Incest Story EK MAA PART-2 - SexBaba
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Incest Story EK MAA PART-2

hotaks

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एक माँ की सफलता के बाद उसके आगे की कहानी शुरू क्र रही हु, उम्मीद करती हु आप सबका भरपूर साथ मिलेगा, जैसे एक माँ और वो अनोखा ह को आप सबने दिया ह,

ये कहानी एक माँ के अंत से शुरू होगी,
 
अपडेट-1






ईयर 2024 सुबह सुबह का टाइम, हिमाचल की पहाड़ियों में बर्फ पड़ी हुई थी, अंजलि सीमा दीपा गरम गरम कॉफ़ी की चुस्किया ले रही थी तभी अंजलि का फ़ोन बजा, अंजलि ने फ़ोन उठाया उदार से राजेश बोल रहा था,

अंजलि- क्या हुआ राजेश जी आप इतने घबराये हुए से क्यों हो,

राजेश- अंजलि तुषार रूचि और अलका गायब हैं, फिछले 7 दिन से उनकी कोई खबर नहीं ह,

अंजलि के हाथ से कॉफ़ी का मग गिर गया,

अंजलि- ये क्या बोल रहे हो आप

राजेश- है मुझे लगा कही घूमने गए होंगे लेकिन जब वापस नहीं आये तो मैंने खोज की तो उनकी गाड़ी जंगल में कड़ी मिली और उनका कोई पता नहीं था,

अंजलि- बच्चो के साथ गए हैं

राजेश- नहीं बच्चे घर पैर hi थे, तुम जल्दी आ जाओ

अंजलि तुरंत घबराती हुई भागी, और तीनो माँ बेटी गाड़ी लेकर गाओं की तरफ भाग ली, उन्हें पहुंचने में पूरा दिन लग गया रात तक वो गाओं पहुंची, वह जाकर पता लगा की रूचि तुषार से मिलने आई थी तो रूचि अलका और तुषार तीनो गाड़ी लेकर निकले थे लेकिन तीनो वापस नहीं आये,

अंजलि पैर तो पहाड़ सा टूट पड़ा था, सीमा और दीपा का भी रो रो क्र बुरा हाल था, पुलिस को रिपोर्ट क्र दी गई, तुषार की बाकि पत्निया भी आ चुकी थी,

अनीता रिंकी और नंदनी अमेरिका से आ चुकी थी, वर्षा को भी जेकरि लग चुकी थी वो भी मुंबई से वापस आ गई, कोमल भी साथ थी, सबने अपने अपने सोर्स लगा दिए थे उन तीनो का पता करने में इतनी पावर लगाने के बाद बस ये जेकरि मिली की तुषार और अलका रूचि दिल्ली के पास एक फार्महाउस पैर थे लास्ट बार और वह 60 लोगो की लाशे मिली हैं और वो 60 लोग बड़े बड़े नाम थे, बहुत से गुंडे भी थी, लेकिन ये समझ नहीं आया की तुषार की गाड़ी दिल्ली से वापस गाओं के पास जंगल में कैसे मिली, इसके आगे की किसी को कोई जानकरी नहीं थी, सबका रो रो कर बुरा हाल था, उन्हें ढूंढ़ते ढूंढ़ते 1 साल गुजर गया, धीरे धीरे सबने हालत से समझौता कर लिया,

अंजलि ने सबको बुलाया और फैसला किया की वो यही तुषार को ढूंढ़ती रहेगी बाकि सब अपने अपने जगह वापस लोट जाओ, बच्चो की केयर करो,

अनीता रिंकी नंदनी अमेरिका चली गई अपने बच्चो के साथ,

वर्षा अपनी और अलका की बेटियों को लेकर मुंबई लोट गई, कोमल पैर मुजरिम का तगमा लग चुक्का था इसलिए वो अकेली देश छोड़ क्र कहा चली गई किसी को नहीं पता था,

सीमा अपनी और दीपा की बेटी को लेकर कपिल और सचिन के पास चली गई, और दीपा ह्रदय को लेकर हिमाचल चली गई, और अंजलि ने तुषार को ढूंढ़ने का फैसला किया वो और राजेश बस तुषार अलका और रूचि को ढूंढ़ने में लगे रहे, अब काफी कुछ बदल चुक्का था,

अंजलि ने सबको अलग अलग क्र दिया ताकि बड़े होकर बच्चे जब एक hi पिता का नाम देखंगे तो बहुत प्रॉब्लम हो जाएगी, इसलिए आज के बाद कोई कभी बच्चो के सामने एक दूसरे से नहीं मिलेगा, न hi कोई उन्हें एक दूसरे के बारे में बताएगा,

ईयर 2043

सुबह का टाइम अलार्म बजा एक लड़की अंगड़ाई लेती हुई उठी, गोल बीएड पैर एक छोटी सी निघ्त्य पहले हुए एक 19 साल की जवान लड़की, जिसके अंग अंग में जवानी भरी हुई थी, विंडो से आती हुई धुप उसके बदन पैर पद रही थी उसकी स्किन हिरे की तरह चमक रही थी,


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उसने एक बार सर उप्पेर किया फिर अलार्म बंद किया और फिर से सो गई,

तभी एक आवाज आई, शनाया उठजा बेटी बहुत टाइम हो गया ह, तुझे कॉलेज नहीं जाना क्या कॉलेज का पहला दिन ह,

शान्या ( सीमा की बेटी)- माँ सोने दो न कितना प्यारा सपना आ रहा ह

सीमा- सपने की बच्ची उठ जा देख दिया नाहा भी ली

शनाया- वो तो पागल ह पढाई के पीछे, उसे और कुछ नजर hi नहीं आता, दुनिया कितनी खूबसूरत ह, पढ़ने के अलावा भी मजे करने चाहिए,

सीमा- मजे करने की उम्र नहीं आई तेरी जब आएगी तब कर लेना अब कड़ी हो और जल्दी से तैयार हो जा मैं तेरे लिए नाश्ता तैयार कर रही हु,

शनाया अलसाई सी उठी और बाथरूम की तरफ चल दी,

सीमा- कितनी बार बोलै ह कपडे पहन क्र सोया क्र

शान्या- माँ पहने तो हुए हैं

सीमा- ये कपडे हैं इनमे सब कुछ तो दिख रहा ह, छुपाया क्या ह तूने

शनाया- माँ आज का टाइम ऐसा hi ह, जब तक कुछ दिखे न लोग आपको गवर संहते हैं, और मुझे रोज ज्ञान मत दिया करो,

सीमा बड़बड़ाती हुई निचे आ गई, सामने दिया बैठी हुई थी, एक जीन्स और टॉप में,

सीमा- अपनी बहन को भी समझा दिया क्र कैसे कपडे पहनने होते हैं, हमेषा नंगी घूमने पैर उतारू रहती ह,

दिया- माँ मैं तो बहुत समझा चुकी हु लेकिन उसे कुछ समझ नहीं आता,

तभी आशना और रैना भी आ गई, उन दोनों ने स्कर्ट और टॉप पहना हुआ था,

आशना- बुइ आप हमेशा ये ओल्ड फासिओं की बात hi क्यों करती हो, दिया को तो आपने पुराने ज़माने की बना दिया, अब आप हम शनाया के पीछे भी पद गई हो, आज कल कोण जेनस फेंटा ह, और जिस कॉलेज में हम जा रहे हैं वह लड़किया माइक्रो मिनी स्कर्ट पहन क्र आती हैं, हम तो फिर भी जांघो से निचे वाली स्कर्ट फेंटे हैं,

सीमा- है मैं तो ओल्ड फासिओं hi हु, दिया बेटी तू मेरी सुनती रहना तू इनके जैसी मत बनना,

दिया- नहीं माँ मुझे ऐसे रहना hi पसंद ह,

तभी आशिमा और रश्मि आ गई,

आशिमा- दीदी ये नहीं सिधारने वाली इनको इनके हाल पैर छोड़ दो, आओ नाश्ता कर लो,

सीमा- सचिन और कपिल कहा ह वो तैयार नहीं हुए क्या

सचिन- हो गए दीदी

कपिल- बच्चियों तुम तैयार हो न हम तुम्हे कॉलेज छोड़ देंगे

तभी पीछे से शनाया बोली- नहीं अंकल हम खुद ड्राइव करके जायेंगे,

शनाया स्तैर से उतर रही थी, उसकी वो छोटी सी स्कर्ट जिसमे से उतारते हुए कई बार उसकी पंतय तक दिख जाती थी, और उसका वो छोटा से टॉप जिसमे उसके बूब्स आधे बहार दिख रहे थे,


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सीमा ने उसे देख क्र अपना माथा पिट लिया,

कपिल- बेटी ये किस बच्चे के कपडे पहन लिए तूने तेरे पास कपड़ो की कमी पद गई क्या

शनाया- अंकल आप भी माँ की तरह वही बाते करने लगे,

सचिन- तुझसे इतनी बार कहा ह हमे मां बोल लिया कर

शनाया- मां इस ओल्ड फासिओं मैं नए ज़माने की लड़की हु

सचिन- बस मां बोलने से अपने पैन का अहसास होता ह

शनाया- अंकल बोलने पैर भी आप मेरे अपने hi रहोगे,

रश्मि- आओ सब नाश्ता कर लो, देर हो रही ह,

फिर सब नाश्ता करके चले गए, बाद में रह गई आशिमा रश्मि और सीमा

सीमा- क्या होगा इस लड़की का

रश्मि- दीदी आप खामखा परेशां हो रही हैं, आज कल का ये hi जमाना ह, पूरी दुनिया बदल चुकी ह,

आशिमा- दीदी माँ की याद आ रही ह, कितने दिन हो गए माँ को मिले हुए,

सीमा- है यार याद तो आ रही ह, लेकिन मिले भी तो कैसे माँ मिलती hi नहीं ह अपना एड्रेस तक नहीं दिया किसी को, मिले भी तो कैसे,

रश्मि- इन दोनों भाइयो को पता ह माँ कहा ह लेकिन ये माँ के इतने बड़े भगत हैं की माँ ने बोल दिया ऐसा करना ह तो दुबारा सवाल भी नहीं करते क्यों करना ह, कितनी भी जोर लगा लो ये एड्रेस नहीं बताएँगे,

सीमा- मैं पता लगा लुंगी, चलो हम भी ऑफिस चलते हैं, काफी काम ह वह, देर हो जाएगी,

शनाया दिया आशना और रैना अपनी गाड़ी से कॉलेज पहुंच चुकी थी, सचिन और कपिल का बहुत बड़ा नाम था बिज़नेस में, चोपड़ा एम्पियर अब अंजलि के नाम से बहुत बड़ा हो चुक्का था, सब कुछ अंजलि के नाम से hi चल रहा था, हर ब्रांच का नाम अंजलि के नाम से hi चलता था, अब ये अंजलि ग्रुप बन चुक्का था,

और ये चारो अंजलि ग्रुप के मालिकों की बेतिया थी तो उनका रुआब तो अलग होना hi था, पुरे शहर में उनसे ज्यादा मालदार कोई नहीं था,

शनाया इस बात का बहुत फायदा उठती थी, उसे पैसो का बहुत घमंड था, वही दिया बिलकुल शांत रहती, उसे सिंपल रहना बहुत पसंद था, आशना और रैना शनाया के साथ hi रहती, जो वो खेती वही करती, ये चारो हमेषा एक साथ रहती और किसी दोस्त की इन्हे जरुरत hi नहीं थी,

स्कूल का हर लड़का इन पैर लाइन मरता था लेकिन बोलने की किसी की हिम्मत नहीं थी, शनाया सबके सामने उनकी इंसल्ट कर देती थी, लेकिन अब वो कॉलेज में आ गई थी जहा पुरे चंडीगढ़ के बच्चे पढ़ते थे, एक से एक पैसे वाले और बिगड़े हुए, आज के टाइम में चंडीगड़ सबसे बदनाम सिटी था, यहाँ क्राइम बहुत बढ़ गया था, लोगो पैर पैसा बहुत था, ड्रग्स शराब लड़किया आयाशी ये सब चरम पैर था,

जब चारो लड़किया कॉलेज में पहुंची तो वह हर एक लड़के की नजर सिर्फ इन चारो पैर थी, सब उन्हें ऐसे देख रहे थे जैसे अभी उठा क्र ले जायेंगे, शनाया बहुत फासिनाब्ले थी लेकिन गलत नहीं थी उसके अंदर कभी गलत करने की इच्छा नहीं आती थी, इसलिए लड़को से दूर रहती,

कॉलेज में घुसते hi एक लड़को के ग्रुप ने इन चारो को रोक लिया

ग्रुप का एक लड़का- ोू सेक्सी डॉल कहा चली जा रही हो देखती नहीं यहाँ तुम लोगो के सीनियर बैठे हैं

शनाया- ोये चोमू की शकल के हैट सामने वर्ण एक थपड में जमीन चाटने लगेगा,

तभी उस ग्रुप का लीडर सामने आया,

लीडर बॉय- ोये होये मैडम के थपड में बड़ी जान ह, जरा हमे भी दिखा दो अपनी जान कसम से मुझे ऐसी जान वाली hi चाहिए जो मुझे झेल सके,

दिया- शट उप यू इडियट, हटो सामने से वर्ण प्रिंसिपल से कंप्लेंट कर दूंगी समझे

लीडर बॉय- है है जरूर करो और नाम बताना हनी कपूर

दिया- चलो यहाँ से बत्तमीजो के मुँह नहीं लगते

वो चारो वह से चली गई और अपनी क्लास में पहुंची,

आशना- कितने बत्तमीज थे वो लड़के, जरा बी तमीज नहीं ह लड़कियों से बात करने की,

रैना- हमे प्रिंसिपल से कंप्लेंट करनी चाहिए, वर्ण वो आगे भी परेशां करेंगे,

शनाया- अगर उन्होंने आगे परेशां किया तो क्र देंगे,

वही अमेरिका में रात के समय एक औरत चेयर पैर बैठी कुछ देख रही थी, तभी उसके पीछे से एक लड़की आई,

लड़की- माँ आप यहाँ क्या कर रही हैं इतनी रात हो चुकी ह आप सोइ नहीं अब तक,

औरत – बस नींद नहीं आ रही थी नैना बेटी,

जी ये औरत थी नंदनी और उसकी बेटी नैना,

तभी पीछे से काम्य भी आ गई

काम्य- आप दोनों यहाँ क्या कर रही हो, मैं अकेली रह गई थी

नैना- अकेली को डॉ मुझे लगता ह तुझे नहीं, तू क्यों टेंशन में आ गई,

नंदनी- बेटी तू अब बड़ी हो गई ह अब तो डरना छोड़ दे,

नैना - क्या करू माँ जब भी मैं अकेली होती हु तो ऐसा लगता ह जैसे कोई मुझे पकड़ लेगा मेरे साथ जबरदस्ती करेगा, बड़ी घबराहट होती ह माँ,

नंदनी सोच में दुब गई,

काम्य- क्या हुआ माँ

नंदनी- कुछ नहीं

नैना- आप अक्सर इस रूम में आकर क्यों बैठ जाती हो और न जाने क्या पढ़ती रहती हो इन किताबो में, कितनी बार पढ़ चुकी हो आप इन्हे,

नंदनी- बेटी कभी कभी पढ़े हुए को दुबारा पढ़ने में भी मजा आता ह,

खैर तुम दोनों क्यों उठ गई सो जाओ

काम्य- आपके बिना नींद नहीं आती,

नंदनी- चलो रूम में चलो,

नंदनी- और ये कपडे कहा ह तेरे, ठण्ड लग ाजेगी,

नैना- माँ मुझे ऐसे hi रहना पसंद ह, खुला खुला अच्छा लगता ह,

काम्य- माँ मेरा बस चले मैं तो ये भी न फेनु,

नंदनी- बस बस अब सो जाओ दोनों सुबह कॉलेज भी जाना ह,

तीनो एक दूसरे से चिपक क्र लेट गई,

नंदनी अपनी hi सोच में दुब गई न जाने कब उसे नींद आ गई,

इंडिया में,

शनाया दिया रैना आशना कॉलेज में अपनी धक् ज़माने में लगी हुई थी, पूरी क्लास में उनसे खूबसूरत कोई लड़की नहीं थी, है ऐटिटूड वाली बहुत थी, ये पूरा कॉलेज बिगड़े हुए शेजदो का था, शनाया ने जींद करके इसी कॉलेज में एडमिशन लिया था, आजाद जिंदगी जीने के लिए,

कॉलेज की छुट्टी होने पर वो लड़के इन चारो को फिर से बहार मिल गए,

हनी कप्पोर- hello बेबीज कैसा रहा पहला दिन कॉलेज में,

शनाया- तुमसे मतलब

हनी कप्पोर- इस कॉलेज में पढ़ना ह तो मुझसे मतलब तो रखना hi पड़ेगा जानेमन, अगर मेरी चाय में रहोगी तो सेफ रहोगी वर्ण किसी दिन कोई उठा क्र ले जायेगा और पता भी नहीं चलेगा, पूरा रास निचोड़ क्र खली क्र देगा

दिया- जबान सम्हाल क्र बात क्र तू जनता ह हम कोण हैं,

हनी कपूर- अरे किसी मंत्री की बेटी भी तो भी यहाँ फरक नहीं पड़ता, और वैसे भी इंडिया में पैसे वालो की चलती ह,

रैना- चलो यहाँ हमे इनके मुँह नहीं लग्न

हनी- मुँह तो मैं जरूर लगूंगा आज नहीं तो किसी और दिन सही

वो हस्ता हुआ वह से चला गया,

दिया- देख लिया शनाया तेरी जिद का नतीजा, ऐसे लोग पढ़ते हैं यहाँ, बस कपडे पहनने की आजादी के चक्कर में तू हम सबको इस गन्दगी में ले आई ह,

शनाया- तू डर्टी क्यों ह, हम इस शहर के सब आमिर लोग हैं हमे कोण हाथ लगा सकता ह

दिया- इतना घमंड ठीक नहीं ह

शनाया- तू चल न हमेशा तने मरती रहती ह,

फिर वो चारो घर वापस आ गयी,

शाम का समय रश्मि ऑफिस से हमेशा की तरह 4 बजे घर आकर लकड़ियों के साथ टाइम बिता रही थी, दिया आशना और रैना रश्मि के साथ बैठी थी, शनाया अपने रूम में सोशल मीडिया पैर ऑनलाइन चैटिंग में बिजी थी, वो दिन भर सोशल मीडिया पैर लगी रहती, उसके करोडो फोल्लोवेर्स थे,

घर में 2 नौकर थी कोयल और डोली नाम की इनके अलावा ड्राइवर गार्ड्स भी थे, वो हवेली के अंदर नहीं आते थे, घर के अंदर लड़किया जैसे मर्जी रहती कोई तकलीफ नहीं थी, वैसे भी ये डोर फैशन का था, इसमें किसी के अंदर कोई शर्म नहीं थी,

ये तो फिर भी इंडिया था यहाँ फिर भी संस्कार बचे हुए थे, बहुत से परिवार आज भी अपने बच्चो को अच्छे संस्कार दिए हुए थे लेकिन वही अमेरिका में एक नाईट क्लब में बहुत से लड़के लड़किया आधे नंगे होकर एक दूसरे से लिपटे हुए नाच रहे थे, ड्रग्स शराब सिगरेट चारो तरफ धुआँ hi धुआँ था,

उन्ही के बिच में 2 कमसिन लड़किया बहुत hi कामुक कपड़ो में और एक औरत उन्ही के जैसे कामुक कपड़ो में एक दूसरे से लिपट क्र नाच रही थी, इनके कपडे इतने भड़काऊ थे की किसी की पंत गीली करने के लिए काफी थे लेकिन फिर बही वह नाच रही बाकि लड़कियों से ठीक थे, बाकि लड़किया तो आधी नंगी होकर नाच रही थी, किसी का टॉप उतरा हुआ था किसी पंतय दूर पड़ी थी,

बाकि लड़किया लड़को के साथ बहुत hi अश्लील हरकतों के साथ नाच रही थी, बस ये तीनो hi थी जो आपस में खुश थी, एक दो बार लड़को के साथ डांस करती फिर वापस आपस में लग जाती,

डांस करते करते औरत बहुत नशे में हो गई, और इधर उधर गिरने लगी,

एक लड़की- अणि माँ को ज्यादा हो गई ह अब घर चलते हैं,

अणि- है चल घर जाकर वैसे भी बंद बजने वाली ह, माँ तो बेसुध हो गई लेकिन हिटलर हमारी बंद बजाएगी,

दोनों ने औरत को सहारा दिया और गाड़ी से घर आ गई, दूर बेल्ल बजे

सामने से एक थोड़ी सी बुजुर्ग औरत ने दरवाजा खोला उनका रूप इतना मनमोहक था की इस आगे में भी लड़को का क्रश बन सकती थी,


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ये थी बाला की खूबसूरत औरत अनीता जी, जो दरवाजे पैर गुस्से में कड़ी थी, और उनके सामने थी बेसुध नशे में धुत रिंकी और उसको सम्हाले हुए आया उर्फ़ अणि और रम्य उर्फ़ रेमी,

तुषार के गम में रिंकी इतनी टूट गई की वो नशे की आदि हो गई और आज उसकी ये हालत थी की वो नशे के बिना रह hi नहीं सकती थी, उसे देख क्र दोनों बेतिया अन्य और रम्य भी उसके जैसी बनती चली गई, वो दोनों ड्रग्स तो नहीं लेती थी लेकिन ड्रिंक बहुत करने लगी, और अमेरिका की जिंदगी में इतनी खो गई की अपने संस्कार भूल गई,

रिंकी तो पहले से hi ऐसी थी लेकिन तुषार की वजह से बदल गई थी, लेकिन तुषार के जाते hi वो फिर उसी दुनिया में चली गई, बस इस बार इतना फरक था की वो लड़को से दूर रहती, अन्य और रम्य भी लड़को से दूर रहती लेकिन बाकि पूरी अयाशी करती, नाईट क्लब में घूमना, नुदे बीच पैर घूमना,

अनीता जी कभी रिंकी को नहीं रोक पाई इन दोनों के सामने भी कमजोर पद गई, दोनों बच्चियों के प्यार में इतनी खो गई की वो गलत रस्ते पैर चली गई उन्हें पता hi नहीं चला, अब अनीता जी का दर किसी में रहा नहीं बस इतना रह गया की घर जाकर हिटलर शोर मचाएगी,

और उसी रूप में अनीता कड़ी थी

अनीता- तुम तीनो को थोड़ी भी शर्म ह या नहीं, ये क्या हालत बना राखी ह, शरीफ घर की लड़किया ऐसा करती हैं

अन्य- यहाँ शरीफ और बिगड़ा हुआ घर नहीं होता ओल्ड माँ, यहाँ बस अपनी जिंदगी होती ह, कितनी बार कहा ह ये इंडिया का रूल यहाँ मत चलाया कीजिये,

अनीता बेचारी फिर चुप रह गई,

अन्य और रम्य ने रिंकी को अंदर लिटाया और अपने रूम में चली गई,

अनीता वही कड़ी उन्हें देखती रह गई,

अनीता खुद से hi- कमी मुझमे hi ह न मैं रिंकी को सही शिक्षा दे पाई न hi इन दोनों बच्चियों को, दुनिया में कमी ढूंढ़ती रह गई लेकिन मैं hi कमजोर थी, तुषार तुम क्यों चले गए, मैं तुम्हारे बिना अधूरी हो गई हु, और मेरी रिंकी वो तो खुद को ख़तम करने पैर तुली हुई ह, तुम हमारे जीने का सहारा थे,

अनीता आँखों ने आंसू लिए वही सोफे पैर बैठ गई,

इधर इंडिया में..

रश्मि- कैसा रहा कॉलेज का पहला दिन

रैना- मस्त था माँ

दिया- मस्त इसे मस्त बोल रही ह, इतना बुरा दिन था, इतना बुरा कॉलेज, वह कोई कपडे ढंग के नहीं पहनता, लड़के आवारागर्दी करते हैं लड़कियों के साथ बतमीजी करते हैं,

आशना- वो तो सब जगह होता ह दिया इतना क्यों सोच रही ह,

दिया- तुम तीनो तो पागल हो लेकिन मुझे वह अच्छा नहीं लग रहा, वो लड़के कितने बत्तमीज थे,

रश्मि- बेटी मैं सचिन कपिल से बोल दूंगी तो कॉलेज जाकर प्रिंसिपल से बात कर लेंगे सब ठीक हो जायेगा तू घबरा मत, आज कल ऐसा होता ह, ये सब नार्मल हो गया ह,

दिया मन दुखी सा करके बैठ गई,

अगले दिन फिर से वही दिन चरिया, कॉलेज पहुंच क्र उन लड़को ने फिर से परेशां किया,

अब ये रोज का शुरू हो गया था, धीरे धीरे सबको पता चल गया की ये चारो अंजलि ग्रुप्स की शेजड़िया हैं तो इनका रुआब कॉलेज में बढ़ने लगा था, उन लड़को ने भी परेशां करना काम कर दिया था,

अंजलि ग्रुप का नाम बहुत बड़ा था बड़े बारे नेताओ अधिकारियो से पहचान थी,

हनी कपूर का बाप भी चंडीगढ़ का नमी बुसिनेस मन था, लेकिन अंजलि ग्रुप के कभी करीब नहीं पहुंच पाया,

हनी ने अपना पत्र बदला और इन चारो को परशान करना बंद किया और शनाया से दोस्ती बढ़ानी शुरू की, क्योकि शनाया काफी बोल्ड थी,

दिया के समझने के बाद भी शनाया आशना और रैना उनके ग्रुप में शामिल हो गई, उनके साथ घूमना फिरना हसी मजाक शुरू हो गया, शनाया को हनी के रूप में एक बॉडी गार्ड मिल गया था, हनी की कॉलेज में धक् थी शनाया का भी तगड़ा रुआब था दोनों दोस्त हो गए तो पुरे कॉलेज में इन्ही दोनों की चलने लगी थी,

दिया बेचारी इस सब से बहुत दुखी थी, लेकिन शनाया को रोकना किसी के बस में नहीं था वो वही करती जो उसे पसंद आता,

कपिल और सचिन अपने ऑफिस में बैठा था, बहुत से लोग उसके सामने बैठे हुए थे,

कपिल- कहा तक पहुंची आपकी खोज बीन

एक आदमी उठा- सर हमने लगभग पूरा इंडिया खोज लिया ह लेकिन उनका कोई पता नहीं ह,

सचिन- तुम सब किसी काम के नहीं हो, हमने पैसो के भंडार खोल दिए तुम्हारे लिए सिर्फ उन सब का पता लगाने के लिए लेकिन तुम हर बार नाकाम रहे हो,

दूसरा आदमी- सर हमने उस समय से अब तक हर जगह को खोज लिया ह, अगर कोई जिन्दा होता तो जरूर मिल जाता, मुझे तो लगता ह वो

कपिल- ख़बरदार जो ये लाइन पूरी की, उन्हें कुछ नहीं हो सकता,

सचिन ने कपिल का कन्धा तपथपाया और सांत्वना दी,

सचिन- मुझे नहीं पता तुम लोग क्या करोगे, मुझे वो चाहिए किसी भी कीमत पैर, जाओ यहाँ से सब

सब उठ क्र चले गए, बस रह गए सचिन और कपिल

कपिल- सचिन मुझे दर लग रहा ह,

सचिन- दर मत कपिल, वो तुषार ह उसे कुछ करने के लिए खुद यमराज को निचे आना पड़ेगा, इंसानो के बस में उसका कुछ बिगड़ना पॉसिबल नहीं ह,

कपिल- फिर वो गए कहा

सचिन- जरूर तुषार को रूचि और अलका की वजह से ब्लैकमेल किया गया हो गए,

Kapil-wo मिल जायेंगे न

सचिन- जरूर मिलेंगे, हम सब फिर से एक साथ होंगे, हम पूरी दौलत लुटा देंगे लेकिन उन्हें ढूंढ क्र hi रहेंगे,

कपिल- जब तक तुषार नहीं मिलेगा माँ नहीं आएगी,

सचिन- माँ तो मिलना भी नहीं चाहती किसी से,

कपिल- हम सबको फिर वापस एक जगह ले आएंगे,

दोनों भाई दुःख में दुबे हुए काफी देर तक बैठे रहे,

वही दूर हिमाचल की पहाड़ियों में एक कॉलेज में फाइटिंग का मैच चल रहा था,

कॉलेज में डिस्ट्रिक्ट लेवल के गेम्स हो रहे थे, जिसमे फाइटिंग का भी मैच था,

अलग अलग डिस्ट्रिक्ट से अलग अलग कॉलेज के बच्चे आये हुए थे,

फाइट स्टार्ट होने की घंटी बजने से पहले, दोनों फैटेर आमने सामने खड़े थे,

बहार के कॉलेज से आया हुआ लड़का बहुत उछाल रहा था, उसके कॉलेज के साथी भी उसके नाम के नारे लगा रहे थे, सेमि सेमि सेमि सेमि सेमि,

जबकि सामने वाला खिलाडी एक दम शांत खड़ा था, न कोई उछाल कूद न hi हड़बड़ाहट, न hi उसके कॉलेज के साथी कोई शोर मचा रहे थे, सब शांत बैठे है रहे थे,

जैसे hi रेफरी फाइट का इशारा किया,

सेमि ने सामने वाले लड़के पैर हुम्ला कर दिया वो एक अच्छा फाइटर था, बहुत hi फुर्ती से हुम्ला कर रहा था, लेकिन सामने वाला लड़का बस उसके हमले से बच रहा था, सेमि और गुस्से में वॉर करता जा रहा था, लेकिन सामने वाले को छू भी नहीं प् रहा था,

और इसी उछाल कूद में पहला राउंड ख़तम हो गया, किसी को कोई पॉइंट नहीं मिला, सेमि का गुस्सा बढ़ता जा रहा था, सामने वाला खिलाडी बस मुस्कुरा रहा था, वह बैठे सभी स्टूडेंट्स है रहे थे, दूसरे कॉलेज से आये स्टूडेंट्स भी अब खीजने लगे थे,

दूसरे राउंड की बेल्ल बजी और दोनों ानमे सामने आ गए, इस बार सेमि ने एक गलती क्र दी,

सेमि- अबे तेरे में दम नहीं ह क्या वॉर करने का मादरचोद

उसने गली दी और वह बैठे सभी स्टूडेंट्स के मुँह से एक दम निकला aaaaawwwwwwwwwww

वह आवाजे गूंजने लगी तू तो गया बेटे, ये क्या बोल दिया सेल ने, इसका टाइम पूरा हो गया, भेनचोद का दिमाग ख़राब हो गया ह, सेल अपनी जान की तो फ़िक्र करता,

चारो तरफ से ऐसे hi डायलॉग्स आने लगे थे, सेमि का धयान उनकी बातो पैर गया, उसने चारो तरफ देखा फिर अपने सामने वाले खिलाडी को देखा जो उसकी तरफ बढ़ रहा था, उसकी आँखे लाल और नथुने फुले हुए थे,

रेफरी- बीटा गली नहीं देनी थी बस तुझे वो भी माँ की,

सेमि सकपका गया ये सब क्या हो रहा ह,



खिलाडी को आता देख वो उसकी तरफ वॉर करने गया तभी उसकी छाती में एक मुक्का लगा और वो फाइट रिंग से बहार बैठे स्टूडेंट्स के बिच में आकर गिरा, जिस तरह वो हवा में उड़ता हुआ आया, वह बैठे उसके साथी खड़े हो गए, सबके मुँह पैर हाथ आ गए, और दूसरे खिलाडी के साथी छिलने लगे, ह्रदय ह्रदय ह्रदय ह्रदय ह्रदय लड़किया चिल्ला रही थी ी लव यू ह्रदय यू अरे रॉक,
 
अपडेट-2






ये ह ह्रदय थे खिलाडी बॉय के नाम से फेमस, अंजलि और तुषार का बीटा,

ह्रदय पुरे डिस्ट्रिक्ट में खिलाडी बॉय के नाम से फेमस ह, बेचारा सेमि एक मुक्का नहीं झेल पाया और बेहोश हो गया, नाकआउट में ह्रदय को विजेता घोषित क्र दिया गया, स्टूडेंट्स ने रिंग में कूद क्र ह्रदय को कंधे पैर उठा लिया,

तभी अनाउसमेंट हुई, ह्रदय की इस जीत के साथ J.S.S कॉलेज ने 20 गेम्स की प्रतियोगता में से 19 गेम जीत लिए हैं, स्टूडेंट्स ने शोर मचाना शुरू क्र दिया, तभी अनूस करने वाले ने बोलै

रुकिए रुकिए रुकिए इसके आगे तो सुन लो पहले सब शांत हो गए,

अनाउसमेंट- इन 19 गेम में से 15 गेम अकेले ह्रदय ने गोल्ड मॉडल के साथ जीते हैं,

बस फिर तो पूरा शोर मचने लगा, बाकि आये हुए कॉलेज के स्टूडेंट्स भी हैरत में थे कोई लड़का इतने गेम कैसे जीत सकता ह, दूसरे कॉलेज की लड़किया तो ह्रदय को देखने के लिए बावली हुई जा रही थी, एक तो सादे 6 फीता नौजवान लड़का उसका बदन किसी पत्थर जैसा था, बाजुओं की मछलिया किसी का भी मन मोह ले, उसकी आँखे बहुत नशीली थी, उसकी चल किसी शेर जैसी थी, ताकत हाथियों जैसी,

लेकिन इतना सब कुछ होने के बाद भी शराफत इतनी की किसी से कभी ुचि आवाज में बात तक नहीं करता था, हसने बोलने वाला, लड़कियों से दूर रहने वाला एक दम बिंदास था,

जब वो सत्गे पैर अवार्ड्स लेने आया तो लड़किया उसकी फोटो लेने लगी, स्टेज से निचे आते hi लड़किया उससे उसका नंबर मांगने लगी, कुछ ने तो अपना नंबर पेपर पैर लिख क्र उसके सामान में रख दिया,

उसके कॉलेज के लड़के लड़किया सबकी हरकत देख क्र बस है रहे थे, क्योकि वो जानते थे की जब पुरे डिस्ट्रिक्ट की लड़किया इस लड़के को इम्प्रेस नहीं क्र सकीय तो ये सब क्या कर लेंगी.

भीड़ में लड़के ह्रदय को उठा क्र चारो तरफ घूमने लगे, शाम को जब ह्रदय अपनी बाइक पैर वापस घर आया तो उसकी माँ दीपा सामने एक हाथ में थाली और दूसरे हाथ में डंडा लिए कड़ी थी,

ह्रदय – माँ ये सब क्या ह

दीपा- पहले ये बता 7 दिन से कॉलेज में ह तू तुझे अपनी माँ की याद नहीं आती,

ह्रदय- माँ आप जानती न कॉलेज में गेम्स थे,

दीपा- जानती हु इसीलिए कुछ नहीं बोल रही हु,

ह्रदय- फिर ये सब क्यों

दीपा- तूने कितने गेम्स में part लिया और कितने जीता, अगर तेरा जवाब मुझे पसंद आया तो आरती उतरेगी नहीं तो इस डंडे से खाल उतरेगी,

ह्रदय- माँ आपने मुझे क्या बनाया ह, जैसा बनाया ह वैसा hi रिजल्ट भी मिलेगा, मैंने 15 गेम्स में part लिया और 15 में hi जीता हु, वो देखिये बाइक पैर साडी शील्ड बंधी हुई हैं, हमारे कॉलेज में 20 में से 19 गेम जीते हैं

दीपा- बाकि 5 में तूने क्यों नहीं लिया part

ह्रदय- माँ वो डांस, सिंगिंग, kho-kho, कैरम, और नाटक के गेम थे, ये सब मुझे अच्छे नहीं लगते,

दीपा- ठीक ह ठीक ह वैसे तू इनमे भी part लेता तो जरूर जीत जाता

ह्रदय- माँ किसी और को भी तो मौका मिलना चाहिए न

दीपा- हहहहह सही ह, अब आजा तेरी आरती तो उतर लू

दीपा ह्रदय की आरती उतरने लगी और उसकी बलैया लेने लगी, फिर ह्रदय दीपा से लिपट गया,

ह्रदय- माँ बहुत भूक लगी ह, पिछले 7 दिन से भूखा हु

Deepa-hey राम ये क्या किया तूने

ह्रदय- माँ तुम जानती हो मैं सिर्फ तुम्हारे हाथ का खाना खता हु, वह मुझे खाना देने वाला कोण था,

दीपा- ये तूने क्या किया ऐसा नहीं करना छाइये था, हे मेरी बूढी कहा चली गई थी, मुझे ख्याल रखना चाहिए थे, मुझे माफ़ क्र दे मेरे बच्चे ये कितनी बड़ी गलती हो गई मुझसे,

ह्रदय- माँ माँ माँ तुम क्यों परेशां होती हो, मैं पहले भी महीनो तक भूका रहा हु, ये 7 दिन क्या मायने रखते हैं,

दीपा- वो तेरे विद्या के लिए थे लेकिन ये अलग थे ये मेरी गलती ह, तू 7 दिन भूका रह क्र खेलता रहा, तूने मेरा सर गर्व से ुचा क्र दिया

ह्रदय- माँ गर्व से तो उड़ दिन ुचा होगा जिस दिन मैं तुम्हारा सपना पूरा कर दूंगा

दीपा- अब तू तैयार ह बेटे, अब समय आ गया ह तेरे बहार निकलने का,

ह्रदय- मुझे कॉलेज की तरफ से अलग अलग स्टेट में भेजा जायेगा गेम्स के लिए,

दीपा- बहुत बढ़िया, तुझे सभी जगह जीतना होगा और अपना नाम इतना बड़ा करना होगा की पूरी दुनिया देखे,

ह्रदय- जरूर माँ,

दीपा खाना लेकर आ गई,

दीपा- और है पहले तू मेरी कसम खा आज के बाद ऐसा नहीं करेगा, अब तू बहार जायेगा तो मैं हर जगह तेरे साथ तो नहीं जाउंगी, तो क्या तू सब जगह भूखा रहेगा,

ह्रदय- माँ मेरी भूक hi नहीं मिटेगी,

दीपा- बीटा अब तेरी मंजिल के समाने ये भूक नहीं आ सकती, अब तुझे ीे अपने काबू में करना होगा,

ह्रदय- माँ भूक तो मैं काबू में कर लूंगा लेकिन जीभ का क्या करू जिसे तुम्हारे खाने के अलावा कोई खाना पसंद hi नहीं आता,

दीपा- ठीक ह किसी के हाथ का मत खाना लेकिन और भी तो तरीके ह खाने के, कुछ भी खा सकता ह, पेट भरने के लिए सब करना पड़ता ह,

ह्रदय- ठीक ह माँ मैं कोशिश करूँगा, और वडा करता हु भूका नहीं रहूँगा,

ह्रदय खाना खाने लगा दीपा उसके पास बैठ क्र उसे निहारने लगी,

ह्रदय- माँ कॉलेज वाले बस आने जाने का खर्चा देंगे वह मुझे hi खर्च करना पड़ेगा, जो खाना वो देते हैं वो तो मैं खा नहीं पाउँगा

दीपा- तू पैसो की चिंता मत कर, जितने चाहिए उतने ले लेना, तू बस अपनी मंजिल के बारे में सोच पैसो के बारे में नहीं,

ह्रदय- तुमने कभी पैसो की फ़िक्र करने hi नहीं दी, बस ये नहीं बताती इतना पैसा आता कहा से हैं

दीपा- तेरे पिता इतनी दौलत देकर गए ह किट ु साडी जिंदगी खर्च करना चाहेगा तब भी खर्च नहीं कर पायेगा

ह्रदय- फिर हम यहाँ एक मिडिल क्लास परिवारों की तरह क्यों रहते हैं,

दीपा- क्योकि मुझे ऐसे अच्छा लगता ह, वो रहिसो वाली जिंदगी मुझे पसंद नहीं ह, इसमें सकूं ह, सच्चे लोग मिलते हैं, सब लोग बात करते हैं, रहीश बन क्र बैठ जाओ और अपने स्टैंडर्ड के लोग ढूंढ़ते रहो, वो लोग घमंड में ठीक से बात भी नहीं करते,

ह्रदय- तुम भी कमल हो माँ, दुनिया कितनी आगे बढ़ चुकी ह और तुम मेरी भोली माँ आज भी वैसी hi हो,

दीपा- मेरी छोड़ बस तू मत बदल जाना,

ह्रदय- मुझे बदल सके इतना ज़माने में दम नहीं, जमाना हम से ह हम जामने से नहीं

दीपा- ओहो अपनी माँ के सामने डायलॉग मरता ह, उस दिन देखूंगी जब तेरी जिंदगी में कोई लड़की आएगी

ह्रदय- हहहह लड़की माँ ऐसी लड़की बानी hi नहीं जो आपके बेटे की लंगोट को ढीला कर सके,

दीपा- शाबाश बेटे, लेकिन अगर तेरी जिंदगी में कभी कोई आये तो अपनी माँ से मत छिपाना, तू जनता ह मैंने तुझे ऐसा पला ह की हमारे बिच कुछ छिपा न रह सके,

ह्रदय दीपा की गॉड में लेट गया- जनता हु माँ आप फ़िक्र मत कीजिये ऐसा कभी नहीं होगा,

खाना खा क्र ह्रदय वही दीपा की गोद में सर रख लेता लेता hi सो गया, दीपा उसका सर सहलाती रही, और उसे निहारती रही, फिर अपनी यादो में खो गई,

दीपा ( मन में)- माँ मैंने अपना वडा पूरा कर दिया ह्रदय को ऐसा महाबली बनाया ह की पूरी दुनिया मिलकर भी इसे नहीं झुका सकती, लेकिन इसका मन बहुत कोमल ह, उसमे जरा भी चल कपट नहीं ह, ये दुनिया की ताकत से लड़ सकता ह लेकिन चल कपट से लड़ना मैं नहीं सीखा पाई, जितना सीखा सकती थी सीखा दिया, अब इसकी हिम्मत और हमारी किस्मत ह,

इधर रेटाइरेड कमिश्नर मंत्री के सामने बैठा था, ये थे नंदनी के पिता अब वो मंत्री नहीं थे लेकिन लोग उन्हें अब भी मंत्री जी hi बोलते थे,

कमिश्स्नोर संजय कुमार- कैसे हैं मंत्री जी,

मंत्री राज प्रताप- बस अपने जीवन के अंतिम दिन गुजर रहा हु,

संजय – आप परेशां लग रहे हैं,

राज प्रताप- क्या करू साडी जवानी राजनीती में गुजर दी, बच्चे हुए नहीं जब मेरी बेटी पैदा हुई तो मेरी उम्र बहुत हो चुकी थी, बीटा कोई हुआ नहीं, सोचा था बेटी बड़ी होकर राजनीती में आएगी लेकिन वो सब छोड़ क्र अमेरिका चली गई, तब से आज तक वापस नहीं आई ह, बस उसके अकाउंट में पैसे भेज क्र खुद को तसली दे देता हु, अब मेरी उम्र हो चुकी ह, न जाने कब तक बच्चू,

संजय कुमार- आपको पता तो ह आपकी बेटी कहा ह, लेकिन मैं तो जनता तक नहीं मेरी बेटी कोमल कहा ह, वो तो मुझे छोड़ क्र ऐसे गई जैसे इस दुनिया में हो hi न,

राज प्रताप- इसमें हम दोनों की hi गलती ह, हमने अपने बच्चो को सही शिक्षा नहीं दी, और जिसने उन्हें शिक्षा दी वो hi इस दुनिया में नहीं ह,

संजय कुमार- लेकिन उसके परिवार वालो ने आज तक हार नहीं मणि उसे उसे मारा हुआ नहीं मानते, वो आज भी ढूंढ़ने में लगे हैं,

राज प्रताप- ढूंढ तो हम भी रहे हैं लेकिन कोई सफलता नहीं मिली,

राज प्रताप खस्ने लगा उसके मुँह से खून आने लगा,

संजय कुमार- आपकी तबियत बिगड़ रही ह, चलिए हॉस्पिटल चलिए,

राज प्रताप- कोई फायदा नहीं ह संजय ये मेरा अंतिम समय ह मैं ऐसे hi शांति से काटना चाहता हु,

संजय- ये आप क्या बोल रहे हैं

राज प्रताप- है संजय मुझे ब्लड कैंसर ह, और लास्ट सत्गे पैर ह, कभी भी बुलावा आ सकता ह, बस एक बार अपनी बेटी को देखने की इच्छा थी शायद वो भी पूरी नहीं हो पायेगी,

संजय- मैं कोशिश करता हु आपको तो आपकी बेटी से मिला सकू,

संजय ने फ़ोन उठाया और किसी को मिलाया, पुलिस का कमिश्नर रह चुक्का ह तो इन मामलो में काफी जानकारी थी और पहचान भी थी,

शाम का समय ह्रदय घर से बहार निकला, आस पास के जीतनेय भी परिवार रहते थे सब ह्रदय को देख क्र खुश होते हुए उसके पास मिलने आ गए,

ह्रदय पुरे इलाके का चाहता था, लड़कियों के दिलो में तो वो राज करता था लेकिन ह्रदय ने कभी किसी लड़की को नजर उठा क्र नहीं देखा था, सभी परिवार जानते थे की उनकी बेटियों के दिल में ह्रदय बस्ता ह, लेकिन उन्हें ये भी पता था की ह्रदय उन्हें कभी गलत नजर से नहीं देखता,

यहाँ तो इस बात पैर आपस में मन मुटाव तक बन गया था परिवारों में, सब ये hi सोचते की ह्रदय उनकी बेटी को पसंद क्र ले, पूरी दुनिया में ह्रदय जैसा सूंदर स्मार्ट ताकतवर और शरीफ लड़का मिलना नामुमकिन सा था उनके लिए,

ह्रदय को पहाड़ो की शांति बहुत पसंद थी, वो जब भी मौका मिलता पहाड़ो में बर्फ में लेट जाता और बहुत बहुत देर तक लेता रहता, ह्रदय की सबसे खास बात थी की उसे ठण्ड नहीं लगती थी, उसका बदन हमेशा गरम रहता था, गरम इलाके में जाने पैर उसका बदन पसीने से भीगा रहता, बर्फ में hi उसे रहत मिलती थी,

जब दीपा यहाँ बसी थी या ये कहे अंजलि ने ये घर बनवाया था तब बहुत hi काम लोग यहाँ रहते थे, मुश्किल से 4-5 परिवार वो भी थोड़े निचे, लेकिन पिछले 19 साल में यहाँ बहुत से परिवार आ बेस थे, और दीपा यहाँ सबसे पुराणी थी तो उसका सम्मान भी वैसा hi था, अब भी 50 परिवार hi थे यहाँ पैर, वो भी कोई बहुत पैसे वाले नहीं, दीपा hi सबसे सम्पन थी यहाँ पैर,

इनका घर भी सबसे उप्पेर था, उस जगह घर बनाने के लिए बहुत मसकत करनी पड़ती ह ये सब जानते थे, वह परमिशन भी नहीं मिलती घर बनाना की, अगर दीपा का घर वह ह तो सब जानते थे उसकी पहुंच भी बहुत उप्पेर तक रही होगी,

इसलिए दीपा के सम्मान में कोई कमी नहीं थी, इसके उल्टा दीपा सबसे इतनी शालीनता से रहती जैसे वो उनमे से hi एक हो, कोई घनाद नहीं कोई दिखावा नहीं, सबकी हेल्प करती सबका सम्मान करती,

ह्रदय बर्फ में लेता हुआ अपने hi खयालो में खोया हुआ था, एक दम शांत आसमान को देख रहा था, अँधेरा होने लगा था, पहाड़ो में अँधेरा एक दम हो जाता ह, तभी ह्रदय को कुछ आहत सुनाई दी वो एक दम सतर्क हो गया, वो तुरंत उठ क्र बैठ गया और इधर उधर देखने लगा, लेकिन कुछ दिखाई नहीं दिया,

ह्रदय फिर से शांत हो क्र आहात को सुनने लगा, उसे फिर से आहत सुनाई दी तो वो तुरंत उस आहत की तरफ तेज कदमो से बढ़ने लगा, वो आहात के पास पंहुचा लेकिन वह उसे कुछ नहीं दिखा, वो आगे बढ़ा लेकिन एक दम सनता था,

तभी ह्रदय की नजर दो आँखों पैर पड़ी जिनमे एक रौशनी सी दिखाई दी, एक बार तो ह्रदय चौंक गया, लेकिन अगले hi पल उसे लगा वो कोई जानवर ह शेर या भेड़िया हो सकता ह, क्यों किसी जानवर को परेशां करू ये सोच क्र ह्रदय वापस मुद गया और निचे की तरफ चला आया, और सभी को इन्फॉर्म क्र दिया की रात में बहार न निकले कोई जानवर घूम रहा ह उप्पेर,

ह्रदय अपने रूम में गया और लेट गया, मोबाइल निकल क्र कुछ देखने लगा की अचानक खड़ा हो गया,

ह्रदय (खुद से hi)- वो जानवर वो तो मुझसे बहुत दूर था, लेकिन आहात तो मेरे बहुत नजदीक से आई थी, और कोई जानवर इतने करीब आकर वापस क्यों जायेगा, वो जानवर मेरी तरफ तो देख hi नहीं रहा था, मतलब वह कोई और भी था, इस टाइम वह कोण आएगा और छुपेगा क्यों,

ह्रदय तुरंत घर के बहार की तरफ चलने लगा तो दीपा ने रोक लिया

दीपा- कहा जा रहा ह, अभी तो आया ह फिर चल दिया,

ह्रदय- माँ कुछ याद आ गया आता हु

दीपा- नहीं कही नहीं जायेगा यही बैठ मैं खाना ला रही हु खाना खा ले, और तूने hi कहा न बहार कोई जानवर घूम रहा ह, फिर क्यों जा रहा ह,

ह्रदय- माँ तुम जानती हो ये जानवर मेरा कुछ नहीं क्र सकते,

दीपा- मैं तेरी फ़िक्र नहीं कर रही उस जानवर की कर रही हु, उस बेचारे की माँ उसके लिए परेशां हो जाएगी, तू चुप चाप यही बैठ और खाना खा,

ह्रदय रुक गया सोचा कल सुबह देखूंगा,

दोनों माँ बेटो ने एक साथ बैठ क्र खाना खाया और अपने अपने रूम में लेट गए,

ह्रदय मोबाइल चलने लगा,

आज कल सभी सोशल मीडिया वेबसाइट पैर रॉल्स का बड़ा बोल बाला था, हर कोई अपनी वीडियोस बनाने में लगा हुआ था, फेमस होने के लिए लकडिया नंगी होकर वीडियोस बना रही थी, गोवत. ने सरे रूल हटा दिए थे, लड़कियों को इतनी आजादी मिल चुकी थी की वो जो चाहे क्र सकती थी, इसका फायदा काम नुकसान ज्यादा हुआ, लड़किया कमरे के सामने नंगी होकर घूम रही थी, मूवीज में हेरोइंस का पूरी नंगी होकर सीन्स देना नार्मल था, 2024 में जो अमेरिका लंदन का कलक्टर था 2043 में इंडिया का लगभग उससे आगे hi निकल चुक्का था, इससे रपे और बढ़ गए थे, पैसो वालो का बोलबाला था क्राइम करके भी बच जाते थे, देश तरक्की तो क्र रहा था लेकिन संस्कृति बर्बाद हो चुकी थी,

खैर ये सब तो होता hi ह, आधुनिकता अपनानी ह तो कुछ तो नुक्सान होगा hi,

ह्रदय मोबाइल देख रहा था, उसके सामने जब भी एक लड़की की रियल आती वो रुक जाता और उसे देखता, अगर मोबाइल में दीपा के अलावा किसी की तस्वीर थी तो बस उस लड़की की, वैसे ह्रदय के दिल में कोई भी फीलिंग्स नहीं थी, लेकिन उस लड़की को देख क्र वो बस ठहर जाता, न प्यार था न hi कोई सेक्स की फीलिंग्स बस उसे देख क्र सकूं सा महसूस करता था,

कोण थी ये लड़की कोई नहीं जनता था, उसकी सोशल मीडिया ईद भी धड़कन के नाम से थी, ह्रदय बस उसे धड़कन के नाम से hi जनता था,

उसकी रॉल्स देखता देखता ह्रदय सो गया,

अगली सुबह वो अपने कॉलेज चला गया उसे पहाड़ी पैर जाना याद hi नहीं रहा, कॉलेज में उसका सम्मान हुआ सभी ने उसे बधाई दी,

फिर प्रिंसिपल ने उसे बुलाया और बताया की उसे कॉलेज की स्टेट की तरफ से अब दूसरे स्टैट्स में जाना होगा, वह के कॉलेजेस में खेलना होगा, अगर वह जीता जाता ह तो आल इंडिया कॉलेजेस की तरफ से जो गेम्स होते हैं उनमे भाग लेना होगा फिर वो नेशनल खेल सकता ह, उसके बाद इंटरनेशनल,

ह्रदय ने जाने के लिए हामी भर दी,

दो हफ्ते बाद उसे पहले कम्पटीशन के लिए जाना था, तो ह्रदय को कॉलेज की तरफ से 2 हफ्ते की छुट्टी दे दी गई तैयारी के लिए, वो क्लास में न जाकर बस प्रैक्टिस करने के लिए अलग अलग कोर्ट में जाता,

वही चंडीगढ़ में.

शनाया की हरकते दिन पर दिन ख़राब होती जा रही थी, आशना और रैना तो उसका साथ देती लेकिन दिया उससे नाराज रहने लगी,

शनाया का ग्रुप ख़राब होता जा रहा था, वो गालिया देने लगी थी, वैसे भी आज के टाइम में गालिया बहुत hi नार्मल सा था, लड़किया कही भी कड़ी होकर गालिया देती थी, ये सब कॉमन था लेकिन, शनाया के परिवार में ये कॉमन नहीं था, इसलिए दिया उससे नाराज रहने लगी,

इधर हनी शनाया के करीब आने की लगातार कोशिश कर रहा था, दिया को ये समझ आ रहा था लेकिन शनाया इसे दोस्ती मान रही थी और हनी की हरकतों को आज के हिसाब से बोल्ड होना समझ रही थी,

ऐसे hi एक दिन चंडीगढ़ की सड़को पैर एक गाड़ी बहुत hi रफ़्तार से डोडी जा रही थी, आज के टाइम में पुलिस गाड़ियों का पीछा नहीं करती बल्कि ऑनलाइन चलन काट क्र घर भेज देती, इसी बात का पैसे वाले लोग फायदा उठा रहे थे, चलन भरने में उन्हें कोई ऐतराज था नहीं पैसो की कोई कमी नहीं थी,

लेकिन ये गाड़ी कुछ ज्यादा hi स्पीड से थी, तभी सामने एक बाइक वाला आ गया जिसे उस गाड़ी ने टक्कर मार दी और टक्कर इतनी तेज थी की बाइक वाला बाइक से बहुत दूर जाकर गिरा, ये उस बाइक वाले की खुशकिस्मती थी की वो बच गया लेकिन उसके दोनों पेअर टूट गए,

टक्कर लगने से बाइक तो टूट hi चुकी थी, गाड़ी की भी बुरी हालत हो चुकी थी, वो बड़ी मुश्किल से पलटने से बची,

वह तुरंत भीड़ लग गई, तभी गाड़ी में से हनी उतरा और उस बाइक वाले को गालिया देने लगा, उसके साथ hi उत्तरी शनाया वो भी गालिया देती हुई उत्तरी, पब्लिक उन्हें मरने के लिए उन पैर चढ़ गई तो हनी ने गन निकल ली, जिसे देख क्र सब पीछे हैट गए, तभी वह पुलिस भी आ पहुंची थी, इनकी गाड़ी में आशना रैना और हनी का एक दोस्त भी था,

पीछे से दिया गाड़ी भगाये ला रही थी, जैसे hi वो वह पहुंची तो उसे हालत समझते देर नहीं लगी,

शनाया और हनी गलती मैंने की जगह अपने अपने बाप के नाम की धमकी दे रहे थे, दिया ने सबसे पहले सचिन को कॉल किया और माजरा समझा दिया, इधर पुलिस हनी शनाया और बाकि सब को पकड़ क्र ले गई,

उनके ठाणे पहुंचने से पहले सचिन वह पहुंच चुक्का था, उसने पुलिस को पैसे देकर सारा मामला क्लियर किया, जिस आदमी का एक्सीडेंट हुआ था उसका पूरा इलाज और बहुत से पैसे देकर समझौता करवाया,

तब तक हनी का दादा भी वह आ चुक्का था, उसने आते hi पुलिस पैर रूब झड़ना शुरू किया लेकिन सचिन को वह देख क्र अपने व्यव्हार को नार्मल किया,

सचिन और हनी के दादा अशोक कपूर बच्चो को वह से लेकर निकले और हवेली पैर आ गए,

घर पहुंचते hi सीमा ने एक जोर दर थपड शनाया को जड़ दिया,

शनाया- माँ मेरी गलती नहीं ह वो सामने आ गया,

हनी- है आंटी वो सामने आ गया,

सीमा- जब गाड़ी 150 की रफ़्तार से दौड़ रही हो तो लोग सामने नहीं आते तुम उनके पीछे से जाकर उन्हें मरते हो,

अशोक कप्पोर- बच्चे तो ऐसी गलती करते hi रहते हैं, वो बच तो गया न,

सीमा- ये कैसी बात कर रहे हैं आप, इस आगे में आपको बच्चो को समझाना चाहिए और आप इन्हे बढ़ावा दे रहे हैं,

अशोक कपूर- अब बचे हैं गलती हो जाती ह उन्हें सजा तो नहीं दे सकते न,

सीमा- मैं दे सकती हु, मेरे यहाँ बच्चे हो या बड़े गलती करने की सजा मिलती hi ह, चाहे वो अपना हो या पराया, और लड़के तू मेरी बेटी को और मत बिगड़

हनी- आंटी मैंने क्या किया,

सचिन- दीदी शांत हो जाओ, दिया बेटी शनाया को उसके रूम में ले जा,

सचिन- अशोक जी अगर बच्चे ऐसी गलती करेंगे तो बड़ो का काम ह उन्हें समझाना,

अशोक- हनी बीटा तो बहार गाड़ी में मेरा इंतजार क्र,

हनी उठा और बहार चला गया,

अशोक- सचिन जी आप ठीक बोल रहे हैं, मैं जरूर समझाऊंगा, असल में हनी बिन माँ बाप का बीटा ह, उसके चाचा ने hi उसे बाप बन क्र पला ह, तो सबका लाड प्यार कुछ ज्यादा रहा ह इसलिए थोड़ा ऐसा हो गया ह,

सचिन- ओह सुन क्र दुःख हुआ, माँ बाप को खो देना बहुत बड़ा दुःख ह,

अशोक- उसके पिता जिन्दा तो हैं लेकिन

सचिन- लेकिन

अशोक- पिछले 19 साल से कोमा में हैं,

सचिन- ऊह्ह्ह्ह ये तो बहुत दुःख की बात ह,

अशोक- है जी एक हादसे में उसके साथ ऐसा हुआ था, तब हनी उसकी माँ के पेट में था, जब वो पैदा हुआ तो उसकी माँ भी गुजर गई, तो उसके चाचा ने उसकी जिम्मेदारी ली और उसे पला,

सचिन- आपको उसे सही दिशा में रखना चाहिए, बिन माँ बाप के बच्चे को और भी ज्यादा धयान रखना होता ह,

अशोक- मैं उसे सही दिशा में रखूँगा, अब आज्ञा दीजिये, फिर मुलाकात होगी,

अशोक वह से तेज रफ़्तार से निकल क्र गाड़ी में बैठा और गाड़ी दौड़ गई उसके घर की तरफ,

अशोक हनी से- तूने कभी बताया क्यों नहीं की तू अंजलि ग्रुप की बेटी के साथ रहता ह,

हनी- दादू मैंने सोचा जब वो मुझसे सेट हो जाएगी तो सरप्राइज दूंगा,

अशोक- सरप्राइज के बच्चे ये परिवार ऐसा नहीं ह की लड़की को तूने पटाया और ये तेरे पल्ले बांध देंगे, तुम दोनों की दोस्ती के बहाने हम इनके पार्टनर बन सकते थे, लेकिन तूने ये एक्सीडेंट करके अपनी छवि ख़राब कर ली,

हनी- दादू वो लड़की मेरे पास hi आएगी, उसके अंदर बहुत घमंड ह उसे गुंडागर्दी पसंद ह, और मुझसे भीतर उसे कोई नहीं मिल सकता,

अशोक- उसे पता क्र रख और अपनी छवि को अच्छा बना क्र रख, किसी तरफ़ा हम अंजलि ग्रुप में जुड़ गए तो फिर हमे no. 1 बनने से कोई नहीं रोक सकता,

हवेली में,

सचिन- दीदी सबके सामने बेटी पैर हाथ नहीं उठाना चाहिए था,

सीमा- सचिन तू जनता ह हमारी माँ को, जब हम गलत होते थे तो वो कही भी सजा देने से नहीं रूकती थी, हम वैसे hi हैं,

सचिन- दीदी हमारा जमाना अलग था, आज कल के बच्चे अलग हैं,

सीमा- लेकिन मैं अंजलि की बेटी हु, मैं वैसी hi हु, मैंने बहुत गलतिया की थी लेकिन मेरी बेटी वैसी hi गलती नहीं करेगी,

सचिन- दीदी प्यार से समझते हैं,

वही रूम में शनाया सारा सामान फेंक रही थी, दिया उसके पास पहुंची

दिया- शनाया रुकजा तुझे लग जाएगी

शनाया- दिया तू चली जा यहाँ से मेरा दिमाग ख़राब ह, माँ ने मेरी इंसल्ट क्र दी सबके सामने,

दिया- माँ का हाथ उठाना इंसल्ट कब से हो गया

शनाया- वो हनी मुझे बहुत hi बोल्ड और खतरनाक लड़की समझता ह, वो क्या सोचेगा की जो अपनी माँ से hi पिट गई बाकि सबके समाने कैसे करेगी,

दिया- माँ का हाथ उठाना उनका प्यार hi होता ह, और जो प्यार का सम्मान नहीं करता कोई उसका सम्मान नहीं करता,

शनाया- तू चली जा यहाँ से मेरा दिमाग बहुत गरम ह, जब ठंडा हो जायेगा तो बात करुँगी,

दिया वह से चली आई,

सीमा अपने रूम में बैठी दुखी हो रही थी उसकी आंको में आंसू थे,

सीमा खुद से hi- माँ प्लस आ जाओ मैं अच्छी माँ नहीं बन पाई आकर इन सबको सम्हाल लो, वर्ण सब बर्बाद हो जायेगा, एक और सीमा तैयार हो चुकी ह, और इसे सम्हालने वाला कोई नहीं ह माँ, न तुषार ह न hi आप हो,

तभी दिया अंदर आ गई,

दिया- माँ आप क्यों दुखी हो रही हो

सीमा- नहीं नहीं मैं क्यों दुखी होती

दिया- सब ठीक हो जायेगा वो समझ जाएगी

सीमा- तू ह न मेरे पास तू सम्हाल लेगी मैं जानती हु,

दिया सीमा से लिपट गई,



सीमा मन में- मुझे समझ आ गया जैसी माँ के संस्कार होते हैं वैसे hi बच्चो में आते हैं, दीपा तेरी बेटी तुझसे दूर रह क्र भी तेरी hi परछाई ह, दोनों को एक जैसी परवरिश मिली ह फिर भी दोनों में कितना अंतर ह,
 
बहुत बहुत धन्यवाद जी,

मैंने जानबूझ क्र फॅमिली चार्ट नहीं बनाया, कुछ कहानी के पत्र छुपे हुए हैं, और कुछ सुर्प्रीस्ली सामने आ सकते हैं तो मैंनही चाहती सबके बारे में शुरुआत में hi पता चल जाये,

कनेक्शन सही जोड़ा अपने तुषार और कोमा का लेकिन थोड़ा याद कीजिये उस समय कोई भी कोमा में गया था,
 
बहुत बहुत धन्यवाद जी, आपने मुझे इस काबिल समझा,

मैं सांड स्टोरी पढ़ रही थी लेकिन मुझे अपनी स्टोरी का आईडिया आया और उसमे लग गई फिर कोई स्टोरी पढ़ hi नहीं पाई, लेकिन वो स्टोरी अच्छी है, और भी कई स्टोरीज बहुत अच्छी हैं, जैसे प्यार 100 बार उस स्टोरी ने मुझे बहुत इम्प्रेस किया था,

मेरे दिमाग में बस यही होता ह की कही रीडर ये न सोचे की सोत्री में कुछ रहा नहीं, इसलिए कुछ नया सोचती रहती हु
 
अपडेट-3




J.S.S कॉलेज हिमाचल.

प्रिंसिपल- आज से 2 दिन बाद हमारी टीम चंडीगढ़ के लिए निकलेगी, वह पुरे चंडीगढ़ और पंजाब के कॉलेजेस के गेम्स कम्पटीशन हो रहे हैं, हमारा कॉलेज हिमाचल में सबस ेऊपर रहा ह तो हमारे कॉलेज की भी बुलाया गया ह, वह बहुत से गेम होंगे, लेकिन हमारा कॉलेज 18 गेम्स में hi part लेगा, जिसमे सिंगिंग में कल्पना, डांस में मंदिर, कैरम में रवि और अनिल, खो खो और नाटक वह नहीं होते वो बड़े कॉलेजेस हैं, बाकि के 15 गेम्स में अकेला ह्रदय और सेकंड आने वाले स्टूडेंट्स जायेंगे जिनके नाम लिस्ट में आ चुके हैं,

उनके साथ सिंगिंग टीचर निधि जी, और स्पोर्ट्स टीचर राजवीर जी और तम्मना जी, और फाइनांस से अतुल जी साथ जायेंगे,

तो सभी तैयारी क्र लीजिये, वह हम 7 दिन रहेंगे जो भी जीतेगा उसे अगले 5 दिन और रुकना होगा प्राइस के लिए, क्योकि 12 दिन के गेम्स के बाद ट्रॉफी दी जाएँगी,

सभी स्टूडेंट्स ने तालिया बजा कर स्वागत किया, सभी में चर्चाये तेज हो गई,

कल्पना और मंदिर अपने अपने ग्रुप में बैठी थी, दोनों hi कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़कियों में से थी,

कल्पना की फ्रेंड्स- कल्पना इस बार तो उसे परपोज़ क्र hi दे वर्ण वो मंदिर देव न मार जाये, मुझे उसकी फ्रेंड से पता चला ह की वो भी ह्रदय को परपोज़ करने के चक्कर में ह,

कल्पना- ऐसा नहीं होगा, मैं गेम जीतनेय के बाद hi ह्रदय को परपोज़ क्र दूंगी, लेकिन अगर उसने मन क्र दिया तो,

फ्रेंड्स- कोई लड़का लड़की के परपोज़ को मन नहीं कर सकता,

दूसरी फ्रेंड- वो ह्रदय ह वो किसी को भी मन क्र देता ह यार,

वही दूसरी तरफ मंदिर और उसकी फ्रेंड्स में भी ये hi चर्चा चल रही थी,

मंदिर- वो न जाने कितनी लड़कियों को मन क्र चुक्का ह,

मंदिर फ्रेंड्स- क्योकि वो सब तेरे जैसी नहीं थी, तू परपोज़ करेगी तो बिलकुल मन नहीं क्र पायेगा,

दोनों लकड़ियों ने ह्रदय को परपोज़ करने की तैयारी कर ली थी,

और ह्रदय ने अपने गेम्स को जीतनेय के लिए तैयारी की हुई थी,

चंडीगढ़ में शनाया के कॉलेज में hi ये गेम्स हो रहे थे, कॉलेज में बस वही स्टूडेंट्स आ रहे थे जो गेम्स में हिस्सा ले रहे थे या जिन पैर गेम्स की जिम्मेदारी दी गई थी, बाकि सबकी छुट्टिया हो गई थी,

हनी ने भी कुछ गेम्स में part लिया था, कॉलेज की लड़कियों को इम्प्रेस करने के लिए, तो हनी और उसके दोस्त कॉलेज में hi रहते, हनी का गेम्स में part लेने का सबसे खास मकसद था कॉलेज में आने वाली दूसरे कॉलेजेस की लड़कियों को पटना और उनके साथ मजे करना, अक्सर गेम्स में यही होता ह अलग अलग कॉलेजेस के बच्चे आते हैं और उनकी सेटिंग होती ह, वो लोग मजे करते हैं, फिर गेम्स ख़तम तो उनकी प्रेम खाने भी ख़तम हो जाती ह,

हनी ऐसी hi प्रेम कहानिया बनाने के चक्कर में था,

शनाया नाराज थी वो कुछ दिन से कॉलेज नहीं आ रही थी, अब छुट्टिया पद गई तो वो अपने रूम में hi पड़ी रहती और ऑनलाइन चैटिंग में लगी रहती,

वही कॉलेज में दूसरे कॉलेजेस से आये हुए स्टूडेंट्स की भीड़ लगने लगी थी, एक से एक स्मार्ट लड़के और एक से बढ़ क्र एक खूबसूरत लड़किया, कुछ सिम्पल तो कुछ हाई क्लास मॉडर्न, सबको हॉस्टल में रखवाया गया, लड़को को लड़को के हॉस्टल में लड़कियों को लड़कियों के हॉस्टल में, दोनों हॉस्टल आमने सामने hi थे, दोनों हॉस्टल के बिच में स्पोर्ट्स ग्राउंड था, जहा आउटडोर सभी गेम्स होते थे, और इंडोर गेम्स कॉलेज के अंदर होते थे,

ह्रदय दीपा से आशीर्वाद लेकर निकल पड़ा अपनी पहेली मंजिल की तरफ, एक मिनी बस में ह्रदय और उसके साथी चल दिए चंडीगढ़, छोटा कॉलेज था तो खर्चा भी ज्यादा नहीं कर सकते थे, इसलिए बस भी पुराणी सी थी,

जब वो चंडीगढ़ कॉलेज में पहुंचे तो वह का माहौल देख क्र सबकी आँखे फटी रह गई थी, यहाँ लड़किया कपडे बस नाम के लिए पहने हुए घूम रही थी, लड़के भी एक से एक स्टाइलिश बने हुए घूम रहे थे,

और ये सब बेचारे बहुत hi सिम्पल साधारण से बन क्र वह घुसे थे, उन्हें देख क्र हर कोई उन्हें अजीब सा मुँह बना रहा था, जैसे वो किसी और hi दुनिया से आये हो,

J.S.S कॉलेज के स्टूडेंट्स वह मजाक सा बन गए थे, बेचारे चुप चाप सर निचे किये अपने कमरों की तरफ चल दिए, तभी उनके पीछे से बस से उतरा वो शेर जिसे किसी दुनिया की फ़िक्र नहीं थी, उसने पहला कदम hi ऐसा रखा जैसे पूरी धरती को हिलने आया हो,

उसे देख क्र सबकी हसी शांत हो चुकी थी, वह खड़े सभी से वो एक हाथ उप्पेर निकला हुआ था, लड़किया उसे ऐसे देख रही थी जैसे कोई अजूबा देख लिया हो,

सबने सुना था की किसी ज़माने में ऐसे लम्बे चोदे इंसान होते थे, लेकिन अब तो 5 फिट 9-10 इंच के आदमी भी बहुत लम्बे आदमियों में गिने जाते थे, और ये तो 6 फिट से भी बहुत ज्यादा लम्बा था,

और स्मार्ट तो उस लेवल का की कोई देवता जमीन पैर उतर आया हो, ह्रदय बिना नजर इधर उधर डेल सीधा अपने ग्रुप के पीछे पीछे अपने रूम की तरफ चल दिया, कुछ hi देर में ह्रदय के चर्चे सभी ग्रुप्स में फ़ैल चुके थे, लड़कियों में भी चर्चा गरम हो चुकी थी, जो लड़किया बस मजे लेने आई थी उनके लिए तो ह्रदय टारगेट बन गया था, इन गेम्स में उसके साथ मजे करने के लिए,

अगली सुबह गेम्स शुरू होने थे, तो सभी टीचर्स अपने अपने स्टूडेंट्स को समझा रहे थे,

ह्रदय के ग्रुप को सबसे पीछे का सबसे ख़राब रूम मिला था, क्योकि उनका कॉलेज सबसे छोटा था और बाकि की तरह हाई प्रोफाइल नहीं था,

अगली सुबह ग्राउंड के बीचो बिच स्टेज लगी हुई थी सभी कॉलेजेस के बच्चे वह बैठे हुए थे, और गेम्स शुरू होने से पहले चीफ गेस्ट वगेरा आये थे, काफी समय भाषणों में निकल जाने के बाद, डांस सम्पटिशन से गेम्स को स्टार्ट किया गया, ताकि सबका मनोरनजन भी हो जाये और गेम्स भी शुरू हो जाये,

मंदिर ने बहुत अच्छा डांस किया लेकिन वो बेचारी 4तह नंबर पैर रही, वो रोटी हुई अपने ग्रुप में आकर बैठ गई, उसे रोटा देख ह्रदय ने उसे समझाया की गेम्स में ये होता रहता ह, कल्पना को मौका अच्छा लगा ह्रदय को इम्प्रेस करने का, लेकिन सिंगिंग में वो पांचवे नंबर पैर रही, आज के गेम्स में ये हर गए,

बहुत से स्टूडेंट्स इनका मजाक ले रहे थे, इन्हे गवर बैकवर्ड न जाने क्या क्या बोल रहे थे,

लेकिन मंदिर और कल्पना पैर हनी की नजरपाद चुकी थी, दोनों लकडिया खूबसूरत और भोली नजर आ रही थी, हनी समझ गया था ये जरूर कच्ची कालिया हैं, बाकि ज्यादा तर इस खेल की मांझी हुई खिलाडी लग रही थी,

हनी उनके पास आया और उन्हें दिलासा देने लगा, वो बहुत hi अच्छा लड़का बन क्र उनके पास आया था, और कमल तो ये था की उसने कुछ hi देर में उन्हें इतना इम्प्रेस कर दिया की उनका नंबर तक ले गया,

वही हवेली में दिया शनाया को समझा रही थी, की ऐसे रूम में रहने से क्या हासिल होगा सबके साथ घूमे फायर,

लेकिन शनाया कुछ सुनने को तैयार hi नहीं थी, तभी रैना रूम में आई

रैना- शनाया तूने कॉलेज की विडिओ देखि वह कितना मजा आ रहा ह, हजारो बच्चे वह आये हुए हैं,

शनाया- मुझे क्या करना ह

रैना- अरे दूर दूर से आये स्टूडेंट्स पैर धक् ज़माने का अलग hi मजा ह, वो हमारे कॉलेज में हैं इससे अच्छा मौका नहीं मिलेगा और हनी भी गेम्स में भाग ले रहा ह,

शनाया की आँखों में चमक आ गई,

शनाया- सही बोल रही ह तू हम कॉलेज जायेंगे,

दिया को ख़ुशी तो हुई शनाया बहार निकलेगी लेकिन चिंता उससे भी ज्यादा हो गई, क्योकि वो कॉलेज में ड्रामा करने जाएगी,

वही कॉलेज में रात के समय सब अपने अपने रूम में पहुंच चुके थे, कल्पना और मंदिर दोनों दुखी थी और बैचैन थी,

मंदिर रूम की विंडो में उदास बैठी बहार ग्राउंड में देख रही थी की तभी उसकी नजर ग्राउंड में जाते हुए ह्रदय पैर पड़ी, वो अकेला था मंदिर को ये अच्छा मौका लगा बात करने का, वो तुरंत अपना हुलिया ठीक करके बहार को भागी, कल्पना ने उसे देखा तो उसे मंदिर पैर शक हुआ वो भी उसके पीछे चुप क्र चल दी,

मंदिर दौड़ती हुई ह्रदय के पास पहुंची,

मंदिर- यहाँ क्या कर रहे हो

ह्रदय- कुछ नहीं बस टहल रहा हु, मुझे जल्दी नींद नहीं आती,

मंदिर- अकेले क्यों टहल रहे हो किसी को बुला लेते

ह्रदय- अपने चक्कर में किसी और को क्यों परेशां करना, लेकिन तुम यहाँ क्या कर रही हो,

मंदिर- वो मुझे भी टहलना था, आज मन दुखी हो रहा था, मैं कॉलेज के लिए ट्रॉफी नहीं जीत पाई

ह्रदय- इसमें दुखी होने की जरुरत नहीं ह, ऐसा होता रहता ह, यहाँ हरने का मतलब ये नहीं ह की तुम अच्छा नहीं करती तुम बहुत अच्छा डांस करती हो,

मंदिर- ठंकु, मुझे तुमसे कुछ बात करनी थी

ह्रदय- है है बोलो

मंदिर- वो मैं वो

तभी पीछे से कल्पना भी आ गई

कल्पना- अरे तुम दोनों यहाँ क्या कर रहे हो

मंदिर- कुछ नहीं कुछ नहीं बस ऐसे hi टहल रहे थे,

ह्रदय- तुम्हे भी नींद नहीं आ रही,

कल्पना- है बस आज मन दुखी ह,

मंदिर ने अपने मन में कल्पना को बहुत गालिया दी,

तभी झड़ी के पास से कुछ आवाज आई, तीनो के कान खड़े हो गए,

ह्रदय उस तरफ चल दिया,

कल्पना- उधर मत जाओ पता नहीं क्या होगा वह

ह्रदय- डरने वाली कोई बात नहीं ह,

तभी उन्हें एक चीख सी सुनाई दी, तो ह्रदय के कदम तेज हो गए, ह्रदय वह पंहुचा मंदिर और कल्पना भी उसके पीछे वही आ गई,

तभी एक और आवाज आई- aahhhhhhhhhhh

ह्रदय उस झड़ी में घुस गया और जब वो बहार आया तो उसके हाथ में एक लड़के की गार्डन थी, जो बिलकुल नंगा था और उसके साथ थी एक लड़की बिलकुल नंगी, दोनों अपनी प्रेम लीला में लगे हुए थे,

कल्पना- हनी ये तो इसी कॉलेज का लड़का ह

जी है ये हनी था जिसने आज hi एक दूसरे कॉलेज की लड़की सेट कर ली थी और मौका देख क्र हॉस्टल से यहाँ ग्राउंड में बुला लिया था,

मंदिर- और ये लड़की तो डांस में थी मेरे साथ

हनी- छोड़ मुझे तू जनता ह मैं कोण हु

ह्रदय- तू कोई भी हो लेकिन ये हरकत करते हुए तुझे शर्म नहीं आ रही, दूसरे कॉलेज से लड़किया यहाँ आई ह तू उन्हें ख़राब कर रहा ह,

हनी- खुद दो दो को लेकर घूम रहा ह और मुझे ज्ञान दे रहा ह, और ये मेरा कॉलेज ह मैं जो चाहे करू

हनी को गुस्सा आ रहा था क्योकि इन दोनों लड़कियों को वो निचोड़ना चाहता था लेकिन उनके सामने hi उसका कांड खुल गया था,

वो लड़की तुरंत अपने कपडे उठा क्र भाग गई, ह्रदय ने हनी को दूर फेंका उसने अपने कपडे पहने और ह्रदय को धमकी देता हुआ बोलै

हनी- देख लूंगा तुझे गेम ख़तम होने से पहले तू सही सलामत नहीं जायेगा यहाँ से, और तुम दोनों शरीफ बानी घूमती हो और एक साथ दोनों इसके साथ मजे ले रही हो,

इतना बोल क्र हनी वह से निकल गया,

लेकिन उसकी बात से तीनो शर्म से गड़े जा रहे थे,

ह्रदय- उसकी बकवास पैर धयान मत दो और अपने रूम में जाओ,

दोनों श्रम से पानी पानी होती हुई रूम में आ गई और बार बार एक दूसरे को देख क्र नजरे निचे करके लेट जाती,

अगली सुबह सभी स्टूडेंट्स अपने अपने गेम्स की जगह पैर पहुंच गए थे, आज शनाया आशना रैना और दिया कॉलेज में आई थी, और वो चारो जहा से गुजर जाती लड़को की नजरे बस उन्ही पैर टिक जाती, पुरे कॉलेज में चारो के चर्चे शुरू हो गए थे, जो भी लड़के बहार से आये थे उनकी जुबान पैर उन्ही चारो के नाम थे, खास कर शनाया उसकी हॉटनेस देख क्र तो लकड़ो का पंत में hi लीक हो गया था,

वही शनाया का ऐटिटूड इस लेवल का था जैसे देव लोक की अप्सरा घूम रही हो और सामने भिकारी खड़े हो,

हनी उनके साथ hi घूमने लगा तो हनी के चर्चे लड़कियों में कुछ ज्यादा hi होने लगे, जब कोई लड़का किसी बेहद खूबसूरत लड़की का दोस्त हो तो बाकि की लड़किया बस जलन में आकर उसके लड़के से इम्प्रेस हो जाती हैं, वही हाल हनी के साथ हुआ, शनाया के साथ देख क्र लड़किया उसकी तरफ झुकने लगी,

उधर गेम चल रहे थे, और ह्रदय का कमल शुरू हो चुक्का था, आज के 8 गेम्स हुए जिसमे सभी ह्रदय ने फर्स्ट पोटिशन से जीते, और वो भी बहुत बड़े मार्जिन से,

पुरे कॉलेज में ये चर्चा फ़ैल गई की एक लड़के ने सरे गेम जीत लिए, हर कोई उससे मिलने के लिए उतावला हो गया, आज हनी का गेम नहीं था तो वो शनाया के साथ बिजी रहा, और शनाया सब पैर अपना रुआब ज़माने में बिजी रही,

लेकिन जब उनके पास तक ये खबर पहुंची की एक लड़के ने सरे गेम जीत लिए तो उनकी भी इच्छा हुई उससे मिलने की,

शनाया- ऐसा कोण ह जिसने सरे गेम जीत लिए,

दिया- पता नहीं लेकिन कोई खास hi होगा

शनाया- मैं उससे मिलना चाहती हु, उसे इनाम मिलना चाहिए,

दिया- इनाम

शनाया- है इनाम शनाया खुद उससे मिलने गई ह इससे बड़ा इनाम क्या होगा उसके लिए,

दिया ने मन भी किया लेकिन शनाया किसकी सुनने वाली थी,

वो चल दी उसके पीछे आशना रैना और हनी भी चल दिए. दिया को मज़बूरी में जाना पड़ा,

शाम का समय था सभी स्टूडेंट्स अपने अपने रूम में पहुंच चुके थे, ह्रदय ग्राउंड में बैठा हुआ एप्पल खा रहा था, तभी उसके पास एक लड़की आई,

लड़की- hello मर.

ह्रदय ने लड़की को देखा तो ये वही लड़की थी जो रात में हनी के साथ थी,

ह्रदय ने नजरे घुमा ली और दूसरी तरफ देखने लगा,

लड़की- मैं तुमसे hi बात कर रही हु

ह्रदय- बोलिये सुन रहा हु

लड़की- मेरा नाम सिमरन ह

ह्रदय- तो इसमें मैं आपकी क्या सहयता कर सकता हु, आपके माँ बाप ने नाम रखा ह उनसे बात कीजिये,

सिमरन- मैं तुमसे ये कहने आई हु की तुमने जो रात में देखा उसके बारे में किसी से कुछ मत कहना,

ह्रदय ने गुस्से में उसे देखा

सिमरन- मैं जानती हु तुम बिना कुछ लिए मेरी बात नहीं मानोगे, वैसे तुम कुछ काम स्मार्ट नहीं हो, अगर तुम चाहो तो हम दोनों एक अच्छा टाइम साथ में बिता सकते हैं, मैं तुम्हे जरूर खुश कर दूंगी, उन दोनों लड़कियों से ज्यादा खूबसूरत और सेक्सी हु मैं, वो दोनों उतना मजा नहीं दे पाई होंगी जितना मैं अकेले दे दूंगी,

सिमरन और ह्रदय खड़े थे तभी उनके पीछे से शनाया हनी दिया आशना और रैना आ रहे थे, एक लड़के ने उन्हें बताया था की वो गेम जीतने वाला लड़का कोण ह तो वो उसकी तरफ आ रहे थे,

शनाया- अरे ये देखो इसने आज hi गेम जीते हैं और ये लड़कियों को पटाने भी लग गया, देखो कैसे अकेले में पटाने की कोशिश कर रहा ह,

हनी- अरे इन छोटे शहर के लड़को को ऐसी हॉट और सेक्सी लड़किया देखने को भी नहीं मिलती बेचारे उतावले हो जाते हैं, देख कही थपड न खा जाये,

तभी एक जोर दर थपड की आवाज आई

हनी- ो तेरी ये तो मेरे बोलते hi पिट गया

तभी वो लड़की अपना गाल पकड़े दिखाई दी,

ह्रदय- तेरे जैसी लड़किया मुझसे बात भी कर ले उसमे भी मैं अपनी इंसल्ट समझता हु, चली जाओ यहाँ से वर्ण मेरे गुस्से की आग में जल जाओगी,

जब वो लड़की सामने आई तो हनी की गांड फैट गई,

दिया- यहाँ तो मामला कुछ और hi ह लगता ये लड़की hi परपोज़ करने आई थी और थपड खा क्र चली गई,

रैना- ऐसा भी होता ह क्या, लड़कियों के परपोसल को कोई लड़का कभी ठुकराता भी ह क्या

आशना- यहाँ तो ठुकराना बहुत छोटी बात ह उल्टा थपड पद गया इसे तो

शनाया ने बहुत hi घेरि नजरो से ह्रदय को देखा,

शनाया- ए hello

एक सुरीली सी आवाज ह्रदय के कानो में पड़ी तो ह्रदय ने पलट क्र देखा तो सामने आसमान से उत्तरी 4 परिया कड़ी थी, जिन्हे देख क्र ह्रदय का गुस्सा एक दम शांत हो गया,

लेकिन जैसे hi हनी पैर नजर पड़ी उसके दन्त फिर से भींच गए, और फेल इन्तजार में जो रेस्पेक्ट इन चारो के लिए आई थी अगले hi पल ख़तम हो गई, ह्रदय के दिमाग में ये आया इस लड़के के साथ ह तो अछि नहीं होंगी,

ह्रदय- बोलिये

शनाया- तुमने उस लड़की को थपड क्यों मारा

हनी- अरे हमे उससे क्या करना ये इन दोनों की प्रॉब्लम ह

ह्रदय- तेरी प्रॉब्लम सोल्वे करने आई थी

शनाया- क्या मतलब

हनी- ए हम लोग यहाँ तुझे बधाई देने आये हैं तूने आज सरे गेम जीते हैं, इसलिए हमारे कॉलेज की मिस ब्यूटी क्वीन तुझे खुद चल क्र बधाई देने आई ह,

ह्रदय- तू चमचा ह क्या इन सबका

हनी- बहुत बोल रहा ह

ह्रदय- अभी बोलना शुरू hi कहा किया ह,

शनाया- बड़ा घमंड ह तुम्हे

हनी- बच्चो के साथ जीत क्र घमंड दिखा रहा ह, अगर सही गेम खेलने वाला होता तो कल मेरे साथ रेस में मुकाबला करता, मैं तुझे दिखाऊंगा गेम्स कैसे खेले जाते हैं, जरूर आना देखने के लिए

ह्रदय बस मुस्कुराया

हदय- है तो मिस आप कुछ बोल रही थी,

दिया- हम तुम्हे बधाई देने आये थे, ये देख क्र अच्छा लगा की कोई अपने काम को लेकर इतनी लगन रखता ह, आज कल लोगो से एक गेम ठीक से नहीं खेला जाता तुम 8 गेम्स में परफेक्ट हो,

ह्रदय- ठंकु मम

दिया- मेरा नाम दिया ह

ह्रदय- मिस दिया अगर इंसान में कुछ करने की लगन हो तो एक क्या 100 चीजों में भी बेस्ट हो सकता ह,

शनाया बस ह्रदय को देखे जा रही थी,

ह्रदय वह से मुदा और अपने रूम की तरफ चला गया,

हनी- कितना घमंड ह इसमें

आशना- शनाया क्या हुआ तुम्हे आज तुम कुछ बोली नहीं,

शनाया- कुछ नहीं चलो चलते हैं

हनी- क्या हुआ शनाया

शनाया- कुछ नहीं तुम कल की रेस की तैयारी करो, हम घर जा रहे हैं

चारो वह से घर निकल गई, दिया बार बार शनाया को देख रही थी जो एक दम शांत थी,

घर पहुंच क्र शनाया सीधे अपने रूम में चली गई,

सीमा रश्मि आशिमा बैठे थे, दिया उन्ही के पास बैठ गई,

सीमा- आज ये बड़ी शांत सी लग रही ह

दिया- माँ आज कुछ अलग hi हुआ

सीमा- क्या हुआ

दिया- आज मैडम को उसकी टक्कर का ऐटिटूड वाला इंसान मिल गया

सीमा- क्या इसे भी बड़ा बत्तमीज था कोई

दिया- नहीं माँ वो बत्तमीज नहीं था उसका ऐटिटूड किसी बहुत hi इज्जत दर इंसान की तरह था, एक दम परफेक्ट था वो ऐसा लग रहा था जैसे वो कोई इंसान ह hi नहीं, उप्पेर वाले ने अलग से बैठ क्र उसे बनाया हो, उसका बोलना उसकी पर्सनालिटी उसका चलना उसकी आँखे, लम्बा छोड़ा सादे 6 फीता, और शरीफ इतना की लड़कियों की आँखों में आँखे दाल क्र भी बात नहीं कर रहा था, एक लड़की ने उसे परपोज़ किया तो उसे थपड मार दिया,

रश्मि- क्या लड़की को थपड मर दिया बड़ा बत्तमीज था वो तो

दिया- ममी ये तो मैं कल बताउंगी ऐसा क्या हुआ जिस वजह से उसने थपड मारा लेकिन उसे देख क्र नहीं लगता की वो बिना वजह ऐसे hi हाथ उठा देगा,

सीमा- तू कुछ ज्यादा hi तारीफ नहीं क्र रही उसकी, शनाया ये ज्यादा तो तू इम्प्रेस लग रही ह उससे

दिया- माँ आप भी न

दिया उठी और अपने रूम में चली गई,

चारो अपने अपने रूम में लेती बस ह्रदय के बारे में hi सोच रही थी, आशना और रैना जो शनाया के पीछे रहती थी आज उनके दिमाग में खुद के लिए विचार उठ रहे थे, वैसे अब तक किसी के दिल में कोई प्यार या कुछ और नहीं था बस एक अहसास सा था, कुछ अलग वो बस ह्रदय के बारे में hi सोच रही थी, क्योकि आज से पहले उन्होंने उससे परफेक्ट कोई नहीं देखा था,

रश्मि- दीदी दिया कुछ ज्यादा hi तारीफ नहीं कर गई, इतना परफेक्ट कोई होता ह क्या

सीमा- रश्मि परफेक्शन क्या होता ह इन लड़कियों को पता hi नहीं ह, आज तुषार हमारे साथ होता तो इन्हे समझ आता परफेक्शन की असली परिभाषा, आज कल थोड़ा सा भी अच्छा दीखता ह तो लड़किया पागल हो जाती हैं,

सीमा की आंको में नमी आ गई थी

रश्मि- दीदी मन दुखी मत कीजिये,

इधर मंदिर और कल्पना परेशां हो रही थी, उन्होंने ह्रदय से उस लड़की को थपड कहते और 4-4 अप्सराये उसके पास कड़ी थी, असल में दोनों विंडो में बैठी ह्रदय को देख रही थी तभी वो लड़की सिमरन जब ह्रदय के पास आई तो दोनों दर गई, ह्रदय ने रात में उसे नंगी देखा था उन्हें दर लगा कही ह्रदय उसके पीछे न चला जाये, लेकिन थपड पड़ते hi उन्हें ख़ुशी हुई लेकिन अपने लिए दर भी बढ़ गया,

दोनों बैचेन परेशां अपने बिस्टेर पैर पड़ी थी, दोनों hi कुछ कहना छाती थी लेकिन बोल नहीं प् रही थी, और ऐसे hi पड़े पड़े उन्हें नींद आ गई, अगली सुबह सब गेम्स में पहुंच गए, ह्रदय के साथियो के गेम बचे नहीं थे एक कैरम का गेम था जो कॉलेज में हो रहा था, बाकि सभी लोग ह्रदय का हौसला बढ़ने साथ hi रहते,

आज रेस होनी थी, जिसमे सबसे पहले 100 मत्र की रेस थी जिसमे हनी बहुत उछाल कूद कर रहा था, वो ऐसे दिखा रहा था जैसे वो पहले से hi विनर निश्चित हो,

शनाया दिया आशना और रैना भी गेम्स में आई थी आज वो एक जगा बैठी हुई गेम देख रही थी, बिलकुल शांत बैठी थी,

हनी शनाया की तरफ इशारा क्र रहा था, तभी अन्नोउंस हुआ की सभी रेसर अपनी पोजीशन में पहुंचे, सभी लाइन में खड़े हो गए और तभी हनी की नजर ह्रदय पैर पड़ी, वो एक दम चौंक गया

हनी- ओहो तू इस गेम में भी भाग ले रहा ह, आज तुझे हर का सवाद चखना पड़ेगा,

ह्रदय- मुझे बस अपने माँ के खाने का सवाद पसंद ह बाकि कोई सवाद मैं नहीं चखता,

हनी कंफ्यूज सा उसे देखने लगा,

ह्रदय को वह लाइन में देख क्र चारो लड़किया उठ क्र पास में आ गई, उन चारो के फेस पैर hi एक स्माइल थी,

तभी रेफरी का इशारा हुआ सब रेस के लिए तैयार हो गए, और शट की आवाज के साथ दौड़ पड़े, और हनी अपनी पूरी रफ़्तार से डोडा, लेकिन वह खड़े सभी लोग हैरत में खड़े रह गए जब उन्होंने ह्रदय को दौड़ते हुए देखा, ऐसा लगा जैसे बन्दूक से गोली छुट्टी हो, जब तक बाकि रेसर 60-70 मत्र दौड़े होंगे ह्रदय अपनी रेस पूरी कर चुक्का था,

तभी अन्नोउंस हुआ की जेर्सी no. 26 ह्रदय J.S.S कॉलेज हिमाचल रेस जीत चुके हैं.

चारो लड़कियों के मुँह पैर एक साथ आया ह्रदय

हनी बौखलाया सा उनके पास आया,

हनी- कोई नहीं यार अगर ये अगली रेस में आया तो मैं इसे ऐसी हार दूंगा ये यद् रखेगा,

कुछ देर बाद 200 मत्र की रेस और उसमे भी शामे वही हाल हुआ, उसके बाद 400 मत्र की उसका भी वही नतीजा,

फिर बरी आई 1500 मत्र की, सबमे अलग अलग रेसर थे लेकिन इधर से अकेला ह्रदय जो लगातार दौड़ रहा था, किसी को उम्मीद नहीं थी की एक खिलाडी सभी गेम्स में भाग ले सकता ह, इसलिए अपने हिसाब से सेडुल बनाया था,

शाम होते होते 5000 मत्र की भी बरी आई,

जिसमे ह्रदय फिर खड़ा था,

हनी- इस रेस में ये जरूर हारेगा सुबह से दौड़ रहा ह, अब नहीं जीतने वाला,

दिया- मुझे ऐसा नहीं लगता,

रैना- तुमने क्यों नहीं लिया भाग इस रेस में

हनी- मैं ज्यादा लम्बा नहीं दौड़ सकता

दिया- तुम तो छोटी रेस भी नहीं दौड़ पाए,

चारो हसने लगी

हनी को गुस्सा आ गया, वो गुस्से में ह्रदय को देखने लगा,

वही रेस शुरू हो गई, बाकि रेसर 4000 मत्र पहुंचे ह्रदय ने अपनी रेस पूरी कर दी थी,

पुरे कॉलेज में हंगामा मच गया था, कोई ऐसा कैसे दौड़ सकता ह,

दूसरे कॉलेज से आये हुए टीचर्स और स्टूडेंट्स ने इल्जाम लगा दिया की जरूर ये लड़का ड्रग्स लेकर गेम्स खेल रहा ह,

सबकी बात मानते हुए ह्रदय का डोप टेस्ट करवाने की बात राखी गई, तो तय रहा अगले दिन गेम्स ख़तम होने के बाद टेस्ट कराया जायेगा,

अब हनी के दिमाग में साजिश आ चुकी थी,

शनाया दिया रैना आशना ह्रदय के पास पहुंची उसे बधाई देने के लिए, सभी लड़के और लड़कियों के दिल में आग लग चुकी थी,

वही हनी मॅनॅग्मेंट के पास पंहुचा और ह्रदय के गेम्स पता किये, वो किस किस गेम में वो भाग ले रहा, तो पता चला की बैडमिंटन और फाइटिंग ये दो गेम और ह जिसमे से बैडमिंटन तो कल सुबह और फाइट रात में होनी ह,



हनी पंहुचा मेस में जहा सबके लिए खाना बनता था, हनी ने मेस इंचार्ज को पैसे दिए और ह्रदय के ग्रुप में जाने वाले खाने में ड्रग्स मिलवाने का इंतजाम क्र दिया, कल सुबह जो नाश्ता जायेगा उसमे ड्रग्स होने चाहिए जिससे वो नशे में होकर बैडमिंटन न खेल पाए और रात की फाइट से पहले भी हैवी दुर्गस्य उसके खाने में होने छाइये जिससे वो फाइट हरे और बुरी तरह पिटे, फिर डोप टेस्टिंग में फ़ैल हो जाये तो साडी ट्रॉफी चीन ली जाये,
 
अपडेट-4



एक छोटा सा इंट्रोडक्शन अब तक के पत्रों का दे देती हु, और जो जो इस कहानी में हैं उनका भी,

सबसे पहले तो कहानी की लीड हेरोइन हमारी अंजलि जो इस वक़्त लगभग 60 साल की हैं, लेकिन उनके उन्हें देख क्र शायद hi कोई उन्हें 60 की बोल सकता ह, जल्दी hi कहानी में उनकी एंट्री होगी,

उसके बाद आते हैं राजेश जी- आगे 70 के आस पास, काफी बुजुर्ग हो चुके हैं, आज भी गाओं में रह रहे हैं, पुरे गाओं में उनसे ज्यादा सम्मान किसी का नहीं ह,

अंजलि की बेटी सीमा जो चंडीगढ़ में रह रही ह, उसके साथ hi सचिन कपिल और दोनों की पत्निया रश्मि और आशिमा भी रहती हैं, और साथ में

सीमा और तुषार की बेटी- शनाया


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दीपा और तुषार की बेटी- दिया,

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दिया को ये hi बताया गया ह की सीमा hi उसकी माँ ह,

सचिन और रश्मि की बैठी रैना


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कपिल और आशिमा की बेटी आशना

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वही अमेरिका में नंदनी और उसके साथ उसकी और तुषार की बेटी नैना

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और कोमल और तुषार की बेटी काम्य रहती ह,

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नंदनी दोनों को माँ बन क्र पाल रही ह, कोमल का किसी को पता नहीं वो कहा हाली गई,

वही अनीता और रिंकी अपनी बेटियों को पाल रही हैं अनीता की बेटी आया


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और रिंकी की बेटी रम्य,

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दोनों को जुड़वाँ बताया गया ह, दोनों को रिंकी माँ बन क्र पाल रही ह,

और दीपा हिमाचल में अंजलि और तुषार के बेटे ह्रदय को पाल रही ह,


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वही वर्षा मुंबई में चली गई थी जहा वो अपनी और अलका की बेटी को वन्य

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और ाव्य को पाल रही ह,

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मंत्री राज प्रताप नंदनी के पिता बहुत लम्बा रोले नहीं ह,

संजय कुमार कोमल के पिता बिच बिच में रोले आएगा,

अशोक कपूर- स्टोरी में मुख्या पत्रों में से एक ह ये वही अशोक ह जो वो अनोखा है में रोहन का बाप था जो अवनि के पीछे पड़ा हुआ था,

अशोक का बीटा रोहन- 19 साल से कोमा में ह, सबको याद होगा 19 साल पहले कोण कोमा में गया था,

हनी- अशोक का पोता ह, कमीना ह दुनिया के सरे बुरे शोक ह इसमें,

अशोक का दूसरा बीटा- रवि एक नंबर का कमीना और ठरकी ह

रवि की वाइफ- निधि आगे 38 बहुत hi कामुक औरत ह, 36- 28- 38 का फिगर ह,


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पैसा बहुत ह शोक भी बहुत हैं, ये पति के साथ उसके हर गलत काम में साथ रहती ह, इनके बहुत से गलत धंदे हैं जो आगे सामने आएंगे,

रवि और अनीता की बेटी- नित्य आगे 18 ख़ुसूरति में कमल ह, पूरी माँ पैर गई ह,


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बाकि के पत्र कहानी में आते रहेंगे,

उनके बारे में तभी बताती रहूंगी,

अब स्टोरी पैर आते हैं,

अगली सुबह नाश्ता दिया गया, तो खुद हनी ने धयान दिया हनी ने ह्रदय को बिजी करने के लिए अपने दोस्तों को लगा दिया, बाकि उसके ग्रुप ने नाश्ता कर लिया उसके बाद ह्रदय का नाश्ता पहुंचाया गया, जिसमे ड्रग्स मिले हुए थे,

हनी ख़ुशी से उछलता फिर रहा था उसका प्लान कामयाब हो गया, फिर गेम शुरू हुआ बैडमिंटन का और नतीजा वही ह्रदय एक बड़े मार्जिन से जीत गया, उसे कोई नशा नहीं हो रहा था, हनी परेशां हो रखा था, उसने सोचा शायद इसे नशा करने की आदत ह इसलिए झेल गया, शाम के खाने में दोसे हैवी क्र दूंगा,

उसने वैसा hi किया शाम के खाने में बहुत hi हैवी दोसे मिला दी, इतनी हैवी की इंसान मर भी सकता ह,

और उसने तिगड़म भीड़ का ह्रदय का खाना अलग से भिजवा दिया,

रात में फाइट के लिए सब आ चुके थे, सभी गेम एक तरफ फाइट एक तरफ, हर किसी के लिए फाइट बेस्ट गेम था,

फाइट शुरू हो चुकी थी, अलग अलग राउंड में फाइट होनी थी, टोटल 8 फाइटर थे जिन्हे दो ग्रुप में बात दिया गया था, एक ग्रुप में एक फाइटर के 3 मैच होने थे, उसमे से दो फाइटर चुने जाने थे, फिर सेमि फ़ाइनल और फिर फाइनल,

दो दिन में hi सरे मैच ख़तम होने थे, आज hi साडी फाइट होनी थी,

बाई सबकी फाइट में काफी टाइम लगा लेकिन जब भी ह्रदय की फाइट आती तो पहले राउंड के पहले या दूसरे part में hi फाइट ख़तम हो जाती, ह्रदय बस एक hi मुक्के का इस्तेमाल करता, और नाकआउट में फैसला हो जाता,

वह आये सभी लोग देख क्र बड़े हैरत में थे, आज तक कॉलेज लेवल पैर ऐसा फाइटर नहीं देखा था, कुछ देर के लिए ह्रदय सर निचे ककरे बैठा था, तो हनी को लगा उस पैर ड्रग्स का असर होने लगा ह, लेकिन अगले hi पल ह्रदय उठा और अगली फाइट में सामने वाले फाइटर को एक hi पूछ में लिटा दिया,

हनी की गांड फटी हुई थी ये क्या चीज ह जिस पैर इतने ड्रग्स का भी कोई असर नहीं ह, फिर भी वो खुश हो गया की चलो डोपिंग में फास जायेगा ये,

वही शनाया दिया आशना रैना ह्रदय की फाइट देख क्र आचम्भित थी, वो तो क्या वह आयी सभी लड़किया बस ह्रदय ह्रदय पुकार रही थी, एक से एक खूबसूरत लड़किया ह्रदय के नाम के नारे लगा रही थी,

मंदिर और कल्पना की रूह कैंप रही थी, अगर इनमे से किसी लड़की ने ह्रदय को परपोज़ क्र दिया तो क्या होगा, ये तो इतनी मॉडर्न और सेक्सी और खूबसूरत लड़किया हैं,

फाइट ख़तम होने पैर 4 सेमि फ़ाइनल के लिए फाइटर चुन लिए गए, जिनके मैच कल सुबह होने थे, सभी अपने अपने रूम की तरफ जाने लगे, लेकिन लड़किया ह्रदय की तरफ दौड़ पड़ी,

ह्रदय के टीचर जो काफी है मुख थे,

राजवीर जी और तम्मना जी- ह्रदय अगर बचना चाहते हो तो तुरंत अपने रूम की तरफ दौड़ पदों, वर्ण ये लड़किया आज तुम्हे निचोड़ लेंगी, तुमने इन्हे पागल क्र दिया ह,

ह्रदय- सर मुझे इन सबके लफड़े में नहीं पांडा

तम्मना जी- कैसा लड़का ह इतनी लड़किया पीछे पड़ी हैं और ये भाग रहा ह, तुम्हारी जगह कोई और होता तो अब तक न जाने कितने कहते खोल चुक्का होता

ह्रदय- मम मैं रूम में जा रहा हु

ह्रदय तेजी से रूम की तरफ निकल गया, सब लड़किया देखती रह गई,

राजवीर जी- नियम का पक्का ह ये लड़का

तम्मना- आज के ज़माने में ऐसा लड़का मिलना नामुमकिन ह, इसके पीछे तो यहाँ की टीचर भी पागल हुई नजर आ रही हैं,

राजवीर- आप तो ठीक ह न मम कही आप भी तो नहीं

तम्मना- कैसी बता कर रहे हो सर आप, हमारा स्टूडेंट ह वो,

दोनों हस्ते हुए चले गए, लेकिन तम्मना जी की नजर कुछ और hi कह रही थी,

शनाया और दिया ह्रदय से मिलना चाहती थी लेकिन भीड़ की वजह से मौका नहीं मिल पाया,

अगली सुबह सब फिर से फाइट कोर्ट में थे, और दूसरी फाइट ह्रदय की थी जिसे वो कुछ hi देर में जीत गया था,

आधे घंटे बाद फाइनल होना था, उससे पहले डोप टेस्ट का रिजल्ट आ चुक्का था,

ह्रदय राजवीर जी के साथ बैठा हुआ था तभी वह शनाया दिया आशना और रैना आ गई,

शनाया- hello ह्रदय यू अरे रोक्किंग डिअर यू अरे बेस्ट,

ह्रदय- ठंकु मिस

रैना- सच में तुम्हारे जैसा फाइटर कभी नहीं देखा,

आशना- हमे यकीन ह फाइनल तुम hi जीतोगे,

तभी पीछे से हनी आ गया,

हनी- जीतेगा तो तब जब डोप टेस्ट में पास होगा,

शान्या- क्या मतलब

हनी- सबको शक ह ये ड्रग्स लेकर गेम खेल रहा ह, तभी तो सरे गेम्स लगातार खेल रहा ह, ये देखो इसे हर टाइम पसीना आता रहता ह, जबकि मौसम गर्मी वाला तो ह भी नहीं,

ह्रदय मुस्कुरा दिया,

हनी- है मत रिजल्ट आ चुक्का ह, अभी टीचर लेकर आ रहे हैं,

तभी फाइट रिंग में अनोउस्मेंट हुई,

गेम्स हेड- यहाँ आये सभी कॉलेज के लोगो की कंप्लेंट थी की ये लड़का ह्रदय ड्रग्स लेकर गेम खेल रहा ह, सबके शक को शांत करने के लिए हमे इसका टेस्ट किया ह और इसके साथ साथ यहाँ आये सभी स्टूडेंट्स जा टेस्ट करवा दिया गया ह,, और उसका रिजल्ट ये ह की इसके खून में,

हनी धीर से शनाया से- अब देखना बहुत ज्यादा ड्रग्स निकलेगा, हमारा कॉलेज हार नहीं सकता,

शनाया ने अजीब नजरो से हनी को देखा,

गेम्स हेड- इसके खून में जरा सा भी ड्रग्स नहीं पाया गया ह, डॉक्टर्स का कहना ह की इसने आज तक कभी ड्रग्स को छुआ भी नहीं ह, और न hi कोई अल्कोहल उसे किया ह कभी, लेकिन बाकि स्टूडेंट्स में से 23 स्टूडेंट्स के रिजल्ट पोसेटिव हैं जिनमे से 10 तो खुद इसी कॉलेज के है, उन सबको बच्चो को गेम्स से बहार किया जा रहा ह,

रिजल्ट सुनते hi जहा हनी के चेरे का रंग उड़ गया वही लड़कियों ने तालियों के साथ शोर मचाना शुरू क्र दिया,

हनी खुद से hi- ये कैसे हो सकता ह, ये नहीं हो सकता, ये रिपोर्ट गलत ह, ये झूटी ह कुछ गड़बड़ की गई ह,

हनी तुरंत बहार को भगा मेस वाले के पास, दिया की नजर उसकी हरकतों पैर थी वो भी उसके पीछे हो ली,

हनी मेस इंचार्ज के पास पंहुचा

हनी- ये क्या हुआ उसके खून में तो कुछ नहीं निकला, कैसा ड्रग्स मिलाया था

मेस इंचार्ज- तुमने जो दिया था वही मिलाया था,

हनी- फिर ऐसा कैसे हो सकता ह, कही हमारा कॉलेज तो उससे नहीं मिला हुआ,

मेस इंचार्ज- रुको मैं पहले अपने लड़के से पूछ लू

उसने अपने एक लड़के को बुलाया

मेस इंचार्ज- अरे सोनू जो खाना उस लड़के के लिए गया था वो उसने ख़तम क्र लिया था न,

सोनू- सर वो लड़का तो खाना खता hi नहीं ह

हनी- खाना नहीं खता मतलब और क्या खता ह

सोनू- वो तो बस फल खता ह, या फिर चने खता हुआ घूमता ह, वो जब से यहाँ आया ह उसने एक बार भी यहाँ का खाना नहीं खाया ह,

हनी ने अपना सर पकड़ लिया- भेनचोद तूने पहले क्यों नहीं बताया

सोनू- इसमें मैं क्या बताता वो नहीं खता

मेस इंचार्ज- तू जा सोनू

सोनू चला गया

मेस इंचार्ज- उसे क्यों डाट रहे हो उसकी क्या गलती उसे तोडना पता था हम क्या कर रहे हैं,

हनी- सारा काम ख़राब हो गया,

बहार कड़ी दिया सब सुन रही थी, वो वह से हटी और वापस सबके पास आ गई,

उधर फाइनल फाइट शुरू हो चुकी थी, सामने वाला फाइटर काफी अच्छा लड़ रहा था, वो ह्रदय को छू तो नहीं पाया था लेकिन खुद भी ह्रदय के वॉर से बच रहा था,

ह्रदय भी फाइट को थोड़ी इंट्रेस्टिंग बना रहा था, क्योकि अब तक उसने सबको ओने पंच में नाकआउट कर दिया था, तो फाइट का मजा hi ख़तम हो जा रहा था,

ह्रदय कुछ देर मजे लेता रहा,

तभी एक आवाज आई

ह्रदय हिट हिम ओने पंच

और ह्रदय का हाथ चल गया और सीधा पंच उस फाइटर के मुँह पैर लगा और गेम ओवर, वो फैटेर बेहोश हो गया, ह्रदय ने आवाज की तरफ देखा तो वो आवाज शनाया की थी,

ह्रदय को बड़ी हैरत हुई उसने शनाया की बात ऐसे hi मान ली, और शनाया का ख़ुशी से ठिकाना नहीं था, लेकिन उसकी ख़ुशी भीड़ के शोर मचने में कही खो गई,

ह्रदय को विजेता घोषित क्र दिया गया,

वह आये हरे क स्टूडेंट की जुबान पैर बस एक hi नाम था केवल ह्रदय का, लड़के हो या लड़की हर कोई बस ह्रदय का दीवाना बन गया था, शनाया उतावली होकर ह्रदय की तरफ भागी लेकिन वो वह से निकल चुक्का था,

बाकि सा स्टूडेंट्स अगले गेम्स की तरफ जा चुके थे, ह्रदय के कॉलेज के सभी गेम्स ख़तम हो चुके थे तो राजवीर जी सभी स्टूडेंट्स और स्टाफ को लेकर बहार आ गए पार्टी के लिए, कॉलेज की तरफ से तो कुछ मिला नहीं था लेकिन राजवीर जी और अतुल जी ने अपनी पॉकेट से खर्चा करके सबको एक अच्छी जगह खाना खिलाया, ह्रदय ने यहाँ भी फ्रूट्स और पनीर खाया,

राजवीर जी- आज हमने या यु कहो अकेले ह्रदय ने 15 गेम्स जीत लिए हैं, ये बहुत बड़ी जीत ह, हमारे कॉलेज ने सबसे काम गेम्स में हिस्सा लिया था, लेकिन ह्रदय की वजह से हमारे कॉलेज का नाम सुर्खियों में ह, लेकिन हमारा टाइम यहाँ अब पूरा हो गया ह, ह्रदय के अलावा बाकि सबको यहाँ से चलना होगा, जिन लोगो के गेम्स ख़तम हो चुके हैं अब यहाँ के कॉलेज से उनके लिए खाना और रूम नहीं मिलेगा, बस उन स्टूडेंट्स को मिलेगा जो गेम्स में जीते हैं,

हमारे कॉलेज इतना खर्च नहीं क्र सकता की अगले 8 दिन तक सबका खर्चा उठा सके,

सभी स्टूडेंट्स दुखी हो गए,

राजवीर जी- प्रिंसिपल सर का आर्डर ह की कोई एक टीचर ह्रदय के साथ रुक सकता ह, बाकि सबको आज hi वापस लौटना होगा,

स्टूडेंट्स- सर कोण रुक रहा ह यहाँ

राजवीर जी- जब सरे स्टूडेंट्स चले जायेंगे तो यहाँ मन नहीं लगेगा, तो हमने सोचा ह तम्मना जी रुक जाएँगी उनके रिलेटिव यहाँ रहते हैं, तो वो उनके पास चली जाया करेंगी तो प्रॉब्लम भी सोल्वे हो जाएगी,

तम्मना बहुत खुश थी ह्रदय के साथ रुकने के लिए,

वही कल्पना और मंदिर के अंदर तूफ़ान आया हुआ था उन दोनों का दिल धड़ धड़ की अव्वज के साथ बहुत तेज धड़क रहा था,

कॉलेज में वापस आकर सबने अपना अपना सामान लिया और अपनी उस पुराणी सी बस में जाकर बैठ गए, ह्रदय और तम्मना ने सबको bye किया, मंदिर और कल्पना को मौका hi नहीं मिला ह्रदय से बात करने का, उनकी आँखों में आंसू थे, वो ऐसे दुखी थी जैसे अपने माँ बाप को छोड़ क्र ससुराल जा रही हो,

इधर कॉलेज में खबर फ़ैल गई की J.S.S कॉलेज के स्टूडेंट्स वापस जा रहे हैं उनके गेम्स ख़तम हो चुके हैं,

ये बात शनाया तक भी पहुंच गई थी, वो बहुत जल्दी में उनके पास पहसुने के लिए डोडी लेकिन बस जा चुकी थी,

ह्रदय और तम्मना वह से जा चुके थे, तम्मना उसे अपने साथ ये बोल क्र ले गई की यहाँ अकेला क्या करेगा उसके साथ रिलेटिव के घर घूम आएगा, ह्रदय टीचर की बात ताल न सका और चल दिया,

वही दिया रैना भी शनाया के पीछे आई, शनाया दुखी सी कड़ी थी,

दिया- क्या हुआ शनाया

शनाया- कुछ नहीं दिया बस सोचा एक बार उस खिलाडी से मिल लू, उसे बधाई दे दू,

दिया- है बधाई तो उसे देनी चाहिए थी, इतनी साजिसों के बाद भी वो जीत गया,

शनाया- साजिश कैसी साजिश

दिया ने शनाया को हनी की साडी करतूत बता दी,

शनाया के दन्त गुस्से में भींच गए,

रैना- वो अपनी ट्रॉफी लेने तो जरूर आएगा न गेम्स के आखरी दिन

दिया- सही कहा

शनाया- लेकिन पहले इस हनी को सुधर देती हु मैं आज

दिया- नहीं अभी कुछ मत कर, यहाँ का माहौल अलग ह खामो खा ड्रामा हो जायेगा, सही मौका देख क्र करेनेगे,

पुरे कॉलेज में बस गेम्स मॅनॅग्मेंट को पता था की J.S.S कॉलेज से ह्रदय और तम्मना रुके हुए हैं, बाकि किसी को इसकी जानकरी नहीं थी, क्योकि दोनों ने खाने के लिए मन कर दिया था तो मेस में रिपोर्ट पहुंची की J.S.S कॉलेज के सभी स्टूडेंट्स जा चुके हैं, तम्मना अपने रिलेटिव के यहाँ रुकने वाली थी और ह्रदय यहाँ का खाना खता नहीं था,

और गर्ल्स हॉस्टल का रूम खली क्र दिया था, बॉयज हॉस्टल के रूम में टाला लगा क्र चाबी ह्रदय के पास थी वह से बाकि बिस्तरे उठा लिए गए थे, तो सबको लगा सब जा चुके हैं,

शाम का समय था शनाया आज बहुत दिन बाद अपने परिवार के साथ बैठी थी, सीमा खुश थी,

सब लोग एक साथ बैठे थे,

कपिल- आज तो बड़ा अच्छा दिन ह सब एक साथ हैं, कोई खास बात ह क्या

आशना- पापा हमे आपसे कुछ बात करनी ह,

कपिल- अरे ये तो बहुत ख़ुशी की बात ह, बोलो बोलो

शनाया- अंकल हम चाहते हैं की हमारे कॉलेज में जो स्टूडेंट्स गेम्स के विनर होंगे हम उन्हें पार्टी देंगे,

सचिन- ये तो बढ़िया सोचा ह, कहा देनी ह पार्टी

रैना- किसी होटल में देंगे

दिया- अगर अपने घर पैर दे तो, इस घर में हमने कभी पार्टीज नहीं देखि, हमारे बर्थडे भी हमेशा बहार hi मनाये जाते हैं,

घर में पार्टी का नाम सुनकर सीमा सचिन कपिल रश्मि आशिमा एक दूसरे का मुँह देखने लगे,

सीमा- लेकिन बेटी घर में

शनाया- है है सही कहा दिया ने, इस बहाने इस घर में भी खुशिया आ जाएँगी, शायद इसी बहाने कुछ अच्छा हो जाये,

सचिन ने सीमा को इशारा किया ठीक ह,

सचिन- ठीक ह बच्चो तुम बोल दो सब तैयारी हो जाएँगी,

चारो भेने ख़ुशी से उछाल पड़ी,

सरे बड़े उन्हें खुश देख क्र ख़ुशी से मुस्कुरा पड़े,

काफी दिन बाद ऐसी हसी ख़ुशी सुनाई दी थी घर में,

वही ह्रदय तम्मना जी के साथ उनके रिलेटिव उनके मां के लड़के के घर पैर बैठा हुआ था,

ये साधारण सा परिवार जो चंडीगढ़ जैसे शहर में जैसे तैसे करके अपना गुजरा कर रहा था, यहाँ तम्मना के मां का लड़का विनय और उसकी फॅमिली रहे थी, विनय का कुछ दिन पहले बाइक से एक्सीडेंट हो गया था और उसके दोनों पेअर टूट गए थे,

ये वही इंसान ह जिसका एक्सीडेंट हनी की गाड़ी से हुआ था,

अब ये लचर बिस्टेर पैर पड़े थे, इनका इलाज तो सचिन ने करवा दिया था और पैसे भी काफी दिए थे लेकिन पैसे हमेशा नहीं चलते, विनय अकेला कमाने वाला इंसान था घर में, उसकी फॅमिली में उसकी पत्नी विनीता बीटा अनुज और बेटी अदिति रहते थे, दोनों बच्चे जवानी की तरफ बढ़ रहे थे तो खर्चे भी बहुत थे, किराये का माकन था, विनय की नौकरी थी पेअर टूट जाने से नौकरी भी ख़तम हो चुकी थी,

तम्मना दुखी सी अपने भाई के पास बैठी थी,

विनय- अरे पगली दुखी क्यों होती ह किस्मत में जो लिखा ह वो तो होना hi था,

ह्रदय- सर जिन लोगो ने ये किया उन्हें पुलिस ने कुछ नहीं कहा

विनीता- बीटा ये शहर ऐसा hi ह यहाँ बस पैसे वालो की चलती ह, उन लोगो ने पुलिस को पैसे खिलाये और सब शांत करवा दिया, पुलिस ने इनकी hi गलती निकल दी,

विनय- अरे छोड़ो भी उन्होंने इतने पैसे दिए हम लोगो को, उन्हें जेल भेज भी देते तो रोड एक्सीडेंट का केस बनता और वो जल्दी हु जमानत पैर छूट जाते, हम तो फिर भी बर्बाद हो जाते, अब उनकी वजह से कोई काम धंदा तो क्र hi सकता हु,

तम्मना- लेकिन गलती की सजा तो मिलनी चाहिए थी भैया,

विनय- सजा उप्पेर वाला देता ह, जिनको हम सजा नहीं दे सकते उनके लिए उप्पेर वाला खुद आ फैसला करता ह, तू फ़िक्र न कर,

विनीता- बीटा क्या खाओगे

ह्रदय- कुछ नहीं आंटी मैं कुछ नहीं खता,

विनीता- अरे ऐसे कैसे कुछ तो खाना hi होगा,

ह्रदय- माफ़ करना आंटी मेरा नियम ह मैं कही कुछ नहीं खता, ह्रदय ने सोचा बोल दे फ्रूट्स खा लेगा लेकिन उनकी हालत देख क्र समझ गया की ये घर में फ्रूट्स भी नहीं रख पते होंगे इसलिए उन्हें शर्मिंदा नहीं किया,

विनय- बीटा ये तो बहुत गलत होगा घर में बैठ क्र कुछ नहीं लोगे,

ह्रदय- आप इतना बोल रहे हैं तो ब्लैक कॉफ़ी ले लूंगा बिना मीठे के

अदिति ह्रदय के लिए ब्लैक कॉफ़ी बना ले,

तम्मना एक 30 साल की खूबसूरत लड़की थी जवानी पुरे शवाब पैर थी,


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आज कल शादिया कोई भी 28- 30 से पहले करता hi नहीं था, तम्मना ने शादी नहीं की थी, वैसे कुछ hi लोग ऐसे थे जो आज भी लड़का ढूंढ क्र शादी करते थे, वर्ण आज कल लड़के लड़किया खुद अपनी मर्जी से शादी करके आ जाते थे या 18 के होते hi लिविंग में रहना शुरू क्र देते थे, और 30-35 तक आते आते 3-4 पार्टनर बदल चुके होते हैं, आज की पीढ़ी ने शादी करने से hi परहेज क्र लिया था, लड़किया बच्चे पैदा नहीं करना चाहती थी उनका फिगर ख़राब हो जाता था, लड़के जम्मेदारी नहीं उठाना छाते थे इसलिए बच्चे पैदा नहीं करना छाते थे, ऐसे hi शादियों की जगह लिविंग में रहना शुरू क्र दिया था, एक दूसरे के साथ मजे लो जब तक मजा आ रहा h,uske बाद दूसरा पार्टनर ढूंढ लो, बहुत hi सिम्पल हो गया था,

खैर तम्मना की आगे तो इतनी हो चुकी थी की उसे पुरे मजे ले लेने चाहिए थे, लेकिन जहा वो रहती थी वह अब भी इन सब चीजों से दूर थे लोग, लेकिन सेक्स से दुरी किसी की नहीं रही थी, आज का डोर ये था की 18 तक अगर कोई कुँअरि बची ह तो बहुत बड़ी उपलब्धि होती ह, और 18 होते hi लकडिया सबसे पहले अपनी छूट फ़द्वती हैं, आज के टाइम में 18 आगे एडल्ट होने के लिए नहीं बल्कि छोड़ने के लिए हो गई थी, 18 के होजाओ और बस दिल खोल क्र चूड़ो, क्योकि उसके बाद घरवाले आपको रोक नहीं सकते ये गोवत रूल बन गया था,

कुँअरि लड़की ढूंढ़ना मतलब भूसे के ढेर में सुई ढूढ़ने जैसा था,

तम्मना कुँअरि ह या जवानी के मजे ले चुकी ह ये आगे पता चलेगा,

तम्मना को यहाँ आये हुए कुछ hi महीने हुए थे, जब से ह्रदय को देखा था उसका दिल उस पैर आ गया था लेकिन वो टीचर थी तो लिमिट में hi रही थी, आज ह्रदय उसके साथ बैठा था ये hi सोच क्र तम्मना की जांघो के बिच में गिला पैन आ चुक्का था,

लेकिन बेचारी को कोण समझाए की इस लड़के के निचे आने के लिए न जाने कितनी लड़किया पागल हुई घूम रही हैं, लेकिन ये किसी को देखता भी नहीं ह,

कुछ देर वह बैठ क्र ह्रदय उनसे परमिशन लेकर वह से निकल गया, तम्मना ने काफी रोकने की कोशिश की, लेकिन ह्रदय रुका नहीं, वैसे भी घर इतना छोटा था की वह तम्मना के आने से hi सोने में प्रॉब्लम हो गई थी ह्रदय को कहा सुलाते,

ह्रदय वह से पैदल पैदल चंडीगढ़ में घूमने लगा, शहर की चकचोँद तेज दौड़ती हुई गाड़िया, हर कोई बस भगा जा रहा था, कहा पहाड़ो की शांति और कहा ये शोर शराबा, ह्रदय को ये सब पसंद नहीं आ रहा था, मार्किट में आधी नंगी घूमती लकडिया हाथ में शराब और सिगरेट पीती हुई, ह्रदय वह से पैदल hi चलता हुआ कॉलेज पहुंच गया, और रात में सीधे अपने रूम में जाकर सो गया,

अगले 5 दिन ह्रदय ने किसी को पता hi नहीं चलने दिया की वो वह पैर ह, वो नहीं चाहता था लड़किया उसे देखे और उसके पीछे आये, वो शांति चाहता था,

उधर मंत्री राज प्रताप की तबियत बिगड़ती जा रही थी, कमिसिनोर संजय कुमार ने नंदनी के बैंक अकाउंट से उसका एड्रेस निकलवा लिया था, और सीधे फ्लाइट पकड़ क्र पहुंच गया अमेरिका,

अमेरिका में नंदनी के घर पैर संजय जी नंदनी के सामने बैठे हुए थे,

नंदनी- अंकल आप यहाँ क्यों आये हैं,

संजय- बेटी तू अपने पिता को भूल सकती ह लेकिन वो तुझे कैसे भूल सकते हैं,

नंदनी- मैंने उन्हें कसम दी थी मुझे न ढूंढा जाये

संजय- उन्हें दी थी उन्होंने नहीं ढूंढा लेकिन मुझे ढूंढ़ना पड़ा

नंदनी- मैं वापस नहीं आउंगी

संजय- अपने मरते हुए पिता को आखरी बार देखने भी नहीं

नंदनी एक दम सकते में आ गई,

नंदाई बोखलाती हुई- क्या हुआ क्या हुआ उन्हें अंकल बोलिये क्या हुआ उन्हें

संजय- वो नहीं चाहते थे तुझे पता चले लेकिन मैं एक पिता का दर्द समझता हु, मैं खुद अपनी बेटी से दूर रह क्र तड़प रहा हु, इसलिए मैं खुद तेरे पास आया हु ये बताने के लिए की वो अपनी अंतिम सांसे गईं रहे हैं, उन्हें ब्लड कैंसर ह, लास्ट स्टेज

नंदनी सोफे से निचे गिर पड़ी, उसका मुँह खुला रह गया,

नंदनी- ये ये कैसे हो सकता ह, नहीं नहीं ये ये नहीं हो सकता अंकल कह दो ये झूट ह,

संजय- काश ये झूट होता बेटी,

नंदनी- ये क्या हो गया, मेरे पापा

संजय- तेरे जाने के बाद उन्होंने सब कुछ त्याग दिया, अपना ख्याल भी रखना छोड़ दिया, राजनीती से भी दूर हो गए,

नंदनी रोने लगी,

तभी नैना और काम्य आ गई, और उन्होंने अपनी माँ को रट हुए देख लिया

नैना- माँ माँ क्या हुआ, आप ठीक हो न, हे मिस्टर कोण हो तुम, तुमने हमारी माँ को रुलाया,

रम्य- तुम्हारी इतनी हिम्मत

नंदनी- रुक जाओ, और तमीज से बात करो ये

संजय ने न में गार्डन हिला दी,

संजय की आँखों में आंसू थे,

नंदनी समझ गई, अपनी बेटी की बेटी को देख क्र उनका दिल भर आया था,

नंदनी- अंकल ये नैना ह और ये काम्य ह,

संजय ने काम्य को स्नेह भरी नजरो से देखा,

संजय- बहुत बड़ी हो गई हैं,

काम्य- माँ कोण ह ये और आप रो क्यों रही हो,

नंदनी- कुछ नहीं बेटी बाद में बताउंगी

संजय- बेटी एक बार जरूर सोचना मैं चलता हु, वो तेरे इंतजार में हैं न जाने कब वो….

इतना बोल क्र संजय उठे और चले गए,

नैना- माँ कोण थे ये और क्या हुआ

नंदनी खामोश बैठी रही,

काम्य- माँ बोलिये न क्या हुआ ह, आप बोलिये या मैं उस ओल्ड मन की गार्डन पकड़ केर पुछु

नंदनी- काम्य ये hi तमीज सिखाई ह क्या मैंने तुम दोनों को, अपने से बड़ो के साथ ऐसा व्यव्हार किया जाता ह,

काम्य- श्री माँ लेकिन उनकी वजह से आप रोई हो,

नंदनी- तुम नहीं जानती वो कोण हैं,

नैना- तो बताइये न वो कोण ह,


नंदनी- वो मेरे पापा के दोस्त हैं ह, इंडिया से आये हैं
 
अपडेट-5




नैना- पापा के दोस्त, आपके पापा हैं, क्या इंडिया में हमारा कोई रहता ह,

नंदनी चुप हो गई

काम्य- बोलिये माँ

नंदनी- मेरे पापा रहते हैं और वो मर रहे हैं,

इतना बोल क्र नंदनी फुट फुट क्र रोने लगी,

दोनों भेने नंदनी को शांत करने लगी,

नैना- माँ बोलिये न क्या हुआ और आपने तो कभी बताया hi नहीं इंडिया में हमारा कोई अपना भी रहता ह,

जब नंदनी शांत हुई तो उसे समझ आया की अपने दुःख में आकर उसने इंडिया के रिश्तो के बार में बता दिया ह, अब उसे बात सम्हालनी थी,

नंदनी- तुम दोनों जानती हो न मैंने और तुम्हारे पापा ने लव मैरिज की थी,

नैना- है जानते हैं ये बात और ह आपने कभी उनके बारे में बताया नहीं

नंदनी- फिर कभी बताउंगी उनके बारे में,

हमारी शादी से मेरे पिता बहुत नाराज हो गए थे, तो हम उन्हें छोड़ क्र यहाँ आ गए फिर कभी उनसे बात नहीं की,

काम्य- ये तो गलत ह माँ अगर हम अपनी पसंद से शादी क्र लेंगी तो क्या आपसे रिश्ता ख़तम हो जायेगा, आप नाराज भी रहोगी तब भी आपको मन लेंगे,

नंदनी- बस मैं उन्हें मन नहीं पाई

नैना- अब क्या हुआ ह उन्हें

ननदनी- उन्हें कैंसर ह और वो अपने आखरी

नंदनी फिर रोने लगी

नैना- माँ हमे उनके पास जाना चाहिए, उनसे मिलना चाहिए,

काम्य- है सही कहा आज पहेली बार पता चला ह की हमारी माँ के अलावा भी कोई ह जो हमारा अपना कहा जा सकता ह, वर्ण हमारे तो बाप भी हमारा नहीं ह

नंदनी- काम्य ख़बरदार जो अपने पापा के लिए कुछ कहा तो

काम्य- और क्या कहु, वो कहा ह हमारे पास क्यों नहीं ह, उनकी कोई तस्वीर क्यों नहीं ह, वो जिन्दा है या, अगर ह तो कहा हैं,

नैना- काम्य बस क्र माँ ने क्या कहा था, उनके बारे में कभी बात नहीं होगी, जब वक़्त आएगा वो खुद बता देंगी,

काम्य- लेकिन कब, क्या ऐसे hi कोई उनकी भी खबर लेकर आएगा,

नंदनी ने गुस्से में काम्य की तरफ हाथ उठाया लेकिन मारा नहीं, नंदनी की आँखे लाल हो राखी थी रो रो क्र बुरा हाल था, वो दौड़ती हुई अपने रूम में भाग गई,

नैना- ये क्या कर दिया पगली, माँ को रुला दिया, उन्होंने कभी हमारी आँखों में आंसू नहीं आने दिए और हमने,

काम्य अपना सर पकड़ क्र बैठ गई- ये मैंने क्या कर दिया, माँ को रुला दिया,

दोनों नंदनी के रूम की तरफ डोडी, और मिनट करने लगी दरवाजा खोलने के लिए, नंदनी ने बहुत देर बाद दरवाजा खोला तो दोनों भेने नंदनी से माफ़ी मांगने लगी,

तीनो एक दूसरे से लिपटी हुई बैठी रही,

नैना- माँ हम नाना जी के पास जाएंगे न

नंदनी ने एक घेरि साँस बरी- है बेटी हम जायँगे, कल hi जायेंगे,

वही इन सब से दूर उत्तर प्रदेश के एक शहर मीरुत में शहर से बहार एक घर में एक औरत की मस्ती भरी सिसकारियां गूंज रही थी,

औरत- अह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhhhh ऐसे hi छोड़ो मुझे ahhhhhhhhhhhhh फाड् दो मेरी छूट अपने इस लोडे से, aahhhhhhhhhhhhhh


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कसम से जब ये अंदर जाता ह तो हर बार छूट की धजिया उदा देता ह, दिल करता ह बस ऐसे hi चुदती रहु,

आदमी- तो चुदती रहो न मैं नहीं थकने वाला, तू hi मन कर देगी, ये ले भें की लोदी चुद

आदमी ने पूरी जान से धक्के लगाने शुरू क्र दिए,

औरत- अह्हह्ह्ह्ह अह्ह्ह्हह्हह बस बस मर गई इतना तेज नहीं अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह बहुत दर्द हो रहा ह आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह रुक जा जालिम फैट जाएगी,

आदमी- इतने दिन बाद आई ह तो सजा तो देनी hi पड़ेगी,

औरत- इस बार जल्दी आउंगी, इस बार माफ़ कर दे, ahahhhhhhhhhh माँ मैं गई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह ahhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhh भर दे मेरी छूट को अपने लोडे के रास से, निकल दे मेरी छूट से एक और बच्चा,

आदमी ने औरत को अपनी गॉड में उठा क्र बीएड पैर घोड़ी बना दिया और पीछे से छोड़ना शुरू किया, और नॉनस्टॉप धक्के मरता रहा जब तक अपना रास उसकी छूट में भर नहीं दिया,


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वो औरत निढाल होकर पद गई, आदमी उठा और कपडे पहन क्र बहार निकल गया, बहार एक औरत पोछा लगा रही थी, फाटे से कपड़ो में, आदमी को देख क्र सर निचे कर लिया, आदमी बहार निकल गया,

जो औरत अंदर चुद रही थी काफी देर तक बिस्टेर पैर पड़ी रही, फिर जैसे तैसे उठी और अपने कपडे पहने और बहार लंगड़ाती हुई आई, और अंगड़ाई लेती हुई बोली जालिम ने नस नस तोड़ दी, पूरा निचोड़ दिया, फिर वो एक 65 साल की औरत के पास जाकर बैठ गई,

बुजुर्ग औरत जिसे सब जालिम दादी के नाम से जानते हैं- क्यों ऋ सेक्सी इतने दिन में क्यों आई ह तू, तुझे हमारी याद नहीं आती,

सेक्सी- क्या करू अम्मा काम hi इतना हो गया ह टाइम hi नहीं मिलता, लेकिन अब जल्दी जल्दी आया करुँगी, वैसे सब ठीक चल रहा ह न,

जालिम दादी- है सब ठीक ह,

सेक्सी- और वो छोटी शेजडी कहा ह, आज दिखाई नहीं दी

औरत- वो कॉलेज गई ह, ट्रांसफर के लिए

सेक्सी- कहा पड़ेगी वो

जालिम दादी- चंडीगढ़ में ले रही ह ट्रांसफर

सेक्सी- सही ह, सब तैयारी हो गई न

जालिम दादी- है सब तैयारी हो गई ह,

सेक्सी- बढ़िया मेरी कुछ जरुरत पड़े तो बता देना, मुझे ख़ुशी होगी

जालिम दादी- तू मजे क्र जब जरुरत होगी तो बता दूंगी, तूने कुछ खाया या नहीं,

सेक्सी- खा खाया अम्मा बस अभी तो गुल्ला ठुकवा कर आ रही हु,

जालिम दादी जोर से चिल्लाई- आरी ोू करम जाली कहा मर गई मेरी बेटी थकी हुई बैठी ह और उसके लिए कुछ दिया नहीं अब तक,

तभी अंदर से एक औरत हाथ में दूध का गिलास लेकर दौड़ती हुई आई, और सेक्सी के समाने क्र दिया,

सेक्सी ने मुस्कुराते हुए गिलास पकड़ा और दूध पिने लगी,

ज़ालिम दादी- अब यही कड़ी रहेगी जा जाकर काम कर,

वो वापस काम में लग गई,

वही चंडीगढ़ में एक लड़की फ़ोन पैर किसी से बात कर रही थी,

लड़की- माँ खेल शुरू हो चुक्का ह, मैंने अपने पत्ते बिछाने शुरू क्र दिए हैं, जल्दी hi चल चलने का टाइम आने वाला ह,

उधर से- बेटी सम्हाल क्र तू गलती से भी वह मत जाना वह से दूर hi रहना, सब बहार से hi करना

लड़की- चिंता मत करो माँ, मैं सब सम्हाल लुंगी, सब सही चल रहा ह,

उधर से- बहुत बढ़िया बेटी मुझे तुझसे ये hi उम्मीद थी,

वही चंडीगढ़ की सड़क के किनारे एक फ्रूट्स वाले से ह्रदय फ्रूट्स खरीद रहा था, तभी दीपा की कॉल आ गई,

ह्रदय- माँ कैसी हो तुम

दीपा- मैं ठीक हु, तू बहार जाकर अपनी माँ को भूल hi जाता ह, रोज कॉल करने को बोलता ह लेकिन करता ह नहीं,

ह्रदय- माँ बस सोचा घर आकर आराम से बात करूँगा

दीपा- माँ को माखन लगा रहा, ये बता खाना खाया या नहीं

ह्रदय- माँ बस फ्रूट्स खरीदे हैं,

दीपा- फिर से फ्रूट्स,

ह्रदय- माँ पनीर टिक्का और डोसा खा लिया था, अब फ्रूट्स खाऊंगा,

ह्रदय बात कर hi रहा था, की तभी एक गाड़ी उसके पास आकर रुकी, और एक खूबसूरत लड़की उसमे से उत्तरी और ह्रदय के सामने आकर कड़ी हो गई,

उस लड़की को देख क्र ह्रदय सरप्राइज सा खड़ा रह गया,

लड़की- तुम हमारे hi शहर में हो और हमने सोचा तुम चले गए,

ह्रदय- मिस दिया आप

दीपा फ़ोन पैर- ह्रदय कोण ह बीटा किसी लड़की के साथ ह तू, कोण ह सूंदर ह क्या

ह्रदय- माँ बस कीजिये मैं बाद में बात करता हु,

दीपा- है है लड़की के मिलते hi माँ से क्यों बात करेगा

ह्रदय- bye माँ

फ़ोन काटने के बाद

दिया- तुम्हारी माँ थी क्या फ़ोन पैर

ह्रदय- है, लेकिन आप यहाँ

दिया- मैं तो घर जा रही थी, आपको देखा तो रुक गई, हमे तो पता चला था आप चले गए हैं,

ह्रदय- नहीं मेरी पूरी टीम चली गई ह, मैं और मैडम यही हैं,

दिया- कॉलेज में तो दिखाई नहीं देते आप

ह्रदय- मेरे गेम्स ख़तम हो चुके ह तो मैं क्या करूँगा वह इसलिए ज्यादातर रूम में hi रहता हु या फिर शहर घूम लेता हु,

दिया- आपने मुझे क्यों नहीं बताया मैं आपको शहर घुमा देती,

ह्रदय- मैं किसी को तकलीफ नहीं देना चाहता

दिया- कैसी बात कर रहे हो आप हमारे शहर में आये हो तो हमारे महेमान हो ये तो हमारी जिम्मेदारी ह, चलिए आपको शहर घूमती हु,

ह्रदय- नहीं मैं अब हॉस्टल में जाऊंगा, काफी देर हो गई ह, आप भी घर जाइये,

दिया- ये शहर कभी नहीं सोता इसमें कभी देर नहीं होती, ये पूरी रात चलता रहता ह,

ह्रदय- है वो तो मैं देख hi रहा हु,

दिया- तो आइये न प्लस, मैं आपको ज्यादा परेशां नहीं करुँगी, प्लस प्लस प्लस

ह्रदय दिया की बात को ठुकरा न सका, और मन मार क्र बोलै ok ok चलिए

दिया ख़ुशी से उछलती हुई दौड़ क्र दरवाजे के पास पहुंची और गाड़ी का दरवाजा खोला,

ह्रदय मुस्कुराता हुआ उसकी गाड़ी में बैठ गया, दिया ड्राइविंग सीट पैर बैठी और गाड़ी आगे बढ़ा दी,

दिया- ये क्या ले रखा ह

ह्रदय- फ्रूट्स हैं

दिया- इस टाइम फ्रूट्स कोण खता ह

ह्रदय- मैं खता हु

दिया- आप खाना नहीं कहते क्या, मुझे पता चला आपने कॉलेज की मेस से कभी खाना नहीं खाया, श्री मैं ये पूछ रही हु, आपकी पर्सनल लाइफ ह, आपकी मर्जी ह, बस जिज्ञासा हुई जानने की,

ह्रदय- ऐसा कुछ नहीं ह, बस माँ के हाथ का बना हुआ खाना hi खता हु मैं मुझे कुछ और खाना पसंद नहीं ह,

दिया- वाओ आप तो कमल हो, और पिछले 10 दिन में आपने क्या खाया,

ह्रदय- पनीर या फ्रूट्स

दिया- आप बड़े कमल के इंसान हो,

दिया ह्रदय को चंडीगढ़ की सड़को पैर गाड़ी में घूमती रही और शहर की चमक धमक दिखती रही,

ह्रदय भी उसके साथ शांति से बैठा सब देख रहा था, काफी देर घूमने के बाद दिया ने ह्रदय को कॉलेज में ड्राप क्र दिया, और ख़ुशी से झूमती हुई घर की तरफ दौड़ गई,

घर में उसकी चल और रफ़्तार कुछ अलग hi थी जैसे वो हवा में उड़ रही हो,

शनाया- कहा रह गई थी, फ़ोन भी नहीं उठा रही थी, तू पार्टी के लिए डेकोरेटर से बात करने गई थी या वही बसने,

दिया- आज तो कमल हो गया शनाया,

शनाया- ऐसा क्या हो गया

दिया- आज वो मिला था

शनाया- वो कोण

दिया- ह्रदय

ह्रदय का नाम सुनते hi शनाया की धड़कन तेज हो गई

शनाया- कहा कैसे कब

दिया- मार्किट में घूम रहा था, मैंने गाड़ी रोकी,

फिर दिया ने सब बता दिया,

दिया की बात सुनकर शनाया के अंदर जलन आ गई उसे बड़ा दुःख हुआ की वो क्यों नहीं गई डेकोरेटर के पास,

दिया- दुखी मत हो वो कॉलेज में hi ह कल मिल लेंगे,

शनाया चहक उठी

अगली सुबह नंदनी नैना और काम्य के साथ चंडीगढ़ में लैंड क्र चुकी थी, और सीधे अपने पिता के पास पहुंची,

नंदनी दौड़ती हुई अपने पिता के गले लग गई,

राज प्रताप की आँखों में आंसू भेने लगे, दोनों बाप बेटी एक दूसरे से लिपट क्र रोने लगे, नैना और काम्य कड़ी हुई दोनों बाप बेटी का प्यार देख रही थी, उनकी भी आँखे भर आई,

नंदनी- ये क्या हो गया पापा, आपको ये बीमारी

राज प्रताप- बेटी जिंदगी जितनी लिखी ह उससे ज्यादा कभी कोई जी पाया ह क्या, और वैसे भी मैंने अपना जीवन जी लिया ह, तुझे देखने की इच्छा थी वो पूरी हो गई, बस एक बार उस देवी से मिलना चाहता हु,

नंदनी ने राज प्रताप को देखा फिर बात घुमा दी,

नंदनी- पापा ये आपकी नातिन

राज प्रताप ने दोनों को अपने पास बुलाया, और गले से लगा लिया,

राज प्रताप- तुम्हारी माँ तो कभी आई hi नहीं मिलने तुम दोनों तो आ जाती अपने नाना से मिलने

काम्य- हम तो आ जाते लेकिन किसके पास आना ह ये हमे किसी ने कभी बताया hi नहीं, हमे तो पता hi नहीं था हमारा कोई अपना भी ह,

राज प्रताप- अब तुम सब मेरे पास hi रहो

नंदनी- पापा ये नहीं हो सकता

राज प्रताप- मेरे अंतिम दिन चल रहे हैं न जाने कब क्या हो जाये, जब तक मैं जिन्दा हु तब तक तो रुक जा,

नंदनी- खामोश हो गई, पिता की आखरी इच्छा थी तो मान रखना hi पड़ा,

तभी वह संजय कुमार जी भी आ गए,

राज प्रताप- तुम इन्हे ले hi आये संजय

संजय- मंत्री जी मैं आपको इस तकलीफ में नहीं देख प् रहा था,

फिर पांचो एक साथ बैठ क्र बाते करने लगे, नंदनी के फेस पैर एक दर था, लेकिन नैना और काम्य बहुत खुश थी, आज पहेली बार उन्हें उनकी माँ के अलावा कोई अपना मिला था,

इधर शनाया दिया आशना और रैना सीधे कॉलेज में पहुंची और डायरेक्ट बॉयज हॉस्टल में घुस गई, इतनी खूबसूरत और सेक्सी लड़किया बॉयज हॉस्टल में देख क्र हर कोई चौंक गया, लेकिन उन्होंने मॅनॅग्मेंट से ह्रदय का रूम पता किया और उसके रूम के सामने पहुंच क्र दरवाजा खटखटाया,

ह्रदय ने अलसाये हुए ने दरवाजा खोला, और आँख खुलते hi जैसे किसी के सामने अप्सराये आ जाये तो उसे सपना सा hi लगेगा, वैसा hi ह्रदय के सामने 4-4 अप्सराये कड़ी थी, ह्रदय आँख माल्टा हुआ उन्हें देख रहा था, बाकि लड़के पीछे खड़े उन्हें देख रहे थे,

शनाया ने ह्रदय को अंदर धकेला और सीधे कमरे में घुस गई, चारो अंदर आई और दरवाजा बंद क्र लिया, बस फिर क्या था पुरे हॉस्टल में हंगामा हो गया,

ह्रदय- ये क्या तरीका ह किसी के रूम में आने का,

शनाया- पहले ये बताओ तुम यहाँ छुपे हुए क्यों हो, इतने दिन से यहाँ हो और चुप क्र रह रहे हो,

ह्रदय- मुझे अकेले रहना पसंद ह

शनाया- बहुत अकेले रह लिए, शनाया के रहते तुम अकेले नहीं रह सकते,

ह्रदय- हम एक दूसरे को ठीक से जानते भी ह मैडम

शनाया- अरे इतनी सी बात मैं हु शनाया और ये ह दिया ये आशना और ये ह रैना हम चारो भेने हैं और अंजलि ग्रुप के ओनर की बेतिया हैं, और तुम हो ह्रदय हिमाचल से,

हो गई जान पहचान

तीनो भेने हसने लगी,

ह्रदय कंफ्यूज सा शनाया को देख रहा था, ये लड़की ह क्या चीज, हमेषा आफत में hi रहती ह,

शनाया हॉस्टल में गई ह ये बात हनी को भी पता चल गई वो तुरंत डोडा हुआ वह पंहुचा, वो ह्रदय के रूम के बहार पंहुचा और दूर खटखटाया लेकिन किसी ने दूर नहीं खोला, वो काफी देर तक बजता रहा तो दिया ने गुस्से में दूर खोला सामने हनी को देख क्र उसे और गुस्सा आ गया,

दिया- क्या ह

हनी- तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो

दिया- तुमसे मतलब

हनी- शनाया कहा ह

दिया- बिजी ह अभी बहार नहीं आ सकती, बाद में बात करेगी,

इतना बोल क्र दरवाजा बंद क्र दिया,

हनी का दिमाग ख़राब हो गया, वो गुस्से में इधर उधर देखने लगा, बहुत से लड़के उसे देख रहे थे, तभी कॉलेज की बेल्ल बज गई गेम्स का बुलावा आ गया, सभी जल्दी जल्दी तैयार होकर बैग गए,

इधर रूम में,

दिया- हम लोग आपको लेने आये हैं, आप अकेले क्यों रहते हो, हमारे साथ चलो,

रैना- हमसे दोस्ती कर लो अकेले नहीं रहोगे

ह्रदय- मैं 3 दिन बाद यहाँ से चला जाऊंगा फिर दोस्ती का क्या मतलब

आशना- हिमाचल चंडीगढ़ से कुछ ज्यादा दुरी पैर नहीं ह, और दोस्ती तो दूर रह क्र भी निभाई जा सकती ह,

ह्रदय- आप मुझसे दोस्ती क्यों करना चाहती हैं

दिया - गलत सवाल, जब कोई दोस्ती के लिए हाथ बढ़ता ह तो ये नहीं देखते वो क्यों दोस्ती क्यों करना छटा ह, बस ये देखते हैं वो दोस्ती निभा पायेगा या नहीं,

ह्रदय- तुम मेरी माँ के जैसी बात करती हो, और बोलने का स्टाइल तो बिलकुल वैसा hi ह,

दिया- ोू hello मैं दोस्त बनने को बोल रही हु माँ नहीं

ह्रदय है पड़ा

ह्रदय- श्री मेरा वो मतलब नहीं था, आपकी बात टालने का मन नहीं कर रहा मेरी माँ की वजह से hi, बताइये क्या करना ह दोस्ती में

शनाया- कुछ नहीं बस उठो और चलो हमारे साथ,

ह्रदय- आप लोग चलो मैं नाहा धो क्र आता हु,

चारो उठी और कॉलेज में चली गई, ह्रदय भी रेडी होकर ग्राउंड में आ गया, ह्रदय को देख क्र लड़किया फिर से चहक उठी,

ह्रदय अंदर घुसा hi था की सामने कड़ी थी तम्मना जी,

तम्मना- कहा हो तुम इतने दिन हो गए न तो घर आये न hi कोई खबर दी,

ह्रदय- मैडम मैं तो यही था, आप फॅमिली के साथ थी तो डिस्टर्ब नहीं किया,

तम्मना और ह्रदय बात क्र रहे थे तभी वह शनाया आ गई,

शनाया- अरे कहा रुक गए आओ न

तम्मना- ये कोण ह

शनाया- मैं शनाया ह्रदय की दोस्त

तम्मना- दोस्त ये कब हुआ हिमाचल में तो कभी कोई दोस्त नहीं बानी यहाँ आते hi दोस्त बन गई

ह्रदय- ये वो

शनाया- आपको कोई प्रॉब्लम ह क्या

ह्रदय- ये मेरी स्पोर्ट्स टीचर हैं,

शनाया- ओह मैडम श्री हम अभी दोस्त बने हैं,

ह्रदय- मम ये इसी कॉलेज की स्टूडेंट्स हैं,

शनाया- जी मैं हु शनाया अंजलि ग्रुप के ओनर की बेटी

शनाया ने बड़े स्टाइल में ये कहा,

तम्मना- शनाया अंजलि ग्रुप की बेटी, तम्मना ने उप्पेर से निचे तक शनाया को देखा,

तम्मना- तुम वही हो न जिसने कुछ समय पहले एक एक्सीडेंट किया था,

शनाया- आपको उससे क्या मतलब, वैसे भी उस बाइक वाले की गलती थी

तम्मना- जिसका तुमने एक्सीडेंट किया था वो मेरे भाई हैं,

उन दोनों की बात सुनकर ह्रदय सरप्राइज रह गया,

ह्रदय शनाया से - तुमने एक इंसान की जिंदगी बर्बाद क्र दी और तुम्हे अपनी गलती का अहसास भी नहीं ह, हाउ शामे

शनाया- नहीं ऐसी बात नहीं ह, ह्रदय मेरी बात तो सुनो, मेरी गलती नहीं थी,

शनाया ने ह्रदय का हाथ पकड़ा, ह्रदय ने उससे अपना हाथ छुड़वाया और वह से तेज कदमो से चलता हुआ बहार निकल गया, तम्मना भी ह्रदय के पीछे जाने लगी,

शनाया शॉकेड सी कड़ी रह गई उसकी आँखों में आंसू चालक आये, तभी वह दिया आई उसने शनाया को ऐसे देखा तो घबरा गई,

दिया- शनाया क्या हुआ रो क्यों रही ह सब तीख ह न, किसी ने कुछ कहा क्या बोल क्या हुआ

शनाया दिया से लिपट क्र रो पड़ी,

दिया- बोल तो सही

शनाया ने रट hi दिया को सब बता दिया,

दिया- देख लिया अपने ऐटिटूड का नतीजा, और गाड़ी तुम चला रही थी या नहीं लेकिन तुमने हनी को बढ़ावा तो दिया, अपनी गलती तक नहीं मणि,

शनाया- मैं मान लुंगी साडी गलती मान लुंगी, लेकिन वो नाराज हो क्र चला गया,

दिया- तू अंदर जा मैं देखती हु

दिया वह से ह्रदय के पीछे भागी, जो एक पेड के निचे खड़ा था और साथ में तम्मना भी,

तम्मना- देखा तुमने कैसी बेशरम लड़की ह जिसे अपनी गलती तक का अहसास नहीं पैसो का इतना घमंड ह उसे, और तुमने उससे दोस्ती क्र ली,

ह्रदय- मम मुझे उसके ऐटिटूड में एक भोला पैन लगा इसलिए आगे नहीं सोचा

तभी दिया वह आ गई

दिया- आपको सही लगा और सही पहचाना, बहुत भोला पैन ह उसमे,

ह्रदय- ये कैसा भोलापन जो किसी की जान hi लेले,

दिया- उसकी सांगत गलत हो रही ह

ह्रदय- मुझे दूर रहना ह इस सब से

दिया- और जो दोस्ती की थी उसका क्या

ह्रदय- मुझे नहीं पता था की उसने

दिया- ये कैसी दोस्ती हुई अगर दोस्त से गलती हुई ह तो उसे सुधरने की जगह उसका साथ hi छोड़ दिया, अगर हमसे पहले दोस्ती हुई होती और फिर ये हादसा हुआ होता तब भी आप ऐसे hi साथ छोड़ क्र चले जाते या उसे सही रास्ता दिखते,

दिया की बात सुनकर ह्रदय उसे देखता hi रह गया, वो दिया की आँखों में देखता hi रहा, जैसे उन्ही में खो गया हो,

तम्मना- तो क्या ह्रदय यहाँ बच्चे सुधरने आया ह, और तुम्हारी बहन ह तुम सुधारो, चलो जाओ यहाँ से, माँ बाप ने संस्कार दिए नहीं और बात करती ह

दिया- ये माँ के दिए hi संस्कार हैं मैडम की आप मेरे मुँह पैर hi मेरे माँ बाप को ऐसा बोल पाई, वर्ण जवाब देना भी मुझे बहुत अच्छे से आता ह, लेकिन टीचर का अपमान नहीं करना चाहिए,

नहीं तो पुरे चंडीगढ़ में हिम्मत नहीं की अंजलि ग्रुप की बेटी को ुचि आवाज में भी बात कर ले,

तम्मना- देखा ह्रदय इसका घमंड अपनी बहन से काम नहीं ह

ह्रदय- मैडम किसी के माँ बाप को कुछ भी कहना गलत ह, बच्चे गलतिया करते हैं इसका मतलब ये नहीं उनके माँ बाप गलत हो,

और मिस दिया मैंने पहले भी कहा था तुम कुछ अलग हो, तुम्हारे समझने का तरीका भी ऐसा ह जैसे मेरी माँ सामने कड़ी हो क्र मुझे समझा रही ह, तुमने कहा ह मुझे लगा मेरी माँ ने मुझसे ये सब आकर कहा ह, और जब मेरा दिल किसी की बात मान लेता ह फिर मैं पीछे नहीं हैट ता,

मैं दोस्ती नहीं तोडूंगा, लेकिन तुम्हे वडा करना होगा ये घमंड कभी हमारे बिच नहीं आना चाहिए, और शनाया को बदलना होगा

दिया- मैं जी जान लगा दूंगी उसे बदलने में

तम्मना- ह्रदय हमे चलना चाहिए, अंदर गेम्स हो रहे हैं

दिया- हम भी वही जा रहे हैं आओ

तम्मना गुस्से में मुँह बनती हुई चल दी,

तीनो अंदर पहुंचे तो शनाया दुखी सी उदास सी दरवाजे की तरफ देख रही थी, दिया के साथ ह्रदय को आते देख ख़ुशी से उछाल पड़ी और कड़ी होकर उनकी तरफ भागी,

शनाया- तुम आ गए, तुम मुझसे नाराज हो

दिया- शनाया अगर इनकी दोस्ती चाहिए तो तुम्हे अपने ऐटिटूड को बदलना होगा

शनाया- मैं पूरी बदल जाउंगी कसम से

ह्रदय- मैं यहाँ किसी को बदलने नहीं आया लेकिन दोस्ती की ह तो दोस्त की सही रास्ता बताना मेरी जिम्मेदारी ह ये तुम्हारे भले के लिए hi ह,

शनाया ह्रदय के गले लग्न चाहती थी लेकिन रुक गई, फिर सभी स्टैंड में बैठ गए,

आशना- ह्रदय तुम इतने अच्छे फाइटर हो तो कुश्ती में हिस्सा क्यों नहीं लिया

ह्रदय- हमारे कॉलेज में कुश्ती नहीं होती,

तम्मना ने धीरे से कहा अब से होगी,

दिया- कल गेम्स ख़तम हो जायेंगे और परसो ट्रॉफी दी जाएँगी उसके बाद हमारे घर सभी विजेताओं को पार्टी दी जयेगी, आपको भी आना ह, मम आप भी आइयेगा

तम्मना- हमारा वह क्या काम

ह्रदय- मैं पार्टियों में नहीं जाता

शनाया- ये किसी दिखावे के लिए नहीं ह, इतनी दूर दूर से स्टूडेंट्स यहाँ आये हैं गेम्स में जीते हैं तो हमने सोचा उनके लिए कुछ करना चाहिए, हमे ख़ुशी होगी अगर तुम आओगे तो

ह्रदय- ठीक ह कुछ देर के लिए आऊंगा, मम आप चलेंगी

तम्मना- नहीं मैं नहीं जा पाऊँगी मुझे कुछ जरुरी काम ह,

वही दूर बैठा हनी जल भून रहा था, कहा वो शनाया को पतयेगा लेकिन यहाँ तो सब बिगड़ता जा रहा था,

वो कुछ प्लान करने लगा, उसने फ़ोन निकला और किसी को कॉल करने लगा,

गेम्स ख़तम होने तक दिया शनाया आशना रैना ह्रदय के साथ hi रही, तम्मना भी साये की तरह उनके पीछे लगी रही,

हनी लगातार मौका ढूंढ रहा था, शाम होते होते सब वापस अपने अपने रूम में चले गए, अगले दिन बस गिने चुने गेम्स बचे थे, अँधेरा होने लगा था, शनाया और भेने भी ह्रदय से bye करके घर की तरफ चल दी, तम्मना जान बुझ क्र रुक गई,

वही दूर कही जंगलो में एक बुजुर्ग औरत हाथ में बन्दूक लिए आगे बढ़ रही थी, कहने को hi बुजुर्ग थी लेकिन उसकी चल उसके कपडे और उसके चेरे की चमक की जवान औरत को भी मात दे दे,

वो आगे बढ़ी जा रही थी, तभी उसके सामने 10-12 आदमी हाथ में हतियार लिए खड़े थे,

एक आदमी- ोू तै कहा जा रही ह, मरने का इरादा ह क्या जो इधर चली आई ह,

दूसरा आदमी- यार तुझे ये तै दिख रही ह, पाठक माल ह यार कसम से जवानी में तो बवाल रही होगी,

औरत- मैं आज भी बवाल हु बालको,

और उस औरत ने बन्दूक उन आदमियों पैर तान दी,

आदमी उसे देख क्र हसने लगे, अरे तै तू एकेलि ह और हम 10 और हम सबके हाथ में बन्दूक हैं,

औरत ने बन्दूक इतनी फुर्ती से चलनी शुरू की , सामने खड़े आदमियों की उंगलिया उनके बडको में फांसी रह गई, तब तक औरत ने नॉन स्टॉप गोलिया बरसा दी, किसी के सर में किसी की छाती में किसी के पेट में गोलिया लगी, सभी वही ढेर होते चले गए,

उनमे से एक आदमी बचा जिसके हाथ और कंधे पैर गोलिया लगी, वो जमीन पैर पड़ा हुआ औरत के रूप में अपनी मोत को देख क्र थार थार कैंप रहा था,



औरत- देख लिया न मैं आज भी बवाल हु, चिंता मत कर मैं तुझे मरूंगी नहीं, बस मेरा एक काम क्र अपने बॉस से जाकर बोल दे, मैं आ रही हु अंजलि आ रही ह.

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अपडेट-6






रात का समय नंदनी नैना काम्य राज प्रताप के पास बैठी थी,

काम्य- माँ हम शहर घूम आये क्या,

नंदनी- बेटी ये अमेरिका नहीं ह यहाँ वैसा माहौल नहीं ह

राज प्रताप- अरे चिंता क्यों करती ह ये मेरी नातिन हैं, इनकी तरफ कोई आँख भी नहीं उठा सकता, जाओ बच्चो तुम घूम आओ, साथ में सिक्योरिटी लेकर जाना, और है जल्दी आ जाना

नंदनी- पापा आप इन्हे बिगड़ देंगे

नैना- नहीं माँ हम नहीं बिगड़ेंगे,

दोनों भेने खुश होती हुई निकल गई, उनके जाने के बाद

नंदनी- पापा वह सब कैसे हैं,

राज प्रताप- बेटी सब तेरे सामने hi बिखर गया था, अब वह बस सचिन और कपिल ह और सीमा और उनके बच्चे हैं,

नंदनी- माँ का कुछ पता ह वो कहा ह

राज प्रताप- उस देवी का किसी को नहीं पता, वो कभी मिलने नहीं आई,

नंदनी- मैं एक बार उनसे मिलने जाना चाहती हु

राज प्रताप- तेरी मर्जी ह बेटी जैसा तेरा दिल करे,

नंदनी- कल जाउंगी,

वही जब शनाया दिया आशना और रैना कॉलेज से निकली तो कुछ दूर जाकर रस्ते में एक सुमसान इलाके में गाड़ी ख़राब हो गई,

दिया- ये क्या हुआ

शनाया- पता नहीं अरे ये पेट्रोल कैसे ख़तम हो गया, हमारी गाड़ी में तो हमेषा फुल टैंक रहता ह

रैना- तुम्हे धयान नहीं दिया होगा, और ड्राइवर हम लेकर नहीं चलते,

आशना- परेशां क्यों हो रही ह, घर फ़ोन क्र देते हैं दूसरी गाड़ी आ जाएगी

दिया ने फ़ोन निकला तभी उनके सामने 8 लोग आकर खड़े हो गए,

एक आदमी- अबे क्या कांचा माल ह यार कटाई पटोला हैं ये चारो तो, आज तो मजा आ गया,

दिया ने हालत समझे और तुरंत सबके हाथ पकडे और गाड़ी के अंदर घुस गई और गाड़ी लॉक कर दी, दिया ने तुरंत सचिन को कॉल लगाया

दिया- मां जल्दी से यहाँ आ जाइये हमारे पीछे गुंडे पड़े हैं, दिया ने अपनी लोकेशन सेंड क्र दी,

तभी उन आदमियों ने एक पत्थर उठाया और गाड़ी के सीसे में मार दिया जिससे शीशा टूट गया, चारो लड़किया चीखने लगी,

फिर उन आदमियों ने चारो लड़कियों को निचे उतर लिया,

शनाया- क्या छाते हो तुम

आदमी- चाहते तो कुछ और hi थे लेकिन तुम्हे देख क्र अब सब कुछ चाहिए,

तभी पीछे से एक गाड़ी आती दिखाई दी, लड़कियों की जान में जान सी आई,

वो हेल्प हेल्प छिलने लगी,

गाड़ी उनके पास जाकर रुकी और उसमे से बहुत स्टाइल से एक लड़का उतरा, उस लड़के को देख क्र शनाया को तसली सी हुई लेकिन दिया की चिंता ख़तम नहीं हुई,

शनाया- हनी बचाओ हमे

ये हनी था,

हनी- ए कोण हो तुम लोग छोड़ दो इन्हे वर्ण इतना मरूंगा की घर जाने लायक नहीं रहोगे,

आदमी- अबे ोू छछूंदर भाग जा यहाँ से वर्ण तेरी भी मार ली जाएगी,

हनी गुस्से में उन पैर कूद पड़ा और लड़ने लगा, उसने एक दो मुक्के तो उनमे जड़ दिए हनी बड़े स्टाइल से उछाल उछाल क्र उनसे लड़ रहा था, तभी एक ने पिस्तौल निकल क्र हनी के सर पैर लगा दी,

हनी एक दम रुक गया, दो गुंडों ने हनी पैर हॉकी बरसानी शुरू क्र दी,

हनी धीरे से- अबे भोसड़ी को इतनी जोर से क्यों मर रहे हो, तुम्हे मार खाने के पैसे दिए हैं मरने के नहीं,

आदमी- अबे ोू भूतनी के ऐसे पाठक माल देख क्र हमारा मन बदल गया ह अपने पैसे अड्डे पैर आकर वापस ले जाना और जिन्दा रहना चाहता ह तो भाग जा यह से वानर इनकी छूट फड़ी जाएगी तो तेरी गांड मर ली जाएगी, बहुत भूके हैं हमारे आदमी, ये चारो हम सबकी प्यास बुझाएंगी

ये सब हनी का खेल था उसने शनाया को इम्प्रेस करने के लिए गुण्डे बुलाये थे, वो सब गुण्डो को पिट क्र रियल हीरो बनना चाहता था लेकिन यहाँ तो गेम hi बदल गया, ये गुंडे hi पलट गए,

हनी की गांड फैट गई थी, उसके चेरे का रंग उदा हुआ था,

हनी- ये गलत ह तुम गुंडे हो तुम्हारे भी कुछ रूल होने चाहिए

आदमी- भोसड़ी के हम नियम तोड़ क्र गुंडे बने हैं तो हम नियम क्यों बनायेगे हमारे नियम बस हमारे अपने साथियो के लिए होती हैं तुम जैसे मादरचोदो के लिए, हमे पैसो की जरुरत थी इसलिए सोचा तेरा ये काम क्र देंगे लेकिन तेरी वजह से इतनी मस्त माल हमे मिल गई हैं और लगता ह पैसे वाली भी है, अब ये हमे पैसे लेकर देंगी,

तुझे जिन्दा रहना ह तो भाग जा वर्ण इनके साथ तेरा बाप भी पासी पहुचायेगा,

फिर उन्होंने हनी के मुँह पैर 4-5 घुसे जेड वो वही जमीन पैर गिर पड़ा, उन्होंने हनी को पेड से बांध दिया,

वो सभी गुंडे चारो लड़कियों की तरफ बढ़ने लगे, चारो लड़किया रोने लगी और शोर मचने लगी,

तभी एक तेज रफ़्तार से दौड़ती हुई गाड़ी आई और सीधे उन गुंडों में टक्कर मर दी, जिससे 2 गुंडे बहुत दूर जाकर गिरे, बाकि सतर्क हो क्र गाड़ी की तरफ भागे, लेकिन तभी अंदर से 2 गार्ड उतरे बंदूकों के साथ, और बन्दूक उन पैर तान दी,

वो गुंडे बस मार खाने आये थे तो ज्यादा हतियार लेकर नहीं आये थे, उन्होंने तुरंत हाथ उप्पेर कर लिए, तभी गाड़ी में से दो खूबसूरत लड़किया ुअत्तर क्र आई ये थी, नैना और काम्य

नैना और काम्य ने दूर से माहौल को समझ लिया था, और अपने ड्राइवर से कहा था की इन लड़कियों की हेल्प करो, गार्ड बहुत मजबूत और त्रिनेड थे, उन्होंने तुरंत hi वह काबू प् लिया, कुछ hi देर में पुलिस और सचिन और कपिल गाड़ी से वह पहुंच चुके थे, जैसे hi पुलिस पहुंची तो गुंडों ने गार्ड्स की आँखों में मिटटी डाली और वह से भाग लिए,

सबका धयान लड़कियों पैर था इसलिए उन गुंडों पैर ज्यादा धयान नहीं दिया,

चारो लड़कियों ने नैना कर काम्य का धन्यवाद किया,

सचिन और कपिल गाड़ी देख क्र hi समझ गए थे की ये मंत्री जी की गाड़ी ह, उस पैर नाम लिखा हुआ था,

लेकिन दोनों लड़कियों को पहचान नहीं पाए,

पुलिस गुंडों के पीछे चली गई थी, नैना और काम्य भी वह से निकल गई,

फिर सचिन ने एक पुलिस वाले के साथ हनी को हॉस्पिटल भिजवाया और चारो लड़कियों को लेकर घर आ गया,

सचिन- तुममे से कोई भी ये बात घर नहीं बताएगा वर्ण तुम सबकी माये तुम्हे घर से बहार भी नहीं जाने देंगी,

चारो दरी और शमी हुई थी, उनके चेरे से साफ़ दिख रहा था कुछ बड़ा कांड हुआ ह, इसलिए सचिन उन्हें अंदर ले गया और वो चारो सीधे अपने रूम में चली गई,

सचिन कपिल और लड़कियों को लग रहा था कोई ऐसे hi लूटपाट करने वाले लोग होंगे, उन्होंने हनी की बाते नहीं सुनी थी,

रात में वो घबराई हुई थी उन्होंने आज से पहले ऐसा कभी नहीं देखा था, उन गुंडों की बातो से शनाया के अंदर एक दर सा बैठ गया था,

वो जितनी बहादुर खुद को दिखती वो तभी तक थी जब तक उसने खुद किसी प्रॉब्लम को नहीं देखा था, आज पहेली बार उसके सामने एक प्रॉब्लम आई और वो इतना घबरा गई,

वही रात में एक बहुत hi निहायती खूबसूरत लड़की अपना बेग पैक क्र रही थी, एक औरत उसके पास आई, औरत के कपडे ऐसे थे जैसे वो इस घर की नौकरानी हो,

औरत- बेटी मत जा हमसे दूर मत जा

लड़की- तू अपने काम से काम रख कलमुही औरत, और मुझसे दूर रहा क्र,

औरत- बेटी मैं तेरी माँ जैसी हु

लड़की- मेरी माँ को तू कब की खा गई, अब हमारे भी पीछे पड़ी ह बाँझ औरत

तभी जालिम दादी अंदर आ गई

जालिम दादी- अरे मेरी लाडो क्या हुआ इतना गुस्सा क्यों क्र रही ह,

लड़की- दादी इस औरत से बोल दो मुझसे दूर रहा करे, इसकी शकल देख क्र hi मेरा दिमाग ख़राब हो जाता ह,

जालिम दादी- आरी करम जाली क्या चाहती ह तू, तेरी वजह से इसकी माँ चली गई अब इसे भी खाना छाती ह,

औरत- नहीं नहीं

वो रोटी हुई बहार को भाग गई,

लड़की- दादी इसे भगा क्यों नहीं देती यहाँ से

जालिम दादी- बेटी पड़ी रहने दे हमारे सिवा इसका ह hi कोण, तू ये बता तेरी पूरी तैयारी हो गई न,

लड़की- है दादी पूरी तैयारी हो गई

जालिम दादी- सुन मेरी बात धयान से,

तू वह जा रही ह तो सबसे पहले खुद की सुरक्षा का ख्याल रखना, ये पढाई और दुनिया दरी बाद में, और फालतू की बातो पैर धयान मत देना अच्छी लड़किया अपने लक्ष्य की तरफ hi धयान देती ह, फिर उनका धयान नहीं भटकता, और है लड़की के पास बहुत कीमती खजाना होता ह, उस खजाने की चाबी किसको देनी ह ये बहुत hi बड़ा फैसला होता ह, वह जाकर इस खजाने को ऐसे hi लुटा मत देना,

खजाने के इस्तमाल सोच समझ क्र करना चाहिए,

लड़की- समझ गई दादी मैं बेवकूफ नहीं हु अपने बाप की तरह, मेरा दिमाग सही सलामत ह, ऐसे hi मेरा नाम दृष्टि नहीं ह, मेरी दृष्टि जिस पर पड़ती ह उसकी रूह तक कैंप जाती ह,

जालिम दादी- शाबाश बेटी, अब तू आराम क्र सुबह गाड़ी आ जाएगी तुझे लेने,

अगली सुबह चंडीगढ़ में कॉलेज में गेम्स हो रहे थे, दिया आशना रैना घर में पार्टी की तैयारी में लगी हुई थी, शनाया खामोश एक जगह बैठी थी, उसके अंदर अब भी वो दर था, सीमा ने बहुत पूछने की कोशिश की लेकिन शनाया बात को टलती रही,

पूरा दिन भागदौड़ में ह निकल गया, आज तम्मना सुबह से hi ह्रदय से चिपकी हुई थी, आज वो उसे अकेला नहीं छोड़ रही थी, शनाया और भेने आज कॉलेज नहीं आई थी, इससे तम्मन्ना को बड़ी तसली थी,

तम्मना- ह्रदय उन लोगो के यहाँ पार्टी में जाना जरुरी ह क्या

ह्रदय- जरुरी तो कुछ नहीं ह मम लेकिन एक बार है बोल दी तो ऐसे मन करना ठीक नहीं ह,

तम्मना- वो लोग मुझे ठीक नहीं लगते पैसे वाले लोग ह न जाने कैसा बर्ताव करे वह बुला कर, इंसल्ट क्र दी तो

ह्रदय- मम इंसल्ट उसकी होती ह जिसे किसी सम्मान की इच्छा हो, और वह सभी स्टूडेंट्स को बुलाया ह, तो जैसे सब जायेगे वैसे hi मैं भी, क्या फरक पड़ता ह, और वैसे भी कल रात की ट्रैन से हमे निकला भी ह,

तम्मना- है तुम रात में सीधे घर आ जाना वही से स्टेशन चैलेंज,

ह्रदय- ठीक ह मम

गेम्स जल्दी ख़तम हो गए, तो तम्मना ह्रदय को अपने साथ ले गई और पुरे शहर में घुमाया, दोनों को घूमते हुए रात हो गई थी, तम्मना बार बार अपना शरीर ह्रदय के शरीर से रगड़ दे रही थी, कभी हाथ पकड़ लेती कभी बैठने में अपनी जंघे रगड़ देती, कभी ह्रदय के हाथ को बहो में भर लेती जिससे तम्मना की कड़क चूचिया ह्रदय के हाथ से डाब जाती,

अगर ह्रदय की जगह कोई और लड़का होता तो आज जो हरकते तम्मना ने की थी अब तक उसकी छूट के बजे बजा चुक्का होता, लेकिन ह्रदय बस टीचर मानकर नार्मल बेहवे क्र रहा था, उसका धयान इन सब दिशा में था hi नहीं,

रात में तम्मना को घर ड्राप करके ह्रदय कॉलेज में आ गया,

वही दूर एक सुमसान सड़क पैर दो गाड़िया आमने सामने कड़ी थी और बिच में 4 आदमी खड़े थे और उनके सामने थी एक औरत और एक बुजुर्ग आदमी,

वो चारो आदमियों में से एक- तुम क्या चाहती हो क्यों मुझे बर्बाद कर रही हो

औरत- बस एक सवाल मेरे बच्चे कहा ह,

ये थी अंजलि और उसके साथ थे राजेश

आदमी- मुझे नहीं पता, मैं तो तुम्हे जनता तक नहीं हु

अंजलि- तू शकील का साथी रहा था न, उस रात वह क्या हुआ था जब वो 60 लोग मरे गए थे,

आदमी- मैं कसम खता हु जब से रंगा भाई ने कमान सम्हाली थी मैंने शकील का साथ छोड़ दिया था, उस रात वह क्या हुआ मुझे नहीं पता मैं तो वह गया भी नहीं था,

अंजलि- वो पार्टी किसने बुलाई थी और मेरा बीटा वह कैसे गया,

आदमी- पार्टी तो शकील के भाई ने बुलाई थी लेकिन वो भी वह मारा गया, वह कोण बचा था किसी को जानकारी नहीं ह,

अंजलि- सुन मादरचोद मैं नहीं जानती तू क्या करेगा, लेकिन ये जानकारी तू hi मुझे लेकर देगा क्योकि शकील से जुड़ा हुआ तू hi अकेला बचा ह, अगर तू चाहता ह की तू जिन्दा रहे तो मुझे साडी जानकरी लेकर दे वर्ण अपने बाकि साथियो की तरह उप्पेर जाने की तैयारी क्र ले,

आदमी- तुम यहाँ अकेली हो अगर मैं चहु तो अभी यही खेल ख़तम क्र सकता हु

अंजलि- अगर तेरी माँ ने तुझे दूध पिलाया ह तो कोशिश करके देख ले,

अंजलि के तेवर देख क्र वो आदमी शांत हो गया और तुरंत अपना तेवर बदला

आदमी- अरे मैं तो मजाक क्र रहा हु, मैं कोशिश करूँगा जो जानकरी दे सकता हु दूंगा लेकिन अब तुम मेरे आदमियों को नहीं मरोगी,

हमारी आपस में कोई दुश्मनी नहीं ह, और मैं वडा करता हु जो सहायता हो सकती ह वो करंगा, ये अब्दुल का वडा ह

अंजलि- अपने वेड का मान रखना वर्ण मैं किसी का मान नहीं रखूंगी,

अब्दुल अपने आदमियों को लेकर वह से निकल गया, अंजलि जो अब तक किसी शेरनी की तरह उनके सामने कड़ी थी उनके जाते hi अपने घुटनो पैर गिर पड़ी और जोर जोर से रोने लगी,

राजेश- अंजलि शांत हो जाओ शांत हो जाओ

अंजलि- मैं थक गई राजेश जी, मैं हार गई, पूरी दुनिया में जो जो शकील से जुड़ा हुआ था छोटे से छोटा आदमी भी उस को मैंने ढूंढ लिया लेकिन तुषार रूचि और अलका का कोई पता नहीं चला,

अगर उन्हें कुछ हुआ भी ह तो कोई तो जानकरी देगा की उन्हें हुआ क्या

राजेश- अगर तुम hi हिमत हार गई तो बाकि सबका क्या होगा, हम यहाँ तक आकर नहीं रुक सकते, मैं हर कदम पैर तुम्हारे साथ खड़ा हु,

अंजलि- आपके ये अहसान मैं कैसे चूका पाऊँगी,

राजेश- वो मेरे भी बच्चे हैं ये बात दुबारा मत बोलना,

अंजलि अपने आंसू पूछ क्र खड़ी हुई,

अंजलि- लगता ह अब मुझे अपना हतियार इस्तेमाल करना hi होगा,

राजेश- हतियार कैसा हतियार

अंजलि- हमे वापस जाना होगा, बहुत मार लिया इन गुंडों को अब अपनी असली ताकत को इस्तेमाल करने का वक़्त आ गया ह,

अंजलि और राजेश गाड़ी में बैठ वह से निकल गए,

अगले दिन एक नै सुबह के साथ बहुत कुछ नया लेकर आई थी, कॉलेज में स्टेज लगी हुई थी, पहले खाना पीना नाश्ता लगा हुआ था, आज नाश्ता सब बच्चो का एक साथ होना था,

सभी स्टूडेंट्स आ चुके थे, नाश्ता कर रहे थे, बस ह्रदय वह से गायब था जो अपने कमरे में बैठा हुआ एक अलग hi डिश खा रहा था,

तभी वह दिया आ गई,

दिया- हम तुम्हे निचे ढूंढ रहे हैं और आप अब तक रूम से निकले भी नहीं हैं,

ह्रदय- नाश्ता कर रहा हु

दिया- ये क्या नै डिश ह मैंने तो आज से पहले नहीं देखि,

ह्रदय मुस्कुराया- ये ह एप्पल चकुंदर खीरा केला टमाटर और दही मिक्स किया हुआ ह

दिया- कमल ह ऐसा भी कोई खता ह क्या

ह्रदय- मुझे बहार का खाने की आदत नहीं ह,

दिया- चलो आओ निचे ट्रॉफी दी जाने वाली हैं,

ह्रदय ने जल्दी से नाश्ता ख़तम किया और निचे आ गया,

चीफ गेस्ट आ चुके थे, जो थे इस टाइम के चीफ मिनिस्टर कुलविंदर सिंह मान, और उन्होंने ट्रॉफी देनी शुरू क्र दी, और हर थोपि के बाद एक नाम बार बार आ जाता वो था ह्रदय का, ह्रदय की हर ट्रॉफी पैर तालिया बज रही थी, लड़किया सिटी मर रही थी,

साडी ट्रॉफी बाटने के बाद,

गेम्स हेड- अब बरी ह गेम्स लीडर की ट्रॉफी की और कॉलेज लीडर ट्रॉफी की,

एक लड़के ने सबसे ज्यादा गेम्स जीत क्र ये रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया ह, अब से पहले ये रिकॉर्ड था 8 ट्रॉफी जीतने का था लेकिन आज ये बन चुक्का ह 15 ट्रॉफी जीतनेय का और इसमें खास बात ये ह की इस लड़के ने 15 गेम्स में भाग लिया और सभी गेम्स जीत गया, ये ह ह्रदय

फिर एक बार ह्रदय के लिए तालियों की गड़गड़ाहट होने लगी, ह्रदय ट्रॉफी लेकर उतरने लगा,

हेड- रुको रुको

इस लड़के के 15 ट्रॉफी जीतनेय की वजह से J.S.S कॉलेज सबसे ज्यादा गोल्ड ट्रॉफी जीतनेय वाला कॉलेज बन गया ह, जिन्होंने बस 18 गेम्स में भाग लिया और 15 में जीत हासिल की ह, उसके दूसरे नंबर ह 12 थोपि जितने में हमारा कॉलेज ह, तो ये कॉलेजेस लीडर की ट्रॉफी भी इन्ही के पास जाती ह,

चीफ मिनिस्टर ट्रॉफी देते हुए- कमल क्र दिया बेटे ऐसा हुनर हमने आज तक नहीं देखा, बहुत अलग हो तुम, तुम्हारे पिता ने तुम्हे बहुत म्हणती बनाया ह

ह्रदय मेरे पिता नहीं ह सर मेरी माँ ने मुझे ऐसा बनाया ह,

मिनिस्टर- तुम्हे देख क्र लगता ह तुम कुछ खास करने के लिए बने हो,

मिनिस्टर ने प् की तरफ इशारा किया, इनसे मेरा कार्ड ले लो, और अपना नंबर इन्हे दे दो, तुम कुछ बड़ा करने के लिए बने हो, यहाँ खेलने से तुम्हारा कुछ भला नहीं होने वाला,

ह्रदय ने ठंकु कहा और प् से मिलकर निचे आ गया,

फिर चीफ मिनिस्टर वह से चले गए,

गेम्स हेड- अब एक और घोषणा, जो जो स्टूडेंट्स गेम्स में विजेता रहे हैं वो और उनके स्पोर्ट्स टीचर के लिए हमारे कॉलेज की स्टूडेंट्स शनाया ने अपने घर पैर पार्टी राखी ह, दोपहर में कॉलेज के गेट पैर गाड़िया कड़ी होंगी, सभी उन गाड़ियों में बैठ क्र वह जा सकते हैं, ये एक सम्मान ह जो हमारे शहर के सबसे बड़े बिज़नेस मन सचिन और कपिल जी की तरफ से दिया जा रहा ह, तो सभी तैयार होकर आ जाये,

इसी के साथ सभी ट्रॉफी लेकर अपने अपने रूम में पहुंच गए, ह्रदय को वह की लड़कियों ने घेर लिया और उसका नंबर मांगने लगी, लेकिन शनाया वह आ गई और उसे उन सबके बिच से निकल क्र ले गई, तम्मना भी उसके पीछे गई,

शनाया- तुम तैयार रहना मैं तुम्हे लेने आउंगी

ह्रदय- उसकी जरुरत नहीं ह मैं पहुंच जाऊंगा

शनाया- मैं आउंगी न

ह्रदय- प्लस तुम तकलीफ मत करो मैं खुद आ जाऊंगा,

शनाया- आना जरूर

ह्रदय- मैं कभी झूट नहीं बोलता, कहा ह आऊंगा तो जरूर आऊंगा

शनाया वह से खुश होती हुई चलीगे

तम्मना- ये कुछ ज्यादा hi पीछे नहीं पद रही ह

ह्रदय- आज हम लोग निकल जायेंगे मम बाद में कोण किस्से मिलता ह कोण जाने,

तम्मना ने तिरछी नजरो से जाती हुई शनाया को देखा,

तम्मना – तुम्हारी जगह कोई और लड़का होता तो अब तक इन चारो बहेनो को पता चुक्का होता,

ह्रदय- मम मेरा जीवन इस सब के लिए नहीं ह

तम्मना- ऐसा क्यों, श्री मैं तुमसे ये सब पूछ रही हु, मैं स्पोर्ट्स टीचर हु और तुमसे जुडी हर बात मुझे पता होनी चाहिए, क्योकि सेक्स का स्पोर्ट्स से घेरा नाता ह, अगर तुम्हे और आगे बढ़ना ह तो मुझसे शर्म छोड़ क्र सब कुछ खुल क्र बात करनी चाहिए,

ह्रदय- मम मैं शर्माता नहीं हु, मेरी माँ ने मुझे शर्माना नहीं सिखाया, मुझे किसी भी टॉपिक पैर बात करने में कोई ऐतराज नहीं ह, मैं तो बस सामने वाले इंसान की सहूलियत के हिसाब से बात करता हु,

तम्मना- तो ऐसा समझो की मैं दुनिया की हर बात तुमसे कर सकती हु, किसी भी टॉपिक पैर तुम बिना झिजक मुझसे बोल सकते हो, और इन कुछ दिनों मैं हम अब टीचर स्टूडेंट के अलावा एक दोस्त जैसे बन चुके हैं, तो उसी दोस्ती के हिसाब से बताओ, तुम लड़कियों से दूर क्यों रहते हो, क्या मन नहीं करता या कुछ प्रॉब्लम ह

ह्रदय हँसा- मम मैं लड़कियों से इसलिए दूर रहता हु जिससे मेरा धयान न भटके, मेरा लक्ष्य नाम कामना ह, उसके रस्ते में कुछ नहीं आना चाहिए, और रही बात प्रॉब्लम की तो मैं किसी के साथ कुछ किया तो नहीं ह लेकिन इतना पता ह की शायद hi कोई लकड़ी होगी जो मुझे झेल सकेगी,

ह्रदय की बात सुनकर तम्मना का मुँह लाल हो गया, लेकिन उसने अपनी शर्म को छिपा लिया, अगर ह्रदय ने तम्मना की शर्म को परख लिया तो वो दुबारा उससे इस बारे में बात नहीं करेगा,

तम्मना- ये तो अच्छी बात ह, लेकिन ये किसने बोल दिया की लड़कियों की वजह से तुम्हारा धयान भटक सकता ह,

ह्रदय- बस मम मेरी माँ का आदेश ह की सही समय आने तक अपने आप पैर सयम रखना,

तम्मना- कोनसा सही समय

ह्रदय- वो तो माँ hi जाने, जब वो कहेंगी की मैं आजद हु उसके बाद मैं सोचूंगा मुझे क्या करना ह,

तम्मना एक सोच में दुब गई,

ह्रदय- चलिए मम आपको घर छोड़ दू, ये ट्रॉफी आपके घर hi रख देता हु, वही से रात में उठा लेंगे, यहाँ से रूम खली कर देता हु,

फिर ह्रदय ने रूम खली किया और सामान लेकर तम्मना के साथ विनय के घर आ गया,

उधर चारो भेने पूरी सज धज क्र तैयार हुई थी, पार्टी में लोग आने शुरू हो चुके थे, लड़के अउ रलड़किया एक दम तैयार होकर आये थे, लड़कियों इतनी सेक्सी सेक्सी ड्रेस में आयी थी की, सीमा उन्हें देख देख क्र शॉकेड थी,


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शनाया

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दिया

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रैना

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आशना

सीमा- रश्मि आज कल की सभी लड़किया नंगी घूमने पैर क्यों उतारू हैं,

Rashmi-didi आज कल ऐसा hi माहौल ह, लेकिन आज अपनी इन चारो परियो को देखो ये तो बिलकुल अलग hi तैयार होकर आई हैं सच में परिया लग रही हैं, दिया तो फिर भी ऐसे कपडे पहन लेती ह लेकिन ये तीनो तो पहेली बार ऐस कपडे पहन रही हैं, कितनी खूबसूरत लग रही ह, किसी की नजर न लगे,

सीमा- सच में काफी बदलाव दिख रहा ह सब में,

लगभग सभी लोग आ चुके थे, पार्टी स्टार्ट हो चुकी थी, खाना पीना शुरू हो चुक्का था,

सीमा- सभी बच्चे आ चुके ह तो ये चारो बार बार दरवाजे की तरफ क्यों देख रही हैं,

रश्मि- पता नहीं शायद कोई स्पेशल आने वाला होगा,

तभी डोली एक बर्तन में कुछ ले जा रही थी

सीमा- डोली ये क्या ह, कहा ले जा रही ह

डोली- दीदी दिया बेबी ने बनवाई ह अलग से घर में hi, कहा ह इसे सबसे अलग रख दू,

सीमा- ऐसा क्या बनवाया ह दिखा मुझे

सीमा ने बर्तन उठा केर देखा

सीमा- ये क्या ह अजीब सी लाल लाल

डोली- दीदी ये दही में मिक्स एप्पल खीरा टमाटर चकुंदर केला मिलाया हुआ ह

सीमा- हैं ये कोण खता ह, न ये रायता ह न hi फ्रूट्स कस्टर्ड अजीब ह

तभी दरवाजे पैर एक लम्बे चोदे खूबसूरत लड़के की एंट्री हुई उसके आते hi चारो भेने उसकी तरफ दौड़ चली,


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रश्मि- दीदी लगता ह इसी के इंतजार में थी ये चारो

सीमा- है लग तो रहा ह, लड़का ह भी बहुत स्मार्ट और बहुत hi सिंपल भी ह, लेकिन ये चारो एक के hi पीछे हैं,

शनाया ने ह्रदय का हाथ पकड़ क्र उसे अंदर ले आई,

शनाया- बड़ी देर कर दी आने में

ह्रदय- है ट्रैफिक बहुत था, बस नहीं मिली थी

रैना- हमने तो गाड़ी लगाई थी उससे आ जाते

ह्रदय- मैं अपने कदमो पैर चलना पसंद करता हु,

दिया- कोई बात नहीं आप आये ये hi काफी ह, आइये आइये

रैना- आइये पहले कुछ नाश्ता कर लीजिये,

दिया- इनका नाश्ता अलग ह आइये

शनाया रैना और आशना चौंक गई, अलग नाश्ता,

सीमा- आ रश्मि देखे तो सही ये नौजवान ह कोण जिसे देख क्र हमारी परियो के पर कुछ ज्यादा hi बड़े हो गए,

सीमा और रश्मि उधर चल दी,

वह आये लड़के लड़किया भी ह्रदय से मुलाकात करने लगे थे, ह्रदय पार्टी का केंद्र बन चुक्का था, ह्रदय सबसे जान छुड़ा क्र एक साइड में बैठ गया और उसके हाथ में था अपना वही दही वह रायता,

चारो बहन भी उसी के टेबल पैर बैठ गई,

शनाया- कैसा लगा तुम्हे हमारा घर

ह्रदय- जिनके पास घर होता ह ये hi सबसे खास बात ह, और घर घर होता ह, हर घर अच्छा hi होता ह,

दिया- इसका मतलब ह हमारा परिवार कैसा लगा

पीछे से सीमा आ गई

सीमा- परिवार से तुमने मिलाया hi कहा ह इस नौजवान को,

सीमा और रश्मि को देख क्र ह्रदय खड़ा हो गया,

ह्रदय ने हाथ जोड़ क्र दोनों को प्रणाम किया,

सीमा- बेटे ये क्या खा रहे हो, ये सब पार्टी में तोडना खाया जाता ह, इतना सब कुछ ह यहाँ खाने के लिए और तुम ये सब खा रहे हो, क्या तुम्हे वो सब खाना पसंद नहीं आया, कोई कमी रह गई क्या खाने में, तुम कहो तो हम कुछ बनवा सकते हैं,

कोई संकोच मत करना

दिया- माँ माँ रुकिए रुकिए, पहले बात सुन लीजिये,

सीमा- क्या हुआ

दिया- ये बहार का कुछ नहीं कहते किसी के हाथ का खाना इन्हे पसंद नहीं ये बस अपनी माँ के हाथ का खाना पसंद करते हैं,

सीमा- ये तो अच्छी बात ह बीटा लेकिन जहा माँ नहीं होती वह कुछ तो खाना पड़ेगा न

ह्रदय- आंटी वह मैं फ्रूट्स या पनीर खा लेता हु, ये मिस दिया ने बना दिया, ये भी मेरा फविरोयत ह



शनाया- माँ ये वही हैं जिसके बारे में हमने बताया था, अकेले ने 15 गेम्स जीते हैं, मर. ह्रदय
 
अपडेट-7






ह्रदय नाम सुनते hi सीमा ने चौंक क्र ह्रदय को देखा, और उप्पेर से निचे तक निहारा, सीमा ह्रदय के चेरे को गौर से द्केहने लगी,

आशना- बुआ कुआ हुआ

सीमा ने आशना के मुँह पैर हाथ रख दिया,

आशना चुप हो गई, सभी चौक गए,

सीमा- बीटा तुम्हारी फॅमिली में कोण कोण ह कहा से हो तुम

ह्रदय- जी वो मैं

दिया- माँ ये हिम

सीमा- मैंने तुमसे पूछा क्या,

सब एक दम चुप हो गए

ह्रदय भी थोड़ा शॉकेड था

ह्रदय- आंटी मैं हिमाचल से हु और मैं और मेरी माँ hi ह बस परिवार में,

सीमा- और तुम्हारे पिता

ह्रदय- जी वो मैं नहीं

सीमा- बस बीटा बस,

सीमा की आँखों में आंसू आ गए वो अपने आंसुओ को छुपाती हुई तेज तेज कदमो से अंदर की तरफ चली गई,

वह खड़े सब चौंक गए, ये क्या हुआ सीमा ने ऐसा व्यव्हार क्यों किया किसी की समझ में नहीं आ रहा था,

दिया- मैं जरा माँ को देख क्र आती हु,

दिया दौड़ती हुई सीमा के पास पहुंची तो देखा सीमा किचन में लगी हुई ह,

दिया- माँ क्या कर रही हो.

सीमा ने जल्दी से अपने आंसू पोछे और दिया को देखा

दिया फिर भी समझ गई की उसकी माँ रो रही ह, लेकिन दिया ने उस समय पूछना सही नहीं समझा

सीमा- तू जा मैं आती हु बस 5 मिनट्स में

दिया- लेकिन माँ खाने के लिए बहार सब कुछ ह आप यहाँ क्या कर रहे हो,

सीमा- बोलै न तू जा

दिया सोचती हुई बहार चली गई,

दिया सबके साथ कड़ी हो गई, पार्टी में डांस चलने लगा सब एन्जॉय क्र रहे थे,

शनाया ह्रदय के साथ डांस करना छाती थी लेकिन कहने की हिम्मत नहीं थी,

कुछ देर बाद

ह्रदय- अब मुझे चलना चाहिए, काफी टाइम हो गया ह, मुझे ट्रैन भी पकड़नी ह

ह्रदय के जाने की बात सुनकर साडी बहेनो के दिल जोर से धड़क उठे,

तभी सीमा हाथ में एक ट्रे लिए कड़ी थी, बिना कुछ खाये कैसे जा सकते हो,

दिया- माँ मैंने बताया था न ये कही का नहीं कहते

सीमा- माँ को मत सीखा कोण क्या करता ह,

सीमा ने ट्रे टेबल पैर रख दी, उसमे हलवा अरबी की सब्जी और पराठे रखे हुए थे,

शनाया- माँ ये सब कोण खता ह, आप

सीमा ने उंगली दिखा क्र सबको चुप क्र दिया

सीमा- बीटा ऐसी कोई चीज ह जो इसमें तुझे पसंद नहीं ह,

ह्रदय- आंटी आपको कैसे पता मुझे ये सब पसंद ह, मेरी माँ के अलावा कोई नहीं जनता मुझे क्या पसंद ह क्योकि मैंने कभी बहार कुछ खाया hi नहीं,

सीमा- मैं भी तेरी माँ जैसी hi हु, और माँ का दिल सब पहचान लेता ह,

एक बार खा क्र देख अगर तेरी माँ से थोड़ा भी स्वाद अलग हुआ तो मुझे कभी माफ़ मत करना,

ह्रदय- आंटी इस सब की जरुरत नहीं थी

सीमा- मैं अपने दिल से ये सब बना क्र ले हु, एक बार बस अपनी माँ के लिए एक बार खा क्र देख,

ह्रदय सीमा के चेरे पैर आये भावो का सम्मान करते हुए, है में गार्डन हिलाई, सीमा ख़ुशी से उसके सामने निचे hi बैठ गई,

ह्रदय- आंटी उप्पेर बैठिये न, आप निचे क्यों बैठ गई

सीमा- क्यों तेरी माँ तुझे निचे बैठ क्र नहीं खिलाती

ह्रदय- है वो तो खिलाती हैं,

ह्रदय ये सब देख क्र बहुत hi शॉकेड था वही हाल चारो बहेनो का था रश्मि की भी कुछ समझ में नहीं आ रहा था,

ह्रदय ने सबसे पहले हलवा उठाया, सीमा मुस्कुरा पड़ी और मन में सोचने लगी वैसा hi ह बिलकुल वैसा hi ह,

ह्रदय ने पहला चमच खाया और उसकी आँखे बंद हो गई, उसने सीमा को देखा,

ह्रदय- ये आपने बनाया ह आप झूट तो नहीं बोल रही, क्या मेरी माँ यही ह, क्या मेरी माँ भी यहाँ आई ह उन्होंने ये बनाया ह न

सीमा- ये मैंने बनाया ह बीटा, तू खा

ह्रदय ने खाना शुरू क्र दिया और सामने रखा सारा हलवा और 5 पराठे खा लिए,

ये देख क्र सभी शॉकेड थे बस सीमा को छोड़ क्र,

ह्रदय- आंटी पिछले 15 दिन से भूका था, आज भूक शांत हुई ह, लेकिन आपने मेरी माँ जैसा खाना कैसे बनाया ये स्वाद तो मेरी माँ के हाथो का ह,

सीमा- बीटा तूने कभी किसी और जगह का खाना खा क्र देखा hi नहीं तो तुझे कैसे पता होगा की किसी और का स्वाद कैसा ह,

ह्रदय- बचपन में खाया था फिर कभी नहीं खाया

सीमा- वो अच्छा नहीं बनती होगी,

तभी वह सचिन और कपिल भी आ गए,

सीमा- सचिन ये ह्रदय ह, ये

सचिन – है दीदी मैंने सब सुन लिया और सब देख लिया,

कपिल- शाबाश बीटा शाबाश बहुत hi भेतरीन प्रदर्शन किया ह तुमने, तुम्हे देख क्र साफ़ पता चलता ह तुम्हारे अंदर बहुत hi महँ माँ बाप का खून ह, तुम सच में कमल हो,

ह्रदय- ठंकु अंकल आप सबसे मिलकर बहुत अच्छा लगा, एक अपना पैन सा ह आप लोगो में, आप इतने अच्छे हैं फिर आप से ऐसी गलती कैसे हो गई

सचिन- कैसी गलती बीटा

ह्रदय- शनाया की गाड़ी से जिस आदमी का एक्सीडेंट हुआ था, उसका इलाज करवा क्र बस पैसे देकर आपने ऐसे hi छोड़ दिया, वो पैसे कब तक चैलेंज, वो अकेले कमाने वाले इंसान ह, कैसे उनका परिवार चलेगा, दो बच्चे हैं कैसे शादी करवाएंगे

सचिन अउ रकपिल सोच में पद गए,

सीमा- तुम क्या सोचते हो बीटा हमे क्या करना चाहिए था, हमारी बेटी ने गलती की उसे हमने सजा दी

ह्रदय- आपको उनके परिवार की जीविका का ख्याल रखना चाहिए

कपिल- हम उनके लिए ऐसा क्र सकते हैं की उनके ठीक होने के बाद अपने ऑफिस में उनके लायक जॉब दे देंगे, जिससे उन्हें प्रॉब्लम न हो,

ह्रदय खुश हो गया- ठंकु अंकल ये उनके लिए सही होगा,

सचिन- जैसा तुम चाहो,

तीनो बहन भाई सचिन कपिल सीमा ह्रदय को घेरे खड़े थे और बात कर रहे थे, शनाया दिया रैना आशना अलग कड़ी सब देख सुन रही थी, वो तो शॉकेड इसलिए थी की उनके माँ बाप ह्रदय की हर बात ऐसे मान रहे थे जैसे उन्ही का बीटा हो,

इधर पार्टी ख़तम की तरफ चल पड़ी थी, सभी स्टूडेंट्स वह से निकलने शुरू हो चुके थे, लास्ट में बस ह्रदय बचा था,

ह्रदय- अब मुझे आज्ञा दीजिये मेरी ट्रैन ह नाईट में

सीमा- बीटा कुछ दिन हमारे साथ रुक जाओ,

ह्रदय- आंटी मेरी माँ मेरा इंतजार कर रही ह, मुझे जाना होगा

ह्रदय उनसे विदा लेकर निकल गया, चारो लकडिया उदास खड़ी ह्रदय को देख रही थी, वही ह्रदय के जाते hi सीमा दौड़ क्र सचिन के गले लग गई,

सीमा- सचिन ये बिलकुल वैसा ह

सचिन- है दीदी मैंने देखा

इधर ह्रदय पंहुचा तम्मना के घर और वह से स्टेशन,

इधर चारो बेहेन अपने माँ बाप के समाने बैठी थी,

दिया- ये सब क्या था आज जो हुआ आप सब इतना अजीब सा बेहवे क्यों क्र रहे थे, और वो खाना माँ आपने खाना बनाया, हमारे लिए तो आज तक नहीं बनाया

सीमा- तू पागल ह कोई बच्चा हमारे घर आया और हम उसे खाना तक नहीं खिलाएंगे,

जाओ अपने अपने रूम में जाओ और रेस्ट करो, बहुत काम ह हमे,

चारो बहन ह्रदय के खयालो में खो क्र अपने अपने रूम में पहुंच गई, लेकिन सभी के दिमाग में आज की घटना अटक गई थी,

वही ह्रदय के दिमाग में भी ये सब बाते चल रही थी, वो तम्मना को लेकर स्टेशन पंहुचा तो उनकी ट्रैन छूट गई थी, उन्हें पहुंचने में देर हो गई तो दोनों बस अड्डे पहुंचे और वह से बस पकड़ी,

बस में सीट मिली तो तम्मना ह्रदय से चिपक कर बैठ गई, ह्रदय का पूरा धयान आज की हुई घटनाओ पैर घूम रहा था,

और तम्मना ह्रदय के कंधे पैर सर रख क्र सोने का नाटक कर रही थी, और ह्रदय से खुद को चिपका रही थी, मौसम ठंडा था, तो वो और चिपक गई उसने ह्रदय के हाथ को बहो में भर लिया जिससे ह्रदय की बाजु तम्मना की चूचियों के बिच में आ गई,

तम्मना की चूचियों का अहसास ह्रदय को हुआ उसने हाथ हटाने का सोचा लेकिन तम्मना ने कास कर पकड़ा हुआ था और वो ऐसे दिखा रही थी जैसे सोइ हुई हो, ह्रदय ने हाथ वैसे hi रहने दिया, लेकिन उससे बड़ी संशय ये थी की ह्रदय का हाथ तम्मना की जांघो के बिच में आ रहा था, जिससे ह्रदय की उंगलिया तम्मना की जांघो के अंदरूनी भाग से रगड़ जाती थी,

उसकी उंगलिया तम्मना की छूट से ज्यादा दूर नहीं थी, ये ह्रदय को बैचैन क्र रहा था, और सोने पैर सुहागा तब हुआ जा तम्मना ने अंगड़ाई सी ली और अपनी कमर हलकी सी खिसका दी जिससे ह्रदय की उंगलिया तम्मना की छूट को छू गई,

अब ह्रदय ने अपना हाथ खींचना सही समझा उसने हाथ खींचा तो उसका हाथ तम्मना की चूचियों को रगड़ता हुआ आया, तम्मना के मुँह से सिसकारियां फुट पड़ती न जाने उसने कैसे खुद को रोका था,

ह्रदय विंडो की तरफ मुँह करके बैठ गया, तम्मना तिरछी नजरो से ह्रदय को hi देखे जा रही थी, हिमाचल पहुंच क्र ह्रदय ने पहले तम्मना को उसके घर ड्राप किया फिर अपने घर निकल गया,

घर पहुंचने में काफी टाइम हो गया, दीपा ने दरवाजा खोला ह्रदय दीपा के गले लग गया, दोनों माँ बीटा काफी देर टेक एक दूसरे से लिपटे रहे,

दीपा – तू हाथ मुँह धो ले मैं खाना लगाती हु

ह्रदय- माँ भूक नहीं ह बस आराम करूँगा

दीपा- ठीक ह तू आराम क्र सुबह बात करेंगे,

वही जब ह्रदय सीमा के घर से निकला तभी वह नंदनी पहुंची सबसे मिलने के लिए, नंदनी को देख क्र सीमा ख़ुशी से उछाल पड़ी आज सच में बहुत ख़ुशी का दिन था, आज सब कुछ अच्छा हो रहा था, बच्चो की ख़ुशी के लिए घर में पार्टी क्या राखी खुशिया घर में डोडी चली आ रही थी,

सीमा नंदनी के गले लग गई,

सीमा- कैसी ह तू कितना समय हो गया तुझे देखे हुए, बच्चे कैसे हैं

नंदनी- सब अच्छे ह दीदी, मैं भी ठीक हु आप बताओ यहाँ सब कैसे हैं,

सचिन- तुम इंडिया में कैसे सब ठीक ह न

नंदनी- पापा की तबियत ठीक नहीं ह उन्ही से मिलने आई थी,

सीमा- आज बहुत खसुहि का दिन ह नंदनी

नंदनी- क्या ह आज घर में पार्टी का माहौल लग रहा ह,

सीमा- तुझे पता ह आज यहाँ कोण आया था

नंदनी- मुझे कैसे पता होगा

सीमा- है तुझे कैसे पता होगा मैं भी ख़ुशी में पागल हुई जा रही हु, आज यहाँ ह्रदय आया था,

नंदनी- ह्रदय

ख़ुशी में चहकती हुई क्या सच में,

सीमा- है हमारा ह्रदय यहाँ आया था, लेकिन उसे हमारे बारे में कुछ नहीं पता,

नंदनी- कैसा दीखता ह

सीमा- टुशु की कॉपी ह वो, वही ताकत वही शरीर वैसा hi खूबसूरत, गबरू जवान टुशु से भी लम्बा ह वो,

नंदनी- काश मैं भी देख पति,

सीमा- तू बैठ पहले इतने दिन बाद मिली ह, मैं तो आज ख़ुशी से पागल हुई जा रही हु,

नंदनी- माँ कैसी ह,

माँ का नाम सुनकर सब चुप हो गए,

सीमा- माँ के बारे में कुछ नहीं पता, इन दोनों भाइयो को जानकारी ह लेकिन ये बताते नहीं ह

सचिन- दीदी हमे भी ज्यादा कुछ नहीं पता,

सीमा- झूट मत बोल तू

नंदनी- दीदी गुस्सा नहीं, आप सब को देख क्र मन को सकूं आ गया, दीदी अब बच्चे अपने पिता के बारे में पूछने लगे हैं,

सीमा- माँ ने कहा था सही समय आने तक कुछ नहीं बताना,

कपिल- समय नजदीक आ रहा ह, माँ ने कहा था एक समय आएगा जब सब लोग खुद एक दूसरे के नजदीक आने लगेंगे, और मुझे लग रहा ह सब नजदीक आ रहे हैं, इसका मतलब

सचिन- माँ आने वाली ह,

माँ का नाम सुनते hi सबके रोंगटे खड़े हो गए थे,

वही नैना और काम्य अपने नाना के पास बैठी थी,

नैना- नाना जी आपने माँ को माफ़ क्र दिया न

राज प्रताप- माफ़ किस लिए बेटी, मैं उससे नाराज कब था और क्यों नाराज रहूँगा उससे,

नैना- उन्होंने आपकी मर्जी के खिलाफ शादी क्र ली थी

राज प्रताप- मेरी मर्जी के खिलाफ,

राज प्रताप के चेरे के भाव देख क्र काम्य का माथा ठनक गया,

राज प्रताप- है है वो दोनों ने मेरी मर्जी के खिलाफ शादी की, मैं नाराज था लेकिन उनकी शादी करवा दी, फिर वो दोनों विदेश चले गए,

नैना- लेकिन

काम्य ने तुरंत नैना को उंगली मरी और चुप रहने को कहा,

काम्य- नाना जी पापा कैसे इंसान थे, माँ तो बोलती ह बहुत बुरे इंसान थे,

राज प्रताप के दिमाग में कमल और सोहन याद आ गए, राज प्रताप को लगा की नंदनी ने उन दोनों के बारे में बताया हुआ ह, नंदनी से यहाँ चूक हो गई थी वो अपने पिता को सब कुछ नहीं बता पाई थी,

राज प्रताप- है बेटी बहुत बुरा इंसान था, मेरी गलती थी मैंने उससे तुम्हारी माँ की शादी होने दी, उसका पूरा परिवार hi बहुत बुरा था, इसीलिए तुम्हारी माँ ने तुम्हे नाम के साथ उसका नाम नहीं लिखा, बस अपना नाम दिया ह,

काम्य- नाना जी, क्या इस घर में कोई पूर्णी तस्वीरें नहीं हैं,

राज प्रताप- बेटी मैं हमेशा राजनीती में रहा हु तो इस सब में कभी धयान hi नहीं दिया, तुम्हारी नानी जब तक जिन्दा थी वो hi सब सम्हालती थी, फिर नंदनी अकेली थी तो वो hi सब करती थी, मैं तो हमेशा घर से बहार hi रहा,

काम्य- माँ का कमरा कोनसा ह नाना जी, हम उनकी पुराणी चीजे देखना चाहते हैं,

राज प्रताप- वो उप्पेर वाला ह और उसका सारा सामान उसी में ह, कोई उसे नहीं खोलता,

काम्य ने नैना का हाथ पकड़ा और कमरे की तरफ चल दी,

नैना- नाना जी झूट क्यों बोल रहे थे,

काम्य- ये कोण बताएगा की नाना जी झूट बोल रहे हैं या माँ, लेकिन ये कन्फर्म ह कोई तो झूट बोल रहा ह, या फिर दोनों hi झूट बोल रहे हैं, कुछ तो गड़बड़ ह हमारी माँ और पापा की शादी में,

नैना- काम्य ये सब क्या हो रहा ह,

काम्य- तू चिंता क्यों करती ह हम माँ को दुःख नहीं देंगे लेकिन सच का पता करके hi रहेंगे,

दोनों नंदनी के कमरे में पहुंच गए, और पुरे कमरे को देखने लगे लेकिन वह कपडे खिलोने और नंदनी की और नाना नानी की तस्वीरों के अलावा कुछ नहीं मिला,

जब तक नंदनी वापस नहीं आ गई वो दोनों वह ढूंढ़ती रही,

अगली सुबह सूरज की रौशनी के साथ एक नए दिन की शुरुआत हुई थी लेकिन आज बहुत कुछ बदल चुक्का था, आज जो भी उठा रहा था उसके दिमाग में बहुत से सवाल थे, शनाया और दिया के दिमाग में ह्रदय और सीमा को लेकर बहुत से सवाल थे, नैना और काम्य के दिमाग में अपनी माँ और बाप के बारे में सवाल खड़े थे, वही ह्रदय उठ क्र बस सीमा के बर्ताव के बारे में सोच रहा था,

उसके दिमाग में बस यही घूम रहा था की उन आंटी को कैसे पता मैं क्या खता हु और उन्होंने माँ के जैसा खाना कैसे बनाया,

दीपा- उठ जा मेरे लाल कब तक सोयेगा,

ह्रदय- माँ घर में आकर जो नींद आती ह उससे भीतर कुछ नहीं होता

दीपा- सही खा घर में जो सकूं मिलता ह वो कही,

अच्छा उठ अब मैं तेरे लिए कॉफ़ी लती हु,

ह्रदय ने दीपा का हाथ पकड़ा और वही खींच लिया,

ह्रदय- माँ बैठिये न बहुत साडी बाते करनी ह आपसे

दीपा- है है बाबा साडी बाते सुनूंगी, पहले तू उठ तो जा

ह्रदय ने दीपा की बात मणि और उठ क्र नाहा धो क्र आ गया और दोनों माँ बेटे बैठ गए

दीपा- अब बता क्या क्या हुआ वह

फिर ह्रदय ने वह पहुंच क्र होने वाली एक एक घटना को पुरे विस्तार से दीपा को बताया

दीपा- तो लकडिया मेरे लाल के पीछे पागल हो गई थी, और जब वो लड़की खुद तेरे पास चलकर आई थी तो तूने उसका ऑफर ठुकरा क्यों दिया,

ह्रदय- माँ आपने hi तो रोका हुआ ह, की सही समय से पहले अपना धयान मत हटने देना, वर्ण वह तो इतनी साडी खूबसूरत लड़किया थी, और सब तैयार बैठी थी,

दीपा- मुझे तो लगता ह तेरी तम्मना मैडम कुछ ज्यादा जल्दी में हैं,

ह्रदय है पड़ा

ह्रदय- माँ एक अजीब सी बात हुई वह

दीपा- क्या

ह्रदय- वो जो चारो लड़िया थी न पैसे वाली उनमे से एक लड़की को देख क्र लगता था जैसे आपसे hi बात कर रहा हु, बात करने का स्टाइल और समझने का तरीका, बिलकुल आप जैसा था

दीपा- हेठी पागल लकड़ियों में भी अपनी माँ को hi ढूंढ़ता रहता ह,

ह्रदय- नहीं माँ वो बिलकुल आप जैसी थी, और है जब मैं उनके घर पार्टी में गया तो उसकी माँ ने मेरे लिए खाना बनाया

दीपा- अरे वह मेरा बीटा अब बहार का खाना भी खाने लगा ह

ह्रदय- नहीं माँ इन 15 दिन में कुछ बहार का नहीं खाया लेकिन वो आंटी मुझे देख क्र एक दम अजीब सा बेहवे करने लगी, फिर किचन में से खुद खाना बना क्र ले, इतने पैसे वाले लोग ह फिर भी खुद बना क्र ले, और माँ वो मेरी फेवरियत अरबी पराठा और हलवा बना क्र ले

दीपा- सोचती हुई मुद्रा में अच्छा

ह्रदय- है माँ और आपकी तरह मेरे समाने निचे बैठ गई और मुझे जबरदस्ती खिलाया, और कमल तो ये था की उनके खाने का सवाद बिलकुल आपके सवाद की तरह था, ऐसा लगा जैसे आपने hi वो खाना बनाया हो,

मैं तो चौंक गया था, मुझे लगा आप hi वह आ गई हो

दीपा घेरि सोच में दुब गई,

दीपा सीरियस मूड में - क्या नाम था उनका

ह्रदय- उनका नाम तो मैंने नहीं पूछा लेकिन वो अंजलि ग्रुप की मालकिन ह, बहुत पैसा ह

दीपा के मुँह से एक दम निकल गया सीमा

ह्रदय- आप जानती ह उन्हें

दीपा- नहीं नहीं

ह्रदय- माँ आप झूट बोल रही हैं, मैंने आपसे कभी कुछ नहीं पूछा लेकिन उनका ऐसा व्यव्हार और मेरे बारे में सब जाना, इसका क्या मतलब ह,

दीपा- तुझे अपनी माँ पैर यकीन ह न

ह्रदय- खुद से भी ज्यादा माँ

दीपा- तो बस जैसे अब तक तूने इंतजार किया ह वैसे hi इंतजार क्र, सही वक़्त आने पैर तुझे सरे जवाब मिल जायेंगे,

ह्रदय- ठीक ह माँ,

दीपा- और है अब एक बात का वक़्त आ गया ह,

ह्रदय- किस बात का माँ

दीपा- मैंने तुझे एक योद्धा बनाया ह, हर तरह से काबिल बनाया ह, और अपनी क़ाबलियत को हमेषा परखते रहना चाहिए,

ह्रदय- बोलिये माँ किसके साथ लड़ना ह मुझे

दीपा- तेरे सामने कोई मर्द आएगा तू उसे चुकितयो में मसल देगा मैं जानती हु लेकिन अगर कोई औरत तेरे सामने आ गई तो क्या करेगा, क्या उसे मार पायेगा,

ह्रदय- माँ औरत को मरना ये मैंने नहीं सीखा

दीपा- क्योकि औरत को मारा नहीं जाता बीटा उससे लड़ने का एक और तरीका होता ह,

ह्रदय- वो क्या

दीपा- तेरे पास दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज ह, ये खूबसूरत शरीर ये ताकत जिस पैर लड़किया मरती ह, अब तुझे अपने एक और हुनर का इस्तेमाल करना सीखना ह, औरत को खुश कैसे किया जाता ह, लड़किया तुझे देख क्र तेरे पास तो आएँगी लेकिन अगर तू उन्हें संतुष्ट नहीं करेगा तो वो दूर हो जाएँगी, इसलिए अपने इस हुनर को इस्तेमाल करने का वक़्त आ गया ह,

ह्रदय दीपा को देखे जा रहा था,

दीपा- आज से तुझे पूरी आजादी ह, जो लड़की तेरे पास चलकर आ रही ह उसके साथ मजे करने की, लेकिन ख्याल रहे किसी का दिल न टूटे, और किसी को इतना दिल में मत बसा लेना ,

ह्रदय- माँ मैं तुम्हे यहाँ भी निराश नहीं करूँगा, लेकिन इसकी कोई लिमिट ह क्या

दीपा- कोई लिमिट नहीं ह, बस एक hi नियम ह कभी जबरदस्ती मत करना, और है कोई ऐसा रिश्ता मत बना लेना जो तुझे एक जगह रोक दे, तुझे बहुत आगे बढ़ना ह, अब तू जहा चाहे जिसके साथ चाहे जब तू चाहे अपने हुनर को निखार सकता ह,

ह्रदय- माँ बस एक सवाल क्या इसकी जरुरत भी पड़ेगी जीवन में

दीपा- बीटा एक सच्चा और महँ योद्धा वही होता ह जो युद्ध की हर कला में माहिर हो, और सेक्स भी एक तरह का युद्ध न जाने कब ऐसी स्तिथिति आ जाये तुझे दुश्मन स्त्री के साथ सम्बन्ध बनाना पद जाये और तू हर गया तो क्या होगा,

ह्रदय- जो तुम कहती हो वही मेरे लिए आदेश होता ह, लेकिन लड़ाई हो तो समझ आता ह कहा से शुरू करनी ह लेकिन ये कहा शुरू करू,

दीपा- तुझे कुछ नहीं करना बस जो तेरे पास आ रही ह उसे आने देना ह, अब नहीं रुकना ह, अपनी फीलिंग्स को आजाद क्र दे बस,

ह्रदय- ठीक ह माँ आज से मेरा टारगेट इसमें भी अपने झंडे गाड़ने हैं,

दीपा- लेकिन सयम से जल्दबाजी नहीं,

ह्रदय- ठीक ह माँ,

ह्रदय ने एक घेरि साँस भरी और दीपा एक घेरि सोच में दुब गई,

वही दूसरी तरफ नैना और काम्य अपने सवालो के जवाब ढूंढ़ने के लिए बैचैन थी, और आज उन्हें मौका भी मिल गया, राज प्रताप की तबियत कुछ बिगड़ी तो नंदनी उन्हें लेकर हॉस्पिटल चली गई, नैना और काम्य घर में अकेली थी, दोनों ने तुरंत पुरे घर में खोजबीन शुरू क्र दी,

काम्य ने नोकरो से सरे कमरे खुलवाए और ढूंढ़ने लगी जब काफी देर ढूंढ़ने के बाद कुछ नहीं मिला तो नैना ने अलग खोज शुरू करने का सोचा,

नैना- काम्य हमारे नाना यहाँ के मंत्री रहे हैं, तो जो भी उनसे जुड़े लोग होंगे कही न कही इंटरनेट पैर उनका जीकर होगा,

काम्य- है ये तो हमने सोचा hi नहीं,

नैना ने तुरंत इंटरनेट पैर राज प्रताप के बारे में सर्च किया और जल्दी hi उन्हें वह से जाकारी मिलनी शुरू हो गई, और जो जानकारी वह से मिली उसे देख क्र दोनों के दिमाग ख़राब हो गए,

राज प्रताप उनकी बेटी नंदनी और नंदनी के पति की फोटो सोहन चोपड़ा बाप सुरेश चोपड़ा माँ सोनिया चोपड़ा भाई कमल चोपड़ा भाई की पत्नी कोमल और कोमल के पिता कमिश्नर संजय,

सुरेश चोपड़ा का बिज़नेस उसका क्रिमनल होना, सोहन और कमल का मरना कोमल का जेल जाना सुरेश सोनिया का जेल जाना, और पूरी प्रॉपर्टी अंजलि की होना, अब वो प्रॉपर्टी अंजलि ग्रुप से फेमस ह,

नैना और काम्य के समाने धमाके पैर धमाके हो रहे थे, इतना सब कुछ हो गया था,

वो दोनों ये सब पढ़ क्र शॉकेड से एक दूसरे के मुँह को देख रहे थे,

नैना- हमारे पिता सोहन चोपड़ा थे,

काम्य- वो अब इस दुनिया में नहीं ह

नैना- वो क्रिमिनल थे,

काम्य- ये तो इंटरनेट बता रहा ह लेकिन सच क्या ह ये पता करना पड़ेगा, इंटरनेट पैर सब कुछ सच नहीं होता, और हमारे पिता मर गए लेकिन माँ आज भी सिंदूर लगाती ह,

नैना- हो सकता ह माँ हमारी वजह से लगाती हो,

काम्य- लेकिन नाना जी मंत्री थे वो तो उन्हें बचा सकते थे, या तो ये अंजलि ग्रुप वाले काफी पावरफुल लोग हैं जिसकी वजह से ये सब हुआ ह,

नैना- हमे पता करना होगा,

दोनों बहेनो ने अपने पिता के बारे में जानना अपना मिशन बना लिया था,

वही दिया सीमा को पकड़ कर बैठी थी,

दिया- माँ आपको कैसे पता ह्रदय को क्या पसंद ह, और उसने आपका बनाया हुआ खाना खा भी लिया, ये कुछ पल्ले नहीं पड़ा

सीमा- बीटा मैंने तो इत्तेफाक से बना दिया था,

दिया- आप मुझे बेवकूफ समझती हैं क्या,

सीमा- अरे मेरी बच्ची तुझसे ज्यादा समझदार तो कोई हो नहीं सकता, और तुझे ख़ुशी नहीं हुई तेरा दोस्त यहाँ आकर भूका नहीं गया

दिया- बहुत ख़ुशी हु

सीमा- फिर अपनी माँ को शाबाशी देने की जगह इतने सवाल लेकर आ गई

दिया खामोश हो गई, उसे समझ आ गया माँ ऐसे कुछ नहीं बताएगी,

दिया ने सोच लिया अब उसे hi पता करना पड़ेगा कुछ तो गड़बड़ ह इस सब में,

वही बेचारा हनी गऊसे में अपने घर के गयम में पंचिंग बेग पैर अपना गुस्सा निकल रहा था,

अशोक- तू ऐसी मूरखता करने के लिए नहीं बना ह, अबे कुछ करने से पहले मुझे पूछ तो लेता,

हनी- मुझे क्या पता था वो गुण्डे मेरे साथ hi धोका क्र देंगे,

अशोक- ये हमारे ज़माने के तरीके थे मूरख लड़की को गुड्डो से पकड़वाओ और खुद जाकर उन्हें बचा लो, अगर वो गुंडे पकडे जाते तो तेरा नाम और ले लेते,

हनी- उस लड़के की वजह से मेरा दिमाग ख़राब हो गया था, मैं कुछ सोच hi नहीं पाया,



अशोक- मैंने तुझे इतना तैयार किया ह फिर भी तू उन गुण्डो से मर खा गया, अब तू कुछ नहीं करेगा अब मैं करूँगा जो करना ह, तू बस शनाया से अपनी दोस्ती को पक्का रख बाकि मुझ पैर छोड़ दे,
 
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