अच्छा पूरी बात क्या है बताओ.

सरिता दी- अरे यार आज मैंने उसे सडके करने के लिए जब भी उसके पास जाती तो बड़े गले का कपडा पहन कर जाती. वो तो बस जब भी मौका मिलता मेरी इनको hi देखता रहता. और तो और मेरी इनको देख कर बोल रहा था की मुझे ताज़ा दूध पीना है.

और इसके बाद दीदी ने साडी बाते मीरा को यानि मुझे बता दी जो आज दिन भर में उनके और मेरे बिच में हुवा था.

म- अरे वाह ये तो बहुत अच्छा हुवा. और ये इनको इनको क्या लगा रख है. इसे चुकी कहते हैं. भाई का लुंड लेने के लिए मरी जा रही है. और चुकी को इनको इनको बोल रही है. ओह्ह सॉरी यार लैंग्वेज थोड़ा…

सरिता दी- अच्छा मेरी माँ. मेरी चुकी को देख कर कह रहा था अभी. अब खुश. अरे कोई बात नहीं तुम मेरी दोस्त हो तो तुम मुझे तू या तुम कहकर बात कर सकती हो.

म- मतलब की तुम्हारा काम बहुत तेज़ी से हो रहा है. बहुत जल्दी तुम्हारे भाई का लुंड तुम्हारी छूट में होगा. अभी ते तेल लगाकर अपनी छूट को तैयार कल लो, बहुत जल्दी तुम्हारी छूट में लुंड जाने वह है.

सरिता दी- क्या यार. तुम भी न फिर से शुरू हो गई. जाओ मैं बात नहीं करती.

म- देखो देखो. कैसे नखरे दिखा रही है. अच्छा चल नहीं कहती कुछ अब.

सरिता दी- अब आगे क्या करना है वो बताओ.

म- बस जो जैसा चल रहा है वैसे hi चलने दो बस थोड़ा और ज्यादा अपनी चूचियों को अपने भाई को दिखाओ और जितना हो सके उसके शरीर से अपने शरीर को टच करवाओ. फिर देखो क्या होता है.

सरिता दी- एक बात तो मैं बताना भूल hi गई. आपने जो कहानी भेजी थी. उसे पढ़ने के लिए मैंने अभी का लैपटॉप लिया था तो उसमे उसने एक फोल्डर बनाया था. मेरी प्यारी bahan.to मैंने सोचा की मेरा भाई हम बहनो से कितना प्यार करता है. उनकी फोटो अपने पास रखता है वो भी उनके नाम के फोल्डर में. लेकिन जब मैंने उस फोल्डर को ओपन किया तो मैं चौक गई.

म- अरे ऐसा क्या था उस फोल्डर में जो तुम चौक गई.

सरिता दी- अरे यार वो बहुत hi गन्दा फोल्डर था. उसमे बहुत सी सेक्सी कहानिया थी.

म- तो क्या हुवा. उसकी उम्र हो गई है . तो पढता होगा सेक्सी कहानिया.

सरिता दी- अरे तुम समझी नहीं. उसमे साडी कहानिया भाई बहन की चूड……… वाली थी.

म- अरे वाह क्या बात है. वैसे एक बात तो है. तुम्हारा भाई वाकई तुम बहनो से बहुत प्यार करता है. तभी तो उसने फोल्डर का नाम भी मेरी प्यारी बहन रखा. इसका मतलब जानती हो. वो तुम बहनो को छोड़ना चाहता है.

सरिता दी- अच्छा अच्छा. अब अपनी बकवास बंद कर. बहुत बोलने लगी हो तुम.

म- सच hi तो कह रही हूँ. बहन के नाम के फोल्डर में भाई बहन की चुदाई की कहानी. वो तो तुम बहनो को चढ़ना चाहता है. बहुत hi जल्दी वो तुमको छोड़ भी देगा.

सरिता दी- अच्छा तुझे बहुत पता है इन सब का. अच्छा अब फ़ोन रखती हूँ. कल फिर बात करुँगी.

उसके बाद सयरता दीदी ने फ़ोन रख दिया और मैं सोचने लगा की दीदी ने फोल्डर की साडी कहानी पढ़ ली. तभी तो उनकी छूट में बहुत आग लगी है. कुछ दिन बाद तो तुझे मैं छोड़ हो दूंगा सरिता. कुछ देर तक सरिता दीदी के बारे में सोचने के बाद मैंने अपने दिमाग को झटका और अभी जो छूट मिलने वाली थी उसके बारे में सोचने लगा.

काफी देर इंतज़ार करने के बाद जब सविता दीदी नहीं आई तो मुझे बहुत गुस्सा आया. मैंने उन्हें मश्ग किया की कहा है तो उनका कोई रपल्य नहीं आया. तो मैंने मोबाइल साइड में रखा और सोने की कोशिश करने लगा.

अभी मुझे हलकी हलकी नींद आई थी की तभी कोई मुझे जगा रहा था. जब मैंने आँख खोल कर देखा तो वो सविता दीदी थी. मैं उठकर बैठ गया. और जब उन्हें ध्यान से देखा तो वो मेरे दिए हुवे कपड़ो में नहीं थी. उनकी शरीर पर उस समय लबेदा टाइप कुछ पहना हुवा था. मुझे ये देखकर और ज्यादा गुस्सा आया की एक तो इतनी लेट आई हैं और ऊपर से मेरा गिफ्ट भी पहनकर नहीं आई हैं तो मैंने थोड़ी नाराज़गी दिकहि और उनसे बोलै.

मैं- अब क्यों आई हो यहाँ पर. जाओ मुझे नींद लग रही है.

सविता दीदी- अरे अभी वो बाबू सो नहीं रही थी तो उसे सुलाने में देर हो गई.

मैं- चलो ठीक है वो तो समझ में आता है की आप बेबी की वजह से लेट आई हैं लेकिन मैंने और भी कुछ कहा था आपसे.

सविता दी- और क्या कहा था. तूने बोलै था आने के लिए. देख आ गई मैं.

मैं- (नाराज़गी से) अच्छा आप जाइये .मुझे सोना है.

सविता दी- लगता है मेरा भाई मुझसे नाराज़ हो गया है.

मैं- मैं नाराज़ नहीं हूँ. बल्कि मुझे नींद आ रही है.

सविता दी- अच्छा तुम्हारी नींद मैं चुटकी बजाकर दूर कर देती हूँ.

इतना बोलकर दीदी ने अपने जिस्म पर डाला हुवा लबेदा हटा दिया. लबेदा जिस्म से हटते hi मेरी आँखे बड़ी बड़ी हो गई. मेरा मुंह एकदम खुल गया. लोअर में लुंड ने एक झटका मारा तो मैंने अपना एक हाँथ अपने लुंड पर रख दिया और मेरे मुंह से एक आवाज़ निकली



मैं- क्या लग रही हो दीदी. बोले तो एकदम चुड़क्कड़ मॉल.



इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-60

जब दीदी ने अपने शरीर से अपना लबेदा उतारा तो उन्हें देखकर मेरे मुंह से निकल गया.

मैं- क्या लग रही हो दीदी. एकदम चुड़क्कड़ मॉल.

मेरी बात सुनकर दीदी ने पहले मेरी और घूर कर देखा फिर उनके चेहरे पर मुस्कान आ गयी. उन्होंने धीरे से कहा.

सविता दी- बस इतना hi. वो तो तू वैसे भी बोलता रहता है.

मैं अपने बिस्टेर से उठकर उनके पास आकर खड़ा हो गया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी भी मेरी आँखों में देख रही थी. कुछ देर उनकी आँखों में देखने के बाद मैंने उनके चारो तरफ गोल गोल चक्कर लगाकर उनके शरीर का मुआयना करने लगा. मैंने दीदी को जो कपडा दिया था वह ट्रंसपानेन्ट्स था. और वही कपडा दीदी पहनकर आई थी. दीदी ने ऊपर ब्रा नहीं पहनी थी लेकिन निचे उन्होंने पंतय पहन राखी थी ब्रा न पहनने के कारन दीदी की रसभरी बड़ी बड़ी चूचिया एकदन नंगी दिख रही थी. मैंने ये गिफ्ट इसीलिए लिया था. क्योंकि इसको पहनना और न पहनना दोनों बराबर होता है.



मेरा तो लुंड दीदी को इस रूप में देखकर hi लोअर फाड़कर बहार आने को मचलने लगा. थोड़ी देर उनके पुरे शरीर का मुआयना करने के बाद मैंने दीदी की आँखों में आँखे डालकर कहा.

मैं- आप क्या लग रही हैं मैं आपको कैसे बताऊ. आप नाराज़ बहुत जल्दी हो जाती हैं.

सविता दी- मैं नाराज़ नहीं होउंगी. आज तू मेरी खुलकर तारीफ कर सकता है.

मैं- आज आप एकदम रंडी लग रही हैं. जो ऐसे कपडे पहनकर अपने ग्राहकों को रिझाती है छुड़वाने के लिए.



सविता di-(mujhe आँखे दिखाकर). तू कभी मेरी अच्छी लैंग्वेज में तारीफ नहीं कर सकता क्या. हर समय उलटी सीधी तारीफ करता है.

मैं- तो मैं कौन सा किसी और के सामने आपकी तारीफ कर रहा हूँ मैं तो आपके सामने hi आपकी तारीफ कर रहा हूँ. क्योंकि आप मुझे ऐसी hi लग रही हैं.

सविता दी- लेकिन तू मेरी तारीफ ठीक से किया कर अच्छी लैंग्वेज में. ये गंदे लैंग्वेज मुझे अच्छा नहीं लगता.

मैं- अगर आपको मेरे साथ रहना है तो इस गन्दी लैंग्वेज की आदत डालनी होगी आपको. क्योंकि मुझे चुदाई के समय गन्दी लैंग्वेज hi पसंद है.

सविता दी- अब तू मुझसे मार खायेगा अभी.

मैं- लेकिन मैं अभी आपसे नाराज़ हूँ.

सविता दी- मैंने तेरी ख़ुशी के लिए ये सब किया और तू अभी भी मुझसे नाराज़ है.

मैं- मैं इसलिए आपसे नाराज़ हूँ क्योंकि मैंने आपके अंदर कुछ भी न पहनने के लिए कहा था लेकिन आपने अंदर पंतय पहनी है.

इतना कहकर मैंने झूठी नाराज़गी दिखते हुवे उनकी तरफ पीठ कर के खड़ा हो गया. दीदी ने देखा की मैं उनसे नाराज़ हूँ तो वो मेरे पास आई और मेरे कंधे पर हाँथ रख कर कहा.

सविता दी- अभी तू नाराज़ न हो मेरे भाई. तू समझने की कोशिश kar.mujhe बहुत शर्म आ रही थी इसलिए मैंने पंतय पहन ली.

मैं- लेकिन मैंने तो आपको मन किया था अंदर कुछ भी पहनने के लिए. फिर भी.

सविता दी- अभी तू चाहता क्या है. मैं तेरी बहन हूँ. और मैं तेरी तरह इतनी बेशर्म नहीं हूँ की पुरे घर में ऐसे कपडे पहन कर घुमु. वो तो तूने मेरे लिए इतने प्यार से लाया था ये गिफ्ट. इसलिए मैंने पहन लिया. लेकिन तू खुश होने की जगह नाराज हो रहा है. ठीक है तू नैरा रह मैं जा रही हूँ निचे.

जैसे hi दीदी ये कहकर जाने लगी मैंने दीदी का हाँथ पकड़ लिया और एक झटके में अपनी तरफ खींच लिया. जिससे दीदी मेरी बहो में आ गयी और उनकी लगभग नंगी रसीली चूचिया सीधे आकर मेरी साइन से टकराई. तो हम दोनों के मुंह से aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh निकल गई.



मेरी बहो में आकर दीदी शर्म से अपना सर निचे झुका लिया. मैंने दीदी की चिक हो पकड़कर उनका सर ऊपर किया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आंको में इस वक्त सिर्फ प्यास hi प्यास थी. कुछ देर उनकी आँखों में देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- अरे मेरी प्यारी सेक्सी एंड हॉट दीदी. आप तो मुझसे नाराज़ हो गई. सॉरी माफ़ कर दीजिये अपने इस कमीने भाई को.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गई कुछ देर तक दीदी की आँखों में देखने के बाद मैंने उनके माथे को किश कर लिया और दीदी से बोलै.

मैं- दीदी मैं आपसे कभी नाराज़ नहीं हो सकता. मैं अपनी दीदी से बहुत प्यार करता हूँ. मैं तुम्हे वो हर ख़ुशी देना चाहता हूँ. जिसके लिए अभी तक तुम तरस रही हो.

सविता दी- मैं किसी ख़ुशी के लिए नहीं तरस रही hoon.main तो बहुत खुश हूँ.

मैं- (उनके गाल को चूमकर) वो तो आपकी आँखों में देखकर hi पता चल जाता है की आप कितनी खुश हो. मैं वही ख़ुशी आपको देना चाहता हूँ जो जीजा जी ने आज तक आपको नहीं दी.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी में मेरी आँखों में देखा. लेकिन कहा कुछ नहीं. कुछ देर उनकी आँखों में देखते हुवे मैंने अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिया और किश करने लगा. मेरे किश करने से दीदी की धड़कन बढ़ने लगी. मैं दीदी को किश करते हुवे अपने हाँथ उनकी पीठ पर रख दिया और सहलाने लगा. कुछ देर तक तो दीदी ने कोई रिस्पांस नहीं किया फिर वो भी किश में मेरा साथ देना लगी और मेरे मेरी गार्डन पर अपनी बहे दाल दी. हम दोनों पसनते किश में डूब गए. किश करते हुवे मैं लगातार दीदी की पीठ को सहला रहा था लगभग 5 मिनट तक हम दोनों किश करते रहे. फिर मैंने अपना होठ उनके होंठो से हटाकर उनकी आँखों में देखते हुवे पूछा.



मैं- दीदी तुमको कैसा लग रहा hai(main अब दीदी को तुम कहने लगा था)

सविता दी- (शरमाते हुवे) अब तू मुझको आप से तुम कहने लगा (मेरी बातो को बदलते हुवे.)

मैं- आपको बुरा लगा क्या दीदी.

सविता दी- नहीं तू मुझे कुछ भी कह सकता है.

मैं- कुछ भी दीदी. सोच लो.

सविता di-(mere कंडे पर मरती हुवी.) अभी तू न किसी दिन मार खायेगा मुझसे.

मैं- तुम तो मुझको किसी दिन मरोगी लेकिन मैं तो आज hi तुम्हारी मरूंगा.

इतना कहकर मैंने फिर से अपने होंठ दीदी के होंठो पर चिपका दिए और किश करने लगा दीदी ने अभी भी अपनी बांहे मेरी गार्डन पर डाली हुई थी. मेरे दोनों हाँथ दी की पीठ पर अभी भी चल रहे थे. कुछ देर बाद मैंने उनके होंठो पर अपनी जीभ फिरने लगा. और जीभ से दीदी के होंठो पर दबाव देने लगा. थोड़ी देर जीभ फेरने के बाद दीदी ने अपने मुंह हल्का सा खोला तो मैंने अपनी जीभ उनकी मुंह के अंदर सरका दी और उनके मुंह में चारो तरफ घूमने लगा. मैंने अपने हाँथ को उनकी पीठ से सरकते हुवे निचे ले जाकर उनकी कातिल गांड पर रख दिया और दबाने लगा.

दीदी की सांसे भरी होने लगी. उनकी चूचिया हर साँस के साथ ऊपर निचे होने लगी जो मेरे साइन पर रगड़ खा रही थी. कुछ देर बाद दीदी ने रिस्पांस दिया और मेरी जीभ को चूसने लगी. मेरी तो मज़े में आँखे बंद हो गई. मैं उनकी गांड को मुठी में भर कर जोर जोर से दबा रहा था. मच देर बाद दीदी ने खींच खींच कर मेरी जीभ को चूसना चालू कर दिया. मैंने भी अपने हांथो से जोर जोर से दीदी की गांड को दबाने लगा. दीदी के मुंह से सिसकारी की रूप में सिर्फ gggggggggggggguuuuuuuuuuuuuuuuu gggggggggggguuuuuuuuuuuuuuuuu की hi आवाज़ आ रही थी.



थोड़ी देर बाद दीदी मेरी जीभ को दबाव देखर अपने मुंह से बहार निकल दिया और अपनी जीभ से मेरे होंठो को चाटने लगी. जब वो मेरे होंठो को चाट रही थी तो मैंने उनकी गांड को मुठी में भरा और कसकर मसल दिया जिससे दीदी के मुंह से सिसकारी निकल गई.

सविता दी- AAAAAAAaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh Aabhiiiiiiiiii द्वीीीेरे म्मीीीेरररररररे bbbbhaaaaaaaaaaaaiiiiii hhhhhhhhhhhhheeeeeeeyyyyyyyyyy डरडडडडडडड होऊता हैईईई.

इतना बोलकर दीदी ने फिर से मेरे होंठो को चेतना सुरु कर दिया होंठ चाटते चाटते मेरे मुंह में अपनी जीभ दाल दी. मैंने तो जैसे दीदी की जीभ पर टूट पड़ा और पूरी ताकत से उनकी जीभ को चूसने लगा. दीदी के मुंह से हलकी हलकी सिसकी निकल रही थी मेरा लैंड अबतक एकदम कड़ा होकर उनके जांघो के बिछ ठोकर मर रहा था. लगभग 10 मिनट तक उनकी जीभ को चुस्त रहा. जब हम दोनों की सांसे उखाड़ने लगी तो मैंने एक बार फिर दीदी की गांड को डोर से बाबा दिया. अपनी कमर को आगे की तरफ एक धक्का दिया और उनकी जीभ को अपने मुंह से निकल दिया. दीदी के मुंह से एक बार फिर आनंद दायक सिसकी निकल गई.



सविता di-AAAAAAAAaaaaaahhhhhhhhhhhhh MMMMaaaaaaaaaaaammmmmmmmmyyyyyyyyyyyy. Ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhh धीरीईईए मीटीईडीएएएएएएए bhaaaaaaaaaaiiiiiii tttttuuumaaaaaaaaaaahrrrrrri डीडीई कोऊ डरडडडडडड होताआ हैईईई. Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh अब्बब्बबबबबभीइइइइइ.

मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे पूछा.

मैं- क्यों दीदी अच्छा नहीं लग रहा है क्या.

दीदी ने मेरी बात का जवाब दिया बिना मेरी देखते हुवे मेरे चेहरे को किश करना शुरू कर दिया. किश करते हुवे दीदी निचे आने लगी. दीदी मेरी गार्डन पर किश करने लगी. और किश करते हुवे मेरी t-shirt को निचे से पकड़ कर ऊपर उठाने लगी. मैंने भी अपना हाँथ ऊपर कर लिया. दीदी ने मेरी t-shirt उतारकर निचे फेक दी और अपनी नशीली आँखों से मेरी आँखों में देखते हुवे मेरे साइन पर हाँथ फिरने लगी. और कहा.

सविता दी- क्या बात है अभी. बहुत डोले शोले बना रखे हैं तुमने. जिससे तुम्हारी शादी होगी उन्स्की तो मौज हो जाएगी.

मैं- दीदी डोले शोले तो जीजा के भी हैं. लेकिन तुमको देखकर लगता नहीं की आपकी मौज़ है.

सविता दी- (थोड़ा उदास होकर)- हाँ अभी तू सही कह रहा है. उनके बस डोले शोले hi देख लो. बाकि तो बस………

मैं- सिर्फ डोले शोले से कुछ नहीं होता दीदी. जिसके हथियार में ताकत होती है उसकी बीबी उससे खुश रहती है. और तुमने अपनी बात पूरी नहीं की.

सरिता दी- वो सब तू छोड़. तू किस हथियार की बात कर रहा है.

मैं- (अपने लुंड की तरफ इशारा करके लुंड को सहला कर). मैं इसकी बात कर रहा हूँ. इसमें ताकत होनी चाहिए डोले सोले में कुछ नहीं रखा.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्माकर अपना सर दूसरी तरफ कर लिया और मुस्कुराने लगी. फिर मैंने दीदी का चेहरा पकड़ कर अपनी तरफ किया और उनकी नशीली आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- तुम बिलकुल भी चिंता मत करो दीदी. जीजाजी के हथियार में ताकत नहीं है तो क्या हुवा. तुम्हारे भाई के हथियार में बहुत ताकत है ये आपको पूरी तरह खुश रखेगा.

सरिता didi-(sharmakar) बड़ा आया मुझे खुश रखने वाला. बड़ा गुमान है तुझे अपने हथियार पर. पता चला सही मौके पर धोका दे दिया.

मैं- ये गुमान नहीं है दीदी. इसकी ताकत के बार में जाकर नताशा से पूछो. वो आपको बताएगी इसकी ताकत. मैं उसको बहुत रगड़ रगड़ कर घंटो तक छोड़ता था. तभी तो वो मेरी गुलाम बन गई थी. जो मैं बोलता था वही करती थी वो. तुम चींथ मत करो दीदी. एक बार मैंने आपको रगड़ कर छोड़ दिया तो तुमको भी मेरे हथियार की ताकत पता चल जाएगी. और तुम भी मेरी गुलाम बन जाओगी. और मुझसे छोड़ने के लिए रोज तड़पती रहोगी.



सविता दी- छियईईई अभी तू कितने गन्दी बाटे करता है. मैं बहन हूँ तेरी.

मैं- नहीं अब तुम मेरी गिर्ल्फ्रेंड हो. मेरी चुड़क्कड़ मॉल हो.

मेरी ये बात सुनकर दीदी ने घूर कर मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-61

मैं- ये गुमान नहीं है दीदी. इसकी ताकत के बार में जाकर नताशा से पूछो. वो आपको बताएगी इसकी ताकत. मैं उसको बहुत रगड़ रगड़ कर घंटो तक छोड़ता था. तभी तो वो मेरी गुलाम बन गई थी. जो मैं बोलता था वही करती थी वो. तुम चींथ मत करो दीदी. एक बार मैंने आपको रगड़ कर छोड़ दिया तो तुमको भी मेरे हथियार की ताकत पता चल जाएगी. और तुम भी मेरी गुलाम बन जाओगी. और मुझसे छोड़ने के लिए रोज तड़पती रहोगी.

सविता दी- छियईईई अभी तू कितने गन्दी बाटे करता है. मैं बहन हूँ तेरी.

मैं- नहीं अब तुम मेरी गिर्ल्फ्रेंड हो. मेरी चुड़क्कड़ मॉल हो.

मेरी ये बात सुनकर दीदी ने घूर कर मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी.

अब आगे

इतना कहकर मैंने फिर से दीदी को अपनी बहो में भर लिया. मैंने दीदी की पीठ सहलाने लगा और दीदी मेरे साइन पर हाँथ फेरने लगी. कुछ देर मेरे साइन पर हाँथ फेरने के बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखा और झुककर मेरे साइन पर चुम्बन लेने लगी. दीदी के ऐसा करने से मेरे शरीर में झुरझुरी सी दौड़ गई. मेरा शरीर कैंप गया और इसका सीधा असर मेरे लुंड पर हुआ वह लोअर में hi घटके मरने लगा. दीदी मेरे नंगे साइन को कभी चुम रही थी तो कभी जीभ निकल कर छत रही थी. थोड़ी देर मेरे साइन को चाटने के बाद दीदी ने मेरे निप्पल पर जीभ फिरने लगी और मेरे हाँथ से मेरे पेट को सहलाने लगी. थोड़ी देर बाद जीभ फिरने के बाद दीदी ने मेरे निप्पल को मुंह में लेकर दन्त काट लिया. मेरे मुंह से आनंद और मस्ती में दूभि शिस्कारि निकल गई.

मैं- AAAAAAAAAAAAAAAAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh hhhhhhhhhhyyyyyyyyyyyyeeeeeeee दीदी….

सरिता didi-(mere आँखों में देखते हुवे) मज़ा आया अभी.

मैंने दीदी के सवाल पर हाँ में गार्डन हिला दी. दीदी फिर से मेरे साइन को चाहते लगी. चूमने लगी. कुछ देर बाद दीदी मेरे नंगे जिस्म को चूमते चूमते पीछे की तरफ चली गई और मुझसे चिपक कर मेरी गले में बांह दाल दी. जिससे उनकी चूचिया मेरी पीठ पर धंस गई. उनकी चूचियों को अपनी पीठ पर महसूस करके मेरी सिसकी निकल gai.didi अब पूरी बेशरम बैंकर अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ने लगी और अपने होंठो से मेरी गार्डन पर किश करने लगी. थोड़ी देर किश करने के बाद दीदी मेरी गार्डन को चाटने लगी. गार्डन चाटते चाटते दीदी ने एकाएक मेरे कंधे को अपने मुंह में भरा और दन्त गदा दिया. मेरे मुंह से चीख निकल गई.

मैं- अरे साआल्ली जान लेने का इरादा है क्या. धीरे नहीं कर सकती क्या.

सविता दी- दर्द हो रहा है क्या.

मैं- नहीं मज़ा आ रहा है.

इतना बोलकर मैं पलट गया और दीदी को पलटकर उनकी पीठ से चिपक कर खड़ा हो गया. मेरा लुंड सीधी दीदी की गांड पर ठोकर मरने लगा. मैंने दीदी के पीछे खड़े होकर उनके चेहरे को पीछे किया और किश करने लगा दीदी ने भी अपने हाँथ मेरी गर्दन में दाल लिए और किश में मेरा साथ देने लगी. हम दोनों कभी किश करते तो कभी एक दूसरे की जीभ चाटते.



तो कभी एक दूसरे के चेहरे को चाटने लगते. थोड़ी देर ऐसा करने के बाद मैंने दीदी को फोरस्फुल्ली किश करना शुरू कर दिया और अपने एक हाँथ से उनकी चुकी पर रखकर दबाने लगा. थोड़ी देर मैं दीदी की चुकी दबाता रहा. फिर मैंने दूसरे हाँथ को भी उनके चेहरे से हटाकर उनकी चुकी पर रख diya.thodi देर उनकी चुकी धीरे धीरे दबाने के बाद मैंने उनकी दोनों चूचियों को मुट्ठी ने भर कर पूरी ताकत से मसल दिया. दीदी के मुंह से एक आनंद और मस्ती से भरी चीख निकल गई.

सविता di-haaaaaaaaaaaaaaaaeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyy राममममममममम. Mmmmmmmaaaaaaaaaarrrrr डायलाहा रईईए. थूऊऊड्ड्ढडा ड्ढडयरीबीएई बाआआबा कामिन्न्नने. मममममेररररी जाआनंनंन्न लेगाआआ kyaaaaaaaaaaa.

मैंने फिर दीदी को उनकी गार्डन पर किश करने लगा और उनकी चूचियों को दबाने लगा. चुकी को दबाते दबाते मैंने अपने हन्हो को ऊपर करना शुरू किया और उनकी गार्डन के पार उनके कपडे में फसा दिया. और उनकी गार्डन को चूमते हुवे उनके कपडे को पूरी ताकत से खींच दिया और एक chhhhhhhhhaaaaarrrrrrrrrrrrr की आवाज़ के साथ दीदी का कपडा फटते चला गया. और मैंने दीदी के कपडे को उछाल कर दूर फेक दिया. दीदी तुरंत पलट कर मेरी तरफ हुई और मुझे देखते हुवे बोली.



सविता दी- ये क्या किया अभी. अपने गिफ्ट को क्यों फाड़ दिया.

मैं- अरे दीदी तुम्हारी इस मदमस्त और कातिल जवानी के सामने इस गिफ्ट की कोई वैल्यू नहीं है. तुम्हारी इस गदराई जवानी का रास पिने के लिए तो मैं ऐसे कई गिफ्ट फाड़ सकता हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्माने लगी और अपना सर निचे करके मुस्कुराते हुवे मेरे लुंड को देखते हुवे कहा.

सविता दी- उसके लिए तो तू कपडे उतर सकता था इसे फाड़ने की क्या जरुरत थी.

मैं- मैं तुम्हारा ये कपडा फाड़कर तुम्हे ये बताना चाहता था की बहुत hi जल्द तुम्हारी छूट को भी मैं अपने लुंड से इसी तरह से फाड़ूंगा.

मेरे बात सुनकर दीदी बुरी तरह शर्मा गई और अपने सर को मेरे साइन में छुपा लिया. दीदी का शरीर थार थार काँप रहा था. उनकी सांसे बहुत तेज़ चल रही थी.

कुछ देर बाद मैंने दीदी को अपने साइन से हटाकर अपने आगे खड़ा कर दिया और उनकी जवानी को देखने लगा. दीदी आज पहली बार मेरे सामने सिर्फ पंतय में थी. ऊपर से दीदी एकदम नंगी थी. उनकी चूचियों को देखकर मेरे मुंह में पानी आ गया. इतनी बड़ी बड़ी चुकी वो भी एकदम तानी हुई. उनकी चुकी में तनिक भी लोच नहीं था. बिना ब्रा के भी दीदी की चूचिया एक डैम भले की तरह तानी हुई थी. जब मुझसे बर्दास्त नहीं हुवा तो मैं दीदी की चूचियों पर टूट पड़ा और उनके निप्पल को मुंह में भरकर पिने लगा.



दीदी भी अब पूरी तरह गरम हो गई थी उनके मुंह से आअह्ह्ह्हह आआह्ह्ह्हह्ह आआअह्हह्ह्ह्हह आआआहहहहहहह की आवाज़ निकल रही थी. दीदी ने मेरे सर पर अपना हाँथ रखकर अपनी चूचियों पर दबाने लगी. मैं एक चुकी को मुंह में भरकर चूस रहा था और एक चुकी को हाँथ से दबा रहा था. एक चुकी चूसने के बाद मैंने दूसरी चुकी को मुंह में भर कर चूसने लगा और पहली वाली चुकी को दबाने लगा. दीदी के मुंह से लगातार सिसकी निकल रही थी और वो बड़बड़ा रही थी.

सावित दी- aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाआभहहहहहहयई. ईई क्याआआआआ करररररररर डीईया हीी तुममममममनटीई aaaaaapppppppppppnniiiiiiii ड़ड़ड़ड़ड़ड़डीईईडीईईई कीइइइइइइ ड़ड़ड़ड़ूऊऊओढठ्ठ पीईईई राआहाआआ haaaaaaaaaaai. पप्पिइइइइइइ जायआ भाआआई पपी जाआआ बबबबबाआआआआहूयत राछस बबहार हाऐ ीीइसआएमएईए पपपपपपूरररररा कहाआआअली काआआअररर डीएई.

मैं- (उनकी चुकी से मुंह हटाकर) हां दीदी मैं आज आपकी इन रसभरी चूचियों को पूरा निचोड़ लूंगा. पूरा रास पि जाउगा इसका.

सरिता दी- हआ भाई पि ले मेरी छःहःहूछठ्ठियो ककककका पूरा रसससस.

उसके बाद मैंने दीदी की चूचियों को पिटे हुवे एक हाँथ बढाकर उनकी छूट पर पंतय के ऊपर से रख दिया और दीदी की छूट को सहलाने लगा. मेरा हाँथ छूट पर महसूस करते hi दीदी के शरीर ने एक झटका khaya.aur उनके मुंह से ssssssssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhiiiiiiiiiiiiiiiiii की आवाज़ निकल gai.main दीदी की चूचियों को पि रहा था. एक हाँथ से एक चुकी को दबा रहा था और एक हाँथ से उनकी छूट को सहला रहा था. फिर मैंने अपना हाँथ दीदी की पंतय के अंदर दाल दिया और नंगी छूट पैर हाँथ फेरा.



दीदी इतनी ज्यादा गरम हो गई थी की उनकी पूरी छूट और पंतय काम रास से भीग गई थी. कुछ देर तक मैं उनकी छूट को सहलाता हरा फिर मैंने दीदी की छूट के छेड़ पर अपनी ऊँगली रख दी और मसलने लगा. कुछ देर मसलने के बाद मैंने एक उन्गलो दीदी की छूट में घुसा दी. एक हाँथ के ऊँगली और अंगूठे से उनकी चुकी को घुंडी माँ मसाला और उनकी एक चुकी को दन्त काट लिया, मैंने तीनो हमले एक साथ किये. जिससे दीदी का शरीर मचल गया और एक जोरदार मादक सिसकी दीदी के मुंह से निकल गई.

सविता di-hhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyy. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh mmmmmaaaaaaaaaaaaammmmmmmmmmmyyyyyyyyy. Mmmmmmmmaaaaaaarrrrrrrrrrrr dddddddddddallllllllllaaaaaaaaaa आआआआपक्ककककककककीीीीे बीईईतटती नेईईईई. Bbbaccccccchaaaaaaaaaaoooooo मममममममममूउउउउझह्ह्ह्हह्हे.

मैं- अभी कहा मार डाला दीदी. अभी तो मैंने कुछ किया भी नहीं. उसके बाद भी इतना चिल्ला रही हो. जब में अपने लुंड से आपको पिऊंगा तब आपका क्या हाल होगा.

सविता दी- चल हैट बेशरम. बड़ा आया पेलने वाला.

उसके बाद मैंने दीदी को घुमाकर अपने आगे खड़ा कर लिया और उनसे सत्कार खड़ा हो गया. मैंने अपने होंठ दीदी के गार्डन पर रखकर उन्हें किश करने लगा. एक हाँथ से मैंने दीदी की चुकी को पकड़कर मसलने लगा और एक हाँथ मैंने दीदी की पंतय में डालकर उनकी छूट की पत्तियो को मसलने लगा. मेरे इस तेन तरफ़ा हमले से दीदी वासना से भर गई. और मचलने लगी. मैं लगातार दीदी की पीठ और गार्डन पर किश कर रहा था. दन्त काट रहा था.



एक हाँथ से उनकी चुकी को मसल रहा था और एक हाँथ से उनकी छूट को मसल रहा था. फिर मैंने उनकी छूट को मसलते हुवे एक साथ दो ऊँगली उनकी छूट में घुसा दी और एक हाँथ से उनकी चुकी को जोर से मसल दिया. जिससे दीदी चीख पड़ी.

सविता दी- AAAAAAAAaaaaaaaaaaadahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh. कक्काआआमममममममीीीिनीई AAABhhhhhhhhhhhhhhhhiiiiiiiiiii . धीरीईईए काआआआआरररररर कककककककाआआआंममिन्न्नन्नन्नीई बबबबबाहाआआआंनंन्न hhooooooooooon त्तुम्म्मममहाआआअरी. ककककककककककककछ तततततो ररहाआआआं काआआअररर मेररररररीबीईई भाआआआईई.

माइए दीदी की बात को अनसुना करते हुवे 2 ऊँगली से उनकी छूट छोड़ने लगा और एक हाँथ से उनकी चूचियों को दबाने लगा. सेहत hi दीदी की गार्डन पीठ और कंधे पर लगातार कभी किश कर रहा था तो कभी दांत गदा रहा था तो कभी चाट रहा था. दीदी के मुंह से लगातार सिसकिया नीलालटी रही. वह बड़बड़ाये जा रही थी.

सविता दी- AAAAAAaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaabhhhhhhhhhhiiiiiiiii बाआआअस्सस्सस्स्स्स कककककककररररररररर मममममेरररररररीईईए bbbbbbbbhaaaaaaaaaaaiiiiii. कककककयाआआ अप्प्प्पणीईईई डडडडडडडडडी कक्कीीी jaaaaaaaaaannnnn लीगायआ क्याआ. हाआनंनं bbbbhaiiiiiiiiiii आआएसाआआआ हीईई कररररर. Bbbbbbbbbbahuat आचआआआआ laaaaaaaaaagggggg रररररहाआआ haiiiiiiiiiii. काआआआहा सी सीइकहा एई सअअअअअअब ममममेरररररररीबीईई भइईईई.

कुछः देर उनकी छूट छोड़ने के बाद मैंने दीदी मो कमरे में राखी एक कुर्शी पर बैठा दिया और उनके पेअर को बिस्टेर पर रख दिया. और फिर मैंने जो प्लान बनाया था उसको अमल करने लगा (मैं अंगूर बहार से लेकर आया था और उसे अपने कमरे में रखा था) मैंने अंगूर के गुच्छे को प्लाट से उठा लिया और दीदी के मुंह की तरफ आ गया और उनकी चेहरे पर अंगूर की गुच्छे को फेरने लगा. जब दीदी अंगूर को खाना चाहती तो मैं उसे उनके चेहरे से दूर कर लेता. मैं थोड़ी देर उनके चेहरे पर अंगूर फेरने के बाद दीदी से कहा.

मैं- दीदी एक बात बताओ क्या कभी जीजा के साथ ऐसा मज़ा आया था आपको.

सविता दी- तू उनकी बात छोड़. तू अपना काम कर.

मैं- पहले बताओ नहीं तो मैं कुछ नहीं करूँगा.

सविता di-(meri आँखों में देखते हुवे.) नहीं मेरे भाई. तेरे जैसा उन्होंने कभी नहीं किया. बस किसिंग अकेले करते हैं. उसके बाद सीधे…………….

मैं- मैं जनता था की मेरे जीजा मेरी दीदी को खुस नहीं रख रहा है. इसीलिए अब मैं अपनी दीदी को खुस रखूँगा.

उसके बाद मैंने गुच्छे में से 6-7 अंगूर तोड़े और गुच्छे को उनकी गार्डन पर फिरने लगा और अपने हाँथ को मुठी बनाकर दीदी के चेहरे के सामने कर दिया. मेरे इशारा शायद दीदी समझ गई. इसीलिए उन्होंने अपने मुंह खोल दिया. मेने अंगूर को अपने हाँथ से मसल दिया. जिससे उसका रास दीदी के मुंह में गिरने लगा तो तुरंत मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह में डाली और दीदी के मुंह से अंगूर का रास पिने लगा.



उसके बाद मैंने दीदी को किश करने लगा. कुछ देर किश करने के बाद मैंने फिर से 6-7 अंगूर गुच्छे से तोड़े और फिर से उन्हें मसलक उसका रास दीदी के मुंह में दाल दिया और दीदी के मुंह से अपनी जीभ डालकर उनके मुंह को चाटने लगा. ऐसे मैंने लगभग 5 मिनट तक किया फिर मैं दीदी उनके सर के पास से हटकर उनकी कमर के पास खड़ा हो गया और गुच्छे को दोनों हांथो में पकड़ लिया और दीदी की आँखों में देखते हुवे अंगूर को निचोड़ कर उसका रास दीदी की चूचियों, उनके पेट, उनकी छूट और उनके पेअर पर गिरा दिया. अंगूर की बुँदे शरीर पर गिरना से दीदी का शरीर एक बार कैंप गया. फिर मैं बीएड पर दीदी के पेअर के पास बैठ बया और दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

मैं- मैं जो कर रहा हूँ तुमको अच्छा तो लग रहा है न दीदी. मज़ा आ रहा है की नहीं.

सविता दीदी- (एकदम नशीली आँखों से देखते huwe).bahut अच्छा लग रहा है अभी. तेरे जीजा ने ऐसा कभी नहीं किया है.

मैं- अगर जीजा ने तुम्हारे साथ ऐसा कुया होता तो तुम यहाँ नंगी मेरे सामने थोड़ी बैठी होती.

सविता दी- (थोड़ा शर्माकर कातिल निगाहो से देखते हुवे) अभी मैं नंगी नहीं हुई हु समझे( उनका इशारा अपनी पंतय की तरफ था.)

मैं- क्या बात है दीदी. बड़ी जल्दी है तुम्हे नंगी होने की. कोई बात नहीं तुम्हारी ये इच्छा भी बहुत जल्दी पूरी कर दूंगा.

मेरी बात सुनकर दीदी ने शर्म से अपनी आँखे बंद कर ली. दीदी का चेहरा छुडास के कारन एकदम लाल हो गया था दीदी के गुलाबी, ृषभरे होंठ फड़फड़ा रहे थे. उनकी जालिम चूचिया हर साँस के साथ ऊपर निचे हो रही थी. मैंने कुछ देर दीदी के चेहरे को देखता रहा फिर मैं उनके पेअर को चूमने लगा.

जैसे hi मेरे होंठ दीदी के पेअर पर पड़े दीदी के मुंह से AAAAaaahhhhhhhhhhh अभी निकला और वो आँखे खोलकर मुझे देखने लगी. मैंने धीरे धीरे उनके पेअर को चाटते हुवे ऊपर की तरफ बढ़ने लग. मैं कभी उनके एक पेअर को चाटता तो कभी दूसरे पेअर को. मेरे चाहते से दीदी का शरीर कम्पन्न कर रहा था. और उनकी आँखे बंद होने लगी. उनके पेअर को चाटते हुवे मैं उनकी जांघो तक पहुंच गया और दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने होंटो से पंतय के ऊपर से दीदी की छूट पर हल्का सा किश कर लिया. और अपने हाँथ से उनकी पंतय को निचे करने लगा तो दीदी ने अपने हाँथ से पंतय को पकड़ लिया और मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- बस अभी ये मत उतर. नहीं तो तेरी दीदी तुझसे नज़ारे नहीं मिला पाएगी.

मैं- क्यों तुम अपने इस नायब हुस्न पर ज़ुल्म कर रही हो. ऐसा नायब हुस्न कब से कपड़ो से आजाद होना चाहता है और आप रोक रही हैं.

सविता दी- नहीं अभी रहने दे न (एकदम कमजोर आवाज़ में).

मैं- अरे दीदी क्यों अपने इस भाई को तड़पा रही हो. मैं भी तो देखु की मेरी दीदी ने पंतय के निचे जो खजाना छिपा कर रखा है वो कितना नायब है. मत तड़पाओ अपने इस आशिक़ को. और इस पंतय को उतरने दो. मैं तुमको एकदम नंगी देखने केलिए तड़प रहा हूँ.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी ने शरमाते हुवे अपनी पकड़ पंतय से ढीली कर दी लेकिन गार्डन को न में हिलती रही. मैंने उनकी पंतय को एक झटके में निचे कर दिया और उनके पैरो से निकल कर एक कोने में फेक दिया. अब दीदी पूरी नंगी मेरे सामने थी.



उनके जिस्म पर एक सूत भी कपडा नहीं था. मैं दीदी के नायब हुश्न को बस आँखे फाड़े देख रहा था. जब मैं कुछ देर मुंह खोले उनके नंगे जिस्म को देखता रहा तो दीदी ने कहा.

सविता दी- अभी अपना मुंह तो बंद कर ले नहीं तो मक्खी लात मार्कर चली जाएगी.

ये बात दीदी ने मजाक में कही और खिलखिलाकर हंसने लगी. उनकी बात सुनकर मैं भी मुस्कुराये बिना न रह सका.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-62

Savita didi madarjat nangi kurhi par mere samne baithi hui thi. didi ne sharmakar apne hantho se apni chuchiya chhipa li. Maine thodi der tak didi ke nashile jism ko niharta raha fir maine didi ki aankho me dekhte huwe mere munh se ek shayari nikal gai.

तुम्हारी आँखें नशीली हैं।

तुम्हारे होंठ रसीले हैं।

तुम्हारी चूची तीर की तरह चुभती है।

तुम्हारी चूत की बरसात में हम पूरे गीले हैं।



मेरे मुंह से गन्दी शायरी सुनकर दीदी शर्म से लाल हो गई. मैंने दीदी की आखो में देखते हुवे अपना मुंह दीदी की छूट पर रख दिया और चाटने लगा. मेरा मुंह अपनी छूट पर पड़ते hi दीदी ने एक मादक सिसरि ली और कहा.

सविता दी- AAaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh Aaaaabbbbbbbbbbbhiiiiii. क्याआआ काआर रआआआआहाआआ हैईईई. ववूऊओ गाआआआंड्डड्डड़ी जगहःहःहःहः है आआआपणंनायआ मममममननननननहहहहहहह हाआआअआटाआआ आआआआहाआआ सी.

Main-tumhari शरीर में कोई भी जगह गन्दी नहीं है दीदी. और छूट चूसै में बहुत मज़ा आता है दीदी. जीजा ने कभी आपकी छूट नहीं चूसी क्या.

सविता दी- नहीं मेरे भाई. तुम्हारे जीजा ने कभी ऐसा नहीं किया.

मैं- तुम बस देखती जाओ. आज मैं तुम्हे वो मज़ा डोंगा जिसके लिए तुम अभी तक तरसती आयी हो मेरी सविता डार्डिंग.

मेरे मुंह से अपना नाम सुनकर दीदी ने आँख दिखते हुवे कहा.

सविता दी- मैं तेरी बड़ी बहन हूँ और तू मेरा नाम ले रहा है.

मैं- अब इतना कुछ हो गया है. तुम अपनी छूट खोलकर अपने भाई के सामने बैठी हो और कुछ hi देर में छुड़वाने वाली हो और अभी भी दीदी सुनना है. अब तो मैं तुमको सविता hi कहूंगा हमेशा.

सविता दी ने मेरी बात सुनकर एक मुस्कराहट से मेरी तरफ देखा. लेकिन बोली कुछ नहीं. फिर मैंने अपने मुंह को दीदी की छूट पर रख दिया और चूसने लगा. मेरे छूट पे मुंह रखने पर दीदी के मुंह से सिसकारियां निकलने लगी. मैंने कुछ देर तक उनकी छूट को छठा फिर अपनी जीभ को नोक बनाकर उनकी छूट के छेड़ में दाल दिया और चूसने लगा. मेरे ऐसा करने से दीदी के मुंह से सिसकारी निकलना तेज़ हो गई. फिर मैंने अपने एक हाँथ को उनकी छूट पर रखा और उनकी पुट्टिया मसलने लगा. और अपनी जीभ से उनकी छूट छोड़ता रहा. जिसको दीदी बर्दास्त नहीं कर प् रही थी. और वो अपने शरीर को ैठने लगी और मादक सिसकी लेते हुवे बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh bbbbbbhhhhhhhhhhhhaiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaiin माहाररररर जाआआआउगीीीी . टट्टूंणन्नीीी कईईईइसा जाआडूउऊउउउउ काआआअआर्र्डर डीईए हैईईईई ममममझहहहहहहःपर uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiii ममममममममममिययययययय maaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiii माहाआरररररररर gaaaaaaaiii.aaaaaaaaaaahhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhhh अभीयी.

मैं- (मैं उनकी छूट से मुंह हटाकर)- मजा आ रहा है तुम्हे सविता.

सविता दी- हाँ बाहीईई बहुत माआजआआआ आ rahhhhhhhhhhaaa हीी.

मैंने फिर से अपने मुंह उनकी छूट में घुसेड़ दिया और उनकी छूट को अपनी जीभ से छोड़ने लगा. दीदी फिर से मचलने गली. फिर मैंने अपनी जीभ उनकी छूट से निकली और उनकी पूरी छूट को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगा. दीदी मेरी छूट चूसै से एकदम मस्त हो गई थी. उन्होंने अपना हाँथ लेकर मेरे सर पर रखा और अपनी छूट की तरफ दबाने लगी और एकदम छुडासी होकर बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- aaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh bbbbbbhhhhhhhhhhhhaiiiiiiiiiiii mmmmmmmmmmmaaaaaaaaaiin माहाररररर जाआआआउगीीीी uuuuuuuuuuuiiiiiiiiiii ममममममममममिययययययय maaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiii माहाआरररररररर gaaaaaaaiii.aaaaaaaaaaahhhhhhhh hhhhhhhhhhhhhhh अभीयी. ईईईई आआआआइसस्स्सस्सीीे हीईई bbhaaaaaaaaaaaiiiiii बबबबबाआआअह्हह्ह्ह्हह्हुउउउउउत्तत्त माज़आआआआ aaaaaaaaaa राहाआआआ हैईईई ख्ह्ह्हह्हह्हआआआ jaaaaaaaaaa ममममममममेररररररररीईईई छ्हःहूऊऊऊउत्तत कूऊऊओ.

सविता दीदी के मुंह से मादक सिसकी और बाटे सुनकर मेरा जोश बढ़ गया. मैं और जोर जोर से उनकी छूट को मुंह में भर कर पूरा डैम लगाकर चूसने लगा. दीदी का बदन अकड़ने लगा. वो अंत संत बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाबबबबबबभीइइइइइ कक्खाआ jaaaaaaaaaa मीटीईएडीईई चूऊउउउउउत्ततत्तत्त कूऊऊ. बाआहुट्ट्ट्ट ताआआअआदड़ड्पाउआटीईई हैईईई ईईईई म्मुझीीी haaaaaaaaaaaayeeeeeeee मीटीडीईईई रआआआआजआआआआ बाआआहुट्ट्ट माआआआज़ाअ aaaaaaaaaa रहहहहहहहहहा हैईईई aaaaaaaaaaaaurrrrrrrrrrr जूऊऊऊरर सीईई चहहहहहहउततततततततत meeeeeeeeeeeeriiiiiiiii कच्छुतत्तततततत कुओ. Niiiiiiiiiiichoooooodddddd ड्डड्डालललललललल iiiiiiiiiiseeeeeeee.

दीदी मस्ती में बड़बड़ाये जा रही थी. और मैं उनकी छूट पूरा मुंह में लेकर चूस रहा था. लगभग 10 मिनट चूसने के बाद मैंने एक साथ दो उंगली उनकी छूट में दाल दी और तेज़ी दे अंदर बाहर काने लगा. और उनकी पत्तियो को दांतो में दवाकर काटने लगा. मेरी इस हारकर से दीदी एकदम मदहोश हो गई. वो अपने सर को इधर उधर करने लगी. ऐसा कुछ देर करने के बाद दीदी का शरीर अकड़ने लगा और वो बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- ooooooooooooooohhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh बहुत मज़्ज़ज़्ज़ज़आआआ आए रहहा हैईईई. Kkkkkkkhaaaaaaaaaa जाआआआ मीटीएडीईई चूऊउत्तत्त कूऊऊ चहहहहहह्हाबाआआ जाआआआ िस्स्सस्स्स्से ीीीिसनीये बाआआहुतत्त पाररररररररेशानंन्न किया हीीीं मुझी. Aaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh uuuuuuuuuuuuuuuuuuiiiiiiiii maaaaaaammmmmmmmmmyyyyyyyyh. आआआआआउरर ततततततततीयेइज़्ज़्ज़्ज़ काआआअररररर भहहह्हैईईई. मममममुज्ज्ज्जीीीे कूऊउछह होओओओओ रहा हाँआंण. ाऑर्डरर तेइज़्ज़्ज़्ज़्ज़ काआआरररररर नईईईइच्छहहहहाड्ड़डडडडड लेईईई निगुओडीईईई काआअ सअअअअअअअअअअअअ रआआआस्स्स्सस.

दीदी की बात सुनकर पता लगा की वो झड़ने के बहुत करीब हैं तो मैंने अपनी उँगलियों को बहुत तेज़ी से उनकी छूट में अंदर बहार करना शुरू किया. और उनकी पत्तियों( क्लीट) को चुस्त रहा. दीदी दहाड़ने के एकदम करीब थी तो उन्होंने अपने हाथ से मेरे सर को अपनी छूट पर दबा लिया और चीखने लगी.

सविता di-aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooo आआआआउउउउउउउउर्र्ररर जूऊऊररर सीईईई मीटीरे भाआईईईई अब्बब्बबबबबभीइइइइइ ताआगआकककककक kaaaaahaaaaaaaaaa थाहा टूउऊउउउ. टट्टूंणणन्नीई पाआआअह्लेईई कक्कों नहहहहहिं कियाए ईईईई मीरीई साठहहहहह. ाऔर जोररररर सी भाआआआई मइईईईइ जहाआआअआदड़ड्नी वललललललललीईई होऊणन. Maaaaaaaaaainnnnnnnnn गाआआआआई bhhhhhhaaaaaaaiiiiiiiiiii स्स्स्सस्स्स्सम्मम्मम्मम्मभावआएलो मुझेईईई. Aaaaaaaaaaaaaaaaaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii मइईईईन्न्नण गाआआईईईई बाआआआहाआआआंकक्कक्कक्कछूऊऊऊडड़डडडडड. सअअअअअअअभाआआअलललललल mujjjjjjjjjjjjjjheeeeeee.

और इतना कहकर दीदी की छूट ने भल भालकर पानी छोड़ना शुरू कर दिया. और मैं दीदी की छूट का पानी पिने लगा. दीदी झाड़कर पूरी तरह शांत हो चुकी थी. मैंने चाट चाट कर उनकी छूट को साफ किया और अपना सर ऊपर उठाकर उनकी आँखों में देखा. तो दीदी मुझे hi देख रही थी. मेरा पूरा चेहरा दीदी की छूट के पानी से सना हुवा था. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे ऊपर की तरफ आने लगा. और उनके चेहरे के ऊपर पहुंच कर मैंने दीदी की आँखों में देखकर कहा.

मैं- क्यों सविता डार्लिंग. मज़ा आया की नहीं आपने भाई के साथ.

सविता दी- (शर्माकर नज़रे झुककर)- तू बहुत कमीना है अभी. अपनी दीदी के साथ तूने ये सब किया.

मैं- अब क्यों शर्मा रही हो सविता. बताओ न मज़ा आया की नहीं. प्ल्ज़

मेरी बात सुनकर दीदी ने अपनी नज़ारे मुझसे मिलकर मुझे देखा और मेरे होंठ चूमकर बोली.

सविता दी- बहुत मज़ा आया अभी. लाइफ में पहली बार ऐसा मज़ा आया. तू अभी तक कहा था. तूने ये सब मेरे साथ पहले क्यों नहीं किया. तुझे नहीं पता मैं कितना तदपि हु इस मज़े के लिए.

मैं- क्या करू दीदी. मैंने तो पहले hi कोशिश की लेकिन तुमने hi मुझे थप्पड़ मर दिया और नाराज़ हो गई. नहीं तो 10 दिन पहले hi तुम मुझसे छुड़वा लेती.

फिर मैं दीदी के होंठो पर टूट पड़ा और उनके चेहरे को पकड़कर उन्हें डीपली किश करने लगा. कभी उनके होंठो पर जुबान फेरता तो कभी उनके मुंह में अपनी जीभ दाल देता. दीदी भी मेरे किसिंग में पूरा साथ दे रही थी. मैंने 5 मिनट तक उनकी किसिंग की अपनी जीभ को चुसवाया और दीदी की जीभ को चूसा.



फिर मैं उनके चेहरे को चूमना लगा. चूमते चूमते मैं उनकी गार्डन से होता हुवा उनकी चूचियों की तरफ आने लगा और अपने मुंह में उनकी एक चुकी को भरकर चूसने लगा. और एक हाँथ निचे बढाकर उनकी छूट में ऊँगली घुसा दी. दीदी के मुंह से aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh निकल गई.

कुछ देर तक दीदी की चुकी चूसने के बाद मैंने चुकी से मुंह हटाया. लेकिन अपनी ऊँगली से उनकी छूट को छोड़ता रहा. जिससे दीदी पर फिर से मस्ती चढ़ने लगी. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे कहा.

Main-Savita तुम्हारी पूरा जिस्म लाजवाब है. और तुम्हारे इस हुस्न को और लाजवाब बनती हैं ये तुम्हारी गदराई और रसभरी जालिम चूचिया. तेरी चूचिया बड़ी ठोस हैं एकदन क्रिकेट के बॉल की तरह. इन्हे देखकर मेरा मन करता है की मैं तुम्हे साडी ज़िन्दगी नंगा राखु और तुम्हारी चूचियों को दिन रात चूस चूस कर इनका रास निचोड़ लून.



सविता दी- तो चूस लो न भाई. किसने मन किया है. तेरा जब भी मन हो मेरी चूचियों को चूस लेना.

मैं- और तेरी ये छूट भी बहुत करारी है. मैं तुझे दिन रात पटक पटक के छोड़ना चाहता हूँ. बोल छुडवायेगी न अपने भाई से.

सविता दी ने मेरी बातो का कोई जवाब नहीं दिया और अपनी आँखे बंद कर ली. मैं फिर से उनकी चुकी को मुंह में भरकर चूसने लगा. और एक हाँथ से उनकी छूट को छुड़ता हरा. थोड़ी देर में दीदी फिर से गरम हो गई. छूट को छोड़ते हुवे मैंने उनकी एक चुकी की घुंडी को दांतो से काट लिया जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सविता दी- AAAAaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh अभी क्या करता है. थोड़ा प्यार से कर. मैं कही भागी थोड़ी जा रही हूँ.

मैं- अच्छा. मैंने तुमको बहुत मज़ा दिया. अब तुम्हारी बरी है की तुम भी मुझको मज़ा दो.

दीदी मेरी बातो का मतलब नहीं समझी तो मैंने उन्हें कुर्सी से उठाकर जमीन में घुटनो के बल बैठा दिया और उनके सामने खड़ा हो गया. उनके सामने खड़ा होने के कारन मेरा तना हुवा लुंड ठीक उनकी आँखों के सामने लहराने लगा. जिसे दीदी बस देखे जा रही थी. कुछ देर तक जब दीदी ने कुछ नहीं किया तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- चलो सविता अब मेरे लुंड को भी मज़ा दो.

और इतना बोलकर मैंने उनका हाँथ पकड़कर अपने लुंड पर लोअर के ऊपर से रख दिया. दीदी अपना हाँथ हटाने लगी तो मैंने उनके हाँथ को दबाकर अपने लुंड पर आगे पीछे करना लगा. कुछ देर बाद मैंने अपना हाँथ उनके हाँथ से हटा लिया. लेकिन दीदी ने मेरे लुंड से हाँथ नहीं हटाया और सहलाती रही. थोड़ी देर सहलाने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- अब इसके इस कैद से आज़ाद कर दो सविता. अंदर खड़े खड़े इसका डैम घुटने लगा है. इसे लोअर से बहार निकल लो.

सविता दीदी ने तुरंत मेरे लोअर को निचे किया. लोअर निचे होते hi मेरे लुंड ने एक झटका मारा जो उनकी ठुड्डी पर लगा. मेरे लुंड को दीदी ने पहली बार इतने करीब से नंगा देखा था. मेरे लुंड को इतने पास से देखकर उनका मुंह खुल गया उन्होंने अपने मुंह पर हाथ रख लिया. और आँखे बड़ी करके बोली.

सविता दी- अरे बाप रे. ये कितना बड़ा है अभी.

मैं- क्यों ऐसा रिएक्शन दे रही हो जैसे पहली बार लुंड देखा हो. जीजा का इतना बड़ा नहीं है क्या.

सविता दी- अरे नहीं उनका तो इससे आधा hi होगा.

मैं- इसी लिए वो मेरी सविता की प्यास नहीं भुझे पते. लेकिन अब तू चिंता मत कर तेरी प्यास अब मैं बुझाऊंगा. चलो अब इसे प्यार करो ताकि ये तुम्हारी छूट की सेवा कर सके.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने मेरे लुंड को अपने दोनों हांथो में पकड़ लिया और मसलने लगी. जिससे मेरे मुंह से सिसकी निकल गई.

मैं- AAAaaaaaahhhhhhhhhhh सवीटाआ डार्लिंगगगग.

दीदी ने लगभग 5 मिनट तक मेरे लुंड को खूब सहलाया. मसाला. जिससे मेरे लुंड एकदम लाल हो गया. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- इसे मुंह में लेकर प्यार करो सविता डार्लिंग.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखा जैसे वो पूछ रही हो की इसको मुंह में भी लेना है. लेकिन जाएगा कैसे.

मैं- ऐसे क्या देख रही हो. इसे मुंह में भी लेकर प्यार किया जाता है. अब ज्यादा देर मत करो और इसे अपने मुंह में लो.

सविता दी- लेकिन अभी मैंने कभी लुंड मुंह में नहीं लिया है. और ये इतना बड़ा और मोटा है की मेरे

मुंह में जाएगा भी नहीं. मैं हाँथ से hi सहला देती हूँ न.

मैं- नहीं हाँथ से नहीं इसे अपने मुंह में लेकर प्यार करो. मैंने भी तो तुम्हारी छूट को मुंह में लेकर प्यार किया था. तो तुम भी इसे मुंह में लेकर प्यार करो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने झिझिकटे हुवे मेरे लुंड के टोपे को मुंह में भर लिया और पूछ की आवाज़ के साथ मुंह से बहार कर दिया. मेरी तो आनंद के कारन आँखे बंद हो गई की मेरी बड़ी बहन ने मेरे लुंड को मुंह में लिया है.

मैं- AAAAhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooohhhhhhhhhhhhh सविता. चुसो मेरे लुंड को मेरी बहन.

दीदी ने फिर से मेरे लुंड के टोपे को मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर तक टोपे को चूसने के बाद उन्होंने अपना मुंह और आगे बढ़ाया और 3” लुंड को मुंह में भर कर चूसने लगी. मैं तो मज़े से आँखे बंद कर सिसकिया लेता रहा और दीदी को और लुंड लेने के लिए कहता रहा.



Main-AAAAAaaaaaahhhhhhhhhhhhhh सविताआ. क्या लुंड चुस्ती हो. थोड़ा और अंदर लेने की कोसिस करो.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी ने थोड़ा और मुंह को आगे किया और 1”और लुंड मुंह में ले किया. और चूसने लगी. दीदी के लुंड चूसने से मैं मज़े के सातवे आसमान पर पहुंच गया था. मैं दीदी का हौसला बढ़ने लगा.

मैं- aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh ड्डड्डड्डड्डीिड्डड्डड्डी aaaaaaaaahhhhhhhhhhh. क्या लुंड चुस्ती हो. बाआआआआहुत ाछहः दीदी. ऐसे hi चुसो थोड़ा और अंदर लेकर चूऊउउउस्सःसू. Aaaahhhhhhhhhhhhhhhh Sasviiiiiiiiiitttaa. और चूऊउउउस मम्मेराआआ लुंडडडड.

दीदी अपनी तारीफ सुनकर लुंड को और तेज़ी से चूसने लगी लेकिन उससे ज्यादा लुंड मुंह में नहीं ले रही थी. फिर मैंने दीदी के सर को पकड़ लिया और उनके मुंह को हल्का हल्का धक्का देकर छोड़ने लगा.



दीदी अभी लुंड चूसने में एक्सपर्ट नहीं थी. इसलिए कभी कभी उनके दांत मेरे लुंड में लग जाते थे. जिससे मैं ssssssssssss कर देता था. थोड़ी देर लुंड को हल्का हल्का धक्का देने के बाद मैंने दीदी के सर पर दबाव बनाया और लुंड को और अंदर करने लगा. दीदी पहली बार लुंड मुंह में ले रही थी. इसलिए उन्हें थोड़ी तकलीफ हो रही थी. वो मेरी जांघो पर हाथ रखकर मुझे पीछे करने लगी थी. तो मैंने भी मौके की नजाकत को समझते हुवे अपना लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया तो दीदी ने कहा.

सविता दी- क्या कर रहे हो अभी. मेरा मुंह फाड़ने का इरादा है क्या.

मैं- अरे नहीं सविता. तुम्हारा मुंह नहीं तुम्हारी छूट फाड़ने का इरादा है. लेकिन मेरे लुंड को जितना मुंह के अंदर लोगी उतना hi तुमको मजा आएगा.

सविता दी- लेकिन ये बहुत बड़ा है मेरे मुंह में नहीं जा रहा है.

मैं- तुम कोशिश करो और अंदर लेने की मैं तुम्हारी मदद करता हूँ.

फिर दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और लुंड को अपने मुंह में डालने लगी. दीदी पूरी कोशिश कर रही थी की ज्यादा से ज्यादा लुंड मुंह में ले सके. लेकिन उनसे नहीं हो प् रहा था. और इधर इतनी देर से फोरप्ले करने के कारन और इतने दिन से मुठ न मरने के कारन मेरा लुंड फटने को हो गया. जब मुझे लगा की मेरा लुंड जल्द hi पानी छोड़ देगा तो मैंने दीदी के सर को सख्ती से पकड़ा और अपना पूरा लुंड दीदी के मुंह में एक झटके में पेल दिया. मेरे इस झटके का लिए दीदी बिलकुल भी तैयार नहीं थी. उनके मुंह से ggggggguuuuuuuuuuuuuuuuu ggggggggggggggguuuuuuuuuuuuuu की आवाज़ निकलने लगी.



वो मेरी जांघ पर थप्पड़ मरने लगी और मुझे पीछे करने लगी. उनकी आंको में आँशु आ गए. लेकिन मैंने लुंड उनके मुंह से नहीं निकला और 4-5 तेज़ धक्के देखर उनके मुंह में hi पानी छोड़ने लगा. एक तो मेरा पूरा लुंड उनके मुंह में था ऊपर से मेरे लुंड का पानी भी उनके मुंह में गिरने लगा. तो उनको साँस लेने में तकलीफ होने लगी. उनका पूरा चेहरा लाल हो गया और आखे बड़ी बड़ी होने लगी. आँशु आखो की कोनो से बहार निकलने लगे तो मैंने एक झटके से उनके मुंह से अपना लुंड निकल लिया. मेरे लुंड निकलने से लुंड का पानी उनकी चूचियों पर उनके चेहर पर भी फिर गया. दीदी के मुंह से लुंड निकलने के बाद दीदी ने एक चैन की साँस ली और अपने मुंह से मेरे लुंड का पानी जमीन में थूक दिया और. हांफती हुई उठकर कड़ी हो गई एयर एक थप्पड़ मेरे गाल पर जमा दिया.

सविता दी- कमीने. तू पूरा जानवर है मेरी जान लेने का इरादा था क्या. तुझको तो मेरी फ़िक्र hi नहीं है.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-63

4-5 तेज़ धक्के देखर उनके मुंह में hi पानी छोड़ने लगा. एक तो मेरा पूरा लुंड उनके मुंह में था ऊपर से मेरे लुंड का पानी भी उनके मुंह में गिरने लगा. तो उनको साँस लेने में तकलीफ होने लगी. उनका पूरा चेहरा लाल हो गया और आखे बड़ी बड़ी होने लगी. आँशु आखो की कोनो से बहार निकलने लगे तो मैंने एक झटके से उनके मुंह से अपना लुंड निकल लिया. मेरे लुंड निकलने से लुंड का पानी उनकी चूचियों पर उनके चेहर पर भी फिर गया. दीदी के मुंह से लुंड निकलने के बाद दीदी ने एक चैन की साँस ली और अपने मुंह से मेरे लुंड का पानी जमीन में थूक दिया और. हांफती हुई उठकर कड़ी हो गई एयर एक थप्पड़ मेरे गाल पर जमा दिया.

सविता दी- कमीने. तू पूरा जानवर है मेरी जान लेने का इरादा था क्या. तुझको तो मेरी फ़िक्र hi नहीं है.


अब आगे

दीदी के मुंह में झड़ने और उनका मुंह छोड़ने के कारन दीदी थोड़ा नाराज़ हो गाइट hi उन्होंने जिसके लिए उन्होंने मुझे थप्पड़ मर दिया.

सविता दी- तू एकदम कमीना है. मेरी जान लेने का इरादा था क्या. तुझको मेरी फ़िक्र है या नहीं.

मैंने दीदी की तरफ देखा. तो उनका मुंह मेरे लुंड के पानी से सना हुवा था. उनके चेहरे और चूचियों पर भी लुंड का पानी लगा हुआ था. वो हांफ रही थी जिसके कारन उनकी चूचिया ऊपर निचे हो रही थी. कुल मिलकर दीदी एकदम छुडासी रंडी लग रही थी. मैंने दीदी से कहा.

मैं- वो गलती से हो गया दीदी. जब मुझे जोश आता है तो ऐसा हो जाता है सॉरी मैंने ये जानबूझकर नहीं किया.

सविता दी- हां तुझसे तो हर काम गलती से hi होता है. तू मुझे छोड़ भी लेगा और कहेगा दीदी गलती हो गई मैंने जानबूझकर आपको नहीं छोड़ा.

दीदी ने ये बात मुस्कुराते हुवे कही थी जिसे सुनकर मेरे चेहरे पर भी मुस्कान आ गई . तो मैं चलकर दीदी के पीछे जाकर खड़ा हो गया और दीदी से कहा.

मैं- अरे नहीं दीदी तुमको गलती से थोड़ी छोडूंगा. तुझको तो जानबूझकर हचक हचक कर इसी बिस्टेर पर छोडूंगा.

और इतना कहकर मैंने दीदी के होंठो पर अपनी उंगलिया फिरने लगा और एक हाँथ से उनकी चूचियों पर लगे मेरे स्पर्म को मलने लगा. साथ hi साथ उनकी गार्डन और कंधे को किश करने लगा. दीदी के अंदर फिर से छुडास भरने लगी. उन्होने हाँथ उठाकर अपनी बांहे मेरे गले में दाल ली. मैंने दीदी के चेहरे पर लगे लुंड के पानी को उनके गलो पर मलने लगा. थोड़ी देर मलने के बाद दीदी का चेहरा और चूचिया चमकने लगी. फिर मैंने दीदी के चेहरे को हाँथ से पकड़कर पीछे की तरफ घुमाया और उन्हें किश करने लगा और उनकी चुकी से हाँथ हटाकर उनकी बुर में एक ूनंगली दाल दी. और अंदर बहार करने laga.didi भी किश में मेरा साथ देने लगी. किश करते हुवे मैं ऊँगली से दीदी की छूट छोड़ता रहा जिससे दीदी फिर से गरम हो गई और उनके मुंह से ggggggguuuuuuuuuuuu गगगगगगगगूउऊउउउ की आवाज़ निकलने लगी. फिर मैंने अपनी किश तोड़ी और उनकी गलो को चाटने लगा और चाटते चाटते गार्डन तक आ गया. दीदी सिसकारी भर्ती हुई बोली..

सविता दी- AAaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh अभी ममममममेररररररीईईए भाआईईई ककककककयाआ जाआआअदड्डड्डड्डू हाऐ टीड़ीए हठहठों मीटीई. तूंबीए टूऊंऊं मुझहीईईई अपना ड्डड्डीीीेवाना बाणाआआआ दिया ही. हहहहातत्थ निकककककल लीईई भाआआआईई अअअअअअब्ब ससाहाआआ नहहहिं हो रहा हैईईई.

मैं- अरे सविता जादू मैंने नहीं. तुम्हारे इस नशीले जिस्म ने मुझपर किया है. तभी तो आज मैं तुझे छोड़कर बहनचोद बनाने जा रहा हूँ. तू सच में एक चुड़क्कड़ मॉल है. तुझे तो जितना रगड़ रगड़ छोड़ू उतना काम है. बहुत गर्मी है तेरे जिस्म के अंदर साली.

सविता दी- तो निकल दे मेरे जिस्म की साडी गर्मी. तुझे रोका किसने है.

मैं- हाँ साली आज मैं तेरे जिस्म की साडी गर्मी निकल दूंगा. मैं तुझे आज इतना छोडूंगा. इतना छोडूंगा की जब तू इस कमरे सा बहार जाएगी तो मेरी गुलाम सविता बैंकर जाएगी. और मुझसे हमेशा छोड़ने के लिए तैयार रहेगी.

इतना बोलकर मैंने दीदी की छूट से उंगली निकली और उन्हों बीएड के सहारे जमीन पर बैठा दिया और अपने लुंड को उनके मुंह पे रगड़ने लगा. दीदी ने भी मेरा इशारा समझ लिया और मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. दीदी के मुंह इतना मुलायम था की ऐसा लगता था की जैसे कोई छूट हो. थोड़ी देर लुंड को चूमने चाटने के बाद दीदी लुंड को और अंदर लेने की कोषिष करने लगी. लेकिन लुंड अंदर नहीं जा रहा था तो दीदी ने जितना लुंड उनके मुंह में था उसे hi चूसने लगी. मैं मस्ती में बड़बड़ाने लगा.



मैं- ह्ह्हह्ह्ह्हीीेय्यय्यययय सविता क्या लुंड चुस्ती है तू. क्या गरम मुंह है तेरा जैसे कोई भट्टी हो. अरे साली और तेज़ चूस मेरा लुंड. और तेज़ चूस.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी तेज़ी से मेरा लुंड चूसने लगी. उनके मुंह से सूउऊउउउउउद्द्दाप्पपपपप सूउऊउउउउउड़ाआआप्प्पपप्पप्प सूउऊउउउउउउडड्ढड़ड़पपपपपपपपप की आवाज़ आ रही थी. थोड़ी देर लुंड चूसने के बाद मैंने दीदी के सर को पकड़ लिए और अपने लुंड की तरफ प्रेस्सुर देने लगा. जिससे मेरे लुंड और अंदर चला गया. दीदी ने मेरे झंघ पर दबाव देकर लुंड अपने मुंह से बहार निकल लिया और खांसते हुवे बोली.

सविता दी- खोऊऊऊऊ ख्ह्ह्हह्हह्हूऊऊऊ. क्या करता है अभी. मेरी साँस रुकने लगती है. मैं पूरा नहीं ले पाऊँगी.

मैं- मुझे तुम्हारे मुंह में इसे पूरा डालना है तुम कोशिश तो करो. तुम्हे एक बार थोड़ी तकलीफ होगी उसके बाद तुमको भी बहुत मज़ा आएगा. तुम अपने भाई के लिए इतना भी नहीं कर सकती.

मेरे इतना बोलने के बाद दीदी ने फिर से मेरा लुंड अपने मुंह में ले लिया और जितना हो सकता था लुंड को अंदर करके चूसने लगी. मैं तो लज़्ज़त की अलग hi एहसास में डूब गया था. मैं उनके सर पर हाँथ फिरने लगा और उन्हें और लुंड मुंह में लेने के लिए उकसाने लगा.



मैं- हआ डीईई aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh रे क्या लुँड्ड़डडडड चुस्ती है तू सलिई और अंदर लेईईई. क्याआ गारायअम्म्मम्म मुंह हाई टेर्रा. तू मेरे लांदड़ और ैण्डआयआर ली साअक्ति हैईईई सविता डार्लिंग. तेरे जैसाअअअअअअ लुँड्ड्ड किस्स्स्सी ने मीटीरा नहीं चुस्स्सा.

मेरे उकसाने से दीदी के अंदर और जोश आ गया. और वो और लुंड अंदर लेने को कोशिश करने लगी. वो लुंड ऐसे चूस रही थी जैसे कई दिन की भूखी हो. थोड़ी देर उनका सर सहलाने के बाद मैंने उनका सर पकड़ा और एक तेज़ झटके के साथ पूरा लुंड उनके मुंह में घुसेड़ दिया. और ताबड़तोड़ धक्के मरने लगा. दीदी की आँखों से आंसू बहने लगे उनके मुंह से सिर्फ ggguuuuuuuuuu ggggggggggguuuuuuuuuu की hi आवाज़ निकल रही थी. मैं दकके लगते हुवे बड़बड़ाता रहा.



मैं- ले साली और ले अंदर मेरा लैंड. बहुत गरम मुंह है तेरा. तू बहुत गरम मॉल है क्या लुंड चुस्ती है तू. तेरा मुंह बहुत हराम है. मेरे लुंड तेरे मुंह में पिघला जा रहा है. जब तेरा मुंह इतना गरम है तो तेरी छूट कितनी गरम होगी सविता साली. ले और ले अंदर तू बहुत छुडासी है. कैसे कुटिया की तरह मेरा लुंड चूस रही है. ले साली और ले अंदर.

मैं लगातार दीदी के मुंह को तेज़ तेज़ छोड़ता रहा. दीदी के मुंह से थूक निकल कर उनकी चूचियों पर गिरने लगा. वो गूऊऊऊ गूऊऊऊ की आवाज़ कर रही थी. फिर मैंने उनके सर को अपने लुंड पर दबा लिया और जिससे दीदी की डैम घुटने लगा. दीदी की आँखे बड़ी बड़ी होकर बहार निकलने को होने लगी उनका चेहरा पूरा लाल हो गया. दीदी मेरे जांघ पर थप्पड़ मरने लगी. जब मुझे लगा की दीदी का डैम घुट जाएगा तो मैंने अपने लुंड टोपे तक उनके मुंह से निकल लिया और दीदी ने जैसे hi साँस लेकर कुछ बोलना चाहा मैंने फिर से एक झटके में पूरा लुंड उनके मुंह में पेल दिया. फिर जब उनका डैम घुटना लगा तो फिर मैंने लुंड टोपे तक उनके मुंह से बहार निकल लिया. और फिर जैसे hi दीदी अपनी साँस दुरुस्त करने कुछ कहने को हुई मैंने फिर से लुंड जड़ तक उनके मुंह में पेल दिया. लगभग 5 मिनट तक मैं दीदी का मुंह इसी तरह पेलता रहा. और अनाप सनाप बकता रहा.



मैं- अरे साली तू तेरा मुंह तो इतना बड़ा है की तू गधे का लुंड भी पूरा ले लेगी और मेरा लुंड पूरा लेने में नाटक करती है. शर्माती है तू. आज मैं तुझे छोड़ छोड़ कर तेरी साडी शर्म उतर दूंगा साली सविता. ले और अंदर ले. तुझे तो तेरे मर्द ने इतना मज़ा कभी नहीं दिया होगा तभी तू अपनी तंग फैलाये मेरे सामने पड़ी है. आज मैं तेरी साडी गर्मी निकल दूंगा कुटिया.

5 मिनट तक दीदी का मुंह छोड़ने के बाद मैंने दीदी के मुंह से अपना लुंड बहार खींच लिया. लुंड मुंह से बहार निकलते hi दीदी लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. मेरा लुंड दीदी के थूक से पूरी तरह सं गया था और थूक की एक पतली सी लकीर मेरे लुंड से दीदी की मुंह तक बानी हुई थी. जब दीदी की साँस थोड़ा दुरुस्त हो गई तो दीदी ने मुझसे कहा.

सविता दी- तो एकदम जानवर है अभी. तूने तो आज मेरी जान हो ले लेनी थी. तेरे जीजा ने तो कभी ऐसा नहीं किया.

मैं- सविता डार्लिंग. तुझे बिना चोदे तेरी जान जाने नहीं दूंगा. और जीजा को पता hi नहीं है की लड़की को कैसे छोड़कर संतुस्ट किया जाता है तभी तो तू छोड़ने के लिए मेरे पास आई है.

मेरी बात सुनकर दीदी शर्माने लगी. मैंने दीदी को उठाकर बिस्तर पर फेक दिया और उनकी छूट पर टूट पड़ा. और उनकी छूट को मुंह में भरकर चूसने लगा और एक हाँथ से उनकी क्लीट को सहलाने laga.mere इस अप्रत्याशित हमले से दीदी की आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह निकल गई. मैं कभी उनकी छूट चुस्त तो कभी उनकी पत्तियो को दन्त से पकड़कर खींच लेता. दीदी तो एकदम मदहोश होकर अपने शरीर को बिस्टेर पर ैठने लगी. और बड़बड़ाने lagi.a

सविता दी- AAAAAAAAAAAAAahhhhhhhhhhhhhhhh ाआभी मेरे भाआईई ऐसे hi चूऊउउउउउस अपनननननि बहनणननं की चहहहहउतततत को बहुत्तत्त तडपाआआती है ईईई मुझीीीी. चूस भाईईई चुस्स्सस्स्स्स. साआरआए राआआत्स नईईईईचुआड़ ली इस्स्स्सस्स्स्सकाआआआ. ऑरररर तेइज़्ज़्ज़्ज़्ज़ी सीईए भाई ऑरररररर टीज़ज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़.

मैं भी दीदी की बात सुनकर उनकी छूट को दबा दबा कर चूसने लगा. छूट चूसते हुवे मैं उनकी छूट में दो ऊँगली दाल कर पेलने लगा. दीदी बस बिस्टेर पर अपना सर इधर उधर करती हुई aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh ohhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssss uuuuuuuuuuuuuuuuuuuu aaaaaaaahhhhhhhhhhheeeeeeeeeyyyyyyyyyy कर रही थी. 5 मिनट तक छूट चूसने के बाद दीदी बहुत ज्यादा गरम हो गई और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- AAAAAAAAAhhhhhhhhhhhh mmmmmmmmuuuuummmmmiyyyyyyyyyyyy ाआब बाहारदास्त नाहीई हूँ रहहह हैईईई अअअअअभीइइइइइइइ मेरे भाआई. Kuchhhhhhhhhhh काआर मीटीएराआआ बाआआअआदानंन्न जाआआ रह्हह्हह्हआआआ ही. इस्ससे ठाआआंआड़ा कररर दे अभीयी.

मैं- क्या कर्रु डीडीई. ऊँगली तो कर रही हूँ.

सविता दी- ुण्णंगगगगगगगलई माआत काआर अब्ब्ब hhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyy. अपपपपपपपनाआआ व्व्व्व्व्व ddddddddddaaaaaalllllllll डीएई भाआआअइ ोुर्र और मीटीएडीईई ाआग बहुउउझाए दी.

दीदी के ऐसा कहने पर मुझे लगा की आप दीदी को छोड़ देना चाहिए तो मैंने दीदी की तंग को उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और मुंह से थूक निकल कर अपने लुंड पर मॉल दिया और अपने लुंड से दीदी की छूट पर मरने लगा. जिससे दीदी और मचलने लगी और बोली.

सविता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh ममममममममिययययययह. क्यूऊँऊं ताआअंअदपपपपप रहा है अपनीई बहन को. डाआआआआ डीईई andaaaaaaar.Abhiiiiiii

मैं अपने लुंड से दीदी की छूट पर मरते हुवे कहा.

मैं- क्याआ दाल ड्डू अंदर और कहा दालु.

सविता दी- अभीइइइइइइ क्योऊऊऊ taaaaaaadaaapaaaaaaaaaaa रहा अअअअअअअ हीी भाआआअआइईईई अपनी बहह्ह्ह्हह्ण को. तू सममममममझहहहह jaaaaaaaaaa नाआआ.

मैं- मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा है जो कहना है खुलकर कहो.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- मुझे छोड़ड़ड़ड़ड़ड़ ड़ड़ड़ड़ड भायआई ाआपपपपपपपणी ललूंड़ड़ड़ड़ड़ सीईए. घुस्स्साआ डीएई अपनाआआआ लुँड्ढड्डड़ मीरीईई छुटत meeeeeeeeee ऑररररर छोड़ड़ड़ड़ मुझेईई. ममीजीए

भूउउउजहाआआ डीई meeeeeeeeeerrrre जिसमं की pyaaaaaaaaaasss बआहुट्ट्ट्ट टाआड़पपपपपपी होऊं मैई. अप्प्प्पणीईई बहह्हह्हंणंन्न कोऊ छूवोड्ढ ड्डड्डे अपनीईई लूंणड़ड़ड़ड़ से. जाआआदी करररर ाभीईई अब बर्डध्दास्त्टटटटट नाहीईईई होऊ रहहहहहहहआ है.

मैं- मैं तुम्हे छोडूंगा तो मुझे क्या फायदा hoga.(unki छूट पर अपने लुंड घिसते हुवे)

सविता दी- hhhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeee अअअअअभीइइइइइइ. आआआपपपपपपपपनीईई बाआअहाआआ कीईई जाआआआआआआआआई मिल्ल्ल्ल राहाहीईई हाई तुझहीए ऑर्डर क्याआआ छाअअअअहिये. छहोडड दिए भायआई अअअअअअब आओर मैट ताआअंअदपायआ. तू जूऊऊ काआआअह्यइइएगाआआआ मैईन वव्वव्वव्वव्व कारूंगीयी लीईकीन चू कक्कच्छोद्ड़ मुझे आआआअब बाआरास्त नाहीइइइइइइ होओओओ रह्हह्ह्ह्ह ही.

मैं- एक बार और सोच lijieeee.(chut में लुंड का टोपा दबाकर घिसते हुवे)

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh ooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मुउम्मय्य्यय्य soooochhhhhhhhhh liyaaaaaaaaaa हैईईई जोऊ टूउउउ बुलीबीजाआ ववववूऊ karunggggggggggi लेकिन पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़ भाआआईईई ैण्डआयआर डायललललल डीई.

मैं- तुमको मेरी हर बात माननी पड़ेगी. मैं तुम्हे कुछ भी कहूंगा तो नाराज़ नहीं होगी. तुमको जब मैं चहु तब छोड़ू और तू मन नहीं करेगी.( छूट पर लुंड घिसते हुवे)

सविता दी- hhhhhhhhhhhheeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh तेरा जूऊऊ माआआं काआरईईए वोओओओ काहारणा मेरी साठहहहहह. मुझीीी सब मन्नणजूऊऊर हाइइइइइइ. बस ाअब्ब चुड्ड्ढ डीएई मुझीीी.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपने लुंड को उनकी छूट पर सेट किया और उनकी मदहोश और मदभरी आँखों में देखा और बोलै.

मैं- तो तुम तैयार हो मेरा लुंड लेने के लिए.

मेरी बात सुनकर सविता दी ने हां में गार्डन हिलायी. फिर मैंने उनकी आँखों में देखते हुवे एक हल्का सा धक्का मारा. जिससे मेरे लुंड का सूपड़ा दीदी की छूट में चला गया. जिससे दीदी के मुंह से एक सिसकारी निकल गई.



सविता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh धीरीईईईई.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-64

मेरा लुंड को टोपा जाइए hi सविता दीदी की छूट में गया. उनकी मुंह से सिसकारी निकल गई.

सविता दी- AAAAAAAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ाभीईईई डीईईडीईए.

मैंने दीदी की बात सुनकर उनके होंठो पैर अपने होंठ रख दिए और उनकी होंठो को चूसने लगा. होंठ चूसते हुवे मैंने अपनी जवाब दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी की जुबान से खेलने लगा. साथ hi अपने हांथो से दीदी की चूचिया दबाने लगा. थोड़ी देर में दीदी मस्त हो गई और बोली.

सविता दी- अब दाल भी दे अभी. और कितना तड़पाएगा अपनी दीदी को.

मैंने दीदी की बात सुनकर अपने लुंड का दबाव दीदी की छूट पर बढ़ा दिया. जिससे मेरा लुंड दीदी की छूटा में जाने laga.fir मैंने उनकी चूचियों को दबाते हुवे एक हल्का धक्का मार दिया. जिससे दीदी की चीख निकल गई.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaammmyyyyyyyyyyyyy. Ooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh धीरीई करो भाआआआईइइइइइइइ डरडडडडडडड होत्ता ही.

मैंने दीदी की बात को अनसुना करते हुवे अपने लैंड को बहार खींचा और फिर एक धक्का उनकी छूट पर लगा दिया. जिससे मेरा लुंड आधा दीदी की छूट में घुस गया. जिससे दीदी चिल्लाने लगी और अपनी कमर इधर उधर करने लगी.



सविता दी- AAAAAAAAAAaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaaammmmmyyyyyyyyyyyyy माहाआर गाइइइइइइ माईंन्न्नन्नन्न. बाआआहाआर्र निकाआआअआलललललल लीईईई अभीइइइइइ. मुझीऐ नाहीइ चूड़वानन्णन्नआआआ. बाआहुत्त दररररद हो रहा हिअआआअ… ooooooooohhhhhhhhhhh mammyyyyyyyyyyyyyyyyy.

दीदी चिल्लाते हुवे अपने हंथ से मेरे साइन पर रख कर मुझे धकेलने लगी लेकिन मैंने दीदी को कसकर पकड़ रखा था. मैंने अपने लुंड को वही रोक दिया और तुरंत दीदी के चेहरे को चूमना चेतना शुरू कर दिया और एक हाँथ से दीदी की चूचियों को हलके हलके दबाने लगा. दीदी अभी भी सिसक रही थी और कह रही थी.

सविता दी- AAAAAaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh मरीईई प्प्याआरे भाआई. बाआअहाररर निकाएआल केईएएए मुझी बहुत्त डरडडडडडड हो रहा हिआआआआ. Oooooohhhhhhhhhhhhh

Main(unke चेहरे को चूमते हुवे)- क्या हुवा सविता तुम तो जीजा से छुड़वा चुकी हो फिर भी तुम्हे दर्द हो रहा है.

सविता दी- aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhh अभी. टीएडीईए जेईएएएफ काआअ 4”का hi हीी और टीएएएएएडीईए के ाआआधायआ hi हैई. और मत्तता भीईई टीएरे से आधा हैंआआआआ. उनके सामनेईईई टीएईरायआ लुंडडडड तो मुस्सलललल है.

मैं- मुसल लुंड से hi छुड़वाने में मज़ा है दीदी. बस थोड़ा सा दर्द बर्दास्त कर लो उसके बाद तो तुम खुद मेरे लुंड पर उछाल उछाल कर छुडवाओगी.

मैंने ये कहते हुवे दीदी को किश करना शुरू कर दिया. एक हाँथ को मैंने दीदी की छूट पर रखा और उसे सहलाने लगा और एक हाँथ से दीदी की चुकी को दबाने लगा. जिससे थोड़ी देर बाद दीदी को भी अच्छा लगने लगा और वो भी किश में मेरा साथ देने लगी. अब दीदी का दर्द भी काम हो गया था. इसलिए वो अपनी गांड को उठा उठा कर लुंड को लेने की कोशिश करने लगी और बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- AAaaaaaahhhhhhhhhh अभीयी मेरे भाआई sssssssssseeeeeeeeeeeee बाआआअस्ससससस अब आराम आराम से छोड़ो अपनी दीदी को. धीरे धीरे धक्के लगाओ अपनी दीदी की छूट पर और छोड़ो.

मैंने दीदी की बात सुनकर हलके हलके धक्के लगाकर दीदी को छोड़ने लगा. दीदी एकदम मस्ती में आ गई और बड़बड़ाने लगी.

सरिता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh oooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssss बस ऐसे hi chodddddddddd mujheeeeeeeeee. बहुउउउउउउत अच्छाआ लग rahaaaaaaaaaa हाऐ आआआइसे hi धीरी धीरीईए छोड़दो मुझीीी भायआई अअअअअअअअअअअ अअअअअअअअअ से मैईयिन आआआआअज्ज़ आआआउर jyaaaaaaaaaada माआज़ा लेणाआ छाआआआहति हूऊओन aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh आजभीइइइइइइ छोड़ो अपनी बाआआअह्न को.

मैं- क्यों सविता जीजा के साथ मज़ा नहीं आता क्या.

सरिता दी- sssssssssssssssssssssss heeeeeeeeeeeeeeeeyyyyyyyyyyyyyyyyyh उन्केईएएएए सअअअअअअतःहःहः भीईईई uuuuuuuuuuuuuuuoooiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii maaaaaaaaaaaaaaa. मज़्ज़ज़ा ाआआताआआआ हैईईई. लीएटीकिनन्ननननन टीएएएएएडीईईई सअअअअअअतः अअअअअलग हीईई माआआअआज़ाआआअ अअअअअअअ रहाआआ हैईईई, चूऊउड़ूऊऊ भायआई औररररररर जोरररर जोररररररर से छहोड़दो.

मैं दीदी की बात सुनकर और भी मस्ती में आ गया. और मैं दीदी की चूचियों को दोनों हांथो में पकड़कर दीदी को छोड़ने लगा. जब मैंने देखा की दीदी ज्यादा मस्ती में आ गई हैं तो मैंने अपने लुंड को बहार टोपे तक खींचा और दीदी की तरफ देखने लगा. जब कुछ देर तक मैंने लुंड छूट में नहीं डाला तो दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता दी- छोड़ न अभी. लुंड बहार क्यों निकल लिया है. दाल दे अंदर अपना लुंड

मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे उनकी दोनों चूचियों की पूरी ताकत से पकड़कर एक जोरदार धक्का उनकी छूट पर लगा दिया. जिससे मेरा लुंड इनकी छूट को चीरता हुवा जब तक आदर घुस गया. मेरा धक्का इतना जोरदार था की दीदी की आँखे बड़ी हो गई. कुछ सेकंड तक तो दीदी की चीख hi अटक गई. फिर दीदी की एक जोरदार चिक्ख निकल गई.



सविता दी- oooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh marrrrrrrrrr gaaaaaaaaaai माआआआं. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh बायस्क्कच्छाऊऊऊओ मुझीीी माममयीय. Aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhh मीटीईएएररररररररीईईईई चूऊउउउउत्तत्तत्त फाआआआआट गाआआअइ hhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyyyy. इस्स्स्सस्स्स्सीीीीे baaaaaahaaaaaaaaarrrrrrrrrr niiiiiiiiikaaaaaaaaaalllllll kaaaaaaaaaamineeeeeeeeeeee mujheeeeeeeeeeee नहह्ह्ह्हह्हियी चूऊउउउउडवाआआआआआआआआ tuhseeeeeeeeee. Oooooooooooooooohhhhhhhhhhh बाआआअच्छाआआआआ मुझीीीी.

सविता दीदी चीख रही थी. उनका पूरा चेहरा दर्द के कारन लाल हो गया था. आँखों से आंखो बहने लगे थे. मुझे दीदी की हालत पर बहुत तरस आ रहा था. लेकिन मैं जनता था की अगर मैंने इन्हे अभी छोड़ दिया तो फिर ये मुझे अपनी छूट में लुंड नहीं डालने देंगी. इसी लिए मैंने उनकी चीख की परवाह किये बिना फिर से उनकी दोनों चूचियों को मसलते हुवे लुंड टोपे तक बुर के बहार खींचा और पूरी ताकत से लुंड दीदी की बुर में पेल दिया. दीदी की तो हालत ख़राब हो गई. वो रोये जा रही थी. चिल्लाये जा रही थी.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh maaaaaaaammmyyyyyyyyyyyy मुझेईई बहकाआआआ loooooooooooo. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh sssssssssssssssssssssssssss ईईई मुझेईईईई aaaaaaaaaaj माहाआर दलिएईएएगाआआ. बाआआहाररररर निकाआआअलललल लेईईई bhaaaaaaaaaaaaiii .बहुत्तत्तत्त डायआरड हो rahhhhhhhhhhhha हैईईई मीरीईईई छुट्ट्ट्ट्ट पहाआआत गाआआई हैईईई प्ल्ज़ भाआआआई राहाआआम काआआरओ अपपपपपणीइइइइइइइ डीडीइइइइइइ पररररररर.

दीदी की बार सुनकर मन उनके चेहरे पर झुका और उनके होंठो को चूसने लगा. दीदी दर्द के कारन अपना चेहरा इधर उधर करने लगी. लेकिन मैंने उनके होंठो पर अपना होंठ रख hi दिया और चूसने लगा. एक हाँथ से उनकी चूचिय को दबाने लगा और एक हाँथ से दीदी की छूट सहलाने लगा. कुछ देर तक एशिया करने के बाद मैंने फिर अपने लुंड को टोपे तक बहार खींचा और एक झटके में दीदी की छूट में पेल दिया दीदी फिर से चीख पड़ी.



सविता दी- AAaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhh Aaaaaaaaaaaabhiiiiiiiiiii साआआईएएएएए कुट्टीीीी. मेरिइइइइइइ जन्न्नन लेगाआ kyaaaaaaaaaaa. कुछहहहहह तो राहाआम कार काहामिनीई. Ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhh ssssssssssssssssssssssssss aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh बाआआआअच्छाआआआआआओ मुझेईईई कोइइइइइइइइइ.

मैंने दीदी की चीख की परवाह न करते हुवे इसी तरह छूट को सहलाते हुवे. चुकी को दबाते हुवे लुंड टोपे तक दीदी की छूट से निकल कर वापस जड़ तक उनकी छूट में पेलता रहा. दीदी दर्द के कारन मुझे उल्टा सीधा बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- AAAAAAaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh कुत्ते सलेईईई मीरीईईई छुट्ट्ट्ट फआयआयडीईएएगा क्याआआआ सअअअअअअअअलीए. Ooooooooooohhhhhhhhhhhhhhhh माममममममममय मुझेईई bachaaaaaaaaaao isssssssssss सैंड सससससीएएएएए नाहीई तूऊऊओ ईई मीटीडीईईजाननं ले लाआएगा कमीनाआआआ साआआआआआ aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh. धिर्र्र्रे काहार बाआअहाणणन्न हूऊओन मैईन टीईएडीईईई राहाहाम्म्म्म करररर.

मैं दीदी की छूट को सहलाते और चुकी को दबाते दीदी को जोर जोर से पेलता रहा. तोड़ी देर के बाद दीदी नार्मल हो गई और निचे से अपनी गांड उठा उठा कर लुंड अंदर लेने की कोशिश करने लगी. मैंने दीदी को चूचियों को दोनों हांथो से पकड़कर लम्बे लम्बे स्ट्रोक लगाने लगा. जिससे मेरा बीएड हिलने लगा और छू छू की आवाज़ करने लगा. थोड़ी देर तक दीदी को इसीतरह छोड़ने के बाद मैंने अपनी स्पीड काम कर दी और अपना मुंह दीदी की चूचियों पर रखकर उन्हें पिने लगा. दीदी भी मेरे सर पर हाँथ पिराने लगी. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्यों सविता. मज़ा आ रहा है न चुदाई में.

सविता दी- तूने तो मेरी जान hi निकल दी थी. कोई ऐसे छोड़ता है क्या अपनी बहन को. मेरी तो छूट hi फाड् दी तूने.

मैं- अभी कहा पहाड़ी तुम्हारी छूट. लेकिन तुम्हारी छूट बहुत टाइट है ऐसा क्यों.

सविता दी- अभी तक मेरी छूट में तेरे जीजा का hi लुंड गया है. जो 4”का hi है. लेकिन अपना लुंड देख एकदम गधे के जैसा. तो इस लुंड के लिए मेरी छूट तो टाइट hi होगी.

मैं- अच्छा ये बताओ सविता मज़ा आ रहा है की नहीं.

सविता दी- बहुत मज़ा आ रहा है अभी. पहले तो बहुत दर्द हुवा, लेकिन बाद में मज़ा आया.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी के ऊपर लेट गया और हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. साथ साथ दीदी की मुंह में अपनी जीभ दाल दी. जिसे दीदी शौक से चूसने लगी. मेरी जोरदार चुदाई से दीदी की सांसे भरी होने लगी. उनके मुंह से aaaaaaaaaaahhhhhhhh sssssssssssssssssss की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर दीदी को इसी पोजीशन में छोड़ने के बाद मैंने दीदी की छूट से लुंड खींच लिया. मेरे लुंड निकलते hi दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा.



सविता दी- क्या हुवा अभी. छोड़ो ने. निकल क्यों लिया.

मैं- क्या निकल लिया सविता और कहा छोड़ू.

सविता दी- अपना लुंड मेरी छूट में डालकर छोड़ो.

मैं- पहले मेरे लुंड को अपने मुंह में लेकर इसे गिला तो करो. फिर मैं तुम्हारी चुदाई करता हूँ.

सविता दी- लेकिन अभी ये तो गन्दा हो गया है. मैं इसे मुंह में कैसे लू.

मैं- चुदाई करते समय कुछ भी गन्दा नहीं होता सविता. इसी में तो चुदाई का मज़ा आता है. चलो अब मेरे लुंड को चूसकर गिल्ला करो.

सविता दी- लेकिन अभी इसको साफ तो कर ले. बहुत गन्दा है ये.

मैं- इतनी छुडासी होकर भी अब नखरे पेल रही हो. अब चुपचाप लुंड अपने मुंह में लो और चुसो इसे.

मैंने दी को पकड़ कर बीएड के सहारे दीदी को बैठा दिया और मैं उनके सामने खड़ा हो गया. मेरा लुंड दीदी के मुंह के सामने लहराने लगा. मेरा लुंड दीदी की छूट के राश से चमक रहा था. थोड़ी देर तक जब दीदी ने लुंड कोई हरकत नहीं की तो मैं अपने लुंड से दीदी के होंठो पर मरने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी ने अपना मुंह खोला और लुंड का टोपा चाटने लगी. दीदी का मुंह लुंड पर लगते hi मेरे मुंह से sssssssssssssssss की आवाज़ निकल गई. थोड़ी देर तक जब दीदी सूपड़ा चाटती रही तो मैंने दीदी से कहा.



मैं- क्या कर रही हो सविता. जल्दी से लुंड चूसकर गिला करो ताकि मैं तुम्हे छोड़कर तुम्हारी प्यास बुझा सकू.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी आँखों में देखते हुवे लुंड मुंह में ले लिया और चूसने लगी. कुछ देर बाद मैंने दीदी के सर के पीछे हाँथ रखा और उनके सर को अपने लुंड पर दबा दिया. और तब तक नहीं चूड़ा जब तक दीदी की साँस न अटकने लगी. दीदी की आँखों में आंसू आ गए. उनका मुंह फुल गया. जब मैंने दीदी को छोड़ा तो दीदी लुंड को मुंह से निकल कर खांसने लगी. अभी दीदी कुछ कहने के लिए मुंह खोलती उससे पहले hi मैंने दीदी के सर को पकड़कर लुंड उनके मुंह में दाल दिया और एक झटके में जड़ तक दीदी के मुंह में पेल दिया. दीदी की तो जैसे जान hi निकल गई. वो मेरी जांघो पर हाँथ मरने लगी. मैंने अपने लुंड को भर खींचा और एक झटके में फिर से पुरलकुल बा लुंड पेल दिया. दीदी के मुंह से गगगगगगूउऊउउउउउ gggggggggggguuuuuuuuuuu की आवाज़ निकल रही थी. मैं दीदी के मुंह में लुंड पेलते हुवे बड़बड़ाने लगा.

मैं- Aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh oooooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh क्या गरम मुंह है तेरा साली. तेरे मुंह में तो मेरा लुंड पिघल रहा है. तू बहुत कमल की है सविता. ले साली और अंदर तक ले साली. बहुत अच्छा लुंड चुस्ती है तू. लग hi नहीं रहा है किट ु पहली बार लुंड चूस रही है. ले और अनार ले कुटियाआआ.

मैं दीदी के सर को पकड़कर लगातार उनके मुंह में पूरा लुंड पेल रहा था और उनके मुंह से बस ggggggggggguuuuuuuuuuuu guuuuuuuuuuuuu की आवाज़ निकल रही थी. उनके मुंह से थूक निकलकर उनकी चूचियों पर गिर रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड पूरा पेलकर कुछ सेकंड तक रुका रहा फिर लुंड उनके मुंह से निकाल लिया. दीदी के मुंह से मेरे लुंड तक थूक की एक लकीर बन गई. लुंड निकलने के बाद दीदी खांसने लगी और अपनी सांसे दुरुस्त करके बोली.

सविता दी- तू सच में कमीना है तुझे मेरी बिलकुल भी परवाह नहीं है. एकदम जानवर की तरह बर्ताव करता है.

मैं- तू एक बार अपनी शर्म छोड़ कर जैसा मैं कर रहा हूँ बस उसमे मेरा साथ दे. देखने तुझे बहुत मज़ा आएगा.

इतना बोलकर मैंने दीदी को डोगग्य स्टाइल में कर दिया. दीदी दर गई और मेरी तरफ देखते हुवे कहा.

सविता दी- वह नहीं अभी. मैं मर जाउंगी.

मैं- अरे सविता. मैं तेरी गांड भी मरूंगा. लेकिन अभी मुझे तेरी छूट मारनी है. तू बेफिक्र रह.

मेरे ऐसा कहने पर दीदी डोगग्य स्टाइल में हो गई. मैं उनके पीछे आकर दीदी की छूट पर अपना मुंह रख दिया और चाटने लगा. दीदी के मुंह से सिकिया निकलने लगी. थोड़ी देर दीदी की छूट चाटने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी की छूट पर रखा और अपने दोनों हांथो से दीदी की कान्हो को मजबूती से पकड़कर एक hi झटके में अपना पूरा लुंड पीछे दे दीदी की छूट में पेल दिया. मेरा जहतका बहुत तेज़ था जिससे दीदी मुंह के बल बिस्तर पर गिर पड़ी और चीख पड़ी.



सविता दी- OOooooooooooooooooohhhhhhhhhhhhhh muammmyyyyyyyyyyy. साआईईएई हाआरामममममममी कुटटटटटटीईईई. Maaaaaaaaaarr दलललेगाआआ kyaaaaaaaaaaa माआदाअरचूऊऊऊद. Aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियीय बाआअशाआआआओ mujheeeeeeeeeeeeee. अअअअअअअअज्ज मीटीएडीई jaaaaaaaaaannnnnnn लीईईई लिएईईएगाआआआ ईईईई kkkkkkkkkkkuttttttaaaaa.

दीदी की बात सुनकर मुझे बहुत जोश आ गया. मैंने दीदी की कमर को पकड़कर ऊपर किया और लुंड को टोपे ताख बहार निकल कर एक झटके में दीदी की छूट में पेलने लगा. दीदी दर्द से दोहरी हो रही था और बड़बड़ाये जा रही थी.

सविता दीदी- Aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhh साआईईई हाआआअआआअआमी. धीरीईए नहहहहिं कररररररर सकककककककता kyaaaaaaaaaaaaa. काआअमिनीईईए. मुफ्फफ्फ्फ्फफ्ट मइईईई बाहाआआआं कीई छुट्ट्ट्ट्ट मिलीईई हैईईई टूवू क्याआ फआयआयड डीएगा ुस्स्सस्सीीे. सलीबी. गाआआताआआआआ के किड्डड्डड़ईईईईई. राहाआआआअम्म्मम्म काआआआररररर थोड़ड्डाआंआ बाहाआआआं होऊं टीईईडीईईई वोओओओओ भीइइइइइइइ शाआडीई शूऊऊऊदआआ.

मैं दीदी की छूट को हचक हचक कर छोड़ने लगा और दीदी से बोलै.



मैं- हाँ साली सविता तू ाआब बहन नहीं है मेरी. तू मेरी चुड़क्कड़ माल है. और तू शादीशुदा है तभी तो मेरे आगे अपनी छूट फैलाकर लेती hi. क्योंकि तेरा पति तुझे ठीक से छोड़ता नहीं है. इसीलिए तू अपने भाई से छूट छुड़वा रही है. बहुत छुडासी है तू सविता. तुझे तो पटक पटक कर छोड़ना चाहिए तब तेरे छूट की प्यास बुझेगी.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
आपको और आपके परिवार को अंग्रेजी नए वर्ष 2021 की बहुत बहुत बधाई और शुभकामना।
 
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