Incest Story EK MAA PART-2 - Page 5 - SexBaba
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Incest Story EK MAA PART-2

अपडेट-27




कोमल नाम सुनकर ह्रदय की आँखे फटी रह गई, कोमल कोमल कोमल

ह्रदय- कोमल कमिसनीयर की बेटी,

औरत- तुम कैसे जानते हो

ह्रदय- आप यहाँ कैसे आप तो सब छोड़ क्र विदेश चली गई थी, आप यहाँ कैसे

कोमल- तुम मुझे कैसे जानते हो कोण हो तुम

ह्रदय- मैं आपका

ह्रदय इतना की बोल पाया था की पीछे से किसी ने ह्रदय को उठाया और दूर फैक दिया,

ह्रदय एक दीवार से टकराया, वो बड़ी फुर्ती से उठ क्र खड़ा हुआ, तो सामने वही मास्क वाला आदमी खड़ा था,

कोमल उसके पैरो में गिर पड़ी और गिड़गिड़ाने लगी,

कोमल- उसे माफ़ कर दो उसकी गलती नहीं ह, उसे जाने दो वो बच्चा ह

उस आदमी ने कोमल को एक लात मरी उसके मुँह से खून निकलने लगा, ये देख क्र ह्रदय को गुस्सा आ गया और वो उस आदमी की तरफ दौड़ पड़ा,

और एक जोर दर मुक्का उस आदमी के मुँह पैर जड़ दिया, जिससे वो दूर जाकर गिरा,

ह्रदय ने कोमल को उठाया

ह्रदय- आप ठीक ह न

कोमल कुछ बोल पति तभी पीछे से उस आदमी ने फिर ह्रदय पैर हमला कर दिया, अब दोनों की लड़ाई होने लगी,

ह्रदय आज गुस्से में था जिसका परिणाम उस आदमी को झेलना पद रहा था, लेकिन वो ह्रदय से कही भी काम नहीं पद रहा था, उस आदमी ने ह्रदय को उठाया और दूर फैक क्र मारा जिससे ह्रदय एक घर की दीवार से टकराया और दीवार गिर गई, दीवार के गिरने की आवाज से आस पास के लोग उठ गए, जल्दी hi वह भीड़ इकठा होने लगी,

इधर दोनों की लड़ाई पुरे जोर पैर थी, कोई भी रुकने थकने के लिए तैयार नहीं था, सूरज निकल आया था पूरा उजाला हो चुक्का था, तभी वह दृष्टि भी आ गई, और ह्रदय को उस आदमी से लड़ता देख घबरा गई,

दृष्टि- ह्रदय रुक जाओ प्लस रुक जाओ

ह्रदय- दृष्टि दूर रहो ये खतरनाक आदमी ह

दृष्टि- ह्रदय रुक जाओ ये हमारे साथ ह,

ह्रदय- इसने औरत पैर हाथ उठाया ह,

तभी वह शाक्षी भी आ गई और कोमल को वह देख क्र वो गुस्से में लाल हो गई और कोमल के पास पहुंची और उसके बाल पकड़ लिए और कोमल के मुँह पैर थपड मरने शुरू क्र दिए

शाक्षी- क्यों ऋ कलमुही यहाँ भी लड़ाई करवा दी, क्या चाहती ह तू

ह्रदय ने देखा की शाक्षी ने कोमल के बाल पकडे हुए हैं, ह्रदय की आँखे गुस्से में लाल हो गई और वो जोर से चिल्लाया,

ह्रदय- shakshiiiiiiiiiiii

उसकी आवाज इतनी तेज और जोर दर थी की शाक्षी दर के सहम गई, ह्रदय ने उस आदमी के मुँह पैर लगातार मुक्के बरसाने शुरू किये और उसे दूर फेंक क्र कोमल की तरफ डोडा, उसने शाक्षी को एक थपड मारा जिससे वो दूर जाकर गिरी,

उसके मुँह से खून आने लगा था,

दृष्टि- ह्रदय तुम ये क्या कर रहे हो, ये औरत इतने सम्मान के लायक नहीं ह, तुम नहीं जानते इसने क्या क्या किया ह,

ह्रदय- खामोश,

ह्रदय की आवाज से दृष्टि भी कैंप उठी

ह्रदय- इन्हे मैं बहुत अच्छे से जनता हु, तुम लोगो ने इनकी ये हालत की हुई ह, जिसने अपनी पूरी जवानी एक राजकुमारी की तरह जी ह, जिसके नाम से लोग कांपते थे उनकी ये हालत,

दृष्टि- तुम कैसे जानते हो इसे

ह्रदय- तुम्हे क्या लगा था तुम मुझे यहाँ भएका क्र लाइ हो मिस दृष्टि, मैं यहाँ खुद आया हु, और इस बेवकूफ औरत को भेजा मुझे रिझाने, जिसने यहाँ आते hi मेरा नाम बोल दिया जबकि किसी ने इसे मेरा नाम तक नहीं बताया था,

जितनी गिरी हुई बदचलन इसकी माँ थी ये उससे भी आगे निकल गई,

शाक्षी- तेरी ये हिम्मत

ह्रदय- हिम्मत देखि hi कहा ह तूने, शाक्षी रजनी की बेटी, उस रजनी की जिसने अपनी hi बेटी को मरने की कोशिश की, अपने hi परिवार को बर्बाद कर दिया,

शाक्षी- कोण हो तुम

ह्रदय- मैं हु तुषार का बीटा,

इतना सुनते hi कोमल की आँखे ख़ुशी से चमक उठी उसने आश्चर्य से ह्रदय को देखा, वही दृष्टि के आँखों में हैरत भरी पड़ी थी, शाक्षी दर क्र पीछे हो गई, और वही दूर अपना मुँह ढके हुए कड़ी थी जालिम दादी, जिसके चेरे पैर गुस्सा हैरत नफरत सब उभर आया था,

वो जोर से छिलाई- धामा मर दाल इसे

ह्रदय की नजर जालिम दादी पैर गई, तभी उस मास्क वाले आदमी ने ह्रदय पैर हुम्ला कर दिया, और दोनों की लड़ाई फिर होने लगी, लड़ाई इतनी जोर दर थी की ऐसा लग रहा था जैसे दो हठी आपस में टकरा रहे हो, दृष्टि और जालिम दादी को अपने आदमी की ताकत का पता था लेकिन वो ह्रदय की ताकत को देख क्र सुरप्रीसेड थे,

कोमल रट हुए ह्रदय को रोके जा रही थी, रुक जा बीटा रुक जा, प्लस रुक जा, मत लड़,

इधर जालिम दादी ने अपने 15-20 आदमी और बुला लिया, अब ह्रदय अकेला हो गया था, क्योकि ह्रदय की ताकत के लिए तो धामा की ताकत टक्कर दे रही थी, 20 आदमी और आ जाने से ह्रदय कमजोर पड़ने लगा,

दृष्टि- दादी रुक जाइये

जालिम दादी- आज इसका अंत होगा, हाहाहाहाहा आज ये यहाँ से जिन्दा नहीं जायेगा, इसके बाद उस अंजलि का कोई रक्षक नहीं बचेगा,

ह्रदय सामने गुंडों से लड़ रहा था तभी पीछे से धामा ने ह्रदय के सर पैर एक जोर दर वार किया जिसे उसका सर फैट गया और खून की धार भेने लगी, कोमल और दृष्टि ह्रदय की तरफ दौड़े, लेकिन धामा ने कोमल का हाथ पकड़ लिया और शाक्षी ने दृष्टि का,

बाकि आदमी ह्रदय की तरफ बढे तभी वह गाड़ियों की आवाज गूंज गई, कुछ गाड़िया बड़ी रफ़्तार से डोडी चली आ रही थी, और एक खुली जीप में कड़ी थी अंजलि जिसके हाथ में एक बन्दूक थी, जो ह्रदय की तरफ बढ़ा उसके सर में अंजलि ने गोली मर दी,

अंजलि को वह देख क्र जालिम दादी का प्लान फ़ैल होता दिखा,

जालिम दादी- धामा सेक्सी दृष्टि निकालो यहाँ से

साक्षी और धामा तुरंत दादी के पीछे हो लिए, दृष्टि रोटी हुई ह्रदय को देखती हुई दादी के पीछे चल दी, कोमल भी तुरंत उनके पीछे चल दी,

ह्रदय ने कोमल का हाथ पकड़ लिया

ह्रदय- आप क्यों जा रही हो

कोमल- बीटा मेरा जाना जरुरी ह, अगर मैं उनके साथ नहीं गई तो सब बर्बाद हो जायेगा, लेकिन मुझे उम्मीद ह तू हमे ढूंढ लेगा, तू सबको ढूंढ लेगा, पुरे परिवार को ढूंढ ले, और जो भटक चुके ह उन्हें रास्ता दिखाना,

इतना बोल क्र कोमल दौड़ती हुई उनके पीछे चली गई,

अंजलि उनके पीछे जाना चाहती थी लेकिन ह्रदय की हालत ठीक नहीं थी,

अंजलि ने ह्रदय को गाड़ी में डाला और तुरंत हॉस्पिटल की तरफ दौड़ पड़ी,

ह्रदय- माँ वो कोमल मौसी

अंजलि- कोमल यहाँ कैसे, ये सब हो क्या रहा ह

ह्रदय- हमे उनके पीछे जाना चाहिए,

अंजलि- मेरे लिए तू ज्यादा जरुरी ह,

अंजलि के आदमियों ने पुरे गाओं को घेर लिया था, और दादी के आदमियों को कैद क्र लिया था,

अंजलि ह्रदय को लेकर हॉस्पिटल पहुंची, बाकि परिवार को भी खबर लग गई थी, पूरा परिवार हॉस्पिटल की तरफ दौड़ पड़ा,

डॉक्टर ने ह्रदय की पाटिया क्र दी, ज्यादा सीरियस नहीं था, तुरंत hi छुट्टी क्र दी,

सभी घर आ गए, पूरा परिवार एक साथ बैठा था, बस अन्य और रम्य वह नहीं थी,

ह्रदय- माँ आपने गलती क्र दी, उन्हें हाथ से जाने दिया

अंजलि- बस इस बारे में और कोई बात नहीं होगी, तुझसे ज्यादा जरुरी और कुछ नहीं ह, मैं अपना बीटा खो चुकी हु, दूसरे के लिए रिस्क नहीं ले सकती

ह्रदय- फिर क्या फायदा इस ताकत का जो इतने से खतरे से घबरा जाये, माँ ये मौका दुबारा नहीं मिलने वाला वो लोग सतर्क हो जायेंगे, अब उन्हें पता भी चल गया ह की कोण हु, अब आसान नहीं होगा

अंजलि- होगा सब होगा हम करेंगे, पहले थोड़ा रेस्ट करो और रात में सब एक साथ होंगे और अपनी अपनी जानकरी बताएँगे,

ाव्य गुस्से में मुँह फुलाए बैठी थी,

ह्रदय- तुम्हे क्या हुआ

वर्षा – ये नाराज ह, इसे अपने साथ क्यों नहीं लेकर गए,

ह्रदय- वह खतरा था, इसलिए तुम्हे लेकर नहीं गया, अगली बार जाऊंगा तो साथ लेकर जाऊंगा,

फिर सबने आराम किया और रात के खाने के बाद सब एक साथ बैठे थे, काम्य बहुत उदास बैठी थी, उसके चेरे पैर बेचैनी साफ़ दिख रही थी,

अंजलि- काम्य बेटी क्या हुआ तू इतनी दुखी क्यों ह, तुम्हे तो खुश होना छाइये की तुम्हारी माँ मिल गई हैं,

ाव्य- मेरी माँ ये हैं,

उसने नंदनी की तरफ इशारा किया,

काम्य- उस औरत ने कोई अच्छा काम नहीं किया ह, और अब भी वो दुश्मन के साथ रह रही ह,

ह्रदय- नहीं तुम गलत सोच रही हो, वो दुश्मन के साथ नहीं हो सकती, कोमल जैसी मजबूत लड़की ऐसे लाचारी में फाटे हाल में दरी हुई नहीं हो सकती, और वो आदमी उन पैर जुलुम कर रहा था, वो किसी का जुलम नहीं सेहन कर सकती थी, वो ऐसा कर रही ह उसके पीछे जरूर कोई बहुत बड़ी वजह ह,

अंजलि- सही कहा, कोमल को काबू में करना मतलब किसी शेरनी के मुँह में हाथ डालने जैसा ह, कुछ तो गड़बड़ ह,

ह्रदय- उन्होंने कहा था सबको ढूंढो, पुरे परिवार को ढूंढो और जो बहके हुए हैं उन्हें भी सही रस्ते लाना ह,

नंदनी- भेके हुए से उसका क्या मतलब था,

अंजलि- इस सब के पीछे वो औरत थी जो मुँह छिपाये दूर कड़ी थी,

ह्रदय- सही कहा, वही थी जो उन सबको कमांड क्र रही थी और उस आदमी को धामा कह क्र बुला रही थी,

अंजलि- धामा नाम के तो किसी आदमी को मैं नहीं जानती, लेकिन ये शाक्षी वह कैसे,

नैना- रजनी जी के मरने के बाद शाक्षी बगावत पैर उतर आई थी, फिर कोई औरत उनसे मिलने लगी थी, और फिर वो एक दिन बस चली गई, उसके बाद उसका कोई रिकॉर्ड नहीं ह, तब से आज दिखी ह,

दिया- राहुल मैनेजर के हिसाब से भी कोई औरत थी, जिससे वो दर रहा था,

सीमा- कोण हो सकती ह वो औरत

अंजलि- मेरा शक जहा जा रहा ह, अगर वही हुई तो बहुत hi खतरनाक हो सकता ह,

ह्रदय- कोण हो सकती ह माँ

अंजलि ने ह्रदय की तरफ देखा,

अंजलि- अभी नहीं पहले पूरी जानकरी इकठा कर ले उसके बाद, और अब मंजिल साफ़ ह, हमे पता ह क्या ढूंढ़ना ह, कहा से शुरू करना ह, गाओं में आदमी लगे हैं जानकरी निकलने में, कल उस औरत के गुंडों से मिलेंगे, शायद कुछ पता चल जाये, तब तक सब आराम करो

अंजलि ने सबको भेज दिया और खुद वर्षा के साथ अपने कमरे में चली गई,

ह्रदय के पास ाव्य वन्य नैना काम्य दिया और शनाया बैठे थे, शनाया ह्रदय से चिपकने की कोशिश कर रही थी, जिसे सब महसूस कर रहे थे, ह्रदय थोड़ा झेप रहा था,

वन्य और ाव्य के चेरे पैर दर्द साफ़ दिख रहा था, वन्य थोड़ा शर्मा रही थी, वही ाव्य ह्रदय के दर्द को फील करने की कोशिश कर रही थी,

तभी ह्रदय के फ़ोन पैर तम्मना की कॉल आई,

शनाया- ये क्यों कॉल क्र रही ह, इससे अब क्या मतलब ह,

ह्रदय- पता नहीं देखना पड़ेगा,

शनाया- इससे दूर रहो, ये अच्छे लड़की नहीं ह,

ह्रदय ने शनाया को देखा, उसकी आँखों में जलन साफ़ दिख रही थी, हालत समझते ह्रदय ने फ़ोन नहीं उठाया,

वही जालिम दादी शाक्षी दृष्टि धामा और कोमल, एक जंगल में बैठी थी,

दादी- हरामजादी तेरी वजह से सब बर्बाद हो गया,

दादी ने कोमल को एक थपड मारा,

कोमल- मैंने कुछ नहीं किया, आप लोग hi तो उसे गाओं में लाये,

दादी- दृष्टि तू इतनी बड़ी गलती कैसे क्र सकती ह, तू उसके बारे ठीक से कुछ नहीं जान पाई, तेरी गलती की वजह से आज सब बर्बाद हो जाता,

दृष्टि- उन्होंने अच्छी चल चली, लेकिन आप वह से भागी क्यों अंजलि सामने थी आपने उसे ख़तम क्यों नहीं किया, हमारे परिवार को बर्बाद करने वाली को ख़तम क्यों नहीं किया,

दादी- वो अकेली नहीं थी उसके साथ आदमी थे, और वो अकेली भी मेरे जैसी 10 पैर भरी ह, और अब उसके साथ में ह्रदय जैसा योद्धा ह,

शाक्षी- हमारे पास भी तो ये ह, इसका क्या अचार डालोगी,

दृष्टि- आंटी जबान सम्हाल क्र बात करो मेरे पापा के लिए,

शाक्षी- ये बस रिश्ते में तेरा बाप ह, वर्ण इसमें कोई जज्बात नहीं ह,

दृष्टि- जैसे आपके अंदर नहीं ह, रात में आप ह्रदय के साथ क्या कर रही थी देखा मैंने, आपको शर्म नहीं आई, एक जवान लड़के के साथ ये सब करते हुए, ची कितनी जलील और गिरी हुई औरत हो आप, क्या आपकी माँ भी ऐसी hi थी, ह्रदय बोल रहा था न, शायद वो जनता ह आपको

शाक्षी गुस्से में- जबान सम्हाल क्र लड़की वर्ण तेरी जबान खींच लुंगी



दृष्टि- हाथ तो लगा क्र दिखा, बिच में से चिर दूंगी,



दादी- बस चुप हो जाओ तुम दोनों, यहाँ सब बर्बाद हो रहा ह तुम आपस में hi लड़ रहे हो,

दृष्टि चुप हो गई, उसके दिमाग में बहुत हलचल थी, उसका दिमाग बहुत कुछ सोच रहा था, और उसका कारन था ह्रदय, ह्रदय की अच्छे उसे दूसरी तरफ सोचने पैर मजबूर क्र रही थी,

और आज पहेली बार उसे कोमल के लिए कुछ दया दिख रही थी, कोमल के पास मौका था भागने का लेकिन वो गई क्यों नहीं,

कोमल की आँखों में आंसू थे लेकिन फिर भी उसके फेस पैर आज एक सकूं सा था, इस सब में धामा बिलकुल शांत बैठा था जैसे कुछ हुआ hi न हो, उसे कुछ फरक नहीं पद रहा था,

शाक्षी- अब क्या करना ह, हमारे ठिकाने पैर तो कब्ज़ा हो गया,

दादी- ऐसे 100 ठिकाने ह मेरे तू चल, अब सीधा हुम्ला होगा, अब मेरा जानवर उन जलादो के साथ मिलकर ख़तम करेगा उन सबको, जब ये उनके साथ मिलेगा तो वो लड़का और अंजलि कुछ नहीं कर पाएंगे,

कोमल- तुम उन्हें नहीं रोक पाओगी, तुम्हारे पाप तुम्हे hi बर्बाद कर देंगे

दादी- खामोश, मुँह बंद रख अपना वर्ण यही जबान खींच लुंगी तेरी,

दादी सबको लेकर गाड़ी में बैठ क्र चल दी रात के अँधेरे में,

इधर अन्य और रम्य की घर बात हुई तो उन्हें सब पता चला, वो घर जाने के लिए बैचैन हो गई, वैसे भी यहाँ की काफी जानकरी उन्हें मिल चुकी थी, लेकिन कामिनी का असली मकसद सामने नहीं आया था,

इस लिए उन्होंने कुछ समय के लिए रुकने का फैसला किया, उन्होंने अंजलि को साडी जानकारी दे दी थी, जिससे तम्मना और उसके झूठे मां के पीछे जासूस लग चुके थे,

आश्रम में सुबह सुबह …..

एक आदमी- गुरु जी वह हुम्ला हुआ ह, उन लोगो को जगह छोड़ क्र भागना पड़ा,

बाबा- उस हरामजादी को नहीं पता क्या करना ह, उसे कितना भी समझा लो वो नहीं समझेगी, प्रतिशोध में अँधा इंसान कभी नहीं सुनता, वो उस लड़के की ताकत को अभी समझ नहीं पाई ह,

आदमी- गुरु जी, वो हमारे आश्रम में पहुंच चुकी ह,

बाबा- उससे कहो वह शांत रहे, और छुपी रहे, किसी को पता न चले वो आश्रम में ह, खास क्र उस औरत और उस लड़के को,

आदमी- गुरु जी हमे उनसे क्या दर

बाबा- अभी हम उससे लड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, उसकी ताकत दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही होगी, उसकी पूरी ताकत बढ़ने से पहले वो हमे चाहिए, अपनी पूरी ताकत लगाओ और उसे यहाँ लेकर आओ,

आदमी- हमने जो अब तक छुपा रखा ह उनका भी तो इस्तेमाल क्र सकते हैं,

बाबा- उनका इस्तेमाल होगा किन्तु पहले उसे यहाँ लाना होगा, लेकिन सावधानी से, उसे अहसास नहीं होना चाहिए उसके साथ क्या हो रहा ह

आदमी- ठीक ह गुरु जी, मैं कुछ गणिकाओं को भेजता हु, उसे रिझाने के लिए, और अपना आदमी भेजता हु उसे यहाँ तक लेन के लिए,

इतना बोल क्र आदमी चला गया, और बाबा फिर सोच में दुब गया,

तभी वह 4 गणिका आ गई, जो बिना बोले बाबा के कपडे उतरने लगी, बना आँख बंद करके लेट गया, कुछ hi पालो में वो बिलकुल नंगा लेता हुआ था, और चारो लड़किया भी बिलकुल नंगी थी, फिर बाबा उठा और सभी नंगे hi चल दिए और बहार आकर खुले आसमान के निचे बाबा एक बड़े से टब में बैठ गया, और चारो लड़किया और नहलाने लगी, कोई उसका बदन को मॉल रही थी तो कोई अपनी चूचियों से उसकी कमर को रगड़ रही थी, एक निचे बैठ क्र उसके विशाल लुंड की मालिश कर रही थी, बाकि लोग वह से ऐसे गुजर रहे थे जैसे ये बहुत hi नार्मल घटना हो,

फिर बाबा नाहा क्र नंगा hi अंदर आया और दो दूसरी लड़किया उसे कपडे पहनने लगी, तभी बाबा ने दो लड़कियों को सामने बैठाया और अपने खड़ा लुंड उसके मुँह में दे दिया और वो मजे से चूसने लगी,


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जब तक लड़कियों ने बाबा को तैयार किया वो लड़किया बैठी लुंड चुस्ती रही, लेकिन बाबा झड़ने को तैयार नहीं था, लड़की का मुँह दर्द करने लगा था लेकिन वो रुक नहीं रही थी, फिर बाबा ने उसे अपने पेअर से hi दूर धकेला तभी दूसरी लड़की ने बाबा के लुंड को कपड़ो के अंदर किया और बाबा चल दिया बहार को, बहार उसके चेले खड़े थे जो उसे लेकर एक सभा में चले गए, जहा हजारो लोग बैठे हुए थे, बाबा के दर्शन पाने के लिए,

बाबा ने वह अपनी गद्दी पैर बैठ क्र लोगो को ज्ञान देना शुरू क्र दिया,

हवेली में ह्रदय उठा और निचे आया तो देखा पूरा परिवार एक साथ बैठा हुआ ह,

ह्रदय- क्या हुआ कुछ गड़बड़ हुई ह क्या सुबह सुबह

सीमा- नहीं बीटा सब ठीक ह बस सब एक साथ बैठे थे, अच्छा लग रहा था,

अंजलि- आओ बैठो, कैसी तबियत ह अब

ह्रदय- मैं तो पहले भी ठीक था, लेकिन आप ने मेरे चक्कर में उन्हें जाने दिया,

अंजलि- हम उन्हें पकड़ लेंगे,

ह्रदय- कामिनी जी का कुछ पता चला

अंजलि- है तम्मना उसी की बेटी ह लेकिन नाजायज, और उसने तम्मना को हमारे खिलाफ पूरी तरह तैयार किया ह, बस अब तक ये पता नहीं चल पाया ह की उसका और क्या क्या मकसद ह और ये झूठा भाई कोण ह,

अंजलि की बात सुनकर रश्मि और आशिमा ने सर निचे क्र लिया,

अंजलि- तुम दोनों क्यों सर झुका रही हो, ये तुम्हारी गलती तोडना ह, उस औरत को सुधारना नामुमकिन ह, जो अपने स्वैर्त के लिए अपने परिवार को मरता छोड़ क्र किसी के साथ भाग गई, जो अपनी जिंदगी को अच्छा बनाने के चक्कर में अपने नवजात बच्चो को किसी और औरत को देकर भाग गई वो किसी की सगी नहीं हो सकती, इसलिए तुम उसके बारे में मत सोचो, तुम्हारी माँ मैं हु,

रश्मि- जी माँ आप हमारी माँ हो और हमे गर्व ह इस बात पैर,

वन्य- ह्रदय तुम्हे निधि से मिलना चाहिए एक बार

ह्रदय- क्यों

अंजलि- वन्य बोल रही ह तो मिल लेना, हमे उसकी जरुरत पद सकती ह,

ह्रदय- लेकिन माँ

अंजलि- मैंने क्या समझाया था, हमारा मकसद बहुत बड़ा ह, और उसमे जो लोग तुम्हारा फायदा उठाना चाहते हैं तुम उनसे अपना मतलब निकलना सीखो,

ह्रदय- ठीक ह माँ

अंजलि- तुम सब अपने अपने काम पैर जाओ, मैं ह्रदय और वर्षा जायेंगे उन आदमियों से बात करने,

ाव्य- मैं भी चालू क्या

अंजलि- अभी नहीं बेटी, तू अपनी बहेनो के साथ जा

ाव्य- मुझसे कोई कुछ काम नहीं करवाता, सब अपने अपने काम में लगे रहते हैं, ह्रदय ने कहा था अपने साथ लेकर जायेगा वो भी नहीं ले गया, मेरी किसी को जरुरत नहीं ह,

वन्य- ये कैसी बात कर रही ह, तेरी जरुरत सबसे ज्यादा ह, भ्रमसत्र का इस्तेमाल इन छोटे कामो में नहीं किया जाता,

वन्य की बात सुनकर सब है पड़े,

ाव्य वन्य को मरने डोडी,- मेरा मजाक उड़ाती ह,

उन्हें भागता देख वर्षा की आँखों में ख़ुशी के आंसू थे, वही अंजलि भी खुसी से फूली नहीं समां रही थी,

फिर सभी निकल गए, अंजलि ह्रदय और वर्षा पहुंचे एक सुमसान अड्डे पैर जहा 15 आदमी बंधे पड़े थे,

अंजलि- अगर तुम लोग चाहते हो मैं तुम्हे जिन्दा छोड़ दू तो जो जानते हो सब सच बता दो वर्ण इसकी ताकत तुम देख चुके हो अब मेरा गुस्सा देखोगे, एक एक का सर काट क्र उसके पिछवाड़े में न घुसा दिया तो मेरा नाम भी अंजलि नहीं,

सरे आदमी एक साथ- हम कुछ नहीं जानते हमे कुछ नहीं पता हम तो बस किराये के गुंडे हैं,

अंजलि- किराये के गुंडे जान देव पैर नहीं लगते,

एक आदमी बोलै- मैडम हमे नहीं पता था इसमें जान का भी खतरा ह, हमे तो बस उन लोगो की सुरक्षा के लिए रखा था, और एक आदमी के हाट पॉ तोड़ने थे, हमे नहीं पता था वो आदमी इतना ताकतवर निकलेगा, हम तो खामखा अपनी जान गवाने वाले थे, इतने तो पैसे भी नहीं मिलते हमे,

अंजलि समझ गई ये किराये के टैटू हैं, इनके पास ज्यादा जानकारी नहीं मिलेगी,

अंजलि- ठीक ह तुम जो भी जानते हो वो बता दो, मैं कुछ नहीं करुँगी,

एक आदमी- मैडम हमे तो इतना काम दिया गया था की इस गाओं में दबाव बना क्र रखे, कोई फालतू बोले तो हाथ पॉ तोड़ दो, बस वो बूढी औरत hi हमे आर्डर देती थी, उसके साथ एक जानवर जैसा आदमी था, हठी से भी ज्यादा ताकत ह उसमे, सारा काम वही करता था,

अंजलि- तुमने उस आदमी को देखा कभी

आदमी- नहीं वो हमेशा मुँह धक् क्र hi रहता था,

अंजलि- और वो बूढी औरत

आदमी- उसे देखा ह,

अंजलि- वैरी गुड, क्या नाम ह उसका

आदमी- सब उसे दादी बोलते हैं, नाम कभी नहीं सुना

वर्षा- कैसे पता लगाएंगे कोण ह

अंजलि ने एक पल के लिए आँखे बंद की, फिर झटके से फ़ोन निकला और एक पिछ ढूंढ क्र उस आदमी के सामने क्र दी,

अंजलि- गोर से देखो यही ह क्या

आदमी बड़ी गोर से तस्वीर देखने लगा,

अंजलि- पता नहीं चला क्या

आदमी- मैडम ये जवान ह और कपडे बहुत फासिओं के ह लेकिन वो बूढी ह और गाओं के कपडे पहनती ह, फिर भी 80 % ऐसी hi दिखती ह, इसकी आँखों से पता चल रहा ह,

अंजलि ने गुस्से में आँखे बंद क्र ली, और जोर से चीखी nhiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiiii

वह बैठे सभी गुंडे घबरा गए, ह्रदय भी घबरा गया,

ह्रदय- क्या हुआ माँ

वर्षा- माँ क्या हुआ

अंजलि- जिसका दर था, ये वही ह

वर्षा- कोण

अंजलि ने मोबाइल वर्षा के सामने कर दिया, जिसे देख क्र वर्षा अपनी जगह से कड़ी कड़ी hi गिर पड़ी,

ह्रदय ने उसे सम्हाला,

उधर शाक्षी जालिम दादी के सामने कड़ी थी,

शाक्षी- ऐसे कब तक छुपेंगे, तुमने बहुत hi ख़राब प्लान बनाया देखा हम कहा फास गए,

दादी- मेरा प्लान कभी फ़ैल नहीं होता 20 साल से मेरा प्लान कामयाब होता आया ह आगे भी होगा, अब मेरा ये जानवर उन सबको तबाह करेगा,

शाक्षी- लेकिन उसकी टक्कर के लिए वो ह्रदय ह न, उसके अंदर इससे भी ज्यादा ताकत ह, कमीने ने एक बार में hi छूट फाड़ दी, इस जानवर से छोड़ने के बाद भी इतना दर्द दिया की अब तक मजा आ रहा ह,

दादी- मतलब बाप पैर गया ह ताकत में भी और हतियार में भी

शाक्षी- दोनों में अपने बाप से आगे hi ह ताकत में भी और हतियार में भी,

दादी- लेकिन मुझसे नहीं बच पायेगा, तू जानती ह न मैं कोण हु,

वही दूसरी तरफ

ह्रदय- वर्षा मौसी सम्हालिए खुद को,

वर्षा- ये कैसे ये जिन्दा कैसे बच गई,

अंजलि- सरे सबूत ये hi गवाही दे रहे हैं, और अब तो सब कुछ खुल क्र सामने आ गया ह,

ह्रदय- कोण ह माँ किसकी बात कर रही हो,

इधर शाक्षी....

जानती हु तुम्हे, तुमसे बड़ी जालिम कामिनी शायद कोई नहीं पैदा हो सकती,

दो तरफ एक साथ एक hi टॉपिक पैर चर्चा चल रही थी, उस जालिम दादी के नाम पैर,

और एक तरफ अंजलि और दूसरी तरफ जालिम दादी एक साथ बोले,

Anjali/dadi- सोनिया चोपड़ा, uska/mera नाम ह सोनिया चोपड़ा,



लेकिन कैसे वो जिन्दा कैसे ह,
 
अपडेट-28






पूरा परिवार एक साथ बैठा हुआ था,

अंजलि- हमारा दुश्मन बहुत hi खतरनाक ह,

सीमा- लेकिन वो जिन्दा कैसे हो सकती ह, उसका तो एनकाउंटर हो गया था,

अंजलि- वो सुरेश चोपड़ा से भी ज्यादा खतरनाक और चालक थी, सुरेश चोपड़ा ने बस चालाकी से मेरी माँ को फसाया और शादी क्र ली, और पूरी प्रॉपर्टी अपने नाम कर ली, लेकिन सोनिया वो थी जिसने सुरेश चोपड़ा को अपने जाल में फसाया और उसके हाथो मेरी माँ और नाना को मरवाया, और पूरी प्रॉपर्टी की मालकिन बन गई,

अंडरवर्ल्ड से उसी ने सुरेश को जुड़वाया, सुरेश से ज्यादा पहचान सोनिया की थी अंडरवर्ल्ड में, उसने सुरेश की जानकरी के बिना बहुत पैसा जोड़ा हुआ था, और उसने उसी पैसे की ताकत का इस्तेमाल किया होगा, इस शहर के हर बड़े आदमी के निचे वो खुद को बिछा चुकी थी, बड़े बड़े मंत्री बुसिनेस्स्में से उसकी पहचान थी, और बहुत लोगो के खिलाफ सबूत भी थे उसके पास,

जब वो जेल गई तो बड़े बड़े नाम वाले लोग घबरा गए, कही उनके राज न खुल जाये, इसलिए उन्होंने सोनिया का साथ दिया, और उस एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिस वालो को खरीद लिया, सुरेश और अंडरवर्ल्ड डॉन सकील का एनकाउंटर तो उन्होंने किया लेकिन सोनिया को जिन्दा छोड़ दिया होगा, सोनिया की जगह उसी से मिलती जुलती औरत की लाश रख दी होगी, और डॉक्टर से फर्जी पोस्टमार्टम करवा दिया गया,

उसके बाद सोनिया एक एक करके उन पुलिस वालो और डॉक्टर के पास गई उनके साथ सम्बन्ध बनाये और उनका मुंडेर करती रही होगी, और सबको ऐसा hi लगा जैसे वो सब खुद की मोत मरे हैं लेकिन सबको सोनिया ने hi मारा,

उसके बाद वो कहा लापता हो गई किसी को नहीं पता, फिर कभी सामने नहीं आई, और जब पार्टी हुई थी उसमे एक औरत भी थी, ये जानकारी मुझे डॉन के आदमी से hi पता चली ह, तो वो औरत सोनिया चोपड़ा hi होगी,

सीमा- तो रूचि अलका तुषार सोनिया के पास हैं,

अंजलि- इसका कोई सबूत नहीं मिला, लेकिन अनुमान ये hi ह की सोनिया का hi ये सब किया धरा ह,

और कोमल का उसके पास होना, ये बड़ा सोचने वाली बात ह,

ह्रदय- लेकिन वो अकेली औरत पापा और मौसी को कण्ट्रोल कैसे क्र सकती ह, पापा को बांध क्र रखना नामुमकिन ह,

अंजलि- मुझे अब दर लग रहा, सोनिया बहुत बड़ी जल्लाद ह, वो कुछ भी कर सकती ह, उसके अंदर कोई दया रहम नहीं ह, वो इस दुनिया में बस अपने बेटे कमल से सबसे ज्यादा प्यार करती थी, उसके अलावा वो किसी की जान की फ़िक्र नहीं करती थी, अपनी बेटी तक की जान की परवाह नहीं थी उसे,

वर्षा- अब क्या होगा, क्या वो लोग जिन्दा होंगे,

ह्रदय- जरूर होंगे,

रिंकी- तुम इतने यकीन से कैसे कह सकते हो,

ह्रदय ने अंजलि की तरफ देखा- माँ ने बताया की सोनिया की पहचान बहुत ज्यादा थी, तो वो अब तक छुपी क्यों रही,

शनाया- पुलिस न पकड़ ले इसलिए और क्या

ह्रदय- वो चाहती तो यहाँ से विदेश भाग सकती थी, जहा उसके पीछे कोई पुलिस नहीं होती, पैसा और पहचान की कोई कमी नहीं थी उसके पास, फिर वो यहाँ क्यों रुकी, और इतना चुप क्र

कपिल- हमसे बदला लेने के लिए

अंजलि- बदला तो वो विदेश में रह क्र वह भी सेना तैयार क्र सकती थी, यही क्यों और उसने अब तक इंतजार क्यों किया, जब सब अकेले थे वो हुम्ला कर सकती थी, उसके पास इतना ताकतवर इंसान था वो कभी भी हमे मर सकती थी, फिर वो रुकी क्यों रही,

ह्रदय- कुछ तो छुपा हुआ ह जिसके बारे में हमे जानना होगा, उसके पास खतरनाक लोग जुड़ चुके हैं, ऐसा लगता ह जैसे वो इस दुनिया के hi न हो,

अंजलि- मतलब

ह्रदय- हिमाचल में उसने दो आदमियों को बेहेजा था, 8-8 फिट से ज्यादा लम्बे और किसी आदिमानव जैसे, और ताकत तो भरपूर ऐसा लगता था जैसे इस धरती के hi न हो, बहुत सुध हिंदी का इस्तेमाल कर रहे थे, और वो मास्क वाला आदमी भी उसी के साथ ह, उसी ने हमला करवाया था, वो उस गाओं में भी था,

अंजलि- वो दोनों आदमी उनके बारे में तूने क्यों नहीं बताया मुझे,

ह्रदय- मुझे लगा मिल क्र बता दूंगा, क्यों क्या हुआ कोई प्रॉब्लम ह क्या,

अंजलि- उनका आना मतलब खतरा बहुत बड़ा ह,

वर्षा- आप जानती ह उनके बारे में,

अंजलि- जानती नहीं हु, लेकिन

ह्रदय- लेकिन क्या

अंजलि- छोड़ो कुछ नहीं इस बारे में मैं जानकारी निकल क्र बात करुँगी, लेकिन अब उस सोनिया के पास बहुत ताकतवर लोग हैं, और हमारी कमजोरिया भी हो सकती हैं, जैसे कोमल ह, बाकि भी हो सकते हैं,

वर्षा- हमे संभल क्र वॉर करना होगा,

सीमा - हमारी साइड कमजोर पद रही ह, वो लोग ज्यादा ताकतवर हैं, हमारे पास बस ह्रदय ह,

वन्य- वो अकेला hi काफी ह मौसी, और किसने कहा ह्रदय अकेला ह, हम 10 लड़किया उसके साथ कड़ी हैं,

काम्य- शायद लड़कियों की ताकत को आप लोग काम समझ रहे हो,

ाव्य- माँ कसम अगर कोई भी हमारे परिवार को हाथ लगाएगा उसके हाथ उखड दूंगी,

ाव्य की बात पैर सब है पड़े,

ाव्य- तुम्हे हसी आ रही ह, मेरी बात पैर यकीन नहीं ह, जिस दिन सामना होगा उस दिन बताउंगी,

दिया - हम सबको ट्रेनिंग लेनी होगी, हमारी ताकत कितनी ह ये तो नहीं पता लेकिन हमारी स्किल सबसे भीतर होनी चाहिए, वो ताकत में हमसे आगे हो सकते हैं लेकिन हम स्किल में उनसे आगे रहेंगे, अंजलि माँ हमेशा उनसे आगे रही हैं अपनी बूढी और स्किल की वजह से,

अंजलि- सही कहा बीटा, तुम सबको ट्रेनिंग की जरुरत ह, और तुम्हारी असली स्किल को अनलॉक करने का टाइम भी आ गया ह,

सीमा- असली स्किल मतलब

अंजलि- मुझे कही जाना ह, अनीता जी और दीपा मेरे साथ चलेंगे, वर्षा तू इनकी ट्रेनिंग का इंतजाम क्र, भीतर से भीतर टीचर होना छाइये, इन लड़कियों की ट्रेनिंग कैसे होनी ह ये जिम्मेदारी वर्षा और नंदनी की होगी,

और रिंकी और सीमा तुम दोनों का बहुत hi महतवपूरण काम होगा, जो मैं तुम्हे बाद में बताउंगी,

रश्मि- माँ क्या हम इस लड़ाई में शामिल नहीं ह,

अंजलि- बेटी ऐसा तूने कैसे सोच लिया, तुम दोनों को बहुत महतवपूरण कार्य करना ह, सब अपने अपने हिस्से की लड़ाई लड़ेंगे, इस युद्ध से कोई नहीं बच पायेगा,

अनीता – दीदी आप कभी कभी इतनी भयानक तरीके से बोलते हो की रोह तक कैंप जाती ह,

अंजलि- कपिल ह्रदय का एडमिशन इन लड़कियों के कॉलेज में करवाओ, अब से ये भी यही रहेगा, अब पूरा परिवार एक साथ रहेगा, अब किसी को छुपने की जरुरत नहीं ह, अब हमे पता ह दुश्मन कोण ह, अब लड़ाई आमने सामने की होगी, परिवार का एक साथ रहना बहुत जरुरी ह,

कपिल- ठीक ह माँ

अंजलि- तुम लोग अब रेस्ट करो मैं आती हु,

अनीता अंजलि और दीपा एक साथ निकल गए,

वही दृष्टि बहुत घेरि सोच में डूबी हुई थी, कोमल एक कमरे में बंद पड़ी हुई थी, और धामा आश्रम के गेट पैर खड़ा था, शाक्षी और जालिम दादी उर्फ़ सोनिया, आश्रम के आदमी के पास बैठी थी,

सोनिया- क्या कहा ह गुरु जी ने

आदमी- गुरु जी ने कहा ह जब तक वो न कहे यही छुपे रहो, और उसे तैयार करो उनके लिए अब समय आ चुक्का ह भोग लगाने का,

सोनिया- ठीक ह मैं उसे तैयार करती हु, क्या गुरु जी यही आएंगे या वही लेकर जाना होगा,

आदमी- गुरु जी अगले महीने यही पैर आएंगे,

सोनिया- तब तक कही देर न हो जाये,

आदमी- उन्हें पता ह कब क्या करना ह,

इतना बोल क्र आदमी चला गया,

सोनिया धीरे से- भोसड़ी वाले को पता होता तो हमे बता नहीं देता की वो लड़का अंजलि के परिवार से ह,

शाक्षी- लेकिन ह्रदय तुषार का बीटा कैसे हुआ उसका तो कोई लड़का था hi नहीं, इस तुषार ने किस किस को छोड़ रखा ह, कितनी औलादे हैं इसकी,

सोनिया- सब मेरी hi गलती ह, मैंने hi अंजलि के दिमाग में रिश्तो के लिए हवस भरी थी, आज देख उस हरामजादी ने अपने hi घर में सरे रिश्ते उलट पुलट कर दिए, मेरी दोनों बेटियों तक को छुड़वा दिया उस जानवर से,

शाक्षी- और ये गुरु किसे तैयार करने को बोल रहा था,

सोनिया- किसी को नहीं तू इस बात पैर धयान मत दे,

शाक्षी- अरे गुरु से मिलने का तो मेरा भी मन कर रहा ह, कसम से क्या छोड़ता ह,

सोनिया- तेरा मन नहीं भरता क्या कभी छोड़ने से

शाक्षी- ये तुझे तब सोचना छाइये था जब तूने मुझे उसके सामने परोसा था, उस भें के लोडे ने मेरी छूट फाड़ दी थी, जवानी की पहेली चुदाई वो भी उस जालिम के साथ, उसने जो दर्द दिया था उसे याद करके भी रूह कैंप जाती ह, लेकिन छूट को इतना खोल दिया की तेरे पीला हुए इस जानवर के अलावा कोई ठंडा नहीं कर पता, लेकिन ये लोंदा ह्रदय ये तो सबसे ऊपर ह, इसने तो फटी हुई छूट में भी दर्द क्र दिया,

सोनिया- क्या बात कर रही ह, गुरु जी से ज्यादा बड़ा ह क्या उसका

शाक्षी- है तूने इस गुरु की बहुत सेवा की ह न, और तूने तुषार का भी लिया ह, अगर इस लोने का ले लेती न तो गुरु के पास कभी न आती,

सोनिया- है अब ज्यादा बकवास मत क्र रंडी चल कड़ी और काम पैर लग, यहाँ फ्री में कुछ नहीं मिलता, आश्रम में खुद काम करना पड़ता ह, और ज्यादा चुदाई की बात मत कर अगर आश्रम के किसी मुस्टंडे ने सुन लिया तो यही हम दोनों के उप्पेर चढ़ जायेंगे,

शाक्षी- है है चल, वैसे मैं किसी से नहीं डर्टी अब कोई आ जाये, तूने मुझे इतनी बड़ी रंडी बना दिया ह की चाहे पुरे गाओं के सामने दाल दे तब भी ऊफ्फ तक न करू,

दृष्टि के दिमाग में बहुत सी बाते घूम रही थी, ह्रदय को सब पहले से पता था, उसे पता था मैं उसके साथ गेम खेल रही हु, वो मेरे करीब आ सकता था, उसे फ़साने के लिए मुझे उसके साथ शायद आगे भी बढ़ना पद जाता लेकिन उसने मेरा कोई फायदा नहीं उठाया, और दादी उसके सामने क्यों नहीं आ रही थी,

और कोमल उसके साथ क्यों नहीं गई, ऐसा क्या ह जिसकी वजह से कोमल ने जाने से मन कर दिया,

ह्रदय चाहता तो कुछ भी कर सकता था, क्या मुझे सब कुछ पता ह, क्या जो मुझे बताया गया ह वो सब सही ह, और मेरे पिता को क्या हुआ ह, उन्होंने ऐसे क्यों रियेक्ट किया, उन्होंने सामना क्यों नहीं किया,

और ह्रदय तुषार का बीटा ह, लेकिन कैसे ये कैसे हो सकता ह, फिर ह्रदय की माँ कोण ह,

और कितने बच्चे हैं, मुझे और जानकरी निकालनी होगी, मुझे कोमल से बात करनी होगी, उनके अलावा शायद और किसी के पास जानकरी न हो, लेकिन क्या वो मुझे बताएंगी, एक बार कोशिश तो करनी hi पड़ेगी, वर्ण कोई और रास्ता अपनाना पड़ेगा,

दृष्टि उठी और कोमल के रूम की तरफ चल दी, लेकिन रस्ते में सोनिया मिल गई

सोनिया- कहा जा रही ह

दृष्टि- कही नहीं ऐसे hi घूम रही हु,

सोनिया- तेरी वजह से सब बर्बाद हो गया, अब कोई और गलती मत कर देना,

दृष्टि- मेरी वजह से क्या हुआ, मुझे तोडना पता था वो लोग इतना तगड़ा गेम खेल जायेंगे,

सोनिया- है है बस रहने दे, अब एक तरीका ह ठीक करने का अगले महीने गुरु जी आ रहे हैं, जब वो आये तो तुझे उनकी सेवा करनी ह, वही हमे अब सही रास्ता दिखा सकते हैं,

दृष्टि- मैं hi क्यों

सोनिया- जितना बोलै उतना कर समझी न, मुझसे बहस मत किया कर,

दृष्टि गुस्से में चली गई,

शाक्षी- जब तुझे पता ह बाबा को भविष्य नहीं पता तो फिर उसके लिए ये सब क्यों,

सोनिया- उसे भविष्य नहीं पता लेकिन उसे ऐसी जनक्रिया हैं जो किसी के पास होना नामुमकिन ह, और उसके पास ऐसा कुछ ह जो हमारी समझ के बहार ह, इसलिए उससे िलझण मतलब मोत को दावत देना, जैसा वो बोले करती जाना, वर्ण

वही दूसरी तरफ अशोक कपूर निधि पैर अपना गुस्सा उतर रहा था,

अशोक- इसी लिए तुझे पला था मैंने, हरामजादी तेरी वजह से मेरा सब प्लान फ़ैल हो गया ह,

निधि- मैं क्या कर सकती हु जब उसे शक हो गया, मैंने अपनी तरफ से पूरी कोषिष की

अशोक- खाक कोशिश की एक लड़के को अपने जाल में फसा क्र नहीं रख सकीय तू, क्या फायदा तेरे इस सेक्सी बदन का,

निधि- इस बदन से hi मैंने आपको और आपने जिसे कहा उसे खुश किया ह, वो लड़का इतनी आसानी से झांसे में आने वाला नहीं ह,

अशोक- टाइम बहुत निकल चुक्का ह मुझे अपना दूसरा देव खेलना पड़ेगा, तू तैयारी क्र प्रोजेक्ट की मैं कुछ करता हु,

निधि- और कोण कर सकता ह, और किसी में इतनी ताकत और हिम्मत मिलेगी कहा,

अशोक- तू उसकी चिंता मत kr,main एक hi प्लान पैर डौन hi लगता, मेरा शेर आ रहा ह, मैंने उसे इसी काम के लिए भेजा था, वो पहुंच रहा ह कल,

निधि सोच में दुब गई, अशोक वह से निकल गया,

निधि के सरे सपने टूट चुके थे वो पूरी तरह हताश हो चुकी थी, और वही चेयर पैर बैठ गई,

उसकी आँखों में आंसू थे, तभी वह नित्य आ गई,

नित्य- माँ क्या हुआ आप ऐसे क्यों रो रही हो,

निधि- कुछ नहीं बेटी बस आज मैं पूरी तरह हार गई,

नित्य- हर गई किस्से हर गई, क्या हुआ मुझे बताइये मैं कुछ कर सकती हु आपके लिए,

निधि- कुछ नहीं बीटा ये बिज़नेस की बाते हैं, तू दूर रहे मैं सब सम्हाल लुंगी, तू ये बता तेरी लाइफ में क्या चल रहा ह, तू ठीक ह न, तू खुश ह न

नित्य- ये सवाल क्यों किया आपने आजसे पहले तो कभी नहीं किया, आज से पहले तो आपने कभी नहीं पूछा मेरे बारे में

निधि- बस ऐसे hi मन किया पूछने का,

नित्य- मैं ठीक हु और खुश भी हु, लेकिन अगर आप चाहो तो मेरी ख़ुशी बढ़ सकती ह

निधि- कैसे

नित्य- किसी और दिन बताउंगी पहले मैं कन्फर्म क्र लू ऐसा हो सकता ह या नहीं,

नित्य की बातो को निधि तुरंत समझ गई की नित्य क्या कहना छाती ह,

निधि- बेटी मैं तेरी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकती हु, लेकिन कुछ ऐसा मत मांग लेना जो तेरी माँ छह क्र भी न ला पाए,

नित्य- ऐसा कुछ नहीं मांगूंगी, आप परेशां न हो,

निधि- अगर आगे की लाइफ में मैं न राहु तो तू क्या करेगी बेटी,

नित्य- ये कैसी बात कर रही हो आप,

निधि- बस ये याद रखना अगर फ्यूचर में मैं न रहु तो किसी पैर भरोसा मत करना अपने दोस्त के अलावा, कभी भी कोई प्रॉब्लम हो तो बस उसी के पास जाना अपने दादा पापा के पास भी नहीं समझी न,

नित्य- माँ ये आपको हुआ क्या ह, आप कैसी कैसी बात क्र रही हो,

निधि- जो समझा रही हु वैसा करना बस,

नित्य- ठीक ह माँ

नित्य सोचती हुई चली गई, निधि को और घबराहट होने लगी थी,

निधि ने वन्य को कॉल लगाया और प्रोजेक्ट रेडी करने को कहा, प्रोजेक्ट की खबर सुनते hi वन्य का दिमाग भी ख़राब हो गया, उसे भी चिंता होने लगी,

वन्य वर्षा के पास पहुंची

वन्य- माँ निधि प्रोजेक्ट रेडी करने को बोल रही ह,

वर्षा- एक दम कैसे

वन्य- मुझे नहीं पता लगता ह उसे कोई और मिल गया ह,

वर्षा- तू चिंता मत कर, शायद हमे उसकी जरुरत hi न पड़े,

वन्य लेकिन वो प्रोजेक्ट किसी और ने किया तो उसका गलत इस्तेमाल हो सकता ह,

वर्षा- उसके लिए भी कुछ सोच लेंगे तू जा और अपना काम कर,

वन्य की चिंता काम नहीं हुई थी फिर भी वो चली गई,

वर्षा ने वन्य को समझा तो दिया था लेकिन खुद परेशां थी,

इधर...

ह्रदय लेता हुआ सब सोच रहा था, साडी घटनाओ पैर फिर से गोर क्र रहा था, तभी नित्य की कॉल आई,

ह्रदय ने न चाहते हुए भी नित्य की कॉल उठा ली,

ह्रदय- hello

नित्य- कैसे हो मर. कहा गायब हो गए, लगता ह भूल गए मुझे

ह्रदय- नहीं ऐसी बात नहीं ह बस थोड़ा बिजी था,

नित्य- माँ से बात हुई तुम्हारी

ह्रदय- नहीं क्यों क्या हुआ

नित्य- वो बहुत परेशां ह, दिन भर रोटी रहती हैं, आज तो दादा जी के साथ उनका झगड़ा भी हुआ था,

ह्रदय- ऐसा क्यों

नित्य- मुझे नहीं पता लेकिन कुछ अजीब सी भेकी भेकी बाते कर रही हैं, की मुझे कुछ होजाये तो किसी पैर भरोसा मत करना , बस अपने दोस्त पैर करा, कोनसे दोस्त पैर ये नहीं बताया,

ह्रदय समझ गया निधि किसके बारे में बोल रही ह,

ह्रदय- अच्छा मैं उनसे बात करूँगा तुम घबराओ नहीं, और टाइम मिला तो आकर मिलूंगा,

शाम को अंजलि एक मीटिंग क्र रही थी जिसमे अनीता रिंकी सीमा दिया वर्षा और नंदनी बैठे थे,

सीमा- क्या हुआ माँ ऐसे अकेले में मीटिंग क्यों बुलाई ह आपने,

अनीता- बात hi ऐसी ह, जिसमे तुम सबकी रजामंदी चाहिए,

रिंकी- ऐसा क्या हुआ

अंजलि- ये सब तुम्हारी बेटियों के बारे में ह, और तुम उनकी माँ हो तो उनके भविष्य का फैसला तुम्हे hi करना होगा,

नंदनी- माँ आपसे भीतर उनके लिए और कोण सोच सकता ह, आप जो फैसला करेंगी वो उनके भले के लिए hi होगा,

अंजलि- फिर भी तुम सबका जानना जरुरी ह, और मेरे फैसले से सहमत होना भी जरुरी ह, तभी मैं आगे बढ़ पाऊँगी

वर्षा- आप बेफिक्र होकर बोलिये,

अंजलि ने बोलना शुरू किया, अंजलि की बाते सुनकर कोई शॉकेड में थे तो कोई मुस्कुरा रहा था, कोई सोचने की मुद्रा मैं बैठा था,

अंजलि की पूरी बात सुनकर एक दम सनता था,

अंजलि- तो क्या सोचा ह आप सबने

सीमा- मैं आपके साथ हु,

सब सीमा की तरफ देखने लगे,

अनीता जी- मैंने तो पहले hi है क्र दी थी,

दिया- जो होना ह वो होकर hi रहता ह, हम उसमे रोकने वाले कोण होते हैं, मैं भी तैयार हु,

रिंकी- मेरी तरफ से कोई ऐतराज नहीं ह, और अच्छा भी ह,

नंदनी- मैं आपकी बात नहीं काटूंगी लेकिन लड़कियों को खुद फैसले लेने की अनुमति देनी चाहिए, उन्हें सोचना चाहिए उन्हें ये करना ह या नहीं,

वर्षा- उन्हें पूरी आजादी ह नंदनी, उनका फैसला hi होगा, हमे तो बस इतना करना ह की उनके फैसले में उनका साथ देना ह, और ये होकर hi रहेगा, मैं जो देख प् रही हु उससे ये hi बता सकती हु की ये शुरू हो चुक्का ह,

सीमा- है ये शुरू हो चुक्का ह, मुझे भी पता ह,

अंजलि- ये होगा जरूर होगा लेकिन ये सही समय पैर हो जाये, उसके लिए हमे कोशिश करनी होगी, इसकी जिम्मेदारी मैं सीमा और रिंकी को दे रही हु, अपनी अपनी बेटियों से सभी माँ खुद बात कर सकती ह, लेकिन सीमा और रिंकी तुम दोनों का काम उन्हें उस तरफ लेकर जाना होगा, क्योकि तुम दोनों ने hi अपनी लाइफ में ऐसे दिसिओं लिए हैं जो शायद दूसरा न ले पाए, और ये बात साडी लड़किया भी जानती हैं तो वो तुम दोनों के साथ जल्दी ओपन हो सकती हैं,

सीमा- समझ गई माँ, हम कर देंगे,

अंजलि- शान्या तेरी तरह उतावली ह, उसे थोड़ा सबर रखना समझाना,

सीमा- मैं सम्हाल लुंगी माँ, मुझे पता ह उससे कैसे समझाना ह,

अंजलि- तो तुम सब मेरी बात का समर्थन करते हो,

सब एक साथ- जी है हम आपके साथ हैं,

वर्षा- मुझे ये तो नहीं पता ये सब क्यों हो रहा ह, या आपको इस सब की जानकरी क्यों ह, कैसे ह, लेकिन ये होना hi ह ये मुझे अहसास हो रहा ह, सब कुछ खुद उसी रस्ते पैर जा रहा ह, तो हम किस्मत को कैसे बदल सकते हैं,

दिया- मैं ह्रदय से बात नहीं कर पाऊँगी

अंजलि- मैं खुद करुँगी उससे बात

वही आश्रम में…

बाबा- हमारी एक सभा चंडीगढ़ में आयोजित करवाओ, वह के कम से बोलो हमारी एक बड़ी सभा करवाई जाये, और हमे उस पुरे परिवार से मिलना ह जिस परिवार का वो लड़का ह, और अपने लोगो को बुलाओ जो उस लड़के के बारे में जानकारी लाया था,

आदमी तुरंत चला गया, और कुछ देर बाद 3 आदमी आये, बड़े लम्बे चोदे,

बाबा- है संभु कैसे ढूंढा उस लड़के को तुमने ऐसा क्या दिखा तुम्हे उसमे,

संभु- महाराज हमे उसकी कोई जानकारी नहीं थी, हम तो आपके कहे अनुसार उस परिवार पैर नजर रखे हुए थे, लेकिन कुछ समय पहले, हमे एक अलग ऊर्जा का अहसास हुआ, जब जब वो लड़का इस परिवार की लड़कियों या कुछ और लड़कियों के करीब होता तो एक अलग hi ऊर्जा उत्पन्न हो रही थी, हमने हर बार उस पैर हुम्ला किया ताकि उसकी ताकत या उसके अंदर की शक्ति का अनुमान लग उसके, लेकिन वो हर बार बच जाता, और सबसे खास जब हमने एक पार्क में उस पैर हुम्ला किया तो वह एक शेर भी था, जिसकी वजह से हम रुक गए,

बाबा- शेर वह शेर कैसे आ गया, तुम लोगो ने उसे देखा था क्या,

सम्भि- नहीं महाराज हमने नहीं देखा बस आवाज सुनी थी, वह कोई दिखाई नहीं दिया,

बाबा- ये कोई और शेर भी तो हो सकता ह,

संभु- हो सकता ह महाराज,

बाबा- वो लड़किया कोण थी,

संभु- महाराज वो सभी इसी के परिवार में से हैं, जब भी वो सब एक साथ होते हैं तो ऊर्जा की मात्रा बहुत बढ़ जाती ह,

बाबा- वह वह वह क्या जानकारी दी ह तुमने, मतलब मैं सही रस्ते पैर हु, मंजिल दूर नहीं ह, चंडीगढ़ में सभा की तैयारी करवाओ जल्दी से जल्दी मुझे इन सबसे मिलना होगा, अब मुझे खुद सामने आना होगा,

संभु- लेकिन महाराज आप सीधे सामने कैसे आ सकते हैं

बाबा- अरे सीधे नहीं आ रहा लेकिन सामने आकर पीछे से वॉर करना होगा,

तुम लोग तैयारी करो मुझे पता ह क्या करना ह,

संभु चला गया,

बाबा खुद से hi- अब जल्दी hi हमारी कोशिश सफल होने वाली ह, मैं जरूर कामयाब होऊंगा, मेरे इतने वर्षो के ीनेजर का फल जरूर मिलेगा,

हहहहहहहहाहा

अशोक कपूर खुश था, इधर निधि की चिंता बढ़ी हुई थी, निधि बैचैन थी कोण आने वाला ह जिसके लिए अशोक कपूर इतना खुश ह, ऐसा कोण ह जो उसकी ताकत का मुकाबला कर सकता ह,

निधि प्रोजेक्ट का काम ख़तम करके फार्महाउस पैर पहुंची, और अकेली लेती हुई सब सोच रही थी, ह्रदय के बारे में सोच रही थी,

निधि खुद से hi- खा हो ह्रदय, प्लस मेरे पास आ जाओ, एक बार मेरे पास आ जाओ,

तभी दरवाजा खुला और सामने ह्रदय खड़ा था, निधि को अपनी आँखों पैर विश्वास नहीं हुआ, वो एक तक ताकि लगाए हुए ह्रदय को देखे जार hi थी, जैसे विश्वास करने की कोशिश कर रही हो, वो उठी और दौड़ क्र ह्रदय के गले लग गई,

निधि बस रोये जा रही थी, दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे, बस निधि के रोने की आवाज आ रही थी, ह्रदय ने चुप करने की कोशिश भी नहीं की, जब निधि अच्छे से रो ली,

निधि- इतना नाराज हो मुझसे की वापस मुद क्र तक नहीं देखा, मैं जिन्दा हु या मर गई,

ह्रदय- आपको क्या फरक पड़ता ह मेरे जाने से आपको कोई और मिल जायेगा अपने प्रोजेक्ट के लिए,

निधि- ये सब प्रोजेक्ट के लिए नहीं ह, मुझे अब फरक नहीं पड़ता उस प्रोजेक्ट से, मेरा जो होना था हो चुक्का ह लेकिन तुम्हे वह नहीं धकेल सकती,

ह्रदय- ले तो मुझे इसीलिए थी न,

निधि- जब तक तुम्हे नहीं जनि थी तब तक उसी लिए ले थी लेकिन अब मैं वो निधि नहीं हु, मैंने बहुत कुछ गन्दा किया ह, लेकिन जब से तुमने मुझे छुआ ह, तब से मैं पूरी तरह बदल चुकी हु, उसके बाद किसी को अनुमति नहीं ह मुझे चुने की,

ह्रदय- हाहाहाहा खैर मुझे इससे फरक नहीं पड़ता, मैं यहाँ नित्य की वजह से आया हु, वो परेशां ह आपके लिए,

निधि- तुम्हे नित्य का दर्द दिखा जो तुमसे सिर्फ एक बार मिली ह, मेरा दर्द नहीं दिखा जिसकी आत्मा तक में तुम बस गए हो,

ह्रदय- जब कोई रिश्ता झूट की बुनियाद पैर बनता ह तो उस रिश्ते का परिणाम ये hi होता ह, और यहाँ तो सिर्फ झूट hi झूट था,

निधि- रिश्ता बनाने के लिए झूट था लेकिन रिश्ता झूट नहीं था,

निधि पूरी तरह भावनाओ में बह चुकी थी, और उसी भावना में बह क्र उसने ह्रदय की गार्डन में हाथ डाला और उसे अपनी तरफ खींच क्र उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए, ह्रदय उसे दूर धकेलना चाहता था लेकिन निधि की फीलिंग इतनी स्ट्रांग थी की ह्रदय छह क्र भी उससे अलग न हो पाया, और तभी दरवाजे पैर एक जोर दर अव्वज आई, जिसे सुनकर दोनों चौंक गए,

दोनों उस तरफ देखा,

निधि- हनी तुम यहाँ क्या कर रहे हो,

वो हनी था



हनी- है रंडी तेरी आयाशी देखने आ गया, मुझे बीटा खेती ह और मेरी उम्र के लड़के के साथ रान्दीपना कर रही ह, और ये भिकारी हमारे घर की औरतो पैर गन्दी नजर डालेगा आज मैं इसे जान से मर दूंगा,
 
अपडेट-29






निधि- हनी होश में बात कर

हनी- अभी इसे सबक सिखाता हु फिर तुझे सबक सिखाऊंगा,

ह्रदय- हनी जबान सम्हाल क्र बात कर

हनी- तुझे अपनी ताकत पैर बड़ा घमंड ह न, अब देखना मेरी ताकत, मैं तो सोच क्र hi ये आया था की सबसे पहले तेरी ताकत का घमंड उतरूंगा, आज तुझे अपनी ताकत दिखाऊंगा

इतना बोल क्र हनी ह्रदय के उप्पेर कूद पड़ा और उसके मुँह पैर एक मुक्का मर दिया, मुक्का लगते hi ह्रदय दूर जाकर गिरा, जिसे देख क्र निधि और खुद ह्रदय सुरप्रीसेड थे, हनी के अंदर इतनी ताकत कैसे आ गई,

ह्रदय को एक मुक्के में गिरना ऐसा था जैसे किसी हठी को धराशाही क्र देना,

ह्रदय अपने मुँह को सहलाते हुए खड़ा हुआ,

ह्रदय- मत कर हनी मत कर मैं यहाँ लड़ने नहीं आया हु, मुझे लड़ने पैर मजबूर मत कर,

हनी- तुझे तो मैं उसी दिन से मरना चाहता था जब से तूने मेरी शिकार शनाया पैर नजर डाली थी, लेकिन अब तू मेरे घर तक पहुंच गया ह, मेरे घर की औरतो को भी शिकार बनाने लगा ह, तुझे मर क्र मैं उस शनाया का शिकार करूँगा,

ह्रदय के दन्त भिचने लगे थे उसे गुस्सा आने लगा था,

ह्रदय- मान जा हनी मेरा मूड बहुत ख़राब ह, ऐसा न हो कही का गुस्सा कही और निकल जाये, मैं खुद को रोक नहीं पाउँगा, चला जा यहाँ से

लेकिन वो कहावत बहुत सही कही गई ह, जब गीदड़ की मोत आती ह तो वो शहर की तरफ भागता ह, ऐसे जब यमराज सर पैर आकर बैठ जाये तो सबसे पहले बूढी काम करना बंद कर देती ह, वही हनी के साथ हो रहा था,

हनी- आज तेरी माँ चूऊओ

हनी इतना hi बोल पाया था की एक जोर दर मुक्का उसकी छाती में लगा जिससे वो हवा में उड़ता हुआ दीवार में जाकर लगा, उसके शब्द उसी के मुँह में रह गए, बस मुँह से एक जोर दर चीख निकली, और साथ में खून,

हनी को एक hi मुक्के में चक्कर आ गए, वो लड़खड़ाता हुआ उठा, और ह्रदय की तरफ डोडा, ह्रदय ने उसे उठा क्र जमीन पैर दे मारा, तभी निधि के फ़ोन पैर अशोक कपूर का फ़ोन आया,

निधि ने जलदी से फ़ोन उठाया ताकि वो अशोक को हनी से बात करने के लिए बोल सके, लेकिन उससे पहले अशोक बोल पड़ा

अशोक- निधि हनी आ गया ह शहर में मेरा शेर आ गया ह प्रोजेक्ट तैयार ह न, हनी बहुत ताकतवर होकर आया ह, ह्रदय जैसे 10 को धूल छठा सकता ह अब वो,

निधि- क्या हनी उस प्रोजेक्ट के लिए तैयार किया ह आपने,

अशोक- है क्यों क्या हुआ,

निधि- हनी यहाँ आ चुक्का ह

अशोक- अच्छा कहा ह वो

निधि- जल्दी से हॉस्पिटल पहुँचो कुछ देर में वही मिलेगा, मैं उसे लेकर पहुंच रही हु,

अशोक- हॉस्पिटल क्यों, क्या हुआ तुम्हे

निधि- मुझे कुछ नहीं हुआ लेकिन हनी यहाँ फार्महाउस पैर ह्रदय से भीड़ गया ह, और

अशोक- और, और क्या

निधि- उसे हॉस्पिटल की जौरात पड़ने वाली ह, उसने ह्रदय और उसकी फॅमिली के लिए कुछ ज्यादा hi बोल दिया,

अशोक- अब उसकी ताकत बहुत ज्यादा ह

निधि- लेकिन ह्रदय के सामने अभी भी बहुत काम ह, मैं ह्रदय को रोकने की कोशिश करती हु आप जल्दी से आइये,

अशोक ने फ़ोन कटा और फार्महाउस की तरफ दौड़ पड़ा,

इधर ह्रदय ने हनी को 3-4 बार उठा क्र जमीन में दे मारा था, हनी कई हड़िया टूट चुकी थी,

ह्रदय गुस्से में था, उसने हनी के मुँह पैर 3 घुसे मरे जिससे उसका दन्त टूट क्र निकल गए,

निधि ने दौड़ क्र ह्रदय को रोका

निधि- ह्रदय रुक जाओ वो मर जायेगा उसकी इतना दम नहीं ह, प्लस रुक जाओ, मेरा गुस्सा उस पैर मत निकालो, उसे छोड़ दो प्लस ये बेवकूफ ह उसे अकाल नहीं ह वो किसे क्या कह रहा ह, उसे माफ़ क्र दो, मैं हाथ जोड़ती हु, मुझे जो सजा देनी ह दे दो पैर उसे छोड़ दो,

ह्रदय ने निधि की तरफ देखा और हनी को छोड़ दिया,

ह्रदय- मैं ये सब नहीं करना चाहता, प्लस मुझे मजबूर मत किया करो, मैं खुद को रोक नहीं पता,

निधि ने बड़े गोर ह्रदय को देखा,

हनी बेहोश हो चुक्का था,

निधि- अशोक शांत नहीं रहेगा, तुम यहाँ से जाओ और प्लस अपने गुस्से को शांत करो, और जैसा मैं बोलती हु वैसा hi कहना,

ह्रदय- मैं अशोक से नहीं डरता, अगर तुम्हे दर लगता ह तो बताओ मैं उसे सीधा कर दूंगा

निधि- अब मैं किसी से नहीं डर्टी, लेकिन तुम्हे इन सब में पड़ने की जरुरत नहीं ह, तुम्हारा लक्ष्य ये सब नहीं ह,

ह्रदय को निधि की बात सही लगी, उसे अहसास हुआ की उसने हनी जैसे बेवकूफ पैर इतना गुस्सा क्यों किया,

ह्रदय- इसे हॉस्पिटल लेकर चलो जल्दी कही इसे कुछ हो न जाये,

ह्रदय ने हनी को उठा क्र गाड़ी में डाला और निधि गाड़ी लेकर हॉस्पिटल की तरफ दौड़ गई, उसने अशोक को कॉल क्र दिया की वो हॉस्पिटल जा रही ह,

ह्रदय ने वन्य को कॉल किया, और उसे सब बताया,

वन्य- ये तुमने क्या किया, तुम खुद पैर काबू नहीं रख सकते थे,

ह्रदय- उसने बहुत ज्यादा बोल दिया था,

वन्य- तुम घर पहुँचो मैं बात करती हु वह,

वन्य ने निधि को कॉल किया

निधि- क्या बात ह वन्य

वन्य- मम ह्रदय से बात हुई उसने बताया वह क्या हुआ

निधि- है लेकिन किसी से जीकर मत करना इस बारे में, और प्रोजेक्ट को अभी होल्ड करो मेरे अगले आर्डर तक

वन्य- ok मम,

फ़ोन कट होते hi वन्य ख़ुशी से उछाल पड़ी,

वन्य खुद से hi- माँ सही खेती हैं जो होना ह वही होगा,

इधर अशोक कपूर हॉस्पिटल पंहुचा और हनी की हालत देख क्र आग बबूला हो गया,

अशोक- मैं उसे जान से मार दूंगा, उसने मेरे पोते को हाथ लगाया,

निधि- उसके नजदीक भी गए तो वो तुम्हे भी यही लिटा देगा, पहले से दो लेते हुए हैं,

अशोक ने गुस्से में निधि को देखा, लेकिन निधि की बात सही थी वो अपने गुस्से को पि गया,

अशोक- ये हुआ कैसे. वो तो चला गया था फिर ये सब कैसे,

निधि- मैं कोशिश कर रही थी की वो वापस आ जाये, मुझे पता ह उसके अलावा इस प्रोजेक्ट को कोई नहीं क्र सकता, वो मेरे नजदीक था तभी हनी आ गया और उसने उसे गालिया देनी शुरू क्र दी, उसकी गर्लफ्रेंड शनाया के लिए बहुत गंदे शब्द बोलने लगा, ह्रदय ने रोका भी लेकिन हनी ने उस पैर हुम्ला कर दिया, और मज़बूरी में ह्रदय ने हाथ उठाया, और हनी उसके 2-4 हाथ भी झेल नहीं पाया,

आप बोलते हो इसमें ताकत आ गई लेकिन ये ताकत उसके सामने ऐसी थी जैसे हठी के सामने कुत्ता,

अशोक- ये नहीं हो सकता मैंने खुद उसकी ताकत को देखा ह उसने 20 लोगो को एक साथ हरा दिया था, एक दीवार को अपने मुक्को से तोड़ दिया था,

निधि- लेकिन सामने ह्रदय था और सही बताऊ उसकी ताकत का कोई अनुमान नहीं ह, अब तक उसके सामने जितने भी बड़ी मुश्किल आई ह उसने बड़ी आसानी से पर कर ली ह, अब तक ऐसा नहीं लगा की किसी मुश्किल से ह्रदय को मुश्किल हुई हो,

अशोक सोच में दुब गया,

अशोक- मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा मैं क्या करू, इतना नजदीक आकर भी मैं कुछ नहीं क्र प् रहा हु,

निधि- आप मुझ पैर छोड़ दीजिये, मैं ले आउंगी उसे मैं सब ठीक क्र दूंगी,

अशोक हताश सा निधि को देख रहा था,

अशोक- अब बस तुम पैर hi भरोसा ह,

अशोक हनी के पास चला गया, निधि के फेस पैर एक मुस्कान थी जैसे वो जीत गई हो,

ह्रदय घर पंहुचा तो अंजलि से उसकी मुलाकात हुई,

अंजलि- बीटा मुझे तुझसे कुछ बात करनी ह,

ह्रदय- जी माँ बोलिये

अंजलि ह्रदय को अपने रूम में ले गई,

अंजलि- मेरी बात को धयान से सुन्ना, अगर तेरा कोई सवाल हो तो बिना झिजक के पूछना, लेकिन जो भी मैं बोलने जा रही हु, वो इस परिवार और तेरे लिए बहुत जरुरी ह,

ह्रदय- जनता हु माँ, आप जो भी कहेंगी वो मेरे भले के लिए hi होगा, आप बोलिये

अंजलि- तुझे अब सभी लड़कियों से जुड़ना होगा,

ह्रदय- जुड़ना होगा मतलब, मैं कुछ समझा नहीं,

अंजलि- तेरा रिश्ता अब इन लड़कियों के साथ बनना चाहिए,

ह्रदय- माँ ये आप क्या बोल रही हैं, ये कैसे हो सकता ह

अंजलि- तू मेरी कोक से पैदा हुआ ह वो मेरे hi बेटे के वीर्य से, जिसे मैंने बिना झिजक के अपने अंदर लिया था, मैंने hi अपनी बेटियों का रिश्ता उनके भाई से बनने दिया, यहाँ सब लड़किया और तू ऐसे hi रिश्ते से पैदा हुए हो, जो जरुरी था वो हो गया था, अब जो जरुरी ह वो करना ह,

और सही गलत मेरे सामने कोई मायने नहीं रखता,

ह्रदय- लेकिन आपके हालत अलग थे, यहाँ ऐसी मज़बूरी नहीं ह,

अंजलि- मज़बूरी वह भी नहीं थी, लेकिन अब जरुरी ह, अगर जरुरी न होता तो मैं तेरी मर्जी के बिना कुछ नहीं खेती, तेरा शनाया के साथ रिश्ता बना ह, सिर्फ एक रिश्ते से hi बहुत कुछ बदल चुक्का ह, अगर सबके साथ बनेगा तो क्या होगा मुझे भी नहीं पता,

ह्रदय- क्या बदल गया ह,

अंजलि- शनाया पूरी तरह तुझसे जुड़ चुकी ह, वही थी जिसे अहसास हुआ था की तू खतरे में ह, तेरे फ़ोन आने से पहले hi उसे अहसास हो गया था की तेरे साथ कुछ होने वाला ह, इसलिए hi मैं उसी समय घर से निकल गई थी,

ह्रदय- ये इत्तेफाक भी हो सकता ह माँ

अंजलि- इत्तेफाक हमारे परिवार में नहीं होते, यहाँ जो होता ह उसका कोई कारन होता ह, और बिना कारन मैं कोई काम नहीं करती,

ह्रदय- लेकिन हमारा लक्ष्य पहले सबको ढूंढ़ना ह

अंजलि- वो तो करना hi ह, लेकिन उसके साथ ये भी होगा, और ये जल्दी से जल्दी होगा, तेरे 20तह बर्थडे से पहले,

ह्रदय- माँ मुझे ये सही नहीं लग रहा

अंजलि- बस दीपा यही चूक क्र गई तेरे साथ, तुझे हर तरह से बेस्ट बनाया लेकिन इस काम में तू ज्यादा hi नासमझ हो गया ह, मुझे hi कुछ करना पड़ेगा,

ह्रदय- क्या

अंजलि- तुझे सीखना पड़ेगा असली चुदाई क्या होती ह, लुंड का इस्तेमाल केवल मूतने के लिए नहीं किया जाता और जब इतना तगड़ा लुंड हो तो उसका इस्तेमाल दुनिया के भले के लिए किया जाता ह, और इन लड़कियों के अंदर की गरमी को बस तेरा ये लुंड hi शांत क्र सकता ह समझा,

अंजलि की बात सुनकर ह्रदय मुँह फाडे अंजलि को देखे जा रहा था,

ह्रदय- माँ ये आप कैसे भाषा बोल रही हैं,

अंजलि- कैसी भाषा, इसे लुंड नहीं बोलते क्या, और लड़की के पास जो होता ह उसे छूट नहीं बोलते क्या, दीपा ने नहीं सिखाया तुझे, मैंने कहा था तेरे साथ ओपन रहे,

ह्रदय- वो काफी ओपन ह, लेकिन इतनी भी नहीं ह की ऐसे शब्द बोले

अंजलि- लेकिन मैं ऐसी हु और मेरे सामने तू भी ऐसा hi होगा समझा, ये अच्छे अच्छा के लिए रख, ब्यूरो के लिए बुराई भी सिख ले, तेरा युद्ध केवल ताकत का नहीं ह, तेरी अच्छी और बुराई का भी ह, और भविष्य में तुझे ऐसा कुछ भी करना पद सकता ह, जिसके लिए तेरा जमीर तुझे गवारा न दे, इसलिए खुद को ऐसा बना की दुनिया की भी बात तुझे परेशां न कर सके,

ह्रदय- माँ मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा,

अंजलि- अच्छा एक बात बता तेरा मन नहीं करता खुल क्र बात करने का, ये सब औपचारिकता तोड़ने का

ह्रदय- करता ह माँ, लेकिन सामने वाले को बुरा लग सकता ह,

अंजलि- क्या पता सामने वाला भी ये सुन्ना चाहता हो, और जब किसी के साथ रिश्ता बनाते हैं तो ये औपचारिकताओ का महत्व नहीं रहता,

हर औरत अपने पति या साथी के साथ खुल क्र मजे लेना चाहती ह, केवल छूट में लुंड दाल क्र छोड़ने को सुख मजा नहीं कहते, लड़की को इतना गरम करना पड़ता ह की वो खुद तेरे लुंड के उप्पेर चढ़ जाये, उससे ऐसी बाते की जाती ह जिससे वो अपना कण्ट्रोल खो बैठे, लड़की शर्मा क्र कुछ नहीं बोल पति लेकिन लड़के को उसकी शर्म ख़तम करनी पड़ती ह,

ह्रदय- लेकिन माँ मैंने कभी ऐसे वर्ड्स नहीं बोले

अंजलि- तो अब बोलना सिख, मेरे सामने बोल

ह्रदय- आप मेरी माँ हो आपके सामने कैसे

अंजलि- मैं तेरी माँ हु, तू ये सोच मैं वो औरत हु जो अपने hi बेटे से चूड़ी ह, फिर तेरे मन में क्या ख्याल आता ह, उधर अनीता और रिंकी दोनों माँ बेटी एक hi लोडे से चूड़ी हैं, सीमा और दीपा ने अपने भाई को पटाया और उसके लोडे को चूसा ह उसे चूड़ी हैं, फिर भी तू हमसे ये बात नहीं कर सकता,

ठीक ह उनसे नहीं कर सकता मुझसे तो क्र सकता ह न,

ह्रदय- कोशिश करूँगा माँ

अंजलि- ठीक ह मेरी बात को धयान से सुन ले, इस घर की हर लड़की की छूट की सील तू खोलेगा, कैसे करेगा मुझे नहीं पता, लेकिन ये करना ह और जल्दी से जल्दी करना ह,

ह्रदय- जी माँ

अंजलि- क्या जी माँ

ह्रदय- मैं खोलूंगा सबकी सील

अंजलि- गुड और ये शर्मीला सवभाव ख़तम कर, तेरी माँ उस उम्र में अपने बाप से चुद ली थी जिस उम्र में छूट और लुंड का ज्ञान भी नहीं होता समझा, चल खड़ा हो और अपने काम पैर लग जा,

ह्रदय उठा और बहार चला गया, ह्रदय के जाते hi अंजलि ने घेरि साँस भरी, और अपने सर को पीटने लगी

अंजलि खुद से hi- ये क्या क्या बोल गई तू, दिमाग ख़राब हो गया क्या, ऐसे सिखाएगी उसे, प्यार से समझा सकती थी न ये सब क्या रंडी पाना कर दिया तूने, वो क्या सोचेगा उसकी माँ रंडी ह,

खैर जो सोचेगा सोचने दो लेकिन ये जरुरी ह, उसे ये सब करना पड़ेगा चाहे उसके लिए कुछ भी हो जाये,

ह्रदय शॉकेड सा बहार आकर बैठ गया, अंदर क्या हुआ उसे अब तक सपना सा लग रहा था,

ह्रदय खुद से hi- ये सब क्या था, माँ ने कैसी बात की आज, ये सब

लेकिन वो ठीक भी तो थी, हमारे घर में सब कुछ अजीब हुआ ह, माँ ने अपने hi बेटे के साथ सेक्स किया, दीपा माँ ने भी अपने भाई के साथ ये सब किया, हर औरत ने पापा के साथ सेक्स किया ह, किसी को कोई ऐतराज नहीं था, फिर मैं उनसे अलग कैसे हो सकता हु, मुझे उनके रस्ते पैर hi चलना होगा,

अगर माँ बोल रही ह ये जरुरी ह तो जरुरी hi होगा, लेकिन मैं करूँगा कैसे, शनाया को पता नहीं था वो तो प्यार में पद गई उसके साथ हो गया लेकिन बाकि सब के साथ कैसे, कुछ समझ नहीं आ रहा,

वन्य है वन्य वो भी तो उस दिन, यस उसी से शुरू करता हु, लेकिन इस सब से पहले पापा को ढूंढ़ना मेरा लक्ष्य ह,

वही रात का समय आश्रम में,

दृष्टि चुप चुप क्र कोमल के कमरे की तरफ जा रही थी, चारो तरफ सनता था,

वो धीरे से कमरे में घुसी और दरवाजा बंद क्र लिया, कोमल जमीन पैर पड़ी हुई थी,

दृष्टि को वह देख क्र कोमल थोड़ा सरप्राइज हुई,

कोमल- तुम यहाँ

दृष्टि- मैं भी इतनी hi शॉकेड हु की मैं यहाँ तुम्हारे पास क्यों आ गई, लेकिन मेरे सवाल मुझे यहाँ खींच लाये,

कोमल ने घेरि साँस भरी,

कोमल- मैं इसी दिन के इंतजार में थी की तुम्हारे अंदर सवाल जगे, लेकिन इन सवालो को उठने में बहुत टाइम लग गया,

दृष्टि- तुम्हे क्या पता मेरे अंदर क्या सवाल हैं,

कोमल- मैं जानती हु तुम क्या सोच रही हो, लेकिन तुम खुद hi पूछो मैं जवाब दूंगी, लेकिन क्या तुम्हे मुझ पैर भरोसा ह,

अगर तुम्हे मुझे पैर भरोसा नहीं तो जवाबो पैर यकीन कैसे करोगी,

दृष्टि- मैं तुम पैर भरोसा क्यों करू, तुमने इस परिवार को बर्बाद किया ह,

कोमल- कोनसा परिवार किसका परिवार,

दृष्टि- हमारा परिवार मेरी दादी का परिवार,

कोमल- तुम क्या जानती हो मेरे बारे में,

दृष्टि- यही की तुम दादी के बेटे कमल की पत्नी थी, तुमने उसे धोका दिया उस तुषार के लिए, और फिर यहाँ आ गई मेरे पापा के पीछे, तुम्हारी वजह से मेरी माँ मर गई, दादी ने तुम यहाँ सजा देने के लिए रखा ह,

कोमल- तुमने इससे आगे जानने की कोशिश की कभी, तुमने सोनिया के परिवार के बारे में पढ़ा, तो उसमे ये भी पढ़ा होगा की कोमल क्या चीज थी, और कमल क्या था, उन दोनों ने क्या किया था, किस हद तक गिरे हुए थे दोनों,

दृष्टि- तभी तो तुम्हे सजा मिल रही ह

कोमल- है मुझे सजा मिल रही ह और उन्ही कर्मो की सजा मिल रही ह, लेकिन जो तुम्हे बताया गया ह वो मेरे करम नहीं ह,

दृष्टि- तो क्या ह सच

कोमल- तुमने कभी सोचा जो कोमल पुरे शहर पैर भरी थी, जिसका बाप कमिशर हो वो यहाँ ऐसे तुम सबके अत्याचार सेह सकती ह, तुमने सोनिया और उसके परिवार का इतिहास पढ़ा ह सब क्रिमिनल थे, फिर ये सब सही कैसे हो सकते हैं,

दृष्टि- वो सब दादा जी की गलती थी दादी की क्या गलती,

कोमल- हाहाहाहाहा दादी, इस धरती पैर उससे खतरनाक औरत कोई नहीं ह, तुझे फिर से सब कुछ ढूंढ़ने की जरुरत ह, तूने वो ढूंढा जो इस औरत ने तुझसे कहा, तूने उससे अलग कुछ सोचने की कोशिश hi नहीं की, इस औरत के पुरे खून में hi गन्दगी ह, हर कोई क्रिमिनल ह

दृष्टि- मैं नहीं हु मैं भी इन्ही का खून हु

कोमल- इसी लिए खेती हु फिर से खोज क्र अपने बारे में भी और इस सोनिया के बारे में भी, और है उस लड़के से मिल, वो तुषार का बीटा ह, तुषार अच्छे का देवता था, उसका बीटा गलत नहीं कर सकता, वो hi सही रास्ता ला सकता ह,

दृष्टि- तुम सब कुछ क्यों नहीं बता सकती,

कोमल- मैं मजबूर हु, कुछ बाते हैं अगर मेरे मुँह से निकल गई तो सब बर्बाद हो जायेगा, बस इतना याद रख जो तेरे सामने ह सब झूट ह, तेरे हर रिश्ते झूट हैं, अगर कुछ सच ह तो सिर्फ अंजलि माँ,

उस औरत से बड़ा सच कुछ नहीं ह, उन्हें फिर से समझ, वो सिर्फ अपने बच्चो को नहीं ढूंढ रही इस सोनिया के बच्चो को भी ढूंढ रही हैं, कोई बेटी अपनी माँ के खिलाफ जाकर किसी दुश्मन का साथ नहीं दे सकती, इस सोनिया की बेटी वर्षा खुद अंजलि माँ के साथ कड़ी ह, और सोनिया के खिलाफ ह, तुझे तो बहुत पहले समझ जाना चाहिए था कोण गलत ह कोण सही,

दृष्टि- मैं तुम पैर यकीन क्यों कृ

कोमल- अपने पिता के लिए

दृष्टि- मेरे पिता उन्हें क्या होगा वो एक दम ठीक हैं,

कोमल- क्या तुझे लगता ह वो एक दम ठीक हैं,

दृष्टि सोच में दुब गई,

कोमल- मेरी बात धयान से सुन बस इसका जीकर गलती से भी कही मत कर देना, अगर ये बात बहार निकली तो सब बर्बाद हो जायेगा, मेरे 20 साल की तपश्या बर्बाद हो जाएगी, तू बहुत कुछ कर सकती ह, बस तुझे सही लोगो का चुनना होगा,

कोमल ने दृष्टि को बताना शुरू किया, जिसे सुन क्र दृष्टि की आँखे फटी रह गई, उसकी आँखों में खून उतर आया था,

दृष्टि- मुझे यकीन नहीं होता

कोमल- मत कर यकीन खुद सबूत ढूंढ, शायद तू hi कोई राष्ट निकल ले,

दृष्टि उठी और बहार चली गई, उसका दिमाग घुमा हुआ था, ये सब जो उसने सुना उसे यकीन hi नहीं हो रहा था, लेकिन कोमल की बातो में इतना लॉजिक था जो उसे आज तक सोनिया की बातो में कभी नहीं दिखा था, वो बस बचपन से दादी की बात मानती आ रही थी तो बिना सोचे सब किये जा रही थी,

दृष्टि अपने कमरे में लेट गई और पूरी रात इस बारे में सोचती रही, उसे जो जो जानकरी मिली थी सबको जोड़ती रही,

दृष्टि ने फैसला कर लिए था, उसके दिमाग में चीजे आ गई थी उसे करना ह, लेकिन संशय ये थी की उसने ह्रदय को धोका दिया था, वो दुबारा ह्रदय के सामने कसिए जाएगी, और ये सच और कोण बता सकता ह, सबसे पहले मुझे तुषार को ढूंढ़ना होगा, लेकिन उसकी कोई तस्वीर तक नहीं ह, कैसे ढूंढूंगी उसे, अंजलि के घर में उसकी तस्वीर मिल सकती ह, लेकिन वह तक पंहुचा कैसे जायेगा,

मेरी माँ उनका जीकर क्यों नहीं ह कही भी, बस ये पता ह दुश्मनो ने उन्हें मर दिया, कोमल की वजह से वो मर गई, लेकिन दुश्मनो तो पता hi नहीं था कोमल यहाँ ह, अगर उन्हें पता नहीं कोमल यहाँ ह, तो कोमल यहाँ रुकी हुई ह अपनी मर्जी से, मतलब कोमल की बातो में सचाई हो सकती ह,

इधर अशोक कपूर फ़ोन पैर किसी से बात कर रहा था,

अशोक- आपने तो कहा था इससे ज्यादा ताकत किसी इंसान में नहीं ह, लेकिन एक लड़के ने उसे 1 मिनट्स में hi हॉस्पिटल पंहुचा दिया,

दूसरी तरफ से- ये संभव नहीं ह, ऐसा हो hi नहीं सकता,

अशोक- लेकिन ऐसा हुआ ह, मैं अभी हॉस्पिटल में hi हु, ऐसा लग रहा जैसी किसी हठी ने मारा हो,

दूसरी तरफ से- कोण ह वो

अशोक- ह्रदय नाम ह उसका हिमाचल से आया ह, मैंने आपकी इतनी सेवा की ह, फिर भी आपने मुझे वो नहीं दिया जिसकी मुझे जरुरत ह,

दूसरी तरफ से- मुझे नहीं पता तुम्हे ऐसा कोई क्यों चाहिए, तुमने आज तक अपना मकसद बताया hi कहा ह हमे, अगर तुम बताते तो हम उसी हिसाब से तुम्हे आदमी देते,

अशोक- मैंने कई बार कहा ह मुझे ऐसा आदमी चाहिए जिसकी ताकत के सामने 100 आदमी की ताकत भी काम पद जाये,

दूसरी तरफ से- ऐसी ताकत वाला इंसान एक hi था अंश , अब ऐसी ताकत किसी में नहीं ह, और उससे लड़ने की हिम्मत किसी में नहीं ह,

अशोक- लेकिन इस लड़के में उतनी hi ताकत ह, मैंने देखि ह,

दूसरी तरफ से- मतलब अब हमे इससे मिलना hi होगा,

अशोक- वो आप देखिये

दूसरी तरफ से- हम आ रहे हैं तुम्हारे शहर में, और हमारी बेझे हुए लोग काम तो ठीक से कर रहे ह न, तुम हमसे हमारा नगीना चीन क्र ले गए,

अशोक- वो तो आपका आशीर्वाद था,

दूसरी तरफ से- हाहाहाहा हमे मिलना ह उससे जब से तुम लेकर गए हो दुबारा हमसे मिलाया भी नहीं,

अशोक- जैसा आप कहे, मेरे लिए क्या आदेश ह,

दूसरी तरफ से- हम आकर बताएँगे और तुम्हरी शंश्य भी सुलझाएंगे, अगर तुम बताओ की तुम करना क्या चाहते हो,

अशोक- आप आइये फिर बात करता हु,

दूसरी तरफ से- सुना ह तुम्हारी एक पोती भी ह, बड़ी खूबसूरत ह,

अशोक- आपका hi आशीर्वाद ह

दूसरी तरफ से- हम अपने आशीर्वाद से मिलना चाहेंगे,

अशोक- जरूर,

दूसरी तरफ से- हम रवि को लेकर आ रहे हैं वह, अब वो तुम्हारे काम आ सकता ह,

अशोक- क्या सच में, फिर तो बहुत बढ़िया रहेगा, मैं आपका इंतजार करूँगा,

अशोक फ़ोन काट क्र खुश होता हुआ वापस िक के सामने आ गया,

निधि भी वही बैठी हुई थी और साथ में नित्य भी,

अशोक के चेरे पैर ख़ुशी देख क्र निधि को सरप्राइज हुआ,

निधि- क्या हुआ आप खुश नजर आ रहे हैं,

अशोक- रवि आ रहा ह,

इतना सुन क्र नित्य ख़ुशी से उछाल पड़ी, क्या पापा आ रहे हैं, वाओ कब आ रहे हैं,

अशोक- जल्दी hi आएंगे,

नित्य- yeeeeeeeeee मजा आएगा,

नित्य खुश थी लेकिन निधि के होश उड़े हुए थे, वो तो जैसे सदमे में चली गई थी,

नित्य निधि से लिपट गई ख़ुशी में, लेकिन निधि ने कोई रियेक्ट नहीं किया,

अशोक- वो आ रहे हैं हमारे शहर,

निधि एक दम कड़ी हो गई, उसने गुस्से में अशोक को देखा लेकिन नित्य के सामने चुप रह गई,

निधि- नित्य बेटी हमारे लिए कॉफ़ी लेकर आओगी क्या

नित्य- माँ इस टाइम कॉफ़ी घर चल क्र पि लेना न

निधि- जितना बोलै ह उतना क्र

नित्य- ok ok लती हु,

नित्य वह से चली गई, नित्य के जाते hi,

निधि- वो यहाँ क्यों आ रहे हैं, उनका यहाँ क्या काम

अशोक- उन्होंने hi कहा ह वो आ रहे हैं, मैंने हनी के बारे में बताया तो उन्होंने कहा हम वही आ रहे हैं और इस ह्रदय नाम के लड़के से भी मिलेंगे वो परखेंगे इसकी ताकत को, और रवि को साथ ला रहे हैं,

निधि के आँखों में खून उतर आया था, वो दर से कैंप रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था क्या करे, वो बोखला सी गई थी, वो कुछ बोलना चाहती थी लेकिन तभी नित्य आ गई, निधि चुप हो गई और नित्य का हाथ पकड़ क्र वह से निकल गई,

नित्य बोलती रह गई माँ कॉफ़ी तो पि लो, लेकिन निधि को तो कुछ सुनाई hi नहीं दे रहा था,

इधर रात में ह्रदय रूम में लेता हुआ था तो कोई उसके बगल में आकर लेट गया,

ह्रदय की आँख खुल गई,



ह्रदय- तुम यहाँ
 
अपडेट-30






शनाया- मन नहीं लग रहा था,

ये शनाया थी जो काफी बैचैन थी, उसे कुछ सूझ नहीं रहा था तो ह्रदय के पास पहुंच गई,

ह्रदय उठ कर बैठ गया.

ह्रदय- तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहिए था, किसी ने देख लिया तो क्या होगा,

शनाया- कुछ नहीं होगा, और जो होगा मुझे फरक नहीं पड़ता, मैंने खुद को रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन मैं नहीं रोक पाई, मुझे फरक नहीं पड़ता हमारा क्या रिश्ता ह, मैं तुमसे प्यार करती हु और बहुत प्यार करती हु, अब दुनिया कुछ भी बोले मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती,

ह्रदय- शायद हमारा रिश्ता हमारे प्यार के बिच बढ़ा तो नहीं बनेगा, लेकिन अगर और कोई लाइन में आ गई तो क्या होगा,

शनाया एक सोच में दुब गई,

ह्रदय- क्या हुआ टेंशन में आ गई

शनाया- नहीं माँ ने मुझे पहले hi बता दिया था की तुम पैर सिर्फ मेरा अधिकार नहीं ह, बाकि बहेनो का भी ह,

ह्रदय- माँ ने, क्या उन्हें पता ह हमारे बारे में,

शनाया- है उन्हें पता ह, मुझे बताना पड़ा, जब पता चला की तुम मेरे भाई लगते हो तो मैं काफी परेशां हो गई थी तो माँ ने hi हेल्प की मेरी

ह्रदय- वो क्या सोच रही होंगी हमारे बारे में,

शनाया- हाहाहाहा वो ये hi सोच रही होंगी की उनकी बेटी उन पैर hi गई ह सबसे पहले देव मारा ह, उन्होंने भी तो पापा को इतना मजबूर क्र दिया था की पापा ने उन पैर चढ़ाई क्र दी थी,

ह्रदय- तुम सच में पागल हो, ऐसे कोण बोलता ह अपनी माँ पापा के लिए

शनाया- आज वो हमारे माँ पापा हैं लेकिन जवानी में वो लोग हमसे ज्यादा खतरनाक थे, उन्होंने ऐसे कारनामे क्र दिए जिन्हे हम सोचने से भी दर रहे हैं,

ह्रदय- बात तो सही ह, तो हमे क्या करना चाहिए,

शनाया- मुझे पता ह क्या करना चाहिए,

शनाया ने ह्रदय को बहो में बहरा और उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए, ह्रदय एक पल के लिए शॉकेड सा रह गया, लेकिन वो खुद अब तैयार था अपनी माँ का आदेश उसे मन्ना hi था,


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ह्रदय ने भी शनाया के बालो में हाथ डाला और दूसरा हाथ उसकी कमर पैर कास दिया और उसके होतो का रास पिने लगा, शनाया भी पुरे जोश में आ गई थी, उसने ह्रदय को कास क्र भींच लिया और अपनी कठोर चूचियों को ह्रदय की चेस्ट में दबा दिया,

ह्रदय ने शनाया के बहो में भरा और बीएड पैर लिटा दिया और उसके उप्पेर आ गया,

दोनों किसी पूरी तरह खो गए थे, शनाया के हाथ ह्रदय के बालो में और उसकी कमर पैर घूम रहे थे वही ह्रदय का एक हाथ शनाया के गलो को शेला रहा था,

शनाया ह्रदय के टी शर्ट उतरने लगी, अगले hi पल ह्रदय उप्पेर से नंगा था, शनाया उसकी नंगी चेस्ट को चूमने लगी, ह्रदय का हाथ शनाया की जांघ पैर घूमने लगा जो छोटी सी निघ्त्य में नंगी चमक रही थी,

ह्रदय का हाथ उसकी जांघ से उप्पेर गया और शनाया की गांड पैर रख दिया, और ह्रदय ने शनाया की गांड को कास क्र पकड़ और उस ेअपनी गॉड में बैठा लिया, गॉड में आते hi ह्रदय ने शनाया की निघ्त्य को पकड़ा और उप्पेर की तरफ खींच क्र निकल दिया, अब शनाया मात्रा ब्रा पंतय में उसकी गॉड में बैठी थी,


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शनाया एक पल क्र लिए शर्मा गई, लेकिन यहाँ शर्माने से काम नहीं चलने वाला था, आज वो होश में थी, होश में रह क्र वो सब फील करना चाहती थी,

उसने ह्रदय के मुँह को पकड़ा और फिर से अपने हॉट उसके होतो से जोड़ दिए, वही ह्रदय ने एक हाथ शनाया की चुकी के उप्पेर रख्हा जिससे शनाया एक्सीटेंड हो गया ुर उसने ह्रदय के हॉट पैर काठ लिया, ह्रदय ने भी उसकी चुकी को जोर से बिच दिया,

दोनों का जोश बढ़ने लगा था, ह्रदय का एक हाथ शनाया की गांड के निचे था जिससे उसकी उंगलिया पंतय के उप्पेर से hi शनाया की गांड की दरार में घुस रही थी, दूसरे हाथ से ह्रदय ने शनाया की ब्रा का हुक खोल दिया,


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हुक खुलते hi शनाया ह्रदय से चिपक गई, ह्रदय ने बिच में से ब्रा को खींच क्र निकल दिया, शनाया की नंगी चूचिया ह्रदय की नंगी छाती से रगड़ गई, इससे दोनों के मुँह से आआह निकल गई,

निचे से ह्रदय का लुंड पुरे उफान पैर आ चुक्का था जो शनाया की छूट पैर दबाव बना रहा था, शनाया की आँखे नशे में लाल हो चुकी थी, उसने ह्रदय के कंधे पैर अपने दन्त गदा दिए थे,

ह्रदय ने भी अपने पंजे उसकी चूचियों पैर कास दिए, ह्रदय ने शनाया को बीएड पैर लिटाया और उसकी कड़क और एक दम गोल चूचियों को अच्छे से निहारा, शनाया ने शर्म से आँखे बंद क्र ली,

ह्रदय ने अपनी उंगलियों से उसके निप्पल को पकड़ लिया और मरोड़ने लगा,

शनाया – aahhhhhhhhhhhhh आराम से

ह्रदय ने मुस्कुराते हुए उसकी चुकी को अपने मुँह में भर लिया, और एक हाथ से शनाया की नही को सहलाने लगा,


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शनाया का बदन थिरकने लगा था, ह्रदय ने हलके हलके शनाया का पेट शलया और हाथ को निचे ले गया और पंतय के उप्पेर से hi उसकी छूट पैर रख दिया, जिसे शनाया ने पकड़ लिया, ह्रदय ने शनाया की चुकी को अपने होतो से चूसा तो शनाया की आग और बहदाक गई उसने ह्रदय के हाथ को अपनी छूट पर दबा दिया, और दूसरे हाथ को ह्रदय के लुंड की तरफ ले गई, लेकिन ह्रदय झुका हुआ था तो शान्या का हाथ वह तक पहुंच नहीं पाया,

शान्या एक दम से उठी और उसने ह्रदय को निचे बीएड पैर गिराया और उसके उप्पेर आ गई और उसका लोअर निचे खिसकने लगी, ह्रदय का लुंड फूल जोश में खड़ा था जो अंडर वियर में से साफ़ दिख रहा था, जिस ेदेख शनाया की आँखों में नशा उतर आया था, वो ह्रदय के लुंड के उप्पेर लेट गई और अपनी चूचियों को उसके लुंड पैर रगड़ने लगी फिर अपना मुँह उसपर रगड़ने लगी, अंडर वियर के उप्पेर से hi लुंड को चूमने लगी,

शनाया ने अंडरवियर में हाथ डाला और निचे खिसकने लगी, ह्रदय नेकमर उठा उसकी हेल्प की, जैसे hi अंडरवियर निचे हुआ, शनाया की चीख सी निकल गई,

शनाया- उउउउइइइइइइइइ माँ ये क्या ह,


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ह्रदय- ये hi ह जो ह

शनाया- ये इतना बड़ा कसिए हो सकता ह, क्या इतना बड़ा हो सकता ह कभी किसी का

ह्रदय- मुझे नहीं पता किसी और के बारे में, लकिन ये तो इतना hi बड़ा ह

शनाया ने फटी आँखों से बड़े गोर से लुंड को देखा डरते हुए कांपते हाथो से लुंड को पकड़ लिया, ह्रदय का लुंड उसकी मुठी में भी नहीं आ रहा था,

शनाया लुंड को उलट पलट क्र देखने लगी,

ह्रदय- ऐसे hi देखती रहोगी क्या

शनाया ने ह्रदय को देखा फिर उसकी नजरो में देखते हुए लुंड पैर अपने हॉट रख दिए, और चूमने लगी, शनाया को लूँ डुसँ एक ठीक से आईडिया तो नहीं था लेकिन उसने जो पोर्न मूवीज में देखा वो वैसा hi करने की कोशिश करने लगी, और लुंड को अपने मुँह में भरने लगी,


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लेकिन लुंड बहुत मोटा था जिससे उसके हॉट चीरने लगे थे, शनाया ने कोशिश बंद की और जितना उससे हुआ लुंड को जीभ से और अपने होतो से चूमने लगी, वो लूँ डको उप्पेर से निचे तक चाटने लगी, अपने थूक से उसे भिगोने लगी थी,

काफी देर वो लुंड से खेलती रही, उसकी छूट पूरी बगावत पैर थी, भट्टी की तरह तप रही थी, पंतय पूरी भीग चुकी थी, उसकी हालत ख़राब होती जार hi थी, ह्रदय की हालत को समझ रहा था,

ह्रदय शनाया के उप्पेर आ गया और उसके हॉट चूमता हुआ निचे की तरफ जाने लगा, उसकी गार्डन को चूमता हुआ उसकी चूचियों को चूसने लगा फिर उसके पेट पैर आकर शनाया की खूबसूरत नाभि को अपनी जीभ से कुरेदने लगा, शनाया का सपाट पेट बहुत hi खूबसूरत था, जिस पैर उसकी नाभि बड़ी प्यारी सी थी,

ह्रदय निचे को हुआ तो शनाया ने उसका सर पकड़ लिए, लेकिन ह्रदय का रुकने वाला था उसने शनाया की पेंटी में हाथ डाला और उसे निचे की तरफ खींच दिया, शनाया की वो चिकनी छूट का उभर सामने आ गया, शनाया ने अपने पेअर भींच लिए,

ह्रदय ने पंतय उतर क्र उसके छूट के उभर को अपनी जीभ से चाट लिया जिससे शनाया मजे में अकड़ सी गई, वो छह क्र भी अपने पेअर नहीं जोड़ प् रही थी, ह्रदय ने हल्का सा हाथ उसकी जांघो के बिच डाला तो शनाया के पेअर खुद खुलते चले गए,

ह्रदय ने एक बार शनाया को देखा और फिर अपने हॉट उसकी छूट पैर रख दिए, शनाया के मुँह से मस्ती भरी आअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह निकल गई, उसने ह्रदय का सर अपनी छूट पैर दबा दिया, शनाया मजे में पागल हुई जार hi थी, ह्रदय भी उस ेसम्हाल्ने का कोई मौका नहीं दे रहा था, ह्रदय ने अपनी जीभ उसकी छूट में घुसनी शुरू की और अपने दांतो से छूट की दीवारों को कुरेदने लगा,


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शनाया ये हुम्ला बर्दास्त नहीं कर सकती और ह्रदय के मुँह पैर झड़ने लगी,

Ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh यस यस यस प्लस ahhhhhhhhhhhh ह्रदय प्लस ahahhhhhhhhhhhhhh यस उउउउइइइइइइइइ माआ ahhhhhhhhhh

वो अपनी छूट ह्रदय के मुँह पैर उछलने लगी और ह्रदय का सर अपनी छूट पैर दबाने लगी, ह्रदय को मौका ठीक लगा शनाया पूरी तरह गरम थी, ह्रदय तुरंत उठा, शनाया ने शॉकेड होकर ह्रदय को देखा, लेकिन अगले hi पल उसका सुरप्रीसेड एक्सिटमेंट में बदल गया जब ह्रदय अपना लुंड पकड़ क्र उसके पैरो के बिच आ गया और लुंड को उसकी छूट पैर लगाया और दबाव बनाया,

छूट पूरी तरह ह्रदय एक थूक और छूट रास में गीली हुई पड़ी थी, और ह्रदय का लुंड एक बार पहले भी उसकी छूट को खोल चुक्का था, जिसक ाफायदा ये हुआ की एक hi धक्के में ह्रदय का ¼ भाग शनाया की छूट में घुस गया, लेकिन शनाया वो धक्का बर्दास्त नहीं क्र पाई उसके मुँह से दर्द भरी चीख निकल गई,


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चीख काफी तेज थी ह्रदय ने उसके मुँह पैर हाथ रख दिया, और उसे शांत रहने को कहने लगा, लेकिन दर्द काफी था शनाया से सहन नहीं हो रहा था,

ह्रदय ने शनाया के होतो पैर अपने हॉट रख दिए और उसकी चूचियों को मसलें लगा, और लुंड को अपनी जगह फिक्स रखा जरा भी हिलने नहीं दिया,

शनाया की आँखों से आंसू भी रहे थे, लेकिन किसी ने कहा ह न छूट में चाहे घोड़े का लुंड भी घुसा हो, छूट खुद को उसके हिसाब से hi एडजस्ट क्र लेती ह, कुछ hi देर में शनाया का दर्द हल्का पांडा शुरू हो गया था, उसके हॉट भी ह्रदय के साथ चलने लगे थे, ह्रदय ने मौका देख क्र अपनी कमर को हलके हलके हिलना शुरू किया,

शनाया की आँखे फटी जा रही थी लेकिन ह्रदय जनता था अगर शनाया को मजा आना शुरू नहीं हुआ तो वो चुदाई पूरी नहीं क्र पायेगी,

और कुछ hi पालो में लुंड ने अपना काम कर दिया, शनाया का दर्द अब हलके हलके मजे में बदलने लगा था, लुंड को भी थोड़ी आसानी होने लगी थी, और उसी आसानी में लुंड और अंदर घुस गया, तभी शनाया झड़ने लगी,


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Aahhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhh ह्रदय हहहह ahhhhhhhhhhhhhh मैं गई aahhhhhhhhhhhhh बहुत मजा आ रहा ह, uuuffffffffffffffffff aaahhhhmmmmmmmmmmm करो करो प्लस करो, बहुत मजा आ रहा ह , मैं हवा में उड़ रही हु,

शनाया झाड़ रही थी और ह्रदय अपने लुंड के लिए जगह बना रहा था, इसी बिच ह्रदय ने आधे से ज्यादा लुंड शनाया की छूट की घेरे में उतर दिया था, और हलके हलके धक्के लगाने शुरू क्र दिए थे, शनाया दूसरी बार के झड़ने से खुद को सम्हाल भी नहीं पाई थी की, ह्रदय के लुंड ने उसके और मजा देना शुरू क्र दिया था,

जब भी लुंड बहार आता तो ऐसा लगता शनाया की छूट उसी के साथ बहार निकल रही थी, शनाया को दर्द बहुत हो रहा था लेकिन मजा दर्द से भी अधिक आ रहा था, शनाया अपनी आवाजों को अपनी सांसो को कण्ट्रोल नहीं क्र प् रही थी, और ह्रदय खुद इतने मजे में आ गया था की उसे अहसास hi नहीं हुआ उन दोनों की सांसे कितनी तेज और जोर से चल रही हैं, दोनों की आहे भरने की आवाजे पूरी मजिल पैर गूंज रही थी,

शनाया ये मजा बर्दास्त नहीं क्र सकीय और 1 घंटे की चुदाई में तीसरी बार झड़ने लगी इस बार ह्रदय ने भी साथ hi झड़ने का फैसला किया और खुद को कण्ट्रोल करना बंद किया, और अपना लावा शनाया की छूट की घेरे में उतरने लगा,

ह्रदय पूरी रफ़्तार से धक्के तो नहीं ला रह अतः लेकिन फिर भी उसके धक्के काफी तेज थे,

शनाया- समां जाओ मुझे ह्रदय, मुझ ेपुरी तरह अपनी बना लो, पूरी तरह निचोड़ दो मुझे, aahhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhhhhhh ahhhhhhhhhhh यस ये सीएस यस यस यस uuuuuuuuuuuuuuufffffffffffffffffff aahhhhhhhhhhhhhh माँ माँ मई गई, बहुत मजा ह कसम से बहुत मजा आ रहा ह,


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कुछ देर में दोनों शांत हो गए, और कमरे में दोनों की सांसो की आवाजों के अलावा सब कुछ शांत था, दोनों एक दूसरे से चिपके लेते रहे,

कुछ देर बाद ह्रदय उठा उसने शनाया को उठाया लेकिन दर्द की वजह से उससे हिला भी नहीं गया, ह्रदय ने उसे गॉड में उठाया और बाथरूम में ले गया, वह उसने शनाया को साफ़ किया और बीएड पैर लिटा दिया,

शनाया- मैं यही ऐसे hi सो जाओ तुम्हारे पास, मेरा मन नहीं हो रहा तुम्हारे पास से जाने का

ह्रदय- सुबह किसी ने देख लिया तो प्रॉब्लम हो जाएगी

शनाया- कोई प्रॉब्लम नहीं होगी, हमारी माओ को तो कोई प्रॉब्लम नहीं ह

ह्रदय- हम जानते हैं उन सबके रिश्तो के बारे में, लेकिन इस मतलब ये नहीं ह की हम उनका सम्मान नहीं करेंगे, और हमारे रिश्ते भी सामाजिक नहीं ह, तो इन्हे ऐसे सबके सामने नुमाया करना भी अच्छी बात नहीं ह, जब तक चीजे छुपी रहे अच्छा ह,

सबको पता होने के बाद भी सब छिपा रहता ह न, पति पत्नी सेक्स करते हैं ये सब जानते हैं, लेकिन वो सबके सामने खुले में तो नहीं कर सकते, वैसे hi हमारा रिश्ता ह, सबको पता होने और सबके सामने करने बहुत अंतर ह

शनाया- शमझ गई मेरे ज्ञानी बाबा, लेकिन मैं जाउंगी कैसे मुझसे हिला भी नहीं जा रहा,

ह्रदय ने शनाया को उसके कपडे पहनाये और फिर ये घेरा किश किया और गॉड में उठा क्र उसके रूम में ले गया, फिर छुपते हुए अपने रूम में वापस आ गया,

अगली सुबह सब लोग नाश्ते की टेबल पैर बैठे थे, बस वह शनाया नहीं थी,

अंजलि- ये शनाया कहा ह आज

सीमा- उसकी तबियत ठीक नहीं ह,

वन्य- पेअर में दर्द होगा,

इतना बोल क्र वो है पड़ी उसके साथ दिया और रिंकी के हसने की आवाज भी आ गई, जिसे देख ह्रदय झेप गया, उसने नजर उप्पेर उठाई तो सब उसे hi देख रही थी,

ह्रदय ने झिझकते हुए नजर निचे कर ली,

अंजलि- तुम सबका मजाक ख़तम हो गया हो तो कुछ काम की बात कर ले,

सब शांत हो गए,

अंजलि- ह्रदय अब हमारी खोज दूसरे तरीके से चलने वाली ह, हमे पता ह किसे ढूंढ़ना ह, अब तक हम अनजान थे की ढूंढ़ना किसे ह, मैंने सभी जगह आदमी लगा दिए हैं, अब दो तरीके से खोज होगी, शाक्षी के तर कहा कहा तक जुड़े हैं और सोनिया के कहा तक,

इन दोनों से जुड़े हर इंसान की जानकारी निकली जाये, और कपिल उस आदमी के पता चला जिसने दृष्टि की मदद की कॉलेज में रिकॉर्ड ख़तम करने में,

कपिल- अब तक नहीं माँ, मैंने अपना आदमी अंदर लगा दिया ह, लेकिन डायरेक्ट किसी से पूछ नहीं सकते वो मेनेजमेंट से कोई भी हो सकता ह,

ह्रदय- माँ हमे सबसे पहले परिवार की सुरक्षा का कुछ करना पड़ेगा, सामने वाले हमसे ज्यादा ताकतवर हैं, अगर उन्होंने अलग हुम्ला किया तो प्रॉब्लम हो सकती ह,

अंजलि- कोई भी लड़की अकेले घर से बहार नहीं जाएगी, बिना ह्रदय को साथ लिए कोई कही नहीं जायेगा, जब तक ये प्रॉब्लम सोल्वे न हो जाये, सचिन जीतनेय आदमी हो सकते हैं उन्हें घर की सुरक्षा में लगा दो, और अन्य और रम्य को यहाँ बुलाओ, जितनी जानकरी निकालनी थी निकल ली, अब कामिनी से डायरेक्ट आमना सामना करना होगा,

ह्रदय- मुझे नहीं लगता कामिनी दादी सोनिया से जुडी हुई हैं,

वर्षा- ऐसा क्यों

ह्रदय- कामिनी दादी को पता था मेरे और दीपा माँ के बारे में, अगर वो सोनिया से जुडी होती तो हमारी जानकरी वह तक पहुँचती, लेकिन सोनिया और दृष्टि को मेरे बारे में कोई जानकरी नहीं थी,

सीमा- तो उनका मकसद क्या था

अंजलि- मेरी समझ में आ रहा ह, अगर जो उसने किया ह उतना hi उसका मकसद हुआ तो ठीक ह हमारे लिए, लेकिन अगर उससे ज्यादा कुछ हुआ तो सोचना पड़ेगा, लेकिन फिर भी वक़्त आ गया ह कामिनी से मिलने का,

रश्मि- माँ क्या मुझे उनसे बात करनी चाहिए,

अंजलि- करेंगे बेटी, ह्रदय तम्मना से बात कर और डायरेक्ट बात कर, तब तक अन्य और रम्य को यहाँ बुलाओ,

ह्रदय- दिया तुम मेरे साथ चलोगी क्या,

दिया- है जरूर

ाव्य- दिया क्यों

ह्रदय- मुझे कुछ ऐसा करना ह जो वो मुझसे करवाना चाहते थे,

अंजलि समझ गई,

बाकि थोड़ा कंफ्यूज थे,

नाश्ता करके सब निकल गए, ाव्य फिर से गुस्से में आ गई थी,

दिया- ऐसा क्या काम ह जोट ुम मुझे साथ लाये हो,

ह्रदय- हमे कुछ ऐसा करना ह जिससे उसे यकीन हो जो वो चाहती ह वही हो रहा ह,

दिया- ऐसा क्या करना ह

ह्रदय- शायद तुम्हे अच्छा न लगे लेकिन ये तुम hi कर सकती हो,

दिया- तुम बोलो तो सही मैं जरूर करुँगी, ऐसा क्या ह जो मैं hi कर सकती हु, बाकि सभी बहेनो के अलावा,

ह्रदय- तम्मना की नजरो में अभी तक शनाया दिया रैना और आशना hi मेरी बहन लगती हैं, और वो चाहती ह मेरा रिश्ता मेरी बहेनो से बने, तो तुम hi सबसे सही थी,

दिया शर्मा क्र निचे देखने लगी,

ह्रदय- अगर तुम्हे सही न लगे तो कोई बात नहीं

दिया- ऐसी बात नहीं ह, लेकिन तुम्हे शनाया को क्यों नहीं लिया साथ

ह्रदय- शनाया और मेरा रिश्ता वो जानती ह, उसे पता ह हमारे बिच सब हो चुक्का ह,

दिया ने बस ह्रदय को एक लुक दी,

ह्रदय- तुम्हे बुरा नहीं लगा,

दिया- मुझे क्यों बुरा लगेगा,

ह्रदय- मेरे और शनाया के बिच ये सब हो चुक्का ह, वो मेरी बहन लगती ह, और आज मैं तुम ऐसा करने को बोल रहा हु,

दिया- अपने परिवार के बारे में जान क्र अब कुछ सही गलत अच्छा बुरा नहीं लगता, बस ऐसा लगता ह जो होना ह वो होता hi ह, और हमे वो करना छाइये जो जरुरी हो, अगर ये जरुरी ह तो मैं तैयार हु,

ह्रदय ने एक घेरि साँस भरी, ह्रदय ने गाड़ी तेज भगा दी और एक साफé के सामने गाड़ी रोक दी,

ह्रदय घर से निकलते hi तम्मना को बता चुक्का था की वो मिलने आ रहा ह, उसने तम्मना को जो टाइम दिया था उसे 20 मिंटुस पहले hi पहुंच चुक्का था,

ह्रदय- तुम कुछ ऐसा करना ह जिससे तम्मना को लगे की हमारे बिच कुछ चल रहा ह,

दिया ने बस हम्म्म कहा,

दोनों एक दम खामोश बैठे थे, कार में बार दोनों के साँस लेने की आवाज आ रही थी, ह्रदय तो फिर भी अंजलि के समझने पैर इस सब के लिए तैयार था लेकिन दिया के लिए नया था,

तभी दिया को तम्मना दिखाई दी,

दिया- वो आ गई ह,

ह्रदय- कहा ह

दिया- उधर मत देखो वर्ण उसे लगेगा हमने उसे देख लिया ह और उसके समाने ऐसा कर रहे हैं,

ह्रदय- ok कितनी दुरी पैर ह

दिया- हमारी तरफ hi आ रही ह, उसकी नजर गाड़ी पैर hi ह,

ह्रदय- ok मुझे दिख गई, अब तुम देखो क्या करना ह, ऐसा करो मेरे गले लग जाओ, अउ रेज हुग करो जैसे हम गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड हो,

दिया ने अपनी आँखे बंद की और एक घेरि साँस भरी और ह्रदय की तरफ पलटी, ह्रदय हुग करने के लिए हाथ खोलने लगा तभी दिया ने उसके बालो में हाथ डाला और उसे अपनी तरफ झुकाया और ह्रदय के होतो पैर अपने हॉट रख दिए, दिया के इस कदम से ह्रदय भी शोकेड था,


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उसकी आँखे हैरत से खुली रह गई, जबकि दिया आँखे बंद करके बड़ी hi तलीनता से ह्रदय के होतो को चुम रही थी, वो पूरी तरह उसके होतो में खो गई थी, तभी तम्मना गाड़ी के नजदीक आ गई, और शीशे में से अंदर देखने लगी, एक पल के लिए तम्मना शॉकेड सी रह गई, दिया और ह्रदय किश में इतना खो गए की उन्हें अहसास भी नहीं हुआ तम्मना वह आ चुकी ह,

ह्रदय ने महसूस किया की कोई गाड़ी के बहार खड़ा ह, उसने बिना आँखे खोले बस हलचल की, जिससे दिया का धयान किश से टूट गया, उसे याद आया की उसे बस दिखाना था, वो बहुत hi प्यार से ह्रदय से अलग हुई उसकी आँखे एक दम लाल हो चुकी थी, और जब उसने बहुत hi प्यार से और धीरे से बोलै,

ह्रदय ी लव यू,

ह्रदय की तो आँखे फटी रह गई, उसे पाने कानो पैर विश्वास hi नहीं हुआ, दिया ने उसका जवाब सुने बिना hi सीधी हो गई, और एक दम से तम्मना को देख क्र चोकने का नाटक किया,


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दिया ने अपने होतो पैर अपना हाथ फिराया और शर्माती हुई सी गाड़ी से उतर क्र बहार आ गई, तम्मना के चेरे पैर एक सिमले थी, ह्रदय तो पहले से hi दिया की हरकत से शॉकेड था,

वो गाड़ी से बहार उतरा और झिझकता हुआ सा खड़ा हो गया,

तम्मना- अरे तुम लोग शर्मा क्यों रहे हो, इस आगे में तो ये सब होता ह, यही टाइम ह एन्जॉय करने का,

ह्रदय- मम वो हम बस

तम्मना- अरे यार तुम बहुत शरमाते हो, मैं किसी से नहीं कहूँगी, मजे करो अगर जगह की प्रॉब्लम हो तो बताना मैं अर्रेंगे क्र दूंगी,

दिया- ठंकु मम,

तम्मना ने दिया को गले से लगा लिया,

तम्मना- आओ कॉफ़ी पिटे हैं,

दिया- नहीं मुझे निकलना ह, एक जरुरी काम ह, ह्रदय तुम लोग बात करो मैं वो काम ख़तम करके आती हु,

दिया ने आगे बढ़ क्र ह्रदय को गले से लगा लिया, ह्रदय ने झिझकते हुए दिया को गले से लगाया और दिया वह से चली गई,

तम्मना और ह्रदय कॉफ़ी शॉप में चले गए,

तम्मना- वह यार तुमने तो दूसरी बहन पैर भी देव मार दिया और मुझे बताया भी नहीं,

ह्रदय- वो ये सब अभी कुछ समय पहले hi हुआ ह, अब बात इतनी आगे नहीं बढ़ी,

तम्मना- कोई नहीं आज किश दिया ह, जल्दी hi छूट भी देगी, मेरी हेल्प चाहिए तो बताना,

ह्रदय- ये सब मुझे ठीक नहीं लग रहा, दो बहेनो को एक साथ डेट करना, दोनों को धोका देना मेरा मन नहीं मान रहा,

तम्मना- ये क्या बोल रहे हो, ऐसा कुछ नहीं होता कोई धोखा नहीं होता, आज के टाइम धोके जैसा कुछ नहीं ह तुम उनकी चुदाई नहीं करोगे तो कोई और क्र देगा, शादी तक तो वो वैसे भी कुँअरि नहीं रहेंगी और जिससे पहेली बार छोड़ेंगी उससे शादी आज कल किसी की होती ह नहीं, इस आगे में बस हर लड़की को चुदाई चाहिए, शादी करने के लिए बाद में कोई पैसे वाला मुर्गा ढूंढ लेती हियँ, तो तुम ये सब छोड़ो और मजे लो,

ह्रदय- मम हमे वापस भी जाना ह, हम यहाँ कॉलेज की तरफ से आये हुए हैं और हमने अब तक कुश्ती की कोई प्रैक्टिस नहीं की, यहाँ तो कुछ hi कुश्ती शुरू हो गई मेरी, अब वापस चलते हैं न

तम्मना- लेकिन यहाँ तुम्हे मजा नहीं आ रहा, दो दो लड़कियों से सेटिंग हो गई ह, मैं भी हु, हम तीनो मजा देंगी तुम्हे,

ह्रदय- वह कल्पना और मंदिर भी तो ह उनके साथ मजे क्र लेंगे मम,

तम्मना- उन लड़कियों में वो बात कहा जो इन लड़कियों में ह,

ह्रदय- वो भी बहुत खूबसूरत हैं और दोनों hi मुझे पसंद करती हैं,

तम्मना- मैं बोल रही हु न तुम्हे इनके साथ hi करना ह,

ह्रदय- लेकिन क्यों, इनके साथ hi क्यों, दुनिया में और भी तो लड़किया हैं,

तम्मना के चेरे पैर गुस्सा था, वो बहुत कुछ कहना चाहती थी लेकिन बोल नहीं प् रही थी, उसे समझ नहीं आ रहा था ो कैसे ह्रदय को समझाए, कैसे रोके,

ह्रदय- आप मुझसे कुछ छुपा रही हैं मम,

तम्मना- नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं ह

ह्रदय- मुझे ऐसा क्यों लग रहा ह जैसे आप मुझसे झूट बोल रही हैं, क्या आपको मुझ पैर यकीन नहीं ह,

तम्मना- ऐसी बात नहीं

ह्रदय- आप मुझे बता सकती हैं शायद मैं आपकी कोई हेल्प hi क्र दू, अगर मुझे पता होगा तो शायद मैं कुछ सही तरीके से कर दू,



तम्मना सोच में दुब गई,
 
बहुत बहुत धन्यवाद आप सभी का, अपडेट आ चूका ह,

आप सभी को होली की बहुत बहुत शुबकामनाएं,

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अगला अपडेट होली के बाद आएगा
 
अपडेट-31




निधि पूरी रात बस अपने बीएड पैर अपने घुटनो में सर रख क्र बैठी थी, वो एक टकटकी लगाए हुए दीवार को देखे जा रही थी,

उसकी आँखों में एक सुना पैन था, आँखे सूजी हुई थी, कुछ न सोने की वजह से कुछ पूरी रात रोने की वजह से,

दिन के 11 बजे हुए थे, वो अपने रूम से बहार नहीं निकली थी, नित्य उठी और देखा निधि नहीं आई ह बहार तो वो उसके रूम में चली गई, दरवाजा खुला हुआ था, वो अंदर गई तो देखा निधि के कपडे बिखरे पड़े हैं, नित्य शॉकेड सी अंदर घुसी तो एक दम से घबरा गई, क्योकि उसकी माँ निधि अपने बीएड पैर बिलकुल नंगी होकर अपने घुटनो पैर अपना सर रख क्र बैठी थी और एक तक बस दीवार को निहारे जा रही थी,

नित्य दौड़ क्र निधि के पास पहुंची और पास में राकगी चादर निधि के ऊपर डाली,

नित्य- माँ माँ माँ क्या हुआ माँ आप ठीक तो ह न माँ, क्या हुआ माँ कुछ बोलो,

नित्य बौखलाई सी निधि को पुकारे जा रही थी,

नित्य- दादा जी को कॉल करती हु

निधि ने नित्य को देखा बस न में गार्डन हिलाई,

नित्य- माँ आप ठीक ह न,

निधि ने नित्य को गले से लगा लिया और रोने लगी, बस रोये जा रही थी,

नित्य- माँ आप रो क्यों रही हैं, प्लस बोलिये न क्या हुआ, किसी ने कुछ कहा ह क्या,

निधि- नित्य तू मेरी बेटी ह, तू मुझे छोड़ क्र कही मत जाना, मैं तेरे बिना नहीं जी सकती

नित्य- माँ मैं कही नहीं जाउंगी, आपको छोड़ क्र कही नहीं जा रही, मैं हमेशा आपके पास रहूंगी,

निधि- नहीं नहीं तू चली जा तू यहाँ से कहि दूर चली जा बहुत दूर चली जा, इतनी दूर चली जा की तुझे कोई ढूंढ hi न सके,

नित्य- माँ ये कैसी बात कर रही हो आप

निधि- तू ह्रदय के पास चली जा, वो सही ह, तू अपने दोस्त के पास चली जा,

नित्य- माँ मैं आपके पास रहूंगी, और आप घबरा क्यों रही हैं, सब ठीक ह,

निधि फिर से नित्य से लिपट गई,

इधर तम्मना कंफ्यूज सी बैठी थी की वो ह्रदय को क्या बताये,

ह्रदय- बोलिये कुछ मम

तम्मना- मैं क्या चाहती हु क्या फरक पड़ता ह

ह्रदय- मुझे फरक पड़ता ह, आप मेरी गुरु हैं, आपने मुझे सब कुछ सिखाया ह, आपकी कोई प्रॉब्लम हो उसे सोल्वे करना मेरी जिम्मेदारी ह,

तम्मना- तुम मेरी प्रॉब्लम में क्यों पड़ना छाते हो,

ह्रदय- गुरु दक्षिणा देने के लिए,

तम्मना सोच में दुब गई, ह्रदय से देखे जा रहा था,

कुछ देर सोचने के बाद

तम्मना- तुम क्या कर सकते हो मेरे लिए,

ह्रदय- आप आजमा क्र देख लो क्या क्या कर सकता हु,

तम्मना- मैं चाहती हूत ुम उन चारो बहेनो को छोड़ो

ह्रदय- हो जायेगा, अगर आप बता दे इसके पीछे कोई खास वजह ह तो काम करने में और मजा आएगा,

तम्मना कुछ सोचते हुए- इनके परिवार ने मेरे परिवार के साथ गलत किया,

ह्रदय- जिसने गलत किया उसका नाम बता दीजिये मैं सीधे उसे hi सबक सीखा दूंगा

तम्मना- उसकी सजह ये hi ह की उसके परिवार की लड़किया तुमसे चूड़े, मतलब सभी एक hi लड़के के साथ रिश्ता बना ले, उसने मेरे परिवार की लड़कियों को मजबूर किया था अपने बेटो के निचे सोने के लिए,

ह्रदय- किसने किया

तम्मना- अंजलि ने

ह्रदय- अंजलि के बेटे मतलब सचिन और कपिल

तम्मना- है अब मैं चाहती हु इनकी बेतिया तुमसे चूड़े,

ह्रदय- कोई और सजा नहीं देनी बस इतनी hi सजा, ये सजा कहा हुई ये तो मजा हो गया,

तम्मना- मजा कैसा मजा

ह्रदय- आज कल सब जानते ह की शादी में कुँअरि लड़की मिलना मतलब भगवान् के दर्शन होने जैसा ह, फिर वो लड़किया सेक्स कर रही ह उससे किसी को क्या नुकसान, वो किसी न किसी के साथ तो सेक्स करेंगी hi, मेरे साथ करेंगी तो लड़कियों को मजा hi आएगा, सजा किसे मिल रही ह, उनके माँ बाप भी जानते hi होंगे लड़किया जवान ह किसी न किसी के साथ रिश्ता बनाएंगी hi,

तम्मना सोच में दुब गई, वो छह क्र भी ह्रदय को ये नहीं बता प् रही थी की वो चारो ह्रदय की बहन ह, और ह्रदय तम्मना के अंदर से जानकरी निकलना चाहता था वो ये जानना चाहता था की इसके अलावा तो और कोई खेल नहीं चल रहा ह,

ह्रदय- और आपने तो अपने मां को उनकी hi फैक्ट्री में काम करने भेज दिया, जबकि आप उन्हें सजा दिलवा सकती थी, जब उन्होंने एक्सीडेंट किया,

तम्मना- वो एक्सीडेंट नहीं था मां को उनकी फैक्ट्री में घुसाने का तरीका था,

ह्रदय- क्या

तम्मना को लगा उसने गलती क्र दी अपनी सचाई बता दी,

ह्रदय- वह ये तरीका सही लगा, लेकिन वो अकेले क्या कर पाएंगे, वो वह काम के अलावा क्या कर सकते हैं, आईडिया अच्छा ह लेकिन इससे सचिन कपिल का क्या बिगड़ लेंगे वो,

तम्मना – ये मुझे नहीं पता, शायद माँ के दिमाग में कुछ होगा,

ह्रदय- माँ उन्होंने ये प्लान बनाया

तम्मना- है मेरी माँ ने hi ये प्लान बनाया, इन लोगो से बदला लेने के लिए मैंने बहुत कुछ किया ह, अपना सब कुछ खो दिया, मेरी इज्जत मेरा आत्मसम्मान

तम्मना की आँखों में आंसू थे, ह्रदय समझ गया इसे गलत रास्ता दिखाया गया ह,

ह्रदय- आप कहे तो मैं आपके मां की हेल्प करू, कही ऐसा न हो वो पकडे जाये, ये लोग उन्हें बख्शेंगे नहीं,

तम्मना- वो खुद सम्हाल लेंगे, वैसे भी हमे उनके बिज़नेस से कुछ नहीं करना, वो तो बस ऐसे hi जानकरी निकलने के लिए वह लगे हैं, ताकि उस अंजलि की जानकरी निकली जा सके,

ह्रदय- ok तो मुझे इन चारो के साथ रिश्ता बनाना ह, ठीक ह एक के साथ हो गया दूसरी के साथ आज hi मैं करूँगा, बाकि दो को जल्दी hi तैयार क्र लूंगा,

तम्मना- जब तुम ये सब कर डोज तब मैं और माँ इनके सामने आएंगे,

दोनों बात hi क्र रहे थे की तम्मना का फ़ोन आया,

तम्मना- hello माँ

कामिनी- तम्मना बेटी तेरे पापा घर से गायब हैं,

तम्मना- क्या गायब हैं कैसे गायब ह, कहा चले गए,

कामिनी- मैंने दो नृ लड़कियों को घर रेंट पैर दिया था, आज सुबह से वो दोनों भी गायब हैं और तेरे पापा भी,

तम्मना- कोण थी वो लड़किया और वो लकडिया पापा का क्या करेंगे,

ह्रदय सब बाते सुन रहा था, वो समझ गया अन्य और रम्य तम्मना के पापा को लेकर निकल चुकी हैं वह से,

तम्मना- वही कही होंगे आप कोशिश कीजिये न,

ह्रदय- हो सकता हो वो लड़किया खतरनाक हो, उन लड़कियों की तस्वीर मंगवा लो आंटी से

तम्मना – माँ उन लड़कियों की फोटो ह क्या आपके पास मुझे भेजो मैं देखती हु,

कामिनी ने अपने फ़ोन में अन्य और रम्य की फोटो भेज दी, जो उसने उनकी सुंदरता से इम्प्रेस होकर खींची थी,

तम्मना ने फोटो ह्रदय को दिखाई,

ह्रदय- इन लड़कियों को तो मैंने अंजलि हाउस में देखा था,

तम्मना – क्या ये क्या बोल रहे हो, ये लड़किया हमारे घर क्या कर रही हैं फिर,

तम्मना- माँ ये लड़किया अंजलि के परिवार से जुडी हुई हैं,

कामिनी- क्या लेकिन ये कैसे हो सकता ह, उसके घर में तो बस 4 लड़किया थी, ये तो बहुत गलत हो गया,

तम्मना- माँ वो पापा को ले गए हैं, उन्हें खतरा हो सकता ह,

कामिनी- मैं आ रही हु, अब सामना करुँगी उसका, तेरा काम हो गया ह न,

तम्मना – माँ बस अभी एक के साथ हुआ ह, दूसरी के साथ जल्दी हो जायेगा,

कामिनी- कोई नहीं एक hi सही, अगर दूसरी के साथ भी हो जाये तो बढ़िया ह

तम्मना- आप आ जाइये मैं कोशिश करती हु,

फ़ोन काटने के बाद

तम्मना- ह्रदय क्या तुम दिया के साथ आज hi वो सब कर सकते हो,

ह्रदय- मैं पूरी कोशिश करूँगा,

तम्मना- उसकी चुदाई ऐसी होनी चाहिए की वो जिंदगी भर याद रखे,

ह्रदय- ऐसा hi होगा,

तम्मना तुरंत वह से निकल गई,

ह्रदय ने सचिन को कॉल करके तम्मना के मां को कब्जे में लेने को बोलै,

और अंजलि को कॉल करके बता दिया की कामिनी आने वाली ह,

वही आश्रम में दृष्टि खोज में लग गई थी, सोनिया और शाक्षी आश्रम के कमाओ में लगी थी, तभी दृष्टि सोनिया के सामान में खोजबीन करने लगी, लेकिन उसे वह कुछ नहीं मिला, ज्यादा सामान hi नहीं था,

सब कुछ खोजने के बाद उसे मिली तो एक तस्वीर जिसमे सोनिया सुरेश चोपड़ा सोहन चोपड़ा और कमल चोपड़ा की तस्वीर थी, इस तस्वीर में न hi वर्षा थी और न hi अलका,

दृष्टि खुद से hi- और कहा मिल सकती ह जानकरी, इसमें मेरे पिता की तस्वीर क्यों नहीं ह, अगर सोनिया मेरी दादी हैं और धामा मेरे पिता तो इन दोनों की तस्वीर एक साथ कही नहीं ह,

शाक्षी का इतहास भी बहुत ख़राब रहा ह, उसकी माँ के साथ जो हुआ वो तो गलत नहीं था, मतलब शाक्षी का पक्ष तो गलत hi ह, अंजलि का इतहास अभी तक तो कुछ अच्छा मिला नहीं, जिसने अपनी hi बेटियों को अपने hi बेटे से छुड़वा दिया वो और क्या गलत कर सकती ह, यहाँ तो हर कोई कटघरे में खड़ा ह, अब किस तरफ जाऊ, किस पैर भरोसा करू और किस पैर नहीं, लेकिन मुझे पता तो करना hi होगा, कहा से शुरू करू, कहा से शुरू कृ, यस यस यस यस मिल गया रास्ता, मुझे शुरुआत से hi शुरू करना होगा, बस मुझे यहाँ से निकलना होगा,

इधर नित्य ने ह्रदय को फ़ोन मिलाया,

ह्रदय- hello नित्य क्या हुआ

नित्य- क्या तुम घर आ सकते हो,

ह्रदय- नहीं लास्ट बार निधि जी के पास आया तो हनी हॉस्पिटल पहुंच गया, वह आना ठीक नहीं ह, कही बहार मिल लो,

नित्य- ok मैं एक एड्रेस भेज रही हु, वह आ जाओ, पैर थोड़ा जल्दी करना,

ह्रदय तुरंत वह के लिए निकल गया, ये छोटा सा घर था, एक अच्छी कॉलोनी में,

ह्रदय वह पंहुचा तो नित्य वह पहले से hi थी,

ह्रदय- ये किसका घर ह

तभी निधि की आवाज आई – मेरा

ह्रदय चौंक गया

निधि- है ये मेरा घर ह मेरी खुद की महेनत की कमाई से खरीदा हुआ घर,

नित्य भी सुरप्रीसेड थी,

नित्य- माँ हमारे पास इतना बड़ा घर ह फिर आपने ये क्यों खरीदा, हमे इसकी क्या जरुरत ह,

ह्रदय- इन्होने कुछ सोच क्र hi किया होगा, इनका दिमाग बहुत तेज चलता ह, ये प्लानिंग बहुत अच्छी करती हैं,

ये एक तना मारा था ह्रदय ने, जिसे निधि ने हाथ जोड़ क्र माफ़ी मांगते हुए सिव्कर किया था,

नित्य- माँ ये सब क्या ह, आपने ह्रदय को यहाँ क्यों बुलवाया, ऐसा क्या ह जो आप बता नहीं रही हैं,

निधि- मुझे तुम दोनों से बात करनी ह, और वो इतनी जरुरी और कॉन्फिडेंशल ह की मैं उसे कही बहार बोल भी नहीं सकती,

नित्य- ऐसा क्या ह माँ

निधि- एक सच जो तुमसे जुड़ा हुआ ह, ये समझो तुम्हारा सच, जो मेरे अंदर छुपा हुआ ह,

ह्रदय- उससे मेरा का कनेक्शन ह,

निधि- कोई कनेक्शन नहीं ह, लेकिन इस दुनिया में सिर्फ तुम हो जो उस सच को जानने के लायक हो या उस सच को जान क्र नित्य का साथ दे सकते हो,

नित्य- ये सब क्या बोल रही हो माँ, कैसा सच

निधि- पहला सच की अशोक कपूर तेरे दादा नहीं ह,

नित्य- क्या

निधि- और दूसरा सच रवि तेरे पिता नहीं हैं, यहाँ तक की रवि और अशोक से मेरा कोई रिश्ता hi नहीं ह, मैं बस अशोक कपूर के लिए काम करने वाली एम्प्लोयी हु, जो वो बोलता ह मैं करती हु, मुझे यहाँ लाया hi इस काम के लिए ह, मुझ पैर अशोक का एक अहसान ह, जिसे चुकाने के लिए मैं आज तक उसके लिए काम करती आ रही हु,

निधि की बात सुनकर नित्य शॉकेड से आँखे फाडे भौचक्की सी सुन रही थी,

ह्रदय को काफी कुछ पता था लेकिन इतना सब नहीं,

निधि- मैंने अपनी जिंदगी में बहुत बड़ी गलती की थी जिसकी सजा मैं आज तक भुगत रही हु, जीवन में मुझे कभी एक मौका मिले तो मैं उस गलती को बदल दू, और फिर सब सही हो जाये,

नित्य- ये सब क्या बोले जा रही हो मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा

निधि- तू समझ मत बस सुनती जा, एक बाबा ह बहुत खतरनाक ह, उसकी उम्र कितनी ह कोई नहीं जनता, मैंने उसे अपने बचपन में देखा था तभी वो ऐसा hi लगता था जैसा आज लगता ह, मैंने उससे ज्यादा ताकतवर और जल्लाद आदमी नहीं देखा, वो इंसान नहीं ह वहशी दरिंदा ह, उसने न जाने कितनी लड़कियों की जिंदगी बर्बाद कर दी ह, जो औरत एक बार उसके निचे गई वो जीवन में दुबारा किसी और के लायक नहीं रही, बहुत hi काम लड़किया ह जो उसके निचे आकर जिन्दा बची हैं, या यु कहु जिन लड़कियों को उसने चाहा जिन्दा बचाना वही बची हैं,

रवि उसी का एक तैयार किया हुआ खतरनाक जानवर ह, मैं एक बार मिली हु उससे वो इंसान को ऐसे काट डालता ह जैसे गाजर खा रहा हो,

अब वो दोनों यहाँ आ रहे हैं, अगर वो यहाँ आ रहे हैं तो बहुत hi खास मकसद होगा, और अशोक ने उस बाबा को ह्रदय के बारे में भी बताया ह, ह्रदय की ताकत के बारे में भी बताया ह,

और जितना मैंने उस बाबा को जाना ह वो आज तक बस ताकतवर इंसानो को hi ढूंढ़ता हुआ आ रहा ह, और अब वो ह्रदय को ढूंढ़ने आ रहा ह यहाँ, और नित्य तू उसके सामने मत आना, मैंने आज तक तुझे उससे दूर रखा ह, लेकिन अगर तू उसके सामने आई तो सब ख़तम हो जायेगा, इसलिए तुझे यहाँ से जाना होगा, और ह्रदय तुम्हे भी,

तुम दोनों यहाँ से निकल जाओ, इस दुनिया में मेरे लिए तुम दोनों से कीमती कुछ नहीं ह,

नित्य- लेकिन माँ कोई ऐसे कैसे कोई कुछ कर सकता ह, सर्कार ह पुलिस ह,

निधि- वो कुछ भी कर सकता ह, वो सर्कार बनता ह, बड़े बड़े नेता उसके सामने हाथ जोड़ क्र खड़े रहते हैं, पूरी पुलिस फाॅर्स भी उसका कुछ नहीं बिगड़ सकती,

ह्रदय को निधि की बातो में सच्ची और उसका दर साफ़ दिख रहा था,

ह्रदय- आप इतना दर क्यों रही हैं, मेरे होते कोई नित्य को छू भी नहीं सकता,

निधि- इसी लिए तो तुम पैर भरोसा ह,

नित्य- माँ अगर रवि मेरे पापा नहीं ह तो मेरे पापा ह कोण,

नित्य के सवाल पैर निधि ने सर झुका लिया,

ह्रदय समझ गया कुछ ऐसा ह जो नित्य को जानना सही नहीं ह,

ह्रदय- ये सवाल हम बाद में जानेंगे पहले हम इस बाबा के बारे में जान ले, ये कोण ह और मेरे लिए क्यों आ रहा ह, और कैसी ताकत चाहिए उसे,

निधि- नहीं ह्रदय प्लस मेरी बात मन जाओ उससे दूर रहो, वो क्या कर सकता ह तुम्हे अंदाजा भी नहीं ह, मैंने उसके अंदर ऐसी हैवानियत देखि ह जिससे किसी की रूह तक कैंप जाये,

ह्रदय- फिर तो उसका सामना करना hi होगा, अगर वो हवन ह तो मैं देवदूत हु,

खैर उसका तब सोचेंगे जब वो आएगा, फ़िलहाल आप इस दर से बहार निकलो,

निधि- नित्य बेटी तू सबके लिए कुछ खाने के लिए ले आ, बहार एक शॉप ह वह सब मिल जायेगा,

नित्य उठ क्र चली गई,

ह्रदय- कुछ और भी ह जो आप कहना छाती हैं,

निधि- ठंकु तुम यहाँ आये, मुझ पैर भरोसा किया,

ह्रदय- आपने भरोसा करने का कोई कारन तो छोड़ा नहीं ह, लेकिन नित्य के लिए मुझे फ़िक्र ह वो भोली ह,

निधि- मैंने तुम्हारे साथ जो किया वो मेरी मज़बूरी थी, कुछ मेरा स्वार्थ था, वो सब नित्य के लिए hi था, नित्य के भविष्य के लिए hi मैं ये सब करती आ रही हु, मैंने जो तुम्हारे साथ किया उसके लिए मैं माफ़ी मांगती हु, लेकिन तुमसे मिलने के बाद मैंने सोच लिया था तुम्हे धोका नहीं दूंगी, लेकिन मैं मजबूर थी, लेकिन अब चाहे जो हो जाये मैं तुम्हारे साथ कुछ गलत नहीं करुँगी न hi होने दूंगी,

ह्रदय- उस दिन के लिए मैं भी माफ़ी चाहता हु, उस दिन मैं अपना आप खो बैठा था, मैं समझ सकता हु कोई भी माँ अपनी औलाद के लिए कुछ भी कर सकती ह, आज मैं आपकी प्रॉब्लम को समझ सकता हु, इसलिए मेरे मन में आपके लिए कोई शिकायत नहीं ह,

निधि- एक और रिक्वेस्ट ह

ह्रदय- बोलिये

निधि- नित्य के साथ अपना रिश्ता बना लो,

ह्रदय- ये क्या बोल रही हो

निधि- मेरी बात को मान लो, चाहे बस एक बार, चाहे उसके बाद दुबारा उसे देखना भी मत, लेकिन बस एक बार, पहेली बार तुम उसके साथ रिश्ता बना लो, प्लस

ह्रदय- ये क्या बोल रही हो आप, उससे क्या होगा

निधि- मुझे नहीं पता, बस मैं इतना जानती हु की वो बाबा या कोई समाज का दुश्मन नित्य के साथ पहेली बार सेक्स नहीं करना चाहिए, उसका कॉरया बहुत कीमती ह,

ह्रदय कंफ्यूज सा निधि को देख रहा था,

तभी नित्य आ गई दोनों चुप हो गए,

शाम का समय था अन्य और रम्य कामिनी के पति को लेकर चंडीगढ़ में हवेली पैर पहुंच चुकी थी,

रश्मि ने जैसे hi अपने पिता को देखा वो दौड़ क्र उनके गले लगी गई, और जोर से रोने लगी, आशिमा भी पीछे आ गई,

दोनों भेने अपने पिता से लिपट क्र रोने लगी, उनके पिता भी दोनों से लिपट क्र रोये जा रहे थे, पूरा परिवार वह खड़ा था,

सबकी आँखे नाम थी, जब काफी देर बाद वो तीनो के आंसू सूखे,

अंजलि- कैसे हैं जीजा जी,

रश्मि के पिता जिनका नाम आदेश था,

आदेश जी- जीजा जी, भेजी मैं कैसे आपका जीजा लगा,

अंजलि- आप इस घर के दामाद हैं,

आदेश- मैं कुछ समझा नहीं,

अंजलि- कामिनी ने आपको हमेशा रिश्तो से दूर रखा ह, लेकिन सच ये ह की कामिनी मेरी ननद ह, और आप हमारे बहनोई, और सचिन कपिल के ससुर, रिश्ते थोड़े उलझे हुए हैं लेकिन सब अपने hi हैं,

आदेश- अब मेरे लिए कोई रिश्ते मायने नहीं रखते, जिस औरत को सरे रिश्तो से लड़ क्र अपनी पत्नी बनाया उसने hi मेरे साथ ऐसा किया, मुझे लचर बना दिया, अब मुझे किसी रिश्ते से शिकायत नहीं ह, मेरी बेतिया मेरे सामने हैं, मैं इनकी एक झलक पाने के लिए hi अब तक जिन्दा था, अब मैं सकूं से मर सकता हु,

रश्मि- ऐसा मत कहो पापा,

रम्य- ममी नाना जी को आपके हाथ की चाय पिणि हैं, इन्होने पिछले 20 सालो से सकूं की चाय भी नहीं पि ह,

रश्मि रोटी हु किचन की तरफ भागी पीछे आशिमा भी थी,

अंजलि ने आदेश जी को बैठाया,

अंजलि- ये आपकी नातिन हैं रैना और आशना,

आदेश जी ने दोनों को गले से लगा लिया,

आदेश- वो नागिन मुझे ढूंढ़ते हुए यहाँ भी पहुंच जाएगी

अंजलि- आने दो अब वो आपका कुछ नहीं बिगड़ पायेगी, अब आप उसके भाई के घर में हैं

आदेश- मुझे तो ये भी नहीं पता था कामिनी का कोई भाई भी ह, उसने तो कहा था वो अनाथ ह, उसके परिवार को उसी के भाई ने मर दिया और खुद आत्महत्या कर ली,

अंजलि को बहुत गुस्सा आया अगर कामिनी सामने होती तो आज वो अंजलि का रौद्र रूप देख लेती,

अंजलि- कोई बात नहीं आने दो उसे आज उसे सरे रिश्तो से मुलाकात करवाई जाएगी,

आश्रम में…..

दृष्टि- दादी मुझे कॉलेज जाना ह, मेरी पढाई का नुकसान हो रहा ह, चंडीगढ़ के कॉलेज से सब रिकॉर्ड गायब क्र दिया था, अब कैसे एडमिशन लुंगी

शाक्षी- अब क्या करेगी तू पढ़ क्र, अब तुझे सेवा करनी होगी,

दृष्टि- तुम थोड़ा काम बोलै करो समझी, दादी मुझे कॉलेज जाना ह,

सोनिया- सही तो बोल रही ह ये, क्या करेगी कॉलेज जाकर, तुझे कोनसा अफसर बनना ह, यही आश्रम में रहना ह

दृष्टि- मैं यहाँ क्यों रहूंगी, और जब अंजलि को हरा कर बिज़नेस अपने कब्जे में लेंगे तो उस बिज़नेस को कोण चलाएगा, मैं hi तो चलूंगी,

सोनिया- वो मैं चला लुंगी,

दृष्टि- अच्छा जी मतलब मैं अनपढ़ रह जाऊ और तुम बुढ़िया होकर बिज़नेस चलाओ,

सोनिया- बिज़नेस चलने के लिए डिग्रियों की जरुरत नहीं होती,

दृष्टि- मुझे ह, मुझे पढ़ना ह,

सोनिया- ठीक ह लेकिन तू कॉलेज तो जा नहीं सकती, अभी बहार निकलना खतरे से खली नहीं ह,

दृष्टि- ठीक ह प्राइवेट फॉर्म भर देती हु, बस एग्जाम देने जाउंगी,

सोनिया- ये ठीक ह

दृष्टि- ठीक ह तो पैसे दो मैं फॉर्म भरकर आती हु, वर्ण उसमे भी देर हो जाएगी,

सोनिया ने दृष्टि को पैसे दे दिए,

सोनिया- तू ऐसी यूनिवर्सिटी से फॉर्म भरना जो अंजलि की पहुंच से दूर रहे.

दृष्टि- मैं जानती हु दादी तुम चिंता मत करो,

दृष्टि को आश्रम से बहार निकलने का मौका मिल गया था,

दृष्टि वह से सीधे पहुंची अंजलि के गाओं जहा अंजलि राजेश जी और अपने 6 बच्चो के साथ रहती थी,

वही राजेश को अंजलि ने चंडीगढ़ बुलाया हुआ था, कामिनी के पति से मिलने के लिए, इस लिए राजेश गाओं में थे नहीं,

दृष्टि ने जितनी जानकारी निकली थी उसमे इस गाओं का जीकर था, उसने गाओं में घूमना शुरू किया, और कुछ बुजुर्ग लोगो से अंजलि के बारे में पता किया, तो उसकी हवेली के बारे में पता चला,

दृष्टि हवेली नहीं जाना चाहती थी, इसलिए उसने बहार के लोगो से hi जानकरी लेनी की कोशिश की, तो उसे अंजलि के पुराने घर का पता चला, जब दृष्टि वह पहुंची तो उस झोपडी को देख क्र उसे बड़ी हैरत हुई, दृष्टि काफी देर वही कड़ी थी तभी एक औरत ने उसके कंधे पैर हाथ रखा,

दृष्टि ने पलट क्र देखा तो एक बुजुर्ग सी औरत थी, सर पैर दुपट्टा लिए हुए कड़ी थी,

औरत- कोण हो बेटी

दृष्टि जी मैं वो

औरत- तुम अंजलि के परिवार से हो क्या

दृष्टि- जी है है

दृष्टि ने झूट बोल दिया,

औरत- मेरा नाम रजिया ह, अंजलि बहन तो गाओं को भूल hi गई, तू हवेली में नहीं गई, इधर क्यों आई, अब यहाँ कोई नहीं रहता

दृष्टि- जी बस उनकी जिंदगी को देखने आई थी वो कैसे रहती थी,

रजिया- आ बेटी घर आ, आराम से बैठ क्र बात करेंगे, अंजलि का परिवार मतलब मेरा परिवार,

दृष्टि रजिया के साथ चली गई,

रजिया ने उसके लिए चाय नाश्ता दिया,

दृष्टि- आप बहुत नजदीक रही थी उनके

रजिया- एक मैं hi थी जो उसस्के करीब थी वर्ण पुरे गाओं ने उसे अपमान के अलावा कुछ दिया hi नहीं कभी, अब देखो पूरा गाओं जय जय कर करता ह, लेकिन जब बेचारी तकलीफो से गुजर रही थी, तब उसकी जिंदगी बर्बाद करने के अलावा कुछ नहीं किया किसी ने,

दृष्टि- कैसा था उनका जीवन

रजिया- कैसा होगा 19 साल की उम्र में 6 बच्चे थे उसके, राजेश भाई मजदूरी करते थे, उसी से गुजरा चलता था, बेचारी कितना काम करती कैसे अपने बच्चो को पढ़ाया, गाओं का हर आदमी उसकी इज्जत लूटने को उतारू रहता था, कैसे अपनी इज्जत बचती थी बस मुझे hi पता ह, फिर वो ठाकुर का परिवार उन लोगो ने तो बर्बाद करने में कोई कसार hi नहीं छोड़ी थी,

रजिया ने दृष्टि को वो सब बताया जो वो जानती थी, इसमें शाक्षी की माँ रजनी का भी जीकर था,

दृष्टि- और तुषार वो कैसे थे,

तुषार का नाम आते hi रजिया की आँखों में आंसू आ गए,

रजिया- तुषार इस धरती पैर उप्पेर वाले का भेजा फरिश्ता था वो, किसी का दुःख नहीं देख सकता था वो, चाहे अपने हो या पराये सबके लिए हमेषा खड़ा रहता था, मेरी तो जान बस्ती थी उसमे, कहा चला गया वो कोई नहीं जनता,

उसने अपने परिवार के लिए जो किया उसके अलावा कोई नहीं कर सकता था, उसके जैसा खूबसूरत और ताकतवर मर्द धरती पैर बार बार जनम नहीं लेते बेटी,

दृष्टि- उनकी कोई तस्वीर होगी आपके पास,

रजिया- अभी तो नहीं ह, तुम्हारे घर में तो होंगी न,

दृष्टि- अंजलि अम्मा की वजह से कोई तुषार अंकल की कोई तस्वीर नहीं ह, अम्मा की तकलीफ होती ह तस्वीर देख क्र,

रजिया- कोई बात नहीं, सानिया की शादी में पूरा परिवार आया था, उसमे होगी मैं मंगवा कर दे दूंगी,

दृष्टि- ठंकु आंटी, ये मेरा नंबर लिख लीजिये और मुझे इस नंबर पैर भेज देना,

दृष्टि वह से विदा लेकर निकल गई,



उसे बहुत जानकरी मिली थी, अब उसे विश्वास हो रहा था की उसे जो बताया गया ह वो सच नहीं ह, सोनिया ने उससे झूट बोलै ह,
 
अपडेट-32






रात में राजेश जी कामिनी के पति आदेश जी साथ बैठे हुए थे, घर के बड़े भी वही थे, शनाया भी अब काफी ठीक थी,

शनाया निचे आई तो रिंकी सामने मिल गई,

रिंकी- कैसी हो शनाया, सब ठीक ह न

शनाया- है आंटी सब ठीक ह,

रिंकी- पेअर में दर्द तो नहीं ह न

शनाया- आपको कैसे पता

रिंकी- असल में इस उम्र में ऐसा दर्द अक्सर हो जाता ह,

शनाया- मैं कुछ समझी नहीं,

रिंकी- वैसे तुम्हारी चीख बता रही थी उसका काफी बड़ा ह, ज्यादा दर्द हुआ था क्या,

रिंकी की बात सुन क्र शनाया शर्म से लाल हो गई वो आँखे फाडे रिंकी को देखती रह गई, और रिंकी हस्ती हुई निचे चली गई,

शनाया के पेअर वही जैम गए, उसका दिल जोर जोर से धड़क रहा था, तभी पीछे सीमा आई,

सीमा- ये रिंकी क्या बोल गई तुझे जो तू इतनी टेंशन में आ गई,

शनाया- माँ वो रात वो

सीमा- तू इतनी जोर से चीखेगी तो पुरे घर को पता चलना hi था, अब जा खाना खा क्र सो जा आराम मिलेगा, सीमा भी मुस्कुराती हुई निचे चली गई,

शनाया अपने रूम की तरफ गई तो वन्य मिल गई,

वन्य- सब ठीक था न,

शनाया शर्माती हुई बस हम्म्म करके रह गई और अपने रूम में भाग गई,

निचे राजेश जी आदेश जी से बाते करने में लगे थे, आज आदेश जी बहुत खुश थे,

आदेश- मुझे नहीं पता था मेरे इतने सरे रिश्तेदार हैं, आप जैसा भाई भी ह, मैं साडी जिंदगी अकेले जीता रहा,

राजेश- मेरी बहन ने पुरे परिवार को तबाह क्र दिया, और अपना घर तक ठीक से नहीं बसा सकीय,

तभी आवाज आई,

तुम होते कोण हो मुझ पैर इल्जाम लगाने वाले, जिसका खुद का कोई घर परिवार नहीं, खुद की कोई हैसियत ह नहीं और मुझे ज्ञान दे रहे हो,

अंजलि- kaminiiiiiiiiiiiiii जबान सम्हल क्र अगर इन्हे कुछ कहा तो मैं भूल जाउंगी तुम मेरी कुछ लगती हो,

कामिनी- मैं तेरी कुछ नहीं लगती, तू रंडी ह और मेरी बेटियों को भी तूने रंडी बना दिया ह, जो अपने hi चीई

रश्मि- माआआआ होश में होकर बात करो, अगर हमारी माँ को कुछ कहा न तो आज तुम्हारे लिए ाचा नहीं होगा,

कामिनी- हाहाहाहाहा देखो देखो ये भी बोली जो पैदा होते hi अपनी माँ को खा गई,

रश्मि रोने लगी, आदेश ने रश्मि को गले से लगा लिया,

ाव्य- ोोू बूढी आंटी, आपको थोड़ी बहुत तमीज ह या नहीं, किसी के घर आकर कैसे बात करते हैं, यहाँ आकर सीधे भोकना शुरू क्र दिया, थोड़ी शांत हो जाओ, देख लो हम लोग बात कर रहे हैं,

कामिनी- तुझे अपने बड़ो से बात करने की तमीज नहीं ह, ये hi सिखाया ह तुझे इस अंजलि ने,

ाव्य- मुझे क्या सिखाया ह वो मैं आपको अगर सीखने लगी तो आप पागल हो जाओगी,

कामिनी- पागल तो तुम सब हो जाओगे जब सुनोगे मैंने अपना बदला ले लिया ह,

अंजलि- राजेश जी आप आदेश जी को लेकर अंदर चले जायँगे क्या, मैं जरा आज इससे ठीक से बात कर लू, मैं नहीं चाहती आप ये सब देखे और जीजा जी को तो इस सब से दूर रहना चाहिए,

राजेश आदेश के साथ अंदर चले गए,

अंजलि- बदला कैसा बदला

कामिनी- तूने मेरी बेटियों की शादी उनके hi भाइयो से करवाई न, मैंने वही काम तेरे भी घर में क्र दिया,

अंजलि- क्या कर दिया,

कामिनी- तम्मना लेकर आ उसे

तम्मना पीछे से आई और साथ में ह्रदय, कामिनी के फेस पैर विजय स्माइल थी, कुछ लोग कंफ्यूज से थे, तो कामिनी को लगा वो सब ह्रदय को देख क्र हैरत में हैं,

कामिनी- इसे जानते हो न तुम लोग,

पूरा अपरिवार वह खड़ा था, जिन्हे देख क्र कामिनी काफी कंफ्यूज थी, लेकिन उसका टारगेट वो चारो लड़किया थी, और उन सब में दीपा वह नहीं थी तो कामिनी को यकीन था की यहाँ ह्रदय के बारे में कोई नहीं जनता होगा,

कामिनी- ये ह दीपा का बीटा ह्रदय और मैंने इसके साथ सीमा की दोनों बेटियों का कौमार्य भांग करवा दिया ह,

इस बात से कुछ लड़कियों को शॉकेड लगा, और कुछ इस बात का की दिया के साथ भी हो चुक्का ह,

कामिनी जोर से हसने लगी, लेकिन उसकी हसी तब गायब हो गई जब सामने कड़ी अंजलि बस मुस्कुराये जा रही थी,

कामिनी- तू सच में रंडी ह तुझे कोई फरक नहीं पड़ा, लेकिन तुम दोनों रश्मि और आशिमा तुम्हे तो फरक पड़ा होगा,

तम्मना थोड़ी कंफ्यूज लग रही थी, उसे पूरा सच नहीं पता था,

अंजलि- तू हमेशा से बुक़ूफ़ थी कामिनी तुझे कभी कोई काम करना नहीं आया, गाओं में अपने परिवार के साथ थी तो उनका साथ नहीं दे पाई, तेरे माँ बाप मरे तो तू अपने भाई का साथ नहीं दे पाई, जब तेरे भाई पैर ताक़िफ़ आई तो तू किसी के साथ भाग गई,

जिसके साथ भागी जब उस पैर पैसो की दिक्कत आई तो तू उसका साथ छोड़ क्र भी भाग गई, और सबको बताया की वो तुझे छोड़ क्र भाग गया,

तेरी कोख से दो बेटे पैदा हुए, उप्पेर वाला किस्मत से ऐसे बच्चे देता ह, जो रूप रंग गन स्नस्कारो में महँ थे, तू उन्हें भी किसी अनजान औरत को देकर भाग गई, और आदेश जी से शादी क्र ली, तूने एक काम जीवन में अच्छा किया जो आदेश जी की पहेली बेटी रश्मि को माँ जैसा प्यार दिया,

शायद उसी का परिणाम ह की तू आज तक ठीक थक ह, लेकिन तूने आदेश जी को उनके hi परिवार से अलग कर दिया, और उन्हें पागल बनाने की कोशिश की, फिर किसी मर्द से नाजायज सम्बन्ध बनाना शुरू क्र दिए, और तू प्रेग्नेंट हो गई, तो तूने अपने hi पति का रपे किया, बस ये जताने के लिए की तेरी कोक में उनका बच्चा ह, लेकिन मूरख औरत तूने नहीं सोचा जब 7 महीने में बच्चा हो जायेगा तो सबको पता चल जायेगा,

तू सबसे भगति तो रही लेकिन किस्मत तेरे hi पीछे थी, और अनजाने में hi वो किस्मत मेरे बेटो के रूप में जो तेरी hi कोक से जन्मे थे तेरी hi बेटियों के पास भेज दिए, और शादी भी हो गई,

हमे लगा तू सुधर गई लेकिन तू सुधरने वाली चीज कहा थी, तूने उस मासूम सी बच्ची के अंदर हवस और नफरत भरनी शुरू क्र दी, और अपनी hi बेटी को अपने hi आशिक के साथ भेज दिया, तुझे जरा भी शर्म नहीं आई, तूने उसकी तकलीफ के बारे में कभी सोचा, उसका क्या होगा तेरे बदले के चक्कर में उसकी जिंदगी बर्बाद हो जाएगी,

और किस किस के साथ तूने उसे सलवा दिया ताकि उसके अंदर हवस जगे, वो रोटी रही मजबूर होकर लोगो के साथ सम्बन्ध बनती रही, पैर तुझे तरस नहीं आया, इस बच्ची की जिंदगी बर्बाद कर दी तूने, और हिमाचल भेज दिया ह्रदय को फ़साने के लिए, और ह्रदय के साथ भी उसका सम्बन्ध बनवाया फिर इसके द्वारा हमारी hi बच्चियों के पीछे ह्रदय को लगवाया,

कामिनी गुस्से में आग बबूला हुई अंजलि को देखे जा रही थी, और तम्मना की आँखि में आंसू बहे जा रहे थे, ह्रदय ने उसके कंधे पैर हाथ रखा, तम्मना को तो ये पता था अंजलि ने उसका घर बर्बाद किया ह, लेकिन ये तो कामिनी hi थी जिसने सब कुछ बर्बाद किया ह,

कामिनी- मेरा जो होना था वो हो गया लेकिन तेरे घर में वो फिर से शुरू हो गया ह,

तभी पीछे से तम्मना आई और एक जोर दर थपड कामिनी को जड़ दिया,

कामिनी शॉकेड सी तम्मना को देखती रह गई,

तम्मना- नीच औरत तुझे जिन्दा रहने का कोई अधिकार नहीं ह, तू औरत के नाम पैर कलंक ह, तुझे जरा भी शर्म नहीं आई, तू कोई भी रिश्ता नहीं सम्हाल सकीय, कैसी औरत ह तू,

कामिनी ने तम्मना की तरफ हाथ उठाया तो रश्मि और आशिमा बिच में आ गई, और आशिमा ने हाथ पकड़ लिया

आशिमा- ख़बरदार जो हमारी बहन पैर हाथ उठाया, हाथ उखड दूंगी,

किमिनी- तुम लोग इस औरत को कुछ नहीं कहोगे जिसने भाई बहेनो की शादी करवा दी,

आशिमा- तुम्हारी वजह से ये हुआ, और जो हुआ हमे ख़ुशी ह वो सब हुआ, ऐसा परिवार और ऐसी माँ किस्मत से मिलती ह, अभी तो तुमने बस इतना hi जाना ह की मेरी और रश्मि की शादी हमारे भाइयो से हो गई, अगर यहाँ का पूरा सच जान लिया तो तुम खड़े खड़े प्राण त्याग डौगी,

अंजलि- ह्रदय दीपा का बीटा नहीं ह,

कामिनी को झटका लगा,

अंजलि- ये सब तुम्हे जानने की जरुरत नहीं ह की यहाँ कोण क्या ह, बस इतना जानो की ह्रदय इसी घर का बीटा ह, और उसका रिश्ता शनाया और दिया से बना ह इससे किसी को ऐतराज नहीं ह, आगे भी किसी से बनता ह उस बात से भी किसी को ऐतराज नहीं ह,

कामिनी- तू कुटिया रंडी ह,

इस बार थपड अंजलि का था, एक hi थपड में कामिनी जमीन पैर जा गिरी,

अंजलि- तुझे एक जानकारी दे hi देती हु, यहाँ जितनी भी लड़किया कड़ी हैं वो सब तुषार की बेतिया हैं और सबकी माँ अलग अलग हैं, वो सभी यहाँ ह, और ह्रदय भी तुषार का बीटा ह, इस परिवार में इतना प्रेम ह की तू कभी समझ hi नहीं सकती, जो जानकरी तुझे देनी थी दे दी आज से तू ऐसी जगह रहेगी जहा तेरी किये की सजा तुझे मिलेगी, तूने किसी रिश्ते का सम्मान नहीं किया, तो आज के बाद तुझे कोई रिश्ता नहीं मिलेगा,

माफ़ करना तम्मना लेकिन ये औरत हमारे आस पास रहने के लायक नहीं ह

तम्मना- मैं समझती हु

अंजलि- कपिल इस औरत को इसके उस आशिक के साथ उसी जगह बंद क्र दो जिसे इसने हमारी कंपनी में भेजा था, जो तम्मना मां बना घूम रहा ह, वो इसका आशिक ह, और तम्मना का बाप भी वही ह,

ह्रदय- ये बात आप कैसे जानती हैं,

कपिल- उसी ने अपने मुँह से बताया उसने सब कुछ बता दिया ह,

तम्मना जमीन पैर गिर पड़ी और रोने लगी,

रश्मि- न छोटी रो मत, तू अकेली नहीं ह तेरी दो बहन ह

सीमा- दो नहीं हम सब इसकी भेने हैं,

तम्मना- मैं इस परिवार के लायक नहीं हु, इस औरत की वजह से मैं क्या बन गई हु, मेरा कोई चरित्र नहीं ह, ह्रदय मेरा भांजा लगता ह, मैं उसी के साथ ची ची ची मुझे तो मर जाना चाहिए,

अंजलि- तुम्हे क्या करना ह वो फैसला मैं करुँगी, तुमने कुछ गलत नहीं किया ह,

कपिल कामिनी को ले जाने लगा

कामिनी- तू अच्छा नहीं कर रही ह अंजलि, मैं तुझे जान से मार दूंगी, तूने मेरा सब कुछ चीन लिया, मैं तुझे मार दूंगी,

अंजलि- तूने खुद अपना सब बर्बाद किया ह, मैं बस उनका भला कर रही हु जिनको तूने बर्बाद किया ह, अब आदेश राजेश जी के साथ रहेंगे और अपनी जिंदगी को ख़ुशी से जियेंगे और तम्मना को मैं ऐसी जिंदगी दूंगी जिससे ये अपने अतीत से उभर पाए,

दो आदमी कामिनी को पकड़ क्र ले गए और साथ में सचिन और कपिल भी चले गए,

अंजलि- रश्मि बेटी तम्मना को अंदर लेकर जाओ और इसका ख्याल रखो,

अंजलि अपना सीना पकड़ क्र बैठ गई,

ह्रदय- माँ क्या हुआ माँ

तम्मना ने भी सुना जब ह्रदय ने अंजलि को माँ कहा,

अंजलि- बस थक गई हु, कब तक ऐसे लोगो को आइना दिखती रहूंगी , कब ख़तम होंगे ये दुश्मन,

ह्रदय- लगता तो नहीं कभी ख़तम होंगे, एक खतम होता ह दूसरा तैयार हो जाता,

अंजलि- दूसरा कोण दूसरा और कोण आ गया,

ह्रदय- हमे आराम से बात करनी ह,

अंजलि एक दम सीरियस हो गई,

अंजलि- आओ रूम में चलो,

ह्रदय अंजलि के साथ चल दिया,

ह्रदय आगे बढ़ा तो ाव्य ने उसे जोर से कन्धा मारा, ह्रदय ने ाव्य को देखा तो उसने मुँह फेर लिया, ह्रदय को अजीब लगा लेकिन अंजलि के पीछे जाना था तो वो रुक न सका,

ह्रदय के जाते hi साडी लड़किया एक दूसरे को देखने लगी, और आँखों hi आँखों में इशारा हुआ,

रम्य, अन्य, नैना, काम्य तुरंत अपने रूम की तरफ चली गई, वन्य उन्हें देखती रह गई, शनाया और दिया एक दूसरे को देख रही थी, शनाया जानना चाहती थी दिया के साथ कब हुआ,

ाव्य भी गुस्से में अपने रूम में चली गई,

वन्य- ये साडी ऐसे क्यों गई हैं,

शनाया- हमारे बारे में चर्चा करने के लिए,

वन्य- क्यों

शनाया- मेरे और दिया के ह्रदय के साथ रिश्ते को लेकर

वन्य- ऊह्ह्ह्ह ok ok लेकिन ये सब हुआ कैसे

शनाया- मेरा तो पहले hi हो गया था, मुझे नहीं पता था ह्रदय मेरा क्या लगता ह लेकिन दिया ने नहीं बताया कब हुआ,

दिया ने झिझकते हुए देखा और अपने रूम की तरफ चली गई,

अंजलि- क्या हुआ क्या प्रॉब्लम ह अब

ह्रदय- माँ कोई बाबा आ रहा ह मेरे लिए

अंजलि- बाबा?

ह्रदय- है निधि के अतीत से जुड़ा ह कोई, और अशोक कपूर की हेल्प उसी ने की ह आज तक, वो ताकतवर इंसानो को ढूंढ़ता ह, उसी ने हनी को ताकत दी ह, और अशोक का बीटा रवि सुना ह वो भी बहुत खतरनाक ह,

अंजलि- लेकिन उसका हमसे क्या सम्बन्ध

ह्रदय- अब तक तो नहीं ह लेकिन आमना सामना हो सकता ह, जिस तरह से निधि दरी हुई थी, रवि और उस बाबा से, ऐसा लग रहा था कुछ बड़ा होने वाल यह,

अंजलि- हमे चौकन्ना रहना होगा, मैं पता करती हु इस बाबा के बारे में, देखती हु क्या बाला ह ये, और ये हमारे लिए क्यों आ रहा ह, हमसे क्या चाहिए इसे,

वही दूसरे रूम में…..

काम्य- ये तो सीधा डाका डाला जा रहा ह,

अन्य- क्या हुआ

रम्य- तेरी समझ में कुछ नहीं आता बेअकल, यहाँ माल लुटा जा रहा ह,

अन्य- माल कोनसा माल

काम्य- माल नहीं कोहिनूर लुटा जा रहा ह, वो भी अपने hi लोग लूट रहे हैं,

नैना- इसमें हम क्या कर सकते हैं,

काम्य- देख तू फालतू का ज्ञान मत दे, वासी hi न जाने क्यों मैं अब तक कुँअरि रही हु, और अब ऐसा मिला ह जिसकी तरफ दिल और दिमाग दौड़े जा रहे हैं, उसे कोई और ले जा रहा ह,

अन्य- तुम ह्रदय की बात कर रही हो,

रम्य- और कोण ह यहाँ,

नैना- लेकिन वो जिसे चाहेगा उसका होगा

काम्य- ोोोू म्हणता की देवी बात सुन जरा, तुझे पता ह न हमारी फॅमिली क्या ह और हमारी माओ ने भी ये hi समझाया ह की, हम जो चाहे क्र सकती हैं, ह्रदय पैर हम सबका अधिकार ह,

नैना- है कहा तो था,

रम्य- तो फिर वो दोनों अकेली कैसे अधिकार ले सकती हैं, उस पैर हमारा भी हक़ ह,

काम्य- तो हम अपना हक़ जरूर लेंगे,

अन्य- लेकिन हम सब

काम्य- है आपस में ईमानदार रहना होगा, क्या हमे आपस में उसे बाटने में कोई ऐतराज ह क्या

रम्य- मुझे तो नहीं ह,

काम्य- नैना तुझे

नैना- मैं तो हमेषा तेरे साथ हु

अन्य- और मैं रम्य के साथ हु,

काम्य- तो ठीक ह तय रहा सब अपने अपने हिसाब से तरय करना जिसका देव जैसे बैठ जाये, मोके पैर चुका मर देना, अब उसके बिना रहा नहीं जाता, जब से उसे देखा ह, मैं खुद के काबू में नहीं हु,

अन्य- हाल तो मेरा भी ऐसा hi ह, ऐसा लगता ह उसके बिना जीना बेकार ह

नैना- सही कहा ऐसा लगता ह जैसी उससे जन्मो जन्मो का रिश्ता हो, वो हमारे लिए hi बना हो,

रम्य- कोई भी लड़की अपने साथी को किसी के साथ बाटने के लिए कभी तैयार नहीं होती और हम सब उसे एक दूसरे में बाटने के लिए तैयार हैं, जबकि हम लोग खुद एक दूसरे से कुछ समय पहले hi मिले हैं, ठीक से एक दूसरे को जानते बी नहीं, लेकिन उसके लिए कुछ भी करने को तैयार हो रही हैं,

अन्य- सही कहा, अजीब सी कशिश ह उसमे एक बार देखु तो नजर हटाने का मन hi नहीं करता

काम्य- वो शनाया सबसे पहले देव मर गई, कितना मजा आया होगा उसे,

रम्य- जल्दी hi हमे भी आएगा,

चारो ने एक दूसरे के हाथो पैर हाथ रखे और चियर्स किया,

वही ाव्य गुस्से में बीएड पैर लेती हुई थी, वन्य वह आ गई,

वन्य- ाव्य क्या हुआ बाबू

ाव्य कुछ नहीं बोली

वन्य- नाराज ह क्या

ाव्य- मुझे कोई बात नहीं करनी,

वन्य- मुझसे भी नहीं करेगी,

ाव्य- क्यों करू मैं बात, मेरी वैल्यू hi क्या ह यहाँ,

वन्य- अरे हुआ क्या ह

ाव्य- मुझे किसी भी काम में इन्वॉल्व नहीं किया जाता, सब अपनी अपनी प्लानिंग करने में लगे रहते हैं, और वो दोनों भेने उन्हें अयाशी से फुर्सत नहीं ह, उन्हें क्या कहु ह्रदय माँ पापा को ढूढ़ने की जगह छू…. मतलब आयाशी करने में लगा ह,

वन्य- वो जो कर रहा ह, उसे करना hi पड़ेगा, माँ ने समझाया था न,

ाव्य- लेकिन मैं सबसे अलग क्यों की हुई हु

वन्य- अगर किसी हतियार का इस्तेमाल नहीं किया जाता ह तो इसका मतलब ये नहीं होता वो हतियार काम का नहीं ह, उसे किसी बड़े काम के लिए बचा कर रखा जाता ह, हो सकता ह तेरी जरुरत तब पड़े जब कोई भी मुसीबत से निकल न पाए,

ाव्य- तू मुझे ऐसे hi भएका क्र कहानी सुना कर पता लेती ह

वन्य- मैं तो बस सही रास्ता ढूंढ़ने की कोशिश करती हु,

अगली सुबह सब नाश्ते की टेबल पैर बैठे थे, तम्मना वह नहीं थी उसकी हिम्मत hi नहीं हो रही थी वो सबका सामना करे, रश्मि उसी के साथ थी, कपिल के फ़ोन पैर न्यूज़ नोटिफिकेशन आ रहा था वो बार बार उसे देख रहा था,

अंजलि- कपिल नाश्ते के टाइम ये क्या तरीका ह

कपिल- माँ वो न्यूज़ देख रहा था, कुछ खास ह

अंजलि- ज्यादा खास ह तो टीवी ों क्र सभी देख लेंगे,

वर्षा ने टीवी ों क्र दिय्या, जिस पैर ब्रेकिंग न्यूज़ चल रही थी, चिरंजीवी बाबा चंडीगढ़ में आ रहे हैं, सभी न्यूज़ चैनल पैर बस चिरंजीवी बाबा के बारे में बताया जा रहा था,

सचिन- मैं तो बताना hi भूल गया माँ कम साहब का फ़ोन आया था, हमारी पूरी फॅमिली को बुलाया ह, ये प्रोग्राम खुद कम साहब ने रखवाया ह, शहर के सभी बड़े लोगो को बुलया ह,

ह्रदय- माँ मुझे ये वही लग रहा ह,

अंजलि- इसका नाम तो मैंने सुना ह लेकिन ज्यादा जानकरी नहीं ह, कपिल मुझे इस प्रोग्राम की पूरी जानकरी चाहिए, किस किस को इस प्रोग्राम में बुलाया गया ह, और ऑर्गेनिसे किसने किया ह, पूरी जानकरी निकालो,

ह्रदय- मुझे लगता ह हमे कुछ बदलाव करने चाहिए,

अंजलि- कैसे बदलाव

ह्रदय- नाश्ते के बाद बात करते हैं,

सीमा- हम सबको भी बता सकते हो न

अंजलि- कुछ बाते सही समय और सही हालत देख क्र की जाती हैं, तुम सब अपने काम पैर निकालो,

और कपिल मैं चाहती हु तम्मना को किसी अच्छी जगह भेजो, जहा वो सकूं से रह सके, यहाँ उसे देख क्र परिवार को भी प्रॉब्लम होगी और उसे भी, वो सबका सामना नहीं कर पायेगी, उसे कुछ दिन अकेले रही की जरुरत ह,

कपिल- ठीक ह माँ

सब नाश्ता करके निकल गए.

अंजलि और ह्रदय रह गए,

अंजलि- अब बता क्या सोच रहा ह तू,

ह्रदय- मैं सोच रहा था की ये लड़ाई अब खतरनाक होती जा रही ह, सोनिया कही चुप गई ह, वो हम पैर हुम्ला कर सकती ह, इधर ये बाबा भी खतरनाक लग रहा ह, परिवार की सुरक्षा को देखते हुए सबको कही दूर भेज दिया जाये तो कैसा रहेगा,

अंजलि- आज के टाइम में कोई भी देश बस कुछ hi घंटो की दुरी पैर ह, और ये दुश्मन इतने पॉवरफुल ह की कही भी पहुंच सकते हैं,

ह्रदय- फिर भी हम यहाँ सबकी सुरक्षा नहीं कर सकते,

अंजलि- ठीक ह मैं कुछ इंतजाम करती हु,

ह्रदय- साडी माँ और लड़कियों को शिफ्ट कर सकते हैं,

अंजलि- लकडिया नहीं, वो सब तेरे साथ रहेंगी, इस लड़ाई में वो तेरी साथी रहेंगी हर कदम पैर, बाकि सबको मैं भेजने की तैयारी करती हु,

वही तम्मना एक कमरे में बीएड पैर लेती हुई थी, उसकी पूरी दुनिया hi उलट पुलट हो चुकी थी, उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा था, वक दिन पहले उसके पास एक मकसद था उसकी माँ उसके लिए एक योद्धा थी जो अपने दुश्मनो के खिलाफ लड़ रही थी, लेकिन आज सब कुछ बदल गया था,

जिसे वो योद्धा समझ रही थी वो खुद एक गिरी हुई औरत थी, जिसने हर रिश्ते के साथ अन्याय किया था, जिनसे वो बदला लेने आई थी वो तो उसे के परिवार हैं, तम्मना को अपनी पूरी जिंदगी याद आ रही थी, कैसे उसकी माँ ने काम उम्र में hi उसे एक पैसे वाले आदमी के सामने परोस दिया था, कैसे उसका धयान सेक्स हवस नफरत की तरफ धकेला, वोट क नाजायज ह, जिसे वो आज तक मां बोलती आई ह वही उसका बाप ह,

तम्मना गुस्से में अपना सर बीएड पैर पटकने लगी, उसका मन था की वो जोर जोर से चिल्ला कर रोये, लेकिन वो तकिये में अपना मुँह दबा कर अपने दर्द को छुपाने लगी,

तभी उसके सर पैर किसी ने हाथ रखा, तम्मना एक दम से उठ गई तो देखा सामने रश्मि बैठी हुई ह,

तम्मना सर निचे करके बैठ गई और अपने आंसुओ को पूछने लगी,

रश्मि- मत रो मेरी बहन, तेरी गलती नहीं ह,

तम्मना- मेरी गलती ह दीदी सब मेरी गलती ह, मुझे समझना चाहिए था, मुझे पता करना चाहिए था कोण सही ह कोण गलत,

रश्मि- तू कुछ नहीं क्र सकती थी,

तम्मना- आप भी मेरे पास नहीं आई आप दोनों बहन भी मुझे अकेली छोड़ क्र चली आई,

रश्मि- मुझ एमएफ कर दे मेरी बहन, हमे आना चाहिए था, लेकिन हमने सोचा माँ सुधर गई ह, वो तेरा अच्छे से ख्याल रखेंगी, लेकिन हम गलत थी,

तम्मना रश्मि के गले लग और रोने लगी, रश्मि ने कुछ देर रोने दिया, कुछ देर बाद,

तम्मना- मैंने अपने hi भांजे के साथ ये सब किया, मैं उसकी मौसी लगती हु, मैं कितनी गिरी हुई हु, मैंने उसका उसी की बहेनो के साथ रिश्ता बनवाया, मैंने अपराध किया ह, जो मेरी माँ ने किया नाजायज रिश्ता बनाया वैसा hi मुझस ेभी करवाया, मेरे अंदर गन्दा खून घूम रहा ह मैं एक नाजायज हु,

रश्मि- अच्छा मेरी बात सुन मैं तुझे एक कहानी सुनती हु, उस कहानी को धयान से सुन और फिर फैसला करना सही गलत क्या होता, नाजायज क्या होता ह,

तम्मना रश्मि की तरफ देखने लगी,

रश्मि ने तम्मना को अंजलि की कहानी सुननी शुरू की, जिसे सुन क्र तम्मना अपना दुःख भूल गई, उसे असली दर्द का अहसास हुआ, उसे तो अपनी माँ के कर्मो पर गुस्सा आ रहा था की कामिनी ने खुद की बेटी के साथ ऐसा कैसे किया, लेकिन यहाँ तो ऐसे लोग भी थे जिन्होंने अत्याचार की लिमिट hi तोड़ दी,

रश्मि- दुनिया में बहुत बुरे लोग रहते हैं, लेकिन हम कितने मजबूती से लड़ सकते हैं ये अंजलि माँ से सिख, और कल क्या हुआ उसे भूल आगे क्या करना ह वो सोच,

तम्मना- लेकिन दीदी मैं ह्रदय के साथ रिश्ता बनाया ह घर वालो के सामने कैसे जाउंगी,

रश्मि- तू इतना सोच रही ह शनाया और दिया का सोच, क्या उनके चेरे पैर कोई दर पश्चाताप दिखा तुझे, इस घर में ऐसा कोई नहीं सोचता,

तम्मना- ठीक ह दीदी मैं अब अतीत को याद नहीं करुँगी,

आश्रम में देखते हैं दृष्टि क्या कर रही ह,

दृष्टि मौका देख क्र कोमल के पास पहुंची,

दृष्टि- आपकी बातो में काफी सचाई मिली ह, लेकिन कुछ चीजे हैं जो काफी उलझी हुई हैं, सभी भाई बहन ह, फिर अंजलि ने उनका रिश्ता कैसे बनाया, और किस किस का रिश्ता ह तुषार के साथ,

कोमल- मैं इतने समय तक उनके साथ नहीं जुडी थी, कैसे उनके बिच रिश्ता बना ये मैं नहीं जानती, लेकिन इतना जानती हु की, मैं नंदनी अनीता रिंकी अलका वर्षा और सीमा हम सभी तुषार के बच्चो की माँ हैं,

दृष्टि- आप सबको एक दूसरे से जलन नहीं हुई, सब एक hi लड़के से प्यार करती थी,

कोमल- वो ऐसा hi था, उससे पाने के लिए कोई भी लड़की कितना भी बड़ा त्याग करने को तैयार थी,

दृष्टि- मुझे पूरा सच जानना ह, अंजलि का भी और सोनिया का भी, ये दोनों ने समाज की बनाई हुई परम्पराओ को तोडा ह, आपको पूरा सच नहीं पता, आपने सोनिया का सच बताया लेकिन अंजलि का पूरा सच आप भी नहीं जानती, उन्होंने जो किया उसके पीछे क्या कारन थे, क्यों अपनी hi बेटी के साथ सेक्स करने दिया, क्यों इतनी लड़कियों के साथ रिश्ता बनने दिया,

कोमल- उसके लिए तुम्हे उनके बिच जाना होगा, और तुम्हे वर्षा से मिलना होगा, या उस लड़के से,

दृष्टि- आगा आप झूट बोल रही हुई तो क्या होगा,

कोमल- अगर मैं झूटी हुई तो मैं यहाँ से कहा जाउंगी, मैंने तो अपनी जिंदगी इस डायन के हाथो में दे दी ह, और जब तक सब ठीक नहीं हो जायेगा मैं यहाँ से नहीं जा सकती,

दृष्टि- ये दादी मतलब सोनिया जी इस आश्रम में क्यों हैं, इनके पास तो बहुत पैसा ह, फिर कही और क्यों नहीं रहती,



कोमल- ये hi वो लोग हैं जिनकी वजह से सोनिया आज तक बची रही ह अंजलि माँ से, लेकिन इन लोगो का कोई बहुत बड़ा मकसद ह जिस वजह से ये सोनिया की मदद कर रहे हैं,
 
अपडेट-33





दृष्टि- ये लोग ह कोण साधु तो कही से नहीं लगते, सब पहलवान से हैं, और लगभग नंगे से hi घूमते हैं, एक धोती में और औरते भी बस एक hi साड़ी में रहती हैं, मुझे तो कही से भी भगवान् की पूजा करते नहीं दीखते,

कोमल- ये लोग हवस के पुजारी हैं, रोज यहाँ रात में हवस का नंगा नाच होता ह, और ये सोनिया और शाक्षी इनको खुश करने यहाँ आया करती थी,

दृष्टि- ये क्या बोल रही हो आप

कोमल- मैंने जो देखा ह वही बोल रही हु, तू यहाँ से निकल जा, मुझ पैर यकीन क्र बेटी तू यहाँ से निकल जा, अंजलि माँ के पास चली जा, इन हैवानो से दूर चली जा,

दृष्टि- अगर आपकी साडी बाते सच तो मैं यहाँ से कैसे जा सकती हु, अगर मैं गई तो आप समझ सकती हैं क्या हो सकता ह,

कोमल- तेरा सेफ रहना ज्यादा जरुरी ह,

दृष्टि- आपने इतना बड़ा त्याग क्यों किया, आपका तो कोई रिश्ता नहीं था,

कोमल- रिश्ता, प्रेम से घेरा कोई और रिश्ता नहीं होता, और मेरे अंदर तुषार के लिए इतना घेरा प्रेम बस चुक्का ह की मैं उसके लिए ऐसे 100 जनम भी कुर्बान कर सकती हु,

दृष्टि- लेकिन मैं अब ऐसा नहीं होने दूंगी, अब किसी की जिंदगी बर्बाद नहीं होगी,

दृष्टि कुछ और बोलने वाली थी की शाक्षी आ गई,

शाक्षी- तू यहाँ क्या कर रही ह,

दृष्टि- तुमसे मतलब

शाक्षी- तू आज कल कुछ ज्यादा hi बत्तमीज हो गई ह,

दृष्टि- मैंने कहा मेरे मुँह मत लगा करो वर्ण ठीक नहीं होगा,

दृष्टि वह से गुस्से में निकल गई, कोमल अपने काम में लग गई,

शाक्षी मुँह चढ़ती हुई सोनिया के पास पहुंची,

शाक्षी- आज कल तुम्हारी ये लाड़ली कुछ ज्यादा hi तेवर दिखा रही ह,

सोनिया- उम्र hi ऐसी ह इसमें जोश कुछ ज्यादा होता ह, सब ठंडा हो जायेगा जल्दी hi,

शाक्षी- ये उस कोमल के साथ बात कर रही थी,

सोनिया- वो सब छोड़ धामा को रात में निकलना ह गुरु जी ने बुलवाया ह,

शाक्षी- क्यों उन्हें क्या काम ह इससे,

सोनिया- ये तो वही जाने, तू बस उसका सामान रख दे,

शकशी- हमारी रक्षा कोण करेगा

सोनिया- यहाँ बहुत लोग हैं हमारी सुरक्षा करने के लिए, तू फ़िक्र न कर,

शाक्षी चली गई,

वही हवेली में ह्रदय अपने रूम में लेता हुआ था तभी उसके पास दिया आई,

ह्रदय उसे देख क्र शर्मिंदा सा महसूस कर रहा था,

दिया- तुम्हे क्या हुआ, ऐसे क्यों रियेक्ट क्र रहे हो,

ह्रदय- मेरी वजह से तुम्हे सबके सामने वो सब झूट सुन्ना पड़ा,

दिया- मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं ह,

ह्रदय- वो सब तुम्हारे बारे में गलत सोच रहे होंगे,

दिया- क्या फरक पड़ता ह, वैसे भी किसी ने ऐसे रियेक्ट hi नहीं किया की कोई बड़ी बात हुई हो, सब नार्मल hi थे,

ह्रदय- तुम्हे बुरा नहीं लगा वो सब सुन क्र

दिया- मैं यहाँ आपसे पूछने आई हु आपको बुरा तो नहीं लगा जो मैंने कार में किया,

उस सीन को याद करके ह्रदय फिर से झेप सा गया,

दिया- क्या हुआ आप को बुरा लगा

ह्रदय- नहीं नहीं ऐसा कुछ नहीं ह

दिया- तो अच्छा लगा

ह्रदय फिर से झेप गया और इधर उधर देखने लगा, दिया के फेस पैर स्माइल आ गई उसने ह्रदय के गाल पकडे और फिर से अपने हॉट उसके होतो से जोड़ दिए, ह्रदय फिर से शॉकेड रह गया,

इस बार ह्रदय ने दिया को निराश नहीं किया और उसने दिया के किश का जवाब देना शुरू क्र दिया, दोनों का किश अपने सवाब पैर आने hi लगा था की वन्य वह आ गई,

दिया कर ह्रदय को किश करते देख वो एक दम से ठिठक गई, उसके पैरो की आहात से दोनों अलग हो गए, दिया एक दम उठी और बहार चली गई, ह्रदय वही बैठा रह गया, वन्य उसके सामने hi कड़ी थी, ह्रदय अपनी नजरे चुरा रहा था,

वन्य- मुझसे क्यों शर्मा रहे हो,

ह्रदय- वो मैंने नहीं किया वो दिया ने hi

वन्य- मैं जानती हु, ये सब छोड़ो और चलो मेरे साथ, निधि ने बुलाया ह अर्जेंट,

ह्रदय- क्यों क्या हुआ उन्हें,

वन्य- वही चल कर बात करेनेगे चलो,

ह्रदय वन्य के साथ निकल गया,

दोनों निधि के फार्म हाउस पैर पहुंच गए,

निधि अपने बीएड पैर लेती हुई थी,

वन्य उसके सामने एम्प्लोयी की तरह hi कड़ी हो गई,

निधि- वन्य तुम यहाँ मेरी एम्प्लोयी नहीं हो, तो आराम से बैठो,

ह्रदय- आपने मुझे कॉल क्यों नहीं किया,

निधि- मुझे लगा तुम मेरा फ़ोन नहीं उठाओगे,

ह्रदय- मैंने आपको माफ़ क्र दिया, अब मेरे मन में आपके लिए कोई शिकायत नहीं ह,

निधि- तुम दोनों के बिच क्या रिश्ता ह क्या मुझे बताना चाहोगे,

निधि की बात से दोनों चौंक गए,

निधि- मैं जानती हु ह्रदय अंजलि हाउस में hi रहते है, और वन्य तुम भी वही रहती हो, मतलब दोनों के बिच कोई रिश्ता जरूर ह,

ह्रदय- अब भी जासूसी का कीड़ा ख़तम नहीं हुआ,

निधि- मैं जासूसी नहीं क्र रही बस ये परख रही हु की मैं तुम दोनों पैर विश्वास कर सकती हु या नहीं,

वन्य- हम दोनों का जो भी रिश्ता हो मम लेकिन हमारे अंदर धोका देने की फितरत नहीं ह,

निधि- ये मेरे लिए और भी अच्छा ह, तुम दोनों साथ हो, वन्य ने तुम्हे उस प्रोजेक्ट के बारे में तो बता दिया होगा जिसके लिए मैं तुम्हे यहाँ ले थी,

वन्य- जी नहीं मम मैंने आज तक किसी को कुछ नहीं बताया,

निधि- ओह्ह्ह तुम सच में वफादार एम्प्लोयी हो, मैं तुम पैर भरोसा कर सकती हु,

ह्रदय- क्या हुआ ह

निधि- परसो को रवि और चिरंजीवी बाबा आ रहा ह, और अगर उसे इस प्रोजेक्ट के बारे में पता चला तो सब अनर्थ हो जायेगा, मैंने किसी तरह अशोक को डरा क्र समझा क्र रखा था की उस बाबा को इस प्रोजेक्ट के बारे में पता न चल जाये वर्ण वो इसे अपने कब्जे में ले लेगा, लेकिन अब मुझे दर लग रहा ह, अशोक को कामयाबी नहीं मिली ह, ऐसा न हो वो बाबा के झांसे में आकर इस प्रोजेक्ट के बारे में बता दे, अगर ऐसा हुआ तो वो सब अपने कब्जे में ले लेगा, और वो इसका बहुत गलत इस्तेमाल कर सकता ह,

ह्रदय- इस प्रोजेक्ट को ख़तम कर देते हैं न

वन्य- नहीं इसे ख़तम नहीं कर सकते,

निधि- वन्य तुम इस प्रोजेक्ट को ऐसी जगह छुपा दो की कोई इसे ढूंढ न सके, और ह्रदय तुम नित्य को कही ले जाओ जिससे वो उस बाबा के सामने न आ सके,

ह्रदय- आपकी मर्जी के बिना नित्य उसके सामने कैसे आ सकती ह,

निधि- अशोक की वजह से, मैं खुद यहाँ से भागना छाती हु, लेकिन अगर मैं भागी तो वो बाबा मुझे पटल से भी ढूंढ लाएगा, इसलिए मुझे उसके सामने आना hi होगा, और उसके बाद मेरा क्या होगा मुझे नहीं पता,

ह्रदय- इस बाबा के पास ऐसा क्या ह जिससे आप इतना दर रही हो, और वो लोगो को अंधविश्वास दिखा क्र डरा सकता ह उसे इस प्रोजेक्ट के बारे में क्या पता,

निधि- वो कोई बाबा नहीं ह वो इस दुनिया का सबसे खतरनाक स्केंटिस्ट ह, उसका दिमाग इस दमिया में सबसे तेज चलता ह, उसने बहुत से अविष्कार किये हुए हैं, उसने हनी को ताकतवर बनाया, उसने रवि को ताकतवर बनाया, वो सब उसका अविष्कार ह,

ह्रदय- आप चिंता मत करो, किसी को कुछ नहीं होगा,

तभी निधि के फ़ोन पैर अशोक की कॉल आ गई, कुछ देर बात करने के बाद,

निधि- मुझे अर्जेंट जाना होगा, मैं जल्दी hi वापस आउंगी,

ह्रदय- क्या हुआ कुछ सीरियस ह क्या

निधि- ऑफिस में मीटिंग ह और मेरा वह होना जरुरी ह,

निधि वह से निकल गई, ह्रदय और वन्य अकेले रह गए,

ह्रदय- निधि कुछ ज्यादा hi दर रही ह, वो बाबा एक इंसान hi तो ह, ऐसा क्या कर लेगा,

वन्य- मैंने इस औरत कभी ऐसी हालत में नहीं देखा, ये अकेली पुरे बिज़नेस को चलती ह, सब इससे डरते हैं, अगर ये इतना दरी हुई ह कुछ तो बात होगी,

ह्रदय- मेरी समझ ये नहीं आ रहा, ये मुझे नित्य के क्लोज होने को क्यों बोल रही हैं,

वन्य- नित्य के साथ मतलब

ह्रदय- ये चाहती हैं मैं नित्य के साथ फर्स्ट नाईट बितौ, कोई माँ ऐसा कैसे बोल सकती ह,

वन्य- हमारे परिवार में कुछ भी पॉसिबल ह, लेकिन निधि ऐसा क्यों कर रही ह, वैसे तुम्हारी तो ऐश hi ऐश ह, जहा देखो लड़किया hi लड़किया हो रही हैं, किस किस को संतुष्ट करोगे,

ह्रदय थोड़ा सा शर्मा गया,

वन्य- ये दिया के साथ कब हुआ

ह्रदय- कुछ नहीं हुआ उसके साथ वो तो कामिनी को झांसा देने के लिए झूट बोलै,

वन्य- ओह्ह अच्छा, लेकिन दिया बड़ी बुरी ह उसने किसी को नहीं बताया की वो सब झूट था, लेकिन वो किश तुम दोनों तो ऐसे लगे हुए थे जैसे किसी जनम के लैला मजनू हो,

ह्रदय- वो प्यार करती ह, दो दिन पहले hi बोलै उसने,

वन्य- हर कोई तुमसे प्यार करती ह, बहुत लकी हो तुम

ह्रदय- लकी तो हु, लेकिन दर लगता ह, इतना प्यार इतनी लड़किया कैसे होगा सब

वन्य- तुम कर hi कहा रहे हो जो होता ह खुद हो जाता ह,

ह्रदय- तुम्हारे मन में क्या ह,

वन्य- मुझे नहीं पता

वन्य ने सर निचे कर लिया और अपने नाखुनो को कुरेदने लगी,

ह्रदय वन्य की हालत को समझ गया, उसने खुद आगे बढ़ने का विचार किया,

ह्रदय ने वन्य का हाथ पकड़ा और अपने पास बैठा लिया, वन्य की धड़कन तेज हो गई, उसने पलके उठा का ह्रदय को देखा,

ह्रदय ने वन्य का हाथ अपने हाथो में लिया,

ह्रदय- मुझे नहीं पता हमारी जिंदगी में क्या लिखा ह, किस किस का प्यार मिलेगा मुझे, लेकिन तुम्हारा प्यार बहुत hi पुरे ह,

वन्य – मेरा प्यार?

ह्रदय- हम्म्म जो उसी दिन तुम्हारी आँखों में दिख रहा था जब तुम पहेली बार मुझे मिली थी, तुम उस दिन भी मेरे बारे में सब कुछ जानती थी और आज भी सबसे ज्यादा तुम hi जानती हो, मुझसे मिले बिना भी तुम्हारे अंदर मेरे लिए प्यार था, और आज तो वो बहुत hi ज्यादा ह, तुम हमेशा दुसरो के लिए सोचती हो खुद के लिए कभी नहीं,

वन्य- ये ये क्या बोल रहे हो

वन्य अपनी नजर चुराने लगी,

ह्रदय ने उसे अपनी तरफ खींचा और वन्य को अपने उप्पेर गिरा लिया और उसके होतो पैर अपने हॉट रख दिए, वन्य की आँखे बंद हो गई,

वन्य की आँखों में आंसू आ गए थे, वो इतना लीं हो गई जैसे कोई भगवान् की भक्ति में खो जाता ह, वन्य ने अपना पूरा कण्ट्रोल छोड़ दिया था, जैसे पूर्ण समर्पण कर दिया हो,

ह्रदय ने बड़े प्यार से वन्य के हॉट चूमने शुरू क्र दिए, वन्य की हिम्मत नहीं हो रही थी अपनी तरफ से कुछ करने की लेकिन वो अपनेहोत खोल क्र ह्रदय के होतो का सवागत कर रही थी,

ह्रदय का हाथ वन्य की कमर पैर घूम रहा था, वन्य की हालत ख़राब होने लगी थी, उसे यकीन hi नहीं हो रहा था ये सब उसके साथ हो रहा ह, ह्रदय के हाथ निचे खिसक क्र वन्य की टाइट गांड पैर आ गया, जो उसकी टाइट जीन्स में और कासी हुई लग रही थी,

वन्य के मुँह से डाभी हुई आह्ह्ह्हह्ह निकल गई, उसका जोश बढ़ गया, जो अब तक खुद को आगे बढ़ने से रोक रही थी, उसका सबर का बांध टूट गया, और उसने ह्रदय को पुरे जोश में चूमना शुरू क्र दिया,

दोनों पूरी तरह एक दूसरे में खो गए थे,

न जाने कब टेक क दूसरे के होतो को चूमते रहे, कोई भी रुकने को तैयार नहीं था,

ह्रदय को hi वन्य के सामने हर माननी पड़ी,

ह्रदय ने वन्य को उठाया तो उसकी आँखे एक दम लाल हो राखी थी,

वन्य- ी लव यू ह्रदय, लव ु सो मच,

ह्रदय- कब से

वन्य- बचन से, माँ ने बचपन से hi तुम्हारे बारे में बताना शुरू क्र दिया था, और हमेशा एक hi बात बताई की मैं सिर्फ तुम्हारी हु, जवान हुई तो बस तुम्हारे hi सपने संजोती रही और जब पहेली बार तुहे देखा तो ऐसा लगा जैसे सरे सपने सच हो गए, बहुत hi खूबसूरत सपना पूरा हो गया मेरा,

ह्रदय- इतना प्यार

वन्य- ये तो कुछ भी नहीं ह, कोई और भी ह तुम्हे इससे भी ज्यादा प्यार करता ह, और इतना प्यार करता ह की अगर उसके प्यार के बिच में कोई आया तो वो न जाने क्या कर जाएगी,

ह्रदय- कोण ह वो

वन्य- समय आने दो पता चल जायेगा, उसके अंदर बहुत पागल पैन ह, कभी कभी मुझे भी दर लगता ह उससे,

ह्रदय- ऐसी कोण ह

वन्य- उसे छोड़ो और मुझ पैर फोकस करो,

ह्रदय- बहुत hi प्यारी किस्मत ह मेरी जो मुझे तुम मिली

वन्य- किस्मत तो मेरी अच्छी ह,

वन्य फिर से ह्रदय को किश करने लगी, और इस बार किश का रूप बदला हुआ था ो किश के साथ साथ एक दूसरे के कपडे भी निकल रहे थे,

और ये सब बहुत hi नार्मल होने वाला ह आज से 20 साल बाद, प्यार में ी लव ु बोलना और सामने वाले का एक्सेप्ट करते hi कपडे उतरने सबसे कॉमन बात होगी, उसी जिंदगी में ह्रदय और वन्य भी थे,

दोनों के कपडे उतर छुएक थे, वन्य ह्रदय के सामने बिलकुल नंगी कड़ी थी, थोड़ी सी शर्म थी लेकिन वो बहुत उतावली थी ये सब करने के लिए,

ह्रदय ने वन्य की चूचियों पैर अपने हॉट रख दिए, वन्य की आँखे मजे में बंद हो गई,

ह्रदय का एक हाथ वन्य की नंगी गांड पैर था, वन्य की गांड एक दम गोल और टाइट थी,

वन्य भी ह्रदय की गार्डन को चुम रही थी, दोनों के हाथ एक दूसरे के नंगे बदन को शेला रहे थे, ह्रदय ने वन्य को बीएड पैर लिटाया और और उसके उप्पेर आ गया, ह्रदय का लुंड वन्य की जांघो में रगड़ रहा था, गरम गरम लोहे की रोड की तरह खड़ा था जो वन्य को सॉफ्ट स्किन पे ररगड रहा था, वन्य पूरी तरह गरम हो चुकी थी,

उसने ह्रदय को पलटा और उसके लुंड की तरफ पहुंच गई, जिससे वन्य की छूट ह्रदय के मुँह की तरफ आ गई, ह्रदय ने तुरंत वन्य के पैरो को अपने मुँह के दोनों तरफ किया, अब दोनों 69 पोसिटिव में आ चुके थे, दोनों के हाहाकार मशीन वाले छुपे रहने वाले अंग एक दूसरे के सामने थे,

वन्य की सील पैक छूट की वो पतली सी दरार बंद काली का गुलाब का फूल जैसी लग रही थी, वही ह्रदय का विशाल मोटा लम्बा लुंड एक दम मीणा रकि तरह खड़ा था, जिसे देख क्र कोई भी औरत अपना सब कुछ वॉर दे उस पैर,

दोनों की जीभ एक साथ बहार निकली और एक दूसरे के अंगो का स्पर्श करने लगी, ह्रदय ने अपनीजिबह वन्य की छूट की दरार में घुसा दी वही वन्य ने अपनी जीभ से ह्रदय के लुंड के टोपे को छठा जो थोड़ा सा उसकी सकन से बहार झांक रहा था,

वन्य ने अपने हाथ से ह्रदय के लुंड की स्किन को निचे खींचा और लुंड को अपने होतो के बिच दबा लिया, वही ह्रदय ने वन्य की छूट की फंखुडियो को अपनी उंगलियों से खोला और अपनी जीभ को और अंदर तक घुसाया,

वन्य मजे में बावरी सी हो उठी उसने लुंड को और अंदर लेने की कोशिश की लेकिन लुंड मोटा था जो उसके मुँह में नहीं जा प् रहा था, उसकी लार टपक रही थी जो पुरे लुंड को भिगो रही थी,

दोनों एक दूसरे के अंगो को अपने थूक से भिगो क्र अच्छे से गिला कर रहे थे, और ओरल सेक्स का मजा ले रहे थे, वन्य काफी देर तक खुद को रोक रही थी लेकिन पहेली बार जब लड़की की छूट पैर किसी मर्द के हॉट लगते हैं तो वो कितनी देर खुद को रक् सकती ह, वन्य ने अपनी छूट ह्रदय के मु हेर पटकनी शुरू क्र दी और हाथ से जल्दी जल्दी ह्रदय के लुंड को हिलने लगी,

ह्रदय ने कोई जल्दबाजी नहीं की बस अपनी जीभ को तेजी से चलने लगा और वन्य ाको अच्छे से झड़ने दिया, जब वन्य झाड़ क्र शांत हो गई तो ह्रदय ने उस एसिड में लिटाया और निधि की टेबल की दरवार में से एक आयल निकला और वन्य की छूट में अपनी उंगली से अच्छे से अंदर तक भर दिया, फिर काफी आयल अपने लुंड पैर डाला और वन्य के उप्पेर आ गया,

अपना लुंड वन्य की छूट पैर टिकाया और वन्य की आँखों में देखा

ह्रदय- तुम तेया रो न अपनी छूट का दरवाजा खुलवाने के लिए,

वन्य- मैं तो कब से तड़प रही हूत ुम hi देर कर रहे हो,

ह्रदय ने लुंड कदबाव बनाया और लुंड छूट को चीरता हुआ अंदर घुस गया, वन्य की दर्द भरी चीख पुरे फार्महाउस पैर गूंज गई, ह्रदय ने तुरंत वन्य के होतो पैर अपनेहोत रखे और उसकी चूचियों को मसलने लगा,

वन्य की आँखों में आंसू आ गए थे, लेकिन उसके चेरे पैर एक मुस्कान थी,

ह्रदय ने वन्य को देखा,

ह्रदय- तुम मुस्कुरा रही हो,

वन्य- माँ ने बताया था जब पापा ने उनकी सील खोली थी तो वो बिना चीखे सब शी गाइट hi, उन्होंने पापा का पूरा साथ दिया था, तो मैंने शरत लगाई थी की मेरी भी आवाज नहीं आएगी, तो माँ ने कहा था की ह्रदय अपने बाप से भी आगे है, वो चीखे निकल देगा,

माँ जीत गई तुमने मेरी चीख निकल दी,

ह्रदय- तुम वर्षा माँ से ऐसी बाते भी कर लेती हो,

वन्य- उन्होंने कभी कोई पर्दा नहीं रखा, मेरे साथ वो हमेशा एक सहेली की तरह रही हैं, और हमारा पूरा परिवार hi ऐसा ह, और ये सब अंजलि माँ की वजह से ह, उन्होंने hi सबको ऐसा बनाया ह की कोई पर्दा न कर सके,

वन्य बातो में खो गई थी और ह्रदय ने उसका फ़ायद ौठा लिया था और धीरे धीरे अपना आधा लुंड वन्य की छूट में उतर दिया था, वन्य को दर्द हो रहा था लेकिन वो बातो में इतना खो गई की उसे ये समझ hi नहीं आया की ये दर्द पहेली बार घुसने से हुआ ह या ह्रदय ने आए लुंड घुसा दिया उस वजह से हो रहा ह,

अब ह्रदय ने हलकी सी कमर चलनी शुरू की तो वन्य को अहसास हुआ की लुंड कहा तक घुस चुक्का ह, वन्य ने अपने पेट पैर हाथ फिर क्र देखा और आँखे फाडे ह्रदय को देखा, और पेट को दबा क्र लूँ डको महसूस करने की कोशिश कर रही थी,

पतला सपाट पेट और वो पतली सी कमर छोटी सिक् हूत में ितं ाबड़ा लुंड घुसा हुआ था, वन्य को दर्द हो रहा था लेकिन वो अपनी माँ की तरह मजुत बानी हुई थी, ह्रदय उसकी हिम्मत का कायल हो चुक्का था, ह्रदय हलके हलके कमर हिला रह अतः, वन्य कोशिश क्र रही थी लुंड आसानी से छूट में आता जाते रहे,

कुछ hi देर में वन्य जहदने लगी और अपनी कमर खुद hi हिलने लगी, जिससे लुंड और अंदर घुस गया, वन्य की हालत ख़राब थी लेकिन चुदाई का मजा इतना ज्यादा था की दर्द उसके सामने फीका लग रहा था, ह्रदय बड़े प्यार से लुंड को अंदरबाहर क्र रहा था, वन्य ह्रदय को अपनी तरफ खींच रही थी लेकिन ह्रदय जनता था इससे ज्यादा वन्य झेल नह पायेगी,

वन्य झाड़ क्र शांत हुई लेकिन ह्रदय ने अपनी रफतर वैसी hi राखी, कुछ hi देर में वन्य फिर से गरम हो गई और बी उसकी छूट को काफी आसानी हो रही थी ह्रदय के लुंड को झेलने में, अगले 50 मिनट्स तक नॉनस्टॉप ह्रदय धक्के लगता रहा इस बिच वन्य 4 बार झाड़ गई, अब उसकी छूट में जलन होने लगी थी, लेकिन ह्रदय इतने आराम से धक्के लगा रहा था की अगर वो चाहता तो 1 घंटे अउ रेज hi छोड़ सकता था,

लेकिन वन्य की तकलीफ को समझते हुए ह्रदय ने अपनी रफ़्तार बछड़े, जिससे वन्य की तकलीफ बढ़ी लेकिन कुछ hi पालो में तकलीफ मजे में बदल गई और वन्य निचे से अपनी छूट उछलने लगी, ह्रदय जहदने की कगार पैर आ चुक्का था जिससे उसका लुंड और कड़क हो गया था जो छूट की पूरी घेरे में उतर गया, जिससे वन्य का मुँह खुला रह गया, और तभी ह्रदय के लुंड ने अपनी पिचकारी छोड़ दी, गरम गरम लावा जब वन्य की छूट की घेरे में टकराया तो वन्य फिर से जहदने लगी, और दोनों एक साथ झाड़न एक आनंद लेने लगे,

कमरे में बस दोनों की सांसो की आवाज hi गूंज रही थी, दोनों पसीने से भेज एक दूसरे से चिपके लेते रहे, लुंड वन्य की छूट में hi घुसा हुआ था, ह्रदय का लुंड शांत होने के बाद भी किसी नार्मल इंसाने के खड़े लुंड से बड़ा और मोटा hi होता था, तो खुद से बहार तो लुंड आता hi नहीं था,

वन्य बहुत ज्यादा थक हकूकी थी, कुछ देर बाद ह्रदय उठा और वन्य को अपनी गॉड में उठा क्र बाथरूम में ले गया और ठन्डे पानी के निचे दोनों खड़े हो गए, वन्य को बड़ी रहत महसूस हो रही थी,

फिर दोनों नंगे hi वापस आये तो बीएड की हालत देखि जिस पैर खून hi खून लगा था, और लुंड और छूट का मिक्स रास फैला पड़ा था, वन्य शर्मा गई,

एक दम से वन्य घबरा गई- ऊऊह्ह्हह्ह ये हम कैसे साफ़ करेंगे ये तो निधि का बीएड ह,

ह्रदय- कुछ नहीं होगा तुम इधर बैठो,

ह्रदय ने वन्य को बैठाया और बीएड शीट बदल दी, फिर वन्य को कपडे पहनाये,

वन्य ह्रदय की गॉड में सर रख क्र लेती थी,

वन्य- कितना अजीब ह ये सब, हमारा प्यार हमारा रिश्ता हमारी जिंदगी,

ह्रदय- कभी कभी ऐसा लगता ह जैसे हम इस दुनिया समाज से अलग हो,

वन्य- वो तो ह hi,

दोनों बाते क्र hi रहे थे की ह्रदय का फ़ोन बजने लगा, जो एक अननोन no. से था,

ह्रदय- hello

दूसरी तरफ से- ह्रदय मेरी बात धयान से सुनो, जितना जल्दी हो सके मुझे **** शहर के जंगल में आकर मिलो,

ह्रदय- तुम कोण बोल रही हो

दूसरी तरफ से- मैं कोण हु ये तो तुम जान hi जाओगे लेकिन, हम अगर नहीं मै तो अनर्थ हो जायेगा,

वन्य- क्या हुआ कोण ह फ़ोन पैर

ह्रदय ने फ़ोन स्पीकर पैर डाला,

ह्रदय- तुम मुझसे क्यों मिलना छाती हो

दूसरी तरफ से- हमारा मिलना बहुत जरुरी ह

ह्रदय- तुम दृष्टि बोल रही हो?

दूसरी तरफ से- अब तक मेरी आवाज नहीं भूले

ह्रदय- धोखा देने वालो को भूलने की आदत नहीं ह मेरी

दृष्टि- मैंने जो किया उसके लिए माफ़ी मांगती हु लेकिन हमारा मिलना बहुत जरुरी ह,

ह्रदय- मैं तुमसे क्यों मिलु, तुम कोई गेम खेल रही हुई तो,

दृष्टि- मेरे पास तुषार रूचि और अलका के बारे पता करने का रास्ता ह,

ह्रदय- तुम कहना क्या छाती हो

दृष्टि- मैं अभी कुछ नहीं बता सकती, मेरे पास यही मौका ह मिलने का, प्लस मैं रिक्वेस्ट करती हु एक बार मुझसे मिल लो,

ह्रदय- मैं सोच क्र बताऊंगा

दृष्टि- मैं इंतजार करुँगी

दृष्टि ने फ़ोन काट दिया,

वन्य और ह्रदय कंफ्यूज से बैठे रह गए,

वन्य- इसकी कोई चल तो नहीं ह

ह्रदय- उसकी आवाज से लग तो नहीं रहा,

वन्य- अंजलि माँ से बात करनी होगी, चलो चलते हैं,

वन्य कड़ी हुई उसकी चीख निकल गई, uuuiiiiiiiiiiii माआआ

ह्रदय ने उसे सम्हाला, ह्रदय ने सहारा देकर वन्य को गाड़ी में बैठाया और घर की तरफ निकल गए, रस्ते में से ह्रदय ने एक पेनकिलर खरीद क्र वन्य को दी जिससे उसे कुछ रहत मिली,

घर में वन्य खुद को सम्हालती हु अंदर गई ताकि किसी को पता न चले,

लेकिन अंजलि ने पहेली hi नजर में पहचान लिया,

अंजलि- आओ आराम से बैठो,

ह्रदय वन्य के लिए गरम पानी की बोतल ला दे सिकाई क्र लेगी तकलीफ हो रही होगी,

अंजलि की बात से वन्य शर्म से पानी पानी हो गई,

वन्य- माँ बहुत जरुरी बात ह

अंजलि- क्या हुआ

ह्रदय- दृष्टि का फ़ोन आया था और वो अर्जेंट मिलना चाहती ह, बोल रही थी पापा के बारे जानकारी निकलने का तरीका ह उसके पास,

अंजलि एक दम कड़ी हो गई- सच ऐसा हो सकता ह

ह्रदय- बोल तो रही ह लेकिन वो एक बार धोका दे चुकी ह,

अंजलि- फिर भी हमे कोशिश करनी छाइये, तू उससे मिल लेकिन पूरी तैयारी के साथ जाना,

वन्य- मैं साथ जाउंगी

अंजलि- तू जाने की हालत में नहीं ह, वह कुछ खतरा हो सकता ह,

वन्य- तो ाव्य को ले जाओ साथ

ह्रदय- नहीं उसके लिए भी खतरा हो सकता ह

वन्य- मेरी बात मनो उसे ले जाओ, वो साथ रहेगी तो अच्छा होगा,

अंजलि- मैं चलती हु साथ

ह्रदय- नहीं आपका यहाँ रहना जरुरी ह, ऐसा न हो की मेरे यहाँ से जाते hi यहाँ हुम्ला हो जाये,

अंजलि- ये भी ठीक बात ह, तू निकल और ाव्य को साथ ले जा,

ह्रदय- ठीक ह माँ
 
अपडेट-34






ह्रदय पूरी रफ़्तार से कार भगाये जा रहा था, ाव्य उसके बराबर वाली सीट पैर बैठी थी, ाव्य के फेस पैर ख़ुशी और जोश साफ़ दिख रहा था, ये पहला मिशन था जिसमे ाव्य को शामिल किया गया था,

ह्रदय- तुम ठीक हो न ाव्य

ाव्य- है मुझे क्या होगा, मैं एक दम झकास हु,

ह्रदय- वह खतरा हो सकता ह, तुम्हे थोड़ा सम्हाल क्र रहना होगा,

ाव्य- खतरे की माँ की आँख, मेरे सामने तो आये एक बार

ह्रदय को हसी आ गई,

ह्रदय ने दृष्टि को संस किया की वो आ रहा ह, कुछ hi घंटो में पहुंच जायेगा,

इधर चंडीगढ़ में चिरंजीवी बाबा का शोर मचा हुआ था पूरा शहर सजा दिया गया था, कम खुद पूरा इंतजाम देख रहा था, निधि परेशां सी भागी फिर रही थी,

शाम हो चुकी थी, ह्रदय एक जंगल के बहार खड़ा था,

ाव्य- यहाँ क्यों बुलाया उसने

ह्रदय- पता नहीं ये तो उसके आने पैर hi पता चलेगा, तुम यही गाड़ी में बैठो मैं अंदर देख क्र आता हु,

ाव्य- नहीं मैं साथ चलूंगी,

ह्रदय- वह अगर कुछ खतरा हुआ तो तुम आकर मुझे बचा तो लोगी न,

Aavya-to अपनी लाइव लोकेशन मेरे फ़ोन पैर भेजो ताकि मैं तुम तक पहुंच सकू,

ाव्य कितनी समझदार ह ह्रदय को समझ आ गया,

ह्रदय- अगर यहाँ कुछ खतरा हो तो कार का हॉर्न बजा देना मैं तुरनत वापस आ जाऊंगा,

ह्रदय अंदर घुस गया, जंगल ज्यादा घाना नहीं था फिर भी ठीक थक था, ये सरकारी वन विभाग की जगह थी तो यहाँ काम hi लोग आते थे,

ह्रदय ने दृष्टि को कॉल किया उसने फ़ोन नहीं उठाया,

कुछ देर इंतजार करने के बाद ह्रदय को लगा शायद दृष्टि ने फिर धोका दिया ह, वो वापस मुदा तभी दृष्टि की कॉल आ गई,

ह्रदय- मुझे यहाँ बुला कर कहा गायब हो गई

दृष्टि- मैं अपनी लोकेशन भेज रही हु, इससे आगे मैं नहीं आ पाऊँगी,

ह्रदय दृष्टि की भेजी लोकेशन की तरफ चल दिया जो ज्यादा दुरी पैर नहीं थी,

ह्रदय वह पंहुचा तो दृष्टि अपना मुँह अपने दुपट्टे से ढके हुए कड़ी थी,

ह्रदय- अब ये मुँह छुपाना पद रहा ह,

दृष्टि- मैं यहाँ तक छुपते हुए पहुंची हु, तुमसे मुँह नहीं छुपा रही हु,

ह्रदय- मतलब पूरी बेशरम हो, मेरे साथ धोखा देने के बाद भी शर्म नहीं ह,

दृष्टि- मैं जो कर रही थी उसके पीछे वजह थी, ये और बात ह की वो वजह गलत थी लेकिन मैं गलत नहीं थी, मुझे जो दिखाया गया मैं वैसी hi बन गई, मुझे पुरे सच का नहीं पता था, वैसे तो पूरा सच अब भी नहीं पता, बस दिल कहता ह तुम पैर भरोसा क्र सकती हु इसलिए यहाँ आई हु,

ह्रदय- क्या जानती हो तुम उनके बारे में

दृष्टि- पहले मुझे अंजलि और सोनिया के बारे में सब कुछ जानना ह,

ह्रदय- सोनिया तुम्हारी दादी ह न, तुम्हे नहीं पता उस औरत के बारे में,

दृष्टि- मुझे बस इतना बताया गया था, धामा मेरे पिता हैं और सोनिया मेरी दादी, मेरी माँ कोमल की वजह से मर गई, अंजलि एक आयाश औरत ह, उसके नाजायज सम्बन्ध बहुत लोगो से रहे हैं, उसने अपनी बेटियों से भी धनधा करवाया, और मेरे दादा को अपने जाल में फसा कर साडी प्रॉपर्टी अपने कब्जे में कर ली, और मेरे चाचाओं सोहन और कमल को तुषार के हाथो मरवा दिया, मेरी बुआ वर्षा को भी अपने जाल में फसा क्र तुषार के साथ सेक्स करवाया,

अलका के साथ भी ऐसा hi किया लेकिन वो दादी के साथ आ गई थी लेकिन अंजलि ने उसे गायब करवा दिया अपने hi बेटे को मरवा दिया अंजलि ने,

ह्रदय- तुमने इस सब पैर यकीन क्र लिया,

दृष्टि- मुझे सोनिया ने बचपन से पला ह, और मैंने उसे hi अपनी दादी के रूप में देखा ह, जो उसने बताया वही मेरे लिए सच था, लेकिन अब कहानी दुश्री तरह से सामने आ रही ह, तो अब लगता ह मैं गलत थी,

ह्रदय- सोनिया ने अपने कर्मो को छुपा कर अंजलि माँ की तरफ मोड़ दिया, लेकिन मैं तुम्हे ये सब क्यों बताऊ, तुम्हारा क्या भरोसा

दृष्टि- मुझे यहाँ कोमल ने भेजा ह, उन्होंने मुझे बहुत कुछ बताया ह लेकिन पूरा सच शायद वो नहीं जानती, उन्हें बस इतना पता ह अंजलि बहुत अच्छी ह, और कोमल तुषार के प्यार के लिए कुछ भी क्र सकती ह,

ह्रदय- अंजलि माँ वो तो त्याग की देवी हैं, उन्होंने जीवन में बस खोया hi खोया ह, जब भी खुशिया उनकी तरफ आई तब तब ये सोनिया नाम का ग्रैहम उन्हें तबाह करता रहा,

ह्रदय ने दृष्टि को अंजलि के जनम से लेकर आज तक की कहानी शार्ट में सुनाई, बस तुषार और अंजलि के बिच के रिश्ते को छुपा कर,

दृष्टि- तुम्हारी कहानी कोमल की कहानी से बिलकुल मैच करती ह,

ह्रदय- क्योकि ये hi सच ह,

दृष्टि- तो आज तक किसी को नहीं पता चला उस रात क्या हुआ था, वो तीनो कहा गए,

ह्रदय- नहीं लेकिन हमे शक ह, शक क्या यकीन ह इसमें सोनिया का hi हाथ ह,

दृष्टि- सही कहा तुम, इसमें सोनिया का hi हाथ ह, और कोमल आंटी बस उन्ही की सुरक्षा के लिए सोनिया की कैद में ह,

ह्रदय- मतलब?

दृष्टि- कोमल आंटी ने बताया था की सोनिया ने तुषार रूचि और अलका को अपने कब्जे में ले लिए था, जब सभी लोग उन्हें ढूंढ रहे थे तो कोमल आंटी भी उन्हें ढूंढ़ने निकली थी, और उन्हें सोनिया मिल गई थी, लेकिन सोनिया ने उन्हें पकड़ लिया, सोनिया ने उन तीनो को मरने की धमकी दी, इसलिए कोमल आंटी खामोश रह गई, सोनिया ने कोमल आंटी को अपने घर की नौकरानी बना कर रखा ताकि अपने बेटे कमल के साथ किये धोखे की सजा दे सके,

ह्रदय- क्या तुम सच कह रही हो, वो तीनो जिन्दा हैं, मेरे पापा जिन्दा हैं, कहा ह वो

दृष्टि- ये नहीं पता की वो कहा ह लेकिन इतना जानती हु की उन्हें पकड़ने में एक बाबा ने सोनिया की मदद की थी,

ह्रदय- बाबा कोण बाबा

दृष्टि- हे कोई चिरंजीवी बाबा

ह्रदय- चिरंजीवी बाबा, उसका सोनिया से क्या रिश्ता,

दृष्टि- सोनिया और शाक्षी उसकी पालतू कुटिया हैं इस वक़्त, जो वो बोलता ह वही करती हैं, और वो बाबा इनकी मदद करता ह, अब भी वो लोग उस बाबा के आश्रम में हैं,

ह्रदय- वो बाबा भी वही ह क्या

दृष्टि- नहीं वो यहाँ नहीं ह,

ह्रदय- तुम कोई खेल तो नहीं खेल रही न

दृष्टि- मैं खुद अपना सच ढूंढ रही हु तुम्हरे साथ क्या खेल खेलूंगी,

ह्रदय- सच कैसा सच

दृष्टि- धामा सोनिया का बीटा नहीं ह, क्योकि उसके तो सिर्फ दो hi बेटे थे फिर ये धामा कहा से आ गए, और अगर धामा का सोनिया से कोई रिश्ता ह भी तो मुझे उनके बिच केवल नौकर मालिक जैसा रिश्ता hi दीखता ह, माँ बेटे का तो कभी नहीं दीखता, सोनिया बस उन्हें हुकुम देती ह और वो कुछ भी करने लगते हैं,

ह्रदय- तुम्हारी माँ

दृष्टि- मैंने उन्हें कभी देखा hi नहीं उनकी कोई तस्वीर तक नहीं ह, मेरे पापा की शादी का कोई रिकॉर्ड तक नहीं ह,

ह्रदय- तुम्हारे पापा हमेषा मास्क लगा क्र क्यों रहते हैं,

दृष्टि- पता नहीं जैसा सोनिया बोलती ह वो करते हैं

ह्रदय- तुम्हारे पास उनकी कोई तस्वीर ह

दृष्टि ने अपने फ़ोन में से एक तस्वीर निकल क्र ह्रदय को दिखाई,

दृष्टि- सोनिया कभी उनकी तस्वीर खींचने hi नहीं देती ये तो मैंने अपनी याद के लिए खींची थी,

ह्रदय बड़े गोर से तस्वीर को देख रहा था,

दृष्टि- क्या हुआ

ह्रदय- ऐसा लग रहा ह जैसे मैंने इन्हे कही देखा हो,

दृष्टि- कहा

ह्रदय- याद नहीं आ रहा,

दृष्टि- अब क्या करना ह,

ह्रदय- हमे कोमल आंटी को वह से निकलना होगा,

दृष्टि- नहीं अगर सोनिया को पता चला तो तुषार जी अलका और रूचि को खतरा हो सकता ह,

ह्रदय- सही कहा,

दृष्टि- मेरे हिसाब से अगर तुम्हे उन्हें ढूंढ़ना ह तो इस बाबा के पीछे जाना होगा, अगर इसने सोनिया की हेल्प की ह तो हो न हो उसके पास साडी जानकरी होगी,

ह्रदय- मैं इस सोनिया को hi उठा लेता हु ये सारा सच उगल देगी,

दृष्टि- मुझे नहीं लगता ये इतना आसान ह, वो बहुत जालिम औरत ह, गाओं में उसे जालिम दादी के नाम से जानते थे, और इतने सालो में आज तक मैंने उन तीनो को नहीं देखा, तो उसने ऐसी जगह छुपाया होगा जहा कोई आसानी से न पहुंच सके, तुम्हे पहले उनका पता करना होगा, तब सोनिया का कुछ बिगड़ सकते हो,

ह्रदय- तुम्हारा ये अहसान मैं कभी नहीं भूलूंगा, तुम्हे जब भी मेरी जरुरत होगी बताना मैं आ जाऊंगा,

दृष्टि- बस एक रिक्वेस्ट ह

ह्रदय- क्या

दृष्टि- इस लड़ाई में मेरे पापा का क्या रोले ह मुझे नहीं पता, सोनिया हर बार उन्हें आगे करके लड़ाई लड़ती ह, प्लस उन्हें कुछ मत करना, वो अपने आप में नहीं ह, उन्हें नहीं पता होता वो क्या कर रहे हैं, वो हमेषा ेमोस्टिओक्लेस रहते हैं, उन्होंने आज तक मुझे बेटी भी नहीं बोलै, हमारी कभी बात hi नहीं होती, लेकिन फिर भी वो मेरे पापा हैं,

ह्रदय- मैं कोशिश करूँगा उन्हें कुछ न करू, लेकिन अगर वो मेरे परिवार के लिए खतरा बने तो मैं मजबूर हो जाऊंगा,

दृष्टि- उन्हें कैद क्र दो कही ताकि वो कुछ न कर सके,

ह्रदय- उनके पास बहुत ताकत ह, एक इंसान में इतनी ताकत होना नामुमकिन सा ह

दृष्टि- तुम्हारे अंदर उनसे भी ज्यादा ताकत दिखाई देती ह, तो नामुमकिन तो नहीं ह,

ह्रदय- कोई भी ताकत ऐसे नहीं आ जाती उसके पीछे कोई कारन रहे होते हैं, मेरे अंदर जो ताकत ह वो मेरे पिता तुषार की ताकत की वजह से ह और मेरी माँ की ताकत की वजह से, लेकिन तुम्हरे पापा का कोई पिछले रिकॉर्ड नहीं पता, उनके अंदर ये ताकत कैसे आई,

दृष्टि- मैं कोशिश करती हु पता करने का, उनके अतीत के बारे में जानकरी निकलने की कोशिश करती हु,

ह्रदय- जिस आश्रम में तुम लोग हो वह सब देख लिया, वही तो नहीं छुपा रखा

दृष्टि- मैंने अब तक पूरा आश्रम नहीं देखा, मैं अपनी तरफ से भी ढूंढ़ने की कोशिश करती हु,

तभी पीछे से आवाज आई- हम क्यों नहीं ढूंढ़ते,

ह्रदय- ाव्य तुम यहाँ क्यों आ गई,

ाव्य- तुमने काफी देर लगा दी तो मुझे चिंता हुई इसलिए मैं भी आ गई,

ह्रदय- हम आश्रम में घुसेंगे कैसे

दृष्टि- मैं रास्ता बता ूँगी लेकिन तुम्हारे साथ नहीं दे पाऊँगी, अगर किसी ने मुझे तुम्हारे साथ देख लिया तो सब बर्बाद हो जायेगा,

ह्रदय- कोई बात नहीं तुम आश्रम की लोकेशन भेजना मैं रात में घुसूंगा,

ाव्य- हम दोनों घुसेंगे,

ह्रदय ने बस ाव्य को देखा, ाव्य ने गुस्से में ह्रदय को देखा,

दृष्टि- मैं चलती हु वर्ण उस सोनिया को शक हो जायेगा,

दृष्टि वह से निकल गई ह्रदय और ाव्य वापस कार में आ गए,

ाव्य- क्या क्या बताया उसने,

ह्रदय- बहुत कुछ, मैं माँ से बात करता हु एक बार

ह्रदय ने अंजलि को कॉल मिलाया और सब कुछ बताया,

अंजलि- तुझे यकीन ह वो सच बोल रही ह,

ह्रदय- है माँ मुझे यकीन ह इस बार वो सच बोल रही ह,

अंजलि- तो ठीक ह तुम लोग वह पता करो, मैं इस बाबा की कुंडली निकलती हु, और कल इसका प्रोग्राम भी ह वह देखती हु क्या पता चलता ह,

ह्रदय- माँ कोमल जी को यहाँ से निकलना ह, उन्होंने बहुत तकलीफ सही ह

अंजलि- अभी कुछ मत बदलना एक बार उनका पता चल जाये, उसके बाद कुछ करेंगे वर्ण उसका त्याग बर्बाद हो जायेगा, कही ऐसा न हो वो उन तीनो को कुछ नुक्सान पंहुचा दे,

ह्रदय- मैं आपको एक फोटो भेज रहा हु इसके बारे में पता करो ये कोण ह,

अंजलि- ok किसकी तस्वीर ह

ह्रदय- दृष्टि के पिता की, जो सोनिया की कठपुतली बना हुआ ह,

अंजलि- ठीक ह भेज दे मैं पता करती हु,

ाव्य- अब हम कहा इंतजार करेंगे,

ह्रदय- यही कार में, बहार किसी ने देख लिया तो प्रॉब्लम हो सकती ह,

ह्रदय ने कार को एक सुमसान जगह पैर खड़ा कर लिया, दोनों एक दम शांत बैठे थे,

ाव्य- मेरी माँ जिन्दा तो होगी न

ह्रदय- ऐसा क्यों सोच रही हो, उन्हें कुछ नहीं होगा,

ाव्य- अगर उन्हें कुछ हुआ न कसम से इस सोनिया को बिच में से न चिर दिया मेरा नाम भी ाव्य नहीं,

ह्रदय- मिलेगा मौका जरूर मिलेगा, एक एक को सजा मिलेगी, किसी को नहीं बक्शा जायेगा,

ाव्य- ये सोनिया चाहती क्या ह, आमने सामने की लड़ाई क्यों नहीं लड़ती,

ह्रदय- इसके बारे में जितना जाना ह ये इतना छुपने वालो में से नहीं ह, फिर ये ऐसा क्यों कर रही ह, इस सब में इस बाबा का झोल बहुत बड़ा ह,

ाव्य- इस बाबा की तो मैं गाए

ह्रदय- बस बस बस मैं समझ गया

ाव्य- तुम गलियों से इतना क्यों डरते हो, लगता ह कभी मुंबई नहीं आये,

ह्रदय- मैं हिमाचल से पहेली बार बहार निकला हु, और वह कोई गालिया नहीं देता,

ाव्य- फिर तो तुम्हे कुछ समय मुंबई, दिल्ली, हरियाँ और सबसे खास उत्तर प्रदेश में भेजना पड़ेगा फिर तुम सीखोगे गालिया कैसे दी जाती हैं,

ह्रदय- मुझे कुछ नहीं सीखना,

ाव्य- कोई नहीं हम खुद सीखा देंगी, तुम्हारे इस मासूम से चेरे के पीछे के नटखट लड़के को तो बहार निकलना hi होगा,

ह्रदय- काफी देर हो चुकी ह दृष्टि का संस नहीं आया,

ाव्य- कही उसने धोका तो नहीं दिया

ह्रदय- नहीं ऐसा तो नहीं करेगी,

ाव्य- बड़ा भरोसा हो गया ह उस पैर,

ह्रदय- न जाने क्यों मन कर रहा ह उस पैर भरोसा करने का,

ाव्य- तुम्हारा मन आज कल हर लड़की की तरफ भगा जा रहा ह,

ह्रदय- मैं कही नहीं जा रहा, वो सब मेरे पास आ रही हैं,

ाव्य- है है तुम तो सूरजमुखी हो और साई लकडिया भरे की तरह तुम्हारे चारो तरफ मंडरा रही हैं,

ह्रदय- ये देखो दृष्टि का संस आ गया,

ाव्य- ऐसे खुश हो रहे हो जैसे गर्ल फ्रेंड ने परपोज़ क्र दिया हो,

ह्रदय ने ाव्य को देखा

ह्रदय- तुम इतना गुस्से में क्यों रहती हो, हर टाइम छिड़ी छिड़ी सी रहती हो,

ाव्य- तुम नहीं समझोगे, चलो लोकेशन पैर चलते हैं,

ह्रदय- अभी टाइम ह, सब को सो जाने दो,

उधर निधि चिंजिवि के आने के इंतजाम तो क्र रही थी लेकिन बहुत घबराई हुई थी,

निधि अशोक से- उन्हें प्रोजेक्ट के बारे में मत बताना वर्ण ये प्रोजेक्ट आपके हाथ से निकल जायेगा,

अशोक- नहीं बताऊंगा, लेकिन वो सब पता कर लेते हैं, उनसे कैसे छुपाऊंगा,

निधि- जैसे अब तक छुपाते आ रहे हो,

अशोक- ठीक ह मैं देख लूंगा तू तैयारी क्र बस, वो खुश हो जाने चाहिए,

निधि- तैयारी तो पूरी ह, लेकिन अगर उन्होंने कुछ ऐसा मांग लिया जो मैं अब नहीं दे सकती तो क्या होगा,

अशोक सोच में दुब गया,

अशोक- मैं सम्हाल लूंगा,

अशोक चल दिया उसके फेस पैर कामिनी मुस्कान थी,

इधर अंजलि की टीम चिरंजीवी बाबा की कुंडली खंगालने में लगी थी, उसके बहुत से आश्रम थे वो कब कहा मिलता था किसी को नहीं पता होता,

अंजलि बाबा के हर आश्रम पैर आदमी लगा दिए, उसके अनुयाइयों से जानकारी निकलने लगी, लेकिन बहुत कुछ पता नहीं चल पाया, बस एक hi बात बार बार आती की इनकी उम्र का कोई अंदाजा नहीं ह, न जाने कब से हिमालय पैर तपश्या कर रहे थे ये,

अंजलि जितनी हो सकती थी उतनी जानकारी निकल रही थी, समय काम था,

वही रात में ह्रदय और ाव्य आश्रम के नजदीक पहुंच गए, ये आश्रम शहर से बहुत दूर एक सुमसान इलाके में बना हुआ था, ऊँची ऊँची दीवारे और उन पैर लोहे के तार बढे थे काँटों वाले,

ाव्य- अंदर कैसे जायेंगे.

ह्रदय ने दृष्टि को कॉल किया, और सबसे सेफ एरिया पूछा, दृष्टि ने उसे बता दिया,

ाव्य- अंदर कैसे घुसेंगे ये सोचो, इनलोगो ने आस पास के पेड भी काट रखे हैं, बिलकुल खली जगह ह यहाँ,

ह्रदय- मैं अकेला होता तो एक hi बार में अंदर घुस जाता लेकिन तुम्हे लेकर घुसने में थोड़ी महेनत लगेगी,

ाव्य- कैसे

ह्रदय ने एक बड़ा सा पढ़तर उठाया और दीवार के पास में रख दिया, फिर ह्रदय ने ाव्य का हाथ पकड़ा और दीवार से दूर ले गया, ाव्य की समझ में कुछ नहीं आ रहा था,

ह्रदय- अपने मुँह पैर हाथ रख लो, घबराना मत और आवाज मत करना,

ाव्य कुछ समझ पति, उससे पहले ह्रदय ने ाव्य को अपने कंधे पैर उठाया और दीवार की तरफ दौड़ लगा दी, ाव्य शॉकेड सी थी, ह्रदय ने उस पत्थर पैर पेअर मारा और हवा में उप्पेर उछाल गया, और 8 फिट की दीवार और 2 फिट के लोहे तारो के भी उप्पेर को कूद गया,

दूसरी तरफ अँधेरा था तो ह्रदय जमीन का अंदाजा नहीं लगा पाया और उसका बैलेंस बिगड़ गया, लेकिन गिरते हुए उसने खुद को निचे क्र लिया ाव्य उसके उप्पेर आ गई,

ाव्य ह्रदय की बहो में थी, वो उससे कास क्र चिपक गई,

ह्रदय धीरे से- उठो हम अंदर आ गए,

ाव्य झपटी हुई उठी,

ाव्य- ये तुमने कैसे किया, ऐसा करना नामुमकिन सा ह

ह्रदय- मैं न जाने ऐसे कितने काम कर सकता हु जो नमुमकिन से होते हैं, इस सब के बारे में बाद में बात करेंगे पहले अपनी खोज करते हैं,

ह्रदय ने दृष्टि को संस क्र दिया की वो अंदर आ चुक्का ह,

दृष्टि उनके पास hi आ गई,

तीनो धीरे धीरे आश्रम को चेक करने लगे,

ह्रदय- पहले मुझे कोमल मौसी से मिलना ह

दृष्टि ह्रदय को कोमल के रूम तक ले गई,

आश्रम में दरवाजे नहीं लगे थे कुछ hi कमरों में थे बाकि सब में बस पर्दा होता था, तीनो अंदर गए तो देखा कोमल एक कोने में फटी हुई साड़ी में लेती हुई थी जमीन पैर चादर बिछा क्र,

ह्रदय कोमल के पास पाहकः और उसके पेअर छू लिए , कोमल की आँख खुल गई,

कोमल हड़बड़ा क्र उठ गई, दृष्टि ने उसके मुँह पैर हाथ रख दिया,

दृष्टि- सब ठीक ह शांत रहना,

कोमल- तुम लोग यहाँ क्या कर रहे हो, बच्चे तुम यहाँ क्यों आये, तुम्हे यहाँ नहीं आना चाहिए था,

ह्रदय- मौसी दृष्टि ने मुझे सब बता दिया ह, आप चिंता मत कीजिये मैं उन्हें ढूंढ लूंगा और आपको यहाँ से बहार निकलूंगा,

कोमल- अब सब तेरे hi भरोसे ह बीटा, तेरे पापा ने इन दुश्मनो को हराया था, हराया क्या पूरी तरह तहसनहस कर दिया था, लेकिन इस सोनिया नाम की नागिन को छोड़ दिया, तू ऐसा मत करना इस नागिन को ख़तम कर देना,

ाव्य- वो मेरा काम ह, जिस दिन वो मेरे सामने आई उसका आखरी दिन होगा,

कोमल- ये बच्ची कोण ह

ह्रदय- ये ाव्य ह अलका मौसी की बेटी

कोमल की आँखो में आंसू आ गए

कोमल- अलका की बेटी कितनी प्यारी ह कितनी बड़ी हो गई ह, अब तो सरे बछिया बड़ी हो गयी होंगी,

ाव्य- है मौसी, जल्दी hi आपकी मुलाकात सबसे होगी और आपकी बेटी काम्य से भी

कोमल- काम्य मेरी बच्ची

ह्रदय- पूरा परिवार एक साथ ह मौसी अंजलि माँ के पास, और सब आपके इंतजार में हैं,

कोमल- पहले तू अपने पिता और रूचि और अलका को ढूंढ

ह्रदय- आपको क्या लगता ह वो कहा हो सकते हैं,

कोमल- इस वक़्त वो इस सोनिया के पास तो नहीं ह, और इसका एक hi सहारा ह ये बाबा,

ह्रदय- हम्म्म्म मैं इस बाबा की सरे जेड उखड दूंगा,

कोमल- बस ख्याल रखना उसमे कोई अपना न खो जाये,

ह्रदय- आपने उस दिन कहा था अपनों को सही रस्ते पैर लाना,

कोमल- वो इस बच्ची के लिए था दृष्टि के लिए, इसे गलत रास्ता दिखाया गया था, लेकिन अब ये सब समझ चुकी ह,

ह्रदय- और आप मुझे उस आदमी से लड़ने के लिए क्यों रोक रही थी,

कोमल ने दृष्टि की तरफ देखा,

कोमल- तुम और ाव्य बहार निगरानी रखो जरा कोई इधर न आ जाये,

दृष्टि और ाव्य बहार झाकने लगी, तभी कोमल ने ह्रदय को कुछ बताया, जिसे सुन क्र ह्रदय शॉकेड सा बैठा रह गया, उसकी आँखों में आंसू थे,

ह्रदय- इसे छुपाना क्यों

कोमल- इसका सही समय नहीं आया ह, ये बात सोनिया को भी नहीं पता ह,

ह्रदय- ऐसे कैसे, फिर आपको कैसे पता चला,

कोमल- ये सब बताने का अभी सही समय नहीं ह, काफी समय हो गया ह तुम्हे यहाँ से निकलना चाहिए, बस एक बात का ख्याल रखना तुम्हारे हाथो वो न मारा जाये, और उस बाबा के बहुत से अड्डे हैं, ऐसे अड्डे को ढूंढो जहा वो सबसे ज्यादा समय बीतता हो, कोई ऐसी जगह जहा कोई पहुंच न सके,

ह्रदय- आप फ़िक्र मत कीजिये,

दृष्टि और ाव्य वापस आ गई,

दृष्टि- सब सेफ ह,

कोमल- अब तुम्हे निकलना चाहिए, किसी को शक न हो, ये जगह बस अयाशी के लिए ह, यहाँ कुछ नहीं मिलेगा,

ह्रदय- समझ गया, आप बस हिम्मत रखना मैं आऊंगा आपको लेने, और कसम माँ के चरणों की इस सबकी गार्डन न उखड दी तो कहना,

कोमल- माँ छोड़ देना इन सबकी,

कोमल की गली पैर दृष्टि सुरप्रीसेड सी हो गई, ह्रदय झेप सा गया और ाव्य की हसी छूट गई,

कोमल- तू क्यों हसी

ाव्य- मौसी इसे गालिया देना पसंद नहीं ह

कोमल- सब सिख जायेगा, जब मैं आउंगी न तो सब सीखा दूंगी,

दृष्टि- चलो अब यहाँ से,

ह्रदय और ाव्य कोमल के गले लगे और बहार निकल गए,

दृष्टि- यहाँ आने का कोई खास फायदा नहीं हुआ, बस तुम लोग कोमल आंटी से मिल लिए,

ह्रदय- बहुत फायदा हुआ ह दृष्टि, बहुत ज्यादा फायदा हुआ ह यहाँ आने से,

ह्रदय ने दृष्टि को गले से लगा लिया,

ह्रदय- तुम घबराना मत मैं सब ठीक क्र दूंगा, सब कुछ ठीक क्र दूंगा,

ह्रदय के गले लगते hi दृष्टि का पूरा बदन सनसना गया, उसके पुरे बदन में ठिठुरन सी दौड़ गई, रोंगटे खड़े हो गए,

ाव्य भी शॉकेड थी, एक दम से ये क्या हुआ,

कुछ पल बाद ह्रदय अलग हुआ,

ह्रदय- मैं जल्दी hi वापस आऊंगा,

ह्रदय और ाव्य आगे बढे दृष्टि वही एक पल के लिए कड़ी रह गई,

जैसे hi दृष्टि को होश आया वो जल्दी से ह्रदय के पास बढ़ी तभी सामने से एक औरत आ गई,

वही चंडीगढ़ में चिरंजीवी बाबा शहर में पहुंच चुक्का था,

उसके साथ उसके बहुत से अनुयायी भी थे, सभी को प्रोग्राम की जगह पैर रुकने का इंतजाम किया हुआ था, लेकिन चिरंजीवी के लिए कम ने अलग से एक फार्महाउस पैर इंतजाम किया हुआ था,

चिरंजीवी बाबा एक आसान पैर बैठा हुआ था, और उसके बराबर में एक आदमी खड़ा था, देख क्र hi लग रहा था की उसमे बहुत ताकत होगी, उसके सामने कम और शहर के कुछ नमी बिज़नेस मन कुर्सियों पैर बैठे हुए थे, जिनमे से के अशोक कपूर भी था,

चिरंजीवी- है अशोक कैसा चल रहा ह सब,

अशोक- आपका आशीर्वाद ह गुरु जी,

चिरंजीवी- अब ये रवि तुम्हारा काम करेगा, इसका मुकाबला कोई नहीं कर सकता, यहाँ ऐसा कोई नहीं ह जो इसका मुकाबला कर सके,

अशोक- वो लड़का

चिरंजीवी- उसे हम देखेंगे, उसकी ताकत को हम खुद परखेंगे, हमने इसे इतनी ताकत दी ह की इसका सामना बस एक hi इंसान क्र सकता ह,

अशोक- कोण गुरु जी

चिरंजीवी- अंश राणा, तुम तो मिल चुके हो उससे 20 साल पहले, उसी ने तुम्हारे बेटे को कोमा में पहुंचाया था,

अशोक के दंड भींच गए, गुस्से में मुठिया बंद हो गई,

चिरंजीवी- जो हो गया सो हो गया, अब आगे की सोचो,

अशोक के मन में बहुत कुछ चल रहा था,

अशोक- रवि मेरी बात तो सुनेगा न,

चिरंजीवी- मैं कहूंगा तो जरूर सुनेगा

चिरंजीवी ने रवि की तरफ इशारा किया- रवि जैसा अशोक बोले वैसा hi करना ह,

रवि- जी

चिरंजीवी- निधि कहा ह अशोक

अशोक- जी वो आपके प्रोग्राम की तैयारी क्र रही ह,

चिरंजीवी- और तुम्हारी पोती कहा ह, हमसे मुलाकात नहीं करवाओगे क्या

अशोक- गुरु जी वो कल आपको वही प्रोग्राम में मिलेगी,

चिरंजीवी- बहुत अच्छा,

कम साहब अंजलि के परिवार पैर थोड़ी सी लगाम लगाओ, सुना ह वो वापस आ गई ह,

कम- गुरु जी वो बहुत पावरफुल ह, उसकी पहुंच बहुत उप्पेर तक ह,

चिरंजीवी गुस्से में - हमसे भी उप्पेर तक ह क्या,

कम- मेरा वो मतलब नहीं था गुरु जी,

चिरंजीवी- सुना ह उसके परिवार की रक्षा वो लड़का कर रहा h,kya नाम ह उसका ह्रदय, क्या रिश्ता ह उसका

अशोक- वो अंजलि की बेटी की बेटी को प्यार करता ह, या यु कहे वो लड़किया उसके पीछे पागल हैं,

चिरंजीवी- हम्म्म्म ये प्यार हहहहहह, वैसे अशोक आज भी किसी के बारे में तुम पूरी जानकारी निकलना नहीं सीखे,

अशोक- पक्की खबर ह गुरु जी, वो हिमाचल से आया ह,



चिरंजीवी- वो कही से भी आया हो, लेकिन वो इसी घर का बीटा ह,
 
अपडेट-35






ह्रदय ाव्य और दृष्टि के सामने एक औरत आ गई थी जिसे देख क्र दृष्टि घबरा गई, ह्रदय भी थोड़ा टेंशन में आ गया था,

दृष्टि- शाक्षी?

ये शाक्षी थी, न जाने इसकी आँख कैसे खुल गई वर्ण ये तो घोड़े बेच क्र सोती ह,

ाव्य ने शाक्षी की तरफ देखा

शाक्षी- ह्रदय तू यहाँ क्या कर रहा ह, और दृष्टि तू इसके साथ क्या कर रही ह, तू इसके साथ मिल गई क्या, अपनी दादी को धोखा दे रही ह, अभी शोर मचती हु,

शाक्षी छिलने hi वाली थी की उसके साथ जो हुआ उसे देख क्र ह्रदय और दृष्टि की आँखे फटी रह गई,

सबसे आगे ाव्य कड़ी थी, जब उसने शाक्षी नाम सुना तो उसके गुस्से का पारा चढ़ गया, और शाक्षी बस छिलने hi वाली थी की ाव्य ने शाक्षी की गार्डन पकड़ी और दूसरा हाथ उसकी जांघो के बिच डाला और हवा में उठा क्र जमीन में दे मारा, ये सब इतनी फुर्ती से हुआ की किसी को कुछ समझ hi नहीं आया, और हुम्ला इतना तेज था की शाक्षी तुरनत बेहोश हो गई उसके मुँह से आह्ह्ह्ह तक भी नहीं निकल सकीय,


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ह्रदय और दृष्टि ाव्य की ताकत और फुर्ती देख क्र हैरान थे,

ाव्य- साली बकवास कर रही थी, भें छोड़

ह्रदय- तुम तो कमाल हो यार

ाव्य- ये सब छोड़ो इसका क्या करना ह

दृष्टि- ये उठेगी तो सब बता देगी, और सब बर्बाद हो जायेगा

ाव्य- मार देते हैं कुटिया को,

ह्रदय- नहीं इसे साथ लेकर चलते हैं,

दृष्टि- लेकिन यहाँ क्या होगा

ह्रदय- यहाँ तुम्हे सम्हालना पड़ेगा, ये हमे कुछ जानकारी दे सकती ह,

ाव्य- है सही ह, उठाओ इसे रंडी को, इसने भी हमारे परिवार को बहुत परेशां किया ह,

ह्रदय ने शाक्षी को कंधे पैर उठाया और एक पेड पैर चढ़ क्र बहार की तरफ कूद गया, ाव्य भी कूद गई जिसे बहार ह्रदय ने गॉड में hi पकड़ लिया, ाहस्राम में अंदर की तरफ से पेड लगे हुए थे,

दृष्टि ने वापस जाकर कोमल को सब बता दिया,

इधर ह्रदय शाक्षी को उठा क्र कार तक पंहुचा और कार चंडीगढ़ की तरफ डोडा दी,

वही चिरंजीवी की मीटिंग चल रही थी,

कम- गुरु जी क्या वो लड़का हमारे लिए खतरा ह,

चिरंजीवी- नहीं वो हमारे लिए खतरा नहीं ह, लेकिन हम उसके लिए खतरा जरूर हैं, उसकी ताकत के बारे में बहुत सुन रहे हैं, उसने हमारे हठी को टक्कर दी ह, उस पैर भी भरी पड़ा ह, उसकी ताकत हमारे काम की ह, शायद ये वही ह जिससे हमारी तलाश पूरी हो जाये,

कम- आपको किस चीज की तलाश ह

चिरंजीवी- ये जानना तुम्हारा काम नहीं ह, तुम वही करो जिसके लिए कहा जाये,

कम- जी गुरु जी,

चिरंजीवी- वो आएगा न कल सभा में,

अशोक- जी गुरु जी बुलाया तो ह

चिरंजीवी- जल्दी hi वो हमारे कब्जे में होना चाहिए, इस सभा के बाद अपने सभी आदमियों को लगाओ उस लड़के को हमारे पास लेन के लिए,

अब हम आराम करेंगे, रवि के अलावा बाकि सब लोग जाओ,

कम- जी गुरु जी हम आपको लेने आएंगे सुबह सभा के लिए,

चिरंजीवी- अशोक सभा के बाद हमारे पास हमारे हिरे को भेजना, बहुत समय से उसके लिए तड़प रहे हैं हम,

अशोक- ठीक ह गुरु जी,

रवि के अलावा बाकि सब चले गए,

रवि- गुरु जी, उस लड़के में सच में बहुत दम ह, मेरा जब सामना हुआ तो ऐसा लगा जैसे किसी पहाड़ से टकरा गया हु,

चिरंजीवी- वही तो चाहिए हमे, न जाने कितने hi प्रयाश किये गए हैं लेकिन हर बार असफलता hi मिली ह, लेकिन हम कामयाब होंगे, हम वो ताकत हासिल करेंगे, और हमे वो…….

रवि- जरूर गुरु जी ऐसा hi होगा,

चिरंजीवी- रवि तू सभी आदमियों को लगा काम पैर और इस सभा के बाद उस लड़के को हमारे पास लेकर आना,

रवि- जरूर गुरु जी,

सुबह हो चुकी थी, सूरज निकल आया था,

ह्रदय तेज रफ़्तार से गाड़ी दौड़ाये जा रहा था, उसने अंजलि को कॉल लगाया और उसे बता दिया की वो शाक्षी को उठा क्र ला रहा ह,

रस्ते में शाक्षी को होश आने लगा था, तो ाव्य ने उसके हाथ पाव बांध दिए और मुँह भी टेप से बंद क्र दिया,

ह्रदय को घर पहुंचने में टाइम लगने वाला था, इधर बाबा की सभा शुरू हो चुकी थी, बहुत भीड़ लगी हुई थी, आम जनता के लिए खुली जगह थी, शहर के बड़े लोगो के लिए बाबा के सामने और कुछ की बराबर में जगह थी,

वही निधि भी थी लेकिन वो खुद को छिपाने की कोशिश कर रही थी, चिरंजीवी की नजर निधि पैर पड़ी तो निधि घबरा गई,

सभा शुरू हो चुकी थी, बाबा ने अपना ज्ञान बाटना शुरू क्र दिया था, मीडिया पूरा कवर क्र रही थी, जब सभा पुरे सवाब पैर थी तब एंट्री हुई अंजलि और उसके परिवार की,

ह्रदय नहीं पंहुचा था तो अंजलि खुद चली गई, उसके साथ सचिन, वन्य, शनाया, दिया, नैना, रम्य और अन्य गई हुई थी,

जैसे hi चिरंजीवी की नजर अंजलि और लड़कियों पैर पड़ी तो वो बोलते बोलते रुक गया, उसके शब्द उसके मुँह में hi रह गए,

कुछ पालो के लिए एक दम सनता चा गया था पूरी सभा में,

लेकिन चिरंजीवी ने खुद को सम्हाला और ज्ञान बाटना शुरू किया लेकिन उसका धयान बार बार अंजलि और उसके परिवार की तरफ hi जा रहा था,

कुछ देर बाद चुरंजीवी का आराम का टाइम हुआ तो उसे 2 घंटे बाद फिर से सभा में बैठना था, वो उठ क्र अंदर चला गया, अशोक और कम भी उसके साथ थे,

इधर अंजलि का धयान बाबा के साइड में खड़े आदमी पैर था, जो वही था जिसका फोटो ह्रदय ने भेजा था पता करने के लिए,

बाबा के जाते hi अंजलि ने ह्रदय को फ़ोन मिला क्र बताया की जिस आदमी के बारे में वो पूछ रहा था, वो यहाँ चंडीगढ़ में बाबा के साथ में ह,

ह्रदय ने तुरंत निधि को फ़ोन मिलाया

निधि- कहा हो तुम, वो बाबा यहाँ आ चुक्का ह, मुझे दर लग रहा ह,

ह्रदय- तुम डरो नहीं मैं पहुंच रहा हु, तुम ये बताओ बाबा के साइड में जो आदमी खड़ा ह वो कोण ह,

निधि- उसकी साइड में तो बस रवि खड़ा ह,

ह्रदय- रवि, जिसे अशोक अपना बीटा बना क्र घूम रहा ह

निधि- है वही,

ह्रदय- नित्य कहा ह

निधि- नहीं पता वो सुबह से गायब ह मैं कब से उसे ढूंढ रही हु,

ह्रदय- मैं पता करता हु,

ह्रदय खुद से hi- दृष्टि का बाप और अशोक का बीटा दोनों एक hi हैं, मतलब दोनों जगह इसे बाबा ने hi लगाया हुआ ह,

बाबा अंदर जाते hi- अशोक ये लड़किया कोण हैं,

अशोक- ये सब इस अंजलि के परिवार से hi मालूम पड़ती हैं, क्या हुआ गुरु जी.

चिरंजीवी- इनका तेज बहुत अधिक ह, ये कोई साधारण कन्या नहीं हैं, ये सभी बहुत तेजस्वी हैं, मुझे इन सभी के साथ सम्भोग करना ह,

रवि इस परिवार में जितनी भी कन्याये हैं सबको हमारे आश्रम में लेन की वयवस्था करो,

अशोक- ऐसा क्या ह इनमे गुरु जी,

चिरंजीवी- तुम नहीं समझोगे, ये बताओ वो लड़का आया या नहीं,

अशोक- अभी तो नहीं आया,

चिरंजीवी- उसके बारे में पता करो, और सभा को जल्दी समापत करवाना, उसके बाद मुझे इस पुरे परिवार से मिलना ह,

कम- ठीक ह गुरु जी,

ये लोग बात कर रहे थे, कोई चुप क्र इनकी बाते सुन रहा था,

2 घंटे बाद सभा फिर से शुरू होनी थी तब तक अंजलि और लड़किया दूसरी तरफ चली गई जहा उनके लिए खाने की व्यवस्था की हुई थी,

सभी लोग खाना खा रहे थे की तभी निधि हाफति हुई अंजलि के पास आई,

निधि- मम मुझे आपसे जरुरी बात करनी ह,

अंजलि- क्या हुआ तुम इतना क्यों घबरा रही हो,

निधि- मुझे बस दो मिनट्स का समय दे दीजिये मम,

वन्य- निधि मम क्या हुआ आप इतना परेशां क्यों हैं,

अंजलि- आइये बैठ क्र बात करते हैं,

निधि और अंजलि एक एकांत जगह पैर पहुंच गई,

अंजलि- आराम से बताओ क्या हुआ

निधि ने चारो तरफ देखा

निधि- मम मैंने अभी अंदर उस बाबा की बाते सुनी हैं, वो आपके परिवार की लड़कियों के बारे में बात कर रहा था, की उनके अंदर बहुत तेज ह और उस इन कन्याओ के साथ सम्भोग करना ह,

अंजलि ने गुस्से में मुठिया भींच ली,

निधि- मुझे इस बात का कारन तो नहीं पता लेकिन मैं नित्य को भी इसी वजह से आज तक उससे छुपाती आई हु, आप जल्दी से इन सभी की वेर्जिन्त्य खुलवा दीजिये, या इनकी शादी कर दीजिये, मुझे इतना पता ह की जो लड़की कुँअरि नहीं ह वो इसके किसी काम की नहीं ह,

अंजलि- मैं सब समझ गई तुम घबराओ नहीं वो कुछ नहीं कर सकता, मेरे परिवार की लड़कियों का तो समझ आता ह लेकिन तुम्हारी बेटी के साथ क्यों

निधि- जब वो पैदा हुई थी तभी इस हैवान ने कहा था इस कन्या का कौमार्य वो hi भांग करेगा, इसलिए मैं किसी तरह से उसे बचा क्र यहाँ ले आई थी,

अंजलि- मुझे साडी बात बताओ क्या हुआ था, ये लकड़ी कैसे पैदा हुई थी,

निधि बोलने hi वाली थी की वह बाबा का एक शिष्य आ गया, निधि चुप हो गई,

आदमी- निधि जी आपको गुरु जी ने याद किया ह,

निधि एक दम घबरा गई, अंजलि ने निधि का दर भांप लिया,

अंजलि- गुरु जी से बोलो वो अभी बिजी ह, कुछ देर में आकर मिलेंगी,

आदमी- ये गुरु जी का आदेश ह,

अंजलि गुस्से में- उनसे कहो ये अंजलि का आदेश ह, समझे

आदमी गुस्से में अंजलि को देखने लगा तो अंजलि ने और गुस्से में उसे देखा, आदमी को समझ आ गया ये बहुत मजबूत औरत ह, वो तुरंत वापस मुद गया और चला गया,

निधि- ये आपने क्या किया, उस हैवान को नाराज कर दिया,

अंजलि- अगर वो हैवान ह तो मैं भी दो दो देव दूतो की माँ हु, तुम्हे डरने की जरुरत नहीं ह, वो कुछ नहीं बिगड़ सकता,

निधि- मैंने उसका वहशीपन देखा ह,

अंजलि- ह क्या चीज ये बाबा जो तुम इससे इतना दर रही हो, इसके बारे में तुम जो भी जानती हो मुझे बताओ,

निधि- मैं इसे तब से जानती हु जब मैं सिर्फ 19 साल की थी, मुझसे एक गलती हुई थी जिसकी वजह से मैं इस बाबा के पास पहुंच गई और इसने, नित्या

अंजलि- नित्य?

निधि- मेरी बेटी ये यहाँ क्या कर रही ह, मैंने इसे मन किया था यहाँ आने के लिए,

अंजलि ने देखा सामने से एक मासूम सी खूबसूरत लड़की चली आ रही थी,

निधि- नित्य तू यहाँ क्या कर रही ह,

नित्य- दादा जी ने कहा था यहाँ अर्जेंट आने के लिए

निधि- मैंने तुझे मन किया था न यहाँ मत आना,

अंजलि- कोई बात नहीं तो क्या हुआ

निधि- आप नहीं जानती मम वो हैवान,

निधि- नित्य तुझे यहाँ नहीं आना चाहिए था,

अंजलि- मैं हु न यहाँ इसे कुछ नहीं होगा,

निधि- है है आप ह न, इसे आप अपने साथ hi रखना और ख्याल रखियेगा ये किसी के भी बुलाने से उस बाबा के पास न जाये,

अंजलि- नहीं जाएगी,

अंजलि- नित्य बेटी तुम मेरे साथ रहोगी, वह तुम्हारी भेने हैं उनके साथ रहना, ह्रदय भी यही आ रहा ह,

नित्य- ह्रदय यही आ रहा ह

अंजलि- है

अंजलि- निधि मुझे लगता ह हमे आराम से बैठ क्र बात करनी होगी, तुम पहले मुझे इस रवि के बारे में बताओ

निधि- ये उस बाबा का बनाया हुआ शैतान ह, बहुत बड़ा जानवर ह ये, बहुत ताकत ह इसमें,

अंजलि- बनाया हुआ मतलब

निधि- जब मैं इससे पहेली बार मिली थी तो ये एक कमजोर सा लड़का था, ये बाबा के लिए कुँअरि लड़किया लाया करता था, फिर ये 3 महीने के लिए गायब हो गया, और जब सामने आया तो पूरा जानवर बन चुक्का था, लेकिन इसके अंदर कोई ेमस्तीओं नहीं थे, एक दम खामोश रहता, और जिसको भी मरता बहुत बुरी तरह से मरता,

अंजलि- तुम्हारे कहने का मतलब ह इसके अंदर ताकत भरी गई ह किसी तरह से,

निधि- है जी

अंजलि- ok और क्या जानती हो इसके बारे में, इसका परिवार कोई बच्चा

निधि- नहीं इसका कोई बच्चा नहीं ह कोई परिवार नहीं ह, ये हमेशा से इस बाबा के पास hi रहा ह,

अंजलि- और ये बाबा आया कहा से ह

निधि- बस इतना जानती हु की वो हिमलाय में रहता था, ये कोई नहीं जनता कब से, मैंने इसे जब भी देखा ह ऐसे hi देखा ह, न जवान न hi बूढ़ा,

अंजलि- मुझे तुम्हारी पूरी कहानी सुन्नी ह, लेकिन अभी टाइम काम ह, इस सभा के बाद रात में घर आओ, वही बात करेंगे,

फिर सभी लोग सभा में आ गए, निधि अब भी दर रही थी, वो बाबा के सामने गई तो बाबा ने उसे गुस्से में देखा और एक नजर अंजलि पैर डाली, अंजलि उसे hi देख रही थी, बाबा ने मुस्कुरा का अंजलि का अभिवादन किया,

और तभी बाबा की नजर नित्य पैर गई जिसे देख क्र बाबा पालक झपकी तक भूल गया, ये बात अंजलि ने भी नोटिस की, और तभी सभा में एंट्री ली ह्रदय और ाव्य ने, जिसे देख क्र बाबा शॉकेड सा देखे जा रहा था,


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पूरी सभा बाबा के बोलने का इंतजार कर रहे थे लेकिन बाबा का मुँह तो जैसे सील गया था, बाबा के चलो ने मोके की नजाकत को समझते हुए भक्ति गीत चला दिए,

बाबा का धयान ह्रदय और ाव्य से हटा, उसने अशोक को अपने पास बुलाया और धीरे से कुछ पूछा, तो अशोक ने सामने देख क्र कुछ बताया, बाबा ने एक बार फिर ह्रदय ाव्य और नित्य पैर नजर डाली, और अपनी आँखे बंद की जैसे कुछ याद कर रहा हो,

बाबा ने निधि की तरफ देखा जिसमे गुस्सा साफ़ दिख रहा था, निधि के अंदर दर बैठ गया था, अंजलि का पूरा फोकस बाबा की हर एक हरकत पैर था, अंजलि समझ गई कुछ ह जिसकी वजह से ये निधि से बहुत नाराज ह,

बाबा ने तुरंत कम को बुला क्र सभा का समापन करने को कहा, कम ने तुरंत एलान क्र दिया की बाबा जी को अर्जेंट कही जाना ह, इसलिए सभा यही समापत होती ह, अगली बार जब बाबा आएंगे तो कुछ दिनों तक यही रुकेंगे, सब लोग शॉकेड से रह गए,

निधि दर क्र कैंप रही थी, अंजलि तुरंत उसके पास गई,

अंजलि- तुम घबराओ नहीं

निधि- वो मुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगा,

तभी कम का एक आदमी अंजलि के पास आया,

आदमी- मम आपको और पुरे परिवार को कम साहब ने हॉल में इन्विते किया ह, शहर के सभी बड़े लोगो को वह पर्सनल गुरु जी से मिलने का मौका दिया गया ह,

अंजलि कुछ सोचते हुए- ठीक ह हम आते हैं,

वो आदमी चला गया,

अंजलि- निधि तुम मेरे साथ रहोगी,

अंजलि पुरे परिवार को लेकर हॉल में पहुंच गई, वह अशोक कपूर, कम, रवि, और कुछ बड़े बिजनेसमैन थे, अंजलि के सामने सभी बहुत छोटे थे, अशोक कपूर hi था थोड़ा बहुत लेकिन वो भी उतना बड़ा बिज़नेस मन नहीं था,

बाबा बिच में एक सिंघासन पैर बैठा था,

बाबा- भेजी ये आपका hi परिवार ह,

अंजलि- जी है सब मेरा परिवार ह,

अशोक- गुरु जी वो नित्य ह मेरी पोती, निधि और रवि की बेटी,

नित्य गुरु जी को प्रणाम करो उनके पेअर छुओ,

नित्य उठने लगी,

अंजलि ने उसका हाथ पकड़ लिया,

अंजलि- अशोक जी आपको पता होगा हमारे संस्कारो में लड़किया पेअर नहीं छुट्टी,

अशोक – ये गुरु जी हैं, इनका आशीर्वाद लेना बी संस्कारो में hi आता ह,

अंजलि- आशीर्वाद हाथ जोड़ क्र भी लिया जा सकता ह,

चिरंजीवी- अशोक अंजलि बहन सही बोल रही हैं, कन्याओ तो देवी का रूप होती हैं, और हम कुँअरि कन्याओ का बहुत अच्छे से सम्मान करते हैं, ह न निधि बेटी

निधि ने गुस्से भरी नजरो से बाबा को देखा,

सचिन- कम साहब कोई खास वजह थी क्या इस सभा की, हम सबको बुलाया गया ह,

कम कुछ बोलने वाला था, उससे पहले बाबा बोल पड़ा

चिरंजीवी- मैं काफी समय से इस शहर में नहीं आया था, अब आया हु तो सोचा शहर को चलने वाले पूंजीपतियों से एक बार मिल लिया जाये, आप सबकी वजह से hi हम अलग अलग शेरो में जाकर भक्तो का कल्याण कर पते हैं,

वैसे आपके परिवार के बच्चे बहुत तेजस्वी हैं, सबके चेरे पैर अलग hi चमक ह,

अंजलि- ये तो भगवान् की कृपा ह, उन्ही के आशीर्वाद हैं ये सब,

ह्रदय- चले क्या

अंजलि – है है जरूर, बाबा जी हमे अनुमति दे, बहुत से काम ह, बहुत तेयारिया करनी हैं,

बाबा- तेयारिया?

अंजलि- है जी शादी की तेयारिया

शादी का नाम सुनकर बाबा के साथ साथ अंजलि के परिवार के लोग भी चौंक गए, घर में किसकी शादी की बात चल रही ह,

सबने अंजलि की तरफ देखा,

बाबा- बहुत अच्छी बात ह, किसकी शादी ह

अंजलि- ह्रदय और नित्य की शादी, अशोक जी आप हमारे समधी बनने जा रहे हैं, बधाई हो,

अंजलि की बात ने तो वह धमाका सा कर दिया था, पूरा परिवार शॉकेड हो गया था, इधर निधि की आँखों में ख़ुशी के आंसू आ गए थे, अशोक ख़ुशी से झूम उठा था, वो दौड़ क्र अंजलि के पास आया, और हाथ जोड़ क्र खड़ा हो गया,

अशोक- आप सच बोल रही हैं,

बाबा- ये कैसे हो सकता ह,

अंजलि- क्यों नहीं हो सकता, आपको कोई ऐतराज ह,

बाबा- नहीं हमे क्यों कुछ ाइटर्ज होगा लेकिन उसके पिता से तो पूछना चाहिए एक बार

रवि- मुझे पूछे बिना ये रिश्ता नहीं हो सकता, मेरी बेटी की शादी जहा मैं चाहूंगा वह होगी,

अंजलि गुस्से में कड़ी हो गई,

अंजलि- नित्य ह्रदय को पसंद करती ह, मेरे लिए इतना बहुत ह, और लड़की की माँ को ये रिश्ता पसंद ह, इससे ज्यादा मैं किसी से पूछने की जरुरत नहीं समझती, लड़की बालिग ह, अपनी मर्जी की मालिक ह,

सभा में एक दम सनता च गया,

अंजलि- आज से नित्य हमारी हुई, ये हमारे साथ जा रही ह, शादी की तारीख तय करके आपको खबर भिजवा दूंगी अशोक जी, शादी हमारी हवेली में होगी बस आप महेमान लेकर आ जाना,

ह्रदय को कुछ समझ नहीं आ रहा था, लेकिन उसे पता था उसकी माँ बिना सोचे समझे कुछ नहीं करती, वो शांत बैठा रहा, लेकिन साडी लड़कियों के दिमाग ख़राब हो चुके थे,

वही बाबा का पारा पूरा चढ़ा हुआ था, लेकिन न जाने वो कैसे खुद को रोके हुए था,

रवि- मैं भी देखता हु मेरी मर्जी के बिना कोण शादी करता ह,

रवि नित्य की तरफ बढ़ा तो बिच में ह्रदय खड़ा हो गया,

बाबा- अरे रवि भेजी ठीक बोल रही हैं, कन्या का विवाह उसकी मर्जी से hi होना चाहिए,

अंजलि ने सबको इशारा किया और बहार को चल दी,

बाबा- भें जी हमे न्योता नहीं डौगी बच्चो के विवाह का,

अंजलि ने पलट क्र देखा- आप को तो दोनों तरफ से न्योता मिलेगा बाबा जी, अंजलि सबको लेकर निकल गई, निधि भी उनके साथ खिसक गई,

उनके बहार जाते hi बाबा खड़ा हो गया और एक मुक्का दीवार में मारा जिससे दीवार में दरार आ गई, बाबा के गुस्से से सब सहम गए,

अशोक- गुरु जी आप इतने गुस्से में क्यों आ गए,

बाबा- अशोक वो लड़की हमे चाहिए, इस लड़की को हम 18 साल पहले मारा मान चुके थे, ये जीवित ह,

बाबा ने अशोक की गार्डन पकड़ी और हवा में उठा लिया,

अशोक- गुरु जी मेरी क्या गलती ह, इसे तो निधि अपने साथ लेकर आई थी, मुझे लगा आपका hi आशीर्वाद ह ये,

बाबा- हमने तुम्हे निधि दी थी, ये लड़की कैसे आ गई यहाँ

अशोक- ये तो निधि hi लेकर आई थी, उसी ने कहा गुरु जी का आशीर्वाद ह,

अशोक यहाँ झूट बोल गया था,

बाबा चिल्ला कर- रवि मुझे ये लड़की और उस लड़के के साथ जो लड़की आई थी वो दोनों चाहिए किसी भी कीमत पैर,

रवि- मैं आज hi उठा लाऊंगा,

बाबा- अभी नहीं विवाह वाले दिन, ये औरत इनका विवाह करेगी न, परन्तु इसका पहला सम्भोग हमारे साथ होगा,

अंजलि का परिवार गाड़ियों में घर की तरफ निकल चुक्का था,

एक गाड़ी में सचिन अंजलि के साथ शनाया, नैना, रम्य और अन्य नित्य और निधि थे, ह्रदय के साथ ाव्य तो थी hi वन्य और दिया भी उसी की गाड़ी में बैठ गई,

शनाया – अंजलि माँ इतना बड़ा फैसला ले लिया आपने,

अंजलि- खामोश, मेरे फैसले पैर सवाल करने का अधिकार किसने दिया तुम्हे, अपने मां को देख रही ह न, तुम सबसे बड़ा ह लेकिन इसने एक भी सवाल किया क्या,

शनाया चुप हो गई,

सचिन- आपने किया ह तो कुछ सोच क्र hi किया होगा, कुछ जरुरी hi होगा,

अंजलि- तुम दोनों भाइयो से ज्यादा मुझे कोई नहीं समझ सकता,

ऐसे hi सवाल ह्रदय की कार में भी उठ रहे थे,

ाव्य- ये सब क्या था, अंजलि माँ ने ऐसा क्यों किया,

दिया- कुछ तो गड़बड़ ह,

वन्य- बहुत कुछ गड़बड़ ह,

ह्रदय- उन्होंने कुछ सोच क्र hi किया होगा

ाव्य- है है तुम्हे तो ये सब सही लगेगा hi, तुम्हारे तो मजे आ गए एक और लड़की तुम्हारे पास आ रही ह,

वन्य- ाव्य क्या बोलती रहती ह, यहाँ हालत कुछ और hi चल रहे हैं

ाव्य- है है मैं जानती हु,

वन्य- निधि बहुत ज्यादा दरी हुई थी, और वो बाबा हमारे परिवार की लड़कियों को और नित्य को कितनी बुरी था से घर रहा था,

दिया- है मैंने भी नोटिस किया था,

वन्य- वो बाबा नित्य को हासिल करना छटा ह, निधि उसी से घबराई हुई थी, इसीलिए अंजलि माँ ने ये फैसला लिया होगा,

कुछ hi देर में सब घर पहुंच गए,

अंजलि हॉल में जाकर बैठ गई, बाकि सब भी उसके आस पास बैठ गए, अंजलि काफी सीरियस थी जिसे देख बाकि परिवार के लोग भी धीरे धीरे वही आ गए,

सचिन- माँ कब करनी ह शादी,

सीमा- शादी किसकी शादी,

अंजलि- दीपा को बुलाओ, उससे कहो जितना जल्दी हो सके यहाँ आ जाये,

सचिन ने तुरंत कॉल मिला दिया, और दीपा को अर्जेंट घर आने को बोलै,

कपिल- क्या हुआ ह, सब लोग इतना चिंता में क्यों हो,

अंजलि- सभी लड़किया अंदर जाओ, ह्रदय तू भी अंदर जा,

ह्रदय- माँ मुझे बहुत जरुरी बात करनी ह,

माँ सुनकर निधि और नित्य ने थोड़ा चौंक क्र देखा,

अंजलि- अभी नहीं, थोड़ी देर में, अभी मुझे कुछ जरुरी फैसला लेना ह,

ह्रदय- वो बात इस सब से बहुत बड़ी ह,

अंजलि- इससे बड़ी नहीं हो सकती, थोड़ा वेट क्र मैं आती हु,

ह्रदय चुप चला गया, साडी लड़किया भी चुप चली गई,

घर के सभी बड़े वह बैठे थे,

सचिन- माँ बोलिये, हम सुन रहे हैं,

अंजलि- नित्य और ह्रदय की शादी होनी ह, और वो आज hi होनी ह,

सीमा- माँ ये क्या बोल रही हो, ऐसा कैसे हो सकता ह, और वो भी आज hi,

अंजलि- मैंने तुम सबको यहाँ सलाह लेने के लिए नहीं बुलाया ह, सिर्फ फैसला सुनाने बुलाया ह,

निधि- मम आज hi, लेकिन आपने तो अशोक को महेमानो के साथ बुलाया ह,

अंजलि- उसे बस बताया ह ताकि वो लोग उस तारीख का इंतजार करे, लेकिन शादी आज hi होगी,

वर्षा- क्या ये जरुरी ह,

अंजलि- बहुत जरुरी ह, और सिर्फ नित्य hi नहीं,

वर्षा- क्या हुआ माँ सब ठीक ह न,

अंजलि- उनकी कही बात सच हो रही ह,

सीमा- किसकी बात माँ

अंजलि- तू ये सब छोड़ो और शादी की तैयार करो, शादी यही इसी घर में होगी, और शादी के जोड़ो का इंतजाम करो,

अनीता जी- शादी के जोड़ो मतलब कितनी शादिया होनी ह यहाँ,

अनीता के सवाल पैर सबने अंजलि की तरफ देखा,

अंजलि कुछ देर खामोश रही, अंजलि ने वर्षा की तरफ देखा,

वर्षा- इस घर में जिसके भी पास शादी के जोड़े हैं निकल लो, अगर नहीं ह तो सचिन चलो अभी मार्किट, अभी जोड़े आएंगे,

सीमा- लेकिन क्यों कितने जोड़े चाहिए,

अंजलि- 9

सबके मुँह खुले रह गए, और सबसे ज्यादा शॉकेड थी निधि,

सीमा- माँ 9 ये क्या बोल रही हो, इतनी तो तोषु की भी नहीं हुई,

रिंकी- तोषु की लिस्ट बहुत लम्बी ह, ह्रदय तो उसके सामने बच्चा hi रहेगा इस मामले में,

अनीता जी- मेरा जोड़ा रखा ह,

नंदनी- मेरा भी रखा ह,

रश्मि- मेरा और आशिमा के भी जोड़े हैं,

सीमा- मेरा और दीपा के भी रखे हैं, और रूचि और अलका के जोड़े भी यही हैं,

निधि- लेकिन 9 किस किस की शादी ह और किस किस से,

अंजलि- शनाया, दिया, अन्य, रम्य, काम्य, नैना, वन्य, ाव्य और नित्य, और सबकी शादी ह्रदय से होगी,



सब थोड़े शॉकेड थे लेकिन निधि के लिए तो ये परमाणु विस्फोट जैसा था,
 
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