Intehah................(A टेल ऑफ़ लस्ट) - Page 12 - SexBaba
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Intehah................(A टेल ऑफ़ लस्ट)

अपडेट-55 (ा) (मेघा अपडेट)

अभी भी वो लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही थी .........वहीँ उसकी बुर से बेहटा रघु का मूट अब धीरे धीरे बहार की तरफ बेहटा जा रहा tha............kareeb 5 मिनट तक काव्य पर जैसे एक नशा सा चाय रहता हैं और जब उसे होश आता हैं वो फ़ौरन उठकर बैठ जाती hain..........raghu उसी के तरफ देखता हुआ मुस्कुराये जा रहा tha...........wahin काव्य के चेहरे पर शर्म की लखीरें भी अब नज़र आने लगी thi...........magar ये शर्म अब सिर्फ नाम के लिए मात्रा रह गयी thi............kyon की इससे बड़ा बेशर्मी का जीता जगता उदाहरण और भला हो भी क्या सकता tha..............................dekhna था की अभी ये सिर्फ एक हुड्ड hain.................................ya हुड्ड की एक शुरुआत...............................................

अब आगे..........................................................................

काव्य पर तो जैसे जवानी का नशा ज़ोरों पर चाय tha.................wo इस वक़्त सब कुछ भूल चुकी थी की उसके लिए क्या सही हैं aur............kya galat....................bus होश इतना था की वो अपने बुर में उठ रहे उस प्यास ko...................kisi भी कीमत पर शांत करना चाहती thi..........chahe उसके लिए उसे कोई भी कीमत क्यों न चुकानी pade..........usey सब मंज़ूर tha...........wo आज अपने कदम पीछे नहीं हटाने देना चाहती थी...........

रघु तो जैसे काव्य की बुर में मूतने का पूरा पूरा मज़ा ले चूका tha........magar कहीं न कहीं अब जीतू को भी इस बात की खटक सी होने लगी thi.........ki उसके जगह पर आज वो क्यों नहीं tha.............magar रघु की वजह से वो अपने इच्छाओं को पूरा नहीं कर पा रहा tha........is वजह से वो अब अंदर hi अंदर रघु पर छिड़ने लगा tha.........aur काव्य की ऐसी बाटिओं से उसका रहा सहा गुस्सा भी अब और भड़क गया था.......

" तुम तो मेरी जान हो raghu.............main तुम्हारी ख़ुशी के लिए आज सब कुछ करने को तैयार hoon...........bus एक बार तुम हुकुम तो karo.........dekhna तुम्हारी ये दासी तुम्हारे हर इशारों पर नाचेगी........" और काव्य रघु की तरफ प्यार से देखती हुई धीरे से हंस पड़ती हैं वहीँ जीतू गुस्से से अपना मुँह दूसरी तरफ फेर लेता हैं और अगले hi पल फ़ौरन बोल पड़ता हैं..........

" हाँ haan............tumhare लिए तो बस रघु hi सब कुछ hain.........main कुछ nahin............kitna भी हैं तो वो तुम्हारा ख़ास हैं na........uski इच्छा उसके सपने ...............सब अपने hain.......aur हमारी इच्छा का कोई मोल nahin............hum तो बस रघु के इशारों पर नाच रहे hain..........jaisa वो चाहेगा हम karnegey.........agar उसका मुन्न हुआ तो हमें तुम्हें छोड़ने को milega.......nahin तो बस अपने आँखों से तुम्हारी चुदाई देखते हुए बस अपना घंटा हिलाते rahengey.............yehi न..........." और जीतू के चेहरे पर नज़रगी के भाव उमड़ पड़ते hain...........wahin इससे पहले रघु कुछ बोलता काव्य बीच में बोल पड़ती हैं.........

" तुम न jeetu...............poorey पागल ho...........maine तुम्हें कभी किसी चीज़ के लिए मन किया हैं क्या!!!!!!! कब तुमसे ये कहा की रघु जो चाहे मेरे साथ करे और तुम वो न karo............nahin कहा na.........to फिर तुम ऐसा क्यों कहते हो........." और इस बार काव्य जीतू की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं वहीँ जीतू गुस्से से काव्य को घूरे जा रहा tha.........wahin कुछ दूर पर बैठा रघु बिलकुल चुप tha........ussey कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या bole...................aur जीतू को आखिर कैसे समझाए..................

" फर्क hain..........mere और रघु में बहुत फर्क hain.............agar वो तुम्हारी बुर के अंदर मूट सकता hain............to फिर मैं क्यों nahin.........kya मेरा मन नहीं हैं ऐसा करने का!!!!!!! और जीतू के दिल की बात जैसे उसकी जुबान पर आ जाती हैं वहीँ इस बार काव्य उसकी बाटिओं को सुनकर ज़ोरों से हंस पड़ती हैं.............

" बस इतनी सी baat.........to इस लिए तुम रघु se......aur मुझसे नाराज़ ho.............chalo मैं तुम्हारी ये नाराज़गी अभी दूर किये देती hoon...........magar पहले ये बताओ की मैंने कब तुम्हारे रघु और राम के बीच भेदभाव kiya............ram तो मेरी जान hain........to क्या मैं राम के लिए कुछ नहीं कर rahi............tum जो चाहते हो एक बार मुझसे मांग कर तो dekho...........agar न मैं उसे दे पवन तो फिर kehna...............aur रही बात तुम्हारे इच्छा की तो तुम एहि चाहते हो न की तुम भी रघु की तरह मेरी बुर के अंदर mooto.........to मैं तुम्हारी ये इच्छा अभी पूरी कर देती hoon............meri बुर hi क्या!!!!! अगर तुम मेरी गांड के अंदर भी मूतना चाहोगे तो भी मैं तुम्हें मन नहीं करने wali.......aur जो कुछ भी तुम्हारे मुन्न में हैं वो भी तुम मुझसे अभी बोल do........agar मेरे बस में रहा तो मैं वो सब कुछ करुँगी जो मैं रघु और राम के लिए करना चाहती हूँ............" और काव्य धीरे से मुस्कुराती हुई जीतू की तरफ देखने लगती हैं वहीँ इस बार रघु बोलना शुरू करता hain........aab जीतू शर्मिंदगी की वजह से पूरी तरह चुप था..............

" तू बहनचोद चुटिया hain............kya hain........chutiya...........maine तेरे लिए कितना मस्त प्लान सोच रखा था मगर तूने सब एक hi पल में गुड़ गोबर कर diya.........kahan मैं तुझे काव्य की गांड के अंदर मोटवाने की सोच रहा था और तू बस अभी तक वहीँ पे अटका पड़ा hain............tera कुछ नहीं होने wala..........jaa और अपनी ये इच्छा पूरी कर le.......jaa के मूट ले मेरी जान की बुर mein..........aagey से मैं तुझे कोई राइ मश्वरा नहीं देने wala.........tera जो दिल में आये सो करना........." और रघु इस बार जैसे भड़क उठता हैं वहीँ जीतू रघु के सामने माफ़ी मांगने लगता hain........aab उसकी भी ग़लतफहमी रघु के प्रति दूर हो गयी thi...........aab वो भी पूरी तरह से नार्मल हो गया था......

" चल मैं तुझे नास्ता करा देता hoon.....tujhe अब भूख लगी hogi.............naaste में बिस्कुट चलेगा naa.........agar घर में बिस्कुट नहीं हैं तो मैं अभी बहार से उसे मंगवा देता हूँ......." और रघु काव्य की तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं .......वहीँ काव्य हाँ में कहकर अपनी गुर्दें धीरे से हिला देती hain..........wahin सामने बैठा जीतू बिलकुल चुप tha..........aab उसके पास कहने के लिए कुछ बचा hi कहा था............

रघु फ़ौरन किचन में जाता हैं और एक शीशे की कतरौरी और एक स्पून (चमच) और एक मारिए गोल्ड की बिस्कुट का पैकेट लेकर आता हैं वहीँ काव्य उसके तरफ बड़े गौर से देख रही thi...........wo भी जानती थी की रघु अगर उसे बिस्कुट खिला रहा हैं तो वो कुछ न कुछ तो खुरापात उसमें ज़रूर सोच रखा होगा................

" आज मैं तुझे एक दम स्पेशल बिस्कुट खिलता hoon...........isey खाने के बाद तुझे मज़ा आ जायेगा................" और रघु उस शीशे की कटोरी में 5 बिस्कुट एक के ऊपर एक रखता चला जाता हैं और काव्य के तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा पड़ता hain........wahin सबकी नज़रें अब उस बिस्कुट पर जाकर टिक गयी thi..........wahin पैकेट में अभी और भी कई साडी बिस्किट्स रखे हुए थे.......

" jeetu........aab यहाँ खड़ा खड़ा मेरा मुँह क्या देख रहा hain..........tujhe मूतना हैं न मेमसाहेब की बुर mein............to chal.......aakar मूट ले aabhi.........magar ये याद रहे की तेरी मूट बस थोड़ी सी निकालनी chahiye........jissey इसमें रखा बिस्कुट तेरे मूट के पानी से पूरी तरह से सं jaye.........aur मैं उसका पेस्ट बनाकर अपनी जान को खिला sakun.........khawogi न मेरी जान.............." और रघु काव्य की तरफ देखता हुआ फिर से हंसी लगता हैं वहीँ काव्य धीरे से हाँ में अपनी गुरनें हिला देती हैं..........

" अरे waah..............ye क्या बात hui.........apni बरी थी तो अपने आखरी कतरे तक तू मेमसाहेब की बुर में मूतता raha...........aur जब मेरी बरी आयी to......thoda सा बस मूट lena.........main कुछ नहीं janta..........jab तक मेरे लुंड का पानी की आखरी बूँद नहीं निकल जाती मैं अपने लुंड को मेमसाहेब की बुर में से नहीं निकलूंगा............" और जीतू थोड़ा चिढ़ते हुए फिर से बोल पड़ता हैं वहीँ इस बार रघु उसपर जैसे भड़क सा जाता हैं..........

" behanchod...............tujhe कभी अकाल आएगी भी या nahin...............theek हैं ........तू अब अपने रास्ते और मैं अपने raaste.........kar ले जो तुझे करना hain.........nikal ले भड़ास अपने दिल की .............वैसे भी तुझे तेरी मेमसाहेब कुछ बोलने वाली तो हैं nahin...........magar इतना याद रखना जो खेल तू मेरे साथ रहकर खेलेगा उस खेल में मैं तुझे मज़े की बुलंदियों तक pahuchaunga............main वो साडी चीज़ें करूँगा जो तेरा भी कभी सपना हुआ करता tha...........is लिए तू एक बार और ाचे से सोच समझ le.......aagey तेरी marzi...........aur हाँ अगर इसके बाद भी तू अगर बीच में न नुकुर किया to............fir मुझसे बुरा कोई नहीं होगा............." और इस बार जैसे रघु जीतू की तरफ देखता हुआ जैसे अपना फैसला सुनाता हैं वहीँ जीतू कुछ देर की चुप्पी के बाद आखिर रघु के पक्ष में आकर उसकी बात मान लेता हैं............

" ठीक hain..........khel तेरे हिसाब से hi chalega.............jaisa तू चाहता hain.........magar मुझे मज़ा नहीं आया to.........fir बाद में मैं अपने मुन्न की hi karunga..........fir मुझे तू दोष मुट्ठ देना.............." और इस बार जीतू धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ रघु अपना एक हाथ उसके कंधे पर हौले से रखता हुआ उसकी आँखों में देखने लगता हैं और फिर धीरे से मुस्कुरा देता हैं.......

फिर रघु आगे कहना शुरू करता हैं जिसे सुनने के बाद जीतू का चेहरा ख़ुशी से खिल उठता hain........wahin इस बार राम भी मुस्कुरा देता hain...........wahin दूसरी तरफ काव्य अब समझ चुकी थी की आज उसकी पूरी माँ छोड़ने का प्लान बन चूका hain..........khel चाहे जैसा ho.........jo भी खेल रहा ho..........ussey फर्क नहीं padta...........aakhir............fategi hi तो उसकी hi बुर और gand...........bus देखना ये था की वो इस खेल में ज़्यादा देर तक टिक पति हैं या सामने वाला .............खिलाडी.................

" अब तू उसी अंदाज़ में आकर यहाँ इसी डाइनिंग टेबल पर आकर चढ़ ja..........jis पोजीशन में मैं तेरे बुर के अंदर मूट रहा tha........theek वैसे hi अब जीतू भी तेरी बुर के अंदर mootega..........aur ये याद रहे की मूट का सारा पानी नीचे रखे इस बिस्कुट वाली कटोरी में गिरने chahiye........uske बाद तुझे मालूम हैं की तुझे क्या करना हैं.........." और रघु जैसे काव्य को आदेश देता हैं वहीँ काव्य फिर से अपने दोनों हाथ पीछे की तरफ करती हुई लेट जाती हैं और अपने बुर को हवा में ऊपर की तरफ उठा लेती hain.........aur अपने दोनों पवन पूरा फैला लेती hain.........jeetu अगले hi पल अपने सरे कपड़े पूरा उतर देता हैं और काव्य के टांगों के बीच अपना लुंड सेट करता हुआ उसके ऊपर चढ़ जाता हैं...........

इस वक़्त उसका लुंड भी अकड़ा हुआ tha............wo एक तेज़्ज़ ढाका मरता हैं जिससे उसका लुंड पूरा एक hi झटके में काव्य के बुर के अंदर समां जाता hain.......wahin काव्य की लाजत से आँखें बंद हो जाती हैं और उसकी चीख निकल पड़ती हैं .........और जब जीतू को एहसास होता हैं की उसका लुंड पूरा अंदर चला गया हैं वो अपने लुंड पर प्रेशर डालना शुरू करता hain.............lund थोड़ा खड़े होने की वजह से उसकी मूट जल्दी नहीं निकलती मगर थोड़ी म्हणत के बाद वो आखिर काव्य के बुर के अंदर मूतना शुरू करता hain.........wahin काव्य को अपने अंदर पानी इक्कठा होता हुआ सा महसूस होने लगता हैं.........

वो वहीँ ज़ोरों से सिसक पड़ती हैं और मज़े से उसकी आँखें बंद होने लगती hain............jeetu को भी बहुत मज़ा आ रहा था मगर जैसे तैसे वो थोड़ा सा मूतने के बाद अपना मूट अंदर hi रोक लेता हैं वहीँ काव्य के बुर से अब धीरे धीरे मूट नीचे की तरफ गिरना शुरू हो जाता hain.............pehle कुछ बूंदों के रूप mein...........fir एक तेज़ धार की रूप mein.......wahin काव्य का अब बुरा हाल tha.........uski प्यास बुझने के बजाये और भी भड़कती जा रही thi............aab उसे ये सब कण्ट्रोल नहीं हो रहा था..........

जीतू थोड़े देर तक अपने लुंड को काव्य के बुर के अंडे hi रखे रहता हैं फिर वो अगले पल अपना लुंड एक hi झटके में पूरा बहार खींच लेता हैं और जैसे हु उसका लुंड बहार आता हैं एक ज़ोर की ppppppppppphhhhhhhhhuuuuuuuccchhhhhhhhhhhhhhhhkkkkkkkkkkkkk की आवाज़ के साथ काव्य की आहें भी फुट पड़ती hain..........wahin उसकी बुर से ढेर सारा पानी नीचे उस कटोरे में रखे बिस्कुट में गिरने लगता hain........jo पानी की वजह से अब धीरे धीरे वो बिस्कुट घुलने लगा tha.......to कुछ मूट की बूँदें फिर से उस टेबल के इधर उधर गिरने लगती hain..........wahin काव्य तब तक अपनी बुर को वैसे hi फैलाये रहती हैं जब तक की उसके बुर से जीतू का मूट पूरी तरह से टपकना बंद नहीं हो jata............ye देखकर रघु काव्य की तरफ धीरे से मुस्कुरा देता हैं.......

" लावो ram..........aab ये कैमरा मुझे do............main इसे sambhlunga........aur जैसा मैंने कहा हैं वैसा karo.........tum भी अब पूरा नंगा हो जाओ और जाकर अपनी भाभी के साथ पूरे मज़े करो............." और इस बार रघु जैसे राम को हुकुम देता हैं वहीँ राम भी एक एक कर अपने सरे कपय निकलन शुरू करता हैं और देखते hi देखते वो भी पल भर में पूरा नंगा हो जाता hain.........udher जीतू काव्य को अपने गॉड में उठा लेता हैं और उसे उठाकर सामने के सोफे के तरफ ले जाने लगता हैं.........

कंटिन्यू.......................................................
 
अपडेट- 55 (बी) (मेघा अपडेट)

वहीँ इस बार राम सामने के बीएड पर रखा एक पिलो (तकिया) उठाकर लता हैं और नीचे फ्लोर टाइल्स पर उसे रख देता hain.......wahin दूसरी तरफ जीतू काव्य को उठाकर लता हैं और उसे उल्टा करके उस सोफे के ठीक सामने लेता देता hain...........aab काव्य का जिस्म उल्टा पोजीशन में tha...........yani सर उसका नीचे रखे फ्लोर टाइल्स पर यानि तकिये पर tha.........aur उसका पवन अब हवा में ऊपर की तरफ they..........aur उस सोफे से बिलकुल सटे हुए थे............

रघु कमरे की तरफ जाता हैं और थोड़े देर बाद एक कुप्पी (जो तेल डालने के काम में आता हैं) लेकर आता hain........fir वो हँसते हुए उस कुप्पी की नोक को अगले hi पल काव्य के गांड के छेद पर सेट करता hain.........aur उसकी पूरी एक इंच की प्लास्टिक की गोलाई को काव्य के गांड के अंदर दाल देता hain..........usey देखने से ऐसा लग रहा था मनो वे लोग काव्य की गांड के अंदर तेल वगैरह कुछ dalengey........magar रघु का तो कुछ और hi इरादा tha...........agle hi पल वो राम को पास आने का इशारा करता हैं और जैसे hi राम काव्य के पास आता हैं वो एक तुक उस कुप्पी एक अंदर बड़े ध्यान से देखने लगता हैं........

अंदर काव्य की गांड की लाल लाल चमड़ी कुछ धुंदली सी नज़र आ रही thi.........wahin जीतू उसके करीब आता हैं और काव्य के गांड के छेद को थोड़ा थोड़ा फैलाने लगता hain........wahin अपने हाथों से उस कुप्पी को और अंदर तक पुश करता hain........fir वो उस कुप्पी में देखता हुआ थूक देता हैं जिससे उसका गधा गधा लार अब उस कुप्पी के रास्ते काव्य के गांड के अंदर जाने लगा tha.........fir वो राम को उस कुप्पी के अंदर धीरे धीरे से मूतने का इशारा करता hain...........taki उसका मूट धीरे धीरे अब काव्य के गांड के अंदर जमी होती जाये........

राम बहुत आहिस्ता से मूतना शुरू करता हैं और जब उसकी मूतने की रफ़्तार तेज़्ज़ हो जाती हैं उस कुप्पी में ढेर सारा उसका मूट जमा होने लगता hain..........wahin जीतू अब काव्य की गांड को धीरे धीरे से फैलता जा रहा था ताकि ऊके मूट का सारा पानी धीरे धीरे अंदर समां sake.........wahin काव्य उलटी पोजीशन में लेती हुई thi.........wo भी ाचे से जानती थी की अगर मूट का पानी इधर उधर गिरा तो सीधा उसके जिस्म से होते हुए सीधा उसके मुँह पर girega.........udher राम भी थोड़ा थोड़ा करके मूट रहा था.......

जब कुप्पी खली होती वो थोड़ा सा mootata........wahin जीतू बार बार काव्य के गांड को फैलता jata.........to उस कुप्पी में जमा पानी काव्य के गांड के अंदर चला jata..........aab काव्य की गांड राम के मूट से पूरी तरह भर गयी thi........jab जीतू देखता हैं की अब इसमें और मूट नहीं जायेगा वो अगले hi पल उस कुप्पी को काव्य के गांड से निकल देता hain..........wahin उसके गांड से कुछ मूट का पानी काव्य के कमर से होते हुए उसके पेट और मुँह पर गिरने लगता hain........wahin वो राम को इस बार काव्य की गांड पूरा फैलाने का इशारा करता hain........aur देखते hi देखते इस बार जीतू पास में रखा दो बिस्कुट अपने हाथों में उठता हैं और उसे छोटे छोटे टुकड़े करता हुआ धीरे धीरे एक एक करके काव्य की गांड के अंदर डालना शुरू करता hain.........aur तब तक डालता हैं जब तक वो दो बिस्कुट ख़तम नहीं हो जाते................

इस वक़्त काव्य की गांड में राम की मूट और बिस्कुट they......usey बहुत अजीब सा लग रहा tha............usey ऐसा लग रहा था जैसे उसकी गांड की सूराख पूरी तरह से भर गयी ho...........fir इस बार जीतू वहीँ कुप्पी को फिर से उठता हैं और उस बार वो उसे काव्य की बुर पर सेट करता hain...........fir वो उसमें ढेर सारा थूक गिरता हैं और आखिर उस कुप्पी में धीरे धीरे खुद मूतना शुरू करता hain.......aur तब तक मूतता हैं जब तक उसका मूट ख़तम नहीं हो jata..........fir वो उस कुप्पी को हटा देता हैं और दो बिसकियत तोड़कर उसके छोटे छोटे टुकड़े करके उसकी बुर के अंदर डालना शुरू करता hain.......wahin इस बार राम अंदर से जाकर एक बड़ा सा कटोरा ले आता हैं और वहीँ उसी डाइनिंग टेबल पर फिर से रख देता हैं........

" अब तेरी बुर और गांड राम और जीतू के मूट से पूरी तरह भरी हुई hain..........aab तू ऐसी hi इसी हाल में इन दोनों से एक साथ एक hi समय पर chudwayegi.........ram तेरी बुर में अपना लुंड pelega...........wahin जीतू तेरी गांड mein............ek समय पर तेरे ये दोनों छेद में लुंड jayengey..........aur तब तक ये दोनों तुझे ऐसे hi छोड़ेंगे जब तक की इनका छुम तेरी दोनों छेद में भर नहीं jata.........magar ये याद रहे की तू ऐसे hi रहेगी जब तक तुझे उठने के लिए न कहा jaye...........aur छोटे malik......agar आपको लगता हैं की आपका लौड़ा मुरझा गया हैं तो आप अपनी भाभी के मुँह में अपना लुंड बेशक दाल सकते hain.........unse अपना लुंड चुसवा सकते hain.........aur जीतू तुझे तो पता hi हैं न की एक मिनट के अंदर लौड़ा कैसे खड़ा किया जाता hain...........chal जाकर समजह दे अपने छोटे मालिक को............." और रघु हँसता हुआ जीतू की तरफ देखने लगता हैं वहीँ इस बार जीतू फ़ौरन काव्य के पास जाता हैं और जाकर उसके चेहरे पर अपनी गांड टीकाकार बैठ जाता हैं............

अब काव्य के मुँह में जीतू का गन्दा गांड tha...........jisey वो अब काव्य को चटवाने वाला tha..........jeetu अपना गांड थोड़ा सा हवा में उठता हैं और काव्य को अपना मुँह पूरा खोलने का इशारा करता hain...........wahin काव्य भी ाचे से समझ रही थी की जीतू अब उससे क्या चाहता hain...........agel hi पल वो अपना मुँह हौले से खोल देती हैं और जीतू ढेर सारा गधा गधा अपना गन्दा थूक काव्य के मुँह में गिरने लगता hain..........aur अगले hi पल वो अपनी गांड की छेद को फिर से काव्य के मुँह पर रखकर बैठ जाता hain........wahin काव्य धीरे धीरे उसके गांड के सूराख पर अपना जीभ फेरना शुरू करती hain..........chatney लगती hain.........wahin जीतू अपना गांड धीरे धीरे काव्य के मुँह पर रगड़ रहा tha...........fir वो थोड़ा सा पीछे की तरफ हटाता हैं और अपने बड़े बड़े ांडों को बरी बरी से काव्य के मुँह के अंदर डालकर चुसवाने लगता hain.........dekhtey hi देखते उसका लौड़ा पूरा अकड़ जाता हैं........

वहीँ ये नज़ारा देखकर तो राम का लुंड वैसे भी पूरा अकड़ गया tha.......aab चुदाई का खेल शुरू होने वाला tha..............ek तरफ राम .........और दूसरी तरफ jeetu..........wahin थोड़े दूर पर रघु उस कमरे से वीडियो शूट कर रहा tha........jeetu पीछे की तरफ आता हैं और अपने लुंड को काव्य की गांड पर धीरे से सेट करता हैं और बहुत आहिस्ता से रगड़ना शुरू करता hain........wahin राम भी उसका देखा देखि एहि काम कर रहा tha..........agle hi पल जीतू अपने लुंड पर दबाव बनाना शुरू करता हैं और जैसे जैसे उसका लौड़ा काव्य की गांड में उतरता चला जाता हैं वैसे वैसे काव्य की गांड फटनी शुरू हो जाती hain.........saath साथ काव्य की चीख भी.......

जैसे hi जीतू का सूपड़ा अंदर घुसता हैं काव्य की ज़ोरों से चीख निकल जाती hain..........wahin उसकी गांड की छेद से थोड़ा सा मूट बहार की तरफ तपने लगता hain..........magar इस बार न जीतू रुकता हैं और न वो काव्य के दर्द की परवाह करता hain..........jab उसका लुंड पूरा काव्य के गांड में समां जाता हैं वो अपने लम्बे लम्बे सांस लेता हुआ रुक जाता hain............usey तो एक पल ऐसा लग रहा था मनो उसका लुंड किसी गहरी झील में समाया hain.........kuch पानी उसकी गांड से बेहटा हुआ उसके कमर से होता हुआ अब काव्य क मुँह में जा रहा tha........wahin दूसरी तरफ राम अपना लुंड धीरे धीरे काव्य के बुर में पेलना शुरू करता हैं और तब तक वो भी नहीं रुकता जब तक उसका लुंड काव्य की बुर की गहराई में नहीं उतर जाता.......

इधर जीतू धीरे धीरे धीरे अपना लुंड आगे पीछे पेलना शुरू करता हैं............ वहीँ दूसरी तरफ ram.........aab उसके दोनों छेद से मूट भी थोड़ी थोड़ी करके बहार की तरफ तपाद रही thi....aur चुदाई के वक़्त एक अजीब सा आवाज़ निकल रहा tha.........wahin काव्य की आहें अब और भी तेज़्ज़ होती जा रही thi............aisa पहला मौका था जब वो एक साथ अपने दोनों छेद में लुंड ले रही थी..........

" मूट का पानी be-wajah बहार नहीं टपकना चाहिए मेरी jaan.........warna मैं तेरे दोनों छेद में इतना पानी भरूंगा की तुझे पता नहीं चलेगा की तू गांड से मूट रही hain.............ya अपने बुर se...............aur हाँ अपना बैलेंस ऐसे hi बनाये rakhna............aabhi तो तेरे इन दोनों छेद में बहुत सी चीज़ें जाना बाकि hain.......tu बस देखती जा........." और रघु अपने लुंड मसलता हुआ उस वीडियो को धीरे धीरे शूट करने लगता हैं...........

चुदाई का दौर अब लुम्बा चल रहा tha...........pichley 5 मिनट तक लगातार एक तरफ से जीतू काव्य की गांड फाड़ रहा tha.......wahin दूसरी तरफ से राम उसकी bur............wahin काव्य की आहें तेज़्ज़ होती जा रही thi...........wo वहीँ सिसक रही thi.........khel तेज़ी से आगे बढ़ता जा रहा था और राम की हालत भी अब ख़राब होती जा रही thi.............bur में मूट और बिस्कुट भरे होने की वजह से अब राम और जीतू के लुंड पर भी उसका लेप चढ़ा हुआ साफ़ दिख रहा tha............wahin राम की सांसें फूलने लगती हैं और उधर जीतू भी अपने होश को नहीं संभल पता..............

अगले hi पल राम aaaaaaaaaaaaiiiiiiiisssssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhh............zoron से चीखता हुआ झरने लगता हैं और अपना सारा छुम वो काव्य की बुर की गहराई में उतरता चला जाता hain.............aur ज़ोरों से हांफता हुआ अपने चेहरे पर आये पसीने को पूछने लगता hain...............aur लुम्बी लुम्बी साँस लेने लगता hain...........jab उसका सारा छुम निकल जाता हैं वो फ़ौरन अपना लुंड बहार खींच लेता हैं और अगले hi पल एक pppppppppppuuuuuuuuuchhhhhhhhhhhhh की ज़ोर से आवाज़ आती hain.........wahin जीतू भी अपने सैयाम को नहीं रोक पता और अगली बार वो भी काव्य की गांड में अपना छुम छोड़ने लगता hain........aur हफ्ता हुआ बिलकुल ठंडा पढ़ जाता हैं............

रघु हँसता हुआ काव्य के पास आता हैं और उसकी तरफ देखकर मुस्कुराने लगता hain........wahin अब काव्य की गांड और बुर पूरी तरह से भर चुकी thi.........kuch छुम se.......kuch बिस्कुट se.........to कुछ मूट se...........issey पहले काव्य कुछ samajthi........raghu उसे हवा में उठा लेता हैं और उसे यथाथता हुआ फिर से ले जाकर उस डाइनिंग टेबल पर उस बड़े से कटोरी के ठीक ऊपर बैठा देता हैं और उसके दोनों पवन को धीरे से फैला देता hain..........aur काव्य को ज़ोर लगाने को कहता hain............aur जब काव्य अपने बुर और गांड पर थोड़ी सी प्रेशर देती हैं अगले hi पल उसकी गांड से जीतू की ढेर साडी वरीय और राम की मूट और उसमें सना बिस्कुट धीरे धीरे बहार निकला शुरू हो जाता हैं वहीँ रघु उसकी दोनों गांड को पकड़े हुए पूरा फैलाये हुआ था..............

जब गांड से पूरा माल निकल जाता हैं तब काव्य अपने बुर पर प्रेशर करती हैं और उसके बुर से ढेर सारा माल फिर से गिरने लगता hain......aur देखते hi देखते उस कटोरे में ढेर सारा मूट और छुम सब कुछ उसमें घुलने लगता hain...........raghu मुस्कुराता हुआ काव्य के करीब जाता हैं और धीरे से उसक कटोरे को अपने हाथों में उठता हैं और एक तुक उसमें देखने लगता hain............fir वो उसमें थूक देता हैं और अपनी एक ऊँगली से उस कटोरे में जमा माल को मिलने लगता हैं और उसे मिलते हुए धीरे से काव्य के मुँह पर सटाकर रख देता hain...............wahin काव्य बड़े अजीब से रघु को एक तुक देख रही थी........

"पी ले मेरी jaan............ye ख़ास तरह का आयुर्वेदिक दवा hain........ye किसी किसी को बस मिलती hain............ismein वो सरे रूस मिले हैं जो तेरे लिए फायदेमंद hain............aab तो तू इन सब की आदत दाल hi le.............kyon की मैं तेरे साथ आगे भी ऐसे hi कुछ खेल खेलने वाला hoon..........jismein हम सब को तो मज़ा आएगा hi................tujhe भी बहुत मज़ा आने वाला हैं..........." और रघु उस करते को काव्य के होंठों पर लगा देता हैं और अगले hi पल काव्य बिना किसी सवाल जवाब के उस कटोरे में रखे सरे पानी को पी जाती hain...........uska टास्ते बहुत अजीब सा tha...........kuch meetha.....kuch नमकीन sa..........ajeeb सा.........

फिर रघु उसे अपने गॉड में बैठता हैं और उस बिसुईट का घोल जो जीतू के मूट से बना था उसे भी धीरे धीरे खिलाने लगता hain..........aur तब तब कहता हैं जब तक उसमें का रखा बिस्वुत पूरी तरह से ख़तम नहीं हो जाता..............

वहीँ कुछ दूर पर खड़ा राम बड़े गौर से अपने भाभी को एक तुक देख रहा tha.............wo खुद पर यकीन नहीं कर पा रहा था की कल तक वो जिस भाभी से प्यार करता था ............आज क्या ये वही hain..............ya फिर ये कोई हैं एक बाज़ारू ..............raand...................ya उससे भी कहीं बढ़कर............................!!!!!!! शायद अब इस सवाल का जवाब उसके पास भी नहीं था.........................................................

टिल कॉन्टिनोएड..................................................................
 
ये इन्तेहाह का सबसे किंकी part था....... और मैं जनता हूँ की बहुत से लोग को किंकी पसंद हैं तो बहुत को नहीं..... आगे से इस कहानी में किंकी पार्ट्स अब नहीं आएंगे क्यों की मुझे भी प्रोब्लेम्स होती हैं दिन मैं भी डिस्टर्ब रहता हूँ.... किंक के कुछ पार्ट्स चलेंगे मगर ज़्यादा नहीं... कीप रीडिंग...
 
अपडेट- 56 (ा) (मेघा अपडेट)

वहीँ कुछ दूर पर खड़ा राम बड़े गौर से अपने भाभी को एक तुक देख रहा tha.............wo खुद पर यकीन नहीं कर पा रहा था की कल तक वो जिस भाभी से प्यार करता था ............आज क्या ये वही hain..............ya फिर ये कोई हैं एक बाज़ारू ..............raand...................ya उससे भी कहीं बढ़कर............................!!!!!!! शायद अब इस सवाल का जवाब उसके पास भी नहीं था.........................................................

अब आगे.......................................................

काव्य के जिस्म पर जगह जगह छुम, मूट , और बिस्कुट के चींटी बिखरे पड़े they......wahin अब कमरे में जैसे एक तूफ़ान आकर गुज़र गया tha........ram फ़ौरन बाथरूम में जाकर घुस जाता हैं और जीतू भी अपने जिस्म पर टॉइलइ लपेट लेता hain.........wahin कुछ दूर पर खड़ा रघु उस वीडियो को बंद करता हैं और बड़े गौर से उस हॉल को एक तुक देखने लगता hain.....dining टेबल काव्य के मूट से पूरी तरह गन्दा हो गया tha.........poorey फर्श पर जगह जगह मूट बिखरे पड़े they..........jo अब उस कमरे में अजीब सा स्मेल कर रहे थे............

" memsaheb................aap तो बहुत गन्दी हो गयी hain............aacha होगा की आप जाकर ाचे से नाहा lijiye............aur मस्त खुसबू वाला पाउडर और क्रीम लगाकर अपने बैडरूम में मेरे आने का इंतज़ार kijiye.........main अभी इस कमरे की पूरी सफाई करके आता हूँ........" और रघु एक बकेट उठता हैं और उसमें फिनायल डालकर पूरे हॉल की साफ़ सफाई में जुट जाता हैं वहीँ काव्य को थोड़ी सी हैरानी भी होती हैं की रघु के अंदर ऐसा परिवर्तन आखिर आया कैसे???????...........

वो भी रघु से बिना सवाल जवाब के सीधा बाथरूम में नहाने घुस जाती हैं और करीब 1/2 घंटे की साफ़ सफाई के बाद वो तीनों काव्य के बैडरूम की तरफ चल पड़ते hain..........wahin काव्य नहाकर इस वक़्त पूरी नंगी उनके बीच बेटी हुई thi.........raghu पास में रखा एक टॉवल काव्य के तरफ बढ़ा देता हैं और उसे अपने बदन को ढकने का इशारा करता hain.........wahin काव्य बिना सवाल जवाब के अपने जिस्म को धक् लेती हैं और रघु की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं..........

" क्या बात hain............tumhara तो अब मूड पूरा बदल gaya.........aab तुम मुझे छोड़ोगे नहीं kya.....jo मुझे तुम अब टॉवल पहना रहे हो..........!!!!!! " और काव्य शरारती भरे अंदाज़ में रघु की तरफ देखती हुई धीरे से हंस पड़ती हैं वहीँ रघु भी जवाब में मुस्कुरा देता हैं.............

" ऐसी बात नहीं हैं janeman.........agar तुम ऐसे hi दिन रात मेरे सामने नंगी रहोगी तो पता चला की मेरा लौड़ा तुम्हें देखकर उठने का नाम hi नहीं lega........fir मैं तुम्हें छोडूंगा क्या ख़ाक!!!!!!! इस लिए तुम्हारे जिस्म पर थोड़े बहुत कपड़े भी होने जरूररी hain............aur देखो घडी की taraf........dopahar के 2 बज चुके hain........mujhe तो ज़ोरों की भूख लगी hain.........aur सच कहो तो अगर पेट खली रहे तो चुदाई भी ाची नहीं lagti......pehle मस्त आराम से कुछ खा पी लेते हैं उसके बाद थोड़ा आराम करके पूरी रात तुम्हारी दोनों छेद ाचे से हम सब मिलकर चौड़ा करेंगे ................." और रघु अपने पीले काळा दांत दिखता हुआ हंस पड़ता हैं वहीँ काव्य भी अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका लेती hain..............shayd शर्म se........kyon की अभी भी थोड़ी बहुत शर्म उसके अंदर बची थी.............

" जीतू तू कपड़े पहन le...........aur जा बहार से कुछ खाने को लेता आ........" और रघु धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य बीच में तुरंत बोल पड़ती हैं...........

" ram............tum क्या खाना चाहते ho.............chicken biryani........tumhari favorite.........kaho तो मैं अभी आर्डर कर देती hoon...........samney की इस अलमारी में मेरा पर्स रखा हुआ hain........usmein से 2000 के नोट ले जाओ और जाकर मार्किट से अभी चिकन बिरयानी लेते आवो.........." और काव्य अपने हाथों को उस अलमारी की तरफ धीरे से इशारा कर देती हैं वहीँ राम जाकर अलमारी खोलता हैं और उसमें से 2000 का एक नोट निकल लेता hain.........wahin रघु बड़े गौर से सामने के अलमारी को एक तुक देखे जा रहा tha...........jaise उसमें रखा सारा रूपया उसी का ho............ya फिर होने वाला हो................

" आपको कहीं जाने की ज़रूरत नहीं हैं छोटे malik..........jeetu हैं na........wo चला jayega..........aur लेता आएगा............" और राम उस 2000 के नोट को जीतू के हाथों में सौंप देता हैं और जीतू अगले hi पल तैयार होकर बहार निकल जाता hain..............wahin काव्य बड़े गौर से एक तुक रघु और राम की ओरे देख रही थी..........

" क्या बात हैं raghu.............tum नहीं छोड़ोगे mujhe............tum नहीं बुझावोगे अपनी ये प्यास.............." और काव्य धीरे से मुस्कुराती हुई फिर से बोल पड़ती हैं वहीँ जवाब में रघु भी हंस पड़ता हैं...........

" तुम तो एक नशा हो मेरी jaan................tumse भला मैं कैसे दूर रह सकता hoon.........aur रही बात छोड़ने की तो अभी तो साडी रात पड़ी hain............aaj की रात तुम्हारे सरे छेद को छोड़ छोड़कर उसे भोंसड़ा जो बनाना hain............aisi भी क्या जल्दी हैं............" और रघु फिर से गन्दी हंसी अपने चेहरे पर लता हुआ धीरे से हंस पड़ता हैं वहीँ काव्य बस उसके तरफ देखे जा रही thi..........wahin राम चुप चाप से उनकी बातें सुनता रहता hain............aab उसके पास बोलने को बचा hi क्या था............

तभी राम का मोबाइल बज उठता हैं और जब उसकी नज़र मोबाइल के स्क्रीन पर जाती हैं उसकी आँखें थोड़ी हैरत से फैलत्ती चली जाती hain........phone राहुल का tha.........yani उसके बड़े भाई ka............wo काव्य की तरफ देखता हुआ अपना फ़ोन पिक करता हैं और धीरे धीरे फिर बोलना शुरू करता हैं.......

" अरे यू alright..........ram.........kavya कहाँ hain.....main कब से उसका फ़ोन तरय कर रहा hoon........uska फ़ोन स्विच ऑफ आ रहा hain...........baat क्या हैं!!!!!! और राहुल राम से सवाल करता हैं वहीँ राम को कुछ समझ में नहीं आता और वो धीरे से अपना फ़ोन काव्य को पकड़ा देता hain...........wahin रघु बड़े गौर से उन दोनों की तरफ देखे जा रहा tha.......fir रघु उठकर फ़ौरन उस कमरे की बहार की तरफ चल पड़ता hain.......raghu के जाते hi काव्य थोड़ा सा रिलैक्स फील करती हैं और फ़ोन अपने हाथ में लेती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं...

" rahul............mera फ़ोन पानी में गिर गया tha........tab से ों hi नहीं हो raha.....ram उससे बनाने को दिया hain........ek दो दिन तो लग hi jayengey........waise मैं ठीक हूँ..........." और काव्य बाद को बदलती हुई दो चार मिनट तक राहुल से बातें करती हैं वहीँ राहुल वीडियो कॉल करने की ज़िद्द करता हैं मगर काव्य उसे ये बोलकर मन कर देती हैं की जब उसका फ़ोन ठीक हो जायेगा वो उसपर वीडियो कॉल कर lega.........do चार बातें होने के बाद काव्य धीरे से फ़ोन रख देती हैं....

राम इधर उधर बहार की तरफ देखता हैं फिर वो अपना एक हाथ काव्य के हाथों में धीरे से रख देता हैं और बड़ी आस से काव्य के तरफ देखने लगता hain.....mano वो उससे कुछ कहना चाहता ho...........wahin काव्य भी उसकी नज़रें पढ़ने की पल पल कोशिश कर रही थी......

" bhabhi.........ek बात poochun.........aap जो कर रही क्या वो सही hain.......kya आप भैया को धोका नहीं दे rahi..........main आपको ज़्यादा तो नहीं बस इतना hi कहूंगा की पानी अगर सर से ऊपर जाने लगे तो ाचा होगा की उससे पहले हमें संभल जाना chahiye...........aagey आप खुद hi समझदार हैं..........." और राम आगे और कुछ बोलता तभी दरवाज़े की आहात सुनकर वो बिलकुल चुप हो जाता हैं और रघु फिर से अंदर आता hain.........wahin काव्य फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे झुका लेती हैं........

थोड़े देर बाद जीतू भी 4 पैकेट चिकन बिरयानी पैक करके लता हैं और फिर चरों बैठकर आराम से कहते hain...........khana खाने के बाद रघु सोने की ज़िद्द करता हैं और राम उसके बगल में kavya.........aur उसके बगल में रघु एक hi बिस्टेर पर सू जाते हैं वहीँ सबसे लास्ट में जीतू भी सू जाता hain...........A.C चलने की वजह से नींद सबको जल्दी आ जाती हैं और काव्य की जब नींद खुलती हैं उस वक़्त घडी में रात के 8 बाज रहे they.......sabhi ऐसे hi बेसुध सोये हुए they............sabko ऐसे सूता हुआ देखकर काव्य फ़ौरन अपनी जगह से उठती हैं और सीधा जाकर बाथरूम में घुस जाती हैं.........

अब वो काफी रिलैक्स फील कर रही thi............uski थकन भी कम हो गयी thi.........magar आज की रात रघु और जीतू उसे सूने नहीं देने वाले they........ye बात भी वो ाचे से जानती thi...........aur जब थोड़े देर बाद वो बाथरूम से जब बहार निकलती हैं सामने दरवाज़े पर रघु खड़ा हुआ उसे सामने नज़र आता hain...........wahin रघु उसकी तरफ देखता हुआ मुस्कुरा रहा था.............

" कहाँ गयी थी मेरी jaan.........mootney क्या!!!!! " और रघु गन्दी हंसी लता हुआ अपने चेहरे पर चहक से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य जवाब में उसे देखकर धीरे से मुस्कुरा पड़ती hain......aur हाँ में अपणी गुर्दें हिला देती hain.........wahin इस बार रघु काव्य का हाथ पकड़ता हुआ सीधा बैडरूम में ले जाता हैं और सबके सामने वहीँ खड़ा कर देता hain..........aab सब लोग उठ चुके थे और सब अब काव्य की तरफ बड़े गौर से देख रहे थे..........

" तू तो शर्त हार गयी मेरी jaan..........aur शर्त के मुताबिक अब से 24 घंटे तक फिर से तू हमारी घुलम rahegi.........hum जो चाहे जैसा चाहे तेरे साथ कर सकते हैं..........." और रघु अपने पीले काळा दांत दिखता हुआ फिर से हंस पड़ता हैं वहीँ काव्य अजीब सी नज़रियों से एक तुक रघु और उन सब को देखने लगती hain...........ussey ये समझ में नहीं आ रहा था की उससे अब गलती कहाँ पर हुई..........

" magar......aakhir मैंने किया क्या हैं !!!!!!! और काव्य इस बार थोड़ी सी चौंकते हुए रघु की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ रघु जैसे उसकी गलती को याद दिलाता हैं..........

" मैंने तुझसे कहा था न की तू जो कुछ भी करेगी हमसे पूछ कर hi karegi.......fir तुझे किसने कहा था बाथरूम जाने ko........wo भी हमसे पूछे bagair..........tujhe मूतने का बड़ा शौक हैं na...........aab मैं तेरे साथ ऐसे ऐसे खेल खेलूंगा की तेरी मूट खुद hi निकल jayegi..........tujhe याद आया की मैं और भी कुछ याद दिलवुन.........." अउ रघु अपने बात पर ज़ोर देता हुआ फिर से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य कुछ नहीं बोल पति और किसी गुनेहगार की तरह अपनी गुर्दें धीरे से नीचे की तरफ झुका लेती हैं........

रघु उसे वहां से अपनी गॉड में उठता हुआ फिर से हॉल में ले जाता हैं और सबके बीच काव्य को खड़ा कर देता हैं और एक hi झटके में उसके जिस्म पर लगा टॉवल उतर फेंकता hain...........ek बार फिर से काव्य उन सबके बीच पूरी नंगी हो जाती hain.........aur सब उसे बड़े अजीब सी नज़रियों से देखने लगते हैं............

कंटिन्यू....................................................
 
अपडेट- 56( बी) (मेघा अपडेट)

" अब जो तेरी चुदाई का खेल शुरू होगा वो अब हम सब की प्यास ख़तम होने के बाद hi thamega...........aab हमारी प्यास बुझाने के लिए चाहे जो तुझे करना pade.........jaisa तुझे करना pade..........wo सब कुछ तू karegi........chahe कुछ भी क्यों न तुझे हर हाल में अब करना pade........uske लिए तुझे तेरी गांड और बुर भी क्यों न अपनी फडवणी pade........tu अब पीछे नहीं हुत्त सकती........." और रघु जीतू को पानी की बोतल लेन का इशारा करता हैं और जीतू एक लीटर की पानी की बोतल फिर से उठा लता हैं और सीधा काव्य के होंठों पर उसे लगा देता hain..........kavya बिना किसी सवाल जवाब के चुप चाप से उस पानी को पूरा पी जाती hain........wahin वो ाचे से जानती थी की रघु उससे आगे क्या कुछ करवाना चाहता hain..........wo अब फिर से इन सब के लिए अपने आपको तैयार कर रही थी........

रघु फ़ौरन उस कमरे के सरे लाइट्स ों करता हैं और उस कमरे का फैन और A.C बंद कर देता hain............may का महीना चल रहा था और गर्मी बहुत thi......bina फैन के रहना उस कमरे में बहुत मुस्खिल tha.........to काव्य तो हमेशा A.C में रहती आयी thi.........usey तो गर्मी बर्दास्त करना बहुत मुस्खिल tha.........raghu तो काव्य के जिस्म से सरे जगह से अब पानी निकलन चाहता tha........kuch पसीने के रूप mein......to कुछ उसकी मूट के ज़रिये.................

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रघु फिर अपने सरे कपड़े उतर देता हैं और पूरा नंगा हो जाता hain...........wahin कुछ दूर पर राम और जीतू बैठे बस चुदाई का लाइव शो देख रहे tthey.............raghu फिर से दो पुड़िया अपने लुंगी से निकलता हैं और उसके चार हिस्से कर देता hain.........ye वहीँ वायग्रा की दवा thi.........pehle खुद वो पानी के साथ पीटा हैं फिर वो सबको बरी बरी से पीने को कहता hain........aur फिर लास्ट में वो काव्य को भी उस पाउडर को पानी के साथ दुबारा पीने को कहता hain...........khel फिर से अब शुरू हो गया था...........

रघु काव्य के ठीक पीछे जाकर उससे सत्कार खड़ा हो जाता हैं और इस बार वो अपना लुंड काव्य की गांड पर टिका देता hain........aur उसके दोनों पवन को पूरा फैलने का इशारा करता hain..........kavya भी अपने दोनों पवन चौड़ा करके कड़ी हो जाती hain........raghu काव्य के पीठ पर अपने गंदे हाथ हौले से रखता हैं और बड़े प्यार से उसके पीठ को धीरे धीरे चेतना शुरू करता hain.........aur अपने गंदे थूक को धीरे धीरे उसपर गिरना शुरू करता hain......jaise जैसे उसके जीभ काव्य के बदन पर फिर रहे थे वैसे वैसे काव्य की सिसकारी भी बढ़ती जा रही थी.......

मगर न रघु को किसी बात की अब कोई जल्दी thi......aur न hi वो थोड़ा भी बेचैन tha............haan अब वो पल पल काव्य को बेचैन करता जा रहा tha..........jab उसके होंठ काव्य के पूरे पीठ पर चल जाते हैं वो धीरे से सरकता हुआ ऊपर की तरफ आने लगता hain.............kavya के गुर्दें की taraf..............aur फिर उसी अंदाज़ में धीरे धीरे से उसके गुर्दें और कान के दोनों हिस्से को चटनी लगता hain............wahin काव्य की सांसें फिर से बढ़ने लगती hain......pasiney से उसका जिस्म भीगता जा रहा था वहीँ रघु उसके पसीने को भी अपने जीभ से चाट चाटकर साफ़ कार रहा था........

जब रघु काव्य की सुराही गुर्दें को ाचे से चाट लेता हैं वो फ़ौरन काव्य को अपनी तरफ घूमता हैं और उसके चेहरे और नाक होंठ सबपर अपने गंदे जीभ को फेरना फिर से शुरू करता hain........raghu के होंठ और जीभ लगातार काव्य के बदन के हर हिस्से पर चल रहे they.............kabhi वो उसके गलों पर अपना जीभ फेर रहा tha.....to कभी उसके होंठों par..........to कभी नाक par........fir अगले hi पल वो उसके होंठों को अपने डेंटन के बीच दबाकर उसे हौले हौले से चूसने लगतरा hain..........katney लगता hain........uske जीभ को अपने मुँह में लेकर चूसने लगता hain..........wahin वो अपना थूक काव्य के मुँह में भी डालता जा रहा था.......

फिर वो थोड़ा सा नीचे की तरफ झुकता हुआ नीचे आने लगता हैं और उसके शोल्डर और आर्मपिट्स पर भी अपने जीभ को ऐसे hi फेरता hain.......wahin काव्य को अब गुदगदी सो होने लगी thi......magar रघु पर तो जैसे नशा सा चाय tha..........fir वो अपना जीभ काव्य के चूचियों पर लेकर रख देता हैं और किसी छोटे बाचे की तरह उसकी दोनों चूचियों को बरी बरी से चूसने लगता hain........katney लगता hain.......apne हाथों से उसके निप्पल्स को मसलने लगता hain..........wahin काव्य की सिसकारी पल पल बढ़ती जा रही thi.........aab उसके छूट में भी गीलापन बढ़ने लगा था..........

वो जी भरकर वो काव्य के दोनों चूचियों का रूस पी लेता हैं वो थोड़ा सा और नीचे की तरफ आने लगता hain.....uske नैवेल की taraf........wahan भी वो अपना गन्दा सा जीभ उस नैवेल के अंदर डालने लगता हैं और बहुत आराम से चाटता रहता hain.........aur फिर अपना जीभ जब काव्य के छूट के करीब पहुंचता हैं काव्य की सांसें भरी होने लगती hain...wo हौले से अपनी टांगें पूरा फैला देती हैं जिससे रघु को उसकी बुर चटनी में दिक्कत न ho............aur जब रघु की जीभ काव्य के बुर को जब छूती हैं काव्य न चाहते हुए भी ज़ोरों से सिसक पड़ती hain........uske जिस्म में मस्ती की एक तेज़्ज़ लहर दौड़ जाती हैं..........

"aaaaaaaaaaaaaassssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhh........raghu आहिस्ता se...........aaah............aise hi ....haaaannnnn.........chato मेरी बुर ko..............aaaaaaaaaaahhhhh....." और काव्य सिसकते हुए फिर से बोल पड़ती hain......lajaat से उसकी दोंनो आँखें बंद हो गयी thi......wahin रघु काव्य की बुर को बुसस छाती जा रहा tha........uske क्लिटस को लगातार अपने जीभ से कुरेद रहा tha...........raghu अपने दोनों हाथ अबकी बार ऊपर की तरफ ले जाता हैं और काव्य के बुर के लिप्स को धीरे धीरे से खोलने लगता hain...........usey फैलाने लगता hain..........ander गुलाबी रंग की चमड़ी साफ उसके चोट रूस में चमक रही thi...........aur एक छोटा सा छेद भी नज़र आ रहा था जो काव्य का पी होल tha.............jahan से उसकी मूट निकलती hain..........thode देर तक रघु उस छोटे से छेद को एक तुक देखता हैं फिर वो अपने जीभ से उस छेद को चेतना शुरू करता हैं और अगले hi पल काव्य की aaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhh निकल जाती हैं..........

वो छेद तो उसकी इतनी छोटी थी की उसका उसमें एक ऊँगली भी नहीं जा सकता tha.........wo कभी अपने ऊँगली से उस छेद को चढ़ रहा था तो kabhi........apne जीभ se.....kabhi अपने मुँह में भरकर चूस leta.........fir रघु अपना जीभ और नीचे की तरफ ले जाने लगता hain......kavya के गुलाबी गांड के सूराख के taraf.............ek नज़र वो जी भरकर उस छेद को देखता हैं फिर वो उस छेद पर अपना जीभ चलन शुरू करता hain..........ek बार फिर से सब कुछ उस कमरे में रिकॉर्ड हो रहा tha.........wahin काव्य के मुँह से सिसकारी निकटि जा रही थी.......

थोड़े देर तक रघु काव्य की गांड की छेद को चाट चाटकर पूरा साफ़ कर देता hain.........aur फिर अपनी दो ऊँगली धीरे से बढ़ता हुआ काव्य के गांड के सूराख पर रख देता हैं और अगले hi पल वो अपनी उस ऊँगली को धीरे धीरे अंदर पुश करने लगता hain..........thodi ज़ोर लगाने पर रघु की दोनों मोती उँगलियाँ काव्य की गांड में पूरा समां जाती हैं और काव्य की aahhhhhhhhhhhhh फिर से निकल जाती hain........tabhi वो अपनी दो ऊँगली दूसरे हाथ की लता हैं और इस बार वो अपनी दोनों उँगलियों को काव्य की बुर के अंदर डालने लगता hain..........aab उसकी 4 उंगलियां दोनों हाथ की काव्य के दोनों छेद में thi...........thodi देर रुककर वो अपने हाथों को फिर धीरे धीरे हरकत करना शुरू करता हैं और जैसे जैसे रघु की हाथों की रफ़्तार तेज़्ज़ होने लगती हैं वैसे वैसे काव्य की आहें भी बढ़नी षुरू हो जाती हैं..........

उसका बदन बहुत तेज़ी से हिल रहा tha...........wahin काव्य बड़े मुस्खिलों से अपने आपको कण्ट्रोल की हुई thi............magar रघु न hi उसे अब कहीं संभालने देने वाला tha..............aur न खुद संभालने वाला tha..........kareeb 5 मिनट तक वो ऐसे hi काव्य की बुर और गांड अपनी दोनों उँगलियों से छोड़ता हैं और काव्य की आहें भी तेज़्ज़ होती चली जाती hain..........wahin कमरे में fffffaaaaccccccccccchhhh faaaaacvcchhhhhhhhhhhhhhhhhh aaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhh जैसी आवाज़ें लगतार गूँज रही thi........aur थोड़े देर बाद रघु आगे झुकार काव्य के बुर को फिर से चटनी लगता हैं और अपनी उँगलियों को ऐसे hi चलता hain.........aur आखिर वहीँ हुआ जो वो चाहता tha...........kavya के साबरा का बाँध आखिर टूट जाता हैं और वो वहीँ चीखते हुए ज़ोरों से झरने लगती hain..............uski बुर से कुछ बूँद पानी फर्श पर aur..........raghu की उँगलियों पर लग चूका tha...........jisey वो अब मज़े से चाट रहा tha............aur अब काव्य को भी बरी बरी से चटवा रहा था...............

वो वहीँ फिर से काव्य को उसी अंदाज़ में बैठता हैं जिस अंदाज़ में वो मूतने बाथरूम में जाया करती hain.........dono पवन failakar.......raghu फिर से काव्य के बदन पर अपने जीभ फेर रहा tha.........aur वो भी अगले hi पल आकर काव्य के ठीक पीछे बैठ जाता hain.......aur अपना हाथ उसकी दोनों टांगों के बीच से होते हुए फिर से काव्य के बुर पर धीरे धीरे से फेरने लगता hain..........thode देर तक वो अपने हाथों को ऐसे hi फेरता हैं फिर वो काव्य के कान के पास जाकर धीरे से बोल पड़ता हैं.........

" थोड़ा अपने बुर पर ज़ोर लगा मेरी जान........." और रघु अपने हाथों को तेज़ी से चलने लगता हैं ............वहीँ काव्य की गीली बुर अब और भी पानी छोड़नी शुरू कर देती hain........magar रघु तो उसका माल nahin......uski मूट निकलवाना चाहता tha........aur ऐसा हुआ bhi...........kareeb 2 मिनट के अंदर hi काव्य का सैन्यम जवाब दे जाता हैं और उसकी बुर से मूट निकालनी शुरू हो जाती hain......jo अब रघु की उँगलियों से होते हुए पूरे फर्श को फिर से भिगो रहा tha........kavya के बुर से कुछ मूट के चींटी इधर उधर फर्श पर फिर से बिक्री पड़े they.........wahin काव्य लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही thi........aur अपने बेकाबू होते सांसों को पल पल संभल रही थी............

रघु अपने मूट से साणे हुए हाथ इस बार काव्य के चेहरे पर ले जाता हैं और बहुत आराम से उसके चेहरे पर धीरे धीरे मलने लगता hai........tapkaney लगता hain.........uske खूबसूरत से चेहरे पर उसकी मूट गिरने लगता hain........aur जब काव्य का पूरा चेहरा उसकी मूट से भीग जाता हैं रघु फ़ौरन अपना चेहरा उसके करीब ले जाता हैं और बड़े प्यार से काव्य के चेहरे को चटनी लगता hain..........apni उंगलयों को काव्य के मुँह में डालकर उससे अपनी उँगलियाँ भी चूसवाने लगता hain...............aur तब तक चुसवाते हैं जब तक की उसकी उंगलियां पूरी तरह से साफ़ नहीं हो jati.........aur खुद भी अपने जीभ तब तक चलता हैं जब तक काव्य का चेहरा उसकी थूक और लार से भर नहीं जाता..........

" chal...........aab तू मुझे प्यार kar..............jaise मैं तुझे किया हूँ..............." और रघु इतना कहकर फ़ौरन वहीँ फर्श पर पीठ के बल लेट जाता हैं जहाँ पर काव्य का मूट गिरा पड़ा tha...........uski मूट अब उसके नंगे जिस्म पर लगने लगी thi..........wahin काव्य हौले से रघु के ऊपर आती हैं और उसके जांघों पर अपने दोनों पवन दोनों तरफ फैलाकर बैठ जाती हैं और रघु के गाल और गुर्दें को धीरे धीरे चटनी लगती hain...........raghu का जिस्म काल था और पसीने की वजह से अब उसके जिस्म पर लगी गन्दगी भी अब पसीने के रूप में साफ़ नज़र आ रही थी.............

वहीँ काव्य बेसुध होकर बस उसके जिस्म के हर एक हिस्से को चाट रही thi........aa न जाने क्यों उसे भी अब इस खेल में मज़ा आने लगा tha...........wo थोड़ा सा अपनी पोइस्तियन बदलती हैं और उसके सीने पर अपने जीभ फेरती हुई वहां भी चटनी लगती hain...........fir बरी बरी से उसके दोनों काळा काळा निप्पल्स को अपने मुँह में लेकर चूसने लगती hain.......raghu काव्य के इस हरकत पर मचल उठता hain...........fir काव्य हौले हौले से नीचे की तरफ सरकती हुई उसके नाभि की तरफ जाती हैं और अपना थूक उस गहरी नाभि के अंदर धीरे धीरे से गिरने लगती hain..........jab काव्य की थूक से उसकी गन्दी नाभि भार जाती हैं व्वो अपनी जीभ फिर से लेकर उस गंद्गगी को फिर से चटनी लगती हैं और तब तक चाहताती हैं जब तक रघु की नाभि साफ़ नहीं हो जाती......

एक अजीब सा स्मील और गन्दगी उसके मुँह में अब घुल रहा tha..........jaise जैसे वो नीचे की तरफ जा रही थी वैसे वैसे रघु की बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi.....jab वो रघु के लुंड के पास पहुंचती हैं वो उसके सुपाड़ी को बड़े प्यार से चोऊम लेती हैं और उसपर अपना जीभ हौले से फिर देती hain.........wahin रघु इस बार ज़ोरों से सिसक पड़ता हैं..........

" chhhhosssssssssssssssss न मेरी jaan..........isey अपने मुँह में lekar.........mere ांडों को भी पूरा choos.....aaaaaaa..hhhhhhhhhhh..........." और रघु सिसकते हुए धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य थोड़ा सा मुस्कुराती हैं और फिर रघु के मुरझाये लुंड को धीरे धीरे अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू करती hain.......wahin रघु की सांसें धीरे धीरे बढ़ती चाली जाती hain.........wo हौले से काव्य के बालों के साथ खेलने लगता hain......aur उसके दोनों हाथों को पीछे के तरफ ले जाने लगता hain.......wahin काव्य अपणी दोनों हाथ पीछे करके बंद लेती hain......aur अपने मुँह से रघु के लुंड को चूसती रेती hain...........to कभी उसके बड़े बड़े ांडों को अपने मुँह में लेकर चूसती हैं.............

" मेरा lauda.......poora अपने हलक़ तक ले ........जितना अंदर जा सके तेरा........." और इस बार रघु अपने दोनों हाथों को काव्य के सर पर ले जाता हैं और बहुत आराम से पहले धीरे धीरे .........फिर उसके सर पारर तेज़ी से दबाव बनाना शुरू करता hain..............wahin काव्य अपना मुँह पूरा खोल लेती हैं और रघु के लौड़े को अपने हलक़ तक ले जाने की पूरी पूरी कोशिश करती hain.........magar लुंड इतना मोटा औरर बड़ा था की वो अंदर पूरा जा hi नहीं रहा tha..........magar रघु कहाँ मानने वाला tha.........jab वो देखता हैं की काव्य आधा hi लुंड बस अपने मुँह में ले पा रही हैं वो फ़ौरन अपनी जगह से उठ जाता हैं और काव्य को फ़ौरन वहीँ उसी जगह पीठ के बल सुला देता हैं और खुद अब वो उसके ऊपर आता हैं और उसके मुँह पर अपना लुंड सेट करता हुआ उसके मुँह के अंदर धीरे धीरे अपना लौड़ा पेलना शुरू करता हैं............

उल्टा सोने की वजह से अब उसका भरी भरकम शरीर पर पूरा पूरा दबाव बन रहा था जो अब काव्य की तकलीफों को धीरे धीरे बढ़ते जा रहा tha......raghu अपने लुंड को पूरा ऊपर हवा में उठता हैं और एक करारा ढाका मरता हैं जिससे उसका पूरा लुंड काव्य की मुँह में समता चला जाता hain...........aadha से ज़्यादा उसका लुंड इस ढके से अंदर चला गया tha....baki का बचा हुआ वो अगले धाए में पूरा कर देता hain.......jaise जैसे वो अपना लुंड अंदर पेलता जा रहा था काव्य की सांसें उखड़नी शूर हो गयी थी...........

वहीँ अब उसके मुँह से रघु का प्रेकम और थूक की मोती लार उसके चेहरे और उसके होंठों से नीचे की तरफ फर्श पर टपक रही thi..............magar रघु कहाँ इतनी आसानी से हार मानने वालों में से tha.............wo एक बार फिर से अपना लुंड बहार निकलता हैं और एक तेज़्ज़ ऐसा झटका मरता हैं जिससे उसका पूरा का पूरा लुंड काव्य के हलक़ में उतरता चला जाता hain................wahin रघु अपने लुंड पर कुछ देर तक ऐसे hi दबाव बनाये रखता hain..........wahin काव्य अब बुरी तरह से तड़पने लगती हैं..........

उसकी सांस अब फूटी जा रही thi..........wo तेज़ी से अपने दोनों हाथ पवन फर्श पर पटक रही thi..........wahin राम ये नराजा देखकर दुर्र जाता hain.......usey लगा की इसी तरह अगर चलता रहा तो उसकी भाभी यकीनन यही तड़प तड़पकर मुरर jayegi..........magar रघु कहाँ इतनी आसानी से काव्य को छोड़ने वाला tha...........wo तो जैसे अब अपना लुंड काव्य के गले के अंदर फंसाया हुआ tha..........wahin काव्य के मुँह से अब gggggggooooooooooooooggggggggggooooooooooooooooooooooo की लगातार आवाज़ निकल रही thi...........saath hi साथ उसकी आँखों से आंसूं की धरा भी फुट पड़ी थी............

हालात थे की मनो अभी फुट jayengey..........usey ठीक से सांस तक नहीं लिया जा रहा tha.........wo वहीँ फर्श पर रघु के वजह के नीचे बिलकुल बेजान si.......ashaay नज़र आ रही thi...............usey भी अब लगने लगा था की अगर रघु चाँद सेकण्ड्स तक अपने लुंड बहार और न निकला तो यकीनन उसका दम अब घुट jayega............wahin काव्य की तड़प जैसे राम को देखि नहीं जाती और वो फ़ौरन बोल पड़ता हैं..........

" ये क्या कर रहे हो kaka,............aise में तो मेरी भाभी मुरर jayegi......chodo इन्हें प्लीज.........." और राम काव्य की बेबसी देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता hain...........wahin रघु अपना लुंड एक hi झटके में बहार निकलता हैं और काव्य वहीँ ज़ोरों से खांसते हुए फर्श पारर बैठ जाती हैं और लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती hain...........uske मुँह से घड़ा गधा कुछ छुम और थूक की ढेर साडी लार निकल रही थी .........वहीँ रघु का लुंड भी पूरा काव्य के थूक से चमक रहा ttha.............agle hi पल रघु राम की तरफ देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा देता हैं............

" आपको फ़िक्र करने की ज़रूरत नहीं हैं छोटे malik................isey कुछ नहीं hoga............waise भी अब ये पूरी रांड बन चुकी hain..............aab इसके तीनों छेद में कुछ भी dalo.......ye आसानी से उसे ले legi.............aap बस देखते तो जाओ.........." और रघु इस बार फिर से खड़ा होता हैं और काव्य के सर के बालों को कसकर अपनी मज़बूत मुट्ठी में जकड लेता हैं सामने खड़े जीतू को अपने पास आने का इशारा करता hain...........jeetu भी काव्य के करीब आता हैं और उसके दोनों हाथों को कसकर जकड लेता hain....wo भी पीछे की तरफ se.......aur उसकी गुरंदन को पीछे की तरफ झुका देता हैं.........

अब काव्य पूरी तरह से उन दोनों के बीच बेबस thi..........na hi अब वो अपने हाथों को अब छुड़ा सकती thi..........aur न hi रघु के लुंड को अपने मर्ज़ी से निकल सकती thi..........aab जो भी था काव्य रघु के रहमो करम पर thi.........chahe रघु जो उसके साथ सुलुख kare..........raghu फिर से अपना लुंड काव्य के मुँह में धीरे धीरे डालना शुरू करता हैं और जीतू उसे कसकर अपने हाथों में जकड़े रहता hain.........wahi राम को अपनी भाभी के साथ होता ऐसा सुलुख अब देखा नहीं जा रहा tha........magar अब उसकी चल भी कहाँ रही थी.......

" फ़िक्र मुट्ठ करो malik............tumhari भाभी एक दिन बहुत बड़ी इस सेहर की रांड banegi.........ye वो सब कुछ करेगी जो बड़ी से बड़ी रंडियां भी करने से कुछ पहले सुआ बार सोचती hain.........bus अभी तो खेल शुरू हुआ hain...................aagey आगे देखिये होता हैं क्या!!!!!!!!!!!!!!!!......................................

टिल कॉन्टिनोएड......................................................
 
अपडेट- 57(ा) (मेघा अपडेट)

" फ़िक्र मुट्ठ करो malik............tumhari भाभी एक दिन बहुत बड़ी इस सेहर की रांड banegi.........ye वो सब कुछ करेगी जो बड़ी से बड़ी रंडियां भी करने से कुछ पहले सुआ बार सोचती hain.........bus अभी तो खेल शुरू हुआ hain...................aagey आगे देखिये होता हैं क्या!!!!!!!!!!!!!!!!......................................

अब आगे.............................................................

काव्य अभी भी जीतू की गिरफ्फत में thi.........bilkul bebus..........laachar si...........wahin अब रघु फिर से अपना लौड़ा काव्य के गले तक उतरना चाहता tha..........poora का poora...........wo फिर से अपना लुंड काव्य के मुँह में डालता हैं और इस बार आहिस्ता आहिस्ता से अपना लुंड काव्य के मुँह के अंदर पुश करना शुरू करता hain.......wahin काव्य बड़े मुस्खिलों से रघु के विशाल लुंड को ले रही thi.......jaise जैसे रघु का लुंड अंदर जाता जा रहा था वैसे वैसे काव्य की बेचैनी और तकलीफें भी बढ़ती जा रही थी........

वहीँ अब रघु पर जैसे एक जूनून सवार हो गया tha........chahe कुछ भी हो जाये वो आज अपना पूरा लौड़ा काव्य के गले तक उतरना चाहता tha..........uske लिए अगर काव्य को कितनी भी तकलीफें क्यों न सहनी पड़े .........वो आज पीछे नहीं हटना चाहता tha.........raghu का आधा से ज़्यादा जब लुंड काव्य के मुँह में चला जाता हैं वो थोड़ा सा अपना लुंड बहार की ओरे निकलता हैं और एक करारा ढाका फिर से मरता hain............dhaaka इस बार इतना तेज़्ज़ था की काव्य तड़प उठी thi..........wahin एक बार फिर से उसकी आँखों से आंसूं बहने शुरू हो गए they......magar रघु की आज ज़िद्द थी की वो काव्य की हलक़ तक अपने लुंड उतरके hi rahega...........so....utarke hi रहेगा.............

अगले hi पल काव्य का मुँह पूरा फूलने लगता hain............uski तक़लीफ़ें बढ़ने लगती hain........saan जैसे बंद होने लगती hain.........wahin जीतू अपनी गिरफ्त और भी मज़बूत कर देता hain........aur उधर रघु एक ज़ोर का फिर से ढाका मरता हैं जिससे उस्का लौड़ा काव्य के गले में जाकर जैसे अटक जाता hain.........uske मुँह से बस ggggggggggggggoooooooooooooooo.........goooooooooooooooooooooooooo की आवाज़ें लगातार निकल रही thi.........aankhon से आंसूं की धरा बढ़ती जा रही thi..........wahin काव्य ज़ोरों से अपने शरीर को ैठती भी जा रही thi................dard की वजह से ...........मगर जीतू उसे हिलने भी नहीं दे रहा tha........raghu कुछ देर तक ऐसे hi काव्य के हलक़ के अंदर अपना लुंड फंसाये रहता हैं और काव्य को अब ऐसा लगने लगता हैं की वो अब gayi..........aab उसे कोई नहीं बचा sakta..........wahin रघु का मज़े से बुरा हाल था.............

एक बात तो था की रघु उसे इतनी आसानी से कहाँ मरने देने वाला था......10 सेकण्ड्स तक वो अपने लुंड को और ऐसे hi काव्य के गले में फंसाये रहता हैं और जब उसे लगता हैं की काव्य अब शायद उसे एक पल और बर्दास्त नहीं कर पायेगी अगले hi पल वो फ़ौरन अपने लुंड को बहार पूरा खींच लेता hain.......wahin इस बार काव्य किसी लाश की तरह फर्श पर धाम से गिर पड़ती hain.........uski सांसें बहुत ज़ोरों से चल रही thi.......mooh उसका लार और थूक से पूरा भर गया था जो उसके होंठों से बहते हुए अब फर्श पर गिरने लगा tha..........kareeb 5 मिनट तक काव्य ज़ोरों से सांस लेती रहती हैं और अपने आपको पूरी तरह से नार्मल करने की लगातार कोशिश करती hain...........aur जब वो थोड़ी सी नार्मल होती हैं वो गुस्से से रघु के तरफ एक तुक देखने लगती hain.........aansoon अब भी उसकी आँखों से बह रहे थे.............

" tum.........mujhe मार डालोगे क्या!!!!! ये तुम्हारा कैसा प्यार hain..............jissey प्यार करते हो उसे hi तकलीफ देते ho...........aisa लग रहा हैं जैसे तुम मुझसे किसी जनम का बदला ले रहे ho..........agar इंसानों जैसा मेरे साथ बर्ताव करना हैं तो मेरे साथ चुदाई karo........warna मैं अब जा rahi........mujhse अब और नहीं हो पायेगा..........." और इस बार काव्य गुस्से से अपनी जगह से उठने लगती हैं तभी रघु जाकर उसे कसकर अपनी बाँहों में थम लेता hain.........magar प्यार से.................

" नाराज़ क्यों होती हो मेरी jaan......ek तुम hi तो हो जो मेरा दर्द समझ सकती हो.........." और रघु काव्य को मस्का लगते हुए धीरे से बोल पड़ता hain..........wahin काव्य अभी भी गुस्से से रघु को घूरे जा रही थी.........

" दर्द समझने का ये मतलब नहीं होता की तुम अपनों को दर्द दो............" और काव्य थोड़ी सी शांत होती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ रघु उसकी बाटिओं को सुनकर अपने अतीत में डूबता चला जाता हैं............

" अपनों का दर्द क्या होता हैं तुम्हें क्या मालूम madam..............jo घाव तुमने मुझे दिए हैं वो तो ये इस दर्द के आगे कुछ भी नहीं hain............main यहाँ तुझे पूरा बर्बाद करने hi आया hoon............aur मैं तुझे यहाँ से पूरा बर्बाद करके hi jawunga........uske लिए मुझे जो करना पड़े main............karunga............chahe किसी को अपने रास्ते से भी क्यों न हटाना pade...........main इससे भी अपने कदम पीछे नहीं हटा सकता............" और रघु के दिमाग में हज़ारों सवाल जवाब एक एक कर घूमने लगते हैं वहीँ जीतू बड़े ध्यान से उसके ओरे एक तुक देखता रहता हैं......

" कहाँ खो gaye....................kavya जब थोड़ी शांति होती हैं वो रघु की तरफ देखती हुई धीरे से बोल पड़ती hain.......wahin रघु अपने अतीत से जुड़े यादों से बहार निकलता hain..........aur काव्य को देखता हुआ धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं...........

" बेवजह फालतू की बाटिओं को सोचकर अपना टाइम क्यों बर्बाद karna............aawo मज़े kare...........aur अगले hi पल वो जीतू को भी अपने पास आने का इशारा करता हैं और ......राम को bhi.............teenon के बीच काव्य फिर से अकेली thi..........raghu व्वहिं फर्श पर पीठ के बल लेट जाता हैं और काव्य को अपने ऊपर आने का इशारा करता hain...........wahin काव्य बिना सवाल जवाब के चुप चाप से रघु के ऊपर आकर लेट जाती हैं और रघु अपने लुंड को सेट करता हुआ इस बार अपना लौड़ा काव्य की गांड के छेद पर सेट करता hain.............aur लुंड गीली होने की वजह से अगले hi पल वो एक तेज़्ज़ करारा ढाका मरता हैं जिससे उसका लौड़ा एक hi झटके में काव्य के गांड में समां जाता हैं........

इसी तरह रघु लगातार अपने लुंड पर दबाव बनाये रखता हैं जब तक उसका पूरा लुंड काव्य के गांड में नहीं उतर jata..........wahin काव्य कुछ दर्द से और मज़े से सिसकती हुई रघु का लुंड अपने गांड में पूरा ले चुकी thi.......raghu अपने दोनों हाथों को काव्या के दोनों चूचियों पर रख देता हैं और उसे फिर से एक बार बेहरमी से मसलना शुरू करता hain.........kaabhi वो अपने कठोर हाथों से maslata..........to कभी उसके निप्पल्स को ज़ोरों से kheenchta......to कभी उसपर चांटा marta..........kareeb 5 मिनट तक रघु काव्य की गांड मरता रहता हैं वहीँ अब काव्य का दर्द मज़े में बदलता जा रहा tha.........wo खुद अब रघु के ऊपर अपने गांड को ऊपर नीचे हिला रही थी..........

पूरे कमरे में एक बार फिर से काव्य की आहें aaaaaaaaaaasssssssssssssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh fffffffffffffcccccccccccccchhhhhhhhhhhhhh जैसी आवाज़ीं लगातार गूँज रही thi........agle hi पल वो राम को इशारा करता हैं और राम भी काव्य के चेहरे के पास आकर खड़ा हो जाता hain.......wo भी जनता था की आगे उसे क्या करना hain........wo फ़ौरन अपना लोअर धीरे से सरका देता हैं और काव्य के मुँह में अपना लौड़ा धीरे से अंदर बहार करके उसे चुसवाने लगता hain.........wahin काव्य एक तरफ रघु से अपनी गांड मरवा रही thi...............to दूसरी तरफ राम का अब लुंड चूस रही थी.........

कुछ दूर पर बैठा जीतू बड़े गौर से ये नज़ारा पूरे मज़े के साथ देख रहा tha............uska भी लौड़ा अब पूरी तरह से अकड़ चूका tha...........wo ततो बस रग्घू के इशारे का इंतज़ार कर रहा tha........aur चाँद मॉनीटे hi बीते थे की रघु उसे अपने पास आने का इशारा करता हैं और काव्य के दोनों जांघों को और थोड़ा सा फैला देता hain..........jeetu भी मुस्कुराता हुआ अपना लौड़ा काव्य के बुर्र पर सेट करता hain..........aur उधर रघु कुछ पल के लिए अपनी चुदाई रोक देता हैं मगर काव्य के गांड से अपना लुंड नहीं nikalta...............jab तक की जीतू का लौड़ा काव्य के बुर में नहीं घुस जाता..........

अब काव्य के तीनों छेद की चुदाई एक साथ हो रही thi...........uski आहें ....उसकी तेज़्ज़ sansein.............chudai के दौरान जो आवाज़ें निकल रही थी वो उस माहोल को और भी रंगीन बनती जा रही thi...........poorey कमरे में ffffffffffffaaaaaaaaaaaaaaccchhhhhhhhhhhhhhh faaaaaaaaaaaaaaacccccccccccccchhhhhhhhhhhhhh...........aaaaaaaaaaaaaaaaaaassssssssssshhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh.........aur काव्य की आहें पल पल गूँज रही थी..........

बीतते वक़्त के साथ अब तीनों की रफ़्तार भी बढ़ती जा रही thi.......ek लुंड जब काव्य के छेद से nikalta........tab उसकी दूसरी छेद में दूसरा लुंड ghusta..........kabhi कभी तो एक साथ ऐसा hota.........wahin काव्य का अब मज़े से बुरा हाल tha............uski छूट इस कदर पानी छोड़ रही थी जैसे कोई दरिया बह रहा ho...........kabhi रघु उसके निप्पल्स को maslta.......to कभी ram......to कभी jeetu........teenon बरी बरी से उसके हर एक आंग को चढ़ रहे they..........chod रहे they.........wahin काव्य तो मज़े की दुनिया में thi.......aab उसे कोई होश नहीं tha............ki सामने कौन hain............uska देवर ....या इस घर के दो जाहरी गंदे naukar.............jo अब वे सब अब उसकी प्यास बुझा रहे थे................

खेल का दौर लुम्बा चला raha......kuch तो दवाई की वजह se.......to कुछ इतने देर से उस माहोल में रहने की वजह se...........teenon का छुम निकलने का नाम नहीं ले रहा tha............wahin काव्य की आहें उस माहोल को और भी कातिलाना बनती जा रही thi...........wo तेज़ी से राम के लुंड को अपने मुँह के अंदर तक लेकर चूसती जा रही thi..........thode देर बाअद रघु काव्य को अपने ऊपर से हटाता हैं और जीतू इस बार नीचे आकर लेट जाता हैं...........

फिर वो काव्य की गांड में अपना लुंड पेलना शुरू करता हैं और रघु उसकी बुर में लुंड डालता hain..........amagr राम को तो अपना लौड़ा चुस्स्वनी में मज़ा आ रहा tha..............kareeb 1/2 घंटे तक ये खेल चला और आखिरकार राम और उन दोनों का साबरा धीरे धीरे डगमगाने laga...............dawa की वजह से आज पहली बार राम इतनी देर तक टिक पाया tha..................wahin रघु और जीतू भी हार नहीं मान रहे they.....................khel चलता गया और आखिर उनका साबरा भी धीरे धीरे जवाब देता gaya...........aur वो दौर भी आया जो चुदाई का अब अंतिम दौर था...............

कंटिन्यू.....................................................
 
अपडेट 57(बी) (मेघा अपडेट)

राम का जिस्म अब अकड़ने लगा tha........wo अपना पूरा वजन अपने लुंड पर लगा देता हैं और काव्य की मुँह के और अंदर अपने लुंड को पेलने लगता hain........wahin काव्य भी उसके लुंड को और तेज़ी से चूसना शुरू करती hain..............aur तब तक चूसती रहती हैं जा तक राम का छुम नहीं चूह jata...........agle hi पल राम ज़ोरों से aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaassssssssssssssssssssss करता हुआ डिस्चार्ज होने लगता हैं और अपना सारा छुम काव्य के मुँह में डालने लगता hain..........girnaey लगता hain.............wahin काव्य किसी आदर्श रांड की तरह राम के लुंड का सारा रूस पीती चली जाती हैं............

ये देखकर आखिर रघु और जीतू का भी साबरा जवाब दे जाता हैं और वो दोनों का जिस्म भी अब ैठने लगता hain............aur रघु ........जो इतने देर से अपने सैयाम को संभाले हुआ था आखिर उसके साबरा का भी बाँध अब टूट पड़ता hain...........aur वो काव्य के बुर के अंदर अपना माल छोड़ना शुरू करता hain..........aur काव्य के चेहरे के पास अपना चेहरा लेजाकर उसके होनोटों को भी चूसना शुरू करता hain.........aabhi भी काव्य के मुँह में राम का वीर्य tha..........magar रघु को उससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला tha............wo उस छुम को काव्य के मुँह से चूसता हुआ कुछ अपने मुँह में लेता हैं और फिर से उसे काव्य के मुँह के अंदर गिरने लगता hain.............wahin काव्य इस बार रघु के मुँह से निकला हुआ सारा छुम अपने हलक़ में उतरती चली जाती हैं..............

उधर जीतू भी अपना साबरा खो देता हैं और इस बार वो भी अपना कम्म काव्य की गांड की गहराईयों में उतरता चला जाता hain.............aab तीनों वहीँ पसीने से बुरी तरह लथपथ they.......kavya उन दोनों मर्दों के बीच ज़ोरों से हांफ रही thi.......us कमरे में A.C और फैन भी बंद they...........jissey उनका गर्मी से ाब्ब बुरा हाल था...........

रघु फ़ौरन अपनी जगह से उठता हैं और काव्य का हाथ पकड़ते हुए इस बार उसे वहीँ फर्श पर बैठा देता hain...........aur उसे ज़ोर लगाने को कहता hain.............kavya वहीँ अपने दोनों पवन को मोड़ती हुई फर्श पर बैठ जाती हैं और धीरे धीरे अपने बुर और गांड पर दबाव डालने लगती hain............aur आखिर कुछ देर की मेहनत के बाद उसके बुर और गांड की छेद से रघु और जीतू का छुम निकलना शुरू हो जाता hain............jo अब नीचे उस टाइल्स पर धीरे धीरे टपक रहा था...........

वहीँ jeetu.......ram और रघु तीनों की नज़रें अब काव्य पर thi.........jo उसके दोनों छेद से छुम धीरे धीरे अब निकलता जा रहा tha............jo अब फर्श पर गिर रहा tha...........raghu काव्य के पीछे जाकर बैठ जाता हैं और उसके बुर और गांड के छेद को फिर से अपने हाथों से पकड़कर फैलाने लगता hain.........aur तब तक फाईअल्टा हैं जब तक उसकी दोनों छेद से छुम पूरी तरह से फर्श पर नहीं टपक jata........aur जो बाकि बचा कुछ रूस था वो रघु अपनी उँगलियों को उसके दोनों सूराखों में डालकर बहार निकलने लगता hain...........aur देखते hi देकते काव्य के दोनों सूराखों में का सारा छुम बहार बह जाता हैं...........

रघु फिर काव्य के बालों को कसकर अपनी मुट्ठी में थम लेता हैं और उसके सर को इस बार नीचे की तरफ ले जाने लगता hain............farsh की taraf.......jahan उस फर्श पर कुछ मूट भी बिखरे पड़े they.......wo उसके चेहेरी को फर्श पर सताता हैं और नीचे फर्श पर गिरे उसके मूट में साणे हुए छुम को चटनी का इशारा करता hain..........wahin काव्य एक तुक अपनी बुर और गांड के अंदर से निकले हुए छुम को अजीब सी नज़रियों से देखने लगती hain..........aur कुछ सोचकर वो हौले से अपना जीभ पूरा खोल देती हैं और धीरे धीरे उस छुम को चेतना शुरू करती hain.............wahin कुछ दूर पर खड़े राम की जब बर्दास्त से बहार हो जाती हैं वो काव्य को अजीब सी नज़रियों से एक तुक देखने लगता हैं और इस बार काव्य से बिना कुछ कहे फ़ौरन अपने कपड़े समेटता हुआ अपने कमरे की तरफ जाने लगता hain............ye देखकर रघु फ़ौरन बोल पड़ता हैं..........

" आप कहाँ चल दिए छोटे malik..............kya हुआ आपको............." और रघु हैरत से राम की तरफ देखने लगता हैं वहीँ इस बार राम की गुस्से से आँखें लाल हो जाती hain........wo कुछ देर तो वहीँ ठहर जाता हैं मगर काव्य के तरफ पलटकर देखता तक nahin.........shayad नफरत से.............

" जहाँ तक मैं देख सकता था मैंने वो सब कुछ देख लिया जो आप सब मुझे दिखाना चाहते they.............magar अब और nahin..........aur nahin.............mere बस में नहीं हैं और ये सब कुछ dekhna............mujhe तो अब ये हैरानी हो रही हैं की जो मेरे सामने इस वक़्त हैं ............वो मेरी भाभी hain.............meri अपनी bhabhi.........jinhein अब भाभी कहते हुए भी मुझे शर्म आ रही hain..........aisa घिनौना khel........aisi gandagi.........aisi ghatiyayi......cheeeee....................mujhe तो सोचकर भी अजीब लगता hain..........main तो एहि सोच रहा हूँ की कैसे कोई इतना नीचे तक गिर सकता hain..............kya हवस सच में इतनी आंधी होती हैं की इंसान उसमें खोकर सब कुछ भूल जाता hain..........apna wajood.......apni hasiyaat...........apna rutba..........apni izzat...........apni शान shaukhat...........sab कुछ.............

आपने सही कहा था काका की मैंने आज से पहले ऐसा सेक्स कभी न देखा tha.............aur न कभी सुना tha.........aur न आज के बाद कभी ऐसा dekhunga..........aur अब मैं ये भी जान गया हूँ की ये मेरे सामने जो औरत इस वक़्त hain...........wo आपकी ख़ुशी के लिए कुछ भी कर सकती hain......kisi भी हुड्ड तक जा सकती hain.............kisi भी हुड्ड तक गिर सकती hain............iske हवस की कोई सीमा नहीं hain.............kal तक मुझे जिस भाभी से प्यार tha..........ye वो नहीं hain..........ye वो नहीं हैं.........." और इस बार राम की आँखों में आंसूं आ जाते हैं और वो एक नज़र काव्य के तरफ पीछे मुड़कर देखता hain............wahin काव्य फर्श पर गिरे कुछ छुम को अपने मुँह से चाट चुकी thi........magar अब उसका सारा ध्यान राम पर tha............uspar चुदाई का नशा जैसे अब पूरी तरह से उतर गया था..............

राम की कही हुई एक एक बातें उसके दिल पर चोट कर रही thi........sach hi तो कह रहा था ram............ki वो हवस में इस कदर आंधी हो चुकी हैं की उसे अब कुछ दिखाई नहीं दे रहा tha............na sahi......na गलत.............

" रुक जाओ ram................please......na जाओ..............." और काव्य जैसे गहरी नींद से जगती hain...........ek hi पल में उसके ऊपर से अब हवस का नशा उतर चूका tha..........saath hi साथ जीतू और रघु का bhi............wahin काव्य के चेहरे पर पश्च्याताप साफ़ नज़र आने लगे थे.............

" क्यों न जावून मैं अब यहाँ se...............kya यहाँ पर मैं खड़ा रहकर आपका ये नंगापन का खेल dekhun.............bahut कुछ तो आप दिखा चुकी हो mujhe..........aab और क्या दिखाना रह गया hain............moot पी li......cum खा chuki.........thook चाट li............sabke सामने बेशरम की तरह मूट भी li.............aab और क्या देखने को रह गया hain...........kya इससे भी और कुछ हुड्ड हो सकता hain........agar haan..............to वो भी अब मुझे दिखा do................ye सब अगर पेशावर रंडियां अगर करती तो समझ में aata.............magar ये सब कुछ आप कर रही hain.............wo भी इतने बड़े घर की एकलौती मालकिन और बहुरानी hokar................aaj उनकी इज़्ज़त दो कौड़ी की होकर रह गयी हैं..........."

" अब बस एहि बचा हैं आपके लिए की आप इनका सहित खा lijiye.................aur मैं जनता हूँ की आप वो भी करने के लिए पीछे नहीं hatengi..........magar मैं अब और नहीं देख sakta.............aapko जो करना hain....jaisa करना hain............jab तक करना हैं .......आप बेशक kijiye.........na hi मैं अब आपके रास्ते में aawunga..........aur न hi मैं आज के बाद आपको कभी रोकूंगा या tokunga.....................aap आज के बाद पूरी तरह से आज़ाद hain.........magar मुझे मेरे भैया पर अब तरस आ रहा हैं जो उनकी किस्मत इतनी ाची होकर भी अब फुट gayi....chalta हूँ aab.......chota देवर समझकर मुझे माफ़ कर दीजियेगा............." और राम लगभग वहां से रोटा हुआ बिना पीछे मुड़े चुप चाप से निकल जाता हैं वहीँ काव्य शर्म से अपना सर नीचे की तरफ झुका लेती हैं...............

आज राम ने उसे आईना दिखा दिया tha............aaj उसे खुद पर बहुत शर्म आ रही thi...........aaj उसे अपने अस्तिस्त्वा का पता चला tha...........wahin रघु और जीतू टकटकी लगाए बस काव्य की तरफ देखे जा रहे they..........kuch देर की चुप्पी के बाद रघु काव्य के पास आता हैं और आकर उसके हाथ को पकड़ने की कोशिश करता hain.......magar इस बार काव्य रघु के तरफ देखती हुई गुस्से से अपना हाथ ज़ोरों से झटक देती hain......wahin रघु टकटकी लगाए बस काव्य के चिहरे की तरफ बस देखता रह जाता हैं..............

" चूना नहीं mujhe.........bus बहुत hua..............chale जाओ तुम सब यहाँ से aabhi.............mujhe अकेले रहना hain..........jawo.........................................." एयर इस बहार काव्य लगभग ज़ोरों से उन दोनों पर चिल्ला पड़ती हैं वहीँ रघु और जीतू दुर्र से एक लफ्ज़ नहीं बोल पते और चुप चाप अपने कपड़े समाते हुए फ़ौरन उस हॉल से निकलर अपने कमरे की तरफ जाने लगते hain...........wahin काव्य अपना सर झुकाये फर्श पर बैठ जाती hain........aur फुट फुट कर अबकी बार रू पड़ती hain..........shayad शर्मिंदगी की वजह se.................magar शायद आज ीतीं देर हो चुकी थी की अब उसकी आँखों से आंसूं पूछने वाला अब कोई नहीं tha..............na ram..................aur न hi राहुल.....................................

टिल कॉन्टिनोएड....................................
 
अपडेट- 58(ा) (मेघा अपडेट)

" चूना नहीं mujhe.........bus बहुत hua..............chale जाओ तुम सब यहाँ से aabhi.............mujhe अकेले रहना hain..........jawo.........................................." एयर इस बार काव्य लगभग ज़ोरों से उन दोनों पर चिल्ला पड़ती हैं वहीँ रघु और जीतू दुर्र से एक लफ्ज़ कुछ नहीं बोल पते और चुप चाप अपने कपड़े समाते हुए फ़ौरन उस हॉल से निकलर अपने कमरे की तरफ जाने लगते hain...........wahin काव्य अपना सर झुकाये फर्श पर बैठ जाती hain........aur फुट फुट कर अबकी बार रू पड़ती hain..........shayad शर्मिंदगी की वजह se.................magar शायद आज इतनी देर हो चुकी थी की अब उसकी आँखों से आंसूं पूछने वाला अब कोई नहीं tha..............na ram..................aur न hi राहुल.....................................

अब आगे...................................................................

काफी देर तक काव्य ऐसे hi वहां गुमसुम सी अकेली बैठी रहती hain..........sach तो ये था की अब वो राम का सामना भी नहीं कर सकती thi..........aur न अब करना चाहती thi..............udher जीतू और रघु का पूरा मूड ख़राब हो चूका tha..........reh रहकर उन्हें अब राम पर भी बहुत गुस्सा आ रहा tha.......kitna मस्त सब कुछ चल रहा tha..........magar राम ने आके सही मौके पर उनका सारा प्लान एक hi पल में गुड़ गोबर कर दिया tha..........magar अब हो भी क्या सकता था...............

" मुन्न तो कर रहा की उस सेल के पास अभी जाकर एक ज़ोर का थप्पड़ उसके गलों पर कसकर जड़ doon..............pata नहीं साला अपने आपको समझता क्या hain..............sab कुछ किया धरा उसने और एक hi पल में साला धर्मात्मा बन baitha.........aab तो बीटा काव्य भी हाथ से गयी samjho........wo अब मिलने से rahi............suna नहीं तूने की उसने हमसे क्या kaha..........ki तुम सब अब यहाँ से चले jawo.............aur तो aur.........choona नहीं मुझे............." अब तो बीटा ज़िन्दगी भर यहाँ रहकर बस घंटा hi हिलना padega.............mujhe तो ऐसा लगता हैं..........." और इस बार जीतू रघु की तरफ देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता hain.....saath hi साथ अब उसके चेहरे पर गुस्सा भी tha.........wahin रघु शांत था और चुप चाप से जीतू की बक बक सुने जा रहा था.............

" अब इतना सब कुछ हो गया तो मैं अपनी बुलबुल को कैसे इतनी आसानी से अपने हाथ से ऐसे जाने दे सकता hoon............wo कितना भी कुछ कर le..........aakhir रहेगी तो मेरी hi मुट्ठी mein...........jab उसे दाने का स्वाद चखा दिया हैं तो वो कहीं और क्यों जाएगी दाना chugney.............aakhir आएगी तो वो मेरे hi पास hi ना .........बस हमें सही मौका और सही दांव का इंतज़ार करना hain..........fir सब कुछ पहले जैसे ठीक हो jayega..............aab यहाँ बैठकर बक बक मुट्ठ kar.............chaadar ओढ़ और पंखा चालू करके चुप चाप जा के सू jaaa..............itn जान ले की आज की रात अब हम दोनों का कुछ नहीं हो sakta.........is लिए बेकार का दिमाग मुट्ठ चला और जा के सू जा चुप चाप........." और रघु अपने चेहरे पर चादर धक् लेता हैं और सूने की कोशिश करता हैं वहीँ जीतू गुस्से से रघु की तरफ बस देखता रह जाता hain.................wo भी जनता था की आज की रात अब उसका कुछ नहीं होने वाला.........

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सुबह हर रोज़ की तरह काव्य किचन में नास्ता बना रही thi............tabhi वो अपना फ़ोन ों करती हैं और कुछ देर बाद उसके मोबाइल पर कई सरे मेस्सगेस एक के बाद एक आने लगते hain...........wo एक एक कर उन सरे मेस्सगेस को पढ़ने लगती hain.........aur जब एक मैसेज पर उसकी निगाह जाती हैं उसके चेहरे पर ख़ुशी की लहर दौड़ जाती hain.............ye मैसेज उसकी बेस्ट फ्रेंड सना का tha............jo उसका फ़ोन नहीं लगने की वजह से उसने उसके पास किया था.............

वो तुरंत अपने फ़ोन से सना के पास कॉल बैक करती हैं और थोड़े देर बाद उधर से सना की आवाज़ उसके कानों में गूंजती hain.....jisssey उसके चेहरे पर मुस्कान तैर जाती हैं..........

" कहाँ मुरर गयी थी तू ..............मैं कल से तेरा फ़ोन कितनी बार तरय कर चुकी hoon........magar हर बार तेरे फ़ोन से बस एक hi जवाब आता hain..............switch off..........tu ठीक तो हैं न............." और सना चहकते हुए ज़ोरों से बोल पड़ती हैं वहीँ काव्य कुछ देर तक अपने ख्यालों में डूबी रहती हैं फिर वो भी मुस्कुराते हुए धीरे से बोल पड़ती hain.........wo उसे क्या बताती की उसका फ़ोन स्विच ऑफ होने के पीछे आखिर क्या वजह थी...............

" हाँ haan..........main ठीक hoon.........bus मोबाइल डिस्चार्ज हो गया tha........aur कुछ प्रॉब्लम भी tha........shayad इस लिए ों नहीं हो रहा था........... " और काव्य झूठ बोलती हुई जैसे अपनी बात संभालती हैं वहीँ सना बस जवाब में धीरे से मुस्कुरा पड़ती हैं......

" ों नहीं हो रहा tha..........tab तू अपने मोबाइल को अपने बुर में दाल ली hoti.........extra चार्ज हो जाता और तेरा फ़ोन तुरंत चार्ज उठा leta..........aur कभी स्विच ऑफ भी नहीं hota..........aakhir तेरे बुर में से हज़ार वाट का करंट जो हमेशा दौड़ता रहता हैं............." और सना इस बार खिलखिलाते हुए ज़ोरों से हंस पड़ती हैं वहीँ काव्य जवाब में बस मुस्कुरा पड़ती हैं........

" तू na........kuch भी बोलती hain...........tu कभी नहीं sudheregi............chal chodh........ye बता की तूने मेरे पास कॉल क्यों किया था........" और काव्य बात को बदलती हुई धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ सना अपनी हंसी रोकती हुई आगे कहना शुरू करती हैं..........

" बस ये बताने के लिए की मेरे सास ससुर गाँव चले गए हैं और मेरा शोहर (अख्तर) वो भी विदेश दो दिन पहले का जा चुके hain...........aab मैं इस बड़े से घर में बिलकुल अकेली hoon.........aur बहुत बोर हो रही hoon..............aur मैं अब चाहती हूँ की मैं भी अपना बोरिया बिस्टेर समेटकर तेरे पास तेरे घर पर रहने आ jawun..........issey तेरा भी टाइम पास हो जायेगा .......और मेरा भी दिल बेहाल jayega..............kya कहती हैं तू............." और सना मुस्कुराते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ काव्य फ़ौरन सना को हाँ बोल देती hain...........aab सना उसके पास आकर रहेगी तो उसका भी दिल लगा rahega...........aur शायद अब वो रघु और जीतू को आसानी से भुला भी दे देगी...........

" तू आ कब रही hain.............ye तो बता.........." और इस बार काव्य मुस्कुराते हुए फिर से बोल पड़ती हैं वहीँ सना उसे दो दिन के बाद का डेट बताती हुई दो चार इधर उधर की बातें करती हैं और फिर अपना फ़ोन रख देती hain...........wahin काव्य को अब ऐसा लगने लगा था की अब उसकी ज़िन्दगी दुबारा से फिर से पार्टी पर सही से दौड़ padegi.............jaise पहले दौड़ती thi.........magar ये उसका भ्रम था या कुछ aur.........ye तो बस जल्द hi आने वाला वक़्त बता सकता था.............

जैसे तैसे तो वो पूरा दिन बीत gaya..........aur न hi रघु काम करने aaya.........aur न hi jeetu............wahin अब काव्य फिर से बेचैन होने लगी thi..........jane अजाने में उसने उन दोनों को चिल्लाकर जो कहा था कहीं न कहीं उन दोनों को उसकी बातें दिल पर चोट कर गयी thi...........shaam का वक़्त था काव्य अब पूरी तरह से बेचैन हो उठी thi...........reh रहकर उसे रघु की याद सत्ता रही thi............aur उधर राम भी सुबह से अपने घर में hi tha......magar शाम होते hi वो बहार किसी काम से चला गया tha...........wahin काव्य राम के जाते hi और भी बेचैन हो उठती हैं और फ़ौरन रघु के कमरे की तरफ बिना सोचे चाल पड़ती hain..........wo भी अब अपने छूट के आगे बिलकुल मज़बूर हो चुकी थी.....................

जैसे जैसे उसके कदम आगे बढ़ते जा रहे थे वैसे वैसे उसके दिल में एक अजब सी बेचैनी बढ़ती जा रही thi........jab वो रघु के कमरे के पास पहुंचती हैं वो कुछ देर तक ऐसे hi उसके दरवाज़े के सामने चुप चाप से कड़ी रहती हैं फिर वो अगले hi पल अपने हाथों को आगे बढाकर थोड़ा सा उस दरवाज़े पर ज़ोर देती हैं और सामने का दरवाज़ा खुलता चला जाता hain...........wahin एक कोने पर जीतू बैठा हुआ tha..........aur दूसरे तरफ रघु सस्ती वाली बीड़ी पी रहा tha............nashe से उसकी आँखें पूरी लाल हो चुकी thi........jab उसकी नज़र सामने कड़ी काव्य पर पड़ती हैं उसके चेहरे पर फिर से वहीँ कमीनी हंसी तैर जाती हैं........

" आ गयी tu................main जनता था की तू यहाँ पर मुझसे मिलने ज़रूर aayegi..........bata क्या काम था मुझसे............." और इस बार रघु उस बीड़ी की काश को अपने मुँह के अंदर ज़ोरों से खींचता हैं और वो फ़ौरन उठकर काव्य के करीब आता हैं और उसके चेहरे के पास अपना चेहरा लेजाकर उसके चेहरे पर उस बीड़ी का धुवां धीरे धीरे से छोड़ने लगता hain...........wahin काव्य इस बार खांस पड़ती hain.......magar न hi रघु को मन करती hain.........aur न hi उससे कोई सवाल जवाब करती हैं.........

" मैं जानती हूँ की तुम सब मुझसे नाराज़ ho..........magar...........main......" और काव्य की बातें पूरी होती तभी रघु अपना लैब हौले से काव्य के लबों पर रख देता हैं और अपना एक हाथ उसके नीचे की तरफ ले जाने लगता hain......kavya के चूचियों के taraf.........aur अपना वही हाथ लेजाकर उसके बायीं वाली चुकी को इस बार कसकर मसलने लगता hain.............wahin काव्य हौले से सिसक पड़ती hain.........aur रघु को इस बार छुड़ाने की नाकाम कोशिश करती hain..........magar इसमें वो सफल नहीं हो पति.............

" ये अगर मगर क्या लगा राखी हैं मेरी jaan.............main न कहता था की तू एक नशा hain............kabhi न ख़तम होने wali.........ek nasha...............tere जैसी यहाँ कोई nahin........jo तू कर सकती हैं वो यहाँ पर कोई नहीं कर sakta............tere साथ तो मैंने बहुत कुछ करने का सोच रखा था मगर तेरे उस देवर ने ..........मेरा सारा प्लान चौपथ कर dala............khair..............aagey तूने अब इस बारे में क्या सोचा रखा hain...........ki हम अब ऐसे hi अपने हाथों से अपना लौड़ा हिलाएंगे ya...........tu खुद अपनी ये दोनों छेद हमें छोड़ने को कभी देगी......." और रघु काव्य के चुकी को कसकर मसलता हुआ फिर से बोल पड़ती hain...........is वक़्त उसकी नज़रें काव्य की नज़रियों से एक पल के लिए भी नहीं हुत्त रही thi.......wahin काव्य जवाब में कुछ नहीं बोल पति और फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे की तरफ झुका लेती हैं......

" तू फ़िक्र मुट्ठ कर मेरी jaan.............aab जो हम तेरे साथ चुदाई करेंगे वो अब इस घर में रहकर नहीं karengey...........balki यहाँ से कहीं दूर बहार जाकर karnegey..........aur मैंने तो जगह भी सोच रखा hain......bus तू एक बार हाँ बोल de............uske बाद तू अपनी छूट दे या न दे हम कैसे भी अपनी ज़िन्दगी गुज़र बसर कर lengey.............bus एक baar...........haan बोल दे ......बस ..........." और इस बार रघु जैसे काव्य के सामने फर्याद करने लगता हैं वहीँ इस बार काव्य उसे मन नहीं कर pati.........aur कुछ सोचकर वो फ़ौरन आगे बोल पड़ती हैं.......'

" तुम्हारे पास बस कल दिन भर का समय hain........kal के बाद फिर मैं तुम्हें अब कभी नहीं मिलने wali............is लिए जो तुम मेरे साथ करना चाहता ho.....jaisa चाहते ho.....kar सकते ho.............mujhe कोई ऐतराज़ नहीं हैं................" और काव्य इस बार गहरी सांस छोड़ते हुए धीरे से बोल पड़ती हैं वहीँ रघु उससे थोड़ा दूर हो जाता हैं और अजीब सी नज़रियों से काव्य को घूरने लगता hain..........usey काव्य की बातें कुछ ज़्यादा समझ में नहीं आयी थी..........

" matalb...................main कुछ समझा nahin..........ki तू क्या कहना चाहती हैं.........." और रघु बीड़ी की एक लुम्बी काश लेता हुआ फिर से बोल पड़ता हैं..........

कंटिन्यू........................................................
 
अपडेट- 58(बी) ( मेघा अपडेट)

" मतलब ये ki..............kal के बाद मेरी बेस्ट फ्रेंड सना खातून यहाँ मेरे पास अब रहने आ रही hain.............aur उसके रहते तो तुम्हें मैं अब मिलने से rahi...........aur वो भी यहाँ एक दो दिन के लिए नहीं रहेगी .........बल्कि पूरे दो महीने के लिए rahegi..........kum से kum..........is लिए सोच lo.........ki क्या तुम्हें करना hain..............aur क्या नहीं.........." और काव्य जैसे अपनी परेशानी रघु और जीतू को बताती हुई फिर से बोल पड़ती हैं वहीँ रघु अपने सोच में डूबता चला जाता हैं.........

" वो सब बाद में dekhnegey...........wo तेरी नहीं मेरी टेंशन hain......bus तू कैसे भी करके राम को बस राज़ी कर lena........agar वो चाहे तो हमारे साथ इस खेल में फिर से शामिल हो सकता hain..........agar नहीं तो कोई बात nahin...........main तुझे कल एक ऐसी जगह ले जाने वाला हूँ जहाँ तुझे मज़े hi मज़े aayengey................bus तू वहीँ करना चुप चाप जो वे सब चाहेंगे................" और रघु जैसे अपने प्लान के बारे में काव्य को समझता हैं वहीँ काव्य थोड़ी सी परेशां सी नज़र आने लगती हैं..........

" वे सब कौन लोग raghu...........kya कल तुम दोनों के आवला और भी कोई hoga........tumhare साथ..........." और काव्य के इस सवाल पर रघु जैसे हंस पड़ता हैं...........

" haan......mere दो तीन दोस्त hain.............bade काम के चीज़ hain..........jab से उन्होंने तेरी फोटो देखि hain............wo तो जैसे पागल से हो गए hain...............bus मेरी jaan........ek आखरी baar.....iske बाद मैं तुझे कभी किसी चीज़ के लिए ज़िद्द नहीं karunga.............maa कसम.............." और इस बार रघु अपने गले पर हाथ रखता हुआ कसम खाने लगता हैं वहीँ काव्य रघु की तरफ देखती हुई धीरे से मुस्कुरा देती hain.........uski बुर में भी अब गीलापन बढ़ने लगा था...........

रघु फ़ौरन थोड़ा सा दूर जाता हैं और एक मोती सी गाजर ले आता हैं .......गाजर करीब 2 से 3 इंच की मोटाई में थी और लम्बाई लगभग 5 इंच के आस paas............wo उस गाजर को काव्य के हाथों में धीरे से थम देता हैं.........

" ये लीजिये मेरा tohfa.........aapke लिए ............ये gajar...........naa naa......aap इसे खाइयेगा nahin......main इसे खाने के लिए आपको नहीं दे raha..............isey तो मैं आपको अमानत के तौर पर दे रहा hoon............kal जब आप मेरे साथ जब चलेंगी तब आप इस गाजर को यहाँ से जाने से पहले इसे आप अपनी पीछे वाली छेद mein..........yani की गांड में दाल lijiyega.............poora का poora..........aur न hi आपको ये गाजर निकला hain...........aur न hi इसे दुबारा चूना hain.........bus इसके ऊपर आप अपनी पंतय पहन लीजियेगा और हाँ आपको वो स्कर्ट पहननी hain........choti वाली जो आपके जांघों तक आती hain..........upar आपका सफ़ेद रंग का शर्ट रहेगा और नीचे गुलाबी रंग की skirt.........jismein आप किसी कॉलेज की लड़की की तरह बस नज़र aayengi..........bus bus.......mere खातिर बस एक baar..........naa मुट्ठ कहियेगा............." और रघु जैसे काव्य के सामने गिड़गिड़ाने लगता हैं वहीँ काव्य मुस्कुराती हुई वो गाजर ले लेती हैं और वहां से फुरण अपने बंगलो के अंदर चली जाती hain................wahin इस बार रघु ख़ुशी से उछाल पड़ता हैं.........

काव्य के जाते hi रघु के चेहरे पर एक गन्दी सी हंसी फिर से आ जाती हैं और वो जीतू की तरफ देखता हुआ फिर से मुस्कुरा पड़ता hain..........wahin जीतू बड़े गौर से रघु की तरफ बस देखने लगता हैं...........

" ये सब क्या हैं yaar............tujhe कैसे पता चला की मैडम यहाँ पर aayegi..........mujhe लगा की वो अब कभी नहीं आएगी................" और जीतू सवाल भरे नज़रियों से एक तुक रघु के तरफ देखता रहता हैं वहीँ रघु उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से हंस पड़ता हैं........

" तू क्या जाने ये छूट का नशा होता hi कुछ ऐसा hain............jisey एक बार ये लत्त लग गयी समझो वो गया काम se...............aab हमने भी तो अपनी मेमसाहेब को इतने दिनों से ये लत्त पदक दी हैं तो उसका नशा तो जाते जाते hi जायेगा naa..............aur तू बस देखता jaa.............kal तो मैंने अपनी मैडम के लिए बहुत कुछ सोच रखा hain.........wo सब कुछ जो मैं चाहता hoon............kal तो वो जाएगी अपने दो कदम से chalkar.............magar शाम को जब वो वहां से लौटेगी to.............chalney के काबिल नहीं रह जाएगी..........." और रघु इतना कहकर ठाहक मरकर हसने लगता हैं वहीँ जीतू अभी भी उसके चेहरे को घूरे जा रहा था.............

" पहेलियाँ न बुझा yaar.................teri ये आधे से ज़्यादा बातें मुझे समझ में बिलकुल नहीं aati.....jo कहना हैं साफ़ साफ़ बोल.........." और जीतू इस बार फिर से हौले से बोल पड़ता हैं वहीँ रघु आगे बोलना शुरू करता हैं........

" कल वहां हम दोनों के साथ साथ मेरे और तीन दोस्त भी hongey...........wo भी मेरी तरह पूरे एक नंबर के ऐयाश और हरामी किसम के hain.........harami इतना की मैं भी उसके आगे फीका लगता hoon..........aab तू hi bata...........jab हम दो हरामी मिलके काव्य का जब इतना बुरा हाल कर सकते हैं तो हम अगर पाँचों एक साथ अगर मिल जाये तो........... तो उस बेचारी काव्य का क्या हर्षा karenge...............soch सकता हैं की उस बिचारि के उस छोटे से दो छेद का क्या hoga...........jisey सिर्फ कल बस फटना hi हैं.........."

" तू भले hi कुछ नहीं जनता उनके बारे mein...........magar मैं उनके हरामीपन के नस नस से वाकिफ hoon.........unmein से एक मेरा ख़ास दोस्त हैं........... rajan.............jo एक पीछे टाइप का आदमी hain........uska दिमाग कब फिर जाये और वो क्या कर जाये ये कोई नहीं janta...........aur अगर उसने किसी चीज़ की अगर ज़िद्द कर ली ............तो फिर पूछो mutt.............wo तो उसे करके hi manega...........chahe जो हो............

दूसरा मेरा दोस्त javed...............hain तो वो पूरा musalmaan.........magar पेशे से वो एक कॅशे hain.............din भर में कम से कम वो 10 या 12 बकरियां काट hi देता hain...........wo भी पूरे बेदर्दी के saath.........aur सच पूछों तो उसे बकरियों को यु तड़पता हुआ देखकर बहुत मज़ा आता hain.............ya ये कह ले की उसे दूसरों को दर्द देने में बड़ा मज़ा आता हैं......

और तीसरा जो सबसे ख़ास हैं वो hain...........mera डॉक्टर dost.............irfan.............waise तो ये भी थोड़ा पीछे टाइप का आदमी हैं मगर ये छोटे मोठे से लेकर बड़े केसेस आसानी से संभल सकता hain...........aur इसे दवाई के बारे में काफी जानकारी hain........aksar ये छोटे मोठे प्रयोग हमेशा करता रहता हैं और एक बार इसके इसी प्रयोग के चलते एक आदमी की जान चली गयी थी जिसके वजह से इसे अपनी नौकरी से हाथ धोना pada...........tab से ये उस बस्ती में घूम घूमकर दवाइयां करता hain.........magar पैसों की इसके पास कोई कमी nahin...........magar रहता फिर भी एक गन्दी बस्ती में हैं.........

मगर जब बात औरत की आती हैं to...........ye दवाइयां के साथ साथ और भी बहुत कुछ कर देता hain.............wo भी बिलकुल फ्री में........" और रघु इतना कहकर जीतू की तरफ बड़े गौर से देखने लगता हैं वहीँ जीतू बड़े अजीब से उसकी तरफ देखने लगता हैं.........

" तू पागल हो गया हैं क्या!!!!!!!!!!!!!!! तू मेमसाहेब को ऐसे कसाइयों और दरिंदों के हाथों saunpega...........jahan ये सब मिलकर उसकी बोटी बोटी नूच khayengey............yaar दुश्मनी का बदला और भी तरीके से लिया जा सकता hain.........kahin कुछ हो गया तो .......लेने के देने पढ़ जाएंगे............" और जीतू थोड़ा सा डरते हुए फिर से बोल पड़ता हैं वहीँ रघु उसकी बाटिओं को सुनकर मुस्कुरा देता हैं.........

" वैसे तू फ़िक्र मुट्ठ kar..........humari मेमसाहेब इन तीनों को आसानी से संभल legi............usey इन तीनों को संभालने में थोड़ी दिक्कत तो आएगी मगर उससे ये हो jayega............aur जहाँ तक मैं इनके बारे में जनता हूँ इनके पास रंडियां मुँह मांगी दाम मिलने के बावजूद भी जाना पसंद नहीं karti..............tu hi सोच कुछ तो खईसत होगी inmein............aur इनकी क्या खासियत हैं ये तो अब कल hi जाकर वहां पता chalega............main अभी इरफ़ान से बात कर लेता hoon.........wo ये जानकर बहुत खुस हो jayega............aur मुझे मुँहमाँगी दाम भी देगा............." और रघु इतना कहकर फ़ोन लगता हैं और कुछ देर की रिंग के बाद उधर से आवाज़ आती हैं............

" बोल बे haramzyade..............aaj तुझे कैसे मेरी याद आ gayi...............kisi के बुर के अंदर छुपकर बैठा था क्या जो इतने दिनों बाद तुझे मेरी याद आयी..............." और इधर से इरफ़ान रघु को गालियां देता हुआ बोल पड़ता hain.........wahin रघु उसकी बाटिओं को सुनकर धीरे से मुस्कुरा पड़ता हैं......

" जहाँ tha........maze में tha.........waise तुझे एक तोहफा देने का मुन्न कर रहा हैं mujhe..........ek नायाब tohfa...........jisey देखकर तेरा लौड़ा बैठने का नाम नहीं lega............magar उसकी कीमत ज़्यादा लगेगी इस baar.......poorey 10,000 ( दस हज़ार) लूँगा उसके एक दिन के........." और रघु हस्ता हुआ फिर से बोल पड़ता हैं वहीँ इरफ़ान अपने लुंड को पेण्ट के ऊपर से मसलता हुआ अपने दांत दिखने लगता हैं.......

" बड़ा मादरचोद हैं रे tu..................saaf साफ़ नहीं बोल सकता की तूने मेरे लिए छूट का इंतेज़ाम किया hain..............kaun हैं re.......wahi क्या जिसकी फोटो तूने मुझे दिखाई thi..............agar वो होगी तो समझ ले की तुझे उसकी पूरी कीमत तुझे मिल जाएगी...." और इरफ़ान हँसता हुआ फिर से बोल पड़ता हैं वहीँ इस बार रघु हाँ में जावद देता हैं...........

" मगर मेरी भी एक शर्त hain...............agar कहीं वो बीच में अगर भाग गयी to.......ya उसने हमें मन कर दिया to........jo हम उसके साथ कारण चाहते hain...........to फिर समझ लेना की तुझे एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिलने वाली............." और इरफ़ान रघु को सचेत करता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ रघु उसे पूरा विश्वास दिलाता hain............aur फिर रघु अपना फ़ोन रख देता हैं............

" तू पागल तो नहीं हो गया ..........तू अपनी मेमसाहेब का सौदा कर रहा hain.................agar ये बात उन्हें पता लग गयी तो.........." और जीतू थोड़ा सा परेशां होता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ रघु उसकी बाटिओं को सुनकर फिर से मुस्कुरा पड़ता हैं...........

" तू फ़िक्र मुट्ठ kar............sab कुछ हो jayega.............tu अपनी ज़्यादा दिमाग मुट्ठ चला aab.............schney दे मुझे की आगे अब क्या करा हैं............." और रघु फिर से बीड़ी निकलता हैं और उसकी काश लेता हुआ फिर से अपने सोच में डूबता चला जाता हैं..........

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जैसे तैसे रात guzari..............kavya बिस्टेर पर अकेले बहुत बेचैन thi............uski रातें काटे नहीं कुत्त रही thi.........wo राम से इस बारे में एक बार बात करना चाहती थी मगर उसकी ज़रा भी हिम्मत नहीं hui..........usney तय कर लिया की जब राम सुबह कॉलेज को जायेगा उसके निकलते hi वो रघु के साथ चली जाएगी और शाम होते होते घर वापस लौट aayegi..........agar उसे देरी हुआ ततो वो राम से मार्किट का बहाना बना degi.........ye सोचकर वो सुकून से उस रात सू जाती हैं और सुबह राम नास्ता करके कॉलेज जाने लगता hain..........thode देर में उसकी कॉलेज बस आ जाती हैं और राम फिर उस बस में बैठकर अपने कॉलेज चला जाता हैं.........

राम के जाते hi रघु काव्य के पास आता हैं और आकर फिर से काव्य को अपने गले लगा लेता हैं..............

" तू तैयार hoja.............yaad हैं na......maine तुझे जैसा बोलै tha.........theek वैसे hi............aur haan........wo गाजर अपनी गांड के अंदर डालना न bhoolna.........maine अपने एक दोस्त को बुला लिया hain.........wo अभी यहाँ आता hi hoga........usey ड्राइविंग आती hain.........wo तेरी कार चलकर तुझे वहां ले jayega..........aur फिर शाम को वो तुझे यहाँ छोड़ भी jayega............teri कार ऐसे जगह पार्क होगी जहाँ किसी को कोई शक नहीं hoga............aab तू फटाफट जाकर तैयार हो जा..........." और रघु काव्य को जैसे आर्डर देता हैं वहीँ काव्य फ़ौरन अपने कमरे में जाती हैं और रघु के हिसाब से तैयार होने लगती hain.......wahin रघु बार बार अपने लौड़े को मसल रहा tha..............shayad एक्ससिटेमेंट की वजह से...................

थोड़े देर बाद रघु का वही दोस्त जावेद आता हैं और आकर बड़े गौर से उस बंगलो को एक तुक देकने लगता hain.................is वक़्त वो भी जोश में दिख रहा tha...........baar बार उसकी नज़रें काव्य को ढूंढ रही thi.........magar काव्य अब तक उसे कहीं नज़र नहीं आयी thi........wo एहि सोच रहा था की जिसे वो आज छोड़ेगा वो आखिर दिखती कैसी हैं..........

वैसे जावेद का उम्र करीब 48 साल tha.........dikhney में वो थोड़ा सावला और उसके चेहरे पर हल्की सफ़ेद और काळा रंग की ढाढी thi...........bal भी करीब करीब पाक गए they............na जाने हर रोज़ वो कीतीन साडी बकरियां काटता था एहि उसका पेशा tha........to स्वाभाव भी उसका अब कसाइयों जैसा बन गया tha...........aise लोगों को औरत तो भाव भी नहीं देती थी तो लडकियां क्या ख़ाक deti.........wo तो रघु की मेहरबानी थी की आज ुषें छोड़ने को काव्य जैसी अप्सरा मिल रही thi...........ye उन सब के लिए किसी बड़े सपने से कम नहीं tha.............aakhir इंतज़ार के बाद जावेद की नज़र जब सामने से आ रही काव्य पर जब पड़ती हैं उसकी आँखें एक पल के लिए मनो फटी की फटी रह जाती हैं............

काव्य का रंग रूप देखकर तो उसके होश उड़द गए they.........aisi पारी को पाना तो door.......aab उन्हें छोड़ने को मिल रहा था ये तो उनका सौभाग्य hi tha............nahin तो इस उम्र में उन्हें कोई भाव देता क्या!!!!!!!!!!!!! काव्य ऊपर वाइट रंग की शर्ट और नीचे पिंक रंग की स्कर्ट पहनी हुई thi.........jo स्कर्ट अब उसकी दोनों घुटनों के एक 5 इंच ऊपर तक thi.....jismein उसका गोरा और मांसल जांघें साफ़ नज़र आ रही thi........jo जावेद आँख फाड़े बस काव्य के रूप रंग को देख रहा tha..........waise वो कॅशे के साथ साथ टेम्पो और ट्रक भी चलाया करता tha........magar ज़रूरत पड़ने par............is लिए उसे ड्राइविंग ाचे से आती थी...........

काव्य अजीब सी नज़रियों से जावेद की तरफ देखने लगती हैं फिर वो फौरन अपनी नज़रें नीचे झुककर सामने कड़ी अपनी कार के पीछे वाली सीट पर जाकर बैठ जाती hain........wahin जावेद भी जाकर ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता hain.......aur उसके एक तरफ रघु बैठ जाता hain...............aur काव्य के दूसरी तरफ jeetu...........aur फिर वो कार अपने मज़िल की तरफ चल पड़ती हैं और udher................aab खेल भी शुरू हो जाता hain................kavya के चुदाई का खेल..........................................

टिल कॉन्टिनोएड.......................................................
 
अपडेट-59 (ा) (मेघा अपडेट)

काव्य अजीब सी नज़रियों से जावेद की तरफ देखने लगती हैं फिर वो फ़ौरन अपनी नज़रें नीचे झुककर सामने कड़ी अपनी कार के पीछे वाली सीट पर जाकर बैठ जाती hain........wahin जावेद भी जाकर ड्राइविंग सीट पर बैठ जाता hain.......aur उसके एक तरफ रघु बैठ जाता hain...............aur काव्य के दूसरी तरफ jeetu...........aur फिर वो कार अपने मज़िल की तरफ चल पड़ती हैं और udher..............aab खेल भी शुरू हो जाता hain................kavya के चुदाई का खेल..........................................

अब आगे........................................................................

काव्य जा तो रही थी रघु और जीतू के साथ saath...........magar उसे ज़रा भी अंदाज़ा नहीं था की वे सब लोग उसे कहाँ पर लेकर जा रहे hain..........aur वहां लेजाकर उसके साथ अब कौन सा खेल खेलने वाले hain..........waise देखा जाये तो राजन , फ्रां और जावेद तीनों हम उम्र के they.........teenon के बल अब सफ़ेद हो चुके they...............aur जावेद अगर 55 का था तो इरफ़ान 52 साल ka,......wahin राजन 48 साल ka............magar देखा जाये तो काव्य उनकी बेटी सामान thi...............aur उन सब के उम्र में 1/2 से भी कम में थी..........

" waise................maal तो बहुत टाँच hain.............isey छोड़ने में मज़ा तो बहुत आने वाला hain...........magar पता नहीं ये हम सब को अकेले झेल भी पायेगी या nahin..................kahin इसकी पूरी तरह से फुट न जाये............." और इस बार जावेद अपने चेहरे पर गन्दी सी हंसी लता हुआ काव्य को बैक मिरर में देखता हुआ धीरे से बोल पड़ता hain...........wahin जावेद की बातें सुनकर रघु ज़ोरों से हंस पड़ता हैं............

" संभल legi............ye सबको आसानी से संभल legi............iski बुर और गांड में बहुत दम भरा hain..........aab मालकिन हम सबकी लाज आपके इन दो छेदों में hain...........chahe तो इसे फुट जाने देना मगर हार न manana..........nahin तो मेरी इज़्ज़त तो गयी समझो........" और इस बार रघु काव्य की बेइज़्ज़ती करते हुए अपना एक हाथ काव्य के बायीं चुकी पर हौले से रख देता हैं और उसे फिर धीरे धीरे से मसलना शरुरु करता hain......wahin दूसरी तरफ जीतू भी अपना एक हाथ उसकी दूसरी चुकी पर रखकर वो भी उसे धीरे धीरे से मसलना शुरू करता hain...........wahin काव्य इस दोहरे हमले से बुरी तरह से सिसक पड़ती hain.........wahin जावेद बैक मिरर में देखता हुआ अब मज़े ले रहा tha.........aur मुस्कुरा भी रहा था..........

कार तो चल रही थी मगर काव्य की चुदाई अब शुरू हो गयी thi........itne सरे एक साथ पांच पांच mard...........ufff...........kaise वो अकेले सबको sambhalegi...........pata नहीं कौन कैसा hain.......kis नेचर का hain.............kisey किस तरह का सेक्स पसंद hain..........in सरे सवालों के जवाब अब उसे बहुत जल्द मिलने वाले they..............aur अब एहि सरे सवाल उसे अब परेशां करने लगे थे........

" अपनी दोनों टांगें ऊपर की तरफ उठकर थोड़ी सी अपनी जांघें फैलाओ न मेरी जान......" और इस बार रघु काव्य के जीभ पर अपने गंदे होंठ चलता हुआ धीरे से बोल पड़ता हैं वहीँ अब वो उसकी चुकी को लगातार मिस्स्स्स रहा tha............wahin काव्य अब धीरे धीरे आहें भर रही thi........usey सब कुछ बहुत अजीब सा लग रहा tha..........magar साथ hi साथ उसकी बुर गीली होनी भी शुरू हो गयी thi..............wahin काव्य अपना एक पवन रघु के जांघों पर चढ़ा लेती हैं और दूसरा पवन जीतू के जांघों par..........wahin जावेद बार बार बैक मिरर से ये हसीं नज़ारा देख रहा tha...........uska भी लौड़ा अब टाइट होता जा रहा tha..........jaise तैसे वो अपना ध्यान सामने रोड की ओरे रख पा रहा था...........

काव्य धीरे से आगे की तरफ देखती हुई अपनी गांड थोड़ी सी हवा में उठा लेती हैं और रघु इस बार अपने दूसरे हाथ को नीचे की तरफ सरकता हुआ ले जाता हैं और इस बार उसके स्कर्ट के अंदर अपना वही हाथ धीरे से दाल देता हैं और उसकी पंतय को ऊपर से hi मसलना शुरू करता hain.......ye देखकर जीतू भी मुस्कुराने लगता hain...........wahin काव्य अपने दोनों हाथों को सीट के दोनों तरफ रखती हुई ज़ोरों से उस सीट को अपने नाख़ून से नूच रही thi............masal रही thi................sisak रही thi............wahin जावेद का अब बुरा हाल होता जा रहा tha..........jaise तैसे वो खुद को संभाले हुआ था............

" अबे laude......................accident करवाएगा kya.................main पीछे देखूं की .......आगे............." और इस बार जावेद अपने लुंड को मसलता हुआ ........ड्राइव करता हुआ धीरे से बोल पड़ता hain...........wahin रघु उसकी बाटिओं को सुनकर हंस पड़ता हैं.......

" तू तो अभी से बेचैन हो gaya.............chal कोई बात nahin.......main तेरा भी अभी कुछ इंतेज़ाम कर देता hoon...........mere रहते तू फ़िक्र कहे को करता हैं..........." और इस बार रघु अपने हाथों को धीरे से हरकत करता हैं और काव्य के पंतय को स्कर्ट के अंदर से hi अपना हाथ dale.........dheere धीरे उसे बहार की तरफ खींचना शुरू करता hain........wahin काव्य ना में अपना सर हिलती हुई रघु को मन करने लगती hain.......magar रघु अब कहाँ मानने वालों में से था..........

" aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhhhssssssssssssssss.........nahin raghu........aabhi nahin..........please.........." और काव्य अपना एक हाथ रघु के हाथों पर हौले से रख देती हैं वहीँ रघु उसके हाथों को फिर से हटा देता हैं..........

" इसमें शर्माने की क्या बात हैं janeman..........javed तेरे लिए नया आदमी हैं मगर वो भी तो अपना hi hain.........aur अपनों से भला कैसी sharam..........aagey वो भी तो तेरे इन दो छेद में अपना लौड़ा डालने वाला hain.........fir उसे कहे की sharam........dekho गौर से उस बिचारे ko........usey ठीक से अब गाड़ी भी चलाये नहीं जा rahi........uska तो कुछ करना hi पड़ेगा na..........nahin तो साला कहीं एक्सीडेंट करा दिया to.......lene के देने पढ़ जाएंगे................." और इस बार रघु काव्य के होंठों को चूसने लगता हैं और अपने हाथों को नीचे लेजाकर काव्य के उस पंतय को धीरे धीरे नीचे की तरफ सरकने लगता hain........kavya भी अब कोई सवाल जवाब नहीं करती और चुप चाप से अपनी पंतय उतरवा लेती hain............wahin रघु और जीतू अभी भी उसके दोनों चूचियों को लगातार मीइसससससस रहे they........aab रघु के हाथों में काव्य की ब्लैक कलर की पंतय thi.......jo वो उसे बड़े गौर से देखता हुआ धीरे से चूम लेता हैं और उसे हवा में उछलता हुआ सीधा जावेद की तरफ फेंक देता hain...........wahin जावेद ख़ुशी से उछाल पड़ता है.........

" ले तू भी क्या याद रखेगा की तेरा पला किस्से पड़ा tha..........tu भी अब ऐश कर.............." और रघु इस बार काव्य की नंगी बुर को स्कर्ट के अंदर से hi धीरे धीरे मसलता हुआ......... साथ hi साथ उसके चूचियों को दबाता हुआ हंस पड़ता hain..........udher जीतू भी लगातार उसकी एक चुकी को मसाले जा रहा tha...........is दोहरे हमले से काव्य पल पल तड़पती जा रही thi..........uski आहें उस कार में पल पल गूँज रही thi........wahin जावेद उस पंतय को अपने नाक के पास लेजाकर सूंघता हैं और मदहोश होता हुआ कुछ सेकण्ड्स तक अपनी दोनों आँखें बंद कर लेता hain........uspar तो जैसे एक सुरूर सा च गया tha..........wahin काव्य के छूट रूस थोड़े बहुत उस पंतय पर भी लगे थे जिसे वो कभी सूंघ रहा tha............to कभी अपने जीभ से चाट रहा tha................saath hi साथ ड्राइव भी कर रहा था.........

खेल चलता रहा और दोनों उधर काव्य को गरम करते rahe............wahin काव्य उन दोनों के बीच अकेली तड़पती rahi...........javed 1/2 घंटे की ड्राइव के बाद एक गंदे बस्ती की ओरे उस कार को मोड़ देता hain...........raaste बहुत ख़राब थे मगर कार आसानी से निकल सकती thi........har तरफ जगह जगह लोग खड़े उस कार को अजीब सी नज़रियों से घूर रहे they.......wahin रघु और जीतू अब काव्य से थोड़ा दूर हटकर बैठ जाते हैं और काव्य आँख बंद किये अभी भी लुम्बी लुम्बी सांसें ले रही thi......aur अपने आपको पूरी तरह से कण्ट्रोल कर रही thi..........aur नार्मल भी................

सड़क के दोनों बगल छोटे छोटे झोपड़ी बने थे और बहुत सी झुग्गी बस्तियां भी thi...........har तरफ नंगे और गंदे से गरीब लोग बस नज़र आ रहे they..............kul मिलजुलकर अब वो कार एक गन्दी बस्ती में एंटर कर चुकी thi.....kuch दूर जाने पर एक बड़ा सा पेड़ मिलता हैं जहाँ थोड़ा सूनसान सा tha........javed उस कार को वहीँ पार्क करता हैं और फिर सबको उतरने को कहता hain.....wahan से बस 5 मिनट की दूरी thi..............unki manzil........magar काव्य स्कर्ट के अंदर कुछ नहीं पहनी थी इस वजह से उसे बहुत अजीब लग रहा tha........wo भी उसकी स्कर्ट घुटन से 4 इंच ऊपर की तरफ thi..........upar से अब उसकी पंतय जावेद के पास थी तो वो उससे भला कैसे मांगती..........

" raghu.......please..........meri पंतय मंगवा दो na.........mujhe यहाँ इस जगह पर बहुत अजीब सा लग रहा hain...........jahan तुम मुझे ले जाना चाहते हो मैं वहां पहुंचकर वो पंतय तुम्हें फिर से लौटा doongi.....magar ..........." और काव्य आहिस्ता से कार में बैठे बैठे बोल पड़ती हैं वहीँ रघु उसे चुप करता हुआ बोल पड़ता हैं..........

" अब तो तुझे नंगा होना hi हैं हम सब के beech.......to तू क्या करेगी अपनी पंतय को दुबारा से pehankar.........chal चुप chaap.......agar ज़्यादा सवाल जवाब की तो मैं यहीं तेरे सरे कपड़े पूरा उतरवा लूँगा और तुझे ऐसे hi पूरा नंगा करके यहाँ से अब ले चलूँगा........." और रघु जैसे अपने तेवर बदलता हुआ बोल पड़ता हैं वहीँ काव्य कोई सवाल जवाब नहीं करती और अपने स्कर्ट को सही करती हुई उन सब के पीछे पीछे चल पड़ती hain.........wahin जावेद के हाथ में काव्य की पंतय thi........jo वो उसे कभी अपने नाक के पास ले जाता .............तो कभी उसे चूम leta........to कभी उसे हवा में उछाल deta..........wahin काव्य का अब शर्म से बुरा हाल tha..........jisey नहीं जनन था वो सब जावेद को देखकर आसानी से समझ जाएंगे की वो उन सब से छोड़ने जा रही thi.........aur जावेद के हाथ में उसी की पंतय hain...........magar अब वो अपनी पंतय के लिए दुबारा हिम्मत न जूता सकीय............

उबेर खाबड़ रास्ते से गुज़रते हुए जावेद आगे आगे चल रहा था वहीँ रघु जावेद के पीछे पीछे tha..........aur काव्य उन सब के peechay.........aur सबसे आखरी में जीतू चल रहा tha........jo हर पल काव्य के थिरकी हुई गांड पर किसी गिद्दी की तरह अपनी नज़रें जमाये बैठा tha..........raasta इतना संकरा था की उस गली में दो से ज़्यादा लोग एक साथ नहीं चल सकते they...........wahin बस्ती के सरे लोग अजीब सी नज़रियों से काव्य को घूर रहे they......mard तो mard......baachey से लेकर औरत भी उसे अजीब सी नज़रियों से घूर रहे they...........itna तो वे सब समझ hi चुके थे की ये कोई बड़े घराने की लड़की हैं और इन सब से ये यहाँ छोड़ने आयी hain.......magar काव्य के रंग रूप को देखकर किसी को जैसे विश्वास नहीं हो रहा tha........aur वैसे भी वो बस्ती पहले से hi बदनाम था.............

जहाँ जहाँ वो जा रही थी वहां के मर्द उसे देखते हुए उसकी आँखों के सामने अपने अपने लौड़े को मसल रहे थे साथ hi गन्दी तरह से हंस भी रहे they............javed कुछ दूर जाने पर एक झोपड़ी टाइप के घर के सामने रुक जाता हैं और उस घर की कुण्डी खोलने लगता hain......fir वो उस झोपड़ी टाइप के घर के अंदर जाता हैं और पीछे पीछे बाकि लोग भी चल पड़ते hain.........kuch 10 कदम की दूरी पर एक बड़ा सा बगीचा (गार्डन) मिलता हैं और उससे थोड़े दूर पर एक पक्का माकन दीखता hain........waise ये गार्डन चरों तरफ से घिरा हुआ tha........aur उसके चरों तरफ 8 फ़ीट ऊँची बाउंड्री thi.......magar आस पास बड़े बड़े कुछ घर भी थे जहाँ पर चढ़ने से वहां का आँगन साफ़ दीखता था............

जैसे hi जावेद उस घर के सामने पहुँचता हैं वो दरवाज़े के साइड में एक बेल्ल जैसा बटन दबाता हैं और कुछ hi सेकण्ड्स में एक छोटी सी स्क्रीन उस दरवाज़े के सामने नज़र आती hain................wo उस स्क्रीन पर कुछ 4 डिजिट्स के कोड एंटर करता हैं और अगले hi पल सामने का दरवाज़ा खुलता चला जाता hain..............kavya बड़े गौर से जावेद के उँगलियों को एक तुक देख रही thi..........wahin काव्य को बहुत बड़ा झटका लगा था की ऐसे गंदे और झुग्गी टाइप इलाके में ऐसी सिक्योरिटी टाइप के ghar............ye बात अब उसके गले नहीं उतर रही thi..........ya तो ये घर प्रोहिबिटेड था (जहाँ लोगों का जाना मन होता हैं) या फिर सबकी नज़रियों से बचाकर इसे सबसे छुपाया गया tha..................par जो भी था अब उसको इन सब सवालों के जवाब बहुत जल्द मिलने वाले थे............

जावेद जैसे hi अंदर जाता हैं पीछे पीछे सब लोग एक एक कर अंदर जाने लगते hain............ander एक बड़ा सा हाल था और उसमें तमाम वो साडी चीज़ें थी जो एक आलिशान घर में होनी chahiye..........kahin से भी ऐसा नहीं लग रहा था जैसे वो किसी गंदे बस्ती या झुग्गी टाइप एरिया में आयी हुई hain............wo बड़े गौर से उस घर को देख रही thi............samney एक बड़ा सा टेबल था जिसपर कुछ रस्सियां राखी हुई thi............wahin सामने एक 6 फ़ीट ऊँची लटकने की चीज़ थी जो जिम में लोग अक्सर उसपर चढ़कर लटका करते hain.......peechay पीठ के पास एक गाड़ेदार सीट थी और उसके दोनों बाजु में लोहे की दो रोड थी जिसपर दो छोटे छोटे गाड़ी लगे they......jisey पकड़कर लोग लटका करते हैं या अपने पैरों को मूवमेंट करते हैं...................

वहीँ सामने एक शीशे का शोरूम जैसा tha............jismein बहुत अजीब जीब सी चीज़ें राखी हुई thi..........jaise हर साइज की mala.......jo किसी कांच के गोली बराबर एक लाइन से पिरोये हुए रखे they......ek लाइन mein..........to कुछ बड़े साइज mein.......to कुछ rings........jo काव्य को बहुत अजीब सा लग रहा tha..............aab उसे ऐसा ख्याल आने लगा था जैसे वो यहाँ पर आकर कोई गलती कर दी ho............wo अभी इन्ही सब में उलझी हुई थी तभी उसके कानों में किसी के चलने की आहात सुनाई देती hain.....agle hi पल वो सामने की तरफ बड़े गौर से अपने तरफ आते उस साक्ष को एक तुक देखने लगती हैं..............

कंटिन्यू...........................................
 
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