hotaks444
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गतान्क से आगे... रात को कामिनी फिर से वीरेन के साथ उसकी कॉटेज मे नंगी
पड़ी हुई थी.वो अपनी बाई करवट पे लेटी थी & वीरेन अपनी दाई पे उसके
सामने.वीरेन का लंड उसकी चूत मे था.कामिनी ने अपनी दाई जाँघ वीरेन की
जाँघ के उपर चढ़ाई हुई थी,दोनो प्रेमी 1 दूसरे से लिपटे हुए 1 दूसरे को
चूम रहे थे. वीरेन ने अपना बाया हाथ उसकी गंद की दाई फाँक पे रखा & अपनी
कमर हिलाके चुदाई शुरू कर दी.कामिनी ने भी जवाब मे वीरेन की गंद को अपने
दाए हाथ मे भींच लिया & अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी.वीरेन की चुदाई से
कामिनी हवा मे उड़ रही थी मगर उसकी 1 नज़र उस खिड़की पे ही थी जहा उसने
पिच्छली रात किसी साए को देखा था. "ऊव्वव..!",वीरेन के लंड के धक्को से
बहाल कामिनी की आहे निकलने लगी थी & वो उसकी गंद पे अपने नखुनो के निशान
छ्चोड़ रही थी.वीरेन भी बस अब जल्द से जल्द उसके साथ-2 अपनी मंज़िल पे
पहुँचना चाहता था.अपनी प्रेमिका के जिस्म से खेलते हुए उसे कोई 2 घंटे
होने को आए थे जिस दौरान वो तो 3-4 बार झाड़ चुकी थी मगर वो अभी तक 1 बार
भी नही झाड़ा था. दोनो प्रेमियो के दिल की धड़कने बहुत तेज़ हो गयी थी
साथ ही उनकी कमर के हिलने की रफ़्तार भी.कामिनी अब बिल्कुल मदहोश हो चुकी
थी मगर फिर भी उसने अपनी आँखे बंद नही की & खिड़की पे ही लगाए रखी.तभी
उसकी चूत मे बन चुका तनाव अचानक जैसे ढीला पड़ने लगा & उसके रोम-2 मे
खुशी भरने लगी.उसकी बाहो मे क़ैद वीरेन भी ज़ोर-2 से आहें भर रहा
था.झड़ने की खुशी को दिल मे शिद्दत से महसूस करती कामिनी ने अपनी चूत मे
अपने प्रेमी के गढ़े,गरम विर्य का गीलापन महसूस किया & समझ गयी की वो भी
झाड़ चुका है. आज रात उसे खिड़की पे कोई साया नही दिखाई दिया.रात काफ़ी
गहरी हो चुकी थी & उसे उमीद थी की अब आज रात कोई उनकी जासुसु नही
करेगा,"वीरेन.." "हूँ.",वीरेन उसकी चूचियो मे अपना चेहरा च्छुपाए वैसे ही
पड़ा था. "अगली बार यहा कब आओगे?",उसने उसके बालो मे प्यार से उंगलिया
फिराते हुए उसके सर को चूम लिया. "अगले महीने.क्यू?",उसने उसके सीने से
सर उठाया. "बस ऐसे ही पुचछा था.मैं तुम्हारे साथ फिर से यहा आना चाहती
हू.ये जगह बहुत खूबसूरत है & मैं 1 बार फिर इस खूबसूरती का लुत्फ़
तुम्हारे साथ उठाना चाहती हू.",बात दरअसल ये थी की कामिनी को वीरेन की
फ़िक्र होने लगी थी.सवेर चाइ पे जब उसने देविका से वसीयत की बात की तो
उसने कुच्छ समय वो काम करने की बात कही थी & इस से उसे ये खटका हुआ था की
कही देविका & शिवा मिलके तो ये खेल नही खेल रहे.ऐसी सूरत मे उनका अगला
शिकार वीरेन ही था.उसने सोचा की वीरेन को अपने शक़ के बारे मे बता दे मगर
ना जाने क्यू उसका दिमाग़ उसे ऐसा करने से रोक रहा था. अपनी प्रेमिका की
बात से वीरेन को काफ़ी खुशी हुई थी.उसने उसके नर्म होंठो को चूम लिया &
उसके गले से लग गया.ऐसा करने से कामिनी की मोटी चूचिया उसके चौड़े सीने
से पीस गयी.उसका हाथ खुद बा खुद कामिनी की कसी हुई गंद पे चला गया
था.चूचियो की गुदगुदी & गंद के नर्म,मस्त एहसास & कामिनी की प्यारी बात
ने उसे फिर से मस्त कर दिया & वो 1 बार फिर उसके जिस्म की गहराइयो मे
डूबने लगा. ------------------------------
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"तुमने सेक्यूरिटी सिस्टम्स के लिए जो कंपनी तय की है उसे अगले महीने
बुला के डील फाइनल कर लेते हैं.",देविका ने 1 फाइल पे दस्तख़त कर उसे
किनारे किया & दूसरी खोल ली.शिवा उसके सामने उसके डेस्की की दूसरी तरफ
बैठा उसे देख रहा था. "हूँ.",उसके दिल मे 1 बार ख़याल आया की उस दूसरी
कंपनी के सेल्स रेप के उसे रिश्वत देने की बात के बारे मे अपनी प्रेमिका
को जो अब उसकी बॉस भी थी,बता दे मगर फिर उसने सोचा की क्यू वो उसे नाहक
परेशान करे!ये सब तो चलता ही रहता था & फिर देविका पे अब काम का कितना
बोझ भी था.वो एकटक उसे निहारे जा रहा था & बेख़बर देविका अपना काम किए जा
रही थी.शिवा के दिल ने उस वक़्त ये दुआ माँगी की बस ये पल यही थम जाए &
वो बस ऐसे ही अपनी महबूबा के सामने बैठा उसे निहारता रहे,क़यामत के दिन
तक. देविका ने नज़रे उठाई & अपने आशिक़ को खुद को निहारते पाया तो काम की
मसरूफ़ियत के बावजूद उसके गुलाबी होंठो पे मुस्कान खिल गयी..कितना चाहता
था ये शख्स उसे?..अगर हालात कुच्छ और होते तो वो कब का इसको अपना पति बना
चुकी होती.ऐसा आशिक़ तो किस्मतवालो को मिलता है!मगर ये मुमकिन नही
था..शिवा तुम मुझे पहले क्यू नही मिले?..देविका के दिल मे हुक उठी..क्या
हो जाता अगर मिल भी जाता तो?..उसके ज़हन ने उसके दिल से पूचछा..ये
शनोशौकत ये ऐशोआरम तो ये शख्स तुम्हे कभी नही दे पाता....ज़माने की नज़रो
मे वो उसका नौकर है मगर हक़ीक़त मे तो वो उसका आशिक़ है.अभी उसके पास
दौलत & इश्क़ दोनो हैं.अगर शिवा उसे पहले मिल जाता तो वो इस दौलत से तो
महरूम रह जाती..जो होता है वो अच्छे के लिए होता है! "क्या देख रहे
हो?",दिल की जद्ड़ोजेहाद को देविका ने चेहरे पे नही आने दिया था. "दुनिया
का सबसे हसीन चेहरा." "अच्छा.अब बहुत देख लिया,अब जाओ.काम नही
तुम्हे?",उसने शिवा को प्यार से झिड़का. "हां वो तो है.",आ भरता शिवा उठ
खड़ा हुआ & दरवाज़े की ओर मूड गया. "शिवा..",महबूबा की आवाज़ सुन वो
घुमा,"..उदास क्यू होते हो,जानम!अपनी हर रात तो मैने तुम्हारे नाम कर दी
है.",शिवा को महबूबा के प्यार के इज़हार से बहुत खुशी हुई & वो बेज़री जो
उसके चेहरे पे आई थी वो गायब हो गयी & वो वाहा से निकल गया. रात के 10
बजे इंदर अपने क्वॉर्टर मे अंधेरे मे बैठा खिड़की से बाहर देख रहा था.उसे
एस्टेट मॅनेजर की नौकरी करते 1 महीने से उपर हो गया था मगर सुरेन सहाय की
मौत के बाद वो अपने प्लान के अगले कदम अभी तक नही उठा पाया था.इस वक़्त
उसे शिवा सबसे बड़ा ख़तरा नज़र आ रहा था.वो बहुत वफ़ादार था & अभी तक
इंदर को उसकी कोई भी कमज़ोरी या कोई ऐसी बात का पता नही चला था जिसे वो
उसके खिलाफ इस्तेमाल कर सकता. उसे बौखलाहट होने लगी मगर अभी उसे थोड़ी
देर बाद रजनी के पास जाना था & उसके पास शराब पी के जाना ठीक नही था.शिवा
के बारे मे जानने के लिए 1 बार उसके कमरे की तलाशी लेना ज़रूरी था क्यूकी
साथ काम करने वालो से उसके बारे मे कोई भी काम की बात नही पता चली थी
लेकिन शिवा बंगल के अंदर रहता था & वो बंगल के अंदर घुसे कैसे,ये उसकी
समझ मे नही आ रहा था. तभी उसकी निगाह मे,जोकि बंगल से क्वॉर्टर्स की ओर
आते रास्ते पे थी,उसके हाथो की कठपुतली का अक्स उभरा.बंगल के अंदर काम
करने वालो के लिए देविका ने वर्दी बनवाई थी.नौकर तो कमीज़ & पॅंट &
सर्दियो मे कोट पहनते थे वही नौकरानिया या तो सारी या फिर घुटनो से नीचे
तक की काले रंग की पूरे या आधे बाज़ू की ड्रेस पहनती थी. रजनी ने भी इस
वक़्त आधे बाज़ू वाली ड्रेस पहनी हुई थी.रसोई मे काम करते वक़्त पहनने
वाला एप्रन अभी भी उसकी ड्रेस के उपर बँधा था & हाथो मे 1 छ्होटा सा बॅग
था जिसमे कभी-कभार वो लंच ले जाती थी.नौकरो को सारा खाना बंगले मे ही
मिलता था मगर रजनी & कुच्छ और लड़किया कभी-कभार अपने घर से भी कुच्छ
बनाके ले जाती थी ज़ेयका बदलने की गरज से. उसे देखते ही इंदर की आँखे चमक
उठी & वो अपनी कुर्सी से उठ फुर्ती से अपने दरवाज़े से निकल गया.
"आहह..!",रजनी ने दरवाज़ा खोल अभी क्वॉर्टर मे कदम रखा ही था की इंदर ने
उसे अपनी बाँहो मे दबोच लिया,"..कैसे चोरो की तरह आते हो?!!डर के मारे
मेरी तो जान ही निकल गयी थी!",इंदर ने दरवाज़ा बंद किया & 1 मद्धम रोशनी
वाला बल्ब जला दिया. "देखो,तो मेरा दिल कैसे धड़क रहा है.",शोखी से
मुस्कुराती रजनी ने अपने सीने की ओर इशारा किया.इंदर ने उसे दरवाज़े के
बगल की दीवार से लगा के खड़ा किया हुआ था & खुद उस से सॅट के खड़ा था.
"अभी शांत करता हू इसे.",उसने अपना दाया हाथ रजनी की कमर के पीछे कर उसके
एप्रन की ड्राइव को खोला & बाए से उसके हाथ का बॅग & क्वॉर्टर की चाभी
लेके बगल की दीवार मे बने शेल्फ पे रख दिया.डोर खुलते ही रजनी ने एप्रन
को गले से निकाला & अपनी बाहे अपने प्रेमी के गले मे डाल दी. इंदर का हाथ
रजनी की गंद पे फिर रहा था & जैसे ही उसने उसके गंद को दबा उसकी चूत को
अपने लंड से पीसा उसे रजनी की ड्रेस मे से उसकी कमर के पास कुच्छ
चुबा,"ये क्या है?",रजनी के खुले होंठ जोकि उसके होंठो की ओर बढ़ रहे
थे,सवाल सुन वही रुक गये. "ओह्ह..ये है.",उसने जेब मे हाथ डाल कर 1 चाभी
निकाली,"..ये तो बंगले की चाभी है." "क्या?",बड़ी मुश्किल से इंदर अपनी
हैरानी & खुशी को च्छूपा पाया,"..बंगल की चाभी तुम्हारे पास कैसे
आई?",उसका दाया हाथ रजनी की ड्रेस को उपर कर उसकी बाई जाँघ को उठा के उसे
सहला रहा था. "ये बंगले की रसोई के दरवाज़े की चाभी है.देविका मॅ'म ने
मुझे दे रखी है ताकि सवेरे जब मैं काम पे जाऊं तो उनकी नींद मे खलल ना
पड़े,वो थोड़ा देर से उठती है ना.",इंदर ने उस से चाभी ले ली & अपने होंठ
उसके होंठो से मिला दिए.उसने चाभी वाला हाथ 1 रजनी के ड्रेस की जेब मे
घुसाया मगर चाभी अंदर नही डाली बल्कि उस चाभी को अपने शॉर्ट्स की जेब मे
डाल लिया. रजनी का हाथ अब उसकी शॉट्स के उपर से उसके लंड को टटोल रहा
था,इंदर ने फ़ौरन उसे ढीला का नीचे गिरा दिया.वो नही चाहता था की रजनी को
चाभी के बारे मे पता चले,"जान,खाना खाया तुमने?" "हां.",इंदर के इस
मामूली से सवाल ने रजनी के दिल को बहुत खुश कर दिया.उसे अपने प्रेमी पे
बहुत प्यार आया..कितनी फ़िक्र करता था वो उसकी!उसने और गर्मजोशी से उसके
तगड़े लंड को अपनी गिरफ़्त मे कस लिया & उसे चूमते हुए हिलाने लगी.इंदर
भी उसकी कामुक हर्कतो का लुत्फ़ उठाने लगा,उसने तो सवाल इसलिए किया था की
कही रजनी उसे गरम करने के बाद खाना ना खाने लगे & उसे झड़ने के लिए
इंतेज़ार करना पड़े. इंदर ने भी उसकी पीठ पे लगी ड्रेस की ज़िप को नीचे
कर दिया था & अपने हाथ अंदर घुसा उसकी चूचियो से खेल रहा था.रजनी ने
बेचैन हो इंदर की टी-शर्ट निकाल दी & बड़ी बेताबी से उसके सीने पे अपने
हाथ फिराती हुई उसे चूमने लगी.उसके होंठ इंदर के चेहरे से नीचे उसके सीने
पे आए,"इंदर.." "हूँ..",इंदर उसकी पीठ & बाल सहला रहा था. "हम शादी कब
करेंगे?",रजनी उसके सीने से नीचे उसके पेट पे पहुँच गयी थी. "बहुत जल्द
मेरी जान,बहुत जल्द.",इंदर ने उसका सा नीचे अपने प्यासे लंड की ओर
धकेला,"..बस थोड़े पैसे जमा हो जाएँ ताकि शादी के बाद हनिमून के लिए मैं
तुम्हे किसी बहुत ही खूबसूरत जगह ले जा सकु. "ओह्ह..इंदर.इतना खर्च करने
की क्या ज़रूरत है?",रजनी इस बात को सुनकर फूली नही समा रही थी.उसने इंदर
के लंड को दोनो हाथो मे लिया & अपना सर बाई तरफ झुका लंड की बगल मे चूमने
लगी. "उन्न्न..!",..ये लड़की देखने मे जितनी साधारण थी चुदाई मे उतनी ही
मस्त!इंदर का दिल जोश से भर गया था,"..प्रसून जैसा आदमी अगर शादी कर मौज
उड़ा सकता है तो हम क्यू नही!",उसने रजनी के बालो को पकड़ उसके सर को लंड
पे दबाया. "उनकी बात और है..",रजनी लंड की जड़ पे जहा से इंदर के अंडे
शुरू होते थे,अपनी जीभ चला उसे पागल कर रही थी,"..वो रईस हैं,जान.देखो
ना,सर को गुज़रे अभी कितने ही दिन हुए हैं & अब मॅ'म की वकील उन्हे नयी
वसीयत बनाने के लिए कह रही है." "क्या?!",1 बार फिर इंदर बड़ी मुश्किल से
अपने हैरत भरे जज़्बातो को रजनी से च्छूपा पाया.रजनी ने लंड को अपने मुँह
मे भर लिया था & उसे हिलाते हुए चूस रही थी & इसलिए उसने फ़ौरन इंदर को
जवाब नही दिया.इंदर का दिल तो किया की लंड खींच उसे 2 तमाचे जड़े & उसे
पूरी बात बताने को कहे मगर ये मुमकिन नही था.वो रजनी के जवाब का इंतेज़ार
करता रहा. काई पॅलो तक लंड को जी भर के चूसने के बाद रजनी ने सांस लेने
के लिए उसे मुँह से निकाला,"..उस दिन उनकी वकील नही है..क्या नाम है
उसका.." "कामिनी शरण.",इंदर ने उसे उठाया & बाहो मे भर उसकी ड्रेस को
नीचे सरका दिया.ब्रा का बाया कप नीचे था & उसकी बाई चूची नुमाया थी.इंदर
तो पूरा नंगा ही था.उसने रजनी को गोद मे उठाया & उसके बेडरूम मे ले
गया.बिस्तर पे लिटा उसने उसकी पॅंटी उतारी & उसकी गंद की फांको के नीचे
अपने हाथ लगा उसकी झांतो को अपनी लपलपाति जीभ से चीर उसकी चूत मे घुसा
दिया. "आअनह...ऊन्णन्न्....!",रजनी तो जिस्म मे फुट रहे मज़े की
फुलझड़ियो मे अपनी कही बात भूल ही गयी थी मगर इंदर को तो उसके मुँह से
अभी बात निकलवानी ही थी. "तो क्या कह रही थी वकील कामिनी शरण?",वो अपने
घुटनो पे था & रजनी की गंद को थाम उसने हवा मे ऐसे उठा रखा था मानो उसका
वज़न कुच्छ खास ना हो. "ऊन्ंह....कह रही थी की मॅ'म को अब वसीयत
बना...आअनह..ले..नि..चाअ..हिई...हाइईईई..!",रजनी झाड़ आयी थी मगर इंदर की
लपलपाति जीभ अभी भी उसकी चूत के दाने को चाट रही थी. "तो मॅ'म ने क्या
कहा?" "उउन्ण..हहुन्न्नह....कहा की कुच्छ दिन रुक जाइए...ऊओह.....!",इंदर
ने उसकी जाँघो को अपनी जाँघो पे टीका लिया था & अपना लंड उसकी चूत मे
घुसा रहा था.रजनी ने बेचैन हो उसकी बाहो को थाम लिया था. "और कुच्छ नही
कहा उन्होने?" नही.",इंदर समझ गया की इस से ज़्यादा रजनी को कुच्छ नही
पता.रजनी ने उसकी बाँह पकड़ के नीचे खींचा तो इंदर ने उसकी बात मानते हुए
अपना उपरी बदन नीचे किया & उसे चूमने लगा.ये कठपुतली उसका सबसे बढ़िया
हथ्यार थी & वक़्त आ गया था की अभी दी गयी जानकारी के लिए उसे इनाम दिया
जाए.इंदर ने अपनी जनघॉ को फैलाया & रजनी के उपर लेट गहरे धक्के लगा उसे
मदहोश करते हुए उसकी चुदाई करने लगा.
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पड़ी हुई थी.वो अपनी बाई करवट पे लेटी थी & वीरेन अपनी दाई पे उसके
सामने.वीरेन का लंड उसकी चूत मे था.कामिनी ने अपनी दाई जाँघ वीरेन की
जाँघ के उपर चढ़ाई हुई थी,दोनो प्रेमी 1 दूसरे से लिपटे हुए 1 दूसरे को
चूम रहे थे. वीरेन ने अपना बाया हाथ उसकी गंद की दाई फाँक पे रखा & अपनी
कमर हिलाके चुदाई शुरू कर दी.कामिनी ने भी जवाब मे वीरेन की गंद को अपने
दाए हाथ मे भींच लिया & अपनी कमर हिलानी शुरू कर दी.वीरेन की चुदाई से
कामिनी हवा मे उड़ रही थी मगर उसकी 1 नज़र उस खिड़की पे ही थी जहा उसने
पिच्छली रात किसी साए को देखा था. "ऊव्वव..!",वीरेन के लंड के धक्को से
बहाल कामिनी की आहे निकलने लगी थी & वो उसकी गंद पे अपने नखुनो के निशान
छ्चोड़ रही थी.वीरेन भी बस अब जल्द से जल्द उसके साथ-2 अपनी मंज़िल पे
पहुँचना चाहता था.अपनी प्रेमिका के जिस्म से खेलते हुए उसे कोई 2 घंटे
होने को आए थे जिस दौरान वो तो 3-4 बार झाड़ चुकी थी मगर वो अभी तक 1 बार
भी नही झाड़ा था. दोनो प्रेमियो के दिल की धड़कने बहुत तेज़ हो गयी थी
साथ ही उनकी कमर के हिलने की रफ़्तार भी.कामिनी अब बिल्कुल मदहोश हो चुकी
थी मगर फिर भी उसने अपनी आँखे बंद नही की & खिड़की पे ही लगाए रखी.तभी
उसकी चूत मे बन चुका तनाव अचानक जैसे ढीला पड़ने लगा & उसके रोम-2 मे
खुशी भरने लगी.उसकी बाहो मे क़ैद वीरेन भी ज़ोर-2 से आहें भर रहा
था.झड़ने की खुशी को दिल मे शिद्दत से महसूस करती कामिनी ने अपनी चूत मे
अपने प्रेमी के गढ़े,गरम विर्य का गीलापन महसूस किया & समझ गयी की वो भी
झाड़ चुका है. आज रात उसे खिड़की पे कोई साया नही दिखाई दिया.रात काफ़ी
गहरी हो चुकी थी & उसे उमीद थी की अब आज रात कोई उनकी जासुसु नही
करेगा,"वीरेन.." "हूँ.",वीरेन उसकी चूचियो मे अपना चेहरा च्छुपाए वैसे ही
पड़ा था. "अगली बार यहा कब आओगे?",उसने उसके बालो मे प्यार से उंगलिया
फिराते हुए उसके सर को चूम लिया. "अगले महीने.क्यू?",उसने उसके सीने से
सर उठाया. "बस ऐसे ही पुचछा था.मैं तुम्हारे साथ फिर से यहा आना चाहती
हू.ये जगह बहुत खूबसूरत है & मैं 1 बार फिर इस खूबसूरती का लुत्फ़
तुम्हारे साथ उठाना चाहती हू.",बात दरअसल ये थी की कामिनी को वीरेन की
फ़िक्र होने लगी थी.सवेर चाइ पे जब उसने देविका से वसीयत की बात की तो
उसने कुच्छ समय वो काम करने की बात कही थी & इस से उसे ये खटका हुआ था की
कही देविका & शिवा मिलके तो ये खेल नही खेल रहे.ऐसी सूरत मे उनका अगला
शिकार वीरेन ही था.उसने सोचा की वीरेन को अपने शक़ के बारे मे बता दे मगर
ना जाने क्यू उसका दिमाग़ उसे ऐसा करने से रोक रहा था. अपनी प्रेमिका की
बात से वीरेन को काफ़ी खुशी हुई थी.उसने उसके नर्म होंठो को चूम लिया &
उसके गले से लग गया.ऐसा करने से कामिनी की मोटी चूचिया उसके चौड़े सीने
से पीस गयी.उसका हाथ खुद बा खुद कामिनी की कसी हुई गंद पे चला गया
था.चूचियो की गुदगुदी & गंद के नर्म,मस्त एहसास & कामिनी की प्यारी बात
ने उसे फिर से मस्त कर दिया & वो 1 बार फिर उसके जिस्म की गहराइयो मे
डूबने लगा. ------------------------------
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"तुमने सेक्यूरिटी सिस्टम्स के लिए जो कंपनी तय की है उसे अगले महीने
बुला के डील फाइनल कर लेते हैं.",देविका ने 1 फाइल पे दस्तख़त कर उसे
किनारे किया & दूसरी खोल ली.शिवा उसके सामने उसके डेस्की की दूसरी तरफ
बैठा उसे देख रहा था. "हूँ.",उसके दिल मे 1 बार ख़याल आया की उस दूसरी
कंपनी के सेल्स रेप के उसे रिश्वत देने की बात के बारे मे अपनी प्रेमिका
को जो अब उसकी बॉस भी थी,बता दे मगर फिर उसने सोचा की क्यू वो उसे नाहक
परेशान करे!ये सब तो चलता ही रहता था & फिर देविका पे अब काम का कितना
बोझ भी था.वो एकटक उसे निहारे जा रहा था & बेख़बर देविका अपना काम किए जा
रही थी.शिवा के दिल ने उस वक़्त ये दुआ माँगी की बस ये पल यही थम जाए &
वो बस ऐसे ही अपनी महबूबा के सामने बैठा उसे निहारता रहे,क़यामत के दिन
तक. देविका ने नज़रे उठाई & अपने आशिक़ को खुद को निहारते पाया तो काम की
मसरूफ़ियत के बावजूद उसके गुलाबी होंठो पे मुस्कान खिल गयी..कितना चाहता
था ये शख्स उसे?..अगर हालात कुच्छ और होते तो वो कब का इसको अपना पति बना
चुकी होती.ऐसा आशिक़ तो किस्मतवालो को मिलता है!मगर ये मुमकिन नही
था..शिवा तुम मुझे पहले क्यू नही मिले?..देविका के दिल मे हुक उठी..क्या
हो जाता अगर मिल भी जाता तो?..उसके ज़हन ने उसके दिल से पूचछा..ये
शनोशौकत ये ऐशोआरम तो ये शख्स तुम्हे कभी नही दे पाता....ज़माने की नज़रो
मे वो उसका नौकर है मगर हक़ीक़त मे तो वो उसका आशिक़ है.अभी उसके पास
दौलत & इश्क़ दोनो हैं.अगर शिवा उसे पहले मिल जाता तो वो इस दौलत से तो
महरूम रह जाती..जो होता है वो अच्छे के लिए होता है! "क्या देख रहे
हो?",दिल की जद्ड़ोजेहाद को देविका ने चेहरे पे नही आने दिया था. "दुनिया
का सबसे हसीन चेहरा." "अच्छा.अब बहुत देख लिया,अब जाओ.काम नही
तुम्हे?",उसने शिवा को प्यार से झिड़का. "हां वो तो है.",आ भरता शिवा उठ
खड़ा हुआ & दरवाज़े की ओर मूड गया. "शिवा..",महबूबा की आवाज़ सुन वो
घुमा,"..उदास क्यू होते हो,जानम!अपनी हर रात तो मैने तुम्हारे नाम कर दी
है.",शिवा को महबूबा के प्यार के इज़हार से बहुत खुशी हुई & वो बेज़री जो
उसके चेहरे पे आई थी वो गायब हो गयी & वो वाहा से निकल गया. रात के 10
बजे इंदर अपने क्वॉर्टर मे अंधेरे मे बैठा खिड़की से बाहर देख रहा था.उसे
एस्टेट मॅनेजर की नौकरी करते 1 महीने से उपर हो गया था मगर सुरेन सहाय की
मौत के बाद वो अपने प्लान के अगले कदम अभी तक नही उठा पाया था.इस वक़्त
उसे शिवा सबसे बड़ा ख़तरा नज़र आ रहा था.वो बहुत वफ़ादार था & अभी तक
इंदर को उसकी कोई भी कमज़ोरी या कोई ऐसी बात का पता नही चला था जिसे वो
उसके खिलाफ इस्तेमाल कर सकता. उसे बौखलाहट होने लगी मगर अभी उसे थोड़ी
देर बाद रजनी के पास जाना था & उसके पास शराब पी के जाना ठीक नही था.शिवा
के बारे मे जानने के लिए 1 बार उसके कमरे की तलाशी लेना ज़रूरी था क्यूकी
साथ काम करने वालो से उसके बारे मे कोई भी काम की बात नही पता चली थी
लेकिन शिवा बंगल के अंदर रहता था & वो बंगल के अंदर घुसे कैसे,ये उसकी
समझ मे नही आ रहा था. तभी उसकी निगाह मे,जोकि बंगल से क्वॉर्टर्स की ओर
आते रास्ते पे थी,उसके हाथो की कठपुतली का अक्स उभरा.बंगल के अंदर काम
करने वालो के लिए देविका ने वर्दी बनवाई थी.नौकर तो कमीज़ & पॅंट &
सर्दियो मे कोट पहनते थे वही नौकरानिया या तो सारी या फिर घुटनो से नीचे
तक की काले रंग की पूरे या आधे बाज़ू की ड्रेस पहनती थी. रजनी ने भी इस
वक़्त आधे बाज़ू वाली ड्रेस पहनी हुई थी.रसोई मे काम करते वक़्त पहनने
वाला एप्रन अभी भी उसकी ड्रेस के उपर बँधा था & हाथो मे 1 छ्होटा सा बॅग
था जिसमे कभी-कभार वो लंच ले जाती थी.नौकरो को सारा खाना बंगले मे ही
मिलता था मगर रजनी & कुच्छ और लड़किया कभी-कभार अपने घर से भी कुच्छ
बनाके ले जाती थी ज़ेयका बदलने की गरज से. उसे देखते ही इंदर की आँखे चमक
उठी & वो अपनी कुर्सी से उठ फुर्ती से अपने दरवाज़े से निकल गया.
"आहह..!",रजनी ने दरवाज़ा खोल अभी क्वॉर्टर मे कदम रखा ही था की इंदर ने
उसे अपनी बाँहो मे दबोच लिया,"..कैसे चोरो की तरह आते हो?!!डर के मारे
मेरी तो जान ही निकल गयी थी!",इंदर ने दरवाज़ा बंद किया & 1 मद्धम रोशनी
वाला बल्ब जला दिया. "देखो,तो मेरा दिल कैसे धड़क रहा है.",शोखी से
मुस्कुराती रजनी ने अपने सीने की ओर इशारा किया.इंदर ने उसे दरवाज़े के
बगल की दीवार से लगा के खड़ा किया हुआ था & खुद उस से सॅट के खड़ा था.
"अभी शांत करता हू इसे.",उसने अपना दाया हाथ रजनी की कमर के पीछे कर उसके
एप्रन की ड्राइव को खोला & बाए से उसके हाथ का बॅग & क्वॉर्टर की चाभी
लेके बगल की दीवार मे बने शेल्फ पे रख दिया.डोर खुलते ही रजनी ने एप्रन
को गले से निकाला & अपनी बाहे अपने प्रेमी के गले मे डाल दी. इंदर का हाथ
रजनी की गंद पे फिर रहा था & जैसे ही उसने उसके गंद को दबा उसकी चूत को
अपने लंड से पीसा उसे रजनी की ड्रेस मे से उसकी कमर के पास कुच्छ
चुबा,"ये क्या है?",रजनी के खुले होंठ जोकि उसके होंठो की ओर बढ़ रहे
थे,सवाल सुन वही रुक गये. "ओह्ह..ये है.",उसने जेब मे हाथ डाल कर 1 चाभी
निकाली,"..ये तो बंगले की चाभी है." "क्या?",बड़ी मुश्किल से इंदर अपनी
हैरानी & खुशी को च्छूपा पाया,"..बंगल की चाभी तुम्हारे पास कैसे
आई?",उसका दाया हाथ रजनी की ड्रेस को उपर कर उसकी बाई जाँघ को उठा के उसे
सहला रहा था. "ये बंगले की रसोई के दरवाज़े की चाभी है.देविका मॅ'म ने
मुझे दे रखी है ताकि सवेरे जब मैं काम पे जाऊं तो उनकी नींद मे खलल ना
पड़े,वो थोड़ा देर से उठती है ना.",इंदर ने उस से चाभी ले ली & अपने होंठ
उसके होंठो से मिला दिए.उसने चाभी वाला हाथ 1 रजनी के ड्रेस की जेब मे
घुसाया मगर चाभी अंदर नही डाली बल्कि उस चाभी को अपने शॉर्ट्स की जेब मे
डाल लिया. रजनी का हाथ अब उसकी शॉट्स के उपर से उसके लंड को टटोल रहा
था,इंदर ने फ़ौरन उसे ढीला का नीचे गिरा दिया.वो नही चाहता था की रजनी को
चाभी के बारे मे पता चले,"जान,खाना खाया तुमने?" "हां.",इंदर के इस
मामूली से सवाल ने रजनी के दिल को बहुत खुश कर दिया.उसे अपने प्रेमी पे
बहुत प्यार आया..कितनी फ़िक्र करता था वो उसकी!उसने और गर्मजोशी से उसके
तगड़े लंड को अपनी गिरफ़्त मे कस लिया & उसे चूमते हुए हिलाने लगी.इंदर
भी उसकी कामुक हर्कतो का लुत्फ़ उठाने लगा,उसने तो सवाल इसलिए किया था की
कही रजनी उसे गरम करने के बाद खाना ना खाने लगे & उसे झड़ने के लिए
इंतेज़ार करना पड़े. इंदर ने भी उसकी पीठ पे लगी ड्रेस की ज़िप को नीचे
कर दिया था & अपने हाथ अंदर घुसा उसकी चूचियो से खेल रहा था.रजनी ने
बेचैन हो इंदर की टी-शर्ट निकाल दी & बड़ी बेताबी से उसके सीने पे अपने
हाथ फिराती हुई उसे चूमने लगी.उसके होंठ इंदर के चेहरे से नीचे उसके सीने
पे आए,"इंदर.." "हूँ..",इंदर उसकी पीठ & बाल सहला रहा था. "हम शादी कब
करेंगे?",रजनी उसके सीने से नीचे उसके पेट पे पहुँच गयी थी. "बहुत जल्द
मेरी जान,बहुत जल्द.",इंदर ने उसका सा नीचे अपने प्यासे लंड की ओर
धकेला,"..बस थोड़े पैसे जमा हो जाएँ ताकि शादी के बाद हनिमून के लिए मैं
तुम्हे किसी बहुत ही खूबसूरत जगह ले जा सकु. "ओह्ह..इंदर.इतना खर्च करने
की क्या ज़रूरत है?",रजनी इस बात को सुनकर फूली नही समा रही थी.उसने इंदर
के लंड को दोनो हाथो मे लिया & अपना सर बाई तरफ झुका लंड की बगल मे चूमने
लगी. "उन्न्न..!",..ये लड़की देखने मे जितनी साधारण थी चुदाई मे उतनी ही
मस्त!इंदर का दिल जोश से भर गया था,"..प्रसून जैसा आदमी अगर शादी कर मौज
उड़ा सकता है तो हम क्यू नही!",उसने रजनी के बालो को पकड़ उसके सर को लंड
पे दबाया. "उनकी बात और है..",रजनी लंड की जड़ पे जहा से इंदर के अंडे
शुरू होते थे,अपनी जीभ चला उसे पागल कर रही थी,"..वो रईस हैं,जान.देखो
ना,सर को गुज़रे अभी कितने ही दिन हुए हैं & अब मॅ'म की वकील उन्हे नयी
वसीयत बनाने के लिए कह रही है." "क्या?!",1 बार फिर इंदर बड़ी मुश्किल से
अपने हैरत भरे जज़्बातो को रजनी से च्छूपा पाया.रजनी ने लंड को अपने मुँह
मे भर लिया था & उसे हिलाते हुए चूस रही थी & इसलिए उसने फ़ौरन इंदर को
जवाब नही दिया.इंदर का दिल तो किया की लंड खींच उसे 2 तमाचे जड़े & उसे
पूरी बात बताने को कहे मगर ये मुमकिन नही था.वो रजनी के जवाब का इंतेज़ार
करता रहा. काई पॅलो तक लंड को जी भर के चूसने के बाद रजनी ने सांस लेने
के लिए उसे मुँह से निकाला,"..उस दिन उनकी वकील नही है..क्या नाम है
उसका.." "कामिनी शरण.",इंदर ने उसे उठाया & बाहो मे भर उसकी ड्रेस को
नीचे सरका दिया.ब्रा का बाया कप नीचे था & उसकी बाई चूची नुमाया थी.इंदर
तो पूरा नंगा ही था.उसने रजनी को गोद मे उठाया & उसके बेडरूम मे ले
गया.बिस्तर पे लिटा उसने उसकी पॅंटी उतारी & उसकी गंद की फांको के नीचे
अपने हाथ लगा उसकी झांतो को अपनी लपलपाति जीभ से चीर उसकी चूत मे घुसा
दिया. "आअनह...ऊन्णन्न्....!",रजनी तो जिस्म मे फुट रहे मज़े की
फुलझड़ियो मे अपनी कही बात भूल ही गयी थी मगर इंदर को तो उसके मुँह से
अभी बात निकलवानी ही थी. "तो क्या कह रही थी वकील कामिनी शरण?",वो अपने
घुटनो पे था & रजनी की गंद को थाम उसने हवा मे ऐसे उठा रखा था मानो उसका
वज़न कुच्छ खास ना हो. "ऊन्ंह....कह रही थी की मॅ'म को अब वसीयत
बना...आअनह..ले..नि..चाअ..हिई...हाइईईई..!",रजनी झाड़ आयी थी मगर इंदर की
लपलपाति जीभ अभी भी उसकी चूत के दाने को चाट रही थी. "तो मॅ'म ने क्या
कहा?" "उउन्ण..हहुन्न्नह....कहा की कुच्छ दिन रुक जाइए...ऊओह.....!",इंदर
ने उसकी जाँघो को अपनी जाँघो पे टीका लिया था & अपना लंड उसकी चूत मे
घुसा रहा था.रजनी ने बेचैन हो उसकी बाहो को थाम लिया था. "और कुच्छ नही
कहा उन्होने?" नही.",इंदर समझ गया की इस से ज़्यादा रजनी को कुच्छ नही
पता.रजनी ने उसकी बाँह पकड़ के नीचे खींचा तो इंदर ने उसकी बात मानते हुए
अपना उपरी बदन नीचे किया & उसे चूमने लगा.ये कठपुतली उसका सबसे बढ़िया
हथ्यार थी & वक़्त आ गया था की अभी दी गयी जानकारी के लिए उसे इनाम दिया
जाए.इंदर ने अपनी जनघॉ को फैलाया & रजनी के उपर लेट गहरे धक्के लगा उसे
मदहोश करते हुए उसकी चुदाई करने लगा.
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