KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION - Page 8 - SexBaba
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KAMINA CHUDDAKAD - NEW VERSION

आरती फिर आपने साड़ी ठीक करके बिना नवाज़ को देख के सीधा अपने कमरे की तरफ निकल पड़ती हैं जैसे hi वो नवाज़ के रूम से बहार पड़ती है वैसे hi नवाज़ बीएड पाई उठ के बैठ जाता है..

अब आरती गर्दन से होते हुई आपने रूम मई जा रही थी.. नवाज़ आरती की थिरकती हुई गांड को खा जाने वाली नजरोंसे से बस देख रहा था.. और तब तक उसे ऐसे hi देखता रहा जब तक आरती उसकी नज़रो से ओझल नहीं हो जाती .. इस समय आरती ने एक बार भी पलट के देखा नहीं ..

जैसे hi आरती नवाज़ के रूम से आपने घर मई आयी तब उसे सामने आपने पति अरविन्द दिखा .. वो देख के उसको बड़ा शॉक लगा .. आपने पति को ऐसे सामने अचानक देखने से वो थोड़ी दर सी गयी ..क्यों की उसके पति ने उसे बोलै नहीं था की रात में वो आ जायेगा .. इसलिए वो बड़े आशर्य से आपने पति को देखने लगी ..

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तब अरविन्द आपने पत्नी को देखते हुई वो कहता है

" कैसी हो मेरी जान"

ऐसा कह के उसे अपनी बाँहों में जकड लेता हैं.. और पूछता है

पापा कहा है ..दिख नहीं रहे है

वो शांतनु चाचा बीमार है न .. वह गए है .. आएंगे की नहीं पता नहीं

तब अरविन्द कहता है

ाचा हैं अब इस घर में हम दोनों अकेले है .. हमें एक साथ टाइम स्पेंड करने का मौका hi नहीं मिलता ..

इतना बोलकर अरविन्द आरती के कंधे पर अपने हाथ रख देता हैं और उसे सरकते हुई नीचे उसके बूब्स के तरफ ले जाने लगता हैं....... तब झट से आरती पीछे हैट जाती है..

आप फ्रेश हुई क्या

नहीं

फ्रेश हो जाएये .. मई आप के लिए खाना लेके आती हु

ऐसा बोल के बिना आपने पति को देखे किचन में चली जाती है .. जैसे hi आरती किचन में जाती है वो लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगती इहै और सोचने लगती hai..aapne बालो मई हाथ घूमते हुई ..

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कैसे वो ये सब किसी पराये मर्द के साथ कर सकते है और उसके बारे में कैसे ऐसे सोच सकती है ..........

फिर खुदको को कहती है

अगर उस वक़्त अरविन्द वह आ जाते तो ...

ओह्ह्ह माय god..phir मई क्या karte..aur उनको क्या जवाब देते.. क्या बताती की मई इस वक़्त आपने नौकर के रूम मई क्या कर रही हु

फिर वो अब अपने आपको पूरी तरह से नार्मल करने की कोशिश करने लगती हैं .....और फिर एक चेयर पाई जेक बैठ जाते है .. और सोचने लगती है..

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और आपने आप को कहती है

पर मैंने तो ऐसा वैसा कुछ भी नहीं किया है नवाज़ के साथ ..

फिर खुद के सवाल का खुद hi जवाब देते है

तूने कुछ नहीं किया आरती पर तेरा ये सब सोचना भी पाप hain...........tu शाधिशुद्धा लेडी है .. कोई कॉलेज गोइंग लड़की नहीं है .. जो रात के इस वक़्त मई उसके रूम मई हो और वो तेरा नौकर है ..

वो कभी कभी ये सोच रही थी की कैसे वो ये सब किसी पराये मर्द के बारे में सोच सकती है ............ ये सब हराम हैं ......

वो अब तक पूरी तरह पाक साफ़ थी ......उसका दिमाग तर्क- वितर्क कर रहा था मगर दिल तो बार बार इन्ही सब चीज़ों की तरफ जा रहा था की मैंने कुछ गलत नहीं किया है ....... उसके दिल में अजीब अजीब से ख्याल बार बार आ रहे थे जो उसके मैं को विचलित करते जा रहा था ......................

थोड़े देर बाद वो सोचते है अरविन्द के लिए सब्जी गरम करती हु .. ऐसा सोच के उठ के वो किचन के रैक पर जेक अपने दोनों हाथों को रखती है और लुम्बी लुम्बी सांसें लेने लगाती है .......

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फिर खुद को शांत करते हुई स्टोव चालू करके आपने पति के लिए सब्जी गरम करने लगी ..
 
फिर खुद को शांत करते हुई स्टोव चालू करके आपने पति के लिए सब्जी गरम करने लगी ..

तभी उसके मैं मई आया की ये सब वो मेरे साथ कर रहा था तब क्या वो जग रहा था क्या ? अगर जग रहा था तो क्या उसने मेरे साथ जानबबूजकर किया क्या ? पर क्यों ?? और उसको तो मैंने ओपपोसे भी नहीं किया ?? तो क्या वो मेरे बारे मई कुछ गलत तो समझ नहीं बैठेगा न ? समाज बैठेगा तो मई उसको समजा दूंगी ?

फिर कुछ सोच कर कहते है

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मगर मैं अपनी बात उसको कैसे बताऊँ? कल वो जब मुझसे मिलेगा तो उसके रिएक्शन क्या होगी ?? कैसे रियेक्ट करेगा wo?jab वो मेरे सामने कल सुबह आएगा तो मेरा क्या होगा ? मैं क्या karungi?Itne दिनों तक तो किसी के वजह से मेरे साथ ऐसा फील नहीं हुआ था .. पर नवाज़ के वजह से मुझे ऐसा क्यों फील हो रहा है .. क्या मैं नवाज़ के तरफ अत्त्रक्ट हो रही हु क्या ?? नहीं नहीं मई ऐसे कैसे कर सकती हु .. फिर ऐसा क्यों हो रहा है ??? क्या मैं उस्सको दिल दे बैठी हु ? नूवो

फिर सोचने लगती है

क्यों मैंने शुरू में hi उसको ओपपोसे नहीं किया .. वो जब मुझे घूरता था तब मैंने उसपे गुस्सा क्यों नहीं किया .. उसको खरी खोटी क्यों नहीं सुनाई ?

फिर वो आपने पति के बारे मई सोचने लगी .. अभी तक मैंने नवाज़ के साथ कोई ऐसे वैसे हरकत नहीं की है और उसने भी नहीं की है .. फिर क्या मैं अरविन्द को सब कुछ सच सच बता दू क्या ??

तब स्माइल करते हुई कहते है

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क्या सच बोलू ..ऐसा कुछ हुआ hi नहीं है ..

फिर सोच के कहती है

बताना hi ठीक है .. अरविन्द को धोके में रखना ठीक नहीं है .. मुझे लगता है के उनको सब सच सच बता देना चाहिए . क्यों की अरविन्द जी को खुद होक पता चला या बहार से पता चला तो उनको बहुत बुरा लगेगा .. पर क्या बताऊ उन .. यही की मई आप के आने से पहले नवाज़ के रूम मई गयी थी .. मई थोड़ा नवाज़ से बात करती हु .. वो भी मुझे बात करता है.. तब अरविन्द जी ने कहा इसमे क्या बड़े बात है ..

अरविन्द जी ने ऐसा कहा तो .. तब..

फिर सोच के कहती है

अब क्या करूँ मैं.. बताऊ या न बताऊ .. हे भगवान् हेल्प में!
 
अरविन्द जी ने ऐसा कहा तो ..

tab..Phir सोच के कहती है

अब क्या करूँ मैं.. बताऊ या न बताऊ .. हे भगवान् हेल्प में!

तभी अरविन्द पीछे से आके आरती को आपने बाँहों में जकड लेता hain..aur उसके गर्दन को किश करते हुई कहता है

हो गया खाना

आपने पति के चूमने से और उसको आपने बहो मई लेने से एक बार फिर से उसके साँसे बढ़ाने लगती है.. उसके तन बदन में एक अजीब सा डर होना शुरू हो जाता है ...फिर आरती खुद को कण्ट्रोल करते हुई पलट जाती है और गर्दन निचे कर के हां मई गर्दन हिलाते hai..tab अरविन्द धीरे से मुस्कुरा देता हैं और आरती का एक हाट आपने हाटों मई लेके उसके हाट को और उँगलियों को चूमता है .. मगर आरती न hi उसे कुछ कहती हैं और न hi उसके हरकतों का कोई विरोध करती हैं ....

तब अरविन्द आरती को अपनी बहो मई ले लेता है .. अभी भी आरती ने अपना सर निचे झुकाया हुआ था .. तब अरविन्द ने आरती की थोड़ी को ऊपर उठाया और उसके चेहरे को देखने लगा .. आरती के आँखों मई अरविन्द ने देखा.. तब आरती शर्मा रही थी .. तब अरविन्द ने झुक कर अपने होंठों को आरती के होंठों पर रख दिया…. और उसको किश करने लगा … तभी आरती किश 💋 तोड़ते हुई कहते है..

खाना ठंडा हो जायेगा

और ऐसा कह के बाजु होक एक प्लेट लेके आपने पति को खाना परोसने लगी ..

अब दोनों ने खाना खाया .. हलकी फुलकी बात की .. फिर उसके पति ने उसको बीएड मई चलने को कहा .. आरती ने कहा आती हु .. और किचन का थोड़ा सा काम किया और बैडरूम मई चली गयी .. अब आरती बीएड पाई बैठी हुई थी ..आरती आज पूरी तरह से बेचैन थी ....... नींद तो क्या उसे तो अब एक पल का चैन भी नहीं आ रहा tha......wo कभी वाल पाई के वाच को तो कभी अपने मोबाइल को देख रही थी...... उसका पति बैडरूम मई आते hi आरती के चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान तैर जाती है ......

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अरविन्द उसके पास आके बैठ गया .. और उससे बाते करने लगा .. वो उसके बातो का सिर्फ जवाब देने लगी .. आरती का आज सेक्स करने का बहोत मैं हो रहा तह बूत अरविन्द आपने ऑफिस की बाते और टूर की बाते करने लगा.. वैसे तो आरती ने शादी से पहले कभी किसी मर्द से शारारिक सम्बन्ध नहीं बनाये थे और अपनी विरगनित्य को आपने पति अरविन्द के हवाले की थी.......

ऐसे बात नहीं थी की शादी के पहले उसके पास ऑप्शन नहीं थे .. ऑप्शन तो बहुत थे .. उसके पीछे बहुत सरे लड़के पड़े थे .. किटनोने तो उसे प्रोपोज़ भी किया तह पर उसने किसी को हां नहीं कहा था क्यों की उसे पता था अगर समाज में कहीं कोई ऊंच नीच हो गयी तो उसकी बदनामी hogi......is वजह से वो लड़कों से दूर रहती थी और किसी को हां भी नहीं बोलती थी ..

हालाँकि उसे सेक्स करना बहुत ज़्यादा पसंद था.... मतलब सेक्स का एक अट्रैक्शन था उसमे .. पर उसने आपने पति को शादी के इतने दिनों बाद भी सेक्स की बात नहीं की थी.. उसके पीछे की वजह थी उसके संस्कार.. पर आज उसका बहुत मैं हो रहा था .. शयद नवाज़ की वजह से या नवाज़ के बॉडी के वजह से .

कॉलेज मई वो जब थी तब उसने एक दो बार पोर्न वीडियोस देखे थे ..... तब वो सोचा करती की काश उसका होने वाला पति भी कुछ उसके साथ ऐसा hi kare..............wo सब देख के आरती को वाइल्ड और हार्डकोर टाइप का सेक्स बेहद पसंद आने लगा था ...........जिसमें कोई लड़का लड़की को बड़ी hi बेरहमी से छोड़ता था .......उसकी चीखें निकलवाता tha............aisi hi कुछ फंतासी आरती की भी थी उस वक़्त .....की कोई उसे बिस्टेर पर इतना रगड़े की उसकी बस चीखे निकलवाता rahe.........................magar अफ़सोस अभी तक आरती के साथ शादी के बाद के इन कुछ महीनों में कहीं कुछ ऐसा नहीं हुआ था .......

अरविन्द का लुंड करीब 4 या 5 इंच का होगा .... ऊपर से 1.5 इंच mota......jo की एवरेज से भी बहुत छोटा tha.......................aur सबसे बड़ा दुःख तो इस बात का था की अरविन्द बिस्टेर पर मुस्खिल से 5 मिनट तक hi टिक पता था ...... और एक रात में वो एक hi राउंड कर पता था .. दूसरे राउंड के लिए दूसरी बार उसका खड़ा भी नहीं होता था और न hi उसमे उतना स्टैमिना था .. शादी होने के बाद से अब तक आरती मुस्खिल से एक या दो बार hi आपने पति से सटिस्फी हो पायी thi......wajah बहुत सी thi......ek तो वो हमेशा काम के चक्कर मई .. या बिज़नेस के लिए कह सकते है घूमता रहता था ..इस वजह से बहुत काम बार वो रात मई घर मई रहता .. और जब कभी घर मई रहता था तब वो थका हुआ घर आता था . और जिस दिन वो थका हुआ नहीं होता था तब वो पहले तो आरती को गरम करता .....और जब चुदाई की बरी आती तब वो सीधा छोड़ना शरू करता .. छूट मई डायरेक्ट लुंड डालके आरती को छोड़ना शरू करता .. न hi वो आरती के साथ ओरल सेक्स करता .. न hi उसको अच्छे से किश 💋 करता और न hi उसके मम्मी चूसता .......... हल्का सा किश करके हल्का सा मां दबाने के बाद सीधा छोड़ना शरू करता . .. और न hi वो सेक्सी बाते करता .. और 5 मिनट में ठंडा हो जाता...... और सो जाता .. बिना आरती की परवाह किये......

इस वजह से वो अक्सर अब थोड़ी मायूस सी रहने लगी थी ...... मगर अरविन्द को उसकी ये मायूसी कहीं नज़र नहीं आ रही थी… क्यों की उसका ध्यान आपने बिज़नेस पर hi था ..

आज भी वैसे hi हुआ .. अरविन्द ने थोड़े बाते की और फिर हमेशा की तरह उसके उप्पर आया और साड़ी उप्पर करके छोड़ने लगा और 4-5 मिनट मई ठंडा हो गया और बाजु मई लुढ़क गया .. और थोड़े देर बाद अपने बिस्टेर पर मुँह घुमाकर सू गया .....
 
इस वजह से वो अक्सर अब थोड़ी मायूस सी रहने लगी थी ...... मगर अरविन्द को उसकी ये मायूसी कहीं नज़र नहीं आ रही थी… क्यों की उसका ध्यान आपने बिज़नेस पर hi था ..

आज भी वैसे hi हुआ .. अरविन्द ने थोड़े बाते की और फिर हमेशा की तरह उसके उप्पर आया और साड़ी उप्पर करके छोड़ने लगा और 4-5 मिनट मई ठंडा हो गया और बाजु मई लुढ़क गया .. और थोड़े देर बाद अपने बिस्टेर पर मुँह घुमाकर सू गया .....

अब दूसरे दिन सुबह ये तीनो किचन मई थे .. नीता और नवाज़ पहले hi थे और बाते कर रहे थे .. अब वह आरती अभी अभी आयी थी .. और चुपचाप आपने काम कर रही थी.. नवाज़ नीता के पास खड़ा tha..aab नवाज़ नीता को चिपक के वाश बेसिन पाई थोड़ा जुख गया हाथ धोने के बहाने .. और नवाज़ ने नीता के आँखों मई देखा.. उसके करीब आपने चेहरा ले जेक .. तब नीता ने कहा

नीता - वैसे तुम कुछ कह रहे थे...

नवाज़ (हस्ते हुए)- वैसे आज तुम थोड़ा हैट कर...

मतलब

वो आज तुम थोड़ा अलग लग रही हो...

अलग matlab...kya मैं बुरी लग रही हु...

आरती बड़े प्यार से इन् दोनों को देख रही थी.. और मैं मई कहती है..

हाउ रोमांटिक..

अरे nhi...tum तो aaj...(ruk गया)

नीता (नजाकत के साथ)- आज तो main....main क्या....???

Nawaz(neeta ी की आँखों में झांक कर)- तुम बेहद hi खूबसूरत लग रही हो....

नीता (गुस्से से)- क्या मतलब है तुम्हारा ...

नवाज़ (डरते हुए)- mmmm...mera मतलब था .. था की....

नीता (बीच में, गुस्से से)- क्या मतलब था तुम्हारा ...हां...

इतना कह कर नीता ने उसके बाल पकड़ लिए ...

नीता (गुस्से से)- तो क्या कह रहे थे तुम ...मतलब क्या था तुम्हारा ..

नवाज़ की हालत देखकर आरती का चेहरा खिल उठता है..

नवाज़ - मैंने to...main बस तुम्हारे थोड़ी taareef...bas...

आरती की लघबघ हसी छूट गयी पर उसने आपने चेरे पर हाथ रख दिया इस वजह से आवाज बहार नहीं आयी..

नीता - ...वो samjhi...par इसका क्या मतलब था की आज बहुत खूबसूरत दिख रही हु....

नवाज़ - वो मैं....

नीता (बीच में)- क्या मैं पहले तुम खूबसूरत नहीं लगी thi...ya उससे pahle...aaj hi लग रही hu...haa...

अब आरती को कण्ट्रोल नहीं हुआ और उसकी हसी जूथ गए..

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मेमसाब वो.. मेमसाब वो...

ऐसा नीता कहने लगे तब आरती ने हस्ते हस्ते hi कहा

सुना मैंने

तब नीता कहने लगे

देखो न मेमसाब क्या कह रहा hai..keh रहा है मई अब खूबसूरत दिख रही हु.. फिर पहले मई क्या इसको खूबसूरत नहीं दिखते नहीं थी क्या.. इसका क्या मतलब हुआ..

फिर मई क्या बोलू.. तू आज खूबसूरत नहीं दिख रही है ऐसा बोलू क्या..

कुछ भी बोलते है मेमसाब ये..

ऐसा थोड़ा चिढ़ाते हुई नवाज़ कहता है..

तब आरती हस्ते हुई कहते है..

तुम दोनों के बीच मई क्या बोलू

ऐसा बोल के घूम जाते है... उसकी हसे काम नहीं हो रही थी.. और काम करने लगे.. और उसे कुछ याद आता है तब वो झट से आपने गर्दन घुमा लेते है नीता के तरफ..
 
तुम दोनों के बीच मई क्या बोलू

ऐसा बोल के घूम जाते है... उसकी हसे काम नहीं हो रही थी.. और काम करने लगे.. और उसे कुछ याद आता है तब वो झट से आपने गर्दन घुमा लेते है नीता के taraf..aur उसे पूछ लेती है..

क्यों री..

क्या दीदी ..

मैंने थोड़े उस दिन तुजे पूछा था इसके साथ तेरा कोई चक्कर है क्या तब तूने क्या कहा था मुझे.. दीदी ... ऐसा कुछ नहीं है.. फिर उसी दिन मैंने बाते करते हुई इसे तेरा आशिक़ कहा तब कैसे नखरा करते हुई कह रही थी.. दीदी ये मेरा आशिक़ नहीं है...

अब दीदी मई कैसे कह सकते हु..

और नीचे गर्दन करके शर्माने लगे..

तब आरती कहते है.. गुस्से से..

मई कैसे क्या ..

मई कैसे कह सकते हु दीदी की ये मेरा आशिक़ है.. मुझे शर्म आते है..

तब आरती झट से नवाज़ के पीछे से नीता के पास चली जाती है.. और उसका कान पकड़ के जोर से मरोड़ देते.. तब नीता छीलते है..

आह्ह्ह्हआ... दीदी... छोड़िये न.. कान दुःख रहा है..

शर्म की बच्ची.. मुझसे झूठ बोलते है..

सॉरी दीदी.. गलती हो गए.. अब से नहीं होंगे..

वैसे तो वो पहले से जानती थी दोनों का affair..uske उनका किश भी देखा था पर नीता की फिरकी लेने के लिए आरती ये सब कर रही थी .. अब आरती उसका कान चोर देती है और आपने जगह पाई आके काम करने लगती है.. इस बार आरती का फेस सामने था .. वो इन् दोनों के तरफ पिट करके खड़े नहीं थी.. इस वजह से वो डायरेक्टली इन् दोनों को देख सकती थी..

फिर वो दोनों धीरे धीरे आवाज मई बाते करने lage..Aur इधर आरती आपने काम करने लगे .. कुछ देर ऐसा hi चला ..

अब नीता नवाज़ को कहने लगे..

तूने अच्छा किया यहाँ आकर ... काम से काम अब मेरी बोरियत तो दूर हो जायेगी... वर्ण तो मई इस बड़े से बंगले मई अकेले अकेले hi बोर होकर रह जाती हु ...

नीता ने मायूसी से कहा... तब आरती ने नीता की तरफ गर्दन घूमते हुई देखा ...

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नवाज़ नीता के ऐसे कहने से उसे देख रहा था ...

आरती की नज़र आपने तरफ है ये जानते hi नीता भी आरती के तरफ देखने लगे..
 
नवाज़ नीता के ऐसे कहने से उसे देख रहा था ...

आरती की नज़र आपने तरफ है ये जानते hi नीता भी आरती के तरफ देखने lage..tab आरती कहती है

क्यों रे.. तू अकेले है क्या रे इस बंगले मई.. मई नहीं हु क्या.. मई क्या कोई बहुत हु क्या रे..

नवाज़ : मई भी तो यही सोच रहा हु.. इतने अच्छे मेमसाब ..होते हुई ..

ऐसे कहते हुई नवाज़ उन्दोनो के करीब आके खड़ा हो gaya..Jaise hi नवाज़ ऐसा कहता है वैसे आरती उसको देखने लगती है.. आपने सेक्सी लुक के साथ ..

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तब नवाज़ हूंतो hi हूंतो मई कहता है.. आरती की तरफ देखते हुई... सेक्सी एंड ब्यूटीफुल...

ये वर्ड आरती समाज जाती है.. हूंतो की हलचल से.. नीता का ध्यान दूसरे तरफ था.. जैसे hi नवाज़ ने ऐसे कहा तो आरती ने आपने सेक्सी अदा के साथ इशारे से कहा...

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No फ्लेर्टिंग.

आरती न न की गर्दन हिला रही थी पर उसके चहरे पर की स्माइल और उसका सेक्सी अंदाज़.. उसके आँखों मई के भाव.. ये सब देखकर नवाज़ समाज गया था की अगर तरय किया जय तो इस बाला को पटाया जा सकता है..

ये सब नवाज़ आरती की आँखों मई देखते हुई सोचने लगा..

फिर नवाज़ कहता है..

मेरा मतलब है इतने अच्छी मेमसाब होते हुई नीता तू बोर कैसे हो सकते है..

आरती - हाँ.. मेरे होते हुई नीता तुम बोर कैसे hi सकते हु.. इतने अच्छे बंगले मई..

नहीं मेमसाब.. आप तो है hi इतने अच्छे.. और आप का बांग्ला भी बहुत अच्छा hai...par न के बराबर..

मतलब क्या है रे तेरा

मतलब एक तो सुबह आप साहब या शेठजी के साथ बिजी रहते हो .. और दोपहर मई आप आपने रूम मई रहते हु.. मई यहाँ अकेले अकेले काम करते हुई बोर होते हु.. बात करने को कोई है नहीं न यहाँ..

ये तेरे बात सही भी है..

तब नवाज़ उन दोनों के और थोड़ा करीब जाता है.. किचन सिंक के पास.. नीता के थोड़ा करीब जाता है .. आरती बगल मई hi खड़े थी.. नीता के करीब जाते हुई नवाज़ कहता है

अब दर मत.. मई आ गया हु न..

तब आरती नवाज़ की तरफ तिरछी नज़र से देखते है..

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मई तुम्हारे बोरियत दूर करने hi तो आया हु..

नीता कुछ बोले इस से पहले hi आरती कहती है

क्या मतलब है तेरे कहने का.. तू काम करने आया है या????

ऐसा कहते हुई आरती रुख जाती hai..Tab आरती की आँखों मई आँखे डालते हुई नवाज़ कहता है..

मेमसाब जी.. साथ साथ मई काम करेंगे तो एक दूसरे की बोरियत दूर होंगे न..

ये दोनों एक दूसरे की आँखों मई देख रहे the..Iss पर आरती कहते है.. उसके आँखों मई आँखे डालते हुई..

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ओह्ह्ह.. ी सी

और रुख जाती है.. आगे वो और कुछ कहने वाली थी पर उसने खुद को रोक दिया.. नवाज़ इतने नज़दीक आके खड़ा हुआ था उस वजह से आरती को ऑकवर्ड फील हो रहा तह शयद.. इस वजह से उसने खुद को रोक दिया..
 
ओह्ह्ह.. ी सी

और रुख जाती है.. आगे वो और कुछ कहने वाली थी पर उसने खुद को रोक दिया.. नवाज़ इतने नज़दीक आके खड़ा हुआ था उस वजह से आरती को ऑकवर्ड फील हो रहा तह शयद.. इस वजह से उसने खुद को रोक diya..aur फिर आपने जगह पर चली गए.. और पलट कर मतलब गर्दन दूसरे और घुमाके काम करने लगे..

उसके बाद ऐसे hi 5-10 मिनट चले गए.. आरती इधर नीचे गर्दन करके काम कर रही थी और नीता काम करते हुई नवाज़ से बाते कर रही थी.. नवाज़ इन् दोनों के बीच खड़ा था.. नीता से चिपक के पर आरती से दूर खड़ा था ..

अब नवाज़ नीता से बाते करते हुई उसका हाथ पकड़ लेता है तब आरती झट से आरती की तरफ देखती है..

दीदी यही है..

आरती की तरफ इशारा करते हुई नीता कहते है तब नवाज़ आरती की तरफ देखती हुई कहता है..

उसका इस तरफ ध्यान नहीं है

ऐसा कहते हुई नवाज़ नीता के हाथ को चुम लेता है.. जिससे सहारमाके नीता घूम जाती है..

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और फिर लगातार उसके उसी हाथो को नवाज़ चूमने लगा फिर दूसरे हाथ को... इधर इतने देर तक आरती काम मई बिजी थी इस वजह उसका ध्यान इन् दोनों के हरकतों पर नहीं था.. पर अभी वो सोचने लगे इतने देर तक ये दोनों क्या कर रहे होंगे .. पानी की आवाज़ भी नहीं आ रही है .. तब आरती अचानक उन्दोनो की और देखते हुई कहते है..

वैसे तुम सुबह सुबह किचन मई क्या कर रहे हो

तब नीता कुछ बोले इससे पहले hi नवाज़ आरती के और देखते हुई कहता है ..

भूख लगी थी मेमसाब

तब नवाज़ की और स्माइल करते हुई आरती कहते है

अच्छा .. भूख लगी थी तुम

हां मेमसाब

ठीक है फिर तुम हाट धोवो .. मई तुम्हारे लिए नास्ता बना देती हु

जी मेमसाब.. बहुत बहुत धन्यवाद्..

तब आरती बिना उसको देखते हुई नीचे देखते हुई काम करने लगी .. कुछ 5 मिनट्स के बाद आरती जब पलट के इन् दोनों को देखते है तब वो देखती है नवाज़ नीता से चिपक के खड़ा है तब उन्दोनो को देखते हुई आरती कहती है

तूने शयद अभी तक हैट नहीं धोये..

धो रहा हु मेमसाब..

फिर स्माइल करते हुई कहते है..

शयद आपने माशूका से दूर जाने का मैं नहीं कर रहा है इसलिए हाट धुनें के बहाने वही खड़े हो इतने समय से..

इसपर नवाज़ कुछ नहीं कहता.. अब वो दोनों आरती की तरफ देखने लगे.. तब आरती ने गर्दन घुमा ली और काम करने लगे..
 
शयद आपने माशूका से दूर जाने का मैं नहीं कर रहा है इसलिए हाट धुनें के बहाने वही खड़े हो इतने समय से..

इसपर नवाज़ कुछ नहीं कहता.. अब वो दोनों आरती की तरफ देखने लगे.. तब आरती ने गर्दन घुमा ली और काम करने lage..aur इधर नवाज़ नीता के साथ खेलने लगा ..मतलब नीता के बदन के साथ ..वो उसके दोनों हाथो को बार बार चूमने लगा .. कुछ देर तक चूमने के बाद नवाज़ ने थोड़ी हिम्मत करके अपना हाथ नीता के नंगे कमर पर हौले से रख देता हैं.......

aahhhhaa....mat करो.. नवाज़ .. दीदी देख लगे..

नीता सिसक उठाती hai..tab नवाज़ बिना अपने हाथों की कोई हरकत किये वो चुप चाप उसी अवस्था में मतलब वैसे hi खड़े रहता हुई आरती की तरफ देखता है .. वो इधर देख रही है या नहीं ये देखता है.. पर आरती अभी भी इन् दोनों के तरफ पीट करके कड़ी थी .. बड़ी अड्डा के साथ ..

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आरती के सेक्सी बॉडी को नवाज़ बस देखते रहता है .. उसके सेक्सी बॉडी को देखते हुई नवाज़ सोचने लगा..

क्या सेक्सी बॉडी है मेमसाब की

आरती को देख के नवाज़ नीता से कहता है..

नहीं देख रही है वो.. वो आपने काम कर रही है..

पर कभी भी देख सकती है न..

तब हाथ निकल लूंगा..

जब आरती करीब 2 मिनट तक इधर नहीं देखती तब नवाज़ हौले से अपना हाथ धीरे धीरे हरकत करने लगता हैं ..... वो बहुत आहिस्ता से अपनी एक एक उँगलियों को नीता के कमर पर चला रहा tha......aur उसे बहुत आहिस्ता से सरकते हुए उसके पेट और कमर पर फेर रहा tha.......waise तो उसे ये सब में बहुत मज़ा आ रहा था और वो बार बार आरती के तरफ भी देख रहा था की कहीं आरती इधर देख न ले .........

एक औरत बाजु मई खड़े होते हुई दूसरे औरत के बॉडी के साथ खेलना .. ऐसा करने का उसका ये पहला एक्सपीरियंस था .. .और इस वजह से इस वक़्त उसका लुंड पूरे उफान पर tha........aab नवाज़ अपनी बीच की ऊँगली को धीरे से सरकते हुए और आगे की तरफ ले जाता हैं ........ नीता की नैवेल के taraf.......fir वो उस ऊँगली को बहुत आहिस्ता से उस नैवेल के चरों तरफ गोल गोल धीरे धीरे घूमने लगता हैं ......... और उसकी नैवेल के साथ धीरे धीरे खेलने लगता हैं ......... कुछ देर तक नवाज़ अपनी उँगलियों को नीता के नैवेल पर ाहिष्ता ाहिष्ता फेरता रहता हैं मगर दिल में जोश जैसे जैसे बढ़ता जाता हैं उसकी हिम्मत भी धीरे धीरे बढ़ती चली जाती हैं ....... दिल तो कर रहा था की वो अपनी मुट्ठी से नीता की नरम चूचियों को कसकर कैद कर ले ......... और उन्हें तब तक मसलता रहे जब तक उसका जी न भर जाये .......... पर आरती की वजह से वो ये सब नहीं कर प् रहा था.. उसे डर था की वो कभी भी इधर देख सकती है..

उसे पता था ऐसा करना बहुत रिस्की है .. उसे मालूम था अगर आरती ने इधर नहीं भी देखा तो भी नीता के मम्मी पाई हाथ रखते hi वो सिसक पड़ेगे और उसकी आवाज से आरती मेमसाब को सब पता चल jayega..aur ऐसा होने के चान्सेस 100% है .... मगर इंसान साबरा करना अगर सीख जाये तो क्या बात थी ...... कुछ वैसा hi हाल नवाज़ का भी अब था ....अब वो नीता के नरम चूचियों को अपने हाथों में लेकर मसलना चाहता tha........mehsoos करना चाहता था .....वहीँ उसका लुंड और भी सख्त होता जा रहा tha......kuch सोचकर वो अपना हाथ ऊपर की तरफ ले जाने लगता hain......magar बहुत धीरे dheere.......aur जैसे जैसे उसके हाथ ऊपर की तरफ बढ़ रहे थे वैसे वैसे नवाज़ की धड़कनें भी बढ़ती जा रही थी .... और उस से ज्यादा नीता के दिल की धड़कन.. उसका साबरा भी अब टूट ते जा रहा tha..aur फिर नवाज़ का हाथ पकड़ के बोल hi पड़े..

नहीं नवाज़ ... यहाँ नहीं..

वो नहीं देख रही है

दीदी को मेरे आवाज से पता चल जायेगा..

नहीं पता चलेगा.. मई इस बात का पूरा ख्याल रख रहा हु की हमरे किसी हरकत का तेरे दीदी को पता न चले ..........

जैसे जैसे वो अपने हाथ ऊपर ले जाता जा रहा था वैसे वैसे नीता की बेचैनी भी बढ़ती जा रही thi................jaise hi उसका हाथ नीता के राइट चूचियों पर जाता हैं नीता की धड़कनें बहुत तेज़्ज़ होती चली जाती हैं ....... उसका गाला सूखने लगता हैं और चेहरे पर पसीने की चाँद बूँदें भी साफ़ नज़र आने लगती हैं........ और इसी वजह से आपने मू पर आपने एक हाथ रख कर आपने मू को बंद कर देते है ताकि उसके मू से बहार आवाज न चली jai..aab नवाज़ बहुत हल्के हाथों से नीता के चूचियों पर अपने हाथ रख देता हैं और अपने पूरे पंजे से उसे पूरी तरह अपनी हथेली में जकड लेता hain.......mano कहीं वो उसकी कैद से चूत न jaye.......ya फिर जैसे वो उसका साइज नाप रहा हो.........

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वहीँ अब उसका लुंड पूरी तरह बेकाबू हो चूका tha...wo अब नीता का दूसरा हाथ अपने लुंड पर ले जाता हैं और तेज़ी से अपने लुंड को पंत के ऊपर से hi मसलने लगता हैं .......... आज उसके मज़े की कोई सीमा नहीं thi......wo नीता के चूचियों को थामे नीता के दूसरे हाथ से लुंड मसाला रहा tha........jee तो कर रहा था की वो उसकी गोरी पीठ पर अपने होंठ रख de....aur उसके नंगी पीठ को अपने जीभ से चाटता चला jaye........magar फिलहाल उसके लिए इतना hi बहुत था.......

अब नीता तेज़ी से नवाज़ का लुंड हिला रही थी आरती के तरफ देखते हुई और आपने मू के अंदर hi सिसकते है.. और इधर नवाज़ का पूरा ध्यान आरती की तरफ tha..wo उसकी सेक्सी गोर गोर पिट को देखता है..

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वो आरती की तरफ देखते हुई अपने एक हाथ से नीता के चूचियों को थामे हुई था ......वो आरती के सेक्सी पिट को देखते हुई नीता के हाट पाई हाट रख के लुंड की स्पीड बड़ा देता है तब नीता नवाज़ के लुंड पर थोड़ा सा दबाव बढ़ती हैं तब नवाज़ थोड़ा कसकर इस बार नीता की चूचियों को दबा देता हैं .........
 
वो आरती की तरफ देखते हुई अपने एक हाथ से नीता के चूचियों को थामे हुई था ......वो आरती के सेक्सी पिट को देखते हुई नीता के हाट पाई हाट रख के लुंड की स्पीड बड़ा देता है तब नीता नवाज़ के लुंड पर थोड़ा सा दबाव बढ़ती हैं तब नवाज़ थोड़ा कसकर इस बार नीता की चूचियों को दबा देता हैं ......... वैसे hi नीता जरा जोर से सिसक पड़ती है.. पर आरती को आवाज न चला जय इस वजह से नवाज़ थोड़ा बर्तन का आवाज करता है.. इस से पहले की नवाज़ कुछ और आगे कर पता है नीता झट से उसके लुंड पर का उसका हाथ हटा के उसके मम्मी पर जो नवाज़ का हाथ था उसे गुस्से से निकल देती है और रहत की सास लेते है.. अभी तक नवाज़ ने आरती की और देखा नहीं था पर अब वो घूम जाता है और आरती की और देखने लगा ..

इधर आरती नीता के आवाज़ करने के बाद सोचते है ..क्या इन् दोनों के बीच कुछ हुआ है क्या.. पक्का कुछ न कुछ हुआ है तभी नीता के मू से आवाज आये .. हलकी पर आवाज आये.. पर किस वजह से आवाज आये होगी .. क्या इस कमीने ने कुछ करने की कोशिश की या कर चूका है.. कोशिश hi की hoge..kar चूका नहीं होगा.. इसलिए नीता ने वो आवाज की..

आवाज़ की है तो फिर तो पक्का इस कमीने ने कुछ न कुछ करना शुरू किया होगा इस वजह से पानी की आवाज नहीं आ रही थी .. मई देखु या नहीं .. मैंने गर्दन घुमा दी और उसी टाइम ये दोनों कुछ गन्दी हरकत कर रहे होंगे तो .. तो क्या आरती .. गंदे हरकत वो कर रहे होंगे .. तू तो नहीं न .. आखिर ये तेरा घर है .. तेरा किचन है .. तू क्यों डर रही है .. तुजे पूरा हक़ है .. ऐसा कुछ गन्दा हो रहा होगा तो रोकने का ..इधर आरती डर रही थी उन दोनों की तरफ देखने के लिए पर आरती को रहा नहीं नहीं जा रहा था.. उसके मैं मई यही चल रहा था की ये दोनों अब क्या कर रहे होंगे.. इतने देर तक पानी की आवाज क्यों नहीं आ रही है .. ये कमीना नीता के साथ कुछ कर तो नहीं रहा है na..Kya इस कमीने ने नीता के साथ यहाँ hi कुछ करना सुरु तो नहीं किया होगा.. फिर वो खुद से hi कहने लगे.. ऐसा नहीं कर सकता ये.. मेरे होते हुई नवाज़ ऐसा नहीं कर सकता और इस कमीने ने कुछ करने की कोशिश भी की तो नीता कैसे होने देंगे .. ये कमीना तो मुझे बेशरम hi लग रहा है पर नीता ऐसे नहीं है .. नीता ऐसे बेशर्मी नहीं करेंगे और न करने देंगे ..

ऐसा सोचते हुई वो पलट के नीता की और देखते है ..

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वो देखती है नीता के साड़ी का पल्लू उसके छथि पर से निकल चूका है ..हल्का sa..ye देख के वो सोचने lagi..kuch सोच के कहती है

क्या इसने..

ऐसा वो बोल pade..aarti ये थोड़ा धीरे से बोलती है... एक्चुअली आरती आपने सोच विचार मई थी.. वो सोच रही थी क्या उसने नीता के साडी का पल्लू निकला .. ऐसे सोच मई hi वो बोल पड़ी .. पर आरती ने ये जो कहा था वो नवाज़ ने सुना था .. इतने देर तक नवाज़ उसे देख रहा था उसको पता hi नहीं था.. जब उसने कहा..

मेमसाब आपने कुछ कहा क्या

तब आरती का ध्यान नवाज़ की तरफ गया और वो उसकी और देखते है ..

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और देखते हुई कहते है..

क्या??

जब नवाज़ कहता है..

मेमसाब आपने कुछ कहा क्या..

तब आरती सिर्फ न मई गर्दन हिलाते hai..aur वो नवाज़ की तरफ देखने लगाती है .. अब वो दोनों एक दूसरे की तरफ देखने लगे .. एक दूसरे के आँखों मई ..

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नवाज़ आरती के आँखों मई देखे जा रहा था .. और आरती भी नवाज़ की आँखों मई देखे जा रही थी .. जैसे की नवाज़ ने उसे हिप्नोतिजे किया हो .. आरती ने ये सोच कर आपने गर्दन घुमाये थे की नवाज़ और नीता क्या कर रहे है ये देखा जय पर वो तो बस नवाज़ की आँखों मई देखे जा रही थी.. वो तो नीता के तरफ नहीं देख रही थी ..

नीता का हाट नवाज़ के हाथो मई है इसपर भी आरती की नज़र नहीं गए थी .. वो तो बस नवाज़ की आँखों मई देख रही थी .. जैसे नवाज़ के आँखों ने आरती को पागल बना दिया हो और उसे आपने और उसके आँखे खिंच रही हो .. नवाज़ आरती की आँखों मई देखते हुई मैं मई कहता है

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उफ्फ्फ यार ये मेमसाब तो बहुत hi कातिल hai..kaise देख रही है मुझे .. पलके भी निचे जुका नहीं रही है .. किसी दिन इसका हुस्न मेरी जान hi न लेले...

ऐसा आपने आप कको कहने लगा .. तभी उसकी नज़र आरती के बूब्स पर जाती है .. उसको देखते हुई वो कहता है ..

इसके बूब्स तो बहुत hi ज्यादा बड़े है.. उफ्फ्फ्फ़ अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह .... मालिक की तो लाटरी लग गयी है ..मेरी इतनी सेक्सी मालकिन पाकर.... बूब्स ब्लाउज और साड़ी मई कितने मस्त लग रहे है ..

नवाज़ आरती के शरीर के बारे मई सोचते हुई उसके बॉडी को देखता है .. अब आरती को समाज मई आ जाता है की नवाज़ की नज़र कहा है ..नवाज़ जो देख रहा है ये जानकर आरती गुस्से से कहती है..

कमीना साला ....

और वो झट से आपने गर्दन घुमा लेती है ..

आरती ने धीरे से कहा तह पर उसके हूंतो के हलचल से नवाज़ को पता चल गया की आरती ने उसे क्या कहा होगा.. आरती ने जो कहा वो देखकर वो उसके तरफ देखकर स्माइल करने लगा.. उसे पता था लेडीज पहले ऐसे hi नखरे करती है.. फिर नवाज़ सोचने लगा..

लग तो रहा है की साली लाइन पर आ रही है… पर पक्का आ रही है या मुझे घुमा रही है.. पता तो करना hi hoga...par कैसे करू...

आरती फिर नवाज़ के बारे मई सोचते हुई आपने आप से कहते है.. गुस्से मई थी आरती...

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मुझे लगा hi तह ये कमीना इंसान है.. आते hi उसके नज़र मुज पर थी hi.. अब देख भी ली..

आरती थोड़ा गुस्से से बोल पड़े थी.. उसने आपने गर्दन हिलाते हुई कहा था.. इस वजह से नवाज़ को लगा ये कुछ तो कह रही है. .

तब नवाज़ कहता है
 
मुझे लगा hi तह ये कमीना इंसान है.. आते hi उसके नज़र मुज पर थी hi.. अब देख भी ली..

आरती थोड़ा गुस्से से बोल पड़े थी.. उसने आपने गर्दन हिलाते हुई कहा था.. इस वजह से नवाज़ को लगा ये कुछ तो कह रही है. .

तब नवाज़ कहता है

कुछ कहा क्या मेमसाब आपने

तुमने हाथ नहीं धोये अब तक..

तब नीता झट से बोल पड़े..

शयद पानी ख़तम हो गया मेमसाब ..

पानी ख़तम और इतने जल्दी.. ऐसा कैसे हो सकता है..

ऐसा बोल के वो थोड़े पानी के नल के करीब मतलब वाश बेसिन के करीब आते है.. मतलब नवाज़ के करीब..

सन ऐसा था यहाँ.. वाश बेसिन के एक्साक्ट्ली सामने नीता खड़े थी.. और बर्तन पांच रही थी.. कपडे से.. उसके राइट साइड मई नवाज़ खड़ा था.. मतलब वाश बेसिन से थोड़ा दूर.. और उसके राइट साइड मई थोड़े दुरी पर आरती गैस पर नाश्ता बना रही थी

..

नवाज़ नीता को सत्ता के खड़ा था.. और उसने नीता के नवल पर आपने लेफ्ट हैंड रखा था.. जब वो आरती से बाते कर रहा tha..tab hi ( थोड़े देर पहले जब उसने नीता को कहा था की अब उसे डरने की कोई जरुरत नहीं है तब उसने नीता के नवल पर आपने हाथ रखा था..)

वो हाथ वह से निचे न ले जाये इस वजह से नीता ने आपने एक हाथ से उसका हाथ पकड़ा तह.. इस वजह से नीता की नज़र उस पर नहीं जाती है.. वो आपने आप पाई कण्ट्रोल नहीं कर पा रही थी.. वो काम करने का नाटक कर रही थी.. और जब वो आरती के करीब आया तह और उसने आरती को हाथ धोने का बहाना बनाया था.. और नीता आपने काम करने मई बिजी हो गए थी तब नवाज़ ने जुख के वाशबेसिन का नल निचे से बंद किया हुआ तह.. इस वजह से पानी नहीं आ रहा था.. नीता भी इस पर ध्यान नहीं दे पाए.. दे भी पति कैसे भला.. नवाज़ ने उसके छूट की आग उसके नवल की मालिश करते हुई बढ़ाये थी..

अब नवाज़ के थोड़ा करीब आके मतलब वाश बेसिन के वह.. आके आरती कॉक ठीक करने की कोशिश कर रही थी .. नवाज़ नीता के साथ खेलते हुई एक हाथ धीरे से जो किचन के काउंटर पाई था वो धीरे धीरे आरती के नवल के तरफ ले जाने लगता है.. जैसे hi नवाज़ का हाथ उसके नवल को टच होता है वो शॉक हो जाती है..

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और अपनी कमर थोड़े राइट साइड सरका देती है.. और गर्दन घुमा के नवाज़ को देखती है.. बुरा सा मू बनके ..

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तब नवाज़ उसकी और देखते हुई ऐसा दीखता है जैसे कुछ हुआ hi नहीं.. और आरती को कहता है..

हाँ मैडम वही कॉक ख़राब हुआ होगा.. मई देखु क्या?

आरती को लगा शयद गलती से हाथ लगा होगा.. वो नीता के तरफ देखते है तो वो चुपचाप निचे गर्दन करके एक एक बर्तन साफ़ कर रही थी.. कपडे से.. उसे तो पता hi नहीं था यहाँ आरती के साथ नवाज़ क्या करने जा रहा है.. क्यों की अब तब नवाज़ ने जो हाथ नीता के नवल पाई था वो उसके सादे के अन्दर से उसके छूट पाई रखा था.. नीता ने उसे इशारे से संजय की मेमसाब है.. पर वो इशारे से कहता है वो तो कॉक ठीक कर रही है उसे कुछ पता नहीं चलेगा.. पर फिर भी नीता डर रही थी.. उसने जब हाथ सरे से अन्दर डालने की कोशिश की तो नीता ने वो हाथ पकड़ लिया.. तब नवाज़ उसके हाथ पाई हलके से मरता है और कहता है नखरा मत कर तब डरते हुई नीता नवाज़ का वो हाथ आपने सरे के अन्दर जाने देती है..

अब वो एक तरफ नीता के छूट की मालिश कर रहा था और दूसरे तरफ दूसरा हाथ धीरे धीरे आरती के तरफ ले जा रहा था...

अब वो एक तरफ नीता के छूट की मालिश कर रहा था और दूसरे तरफ दूसरा हाथ धीरे धीरे आरती के तरफ सरका रहा था.. जब आरती नीता के तरफ देखते है तब नीता निचे गर्दन करके आपने छूट के मालिश का मज़ा ले रही थी.. इस वजह से उसने आरती के तरफ नहीं देखा. .

अब आरती फिर से कॉक ठीक करने लगे .. तब नवाज़ चोरी छुपे आरती का अंग देखने लगा ..उसे काम करते हुए देख उसकी उठी हुयी गांड और उसके मम्मी को देखने लगा .. झुकने की वजह से उसके साडी का पल्लू साइड से हैट गया था .. इस वजह से उसका मां एक साइड से उसे क्लियर दिख रहा था ...

काम से काम 36 के होंगे...

आरती के बूब्स को देखकर नवाज़ खुद से बोलै …

आरती को लगा नवाज़ ने कुछ कहा .. उसको धीमे से आवाज आये .. पर क्या कहा वो ठीक से सुनाये नहीं दिया .. इसलिए उसने गर्दन घुमाकर नवाज़ की तरफ देखते हुई उससे पूछा

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कुछ कहा तूने...

nnn...nahi तो...

नवाज़ जल्दी से बोलै… और मैं मई कहा उसने ..

कान मई क्या मशीन है क्या इस लौंडे के.. इतने धीरे से बोलै हुआ भी इससे सुनाये दिया ..

आरती नवाज़ के सामने जूक हुई थी... वाशबेसिन के वह एक कॉक था वो ठीक करने की कोशिश करने लगे थी.. उसके झुकने की वजह से नवाज़ के आँखों के सामने.. एकदम नज़दीक.. आरती के बॉडी थी.. ... नवाज़ तो बस आरती की गदरायी बॉडी को hi घूरे जा रहा था... उसके बॉडी को घूरते हुई वो सोचने लगा..

चाहे मेरा कुछ भी ho..lekin इस लौंडे को अब तो जरूर छोड़ना है... इस ने मेरे लौड़े का बहुत बुरा हाल किया है.. ऐसा सोचते हुई वो अपना लुंड सहलाने लगा .. जोकि आरती की वजह से अब पुरे जोश मई आ गया था.. और झटके मार रहा tha..jis दिन इस लौंडे को छोड़ने का मौका मिल गया न तो उस दिन के बाद से इससे दिन रात छोडूंगा … उसके बड़े बड़े आम देखकर नवाज़ ख़याली पुलाव पकने लगा … फिर वो खुद से खहने लगा..

लेकिन रास्ता थोड़ा मुश्किल है.. क्योंकि ये है शेठजी की बहु.. और है चालक लौंडे.. इतने काम समय मई इसने पता लगाया की मेरा और नीता का कुछ है.. .. पता नहीं ये साली इससे छोड़ने का मेरा सपना कभी पूरा भी होने देंगे या नहीं.. लेकिन ये पक्का है की अब मई हार नहीं मानने wala..mai अपनी तरफ से पूरी कोसिस करूँगा.. फिर उसका नतीजा चाहे कुछ भी रहे...

नवाज़ अब खुद को आने वाले वक़्त के लिए तैयार कर रहा था. उसके आँखों के सामने आरती का फिगर था... उसको देखते हुई नवाज़ सोच रहा था..

पर इसके लिए पहले मुझे इस से थोड़ी नजदीकियां बढ़ानी पड़ेगी .. तब कुछ होगा... मुझे अपना प्लान तैयार करना होगा ..पहले तो मुझे इसके और छोटे शेठ के बीच का रिलेशन केसा hai..yahi पता करना पड़ेगा.. शयद तभी आगे का कोई रास्ता निकले.. लेकिन लगता तो ऐसा है की इस सेक्सी लौंडे पाई छोटे शेठ फुल फ़िदा होंगे ... कोण नहीं होगा.. ये अगर मेरे बीवी होते थो मई इससे दिन रात छोड़ते रहता..

नवाज़ अब सिर्फ आरती के बारे मई सोच रहा था...

लेकिन कुछ भी हो जो मज़ा इस लौंडे को छोड़ने मई आएगा उसके सामने सब बेकार है... आह्हः जब मेरा ये लुंड इस के मुँह मई जाएगा.. जब मई इस के मम्मी को दबाऊंगा.. और जब मई अपना ये लुंड इस की गांड मई उतारूंगा अह्ह्ह क्या नजारा होगा...

नवाज़ ये आरती के बॉडी को देखकर इमेजिन कर रहा था...
 
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