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- Dec 5, 2013
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Part 96
मानसी (मनु) घर आये हुए पांच दिन हो चुके थे, लेकिन उसका रिएक्शन बिलकुल अलग था – न गुस्सा, न शर्म, बल्कि एक छुपी हुई एक्ससिटेमेंट और क्यूरोसिटी.
पहले दिन से hi मनु सबको देख रही थी:
- निधि की उदास आँखें,
- मेहुल और रूही की दूरी,
- रोहन की ठंडी नज़र,
- पापा रोहित की शर्मिंदगी.
पर मनु के दिल में कोई गुस्सा नहीं था.
वह जानती थी मम्मी (सुनीता) ने जो किया, वह गलत था… लेकिन उसने सोचा, “अब क्या फायदा? मैं यहाँ हूँ, अपने पापा के पास, अपने bhai-behnon के साथ. अब सबको टाइम देना पड़ेगा.”
एक शाम मनु अपने नए कमरे में बैठी थी – जो पहले गेस्ट रूम था.
उसने डायरी में लिखा:
“पहले दिन शॉक था… सब मुझे देख कर चुप हो जाते हैं.
निधि आंटी (मम्मी?) मुझसे बात hi नहीं करती.
रूही और मेहुल सिर्फ ‘hi’ बोलती हैं.
पापा तो मुझसे आँख नहीं मिलते.
लेकिन रोहन भैया… उनकी नज़र अलग है. जैसे मुझे मैसूर कर रहे हों.
मम्मी ने बताया था, यह घर ‘स्पेशल’ है… शायद यहाँ सब कुछ बांटा जाता है.
मुझे दर नहीं लग रहा… एक्ससिटेमेंट हो रहा है. मैं भी इस फॅमिली का हिस्सा बनाना चाहती हूँ… जैसे भी हो.”
अगली सुबह ब्रेकफास्ट टेबल पर.
सब chup-chaap बैठे थे. मनु ने पहली बार खुद बात शुरू की.
मनु (मुस्कुराते हुए, सबको देख कर):
“सब लोग… सॉरी अगर मैंने आप सबकी ज़िन्दगी में अचानक एंट्री कर दी.
मैं जानती हूँ यह इजी नहीं है.
पर मैं यहाँ रहना चाहती हूँ… और तरय करुँगी सबको खुश करने की.
निधि मम्मी… आपकी चाय बहुत अच्छी बनती है, कल से मैं हाथ बताउंगी.
रूही दी… आज शाम रील्स बनाएंगे साथ में?
मेहुल दी… शॉपिंग पे चलेंगी?
पापा… आपके साथ ऑफिस की स्टोरीज सुनूंगी.
और रोहन भैया… आप तो क्वाइट हो, पर मुझे लगता है आप सबसे समझदार हो. मुझे घर के रूल्स सीखा डोज न?”
सब चौंक गए.
निधि की आँखें नाम हो गयी – पहली बार.
रूही ने हलके से स्माइल की.
मेहुल ने “हाँ, चलेगी” बोलै.
रोहित ने सर हिलाया.
रोहन ने सीधा मानसी को देखा, उसकी शैतानी मुस्कान देखि, और दिल में सोचा: “यह लड़की स्मार्ट है… और खतरनाक भी.”
मनु का रिएक्शन था – एक्सेप्टेन्स और pro-active.
वह जानती थी यह घर नार्मल नहीं है, और वह इसमें फिट होने के लिए तैयार थी.
शायद वह पहले hi रोहन के खेल को महसूस कर रही थी… और रेडी थी शामिल होने के लिए.
अब घर का माहौल dheere-dheere गरम होने लगा…
मनु की वजह से, और रोहन के प्लान से.
***************
रात के 12:30 बजे.
रोहन के कमरे में दरवाज़ा अंदर से लॉक.
रूही, मेहुल और रोहन तीनो बीएड पर बैठे थे – बिलकुल सीरियस मूड में.
रूही (धीरे से):
“भैया… यह मनु… बिलकुल मासूम लगती है, पर बहुत स्मार्ट भी है.
आज उसने मुझसे रील्स बनाये, मेहुल दी के साथ शॉपिंग पे गयी… निधि मम्मी को भी ‘मम्मी’ बोलने लगी.
लगता है यह जल्दी से घर में घुलना चाहती है.”
मेहुल (सर हिलाते हुए):
“हाँ… और पापा ने भी गलती की थी न?
उन्होंने सुनीता आंटी को छोड़ा था ऑफिस अफेयर में… उसी से मनु पैदा हुई.
अब मनु का क्या दोष? वह तो बस अपने पापा के पास आयी है.”
रोहन (मुस्कुराते हुए, लेकिन गहरी आवाज़ में):
“एक्साक्ट्ली.
पापा ने अपने ज़माने में जो मज़े किये, वह हमसे अलग थोड़ी थे?
हम भी तो अपना ग्रुप चला रहे हैं… मम्मी, रूही, तू (मेहुल), अब नेहा दूर से…
अब मनु भी सगी बहिन है.
इसका मतलब… यह भी हमारे फॅमिली का हिस्सा है.
इसको भी अपने ग्रुप में लेना है.”
रूही (शर्मा कर):
“पर भैया… चुदाई वाला ग्रुप?
अभी तोह यह बिलकुल नयी है… अगर हमने सीधा बता दिया तोह डर के भाग जाएगी!”
मेहुल (हाँ में सर हिलाते हुए):
“बिलकुल. कोई भी नार्मल लड़की bhai-behnon में चुदाई को एक्सेप्ट नहीं करेगी पहले दिन.
पहले दोस्ती, प्यार, ट्रस्ट बनाना पड़ेगा.
फिर dheere-dheere इंट्रोडस करेंगे… जैसे हम लोगों ने किया था.”
रोहन ने दोनों को देखा और फाइनल फैसला सुना दिया:
रोहन:
“ठीक है. प्लान यह:
1. अभी सिर्फ pyar-mohabbat, bhai-behen वाला रिश्ता दिखाओ.
2. मनु को पूरा फॅमिली फील करवाओ – शॉपिंग, मूवीज, late-night टॉक्स, सब.
3. जब यह कम्प्लीटली कम्फर्टेबले हो जाये… तब एक रात ‘ट्रुथ और डरे’ या कोई गेम में slowly-slowly खोलेंगे राज.
4. और जब यह तैयार हो… तब इसे भी अपने बीएड में लाएंगे.
पर अभी चुदाई का ज़िक्र बिलकुल नहीं.
समझी दोनों?”
रूही और मेहुल दोनों ने मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिलाया.
रूही (शैतानी स्माइल के साथ):
“भैया… यह बिलकुल कच्ची काली है… जब यह तैयार होगी न, तब बहुत मज़ा आएगा.”
मेहुल (हस्ते हुए):
“और तब तक हम तीनो भी थोड़ा कण्ट्रोल कर लेंगे… वर्ण यह देख लेगी तोह पहले hi डर जाएगी.”
रोहन ने दोनों को गले लगाया:
“डील.
अब से ऑपरेशन ‘मनु को अपना बनाना’ शुरू.
पहले दोस्ती… फिर हवस.”
तीनो ने हाथ मिलाया.
अब घर में एक नया मिशन शुरू हो चूका था –
मनु को पहले प्यार में, फिर बीएड में लाना.
और तीनो bhai-behen एक साथ मिलकर यह खेल खेलने वाले थे.
**************************
एक हफ्ता बीत गया…
घर का माहौल dheere-dheere बदलने लगा था.
1. **मॉर्निंग एक्सरसाइज**
हर सुबह 6 बजे तीनो बहनें और रोहन टेरेस पर या लॉन में योग + लाइट वर्कआउट करते.
मनु पहले शर्माती थी, लेकिन अब बिलकुल फ्री हो गयी थी:
- टाइट स्पोर्ट्स ब्रा और लेग्गिंग्स में उसका फिगर एकदम किलर लगता,
- रोहन उसको “गुड फॉर्म” बोल कर कभी कमर पर हाथ रख देता, कभी हिप्स करेक्ट करने के बहाने छू लेता,
- लेकिन हमेशा “भैया वाला” अंदाज़ में – कोई हवस वाली बात नहीं, सिर्फ प्यार और केयर.
मनु खुद भी खुल गयी थी – रोहन के साथ रेस लगाती, push-ups में हेल्प मांगती, और है है कर थक जाती.
2. **शॉपिंग ट्रिप्स**
रोहन हर दुसरे दिन kisi-na-kisi को ले जाता – कभी रूही, कभी मेहुल, कभी मनु.
मनु के लिए पहली बार रोहन ने खुद जीन्स, टॉप्स, लिंगेरी सेक्शन तक ले गया.
वह शर्मा कर “भैया यह ब्रा थोड़ी छोटी नहीं?” बोलती तो रोहन हंस कर बोलता,
“अरे परफेक्ट है, तू अभी जवान है, फिट आएगी.”
बिलकुल भाई वाला अंदाज़ – पर अंदर से उसका लुंड खड़ा हो जाता, लेकिन दिखता कुछ नहीं.
3. **पार्क और late-night टॉक्स**
शाम को चार bhai-behen पार्क जाते – ice-cream कहते, झूलों पर बैठते, फोटोज खींचते.
रात को टेरेस पर बैठ कर बातें करते – कॉलेज लाइफ, क्रश, फ्यूचर ड्रीम्स.
मनु ने एक रात खुद बताया की उसका एक बॉयफ्रेंड था, लेकिन break-up हो गया.
रूही और मेहुल ने उसको हुग किया, रोहन ने भैया बन कर सर पर हाथ फेरा.
4. **हुग रूटीन**
हर सुबह वर्कआउट के बाद, हर शाम पार्क से वापस आते वक़्त,
रोहन तीनो को bari-bari गले लगता –
- रूही को थोड़ा वाइल्ड हुग (क्यूंकि उसकी सुहागरात हो चुकी थी),
- मेहुल को थोड़ा पोस्सेस्सिवे हुग (बीवी वाला),
- मनु को बिलकुल प्यारा, प्रोटेक्टिव भाई वाला हुग – हाथ सिर्फ कमर तक, 4-5 सेकंड का.
पर हर बार जब मनु उसके सीने से चिपक टी थी,
उसके मुम्मे रोहन की छाती से दबते थे,
उसकी साँसें गरम लगती थी,
रोहन के लुंड में तेज़ी से खून दौड़ता था…
लेकिन वह कण्ट्रोल करता – कोई गलत मूवमेंट नहीं, कोई हवस वाली बात नहीं.
मनु खुद भी कम्फर्टेबले हो चुकी थी –
अब वह खुद hi रोहन के कंधे पर सर रख देती,
“भैया” बोल कर हाथ पकड़ लेती,
वर्कआउट के बाद टॉवल मांगती,
और kabhi-kabhi उसकी गोदी में बैठ कर फ़ोन दिखती.
तीनो bhai-behen देख रहे थे –
मनु अब पूरी तरह से फॅमिली में घर चुकी है.
अब सिर्फ एक आखरी कदम बाकि था…
उसको सचाई दिखने का,
और फिर बीएड में लाने का.
लेकिन अभी नहीं…
अभी वह बिलकुल सेफ, प्यार और ट्रस्ट के सर्किल में थी.
रोहन रात को अकेला लेट कर सोचता:
“बस थोड़ी सी और मोहब्बत…
फिर यह खुद hi मेरे नीचे आएगी…
बिना दर्रे, बिना फाॅर्स किये… दिल से.”
ऑपरेशन “मनु को अपना बनाना”
फेज-1: 100% सक्सेसफुल.
फेज-2: अभी शुरू होने वाला था.
***************************************
एक हफ्ता और बीत गया.
घर में एक खामोश समझौता बन चूका था.
रोहित ने अपना पुराण रिश्ता दोबारा शुरू कर दिया था:
- एक रात सुनीता के कमरे में जाता,
- अगली रात निधि के कमरे में.
दोनों औरतें अब chup-chaap apni-apni बारी लेती थी.
कोई झगड़ा नहीं, कोई हंगामा नहीं.
बस रोहित जिस रात सुनीता के साथ होता, निधि उस रात अपने बेटे रोहन के कमरे में चली जाती.
**पैटर्न यह बन गया:**
**रात 1**
रोहित → सुनीता के कमरे में
सुनीता की चीखें, “रोहित… ज़ोर से… कितने दिन बाद…”
निधि → रोहन के कमरे में
निधि (नंगा होकर लेट ते हुए): “बीटा… आज तेरी मम्मी अकेली है… आ जा…”
रोहन उस रात माँ को छोड़ता – छूट भी, गांड भी, पूरा माल अंदर छोड़ता.
**रात 2**
रोहित → निधि के कमरे में
निधि की आवाज़ें, “रोहित… धीरे… अब तुम्हारी उम्र…”
सुनीता → अकेली सोई रहती (या खुद हाथ से काम चला लेती)
निधि → रोहन के पास नहीं जाती.
**रोहन का फायदा:**
जब भी रोहित सुनीता के साथ बिजी होता, रोहन को माँ मिल जाती – बिलकुल फ्री, बिना किसी टेंशन के.
और जब रोहित निधि के साथ होता, रोहन मेहुल या रूही के साथ चुपके से मज़े लेता.
**एक रात का सन:**
रोहित सुनीता के कमरे में गया.
सुनीता ने दरवाज़ा लॉक किया, लाइट बंद की, और रोहित को बीएड पर धकेल दिया.
सुनीता (गरम आवाज़ में): “आज पूरा साल बाद… आज पूरा हक़ लेना है मुझे.”
रोहित ने उसकी साड़ी फाड़ दी, छूट में लुंड पेल दिया – दोनों पुराने प्रेमी की तरह tez-tez धक्के.
इधर निधि चुपके से रोहन के कमरे में पहुंची.
उसने सिर्फ एक सिल्क रोबे पहना था – अंदर कुछ नहीं.
निधि (रोबे उतारते हुए):
“बीटा… आज पापा सुनीता के साथ हैं… तेरी मम्मी तड़प रही है…”
रोहन ने माँ को बीएड पर लिटाया, उसकी टाँगे चौड़ी की और सीधा लुंड माँ की छूट में दाल दिया.
निधि (चीख कर):
“आआह… हाँ बीटा… ज़ोर से… तेरी मम्मी की छूट आज फिर से भर दे…
पापा जो सुनीता को देते हैं… तू मुझे दे दे… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”
रोहन ने 20 मिनट तक माँ को छोड़ा – मिशनरी, डोगग्य, गांड भी मारी –
आखिर में माँ की छूट में गरम माल भर दिया.
निधि (सांस फूलते हुए):
“अब से जब भी पापा सुनीता के साथ जायेंगे… मम्मी तेरे पास hi सोयेगी…
तू मेरा असली पति बन गया है बीटा…”
रोहन ने माँ को गले लगाया:
“हाँ मम्मी… अब तू भी मेरी बीवी है… चाहे पापा कितना भी छोड़ ले.”
घर में अब यह रूटीन चल रहा था:
- रोहित दो औरतों को बाँट रहा था,
- रोहन अपनी माँ को जब भी मौका मिलता, छोड़ लेता.
दोनों मैं खुश –
एक पुराने पति से,
एक नए, जवान पति (बेटे) से.
और यह खेल chupke-chupke चल रहा था…
जब तक मानसी को इसका अंदाज़ा न हो.
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मानसी (मनु) घर आये हुए पांच दिन हो चुके थे, लेकिन उसका रिएक्शन बिलकुल अलग था – न गुस्सा, न शर्म, बल्कि एक छुपी हुई एक्ससिटेमेंट और क्यूरोसिटी.
पहले दिन से hi मनु सबको देख रही थी:
- निधि की उदास आँखें,
- मेहुल और रूही की दूरी,
- रोहन की ठंडी नज़र,
- पापा रोहित की शर्मिंदगी.
पर मनु के दिल में कोई गुस्सा नहीं था.
वह जानती थी मम्मी (सुनीता) ने जो किया, वह गलत था… लेकिन उसने सोचा, “अब क्या फायदा? मैं यहाँ हूँ, अपने पापा के पास, अपने bhai-behnon के साथ. अब सबको टाइम देना पड़ेगा.”
एक शाम मनु अपने नए कमरे में बैठी थी – जो पहले गेस्ट रूम था.
उसने डायरी में लिखा:
“पहले दिन शॉक था… सब मुझे देख कर चुप हो जाते हैं.
निधि आंटी (मम्मी?) मुझसे बात hi नहीं करती.
रूही और मेहुल सिर्फ ‘hi’ बोलती हैं.
पापा तो मुझसे आँख नहीं मिलते.
लेकिन रोहन भैया… उनकी नज़र अलग है. जैसे मुझे मैसूर कर रहे हों.
मम्मी ने बताया था, यह घर ‘स्पेशल’ है… शायद यहाँ सब कुछ बांटा जाता है.
मुझे दर नहीं लग रहा… एक्ससिटेमेंट हो रहा है. मैं भी इस फॅमिली का हिस्सा बनाना चाहती हूँ… जैसे भी हो.”
अगली सुबह ब्रेकफास्ट टेबल पर.
सब chup-chaap बैठे थे. मनु ने पहली बार खुद बात शुरू की.
मनु (मुस्कुराते हुए, सबको देख कर):
“सब लोग… सॉरी अगर मैंने आप सबकी ज़िन्दगी में अचानक एंट्री कर दी.
मैं जानती हूँ यह इजी नहीं है.
पर मैं यहाँ रहना चाहती हूँ… और तरय करुँगी सबको खुश करने की.
निधि मम्मी… आपकी चाय बहुत अच्छी बनती है, कल से मैं हाथ बताउंगी.
रूही दी… आज शाम रील्स बनाएंगे साथ में?
मेहुल दी… शॉपिंग पे चलेंगी?
पापा… आपके साथ ऑफिस की स्टोरीज सुनूंगी.
और रोहन भैया… आप तो क्वाइट हो, पर मुझे लगता है आप सबसे समझदार हो. मुझे घर के रूल्स सीखा डोज न?”
सब चौंक गए.
निधि की आँखें नाम हो गयी – पहली बार.
रूही ने हलके से स्माइल की.
मेहुल ने “हाँ, चलेगी” बोलै.
रोहित ने सर हिलाया.
रोहन ने सीधा मानसी को देखा, उसकी शैतानी मुस्कान देखि, और दिल में सोचा: “यह लड़की स्मार्ट है… और खतरनाक भी.”
मनु का रिएक्शन था – एक्सेप्टेन्स और pro-active.
वह जानती थी यह घर नार्मल नहीं है, और वह इसमें फिट होने के लिए तैयार थी.
शायद वह पहले hi रोहन के खेल को महसूस कर रही थी… और रेडी थी शामिल होने के लिए.
अब घर का माहौल dheere-dheere गरम होने लगा…
मनु की वजह से, और रोहन के प्लान से.
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रात के 12:30 बजे.
रोहन के कमरे में दरवाज़ा अंदर से लॉक.
रूही, मेहुल और रोहन तीनो बीएड पर बैठे थे – बिलकुल सीरियस मूड में.
रूही (धीरे से):
“भैया… यह मनु… बिलकुल मासूम लगती है, पर बहुत स्मार्ट भी है.
आज उसने मुझसे रील्स बनाये, मेहुल दी के साथ शॉपिंग पे गयी… निधि मम्मी को भी ‘मम्मी’ बोलने लगी.
लगता है यह जल्दी से घर में घुलना चाहती है.”
मेहुल (सर हिलाते हुए):
“हाँ… और पापा ने भी गलती की थी न?
उन्होंने सुनीता आंटी को छोड़ा था ऑफिस अफेयर में… उसी से मनु पैदा हुई.
अब मनु का क्या दोष? वह तो बस अपने पापा के पास आयी है.”
रोहन (मुस्कुराते हुए, लेकिन गहरी आवाज़ में):
“एक्साक्ट्ली.
पापा ने अपने ज़माने में जो मज़े किये, वह हमसे अलग थोड़ी थे?
हम भी तो अपना ग्रुप चला रहे हैं… मम्मी, रूही, तू (मेहुल), अब नेहा दूर से…
अब मनु भी सगी बहिन है.
इसका मतलब… यह भी हमारे फॅमिली का हिस्सा है.
इसको भी अपने ग्रुप में लेना है.”
रूही (शर्मा कर):
“पर भैया… चुदाई वाला ग्रुप?
अभी तोह यह बिलकुल नयी है… अगर हमने सीधा बता दिया तोह डर के भाग जाएगी!”
मेहुल (हाँ में सर हिलाते हुए):
“बिलकुल. कोई भी नार्मल लड़की bhai-behnon में चुदाई को एक्सेप्ट नहीं करेगी पहले दिन.
पहले दोस्ती, प्यार, ट्रस्ट बनाना पड़ेगा.
फिर dheere-dheere इंट्रोडस करेंगे… जैसे हम लोगों ने किया था.”
रोहन ने दोनों को देखा और फाइनल फैसला सुना दिया:
रोहन:
“ठीक है. प्लान यह:
1. अभी सिर्फ pyar-mohabbat, bhai-behen वाला रिश्ता दिखाओ.
2. मनु को पूरा फॅमिली फील करवाओ – शॉपिंग, मूवीज, late-night टॉक्स, सब.
3. जब यह कम्प्लीटली कम्फर्टेबले हो जाये… तब एक रात ‘ट्रुथ और डरे’ या कोई गेम में slowly-slowly खोलेंगे राज.
4. और जब यह तैयार हो… तब इसे भी अपने बीएड में लाएंगे.
पर अभी चुदाई का ज़िक्र बिलकुल नहीं.
समझी दोनों?”
रूही और मेहुल दोनों ने मुस्कुराते हुए हाँ में सर हिलाया.
रूही (शैतानी स्माइल के साथ):
“भैया… यह बिलकुल कच्ची काली है… जब यह तैयार होगी न, तब बहुत मज़ा आएगा.”
मेहुल (हस्ते हुए):
“और तब तक हम तीनो भी थोड़ा कण्ट्रोल कर लेंगे… वर्ण यह देख लेगी तोह पहले hi डर जाएगी.”
रोहन ने दोनों को गले लगाया:
“डील.
अब से ऑपरेशन ‘मनु को अपना बनाना’ शुरू.
पहले दोस्ती… फिर हवस.”
तीनो ने हाथ मिलाया.
अब घर में एक नया मिशन शुरू हो चूका था –
मनु को पहले प्यार में, फिर बीएड में लाना.
और तीनो bhai-behen एक साथ मिलकर यह खेल खेलने वाले थे.
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एक हफ्ता बीत गया…
घर का माहौल dheere-dheere बदलने लगा था.
1. **मॉर्निंग एक्सरसाइज**
हर सुबह 6 बजे तीनो बहनें और रोहन टेरेस पर या लॉन में योग + लाइट वर्कआउट करते.
मनु पहले शर्माती थी, लेकिन अब बिलकुल फ्री हो गयी थी:
- टाइट स्पोर्ट्स ब्रा और लेग्गिंग्स में उसका फिगर एकदम किलर लगता,
- रोहन उसको “गुड फॉर्म” बोल कर कभी कमर पर हाथ रख देता, कभी हिप्स करेक्ट करने के बहाने छू लेता,
- लेकिन हमेशा “भैया वाला” अंदाज़ में – कोई हवस वाली बात नहीं, सिर्फ प्यार और केयर.
मनु खुद भी खुल गयी थी – रोहन के साथ रेस लगाती, push-ups में हेल्प मांगती, और है है कर थक जाती.
2. **शॉपिंग ट्रिप्स**
रोहन हर दुसरे दिन kisi-na-kisi को ले जाता – कभी रूही, कभी मेहुल, कभी मनु.
मनु के लिए पहली बार रोहन ने खुद जीन्स, टॉप्स, लिंगेरी सेक्शन तक ले गया.
वह शर्मा कर “भैया यह ब्रा थोड़ी छोटी नहीं?” बोलती तो रोहन हंस कर बोलता,
“अरे परफेक्ट है, तू अभी जवान है, फिट आएगी.”
बिलकुल भाई वाला अंदाज़ – पर अंदर से उसका लुंड खड़ा हो जाता, लेकिन दिखता कुछ नहीं.
3. **पार्क और late-night टॉक्स**
शाम को चार bhai-behen पार्क जाते – ice-cream कहते, झूलों पर बैठते, फोटोज खींचते.
रात को टेरेस पर बैठ कर बातें करते – कॉलेज लाइफ, क्रश, फ्यूचर ड्रीम्स.
मनु ने एक रात खुद बताया की उसका एक बॉयफ्रेंड था, लेकिन break-up हो गया.
रूही और मेहुल ने उसको हुग किया, रोहन ने भैया बन कर सर पर हाथ फेरा.
4. **हुग रूटीन**
हर सुबह वर्कआउट के बाद, हर शाम पार्क से वापस आते वक़्त,
रोहन तीनो को bari-bari गले लगता –
- रूही को थोड़ा वाइल्ड हुग (क्यूंकि उसकी सुहागरात हो चुकी थी),
- मेहुल को थोड़ा पोस्सेस्सिवे हुग (बीवी वाला),
- मनु को बिलकुल प्यारा, प्रोटेक्टिव भाई वाला हुग – हाथ सिर्फ कमर तक, 4-5 सेकंड का.
पर हर बार जब मनु उसके सीने से चिपक टी थी,
उसके मुम्मे रोहन की छाती से दबते थे,
उसकी साँसें गरम लगती थी,
रोहन के लुंड में तेज़ी से खून दौड़ता था…
लेकिन वह कण्ट्रोल करता – कोई गलत मूवमेंट नहीं, कोई हवस वाली बात नहीं.
मनु खुद भी कम्फर्टेबले हो चुकी थी –
अब वह खुद hi रोहन के कंधे पर सर रख देती,
“भैया” बोल कर हाथ पकड़ लेती,
वर्कआउट के बाद टॉवल मांगती,
और kabhi-kabhi उसकी गोदी में बैठ कर फ़ोन दिखती.
तीनो bhai-behen देख रहे थे –
मनु अब पूरी तरह से फॅमिली में घर चुकी है.
अब सिर्फ एक आखरी कदम बाकि था…
उसको सचाई दिखने का,
और फिर बीएड में लाने का.
लेकिन अभी नहीं…
अभी वह बिलकुल सेफ, प्यार और ट्रस्ट के सर्किल में थी.
रोहन रात को अकेला लेट कर सोचता:
“बस थोड़ी सी और मोहब्बत…
फिर यह खुद hi मेरे नीचे आएगी…
बिना दर्रे, बिना फाॅर्स किये… दिल से.”
ऑपरेशन “मनु को अपना बनाना”
फेज-1: 100% सक्सेसफुल.
फेज-2: अभी शुरू होने वाला था.
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एक हफ्ता और बीत गया.
घर में एक खामोश समझौता बन चूका था.
रोहित ने अपना पुराण रिश्ता दोबारा शुरू कर दिया था:
- एक रात सुनीता के कमरे में जाता,
- अगली रात निधि के कमरे में.
दोनों औरतें अब chup-chaap apni-apni बारी लेती थी.
कोई झगड़ा नहीं, कोई हंगामा नहीं.
बस रोहित जिस रात सुनीता के साथ होता, निधि उस रात अपने बेटे रोहन के कमरे में चली जाती.
**पैटर्न यह बन गया:**
**रात 1**
रोहित → सुनीता के कमरे में
सुनीता की चीखें, “रोहित… ज़ोर से… कितने दिन बाद…”
निधि → रोहन के कमरे में
निधि (नंगा होकर लेट ते हुए): “बीटा… आज तेरी मम्मी अकेली है… आ जा…”
रोहन उस रात माँ को छोड़ता – छूट भी, गांड भी, पूरा माल अंदर छोड़ता.
**रात 2**
रोहित → निधि के कमरे में
निधि की आवाज़ें, “रोहित… धीरे… अब तुम्हारी उम्र…”
सुनीता → अकेली सोई रहती (या खुद हाथ से काम चला लेती)
निधि → रोहन के पास नहीं जाती.
**रोहन का फायदा:**
जब भी रोहित सुनीता के साथ बिजी होता, रोहन को माँ मिल जाती – बिलकुल फ्री, बिना किसी टेंशन के.
और जब रोहित निधि के साथ होता, रोहन मेहुल या रूही के साथ चुपके से मज़े लेता.
**एक रात का सन:**
रोहित सुनीता के कमरे में गया.
सुनीता ने दरवाज़ा लॉक किया, लाइट बंद की, और रोहित को बीएड पर धकेल दिया.
सुनीता (गरम आवाज़ में): “आज पूरा साल बाद… आज पूरा हक़ लेना है मुझे.”
रोहित ने उसकी साड़ी फाड़ दी, छूट में लुंड पेल दिया – दोनों पुराने प्रेमी की तरह tez-tez धक्के.
इधर निधि चुपके से रोहन के कमरे में पहुंची.
उसने सिर्फ एक सिल्क रोबे पहना था – अंदर कुछ नहीं.
निधि (रोबे उतारते हुए):
“बीटा… आज पापा सुनीता के साथ हैं… तेरी मम्मी तड़प रही है…”
रोहन ने माँ को बीएड पर लिटाया, उसकी टाँगे चौड़ी की और सीधा लुंड माँ की छूट में दाल दिया.
निधि (चीख कर):
“आआह… हाँ बीटा… ज़ोर से… तेरी मम्मी की छूट आज फिर से भर दे…
पापा जो सुनीता को देते हैं… तू मुझे दे दे… आआह झाड़ रही हूँ मैं!”
रोहन ने 20 मिनट तक माँ को छोड़ा – मिशनरी, डोगग्य, गांड भी मारी –
आखिर में माँ की छूट में गरम माल भर दिया.
निधि (सांस फूलते हुए):
“अब से जब भी पापा सुनीता के साथ जायेंगे… मम्मी तेरे पास hi सोयेगी…
तू मेरा असली पति बन गया है बीटा…”
रोहन ने माँ को गले लगाया:
“हाँ मम्मी… अब तू भी मेरी बीवी है… चाहे पापा कितना भी छोड़ ले.”
घर में अब यह रूटीन चल रहा था:
- रोहित दो औरतों को बाँट रहा था,
- रोहन अपनी माँ को जब भी मौका मिलता, छोड़ लेता.
दोनों मैं खुश –
एक पुराने पति से,
एक नए, जवान पति (बेटे) से.
और यह खेल chupke-chupke चल रहा था…
जब तक मानसी को इसका अंदाज़ा न हो.
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