Kasam - Love is not Everything (Completed) - Page 10 - SexBaba
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Kasam - Love is not Everything (Completed)

अपडेट 79

अजय:- भाई ठीक तो है न तू?

अतुल:- मुझे क्या hoga...Hamesha की तरह फिट एंड फाइन. :फ्लेक्स:

अजय:- तो फिर ये लाल आँखें? और क्लास में भी सू रहा था?

अतुल:- (मुस्कुरा कर) एक आशिक़ हो कर दूसरे आशिक़ की दिल की बात नहीं समझता?

अजय:- मतलब?

अतुल:- ये हसीं रात के बाद की दर्दनाक सुबह है जो किसी आशिक़ को मंजूर नहीं.

अजय:- Abey...Sidhe bol...Baat को क्यों घुमा रहा है.

अतुल:- क्या आशिक़ बनेगा रे तू? इतनी सी बात भी नहीं समझ पाटा.

अजय:- और मत चाट यार दिमाग.

अतुल:- अच्छा ठीक hai...Tera छोटा सा दिमाग और नहीं चाटूँगा.

मेरा जो हाल hai...Haal नहीं बेहाल hai...Isse मेडिकल लैंग्वेज में इंसोम्निया (िनबिलिटी तो स्लीप) कहते है.

अतुल ने बस इतना hi कहा था की वह मौजूद सभी दोस्त अतुल को चिंता भरी नजरो से देखने lage...Bas निशा hi मुस्कुरा रही थी.

दूसरे टेबल में बैठा रवि भी अतुल को घर रहा था.

रवि:- (इन हिज मंद) कितना पढता है.

अजय:- क्या भाई? कैसे?

अतुल:- सब इश्क़ की कमाल है yaar...Raat की नींद उड़ा देती है और दिन का छैन.

अंजलि:- हाउ रोमांटिक? और एक है अजय जिससे रोमांस का र भी पता नहीं?

अजय:- अच्छा ji...Abb ये भी बता दो की 10 बजे से पहले hi कौन सू जाता है? वीकेंड में डेटिंग के लिए मन कौन करता है? और बताओ?

अंजलि:- अरे अरे...

अजय:- No पंगा विथ ट्रू आशिक़.

अंजलि:- तुम्हे तो बाद में देखूंगी.

अजय:- लेकिन प्यार से.

अजय की इस अंदाज में अंजलि शर्मा गयी.

अतुल:- अबे bewkoof...Tujhe इतना भी नहीं पता, "ओपन फ्लिर्टिंग इस नॉट अल्लोवेद इन कॉलेज टेरिटरी."

अजय:- ऐसी बकवास रूल तो कही नहीं suna...Tu अपनी स्टोरी कंटिन्यू कर.

अतुल:- हुआ ये की हम दोनों यानी की मई और मेरी Nishu...Puri raat...Subah के 5 बजे तक फ़ोन और चैटिंग करते रहे.

अतुल ने मुस्कुराते हुए कहा.

ये सुनते hi रवि को ालने दिल में कुछ चुभता सा महसूस हुआ.

अजय:- अबे पागल है kya...Subah की 5 बजे तक.

अतुल:- दिल फिर भी नहीं bhara...Dil तो कर रहा था की बातें करता hi जाओ

और साला ये कॉलेज time...Mood ऑफ कर दिया.

अजय:- 5 बजे तक कैसी बातें?

अतुल:- इश्क़, प्यार और mohobbat...Lekin तुम जैसे अनरोमांटिक लोग ये बात नहीं समझ पाओगे.

अंजलि:- अतुल, हाउ डरे यू?

अंजलि की इस गुस्से की झूठा नाटक पर अतुल मुस्कुरा कर बोलै.

अतुल:- मैडम, ये बात मुझे नहीं अपना इस बेवकूफ आशिक़ को समझाइये.

अजय:- अबे मुझे क्यों फसा रहा है?

अजय भी डरने की एक्टिंग करते हुए बोलै.

अतुल:- चलो Nisha...Chalte है.

अजय:- रुक साथ में hi जाएंगे क्लास.

अतुल:- तुम लोग जाओ.

अजय:- और तू.

अतुल:- Dating...17th डेटिंग.

अजय:- प्यार हुआ 2 मंथ भी नहीं hua...Aur जनाब का 17तह डेटिंग.

अतुल बस मुस्कुराता रहा.

अजय:- और क्लास?

अतुल:- बड़ी बड़ी प्यार में छोटी छोटी क्लास को बंक मारना पड़ता है.

अजय:- तू नहीं सुधरेगा.

अतुल:- सुधारना किस्से है? मुझे तो इश्क़ के रंग में रंग जाना है.

फिर अतुल और निशा वह से जाने hi वाला था की.

रवि:- अतुल अतुल.

अतुल:- हम्म.

रवि:- एक क्वेश्चन था.

अतुल:- बोल?

रवि:- हेपेटाइटिस टॉपिक के बारे में.

फिर रवि क्वेश्चन पूछता है और अतुल एक्सप्लेन कर देता है.

रवि:- इतना कैसे पढ़ लेता है?

अतुल:- कांसेप्ट bro...Concept.

रवि:- सही hai...Lekin कुछ और टॉपिक है लिवर का जो मई डिटेल में समझना चाहता हु.

अतुल:- फिर kabhi...Liver तो अपना hi ऑर्गन hai...Abhi मई जा रहा hu...Kal शाम में लाइब्रेरी में आ जाना.

अतुल मुद कर जाने hi वाला था की.

रवि:- एक और बात.

अतुल पीछे मुड़ता है.

रवि:- (हिचकिचा कर) क्या मुझसे दोस्ती करेगा?

एक पल के लिए तो अतुल को विश्वास hi नहीं hua...Fir रवि का फेस देख कर जोर जोर से हसने लगता है.

अतुल:- किसी कीड़े (इन्सेक्ट) ने तो नहीं काट लिया तुझे?

रवि:- नहीं yaar...Socha बहुत हो gaya...Chhoti छोटी बातो पर भी क्या लड़ना और jhagadna...Saath रहे तो पढ़ाई से ले कर हर चीज में हेल्प हो जायेगी.

अतुल एक बार फिर रवि को गौर से देखता hai...Wo सीरियस hi दिख रहा tha...Aur न जाने क्यों अतुल को उसमे सचाई भी दिखा.

अतुल:- Ok फ्रेंड्स.

फिर अतुल अपना हाथ आगे बढ़ा देता hai...Ravi हाथ मिलता है.

अतुल और निशा अब्ब वह से निकल जाते hai...Ajay और अंजलि को दोनों का प्यार देख बहुत अच्छा लग रहा था.

वही रवि को दिल में दर्द महसूस होता hai...Aur ना चाहते हुए भी आँखें भरने लगती है.

ये कहा आये है हम?

निशा उत्साहित हो कर बोली.

अतुल:- तुम्हारी नेचुरल ब्यूटी देख देख कर बोर हो गया तो सोचा नेचर hi घूम ले.

निशा:- बकवास जोके.

अतुल:- तुम में आज कल इतना खोया हु की सेंस ऑफ़ ह्यूमर hi भूल गया हु.

निशा:- एक और बकवास जोके.

अतुल:- ये जोके में क्या रखा hai...Tum बस मेरा और इस नेचर का मजा लो.

फिर अतुल भी चारो तरफ देखने लगता है.

सामने एक छोटी सी नदी thi...Nadi में घुटना भर की पानी tha...Aur वह का nakaara...Hare और घने जंगल की बिच से गुजरती वो नदी जब भी किसी पत्थर पर टकराती तो वह का शांत वातावरण में गूंज रही आवाज दिल और दिमाग में सुकून पैदा कर रही थी.

वह का ठंडी हवाएं और पंछियो का गीत संगीत दिल खुश कर रहा था.

निशा:- वो सब तो ठीक hai...Par ये बताओ तुम हमारे चैटिंग की बातें सब को चीख चीख कर क्यों बता रहे थे?

अतुल:- आखिर उन्हें भी तो पता चले हमारी प्यार की gehraai...Meri ाहिकी, तुम्हारी deewangi...Hume हमारा प्यार को एक मिशाल बनाना hai...Abhi तो बहुत जूनून, पागलपन बाकी है हमारे प्यार में.

निशा:- जो अक्षर ज्यादा बोलते है वही साथ छोड़ देते है.

अतुल:- (निशा की आँखों में देख कर) अगर मई साथ छोड़ने वाला होआ तो तुम्हे मुझ पर विश्वास नहीं hota...Agar विश्वास नहीं होता तो प्यार नहीं hota..Agar प्यार नहीं होता तो मुझे इतनी क्यूट एंड ब्यूटीफुल गफ नहीं मिलती.

निशा कुछ देर अतुल को देखती है फिर उसकी होंठो में मुस्कान आ जाती है.

इससे पहले वो कुछ समझ पाती...5 सेक् के लिए दोनों खुद को हवा में महसूस करते है और फिर चम्म की आवाज.

निशा:- Nahi...Nahi..Mujhe chhodo...Mujhe पानी से दर लगता है.

निशा नदी से बाहर निकलना चाहती थी.

निशा:- प्लीज हाथ छोडो.

जवाब में अतुल हाथ को और भी कास के पकड़ लेता है.

अतुल:- ये हाथ छोड़ने के लिए पकड़ा नहीं hai...Jindagi भर साथ निभाने के लिए पकड़ा है.

निशा:- मुझे दर लग रहा है.

अतुल:- हम है तो क्या दर है.

फिर अतुल निशा को प्यार से देखता है.

अतुल:- भरोषा है न मुझ पर.

निशा बस सर को हां में हिला देती है.

अतुल:- तो फिर चलो.

निशा भी अतुल की आँखों में आँखें डाले साथ चल देती है नदी की बीच में.

फिर अतुल थोड़ा दूर जाता है.

निशा बस अतुल को hi देख रही थी की पानी की कुछ चिन्ता वो अपने चेहरे पे महसूस करती है.

जब उससे समझ में आता है तो झूठा गुस्से से अतुल को देखती hai...Atul उस पर हंसने लगता है फिर पानी की और भी बौछार कर देता है.

फिर होना क्या था वाटर War...Dono एक दूसरे पर पानी की बौछार करते hai...Dono हंस रहे थे, मुस्कुरा रहे थे और इस पल को जी रहे थे.

फिर जब दोनों थक जाते है तो एक दूसरे को देख प्यार भरी मुस्कान से एक दूसरे को देखने लगते है.

निशा अचानक से पानी की बौछार करने hi वाली थी की उसका पेअर (लेग) फिसल जाता है.

निशा:- आउच.

अतुल हड़बड़ा कर निशा के पास जाता है और उससे सँभालने लगता है.

अतुल:- क्या हुआ? छोट तो नहीं ला.

फिर अतुल निकहा को सही सलामत देख उससे अपने बाहो में भर लेता है.

कुछ देर ऐसे hi एक दूसरे के प्यार को महसूस करने के बाद दोनों एक दूसरे को देखते hai...Dono अब्ब आँखों से एक दूसरे को प्यार जताने लगते hai...Fir धीरे धीरे दोनों का चेहरा एक दूसरे के बेहद पास आ जाता है.

तभी निशा अपना चेहरा घुमा लेती है और मुस्कुराने लगती है.

अतुल:- प्लीज.

निशा:- नहीं.

अतुल:- प्लीज.

निशा:- Nahi...No मीन्स no.

अतुल:- ये तो हम जैसे ाहिक के लिए ना इंसाफ़ी है.

निशा:- No मीन्स no.

निशा को अतुल की हालत पर हंसी आ रहा था.

अतुल:- 2 महीने hi gaye...Lekin एक बार भी नहीं.

निशा:- ये तो पहले hi समझ लेना चाहिए tha...Mujhse प्यार किया है तो मेरा नखरा भी उठाना पड़ेगा.

अतुल:- सब कुछ uthaaunga...But एक किश.

निशा:- अभी नहीं.

अतुल की उम्मीद अब्ब कुछ बढ़ने लगी.

अतुल:- लेकिन कब?

निशा:- अभी nahi...Fir कभी.

अतुल ने बस इतना hi सुना था की वो निशा को अपने बाहो में भर कर पूरा एक चक्कर घुमाता है.

दोनों को एक दूसरे पर बहुत प्यार आ रहा था. :लव:
 
थैंक्स आल फ्रेंड्स फॉर योर कंसिस्टेंट सपोर्ट एंड कमैंट्स. रियली ग्रेटफुल.

बूत ी हैवे "नॉट ा गुड न्यूज़" फॉर यू गाइस.

नेक्स्ट वीक से एग्जाम है 1 वीक के लिए. सो रेगुलर अपडेट नेक्स्ट वीक के सैटरडे (ौग 3) से आएगा. प्रिपरेशन ावग है और एग्जाम कंटेंट ज्यादा. सो विल बे फोकसिंग फॉर एग्जाम इन थी 2 वीक्स. कल या परसो एक अपडेट दूंगा उसके बाद ौग 3 में.

ौग 3 से रेगुलर रहूँगा 14 वीक्स के लिए. (बिफोर नेक्स्ट एग्जाम).

वन्स अगेन थैंक यू आल फॉर योर ग्रेट support...Keep सपोर्टिंग लिखे थिस.
 
थैंक्स आल फ्रेंड्स फॉर योर विशेष एंड patience...Exam से पहले एक अपडेट पोस्ट करने का सोचा था लेकिन अब्ब लिख नहीं paaunga...Probably 10 सब्जेक्ट्स तो रेविसे वीथिन 2 days...Aur सभी सब्जेक्ट्स का एग्जाम 1 दिन में hi complete...Dimaag सही से काम नहीं कर रहा hai...Aur ऐसी कन्फूसिओं में लिख भी नहीं पाऊंगा.

साथ बने रहिये सैटरडे tak...Uske बाद रेगुलर अपडेट (2-3 डेज के गैप) में पोस्ट करता रहूँगा.
 
अपडेट 80

मेरे बेटे को कल क्या गिफ्ट चाहिए? कल तो आप का बर्थडे है.

पापा मुझे 2 तकलेट (चॉकलेट) और 3 ाइट क्लेम (आइस क्रीम) खाना है.

एक 2 साल के बच्चे ने जवाब दिया.

Ha..Aur पूरी करो इसकी jidd...Abhi से चॉकलेट, आइस क्रीम, बिस्किट्स और न जाने क्या kya...Ghar का खाना तो देखता भी नहीं.

खाने दो न yaar...Baccha hi तो hai...Abhi नहीं खायेगा तो कब खायेगा.

यही कह कह कर इसकी दांत खराब करवा डोज.

फ़िक्र क्यों करती हो? जब इसका बाप और माँ दोनों hi डॉक्टर hai...Dekh लेंगे दोनों मिल कर.

अच्छा ये सब chhodo...Kal हमारे बेटे का बर्थडे hai...Pehli बार बोलना सीखा hai...Iska ये बर्थडे धूम धाम से manayenge...Tumne सभी दोस्त और रिलेटिव्स को कांटेक्ट तो कर लिया है न?

है सभी को बुला लिया है लेकिन अतुल को छोड़ कर.

नाम मत लो उस कमीने ka...Abb वो मेरा दोस्त नहीं.

अचानक से अजय के चेहरे में गुस्सा की भाव आ गया.

5 साल...5 साल हो गए hai...Ek बार भी उसने मुझे याद किया? नहीं na...To फिर मई क्यों यार karu...Uss कमीने को भूल जाना चाहता हु.

अजय गुस्से में बोलता hi जा रहा था.

क्या यार? इतना hi कमजोर दोस्ती था hamaara...Jo एक झटके से टूट गयी.

जैसे hi ये आवाज अजय और अंजलि ने suna...Dono एकदम से पीछे मुद गए.

और अपने सामने अतुल को देख हैरानी में एक दूसरे की शकल देखने लगे.

अतुल के चेहरे में मुस्कान tha...Khushi का muskaan...Apne बिछड़े हुए दोस्तों से मिलने का ख़ुशी.

Atul...Tu yaha...Kab कैसे?

अजय को यकीं hi नहीं हो रहा tha...Wo दौड़ते हुए अतुल के पास gaya...Aur उसको कसके गले लगा लिया.

अतुल:- अब्ब कहा गया तेरा नाराजगी?

अजय:- तुझसे कब तक नाराज रह सकता हु yaar...Bas शिकायत tha...Tu मुझे अपना दोस्त कहता tha...Kya मई इस लायक भी नहीं था की 5 सालो में एक बार भी तू मिलने नहीं aaya...Milna तो दूर की बात है एक फ़ोन भी नहीं किया.

इतनी जल्दी मुझे भूल गया.

अतुल:- भूल तो मई खुद को गया था...5 साल सिर्फ तन्हाई में बिता diya...Yaadon के सहारे ख्यालों की दुनिया me...Naa hi जीने की ख्वाहिश और ना hi मौत की parwaah...Bas जी रहा था किसी तरह.

यहाँ तक की मई खुद को hi भूल गया tha...Tujhe कैसे याद karta...Aur जब थोड़ा बहुत जीने लगा हु और वापस होश में आने लगा हु तो देख आज यहाँ इस हालत में हु.

अजय:- इतना प्यार? आखिर कब तक?

अतुल:- (अजय और अंजलि को देख कर) तुम दोनों एक साथ क्यों हो?

अजय:- प्यार करते है.

इतना कह कर अजय चुप हो gaya...Atul का सवाल वो समझ गया.

अतुल:- मई भी तो प्यार करता हु.

अजय:- लेकिन kyu...Abb तो तुम दोनों साथ नहीं ho...Nisha की शादी हो gayi...Tujhe भी आगे बढ़ जाना चाहिए.

अतुल:- प्यार किया है yaar...Koi मजाक nahi...Kya मेरा प्यार निशा की शादी तक hi tha...Sacche दिल से प्यार किया tha...Aur जब से प्यार किया है तब से hi मई निशा का हो गया था हमेशा हमेशा के लिए.

भले hi किस्मत ने हम दोनों को अलग कर दिया लेकिन आज भी मेरे दिल से निशा को निकल नहीं पाया hai...Pyar करने से रोक नहीं पाया.

अजय:- आखिर कब तक इसी दर्द में जीता रहेगा?

मुस्कुराते हुए अतुल ने कहा.

अतुल:- प्यार कमजोर दिल वालो के लिए नहीं hai...Jo ये सोच कर प्यार करते है की उसका प्यार का फ्यूचर है या नहीं.

प्यार हुआ प्यार kiya...Har हाल में प्यार के साथ चला प्यार को nibhaya...Aur हर पाल jeeya...Aur जब वक्त आया तो अपने hi प्यार के लिए उससे अलग भी हो गया.

किसी ने सही कहा था प्यार का मलतब हर बार पाना नहीं होता.

और वो जिंदगी भी क्या जिंदगी जिसमे दर्द ना ho...Abb तो आदत सी हो गयी है दर्द में जीने की.

अजय:- कब तक?

अजय भी अतुल की हालत देख तड़प उठा.

अतुल:- एक दिन. उस एक दिन का hi इंतजार कर रहा हु.

अतुल ने विश्वाश से भरे आवाज में तो कहा लेकिन वो खुद भी जानता था की ये एक झूठा दिलासा के अलावा कुछ नहीं.

अजय बस अतुल को hi देखे जा रहा tha...Bilkul भी नहीं बदला था उसका dost...Jitna टूटा हुआ वो पिछले 5 साल से था उतना hi आज hai...Munh से बोल तो कुछ और hi बोल रहा था लेकिन aankhein...Aankhein तो कभी झूठ नहीं बोलती.

अंजलि तो अतुल को इस हालत में देख भी नहीं पा रही thi...Atul और निशा की जुदाई के वो lamhe...Sochte hi रूह कांप रही thi...Bas एक दर्द भरी नजरो से वो अतुल को देख रही थी.

अतुल को देख अजय एक बार फिर पुरानी यादों में खो गया.

अजय:- अरे संभल खुद ko...Kya कर रहा है?

अतुल:- किसको सँभालु? और क्यों?

अजय:- मर jaayega...Itna पियेगा तो?

अतुल:- मर जाने दे yaar...Kuch नहीं रखा इस जिंदगी me...Iss तकलीफ से राहत तो मिल जायेगी.

अजय कुछ नहीं bola...Bas अतुल को hi देखे जा रहा था.

अतुल:- जा रहा हु मई यहाँ से?

अजय:- कहा?

अतुल:- बहुत dur...Nafrat सी होने लगी है मुझे इस जहह se...Kahi दूर चला जाना चाहता hu...Jaha शायद दो पल की छैन मिले.

अजय:- जल्दबाज़ी कर रहा hai...Chal एक बार फिर निशा की घर चलते hai...Ek बार फिर मनाएंगे.

अतुल:- तुझे क्या लगता hai...Maine कोशिश नहीं kiya...Abb तो आखिरी उम्मीद भी टूट गयी hai...Nisha भी शादी के लिए तौयार हो गयी.

Kisse...Ravi से.

उस साला ने कहा था एक दिन वो मेरे सामने से निशा को ले jaayega...Aur आज हो भी रहा है.

हार गया हु mai...Sab se...Apno se...Apne प्यार se...Aur उस रवि से bhi...Ek पल भी अब्ब यहाँ रह नहीं sakta...Ghutan से होने लगी है.

अतुल ने दो घूँट पी कर बोलै.

अतुल:- सुन एक बात ध्यान se...Mai कल hi यहाँ से जा रहा hu...Dosti के हक़ से कहता हु मुझे कुछ दिन अकेला छोड़ de...Kabhi मिलने की कोशिश मत karna...Phone भी मत kar...Aur ये भी पता लगाने की कोशिश मत करना की मई कहा हु.

कुछ दिन अकेला रहना चाहता hu...Aur तेरा दोस्ती पर भरोषा भी hai...Jis दिन सब कुछ ठीक होगा उस दिन मई खुद hi तुझ से मिलूंगा.

अजय:- मई ऐसा नहीं करूँगा.

अतुल:- दोस्त है तू mera...Tera दोस्ती पर विश्वाश hai...Mere भरोषा को कभी टूटने मत देना.

इतना कह कर अतुल वह से चला gaya...Aankho में आंसू और होंठो पे bottle...Ajay से ये सब देखा नहीं जा रहा tha...Atul के साथ साथ वो भी टूट गया था.

वो और अंजलि साथ थे तो अतुल की वजह se...Dono के घर वालो से बात कर के मानाने में कामयाब हुआ था Atul...Lekin wo...Wo चाह कर भी कुछ नहीं कर पा रहा tha...Aaj पहली बार वो अपने दोस्ती को इतना बेबस देख रहा था.

अतुल को रट हुए जाते देखने के अलावा वो कुछ कर नहीं पा रहा था.

और आज भी वही हाल tha...Sirf और सिर्फ अतुल को मजबूर hi देख सकता था.
 
अपडेट 81

अजय:- और बता कहा है आज कल, क्या कर रहा है? मब्ब्स तक hi या फिर आगे भी बढ़ा?

अजय डरते हुए अतुल की जवाब का इंतजार करने laga...Usse दर था की कही अतुल ये ना कह दे की इश्क़ में देवदास बन कर वो पूरी दुनिया से अलग अपनी hi दुनिया में जी रहा hai...Daru और नशा की दुनिया.

अतुल:- मद इन जनरल प्रैक्टिस किया है.

अजय:- मद wtf? तुझे तो सर्जन बनना था na...Hamesha से सर्जन बनना चाहता tha...Fir अचानक से मद.

अतुल:- हालात कब क्या करने पर मजबूर कर दे ये कोई नहीं जानता.

हालात तो ऐसे थे की पढ़ना तो दूर अपना काम भी अच्छे से कर नहीं पा रहा tha...Har वक्त उदासी, तन्हाईयाँ और वो दर्द इश्क़ में बिछड़ने ki...Bataa नहीं सकता यार.

फिर मेरी लाइफ में आयी Shreya...Yaa फिर ये समझ ले की जिंदगी की एक मोड़ में श्रेया mili...Jisne मुझे आगे बढ़ने की हिम्मत di...Ek भटके हुए मुशाफिर को मंजिल की रास्ता दिखाया.

ये एहसास दिलाया की आखिर मई कौन हु, मेरा कर्त्तव्य (ड्यूटी) क्या hai...Shreya और बाकी गांव वालो से जो अपना पैन मिला, प्यार मिला, इज्जत mila...Issi वजह से जिंदगी में थोड़ा बहुत आगे बढ़ पाया.

इश्क़ का जख्म तो दिल में था hi और अभी भी है लेकिन वो प्यार वो अपना पैन एक मरहम की तरह tha...Jo उस जख्म को भर तो नहीं सका पर कुछ राहत तो जरूर दी.

ये प्यार, ये अपना पैन hi तो था जिसने एक जूनून दिल में पैदा ki...Inn सभी लोग की कर्ज को चुकाने की.

सिर्फ मब्ब्स काफी नहीं tha...Socha मद भी करना padega...Aur नॉलेज hogi...Aur अच्छे से इलाज करूँगा.

उसके बाद दिन में एक डॉक्टर और रात में एक student...Jiska मकशद था और भी अच्छा डॉक्टर बनना और सभी जरुरत मंद का इलाज karna...Raat भर म्हणत करता था.

कई बार तो लगता था अब्ब मुझसे नहीं hoga...Aur पढ़ नहीं sakta...Yaa फिर अब्ब पढ़ने की हिम्मत hi नहीं है.

लेकिन निशा की वो yaadein...Jo मुझे हमेशा आगे बढ़ते देखना चाहती thi...Bicchadte वक्त भी रट हु बोली थी, "अतुल तुम आगे बढ़ते रहना, मुझे ख़ुशी hogi...Dekh तो नहीं पाउंगी लेकिन कही से सुन सकू यही ख्वाहिश hai...Tumhari खुशियां, सफलता hi मेरी सपना और ख्वाहिश hai...Please मेरी यह ख्वाहिश जरूर पूरा करना."

निशा की यही बातें, वो आँशु मुझे हर वक्त हर पल मजबूर करता रहा.

Shreya...Uski मोटिवेशन उसका hausla...Yahi सब कुछ था जिसने मुझे आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया.

सर्जन बनना एक सपना था लेकिन फिजिशियन बन कर एक अलग hi सटिस्फैक्शन mila...Surgeon बनता तो शायद 10 या 15 जिंदगी बचा paata...Lekin फिजिशियन बन कर बहुत लोगो की जिंदगी बचने के साथ साथ जिंदगी जीने के तरीका में सुधार लाने में सफल रहा.

मेरी जिंदगी किसी के लिए काम तो आया बस यही सुकून बाकी hai...Bas यही सुकून और निशा की साथ बिठाये हसीं yaadein...Issi वजह से hi तो अभी तक जी रहा हु.

अजय और अंजलि पूरी ध्यान से अतुल की एक एक बातें सुन रहे थे.

अजय:- ये श्रेया कौन है? कही तू...

अतुल:- नहीं nahi...Aisa कभी सोच भी नहीं sakta...Pyar तो सिर्फ निशा से hi करता था और करता रहूँगा.

है श्रेया के लिए दिल में अलग hi जगह hai...Bahut इज़्ज़त करता हु uska...Ek सच्चा दोस्त है वो जिसने मुझे जिंदगी के सबसे मुश्किल वक्त में जीना sikhaya...Aage बढ़ने की हिम्मत diya...Ek अनजान के लिए उसने इतना कुछ किया.

शी इस रियली ग्रेट yaar...Bahut रेस्पेक्ट करता हु उसको और हमारा फ्रेंडशिप को.

अतुल की बात से अजय को यकीं हो गया की अतुल निशा से आगे कभी किसी के बारे में सोच नहीं सकता या फिर सोचना hi नहीं चाहता.

कुछ देर सभी चुप rahe...Kabhi कभी एक दूसरे को देख लेते लेकिन क्या बोले किसी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था.

अतुल को देख दोनों यही सोच रहे थे की "आखिर कैसा इंसान है Atul...Itna सब कुछ हो जाने के बाद भी कैसे अपने जिंदगी को किसी की सेवा में बिता सकता hai...Naa hi कोई स्वार्थ और ना hi कोई अपनी khwahishein...Bas अपना ज्ञान और शक्ति जरुरतमंदो की भलाई में इस्तेमाल कर रहा था."

"तो कभी उसकी किस्मत पर रोना aata...Kaise किस्मत इतना निर्दयी हो सकता hai...Ek इंसान से उसकी साड़ी खुशियां, चेहरे का रौनक, दिल से धड़कन और जीने की वजह छीन सकता hai...Kaise एक इंसान को ज़िंदा लाढ़ बना सकता है."

अतुल:- निशा के बारे में कुछ जानते हो?

अजय:- नहीं.

अतुल:- अंजलि तुम भी नहीं?

एक दर्द भरी आवाज में अतुल ने पूछा.

अंजलि:- Nahi...Jaise तुम ने हमसे कांटेक्ट तोड़ दिया उसने भी हमसे कांटेक्ट तोड़ liya...Kitna समझने की कोशिश ki...Lekin वो नहीं maani...Bahut जिद्दी hai...Kasam भी दे दिया की हम दोनों उसकी जिंदगी में लोई दखल अंदाजी ना करे.

समझ सकती हु दिल टूटा hai...Kya बीत रही होगी उस पर लेकिन इस तरह से दोस्ती तोड़ lena...Bahut खुदगर्ज़ हो गयी है वो.

अंजलि की बातें सुन अतुल मुस्कुराने लगा.

अतुल:- Khudgarzi...Haa सही hai...Aise में इंसान अपनी ग़म और तन्हाइयों भुलाने के लिए पूरी दुनिया से रिश्ता तोड़ लेता hai...Mujhe hi देख लो.

कुछ सोचते हुए अतुल और भी मुस्कुराने लगा.

Jiddi...Bahut जिद्दी hai...Jidd में वो मेरी एक नहीं सुनती तुम्हारी बात क्या मानेगी.

खैर जहा भी रहे खुश rahe...Yahi दुआ करते आया हु और करता रहूँगा.

एक बार फिर सब ख़ामोशी में एक दूसरे को देखने लगे.

अतुल:- अच्छा चलता hu...Tum दोनों से मिलने आया tha...Dono को साथ देख बहुत ख़ुशी हुई.

हमेशा ऐसे hi खुश रहो एक दूसरे के saath...Jindagi में छोटी छोटी लड़ाइयां तो होती रहती hai...Pyar से संभल lena...Judaai का दर्द बता नहीं sakta...Bas महसूस किया hai...Kabhi ऐसी हालात आने भी मत देना.

अतुल फिर अपनी जगह से उठ गया.

अजय:- आते रहना यार.

अतुल:- ओह्ह shit...Tum दोनों का बीटा का नाम क्या है?

अंजलि:- राज.

अतुल:- Aaunga...Aur अगली बार जब आऊंगा राज के लिए 2 तकलेट और 3 ाइट क्लेम जरूर लाऊंगा.

अतुल ने मुस्कुराते हुए राज की तरफ देख कर कहा.

राज ख़ुशी में उछलने लगा.

जाते वक्त अतुल राज के सर पर प्यार से हाथ फेरता है.

अतुल:- चेहरा अंजलि पर गया है और आदत अजय पर.

फिर अतुल वह से जाने लगा.

अजय और अंजलि भी गेट तक आये ड्राप करने के liye...Aur कास कर एक दूसरे का हाथ पकड़ liya...Ek दूसरे से मन hi मन कभी एक दूसरे से अलग ना होने की बात कह रहे थे.

रास्ते में चलते हुए अतुल बहुत खुश नजर आ रहा tha...Khush होता भी क्यों naa...Aakhir उसके दोनों दोस्त खुश थे एक दूसरे के साथ.

भले hi ख़ुशी से अतुल का अब्ब दूर दूर तक कोई रिश्ता नहीं tha...Lekin दुसरो की खुशियों में खुश होना वो सिख गया था.

और इसी ख़ुशी में वो अपने घर पहुँच gaya...Jaha घर के अंदर जाते हु उसकी ख़ुशी एक्ससिटेमेंट में बदल गयी.

हैरानी के साथ वो बोलै "श्रेया."

सॉरी फॉर डिले friends...Aaj 12:00 ऍम में hi अपडेट पोस्ट करने वाला था अस बर्थडे gift...But दोस्तों के बिच बिजी हो गया और अब्ब अपडेट पोस्ट कर रहा हु.
 
सॉरी भाई बूत थिस इस थे एवरेज साइज ऑफ़ अपडेट ी कैन पोस्ट. अभी ऐसा कंडीशन में नहीं हु की लॉन्ग अपडेट और डेली अपडेट लिख saku...Iss अपडेट को भी लिखने में 2 दिन सोचना पड़ा tha...Agar और बड़ा करने की कोशिश करू तो अपडेट की क्वालिटी भी काम हो सकता hai...Sirf कोशिश hi कर सकता हु भाई लॉन्ग और फ्रीक्वेंट अपडेट की वादा नहीं.

उम्मीद है आपको स्टोरी पसंद आ रही hai...Agar अच्छा लगे तो 2,4 कमेंट स्टोरी के बारे में भी लिख dijiye...Accha लगेगा भाई.

थैंक यू.
 
अपडेट 82

अतुल:- तुम यहाँ? कब?

अतुल घर के अंदर जाते hi ख़ुशी से बोलै.

श्रेया:- बस कुछ देर pehle...Lekin आप को क्या मतलब डॉ. Sahab...Aapko तो काम से फुर्सत मिले तब न.

अतुल:- अरे ऐसा कुछ नहीं है.

फिर अतुल श्रेया को सबसे मिलाने लगता है.

पहले hi उसके नजर अपने पापा और भाई पर पड़ता hai...Bura सा शकल बना कर वो अपना चेहरा घुमा लेता है.

अतुल:- Shreya...Ye है मेरी माँ और मेरी दी.

(तो माँ एंड सिस्टर) ये है Shreya...Meri dost...Sabse अच्छी और सच्ची dost...Aaj जो कुछ बुइ हु बस इसी की वजह से हु.

जब अपने hi अपनों को बर्बाद कर दे तो बहुत काम hi ऐसे लोग होते है जो पराया हो कर भी अपनों के जैसे साथ निभाते है.

अतुल की इस बात से कुछ देर के लिए माहौल पूरा शांत हो जाता hai...Uska भाई सर झुकाये खड़ा था तो पापा मुस्कुरा रहे thhe...Apne हालात par...Lekin इस मुस्कान के पीछे की दर्द शायद hi कोई समझ सकता था.

निधि:- जानती hu...Maine hi बुलाया है.

अतुल:- आपने? लेकिन कैसे?

निधि:- तू तो अपना अलग hi दुनिया में जीता hai...Kisi से क्या लेना देना तुझे?

ये यहाँ इसी शहर में आयी थी और सुबह से फ़ोन कर रही thi...Tu फ़ोन घर में hi छोड़ कर पता नहीं कहा गायब हो गया था.

बात किया तो पता चला तेरी दोस्त hai...Yahi बुला लिया.

अतुल:- सही kiya...Sorry Shreya...Kahi बाहर गया था.

श्रेया:- अब्ब ये सॉरी बिच में कहा से आ gaya...Mana किया है ना कभी भी सॉरी बोलने se...Itna तो जानती हु की डॉ. साहब आप कितना बिजी इंसान है.

अतुल:- तुम जब तक डॉ. साहब बोलती रहोगी उतना hi सॉरी बोलता rahunga...Maine भी तो तुमसे कितनी बार कहा है की मुझे सिर्फ अतुल hi कहो.

और रही बात बिजी की to...Chaahe कितना बुइ बिजी राहु अपनों के लिए वक्त निकाल hi लेता हु.

निधि:- है है सब पता hai...Kitna वक्त निकलता है...5 साल से बुला रही hu...Aur अब्ब आया hai...Ye देखने के लिए की तेरी दी ज़िंदा भी है या.

दी और बुइ कुछ बोलता उससे पहले hi अतुल ने दी का मुंह बंद कर दिया.

अतुल:- Nahi...Aisa आगे कभी सोचना भी मत.

अतुल अचानक से गुस्सा हो gaya...Chehre में दर और गुस्सा का मिला जुला भाव tha...Dhire धीरे आँखों से आंसू बहने लगे.

अतुल:- प्लीज दी ऐसा कभी सोचिये भी mat...Abb मेरा आप सब के अलावा है hi kaun...Aap सभी के लिए hi तो जीना चाहता हु और आप सभी की ख़ुशी में hi तो अपना ख़ुशी ढूंढता हु.

अब्ब आप hi ऐसी बोलेंगी तो मेरा क्या होगा?

जानता हु बहुत देर कर दिया यहाँ आने me...Lekin आप तो जानती है न मई कैसे हालात से गुजर रहा हु.

निधि:- मई तो मजाक कर रही थी.

अतुल:- मुझे ऐसा मजाक पसंद नहीं.

अतुल गुस्से में बोल कर दूसरी तरफ मुद गया.

कुछ देर ऐसे hi खामोशी छायी rahi...Kisi को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या बोले.

अतुल:- माँ ये क्या? जब आप का बीटा आया था तब तो बहुत खातिरदारी किया था aapne...Lekin बीटा की dost...Uska भी तो खातिरदारी कीजिये?

श्रेया तुम भी जा कर फ्रेश हो जाओ.

ा. माँ:- Ohh...Bhul hi गयी थी.

अतुल की माँ श्रेया को अपने सारः ले जाती है और अतुल भी वह से जाने hi वाला था की वो कुछ महसूस करता है.

अचानक hi वो प्रीती की तरफ देखता है जो श्रेया को घर रही थी.

अतुल गुस्से से प्रीती की तरफ देल्हता hai...Atul का ये गुस्सा देख प्रीती भी दर जाती hai...Ek बार भी आँखें उठा कर अतुल को देखने की हिम्मत नहीं कर पा रही थी.

अतुल:- वो मेरी दोस्त hai...Sirf dost...Kuch बुद्धि जीवी है जो बातो की तरह तरह का मतलब बनाने का एक्सपर्ट है.

इतना कह कर अतुल अपने रूम में चला जाता है.

गौरव:- (तो प्रीती) ऐसे हज़ारो लड़किया होंगी जिससे अतुल तुमसे अपना अच्छा दोस्त मानता hoga...Nisha से कम्पटीशन कर रही थी न tum...Nisha गयी श्रेया आयी hai...Shreya जायेगी तो कोई और aayega...Aur तुम सिर्फ कम्पटीशन करते रह जाओगी.

ये कम्पटीशन से कुछ नहीं होने wala...Pyar किया था तो तुम्हे अतुल के दिल में अपने लिए अतुल के दिल में अलग पहचान बनाना चाहिए tha...Lekin तुम to...Khair छोडो.

अभी भी अच्छे से समझा रहा hu...Atul को भूल जाओ और जिंदगी में ईमानदारी से आगे बढ़ो.

प्रीती:- सलाह भी कौन दे रहा है...

प्रीती ये कह कर हसने लगती hai...Jawaab में गौरव भी हंस कर कहता है.

गौरव:- जिंदगी बहुत अच्छा सबक सिखाता hai...Maine भी सिख liya...Tum में अपना hi रूप देखता hu...Mujhe समझाने वाला कोई नहीं था.

तुम भी अंधकार की रास्ता में मत chalo...Yahi कहना चाहता था.

बाकी तुम्हारी marji...Jab सपनो की दुनिया से हकीकत में आओ तो ये मत कहना की आखिर ये सब तुम्हारे साथ क्यों हो रहा है? तुम्हारे पास अभी पूरी जिंदगी बाकी hai?Ek मौका नयी तरीके से नयी जिंदगी की शुरुवात करने ki...Baaki तुम्हारी मर्जी.

श्रेया:- ये सब क्या था अतुल? कोई अपने घर वालो को इतना कहता है? वो भी एक अनजान लड़की के सामने?

अतुल:- Accha...Ye ज्यादा हो gaya...Wo लोग इतना भी सुन नहीं सकते.

दो बातें उनको इतना छुभता है तो सोचो 5 साल...5 साल हर एक पल मुझे कितना चुभा hoga...Sirf मई hi जानता हु कैसे मैंने खुद को संभाला है.

अतुल गुस्से में चिल्ला कर bola...Fir जैसे hi एहसास हुआ.

अतुल:- सॉरी sorry...Wo पापा और भाई का गुस्सा तुम पर निकल गया.

श्रेया:- आखिर वो तुम्हारे पापा और भाई है?

अतुल:- कैसा पापा और कैसा भाई? सब के सब मतलबी है.

फिर अचानक से अतुल की आँखों में आंसू आने लगे.

अतुल:- तुम्हे लगता है मैंने उनको एक अनजान लड़की के सामने इतना सुनाया ये गलत है.

लेकिन उसका क्या.

मेरा इंगेजमेंट था उस din...Engagement कहो या फिर एक साजिश.

उस दिन सभी मेहमानो के बिच मेरा प्यार और निशा का इतना मजाक बनाया दोनों ने की क्या bataau...Wo भी मेरा गैर मौजूदगी me...Khoon तो इतना खौला था की क्या बताओ कैसे संभाला था खुद को? वो तो माँ और दी की वजह से चुप हो गया वर्ण पता नहीं क्या कर बैठ ता?

तुम सोचती हो की मई गलत कर रहा hu...Lekin उन् दोनों को क्या kahogi...Jiski वजह से मेरे जिंदगी के 5 साल अँधेरा में डूब गया और अभी भी अँधेरा में hi है...5 साल मैंने तन्हाई में गुजार दिया...5 साल तक खून खौलता रहा और मई कुछ कर भी नहीं पाया.

सिर्फ मई hi नहीं उन्होंने जो भी किया उससे निशा को भी सहना पद रहा hai...Unki एक galti...Aur सजा 2 परिवार को.

क्या कहना चाहोगी तुम? मुझे सब कुछ चुप चाप सुन लेना chaahiye...Aise hi चुप बैठना chaahiye...Kya मई आँखों में पट्टी बाँध कर इनको अभी भी इनका मर्जी करने दू?

नहीं ये हो नहीं sakta...Pata नहीं मई कैसे अपने गुस्सा को रोक रहा hu...Agar गुस्से का बाँध टूट गया तो पता नहीं क्या कर बैठूंगा?

श्रेया बस अतुल को hi देख रही thi...Kabhi उसके दर्द को तो कभी उसके गुस्से को.

अतुल के भाई और पापा को देख कर और थोड़ा बहुत जान्ने के बाद वो इतना तो समझ गयी थी की सिर्फ वो hi दोनों इस खेल में शामिल नहीं hai...Koi तो और भी है जिसने खेल का शुरुवात किया है और अंजाम भी दिया है.

अगर अतुल को उसके बारे में पता चला तो? जब वो अपने बाप और भाई को माफ़ नहीं कर पाया तो उसका क्या हाल होगा? और अतुल का ये खतरनाक गुस्सा?
 
अपडेट 83

एक और प्लीज!!!

नहीं.

प्लीज...

तुमने सिर्फ एक कहा था ना.

अरे एक से क्या होता है.

ये तो पहले सोचना चाहिए था na...Tumne एक कहा tha...Ek hi मिलेगा.

इतना भी क्या नखरा दिखा रही ho...Please.

Accha...Nakhra दिखा रही hu...Wo तो dikhaaungi...Pyar करने से पहले सोचना चाहिए था न.

प्यार कोई सोच समझ कर करता है? ये तो हो जाता hai...Agar सोचने समझने लगता तो शायद hi मौ तुमसे प्यार karta...Aur तुम पागलो की तरह मेरे पीछे पड़ी रहती.

Acha...Mai तुम्हारे पिच्छे पागल थी या तुम मेरे पीछे?

(कुछ देर सोचने के बाद) हम dono...Please यार Nishu...Bahut मन कर रहा hai...Please ओने मोरे किश.

निशा:- नू..

अतुल:- पलासी.

फिर कुछ देर और तड़पाने के बाद निशा हां में इशारा कर देती है.

अतुल:- यस यस.

फिर दोनों प्रेमी जोड़ी एक दूसरे के होंठो में खो जाते है पूरी दुनिया को भुला कर चांदनी रात में चाँद की रौशनी में.

खुली आसमान के निचे घर से काफी दूर सुनसान जगह में ऐसे छुप छुप कर दोनों अपनी जिंदगी को पुरे मजे से जी रहे थे.

निशा:- बस bas...Saans तो लेने दो.

तेज सांसें लेती हुई निशा बोली.

अतुल:- Lo...Jitni सांस लेना hai..Lo.

लेकिन ये मत भूलना की तुम्हारी हर सांस और हद धड़कन में मई हु.

अतुल की इस बात पर निशा मुस्कुराती है.

निशा:- बाद जोके.

अतुल कुछ नहीं bolta...Bas निशा को hi देखे जा रहा था.

निशा:- ऐसे क्या देख रहे हो?

थोड़ा शरमाते हुए निशा बोली.

अतुल:- आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो.

निशा:- झूठा.

अतुल:- No माय बर्थडे girl...Aaj सच में तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो.

निशा:- (थोड़ा शर्माते हुए) ये तो तुम रोज कहते हो.

अतुल:- क्यों की तुम और भी ज्यादा खूबसूरत होती जा रही हो.

निशा:- तुम्हे कैसे पता?

अतुल:- बस दिल ने कहा.

निशा:- और क्या क्या कहता है तुम्हारा दिल?

अतुल:- बहुत kuch...Jindagi भर मुझे मेरी निशु को प्यार करना है, उसका ख्याल रखना है, उसको दुनिया भर की खुशियां देना hai...Itna प्यार की आज तक किसी ने किसी से भी नहीं किया हो.

जिंदगी भर एक दूसरे के साथ रहना hai...Saath देना hai...Jindagi भर के लिए.

और और aur...Yahi मुस्कान (निशा की स्माइल को देख कर) हमेशा अपने निशु की फेस में देखना है.

निशा से अब्ब रहा नहीं gaya...Wo अचानक से अतुल के गले लग गयी.

निशा:- इतना प्यार?

अतुल:- बहुत jyada...Ye तो कुछ भी नहीं hai...Shabdo में बता नहीं सकता कितना प्यार करता हु तुमसे.

फिर अतुल भी निशा को अपने बाहो में भर लेता है.

कुछ देर ऐसे hi एक दूसरे के प्यार को महसूस करने के बाद...

अतुल:- अरे मई तो भूल gaya...Chalo डिनर करते है.

फिर अतुल दोनों के लिए डिनर रेडी करता है.

अतुल:- तुम्हारे प्यार ने मुझे कुक भी बना दिया.

निशा:- अभी तो और भी बहुत कुछ करना बाकी है मेरे लिए.

अतुल:- कुछ नहीं karunga...Ye तो बर्थडे था तुम्हारा इसी लिए.

निशा अतुल को गुस्से से घूरती है तो अतुल भी डरने की एक्टिंग करता है.

एक चम्मच खाते hi.

निशा:- नॉट बाद.

अतुल:- ये क्या yaar...Itni म्हणत से बनाया hai...Raat भट यूट्यूब देख kar...Aur तुम हो की.

अतुल की इस बात पर निशा को हंसी आ गयी.

निशा:- (हँसते हुए) Aree...Mai तो मजाक कर रही hu...Sach में बहुत टेस्टी है.

निशा की इस बात पर अतुल बहुत खुश हो जाता है.

फिर दोनों खाने लगते hai...Dono का नजर खाने से ज्यादा एक दूसरे की आँखों में था.

निशा:- थैंक्स ा लोट Atul...Thanks फॉर मेकिंग माय बर्थडे सो स्पेशल.

अतुल:- यू अरे मोस्ट वेलकम.

फिर अतुल अपनी hi यादो में खो जाता है.

रात के 12:00 ऍम में निशा को सबसे पहले विश करना...1 घंटे तक फ़ोन में hi प्यार भरी बातें karna...Subah दोस्तों के साथ कॉलेज में बर्थडे सेलिब्रेट करने के बाद लास्ट के कुछ लेक्चर बंक करके इतना इंतजाम karna...Dinner और म्यूजिक.

डिनर ख़त्म करने के बाद अतुल एक गाना बजा देता है और दोनों एक दूसरे में खो कर नाचने लगते है.

दिल का दरिया बह hi गया

इश्क़ इबादत बन hi गया

खुद को मुझे तू सौंप दे

मेरी ज़रुरत तू बन गया

बात दिल की नज़रों ने की

सच कह रहा तेरी कसम

तेरे बिन अब न लेंगे इक भी डैम

तुझे कितना चाहने लगे हम

तेरे बिन अब न लेंगे इक भी डैम

तुझे कितना चाहने लगे हम

तेरे साथ हो जायेंगे ख़तम

तुझे कितना चाहने लगे हम

बात दिल की नज़रों ने की

सच कह रहा तेरी कसम

तेरे बिन अब न लेंगे इक भी डैम

तुझे कितना चाहने लगे हम

तेरे साथ हो जायेंगे ख़तम

तुझे कितना चाहने लगे हम

तुझे कितना चाहने लगे हम

इस जगह आ गयी चाहतें अब मेरी

छीन लूँगा तुम्हे साड़ी दुनिया से hi

तेरे इश्क़ पे हाँ हक़ मेरा hi तोह है

कह दिया है ये मैंने मेरे रब्ब से भी

जिस रास्ते तू न मिले

उस पे न हो मेरे कदम

तेरे बिन अब न लेंगे इक भी डैम

तुझे कितना चाहने लगे हम

तेरे साथ हो जायेंगे ख़तम

तुझे कितना चाहने लगे हम

तुझे कितना चाहने लगे हम

ो...

तुझे कितना चाहने लगे हम...

[Song Credit:- Kabir Singh Movie Soundtrack]

निशा:- अतुल

अतुल:- हम्म

निशा:- अब्ब हम फिर कब milenge...Aise hi सबसे dur...Sirf एक दूसरे के साथ.

अतुल:- जब तुम chaho...Waise भी हम तो रोज hi डेट पर जाते है.

Library...Abb ये स्टडी की जगह रोमांटिक स्पॉट बन चूका hai...Haatho में बुक लेकिन आँखें, दिल और दिमाग सिर्फ एक दूसरे पर.

लेक्चर के वक्त भी पढ़ाई काम इश्क़ ज्यादा.

कॉलेज के baad...Ek और रोमांटिक spot...Hamaara chhat...Jaha घंटो तक एक दूसरे के साथ बातें करते है.

और फिर सोते वक्त हमारा mobile...Good night...Good मॉर्निंग विश करने के लिए.

हर वक्त तो हम दोनों एक दूसरे के पास hi होते है.

निशा:- वो तो hai...Fir भी ऐसे बाहर घूमना फिरना.

अतुल:- जब तुम chaho...Mai तो हर वक्त तैयार हु.

निशा:- (कुछ सोचते हुए) हमारी स्टडी पर कोई इफ़ेक्ट नहीं पड़ेगा?

अतुल:- आज तक पड़ा है क्या? नॉलेज और रिजल्ट भी अच्छा hi hai...Jyada पढ़ना जरुरी nahi...Jaruri ये है की क्या पढ़ रहे है और कैसे पढ़ रहे है.

पहले एक hi बात को 10 बार पढ़ते the...Abb 1 baar...Lekin पढ़ रहे है और समझ भी रहे है.

पढ़ाई अपनी जगह और प्यार अपनी jagah...Dono को साथ ले कर chalenge...Jab एक दूसरे के साथ वक्त बिताएंगे तब सिर्फ pyar...Aur जब पढ़ते है उस वक्त सिर्फ पढ़ाई.

जिस दिन ऐसा लगे की हमारा पढ़ाई में असर पद रहा है तब इस बात को सोचेंगे.

अभी तो साथ वक्त बिताएंगे, साथ पढ़ेंगे और बहुत साड़ी मस्तिया करेंगे.

निशा भी अतुल की बात से सहमत हो गयी.

अचानक hi अतुल की दिमाग में एक बात आया.

अतुल:- Nisha...I थिंक वे शुड ब्रेक उप?

निशा:- व्हाट?

अतुल:- सही तो सुना तुम ने!!! ब्रेक उप.

निशा समझ नहीं पा रही थी की अतुल को आखिर हो क्या गया है.

अतुल:- सुना है जूनियर बैच में बहुत hi खूबसूरत लड़किया hai...Tumse ब्रेक उप करने के बाद hi तो उन् पर लाइन मार सकता हु.

लेकिन अतुल की आँख और उसकी हंसी उसका झूठ छुपा न सका.

निशा:- Accha...To ये सुना है tumne...Fir निशा अतुल की कान (एअर) खींचने लगती है.

अतुल:- Ouch...Kya कर रही ho...Dard हो रहा है.

निशा:- तुम्हारा कान खिंच कर निकलन्हि देती hu...Naa रहेगी कान और ना सुन पाओगे तुम बकवास

अतुल:- सॉरी sorry...Mai तो मजाक कर रहा हु.

निशा:- लेकिन मई मजाक नहीं कर रही हु.

निशा अभी भी गुस्से में थी.

अतुल:- Sorry...Please.

अतुल ऐसे hi निशा को मनाता रहा और फिर निशा कुछ देर बाद पिघल hi गयी.

कान छोड़ने के बाद निशा अतुल से मुंह फेर कर गुस्से से दूसरी तरफ देखने लगती है.

अतुल:- मई तो तुम्हारे गुस्सा का दीवाना hu...Gusse में जब तुम मुझ पर अपना हक़ जताती हो तो बहुत अच्छा लगता है.

निशा:- तुम्हे ये मजाक लग रहा hai...Kitni बार कहा है हमारे प्यार पर कोई मजाक मत karo...Wo भी ऐसी.

अतुल को समझने में देर नहीं लगा की निशा को उसकी ये बात कितना बुरा लगा है.

वो निशा को अपने बाहो में भर लेता है और उसकी पीठ पर अपना हाथ फेरने लगता है प्यार से.

अतुल:- सॉरी Nishu...Abb से ऐसा मजाक नहीं करूँगा.

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डॉ. साहब आप कही खो गए है?

श्रेया की आवाज सुनते hi अतुल होश में आया.

अतुल:- क्या दिन थे wo...Aur आज क्या दिन है.

अफ़सोस भरी आवाज में अतुल ने ये बात कहा.

सामने देखा तो शाम हो गयी thi...Yaadon में खोने के बाद वक्त का पता hi नहीं चला.

अतुल:- अब्ब हमें वापस लौट चलना चाहिए.

श्रेया भी अतुल के साथ चलने लगती है.

श्रेया:- अतुल तुम्हारा प्यार का कोई जवाब नहीं? इतना प्यार कोई किसी से कैसे करता है?

क्या कभी इस प्यार में कोई झगड़ा कभी हुआ या नहीं?

अतुल:- है हुआ था एक baar...Pyar में कब गुस्सा और मुसुन्दरस्टण्डींग हो गया पता hi नहीं चला.

(इन हिज मंद) मिसुन्दरस्टण्डींग.

ये सोचते वक्त अतुल के दिमाग में एक चेहरा छाप gaya...Preeti...Aur फिर चेहरे में अचानक से गुस्से के भाव आ गए.

आफ्टर रीचिंग होम

घर पहुँचने के बाद फ्रेश हो कर अतुल निचे हॉल में aaya...Shreya पहले hi एक सोफे में बैठी thi...Atul भी उसके पास आ कर बैठ गया.

दोनों कुछ बातें करते इससे पहले घर के मैं गेट पर किसी ने नॉक किया.

निधि जा कर गेट खोलती है तभी सामने खड़े शख्स को देख कर सभी हैरान हो जाते है.

निशा के पापा.

जब वो अंदर आते है तभी आरव भी आ कर अतुल के पास बैठ जाता है.

निशा के पापा घर के अंदर आते hi 3 शख्स को देखते hai...Atul, श्रेया और आरव.

और इसी नजर ने उनको कई सारे सवाल का जवाब दे दिया.
 
सॉरी friends...Kuch ज्यादा hi डिले कर रहा hu...Kal अपडेट देने का बोलै था लेकिन आज भी सूरे नहीं hu...Exams तो नहीं है बूत स्टडी में कुछ ज्यादा hi बिजी hu...Abhi इम्पोर्टेन्ट टॉपिक्स चल रहा है लास्ट 2 वीक्स se...Most कॉमन डिसीसेस लिखे थाइरोइड एंड Diabetes...Study का एक भी part मिस नहीं कर सकता और जब भी थोड़ा बहुत फ्री होता हु मूड रिफ्रेश करना पड़ता hai...Chaah कर भी लिख नहीं पा रहा hu...Abhi फिजिकली और मेंटली स्ट्रेस फील कर रहा हु.

आज कोशिश karunga...Sirf कोशिश सूरे नहीं hu...Kal तक अपडेट शायद आ जाएगा.

एंड ा गुड न्यूज़...1 वीक के बाद 1 मंथ के लिए पोस्टिंग hai...No स्टडी उस टाइम थोड़ा और रेगुलर हो sakunga...And होपिंग तहत अपडेट फ्रीक्वेंसी विल बे बेटर.

नॉट सूरे फॉर टुडे बूत ऑप्टिमिस्टिक ुप्तो टुमारो.

एंड वन्स अगेन सॉरी फॉर थी अनवांटेड देलेस.
 
अभी ये नहीं कहूंगा की अपडेट कब aayega...Kyu की पहले भी दो बार नहीं दे paaya...But इतना जरूर कहूंगा की जल्द hi.

और फिर 1 वीक के बाद 1.5 मोनथस के लिए फ्री hu...Community पोस्टिंग रिलेटेड work...Thoda बिजी तो रहूँगा लेकिन अभी जितना हु उतना nahi...Uss टाइम अपडेट फ्रीक्वेंसी अच्छा होगा.

अभी मेंटली प्रेपर नहीं हो पा राहु हु लिखने के liye...Likhne की कोशिश करता हु पर सही से लिख नहीं paata...Update क्वालिटी डाउन भी नहीं कर सकता.

पहली बार इतना स्ट्रेस फील कर रहा हु विथाउट अन्य स्ट्रांग reason...Pehli बार स्टोरी राइटिंग में ऐसा टाइम आया है की कॉन्फिडेंस गेनेराते नहीं कर पा रहा hu...Shayad स्ट्रेस और रेस्ट की कमी से.

विल मीट यू गाइस विथ सम रेगुलर उपदटेस सून. :)

अभी तक आप सभी ने बहुत साथ दिया hai...Bas ये बुरा वक्त में भी थोड़ा साथ बने rahiye...Likhna सुरु कर दिया hai...Will पोस्ट anytime...But नॉट सूरे ऑफ़ टाइम एंड डेट.

थैंक यू all...And सॉरी फॉर डिले अगेन.
 
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