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- Dec 5, 2013
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अजय:- भाई ठीक तो है न तू?
अतुल:- मुझे क्या hoga...Hamesha की तरह फिट एंड फाइन. :फ्लेक्स:
अजय:- तो फिर ये लाल आँखें? और क्लास में भी सू रहा था?
अतुल:- (मुस्कुरा कर) एक आशिक़ हो कर दूसरे आशिक़ की दिल की बात नहीं समझता?
अजय:- मतलब?
अतुल:- ये हसीं रात के बाद की दर्दनाक सुबह है जो किसी आशिक़ को मंजूर नहीं.
अजय:- Abey...Sidhe bol...Baat को क्यों घुमा रहा है.
अतुल:- क्या आशिक़ बनेगा रे तू? इतनी सी बात भी नहीं समझ पाटा.
अजय:- और मत चाट यार दिमाग.
अतुल:- अच्छा ठीक hai...Tera छोटा सा दिमाग और नहीं चाटूँगा.
मेरा जो हाल hai...Haal नहीं बेहाल hai...Isse मेडिकल लैंग्वेज में इंसोम्निया (िनबिलिटी तो स्लीप) कहते है.
अतुल ने बस इतना hi कहा था की वह मौजूद सभी दोस्त अतुल को चिंता भरी नजरो से देखने lage...Bas निशा hi मुस्कुरा रही थी.
दूसरे टेबल में बैठा रवि भी अतुल को घर रहा था.
रवि:- (इन हिज मंद) कितना पढता है.
अजय:- क्या भाई? कैसे?
अतुल:- सब इश्क़ की कमाल है yaar...Raat की नींद उड़ा देती है और दिन का छैन.
अंजलि:- हाउ रोमांटिक? और एक है अजय जिससे रोमांस का र भी पता नहीं?
अजय:- अच्छा ji...Abb ये भी बता दो की 10 बजे से पहले hi कौन सू जाता है? वीकेंड में डेटिंग के लिए मन कौन करता है? और बताओ?
अंजलि:- अरे अरे...
अजय:- No पंगा विथ ट्रू आशिक़.
अंजलि:- तुम्हे तो बाद में देखूंगी.
अजय:- लेकिन प्यार से.
अजय की इस अंदाज में अंजलि शर्मा गयी.
अतुल:- अबे bewkoof...Tujhe इतना भी नहीं पता, "ओपन फ्लिर्टिंग इस नॉट अल्लोवेद इन कॉलेज टेरिटरी."
अजय:- ऐसी बकवास रूल तो कही नहीं suna...Tu अपनी स्टोरी कंटिन्यू कर.
अतुल:- हुआ ये की हम दोनों यानी की मई और मेरी Nishu...Puri raat...Subah के 5 बजे तक फ़ोन और चैटिंग करते रहे.
अतुल ने मुस्कुराते हुए कहा.
ये सुनते hi रवि को ालने दिल में कुछ चुभता सा महसूस हुआ.
अजय:- अबे पागल है kya...Subah की 5 बजे तक.
अतुल:- दिल फिर भी नहीं bhara...Dil तो कर रहा था की बातें करता hi जाओ
और साला ये कॉलेज time...Mood ऑफ कर दिया.
अजय:- 5 बजे तक कैसी बातें?
अतुल:- इश्क़, प्यार और mohobbat...Lekin तुम जैसे अनरोमांटिक लोग ये बात नहीं समझ पाओगे.
अंजलि:- अतुल, हाउ डरे यू?
अंजलि की इस गुस्से की झूठा नाटक पर अतुल मुस्कुरा कर बोलै.
अतुल:- मैडम, ये बात मुझे नहीं अपना इस बेवकूफ आशिक़ को समझाइये.
अजय:- अबे मुझे क्यों फसा रहा है?
अजय भी डरने की एक्टिंग करते हुए बोलै.
अतुल:- चलो Nisha...Chalte है.
अजय:- रुक साथ में hi जाएंगे क्लास.
अतुल:- तुम लोग जाओ.
अजय:- और तू.
अतुल:- Dating...17th डेटिंग.
अजय:- प्यार हुआ 2 मंथ भी नहीं hua...Aur जनाब का 17तह डेटिंग.
अतुल बस मुस्कुराता रहा.
अजय:- और क्लास?
अतुल:- बड़ी बड़ी प्यार में छोटी छोटी क्लास को बंक मारना पड़ता है.
अजय:- तू नहीं सुधरेगा.
अतुल:- सुधारना किस्से है? मुझे तो इश्क़ के रंग में रंग जाना है.
फिर अतुल और निशा वह से जाने hi वाला था की.
रवि:- अतुल अतुल.
अतुल:- हम्म.
रवि:- एक क्वेश्चन था.
अतुल:- बोल?
रवि:- हेपेटाइटिस टॉपिक के बारे में.
फिर रवि क्वेश्चन पूछता है और अतुल एक्सप्लेन कर देता है.
रवि:- इतना कैसे पढ़ लेता है?
अतुल:- कांसेप्ट bro...Concept.
रवि:- सही hai...Lekin कुछ और टॉपिक है लिवर का जो मई डिटेल में समझना चाहता हु.
अतुल:- फिर kabhi...Liver तो अपना hi ऑर्गन hai...Abhi मई जा रहा hu...Kal शाम में लाइब्रेरी में आ जाना.
अतुल मुद कर जाने hi वाला था की.
रवि:- एक और बात.
अतुल पीछे मुड़ता है.
रवि:- (हिचकिचा कर) क्या मुझसे दोस्ती करेगा?
एक पल के लिए तो अतुल को विश्वास hi नहीं hua...Fir रवि का फेस देख कर जोर जोर से हसने लगता है.
अतुल:- किसी कीड़े (इन्सेक्ट) ने तो नहीं काट लिया तुझे?
रवि:- नहीं yaar...Socha बहुत हो gaya...Chhoti छोटी बातो पर भी क्या लड़ना और jhagadna...Saath रहे तो पढ़ाई से ले कर हर चीज में हेल्प हो जायेगी.
अतुल एक बार फिर रवि को गौर से देखता hai...Wo सीरियस hi दिख रहा tha...Aur न जाने क्यों अतुल को उसमे सचाई भी दिखा.
अतुल:- Ok फ्रेंड्स.
फिर अतुल अपना हाथ आगे बढ़ा देता hai...Ravi हाथ मिलता है.
अतुल और निशा अब्ब वह से निकल जाते hai...Ajay और अंजलि को दोनों का प्यार देख बहुत अच्छा लग रहा था.
वही रवि को दिल में दर्द महसूस होता hai...Aur ना चाहते हुए भी आँखें भरने लगती है.
ये कहा आये है हम?
निशा उत्साहित हो कर बोली.
अतुल:- तुम्हारी नेचुरल ब्यूटी देख देख कर बोर हो गया तो सोचा नेचर hi घूम ले.
निशा:- बकवास जोके.
अतुल:- तुम में आज कल इतना खोया हु की सेंस ऑफ़ ह्यूमर hi भूल गया हु.
निशा:- एक और बकवास जोके.
अतुल:- ये जोके में क्या रखा hai...Tum बस मेरा और इस नेचर का मजा लो.
फिर अतुल भी चारो तरफ देखने लगता है.
सामने एक छोटी सी नदी thi...Nadi में घुटना भर की पानी tha...Aur वह का nakaara...Hare और घने जंगल की बिच से गुजरती वो नदी जब भी किसी पत्थर पर टकराती तो वह का शांत वातावरण में गूंज रही आवाज दिल और दिमाग में सुकून पैदा कर रही थी.
वह का ठंडी हवाएं और पंछियो का गीत संगीत दिल खुश कर रहा था.
निशा:- वो सब तो ठीक hai...Par ये बताओ तुम हमारे चैटिंग की बातें सब को चीख चीख कर क्यों बता रहे थे?
अतुल:- आखिर उन्हें भी तो पता चले हमारी प्यार की gehraai...Meri ाहिकी, तुम्हारी deewangi...Hume हमारा प्यार को एक मिशाल बनाना hai...Abhi तो बहुत जूनून, पागलपन बाकी है हमारे प्यार में.
निशा:- जो अक्षर ज्यादा बोलते है वही साथ छोड़ देते है.
अतुल:- (निशा की आँखों में देख कर) अगर मई साथ छोड़ने वाला होआ तो तुम्हे मुझ पर विश्वास नहीं hota...Agar विश्वास नहीं होता तो प्यार नहीं hota..Agar प्यार नहीं होता तो मुझे इतनी क्यूट एंड ब्यूटीफुल गफ नहीं मिलती.
निशा कुछ देर अतुल को देखती है फिर उसकी होंठो में मुस्कान आ जाती है.
इससे पहले वो कुछ समझ पाती...5 सेक् के लिए दोनों खुद को हवा में महसूस करते है और फिर चम्म की आवाज.
निशा:- Nahi...Nahi..Mujhe chhodo...Mujhe पानी से दर लगता है.
निशा नदी से बाहर निकलना चाहती थी.
निशा:- प्लीज हाथ छोडो.
जवाब में अतुल हाथ को और भी कास के पकड़ लेता है.
अतुल:- ये हाथ छोड़ने के लिए पकड़ा नहीं hai...Jindagi भर साथ निभाने के लिए पकड़ा है.
निशा:- मुझे दर लग रहा है.
अतुल:- हम है तो क्या दर है.
फिर अतुल निशा को प्यार से देखता है.
अतुल:- भरोषा है न मुझ पर.
निशा बस सर को हां में हिला देती है.
अतुल:- तो फिर चलो.
निशा भी अतुल की आँखों में आँखें डाले साथ चल देती है नदी की बीच में.
फिर अतुल थोड़ा दूर जाता है.
निशा बस अतुल को hi देख रही थी की पानी की कुछ चिन्ता वो अपने चेहरे पे महसूस करती है.
जब उससे समझ में आता है तो झूठा गुस्से से अतुल को देखती hai...Atul उस पर हंसने लगता है फिर पानी की और भी बौछार कर देता है.
फिर होना क्या था वाटर War...Dono एक दूसरे पर पानी की बौछार करते hai...Dono हंस रहे थे, मुस्कुरा रहे थे और इस पल को जी रहे थे.
फिर जब दोनों थक जाते है तो एक दूसरे को देख प्यार भरी मुस्कान से एक दूसरे को देखने लगते है.
निशा अचानक से पानी की बौछार करने hi वाली थी की उसका पेअर (लेग) फिसल जाता है.
निशा:- आउच.
अतुल हड़बड़ा कर निशा के पास जाता है और उससे सँभालने लगता है.
अतुल:- क्या हुआ? छोट तो नहीं ला.
फिर अतुल निकहा को सही सलामत देख उससे अपने बाहो में भर लेता है.
कुछ देर ऐसे hi एक दूसरे के प्यार को महसूस करने के बाद दोनों एक दूसरे को देखते hai...Dono अब्ब आँखों से एक दूसरे को प्यार जताने लगते hai...Fir धीरे धीरे दोनों का चेहरा एक दूसरे के बेहद पास आ जाता है.
तभी निशा अपना चेहरा घुमा लेती है और मुस्कुराने लगती है.
अतुल:- प्लीज.
निशा:- नहीं.
अतुल:- प्लीज.
निशा:- Nahi...No मीन्स no.
अतुल:- ये तो हम जैसे ाहिक के लिए ना इंसाफ़ी है.
निशा:- No मीन्स no.
निशा को अतुल की हालत पर हंसी आ रहा था.
अतुल:- 2 महीने hi gaye...Lekin एक बार भी नहीं.
निशा:- ये तो पहले hi समझ लेना चाहिए tha...Mujhse प्यार किया है तो मेरा नखरा भी उठाना पड़ेगा.
अतुल:- सब कुछ uthaaunga...But एक किश.
निशा:- अभी नहीं.
अतुल की उम्मीद अब्ब कुछ बढ़ने लगी.
अतुल:- लेकिन कब?
निशा:- अभी nahi...Fir कभी.
अतुल ने बस इतना hi सुना था की वो निशा को अपने बाहो में भर कर पूरा एक चक्कर घुमाता है.
दोनों को एक दूसरे पर बहुत प्यार आ रहा था. :लव:
अजय:- भाई ठीक तो है न तू?
अतुल:- मुझे क्या hoga...Hamesha की तरह फिट एंड फाइन. :फ्लेक्स:
अजय:- तो फिर ये लाल आँखें? और क्लास में भी सू रहा था?
अतुल:- (मुस्कुरा कर) एक आशिक़ हो कर दूसरे आशिक़ की दिल की बात नहीं समझता?
अजय:- मतलब?
अतुल:- ये हसीं रात के बाद की दर्दनाक सुबह है जो किसी आशिक़ को मंजूर नहीं.
अजय:- Abey...Sidhe bol...Baat को क्यों घुमा रहा है.
अतुल:- क्या आशिक़ बनेगा रे तू? इतनी सी बात भी नहीं समझ पाटा.
अजय:- और मत चाट यार दिमाग.
अतुल:- अच्छा ठीक hai...Tera छोटा सा दिमाग और नहीं चाटूँगा.
मेरा जो हाल hai...Haal नहीं बेहाल hai...Isse मेडिकल लैंग्वेज में इंसोम्निया (िनबिलिटी तो स्लीप) कहते है.
अतुल ने बस इतना hi कहा था की वह मौजूद सभी दोस्त अतुल को चिंता भरी नजरो से देखने lage...Bas निशा hi मुस्कुरा रही थी.
दूसरे टेबल में बैठा रवि भी अतुल को घर रहा था.
रवि:- (इन हिज मंद) कितना पढता है.
अजय:- क्या भाई? कैसे?
अतुल:- सब इश्क़ की कमाल है yaar...Raat की नींद उड़ा देती है और दिन का छैन.
अंजलि:- हाउ रोमांटिक? और एक है अजय जिससे रोमांस का र भी पता नहीं?
अजय:- अच्छा ji...Abb ये भी बता दो की 10 बजे से पहले hi कौन सू जाता है? वीकेंड में डेटिंग के लिए मन कौन करता है? और बताओ?
अंजलि:- अरे अरे...
अजय:- No पंगा विथ ट्रू आशिक़.
अंजलि:- तुम्हे तो बाद में देखूंगी.
अजय:- लेकिन प्यार से.
अजय की इस अंदाज में अंजलि शर्मा गयी.
अतुल:- अबे bewkoof...Tujhe इतना भी नहीं पता, "ओपन फ्लिर्टिंग इस नॉट अल्लोवेद इन कॉलेज टेरिटरी."
अजय:- ऐसी बकवास रूल तो कही नहीं suna...Tu अपनी स्टोरी कंटिन्यू कर.
अतुल:- हुआ ये की हम दोनों यानी की मई और मेरी Nishu...Puri raat...Subah के 5 बजे तक फ़ोन और चैटिंग करते रहे.
अतुल ने मुस्कुराते हुए कहा.
ये सुनते hi रवि को ालने दिल में कुछ चुभता सा महसूस हुआ.
अजय:- अबे पागल है kya...Subah की 5 बजे तक.
अतुल:- दिल फिर भी नहीं bhara...Dil तो कर रहा था की बातें करता hi जाओ
और साला ये कॉलेज time...Mood ऑफ कर दिया.
अजय:- 5 बजे तक कैसी बातें?
अतुल:- इश्क़, प्यार और mohobbat...Lekin तुम जैसे अनरोमांटिक लोग ये बात नहीं समझ पाओगे.
अंजलि:- अतुल, हाउ डरे यू?
अंजलि की इस गुस्से की झूठा नाटक पर अतुल मुस्कुरा कर बोलै.
अतुल:- मैडम, ये बात मुझे नहीं अपना इस बेवकूफ आशिक़ को समझाइये.
अजय:- अबे मुझे क्यों फसा रहा है?
अजय भी डरने की एक्टिंग करते हुए बोलै.
अतुल:- चलो Nisha...Chalte है.
अजय:- रुक साथ में hi जाएंगे क्लास.
अतुल:- तुम लोग जाओ.
अजय:- और तू.
अतुल:- Dating...17th डेटिंग.
अजय:- प्यार हुआ 2 मंथ भी नहीं hua...Aur जनाब का 17तह डेटिंग.
अतुल बस मुस्कुराता रहा.
अजय:- और क्लास?
अतुल:- बड़ी बड़ी प्यार में छोटी छोटी क्लास को बंक मारना पड़ता है.
अजय:- तू नहीं सुधरेगा.
अतुल:- सुधारना किस्से है? मुझे तो इश्क़ के रंग में रंग जाना है.
फिर अतुल और निशा वह से जाने hi वाला था की.
रवि:- अतुल अतुल.
अतुल:- हम्म.
रवि:- एक क्वेश्चन था.
अतुल:- बोल?
रवि:- हेपेटाइटिस टॉपिक के बारे में.
फिर रवि क्वेश्चन पूछता है और अतुल एक्सप्लेन कर देता है.
रवि:- इतना कैसे पढ़ लेता है?
अतुल:- कांसेप्ट bro...Concept.
रवि:- सही hai...Lekin कुछ और टॉपिक है लिवर का जो मई डिटेल में समझना चाहता हु.
अतुल:- फिर kabhi...Liver तो अपना hi ऑर्गन hai...Abhi मई जा रहा hu...Kal शाम में लाइब्रेरी में आ जाना.
अतुल मुद कर जाने hi वाला था की.
रवि:- एक और बात.
अतुल पीछे मुड़ता है.
रवि:- (हिचकिचा कर) क्या मुझसे दोस्ती करेगा?
एक पल के लिए तो अतुल को विश्वास hi नहीं hua...Fir रवि का फेस देख कर जोर जोर से हसने लगता है.
अतुल:- किसी कीड़े (इन्सेक्ट) ने तो नहीं काट लिया तुझे?
रवि:- नहीं yaar...Socha बहुत हो gaya...Chhoti छोटी बातो पर भी क्या लड़ना और jhagadna...Saath रहे तो पढ़ाई से ले कर हर चीज में हेल्प हो जायेगी.
अतुल एक बार फिर रवि को गौर से देखता hai...Wo सीरियस hi दिख रहा tha...Aur न जाने क्यों अतुल को उसमे सचाई भी दिखा.
अतुल:- Ok फ्रेंड्स.
फिर अतुल अपना हाथ आगे बढ़ा देता hai...Ravi हाथ मिलता है.
अतुल और निशा अब्ब वह से निकल जाते hai...Ajay और अंजलि को दोनों का प्यार देख बहुत अच्छा लग रहा था.
वही रवि को दिल में दर्द महसूस होता hai...Aur ना चाहते हुए भी आँखें भरने लगती है.
ये कहा आये है हम?
निशा उत्साहित हो कर बोली.
अतुल:- तुम्हारी नेचुरल ब्यूटी देख देख कर बोर हो गया तो सोचा नेचर hi घूम ले.
निशा:- बकवास जोके.
अतुल:- तुम में आज कल इतना खोया हु की सेंस ऑफ़ ह्यूमर hi भूल गया हु.
निशा:- एक और बकवास जोके.
अतुल:- ये जोके में क्या रखा hai...Tum बस मेरा और इस नेचर का मजा लो.
फिर अतुल भी चारो तरफ देखने लगता है.
सामने एक छोटी सी नदी thi...Nadi में घुटना भर की पानी tha...Aur वह का nakaara...Hare और घने जंगल की बिच से गुजरती वो नदी जब भी किसी पत्थर पर टकराती तो वह का शांत वातावरण में गूंज रही आवाज दिल और दिमाग में सुकून पैदा कर रही थी.
वह का ठंडी हवाएं और पंछियो का गीत संगीत दिल खुश कर रहा था.
निशा:- वो सब तो ठीक hai...Par ये बताओ तुम हमारे चैटिंग की बातें सब को चीख चीख कर क्यों बता रहे थे?
अतुल:- आखिर उन्हें भी तो पता चले हमारी प्यार की gehraai...Meri ाहिकी, तुम्हारी deewangi...Hume हमारा प्यार को एक मिशाल बनाना hai...Abhi तो बहुत जूनून, पागलपन बाकी है हमारे प्यार में.
निशा:- जो अक्षर ज्यादा बोलते है वही साथ छोड़ देते है.
अतुल:- (निशा की आँखों में देख कर) अगर मई साथ छोड़ने वाला होआ तो तुम्हे मुझ पर विश्वास नहीं hota...Agar विश्वास नहीं होता तो प्यार नहीं hota..Agar प्यार नहीं होता तो मुझे इतनी क्यूट एंड ब्यूटीफुल गफ नहीं मिलती.
निशा कुछ देर अतुल को देखती है फिर उसकी होंठो में मुस्कान आ जाती है.
इससे पहले वो कुछ समझ पाती...5 सेक् के लिए दोनों खुद को हवा में महसूस करते है और फिर चम्म की आवाज.
निशा:- Nahi...Nahi..Mujhe chhodo...Mujhe पानी से दर लगता है.
निशा नदी से बाहर निकलना चाहती थी.
निशा:- प्लीज हाथ छोडो.
जवाब में अतुल हाथ को और भी कास के पकड़ लेता है.
अतुल:- ये हाथ छोड़ने के लिए पकड़ा नहीं hai...Jindagi भर साथ निभाने के लिए पकड़ा है.
निशा:- मुझे दर लग रहा है.
अतुल:- हम है तो क्या दर है.
फिर अतुल निशा को प्यार से देखता है.
अतुल:- भरोषा है न मुझ पर.
निशा बस सर को हां में हिला देती है.
अतुल:- तो फिर चलो.
निशा भी अतुल की आँखों में आँखें डाले साथ चल देती है नदी की बीच में.
फिर अतुल थोड़ा दूर जाता है.
निशा बस अतुल को hi देख रही थी की पानी की कुछ चिन्ता वो अपने चेहरे पे महसूस करती है.
जब उससे समझ में आता है तो झूठा गुस्से से अतुल को देखती hai...Atul उस पर हंसने लगता है फिर पानी की और भी बौछार कर देता है.
फिर होना क्या था वाटर War...Dono एक दूसरे पर पानी की बौछार करते hai...Dono हंस रहे थे, मुस्कुरा रहे थे और इस पल को जी रहे थे.
फिर जब दोनों थक जाते है तो एक दूसरे को देख प्यार भरी मुस्कान से एक दूसरे को देखने लगते है.
निशा अचानक से पानी की बौछार करने hi वाली थी की उसका पेअर (लेग) फिसल जाता है.
निशा:- आउच.
अतुल हड़बड़ा कर निशा के पास जाता है और उससे सँभालने लगता है.
अतुल:- क्या हुआ? छोट तो नहीं ला.
फिर अतुल निकहा को सही सलामत देख उससे अपने बाहो में भर लेता है.
कुछ देर ऐसे hi एक दूसरे के प्यार को महसूस करने के बाद दोनों एक दूसरे को देखते hai...Dono अब्ब आँखों से एक दूसरे को प्यार जताने लगते hai...Fir धीरे धीरे दोनों का चेहरा एक दूसरे के बेहद पास आ जाता है.
तभी निशा अपना चेहरा घुमा लेती है और मुस्कुराने लगती है.
अतुल:- प्लीज.
निशा:- नहीं.
अतुल:- प्लीज.
निशा:- Nahi...No मीन्स no.
अतुल:- ये तो हम जैसे ाहिक के लिए ना इंसाफ़ी है.
निशा:- No मीन्स no.
निशा को अतुल की हालत पर हंसी आ रहा था.
अतुल:- 2 महीने hi gaye...Lekin एक बार भी नहीं.
निशा:- ये तो पहले hi समझ लेना चाहिए tha...Mujhse प्यार किया है तो मेरा नखरा भी उठाना पड़ेगा.
अतुल:- सब कुछ uthaaunga...But एक किश.
निशा:- अभी नहीं.
अतुल की उम्मीद अब्ब कुछ बढ़ने लगी.
अतुल:- लेकिन कब?
निशा:- अभी nahi...Fir कभी.
अतुल ने बस इतना hi सुना था की वो निशा को अपने बाहो में भर कर पूरा एक चक्कर घुमाता है.
दोनों को एक दूसरे पर बहुत प्यार आ रहा था. :लव: