Incest sex kahani - Meri Mast Bahane - Page 17 - SexBaba
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Incest sex kahani - Meri Mast Bahane

अपडेट-136

पीछे से दीदी अपनी चूचिया जोर जोर से मेरी पीठ में रगड़ रही थी. थोड़ी देर चूचिया रगड़ने के बाद दीदी ने मेरा लुंड जोर से दबा दिया और मेरी गार्डन को दांतो से काट लिया. मेरी चीख निकल गयी.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh सरिताआए. क्या काररर रहीए हैई. दर्द होता है मुझे. निशाननं पाद जाएगा. ऐसा मत कर.

मेरी सिसकी सुनकर दीदी ने मुझे घुमाकर अपनी तरफ कर लिया.

अब आगे.

जब दीदी ने मेरी गार्डन पर दन्त गदया तो मैं सिसक पड़ा तो दीदी ने मुझे घुमाकर अपनी तरफ कर लिया और मरी आँखों में देखने लगी. मैं भी दीदी की आँखों में देखने लगा तो दीदी ने कहा.

सरिता दी- क्यों अभी. दर्द हुवा था क्या.

मैं- जब दन्त गडाओगी तो दर्द नहीं होगा क्या.

सरिता दी- तो क्या हम लोगो को दर्द नहीं होता जब तू दन्त गड़ता है. जोर जोर से दबाता है.

मैं- तुम्हारी चूचिया और गांड बहुत मुलायम और बड़े बड़े हैं और मुलायम भी हैं तो दम लोगो को इतना दर्द नहीं होता होगा जितना मुझको होता है.

इतना कहकर मैंने दीदी के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा. एक हाँथ से मैंने दीदी की चुकी को पकड़कर दबाने लगा और एक हाँथ को मैंने निचे बढाकर दीदी की छूट पर रख दिया और उनकी पंतय के ऊपर से सहलाने लगा. पीछे से मनीषा ने झुककर मेरी लोअर उतर दी. मैंने भी दोनों पेअर उठाकर लोअर उतरने में मदद की. अब मनीषा निचे बैठी मेरी अपना हाँथ आगे बढाकर मेरे लुंड को पकड़ लिया और अपनी जीभ निकलकर मेरे दोनों पैरो को चाटने लगी. मेरे शरीर में गुदगुदी होने लगी.

ऊपर मैं दीदी के होंठो को चूसते हुवे उनकी चूचिया दबाता रहा और उनकी छूट को सहलाता रहा. थोड़ी देर छूट सहलाने के बाद मैंने दीदी की पंतय एक साइड की और अपनी बिच वाली ऊँगली दीदी की छूट में दाल दी और अंदर बहार करने लगा. थोड़ी देर दीदी के होंठ चूमने और छूट में ऊँगली करने के बाद मैंने दीदी की चुकी को कसकर मसल दिया जिससे दीदी मस्ती में चीख पड़ी.

सरिता दी- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiiiiiiii. धीरे कर भाईईई. ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह

दीदी की चीख सुनकर मैंने अपनी ऊगली जोर जोर से उनकी छूट में अंदर बहार करनी शुरू कर दी. मैं दीदी के होंठ छोड़कर अब उनकी गलो को मुंह में भर भर कर चूस रहा था. पीछे मनीषा मेरे लुंड को मुठ मरते हुवे मेरे दोनों पेअर को chat-te हुवे मेरी गांड तक आ गयी. गांड तक आने के बाद मनीषा ने अपने एक हाँथ से एक जोर का थप्पड़ मेरी गांड पर लगा दिया. मेरे मुंह से सिसकी निकल गई.

main-aaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh मनीषआआआआ. मेरी जन्न्नन्नन्न

मेरी सिसकी सुनकर मनीषा जोर जोर से मेरा लुंड मुठियाने लगी और मेरी गांड पर लगातार थप्पड़ बरसाने लगी. मुझे दर्द भी हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था. इधर मैं अपना मुंह दीदी की चुकी पर रखकर चूसने लगा. मैंने दीदी की छूट से ऊँगली बहार निकल ली और उसे दीदी के मुंह में दाल दी. दीदी मेरी ऊँगली चूसने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi करने के बाद दीदी ने मेरा मुंह अपनी चूचियों से हटा दिया और झुककर मेरी गार्डन पर अपनी जीभ घूमने लगी. पीछे मनीषा मेरी गांड को अचे से बजने के बाद अपनी जीभ मेरी कमर पर चलने लगी और ऊपर की तरफ बढ़ने लगी. आगे दीदी मेरी गार्डन को chat-te हुवे निचे की तरफ आने लगी. मैं अपनी दो बहनो के बिच सैंडविच बना हुवा था. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.

दीदी मेरी गार्डन को chat-te हुवे मेरे साइन तक आयी और अपनी जीभ मेरे साइन पर फिरने लगी. मनीषा पीछे से मेरी पीठ को चाट रही थी. दीदी ने मेरे निप्पल को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मैं मस्ती में आआआहहहहहहह स्स्स्सस्स्स्स करने लगा. एक निप्पल चूसने के बाद दीदी ने दूसरा निप्पल अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर तक दीदी मेरे दोनों निप्पल को चूस चूस कर गिला कर दिया. मेरे साइन को चूसने के बाद दीदी ने निचे की तरफ बढ़ना शुरू किया और मेरे पुरे पेट को चाटने लगी. मनीषा पीछे से मेरी गार्डन तक पहुंच गयी थी. वो मेरे लिंड को हिलाते हुवे मेरी गार्डन पर अपनी जीभ फिर रही थी. मैं मस्त हो चुक्का था और बोलने लगा.

मैं- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरिइइइइइइइइ नमकीन बहनोऊ. बहुत मज़ा दे रही छूट ुम दोनों अपने भाई को

मेरी बात सुनकर मनीषा ने पीछे से अपने होंठ मेरे कण के पास लाये और नशीली आवाज़ में कहा.

मनीषा- ारी मेरिइइइ जांणण . अभी तू माज़ा देना शुरू किया हीी और अभी सी ही यी हाल ही. अभी तो बहुत्त कुछ होना बाकी हैई मेरे राजाआं.

इतना बोलकर मनीषा फिर से मेरी गार्डन पर अपनी जीभ घूमने लगी. निचे दीदी अपने जीभ मेरी जांघो पर घुमा रही थी. थोड़ी देर जांघो पर जीभ घूमने के बाद दीदी ने अपना मुंह मेरी जांघो से हटाया और घुटनो के बल जमीन पर बैठ गयी और मेरे लुंड को अपने हांथो से पकड़ लिया और आगे पीछे करने लगी. पीछे मनीषा ने अपने हाँथ मेरे लुंड से हटा लिया और मुझसे एकदम चिपक कर मेरी बगलो से अपने दोनों हाँथ डालकर मेरे साइन को मुट्ठी में भर लिया और अपनी चूचियों को मेरी पीठ पर रगड़ने लगी.

दीदी मेरे लुंड को सहला रही थी और मेरी गोटियों को एक हाँथ से छेड़ रही थी. थोड़ी देर मेरे लुंड को सहलाने के बबाद दीदी ने अपने मुंह से ढेर सारा थूक मेरे लुंड पर गिरा दिया और अपने हाँथ से थूक मेरे लुंड पर रगड़ने लगी. थोड़ी देर थूक रगड़ने के बाद दीदी ने फिर से मेरे लुंड पर टूक दिया और फिर से उसे लुंड पर रगड़ने लगी. थोड़ी देर रगड़ने के बाद उन्होंने अपनी जीभ बहार निकली और मेरे लुंड को चाटने लगी. एक हाँथ से वो मेरी गोटियों को भी सहलाने लगी.

पीछे से मनीषा अपनी चूचिया मेरी पीठ पर रगड़ रही तह और अपने दोनों हांथो से मेरे साइन को मसल रही थी. थोड़ी देर तक अपनी चूचिया मेरे साइन पर रगड़ने के बाद मनीषा ने मुझे छोड़ दिया और आकर मेरे सामने कड़ी हो गयी और मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगी. मैं भी मनीषा के होंठ चूस रहा था. मैंने हाँथ बढाकर मनीषा की चूचियों को पकड़ लिया और मसलने लगा. मनीषा मेरे होंठो को चूसते हुवे निचे को तरफ जाने लगी.

मैं मनीषा के होंठो को चूसते हुवे उसकी चूचियों को मसलता रहा. निचे दीदी मेरा लुंड चाट रही थी और मेरी गोटियों से खेल रही थी. थोड़ी देर बाद दीदी ने अपना मुंह खोला और मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर बाद मनीषा ने अपना होंठ पीछे कर लिया और मेरे साइन को चूमने lagi.wo मेरे एक णिप्प्पल को अपने मुंह में भरकर चूसने लगी और एक निप्पल को अपनी उंगलियों और अंगूठे में भरकर दबाने लगी. मैं मस्ती में बड़बड़ाने लगा.

मैं- आआआहहहहहहह मेरिइइइइइ बहानोऊ. क्या काररर राहूऊ यी साब. बहुत्त अच्छा लाग्ग रहा हैईईई. कहाँ सी सीखा हैई इतना माज़ा देना. आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह

अब दीदी मेरे लुंड को अपने मुंह में पूरा अंदर बहार करने लगी. और जोर जोर से चूसने लगी. थोड़ी देर बाद मनीषा मेरे साइन से खेलने के बाद मेरे पेट को चाटने लगी और अपना हाँथ बढाकर दी के हाँथ पर मेरी गोटियों को पकड़ लिया और दबाने लगी. मैं मस्ती में आआह्ह्ह्हह्ह ssssssssss आआआअह्ह करने लगा. निचे दीदी मेरे लुंड को जोर से चूसते हुवे हल्का सा कल लिया. मैं सिसक पड़ा.

main-Aaaaaaahhhhhhhh सरिता. मेरीए ी जाननं. काट खोओ मेरी लैंड को. खा जा इसी. बहुत्त गरममम मुंह हीी तेरा. पिघला दे मेरे लौड़े को अपने मुंह में.

मेरी बात सुनकर दीदी ने लुंड पाने मुंह से बहार निकला और मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सरिता दी- हआ सेल अभी. बहुतत्त घमंड हैई न तुझी अपने लुडे पर आजजज मैं इसी पूरा कच्चा चबा जौंगीय. निचोड़ लुंगी इसे आअज मैं.

इतना कहकर दीदी ने मेरी गोटियों को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. तब तक मनीषा ने मेरे पेट को चूमने चाटने के बाद मेरे लुंड पर अपनी जीभ फिरने लगी. मैंने अपने दोनों हाँथ दोने के सर पर रख दिया और सहलाने लगा. मनीषा ने मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर लुंड चूसने के बाद वो जोर जोर से मेरे लुंड को अपने मुंह में अंदर बहार करने लगी. दीदी भी मेरी गोटियों को जोर जोर से चूसने लगी. मैं मस्ती के सातवे आसमान पर पहुंच गया था.



थोड़ी देर तक मेरे लुंड को चूसने के बाद मनीषा ने अपना मुंह मेरे लुंड से हटा लिया तो सरिता दीदी ने मेरा लुंड अपने मुंह में भर लिया. मनीषा अब जमीन में घुटनो के बल बैठकर मेरी गोटिया चूसने लगी. मैंने अपने हाँथ से दीदी के सर को पकड़ा और लुंड अंदर बहार करने लगा. दीदी भी अपना पूरा मुंह खोलकर मेरा लुंड अपने मुंह में ले रही थी. थोड़ी देर बाद मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और पूरी ताकत से दीदी का मुंह छोड़ने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी का सर छोड़ दीया और अपने लुंड बहार निकल कर मनीषा के मुंह के पास कर दिया. मनीषा ने मेरे लुंड को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. दीदी मेरे लुंड के जड़ को चाटने लगी.



मैंने मनीषा के सर को पकड़ा और लुंड अंदर बहार करने लगा. मैं मनीषा का मुंह जोर जोर से छोड़ रहा था. थोड़ी देर मनीषा का मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड मनीषा के मुंह से निकल लिया फिर दीदी मेरा लुंड पाने मुंह में लेने लगी तो मैंने उनसे कहा.

मैं- अरे बस करो तुम दोनों. मेरे लुंड को खा hi जाओगी क्या. मुझे भी तो अपनी छूट चाटने का मौका दो.

इतना कहकर मैं मनीषा और दीदी को पकड़कर बिस्टेर पर ले गया मैंने पहले मनीषा को बीएड पर पीठ के बल लिटाया फिर दीदी को डोगग्य स्टाइल में मनीषा के मुंह के ऊपर अपनी छूट को रखकर खड़ा होने के लिए बोल दिया. दीदी ने अपनी पंतय उतार दी और मनीषा के मुंह पर डोगग्य स्टाइल में कड़ी हो गयी. मनीषा ने दीदी की दोनों जांघो को पकड़कर अपने मुंह की तरफ खींचा और अपनी लपलपाती जीभ दीदी की छूट पर रख दिया. मैंने अपने हांथो में मनीषा की पंतय फसे और उसे खींच कर मनीषा के टैंगो से बहार कर दी और झुककर उसकी छूट की खुसबू लेने लगा.

थोड़ी देर उसकी छूट की खुसबू लेने के बाद मैंने अपने हाँथ से मनीषा की छूट को फैलाया और अपनी जीभ उसकी छूट में दाल दी. मनीषा का शरीर कैंप गया. मैं मनीषा की छूट में जीभ डालकर उसकी छूट अपनी जीभ से छोड़ने लगा. थोड़ी देर उसकी छूट को छोड़ने को छोड़ने के बाद मैं अपनी पूरी जीभ से मनीषा की छूट चाटने लगा. मनीषा दीदी की छूट जोर जोर से चूस रही थी. थोड़ी देर दीदीकी छूट चूसने के बाद मनीषा ने अपना एक हाँथ उनकी जांघो से हटाया और अपनी एक ऊँगली उनकी छूट में घुसकर अंदर बहार करते हुवे दीदी की छूट चूसने लगी.

मैं मनीषा की छूट को चूसते हुवे अपनी एक ऊँगली उसकी गांड के सुराख़ पर रखकर उसे अंदर कर दिया. मेरी ऊँगली सुखी थी इसलिए मनीषा को थोड़ा दर्द हुवा. उसका बदन हल्का सा थरथराया. मैंने उसकी गांड से ऊँगली निकली और उसकी छूट में घुसकर गिला किया और फिर से उसकी गांड में दाल दी. मैंने अपनी ऊँगली उसकी गांड में तेज़ी के साथ अंदर बहार करना शुरू कर दी. थोड़ी देर मनीषा की गांड में ऊँगली करने के बाद मैंने उसकी गांड से उंगलिनीकल ली और उसकी छूट में घुसा दी. फिर मैंने दीदी को उसकी छूट के ऊपर मुंह रखकर चूसने के लिए कहा. दीदी मनीषा के ऊपर 69 की पोजीशन पर आ गयी और अपनी जीभ से मनीषा की छूट चाटने लगी.

मैं अपने घुटनो के बल बैठ और अपना लुंड दीदी के मुंह से सामने कर दिया. दीदी ने मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. थोड़ी देर लुंड चुसवाने के बाद मैंने दीदी के मुंह से लुंड बहार निकला और मनीषा की छूट पर रख कर उसकी छूट में तेल दिया. मनीषा सिसक पड़ी.

मनीषा- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह भाइयाँआ. थोड़ा धीरे से करियेगा.

मनीषा इतना बोलकर दीदी की छूट चूसने लगी. दीदी मेरे बहार बचे लुंड को चाटने लगी. मैंने अपना हाँथ दीदी के सर पर रखा और उसे अपने लुंड पर दबाकर एक जोरदार धक्का mara.mera लुंड सरसराता हुवा मनीषा की छूट में जड़ तक घुस गया. मनीषा के मुंह से मस्ती और दर्द भरी चीख निकल गई.

मनीषा- aaaaaaaahhhhhhhhhh भैईयाआआआ. थोड़द्दआ धीरी करनी की लिये बोला था. लेकिननं तुमन्नेई तू पुर्रा इक्क झाटककी मी पिल्ल दिया. ाआअऊऊऊऊऊऊऊऊछहःछःह. मुझी मीठा मीठा दररदद्ड हूँ रहा हीी. थोड़ड़ा धीरे ढीरी करिये ना. आआअह्ह

मनीषा की बात सुनकर मैंने अपनी गति थोड़ा स्लो कर दी. मैं अपना लुंड धीरे धीरे उसकी छूट में अंदर बहार करने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड उसकी छूट से बहार निकला और दीदी के मुंह में एक झटके में पेल दिया और दीदी का मुंह छोड़ने लगा. थोड़ी देर तक दीदी का मुंह छोड़ने के बाद मैंने लुंड को दीदी के मुंह से निकला और मनीषा की छूट पर रखकर एक hi झटके में पुरे अंदर पेल दिया. मनीषा एकदम मस्ती में बोल पड़ी.

मनीषा- aaaaaaahhhhhhhhhh मेरी छोड़ू भैया. ऐसी hi मुजी छोड़ू बहुतत्त होई अच्छा लग रहा हैईईई और जोर से छोड़ो मुझी भैया. तुममम मुझी छोडड़ना चाहत्तीए थी ना तू छोड़ू मेरे यारर अपनीइ मसक्का कोऊ. जूरर जोररर सी ठोक्को मेर्री छुटत कोऊ उउउउउउइइइइइ.

मनीषा की बात सुनकर मैंने मनीषा को जोर जोर से छोड़ना शुरू कर दिया. कुछ देर छोड़ने के बाद मैंने पा लुंड उसकी छूट से बहार निकल कर सरिता दीदी के मुंह में घुसकर उनका मुंह छोड़ने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी के मुंह से भी अपना लुंड निकल लिया और पीछे हटकर बैठ गया और दीदी को मनीषा के ऊपर से उठकर बिस्टेर पर लेटने के लिए कहा. दीदी बिस्टेर पर लेट गयी थो मनीषा दीदी के ऊपर 69 की पोजीशन में लेट गयी. दीदी मनीषा की छूट चाटने लगी. मैंने अपने लुंड को दीदी की छूट पर लगाया और एक hi झटके में उनकी छूट में लुंड उतर दिया. दीदी ने ससकते हुवे कहा.

सरिता दीदी- aaaaaaahhhhhhhhhhh बहनचोड़ड़. ीकेकक होई भार मी पुर्रा डालल दिया. छोड़ड़ड़ मेरे राजा. छोड़ मुझी. जजर्र जोरर सी छोड़ अपनी बहनन कोऊ. मैंन बहुतत्त ग्रामं होओओओ सल्ली. मुझी छोड़. बोल सल्ली तू मुझी छोड़ना चाहता ही ना. बोलल तू मेरा यार बनकर मुझी छोड़ेगा. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह गॉडडडड. फुककक मी मेरे राजा. छोड़ दल्लू अपनी गंडडीए ऑर्डर गाराममम डीडीई को मेरे भाई.

दीदी की बात सुनकर मैंने जोर जोर से दीदी की छूट पर धक्का मरना शुरू कर दिया. मनीषा जीभ निकलकर मेरे अंदर बहार होते लुंड पर घूमने लगी. मैं दीदी को छोड़ते हुवे बोलै.

मैं- आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सरित्ता डार्लिंगगग. मेरे तू नशिबब खुल गयी जो तुम्मने मुझी अपनी यी मदमस्त और गरम्म जावणीई का मालिक बनाया है. छुड़वा लू सरिता आजजज मुजसे जी भरकरर. बहुत मस्त है तुम्हारिई छूट मेरी गरम्म दीदी. मैं तुम्ही सरीई ज़िंदगीय छोड़ना चाहता हूँ. बोलु सरित्ता तुमममम अपंनीय छुटत मी मेरा लुंड लोगी साडी ज़िन्द्दगीई. बोललो

इतना कहकर मैं दीदी को जोर जोर से कोड़ने लगा. दीदी ने भी अपनी कमर को थोड़ी हरकत देकर अपनी छूट मुझसे चुदवाती हुई बोली.

सरिता दी- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सलीईई. मीरीई गराममम ऑर्डर गदरायी जवानीय को तेरी जैसा छोडऊ होई समभाल सकता हैई. टूउउ ही मुझी साडी ज़िन्द्दगी छोड़ेगा. औरर जोर जोर से थोकक अपना लुंड मेरीए छूट मी. आआआआहहहहहहह अभीयी. बाससस ऐसी hi छोड़ अपनी दी को. हचक हचक्क कर छोड़ mujje.bilkul भी रहम मैट करना मेरी छूट पाररर. जाब्ब देरखू रोटी रहत्ती हैई. ोोूहः.

मैंने दीदी की बात सुनकर 5-6 धक्के लगाकर अपना लुंड ुकि छूट से बहार कर लिया और मनीषा के मुंह में दे दिया. मनीषा मेरा लुंड बड़े चाव से चूसने लगी. मैंने मनीषा के सर को पकड़ लिया और उसका मुंह जोर जोर से छोड़ने लगा. थोड़ी देर छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड फिर से उसके मुंह से निकला और दीदी की छूट में पेल दिया और हचक हचक कर छोड़ने लगा. थोड़ी देर दीदी को छोड़ने के बाद मैंने अपन लुंड दीदी की छूट से निकल लिया और उनसे बगल होकर बिस्टेर के सिरहाने बैठ गया. दीदी और मनीषा उठकर मेरे पास आई और दीदी मेरा होंठ चूमने लगी.

थोड़ी देर दीदी ने मेरे होंठ चूमे फिर मनीषा ने मेरे मुंह को अपनी तरफ घुमाया और मेरे होंठ चूसने लगी. दीदी बिस्टेर पर लेट गयी और मेरा लुंड अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. थोड़ी देर मनीषा ने मेरा होंठ चूमा फिर वो भी बिस्टेर पर लत गयी और दीदी से मेरा लुंड लेकर अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. ऐसे hi बरी बरी से मेरा लुंड चूसने के बाद मैंने उन दोनों को अलग किया और दीदी को डोगग्य स्टाइल में खड़ा किया और मनीषा को दीदी के बगल में खड़ा करके दीदी की गांड को फ़ैलाने के लिए कहा. मनीषा ने दीदी की गांड को अपने हैंतो से फैल्या और दीदी की गांड पर थुक्क दिया. मैंने भी अपने मुंह से थूक दीदी की गांड पर गिराया और अपना लुंड उनकी गांड पर रख दिया. मैंने अपने एक घुटने को मोड़ा और पोजीशन बनाई और अपना लुंड दीदी की गांड में तेल दिया. एक दकके के साथ मेरा आधा लुंड दीदी की गांड में घुस गया दीदी मस्ती में सिसक पड़ी.

सरिता दी- AAAAhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiii. थोड़ा थिरी डायलललल, मेरिइइइ गणनंददद अभी पुररी खुलिई नाहीइ हैई. आराममम सी छोड़ bhaaiiii.ooooooooooohhhhh.

दीदी की सिसकारी सुनकर मैंने अपने लुंड को झाड़ तक बहार निकला और एक झटके के साथ दीदी की गांड में दाल दिया. दीदी की दर्द से चीख निकल गयी.

सरिता दी- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh सलीईईई. धीरी बोला था डालनी की लियी. तुणीऐ मेरिइइइ गाँण्ड फाडड्ड डीई. ऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मुम्ममइय्ययययययय. दिखोऊ तुम्मारा बीतता tummhaaariiiiiiiiiii सरित्ता कक्कीी गंड़द फाड़ रहा हैई. ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

दीदी की बात सुनकर मनीषा अपनी जीभ निकल कर मेरे अंदर बहार होते लुंड को चाटने लगीई. दीदी ने भी मनीषा की छूट में अपना हाँथ फिरना सुरु कर दिया. मैं दीदी की गांड से लुंड निकल कर मनीषा के मुंह में दे दिया और उसका मुंह छोड़ने लगा.



थोड़ी देर बाद मैंने अपना लुंड मनीषा के मुंह से निकलकर दीदी की गांड में दाल दिया और जोर जोर से दीदी की गांड छोड़ने लगा. थोड़ी देर दीदी की गांड हचक हचक कर छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड दी की गांड से बहार निकला और मनीषा की डोग्गिस्टीले में किया और दीदी को अपने पैरो के बिच बैठाया और अपना लुंड मनीषा की गांड पर रख कर एक झटका लगाया. मेरा लुंड पूरा मनीषा की गांड में समां गया. मनीषा दर्द के कारन जोर से चिल्ला उठी.

मनीषा- ooooooohhhhhhhhhhhhh मम्मीयिययियीय. निकालल साली अपना लुंड मेरीए गंड़द सी बहाररर. मुझी नाहीइ छुड़वाना तेरी see.salla एक्दम्मम जंवरर की तरह छोड़ता हैई तू. थोड़ा भी रहम नहीं करता. मैंनं तेरी बहाणं होऊं सेल कोइई बाजारू रण्डी नही होऊं जो इतनी बेदर्दी सी ठोंककक रहा हैई. ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भैया. ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा हैई.

मनसा की बात सुनकर मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड से बहार निकल लिया और मनीषा की छूट पर रककर एक झटके में मनीषा की छूट में उतर दिया. मनीषा मस्ती में सिसकने लगी. मैं अपना लुंड अंदर बाहर करने लगा. दीदी ने अपनी जीभ बहार निकल ली और मेरी गोटियों और लुंड को चाटने लगी. मैं थोड़ी देर मनीषा को छोड़ने के बाद अपना लुंड उसकी छूट से बहार निकला और उसकी गांड में रखकर जोर से उसकी गांड में थोक दिया और ताबड़ तोड़ धक्का मरने laga.manisha मदहोशी में बड़बड़ाने लगी.

मनीषा- ooooooohhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaahhhhhhhhhhh छोड़ू साली. बहुत्त जालिम्म ही तू. बहुत्त बुरी तरहहह छोड़ता हैई री तू और अछ्हीइ तरहहह से भी छोड़ता हैई. मेररिई तू नस नसस ढिलीई कर दी ही तुणी भैया. आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह uuuuuuuuuuuuffffffffffff .

मैं मनीषा की गांड छोड़ रहा था और दीदी मेरी गोटिया और लुंड चाट रही थी.



थोड़ी देर मनीषा की गांड छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड मनीषा की गांड से निकल लिया और मनीषा के ऊपर hi दीदी को भी डोगग्य स्टाइल में लिटा दिया और अपना लुंड दीदी की छूट में डालकर धक्के मरने लगा. मैं अब बहुत तेज़ तेज़ धक्के मर्डर रहा था. दीदी ने अपना हाथ निचे करके मनीषा की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. थोड़ी देर दीदी की छूट छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड उनकी छूट से निकलकर मनीषा की छूट में घुसा दिया. और उसकी छूट छोड़ने लगा. और दीदी की गांड पर थप्पड़ मरने लगा.

10 मिनट तक धुँवाधार चुदाई के बाद दोनों झड़ने के कगार पर आ गयी. मेरा भी होने वाला था तो मैं हचक हचक कर दोनों को बरी बरी से छोड़ने लगा. दोनों मस्ती में बड़बड़ाते हुवे झड़ने लगी.

मनीषा- aaaaaahhhhhhhhhh भैइयाआ और जोर से छोड़ो मैं झड़ने वाली हूँ. पूरा डैम लगाकर छोड़ो मुझे. फाड़ डालो मेरी छूट को. भरता बना दो इसका. ooooooooooohhhhhhhh मेरे छोड़ू भैया. हचक हचक कर छोड़ो मुझे और बन जाओ मेरे सैया. मैं झाड़ रही हूँ भैई. मुझे सम्भालो भैया. uuuuuuuuffffffffff आआआअह्हह्ह्ह्हह.

सरिता दी- oooooohhhhhhhhhhhhh सलीबी अभियई. मैंनं भीई आ रहीए हूँ छोडऊ राजा. औरर जोरर से बजा मेरा बजा. मर्डर धक्के मेरी छूट पारर. मैं झड़ने वाली हूँण. और जोर से छोड़. आआअह्ह्ह अभीयी संबालल मुझी मैं गइईईई मैंनं गयी. ooooohhhhhhhhhh

दोनों झाड़ गई तो मैं बिस्टेर पर उनके मुंह के पास गया और अपना लुंड मनीषा के मुंह में दाल दिया और उसका मुंह छोड़ने लगा. तब तक दीदी मनीषा के ऊपर से उठाकर बैठ गयी थी. मनीषा का मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह में डाला और छोड़ने लगा. अब मैं भी झड़ने को हो गया था इसलिए मैंने अपना लुंड बहार निकला और अपने हाँथ में लेकर मसलते हुवे झड़ने लगा.

मैं- aaaaaaaahhhhhhhhhh मेरिइइइइइइइ चुड़कक्कड़ड रांदडीयूओ. मैंन झाड़ड़ड़ रहा होऊणन. पीई जोऊ मेरे लुंदड़ का अमृतततत. ऊऊऊह्ह्हह्ह सरिता मैं आए रहा हूँण. लिए मनीषा पी जा मेरा पपनीई. oooohhhhhhhhhhh मैं गया. पिज्जा.

इतना कहते हुवे मैं उन दोनों के मुंह में बरी बारे से अपना लुंड का पानी निकलने लगा. जिसकी ेके क बून्द मैंने दोनों के मुंह में छोड़ दी और बिस्टेर पर धड़ाम से लेट गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-137

झड़ने के बाद मैं बिस्टेर पर धड़ाम से बैठ गया. थोड़ी देर तक दोनों ने अपने मुंह में लगे मेरे वीर्य को जीभ से चाटकर साफ किया फिर दोनों एकक दूसरे के होंठो को चूसने लगी. थोड़ी देर तक एकक दूसरे के होंठ चूसने के बाद मनीषा आकर मेरे लेफ्ट साइड में लेट गयी और सरिता दीदी मेरे राइट साइड में लेते गयी और करवट लेकर दोनों ने अपना हाँथ मेरे साइन पर रख दिया और फिरने लगी. हाँथ फिरते हुवे दोनों एक दूसरे को देख रही थी. मैंने दीदी की तरफ देखते हुवे कहा.

मैं- सच में दीदी मज़ा आ गया तुम दोनों की चुदाई करने में.

सरिता दीदी- मुझे भी बहुत मज़ा आया. सच में अभी 3सम चुदाई में बहुत मज़ा आता है.

मनीषा- इसका क्रेडिट मुझे जाता है. जो आपको इतना मज़ा आ रहा है.

सरिता दी- हाँ तुमने सही कहा. अच्छा अभी तू कल तो दीदी के यहाँ जा रहा है न.

मैं- हाँ कल hi जाऊंगा. क्योंकि कल सुबह जीजा जी मुंबई के लिए निकल रहे हैं.

मनीषा- तो कल कितने बजे तक निकलने का प्रोग्राम है आपका.

main-soch रहा हूँ की मॉर्निंग वाली ट्रैन पकड़कर निकल जाओ ताकि दोपहर तक दीदी के पास पहुंच जाऊ.

मनीषा- मैं सोच रही थी की जाने से पहले आज रत में एक बार और मज़ा कर लेते.

main-(mazakiya लहजे में) नहीं अब मैं कुछ नहीं करूँगा. अरे थोड़ी एनर्जी तो रहने दो मुझमे. वह दीदी भी भूखी प्यासी बैठी हैं. पहुंचते hi मुझपर टूट पड़ेंगी. तो कुछ तो डैम मेरे अंदर रहना hi चाहिए न दीदी की भूख और प्यास बुझाने के लिए.

सरिता दी- हाँ मनीषा अभी सही कह रहा है. अब कोई चुदाई वुडै नहीं होगी. जब अभी आएगा तो फिर मज़ा करेंगे. और हो सकता है दीदी भी हम लोगो के साथ हो.

मैं- हो सकता है का क्या मतलब. दीदी को हर हाल में अपने साथ शामिल करूँगा फिर होगा 4सम.

मनीषा- सच में भैया आप बहुत कमीने हो. देखो कैसे लार टपक रही हैई मुंह से.

मैं- हाँ मनीषा मैं कमीना ही हूँ और तुम्हे भी यही कमीना पसंद है.

मेरी बात सुनकर दोनों हंसने लगे. उसके बाद हम सबने अपने अपने नाम मात्र के कपडे पहने और मैं अपने कमरे में आ गया. कमरे में आने के बाद मैं बाथरूम में जाकर अपने आपको साफ किया और अपने कमरे में चला गया और लेट गया. थोड़ी देर बाद मम्मी पापा भी गर आ गए. शाम को मैं अपने कमरे से बहार आया और हॉल में बैठ गया. थोड़ी देर बाद पापा भी हॉल में आ गए. मम्मी किचन में चली गयी. पापा ने मुझसे पूछा.

पापा- तो किस टाइम निकल रहे हो सविता के पास जाने के लिए.

मैं- सोच रहा हूँ पापा की सुबह 3.30 की ट्रैन है उससे निकलूंगा तो 11 बजे तक पहुंच जाउगा बाकि जैसा आप कहे.

पापा- टिकट तो किये नहीं हो. तो ऐसा करो सुबह 6 बजे वाली ट्रैन से जाओ. उससे भी 2 बजे तक पहुंच hi जाओगे. दिन का समय रहेगा तो तुम्हे बैठने के लिए भी जगह मिल जाएगी.

मैं- ठीक है पापा. रेजर्वेशन हो hi नहीं पाया था. तो सुबह hi चला जाऊंगा.

उसके बाद वह जाकर कैसे रहना है. दीदी को परेशां नहीं करना है. ऐसे कई बात पापा ने समझे और मैं हाँ हाँ करता रहा. फिर ऐसे hi बातो बातो में खाने का समय हो गया तो सबने मिलकर खाना खाया और मैं उठकर अपने कमरे में चला गया. मैंने अपना कपडा उतर कर उव में लेट गया और दीदी के पास जाने के बाद मुझे कैसे कैसे क्या क्या करना है वो सोचने लगा. 10 बजे के लगभग मुझे जीजा जी का फ़ोन आया. मैंने कॉल पिच की और जीजा जी से नमस्ते किया.

मैं- प्रणाम जीजा जी. कैसे हैं आप.

जीजा जी- प्रणाणं सेल साहब. मैं ठीक हूँ. तुम अपना बताओ.

मैं- मैं भी बढ़िया हूँ. कल आप कितने बजे निकल रहे हैं मुंबई के लिए.

जीजा जी- वही सुबह 10 बजे के लगभग ट्रैन है. तुम तब ताका ा hi जाओगे न.

मैं- नहीं जीजा जी तब तक मैं नहीं आ पाउगा. बात ये है की रिजर्वेशन हुवा नहीं तो पापा कह रहे हैं 3 वाली ट्रैन से न जाकर 6 बजे वाली से जाओ. दिन का समय रहेगा तो बैठने के लिए दिक्कत नहीं होगी.

जीजा जी- ठीक है सेल साहब. 3 बजे तक तो घर आ hi जाओगे. तब तक तुम्हारी दीदी तुम्हारे लिए कुछ अच्छा सा खाना वगैरह बना लेंगी.

मैं- ठीक है जीजा जी. वैसे दीदी कहा पर हैं.

जीजा जी. वो अभी दूसरे कमरे में हैं. कल की तयारी कर रही हैं. रुको मैं बात करता हूँ.

मैं- रहने दो जीजा जी. अभी दीदी को तयारी करने दीजिए मैं बाद में बात कर लूँगा.

इतना कहकर जीजा जी को प्रणाम बोलकर मैंने अपने मोबाइल साइड में रख दिया और अपनी पैकिंग करने लगा. ज्यादा कुछ तो ले जाना नहीं था. बस दो सेट पंत शर्ट t-shirt रख लिया उव रख ली एक लोअर अउ t-shirt रख ली और कुछ और जरूरी सामान रख कर अपना बैग पैक कर लिया. इसके बाद मैं अपने बिस्टेर पर लेट गया. थोड़ी देर बाद मनीषा कमरे में दूध लेकर आई. वो एकदम मॉल बैंकर आई थी. वह कण में ईरफ़ोन लगाए हुवे कोई गण सुनती हुई एक बहुत hi डीप गले की निघ्त्य पहन कर आई थी, उसका गाला शायद मनीषा ने काटकर बड़ा किया था क्योंकि उसकी सिलाई दिख रही थी.



मेरा लुंड मनीषा को देखकर झटके खाने लगा. मैंने मनीषा की चूचियों को देखते हुवे लुंड रगड़ना शुरू किया. मनीषा मुझे देखर मुस्कुराने लगी. और आ कर मेरे पास कड़ी हो गयी. मैं उसकी चूचियों को देखकर अपना लुंड सहलाता रहा. थोड़ी देर बाद मनीषा ने कहा.

मनीषा- बस करिये भैया नहीं तो दूध निकल आएगा आपका.

मैं- दूध तो मैं तेरा निकलूंगा किसी दिन और निकल का पि जाऊंगा तुम देख लेना.

मनीषा- उसमे निकलने की क्या जरूरत है. मैं तो कब से निकल कर कड़ी हूँ, लेकिन आप पिटे hi नहीं हो.

ये बात मनीषा ने अपनी चूचियों को देखकर कही थी. मैं मनीषा की चूचियों को देखते हुवे उससे कहा.

मैं- आज मेरा मन नहीं है तुम्हारा दूध पिने का. किसी और दिन पिऊंगा तुम्हारा दूध.

मेरी बात सुनकर मनीषा झुककर मुझे दूध का गिलास पकड़ने लगी. झुकने की वजह से उसकी चुच्या घुंडी समेत बहार निकल आई.



मैं दूध पीकर गिलास टेबल पर रखा और मनीषा को पकड़कर अपने ऊपर खींच लिया और उसको अपने जांघो पर लिटा लिया. मनीषा मेरी जांघो पर लेटकर मचलने लगी. मैंने मनीषा की निघ्त्य को उसके कमर तक ऊपर सरका दिया निचे मनीषा ने पंतय पहनी हुई थी. मैं मनीषा की गांड सहलाने लगा. थोड़ी देर मनीषा की गांड सहलाने के बाद मैंने उसकी गांड को अपनी हथेली में भर लिया और दबाने लगा. जिससे मनीषा के मुंह से सिसकी निकल गयी.

थोड़ी देर उसकी गांड दबाने के बाद मैंने उसकी पंतय को उसकी गांड पर दोनों तरफ से अपने पंजो से पकड़ लिया. जिसके कारन उसकी पंतय सिमट कर उसकी गांड की गरर में घुस गयी. अब मनीषा की गांड मेरे सामने नंगी थी. मैंने मनीषा की गांड सहलाते हुवे एक हल्का सा थप्पड़ मनीषा की गांड पर जमा diya.uske मुंह से सिसकी निकल गयी. थोड़ी देर उसकी गांड पर हल्का हल्का थप्पड़ मरने के बाद मैं जोर जोर से थप्पड़ मरने लगा. मनीषा मचलने लगी. मैं मनीषा की गांड पर थप्पड़ मरने के बाद अपनी उसकी गांड के ऊपर झुककर अपनी जीभ निकल कर उसकी गांड चाटने लगा.



मैं अब और जोर जोर से मनीषा की गांड पर थप्पड़ मरने लगा और उसकी गांड को चाटने laga.manisha मस्ती में और दर्द में पागल हो गयी और बोलने लगी.

मनीषा- आआआह्ह्ह्हह्ह भैइयाआ. थोड़ड़ा धीरे मरू. आआआआअह्हह्ह्ह्हह जनुउउउउउ. बहुत्त अच्छा लग रहा हैईईई. कहा सी दिखा ही यी साब. ाप्प नई तू मुझी पागल कर दिया haiiii.oooooohhhhhhhhhhhhh मेरी जाननं ऐसी हीई करती राहु.

उसकी सिसकारी सुन और उसकी मस्ती देख मैंने दोनों हांथो से मनीषा की गांड पर थप्पड़ो की बरसात कर दी. और थप्पड़ मरने के बाद अपनी जीभ निकल कर उस जगह को चुम और चाट भी रहा था. मनीषा की गांड थप्पड़ से लाल हो गयी थी मगर मनीषा ने थप्पड़ मरने से मन नहीं किया था. ये देखकर मैंने मनीषा की गांड पर जोर से थप्पड़ मारा और मुठ्ठी में भरकर उसकी गांड को जोर से मसल दिया. मनीषा की दर्द और आनंद के कारन आँखे बंद हो गयी और वो मस्ती भरी आवाज़ में बोली.

मनीषा- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह भाइयाँआ. क्या करती हो तुमममम. बहुत्त ाहहए लग रहा हैई. मैंन तू तुम्हारी दीवाणीइ हूँ गयी होऊ मेरी राजा. पहली तू तुम ड़ड़ड़ड़ड़ देती हो लेकिन उसकी बाअद बहुत्त मज़ा देती हो. ोुह्ह्हह्ह औरर कर्रूआ भैया.

मैंने मनीषा की गांड पर थप्पड़ लगाना बंद कर दिया और उसकी गांड को एक हाँथ से सहलाने लगा. एक हाँथ मैंने आगे बढाकर उसकी चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा. मनीषा मज़े से भर गयी और अपने हाँथ से मेरे हाँथ को पकड़कर अपनी चूचियों पर जोर जोर से दबाने लगी. ये देखकर मैं मनीषा की एक चुकी और गांड अपनी हथेली में लेकर जोर से मसल दिया. जिससे वो सिसक कर बोली.

मनीषा- आआआआअह्हह्ह्ह्हह भैयाआ. अब्ब बर्दास्त नहीं हूँ रहा हैई. छोड़ दीजिये मुझी.

इतना कहकर मनीषा मेरी जांघो से उठकर मेरी गॉड में बैठ गयी और मेरे होंठो को चूमने लगी. और अपने हाँथ पीछे ले जाकर मेरी पीठ को सहलाने लगी. मनीषा बहुत वाइल्ड तरीके से मेरे होंठ चूस रही थी. होदी देर मेरे होंठ चूसने के बाद मनीषा ने अपना होंठ मेरे होंठो से हटा लिया और मेरी ाअंखो में देखने लगी. उसकी आँखे वासना के कारन लाल हो गयी थी. मैंने मनीषा से कहा.

मैं- देखो मनीषा आज मैं कुछ नहीं करना चाहता तुम्हारे साथ प्ल्ज़ मन जाओ न.

मनीषा- ठीक है भैया. अगर आप नहीं चाहते हैं तो मैं आपको फाॅर्स नहीं करुँगी.

मैं- तू नाराज़ तो नहीं हो गयी न मुझसे.

मनीषा- नहीं भैया. मैं नाराज़ नहीं हूँ. वैसे भी आप कही भागे थोड़े hi जा रहे हूँ. आज नहीं तो फिर कभी. अच्छा अब मैं चलती हूँ. सुबह जल्दी उठना भी है.

मैं- क्यों सुबह कोई खास काम है क्या जो जल्दी उठना है तुमको.

मनीषा- ख़ास काम क्यों नहीं है. मेरा सैया अपनी पहली बीवी के पास जा रहा है और मैं उसे भूखा थोड़ी hi जाने दूंगी. पता चला आपकी पहली बीवी को खबर लगी की उनका सैया पुरे रस्ते bhukha-pyasa रहा तो वो मुझको बोलेगी नहीं की तुमने मेरे सैया का ख्याल अचे से नहीं रखा. खाना तक नहीं दिया उसे.

मनीषा की बात सुनकर मैं हसने लगा. मनीषा भी मुस्कुराने लगी. फिर मनीषा बिस्टेर से उठकर कड़ी हो गयी और झुककर मेरे होंठो को एक किश की और दूध का गिलास उठाकर निचे चली गयी. मैं भी मनीषा के जाने के बाथरूम में जाकर पेशाब किया और अपने कमरे में आ गया. कमरे में आकर मैंने टाइम देखा तो 11.30 हो गए थे. मैंने सविता दीदी को फ़ोन किया. तो उन्होंने एक रिंग में फ़ोन नहीं उठाया और फ़ोन काट गया. मैंने फिर से दीदी को फ़ोन किया तो इस बार उन्होंने फ़ोन उठाया.

सविता दी- Hello अभी. कैसा है तू.

मैं- मैं बहुत अच्छा हूँ. आप कैसी हैं.

सविता दी- हाँ मैं भी बहुत बढ़िया हूँ. इतनी देर से क्यों फ़ोन किया. मैं कब से वेट कर रही थी.

मैं- मैंने सोचा कल जीजा जी जा रहे हैं तो आप दोनों कुछ खेला कर रहे होंगे. कही आप दोनों डिस्टर्ब न हो जाये. इसलिए मैंने और पहले फ़ोन नहीं किया.

सविता दी- हाँ एक राउंड हुवा उनका और वो सो गए. मैं तेरे फ़ोन का hi वेट कर रही थी, इसलिए अभी तक जग रही हूँ. तू कल आ जा. इतने दिन की साडी कसार निकल लूंगी.

मैं- ठीक है मैं कल 3 बजे तक पहुंच जाउगा. आप मेरे स्वागत के लिए तैयार रहना.

सविता दी- तुम आओ तो सही फिर देखो मैं तुम्हारा कैसा स्वागत करती हूँ. तुम देखते रह जाओगे.

मैं- ठीक है दीदी मैं अब रखता हूँ, बस एक कोई अच्छी सी फोटो भेज दो ताकि मैं आपकी फोटो देखते हुवे सपनो की रंगीन दुनिया में खो जॉन.

ये कहकर मैंने फ़ोन काट diya.meri बात सुनकर दीदी ने 5 मिनट बाद मुझे व्हाट्सप्प पर दीदी ने 2 फोटो भेजी थी. दीदी इस फोटो में बड़ी जानलेवा लग रही थी.





मैं दीदी की फोटो देखते देखते सो गया और सपनो की हसीं वादियों में खो गया. सुबह 4 बजे मनीषा ने आकर मुझे जगाया. मैं उठकर अपने कपडे लेकर बाथरूम में चला गया. मैं फ्रेश होकर नहाया और बहार अपने कमरे में वापस आ गागा. कमरे में आकर मैंने अपने कपडे पहने और निचे हॉल में आ गया. थोड़ी देर बाद पापा भी उठकर फ्रेश हुवे और हाल में आ गए.

मम्मी और दीदी ने नाश्ता बनाया और मेरे लिए ट्रैन पर खान ेके लिया खाना भी बनाया और मैंने थोड़ा नाश्ता किया. फिर दीदी ने खाना पैक किया और मुझे ला कर दे दिया. नाश्ता देने के बाद दीदी ऊपर चली गयी और मनीषा भी दीदी के पीछे पीछे ऊपर चली गयी. वह जाने के बाद दीदी ने मुझे बुलाया.

सरिता दी- अभी ज़रा ऊपर आना कुछ काम था तुझसे.

दीदी की बात सुनकर मम्मी ने कहा.

मां- जो भी काम है वो बता दो ये वापस आ कर कर देगा. अभी देर हो रही है इसको.

सरिता दीदी- नहीं 10 मिनट का काम है अभी. तू ऊपर आ जा मैं बताती हूँ तुझे और अभी गाड़ी छूटने में बहुत समय है.

मैं- रुको मां मैं देखकर आता हूँ की क्या काम है इनको. हो सकता है कुछ जरूरी काम हो.

इतना बोलकर मैं ऊपर दीदी के कमरे में चला गया. पापा निचे हॉल में hi बैठ गए और मम्मी किचन में चली गयी. जब मैं कमरे में पंहुचा तो मनीषा ने दरवाज़ा बंद कर लिया और आकर मेरी बगल कड़ी हो गयी और मेरे होंठो को चुम लिया. दीदी भी मेरे पास आयी और मेरे होंठो को किश करने लगी. मैंने अपने दोनों हांथो से दोनों की एक एक चूचियों को पकड़कर दबा दिया. दोनों की सिसकी निकल गयी. थोड़ी देर किश करने के बाद दोनों ने मुझे छोड़ा और मेरे सेठ निचे आ गे. पापा ने पूछा.

पापा- हो गया तुम्हारा काम. अब मैं जाऊ इसे लेकर. वैसे जान सकता हूँ की क्या काम था.

सरिता दी- अब ये जा रहा है दीदी के पास अगर इसका वह मन लग गया तो ये पता नहीं कितने दिन बाद लौटे इसलिए इसकी क्लास ले रही थी मैं. क्यों मनीषा.

दीदी की पूछने पर मनीषा ने अपनी गार्डन हाँ में हिलायी. पापा दीदी की बात सुनकर मुस्कुराने लगे तब तक मम्मी भी किचन से आ गयी थी. सब ने मिलकर मुझे बहार तक छोड़ने आये. पापा ने बाइक निकली और बाइक स्टार्ट की. मैं बाइक पर बैठ गया और स्टेशन की तरफ चल पड़ा. स्टेशन पर मैं सही समय पर पहुंच गया. ट्रैन भी सही समय पर थी. ट्रैन आने के बाद पापा घर चले गया और मैं अपनी मंजिल सविता दीदी की लेने के लिए चल पड़ा.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-138

सरिता दी- अब ये जा रहा है दीदी के पास अगर इसका वह मन लग गया तो ये पता नहीं कितने दिन बाद लौटे इसलिए इसकी क्लास ले रही थी मैं. क्यों मनीषा.

दीदी की पूछने पर मनीषा ने अपनी गार्डन हाँ में हिलायी. पापा दीदी की बात सुनकर मुस्कुराने लगे तब तक मम्मी भी किचन से आ गयी थी. सब ने मिलकर मुझे बहार तक छोड़ने आये. पापा ने बाइक निकली और बाइक स्टार्ट की. मैं बाइक पर बैठ गया और स्टेशन की तरफ चल पड़ा. स्टेशन पर मैं सही समय पर पहुंच गया. ट्रैन भी सही समय पर थी. ट्रैन आने के बाद पापा घर चले गया और मैं अपनी मंजिल सविता दीदी की लेने के लिए चल पड़ा.

अब आगे

ट्रैन में चढ़ने के बाद मैं 2 बोगी घूमता रहा बैठने की जगह ढूंढते हुवे. फिर मैं एक फॅमिली के पास थोड़ी खली जगह देखकर बैठ गया. वो फॅमिली अच्छी थी. उन्होंने मुझे थोड़ी और जगह बनाकर आराम से बैठने के लिए कहा. वो लोग भी आगरा hi जा रहे थे. उनसे बातचीत करके समय का पता hi नहीं चला और हम आगरा पाउच गए. आगरा पहुंचने तक मेरी उस फॅमिली के साथ अच्छी बॉन्डिंग हो गयी थी. वो वही आगरा के रहने वाले थे. उन्होंने अपना एड्रेस भी दिया और अपना फ़ोन no भी. मैंने उनको अपना फ़ोन no. दिया और आने आ वडा करके उनसे विदा लेकर स्टेशन से बहार आया और ऑटो कर दीदी के फ्लैट की तरफ चल पड़ा. मैं दीदी के प्लेट के सामने ऑटो से उतरा और पैसे देने के बाद मैं दीदी के प्लेट के अंदर गया.

जैसे hi मैं दरवाज़े के सामने पंहुचा दीदी दरवाज़े पर सोरह श्रीनगर करके रंगोली बना चुकी थी और उस पर दीपक जलाकर सजावट कर रही थी. दीदी ने लहंगा चोली पहना हुवा था जिसमे से दीदी के क्लीवेज दिख रहे थे. लेकिन दीदी इतनी खूबसूरत लग रही थी की मेरे मन में दीदी के लिए इस समय भाई बहन वाला प्रेम उमड़ आया. मैं दीदी को देखकर मुस्कुराने लगा. दीदी ने अभी मुझे नहीं देखा था. मैंने दीदी को आवाज़ दी तो दीदी ने नज़र उठाकर मुझे देखा और मुस्कुरा दी.



दीदी ने थाली साइड में राखी और दौड़कर मेरे गले लग गई और मेरे पुरे चेहरे पर चुंबनों की बरसात कर दी. दीदी बहुत देर तक मेरे गले लगी रही. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या दीदी बस गले hi लगी रहोगी. अपने भाई को घर के अंदर नहीं ले चलोगी.

मेरी बात सुनकर दीदी मुस्कुराते हुवे मुझसे अलग हो गयी और मेरा हाँथ पकड़कर मुझे घर के अंदर ले गयी. दीदी मुझे लेकर अपने बैडरूम में आ गयी और मुझे बीएड पर बैठा दिया और मेरे साथ hi वो भी बीएड पर बैठ गयी और मुझसे पूछा.

सविता दी- सफर कैसा रहा अभी. आने में कोई दिक्कत तो नहीं हुई न.

मैं- नहीं दीदी आने में कोई दिक्कत नहीं हुई. एक अच्छी फॅमिली मिल गयी थी तो बातचीत करते हुवे समय का पता hi नहीं चला. और मैं आपके पास आ गया.

सविता दी- और बता घर में सब कैसे हैं और मनीषा और सरिता कैसी हैं. वो मुझे याद करती हैं या बिलकुल hi भूल गई हैं.

मैं- कैसी बात कर रही हो दीदी. आप भी कोई भूलने की चीज हो. सभी ाको याद करते हैं. और आते समय दीदी ने कहा था की आपको भी साथ लेकर hi मैं वापस आऊं.

सविता दी- अच्छा. ले जी बातो बातो में तो मैं तुझे पानी पूछना hi भूल गई. तू रुक मैं पानी लेकर आती हूँ. तू तब तक बाथरूम में हाँथ मुंह धोकर फ्रेश हो जा.

उसके बाद दीदी उठकर किचन में चली गई और मेरे लिए पानी और मिठाई लेकर आई. मेरे साथ दीदी ने भी मिठाई खाई और मिठाई कहते हुवे दीदी ने पूछा.

सविता दी- तो कैसा लगा मेरे स्वागत करने का अंदाज़.

मैं- बहुत अच्छा दीदी. आपके स्वागत करने का अंदाज़ ऐसा था जैसे कोई पत्नी अपने पति का स्वागत करती है जब वो जंग के मैदान से कोई जंग जीतकर घर वापस आता hai.waise मेरा भांजा कहाँ है दिखाई नहीं दे रहा hai.khahi खेलने गया है क्या.

सविता दी- वो तो अपनी दादी के घर गया हुवा है कुछ दिन पहले. उसके दादा जी आये थे उसे लेने.

ये बोलकर दीदी मुस्कुराने लगी. मैं भी मुस्कुराने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी ने कहा.

सविता दी- तू रुक मैं कुछ देर में आ रही हूँ अब ये कपडे बदल लून.

मैं- क्या हुवा इन कपड़ो को अचे तो लग रहे हैं. पहने रहिये न. मुझे तो अच्छा लग रहा है.

सविता दी- तू रुक तो सही. मैं आ रही हूँ कुछ देर में.

इतना बोलकर दीदी अपने बैडरूम से बहार निकल गयी. मैं उनके कमरे में बैठा अपना फ़ोन निकलकर देखने लगा. लगभग 20 मिनट बाद दीदी कमरे में आई और मुझसे बोली.

सविता दी- अभी. देखकर बता मैं कैसी लग रही हूँ.

दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने दीदी की तरफ देखा तो मैं पलके झपकना भूल गया. दीदी बाला की खूबसूरत लग रही थी. उन्होंने लहंगा चोली उतारकर भारतीय नारी का श्रृंगार किया हुवा था. दीदी सदी और ब्लाउज पहना हुवा था. ब्लाउज दोनों तरफ से डीप था इसलिए दीदी के क्लीवेज दिख रहे थे. दीदी एक ऐडा से आगे पीछे, घूम घूम कर अपना हुस्न मुझे दिखा रही थी, लेकिन मेरे अंदर पता नहीं उस समय तनिक भी दीदी के गन्दा विचार नहीं आया. मैं अपना मुंह खोले दीदी को देखता जा रहा था. दीदी ने मुझे ऐसे अपने आपको देखते पाया तो उन्होंने मुझसे कहा.



सविता दी- क्या हुवा अभी तू ऐसे मुंह फाडे क्या देख रहा है. मैं अच्छी नहीं लग रही हूँ क्या.

मैं- कैसी बात कर रही हो दीदी. तुम इस समय ऐसी लग रही हो जैसे आसमान से कोई देवी साक्षात् मुझे दर्शन देने के लिए जमीन पर उतर आई हो. यू अरे लुकिंग गॉर्जियस दीदी. यू अरे डैम बेऔतीफुल्ल.

दीदी अपनी इतनी ज्यादा तारीफ सुनकर शर्मा गयी और शरमाते हुवे मुझसे बोली.

सविता दी- क्या अभी. क्यों झूठ बोल रहा है. मैं इतनी ज्यादा भी सुन्दर नहीं लग रही हूँ जितनी ज्यादा तू तारीफ कर रहा है मेरी.

मैं- मैं सच कह रहा होऊं दीदी. आपको देखकर मेरे मन में कोई भी गलत भावना जन्म नहीं ले रही है. मैं एक भाई की साफ नियत से ये आपको कह रहा हूँ की आप बहुत सुन्दर लग रही हो.

मेरी बात सुनकर दीदी मेरे पास आकर बैठ गयी और मेरे माथे को चूमकर बोली.

सविता दी- तू सच में बहुत अच्छा है मेरे भाई. उस समय पता नहीं कैसे हम दोनों गलत रस्ते पर चल पड़े थे. और अब वापस नहीं लौट सकते. लेकिन तू मेरी इतने इज़्ज़त करता है. मुझे ये जानकर अच्छा लगा. च लैब तुझे भूख लगी होगी. मैं तेरे लिए खाना लेकर आती हूँ और अपने हांथो से तुझे खिलाती हूँ.

इतना कहकर दीदी किचन में चली गयी और मैं बिस्टेर पर बैठे बैठे यह सोचने लगा की क्या मैंने अपनी बहनो के साथ जो किया वो सही था. एक भाई की नज़र से देखु तो मैंने बहुत बड़ा पाप किया है, लेकिन एक मर्द की नज़र से देखों तो इसमें कोई बुराई नहीं है. आखिर मेरी बहने प्यासी थी और मैंने उनकी प्यास बुझाई. अब वो भी खुश हैं और मैं भी तो ये गलत नहीं हो सकता. अभी मैं ये सब सोच hi रहा था की दीदी खाना लेकर आ गयी. मुझे गहरी सोच में डूबा देखकर दीदी ने मुझसे पुछा.

सविता दी- क्या हुवा अभी. किश सोच में डूबा हुवा है.

मैं- मैं सोच रहा हूँ की क्या मैंने आपके साथ जो किया वो गलत नहीं था.

सविता दी- नहीं भैई तुमने कुछ गलत नहीं किया और ये बात अपने दिमाग से निकल दे क्योंकि, अगर मेरी मर्ज़ी के बिना तू ये मेरे साथ करता तब ये गलत होता. लेकिन तुमने जो कुछ भी किया उसमे मेरी मर्ज़ी भी शामिल थी. इसलिए तू ये सब भूल जा और चुपचाप खाना खा. और भविष्य में ऐसा फिर कभी मत सोचना की तुमने कुछ भी गलत किया है मेरे साथ.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपने हाँथ से एक निवाला उठाया और दीदी को खिलने लगा. दीदी ने अपने मुंह आगे करके निवाला अपने मुंह में दाल लिया. दीदी ने भी एक निवाला मेरे मुंह में दाल दिया. इसी तरह हम डॉन भाई बहन पूरा खाना एक दूसरे को अपने हांथो से खिलाकर ख़तम कर दिया. फिर दीदी मुझे आराम करने को बोलकर बर्तन लेकर किचन में चली गयी. मैं दीदी के बैडरूम में hi सो गया.

शाम को 7 बजे तक मैं सोता रहा. जब मैं सोकर उठा और बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर बैडरूम से बहार आया तो दीदी किचन में टिया बना रही थी. मैं जाकर दीदी के पास खड़ा हो गया. दीदी ने मुझे देखा और मुस्कुराने लगी और मुझसे बोली.

सविता दी- अरे अभी. तुम उठ गए. मैं चाय बनाकर तुझे जगाने hi वाली थी.

तब तक चाय बन गई दीदी ने दो कप में चाय निकली और एक प्लेट में नमकीन निकली और उसे लेकर हॉल में आ गयी. मैं और दीदी हॉल में आकर बात करते हुवे चाय पिने लगे. चाय पिने के बाद दीदी ने बर्तन साफ़ किया और आ कर मेरे बगल में बैठ गयी और बोली.

सविता दी- मैं सोच रही हूँ की हम दोनों बहार कही डिनर के लिए चलते हैं. तुम क्या बोलते हो अभी.

मैं- ये भी कोई पूछने की बात ही दीदी. चलो इसी बहाने थोड़ा घूमना हो जाएगा.

सविता दी- ठीक है फिर. तू जाकर तैयार हो जा मैं भी तैयार होने जा रही हूँ.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी के बैडरूम में तैयार होने चला गया और दीदी दूसरे कमरे में चली गयी. मैं तैयार होकर हॉल में आकर बैठ गया और दीदी का वेट करने लगा. 30 मिनट बाद दीदी तैयार होकर बहार आई. मैं दीदी को देखता रह गया. दीदी ने ज्यादा श्रृंगार नहीं किया था. बस हल्का सा अपने आपको make-over किया था. दीदी बहुत ज्यादा खूबसूरत लग रही थी. मैं दीदी को देखकर बोलै.



मैं- आप बहुत hi ज्यादा खूबसूरत लग रही हो दीदी.

सावता दी- थैंक यू. अब ज्यादा बात मत बना. बाइक निकल नहीं तो देर हो जाएगी.

दीदी की बात सुनकर मैंने बाइक बहार निकली और दीदी ने दरवाज़ा लोक किया. मैंने बाइक स्टार्ट की और दीदी मेरे पीछे मेरे कंधे पर हाँथ रखकर बैठ गयी. दीदी के बैठने के बाद मैंने गई आगे बढ़ा दी. दीदी मुझे एक रेस्टोरेंट में ले गयी. रैस्टोरैंट बहुत hi अच्छा था. हम वह जाकर एक टेबल पर बैठ गए. थोड़ी देर बाद वाटर आया. दीदी ने मुझसे खाना आर्डर करने के लिए कहा. मैंने खाना आर्डर कर दिया. हम दोनों बैठे इधर उधर की बाते करते रहे 15 मिनट बाद वाटर खाना लेकर आया. हम दोनों ने मिलकर खाना खाया. फिर बिल पाय करने के बाद मैं और दीदी भर के लिए निकल गए. घर वापस आते आते 10 बज गए थे. घर पहुंच कर दीदी ने दरवाज़ा खोला.

हम दोनों अंदर गए और दरवाज़ा लोक बंद कर लिया. मैं दीदी के बैडरूम में जाकर अपने कपडे चेंज किये और सिर्फ लोअर पहनकर बीएड पर बैठ गया. थोड़ी देर बाद दीदी भी कड़पे चेंज कर के बैडरूम में आ गयी. दीदी ने निघटीपहनि हुई थी जो उनकी चूचियों से लेकर निचे पुरे पैरो तक थी.



मैं दीदी को देख रहा था. दीदी मुझे देखते हुवे मेरे पास आई और बीएड पर बैठ गयी. अभी मैं दीदी से कुछ बोलता. उससे पहले hi मेरा मोबाइल बजने लगा. मैंने देखा तो मनीषा की कॉल थी. मैंने कॉल पिक की और स्पीकर पर दाल दी. मैं बोलै.

मैं- Hello मनीषा.

मनीषा- ही भैया. पहुंच गए अचे से. आपने तो फ़ोन hi नहीं किया पहुंचने के बाअद.

मैं- हाँ पहुंच गया. और पापा को फ़ोन करके बता दिया था मैंने.

मनीषा- हाँ अब मुझे क्यों बताओगे दीदी जो मिल गयी हैं आपको.

मनीषा की बात सुनकर दीदी ने कहा.

सविता दी- हाँ तो इतने दिन बाद मेरा भाई मेरे पास आया है. अभी तक तो तुम्हारे hi पास था. आने के बाद बातो में व्यस्त हो गई. इसलिए तुन्हे नहीं बता पाई मैं भी.

मनीषा- अच्छा दीदी. अब भी भैया के पास hi हो क्या.

सविता दी- हाँ दीदी की बच्ची. और बता सरिता कैसी है. क्या कर रही है वो.

सरिता दी- हाँ दीदी मैं अच्छी हूँ. आप जल्दी से अभी के साथ आ जाइये यहाँ. फिर हम चारो मिलकर खूब मस्ती करेंगे.

सविता दी- हाँ बस कुछ दिन में मैं आ रही हूँ वह. च लैब फ़ोन रख रही हूँ. बाद में बात करती हूँ तुमसे.

सरिता दी- गुड़ नाईट दीदी. बेस्ट ऑफ लक अभी.

इतना कहकर सरिता दीदी ने फ़ोन काट दिया. लेकिन उन्होंने मुझे बेस्ट ऑफ़ लुक बोलै तो सविता दीदी ने उस बात को पकड़ लिया और मुझसे पूछने लगी.

सविता दी- ये सरिता ने तुझे बेस्ट ऑफ लुक क्यों बोलै अभी.

मैं- अब क्या बताऊँ आपको दीदी. जब से आप यहाँ आई हैं सरिता दीदी मुझे बहुत परेशां करती हैं. वो बात बात पर कुछ भी बोलती रहती हैं. जो मेरी समझ में बिलकुल भी नहीं आता. पहने मैंने कई बार उनसे पूछा था, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं बताया तो मैंने उनसे पूछना hi छोड़ दिया.

सविता दी- अच्छा तुझे परेशां करती है सरिता. चलती हूँ वह तो उसकी अचे से खबर लेती हूँ. अच्छा ये बता. तू बोल रहा था की तूने एक गिर्ल्फ्रेंड बना ली है. मुझे भी बता कौन है वो.

मैं- एक नहीं है दीदी. दो गिर्ल्फ्रेंड बना ली है मैंने आपके आने के बाद. और उनको मैं बताऊंगा नहीं. जब आप चलेंगी तो आपसे मिलवाऊंगा उन्हें.

सविता दी- अच्छा. अभी उस दिन तो बोल रहा था की एक hi गिर्ल्फ्रेंड है और अभी बोल रहा है की 2 हैं.

मैं- (हँसते हुवे) आपको भी उनके साथ जोड़ लू तो मेरी 3 गिर्ल्फ्रेंड हैं. एक को तो मैंने अभी 2-3 दिन पहले hi पटायी है.

सविता दी- चाल हैट कमीने. मैं तेरी गिर्ल्फ्रेंड नहीं हूँ. तेरी बहन हूँ. और तू तो बड़ा hi फ़ास्ट निकला रे. मेरी अनुपस्थिति में तुमने 2 गिर्ल्फ्रेंड बना ली. वाह तेरे तो मज़े हैं. वैसे दूसरी वाली के साथ कुछ किया भी या नहीं अभी तक.

मैं- क्या किया दीदी. अब खुलकर बोलो न. मुझसे किस बात की शर्म.

सविता दी- हाँ तू तो मुझे बेशरम बनाकर hi मानेगा. अरे मैं ये कहना चाहती हूँ की तूने दूसरी वाली को छोड़ा है या नहीं.

मैं- अरे दीदी कैसी बात करती हो आप. मैं किसी को पत्तों और बिना चोदे hi छोड़ दूँ. ये भला हो सकता है क्या. आप तो मुझे अच्छी तरीके से जानती hain.(ye बात मैंने दीदी के पैसर को उनकी निघ्त्य के ऊपर से सहलाते हुवे बोलै था)

सविता दी- (मुस्कुरा कर) हाँ . ये मुझसे बेहतर और कौन जान सकता है. जैसे तुमने मुझे पाटकर छोड़ दिया था. यही कहना चाहता है न.

मैं- बिलकुल सही कहा आपने दीदी. और दीदी मैंने उसको आगे और पीछे दोनों जगह से छोड़ दिया है.

सविता दीदी- मतलब. कही तू उसकी गण्ड की बात तो नहीं कर रहा है.

मैं- बिलकुल सही दीदी. मैंने उसकी छूट भी छोड़ी है और उसकी गांड भी मरी है. और एक बात बताऊँ यहाँ आने से पहले कल दिन में मैंने अपनी दोनों गर्लफ्रेंड की छूट और गांड अच्छी तरह से बजे है. दोनों ने बहुत मज़ा लिया. बोल रही थी की जब तक मैं नहीं आऊंगा. तब तक वो कैसे रहेंगी.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी ने अपने मुंह पर हाँथ रख लिया और मुझे देखते हुवे बोली.

सविता दी- क्या बात ही अभी तो तो बहुत पहुंची हुई चीज़ है, लेकिन उन्होंने अपनी गांड कैसे मरवा ली. वो भी कोई छुड़वाने की जगह है.

मैं- आपको नहीं पता दीदी उन दोनों को अपनी छूट छुड़वाने से ज्यादा अपनी गांड मरवाने में कही ज्यादा मज़ा आता है. कभी आप भी तरय करना. आपको भी बहुत मज़ा आएगा.

इतनी गरम गरम और खुली बातो से दीदी और मैं गरम होने लगे थे. इसलिए मेरे गांड मरवाने वाली बात पर दीदी ने ज्यादा रिएक्शन नहीं दिया और मुझसे कहा.

सविता दी- अभी तू उन दोनों की बात छोड़. और जो हम दोनों को करना है उसके बारे में सोच.

मैं- क्या करना है दीदी हम दोनों को अब.

मेरी बात सुनकर दीदी ने कुछ नहीं कहा और आगे बढ़कर मेरी गॉड में आकर बैठ गयी. मेरा लुंड अब तक खड़ा हो गया था. इसलिए दीदी के बैठने से वो दीदी की गांड के निचे डाब गया. मेरी गॉड में बैठने के बाद दीदी ने अपने होंठ आगे बढाकर मेरे होंठो पर रख दिए और चूसने लगी. मैं भी अपना एक हाँथ दीदी की पीठ पर और एक हाँथ दीदी की गांड पर रखकर उन्हें सहलाने लगा और होंठ चूसने में दीदी का साथ देने लगा. होंठ चूसते हुवे दीदी ने अपना हाँथ मेरी गार्डन में लप्पेट रखा था और पूरी तल्लीनता के साथ मेरे होंठो का रसपान कर रही थी.

थोड़ी देर मेरा होंठ चूसने के बाद दी ने अपनी जीब मेरे होंठो पर फिरनी शुरू कर दी. मैंने भी अपना मुंह थोड़ा सा खोल दिया. जिससे दीदी ने अपनी जीभ मेरे मुंह में दाल दी और गोल गोल घूमने लगी. मैं भी अपनी जीभ दीदी की जीभ के साथ अपने मुंह में लड़ने लगा. फिर दी की जीभ चूसने लगा.



दीदी भी अपने जीभ पूरी मेरे मुंह में दाल कर चुसवा रही थी. थोड़ी देर दीदी की जीभ चूसने के बाद मैंने अपनी जीभ दीदी के मुंह में दाल दी और दीदी मेरी जीभ चूसने लगी. मैं एक हाँथ से उनकी पीठ और एक हाँथ से दीदी की गांड दबाने लगा. थोड़ी देर पीठ दबाने के बाद मैंने अपना हाथ निचे लेजाकर उनकी गांड पर रख दिया और दोनों हांथो से दीदी की गांड दबाने लगा.

थोड़ी देर दीदी की गांड दबाने के बाद मैंने दीदी की निघ्त्य को अपने हांथो से पकड़ लिया और उसे ऊपर करने लगा. मैं थोड़ा थोड़ा निघ्त्य को ऊपर सरका रहा था. मैंने निघ्त्य दीदी की गांड के ऊपर कर दी और दीदी की नंगी गांड पर अपना दोनों हाँथ रखा तो दीदी के मुंह से आआआह्ह्ह्हह्ह निकल गयी. दीदी अब मेरे पुरे चेहरे को चाट रही थी. थोड़ी देर तक मेरे चेहरे को चाटने के बाद दीदी मेरे चेहरे को चूमने लगी. मैं दीदी की नॉटी को और ऊपर उठाया और अब उनकी नीगहत्य चूचियों तक ऊपर उठा दी थी मैंने. मैं अपने हाँथ दीदी की नंगी पीठ पर घूमने लगा. मकने अपने हांथो में दीदी की पीठ को सहलाते हुवे उनकी निघ्त्य में पीछे से उनकी गार्डन तक दाल देता था और सहलाता था.

दीदी मेरे चेहरे को चूमने के बाद अपना मुंह पीछे कर लिया और मेरी आँखों में देखने लगी. मैंने दीदी की निघ्त्य उनके जिस्म से उतरकर निचे फेंक दी. अब दीदी मेरी गॉड में ब्रा और पंतय में बैठी थी. मैं दीदी की आँखों में देखने लगा. थोड़ी देर दोनों एक दूसरे की आँखों में देखते रहे. दीदी की आँखों में एक सेक्सी निमंत्रण था मेरे लिया. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपना एक हाँथ दीदी से दीदी के गलो को सहलाने लगा और एक हाँथ दीदी की चूचियों पर रखकर दबाने लगा. दीदी ने मस्ती में अपनी आँखे बंद कर ली थी. थोड़ी देर उनके गलो को सहलाने के बाद मैंने अपनी ऊँगली उनके होंठो पर रख दी और सहलाने लगा. मेरे ऐसा करने से दीदी ने अपनी आँख खोलकर मुझे देखा और फिर से अपनी आँखे बंदकर ली. मैं दीदी के होंठो को सहलाने लगा. थोड़ी देर दीदी के होंठ सहलाने के बाद मैंने अपनी ऊँगली से दीदी के मुंह पर दबाव डालने लगा. तो दीदी ने अपनी आँखे खोल दी. थोड़ी देर मेरी आँखों में देखने के बाद उन्होंने अपना मुंह खोल दिया और मेरी ऊँगली अपने मुंह में ले ली.



दीदी मेरी ऊँगली अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. मैं एक हाँथ से दीदी की चूचियों को अभी भी दबा रहा था और बिच बिच में उनकी चूचियों पर थप्पड़ भी मर रहा था. जिससे दीदी आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह उउउउउउउउफ्फ्फफ्फ्फ़ कर रही थी. मैं दीदी की चूचियों से खेलने के बाद अपना हाँथ उठाकर दीदी की गांड पर रख दिया और दबाने लगा. अब मैं अपनी एक ऊँगली दीदी के मुंह से अंदर बहार करने लगा. दीदी भी अपना मुंह खोलकर मेरी ुंली अंदर बहार अपने मुंह में करवा रही थी. थोड़ी देर एक ऊँगली अंदर बहार करने के बाद दीदी मैंने अपनी एक और ऊँगली दीदी के मुंह में दाल कर अंदर बहार करने लगा. दीदी के मुंह से घायललललललल ह्ह्ह्हालललल की आवाज़ निकल रही थी. थोड़ी देर ऐसे hi दीदी के मुंह को ऊँगली से छोड़ने और दीदी की गांड को दबाने के बाद मैंने अपने हाँथ उनके मुंह और गांड से हटा लिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-139

मैंने दीदी के मुंह और गांड से हाँथ हटाने के बाद दीदी को उठाकर बगल में बैठा दिया और उठकर खाद हो गया और दीदी को उठाकर अपनी गॉड में उठा लिया दीदी मेरी गार्डन को पकड़कर बोली.

सविता दी- क्या कर रहा ही अभी. मुझे निचे उतार. मैं गिर जरूंगी.

मैं- अभी तो तुम्हारा टाइम आया है मेरे ऊपर सवारी करने का और तुम उतरने की बात कर रही हो. अब मैं बिना अपने घोड़े की सवारी कराये नहीं उतरूंगा.

सविता दी- प्लीज अभी. निचे उतर मुझे नहीं तो मैं सच में गिर जाउंगी.

मैं दीदी की गांड को कसकर पकडे हुवे उसे दबाने लगा और अपने होंठ दी के होंठो पर रख दिए और चूसने लगा. मैं दीदी के होंठ बहुत जोर जोर से चूस रहा था. दीदी भी मेरा सहयोग कर रही थी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैंने दीदी के होंठो को छोड़कर दीदी के गलो को चूमना शुरू कर दिया. मैं दीदी के गलो को चूमते हुवे निचे की तरफ आने लगा. मैं दीदी की गार्डन और कंधे से होते हुवे निचे आने लगा तो दीदी ने अपना एक हाँथ मेरी गार्डन से हटा कर अपने शरीर को थोड़ा पीछे किया जिससे दीदी का शरीर मेरे शरीर से थोड़ा दूर हो गया.

मैं दीदी का निमंत्रण समझकर दीदी की गार्डन को चूमते हुवे दीदी के चूचियों के ऊपरी भाग को चूमने लगा. निचे से मैं दीदी की गांड को जोर जोर से दबा रहा था. जिससे दीदी मस्ती में सीसर रही थी और मेरे सर को अपने चूचियों पर दबा रही थी.

सविता दी- Aaaaaaaaaaaahhhhhhh अभियई. क्याआआ जादूओ कर ददिया ही तुमने मुझपेररर. मैंन तेरई दीवाणीइ बाण गईइहुँ. टेरिइइइइ हीरर ेक्क्क बात मुझी अछ्ही लगतीय हैंन ऐसे ी ही चूस मेरी चूचियोऊ को और खूब कास कास कर मेरी गण्ड दबा री भईई.

दीदी की बात सुनकर मैं जोर जोर से दीदी की गांड दबाने लगा. मैंने थोड़ा अपना मुंह और निचे झुकाया और अपने मुंह में दीदी की एक चुकी ब्रा समेत भर ली और चूसने लगा. वो मस्ती में आह्ह्ह्हह ऊऊओह्ह्ह्हह करने लगी. मैं दीदी की चुकी ब्रा समेत जोर जोर से चूस रहा था और दीदी की गांड खूब तेज़ी से मसल रहा था.



मैंने दीदी की चूचियों की घुंडी को अपने दन्त से खुरेदना लगा जिससे दीदी मस्ती में मचलने लगी. मैं दीदी की एक चुकी को छोड़कर दूसरी चुकी को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा. मैं उनकी घुंडियो को दांतो के बिच दबा दिया और उनकी गांड को जोर से मसल दिया. दीदी मस्ती में सिसक पड़ी.

सविता दी- oooooooooohhhhhhhh Bhaaiiiiiiiiiiiii. ऐसी हीई कटु मेरी चूचियोऊ को बहुत्त अच्छा लग रहा हैई. मैंनं माहिईणु सीए इस माज़ी की लिये तरसससस रहियी थिई. uuuuuuuuuuiiiiiiiiii mummyyyyyyyyyy. तू बहुत्त अच्छी तआराहहह मेरे जिस्सममम सी खील रहा haiiiii..aiseee होई खिलता रहहह मेरे शरीयर सी. टूउउ होई इस्सस शरीयर का माल्लीककक हैईईई. पीईई जाए मेरीए चूचियोऊ कोऊ अभीयी. सर्रा दुधह निछोड़ ली मेरा.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी की चूचियों को जोर जोर से खींच खींच कर चूसने लगा. फिर मैंने दीदी की गांड दबाते हुवे दीदी को अपनी गॉड से उतारकर उनको जमीन पर खड़ा किया और घुमाकर अपने आगे कर लिया और उनकी ब्रा का हुकक्क पकड़ कर उसे खोल दिया और दीदी के शरीर से निकलकर उसे दूर फेंक दिया. अब दीदी ऊपर से नंगी मेरे आगे कड़ी थी. मैंने दीदी की कमर में हाँथ डाला और जोर से अपनी तरफ खींचा. दीदी सीधे पीठ की तरफ से मुईशे चिपक गयी और दीदी के मुंह से सिसकी निकल गई.

सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह Bhaaiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. थोड़द्दआ धीरे सीए.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी के कंधे पर अपना होतन्ह रख दिया और अपना हाँथ आगे बढाकर एक हाँथ से दीदी की चुकी को पकड़ लिया और एक हाँथ से दीदी की छूट कोप एंटी के ऊपर से पकड़ लिया और दोनों को जोर से मसल दिया. दीदी सिसक पड़ी.

सविता di-aaaaaaaahhhhhhhhhhhh ABhiiiiiiiiiiiiiiiiiiii. मेरीए भाईईई. aaaaahhhhhhhhhhh

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने अपने हाँथ में दीदी की चुकी और छूट भरकर फिर से मसल दिया. दीदी बहुत ज्यादा मदहोश हो चुकी थी. इसलिए वो मादक आवाज़ में सिसक पड़ी.

सविता di-aaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh oooooohhhhhhhhhhhhh mummmyyyyyyyyyy. कीटनाए अछ्हा लाग्ग रहा हैई तेरा हठः मेरी छूट औरर चुकी पररर. uuuuuuuuuuuufffffff ऐसी होई करर्ता रहहहह मेरे भैई. तेरा जितंना मंत्र कर्रे उतना मसल्ल मेरी चूचिवू कोऊ. मसलललमसल्ल कररर लाल कर दे िंकोऊ. यी बहुत्त तंगगग करतीय हैंन मुझको भईई.

main-(didi की चूचियों को जोर से मसलते हुवे)- ये कैसे तंग करती हैंन तुमको सविता.

सविता दी- oohhhhhhhhhhhh मेरी भाईईई. मेरी राजा. एईई काःटीई हीी कोई मुझी अभी सीए मासलवाना हीी. उसके हांथोउ सी निचोडवाना हीी. उसे बुलाओ और मुझी उसकी हवाले कर दोऊ. ताकीवो मुझी अच्छी सी निचोड़ सकी.

main-(chuchiya और जोर से मसलते हुवे)- अच्छा ऐसी तंग करती हैंन तुमको तुम्हारी चूचिया सविता.

सावित ा dii-oooooooohhhhhhhhhhhhhh मुम्मईयययययययय. हांण भईईई ऐसी होई मेरिइइइइ छुटत को बदाऊओं जोरर जोरर सी दबाओओओओ. एई भीईई तुझीऐ बहुत्त याद कार्र्टी िहाइईईई हीी. हमेशा अटेरेई याद में रोटी रहतीई हैईईईई. िस्कु भीई टेरिइइइ जरूरतत ही भईई.

मैं- (छूट और चुकी मसलते हुवे)- चूचियों का तो ठीक ही लेकिन इनको मेरी क्या जरूरत ही सविता.

सविता दी- uuuuuuuuuuuufffffffffffff uuuuuuuuuiiiiiiiiiiiiii mummyyyyyyyyyy. इसकूओ टेरिइइइ नाहीई भाईईई तेरी लुंदड़ कीई जर्रूरत हीी. वोऊ तेरी लौडी के लिये रोटीइ रहहतीई हैई. यी कहती हैई की मुझी अभी का लौड़ा चाहिये मेरीए छूट मई. oooooohhhhhhhhhh अभीयी. ाआजजजजज चू इसी इतना छोड़ना की यी रोना भूल जेईई. बोलल अभियई करेगा ना ऐसा.

मैं- हाँ सविता तुम बिलकुल भी चिंता मत करूओ. मैं इसीलिए तो तुम्हारे पास आया हूँ. मैं 2-3 दिन अभियई तुम्हारी सठह यहा अकेला रहूंगा औरर इन् 2-3 दिनु मी मैंन तुम्हारी सररर चीड़ अच्छी से खुल दूंगा. जोऊ खुल गया खुल गया ही उसे और फैला दूंगा और जो अभी नहीं खुला ही उसे खोलकर तुमको घर ले चलूँगा सविता.

इतना बोलकर मैं दीदी की छूट से उनकी पैंटी को साइड में किया और उनकी छूट में ऊँगली एक झटके में घुसा दी और तेज़ी से दीदी की छूट ऊँगली से छोड़ने लगा. मैं एक हाँथ से दीदी की चूचियों को भी बरी बरी से जोर जोर से दबाने लगा. दीदी ने अपना हाँथ पीछे ले जाकर लोअर के ऊपर से मेरा लुंड पकड़ लिया और उसे हिलने लगी. थोड़ी देर ऐसे hi लुंड हिलने के बाद दीदी ने अपना हाँथ लोअर के अंदर दल लिया और नंगे लुंड को जोर से दबा दिया. मरी सिसकी निकल पड़ी.

मैं- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhh सविताआए जनममनननननन. आराममम सी.

दीदी मेरी आह्हः सुनकर जोर जोर से मेरे लुंड को दबाने लगी. मैं दीदी की छूट और चुकी पर जोर जोर से पाने हांथो का कमल दिखा रहा था. लगभग 5 मिनट तक दीदी ने मेरे लुंड के साथ और मैं दीदी की छूट और चूचियों को साथ खेलने के बाद मैं दीदी को छोड़कर उनसे अलग हो गया, लेकिन दीदी ने अभी भी मेरा लुंड पकड़ा हुवा था. दीदी घूमकर मेरे सामने हो गयी और मेरे होंठो पर अपना होंठ रखकर चूमने लगी और मेरे लुंड को दबाने लगी. दीदी मेरे होंठ को कुछ देर चूमने के बाद मेरे गलो को चूमते हुवे गार्डन और कंधे से होते हुवे मेरे साइन पर आकर रुक गई.

मेरे साइन को दीदी ने अपनी जीभ निकल कर कुछ देर छठा उसके बाद मेरे निप्पल से छेड़खानी करते हुवे वो निचे की तरफ आने लगी, दीदी मेरे पेट को चूमने लगी. वो मेरे लुंड को अभी भी दबा रही थी. दीदी ने कुछ देर मेरे पेट को चूमा फिर जमीन पर बैठ गयी और मेरी आँखों में देखने लगी. थोड़ी देर मेरी आँखों में देखने के बाद उन्होंने अपने दोनों अंगूठे मेरी लोअर में फंसा दिए और उसे निचे की तरफ खींचने लगी. दिदिने मेरी लोअर निचे खींच दी. मेरा लुंड पहले से hi खड़ा हुवा था जैसे hi मेरा लोअर निचे हुवा मेरा लुंड उछलकर दीदी की ठुड्डी से टकराया. और पेंडुलम की तरह हिलने लगा. दीदी ने मेरी लोअर निचे की मैंने अपना पेअर उठाकर लोअर उतरने में मदद की.

लोअर उतारकर दीदी ने मेरे लुंड को अपने हांथो में भर लिया और सहलाने लगी. तोड़ी देर लुंड सहलाने के बाद दीदी ने अपनी जीभ निकली और मेरे लुंड पर घूमने लगी. दीदी मेरे पुरे लुंड पर अपनी जीभ घुमा रही थी. जीभ लुंड पर पड़ते hi मेरे मुंह से ssssssssssss आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सविता की आवाज़ निकलने लगी. थोड़ी देर मेरे लुंड को चाटने के बाद दीदी ने मेरी आँखों में देखा और अपना मुंह खोलकर मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. दीदी अपना पूरा मुंह खोलकर मेरा लुंड अपने मुंह में लेने की कोशिश कर रही थी. दीदी मेरा लुंड पहले धीरे धीरे चूस रही थी.

कुछ देर धीरे धीरे चूसने के बाद दीदी ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और तेज़ी से चूसने लगी. मैंने दीदी को घुटने के बल बैठने को बोलै. दीदी घुटने के बल बैठ गे और मेरा लुंड चूसने लगी. मैंने अपना हाँथ दीदी के सर पर रख दिया और अपने लुंड की तरफ दबाने लगा. थोड़ी देर मेरा लुंड चूसने के बाद दीदी ने मेरा लुंड अपने मुंह से बहार निकल लिया और मेरे लुंड पर थूका फिर पूरा मुंह में भरकर चूसने लगी. मैंने दीदी के सर को पकड़ लिया और अपने लुंड पर आगे पीछे करने लगा. दीदी के मुंह से ग्ग्ग्ग्हःहःहःहूउऊउउउउउ ghghhhuuuuuuuuuuu की आवाज़ निकल रही थी.



थोड़ी देर दीदी का सर आगा पीछे करना के बाद मैंने दीदी का सर मज़बूती से पकड़ लिया और अपने लुंड जोर से दीदी के मुंह में घुसा दिया और फिर बहार निकल लिया. दीदी खांसने लगी. दीदी जैसे hi खांस चुकी मैंने फिर से अपना लुंड एक झटके में दीदी के मुंह में घुसा दिया और जोर जोर से उनका मुंह छोड़ने लगा. दीदी गगगगगगगगह्ह्हह्हह्हुउउउउउउउउ gggggggghhhhhhhhhhuuuuuuuu कर रही थी. मैं दीदी का मुंह छोड़ते हुवे उनसे बोलै.

मैं- aaaaaaahhhhhhhhhh सविताआआ. बहुत्त दिनु बाददद तेरा मुँहहहह नसीइब्बब हुवा हैई मेरी लॉडेड कोऊ. कीटनाआ गारामममम बाद्दयंत्र हैई टेराआ उससेई भीईई जायदा तेरा मुंह गरमममम हीी. कहीए मेरा लुँड्ढना पिघलल जाई तेरी मुँहहह में सरिताआ.

इतना बोलते हुवे मैं तेज़ी से दीदी का मुंह छोड़ता रहा. मैं जोर जोर से धक्का मर रहा था. फिर मैं ीक हाँथ दीदी के सर से हटाया और दीदी की चूचियों पर धीरे धीरे थप्पड़ मरने लगा.



दीदी का पूरा चेहरा उत्तेजना के करना लाल हो गया था और मैं उसपर थप्पड़ भी मर्डर रहा था. थोड़ी देर दीदी का मुंह छोड़ने के बाद मैंने अपने लुंड दीदी के मुंह से निकल लिया. दीदी खांसते हुवे अपनी सांसे दुरुस्त करने लगी और सांसे दुरुस्त होने के बाद मुझसे बोली.

सविता दी- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भहाआईई चू तू अभी भी वैसी hi जहवारू कोई ताराहहह करता हीी. तनिककक भी बदलाव नही आया तेरे ाँदाररर. कैसी झेलटीई होंगीइ वो दूनू तेरे मुसल्ल जैसी लुंदड़ को. जांनंनिकलल जेटी होगी उनकी तेरा अंडरर लेनी में.

मैं- क्या बात करती होऊ सविता. वोऊ तुमसे भी अच्छीई तरहहह मेरा लुंड लेटीइ हैई अपने मुँहहह मई. बहुत्त गरममम मालललल हईं दोन्यू सविता.

सविता दी- मुझसे भी गरममम मॉल हैंन क्या वोऊ donoo(Jelouse में)

मैं- तुम तो मेरे लिए दुनिया की सबसे गरममम औरत होऊ सविता. तुम्हाररी बराबरी वोऊ दोनों कभी नहीं कर सकती हैं.

इतना बोलकर मैंने दीदी को उठाकर उनके बिस्टेर पर फेंक दिया. और उनके पास जाकर उनकी पंतय को अपनी उंगलियों में फसकर उतर कर जमीन पर फेंक दिया. दीदी अब बिलकुल नंगी बिस्टेर पर लेती हुई थी. मैं दीदी के ऊपर चढ़ गया और उनके होंठो को चूमने लगा और एक हाँथ से दीदी की चूचियों को दबाने लगा. थोड़ी देर दीदी की चूचियों को दबाने और होंठ चूसने के बाद मैं दीदी की चूचियों को मुंह में भर लिया और अपना हाँथ दीदी की छूट पर रख दिया. दीदी के मुंह से सिसकी निकल पड़ी.



सविता di-aaaaaaahhhhhhhhhh अभीइइइइइइ. मरीईईई bhaiiiiiiiiiiiiiiiii.

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने दीदी की चूचियों को चूसते हुवे दीदी की छूट मसलने लगा. दीदी की छूट मसलते हुवे मैं दीदी की चुकी को जोर जोर से चूसने लगा. थोड़ी देर दीदी की चुकी चूसने के बाद मैं निचे आया और अपनी जीभ उनकी छूट पर रख दी और चाटने लगा. मैंने अपने एक हाँथ ऊपर करके उनकी चुकी को दबाने लगा. मैं दीदी की छूट को chat-te हुवे एक ऊँगली उनकी छूट में घुसा दी और अंदर बहार करने लगा. मैं दीदी की छूट में ऊँगली करते हुवे दीदी की चुकी वाला हाँथ उठाकर अपने मुंह में दल लिया और ऊँगली पर थूक लगा कर दीदी की गांड पर रख दिया और उनके ासशोले पर थोकक मलने लगा. मेरा उंगली अपनी गांड पर महसूस करके दीदी ने अपनी आखे खोलकर मुझे देखा और कहा.

सविता दी- ये क्या कर रहा है अभी. वहा ऊँगली क्यों कर रहा है. तेरे इरादे तो ठीक हैं न.

मैं- मेरे इरादे बिलकुल ठीककक हैं सविता. तुम्हारी गदरायी हुई गांड देखकर मैं कण्ट्रोल नहीं कर प् रहा हूँ. तुम अपनी गांड तो मरने डौगी नहीं. तो काम से काम ऊँगली hi कर लेने दो. मैं ये सोचकर संतोष कर लूंगा की मैंने अपनी गांड के साथ खेला था.

सरिता दी- मेरा ये शरीर तेरा हैईईई. तू मेरे जिस्म का मालिक ही अभी. तू जो चाहे कर मेरे साथ, लेकिन वहा बहुत दर्द होगा. इसलिए मैं तुझे अपनी गांड नहीं दे रही हूँ भैई. देखह नाराज़ मैट होना मुझसे. यी गांड भी अब तेरई ही हीी. इसका ढक्कन तू hi खोलेगा. लेकिन मुझे गांड मरवाने में बहुत दर लग रहा हैई भाई.

मैं- ठिक्क है सविता. जैसा तुम कहोगी वैसा hi होगा. मैं बिना तुम्हारी सहमति के तुम्हारी गांड नहीं मरूंगा, लेकिन अपनी कातिल गांड से खेलने से मुझे मत रोक सविता.

सविता दी- मुझे तुझपर भरोषा है भायी की तू बिना मेरिइइइ सहमतीय के मेरी गण्ड नही मरेगा. ठीकक हैई चू मेरी गांड से खेल सकता है.

दीदी की सहमती मिलने के बाद मैंने फिर से एक ऊँगली उनकी छूट में डाली और एक ऊँगली अपने मुंह में दाल ली. और दीदी की छूट अपनी जीभ निकल कर चाटने लगा. मैंने अपनी ऊँगली अपने मुंह से निकलकर उनकी गांड पर रखकर दबाव डालने लगा. थोड़ा जोर से दबाव दानले के कारन कछह की आवाज़ आई और मेरी ऊँगली उनकी गांड में एक इंच घुस गई. दीदी के मुंह से चीख निकल गई.

सविता दी- ooooooohhhhhhhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiii. बहार निकाल ली भायी अपनी उंगली. मुझे दर्द्द हो रहा हैई. aaahhhhhhhhhhhh. प्ल्ज़ भैई.

दीदी की चीख सुनकर मैंने अपनी ऊँगली वही रोकक दी और दीदी की छूट चाटने लगा फिर मैंने अपने मुंह में थूक इकट्ठा किया और अपनी ऊँगली बहार निकल कर उनकी गांड पर थूक दिया और अपनी ऊँगली फिर से उनकी गांड में डालने लगा. मेरी ऊँगली फिर से उनकी गांड में थोड़ी सी hi गई तो दीदी ने अपना शरीर ईशर उधर करना शुरू कर दिया. मैंने अपनी एक इंच ऊँगली hi अंदर बहार करते हुवे दीदी की छूट चाटने laga.main 5 मिनट तक दीदी की छूट छठा और जिससे दीदी झड़ने के करीब पहुंच गयी तो मैंने अपनी ऊँगली एक झटके में दीदी की गांड में उतर दी दीदी दर्द से चीख पड़ी.

सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह मम्मीयिययियी. बहुत्त दररररडद्ड हो रहा हैईईई bhaiiiiiiiiii. बहरररर निकककलललललल लिए अपनी ऊंगलीईई, मेरी छूट में आग लगीई हैई पहली उसे बुझा दी. ऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपनी ऊगली दीदी की छूट से निकल ली और अपनी गांड वाली ऊँगली बहार निकल कर दो बार अंदर बहार की और फिर बहार निकल कर दीदी के एक पेअर को अपने कंधे पर रखा और अपने लुंड का निशाना दीदी की छूट को लगाकर उनकी चुकी को पकड़कर एक जोरदार धक्का मारा. मेरा लुंड सरसराता हुवा दीदी की छूट में उतर गया. दीदी चीखः पड़ी और अपने शरीर को इधर उधर करने लगी.

सविता दीदी- aaaaahhhhhhhhhhhh ooooooohhhhhhhhhhhh मुम्ममइय्ययययययय. बहाररर निकककलललल सल्ली. बहुतत्त ड़ड़ड़ड़ड़ होओओओ रहा हैईईई. ढेरी नाहीइ डालल सक्क्ता था क्या. हर्र समायी जँवाररर बना रहहता हैईईई. ड़ड़ड़ड़ड़ हूँ रहा हीी भैई.

main-(apna लुंड बहार निकलकर फिर से उनकी छूट में जड़ तक्क ठोककर बोलै) मैंने तुम्हे कितनी बार छोड़ा हैई फिर भी नाटककक कर रहीए होओओओ.

सविता दी- Saleeeeeeeeee ooooooohhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh ऊऊफफफफ्फ्फ्फ्फ़. माहिईनी सी ज्यादा हूँ गया हैई तेरा लुंड लिये हुवेई. मेरी छूट कस गयी हैई. तेरी जीजाजी का छोटा लुंड हैई तू पाटा नाहीइ चलता की कब्ब आया औरर कब्ब गया. लेकिननंतरा लुंड को हलब्बी हैई. इसी अपने अंदर लेना बहुत्त मुस्ककललल ही. ooooooooohhhhhhhhhh धीरे से.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को जोर जोर से ठोकना शुरू कर दिया. दीदी बहुत छुडासीय हूँ चुकी थी इसलिए वोऊ झड़ने के करीब पहुछ गई और मेरे 8-10 धक्के के बाद दीदी भलभलाकर झड़ने लगी.



सविता दी- ooooooooohhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiiiiiiii. मेरी भैयाआ. मैं आनी वालीए हुन्न. ऐसी होओओओ चूडड्ढू मुझी. औरर जोरर जोरर से ढकी मरू. मैंन झाड़ड़ड़ रहीए होऊणन. ooohhhhhhhhhhh अभियई. मैं गईई. मैंन गईई.

दीदी इतना बोलकर झाड़ गई और लम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. मैं थोड़ी देर अपने लुंड को आगे पीछे करना बंद कर दिया. जब दीदी कुछ नार्मल हुई तो मैं दीदी को फिर से ठोकने लगा. अब उनकी छूट झाड़ चुकी थी तो उनकी छूट में चिकनाई ज्यादा हो गई थी जिसके कारन हर धक्के के साथ फछहः फछहः की आवाज़ आ रही थी. मैं दीदी को छोड़ते हुवे उनकी दूसरी तंग को भी उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और छोड़ने लगा. थोड़ी देर चुदाई के बाद दीदी फिर से गरम हो गई और बोलने लगी.

सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह Abhiiiiiiiiiiiiii. ऐसी ही छोड़ मुझी. मेरीए छूट में फिरर सी आग लग गयी हीी. औरर जोरर से छोड़ मेर्री रज़ाअ मैं तुझसे हमेशा ऐसी होई छुड़वाना चाहती हों. औरर जोरर जोर धक्के मर्डर और मेरी छूट के चिथड़े उदा दे. हचक हचक कर छोड़ अपनी दीदी को. आआआअह्ह्ह्ह Bhaiiiiiiiiiiiiii uuuuuuuiiiiiiiiiiiiiiiii मम्मीयियय.

दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. मेरे धक्के की स्पीड इतनी ज्यादा बढ़ा गई थी की मैं 10 सेकंड में 25-30 बार अपना लुंड बहार निकल कर दीदी की छूट में पेल देता था. दीदी भी अपनी गांड उछाल उछाल कर मेरा लुंड अपनी छूट में ले रही थी. मैं दीदी की दोनों तंग को ुकि चुकी पर लगा दिया और उनके ऊपर लेटकर हचक हचक कर उन्हें छोड़ने लगा. दीदी मेरी आँखों में दीख रही थी. वो मस्ती में नशीली आवाज़ में बोलने लगी.



सविता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरिइइइइ जांणण. छूवोड्ढ मुझीऐ भाईई ऑर्डर जूरर सी छोड़ मुझी दियल्ल खुलल कर चूडड़ड मुज्झी. मैं तेरई गुल्लाम्म्म होऊं. औरर जोरर सी छोड़ Salee.merriii प्यासस टीएडीए जीजजा की लुंड सी नाहीई बूझटति. मेरीए प्यास भुझाने की लिये तेरी जैसी हालाबभी लुंड की जरूरत हैई. औरर जोरर सी छोड़ सेल. दम्म लगा कर चूड्डड्ड.

दीदी की मदमस्त आवाज़ सुनकर मैंने दीदी की छूट में 3-4 कसकर धक्के लगाए और अपने लुंड को बहार निकल कर बिस्टेर से निचे खड़ा हो गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
धन्यवाद आपका।

अब कहानी का नायक एक ही व्यक्ति है अभी। और उसके पास एक ही लण्ड है, वो भी गोल गोल। तो जाहिर सी बात है कहानी एक ही लंड पर गोल गोल ही घूमेगी। :DD: :DD::what1::toohappy::vhappy1:

अगर लंड आँड़ा तिरछा होता तो शायद कहानी आँड़ा तिरछा घूमती।

आप ज्यादा परेशान मत होइए। ये कहानी अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गई है। बामुश्किल 10-12 भाग में कहानी समाप्त हो जाएगी। उसके बाद आपको मुझे झेलना नहीं पड़ेगा।:what1::DD:😂😅😜

साथ बने रहिए।
 
अपडेट-140

सविता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह मेरिइइइइ जांणण. छूवोड्ढ मुझीऐ भाईई ऑर्डर जूरर सी छोड़ मुझी दियल्ल खुलल कर चूडड़ड मुज्झी. मैं तेरई गुल्लाम्म्म होऊं. औरर जोरर सी छोड़ Salee.merriii प्यासस टीएडीए जीजजा की लुंड सी नाहीई बूझटति. मेरीए प्यास भुझाने की लिये तेरी जैसी हालाबभी लुंड की जरूरत हैई. औरर जोरर सी छोड़ सेल. दम्म लगा कर चूड्डड्ड.

दीदी की मदमस्त आवाज़ सुनकर मैंने दीदी की छूट में 3-4 कसकर धक्के लगाए और अपने लुंड को बहार निकल कर बिस्टेर से निचे खड़ा हो गया.

अब आगे.

मैंने दीदी की छूट से अपना लुंड बहार निकल लिया. दीदी ने मेरी तरफ सवाल भरी नज़रो से दिखा. मैंने दीदी का हाँथ पकड़ कर जमीन पर खड़ा किया और उनकी चूचियों को पकड़कर दबाने लगा. पीछे से एक हंथ से दीदी की गांड पर थप्पड़ मरने लगा. दीदी आआआअह्हह्ह्ह्ह अभी. उउउउउउउ ह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभी करने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की तंग थोड़ा सा फैलाकर उनके बगल से एक हाँथ डालकर उनकी एक चुकी को पकड़ लिया और एक हाँथ से अपना लुंड दीदी की छूट पर सेट किया और उनकी कमर को पकड़ लिया. मैं कुछः देर ऐसे hi खड़ा रहा तो दीदी ने पीछे मुड़कर मेरी आँखों में देखते हुवे कहा.

सविता di-kyaaa हुवा अभियई. अब्ब किस बात का इंतज़ार कर रहा है टोक दे अपना लुंड मेरी छूट में. अब बर्दास्त नहीं हो रहा है. छोड़ मुझे भाई चूड मुझे.

दीदी की बात मानकर मैंने अपनी कमर को एक झटका दिया. मेरा लुंड आधा दीदी की छूट में उतर गया. दीदी के मुंह से सिसकी निकल गयी.

सविता दी- aaaaaahhhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii. ऐसी हीई धीरे धीरे अंडर दललल.

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने उनकी चुकी को अपनी मुठी में दबा लिया और उनकी कमर को मज़बूती से पकड़कर अपना लुंड एक hi झटके में उनकी छूट में उतर दिया. दीदी दर्द से चीख पड़ी.



सविता दीदी- aaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh कामिनी साली. धीरे सीए नाहीइ दललल सकता था क्या. मुझी ड़ड़ड़ड़ड़ देना तुझको अच्छा लगता हैई. uuuuuuuuuuiiiiiiiii मा. आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऐसी ही छोड़ मुझी. तुझसे छोड़ना मुझे बहुत पसंदड़ हीी भाईईई. आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

main(didi की छूट को ठोकते हुवे)- अच्छा इतना पसंद ही तुम्हे मुझसे छुड़वाना. तो बताऊओं क्या कर सकती छूट उम् मेरे लिये.

सविता दी- आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीयी. औरर जोरर सी चूडड़ड मुझी. मैं तेरी लिये सबब कुछ करूंगी मेरीए जाननं चू कही तू सरई ुमारर टेरिइइइइ कुटिया बंनकरर तुझसे चुदती राहुओं. चू कही तू मैं कीसीई सी भी छुड़वा लू. बोलल क्या चाहिये तुझी. मैं सबब कुछ करूंगी तेरी लिये.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी की चुकी दबाते हुवे दूसरे हाँथ से उनकी गार्डन को पकड़ लिया और जोर जोर से छोड़ने लगा. मेरे झटके से दीदी हिल जाती थी. मैं उन्हें छोड़ते हुवे उनसे बोलै.

मैं- मुझे तुम्हाररी गण्ड मारनी हैई. बोलु अपनी गण्ड मरवाओगी मुझसेइ. बोलो सविता.

सविता दी- आआअह्हह्ह्ह्हह अभीयी. आईसीई ीबाटी मैट कर भईईई. मुज्झी बहुत्त दर्द्द होगा. चू इसकी अलावा कुछ भी बोलल. और मुझी ऐसी ही छोड़ता रह. बहुत्त मज़ा आ रहा ही तुझसे छुड़वाकर.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को लेकर बिस्टेर पर लिटा दिया. दीदी का जांघ से बहार का हिस्सा बीएड से बहार था. मैं दीदी के गांड के ऊपर थप्पड़ मर मर कर हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. मेरा झटका बहुत दमदार था पूरा बीएड हिल रहा था. मैं दीदी की गार्डन को पकड़े हुवे जोर जोर धक्के मरे जा रहा tha.didi बोल रही थी.



सविता दी- आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह भईईई. औरर जोरर से छोड़ो भईई मुझी छूट मी कुछ हो रहा हैई. लगता हैई मैं झाड़ जोगीइ और जोर से धक्के मरू. ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह bhaiiiiiiiiiiiiiiii.

दीदी की बात सुनकर लगा की वो झड़ने वाली हैंन. मैं भी किसी वक्त झाड़ सकता था इसलिए मैं दीदी के ऊपर से उठा और दीदी को उठाकर बिस्टेर पर किया और उनकी कमर को ऊपर उठाकर उनकी गार्डन को निचे बीएड पर दबा दिया और जोर जोर से उनकी छूट ठोकने लगा. दीदी बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- oooooooooooohhhhhhhhh अभी.. मैंनं आए रही हूँण मेरा पानी निकलने वाला haiii.mainnn झड़ने वाली हूँण मुझी सम्भालो अभी. आह्ह्हह्ह्ह्ह मैं गईइइइइइइ.

दीदी ये कहते हुवे झाड़ गई. मैं भी झड़ने वाला हो गया था इसलिए 5-6 धक्के लगाकर मैं भी दीदी की छूट में दहाड़ने लगा और बोलने लगा.

मैं- ऊऊऊओह्ह्ह्ह सविता रानीई. मैंन भी गया री. तू बहुत्त अच्छी से चुदवाती ही. टेरिइइइ छूट मी तू आग ही रणीय. मेरे लुंड को निचोड़ लिए तुमने. आआआआह्ह्ह्हह्ह मैंन भी झाड़ रहा हूँण तेरी छूट मी. संभाल मुझे सरिता. ऊऊफफफ ोुह्ह्ह्हह्ह.

इतना कहकर मैं भी झाड़ गया और अपना लुंड दीदी की छूट से निकलकर बिस्टेर पर किनारे लेते गया. थोड़ी देर तक दोनों ने अपनी सांसो को कण्ट्रोल किया फिर दीदी भी सीधी लेट गयी और मेरी तरफ देखने लगी. मैं दीदी की तरफ देखकर उनसे कहा.

मैं- इतने दिन बाद आपको छोड़ने में बहुत मज़ा आया. तुमको मज़ा आया सविता.

सविता दी- हाँ अभी कितने दिन बाद जाकर आज मेरीए प्यास बुझी हैई. मैं तो इस मज़े के लिए तड़पती रहती थी. काश राघव की जगह तू मेरा पति होता.

मैं- अच्छा हुवा मैं तुम्हारा पटी नही हूँ. नहीं तो मेरा लुंड भी छोटा होता और तुम्हारा जो भैई होता वो तुम्हारी मस्त जवानी को छोड़ता. मैं तुम्हारा भाई hi ठिक्क हूँ.

मेरी बात सुनकर दीदी हंसने लगी. थोड़ी देर बाद दीदी उठकर बाथरूम में चली गयी थोड़ी देर बाद दीदी फ्रेश होकर बहार आयी तो मैं भी बाथरूम में घुस गया और फ्रेश होकर बहार आ गया.

बाथरूम से बहार आकर मैं और दीदी नंगे hi बीएड पर लेट गए. दीदी मुझसे चिपक कर लेती हुई थी. मैं दीदी के बालो को सहला रहा था. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी से कहा

मैं- दीदी एक बात कहनी थी तुमसे. अगर तुम बुरा न मनो तो कहु.

सविता दी- मैं तुम्हारी बातो का कभी बुरा मन सकती हूँ. तुम कहो तो.

मैं- (दीदी की आँखों में देखते हुवे) वो क्या है न दीदी मैं ये कह रहा था की मुझे आपके साथ इसी बिस्टेर पर सुहागरात माननी है. आपको अपनी दुल्हन बनाकर छोड़ना चाहता हूँ.

सविता दी- ये तू क्या कह रहा है अभी. तू जनता है की मैं राघव की दुल्हन हूँ.

मैं- तो क्या हुवा दीदी. एक रात के लिए मेरी भी दुल्हन बन जाइये न. मुझे बहुत ख़ुशी होगी.

सविता दी- चल ठीक हैई. तेरी ख़ुशी के लिए मैं ये भी करुँगी. चल अब सो जा रात बहुत हो गयी है.

उसके बाद हम दोनों सोने की कोशिश करने लगे और हम दोनों को कब नींद आ गयी पता hi नहीं चला. सुबह दीदी पहले उठी. उन्होंने अपने कपडे पहने और बाथरूम में चली गयी. पानी की आवाज़ सुनकर मेरी भी आँख कुल गयी. थोड़ी देर बाद दीदी फ्रेश होकर बहार आयी. मैं अभी भी नंगा बिस्टेर पर लेता हुवा था. दीदी ने बहार आकर मुझे फ्रेश होने के लिए कहा और किचन में चाय बनाने के लिए चली गयी. थोड़ी देर बाद दीदी ने चाय बनाई और बैडरूम में hi लेकर आ गयी. हम दोनों ने मिलकर चाय पिया. दीदी ने मुझसे कहा.

सविता दी- तू आज का क्या प्रोग्राम है अभी.

मैं- मेरा क्या प्रोग्राम होगा. मैं तो मेहमान हूँ. जो तुम बोलोगी वही करूँगा.

सविता दी- मैं सोच रही हूँ की कही घूमकर आया जाये. बहुत मज़ा आएगा.

मैं- ठीक है दीदी जैसा तुम कहो.

सरिता दी- तो फिर जल्दी से नाहा धोकर तैयार हो जाओ. तब तक मैं भी खाना बना लेती हूँ.

इतना बोलकर दीदी रसोई में चली गयी. मैं भी अपना कपडा निकल कर बिस्टेर पर रख दिया और बाथरूम में नहाने चला गया. नहाने के बाद मैं बहार आकर अपना कपडा पहन लिया और रसोई में आ गया . मैंने रसोई में आकर दीदी को ीछे से अपनी बहो में भर लिया और उनकी गार्डन को चुम लिया. दीदी कुछ नहीं बोली और अपना काम करती रही.



मैं दीदी हाँथ बढाकर दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और हल्का हल्का दबाने लगा. दीदी अपना काम करती रही और मई अपना काम करता रहा. दीदी ने खाना पूरा बना लिया तो मैं उनको छोड़कर हैट गया. थोड़ी देर बाद दीदी ने जाकर बाथरूम में स्नान किया और कमरे में जाकर अपने कपडे पहने. दीदी बहुत सिंपल तरीके से तैयार हुई थी फिर भी बहुत प्यारी लग रही थी. मैंने कहा.

मैं- आप बहुत खूबसूरत लग रही हो.



सविता दी- थैंक यू. तुम भी बहुत हंसमे लग रहे हो.

मैं- थैंक यू दीदी. तो अब चले आगरा घूमने. कहा कहा चलने का प्रोग्राम है दी.

सविता दी- मैं सोच रही हूँ की ताजमहल, पांच महल और आगरा का किला घूमा जाये.

मैं- ठीक है दीदी फिर चलो चलते हैं.

इतना बोलकर मैं और दीदी घर से बहार आ गए. दीदी ने दरवाज़ा लॉक किया और मैंने बाइक स्टार्ट की और निकल पड़े ताजमहल घूमने के लिए. लगभग 30 मिनट में मैं और दीदी ताजमहल पहुंच गए. मैं एक दो बार दीदी के यहाँ आया था लेकिन कभी ताजमहल देखने नहीं आया. मैं पहली बार नज़र के सामने से ताजमहल देख रहा था. मुझे बहुत अच्छा लग रहा था ताजमहल घूमने में. उस समय वह ताजमहल के अंदर एंट्री नहीं थी इसलिए हम दोनों बहार hi टहल रहे था और फोटो क्लिक कर रहे थे.

थोड़ी देर ताजमहल घूमने के बाद दीदी ने आगरा फोर्ट चलने के लिए कहा. मैं बाइक स्टार्ट करके दीदी को पीछे बैठकर आगरा फोर्ट के लिए निकल पड़ा. आगरा फोर्ट ताजमहल से 15 मिनट की दूरी पर था. मैं वह पहुंचकर बाइक पार्क की और आगरा फोर्ट के अंदर चले गए. आगरा फोर्ट बहुत hi सुन्दर लग रहा था. मैंने और दीदी ने वह भी कई फोटो क्लिक किये. थोड़ी देर वह घूमने के बाद दीदी ने पांच महल चलने के लिए कहा. जो की आगरा फोर्ट से 40 कम. की दूरी पर था. मैंने अपनी बाइक निकली और पांच महल के लिए निकल पड़े. रास्त में हमने कुछ नाश्ता किया. लगभग 1 हॉर्स बाद हम पांच महल पहुंच गए. वह पर लगभग 1 हॉर्स घूमने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी मुझे बहुत अच्छा लगा तीनो जगहों पर घूमकर. अब घूमने निकला hi हूँ तो सोच रहा हूँ की ट्रैन में जो फॅमिली मिली थी उनके यहाँ भी चला जॉन. उन्होंने कई बार आने के लिए कहा था. आप क्या कहती हो दीदी.

सविता दी- ठीक है अभी. जैसा तुझे ठीक लगे . उनका ाड़द्रेश क्या है.

मैं- उन्होंने बताया था की वो कलोल तहसील के पास hi रहते हैं. कलोल कितनी दूर है यहाँ से.

सविता दी ने वही एक फ्रूट वाले से कलोल के बारे में पूछा तो पता चला की वो ज्यादा दूर नहीं है तो मैंने उस फॅमिली ने जो no. दिया था उनको फ़ोन किया और उनको कलोल आने की सुचना दी. फिर मैं दीदी को बाइक पर बिठाया और कलोल में जाकर बाइक रोक दी. थोड़ी देर बाद फॅमिली के मुखिया वह आये और हम दोनों ने उन्हें प्रणाम किया और उनके साथ उनके घर चले गए. वह सभी लोगो से मिलकर दीदी का परिचय उन लोगो से कराया. उन लोगो ने हम दोनों की अच्छी आवभगत की. 30 मिनट रहने के बाद मैंने उनसे कहा.

मैं- अंकल जी. अब हम लोगो को जाना चाहिए.

फम- अरे ऐसे कैसे चले जाओगे. काम से काम खाना खा कर तो जाओ. बिटिया भी पहली बार आई है तो उसे भी थोड़ा घुल मिल लेने दो सबसे.

सविता दी- नहीं अंकल वो क्या है की शायद कल हमको अल्लाहाबाद के लिए निकलना होगा. तो अभी घूमने निकले हैं. जितना हो सकेगा अभी को आगरा घुमा दूंगी. फिर कभी आ जाएंगे.

उसके बाद दीदी और मैं उनसे बीड़ा लेकर निकल पड़े. थोड़ी दूर आने के बाद दीदी ने मुझे बाइक बेऔतिपार्लर पर रोकने के लिए कहा. तो मैंने दीदी से कहा.

मैं- आप इतनी सुन्दर वैसे hi हैं. आपको बेऔतिपार्लर जाने की क्या जरूरत है.

सविता दी- मैं आज अपने भाई की दुल्हन बनाने वाली हूँ और उसके साथ सुहागरात मानाने वाली हूँ तो मैं कोई भी कमी नहीं रखना चाहती अपनी सुहागरात में. इसलिए तू गाड़ी रोक.

मैंने एक बप के सामने गाड़ी रोकी. हम दोनों अंदर चले गए. वह पर एक लड़की ने हमारा वेलकम किया. मैं वही पर गैथ गया. दीदी अंदर चली गयी और उस लड़की से बोली.

सविता दी- आज मेरी एनिवर्सरी है. तो आप मेरा ऐसा फेसिअल कीजिये की जब मैं सज कर निकलू तो मेरे हस्बैंड मुझे देखते रह जाये. कोई कमी मत रखना. बेस्ट से बेस्ट फिसल करना.

लड़की- व्हाई नॉट मैडम, आप बेफिक्र रहिये. मैं आपको शिकायत का मौका नहीं दूँगी.

फिर दीदी का फेसिअल शुरू हुवा और लगभग 1 हॉर्स बाद दीदी बहार निकली. मैं दीदी को देखता रह गया. दीदी के चेहरा और ज्यादा निखार आया था. मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी यू अरे लुकिंग गौर्जियस. बहुत hi खूबसूरत लग रही हैं आप.

सविता दी- ठनक यू अभी. अब चले घर.

मैंने हाँ में गार्डन हिलायी. फिर मैंने पेमेंट किया और मैं दीदी को लेकर घर आ गया. घर आकर मैंने और दीदी ने अपने कपडे चेंज किये और बैडरूम में आकर सो गए. शाम को करीब 6 बजे मेरी आँख खुली तो मैंने दीदी को भी जगाया. दीदी उठकर बाथरूम में चली गयी.

बाथरूम से निकलकर दीदी किचन में चली गयी और चाय बनाने लगी. चाय बनाकर वो बैडरूम में दो कप लेकर आ गयी. हम दोनों बाटे करते हुवे छाई पिए उसके बाद दीदी कप उठाकर किचन में चली गयी. फिर उन्होंने खाना बनाया. 9 बजे के लगभर हमने खाना खाया. खाना खाने के बाद दीदी ने बर्तन साफ किया. फिर वो मुझसे आकर बोली.

सविता दी- अभी तू अभी चाट पर चला जा और जब मैं तुझे फ़ोन करुँगी तब तू आना.

दीदी क बात सुनकर मैं छत पर चला गया. और टहलने लगा. कुछ देर बाद सरिता दीदी का फ़ोन मेरे no. पर आया. मैंने कॉल उठायी तो दीदी ने मुझसे पूछा.

सरिता दी- क्यों बे सेल. सारा दिन कहा था. एक भी फ़ोन नहीं. दीदी क्या मिली मुझको तो भूल hi गया तू.

मैं- अरे नहीं सरिता. वो आज घूमने गया था, अभी कुछ देर पहले hi लौटा हूँ. तो थका हुवा था तो सो गया. अभी छात पर टहल रहा हूँ.

सरिता दी- अच्छा और बता. क्या प्रोग्रेस है वह की. दीदी के साथ रात कैसे कटी और आज रत का क्या प्रोग्राम है.

मैं- बस ये समझ लो की आज तुम्हारे भायी की सुहागरात तुम्हारी बड़ी बहन के साथ है.

सरिता दी- वाह मेरे शेर. गाड़ दे अपना झंडा. मैं फ़ोन रखती हूँ. आल थे बेस्ट भैई.

ये कहकर सरिता दीदी ने फ़ोन रख दिया. मैं चाट पर बैठकर मोबाइल में कुछ करने लगा. 1 हॉर्स बाअद सविता दीदी ने मुझे फ़ोन किया और कमरे में आने के लिए कहा. मैं निचे बैडरूम में पंहुचा तो देखा दीदी ने पूरा बीएड अचे से सजाया है. नई चद्दर, नई पिलो. दीदी बीएड पर शादी के जोड़े में चुनरी से घूँघट ओढ़कर बैठी हुई थी.



मैं दीदी को देखने लगा. थोड़ी देर दरवाज़े पर खड़ा होकर देखने के बाद मैं बीएड के पास चला गया और दीदी के पास बैठ गया. मैंने हाँथ बढाकर दीदी का घूँघट उठाया और चुन्नी उनके सर के ऊपर कर दी. दीदी का चेहरा दमकने लगा. ऐसा लग रहा था की कमरे की रौशनी बढ़ गयी है.



मैं बस दीदी की तरफ देखता रहा. थोड़ी देर तक जब मैं कुछ नहीं बोलै तो दीदी ने अपनी नज़र उठाई और मुझे देखा. अपनी तरफ मुझे देखता पाकर दीदी शर्माकर अपनी नज़ारे झुका ली और मुझसे बोली.

सविता दी- ऐसे क्या देख रहा है. पहले मुझे नहीं देखा था क्या.

मैं- इस रूप में मैं आपको शादी के बाअद से दूसरी बार देख रहा हूँ. मुझे सच में जीजा के किस्मत से जलन हो रही है जो इतनी टॉप क्लास की आइटम उनको मिली.

दीदी मेरी बात सुनकर मुस्कुराते हुवे शर्माने लगी. मैं दीदी के और पास खिसक गया तो दीदी ने अपनी चुनरी एक हाँथ से पकड़ कर अपना चेहरा ढकने की कोशिश की, लेकिन मैंने उनका हाँथ पकड़ लिया तो दीदी का एक तरफ का चेहरा hi चुन्नी से ढाका, लेकिन चुन्नी इतनी बारीक थी की मुझे तब भी दीदी का चेहरा साफ नज़र आ रहा था. मैंने दीदी के हाँथ से चुन्नी ली और उसे बीएड से दूर फेंक दिया. मैंने दीदी से कहा.



मैं- आप कमल की लग रही हैं दीदी. आप के ये काळा काळा बॉल. उसपर अपने जो गजरा लगाया है उसके तो कहने hi kya.upar से आपने मांगटीका लगाया है जो आपकी सुंदरता को चार चाँद लगा रहा है. आपकी ये सुरमयी काली काली आँखे. ऊपर से जुलम ये की इसमें जो सुरमा लगाया है आपने इसे देख कर मुझे एक शेयर याद आ रहा है की आप की आँखों में सूरमा लगा है ऐसे. जैसे चाकू पर धार लगायी हो किसी ने. आआह्ह्ह्हह दीदी आपकी कजरारी आँखों ने मेरे तरल कर डाला है. आपके ये गुलाब की पंखुड़ियों जैसे पतले होंठ और उनपर लगी लाल लिपिस्टिक. आपके ये कश्मीरी सेब जैसे मुलायम गल्ल. आपके कानो में पहना हुवा ये झुमका. आपकी नक् में पहनी हुई ये नथनी आप को क़यामत बना रहे हैं दीदी.

और आपकी ये सुराहीदार पतली गार्डन में ये सोने का हार और मंगलसूत्र. आपकी सुंदरता को और बढ़ा रहे हैं. मैं तो आपकी सुंदरता का दीवाना हो गया हूँ. मेरा दिल तो कर रहा है की आप इसी तरह साडी उम्र मेरे सामने बैठी रहो और मैं आपको देखते हुवे अपनी पूरी ज़िन्दगी गुजर दूँ.

मेरे मुंह से अपनी खूबसूरती की इतनी तारीफ सुनकर दीदी बहुत खुश हुई. उनका चेहरा खुसी से दमकने लगा. मैंने दीदी की कमर में हाँथ डालकर दीदी को अपने करीब खींच लिया और उनके होंठो पर अपने होंठ रख दिए और हौले हौले दीदी के होंठो को चूमने लगा. दीदी ने भी अपना हाँथ मेरी गार्डन के पीछे लगाया और किश में मेरा साथ देने लगी. हमारी किश लगभग 5 मिनट तक चली. 5 मिनट बाद मैंने अपना होंठ खोलकर दीदी के पुरे होंठ को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा. दीदी मेरे सर को अपनी तरफ दबाने लगी और चूसने में मेरा साथ देने लगी. मैं बहुत धीरे धीरे और आराम से दीदी के होंठ चूस रहा था. होंठ चूसने से दीदी के होंठो की लिपिस्टिक पूरी तरह साफ होकर मेरे मुंह में चली गयी थी. कुछ देर दीदी के होंठ चूसने के बाद मैं दीदी के होंठो को छोड़ दिया और दीदी से बगल हटकर खड़ा हो गया. दीदी ने मेरी तरफ देखा और कहा.

सविता दी- क्या हुवा अभी. तुझे अच्छा नही लगा क्या जो मुझसे दूर हैट गया है तू.

मैं- ऐसी बात नहीं है दीदी. बस 2 मिनट रुको. फिर में आता हूँ.

इतना कहकर मैंने मैंने अपनी अपनी लोअर से सिन्दूर की पुड़िया निकली और आगे बढ़कर दीदी का मांगटीका उठाकर उनकी मांग में सिन्दूर दाल दिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-141

मैंने सिन्दूर से दीदी की मांग भर दी. दीदी भौचक्की होकर मुझे देखने लगी. उनके चेहरे से नाराजगी झलक रही थी. वो अभी कुछ कहने वाली थी, लेकिन मैंने उन्हें बोलने नहीं दिया और उनसे बोलै.

मैं- देखो सविता तुम नाराज़ मत होना. बस मुझे ऐसे लगा की सुहागरात मानाने से पहले तुमको पूरी तरह अपनी बना कर रुम्हारे साथ सुहागरात मनौ. इसलिए मैंने ये किया है.

सविता दी- (नाराजगी से) लेकिन उसके लिए इसकी क्या जरूरत थी. मैं तो तैयार बैठी hi हूँ तुम्हारे साथ सुहागरात मानाने के लिए. ये तुमने अच्छा नहीं किया अभी. मैं राघव की पत्नी हूँ. तुमने ये क्या अनर्थ कर दिया अभी. अब मैं राघव को क्या मुंह दिखाउंगी.

मैं- देखो दीदी आपको लगता है की मैंने गलत किया है. तो मैं भी ये मन लेता हूँ की मैंने गलत किया है, लेकिन जरा ये तो सोचो की हम जो कुछ कर रहे हैं ये अभी तक करते आ रहे हैं. एक नजरिये से वो भी तो गलत hi है न. तो आप इतना क्यों सोच रही हैं.

सविता दी- तुझसे मैं छुड़वा रही हूँ. ये मेरी मज़बूरी है. और तुझे वो पता है. लेकिन सिन्दूर का मतलब तुझे पता है, वो सिर्फ पति के नाम का लगाया जाता है. किसी और के नाम का नहीं.

मैं- देखो दीदी. मैं आपके साथ आज सुहागरात मन रहा हूँ. तो आप एक दिन के लिए मुझे hi अपना पति मन लीजिये न. हमने इतना सबकुछ किया है. तुम अपने आपको मेरा गुलाम तक मानती हो. तो मुझे एक दिन के लिए अपना पीटीआई मन लेने में क्या हर्ज़ है बताओ मुझे. मैं तुम्हारे साथ सुहागरात ऐसे मानना चाहता हूँ की मेरे अंदर से ऐसी फीलिंग आये की मैं अपनी पत्नी को सुहागरात पर छोड़ रहा हूँ. क्या तुम मेरे लिए इतना भी नहीं कर सकती हो.

मेरी बात सुनकर दीदी चुप हो गयी और कुछ सोचने लगी. थोड़ी देर तक सोचने के बाद दीदी ने कहा.

सविता दी- तू न अभी. बहुत कमीना है. अपने जीजा जी की जगह लेना चाहता है. वैसे तो तूने उनकी जगह बहुत पहले hi मुझे छोड़ कर ले ली थी, आज तू उनका पूरा हक्क हथिया रहा है.

मैं- अभी कहा दीदी. पूरा हक़ तो तब हतियूंगा जब मैं तुम्हे ये मंगलसूत्र पहनकर पूरी तरह से अपनी पत्नी बनाऊगा. अरे जब जीजा को आपकी मस्त जवानी की परवाह नहीं है तो आपकी जवानी को सँभालने के लिए किसी को तो आगे आना पड़ेगा न. अब मैंने आपकी जवानी को संभाला है तो उनकी जगह भी तो मुझे hi लेनी पड़ेगी. वैसे भी तुम्हारी जैसी गरम औरत को संभालना जीजा के बस की बात नहीं है.

इतना कहकर मैं अपनी जेब से एक मंगलसूत्र निकला और दीदी की आँखों में एकटक देखते हुवे अपने हाँथ उनकी गार्डन के पीछे ले जाकर मंगलसूत्र उनके गले में दल दिया. दीदी की कजरारी हिरणी जैसी आँखे इस वक्त लाल हो गयी थी. मेरे मंगलसूत्र पहनने के बाद दीदी ने अपनी नज़ारे झुका ली.



दीदी मेरे साथ सुहागरात मानाने की कल्पना से hi बहुत गरम हो गयी थी. मैं दी के चेहर को उठाया और आँखों में देखते हुवे उनके चेहरे पर झुका और अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी ने मेरे सर के पीछे अपना हाँथ रखा और मुझे पूरी ताकत से अपने होंठो पर दबोच लिया. थोड़ी देर में मेरी सांसे उखाड़ने लगी तो दीदी ने अपनी पकड़ ढीली की. मैं दीदी के होंठो को छोड़कर खड़ा हो गया और अपनी t-shirt और लोअर उतर कर जमीन पर फेंक दी. अब मैं दीदी के सामने उव में खड़ा था.

मैं उव में दीदी के सामने खड़ा था. मेरा लुंड एकदम टैंकर दीदी की आँखों के सामने था. थोड़ी देर ऐसे hi खड़ा रहने के बाद मैं बीएड पर भध गया और दीदी के पीछे जाकर उनसे सत्कार बैठ गया. बैठने के बाद मैंने अपने हाँथ से दीदी के बालो में लगे गजरे को निकलने लगा. दज्रे निकलकर मैंने अपनी नक् के सामने किया और एक जोर की साँस लेकर दीदी से कहा.

मैं- वाह्ह्हह्ह क्या महाकक ही. तुम्हारे जिस्म को छूकर इसके सुगंध और बढ़ गई ही सविता

इतना कहकर मैंने अपने दोनों हाँथ दीदी के दोनों कंधो पर रख दिया और उनकी कंधे से लेकर उनकी हथेली तक पुरे हाँथ पर अपनी उंगलिया फेरना लगा और अपने मुंह में दीदी के कण के भरकर हल्का हल्का kat-te हुवे चाटने लगा. दीदी के जिस्म में कंपकपी होने लगी. मैंने अपने हांथो से बहुत देर तक दीदी के हांथो पर फिरने के बाद मैंने पीछे से दीदी के सदी का पल्लू उठाकर आगे उनकी गॉड में रख दिया. उनका ब्लाउज पूरा बैकलेस था केवल एक पतली पट्टी थी जो पीठ पर हुनक के सहारे बंधी हुई थी. और एक पतली डोरी उनकी गार्डन पर बंधी हुई थी. मैं अपने हांथो से उनकी लगभल पूरी नंगी पीठ को धीरे धीरे से सहलाने लगा. मैं इतना ाहिष्ता ाहिष्ता हाँथ घुमा रहा था की दीदी को गुदगुदी होने लगी और वो अपना शरीर इधर उधर करने लगी.

मैंने दीदी की पीठ सहलाते हुवे उनके कण को चूसना छोड़कर उनकी गार्डन पर अपना होंठ रख दिया और चूमने लगा. मैंने एक हाँथ आगे बढाकर दीदी की गार्डन और चूचियों के ऊपरी हिस्से को सहलाने लगा. दीदी ने अपनी आँखे बंद कर ली और मेरी हरकतों का मज़ा लेने लगी. थोड़ी देर दीदी की पीठ सहलाने के बाद मैंने दीदी की सदी को उतरने लगा. दीदी ने अपनी कमर उठाकर अपनी सदी उतरने में मदद की. अब दीदी पेटीकोट और ब्लाउज में मेरे सामने बैठी थी.

मैं दीदी की पीठ सहलाते हुवे अपना होंठ दीदी की पीठ पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी मस्ती में आहे भरने लगी. मैं दीदी की पीठ जोर जोर से चूमने लगा और अपने हाँथ से दीदी की पीठ को सहलाने लगा. थोड़ी देर पीठ चूमने के बाद मैंने दीदी को पुश करके पेट के बल लेटने के लिए कहा. दीदी पेट के बल लेट गयी. मैं दीदी की कमर को चुने लगा. मैं दीदी की कमर को चूमते हुवे ऊपर की और आने लगा. दीदी की कमर सी होते हुवे मैं दीदी की पीठ को चूमने लगा. दीदी अपनी आँखे बंद करके बिस्टेर की चादर को पकड़ रही थी. मैं उनकी पीठ से होते हुवे उनकी गार्डन तक पहुंच गया और चूमने लगा.

थोड़ी देर गार्डन चूमने के बाद मैंने ुकि गार्डन में बंधी ब्लाउज की डोरी को दांतो से पकड़ लिया और खींचने लगा. थोड़ी सी म्हणत के बाद उनकी गार्डन से डोरी खुल गयी थी. मैं अपनी जीभ निकलकर उनकी गार्डन को चाटने लगा. मैं दर्दन चाटने के साथ साथ उनकी कमर को अपने हाथो से सहला तहा था. दीदी ने मस्ती में भरकर अपने हांथो से चद्दर को कसकर पकड़ लिया. मैं दीदी की गार्डन और ब्लाउज की पट्टी से ऊपर के हिस्से को अपनी जीभ से चाट रहा था. फिर मैंने अपने हाँथ और दन्त के सहारे उनकी ब्लाउज का हक्क खोल दिया.



निचे दीदी ने बरपाहणी हुई थी. इसलिए ब्लाउज की पट्टी खुलते hi दीदी की पीठ नंगी हो गई मैं अपनी जीभ निकलकर उनकी पूरी पीठ को चाटने लगा. दीदी मस्ती में आआअह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइइइ उउउउउउउउउठ्हहहहहह अभीयी ssssssssss करने लगी. लगभग 5 मिनट तक दीदी की पीठ चाटने के बाद मैं उनकी गार्डन को चूमते हुवे उनकी कंधे तक आया और अपने हाँथ से उनके एक कंडे से ब्लाउज निचे करने लगा. दीदी ने अपना कन्धा उठाकर ब्लाउज निचे खिसकने में मदद की. दीदी का कन्धा नंगा करने के बाद मैंने अपना होंठ उनकी कंधे पर रख दिया. थोड़ी देर एक कन्धा चूमने चाटने के बाद मैंने दीदी के दूसरे कंधे को भी ननगा कर दिया औरर उसे चूमना चाटने लगा.

कुछ देर बाद मैंने दीदी को पलटकर सीधा कर दिया और उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखे लाल हो गई थी. मैं दीदी की आँखों में देखते हुवे अपने होंठ बढाकर उनके गुलाबी होंठो पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी ने अपना हाँथ मेरे सर के पीछे किया और मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर दीदी के होंठ चूमने के बाद मैं दीदी के गाल और गार्डन को किश काने लगा और निचे उनकी चूचियों के क्लीवेज को चूमा और दीदी की तरफ देखने लगा. मैंने दीदी का ब्लाउज पकड़कर उनके जिसमे से निकल कर नईचे फेंक दिया. फिर मैंने दी की तरफ देखते हुवे अपना होंठ ब्रा के ऊपर से उनकी चूचियों पर रख दिया और मुंह खोलकर एक चुकी को मुंह में भर लिया और चूसने लगा.

एक हाँथ से मैं दीदी की चुकी को दबाने लगा. दीदी बहुत गरम हो गयी और पाना सर इधर उधर करने लगी. थोड़ी देर एक चुकी को चूसने के बाद मैंने दूसरी चुकी को मुंह में भर लिया और एक चुकी को हाँथ से दबाने लगा. दीदी अपना हाँथ मेरे सर पर फेर रही थी. थोड़ी देर तक उनकी चुकी पिने के बाद मैं उठा और दीदी को देखते हुवे उनकी ब्रा का कप पकड़ा और उसे निचे खींच दिया. ब्रा निचे होते hi दीदी की चूचिया चालक कर बहार आ गयी. मैं दी की चूचियों को पकड़ कर दबाने लगा. दीदीकी चूचियों कोड़ाबते हुवे मैं उन्हें हिला भी रहा था. मैंने दीदी की चूचिया दबाते हुवे उनसे कहा.



मैं- सविता तुम्हारी चूचिया तो बहुत कड़क हैं ये पहले से भी ज्यादा ठोस लग रही हैं.

सविता दी- तेरे जीजा इनकी अचे से सेवा नहीं कर पते हैं. इसलिए ये बहुत ठोस हैं. तुमने बहुत दिन बाद इनपर हाँथ लगाया है. कुछ दिन बाद तू इनको निचोड़ कर लटका देगा.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी की चूचियों को जोर जोर से दाने लगा. चूचिया दबाते हुवे मैंने उन्हें आपस में जोड़ दिया अपना मुंह उनकी चूचियों के निप्पल पर रखकर उनसे खेलने लगा, मैं अपनी जीभ निकलकर उनके निप्पल पर गोल गोल घूमने लगा. थोड़ी देर एक निप्पल पर जीभ घूमने के बाद मैं दूसरे निप्पल पर भी जीभ घूमने लगा. फिर मैंने अपना मुंह उनकी चूचियों से हटा दिया और दोनों हांथो से उनकी चूचियों को दबाने लगा. लगभग 5 मिनट तक उनकी चूचियों का मर्दन करने के बाद मैंने अपना हाँथ उनकी चूचियों से हटा लिया.



मैंने उनकी चूचियों को छोड़कर अपना हाँथ दीदी के पेट पर फेरने लगा और अपना होंठ दीदी के पेट पर रखकर चूमने लगा. कुछ देर बाद मैं दीदी के पुरे पेट को चूमने लगा. साथ साथ उनके पेट को भी चुम रहा था. उनका पेट चूमने के बाद मैंने अपनी जुबान निकली और उनकी नेवेल पर रख कर घूमने लगा. दीदी मछली की तरह तड़पने लगी. मैं जल्दी जल्दी अपनी जीभ उनकी नैवेल में घूमता रहा. दीदी मस्ती में अपने शरीर को लहराने लगी. दीदी मस्ती भरी आवाज़ में बोली.

सविता दी- ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह ाभीईई. क्या करता ही भइईईईई. मुझी गुड़गुड़ीय हूँ रही हीी. ओह्ह्ह बहुत्त अच्छा कर रहा हैई टूउउ. ऐसे होई करता रह भैई.

मैं दीदी की नेवेल को जीभ से छोड़ते हुवे अपना हाँथ उठाकर उनकी पेटीकोट की डोरी पर रख दिया और उसे खोलने लगा. थोड़ी देर बाद पेटीकोट कुल गया. मैं उनकी नेवेल के साथ खेलते हुवे एक हाँथ से दीदी का पेटीकोट उतरने लग. थोड़ी देर की मसक्कत के बाद दीदी का पेटीकोट मैंने उनके घुटनो तक सरका दिया. मैं दीदी की नेवेल से जी भर कर खेलने के बाद अपना होंठ सरकते हुवे निचे दीदी की छूट की तरफ बढ़ने लगा. मैं अपना मुंह दी की छूट के पास ले गया. मैं देखा दीदी की छूट बहुत गीली हो गयी थी. मैंने थोड़ी देर दीदी की छूट को देखा और नक्क निचे करके लम्बी साँस खींची और दीदी से कहा.

मैं- आआआआहहहहहहह सरिता. कीत्नीईई मढ़ाककक सुगान्द्द हैई तुखाररी छूट की.

इतना कहकर मैंने अपने होठ दीदी की जांघो पर रैह दिया और चूमने लगा. मैं दीदी की जांघो को चूमते हुवे निचे जाने लगा और अपने हाँथ से दीदी का पेटीकोट भी निचे सरकने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी का पेटीकोट उनकी टैंगो से निकलकर जमीन पर फेंक दिया और उनकी टैंगो को चूमने लगा. फिर मैं दीदी की टैंगो में बिच लेट गया और अपना हाँथ उनकी पंतय में फसकर उसको उतर दिया. अब दीदी नंगी मेरे सामने लेती हुई थी.

मैंने भी आपने उव उतर दिया और दीदी की छूट के सामने आकर मैंने अपनी जीभ निकलकर दीदी की छूट पर रख दिया और चूसने लगा. कुछ देर तक दीदी की छूट चूसने के बाद मैं ीक ऊँगली उनकी छूट रास से गीली की और उनकी गांड पर रख दी. दीदी ने अपना ासशोले टाइट कर लिया. मैंने अपनी दीदी की छूट से हटा ली और उनकी गांड पर रख दी. दीदी का सरीर हिल गया. मैं दीदी की छूट में ऊँगली दाल दी और उनकी छूट छोड़ने लगा. मैं दीदी की गांड को अपनी जीभ निकल कर चाटने लगा. मैं पूरी जीभ निकल कर दीदी की गांड चाट रहा था. कुछ देर गांड चाटने के बाद मैंने अपनी जीभ की नोकक बनाकर दीदी की गांड के छेड़ पर फिरने लगा.

मैंने दीदी की गांड चाट चाट कर अच्छी तरह गीली कर दी और उनकी गांड पर थूक भी दिया. फिर मैंने अपनी जीभ वह से हटाई और उनकी छूट पर रख दी और चाटने लगा. फिर मैंने छूट से ऊँगली निकली और उसे उनकी गांड पर रखकर जोर देने लगा. मेरी ऊँगली थोड़ी सी अंदर चली गयी. दीदी की सिसकी निकल गयी.

सविता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhhhhh ABhiiiiiiiiiiii. धीरे करना.

दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने अपनी ऊँगली धीरे धीरे उनकी गांड में डालने लगा. मैं दीदी की छूट को chat-te हुवे उनकी छूट को मुंह में भरकर चूस रहा था. थोड़ी देर धीरे धीरे ऊँगली अंदर बाहर करने के बाद मैंने जोर लगाकर अपनी ऊँगली दीदी की गांड में पूरी एक बार में घुसा दी. दीदी दर्द से चीख पड़ी.

सविता दी- oooooooooohhhhhhhhhhhh ाभीईई. ऊंगलीईईई निकालल ली मेरिइइइ गण्ड सी ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा ही. मैट कररर गानंदड मी ऊंगलीई.

इतना बोलकर दीदी ने अपना हाँथ उठाकर मेरे सर पर रख दिया और अपनी छूट पर दबाने लगी. दीदी मेरा सर ऊपर निचे होने के कारन दीदी के हांथो में पहनी हुई चुडिया खनक रही थी. मैंने अपना मुंह दीदी की छूट से हतय और गांड से ऊँगली बहार खींची और एक ऊँगली छूट पररख कर दोनों ऊँगली एक hi बार में दीदी की गांड और छूट में पेल दी. दीदी मस्ती और दर्द से चीखः पड़ी.

सविता दी- ooooooooohhhhhhhhhhhhh UUUUUUUuiiiiiiiiiiiiiiii मुउम्मय्य्य्यय्य. क्या हररता हीी अभियई. एकक साठः ड़ड़ड़ड़ड़ भी डियर कहा ही औरर मज़ाआ भी दे रहा हीी. ऐसी hi करता रहहह.

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने अपने ऊँगली की स्पीड बढ़ा दी और जोर जोर से उनकी गांड और छूट में पेलने लगा. दीदी मस्ती में बड़बड़ाने लगी.

सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह अभीइइइइइ, मेरे भाईईई. ऐसा माज़आ तू मुझी कभी नाहीइ मिला. चू बहुत्त मज़ा देता हैई भाईई. कितना अच्छा छुटत की चुसेई करता अहोई री तू.

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने अपना मुंह दीदी की छूट पर रख दिया और हाथ से उनकी क्लीट सहलाने लगा. एक ऊँगली गांड में मैं लगातार अंदर बहार कर रहा था. 5 मिनट लगातार उंगली और जीभह से छूट चटवाने और छुड़वाने से दीदी अब झड़ने के करीब पहुछठ गई थिई. मैं जोर जोर से दीदी की क्लीट को मसल रहा था. दीदी की गांड ऊँगली से छोड़ रहा था. कुछ देर बाद दीदी झड़ने को हो गई और चीखती हुई झड़ने लगी.

सविता दीदी- oooooooohhhhhhhhhhh अभीयी. मेरी भाईई. मैंनं आए रहीए होऊ. मेरा पनीइ पीई जाए. बहुत्त मज़ाआ देता ही चू. मैंन कईई दीनू सी पयासीई थिई. मेरिइइइइ छुटत की प्यासस मुझी बेचैनंन कर रहीए थिई. आआआअह्ह्ह्ह ाभीईई. मैंनं झाड़ रहीए होऊं पीई जा मेरा amrittt.ooooohhhhhh aaaaaahhhhhhhhhhhhhh मैंन गईइइइइइइइ.

दीदी इतना बोलकर झाड़ गई औरलम्बी लम्बी सांसे लेने लगी. मैं दीदी की छूट से बहाने वाला पूरा पानी चाट चाट कर साफ कर दिया. झड़ने के बाद दीदी की छूट बहुत दमक रही थी. मैं दीदी के ऊपर let-ta हुवे अपना होंठ दीदी के होंठो पर रख दिया और उनको किश करने लगा, दीदी किश करने के साथ साथ अपनी जीभ निकलकर मेरे चेहरे को चाटने लगी. जिसपर दीदी की छूट का पानी लगा हुवा था. थोड़ी देर बाद दी ने मेरे चेहरे को चाटकर साफ़ कर दिया था. मैं दीदी के ऊपर से उठते हुवे दीदी से कहा.

मैं- तुम्हारा पानी तो निकल गया सविता. अब मेरा भी कुछः ख्याल करूओ. अपना मुंह खोलकर अपने पति का लुंड अपने मुंह में ले लो और चुसो इसे.

इतना बोलकर मैं बिस्टेर से उतारकर निचे खड़ा हो गया. दीदी बिस्टेर पर अधलेटी अवस्था में मुझे कामुक नजरो से देख रही थी. मेरा लुंड पूरी तरह टैंकर सलामी दे रहा था. थोड़ी देर मेरा लुंड देखने के बाद दीदी ने उठकर बिस्टेर पर पेअर लटककर बैठ गयी और मेरे लुंड को अपने हांथो में पकड़ लिया और सहलाने लगी, दीदी के हांथो का लम्स पाकर मेरे मुंह से sssssssssssss की आवाज़ निकल गयी.

दीदी मेरे लुंड को सहलाते हुवे मेरी गोटिया भी सहला रही थी. मैं हाँथ निचे ले जाकर दीदी की एक चुकी को हाँथ से पकड़कर दबा दिया. दी के मुंह से सिसकी निकल गयी तो दीदी ने मेरे लुंड को दबा दिया, मेरे मुंह से ssssssssssss की आवाज़ निकल गई.

सविता दी- aaahhhhhhhhhhh अभीइइइइइ. धीरे दबाया कर मेरी चूचियों को.

मैं- अब ऐसे सहलाती hi रहोगी ये मेरा लूणद मुंह में भी लेने का इरादा है.

दीदी मेरी बात सुनकर अपने मुंह से थूक मेरे लुंड पर गिरा दिया और अपने हाँथ से मेरे लुंड पर मलने लगी. मेरे लुंड पर थूक मलने के बाद दी ने अपनी जीभ निकल कर मेरे लुंड पर फिरने लगी. दीदी पुरे लुंड पर अपनी जीभ घुमा रही थी और एक हाँथ से मेरी गोटी को भी सहला रही थी. लैंड chat-te हुवे दी ने टोपे पर गोल गोल अपनी जीभ घूमने लगी. कुछ देर टोपे पर जीभ गुमने के बाद दी ने टोपे के छेड़ पर अपनी जुबान फिरने लगी और अपनी जीभ की नोक बनाकर उसे छेड़ पर रगड़ने लगी. मेरा तो पूरा शरीर गंगना गया. मैंने दीदी का सर पकड़कर बोलै.



मैं- आआअह्ह्ह्हह सविताआ. टेर्री मुँहहहह मी जादू हीी. बहना. मेरा तो तू ऐसी ही पनीइ निकालल देगीए. बहुत्त अच्छा सविता. ऐसी ही करतीय रहहह जानीमंत्र.

मेरी बात सुनकर सविता दी और जोर से अपनी जीभ मेरे टोपे पर दबाने लगी. कुछ देर ऐसे करने के बाअद दीदी ने मेरा टोपा मुंह में लेकर चूमा और पिक की आवाज़ के साथ बहार निकल दिया. दीदी बार बार मेरे टोपे को मुंह में लेती और चाटकर पक की आवाज़ के साथ बहार निकल देती. ये देखकर मैं दीदी के सर को अपने लुंड पर दबाने लगा. लेकिन तब भी दीदी यहीइ कर रही थी तो मैं दीदी से गुस्से में बोलै.

मैं- क्या कर रही ही सलीई. ये तेरे पटी का छोटा लुंड नहीं है तेरे यार का लौड़ा है. मुंह में लेकर प्यार का राइज सविता. मुझे तड़पा क्यों रही ही. जल्दी से मुंह में ले ले मेरा लूणदा.

मेरी बात सुनकर दीदी मेरी आँखों में देखने लगी और अपने मुंह खोलकर मेरा लुंड अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैं दीदी से सर को पकड़ लिया और उनका सर धीरे धीरे आगे पीछे करने लगा. थोड़ी देर लुंड आगे पीछे करने के बाद मैंने अपनी कमर रोक दी और दीदी का सर अपने लुंड पर दबा लिया. दीदी कुछ देर तो ठीक रही फिर अपना हाँथ मेरी जांघो पर मरने लगी. जब मुझे लगा की दीदी की सांसे रुक जाएंगी तो मैंने दीदी का सर छोड़ दिया. दीदी लुंड बहार निकल कर ख्हूऊओ ख्हूऊओ करके खांसने लगी. दीदी के थूक से मेरा लुंड पूरा सं गया था. दीदी मुझे देखते हुवे गुस्स्से से कहा.

सविता दी- ये क्या जंगलीपन था अभी. मैं चूस तो रहियी होऊं ना. चू मेरी जान लेनी पर क्यों तुला हैई. ागररर कुछः सेकंड औरर अपना लुंड बहार न निकलता तो आज मैं भगवानको प्यारी होऊ गयी होती. थोड़ा प्यार सी कर ना. जोऊ चू चाहता हैई. मैं सबब करुनगजी. लेकिननं सबब कुछ प्यार सी करूओ.

दीदी की ब्बत सुनकर मैंने दीदी का सर पकड़कर फिर से लुंड दी के मुंह में पेल दिया और धीरे धीरे अपनी कमर चलकर अंदर बहार करने लगा. मैं झुककर दीदी की गांड और छूट में पीछे से उंगली करने लगा . और झटके मरने लगा. साथ साथ दीदी की गांड पर थप्पड़ मरने लगा. कुछः देर तक मैं धीरे धीरे लुंड दीदी के मुंह में पेलता रहा. फिर दीदी के सर को मजबूती से पकड़कर जोर जोर से लुंड अंदर बहार करने लगा और बोलने लगा.



मैं- aaaaaaaaaahhhhhhhh सविताआआ. लिए मेरा लुंडडडड. खा जाए इसी. बहुत्त तरसा हैई तुम्हारी इस्सस हसींन मुँहहह मी घुसने की लिया. तुम्हारररे मुंह को पीलने के लियी. आजजज सर्जरी कसार निकाल लूंगा तेरे मुँहहह को फाडकररर सलिई. जैसी चू बहुत्त ग्राम कॉल हैई वैसी ही तेरा मुँहहह भी बहुत्त गरम्म हीी. ली मेरा लुंड पूरा अंडरर तक.

इतना बोलकर मैं अपनी कमर और जोर जोर से दीदी के मुंह पर चलने लगा. दीदी ह्ह्हह्हुउउउउउउउ हूऊऊऊ की आवाज़ निकलने लगीई. मैं अपने एक हाँथ से दीदी के गलो को सहलाने लगा और अपने लुंड को जोर जोर से उनके मुंह में धक्के मरने लगा. मैं भी अब झड़ने के करीब पहुंच गया. मैं बड़बड़ाने लगा.

मैं- oooooooohhhhhhhhhh मेरिइइइ ीी चुदकककाडडडडड सविता मेरीए बीवीई. चू बहुत्त चूडाकककड़ हैई रीई. टूउउ तू दीनंण राआटट छुड़नी लयक्क हैई. मैं तेरा मुँहहह ृत्त दिन्नं छोडूंगा सलीई. लिए मेरा लुंदड़ पाने मुंह मी मैंन झाड़ रहा हूँ. मैं गया ओह्ह्ह्हह्ह

इतना कहकर मैं दीदी के मुंह में झाड़ गया. मैंने अपना लुंड दीदी के मुंह में दबा दिया था. जिससे मेरी एकक एकक बून्द दीदी के गले में उतर गयी तो मैंने दीदी के सर को छोड़ दिया और बीएड पर बैठ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-142

झड़ने के बाद दीदी मैं बिस्टेर पर बैठ गया और दीदी मेरा पूरा वीर्य पि गयी. मेरा वीर्य पिने के बाद दीदी मेरी तरफ देखने लगी और मैं उन्हें देखकर मुस्कुराने लगा. दीदी बिस्टेर पर चढ़कर मेरी तरफ मुंह करके पेट के बल लेट गयी. और एक हाँथ से अपनी एक चुकी को पकड़ लिया. अभी भी दीदी के शरीर पर उनके पुरे गहने लाडे हुवे थे. दीदी एक सेक्सी और नशीली नज़रो से मुझे देख रही थी. मैं भी दीदी के इस रूप का रसपान कर रहा था. दीदी मुझे देखते हुवे बोली.



सविता दी- ऐसे क्यों देख रहा ही और तू मुस्कुरा क्यों रहा है.

मैं- देख रहा हूँ की तुम कितनी चुड़क्कड़ हो गयी हूँ. मुझे एकदम निचोड़ लेती हो तुम.

सविता दी- अच्छा. और मुझे चुड़क्कड़ बनाया किसने है. साली मैं इतनी सीधी सडीई अपनी जिंदगी में मस्त रहने वाली थी. लेकिन तेरी बुरी नियत मुझपर पद गयी. मैंने बहुत कोशिश की अपने आपको तुझसे बचने की और तुझे इसीलिए मारा मैंने की आगे से तू मेरे साथ कोई गन्दी हरकत न करे, लेकिन कहते हैं न की जिसकी किस्मत में छोड़ना होता है वो छोड़कर hi रहता है. मेरी किस्मत में भी तुझसे छोड़ना hi लिखा था, इसलिलिये किसी कोमल नान की लड़की ने मुझे भाई बहन की चुदैई वालीए कहानिया गलती से सेंड कर दी. बस फिर क्या था. कहानिया पढ़ने के बाद मैं बेचैन होने लगी. 5 दिन तक मैं लगातार रोज भाई बहन की कहानिया नेट से ढूंढ ढूंढ कर पढ़ती रही. और आखिर में मैं हार गयी और अपना जिस्म तुझे सौप दिया.

मैं- एक मज़े की बात बताऊ सविता अगर तुम नाराज़ न हो तू.

सविता दी- तुझे तो मालूम हैई की अब मैं तुझसे चूड़े बिना नहीं रह सकती तो नाराज़ होने का सवाल hi नहीं है. तू बिंदास बोलल.

मैं- वो कहानियां किसी कोमल ने नहीं मैंने भेजी थी दूसरे no. से व्हाट्सप्प ईद बनाकर.

सविता दी मेरी बात सुनकर मुस्कुराती हुई मुझे मरने लगी और बोली.

सविता दी- साली हरामी. अपनी बहन को छोड़ने के लिए तू मारा जा रहा था. ऑर्डर तुणी मुझे छोड़ने के लिये वो कहानिया भेजी ताकि मैंन उसे पढ़कर मजबूर हो जॉन तुझसे छुड़वाने के लिए. सच मी तू बहुत कमीना हैई. मैं तो अभी तक्क सूछह रही थी की मैनी तुझी अपना जिसमं दिखाकाररर तुझी मज़बूर कर दिया था की तू मुझे चोदे, लेकिन आज पता चल रहा ही की मैं तो तेरे इशारे पर मजबूर होकर तुज्ज़हसे चुदैई करवा ली. तू बहुत बड़ा खिलाडी है सेल.

मैं- वो तो मैं हूँ ही. इसलिए तू तुम्हारे यहाँ आने के बाद मैंने दो और लड़की पता कर छोड़ दी.

सविता दी- अब मुझे तुझपर कुछ डाउट हो रहा है. कहीए तूने सरिता या मनीषा के साथ तो कुछः गलत नही कर दिया. क्योंकि चू जब इतना बड़ा गेम मेरे साथ खेल सकता ही तो तेरा कोई भरोषा नहीं ही. तू उनके साथ भी ये गेम खेल सकता है.

मैं- क्या बात कर रही हो सविता. वो मेरी बहाने हैं. उनकी तरफ मैं गलत निगाहों से नहीं देखता.

सविता दी- अच्छा और मैं क्या हूँ तेरी. मैं भी तो बहन हूँ, लेकिन तुमने मुझे गलत निगाहो से देखा न. तो उन्हें भी तो देख सकता है.

मैं- देखो सविता. तुम्हारी बात दूसरी ही. तुम्हारी शादी हो गई है. बात ये है की मैंने तुमको ऑब्सेर्वे करने के बाद ये अंदाज़ा लगा लिया था की तुम प्यासी औरत हो. इसलिए मैंने तुमको अपने जाल में फंसाया. और तुम खुद छुड़वाना चाहती थी मुझसे. हो सकता है की मैं वो कहानी नहीं भेजता तो थोड़ा लेट में चुदवाती, लेकिन चुदवाती जरूर, लेकिन उन दोनों को अभी इसके बारे में पता hi नहीं होगा. वो दोनों देखने में बड़ी हो गयी हैं, लेकिन दिमाग से अभी भी पैदल हैं. वो दोनों आपकी तरह तेज दिमाग की थोड़ी hi हैं. उन दोनों के साथ मैंने कुछ नहीं किया है सरिता. चलो अब बहुत देर हो रही ही सुहागरात के लिए. इन सब बातो में समय गवाने से क्या फायदा.

इतना कहकर मैंने दीदी को पकड़कर अपने पास खींच कर बैठा दिया और उनके होंठो पर होठ रख दिए और चूमे लगा. उनके होंठ चूमने के साथ मैंने अपना हाँथ उनकी चूचिय पर रख दिया और एक हाँथ उनकी गांड पर रख दिया और दबाने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी.

थोड़ी देर तक दीदी के होंठ चूसने के बाद मैं उठकर बिस्टेर पर लेट गया और अपने लुंड को सहलाने लगा. दीदी ने मुझे लुंड सहलाते हुवे देखा तो वो उठकर मेरे पास आई. मैंने दीदी की तंग पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और अपने ऊपर 69 के पोसिशनमे लिटा लिया. मैं दीदी के दोनों जांघो को पकड़कर अपनी जीभ दीदी की छूट पर रख दी और चाट ली. दीदी के मुंह से aaaaaaaahhhhhhhhhh अभियई निकल गया. दीदी भी मेरा लुंड पकड़कर सहलाने लगी और मेरी गोटियों से खेलने लगी.



मैं दीदी की छूट chat-te हुवे अपनी एक ऊँगली दीदी की छूट में दाल दी और अंदर बहार करने लगा. दीदी मेरे लुंड को सहलाते हुवे पानी जीभ निकल कर लुंड पर फिरने लगी. मैं अपनी ऊँगली दीदी की छूट से निकली और उनकी गांड पर रख दी और अंदर घुसेड़ने लगा. दीदी अपनी गांड तीते करने लगी. तो मैं अपनी ऊँगली उनकी गांड से निकल ली और अपनी जीभ उनकी गांड पर रख दी और गोल गोल घूमने लगा. दीदी मस्ती में मेरे लुंड को अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगी. मैं दीदी की गांड chat-te हुवे उनकी गांड पर थूक दिया और अपनी जीभ वापस उनकी छूट पर रख कर चाटने लगा.

मैंने अपनी एक ऊँगली फिर से दीदी की ासशोले पर राखी और एक hi झटके में उसे डीई की गांड में दाल दिया. दीदी की सिसकी और चीख निकल गयी.

सविता दी- aaaaaaaaaahhhhhh aBhiiiiiiiiiiiii. क्या करता हैईईई. धीरे धीरे डॉल अंदर भैया..

दीदी इतना बोलकर फिर से मेरा लुंड पाने मुंह में भर लिया और जोर जोर से चूसने लगी. मैं दीदी की छूट chat-te हुवे अपनी ऊँगली उनकी गांड में अंदर बहार करता रहा. कुछ देर तक ऊँगली अंदर बहार करने के बाद मैंने अपने पेअर से दीदी के सर को अपने लुंड पर दबा लिया और निचे से कमर उठा उठा कर दीदी का मुंह छोड़ने लगा. मैंने दीदी की छूट को पूरा मुंह खोलकर अपने मुंह में ले लिए और जोर जोर से भीज भीज कर चूसने लगा. मैंने अपनी ऊँगली दीदी की गांड से बहार निकल कर एक झटके में उसे अंदर दाल दिया. दीदी के मुंह से गठ्हूउउउउउउ ggggghhhhhhuuuuuuuuuu की आवाज़ निकलने लगी.

थोड़ी देर तक दीदी के मुंह को छोड़ने के बाद मैंने अपना पेअर दीदी के सर से हटा लिया तो दीदी ने मेरा लुंड अपने मुंह से बहार निकला और खांसने लगी. मैं दीदी की छूट और गांड के साथ खेलता रहा. फिर मैंने अपनी ऊँगली दीदी की गांड से निकली और दीदी की छूट में दाल दी और अपना मुंह उनकी गांड पर रख दिया. दीदी एकदम मस्त हो गयी थी और मेरा लुंड अपने हाँथ में भरकर मुट्ठियाने लगी.



मैंने दीदी की गांड पर थूक दिया और अपनी ऊँगली छूट से निकलकर उनकी गांड पर राखी और इस बार बिच वाली ऊँगली एक hi बार में उनकी गांड में घुसेड़ दी. साथ में उनकी छूट को भी अपने मुंह में भरकर चूस लिया. दीदी मस्ती और दर्द से कराह उठी.

सविता दी- ooooooohhhhhhhhhhhhhhh सलीबी. कितना मस्स्ष्ट्ट करेगा ऑर्डर अपनीइ डीडीई kooo.abbb अपनीइ जीभहह सी नाहीई. अपनी लुंड से छोड़ मेरीए छूट को. बहुत्त प्यासी हैई मेरी छूट. ोुह्ह्ह्ह अभीयी. बहुत्त कमालललल की छूट chat-ta हैई तू. उउउउउउफफ्फफ्फ्फ़

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने अपनी ऊँगली दीदी की गांड में जोर जोर से अंदर बहार करनी शुरू कर दी और दीदी की छूट को जोर जोर से चूसने लगा. 2 मिनट बाद दीदी ने अपने शरीर को aith-te हुवे मुझसे फिर कहा.

सविता दी- uuuuuufffffffffff भाईईई. बॉस कररर अब्ब्ब. छोड़ड़ड़ दी मुझी अब्ब्ब. बहुत्त पयासीय हो गयी हूँ मैंन. अपना लुंड मेरिइइइ छूट मी दललकाररर मेरीए प्यास बुझा दी भईई. आआह्ह्ह्हह

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने दीदी की छूट से अपनी जीभ हटा ली और दीदी की कमर को छोड़ दिया. दीदी उठकर बिस्टेर पर बैठ गयी, मैं दीदी की नशीली आँखों में देखते हुवे बोलै.

मैं- अब ऐसी क्या देख रही हो रानी. आज तुम खुद्द अपने यार के लुंड की सवारी करो.

दीदी मेरी बात सुनकर उठकर कड़ी हो गयी और अपने दोनों पेअर मेरी कमर के दोनों तरफ रख लिए और निचे झुककर मेरे लुंड को अपने हांथो से पकड़ लिया और लुंड को सीधा करके उस पर बैठने लगी. दी ने एक हाथ मेरे साइन पर रख दिया और मेरे लुंड को अपनी छूट में लेकर बैठ गई. दीदी ने अभी आधा लुंड की छूट में लिया तो उनके मुंह से सिसकी निकल गयी.



सरिता दी- oooooooooohhhhhhhhh abhiiiii.mere भैई. कितना बड़ा लुंड हैई तेरा.

इतना बोलकर दीदी आधे लुंड पर hi उछाल उछाल कर छुड़वाने लगी. मैंने हाँथ ऊपर बढाकर दी की दोनों चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगा. दीदी ने अपना एक हाँथ मेरे मुंह पर रख दिया और मेरे होंठो पर ऊँगली फिरने lagi.maine ऊँगली मुंह कोलकर अपने मुंह में ली और चूसने लगा. मैं ऊँगली चूसते हुवे दीदी की चूची को जोर से पकड़कर दीदी को निचे खींचा और अपनी कमर को ऊपर की तरफ उछाल दिया. दीदी ने उसी समय अपनी कमर निचे की थी. जिसके कारन मारा लुंड जड़ तक दीदी की छूट में समां गया. दीदी मस्ती से सिसक पड़ी.

सविता di-ohhhh अभीयी. aaaaaaaaaahhhhhh थोड़ड़ धिरररी सीए. एकककक झटके मी क्यों अंदर दल दियाए. ऐसी ठुड्डी कोई छोड़ता हीी अपनी बहन को.

दीदी की आवाज सुनकर मैंने अपने अपनी कमर की गति और तेज़ कर दी और उछाल उछाल कर कमर दीदी की छूट पर ठोकने लगा. दीदी भी अपनी गांड जोर जोर से मेरी कमर पर पटकने लगी. मैंने दी को अपने ऊपर झुकाया और उनकी पीठ पर अपने हाँथ लप्पेट कर उन्हें अपने से पूरा सत्ता लिया और sata-sat लुंड उनकी छूट में डालकर छोड़ने लगा. दीदी को मज़ा आने लगा. वो भी अपनी कमर पीछे करके मेरा लुंड अपनी छूट में लेने लगी. मैं जोर जोर से अपनी कमर उनकी छूट में थोक रहा था. थोड़ी देर बाद दीदी मस्त हो गई और माधोसी में मेरे कण में बड़बड़ाने लगी.



सविता दी- ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाभीईई. मेरे चुदककडद भईई. चू भट्ट मस्त छोड़ता हीी. कहा से सीखा तुणी ऎसी चुदैई करना. तुही नताशा ने एक्दम्मम परफैट बना दिया हैई भईई. ताकी तू अपनी बहानोऊ को छोड़कर उन्ही जन्नत का मज़ा दे. आआआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ooooohhhhhhhhhh औरर जोरर से छोड़ो अभियई.

दीदी की बात सुनकर मैं दीदी को अपनी बहो में लेकर पलट गया. अब दीदी बिस्टेर पर लेती थी और मैं उनके ऊपर. मैं दीदी के ऊपर से उठा और अपना लुंड दीदी की छूट पर लगाकर एक झटके में पूरा लुंड चाप दिया और दीदी की चूचियों पर थप्पड़ मरने लगा. दीदी मस्ती में डाबड़ादाने लगी.

सविता दी- Aaaaaaaaaahhhhhhhhhh सलीईई गंड्डूउउउ. मारर्र क्यूओ रहा हैईईई. एई मेरिइइइ छूछीया हैंन सलेटी. क्योंन इन्ही मर्डर मर्डर के लाल्ल्ल कर रहा हैईईई. औरर जोरर जोरर से छोड़ मेरी छूट कोऊ. चू बहुत्त अच्छा चुदऊ भाई हैईईई. ऐसी ही अपनी बहाणं को छोड़ता रह. तू मेरा सैया हीी. छोड़ मेरे बलमा अपनी बहा को.

मैं- हाँ सविता अज्ज्ज मैं तेरी सरे छिड़ मर्डर मर्डर कर लाल कर दूंगा. तुझे मैं इतना छोडूंगा की तू ठिक्क से चल नहीं पाएगी. तुझे मैं कुटिया बनाकर छोडूंगा साली.

इतना कहकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट से मुहाने तक बहार निकला और दीदी की गर्दन पकड़कर उनकी आँखों में देखने लगा. दीदी की आँखों में देखते हुवे मैंने एक झटका मारा. लुंड दीदी की छूट में समां गया. मेरे इस धक्के से दीदी झड़ने के करीब पहुंच गयी. वो बड़बड़ाने लगी.



सविता दी- aaaaaaahhhhhhhhhh सलीबी. मैंन अभह झड़ने के निकट आ गयी हूँ ऐसी hi छोड़ता मेरे बालमम. मैंन अब्ब झड़ना चाहती हूँ और जोर से छोड़.

मैंने दीदी की बायत सुनकर अपना लुंड उनकी छूट से बहार खींच लिया. दीदी ने मुझे क्वेश्चन वाली नज़र से देखा और मुझसे कहा.

सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह ाभीईई. मुझी कितना मज़ा आ रहा था. मैं झड़ने वाली थी. तूने पूरा मज़ा ख़राब कर दिया. अपना लुंड डालू मेरी छूट में और छोड़ो मुझे.

मैं- मैं तुमसे कुछ मांगना चाहता हूँ अगर तुम वडा करो की तुम वो मुझे डौगी तभी मैं तुम्हारी प्यास बुझाऊगा.

इतना बोलकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट में सेट करके एक झटके में उनकी छूट में उतर दिया और तुरंत बहार निकल लिया दीदी मुझे नशीली नज़रो से देखती हुई बोली.

सविता दी- तू जो चाहता है मैं तुझे सब दूंगी. लेकिन मेरी प्यास बुझा दे अब. बर्दास्त नहीं हो रहा है.

मैं दीदी की बात सुनकर अपना लुंड उनकी छूट में टोपे तक अंदर डाला. दीदी अपनी कमर उचका कर मेरा लुंड लेने की कोशिश कर रही थी, लेकिन मैं अपना लुंड अंदर नहीं दाल रहा था. मैंने दीदी से कहा.

मैं- नहीं पहले मुझे वो दीजिये जो मैं मांगूंगा. उसके बाद hi आपकी प्यास बुझाऊगा.

इतना कहकर मैंने अपना लुंड दीदी की छूट में उतर दिया और खींचकर बहार निकल लिया. दीदी सिसक पड़ी.

सविता दी- बता तुझे क्या चाहिए. अगर मेरे पास वो चीज हुई तो मैं तुझे जरूर दूंगी.

मैं- मुझे अब आपकी गांड मारनी है. उसके बाद hi मैं आपकी छूट छोडूंगा.

मेरी बात सुनकर ने मुझे घूरकर देखा और मुझसे कहा.

सविता दी- ये क्या कह रहा है तू. तू न एकदम पागल हो गया है. गांड भी कोई छोड़ने की चीज होती है.

मैं- क्यों नहीं होती. आपने कहानियो में भी तो पढ़ा होगा और तो और मेरी दोनों गफ भी तो अपनी गांड मरवाती हैं मुझसे. तो आप क्यों नहीं मरवा सकती. आपने कहा था की जो मैं मांगूंगा वो आप डौगी मुझे. अब आप अपनी बात से मुकर रही हो.

सविता दी- मैंने कहा tha.lekin मुझे नहीं पता था की तू पागलो जैसी बात करेगा. तेरा लुंड बहुत बड़ा है मैं इसे मुश्किल से अपनी छूट में ले पति हूँ. और तू इसे मेरी गांड में डालने की बात कर रहा है. तुझे पता है की तेरा लुंड मेरी गांड की क्या हालत करेगा.

मैं- कुछ नहीं होगा. पहले थोड़ा दर्द होगा. लेकिन उसके बाद आपको बहुत मज़ा आएगा.

सविता दी- नहीं अभी ऐसा मत कर. तू चाहे तो मेरी छूट साडी रात छोड़ ले. मैं तुझसे साडी रत छुड़वाने के लिए तैयार हूँ, लेकिन मेरी गांड को बॉक्स दे.

मैं- ठीक है दी. कोई बात नहीं. मैं तो समझता था की मेरी दीदी मुझे बहुत प्यार करती है. वो मुझे किसी चीज के लिए मन नहीं करेगी. मेरी गफ भी मुझे नहीं आने दे रही थी, लेकिन मैं उसके बाद भी आया. इससे अच्छा मैं आता hi नहीं. काम से काम मैं अपनी गफ की गांड तो मर लेता अब तक दो बार.

मैंने ये बात बहुत बेचारा सी सकल बनाकर कही थी. जिसे सुनकर दीदी मुझे hi देख रही थी. थोड़ी देर मुझे देखने के बाद दीदी ने मुझसे कहा.

सविता di-Mann जा भाई. मेरी छूट मर ले. मैंने आज तक कभी गांड नहीं मरवाई. बहुत दर्द होगा मुझे

मैं- छूट भी तो आपने पहली बार शादी के बाद छुड़वाई थी जीजा से. आज मैं भी तुम्हारा पति हूँ. तुमने तो जीजा को एक कुंवारा छेड़ दिया था सुहागरात में जो आज तुम्हारी प्यास भी नहीं बुझा प् रहे हैं. और एक मैं हूँ जो तुम्हारी प्यास बुझा रहा हूँ तो क्या मेरा तुम्हारे इस कुंवारे छेड़ पर कोई हक़ नहीं है. इसका मतलब तुम्हे जीजा जी hi प्यारे हैं मैं नहीं.

सविता दी- तू मुझे अपनी जान से भी ज्यादा प्यारा ही भाई. चल ठीक है मैं तेरी बात मन लेती हूँ. लेकिन पहले मेरी छूट की प्यास बुझा दे. उसके बाद मेरी गांड मर लेना.

मैं- जब गांड मरवाना है तो पहले क्या और बाद में क्या. मुझे अभी तुम्हारी गांड चाहिए.

सविता दी- तू न सच में बहुत जिद्दी है. चल ठीक है, लेकिन धीरे धीरे hi अंदर डालने अपन. मुझे बिलकुल भी दर्द नहीं होना चाहिए.

मैं- ठीक है सविता तुम बिलकुल फ़िक्र मत करो. मैं बहुत आराम से तुम्हारी गांड मरूंगा. इसके लिए थोड़ा तेल की जरुरत पड़ेगी.

सविता दी- वह डरोएर में तेल की सीसी राखी हुई है. आज तू मेरी जान लेकर hi डैम लेगा.

मैं- तुम्हारी जान नहीं सरिता, तुम्हारी गांड लेकर hi डैम लूंगा.

इतना कहकर मैं डरोएर से तेल की शीशी ले आया और दीदी को पलटकर डोगग्य स्टाइल में किया और उनकी गांड पर तेल गिराने लगा. तेल गिराने के बाद मैंने अपनी एक ऊँगली से तेल दीदी की गांड में डालने लगा. दीदी अपनी गांड को बंद और खोल रही थी. मैंने अपनी ऊँगली दीदी की गांड में दाल दी. दीदी की मुंह से sssssssssss की आवाज़ निकल पड़ी. मैंने फिर से दीदी की गांड पर तेल की कुछ बुँदे गिरे और उसे दीदी की गांड में डालने लगा. अब मैंने अपनी एक ऊँगली से साथ अपनी दूसरी ऊँगली भी उनकी गांड पर राखी और एक झटके से उसे अंदर पेलने लगा. अभी मेरी दूसरी ऊँगली आधी hi अंदर गई थी की ड्डी को दर्द होने लगा. वो छटपटाते हुवे बोली.

सविता दी- नाहीइ अभी. ऐसा मैट कर ड़ड़ड़ड़ड़ हो रहा हैई. ऊऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आआआअह्ह्ह.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपने दोनों ऊँगली बहार निकली और उसपर तेल गिराकर दीदी की गांड पर रखा और एक जोरदार झटके के साथ अपनी दो ऊँगली दीदी की गांड में घुसा दी. दीदी दर्द के कारन तड़पने लगी और बोली.

सविता दी- oooooooohhhhhhhhhh Abhiiiiiiiiiiiii. बहुत दरररड होऊ रहा हैईईई. मेरीए छूट छोड़ ली भैई. मेरी गंड़द मैट मारर्र. निकाल ली अपनी ऊंगलीई बहररर.

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने मैं ड्डी के ऊपर झुक गया और उनकी एक चुकी को हाँथ से पकड़कर दबाने लगा और अपने होठो से दीदी की पीठ चूमने लगा. और अपनी ऊँगली धीरे धीरे उनकी गांड में डालने और निकलने लगा. थोड़ी देर तक ऐसा करने पर डीई थोड़ी नार्मल हुई और अपनी गांड को पीछे करने लगी. मैंने ये देखकर दी के ऊपर से उठा और थोड़ा तेल और उनकी गांड पर गिराया और ऊँगली तेज़ी से अंदर बहार करने लगा. दीदी की छूट पानी छोड़ने लगी. जो बहकर उनकी जांघो से निचे जाने लगा. थोड़ी देर दीदी की गांड ऊँगली से छोड़ने के बाद मैं अपनी ऊँगली बहार निकल ली और दीदी को पकड़ कर सीधा किया और अपना लुंड उनकी मुंह में दाल दिया. दीदी मेरा लुंड चूसने लगी.



मैं दीदी का मुंह छोड़ने लगा. थोड़ी देर दीदी का मुंह छोड़ने के बाद मैं दीदी के गलो पर थप्पड़ मरने लगा. थप्पड़ मरते हुवे मैं दीदी का मुंह छोड़ता रहा. थोड़ी डेट बाद मैंने दीदी के मुंह से अपना लुंड बहार निकल लिया और दीदी को बिस्टेर पर पीठ के बल लिटा दिया और उनकी गांड के निचे 3 तकिया रख दिया जिससे दीदी की गांड उभर कर बहार आ गयी. तकिया रखने के बाद मैंने फिर से तेल की सीसी उठाई और उसमे से कुछ बून्द दीदी की गांड पर गिरायी और कुछ अपने लुंड पर. फिर मैंने दीदी का एक पेअर उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और दीदी की आँखों में देखते हुवे दीदी से पूछा.

मैं- तैयार हो तुम सविता अपनी गांड अपने पति से मरवाने के लिए.

सविता दी- हाँ, लेकिन धीरे धीरे करना. मुझे दर्द नहीं होना चाहिए. थोड़ा बहुत मैं सह लुंगी, लेकिन ज्यादा दर्द मत देना अभी.

दीदी की बात सुनकर मैं एक हाँथ से दीदी की कमर पकड़ कर अपना लुंड दीदी की गांड के छेड़ पर लगा दिया और उनके पेअर को मजबूती से पकड़ लिया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट-143

मैं- तैयार हो तुम सविता अपनी गांड अपने पति से मरवाने के लिए.

सविता दी- हाँ, लेकिन धीरे धीरे करना. मुझे दर्द नहीं होना चाहिए. थोड़ा बहुत मैं सह लुंगी, लेकिन ज्यादा दर्द मत देना अभी.

दीदी की बात सुनकर मैं एक हाँथ से दीदी की कमर पकड़ कर अपना लुंड दीदी की गांड के छेड़ पर लगा दिया और उनके पेअर को मजबूती से पकड़ लिया.

अब आगे..

मैंने अपना लुंड दीदी की गांड में सेट किया और दीदी की कमर और तंग को पकड़ कर अपने लुंड को उनकी गांड में दबाया. मेरा लुंड फिसल कर दीदी की छूट से जाकर टकराया. मैं दीदी की कमर से हाँथ हटाकर अपने लुंड को पकड़ा और उसे उनकी गांड में सटाकर एकक हल्का सा धक्का दिया. मेरा लुंड पुक्क की आवाज़ के साथ सूपड़ा दीदी की गांड में घुस गया. दीदी के मुंह से चीख निकल गयी.

सविता दी- आआआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाभीईई. मैंन नाहीइ ली पौंगजी टेरी लुंड अपनी गण्ड मी. मुझी दर्द्द हो रहा हैई बाहर निकालल ली अभी.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना लुंड बहार निकल लिया और तेल की सीसी से थोड़ा तेल दीदी की गांड में गिराया और अपना लुंड उनकी गांड पर सेट करके उनकी कमर को पकड़ कर एक धक्का मारा. मेरा लुंड 2 इंच तक उनकी गांड में उतर गया. दीदी दर्द से चिल्ला उठी.

सविता दी- aaaaaaaaaahhhhhhhhh ABhiiiiiiiiiiii. बहाररर निककककललल लिए भईईई. बहुतत्त दरररडद्ड होऊ रहा ही मैं मर्डर जौंगीय.

दीदी की चीख सुनकर मैंने अपने लुंड को टोपे तक्क बहार खींचा और एक और दक्का मारा. इस बार मेरा लुंड 4 इंच उनकी गांड में चला गया. दीदी दर्द से दोहरी हो गई और चीख पड़ी.

सविता दी- aaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh मदाररर choodddd.faaadd डालाअ मेरी छूट कोऊ. निकालल साली अपना लुंड बहार. मुझी नही मरवानी अपनी गण्ड तेरी मुसल्ल जैसी लुंड सी. निकाललललली बाहर भईई . बहुत्त ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हीी. ऊऊऊह्ह्ह्हह्ह उउउउउउउउइइइइइइइइइ

दीदी चीख रही थी. उनकी आँखों से आंसू निकलकर बिस्टेर पर गिर रहे थे. मैं उनकी चीख सुनकर दीदी के ऊपर लेट गया और दजदि के होठ चूसने लाहा. मैंने कमर से हाँथ उठाकर दीदी की एक चुकी पर रह दिया और हल्का हल्का सहलाने लगा और एक हाँथ से दीदी की छूट को मसलने लगा. थोड़ी देर बाद दीदी का दर्द कुछ काम हुवा तो मैं उसके होंठो को छोड़कर डंकी एक चुकी को मुंह में बाहरकर चूसने लगा. दीदी मेरे सर को सहलाते हुवे बोली.

सविता दी- ाभीईई मुझी दर्द्द हो रहा हैई. प्ल्ज़ बहार निकल ले. मैं नहीं ले पाऊँगी तेरा लुंड पूरा.

मैं- बस हो गया दीदी. जितना दर्द होना था. अब आपको कुछः भी दर्द नहीं होगा.

इतना बोलकर मैं दीदी के ऊपर से उठ गया और फिर से उनके पेअर और उनकी कमर को पकड़कर अपना लुंड दीदी की गांड से निकलने लगा. दीदी को फिर से दर्द होने लगा. वो फिर से छटपटाने लगी और आआअह्ह्ह्ह ABhiiii,nahii अभियई. करने लगी. मैं अपने लुंड को बहार निकला और फिर धीरे धीरे अंदर करने लगा. मैंने उनकी कमर से हाँथ हटाकर उनकी छूट पर रख दिया और सहलाने लगा. मैं अपना लुंड धीरे से दीदी की गांड से निकलता और फिर धीरे से उनकी गांड में दाल देता. 5 मिनट ऐसे करने के बाद दीदी नार्मल हुई. तो मैंने फिर से उनकी कमर को पकड़ा और अपना लुंड टोपे तक बहार खींचा और एक जोरदार धक्का उनकी गांड पर मार दिया. मेरा लुंड सभी बढ़ाओ को रस्ते से hata-ta हुवा जड़ तक उनकी गांड में समां गया. दीदी दर्दभरी आवाज़ में गाला फाड़कर चिल्लाई.



सविता दी- aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhh mummyyyyyyyyyy. मारर्र दियाआ री मदारछोड़ड़ड़. फाडड्ड डीई मेरीए गंडड. ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह सरिताआ मुझी बचाए ली इस बहन के लौड़ी सी. यी आज्ज मुझी मारर्र daleegaa.ooohhhhhhhh नाहीईईई. अपननननननना लुंदड़ बहार निकक्कल्ल saleee.oooohh mummyyyy..mujhee बचाएउ. uuuuuuuffffffffff आआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह, मुझी नाहीई मरवानी अपनीईई गण्डददद. मुझी कुछःह नहहीइ कारणा. छहोड़द्ध दी मुझी बहनोडडडड. जानी दी मुझी आआआहहहहहहह सरिता मैंन मर्डर जौंगीई.

मैं दीदी की चीख सुनकर दीदी के चेहरे पर झुक गया. दीदी रो रही थी. उनकी आँख से आंसू निकल रहे थे. मैंने अपनी जीभ निकलकर दीदी के आंसू चाट लिए. दीदी मेरी और देखते हुवे रोटी हुई बोली.

सविता दी- आआह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह भाईईई. बाहर निकाल ली. मैंनंन मर्डर जौन्ग्गी. मुझी बहुत्त ड़ड़ड़ड़ड़ होऊ रहा हैई. रहामं कर मुझेपररर. ऊऊऊओह्ह्ह्ह आआआआहहहहहहह.

दीदी की बात सुनकर मैंने अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. दीदी अपना सर इधर उधर कर रही थी, लेकिन मैंने उनके होंठो की नहीं छोड़ा. एक हाँथ मैंने दीदी की छूट पर रखा तो मुझे कुछ गिला गिला लगा. मैं जान गया की दीदी की गांड फैट गयी है और खून निकल रहा है. मैं दीदी की छूट को सहलाने लगा. एक हाँथ बढाकर मैंने दीदी की चुकी पर रख और उन्हें दबाने लगा. मैं दीदी के होंठो को चूसते हुवे उनके होंठ पर जीभ घूमने लगा. दीदी ने अपना मुंह खोल दिया और मेरी जीभ अंदर ले ली.

दीदी अपने मुंह में मेरी जीभ लेकर चूस रही थी. मैं दीदी की चुकी को दबाते हुवे उनकी छूट सहलाने लगा. लगभग 5 मिनट के बाद दीदी नार्मल हो गयी तो मैंने दीदी के होंठ फिर से चूसते हुवे उनकी चुकी को सहलाते हुवे अपना लुंड हल्का हल्का बहार खीचने लगा. दीदी को दर्द होने लगा तो वो अपना शरीर इधर उधर करने लगी. लेकिन मैंने दी को छोड़ा नहीं और उनकी छूट को सहलाता रहा. एक हाँथ से चुकी दबाते हुवे होंठ चुस्त रहा. और लैंड हल्का हल्का अंदर बहार करता रहा थोड़ी देर बाद दीदी को आराम हुवा तो वो अपनी गांड उचका उचका कर मेरा लुंड अपनी गांड में लेने की कोशिश करने लगी. मैंने भी अपना लुंड धीरे धीरे दीदी की गांड में डालना शुरू कर दिया.

मैं अब दीदी के ऊपर से उठ गया और दीदी के दूसरे पेअर को भी उठाकर अपने कंधे पर रख लिया और उनकी गांड मरने लगा. पहले धीरे धीरे, फिर तेज़, फिर और तेज़ अपना लुंड दीदी की गांड में पेलने लगा. अब दीदी एकदम नार्मल हो चिकि थी तो वो अपनी कमर पीछे कर के अपनी गांड में मेरा लुंड ले रही थी. ये देखकर मैंने दीदी अपना लुंड टोपे तक बहार खींच लिया और एक जोरदार धक्के के साथ पूरा लुंड जड़ तक अंदर पेल दिया. दीदी फिर से दर्द से चीख पड़ी.

सविता di-ooooooohhhhhhhhhhh हरामीईई सलीबी. धीरीईईए करररर कामिनी. चू तू सलीईई असलिई बाहाआनचूड़ भायी ी निकला रीई. अपनीई डीडीई की हीई गंड़द मारर्र रहा हैई बेरहहमीइ सीए ाअखिरर तुणी खुलल होई दिया मेरा पिछवाडाआ. कर दिया उद्घाटन मेरिइइइ गण्ड का. साली तू जानवर हैई एकदममममम. अपनी डीडीईई कोऊ जनवरोऊ की तरहहह छोड़ता हैई हारामीई सलेटी. uuuuuuuuuuuuuuuuuuhhhhhhhhhhhhhhhhh मुम्ममइय्य्य.

दीदी की चीख सुनकर मैं जोर जोर से धक्का लगाकर उनकी गांड मरने लगा. मैं दीदी की छूट अभी भी सहला रहा था. ेक्क्क हाँथ से दीदी की चुकी दबती हुवी दीदी की गांड ठोकता रहा. अब दीदी का दर्द बिलकुल hi ख़तम हो गया था. वो अपनी गांड उचलल उछाल कर मेरा लुंड अपनी गांड में ठोकवा रही थी. दीदी अपनी गांड मरवाती हुई मस्ती में बोली.

सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्ह्हह्ह अभीइइइइइ सलेटी औरर छोड़ड़ड़ड़ ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह फाडड्ड दिए अपनीइ डीडीई की गानंददद आआअह्हह्ह्ह्ह ऑर्डर टीज़ज़्ज़ज़. मुझी तू हचाकक हचाकक कर छोड़ड़ड़. चीथड़े उड़ा दे मेरीए गण्ड के ऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह बहनचुड़द्द भईईई. aaaaaaaaaahhhhhh. अब्ब्ब्ब ट्टूओ मीरीई गण्ड भीई मर्डर लिई तुणी अब्ब्ब मेरीए छूट का भी तू ख्यालल कररर. काब सी रोऊ रहीी ही तेरी लुंदड़ के लिये. छोड़ मुझी. और जोरर सीए कड़ड़.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की गांड से अपना लुंड बहार निकल लिया और दीदी को पलटकर डोगग्य स्टाइल में किया और उनके पीछे खड़े होकर अपना लुंड उनकी छूट पर सेट किया और एक जोर दर धक्का मर दिया. मेरा लुंड दीदी की छूट में एक hi बार में पूरा समां गया. दीदी के मुंह से मदहोशी भरी आवाज़ निकली.



सविता दी- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइइइ. किटनी जोररदाररर तरीककके सी छोड़ता ही चू साली. आह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़ मुझी. तेरई डीडीई की छूट तेरी अमानत हैई भईईई ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह डररररर. ufffffffffffffff मैं सरीई उमररर छुडवाऊंगीए तुझसी बस्स्स मुझी इसी तरह से छोड़ती rahnaaa.aaahhhhhh

मैं- हॉँण्णन सविताआ. मैंनं तुझीऐ सरई जिन्दागीय छोड़ना चाहता होओओओओणन्न. तुझी छोड़ छोड़ड़ड़ कर अपनी बच्ची की माँ बनाना चाहता होऊणंन्न. बोल सलीई सविता. बनेगी मेरे बच्ची की मम्मीयियय. सलीईईई पहली तू बहुतत्त नखरा करतीय थिई. अब्ब देखू कैसी गण्ड उचका उचकक्का कर लुंड ले रही हीी. औरर ली अंडरर अपनी छूट मई ाऊओह्ह.

मैं दाना दान दीदी की छूट छोड़ता रहा. दीदी भी मस्ती में अपनी छूट चुदवाती रही औअर बड़बड़ाती रही.

सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्ह साली अभियई. एसीईए होऊ छोडोऊ मुझी. दामम लगाए करर छोडोऊ. ढिलीइ कर दू मेरी छूट को रात दिन्नं छोड़ छोड़ कर ooooooooooooohhh बालमममम. बहुत्त मज़ा आ रहा हैई. ऐसी हीई रूजज छोड़ना मुझी. ऐसी ही पैल्ल पिल्ल कर मुझे अपने बची की माँ बना दो. मैं बनूँगी तेरे बच्चे की मम्मी. छोड़ड़ड़ छोड़ कर गभिन्नं कर दोऊ अपनीइ डीडीई को. हर्र सल्ल मैं तुमसे छुड़वा छुड़वा कर तुम्हारे बच्चे पैदा करूंगी अपनी छूट सी. ऊऊऊऊह्ह्हह्ह साली हारामीई. अपनी दीदी कोऊ माँ बनाना चाहता हैई. उउउउउफफ्फ उउउउउइइइइइइ.

मैं दीदी को छोड़ते हुवे अपना लुंड दीदी की चूर से नीकल लिया और उनके सर को बिस्टेर पर दबा दिया और और उनके दोनों पेअर मोड़ कर अपना एक पेअर उनके कमर के पास रखा और लुंड को उनकी गांड पर सेट किया और एक जोर्डरर ढक्की के साथ उनकी गांड में उतारर दिया. दीदी फिर से चिल्ला उठी.



सविता दी- ऊऊऊऊह्ह्हह्हह्ह्ह्ह साली. फिरर सी गण्ड में डॉल दियाए माँ के लौड़े. मेरे चुड़क्कड़ भायी, हरामजादी. औरर जोरर सी छोड़ड़ड़ मेरी गण्ड को. तू अगर मुझी ऐसी होई पलटा रहा तू ेक्क्क दिन्नं मैं मरुन्गीय पक्का ोुह्ह्हह्हह्ह्ह्ह Siiiiiiiiii ाआउउउछहहहहहह बहाणचूडड़ड. ोूह

मैं- ooooooohhhhhhhhhhh Saliiiiiiiiiiiiii रांदडीई सरिता तेरई गण्ड मरूउउ. यी ली मेरा लौड़ा. तुझीऐ तू मैंन अपनी रण्डी बनाकर रखूंगा. चू बहुत्त मस्त होकर चुदवाती हैई. औरर अंदर ताककक ली मेरा लुंड अपनी गण्ड मी सलीई. तुझी जब चाहूंगा छोड़ूँगा.

सरिता दी- मेरा जिसमममम तेरा ही हैई साली. जाब्ब चाही जहा चाही छोड़ लेना मुझी. बबास चू मेरी गण्ड अछ्हीइ तरहहह मर्डर ऊऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह भादवी. औरर ताका टला के छोड़. फुककक मी हार्डड, तुममम मुज्झिये कितनी ताल्ल्ल सी ताल मिलकर छोड़ रहरर हूँ. आआअह्हह्ह्ह्ह ऑर्डर जोरर सीए छोड़ू.

दीदी की मस्ती भरी सिसकारीय सुनकर मैंने दीदी की गांड कुछ देर छोड़ी फिर आगे झुककर दीदी के सर को पकड़कर अपना लुंड दीदी की गांड से बहार निकला और उनकी छूट में रखकर एकक झटके के साथ अंदर कर दिया. दीदी मस्ती में बादबांए लगी.



सरिता दी- उउउउउउउउइइइइइइइइइ मम्मीयिययीय. खा जउओ मेरे रज़ाअ मेरी छूट को अपनी लुंड सीए. बहुत्त मज़ा दी रही हूँ मेरी छूट को तुममम. तुम बहुत्त अच्छी चुदऊ भैई हूँ. जो अपनीइ बहन को ख़ुशह कर्र्ना जनता हैईईई. चूडू सैया औरर जोरर जोर से छोड़ू. आआआहहह.

मैं दीदी की बात सुनकर अपना लुंड उनकी छूट से बहार निकला और पलटकर उनको लिटा दिया और उनकी कमर को दोनों हांथो से पकड़कर अपना लुंड उनकी छूट में पेल दिया और लम्बे लम्बे स्टॉक लगाने लगा. डीडीई कुछ देर लम्बे लम्बे स्ट्रोकक मरने के बाद दीदी अपनी चरम पर पहुछः gayiii..main भी झड़ने वाला हो गया था. 5-6 धक्के और लगने के बबाद दीदी बड़बड़ाती हुई झड़ने लगी.

सरिता di-aaaaaaaahhhhhhhh ाभीईई. मेंनननन झड़ने वालीए hoooo.mujhee कसककरर पकड़ड ली. मॉझी गिरने मैट देना छोड़ड़ड़ mujhee.mainn झाड़ रही होऊणन्न आअह्हह्ह्ह्हह ऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह. ऑर्डर जोरर सी मर्डर धक्क्की. मैंनं गईई भईई. संभाल मुझी…..

इतना कहकर डीडीई झाड़ गई. मैं भी अपनी आखिरी स्टेज पर था. इसलिए मैंने जोर दर 5-6 धक्के लगाकर दीदी की छूट से अपना लुंड बहार निकल लिया और दीदी को हाँथ पकड़कर उठाया और उनके मुंह के पास लुंड करके अपने हाँथ से 2 बार हिलाया. दीदी ने हाँथ बढाकर मेरा लुंड पकड़ लिया. दीदी का हाँथ लगते hi मेरे लुंड ने पानी छोड़ दिया जो दीदी की चूचियों पर जाकर गिरा. दीदी ने अपना मुंह खोल लिया और पर पूरा पानी अपने मुंह में लेने लगी. मेरी ेके क बून्द दीदी के मुंह में गिरी जिसे दीदी ने अपने गले के निचे उतर लिया. मैं झड़ने के बाद पास्ट होकर बिस्टेर पर बैठ गया. दीदी भी निढाल होकर बिस्टेर पर लेट गयी.



जब हम दोनों की सांसे दुरुस्त हो गयी तो मैंने दीदी की तरफ देखा. वो अभी भी लम्बी लम्बी सांसे ले रही थी. उनकी चूचिया हर साँस के साथ ऊपर निचे हो रही थी और उनकी चूचियों पर मेरा वीर्य चमक रहा था. तोड़ी देर बाद दीदी बिस्टेर से उठी और मेरी तरफ देखने लगी. फिर उन्होंने अपनी चूचियों से मेरे वीर्य को अपनी ऊँगली में लिया और मेरी आँखों में देखते हुवे अपनी ऊँगली अपने मुंह में दाल ली और चूसने lagi.isi तरह दीदी ने अपनी चूचियों का सारा वीर्य. अपने मुंह में दाल लिया. चूचियों पर लगा वीर्य छंटने के बाद दीदी खिसककर मेरे पास आई और मेरे होंठो को चूमने लगी.

थोड़ी देर मेरे होंठो को चूमने के बाअद दीदी मुझसे अलग हो गयी और मुझसे बोली.

सविता दी- आखिर तुमने अपने मन की कर hi ली. मेरी गांड का उदघाटन कर के hi डैम लिया तुमने.

मैं- आपकी गांड है ही ऐसी, इतना कातिल और बड़ी की मुझसे कण्ट्रोल hi नहीं हुवा. और आपने मुझे अपनी कुंवारी गांड देखर बहुत बड़ा एहसान किया है अपने भाई पर. मुझे बहुत ख़ुशी दी है अप्पने. मेरे तो भाग्य hi खुल गए ऐसी गांड का उदघाटनकरके.

सविता दी- तेरे तो भाग्य खुल गए, लेकिन यहाँ तो मेरी गांड खुलल गयी. पता है तुम्हे मुझे कितना दर्द हुवा था. मेरी तू जान नहीं निकली. बाकि मैंने कैसे झेला है तेरे लुंड को अपनी गांड में ये मैं hi जानती हु. जानवर कही का.

main-Sachh बताऊओं. मज़ा नहीं आया क्या तुमको सविता.

सविता दी- तू मज़े की बात करता ही. मेरी तो हालत ख़राब हो गयी थी उस समाया.

मैं- मज़ा तो बहुत लिया तुमने दीदी. कैसे अपनी गांड उछाल उछाल कर मेरा लुंड अंदर ले रही थी.

मेरी बात सुनकर दीदी के चेहरे पर मुस्कान आ गयी. इन सब बातो के दौरान मेरा लुंड फिर से खड़ा हो गया. मैंने दीदी को अपने लुंड की तरफ इशारा करते हुवे कहा.

मैं- अगर तुम कहो तो एक राउंड और हो जाये. देखो तुमको देखकर इसका क्या हॉल हो गया है.

सविता दी- ooooohhhhhhhhhhh दिया. ये तो फिर से खड़ा हो गया. कितना प्यासा है तेरा लुंड.

मैं- जॉब तुम जैसी गरम बहन नंगी सामने बैठी हो तो लुंड तो खड़ा होगा hi न.

सविता दी- चल हैट सेल. तेरे से तो बात करना hi बेकार है. मैं थोड़ा बाथरूम में फ्रेश होकर अति हों.

इतना कहकर बाथरूम जाने के लिए उठने लगी और जैसे hi उन्होंने निचे पेअर रखकर उठा. तुरंत चिल्ला कर बैठ गयी.

सविता दी- Aaaaaaaaahhhhhhhhhhh मम्मीयिययीय.

मैं- क्या हुवा सविता. तुम चिल्ला क्यों रही हो. अब तो मैं कुछ कर भी नहीं रहा हूँ.

सविता दी- सेल कमीने इतना कुछ करने के बाद भी बोल रहा ही की तुमने कुछ किया hi नही. मेरे शरीर का एक एक रेशा तूने ढीला कर दिया और. मेरी छूट और गांड का अंजार पंजर सब तोड़ फोड़ डाला है. इतनी बेरहमी से छोड़ा है की गांड अभी तक दर्द कर रही है. मुझसे उठा नहीं जार अहा है.

मैं- रखिये मैं ले चलता हूँ तुमको बाथरूम. मैं भी फ्रेश हो लूंगा.

इतना बोलकर मैं दीदी को शहर देखर बाथरूम में ले गया और अपने हाँथ से दीदी की छूट और गांड साफ की. दीदी ने अपना चेहरा पानी से धोया. फिर मैं दीदी को बिस्टेर पर लेकर बिठा दिया और उनको टॉवल दे दिया. और मैं बाथरूम में घुस गया. बाथरूम में जाने के बाद मैंने भी अपने लुंड को धोकर साफ किया और वापस आकर बीएड पर बैठ गया. दीदी ने मुझसे पेनकिलर डरोएर से निकलकर देने के लिए कहा मैंने दीदी को पैन किलर दी खाने के लिए. दीदी ने पेनकिलर खा ली और बिस्तरे के सिरहाने टेक लगाकर बैठ गयी. मैं भी बिस्टेर पर तक लगाकर बैठ गया और दीदी को देखने लगा. थोड़ी देर दीदी को देखने के बाद मैंने दीदी से कहा.

मैं- तो दीदी कब निकलना है घर के लिए.

सविता दी- अब कल तो चलने लायक नहीं हूँ. परसो चलते हैं फिर.

मैं- ठीक है दीदी. जैसा तुम कहो. एक बात कहनी थी आपसे सोच रहा हूँ की कैसे कहूँ.

सविता दी- बिंदास होकर जो भी है बोल दे. वैसे भी तू अपनी hi मानवता है मेरी सुनता hi कहा है.

मैं- वो दीदी मैं ये कह रहा था की मेरी दोनों गफ चाहती हैं को आप उनके साथ मिलकर मेरे साथ चुदाई करे.

मेरी बात सुनकर दीदी ने मेरी तरफ गुस्से से देखा और मुझसे कहा.

सविता दी- सेल कमीने. तूने मुझे बदनाम कर दिया न. तुझे मेरी इज़्ज़त की तनिक भी फ़िक्र नहीं है. अगर उन्होंने मां पापा को अपने बारे में बोल दिया तो क्या मुंह दिखाउंगी मम्मी पापा को मैं.

मैं- मैंने उनको ये थोड़ी hi बताया है की तुम मेरी दीदी हो, बस ये बताया है की तुम मेरी गफ हो और अभी आगरा गई हो अपने पति के पास.

सविता दी- क्या. सेल तुझे ये बताने की क्या जरूरत थी की मैं शादी शुदा हूँ. पता नहीं क्या सोच रही होगी मेरे बारे में वो. तू मुझे किसी दिन बदनाम कर देगा.

मैं- ऐसा कुछ नहीं होगा दी. बस तुम ये बताओ की तुम उनके साथ मिलकर मुझसे छुडवाओगी.

सविता दी- देख अभी. अब तू कुछ ज्यादा hi बोल रहा है. तूने अपनी बहन को बाजारू औरत समझ रखा है क्या. जो किसी के साथ भी ये गन्दा काम karungi.tune ऐसे सोच भी कैसे लिया अभी.

मैं- मैंने कुछ नहीं सोचा. बस एक दिन मैं उन दोनों को साथ में छोड़ रहा था तो उन दोनों ने कहा की तुम अपनी उस गफ को भी साथ मिला तो फिर चुदाई में बहुत मज़ा आएगा.

मेरी बात सुनकर सविता दीदी का मुंह आश्चर्य से खुला रह गया. जब उन्हें ये पता चला की मैं दोनों को एकसाथ छोड़ता हूँ. और वो खुसी ख़ुशी चुदवाती हैं.

सविता दी- क्या कहा तुणीऐ. दोनों को एक साथ छोड़ता है तू. लेकिन ये कैसे पॉसिबल है. दोनों एक कैसे कर लेती हैं तेरे साथ. उन्हें शर्म नहीं आती क्या.

main-Are इसमें शर्म कैसी. बल्कि उन दोनों को तो बहुत मज़ा आता है. आप बताओ क्या बोलती हो.

सविता दी- देख अभी. मैं तेरी बहन हूँ. मुझे पता है की हम दोनों जो कर रहे हैं वो गलत है समाज की नज़र में, लेकिन फिर भी मैं तुझसे ख़ुशी ख़ुशी चुदवाती हूँ, लेकिन एक बात याद रख और अपने दिमाग में अच्छी तरह बिठा ले की मैं ये बेहूदा काम कभी नहीं करुँगी.

इस बार दीदी ने अपनी बात बहुत गुस्से में कही थी. मैंने तो पहले से hi ऐसे hi जवाब की उम्मीद किट hi, इसलिए मैं दीदी के कंधे पर अपने हाथ रखते हुवे कहा.

मैं- ी म सूर्य्य दीदी. मैंने तो बस ऐसे hi कहा था. आप नाराज़ मत होइए. वही होगा जो आप चाहती हैं.

उसके बाद मैंने और दीदी ने बहुत बाटे की और थोड़ी देर बाद हम दोनों सो गए.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
अपडेट- 144

सुबह मैं दिन चढ़े उठा तो दीदी अभी भी सो रही थी. दीदी सोती हुई बहुत प्यारी लग रही थी. मैं दीदी के गाल पर एक चुम्मा लिया और बाथरूम में फ्रेश होने के लिए चला गया. फ्रेश होकर आया तो दीदी अभी भी सो रही थी. मैंने दीदी को जगाया. दीदी ने उठकर बाथरूम जाने लगी, लेकिन वो अभी भी लंगड़ा रही थी. दीदी बाथरूम में जाकर फ्रेश हुई और तौलिये से मुंह पोछते हुवे बहार आयी. मैंने दीदी से कहा.

मैं- क्या हुवा दीदी. लंगड़ा कर क्यों चल रही हो.

दीदी मेरी बात सुनकर मुझे मरने लगी. में अपने आपको बचने के लिए दीदी की पकड़ लिया और बिस्टेर पर धकेल दिया और उनको किश करने लगा. दीदी मेरे किश का जवाब दे रही थी. थोड़ी देर किश करने के बाद मैंने अपना हाथ बढाकर उनकी चूचियों पर रख दिया और मसलने लगा. दीदी मचलने लगाई और बोली.

सविता दी- नही अभी मत कर, नहीं तो मैं फिर से गरम हो जाउंगी. मैं अभी इस कंडीशन में नहीं हूँ की तेरा लुंड ले सकूँ, मुझे अभी आराम की जरूरत है.

दीदी की बात मानकर मैंने दीदी को छोड़ दिया और दीदी से कहा.

मैं- ऐसा करिये आप आज सारा दिन आराम कीजिये. मैं खाना बहार से माँगा लूंगा. अभी आप आराम कीजिये तब तक मैं चाय बनाकर लता हूँ.

इतना कहकर मैं दीदी को बैडरूम में छोड़कर किचन में चला गया. मैंने किठचें में जाकर छाई बनाना शुरू कर दी. मैंने एक प्लेट में कुछ बिस्किट्स और नमकीन निकल लिया और चाय बन जाने के बाद उसे छ्ह कर दो कप में निकला और ट्रे में रखकर दीदी के कमरे की तरफ चल पड़ा. थोड़ी देर बाद मैं कमरे में था. मैंने दीदी को चाय ऑफर की. उन्होंने कप उठा लिए और पिने लगी. मैं भी बिस्टेर पर बैठकर चाय पिने लगा. चाय पिने के बाद मैंने बरतें किचन में रख और आकर दीदी के पास बैठ गया. दीदी ने पेनकिलर मांगी तो मैंने उन्हें पेनकिलर डरोएर से निकल कर दे दी. दी ने दवा खा ली और बिस्टेर पर आराम करने के लिए लेट गयी.

मैं भी दीदी के साथ लेते गया. कुछ देर लेते रहने के बाद मेरा फ़ोन बजने लगा. मैंने फ़ोन देखा तो वो मनीषा की कॉल थी. मैंने फ़ोन स्पीकर में डाला और दीदी को दे दिया. दीदी ने फ़ोन लेकर और कहा.

सविता दी- hello मनीषा.

मनीषा- ओह्ह्ह hello दीदी. कैसी हैं आप.

सविता दी- मैं ठीक हूँ मनीषा. तुम और सरिता कैसी हो और घर वाले कैसे हैं.

मनीषा- मैं भी ठीक हूँ दीदी और भरवले और सरिता दीदी भी बढ़िया हैं. सरिता दी तो मेरे पास hi हैं. आप बात करिये उनसे.

सविता दी- हाँ सरिता कैसी छूट ुम. पढाई कैसी चल रही है तुम दोनों की.

सरिता दी- मैं बढ़िया हूँ दीदी. और आप कैसी हैं.

सविता दी- ठीक हों मैं भी.

मैं- नहीं सरिता दीदी, सविता दीदी ठीक नहीं हैं. ये झूठ बोल रही हैं.

सरिता दी- क्यों क्या हुवे दीदी को. कही तूने तो कुछ उल्टा सीधा नहीं किया. जिससे दीदी की तबियत ख़राब हो गयी है.

मैं- मैंने क्या किया है. ये आज लंगड़ा लंगड़ा कर चाल रही हैं. और पूछने पर बता नहीं रही हैं.

जब मैंने ये बात सरिता दीदी से बोली तो सविता दीदी मुझे आँखे दिखाकर घोर रही थी. और मुझे छुप रहने का इशारा कर रही थी. सरिता दीदी मेरी बात सुनकर समझ गई की सविता दीदी की गांड का उद्घाटन हो चुक्का है. फिर भी वो दीदी माँ मज़ा लेने के लिए बोली.

सरिता दी- क्या हुवा दीदी आप लंगड़ा कर क्यों चल रही हैं. कही अभी ने कुछ उलटी सीधी हरकत की. जिससे आपको चोट लग गयी हो. जिसके कारन आप लंगड़ा कर चल रही हैं.

सविता di(mujhe घूरते हुवे). अरे नहीं सरिता. ऐसी कोई बात नहीं है. बात ये है की कल रात में मैं बाथरूम में फिसल कर गिर गयी थी. रात में तो कुछ नहीं हुवे, लेकिन अभी बहुत दर्द कर रहा है, इसलिए लंगड़ा कर चल रही हूँ.

सरिता दी- तुम बच गए अभी. नहीं तो अगर दीदी को तुम्हारी वजह से चोट आई होती तो मैं तुमको बहुत मरती. अच्छा ये सब छोडो का बा रहे हैं आप दोनों यहाँ.

सविता दी- अभी तो दो दिन मुश्किल है. मुझे ठीक होने में समय लगेगा. उसके बाद आ जाउंगी.

सरिता दी- अबे गधे. तू अब कही घूमने मत जाना और दीदी का पूरा ख्याल रखने. नहीं तो तेरी खैर नहीं.

मैं- (सविता दी को आँख मरते हुवे) अरे दीदी अब बिलकुल भी फ़िक्र मत करिये. मैं दीदी का बहुत अचे से ख्याल रखूँगा, दीदी की मैं बहुत खिदमत करूँगा. देखना दीदी खुद आपसे मेरी तारीफ करते नहीं. थकेंगी. अच्छा अब फ़ोन रखिये बाद में बात करते हैं.

इतना बोलकर मैंने फ़ोन रख दिया. फ़ोन रखने के बाद दीदी मुझे मरने लगी और बोली.

सविता दी- क्या जरुरत थी सरिता से ये बात बताने की की मैं लंगड़ा कर चल रही हूँ. कही उसको कोई शक हो जाता तो. तू भी न.

मैं- कैसी बाते कर रही हो दीदी. सरिता दीदी आप पर और मुझपर शक करेंगी की हम दोनों ने चुदाई की है. इसलिए आप लंगड़ा कर चल रही हैं. ओह्ह्ह के ों यार. कुछ्ह तो लॉजिक वाली बात करो आप.

सविता दी- अच्छा चल बड़ा आया लॉजिक वाली बात करने. अब खाना आर्डर कर दे. भूख लग रही है.

दीदी की बात मानकर मैंने खाना आर्डर कर दिया. थोड़ी देर बाद खाना भी आ गया. मैंने खाना लिया और रसोई से जाकर एक प्लेट ली और उसे लेकर दीदी के बेडरूम में चला गया. मैंने वह खाना प्लेट में निकला और मैं और दीदी खाने लगे. एक दूसरे को खिलने लगे. थोड़ी देर में हम दोनों ने खाना फिनिश किया. खाना खाने के बाद मैंने प्लेट किचन में राखी और आकर दीदी के पास बैठ गया और कहा.

मैं- दीदी. टिकट तो मैंने कल दोपहर 2 बजे की निकली है. तो कल hi निकल चलते हैं घर. और टिकट अवेलेबल नहीं है एक हफ्ते के लिए.

मेरी बात सुनकर दीदी ने ोकक कह दिया. फिर हम दोनों कुछ देर बाते करने के बाद सो गए. शाम को जाकर मेरी नींद खुली तो मैंने उठकर चाय बनाई और दो कप में डालकर दीदी के पास आया और एक कप उन्हें पकड़ा दी. चाय पिने के बाद मैंने कप लेकर किचन में आया और बर्तन साफ किय और दीदी के पास आ गया. रत हुई तो मैंने फिर से खाना आर्डर किया. कुछ देर में खाना aaya.to मैंने और दीदी ने खाना खाया और बिस्टेर पर लेट गए. बिस्टेर पर लेट कर मैंने दीदी से कहा.

मैं- दीदी. मैं घर जाने से पहले आपको एक बार और छोड़ना चाहता हूँ. पता नहीं घर जाने के बाद मौका मिले या न मुले.

सविता दी- नहीं अभी. आज्ज नही. थोड़ा और आराम कर लुंगी तो बिलकुल ठीक हूँ जाउंगी. लेकिन कल जाने से पहले पक्का तेरी ख्वाहिश पूरी करुँगी. अब चुपचाप से जा.

दीदी की बात सुनकर मैं दी और करीब आ गया और अपने होंठो से उनके होंठ चूसने लगा. दीदी भी मेरा साथ देने लगी. थोड़ी देर होंठ चूसने के बाद मैं दीदी से अलग हुवा. फिर दीदी ने गुड़ नाईट बोलै और हम दोनों सो गए.

अगले दिन मैं शावर की आवाज़ सुनकर उठा. मैं बीएड पर वैसे hi लेता रहा. थोड़ी देर बाद बाथरूम का दरवाज़ा खुला और दीदी एक छोटी सी टॉवल अपने जिस्म में लप्पेट कर बहार आयी. उसमे से दीदी की आधी चूचिया बहार दिखाई दे रही थी. टॉवल उनकी जांघो तक hi था.



जिसमे से दीदी की सेक्सी पिण्डलिया भी दिखाई दे रही thi.ye देखते hi मेरा लुंड खड़ा हो गया और मैं उसे अपने लोअर के ऊपर से पकड़ लिया और दबाने लगा. दीदी मुझे देखकर हंसने लगी. मैं उठकर दीदी के पास जाने लगा तो दीदी ने मुझे रोकक दिया और मुझसे कहा.

सविता दी- देख अभी मैंने अभी अभी स्नान किया है. और मुझे खाना बनाना है. तू अभी तू कुछ भी उल्टा सीधा करने की सोचना भी मत. अभी मुझे खाना बनाना है.

इतना कहकर दीदी दूसरे कमरे में चली गयी और कपडा बदलने लगी. मैं भी बाथरूम में चला गया और फ्रेश होने लगा. फ्रेश होने के बाद मैंने भी स्नान किया और बाथरूम से बहार आकर कपडे पहने और किचन में चला गया. दीदी किचन में खाना बना रही थी. दी ने एक लोअर और t-shirt पहन कर खाना बना रही थी. मैं भी जाकर दीदी के पीछे से चिपक कर खड़ा हो गया और उन्हें बहो में भर लिया.



दीदी ने भी कुछ नहीं कहा और खाना बनती रही. मैंने अपना होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिया और चूमने लगा. दीदी ने कन्धा उचककर मुझे मन किया लेकिन मैं नहीं मन और दी का कन्धा चूमते हुवे अपना हाँथ आगे बढाकर उनकी चूचियों को पकड़ा लिया और दबा दिया. दीदी ने घूमकर मेरी आँखों में देखते हुवे मुझे अपने से दूर किया और कहा.

सविता दी- खाना बनाने दे अभी. जरा भी सबर नाम की चीज नहीं है तेरे अंदर.

दीदी की बायत सुनकर मैं किचन में hi प्लेटफॉर्म से लगकर खड़ा हो गया और दीदी को खाना बनाते हुवे देखता रहा. दीदी रोटी बना रही थी. रोटी बनाते हुवे दी हिल रही थी. जिसके कारन उनकी चूचिया भी थिरक रही थी. मेरा लुंड ये देखकर खड़ा हो गया था. मैं अपने लुंड को अपने हाँथ से पकड़ लिया और लोअर के ऊपर से hi सहलाने लगा. दीदी ने जब मुझे लुंड सहलाते हुवे देखा तो वो बोली.

सविता दी- हद ही यार. बिलकुल भी सबर नहीं है तेरे अंदर. और ये तो हमेशा खड़ा रहता है.

मैं- अब इसमें मैं क्या कर सकता हूँ. आप हो hi ऐसी की आपको देखकर मेरा खड़ा हो जाता है.

दीदी इन सब बातो के दौरान खाना बना चुकी थी. उन्होंने रस्ते के लिए खाना पैक किय और दो थाली में खाना निकल कर उसे धक् दिया और झूठे बर्तन सिंक में रखकर धुलने लगी. दीदी बर्तन धुलने लगी और में दीदी के पीछे खड़ा दीदी की हिलती हुई गांड देखने लगा. मैं चलता हुवा दीदी के पास पहुंच गया और उनके पीछे कड़ा होकर अपना हाँथ उनके कंधे पर रख दिया. दीदी ने गार्डन घुमाकर एक नज़र मुझे देखा और फिर गार्डन आगे करके बर्तन धुलने लगी. मैं थोड़ा और आगे हुवा और दीदी से एकदम सत्कार खड़ा हो गया मैंने अपना हाँथ निचे किया और अपने लुंड को पकड़कर सीधा किया और अपने कमर को पूरी तरह उनकी गांड से चिपका दिया. मेरा लुंड लोअर समेत दीदी की गांड में घुस गया. मैंने अपना हाँथ बढाकर दीदी की दोनों चूचियों पर रख दिया. बर्तन धोते हुवे दीदी ने कहा.



सविता दी- इतना उतावला क्यों हो रहा है. मैं कही भागी तो नहीं जा रही हूँ. बर्तन तो धूल लेने दे.

मैं- तो मैं कहा आपकी मन कर रहा हूँ. आप अपना काम करिये. मैं अपना काम कर रहा हूँ.

मेरी बैठत सुनकर दीदी फिर से बर्तन धुलने लगी. मैंने अपने होंठ दीदी की गार्डन पर रख दिया और दीदी की चूचियों को दबाने लगा. दीदी बर्तन साफ करते हुवे आआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊओह्ह्ह्हह की आवाज़ निकलने लगी. मैं दीदी की गार्डन चूमते हुवे उनके नंगे कंधे को भी चूमने लगा. मैंने दीदी की दोनों चूचियों को मुठी में भर लिया और अपने लुंड को पीछे किया और एक झटका मार्कर अपना लुंड दीदी की गांड की दरार में घुसा दिया और दोनों चूचियों को कसकर मीज दिया. दीदी दर्द से कराह उठी.

सविता दी- आआआआह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ाभीईई. क्या कररर रहा हीी. इतनी तीज़ज़ सी मैट दबाआ. ड़ड़ड़ड़ड़ होता हीी. थोड़ा धीरे se.thodaa प्यार से.

दीदी की आवाज़ सुनकर मैंने उनकी चूचिया धीरे धीरे दबनी शुरू कर दी. दीदी अब तक बर्तन धो चुकी थी. मैंने दीदी को पलटकर स्लैब से चिपकाकर अपनी तरफ घुमाया और उनकी आँखों में देखने लगा. मैंने दी की आँखों में देखते हुवे अपना होंठ उनके होंठो पर रख दिया और चूसने लगा. मैंने एक हाँथ दीदी की चुकी पर रख दिया और दबाने लगा. थोड़ी देर उनकी चूचिया दबाने के बाद मैंने अपना हाँथ सरका कर उनकी लोअर के उप्पेर उनकी छूट पर रख दिया. दीदी का लोअर थोड़ा गिला हो गया tha.main दीदी के होंठ चूमता हुवे अपने हाँथ से दीदी की छूट को मुट्ठी में भर लिया और दबाने लगा. दीदी मस्ती में अपने होंठ मुझसे छुड़ाकर बोली.

सविता दी- आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह AAAAAAAAAAAhhhhhhhhh अभियई. मास्साललल दी मेरीए छुटत कोऊ बहुत्त परेशाननं करतीय हैई यी तेरई डीडीई कोऊ. हमेशा रोटी रहत्ती हैई. ऑर्डर जोररर सी मसअल लाल कर दी भाई इनको. तेरी लिये ही तू आज तक्क इसको बचाकर रखा हैई मिनी. ोुह्ह्हह्हह्हं

दीदी की सिसकी सुनकर मैंने अपने हांथो की गति बढ़ा दी और दीदी की छूट को मसल मसल कर लाल करने लगा. मैंने अपना होठ दीदी के होंठो से अलग किया और उनकी गार्डन को चूमने लगा. थोड़ी देर गार्डन चूमने और उनकी छूट मसलने के बाद मैंने अपने हाँथ से दीदी की t-shirt पकड़ कर ऊपर करने लगा. दीदी ने हाँथ ऊपर करके अपनी t-shirt उतरने में मेरा सहयोग करने लगी. थोड़ी देर बाद मैंने दीदी की t-shirt उतारकर जमीन पर फेंक दी दीदी ने अंदर ब्रा नहीं पहनी नई थी इसलिए दीदी की चूचिया नंगी हो गयी थी. उनकी t-shirt उतारते hi दीदी ने अपने हांथो से मेरी t-sirt भी उतर दी और मुझसे कसकर लिपट गई.



दीदी मुझसे लिपटने के बाद अपनी चूचिया जोर जोर से मेरे साइन में रगड़ने लगी और अपने होंठो से मेरी गार्डन और कंधे को किश करने लगी. मैं हाँथ उनकी पीठ पर ले जाकर उनकी पीठ को सहलाने लगा और एक हाँथ उनकी गांड पर रखकर उनकी गांड दबाने लगा. थोड़ी देर धीरे धीरे उनकी गांड दबाने के बाद मैंने दीदी की गांड अपने हाँथ में भर ली और जोर से दबा दिया. दीदी सिसक पड़ी और सिसकते हुवे वो अपनी चुकी जोर जोर से रगड़ने लगी.

सविता दीदी- ऊऊऊह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइ. ऐसी ही दबा मेरी गण्ड को. तुझी यी बहुत्त परेशां करती है न. मसल डॉल इनको. इतना मसल की ये लाल्ल्ल हो जाईए. मैं तेरे साइन से रगड़ रगड़ कर अपनी चूचिया लाल कर रही हूँ. ऊऊऊओह्ह्ह्ह भाईईई. चू बहुत्त अच्छा है री.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपने से दूर किया और उनकी एक चुकी को पकड़कर मसलते हुवे एक हाँथ से उनकी लोअर उतरने लगा. दीदी की छूट के पानी से लोअर गीली हो गयी थी. इसलिए वो उनकी छूट के साथ चिपकी हुई थी. मैंने अपने एक हाँथ से उनकी लोअर उतर दी और दीदी को नंगा कर दिया. दीदी ने अपने पैरो से लोअर निकल दी अब दीदी नागि थी. दीदी नंगी होने के बाद निचे जमीन पर बैठ गयी थी और अपने हांथो से मेरे लोअर उतरने लगी. दीदी ने मेरी लोअर उतर कर दरवाज़े के पास फेंक दी और मेरे लुंड को पकड़कर सहलाने लगी.

थोड़ी देर लुंड को सहलाने के बाद दीदी ने लुंड पर अपनी जुबान फिरै और चाटने लगी. दीदी पूरी जुबान बहार निकल कर लुंड चाट रही थी. थोड़ी देर लुंड चाटने के बाद दीदी ने अपना मुंह खोला और लुंड को अपने मुंह में ले लिए और चूसने लगी. दिदिने अपने हांथो से मेरी गोटियों को भी सहलाना शुरू कर दिया था. दीदी मेरे लुंड को पहले धीरे धीरे चूस रही थी फिर पूरा मुंह खोलकर जोर जोर से चूसने लगी. मैं दीदी के सर को पकड़कर जोर जोर से स्ट्रोक लगाकर दीदी के मुंह को छोड़ने लगा और बोलने लगा.

मैं- आआह्ह्ह्हह्ह सविता. ऐसी ही चुसो मेरे लुंड को. अच्छी तरह से गिला कर दो इसी ताकि मैं तुम्हरी छूट की अचे से ठुकाई कर saku.aoooooooooooohh बहना. मेरी रणीय.

मैं दीदी के मुंह में कुछ देर तक धक्के लगता रहा फिर मैंने अपना लुंड उनके मुंह से निकल लिया और उन्हें पकड़कर खड़ा किया दीदी को उठाकर सेल्फ पर बैठा दिया और उनकी टैंगो के बिच खड़ा होकर उनकी आँखों में देखने लगा.

उनकी आँखों में देखते हुवे मैं झुका और अपनी जीभ निकल कर उनकी छूट चाट लिया और एक हाँथ से उनकी चुकी को दबा दिया. दीदी की छूट एकदम पानी पानी हो गयी थी. मैं जीभ से पूरी छूट चाट रहा था और छूट को मुंह में भरकर चूस रहा था. दीदी भी मस्ती में मेरे सर को पकड़कर अपनी छूट पर दबा रही थी. मैंने अपने हाँथ से दीदी की चुकी को मुट्ठी में भरकर मसल दिया और दीदी की छूट को मुंह में भर कर चूस लिया. दीदी एकदम छुडासी होकर बोल पड़ी.

सविता दी- ooooooooooohhhhhhhhh सैया. मेरीए छूट मी आग जल रही हैई. इसी बुझा दोऊ भायी. मेरी छूट में अपना हलब्बी लैंड डालकर इसकी प्यास बुझा दो. ऊऊह्ह्ह्ह

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी की छूट से अपना मुंह हटा लिया और अपने लुंड को पकड़कर दीदी की छूट पर सेट किया और एक हाँथ से उनकी चुकी पकड़ ली. दिदिने भी अपना दोनों हाँथ पीछे सेल्फ पर रख दिया. मैंने दीदी की आँखों में देखते हुवे अपनी कमर को झटका दिया मेरा लुंड आधा दीदीकी छूट में समां गया. दी के मुंह से आआआहहहहहहह अभी निकला और उनकी आँखे मस्ती में बंद हो गयी. मैंने अपने लुंड को टोपे तक उनकी छूट से बहार निकला और एक जोरदार धक्का उनकी छूट पर मार दिया. दीदी की चीख निकल गयी और मेरा लुंड जड़ तक उनकी छूट में समां गया.



सविता दी- ऊऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अभीइइइइइइ. aaaaaaaaahhhhhhhhhh धीरे कररर भाआईई . माज़ा आता हैई. फारिये मेरीए छूट को भाई आआह्ह्ह्हह्ह. आह्हः ऐसे hi छोड़ो अपनी दीदी को.

मैं दीदी की चीख सुनकर अपने धक्के के स्पीड बढ़ा दी और हचक हचक कर दीदी को छोड़ने लगा. कुछ देर तक दीदी की छूट को सेल्फ पर छोड़ने के बाद मैंने दीदी की दोनों गांड को अपने हांथो से पकड़कर अपनी गॉड में उठा लिया. दीदी की गांड पकड़ने से दीदी को थोड़ा दर्द हुवे और वो सससससस सससस की आवाज़ करने लगी. मैंने दीदी की गांड से हाँथ हटाया और उनकी जांघो से दीदी को पकड़कर अपने लुंड पर बैठा लिया और खड़े खड़े दी को छोड़ने लगा. दीदी ने अपना हाँथ मेरी गर्दन पर दाल दिया. मैं झुककर दीदी की एक चुकी को मुंह में भर लिया और दीदी को छोड़ते हुवे उनकी चुकी पिने लगा.



मैं दीदी को गॉड में उठाये हुवे छोड़ रहा था. दीदी चुदाई से मस्त होकर अपनी कमर उठा उठाकर मेरे लुंड पर पटक रही थी. थोड़ी देर तक दीदी को धीरे धीरे छोड़ने के बाद मैंने अपनी स्पीड और बछड़ा की और दीदी को उठा उठाकर अपने लुंड पर पटकने लगा. दीदी मस्ती में बोलने लगी.

सविता दी- आआआआअह्हह्ह्ह्ह अभीयी. ऐसे hi छोड़ मुझी. बहुत अच्छा लग रहा हैई राजा. ऐसे hi छोड़ो अपनी रानी को आआअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह.

दीदी की बात सुनकर मैंने दीदी को अपनी गॉड से उतर दिया और दीदी को सेल्फ के सहारे झुककर खड़ा किया और दीदी के पीछे आकर उनकी कमर को पकड़कर उनकी छूट में अपना लुंड सेट करके एक जोरदार धक्का मारा. मेरा पूरा लुंड दीदी की छूट में समां गया. दीदी की दर्द से सिसकारी निकल गयी.



सविता di-ooooooohhhhhhhh मम्मीयिययी. मारर डाला री. oooooooooohhhhhhh ABhiiii.meri प्यासी छूट को बहुत्त दीनू बाद ऐसा मज़ा मिल रहा हैईईई. चू मेरीए प्यास भाली ही बुझा रहा haii.maagarrr मेरीए प्यास दिन बा दिन्नं बढ़तीइ जा रही हैई ऊऊह्ह्ह्हह्ह्ह्ह पट्ट नाहीइ मेर्री छूट कोई प्यास काबबब कामम hogiiii.uuuuuuufffffffff भईईई टेरिइइइ वजह सीए आजजज तेरई बहाणं इतनीई खूसष्ठ रहत्तीए हीी. टेरिइइइ वजाहहह सी मैंनं आजजज टेरिइइइइ रण्डी बननंगैईहूंणन आआअह्ह्ह्ह औरर जोरर सी छोड़ू बहई मैंन झाड़ड़ड़ रहियी होऊ. तेरी बहाणं का पनीइ निकालल रहा हैई. ऊऊओह्ह मैं गयी सम्भालूमुझेई अभियई आआआहहहहहहह

दीदी इतना कहकर झाड़ गई. मैं अब भी उनको हचक हचक्क कर छोड़ रहा था 10-12 जोर दर धक्के लगन ेके बाद मैं भी झड़ने वाला हो गया था. इसलिये मैं भी बड़बड़ाते हुवे उनकी छूट में झड़ने लगा.

मैं- ऊऊओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह सविता सलीईई. चू मेरीए रद्द हीी. ली मेरा पनीइ निकाल राहहह यही तेरई छूट मई मैंन झाड़ रहा हूँ. ऊऊओह्ह्ह्हह्ह सविता. मैं भी गया ररी.

इतना कहकर मैं भी दीदी की छूट में झाड़ गया और दीदी के ऊपर लड़ गया.

इसके आगे की कहानी अगले भाग में..
 
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