Incest Story - Didi Ki Chinta - Page 3 - SexBaba
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Incest Story - Didi Ki Chinta

Part 20रूही वैसे तो शायद न भी तैयार होती टाइम से पर क्यूंकि उसकी मम्मी और रोहन ने उसका मज़ाक उदय था तो वो ठीक 5.55 पर तैयार थी और उसने तैयार होते hi रोहन को आवाज़ lagayi…bhai चलना नहीं है क्या?

रोहन एकदम से रूम से बहार आया और मज़ाकिया ढंग से मुस्कुराते हुए bola…wah आज तो हमारी छिपकली टाइम से पहले hi तैयार हो गयी.

Ruhi…chidhte hue…bhai मैं छिपकली नहीं हूँ. आप ऐसा मत बोलै karo…chalen अब?

Rohan…haan नहीं bolta…chalo चलते हैं.

रोहन ने बाइक निकला तो रूही boli…kyun भाई कार में नहीं जाना क्या?

Rohan…arey हम दोनों तो हैं. और कार की घर पर जरुरत पद सकती है.

Ruhi…main तो बोल रही थी रात को देर हो जाएगी तो कार में सेफ रहता.

Rohan…nahi मुझे बाइक पर hi कम्फर्टेबले है. रात को दस बजे ट्रैफिक बहुत हो जाता है. आने में लेट हो जायेगा. अब देर मत करो, बैठो बाइक पर.

रोहन के पास अपाचे 180 बाइक थी. और वो हवा से बातें करने लगी. रूही को साथ पाकर वैसे भी रोहन का जोश दुगुना हो गया था. इसलिए 20-25 मिनट का सफर 15 मिनट में hi पास हो गया और ये लोग टाइम से बहुत पहले हॉल में पहुँच गए. अभी तो हॉल की सजावट चल रही थी.

दोनों एक दुसरे का मुँह ताकने लगे. अभी तो घर से भी कोई नहीं आया था. अब ये लोग मन hi मन पछता रहे थे. पर दोनों में से कोई भी एक दुसरे को कुछ कह नहीं प् रहा था. पर ऐसा कब तक चलता.

आखिर रोहन को hi बोलना pada….ruhi लगता है हम काफी पहले आ गए.

Ruhi…tunakte hue…haan आप hi को जल्दी पड़ी. Thi…waise रोहन महसूस कर रहा था अभी भी रूही उसकी और नहीं देख रही थी.

शायद अभी भी उसके अंदर झिझक सी थी. इसलिए वो उसके चेहरे की और देखकर बात नहीं कर रही थी.

रोहन ने इस बात को महसूस किया और उससे bola…haan क्यूंकि मैं तुम्हे लेट नहीं करवाना चाहता था. एक तो मुझे लगा शायद आधे घंटे का रास्ता होगा दूसरा मुझे लगा ट्रैफिक होगा तो मुझे तुम्हे टाइम पर पहुँचाना था. और हाँ यहाँ पर रेस्टोरेंट भी है. जब तक कोई आता नहीं हम लोग कुछ हल्का फुल्का ले लेते हैं.

रूही boli..arey भाई. पार्टी में कहाँ hi है तो रेस्टोरेंट में खाने का कोई फायदा नहीं न.

Rohan…chalo एक एक कप कॉफ़ी पि लेते हैं. टाइम भी पास हो जायेगा और बोर भी नहीं होंगे.

दरअसल रोहन का उसे रेस्टोरेंट में ले जाने के दो मकसद थे एक तो टाइम पास करना दुसरे और मैं रीज़न वो उससे उस दिन के बारे में डिसकस करना चाहता था.

रूही ने भी सोचा यहाँ खड़े होकर भी क्या करेंगे इससे तो अच्छा है रेस्टोरेंट में hi चलें और कॉफ़ी पिटे पिटे आधा घंटा तो आराम से बीत जायेगा.

दोनों रेस्टोरेंट में जाकर बैठ गए. बाँदा आर्डर लेने के लिए आया तो रोहन ने उसे जानबूझकर ताल diya…bolkar के दस मिनट बाद आर्डर देते हैं. उस बन्दे को भी पता था के अक्सर कपल्स आते हैं और ऐसे hi टाइम पास करते हैं इसलिए देरी से आर्डर देते हैं.

रोहन थोड़ी देर रूही की और देखता रहा जो उसके सामने बैठी थी. फिर थोड़ी देर बाद उसने उससे बात शुरू की.

रोहन अचानक से bola…mujhe तुमसे कुछ बात करनी थी रूही.

Ruhi…ekdam से मुँह उठाकर रोहन की और देखने लगी. क्यूंकि उसे समझ आ गयी थी के रोहन उससे कुछ खास बात करना चाहता hai..haan बोलो भाई.

Rohan…dekho मैं उस दिन के बारे में तुमसे साफ़ साफ़ बात करना चाहता हूँ. तुम उस दिन के बाद मुझसे खुलकर बात नहीं कर रही हो. बात करती भी हो तो मुझसे नज़रें नहीं मिलाती हो.

उस दिन जो भी हुआ एक्सिडेंटली हुआ. उसमे न तुम्हारी कोई गलती है और न hi मेरी. तो इतना क्यों सोच रही हो तुम.

रूही को समझ नहीं आये के क्या बोले. उसे थोड़ी उम्मीद थी के उसका भाई रोहन उससे एकदम से उस टॉपिक पर बात शुरू कर देगा. वो फिर भी झिझकते हुए boli…par भाई जिस तरह से मैं आपके सामने एकदम से बिना कपड़ों के हो गयी तो कोई भी बहिन शर्मिंदा हो जाएगी.

Rohan…chalo मान ली तुम्हारी बात. तो क्या तुम पूरी ज़िन्दगी ऐसे hi शर्मिंदगी में गुजर डौगी.

Ruhi,,,ne बोलै कुछ नहीं बस ना में गर्दन हिला di…abhi भी ऐसे hi लग रहा था के वो कन्फ्यूज्ड है.

Rohan…arey हमें एक hi घर में रहना है बहिन. इतना सोचोगी तो कैसे चलेगा.

Ruhi…main क्या करूँ भाई. मुझे अब आपसे शर्म आती रहती है.

रोहन को लगा अब थोड़ा सीधा होकर इसे समझाना पड़ेगा तो वो bola….achha एक बात बताना ruhi…sahi सही बताना.

Ruhi…haan भाई पूछो.

Rohan….ham दोनों में से कोई भी बचा नहीं है. क्या तुम्हे ऐसा लगता है के मुझे नहीं पता तुम्हारे शरीर में कौन कौन से अंग हैं या फिर क्या तुम्हे नहीं पता मेरे शरीर में कौन कौन से अंग हैं.

रूही को तो रोहन की बात सुनकर और भी ज्यादा शर्म आने लगी और वो boli…bas करो भाई. कैसे बेशर्मो जैसे बात कर रहे हो. चाहे हम दोनों को पता है एक दुसरे के अंगों के बारे में. फिर भी क्या कोई बहिन एक भाई के सामने नंगी हो सकती है?

Rohan…achha चलो यही तुम दो साल की होती तो क्या तुम्हे शर्म आती.

Ruhi…bilkul भी नहीं.

Rohan…to फिर क्या फर्क पड़ता है के तुम दो साल की हो या 17 की. ये एक फिगर है रूही. बात हमारी सोच की है बस, के हम किस चीज को किस तरह से लेते हैं. और फिर जब दो बहने एक दुसरे के सामने कपडे चेंज करते हुए नहीं शर्माती तो एक भाई के सामने एक्सिडेंटली आने से इतना क्या शर्माना बहिन. मुझे बिलकुल भी अच्छा नहीं लग रहा के तुम मुझसे दूरी बनाये हुए हो एक उस बात के लिए.

Ruhi…haan भाई बात तो आपकी सही है. पर मन से बात जा hi नहीं रही तो क्या करूँ.

Rohan…muskurate hue…iska एक hi हल है बस.

रूही भी मुस्कुराने लगी उसकी बात sunkar…kya हल है भाई.

Rohan…tum मुझे भाई के साथ साथ दोस्त भी समझना शुरू कर दो. बस फिर हर समस्या का हल मिल जायेगा. फिर कभी न तुम्हे ऐसी हालत से परेशानी होगी और ना hi कोई बात डिसकस करने से.

रूही सोचने lagi…bhai बात तो सही कह रहा है. पर क्या भाई बहिन दोस्त हो सकते हैं.

Rohan…ab ये न सोचने लग जाना के भाई बहिन तो दोस्त हो नहीं सकते,

रूही हंसने लगी उसकी बात सुनकर और boli…wah भाई तुम तो मन की बात भी जान लेते हो.

Rohan…muskurate hue…dekha? तुम्हे मुझे दोस्त बना कर फायदा hi होगा. मुझसे आधी बात डिसकस करोगी तो आधी मैं खुद जान लूंगा.

अब तो रूही रोहन की बातें सुनकर खिलखिलाकर हंस पड़ी. रोहन ने कॉफ़ी का आर्डर दिया और अरुचि के आगे हाथ करके bola…bolo बनोगी मेरी दोस्त.

रूही में अब पता नहीं कहाँ से ऊर्जा आ गयी thi…wo उसका हाथ थामकर हिलाते हुए boli…bilkul बनूँगी dost…apne भाई की.

रोहन bola…tumhe एक बात पता है ruhi…bhai बहिन से बढ़िया दोस्त कोई हो नहीं सकते. अगर तुम खुलकर अपने भाई से बातें करने लग जाओ न. तो तुम्हे किसी दुसरे की जरुरत hi नहीं रहेगी.

Ruhi…sach कहूं भाई. मेरा मन भी था के किसी लड़के को अपना दोस्त बनाऊ.

रोहन स्टाइल में बालों पर हाथ फेरते हुए bola….dekha फिर से जान ली न तुम्हारी मन की बात.

रूही उसके हाथ पर हाथ मरते hue…hanste hue…bhai आप बहुत फनी हो.

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रोहित खुद hi अपने कंधो को दबा रहा था. सामने बैठी तान्या की कई बार नज़र गयी रोहित पर. अब पता नहीं वो सच में दर्द की वजह से ऐसा कर रहा था या फिर ये उसकी कमीनगी थी तान्या को पटाने के लिए.

पर बेचारी तान्या उसके जाल में फंसती नज़र आ रही थी क्यूंकि उसका ध्यान बार बार अपने सर की और जा रहा था. वो सर, जिन्होंने हमेशा उसे सपोर्ट किया. उसे इतना कुछ सिखाया. आज वो जो कुछ भी है उन्ही सर की वजह से है. ये बात तान्या अक्सर सोचा करती थी.

वो बार बार अपने कन्धों पर हाथ रखकर उन्हें दबाता तो तुरंत तान्या की नज़र उस पर पहुँच hi जाती.

कुछ देर बाद जब तान्या से रहा नहीं गया तो वो बोली…. सर फिरसे कंधो पर पैन हो रहा है क्या?

Rohit…aisa मुँह बनाकर जैसे उसे सच में दर्द हो रहा hai…haan तान्या बहुत दर्द हो रहा है.

Tanya…to सर आप स्पा क्यों नहीं चले जाते. सुना है वहां काफी एक्सपर्ट लोग होते हैं मस्सगे करने के लिए. तान्या ने लोग बोलै लड़कियां नहीं.

Rohit…arey नहीं नहीं tanya..spa परलौर्स में गलत काम होता है. बहुत बार राइड भी पद जाती है.

तान्या सकपका गयी उसकी बात सुनकर. उसे उम्मीद नहीं थी के उसका बॉस उसके साथ ऐसे भी बात करेगा. अरे सर आप किसी अच्छे होटल में जाओ वहां पर भी होते हैं स्पा. वहां कोई खतरा hi नहीं. और किसने कहा है आप लड़की से मस्सगे करवाओ. कई मेल एक्सपर्ट भी होते हैं.

रोहित को लगा उसका डाव hi उल्टा पद गया तो bola…haan देखूंगा न. जब ऑफिस से जाऊंगा,

तान्या भी चुप होकर अपना काम करने लग गयी. रोहित अपने कंधे को दबाता ऑफिस में hi बने अटैच्ड बाथरूम में गया और कोई 5-7 मिनट बाद कंधे दबाता hi बहार निकला.

तान्या को उस पर तरस आ रहा था. वो boli…sir आप घर क्यों नहीं चले जाते.

Rohit…tumhe तो पता है तान्या ये दो फाइल्स कम्पलीट करनी कितनी जरुरी हैं, ऐसे कैसे घर चला जॉन, तान्या को इस बात का पता था के ये जरुरी काम है. वैसे तो वो काफी कुछ कर लेती थी पर सभी कुछ करना उसके बस की बात नहीं थी.

इसलिए वो रोहित को boli…sir आप ऐसा करो शर्ट निकाओ. उस दिन का तेल पड़ा hi है. मैं आपके कन्धों पर मॉल देती हूँ.

रोहित ने तो एक मिनट भी नहीं लगाया और फाटक से शर्ट खोल दी. शर्ट खोलते वक्त अपने आप hi उसके चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गयी.

तान्या ने आज पहली बार रोहित को शिरट्लेस्स देखा था. इस उम्र में भी उसकी बॉडी ठीक hi थी. उसके शरीर पर कहीं भी एक्स्ट्रा चर्बी नहीं थी.

तान्या ने सोफे पर बैठे hi उसे अपनी दोनों टांगों के बीच में बिठा लिया और धीरे धीरे उसके कंधो की मालिश करने लगी.

रोहित को तो ऐसे महसूस हो रहा था जैसे वो स्वर्ग में पहुँच गया है.

उधर रोहित के श्री से टच होने की वजह से तान्या के श्री में भी हलचल शुरू हो गयी थी. तान्या की जांघो से उसका नंगा शरीर टकरा रहा था जिसने तान्या की छूट में झुरझुरी फैला दी थी. पर उसने फिर भी रोहित की मालिश करना नहीं छोड़ा.

थोड़ी देर मालिश होने के बाद अचानक रोहित को पता नहीं क्या हुआ. वो उठकर तान्या के बगल में सोफे पर बैठ गया और उसके कंधे पर अपनी बाजु रखकर bola…thank यू सो मच तान्या. तुमने मेरा दर्द काफी काम कर दिया.

तान्या तो एकदम से घबरा सी गयी. वो ऐसे कैसे उसे साइड से हुग कर सकता था. तान्या की नाक में उसके शरीर की महक जा रही थी जो उसे मदहोश कर रही थी. वो घबराते हुए धीरे से boli…isme थैंक यू की क्या बात है सर. पर क्या आप मेरे कंधे से अपना हाथ हटा लोगे.

रोहित तो बेशर्म बना रहा bola…kyun कोई दिक्कत है क्या तुम्हे मेरे हाथ रखने से.

तान्या को अचानक soojha…wo आपके शरीर से तेल मेरे कपड़ों पर लग जायेगा. स्टाफ वाले क्या बोलेंगे सर.

रोहित ने एकदम से अपना हाथ उसके कंधे से हटा लिया. तान्या की नज़रें झुकी हुई थी. रोहित ने एक हाथ से उसका चेहरा ऊपर करते हुए kaha…tum मुझे नाराज़ हो क्या तान्या.

तान्या ने ना में गर्दन हिलाते हुए kaha….main भला आपसे कभी नाराज़ हो सकती हूँ

रोहित को लगा लोहा गर्म है और चोट करनी चाहिए तो वो bola…suno तान्या तुमसे एक बात करना चाहता हूँ. अगर तुम्हे बुरा न लगे तो.

तान्या boli…maine कहा न सर मुझे आपकी किसी बात का बुरा नहीं लगेगा आप बेहिचक बोलो.

Rohit…yaar तान्या मैं कुछ दिनों से तुम्हारी और अत्त्रक्ट हो रहा हूँ.

तान्या को उसकी बात सुनकर कोई आश्चर्य नहीं हुआ boli….sir मैं जानती हूँ ये बात. पर एक तो हमारी उम्र में बहुत फर्क है दूसरा आप शादीशुदा हो.

Rohit…pyar दोस्ती आकर्षण इन चीजों को नहीं मानते तान्या. तान्या ने चेहरा उठाकर उसकी और देखा और सीधे hi सवाल कर diya…to आप मुझसे क्या चाहते हो सर.

Rohit…muskurate हुए bola…chahta तो बहुत कुछ हूँ तान्या. पर क्या अभी मुझे एक किश मिल सकती है तुमसे?

तान्या सोच में पद गयी. रोहित उसे सोच में पड़े देखकर एक बार तो सचने लगा के मैंने गलत कर दिया है.

वो bola…its ok तान्या. ज्यादा सोचो मत. मैं अपने टेबल पर चलता हूँ.

तान्या को पता नहीं क्या हुआ एकदम से उठी सोफे पर बैठे hi रोहित की तरफ मुँह करके उसकी गॉड में बैठी और उसके होंठों पर होंठ रख दिए और बेतहाशा चूसने लगी.


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तुम जैसे बद्तमीज़ पाठको की वजह से मैंने लिखना छोड़ा है यहाँ. तुम लोगों को किसी की मज़बूरी का एहसास नहीं. किसी की तारीफ में कभी कमेंट नहीं करोगे. हमेशा नेगेटिव कमैंट्स कोरगे आप लोग. म्हणत मेरी लगनी थी दिमाग भी मेरा hi लग्न था. अभी एक पंजाबी कहानी लिख रहा हूँ उसके बाद इसे भी शुरू करूँगा पर अपने हिसाब से लिखूंगा और पूरी भी करूँगा चिंता मत करो तुम
 
अरे संजू भाई वो बस ऐसे hi लिख दिया मैंने. मैं कहानी लिखूंगा. पर अभी मैंने इस दौरान पंजाबी सेक्शन में एक कहानी शुरू की है. वैसे अगर आप पढ़ना चाहो तो लेटर्स रोमन hi उसे किये हैं मैंने. पर शायद आपको पंजाबी आती नहीं होगी. वैसे आपको बता दूँ. ये स्टोरी के पाठकों के नेगेटिव कमैंट्स मेरे सेंटीमेंट्स को नहीं हिला सकते भाई. हम लोगों को तो कितनी विपरीत परस्थितियों में काम करना पड़ता है. आपका कोई मित्र का हो तो पूछना आजकल उनका क्या हाल है. :) :) :) वो तो बस उस समय रुक गया था क्यूंकि श्रीमती जी आयी हुई थी. फिर किसी ने एक पंजाबी कहानी लिखने को बोल दिया. सोचा तो था दो चार एपिसोड्स में निपटा दूंगा पर नहीं बोहत लम्बी हो गयी है. शुरू करूँगा इसे भी.

पर सचमुच भाई ज्यादातर पाठक तो बहुत अच्छे हैं पर दो चार इतने बद्तमीज़ हैं के किसी का लिहाज hi नहीं करते. इनके लिए म्हणत करके अपने परिवार से बचकर कहानियां लिखो और इनकी बदतमीज़ी भी सहो ये कहाँ का नियम है.

देखिये आपने भी प्रतिक्रिया की. मैं नेगेटिव कमैंट्स से नहीं डरता. मैंने कोशिश की आपके एक एक पॉइंट का रिप्लाई करूँ मैं. वो लेखक और पाठक में एक अच्छे तालमेल की निशानी होती है. पर कहानी को रंडीखाना या फालतू का कुछ बोलो तो तकलीफ तो होती है.
 
थैंक्स ा लोट बीआरओ

वाकई सच बोलते हो tum...november से कहानी चल रही है और 80क पाठक नहीं जूता पाए. अभी अभी शुरू हुई कहानी पर 3.50 लाख pathak...kyun जलते हो यार. पता है मैं अपने पाठकों का बहुत सम्मान करता हूँ .वो लोग हैं भी सम्मान के काबिल क्यूंकि उन्ही की वजह से मैं लेखक हूँ तुम जैसे कमीनो के जज करने की वजह से नहीं. चल अब फुट अपना और मेरा टाइम खोटी मत कर. जो अच्छी कहानी लिखता है तेरी तरह उस थ्रेड पर जा. और हाँ इसके बाद मैं तुम्हारे किसी भी मैसेज का रिप्लाई नहीं करने वाला.
 
Part 21रोहन और रूही एक कपल की तरह पार्टी एन्जॉय कर रहे थे. हालाँकि रूही ने अपनी एक दो फ्रेंड्स अमीर और सेजल को तो रोहन से इंट्रोडस करवा दिया था बोलकर के भाई है मेरा. पर बाकि सब लोग उन्हें एक कपल hi समझ रहे थे क्यूंकि रोहन ने बाकायदा रूही का हाथ पकड़ रखा था. जब से उसने रूही को दोस्त बनाया था दोनों थोड़ा खुल से गए थे एक दुसरे के साथ.

दीक्षा का बर्थडे था. जैसे के केक कटाई सेरेमनी पर अक्सर बचे करते हैं. उन्होंने केक काटने के बाद दीक्षा का चेहरा केक से भर दिया. दीक्षा को अच्छे से दिखाई भी नहीं दे रहा था. रोहन को उस पर दया आयी उसने अपनी जेब से रुमाल निकल कर उसका चेहरा साफ़ करने लगा.

एक हैंडसम लड़के के यूँ केयर करने पर दीक्षा को काफी अच्छा लगा. उसने स्माइल दी और रोहन को थैंक्स बोलै तो बदले में रोहन ने भी उसे थैंक्स बोल दिया. दीक्षा वाशरूम गयी और चेहरा साफ़ करके वापिस आयी तो रोहन और दीक्षा की नज़रें आपस में टकराई. एक छोटी सी ड्रेस में दीक्षा बाला की खूबसूरत लग रही थी. दोनों एक दुसरे को देखकर मुस्कुराने लगे.

रूही इन दोनों को एक दुसरे को देखकर मुस्कुराते हुए देखकर मुस्कुराने लगी. बाकि सबने खाना शुरू कर दिया था पर जैसे hi रोहन और रूही प्लेट उठाने लगे तो दीक्षा ने उन्हें मन कर दिया और बोली “रूही तुम और तुम्हारा भाई मेरे वाले टेबल पर बैठोगे.

उन दोनों की इतनी परेफरेंस देने की वजह से दीक्षा की बेस्ट फ्रेंड शिनय जल गयी और दुसरे टेबल पर जाकर बैठ गयी. दीक्षा ने उसकी तरफ तवज्जो तक नहीं दी. शिनय एक रईसजादी थी और अपनी स्पोर्ट्स कार में दीक्षा को लेकर आयी थी. वो सब लोगों पर अपनी अमीरी का रुआब झाड़ा करती थी. दीक्षा स्कूल में सबसे खूबसूरत थी तो शिनय ने उसे अपने ग्रुप में रखा हुआ था. पर घमंडी शिनय को ये पसंद नहीं था के कोई उसे इग्नोर करे.

आज रोहन की वजह से पहली बार हुआ था के दीक्षा ने उसे इग्नोर किया था. दीक्षा एकदम से रोहन की और अत्त्रक्ट हो गयी थी. वो खुद रोहन को सर्वे कर रही थी सब कुछ. कहते कहते उसने रोहन से सवाल करने शुरू कर दिए.

Diksha…to रोहन जी आप क्या करते हो?

रोहन… मैं फाइनल ईयर में हूँ.

Diksha…oh गुड. तो आगे क्या इरादा है आपका.

Rohan…dekhta हूँ. ब hi करूँगा.

Diksha…sounds गुड. बेस्ट ऑफ़ लक.

Rohan…muskurate hue…thanks दीक्षा.

Ruhi…arey तुम दोनों hi बातें करते रहोगे? मुझे इन्वॉल्व नहीं करोगे?

रोहन… अरे गुडिअ तुझे क्यों भूलेंगे भला. मुस्कुराने लगा तो दीक्षा बोली.

Diksha…sorry यार. अच्छा तू बता कौन से कॉलेज में एडमिशन लोगी.

Ruhi…rohan के हाथ पर हाथ rakhkar…main तो भाई वाले कॉलेज में hi एडमिशन लुंगी. और तुम?

दीक्षा रोहन के दुसरे हाथ पर हाथ रख देती hai…jahan तुम जाओगी मैं भी वहीँ जाउंगी रूही. और मुस्कुरा देती है. रोहन के शरीर में झुरझुरी सी उठती है दो जवान लड़कियों के स्पर्श से. दीक्षा तो उस पर लट्टू हुई जा रही थी.

उधर बगल वाले टेबल पर बैठी शिनय और भी जल जाती है और मन hi मन कुढ़ कर बोलती hai…hunh कल तक तो ये मेरे साथ रॉयल कॉलेज में एडमिशन लेने वाली थी आज रूही के जवान भाई को देखकर इसकी छूट में खुजली हो गयी और देसी कॉलेज में एडमिशन लेने को तैयार हो गयी. हुंह चीप लोग.

खाने के बाद डांस शुरू हो गया. सब लोग कपल में डांस कर रहे थे. रोहन और रूही ने एक कपल की तरह डांस करना शुरू किया एक दुसरे की आँखोने में देखकर. आज ये दोनों काफी करीब लग रहे थे एक दुसरे के. कुछ देर बाद दीक्षा एक बेकार से लड़के के बाद डांस करके जब बोर हो गयी तो रोहन और रूही के पास आकर boli..may ी?

रूही का मन तो नहीं कर रहा था रोहन को छोड़ने का पर दीक्षा उसकी अच्छी सहेली थी तो उसकी बात को टालना नहीं चाहती थी. वैसे भी दीक्षा ने आज उन दोनों को स्पेशल ट्रीटमेंट दिया था. इसलिए वो उससे काफी खुश थी वो साइड में हो गयी तो दीक्षा रोहन के साथ डांस करने लगी. उसने रोहन का एक हाथ अपनी कमर पर रख दिया और उसकी आँखों में देखकर बड़े hi प्यार से उसके साथ डांस करने लगी. रूही साइड में कड़ी इन दोनों को डांस करते हुए देखने लगी और वो समझ प् रही थी के दीक्षा उसके भाई की और अत्त्रक्ट हो रही है.

वो बेकार लड़का रूही के पास आया डांस के लिए पूछने पर रूही ने उसे मन कर दिया. दीक्षा और रोहन का डांस देखने वाला था. दोनों hi कमल के डांसर लग रहे थे. उन दोनों ने कितने hi यूनिक स्टेप किये डांस में. सब लोग बार बार तालियां बजा रहे थे इन दोनों के लिए. साइड में कड़ी रूही भी. पर उसका मन था वो अपने भाई के साथ डांस करे. दीक्षा जिस तरह से उसके भाई के साथ चिपकी जा रही थी उसका आज मन था वो भी चिपके उसके साथ.

पार्टी ख़तम होने का टाइम हो गया था. ये पार्टी पेरेंट्स के बिना थी तो जल्दी ख़तम करने का आर्डर हुआ था दीक्षा के पेरेंट्स द्वारा. शिनय तो पता नहीं कब की दीक्षा को छोड़कर भाग गयी थी जलन के मारे ये बात दीक्षा को उस समय पता चली जब वो जाने को तैयार हुई और पता चला शिनय तो जा चुकी है.

दीक्षा पार्किंग में कड़ी सोच hi रही थी तभी रोहन ने अपनी बाइक उसके साथ कड़ी करके उसे poochha…lift चाहिए क्या?

Diksha…uljhan भरे भाव के saath…nahi रहने दो मैं घर से गाड़ी मंगवा लेती हूँ.

Ruhi…arey यार क्यों फॉर्मेलिटी कर रही हो. हम छोड़ देंगे न.

Diksha…nahi यार तुम लोग बाइक पर हो. दिक्कत होगी.

Ruhi..hanste hue…ham दोनों पिद्दी सी तो हैं. कोई दिक्कत नहीं hogi…kyun भाई?

Rohan…aur क्या. तुम चिंता मत करो मैं आराम से तुम्हे तुम्हारे घर छोड़ दूंगा.

दीक्षा को मजबूरन उन दोनों के साथ बैठना पड़ा. पहले तो रूही उसे पीछे बिठाने वाली थी फिर पता नहीं क्या हुआ उसने उसे दोनों के बीच बिठा लिया. रोहन और रूही के बीच में दीक्षा भींच सी गयी पर रोहन को मज़ा आना शुरू हो गया. दीक्षा का मखमली टच उसके लुंड को हार्ड करने के लिए काफी था. पर इससे भी बड़ी एक और बात हो गयी. दीक्षा ने अनजाने में रोहन के लुंड पर hi हाथ रख diya.jisse लुंड महाराज सलामियां देने लगे.

रूही दीक्षा को पूछती hai…diksha वैसे तुम आयी किसके साथ थी.

Diksha…yaar शिनय खुद hi लेकर आयी थी मुझे अपने साथ पता नहीं उसे क्या हुआ वो मुझे बिना बोले hi चली गयी.

Ruhi…muh बनाते hue…wo तो है hi अजीब. पता नहीं क्या समझती है अपने को.

Diksha…waise तो मेरे साथ ठीक hi रहती है. पर आज उसका बेहवे कुछ अजीब रहा.

Ruhi…tumne उसकी जगह हम दोनों को परेफरेंस दी. इसलिए वो चिढ गयी.

Diksha…haan यार ये बात तो पक्की है, पर कोई बात नहीं दोस्त है वो भी. कल उसे मन लुंगी स्कूल में.

Ruhi…haan तुम्हारी बात भी सही है. दोस्त है मन लेना.

दीक्षा को अब तक उसके लुंड में हो रही हलचल की वजह से पता चल चूका था के उसका हाथ कहाँ है. इससे पहले के वो वहां से अपना हाथ हटती रोहन के लुंड ने एक और झटका मारा तो उसे अब अपना हाथ वहां से हटाना hi था.

रोहन और दीक्षा दोनों को hi बहुत अजीब सा महसूस हो रहा था. जब दीक्षा के घर पहुंचे तो रात काफी हो चुकी थी. इसलिए उसने अपने पेरेंट्स से इन दोनों को मिलवाया तो पर ज्यादा बात नहीं हो पायी.

रूही दीक्षा के साथ hi सो गयी और रोहन को अलग से कमरा दिया गया. रोहन लेते लेते आज जो कुछ भी दीक्षा के साथ हुआ उसके बारे में सोच रहा था और सोचते सोचते उसे नींद आ गयी.



बीच रात में उसे अपने कमरे में कुछ हलचल सी महसूस हुई तो अचानक उसकी आंख खुल गयी.
 
Part 22तान्या होंठ चूसते चूसते कब रोहित के लुंड तक पहुँच गयी पता hi नहीं चला पर रोहित के लिए तो ये बेहद खास पल था. उसका सपना था तान्या के साथ एक होना और शायद ये आज पूरा होने वाला था. तान्या को भी लग रहा था के उसके सर की साडी ख्वाहिशें पूरी करके वो उनके हर एहसान को चूका सकती थी, बल्कि जिस तरह से वो रोहित के लुंड को चूस रही थी ऐसा महसूस हो रहा था के ये खुद तान्या की ख्वाहिश है के वो रोहित के साथ एक हो.

रोहित सोफे पर बैठा है अलफ नंगा और तान्या ज़मीं पर बैठकर उसके लुंड को एक हाथ से पकड़कर पूरी फुर्ती के साथ चूस रही है और उसके सर के ऊपर रोहित के हाथ का दबाव बाकायदा बना हुआ है. ये तो ऐसा सन था जैसे किसी हाई क्लास पोर्न मूवी में हो.

पिंक कलर की जाली वाली पंतय और ब्रा में तान्या किसी अप्सरा से काम नहीं लग रही थी. चूसते चूसते हालाँकि वो हांफने लगी थी पर उसे इसमें इतना ज्यादा मज़ा आ रहा था के वो एक hi रफ़्तार से लगी हुई थी उसके लुंड को चूसने.

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रोहन ने उठकर देखा जब उसे कोई नहीं नज़र आया तो उसने बीएड के साथ लगा स्विच ों किया तो देखा दीक्षा निघ्त्य में उसके सामने कड़ी थी. रोहन भौचक्का रह गया उसने टाइम देखा तो रात के दो बजे थे और इतनी रात को एक लड़की का इस तरह से उसके रूम में इस हालत में होना बहुत कुछ बयां कर रहा था.

रोहन का मन चाहे अपनी बहनो के लिए जज़्बाती होने लगा था पर इसका मतलब यह नहीं है के वो सेक्स ड्रिवेन इंसान था. उसका अपने ऊपर कण्ट्रोल था. बाकायदा था. इसलिए उसे बड़ी हैरानी हुई जब उसने दीक्षा को रात के दो बजे ऐसी निघ्त्य में देखा जिसमे से उसके अंग साफ़ तौर पर नज़र आ रहे थे.

उसने हकलाते से स्वर में दीक्षा से kaha….dddiksha…ttum…yayahn?

दीक्षा भी घबरा सी गयी थी उसे इस तरह घबराया हुआ देखकर. वो फिर भी खुद को संयमित करते हुए boli….wo वो मैं बाथरूम आयी थी तो सोचा के देख लूँ आपको कोई तकलीफ तो नहीं है?

रोहन अभी भी हैरान tha…par तुम आखिर मेरे रूम में कैसे आयी?

Diksha…gardan नीची karke…bathroom कॉमन है और इसमें कॉमन दरवाजा है. तो उसी के जरिये अंदर आयी हूँ उसने दरवाजे की और इशारा करते हुए बोलै.

रोहन को अब माजरा समझ में आ गया था. ये कोई बड़ी बात नहीं थी. वो उनका मेहमान था तो उन लोगों को फ़िक्र होना लाजमी है. इसलिए अब रोहन संभल कर bola…oh अच्छा. मैं ठीक हूँ कोई परेशानी नहीं hai…usne मुस्कुराते हुए बोलै तो दीक्षा भी मुस्कुरा उठी.

Diksha…thik है अगर कोई परेशानी हो तो मैं दुसरे रूम में हूँ आप बेजिझक मुझे बोल दीजियेगा.

रोहन… जरूर बोल दूंगा. अब आप आ hi गयी हो तो दो मिनट बैठ jaiye….usne पास पड़ी कुर्सी की और इशारा करते हुए कहा.

दीक्षा गर्दन नीची करके चुपचाप बैठ गयी. वो अभी तक नार्मल नहीं हो पायी थी उसे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे उसकी चोरी पकड़ी गयी हो.

रोहन ये बात समझ रहा था वो उसे नार्मल करते हुए bola…to फिर आप मेरे hi कॉलेज में आने का सोच रही हो?

दीक्षा अब ऐसा टॉपिक देखकर जो उसके फवौर का था मुस्कुराने लगी और boli…hanji. फिर वहां आपसे मुलाकात हुआ करेगी.

रोहन को अजीब लगा के ये लड़की भला मुझसे क्यों मुलाकात करना चाहती है फिर भी वो मुस्कुराते हुए bola…par ये तो पॉसिबल नहीं हो पायेगा दीक्षा.

Diksha…hairani से चेहरा ऊपर karke…par क्यों?

Rohan….muskura kar…kyunki ये मेरा आखरी साल है. आप लोगों का कॉलेज में पहला साल होगा पर मैं कॉलेज से निकल चूका हूँगा.

अब दीक्षा को उसकी बात समझ में आ गयी और वो मुस्कुराते हुए boli…oh अच्छा कोई बात नहीं पर आपसे हेल्प तो मिल hi सकती है पढाई के बारे.

Rohan…any time…main हमेशा हाज़िर हूँ.

diksha…thanks . अब मैं चलती हूँ. सॉरी आपको डिस्टर्ब किया.

दीक्षा जैसे hi उठने लगी रोहन की नज़र उसके बूब्स और निघ्त्य की जाली में से झांक रहे उसके निप्पल्स पर पड़ी तो उसके लुंड को एक झटका सा लगा पर जल्द hi उसने अपना मुँह उसके बूब्स से हटा लिया पर दीक्षा ने उसे अपने बूब्स को इस तरह एक्ससिटेड होकर घूरते हुए देख लिया था. उसे रोहन पहली hi नज़र में अच्छा लगने लगा था. वो मुस्कुरा उठी उसके ऐसे घूरने पर.

रोहन bola…arey नहीं डिस्टर्ब की कोई बात नहीं दीक्षा बल्कि मुझे अच्छा लगा तुम्हे मेरी फ़िक्र hui…usne मुस्कुरा कर कहा तो दीक्षा भी मुस्कुरा दी और लगभग भागते हुए अपने रूम में चली गयी.

उसके जाने के बाद रोहन को मुठ मरकर hi सोना पड़ा क्यूंकि दीक्षा के अंगों ने उसके लुंड को पूरी तरह से एक्टिव कर दिया था.

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रोहित ने तान्या को अपने निचे लिटाया हुआ था. रोहित और तान्या के कपडे फर्श पर एक दुसरे में गुथम गुथा हुए पड़े थे. रोहित के पास इस वक्त कंडोम तो नहीं था पर फिर भी वो सेक्स में इतना ज्यादा एक्ससिटेड हो चूका था के कंडोम की जरा भी परवाह नहीं थी.

अपनी कुर्सी के पीछे पड़ा वाइट कलर का टॉवल उसने तान्या की गांड के निचे रख दिया था ताकि डिस्चार्ज के वक्त वो टॉवल पर डिस्चार्ज कर सके.

आज तान्या का पहला सेक्स था और वो दूसरी लड़कियों की तरह बहुत ज्यादा एक्ससिटेड थी जैसे वो अपने बर्फ के साथ होती हैं तान्या भी रोहित को एक बर्फ से काम नहीं समझ रही थी. रोहित अपने खड़े लुंड को उसकी छूट पर रगड़ रहा था और उसके होंठों को चूस रहा था.

तान्या आहे भर रही थी. आज उसके जीवन में पहली बार ये पल आया था जब वो इस तरह किसी मर्द के साथ नंगी थी एकदम अलफ नंगी. उसे ये सोचकर बड़ा मज़ा आ रहा था के रोहित उसके साथ चुदाई करेगा. वो मन hi मन सब कुछ इमेजिन कर रही थी और किसी भी पर उसकी छूट में लुंड घुस सकता था.

रोहित जब काफी देर अपने लुंड को तान्या की छूट के ऊपर रगड़ता रहा तो तान्या से रहा नहीं गया और उसने उसके लुंड को एक हाथ से पकड़ कर अपनी छूट के दरवाजे पर टिका दिया. रोहित समझ गया था के अब लड़की से बर्दाश्त होना मुश्किल हो गया है.

इसलिए उसने छूट के दरवाजे पर रखे लुंड को धक्का मारकर जैसे hi अंदर का रास्ता दिखाया तो तान्या की चीख ने उसके अंदर आने का स्वागत kiya…uske मुँह से एकदम से ुयी माँ निकला.

पर रोहित ने उसके होंठों को जोर से अपने होंठों में कास कर उसकी चीखों को रोका ताकि कोई बहार से उन्हें न सुन सके. उसके बूब्स को हाथ में पकड़कर वो उनके साथ खेलते हुए कुंवारी तान्या के साथ चुदाई का आनंद लेने लगा,

तान्या को हालाँकि शुरू के काफी दर्द हुआ पर धीरे धीरे वो उसके साथ मज़े लेने लगी और उछाल उछाल कर अपने प्रेमी का साथ देने लगी. उसका चेहरा सुर्ख हो गया था जिससे ये ज़ाहिर हो रहा था के वो सेक्स का कितना लुत्फ़ उठा रही है.

रोहित के आनंद की तो कोई सीमा hi नहीं थी. वो तो एकदम मस्त होकर दबाबाद तान्या को छोड़ने लगा. और ऐसा लग रहा था के वो आज पूरा दिन उसे छोड़ने वाला है.

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सुबह उठकर दिसखा के मम्मी पापा ने उन दोनों को नाश्ता करने के बाद hi जाने दिया. रोहन ने महसूस किया के रूही थोड़ी गुमसुम सी नज़र आ रही थी. वो बाइक पर भी चुप चुप सी थी. रोहन से रहा नहीं गया वो bola….kya हुआ गुड़िया. इतनी चुप चुप सी क्यों हो.

रूही एकदम से boli…bhai दीक्षा रात को आपके कमरे में क्या करने गयी थी.

रोहन को काटो तो खून नहीं. हालाँकि उसके मन में दीक्षा के लिए कुछ नहीं था. और उसके हिसाब से तो और जैसा के दीक्षा ने कहा वो उसकी फ़िक्र की वजह से उसके रूम में आयी थी पर उसे इस बात का अंदाज़ा थोड़े था के रूही को इस बात का पता था के वो उसके रूम में आयी थी.


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Part 23अब ज्यादा हैरान मत हो bhai…ruhi boli…main उसके पीछे hi थी. और वो पांच दस मिनट तक आपके रूम में hi रही थी.

Rohan…..haan तो क्या hua…wo तो मुझे बोलने आयी थी के कुछ चाहिए हो तो मुझे बोलना.

Ruhi…thodi रौदे सी thi…par इतनी रात को भला आपको उससे क्या काम हो सकता है.

Rohan…baat को टालते hue…arey अब छोडो bhi..wo हमारी मेजबान थी तो थोड़ी चिंता हो गयी होगी. अच्छा तू बता तुझे तो अच्छे से नींद आयी न.

Ruhi…haan भाई ठीक नींद आयी मुझे. मन hi मन रूही सोच रही थी के कहीं इन दोनों में कुछ हुआ तो नहीं. पर फिर सोचने लगी, अगर कुछ हुआ भी हो तो मुझे क्या. भाई जवान hai…diksha भी. अगर कुछ हुआ हो तो ये नार्मल बात है.

Rohan…achha है न. रस्ते में कुछ खाना पीना तो नहीं है.

Ruhi…abhi तो खा पीकर चले हैं भाई. अब और कोई इच्छा नहीं है.

रोहन को थोड़ा महसूस सा हो रहा था के कहीं इसे बुरा तो नहीं लग गया. पर फिर सोचा के अगर ऐसा होता तो वो बोल देती.

रूही और रोहन घर पहुँच जाते हैं. मेहुल जैसे इन दोनों का hi इंतज़ार कर रही थी. गेट भी उसने hi खोला. उन्हें देखते hi मेहुल बोली.

Mehul…tum लोग कल रात घर hi नहीं आये. कहाँ रुके थे?

Ruhi…didi मैंने फ़ोन तो किया था दीक्षा के यहाँ hi रुकना है.

Mehul…fir भी मुझे तुम दोनों के लिए चिंता हो रही थी. और हाँ तुम दोनों को मिस भी बहुत कर रही थी,

Ruhi…muskurate hue…mujhe पता है सिर्फ भाई को मिस कर रही थी.

Mehul,...nahi ऐसी बात नहीं है ruhi…darasal भाई के बिना कभी रही नहीं न.

रोहन मेहुल को जोर से हुग कर लेता hai…meri प्यारी बहिन. मैं खुद तुम्हारे बिना नहीं रह सकता.

और उसके माथे पर एक किश कर देता है. मेहुल हिल सी जाती है. पर जल्द hi खुद को संभल लेती है.

उसे मम्मी के साथ कहीं बहार जाना था. आज वैसे भी घर पर कोई और नहीं था.

रूही और रोहन hi घर में अकेले रह गए थे. दोनों अपने अपने कमरे में जाकर लेट गए. रोहन को नींद नहीं आ रही थी . वो ऐसे hi लेता हुआ था. उसके दिमाग में बार बार आ रहा था के रूही ने वो सब क्यों पूछा कहीं उसे ये शक तो नहीं के हम दोनों में कुछ हुआ है.

वो कुछ देर बाद रूही के कमरे की और गया. उसने खटखटाना चाहा पर देखा के ये तो खुला hi हुआ था. रूही बेसुध बीएड पर लेती सो रही थी. वो टैंगो को ऊपर उठाकर इस तरह से लेती थी के उसकी स्कर्ट पेट की और चली गयी थी और उसकी कच्ची साफ़ नज़र आ रही थी.

रोहन कुछ देर एकटक उसकी कच्ची की और देखता रहा. उसके लुंड में हलचल भी हो गयी थी, इसे देखकर. पर उसे अभी कुछ पूछना था रूही से. उसने उसे पास आकर आवाज़ लगाई. रूही गहरी नींद में थी. इसलिए वो नहीं जगी. रोहन आगे गया तो उसे कंधे से पकड़ कर हिलाते हुए जगाने लगा.

उसकी टॉप में से उसके बूब्स भी झलक रहे थे. रोहन का मन बेईमान हो रहा था. पर उसने खुद को कण्ट्रोल करके उसे जगाना जारी रखा. एक दो बार झटका देने से रूही की आंख खुली तो वो एकदम घबराकर उठी. और रोहन को देखकर बोली.

Ruhi…arey भाई आप. कुछ काम था क्या?

Rohan…abhi बात शुरू नहीं करना चाहता tha….chay मिल सकती है क्या रूही.

Ruhi…jarur बना देती हूँ भाई.

Rohan…main भी बहार hi आ रहा हूँ. अपनी भी बना लेना. वहीँ सोफे पर बैठकर पिएंगे.

रूही ने मुस्कुरा कर हाँ में गर्दन हिलाई और boli…bhai मैं फ्रेश होकर आती हूँ आप सोफे पर चलकर बैठो. उठते हुए उसकी निगाह एक बार बीच में उठे हुए उभर पर जाती है. और वो हैरान रह जाती है भाई को इस हाल में देखकर.

रूही आकर चाय बनती है और दोनों के लिए चाय बिस्कुट लेकर सोफे पर आकर बैठ जाती है.

रोहन उसे बोलता hai…ruhi लगता नहीं तुम्हे अच्छे से नींद आयी होगी दीक्षा के घर पर.

Ruhi…muskura kar….neend तो आपको भी नहीं आयी भाई.

Rohan…achha एक बात बताओ ruhi..kahin तुम्हे शक तो नहीं के हम दोनों में कुछ हुआ कल रात.

Ruhi…hairani se…maltab?

Rohan…matlab मेरे और दीक्षा के बीच.

Ruhi…nahi भाई. वैसे भी आप लोग 10 मिनट hi इकट्ठे रहे और इतनी देर में कहाँ कुछ हो सकता है. रूही ने ये बात बोल तो दी पर उसे खुद पर hi शर्म आ रही थी के क्या बोल गयी वो.

रोहन मुस्कुरा kar….achha कितना टाइम लगता है उसमे? आँखों में मस्ती के साथ बोलै तो रूही बुरी तरह से शर्मा गयी.

Ruhi…gardan नीची करके मुस्कुराते hue…aap भी भाई बात को पकड़ लेते हो. मुझे क्या पता कितना टाइम लगता है मैंने कौन सा कभी किया है. वो तो मुझे लगा किश इस ना हुई हो,

Rohna…wahi तो …मुझे लग hi रहा था के तुम्हे शक है कुछ हुआ है. अच्छा अगर कुछ हो भी जाता तो तुम्हे कोई दिक्कत थी क्या?

Ruhi…bilkul नहीं bhai…dekho आपने मुझे दोस्त बनाया तो मैं खुलकर बोलूंगी. अगर तुम दोनों में कुछ हो भी जाये तो मुझे क्या ऐतराज़ हो सकता है भाई. तुम दोनों जवान हो. हाँ होना रजामंदी से चाहिए.

Rohan…wo तो बाद की बात है. पर दोस्ती हुई है तो तुमसे कुछ शेयर करना चाहता हूँ. अगर तुम्हे कोई परेशानी ना हो तो.

Ruhi…offo भाई. आप हर बार इजाज़त लेकर बोलोगे क्या. आप अब खुलकर बात कर सकते हो मुझसे. और कुछ भी बात करो आप. विश्वास रखो बात हम दोनों में हारेगी.

Rohan…thik hai…batata हूँ. दरअसल मेरे कुछ दोस्त हैं. जो हमेशा सेक्स में hi लगे रहते हैं. पता नहीं कैसे लड़कियों और ाउंटियों को पता लेते हैं. फिर उनसे सेक्स करते हैं. और आने के बाद मुझसे सब कुछ शेयर करते हैं. यार रूही मेरा भी आजकल बहुत मन हो रहा है मैं सेक्स करूँ. पर किसी ऐरी गैरी लड़की के साथ कर भी नहीं सकता. किसके साथ करूँ.

अनजाने में hi रोहन का हाथ उसके लुंड पर चला जाता है. रूही को देखकर वो थोड़ा शर्मा जाता है और हाथ हटा लेता है.

Ruhi…arey ये तो बहुत hi स्वाभाविक बात है भाई. आप तो मुझसे भी बड़े हो. इन सब चीजों का इंसान को मन करता hi है. आप क्यों नहीं कोई गफ बना लेते.

Rohan…muskura kar…tumhari इस फ्रेंड दीक्षा को hi बना लूँ क्या. मुझे तो लग रहा है ये मान जाएगी.

Ruhi…hanskar…agar लड़की मान जाएगी तो भला मुझे क्या परेशानी है. लड़की अच्छी है वैसे. फिर रूही उत्सुकता वश पूछती hai….achha अगर मान गयी तो कहाँ ले जाओगे उसे.

Rohan..agar मानती है तो पहले तो मैं उसे होटल में hi ले जाऊंगा. आजकल यंग कपल्स के लिए होटल सेफ है. पर उसे 18 की होनी चाहिए.

Ruhi…ankh मारते hue…wo तो वो हो चुकी अब. लीगल है आप दोनों के लिए कुछ भी करना.

रोहन का लुंड ऐसी बातों से फटने को आ गया था. रूही ने देख लिया था उसे हिलते डुलते …boli…bhai चाय पीकर एक बार बाथरूम हो आओ. नहीं तो आपको परेशानी होगी.

रोहन हंस पड़ा उसकी बात sunkar…lag रहा है तुम्हे भी तजुर्बा है रूही.

Ruhi…hato भाई. बेशर्म हो आप बहुत. जैसे आपके दोस्त हरामी हैं वैसे hi मेरी भी फ्रेंड्स हरामजादी हैं एक नंबर की. उनसे hi बातें पता चलती है.

रोहन …हँसते hue…aisa kya…chalo मैं आता हूँ. यही बैठो तुम. फिर बातें करते हैं.

रोहन देख रहा था. रूही को भी इन सब बातों में खूब मज़ा आ रहा था. वो बाथरूम में गया और पहले दीक्षा को मन में याद करके मुठ मारने लगा. पर उसके दिमाग में बार बार रूही आ रही थी. उसे बहुत जोश आ गया.

पर फिर पता नहीं क्या हुआ. वो अपनी बहिन मेहुल के मिस करने वाली बात को याद करने लगा उसके बाद जो हुग हुई दोनों की. जैसे hi उसे अपनी बहिन मेहुल याद आयी और उसका स्पर्श एक तेज धार सी निकली उसके लुंड से और लगातार निकलती hi रही.



उधर रूही का भी हाथ अपने आप अपनी स्कर्ट में चला जाता है. आज पहली बार उसे इन सब बातों में इतना रास मिल रहा था. उसने सोचा क्यों न अपना पानी निकल लूँ. पर फिर सोचा कहीं अचानक भाई आ गया तो वो उसको फेस नहीं कर पायेगी. इसलिए मन को मारकर वो वैसे hi बैठी रही.
 
Part 24 जब इंसान एक बार गन्दी बातें करने लग जाए तो उसे फिर उसमे रास आने लगता है, मज़ा आने लगता है और हर वक्त वही बातें करने को दिल करता है. अब रूही का रूटीन बन गया था वो रात को सोने से पहले एक बार जरूर जाती. बातें नार्मल शुरू होती पर फिर सेक्स पर आकर hi ख़त्म होती. वो जाने के बाद बाथरूम में जाकर अपनी संतुष्टि करती और इधर रोहन अपना लुंड निकल कर बिस्तर पर hi शुरू हो जाता.

ये बात भी दोनों आपस में शेयर करने लगे थे के कितनी बार मास्टरबेट किया. फिर हंसने लगते. ऐसे hi हंसी मज़ाक करते 4-5 दिन बीत गए. एक दिन स्कूल से आकर रूही ने रोहन को bola…bhai मुझे दीक्षा के यहाँ ले चलोगे शाम को.

दीक्षा का नाम सुनते hi रोहन के चेहरे पर रौनक आ गयी और bola…haan चलूँगा पर काम क्या है.

जिसे महसूस करते hi रूही मुस्कुरा दी और boli…kya bhai…uske घर जाने के लिए भी तुम्हे किसी काम का बहन चाहिए क्या?

रोहन थोड़ा शर्मा सा गया उसकी बात सुनकर bola…arey मुझे नहीं पर घर वालों को तो बताना पड़ेगा न कोई कारन.

Ruhi…usme सोचने की कोई बात नहीं है. उसके मम्मी पापा हरिद्वार गए हैं. मुझे आज रात उनके यहाँ रुकना है.

Rohan…to तू ऐसा क्यों नहीं बोल देती के भाई भी साथ में रुक जायेगा.

Ruhi….achha बच्चू मन hi मन ख्याली पुलाव पका रहे हो. वो पुलाव तुम्हे ऐसे hi नहीं मिलने वाले. मुझे भी कुछ दक्षिणा देनी पड़ेगी.

Rohan…tu जो कहेगी वो दूंगा. पर तू मेरा आज उसके घर रहने का जुगाड़ बना दे.

Ruhi…dekho कैसे अपना जुगाड़ बनाने को मरे जा रहे हो भाई. तभी मुझे मुझे जुगाड़ बनाने को बोल रहे हो. चलो ठीक है चलते हैं आज. शायद आपके उसका इंतज़ाम हो जाये.

रूही ने रोहन के लुंड की और इशारा करके बोलै तो रोहन को हंसी आ गयी. और रूही भी हंस दी. उन्होंने नोटिस नहीं किया के जब रूही उसके लुंड की और इशारा कर रही थी तो मेहुल वहां आ गयी थी. वो उसे ऐसा इशारा करते देखकर हैरान रह गयी और बोली.

Mehul…ye तुम क्या बोल रही थी रूही? रूही को काटो तो खून नहीं.

रोहन का चेहरा भी फक्क पद गया था पर किसी को तो बात सम्भालनि थी तो रोहन को अचानक कुछ sujha….arey दीदी मेरे पास लोअर नहीं रहे. इसीलिए रूही बोल रही थी आज शाम आपको लोअर दिलवाने जाना है. रोहन ने ये बात बोल तो दी पर उसमे बिलकुल भी कॉन्फिडेंस नहीं झलक रहा था. और उसे मेहुल का चेहरा देखकर महसूस हो रहा था के मेहुल को भी उसकी बात पर ज्यादा विश्वास नहीं हो रहा. खैर जो भी हो बात संभाली जा चुकी थी.

Mehul…hope के यही बात हो. फिर रूही को देखकर boli…ruhi जाओ मेरे लिए एक गिलास पानी लाओ.

उसे बोलकर रोहन को boli…aao सोफे पर baitho….rohan…mujhe उम्मीद है तुम कुछ गलत नहीं कर रहे हो. और हाँ पिछले दिनों तुम किसी बात से परेशान थे. अब तुम्हारी परेशानी दूर हो गयी है क्या?

रोहन असमंजस में पद गया के दीदी क्या बात लेकर बैठ गयी. जबकि मेहुल उसकी सेक्स की डिजायर को रूही के साथ जोड़कर देख रही थी और रोहन इस बात को समझ नहीं रहा था. हाँ उसे इस बात का आईडिया तो हो गया था के उनकी अभी की बातों से मेहुल को कुछ शक सा हो गया था इन दोनों के बारे में. उसे समझ नहीं आ रही थी के वो क्या पूछना छह रही है.

Rohan….aap क्या बोल रही हो दीदी मुझे समझ नहीं आ रहा.

Mehul…nahi कुछ दिन पहले बड़े मुरझाये से रहते थे. लगता था किसी परेशानी में थे. अब तो वो परेशानी दूर हो गयी है न.

रोहन बात को टालते hue…wo दरअसल दीदी फाइनल एग्जाम का टेंशन था. अब दूर हो गया है. आप चिंता मत कीजिये. और मुस्कुराने लगता है. उसको मुस्कुराता देख उसकी प्यारी बहिन भी मुस्कुराने लगती है.

मेहुल उसे बोलती है. रोहन मैं आज शाम को शॉपिंग पर जाना चाहती हूँ. क्या तुम मेरे साथ चल सकते हो?

इतने में रूही पानी का गिलास लेकर आ जाती है. मेहुल की बात सुनकर दोनों का चेहरा एक बार फिर से उड़ जाता है. ये दोनों तो खुद प्रोग्राम बना रहे थे दीक्षा के यहाँ जाने का. अब दीदी ने भी बोल दिया. और ये एक बार शॉपिंग करने लग जाती है तो टाइम का तो पूछो hi मत.

उन दोनों को ऐसे हैरान परेशान सा देखकर मेहुल boli…kyun तुमको भी तो लोअर लेने थे रोहन. इकट्ठे hi कर लेंगे न शॉपिंग. रूही तुम भी चलना. तीनो बहिन भाई चलेंगे. कार में ले चलेगा rohan…kyun रोहन.

रोहन हकलाकर bola…h ह हाँ दीदी क्यों नहीं.

मेहुल को लग रहा था कुछ तो बात है boli…mujhe तो लग नहीं रहा तुम्हारा मन है आज जाने का.

Rohan…nahi नहीं दीदी ऐसी कोई बात नहीं है. हम चलेंगे. रोहन ने तो मजबूरी में ये बात बोल दी पर रूही ने सोचा मेहुल दीदी से डिसकस करने में क्या प्रॉब्लम है उन्हें असली बात बता hi देनी चाहिए. वो boli….didi रोहन भैया आपसे बोल नहीं प् rahe…darasal मेरी दोस्त diksha…jinke घर हम उस दिन रुके थे. आज फिर उसके घर रुकना पड़ेगा.

मेहुल रोहन की पीठ पर थप्पड़ मरते hue…to झल्ले बताया क्यों नहीं पहले. मेरी हर बात के लिए हाँ करना जरुरी है क्या?

Rohan….arey मुझे लगा के आपको बुरा लगेगा. इसलिए नहीं बोलै.

Mehul….pagal मुझे तब ज्यादा बुरा लगता अगर मुझे बाद में पता चलता के मेरी वजह से तुम्हारा कोई प्रोग्राम कैंसिल हुआ है. एक minute…uski तो फ्रेंड है. तुम भी रुक रहे हो क्या वहां.

Rohan…sar झुका kar…arey दीदी रुकना hi पड़ेगा न. नहीं तो एक बार छोड़ के आना और दूसरी बार लेकर आना इतनी दूर से. आप समझ रही हो न.

Mehul…hanste हुए… मैं सब समझ रही हूँ. मुझे तो कुछ दाल में कला नज़र आ रहा है.

Rohan….sakpaka गया उसकी बात sunkar…matlab?

रूही भी परेशान सी हो गयी thi…nahi दीदी ऐसी कोई बात नहीं है. ये सचमुच मेरी वजह से रुक रहा है.

मेहुल हँसते hue…to मैंने कब कहा ये दीक्षा की वजह से रुक रहा है. शक तुम दोनों hi पैदा कर रहे हो. अरे मैं बस मज़ाक कर रही थी. जाओ तुम दोनों. शॉपिंग पर हम लोग कल चले जायेंगे.

रूही और रोहन ने चैन की सांस ली जब मेहुल ने ऐसा बोलै. रूही ने अपनी मम्मी यानि राधा से रात रहने के बारे में बात कर ली थी और रोहन ने भी अपनी मम्मी को बता दिया था. उन्होंने उन दोनों को जाने दिया. रोहन ने बाइक hi निकली जाने के लिए. रूही के हाथ में एक छोटा सा बैग था, जिसमे दोनों के कपडे थे. रोहन ने उससे वो बैग ले लिया और उसे आगे तंग लिया.

रोहन ने रूही को दोनों तरफ टंगे करके बैठने को बोलै. रूही बैठ गयी. वो खुद आज काफी करीब होकर बैठी थी. पता नहीं उसे क्या हो गया था. रोहन के टच से उसे अजीब सा सुकून मिलता था. जल्द hi वो भी 18 की होने वाली थी. जिस दिन रोहन के मम्मी पापा की मैरिज एनिवर्सरी थी उसी दिन उसकदा बर्थडे भी था और वो 18 की होने वाली थी. उसकी तमनाएँ भी जाग रही थी.

उसने तो सोच रखा था, जैसी उसकी सहेलियां सेक्सुअल एक्सपीरियंस ले रही हैं, 18 की होते hi वो भी किसी न किसी का लुंड जरूर लेगी और पक्का लेगी. खुद hi हंस देती. इस बात को सोचते हुए उसका हाथ पता नहीं कब रोहन के लुंड पर चला गया.

उसे एहसास तब हुआ जब उसके हाथ के छूटे hi रोहन के लुंड ने झटका मारा. रोहन अलर्ट हो गया उसने भी रूही का हाथ महसूस कर लिया. आनंद आ गया रोहन को एक बार तो. पर वो एहसास के मेरी बहिन है, मन में गिल्ट भी भर देता है. लेकिन फिर बेईमान मन बोलता hai…chalne देते हैं यार. ऐसे hi रूही भी दुविधा को दूर किये हाथ को रखे रहती है. इस लुंड और हाथ की क्रीड़ा का लुत्फ़ उठाते दोनों दीक्षा के घर पहुँच जाते हैं.

दीक्षा ने जब देखा के रोहन भी आया है रूही के साथ तो उसका चेहरा खिल उठा. उसने पिंक कलर का सूट पहना हुआ था. उसके चेहरे की चमक और उभरी हुई जवानी को देखकर रोहन के अधखड़े लुंड में और भी जान आ गयी. वो भी उसे देखकर खुश हो गया.

दीक्षा ने दोनों को अंदर आने को बोलै. उन्हें पानी पिलाया और रोहन की और देखकर boli…achha लगा आप आये रूही को छोड़ने.

Ruhi..use आंख मारते hue….ye सिर्फ छोड़ने नहीं आये हैं. ये भी हमारे साथ सोने आये हैं.

रूही ने ये नहीं बोलै के ये भी रात को यहीं रहेंगे उसने स्पेशलय बोलै के ये भी हमारे साथ सोने आये हैं तो दीक्षा की छूट ने हिचकी सी ली. वो भी सामने बैठ गयी और boli…ye तो बहुत अच्छी बात है.

उसको चहकती देख रूही boli…arey इनको वापिस जाना पड़ता सुबह फिर लेने आना पड़ता इसलिए रुके हैं. इसमें अच्छी बात क्या है भला. उसने दीक्षा को छेड़ते हुए बोलै तो रोहन रूही की और देखने लगा जो शैतानी से मुस्कुरा रही थी.

Diksha…usko ऑंखें निकलते hue…kyun तुझे क्या प्रॉब्लम हो गयी जो मैंने अच्छी बात है बोल diya..ruhi हंस पड़ी उसकी बात सुनकर और रोहन बोलै.

Rohan…arey दीक्षा ये तुम्हे ऐसे hi चिढ़ा रही है. रूही उठकर वाशरूम चली गयी और दीक्षा बार बार चोरी छुपे नज़र उठा कर रोहन को देख रही थी जो उसे hi देखे जा रहा था.



रोहन थोड़ी देर बाद bola…aaj भी आओगे क्या आधी रात को मेरी जरूरतें पूछने. दीक्षा ने हैरानी से नज़र उठाकर रोहन की और देखा के इसने क्या कह दिया. इतने में रूही भी आ गयी थी बाथरूम से और उसकी बात सुनकर boli…diksha तुमने भाई की बात का जवाब नहीं दिया. दीक्षा उन दोनों की बात सुनकर बुरी तरह से शर्मा गयी .
 
Part 25मेहुल अपने बिस्तर पर लेती सोच रही thi…..mujhe पता है रूही ने भाई के लुंड की और इशारा करके कहा था. क्या इसका मतलब ये दोनों आपस में खुलकर बात करते हैं? ये ठीक नहीं है. फिर दुसरे hi पल सोचती hai…kyun ठीक नहीं है. मैं तो भाई के साथ वो सब करने को भी तैयार थी तो फिर इनके बात करने में क्या प्रॉब्लम है.

पहला man…lekin अगर बात करने से ज्यादा हुआ तो?

दूसरा man…to भी क्या हुआ. जो मैं कर सकती हूँ वो रूही भी कर सकती है. बात तो भाई की चिंता दूर करने की थी ना.

पहला man….kya बहनो के साथ ये सब शोभा देता है?

दूसरा man…itna नहीं सोचना चाहिए. जब दो लोगों को कुछ करना अच्छा लगता है तो इसमें हर्ज hi क्या है.

पहला man..dekh लो भाई मेरा तो फर्ज बनता था चेतावनी देना.

दूसरा man…arey बहुत ज्यादा मत सोचो यार. अभी तो ये भी नहीं पता के मामला है क्या? और फिर मुझे तो लगता है रोहन दीक्षा की और अत्त्रक्टेड है तभी तो उसके घर सोने को चला गया. नहीं तो जल्दी से किसी के यहाँ जाता कहाँ है.

फिर कुछ देर बाद ये कश्मकश सी ख़त्म हो गयी क्यूंकि मेहुल को नींद ा गयी थी.

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रूही रोहन को boli…bhai मैं बीच में पद जाती हूँ. क्यों नहीं हम तीनो एक hi बीएड पर सो जाएँ.

रोहन को रूही के लुंड पर हाथ रखने वाली बात याद आ गयी. वो अभी प्रेपरेड़ नहीं था अपने बहिन के साथ ये सब करने के liye…bola…nahi मुझे ऐसे घुटन सी में नींद नहीं आएगी. तुम दोनों इधर सो जाओ, मैं उधर सो जाऊंगा. मुझे कुछ चाहिए होगा तो दीक्षा को जगा lunga…kyun diksha…maine बड़े अर्थपूर्ण ढंग से बोलै तो दीक्षा हड़बड़ा सी गयी.

Boli…aannn हाँ हाँ बिलकुल मुझे जगा लेना. बल्कि एक बार मैं hi देख आउंगी के कुछ चाहिए तो नहीं.

रोहन मुस्कुरा diya..ruhi भी मुस्कुरा दी. दीक्षा उन दोनों को मुस्कुराते देख मुस्कुरा दी. सभी का hi दिल धक् धक् कर रहा था. रोहन का तो मन कर रहा था आज दीक्षा को पेल hi दे. दीक्षा मन hi मन सोच रही थी काश रोहन मेरे साथ लेट जाये मुझे हुग करके. रूही तो इतना बस सोच रही thi…kash भाई दीक्षा के साथ कुछ करे और मैं इन दोनों को देख सकूँ बस.

तीनो अपनी अपनी सोच को लिए हुए सो गए. रात के किसी पहर रोहन को चिटकनी की आवाज़ सुनाई दी जिससे उसकी आंख खुल गयी. उसने देखा कोई है बाथरूम में. उसे मस्ती सूझी. वो दरवाजे की और गया और उसे धक्का दिया. जिससे बाथरूम में जो भी था उसे पता चल गया कोई उधर से बाथरूम में आना चाहता है.

उसमे दीक्षा थी boli…rohan…rukiye मैं कर लूँ. फिर आप कर लेना.

Rohan…janbujhkar….arey मुझे बहुत जोर से प्रेशर लगा है. प्लीज खोल दो. दोनों इकट्ठे कर लेंगे. उसकी बात सुनकर दीक्षा का दिल धक् से रह गया और उसकी छूट में हलचल सी मच गयी.

दीक्षा पेशाब कर चुकी थी. उसने जब सुना के रोहन को प्रेशर लगा है तो उसने झट से चिटकनी खोल दी. सामने मुस्कुराता हुआ रोहन खड़ा था. दीक्षा भी मुस्कुरा दी और हटने के बाद अपने रूम में जाने की बजाये रोहन वाले रूम में चली गयी और रोहन फटाफट बाथरूम में घुस गया. पेशाब करने के बाद बहार आया तो दीक्षा को बीएड के पास पड़ी चेयर पर बैठे पाया.

दीक्षा उसे मुस्कुराते हुए बोलती hai….achha इकट्ठे बाथरूम जाने का इरादा था जनाब का? शर्म नहीं आती आपको? वो बोल तो ऐसे रही थी पर साथ hi साथ मुस्कुरा भी रही थी. रोहन भी मुस्कुराये बिना ना रह सका.

Bola….waise हर्ज क्या है और आँख मार देता है,

दीक्षा शर्मा जाती है उसकी बात सुनकर और सर झुका लेती है. कुर्सी बीएड के काफी नजदीक थी. रोहन उसके सामने बैठ जाता है और उसका हाथ पकड़कर बोलता hai….tum वाकई बहुत खूबसूरत हो diksha….diksha शर्म से गड जाती है. उसे हालाँकि बहुत शर्म आती है पर वो अपना हाथ नहीं हटती. यानि जो भी हो रहा था उसकी मंजूरी थी. किसी लड़की के नरम मुलायम हाथ उसने पहली बार पकडे थे. तो उन कोमल हाथों के स्पर्श से उसके शरीर में झुनझुनी सी फ़ैल गयी. जिसे उसने बाकायदा महसूस किया. फिर मन hi मन सोचकर मुस्कुरा diya…hath छूने से ये हाल है जब बाकि के अंग चूँगा तो क्या होगा.

उसका उत्तर न पाकर रोहन फिर से bola…kya बात मेरी बात अच्छी नहीं लगी क्या. दीक्षा ने मुँह ऊपर उठाया और तुरंत बोल padi….arey ऐसा मैंने कब kaha…fir खुद hi अपनी बात को समझते हुए शर्मा गयी.. रोहन उसकी घबराहट देखकर हंसने लगा.

दीक्षा मन hi मन सोच रही thi…ye तो बहुत मूड में लग रहा है, कहीं कुछ कर ना दे. मैं अभी इसके लिए तैयार नहीं हूँ. कुछ करने के लिए सोचना और बात है पर करना और बात hai….udhar रोहन उसे दीक्षा दीक्षा कह कर बुला रहा था पर दीक्षा थी के अपनी सोचों में डूबी हुई थी.

रोहन ने जब उसका काढ़ा पकड़ कर उसे झिंझोड़ा तब जाकर दीक्षा अपनी सोचों से बहार आयी. वो एकदम से बोल padi…ha हाँ क्या बात है रोहन. रोहन मुस्कुरा कर bola…kuchh नहीं.

रोहन उसके ठीक सामने बैठा था. उसने दीक्षा को कमर से पकड़ा उठाया और बैठे बैठे hi अपनी टांगों पर बिठा लिया. दीक्षा तो यंत्रवत उसकी हरकतों को बस देखे जा रही थी. वो जो भी कर रहा था उसे करने दे रही थी. पर एक बात के लिए सूरे थी वो के अभी सेक्स के लिए वो रेडी नहीं है.

रोहन ने उसका चेहरा पकड़ा और अपने चेहरे के पास ले जाकर बड़े hi गौर से देखने लगा. दीक्षा मन hi man….hey भगवन लगता है मिस्टर रोहन मुझे किश करने के लिए रेडी हैं. कैसा लगेगा किश करके?

उसकी बात सही निकली वो उसके चेहरे में ऐसा खो गया के पता hi नहीं चला कब उसके होंठ दीक्षा के होंठों से मिल गए. ये एक बहुत hi अनोखा अनुभव था दोनों के लिए. रोहन दीक्षा के रसीले होंठों में खो गया. दीक्षा भी इस किश का पूरी शिद्दत से मज़ा ले रही थी. दोनों के अंग एक दुसरे से मिले हुए थे. दीक्षा के हाथ रोहन की पीठ पर पहुँच गए थे. वो उसकी पीठ पर हाथ फेरकर रोहन को ये एहसास दिला रही थी के वो भी इस किश में पूरी तरह से उसके साथ है और वो उसका लुत्फ़ उठा रही है.

कोई पांच मिनट तक ये किश चलती रही. दोनों जैसे एक हो चुके हों. निचे रोहन के लुंड की हरकतें दीक्षा को बहुत ज्यादा महसूस हो रही थी. वो समझ चुकी थी के ये अपने पूरे जोश में आ चूका है.

एक और शख्स इन दोनों के साथ किसी तरह से जुड़ा था और वो थी रोहन की प्यारी छुटकी रूही. उन दोनों का ये खेल वो के होल से देख रही थी. जब वो दोनों एक दुसरे के होंठों को बेतहाशा चूस रहे थे तो रूही का हाथ अपने आप अपनी लोअर में चला गया और वो अपनी छूट को सहलाने लगी. वो खुद को उन देने के साथ hi महसूस कर रही थी और भूल चुकी थी के वो रोहन की बहिन है.

उधर दोनों जब एक दुसरे को होंठों को चूसते थक गए तो रोहन उसे उसी तरह जकड़े हुए लेट गया. दीक्षा ने अब भी कोई विरोध नहीं किया. दीक्षा की निघ्त्य हमेशा जालीदार hi होती है. रोहन मन में सोच रहा था. उसे उस निघ्त्य में से झांकते हुए उसके दो चुके नज़र आये तो रोहन का मन ललचाने लगा.

Let-te hi उसका मुँह उसके बूब्स पर चला गया. दीक्षा का दिल बोल रहा था के इसे रोक आगे जाने से. पर अभी ना रोहन hi रुकने वाला था और ना hi दीक्षा मन कर पा रही थी उधर रूही भी लगी थी अपने आप hi अपनी छूट की सर्विस करने को. के देखते hi देखते रोहन कपडे में से hi उसके बूब्स चूसने लगा.

दीक्षा सी सी की आवाज़ें निकलने लगी. वो धीरे धीरे बोल रही thi…limit में hi रहना रोहन. रोहन को सुन तो सब रहा था पर उससे रुका नहीं जा रहा था. वो बेतहाशा उसके बूब्स को चुस्त hi जा रहा था. उसका लुंड हिलोरे लेने लगा.

उसने सीधा होकर जैसे अपना लुंड लोअर में से निकला तो दीक्षा ने उसे देखते hi अपनी ऑंखें बंद कर ली. उधर रूही ने भी अपने भाई का लुंड देखकर अपनी छूट पर गति बढ़ा दी.

दीक्षा boli…nahi रोहन, हमें कुछ नहीं karna…rohan ने उसके चेहरे को चूमते हुए bola…jaisa तुम कहोगी दीक्षा वैसे hi होगा. पर इसका कुछ करो न. अरे जानेमन काम से काम ऑंखें तो खोलो.

दीक्षा ने उसके कहने पर मुश्किल से ऑंखें खोली. उसे अभी भी दर था के रोहन जरूर उसके साथ कुछ करने वाला है. उसे दर था के उसकी नन्ही मुन्नी छूट में अगर ये विकराल नाग समां गया तो उसका फटना तय है.



रोहन ने उसके कोमल हाथ को अपने लुंड पर लेजाकर रख दिया और बोलै …अभी के लिए इसे पकड़ कर हिलाओ, दीक्षा किसी आज्ञाकारी बचे की तरह उसे हिलाने लगी और उसे उसमे आनंद आने लगा. जैसे hi दीक्षा का हाथ रोहन के लुंड को हिलने लगा रूही को इतना जोश आया के वो झाड़ hi गयी. ऐसी झड़ी के झड़ती hi चली गयी.
 
Part 26रोहन को आज अपने कुंवारे लुंड पर एक लड़की के कोमल हाथ का स्पर्श मिला था. वो तो जैसे खुद को स्वर्ग में पहुंचा हुआ महसूस कर रहा था. दीक्षा ने भी हालाँकि आज से पहले किसी लुंड को छुआ नहीं था. पर पता नहीं कैसे उसे मुठ मारनी आ गयी थी. वो पूरे जोश में उसके लुंड को हिलाने लगी. जैसे उसे बहुत मज़ा आ रहा हो इस खेल में.

वो मुस्कुरा रही थी ऐसे करते हुए. रोहन की तो उत्तेजना में आँखें बंद हो चुकी थी. फिर जैसे hi आनंद अपनी चार्म सीमा पर पहुंचा उसके लुंड ने गर्म गर्म लावा उगलना शुरू कर दिया. फिर क्या रोहन का लोअर दीक्षा का लोअर, चादर तक भर गयी उस रास में. यहाँ तक के पहली धार इतनी तेज़ थी के वो रास फर्श तक फ़ैल चूका था. रूही की तो ऑंखें चौड़ी हो गयी ये सब देख कर.

उसने पहले ऐसा कुछ कहाँ देखा था. खैर उसने तो अपने जीवन में पहली बार इतना आनंद लिया था और पहली बार लाइव ब्लू फिल्म देखि थी. दीक्षा तो पहली बार ब्लू फिल्म का part बानी थी.

रोहन ने जब देखा के उसका तो हो गया है उसे दीक्षा पर भी तरस आया और उसने उसके लोअर में हाथ डालकर उसकी छूट को सहलाना शुरू कर दिया. दीक्षा को लगा अब ये मेरी छूट मारेगा. वो एकदम से उठकर कड़ी हो गयी और बोली. क्या कर रहे हो रोहन. मैंने बोलै ना के कुछ नहीं करना.

रोहन bola…arey शोना मैं तो अपने हाथों से तुम्हे आनंद देने का सोच रहा था. और कुछ थोड़े करना था.

दीक्षा जाते hue…nahi मैं अपने आप hi कर लुंगी. आप अब सो जाओ. गुड नाईट. बोलकर वो भाग सी गयी. रूही को पहले से अंदेशा हो गया था के दीक्षा आने वाली है तो वो तुरंत दुसरे कमरे में जाकर बीएड पर लेट गयी थी और ऑंखें बंद करके सोई हुई का नाटक करने लगी थी.

दीक्षा मुस्कुरा रही थी. उसे बिजली का झटका लगा था अपनी छूट पर रोहन के हाथ का स्पर्श पाकर. पर अभी उसे खुद को कण्ट्रोल करना था. इसकी मुख्या रूप से दो वजह थी. एक तो रोहन के विकराल लुंड का उसकी छूट को फाड़ देने का दर. दुसरे उसकी फ्रेंड शिनय ने उसे समझा रखा था जब भी बॉय फ्रेंड बनाना पहली hi बार में छूट मत मरने देना नहीं तो वो तुम्हे गश्ती समझेगा. इसलिए उसने रोहन को कुछ करने नहीं दिया.

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रोहन तुम्हे मेरे साथ दो दिन के लिए ….मेहुल की इस बात से रोहन चौंक सा गया. वो एक्सरसाइज कर रहा था जब पीछे से आकर मेहुल ने ये बात बोली. वो दरअसल जाने की बात से नहीं चौंका. एकदम से पीछे से आकर कोई हमें अचानक बुलाये तो चौंकना स्वाभाविक hi है.

रोहन ने पीछे मुड़कर देखा तो उसकी दीदी ने निक्केर के साथ खुली सी टीशर्ट पहनी थी. उसके अंग प्रत्यंग केहर ध रहे थे. रोहन एक बार को तो अपनी दीदी को देखता hi रह गया. पर जल्द hi संभल कर bola….kahan जाना है दीदी.

वो मैं खली बैठी रहती थी तो मैंने कैट के एग्जाम के लिए फॉर्म भरा है. सोचा देकर देख लेती हूँ. शायद निकल hi लूँ. …मेहुल ने बताया तो रोहन bola…to कहाँ पर है एग्जाम आपका?

Pune….mehul boli..hame कल सुबह hi निकलना पड़ेगा. शाम को एग्जाम है. परसो वापिस आएंगे.

रोहन bola…mummy पापा से बात हो गयी तुम्हारी?

Mehul….haan पहले पापा को hi बोलै था साथ जाने के लिए. उनको कोई काम है बोले तुम्हे साथ ले जाऊं.

रोहन …ठीक है फिर दीदी, चलते हैं कल subah…muskurate हुए बोलै. Mehul…thanks. Rohan…arey दीदी. थैंक्स की क्या बात है इसमें भला.

मेहुल मुस्कुराई और वहां से चली गयी. रोहन अपनी एक्सरसाइज में लग गया.

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ट्रैन में 6 घंटे का रास्ता था पुणे का. इन्होने तत्काल में 2 टिकट एक थ्री टियर की करवाई. बी चांस सीट अवेलेबल थी. दोनों को साइड उप्पेर और लोअर सीट मिल गयी थी. दोनों ने अपना सामान सेट किया और निचे hi बैठ गए. रात हो चुकी थी. दोनों लेटने की तयारी करने लगे. अटेंडेंट दोनों को बिस्तर दे गया था. मेहुल ने अपने साथ साथ रोहन का भी बिस्तर लगा दिया. रोहन मुस्कुराते हुए मेहुल को थैंक्स बोलै तो मेहुल boli…tu मेरे साथ इतनी दूर जा रहा है तो मुझे इस तरह थैंक्स बोलने की जरुरत नहीं है समझे.

मेहुल ने ऊपर वाली सीट चूसे की थी, इसलिए रोहन निचे सेट हो गया था. अभी सोने में थोड़ा टाइम था तो मेहुल और रोहन साइड में पीठ टिका के और टंगे फैला के बैठे थे. दोनों की टंगे एक दुसरे से स्पर्श हो रही थी. आजकल मेहुल जब भी रोहन को टच करती तो उसके दिमाग में हमेशा शुरुआत वाली बात आ जाती के वो उसके साथ करने को तैयार है. उसे आनंद आने लगा था उसके स्पर्श से. पर साथ hi वो शर्मा भी रही थी.

कुछ कुछ यही हाल रोहन का भी था. उसे भी मेहुल के स्पर्श से झुनझुनाहट सी हो रही थी. अब तो उसे लड़की के स्पर्श का अच्छे से पता चल चूका था पर ये लड़की उसकी गर्ल फ्रेंड नहीं बहिन थी.

उसको सोचते हुए देख मेहुल boli…kya सोच रहे हो रोहन.

वो मुस्कुरा कर बोलै. कुछ नहीं दीदी. बस ऐसे hi. मेहुल भी मुस्कुरा कर boli…fir भी कुछ तो सोच रहे होंगे.

रोहन को समझ नहीं आ रहा था के क्या bole…..main बस सोच रहा था के ये बहुत टफ एग्जाम है आप पास हो जाओ बस.

मेहुल को समझ तो आ गयी थी के रोहन बहाना बना रहा है बात कुछ और है. पर उसने ज्यादा टटोलना सही नहीं समझा.

फिर वो बात को आगे बढ़ने के लहजे से boli…us दिन दीक्षा के घर पर रहे तुम दोनों. सही तो रहा न.

रोहन को समझ नहीं आया के मेहुल ने ये सवाल क्यों किया. और ऐसे सवाल का क्या मतलब भला. फिर भी रोहन bola…haan ठीक रहा. आपने ऐसा क्यों poochha..darasal रोहन के मन में चोर भी था. के कहीं दीदी को शक तो नहीं हो गया. पर फिर सोचने लगा के ऐसे कैसे शक हो सकता है भला.

मेहुल मुस्कुरा कर boli…arey मैं तो ऐसे hi पूछ रही हूँ. तुम तो ऐसे घबरा गए मानो तुम्हारी चोरी पकड़ी गयी हो. वो हंसने लगी अपनी hi बात बोलकर, रोहन झेंप गया और bola…arey नहीं दीदी भला मेरी कौन सी चोरी पकड़ी जनि है. सब कुछ तो पता है आपको.

Mehul…ungli को हिलती hui…sab कुछ तो नहीं बच्चू. तुमने बताया नहीं. कोई गफ बना ली है क्या?

Rohan…hanste hue…aap भी दीदी. कैसी बातें करते हो. भल मुझसे कौन लड़की पटेगी. और अगर पटेगी तो आपको बताऊंगा न.

Mehul…shikayat भरे लहजे mein….pategi तो मुझे थोड़ी रूही को बताओगे तुम तो. आजकल उसके ज्यादा करीब हो.

रोहन को हैरानी हुई. उसे महसूस हो रहा था रूही से नजदीकी की वजह से उसकी दीदी को शायद जलन हो रही है. वो bola….aisa कुछ नहीं है. अगर कुछ भी हुआ तो मैं आपको जरूर बताऊंगा. और हाँ आपने कैसे मान लिया के मैं रूही के ज्यादा करीब हूँ. आप मेरी बड़ी बहिन हो वो छोटी. मैं शुरू से आपके साथ रहा हूँ. वो तो अभी आयी है.

मेहुल को लगा बेचारा ज्यादा hi क्लैरिफी कर रहा hai….arey तुम इतनी सफाई क्यों दे रहे हो रोहन मैं तो ऐसे hi बोल रही थी चल कोई बात नहीं पर हाँ वादा कर मुझसे के अगर कोई गर्ल फ्रेंड पतयेगा और उसके साथ कुछ झलमल होगा तो मुझे जरूर बताएगा तू.

रोहन तो क्या खुद मेहुल भी खुद पर हैरान थी के वो इतनी बोल्ड कैसे बोल gayi…rohan से हड़बड़ा कर इतना hi बोलै gaya…jjj जी दीदी.

अब तो उसे महसूस भी हो रहा था के उसे दीक्षा के बारे में बताना चाहिए या नहीं?

उसको फिर से सोचते देख मेहुल बोली. तू मुझे अपना दोस्त मानकर कुछ भी शेयर कर सकता है. कुछ किया है वो भी और अगर कुछ मन के भाव हैं तू वो भी मुझे बता सकता है.

वो मुस्कुरा कर बोली तो रोहन भी मुस्कुरा दिया और उसका हाथ पकड़कर bola…arey दीदी आपको नहीं बताऊंगा तो और किसे बताऊंगा bhala….uska स्पर्श रोहन को बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए उसने उसके हाथ को छोड़ा नहीं और मन hi मन सोचने लगा के उसको जल्द hi मेहुल को दीक्षा के बारे में बता देना चाहिए.

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रूही को अपने भाई और सहेली की ब्लू फिल्म देखने के बाद पता नहीं क्या हो गया था. हर वक्त हाथ छूट पर hi रहता. अब तो लग रहा है के जल्द hi कहीं ये लड़की किसी लड़के के निचे न पद जाये. दिन में तीन तीन बार फिंगरिंग करने लगी है. जैसे लत hi पद गयी इसे सेक्स की.

अब तो ये अपने भाई के लुंड के बारे में सोच सोचकर मुठ मारने लगी थी. उसने जब रूही को बताया के वो मेहुल के साथ जाने लगा है तो रूही को बिलकुल भी अच्छा नहीं लगा. उसका चेहरा उदास हो गया. वो उसे अब भाई काम एक तरह से दोस्त मैंने लगी थी.



तो दोस्तों इस तरह से अब दोनों बहने रोहन को अपना दोस्त मान चुकी थी. अब देखते हैं ये सिर्फ दोस्ती hi रहेगी या फिर इससे आगे भी बढ़ेगा.
 
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