अपडेट-2
ये ह ह्रदय थे खिलाडी बॉय के नाम से फेमस, अंजलि और तुषार का बीटा,
ह्रदय पुरे डिस्ट्रिक्ट में खिलाडी बॉय के नाम से फेमस ह, बेचारा सेमि एक मुक्का नहीं झेल पाया और बेहोश हो गया, नाकआउट में ह्रदय को विजेता घोषित क्र दिया गया, स्टूडेंट्स ने रिंग में कूद क्र ह्रदय को कंधे पैर उठा लिया,
तभी अनाउसमेंट हुई, ह्रदय की इस जीत के साथ J.S.S कॉलेज ने 20 गेम्स की प्रतियोगता में से 19 गेम जीत लिए हैं, स्टूडेंट्स ने शोर मचाना शुरू क्र दिया, तभी अनूस करने वाले ने बोलै
रुकिए रुकिए रुकिए इसके आगे तो सुन लो पहले सब शांत हो गए,
अनाउसमेंट- इन 19 गेम में से 15 गेम अकेले ह्रदय ने गोल्ड मॉडल के साथ जीते हैं,
बस फिर तो पूरा शोर मचने लगा, बाकि आये हुए कॉलेज के स्टूडेंट्स भी हैरत में थे कोई लड़का इतने गेम कैसे जीत सकता ह, दूसरे कॉलेज की लड़किया तो ह्रदय को देखने के लिए बावली हुई जा रही थी, एक तो सादे 6 फीता नौजवान लड़का उसका बदन किसी पत्थर जैसा था, बाजुओं की मछलिया किसी का भी मन मोह ले, उसकी आँखे बहुत नशीली थी, उसकी चल किसी शेर जैसी थी, ताकत हाथियों जैसी,
लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी शराफत इतनी की किसी से कभी ुचि आवाज में बात तक नहीं करता था, हसने बोलने वाला, लड़कियों से दूर रहने वाला एक दम बिंदास था,
जब वो सत्गे पैर अवार्ड्स लेने आया तो लड़किया उसकी फोटो लेने लगी, स्टेज से निचे आते hi लड़किया उससे उसका नंबर मांगने लगी, कुछ ने तो अपना नंबर पेपर पैर लिख क्र उसके सामान में रख दिया,
उसके कॉलेज के लड़के लड़किया सबकी हरकत देख क्र बस है रहे थे, क्योकि वो जानते थे की जब पुरे डिस्ट्रिक्ट की लड़किया इस लड़के को इम्प्रेस नहीं क्र सकीय तो ये सब क्या कर लेंगी.
भीड़ में लड़के ह्रदय को उठा क्र चारो तरफ घूमने लगे, शाम को जब ह्रदय अपनी बाइक पैर वापस घर आया तो उसकी माँ दीपा सामने एक हाथ में थाली और दूसरे हाथ में डंडा लिए कड़ी थी,
ह्रदय – माँ ये सब क्या ह
दीपा- पहले ये बता 7 दिन से कॉलेज में ह तू तुझे अपनी माँ की याद नहीं आती,
ह्रदय- माँ आप जानती न कॉलेज में गेम्स थे,
दीपा- जानती हु इसीलिए कुछ नहीं बोल रही हु,
ह्रदय- फिर ये सब क्यों
दीपा- तूने कितने गेम्स में part लिया और कितने जीता, अगर तेरा जवाब मुझे पसंद आया तो आरती उतरेगी नहीं तो इस डंडे से खाल उतरेगी,
ह्रदय- माँ आपने मुझे क्या बनाया ह, जैसा बनाया ह वैसा hi रिजल्ट भी मिलेगा, मैंने 15 गेम्स में part लिया और 15 में hi जीता हु, वो देखिये बाइक पैर साडी शील्ड बंधी हुई हैं, हमारे कॉलेज में 20 में से 19 गेम जीते हैं
दीपा- बाकि 5 में तूने क्यों नहीं लिया part
ह्रदय- माँ वो डांस, सिंगिंग, kho-kho, कैरम, और नाटक के गेम थे, ये सब मुझे अच्छे नहीं लगते,
दीपा- ठीक ह ठीक ह वैसे तू इनमे भी part लेता तो जरूर जीत जाता
ह्रदय- माँ किसी और को भी तो मौका मिलना चाहिए न
दीपा- हहहहह सही ह, अब आजा तेरी आरती तो उतर लू
दीपा ह्रदय की आरती उतरने लगी और उसकी बलैया लेने लगी, फिर ह्रदय दीपा से लिपट गया,
ह्रदय- माँ बहुत भूक लगी ह, पिछले 7 दिन से भूखा हु
Deepa-hey राम ये क्या किया तूने
ह्रदय- माँ तुम जानती हो मैं सिर्फ तुम्हारे हाथ का खाना खता हु, वह मुझे खाना देने वाला कोण था,
दीपा- ये तूने क्या किया ऐसा नहीं करना छाइये था, हे मेरी बूढी कहा चली गई थी, मुझे ख्याल रखना चाहिए थे, मुझे माफ़ क्र दे मेरे बच्चे ये कितनी बड़ी गलती हो गई मुझसे,
ह्रदय- माँ माँ माँ तुम क्यों परेशां होती हो, मैं पहले भी महीनो तक भूका रहा हु, ये 7 दिन क्या मायने रखते हैं,
दीपा- वो तेरे विद्या के लिए थे लेकिन ये अलग थे ये मेरी गलती ह, तू 7 दिन भूका रह क्र खेलता रहा, तूने मेरा सर गर्व से ुचा क्र दिया
ह्रदय- माँ गर्व से तो उड़ दिन ुचा होगा जिस दिन मैं तुम्हारा सपना पूरा कर दूंगा
दीपा- अब तू तैयार ह बेटे, अब समय आ गया ह तेरे बहार निकलने का,
ह्रदय- मुझे कॉलेज की तरफ से अलग अलग स्टेट में भेजा जायेगा गेम्स के लिए,
दीपा- बहुत बढ़िया, तुझे सभी जगह जीतना होगा और अपना नाम इतना बड़ा करना होगा की पूरी दुनिया देखे,
ह्रदय- जरूर माँ,
दीपा खाना लेकर आ गई,
दीपा- और है पहले तू मेरी कसम खा आज के बाद ऐसा नहीं करेगा, अब तू बहार जायेगा तो मैं हर जगह तेरे साथ तो नहीं जाउंगी, तो क्या तू सब जगह भूखा रहेगा,
ह्रदय- माँ मेरी भूक hi नहीं मिटेगी,
दीपा- बीटा अब तेरी मंजिल के समाने ये भूक नहीं आ सकती, अब तुझे ीे अपने काबू में करना होगा,
ह्रदय- माँ भूक तो मैं काबू में कर लूंगा लेकिन जीभ का क्या करू जिसे तुम्हारे खाने के अलावा कोई खाना पसंद hi नहीं आता,
दीपा- ठीक ह किसी के हाथ का मत खाना लेकिन और भी तो तरीके ह खाने के, कुछ भी खा सकता ह, पेट भरने के लिए सब करना पड़ता ह,
ह्रदय- ठीक ह माँ मैं कोशिश करूँगा, और वडा करता हु भूका नहीं रहूँगा,
ह्रदय खाना खाने लगा दीपा उसके पास बैठ क्र उसे निहारने लगी,
ह्रदय- माँ कॉलेज वाले बस आने जाने का खर्चा देंगे वह मुझे hi खर्च करना पड़ेगा, जो खाना वो देते हैं वो तो मैं खा नहीं पाउँगा
दीपा- तू पैसो की चिंता मत कर, जितने चाहिए उतने ले लेना, तू बस अपनी मंजिल के बारे में सोच पैसो के बारे में नहीं,
ह्रदय- तुमने कभी पैसो की फ़िक्र करने hi नहीं दी, बस ये नहीं बताती इतना पैसा आता कहा से हैं
दीपा- तेरे पिता इतनी दौलत देकर गए ह किट ु साडी जिंदगी खर्च करना चाहेगा तब भी खर्च नहीं कर पायेगा
ह्रदय- फिर हम यहाँ एक मिडिल क्लास परिवारों की तरह क्यों रहते हैं,
दीपा- क्योकि मुझे ऐसे अच्छा लगता ह, वो रहिसो वाली जिंदगी मुझे पसंद नहीं ह, इसमें सकूं ह, सच्चे लोग मिलते हैं, सब लोग बात करते हैं, रहीश बन क्र बैठ जाओ और अपने स्टैंडर्ड के लोग ढूंढ़ते रहो, वो लोग घमंड में ठीक से बात भी नहीं करते,
ह्रदय- तुम भी कमल हो माँ, दुनिया कितनी आगे बढ़ चुकी ह और तुम मेरी भोली माँ आज भी वैसी hi हो,
दीपा- मेरी छोड़ बस तू मत बदल जाना,
ह्रदय- मुझे बदल सके इतना ज़माने में दम नहीं, जमाना हम से ह हम जामने से नहीं
दीपा- ओहो अपनी माँ के सामने डायलॉग मरता ह, उस दिन देखूंगी जब तेरी जिंदगी में कोई लड़की आएगी
ह्रदय- हहहह लड़की माँ ऐसी लड़की बानी hi नहीं जो आपके बेटे की लंगोट को ढीला कर सके,
दीपा- शाबाश बेटे, लेकिन अगर तेरी जिंदगी में कभी कोई आये तो अपनी माँ से मत छिपाना, तू जनता ह मैंने तुझे ऐसा पला ह की हमारे बिच कुछ छिपा न रह सके,
ह्रदय दीपा की गॉड में लेट गया- जनता हु माँ आप फ़िक्र मत कीजिये ऐसा कभी नहीं होगा,
खाना खा क्र ह्रदय वही दीपा की गोद में सर रख लेता लेता hi सो गया, दीपा उसका सर सहलाती रही, और उसे निहारती रही, फिर अपनी यादो में खो गई,
दीपा ( मन में)- माँ मैंने अपना वडा पूरा कर दिया ह्रदय को ऐसा महाबली बनाया ह की पूरी दुनिया मिलकर भी इसे नहीं झुका सकती, लेकिन इसका मन बहुत कोमल ह, उसमे जरा भी चल कपट नहीं ह, ये दुनिया की ताकत से लड़ सकता ह लेकिन चल कपट से लड़ना मैं नहीं सीखा पाई, जितना सीखा सकती थी सीखा दिया, अब इसकी हिम्मत और हमारी किस्मत ह,
इधर रेटाइरेड कमिश्नर मंत्री के सामने बैठा था, ये थे नंदनी के पिता अब वो मंत्री नहीं थे लेकिन लोग उन्हें अब भी मंत्री जी hi बोलते थे,
कमिश्स्नोर संजय कुमार- कैसे हैं मंत्री जी,
मंत्री राज प्रताप- बस अपने जीवन के अंतिम दिन गुजर रहा हु,
संजय – आप परेशां लग रहे हैं,
राज प्रताप- क्या करू साडी जवानी राजनीती में गुजर दी, बच्चे हुए नहीं जब मेरी बेटी पैदा हुई तो मेरी उम्र बहुत हो चुकी थी, बीटा कोई हुआ नहीं, सोचा था बेटी बड़ी होकर राजनीती में आएगी लेकिन वो सब छोड़ क्र अमेरिका चली गई, तब से आज तक वापस नहीं आई ह, बस उसके अकाउंट में पैसे भेज क्र खुद को तसली दे देता हु, अब मेरी उम्र हो चुकी ह, न जाने कब तक बच्चू,
संजय कुमार- आपको पता तो ह आपकी बेटी कहा ह, लेकिन मैं तो जनता तक नहीं मेरी बेटी कोमल कहा ह, वो तो मुझे छोड़ क्र ऐसे गई जैसे इस दुनिया में हो hi न,
राज प्रताप- इसमें हम दोनों की hi गलती ह, हमने अपने बच्चो को सही शिक्षा नहीं दी, और जिसने उन्हें शिक्षा दी वो hi इस दुनिया में नहीं ह,
संजय कुमार- लेकिन उसके परिवार वालो ने आज तक हार नहीं मणि उसे उसे मारा हुआ नहीं मानते, वो आज भी ढूंढ़ने में लगे हैं,
राज प्रताप- ढूंढ तो हम भी रहे हैं लेकिन कोई सफलता नहीं मिली,
राज प्रताप खस्ने लगा उसके मुँह से खून आने लगा,
संजय कुमार- आपकी तबियत बिगड़ रही ह, चलिए हॉस्पिटल चलिए,
राज प्रताप- कोई फायदा नहीं ह संजय ये मेरा अंतिम समय ह मैं ऐसे hi शांति से काटना चाहता हु,
संजय- ये आप क्या बोल रहे हैं
राज प्रताप- है संजय मुझे ब्लड कैंसर ह, और लास्ट सत्गे पैर ह, कभी भी बुलावा आ सकता ह, बस एक बार अपनी बेटी को देखने की इच्छा थी शायद वो भी पूरी नहीं हो पायेगी,
संजय- मैं कोशिश करता हु आपको तो आपकी बेटी से मिला सकू,
संजय ने फ़ोन उठाया और किसी को मिलाया, पुलिस का कमिश्नर रह चुक्का ह तो इन मामलो में काफी जानकारी थी और पहचान भी थी,
शाम का समय ह्रदय घर से बहार निकला, आस पास के जीतनेय भी परिवार रहते थे सब ह्रदय को देख क्र खुश होते हुए उसके पास मिलने आ गए,
ह्रदय पुरे इलाके का चाहता था, लड़कियों के दिलो में तो वो राज करता था लेकिन ह्रदय ने कभी किसी लड़की को नजर उठा क्र नहीं देखा था, सभी परिवार जानते थे की उनकी बेटियों के दिल में ह्रदय बस्ता ह, लेकिन उन्हें ये भी पता था की ह्रदय उन्हें कभी गलत नजर से नहीं देखता,
यहाँ तो इस बात पैर आपस में मन मुटाव तक बन गया था परिवारों में, सब ये hi सोचते की ह्रदय उनकी बेटी को पसंद क्र ले, पूरी दुनिया में ह्रदय जैसा सूंदर स्मार्ट ताकतवर और शरीफ लड़का मिलना नामुमकिन सा था उनके लिए,
ह्रदय को पहाड़ो की शांति बहुत पसंद थी, वो जब भी मौका मिलता पहाड़ो में बर्फ में लेट जाता और बहुत बहुत देर तक लेता रहता, ह्रदय की सबसे खास बात थी की उसे ठण्ड नहीं लगती थी, उसका बदन हमेशा गरम रहता था, गरम इलाके में जाने पैर उसका बदन पसीने से भीगा रहता, बर्फ में hi उसे रहत मिलती थी,
जब दीपा यहाँ बसी थी या ये कहे अंजलि ने ये घर बनवाया था तब बहुत hi काम लोग यहाँ रहते थे, मुश्किल से 4-5 परिवार वो भी थोड़े निचे, लेकिन पिछले 19 साल में यहाँ बहुत से परिवार आ बेस थे, और दीपा यहाँ सबसे पुराणी थी तो उसका सम्मान भी वैसा hi था, अब भी 50 परिवार hi थे यहाँ पैर, वो भी कोई बहुत पैसे वाले नहीं, दीपा hi सबसे सम्पन थी यहाँ पैर,
इनका घर भी सबसे उप्पेर था, उस जगह घर बनाने के लिए बहुत मसकत करनी पड़ती ह ये सब जानते थे, वह परमिशन भी नहीं मिलती घर बनाना की, अगर दीपा का घर वह ह तो सब जानते थे उसकी पहुंच भी बहुत उप्पेर तक रही होगी,
इसलिए दीपा के सम्मान में कोई कमी नहीं थी, इसके उल्टा दीपा सबसे इतनी शालीनता से रहती जैसे वो उनमे से hi एक हो, कोई घनाद नहीं कोई दिखावा नहीं, सबकी हेल्प करती सबका सम्मान करती,
ह्रदय बर्फ में लेता हुआ अपने hi खयालो में खोया हुआ था, एक दम शांत आसमान को देख रहा था, अँधेरा होने लगा था, पहाड़ो में अँधेरा एक दम हो जाता ह, तभी ह्रदय को कुछ आहत सुनाई दी वो एक दम सतर्क हो गया, वो तुरंत उठ क्र बैठ गया और इधर उधर देखने लगा, लेकिन कुछ दिखाई नहीं दिया,
ह्रदय फिर से शांत हो क्र आहात को सुनने लगा, उसे फिर से आहत सुनाई दी तो वो तुरंत उस आहत की तरफ तेज कदमो से बढ़ने लगा, वो आहात के पास पंहुचा लेकिन वह उसे कुछ नहीं दिखा, वो आगे बढ़ा लेकिन एक दम सनता था,
तभी ह्रदय की नजर दो आँखों पैर पड़ी जिनमे एक रौशनी सी दिखाई दी, एक बार तो ह्रदय चौंक गया, लेकिन अगले hi पल उसे लगा वो कोई जानवर ह शेर या भेड़िया हो सकता ह, क्यों किसी जानवर को परेशां करू ये सोच क्र ह्रदय वापस मुद गया और निचे की तरफ चला आया, और सभी को इन्फॉर्म क्र दिया की रात में बहार न निकले कोई जानवर घूम रहा ह उप्पेर,
ह्रदय अपने रूम में गया और लेट गया, मोबाइल निकल क्र कुछ देखने लगा की अचानक खड़ा हो गया,
ह्रदय (खुद से hi)- वो जानवर वो तो मुझसे बहुत दूर था, लेकिन आहात तो मेरे बहुत नजदीक से आई थी, और कोई जानवर इतने करीब आकर वापस क्यों जायेगा, वो जानवर मेरी तरफ तो देख hi नहीं रहा था, मतलब वह कोई और भी था, इस टाइम वह कोण आएगा और छुपेगा क्यों,
ह्रदय तुरंत घर के बहार की तरफ चलने लगा तो दीपा ने रोक लिया
दीपा- कहा जा रहा ह, अभी तो आया ह फिर चल दिया,
ह्रदय- माँ कुछ याद आ गया आता हु
दीपा- नहीं कही नहीं जायेगा यही बैठ मैं खाना ला रही हु खाना खा ले, और तूने hi कहा न बहार कोई जानवर घूम रहा ह, फिर क्यों जा रहा ह,
ह्रदय- माँ तुम जानती हो ये जानवर मेरा कुछ नहीं क्र सकते,
दीपा- मैं तेरी फ़िक्र नहीं कर रही उस जानवर की कर रही हु, उस बेचारे की माँ उसके लिए परेशां हो जाएगी, तू चुप चाप यही बैठ और खाना खा,
ह्रदय रुक गया सोचा कल सुबह देखूंगा,
दोनों माँ बेटो ने एक साथ बैठ क्र खाना खाया और अपने अपने रूम में लेट गए,
ह्रदय मोबाइल चलने लगा,
आज कल सभी सोशल मीडिया वेबसाइट पैर रॉल्स का बड़ा बोल बाला था, हर कोई अपनी वीडियोस बनाने में लगा हुआ था, फेमस होने के लिए लकडिया नंगी होकर वीडियोस बना रही थी, गोवत. ने सरे रूल हटा दिए थे, लड़कियों को इतनी आजादी मिल चुकी थी की वो जो चाहे क्र सकती थी, इसका फायदा काम नुकसान ज्यादा हुआ, लड़किया कमरे के सामने नंगी होकर घूम रही थी, मूवीज में हेरोइंस का पूरी नंगी होकर सीन्स देना नार्मल था, 2024 में जो अमेरिका लंदन का कलक्टर था 2043 में इंडिया का लगभग उससे आगे hi निकल चुक्का था, इससे रपे और बढ़ गए थे, पैसो वालो का बोलबाला था क्राइम करके भी बच जाते थे, देश तरक्की तो क्र रहा था लेकिन संस्कृति बर्बाद हो चुकी थी,
खैर ये सब तो होता hi ह, आधुनिकता अपनानी ह तो कुछ तो नुक्सान होगा hi,
ह्रदय मोबाइल देख रहा था, उसके सामने जब भी एक लड़की की रियल आती वो रुक जाता और उसे देखता, अगर मोबाइल में दीपा के अलावा किसी की तस्वीर थी तो बस उस लड़की की, वैसे ह्रदय के दिल में कोई भी फीलिंग्स नहीं थी, लेकिन उस लड़की को देख क्र वो बस ठहर जाता, न प्यार था न hi कोई सेक्स की फीलिंग्स बस उसे देख क्र सकूं सा महसूस करता था,
कोण थी ये लड़की कोई नहीं जनता था, उसकी सोशल मीडिया ईद भी धड़कन के नाम से थी, ह्रदय बस उसे धड़कन के नाम से hi जनता था,
उसकी रॉल्स देखता देखता ह्रदय सो गया,
अगली सुबह वो अपने कॉलेज चला गया उसे पहाड़ी पैर जाना याद hi नहीं रहा, कॉलेज में उसका सम्मान हुआ सभी ने उसे बधाई दी,
फिर प्रिंसिपल ने उसे बुलाया और बताया की उसे कॉलेज की स्टेट की तरफ से अब दूसरे स्टैट्स में जाना होगा, वह के कॉलेजेस में खेलना होगा, अगर वह जीता जाता ह तो आल इंडिया कॉलेजेस की तरफ से जो गेम्स होते हैं उनमे भाग लेना होगा फिर वो नेशनल खेल सकता ह, उसके बाद इंटरनेशनल,
ह्रदय ने जाने के लिए हामी भर दी,
दो हफ्ते बाद उसे पहले कम्पटीशन के लिए जाना था, तो ह्रदय को कॉलेज की तरफ से 2 हफ्ते की छुट्टी दे दी गई तैयारी के लिए, वो क्लास में न जाकर बस प्रैक्टिस करने के लिए अलग अलग कोर्ट में जाता,
वही चंडीगढ़ में.
शनाया की हरकते दिन पर दिन ख़राब होती जा रही थी, आशना और रैना तो उसका साथ देती लेकिन दिया उससे नाराज रहने लगी,
शनाया का ग्रुप ख़राब होता जा रहा था, वो गालिया देने लगी थी, वैसे भी आज के टाइम में गालिया बहुत hi नार्मल सा था, लड़किया कही भी कड़ी होकर गालिया देती थी, ये सब कॉमन था लेकिन, शनाया के परिवार में ये कॉमन नहीं था, इसलिए दिया उससे नाराज रहने लगी,
इधर हनी शनाया के करीब आने की लगातार कोशिश कर रहा था, दिया को ये समझ आ रहा था लेकिन शनाया इसे दोस्ती मान रही थी और हनी की हरकतों को आज के हिसाब से बोल्ड होना समझ रही थी,
ऐसे hi एक दिन चंडीगढ़ की सड़को पैर एक गाड़ी बहुत hi रफ़्तार से डोडी जा रही थी, आज के टाइम में पुलिस गाड़ियों का पीछा नहीं करती बल्कि ऑनलाइन चलन काट क्र घर भेज देती, इसी बात का पैसे वाले लोग फायदा उठा रहे थे, चलन भरने में उन्हें कोई ऐतराज था नहीं पैसो की कोई कमी नहीं थी,
लेकिन ये गाड़ी कुछ ज्यादा hi स्पीड से थी, तभी सामने एक बाइक वाला आ गया जिसे उस गाड़ी ने टक्कर मार दी और टक्कर इतनी तेज थी की बाइक वाला बाइक से बहुत दूर जाकर गिरा, ये उस बाइक वाले की खुशकिस्मती थी की वो बच गया लेकिन उसके दोनों पेअर टूट गए,
टक्कर लगने से बाइक तो टूट hi चुकी थी, गाड़ी की भी बुरी हालत हो चुकी थी, वो बड़ी मुश्किल से पलटने से बची,
वह तुरंत भीड़ लग गई, तभी गाड़ी में से हनी उतरा और उस बाइक वाले को गालिया देने लगा, उसके साथ hi उत्तरी शनाया वो भी गालिया देती हुई उत्तरी, पब्लिक उन्हें मरने के लिए उन पैर चढ़ गई तो हनी ने गन निकल ली, जिसे देख क्र सब पीछे हैट गए, तभी वह पुलिस भी आ पहुंची थी, इनकी गाड़ी में आशना रैना और हनी का एक दोस्त भी था,
पीछे से दिया गाड़ी भगाये ला रही थी, जैसे hi वो वह पहुंची तो उसे हालत समझते देर नहीं लगी,
शनाया और हनी गलती मैंने की जगह अपने अपने बाप के नाम की धमकी दे रहे थे, दिया ने सबसे पहले सचिन को कॉल किया और माजरा समझा दिया, इधर पुलिस हनी शनाया और बाकि सब को पकड़ क्र ले गई,
उनके ठाणे पहुंचने से पहले सचिन वह पहुंच चुक्का था, उसने पुलिस को पैसे देकर सारा मामला क्लियर किया, जिस आदमी का एक्सीडेंट हुआ था उसका पूरा इलाज और बहुत से पैसे देकर समझौता करवाया,
तब तक हनी का दादा भी वह आ चुक्का था, उसने आते hi पुलिस पैर रूब झड़ना शुरू किया लेकिन सचिन को वह देख क्र अपने व्यव्हार को नार्मल किया,
सचिन और हनी के दादा अशोक कपूर बच्चो को वह से लेकर निकले और हवेली पैर आ गए,
घर पहुंचते hi सीमा ने एक जोर दर थपड शनाया को जड़ दिया,
शनाया- माँ मेरी गलती नहीं ह वो सामने आ गया,
हनी- है आंटी वो सामने आ गया,
सीमा- जब गाड़ी 150 की रफ़्तार से दौड़ रही हो तो लोग सामने नहीं आते तुम उनके पीछे से जाकर उन्हें मरते हो,
अशोक कप्पोर- बच्चे तो ऐसी गलती करते hi रहते हैं, वो बच तो गया न,
सीमा- ये कैसी बात कर रहे हैं आप, इस आगे में आपको बच्चो को समझाना चाहिए और आप इन्हे बढ़ावा दे रहे हैं,
अशोक कपूर- अब बचे हैं गलती हो जाती ह उन्हें सजा तो नहीं दे सकते न,
सीमा- मैं दे सकती हु, मेरे यहाँ बच्चे हो या बड़े गलती करने की सजा मिलती hi ह, चाहे वो अपना हो या पराया, और लड़के तू मेरी बेटी को और मत बिगड़
हनी- आंटी मैंने क्या किया,
सचिन- दीदी शांत हो जाओ, दिया बेटी शनाया को उसके रूम में ले जा,
सचिन- अशोक जी अगर बच्चे ऐसी गलती करेंगे तो बड़ो का काम ह उन्हें समझाना,
अशोक- हनी बीटा तो बहार गाड़ी में मेरा इंतजार क्र,
हनी उठा और बहार चला गया,
अशोक- सचिन जी आप ठीक बोल रहे हैं, मैं जरूर समझाऊंगा, असल में हनी बिन माँ बाप का बीटा ह, उसके चाचा ने hi उसे बाप बन क्र पला ह, तो सबका लाड प्यार कुछ ज्यादा रहा ह इसलिए थोड़ा ऐसा हो गया ह,
सचिन- ओह सुन क्र दुःख हुआ, माँ बाप को खो देना बहुत बड़ा दुःख ह,
अशोक- उसके पिता जिन्दा तो हैं लेकिन
सचिन- लेकिन
अशोक- पिछले 19 साल से कोमा में हैं,
सचिन- ऊह्ह्ह्ह ये तो बहुत दुःख की बात ह,
अशोक- है जी एक हादसे में उसके साथ ऐसा हुआ था, तब हनी उसकी माँ के पेट में था, जब वो पैदा हुआ तो उसकी माँ भी गुजर गई, तो उसके चाचा ने उसकी जिम्मेदारी ली और उसे पला,
सचिन- आपको उसे सही दिशा में रखना चाहिए, बिन माँ बाप के बच्चे को और भी ज्यादा धयान रखना होता ह,
अशोक- मैं उसे सही दिशा में रखूँगा, अब आज्ञा दीजिये, फिर मुलाकात होगी,
अशोक वह से तेज रफ़्तार से निकल क्र गाड़ी में बैठा और गाड़ी दौड़ गई उसके घर की तरफ,
अशोक हनी से- तूने कभी बताया क्यों नहीं की तू अंजलि ग्रुप की बेटी के साथ रहता ह,
हनी- दादू मैंने सोचा जब वो मुझसे सेट हो जाएगी तो सरप्राइज दूंगा,
अशोक- सरप्राइज के बच्चे ये परिवार ऐसा नहीं ह की लड़की को तूने पटाया और ये तेरे पल्ले बांध देंगे, तुम दोनों की दोस्ती के बहाने हम इनके पार्टनर बन सकते थे, लेकिन तूने ये एक्सीडेंट करके अपनी छवि ख़राब कर ली,
हनी- दादू वो लड़की मेरे पास hi आएगी, उसके अंदर बहुत घमंड ह उसे गुंडागर्दी पसंद ह, और मुझसे भीतर उसे कोई नहीं मिल सकता,
अशोक- उसे पता क्र रख और अपनी छवि को अच्छा बना क्र रख, किसी तरफ़ा हम अंजलि ग्रुप में जुड़ गए तो फिर हमे no. 1 बनने से कोई नहीं रोक सकता,
हवेली में,
सचिन- दीदी सबके सामने बेटी पैर हाथ नहीं उठाना चाहिए था,
सीमा- सचिन तू जनता ह हमारी माँ को, जब हम गलत होते थे तो वो कही भी सजा देने से नहीं रूकती थी, हम वैसे hi हैं,
सचिन- दीदी हमारा जमाना अलग था, आज कल के बच्चे अलग हैं,
सीमा- लेकिन मैं अंजलि की बेटी हु, मैं वैसी hi हु, मैंने बहुत गलतिया की थी लेकिन मेरी बेटी वैसी hi गलती नहीं करेगी,
सचिन- दीदी प्यार से समझते हैं,
वही रूम में शनाया सारा सामान फेंक रही थी, दिया उसके पास पहुंची
दिया- शनाया रुकजा तुझे लग जाएगी
शनाया- दिया तू चली जा यहाँ से मेरा दिमाग ख़राब ह, माँ ने मेरी इंसल्ट क्र दी सबके सामने,
दिया- माँ का हाथ उठाना इंसल्ट कब से हो गया
शनाया- वो हनी मुझे बहुत hi बोल्ड और खतरनाक लड़की समझता ह, वो क्या सोचेगा की जो अपनी माँ से hi पिट गई बाकि सबके समाने कैसे करेगी,
दिया- माँ का हाथ उठाना उनका प्यार hi होता ह, और जो प्यार का सम्मान नहीं करता कोई उसका सम्मान नहीं करता,
शनाया- तू चली जा यहाँ से मेरा दिमाग बहुत गरम ह, जब ठंडा हो जायेगा तो बात करुँगी,
दिया वह से चली आई,
सीमा अपने रूम में बैठी दुखी हो रही थी उसकी आंको में आंसू थे,
सीमा खुद से hi- माँ प्लस आ जाओ मैं अच्छी माँ नहीं बन पाई आकर इन सबको सम्हाल लो, वर्ण सब बर्बाद हो जायेगा, एक और सीमा तैयार हो चुकी ह, और इसे सम्हालने वाला कोई नहीं ह माँ, न तुषार ह न hi आप हो,
तभी दिया अंदर आ गई,
दिया- माँ आप क्यों दुखी हो रही हो
सीमा- नहीं नहीं मैं क्यों दुखी होती
दिया- सब ठीक हो जायेगा वो समझ जाएगी
सीमा- तू ह न मेरे पास तू सम्हाल लेगी मैं जानती हु,
दिया सीमा से लिपट गई,
सीमा मन में- मुझे समझ आ गया जैसी माँ के संस्कार होते हैं वैसे hi बच्चो में आते हैं, दीपा तेरी बेटी तुझसे दूर रह क्र भी तेरी hi परछाई ह, दोनों को एक जैसी परवरिश मिली ह फिर भी दोनों में कितना अंतर ह,